मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा                                                               त्रयोदश सत्र

 

 

फरवरी-मार्च, 2017 सत्र

 

गुरूवार, दिनांक 23 फरवरी, 2017

 

( 4 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1938 )

 

 

[खण्ड-  13  ]                                                                              [अंक- 3 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

गुरूवार, दिनांक 23 फरवरी, 2017 

( 4 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1938 )

विधान सभा पूर्वाह्न 11.02 बजे समवेत हुई.

{ अध्यक्ष महोदय (डॉ. सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर

 

अध्यक्ष महोदय--प्रश्न संख्या--1 श्री मुकेश नायक

श्री सुन्दरलाल तिवारी--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे द्वारा एक स्थगन प्रस्ताव दिया गया है.

अध्यक्ष महोदय--प्रश्नकाल के बाद बात करिये. नहीं मैं इसको अलाऊ नहीं कर रहा हूं. तिवारी जी यदि आप रोज़ प्रश्नकाल में इस तरह से बाधा डालेंगे तो मुझे कुछ कार्यवाही करनी पड़ेगी.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--अध्यक्ष महोदय, मैं प्रश्नकाल में बाधा नहीं डाल रहा हूं. मैंने एक स्थगन प्रस्ताव दिया है.

अध्यक्ष महोदय--बैठिये आप.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--अध्यक्ष महोदय, आपने देखा भी होगा कि सुप्रीम कोर्ट ने--

अध्यक्ष महोदय--कृपया करके बैठ जाएं. बिलकुल नहीं सुना जाएगा और न ही लिखा जाएगा.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--- (XXX)

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ.नरोत्तम मिश्रा)--अध्यक्ष महोदय, यह जो बात कह रहे हैं वह शून्यकाल में नहीं कही जा सकती.

अध्यक्ष महोदय--कह सकते हैं, लेकिन उनको तो प्रश्नकाल में व्यवधान डालना है.

डॉ.नरोत्तम मिश्रा--शून्यकाल में जो कहना है वह कहें.

अध्यक्ष महोदय--मैं उनसे कह रहा हूं कि 12.00 बजे के बाद में बात करें.

डॉ.नरोत्तम मिश्रा--अध्यक्ष महोदय, दूसरे सदस्यों के भी प्रश्न महत्वपूर्ण हैं, यह प्रश्नकाल को बाधित करने की परम्परा अच्छी नहीं है.

अध्यक्ष महोदय--यह जान-बूझकर कर रहे हैं. तिवारी जी आप वरिष्ठ सदस्य हैं. आप कृपा करके कार्यवाही करने के लिये मुझे मजबूर न करें. बैठ जाईये आप 12.00 बजे के बाद बात करिये मैं आपकी सब बातों को सुनूंगा. मैं आपकी बात सुनने को मना कहां कर रहा हूं.

पवई विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत डी.पी. सुधार

[ऊर्जा]

1. ( *क्र. 772 ) श्री मुकेश नायक : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) पन्‍ना जिले की पवई विधान सभा क्षेत्र के पवई एवं शाहनगर जनपद पंचायतों में कितने डी.पी. एवं पोल क्षतिग्रस्त स्थिति में हैं? ग्रामवासियों/पंचायतों द्वारा उक्‍त हितग्राहियों द्वारा डी.पी. एवं पोल के लिये कितने हितग्राहियों ने आवेदन किये हैं? हितग्राहियों के आवेदन पर क्‍या कार्यवाही की गई? (ख) उक्‍त क्षतिग्रस्‍त डी.पी./पोल का सुधार कार्य कब तक किया जावेगा? (ग) क्‍या विभाग द्वारा उक्‍त में से कोई ट्रांसफार्मर/विद्युत पोल को अन्‍यत्र स्‍थान पर लगाने की कोई कार्य योजना है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) पन्‍ना जिले के पवई विधानसभा क्षेत्र के पवई जनपद पंचायत क्षेत्रान्‍तर्गत 4 डी.पी. स्‍ट्रक्‍चर/ट्रांसफार्मर एवं 104 पोल तथा शाहनगर जनपद पंचायत क्षेत्रान्‍तर्गत 18 डी.पी. स्‍ट्रक्‍चर/ट्रांसफार्मर एवं 154 पोल, भिन्‍न-भिन्‍न तिथियों में आई आंधी/तूफान के कारण से क्षतिग्रस्‍त हुए हैं। इन क्षतिग्रस्‍त डी.पी. स्‍ट्रक्‍चर/ट्रांसफार्मरों एवं पोलों से सम्‍बद्ध उपभोक्‍ताओं में से 3 हितग्राहियों/उपभोक्‍ताओं यथा (1) ग्राम बड़खेरा के आवेदक सरपंच एवं समस्‍त ग्रामवासी (2) ग्राम चौमुखा के आवेदक श्री रामप्रकाश तिवारी (3) ग्राम सुडोर के आवेदक श्री सोनू शुक्‍ला द्वारा आवेदन पत्र संबंधित कार्यालय में दिए गए। प्राप्‍त आवेदनों पर त्‍वरित कार्यवाही करते हुए सर्वे उपरान्‍त प्राक्‍कलन स्‍वीकृत कर कार्य आदेश जारी किये जा चुके हैं। (ख) उत्‍तरांश (क) में दर्शाये गये कार्य प्रगति पर हैं, जिन्‍हें दिनांक 31.03.2017 तक पूर्ण किये जाने के प्रयास किये जा रहे हैं। (ग) पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा उक्‍त क्षतिग्रस्‍त ट्रांसफार्मर/पोलों को अन्‍यत्र स्‍थान पर लगाने की कोई योजना नहीं है। 

 

श्री मुकेश नायक--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न के उत्तर में माननीय मंत्री जी ने अपने जवाब में यह कहा है कि ग्राम बरखेरा के आवेदक सरपंच एवं समस्त ग्रामवासियों की बिजली नहीं होने की उन्हें शिकायत मिली है. बाढ़ आने के बाद यहां पर खम्भे गिर गये थे. इसमें मैं माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि आवेदन में कितनी तारीख को खम्भे गिरे थे और कितनी तारीख को इस गांव की बिजली गोल हुई, बताएं ?

श्री पारस चन्द्र जैन-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जो माननीय सदस्य बता रहे हैं यह बात सही है कि खम्बे गिरे थे और खम्बे सुधारने में अलग अलग तारीख लगी है, उन्होंने खम्भों की तारीख पूछी है.

श्री मुकेश नायक--माननीय अध्यक्ष महोदय, केवल स्पेसिफिक ग्राम बरखेरा के बारे में उत्तर में जिक्र किया है. इसमें मेरा स्पेसिफिक प्रश्न है कि ग्राम बरखेरा में किस तारीख को बाढ़ आने से खम्भे गिरे थे, किस तारीख को आपने प्राक्कलन तैयार किया, किस तारीख को प्राक्कलन स्वीकृत हुआ, किस तारीख को यह काम शुरू किया? यह तीनो मेरे स्पेसिफिक प्रश्न हैं इसका उत्तर मंत्री जी दें ?

श्री पारस चन्द्र जैन--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं सदस्य महोदय को बताना चाहता हूं कि वहां के जो प्राक्कलन हमने तैयार किये हैं उस प्राक्कलन में 11 वर्क आर्डर हमने 45 लाख रूपये के जारी किये हैं.

श्री मुकेश नायक--नहीं नहीं.मेरा प्रश्न दूसरा है.

अध्यक्ष महोदय--आप मंत्री जी के उत्तर को सुन लें. आपने तारीखों के बारे में पूछा है.

श्री पारस चन्द्र जैन--माननीय अध्यक्ष महोदय, उसमें से 2 कार्य पूर्ण हो गये हैं बाकी दिसम्बर 2016 के कार्य बाकी हैं उनको भी पूर्ण कर देंगे.

श्री मुकेश नायक - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह जानना चाहता हूं और मेरे प्रश्‍न का आशय यह है कि कितनी तारीख को उस गांव में बिजली नहीं थी और आज तक क्‍यों नहीं आई है, मुझे आप यह स्‍पेसिफिक बतायें.

अध्‍यक्ष महोदय - आपका प्रश्‍न मंत्री जी समझ गयें हैं कि आप उनसे तारीख पूछ रहे हैं, माननीय मंत्री जी आपके पास क्‍या तारीख उपलब्‍ध है ? यदि तारीख आपके पास हो तो आप बता दें, अगर उपलब्‍ध नहीं हो तो आप बाद में तारीख बता दीजियेगा.

श्री पारसचंद्र जैन - अभी इसकी कोई जानकारी मेरे पास नहीं है लेकिन तीन आवेदन इन लोगों के मेरे पास आये थे.

श्री मुकेश नायक - मैं एक अनुपूरक प्रश्‍न आपकी अनुमति से पूछना चाहता हूं.

अध्‍यक्ष महोदय -  एक मिनट रूकिये आपने जो प्रश्‍न पूछा उसका मंत्री जी कुछ जवाब दे रहे हैं.

श्री पारसचंद्र जैन - बरखेड़ा में जुलाई, अगस्‍त से आपूर्ति बाधित है, ग्रामवासियों के आपसी विवाद के कारण यह काम पूर्ण नहीं हो पा रहा है. हमने प्राक्कलन माह नवम्‍बर एवं दिसंबर में बनाये हैं.

श्री मुकेश नायक - जुलाई में बिजली गोल हुई, इन्‍होंने दिसंबर और नवम्‍बर में प्राक्कलन तैयार किया है, यह इस तरह से मंत्रालय चला रहे हैं. आप कल्‍पना करिये अगर एक दिन आपके घर की बिजली गुल हो जाये तो क्‍या आपके बच्‍चे आपसे शिकायत नहीं करते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -  आप प्रश्‍न करें, इस तरह से आप व्‍यक्तिगत बात नहीं कर सकते हैं.

श्री मुकेश नायक - जुलाई में बिजली गोल हुई है और आप दिसंबर में प्राक्कलन तैयार करवा रहे हैं.

श्री पारसचंद्र जैन -माननीय सदस्‍य जी आपके टाईम पर तो बिजली मिलती ही नहीं थी.

श्री मुकेश नायक - आप सोते रहते है, इस तरह से मंत्रालय चला रहे हैं, आपको कोई चिंता नहीं है.

श्री पारसचंद्र जैन -हम तो मंत्रालय चला रहे हैं, आपके समय तो पहले आदेश निकले थे कि आठ बजे बाद दुकानें बद कर लो.

श्री मुकेश नायक - मैं आपसे स्‍पेसिफिक प्रश्‍न पूछना चाहता हूं कि नौ महीने से उस गांव में बिजली नहीं है, आप विधानसभा को इस संबंध में क्‍यों नहीं बताते हैं.

श्री पारसचंद्र जैन - मैं भी स्‍पेसिफिक ही बता रहा हैं. बाढ़ आने के कारण वहां के लोगों के आपसी विवाद हैं, हम उसको सुधारना भी चाहते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - आप दूसरा प्रश्‍न कर लें, आप भाषण नहीं दे सकते हैं,

श्री मुकेश नायक - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नौ महीने से दो हजार जनसंख्‍या वाले उस गांव में बिजली नहीं है और यह इस तरह से विधानसभा में उत्‍तर दे रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - आप दूसरा प्रश्‍न करें.

श्री मुकेश नायक - मेरा दूसरा प्रश्‍न यह है, इनकी कोई तैयार नहीं है इनसे प्रश्‍न पूछने का मतलब है, (XXX).

अध्‍यक्ष महोदय - यह कार्यवाही से निकाल दें, यह उचित नहीं है.

श्री मुकेश नायक - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं स्‍पेसिफिक प्रश्‍न माननीय मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं कि इन्‍होंने शाहनगर ब्‍लॉक और पवई ब्‍लॉक की चर्चा की है. माननीय मंत्री जी आप यह बतायें ग्राम सर्रा, ग्राम छिरिया, ग्राम जमड़ा, ग्राम महुआडोल, महियागांव घाट, कनकी यह शाहनगर ब्‍लॉक के गांव हैं. दूसरा पवई ब्‍लॉक जिसमें ग्राम मझगवां, सतधारा, ताला, अमझोरा, सरसा, बुधवानी, रोहनियां, केमुरिया, जूही, रामगढ़, बीजादोह, खुलचारी, पगरा, टोला, गहरवार, उमड़ी, जमगढ़ इन गांवों में कब से बिजली नहीं हैं, इस संबंध में आप बतायें ?

श्री पारसचंद्र जैन - गांवों में बिजली पर्याप्‍त है और बरखेड़ा में बिजली मिल नहीं रही है.

श्री मुकेश नायक - आपको यह ही पता नहीं है कि इन गांवों में ट्रांसफार्मर ही नहीं लगा है तो बिना ट्रांसफार्मर के बिजली कैसे पहुंचेगी.

श्री पारसचंद्र जैन - बरखेड़ा में बिजली नहीं है यह मैं भी तो कह रहा हूं लेकिन वहां की लाईन टूटने के बाद वहां आपसी किसानों का विवाद है .

श्री मुकेश नायक - आपके विभाग के ओआईसी ने मुझे लिखकर दिया है कि यहां ट्रांसफमर नहीं है, मेरे पास हस्‍ताक्षर किया हुआ कागज है.

श्री पारसचंद्र जैन - जहां-जहां बरखेड़ा में ट्रांसफार्मर है वह यह चाहते हैं कि ट्रांसफार्मर को बदले, लेकिन वह ट्रांसफार्मर नहीं बदल सकते हैं.

श्री मुकेश नायक - मैं यह कह रहा हूं कि विभाग के जूनियर इंजीनियर ने एक जनप्रतिनिधि के कहने पर, उसकी चिट्ठी पर अपने हस्‍ताक्षर से लिखकर दिया है कि गांव में ट्रांसफार्मर जले हुए हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - आपका प्रश्‍न क्‍या है ?

श्री मुकेश नायक - मेरा प्रश्‍न यह है कि यह बतायें कि इन गांवों में कब से ट्रांसफार्मर जले हुए हैं और आप इनको कब रिप्‍लेस कर देंगे ?

अध्‍यक्ष महोदय - ऐसा आपके प्रश्‍न में नहीं है.

श्री पारसचंद्र जैन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इनके प्रश्‍न में ऐसा नहीं है.

श्री मुकेश नायक - माननीय अध्‍यक्ष महोदय इन्‍होंने शिकायत में मूल प्रश्‍न के उत्‍तर में इन ब्‍लॉकों के बारे में स्‍पेसिफिक लिखा है, आप देखिये. 4 डी.पी., 104पोल, इन्‍होंने अपने उत्‍तर में लिखा है.

श्री पारसचंद्र जैन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय बरखेड़ा को छोड़कर बाकी सब जगह बिजली मिल रही है.

श्री मुकेश नायक - मैं इनसे कह रहा हूं इनके विभाग के जूनियर इंजीनियर ने मुझे लिखकर दिया है, कि ट्रांसफार्मर जले हुए हैं, मैं विभाग के एसीएस से जो नये नये आये हैं, उनसे खुद जाकर मिलकर आया हूं, वह अच्‍छे अधिकारी हैं, मैंने एसीएस से आग्रह किया था कि महाशय यहां ट्रांसफार्मर जले हुए हैं उन्‍होंने खुद विभाग के एमडी को फोन करके कहा था कि तत्‍काल आप इनको रिप्‍लेस करिये, आपकी कोई तैयारी ही नहीं है,(XXX).

श्री पारसचंद्र जैन - मैं आपसे ज्‍यादा पढ़ा लिखा हूं.

श्री मुकेश नायक - आप क्‍या पढे़ हैं ? आप कितने पढे़ लिखे हैं.

श्री पारसचंद्र जैन - मैं बी.कॉम. हूं और आप बेकाम हो.

श्री बाबूलाल गौर- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य कह रहे हैं (XXX).

अध्‍यक्ष महोदय - यह सब कार्यवाही से निकाल दें और श्री मुकेश नायक जी की वह बात भी निकाल दें जिसमें उन्‍होंने कहा है कि पढ़ते लिखते नहीं है. माननीय मुकेश नायक जी आप बैठ जायें.

 

बरबटी उद्वहन सिंचाई योजना को पूर्ण किया जाना

[नर्मदा घाटी विकास]

2. ( *क्र. 602 ) श्रीमती प्रतिभा सिंह : क्या राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जबलपुर जिले में स्‍वीकृत बरबटी उद्वहन सिंचाई योजना में अब तक कितना कार्य हुआ है? उपरोक्‍त उद्वहन सिंचाई योजना के निर्माण कार्य में विलंब होने के क्‍या कारण हैं? (ख) किसानों के हित में उक्‍त सिंचाई योजना शीघ्र पूर्ण करने हेतु क्‍या शासन निर्देश जारी करेगा? यदि हाँ, तो कब तक?

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) ठेकेदार द्वारा बरबटी लिंक सिंचाई योजना का सर्वेक्षण कार्य पूर्ण कर लिया गया है। योजना का निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है। निर्माण कार्य की डिजाईन, ड्राइंग में विलंब के कारण निर्माण कार्य में विलंब हुआ है। (ख) जी हाँ। निर्देश जारी किये जा रहे हैं।

श्रीमती प्रतिभा सिंह :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहती हूं कि बरबटी सिंचाई उद्वहन सिंचाई योजना दिनांक 24.5.13 को स्‍वीकृत की गयी एवं 8.5.15 को ठेकेदार द्वारा इसका कार्य प्रारंभ किया गया. लगभग दो वर्ष होने वाले हैं लेकिन इस सिंचाई योजना में 5 प्रतिशत कार्य भी नहीं हुआ है. अधिकारी एवं ठेकेदार कार्य के प्रति उदासीन हैं तो किसानों की स्थिति कैसे सुधरेगी. इस योजना से 850 हेक्‍टेयर रकबे की सिंचाई होना थी, लेकिन दो वर्ष पूर्ण होने के बाद 5 प्रतिशत भी कार्य नहीं किया गया है.

मेरा आपके माध्‍यम से मंत्री जी से आग्रह है कि क्‍या ठेकेदार को ब्‍लैकलिस्‍टेट किया जायेगा.

श्री लाल सिंह आर्य :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बरबटी लिंक सिंचाई योजना के निर्माण की एजेंसी स्‍वीकृत की गयी थी, यह बात सही है. यह बात भी सही है कि सरकार की इच्‍छा है कि किसानों को पानी मिले, लेकिन हमने कई बार ठेकेदार को पत्र जारी किया है उनको नोटिस भी जारी किया है, इसके बाद भी कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है, हम ठेकेदार को अंतिम नोटिस कार्य प्रारंभ करने के लिये दे रहे हैं, यदि उसके बाद भी वह कार्य प्रारंभ नहीं करता है तो जो भी प्रक्रियाधीन कार्यवाही होगी वह करेंगे.

श्रीमती प्रतिभा सिंह :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कार्य पूर्ण होने की समय-सीमा मंत्री जी बतायेंगे कि कब तक यह कार्य पूर्ण कर लिया जायेगा ?

श्री लाल सिंह आर्य :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यदि हम अभी उसको ब्‍लैकलिस्‍टेड कर भी दें तो हमको दूसरी कार्यवाही करना पड़ेगी, यदि हम दूसरी कार्यवाही करेंगे तो उसमें 6 महीने लगेंगे. हम चाहते हैं कि उसको अंतिम नोटिस देकर कि आप कार्य प्रारंभ कर दे, इससे किसानों का भला भी होगा और आपकी भावना भी पूर्ण हो जायेगी.

श्रीमती प्रतिभा सिंह :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा कहना है कि उस ठेकेदार को टर्मीनेट करें, क्‍योंकि उस ठेकेदार से लगातार दो वर्षों से जानकारी ले रहे हैं और अधिकारी भी लगातार आश्‍वासन दे रहे हैं कि कार्य होगा. माननीय मुख्‍यमंत्री जी का दौरा 26 जनवरी नमामि नर्मदे योजना के समय हुआ था, उस समय भी ठेकेदार ने मेरे से कहा था कि हम कार्य प्रारंभ कर रहे हैं और 6 माह में ही हम कार्य पूर्ण कर देंगे. लेकिन उसके बावजूद भी ठेकेदार ने कार्य पूर्ण नहीं किया और वह अपना पूरा सामान लेकर चला गया, इसलिये मेरा आपसे निवेदन है कि उसको टर्मीनेट किया जाये.

अध्‍यक्ष महोदय :- मंत्री जी, आप अंतिम नोटिस में ठेकेदार को कितना समय देंगे ?

श्री लाल सिंह आर्य :- अध्‍यक्ष महोदय, हम अंतिम नोटिस उसको शीघ्र जारी कर रहे हैं और यदि वह कार्य प्रारंभ नहीं करेगा तो मैं आश्‍वस्‍त कर रहा हूं कि उसको टर्मीनेट कर दूंगा.

श्रीमती प्रतिभा सिंह :- माननीय मंत्री जी आप समय-सीमा बतायें कि कितने समय में कार्य पूर्ण करा दिया जायेगा. किसानों में इससे आक्रोश है उनका आक्रोश कैसे दूर होगा. माननीय अध्‍यक्ष मैं आपसे सहयोग चाहती हूं. मैं लगातार दो वर्ष से प्रश्‍न लगा रही हूं, दो वर्ष से परेशान हूं. दो साल से प्रश्‍न लगा रही हूं और आज यह प्रश्‍न चर्चा में आया है. मैं आप आपसे समय-सीमा चाहती हूं.

अध्‍यक्ष महोदय :- मंत्री जी आप उनका कार्य जल्‍दी करायें.

श्री लाल सिंह आर्य :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍या ने तो एक साल मांगा है एक साल नहीं, हम उसको अंतिम नोटिस एक महीने के अंदर दे रहे हैं यदि उन्‍होंने कार्य प्रारंभ नहीं किया तो उसके खिलाफ कार्यवाही करेंगे.

श्रीमती प्रतिभा सिंह :- अध्‍यक्ष महोदय, मैं समय-सीमा चाहती हूं कि कार्य पूर्ण कब होगा ?

अध्‍यक्ष महोदय :- अब आप बैठ जाइये, मंत्री जी ने समय-सीमा बता दी है.

श्रीमती प्रतिभा सिंह :- अध्‍यक्ष महोदय, मैं समय-सीमा चाहती हूं कि कार्य कब पूर्ण होगा और सिर्फ ठेकेदार के ऊपर ही नहीं दोषी अधिकारियों के ऊपर भी कार्यवाही होना चाहिये.

अध्‍यक्ष महोदय :- आपकी बात भी आ गयी है और आपका कार्य भी हो गया है, अब आप बैठ जाइये. एक महीने के अंदर नोटिस देंगे.

श्रीमती प्रतिभा सिंह :- अध्‍यक्ष महोदय, मैं समय-सीमा चाहती हूं और जो संबंधित अधिकारी दोषी हैं उनके ऊपर कार्यवाही करेंगे ?

श्री लाल सिंह आर्य :- अध्‍यक्ष महोदय, एक महीने के अंदर नोटिस देंगे और उनसे शीघ्र कार्य प्रारंभ करने के लिये कहेंगे और यदि नहीं होगा तो एक साल तो बहुत दूर हम तो और जल्‍दी कर देंगे.

अध्‍यक्ष महोदय :- मंत्री जी ने कहा है कि एक साल के अंदर कार्य कर देंगे.

 

अवैध शराब की बिक्री पर प्रतिबंध

[वाणिज्यिक कर]

3. ( *क्र. 1225 ) श्री चन्‍द्रशेखर देशमुख : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मुलताई विधानसभा क्षेत्र में आबकारी विभाग की कितनी देशी एवं विदेशी शराब की दुकानें संचालित हैं? सभी दुकानों का नाम, संचालक फर्म का नाम, पता, रजिस्ट्रेशन नम्बर, ठेके की वैधता सम्‍बन्‍धी जानकारी दें। (ख) क्या प्रश्‍नांश (क) अनुसार दी गई दुकानों से ही शराब बेचने का प्रावधान है? यदि हाँ, तो निरंतर क्षेत्र के गांवों एवं शहरों से अवैध शराब (कच्ची एवं पक्की) बिक्री की आ रही शिकायतों में क्यों वृद्धि हो रही है? अधिकारियों द्वारा क्षेत्र में किये गये दौरों की वर्ष जनवरी 2014 से आज दिनांक तक की लॉग बुक की छायाप्रति दें। (ग) मुलताई विधानसभा क्षेत्र में वर्ष जनवरी 2014 से आज दिनांक तक विभाग द्वारा कितने प्रकरण (अवैध शराब बिक्री की सभी मान्य धाराएं) दर्ज किये गये। दिनांकवार प्रकरण दर्ज करने वाले अधिकारी के नाम सहित जानकारी दें, साथ ही यह भी दर्शायें की प्रकरण पर कार्यवाही की गई है या नहीं? यदि हाँ, तो क्या कार्यवाही की गई। सभी प्रकरणों के विभाग द्वारा की गयी कार्यवाही के दस्तावेजों एवं पत्राचार की छायाप्रति दें। (घ) मुलताई विधानसभा क्षेत्र से संबंधित उपरोक्त विषय के मामले जो मा. न्यायालयों में चल रहे हैं, में विभागीय अधिकारियों की उपस्थिति एवं अनुपस्थिति की विगत दो वर्षों की संपूर्ण जानकारी, संबंधित अधिकारी के नाम सहित दें?

