मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा                                                                                                      चतुर्दश सत्र

 

 

जुलाई, 2017 सत्र

 

शुक्रवार, दिनांक 21 जुलाई, 2017

 

(30 आषाढ़, शक संवत्‌ 1939 )

 

 

[खण्ड-  14]                                                                                                                    [अंक- 5 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

शुक्रवार, दिनांक 21 जुलाई, 2017

 

(30 आषाढ़, शक संवत् 1939 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.01. बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

 

 

बधाई

नव-निर्वाचित राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी को सदन द्वारा बधाई

          श्री यशपाल सिंह सिसोदिया(मंदसौर)--माननीय अध्यक्ष महोदय, आज का दिन ऐतिहासिक दिन है. सदन के अनेक सदस्यों ने जिनको मतदाता के रूप में कानूनी निर्वाचित करने का अधिकार था. देश के राष्ट्रपति आदरणीय कोविंद जी निर्वाचित हुए हैं. सदन की ओर से बहुत बहुत बधाई, शुभकामनाएं.

          अध्यक्ष महोदय--यह सदन श्री रामनाथ कोविंद को भारत गणराज्य का चौदहवां राष्ट्रपति निर्वाचित होने पर हार्दिक बधाई देता है. हम सभी को यह विश्वास है कि राष्ट्रपति के रूप में उनके कार्यकाल में हमारे देश की संवैधानिक व्यवस्था और मजबूत होगी.

          श्री बाबूलाल गौर--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि सदन खड़े होकर के माननीय श्री रामनाथ कोविंद जी को बधाई दें.

          (सभी माननीय सदस्यों द्वारा खड़े होकर सदन में श्री रामनाथ कोविंद जी को नव-निर्वाचित राष्ट्रपति चुने जाने पर बधाई दी गई)

          श्री विश्वास सारंग(राज्यमंत्री, सहकारिता)--माननीय अध्यक्ष महोदय, (XXX)

          श्री सोहनलाल बाल्मीक--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह सदन के अंदर व्यवहार नहीं होना चाहिये तथा इस तरह की टिप्पणी भी नहीं होनी चाहिये.

          श्री विश्वास सारंग--टिप्पणी क्या सबको धन्यवाद एवं बधाई दे रहे हैं.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह कौन सी बात हो गई? इतना भी अहंकार तथा घमंड नहीं होना चाहिये.

          अध्यक्ष महोदय--इसको कार्यवाही से निकाल दें.

 

तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर

 

        वाणिज्य संकाय के शिक्षकों की पदोन्‍नति

[स्कूल शिक्षा]

1. ( *क्र. 1589 ) श्री सुदर्शन गुप्‍ता (आर्य) : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या स्कूल शिक्षा विभाग में कार्यरत वे सहायक शिक्षक जिनकी स्नातक/स्नातकोत्तर की डिग्री वाणिज्य विषय से थीउनकी पदोन्नति नहीं होने के कारण वाणिज्य संकाय को कला संकाय में समाहित करना हैयदि हाँ, तो इसे किस आधार पर किया जाएगा(ख) प्रश्नांश (क) अनुसार की गई कार्यवाही के तहत ऐसे सहायक शिक्षक जो एक ही पद पर रहते हुए 20 से 30 वर्ष से भी अधिक सेवा पूर्ण करने के बाद भी पदोन्नति का लाभ नहीं ले पा रहे हैंइनके लिये विभाग क्या कार्यवाही करेगा?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) रचनाक्रम एवं भर्ती पदोन्नति नियम में वाणिज्य विषय समूह नहीं होने के कारण इस विषय के लोक सेवकों की गणना कला संकाय (सामाजिक विज्ञान) में म.प्र. राजपत्र (असाधारण) दिनांक 3/4अगस्त 2012 के बिंदु की अनुसूची चार में कॉलम (2) में अनुक्रमांक (2क) की प्रविष्टि एवं संचालनालय के पत्र दिनांक 13.02.2013 अनुसार की जाती है। जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) भर्ती एवं पदोन्नति नियम के अनुसार पात्रता एवं पद रिक्तता की दशा में पदोन्नति का लाभ दिए जाने का प्रावधान है। वर्तमान में माननीय उच्चतम न्यायालय में प्रचलित पदोन्नति से संबंधित न्यायालयीन प्रकरण में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश के परिपालन में पदोन्नति की कार्यवाही नहीं की जा रही है।

परिशिष्ट - ''एक''

          श्री सुदर्शन गुप्ता--माननीय अध्यक्ष महोदय, सर्वप्रथम मैं भी नव-निर्वाचित राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी को बधाई देता हूं. मैं अपने प्रश्न की ओर आता है. हम अपना अधिकार मांगते हैं न किसी से भीख मांगते हैं. इस युक्ति के आधार पर यह शिक्षकगण शीघ्र न्याय की उम्मीद कर रहे हैं. माननीय मंत्री जी ने अपने उत्तर (ख) में स्वीकार किया है कि भर्ती एवं पदोन्नति नियम के अनुसार उनकी पात्रता एवं रिक्तता की दशा में पदोन्नति का लाभ दिये जाने का प्रावधान है, किन्तु उनको लाभ नहीं मिल रहा है. चूंकि मामला माननीय उच्चतम न्यायालय में स्टे के आधार पर लंबित है. शासन की भूमिका न्याय प्रक्रिया में शीघ्र निपटारे को लेकर उम्मीद पर टिकी है. कृपया कर यह बतायें कि स्टे को वेकेट कराने में विभाग के द्वारा निरंतर प्रयास किये जाएंगे. जिससे शिक्षकों को भविष्य में उसका लाभ मिल सके.

          कुंवर विजय शाह--माननीय अध्यक्ष महोदय, जहां तक कोर्ट का सवाल है उसके बारे में विधान सभा के तौर पर कुछ कहना लगता है कि ठीक नहीं है. पदोन्नति वाले मेटर पर निर्णय होगा, लेकिन जो पदनाम की बात माननीय विधायक जी ने कही है. विभाग उससे सहमत है कि उन्हीं के साथ वालों का पदनाम बदल गया है इनकी पदोन्नति नहीं हुई है. केबिनेट में हम निश्चित रूप से लाकर के इनकी जो हक की लड़ाई है उस पर जो भी सहानुभूतिपूर्वक विचार होगा और जो भी उनके हक में हो सकता है. पूरा-पूरा प्रयास सरकार करेगी.

          श्री सुदर्शन गुप्ता--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह कार्य शीघ्रातिशीघ्र हो जाए, क्योंकि शिक्षकों को उनका हक नहीं मिल रहा है. माननीय मंत्री जी ने बोला है तो मैं उनके उत्तर से संतुष्ट हूं. धन्यवाद.

          कुंवर विजय शाह--बहुत जल्दी कर देंगे.

 

फर्जी जाति प्रमाण पत्र की जाँच

[स्कूल शिक्षा]

2. ( *क्र. 859 ) श्री लाखन सिंह यादव : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या ग्‍वालियर जिले के शा.प्र.वि. हुकमगण जनपद पंचायत घाटीगाँव में पदस्‍थ प्रधान अध्‍यापक श्री विजय सिंह बंजारा फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर प्रधान अध्‍यापक के पद पर पदस्‍थ हैंक्‍या इस संबंध में गोविन्‍द सिंह पुत्र श्री लोकमन सिंह ग्राम हुकमगण के द्वारा शिकायत पर प्रश्‍नकर्ता विधायक के द्वारा पत्र क्र./कलेक्‍टर/2017-18/11, दिनांक 20.04.2017 को शिकायत की थीयदि हाँ, तो उक्‍त दिवस से प्रश्‍न दिनांक तक ऐसे फर्जी अनु.जनजाति के प्रमाण पत्र के आधार पर कार्यरत प्रधान अध्‍यापक के प्रति कोई जाँच कराई गईयदि हाँ, तो क्‍या जाँच में दोषी पायायदि हाँ, तो ऐसे दोषी प्रधान अध्‍यापक के विरूद्ध क्‍या कोई दण्‍डात्‍मक कार्यवाही की गई हैयदि हाँ, तो क्‍यायदि नहीं, तो क्‍यों(ख) भितरवार विधान सभा क्षेत्र में शासकीयप्राथमिकमाध्‍यमिकहाईस्‍कूल एवं हायर सेकेण्‍डरी विद्यालय में कौन-कौन कर्मचारी/शिक्षक/अधिकारी पदस्‍थ हैंप्रत्‍येक विद्यालयवार अलग-अलग स्‍वीकृत पदों की संख्‍या तथा उनके विरूद्ध कितने कर्मचारी/अधिकारी पदस्‍थ हैं, उनका नामपदपदस्‍थापना दिनांक तथा किस-किस विद्यालय में कितने-कितने किस स्‍तर के कर्मचारियों के पद रिक्‍त हैंप्रत्‍येक विद्यालय वार स्‍पष्‍ट करें। इन रिक्‍त पदों को कब तक भर लिया जावेगा? एक निश्चित समय-सीमा स्‍पष्‍ट करें।

स्कूल शिक्षा मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) जी नहीं। जी हाँ। जी हाँ। जी नहीं। शेषांश का प्रश्‍न  उपस्थित नहीं होता है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशि‍ष्ट अनुसार है। पद रिक्‍तता एवं पूर्ति सतत प्रक्रिया है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

 

            श्री लाखन सिंह यादव:-माननीय अध्‍यक्ष, मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में माननीय मंत्री जी ने जो उत्‍तर दिया है, वह आप भी देख रहे होंगे. आपने उत्‍तर में लिखा है कि (क) में जी नहीं, जी हां. जी हां.जी नहीं.शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है और समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है. यह मेरे प्रश्‍न का उत्‍तर आया है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि मैंने जो प्रश्‍न लगाया था वह एक सहायक शिक्षक के बारे में था. मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि क्‍या यह विजय सिंह बंजारा, अनुसूचित जाति में आता है या पिछड़े वर्ग में आता है ? यदि यह पिछड़े वर्ग में आता है तो अनुसूचित जनजाति की कैटेगरी में इसको प्रमोशन दिया गया था. यदि दिया गया तो क्‍यों दिया गया और फिर इसको 2008 में इसको प्रमोशन देने के बाद, फिर 2015 में इसका डिमोशन किसके कहने पर, किसकी शिकायत पर किया गया ? यह माननीय मंत्री जी से मेरा पहला प्रश्‍न है. कि यह विजय सिंह बंजारा किस कैटेगरी में आता था और इसको प्रमोशन किस कैटेगरी में मिला और फिर किसकी शिकायत पर इसका डिमोशन किया गया.    

          कुँवर विजय शाह :- विजय सिंह बंजारा की नियुक्ति वर्ष 22.7.1992 में हुई थी और उसके बाद जिस जाति के आधार पर उसकी पदोन्‍नति हुई थी, जब उसकी जांच करायी गयी तो वह उस जाति का नहीं पाया गया, जिस जाति के कारण उसने पदोन्‍नति का लाभ लिया. हम लोग इसकी जांच कर रहे हैं और जिस अधिकारी/कर्मचारी ने बिना पूरी जांच के उसको पदोन्‍नति का लाभ दिया है उन लोगों पर हम सख्‍त कार्यवाही करेंगे. अभी उस टीचर को हमने वहां से हटा दिया है.

          श्री लाखन सिंह यादव:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा दूसरा प्रश्‍न यह है कि आपने अभी स्‍वीकार किया कि उसकी पदोन्‍नति गलत कैटेगरी में की गयी. उसमें सच्‍चाई तो यह है कि वह पिछड़े वर्ग का था और अनुसूचित जनजाति का सर्टिफिकेट लगाकर उसने अपनी पदोन्‍नति करवा ली और लगातार साढ़े सात साल तक उसने अपने पद का दुरूपयोग किया. मेरा आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि आज वह सदन में घोषण करें कि ऐसे गलत तरीके से अपने पद का दुरूपयोग करने वाले और गलत सर्टिफिकेट लगाने वाले ऐसे सहायक अध्‍यापक को, सहायक शिक्षक को आप इस सदन में तत्‍काल निलंबित करके उसकी जांच कराने की और वहां से हटाने की घोषणा करेंगे क्‍या ?

          अध्‍यक्ष महोदय :- वहां से हटाने का तो मंत्री जी ने कह दिया है.

          श्री लाखन सिंह यादव:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उसको तत्‍काल निलंबित करें, यह इतना बड़ा घोर-अपराध है, वह अपने पद का गलत तरीके से साढ़े सात साल से दुरूपयोग कर रहा है.

          कुँवर विजय शाह :- माननीय अध्‍यक्ष जी, प्रथम दृष्‍टया ऐसा लगता है पूरी-पूरी गलती उस शिक्षक की नहीं है. हमारे विभाग से भी कहीं न कहीं लापरवाही इसमें हुई है. इसलिये इसकी समग्र जांच करवायेंगे. इसमें बड़े लेवल पर जो अधिकारी यहां पर भी दोषी हैं, उन भी कार्यवाही करेंगे. जिला अधिकारी पर भी कार्यवाही करेंगे और उस संबंधित टीचर को वहां से हटाकर के जांच करवायेंगे. आज ही वह हट जायेगा.

          श्री लाखन सिंह यादव :- इसमें बात यह है कि जिस व्‍यक्ति ने फर्जी सर्टिफिकेट अनुसूचित जनजाति का बनाया है, पहले जिसने नकली सर्टिफिकेट बनाया है तो आप उसको क्‍यों सस्‍पेंड नहीं करना चाहते हैं. आप उनको सस्‍पेंड करके जांच करवा लें. उसको सस्‍पेंड करने में क्‍या दिक्‍कत है, उसने साढ़े सात साल अपने पद का दुरूपयोग किया.

          अध्‍यक्ष महोदय:- मंत्री जी ने कहा है कि अभी तत्‍काल हटा रहे हैं.        

          श्री लाखन सिंह यादव:- मंत्री जी हटाना अलग बात है, आप उसको तत्‍काल सस्‍पेंड करें. उसने इतना बड़ा घोर-अपराध किया है.

          अध्‍यक्ष महोदय :- (श्री रामनिवास रावत के खड़े होने पर) श्री रामनिवात रावत आप कुछ कह रहे हैं.

          श्री रामनिवास रावत :- विधायक जी का जवाब आ जाये.

          श्री लाखन सिंह यादव:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत ...

          अध्‍यक्ष महोदय :- उनके प्रश्‍न का जवाब आ गया है.उस पर कार्यवाही भी हो रही है.

 

          श्री लाखन सिंह यादव-  अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या कार्यवाही हो रही है, उसे हटाकर जांच करवाई जा रही है. हम चाहते हैं कि उसे निलंबित किया जाये जिससे उसे कुछ तो सजा मिले. जांच के बाद जो होगा, वह प्रश्‍न बाद में आता है. सदन में मंत्री जी इसकी घोषणा करें कि उसे निलंबित कर जांच करवाई जायेगी.

          कुंवर विजय शाह-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, किसी की जाति की जांच करवाने और उसका निराकरण करने की एक प्रक्रिया है.

          श्री लाखन सिंह यादव-  मंत्री जी, आपने स्‍वयं स्‍वीकार किया कि वह उस जाति का नहीं था, जिस जाति के वर्ग में उसने क्रमोन्‍नति प्राप्‍त की थी.

          कुंवर विजय शाह-  अध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि जाति के प्रकरणों में होने वाली जांच पी.एस. स्‍तर की कमेटी द्वारा होती है और वह माननीय उच्‍च न्‍यायालय से नामज़द होती है. हमने कार्यवाही करके उसकी पदोन्‍नति वापस कर दी है. जिला और प्रदेश स्‍तर के जिन अधिकारियों ने गड़ब‍ड़ी की है, उनके विरूद्ध भी कार्यवाही कर रहे हैं. उस मास्‍टर को वहां से हटा दिया गया है. उसके जाति प्रमाण-पत्र को हम जांच कमेटी को भेज देंगे.

          श्री लाखन सिंह यादव-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि यह बहुत ही बड़ा अपराध है. उसे निलंबित करने में क्‍या आपत्ति है ? जब मंत्री जी सदन में स्‍वीकार कर रहे हैं कि उसने गलत तरीके से क्रमोन्‍नति प्राप्‍त की है तो उसे निलंबित क्‍यों न किया जाये. यदि हमारा रवैया ऐसा ही रहा तो हर आदमी ऐसा करेगा. यह एक प्रकरण संज्ञान में आया है और भी बहुत से ऐसे प्रकरण होंगे.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यदि आज मंत्री जी सदन में यह घोषणा नहीं करते तो मैं यह मानकर चलूंगा कि (XXX)

....(व्‍यवधान)....

          अध्‍यक्ष महोदय-  इस तरह के आरोप सदन में नहीं लगाये जा सकते. इसको कार्यवाही से निकाला जाये.

          श्री लाखन सिंह यादव-  फिर मंत्री जी कार्यवाही क्‍यों नहीं करना चाहते, निलंबन की घोषणा क्‍यों नहीं कर रहे हैं ?

....(व्‍यवधान)....

            कुंवर विजय शाह-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उनकी बात कार्यवाही से निकाली जाये. यादव जी, मैं आपको चुनौती देता हूं. आप मेरी जाति को चुनौती दे रहे हैं. आप लिखकर अनुसूचित जाति आयोग में दीजिए. इस तरह से सदन नहीं चल पाएगा और न ही जवाब दिए जा सकेंगे.

....(व्‍यवधान)....

          अध्‍यक्ष महोदय-  मैंने वे शब्‍द कार्यवाही से निकलवा दिए हैं.

          राजस्‍व मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्‍ता)-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍हें अपनी बात के लिए खेद व्‍यक्‍त करना चाहिए. यह गलत तरीका है. क्‍या आप मंत्री जी के बारे में कुछ भी बोलेंगे ?

....(व्‍यवधान)....

          श्री लाखन सिंह यादव-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ऐसे दोषी कर्मचारी को तो तत्‍काल निलंबित करना चाहिए था. उसने गलती की है और आप उसे हटाना नहीं चाहते हैं. 

          कुंवर विजय शाह-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, (XXX)

....(व्‍यवधान)....

          श्री लाखन सिंह यादव-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यदि मंत्री जी कार्यवाही नहीं करेंगे तो यह सदन का अपमान है.

          श्री रामनिवास रावत-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह क्‍या तरीका है. यह आसंदी और सदन का अपमान है.

....(व्‍यवधान)....

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता-  आप जो कह रहे हैं, क्‍या वह अपमान नहीं है ? आप कुछ भी बोलेंगे.

....(व्‍यवधान)....

          श्री लाखन सिंह यादव-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब सदन में यह स्‍वीकार किया जा रहा है कि उसने गलत तरीके से क्रमोन्‍नति प्राप्‍त की है तो उसे निलंबित क्‍यों नहीं किया जा रहा है. मंत्री जी ने जो कहा वह भी सदन की गरिमा के अनुसार उपयुक्‍त नहीं है. क्‍या आप अपने जनाधार का बल दिखा रहे हैं.

....(व्‍यवधान)....

           श्री उमाशंकर गुप्‍ता- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, किसी के बारे में कुछ भी बोलने का, यह गलत तरीका है. आप किसी मंत्री को जवाब देने के लिए मजबूर नहीं कर सकते हैं. क्‍या आपने सदन की गरिमा को कायम रखा ? आपने मंत्री जी के बारे में क्‍या बोला ? आपको माफी मांगनी चाहिए. आपको यह अधिकार किसने दिया कि आप मंत्री जी के लिए कहें कि वह भी ऐसे ही गलत तरीके से जाति का लाभ ले रहे हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय-  यादव जी, मेरा आपसे अनुरोध है कि कभी-भी इस तरीके के आरोप व्‍यक्तिगत नहीं लगाने चाहिए. आपके प्रश्‍नों का समाधान यदि नहीं हुआ तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप व्‍यक्तिगत आरोप लगायें. यह एक सामान्‍य प्रक्रिया है कि माननीय सदस्‍यगण कुछ मांग करते हैं उनमें से कई मांगें मंत्रीगण मानते हैं और कई नहीं मानते हैं. इसमें व्‍यक्तिगत राग-द्वेष का प्रश्‍न नहीं आता है. माननीय मंत्री जी ने क्रोध में आकर जो कह दिया है, मैं उसे भी अनुचित मानता हूं. माननीय मंत्री जी, आपने जो पहले अपने उत्‍तर में कहा है, वहीं कार्यवाही होगी, बाद की आपकी बात विलोपित की जाती है. जाटव जी आप अपना प्रश्‍न करिए उन्‍हें बोलने दीजिए. लाखन सिंह जी जो बोलेंगे वह नहीं लिखा जाएगा. आप उन्‍हें पढ़ने दीजिए उनका प्रश्‍न भी महत्‍वपूर्ण है. आपकी बात हो गई है.

          राज्‍यमंत्री, सहकारिता (श्री विश्‍वास सारंग) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय नेता प्रतिपक्ष जी इस पर खड़े होकर संज्ञान तो लें. 

          अध्‍यक्ष महोदय-- यह विषय समाप्‍त हो गया है, अब यह विषय आगे नहीं बढ़ेगा. डॉ. कैलाश जाटव जी अपना प्रश्‍न करें नहीं तो मैं आगे बढ़ूंगा.

          श्री रामनिवास  रावत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने मेरी बात सुनी ही नहीं.

          अध्‍यक्ष महोदय-- नहीं सुनना आपकी बात. प्रश्‍नकाल होने दें.

विद्यालयों में शौचालयों का निर्माण

[स्कूल शिक्षा]

3. ( *क्र. 1404 ) डॉ. कैलाश जाटव : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या विधानसभा क्षेत्र गोटेगांव में वर्ष 2013-14, 2014-15 एवं 2015-16 में विभाग द्वारा राशि रू. 1.17 लाख, 1.13 लाख के एवं एन.टी.पी.सी. द्वारा विद्यालयों में शौचालयों का निर्माण कराया गया हैयदि हाँ, तो उक्त शौचालयों का कहाँ-कहाँ निर्माण किया गयास्कूलवार सूची उपलब्ध करावें। (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में इन शौचालयों में क्या-क्या सुविधायें उपलब्ध कराई जाना थीक्‍या जो सुविधायें उपलब्‍ध करायी जानी थी, वह सभी सुविधायें मुहैया करा दी गईं हैंयदि नहीं, तो इसके लिए कौन जिम्‍मेदार है(ग) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में जिन स्कूलों में शौचालयों का निर्माण किया जाना था? क्या समस्त स्वीकृत शौचालयों का निर्माण पूर्ण हो चुका हैपूर्ण एवं अपूर्ण शौचालयों की सूची उपलब्ध करावें। जहां शौचालयों का निर्माण पूर्ण हो चुका है, वहां उक्त शौचालयों का मूल्यांकन किस अधिकारी द्वारा किया गयानाम,पद सहितस्कूलवार सूची उपलब्ध करावें।

स्कूल शिक्षा मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) विधानसभा क्षेत्र गोटेगांव में वर्ष 2013-14, 2014-15 एवं 2015-16 में विभाग एवं एन.टी.पी.सी. द्वारा विद्यालयों में शौचालयों का निर्माण कराया गया है। शौचालय निर्माण की स्कूल वार सूची पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। हाई एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों में उक्त लागत के शौचालय निर्मित नहीं हुए। (ख) वर्ष 2013-14 में शौचालय निर्माण के साथ मुख्य घटक रेम्प रेलिंगइन्सीनेटर एवं पानी की टंकी आदि का प्रावधान किया गया था। वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 में शौचालय निर्माण के साथ मुख्य घटक रेम्प रेलिंगमा.शाला की छात्राओं हेतु इन्सीनेटरफोर्सलिफ्ट पंपहेण्डवाश यूनिट और पानी की टंकी आदि का प्रावधान किया गया था। जिन शालाओं में फोर्सलिफ्ट पंप का निर्माण नहीं हुआ हैसंबंधित एजेंसी को फोर्सलिफ्ट पंप की राशि का भुगतान नहीं किया गया है। (ग) जी हाँ। प्रश्नांश (कमें जिन स्कूलों में शौचालयों का निर्माण किया जाना थाउन स्वीकृत समस्त शौचालय का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। शौचालय निर्माणकार्य के मूल्यांकनकर्ता उपयंत्री के विवरण की स्कूलवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है।

          डॉ. कैलाश जाटव-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय ने जो मेरे सवाल का उत्‍तर दिया है उसमें मैं मंत्री महोदय से पूछना चाहूंगा कि जो शौचालय 8300 रुपए, 71000  रुपए, 86,300 रुपए और 1.13 लाख रुपए, 1.17 लाख रुपए के बने हैं इसमें क्‍या-क्‍या सुविधाएं उपलब्‍ध कराना थीं. एक बार मंत्री जी बता देंगे तो ठीक रहेगा.

