मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा                                                                              त्रयोदश सत्र

 

 

फरवरी-मई, 2017 सत्र

 

मंगलवारदिनांक 21 मार्च, 2017

 

( 30 फाल्‍गुनशक संवत्‌ 1938 )

 

 

[खण्ड-  13  ]                                                                                                [अंक- 15 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

मंगलवारदिनांक 21 मार्च, 2017

( 30 फाल्‍गुनशक संवत्‌ 1938 )

विधान सभा पूर्वाह्न 11.02 बजे समवेत हुई.

{ अध्यक्ष महोदय (डॉ. सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर

 

 

            प्रश्न संख्या 1     (अनुपस्थित)

         

पन्‍ना जिले में हीरा भंडार क्षेत्रों का आवंटन  

[खनिज साधन]

2. ( *क्र. 6881 ) श्री बाला बच्‍चन : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) छतरपुर जिले के पन्‍ना में हीरा भंडार क्षेत्र को किन शर्तों पर रियों टिंटों को खुदाई हेतु आवंटित किया गया था? अनुबंध की प्रति उपलब्‍ध करावें तथा बतावें कि क्‍या उन्‍होंने आवंटित भूमि पर ही तयशुदा खनन किया था? इसकी प्रमाणित जानकारी देवें (ख) कंपनी ने उपरोक्‍त भूमि पर स्‍थायी/ अस्‍थायी प्रकृति के कितने निर्माण किए? भूमि वापस करते समय कंपनी द्वारा दी गई सभी संपत्ति स्‍थायी/अस्‍थायी की सूची उनके क्षेत्रफल सहित देवें? यदि भवन है तो भवन के कमरों इत्‍यादि की भी पूर्ण जानकारी देवें? यदि कक्ष या वाहन हैं तो उनके बारे में भी बतावें? (ग) कंपनी ने विगत 10 वर्षों में कितने मूल्‍य का हीरा उपलब्‍ध कराया? उसकी सूची देवें (घ) उपरोक्‍तानुसार अपनी मर्जी से सेवा शर्तों को पूरा किए बिना काम छोड़कर जाने वाली कंपनी एवं इसकी निगरानी करने वाले जिम्‍मेदार अधिकारियों पर शासन कब तक कार्यवाही करेगा?

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) प्रश्‍नाधीन जिले के पन्‍ना क्षेत्र में प्रश्‍नाधीन कंपनी को हीरा भण्‍डार के खनन हेतु कोई क्षेत्र आवंटित नहीं किया गया है। अत: शेष प्रश्‍न उ‍पस्थित नहीं होता। (ख) से (घ) प्रश्‍नांश (क) में दिये उत्‍तर के प्रकाश में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

 

          श्री बाला बच्चन--माननीय अध्यक्ष महोदय, एक लिपिकीय त्रुटि के कारण मेरे प्रश्न का उत्तर ही सरकार ने गायब कर दिया है इससे ऐसा लगता है कि सरकार रियो टिंटों कम्पनी के साथ में खड़ी है.

          अध्यक्ष महोदय--आप पूरा पूछ लीजिये.

          श्री बाला बच्चन--माननीय अध्यक्ष महोदय, सर्वविदित है, हम सब जानते हैं कि हीरा भण्डार क्षेत्र केवल छतरपुर एवं पन्ना जिले में ही है. सरकार ने मेरे प्रश्न के उत्तर को गायब कर दिया है. मैं आपका संरक्षण चाहता हूं कि कल भी मेरे 19 वें नंबर पर प्रश्न था, वह आ नहीं पाया था. सरकार ने मेरे प्रश्न का उत्तर क्यों नहीं दिया ? मैं यह जानना चाहता हूं कि किन शर्तों पर हीरा भण्डारण क्षेत्र रियो टिंटों कम्पनी को दिया गया था उन शर्तों का पालन क्यों नहीं किया बीच में कंपनी काम छोड़कर के क्यों चली गई ? कितने मूल्य के हीरे सरकार को मिलने थे वह नहीं मिले ? दूसरा जिन शर्तों के साथ अनुबंध हुआ था उसकी कापी दिलवा दें.

           श्री राजेन्द्र शुक्ल--माननीय अध्यक्ष महोदय, रियो टिंटों कम्पनी को प्रॉसप्रेक्टिंग लायसेंस 2007 में दिया गया था. 2008 में 25 तथा 45 स्क्वायर किलोमीटर के लिये दिया था. इसमें अनुबंध की कापी उपलब्ध हो जाएगी, दिक्कत नहीं है. लेकिन प्रॉसप्रेक्टिंग लायसेंस के बाद उन्होंने लगभग 1 हजार हैक्टेयर में एमएल के लिये भी एप्लाई किया था. इसका मतलब कि उनको हीरे का भण्डारण मिला है जिसके आधार पर ही एमएल के लिये एप्लाई किया है. यह प्रकरण भारत सरकार में प्रोसेस में था. इसी बीच में रियो टिंटों कम्पनी ने अपनी इंटरनल नीति हर वर्ष उनके बोर्ड में तय होती है. उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी निर्णय लिया कि यहां पर इन्वेस्टमेंट नहीं करना  है तो उन्होंने उस क्षेत्र को छोड़ने का प्रस्ताव दिया, जिसका उनको अधिकार है. इसमें न तो किसी शर्त का उल्लंघन हुआ है. उनको खनिज की खोज के लिये लायसेंस मिला था उन्होंने खनिज खोजा भी, लेकिन आगे न बढ़ने का उनका अपना निर्णय है उसमें हम उनको बाध्य नहीं कर सकते थे. इसीलिये किसी भी शर्त के उल्लंघन का कोई सवाल ही नहीं उठता ?

            श्री बाला बच्चन--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं यह चाहता हूं कि कितने मूल्य के हीरे सरकार को मिलने थे दूसरा अनुबंध की कापी कब तक उपलब्ध करवा देंगे, क्योंकि जहां तक मेरी जानकारी में है और मैंने जिस कारण से इस प्रश्न को लगाया है कि बड़ी मात्रा में हीरो की चोरी हुई है. इस कंपनी ने बड़ी मात्रा में हीरे चुराये हैं. एक तरफ आपकी ही पार्टी बोलती है कि इंग्लैंड में जो कोहिनूर हीरा है उसको हम वापस लायेंगे. पिछले 10 सालों में रियो टिंटों कंपनी मूल्य के हीरे हमारे यहां से फिर चुराये हैं. दूसरा जिन शर्तों का अनुबंध हुआ था उसकी कापी कब तक उपलब्ध करवा देंगे ?                                                           

            श्री राजेन्द्र शुक्ल--अध्यक्ष महोदय, अनुबंध की कॉपी तो कल ही मिल जाएगी. आदरणीय बाला बच्चन जी बहुत सीनियर मेम्बर हैं और उप नेता प्रतिपक्ष भी हैं इसलिए यह कहना ठीक नहीं है और अच्छा नहीं लगता कि कितने मूल्य के हीरे चुराये. वास्तव में इसमें 64 लाख रुपये की रॉयल्टी उन्होंने उस रॉ डायमण्ड के लिए जमा की है जिसको सेम्पलिंग के लिए वह बाहर ले जाते थे यह देखने के लिए कि इसमें किस क्वालिटी का डायमण्ड है.

          अध्यक्ष  जी, आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि उन्होंने लगभग 15 लाख रुपये के हीरे जिसको लौटाने के लिए वह बाध्य नहीं हैं क्योंकि उन्होंने रॉयल्टी जमा कर दी है. उसके बाद भी 15 लाख रुपये के हीरे, जब उन्होंने यह फैसला किया कि अब हमको आगे यहां काम नहीं करना है, वापस किए. दूसरा लगभग 50 लाख रुपये की गाड़ियां जिसमें एम्बुलेंस, मार्शल महिन्द्रा आदि एक प्रकार से राज्य शासन को दान किया है. इसके अलावा 32 एकड़ जमीन जिसकी कीमत लगभग 18 करोड़ रुपये है वह जमीन उन्होंने एक प्रकार से राज्य शासन को ऑफर की है कि हम इसको छोड़ कर जाना चाहते हैं, इसको आप स्वीकार कर लें. यह एक बहुत बड़ी कंपनी है उनके लिए करोड़ की प्रापर्टी ज्यादा मायने नहीं रखती होगी इसलिए उन्होंने उसको दान के रुप में दे दिया है. अध्यक्ष महोदय, क्या वह हीरे चुराएंगे जिसका कमर्शियल प्रोडक्शन शुरु ही नहीं हुआ! प्रॉस्पेक्टिंग लायसेंस के माध्यम से जिस हीरे को निकाला उसमें पहले कोर निकालते हैं, फिर कोर को क्रश करते हैं, फिर मेटल बनाते हैं, फिर मेटल को बंगलुरु की लेब में ले जाकर उसको और पीस कर उसमें से डायमण्ड निकालते हैं और फिर उसकी कटिंग और पॉलिसिंग होती है. उसमें 2762 कैरेट हीरे जिसका बाजार मूल्य 15 लाख रुपये है वह भी उन्होंने जमा कर दिया है जो कि कोष में सुरक्षित है. इसलिए हीरे चुराने का कहना मुझे नहीं लगता कि उचित है.

          श्री बाला बच्चन--अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मैं मंत्री जी की जानकारी में लाना चाहता हूं कि 20 फरवरी को आपके मंत्रिमंडल की मंत्री जो कि छतरपुर-पन्ना से ताल्लुक रखती हैं, उन्होंने इस बात को कहा था कि बीच में इस कंपनी का छोड़ कर जाना संदेह पैदा करती है. अध्यक्ष महोदय, अभी मंत्री जी ने बोला कि हम कंपनी को बाध्य नहीं कर सकते हैं. मैं समझता हूं कि इतना बड़ा कारोबार करने वाली कंपनी, दुनिया की रेप्युटेड कंपनी जिसके साथ अनुबंध किया तो आप किन बातों का अनुबंध करते हैं कि हम उसको बाध्य नहीं कर सकते तो क्या इस तरह की पुनरावृत्ति मध्यप्रदेश में कराते रहेंगे और अरबों रुपये के पन्ना-हीरा की चोरी सरकार कराती रहेगी? आप कंपनी को बाध्य क्यों नहीं कर सकते? यह पूरा मध्यप्रदेश जानना चाहता है. आपके मंत्रिमंडल की एक मंत्री ने इस बात पर संदेह जताया है. मंत्री जी, हम अनुबंध करते हैं, शर्ते लगाते हैं उनका सरकार पालन क्यों नहीं कराती है?

           पंचायत और ग्रामीण विकास,मंत्री(श्री गोपाल भार्गव)-- बाला भाई ! मंत्री जी ने इतना स्पष्ट उत्तर दिया है. मुझे लगता है आपने रात में ज्वेल थीफ फिल्म देखी होगी.

          श्री बाला बच्चन-- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने अनुबंध की प्रति कल तक उपलब्ध कराने की बात कही. मैं उसके लिए आपको धन्यवाद देता हूं. वह प्रति उपलब्ध कराइये उसके बाद आपसे फिर और जानना चाहूंगा. धन्यवाद.

         

           निशातपुरा पन्‍नानगर योजना में आवास आवंटन  

[नगरीय विकास एवं आवास]

3. ( *क्र. 5712 ) श्री चम्पालाल देवड़ा : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) गृह निर्माण मण्‍डल द्वारा संचालित आवासीय योजना में क्‍या सभी आवश्‍यक स्‍वीकृति प्राप्‍त होने के पश्‍चात् भवन पंजीयन का विज्ञापन जारी किया जाता है? यदि हाँ, तो निशातपुरा पन्‍नानगर योजना में नगर एवं ग्राम निवेश विभाग द्वारा अनुमति प्राप्‍त किये बिना ही योजना में पंजीयन हेतु विज्ञापन जारी कर राशि क्‍यों प्राप्‍त की गई? क्‍या यह कार्यवाही नियमानुसार थी? बोर्ड की योजना अनुसार भवन निर्माण में विलंब होने से क्‍या योजना आर्थिक दृष्टि से बोर्ड के लिये या पंजीयनकर्ता की दृष्टि से हितकारी नहीं होती है? यदि नहीं, तो इस योजना को बोर्ड द्वारा आर्थिक दृष्टि से हितकारी नहीं बताकर प्रकोष्‍ठ योजना क्‍यों लागू की गई? (ख) क्‍या इस योजना को वर्ष 2013 में पुन: जीवित करने हेतु आवेदकों द्वारा माननीय मुख्‍यमंत्री/बोर्ड अध्‍यक्ष, प्रमुख सचिव, आवास एवं पर्यावरण, म.प्र. शासन से निवेदन करने पर योजना को शासन द्वारा पुन: स्‍वीकृति दी गई? यदि हाँ, तो उन आवेदकों की सहमति लिये बिना ही स्‍वतंत्र भवन प्रकोष्‍ठ से बहुमंजिला भवन निर्माण की योजना बोर्ड द्वारा अपनी मर्जी से क्‍यों स्‍वीकृत की गई? (ग) क्‍या शासन इस योजना में शेष बचे आवेदकों जिनके द्वारा पंजीयन राशि वापिस नहीं ली गई है, उन्‍हें पंजीयन के आधार पर स्‍वतंत्र भवन निर्मित कर उसी मूल्‍य पर आवास उपलब्‍ध कराकर शेष भूमि पर प्रकोष्‍ठ के निर्माण की कार्यवाही करने के निर्देश देगा? (घ) यदि उसी स्‍थान पर भवन उपलब्‍ध कराने में बोर्ड को कठिनाई है तो नगर निगम सीमा के अंतर्गत उसी क्षेत्रफल या आवेदकों की मांग अनुसार भवन/भूखण्‍ड पूर्व भवन के मूल्‍य को आधार मानते हुए उपलब्‍ध करायेगा? यदि हाँ, तो कब तक नहीं तो क्‍यों नहीं?

        नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जी हाँ। निशातपुरा पन्ना नगर की योजना अंतर्गत अभिन्यास नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के पत्र क्र. 2728/जी-211/29/जिला/न.ग्रा.नि./2005 दिनांक 21.09.2005 द्वारा 1158 ई.डब्ल्यू.एस. प्रकोष्ठों हेतु स्वीकृत था। उक्त योजनांतर्गत पंजीयन प्राप्त न होने से योजना पुनरीक्षित कर स्वतंत्र एम.आई.जी. भवनों के निर्माण करने की दृष्टि से योजना का अभिन्यास पुनरीक्षित हेतु दिनांक 25.05.2009 को नगर तथा ग्राम निवेश विभाग को अनुमोदन हेतु प्रेषित किया गया। पुनरीक्षित अभिन्यास स्वीकृति की प्रत्याशा में एम.आईजी. भवनों हेतु पंजीयन आमंत्रित किए गए। पूर्व अभिन्यास आवासीय उपयोग हेतु स्वीकृत था एवं पुनरीक्षित योजना जो कि पुनः आवासीय उपयोग की थी। अतः समस्त कार्यवाही नियमानुसार की गई। भवन निर्माण में विलम्ब होने के दृष्टिगत योजना आर्थिक दृष्टि से हितकारी होने अथवा न होने संबंधी प्रश्न उपस्थित नहीं होता। प्रश्नाधीन योजना आर्थिक दृष्टि से हितकारी नहीं होने संबंधी स्थिति का तात्पर्य यह है कि नगर तथा ग्राम निवेश विभाग द्वारा अभिन्यास का भूमि उपयोग यातायात निर्दिष्ट होने के आशय से निरस्त किया गया। अतः मण्डल द्वारा भूमि उपांतरण हेतु नियमानुसार प्रस्तुत आवेदन अंतर्गत नगर तथा ग्राम निवेश विभाग द्वारा रेलवे की सीमा से 30 मी. चौड़ा खुला क्षेत्र अभिन्यास में छोड़ने की शर्त पर भूमि उपांतरण किया गया। इस शर्त के परिप्रेक्ष्य में अभिन्यास अंतर्गत उपलब्ध होने वाली भूमि में स्वतंत्र भवनों की योजना आर्थिक रूप से साध्य न होने से प्रकोष्ठ भवनों के निर्माण की योजना प्रस्तावित की गई। (ख) जी नहीं। पूर्व में प्रस्तावित स्वतंत्र भवनों की योजना साध्य न होने से प्रकोष्ठ भवनों की योजना प्रस्तावित की गई एवं तत्समय पंजीकृत हितग्राहियों को विकल्प प्रदान किया गया कि वे प्रकोष्ठ भवनों की योजना में शामिल हो सकते हैं अथवा अपनी जमा राशि निर्धारित ब्याज सहित प्राप्त कर सकते हैं। अतः बहुमंजिला भवन निर्माण की योजना परिस्थितिजन्य होने से मण्डल द्वारा अपनी मर्जी से स्वीकृत नहीं की गई। (ग) पूर्व योजनांतर्गत शेष बचे ऐसे आवेदक जिनके द्वारा पंजीयन राशि वापिस नहीं ली गई है, उनके लिए प्रश्नाधीन योजनांतर्गत स्वतंत्र भवन निर्मित कर प्रदान करना पुनरीक्षित अभिन्यास में प्रावधान उपलब्ध न होने के परिप्रेक्ष्य में नहीं किया जा सकता है। शेष हितग्राहियों को मण्डल की रिक्त संपत्ति अथवा नवीन योजनाओं अंतर्गत वर्तमान निर्धारित मूल्य पर संपत्ति प्राप्त करने का विकल्प उपलब्ध है, जिसमें उनके द्वारा जमा राशि निर्धारित ब्याज दर पर संपत्ति के मूल्य में समायोजित की जावेगी। (घ) जानकारी प्रश्नांश (ग) अनुसार है।

 

                   श्री चम्पालाल देवड़ा--अध्यक्ष महोदय, मैं, आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी को अवगत कराना चाहता हूं कि विभाग द्वारा दिया गया उत्तर असत्य और भ्रामक है. विभाग द्वारा बताया गया कि उक्त क्षेत्र रेल यातायात के लिए प्रभावित होने से प्रोजेक्ट स्थगित कर, ले आउट परिवर्तित किया गया. जबकि वास्तव में यातायात क्षेत्र हेतु न तो नगर एवं ग्राम निवेश और न ही कलेक्टर द्वारा कोई अधिसूचना जारी की गई. उक्त प्रोजेक्ट में यातायात के लिए स्थान पूर्व से ले आउट में ही छोड़ा गया था. केवल ले आउट परिवर्तन के नाम पर असत्य जानकारी दी गई है.

          अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी यह जानना चाहता हूं कि मंडल के दबाव में उक्त योजना में 196 में से 192 लोगों ने अपनी जमा राशि वापस ले ली. शेष 4 हितग्राही हैं जिन्होंने बैंक से कर्जा लिया था. बैंक से कर्जा लेने के बाद वे इतने डिप्रेशन में है कि वह न तो बैंक में वापस राशि जमा करा पा रहे हैं और न उनको भूखंड आवंटित हो पा रहा है. मैं, मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि जो 4 हितग्राही बचे हैं, उनको भूखंड उपलब्ध कराएंगे या जो बैंक ने उनको लोन दिया था उस पर उनको जो ब्याज देना पड़ रहा है, वह ब्याज की राशि विभाग देगा?

          श्रीमती माया सिंह - माननीय अध्यक्ष जी, आपके माध्यम से मैं सम्माननीय विधायक जी को बताना चाहती हूं कि जो माननीय विधायक जी ने कहा कि असत्य जानकारी दी गई है, तो असत्य जानकारी नहीं दी गयी है बल्कि भूमि उपांतरण मध्यप्रदेश राजपत्र में  इस शर्त के साथ प्रकाशित हुआ कि रेलवे सीमा से 30 मीटर तक खुला क्षेत्र रखा जाये. यह सच है, भ्रामक जानकारी नहीं है और दूसरी जानकारी जो वह चाह रहे हैं  4 आवेदकों के बारे में, तो शेष जो 4 आवेदकों ने राशि प्राप्त नहीं की है  तो हाऊसिंग बोर्ड द्वारा जो पूर्व में देवकी नगर योजना में निर्मित क्षेत्रफल है वह है 46.80 वर्गमीटर का, और अब उन्हें इससे दुगुने से ज्यादा क्षेत्रफल 95.50 वर्गमीटर का भवन दिया जाना प्रस्तावित किया है जिसमें उनके द्वारा पूर्व में जमा राशि का मय ब्याज समायोजन भी कर दिया जायेगा. उनको यह विकल्प सुझाया है और इस विकल्प के अनुसार नवीन योजना में इस भवन का मूल्य 18.30 लाख रुपये निर्धारित है. उनकी जो राशि जमा थी जैसा आप कह रहे हैं कि उन्होंने बैंक से ली थी तो इसके लिये विभाग उनको ब्याज दे रहा है. उनके पास आप्शन भी हैं. मुझे जो जानकारी है कि यह जो 4 लोग हैं जिसमें से एक व्यक्ति ने जिनका 46.80 वर्गमीटर क्षेत्रफल का पैसा जमा है उसमें केवल 1 लाख रुपये की राशि ही उन्होंने दी है और उसका भी ब्याज विभाग उन्हें लगातार दे रहा है. उनको आप्शंस दिये हैं मकान के लिये भी और पहले से ज्यादा वर्गमीटर क्षेत्रफल का प्लाट देने के लिये भी, अगर वह इसके लिये तैयार हैं तो उनको मकान के लिये भी, और उनकी जो राशि जमा है उस पर हम ब्याज दे रहे हैं. निर्णय उनको ही करना है. दोनों ही आप्शंस उनके लिये खुले हैं.

          श्री चंपालाल देवड़ा- अध्यक्ष महोदय, इसका निराकरण कब तक कर लिया जायेगा ?

            श्रीमती माया सिंह -  माननीय अध्यक्ष जी, 2 आप्शंस उनको दिये हैं. उसमें से वे जो चुनना चाहें हम दोनों के लिये तैयार हैं  उनकी मदद के लिये.

          अध्यक्ष महोदय -  कीमत में कितना डिफरेंस है दोनों आप्शंस में, उतने महंगे मकान शायद वे नहीं ले सकें. यह उनका विषय हो सकता है.

          श्रीमती माया सिंह - अध्यक्ष जी, नंबर वन पर जिनका नाम है उनके लिये मैं कहना चाहती हूं कि उन्होंने 1 लाख रुपये की राशि भूखण्ड के लिये जमा कराई थी और इसका बाकायदा ब्याज इन्हें मिल रहा है और पहले 9 लाख 65 हजार रेट था और अब 18 लाख 30 हजार है और साईज दुगुने से ज्यादा है. कीमत भी ज्यादा नहीं है और उनको पहले से ज्यादा आप्शन मिल रहा है.     

          श्री चंपालाल देवड़ा - धन्यवाद अध्यक्ष महोदय.

ग्‍वालियर जिले में अवैध उत्‍खनन पर कार्यवाही

[खनिज साधन]

4. ( *क्र. 6715 ) श्री लाखन सिंह यादव : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्‍वालियर जिले में प्रश्‍न दिनांक की स्थिति में किस-किस प्रकार के खनिज के उत्‍खनन करने की स्‍वीकृति किस-किस सर्वे नम्‍बरों से किस-किस व्‍यक्ति, ठेकेदार या फर्म को किस-किस दिनांक से किस दिनांक तक की अवधि तथा कितने राजस्‍व की प्राप्ति के लिये दी गई है? (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार स्‍वीकृत खदानों से 01 अप्रैल 2016 से प्रश्‍न दिनांक तक कितना-कितना राजस्‍व प्राप्‍त हुआ है? अलग-अलग खदानवार स्‍पष्‍ट करें (ग) ग्राम मोहना के सर्वे क्रमांक 314/1 अफरोज खान पुत्र सुल्‍तान खान के नाम से 18.08.2009 से 17.08.2019 तक के लिये खदान स्‍वीकृत थी? क्‍या श्री अफरोज खान द्वारा उक्‍त सर्वे नंबर की खदान को निरस्‍त करा दिया था? यदि हाँ, तो निरस्‍ती आदेश की प्रति दें? क्‍या उस खदान पर मोहना पुलिस की देख रेख में तथा खनिज विभाग के कर्मचारियों/अधिकारियों की मिली भगत से लाखों रूपयों का अवैध उत्‍खनन किया जा रहा है? यदि नहीं, तो क्‍या प्रश्‍नकर्ता विधायक के साथ भोपाल से वरिष्‍ठ अधिकारियों की टीम गठित कर जाँच कराई जा सकती है? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों? (घ) ग्‍वालियर जिले में स्‍वीकृत रेत की खदानों से किस-किस प्रकार के वाहनों से कितनी-कितनी मात्रा के लिये      कितनी-कितनी रॉयल्‍टी वसूली का प्रावधान है? नियम की प्रति उपलब्‍ध करावें ठेकेदार द्वारा अधिक राशि वसूलने के लिये क्‍या दण्‍डात्‍मक कार्यवाही का नियम है? यदि है तो प्रति उपलब्‍ध करावें? क्‍या ठेकेदार द्वारा रसीद में लिखी राशि का 5-6 गुना अधिक अवैध वसूली की जा रही है? यदि हाँ, तो क्‍यों? यदि नहीं, तो क्‍या इसकी जाँच कराई जावेगी?

            खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) एवं (ख) प्रश्‍नानुसार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) जी हाँ। जी नहीं। अपितु प्रश्‍नाधीन खदान को माननीय एन.जी.टी. नई दिल्‍ली के प्रकरण क्रमांक 34/2016 में माननीय एन.जी.टी. के आदेश दिनांक 04.05.2016 के परिप्रेक्ष्‍य में कलेक्‍टर कार्यालय, जिला ग्‍वालियर के आदेश दिनांक 31.05.2016 से बंद की गई है। जी नहीं। जिले में समय-समय पर जाँच की कार्यवाही की जाकर, पाए जाने पर अवैध उत्‍खननकर्ताओं एवं परिवहनकर्ताओं पर कार्यवाही की जाती है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) मध्‍यप्रदेश गौण खनिज नियम, 1996 में रेत खनिज की रॉयल्‍टी प्रति घनमीटर की दर रूपए (रूपये 100/- प्रति घनमीटर) अधिसूचित है। परिवहित की जा रही रेत की मात्रा के आधार पर रॉयल्‍टी लिये जाने का प्रावधान है। वाहन के आधार पर रॉयल्‍टी लिये जाने के प्रावधान नहीं है। रेत का विक्रय मूल्‍य खदान के उच्‍चतम बोली के आधार पर निर्भर होता है। ठेकेदार द्वारा बाजार में किस दर पर रेत खनिज का विक्रय किया जायेगा, ऐसे कोई प्रावधान नियमों में नहीं हैं। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

 

          श्री लाखन सिंह यादव - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने अपने प्रश्न के "" में जानना चाहा था कि ग्वालियर जिले के ग्राम पंचायत मोहना के सर्वे क्रमांक 341/1, अफरोज खान,पुत्र सुलतान खान के नाम से  दिनांक 18.8.2009 से 17.8.2009 तक एक खदान स्वीकृत थी. किन्हीं कारणवश आवेदक द्वारा यह खदान निरस्त करने के लिये कलेक्टर,ग्वालियर को आवेदन दिया था. मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से अपने प्रश्न के माध्यम से जानना चाहा था कि वह खदान यदि निरस्त हुई तो उसकी निरस्ती की कापी आप मुझे उपलब्ध कराएंगे क्या ? जैसी मुझे जानकारी है कि उस खदान से अभी भी लंबे पैमाने पर मोहना के थाना प्रभारी द्वारा बड़े पैमाने पर  अवैध उत्खनन कराया जा रहा है. क्या आप इसकी जांच कराएंगे ?