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) मुलताई विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2016-17 में आबकारी विभाग की 14 देशी मदिरा दुकानें एवं 04 विदेशी मदिरा दुकानें संचालित हैं। समस्‍त 18 मदिरा दुकानों का नाम, संचालक फर्म का नाम, पता, रजिस्‍ट्रेशन नम्‍बर, ठेके की वैधता संबंधी जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-एक अनुसार है। (ख) जी हाँ। उत्‍तर (क) में वर्णित लायसेंसी दुकानों से ही शराब बेचने का प्रावधान है। क्षेत्र में महिला संगठनों की सक्रियता से आयी जन जागरूकता एवं सी.एम. हेल्‍प लाईन, जन सुनवाई जैसे उचित फोरम के कारण गांवों एवं शहरों से अवैध शराब (कच्‍ची एवं पक्‍की) बिक्री की शिकायतों में वृद्धि हुई है। अधिकारियों द्वारा क्षेत्र में स्थित आबकारी केन्‍द्रों के निरीक्षण एवं उपलंभन कार्य हेतु वर्ष जनवरी 2014 से प्रश्‍न दिनांक तक की अवधि में किये गये दौरों से संबंधित वाहन लॉग बुक की प्रमाणित छायाप्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-दो अनुसार है। (ग) मुलताई विधान सभा क्षेत्र में वर्ष जनवरी 2014 से प्रश्‍न दिनांक तक अवैध शराब के कुल 609 न्‍यायालयीन प्रकरण पंजीबद्ध किये गये हैं। दिनांकवार प्रकरण दर्ज करने वाले अधिकारी के नाम सहित जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-तीन अनुसार है। जी हाँ, प्रकरण पर कार्यवाही की गई है। विभाग द्वारा की गई कार्यवाही से संबंधित अभिलेखों की प्रमाणित छायाप्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-चार अनुसार है। (घ) क्षेत्र से संबंधित उपरोक्‍त विषय के कुल 03 प्रकरण सक्षम न्‍यायालय में विचाराधीन हैं। विगत दो वर्षों की संपूर्ण जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-पाँच अनुसार है।

श्री चन्‍द्रशेखर देशमुख- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी से मैं जानना चाहता हूं कि मुलताई विधान सभा क्षेत्र में 2014 से आज दिनांक तक अवैध शराब के कुल कितने प्रकरण दर्ज किए गए हैं ?

श्री जयंत मलैया- अध्‍यक्ष महोदय, मुलताई विधान सभा में जनवरी 2014 से प्रश्‍न दिनांक तक कुल 609 न्‍यायालयीन प्रकरण धारा 34 के अंतर्गत कायम किए गए हैं.

श्री चन्‍द्रशेखर देशमुख- क्‍या मंत्री जी यह बतायेंगे कि इन पर क्‍या कार्यवाही की गई ?

श्री जयंत मलैया- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पंजीबद्ध 609 न्‍यायालयीन प्रकरणों में से 404 प्रकरण सक्षम न्‍यायालय द्वारा निर्णीत कर 4,36,800 रूपये का जुर्माना लगाया गया है एवं शेष प्रकरणों में कार्यवाही प्रचलन में है.

132 के.व्ही. ग्रि‍ड की स्थापना

[ऊर्जा]

4. ( *क्र. 559 ) श्री दिलीप सिंह शेखावत : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा दिनांक 10.01.2016 को खाचरौद प्रवास के दौरान अन्‍त्‍योदय मेले में घोषणा की गयी थी कि ग्राम गढ़ी भैसोला में 132 के.व्ही. ग्रिड की स्थापना शीघ्र की जावेगी? (ख) यदि हाँ, तो यह कार्य कब तक प्रारम्भ हो जावेगा?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ। (ख) ग्राम भैसोला, जिला उज्‍जैन में 132 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र की स्‍थापना के कार्य की प्रशासनिक स्‍वीकृति दी जा चुकी है। इस कार्य को 13वीं पंचवर्षीय योजना में सम्मिलित किया गया है। इस हेतु वित्‍तीय संसाधन जुटाने के लिए कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। वित्‍तीय संसाधन उपलब्‍ध होते ही कार्य प्रारंभ किया जाएगा।

श्री दिलीप सिंह शेखावत- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सर्वप्रथम में मंत्री जी को धन्‍यवाद दूंगा कि 132 के.व्‍ही. उपकेंद्र की प्रशासकीय स्‍वीकृति जारी हो गई है. लेकिन मंत्री जी ने अपने उत्‍तर में कहा है कि वित्‍तीय संसाधन उपलब्‍ध होते ही कार्य प्रारंभ कर दिया जायेगा, क्‍योंकि मेरे पूरे विधान सभा क्षेत्र में केवल एक ही 132 के. व्‍ही. का ग्रिड है. दिल्‍ली-मु्ंबई के रेल्‍वे ट्रैक के दोनों तरफ लगभग 60-70 गांव हैं. बुरानाबाद से जो रेल्‍वे लाईन आती है, यदि उसमें कोई फॉल्‍ट होता है तो वे 70 गांव जो गढ़ी भैसोला की ओर हैं, उनमें कई दिनों तक बिजली नहीं रहती है. मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहूंगा कि वे समय सीमा बतायें कि यह कार्य कब तक प्रारंभ होगा.

श्री पारस चन्‍द्र जैन- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 132 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र की प्रशासकीय स्‍वीकृति हो गई है. इसे विभागीय मद से यथाशीघ्र पूर्ण किया जावेगा.

श्री दिलीप सिंह शेखावत- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि यह एक गंभीर विषय है, इसलिए मंत्री जी कृपया समय सीमा बतायें. आपके माध्‍यम से मैं मंत्री जी से एक और आग्रह करना चाहता हूं कि मेरी विधान सभा में बड़ागांव में 33 के.व्‍ही. का ग्रिड है, जिसमें से 75 किलोमीटर घरेलू एवं कृषि की अलग से लाइनें हैं. जिसमें पिपलोदा, भाटेसोड़ा, भीलसोड़ा तक 15 किलोमीटर एवं सन्‍डावदा, सन्‍दला, सुरेल, लोहारी, सन्‍डावदा सोमचि‍ड़ी में 45 किलोमीटर और एक फीडर बागेड़ी, चन्‍दवासला में है. मैं आग्रह करना चाहता हूं कि सुरेल, सन्‍दला के बीच में एक 33 के.व्‍ही. का ग्रिड यदि बन जाये तो लगभग 35 गांवों के किसानों को लाभ मिलेगा. इसका प्रपोजल बना हुआ है. आप कृपया मुझे आश्‍वासन दे दें कि किसानों के लाभ से जुड़ा हुआ यह ग्रिड आप इस वर्ष बनवा देंगे, तो मैं आपका बहुत आभारी रहूंगा.

श्री पारस चन्‍द्र जैन- अध्‍यक्ष महोदय, सदस्‍य द्वारा 33 के.व्‍ही. के जिस उपकेंद्र की मांग की जा रही है, हम उसे दिखवा लेंगे, यदि वह तकनीकी रूप से साध्‍य होगा तो आगामी योजना में हम इसे शामिल कर लेंगे.

 

 

 

कैनाल कार्य में अनियमितता

[नर्मदा घाटी विकास]

5. ( *क्र. 1166 ) कुँवर सौरभ सिंह : क्या राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दिनांक 06 दिसम्‍बर 2016 में मुद्रित परि.अता.प्रश्‍न संख्‍या 100 (क्र. 1296) के दिए गए उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में 78,93,235/- रूपये की पी.एफ. राशि में से अभी तक संबंधितों के खाते में कितनी राशि जमा कर दी गई? (ख) यदि नहीं, तो संबंधित ठेकेदार के विरूद्ध अधिनियम में वर्णित प्रावधानों के तहत क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई? कार्यवाही विवरण एवं दस्‍तावेज सहित बताएं तथा ऐसी स्थिति में अधिनियम में क्‍या प्रावधान हैं? प्रतियां उपलब्‍ध करावें (ग) प्रश्‍नकर्ता सदस्‍य द्वारा प्रमुख सचिव नर्मदा घाटी को कार्यालयीन पत्र क्रमांक 1713, दिनांक 19/12/2016 लिखा गया, उस पर विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई?

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) रूपये 78,93,235/- पी.एफ. की राशि ठेकेदार से वसूल कर ली गई है। कर्मचारियों के पी.एफ. विवरण प्राप्‍त होने पर संबंधितों के खाते में जमा की जावेगी। (ख) उत्‍तरांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में अब कोई कार्यवाही आवश्‍यक नहीं है। (ग) पत्र विभाग में प्राप्‍त नहीं हुआ है।

श्री जयवर्द्धन सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी ने अपने उत्‍तर में बताया है कि ठेकेदार से 78 लाख रूपये की राशि वसूल की गई है, लेकिन आज जब हमारे देश के प्रधानमंत्री कैशलेस सोसायटी, डिजिटल पेमेंट की बात करते हैं तो फिर उन कर्मचारियों का पी.एफ. चालान आज तक जमा क्‍यों नहीं किया गया है. मेरा आरोप है कि मंत्री जी संबंधित ठेकेदार को संरक्षण दे रहे हैं. मंत्री जी द्वारा अपने उत्‍तर में यह बहाना दिया गया है कि कर्मचारियों के खातों से संबंधित विवरण प्राप्‍त नहीं हुआ है क्‍योंकि कोई भी कार्य प्रारंभ होने पर ठेकेदार द्वारा सभी कर्मचारियों के अन्‍य विवरणों के साथ ही बैंक खातों की जानकारी भी ली जाती है. माननीय मंत्री जी समय-सीमा बतायें कि कब तक वे सभी कर्मचारियों के खातों में पी.एफ. की राशि जमा करवा देंगे.

श्री लालसिंह आर्य- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सर्वप्रथम माननीय सदस्‍य को धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि उन्‍होंने यह प्रश्‍न सदन में उठाकर इस ओर हमारा ध्‍यान आकर्षित करवाया. हमने कर्मचारियों के पी.एफ. फण्‍ड की राशि ठेकेदार की देयकों से प्राप्‍त कर ली है. माननीय सदस्‍य ने कहा कि हम ठेकेदार को संरक्षण दे रहे हैं, यह बात पूरी तरह से गलत है. हमारी यह सरकार सिर्फ मजदूरों और गरीबों को संरक्षण देती है, हमारे यहां कभी ठेकेदारों को संरक्षण मिल ही नहीं सकता है. अध्‍यक्ष महोदय, पी.एफ. कमीशनर इस राशि को जमा करवाते हैं. हम यथाशीघ्र कर्मचारियों के बैंक खातों की सूची को एकत्रित कर राशि उनके खातों में जमा करवा देंगे. इस बाबत् हमने पूर्व में पी.एफ. कमीशनर को लिखा भी है.

श्री जयवर्द्धन सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह मजदूरों का सवाल है कम से कम माननीय मंत्री जी समय सीमा बताएं और साथ में दो कंपनियों को इसमें टेंडर मिला था ई.सी.एल. और पटेल ग्रुप को, उसके बाद इन्‍होंने सबलेट किया था कोस्‍टल कंपनी को अब कोस्‍टल कंपनी अपना काम अधूरा करके छोड़ चुकी है और अब वहां पर ठीक से उपस्थित भी नहीं है. कम से कम माननीय मंत्री जी यह बताएं कि क्‍या एक सप्‍ताह में पी.एफ. चालान का पूरा पेमेंट मिल जाएगा या फिर एक महीने की बात है. जैसा मैंने पहले कहा आज का समय डिजीटल पेमेंट का है उसमें तो एक या दो दिन में कार्यवाही पूरी होनी चाहिए और माननीय मंत्री जी ने कहा भी है कि पूरी जो सूची है वह एकत्रित हो चुकी है. मैं मानता हूं. एक-दो दिन या फिर अगले हफ्ते ही पेमेंट हो जाए. मंत्री जी इतना आश्‍वासन दे दें.

श्री लाल सिंह आर्य-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पी.एफ. की राशि को जमा कराने का अधिकार पी.एफ. कमिशनर के पास है. हमने उनसे आग्रह भी किया है और हमारी कोशिश है कि तत्‍काल राशि एक माह में मजदूरों के खाते में जमा करा दें.

श्री जयवर्द्धन सिंह -- अगर एक माह में जमा नहीं होगी तो क्‍या पी.एफ. कमिशनर पर कार्यवाही होगी?

श्री लाल सिंह आर्य-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह हमारे लिए संभव ही नहीं है क्‍योंकि राशि जमा करने का अधिकार पी.एफ. कमिशनर को है. हमने उन्‍हें पत्र लिखे हैं लेकिन हम आपसे कह रहे हैं कि एक महीने के अंदर पी.एफ. की राशि उनके खाते में जमा हो जाए इसके लिए हम उनके सारे नंबर एकत्रित कर रहे हैं उनके खाते में जमा होगी.

श्री जयवर्द्धन सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आग्रह क्‍यों माननीय मंत्री जी एक माह का आश्‍वासन दे रहे हैं या तो ठेकेदार पर कार्यवाही हो या उससे फाइन लिया जाए.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप प्रिजम्‍शन क्‍यों कर रहे हैं अभी आप प्रिजम्‍शन न करें. नहीं होगा तब देखेंगे.

श्री जयवर्द्धन सिंह -- माननीय मंत्री जी कम से कम इतना तो आश्‍वासन दे दें.

अध्‍यक्ष महोदय-- हाउस में आश्‍वासन दे दिया.

श्री जयवर्द्धन सिंह-- मंत्री जी ने कार्यवाही की बात नहीं कही है. कम से कम कार्यवाही का भी तो आश्‍वासन दे दें. माननीय मंत्री जी इतना और कर दें.

विद्युत बिलों की समीक्षा

[ऊर्जा]

6. ( *क्र. 511 ) श्री सुखेन्‍द्र सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रश्‍नकर्ता द्वारा विधान सभा में दिये गये भाषण दिनांक 14.03.2016 को सदन में बताया गया था कि मऊगंज विधान सभा में अकेले 80,000 मीटर खराब हैं। रीडिंग नहीं ली जाती है। औसत बिल के नाम पर उपभोक्‍ता के साथ अन्‍याय हो रहा है। (ख) प्रश्‍नांश (क) के प्रकाश में कितने मीटर बदले गये? ग्रामवार संख्‍या उपलब्‍ध करावें। (ग) क्‍या प्रश्‍नकर्ता द्वारा 27 सितम्‍बर 2016 को मऊगंज एवं दिनांक 09.09.2016 को हनुमना में किये गये एक दिवसीय घेराव (धरना) में एम.पी.ई.बी. की विभिन्‍न समस्‍याओं से संबंधित प्राप्‍त आवेदनों पर निराकरण किया गया है? यदि हाँ, तो प्रत्‍येक आवेदन पर किये गये निराकरण का विवरण, आवेदक का नाम, पूर्ण पता सहित समस्‍या का विवरण, निराकरण का विवरण देवें? यदि नहीं, तो क्‍यों एवं इसके लिए कौन-कौन दोषी है? दोषी के खिलाफ क्‍या कार्यवाही होगी? (घ) प्रश्‍नकर्ता के विधान सभा क्षेत्र मऊगंज में जाँच/चेकिंग के नाम पर अनियमितता/विद्युत चोरी का कारण बताकर ऊर्जा क्षति के नाम पर फर्जी तरीके से रूपये वसूले गये हैं, जबकि स्‍थल पर ऐसा नहीं किया गया, क्‍या इसकी समीक्षा करायेंगे? ऐसे प्रकरण का निराकरण करायेंगे? यदि हाँ, तो कब? यदि नहीं, तो क्‍यों?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) दिनांक 01.04.2016 की स्थिति में मऊगंज विधानसभा क्षेत्र के अन्‍तर्गत 14359 मीटर खराब थे। जी नहीं, अपितु स्‍थापित मीटरों की नियमानुसार रीडिंग ली जाती है। मीटर बंद/खराब होने की स्थिति में विद्युत प्रदाय संहिता 2013 की कंडिका 8.35 में निहित प्रावधानों के अनुसार आंकलित खपत एवं म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी दरें आदेश के अनुसार ही बिल दिये जाते हैं। (ख) उत्‍तरांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में 2708 मीटर बदले गये हैं जिनकी ग्रामवार संख्‍या पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) दिनांक 27.08.2016 को मऊगंज में एक दिवसीय प्रदर्शन एवं दिनांक 09.09.2016 को हनुमना में आयोजित शिकायत निवारण शिविर में प्राप्‍त सभी आवेदनों का यथोचित निराकरण कर दिया गया है, जिसका विवरण क्रमश: पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' एवं '' अनुसार है। अत: किसी के दोषी होने अथवा किसी के विरूद्ध कार्यवाही करने का प्रश्‍न नहीं उठता। (घ) मऊगंज विधानसभा क्षेत्र में जाँच/चेकिंग के दौरान विद्युत चोरी पाए जाने अथवा विद्युत का अनाधिकृत उपयोग पाए जाने पर वास्‍तविकता के आधार पर ही प्रकरण बनाए गए हैं, अत: प्रश्‍न ही नहीं उठता। तथापि नियम विरूद्ध बनाया गया कोई प्रकरण यदि संज्ञान में लाया जायेगा, तो उक्‍त प्रकरण की जाँच कर नियमानुसार कार्यवाही किया जाना संभव हो सकेगा। 

श्री सुखेन्‍द्र सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह जो मेरा प्रश्‍न है अवैध बिजली वसूली का मामला है बगैर मीटर की रीडिंग लिए हुए का मामला है और मैं समझता हूं कि यह पूरे प्रदेश स्‍तर का मामला है. पूरे प्रदेश में उपभोक्‍ता परेशान हैं इस मुद्दे को लेकर मैंने जो प्रश्‍न किया है कि 80,000 मीटर खराब हैं तो जो जानकारी माननीय मंत्री जी ने दी है वह पूरी तरह से असत्‍य है. मेरा उनसे यह प्रश्‍न है कि क्‍या इसी तरीके से गलत जानकारी देकर के प्रदेश की जनता को, हमारी मऊगंज की जनता को लुटवाते रहेंगे या इसमें कोई सुधार करेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप स्‍पेसिफिक प्रश्‍न पूछें.

श्री सुखेन्‍द्र सिंह-- इसमें मेरा प्रश्‍न यह है कि मेरे पास प्रूफ है कि कई उपभोक्‍ता जो मेरे पास अवैध वसूली का मुद्दा लेकर आए हैं आप कहें तो मैं नाम सहित आपको गिनवा सकता हूं कि क्‍या उनकी जांच कराएंगे क्‍या विभाग के ऊपर कार्यवाही कराएंगे. और उन्‍होंने ढ़ाई हजार जो जानकारी दी है कि मीटर सुधारे गए हैं. कुल बी.टी.एल. कंपनी के जो मीटर लगाए गए हैं उसकी जानकारी दी है बाकी जो मीटर लगे हुए हैं उनके बारे में उन्‍होंने कोई जानकारी नहीं दी है. जानकारी पूरी तरह से असत्‍य है. मेरा आपके माध्‍यम से अनुरोध है कि इस पर माननीय मंत्री जी क्‍या करेंगे?

श्री पारस चन्‍द्र जैन -- अध्‍यक्ष महोदय, हमारे पास कुल संख्‍या 298 आई थी और हमने उसमें से 30 का निराकरण किया है जो शिकायत निराकरण योग्‍य नहीं पाई गईं वह 268 हैं और ट्रांसफर के संबंध में कुल संख्‍या 25 आई थी हमने उसमें से 18 का निराकरण किया है एक उसमें बाकी है. मीटर बदलने के संबंध में हमारे पास 2 शिकायतें हैं. एक का हमने निराकरण कर दिया और एक रह गई है. विद्युत केबल खराब होने के संबंध में 10 हैं जिसमें से 5 का हमने निराकरण कर दिया है. विद्युत चोरी के प्रकरण समाप्‍त करने के संबंध में 7 में 7 ही बकाया हैं. कुल 342 में से हम 54 का निराकरण कर चुके हैं. 288 हमारी अभी बाकी हैं लेकिन जो आप यह बता रहे हैं इनके मेरे पास बिल हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने चार-चार पांच-पांच साल से पैसा नहीं दिया है. यदि आप देखें तो मेरे पास भी कुछ बिल हैं एक बिल में 251 रुपए भरने थे लेकिन पांच साल तक इनके पैसे न भरने के कारण सरचार्ज होने के बाद यह राशि बढ़ती गई है और इसके लिए बीच में ''समाधान योजना'' भी हम लाए थे लेकिन वह लोग यदि इसमें आ जाते तो इनको राहत मिल जाती.

श्री सुखेन्‍द्र सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे पास नाम हैं फतहखान छिरयारी, मऊगंज दिनांक 11.11.2016 को 16920 बिल पर संशोधन 6 हजार 86 रुपए करके 10835 रुपए शेष बचा जिसमें 7000 जमा किया तो शेष बचा 3835 किन्तु जनवरी के बिल में 20702 समायोजन राशि निकाल दी जबकि नवम्बर में समायोजन हो चुका था. ऐसे ही जो बिल शेष हैं वे लाखों में पहुंच रहे हैं. इसी तरह से श्री चन्द्रमणि प्रसाद मिश्र, जयवीर प्रसाद पटेल (देवरी), रुकबुद्दीन अंसारी, नीलेश गुप्ता (मऊगंज), रामनरेश पाण्डेय. पूरे क्षेत्र में इस तरह के कई उदाहरण हैं. मैं अक्षरश: हर गांव का नाम बता सकता हूँ. इसमें बहुत बड़ा भ्रष्टाचार हो रहा है और उपभोक्ताओं को लूटा जा रहा है. यह साधारण बात नहीं है इस तरह से प्रदेश की जनता को लूटा जा रहा है. क्या इसी तरीके से लुटवाएंगे ? यह पूरा प्रदेशव्यापी मामला है, सरेआम लुटवाया जा रहा है. मैं नामजद गिना रहा हूँ इसकी जांच करवाइये (व्यवधान) असत्य जानकारी दी जाती है.

अध्यक्ष महोदय--आप पहले उनका उत्तर तो आने दें. (व्यवधान)

श्री सुखेन्द्र सिंह-- इस तरह से पूरे प्रदेश में किसानों और गरीबों के साथ...

अध्यक्ष महोदय--जो मामले यह बता रहे हैं उनकी जांच कराकर उसका न्यायपूर्वक निराकरण करेंगे.

श्री सुखेन्द्र सिंह--यह पूरे प्रदेश का मामला है. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--पहले उनका काम तो होने दो (व्यवधान)

श्री सुखेन्द्र सिंह--माननीय मंत्री जी को आज आपके माध्यम से जवाब देना होगा कि पूरे प्रदेश के किसानों को गरीबों को इसी तरीके से लूटा जाएगा? (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--आपने जो नाम बताए हैं. उनके क्षेत्र की समस्या तो हल हो जाने दीजिए फिर आप अपनी बात करना.(व्यवधान)

श्री तरुण भनोत -- माननीय अध्यक्ष महोदय, पूरे प्रदेश में यह हो रहा है आपके क्षेत्र में भी हो रहा है. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--आप उनका उत्तर आ जाने दीजिए उसमें सबका समाधान हो जाएगा.

श्री पारस चन्द्र जैन--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने पहले भी बताया है कि जो खराब मीटर के बिजली के बिल हैं उनके बिल आयोग के निर्देशानुसार बनाए जाते हैं. उसमें यदि शहर का बिल है तो 100 और ग्रामीण क्षेत्र का बिल है तो 75. जो एवरेज बिल बनाए जाते हैं वे उसी हिसाब से बनाए जाते हैं. कुछ सुधार तो हमने किया है बाकी यदि कोई बिल है और कोई स्पेसिफिक बताएंगे तो हम दिखवा लेंगे, हम मना नहीं कर रहे हैं.