          अध्‍यक्ष महोदय-- इसमें लिखा है फिर भी मंत्री जी आप एक बार बता दें.

          कुंवर विजय शाह --  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो प्रश्‍न माननीय विधायक जी ने  लिखा है. यह गोटेगांव नरसिंहपुर में  एन.टी.पी.सी. कंपनी की ओर से स्‍कूलों में पानी की सुविधा, शौचालय की व्‍यवस्‍था उसके लिए सी.एस.आर. फंड से  राशि दी है. कुछ वर्ष कंपनी ने खुद काम कराया और कुछ वर्ष जो स्‍कूल की समिति होती है स्‍कूल की समिति को भी उन्‍होंने एक दो बार पैसा दिया है. शाला प्रबंध समिति जिसके माध्‍यम से यह काम हुआ. जहां तक राशि के डिफरेंस का सवाल है उसमें पांच घटक थे जिसमें फोर्सलिफ्ट पंप, पानी की टंकी, पंप रेलिंग, बालिकाओं द्वारा इस्‍तेमाल किये जाने वाले सेनेटरी नेपकिन जलाने के लिए इन्‍सीनेटर, हैण्‍डवॉश यूनिट तो जो राशि का अंतर आ रहा है वह सामान के हिसाब से है. किसी शौचालय में  इन्‍सीनेटर नहीं लगा है किसी में इन्‍सीनेटर है, किसी में हेण्‍डवॉश यूनिट नहीं लगी  है इसीलिए आप विस्‍तार से अगर आप चाहेगे तो मैं आपको पूरी सूची उपलब्‍ध करा दूंगा.

          डॉ. कैलाश जाटव-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय ने जो जवाब दिया है अभी वर्तमान में मेरा विधानसभा क्षेत्र में जो दौरा हुआ उसमें एक भी जो मापदण्‍ड जो इसमें लिखे हैं और एन.टी.पी.सी. का मामला नहीं है. हमारी सरकार ने भी 71000 रुपए, 86300 रुपए  और  विधायक निधि से भी हमने 1.14 लाख रुपए की राशि शौचालय के निर्माण के लिए दी है. इसमें जो क्राइटेरिया बताया गया है इसमें जो इंसी‍लेटर और फोर्सलिफ्ट पंप के लिए बताया गया है यह किसी भी शौचालय में उपलब्‍ध नहीं है. पानी की टंकी भी नीचे रखी हैं इसीलिए मैं माननीय मंत्री महोदय से निवेदन करूंगा कि यह जितने भी शौचालय बने हैं अगर इनकी उच्‍च स्‍तरीय जाचं हो जाए तो यह जिस तरीके से बालिकाओं के साथ अन्‍याय हुआ है उनकी सुविधा के लिए मध्‍यप्रदेश शासन ने इतना पैसा खर्च किया है और किन लोगों ने इस पैसे में दलाली खाई है उसकी जांच होना चाहिए. मेरा ऐसा माननीय मंत्री महोदय से निवेदन है. अगर वह जांच का आदेश करेंगे तो मैं समझता हूं कि बालिकाओं के लिए जो सुविधा शासन देना चाह रही थी वह सही ढंग से उन तक पहुंच पाएगी.

          कुंवर विजय शाह-- अध्‍यक्ष महोदय, इसमें बहुत सारी सूची है मुझे ऐसा लगता है कि विधायक जी को जहां-जहां शिकायत है उसकी सूची मिल जाएगी तो निश्चित रूप से यहां से कमेटी भेजकर हम जांच करवा लेंगे.

          डॉ. कैलाश जाटव-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें एक भी शौचालय जो सदन के अंदर पात्रता दी जा रही है उसमें पात्र नहीं है वह भी इसीलिए मैं चाहता हूं कि पूरे शौचालयों की आप जांच कमेटी बनाकर गोटेगांव विधानसभा की जांच करवाएं

          अध्‍यक्ष महोदय--  मंत्री जी, आप पूरे की जांच करा लीजिए.

          कुंवर विजय शाह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ठीक है. 

           डॉ. कैलाश जाटव--  धन्‍यवाद मंत्री महोदय.

 

 

 

सर्जनस्पेशलि‍स्ट व सुपर स्पेशलि‍स्ट की पूर्ति

[लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]

4. ( *क्र. 108 ) श्री कालुसिंह ठाकुर : क्या लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रश्‍नकर्ता द्वारा तारांकित प्रश्‍न क्रमांक 5842, दिनांक 22.03.2017 के माध्यम से चिकित्सा क्षेत्र के सर्जन,स्पेशलि‍स्ट व सुपर स्पेशलि‍स्ट चिकित्सक का निर्धारण करने के संबंध में प्रश्‍न पूछा गया थाजिसके उत्तर में जानकारी एकत्रित किया जाना बताया गया था(ख) यदि हाँ, तो क्या जानकारी संकलित कर ली गई है व प्रश्‍नकर्ता को कब तक उपलब्ध कराई जावेगीयदि संकलित नहीं की गई है, तो इसके लिये कौन दोषी है तथा उसके विरूद्ध क्या कार्यवाहीकब तक की जावेगी?

लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) जी हां. जी हां (ख) जी हां. जानकारी संकलित कर ली गई है. शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता.

 

          श्री कालुसिंह ठाकुर-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने माननीय मंत्री जी से सर्जन, स्‍पे‍शलिस्‍ट व सुपर स्‍पे‍शलिस्‍ट के बारे में जानकारी चाही थी. मेरा क्षेत्र मांडव पर्यटन स्‍थल जो पूरे विश्‍व में जाना जाता है, लेकिन हमारे यहां एक भी डॉक्‍टर नहीं है इसके लिए मैंने मंत्री जी  से पूछा था पिछली बार मार्च में भी मेरा प्रश्‍न लगा था उसमें भी उनके द्वारा जानकारी दी गई है कि ''जानकारी एकत्रित की जा रही है''  आज जो प्रश्‍न लगा है उसमें भी यही ''जानकारी एकत्रित की जा रही है'' मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी से जानना चाहूंगा कि चार माह में भी जानकारी एकत्रित नहीं हुई आप बताएं कि कब तक इसका समाधान किया जाएगा?

            अध्यक्ष महोदय--जानकारी आ गई है.

          श्री रुस्तम सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, विधायक जी ने जो प्रश्न पूछा है वह चिकित्सा शिक्षा विभाग से संबंधित था लेकिन आपका आग्रह था कि स्वास्थ्य विभाग ही जवाब दे तो उनसे हमको जानकारी मिल गई है और वह जानकारी हमने विधान सभा में उपलब्ध भी करा दी है. इनका प्रश्न था कि क्या सुपर स्पेशलिटी वाले डॉक्टर निजी क्षेत्र में प्रैक्टिस कर सकते हैं. इसमें यह आग्रह है कि जो भी एमसीआई (मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया) की गाइड लाइन से अधिकृत है. सुपर स्पेशिलिटी का, सर्जरी का वह कर सकता है इसमें कोई आपत्ति नहीं है. यही मैं आग्रह करना चाहता हूँ और जानकारी भी आपको दे दी गई है.

          श्री कालुसिंह ठाकुर--अध्यक्ष जी चार महीने में जानकारी नहीं आई है और अभी भी प्रश्न में लिखा है कि ''जानकारी एकत्रित की जा रही है.'' मुझे अभी तक उपलब्ध नहीं हुई है. मैं आपके माध्यम से मंत्री जी को बताना चाहता हूँ कि धार जिले में माण्डव पर्यटन स्थल है विश्व में उसका नाम है. वहां पर हॉस्पिटल ए.एन.एम. और अन्य स्टाफ के जरिए चल रहा है. वहां पर विदेशी पर्यटक भी आते हैं उनको भी परेशानी उठाना पड़ती है.

          अध्यक्ष महोदय--मंत्री जी, जो जानकारी आपने संकलित की है वह माननीय सदस्य को उपलब्ध करा दें.

          श्री रुस्तम सिंह--अध्यक्ष महोदय, हमने विधान सभा में जानकारी भेज दी है, माननीय सदस्य को मिल जाएगी. दूसरी चीज अब जो माननीय सदस्य कह रहे हैं वह तो प्रश्न से उद्भूत होता ही नहीं है.

          श्री रामनिवास रावत--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्रियों की प्रतिबद्धता को बढ़ाएं.

          श्री रुस्तम सिंह--हमने जानकारी भिजवा दी है.

          अध्यक्ष महोदय--आप भिजवा दीजिए. माननीय सदस्य को शायद वह नहीं मिली है.

          श्री रामनिवास रावत--कितनी गंभीर बात है. थोड़ी सी सदन की गंभीरता तो बनाए रखें.

          श्री रुस्तम सिंह--अध्यक्ष महोदय, हमने यह जानकारी चिकित्सा शिक्षा विभाग से ली थी हमारे पास आ गई थी हमने भिजवा दी है.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह)--माननीय अध्यक्ष महोदय, विधायक महोदय की पीड़ा दूसरी भी है कि माण्डू एक विश्व पर्यटक स्थल है वहाँ पर डाक्टर उपलब्ध नहीं है माननीय सदस्य भी बोल रहे हैं अस्पताल एएनएम के भरोसे चल रहा है. वहां विदेशी पर्यटक भी आते हैं. कभी-कभी शायद आप भी दौरा कर लेते होंगे वहां का तो कृपा करके वहां एक ढंग का डॉक्टर तो पदस्थ कर दें.

          अध्यक्ष महोदय--कालुसिंह जी बैठ जाएं, उत्तर ले लें उसके बाद कुछ पूछना होगा तो फिर मौका देंगे. माननीय मंत्री जी,  दोनों विषय एक तो जो जानकारी है वह कह रहे हैं उन्हें प्राप्त नहीं हुई है वह उपलब्ध करा दें.

          श्री रुस्तम सिंह--अध्यक्ष महोदय, इन्होंने इस प्रश्न को पूछा ही नहीं है. इनका जो प्रश्न है वह केवल इतना सा है कि क्या स्पेशलिस्ट, सुपर स्पेशलिस्ट प्रायवेट में भी सर्जरी कर सकते हैं, इलाज कर सकते हैं. हमारा जवाब यह है कि जो एमसीआई से अधिकृत हैं एमसीआई की गाइडलाइन को पूरा करते हैं वे सर्जरी कर सकते हैं. जहां तक धरमपुरी के हास्पिटल का सवाल है उसके बारे में इन्होंने प्रश्न में कतई नहीं पूछा है, नाम भी नहीं लिया है कि हास्पिटल में डॉक्टर हैं या नहीं है, कम हैं या ज्यादा हैं. लेकिन मैं आपके जरिए उनको आश्वस्त करना चाहता हूँ कि डॉक्टर हम पदस्थ कर रहे हैं क्योंकि अब हमारे पास पीएससी के सिलेक्टेड डॉक्टर आ गए हैं. उनकी सूची भी बन गई है. इनको बहुत जल्दी हम डॉक्टर दे देंगे.

          श्री कालुसिंह ठाकुर--अध्यक्ष महोदय, मेरा कहना है कि जब हमने पूछा उसकी जानकारी नहीं दी तो मैंने ऐसे ही आपसे पूछ लिया था कि किसी तरह तो मेरे विधान सभा क्षेत्र माण्डव में डॉक्टर मिले. चार महीने में जानकारी नहीं दे पा रहे हैं.

          अध्यक्ष महोदय--विधायक जी, जानकारी आ गई है. मंत्री जी, आप विधायक जी को व्यक्तिगत रुप से जानकारी उपलब्ध करा दें. विधायक जी, डॉक्टर भी आपके क्षेत्र में पदस्थ किया जा रहा है, जानकारी के साथ यह आपको बोनस मिल रहा है.

          श्री रुस्तम सिंह--हमने जानकारी भेज दी है शायद इन्होंने देखी नहीं होगी. हम उपलब्ध करा देंगे.

          श्री कालुसिंह ठाकुर--माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारा बस इतना ही निवेदन है कि हमारे यहाँ डॉक्टर उपलब्ध कराया जाए और यह जानकारी मिल जाए. इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.

          श्री रामनिवास रावत--अध्यक्ष महोदय, आप निर्देश तो दे दें कि समय पर जानकारी उपलब्ध कराया करें.

          अध्यक्ष महोदय-- निर्देश दे दिए हैं. डॉक्टर भी पदस्थ कर देंगे और जानकारी भी एक बार फिर से भिजवा दीजिए.

          चिकित्‍सकों के रिक्‍त पदों की पूर्ति

[लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]

5. ( *क्र. 1255 ) श्री नीलेश अवस्‍थी : क्या लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) पाटन विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत संचालित सामुदायिक एवं प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों में चिकित्‍सकों के कितने पद स्‍वीकृत हैं तथा इनके विरूद्ध कहाँ-कहाँ पर कौन-कौन से चिकित्‍सक कब से पदस्‍थ हैं और कौन-कौन से पद कब से रिक्‍त हैंस्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रवार सूची देवें। (ख) प्रश्नांश (क) में उल्‍लेखित रिक्‍त पदों की पूर्ति हेतु प्रश्‍नकर्ता द्वारा विधानसभा सत्रों में बैठक दिनांक 04 जुलाई, 2014 प्रश्‍न क्रमांक 984, दिनांक 24 जुलाई, 2015 प्रश्‍न क्रमांक 1077, दिनांक 18 जुलाई, 2016, प्रश्‍न क्रमांक 828, दिनांक 09 दिसम्‍बर, 2016 तथा प्रश्‍न क्रमांक 1441, दिनांक 08 मार्च, 2017 को पूछे गये प्रश्‍नों के उत्‍तर में पदपूर्ति की कार्यवाही निरंतर जारी हैशीघ्र पद पूर्ति होगीदिये गये उत्‍तर के बावजूद तथा प्रश्‍नकर्ता द्वारा चिकित्‍सकों की कमी के संदर्भ में लगातार शासन से पत्राचार करने के बावजूद प्रश्‍न दिनांक तक रिक्‍त पदों की पूर्ति न होने के क्‍या कारण हैंरिक्‍त पद की पूर्ति किस प्रकार से कब तक कर दी जावेगी(ग) मुख्‍य चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी जबलपुर के अंतर्गत वित्‍त वर्ष 2015-16 से प्रश्‍न दिनांक तक स्‍वास्‍थ्‍य कार्यों हेतु किये गये समस्‍त कार्यों/सेवाओं/दवाओं आदि पर किये गये व्‍यय की जानकारी देवें(घ) प्रश्‍नांश (ग) में किये गये व्‍यय के संबंध में कब-कब क्‍या-क्‍या शिकायतें प्राप्‍त हुईं एवं प्राप्‍त शिकायतों पर कब क्‍या कार्यवाही की गई?

लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) जी हाँ यह सही है कि विभाग द्वारा पदपूर्ति की कार्यवाही निरंतर जारी रहने का लेख किया गया है, परंतु विभाग द्वारा प्रदेश में रिक्त 1896 पदों हेतु मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग को मांग पत्र प्रेषित किया गया था, परंतु मात्र 726 चिकित्सकों की चयन सूची प्राप्त हुई है। विशेषज्ञों की अत्यधिक कमी है कुल स्वीकृत 3278 पदों के विरूद्ध मात्र 1055विशेषज्ञ उपलब्ध हैं। अतः सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र स्तर की संस्थाओं में विशेषज्ञों की पदस्थापना नहीं की जा सकी है। वर्तमान में पाटन में 01 विशेषज्ञ, 01 नियमित चिकित्सक, 01 संविदा आर.सी.एच. चिकित्सक तथा 01 आयुष चिकित्सक की पदस्थापना है। विधानसभा क्षेत्र पाटन अंतर्गत प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रलमकाना एवं इन्द्राना में ही चिकित्सक उपलब्ध नहीं हैं, परंतु अन्य समस्त संस्थाओं में नियमित चिकित्सक एवं आयुष चिकित्सकों की पदस्थापना है। (ग) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (घ) जानकारी निरंक है।

परिशिष्ट - ''दो''

          श्री नीलेश अवस्थी--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगा कि मेरे विधान सभा क्षेत्र में लगातार डॉक्टर की कमी है और यह मेरा विधान सभा में छटवां प्रश्न है. आपसे निवेदन है कि मेरे क्षेत्र में डॉक्टर पदस्थ किया जाए. हमारे यहां दो तहसीलें हैं पाटन एवं मझौली. पाटन में लगभग 230 गाँव आते हैं, मझौली में लगभग 260 गाँव आते हैं.

          श्री निशंक कुमार जैन--आपके तो 6 प्रश्न ही लगे हैं. मैं तो कम से कम 200 पत्र मुख्यमंत्री जी और मंत्री जी को दे चुका हूँ.

          अध्यक्ष महोदय--निशंक जी आप बैठ जाएं.

          श्री नीलेश अवस्थी--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूँ कि पाटन में 11 पद स्वीकृत हैं और मात्र 2 ही डॉक्टर पदस्थ हैं. मझौली में 10 पद हैं और मात्र 2 डॉक्टर पदस्थ हैं. मैं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, उप-स्वास्थ्य केन्द्र की बात नहीं करना चाहता हूँ. कम से कम तहसील मुख्यालय में तो कर दें. अस्पताल में रोज विवाद की स्थिति बनी रहती है. डॉक्टर के न रहने के कारण आए दिन लड़ाई झगड़े होते हैं. मैं माननीय मंत्री जी को एक चीज और बताना चाहता हूँ कि मझौली में दो डॉक्टर हैं उसमें से एक डॉ. पारस का ट्रांसफर भी आपने अन्य स्थान पर कर दिया है. मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूँ, मेरे दो निवेदन हैं, पहला यह है कि वह जो डॉ.पारस हैं जिनका ट्रांसफर हो गया, उसको निरस्त किया जाए और पाटन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में कम से कम मुझे 2 डॉक्टर दिए जाएँ.

          श्री रुस्तम सिंह--  माननीय अध्यक्ष महोदय, जिस डॉक्टर के ट्रांसफर की बात कर रहे हैं, वह पाटन या मझौली में नहीं था, वह दूसरे स्थान पर था और आपने मेरे से व्यक्तिगत आग्रह किया था, वह निरस्त कर दिया है, वह डॉक्टर इनके पास बना रहेगा. दूसरा, जहाँ तक पाटन सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र) का प्रश्न है, वहाँ पर एक स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं, जो जरूरी थी सर्जरी के लिए, चूँकि वहाँ पर कोई निश्चेतना विशेषज्ञ नहीं था, अभी हमने निश्चेतना विशेषज्ञ भी आपके यहाँ दे दिया है, अनुराग अतरौलिया, तो सर्जरी वहाँ होने लगेगी और इसके साथ साथ आपके यहाँ कल्पना चौधरी पदस्थ हैं, एक शालिनी गुप्ता, प्रगति कुशवाह, ये भी आपके पाटन में ही पदस्थ हैं और डॉ.आशीष श्रीवास्तव, जो था, बॉण्ड पर, वह बॉण्ड की वजह से 1 साल होने पर गया है. लेकिन आपको पुनः एक डॉक्टर और हम देंगे. आपके पाटन के डॉक्टर्स की पूर्ति हम करेंगे. वैसे माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं यह कहना चाहता हूँ कि पूरे प्रदेश में डॉक्टर्स की कमी है. हम कोशिश कर रहे हैं. हमने करीब 1900 डॉक्टर्स की पीएससी से डिमाण्ड की थी, आग्रह किया था, 1400 डॉक्टर्स इन्टरव्यू में गए और 700 की उन्होंने भर्ती की. अभी 500-550 डॉक्टर्स की नियुक्ति हमने कर दी है. बहुत सारी जगह ये पोस्टिंग्स हुई हैं, जो हमने पिछले 2 दिन में की हैं. ये सब की सब पोस्टिंग्स ऑन लाइन की गई हैं. जिससे डॉक्टर ने जो मेरिट के हिसाब से, जिसने जहाँ मांगा है, कम्प्यूटर से उसको वही मिल गया है, तो मैं यह आग्रह करना चाहता हूँ कि बहुत सारे डॉक्टर्स इनको बहुत जल्दी, 2-3 दिन में ऑर्डर्स पहुँच रहे हैं, मिल जाएँगे.

          श्री नीलेश अवस्थी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहूँगा. लेकिन उनसे एक सहयोग चाहता हूँ कि डॉक्टर की नियुक्ति जरूर हो जाती है लेकिन वे ज्वाईन नहीं करते. मैं चाहता हूँ कि सरकार कम से कम इसमें ध्यान दे कि अगर ज्वाईनिंग नहीं होती तो वहाँ कोई दूसरा डॉक्टर ज्वाईन हो....(व्यवधान)..

          श्री तरूण भनोत--  अध्यक्ष महोदय, मेडिकल कॉलेज जबलपुर में तो डॉक्टर नहीं हैं.....

          अध्यक्ष महोदय--  पहले कृपा करके मूल प्रश्नकर्ता का उत्तर तो आ जाने दीजिए. आपके प्रश्नों में भी फिर कोई दूसरा बोल देगा...(व्यवधान)..माननीय मंत्री जी बोलिए....(व्यवधान)..जो दूसरों के प्रश्नों में बोलेंगे उनके प्रश्न के समय फिर व्यवधान होगा तो मैं कुछ नहीं बोलूँगा. यह कोई तरीका है. उन्होंने प्रश्न पूछा आप उसका उत्तर ही नहीं आने दे रहे हैं.. ...(व्यवधान)..मैंने आपको एलाऊ नहीं किया. माननीय मंत्री जी, उनके प्रश्न का उत्तर दें, आप लोगों ने व्यवधान कर दिया तो  वे इतनी देर में उनका प्रश्न भूल ही गए होंगे.

          श्री रुस्तम सिंह--  माननीय अध्यक्ष महोदय, जो विधायक जी ने चिन्ता व्यक्त की है कि डॉक्टर ज्वाईन नहीं करते, अब पीएससी से जो सिलेक्ट हुए हैं उनकी खुद की च्वाईस के अनुसार उनकी पोस्टिंग की गई है तो इसमें कोई आपत्ति नहीं होगी. दूसरी चीज, इस बार ट्रायबल एरियाज़ में, रिमोट एरियाज़ में, डॉक्टर्स में कॉम्पिटिशन है कि कौन जाए. हमें आश्चर्य हुआ कि वह रिमोट एरिया जहाँ कोई जाता नहीं था, वह फर्स्ट मेरिट वाला लड़का जा रहा है क्योंकि पीजी करने के लिए रिमोट एरियाज़ के उनको मार्क्स मिलते हैं इसलिए अब दिक्कत नहीं होगी, आपको डॉक्टर्स मिल जाएँगे.

