मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा चतुर्दश सत्र

 

 

जुलाई, 2017 सत्र

 

गुरुवार, दिनांक 20 जुलाई, 2017

 

(29 आषाढ़, शक संवत्‌ 1939)

 

 

[खण्ड- 14 ] [अंक-4 ]

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

गुरुवार, दिनांक 20 जुलाई, 2017

 

(29 आषाढ़, शक संवत्‌ 1939)

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.02 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

 

तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर

 

 


नगरीय निकायों में नैमेत्तिक एवं नियमित कर्मचारियों की भर्ती

[नगरीय विकास एवं आवास]

1. ( *क्र. 1647 ) श्री रामलाल रौतेल : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) नगरीय निकायों में नैमेत्तिक एवं नियमित कर्मचारियों की भर्ती हेतु क्‍या नियम व निर्देश हैंभर्ती नियम निर्देशिका की प्रमाणित छायाप्रति प्रदाय करें। (ख) नगर पालिका धनपुरी जिला शहडोल में चेक क्र. 100826, दिनांक 30.11.2016 के द्वारा किन अधिकारियों/कर्मचारियों के वेतन उनके खाते में जमा किये गये(ग) कर्मचारियों/अधिकारियों का नामपदनाम,खाता क्र.जमा राशिनियुक्ति दिनांक एवं नियुक्तिकर्ता अधिकारी का नाम बतायें?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) नगरीय निकायों में कर्मचारियों की भर्ती क्रमश: मध्‍य प्रदेश नगर पालिक निगम (अधिकारियों तथा सेवकों की नियुक्ति तथा सेवा की शर्तें) नियम 2000 एवं मध्‍य प्रदेश नगर पालिका कर्मचारी (भर्ती तथा सेवा शर्तें) नियम 1968 में दिए गए प्रावधान अनुसार की जाती है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) एवं (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।

 

 

श्री रामलाल रौतेल--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री महोदया से जानकारी अर्जित करना चाहता हूँ. मेरा विषय नगर पालिका धनपुरी में कर्मचारियों की भर्ती को लेकर है. दैनिक मस्टर में जो श्रमिक हैं उसमें वर्ष 2014 से वर्ष 2016 तक कुल 16 लोगों की भर्ती की गई है. वर्ष 2016 में कुल 5 लोगों की भर्ती हुई है. मैं यह जानना चाहता हूँ कि क्या शासन से यह पद स्वीकृत हैं. यदि स्वीकृत हैं तो क्या वह पद भी रिक्त हैं जिस पद के विरुद्ध उस पद की पूर्ति की गई है. अगर की गई है तो क्या उन्होंने परिषद् से प्रस्ताव पारित करके, डिप्टी डायरेक्टर से अनुमति लेने के पश्चात् उसकी प्रक्रिया पूरी की है.

श्रीमती माया सिंह--माननीय अध्यक्ष जी, जहाँ तक पद का सवाल है, मैं माननीय विधायक जी से यह कहना चाहती हूँ कि वहाँ की जो स्थानीय आवश्यकताएं हैं. उनके अनुसार परिषद् में प्रेसीडेंट काउंसिल से समय समय पर अनुमोदन प्राप्त करके नियमानुसार दैनिक मस्टर श्रमिकों की भर्ती की जाती है. उसमें भी उनके बहुत सारे काम होते हैं उनके आधार पर उनकी नियुक्ति की जाती है.

श्री रामलाल रौतेल--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा आरोप यह था कि इसमें दो ऐसे लोगों की भर्ती हुई है जो कि बड़े सम्पन्न लोग हैं जिनके पास हुण्डई कंपनी की कार है, ट्रेक्टर है, सीएमओ के भतीजे हैं. इतने संपन्न व्यक्ति दूसरे क्षेत्र के रहने वाले हैं उनकी भर्ती सीएमओ ने की है. मैं यह चाहता हूँ क्या उनके विरुद्ध कार्यवाही होगी.

श्रीमती माया सिंह--माननीय अध्यक्ष जी, विधायक जी हमें उन 2 लोगों के नाम बता दें कौन हैं, क्या हैं तो हम संयुक्त संचालक स्तर के अधिकारी से जांच करवा लेंगे और जाँच की समय-सीमा भी मैं तय कर देती हूँ कि हम 1 महीने में जाँच पूरी कराएंगे. साथ ही यदि वे दोषी पाए जाते हैं तो उनके विरुद्ध कड़ी कार्यवाही करेंगे.

श्री रामलाल रौतेल--अध्यक्ष महोदय, मेरा एक प्रश्न और था कि दोषी सीएमओ है वह भी प्रभारी है. सात बार उसका स्थानान्तरण हुआ है इसके बाद भी वह आज वहाँ डटा हुआ है. मैं यह चाहता हूँ कि आप उसको निलंबित करिए. उसने खुद इतना पैसा कमाया, आज ताल ठोक कर बोलता है कि मैं पटा लूँगा, सरकार से कोई मेरा कुछ नहीं कर सकता. इतना अर्जित करने के बाद करप्शन, यह तो बड़ी मुश्किल से एक प्रश्न लग पाया है. (शेम शेम की आवाज) मैं चाहता हूँ कि आप उसे निलंबित करें. माननीय अध्यक्ष महोदय, उसके 7 बार स्थानांतरण हुए, इसके बाद भी वह रुका हुआ है, ताल ठोक कर बोलता है कि मेरा कोई कुछ नहीं कर सकता. अध्यक्ष महोदय, माननीय मुख्यमंत्री जी की अध्यक्षता में 18 अप्रैल 2011 को एक बैठक हुई थी. इसमें तय हुआ था, 15 नंबर पर लास्ट में है, नगर पालिका के नियमित मुख्य कार्यपालिक अधिकारी को ही पदस्थ किया जाए. लेकिन वह प्रभारी है और आज भी डटा हुआ है. जो इच्छा उसकी होती है वहाँ वह अपनी पदस्थापना कराता है. मेरा माननीय मंत्री जी से अनुरोध है कि आप उसे तुरन्त निलंबित करें.

श्रीमती माया सिंह-- अध्यक्ष जी, उसे वहाँ से हटा दिया जाएगा, ट्रांसफर कर देंगे और बाकी का मैंने जो कहा है कि इसकी जाँच संयुक्त संचालक स्तर के अधिकारी से हम करवाएँगे.

श्री रामलाल रौतेल-- धन्यवाद.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, सत्तापक्ष के विधायक अनुसूचित जाति वर्ग के, और इतनी पीड़ा हाउस में.....

अध्यक्ष महोदय-- पर उन्होंने धन्यवाद दे दिया.

राजस्व मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्ता)-- वे मंत्री जी को धन्यवाद दे चुके हैं.

श्री अजय सिंह-- मैं, और जो विधायक पीड़ित हैं, उनके लिए कह रहा हूँ. हम लोग पीड़ित नहीं हैं, हम तो जानते हैं कि क्या हो रहा है. माननीय अध्यक्ष महोदय, किस तरह से बेचारा कह रहा है, वह ताल ठोक कर कह रहा है कि मैं वहीं रहूँगा. क्या हालत है सरकार की.

श्री उमाशंकर गुप्ता-- अजय सिंह जी, आप दलित विधायक को दबा रहे हों? आप उनको बिठा रहे हों.

श्री अजय सिंह-- वे दलित नहीं हैं, जनजाति के हैं. आपका नंबर लग रहा है पार्लियामेंट्री अफेयर मिनिस्टर बनने में इसलिए आप बार-बार उचको मत.