श्री सुखेन्द्र सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, कोई एक गांव का मामला नहीं है (व्यवधान)

प्रभारी नेता प्रतिपक्ष (श्री बाला बच्चन) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी ने उनके विधान सभा क्षेत्र मऊगंज के बारे में पूछा था कि 80,000 मीटर खराब हैं जो कि रीडिंग लेने की स्थिति में नहीं हैं. इसमें सरकार ने यह स्वीकार किया है कि 80000 नहीं बल्कि 14359 मीटर खराब है जिसमें से 2708 मीटर बदल दिए गए हैं. हम यहां यह जानना चाहते हैं कि यह 14359 मीटर जो खराब थे इनके उपभोक्ताओं की रीडिंग किस तरह से लेकर उनको बिल दिए गए हैं. यह केवल एक विधान सभा क्षेत्र का मामला है पूरे मध्यप्रदेश में फर्जी बिल दिए जा रहे हैं और बड़े-बड़े बिल दिए जा रहे हैं. माननीय मंत्री जी से इसका उत्तर दिलवाइए.

अध्यक्ष महोदय-- आपने कोई स्पेसिफिक प्रश्न नहीं पूछा है.

श्री बाला बच्चन -- हम यह चाहते हैं कि इसकी समीक्षा करवाइए. इसकी जांच हो जाए. माननीय मंत्री जी आप इतने असहाय क्यों नजर आ रहे हैं ? पूरे मध्यप्रदेश के मीटर खराब हैं उपभोक्ताओं को मनमाने तरीके से बिजली के बिल दिए जा रहे हैं. मऊगंज विधान सभा का प्रकरण तो जिस तरह से हण्डी में चावल चेक किया जाता है वह वाली स्थिति जैसा है. क्या आप पूरे मध्यप्रदेश के उपभोक्ताओं के बिजली के मीटर चेक करवाएंगे और उनके मुताबिक बिजली के बिल दिलवाएंगे ? यह मनमाना तरीका नहीं चलेगा. पहले ही किसान बहुत परेशान है. इसका आप जवाब दीजिए कि क्या आप पूरे मध्यप्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के बिजली के मीटरों को जांच करवाएंगे जिनको फर्जी बिल दिए जा रहे हैं.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री गोपाल भार्गव)-- बाला बच्चन जी, किसान कितना परेशान है और कितना नहीं है. आप दिग्विजय सिंह जी के समय मंत्री थे आपको मालूम है 24-24 घंटे बिजली नहीं आती थी..(व्यवधान)

श्री बाला बच्चन -- आप फालतू की बात कर रहे हैं (व्यवधान)

श्री गोपाल भार्गव -- आप अभी परेशानी की बात कर रहे थे (व्यवधान) आपको कहने का कोई अधिकार नहीं है, आपको यह सब कहने का (व्यवधान)

श्री बाला बच्चन -- आप किसान विरोधी बात कर रहे हैं (व्यवधान)

श्री हर्ष यादव -- 13 साल से आपकी सरकार है (व्यवधान)

..(व्यवधान)..

श्री गोपाल भार्गव-- आपको यह सब कहने का कोई अधिकार नहीं है. ..(व्यवधान)..

श्री बाला बच्चन-- आप किसानों के विरोध में बात कर रहे हों. ..(व्यवधान)..

श्री गोपाल भार्गव-- आपने पूरे प्रदेश को सालों अँधेरे में डाले रखा. ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- प्रश्न क्रमांक 7 डॉ मोहन यादव.... ..(व्यवधान)..

श्री गोपाल भार्गव-- आपको यह कहने का कोई अधिकार नहीं है. आप जिस तरह से कहना चाहते हों कोई अधिकार नहीं है आपको कहने का. ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- कृपया प्रश्नकाल चलने दें.

श्री बाला बच्चन-- आप किसानों के विरोध की बात कर रहे हों.

श्री गोपाल भार्गव-- वे अँधकार के दिन, बच्चों की परीक्षाएँ, बच्चों की आत्महत्याएँ, किसानों की आत्महत्याएँ, आपकी बिजली बंदी के कारण हुई. ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी कृपया बैठ जाएँ. प्रश्न क्रमांक 7 डॉ मोहन यादव. ..(व्यवधान)..

श्री सचिन यादव-- अध्यक्ष महोदय, इनकी सरकार को 13 साल हो गए...(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- आप लोग सुनते कहाँ हैं. ..(व्यवधान)..

श्री बाला बच्चन-- माननीय अध्यक्ष महोदय, उत्तर दिलवाइये. ..(व्यवधान)..यह मध्यप्रदेश के किसानों का मामला है. उत्तर आना चाहिए. ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- आप उत्तर सुनने को तैयार नहीं हैं. ..(व्यवधान)..

डॉ गोविन्द सिंह-- अध्यक्ष महोदय, पूरे प्रदेश में अन्याय हो रहा है. फर्जी बिल, 10-10 वर्षों से न ट्रांसफार्मर हैं, न खम्भे हैं, लेकिन इसके बावजूद भी बिल भेजे जा रहे हैं और धारा 38 में बिल न चुकाने के कारण कई किसानों को जेल भेजा जा रहा है. जबकि उनके ऊपर बिल का कोई बकाया नहीं है. 10 वर्ष से न ट्रांसफार्मर हैं, न खम्भे हैं, न तार हैं और एक एक लाख के बिल भेजे गए और जिनसे वसूली नहीं हो पाई तो उनको जेल भेजा गया.

श्री बाला बच्चन-- माननीय अध्यक्ष महोदय, इसमें उत्तर दिलवाइये.

अध्यक्ष महोदय-- आप बैठ तो जाएँ. ..(व्यवधान)..

श्री बाला बच्चन-- एक मिनट उत्तर ले लीजिए. ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- आप बैठ तो जाएँ. ..(व्यवधान)..मैं आगे बढ़ जाऊँगा. ..(व्यवधान)..

श्री दिनेश राय-- अध्यक्ष जी, मैं तो निर्दलीय हूँ. मैं तो पूछ सकता हूँ. मुझे क्या लेना देना काँग्रेस कार्यकाल से. कम से कम मेरा ही जवाब दे दें.

अध्यक्ष महोदय-- आपका जवाब नहीं देंगे.

श्री बाला बच्चन-- माननीय अध्यक्ष महोदय, इस प्रश्न का उत्तर तो दिला दीजिए.

अध्यक्ष महोदय-- उनका समाधान हो जाने दें.

श्री बाला बच्चन-- आप उत्तर दिलवाइये.

अध्यक्ष महोदय-- आप बैठ जाएँ. माननीय प्रतिपक्ष के नेता जी ने जो विषय उठाया है. उस संबंध में यदि आपके पास कोई शिकायतें आती हैं और माननीय सदस्य सुखेन्द्र सिंह जी जो आपको नाम दे रहे हैं उनकी आप सूक्ष्म जाँच करा लें और उस हिसाब से निराकरण करें. अब आगे डॉ मोहन यादव अपना प्रश्न करें. ..(व्यवधान)..

11.33 बजे

बहिर्गमन

श्री बाला बच्चन, प्रभारी नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में शासन के उत्तर से असंतुष्ट होकर इंडियन नेश्नल काँग्रेस के सदस्यों का सदन से बहिर्गमन.

प्रभारी नेता प्रतिपक्ष (श्री बाला बच्चन)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, हम माननीय मंत्री जी के जवाब से संतुष्ट नहीं हैं इसलिए हम बहिर्गमन करते हैं.

अध्यक्ष महोदय-- आपकी बात आ गई, आपका समाधान होगा.

(प्रभारी नेता प्रतिपक्ष श्री बाला बच्चन के नेतृत्व में इंडियन नेश्नल काँग्रेस के सदस्यों द्वारा शासन के उत्तर से असंतुष्ट होकर सदन से बहिर्गमन किया गया.)

 

 

 

11.34 बजे

तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर (क्रमशः)

प्रश्‍नकर्ता के पत्रों पर कार्यवाही

[वाणिज्यिक कर]

7. ( *क्र. 987 ) डॉ. मोहन यादव : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) परि.अता. प्रश्‍न संख्‍या 19 (क्रमांक 1260), दिनांक 11.03.2016 का गलत जवाब दिये जाने के कारण प्रश्‍नकर्ता द्वारा प्रमुख सचिव मध्‍यप्रदेश शासन को प्रेषित पत्र क्रमांक ए-1318/उ.द./2016 दिनांक 12.06.2016 कलेक्‍टर, जिला उज्‍जैन को प्रेषित पत्र क्रमांक ए-1321/उ.द./2016 दिनांक 12.06.2016 जो कि 20.06.2016 को संबंधित को प्राप्‍त हुआ, वरिष्‍ठ जिला पंजीयक महोदय के संबंध में विभाग को प्रेषित पत्र क्रमांक ए-1319/उ.द./2016 दिनांक 12.06.2016 जो कि 20.06.2016 को संबंधित को प्राप्‍त हुआ? उक्‍त पत्रों के संबंध में विभाग द्वारा क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई? की गई कार्यवाही का विस्‍तृत ब्‍यौरा प्रस्‍तुत करें तथा उक्‍त संबंध में प्रश्‍नकर्ता को कब जानकारी उपलब्‍ध कराई तथा चाही गई जानकारी मय दस्‍तावेजों के उपलब्‍ध करावें? (ख) प्रश्‍नांश (क) की जानकारी अनुसार प्रश्‍नकर्ता के पत्रों पर संबंधित अधिकारियों के द्वारा कार्यवाही नहीं करते हुये नियत समयावधि में कोई जबाव नहीं देने के लिए कौन अधिकारी दोषी हैं? दोषियों के विरूद्ध कब तक कार्यवाही की जावेगी?

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) विधानसभा प्रश्‍न क्रमांक 1260 दिनांक 11/03/2016 के संबंध में प्रश्‍नकर्ता का पत्र क्रमांक ए-1318/उ.द./2016, दिनांक 12/06/2016 के संबंध में विभागीय पत्र क्रमांक-बी-15-24/2016/2/पाँच, दिनांक 17 अक्‍टूबर, 2016 द्वारा प्रकरण की वस्‍तुस्थिति से विधानसभा सचिवालय को अवगत कराया जा चुका है। जिसकी छायाप्रति संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। कलेक्‍टर उज्‍जैन को प्रेषित पत्र क्रमांक ए-1321/उ.द./2016 एवं वरिष्‍ठ जिला पंजीयक उज्‍जैन को प्रेषित पत्र क्रमांक ए-1319/उ.द./2016, दिनांक 12/06/2016 के संबंध में वरिष्‍ठ जिला पंजीयक उज्‍जैन द्वारा प्रश्‍नकर्ता को पत्र क्रमांक 527/जि.पं./बा.मू./गा.ला./2016 दिनांक 22/06/2016 द्वारा वस्‍तुस्थिति से अवगत कराया गया था। जिसकी छायाप्रति संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) प्रश्‍नांश (क) के उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''एक''

 

डॉ मोहन यादव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से एक जन हितैषी और माननीय लोकप्रिय मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए निर्देश के परिपालन में जो थोड़ी त्रुटि हो रही है उस तरफ ध्यानाकर्षित कराना चाहता हूँ. हमारे अपने मुख्यमंत्री द्वारा 2014 में ही यह निर्देश जारी कर दिए गए थे कि गरीबों के आवास के पंजीयन में कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा. इसी प्रकार से किसानों के भूमि बंधन विलेख बनाने में भी पंजीयन शुल्क से छूट मिलेगी. लेकिन दुर्भाग्य से प्रक्रिया की गलती के कारण से नीचे लेवल पर आज भी यह शुल्क लिया जा रहा है. इस विसंगति के कारण से कई सारे लोग, कई बड़ी राशि, अलग अलग जिलों में देकर के परेशान हो रहे हैं, तो मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से इस संबंध में जवाब जानना चाहता हूँ कि वे ठीक से इसका परिपालन कराने की दिशा में कुछ कार्यवाही कर रहे हैं?

श्री जयन्त मलैया-- माननीय अध्यक्ष महोदय, अभी माननीय सदस्य ने जो प्रश्न पूछा है उससे उद्भूत होता नहीं है परन्तु चूँकि उन्होंने प्रश्न पूछा है उसका हम समाधान करा लेंगे.

डॉ मोहन यादव-- अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी का धन्यवाद है कि उन्होंने कहा कि हम ठीक से निर्देश जारी कर देंगे ताकि विसंगति दूर हो जाए. एक और यह जो गरीबों के अलावा जो अंतिम समय में या वसीयत करने के संबंध में पहले निर्देश जारी थे कि घर जाकर के, कोई अंतिम समय में जाकर वसीयत करता है या दस्तावेज पंजीयन कराना चाहता है तो, डी आर या सब रजिस्ट्रार जाकर वह पंजीयन करा देता था. लेकिन अभी यह प्रक्रिया थोड़ी बंद है. इसके कारण से वह ऊपर तक की परमीशन लेकर आएँगे फिर कराएँगे तो इसके चक्कर में व्यक्ति मर जाता है, तो वह जो मूल काम है वह छूट जाता है, तो बेहतर होगा कि इस संबंध में निर्देश जारी करें या वह ठीक से अपनी बात जिला रजिस्ट्रार तक पहुँचाए या इस संबंध में क्या निर्देश हैं थोड़ा बताने का कष्ट करें?

श्री जयंत मलैया-- माननीय अध्यक्ष महोदय, विजिट के दस्तावेजों के संबंध में अब मुख्यालय स्तर से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है जिला स्तर पर ही यह कार्यवाही पूर्ण हो जाए ऐसे निर्देश यहाँ से दिये जा चुके हैं.

डॉ. मोहन यादव-- मंत्री जी, बहुत-बहुत धन्यवाद.

प्रश्न संख्या 8 (अनुपस्थित)

 

 

 

 

अनुदान योजना के तहत स्‍थाई पंप कनेक्‍शन का प्रदाय

[ऊर्जा]

9. ( *क्र. 295 ) श्री जतन उईके : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) पांढुर्णा विधान सभा क्षेत्रांतर्गत शासन की अनुदान योजना के तहत स्‍थाई पंप कनेक्‍शन हेतु वर्ष 2013-14 में एवं 2014-15, 2015-16 में 31 मार्च 2016 तक कितने आवेदन म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड छिंदवाड़ा के संबंधित कार्यालयों को प्राप्‍त हुए हैं? (ख) पांढुर्णा विधान सभा क्षेत्रांतर्गत वर्ष 2013-14 से वर्ष 2014-15, 2015-16 में दिनांक 31 मार्च 2016 तक अनुदान योजना के अन्‍तर्गत कितने स्‍थाई पंप कनेक्‍शन प्रदान किये गये? ग्रामवार बतावें।

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) पांढुर्णा विधानसभा क्षेत्र में ''कृषक अनुदान योजना'' के अंतर्गत स्‍थाई पम्‍प कनेक्‍शन हेतु वर्ष 2013-14 में 7, वर्ष 2014-15 में 18 एवं वर्ष 2015-16 में 21 इस प्रकार प्रश्‍नाधीन अवधि में कुल 46 आवेदन म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के संबंधित कार्यालयों में प्राप्‍त हुए हैं। (ख) पांढुर्णा विधानसभा क्षेत्रांतर्गत वर्ष 2013-14 में 7, वर्ष 2014-15 में 18 एवं वर्ष 2015-16 में 21 इस प्रकार प्रश्‍नाधीन अवधि में प्राप्‍त सभी 46 आवेदनों के कार्य पूर्ण कर स्‍थाई पम्‍प कनेक्‍शन प्रदान कर दिए गए हैं। उक्‍तानुसार दिये गये स्‍थाई पम्‍प कनेक्‍शनों का ग्रामवार एवं वर्षवार विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है।

परिशिष्ट - ''दो''

 

श्री जतन सिंह उईके-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्यम से माननीय से प्रश्न था कि मुख्यमंत्री अनुदान कनेक्शन योजना के अंतर्गत वर्ष 2013, 2014, 2015 में कितने प्रकरण दिये थे. प्रश्नांश (क) और (ख) का उत्तर मुझे दिया गया है. मैं जानना चाहता हूँ कि प्रकरण जमा होने और राशि जमा करने के कितने दिन के दरम्यान डी.पी. और पोल लगा दी जाती है, उसकी समय-सीमा बतायें?

श्री पारस चन्द्र जैन-- माननीय अध्यक्ष महोदय, अभी आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा 23 दिसंबर 2016 को अनुसूचित जनजाति हेतु विद्युतीकरण योजना लागू की है और इसमें जिन लोगों की इस प्रकार की समस्या है, उनका निराकरण करने का काम हम करेंगे. उक्त कार्यों के आवेदन जिला स्तर पर प्राप्त किये जाएंगे. माननीय सदस्य वहाँ आवेदन दे दें, वहाँ पर एक समिति कलेक्टर की देख-रेख में बनी हुई है उसके माध्यम से जब हमारे पास एस्टीमेट आता है तब हम उस पर कार्य करते हैं.

श्री जतन सिंह उईके-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न यह था कि प्रकरण जमा होने और राशि जमा होने के कितने दिनों के भीतर डी.पी. और पोल लगा दिये जाते हैं, उसकी समय-सीमा बतायें.

श्री पारस चन्द्र जैन-- 6 माह के समय के बाद इसमें काम हो जाता है.

श्री जतन सिंह उईके-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा एक और पूरक प्रश्न था कि आदिवासी परियोजना के तहत पहले पोल और डी.पी. सौ फीसदी अनुदान पर लगाये जाते थे. क्या यह योजना बंद हो गई है.यदि बंद नहीं हुई तो इसको कब तक चालू किया जाएगा?

अध्यक्ष महोदय-- यह उद्भूत नहीं होता है लेकिन मंत्री जी,यदि आपको जानकारी हो तो इसको बतला दें.

श्री जतन सिंह उईके-- माननीय अध्यक्ष महोदय, ट्राइबल सब प्लान के तहत 100 परसेंट अनुदान में डी.पी. और पोल लगा दिये जाते थे क्या वह योजना बंद हो गई है ?

अध्यक्ष महोदय-- यह उद्भूत नहीं होता है.

श्री पारस चन्द्र जैन-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह योजना बंद नहीं हुई है इसकी जगह नई योजना चालू कर दी गई है.

प्रभारी नेता प्रतिपक्ष(श्री बाला बच्चन)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, एकीकृत आदिवासी परियोजना के अंतर्गत जो ट्राइबल एरिया लगता है वहाँ बिजली लगाने के काम किये जाते थे.बिजली के खंभे,तार,डीपी लगाने के काम किये जाते थे वह अब हम विधायक राशि देते हैं उसके बावजूद भी सरकार नहीं कर रही है पहले यह होता था. मेरे अकेले विधानसभा में 10 फड़ें जो अभी अविद्युतीकृत हैं.

अध्यक्ष महोदय-- नई योजना प्रारंभ हो गई है, मंत्री जी बता रहे हैं.

श्री बाला बच्चन-- अध्यक्ष महोदय, लेकिन विधायक अपनी निधि से देता है या जो केंद्र सरकार की आईटीडीपी योजना संचालित है उसमें राशि आती है तो उसको सरकार ने क्यों बंद कर दिया है, माननीय सदस्य उसकी जानकारी चाह रहे हैं.

श्री जतन सिंह उईके-- माननीय अध्यक्ष महोदय, वह योजना बंद कर दी गई है क्या उसको सरकार चालू करेगी ?

अध्यक्ष महोदय-- उसका उत्तर उन्होंने दे दिया है कि उसकी जगह दूसरी योजना आ गई है.

श्री जतन सिंह उईके-- अध्यक्ष महोदय, नई योजना का नाम बता दिया जाये.

श्री पारस चन्द्र जैन-- माननीय अध्यक्ष महोदय, अनुसूचित जनजाति बस्तियों में विद्युतीकरण, अनुसूचित जनजाति के कृषकों को सिंचाई सुविधा हेतु विद्युत लाईन का विस्तार,पंपों का ऊर्जीकरण योजना नियम 2016 योजना ,जो मैंने उनको बताई है, मेरे पास है. इसमें उनको शामिल कर लेंगे.

सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्थाओं को अनुदान

[संस्कृति]

10. ( *क्र. 1208 ) श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल : क्या राज्‍यमंत्री, संस्कृति महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्‍थाओं को अनुदान हेतु चयनित किये जाने एवं प्रदान किये जाने की क्या प्रक्रिया एवं नियम हैं और किन सक्षम अधिकारियों द्वारा किन अनुशंसाओं के आधार पर किया जाता है।(ख) कटनी जिले में वर्ष 2012-13 से वर्तमान तक किन-किन संस्थाओं को किन-किन आयोजनों हेतु कब-कब एवं कितना-कितना अनुदान किस-किस की अनुशंसा पर किस नियम के तहत स्‍वीकृत किया गया? संस्था का नाम, पता, पंजीयन एवं संचालक मंडल की जानकारी सहित बतायें। क्‍या इन संस्‍थाओं द्वारा अनुदान हेतु कोई आवेदन किया गया था? यदि हाँ, तो दस्‍तावेज उपलब्‍ध करायें? यदि नहीं, तो किस आधार पर अनुदान स्‍वीकृत किया गया? (ग) प्रश्नांश () के तहत इन संस्थाओं द्वारा कहाँ-कहाँ एवं कब-कब, क्या कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, कार्यक्रमवार व्‍यय राशि का पूर्ण विवरण बतायें एवं क्‍या संस्‍था द्वारा व्‍यय की गई राशि का परीक्षण एवं सत्‍यापन किसी अधिकारी द्वारा किया गया? यदि हाँ, तो विवरण बतायें एवं यदि नहीं, तो क्‍यों? (घ) प्रश्नांश (ख) से (ग) के परिप्रेक्ष्य में क्या संस्थाओं के चयन एवं अनुदान राशि के उपयोग में नियमानुसार कार्यवाही की गई है? यदि हाँ, तो क्या सक्षम प्राधिकारी ऐसा होने का सत्यापन करेंगे? यदि नहीं, तो क्या कार्यवाही की जायेगी?

राज्‍यमंत्री, संस्कृति ( श्री सुरेन्द्र पटवा ) :

श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, धर्म निरपेक्ष, साहित्यिक प्रदर्शनकारी कलाओं के शिक्षण-प्रशिक्षण, अनवेषण और प्रदर्शन के आयोजन के लिए राज्‍य शासन के द्वारा जिन संस्‍थाओं को अनुदान दिया जाता है, उसके लिए मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा और मेरे दो छोटे-छोटे बिन्‍दु हैं. एक मेरा प्रश्‍न था कि जो संस्‍था के आय-व्‍यय के निरीक्षण से संबंधित रिपोर्ट का विवरण है, उसमें जवाब दिया गया कि सी.ए. द्वारा करवाया जाता है, तो उसका विवरण प्रदान कर दिया जाए. दूसरा कटनी में मात्र हर साल तीन संस्‍थाओं को अनुदान दिया जाता है. उसमें से एक संस्‍था किरण है जो राष्‍ट्रीय स्‍तर पर प्रदर्शन और आयोजन करती है लेकिन हर बार बढ़ते-बढ़ते पिछले साल उसकी राशि कम कर दी गई और अन्‍य संस्‍थाओं के प्रकरण भी पेंडिंग पडे़ हुए हैं तो इस संबंध में विशेष ध्‍यान देने की मैं मांग करता हॅूं.

श्री सुरेन्‍द्र पटवा -- पूरी विस्‍तृत जानकारी मेरे उत्‍तर में है. उसके बाद भी माननीय विधायक जी चाहेंगे तो ऑडिट रिपोर्ट की कॉपी उन्‍हें दे दी जाएगी और उसके अलावा भी कोई जानकारी चाहिए तो आपको उपलब्‍ध करा दी जाएगी. धन्‍यवाद.

प्रश्‍न संख्‍या-11 (अनुपस्थित).

प्रश्‍न संख्‍या -12 (अनुपस्थित).

11.41 बजे स्‍वागत उल्‍लेख

श्री कांतिलाल भूरिया , पूर्व मंत्री एवं वर्तमान सांसद का सदन में स्‍वागत

प्रभारी नेता प्रतिपक्ष (श्री बाला बच्‍चन) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आदरणीय श्री कांतिलाल भूरिया जी केन्‍द्रीय मंत्री भी रहे हैं. 6-7 बार से सांसद रहे हैं. मध्‍यप्रदेश सरकार के भी कई विभागों के मंत्री रहे हैं, वे हमारे बीच में उपस्थित हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- आज सदन की दीर्घा में माननीय सांसद, पूर्व मंत्री श्री कांतिलाल जी भूरिया उपस्थित हैं, सदन की ओर से उनका स्‍वागत है.