            श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अवैध उत्‍खनन की जांच जरूर करा लेंगे, उसमें कोई दिक्‍कत नहीं है. जहां तक आपने आदेश की कापी मांगी है, कलेक्‍टर ग्‍वालियर के आदेश दिनांक 31.05.2016 से बंद की गई इस खदान की कापी मिल जायेगी.

          श्री लाखन सिंह यादव--  आप जांच किस स्‍तर के अधिकारी से करायेंगे और क्‍या उसमें क्षेत्रीय विधायक को शामिल रखेंगे ? वैसे कोई आपत्ति नहीं है अगर आप रख लें तो.

          श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल--  जिस बड़े अधिकारी से आप कहेंगे जांच करा लेंगे. किसी खदान में माननीय विधायक जांच करने के लिये जायें वह विधायक की गरिमा के हिसाब से सही नहीं है.

          श्री लाखन सिंह यादव-- मेरे क्षेत्र का मामला है, नहीं तो आपके लोग जायेंगे और गोल-मोल जांच करके लायेंगे जैसा पूर्व में होता रहा है.

          डॉ. गोविंद सिंह--  जब विधायक को अपनी गरिमा का ख्‍याल नहीं है तो आप क्‍यों चिंता कर रहे हो. आप इतने शुभचिंतक हो गये.

          स्‍कूल शिक्षा मंत्री (कुंवर विजय शाह)--  क्‍या फर्क पड़ता है गोविंद सिंह जी आप रखो या मत रखो, शासन के लिये हर माननीय विधायक महत्‍वपूर्ण है. उसकी गरिमा का ध्‍यान तो रखना पड़ता है.

          वन मंत्री (डॉ. गौरीशंकर शेजवार)--  अध्‍यक्ष महोदय, मेरी एक विनम्र प्रार्थना है कि हमेशा यह मांग आती है कि जांच के समय विधायक को भी सूचना दी जाये या बुलाया जाये. यह आज तक तय नहीं हुआ कि जांच वाली टीम में विधायक रहते हैं या जिनके खिलाफ जांच होती है उस टीम में रहते हैं. विधायक की स्थिति को तय कर दिया जाये कि वे केवल खड़े रहेंगे, पर्यवेक्षक के रूप में रहते हैं, जांच अधिकारी के रूप में रहते हैं. हमेशा यह विषय आता है. विधायक की स्थिति को आप कम से कम आसंदी से स्‍पष्‍ट कर दें कि वह किस स्थिति में वहां रहेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय--  जांच में शामिल नहीं होना चाहिये.

          श्री बाला बच्‍चन--  यह तो आपको तय करना है, सरकार को खुद को तय करना है. कितने विधायक परेशान हो रहे हैं, आये दिन यह बात आती है, लेकिन सरकार अभी तक तय क्‍यों नहीं कर पा रही है ?

          संसदीय कार्यमंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र)--  अध्‍यक्ष जी, गोविंद सिंह जी कह रहे हैं कि उनको उनकी गरिमा का ख्‍याल नहीं है. दरअसल हम सबको विधायक की गरिमा का ख्‍याल रखना है. डॉ. गोविंद सिंह जी की पार्टी उनका ख्‍याल नहीं रखती, उनको अटेर विधान सभा में स्‍टार प्रचारक से आज हटा दिया.

          डॉ. गोविंद सिंह--  कब इंकार किया है. सवाल यह है कि जब जांच पर विश्‍वास नहीं है, इसलिये विधायक के सामने थोड़ा-बहुत लिहाज करेंगे, उसके सामने गलत नहीं लिखेंगे.

          डॉ. गौरीशंकर शेजवार--  मैंने तो यह निवेदन किया था कि उस जांच में वैधानिक स्थिति क्‍या है, यह सुनिश्चित हो जाये. रोज ऐसे प्रश्‍न आते हैं. मतलब वह जांच कमेटी से ऊपर रहेंगे या केवल पर्यवेक्षक रहेंगे या केवल सामने वालों की तरफ से रहेंगे ? एक वैधानिक स्थिति होना चाहिये.

          अध्‍यक्ष महोदय--  वह अनौपचारिक है, वैधानिक नहीं है.

          पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री गोपाल भार्गव)--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम सभी विधायक इस लेजिस्‍लेटिव असेम्‍बली के मेंबर हैं. हम विधायी कार्य के लिये यहां पर बैठे हैं और चुने गये हैं, हम कोई    इंस्‍पेक्‍टर या सुपरवाइजर नहीं है, इस कारण से हमें यह कार्य नहीं करना चाहिये.

          श्री लाखन सिंह यादव--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपसे विनम्रतापूर्वक निवेदन है कि मेरे विधान सभा क्षेत्र में सबसे ज्‍यादा अवैध उत्‍खनन हो रहा है. अभी ग्‍वालियर में आपने एक बड़ी जबर्दस्‍त कार्यवाही की है उसके लिये मैं धन्‍यवाद देना चाहता हूं. पिछले 40 साल से जो क्रेशर अवैध चल रहे थे उन 23 क्रेशरों को आपने बंद किया है, वह भी मेरी विधान सभा का मामला है. मैं माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि इस जांच में मुझे रखेंगे कि नहीं ?

          अध्‍यक्ष महोदय--  जब जांच कमेटी जाये तो इनको सूचित कर दें. जांच में शामिल न करें.

          श्री लाखन सिंह यादव--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सूचित करने से क्‍या होगा ?

          श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय की जैसी व्‍यवस्‍था है वैसा कर दिया जायेगा.

          अध्‍यक्ष महोदय--  प्रश्‍न संख्‍या 5 श्री जतन उइके.

          श्री लाखन सिंह यादव--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी कुछ जवाब दे रहे हैं. (श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल जी की ओर इशारा करते हुये) अरे महाराज आप खड़े होकर कुछ तो बोल दो.

          श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय ने जो निर्देश दिया है उसका पालन होगा.

प्रश्‍न संख्‍या 5 (अनुपस्थित)

 औद्योगिक संस्‍थानों में आवंटित भू-खण्‍ड

[सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम]

6. ( *क्र. 4773 ) श्री अजय सिंह : क्या राज्‍यमंत्री, सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जनवरी 2014 से प्रश्‍न दिनांक तक रीवा संभाग में जिला व्‍यापार एवं उद्योग केन्‍द्र के औद्योगिक संस्‍थानों में आवंटित भूखण्‍डों में कितने भूखण्‍ड स्‍वामियों पर गैर-औद्योगिक गतिविधियाँ संचालित करने के लिये व्‍यवसायिक दर से भू-भाटक लेने की शास्ति (पेनाल्‍टी) आरोपित की गई? उनके नाम तथा शास्‍ति‍का विवरण क्‍या है? (ख) प्रश्नांश (क) से संबंधित ऐसे भू-स्‍वामियों से कितनी राशि वसूल की गई? कितनी राशि वसूल करना बकाया है? (ग) प्रश्नांश (ख) से संबंधित ऐसे भू-स्‍वामियों से कब तक वसूल करने तथा ऐसे भू-खण्‍डधारकों पर क्‍या कार्यवाही करने का प्रस्‍ताव है?

राज्‍यमंत्री, सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम ( श्री संजय पाठक ) : (क) रीवा संभाग के जिला व्‍यापार एवं उद्योग केन्‍द्रों के औद्योगिक संस्‍थानों में आवंटित भू-खण्‍डों में किसी भी भू-खण्‍ड स्‍वामी द्वारा गैर औद्योगिक गतिविधि का संचालन नहीं किया जा रहा है। अतएव शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ख) से (ग) प्रश्‍नांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।     

          नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह)--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा मूल प्रश्‍न पूरे प्रदेश के बारे में था. माननीय मंत्री महोदय ने जो उत्‍तर दिया है वह सिर्फ रीवा संभाग का है. हम लोगों की सबसे पहली आपत्ति तो यह है चाहे सत्‍ता पक्ष के विधायक हों या विपक्ष के. हम लोगों के प्रश्‍न टालमटोल करके कभी अस्‍वीकृत हो जाते हैं, यह तो अलग कहानी है और जो हम पूछते हैं वही उत्‍तर नहीं आता. हमने पूरे प्रदेश के क्षेत्र के बारे में पूछा था माननीय मंत्री महोदय सिर्फ रीवा संभाग का उत्‍तर दे रहे हैं कि निरंक प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता.       अध्यक्ष महोदय, पहले तो यह स्पष्ट करें कि हमारे मूल प्रश्न को क्यों संशोधित किया गया ?

            अध्यक्ष महोदय-प्रश्नों में नियम है उसके हिसाब से संशोधित कर सकते हैं .इस बारे में आप चाहें तो मुझसे कक्ष में बात कर सकते हैं.

          श्री अजय सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, ठीक है. यह पूरे प्रदेश में बड़ी समस्या है. पूरे प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र में कितनी ऐसी संस्थायें हैं जिनके ऊपर एरियर्स पेंडिंग हैं, वसूली हेतु सरकार ने नियम बनाये हैं, लोकायुक्त में प्रकरण दर्ज हो गये हैं उसके बाद जब प्रदेश की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है तो इन कंपनियों से सरकार के द्वारा पैसा क्यों वसूल नहीं किया जा रहा है ? मेरा मूल प्रश्न यह था. पहले इसका उत्तर आ जाये.

          राज्य मंत्री, सहकारिता(श्री विश्वास सारंग) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, वैसे तो पूरे प्रदेश का मामला इस प्रश्न से उद्भुत नहीं होता है. जैसा आपने भी निर्देश दिया है. प्रश्न केवल रीवा संभाग का है और रीवा संभाग में इस तरह का कोई भी प्रकरण नहीं है. जहां तक नेता प्रतिपक्ष द्वारा पेनाल्टी लगाने की बात कही है, इस तरह की पेनाल्टी लगाने का कोई भी प्रावधान नहीं है.

          श्री अजय सिंह --माननीय अध्यक्ष महोदय, उदाहरण के लिये बता देता हूं कि सिर्फ औद्योगिक केन्द्र विकास निगम, इंदौर में कम से कम हजार करोड़ रूपये की वसूली है और शासन उसके लिये चिंतित नहीं है.अध्यक्ष महोदय मेरे मूल प्रश्न को आप रीवा संभाग तक सीमित कर दीजिये वह अलग विषय है लेकिन जब प्रदेश वित्तीय संकट से गुजर रहा है, सरकार ऋण ले रही है तो क्या सरकार इस व्यवस्था को सुधारने का प्रयास नहीं कर सकती है.

          श्री विश्वास सारंग-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने पूर्व में भी निवेदन किया है कि पैनाल्टी लगाने का कोई प्रावधान नहीं है. लीज में यदि वायलेशन है तो सीधे सीधे सख्त निर्देश हैं कि 60 दिन का नोटिस दिया जाता है और 60 दिन में यदि लीज की शर्तों का उल्लंघन होता है तो उसकी लीज स्वत: समाप्त हो जाती है. पेनाल्टी लगाने का कोई भी नियम नहीं है. कौन से हजार करोड़ रूपये की रिकव्हरी की बात नेता प्रतिपक्ष कर रहे हैं. यह मेरी जानकारी में नहीं है.

          श्री अजय सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं सिर्फ मंत्री जी को जानकारी दे सकता हूं कि 150 करोड़ रूपये के संबंध में लोकायुक्त कार्यालय में क्रमांक 80 वर्ष 2016 इंदौर में प्रकरण है.600 करोड़ की आयकर की चोरी के संबंध में लोकायुक्त कार्यालय,इंदौर में प्रकरण दर्ज है. लोकायुक्त कार्यालय इंदौर में ही एक प्रकरण 260 करोड़ का प्रकरण दर्ज है.

          पंचायत मंत्री(श्री गोपाल भार्गव) -- अध्यक्ष महोदय, यह सारे प्रकरण 2003 के पहले के हैं आपको स्मरण होगा.

          श्री अजय सिंह -- अध्यक्ष महोदय, प्रकरण 2003 के पहले के हों या 1980 के हों इसका मतलब नहीं है. भार्गव जी यह आपका विभाग है क्या. आप हर विभाग में टांग अड़ाते हैं. माननीय अध्यक्ष महोदय, बात यह है कि एक गरीब किसान की बिजली का बिल एक हजार रूपये आ जाता है उसका पेमेंट नहीं होता है तो आप उस किसान को जेल भेज रहे हैं लेकिन उद्योगपतियों को इस तरह से फायदा दिलाने का काम यह सरकार कर रही है यह शर्मनाक है.

          श्री विश्वास सारंग-- अध्यक्ष महोदय, यह प्रश्न से उद्भुत नहीं होता है. विषय भी नहीं है. नेता प्रतिपक्ष ने जो प्रश्न पूछा था उसका स्पष्ट उत्तर दिया गया है. मैं फिर से रिपीट कर देता हूं कि लीज के मामले में कोई पेनाल्टी के नियम नहीं है. यह कहां के आंकड़े प्रस्तुत कर रहे हैं, मेरे ख्याल से यह भ्रामक जानकारी है.

          श्री अजय सिंह -- कोई भ्रामक जानकारी नहीं है. आप बचाओ, इसी तरह से बचाते रहो.

 

 

 

आवासीय भूमि का मालिकाना हक प्रदान किया जाना

[नगरीय विकास एवं आवास]

7. ( *क्र. 3652 ) श्री रामपाल सिंह : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्या ब्यौहारी तहसील अंतर्गत नगर पंचायत खांड में शासकीय भूमि में दुकान, भवन इत्यादि बनाकर लोग जीवन यापन कर रहे हैं? (ख) यदि प्रश्नांश (क) हाँ तो निर्मित भवन, दुकानों को मध्य प्रदेश शासन के नियमानुसार प्रत्येक आवासीय भूमि का मालिकाना हक प्रदान किये जाने के निर्णय मुताबिक उपरोक्त भवन, दुकान निर्माणकर्ताओं को मालिकाना हक प्रदान कर दिया गया है? यदि हाँ, तो कब और नहीं तो क्यों और कब तक प्रदान किया जावेगा।

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जिला शहडोल तहसील ब्‍यौहारी के नगर परिषद, खांड के अंतर्गत ग्राम चंदोली में 136 किता रकबा 84.993 हेक्‍टेयर है एवं ग्राम खांड में 17 किता रकबा 6.795 हेक्‍टेयर भूमि पर दुकान व भवन इत्‍यादि निर्मित है जो कि मध्‍य प्रदेश जल संसाधन विभाग के नाम दर्ज राजस्‍व अभिलेख है। (ख) प्रश्नांश (क) में अंकित आराजियां मध्‍य प्रदेश जल संसाधन विभाग दर्ज होने से मालिकाना हक दिया जाना संभव नहीं है।

          श्री रामपाल सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय,  नगर परिषद खांड की भूमि के मालिकाना हक के संबंध में मेरा प्रश्न था. मंत्री जी ने अपने जवाब में कहा है कि जिला शहडोल तहसील ब्यौहारी के नगर परिषद, खांड के अंतर्गत ग्राम चंदोली में 136 किता रकबा 84.993 हेक्टेयर है एवं ग्राम खांड में 17 किता रकबा 6.795 हेक्टेयर भूमि पर दुकान व भवन इत्यादि निर्मित हैं जो कि मध्य प्रदेश जल संसाधन विभाग के नाम दर्ज राजस्व अभिलेख है. माननीय अध्यक्ष महोदय, सरकार के द्वारा इस बात को स्वीकार किया गया है कि वहां पर भवन और दुकान बनाई गई हैं. मेरा प्रश्न है कि जब भवन और दुकान बन चुके हैं तो इनको मालिकाना हक क्यों नहीं दिया जाना चाहिये ?

          श्रीमती माया सिंह -- माननीय अध्यक्ष जी, यह जो भवन और दुकानें वहां पर बनी हैं. जल संसाधन विभाग बाणसागर परियोजना के स्वामित्व की भूमि पर अतिक्रमण करके यह निर्माण किया गया है. जल संसाधन विभाग की जमीन है. इसमें हम निर्णय नहीं कर सकते हैं.

          श्री रामपाल सिंह -- अध्यक्ष महोदय, यह चीजें एक दिन में तो बनती नहीं है, काफी समय इसको बनने में लगा होगा, जब यह भवन और दुकानें बन रही थीं तब तो उसमें रोक नहीं लगाई तो क्यो न उनको भवन और दुकान का मालिकाना हक दिया जाये.  मंत्री जी, वहां भवन और दुकान बन गई हैं, लोग उससे रोजगार का सृजन कर रहे हैं तो उन लोगों को भूमि का मालिकाना हक मिले इसके लिये प्रावधान भी सरकार को करना चाहिये.

          श्रीमती माया सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह भूमि सिंचाई जल संसाधन विभाग की है, इसलिए इसमें हम निर्णय नहीं कर सकते. हम इस पूरे प्रकरण को सिंचाई विभाग के पास परीक्षण के लिए भेज देंगे. मैं सिंचाई विभाग के माननीय मंत्री जी से भी इस प्रकरण की विभागीय स्‍तर पर परीक्षण कराने का अनुरोध करती हूं.

          श्री रामपाल सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूं कि जल संसाधन विभाग से भी सम्‍पर्क करें अगर इनका निदान हो जाता है, भवन, दुकान इनको मिल जाती है तो बड़ी मेहरबानी होगी.

          अध्‍यक्ष महोदय - जो भूमियां इनके उपयोग में नहीं आ रही हैं, वह भूमियां हस्‍तांतरित करना चाहिए. मंत्री जी ने परीक्षण कराने के लिए कहा है, जल संसाधन विभाग के उपयोग में यदि वह भूमियां नहीं आ रही है तो उनका हस्‍तांतरण कराना ही चाहिए. आप देख ले, उसका आपने आश्‍वासन दिया ही है.

          शासकीय योजनाओं में बैंक द्वारा ऋण प्रदाय

[सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम]

            8. ( *क्र. 4985 ) श्री मुरलीधर पाटीदार : क्या राज्‍यमंत्री, सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राज्य एवं केन्द्र शासन की कौन-कौन सी ऋण योजनायें एवं अनुदान सह ऋण योजनायें मध्यप्रदेश में संचालित हैं, जिनमें ऋण हेतु ग्यारण्टी या अनुदान शासन की ओर से दिये जाते हैं? योजनावार पूर्ण विवरण देवें (ख) प्रश्नांश (क) में उल्लेखित योजनाओं के क्रियान्वन में बैंकों की भूमिका की मॉनीटरिंग की कोई व्यवस्था है? यदि हाँ, तो पूर्ण विवरण देवें। (ग) उक्तानुसार योजना क्रियान्वन में बैंको द्वारा सहयोग न करने संबंधी कितनी शिकायतें विगत 03 वर्षों में जिला आगर अंतर्गत नोडल अधिकारी कलेक्टर आगर को प्राप्त हुई हैं? प्राप्त शिकायतों पर क्या कार्यवाही की गई?

            राज्‍यमंत्री, सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम ( श्री संजय पाठक ) : (क) राज्‍य एवं केन्‍द्र की योजनाएं विभिन्‍न विभागों द्वारा संचालित की जाने के कारण संबंधित विभागों से जानकारी संकलित की जा रही है। (ख) एवं (ग) जानकारी संकलित की जा रही है।

          श्री मुरलीधर पाटीदार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न बड़ा ही महत्‍वपूर्ण था, सूक्ष्‍म और लघु उद्योग के लिए और विभाग के पास कोई जानकारी नहीं है यह बड़ा अफसोस है. इससे ज्‍यादा अब क्‍या बताऊं. प्रश्‍नांश (क) की जानकारी विभाग के पास नहीं है, लेकिन प्रश्‍नांश (ख) और (ग) की जानकारी तो बहुत ही सूक्ष्‍म जानकारी थी वह जानकारी तो विभाग को देनी ही थी. माननीय अध्‍यक्ष महोदय मेरा आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री से आग्रह है कि बैंकों की भूमिका के लिए मानीटरिंग की व्‍यवस्‍था है या नहीं?

            राज्‍यमंत्री सहकारिता (श्री विश्‍वास सारंग) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वैसे विधायक जी को अफसोस नहीं करना चाहिए, क्‍योंकि प्रश्‍न का स्‍वरूप बहुत विस्‍तृत एवं वृहद है, आपने पूछा था कि राज्‍य एवं केन्‍द्र शासन की कौन कौन सी योजनाएं हैं जिसमें यह लोन मिलता है, राज्‍य की भी और केन्‍द्र की भी जानकारी पूछा था. यह बहुत वृहद सवाल था, इसकी जानकारी उपलब्‍ध कराई जा रही है.     

          श्री मुरलीधर पाटीदार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विधान सभा से तो बड़ा सवाल नहीं था.(हंसी...)

          श्री विश्‍वास सारंग - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें केन्‍द सरकार की योजनाओं के बारे में भी पूछा है. हमारा विभाग जानकारी एकत्रित कर रहा है मैं यह विश्‍वास दिलाता हूं कि जल्‍द से जल्‍द जानकारी विधायक जी को पहुंचायी जाएगी. दूसरा जो सवाल पूछा बैंकों के मामले में राज्‍य स्‍तर पर और जिला स्‍तर पर मानीटरिंग कमेटी है, जिला स्‍तर की कमेटी कलेक्‍टर की अध्‍यक्षता में है और राज्‍य स्‍तर की भी है, दोनों मानीटरिंग कमेटी में बैंक से संबंधित कोई शिकायत होती है तो निराकरण उस स्‍तर पर होता है.

          श्री मुरलीधर पाटीदार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मानीटरिंग कमेटी जिला स्‍तर पर भी होनी चाहिए और सख्‍त होनी चाहिए. एक भी शिकायत नहीं आई, इसका मतलब है वहां पर कोई हलचल ही नहीं है. मेरे विधान सभा में पांच साल से लालूखेड़ी गांव में 63 हेक्‍टेयर जमीन उद्योग विभाग को आवंटित कर दी है, इससे सीधा प्रश्‍न नहीं है लेकिन इसी प्रश्‍न का स्‍वरूप है, चूंकि मेरे विधान सभा का मामला है. मैंने विभाग से और माननीय तत्‍कालीन मंत्री से कई बार पत्र व्‍यवहार भी किया, पहले भी प्रश्‍न लगाए उस जमीन का आज तक विकास नहीं हो पाया है, ए.के.वी.एन को वह जमीन सौंपी भी गई है लेकिन उसका विकास नहीं हो पाया, क्‍या जो उद्योग लगाना चाहते हैं, उनको वह जमीन विभाग आवंटित करेगा?

            अध्‍यक्ष महोदय - यह प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता है.

          श्री विश्‍वास सारंग - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इससे कोई संबंध नहीं है.

          श्री मुरलीधर पाटीदार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, संबंध था वह तो गोल ही कर दिया, फिर उसी के बारे में बता दे.

          श्री विश्‍वास सारंग - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी का जो दूसरा प्रश्‍न था कि यदि बैंक स्‍तर पर कोई समस्‍या है तो जिला स्‍तर की मानीटरिंग कमेटी और प्रदेश स्‍तर की मानीटरिंग कमेटी पर वह विषय लेकर आए और उसका निराकरण हम स्‍वयं इन्‍ट्रेस्‍ट लेकर करेंगे.

          श्री मुरलीधर पाटीदार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी दूसरा उत्‍तर दे रहे हैं, मैं यह कह रहा हूं कि जो जमीन ए.के.वी.एन को आवंटित हुई है वह जमीन छोटे बड़े उद्योग लगाने वालों को कब तक आवंटित कर देंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय - उससे आपका यह प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता है.

          श्री मुरलीधर पाटीदार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विभाग तो वही है,  उद्भूत तो हो रहा है लेकिन मंत्री जी बता नहीं रहे हैं. इसका मतलब विभाग हमारे यहां उद्योग लगाना नहीं चाहता, तो वह जमीन किसानों को वापस दे दें. मैं तो सार्वजनिक हित की बात कर रहा हूं, इसलिए आपके माध्‍यम से आपका संरक्षण चाहते हुए पूछ रहा हूं कि विभाग यह करेगा कि नहीं करेगा ?    

          अध्‍यक्ष महोदय - श्री कैलाश चावला जी इसको स्‍पष्‍ट कर रहे हैं.                      

            श्री कैलाश चावला -- अध्यक्ष महोदय,  मैं  आपका और मंत्री जी का ध्यान   जो इस प्रश्न का  पहला चरण है,  उसकी  ओर आकर्षित करना चाहूंगा.  इसमें  विधायक जी ने  केवल योजनाओं के नाम पूछे हैं, तो इन योजनाओं  में केंद्र की कौन सी योजना है और  प्रदेश की कौन सी योजना है, इन योजनाओं के नाम बताना  कोई  व्यापक नहीं है.  योजनाओं के नाम बताया जाना चाहिये था.   मंत्री जी, क्या प्रदेश   की और केंद्र की  उन योजनाओं  के नाम गिनायेंगे, जो इस प्रश्न में पूछे गये हैं.

          श्री विश्वास सारंग --  अध्यक्ष महोदय,  बहुत विस्तृत  प्रश्न है,  लगभग   अभी की जानकारी  के हिसाब से 17 विभाग हैं, जिसमें ऐसी योजनाएं चलती हैं...

          श्री कैलाश चावला --  मंत्री जी, मैं  एक मिनट आपका लूंगा.

          अध्यक्ष महोदय --  आपकी बात का उत्तर आ गया.  अन्य सदस्यों के भी प्रश्न हैं.

          श्री कैलाश चावला -- अध्यक्ष महोदय,     पूरे प्रदेश में अगर इन   योजनाओं में    कितना  फायनेंस किया गया है, यह पूछा जाता, तो व्यापक था,  किन्तु केवल योजनाओं के नाम  पूछा जाना,  मेरे ख्याल से 25, 40 या 50 होंगीं, उन योजनाओं के नाम अगर नहीं  देंगे, तो इस प्रश्न का फिर क्या मतलब होगा.

                   श्री बाला बच्चन -- मंत्री जी, उत्तर ठीक नहीं है.  पूअर परफारमेंस है. आप अपने ही  विभाग की योजनाओं के नाम बता दो. आपकी पार्टी के दो दो विधायक कह रहे हैं.

                   श्री विश्वास सारंग --  अध्यक्ष महोदय, बाला बच्चन साहब का कैसा परफारमेंस था, यह तो हमें  एक महीने पहले  पता लग गया.  इसलिये आपके सर्टीफिकेट की कोई जरुरत नहीं है.  आपका परफारमेंस  ऐसा था कि  आप आगे आ ही नहीं पाये.  आप पीछे के पीछे ही बने रहे.

                   अध्यक्ष महोदय -- कृपया बैठ जायें. प्रश्न संख्या 9.