राज्य मंत्री, सामान्य प्रशासन मंत्री (श्री लाल सिंह आर्य)-- लेकिन नेता प्रतिपक्ष महोदय, यह शिवराज सिंह जी की सरकार है, जिसमें एससी, एसटी, के साथ न्याय हो रहा है. आपकी सरकार के समय तो अन्याय हुआ.

श्री अजय सिंह-- 7 बार ट्रांसफर हुआ उसके बाद भी बैठा हुआ है. यह हालत हो रही है.

श्री लाल सिंह आर्य-- अभी तत्काल कार्यवाही हुई.

श्री अजय सिंह-- कार्यवाही क्या, वह खुद कह रहा है विधायक कि 7 बार ट्रांसफर हुआ.....(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- ऐसा मामला नहीं है कि इस पर इतनी देर बहस की जाए. प्रश्न क्रमांक 2 श्री हरदीप सिंह डंग अपना प्रश्न करें.

श्री अरूण भीमावद-- माननीय अध्यक्ष महोदय, आगे और भी प्रश्न हैं, यहाँ बहस का विषय न बनाएँ, मंत्री जी ने उत्तर दे दिया.

श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्यक्ष महोदय, कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि एससी के जीएडी मंत्री हैं और पूरे प्रदेश के समस्त एससी, एसटी, के कर्मचारी, अधिकारी प्रमोशन के लिए तरस रहे हैं और आप कह रहे हों कि न्याय हो रहा है. कुछ भी कहते जा रहे हों. पूरे प्रदेश में अन्याय हो रहा है.

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, यह विषय नहीं है. श्री हरदीप सिंह जी प्रश्न पूछिए. प्रश्नकाल का समय खराब मत करिए. बैठ जाइये.

श्री लाल सिंह आर्य-- आपको यह जानकारी होना चाहिए कि यह न्यायालय में मामला चल रहा है.

श्री रामनिवास रावत-- आप क्या कर रहे हों? फिर किसलिए घोषणा करते हों.

पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री (श्री गोपाल भार्गव)-- अध्यक्ष महोदय, मुझे आपत्ति है उसे आप सुन लें. इस सदन में जब हम सभी लोग चुनकर आ जाते हैं, सदस्य हैं इनमें यह वर्गीकरण करना कि एससी, एसटी, ओबीसी, जनरल, मैं मानकर चलता हूँ कि शायद यह उचित नहीं है. ..(व्यवधान)..

वन मंत्री (डॉ.गौरीशंकर शेजवार)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा 14 नंबर पर विभाग पर प्रश्न आने वाला है कृपा करके ऐसा समय बर्बाद न करें. (हँसी)

कुँवर विक्रम सिंह नातीराजा-- अध्यक्ष महोदय, आज व्यवधान पुरुष खुद इस व्यथा को रो रहे हैं?

श्री उमाशंकर गुप्ता-- आज डॉक्टर साहब ने उस प्रश्न के लिए रात भर तैयारी की है.

कपिल धारा कूप निर्माण में अनियमितता

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

2. ( *क्र. 1390 ) श्री हरदीप सिंह डंग : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्राम पंचायत मकडावन में विगत 3 वर्षों में कितने विकास के कार्य महात्‍मा गांधी नरेगा मद से हुये, कार्य का नामस्‍थान एवं स्‍वीकृत राशि की जानकारी देवें। (ख) विगत तीन वर्षों में ग्राम पंचायत मकडावन में कपिल धारा योजना के तहत कितने कुंओं का निर्माण किया गया है? व्यक्तियों के नामसर्वे क्र. एवं खर्च की गई राशि की जानकारी उपलब्ध करावें। (ग) क्या कपिल धारा योजना के तहत कूप निर्माण की स्वीकृति संबंधी फाईल पर वर्तमान अजा. महिला सरपंच के हस्ताक्षर हैं या अन्य कर्मचारी/अधिकारी के गलत (फर्जी) हस्ताक्षर हैं? निर्मित समस्त कुंओं के वर्क कोड की भी जानकारी उपलब्ध करावें। (घ) विगत तीन वर्षों में कपिल धारा योजना के तहत कुओं के निर्माण हेतु किस कर्मचारी द्वारा फाईल तैयार की गई तथा स्वीकृति प्रदान की गई व स्थान का लेआऊट दिया गया? खुदाई व बंधाई की प्रगति रिपोर्ट तथा पूर्णता प्रमाणपत्रराशि जारी करने का आदेश किन-किन अधिका‍री/कर्मचारियों द्वारा दिया गयाअधिकारी/कर्मचारी का नामपद एवं वर्तमान में कुंओं की प्रगति रिपोर्ट सहित जानकारी उपलब्ध करावें।

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-1 अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-2 अनुसार है। (ग) कपिलधारा कूप के प्रकरणों में महिला सरपंच के फर्जी हस्‍ताक्षर उसके पति द्वारा किये जाने की शिकायत जाँच में प्रथम दृष्‍टया सही पाई गई है। सरपंच के विरूद्ध मध्‍यप्रदेश पंचायतराज अधिनियम 1993 की धारा 40 के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया गया है एवं सरपंच पति के विरूद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के लिए मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायतमंदसौर ने पुलिस अधीक्षकमंदसौर को लिखा है। कपिलधारा कूप के वर्ककोड की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-2 अनुसार है। (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-2 अनुसार है।

श्री हरदीप सिंह डंग-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा अभी नंबर वन पर जो प्रश्न था उससे भी गंभीर मेटर अभी यह नंबर 2 पर है. यह भी एससी वर्ग की जो महिला है, वह वहाँ की सरपंच मकड़वन की हैं, मैंने अपने प्रश्न में पूछा है कि विगत 3 वर्षों में मनरेगा राशि से कितना कार्य हुआ. उसमें उत्तर आया है कि 2014-15 मात्र एक साल में एक कुँआ दिया. दूसरे साल में 5 कार्य फलोद्यान के और 4 कार्य टैंक के और 2016-17 में 16 कूप निर्माण कराए गए और जिसमें से एक छोड़ दें तो 16 ही फर्जी. 25 साल पुराने कुए को मस्टर भर कर रुपया निकाला गया. 25 साल पुराना है. देवीलाल पिता प्रभुलाल, 25 साल पुराना जो कुँआ था, उसका रुपया निकाला गया. दुर्गाशंकर पिता रतनलाल, जो सर्वे पर कुँआ ही नहीं है, उसके भी रुपये निकाले गए. उमराव सिंह चंदर सिंह, 6 वर्ष पुराना कुँआ था, उसका रुपया निकाला गया. काली बाई पति कृपाल सिंह जी जो 5 साल पुराना कुँआ था, उसका रुपया निकाला गया. उदय सिंह पिता भेरूसिंह, जो पहले से कुँआ था, उसको एक और कुँआ दिया गया. राम सिंह, विजय सिंह के वहाँ पर निकाले हैं 52944 रुपये और इसका खुद बयान है कि मुझे मात्र 11 हजार रुपये मिले है.

अध्यक्ष महोदय-- आपका प्रश्न क्या है, आपने नाम बता दिये हैं अब आप प्रश्न करें.