11.41 तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर (क्रमश:)

अनियमित भुगतान के दोषियों पर कार्यवाही

[नर्मदा घाटी विकास]

13. ( *क्र. 519 ) श्री सुन्‍दरलाल तिवारी : क्या राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या बरगी डायवर्जन परियोजना की सतना-रीवा मुख्‍य नहर (बरगी दायीं तट नहर) आर.डी. कि.मी 154.050 से आर.डी.‍ कि.मी. 196.650 तक और बरगी डायवर्जन परियोजना पूर्ण वितरण प्रणाली सहित नागौद (सतना) शाखा नहर आर.डी. कि.मी. 0.00 से आर.डी. कि.मी. 33.175 तक के दो कार्यों हेतु टर्नकी आधार पर वर्ष फरवरी 2009 में कार्यादेश दिया गया था? (ख) यदि हाँ, तो उक्‍त कार्य को पूर्ण करने की कार्यावधि क्‍या थी? ठेकेदार को कब-कब, किस-किस माध्‍यम से भुगतान किया गया? क्‍या कार्य निर्धारित समय एवं अनुबंधानुसार कराया गया? क्‍या कार्य पूर्ण करने हेतु कार्यावधि भी बढ़ायी गई? अगर बढ़ायी गई तो अनुबंध के शर्तों के अनुसार लागत में वृद्धि कर ठेकेदार को लाभ पहुँचाया गया? अगर वृद्धि की गई तो किस मान से? (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) के संदर्भ में कार्यपालन यंत्री (ई.ई.) एन.डी. संभाग क्रमांक 07, सतना (नागौद शाखा नहर) और कार्यपालन यंत्री एन.डी. संभाग क्रमांक 09 मैहर (सतना-रीवा मुख्‍य नहर) के अभिलेखों की जाँच दिसम्‍बर 2014 में की गई, जाँच में 99.69 लाख रूपये का अधिक भुगतान ठेकेदार को करना पाया गया? (घ) यदि प्रश्‍नांश (ग) हां, तो क्‍या फर्जी दस्‍तावेज, बिल-वाऊचर तैयार कर भारत सरकार द्वारा प्रकाशित मूल्‍यांक से ज्‍यादा की गणना कर भुगतान करने के लिए संबंधित दोषी अधिकारियों एवं ठेकेदार के विरूद्ध आपराधिक गबन का प्रकरण दर्ज कराते हुए राशि की वसूली ब्‍याज सहित करायेंगे? यदि हाँ, तो कब तक, अगर नहीं तो क्‍यों?

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) जी हाँ। (ख) कार्य अवधि कार्यादेश दिनांक से 30 माह एवं 40 माह थी। ठेकेदार को किये गये भुगतान की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र एवं अनुसार है। जी नहीं। जी हाँ। अनुबंध की कंडिका 113.2 के प्रावधानुसार ठेकेदार को किये गये कार्य पर मूल्‍यवृद्धि का भुगतान किया गया। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी हाँ। महालेखाकार द्वारा आपत्ति उठाई गयी थी। (घ) प्रश्‍नांकित दोनों अनुबंध वर्ष 2009 में किये गये थे। उस समय (आधार वर्ष 1994-95) लागू मूल्‍य सूचकांक के आधार पर प्रावधानों के अनुसार गणना कर मूल्‍यवृद्धि का भुगतान फरवरी/मार्च 2010 से किया जा रहा था। जिनका महालेखाकार दल द्वारा नियमित परीक्षण किया जाता रहा है एवं इस बावत् कोई आपत्ति दर्ज नहीं की गई। वर्ष 2014-15 में (आधार वर्ष 2004-05) के आधार पर सितम्‍बर 2010 से प्रभावशील पुनरीक्षित सीरीज के अनुसार अधिक भुगतान की बात कही गई है। तद्नुसार अनुबंध की कंडिका 108.2 में निहित प्रावधानों के अनुसार कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक 7 सतना द्वारा राशि रूपये 51.76 लाख एवं कार्यपालन यंत्री नर्मदा विकास संभाग क्रमांक 9 मैहर द्वारा राशि रूपये 45.52 लाख ठेकेदार के चलित देयकों से समायोजन कर महालेखाकार को सूचित कर दिया गया है। मुख्‍य अभियंता द्वारा उक्‍त अ‍वधि में पदस्‍थ अधिकारियों को गलत सूचकांक पर आधारित भुगतान करने हेतु कारण बताओ सूचना पत्र जारी किये गये हैं। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

 

श्री सुंदरलाल तिवारी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हॅूं कि बरगी डायवर्जन परियोजना की सतना-रीवा मुख्‍य नहर में जो 99.69 लाख रूपये का अधिक भुगतान किया गया है, इसके बारे में आपने स्‍वीकार किया है कि हॉं, लगभग 1 करोड़ रूपये अधिक भुगतान कर दिया गया है और मंत्री जी ने यह कहा है कि जिन लोगों ने अधिक भुगतान किया है उनको इस संबंध में नोटिस भी दिया गया है. मैं मंत्री जी से यह जानना चाहता हॅूं कि यह नोटिस आपने किस तारीख को और किन-किन अधिकारियों के खिलाफ दिया है? क्‍या इस नोटिस में वे ठेकेदार भी शामिल हैं जिन्‍होंने अधिक भुगतान प्राप्‍त किया है ?

श्री लाल सिंह आर्य -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह मेसर्स मोंटेकार्लो, अहमदाबाद की जो संस्‍था है, माननीय विधायक जी का मुख्‍यत: प्रश्‍न मूल्‍य वृद्धि को लेकर और उसमें जो भुगतान हुआ है उसको लेकर है. जो राशि भु‍गतान हुई थी वह राशि हम लोगों ने उनसे वसूल कर ली है. जनवरी 2017 में कार्यपालन यंत्री को नोटिस भी दिया गया. अगर हम नोटिस नहीं देते, तो यह जो राशि है इसकी हमें जानकारी प्राप्‍त नहीं होती. महालेखाकार द्वारा जो भी ऑडिट हुआ, उसके आधार पर हम लोगों ने आपत्ति ली और समय पर हमने उस राशि की वसूली कर ली है.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, निरंतर वर्ष 2009 से यह भुगतान किया जा रहा था. महालेखा परीक्षक की जो टीप आई है, यह वर्ष 2015 की है. मैंने एक प्रश्‍न किया, आपने जवाब में दिया है कि हमने नोटिस जारी किया है. मैंने पहला प्रश्‍न यह पूछा कि इनको नोटिस किस तारीख को जारी किया गया है और किस-किस को जारी किया गया है? इसका जवाब अभी सदन में नहीं आया है.

श्री लालसिंह आर्य -- जनवरी 2017 में कार्यपालन यंत्री को नोटिस जारी किया था.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अब देखा जाए कि जब यह प्रश्‍न लग गया, उस प्रश्‍न लगने के बाद संबंधित अधिकारी को नोटिस इन्‍होंने दिया है. वर्ष 2009 से निरंतर यह भुगतान चल रहा है. वर्ष 2009 से और यह प्रश्‍न लगने के बीच में, यह जो भ्रष्‍टाचार हुआ है इस पर कार्यवाही न करने के लिए कौन-कौन अधिकारी जिम्‍मेदार थ, जिन्‍होंने इस मामले को 6-7 वर्ष दबाकर रखा.दूसरी बात मुझे यह कहनी है कि चाहे इसे मिसएप्रोप्रिएशन ऑफ फंड कह लीजिए, या भ्रष्‍टाचार कह लीजिए तो क्‍या इसमें अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कोई आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध करके उन पर कार्यवाही करेंगे या नहीं ? यह मैं इसलिए पूछ रहा हूँ कि सरकारी पक्ष से नर्मदा नदी के सफाई के काम की बात की जा रही है तो यह सफाई कब शुरू होगी ?

अध्‍यक्ष महोदय -- आप अपने विषय पर आइये, आप भाषण दे रहे हैं कि प्रश्‍न पूछ रहे हैं ?

श्री सुन्‍दर लाल तिवारी -- अध्‍यक्ष महोदय, आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध करके ठेकेदार और इंजीनियर जो भी इसमें शामिल थे, अविलंब उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी या नहीं ? यह आश्‍वासन सदन को मंत्री जी दे रहे हैं या नहीं ? यह नोटिस तो फार्मलिटी है.

श्री लालसिंह आर्य -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे लगता है कि माननीय तिवारी जी सदन को गुमराह कर रहे हैं. मैं स्‍पष्‍ट करना चाहता हूँ कि ऑडिट 4 बार हुई है. पहली बात यह है कि ऑडिट रिपोर्ट में कहीं आपत्‍ति नहीं ली गई है. दूसरी बात वर्ष 2014 में महालेखाकार ने आपत्‍ति ली कि मूल्‍यवृद्धि की राशि की गणना के लिए सूचकांक आधार वर्ष 1994-95 के स्‍थान पर वर्ष 2004 को लिया जाना चाहिए था. गलत सूचकांक आधार वर्ष लिए जाने से ठेकेदार को रु. 99.69 लाख का भुगतान हुआ. जैसे ही हमारे संज्ञान में यह मामला आया, मूल्‍यवृद्धि का सूचकांक आधार वर्ष 2004-05, जो कि भारत सरकार द्वारा दिया गया है, वह हमारे पास लेट आया, वर्ष 2010 में भूतलक्षी प्रभाव से हमने रु. 99.69 लाख की राशि वसूल कर ली है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, भ्रष्‍टाचार कहा हो गया ? यदि हम राशि की वसूली नहीं करते तो ठेकेदार को कहीं न कहीं सरंक्षण होता और जहा तक आप बात कह रहे हैं, हमने दिनांक 25.01.2017 को कुल 27 अधिकारियों को नोटिस दिए हैं, जिसमें सी.ई. हैं, ए.ई. हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ऑडिट की जो आपत्‍ति दिसंबर, 2014 में आई उसकी वसूली वर्ष 2016 में की गई. इसलिए एक पैसे का भी भ्रष्‍टाचार इसमें नहीं हुआ है. यह गलतफहमी तिवारी जी को नहीं पालना चाहिए.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट को मंत्री जी ने पढ़ा, मैं भी पढ़ के सुना रहा हूँ.

अध्‍यक्ष महोदय -- आपके दो पूरक प्रश्‍न हो गए हैं.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी -- अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट की बात कही है, मैं एक मिनट का समय लूंगा और मैं इस रिपोर्ट की दो लाइन को पढ़कर आपको सुनाना चाहता हूँ. मंत्री जी भी सुन लें, फिर जो जवाब देना होगा दे दें.

अध्‍यक्ष महोदय -- आपका प्रश्‍न आ गया और उसका उत्‍तर भी आ गया है.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस प्रकार गलत मूल्‍यवृद्धि सूचकांक के निर्धारण के कारण...

अध्‍यक्ष महोदय -- तिवारी जी, आप बैठ जाएं. दूसरों के भी प्रश्‍न महत्‍वपूर्ण हैं.

आर्थिक अपराध प्रकोष्‍ठ में दर्ज प्रकरण की जाँच

[सामान्य प्रशासन]

14. ( *क्र. 1246 ) श्री नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या कार्यालय आर्थिक अपराध प्रकोष्‍ठ (ई.ओ.डब्‍लू.) सचिन तेन्‍दूलकर मार्ग ग्‍वालियर का पत्र क्रमांक 3509, दिनांक 18.10.2016 जारी किया गया है? यदि हाँ, तो प्रश्‍नांश दिनांक तक क्‍या कार्यवाही की गई? यदि नहीं, तो क्‍यों? (ख) प्रश्‍नांश (क) के अंतर्गत जिला योजना कार्यालय भिण्‍ड का पत्र क्र. 2265, दिनांक 28.11.2006 के अंतर्गत शासकीय संस्‍थाओं को कम्‍प्‍यूटर प्रदाय के लिए क्‍या मापदण्‍ड निर्धारित किए गए थे? क्‍या मापदण्‍डों का पूर्णत: पालन किया गया है? (ग) प्रश्‍नांश (क) और (ख) के अंतर्गत जिला योजना भिण्‍ड के कार्यालयीन आदेश क्र. 794795, दिनांक 04.11.99 के द्वारा कम्‍प्‍यूटर प्रोजेक्‍ट योजनान्‍तर्गत शासकीय विद्यालयों में कम्‍प्‍यूटर स्‍थापित करने के लिए 1293000.00 मैसर्स कम्‍प्‍यूटर स्‍टडीज एण्‍ड सर्विसेज रीवा के नाम से जारी की गई? यदि हाँ, तो क्‍यों? सत्‍यापन किसके द्वारा किया गया? (घ) कार्यालय जिला योजना समिति के आदेश क्र. 71, दिनांक 29.1.2000 मैसर्स कम्‍प्‍यूटर स्‍टडीज एण्‍ड सर्विसेज रीवा को 484675.00 प्रति विद्यालय के मान से 6 विद्यालयों को आदेश जारी किया गया? यदि हाँ, तो पुनरावृत्ति कैसे हुई, इसके लिए कौन उत्‍तरदायी हैं?

 

मुख्‍यमंत्री (श्री शिवराज सिंह चौहान) --

श्री नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, भिण्‍ड में बहुत बड़ा घोटाला हुआ था, पूर्व सांसद और एक आईएएस अधिकारी द्वारा 16 साल पुराना घोटाला है.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप सीधा प्रश्‍न पूछिए.

श्री नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह -- इसमें उत्‍तर में लिखा है कि जाच चल रही है, यह मामला हाईकोर्ट गया, हाईकोर्ट ने डायरेक्‍शन दिया कि इसमें कार्यवाही करें, हाईकोर्ट के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट गया, सुप्रीम कोर्ट ने कहा इसमें कार्यवाही करें, फिर यह मामला ई.ओ.डब्‍ल्‍यू. को दिया गया, 16 साल से आज तक जाच क्‍यों नहीं हुई ? केवल एक उत्‍तर लिख दिया कि जानकारी एकत्रित की जा रही है.

अध्‍यक्ष महोदय -- पृथक से उत्‍तर आ गया है.

राज्‍य मंत्री, सामान्‍य प्रशासन (श्री लालसिंह आर्य) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जो जानकारी चाही थी वह हमने दी है. यह बात सही है जो वह कह रहे हैं कम्‍प्‍यूटर क्रय किए गए, 23 स्‍कूलों में कम्‍प्‍यूटर दिए गए लेकिन यह मामला माननीय उच्‍च न्‍यायालय में गया, उच्‍च न्‍यायालय ने जो एक्‍शन लिया, उसके आधार पर यह मामला सुप्रीम कोर्ट में गया, सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा कि हाईकोर्ट ने जो डिसिजन दिया है वही जाच इसकी करवानी चाहिए, माननीय उच्‍च न्‍यायालय के आदेश पर ई.ओ.डब्‍ल्‍यू. को जाच के लिए दिया गया. ई.ओ.डब्‍ल्‍यू. इसकी जाच कर रहा है. जैसे ही ई.ओ.डब्‍ल्‍यू. के जाच के बिंदु आ जाएंगे, जो दोषी होगा उस पर कार्यवाही होगी.

नरेन्द्र सिंह कुशवाह -- अध्यक्ष महोदय ईओडब्ल्यू को 7 वर्ष हो गये हैं जांच करते करते. इनको क्या रिपोर्ट चाहिए, ईओडब्ल्यू की जांच क्या कह रही है, ईओडब्ल्यू की जांच कह रही है कि इसमें क्रय नियम के विरूद्ध कार्यवाही हुई है. कलेक्टर ने पत्र लिखा है कि जांच कराई जाय, जानबूझकर आईएएस अधिकारी और सांसद जी को बचाया गया है. यह बहुत बड़ा भ्रष्टाचार है. ईओडब्ल्यू की जांच रिपोर्ट मेरे पास में है इनके पास में नहीं है तो मेरे पास से ले जायें. इसमें सुप्रीम कोर्ट का डायरेक्शन है. ईओडब्ल्यू की रिपोर्ट कलेक्टर का पत्र,

अध्यक्ष महोदय -- आप सीधा प्रश्न पूछें कि जांच कब तक पूरी हो जायेगी.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह -- अध्यक्ष महोदय ईओडब्ल्यू ने जांच कर दी है जांच रिपोर्ट मेरे पास में आ गई है, इनके पास में नहीं होगी. मेरे पास में वह जांच रिपोर्ट है ईओडब्ल्यू ने दोषी पाया है, इनके पास में जांच रिपोर्ट नहीं है, यह मंत्री हैं, सदन में असत्य जवाब दे रहे हैं, सदन को गुमराह कर रहे हैं. ईओ़ब्ल्यू की रिपोर्ट हमारे पास में है कलेक्टर ने लिखा है इसमें घपला हुआ है, इसमें 1 करोड़ 20 लाख रूपये का घपला हुआ है.

अध्यक्ष महोदय -- आप उत्तर तो ले लें.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह -- उत्तर कहां दे रहे हैं, वह कह रहे हैं कि जांच रिपोर्ट उनके पास में नहीं है, ईओडब्ल्यू की रिपोर्ट मेरे पास में हैं...(व्यवधान).. ईओडब्ल्यू की जांच रिपोर्ट हमारे पास है, मैं इनको रिपोर्ट दे सकता हूं, मैं इनको तथ्य दे रहा हूं.

अध्यक्ष महोदय -- माननीय सदस्य आप उत्तर ले लें नहीं तो मैं आगे बढूंगा...(व्यवधान).. आपने अपनी बात कह ली है तो उनको उत्तर तो देने दें.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह -- अध्यक्ष महोदय मैं आपका संरक्षण चाहता हूं यह गलत जानकारी सदन में दे रहे हैं, आप यह बतायें कि सांसद और आईएएस अधिकारी पर कब तक कार्यवाही करेंगे...(व्यवधान)..

श्री आरिफ अकील -- अध्यक्ष महोदय वह सांसद कौन सी पार्टी के थे.

अध्यक्ष महोदय -- आप उत्तर नहीं लेंगे तो हम आगे बढ़ जायेंगे...( व्यवधान)..

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह -- अध्यक्ष महोदय, सांसद और आईएएस अधिकारी पर कब तक कार्यवाही करेंगे, जांच रिपोर्ट मैं आपको दे रहा हूं.

अध्यक्ष महोदय -- आप अपना उत्तर लें नहीं तो हम आगे बढ़ जायेंगे..(व्यवधान)..

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह -- मैं प्रश्न कर रहा हूं कि आप कब तक कार्यवाही करेंगे, केस कब तक दर्ज करेंगे.

श्री लाल सिंह आर्य -- अध्यक्ष महोदय मैंने जवाब बहुत स्पष्ट रूप से दिया है और फिर कह रहा हूं कि प्राथमिक दृष्टि से यदि जांच में गलतियां नहीं पायी गईं होती तो ईओडब्ल्यू को प्रकरण क्यों दिया जाता हमारा बचाव करने का कोई उद्देश्य नहीं है. ईओडब्ल्यू को हमने प्रकरण दिया है ईओडब्ल्यू द्वारा जांच करने के बाद ही अगर उसमें दोषी पाया जायेगा,उसमें कार्यवाही होगी आप निश्चिंत रहिये.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह -- ईओडब्ल्यू की रिपोर्ट हमारे पास में आ गई है उसमें दोषी पाया गया है. आपके पास में रिपोर्ट क्यों नहीं है. इस रिपोर्ट में विवेचना करने वाले अधिकारी के हस्ताक्षर भी हैं...(व्यवधान).. इसमें बहुत बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है.

श्री आरिफ अकील (XXX)...(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय -- इसे कार्यवाही से निकाल दें...(व्यवधान)..

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह -- अध्यक्ष महोदय ईओडब्ल्यू की रिपोर्ट हमारे पास है जो डीएसपी विवेचना कर रहा है उसकी रिपोर्ट हमारे पास में आ गई है.

अध्यक्ष महोदय -- उन्होंने आश्वस्त किया है.....(व्यवधान)..

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह -- जो अधिकारी विवेचना कर रहा था उसकी एक प्रति मेरे पास में आ गई है....(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय -- आप वह रिपोर्ट मंत्री जी को उपलब्ध करा दीजियेगा, मंत्री जी आप उनकी बात सुन लीजियेगा, उनके पास में क्या कागज है...(व्यवधान)

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह -- आखिर क्या सबूत चाहिए उनको, केवल इतना बता दें कि प्रकरण कब कायम होगा....(व्यवधान)..

श्री सुन्दरलाल तिवारी -- अध्यक्ष महोदय सदन में मंत्री जी गलत जवाब दे रहे हैं..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय -- समय कम है आप बैठ जायें...(व्यवधान)..

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह -- अध्यक्ष महोदय जो विवेचना अधिकारी था उसकी प्रति मेरे पास है.

 

अध्यक्ष महोदय -- आपका प्रश्न आ गया है, आपकी बात का उत्तर आ गया है, आप संतुष्ट नहीं है तो उसकी और अन्य प्रक्रियाएं हैं उसमें आप कार्यवाही करें....(व्यवधान)..

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह -- आप यह बतायें कि प्रकरण कब कायम करेंगे...(व्यवधान) कलेक्टर लिख रहा है कि वह दोषी हैं.

अध्यक्ष महोदय -- आप यह उत्तर सुनकर बैठ जायेंगे.

श्री लाल सिंह आर्य -- अध्यक्ष महोदय अभी प्रारंभिक जांच ही पूरी नहीं हुई है, वह होते ही दोषी पाया जायेगा तो अपराध पंजीबद्ध या जो भी कार्यवाही होगी वह करेंगे.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह -- मंत्री जी धन्यवाद्.

 

 

एवरेज बिल दिए जाने की जाँच

[ऊर्जा]

15. ( *क्र. 1289 ) श्रीमती सरस्‍वती सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सिगंरौली जिले के विधान सभा क्षेत्र में कुल कितने घरेलू एवं व्‍यवसायिक कनेक्‍शन दिए गए हैं? पृथक-पृथक विवरण दें। उक्‍त कनेक्‍शनों में कितनों में मीटर लगे हैं, कितनों में नहीं? अलग-अलग संख्‍या बताएं। (ख) क्‍या जिन घरेलू एवं व्‍यवसायिक उपभोक्‍ताओं के विद्युत कनेक्‍शनों में मीटर नहीं लगाए गए, उन्‍हें एवरेज (अनुमानित) बिल दिए जा रहे हैं और किस आधार पर दिये जा रहे हैं? (ग) प्रश्‍नांश (क) और (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में उपभोक्‍ताओं के यहां विद्युत खपत आकलन हेतु मीटर लगाकर बिलों को पुनरीक्षित किया जावेगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों? (घ) प्रश्‍नांश (क), (ख), (ग) के परिप्रेक्ष्‍य में पूरे प्रकरण की जाँच कराकर क्‍या दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) सिंगरौली जिले के अंतर्गत सभी विधानसभा क्षेत्रों में दिये गये घरेलू एवं गैर घरेलू (व्‍यवसायिक) श्रेणी के मीटरयुक्‍त एवं बगैर मीटर वाले (अनमीटर्ड) कनेक्‍शनों की जानकारी निम्‍नानुसार है :-

क्र.