          श्री नीलेश अवस्थी-- धन्यवाद. ..(व्यवधान)..

          अध्यक्ष महोदय--  सिर्फ सखवार को मैंने एलाऊ किया है.

          श्री घनश्याम पिरौनियॉ-- (xxx)

          अध्यक्ष महोदय--  आप बैठ जाएँ. जो घनश्याम जी बोल रहे हैं वह रिकार्ड में नहीं आएगा.

 

 

          एडवोकेट श्री सत्यप्रकाश सखवार--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी एक गुजारिश है और सुझाव भी है कि आज पूरे देश में, पूरे मध्यप्रदेश में, डॉक्टर्स की वास्तव में बहुत कमी है और जो प्रायवेट डॉक्टर्स हैं, इनको गाँव, देहातों में, सुदूर इलाके में जो लोग रहते हैं उनको वे

फर्स्ट-एड देकर के, प्राथमिक उपचार करते रहते हैं और मुझे लगता है उनके सहारे लोगों की जान भी बचती रहती है, तो मेरा मंत्री जी को एक सुझाव था कि इन डॉक्टर्स को शासन, जो प्रायवेट प्रेक्टिस करते हैं, उनको 2 महीने या 3 महीने या 6 महीने की कोई ट्रेनिंग देकर के इन्हें एक प्रमाण पत्र दे दिया जाए और मुझे लगता है कि फर्स्ट-एड के लिए इन्हें नियुक्त कर दिया जाए या फर्स्ट-एड के लिए इन्हें मान्यता मिल जाए. ऐसी मेरी गुजारिश है.

          अध्यक्ष महोदय--  माननीय मंत्री जी सुझाव की ओर नियमानुसार विधिवत ध्यान देंगे.

          श्री रुस्तम सिंह--  माननीय अध्यक्ष महोदय, इस पर विधिवत ध्यान देंगे लेकिन हमारी मेडिकल कांउसिल आफ इंडिया कतई कोई चीज ऐसी परमिट नहीं करती और बिना उनके परमिट के हम लोग कुछ कर नहीं पाएँगे. ...(व्यवधान)..

          अध्यक्ष महोदय--  तीन दिन हो गये 10 से ज्यादा प्रश्न नहीं हो पा रहे हैं.

          श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, इसमें महत्वपूर्ण बात ध्यान में आ गई इसलिए पूछना चाह रहे थे.

          अध्यक्ष महोदय-- इस तरह से बीच बीच में दूसरे सदस्यों के बोलने से प्रश्नकर्ता सदस्यों को तकलीफ हो रही है मेरा माननीय वरिष्ठ,मेरा माननीय नये सदस्यों से अनुरोध है कि कम से कम प्रश्न काल बाधित ना करें. अब कोई सप्लीमेंट्री एलाऊ नहीं किया जाएगा.

युक्तियुक्‍तकरण की प्रक्रिया

[स्कूल शिक्षा]

6. ( *क्र. 721 ) श्री सोहनलाल बाल्‍मीक : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या उप सचिव स्‍कूल शिक्षा विभाग म.प्र. शासन के पत्र क्रमांक/एफ-1/42/2014/ 20-1/भोपालदिनांक 04.05.2017 कंडिका क्रमांक 5 में नगरीय निकायों की शैक्षणिक संस्‍थाओं में अतिशेष अध्‍यापकों को उसी नगरीय निकाय के अंतर्गत अन्‍य शालाओं में युक्तियुक्‍तकरण की प्रक्रिया के अंतर्गत पदस्‍थ किया जायेगा(ख) क्‍या अध्‍यापक संवर्ग की पदस्‍थापना निकाय के बाहर नहीं की जायेगीयदि हाँ, तो क्‍या अध्‍यापक संवर्ग को उसी निकाय में पद रिक्‍त नहीं होने की स्थिति में उनका अतिशेष सूची से नाम हटा दिया गया हैयदि हाँतो परासिया विधान सभा क्षेत्र के नगरीय निकायों में पदस्‍थ अध्‍यापकों के नामों की सूची उपलब्‍ध करायेंयदि नाम नहीं हटाये गये हैं तो ऐसे अध्‍यापकों के नाम अतिशेष सूची से कब तक हटा दिया जायेंगे? (ग) युक्तियुक्तकरण के तहत अतिशेष की गणना में शाला में पदस्‍थ वरिष्‍ठ/कनिष्‍ठ में से किसे हटाने का प्रावधान हैयदि वरिष्‍ठ को हटाने का प्रावधान है तो परासिया विधान सभा क्षेत्र की प्राथमिक एवं माध्‍यमिक शालाओं में वरिष्‍ठों का ही नाम सूची में आया हैक्‍या यह नियमानुसार हैअगर हाँतो पदस्‍थापना दिनांक के अनुसार स्‍कूलवार वरिष्‍ठ/कनिष्‍ठ की सूची उपलब्‍ध करायें(घ) प्राथमिक शाला युक्तियुक्‍तकरण के तहत अतिशेष की अंतिम सूची में प्रथमवार जिन अध्‍यापक/शिक्षक संवर्ग का नाम आया हैक्‍या उन्‍हें दावा आपत्ति प्रस्‍तुत करने का समय दिया गया हैयदि हाँतो अंतिम सूची के बाद किस दिनांक व माह में इनको दावा आपत्ति करने का समय दिया गयाअगर दावा आपत्ति का समय नहीं दिया गया है तो इन्‍हें कब तक दावा आपत्ति प्रस्‍तुत करने का समय दिया जायेगा?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) जी हाँ। (ख) अध्यापक संवर्ग की पदस्थापना निकाय के बाहर युक्तियुक्‍तकरण प्रक्रिया के तहत नहीं की जाएगी। जी नहीं। वर्तमान में युक्तियुक्‍तकरण की प्रक्रिया प्रचलित है। अतः शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।  (ग) स्कूल शिक्षा विभाग म.प्र. शासन के पत्र क्र. एफ-1/42/2014/20-1, भोपाल दिनांक 11.04.2017 की कंडिका 5 (द) अनुसार अतिशेष शिक्षकों की गणना संस्था में पदांकन दिनांक से वरिष्ठता के आधार पर की जावेगी अर्थात संस्था में पदस्थ दिनांक से वरिष्ठ शिक्षक को अतिशेष मानने के निर्देश हैं। जहां तक परासिया विधानसभा क्षेत्र की प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में वरिष्ठों का ही नाम सूची में आया हैदावे आपत्तियों के निराकरण उपरांत अंतिम अतिशेष सूची का प्रकाशन होना लंबित है। अतः शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (घ) स्कूल शिक्षा विभाग म.प्र. शासन के पत्र क्र. एफ-1/42/2014/20-1, भोपाल दिनांक14.06.2017 द्वारा दिनांक 12.06.2017 को जारी परिपत्र शासकीय प्राथमिक शालाओं के युक्तियुक्‍तकरण की प्रक्रिया के तहत प्रकाशित सूची में अभ्यावेदनों के निराकरण उपरांत मृत एवं सेवानिवृत्त शिक्षकों के डाटा पूर्ण रूप से समायोजित न होनेशारीरिक रूप से दिव्यांग एवं गंभीर बीमारी से ग्रसित शिक्षकों के चिन्हांकन में सॉफ्टवेयर में तकनीकी समस्या के कारण जारी सूची को निरस्त किया जाकर नवीन सूची एवं प्रक्रिया की समय सारणी पृथक से जारी किए जाने के आदेश जारी किए गए। अतः शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। यथासमय निर्देश जारी किए जाएंगेतद्नुसार कार्यवाही की जावेगी।

          सोहनलाल बाल्मीक-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न युक्तियुक्तकरण के संबंध में था  मेरे प्रश्नांश (क) में यह था कि क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय बताने की कृपा करेंगे कि क्या उप सचिव,स्कूल शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश शासन के पत्र क्रमांक एफ-1.42.2014.20-1 दिनाँक 4.5.2017, कंडिका 5 में नगरीय निकायों की शैक्षणिक संस्थाओं में अतिशेष अध्यापकों को उसी नगरीय निकाय के अंतर्गत अन्य शालाओं में युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया के अंतर्गत पदस्थ किया जायेगा? इस पर मंत्री महोदय ने कहा जी हाँ. मैं यह पूछना चाहता हूं कि यह जो युक्तियुक्तकरण के नियम लागू किये जा रहे हैं. पहली बात तो जो शिक्षाकर्मी से अध्यापक बने हैं, जो नगरीय निकाय में जितने भी शिक्षाकर्मी भर्ती हुए थे उनको नगरीय निकायों ने भर्ती किया था तो यह अध्यापक आज शिक्षा विभाग के अंतर्गत आते हैं?

            अध्यक्ष महोदय-- आपका प्रश्न क्या है.

          सोहनलाल बाल्मीक-- वह मैंने पढ़कर सुनाया तो है.

          अध्यक्ष महोदय-- आपका पूरक प्रश्न क्या है.

          सोहनलाल बाल्मीक-- यह जो युक्तियुक्तकरण की जो नीति बनाई गई है उस नीति के तहत नगरीय निकाय में जो शिक्षाकर्मी भर्ती हुए थे वह अध्यापक बन गये. इसमें मेरा यह कहना है कि क्या यह शिक्षा विभाग के अंतर्गत आते हैं?

          कुँवर विजय शाह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, वह नगरीय निकाय के कर्मचारी हैं और उसका शिक्षा विभाग में अभी कोई संविलियन नहीं हुआ है लेकिन वह नगरीय निकाय के कर्मचारी ही कहलाएंगे.

          सोहनलाल बाल्मीक-- फिर युक्तियुक्तकरण के संबंध में इनका स्थानांतरण या इनकी सूची कैसे बुला रहे हैं. किस हिसाब से बुला रहे हैं, किस नियम के तहत बुला रहे हैं?

          कुँवर विजय शाह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, बहुत सारे शिक्षक जो गाँवों में थे उन्होंने, चाहे हमारी सरकार रही हो या आपकी रही हो, अपने-अपने जुगाड़ करके सब शहर में चले गये. आप मेरी भावना सुन लें मुझे लगता है आप इससे सहमत होंगे. मेरा निवेदन है कि अधिकांश जो गाँवों के टीचर थे वह धीरे-धीरे सब शहर की ओर आ गये. जितने बच्चे हैं मान लीजिये 50 बच्चों पर 2 टीचर होना चाहिए लेकिन जो संख्या अभी आ रही है वह बड़ी आश्चर्यजनक है. शहरों में इतने टीचर आ गये हैं कि लगभग 20 हजार टीचर अतिशेष हैं, उन 20 हजार टीचर्स को हम गाँवों में भेजेंगे तो गाँव के बच्चों का भला होगा और इसलिए युक्तियुक्तकरण की नीति में हम भारत सरकार  और मध्यप्रदेश सरकार के मापदंड के हिसाब से काम करेंगे. इसमें भी जो वरिष्ठ हैं, जिनके रिटायरमेंट में 1 साल शेष हैं उनको नहीं हटा रहे हैं, जो गंभीर रोग से पीड़ित हैं उनको नहीं हटा रहे हैं, जो पति-पत्नी शहर में ही काम कर रहे हैं उनको नहीं हटा रहे हैं. इसके बाद जो अतिशेष हैं, उनको युक्तियुक्तकरण में हम ले रहे हैं. माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे यह स्वीकार करते हुए बिल्कुल भी हिचक नहीं है कि कई टीचर तो ऐसे हैं कि पद है गणित का, पद है अंग्रेजी का लेकिन भूगोल का टीचर है, हिंदी का टीचर बना हुआ है क्योंकि शहर में रहना है.

          सोहनलाल बाल्मीक-- यह आप अपने विभाग की कमियाँ बता रहे हैं.

          कुँवर विजय शाह-- हम कमी दुरुस्त कर रहे हैं. कमी वही बताता है जो दुरुस्त करने की क्षमता रखता है और मेरा आपसे निवेदन है.

          सोहनलाल बाल्मीक-- अध्यक्ष महोदय, यह मेरे प्रश्न का जवाब नहीं है.

          अध्यक्ष महोदय-- आपने जो कहा है कि निकाय से बाहर नहीं जाये उसका ही वह उत्तर दे रहे हैं थोड़ा लंबा उत्तर दे रहे हैं. मंत्री जी थोड़ा संक्षेप में करें.

          एडवोकेट श्री सत्यप्रकाश सखवार-- वास्तव में मंत्री जी बधाई के पात्र हैं कि उन्होंने अपनी कमी को कहा है उसके लिए उनको बधाई.

          सोहनलाल बाल्मीक-- यह  सच्चाई नहीं सरकार का फेलियर है.

          श्री तरुण भनोत--  पहले गलती करो फिर दुरुस्त करो.

          अध्यक्ष महोदय--आप मंत्री जी को उत्तर देने दें. मंत्री जी संक्षेप करें कृपया.

          सोहनलाल बाल्मीक-- 13 साल के बाद बोलेंगे कि सुधार कर रहे हैं तो यह दुर्भाग्य की बात है.

          कॅुंवर विजय शाह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विपक्ष के साथियों से मेरी विनम्र प्रार्थना है कि आप और हम यहां मध्‍यप्रदेश के बच्‍चों के कल्‍याण के लिए आते हैं. बच्‍चों के कल्‍याण और भविष्‍य के लिए कई बार कठोर कदम भी उठाने पड़ते हैं. मुकेश नायक जी, इसमें मेरा कोई व्‍यक्तिगत लाभ नहीं है लेकिन अगर बीस हजार शिक्षक बिना पैसे दिये मध्‍यप्रदेश के गांव को मिलेंगे तो मुझे लगता है कि आपके सहयोग से एक बहुत बड़ा काम हो जाएगा.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने मेरे प्रश्‍न का जवाब ही नहीं दिया.

          श्री मुकेश नायक -- माननीय मंत्री जी, आप कठोर निर्णय लीजिए, टीचर को गांव में भेजिए हम सब आपके साथ हैं और हम सब लोग ही यह अव्‍यवस्‍था फैलाते हैं...(व्‍यवधान).....

          श्री रामनिवास रावत -- माननीय मंत्री जी, अतिशेष शिक्षकों को हटाइए, युक्तियुक्‍तकरण करिए....(व्‍यवधान)......

          नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय ने बहुत अच्‍छा निर्णय लेने का सोचा है लेकिन कहीं इसमें जुगाड़ न आ जाए, जिससे अवरूद्ध हो जाए. (हंसी) जो तेरह-चौदह साल से जुगाड़ हो रहा है उसे आप ठीक-ठाक करवा लीजिए.

          कॅुंवर विजय शाह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं नेता प्रतिपक्ष जी और सदन को आश्‍वस्‍त करता हॅूं कि किसी का रिश्‍तेदार कोई जुगाड़ से अगर वह विषय-वस्‍तु का टीचर नहीं है तो वह वहां पर नहीं रह पाएगा, यह मैं आपसे वादा करता हॅूं.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह मेरा विषय नहीं है. माननीय मंत्री जी बार-बार कुछ और विषय पर बोल रहे हैं. आप मुझे सीधा-सीधा जवाब दे दीजिए.

          अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी, माननीय सदस्‍य का प्रश्‍न (ख) का स्‍पष्‍टीकरण दे दीजिए. माननीय सदस्‍य ने पूछा है कि क्‍या अध्‍यापक संवर्ग की पदस्‍थापना निकाय के बाहर की जाएगी ? आपने कहा है कि युक्तियुक्‍तकरण प्रक्रिया के तहत नहीं की जाएगी. इसका उत्‍तर चाहते हैं न आप?

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा इसमें यह कहना है कि आप एक तरफ कह रहे हैं कि युक्तियुक्‍तकरण के तहत नगरीय निकायों से हम किसी भी शिक्षक को बाहर नहीं जाने देंगे और अब कह रहे हैं कि बीस हजार शिक्षक शहरों के अंदर आ गए हैं उनका उपयोग हम ग्रामीण क्षेत्रों में करेंगे. लेकिन यहां तो दो तरह की बातें हो रही हैं और दूसरा मेरा इसमें यह कहना है कि यदि इन शिक्षाकर्मियों को नगरीय निकाय में भर्ती किया गया है अध्‍यापक बनाया गया है, इनका प्रमोशन कर रहे हैं इनकी सारी देख-रेख कर रहे है, एडमिनिस्‍ट्रेशन की जितनी भी कार्यवाहियॉं हैं वह नगरीय निकाय कर रहा है तो यह आपके विभाग के हैं ही नहीं, तो आपका वहां पर कैसे जोर चलेगा ? आप उनका स्‍थानांतरण क्‍यों करना चाहते हैं ?  

          कॅुंवर विजय शाह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह शिक्षा विभाग के पूरे शासकीय नियंत्रण में है. हम लोग तनख्‍वाह देते हैं और पूरा प्रशासकीय नियंत्रण हमारा है. इतने वर्षों में लोग बाहर से भी शहरों में आए हैं अब यह व्‍यवस्‍था हम लोग कर रहे हैं मेरा आपसे कहना है कि आप लोग सहयोग करेंगे. यह पहली बार हो रहा है कि शहर का टीचर बिना भेदभाव के ऑनलाइन अपनी मर्जी से ट्रांसफर करवा सकता है, यह बहुत अच्‍छी व्‍यवस्‍था हमने की है. जो बाहर भी जाना चाहते हैं, उनका माननीय मंत्री स्‍थानांतरण नहीं करेंगे. वह टीचर पोर्टल में देख ले. मध्‍यप्रदेश में या गांव में जहां भी वह जाना चाहता है वह 20 जगह भर दे और 20 स्‍थानों में से ऑटो‍मेटिक कम्‍प्‍यूटर उसका स्‍थानांतरण कर देगा.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- माननीय मंत्री जी, यह तो बाद का विषय है. आप मेरे प्रश्‍न का सही जवाब तो दे दीजिए. मेरी बात को आप समझिए. माननीय अध्‍यक्ष जी, मेरे प्रश्‍नों का जवाब नहीं मिल पा रहा है. जैसे मंत्री जी ने कहा कि ये शासकीय स्‍तर पर हमारे विभाग के नियंत्रण में है. मान लीजिए आपके विभाग के शासकीय नियंत्रण में है तो इनका नियंत्रण नगरीय निकाय से क्‍यों है ? इसकी सीधी भर्ती आप क्‍यों नहीं करते ? शिक्षा विभाग इनका जीपीएफ क्‍यों नहीं काटता, इनका फंड क्‍यों नहीं देता, इनकी ग्रेच्‍युटी क्‍यों नहीं देता, इनका नियमितीकरण क्‍यों नहीं करता, इनके आश्रित के जो बच्‍चे हैं उन नौकरी क्‍यों नहीं देता ?

          अध्‍यक्ष्‍ा महोदय -- आप विषय से भटक रहे हैं. आपका प्रश्‍न सीधा-सा है कि निकाय के जो अध्‍यापक हैं उनका निकाय के बाहर युक्तियुक्‍तकरण के तहत पदस्‍थापना की जाएगी या नहीं. मंत्री जी ने कहा कि नहीं किया जाएगा. मंत्री जी आपसे मेरा अनुरोध है कि ख में जो आपने उत्‍तर दिया है कि अध्‍यापक संवर्ग की पदस्‍थापना निकाय के बाहर युक्तियुक्‍तकरण प्रक्रिया के तहत नहीं की जाएगी. अब वास्‍तव में इनकी पदस्‍थापना की जाएगी या नहीं, इसका उत्‍तर माननीय सदस्‍य को दे दीजिए.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- माननीय अध्‍यक्ष्‍ा जी, उन्‍होंने कहा है कि नगरीय निकाय से कहीं बाहर नहीं करेंगे तो अब बीस हजार सरप्‍लस बता रहे हैं, इससे कैसे कार्य चलेगा.

          अध्‍यक्ष महोदय -- उसको आप छोड़ दीजिए. इसका हॉं या ना में उत्‍तर ले लीजिए. फिर आगे बढ़ते हैं.

          कॅुंवर विजय शाह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नगरीय निकाय ने जिनका सलेक्‍शन किया है उन्‍हें नगरीय निकाय में ही रखा जाएगा और जो ग्रामीण निकाय से नगरीय निकाय में आ गए हैं उनको वापस किया जाएगा.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं उनके लिए नहीं कह रहा हॅूं.

          अध्‍यक्ष महोदय -- अब क्लियर हो गया. प्रश्‍न क्रमांक 7

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- माननीय अध्‍यक्ष जी, मेरी बात सुन लीजिए. मेरा मतलब यह है कि जब आपके विभाग का कंट्रोल नहीं है आपके विभाग के नहीं हैं तो आप कैसे उनका ट्रांसफर करेंगे ? .....(व्‍यवधान).....

          श्री गोपाल परमार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बड़ी दिक्‍कत है.....(व्‍यवधान).......

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- अध्‍यक्ष महोदय, जब मैं कह रहा हूँ कि विभाग के कंट्रोल में नहीं हैं तो ..(व्‍यवधान)...

          अध्‍यक्ष महोदय -- आपका समाधान हो गया, यहां वाद-विवाद का प्रश्‍न नहीं है. आपका उत्‍तर आ गया है. प्रश्‍न सं. 7, श्री सूबेदार सिंह रजौधा, अपना प्रश्‍न करें.

          शास्‍त्री हाईस्‍कूल कोढ़ा के संबंध में प्राप्‍त शिकायत पर कार्यवाही

[स्कूल शिक्षा]

7. ( *क्र. 1495 ) श्री सूबेदार सिंह रजौधा : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) शास्‍त्री हाईस्‍कूल कोढ़ा, जनपद पंचायत कैलारस के फर्जी संचालन के संबंध में विभाग को कितनी शिकायतें प्राप्‍त हुई हैंशिकायतकर्ता का नाम एवं शिकायतों पर की गई कार्यवाहियों से अवगत करावें (ख) क्‍या उक्‍त विद्यालय की संचालन समिति के सदस्‍य/सदस्‍यों पर जिला टीकमगढ़ में वर्ष 2002-03 में छात्र-छात्राओं एवं युवा बेरोजगार से फर्जी रूप से स्‍कूल संचालित कर लाखों की ठगी करने के संबंध में पुलिस प्रकरण पंजीबद्ध किया गया था(ग) प्रश्नांश (क) में वर्णित स्‍कूल क्‍या फर्जी तरीके से विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से संचालित हैस्‍कूल में न तो छात्र पढ़ने आते हैं और न ही स्‍कूल भवन हैंजो पुराना कक्ष है वह भी जीर्ण-शीर्ण हैस्‍कूल की वस्‍तुस्थिति छात्र संख्‍याशिक्षक संख्‍या एवं निरीक्षणकर्ता की निरीक्षण टीप सहितअद्यतन जानकारी दें(घ) क्‍या शिक्षा माफियाओं द्वारा उपरोक्‍त फर्जी संचालित स्‍कूल को शासनाधीन करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी हैयदि हाँ, तो प्रकरण किस स्थिति में हैशासनाधीन प्रक्रिया के नियमप्रावधानों से अवगत कराया जावे। क्‍या प्रक्रिया को रोक कर स्‍कूल की जाँच कराई जाएगी?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) माननीय विधायक श्री सूबेदार सिंह रजौधा ने शिकायती पत्र दिनांक 7.2.2017 द्वारा श्रीमती संतोषी धाकड़ का शिकायती पत्र संलग्न प्रस्तुत किया है। इसकी जाँच हेतु संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण संभाग ग्वालियर को निर्देशित किया गया है। जाँच प्रक्रियाधीन है। (ख) जी नहीं। (ग) जी नहीं। विद्यालय में 08 कमरे व छात्रों की संख्या 101 है। तत्समय निरीक्षणकर्ता द्वारा की गई टीप पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'अनुसार है। (घ) विद्यालय को विभागीय आदेश दिनांक 22.3.2002 द्वारा विभागीय आदेश दिनांक 21.3.2002 में निर्धारित सेवा शर्तें एवं मापदण्ड के अधीन निकायाधीन करने के निर्देश जारी किये गये हैं। विभागीय पत्र दिनांक 19.6.2017 द्वारा कलेक्टर को निकायाधीन करने हेतु निर्देशित किया गया है। प्रक्रिया व नियम संबंधी शासनादेश पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'अनुसार है। शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

          श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने प्रश्‍न किया था और माननीय मंत्री जी से जानना चाहा था कि शास्‍त्री हाईस्‍कूल, कोढ़ा के फर्जी संचालन के संबंध में विभाग को जो शिकायतें प्राप्‍त हुई हैं, उसमें क्‍या कार्यवाही हुई ? अध्‍यक्ष महोदय, मेरे मुरैना जिले में एक शिक्षा माफिया है, एक गिरोह है, यह स्‍कूल खोलकर, पैसा वसूल करता है कि इसका सरकारीकरण कराएंगे. इसी प्रकार का एक प्रकरण टीकमगढ़ में हुआ है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- ठीक है, आपका प्रश्‍न आ गया.