श्री हरदीप सिंह डंग--मेरे कहने का मतलब है कि यह जो फर्जी रुपये निकले हैं यह बात जब सरपंच को मालूम पड़ती है उसके पति को मालूम पड़ती है और वह जनपद में दिनाँक 23.5 को शिकायत करते हैं 26.5 को जिले में कलेक्टर और सीईओ को शिकायत देते हैं और जाँच कौन करता है, जिनकी शिकायत होती है, जनपद के सीईओ की, वहाँ के मनरेगा अधिकारी और वहाँ पर जो सचिव हैं और रोजगार सहायक हैं, जाँच उनको ही दी जाती है और सरपंच महिला का पति उसको ले जाकर शिकायत करता है तो उसको कहा जाता है कि अगर तूने शिकायत की तो हम तुझे भी फंसा देंगे.जाँच वहीं लोग कर रहे हैं जिनके खिलाफ शिकायत है. मेरा यह निवेदन है कि इसकी जाँच जो सरपंच के पति पर डाली गई है, निष्पक्ष तौर पर वहाँ पर जाँच कराई जाई. इसमें सीईओ,जनपद सबसे बड़ा जवाबदार आदमी है जिसने 25 साल पुराने कुँए के रूपये निकाले.

अध्यक्ष महोदय-- आप प्रश्न तो करें आप प्रश्न नहीं कर रहे हैं, भाषण दे रहे हैं. मैं अब आगे बढ़ जाऊँगा.

श्री हरदीप सिंह डंग-- मेरा प्रश्न है कि इसकी वास्तविक जाँच नहीं हो पाई और केवल चमकाने के लिए, डराने के लिए उसके सरपंच के पति पर कार्यवाही करने की बात की है.जिसने शिकायत की है उसी के नाम पर कार्यवाही करने की बात की गई है.

अध्यक्ष महोदय-- आप प्रश्न करिये.

श्री हरदीप सिंह डंग-- मेरा कहना है कि सीईओ पर, जनपद के अधिकारियों पर कार्यवाही की जाये और यह असत्य रिपोर्ट है.

अध्यक्ष महोदय-- आप बैठ जाइए.

श्री गोपाल भार्गव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जो जानकारी चाही थी वह उत्तर में भी दे दी है, मैं भी स्वीकार कर रहा हूँ कि यह कपिल धारा के जो कुँए खोदे गये थे इसमें बहुत फर्जीवाड़ा हुआ है. यह बात सही है कि दो व्यक्तियों के कुँए तो मौके पर पाये ही नहीं गये और बिना कुँआ खुदे राशि का आहरण हो गया. एक अनियमितता ये हुई कि एक हेक्टेयर से अधिक भूमि के कूप को खोद दिया गया. दो कूपों के मध्य 150 मीटर की दूरी होना चाहिए उस नियम को तोड़ते हुए भी कूपों की मंजूरी दी गई, इसमें भी नियम का पालन नहीं हुआ है और 150 मीटर से कम दूरी और एक हेक्टेयर की हमारी सीलिंग है उससे ज्यादा भूमि जिनके पास थी उनके भी कुँए खोद दिये गये और पूर्व से निर्मित एक कुँआ और चार कुँओं में केवल खुदाई कार्य दिखाया गया और गोपाल जी, लालजी, देवीलाल, प्रभुलाल, काली बाई पति कृपाल सिंह, नारायण सिंह दाणजू जैसे ही इनके प्रकरण की जानकारी मिली, सारे दोषी लोगों को निलंबित कर दिया गया. रोजगार सहायक के, सचिव के,सरपंच के विरुद्ध भी कार्यवाही की जा रही है क्योंकि सरपंच के भी फर्जी हस्ताक्षर थे. इसमें एफआईआर कायम कर दी गई और मामला बना दिया गया है और वह पुलिस की जाँच में है यदि इसमें और भी अधिकारी दोषी पाये जायेंगे तो उनके विरुद्ध भी कार्यवाही होगी. इसमें हम सख्त से सख्त कार्यवाही इन सारे कर्मचारियों पर और निर्वाचित पदाधिकारी यदि उसमें शामिल हैं तो उनके विरुद्ध कर रहे हैं.

श्री हरदीप सिंह डंग-- अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि शिकायतकर्ता सरपंच को धारा 40 का नोटिस दिया. फर्जी साइन दूसरों ने उस पर कर रखे हैं और धारा 40 का नोटिस उस अनुसूचित जाति की महिला को और उसके पति को जो शिकायत करने ले गया था उसको दिया गया. मतलब आप शिकायतकर्ता पर आरोप लगा रहे हैं और वास्तव में जो सीईओ, जनपद दोषी हैं, जिसने डराने की कोशिश करी, जिसने सरपंच के पति को कहा कि तू समझौता कर लें नहीं तो मैं तुझे एक काम भी नहीं दूंगा. विगत दो सालों से एक रुपये का काम वहाँ पर सरपंच नहीं कर पा रहे हैं. 16 लाख रुपये वहाँ पर पड़े हैं और सरपंच वहाँ पर भटकता रहता है.

अध्यक्ष महोदय-- आप सीधा पूछ लें भाषण मत दें.

श्री हरदीप सिंह डंग-- अध्यक्ष महोदय, यह गंभीर मैटर है. इसमें पहले तो सीईओ को निलंबित करें और उसके बाद जाँच कराई जाये.

श्री गोपाल भार्गव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, इसमें जाँच कमेटी बनी थी उसके निष्कर्षों के बाद यह पाया गया कि इसमें सचिव, रोजगार सहायक और सरपंच सभी की मिलीभगत थी. तीन साल पुराना यह मामला है. यदि सरपंच निर्दोष थीं तो अध्यक्ष महोदय, अभी उन्होंने इस महीने क्यों रिपोर्ट की, तीन सालों में क्यों नहीं उन्होंने रिपोर्ट की? इस कारण से इस तरह से किसी को नहीं बख्शा जा सकता है और मैं कह रहा हूँ ना कि यदि इसमें सीईओ की गलती पाई गई,सीईओ की इसमें शामिलाती पाई गई तो सीईओ के विरुद्ध भी कार्यवाही करेंगे.इसमें किसी को भी नहीं बख्‍शा जाएगा. यंत्री, उपयंत्री जो भी इसमें शामिल हैं उनके विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी. आज ही हम मुख्‍यालय से अधिकारियों को भेजकर फिर से जॉंच करवा रहे हैं.

श्री हरदीप सिंह डंग -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बहुत गंभीर विषय है..(व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय -- सारी समस्‍या का समाधान हो गया है.

श्री हरदीप सिंह डंग -- अध्‍यक्ष महोदय, शिकायतकर्ता के ऊपर जॉंच क्‍यों की गई ? यह गंभीर विषय है....(व्‍यवधान).....

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, आप यह तमाशा देखिए. सचिव को बचाया जा रहा है, रोजगार सहायक को बचाया जा रहा है. यह क्‍या तरीका है ? शिकायत किसने की. शिकायतकर्ता कौन था.

श्री हरदीप सिंह डंग -- माननीय मंत्री जी, यह केवल एक साल पहले दिनांक 23.12.2016 को मंजूर हुआ है....(व्‍यवधान)....

अध्‍यक्ष महोदय -- उनकी सारी बातें आ गईं और उनकी सारी समस्‍या का समाधान हो गया. मंत्री जी फिर से जॉंच करवाने के लिए भी तैयार हो गए हैं. पहले भी जॉंच कमेटी बनी थी. अब एक ही प्रश्‍न में ज्‍यादा समय नहीं दिया सकता.