टैरिफ श्रेणी

कुल कनेक्‍शन

मीटरयुक्‍त कनेक्‍शन

अनमीटर्ड कनेक्‍शन

1

घरेलू

66919

65573

1346

2

गैर घरेलू

7461

7461

0

 

(ख) उत्‍तरांश (क) में दर्शाए अनुसार प्रश्‍नाधीन सभी गैर-घरेलू कनेक्‍शनों में मीटर लगाए गये हैं। बिना मीटर वाले घरेलू उपभोक्‍ताओं को म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी दर आदेश में निहित प्रावधानों के अनुसार निर्धारित आंकलित खपत के आधार पर नियमानुसार बिल दिए जा रहे हैं। (ग) जिन उपभोक्‍ताओं के यहां मीटर लगने शेष हैं, उनके यहां मीटर लगाने की कार्यवाही की जा रही है। उपभोक्‍ताओं को विद्युत बिल नियमानुसार निर्धारित प्रक्रिया के तहत् दिए गए हैं अत: बिलों को पुनरीक्षित करने का प्रश्‍न नहीं उठता। (घ) म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी दर आदेश के अनुसार ही बिना मीटर वाले उपभोक्‍ताओं की बिलिंग की जा रही है। अत: उक्‍त परिप्रेक्ष्‍य में किसी के दोषी होने अथवा किसी प्रकार की जाँच कराए जाने का प्रश्‍न नहीं उठता। 

श्रीमती सरस्वती सिंह - अध्यक्ष महोदय, सबसे पहले मैं जो हमारे पूर्व ऊर्जा मंत्री रहे श्री राजेन्द्र शुक्ल जी को बधाई देना चाहती हूं कि उन्होंने मेरे पत्र का सम्मान किया और 2 टॉवर मंजूर किये. अध्यक्ष महोदय, अभी जो ऊर्जा मंत्री हैं उनसे मैं पूछना चाहती हूं कि हमारे यहां बिना मीटर के जो लोगों को बिल भेजे जाते हैं और कहते हैं कि जितना वे लोग बिजली जलाते हैं उसके अनुसार बिल भेजा जाता है तो मैं यह पूछना चाहती हूं कि आप कैसे यह आकलन कर लेते हैं कि इनके यहां पर मीटर नहीं लगा है, फिर भी इनको इतना बिल भेजा जाता है, जबकि उनका एक बत्ती कनेक्शन है? एक बल्व जलाते हैं फिर भी 1000 रुपए का बिल उनको भेजा जाता है, कैसे यह आकलन कर लेते हैं? उनके यहां मीटर नहीं लगा है फिर भी यह कैसे आकलन कर सकते हैं कि उनके यहां इतना बिल पहुंचाया जाय?

श्री पारस चन्द्र जैन - अध्यक्ष महोदय, मैं पहले भी बता चुका हूं कि शहरी क्षेत्र के उपभोक्ता का 100 यूनिट के हिसाब से बनाते हैं और ग्रामीण क्षेत्र में 75 यूनिट के हिसाब से बनाते हैं. लेकिन इन समस्याओं को देखते हुए हमने एक समिति बनाई है. हर जिले में विद्युत सलाहकार समिति का हमने गठन किया है, जिसमें हमने विधायक को भी रखा है.

श्रीमती सरस्वती सिंह - अध्यक्ष महोदय, नहीं रखा है. आप असत्य बोल रहे हैं. (व्यवधान)..

श्री पारस चन्द्र जैन - अध्यक्ष महोदय, आपके शासन में ये समितियां नहीं थीं. हमने ये समितियां बनाई हैं. (व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय - (कई सदस्यों के एक साथ खड़े होकर बोलने पर) आपकी बात समझ नहीं आ रही है. यह महत्वपूर्ण विषय है. आप सुन लें कोई आपत्ति हो तो वह माननीय सदस्या उठाएंगी.

श्री पारस चन्द्र जैन - अध्यक्ष महोदय, एक बात और है कि किसी भी उपभोक्ता की बिल अधिक आने की शिकायत पर वह फोरम में अपील भी कर सकता है. वे अपील करें. यह पैसे वहां नीचे के लोग भरते नहीं हैं और नहीं भरने के कारण बिल ज्यादा आते हैं. यदि समय पर बिल भर दें तो सरचार्ज नहीं लगेगा. (व्यवधान)..

श्रीमती सरस्वती सिंह - अध्यक्ष महोदय, मेरा माननीय मंत्री जी से सवाल है कि जब आपने समिति बनाई है तो कितने बार विधायकों के साथ विभाग ने मीटिंग ली है? (शेम-शेम की आवाज)...क्या हमें इसकी जानकारी मिली है, क्या हमारे पास इसका पत्र आया है, यह मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहती हूं?

श्री पारस चन्द्र जैन - अध्यक्ष महोदय, कलेक्टर को तीन माह में एक बार मीटिंग बुलाना है.

श्रीमती सरस्वती सिंह - अध्यक्ष महोदय, एक भी बार मीटिंग नहीं बुलाई गई है. (व्यवधान).

श्री कमलेश्वर पटेल - अध्यक्ष महोदय, मीटिंग नहीं बुलाई है.

श्री सचिन यादव - अध्यक्ष महोदय, मीटिंग नहीं बुलाई है.

श्री निशंक कुमार जैन - अध्यक्ष महोदय, एक बार भी मीटिंग नहीं बुलाई है.

श्री पारस चन्द्र जैन - अध्यक्ष महोदय, वहां सब व्यवस्था है, यह आर्डर निकला है. मेरे यहां बैठक हुई है और दूसरी जगह भी बैठकें हुई है. (व्यवधान)..आपके शासन में यह व्यवस्था नहीं थी. हमने यह व्यवस्था की है.

अध्यक्ष महोदय - (कई सदस्यों के एक साथ खड़े होकर बोलने पर) आप समाधान नहीं होने देंगे. समाधान हो रहा है. आप बैठ जाएं, वह सक्षम हैं, वह अच्छे प्रश्न पूछ रही हैं.

श्रीमती सरस्वती सिंह - अध्यक्ष महोदय,जैसा माननीय मंत्री जी बोल रहे हैं कि तीन महीने में मीटिंग बुलाना चाहिए, लेकिन हम लोगों के तीन साल बीत गये हैं, एक भी बार मीटिंग नहीं बुलाई गई है. (शेम-शेम की आवाज)..मेरे यहां के अधिकारी आपके यहां बगल में बैठे हुए हैं.

श्री पारस चन्द्र जैन - अध्यक्ष महोदय, मैं यही बता रहा हूं कि पहले ये समितियां नहीं थीं, हमने ये समितियां बनाई है. समिति के अलावा अब बैठक बुला भी रहे हैं. हमारे पास ऐसे आंकड़ें हैं और अब जहां बैठक नहीं हुई, वहां बैठक बुलाएंगे और वहां जो समस्या है, उन समस्याओं का हम निराकरण करेंगे.

एक माननीय सदस्या - अध्यक्ष महोदय, इसकी समय-सीमा बताएं?

अध्यक्ष महोदय - एक प्रश्न और पूछ लीजिए, उसके बाद आगे बढ़ेंगे.

श्रीमती सरस्वती सिंह - अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न बहुत ही जरूरी है. बिजली का बिल ज्यादा आता है तो किसान आत्महत्या भी करते हैं. मैं माननीय मंत्री जी से कहना चाहती हूं कि जब बिना मीटर लगाए इन्हें बिल का आकलन हो जाता है तो आप मीटर क्यों लगाते हैं? फिर सरकार का करोड़ों रुपयों क्यों खर्च करते हैं? आप मीटर मत लगवाइए, वैसे ही उनको बता दीजिए? अध्यक्ष महोदय, मेरा एक प्रश्न और है कि मेरे यहां जो 1386 उपभोक्ता हैं जिनके यहां पर मीटर नहीं लगा है, उनके यहां कब तक मीटर लग जाएगा? उसकी कोई समय-सीमा बताएंगे?

श्री पारस चन्द्र जैन - अध्यक्ष महोदय, इसमें समय-सीमा बताना संभव नहीं है.

(व्यवधान)..

श्री सचिन यादव - अध्यक्ष महोदय, उपभोक्ताओं को लूटा जा रहा है.

महेश्‍वर जल विद्युत परियोजना की पूर्णता

[ऊर्जा]

16. ( *क्र. 1310 ) श्री राजकुमार मेव : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नर्मदा नदी पर मण्‍डलेश्‍वर में महेश्‍वर जल विद्युत परियोजना (महेश्‍वर हाईड्रोलिक प्रोजेक्‍ट) के तहत बांध एवं संपूर्ण परियोजना की स्‍वीकृति किस वर्ष में दी गई? इसे कब तक पूर्ण करना था? इसकी लागत क्‍या निर्धारित की गई थी एवं किस कंपनी को यह परियोजना स्‍वीकृत की गई? (ख) प्रश्‍नांश (क) के संबंध में महेश्‍वर जल विद्युत परि‍योजना पर कंपनी द्वारा कुल कितना व्‍यय किया गया एवं किस-किस कार्य पर कितना-कितना व्‍यय किया? कंपनी द्वारा किये गये व्‍यय का ऑडिट किन-किन संस्‍थाओं द्वारा किस-किस वर्ष में किया गया एवं उसमें कौन-कौन सी आपत्तियां ली गईं? कितनी आपत्तियों का निराकरण किया गया एवं कितनी राशि की आर्थिक अनियमितताएं पाई गईं? (ग) कंपनी द्वारा निर्धारित समयावधि में कार्य पूर्ण नहीं किये जाने के कारण कब-कब कार्य पूर्ण करने हेतु कार्यावधि बढ़ाई गई एवं लागत में भी कब-कब कितनी-कितनी वृद्धि की गई? क्‍या कार्य पूर्ण नहीं किये जाने के कारण कम्‍पनी को हटा दिया गया? उस पर कितनी आर्थिक अनियमितताओं के तहत राशि वसूली योग्‍य है? किस नई कंपनी को यह परियोजना पुन: कितनी लागत के साथ स्‍वीकृत की गई? (घ) प्रश्‍न (क) के संदर्भ में महेश्‍वर जल विद्युत परियोजना में कितने कर्मचारी, किस-किस वर्ग के कार्य कर रहे थे, कितने कर्मचारियों को वर्तमान में हटाया गया एवं कितने कर्मचारियों को उनके पारिश्रमिक का भुगतान किया जाना शेष है? जिन कर्मचारियों को कार्य से हटाया गया उन्‍हें पुन: कार्य पर लगाया जावेगा? यदि नहीं, तो कारण बतावें?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) म.प्र. शासन द्वारा महेश्‍वर जल विद्युत परियोजना की स्‍थापना, संचालन एवं संधारण का कार्य निजी क्षेत्र की कंपनी मेसर्स एस.कुमार्स को एक जनरेटिंग कंपनी के रूप में सौंपने की स्‍वीकृति वर्ष 1992 में दी गई। परियोजना का कार्य प्रारम्‍भ होने से 5 वर्ष की अवधि में पूर्ण किया जाना प्रस्‍तावित था। परियोजना की कुल अनुमानित लागत रू. 736 करोड़ थी। वर्ष 1994 से इस परियोजना का कार्य मे. एस.कुमार्स द्वारा स्‍थापित कंपनी श्री महेश्‍वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। (ख) प्रश्‍नांश की जानकारी निजी कंपनी श्री महेश्‍वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमिटेड से संबंधित है। निजी कंपनी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार परियोजना पर कंपनी द्वारा दिनांक 31.03.2016 की स्थिति में कुल 5411.15 करोड़ रूपये व्‍यय किए गए। कार्यवार व्यय विवरण निम्‍नानुसार है :- (1) डिजाइन इंजीनियरिंग एवं कन्‍सलटेंसी-52.56 करोड़ रूपये, (2) सिविल कार्य-896.66 करोड़ रूपये, (3) हायड्रो मैकेनिकल कार्य-301.83 करोड़ रूपये, (4) इलेक्‍ट्रो मैकेनिकल कार्य-302.39 करोड़ रूपये, (5) प्‍लांट एवं मशीनरी-20.66 करोड़ रूपये, (6) प्रि-ऑपरेटिव्‍ह खर्च (आई.डी.सी. व आर.एंड.आर. सहित)-3837.05 करोड़ रूपये। कंपनी द्वारा चार्टर्ड एकाउंटेंट फर्म से समय-समय पर आडिट कराये जाने की जानकारी दी गई है। कंपनी के अनुसार इसमें किसी आर्थिक अनियमितता के पाये जाने का उल्‍लेख नहीं है। अत: प्रश्‍न के शेष भाग संबंधी जानकारी निरंक है। (ग) श्री महेश्‍वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमिटेड द्वारा परियोजना को निर्धारित समयावधि में पूर्ण नहीं किये जाने के कारण वर्ष 2006 में परियोजना की पुनरीक्षित लागत 2449 करोड़ रूपये आंकी गई थी। मार्च 2006 में परियोजना से वाणिज्यिक उत्‍पादन मार्च 2010 से प्रारम्‍भ करने का लक्ष्‍य निर्धारित किया गया। कार्य पूर्ण न किये जाने के कारण कंपनी को हटाया नहीं गया है। कंपनी के प्रवर्तकों के विरूद्ध एम.पी. स्‍टेट इण्‍डस्ट्रियल डेव्‍हलपमेंट कार्पोरेशन लि. द्वारा आई.सी.डी. संव्‍यवहार में की गई अनियमितताओं एवं तत्पश्‍चात दिनांक 16.09.2005 में हुये समझौते के तहत् दिनांक 31.12.2016 की स्थिति में वसूली योग्‍य राशि 107.99 करोड़ (ब्‍याज रूपये 85.08 करोड़) की वसूली लंबित है। परियोजना हेतु किसी नई कंपनी का चयन नहीं किया गया है। उपलब्‍ध जानकारी के अनुसार भारत सरकार की संस्‍था पॉवर फायनेंस कार्पोरेशन एवं ऋण प्रदाता वित्‍तीय संस्‍थाओं द्वारा वर्तमान में कंपनी के प्रबंधन पर नियंत्रण लिया गया है। (घ) प्रश्‍नांश निजी कंपनी श्री महेश्‍वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमिटेड से संबंधित है। निजी कंपनी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार वर्तमान में परियोजना में वर्कमेन स्‍टाफ एवं पुनर्वास कार्यालय के कुल 91 कर्मचारी एवं 50 अधिकारी कार्यरत हैं। किसी भी कर्मचारी को वर्तमान में हटाया नहीं गया है। कुल 93 कर्मचारियों को उनके पारिश्रमिक का भुगतान किया जाना शेष है। दो कर्मचारी स्‍वेच्‍छा से कार्य छोड़कर चले गये थे। किसी भी कर्मचारी को हटाया नहीं गया है अत: शेष प्रश्‍नांश लागू नहीं होता। 

श्री हितेन्द्र सिंह सोलंकी - अध्यक्ष महोदय, यह जो वर्ष 1992 में योजना की एस.कुमार्स को स्वीकृति दी गई थी, यह रुपए 736 करोड़ की थी. यह वर्ष 2017 तक अभी अधूरी है, यह कब तक पूरी कर ली जाएगी और इसमें पुनर्वास हो पूरा हो गया कि नहीं, और जिन अधिकारियों, कर्मचारियों ने इसमें गड़बड़ी की है, उनके खिलाफ आप क्या कार्यवाही करेंगे? जिनका पेमेंट रुका हुआ है, उनका पेमेंट कब तक कर दिया जाएगा?

श्री पारसचन्द्र जैन-- अध्यक्ष महोदय, महेश्वर हायडल पावर कार्पोरेशन से संबंधित प्रश्न है. वर्तमान में इस कंपनी को वित्तीय संस्थाओं ने एक जून 2016 से अधिग्रहित कर लेने के उपरान्त कर्मचारियों का भुगतान नियमित हो रहा है. कर्मचारियों को पुराने भुगतान करने और ठेकेदार को बकाया भुगतान हेतु संबंधित कंपनी को निर्देशित किया गया है.

श्री हितेन्द्र सिंह सोलंकी-- अध्यक्ष महोदय, इसको हटा कर नया टेंडर कब कर लिया जाएगा? और इसने जो गड़बड़ी की है उसमें जो अधिकारी दोषी हैं, उन पर कब तक कार्रवाई की जाएगी? जो कर्मचारी वहां पर कार्यरत् हैं, उनको कब तक पेमेंट कर दिया जाएगा? आपने उत्तर में कहा है कि उनका पेमेंट शेष रहा है तो कब तक पेमेंट कर दिया जाएगा? अध्यक्ष महोदय, इसका जवाब दिलवा दें.

श्री पारसचन्द्र जैन--अध्यक्ष महोदय, जिनका पेमेंट बकाया है, उनका पेमेंट कर रहे हैं. कोई स्पेसिफिक बताएंगे तो हम दिखवा लेंगे.

श्री हितेन्द्र सिंह सोलंकी--आपने अपने उत्तर में कहा है इतने कर्मचारियों का भुगतान शेष है.

 

 

 

अध्यक्ष महोदय-- प्रश्न काल समाप्त.

(प्रश्नकाल समाप्त)

(व्यवधान)

 

 

 

12.01 बजे शून्यकाल में उल्लेख

श्री सुन्दरलाल तिवारी(गुढ़)-- अध्यक्ष महोदय, माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने एक निर्णय दिया है जिसमें मध्यप्रदेश के 634 व्यक्ति जिसमें आधे पढ़ने वाले विद्यार्थी और आधे जो डॉक्टर बन चुके थे, पास कर चुके थे उनकी डिग्री समाप्त करने और जो विद्यार्थी पढ़ रहे थे, उनका प्रवेश रद्द करने का आदेश जारी किया है. इस पर सरकार ने क्या कार्रवाई की और 634 लोगों के निकालने से इनकी पढ़ाई पर मप्र सरकार की कितनी राशि बर्बाद हुई?

अध्यक्ष महोदय-- आपने इस विषय पर क्या दिया है?

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- हमने स्थगन प्रस्ताव दिया है. हमारा निवेदन है कि इस पर चर्चा करायी जाए.

अध्यक्ष महोदय-- ठीक है उस पर विचार करेंगे.

श्री हर्ष यादव(देवरी)-- अध्यक्ष महोदय, सागर के महापौर का एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें एक ठेकेदार से कमीशन मांगा जा रहा है. इसकी लोकायुक्त से जांच करवाएंगे क्या? यह वीडियो इलेक्ट्रानिक मीडिया और प्रिंट मीडिया में लगातार वायरल हो रहा है.

अध्यक्ष महोदय-- आपकी बात आ गई. बैठिये

श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा(मुंगावली)-- अध्यक्ष महोदय, मैंने ओला-पाला से किसानों को जो भारी नुकसान हुआ है उसके संबंध में स्थगन और ध्यानाकर्षण दिया है. रेत खदानों में जो भ्रष्टाचार हो रहा है. बड़े-बड़े लोग उसमें इन्वाल्ड हैं उसके बारे में भी दिया है. व्यापम के संबंध में सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला आया है उसके कारण जो स्थिति उत्पन्न हुई है. बहुत सारे नकली डॉक्टर काम कर रहे हैं. सैकड़ों मरीजों के हेल्थ से खिलवाड़ कर रहे हैं अभी तक उनको हटाया नहीं गया है. इस पर मैंने सूचना दी है. आपसे निवेदन है कि किसी भी रुप में इनको लेने का कष्ट करें.

अध्यक्ष महोदय--ठीक है.

श्री जितू पटवारी(राऊ)-- अध्यक्ष महोदय, यह घोषणा हुई थी कि मध्यप्रदेश के किसानों, जिन पर ओला-पाला से नुकसान हुआ है, उनकी किसी भी प्रकार की कुर्की नहीं होगी. पूरे मप्र में टीवी, टेलिफोन, मोटर सायकल और जो जो भी मिल रहा है, वह विद्युत मंडल उठाकर ले जा रहा है. किसानों को डरा-धमका रहे हैं. यह काम मंडल रात में कर रहा है. मैं समझता हूं कि यह मुख्यमंत्री जी के उस भाव की भी अवहेलना है. मैंने ध्यानाकर्षण भी दिया है अगर वह लग जाए तो आपकी मेहरबानी होगी. उस पर चर्चा हो जाएगी.

अध्यक्ष महोदय-- अब शून्यकाल की सूचनाएं पढ़ेंगे.

12.04 बजे नियम 267-क के अधीन विषय

 

प्रदेश सरकार द्वारा पॉलीथीन,धूम्रपान व गुटखा पर प्रतिबंध लगाने.

 

श्री आरिफ अकील(भोपाल-उत्तर)--माननीय अध्यक्ष महोदय,

भोपाल में शासन के प्रति भारी जनाक्रोश व्याप्त है. स्थिति अत्यंत विस्फोटक बनी हुई है.

 

 

 

भिण्ड स्थित ऐतिहासिक किले के संरक्षण के संबंध में.

 

डॉ गोविन्द सिंह (लहार)-- माननीय अध्यक्ष महोदय,

3. सरकार द्वारा खोले गये जन औषधि केन्द्रों का मरीजों तक लाभ न पहुंचना

 

 

श्री सुन्दरलाल तिवारी(गुढ़) - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी शून्यकाल की सूचना का विषय इस प्रकार है :-

 

 

4. रीवा जिले में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा छात्रवृत्ति न मिलना

श्री सुखेन्द्र सिंह(मऊगंज) - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी शून्यकाल की सूचना का विषय इस प्रकार है :-

 

5. मुरैना जिले में जंगली जानवरों से किसानों की फसल की रोकथाम किया जाना

श्री सत्यपाल सिंह सिकरवार(सुमावली) - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी शून्यकाल की सूचना का विषय इस प्रकार है :-

 

 

 

 

 

6. नागदा स्थित स्वास्थ्य केन्द्र में मेडिकल अधिकारी एवं कार्यालय संचालित न होना

श्री दिलीप सिंह शेखावत(नागदा-खाचरोद)- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी शून्यकाल की सूचना का विषय इस प्रकार है :-

नागदा नगर उज्जैन जिले का दूसरा सबसे बड़ा शहर है. यहां तहसील मुख्यालय एवं शासकीय अस्पताल भी संचालित है. नगर की 1.25 लाख की आबादी है एवं इसमें 63 ग्राम पंचायतें सम्मिलित हैं. इसके बाद भी यहां ब्लाक मेडिकल आफिसर का पद एवं कार्यालय संचालित नहीं है जबकि समीपस्थ कस्बा उन्हेल काफी छोटा होने के बाद भी यहां ब्लाक मेडिकल आफिस है. नागदा में ब्लाक मेडिकल आफिस एवं पद सृजित न होने से स्थानीय नागरिकों में जनाक्रोश व्याप्त है.

अध्‍यक्ष महोदय-- श्री शैलेन्‍द्र जैन (अनुपस्थित)

 

 

9. अनुसूचित जाति की सूची में गौड़ गोवारी जनजाति के संबंध में भ्रम की स्थिति.

श्री के.डी. देशमुख (कटंगी)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी शून्‍यकाल की सूचना का विषय इस प्रकार है-

 

10. सिवनी जिले में खेल मैदानों के निर्माण संबंधी.

श्री दिनेश राय (सिवनी)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी शून्‍यकाल की सूचना का विषय इस प्रकार है-

 

श्री बाला बच्‍चन-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट का टाइम मैं भी चाह रहा था. 17 नंबर पर मेरा प्रश्‍न था और 16 नंबर पर प्रश्‍नोत्‍तर काल समाप्‍त हो गया था, तो एक मिनट मैं चाहूंगा.

अध्‍यक्ष महोदय-- अब रिवर्स हो जायेगा मामला, क्‍योंकि अब उसका उत्‍तर भी नहीं आ सकता.

श्री बाला बच्‍चन-- हां उत्‍तर भले ही न आ सके, माननीय मुख्‍यमंत्री जी यहां बैठे हैं, एक मिनट वह बात तो मैं कह डालूं.

अध्‍यक्ष महोदय-- शून्‍यकाल है, बात कह दें.

 

5. शून्‍यकाल में उल्‍लेख (क्रमश:)

 

श्री बाला बच्‍चन-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मामला यह है, पदोन्‍नति में आरक्षण वाला, 58 बार हाईकोर्ट में केस चला और 4 साल तक केस चला और उसके बाद वह पदोन्‍नति में आरक्षण से संबंधित कर्मचारी और अधिकारी जो अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के थे, सरकार डाटा उपलब्‍ध नहीं करा पाने के कारण वह हाईकोर्ट में केस हार गये अब सुप्रीम कोर्ट में तारीख चल रही है, 8 तारीखें लग चुकी हैं, वकीलों को किसी को 10 लाख, किसी को 11 लाख, किसी को 9 लाख 70 हजार रूपये दे चुके हैं, उसके बाद वकील वहां सुप्रीम कोर्ट में भी उपस्थित नहीं हो पा रहे हैं, तो मैं सरकार से और माननीय मुख्‍यमंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि क्‍यों नहीं आप वकीलों को वहां पहुंचा पा रहे हैं या जिस तरह से आपने व्‍यापम में जो .... (व्‍यवधान)... खड़े किये थे आप ऐसे वकील सुप्रीम कोर्ट में क्‍यों नहीं खड़े कर पा रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय-- आपकी बात आ गई, जो आप कहना चाह रहे थे, पत्रों का पटल पर रखा जाना.

श्री बाला बच्‍चन-- क्‍यों इनको पदोन्‍नति में आरक्षण से वंचित करा रहे हैं. माननीय मुख्‍यमंत्री जी अभी नहीं कभी भी आप इसका जवाब दें क्‍योंकि बहुत सारे अधिकारी, कर्मचारी सेवानिवृत्‍त हो चुके हैं..... (व्‍यवधान)....