           श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पहले समझ लें, तभी तो उसका जवाब दे पाएंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय -- समझ गए.

          श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- अध्‍यक्ष महोदय, इस गिरोह ने टीकमगढ़ में ऐसा कांड किया कि वह 6 महीने जेल में रहे, और जमानत पर छूट कर मुरैना में एक स्‍कूल, शास्‍त्री हाईस्‍कूल, कोढ़ा के नाम से खोला. उसमें फर्जी छात्रवृत्‍ति के नाम पर लाखों रुपयों का घोटाला किया, उसमें एफआईआर हुई, अभी वहां न तो स्‍कूल है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- आप प्रश्‍न करें.

          श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न (क) का जवाब दिया गया है कि जो शिकायतें हुई थीं, उनकी जांच प्रक्रियाधीन है, क्‍या 6 महीने में कोई कार्यवाही नहीं हुई ?

            अध्‍यक्ष महोदय -- आप सीधा प्रश्‍न कर दें. माननीय मंत्री जी, श्री रजौधा जी का प्रश्‍न यह है कि जिस स्‍कूल के संबंध में निकायाधीन करने के आदेश जारी किए हैं, उस पर इनका एतराज है तो क्‍या उसकी जाच कराएंगे, आप उनका समाधान कर दें.

          कुवर विजय शाह -- अध्‍यक्ष महोदय, करवा लेंगे.

          श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं अपनी पूरी बात कह लूँ.

          अध्‍यक्ष महोदय -- केस आपका यही है, यह केस है कि नहीं ?

          श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा कहना यह है कि वह मान्‍यता की परिधि में नहीं आता, उसमें ऐसी कोई कंडीशन नहीं है कि उसकी मान्‍यता भी बनी रहे.

          अध्‍यक्ष महोदय -- हां तो आपका यही तो कहना है कि यह नियम विपरीत हो रहा है.

          श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं आश्‍वासन चाहता हूँ कि उनके खिलाफ कार्यवाही की जाए, उसकी मान्‍यता रद्द की जाए और जो सरकारीकरण के नाम से उन्‍होंने करोड़ों रुपये वसूल कर लिए हैं, उस पर रोक लगाई जाए.

          कुवर विजय शाह -- माननीय अध्‍यक्ष जी, मैं आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍य को आश्‍वस्‍त करना चाहता हूँ कि यह सरकार बच्‍चों के भविष्‍य के साथ खिलवाड़ नहीं करने देगी. जिस संस्‍था का इन्‍होंने नाम लिया है, और जो वर्ष 2002-03 बताया है, उसकी जांच हमने टीकमगढ़ के एस.पी. के कराई, उन्‍होंने कहा कि इनके विरुद्ध में कोई प्रकरण पंजीबद्ध नहीं है, यह वहां के एस.पी. की रिपोर्ट है, इसके बाद भी अगर माननीय सदस्‍य को लगता है कि यह वर्ष 2003 का मामला नहीं है, इसके पहले का है या बाद का है, तो जैसी आप जांच करना चाहते हैं, वैसी बता दें.

          श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह वर्ष 2002-03 का मामला है, पक्‍का 3 महीने जेल में एक रहा है और 6 महीने एक रहा है, जमानत पर छूटा है, फर्जी छात्रवृत्‍ति के नाम पर जहां भी एफआईआर हुई है. अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं तो यह जानना चाहता हूँ कि जहां हाईस्‍कूल की बिल्‍डिंग बनी है, वह कांजी-हाऊस के लायक भी नहीं है जहां कि आवारा पशुओं को रखा जाता है, कोई भी पात्रता उसकी नहीं है कि उसकी मान्‍यता बनी रहे.

          अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी कह रहे हैं कि आप जैसी जांच चाहते हैं, वैसी करा देंगे. 

          श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- अध्‍यक्ष महोदय, पहली बात तो यह है कि मुरैना के कलेक्‍टर महोदय से तत्‍काल उसका निरीक्षण करवा लिया जाए कि अब तक जो रिपोर्टें अधिकारियों ने भेजी हैं, क्‍या वे सहीं हैं ? अगर सही नहीं हैं तो उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाए, उन्‍होंने करोड़ों रुपयों की वसूली की है.

          कुवर विजय शाह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दिनांक 19.06.2017 को कलेक्‍टर को निकायाधीन करने हेतु निर्देशित किया गया है. प्रक्रिया व नियम संबंधी जो भी आदेश होंगे, उनको लेने के पहले कि आपने ध्‍यान में लाया है, सोमवार को ही हमारे अधिकारी और कलेक्‍टर से संयुक्‍त जांच कराके जो भी कमियां होंगी, उस पर कार्यवाही करेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय सदस्‍य को भी जानकारी दे दीजिएगा.

          कुवर विजय शाह -- अध्‍यक्ष महोदय, जी हां.

          श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

                                                                                                         

अशासकीय विद्यालयों द्वारा शुल्‍क वसूली

[स्कूल शिक्षा]

                8. ( *क्र. 1347 ) श्री जालम सिंह पटेल : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या‍ नरसिंहपुर जिले में अशासकीय विद्यालयों द्वारा विभिन्न मदों के नाम पर अत्‍यधिक शुल्क बिना पालक शिक्षक संघ की अनुमति के वसूला जा रहा हैयदि हाँ, तो इस पर क्या कार्यवाही की जा रही है(ख) क्या‍ नरसिंहपुर जिले में अशासकीय विद्यालयों में म.प्र. सरकार द्वारा सी.बी.एस.ई. एवं म.प्र. पाठ्य पुस्तक निगम की पुस्तकें विद्यालय प्रबंधन को इस्तेमाल करने की अनुमति हैयदि हाँ, तो जो विद्यालय यह नहीं कर रहे हैं, उन पर क्या कार्यवाही की जाएगी(ग) क्या प्रश्नकर्ता सदस्य द्वारा उक्त संदर्भ में जिला कलेक्टर को पत्र द्वारा सूचित किया गया थायदि हाँ, तो उन पत्रों के संबंध में क्या कार्यवाही स्कूल प्रबंधकों पर की गयी?

                स्कूल शिक्षा मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) वर्तमान में जिले में संचालित अशासकीय विद्यालयों द्वारा अत्यधिक शुल्क वसूल किये जाने के संबंध में प्राप्त पत्रों पर कार्यवाही करते हुये जिले के समस्त अशासकीय विद्यालयों को कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारीजिला नरसिंहपुर के आदेश दिनांक 02.03.2017 एवं कलेक्टरनरसिंहपुर के आदेश दिनांक 31.03.2017 द्वारा मध्यप्रदेश शासनस्कूल शिक्षा विभाग द्वारा अशासकीय विद्यालयों के फीस नियंत्रण हेतु जारी मार्गदर्शी सिद्धांत दिनांक 30.04.2015 के पालन हेतु निर्देशित किया गया है। (ख) जी हाँ। उत्‍तरांश (क) अनुसार।  (ग) जी हाँ। कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारीजिला नरसिंहपुर द्वारा जिले के समस्त अशासकीय विद्यालयों की बैठक लेकर मध्यप्रदेश शासनस्कूल शिक्षा विभाग द्वारा अशासकीय विद्यालयों के फीस नियंत्रण हेतु जारी मार्गदर्शी सिद्धांत दिनांक 30.04.2015 का कड़ाई से पालन करने एवं पुस्तकों के संचालन हेतु निर्देशित किया गया तथा कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारीनरसिंहपुर के पत्र क्रमांक 2755/मान्यता/2017/नरसिंहपुर दिनांक 31.05.2017 द्वारा निर्देश जारी कर माननीय विधायक महोदय को अवगत कराया गया है।

 

                   श्री जालम सिंह पटेल -- अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश में  प्रायवेट स्कूलों में  कुछ अनियमितताएं हैं, उसके संबंध में मंत्री जी ने  प्रश्न का  उत्तर भी दिया था.  उसमें फीस के कई प्रकार होते हैं.  एक तो उनसे डोनेशन लिया जाता है,  दूसरा कम्प्यूटर, खेलों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के नाम पर और  कई प्रकार से उनसे फीस वसूली जाती है.  मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि नरसिंहपुर में  एक नरसिंह पब्लिक  स्कूल है, उसमें जो बच्चे 10वीं,11वीं  और 12वीं में पढ़ते हैं, वह बच्चे बाहर कोचिंग करने चले जाते हैं और उनके नाम से  वे एक लाख रुपये  की राशि कई बार ले लेते हैं.  जो बच्चे 12वीं में फेल हो जाते हैं,  उनसे 50,000/- रुपये  लेकर के  पुनः एडमिशन  देते हैं.  मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि  जिले में कई प्रायवेट स्कूल जो  200 रुपये प्रतिमाह   और 1100 एवं 1200 रुपये प्रतिमाह भी  फीस लेते हैं. इसमें जो अंतर है.   मंत्री जी  से मेरा निवेदन है कि  इसमें  क्या एकरुपता लायेंगे.

                   कुंवर विजय शाह -- अध्यक्ष महोदय, मैं  इस बात से  सहमत हूं कि कुछ  अशासकीय विद्यालय  विभिन्न मदों,  विभिन्न पुस्तकों के नाम पर एवं विभिन्न  लेखकों की पुस्तकें चलाते हैं  और इसमें थोड़ा   काम  गड़बड़ है.  अभी फीस नियंत्रण के लिये हम लोग बहुत जल्दी  नियम यहां ला ही रहे हैं.  आपकी सभी की  अनुमति से बनायेंगे और उसमें  हम यह  विद्यालयों में पुस्तक  कितने दाम पर, कितने मार्जिन पर  चले, मुझे लगता है कि  इसको भी शामिल करना चाहिये,  क्योंकि यह समस्या तो है और जो फीस स्कूलों  की निर्धारित होगी, उसमें कुछ पुस्तकों के निर्धारण के लिये  भी  हम लोग विचार कर रहे हैं.

                   श्री जालम सिंह पटेल -- अध्यक्ष महोदय,  मेरा दूसरा प्रश्न यह है कि  प्रायवेट  स्कूलों में 25 प्रतिशत  गरीब बच्चों को  एडमिशन मिलता है, मगर प्रायवेट स्कूल्स करते क्या हैं कि  जब एडमिशन की डेट होती है, तो  उनको कई कारण  बताकर एडमिशन  नहीं देते हैं  और बाद में  उनकी सीटों पर दूसरे बच्चों से पैसा लेकर एडमिशन देते हैं.  मैं मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि  उसकी जांच करायेंगे क्या.

                   कुंवर विजय शाह -- अध्यक्ष महोदय, अगर ऐसा है, तो यह  बहुत गंभीर विषय है, क्योंकि भारत सरकार ने, सुप्रीम कोर्ट ने  और हमारी सरकार  ने भी  बच्चों के भविष्य के लिये  25 प्रतिशत जो  आरक्षण किया है, वह संवैधानिक है.  आरटीईआई के अंतर्गत हर स्कूल को  25 प्रतिशत बच्चों की भर्ती करना है.  अगर एक भी स्कूल की ऐसी शिकायत होगी, तो हम तत्काल जांच करायेंगे और अगर  उस स्कूल की मान्यता  रद्द  करने तक भी  हमें करना पड़ी, तो हम निर्णय लेंगे.  आप  जिन जिन स्कूलों की बात बतायेंगे,  जितने साल की बतायेंगे,  एक महीने के अन्दर जांच करके आपको जानकारी बता दी जायेगी.

                   श्री जालम सिंह पटेल -- अध्यक्ष महोदय..

                   अध्यक्ष महोदय --   आपकी सब बात तो आ गयी.

                   श्री जालम सिंह पटेल -- अध्यक्ष महोदय, प्रायवेट स्कूलों में बस्ता, पुस्तक और जो बाकी यूनिफार्म है,  वह वहीं से खरीदना पड़ती है..

                   अध्यक्ष महोदय -- उन्होंने कह दिया है कि  जहां जहां अनियमितता  होगी, उसकी जांच करा लेंगे. समय सीमा भी बता दी है.  आपको जानकारी  भी देंगे, वह भी बता दिया है.

                   श्री जालम सिंह पटेल -- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी को धन्यवाद.

अधिकारियोंकर्मचारियों को आवास गृह की सुविधा

[लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]

                9. ( *क्र. 116 ) श्री हितेन्द्र सिंह ध्‍यान सिंह सोलंकी : क्या लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग अंतर्गत बड़वाह विधान सभा क्षेत्र में कितने अधिकारियों,कर्मचारियों के पास आवास गृह हैं एवं कितनों के पास नहीं हैं(ख) राज्य शासन आवासहीन कर्मचारियों के लिए आवास गृह सुविधा उपलब्ध कराने के लिए क्या प्रयास कर रहा है(ग) कब तक आवासहीनों को आवास की सुविधा उपलब्‍ध हो जावेगी?

                लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) 19 अधिकारियों, कर्मचारियों के पास आवासगृह हैं एवं 206 के पास नहीं हैं। (ख) आवास गृह हेतु भूमि की उपलब्धता एवं प्रस्ताव प्राप्त होने पर उपलब्ध वित्तीय संसाधनों की सीमा में प्राथमिकतायें निर्धारित कर आवासगृह बनाने की स्वीकृतियां प्राप्त करने हेतु प्रयास किये जायेंगे। (ग) निश्चित समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

                   श्री हितेन्द्र सिंह ध्यान सिंह सोलंकी -- अध्यक्ष महोदय,   मैंने मंत्री जी से  जो आवासों के मामले में पूछा था कि स्वास्थ्य विभाग के आवास कितने हैं और  कितने बने हुए हैं, उसमें कितने लोग रह रहे हैं.तो उन्होंने  बताया है कि केवल  19 अधिकारियों, कर्मचारियों के पास आवास गृह हैं और 225  अधिकारी, कर्मचारी वहां पर कार्यरत् हैं.  अगर 225 में  से यदि 19 रह रहे हैं, तो 10 प्रतिशत  भी ये वहां पर  पर उपलब्ध नहीं हैं.  इनके आवास कब तक बन जायेंगे. जैसे हमारे यहां पर  काटकूट,बढ़वाह, ढकलगांव, सनावद, बेढ़िया,भढ़ूद, ये सब बड़े बड़े अस्पताल हैं.  यहां पर  यदि  अधिकारियों, कर्मचारियों को  रहने के लिये क्वार्टर नहीं हैं,  तो वहां पर  रहेगा कौन और कैसे वहां पर डॉक्टर  उपलब्ध हो पायेंगे.  मैं मंत्री जी निवेदन करना चाहता हूं कि  इनके आवास कब तक बन जायेंगे और जो बढ़वाह का हास्पीटल  बन रहा है, वह कब तक कम्पलीट हो जायेगा, उसकी समय सीमा  बता दें.

                   श्री रुस्तम सिंह -- अध्यक्ष महोदय,  जैसे उन्हीं ने बताया है कि  225 में से 19 उपलब्ध हैं, मूल उनका जो प्रश्न हैं, क्योंकि मैं स्वयं बढ़वाह गया था,  जिस हास्पीटल को लेकर उन्होंने  चिंता व्यक्त की थी, उसमें आवास बनने थे और  2014 में  इनकी धनराशि  स्वीकृत हुई थी.  उसके लिये  जो भूमि मिलनी थी,  वह विवादित हो गई और इसकी वजह से वह बन नहीं पाये.  अभी 17 तारीख को  इसके लिये कलेक्टर, खरगौन ने  जमीन आवंटित कर दी है और अब वह प्रोसेस में आ जायेगा एवं निर्माण भी हो जायेगा. उसके लिये  हमारे पास  4 करोड़ 25 लाख   81 हजार  रुपये पहले से उपलब्ध हैं और वह हमारे विभाग के पास हैं.  शीघ्र ही  जो कार्यवाही होती है,  प्रक्रिया होने के साथ ही  उस निर्माण कार्य को प्रारम्भ कर दिया जायेगा.

                   श्री हितेन्द्र सिंह ध्यान सिंह सोलंकी -- अध्यक्ष महोदय, इसी विषय में मैंने ध्यान आकर्षण भी लगया था.  मैं मंत्री जी से यही निवेदन करना चाहता हूं कि  वह समय सीमा में बन जाये, तो उसका उपयोग  होना शुरु हो जायेगा.  क्या है कि  ओंकारेश्वर पास में है और लोग तीर्थ यात्रा में  आते जाते  हैं और वहां पर  कई तरह की  समस्याएं आती हैं, एक्सीडेंट भी होते हैं, इन्दौर -इछापुर हाइवे  होने के कारण.  तो मैं यही चाहता हूं कि आप समय सीमा बता दें, वह  कब तक बन जायेंगे और यह हास्पीटल का काम कब तक कम्पलीट हो जायेगा.

          श्री रूस्तम सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने प्रश्न में अस्पताल का कोई जिक्र नहीं किया है. एक शब्द भी अस्पताल को लेकर नहीं है, केवल आवास के बारे में बात की है लेकिन इन्होंने जिस अस्पताल के बारे में बोला है, वह पहले जी प्लस टू की डिजाइन के अनुसार मंजूर किया गया था, और उसकी लागत 8 करोड़ 62 लाख थी. वह पैसा था और अस्पताल बनना शुरू हुआ, उन्होंने ग्राऊंड फ्लोर प्लस फर्स्ट फ्लोर बनाया और उसका डिजाइन बीच में चेंज हुआ और ऐसा बन गया कि उसमें जो 100 बिस्तर की जरूरत थी वह उतने में ही पूरी हो रही है, कांट्रेक्टर ने अपना एस्टीमेट दिया था कि 14 करोड़ रूपये लगेंगे, वह बाद में आया है और यहां पर मई में निर्देश दे दिये गये हैं कि नहीं, हमारा अस्पताल तो ग्राऊंड प्लस वन में तैयार हो रहा है और अभी जो 5 करोड़ 85 लाख खर्च  किया है, शेष राशि उपलब्ध है उनको डायरेक्शन दिये गये हैं. हम लोग प्रयास कर रहे हैं कि अगले 6 माह में यह अस्पताल तैयार हो कर उपयोग होने लगेगा.

          श्री हितेन्द्र सिंह सोलंकी -- मंत्री जी धन्यवाद्.

पर्यटन स्‍थलों का विकास  

[पर्यटन]

10. ( *क्र. 1394 ) श्री हरदीप सिंह डंग : क्या राज्‍यमंत्रीसंस्कृति महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सुवासरा विधानसभा क्षेत्र में विभाग द्वारा कितने स्थानों पर विकास के कार्य प्रगति पर हैं तथा कौन-कौन से स्थानों पर विकास कार्य एवं सुविधाएं होना प्रस्तावित हैं(ख) गांधी सागर में जो जल महोत्सव होना प्रस्तावित है, उसमें सुवासरा विधानसभा क्षेत्र के कितने स्था‍नों को जल महोत्सव के तहत सम्मिलित (चयनित) किया गया है(ग) सुवासरा विधानसभा क्षेत्र में पर्यटन हेतु मुवाझरमातासीतामऊकोटेश्वर महादेवसीतामउगंगेश्वर महादेव सीतामऊएलवी महादेव कयामपुरभड़केश्वर महादेव बसईमाकड़ी माता शामगढ़मोड़ी माता शामगढ़आनंद धाम घसोईहरणेश्वर महादेव घसोईभैंसासरी माताआम्बा,धर्मराजेश्वरचंदवासाजोगणिया मातामेरियाखेड़ीबाबा रामदेवकचनारागुफामातासुवासरागणेश मगरा सुवासराबौद्ध गुफाएं खेजड़‍िया भूपभेरू बावजी घसोईपरासली धामसांवरिया मंदिररूनीजाआदि स्थानों पर विभाग द्वारा निरीक्षण कर कब तक पर्यटन स्थल घोषित कर दिया जावेगा(घ) बसई एवं धर्मराजेश्वर में विभाग द्वारा          कौन-कौन से कार्य एवं कितनी-कितनी राशि प्रस्तावित है, कब तक कार्य प्रारंभ कर दिया जावेगा?

राज्‍यमंत्रीसंस्कृति ( श्री सुरेन्द्र पटवा ) : (क) सुवासरा विधानसभा क्षेत्र में 02 स्‍थानोंधर्मराजेश्‍वरसीतामऊ पर कार्य प्रगति पर है, इसके अतिरिक्‍त अन्‍य कोई कार्य प्रस्‍तावित नहीं है। (ख) गांधी सागर में प्रस्‍तावित महोत्‍सव बाँध के निकट प्रस्‍तावित है। (ग) विभाग द्वारा जारी नवीन पर्यटन नीति 2016 के तहत किसी भी स्‍थल को ''पर्यटन स्‍थल'' घोषित करने की कोई नीति नहीं है। (घ) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है।

परिशिष्ट - ''तीन''

 

          श्री हरदीप सिंह डंग --माननीय अध्यक्ष महदोय, मेरा माननीय मंत्री जी से प्रश्न था कि कौन कौन से काम सुवासरा विधान सभा में चल रहे हैं और कहां कहां पर चल रहे हैं.

          श्री सुरेन्द्र पटवा-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय सदस्य ने पूछा है धर्मराजेश्वर और सीतामऊ में काम चल रहे हैं जिसमें से लगभग 2 करोड़ 90 लाख रूपये के काम धर्मराजेश्वर में चल रहे हैं और  सीतामऊ के पास में  बसई जगह है वहां बे-साइड एमिनिटी हैं 1 करोड़ 90 लाख का है यह दोनों काम वहां पर चल रहे हैं.

          श्री हरदीप सिंह डंग -- अध्यक्ष महोदय, मेरा एक और प्रश्न है कि पर्यटन स्थल आप घोषित करते हैं उसमें हमने कई बार मांग की है कि हमारे यहां पर जो स्थान हैं वह मनमोहक सुंदर और  आकर्षित करने वाले हैं, उन स्थानों की लिस्ट मेरे द्वारा कई बार दी है. अगर वहां पर पर्यटन विभाग कोई विकास का काम कराता है या अपने विभाग में उन स्थानों को सम्मिलित करता है तो कहीं न कहीं मध्यप्रदेश में पर्यटन स्थलों को बढ़ावा मिलेगा और प्रदेश में नये पर्यटक भी आयेंगे. मेरा निवेदन है कि वहां पर एलवी महादेव और भड़केश्वर महादेव और भी कई स्थान मैंने बताये हैं और प्रश्न में लिखकर जानकारी पूछी है अगर उनको आप पर्यटन स्थल की लिस्ट में शामिल करेंगे तो कब तक करेंगे.