प्रधानमंत्री आवास योजना का क्रियान्‍वयन

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

9. ( *क्र. 4075 ) श्री नीलेश अवस्‍थी : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                 (क) प्रधानमंत्री आवास योजना क्‍या है? इस योजना अंतर्गत किस प्रकार से हितग्राहियों को पात्र मानकर किस प्रकार से आवास निर्माण का प्रावधान है? नियम की छायाप्रति देवें एवं इस योजना को कब किस प्रकार से किसके द्वारा प्रदेश में कुल कितनी धन राशि से संचालित किया जा रहा है? वित्‍त वर्ष 2016-17 में जिलेवार योजान्‍तर्गत कितना धन आवंटित किया गया? (ख) प्रश्नांश (क) में उल्‍लेखित योजना अंतर्गत पाटन विधानसभा अंतर्गत पाटन एवं मझौली विकास खण्‍डों के      किस-किस ग्राम को कितना-कितना किस श्रेणी का लक्ष्‍य दिया गया? ग्रामवार सूची देवें एवं ग्रामवार आवास निर्माण का लक्ष्‍य किसके द्वारा किस प्रकार से कब निर्धारित किया गया? (ग) प्रश्नांश (ख) में उल्‍लेखित लक्ष्‍य अनुसार किस-किस ग्राम के कितने हितग्राहियों को कितनी राशि आव‍ंटित की गई? प्रश्‍न दिनांक तक इन स्‍वीकृत प्रधानमंत्री आवासों के निर्माण की अद्यतन स्थिति क्‍या थी?     (घ) प्रश्‍नांक (ख) एवं (ग) के संदर्भ में ग्रामवार स्‍वीकृत आवास निर्माण अनुपातिक क्‍यों नहीं है? क्‍या कुछ अपात्र नाम भी इस सूची में सम्मिलित होने संबंधी शिकायतें शासन स्‍तर में प्राप्‍त हुई हैं? यदि हाँ, तो क्‍या इन स्‍वीकृत आवास निर्माण में प्राप्‍त हुईं हैं? यदि हाँ, तो क्‍या शासन इन स्‍वीकृत आवास निर्माण में हुई विसंगतियों की जाँच कराकर दोषियों पर कार्यवाही करेगा? यदि हाँ, तो कब तक यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' नुसार है। भारत सरकार ने वर्ष 2016-17 के लिए प्रदेश को 4,48,147 आवास का लक्ष्य दिया है। जिलेवार धन आवंटन नहीं किया गया है। (ख) विकासखण्ड पाटन एवं मझौली के लिए ग्रामवार लक्ष्य की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र  '' अनुसार है। प्रदेश के वर्ष 2016-17 के लक्ष्य एवं वर्ष 2017-18 के संभावित लक्ष्य के विरूद्ध राज्य स्तर से वंचितता की तीव्रता के आधार पर हितग्राहियों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। (ग) ग्रामवार धनराशि आवंटित करने की व्यवस्था नहीं है। अब तक स्वीकृत आवास अप्रारम्भ से लेकर निर्माण के विभिन्न चरणों में है। (घ) लक्ष्य का आवंटन क्षेत्रवार न होकर हितग्राहियों की परस्पर वंचितता की तीव्रता पर आधारित है। SECC-2011 में सूचीबद्ध परिवारों का भौतिक सत्यापन करने तथा ग्रामसभा में उन पर विचार करके अपात्रों के नाम हटाने की व्यवस्था की गई है। विकासखण्ड पाटन तथा मझौली से अपात्र हितग्राहियों का चयन किये जाने संबंधी कोई शिकायत प्राप्त नहीं है।

                   श्री नीलेश अवस्थी --  अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से  मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि  प्रश्नांश (ख) के उत्तर में उल्लेखित  सूची  में विसंगतियां हैं और अनुपातिक हैं. इस सूची में  मेरे विधान सभा क्षेत्र पाटन   विकासखण्ड  के ग्राम मोहला,सरखण्डी,भरतरी एवं हरदुआ तथा मझौली विकास खण्ड  के अंतर्गत  रियोंझा,बरोदा, तलवा आदि ग्राम  आवास   लक्ष्य से वंचित हैं.  तकनीकी त्रुटिवश  ये ग्राम प्रधानमंत्री आवास  योजना से वंचित हैं. क्या मंत्री जी   इस योजनांतर्गत  इन ग्रामों को  तत्काल  प्रभाव से जोड़ेंगे.  दूसरा प्रश्न यह है कि  जो सर्वे सूची में पात्र  लोग हैं, उनका नाम एसईसीसी, 2011 की सूची में नहीं हैं, क्या   सर्वे में जो  नाम पात्रता  में आये हैं,  उनको भी  प्रधानमंत्री आवास  योजना के अंतर्गत जोड़ेंगे.

                   श्री गोपाल भार्गव -- अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जैसा  जानना चाहा है कि  पात्र व्यक्तियों के नाम नहीं जोड़े गये हैं  और ग्रामवार उन्होंने  जो चाहा है कि  इसमें कई ग्राम छूट गये हैं तथा उनमें कोई भी  लाभार्थी  वहां पर नहीं पाया गया है.  मैं माननीय सदस्य को अवगत कराना चाहता हूं कि  भारत सरकार ने जो एसईसीसी,2011 की सूची  प्रकाशित  की थी,  उस सूची के आधार पर  ही  यह प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास  योजना के अंतर्गत जो आवास हैं,  उन आवासों का आवंटन  किया गया है, एसईसीसी,2011 की सूची के आधार पर.  इस कारण से  यह भी संभव हो सकता है कि  उस गांव में  कोई  भी ऐसे व्यक्ति  जो आवासहीन हों,  उस केटेगिरी में आते हों, इसमें तीन केटेगिरी हैं.  प्रथम प्राथमिकता है आवासहीन परिवार, जिसके पास  में कोई आवास नहीं हो.  जो सड़क पर सोता हो,  जो धर्मशाला  में सोता हो,  मंदिर में सोता हो, चबूतरे एवं चौपाल पर सोता हो.  पहली केटेगिरी वह है, सर्वोच्चम प्राथमिकता की.  दूसरी प्राथमिकता है कि  शून्य  कक्ष, कच्चे आवास की.  तीसरी केटेगिरी है कि  एक कक्ष  कच्चे आवास की. अब यदि इन केटेगिरीज में  इनके किसी गांव का कोई व्यक्ति  नहीं आ पाया है,  तो मैं कहना चाहता हूं कि ये प्रतीक्षा करें.  हमारा जब  फिर से ग्रामोदय  भारत अभियान  शुरु होगा, इसमें हम फिर से ग्राम सभाएं  लगाकर  और सूचियां तैयार करवायेंगे.  इसमें जो लोग शेष रहेंगे, उनके बारे में  हम विचार करेंगे, लेकिन अभी  फिलहाल हम   जो प्रधानमंत्री  आवास योजना की जो सूची है, इसमें हम कोई नया नाम   नहीं जोड़ सकते.  उसके बारे में  हम लोग  भारत सरकार  से चर्चा करके   विचार करेंगे.  जहां तक पात्रता के बारे में  बात है, तो मैं  सदस्य जी को अवगत कराना चाहता हूं कि  एक भी व्यक्ति, कोई पात्र व्यक्ति  छूट सकता है, लेकिन अपात्र व्यक्ति  इसमें नहीं  जुड़ सकता, नहीं शामिल हो सकता. यदि अपात्र व्यक्ति का नाम  किसी कारण वश सर्वे में  आ गया है, जो एसईसीसी,2011 का सर्वे है, इसमें यदि किसी अपात्र व्यक्ति  का नाम आ भी गया है, हमने बहुत पारदर्शी  एवं प्रामाणिक  व्यवस्था की है, उसको उस सूची से पृथक करने के लिये,  इसके नियंत्रण के लिये हमने  प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत  जो अपात्र व्यक्ति हैं, उनको यदि लाभ दिया जाता है और हमें सूचना मिलती है तो हम सूचना देने वाले व्‍यक्ति को चाहे उस गांव का हो या दूसरे गांव का हो, उसका नाम गुप्‍त रहेगा. उसको हम 5,000 रुपये पुरस्‍कार देंगे, यदि अपात्र व्‍यक्ति हमारे सर्वे के अन्‍दर जुड़ा पाया जाता है. दूसरा, अपात्र व्‍यक्ति को लाभ देने के लिये जिम्‍मेवार सेवायुक्‍तों को सेवा से पृथक किया जायेगा और निर्वाचित प्रतिनिधि की दशा में उन्‍हें निलंबित करते हुए उनके विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही की जायेगी. जिन लोगों ने अभी सर्वे में उनको पात्र पाया होगा जबकि वे अपात्र हैं तो हम ऐसे सभी कर्मचारियों के विरुद्ध सेवा से अलग करने की कार्यवाही करेंगे और जो अनुदान मिलेगा, जिम्‍मेदार लोगों से अनुदान वापसी की कार्यवाही भी करवाएंगे और उनके विरुद्ध एफ.आई.आर. भी दर्ज करवाएंगे. अब इससे बेहतर व्‍यवस्‍था कोई और नहीं हो सकती है. 

          श्री नीलेश अवस्‍थी - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी को बताना चाहूँगा कि मैंने जिन ग्रामों के नाम लिये हैं. उसमें अनुसूचित जाति/जनजाति, आदिवासी और जो मकानविहीन हैं. आप उसकी जांच करवा लेंगे तो सामने आ जायेंगे क्‍योंकि वहां पर ऐसे गरीब वर्ग के लोग भी रहते हैं, जिनके पास पात्रता है, लेकिन उनको मकान नहीं मिल रहे हैं. दूसरा प्रश्‍न मेरा माननीय मंत्री जी से यह है कि पूर्व में जो इंदिरा आवास योजना प्रचलन में चल रही थी, उसमें सूची फायनल हो चुकी थी, पात्र व्‍यक्तियों के नाम आ गए थे, उनको प्रथम किश्‍त मिलना था लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना आने के बाद, उन लोगों के नाम जिनके नाम सन् 2011 की सूची में थे, उनके नाम वंचित हो गए हैं. क्‍या उन लोगों के नाम भी सर्वे सूची में जोड़े जाएंगे तथा इंदिरा आवास योजना की सेकेण्‍ड किश्‍त कई हितग्राहियों को नहीं मिल रही है. क्‍या शासन उनको तत्‍काल देगी ?

          श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अब इंदिरा आवास योजना का कोई औचित्‍य नहीं है क्‍योंकि हमारे देश में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना लागू हो चुकी है. जिन लोगों का नाम सर्वे में, इंदिरा आवास योजना में नाम आया होगा. जैसा मैंने पूर्व में कहा है कि जब हमारी प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना की सूची पूरी हो जायेगी, इसके बाद हम उस पर विचार करेंगे. भारत सरकार से चर्चा करेंगे. दूसरा, जहां तक आपने कहा कि एस.सी.एस.टी. वर्ग के लोग हैं. प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में वर्ग विशेष का ध्‍यान नहीं रखा गया है, न ही देखा गया है और न उसके लिये कोई मापदण्‍ड तय किये गये हैं. उसमें जो मापदण्‍ड तय हुए हैं. वह सिर्फ यह मापदण्‍ड तय हुए हैं कि किसी वर्ग का, किसी समाज का, किसी जाति का, किसी धर्म का, कोई भी व्‍यक्ति क्‍यों न हो. यदि वह आवासहीन है तो उस व्‍यक्ति के लिए सर्वोच्‍च प्राथमिकता दी गई है.

          श्री नीलेश अवस्‍थी - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इंदिरा आवास योजना की  द्वितीय किश्‍त कब मिलेगी ?

          श्री गोपाल भार्गव - आप जैसे ही फोटो अपलोड करवा देंगे, वैसे ही द्वितीय किश्‍त जारी हो जायेगी.

          श्री नीलेश अवस्‍थी - धन्‍यवाद.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में व्‍यावहारिक कठिनाइयां हैं. जो फॉर्म हैं, बहुत जटिल हैं, इसका सरलीकरण कर दें. आपको शायद याद हो आपने कार्यवाही की थी, राजगढ़ जिले में शिकायत मिली थी. इसी तरह की शिकायतें हैं. जो माननीय विधायक जी कह रहे हैं कि वे छूट रहे हैं. इसमें व्‍यावहारिक कठिनाइयां हैं, थोड़ा ध्‍यान दे दें. जैसे राजगढ़ की घटना दूसरे जिलों में न हों.

          अध्‍यक्ष महोदय - मंत्री जी, नेता प्रतिपक्ष के प्रश्‍न का उत्‍तर दे दें.

          श्री मुकेश नायक - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर एक साथ दे दीजियेगा. आपने सन् 2011 को सर्वे सूची का आधार बनाया है. सन् 2011 के सर्वे के आधार पर इसकी प्राथमिकता हितग्राहियों की आपने तय की है. माननीय मुख्‍यमंत्री जी भी सदन में बैठे हैं. अभी सन् 2017 चल रहा है. क्‍या आप इस पर विचार करेंगे कि जो संयुक्‍त परिवार इस बीच में टूटे हैं, गरीब हो गए हैं और वे आवासहीन हो गए हैं. क्‍या आप नई सर्वे सूची जारी करके हितग्राहियों ....(व्‍यवधान)

          अध्‍यक्ष महोदय - आपकी बात आ गई है. माननीय मंत्री जी, आप दोनों विषयों पर बोल दीजिये.

          श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें दो विषय सामने आए हैं. एक तो नेता प्रतिपक्ष जी का प्रश्‍न है. जिसमें उन्‍होंने राजगढ़ जिले का उदाहरण दिया है. यह बात सही है कि सन् 2011 की सूची है और बहुत से नाम हैं चूँकि इसमें हम इस साल 4,48,000 आवास आवासहीन लोगों के लिए दे रहे हैं, हो सकता है कि इसमें कुछ संख्‍या अपात्र व्‍यक्तियों की भी जुड़ी हो और इसी कारण से आपने जो राजगढ़ जिले का उदाहरण दिया है, हो सकता है कि अन्‍य जिलों में भी ऐसी बातें सामने आई होंगी. इतना सख्‍त फैसला शायद ही हिन्‍दुस्‍तान में पहली बार हुआ है कि जो लोग सूचना देंगे उनको 5 हजार ईनाम हम देंगे. जो लोग बताएंगे कि यह आवासयुक्त है यह आपके नार्म्स के अन्तर्गत आवासहीनों की सूची में नहीं आता है उसको 5 हजार रुपए ईनाम दिया जाएगा. जो सर्वे करने वाले कर्मचारी होंगे उनके विरुद्ध सेवामुक्त करने की कार्यवाही करेंगे. यदि निर्वाचित प्रतिनिधि होंगे तो उन्हें पद से हटाने की कार्यवाही करेंगे. जो राशि जारी हो गई है उसकी रिकवरी होगी उसके बाद एफआईआर भी करेंगे. मैं सोचता हूँ इससे ज्यादा बड़ी व्यवस्था नहीं हो सकती है.

          अध्यक्ष महोदय, मुकेश नायक जी ने पूछा है कि इस बीच में परिवार बँट गए. यह बात सही है कि परिवार बँट गए, लेकिन भारत सरकार का यह कहना है कि पहले हमारा जो आवंटन है इस आवंटन को आप पूरा  दे दें, इसके बाद हम विचार करेंगे.

          प्रश्न संख्या - 10 (अनुपस्थित)

आई.ए.पी. योजनांतर्गत वेयर हाउस का निर्माण

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

11. ( *क्र. 5078 ) श्री कमल मर्सकोले : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि          (क) सिवनी जिले में जिला पंचायत सिवनी अंतर्गत वर्ष 2013 से आज दिनांक तक आई.ए.पी. योजना के तहत वेयर हाउस निर्माण कार्य हेतु लघु उद्योग निगम को कितनी-कितनी राशि प्रदान की गई? इसका वर्षवार विवरण देवें। (ख) लघु उद्योग निगम ने वर्ष 2013 से अब तक किन-किन एजेंसियों से सिवनी जिले में कहाँ-कहाँ कितनी लागत से निर्माण कराए हैं। एजेन्‍सी द्वारा कितने वेयर हाउस निर्माण कार्य पूर्ण कराए जा चुके हैं तथा कितने प्रगति पर हैं। निगम द्वारा संब‍ंधित एजेंसी को किस-किस कार्य के लिए कितना-कितना भुगतान किया गया है। (ग) जिला पंचायत सिवनी को लघु उद्योग निगम द्वारा नियुक्‍त एजेंसी से वेयर हाउस निर्माण के चलते वर्ष 2013 से आज तक कितनी शिकायतें प्राप्‍त हुई हैं और उन शिकायतों पर क्‍या कार्यवाही की गई है?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) सिवनी जिला अंतर्गत लघु उद्योग निगम को आई.ए.पी. योजना से वेयर हाउस निर्माण हेतु वर्ष 2013 में रू. 149.95 लाख, वर्ष 2014 में रू. 149.95 लाख एवं वर्ष 2015 में रू. 40.00 लाख की राशि प्रदाय की गई। (ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।

परिशिष्ट - ''एक''

          श्री कमल मर्सकोले--माननीय अध्यक्ष महोदय, सिवनी जिले में वर्ष 2013 में आई.ए.पी. योजना से पांच वेयर हाउस के कार्य स्वीकृत हुए थे. जिसकी लागत 5 करोड़ 99 लाख 85 हजार रुपए थी. जिसमें से 3 करोड़ 88 लाख 35 हजार रुपए का भुगतान हो चुका है. जितने भी कार्य आई.ए.पी. योजना से स्वीकृत हुए थे वे प्लिंथ स्तर पर ही हैं. मैं मंत्री जी से प्रश्न करना चाहता हूँ क्या वे लापरवाही बरतने वाले सक्षम अधिकारी और तकनीकी अधिकारियों पर कार्यवाही करेंगे. दूसरा प्रश्न यह है कि निर्माण कार्य में विलंब हुआ है, समयावधि का ध्यान नहीं रखा गया. चार वर्ष हो गए हैं. ऐसी स्थिति में निर्माण कार्य की जाँच कर निर्माण एजेंसी को ब्लेक लिस्ट करेंगे क्या ? क्या भुगतान की गई राशि 3 करोड़ 88 लाख 35 हजार रुपए की वसूली की कार्यवाही की जाएगी ?

            श्री गोपाल भार्गव--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह इंटीग्रेटेड एक्शन प्लान मध्यप्रदेश के 10 जिलों में चल रहा था. यह प्लान भारत सरकार द्वारा प्रवर्तित था भारत सरकार ने इसे बंद कर दिया है. यह बात सही है जो 10 जिले इनके अन्तर्गत आते हैं उनमें आई.ए.पी. योजना के अन्तर्गत जो काम चल रहे थे वे काम बंद हो गए हैं. जो राशि शेष है उसका हम दूसरे काम में उपयोग कर रहे हैं. सदस्य ने पूछा है कि तीन गोदाम तैयार हो गए हैं उनमें 339 लाख रुपए का भुगतान हो गया है. लघु उद्योग निगम उसमें निर्माण एजेंसी थी. लघु उद्योग निगम का 20 लाख रुपए इसमें बाकी है. जैसा बताया गया है कि कामों में गुणवत्ता नहीं रही है, लघु उद्योग निगम निर्माण एजेंसी थी. जैसी सदस्य की इच्छा है हम इसकी जानकारी ले लेंगे और जाँच करवा लेंगे. क्योंकि निर्माण एजेंसी लघु उद्योग निगम है, पैसा लघु उद्योग निगम में जमा हो गया है तो हम उनसे कार्यवाही करने के लिए कहेंगे.

          श्री कमल मर्सकोले--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा माननीय मंत्री जी और आपसे आग्रह है कि 5 करोड़ 99 लाख 85 हजार रुपए की राशि स्वीकृत हुई थी जिसमें से 3 करोड़ 88 लाख 35 हजार रुपए का भुगतान कर दिया गया है. सिवनी जिले में पांच कार्य प्रारंभ हुए थे जिसमें से तीन कार्य मेरे विधान सभा क्षेत्र में थे जिनमें तीन वेयर हाउस बनना थे. यह मात्र अभी प्लिंथ स्तर तक हैं. मंत्री जी सही कह रहे हैं कि योजना अभी बंद हो गई है. परन्तु जो विलंब हुआ और समयावधि में निर्माण का काम नहीं किया गया. निश्चित रुप से गुणवत्तापूर्ण कार्य हुए हैं. मेरा मंत्री जी से आपके माध्यम से आग्रह है कि क्या सक्षम अधिकारी को भोपाल से भेजकर इसकी जांच कराएंगे ? इसकी समय-सीमा क्या रहेगी ?

          श्री गोपाल भार्गव--अध्यक्ष महोदय, 15 दिन के अन्दर जाँच करा लेंगे.

          श्री कमल मर्सकोले--माननीय मंत्री जी बहुत-बहुत धन्यवाद.

          सोनकच्‍छ विधानसभा क्षेत्रांतर्गत सिटी बस का संचालन

[नगरीय विकास एवं आवास]

12. ( *क्र. 900 ) श्री राजेन्द्र फूलचं‍द वर्मा : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या शासन प्रदेश की जनता के बेहतर व सरल आवागमन व परिवहन के लिए जगह-जगह सिटी बस का संचालन कर बेहतर सुविधाएं दे रहा है? यदि हाँ, तो किस माध्‍यम से किस प्रकार की परिवहन संबंधी सुविधाएं दी जा रही हैं? (ख) क्‍या सोनकच्‍छ नगर व आस-पास के ग्रामीण क्षेत्र के हजारों छात्र-छात्राएं, व्‍यापारी, कर्मचारी महिला-पुरूष प्रतिदिन इंदौर, देवास, उज्‍जैन से सोनकच्‍छ आना जाना करते हैं? क्षेत्र में सिटी बसें नहीं चलने के कारण प्रायवेट बस मालिकों द्वारा अपनी मनमर्जी से किराया निर्धारण कर तथा बस स्‍टेशनों पर गाड़ी न लाकर सीधे बायपास से ही बसों को ले जाया जाता है, जिसके कारण विधानसभा क्षेत्र के हजारों लाखों यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है? क्‍या इसके निराकरण हेतु शासन कोई ठोस कार्यवाही करेगा या नहीं? (ग) क्‍या सोनकच्‍छ विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण व शहरी क्षेत्र वासियों को यातायात समस्‍या से निजात दिलाने हेतु विभाग सिटी बस चालू करेगा?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जी हाँ। बसों के माध्‍यम से परिवहन सुविधाएं दी जा रही हैं। (ख) मध्‍यप्रदेश सड़क परिवहन निगम बसों का संचालन बंद किए जाने के कारण वर्तमान में बसों का संचालन निजी बसों के संचालक द्वारा किया जा रहा है। निजी बस संचालकों के मांग के अनुसार परिवहन विभाग द्वारा परमिट जारी किए जाते हैं, बसों का किराया भी परिवहन विभाग द्वारा निर्धारित है। (ग) सोनकच्‍छ में सिटी बस चलाए जाने की कोई योजना नहीं है।

          श्री राजेन्द्र फूलचन्द वर्मा--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न के उत्तर में माननीय मंत्री जी ने जो जवाब दिया है मैं उससे पूरी तरह से असंतुष्ट हूँ. आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूँ कि मेरा विधान सभा क्षेत्र सोनकच्छ स्टेट हाई-वे पर स्थित है. इससे 100 से अधिक गाँव लगे हुए हैं. तीन नगर पंचायतें बोरासा, टोकपुर एवं पीपलरवां उससे जुड़ी हुई हैं. वहाँ से विद्यार्थी, कर्मचारी और मरीज इंदौर तथा देवास मुख्यालय जाते हैं. उत्तम स्वास्थ्य सुविधा, अच्छी शिक्षा तथा नौकरी के लिए वहाँ पर लोगों को जाना पड़ता है. मेरा मंत्री महोदया से निवेदन है कि इंदौर से देवास, देवास से उज्जैन और इंदौर से सांवेर तक सिटी बसें चल रही हैं. क्या मंत्री महोदया अपने वक्तव्य में इस बात की घोषणा करेंगी कि वे इंदौर से सोनकच्छ के बीच सिटी बस चलाएंगी.                                                    

          श्रीमती माया सिंह-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विधायक जी द्वारा उठाया गया सवाल बिल्‍कुल वाजि़ब है. मैं कहना चाहती हूं कि उनकी मांग के अनुसार सोनकच्‍छ मार्ग की 10 बसों को शहर के अंदर से जाने की व्‍यवस्‍था की जायेगी और इसके साथ ही साथ सोनकच्‍छ में विभाग की प्रस्‍तावित बस योजना क्‍लस्‍टर आ‍धारित है. जिससे सोनकच्‍छ को इंटरसिटी बसों का लाभ निकट भविष्‍य में प्राप्‍त होगा. इसके अंतर्गत सोनकच्‍छ के 16 मार्गों पर 63 बसों के माध्‍यम से इंटरसिटी बस सेवा सोनकच्‍छ के लोगों को निकट भविष्‍य में मिलेगी. ये सारी व्‍यवस्‍थायें विभाग के माध्‍यम से की जायेंगी.

          श्री राजेन्‍द्र फूलचंद वर्मा-  मंत्री जी, मैं जानना चाहता हूं कि क्‍या इनके टेण्‍डर हुए हैं ? इसके अतिरिक्‍त आप कृपया इसकी समय-सीमा भी बता दें.

          श्रीमती माया सिंह-  अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य द्वारा जो सवाल पूछा गया है, उसका जवाब दे दिया गया है. बाकी की विस्‍तृत जानकारी हेतु विधायक जी मुझ से संपर्क करेंगे तो मैं उन्‍हें उपलब्‍ध करवा दूंगी.

          श्री राजेन्‍द्र फूलचंद वर्मा-  बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

 

अवैध निर्माण पर कार्यवाही

[नगरीय विकास एवं आवास]

13. ( *क्र. 4953 ) चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) अतारांकित प्रश्‍न संख्‍या 14 (क्र. 96), दिनांक 03 मार्च 2014 के तहत क्‍या विभाग के अभिन्‍यास अनुमोदन क्र. 782/नग्रानि/सी.पी./99 भोपाल दिनांक 09.03.99 के बिन्‍दु 6 में उल्‍लेख है कि भूमि स्‍वामित्‍व संबंधी किसी भी प्रकार का विवाद होने पर यह अनुमति निरस्‍त मानी जावेगी? संदर्भित प्रश्‍न के प्रश्‍नांश (क) के उत्‍तर में कृषकों से विवाद होना बताया गया है? यदि विवाद था तो अनुमति निरस्‍त क्‍यों नहीं की गयी? (ख) प्रश्नांश (क) के तहत क्‍या उक्‍त प्रकरण का आवेदन अभिन्‍यास अनुमोदन हेतु नगर निगम भोपाल के माध्‍यम से ही प्रस्‍तुत हुआ है? क्‍या उक्‍त आदेश में बिन्‍दु क्रमांक 4 के अनुसार सुपर विजन राशि भोपाल नगर निगम में जमा करवाने को आदेशित किया था? यदि हाँ, तो सुपर विजन नगर निगम भोपाल से क्‍यों नहीं कराया गया? (ग) प्रश्‍नांश (क) व (ख) के तहत क्‍या प्रश्‍न दिनांक तक अवैध निर्माण कार्य चल रहा है? यदि हाँ, तो सम्‍पूर्ण अवैध निर्माण को कब तक तोड़ दिया जायेगा?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जी हाँ। संदर्भित अंताराकित प्रश्‍न के संबंध में माननीय विधायक की शिकायत प्राप्‍त होने पर अमलतास गृह निर्माण सहकारी संस्‍था के स्‍वामित्‍व की भूमि रकबा 11.07 एकड़ का सीमाकंन एवं स्‍थल निरीक्षण करने हेतु शासन द्वारा आदेश जारी कर एक समिति का गठन किया गया है। सीमांकन का कार्य पूर्ण होने के बाद विवाद का निराकरण किया जा सकेगा। (ख) जी हाँ। जी हाँ। क्‍योंकि तत्‍समय प्रश्‍नाधीन क्षेत्र नगर पालिक निगम सीमा से बाहर था। (ग) जी हाँ। संस्‍था द्वारा अनुमोदित अभिन्‍यास की स्थिति से भिन्‍न विकास कार्य करने के कारण म.प्र. नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 की धारा-37 (1) के अंतर्गत सूचना पत्र दिनांक 11.03.2013 एवं 16.06.2013 को जारी किये गये हैं। श्रीमान न्‍यायिक दण्‍डाधिकारी, प्रथम श्रेणी भोपाल के समक्ष परिवाद दायर है, जिसकी सुनवाई दिनांक 25.03.2017 को नियत है। परिवाद के निर्णय अनुसार अग्रेत्‍तर कार्यवाही संभव हो सकेगी।

          चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न के प्रश्‍नांश (ग) के उत्‍तर में विभाग ने यह माना है कि संस्‍था द्वारा अवैध निर्माण किया गया है और दिनांक 11.3.2013 एवं दिनांक 16.6.2013 को संबंधित संस्‍था को नोटिस भी जारी किए गए हैं. मैं जानना चाहता हूं कि किस कारण से अभी तक संस्‍था के विरूद्ध कोई कार्यवाही नहीं की गई है. मैं माननीय मंत्री महोदया से यह भी जानना चाहता हूं कि अवैध निर्माण तोड़ने की कार्यवाही कब तक की जायेगी ?