अध्‍यक्ष महोदय-- बहुत सारे अवसर आयेंगे, कृतज्ञता ज्ञापन पर अवसर आयेंगे. ..... (व्‍यवधान)....

श्री बाला बच्‍चन-- मैं समझता हूं सरकार इसमें गंभीर नहीं है ..... (व्‍यवधान)....

डॉ. गोविंद सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं सदन को सूचना देना चाहता हूं कि माननीय अजय सिंह नेता प्रतिपक्ष बनाये गये है. मैं उनको नेता प्रतिपक्ष बनने पर बधाई देता हूं. सदन की ओर से बधाई देता हूं आप सभी को बधाई देता हूं.

संसदीय कार्य मंत्री(डॉ.नरोत्तम मिश्र) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, अगर गोविंद सिंह जी की सूचना सही है तो हम भी उनको बधाई देते हैं.

डॉ. गोविंद सिंह -- (डॉ.नरोत्तम मिश्र से) आपको आईना दिखाने के लिये अजय सिंह जी का नेता प्रतिपक्ष बनना जरूरी था.

डॉ.नरोत्तम मिश्र -- हमने तो बधाई दे दी. वैसे भी जब वे पहले नेता प्रतिपक्ष थे तो आप ही को आईना दिखा.

राज्यमंत्री, सामान्य प्रशासन(श्री लाल सिंह आर्य)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश की विधानसभा में प्रभारी नेता प्रतिपक्ष के रूप में एक अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति बहुत प्रभावी ढंग से अपनी भूमिका का निर्वहन कर रहे थे. यह अनुसूचित जनजाति विरोधी चेहरा कांग्रेस का उजागर हुआ है.

डॉ.गोविंद सिंह -- आप भी मुख्यमंत्री अनुसूचित जनजाति का बना दो.

श्री आरिफ अकील -- अभी वे सदन में आये भी नहीं हैं और अभी से डरने लगे.

 

 

 

 

 

12.16 बजे

पत्रों का पटल पर रखा जाना

 

1.मध्यप्रदेश वित्त निगम का 61वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2015-16

 

वित्त मंत्री(श्री जयंत मलैया)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं, दि स्टेट फायेनेंशियल कार्पोरेशन एक्ट 1951 (क्रमांक 63 सन्,1951) की धारा 37 की उपधारा (7) की अपेक्षानुसार मध्यप्रदेश वित्त निगम का 61 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2015-16 पटल पर रखता हूं.

 

2.(क) मध्यप्रदेश औद्योगिक केन्द्र विकास निगम(उज्जैन)लिमिटेड का वार्षिक प्रतिवेदन

वर्ष 2015-16 तथा

(ख) मैग्नीज ओर इंडिया लिमिटेड(मॉयल लिमिटेड) की वार्षिक रिपोर्ट वर्ष 2015-16.

 

मंत्री,वाणिज्य, उद्योग और रोजगार(श्री राजेन्द्र शुक्ल) - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं, (क) कंपनी अधिनियम 2003 की धारा 395 की उपधारा (1) (ख) की अपेक्षानुसार मध्यप्रदेश औद्योगिक केन्द्र विकास निगम(उज्जैन)लिमिटेड का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2015-16 तथा मैग्नीज ओर इंडिया लिमिटेड(मॉयल लिमिटेड) की वार्षिक रिपोर्ट वर्ष 2015-16 पटल पर रखता हूं.

 

3.(क)मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम मर्यादित,भोपाल का 52वां वाषिक प्रतिवेदन

वर्ष 2013-14 तथा

(ख) मध्यप्रदेश स्टेट टेक्सटाईल कार्पोरेशन लिमिटेड,भोपाल का 37वां वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखा मार्च 2008.

 

राज्यमंत्री, सूक्ष्म,लघु और मध्यम उद्यम(श्री संजय पाठक)- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 394 की उपधारा (2) की अपेक्षानुसार मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम मर्यादित,भोपाल का 52वां वाषिक प्रतिवेदन वर्ष 2013-14 तथा कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 395 की उपधारा (1) (ख) की अपेक्षानुसार मध्यप्रदेश स्टेट टेक्सटाईल कार्पोरेशन लिमिटेड,भोपाल का 37वां वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखा मार्च 2008 पटल पर रखता हूं.

 

 

समय 12.17 बजे

कार्यमंत्रणा समिति का प्रतिवेदन

अध्यक्ष महोदय-- कार्य मंत्रणा समिति की बैठक दिनांक 22 फरवरी, 2017 को सम्पन्न हुई जिसमें "मध्यप्रदेश नगरीय क्षेत्रों के भूमिहीन व्यक्ति (पट्टाधृति अधिकारों का प्रदान किया जाना) संशोधन विधेयक, 2017 (क्रमांक 1 सन् 2017)" पर चर्चा हेतु एक घण्टे का समय आवंटित किये जाने की सिफारिश की गई है. अब इस संबंध में डॉ. नरोत्तम मिश्र, संसदीय कार्य मंत्री प्रस्ताव करेंगे.

संसदीय कार्य मंत्री(डॉ.नरोत्तम मिश्र)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं कि अभी अध्यक्ष महोदय ने शासकीय विधेयक पर चर्चा के लिये समय निर्धारण करने के संबंध में कार्य मंत्रणा समिति की जो सिफारिशें पढ़कर सुनाई, उसे सदन स्वीकृति देता है.

अध्यक्ष महोदय- प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ. प्रश्न यह है कि जिस कार्य पर चर्चा के लिये समय निर्धारण करने के संबंध में कार्य मंत्रणा समिति की जो सिफारिश पढ़ कर सुनाई, उन्हें सदन स्वीकृति देता है.

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

 

 

12.18 बजे दिसम्बर, 2016 सत्र के प्रश्नों के अपूर्ण उत्तरों के पूर्ण उत्तरों

का पटल पर रखा जाना.

 

अध्यक्ष महोदय-- दिसम्बर, 2016 सत्र के प्रश्नों के अपूर्ण उत्तरों के पूर्ण उत्तर खण्ड-9 का संकलन पटल पर रखा गया.

12.18 बजे नियम 267-क के अधीन दिसम्बर,2016 सत्र में पढ़ी गई सूचनाओं तथा

उनके उत्तरों का संकलन पटल पर रखा जाना.

 

अध्यक्ष महोदय-- नियम 267-क के अधीन दिसम्बर,2016 सत्र में सदन में पढ़ी गई शून्यकाल सूचनाएं तथा उनके संबंध में शासन से प्राप्त उत्तरों का संकलन सदन के पटल पर रखा गया.

 

12.19 बजे राज्यपाल की अनुमति प्राप्त विधेयकों की सूचना

 

अध्यक्ष महोदय- विधानसभा के विगत सत्र में पारित 10 विधेयकों को माननीय राज्यपाल महोदय की अनुमति प्राप्त हो गई है. अनुमति प्राप्त विधेयकों के नाम दर्शाने वाले विवरण की प्रतियां माननीय सदस्यों को वितरित कर दी गई हैं. इन विधेयकों के नाम कार्यवाही में मुद्रित किए जाएंगे.

 

 

12.19 बजे {उपाध्यक्ष महोदय (डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुये}

 

12.19 बजे ध्यानाकर्षण

1. इछावर क्षेत्र के आबादी बाहुल्य ग्रामों को राजस्व ग्राम में शामिल न

करने से उत्पन्न स्थिति.

श्री शैलेन्द्र पटेल(इछावर) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी ध्यानाकर्षण की सूचना का विषय इस प्रकार है :-

इछावर विधानसभा के सीहोर ब्लाक के ग्राम पंचायत खारी के ग्राम सेमलाघाटा, इछावर ब्लाक के ग्राम पंचायत खजूरिया घेंघी के ग्राम घेंघी और ग्राम पंचायत कराड़िया भील के ग्राम नयापुरा ब्लाक, सीहोर अंतर्गत आते हैं. इन ग्रामों में आबादी अधिक है, किंतु यह ग्राम अभी तक राजस्व ग्रामों की सूची में दर्ज नहीं हैं इससे इन ग्रामों में मूलभूत सुविधाओॆं का अभाव बना हुआ है. लोगों को आवागमन हेतु सड़क की सुविधा भी नहीं है. इससे लोगों में रोष व्याप्त है.

राजस्व मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्ता) -- उपाध्यक्ष महोदय,

श्री शैलेन्द्र पटेल -- उपाध्यक्ष महोदय, मेरा इस समस्या को सदन में लाने का उद्देश्य यह था कि निश्चित रुप से मुझे कलेक्टर का पत्र प्राप्त हो चुका था. जब कलेक्टर का पत्र प्राप्त हुआ, उसके बाद मुझे लगा कि यह बात किसी भी माध्यम से सदन में लाई जाये,ताकि नियमों में बदलाव लेकर आया जाये. जहां तक मंत्री जी अपना जो उत्तर दे रहे थे, उन्होंने सड़क का उल्लेख किया, तो मैं मंत्री जी को बताना चाहता हूं कि जो उन गांवों की दूरी है, वह लगभग दो किलोमीटर से ज्यादा है. यह कोई समस्या मेरे अकेले विधान सभा के गांवों की नहीं है, पूरे मध्यप्रदेश की है और दो किलोमीटर से जब दूरी की सड़क है, तो वहां पर सड़क बनी ही नहीं है. न वह मुख्यमंत्री सड़क योजना में है, न प्रधानमंत्री सड़क योजना में है और न वहां पर कोई मुरम सड़क है. जो स्थिति है, वह एक पगडंडी की जो सड़क होती है, जो गांव की सड़क होती है, उन सड़कों का वहां पर निर्माण हुआ है. तो कुल मिलाकर यह जो सदन है, हम यह मानते हैं कि यहां पर नियम संशोधन के लिये ही यह सदन बना है. उनकी जब आबादी बढ़ गई है, तो उनको राजस्व ग्राम कैसे बनाया जायेगा,पहले तो मैं यह चाहता हूं कि मंत्री जी वह नियम हमें बता दें कि क्या क्या नियम हैं, जिसके अंतर्गत यह मंजरे टोले ग्राम में बनते हैं, तो उसके बाद मैं अपनी बात रखना चाहूंगा. उन नियमों का आप उल्लेख कर दें कि कोई जो टोला होगा, कब वह राजस्व ग्राम में आयेगा.

श्री उमाशंकर गुप्ता -- उपाध्यक्ष महोदय, वैसे कलेक्टर ने जो माननीय विधायक जी को पत्र लिखा है, जिसकी प्रति मेरे पास भी है, उसमें उन बातों का उल्लेख उन्होंने कर दिया है. फिर भी अगर आप कहें, तो मैं उसी पत्र को पढ़कर सुना दूं.

उपाध्यक्ष महोदय -- आवश्यकता नहीं है. कलेक्टर ने आपको पत्र भेज दिया है.

श्री शैलेन्द्र पटेल -- उपाध्यक्ष महोदय, मैं यह चाहता हूं कि यह बात सदन में आये, क्योंकि यह मेरे अकेले की समस्या नहीं है, पूरे मध्यप्रदेश में ऐसे सैकड़ों गांव हैं. यहां सारे विधायक गण बैठे हैं, जो इस समस्या से ग्रस्त हैं और उन गांवों में जो मूलभूत सुविधायें हैं, वहां उनका नितांत अभाव है. वहां पर उनको वह सुविधायें नहीं मिल पा रही हैं, जो एक गांव को मिलना चाहिये. आप अगर उनको पढ़कर सुनायेंगे, तो मैं उसके बाद में बात रखूंगा.

श्री उमाशंकर गुप्ता -- उपाध्यक्ष महोदय, अगर आप कहते हैं, तो मैं पढ़कर सुनाता हूं. वैसे उसमें काफी लम्बे प्रावधान हैं,

उपाध्यक्ष महोदय -- आप अलग से ले लीजियेगा.

श्री उमाशंकर गुप्ता -- उपाध्यक्ष महोदय, मेरा कहना है कि इसमें कोई आपके सुझाव हो तो दे दें. जो विधिक प्रावधान हैं और अलग से भी कलेक्टर ने आपको दिया है.

उपाध्यक्ष महोदय -- मंत्री जी यह कह रहे हैं कि आपके पास कोई सुझाव हों, तो दे दीजिये. पत्र तो आपके पास स्वयं है.

श्री शैलेन्द्र पटेल -- उपाध्यक्ष महोदय, मैं बता देता हूं. उसमें 200 की आबादी का प्रावधान है. दो किलोमीटर का प्रावधान है और जमीन का एक प्रावधान है कि उस गांव में जो निवासी हैं, उनके पास इतनी जमीन होना चाहिये, इतने एकड़ की जमीन होना चाहिये.

उपाध्यक्ष महोदय -- यह जवाब में भी उल्लेख हैं.

श्री शैलेन्द्र पटेल -- उपाध्यक्ष महोदय, जी हां.

उपाध्यक्ष महोदय -- अब आप स्पेसीफिक प्रश्न करें.

श्री शैलेन्द्र पटेल -- उपाध्यक्ष महोदय, पहली बात तो यह है कि अगर कोई गांव बस गया है, जिसकी आबादी 500,700,800,1000 अलग अलग इस तरह के टोले हैं और दूरी भी है, लेकिन उनके पास जमीन नहीं है, तो अगर जमीन नहीं होगी, तो क्या वह गांव नहीं कहलायेगा. क्या किसी राजस्व गांव को घोषित होने के लिये, जो किसी जमाने में जमीन का प्रावधान था, क्या वह आज न्याय संगत है. अगर कोई गांव बस गया, जिसकी आबादी बढ़ गयी हैं और जिसकी दूरी भी मुख्य गांव से उतनी दूरी है, तो सिर्फ जमीन के क्लॉज के कारण ये गांव राजस्व ग्राम घोषित नहीं हो पा रहे हैं. क्‍या आज सरकार को इस नियम में संशोधन की आवश्‍यकता पड़ेगी ? क्‍या सरकार इसमें संशोधित करके, इस नियम को चेन्‍ज करेगी और उन गांवों को राजस्‍व गांव घोषित करने की ओर अपना कदम उठाएगी ?

श्री उमाशंकर गुप्‍ता - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, शायद माननीय सदस्‍य ने कलेक्‍टर का पत्र नहीं पढ़ा है. उसमें जिस भूमि का, वे उल्‍लेख कर रहे हैं वह प्रावधान में नहीं बताया गया है कि किसान के पास कितनी भूमि होनी चाहिए ? यह कहा गया है कि जिस एरिये को राजस्‍व ग्राम बनाना है, उसे कम से कम 200 एकड़ होना चाहिए. फिर उसमें एक शर्त यह भी है कि अगर जो ग्राम में अलग-अलग मजरे हैं, उनमें अगर बाकी व्‍यवस्‍थाएं एक ही जगह हैं और वहां उन मजरों में वे सुविधाएं उपलब्‍ध नहीं हैं, इसमें 3-4 प्रावधान हैं. इसमें आप जो कह रहे हैं, वे नियम नहीं हैं कि व्‍यक्तिगत किसान के लिए कितनी खेती होनी चाहिए, यह कोई नियम नहीं है. इसमें टोटल एरिया 200 एकड़ होना चाहिए.

उपाध्‍यक्ष महोदय - यह तो स्‍पष्‍ट है. लगता है कि आपने कलेक्‍टर का जवाब नहीं पढ़ा है.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मुझे मंत्री जी का जवाब ही नहीं मिला है, जो मिलना चाहिए था. उन गांवों में रोड़ की सुविधा नहीं है क्‍योंकि मुख्‍यमंत्री सड़क योजना के अन्‍तर्गत जो राजस्‍व ग्राम हैं, उनको जोड़ा गया है, मंजरे-टोलों के पास रोड़ नहीं हैं और पंचायत के पास जो चौदहवें वित्‍त आयोग की राशि मिलती है, उसमें संभव नहीं है कि उन गांवों को रोड़ से जोड़ा जा सके. उन गांवों की सबसे बड़ी आवश्‍यकता यह है कि वहां सड़कों का निर्माण हो.

उपाध्‍यक्ष महोदय - जो मंत्री जी ने आपको जवाब दिया है, वह शायद आपने पढ़ा नहीं है.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल - मुझे मंत्री जी ने जवाब नहीं दिया है.

उपाध्‍यक्ष महोदय - यह जवाब दिया है कि उनका विकास ग्राम पंचायतें कर सकती हैं.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल - उपाध्‍यक्ष जी, ग्राम पंचायत के पास कोई भी ऐसा बजट नहीं है कि जिससे उनकी रोड़ बनाई जा सके, हम यह सब भली-भांति जानते हैं. जो पंच-परमेश्‍वर योजना की राशि होती है, उससे वे गांव की इन्‍टरनल रोड़ तो बना सकते हैं लेकिन दोनों गांवों को बीच से जोड़ने के लिए कोई फण्‍ड नहीं है, उन गांवों के लिए, जिन गांवों का मैंने उल्‍लेख किया है. ऐसे कई गांव हैं, उन दोनों गांवों के बीच में से कोई रोड़ आज तक नहीं बनी है.

उपाध्‍यक्ष महोदय - शैलेन्‍द्र जी, कई योजनाएं हैं. सुदूर सड़क योजना है, यह सब ग्राम पंचायतें संचालित करती है.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल - माननीय उपाध्‍यक्ष जी, ग्राम सुदूर सड़क योजना के अंतर्गत मनरेगा के तहत, वे सारे रोड़ बनते हैं. मैं उसे भली-भांति जानता हूँ. लेकिन जहां पर मजदूर उपलब्‍ध नहीं हैं, वहां पर ये रोड़ नहीं बन पा रही हैं और मैं यह स्थिति इसलिए बता रहा हूँ कि मैं इन गांवों को खुद जाकर देखकर आया हूँ और इन गांवों में रोड़ नहीं हैं. ऐसे दुर्गम रास्‍तों से जाना पड़ता है. ऐसा लगता है कि आज भी हम 19 वीं सदी में जी रहे हैं. इन रोड़ों का बनना नितान्‍त आवश्‍यक है. इन नियमों में बदलाव लाया जाये ताकि जो छोटे-छोटे मजरे-टोले हैं, राजस्‍व गांव बनेंगे तभी उनमें सड़क का निर्माण हो पायेगा.

उपाध्‍यक्ष महोदय - एक विकल्‍प विधायक निधि भी है.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल - माननीय उपाध्‍यक्ष जी, विधायक निधि से हम देते हैं लेकिन जो रोड़ का निर्माण होना है. कोई भी गांव में 50 लाख रूपये या 1 करोड़ रूपये से कम के रोड़ नहीं बनेंगे.

उपाध्‍यक्ष महोदय - आपकी बात आ गई है.

श्री सचिन यादव - उपाध्‍यक्ष महोदय, यह जो ध्‍यानाकर्षण आया है यह न सिर्फ माननीय शैलेन्‍द्र जी के क्षेत्र का मामला है बल्कि मैं समझता हूँ कि पूरे मध्‍यप्रदेश की हर विधानसभा का मामला है. कई सारे गांव ऐसे हैं, जहां पर वर्तमान में गांव हैं, उससे बड़ी आबादी वहां बस चुकी है. लेकिन उन आबादी में शासन की योजनाओं का लाभ इसलिए नहीं मिल पाता है क्‍योंकि वे गांव आबादी घोषित गांव नहीं हैं. चूँकि यहां सदन में जो नियम-प्रक्रियाएं एवं कानून बनते हैं तो मेरा आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि अगर इस प्रकार के कोई नियम नहीं हैं तो नियम बनाए जाएं और उन तमाम लोगों को शासन की जितनी भी योजनाएं हैं, वहां पर जो मूलभूत सुविधाएं हैं, उन सुविधाओं का लाभ सारे ग्रामवासियों का मिले, ऐसा मेरा आग्रह आपके माध्‍यम से है. अगर कोई कानून नहीं है तो कानून बनाने का भी काम किया जाये.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता - उपाध्‍यक्ष जी, यह कहीं रोक नहीं है कि कोई मजरा है तो उसमें काम नहीं कर सकते हैं, कोई भी काम नहीं रूकता है कि उसके लिए राजस्‍व ग्राम होना जरूरी नहीं है. आप भी इस बात से भली-भांति परिचित हैं. अगर कहीं कोई काम किसी विभाग का नहीं हो पा रहा है तो हमें वहां प्रयास करना पड़ेगा. अगर माननीय सदस्‍य कोई समस्‍या उठायेंगे तो मैं भी संबंधित विभाग के मंत्री जी से आग्रह कर दूँगा.

उपाध्‍यक्ष महोदय - सचिन जी, आप इसमें संशोधन के लिए प्रायवेट मेम्‍बर्स बिल ले आइये. आपको मजरे-टोले में काफी सहयोग मिलेगा. शैलेन्‍द्र जी आपका खत्‍म हो गया है. अब अंतिम ध्‍यानाकर्षण लेंगे.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल - उपाध्‍यक्ष जी, अंतिम बात.

उपाध्‍यक्ष महोदय - श्री यशपाल जी प्रश्‍न पूछ चुके हैं, शैलेन्‍द्र जी, उसके बाद वापस कैसे आएंगे ?

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

(2) भोपाल दुग्ध संघ द्वारा दुग्ध परिवहन हेतु दोष पूर्ण निविदा की कार्यवाही से उत्पन्न स्थिति

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया (मंदसौर)--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मेरी ध्यानाकर्षण सूचना का विषय इस प्रकार है.

 

पशुपालन मंत्री (श्री अंतर सिंह आर्य)--माननीय उपाध्यक्ष महोदय,

 

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने पक्षपातपूर्ण कार्यवाही से इंकार किया है, लेकिन मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी का उन तीन बिंदुओं की तरफ ध्‍याना‍कर्षित करना चाहता हूं, जिसमें लग रहा है कि कहीं न कहीं पक्षपात हुआ है. धरोहर राशि पचास हजार से बढ़ाकर एक लाख रूपये कर दी गई है, जबकि मध्‍यप्रदेश के अन्‍य दुग्‍ध संघों में यह धरोहर राशि पच्‍चीस हजार रूपये से, पचास हजार रूपये के समकक्ष होती है.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, दूसरा पक्षपातपूर्ण रवैया प्रारंभिक दृष्टि में यह नजर आ रहा है कि गुना, पिपरिया और नरसिंहगढ़ जैसे महत्‍वपूर्ण परिवहन मार्गों को निविदा से विलोपित कर दिया गया है, निविदा से हटा दिया गया है और उन मार्गों को छोड़ दिया गया है.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, तीसरा पक्षपातपूर्ण रवैया यह परिलक्षित हो रहा है कि भोपाल शहर के दुग्‍ध संघ परिवहनकर्ताओं की जहां एक ओर अवधि बढ़ा दी गई हैं, वहीं नवीं निविदाओं में यह दर्शा दिया गया है कि जो ट्रांसपोर्ट लाईसेंसी होंगे, वे ही परिवहन में अपने भागीदारी सुनिश्चित कर पायेंगे. ऐसा पहले कभी हुआ नहीं है, इससे जो छोटे छोटे कारोबारी हैं, जो छोटे-छोटे परिवहनकर्ता हैं, जिनके छोटे छोटे वाहन हैं, उस प्रक्रिया से दूर हो जायेंगे और बड़े-बडे़ लोगों का, पांच ट्रांसपोर्ट व्‍यवसायिओं का यह दो ट्रांसपोर्ट व्‍यवसायिओं का इसके ऊपर आधिपत्‍य हो जायेगा और छोटे लोग जो बेरोजगार हैं और जो इस व्‍यवसाय में अपनी सेवाएं देने के लिये कर्ज पर, लोन पर वाहन खरीदकर ले आये हैं, वह जब वाहन नहीं चला पायेंगे तो उनकी रोजी रोटी का सवाल उठेगा.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहते हुए माननीय मंत्री जी से यह अपेक्षा करूंगा की क्‍या वह संपूर्ण प्रक्रिया जो पक्षपातपूर्ण है, द्वेषपूर्ण है, कहीं न कहीं पूरे प्रादेशिक स्‍तर की जिस प्रकार से एक निविदा की प्रक्रिया बनना चाहिए उसमें भोपाल दुग्‍ध संघ ने कहीं न कहीं त्रुटि की है, उस त्रुटि को सुधारते हुए संपूर्ण प्रक्रिया की आप जांच करायेंगे ?

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से यह भी आग्रह करूंगा कि निविदा प्रक्रिया जो अब तक संपादित की गई थी क्‍या आप उस प्रक्रिया को निरस्‍त करने की घोषणा करेंगे ?