          श्री सुरेन्द्र पटवा -- अध्यक्ष महोदय, विधायक जी ने दो चीजें पूछी हैं. पहला तो यह कि विभाग की जो नवीन पर्यटन नीति  2016 उसमें हम कोई भी पर्यटन स्थल घोषित नहीं कर सकते हैं, ऐसी विभाग की नीति है. लेकिन माननीय विधायक जी ने जो स्थान बतायें हैं उसमें आनन्दधाम खसोई में 30 लाख के काम पूरे हो चुके हैं, खेजड़िया भूप में 61 लाख का काम स्वीकृत है वह चल रहा है.अगर बहुत अति आवश्यक होगा तो विधायक जी मुझे बता दें तो वहां का परीक्षण करवा लेंगे.

          श्री हरदीप सिंह डंग -- धन्यवाद मंत्री जी.

 

जिला शिक्षा अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही

[स्कूल शिक्षा]

11. ( *क्र. 1458 ) श्री शंकर लाल तिवारी : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र. पाठ्य पुस्‍तक निगम द्वारा प्रकाशित न की जाने वाली पुस्‍तकों का प्रचार्यों द्वारा क्रय किया जाकर छात्र/छात्राओं को वितरित किये जाने के निर्देश हैंनिर्देश की प्रति देवें एवं प्रक्रिया बतावें। (ख) क्‍या फरवरी 2017 में सतना जिले को प्रश्नांश (क) की पूर्ति के लिये 45 लाख रूपये का आवंटन उपलब्‍ध कराया गया थाउक्‍त आवंटन किन-किन वर्षों का था?तत्‍कालीन डी.ई.ओ. द्वारा उक्‍त राशि का उपयोग किया या नहींउक्‍त राशि का भुगतान किन-किन संस्‍थाओं/प्राचार्यों को कितना-कितना किया जाना था? वर्षवार, संस्‍थावार विवरण एवं संस्‍था के बिल व्‍हाउचर की प्रतियां देवें। (ग) यदि उक्‍त राशि का उपयोग नहीं किया गया और राशि समर्पित नहीं की गई तो आवंटित राशि क्‍या लैप्‍स हुईस्‍वयं को बचाने के लिये तत्‍कालीन डी.ई.ओ. एवं लिपिक द्वारा राशि लैप्‍स होने के बाद प्रचार्यों के देयकों में आपत्ति लगाकर वापस किये गये?राशि को लैप्‍स कराने वाले अधिकारी एवं लिपिक को तत्‍काल निलंबित कर कब तक जाँच करा ली जावेगी(घ) क्‍या संस्‍थाओं से देयकों को प्राप्‍त कर नियमानुसार संधारण नहीं किया जाकर उनका परीक्षण समय-सीमा में नहीं किया गया और आवंटन प्राप्‍त होने पर आनन-फानन में कार्यवाही की गईफर्जी बिल होने एवं देयकों का नियमानुसार प्रतिवर्ष संधारण न कर परीक्षण न करने वाले तत्‍कालीन पाठ्य पुस्‍तक प्रभारी लिपिक एवं राशि लैप्‍स कराने वाले डी.ई.ओ. को अब तक निलंबित क्‍यों नहीं किया गया हैतत्‍काल निलंबित करते हुये प्रकरण की जाँच कब तक करा ली जायेगी?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) जी हाँ। निर्देश की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र 'अनुसार है। (ख) जी हाँ। यह आवंटन वर्ष 2013-14 से 2016-17 तक की अवधि के लिये था। जी नहीं। उक्‍त राशि का भुगतान जिन संस्‍थाओं को भुगतान किये जाने हेतु मांग पत्र प्राप्‍त हुआ थाउनका संस्‍थावार, वर्षवार विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र 'अनुसार है। (ग) आवंटित राशि समर्पित की गई है। अत: शेषांश का प्रश्‍न उपस्‍िथत नहीं होता। (घ)आवंटित राशि का उपयोग समय-सीमा में नहीं करने के लिये तत्‍कालीन जिला शिक्षा अधिकारी को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है। अत: शेषांश का प्रश्‍न उपस्‍िथत नहीं होता।

 

          श्री शंकरलाल तिवारी -- माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा प्रश्न में मंत्री जी ने स्वीकार किया है कि सरकार ने जितनी चिंता की है, मैं मंत्री जी को पहले इस बात की बधाई दूंगा, कि सच में शिक्षा के क्षेत्र में जैसी स्थिति हम सबको मिली थी उसमें उत्तरोत्तर भारी प्रगति हुई है, लेकिन अगर यहां से हम कुछ करते हैं और वहां से कुछ नहीं होता है तो इस व्यवस्था तंत्र को भी ठीक करने का काम  मंत्री जी को ही करना है,45 लाख रूपये गरीब बच्चों को, जो किताबें यहां से नहीं मिल पा रही थी, उसमें यह लिखा है कि बिल्कुल सही है  कि 45 लाख रूपये की किताबें नहीं बांटी गई हैं बच्चों को , बिल्कुल सही है कि 45 लाख रूपये लेप्स हो गये हैं, आखिर में लिखा है कि कारण बताओ नोटिस जारी किया है डिठौरा, हमारा तो कहना है कि यह डिठौरा की वजह उसे तो सस्पेंड करना चाहिए था. जब इतनी बड़ी चूक है तो मुझे पूछने की नौबत ही नहीं आती, अगर इस चूक को गंभीरता से लें.                                                           

          अध्‍यक्ष महोदय- आप सीधा प्रश्‍न कर दें, आप वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं.

          श्री शंकर लाल तिवारी- माननीय अध्‍यक्ष जी, एक विधायक प्रश्‍न तब लगाता है जब नाक के उपर पानी आता है और ये जिला शिक्षा अधिकारी ने इतना बड़ा अपराध किया वर्ष 2014 से लेकर 2015-16, 2016-17 तक की किताबों का पैसा, गरीब को किताब नहीं मिली, पैसा लेप्‍स हो गया और हम कारण बताओ नोटिस जारी कर रहे हैं, मेरी विनती है कि आप सस्‍पेंड करने में मेरी मदद करें और इस अधिकारी को सस्‍पेंड करें. सस्‍पेंशन में कोई दिक्‍कत नहीं है अभी छ: महीने पहले इन्‍होंने एक डीईओ को सस्‍पेंड किया था और तीन महीने में उसको बहाल भी कर दिया. इसलिये बहुत लक्ष्‍मण रेखा में न पड़ें और व्‍यवस्‍था तंत्र को विधायकों के सहयोग से सुधारें.

          कुँवर विजय शाह- अध्‍यक्ष जी, मैं आपके माध्‍यम से इस सदन को और माननीय विधायक जी को भी बतलाना चाहता हूं कि पुस्‍तकें तो मिलीं, लेट मिलीं लेकिन मिलीं. दूसरा था कि पन्‍ना के डीईओ को पिछली बार आपने ही सस्‍पेंड कराया था, अभी 2-3 महीने ही हुए बहाल हुए और अब हमने सूचना-पत्र फिर से जारी कर दिया है कि क्‍यों न तुम्‍हें निलंबित कर दिया जाए.

          श्री शंकर लाल तिवारी- न मैं कातिल हूं, न मैं जालिम, मैं तो आपकी मदद के लिये ही खड़ा हुआ हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय- आप बैठ जाएं तिवारी जी.

          कुँवर विजय शाह- माननीय अध्‍यक्ष जी, विधायक जी की भावना का हम सम्‍मान कर रहे हैं और भविष्‍य में मध्‍यप्रदेश के कोई भी अधिकारी इतनी बड़ी गलती न करे कि जो राशि बच्‍चों की पुस्‍तकों के लिये भेजते हैं, ऐसी पाठ्य पुस्‍तकें जो हमारा पाठ्य पुस्‍तक निगम है वह नहीं छपवाता, तो हमने प्राचार्यों को अधिकार दे रखा है कि आवश्‍यकता पड़ने पर वह अपनी पुस्‍तकों को खरीदकर बच्‍चों को वितरण करें और इसका हम सख्‍ती से पालन करेंगे. सूचना-पत्र हमने अभी दिया है और उसका जवाब अगर संतुष्टिकारक नहीं आया तो कार्यवाही भी करेंगे. लेकिन भविष्‍य में इस तरह की घटना प्रदेश में कहीं न हो इसका जरूर हम संदेश भिजवा देंगे.

          श्री शंकर लाल तिवारी- मैं एक विनती और करना चाहता हूं कि उन्‍होंने ठीक कहा लेकिन इसमें सस्‍पेंशन के बारे में कुछ नहीं बोले, कारण बताओ नोटिस ये डिठौरा है. अगर विधानसभा में प्रश्‍न होने के बाद भी इस तरह के एक्‍शन विभाग से और मंत्रालय से हो रहे हैं तो, दूसरी बात यह कह रहे हैं कि किताबें बंटी हैं, मैं कह रहा हूं कि एक पैसे का भुगतान जब वर्ष 2014 से 2017 तक नहीं हुआ, तब किताबें कैसे बंटी होंगी ?   

          कुँवर विजय शाह- माननीय अध्‍यक्ष जी, डिठौरा शब्‍द क्‍या होता है हमको नहीं मालूम. हमने कभी पुस्‍तक में नहीं पढ़ा.

          श्री शंकर लाल तिवारी- डिठौरा माने डीठ उतारना, नजर उतारना. जब आपका पेमेंट नहीं हुआ एक रुपये का, 45 लाख रुपये लेप्‍स हो गया तो किस आधार पर आप कह रहे हैं कि किताबें बंटी हैं ?

          नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह)- तिवारी जी, आप निरंतर सरकार की तारीफ करते हैं हर बजट भाषण में आप पहले बोलते हैं और इस तरह की हालत आपकी स्‍वयं की हो गई ?

          श्री शंकर लाल तिवारी- आप हमारे ऊपर दया करें. मैं अजय सिंह जी का धन्‍यवाद करता हूं मेरी मदद करने के लिये, क्‍योंकि भाजपा का कोई विधायक प्रश्‍न लगाता है तो आदणीय नेता प्रतिपक्ष बड़ी गम्‍भीरता से मदद करते हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस मदद को रेखांकित किया जाये और माननीय मंत्री से कहा जाये कि जब पैसे नहीं हैं, पैसों का क्‍या होगा ? ये कह रहे हैं कि किताबें बंटी हैं. आज तक किसी का एक रुपये का पेंमेंट नहीं हुआ है तो किताबें कहां से बंटी हैं ? माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा उत्‍तर नहीं आया.

          अध्‍यक्ष्‍ा महोदय- जांच करा रहे हैं, समय सीमा में करा देंगे. मंत्री जी समय सीमा में जांच कराएं.

 

         

जिला चिकित्‍सालय श्‍योपुर में सर्जरी विशेषज्ञों की पदस्‍थी

[लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]

12. ( *क्र. 677 ) श्री दुर्गालाल विजय : क्या लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नकर्ता के तारा.प्र.सं. 03 (क्रमांक 1032), दिनांक 08.03.2017 में सदन में चर्चा के दौरान जिला चिकित्‍सालय श्‍योपुर में वेन्‍टीलेटर प्रदाय होने के उपरांत दो माह में आई.सी.यू. की स्‍थापना कर दिए जाने के कथन के उपरांत भी प्रश्‍न दिनांक तक इसकी स्‍थापना नहीं हो पाने का क्‍या कारण हैकब तक स्‍थापना होगी(ख) चिकित्‍सालय में आई.सी.यू. के संचालन हेतु शासन निर्देशानुसार क्‍या विशेषज्ञ चिकित्‍सक व प्रशिक्षित स्‍टाफ पदस्‍थ कर दिया है? यदि नहीं, तो आई.सी.यू. को कौन ऑपरेट करेगा(ग) उक्‍त प्रश्‍न के प्रश्‍नांश (ख) के उत्‍तर में बताया था कि जनवरी 2014 से दिनांक30.11.2016 तक चिकित्‍सालय में सभी बीमारियों के गंभीर भर्ती 12107 मरीजों में से 168 मरीज रेफर किये, 24 के ऑपरेशन (सीजेरियन ऑपरेशन को छोड़कर) किये 11936 गंभीर मरीजों को मजबूरी में ऑपरेशन हेतु अन्‍यत्र नहीं जाना पड़ा,इनका उपचार वर्तमान पदस्‍थ विशेषज्ञ एवं चिकित्‍सकों द्वारा किया गया। (घ) क्‍या वास्‍तविकता यह है कि सर्जरी विशेषज्ञ के दोनों पद रिक्‍त होने से उक्‍त अवधि में 11936 मरीजों के ऑपरेशन ही नहीं हो पाये, इन्‍हें विशेषज्ञों व आई.सी.यू. के अभाव के कारण मजबूरी में अन्‍यत्र जाना पड़ा? यदि नहीं, तो क्‍या शासन इसकी जाँच कराएगा तथा सर्जरी विशेषज्ञों के पद शीघ्र भरकर आई.सी.यू. की स्‍थापना करवाएगा।

लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) मेसर्स कोबिडियन हेल्थ केयर गोर गॉव हरियाणा के द्वारा दिनांक 28.03.2017 को आई.सी.यू. वेन्टीलेटर जिला चिकित्सालय श्‍योपुर को प्रदाय कर दिया गया है। स्थान के अभाव होने के कारण आई.सी.यू की स्थापना नहीं हो सकी थी। वर्तमान में आई.सी.यू. कक्ष का चिन्हांकन कर लिया गया है। कक्ष में वेन्टीलेटर एवं पलंग स्थापित कर आई.सी.यू. का संचालन दिनांक 11.07.2017 को प्रारंभ कर दिया गया है।        (ख) जिला चिकित्सालय श्‍योपुर में आई.सी.यू. संचालन हेतु शासन द्वारा जिला चिकित्सालय में पदस्थ 03 स्‍टॉफ नर्स को प्रशिक्षित किया गया है एवं कार्यरत 01 निश्‍चेतना विशेषज्ञ, 03 पी.जी.एम.ओ. निश्‍चेतना, 01 मेडीसि‍न विशेषज्ञ, 01 पी.जी.एम.ओ. चिकित्सा विशेषज्ञ, 01 पी.जी.एम.ओ. सर्जरी के द्वारा जिला चिकित्सालय श्‍योपुर में आई.सी.यू. का संचालन किया जावेगा। (ग) हाँ यह सही है कि जनवरी 2014 से दिनांक 30.11.2016 तक की स्थिति में गंभीर भर्ती मरीजों की संख्या 12107 एवं रेफर किये मरीजों की संख्या 168 एवं ऑपरेशन किये गये मरीजों की संख्या 24 थी। शेष 11936 गंभीर मरीजों का उपचार जिला चिकित्सालय श्‍योपुर में पदस्थ विशेषज्ञ एवं चिकित्सकों के द्वारा किया गया है। लेकिन सभी बीमारियों के अधिकांश मरीजों को अन्यत्र रेफर नहीं किया जाता है। कुछ बीमारियों से संबंधित गंभीर मरीजों को जैसे हेडइन्जरीहृदय रोग वाले मरीजों को सुपर स्पेशलिस्ट के अभाव में आगामी उपचार हेतु हायर सेन्टर के लिये रेफर किया जाता है। (घ) हाँ यह सही है कि जिला चिकित्सालय श्‍योपुर में सर्जरी विशेषज्ञ के 2 पद स्वीकृत हैं, जो रिक्त हैं। परन्तु उक्त विधा में पी.जी.एम.ओ. सर्जरी वर्तमान में कार्यरत है। पी.जी.एम.ओ. चिकित्सा एवं सी.एम.एच.ओ. के द्वारा अस्पताल में आये मरीजों का ऑपरेशन किया जाता है। जिला चिकित्सालय श्‍योपुर में आई.सी.यू. का शुभारंभ दिनांक 11.07.2017 से किया गया है। प्रदेश में विशेषज्ञों की अत्यधिक कमी है। कुल स्वीकृत 3278 पदों के विरूध्‍द मात्र 1055 विशेषज्ञ उपलब्ध हैं। अतः विशेषज्ञ के रिक्त पदों में कठिनाई हो रही है। विभाग रिक्त पद की पूर्ति हेतु निरंतर प्रयासरत् हैउपलब्धता अनुसार पदस्थापना की कार्यवाही की जा सकेगी।

          श्री दुर्गालाल विजय- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न श्‍योपुर जिला चिकित्‍सालय में सर्जरी विशेषज्ञ नहीं हो पाने के कारण श्‍योपुर के मरीजों को बाहर जाना पड़ता है मेरा माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि सर्जरी विशेषज्ञ के जो दो पद खाली हैं उन पदों को जल्‍दी-से-जल्‍दी क‍ब तक भर दिया जाएगा ? दूसरा माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक सवाल और है आईसीयू के प्रारम्‍भ करने के बाद इसमें जो व्‍यवस्‍थाएं करनी चाहिए वे व्‍यवस्‍थाएं पूरी नहीं हुई हैं, इस कारण से वह नहीं चल पा रहा है, उसके संबंध में माननीय मंत्री जी से मेरा निवेदन है कि इस व्‍यवस्‍था को ठीक करें और जो उनकी आवश्‍यकता है चिकित्‍सकों की, आईसीयू में लगाने की उनको पूरा करके उस कार्य को करने की मेरी प्रार्थना है.

            श्री रुस्तम सिंह - अध्यक्ष महोदय, मैं तो ऐसे सचेत विधायक जी को बधाई देना चाहता हूं. मध्यप्रदेश के किसी भी हॉस्पिटल से ज्यादा तो इनके यहां पर डॉक्टर्स हैं. 20 चाहिए मेडीकल अफसर 20 इनके पास में हैं. निश्चेतना वाले 2 डॉक्टर्स चाहिए, 3 इनके पास में हैं और अब तो इनका हॉस्पिटल 200 बेड का हो गया है, वह प्रोसेस में है. जितना आप चाह रहे हैं, उससे ज्यादा ही कुछ आपको मिलने वाला है.  मैं यही आश्वस्त करना चाहता हूं.

          अध्यक्ष महोदय - प्रश्नकाल समाप्त.

(प्रश्नकाल समाप्त)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.01 बजे                         नियम 267-क के अधीन विषय

 

अध्यक्ष महोदय - नियम 267-क के अधीन लंबित सूचनाओं में से 26 सूचनाएं नियम 267-क (2) को शिथिल कर आज सदन में लिये जाने की अनुज्ञा मैंने प्रदान की है. यह सूचनाएं संबंधित सदस्यो द्वारा पढ़ी हुई मानी जावेंगी. इन सभी सूचनाओं को उत्तर के लिए संबंधित विभागों को भेजा जाएगा.

मैं समझता हूं, सदन इससे सहमत है?

(सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई.)

(1)    श्री आरिफ अकील

(2)    श्री के.पी. सिंह

(3)    श्री कैलाश चावला

(4)    श्री दुर्गालाल विजय

(5)    श्री सुशील कुमार तिवारी

(6)    श्री आशीष गोविन्द शर्मा

(7)    श्री दिनेश राय

(8)    श्री नारायण सिंह पंवार

(9)    श्री प्रहलाद भारती

(10)          श्री रामनिवास रावत

(11)          श्री हर्ष यादव

(12)          श्री रणजीत सिंह गुणवान

(13)          श्री सुखेन्द्र सिंह

(14)          श्री रजनीश हरवंश सिंह

(15)          श्री गिरीश भंडारी

(16)          श्री इन्दर सिंह परमार

(17)          श्रीमती ऊषा चौधरी

(18)          श्री घनश्याम पिरोनियां

(19)          श्री संजय शर्मा

(20)          श्री रजनीश हरवंश सिंह

(21)          डॉ. योगेन्द्र निर्मल

(22)          श्री हितेन्द्र सिंह सोलंकी

(23)          श्री सचिन यादव

(24)          श्री मधु भगत

(25)          श्री बहादुर सिंह चौहान

(26)          श्री सूबेदार सिंह रजौधा

शून्यकाल में उल्लेख

 

 

1. श्री आरिफ अकील (भोपाल उत्तर) - अध्यक्ष महोदय, मैंने आपके पास ध्यानाकर्षण सूचना भेजी है. मध्यप्रदेश की जेलों में हफ्ते, 15 दिन में कैदियों से मिलाई में जो कच्चा सामान उनको दिया जाता था. एक तुगलकी आदेश से वह बंद हो गया है. वह नमक के लिए तरह रहे हैं तो सामान लेने की  व्यवस्था हो, या जेल के अंदर कोई दुकान खोलकर उनसे पैसे लेकर उनको सामान सप्लाई करें ताकि उनकी आवश्यकतानुसार उनको सामान मिल सके.

 

 

 

2. श्री प्रताप सिंह (जबेरा) - अध्यक्ष महोदय, मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में पूरे मध्यप्रदेश में चौथा चरण समाप्त हो गया है. लेकिन दमोह जिले में अभी भी काम शुरू नहीं हुए हैं. उनकी डीपीआर सम्मिलित है, इस अनुपूरक बजट में उनको ले लिया जाय.

अध्यक्ष महोदय - कृपया सदन में खड़े होकर बात न करें.

श्री आरिफ अकील - मेरा कहना है कि आप गृह मंत्री जी से तो कहें कि वे इस पर विचार करें.

अध्यक्ष महोदय - आपकी बात आ गई है. (कई माननीय सदस्यों के खड़े होकर आपस में बात करने पर) कृपया अपने स्थान पर बैठ जायं. यदि बात करना हो तो बैठकर बात करें.

श्री आरिफ अकील - कृपया करके ऐसी व्यवस्था तो कर दें. यह जनहित का मामला है.

अध्यक्ष महोदय - आपने जो ध्यानाकर्षण दिया है, उस पर विचार कर लेंगे.

 

 

3. नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से गृह मंत्री का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि एक व्यक्ति, जिसके ऊपर धारा, प्रकरण सब पंजीबद्ध हो, वह फरार घोषित हो, एसआईटी जांच कर रही हो और वह निरंतर विधान सभा के अंदर और बाहर हो, उसके ऊपर भी कोई कार्यवाही होगी?

गृहमंत्री (श्री भूपेन्द्र सिंह) -माननीय  अध्यक्ष महोदय, माननीय नेता प्रतिपक्ष जी ने जो विषय रखा है. मैं अभी व्यक्तिगत उनसे मिल लूंगा और जो भी व्यक्ति इस तरह का होगा, हम उस पर कार्यवाही करेंगे.

श्री अजय सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, इसमें एक चीज है. जबलपुर में एसआईटी में गठित हुई. वह कह रही है - "प्रकरण में एसआईटी जबलपुर द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी हेतु हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं. वर्तमान में प्रकरण विवेचना में है. " यह बहुत गंभीर विषय है.

अध्यक्ष महोदय - वह आपसे बात कर रहे हैं और कार्यवाही करने को भी आश्वस्त किया है. आप बहुत वरिष्ठ सदस्य हैं, यह बहस का विषय नहीं है. परन्तु चूंकि आप प्रतिपक्ष के नेता हैं, इसलिए उन्होंने उसका रिस्पांस दिया है. वह आपसे बातचीत करेंगे.