श्री हरदीप सिंह डंग -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, शिकायककर्ता को उसमें शामिल किया जाए......(व्‍यवधान).....

अध्‍यक्ष महोदय -- उसमें जॉंच कर रहे हैं.

श्री हरदीप सिंह डंग -- शिकायतकर्ता सरपंच और सरपंच का पति उसको धारा 40 का नोटिस क्‍यों दिया गया ? ...(व्‍यवधान).....

अध्‍यक्ष महोदय -- डॉ. गोविन्‍द सिंह, कृपया अपना प्रश्‍न करें. श्री डंग शांत नहीं होंगे. श्री डंग मानते ही नहीं हैं...(व्‍यवधान)......जॉंच के लिए बोल दिया गया है.....(व्‍यवधान)....

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने अभी कहा कि सारी समस्‍या का समाधान हो गया है. जब इतने लोग अभी तक अपनी बात कह रहे हैं तो समाधान नहीं हुआ. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं माननीय मंत्री महोदय से गुजारिश करना चाहता हॅूं कि उसमें जॉंच शिकायतकर्ता ही सब कुछ हो रहा है तो उसमें थोड़ा विस्‍तृत आप व्‍यवस्‍था इस तरह से दें कि हम भी संतुष्‍ट हो जाएं और जनता भी संतुष्‍ट हो जाए....(व्‍यवधान)......

अध्‍यक्ष महोदय -- आप लोग बैठ तो जाइएं.

श्री गोपाल भार्गव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा मैंने अपने उत्‍तर में कहा है कि संबंधित पुलिस थाना, जिसकी टेरेटरी लगती है उसमें एफआईआर कायम हो चुकी है. अब यह विभाग से हटकर पुलिस की जॉंच का विषय है. पुलिस इस बात की जॉंच करेगी कि कौन व्‍यक्ति दोषी हैं और कौन व्‍यक्ति दोषी नहीं हैं. जो भी व्‍यक्ति इसमें दोषी होंगे उनको अभियोजित किया जाएगा और उनके विरूद्ध प्रशासनिक कार्यवाही तो अभी हमने की है इसके बाद उनके ऊपर फौजदारी कार्यवाही की जाएगी तो अब यह विषय विभाग से हटकर पुलिस की जॉंच का विषय है. इस कारण मैं इस विषय पर अधिक कुछ नहीं कहना चाहता.

...(व्‍यवधान).....

श्री रामनिवास रावत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बस एक प्रश्‍न कर लेने दीजिए.

अध्‍यक्ष महोदय -- अब हो गया. दूसरे सदस्‍यों के भी प्रश्‍न महत्‍वपूर्ण हैं.

श्री रामनिवास रावत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपसे निवेदन है. मेरा प्रश्‍न बहुत महत्‍वपूर्ण है. माननीय मंत्री जी ने स्‍वीकार किया है कि पुलिस रिपोर्ट के कम्‍प्‍लेनेंट सीईओ होंगे. प्रश्‍न के उत्‍तर में दिया गया है कि आपराधिक प्रकरण केवल सरपंच पति के खिलाफ दर्ज किया गया है; रोजगार सहायक भी दोषी है, सचिव भी दोषी है और उपयंत्री भी दोषी है जिन्‍होंने मूल्‍यांकन किया. सीईओ ने इन लोगों के खिलाफ रिपोर्ट क्‍यों नहीं की ? केवल सरपंच पति के खिलाफ ही रिपोर्ट क्‍यों की और शिकायतकर्ता ने शिकायत कब की जबकि उसी शिकायतकर्ता के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर दिया गया. यह बहुत गंभीर समस्‍या है.

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी से आप उत्‍तर तो ले लीजिए.

श्री गोपाल भार्गव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जॉंच प्रतिवेदन आया है उसमें कमेटी जॉंच करने गई थी और जो हमारा ग्राम उदय से भारत उदय अभियान चला था उस दौरान यह विषय सामने आया था. इसमें जॉंच के कई बिन्‍दु हैं इन बिन्‍दुओं में तेरह सूत्रीय निष्‍कर्ष हैं. इसमें साफ लिखा हुआ है कि कपिलधारा कूप हितग्राही श्री उदय सिंह पिता भेरूसिंह....

श्री रामनिवास रावत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न यह नहीं है. आपराधिक प्रकरण केवल सरपंच पति के खिलाफ ही क्‍यों दर्ज किया गया ? रोजगार सहायक, सचिव, उपयंत्री, इनके विरूद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज क्‍यों नहीं किया गया ? ....(व्‍यवधान).... (XXX)....(व्‍यवधान).....क्‍या इनके विरूद्ध प्रकरण कायम होना चाहिए या नहीं होना चाहिए ? आप ही बताइए.

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी आपकी बात का उत्‍तर दे रहे हैं.

श्री गोपाल भार्गव -- अध्‍यक्ष महोदय, यह फर्जी हस्‍ताक्षर करने का विषय है और फर्जी हस्‍ताक्षर करके जो कपिलधारा के कुएं हैं उनसे राशि आहरण करने का विषय है. जिनके कुएं खुदे ही नहीं हैं उनको राशि आहरण करने का विषय है और खुदे-खुदाए कुंओं का मूल्‍यांकन करके, पुनर्मूल्‍यांकन करके और उनको राशि देने का विषय है....(व्‍यवधान.....)

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी बताएं कि क्‍या ऐसा नियम है कि सचिव के बिना आहरण किया जा सकता है ? ...(व्‍यवधान)...

श्री जयवर्द्धन सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, मूल्‍यांकन कौन करता है ? ...(व्‍यवधान)...

श्री उमाशंकर गुप्‍ता -- पहले उत्‍तर तो सुन लो. ...(व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय -- वे सुनना ही नहीं चाहते. ...(व्‍यवधान)...

श्री निशंक कुमार जैन -- सीईओ को निलंबित करके जाच करा लें. ...(व्‍यवधान)...

श्री गोपाल भार्गव -- अध्‍यक्ष महोदय, निलंबन की कार्यवाही की गई है और ये जालसाजी है, इस कारण से इन सारे के सारे दोषी व्‍यक्‍तियों के विरुद्ध धारा-420 के अतिरिक्‍त जो भी धाराएं इसमें आरोपित हो सकती होंगी, उन पर भी कार्यवाही की जाएगी. ...(व्‍यवधान)...

श्री हरदीप सिंह डंग -- अध्‍यक्ष महोदय, सीईओ पर कार्यवाही की जाए..(व्‍यवधान).

श्री गोपाल भार्गव -- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने पहले भी कहा है कि यहां से वरिष्‍ठ अधिकारी को भेजकर जाच करा लेंगे और सीईओ ही नहीं, जो भी दोषी होगा, चाहे उससे बड़ा अधिकारी हो, चाहे छोटा अधिकारी हो, उस पर भी कार्यवाही की जाएगी.