श्री अंतर सिंह आर्य - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जो ध्‍यानाकर्षण लगाया है, मैं जहां तक समझता हूं कि प्रक्रिया का सही पालन हुआ है परंतु जो एक नई शर्त, जो लाईसेंस वाली बात आई है, जिसके कारण छोटे व्‍यवसायी या जिनके पास सिंगल वाहन है, ऐसे लोग इसमें भाग नहीं ले सकेंगे, माननीय सदस्‍य ने इस ध्‍यानाकर्षण प्रस्‍ताव के माध्‍यम से यह बात रखी है. मैं माननीय सदस्‍य को आश्‍वस्‍त करता हूं और आपके माध्‍यम से यह कहना चाहता हूं कि हमारी जो निविदा प्रक्रिया है जो वर्तमान में चल रही है, उसको हम स्‍थगित कर रहे हैं, दूसरा जो निविदा में ट्रांसपोर्ट लाईसेंस की मांग वाली बात कही गई है, इसको भी हम इस निविदा से हटा देंगे और नये सिरे से हम टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ कर देंगे.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया - धन्‍यवाद माननीय मंत्री जी.

उपाध्‍यक्ष महोदय - आपकी सभी समस्‍याओं का हल हो गया.


 

12.40 बजे सभापति तालिका की घोषणा

उपाध्‍यक्ष महोदय :- मध्‍यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 9 के उपनियम (1) के अधीन, मैं, निम्‍नलिखित सदस्‍यों को सभापति तालिका के लिए नाम-निर्दिष्‍ट करता हूं :-

1. श्री कैलाश चावला

2. श्री दुर्गालाल विजय

3. श्रीमती नीना विक्रम वर्मा

4. श्री मनोज निर्भय सिंह पटेल

5. श्री लाखन सिंह यादव, तथा

6. श्री के.पी.सिंह

 

12.41बजे याचिकाओं की प्रस्‍तुति

उपाध्‍यक्ष महोदय :- आज की कार्यसूची में सम्मिलित सभी याचिकाएं प्रस्‍तुत की हुई मानी जायेंगी.

12.41 वक्‍तव्‍य

अध्‍यापक संवर्ग की अंर्तनिकाय ऑनलाईन संविलियन की नीति विषयक

स्‍कूल शिक्षा मंत्री (कुंवर विजय शाह):- उपाध्‍यक्ष महोदय, हमारी सरकार ने अध्‍यापकों के लिये एक अभिनव योजना उन हजारों-हजार, बल्कि में कहूं तो हमारे जो लाखों अध्‍यापक होंगे, जो वरिष्‍ठ अध्‍यापक, सहायक अध्‍यापक हैं या हमारी जिन बहनों की शादी कहीं दूसरी जगह हो गयी और वह अपने पति के पास नहीं रह पा रही हैं या जिनके माता-पिता या बच्‍चों को गंभीर बीमारी है वह अपने परिवार के साथ नहीं रह पा रही हैं. ऐसी अनेक विसंगतियां थीं, ऐसे तमाम अध्‍यापकगण हमारे जनप्रतिनिधियों के पास आते थे और उनसे निवेदन करते थे, सरकार में मंत्री होने के नाते वह हमारे पास भी आते थे कि हमारा संविलियन कर दिया जाये और हमें हमारे परिवार के साथ भेज दिया जाये और हमारा संविलियन कर दिया जाये. यदि किसी के परिवार में कोई दुर्घटना हो जाती थी और उसके परिवार का काई प्रिय चला जाता है और उसका वहां पर रहना मुश्किल होता था. शासन से बार-बार निवेदन करने के बाद वह अध्‍यापक बे-मन से पढ़ाते थे, आज उनको हमारी सरकार एक बहुत बड़ी राहत देने जा रही है. सदन के सभी सदस्‍यों की भी चिंता होती थी कि हमारे जो वरिष्‍ठ अध्‍यापक, सहायक अध्‍यापक और अध्‍यापक हैं, जो बीमार हैं, परित्‍याक्‍ता बहनें हैं या कोई गंभीर रोग से पीडि़त हैं अब उनको बिना किसी प‍रेशानी के, बिना किसी विधायक या मंत्री से निवेदन किये और न ही उनको कोई आवेदन देना है, इतनी क्रिस्‍टल, क्लीयर संविलियन की नीति हमारी सरकार ने लागू की है, उसकी जानकारी मैं आपके माध्‍यम से सदन को देना चाहता हूं-

अध्‍यापक संवर्ग के पुरूष अध्‍यापकों की संविलियन नीति नहीं होने से उन्‍हें अपने पारिवारिक दायित्‍वों को पूरा करने में परेशानी होती थी. उनकी कठिनाई को देखते हुए मंत्रि-परिषद द्वारा निर्णय लिया गया है कि पुरूष अध्‍यापकों को भी अन्‍तर्निकाय ऑनलाईन संविलियन नीति में शामिल किया जायेगा. उनको अपने स्‍कूल से डायसकोड भरकर ऑनलॉइन आवेदन करना है. किसी नेता को आवेदन नहीं देना है.

इस नीति में स्‍वयं अथवा परिवार के सदस्‍य की गंभीर बीमारी से पीडि़त, विवाह के कारण पति के निवास अथवा कार्यस्‍थान पर संविलियन हेतु इच्‍छुक महिला अध्‍यापक, नि:शक्‍त कोटे के अंतर्गत नियुक्‍त महिला एवं पुरूष अध्‍यापक, विधवा अथवा परित्‍यक्‍ता महिला अध्‍यापक, गैर आदिवासी क्षेत्र से आदिवासी ग्रामीण क्षेत्रों में जाना चाहते हैं, नगरीय क्षेत्र से ग्रामीण क्षेत्र में जाना चाहते हैं, संविलियन हेतु इच्‍छुक महिला एवं पुरूष अध्‍यापक इसके अतिरिक्‍त कार्य निष्‍पादन एवं वरिष्‍ठता को अंतर्निकाय संविलियन में प्राथमिकता दी जायेगी. संविलियन के इच्‍छुक अध्‍यापकों को 20 स्‍थान अध्‍यापकों से ऑनलाईन मांगे जायेंगे. उन 20 स्‍थानों में से जहां भी जगह खाली होगी उनकी वरिष्‍ठता को देखते हुए स्‍वयमेव ही उनका स्‍थानांतरण कम्‍प्‍यूटर के माध्‍यम से ही हो जाएगा. (मेजों की थपथपाहट)

उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं सदन को बताना चाहता हूं कि इस नीति को लागू करने पर अंतर्निकाय संविलियन की संपूर्ण प्रक्रिया ऑनलाईन होने से पूर्ण पारदर्शिता के साथ निर्धारित मापदंड के अनुसार महिला एवं पुरूष अध्‍यापकों को अंतर्निकाय संविलियन का लाभ प्राप्‍त हो सकेगा. अंतर्निकाय संविलियन की संपूर्ण प्रकिया, यथा रिक्‍तियों का प्रदर्शन, अभिलेखों का सत्‍यापन, अनुमति जारी करने की समस्‍त कार्यवाही ऑनलाईन प्रक्रिया के द्वारा समय सारणी के अनुसार सम्‍पन्‍न होगी. आवेदन की प्रक्रिया 1 अप्रैल से 30 अप्रैल 2017 तक रहेगी. अध्‍यापकगण एक माह तक ऑनलाईन आवेदन कर सकते हैं. पूर्व नियमों के अनुसार अंतर्निकायों में अनापत्ति प्राप्‍त नहीं होने पर अध्‍यापक स्‍थानांतरित नहीं किए जाते थे. इस समस्‍या का उपाय हमारे द्वारा यह किया गया है कि हम एक माह तक इंतजार करेंगे. किसी अन्‍य निकाय के अनापत्ति प्रमाण पत्र का हम केवल एक माह तक इंतजार करेंगे. यदि एक माह में निकाय द्वारा किसी कारण से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं दिया गया तो सरकार यह मानेगी कि निकाय को कोई आपत्ति है ही नहीं और अध्‍यापक को स्‍वमेव अनुमति प्राप्‍त हो जायेगी. हमारे द्वारा 1 मई से 30 मई 2017 तक अनापत्तियां प्रदान कर दी जायेंगी. अंतिम सूची का प्रकाशन 1 जून से 15 जून 2017 तक कर दिया जावेगा. संविलियन की संपूर्ण प्रक्रिया 16 जून से 30 जून 2017 तक पूर्ण कर ली जायेगी. अंतर्निकाय ऑनलाईन संविलियन की इस नीति से महिला अध्‍यापक, नि:शक्‍त परिवार आधारित अध्‍यापकों के अलावा पुरूष अध्‍यापकों को भी अंतर्निकाय संविलियन में लाभ प्राप्‍त करने का अवसर मिलेगा. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं समझता हूं कि इससे सरकार की कर्मचारी हितैषी, महिला हितैषी एवं परिवार हितैषी छवि को अतिरिक्‍त बल प्राप्‍त होगा. यह जानकारी आपके माध्‍यम से मैं सदन को देना चाहता था. धन्‍यवाद.

श्री मुरलीधर पाटीदार (सुसनेर)- उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं इस सदन के माध्‍यम से माननीय मुख्‍यमंत्री जी एवं शिक्षा मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्‍यवाद देना चाहता हूं. पिछले 21 वर्षों से हमारे अध्‍यापक साथी विशेषकर पुरूष अध्‍यापक इस संविलियन की सुविधा को चाह रहे थे. मैं एक और विनम्र आग्रह शिक्षा मंत्री जी से करना चाहता हूं कि महिलाओं के लिए पूर्व में यह सुविधा थी कि 2 शिक्षक प्राइमरी स्‍कूल में और 3 शिक्षक मीडिल स्‍कूल में हों और यदि इससे अधिक शिक्षक होंगे तो ही अनापत्ति प्राप्‍त होती थी. यदि किसी स्‍कूल में शिक्षक रिक्‍त पद पर स्‍थानांतरित होकर जा रहा है तो वर्तमान में वह जिस स्‍कूल में कार्यरत है, वहां भी तो पद रिक्‍त हो ही जायेगा. अनापत्ति के इस बंधन को हटाया जाए.

कुंवर विजय शाह- विधायक जी से निवेदन है कि अभी विस्‍तार में न जायें. कई लोगों को सरकार की इस नीति का लाभ मिलेगा. आप अध्‍यापक संवर्ग से ही आए हैं, हम आपका आदर करते हैं. इस विषय में विस्‍तार से बाद में चर्चा कर ली जायेगी.

श्री मुरलीधर पाटीदार- हमारे शिक्षा मंत्री जी बहुत जांबाज है. मेरे दो बिंदु और रह गए हैं. मैं उनका ध्‍यान इस ओर आकर्षित करना चाहता हूं.

उपाध्‍यक्ष महोदय- आप बैठ जाईये. मंत्री जी के वक्‍तव्‍य पर चर्चा नहीं होती है.

प्रभारी नेता प्रतिपक्ष (श्री बाला बच्‍चन)- उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी द्वारा अंतर्निकाय संविलियन की ऑनलाईन प्रक्रिया पर जो वक्‍तव्‍य दिया गया है, इस पर मेरा सुझाव है कि गैर आदिवासी क्षेत्र से आदिवासी ग्रामीण क्षेत्र, नगरीय क्षेत्र से ग्रामीण क्षेत्र में संविलियन हेतु इच्‍छुक महिला एवं पुरूष अध्‍यापकों तक तो ठीक है. लेकिन ऐसा न हो जाए कि ग्रामीण क्षेत्रों से और विशेषकर आदिवासी ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों में अध्‍यापकों का संविलियन करना आप शुरू मत कर दीजिएगा.

कुंवर विजय शाह-- नेता प्रतिपक्ष जी आपने मेरा वक्‍तव्‍य ठीक से पढ़ा ही नहीं अगर आप पढ़ेंगे तो उसमें कहीं भी इस बात का हवाला नहीं है कि हम गांव के टीचर को शहर भेज रहे हैं. हम शहर के टीचर को गांव भेजेंगे, गांव के टीचर को शहर में नहीं.

श्री बाला बच्‍चन -- मेरा कहना यह है कि आप यह करना शुरू नहीं कर देना.

कुंवर विजय शाह-- आप चिन्‍ता मत कीजिए.

श्री बाला बच्‍चन -- उसका शिक्षा जगत पर और बड़ा असर आएगा.

उपाध्‍यक्ष महोदय-- आपके वक्‍तव्‍य को किसी ने नहीं पढ़ा मंत्री जी पहली बार सदन में आ रहा है.

कुंवर विजय शाह-- मेरा माननीय नेता प्रतिपक्ष जी से कहना है कि अच्‍छी बातों के लिए धन्‍यवाद दें. कुछ कमियां होंगी तो मिलकर दूर करेंगे.

श्री बाला बच्‍चन-- हम धन्‍यवाद दे ही रहे हैं लेकिन यह ध्‍यान रखा जाए कि रूरल एरिया से शहर में करना शुरु न कर दें.

उपाध्‍यक्ष महोदय-- आपका सुझाव बहुत अच्‍छा है.

श्री बाला बच्‍चन-- धन्‍यवाद.

12.51 बजे शासकीय विधि विषयक कार्य

मध्‍यप्रदेश नगरीय क्षेत्रों के भूमिहीन व्‍यक्ति (पट्टाधृति अधिकारों का प्रदान किया जाना) संशोधन विधेयक, 2017 (क्रमांक 1 सन् 2017) का पुर:स्‍थापन

 

 

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री, (श्रीमती माया सिंह) -- उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश नगरीय क्षेत्रों के भूमिहीन व्‍यक्ति (पट्टाधृति अधिकारों का प्रदान किया जाना) संशोधन विधेयक, 2017 के पुर:स्‍थापन की अनु‍मति चाहती हूं.

उपाध्‍यक्ष महोदय-- प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश नगरीय क्षेत्रों के भूमिहीन व्‍यक्ति (पट्टाधृति अधिकारों का प्रदान किया जाना) संशोधन विधेयक, 2017 के पुर:स्‍थापन की अनु‍मति दी जाए.

अनुमति प्रदान की गई.

 

श्रीम‍ती माया सिंह-- उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश नगरीय क्षेत्रों के भूमिहीन व्‍यक्ति (पट्टाधृति अधिकारों का प्रदान किया जाना) संशोधन विधेयक, 2017 का पुर:स्‍थापन करती हूं.

 

12.52 बजे.

राज्‍यपाल के आभिभाषण पर प्रस्‍तुत कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्‍ताव एवं संशोधनों पर चर्चा

 

उपाध्‍यक्ष महोदय -- अब सुश्री, उषा ठाकुर सदस्‍य, कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्‍ताव के संबंध में अपना भाषण प्रारम्‍भ करेंगी.

सुश्री उषा ठाकुर (इन्‍दौर-3) -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, भारतीय जनता पार्टी के पितृपुरुष परमश्रद्धेय दीनदयाल जी का यह शताब्‍दी‍ वर्ष है. जिसे हम गरीब कल्‍याण वर्ष के रूप में मनाने जा रहे हैं. मैं राज्‍यपाल जी के कृतज्ञता ज्ञापन पर अपने विचार प्रस्‍तुत करना चाहती हूं. अन्‍त्‍योदय और मानव एकात्‍मवाद दीनदयाल जी के यह दो सर्वाधिक प्रिय सिद्धान्‍त थे. इन दोनों सिद्धान्‍तों को उन्‍होंने वेद की पुनीत व्‍यवस्‍थाओं से ही लिया था. माननीय दीनदयाल जी इस बात को जानते थे कि एक न एक दिन यह विचारधारा सफलता के चरमोत्‍कर्ष को प्राप्‍त करेगी लेकिन उनकी अपेक्षा थी कि जब भी हमारे लोग सत्‍ता में पहुंचे, सत्‍ता के अहंकार भाव से मुक्‍त कर्मयोगी की तरह जनसेवा में जुट जाएं. मध्‍यप्रदेश के लोकनायक भाई शिवराज जी ने दीनदयाल जी के इन दोनों सिद्धांतों को अपनी रग-रग में समाहित किया है और व्‍यावहारिक धरातल पर उन्‍हें उतारने के लिए वह प्रण प्राण से जुटे हैं. अहर्निश 18 घंटे कार्य करने का ही यह सद्परिणाम है. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, उन्‍होंने सैकड़ों कल्‍याणकारी योजनाएं बनाईं जो समाज परिवर्तन में अपनी महत्‍वपूर्ण भूमिका रखती हैं. गुरुवर नानक जी की पंक्ति याद आती है कि-

''शूरा सो पहचानिए, जो लड़े दीन के हेत''

''पुर्जा- पुर्जा कट मरे, कबहु न छोड़े खेत''

सच्‍चा शूरवीर वही है जो दलित पीडि़त शोषित जन की सेवा  में अपना सर्वस्‍व न्‍यौछावर करें. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सम्‍पूर्ण राष्‍ट्र इस बात का साक्षी है कि मध्‍यप्रदेश में सर्वप्रथम लोकतंत्र की सच्‍ची परिभाषा जनता का जनता के लिए, जनता द्वारा शासन को परिभाषित किया. व्‍यावहारिक धरातल पर हम सब जानते हैं कि माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने सभी मत, पंत, वर्ग की पंचायतें अपने आवास पर आहूत कीं. उन्‍हीं से पूछा की तुम्‍हारे सर्वांगीण विकास के लिए हम क्‍या करें और उन्‍हीं के निर्देशों, उन्‍हीं के सुझावों के मुताबिक जनकल्‍याणकारी योजनाओं का निर्माण किया. उपाध्‍यक्ष जी सिर्फ निर्माण ही नहीं किया उसका समुचित लाभ जन-जन तक पहुंचे इस बात की भी पुख्‍ता व्‍यवस्‍था की है. माननीय उपाध्‍यक्ष जी हमने ग्रामोदय, नगरोदय अभियान के माध्‍यम से तीन चरणों में इस व्यवस्था को जुटाने की कोशिश की. 5 प्रशासनिक लोगों की टोली एन-1 से एन-5 तक सभी विधानसभावार, वार्डवार इन हितग्राहियों को चिह्नित करने में लगी हुई है. वास्तविक हितग्राही जो चिह्नित होंगे उन्हें लाभ भी सुनिश्चित कराया जाए, यह टोली का संकल्प है.

उपाध्यक्ष महोदय, इस नगरोदय अभियान में हमारी विधान सभा में समाजसेवी भाई-बहनों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उन्होंने भी प्रशासनिक टोली के साथ कंधे से कंधा मिलाकर हर घर तक पहुंचने का संकल्प किया. उन 15 दिनों का लाभ हमने इस प्रकार उठाया कि एक दिन में दो बूथों पर जाते थे और प्रत्येक व्यक्ति से मिलते थे. पुरजोर कोशिश की है कि कोई भी अभावग्रस्त व्यक्ति, कोई भी हितग्राही जो पात्रता रखता है वह इन योजनाओं से वंचित न रहे.

उपाध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश की इन लोक कल्याणकारी योजनाओं से प्रेरित होकर केन्द्र की सरकार भी हितग्राही योजनाओं के निर्माण में जुटी और उसने हितग्राही निर्माण योजनाओं की एक लंबी श्रृंखला खड़ी कर दी. माननीय प्रधानमंत्री जी ने जन-धन योजना, मुद्रा योजना, फसल-बीमा, जीवन-बीमा, स्टार्ट-अप इंडिया, स्टेंड-अप इंडिया, कौशल विकास उन्नयन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों की चिंता की. इन सबसे बढ़कर उनकी फिक्र यह थी कि इस देश के अन्नदाता की आमदनी अगले पांच वर्षों में कैसे दोगुनी हो जाए. हमें कहते हुए गर्व है, प्रसन्नता है कि इसमें भी मध्यप्रदेश ने बाजी मारी. मध्यप्रदेश पहला प्रदेश है जिसने पांच साल में कैसे किसानों की आमदनी दोगुनी हो जाए इसका रोडमैप तैयार करके उस पर विधिवत् काम शुरु कर दिया.

उपाध्यक्ष महोदय, डिजिटल इकोनॉमी में हम अग्रणी हैं. कैशलेस ट्रांजेक्शन में मध्यप्रदेश 70 प्रतिशत तक पहुंचा. हमारे राज्य का सकल घरेलू उत्पाद 16.6 प्रतिशत है जो हमारी समृद्धि को दर्शाता है.

उपाध्यक्ष महोदय, संस्कृति संस्कारों की जननी होती है और किसी भी राष्ट्र की अस्मिता, आन-बान और शान होती है. संस्कृति के दो पहलू होते हैं भौतिक और अभौतिक. हमें यह कहते हुए गर्व है कि इन दोनों ही संस्कृतियों के चरम को हमने सफलतापूर्वक छूने की पुरज़ोर कोशिश की है. यदि हम भौतिक संस्कृति में अधोसंरचना की बात करें तो हम पाते हैं कि सड़कें जो नितांत आवश्यक हैं, जो विकास की धमनी कही जाती हैं. कुशल प्रशासक शेर शाह शूरी ने ग्रांट ट्रंक रोड बनाते वक्त यह बात कही थी कि यदि किसी राज्य को विकास के चरम को छूना है तो सड़कें उसकी अनिवार्य शर्त होंगी. सड़कों के मामले में हमने 3025 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग स्वीकृत कर दिए. 138 बड़े पुल बनाए हैं. 1502 किलोमीटर जिला मार्गों के उन्नयन की भी चिंता की है. प्रधानमंत्री सड़क योजना में 787 बसाहटों को मुख्य मार्ग से जोड़ने की जहां चिंता हुई जो शेष बचीं उनके लिए मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के माध्यम से 8389 किलोमीटर की कार्य योजना बना डाली.

उपाध्यक्ष महोदय, सबके लिए आवास यह जीवन की मूलभूत आवश्यकता है. हमने शहरी क्षेत्रों में 5 लाख और ग्रामीण क्षेत्रों में 15 लाख आवास बनाने का लक्ष्य रखा है.

उपाध्यक्ष महोदय, ऊर्जा उन्नति का सशक्त मार्ग है उसमें भी हम स्वावलंबी हो गए और 17400 मेगावॉट उपलब्धता हमारी है. हमने नवाचार भी ऊर्जा के क्षेत्र में किए हैं और विश्व की सबसे बड़ी सौर इकाई रीवा में स्थापित की. जिसकी लागत 4500 करोड़ है जो कि 750 मेगावॉट बिजली हमें उपलब्ध कराएगी.

उपाध्यक्ष महोदय, उजाला योजना के माध्यम से एक करोड़ एलईडी बल्ब का वितरण करके हमने 1825 मिलियन यूनिट्स बिजली की बचत का कीर्तिमान स्थापित किया है.

उपाध्यक्ष महोदय, कृषि के संदर्भ में देखें तो हम जानते हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश है. इस राष्ट्र की आत्मा गांवों में ही बसती है. कृषि के लिए हमारा अन्नदाता अहर्निश मेहनत करता है, वह सब विपरीत मौसमों को झेलते हुए संपूर्ण मानवता के पालन-पोषण के लिए फसल उत्पादित करता है. मध्यप्रदेश की सरकार किसानों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करती है, उनका अभिनंदन करती है. उनकी अथक मेहनत और उनके परिश्रम ने हमें चार बार "कृषि कर्मण पुरस्कार" से पुरस्कृत करवाया है. माननीय उपाध्यक्ष जी, मैं दावे से कह सकती हूँ कि पाँचवा "कृषि कर्मण पुरस्कार" भी हमें ही मिलने वाला है (मेजों की थपथपाहट) क्योंकि दलहन, तिलहन, सोयाबीन, चना, मसूर, लहसून, टमाटर, इन सभी में हम देश में प्रथम स्थान पर हैं.

माननीय उपाध्यक्ष जी, कृषि में नवाचारों को माननीय मुख्यमंत्री जी जोड़ने के लिए कटिबद्ध हैं. उन्होंने कृषि वानिकी, कृषि उद्यानिकी, के प्रशिक्षण प्रारंभ किए और प्रदेश की 21 मंडियों को राष्ट्रीय मंडी से जोड़ने का क्रांतिकारी काम किया. आगामी वर्षों में 30 मंडियों को भी जोड़ दिया जाएगा. सभी जिला मंडियों पर आधुनिकतम प्लेटफार्म निर्मित किए जा रहे हैं. जिनमें क्लिनिंग, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, कोल्ड-स्टोरेज, जैसी सुविधाएँ मिलेंगी ताकि किसान अपनी मेहनत का सही-सही दाम प्राप्त कर सके.