श्री अजय सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, अपने बीच का कोई साथी मैं नाम इस तरह से नहीं लेना चाहता हूं. बातचीत भर से नहीं, उसकी व्यवस्था कराएं.

अध्यक्ष महोदय - नेता प्रतिपक्ष जी, यह वाद-विवाद का स्थान, समय नहीं है और इसलिए आपसे अनुरोध है कि आप शासन के ध्यान में बात को ले आए हैं और उन्होंने भी आश्वस्त किया है कि वह अविलंब आपसे बात करके उस पर आगे बढ़ेंगे.

श्री अजय सिंह - समय न हो, स्थान है. आपने कहा कि न समय, न स्थान. समय न हो, स्थान है. मैं नाम इसलिए नहीं ले रहा हूं कि अपने बीच का कोई व्यक्ति है और इस तरह से घटना हो रही है तो फिर कानून व्यवस्था किस तरह से चलेगी?

अध्यक्ष महोदय - वह आपसे अभी बातचीत करेंगे.                                              

            श्री रामनिवास रावत(विजयपुर)-- अध्यक्ष महोदय, मैं गृह मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि दिनांक 6 जून को किसान आंदोलन के दौरान मंदसौर में हुए गोलीकांड के 32 आरोपियों की एक सूची जारी की है जिसमें ढूंढ़ने के लिए 5 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है.

          अध्यक्ष महोदय-- यह विषय कल प्रश्न में आ गया.

          श्री रामनिवास रावत-- एक आरोपी श्री बद्रीलाल पिता नानूराम चर्मकार अपाहिज है. वह दिनांक 2011 से पलंग पर पड़ा है वह चल ही नहीं सकता. (XXX)

          अध्यक्ष महोदय-- यह नहीं लिखा जाएगा.

          कुंवर विक्रम सिंह (राजनगर)--अध्यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र में रुजवा (नीलगाय) जानवर से एक अत्यंत ज्वलंत समस्या उत्पन्न हो रही है. उसने पूरी फसलें चौपट कर दी हैं. बरसाती फसलें लगभग 8 इंच की हो चुकी थीं. इससे समूचे क्षेत्र में, मेरे विधान सभा क्षेत्र में, जिले में हाहाकार मचा है. किसानों में रोष है.

          श्री सुन्दरलाल तिवारी--अध्यक्ष महोदय, इसी समस्या से हमारा जिला भी ग्रस्त है.

          श्री मुरलीधर पाटीदार--अध्यक्ष महोदय, रोजड़े से हम भी परेशान हैं. हमारे किसानों की सारी फसलें नष्ट हो गई है. इसके लिए कोई व्यवस्था करना चाहिए.

          श्री अजय सिंह-- अध्यक्ष महोदय, सदन में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया जाये कि हमारे नातीराज को रुजवा के शिकार की अनुमति दी जाये(हंसी)

          (व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदय-- बैठ जाइये. (व्यवधान)

 

 

12.06 बजे                           पत्रों का पटल पर रखा जाना.

 

 

1.विक्रम उद्योगपुरी लिमिटेड का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2014-2015

 

 

  राजस्व मंत्री(श्री उमाशंकर गुप्ता)--अध्यक्ष महोदय, कंपनी अधिनियम, 2013 (क्रमांक 18 सन् 2013)  की धारा 395 की उपधारा (1) (ख) की अपेक्षानुसार विक्रम उद्योगपुरी लिमिटेड का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2014-2015 पटल पर रखता हूं.

 

 

 

 

 

2.विक्रम विश्‍वविद्यालय, उज्‍जैन का 59 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2015-2016 (01 जुलाई, 2015 से 30 जून, 2016 तक)

  उच्‍च शिक्षा मंत्री( श्री जयभान सिंह पवैया)--अध्यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश विश्‍वविद्यालय अधिनियम, 1973 (क्रमांक 22 सन् 1973)  की धारा 47 की अपेक्षानुसार विक्रम विश्‍वविद्यालय, उज्‍जैन का 59 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2015-2016 (01 जुलाई, 2015 से 30 जून, 2016 तक) पटल पर रखता हूं.

 

 

 

 

3.दिनांक 13 दिसम्‍बर, 2013 को बैढ़न, जिला सिंगरौली में घटित गोली-चालन घटना की न्‍यायिक जांच आयोग का प्रतिवेदन शासन के संकल्‍प सहित

 

 राज्‍यमंत्री सामान्‍य प्रशासन(श्री लाल सिंह आर्य)-- अध्यक्ष महोदय, जांच आयोग अधिनियम, 1952 (क्रमांक 60 सन् 1952)  की धारा 3   की  उपधारा  (4) की अपेक्षानुसार दिनांक 13 दिसम्‍बर, 2013 को बैढ़न, जिला सिंगरौली में घटित गोली-चालन घटना की न्‍यायिक जांच आयोग का प्रतिवेदन शासन के संकल्‍प सहित पटल पर रखता हूं.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.08 बजे                                  ध्यान आकर्षण.

         

 

                                                        सदन द्वारा  सहमति प्रदान की गई .

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

1.शिवपुरी जिले के मायापुर से रेड्डी चौराहा तक स्वीकृत डिवाइडर न बनाये जाने संबंधी.        

 

 श्री के पी सिंह (पिछोर)-- अध्यक्ष महोदय,

 

 

          लोक निर्माण विभाग मंत्री(श्री रामपाल सिंह) - शिवपुरी जिले के विधान सभा क्षेत्र पिछोर अंतर्गत मायापुर से खनियाधाना-रेहटी चौराहा मार्ग लंबाई  28.65 कि.मी. का उन्नयन सी.सी. मार्क के निर्माण हेतु शासन द्वारा पत्र दिनांक 02.04.2016 से लंबाई 28.56 कि.मी. लागत राशि रुपये 4997.59 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदाय की थी. उक्त स्वीकृति में खनियाधाना शहरी भाग में डिवाइडर,चौड़ीकरण का कार्य सम्मिलित नहीं था.

          खनियाधाना शहरी भाग का पुल 1200 मीटर में डिवाइडर एवं 7-7 मीटर चौड़ाई में दोनों तरफ सी.सी. मार्ग की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति दिनांक 10.04.2017 द्वारा लागत राशि रुपये 4766.88 लाख का अनुमोदन शासन के द्वारा किया गया. वर्तमान में कार्य प्रगति पर है.

          ध्यानाकर्षण में उल्लेखित लंबाई हेतु पुनरीक्षित प्रस्ताव का तकनीकी परीक्षण प्रक्रियाधीन है.

          श्री के.पी. सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं अक्टूबर,2016 से इस बारे में मंत्री जी से निरंतर अनुरोध कर रहा हूं. पहला पत्र मैंने अक्टूबर,2016 में पी.एस. को लिखी,माननीय मंत्री जी से व्यक्तिगत अनुरोध किया,सदन में भी अनुरोध किया. पिछले अप्रैल और मई में भी व्यक्तिगत रूप से मंत्री जी से चर्चा की. मंत्री जी को खुद मालूम है कि  नगर पंचायत क्षेत्र की कितनी लंबाई है और दुर्भाग्य से कहना पड़ रहा है कि विभाग के प्रमुख सचिव मौके पर जाकर देख आये और उनके  देखने और मौखिक निर्देश जारी हो ने के बावजूद भी यह काम अभी तक प्रारंभ नहीं हुआ. इसलिये मुझे ध्यानाकर्षण यहां लाना पड़ा. एक विशेष व्यक्ति, जो नहीं चाहता कि नगर पंचायत के क्षेत्र में काम हो क्योंकि वह बुरी तरह से नगर पंचायत का चुनाव हारा है, उसकी जमानत जप्त हुई है. हमारा सौभाग्य कहें या दुर्भाग्य कहें कि नगर पंचायत में कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष बन गया. उसका दुष्परिणाम हमें यह भुगतना पड़ रहा है कि सारा निर्माण पूर्ण होने की स्थिति में है वहां अभी एक जैन समाज का एक वहां सम्मेलन हुआ था. पूरे देश के जैन समाज के लोग वहां इकट्ठे हुए थे. मैंने उस समय भी कहा था कि पूरे देश के जैन समाज के लोग वहां इकट्ठे होंगे तो बड़ी बदनाम होगी, लेकिन पूरी गर्मी गुजरने और आज तक भी वहां डिवाइडर का एक इंच काम चालू नहीं हुआ. आपने यदि 1.2 कि.मी. का अनुमोदन कर दिया तो 1.2 कि.मी. का आपने काम क्यों नहीं करवाया, इसके पीछे क्या कारण है ? उसका अनुमोदन  किये हुए महीना भर गुजर चुका है तो उसका काम चालू हो जाना चाहिये था. जब पी.एस. मौके पर जाकर देख आये कि 2.2कि.मी. लंबाई है और 1.8 कि.मी. नगर पंचायत क्षेत्र में है, तो उसका निर्माण होना चाहिये तो उसका कारण बता दें कि यह क्यों आपके यहां पेंडिंग पड़ा हुआ है ?

          श्री रामपाल सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने उत्तर में पढ़ा है आपने ठीक से उसको गंभीरता से सुना नहीं. आपने मुझे पत्र दिया. मैंने वहां फोर लाईन मार्ग स्वीकृत कर दिया. उसकी राशि भी जारी कर दी है और डिवाइडर भी बनेगा, इसके लिये आपको धन्यवाद देना चाहिये. आप जब ध्यानाकर्षण लिख रहे थे,आपने उसमें लिख दिया कि स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है. जब आप मंत्री थे जब वहां क्या गढ्ढे नहीं थे, जब स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता था अब स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ रहा है.

          श्री के.पी. सिंह - जब डामर रोड था. अभी आपने खोद डाला है.

          श्री रामपाल सिंह - मैं 20 साल पहले वहां गया था जब वहां गढ्ढे थे.

          श्री के.पी.सिंह - आपने उसकी ऊपर की सारी डामर खोद दी. 6 महीने से वह खुला पड़ा है और नगर पंचायत के बीच में आप खोल कर छोड़ दें तो स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा.

          श्री रामपाल सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, इतनी बड़ी सड़क के लिये इतनी बड़ी लगभग 50 करोड़ रुपये की राशि दे दी. ऐसी सड़क आपको बनाकर दे रहे हैं जो आप नहीं बनाए.

          श्री के.पी.सिंह - अपनी गलती स्वीकार करो. यह विषय को अध्यक्ष महोदय, मोड़ रहे हैं. अगर आपसे विलंब हुआ तो कारण बता दें.

          श्री रामपाल सिंह - कारण नहीं, तुरंत वहां कार्य प्रारंभ कराएंगे.

          श्री के.पी.सिंह--  अक्‍टूबर आ जायेगा, एक साल हो जायेगा, तुरंत का तात्‍पर्य क्‍या है. एक साल गुजर गया अब तुरंत कब होगा.

          श्री रामपाल सिंह--  तुरंत का तात्‍पर्य यह है, आपने पत्र लिखा, प्रक्रिया तो पूरी करना पड़ती है, उसको देखना पड़ता है, शहरी भाग, चौड़ाई, अतिक्रमण कितना है. अब काम लगेगा, अभी खम्‍भे वहां से हटेंगे और तुरंत कार्य प्रारंभ हो जायेगा.

          श्री के.पी.सिंह--  वही मैं आपको कह रहा हूं कि इस काम को जानबूझकर विलंब किया जा रहा. खंबे हटाने का टेंडर हो चुका है, अब जानबूझकर एक पर्टिक्‍यूलर आदमी उस टेंडर की मंजूरी नहीं दे रहा है, चूंकि मंजूरी मंत्री जी को नहीं देना, प्रमुख सचिव को नहीं देना है, एक ग्‍वालियर में बैठा हुआ व्‍यक्ति वह उसकी मंजूरी जानबूझकर लटका रहा है जिससे और लंबा समय खिंच जाये. जब टेंडर हो गये, रेट सही आ गये तो अब खम्‍भे हटाने के टेंडर को आप मंजूरी क्‍यों नहीं दे रहे. उसी कारण से आपका काम चालू नहीं हो पा रहा है. आप स्‍वीकार करना नहीं चाहते, आपका विभाग पर कंट्रोल नहीं है, अधिकारी आपसे दबते नहीं हैं.

          श्री रामपाल सिंह--  अगर कंट्रोल आपको देखना है तो इसको रूकवा देता हूं. आप मेरा कंट्रोल टेस्‍ट कर लो, आप मेरा टेस्‍ट कर लो. 

          श्री के.पी.सिंह--  एक साल में आप काम चालू नहीं करा पाये, यह कंट्रोल है ?

          अध्‍यक्ष महोदय--  के.पी.सिंह जी कृपया बैठ जायें, सीधे वाद विवाद न करें.

          श्री के.पी.सिंह--  अध्‍यक्ष महोदय, यह बात बताईये, एक साल में काम चालू नहीं हो पाया.

          श्री रामपाल सिंह--  50 साल में आप कर नहीं पाये, एक गड्डा नहीं भर पाये.

          श्री के.पी.सिंह--  इसमें 50 साल कहां से आग गये.

          श्री रामपाल सिंह--   हम लोग जब विधायक थे, हमको कार्यक्रमों में बुलाते नहीं    थे. ... (व्‍यवधान)....

          श्री के.पी.सिंह--  लेकिन एक साल में आप डिवाइडर नहीं बनवा पाये, रोड की तो बात ही छोड़ दो, रोड की तो हम बात ही नहीं कर रहे.

          अध्‍यक्ष महोदय--  आप सीधे 2-3 प्रश्‍न एक ही बार में पूछ लें.

          श्री के.पी.सिंह--  मैंने पूछ लिये.

          अध्‍यक्ष महोदय--  माननीय मंत्री जी उत्‍तर दे दें फिर आगे बढ़ेगे.

          श्री रामपाल सिंह--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, के.पी. सिंह जी हमारे पुराने साथी हैं. लेकिन आप बुरा मत मानिये, सच्‍चाई तो हमको बताना पड़ेगी, लेकिन बड़ा काम कर दिया, हम तुरंत काम लगायेंगे.

          डॉ. गोविंद सिंह-- साथी हैं, साथ निभाने का तरीका देख लो.

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता--  गोविंद सिंह जी आप क्‍यों बीच में बोल रहे हैं, दो ठाकुरों की बात होने दो, वह आपस में निपट लेंगे. ...(हंसी)...

          श्री रामपाल सिंह--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वर्ष 2018 तक का उसका अनुबंध है, 70 प्रतिशत काम पूरा हो गया है. शहर के भाग का काम है उसको हम तुरंत शुरू करवायेंगे.

          श्री के.पी.सिंह--  मैं पूछ कुछ रहा हूं आप जवाब कुछ दे रहे हैं. मैं रोड के बारे में बात ही नहीं कर रहा हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय--  शहर के भाग की ही बात उन्‍होंने बोली है, आपने सुना नहीं.

          श्री रामपाल सिंह--  शहर के भाग का ही मैं बोल रहा हूं, बिजली के खम्‍भे हटेंगे, तुरंत कार्य प्रारंभ करेंगे, लेकिन आपने जरा बात कह दी न कि पकड़ नहीं है तो पहले उस पर हो जाये.

          श्री के.पी.सिंह--  मैं यही पूछ रहा हूं कि एक साल में एकमात्र नगर पंचायत के एरिये के डिवाइडर का काम आप शुरू नहीं करा पाये इसलिये मैंने कहा.

          श्री रामपाल सिंह--  आपने पत्र बाद में दिया.

          श्री के.पी.सिंह--  मैंने अक्‍टूबर 2016 में पत्र दिया था.

          श्री रामपाल सिंह--  आपने खुद चिंता नहीं की, आप खुद मंत्री रहे वहां. आप खुद फोर व्‍हीलर से वहां घूमते थे.

          अध्‍यक्ष महोदय--  कृपया वाद-विवाद न करें आप ब‍हुत वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं और माननीय मंत्री जी भी बहुत वरिष्‍ठ हैं. कृपया करके आप सीधी-सीधा पूछ लें कि काम कब तक प्रारंभ करेंगे.

          श्री के.पी.सिंह--  अध्‍यक्ष महोदय, मैं सिर्फ इतनी ही बात पूछ रहा हूं कि विलंब का कारण क्‍या है यह बता दें, एक साल से जो नहीं हो पाया और दूसरा यह बता दें एक पर्टिक्‍यूलर डेट किस दिन से चालू हो जायेगा और जितनी लंबाई है, जो प्रमुख सचिव महोदय मौके पर देखकर आये हैं, प्रमुख सचिव से बड़ा अधिकारी तो कोई होता नहीं है. अब इसके बाद भी उसकी स्‍वीकृति में कितना समय और लगेगा. अब मंत्री जी और रह गये हैं अब यह आकर और देख लें.

          श्री रामपाल सिंह--  अध्‍यक्ष महोदय, मैं वही कहने वाला था, लेकिन वह कह रहे हैं कि पकड़ नहीं है, पकड़ का टेस्‍ट पहले हो जाये.

          श्री के.पी.सिंह--  तो पकड़ दिखाओ न. एक साल में पकड़ नहीं पाये...(हंसी)...

          श्री विश्‍वास सारंग--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ये अगर पकड़ शब्‍द वापस ले लें तो काम हो जायेगा, के.पी. सिंह जी आप बोलो कि पकड़ है तो काम हो जायेगा.

          श्री के.पी.सिंह--  अगर आपकी वास्‍तव में पकड़ है, मैं कल जा रहा हूं, खम्‍भों की वजह से जो काम रूका हुआ है आज उसका टेंडर मंजूर करा दें .... (व्‍यवधान)...

          अध्‍यक्ष महोदय--  श्री अशोक रोहाणी कृपया अपना ध्‍यानाकर्षण पढ़ें.

          श्री के.पी.सिंह--  अध्‍यक्ष महोदय, मेरा उत्‍तर तो आ जाने दें. .... (व्‍यवधान)...

          अध्यक्ष महोदय-- के.पी. सिंह जी आप उत्तर लेना नहीं चाहते हैं . कृपया आप बैठ तो जायें तभी तो मंत्री जी उत्तर दे पायेंगे.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी की विभाग पर पकड़ सही है. लेकिन के. पी. सिंह का कहना है कि पकड़ सही है इसका मूल्यांकन तभी होगा यदि सोमवार तब उनका काम मंजूर हो जाये.

          अध्यक्ष महोदय- अभी आपने उनकी बात ओवर रूल कर दी थी.

          श्री अजय सिंह -- नहीं, मैंने दोनों बातें कही हैं. उनकी तरफ से भी कह रहा हूं कि मंत्री जी पर विभाग की पकड़ है. बहुत अच्छी पकड़ है.

          अध्यक्ष महोदय- बस, इसके आगे कुछ नहीं.

          श्री उमाशंकर गुप्ता - अध्यक्ष महोदय शिवपुरी की पकड़ रायसेन में कैसे आ सकती है.(हंसी) यह तो आप के पी सिंह साहब को चुनौती दे रहे हैं.

          अध्यक्ष महोदय- आप सभी लोगों से अनुरोध है कि कृपा करके बैठ जायें. अब इस विषय पर सिर्फ माननीय मंत्री जी का उत्तर आयेगा. इसके बाद में अगला ध्यानाकर्षण लिया जायेगा.

          श्री के.पी. सिंह - लेकिन जवाब तो आ जाये, उसके बाद मेरा एक और प्रश्न है.

          अध्यक्ष महोदय- नहीं, प्लीज आप बहुत वरिष्ठ सदस्य हैं. लेकिन अब अति हो रही है. अब नहीं, मंत्री जी का जवाब आ रहा है उनके जवाब के बाद में बात खतम हो जायेगी.

          श्री रामपाल सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह जो हमने अभी स्वीकृति दी है. माननीय सदस्य ने कुछ इलाका बढ़ाने का अनुरोध किया है उसको हम करेंगे लेकिन अभी जो हमने स्वीकृति दी है उसका कार्य हम शीघ्र प्रारंभ करा देंगे जिसकी अभी हमने स्वीकृति दी है. हो ही गया है यह मानकर के आप चलिये, आप जैसा कह रहे हैं वैसा ही हो जायेगा.

          श्री के.पी.सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, वैसा ही हो जायेगा तो बहुत बहुत धन्यवाद मंत्री जी को, पुराने और अभी के कार्य की स्वीकृति के लिये खूब धन्यवाद. आपकी खूब पकड़ साबित हो, हमारी शुभकामनाये आपके साथ में हैं. धन्यवाद.

 

2.                जबलपुर केण्ट क्षेत्र के राजीव नगर, संजय नगर आदि क्षेत्रों मे पट्टों का नवीनीकरण किया जाना.

 

 

          श्री अशोक रोहाणी (जबलपुर-कैन्टोनमेंट) माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी ध्यानाकर्षण की सूचना की विषय इस प्रकार है :-

 

            जबलपुर के केण्ट विधानसभा के अंतर्गत राजीव गांधी नगर, संजय गांधी नगर एवं मोदीबाड़ा, कटंगा क्षेत्रों में मध्यप्रदेश नगरीय क्षेत्रों में भूमिहीन व्यक्ति (पट्टाधृति अधिकारों का प्रदान किया जाना) अधिनियम, 1984 के अधीन वितरित पट्टों की लीज समाप्त हो गई है, जबकि नगरीय विकास विभाग द्वारा इस अधिनियम में पट्टों के नवीनीकरण के संबंध में नियम बनाने संबंधी कार्यवाही करनी थी परिणामत: आज दिनांक तक उक्त अधिनियम के अंतर्गत लीज नवीनीकरण के संबंध में कोई निर्देश प्रसारित नहीं किये गये हैं जिससे पट्टाधृति अधिनियम के पट्टों का नवीनीकरण नहीं हो पाने से नागरिकों में प्रशासन/शासन के विरूद्ध रोष व्याप्त है.

 

          नगरीय विकास एवं आवास मंत्री( श्रीमती माया सिंह ) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश के नगरीय क्षेत्रों के भूमिहीन व्यक्तियों ( पट्टाधृति अधिकारों का प्रदान किया जाना) अधिनियम 1984 एवं उसके अंतर्गत निर्मित "मध्यप्रदेश नगरीय क्षेत्रों के भूमिहीन व्यक्ति"(पट्टाधृति अधिकारों का प्रदान किया जाना) नियम 2008 के अंतर्गत वर्ष 1984 से पट्टे दिये गये थे, जिन पट्टों की अवधि 30 वर्ष पूर्ण हो गई है, वे नवीनीकरण योग्य हो गये हैं.

          मध्यप्रदेश नगरीय क्षेत्रों के भूमिहीन व्यक्तियों (पट्टाधृति अधिकारों का प्रदान किया जाना) नियम, 2008 के नियम 7 के प्रारूप "" की शर्तों की कंडिका-6 में पट्टों के नवीनीकरण प्रावधान पूर्व से ही हैं. इन प्रावधानों के अंतर्गत कार्यवाही किये जाने के लिये समस्त कलेक्टर मध्यप्रदेश को लेख किया गया है. क्षेत्र के नागरिकों में आक्रोश जैसी कोई स्थिति नहीं है.

          श्री अशोक रोहाणी -- माननीय अध्यक्ष महोदय, नगर उदय अभियान के दौरान हमारे क्षेत्र के लगभग 500 ऐसे पट्टाधारी हैं जिनके प्रकरण लंबित हैं . कलेक्टर द्वार यह कहा जाता है कि जब तक हमें ऊपर से निर्देश नहीं मिलेंगे तब तक हम इनके नवीनीकरण की कार्यवाही नहीं करेंगे. मेरे मंत्री जी से आग्रह है कि आज ही ऐसे निर्देश यहां से जारी करें ताकि उनके नवीनीकरण की कार्य़वाही पूरी हो सके.