            श्रीमती माया सिंह-  अध्‍यक्ष जी, इस प्रकरण में पहले उच्‍च न्‍यायालय द्वारा निर्णय किया गया था. वर्तमान में इस प्रकरण का परिवाद दायर है. अगली सुनवाई 25.3.2017 को है. जैसे ही निर्णय आयेगा, हम उस निर्णय के आधार पर आगे की कार्यवाही करेंगे.

          चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, परिवाद दायर होना और परिवाद में न्‍यायालय द्वारा स्‍टे देना, दो भिन्‍न स्थितियां हैं. न्‍यायालय द्वारा यदि प्रकरण को कोई स्‍टेटस-को दिया गया हो तो समझ में आता है कि कोई कार्यवाही नहीं करना है. अगर न्‍यायालय द्वारा स्‍टेटस-को नहीं दिया गया है तो फिर कार्यवाही क्‍यों नहीं की जा रही है ?

          श्रीमती माया सिंह-  अध्‍यक्ष महोदय, मैंने कहा है कि निकट भविष्‍य में 25.3.17 को प्रकरण की सुनवाई है. न्‍यायालय के निर्णय के आधार पर ही हम कोई निर्णय करेंगे.

जनभागीदारी से स्वीकृत निर्माण कार्यों की जाँच

[योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी]

14. ( *क्र. 1538 ) श्रीमती ममता मीना : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या अपर कलेक्टर जिला गुना के जाँच प्रतिवेदन दिनांक 22.07.2016 में 06 सी.सी. रोड निर्माण कार्य की जाँच संयुक्त जाँच दल से कराये जाने का लेख किया गया था? (ख) क्या प्रश्नांश (क) में वर्णित संयुक्त जाँच दल द्वारा वर्णित 06 कार्यों की प्रश्न दिनांक तक जाँच नहीं की गई? क्या कारण है? (ग) कार्यपालन यंत्री लो.नि.वि./आर.ई.एस. एवं अनुविभागीय अधिकारी राघौगढ़ कलेक्टर जिला गुना के पत्रों को गंभीरता से लेते हैं अथवा नहीं? कलेक्टर के पत्र क्रमांक 2997 दिनांक 29.07.2016 का प्रश्न दिनांक तक पालन क्यों नहीं किया गया है? पालन न करने वाले अधिकारियों के विरूद्ध क्या कार्यवाही की गई है? (घ) 06 सी.सी. रोड़ निर्माण कार्यों की जाँच किस दिनांक तक करा ली जावेगी?

वन मंत्री ( डॉ. गौरीशंकर शेजवार ) : (क) जी हाँ। (ख) संयुक्त जाँच दल द्वारा वर्णित 06 शिकायतों की जाँच पूर्ण कर ली गई है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) कलेक्‍टर के पत्र क्रमांक 2997 दिनांक 20.07.2016 का पालन किये जाने से शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता (घ) जाँच पूर्ण हो चुकी है।

          श्रीमती ममता मीना-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न नागनखेड़ी ग्राम पंचायत में जन भागीदारी द्वारा सी.सी. खरंजों के निर्माण से संबंधित है. जांच दल के द्वारा पूरे सी.सी. खरंजों का निरीक्षण कर लिया गया है. माननीय मंत्री जी ने मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में यह स्‍वीकार भी किया है कि जांच में वे दोषी पाए गए हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहती हूं कि यदि वे दोषी पाए गए हैं तो उनके खिलाफ अभी तक क्‍या कार्यवाही की गई है क्‍योंकि मुझे प्राप्‍त उत्‍तर में उसका कोई उल्‍लेख नहीं है.

          डॉ.गौरीशंकर शेजवार-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह पुराना प्रकरण था और इसकी जांच अभी करवायी गई है. जांच में पाई गई कमियां, हम विधायक महोदया को उपलब्‍ध करवा देंगे. लागत और वस्‍तुस्थिति में जो अंतर होगा, उसमें हम वसूली की कार्यवाही करेंगे. इसके अतिरिक्‍त संबंधित व्‍यक्तियों के खिलाफ भी कार्यवाही की जायेगी.

          श्रीमती ममता मीना-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह प्रकरण 6 सी.सी. खरंजों की जांच का प्रकरण था. यह पुराना प्रकरण है. वर्तमान में उनकी बहू सरपंच है. पहले वह स्‍वयं सरपंच थे. 6 सी.सी. खरंजों में से 75 प्रतिशत जन भागीदारी और एक 50 प्रतिशत जन भागीदारी, ऐसी दो राशियां हैं जो सी.सी. खरंजों की है. जिसमें एक केदारपुरा स्कूल सीसी खरंजा मतलब टीएस एक है और राशि 04 लाख 96 हजार ऐसे करके दो बार निकाली. बस अंशदान यह है कि 75 प्रतिशत एक में था और 50 परसेंट एक में था. यह बहुत बड़ा गंभीर मामला है. अध्यक्ष महोदय, जाँच तो पुराना मामला है. लेकिन जब ध्यान में आया, मेरे विधान सभा क्षेत्र का मामला है और गलत हुआ है तो माननीय मंत्री जी, जब दोषी पाए गए और एक ही टीएस के दो दो कार्य किए और दो दो कार्यों के पैसे निकाल लिए गए तो उसमें एफआईआर कराने के लिए सीधा सीधा करना चाहिए. पैसे जमा तो करा ही देंगे. लेकिन सरपंच और सचिव पर एफआईआर होना चाहिए.

          डॉ.गौरीशंकर शेजवार--  माननीय अध्यक्ष महोदय, यदि आवश्यकता होगी तो एफआईआर भी करेंगे. लेकिन एफआईआर के पहले की जो प्रक्रिया है और नियमों में उल्लेखित है उसके अनुसार रिकवरी की कार्यवाही जरूर तत्काल प्रारंभ कर दी जाएगी.

          श्रीमती ममता मीना--  माननीय अध्यक्ष महोदय, अपर कलेक्टर ने जाँच की है इसलिए एफआईआर तो करा ही देना चाहिए. इसके बाद और क्या बचता है?

          अध्यक्ष महोदय--  वह मना भी नहीं कर रहे हैं.

          श्रीमती ममता मीना--  अपर कलेक्टर ने और जल संसाधन विभाग के ईई के संयुक्त दल ने जाँच की है और दोषी पाए गए, उसमें फोटो लगाए गए. सब कुछ है. एक अपर कलेक्टर रैंक के अधिकारी ने जाँच की चूँकि उस समय के तत्कालीन कलेक्टर जो थे इसमें उसका नाम आ रहा है, वे इसमें लिप्त हैं इसलिए वर्तमान कलेक्टर पूरी तरह से बचाने का प्रयास कर रहे हैं इसलिए एफआईआर कराई जाए क्योंकि अपर कलेक्टर ने बोला है.

          अध्यक्ष महोदय--  आपका पूरा विषय आ गया. वे सहमत भी हैं, मंत्री जी, एक बार और बोल दें. आप सुन तो लीजिए.

          डॉ.गौरीशंकर शेजवार--  अध्यक्ष महोदय, नियम प्रक्रिया में एफआईआर के पहले जो भी नोटिस वगैरह या वसूली की कार्यवाही, जो निर्धारित है, उसको करेंगे और इसके बाद जरुरत पड़ेगी तो एफआईआर भी करवाएँगे. किसी को बचाने का कोई भी प्रयास, कहीं भी, नहीं कर रहा.

          श्रीमती ममता मीना--  अध्यक्ष महोदय, एफआईआर करवा ही देंगे यह आश्वासन दिलवा दें.

          अध्यक्ष महोदय--  उन्होंने बोला तो है.

          श्रीमती ममता मीना--  उसमें नोटिस तो सब जारी हो चुके हैं.

          अध्यक्ष महोदय-- प्रश्न क्रमांक 15 श्री नथनशाह कवरेती, अपना प्रश्न करें.

          श्रीमती ममता मीना--  अध्यक्ष महोदय, एफआईआर करा ही देंगे. आप कहलवा दें क्योंकि जब अपर कलेक्टर ने जाँच कर ली उसके बाद क्या बचता है?

            अध्यक्ष महोदय--  क्लियर बात कर दी, अब इससे ज्यादा और क्या हो सकता है. कृपया व्यवधान न करें.

          श्रीमती ममता मीना--  एफआईआर करवा देंगे ऐसा बुलवा दें.

          अध्यक्ष महोदय--  अब इनका कुछ नहीं लिखा जाएगा, कवरेती जी का लिखा जाएगा. आप बैठ जाइये.

डाटा एंट्री ऑपरेटरों को कर्मचारी भविष्‍य निधि का लाभ

[योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी]

15. ( *क्र. 4122 ) श्री नथनशाह कवरेती : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि               (क) संभागीय योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय तथा जिला योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय में नियुक्‍त डाटा एंट्री ऑपरेटर कितने वर्षों से कार्यरत हैं? (ख) क्‍या शासन द्वारा ऐसा कोई प्रावधान है कि इन्‍हें विभाग में ही नियमित पद पर संवि‍लियन कर दिया जायेगा? (ग) क्‍या विभाग में कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटर को कर्मचारी भविष्‍य निधि अधिनियम 1952 के अंतर्गत कर्मचारी भविष्‍य निधि का लाभ मिल रहा है? अगर नहीं तो कब तक मिल जायेगा? नहीं तो इसके लिए कौन अधिकारी/कर्मचारी जिम्‍मेवार हैं? (घ) क्‍या अन्‍य विभागों में कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटर की भांति जैसे मनेरगा, जन अभियान परिषद, सर्वशिक्षा अभियान में इन्‍हें भी वेतन का लाभ दिया जायेगा? यदि हाँ, तो कब तक नहीं तो क्‍यों?

वन मंत्री ( डॉ. गौरीशंकर शेजवार ) : (क) संभागीय योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय तथा जिला योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय में वर्ष 2011 से कार्यरत हैं। (ख) जी नहीं। (ग) जी नहीं। विभाग द्वारा जारी पद स्वीकृति आदेश में इस प्रकार के कोई प्रावधान नहीं हैं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (घ) विचाराधीन नहीं है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।

          श्री नथनशाह कवरेती--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा क और घ का उत्तर मिल गया है. लेकिन प्रश्नांश ख का उत्तर नहीं मिला. मैं माननीय मंत्री जी से कहना चाहता हूँ कि क्या शासन द्वारा ऐसा कोई प्रावधान है कि इनका विभाग में ही नियमित पद पर संविलियन कर दिया जाएगा? मेरा प्रश्नांश ग यह है कि क्या विभाग में कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटर को कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम 1952 के अंतर्गत कर्मचारी भविष्य निधि का लाभ दिया जाएगा?

          डॉ.गौरीशंकर शेजवार--  माननीय अध्यक्ष महोदय, कर्मचारी भविष्य निधि के बारे में श्रम विभाग के जो भी नियम हैं, उनका पालन करने के लिए हम इन पर विचार करेंगे और यह कर सकते हैं.

          श्री नथनशाह कवरेती--  धन्यवाद.

ईसागढ़ नगर में महाविद्यालय भवन निर्माण

[उच्च शिक्षा]

16. ( *क्र. 4268 ) श्री गोपालसिंह चौहान (डग्‍गी राजा) : क्या उच्च शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या चंदेरी विधानसभा के ईसागढ़ नगर में महाविद्यालय हेतु भवन निर्माण किया जाना प्रस्‍तावित है? (ख) यदि हाँ, तो भवन निर्माण कब तक कर दिया जावेगा?

उच्च शिक्षा मंत्री ( श्री जयभान सिंह पवैया ) : (क) शासकीय महाविद्यालय ईसागढ़ के भवन निर्माण हेतु लोक निर्माण विभाग (पी.आई.यू.) अशोकनगर के प्राक्कलन अनुसार राशि रूपये 747.30 लाख का प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। (ख) समय-सीमा बताई जाना संभव नहीं है।

          श्री गोपाल सिंह चौहान--  माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय उच्च शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या चंदेरी विधानसभा के ईसागढ़ विकासखण्ड में महाविद्यालय हेतु भवन निर्माण किया जना प्रस्तावित है?

          श्री जयभान सिंह पवैया--  माननीय अध्यक्ष महोदय, शासकीय महाविद्यालय ईसागढ़ के भवन निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग (पीआईयू) अशोकनगर के प्राक्कलन के अनुसार 07 करोड़ 47 लाख 30 हजार का प्रस्ताव विभाग को प्राप्त हुआ है.

          अध्यक्ष महोदय--  आपको और कुछ पूछना है?

            श्री गोपाल सिंह चौहान--  यदि हाँ, तो भवन निर्माण कब तक कर दिया जाएगा?

            अध्यक्ष महोदय--  समय-सीमा बताई जाना संभव नहीं है, यह तो उसमें लिखा है. प्रस्ताव तो प्राप्त हुआ है पर राशि स्वीकृत कर दी कि नहीं की? उनका प्रश्न यह है.

          श्री जयभान सिंह पवैया--  माननीय अध्यक्ष जी, मैं संयोग से उस क्षेत्र का प्रभारी मंत्री भी हूँ. मान्यवर सदस्य के प्रश्न पूछने के पहले ही जनता की मांग और विद्यार्थियों के आग्रह को ध्‍यान में रखकर माननीय मुख्‍यमंत्री जी का निर्देश था. हमने सिद्धान्‍त: यह निर्णय कर लिया है कि वहां नवीन सत्र जो बजट सत्र 2017-18 है उसमें भवन के निर्माण की स्‍वीकृति दे दी जाएगी.

          प्रश्‍न संख्‍या - 17 (अनुपस्थित.)

 

निविदा स्‍वीकृति में अनियमितता

[नगरीय विकास एवं आवास]

18. ( *क्र. 1802 ) श्री अनिल फिरोजिया : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) नगर पालिक निगमइ उज्‍जैन में ई-टेण्‍डर क्रमांक 1068 में कितनी निविदाएं प्राप्‍त हुईं? क्‍या कोई निगोशिएशन किया गया? यदि हाँ, तो किस नियम के आधार पर? (ख) क्‍या इस प्रकार के कार्यों का टेण्‍डर क्‍वालिटी एण्‍ड कॉस्‍ट बेस्‍ड सिस्‍टम के अंतर्गत किया जा सकता है? यदि हाँ, तो प्रमाणिक आधार देवें? (ग) क्‍या उक्‍त कार्य में न्‍यायालय से कोई स्‍थगन प्राप्‍त हुआ था? यदि हाँ, तो स्‍थगन के बावजूद किस आधार पर कार्य प्रारंभ कराया गया? क्‍या उक्‍त कार्य स्‍थगन के आधार पर रोका नहीं जा सकता था? (घ) टेण्‍डर में दर्शायी गई सामग्री का हस्‍तांतरण ठेकेदार को किस दिनांक को किया गया

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) तीन निविदाएं प्राप्‍त हुईं। जी हाँ, मध्‍य प्रदेश कार्य विभाग मैन्‍यूअल की कंडिका 2.086 के प्रावधान के आधार पर। (ख) जी हाँ। निविदा प्रपत्र। मेयर इन काउंसिल के द्वारा स्‍वीकृत किया गया। (ग) जी नहीं, अपितु माननीय उच्‍च न्‍यायालय खण्‍डपीठ इंदौर द्वारा रिट पि‍टीशन क्रमांक 4676/2015 में पारित आदेश दिनांक 06.04.2016 में निविदा एवं कार्यादेश को निरस्‍त कर दिया गया था, जिसके क्रम में माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय में दायर एस.एल.पी. क्रमांक 11967/2016 में दिनांक 26.04.2016 को पारित आदेश में माननीय उच्‍च न्‍यायालय इंदौर के आदेश को स्‍थगित किया गया है। उत्‍तरांश () के परिप्रेक्ष्‍य में शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है।

          श्री अनिल फिरोजिया -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने माननीय मंत्री जी से जो प्रश्‍न पूछा था. उस प्रश्‍न के (क) में जवाब दिया गया है कि पूछे गए सवाल में बताया गया है कि तीन निविदाएं प्राप्‍त हुई थीं जिसमें केवल दो द्वितीय निविदादाता के द्वारा विभाग को निगोशिएशन करने के लिए बुलाया गया तो इससे यह प्रतीत होता है कि तीन निविदाऍं आई थीं और दूसरे को निगोशिएशन के लिए बुलाया गया तो एक फर्म को ही ओब्‍लाइज करने के लिए उसको लाभ पहुंचाने के लिए निगोशिएशन के लिए बुलाया गया, दोनों को क्‍यों नहीं बुलाया गया ? और (ग) के उत्‍तर में कि हाईकोर्ट से जो स्‍थगन मिला है स्‍थगन मिलने के 2 से 3 महीने बाद इनको वाहन, सफाई सामग्री उपलब्‍ध कराए गए. स्‍थ्‍ागन मिल गया था तो वह ठेका निरस्‍त भी किया जा सकता था. ठेका निरस्‍त क्‍यों नहीं किया गया ? इंदौर में भी ऐसा ही एक मामला आया था. उसमें इंदौर में ठेका निरस्‍त करके नगर निगम ने काम किया और यहां पर ठेका निरस्‍त न करते हुए दो-तीन महीने बाद उनको सामग्री और वाहन उपलब्‍ध कराए गए तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीया मंत्री जी से निवेदन करता हॅूं कि क्‍या जिन अधिकारियों ने गलती की है उसकी जॉंच करके कार्यवाही कराएंगे ?

          श्रीमती माया सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विधायक जी जो सवाल पूछ रहे हैं उसके सभी जवाब इस के उत्‍तर में दिए गए हैं और यह भी बताया गया है कि इसमें निगोशिएशन की बात कर रहे हैं और कार्य किए, उसके बारे में भी बात कर रहे हैं तो निगोशिएशन किया गया लेकिन कंडिका 2.086 के प्रावधान के आधार पर किया गया है और वह सारी जानकारी आपको यहां पर दी गई है. मैं यह कहना चाहती हॅूं कि जो निविदा में भाग लेने वाले तीनों निविदाकारों में से जो ग्‍लोबल वेस्‍ट मैनेजमेंट मुंबई अधिकतम 84.36 अंक उन्‍होंने प्राप्‍त किए थे और ग्‍लोबल वेस्‍ट मैनेजमेंट से प्राप्‍त वित्‍तीय प्रस्‍ताव जो है वह 1710 प्रति मीट्रिक टन का था, पर निगम हित में निगोशिएशन किया जाकर 1451 प्रति मीट्रिक टन पर सहमति प्रदान की गई थी. इसमें सारी कार्यवाही नियमों के अनुसार की गई है.

          श्री अनिल फिरोजिया -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीया मंत्री जी को बताना चाहता हॅूं और सदन को भी बताना चाहता हॅूं कि जो जानकारी दी गई है, सब असत्‍य जानकारी दी गई है. सदन में बार-बार असत्‍य जानकारी आ रही है. आप यह बताएं कि तीन निविदादाता हैं तीनों को बुलाना चाहिए था, एक को ही क्‍यों बुलाया गया ? एक को ही बुलाकर निगोशिएशन किया गया. बाकी दो को क्‍यों नहीं किया गया ? अगर तीनों को बुलाते तो नगर निगम का फायदा होता या नहीं, आप बताइए ?

          अध्‍यक्ष महोदय -- आप सीधा प्रश्‍न पूछिए.

          श्री अनिल फिरोजिया -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पहले नोटिस दिया गया कि इसमें हाईकोर्ट में केस चल रहा है तो उसके दो दिन पहले उसको ऑर्डर दे दिया और जब प्रक्रिया चालू हुई तो दो तीन महीने तक उसको लटकाकर सामग्री दी गई और वाहन उपलब्‍ध कराए गए, यदि चाहते तो उसको निरस्‍त करते और नगर निगम खुद करता तो नगर निगम का फायदा होता. कुल मिलाकर मेरा यह कहना है कि माननीया मंत्री जी को अधिकारी गुमराह कर रहे हैं और सदन को भी गुमराह कर रहे हैं. यह बहुत बड़ा भ्रष्‍टाचार है. इसमें जनता का सीधा-सीधा अहित है. मैं माननीय मंत्री महोदया से यह निवेदन करता हॅूं कि इसकी निष्‍पक्ष जॉंच कराकर जो संबंधित अधिकारी है उसको वहां से हटाइए. उसके विरूद्ध कार्यवाही कीजिए. क्‍या मंत्री महोदया कार्यवाही करेंगी, कार्यवाही का आश्‍वासन देंगी ?

          श्रीमती माया सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष जी, सिंहस्‍थ के समय सफाई का काम जो है बहुत ही उत्‍कृष्‍ट श्रेणी का हुआ है और माननीय सदस्‍य जो कह रहे हैं कि तीनों निविदाकारों को बुलाना चाहिए था, मैं बता रही हॅूं कि उक्‍त निविदा के मूल्‍यांकन का....

          श्री मधु भगत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पिछले बार भी एक सेंकेंड के लिए चूक गया था. एक प्रश्‍न कर लूंगा. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, (क), (ख), (ग) में (ग) कर लूंगा.

          अध्‍यक्ष्‍ा महोदय -- प्रश्‍नकाल समाप्‍त हो रहा है, अब क्‍या कर सकते हैं.

          श्रीमती माया सिंह-- मुझे इसका जवाब देने दीजिये. क्यूसीबीएस की गाइडलाइन्स के आधार पर जो बेस्ट बिडर था उसको हमने बुलाया है और उसी के आधार पर यह निगोशियेशन वगैरह किया है तो इसमें मैं विधायक जी से कहना चाहती हूं कि यह जो मूल्यांकन का आधार है, वह मध्यप्रदेश कार्य विभाग मेन्युअल की कंडिका 2.086 के प्रावधान अनुसार क्वालिटी एंड कॉस्ट बेस सिलेक्शन है, क्यूसीबीएस द्वारा किया गया है जिसमें तकनीकी योग्यता के लिए 80 प्रतिशत और वित्तीय प्रस्ताव का 20 प्रतिशत के आधार पर मूल्यांकन किया गया है, जो मूल्यांकन किया है वह ठीक किया है उसमें कोई गलती नहीं की है.

          श्री अनिल फिरोजिया--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं बार-बार मंत्री महोदया से यह निवेदन कर रहा हूँ कि आप जाँच क्यों नहीं कराना चाहते हैं? आपने बोला सिंहस्थ में बहुत अच्छा काम हुआ.वहाँ हम भी थे, हमने भी बधाई दी, हमने भी अधिकारियों की प्रशंसा की कि काम बहुत अच्छा हुआ लेकिन जहाँ भ्रष्टाचार हुआ है वहाँ आप जाँच करवा लें.

          अध्यक्ष महोदय--  आपका उत्तर आ गया है.

          श्री अनिल फिरोजिया--  अध्यक्ष महोदय, बहुत उपवास करने के बाद आज मेरा प्रश्न लगा है, ऐसा क्यों करते हैं साहब, आप? कम-से-कम जवाब तो आने दीजिये. अधिकारियों के ऊपर जाँच करा कर के कार्यवाही करने का आश्वासन तो लेने दीजिये.अध्यक्ष महोदय, मुझे आपका संरक्षण चाहिए.

          अध्यक्ष महोदय-- अब समय हो गया, आप वही विषय फिर से बोलेंगे. रिपीटेशन हो रहा है. प्रश्नकाल समाप्त.

(प्रश्नकाल समाप्त)

 

 

12.01 बजे                   नियम 267-क के अधीन विषय

          अध्यक्ष महोदय--  निम्नलिखित माननीय सदस्यों की सूचनायें सदन में पढ़ी हुई मानी जाएंगी.

1.       श्रीमती सरस्वती सिंह

2.       श्री दुर्गालाल विजय

3.       श्री मधु भगत

4.       डॉ.रामकिशोर दोगने

5.       श्री योगेन्द्र निर्मल

6.       श्री मानवेन्द्र सिंह

7.       श्री नारायण सिंह पंवार

8.       श्री पुष्पेन्द्र नाथ पाठक

9.       कुं. हजारीलाल दांगी

10.     श्री कमलेश्वर पटेल

 

12.02 बजे                               शून्यकाल में उल्लेख

          (1) श्री मधु भगत (परसवाड़ा)--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी शून्यकाल की सूचना इस प्रकार है मध्यप्रदेश में मनरेगा के चलते लाखों करोड़ों का भ्रष्टाचार का मामला है और 19 वें नंबर पर मेरा प्रश्न था लेकिन वह नहीं आ पाया. मुझे पढ़ने की परमीशन दी जाये, पिछली बार भी मेरा प्रश्न छूट गया था.

          अध्यक्ष महोदय--  ठीक है, पढ़ दीजिये.

          श्री मधु भगत--  अध्यक्ष महोदय, मैं पढ़ दे रहा हूं आप उसको देख लीजियेगा. माननीय अध्यक्ष महोदय, बालाघाट जिले में आज दिनाँक तक मनरेगा में ऐसे सैकड़ों मजदूर हैं जिनका भुगतान अभी तक का लंबित है. जो जानकारी उपलब्ध कराई गई है वह पूरी तरह से गलत है जबकि सच्चाई यह है कि विलंबित भुगतान का जो आंकलन किया गया है वह आधारहीन है. मध्यप्रदेश शासन की जारी अध्यादेश नियमावली का पालन नहीं किया गया है यदि नियमानुसार आँकलन किया जाता तो यह राशि करोड़ों में होती. साथ ही राशि देना बताया जा रहा है, वह गलत है. वह राशि मजदूरों के खाते में नहीं पहुँची है. मेरा आपसे आग्रह है कि मनरेगा में कार्यरत् मजदूरों को ईपीएफ के दायरे में लाकर उनके ईपीएफ नंबर उपलब्ध करा के उन्हें ईपीएफ नंबर सहित पास बुक उपलब्ध कराई जाए. माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश अनुसार मनरेगा में कार्यरत् मजदूरो के भुगतान में यदि विलंब होता है तो उसे क्षतिपूर्ति के निर्धारित मापदंडों के अनुसार भुगतान किया जाये. समूचे मध्यप्रदेश का यह मामला है.

          (2) श्री हर्ष यादव (देवरी)--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी विधानसभा क्षेत्र में लगातार बिजली कटौती हो रही है बहुत सारे गाँवों की बिजली काट दी गई है छात्रों का भविष्य खराब हो रहा है. दसवीं और बारहवीं की परीक्षायें चल रही हैं. लगातार प्राकृतिक आपदा से किसान परेशान थे. जैसे-तैसे अच्छी फसलें आई हैं लेकिन सिंचाई ना होने की वजह से किसान परेशान हैं. किसानों में और छात्रों में आक्रोश है. कृपया मेरा निवेदन है कि इसमें सुनवाई हो.