निर्माण कार्यों में अनियमितताओं की जाँच

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

3. ( *क्र. 613 ) डॉ. गोविन्द सिंह : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) भिण्‍ड जिले के विकासखण्‍ड लहाररौन एवं गोहद में मनरेगा योजना अंतर्गत 01 फरवरी, 2017 से प्रश्‍न दिनांक तक किन-किन ग्राम पंचायतों को कौन-कौन से कार्यों हेतु कितनी-कितनी राशि की तकनीकी स्‍वीकृति किस-किस अधिकारी द्वारा दी गई(ख) विधान सभा क्षेत्र लहार में मुख्‍यमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत प्रश्‍न दिनांक तक कौन-कौन सी सड़कें पूर्ण की गईं तथा कौन-कौन सी किन-किन कारणों से अपूर्ण हैं तथा किन-किन एजेन्सियों को कितनी-कितनी राशि की निविदायें स्‍वीकृत की गईंएजेन्सियों के नाम पता सहित विवरण दें। किन-किन सड़कों के निर्माण हेतु कितनी-कितनी राशि किस-किस एजेंसी को भुगतान की गयीप्रत्‍येक सड़क का अलग-अलग विवरण दें। (ग) 01 जनवरी, 2017 से प्रश्‍न दिनांक तक भिण्‍ड जिले के लहार एवं रौन विकासखण्‍ड में किन-किन पंचायतों के ग्राम पंचायत सचिव एवं ग्राम रोजगार सहायकों की पदस्‍थापना पंचायत के अलावा कौन-कौन सी पंचायतों के अतिरिक्‍त प्रभार किन-किन कारणों से दिया गयाक्‍या ग्राम पंचायत सरपंचों ने मांग की थीयदि नहीं, तो क्‍या अतिरिक्‍त प्रभार देने में सी.ई.ओ. लहार एवं रौन द्वारा किये गये भ्रष्‍टाचार की जाँच करायी जायेगीयदि नहीं, तो क्‍यों?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-2 अनुसार है। (ग) विकासखण्ड लहार की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-3 एवं विकासखण्ड रौन की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-4 अनुसार है। जी नहीं। सचिव/ग्राम रोजगार सहायकों के निलंबनमृत्युएक्सीडेंट, चिकित्सा अवकाश, स्‍थानान्‍तरण होने के कारण प्रभार दिया गया है। प्रभार देने में सी.ई.ओ. लहार एवं रौन के विरूद्ध भ्रष्टाचार का प्रकरण अथवा प्रमाण शासन के संज्ञान में नहीं आने से उनके विरूद्ध कार्यवाही का प्रश्न उत्पन्न नहीं होता।

डॉ. गोविन्‍द सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने अपने लहार, रौन विकासखण्‍ड के बारे में प्रश्‍न लगाया है. मैं शिकायत कम करता हूँ और जब तथ्‍य मिलते हैं, तभी करता हूँ. मैंने अपने प्रश्‍न में पूछा था कि मनरेगा के तहत कितने कार्य हुए ? माननीय मंत्री महोदय ने जो उत्‍तर दिया है तो मैं उनसे यह पूछना चाहता हूँ कि केवल एक ही उपयंत्री ने करीब 400-450 कार्यों की तकनीकी स्‍वीकृति दी है, जबकि लहार और रौन विकासखण्‍ड में कुल मिलाकर 8-10 उपयंत्री हैं, और सड़कें जो 50-50, 60-60 लाख रुपये की बनाई गईं, इनमें सीईओ, जनपद पंचायत और उपयंत्री ने मिलकर अधूरी सड़कें बनाई हैं, इनका काम हुआ नहीं है और भुगतान भी हो गया. इसके अलावा कुल 65 पंचायतें हैं, उनमें से केवल 10-12 पंचायतें हैं जिनमें 30-30, 40-40 काम स्‍वीकृत किए, बाकी की पंचायतों में, जिन्‍होंने सीईओ को पैसे नहीं दिए, उनको तकनीकी स्‍वीकृति नहीं मिली, उनके कोई काम नहीं हुए और न ही कोई एस्‍टीमेट बनाया गया है. इस संबंध में पूरी जानकारी मैंने पहले भी मंत्री महोदय को पत्र के माध्‍यम से दी है, तो मैं यह जानना चाहता हूँ, क्‍योंकि कई सड़कों के कार्यों के जवाब ही नहीं दिए गए हैं, जवाब छुपा लिए गए हैं, केवल नाडेप वगैरह बताए हैं, तो क्‍या आप किसी वरिष्‍ठ अधिकारी से जांच करवाएंगे, अभी मैंने कल ही समाचार-पत्र में पढ़ा था कि नए सीईओ के रूप में किसी आईएएस अधिकारी को आपने भेजा है, हम नहीं चाहते ही मुख्‍यालय से ही किसी अधिकारी को जांच के लिए भेजें, अगर इन कार्यों में सच्‍चाई है, जो मैंने अभी बताई है, तो क्‍या उनका निरीक्षण कराएंगे और अगर जनपद पंचायत के सीईओ या अन्‍य अधिकारी दोषी पाए जाते हैं तो क्‍या उन पर कार्यवाही करेंगे ? मेरा पहला प्रश्‍न तो यह है, मुझे इसका जवाब चाहिए.

श्री गोपाल भार्गव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं समझ नहीं पाया कि किस विषय में दोषारोपण हो रहा है, एक तो यंत्री के बारे में बताया कि एक ही यंत्री को कार्य दे दिया गया है, अध्‍यक्ष महोदय, ये नाडेप हैं, कुल मिलाकर 12-12 हजार रुपये के हैं, और नाडेप सैकड़ों की संख्‍या में हैं, मैं मानकर चलता हूँ कि इसमें कोई बहुत बड़ी बात नहीं है कि यदि स्‍वीकृति हुई भी होगी.

डॉ. गोविन्‍द सिंह -- आपने सड़कों का हवाला ही नहीं दिया है.

श्री गोपाल भार्गव -- अध्‍यक्ष महोदय, जहां तक सड़कों की बात माननीय गोविंद सिंह जी कर रहे हैं, हमने 15 लाख रुपये की प्रशासनिक स्‍वीकृति, तकनीकी स्‍वीकृति, सारी की सारी स्‍वीकृतियां ग्राम पंचायतों के सरपंचों के अधिकार में ही दे दी हैं. अब हमने सारे के सारे अधिकार, चाहे वह सीसी रोड हो, चाहे कोई भी हो, इनके सारे अधिकार सरपंचों को ही दे दिए हैं, बहुत सरलीकरण हमने कर दिया है, हमने एक पन्‍ने का प्रपत्र बनाया है जिसमें वही नापतौल कर ले, वही मूल्‍याकंन कर ले, वही राशि का आहरण कर ले, हम किसी प्रकार का नियंत्रण यहां से करने का प्रयास नहीं कर रहे हैं, हमने इतनी ऑटानॉमी दी है, इतनी स्‍वायत्‍तता, स्‍वतंत्रता दी है, अध्‍यक्ष महोदय, इसके बावजूद भी लोग गड़बड़ी कर रहे हैं तो क्‍या कर सकते हैं ? पहले चार लोग जांच करते थे, अब खुद सरपंच कर रहा है.