          श्री तरूण भनोत (जबलपुर-पश्चिम) - माननीय अध्यक्ष महोदय, बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है.

          अध्यक्ष महोदय- पहले रोहाणी जी के प्रश्न का उत्तर तो आ जाये. चलिये आप भी बोल दीजिये.

          श्री तरूण भनोत-- अध्यक्ष महोदय, मेरे विधानसभा क्षेत्र की भी कमोवेश यही स्थिति है . माननीय मुख्यमंत्री जी इस संबंध में सदन में भी घोषणा कर चुके हैं, विधानसभा से यह संकल्प भी पारित हुआ था कि नगरीय निकाय क्षेत्र में नजूल के स्थान पर जो लोग 10 वर्षो से अधिक से रह रहे हैं उनको मकान के पट्टे दिये जायेंगे. यह तो 1984 के पट्टे तत्कालीन सरकार द्वारा मिले हुये हैं, चूंकि सरकार इन पट्टों का नवीनीकरण नहीं कर रही है इसलिये माननीय विधायक श्री अशोक जी के क्षेत्र में भी यह स्थिति है कि लोगों का मतदाता सूची से नाम काटा जा रहा है.

          श्रीमती उषा चौधरी -- माननीय अध्यक्ष महोदय, सतना में भी यही हाल है.

 

          अध्यक्ष महोदय-- नहीं. कृपया बैठे. भनोत जी आपने बहुत अच्छा प्रश्न पहले किया था उतने तक ही आप सीमित रहते तो ठीक था.

          श्री भारत सिंह कुशवाह- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा भी इसी से संबंधित प्रश्न है.

           अध्‍यक्ष महोदय - श्री भारत सिंह भी आप बैठ जाएं. माननीय मंत्री जी, इनकी बात का और श्री तरूण भनोत जी की बात का समेकित उत्‍तर आ जायेगा तो अच्‍छा रहेगा.

          श्रीमती माया सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह कह रहे हैं कि 2008 में नियम नहीं बने लेकिन 2008 में नियम संशोधित किये गये थे और पूर्व से प्रचलित नियमों का ही पालन किया जा रहा था. लेकिन फिर भी नगरीय विकास विभाग ने कल सभी कलेक्‍टर्स को निर्देश जारी करके नियमानुसार नवीनीकरण का लेख किया है और इस संबंध में हम समय सीमा में कार्य पूर्ण करने के उद्देश्‍य से शीघ्र ही विस्‍तृत निर्देश समय सारणी के साथ भी जारी कर देंगे.

          श्री तरूण भनोत - नवीनीकरण के साथ-साथ जिनको नये पट्टे प्रदान किये जाने थे और जिनकी सरकार घोषणा कर चुकी है, इनके भी आदेश करें. यह बहुत महत्‍वपूर्ण विषय है.

          अध्‍यक्ष महोदय - श्री अशोक रोहाणी जी आपको इस संबंध में और कुछ पूछना है तो पूछ लीजिए.

          श्री अशोक रोहाणी - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका धन्‍यवाद देता हूं और माननीय मंत्री जी का भी धन्‍यवाद देता हूं जिस आदेश की प्रतिक्षा कलेक्‍टरों को थी वह आज इस सदन के माध्‍यम से प्राप्‍त हुए हैं और कार्यवाही प्रारंभ होगी इसके लिये बहुत-बहुत धन्‍यवाद .

          श्री तरूण भनोत -  अध्‍यक्ष महोदय, यह तो नवीनीकरण की बात हुई मैं उनकी बात कर रहा हूं जिनको नये पट्टे दिये जा रहे हैं. 

          अध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी क्‍या आप इस बारे में कुछ कहेंगी ? हालांकि यह बात ध्‍यानाकर्षण में शामिल नहीं है.

          श्री तरूण भनोत - अध्‍यक्ष महोदय, यह महत्‍वपूर्ण विषय है.     

          श्री भारत सिंह कुशवाह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसी से संबंधित मेरा भी प्रश्‍न है. यह मेरे क्षेत्र की भी समस्‍या है.

          अध्‍यक्ष महोदय - आप बैठ जाएं मंत्री जी कुछ कह रहीं हैं. यह सभी जगह की समस्‍या है.

          श्रीमती माया सिंह - माननीय अध्‍यक्ष जी, अभी दिसंबर 2014 तक के कब्‍जों के पट्टे दिेये जाने के निर्देश जारी किये जा चुके हैं.

          श्री तरूण भनोत - माननीय मंत्री जी कब तक दे दिये जाएंगे.

          श्रीमती माया सिंह - उनका परीक्षण करके नियमानुसार नवीनीकरण किया जाएगा.

           3.      छतरपुर जिले के जसगुवां बिजावर स्थित डी.एड. कॉलेज द्वारा                  फर्जीवाड़ा किया जाना.

         

          चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी (मेहगांव) { सर्व श्री ठाकुरदास नागवंशी एंव वेलसिंह भूरिया} - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे ध्‍यानाकर्षण की सूचना इस प्रकार है कि :-

          जसगुंवा, बिजावर जिला छतरपुर में शासकीय रामकृष्‍ण मेमोरियल बी.एड. कॉलेज खोला गया है. इसके बाद फर्जी तरीके से इसी स्‍थान में एक अशासकीय डी.एड. कॉलेज खोल दिया गया है. कूटरचित दस्‍तावेजों के आधार पर एक ही भवन में दोनों कोर्स संचालित किये जा रहे हैं. डी.एड. मैं पढ़ने वाले विद्यार्थियों को पढ़ने हेतु भवन ही नहीं है. छात्रों एवं उनके अभिभावकों के द्वारा अवगत कराया गया कि कॉलेज प्रबंधक शासन के द्वारा निर्धारित शुल्‍क के अतिरिक्‍त कई गुना शुल्‍क लेते हैं. ज्‍यादा शुल्‍क देने से मना करने वाले छात्रों को विभिन्‍न प्रकार से प्रताडि़त किया जाता है तथा प्रायोगिक परीक्षा में फेल करने की धमकी दी जाती है, जिस कारण छात्रों को अतिरिक्‍त शुल्‍क देने पड़ती है. इसके अतिरिक्‍त्‍ा कॉलेज में नियमित कक्षाएं भी संचालित नहीं होती है और पढ़ाने वाले शिक्षक भी नहीं है. उक्‍त डी.एड. कॉलेज में शासन द्वारा निर्धारित मापदंड से कम भवन निर्धारित शुल्‍क से ज्‍यादा शुल्‍क लेने एवं नियमित एवं गुणवत्‍तापूर्ण शिक्षा प्रदाय नहीं किये जाने के कारण छात्रों एवं उनके अभिभावकों में रोष व्‍याप्‍त है. छात्र एवं अभिभावक उपरोक्‍त बिंदुओं की उच्‍च स्‍तरीय जांच करवाने एवं जांच होने तक संस्‍थान में नवीन   प्रवेश प्रक्रिया को रोकने की मांग कर रहे हैं. अत: उक्‍त डी.एड. कॉलेज के फर्जीवाड़े की जांच करवाने एवं जांच प्रक्रिया पूरी होने तक नवीन प्रवेश प्रक्रिया को रोकते हुए डी.एड. कॉलेज की मान्‍यता निरस्‍त करने की कार्यवाही की जाए.

          स्‍कूल शिक्षा मंत्री (कुँवर विजय शाह) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जो विषय ध्‍यानाकर्षण के माध्‍यम से उठाया है. उक्‍त ध्‍यानाकर्षण सूचना के संदर्भ में उल्‍लेखनीय है कि मध्‍यप्रदेश शासन शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार राज्‍य शिक्षा केन्‍द्र द्वारा एन.सी.टी.ई. से मान्‍यता प्राप्‍त एवं माध्‍यमिक शिक्षा मण्‍डल से संबंद्धता प्राप्‍त डी.एल.एड. महाविद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया संचालित की जाती है. वर्ष 2017-18 में माध्‍यमिक शिक्षा मण्‍डल से संबंद्धता प्राप्‍त डी.एल.एड महाविद्यालयों की सूची में जसगुंवा, बिजावर छतरपुर में अशासकीय रामकृष्‍ण मेमोरियल महाविद्यालय सम्मिलित नहीं है. अत: ऐसे किसी महाविद्यालय में प्रवेश की प्रक्रिया नहीं की जा रही है. राष्‍ट्रीय अध्‍यापक शिक्षा परिषद की सूची के अनुसार इसी पते पर एक अन्‍य अशासकीय डी.एल.एड. महाविद्यालय पीताम्‍बर पीठ शिक्षा प्रसारणीय इंस्‍टीट्यूट के नाम से संचालित है. फर्जी तरीके से अशासकीय डी.एल.एड कॉलेज संचालित करने के संबंध में संभागीय अधिकारी को तत्‍काल छतरपुर जांच के लिये भेजा जा रहा है. जांच प्रतिवेदन के आधार पर राष्‍ट्रीय अध्‍यापक शिक्षा परिषद को मान्‍यता समाप्‍त करने के लिये लिख दिया जाएगा. यदि आवश्‍यकता हुई तो तत्‍काल एफ.आई.आर. भी दर्ज की जावेगी. कॉलेजों को बच्‍चों के भविष्‍य से खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा. प्रदेश में संचालित डी.एल.एड. महाविद्यालयों के निरीक्षण और जांच में राज्‍य शासन की प्रभावी भूमिका बनाने हेतु राष्‍ट्रीय अध्‍यापक शिक्षा परिषद को लेख किया जायेगा ताकि प्रतिवर्ष राज्‍य शासन के अधिकारियों द्वारा निरीक्षण सुनिश्चित किया जा सके और उसके बाद ही उसकी मान्‍यता रहे.

                                                               

12.30 बजे            [उपाध्‍यक्ष महोदय (डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुए]

          चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूँ कि जब तक जांच चले, तब तक नवीन सत्र की प्रवेश प्रक्रिया रोकी जाये और अगर जांच उपरान्‍त दोषी पाए जाते हैं तो स्‍थायी रूप से इनकी संबद्धता खत्‍म की जाये क्‍योंकि कहीं न कहीं एक ही कॉलेज में, मेरे पास उस कॉलेज के बिजली के बिल भी हैं, उसमें बी.एड. कॉलेज, रामकृष्‍ण महाविद्यालय उसका बिजली के बिल इस नाम से है- प्रिसिंपल, बी.एड. कॉलेज महाविद्यालय एवं उसी में मां पीताम्‍बरा संचालित होती हैं तो कहीं न कहीं शासन के साथ फ्रॉड किया जा रहा है तो क्‍या माननीय मंत्री जी उनकी 3 वर्ष की मान्‍यता रद्द करेंगे और तब तक नवीन एडमिशन रोकेंगे ?

          कुँवर विजय शाह - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जहां तक जांच का सवाल है. आज शुक्रवार है, हम सोमवार को एक टीम भेजकर, इसकी विस्‍तार से जांच करवायेंगे और केवल यही नहीं डी.एड., बी.एड. कॉलेज, जितने भी प्रायवेट हैं, उनकी बहुत लम्‍बे समय से शिकायतें आ रही हैं. हमारे जो संभागीय अधिकारी है, जे.डी. हैं, उनको भी हम निर्देशित कर रहे हैं कि अपने-अपने क्षेत्र में जितने भी डी.एड., बी.एड. कॉलेज हैं, 7 दिन में उसकी रिपोर्ट शासन को भेजें तथा रिपोर्ट मिलने के बाद जरूरत पड़ी तो एफ.आई.आर. करवाएंगे एवं अगर जरूरत पड़ी तो भारत सरकार को संबद्धता निरस्‍त करने के लिए भेज दिया जाएगा.

          श्री दिलीप सिंह परिहार - माननीय मंत्री जी, नीमच के भी हैं.

          चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी - क्‍या तत्‍काल नवीन सत्र के प्रवेश रोके जाएंगे ? जिससे बच्‍चों के भविष्‍य के साथ खिलवाड़ न हो.

          कुँवर विजय शाह - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हम सोमवार को तो भेज ही रहे हैं.

          चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी - मंत्री जी, तब तक एक ऐसा आदेश प्रसारित हो जाये कि नवीन शिक्षा सत्र के एडमिशन न हों.

          कुँवर विजय शाह - उपाध्‍यक्ष महोदय, मुझे लगता है कि बिना जांच किये किसी प्रक्रिया को रोकना कानूनन ठीक नहीं है.

          चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी - मंत्री जी, यह आप अपने जवाब में मान ही रहे हैं कि वहां इस तरह का कोई कॉलेज नहीं है, तब तक नवीन सत्र की प्रक्रिया 2 दिन तक रोक दी जाये अगर वह सही निकले तो आप जैसा उचित समझें, वैसा करियेगा.

 

12.33 बजे              [सभापति महोदय (श्री के.पी. सिंह) पीठासीन हुए]

 

          श्री वेलसिंह भूरिया (सरदारपुर) - माननीय सभापति महोदय, मेरा इसमें कहना है कि यदि यह क्‍लीयर हो गया है कि संस्‍था फर्जी है तो मैं माननीय मंत्री जी से आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूँ कि क्‍या आप फर्जी संस्‍था की मान्‍यता रद्द करेंगे ?

          कुँवर विजय शाह - सभापति महोदय, जितने भी मध्‍यप्रदेश में डी.एड., बी.एड. प्रायवेट कॉलेज हैं. चाहे उनकी शिकायत आई है या नहीं, हम 7 दिनों के अन्‍दर उनकी जांच करवाएंगे और जे.डी. से रिपोर्ट मिलने के बाद उचित कार्यवाही, सख्‍त कार्यवाही की जायेगी.

          श्री वेलसिंह भूरिया  - सभापति महोदय, मेरा यह कहना है कि इस तरह के पूरे प्रदेश में सभी संभागों में फर्जी कॉलेज चल रहे हैं, इनकी भी जांच की जायेगी तो विद्यार्थियों के भविष्‍य के लिये अच्‍छा होगा. माननीय मंत्री जी, सभी जगह जांच करवा लेंगे तो बहुत अच्‍छा रहेगा, ऐसा मेरा अनुरोध है.

          कुँवर विजय शाह - सभापति महोदय, एन.सी.टी.ई.आर. की सूची में जो नाम आया है, यदि उसमें उसका नाम नहीं है और यदि वहां प्रवेश हो रहा है तो वह इल्‍लीगल है.

          चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी - सभापति महोदय, मेरा अनुरोध यह था कि नाम नहीं है तो प्रवेश रोका जाये. उनको फर्जी प्रवेश लेने की परमिशन न दी जाये.

          कुँवर विजय शाह - सभापति जी, जिनको मान्‍यता नहीं है, जहां तक मेरी जानकारी में अभी आया है तो प्रवेश का प्रश्‍न ही नहीं उठता है. अगर उसके बाद भी प्रवेश लेता है तो एफ.आई.आर. कर देंगे.

          चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी - माननीय सभापति महोदय, जब तक जांच चल रही है तब तक क्‍या उनकी मान्‍यता निलंबित करेंगे ?

          कुँवर विजय शाह - सभापति महोदय, हम लोग भी विपक्ष में बहुत दिनों तक बैठे हैं. हमने 7 दिन का समय मांगा है.

          श्री वेलसिंह भूरिया - मैं माननीय मंत्री जी को अतिशीघ्र कार्यवाही करने के आश्‍वासन पर बहुत बहुत धन्‍यवाद देता हूँ.          

          कुंवर विजय शाह - सभापति महोदय, मान्‍यता निरस्‍त करने का अधिकार नहीं है, रिकमंड करने का अधिकार है. जांच के बाद रिकमंड कर सकते हैं, मुकेश जी ज्‍यादा बेहतर जानते हैं. जांच के बाद यदि इस तरह से स्थिति है तो निश्चित रूप से निरस्‍त होना ही है.

          श्री ठाकुर दास नागवंशी(पिपरिया) - माननीय सभापति जी, आपके माध्‍यम से कहना चाहता हूं कि  विधान सभा में अभी दो शब्‍द आए हैं. एक पकड़ और एक  है जुगाड़, इसके पास न तो पकड़ है न तो जुगाड़ है फिर भी एक भवन में बीएड और डीएड दोनों चल रहे हैं. यदि बच्‍चों के प्रवेश हो जाते हैं और जांच के बाद उसकी मान्‍यता रद्द होती है तो ऐसे में बच्‍चों के भविष्‍य से खिलवाड़ा होगा. इसलिए तत्‍काल प्रवेश रोके जाने चाहिए.

          कुंवर विजय शाह - माननीय उपाध्‍यक्ष जी, कलेक्‍टर को पत्र लिख रहे हैं कि वहां जाकर के एक बार परीक्षण कर लें और बच्‍चों को भी इस बारे में समझाए और मीडिया के माध्‍यम से जानकारी में भी आ ही जाएगा. यदि थोड़ा सा भी गड़बड़ है तो गड़बड़ी करने वालों को जेल जाने से कोई नहीं रोक पाएगा.

          सभापति महोदय - सदस्‍य का कहना है कि बच्‍चों के भविष्‍य का क्‍या होगा, गलती तो कोई और कर रहा है.

          कुंवर विजय शाह - माननीय सभापति जी, सोमवार को हम जांच कमेटी भेज देंगे, जांच के बाद जो भी तथ्‍य पाए जाएंगे, चाहे एफआईआर करना हो, या राष्‍ट्रीय शिक्षा परिषद को मान्‍यता निरस्‍त करने के लिए पत्र लिखना हो तो हम यह जांच के बाद ही तो लिख पाएंगे.

          चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी - माननीय सभापति महोदय, आज अच्‍छा दिन है, शुक्रवार है आज ही जांच के आदेश दिए जाए तो बेहतर होगा.

          श्री दिलीप सिंह परिहार - नीमच जिले में भी यह बहुत चल रहा है. मंत्री जी आज ही जांच के आदेश कर दीजिए.

          सभापति महोदय - आदेश तो अलग बात है लेकिन सदस्‍यों की चिन्‍ता यह है कि बच्‍चों के भविष्‍य का क्‍या होगा.          

          चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी - अभी तत्‍काल में प्रवेश रोक दिए जाएं. आजकल तो तकनीकी बहुत फास्‍ट है, आप अभी आदेश कर दीजिए तो तुरंत जांच हो जाएगी.

          कुंवर विजय शाह - माननीय सभापति महोदय, चिन्‍ता आवश्‍यक है. हम कलेक्‍टर को निर्देश जारी कर रहे हैं और कलेक्‍टर की रिपोर्ट शाम तक आ जाएगी, उसके बाद कोई निर्णय लें लेंगे.

          चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी - मंत्री जी को धन्‍यवाद.

          श्री यशपाल सिंह सिसौदिया - माननीय सभापति जी, ध्‍यानाकर्षण छतरपुर जिले के जस्‍सूगांव बिजावर क्षेत्र से संबंधित है. सभापति महोदय मैं आपका संरक्षण चाहता हूं और मंत्री जी से आग्रह करूंगा कि क्‍या पूरे मध्‍यप्रदेश में इस प्रकार की जांच करवा लेंगे.

          कुंवर विजय शाह - सारे मध्‍यप्रदेश में जितने भी डीएड और बीएड के प्रायवेट कालेज है, 7 दिन में सभी की जांच जीएडी से करवाकर दे देंगे.

          श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को (पुष्‍पराजगढ़) - माननीय सभापति जी, अनुमति हो तो मेरे क्षेत्र के लिए कुछ कह दूं. इंदिरा गांधी जनजाति विश्‍वविद्यालय अमरकंटक पिछले बीए, बीएड, बीकॉम में प्रवेश लेकर के बच्‍चों ने अध्‍ययन किया, अध्‍ययन करने के पश्‍चात बच्‍चों को डिग्री मिलनी चाहिए थी, लेकिन आज करीब 300 बच्‍चे पढ़ाई पूर्ण करने के पश्‍चात विश्‍वविद्यालय द्वारा उनको डिग्री प्रदान हीं की गई.

          सभापति महोदय - यह प्रश्‍न इससे उद्भूत नहीं होता.

          श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को - सभापति जी, शिक्षा से संबंधित विषय है इसलिए मैं कह रहा हूं कि कम से कम विश्‍वविद्यालय से जानकारी ही इस संबंध में बुलवा ली जाए कि ऐसा क्‍यों हो हुआ है, मध्‍यप्रदेश के ही बच्‍चे हैं, यदि पढ़ाई पूरी हो गई है तो डिग्री मिलना चाहिए.

          सभापति महोदय - आप अलग से माननीय मंत्री जी को लिखकर दे दें, जो कार्यवाही होगी मंत्री जी करवा लेंगे.

          श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को - धन्‍यवाद.

(4) आदिम जाति कल्‍याण विभाग द्वारा आपराधिक प्रकरण में लिप्‍त अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही न किया जाना.

          श्री निशंक कुमार जैन (बासौदा) - माननीय सभापति महोदय, मेरी ध्यान आकर्षण सूचना का विषय इस प्रकार है-

          आयुक्‍त आदिवासी विकास को थाना प्रभारी जहांगीराबाद भोपाल के पत्र क्रमांक 07.02.2017 द्वारा संसूचित किया गया कि अपर संचालक के विरूद्ध अपराध क्रमांक 889/13, धारा 306, 34 भादावि के अंतर्गत कायम कर प्रकरण विवेचना में लिया गया. अपर संचालक को गिरफ्तार कर मुचलके पर रिहा किया गया. प्रकरण का चालान प्रस्‍तुत होने के उपरांत भी उन्‍हें निलंबित नहीं किया गया, इनकी शिकायत लोकायुक्‍त में भी की गई. वाहन चालकों की भर्ती में भी विभाग ने श्री भण्‍डारी को दोषी माना है, इनके दोहरे आहरण से संबंधित बिलों में इनके द्वारा हस्‍ताक्षर किए गए हैं, इनकी विवादित कार्यशैली व इनके विरूद्ध समुचित कार्यवाही नहीं होने के कारण लोगों में रोष व्‍याप्‍त है.

 

          राज्यमंत्री, सामान्य प्रशासन (श्री  लाल सिंह आर्य )माननीय सभापति महोदय,

 

 

          श्री निशंक कुमार जैन--माननीय सभापति महोदय, जैसा कि माननीय मंत्री जी ने कहा कि उच्च न्यायालय से स्थगन है. यदि किसी मामले में उच्च न्यायालय अथवा किसी भी न्यायालय से स्थगन आता है तो संबंधित थाना प्रभारी जिसने कमिश्नर ट्राईबल को लिखा तथा उनको गिरफ्तारी की सूचना दी. यदि किसी भी तरह का स्थगन होता तो मैं अपने पत्र के साथ कमिश्नर में उस बात का उल्लेख भी करते नंबर एक, नंबर दो कमिश्नर ने वह पत्र प्रमुख सचिव को लिखा, टीआई जहांगीराबाद के पत्र की कापी लगायी. उन दोनों पत्रों में किसी भी न्यायालय के किसी भी तरह के स्थगन नहीं है. नंबर एक, नंबर दो यदि स्थगन होता तो किसी भी तरह की स्थगन की कापी विभाग में उपलब्ध होती. न तो विभाग में किसी भी तरह की कापी उपलब्ध है. यदि है तो माननीय मंत्री जी मुझे देने का कष्ट करेंगे अथवा पटल पर रखने का कष्ट करेंगे. नंबर तीन जिस दोहरे आहरण की बात माननीय मंत्री जी ने कही. मैं आपको बताना चाहता हूं कि श्री भण्डारी द्वारा 68 करोड़ रूपये का दोहरा आहरण किया गया, उसकी शिकायत जब लोकायुक्त में हुई. लोकायुक्त ने चीफ सेकेट्री को लिखा. चीफ सेकेट्री ने तीनों प्रमुख सचिवों को अपने चेम्बर में बुलाया. चीफ सेकेट्री की मेरे पास नोटशीट की कापी है. श्री भण्डारी ने जिस पेपर पर दस्तखत करके आहरण लिया उस समय दुर्भाग्य श्री भण्डारी का यह देखिये कि जिन खातों में वह पैसा ट्रांसफर हुआ 70 लाख रूपये एक भृत्य, एक बाबू के पास राशि का एक अंश ट्रांसफर हो गया. अब भृत्य एवं बाबू विभाग में घूमें कि हमारे खाते में 70 लाख रूपये आ गये तब इस प्रकरण की जांच प्रारंभ हुई और जांच में श्री भण्डारी को दोषी पाया गया. चीफ सेकेट्री विभाग को लिखते हैं कि यह गंभीर मामला है और इस पर प्रकरण पंजीबद्ध किया जाना चाहिये. विभाग के अधिकारी निश्चित रूप से श्री भण्डारी को बचा रहे हैं. नंबर एक.