          (3) श्री इन्दर सिंह परमार (कालापीपल)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, शाजापुर जिले के कालापीपल थाना के अंतर्गत 10 मार्च को एक मंदिर के दरवाजे के सामने एक गाय की धारदार हथियारों से हत्या कर दी गई. वहाँ की पुलिस ने इस घटना को गंभीरता से नहीं लिया और कुत्ते के काटने से गाय की मृत्यु दिखा दी गई. पीएम रिपोर्ट आ चुकी है लेकिन आज तक अपराधियों के खिलाफ कार्यवाही नहीं की गई है उसके कारण गाँव में और आसपास के क्षेत्र में सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने की संभावना बन रही है. मैं मंत्री जी से निवेदन करता हूं कि इस पर तत्काल कार्यवाही करने का कष्ट करें.

          (4) श्री उमंग सिंघार (गंधवानी)--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मनरेगा के अंदर क्षति पूर्ति अधिनियम के अंतर्गत क्षति पूर्ति देने का प्रावधान है लेकिन जब से योजना प्रारंभ हुई, आज दिनाँक तक सरकार द्वारा क्षति पूर्ति नहीं दी गई है. उसमें माननीय उच्चतम न्यायालय ने भी आदेश किये हैं कि कहीं से भी और किसी भी एकाउंट से आपको पैसा देना है, स्पष्ट लिखकर दिया है लेकिन आज तक सरकार ने पैसा नहीं दिया और एक-एक मजदूर पर प्रदेश के हर पंचायत के पांच-पांच सौ, हजार रुपये क्षति पूर्ति बनती है.यह प्रदेश का मामला है.

 

            नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, भाई उमंग सिंघार जी ने जो बात कही है, यह बहुत ही गंभीर मामला है. आदरणीय गोपाल भार्गव जी हरदम कहते हैं कि मैं मजदूरों के पक्ष में हूँ और उनके लिए लड़ाई लड़ता हूँ. इस मामले में जब सुप्रीम कोर्ट ने क्षतिपूर्ति तय कर दी है तो कृपा करके वे कार्यवाही करें. आपका जवाब एक दफे आया कि साहब, हमारे पोर्टल में जानकारी नहीं है कि कितने मजदूरी की क्षतिपूर्ति है, जिलेवाइज़ पूरी जानकारी आपके पास है, यदि सबसे गरीब व्‍यक्‍ति, जो मध्‍यप्रदेश का मजदूर है, उसकी मजदूरी की क्षतिपूर्ति नहीं दे सकते तो क्‍या होगा ? इसीलिए परसों के अखबार में था कि मध्‍यप्रदेश में सबसे ज्‍यादा गरीबी बढ़ती जा रही है. 14 सालों से आपकी सरकार है और मध्‍यप्रदेश में गरीबों की संख्‍या बढ़ती जा रही है. आदरणीय भार्गव जी, कृपया क्षतिपूर्ति पर भी कुछ विचार करें और व्‍यवस्‍था कराए.

          श्री कमलेश्‍वर पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, गरीब मजदूर पलायन कर रहे हैं.

          (5)  श्री मुकेश नायक (पवई) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पवई नगर में जो तहसील मुख्‍यालय है, वहा पर नागरिक आपूर्ति विभाग का सर्वर डाऊन होने के कारण पिछले 6 महीने से नई पर्चिया जनरेट नहीं हो पाई हैं और हितग्राहियों को राशन नहीं मिल पाया है, आपसे निवेदन है कि माननीय मंत्री जी आवश्‍यक कार्यवाही करें ताकि पवई नगर में हितग्राहियों को राशन वितरण हो सके.

          (6)  एडवोकेट सत्‍यप्रकाश सखवार (अम्‍बाह) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी शून्‍यकाल की सूचना इस प्रकार है कि अरहर हेतु शासन द्वारा 5050 रुपये का समर्थन मूल्‍य निर्धारित किया गया है लेकिन मुरैना मंडी और मेरी विधान सभा अम्‍बाह पोरसा में अरहर 3000 रुपये या 3200 रुपये में खरीदी जा रही है, वह भी मंडी नहीं खरीदती बल्‍कि वहा के व्‍यापारियों के माध्‍यम से खरीदी जा रही है, इसके कारण किसान बहुत परेशान हैं और दु:खी हैं. अभी उन्‍होंने मुरैना में आंदोलन भी किया था, अत: मैं चाहूँगा कि किसानों से समर्थन मूल्‍य पर अरहर की खरीदी की जाए.

          (7)  श्री दिनेश राय (सिवनी) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वन विभाग के अमले द्वारा हमारे क्षेत्र में पानी और भोजन की पर्याप्‍त व्‍यवस्‍था न होने के कारण वन का राजा रहवासी एरिया में आ गया और रहवासी एरिया में आकर वहा के जानवरों को खा रहा है. अत: मेरा वन मंत्री जी से आग्रह है कि अपने जानवरों को अपनी जगह सुरक्षित रखें नहीं तो बड़ी घटना हो जाएगी. इसी कारण पिछले वर्ष भी कई वन्‍य प्राणियों के हमारे यहा शिकार हुए हैं क्‍योंकि जंगल छोड़कर जब वे रहवासी एरिए में आ रहे हैं तो वहा पर वे मारे भी जा रहे हैं.

 

12.07 बजे                                  पत्रों का पटल पर रखा जाना

         

          1. मध्‍यप्रदेश  भवन  एवं  अन्‍य  संनिर्माण  कर्मकार  कल्‍याण  मण्‍डल  का   वार्षिक   

             प्रतिवेदन वर्ष 2015-2016.

 

 

          2. मध्‍यप्रदेश  पश्‍चिम  क्षेत्र  विद्युत   वितरण  कंपनी  लिमिटेड,  इन्‍दौर  (म.प्र.) का

            चतुर्दश वार्षिक प्रतिवेदन.

 

 

          3. (क) मध्‍यप्रदेश  राज्‍य  सहकारी  आवास   संघ  मर्यादित, भोपाल  का  संपरीक्षित

                 वित्‍तीय पत्रक वर्ष 2015-2016,

             (ख) मध्‍यप्रदेश  राज्‍य  सहकारी  उपभोक्‍ता  संघ  मर्यादित,  भोपाल  (म.प्र.) का

                  संपरीक्षित वित्‍तीय पत्रक वर्ष 2015-2016,

              (ग) मध्‍यप्रदेश  राज्‍य  सहकारी  विपणन  संघ  मर्यादित, भोपाल का संपरीक्षित

                  वित्‍तीय पत्रक वर्ष 2015-2016, तथा

              (घ) मध्‍यप्रदेश  राज्‍य  सहकारी  बैंक  मर्यादित, भोपाल  का संपरीक्षित वित्‍तीय

                  पत्रक वर्ष 2015-2016.

12.09 बजे                                     ध्‍यानाकर्षण

 

          (1) बालाघाट  जिले  के लांजी क्षेत्र के वनग्राम  बोदालझोला में मूलभूत सुविधाओं के

              अभाव से उत्‍पन्‍न स्‍थिति

 

          सुश्री हिना लिखीराम कावरे (लांजी) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  

         

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

  वनमंत्री ( डॉ. गौरीशकंर शेजवार) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

          सुश्री हिना लिखीराम कावरे - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं अभी 17 तारीख को बोदालझोला गई थी. मैंने सांवरनाला में जहां ग्रामवासी आकर बसे हैं, उनसे मुलाकात की तो यह जाना कि वहां पर मुख्‍यमंत्री सड़क योजना के तहत रोड अभी बन रही है. वहां बिजली की भी अभी सप्‍लाई शुरू नहीं हुई है और उसका काम चल रहा है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय यह सब चीजें अभी बन रही हैं, लेकिन वे ग्रामवासी तो काफी सालों से वहां पर रह रहे हैं और खुशी-खुशी रह रहे थे, परंतु पिछले कुछ वर्षों में जो सबसे बड़ी दिक्‍कत उनके साथ आई है, जिसे आपने बताया भी है कि वहां कई मौतें हुई हैं. कोई अज्ञात बीमारी है, उसके चलते वहां के गांववासी इतने ज्यादा भयभीत हो गये कि वे अब वहां पर रहना ही नहीं चाहते हैं. अध्यक्ष महोदय, मैं जब वहां पर गई तो मैंने वहां के जो टीचर हैं, उनसे भी मैंने बात की और उन्होंने बताया कि - हां, मैडम. ऐसी बीमारी है और अचानक ही दोनों हाथ ऐसे बांधकर उन्होंने बताया कि हमारे गांव के मुखिया की मौत मेरे सामने हुई, उनको ठंड लगी, दोनों मुट्ठी उन्होंने बांधी और वे उल्टे गिर गये, उसके बाद उनकी मृत्यु हो गई. इस अज्ञात बीमारी की वजह से वहां पर कोई रहना ही नहीं चाहता है. अभी बालाघाट के कलेक्टर भी उनके पास गये थे..

अध्यक्ष महोदय - आपका प्रश्न क्या है?

सुश्री हिना लिखीराम कावरे - अध्यक्ष महोदय, मैं प्रश्न बिल्कुल करूंगी. लेकिन मैं चाहती हूं कि वास्तविकता से माननीय मंत्री जी को अवगत करा दूं. अध्यक्ष महोदय, कलेक्टर वहां पर गये थे और उन्होंने उनके सामने प्रस्ताव भी रखा कि आप विस्थापित हो जाइए. लेकिन वहां के ग्रामवासियों का कहना है कि हमको विस्थापित होने में कोई दिक्कत नहीं है. वहां पर हम बसने को तैयार हैं, लेकिन हमको केवल घर नहीं चाहिए, हमको खेती के लिए भी जमीन चाहिए. जहां पर आप उनको बसाना चाहते हैं. वहां पर रहने के लिए आप प्रधानमंत्री आवास में केवल मकान बना देंगे. अध्यक्ष महोदय, मैं सीधे-सीधे प्रश्न कर लेती हूं, मैं माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहती हूं कि मध्यप्रदेश शासन अज्ञात बीमारी का जिक्र करते हुए मानवीय आधार पर बोदालझोला से अपना कब्जा छोड़ने की शर्त पर विशेष प्रकरण के तहत वन भूमि पर अन्य स्थान पर ग्रामीणों को कब्जा देने संबंधी प्रस्ताव क्या केन्द्र शासन को भेजेगा?

डॉ. गौरीशंकर शेजवार - अध्यक्ष महोदय, वन अधिकार अधिनियम में वर्ष 2006 से पहले, जिनके कब्जे हैं, उनको जमीन दी जा सकती है और उनके वन अधिकार पत्र बन जाएंगे. आज की परिस्थिति में हमको केन्द्र सरकार का जो कानून है, वह हमको बिल्कुल परमीशन नहीं देता है. दूसरा, एक और कानून है वन संरक्षण अधिनियम, तो वन संरक्षण अधिनियम भी केन्द्र सरकार का कानून है और वन संरक्षण के लिए बहुत महत्वपूर्ण कानून है. अभी तक कहीं कोई विशेष प्रकरण की ऐसी बात आज तक हुई नहीं है. जहां प्रशासन निर्णय लेगा, वहां यह बस जाएं और प्रशासन इनको बसाएगा. लेकिन जमीन उनको खेती के लिए देने के लिए तो कहीं कोई व्यवस्था, आज की तारीख में यह नियम, अधिनियम जितने भी है, इनका उल्लंघन कहलाएगा, इसलिए मध्यप्रदेश वन विभाग उसको नहीं कर पाएगा. जहां तक यह जो बीमारी है. इसकी हम विशेष जांच जिस स्तर पर भी अध्यक्ष महोदय कहेंगे कि कौन-सी बीमारी है, क्या है, क्या इसके प्रिडिस्पोज़िंग फेक्टर हैं और यह किसकी वजह से है, हम इसकी जांच करवा लेंगे और जो भी परिणाम आएंगे, माननीय सदस्या को हम इसके बारे में बता देंगे.

सुश्री हिना लिखीराम कावरे - अध्यक्ष महोदय, वे लोग वहां पर रहना ही नहीं चाहते हैं और बीमारी की ही सबसे बड़ी दिक्कत है. 10 लाख रुपए एक व्यस्क व्यक्ति को उनके परिवार में मिलना है, वे लोग पैसे को लेने के लिए तैयार नहीं है. मैंने खुद उनसे बात की है. मैंने उनको समझाने का भी प्रयास किया. लेकिन वे पैसे लेने को तैयार नहीं है, इसलिए मैंने आपसे निवेदन किया था कि आप क्या केन्द्र शासन को विशेष प्रकरण मानकर उसको भेजेंगे? यह तो आपके हाथ में है. निर्णय केन्द्र शासन को करना है, वह दे अच्छी बात है. लेकिन आप कम से कम इसको विशेष प्रकरण मानकर तो भिजवा दें?

डॉ. गौरीशंकर शेजवार - अध्यक्ष महोदय, जवाब मैंने दे दिया है. एक बात और बताएं कि बीमारियों का जहां तक सवाल है तो अलग-अलग वर्षों में अलग-अलग संख्या है. लेकिन इसमें कोई एक बीमारी का उल्लेख नहीं है, न ही कहीं कोई ऐसी महामारी जैसी स्थिति आई है. इसके बाद भी बीमारियों की हम जांच करवा लेंगे कि आखिर क्यों, किन परिस्थितियों में ये मृत्यु हुई हैं.

            सुश्री हिना लिखीराम कावरे - अध्यक्ष महोदय, अंतिम बात मैं कहना चाहती हूं. वे लोग वहां पर रहना नहीं चाहते हैं. वे दूसरे वन ग्राम सांवरनाला में आकर बस गये हैं. मेरा आपसे निवेदन है कि आप अभी जहां पर वे लोग हैं तो कम से कम जब तक यहां की व्यवस्थाएं ठीक नहीं हो जाती या वे लोग जब तक तैयार नहीं होते या जो भी बात है, तब तक जहां पर वे लोग हैं, कम से कम वन विभाग के अधिकारी उनको परेशान तो न करें और दूसरा, माननीय मंत्री श्री गोपाल भार्गव जी यहां पर बैठे हैं. अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से कहना चाहती हूं कि जो बोदालझोला ग्राम है, वहां से 10 कि.मी. डाबरी है, जो मैहर विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है. मेरा आपसे निवेदन है कि वन विभाग अगर आप परमीशन उनको दे दें तो मात्र 10 कि.मी. की दूरी पर वहां जो डाबरी है, वहां पर उप स्वास्थ्य केन्द्र है. यदि आप परमीशन दे दें तो एमपीआरआरडीए से वहां पर रोड बन जाएगी और उनको कम से कम स्वास्थ्य की सुविधाएं तो मिल जाएगी?

          डॉ.गौरीशंकर शेजवार--माननीय अध्यक्ष महोदय, वहां पर सड़क का भी उल्लेख है. सड़क स्वीकृत          है, उसका निर्माण भी प्रारंभ हो चुका है, मुख्यमंत्री सड़क का भी निर्माण हो चुका है, पुल का भी निर्माण हो चुका है. बिजली अभी बाधित थी. अभी सूचना मिली है कि बिजली भी वहां पर पहुंच चुकी है. हर घर में कनेक्शन भी हो चुके हैं. वहां पर स्कूल भी हैं. बगल में माध्यमिक शाला भी है. यह मूलभूत सुविधाएं पूरी हैं. वन विभाग कहीं किसी रोड़ निर्माण में या बिजली में कहीं कोई बाधा पैदा नहीं कर रहा है. केवल बात इतनी है कि हमें वन संरक्षण अधिनियम का पालन करना है. जहां तक खेती के लिये भूमि आवंटन है उसके लिये केन्द्र सरकार का अधिनियम है उसके हिसाब से हमें उसका पालन करना है.

 

          अध्यक्ष महोदय--एक विषय उनका रह गया है. साबरनाला जहां पर यह लोग आ गये हैं क्या उनको वहीं रहने देंगे अथवा वापस कर देंगे.

          डॉ.गौरीशंकर शेजवार--माननीय अध्यक्ष महोदय, जो हमारा नियम है फारेस्ट कंजरवेशन एक्ट उसमें नियमानुसार परमीशन नहीं दे सकते हैं.

 

 

(2)     नागदा खाचरौद क्षेत्र में पेयजल उपलब्ध नहीं होना.

 

            श्री दिलीप सिंह शेखावत (नागदा खाचरौद)- अध्यक्ष महोदय,

          लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री (सुश्री कुसुम सिंह महदेले):- अध्यक्ष महोदय,

 

 

            श्री दिलीप सिंह शेखावत--अध्यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहते हुए माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं. माननीय मंत्री जी ने मेरे प्रश्न के उत्तर में स्वीकार किया है कि इस कमी के कारण उद्योग बंद होता है. दूसरा आपने उत्तर दिया है कि तीन बैराज जल संसाधन विभाग ने चम्बल नदी पर स्वीकृत किए हैं वह लगभग 20 किमी नीचे आलोट विधान सभा में स्वीकृत हुए हैं. मैंने जैसा आपसे निवेदन किया है कि 40 किमी के रेडिएस में 800 हेक्टर भूमि में किसान सिंचाई करता है. उतनी केपेसिटी का आप डेम बनाएंगे तो 180 करोड़ रुपये लगेगा. अभी वर्तमान में सारे डेम बिरला समूह द्वारा बनाए गए हैं. मैं आपको एक जानकारी और देना चाहूंगा कि अभी 15 दिन पहले किसानों की मोटरें प्रशासन ने जब्त की जिससे वहां आंदोलन जैसी स्थिति निर्मित हुई. मेरे हस्तक्षेप के बाद वह वापस की. अध्यक्ष महोदय, जब जब पानी की कमी होती है तो नागदा-खाचरौद में पेयजल की व्यवस्था भी उसी डेम से है, सिंचाई भी उन्हीं डेम से है. उसके कारण मजदूर पानी लेने के लिए अलग आंदोलन करता है, किसान अलग आंदोलन करता है.

          अध्यक्ष महोदय, मैं एक जानकारी और देना चाहूंगा कि कुमार मंगलम बिरला, प्रसिद्ध उद्योगपति हैं, उनकी वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा हुई थी. उस समय जुलानिया जी प्रमुख सचिव थे उन्होंने निनावट खेड़ा के पास एक नया डेम बनाने की डीपीआर बनाने का निर्देश भी दिया था. मैं जल संसाधन मंत्री जी से भी विनम्रता निवेदन करुंगा कि 2007 में एक डेम वहीं पर स्वीकृत हो गया था. उसके टेंडर भी हो गए थे. वर्क ऑर्डर भी हो गया था लेकिन बाद में नगर पालिका ने...

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले-- अध्यक्ष महोदय,  वैसे तो यह प्रश्न मेरे विभाग से संबंधित नहीं है फिर भी मैं जवाब दे रही हूं. आप इतनी बड़ी कहानी सुनाने के बदले स्पेसिफिक प्रश्न पूछेंगे तो मैं जवाब दे पाऊंगी.

          अध्यक्ष महोदय-- जल संसाधन मंत्री भी जवाब देंगे.

          श्री दिलीप सिंह शेखावत-- मैं  माननीय जल संसाधन मंत्री जी से बहुत विनम्रता से निवेदन करुंगा कि माननीय जयंत मलैया जी ने इसी सदन में मुझे आश्वासन दिया कि चामुंडा माता के पास निनावट खेड़ा में हम डेम बनाएंगे. वर्ष 2007 में यह डेम स्वीकृत हो गया था. मेरा आपसे करबद्ध निवेदन है. हमारा 500 करोड़ रुपये का निवेश पानी की कमी के कारण विलायत चला गया. सिंचाई करने वाले किसान पर हर साल मुकदमे दर्ज होते हैं और पेयजल का गंभीर संकट है.

          अध्यक्ष महोदय, मैं एक चीज का और निवेदन करना चाहूंगा. मैंने माया सिंह जी से निवेदन किया है कि एक नाले की डायवर्शन की कास्ट 15 करोड़ रुपये आ रही है.

          अध्यक्ष महोदय-- पहले प्रश्न का उत्तर ले लें.

          श्री मनोज निर्भय सिंह पटेल--अध्यक्ष महोदय, मेरी विधान सभा भी इसके पास है. उसके भी कुछ लोग प्रभावित होते हैं.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले--अध्यक्ष महोदय, प्रश्न स्पष्ट हो तो उत्तर दूं.

          अध्यक्ष महोदय-- यह दोनों विभाग के मंत्रियों से संबंधित है क्योंकि इसमें पेयजल भी है और सिंचाई की बात भी है.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले--अध्यक्ष महोदय, वह तो मेरी तारीफ कर रहे हैं कि मैंने 22 गांवों की योजना स्वीकार कर दी.

          श्री दिलीप सिंह शेखावत-- मैं आपको धन्यवाद देता हूं.

          अध्यक्ष महोदय--उन्होंने किसी की निन्दा नहीं की है.

          डॉ नरोत्तम मिश्र-- किसी में हिम्मत है जो जीजी की बुराई कर दे. अध्यक्ष जी, कल इसी विषय पर माननीय सदस्य का दूसरे नंबर का प्रश्न है. अध्यक्ष जी, उन्होंने माननीय जयंत मलैया जी का उल्लेख किया है कि उन्होंने आश्वासन दिया है तो हमारे पूर्व जल संसाधन मंत्री के आश्वासन का अक्षरशः पालन करेंगे.

          श्री दिलीप सिंह शेखावत-- अध्यक्ष महोदय, माननीय नगरीय प्रशासन मंत्री जी भी यहां बैठी हैं हमारे यहां नाले के डायवर्शन की 15 करोड़ रुपये की कास्ट आ रही है वह माननीय मंत्री जी स्वीकृत करने के लिए तैयार है....प्रश्न उद्भूत नहीं हो रहा लेकिन यह इतना पेचीदा मामला है लेकिन माननीय मंत्री जी कह देंगे तो उसकी साध्यता आ जाएगी.

          अध्यक्ष महोदय-- नगरीय प्रशासन विभाग की जब अनुदान मांगे आएंगी तब आप मांग कर लीजिए.

          श्री दिलीप सिंह शेखावत--अध्यक्ष जी मैं आपका संरक्षण चाहूंगा. माननीय मंत्री जी से मेरी बात हुई है, वह तैयार हैं.

            नगरीय विकास एवं आवास मंत्री (श्रीमती माया सिंह) - माननीय अध्यक्ष जी, यह जो विधायक जी ने मसला उठाया है तो मैं कहना चाहती हूं कि  हम वर्ल्ड बैंक से सहायता प्राप्त परियोजना से नागदा के सीवेज का प्रोजेक्ट तैयार कर रहे हैं और अमृत योजना के तहत् हम इसको लेंगे और इसकी डी.पी.आर. भी बन रही है.

          श्री दिलीप सिंह शेखावत -  मैं आपसे आग्रह करना चाहूंगा कि उस डैम की 72 करोड़ रुपये की डी.पी.आर. बनी थी. अब आश्वासन आप दे देंगे तो अच्छा होगा. मेरा दूसरा जो प्रश्न था वह वाटर शेड से अलग प्रश्न है. मेरा निवेदन है कि आप खड़े होकर नीनावटखेड़ा डैम की घोषणा कर देंगे तो अच्छा होगा.

          डॉ.नरोत्तम मिश्रा - अध्यक्ष महोदय, जरूर कर देंगे.

          श्री दिलीप सिंह शेखावत - बहुत-बहुत धन्यवाद.

12.31 बजे                                प्रतिवेदनों की प्रस्तुति

                लोक लेखा समिति का तीन सौ छप्पनवां से चार सौ इकतीसवां प्रतिवेदन

        श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा,सभापति - अध्यक्ष महोदय, मैं, लोक लेखा समिति का तीन सौ छप्पन वां से चार सौ इकतीसवां प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूं.

          पिछले 4 वर्षों में 431 प्रतिवेदन पहले प्रस्तुत किये गये हैं और अभी 76 प्रतिवेदन प्रस्तुत किये हैं. मैं प्रमुख सचिव, विधान सभा, सभी लोक लेखा समिति के आदरणीय सदस्यगण एवं सभी अधिकारियों,कर्मचारियों का आभारी हूं कि उनके सहयोग से इतना तेजी से काम हुआ.धन्यवाद.

          अध्यक्ष महोदय - आपको धन्यवाद कि आप बिल्कुल अपडेट रख रहे हैं अन्य समिति के माननीय सभापति महोदयों से भी अपेक्षा है कि सारे विषयों को अपडेट करेंगे.

          संसदीय कार्य मंत्री(डॉ.नरोत्तम मिश्र) - अध्यक्ष जी, मैं आपके मत से इस विषय पर सहमत होना चाहता हूं कि वास्तव में जिस हिसाब से लोक लेखा समिति को कालूखेड़ा जी देखते हैं मैं उनको साधुवाद और धन्यवाद देता हूं.

                                               

 

12.32 बजे                                  याचिकाओं की प्रस्तुति

        अध्यक्ष महोदय - आज की कार्यसूची में सम्मिलित सभी याचिकाएं प्रस्तुत की हुई मानी जायेंगी.

12.33 बजे                               शासकीय विधि विषयक कार्य

        (1) मध्यप्रदेश वेट संशोधन(विधिमान्यकरण) विधेयक,2017(क्रमांक 2 सन् 2017)

          वाणिज्यिक कर मंत्री(श्री जयंत मलैया) - अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश वेट संशोधन(विधिमान्यकरण) विधेयक,2017(क्रमांक 2 सन् 2017) के पुर:स्थापन की अनुमति चाहता हूं.

          अध्यक्ष महोदय - प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश वेट संशोधन(विधिमान्यकरण) विधेयक,2017(क्रमांक 2 सन् 2017) के पुर:स्थापन की अनुमति दी जाय.

अनुमति प्रदान की गई.

          श्री जयंत मलैया - अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश वेट संशोधन(विधिमान्यकरण) विधेयक,2017(क्रमांक 2 सन् 2017) का पुर:स्थापन करता हूं.

 

 

                        (2) मध्यप्रदेश विधानमण्डल सदस्य निरर्हता निवारण(संशोधन)

                                 विधेयक,2017 (क्रमांक 3 सन् 2017)

          संसदीय कार्य मंत्री(डॉ.नरोत्तम मिश्र) - अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश विधान मण्डल सदस्य निरर्हता निवारण(संशोधन)विधेयक,2017(क्रमांक 3 सन् 2017) के पुर:स्थापन की अनुमति चाहता हूं.

          अध्यक्ष महोदय - प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश विधान मण्डल सदस्य निरर्हता निवारण(संशोधन)विधेयक,2017(क्रमांक 3 सन् 2017) के पुर:स्थापन की अनुमति दी जाय.

अनुमति प्रदान की गई.

          डॉ.नरोत्तम मिश्र - अध्यक्ष महोदय,मैं, मध्यप्रदेश विधान मण्डल सदस्य निरर्हता निवारण(संशोधन)विधेयक,2017(क्रमांक 3 सन् 2017) का पुर:स्थापन करता हूं.

 

12.35 बजे           वर्ष 2016-2017 के तृतीय अनुपूरक अनुमान का उपस्थापन

          वित्त मंत्री(श्री जयंत मलैया) - अध्यक्ष महोदय, मैं, राज्यपाल महोदय के निर्देशानुसार वर्ष 2016-2017 के तृतीय अनुपूरक अनुमान का उपस्थान करता हूं.

          अध्यक्ष महोदय - मैं, इस तृतीय अनुपूरक अनुमान पर चर्चा और मतदान के लिये दिनांक 22 मार्च,2017 को 2 घंटे का समय नियत करता हूं.