माननीय उपाध्यक्ष जी, जब हम सिंचाई की बात करते हैं तो हमारा मस्तक गर्व से उन्नत हो जाता है. हमने इस वर्ष चालीस लाख हैक्टेयर का लक्ष्य तय किया है और सिर्फ लक्ष्य ही तय नहीं किया बल्कि उसके लिए 18 वृहद् योजनाएँ, 36 मध्यम, और 460 लघु परियोजनाओं के माध्यम से मध्यप्रदेश की इस पावन भूमि को हम शस्य श्यामला बनाएँगे, धानी चुनर उड़ाएँगे.

माननीय उपाध्यक्ष जी, भौतिक संस्कृति के बाद यदि हम अभौतिक संस्कृति की बात करें तो हमें अति प्रसन्नता होती है कि हमारे प्रदेश में ढाई सौ से तीन सौ कला और संस्कृति से संबंधित कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. लोक नृत्य, लोक नाट्य, क्रांतिकारी, साहित्यकार, समाजसेवी, इन सबके अभिनंदनों में संत-महन्त, इनके अभिनंदनों में हम अग्रणी हैं और यह सब उपक्रम हम इसीलिए करते हैं कि हमारी आगामी पीढ़ी इनके महत्व को समझे, इनके गौरवशाली जीवन को अपने जीवन में समाहित करते हुए समाज सेवा के लिए प्रवृत्त हो.

माननीय उपाध्यक्ष जी, शौर्य स्मारक ने तो हमारे गौरव को विश्ववंदित किया. आजादी के बाद पहली बार देश में बनने वाला यह सैनिक शहीदों को समर्पित स्मारक है. उपाध्यक्ष जी, जब कोई सैनिक सीमा पर खड़ा अपने सर्वस्व न्यौछावर का भाव लाता है तो निःसंदेह मैं मानती हूँ कि उनकी प्रेरणा, हमारे क्रांतिकारी, हमारे आजादी दिलाने वाले, महानायक ही होते होंगे और वह इसी भाव से उत्प्रेरित होकर अपना सर्वस्व न्यौछावर करता होगा--

कि गर देश हित मरना पड़े, मुझको सहस्त्रों बार भी,

तो भी न इस कष्ट को निज ध्यान में लाऊँ कभी,

ए ईश भारतवर्ष में शत बार मेरा जन्म हो.

कारण सदा ही मृत्यु का देशोपकारक कर्म हो.

मरते रौशन बिस्मिल लहरी, अश्फाक-अत्याचार से.

होंगे पैदा सैकड़ों इनके रुधिर की धार से.

इनके प्रबल उद्योग से, उद्धार होगा देश का.

तब नाश होगा सर्वदा, दुःख-शोक के लवलेश का. (मेजों की थपथपाहट)

 

1.04 बजे

{अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए}

माननीय अध्यक्ष जी, यह उत्कट भाव ही शहीदों को सर्वस्व न्यौछावर करने के लिए प्रेरित करता होगा कि मेरे देश के नागरिक सुख-शांति से अपने घरों में जीवन जी सकें. माननीय अध्यक्ष जी, शौर्य स्मारक के बाद जो हमारी बड़ी उपलब्धि है, जो हमारे बच्चों में, आने वाली पीढ़ी में, देश भक्ति के भाव को प्रसारित करेगी वह अभियान है. आजादी सत्तर, "जरा याद करो कुर्बानी", इस अभियान ने हमारी युवा पीढ़ी को, हमारे जन-जन को, राष्ट्रनायकों के प्रति समर्पित सम्मान के भाव से जागृत किया है. माननीय अध्यक्ष जी, हमने इसमें एक नया प्रयोग अपनी विधान सभा में किया. हमने एक क्रांति रथ बनाया था और वह क्रांति रथ 108 शिक्षण संस्थाओं में घूमा.हर विद्यालय में भारतमाता की आरती, संपूर्ण वन्दे मातरम् और जन-गण-मन शुद्धतापूर्वक गाया गया. विद्यार्थियों में क्रांतिकारियों के प्रति सम्मान का भाव जागृत हो इसीलिये तीन प्रकार की प्रतियोगितायें आयोजित की गई. पहली क्रांतिकारियों के चित्र को पहचानो और उन पर कथा लिखो. दूसरा कोई देशभक्ति की कविता कंठस्थ करके सुनाओ. तीसरा क्रांतिकारियों का चित्र बनाओ. निस्संदेह ये प्रतियोगिताएं उनकी चित्त में राष्ट्रभक्ति का पावन भाव निर्मित करेंगी. 950 विजेताओं को इसमें हमने पुरस्कृत भी किया है.

माननीय अध्यक्ष महोदय, राष्ट्रभक्ति, दिव्यांगों के लिये भी, ऐसी चिंता करने वाले अति संवेदनशील मुख्यमंत्री भाई शिवराज जी हैं. फिल्म समारोह के माध्यम से देशभक्ति की फिल्में दिव्यांग बच्चों को दिखाई गई. उनमें सुभाषचंद्र बोस, वीर सावरकर, महात्मा गाँधी, भगत सिंह पर बनी श्रेष्ठ फिल्मों के प्रदर्शन ने उन बच्चों में उत्साह का भाव संचारित किया. उनकी प्रसन्नता और उत्साह देखते ही बनता था. अध्यक्ष जी, लगता है सचमुच कोई व्यक्ति इस मातृभूमि पर जन्म लेकर देशभक्ति से वंचित रह ही नहीं सकता. दिव्यांगों के प्रति हमारे मुख्यमंत्री बहुत ज्यादा चिंतित हैं उन्होंने दिव्यांग दंपत्तियों को कन्यादान में मिलने वाली सुविधाओं के अलावा 50 हजार का अतिरिक्त अनुदान प्रदान किया है. अस्थिबाधित 230 और 138 दृष्टिबाधित दिव्यांगों को आई.टी.आई. का प्रशिक्षण हमने दिया. रोजगार मेला आयोजित करके 400 को रोजगार भी दिलवा दिया, यह आपने आप में एक कीर्तिमान है.

माननीय अध्यक्ष महोदय, जब हम युवाओं की बात करें तो चिंता होती है. क्योंकि यह देश की शक्ति हैं, सामर्थ्य हैं, यही तो देश का भविष्य और भावी पीढ़ी हैं इसका संस्कारित, अनुशासित,शीलवान्,चरित्रवान होना आवश्यक है क्योंकि जब तक वह अपनी इन अच्छी बातों को व्यक्तित्व में समाहित नहीं करेगा तब तक अपनी संपूर्ण क्षमताओं को मानव सेवा के लिए समर्पित नहीं कर पाएगा. युवाओं के लिए हमारे मुख्यमंत्रीजी ने पहली बार प्लेसमेंट पोर्टल का निर्माण किया जो युवा और उद्योग के बीच संवाद की भूमिका निभाएंगे. युवा यदि खाली रहा तो किसी ने कहा है "Empty mind is devils workshop" उसकी ऊर्जा सकारात्मक दिशा में जाए, राष्ट्र सेवा की दिशा में जाए, मानव सेवा की दिशा में जाए यह हमारा प्रण है, यह हमारी प्रतिज्ञा है. मैं युवाओं को आह्वान करते हुए उनके सम्मान में कहना चाहती हूं कि..

" तुम युवा हो, काल को भी काल-से लगते रहे हो, देश का सौभाग्य अपने खून से लिखते रहे हो, ज्वाल की, भूचाल की साकार परिभाषा तुम्हीं हो, देश की समृद्धि की सबसे प्रबल आशा तुम्हीं हो,तुम अगर जो ठान लोगे, युग को नई तस्वीर दोगे, गर्जना से शत्रुओं के तुम कलेजे चीर दोगे."

माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे युवाओं को दीनदयाल अंत्योदय आजीविका मिशन के माध्यम से 5 लाख 46 हजार को रोजगार देने की व्यवस्था हुई.माननीय मुख्यमंत्री जी की मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, आर्थिक कल्याण योजना इसी दिशा में लगातार काम कर रही है. कक्षा 12वीं में 85 प्रतिशत अंक लाने वाले बच्चों की उच्च शिक्षा की सारी चिंता शासन ही करने वाला है. साथ ही 60 प्रतिशत अंक यदि हमारी अनाथ बेटियाँ लाएंगी तो उनकी भी चिंता शासन करेगा और 85 प्रतिशत अंक वाले बच्चों को राशि देने के स्थान पर लेपटॉप इस बार से दिया जाएगा ऐसा हमने तय किया है. शैक्षणिक जगत् में बच्चों को कोई कमी ना रहे इसीलिए आज तक 6 लाख साइकिलें वितरित हुईं, 95 लाख पाठ्य-पुस्तकें बंटी, 72 लाख गणवेश बंटे, 17,896 लेपटॉप और 1 लाख स्मार्टफोन बच्चों को शिक्षा में प्रेरित करने के लिए हमने दिये. ताकि वह सब बातों से निश्‍चिंत होकर और अपना ध्‍यान सिर्फ पढ़ाई की ओर केन्द्रित करे और अपने इस मानव जीवन को संवारे. पढ़ाई में गुणात्‍मक विकास हो, इसलिए संभागीय स्‍तर पर एक-एक उत्‍कृष्‍ट विद्यालय, महाविद्यालय स्‍थापित है. व्‍यावसायिक प्रशिक्षण हेतु आई.टी.आई. की भी व्‍यवस्‍था की गई है. सब-इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेज में स्‍मॉर्ट क्‍लासेस की व्‍यवस्‍था की जा रही है. शिक्षा का नवाचार हमने प्रारम्‍भ किया, व्‍यावसायिक पाठ्यक्रम एवं जल-प्रबन्‍धन जैसे व्‍यावहारिक विषयों में स्‍नातक कोर्स प्रारम्‍भ किया.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सुपर-100 तो अपने आप में अनूठा है क्‍योंकि इसमें बच्‍चों को पढ़ाई के साथ-साथ एम.बी.ए., सी.ए., आई.आई.टी., एन.डी.ए. जैसे विषयों की भी कोचिंग दी जा रही है ताकि हम मिलिट्री के 15,000 खाली पड़े पदों को भरवा सकें. हमने हमारी विधान सभा में फोर्स नामक संस्‍था का गठन किया और उसके माध्‍यम से मुझे बताते हुए प्रसन्‍नता है कि इस बार 27 युवक मिलिट्री में भर्ती हुए हैं.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारी सरकार, हमारे मुख्‍यमंत्री जी की संवेदनशीलता देखिए कि वे केवल योग्‍य बच्‍चों के लिए ही चिंतित ‍नहीं हैं बल्कि उन्‍होंने अयोग्‍य बच्‍चों की भी फिक्र की, क्‍योंकि वे जानते हैं कि एक असफलता उन्‍हें कुंठा, मानसिक अवसाद से ग्रस्‍त कर सकती है. कई बार बच्‍चे निराश होकर अपना जीवन ही समाप्‍त कर लेते थे, पर हमने रूक जाना नहीं जैसा अभिनव प्रयोग प्रारम्‍भ किया और यह बताते हुए मुझे हर्ष होता है कि फिर से 2 लाख बच्‍चों को परीक्षा का मौका मिला, उसमें से 61 हजार बच्‍चे सफल भी हुए. मनुष्‍य जीवन अनमोल है. इसकी महत्‍ता समझते हुए इस पावन अभियान ने बच्‍चों के जीवन में उत्‍साह को भरा है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मिल बांचें मध्‍यप्रदेश जैसा अभिनव प्रयोग वंदनीय है क्‍योंकि यह शिक्षा जगत में शिक्षा के गुणात्‍मक विकास को बढ़ाएगा. यदि समाज की सहभागिता शासकीय विद्यालयों तक पहुंचेगी तो निस्‍संदेह शिक्षा का स्‍तर सुधरेगा, गुणात्‍मक विकास में चार चॉंद लगेंगे.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राज्‍यपाल जी के ज्ञापन में हम यदि खेलों की बात करें, तो हम देखते हैं कि राष्‍ट्रीय, अन्‍तर्राष्‍ट्रीय और राज्‍य स्‍तर पर हमने सैकड़ों पुरस्‍कार प्राप्‍त किए हैं और हमारी महिला हॉकी प्रेसीडेंट अवॉर्ड को प्राप्‍त कर चुकी है. सामाजिक समरसता के विषय में बात करते हुए निवेदन करना चाहती हॅूं क्‍योंकि सामाजिक समरसता किसी भी राष्‍ट्र के निर्माण का एक अनिवार्य हिस्‍सा है. अन्‍तर्राष्‍ट्रीय षडयंत्र अपनी कुत्सित माध्‍यमों से इस देश की एकता, अखण्‍डता को छिन्‍न-भिन्‍न कर देना चाहता है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के भाई-बहनों के उत्‍थान हेतु सैकड़ों योजनाएं बनाकर उन्‍हें भी राष्‍ट्र की मुख्‍य धारा से जोड़ने का काम किया है. दीनदयाल वनांचल योजना ने उनके लिए शिक्षा, रोजगार, चिकित्‍सा‍ की व्‍यवस्‍था की. हम जानते हैं कि माननीय मुख्‍यमंत्री जी चिकित्‍सा‍ स्‍वेच्‍छानुदान से 2 लाख तक की सेवाएं उन्‍हें प्रदान करते हैं और 15 जनवरी से 27 फरवरी तक तो एक अनूठा अभियान पूरे संपूर्ण मध्‍यप्रदेश के हर जिले में चलाया गया. जितने भी हितग्राही वहां आए, जो भी रोगी थे वे चाहे बीपीएल के हों, एपीएल के हों या सामान्‍य जन हों उनका परीक्षण बहुत ही धैर्यपूर्वक किया गया. उनकी बीमारियों को चिन्ह्ति करते हुए समूल उपचार की व्‍यवस्‍था जुटाई गई.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, चिकित्‍सा के क्षेत्र में जो क्रांतिकारी कदम मध्‍यप्रदेश की सरकार ने उठाया, उसके संदर्भ में मैं धन्‍यवाद देना चाहती हॅूं क्‍योंकि प्राथमिक चिकित्‍सा केन्‍द्र, जो चिकित्‍सक से मुक्‍त थे उन्‍हें यूनानी चिकित्‍सक और आयुर्वेदाचार्यों के माध्‍यम से भरने की जो कोशिश की जा रही है, वह वंदनीय है. इसके माध्‍यम से हम जन-जन को स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं प्रामाणिकता से पहुंचा पाएंगे.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप तो जानते ही हैं कि यूनानी चिकित्‍सा और आयुर्वेदिक चिकित्‍सा हमारी अति प्राचीन पद्धतियॉं हैं जो रोगों को जड़-मूल से समाप्‍त करने की हिम्‍मत और ताकत रखती हैं.माननीय अध्‍यक्ष जी, यदि हम इतिहास के गौरवशाली पन्‍नों को पलटें तो हमें लग जाता है कि सुश्रुत और चरक जैसे चिकित्‍सकों ने अति प्राचीनकाल में प्‍लास्‍टिक सर्जरी, हृदय प्रत्‍यारोपण भी किया और बहुत ही महत्‍वपूर्ण काम उस समय भी किए जब तथाकथित विकसित कहे जाने वाले अमेरिका और इंग्‍लैंड जैसे देश बुखार आ जाने पर रक्‍त बहाकर ही तापमान नियंत्रित कर पाते थे. ऐसी चिकित्‍सा सुविधाओं को, ऐसी चिकित्‍सा पद्धतियों को जो मान मध्‍यप्रदेश की सरकार ने दिया है, मैं इसके लिए उनका कोटि-कोटि अभिनन्‍दन करती हूँ.

माननीय अध्‍यक्ष जी, पशुधन संरक्षण में भी हम अग्रणी हैं. गौ-संर्वधन के लिए हमने आचार्य विद्यासागर योजना प्रारंभ की. गौ-पालकों को हम पाच गाय देंगे और 10 लाख रुपये तक का ऋण भी उन्‍हें उपलब्‍ध कराएंगे. हम जानते हैं कि गौदुग्‍ध उत्‍पादन में हम राष्‍ट्र में सर्वाधिक हैं, 12 प्रतिशत से कुछ अधिक दर इसमें सुनिश्‍चित हुई है. गायों के लिए वेदों ने कह दिया '' गावो विश्‍वस्‍य मातर:, मातर: सर्वभूतानाम्, गावो सर्वसुखप्रदा'' हमने उसमें 33 करोड़ देवी-देवताओं के दर्शन किए हैं. वह भारतीय अर्थतंत्र की रीढ़ है. उसका बचाया जाना नितांत आवश्‍यक है. हमें गर्व है कि मध्‍यप्रदेश ऐसा पहला प्रदेश है जहां गौवध पर प्रतिबंध लगा हुआ है क्‍योंकि हम जानते हैं कि हमारी अपनी माताओं ने तो हमें दो साल, ढाई साल, तीन साल दूध पिलाया होगा लेकिन गौमाता तो संपूर्ण मानवता को आजीवन दूध पिलाती है. ऐसे जीव का संरक्षण, संवर्धन हमारे प्राथमिक कार्यों में शामिल होना चाहिए.

माननीय अध्‍यक्ष जी, इस मौके पर हिन्‍दी की महत्‍ता पर बात किए बिना भी मैं नहीं रह सकती क्‍योंकि हम जानते हैं कि राजीव गांधी प्रौद्योगिकी संस्‍थान ने पहली बार हिंदी में प्रश्‍न-पत्र छपवाया है और हिंदी के माध्‍यम से विद्यार्थी परीक्षा दे पाएंगे. माननीय अध्‍यक्ष जी, श्रद्धेय अटल जी ऐसे पहले प्रधानमंत्री थे जिन्‍होंने राष्‍ट्र संघ के मंच पर हिंदी में अपने उद्गार प्रकट किए थे. माननीय शिवराज सिंह जी भी उनके सच्‍चे अनुगामी हैं, उनके सच्‍चे उत्‍तराधिकारी हैं, इसीलिए उन्‍होंने दसवा विश्‍व हिंदी सम्‍मेलन मध्‍यप्रदेश में आयोजित किया था. इस सम्‍मेलन में जो कुछ तय हुआ, वह हम सबके सामने है कि मध्‍यप्रदेश का हर विभाग हिंदी में ही काम करेगा, उसी को सर्वोच्‍च स्‍थान देगा. उच्‍च न्‍यायालय के निर्णय तक हिंदी में प्रकाशित किए जाएंगे ताकि व्‍यक्‍ति अपने को मिले हुए निर्णय को खुद पढ़ सके नहीं तो जब वह अंग्रेजी के निर्णयों को लेकर पढ़वाने पहुँचता है तो उसे ढाई से तीन हजार शुल्‍क लग जाता था. राष्‍ट्रभाषा का सम्‍मान राष्‍ट्र सम्‍मान की अनिवार्य आवश्‍यकता है. हम विश्‍व पर दर्शन डालें तो हम देखते हैं कि विश्‍व की पाचों महाशक्‍तिया फ्रांस, रूस, चीन, जापान और ब्रिटेन सब अपनी राष्‍ट्रभाषा का उपयोग करते हुए ही विश्‍व की सर्वोच्‍च शक्‍ति बने हैं. हमें भी प्रण करना ही होगा कि राष्‍ट्रभाषा के मान-सम्‍मान में हम अपना सर्वस्‍व न्‍यौछावर करेंगे. इस मौके पर मुझे अनायास याद आती हैं अटल जी की वे पंक्‍तिया -

राष्‍ट्र संघ के मंच से, हिंदी का जयकार,

हिंदी का जयकार, हिंदी हिंदी में बोला,

देख स्‍वभाषा-प्रेम, विश्‍व अचरज से डोला,

कह कैदी कविराय, मेम की माया टूटी,

भारत माता धन्‍य, स्‍नेह की सरिता फूटी,

श्री कमलेश्‍वर पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राज्‍यपाल महोदय का यह अपमान है. राज्‍यपाल के अभिभाषण पर चर्चा चल रही है और न माननीय मुख्‍यमंत्री जी सदन में हैं, न अधिकारी दीर्घा में अधिकारी लोग उपस्‍थित हैं. लगता है कि सरकार गंभीर नहीं है.

सुश्री उषा ठाकुर -- माननीय अध्‍यक्ष जी, हिंदी की महत्‍ता को स्‍थापित करने में हमें निरंतर प्रयासरत रहना ही चाहिए. इस मौके पर महिला सशक्‍तिकरण की बात किए बिना भी नहीं रहा जा सकता. हम सब जानते हैं कि भारतीय दर्शन इस बात की गवाही देता है कि यदि कोई मनुष्‍य मातृ ऋण, पितृ ऋण, राष्‍ट्र ऋण से उऋण नहीं होता तो परमपिता परमात्‍मा उसे दोबारा मनुष्‍य योनि में इस धरती पर कदापि नहीं भेजेंगे. मैं गर्व से कह सकती हूं कि अनेक कल्याणकारी योजनाएं मातृशक्ति के सर्वांगीण विकास हेतु मुख्यमंत्री जी द्वारा बनायी गई हैं और वह मातृ ऋण से उऋण हुए. यदि हम सब सदस्यगण मातृ ऋण से उऋण होना चाहते हैं तो उसका एक ही उपाय है मातृशक्ति के सम्मान में बनायी गई इन कल्याणकारी योजनाओं का शतप्रतिशत लाभ हम अपने अपने क्षेत्रों में अवश्य ही दिलायें.

अध्यक्ष महोदय, हमारी आंगनबाड़ियां जन जागरण का केन्द्र बनी हुई हैं. इसीलिए 4 हजार से अधिक नई आंगनबाड़ियां खोलने जा रहे हैं. 600 से अधिक मिनी आंगनबाड़ी खोलेंगे. यह आंगनबाड़ियां अपने क्षेत्र में बहनों को रक्ताल्पता ( खून की कमी ) से मुक्त करने के प्रयास में निरंतर लगी हुई हैं. हमने लालिमा अभियान चलाया है और लालिमा अभियान के अंतर्गत अपनी विधान सभा की 37 आंगनबाड़ियों को हमने सर्वोच्च प्राथमिकता में रखते हुए बहनों को यह प्रशिक्षण देना प्रारम्भ किया है कि रक्ताल्पता से यदि उन्हें मुक्त होना है तो उन्हें गुड़, मूंगफली, कच्चा पपिता, कच्चा कैला और सुरजना जैसा उपयोग अपने दैनंदिन आहार में करना चाहिए. हमने सुरजना फली के व्यंजनों की प्रतियोगिता करायी और उसमें पुरस्कार भी दिये हैं, नि:संदेह यह सब कार्य, यह सब प्रतियोगिताएं बहनों को संतुलित आहार की ओर अग्रसर करेंगी और वह रक्ताल्पता जैसे कलंक से मुक्त हो पायेंगी. समाज के श्रेष्ठीजन को कुपोषण के इस आंदोलन में हमने सहयोगी बनाया है.

अध्यक्ष महोदय, हम प्रशंसा की अनुभूति और प्रसन्नता की अनुभूति करते हैं और सरकार की प्रशंसा करते हैं कि इस प्रदेश में 20 लाख लाड़ली लक्ष्मियों को इस योजना का लाभ मिला है और इस वर्ष जो बच्चियां 6वीं में पहुंची हैं उन्हें 2 हजार की छात्रवृत्ति ई-पेमेंट के माध्यम से सीधे उनके खाते में हमने पहुंचा दी है. लाड़ो योजना के माध्यम से हमने बाल विवाहों को रोकने पर सफलता पायी है. 82 हजार बाल विवाह हमने रोके हैं. मातृशक्ति के सम्मान में किये गये यह कार्य मानवता का उपकार हैं, आने वाली पीढ़ी हमें इन पावन बातों के लिए धन्यवाद देने वाली हैं.

अध्यक्ष महोदय, नमामि देवी नर्मदे के साथ ही मैं अपने इस अभिभाषण को समाप्त करना चाहूंगी. हम सब जानते हैं कि नदी बचाओ यह विश्व का सबसे बड़ा आंदोलन बन गया है. जन जन मां नर्मदा की रक्षा के लिए कटिबद्ध हो गया है. माननीय मुख्यमंत्री जी ने यह प्रण किया है कि नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक से लेकर संपूर्ण मध्यप्रदेश में उनके दोनों किनारों पर एक एक किलोमीटर तक फलदार वृक्ष लगाये जायेंगे. सरकारी जमीन पर सरकार और निजी भूमि पर कृषक स्वयं लगायेंगे. उनके जीवन की व्यवस्था की भी चिंता की है जो निजी भूमि पर कृषक लगायेंगे उन्हें 20 हजार रूपये प्रति हेक्टेयर के हिसाब से पैसा दिया जायेगा, ताकि उनक&#