          सभापति महोदय--आप स्पेसिफिक प्रश्न करें.

          श्री निशंक कुमार जैन--माननीय सभापति महोदय, माननीय मंत्री जी जो जांच आपके विभाग के द्वारा की गई जिसमें श्री भण्डारी को दोषी पाया गया. क्या आप श्री भण्डारी को निलंबित कर फिर जांच की कार्यवाही करायेंगे ?

          श्री लाल सिंह आर्य :- माननीय सभापति महोदय, एक तो माननीय सदस्‍य द्वारा यह कहा गया कि स्‍थगन की कापी है नहीं. माननीय सदस्‍य ने कहा है कि मैं पटल पर यह स्‍थगन की कापी सदन रखने को तैयार हूं, नंबर एक. नंबर दो, आपने कहा है कि 68 करोड़ का कोई..       

          सभापति महोदय:- स्‍थगन की कापी जो आपके पास है, उसमें जो न्‍यायालय के डायरेक्‍शन हैं, वह आप सीधे पढ़कर ही बता दीजिये. उसमें डायरेक्‍शन क्‍या हैं

          श्री लाल सिंह आर्य :- सभापति महोदय, मैंने पूरी बात बतायी है, मैंने तारीख भी बतायी है. विधायक जी ने कहा कि 68 करोड़ घोटाले वाला कोई मामला बताया है. यदि कोई भी जांच प्रक्रिया होती है तो उसमें हमारे जो विभागीय आयुक्‍त हैं एस.सी के, उनको जांच दी गयी है. यदि वह दोषी होंगे तो फिर तो केवल निलंबन की कार्यवाही नहीं होगी, फिर तो एफआईआर भी दर्ज होगी. किसी को छोड़ने का सवाल ही नहीं है.

          सभापति महोदय :- माननीय मंत्री जी, इसमें दो बातें हो रही हैं. आपके ही जवाब में आप कह रहे हैं कि एफआईआर दर्ज है और इधर आप कह रहे हैं कि एफआईआर दर्ज होगी. दोनों में से कौन सी बात सही है.

          श्री लाल सिंह आर्य :- सभापति महोदय, यह 68 करोड़ वाले मामले में बता रहा हूं.

          सभापति महोदय :- अच्‍छा, यह 68 करोड़ वाला मामला है.

          श्री लाल सिंह आर्य :- जी हां.

          श्री निशंक कुमार जैन :- माननीय सभापति महोदय, विभाग ने जांच की और 7 कर्मचारियों को दोषी पाया और उन सातों को निलंबित कर दिया और जिसका जो कर्ता-धर्ता था तो उसे बचाने के लिये छोटे कर्मचारियों को बलि चढ़ाया गया. जबकि कर्ता-धर्ता को विभाग द्वारा संरक्षण दिया जा रहा है. यदि भण्‍डारी दोषी नहीं थे तो चीफ सेक्रेटरी ने ...

          सभापति महोदय :- मंत्री जी, आपके पास जो माननीय न्‍यायालय का आदेश है, उसमें क्‍या उनके खिलाफ कोई कार्यवाही न करने के लिये लिस्‍ट है ?

          श्री निशंक कुमार जैन :- माननीय सभापति महोदय, यह भ्रष्‍टाचार का मामला दूसरा है. वह एक आत्‍महत्‍या के मामले में कार्यवाही न करने के मामले में मना कर रहे हैं.

          सभापति महोदय :- वही मैंने कहा है कि माननीय न्‍यायालय आदेश क्‍या है, उसको आप आप पटल पर रखने को तैयार हैं तो आप पढ़ दें कि वह है क्‍या. उससे क्लियर हो जायेगा कि स्‍टे इस पर है या किस पर है.

           श्री निशंक कुमार जैन :- माननीय सभापति महोदय, वह दूसरा मामला है. उसमें इन्‍होंने एक पत्रकार को प्रताडि़त किया था, उसने आत्‍महत्‍या करी थी, उसमें वह स्‍थगन है.

          सभापति महोदय :- आप बैठ जायें, मंत्री जी उत्‍तर दे रहे हैं.

          श्री लाल सिंह आर्य:- सभापति महोदय, यह बात सही है, जो निशंक जी बता रहे हैं कि एक अपराध पंजीबद्ध हुआ था जो भण्‍डारी के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया गया था. उसमें उनको मुचलके पर छोड़ा गया है. वह उसी दिन कोर्ट में गये और उसी दिन उनको स्‍टे इस बात का दिया कि इनकी अभी गिरफ्तारी न की जाये. इस पर उनको मुचलका मिल गया.जहां तक 68 करोड़ का मामला है. मैं बहुत ही स्‍पष्‍ट कह रहा हूं कि 2 महीने के अंदर, इसमें जो भी जांच चल रही है....

          श्री निशंक कुमार जैन :- माननीय सभापति महोदय, 2010 से जांच चल रही है और अभी 2017 हो गया है. सामान्‍य प्रशासन विभाग का ही नियम है कि एक वर्ष में विभागीय जांच पूरी की जायेगी. अभी 2010 से 2017 तक अकेली जांच ही चल रही है. चीफ सेक्रेटरी अपनी नोटशीट में लिखते हैं और तीनों विभागों तीनों प्रमुख सचिवों को पृष्‍ठांकन करते हैं और चीफ सेक्रेटरी के निर्देश के बाद उनको निलंबित नहीं किया गया है और 68 करोड़ के मामले में उनके खिलाफ एफआईआर नहीं की गयी.

          सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि ऐसे अधिकारी को तत्‍काल निलंबित करें और उनके निलंबन के पश्‍चात् जांच करायें. यदि वह निर्दोष हों तो उनको आप वापस बहाल कर दें.

          श्री लाल सिंह आर्य:- माननीय सभापति महोदय, उन्‍होंने जो स्‍टे लिया है उस पर 16.3.17, 5.4.17, आप एक मिनट मेरी बात सुन लें.         

          श्री निशंक  कुमार जैन :- सभापति महोदय, मंत्री जी सदन को गुमराह कर रहे हैं. स्‍टे दूसरी बात पर है. स्‍टे एक आत्‍महत्‍या पर है न कि 68 करोड़ रूपये के घाटाले पर है.

          श्री लाल सिंह आर्य :- निशंक जी, यह कभी नहीं होता है, अगर किसी ने कोई आरोप लगाया है तो उसकी जांच करना ही पड़ती है नहीं तो वह कोर्ट में जाकर फिर उस चीज पर स्‍टे ले लेगा. इसलिये हम उसे बचाना नहीं चाहते हैं. हमने उस पर जांच बैठा दी है. आयुक्‍त जांच कर रहे हैं.

          सभापति महोदय :- माननीय मंत्री जी, माननीय सदस्‍य का सवाल यह है कि जीएडी का जो सर्क्‍युलर है, उसके अनुसार एक साल के अंदर जांच पूरी होना चाहिये. आपको जांच करते हुए करीब 7 साल हो गये हैं, क्‍या यह सही है, सिर्फ इतनी सी बात है. आखिरकार इसमें चीफ सेक्रेटरी की बात भी नहीं सुनी जायेगी.

          श्री लाल सिंह आर्य :- सभापति महोदय, मैं इसीलिये तो कह रहा हूं. मैं चाहता तो मैं यह कह देता कि जल्‍दी कार्यवाही कार्यवाही करूंगा. मैं समय दे रहा हूं.

          सभापति महोदय :- 7 साल का समय बहुत लम्‍बा होता है.

          श्री लाल सिंह आर्य :- सभापति महोदय, मैं केवल दो महीने का समय चाह रहा हूं. मैं केवल 2 महीने कर रहा हूं. केवल 2 महीने में पूरी जांच करके अंतिम बिंदु पहुंचेंगे. अगर दोषी होंगे तो निलंबित भी होंगे और एफआईआर भी होगी.

          श्री बहादुर सिंह चौहान :- माननीय सभापति महोदय, जब 7 वर्षों का इंतजार किया है तो मंत्री जी 2 महीने मांग रहे हैं. 2 महीने में जांच के निष्‍कर्ष आ जायेंगे.

          श्री रामनिवास रावत- माननीय सभापति जी, मंत्री महोदय के जवाब में एक बात और निकलकर आई है. मंत्री जी जांच की बात कह रहे हैं. कृपया अंतिम पैरा पढ़े- ''वाहन चालकों की नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितता के संबंध में लोकायुक्‍त कार्यालय, भोपाल में शिकायत दर्ज की गई जिसमें प्रारंभिक जांच में सुरेंद्र सिंह भंडारी, अपर संचालक आदिम जाति, क्षेत्रीय विकास योजना, भोपाल को प्रथम दृष्‍टया दोषी पाया गया''. क्‍या आपको लोकायुक्‍त पर भी भरोसा नहीं है ? वह दोषी सिद्ध है, जांच हो चुकी है. आप उसे निलंबित क्‍यों नहीं कर रहे हैं. स्‍टे अपराधिक प्रकरण में कार्यवाही करने के विरूद्ध है और आप बात कहीं की कहीं और ले जा रहे हैं. स्‍टे

          श्री लाल सिंह आर्य-  माननीय सभापति जी, बात को कहीं का कहीं ले जाने का सवाल ही नहीं है. रावत जी जो वाहन चालकों की बात कह रहे हैं, उसमें भी विभागीय जांच संस्थित की गई है. उनको नोटिस दिया गया है.    

          श्री निशंक कुमार जैन-  माननीय सभापति जी, उस नोटिस को दिए हुए तीन साल हो गए हैं.

          श्री लाल सिंह आर्य-  माननीय सभापति जी, नोटिस की तामिली 07.07.2017 को हुई है.

           श्री रामनिवास रावत-  माननीय सभापति जी, मैं पूछना चाहता हूं कि इनका विभाग बड़ा है कि लोकायुक्‍त बड़ा है ?

            श्री लाल सिंह आर्य-  आप दबाव क्‍यों बना रहे हैं ?

....(व्‍यवधान)....

          श्री निशंक कुमार जैन-  माननीय सभापति जी, दबाव की बात नहीं है. हमारी मांग है कि आप उसे निलंबित करें और फिर जांच करवायें.

          सभापति महोदय-  कृपया माननीय मंत्री जी की बात सुन लें.

         

          श्री रामनिवास रावत-  मंत्री जी आप कुछ न बतायें केवल यह बता दें कि आपकी क्‍या मजबूरी है ?

....(व्‍यवधान)....

          श्री लाल सिंह आर्य-  माननीय सभापति जी, लाल सिंह आर्य की न कोई मजबूरी है, न कोई दबाव है और न ही कोई प्रभाव है. केवल 15 दिवस का नोटिस है, उसमें से भी 6-7 दिन निकल गए हैं. यदि 15 दिवस के अंदर उनका जवाब संतोषजनक नहीं आता है तो हम उनके खिलाफ कार्यवाही करेंगे.

          श्री रामनिवास रावत-  इसका मतलब आप लोकायुक्‍त की जांच को नहीं मानेंगे.

          श्री निशंक कुमार जैन-  माननीय सभापति जी, 68 करोड़ रूपये वाले मामले में 3-3 प्रमुख सचिव जांच कर रहे हैं. मुख्‍य सचिव नोटशीट लिख रहे हैं. अब इसके बाद किसका इंतजार किया जा रहा है.

          स्‍कूल शिक्षा मंत्री (कुंवर विजय शाह)-  माननीय सभापति जी, न्‍यायालयीन प्रकरण है.

          श्री रामनिवास रावत-  अब उनको बचाने के लिए आपको खड़ा होना पड़ा. आप कृपया बचाव में न आयें.

          श्री निशंक कुमार जैन-  मंत्री जी, वह न्‍यायालयीन प्रकरण दूसरा है. वह आत्‍महत्‍या का प्रकरण है. दैनिक-भास्‍कर, पत्रिका, नव-दुनिया सभी प्रमुख समाचार पत्रों ने इसके संबंध में लिखा है. दूसरी बात मैं यह कहना चाहता हूं कि पिछली विधान सभा में 20 विधायकों द्वारा इस संबंध में प्रश्‍न लगाये गए थे. 68 करोड़ रूपये का प्रकरण और आत्‍महत्‍या वाला प्रकरण, दो अलग-अलग प्रकरण हैं. माननीय सभापति जी, इसके बाद भी जिस प्रमाण-पत्र के आधार पर भंडारी को नौकरी दी गई, वह प्रमाण-पत्र फर्जी निकला. जिसने प्रमाण-पत्र दिया है, उसने स्‍वयं कह दिया कि हमने ऐसा कोई प्रमाण-पत्र नहीं दिया है.

          सभापति महोदय-  जैन जी, आपकी सारी बात आ गई है. मंत्री जी 2 माह का समय मांग रहे हैं. अब आप बताईये कि इस 2 माह के समय में आप क्‍या चाहते हैं ?

          श्री निशंक कुमार जैन-  माननीय सभापति जी, मेरी मांग है कि ऐसा भ्रष्‍ट अधिकारी जिसके मामले में पूर्व की विधान सभा के 20 विधायकों ने प्रश्‍न लगाया, तमाम मीडिया में उसके बारे में छप चुका, एक पत्रकार ने मुख्‍य सचिव के समक्ष वल्‍लभ भवन के सामने आत्‍महत्‍या की, एक महिला प्रताड़ना की शिकायत कर रही है, आदिम जाति कल्‍याण विभाग ने उस कागज को भी दबा दिया है. महिलाओं और बच्चियों को शाम को ऑफिस टाईम के बाद उसके द्वारा बुलाया जाता है. इतनी ढेर सारी शिकायतों के बावजूद कार्यवाही नहीं की जा रही है तो माननीय मंत्री जी आप ऐसे अधिकारी को पुरस्‍कार दे दीजिये और मान लीजिये कि आपकी सरकार ऐसा ही करती है.

          माननीय सभापति जी, मैं मांग करता हूं कि उसे तत्‍काल निलंबित किया जाये और जांच करवाई जाये. यदि जांच में वह निर्दोष साबित होता है तो उसे बहाल कर दीजियेगा.

          कुंवर विजय शाह-  माननीय सभापति जी, यह तो पूरा भाषण है.

          श्री अजय सिंह-  माननीय सभापति जी, विधायक महोदय भाषण नहीं दे रहे हैं. अपनी पीड़ा तथ्‍यों के साथ बता रहे हैं कि मध्‍यप्रदेश में किस तरह से भ्रष्‍टाचारी लोगों को मंत्री महोदय बचाने की कोशिश कर रहे हैं.

          कुंवर विजय शाह-  माननीय सभापति जी, यह कार्यवाही से विलोपित होना चाहिए.

          श्री रामनिवास रावत-  माननीय सभापति जी, क्‍यों विलोपित किया जाना चाहिए. क्‍या लोकायुक्‍त की जांच को भी आप विलोपित कर देंगे ? आपका ही जवाब है कि लोकायुक्‍त की जांच में प्रथमदृष्‍टया वह दोषी पाया गया है.

          कुंवर विजय शाह-  माननीय सभापति जी, मेरा निवेदन है कि मंत्री जी और शासन द्वारा किसी को बचाने का सवाल ही नहीं उठता है. जो नियम है, उसका पालन तो सभी के लिए होगा. मंत्री जी ने कहा है कि 15 दिनों में यदि जांच नहीं होती है तो कार्यवाही करेंगे.

          श्री रामनिवास रावत-  मेरे भाई, वह प्रथमदृष्‍टया लोकायुक्‍त की जांच में दोषी है.

          सभापति महोदय-  15 दिन में ? जैन जी, विजय शाह जी ने 15 दिन कह दिया है. अब तो ठीक है ?

....(व्‍यवधान)....

          सभापति महोदय-  माननीय लाल सिंह जी स्‍वयं जवाब देने में सक्षम हैं. विजय शाह जी, कृपया आप उन्‍हें जवाब देने दें. 

            श्री हितेन्‍द्र सिंह सोलंकी-  माननीय सभापति जी, विपक्ष में अब यही हो रहा है कि 2-2, 3-3 लोग एक साथ बोल रहे हैं और कोई किसी की बात सुनना ही नहीं चाहता है, न ही समझना चाहता है. यह तो गलत बात है.

          श्री निशंक कुमार जैन-- माननीय सभापति महोदय, मुझे समझ नहीं आता चीफ सेक्रेटरी लिखते हैं, प्रिंसिपल सेक्रेटरी लिखते है, लोकायुक्‍त लिखते हैं, ई.ओ.डब्‍ल्‍यू. लिखता है हर चीज मानी जा रही है. माननीय मंत्री जी इसके बाद भी क्‍यों बचाया जा रहा है. माननीय मंत्री जी आप निलंबन कर दीजिए. (व्‍यवधान)

          सभापति महोदय-- मंत्री जी कुछ कहना चाह रहे हैं आप सुन तो लीजिए. (व्‍यवधान)

          श्री निशंक कुमार जैन-- माननीय मंत्री जी निलंबन करा कर जांच कर लीजिए. 

          राजस्‍व मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्‍ता)-- माननीय सभापति महोदय, माननीय मंत्री जी ने बड़े ही स्‍पष्‍ट रूप से कहा दो महीने में कार्यवाही करेंगे और नोटिस दिए हुए समय हो गया है 15 दिन बचे हैं.

          श्री निशंक कुमार जैन-- माननीय मंत्री जी वह सब अलग अलग मामले हैं मेरा कहना यह है कि इतने सारे प्रमाण तमाम मीडिया में तमाम टी.व्‍ही. चैनलों पर चले तमाम प्रिंट मीडिया में चले जांच हुई अब इसके बाद जांच के लिए क्‍या बचा है?

          सभापति महोदय-- आप सुन लीजिए वह क्‍या कह रहे हैं. उन्‍होंने दो महीने का समय कहा है और उसमें से अब दिन का समय बचा है.

          श्री निशंक कुमार जैन--  सभापति महोदय, वह 15 दिन वाला मामला ड्राइवर का है. 68 करोड़ का मामला दूसरा है. महिलाओं वाला मामला तीसरा है.

          सभापति महोदय-- आप सुनना नहीं चाहते हैं आपकी बात स्‍पष्‍ट हो रही है. आप मेरी पूरी बात सुन लें. दो महीने का समय उनने आज से नहीं मांगा है जब से नोटिस जारी हुआ है तब से मांगा है. विजय शाह जी के अनुसार उसमें 15 दिन बचे हैं. वह एक प्रकरण की बात नहीं कर रहे हैं सम्‍पूर्ण प्रकरण में 15 दिन के अंदर वह कार्यवाही कर देंगे.  इससे ज्‍यादा आप क्‍या चाहते हो. ऐसा नहीं होता है कि तत्‍काल कार्यवाही हो.

          कुंवर विजय शाह -- 15 दिन बाद कार्यवाही करेंगे फिर खुद चला जाएगा.

          श्री निशंक कुमार जैन--  माननीय स्‍कूल शिक्षा मंत्री जी आप सुन लीजिए.

          सभापति महोदय-- धैर्य रखें और समझें. 15 दिन के अंदर कार्यवाही पर परिणाम आपको दे देंगे इससे ज्‍यादा आपको क्‍या चाहिए.

          श्री निशंक कुमार जैन-- सभापति महोदय, 15 दिन का ड्राइवर का मामला है.

          सभापति महोदय-- उन्‍होंने सारे मामलों की बात कही है.

          श्री  निशंक कुमार जैन-- नहीं उन्‍होंने नहीं कहा. 15 दिन का कहा है ड्राइवर वाला.

          सभापति महोदय-- माननीय मंत्री जी आप स्‍पष्‍ट कर दें कि आप 15 दिन के अंदर पूरी कार्यवाही कर देंगे.

          श्री निशंक कुमार जैन-- सभापति महोदय, वह निलंबन क्‍यों नहीं करते.

          सभापति महोदय-- ऐसा नहीं है कि आप जो कहें वह हो जाए.   

          श्री निशंक कुमार जैन-- जिस अधिकारी को पूरे लोग दोषी मान रहे हैं, चीफ सेक्रेटरी दोषी मान रहे हैं .

          सभापति महोदय-- आपको जवाब लेना है कि नहीं लेना है. आपकी पूरी बात आ गई है और आपका जवाब मिल रहा है.

          श्री लाल सिंह आर्य-- निशंक जी, आप जो मामला उठा रहे हैं कि एक साल से.....

          सभापति महोदय-- मंत्री जी आप अपनी  लंबी बात रख रहे हैं बहुत लंबा समय हो गया है.आप सीधा- सीधा एक लाइन में जवाब दे दें आपने दो महीने किया था विजय शाह जी ने 15 दिन कर दिया है. 15 दिन पर सहमति देकर खत्‍म करें.

          श्री लाल सिंह आर्य-- माननीय सभापति महोदय, मैंने बहुत स्‍पष्‍ट कहा. मेरे पास अभी विभाग आया.

          सभापति महोदय-- उससे पहले वाले मंत्री जी ने कह दिया.

          श्री लाल सिंह आर्य-- सभापति महोदय, सुन तो लें. मैंने बहुत स्‍पष्‍ट कहा है कि मैं खुद भी देखूंगा. माननीय सभापति महोदय, किसी भी भ्रष्‍टाचारी को बचाने का सवाल ही नहीं है पूरी जांच, दोनों चीजें एक महीने के अंदर करके विधायक जी को सूचना दूंगा. किसी को बचाने का सवाल ही नहीं है. अगर किसी ने शासन को नुकसान पहुंचाया होगा तो.

          श्री निशंक कुमार जैन--- सभापति महोदय, जिसका प्रमाण पत्र असत्‍य, जिसकी नौकरी असत्‍य, जिसने 68 करोड़ रुपए लिए चीफ सेक्रेटरी ने मीटिंग ली, उनकी मीटिंग के बाद ए.सी.एस. फायनेंस, पी.एस. एस.टी......

          सभापति महोदय--  माननीय सदस्‍य आप अपनी बात समाप्‍त करें. अब निशंक जी जो बोल रहे  हैं कुछ नहीं लिखा जाएगा. जो मंत्री जी ने कह दिया उसके अनुसार एक महीने के अंदर कार्यवाही हो जाएगी.

          श्री निशंक कुमार जैन-- (XXX)

12.59 बजे                                 याचिकाओं की प्रस्‍तुति

 

          सभापति महोदय-- आज की कार्यसूची में सम्मिलित सभी याचिकाएं प्रस्‍तुत की गईं मानी जाएंगी.

 

 

 

12.59 बजे                           बहिर्गमन