12.36 बजे           वर्ष 2017-2018 की अनुदानों की मांगों पर मतदान(क्रमश:)

(1)     मांग संख्या - 23         जल संसाधन

          मांग संख्या - 28         राज्य विधान मण्डल

          मांग संख्या - 32         जनसंपर्क

          मांग संख्या - 45         लघु सिंचाई निर्माण कार्य

          मांग संख्या - 57         जल संसाधन विभाग से संबंधित विदेशों से सहायता

                                      प्राप्त परियोजनाएं

 

        डॉ.गोविन्द सिंह(लहार) - माननीय अध्यक्ष महोदय,

          श्री वैलसिंह भूरिया - माननीय अध्यक्ष महोदय,कल इन्होंने बोल लिया था बार-बार इनको ही मौका दिया जा रहा है.

          अध्यक्ष महोदय - कल इन्होंने नहीं बोला था.

          डॉ.नरोत्तम मिश्र - अध्यक्ष जी, मैं यह कह रहा था आप विभाग बोल दिया करो वे मांग संख्या नहीं समझ पाते हैं.

          डॉ.गोविन्द सिंह - मांगों का विरोध करना हमारा दायित्व है कि हम कमियां बताएं. नहीं कहेंगे तो यह वैसे ही काम नहीं कर रहे हैं तो बंटाधार और सफाया कर देंगे.

          डॉ.नरोत्तम मिश्र - बंटाधार कहकर आप कहीं और उंगली तो नहीं उठा रहे हैं.

          डॉ.गोविन्द सिंह - अध्यक्ष महोदय,मैं बता देता हूं कि इनकी सरकार कैसे चल रही है. पहले मैं अपने क्षेत्र की बात कर लूं. दतिया जिला और लहार विधान सभा क्षेत्र में राजघाट परियोजना और भाण्डेर नहर प्रणाली से वहां सिंचाई का पानी मिलता है. यह बात सही हैकि पिछले चार-पांच वर्षों में पानी ठीक तरीके से मिल रहा है इसकी आलोचना नहीं कर रहा लेकिन जो पहले मंत्री जी थे तो जो बांध रतनगढ़ की माता के पास सिंध नदी पर बना रहे हैं उस बांध से हमारे लहार में पानी देने की योजना थी लेकिन जबसे श्रीमान जी ने कार्यभार संभाला है तो उससे जो हमारे क्षेत्र में पानी देने की योजना थी उसको उसमें से अलग कर दिया है मैं कहता हूं कि इनका मंत्री होने के बाद प्रदेश स्तर की सोच होना चाहिये परन्तु इनका शरीर भी ज्यादा लंबा चौड़ा नहीं है लेकिन दिल भी इनका छोटा है इन्होंने उसका पानी अपने डबरा तरफ मोड़ रहे हैं. नदी का बहाव दूसरी तरफ है लेकिन फिर भी दूसरी तरफ से डबरा पानी ले जा रहे हैं.

          डॉ.नरोत्तम मिश्र - वहां इनकी विधायक इमरती देवी जी हैं आप उनका विरोध कर रहे हैं.

          डॉ.गोविन्द सिंह - आप अपने घर ले जा रहे हैं. खेती बाड़ी उनकी है नहीं है सारी आपकी है. आप अपने लिये वहां पानी ले जा रहे हैं.

          श्री प्रदीप अग्रवाल - डाक्टर साहब, आप तो हमारा सब पानी ले ही जाते हैं इन्दरगढ़ का,सेवढ़ा का लहार, एक नहर का इतना कह रहे हैं.

          चौधरी मुकेश सिंह चतु्र्वेदी -  अध्यक्ष महोदय,यह इतने साल मंत्री रहे इन्होंने बांध के संबंध में कभी सोचा नहीं अब जब हमारी सरकार बना रही है तो उसमें मीन-मेख निकाल रहे हैं. आपने इतने साल मंत्री रहे आपने कभी बांध का प्रस्ताव भी दिया.

          अध्यक्ष महोदय - कृपया व्यवधान न करें.

          श्री प्रदीप अग्रवाल - इससे डबरा जोड़ दें तो 6 विधान सभा क्षेत्र लाभान्वित हो रही हैं.

          डॉ.गोविन्द सिंह - जब भगवान के यहां बुद्धि बंट रही थी तब आप कहां सो रहे थे.

          चौधरी मुकेश सिंह चतु्र्वेदी -  इनके विवेक पर क्या कहें भगवान कभी सोते नहीं हैं.

          डॉ.गोविन्द सिंह - पहले नहर आती है दतिया जिले में, दतिया से चलती है सेंवढ़ा विधान सभा क्षेत्र, फिर अंतिम छोर पर आता है लहार और कह रहे हैं कि हमारा पानी लहार ले जाते हैं. इसलिये कह रहे हैं कि बोलने सेपहले सोचो,समझो कि क्या कह रहे हैं.अध्यक्ष महोदय, जल्दी-जल्दी बोल लेने दें मुझे डिस्टर्ब कर रहे हैं. हमारा कहना है मंत्री जी कि उस बांध को आप जोड़िये जो पहले से योजना थी जुलानिया साहब ने किया था तो उसको आप जोड़ें. मैंने एक पत्र आपको दिया है कि हमारे यहां छोटी-छोटी नहरों की समस्या है. एक-एक,दो-दो किलोमीटर बढ़ना हैं और जो आप लाईनिंग करा रहे हैं. वह ठीक से नहीं हो रहा है इधर हो रहा है उधर उखड़ रहा है इस पर भी आप अंकुशलगाएं. पिछले बजट सत्र में तत्कालीन जल संसाधन मंत्री मलैया जी ने घोषणा की थी,वायदा किया था कि जसकर्धन तालाब का जीर्णोद्धार करेंगे. वह 64 हेक्टेयर का तालाब है. उसके पहले  करीब 6 वर्ष पहले श्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री जी भी गये थे. उन्होंने घोषणा की थी कि इसका जीर्णोद्धार कराएंगे लेकिन अभी तक नहीं हुआ है. अभी एक पत्र नगर परिषद ने भेजा उसमें तालाब को ट्रांसफर कर दिया. मैंने उनको लिखा कि यह तालाब सिंचाई विभाग अपने पास रखे और उसका जीर्णोद्धार करे. एक विचित्र बात है आपका विभाग कैसे चल रहा है यह प्रदेश की जनता जान जाए और माननीय पंडित नरोत्तम मिश्रा जी का बुद्धि का विकास करने के लिये जनता समझे. डाक्टर नरोत्तम जी,फर्जी पी.एच.डी.वाले. मैं कहना चाहता हूं कि आपने प्रशासकीय प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है. इसमें आपने लिखा है कि 1 जनवरी,2017 तक की स्थिति में 29.66 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचित किया जा चुका है. राज्यपाल महोदय का अभिभाषण 21 फरवरी,2017 को हुआ उसमें आपने कहा कि मेरी सरकार का लक्ष्य वर्ष 2018 तक 40 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचित करने का था. लेकिन हमने क्षमता विकसित करते हुये 40 लाख हेक्‍टेयर का सिंचाई लक्ष्‍य पहले प्राप्‍त कर लिया.

          डॉ. नरोत्‍तम मिश्र--  गोविंद सिंह जी, पढ़ा मत करो यह आपकी समझ में नहीं आयेंगी पढ़ने-लिखने की बातें, 29 लाख हेक्‍टेयर जो था.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह)--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस तरह से आप कह रहे हैं कि पढ़ा लिखा मत करो इसका क्‍या मतलब है.

          डॉ. नरोत्‍तम मिश्र--  मैं उनका जवाब दे दूं. मैं यह कह रहा था, गोविंद सिंह जी इधर तो देखो. मैंने निवेदन यह किया कि उसमें जो बताया है वह कन्‍क्‍लूड बताया है कि उसमें बोरिंग से भी सिंचाई हुई है, लिफ्ट ए‍रीगेशन से भी हुई है. इसमें सिर्फ जल संसाधन की बताई है. सिंचाई अलग-अलग माध्‍यमों से नर्मदा घाटी से भी होती है, तालाब से भी होती है.

          डॉ. गोविंद सिंह--  यह आपका जल संसाधन विभाग का प्रतिवेदन है.

          डॉ. नरोत्‍तम मिश्र--  जी हां. आप राज्‍यपाल का उदाहरण दे रहे हैं, राज्‍यपाल के अभिभाषण में कन्‍क्‍लूड करके बताया है.

          डॉ. गोविंद सिंह--  फिर आपने वित्‍त मंत्री का बजट भाषण 1 मार्च को हुआ उसमें आपने बताया है कि 23 लाख हेक्‍टेयर कृषि भूमि की सिंचाई क्षमता का लक्ष्‍य हमनें प्राप्‍त कर लिया है तो अब आप तीनों में अलग-अलग क्‍यों बता रहे हो. आप अपनी बुद्धि विवेक से काम करो, सदन को गुमराह करने के लिये ऐसी योजना मत बनाओ. आपके ढाई हजार करोड़ रूपये की सिंचाई योजना में गड़बड़ी है उसे आपके प्रमुख सचिव अग्रवाल साहब ने पकड़ी है. इस पर जरा ध्‍यान दो, आपने क्‍या कार्यवाही की. बांध लगातार फूट रहे हैं, किसानों को आप मुआवजा देने का काम करें.

          डॉ. नरोत्‍तम मिश्र--  बांध कहां का फूट गया ?

          अध्‍यक्ष महोदय--  कृपया व्‍यवधान न करें माननीय मंत्री जी.

          डॉ. नरोत्‍तम मिश्र--  अध्‍यक्ष जी, नहर फूटी नहीं, यह बांध कह रहे हैं अब गुमराह कौन कर रहा है ?

          डॉ. गोविंद सिंह--  लीकेज हो गया.

          डॉ. नरोत्‍तम मिश्र--  लीकेज और फूटने में अंतर होता है.

          डॉ. गोविंद सिंह--  हां नहर लीकेज हुई. अब आपसे कहना चाहता हूं कि सिंचाई पंचायतों में आप कंट्रोल करें. इसमें सहायक यंत्री को सचिव बनायें ताकि यह जो पूरा का पूरा पैसा गोलमाल हो जाता है उसमें कंट्रोल हो, काम हो. इसके साथ ही कहना चाहता हूं विधान मंडल के बारे में भी एक लाइन बोल दूं अध्‍यक्ष जी. पूरे देश में मध्‍यप्रदेश ऐसा राज्‍य है जहां आपने विधायकों की उपस्थिति तय की है. सरकार करोड़ों रूपये का घोटाला कर रही है. एक लाख छियासी हजार करोड़ का कर्जा लद गया, मेरी उपस्थिति तो शतप्रतिशत रहती है, शायद ही 27 वर्षों में 27 दिन अनुपस्थित रहा हूं. लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि 7 दिन का जो नियम था आप विधान मंडल में विधायकों पर कुठाराघात कर रहे हैं. लोकसभा की तरह प्रतिदिन की उपस्थिति देख रहे हैं यह उचित नहीं है. आप रिनोवेशन में करोड़ों रूपये खर्च कर रहे हो. विधान सभा में आपने कोई नियम नहीं बनाया. मेरा आपसे अनुरोध है कि एक उप समिति बनाईये, यहां तमाम कर्मचारियों के पद खाली पड़े हुये हैं. सचिवालय में उप‍ सचिव नहीं है, सचिवालय में क्‍लर्क नहीं है, सचिवालय में अधिकारी नहीं हैं, संचालक नहीं है पूरे पद खाली पड़े हुये हैं. कर्मचारियों के न होने से विधान सभा की जो गरिमा गिर रही है उसकी पूर्ति कीजिये और जिस प्रकार का लोक सभा में पैटर्न है उसी पैटर्न को अपनाईये, विधान सभा को स्‍वतंत्र रखिये, (XXX), इसके बजट की भी अलग से व्‍यवस्‍था करें.

          डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- माननीय अध्‍यक्ष जी, मेरी आपत्ति है, इसे आप विलोपित कर दें.

          डॉ. गोविंद सिंह--  जब आप बजट नहीं दोगे तो कहां से चलेगी.

          डॉ. नरोत्‍तम मिश्र--  विधान सभा किसी के दवाब में नहीं चलती यह लोक सभा की तरह स्‍वतंत्र है. माननीय अध्‍यक्ष जी, इसको विलोपित करवाना चाहिये.

          अध्‍यक्ष महोदय--  उतना विलोपित कर दें.

          श्री अजय सिंह--  (XXX).

          डॉ. नरोत्‍तम मिश्र--  इसको भी विलोपित करायें माननीय अध्‍यक्ष जी.

          अध्‍यक्ष महोदय--  यह बिल्‍कुल विलोपित कर दें.

          डॉ. गोविंद सिंह--  अध्‍यक्ष जी ने मुझसे कुछ नहीं कहा है, यह मेरा खुदा का कहना है. मैं देख रहा हूं कि गलत जवाब आ रहे हैं, संशोधन नहीं होते, मीटिंगे नहीं हो रहीं, आश्‍वासन पूरे नहीं हो रहे, बैठकें नहीं हो पा रहीं इसलिये मेरा अनुरोध है कि इसके जो नियम हैं उसको अलग से बनायें और इसे स्‍वतंत्र करें, यहां शासन का कोई हस्‍तक्षेप न हो जिस प्रकार लोक सभा में पैटर्न है उसी प्रकार विधान सभा में हो यह मेरा कहना आपसे है. इसके साथ ही साथ मैं यह भी कहना चाहता हूं कि आपका जनसंपर्क विभाग है वह भी आपके अधीनस्‍थ है. इसमें मैं पूछना चाहता हूं कि आप इसका तमाम बजट बढ़ाते चले जा रहे हैं, वैसे ही आपकी शक्‍ल-सूरत भगवान ने खूबसूरत बनाई है तो फिर क्‍यों प्रचार-प्रसार में इतना खर्च कर रहे हो. आपने पद का कितना दुरूपयोग किया, हितग्राही सम्‍मेलन में आपने 16 करोड़ रूपये फूंक डाले, आपने तेंदूपत्‍ता का एक दिन का सम्‍मेलन किया प्रचार-प्रसार में है यह, 2 करोड़ 18 लाख, विश्‍व हिन्‍दी सम्‍मेलन में करीब 11 करोड़ 23 लाख से अधिक, किसान सम्‍मेलन में 7 करोड़ 70 लाख से अधिक, ग्रामोदय से भारत उदय इसमें आपने 4 करोड़ 34 लाख से अधिक खर्च किया है. अंतर्राष्‍ट्रीय महाकुम्‍भ में 17 करोड़ के करीब आपने खर्च किया है. इसके साथ ही साथ ग्‍लोबल पार्क का जो आपने आयोजन कराया उसके प्रचार-प्रसार में लगभग ढाई लाख रूपये खर्च किये हैं. विश्‍व आयुर्वेद सम्‍मेलन में 2 करोड़ 35 लाख खर्च किया है और कृषि महोत्‍सव में 54 करोड़ रूपये खर्च किया है और किया कहां से है ? माध्‍यम से. माध्‍यम संस्‍था है वह आपके विभाग के तहत है, लेकिन माध्‍यम भी करता तो कोई बात नहीं थी. माध्‍यम के बाद आपने नये बिचौलिये छोड़ दिये. यह एक कंपनी है जो एक होटल में भृत्‍य की नौकरी करता था, यह कहां से प्रकट हो गया, इनवेस्‍ट कंपनी, विजन फोर्स, करोड़ों का काम विजन फोर्स को दे दिया. गोपाल ग्‍लोबल स्‍टोर्स, लोटस एडवरटाइजर्स को इतना पैसा जब आप दे रहे हैं और उन संस्‍थाओं को लाभ पहुंचा रहे हैं, क्‍या आप इसकी जांच करायेंगे ? आज से 5 वर्ष पहले जो व्‍यक्ति एक होटल में नौकर था वह आदमी विजन फोर्स नाम की कंपनी बनाकर करोड़ों रूपये का काम कर रहा है, वह आज अरबपति हो गया है, क्‍या यह जनता की गाढ़ी कमाई की लूट नहीं है. मेरा आपसे यही अनुरोध है कि आप इस तरह का जो कार्य कर रहे हैं वह बंद करें. अधिमान्‍य पत्रकार केवल आप चेहरा देख-देखकर घोषित कर रहे हो. एक पत्रकार था अब छोड़कर चला गया पहले उसे मुरैना से अधिमान्‍य पत्रकार बनाया. जिसके पास इतना पैसा भी नहीं था कि आने जाने का किराया वह दे सके और उसमें आधी छूट मिलती है आज वह मुम्‍बई में फिल्‍मों में फाइनेंस का काम कर रहा है.

          उपाध्‍यक्ष महोदय (डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह) -- (सीट पर बैठे-बैठे) क्‍या नाम है.

          डॉ. गोविंद सिंह--  नाम इन्‍हें मालूम होगा (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र जी की तरफ इशारा करते हुये) कोई मशानी नाम का व्‍यक्ति है. वह आज बड़ी-बड़ी कंपनियों को और जो फिल्‍म बनाते हैं उनको फाइनेंस कर रहा है.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह-- अच्‍छा वह संजय मशानी (सीट पर बैठे-बैठे).

          डॉ. गोविंद सिंह--  वह तो इनको पता होगा संजय मशानी है कि कौन है (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र जी की तरफ इशारा करते हुये) आप इन लोगों पर कंट्रोल करें, जनता का धन न लुटायें यही मेरा कहना है. जनता ने आपको जनादेश दिया है तो उसका सम्‍मान करें, दुरूपयोग न करें.

          श्री रामेश्‍वर शर्मा (हुजूर)--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मांग संख्‍या 23, 28, 32, 45 और 57 के समर्थन में बोलने के लिये खड़ा हूं. जैसा कि मेरे पूर्व वक्‍ता ने पहले अपनी बात कही तो मैं भी अपनी बात पहले कह दूं इसके बाद बाकी की बात करूंगा. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे भोपाल में एक कलियासोत डेम है और कलियासोत डेम से एक नदी का उदगम होता है और यह नदी आगे जाकर बेतवा में मिलती है और यह नदी आधे शहर और आधे ग्रामीण भाग से निकलती है. वर्तमान में जब बारिश होती है तो बारिश के कारण आसपास के नागरिक इसके शिकर होते हैं और जगह-जगह अगर इसमें स्‍टॉप डेम बन जायें तो इस नदी की खूबसूरती भी होगी और सिंचाई के साधन भी होंगे और वहां आसपास का भूजल स्‍तर भी बढ़ेगा. दूसरा एक बकानिया है जहां 20-22 हेक्‍टेयर का एक बड़ा तालाब है, उस तालाब के गहरीकरण की भी मैं माननीय मंत्री जी से बात करना चाहता हूं. एक मूढ़ला है वहां भी तालाब की बात करता हूं जिससे वहां लगभग 25 गांव को सिंचाई की क्षमता बढ़ जायेगी. सूखी सेवनिया नाम से ही सूखा इलाका है वहां भी हमारे पास 8 हेक्‍टेयर लेण्‍ड पहले से ही तालाब के नाम से आरक्षित है उसका गहरीकरण करके वहां उसे छोटी सिंचाई परियोजना कर सकते हैं. बगरोदा में हमारे यहां 35 हेक्‍टेयर का तालाब है इससे भी वहां सिंचाई कर सकते हैं इसका गहरीकरण किया जाये. कान्‍हासैया क्षेत्र में भी एक तालाब बनाया जाये. तूमड़ा क्षेत्र में जहां हमारा स्‍टॉप डेम पहले से है उसका गहरीकरण करके उसकी सिंचाई क्षमता बढ़ाई जाये, रतनपुर पठार वहां के नागरिकों ने भी मांग की है. सरबर, भानपुर, कैकडि़या यह आदिवासी क्षेत्र के गांव हैं, छोटी-छोटी खेती है और तालाब के किनारे हैं लेकिन इनकी ऊंचाई होने के कारण वह पानी नहीं ले पाते तो वहां पर एक अलग से तालाब, डेम की हम मांग करते हैं. साथ ही मैं एक और निवेदन करना चाहता हूं कि केरबा जो डेम है इससे आजकल कोलार क्षेत्र में पानी की सिंचाई योजना लाई जा रही है और साथ में एक और महत्‍वपूर्ण बात है कि इस डेम से सिंचाई भी हो रही है और दोनों को ध्‍यान में रखते हुये इस तालाब का गहरीकरण और केरवा डेम को सुरक्षित करना भी बहुत जरूरी है, इसके चारों तरफ अब अतिक्रमण बढ़ने लगा है और यह अतिक्रमण बढ़ जायेगा तो केरबा डेम से हमारी जो 3 लाख की आबादी कोलार को जो पानी मिलेगा वह भी और सिंचाई का जो संसाधन है, मैं यह समझता हूं कि आने वाले दिनों में परेशानी आयेगी. मैं माननीय मंत्री महोदय, नरोत्‍तम मिश्र जी से यह मांग करता हूं कि वह यह चीजें उसमें जोड़ें.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, हम और आप यह सब जानते हैं कि मध्यप्रदेश की सरकार ने आदरणीय शिवराज सिंह चौहान जी के नेतृत्व में अनेक बार इस सदन में चर्चा की है. और आदरणीय गोविन्द सिंह जी ने भी इस बात का समर्थन किया है कि प्रदेश में लगातार सिंचाई बढ़ रही हैं और मेरे क्षेत्र में भी लगातार सिंचाई के लिये जो नहरें चल रही है उससे पर्याप्त पानी वहां के किसानों को मिल रहा है. अध्यक्ष महोदय, हम और आप यह जानते हैं कि 7 लाख हेक्टेयर से आज 40 लाख हेक्टेयर पर आ गये हैं, यह बात अलग है कि इसमें जल संसाधन विभाग के साथ साथ अन्य विभागों का भी महत्वपूर्ण रोल है लेकिन 7 लाख से 40 लाख हेक्टेयर तक की भूमि का रकवा सिंचित होने से मध्यप्रदेश की कृषि को बढ़ावा देना, मध्यप्रदेश के किसानों को संबल और ताकत देना है.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, भाई रामेश्वर शर्मा जी बहुत बात कर रहे थे कि मध्यप्रदेश सरकार ने सिंचाई क्षमता बढ़ाई है, केरवा डेम की बात भी आपके द्वारा कही गई है. अध्यक्ष जी, पता नहीं कौन व्यक्ति है जिनकी 6 एकड़ जमीन है 5-7 एकड़ का उन्होंने कब्जा कर लिया है. भाई रामेश्वर शर्मा जी को भी पता होगा कि कौन है कृपा करके आप वह भी बता दें कि आपकी पार्टी के नेता जहां एक तरफ तलाब के संरक्षण की बात करते हैं वहीं दूसरी तरफ तालाब में मिट्टी डालकर के कब्जा कर रहे हैं. मंत्री जी को तो कम से कम आप जानकारी दे दें.

          श्री रामेश्वर शर्मा- अध्यक्ष महोदय, मैंने तो अपनी बात कही है. मैं नेता प्रतिपक्ष जी को धन्यवाद देता हूं लेकिन कुल मिलाकर के सिंचाई का जो रकबा उससे तय हुआ है और उसका जो कैचमेंट है उसको सुरक्षित रखा जाये. यह सबकी मांग होगी. नाम बताने की जरूरत नहीं है जब सर्वे होगा तो बहुत सारे नाम निकलकर के सामने आयेंगे. लेकिन मैं एक बात जरूर कहना चाहता हूं कि जिस तरह से मध्यप्रदेश में सिंचाई के संसाधन बढ़े हैं, सिंचाई से बिजली का भी उत्पादन हुआ है. एक डेम का निर्माण हुआ है तो उससे एक लाभ किसानों को हुआ, दूसरा वहां पर भूजल का स्तर बढ़ा है तीसरा वहां पर बिजली का उत्पादन भी हुआ है . जल संसाधन ने जो अपने क्षेत्र में काम करने की प्रगति की है मैं उनको बधाई देना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश का अंधेरा दूर हुआ, मध्यप्रदेश का किसान जो परेशान हालत में था सिंचाई का रकवा बढ़ने से उस किसान की ऊर्जा बढ़ी है, उत्पादन क्षमता बढ़ी है और चार बार प्रदेश को कृषि कर्मण्य एवार्ड भी सिंचाई की क्षमता बढ़ने के कारण मिला है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, हम यह प्रार्थना करना चाहते हैं कि मध्यप्रदेश सरकार ने जो जल संसाधन विभाग का बजट प्रस्तुत किया है मैं उसके लिये माननीय मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने छोटी और लघु सिंचाई योजनायें भी उसमें शामिल की हैं. सबसे बड़ी बात है कि विपक्ष के साथी कुछ भी कहें लेकिन बजट देखेंगे तो इसमें छिंदवाड़ा भी है. वहां पर भी सिंचाई की योजनायें बढ़ाई जा रही हैं. किसी भी क्षेत्र को इस सरकार के द्वारा नजरअंदाज नहीं किया गया है. मध्यप्रदेश सरकार का जो देखने का और सोचने का तरीका है वह संपूर्ण मध्यप्रदेश है. संपूर्ण मध्यप्रदेश से कौन प्रतिनिधित्व करता है, इसका ध्यान नहीं है लेकिन मध्यप्रदेश का गांव और मध्यप्रदेश का किसान खुशहाल हो इस बात का ध्यान हमारी सरकार ने रखा है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से जल संसाधन मंत्री जी से मैं एक ओर प्रार्थना करना चाहता हूं. पिछले साल हमने मुख्यमंत्री जी से विधायक निधि बढ़ाने की बात की थी और उन्होंने 2 करोड़ रूपये की विधायक निधि दी उस बात के लिये मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद देते हैं . हमारा जो मध्यप्रदेश का भवन नई दिल्ली में है . इस मध्यप्रदेश भवन में कुछ सुविधाओं में सुधार की आवश्यकता है . वहां पर कुछ अधिकारी ऐसे बैठ गये हैं जो 10-10 साल से वहां पर पदस्थ हैं. उन पर भी सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता है. रात के 3-4 बजे हमारे जनप्रतिनिधि वहां पर पहुंचते हैं तो पहले से कमरे की बुकिंग होने के बाद भी उनको कमरा नहीं मिलता है और उनको मध्यांचल भवन में स्थानांतरित कर दिया जाता है, जबकि स्थिति देखी जाये तो कमरे खाली रहते हैं. इस बात पर ध्यान की आवश्यकता है. हालांकि सदस्यों की दूसरी मांगो का भी समर्थन मिला है, दूसरी चीजों की सुविधायें भी मिली है और विधान सभा ने भी त्वरित कार्यवाही करते हुये काम किया है, आज हमारे सारे प्रश्न आन लाईन लग रहे हैं. मैं इस बात के लिये आपको, आपके विधानसभा सचिवालय को और संसदीय कार्य मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं कि सदस्यों की सुविधा बढ़ाई गई है. मैंने जो मांग की है उसके बारे में जल संसाधन मंत्री जी से एक बार और मांग करता हूं कि हमारी मांगों को ध्यान में रखते हुये बजट में कुछ न कुछ घोषणा अवश्य करेंगे. अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे अपनी बात को रखने का अवसर प्रदान किया इसके लिये आपको भी बहुत बहुत धन्यवाद.

          श्री के.पी.सिंह(पिछोर) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने जब से इस विभाग का कार्यभार सम्हाला है तब से ब़ड़ी विचित्र व्यवस्थायें इस विभाग में हो रही हैं. माननीय मंत्री जी मैं आपका ध्यान प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं की तरफ दिलाना चाहता हूं . बहुत से उप चुनाव हुए और सामान्य चुनाव हुये लगभग 617 घोषणायें आपके मुख्यमंत्री जी के द्वारा की गई हैं. 617 घोषणाओं में विभाग की समीक्षा में मात्र 206 मुख्यमंत्री जी की घोषणायें पूरी हो पाई हैं वह भी 11 वर्ष में. जब प्रदेश के मुख्यमंत्री जी की घोषणाओं की यह स्थिति है तो मंत्री जी आपके द्वारा की गई घोषणाओं का हाल तो भगवान ही जाने कि क्या होगा.