डॉ. गोविंद सिंह -- अब आप पहले समझ लें, अगर आपने तकनीकी स्‍वीकृति के अधिकार सरपंचों को दे दिए, तो आपके उपयंत्री ने 345 तकनीकी स्‍वीकृति क्‍यों कर दी ? सरपंच को अगर आपने अधिकार दिए हैं तो कुल मिलाकर 400 से अधिक तकनीकी स्‍वीकृति केवल एक उपयंत्री पी.एस. यादव ने दोनों विकासखण्‍ड में क्‍यों दी ? इसमें सरपंच का नाम क्यों नहीं आया है. दूसरा मामला है सड़कों के बारे में, जिन पंचायतों में काम चल रहे हैं, मूल्यांकन देखरेख का अधिकार सब इंजीनियर ज्यादा देखता है और 50 और 60 लाख रूपये के काम कई पंचायतों में किये गये हैं, लेकिन वहां पर गिनी चुनी पंचायतें में ही काम क्यों हो रहे हैं. एक एक पंचायत में 40 से 50 लाख रूपये तक के काम हुए हैं, जबकि हमारे दोनों ब्लाक लहार और रौन में मिलाकर 105 के आसपास पंचायतें हें. उसके बाद भी कुछ ही पंचायतों को ही इतने काम क्यों दिये गये हैं, बाकी की पंचायतें क्या इससे अलग थीं. आपने कहा है कि सरपंच कर रहे हैं तो सरपंच ने किये हैं तो उपयंत्री ने क्यों तकनीकी स्वीकृति दी है जैसा कि आप बता रहे हैं. अब आपके जवाब में ही दो बातें आ गई हैं.

मेरा दूसरा यह कहना है कि जिसके बारे में मैंने शिकायत की थी आपके एडीशनल चीफ सेक्रेटरी थे उन्होंने तत्काल फोन किया, हमने उनको कहा था कि कागज दे दें तो उनका कहना था कि इसकी जरूरत नहीं है. आपका काम हो जायेगा. उन्होंने फोन किया पूरे विभाग में उनका खौफ है लेकिन पता नहीं यहां पर क्यों वे असहाय हो गये हैं, कोई कार्यवाही नहीं हुई है. हम यहां से चले गये 2 - 4 माह हो गये हैं, इंतजार करते हुए लेकिन कोई एक्शन नहीं हुआ है. एक तो हमारा यह कहना है कि आप फिर से इसकी जांच करा लें कि 40 - 50 लाख रूपये के काम कुछ ही पंचायतों को क्यों दिये हैं, कहीं न कहीं इसमें संदेह है,सच्चाई यह है कि पैसे का भ्रष्टाचार है सीईओ और उपयंत्री के द्वारा पैसा लिया जा रहा है, हम यही तो चाहते हैं कि सरपंचों को अधिकार दिये हैं तो उनको अधिकार मिलना चाहिए. यह बीच में भ्रष्टाचार न हो. इसलिए इसका परीक्षण और जांच करा लें.

दूसरा प्रश्न यह है कि आपने रोजगार सहायक और सचिवों को , नियम यह है कि सीईओ जिला पंचायत की अनुमति से उनको खाली जगह पर चार्ज दिया जाता है और वह भी नजदीकी पंचायतों का दिया जाता है. सीईओ जनपद पंचायत लहार ने 25 से 30 हजार रूपये की रिश्वत लेकर रोजगार सहायकों को 40 से 50 किलो मीटर दूर पर चार्ज दिया है . क्या इस प्रकार का नियम है कि नजदीकी पंचायत का चार्ज देंगे तो तो जिन्होंने सीईओ जिला पंचायत की अनुमति के बिना चार्ज दिया है इन सबकी जांच करवाकर, अगर सीईओ दोषी पाया जाता है तो कार्यवाही करेंगे या नहीं करेंगे.

श्री गोपाल भार्गव -- माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय सदस्य ने दो बातें की हैं. एक तो उनका कहना है कि उपयंत्री ने स्वीकृतियां दी हैं, उपयंत्री ने स्वीकृतियां नहीं दी हैं यह सहायक यंत्री ने स्वीकृति दी हैं. जहां तक शेष बातों की बात है कि 50 लाख का काम हुआ है, यह विभाग ने आदेश जारी कर दिये हैं कि 15 लाख रूपये तक की सड़क जिसे मुख्यमंत्री सुदूर ग्राम सड़क भी कहते हैं. उसके अंतर्गत पंचायत और सरपंच वह सड़क बना सकते हैं उसमें किसी प्रकार का कोई निषेध नहीं है. एक सड़क बना ले तो दूसरी सड़क का काम भी वह शुरू कर सकता है. दो सड़कों का काम वह कर सकता है इससे ज्यादा की अनुमति नहीं हैं. बीच में यह बंद कर दिया गया था तो काफी आपत्तियां आयी हैं उन्होंने कहा कि नहीं, हमें सड़क बनाना है, इस कारण से उसको पुन: अनुमति दी गई.

दूसरा यह विषय था कि जहां तक बाजू की ग्राम पंचायत में सचिव को प्रभार देने का मामला है या रोजगार सहायक के लिए, यह बात ही है कि हमारे सचिव के 1000 से ज्यादा पद रिक्त हैं, दुर्घटनाएं भी हुई हैं और उसके कारण कुछ लोगों की मृत्यु भी हुई है, और नई भर्ती नहीं होने के कारण बाजू की पंचायत का प्रभार उनको दिया गया था लेकिन हमने आदेश फिर से जारी कर दिये हैं कि एक ग्राम पंचायत में या तो एक सचिव या फिर रोजगार सहायक इनमें से कोई एक व्यक्ति ही प्रभार में रहेगा दो व्यक्ति प्रभार में नहीं रहेंगे, एक सचिव के चार्ज में एक ही पंचायत रहेगी, फिर चाहे रोजगार सहायक उस काम का निष्पादन करे, संचालन करे या फिर सचिव करे, अब इस कारण से यह दोहरा प्रभार नहीं रहेगा.

अध्यक्ष महोदय -- उन्होंने जांच के बारे में पूछा है.

डॉ गोविन्द सिंह -- मैं तो केवल इतना चाहता हूं कि जैसा आपने कहा है कि निर्देश जारी हैं कि नजदीकी पंचायत का चार्ज दिया जा सकता है तो फिर 40 से 50 किलोमीटर दूर का चार्ज क्यों दिया है. एक प्रश्न तो यह है.

श्री गोपाल भार्गव -- वह बंद कर दिया गया है.

डॉ गोविन्द सिंह -- नहीं, आपके बंद करने के बाद में भी यह हुआ है. यही तो हम कह रहे हैं.

श्री गोपाल भार्गव -- आज की तारीख में मेरे विचार से इस प्रकार का प्रचलन उस जिले में कहीं पर नहीं है.

डॉ.गोविन्द सिंह - इसी को आप दिखवा लें, उसका परीक्षण करवा लें.

श्री गोपाल भार्गव - परीक्षण करा लेंगे.

डॉ.गोविन्द सिंह -दूसरा हमारा कहना है कि आपने खर्दु मड़ैया, मूरतपुरा सड़क, जवाब में पूर्ण बताई है, जबकि खुर्द से मड़ैया और मूरतपुरा से लोधियनकापुरा, ये दोनों सड़कें अभी अधूरी हैं. लेकिन आपके उत्तर में आया है कि ये पूर्ण हैं तो क्या इनको आप पूर्ण कराने का निर्देश देंगे? और जो आपने कहा है कि 15 लाख रुपए का अधिकार संरपंचों को दिया है, तकनीकी स्वीकृति के भी अधिकार दिये हैं तो फिर सहायक यंत्री श्री यादव को क्यों अधिकृत किया है? ये दोनों बातें हैं, फिर 15 लाख रुपए से अधिक की स्वीकृति हुई है, 50-50, 60-60 लाख, 1-1 करोड़ रुपए तक स्वीकृति पहुंच गई.

श्री गोपाल भार्गव - नहीं अध्यक्ष महोदय. 50 लाख रुपए की एकमुश्त नहीं कर सकते हैं.