 

12.58 बजे                   {उपाध्यक्ष महोदय(डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह)पीठासीन हुए}

 

          माननीय उपाध्यक्ष महोदय, वैसे मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि आप दौरा करते नहीं है, दूसरे क्षेत्र में कहीं आते जाते नहीं हैं घूम फिरकर आप दतिया पहुंचते हो. उस कारण से आपको घोषणा करने का अवसर ही प्राप्त नहीं होता है. जो कुछ घोषणायें होती भी हैं तो वह दतिया मे होती हैं और दतिया में भी आपकी विधानसभा में. उपाध्यक्ष महोदय, इसलिये मेहरबानी करके आप इनके निर्देश दें कि आप पूरे मध्यप्रदेश के मंत्री हैं कम से कम प्रदेश के चारो तरफ जाओ. मेहरबानी करके आप इसमें परिवर्तन करिये थोड़ा समय प्रदेश के अन्य स्थानों के लिये भी निकालिये और प्रदेश में भले ही आप कांग्रेस के विधायकों के क्षेत्र छोड़ दे लेकिन भारतीय जनता पार्टी के विधायकों के क्षेत्र में तो जायें. तब आपको पता लगेगा कि प्रदेश में क्या हो रहा है.

          डॉ.नरोत्तम मिश्रा -- लहार गये थे, चिकित्सालय देखने (हंसी)

          श्री के.पी.सिंह -- स्वास्थ्य मंत्री के रूप में आप गये होंगे तो लहार के अस्पताल का ओर भी कबाड़ा हो गया होगा. (हंसी) माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से यह निवेदन है कि प्रदेश के अन्य स्थानों पर भी आप नियमित रूप से दौरा करें. उपाध्यक्ष जी एक उदाहरण में बताना चाहता हूं. वर्ष 2009 में प्रदेश का जो सिंचाई क्षेत्र था वह 8.3 लाख हेक्टेयर था, उसके बाद इस वर्ष तीन गुना बढ़कर 36 लाख हेक्टेयर हो गया और अब आप कह रहे हैं कि वर्ष 2018 तक हम इसको 40 लाख हेक्टेयर तक कर लेंगे . हमें इस पर कोई आपत्ति नहीं है. वर्ष 2025 में आपका टारगेट 60 लाख हेक्टेयर है. लेकिन मेरा कहना है कि आप धरातल में जायेंगे तो आपको पता चलेगा कि यह जो सिंचाई का रकवा मध्यप्रदेश में लगातार बढ़ रहा है यह कागजों में ही तो नहीं बढ़ रहा है या वास्तव में स्थिति वैसी है. मैं बताना चाहता हूं कि 2000 करोड़ के आसपास बुंदेलखंड पैकेज के अंतर्गत कार्य हुआ. बुंदेलखंड पैकेज में इसी विभाग के द्वारा जो कार्य किया गया उसमें हमारे भाई मुकेश नायक जी अभी यहां पर उपस्थित नहीं हैं वह बता रहे थे कि उनके ही क्षेत्र में पन्ना जिले में 32 करोड़ का तालाब बना था सिरस्वाहा में, एक तालाब 11 करोड़ का बना बिलखुरा में और दोनों बांध फूट गये. अब यह जितने बांध फूट रहे हैं. यहां मैं यह भी बताना चाहता हूं कि करीब 774 स्टाप डेम बुंदेलखंड पैकेज अंतर्गत बने हैं. 774 स्टाप डेम में वर्तमान स्थिति में सारे के सारे स्टाप डेम फूट चुके हैं यहां आप सिंचाई क्षमता लगातार बढ़ाते जा रहे हैं तो धरातल पर आप देख नहीं रहे हैं सिर्फ कागजी आंकलन कर रहे हैं. मेहरबानी करके आप इसकी समीक्षा करें कि जो बांध फूट रहे है, जो स्टाप डेम फूट रहे हैं इनसे जो सिंचाई की क्षमता में कमी आ रही है वह कहां है. मेहरबानी करके उसका भी उल्लेख विभागीय प्रतिवेदन में आना चाहिये. तब आपको सही स्थिति का पता चलेगा कि वास्तव में सिंचाई क्षमता कितनी बढ़ रही है. मेरे विधान सभा क्षेत्र में दबिया गोविंद तालाब बना हुआ है, तालाब में नहरे बन गई लेकिन पानी एक बीघा जमीन तक को नहीं मिल रहा है लेकिन आंकलन में दिखाया है कि इससे सिंचाई हो रही है. आप मंत्री बने हैं तो कम से कम इतना आंकलन कराये कि जो बांध या स्टाप डेम बन गये है वास्तव में इनसे सिंचाई हो पा रही है या नही हो पा रही है. इसी तरह से राजघाट नहर परियोजना आपके बसई क्षेत्र की तरफ जाती है उसका पानी बसई के टेल तक मुश्किल से एक या दो बार पहुंचा है. जब से आप मंत्री बने हैं तब से लेकिन सिंचाई क्षमता में जो वृद्धि की बात है उसमें तो कोई कमी नहीं आई है इसलिये उपाध्यक्ष महोदय, मंत्री जी से प्रार्थना है कि आप संभागवार दौरा करें वहां पर आप समीक्षा करें कि वास्तव में जितनी आप बता रहे हैं उतनी सिंचाई क्षमता में वृद्धि हो रही है अथवा नहीं हो रही है या धरातल पर स्थिति कुछ ओर है.

12.49 बजे                                  अध्यक्षीय घोषणा

भोजनावकाश विषयक

          उपाध्यक्ष महोदय- आज भोजनावकाश नहीं होगा. भोजन की व्यवस्था सदन की लॉबी में की गई है. माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि वे सुविधानुसार भोजन ग्रहण करने का कष्ट करें.

 

वर्ष 2017-2018 की अनुदानों की मांगों पर मतदान .... (क्रमश:).

 

          श्री के.पी. सिंह- ....  मेरा आकलन करने के ऊपर जोर है, अगर उसका आकलन आप ठीक से दोबारा कराएंगे तो मैं समझता हूं आपके सामने सच्‍चाई आ जाएगी. तब आपको पता लगेगा कि वास्‍तव में सही है या गलत है. पता नहीं क्‍या हुआ आपके रहते हुआ कि आपके पहले से प्‍लांड हो गया, सिंचाई संस्‍थाओं के चुनाव अभी साल भर पहले हुआ, इस चुनाव में किसने आपको सुझाया कि जो अध्‍यक्ष बनेगा उसका हर दो साल में चुनाव होगा. हमारा विधान सभा का कार्यकाल पांच साल का, जनपद का कार्यकाल पांच साल का, पंचायत का कार्यकाल पांच साल का होता है तो ऐसा क्‍या कारण है कि सिंचाई संस्‍थाओं का चुनाव दो साल के लिए करा रहे हो. दो साल में फिर चुनाव होगा और नया अध्‍यक्ष बनेगा. आप अच्‍छी तरह से समझते हैं कि जितने चुनाव सदस्‍यों के द्वारा होते है, चाहे जनपद के हो, चाहे अन्‍य संस्‍थाओं के हो, इनमें लेनदेन का मामला आता है. एक अध्‍यक्ष तो जैसे तैसे करके सिंचाई अध्‍यक्ष बन गया, दो साल में वह कितना काम कर पाएगा, पैसा भी बहुत कम जाता है. मेहरबानी करके यह पांच साल का कार्यकाल कर देते तो मैं समझता हूं कि संस्‍थाओं के अध्‍यक्षों को इसमें ठीक से काम करने का अवसर मिल पाता. दो साल के कार्यक्रम में तो साल भर अध्‍यक्ष कुछ समझ ही नहीं पाते कि उसका काम क्‍या है. अधिकारी संस्‍थाओं के अध्‍यक्ष को  इतना गुमराह करते हैं, अभी तक हमारे यहां सिंचाई संस्‍थाओं के अध्‍यक्ष के नाम से खाता ही नहीं खुल पाए हैं, आपके यहां भी ऐसा हो सकता है. जब खाते ही नहीं खुल पाए तो राशि कहां से आएगी और काम कहां से होगा, ऐसे ही करने में साल भर से ज्‍यादा समय निकल जाता है . मंत्री जी इसमें पुनर्विचार करना चाहिए, आपने गलत प्रक्रिया डाली है, इसको अगर आप ठीक करेंगे तो मैं समझता हूं कि सिंचाई संस्‍था की जो भागीदारी की बात कर रहे हो वह ठीक हो पाएगी. उपाध्‍यक्ष महोदय, बस आखिरी बात कर रहा हूं. मध्‍यप्रदेश भवन के बारे में डॉ गोविन्‍द सिंह जी ने और रामेश्‍वर शर्मा जी ने बात की थी, उसकी ओर आपका ध्‍यान आकर्षित कराना चाहता हूं कि हमारे साथ जो गनमैन जाते हैं, जो वहां रुकते हैं, उनके कमरे में खटमल होते हैं, हम तो ठीक रहते हैं. गनमैन रात भर सो नहीं पाते हैं, वे कई बार शिकायत करते हैं, वे भी तो मानव है, उन्‍हें भी तो नींद की जरूरत पड़ती है मेहरबानी करके उनकी व्‍यवस्‍था ठीक करवा दें. माननीय मंत्री जी आपने लोवर परियोजना को बजट में शामिल कराया है. बहुत दिनों से लंबी प्रतीक्षित योजना थी, उसके लिए जब इसमें काम चालू हो जाएगा तो मैं आपको धन्‍यवाद दूंगा. हमारे क्षेत्र को तो फायदा होना ही है, लेकिन आपके क्षेत्र को ज्‍यादा फायदा होना है.

          संसदीय कार्यमंत्री (डॉ नरोत्‍तम मिश्र) - मेरे क्षेत्र को ज्‍यादा फायदा हो रहा है, इसकी जगह आप यह बोलिये कि आपके क्षेत्र को ज्‍यादा फायदा होना है.  

          श्री के.पी. सिंह - उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने बोलने का समय दिया, इसके लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद.

          उपाध्‍यक्ष महोदय - धन्‍यवाद के.पी. सिंह जी.

          श्री बहादुर सिंह चौहान (महिदपुर) - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मांग संख्‍या 23, 28, 32, 45 एवं 57 का समर्थन करते हुए कटौती प्रस्‍ताव का विरोध करने के लिए खड़ा हुआ हूं. उपाध्‍यक्ष महोदय, किसान एक खरीफ फसल लेता है और एक रबी फसल लेता है, जहां पर पानी पर्याप्‍त होता है वहां किसान तीन तीन फसलें ले लेता है. किसान को सुदृढ बनाने के लिए, प्रदेश को विकासशील बनाने के लिए हमारा जल संसाधन विभाग अति महत्‍वपूर्ण विभाग है, इस बजट में 9850 करोड़ का प्रावधान रखा गया है, विभाग के द्वारा 18 वृहद परियोजनाएं और 36 मध्‍यम परियोजनाएं तथा 407 लघु परियोजना पर कार्य प्रस्‍तावित है. 700 लघु परियोजनाओं में से 646 लघु परियोजनाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है. मात्र 54 लघु परियोजना बची है जो अतिशीघ्र पूर्ण होने वाली है. मुझे कहते हुए अत्‍यंत प्रसन्‍नता हो रही है कि वर्ष 2003 में पूरे मध्‍यप्रदेश में सिंचाई का रकबा 7.5 लाख हेक्‍टेयर था, आज जल संसाधन विभाग, नर्मदा घाटी एवं अन्‍य स्‍त्रोतों से मिलाकर लगभग 40 लाख हेक्‍टेयर हो गय है. बालाघाट के अंदर आजादी के पहले जो बैनगंगा बांध बना है, वह 1914 में बना है उसको बने हुए 100 वर्ष से अधिक हो गए हैं, इसकी नहरों की रखरखाव के लिए विभाग द्वारा 90 प्रतिशत कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं, जो बहुत ही महत्‍वपूर्ण परियोजना है. इसमें पुराने डैम जो 30 से 50 वर्ष पुराने हो गए हैं, उनके रखरखाव के लिए, नहरों की लाइनिंग के कार्य करने के लिए इस बजट में लगभग 3 हजार करोड़ का प्रावधान रखा गया है. के.पी. सिंह जी सही कह रहे थे कि पुरानी परियोजनाओं को भी आधुनिकीकरण करना पड़ेगा, उसके लिए विभाग ने जो राशि का प्रावधान किया है, उसके लिए माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय,आपके माध्‍यम से मंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूं. केन, बेतवा लिंक परियोजना का संवैधानिक प्रस्‍ताव लगभग तैयार हो गया है. कैन, बेतवा लिंक परियोजना जो प्रदेश की सबसे बड़ी योजना है, इस योजना को मूर्तरूप देने के बाद, पूर्ण होने के बाद प्रदेश को 5 लाख 27 हजार हेक्‍टेयर में सिंचाई होगी. विजन 2025 में जाकर सिर्फ शासकीय स्‍त्रोतों से, किसानों के द्वारा नहीं, जो कुंए और ट्यूबवेल से नहीं, सिर्फ शासकीय स्‍त्रोतों से इस प्रदेश का सिंचाई का रकबा 7 लाख हेक्‍टेयर होने वाला है. मुझे कहते हुए अत्‍यंत प्रसन्‍नता हो रही है कि मध्‍यप्रदेश को चौथी बार कृषि कर्मण अवार्ड मिल रहा है, उसमें जल संसाधन  विभाग का बहुत महत्‍वपूर्ण योगदान है. इस विभाग की एवं इस विभाग के मंत्री एवं मुख्‍यमंत्री जी की जितनी भी प्रशंसा की जाए, वह कम है. किसान को सिर्फ बिजली और पानी चाहिए, खेती उसके पास है, बिजली और पानी यदि किसान को उपलब्‍ध करा दिया जाए तो एक एक नहीं तीन तीन फसल लेकर अनाज का अपार भंडार उत्‍पन्‍न करके प्रदेश को आगे बढ़ाने में उसकी अहम भूमिका हो सकती है.

          उपाध्‍यक्ष महोदय - बहादुर सिंह जी, अब आप मालवा और अपने क्षेत्र की बात कीजिए, समय नहीं है, दो मिनट में समाप्‍त कीजिए.

          श्री बहादुर सिंह चौहान - उपाध्‍यक्ष महोदय, मालवा की बात आई है-

                   मालवा माटी गहन गंभीर,

                   डग-डग रोटी, पग-पग नीर.

          यह कहावत थी, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आज तो पानी के दर्शन पांच सौ से 600 फीट तक नहीं होते हैं, यह स्थिति है. इसके लिए माननीय मुख्‍यमंत्री, हमारे संसदीय कार्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री को धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि नर्मदा- क्षिप्रा सिंहस्‍थ लिंक परियोजना 2187 करोड़ की बनाया. नर्मदा का पानी क्षिप्रा में आया है, अधिकांश लोगों ने सिंहस्‍थ महापर्व जो हमने विगत वर्ष मनाया है, जिसमें 8 करोड़ लोगों ने मोक्षदायिनी  क्षिप्रा नदी में स्‍नान किया है. यदि वह पानी नहीं होता तो 8 करोड़ श्रद्धालुओं को स्‍नान कराना संभव नहीं था, यह योजना बहुत ही महत्‍वपूर्ण योजना है.

          उपाध्‍यक्ष महोदय - बहादुर सिंह जी समाप्‍त करें.

          श्री बहादुर सिंह चौहान - मेरे क्षेत्र की बात कर लू, बस एक मिनट में समाप्‍त कर रहा हूं. मेरे क्षेत्र में जो क्षिप्रा नदी बहकर महतुर में जा रही है. मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहता हूं कि हरबाखेड़ी का एक डेम का प्राक्‍क्‍लन तैयार करके विभाग में ईएनसी के पास आ चुका है. मेरे क्षेत्र में कालीसिंध नदी भी बहती है वहां के डेम क प्राकल्‍लन भी तैयार करके ईएनसी के पास आ चुका है. मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी से आग्रह करूंगा कि दोनों हरबाखेड़ी में क्षिप्रा नदी पर हरबाखेड़ी डेम और कालीसिंध नदी पर इंदोख डेम के संबंध में विभाग की पूरी प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है. उपाध्‍यक्ष जी आपके माध्‍यम से आग्रह करूंगा कि इन दोनों योजनाओं को इस बजट में सम्मिलित करने की कृपा करेंगे. आपने बोलने का समय दिया बहुत बहुत धन्‍यवाद.

          उपाध्‍यक्ष महोदय - धन्‍यवाद बहादुर सिंह जी.

            श्री जसवंत सिंह हाड़ा --  उपाध्यक्ष महोदय, आपने  पूरे मालवा का कहा, उसमें मालवा में    केवल उज्जैन ही नहीं है, और भी  जिले  हैं, थोड़ा  दो मिनट और  उनको दे दें. कालीसिंध भी बन रही है. पार्वती भी   बन  रही है.  आप मालवा पर आ   जाओ.

          श्री बहादुर सिंह चौहान -- उपाध्यक्ष महोदय,  गंभीर नदी वाली  योजना भी बन रही है,  उसका सैकण्ड फेज भी आ रहा है, बड़ी काली सिंध और गंभीर भी   जुड़ रही है.   मेरे विधान सभा क्षेत्र में  जो क्षिप्रा नदी बहकर महिदपुर में जा रही है और मैं कहना चाहता हूं कि   हरबाखेड़ी डेम   का  प्राक्कलन  तैयार करके  विभाग  में ईएनसी के पास आ चुका है.  दूसरी मेरे क्षेत्र में एक कालीसिंध नदी बहती है, वहां पर  इन्दोक  डेम का प्राक्कलन  तैयार होकर ईएनसी के यहां  आ चुका है.  मैं मंत्री जी से आग्रह करुंगा कि  यह  दोनों  क्षिप्रा नदी पर  हरबाखेड़ी वाला और  काली सिंध पर इन्दोक  वाला यह दोनों   प्राक्कलन और  विभाग की पूरी प्रक्रिया  पूर्ण हो चुकी है. मैं मंत्री जी से आग्रह करुंगा कि  इन दोनों योजनाओं को  इस बजट में सम्मिलित करने की कृपा करेंगे. उपाध्यक्ष महोदय,  आपने बोलने के लिये  अवसर दिया, बहुत बहुत धन्यवाद.

          उपाध्यक्ष महोदय --  मैं सभी माननीय सदस्यों से,  जो अब भाषण देंगे, उनसे अनुरोध करना चाहता हूं कि  अपने क्षेत्र की बात ज्यादा करें, चूंकि 3-3 वक्ता  सत्ता पक्ष और विपक्ष  से बोल चुके हैं और इस पर समय  ढाई घण्टा आवंटित है.  कृपया समय की मर्यादा का ध्यान रखें

          श्री सचिन यादव (कसरावद) -- उपाध्यक्ष महोदय,  चूंकि आपने पहले ही बोल दिया है,  समय का अभाव है, इसलिये  मैं  ज्यादा बात न करते हुए सीधे  विधान सभा क्षेत्र की कुछ बातों की  ओर मंत्री जी का ध्यान  आकर्षित करना चाहता हूं.  उपाध्यक्ष महोदय,  मेरे विधान सभा क्षेत्र में पूर्व में   कई सारे  सिंचाई के  तालाबों का निर्माण हुआ था, लेकिन समय के साथ साथ  इन तालाबों  की नहरों का और  इन तालाबों के जीर्णोद्धार  की आवश्यकता आन पड़ी  है.  मेरे विधान सभा  में  कुछ प्राक्कलन मुख्य अभियंता, इन्दौर एवं   प्रमुख अभियंता,  भोपाल को प्रस्तुत किये गये हैं.  मैं हमारे जो 3-4 प्रमुख तालाब हैं,  जिनके नहरों  की  और  तालाबों की मरम्मत  की आवश्यकता है और  निश्चित ही उसके पश्चात्  जो सिंचाई का रकबा है, उस सिंचाई के रकबे में भी  वृद्धि होगी.  हमने एक 86.29 लाख  का   अमर बगवा तालाब  का  प्रस्ताव बनवाकर के  भिजवाया है, जिससे 97 हेक्टेयर में अतिरिक्त सिंचाई होगी.  एक धामनोद नाले का करीब  81.39 लाख का प्रस्ताव बनवाकर  भिजवाया है, जिससे 82 हेक्टेयर  में अतिरिक्त सिंचाई होगी.  हमने एक प्रस्ताव  डाबरी  तालाब, जोकि हमारे आदिवासी  बाहुल्य क्षेत्र है, उसमें करीब 240.93 लाख  का प्राक्कलन बनवाकर भिजवाया है, जिससे आने वाले समय में  394 हेक्टेयर  में सिंचाई  में वृद्धि होगी.  इसके साथ साथ एक बिलिदड़  तालाब है, जो पुनः हमारे आदिवासी  बाहुल्य क्षेत्र का एक तालाब है, इसका 91.74 लाख का प्रस्ताव  बनवाकर के भिजवाया है, जिससे आने वाले समय में  166 हेक्टेयर में अतिरिक्त  सिंचाई होगी. मैं मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि   मैं समय समय पर पूर्व में भी  इन तालाबों की और नहरों  की मरम्मत एवं जीर्णोद्धार  के लिये  पत्र लिख चुका हूं और दरख्वास्त  कर चुका हूं,  लेकिन अभी तक इस दिशा में  कोई  काम नहीं हो पाया है.   मैं आशा और उम्मीद करता हूं कि  किसानों की मांग को ध्यान में रखते हुए  मेरे क्षेत्र  के जो तालाब और  नहरें हैं,  उनके जीर्णोद्धार के लिये  आप अपने बजट में  इनको  शामिल करेंगे  और  इन पर काम करेंगे.

                   उपाध्यक्ष महोदय, विभाग में कई सारी खामियां और कमियां हैं.  विभाग ने जो आंकड़े प्रस्तुत किये हैं, कहीं न कहीं  वह सदन को और क्षेत्र  की एवं प्रदेश की  जनता को गुमराह करने वाले हैं. मैं  आज इस सदन में  कुछ आंकड़े प्रस्तुत करना चाहता हूं, जिसके माध्यम से   निश्चित ही   विभाग को इस और ध्यान देने की  आवश्यकता पड़ेगी.  वर्ष 2014-15 में  जो शुद्ध सिंचित   क्षेत्र था  9548 हजार हेक्टेयर था, जो कि  घटकर के  वर्ष 2015-16 में  9284 हजार हेक्टेयर  हो गया.  इस प्रकार गत वर्ष की तुलना में लगभग 3.12  प्रतिशत  की कमी रही है. वर्ष 2015-16 में  जो शुद्ध  सिंचित क्षेत्र था,  उसमें नहरों और तालाबों से  जो सिंचाई हुई है, उसका प्रतिशत  मात्र 20 प्रतिशत है.  अन्य स्रोतों से  जो सिंचाई हुई थी,  वह मात्र 12 प्रतिशत हुई है.  सार्वजनिक सिंचाई जो  हुई है, जो आंकड़े  बार बार सरकार प्रस्तुत कर रही है  और  जो सरकार  असत्य आंकड़े प्रस्तुत करके  अपनी पीठ थपथपाने का  जो काम कर रही है, यह सबसे  चौकाने वाले  आंकड़े है. लगभग 67 प्रतिशत  जो  सिंचाई हो रही है,  वह निजी नलकूपों से  और निजी कुओं से  हो रही है.  उपाध्यक्ष महोदय, मैं पूछना चाहता हूं कि मेरा खेत, मेरा पैसा, मेरे पैसे से  मैंने  अपने खेत में  नलकूप एवं कुआं खुदवाया और  उसका श्रेय लेने का काम  सरकार कर रही है.  मैं आखिरी बात कहकर अपनी बात समाप्त करना चाहता हूं.  अभी पिछले दिनों   नदियों के  संरक्षण को  लोकर के और पानी  को बचाने के लिये  एक सेमिनार आयोजित किया गया था,  उस सेमिनार में  पूरे देश भर के विशेषज्ञ  आये थे, उसमें डॉ. राजेन्द्र सिंह जी, जो कि  मेग्सेसे  से अवार्ड  विनर हैं.   उन्होंने जिस प्रकार से  अवैध उत्खनन  पूरे  प्रदेश में चल रहा है, उसको लेकर के अपनी चिंता जाहिर की थी और  इस अवैध उत्खनन के कारण  हमारे कई  जिलों की  नदियां आज सूखने की कगार पर हैं. रेत की जो विशेषता है, रेत  अपने कणों  के बीच में पानी को सहेजने की  क्षमता रखती है.  लेकिन जिस प्रकार से  और जिस अधिकता से  जो अवैध उत्खनन हो रहा है, यह अवैध उत्खनन  निश्चित ही आने वाले समय में हम सभी के लिये एक  चिंता का विषय है.  उपाध्यक्ष महोदय, आपने बोलने  का मौका दिया,  इसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद.

                   डॉ. मोहन यादव (उज्जैन-दक्षिण)-- उपाध्यक्ष महोदय, मैं  मांग संख्या 23,28,32,45 एवं 57  का समर्थन करता हूं. मैं सबसे पहले तो जनसम्पर्क  विभाग की  बात करते हुए  मंत्री जी एवं मुख्यमंत्री जी को  धन्यवाद देना चाहूंगा.  1980 से लेकर 1992 एवं 2004  के तीन कुम्भ  मेले स्नान  किये हैं, उनकी पब्लिसिटी  उनकी जानकारी थी, लेकिन वाकेही  यह 2016 का  जो हमारा कुम्भ मेला हुआ, जिसको हम सिंहस्थ कहते हैं, यह ग्रह दशा के कारण से  सिंहस्थ कहते हैं, लेकिन इस कुम्भ मेले ने जो दुनिया में  और भारत में  उज्जैन का मान  बढ़ाया है, वाकेही  हम अभारी हैं, मध्यप्रदेश की पहिचान  दिलाई है, उसके लिये भी  आभारी हैं.  जिस प्रकार से उसकी  सब क्षेत्रों में पब्लिसिटी की गई, चाहे वह वेब साइट हो, चाहे इलेक्ट्रानिक मीडिया, प्रिंट मीडिया  के माध्यम से  जितने प्रकार से उसकी चिंता की गई है.  यह बात भी सही है कि  प्राकृतिक आपदाओं के दरमियान  जो एक घबराहट हो जाती  या कोई बड़ी भारी  घटना घट जाती, उसमें भी इसी प्रकार से हमारी मीडिया ने जो रोल  हमारे अपने विभाग के माध्यम से  तुरन्त कंट्रोल करने का काम किया है, वह वाकेही काबिले तारीफ है.  दूसरी चीज इसमें  आपने सिंचाई सुविधाओं  को लेकर के बात  की है.  मैं आपके माध्यम से मुख्यमंत्री जी एवं मंत्री जी का  आभार मानना चाहूंगा, जिन्होंने इस कुम्भ मेले के सम्पन्न कराने के लिये  नर्मदा-क्षिप्रा लिंक  योजना जैसी ऐतिहासिक  योजना को सफल  बनाया.  तीसरी अभी  एक योजना  हमारे अपने दरमियान  आई हुई है गंभीर-नर्मदा लिंक योजना, यह 1842 करोड़  की योजना है,  जिसके माध्यम से लगभग  50 हजार हेक्टेयर  भूमि सिंचित होगी.    मंत्री जी,  मालवा की अगर बात कहें तो   5 नदियों को आपने  हाथ में लिया है.  नर्मदा- क्षिप्रा, नर्मदा-गंभीर, कालीसिंध, चम्बल और पार्वती, इन पांचों नदियों पर आपने जो ध्यान केंद्रित किया है,  जो अभी पूर्ववर्ती  मेरे वक्ता बहादुर सिंह  चौहान जी ने कहावत कही थी  कि वाकेही मालवा बेल्ट ऐसा है, जहां कदम कदम पर पानी और कदम कदम पर खाना  यह पुराने समय से जो  जाना जाता था  मालवा, वास्तव में  अब वह अकाल  और रेगिस्तान के कगार पर है.  अगर यह  नदियां  नर्मदा के माध्यम से  जीवित नहीं  होंगी, तो निश्चित रुप से  यह  भयावह और एक अलग ढंग का  वातावरण  बनकर हमको दिखने वाला है. लेकिन आपने जितनी बड़ी बड़ी योजनाओं को जोड़कर के  यह बात कही है, वाकेही वह काबिले तारीफ है.  क्योंकि मुझे आंकड़े से ध्यान में आता है कि   आपने जिस ढंग से  वर्तमान में  जैसे हम उज्जैन की बात करें,तो उज्जैन के अन्दर भी  1200-1200  फीट के नीचे तक अगर पानी नहीं मिल रहा है तो कहीं-कहीं पर 1400 फीट नीचे भी ट्यूबवेल लगाने के बाद पानी उपलब्‍ध नहीं है. ऐसे में पानी के लिये हमें निश्चित रूप से नर्मदा कछार पर निर्भर रहना पड़ेगा और नर्मदा कछार से न केवल उज्‍जैन बल्कि इन्‍दौर और उज्‍जैन संभाग के सभी जिलों में आपने ताप्‍ती और नर्मदा के माध्‍यम से न केवल सिंचाई सुविधा बल्कि आवासीय ब‍स्‍ती में भी पानी देने की बात कही है, आपने उद्योगों को भी पानी देने की बात कही है. जो आज के ध्‍यानाकर्षण में विषय आया था. मैं मान कर चलता हूँ कि इसके माध्‍यम से निश्चित रूप से हमारा पूरा मालवा, देश और दुनिया में समृद्धि की एक नई मिसाल कायम करेगा.

          उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से अपने क्षेत्र की समस्‍याओं की तरफ भी आपका ध्‍यान आकर्षित कराना चाहूँगा. खासकर नर्मदा-क्षिप्रा लिंक योजना, मुझे ध्‍यान में आया है कि नर्मदा-क्षिप्रा लिंक योजना का जो पानी हमें दिया गया था. लेकिन कभी बीच-बीच में नर्मदा घाटी प्राधिकरण के माध्‍यम से पानी की सप्‍लाई रोक देते हैं, उसके कारण खासकर संक्रान्ति और महाशिवरात्रि के समय उज्‍जैन में क्षिप्रा के पानी की बड़ी खराब स्थिति रही है क्‍योंकि लगभग 1 करोड़ श्रद्धालु उज्‍जैन आते हैं एवं उन सभी की इच्‍छा होती है कि वे क्षिप्रा में स्‍नान करें. अगर यह पानी की जो लाईन बनाई गई है, नर्मदा-क्षिप्रा लिंक योजना इसमें सतत् पानी देने की आवश्‍यकता है क्‍योंकि इसी के माध्‍यम से हमने सन् 2016 में 100 कॉलोनियों को भी पेयजल की व्‍यवस्‍था से जोड़ लिया था.

          उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको जानकारी देना चाह रहा हूँ कि जिस प्रकार से हमने काम किया है, इसमें पानी की आपूर्ति लगातार बनाये रखें, साथ ही सन् 2028 में हमारा कुंभ मेला आने वाला है. समय की कमी के कारण नर्मदा किनारे से, हमारा पानी इकट्ठा होने वाला है, वहां क्षिप्रा के दोनों किनारों पर घाटों की आवश्‍यकता है. जल संसाधन विभाग का इसमें सबसे बड़ा काम यह है कि वह दोनों किनारों को पक्‍का करायें, समय की कमी के कारण 6 घाट छूट गए थे तो वर्तमान में रामघाट से लेकर दाएं किनारे पर हम त्रिवेणी तक और बायें किनारे सिद्धवर तक, दोनों किनारों पर पक्‍के घाट भी बना दिये जायें. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से चाहूँगा, साथ ही साथ बमौरा तालाब लगभग गंभीर डेम से आधी क्षमता का तालाब है लेकिन चूँकि वह निजी जमीन पर बना हुआ है, उसके कारण पानी की जब जरूरत पड़ती है, बरसात में तो पानी इकट्ठा करते हैं और बरसात के बाद उसको छोड़कर बहा देते हैं. अगर जल संसाधन विभाग उसको ले लेगा तो न केवल वाटर लेवल बढ़ेगा बल्कि उसका लाभ उज्‍जैन में पेयजल की आवश्‍यकता पड़ने पर उसका निश्चित रूप से लाभ मिलने वाला है.

          उपाध्‍यक्ष महोदय - यादव जी, आपको बहुत बहुत धन्‍यवाद.

          डॉ. मोहन यादव - उपाध्‍यक्ष जी, आपको भी बहुत-बहुत धन्‍यवाद. मैं एक बार फिर जनसंपर्क और सिंचाई मंत्री के माध्‍यम से सरकार को बधाई देना चाहता हूँ.

          उपाध्‍यक्ष महोदय - श्री शैलेन्‍द्र पटेल जी, समय का ध्‍यान रखेंगे. आपको 5 मिनट दिये जाएंगे.  

          श्री शैलेन्‍द्र पटेल (इछावर) - उपाध्‍यक्ष जी, मैं आपका धन्‍यवाद देना चाहता हूँ. मैं आंकड़ों की बाजीगरी में नहीं जाना चाहता हूँ लेकिन मेरे क्षेत्र की जो जनता पुकार रही है, मैं वे चार लाईनें यहां पर कहना चाहता हूँ -

          'जमीन जल चुकी है, आसमान बाकी है,

          सूखे कुएं तुम्‍हारा, इम्तिहान बाकी है,

          बरस जाना इस बार, वक्‍त पर हे मेघा,

          किसी का मकान गिरवी है, किसी का लगान बाकी है.'

          अभी भी सिंचाई की संभावनाएं पूरी नहीं हो पा रही हैं. मैं अपने क्षेत्र की ही बात करूँगा. मैं जिस क्षेत्र से आता हूँ, वह भोपाल से लगा हुआ ही क्षेत्र है. हम इस मामले में बहुत ज्‍यादा सौभाग्‍यशाली हैं कि हम भोपाल को पानी पिलाते हैं. बड़ा तालाब है, उसमें कोलास नदी और उलझावन नदी का जो पानी आता है, वह इछावर विधानसभा क्षेत्र का पानी आता है और जो कोलार से पानी भोपाल में आता है, वह कोलार डेम भी इछावर विधानसभा की बिरपुर डेम में स्थित है, उससे पानी सप्‍लाई भोपाल को आती है, हमें इस बात की खुशी है. हमें तकलीफ इस बात की है कि इछावर की जनता प्‍यासी है और वहां पर सिंचाई के स्‍त्रोत नहीं हैं. उसकी जो भौगोलिक संरचना है, वह इस तरह की है कि वहां का पानी बहकर नीचे आ जाता है और वहां कोई भी बड़ी सिंचाई की परियोजना नहीं है.

          उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूँ कि प्रधानमंत्री सिंचाई योजना में बहुत सारे प्रस्‍ताव तो आए हैं, लेकिन उन प्रस्‍तावों में एक वर्ष तक एक इंच भी काम नहीं हुआ है. इस बारे में भी कहीं न कहीं सरकार विचार करे और उन योजनाओं के बारे में निर्माणगी करें. मैं आपके माध्‍यम से, मंत्री जी से कहना चाहता हूँ कि जो फॉर्मूला है, जिसमें कॉस्‍ट ऑफ लैण्‍ड जोड़ी जाती है और जो कॉस्‍ट ऑफ कन्‍स्‍ट्रक्‍शन जोड़ा जाता है, उसके बाद यह देखा जाता है कि कितना एरिया एरिगेटेड होगा, वह आज फॉर्मूला कहीं न कहीं बहुत पुराना हो गया है क्‍योंकि जमीन की कीमत बढ़ गई है, मुआवजे के रेट बढ़ गए हैं. अगर उस फॉर्मूले को रिवाइज़ नहीं करेंगे तो छोटे-छोटे तालाब बनना संभव नहीं हैं, सरकार को इस ओर विचार करना चाहिए. हमारे यहां कोई बारहमासी नदी नहीं है, जो 12 माह बहती है, हमारे यहां कोई छ: मासी नदी बहने वाली भी नहीं है. जो नदियां हैं, उनमें पानी एक और दो महीने में सूख जाता है. इसलिए जो पुरानी संरचनाएं हैं, कुछ नवाब काल के समय के तालाब हैं, उनके जीर्णोद्धार की आवश्‍यकता है. ट्रिपल आर स्‍कीम चल रही है लेकिन अभी तक ट्रिपल आर स्‍कीम से वहां पर काम नहीं हुआ है. इस ओर देखें और ट्रिपल आर स्‍कीम के एक्‍सटेंशन में वहां पर काम हों और जो पुराने तालाब हैं, वे भी खस्‍ताहाल हो रहे हैं, उनके लिये भी राशि स्‍वीकृत हो. मैंने समय समय पर मांग पत्र विभाग को दिये हैं लेकिन अभी तक एक पर भी कार्यवाही नहीं हुई है, वहां जो 15-20 वर्ष पहले के तालाब बने हैं, उनकी स्थिति नाजुक है, उस ओर भी देखने की आवश्‍यकता है. मुख्‍य बात हमारे मालवा के अन्‍य दूसरे वक्‍ताओं ने भी कही है कि नर्मदा और पार्वती को जोड़ने की बहुत आवश्‍यकता है. नर्मदा और पार्वती लिंक हो जायेगी तो बीच में पड़ने वाले इलाके में निश्चित रूप से सिंचाई की सुविधा हो जायेगी और एक बहुत महत्‍वपूर्ण मुद्दा है. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी के नोटिस में लाना चाहता हूँ कि बहुत से तालाबों का निर्माण पंचायतों ने किया है, लेकिन सिंचाई विभाग के पास उसका कोई रिकॉर्ड नहीं है और पंचायतें उनका मेंटेनेन्‍स नहीं कर पाती हैं, जो छोटी-छोटी जमीनें 100 एकड़, 150 एकड़, 200 एकड़ हैं, वे सिंचित नहीं हो पाती हैं, जल संसाधन विभाग भी उस बारे में कोई योजना बनाये. इन पंचायत लेवल के तालाबों पर ध्‍यान दें ताकि छोटे-छोटे रकबे भी जमीन सिंचित हो सकें और किसानों तक पानी पहुँच जाये और हमारे यहां के दो बैराज़ के प्रस्‍ताव बहुत दिनों से पैण्डिंग हैं. एक मुसकरा बैराज, जो कि पार्वती से मिलने के पहले नदी पर पड़ता है और एक रामगढ़ का बैराज, ये दोनों बैराज बन जायेंगे तो लगभग 300-400 हेक्‍टेयर जमीनें दोनों जगह सिंचित हो जायेगी.

          उपाध्‍यक्ष महोदय, हम बड़ी योजनाएं तो बनाते हैं, लेकिन जिस तरह की मेरी विधानसभा है जहां पर पानी रूकता नहीं है, वहां के लिये कुछ अलग योजना बनाने के बारे में सरकार को सोचना चाहिए. छोटी-छोटी संरचनाएं कैसे वहां बन सकें ? ताकि तीन-तीन, चार-चार गांवों में सिंचाई का पानी दे सकें, अगर किसान को हम सिंचाई का पानी दे देंगे तो बाकी सारा काम वह कर लेगा. मुझे उम्‍मीद है कि जल संसाधन मंत्री इस ओर ध्‍यान देंगे और इछावर क्षेत्र है, जो किसानों का इलाका है, एक ही नगर पंचायत है और बाकी सब गांव हैं और खेती के अलावा कोई और वहां रोजगार का धंधा नहीं है, ऐसे इलाकों में सिंचाई की सुविधाएं कैसे एक्‍सटेंड करेंगे ? इस बारे में विचार कर कुछ ऐसी नई योजनाएं लायें ताकि सिंचाई की सुविधाएं संपन्‍न हो सकें.

          उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से, अन्‍त में माननीय मंत्री जी से यही निवेदन करना चाहता हूँ कि जो हमारा पैण्डिंग मुसकरा और रामगढ़ का बैराज है, उसको स्‍वीकृत करें और जितनी भी ट्रिपल आर स्‍कीम में हैं, आप वहां पर ले सकते हैं, उनको लें और नई संरचनाओं का निर्माण करें. आपने बोलने का मौका दिया, उसके लिये धन्‍यवाद.

          श्री नारायण सिंह पँवार (ब्‍यावरा) - माननीय उपाध्‍यक्ष जी, आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद. मैं मांग संख्‍या 23, 28, 32, 45 एवं 57 के पक्ष में बात रखना चाहता हूँ. सरकार के विषय में बहुत सारे वक्‍ताओं ने कहा है, मैं भी उनका समर्थन करता हूँ. मैं समय की कमी को ध्‍यान में रखते हुए अपने क्षेत्र की बातों पर निवेदन करना चाहता हूँ. माननीय मंत्री जी, इस ओर ध्‍यान आकृष्‍ट करेंगे कि राजगढ़ जिले में मोहनपुरा एवं कुंडालिया, इन दोनों बड़ी परियोजनाओं के माध्‍यम से लगभग 1.50 से 2.00 लाख हेक्‍टेयर सिंचाई होगी, लेकिन माननीय मंत्री जी से मेरा आग्रह है कि राजगढ़ जिले की ब्‍यावरा और नरसिंहगढ़ दो तहसीलें हैं, जो मैदानी स्‍तर पर हैं. जिनमें कोई बड़ी परियोजनाएं, बड़े डेम बनाने की साईट नहीं हैं. इसलिए पार्वती-रिसी परियोजना का सर्वे कार्य मध्‍यप्रदेश शासन ने स्‍वीकृत किया है, सर्वे कार्य जारी है. मैं निवेदन करूँगा कि कार्य जल्‍दी पूर्ण हो और उसमें विधानसभा क्षेत्र ब्‍यावरा का अधिकतम क्षेत्र शामिल किया जावे क्‍योंकि ब्‍यावरा की एकमात्र जीवन रेखा पार्वती नदी है. मेरा पूरा विधानसभा क्षेत्र पार्वती नदी के किनारे पर बसा हुआ है. उसको गंभीरता से लेते हुए जितना रकबा बढ़ सकता हो, उतना बढ़ाने का प्रयास करें. कुछ स्‍टापडेम पार्वती नदी पर प्रस्‍तावित हैं- जैसे भवांश और किशनगढ़ के बीच एक बहुत अच्‍छी साईट का सर्वे कार्य पूर्ण हो चुका है, उसकी शायद डीपीआर बन चुकी होगी. दो परियोजनाएं आपके यहां सहायता के लिये लम्बित हैं- सुन्‍दरपुरा तालाब, किल्‍ला (सोनकच्‍छ के पास) तालाब, उनको सहायता प्रदान करेंगे तो वे कार्य शीघ्र प्रारंभ होंगे. जैसे अभी श्री शैलेन्‍द्र पटेल जी ने कहा कि मेरी विधानसभा क्षेत्र में भी छोटे-छोटे साईट हैं. जहां बहुत बड़ी परियोजना नहीं हो सकती हैं लेकिन 200-300 एकड़ या उसके कुछ कम ज्‍यादा करके कोई परियोजना बनाई जा सकती है. जो न ग्राम पंचायत बनाती है और न कृषि विभाग बनाता है केवल उसको सिंचाई विभाग बना सकता है. उदाहरण के लिए पातलपानी तालाब, जामी तालाब, भगोरा तालाब, लुहारी तालाब, कुण्‍डीखेड़ा तालाब, अमानपुरा तालाब, हयातपुरा तालाब एवं बैलास तालाब इत्‍यादि ऐसी छोटी साईटें हैं जो अभी तक किसी भी योजना में शामिल नहीं हो पाई है. इनको कृपया स्‍वीकृत कराने का प्रयास क नर्मदा-क्षिप्रा लिंक योजना उपाध्‍यक्ष महोदय, उपाध्‍यक्ष महोदय - श्री शैलेन्‍द्र पटेल - ट्रिपल आर स्‍कीम ? क्षिप्रा के दोनों किनारों पर रेंगे तो विधानसभा क्षेत्र ब्‍यावरा को लाभ मिलेगा. साथ ही मेरी विधानसभा क्षेत्र में पूर्व से जो तालाब बने हुए हैं, कुछ रियासती जमाने के हैं, जैसे नापामेरा तालाब बहुत बड़ा तालाब है, स्‍टेट के जमाने का है लेकिन उसमें वर्षों से गाद जमी हुई है और उसकी आधी डेब्‍थ डूब चुकी है, उसका खनन कराके गहरा करेंगे तो लाभ मिलेगा. एक और स्‍टापडेम धामनटोड़ी, जो कि भोपाल जिले की सीमा में है, लेकिन ब्‍यावरा विधानसभा को उससे आधा लाभ मिलता है. वह बैराज लगभग 5 साल से बन्‍द पड़ा है. उसके पटिये एवं उसको बन्‍द करने के शटर डोर टूट चुके हैं. कृपया उसकी मरम्मत कराएंगे तो भोपाल जिले का नजीराबाद क्षेत्र और ब्यावरा के सीलखेड़ा इत्यादि गाँवों को उसका लाभ मिल सकेगा. साथ ही मेरा निवेदन है कि कपिल धारा कूप का काम मेरे विधान सभा क्षेत्र और पूरे मध्यप्रदेश में चल रहा है. कपिल धारा कूप से बड़ी मात्रा में सिंचाई हो रही है लेकिन शासन के ग्रामीण विकास विभाग ने इसमें कुछ छोटे तालाब जोड़ दिए हैं जिसके कारण कपिल धारा कूप प्रभावित हो रहे हैं. माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि इन कूपों को स्वतंत्र रुप से बनवाया जाए. तालाब जोड़ने के कारण वह काम प्रभावित हो रहा है. कुछ और योजनाएं मेरे क्षेत्र में सर्वेक्षणाधीन है, जिनका पूर्व में सर्वे हो चुका है उनको भी सहायता प्रदान करेंगे तो निश्चित रुप से ब्यावरा को लाभ मिलेगा. राजगढ़ जिले में ब्यावरा ही ऐसा स्थान है जहाँ सबसे कम औसत सरकारी साधनों से सिंचित है. मुश्किल से लोग गुजारा कर रहे हैं. ब्यावरा पर विशेष कृपा की जावे. माननीय मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्यवाद. माननीय उपाध्यक्ष जी मैं समय-सीमा में अपनी बात रख पा रहा हूँ. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद.

          उपाध्यक्ष महोदय--सभी सदस्यों से मेरा अनुरोध है 5 माननीय सदस्य सत्तापक्ष से 5 माननीय सदस्य प्रतिपक्ष से बोल चुके हैं. सत्तापक्ष से बोलने वाले सदस्यों की संख्या 13 और है प्रतिपक्ष से 10 सदस्य और बोलने वाले हैं. तीन-तीन मिनट में अपनी बात कहकर समाप्त कर मेरा सहयोग करें.

          श्री कमलेश्वर पटेल (अनुपस्थित)

          श्री रजनीश सिंह (केवलारी)--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद मैं आज आपका संरक्षण चाहूँगा. मैं सीधा क्षेत्र की बात पर आता हूँ. मेरे विधान सभा क्षेत्र में माँ बेनगंगा पर भीमगढ़ में संजय सरोवर नाम का एशिया का सबसे बड़ा मिट्टी का बाँध है. अभी बहादुर सिंह जी बोल रहे थे कि सन् 1914, मैं उन्हें बताना चाहूँगा कि 1914 नहीं  सन् 1975 में काँग्रेस पार्टी की सरकार ने उस समय उसकी आधारशिला रखी और सन् 1993 में आपकी ही सरकार में उसके संपूर्ण गेट लगे और आज केवलारी विधान सभा क्षेत्र की जमीन, बालाघाट और परसवाड़ा की जमीन उस बाँध से सिंचित होती है. सन् 2013 से जब से मैं इस सदन का सदस्य चुना गया हूँ तब से मैं लगातार इस मांग को उठाता आ रहा हूँ कि जो नहरें टूटी-फूटी हैं, सायफन टूटे-फूटे हैं उनकी लाइनिंग का, सीमेंट कांक्रीटीकरण का काम हो और मुझे सदन में यह कहते हुए बड़ी प्रसन्नता हो रही है. मैं माननीय मंत्री जी और सरकार को धन्यवाद दूंगा कि मध्यप्रदेश सरकार ने 615 करोड़ रुपए का प्रपोजल इस्टीमेट बनाकर केन्द्र सरकार को भेजा है. उसकी परिणिति यह हुई कि वर्ल्ड बैंक से एशियन डेवलपमेंट के एक डायरेक्टर मिस्टर व्यूफिमन 27 व 28 फरवरी को दो दिवसीय दौरे पर केवलारी विधान सभा क्षेत्र में आये. मैंने अधिकारियों के साथ आरबीसी और एलबीसी नहर का दौरा करवाया. किसानों से भी मुलाकात करवाई. विश्व बैंक से लोन लेने की प्रक्रिया चल रही है. उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से प्रार्थना करुंगा कि इस ऋण को जल्दी से स्वीकृत करवायें ताकि वहां के सीमेंटीकरण का काम हो सके और जो 40 प्रतिशत पानी बेकार चला जाता है उसका संधारण हो सके ताकि जिन किसानों की भूमि की सिंचाई नहीं हो पा रही है उसको सींचने की हम कोशिश करें.

          उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी को बहुत-बहुत साधुवाद देता हूँ. इसी सदन में मैंने उनसे प्रार्थना की और जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव आदरणीय श्री पंकज अग्रवाल जी को भी मैं बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूँ कि इन्होंने अपर तिलवारा की बायीं तट का अवलोकन किया. एक ही दिन में 4-5 घंटे में 26 किलोमीटर की दूरी इन्होंने तय की और उन नहरों को देखा वहां के पुल-पुलियों को देखा. इससे 35 गाँव लाभान्वित होने वाले थे पर वर्तमान में 29 ग्राम हैं. मैंने प्रमुख सचिव जी और माननीय मंत्री जी से प्रार्थना की है कि पूर्व में जो डीपीआर, पूर्व में जो सर्वे 35 गाँवों का हुआ है. मैं आपके माध्यम से अनुरोध करना चाहूंगा कि इन पूरे 35 गाँवों के किसानों को, वहां की जमीनों को इससे जोड़ें ताकि लोगों को लाभ मिले. अंत में, मैं अपनी बात खत्म करूं उसके पहले बताना चाहूंगा कि मेरे इलाके में लगभग 15-20 गाँव के किसानों के खेत रुखे और सूखे हो गए हैं. गेहूँ जीरे के समान पका हुआ है और सरकारी अधिकारियों की उदासीनता के चलते हुए उनके खेतों तक आखिरी का पानी नहीं पहुँचा है. मेरा अनुरोध है कि इसका सर्वे करवाकर उचित मुआवजा दिलवाने की कृपा करें. आपने बोलने का अवसर दिया उसके लिए धन्यवाद.

          श्री दिलीप सिंह परिहार (नीमच)-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं, मांग संख्या 23, 28, 32, 45 और 57 के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ.

          मैं लंबी बात न करते हुए क्षेत्र की बात करुंगा. नीमच में जल स्तर बहुत घट रहा था. माननीय मुख्यमंत्री जी और जल संसाधन मंत्री जी जब वहाँ आए थे तो उन्होंने जलाभिषेक का कार्यक्रम किया उसकी वजह से नीमच जिले में जल स्तर बढ़ा है. मैं उन्हें धन्यवाद दूंगा कि उन्होंने गाडगिल सागर, अटल सरोवर, ठीकरिया डेम, शिवाजी सागर और हमरिया डेम मेरे क्षेत्र में दिए. इसके कारण आज किसान प्रसन्न है और जल स्तर भी बढ़ गया है. किसानों को इसका लाभ मिल रहा है. ठीकरिया डेम (शिवाजी सागर) से 3000 हेक्टेयर के लगभग सिंचाई हो रही है. हमरिया डेम से 15000 हेक्टेयर सिंचाई हो रही है वहां के किसानों के 3000 करोड़ रुपए के मुआवजे का प्रकरण आपके यहां पर आया हुआ है उसको आप स्वीकृत कर देंगे तो जो किसान हाय-तौबा कर रहे हैं उनको लाभ मिल जाएगा. मेरे क्षेत्र में एक हरवार डेम है इसके तालाब में 4.5 करोड़ रुपए का एक प्रोजेक्ट आपके यहां आया है. नया तालाब बनाया जा सकता है 3000 हेक्टेयर की उसमें सिंचाई होगी. हरवार डेम में  आप स्वीकृत कर दें. हरवार डेम की साध्यता प्रदान कर दें जिससे हरवार की जीरन तहसील में किसान प्रसन्न हो जाएंगे. मेरे क्षेत्र में एक दारु गांव है उसकी एक पंचायत है उसमें नदी है.

          उपाध्यक्ष महोदय--मेरा माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि यह परम्परा शुरु न करें (श्री दिलीप सिंह शेखावत, सदस्य के अधिकारी दीर्घा के पास खड़े होकर अधिकारियों से बातचीत करने पर)

          श्री यशपाल सिंह सिसौदिया--वह दारु गांव देशी है या अंग्रेजी है (हंसी)

          श्री दिलीप सिंह परिहार--वह गाँव है राजस्थान सीमा से लगा हुआ है उस पर भी आप डेम बना देंगे तो अच्छा होगा. पानीदार मंत्री हैं. आपने नीमच को प्रधानमंत्री योजना में शामिल किया है इसके लिए मैं आपको बधाई देता हूँ. मेरे यहां कुछ नहरों के काम है. मेरे यहां रेतम बैराज पर चलदू ग्राम है यहां पर एक डेम का सर्वे करके विभाग ने आपके पास भेजा है आप उसकी मंजूरी दे दें. मेरे यहाँ जीरन तालाब है उस तालाब की नहरें पक्कीकरण के लिए भी आपके पास प्रस्ताव पेंडिंग है. मेरे क्षेत्र में जो जीरन तालाब है उसकी नहरें पक्की करा दें. मालखेड़ा का 100 साल पुराना एक तालाब है उसके जीर्णोद्धार का प्रस्ताव भी आपके पास आया हुआ है. भड़भड़िया, धामनिया, धसानी, जमुनिया तालाब इनमें नहरों की लाइनिंग का काम आप स्वीकृत कर देंगे तो निश्चित ही वहां के लोग बड़े प्रसन्न होंगे. माननीय मुख्यमंत्री जी, जल संसाधन मंत्री जी आपने लगातार हमारे क्षेत्र में जो तालाब का काम किया है  उसकी वजह से मैं आपको धन्यवाद देता हूँ. आपसे बस एक ही निवेदन है कि हरवार डेम, जीरन और मालखेड़ा के सुदृढ़ीकरण के लिए बजट में प्रस्ताव पास कर दें. आप पानीदार मंत्री हैं. आप नर्मदा का पानी क्षिप्रा में लाए हैं इसके लिए भी