डॉ.गोविन्द सिंह - यह हुआ है, तभी तो मैं कह रहा हूं, नहीं तो हमें प्रश्न लगाने की क्या जरूरत थी?

श्री गोपाल भार्गव - अध्यक्ष महोदय, एक किलोमीटर सड़क बन गई, इसके बाद में दूसरी स्वीकृति दूसरे किलोमीटर की होगी, तीसरी स्वीकृति तीसरे किलोमीटर की होगी.

डॉ.गोविन्द सिंह - नहीं-नहीं. एक साथ लंबी-लंबी सड़कों की 30-30-, 40-40 लाख रुपए की स्वीकृति हुई है. यही तो सीईओ ने किया है और उसकी मैंने शिकायत की है.

श्री गोपाल भार्गव - अध्यक्ष महोदय, जो भी माननीय सदस्य कह रहे हैं, इसकी हम जांच करा लेंगे और यदि उसमें कहीं अनियमितता होगी तो हम कार्यवाही भी करेंगे.

डॉ.गोविन्द सिंह - मैंने जो सीईओ के बारे में प्रश्न किया था.

श्री गोपाल भार्गव - आप तो वैसे ही बात कर लेते हो.

डॉ.गोविन्द सिंह - मैंने तो कहा था, मैं तो श्री जुलानिया जी के पास गया था. हमने कहा कि वह हो गया होगा. तत्काल काम होता है लेकिन पता नहीं यहां क्यों रह गया?

श्री गोपाल भार्गव - काम में बहुत बेहतरी आई है, इस बात को मैं कह सकता हूं.

डॉ.गोविन्द सिंह - इस बात को मैं मान रहा हूं. मैं स्वीकार करता हूं कि काम में सुधार हुआ है और काम भी हो रहे हैं. लेकिन इन कामों में एकाध जगह शिकायत कर रहे हैं तो ..

श्री गोपाल भार्गव -..तो उसकी जांच करा लेंगे.

परफार्मेंस ग्रांट से राशि का प्रदाय

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

4. ( *क्र. 647 ) श्री बलवीर सिंह डण्‍डौतिया : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अता. प्रश्‍न क्र. 6569, दिनांक 21.03.2017 के उत्‍तर भाग (ख) में मुरैना जिले को प्रश्‍नांकित अवधि में 3 करोड़ की राशि प्रदाय करने तथा भाग (ग) में जिला पंचायत मुरैना की सामान्‍य सभा की बैठक दिनांक 25 जनवरी, 2017 को कार्य योजना का अनुमोदन किए जाने तथा उसके आधार पर कार्यवाही प्रचलित होने संबंधी उत्‍तर दिया है तो कार्य योजना अनुमोदन उपरांत कार्य प्रारंभ किये जाने की समय-सीमा क्‍या है(ख) क्‍या कार्य समय-सीमा में प्रारंभ कर दिये गये हैंयदि हाँ, तो जानकारी कार्य विवरणलागत राशिग्राम पंचायत का नामक्रियान्‍वयन एजेंसी आदि सहित दी जावे? यदि अभी तक कोई कार्य प्रारंभ नहीं हुए तो उसके क्‍या कारण हैं?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जी हाँ। पंचायत राज अधिनियम 1993 में सामान्य सभा से कार्ययोजना अनुमोदन उपरांत कार्य प्रारंभ किये जाने की समय-सीमा के प्रावधान का उल्लेख नहीं है। (ख) जी हाँ। अनुमोदित कार्य यथा समय प्रारंभ किये गये हैं। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है।

परिशिष्ट - ''एक''

श्री बलवीर सिंह डण्डौतिया - अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से केवल इतना ही पूछना चाहता हूं कि मेरी विधान सभा में मुरैना में 3 करोड़ और कुछ रुपए दिये हैं तो मेरे विधान सभा क्षेत्र में कितने-कितने रुपए दिये हैं, कौन-कौन सी पंचायत में दिये हैं और कहां-कहां काम कराया गया है, यह बताएं?

श्री गोपाल भार्गव - अध्यक्ष महोदय, विषय कोई बड़ा नहीं है. यह तय हुआ था कि जनपद पंचायतों में काम कराने के लिए हम 1 करोड़ रुपए की विशेष निधि जनपदों के लिए देंगे. जिला पंचायतों में काम कराने के लिए सदस्यों के लिए समान रूप से राशि बांटकर अध्यक्ष को ज्यादा, उपाध्यक्ष के लिए उससे कम ज्यादा और सदस्यों के लिए समान रूप से यह राशि बांटकर, ताकि कभी-कभी यह होता था कि किसी ने ज्यादा राशि ले ली, किसी ने कम ले ली तो हमने एक पूरा फार्मूला बना दिया था तो 2 करोड़ रुपए की राशि माननीय सदस्य पूछ रहे हैं, इनके जिले में वह जमा है और जनपद में 1 करोड़ रुपए की राशि जमा है तो जिला पंचायत में सामान्य समिति जो होती है, सामान्य सभा जो होती है उसके बारे में और प्रशासनिक समिति के बारे में वर्तमान में न्यायालय में मामला चल रहा है, इस कारण से इस राशि का सदुपयोग नहीं हो पाया है. राशि तो पहुंच गई है और जैसे ही उसका निपटारा होगा तो उस राशि का उपयोग हो जाएगा और काम हो जाएंगे.

श्री बलवीर सिंह डण्डौतिया - धन्यवाद.

निविदा प्रक्रिया में अनियमितता

[नगरीय विकास एवं आवास]

5. ( *क्र. 1367 ) श्री अनिल फिरोजिया : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्या नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा 1.00 लाख से अधिक राशि के टेण्डर ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से बुलाये जाने के संबंध में कोई आदेश प्रसारित किये गये हैंयदि हाँ, तो उक्त आदेश के परिपालन में नगर निगम उज्जैन के प्रकाश विभाग में दिनांक 20.06.2016 तक कितनी निविदा आमंत्रित की गई थीनिविदा प्रकरण की छायाप्रति देवें। (ख) क्या नगर निगम उज्जैन के प्रकाश विभाग की ई-निविदा क्रमांक 1991 में निविदा की शर्तों का पालन किया गया हैयदि हाँ, तो क्या निविदा से ई.एस.आई. दस्तावेज लिये गयेयदि हाँ, तो दस्तावेजों की छायाप्रति देवें? यदि नहीं, तो किन कारणों से निविदा शर्तों की अनदेखी कर निविदा खोली गई(ग) क्या नगर निगम उज्जैन के प्रकाश विभाग की ई-निविदा क्रमांक 3529 में निविदा की शर्तों का पालन किया गयायदि हाँ, तो क्या प्रश्‍नांश (ख) व प्रश्‍नांश (ग) में निविदादाताओं में समानता हैयदि हाँ, तो कितने निविदादाताओं में समानता है(घ) क्या कारण है कि ई-निविदा कमांक 1991 में ई.एस.आई. दस्तावेज अभाव में तकनीकी रूप से संबंधित निविदादाता को योग्य घोषित किया गया एवं उसी निविदादाता को ई-निविदा क्रमांक 3529 में ई.एस.आई. दस्तावेज के अभाव में अयोग्य घोषित किया गया। इसके लिये कौन दोषी हैक्या विभाग दोषी अधिकारी के विरूद्ध कोई कार्यवाही करेगायदि हाँ, तो कब तक?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जी हाँ। संचालनालयनगरीय प्रशासन एवं विकास के आदेश क्रमांक 7814, दिनांक 17.06.2016 के पश्चात् नगर पालिक निगम उज्‍जैन के प्रकाश विभाग में दिनांक 20.06.2016तक कोई निविदा आमंत्रित नहीं की गई। (ख) जी नहींनिविदा में ई.एस.आई/ई.पी.एफ. की शर्त रखी गई थीकार्य हेतु 03 निविदायें प्राप्‍त हुईं थींजिसमें से 01 निविदाकार द्वारा ई.एस.आई. के दस्‍तावेज प्रस्‍तुत नहीं किये गये थे। निविदा की तकनीकी मूल्‍यांकन रिपोर्ट में तकनीकी अधिकारियों द्वारा तीनों निविदाकारों को सफल बताये जाने के कारण निविदा खोली गई। (ग) जी हाँ। जी हाँ। एक निविदादाता में समानता है। (घ) निविदा क्रमांक 1991में तकनीकी मूल्‍यांकन रिपोर्ट के कारण निविदादाता को योग्‍य घोषित किया गया था। निविदा क्रमांक 3529 में ई.आई.एस. दस्‍तावेज प्रस्‍तुत ना करने के कारण संबंधित निविदादाता को अयोग्‍य घोषित किया गया था। निविदा क्रमांक 1991 के तकनीकी मूल्‍यांकन रिपोर्ट में हुई त्रुटि के संज्ञान में आने पर नगर पालिक निगमउज्‍जैन द्वारा संबंधित तकनीकी अधिकारी को सूचना पत्र जारी कर स्‍पष्‍टीकरण चाहा गया है। जी हाँजाँच उपरान्‍त नियमानुसार कार्यवाही की जावेगी। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

 

श्री घनश्याम पिरौनिया - आप आज तो खुश हो जाओ, अध्यक्ष महोदय को धन्यवाद दे दें.

श्री अनिल फिरोजिया - अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री महोदय से पूछना चाहता हूं कि मेरे उत्तर में ख और घ में जो विभाग द्वारा जवाब दिया गया है, उसमें स्पष्ट किया गया है कि निविदा क्रमांक 1991 में अनियमितता की गई है, जो विभाग ने भी स्वीकार किया है. चूंकि मात्र नगर निगम उज्जैन के प्रकाश विभाग में ही विशेष शर्तें रखी जाती हैं क्योंकि संबंधित उपयंत्री द्वारा विशेष शर्तों के माध्यम से निविदा में प्रतिस्पर्धा कम कराई जाती है एवं उपयंत्री द्वारा निविदाओं को तकनीकी रूप से योग्य, अयोग्य किया जाता है उक्त आधार पर निविदा के माध्यम से आर्थिक लाभ प्राप्त कर शासन को हानि पहुंचाई जा रही है. माननीय मंत्री महोदय से आपसे निवेदन है कि क्या आप उपयंत्री को तत्काल निलंबित करेंगे?

श्रीमती माया सिंह - माननीय अध्यक्ष जी, यह बात विधायक जी की बिल्कुल सच है कि एमआर- दो रोड से व्यास नगर तक जो स्ट्रीट लाइट पोल लगाने के लिए निविदा जारी की गई थी, उसमें परीक्षण में पाया है कि वहां पर गलत रिपोर्ट प्रस्तुत की गई तो इसलिए मैं कहना चाहती हूं कि हमने संबंधित तकनीकी अधिकारी को सूचना पत्र जारी किया है और जांच के बाद जो भी आएगा, उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही करेंगे.

श्री अनिल फिरोजिया-- अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से यह निवेदन करना चाहता हूं कि जांच पहले भी हुई है. बहुत जाचें हो चुकी हैं. मैं अगर विधान सभा प्रश्न लगाऊं तो इस उपयंत्री के खिलाफ 200 से ज्यादा प्रश्न लगा दूंगा. इतनी जांच हो चुकी है. मेरा निवेदन है कि जांच का कोई तो निर्णय हो जाये. आप भी मान रहे हैं कि यह भ्रष्ट है, उत्तर में भी आ गया तो इसको निलंबित किया जाये. अध्यक्षजी, मैं आपका संरक्षण चाहते हुए माननीय मंत्री जी से विनम्र निवेदन करता हूं कि संबंधित उपयंत्री को सदन में निलंबित करने की घोषणा करें.

श्रीमती माया सिंह-- अध्यक्ष महोदय, विधायक जी ने कहा कि उनके खिलाफ अनियमितताओं के 200 आरोप हैं. मैं उनको आश्वासन देना चाहती हूं कि विभाग किसी भी प्रकार की अनियमितताएं बर्दाश्त नहीं करेगा. इसलिए अनियमितताएं पाये जाने पर हम तत्कालीन कार्यपालन यंत्री को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का और साथ ही साथ संयुक्त संचालक स्तर के अधिकारी से जांच कराने का आदेश देते हैं.

श्री अनिल फिरोजिया-- धन्यवाद.

श्रीमती माया सिंह-- अध्यक्ष जी, मैंने अभी जिनके खिलाफ कार्रवाई की घोषणा की है वह कार्यपालन यंत्री नहीं है, उसमें थोड़ा सा सुधार करें वह उपयंत्री है. हम उपयंत्री को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हैं.

सड़कविहीन मार्गों को मुख्‍यमंत्री सड़क से जोड़ा जाना

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

6. ( *क्र. 874 ) श्री गोवर्धन उपाध्‍याय : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि       (क) विदिशा जिले के सिरोंज विधान सभा क्षेत्रान्‍तर्गत सिरोंज एवं लटेरी क्षेत्र में सड़क विहीन मार्ग को मुख्‍यमंत्री सड़क से जोड़े जाने के संबंध में कार्यालयीन पत्र क्रमांक 12-13 दिनांक 15.04.2017 के द्वारा पंचायत एवं ग्रामीण वि‍कास मंत्री महोदय एवं मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी महोदय जिला पंचायत विदिशा को मुख्‍यमंत्री सड़क योजना के तहत् 21 रोड निर्माण किये जाने के संबंध में पत्र जारी किया गया थाउस पर शासन द्वारा अभी तक क्‍या कार्यवाही की गई(ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार उक्‍त सड़क निर्माण कार्य को शासन द्वारा किन-किन सड़कों को जोड़े जाने के संबंध में अभी तक स्‍वीकृति प्रदान की गई है?यदि हाँतो कब? पूर्ण जानकारी देवें। नहीं तो क्‍यों कब तक स्‍वीकृत किये जाने की संभावना हैस्‍वीकृत न किये जाने का क्‍या कारण हैस्‍वीकृत हेतु क्‍या प्रक्रिया अपनाई जावेगी?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) उपलब्‍ध वित्‍तीय संसाधन पूर्व से स्‍वीकृत कार्यों के लिए आबद्ध होने के कारण स्‍वीकृति प्रदान नहीं की जा सकी है। स्‍वीकृति वित्‍तीय संसाधनों की सुनिश्चित उपलब्‍धता पर निर्भर होने से समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

परिशिष्ट - ''दो''

 

श्री गोवर्धन उपाध्याय-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी का हृदय से आभारी हूं जिन्होंने मेरी विधान सभा क्षेत्र सिरोंज में 80 रोड्स की स्वीकृति प्रदान की है. मैं साथ में यह भी चाहूंगा कि जो 80 रोड्स का कार्य है वह कब तक शुरु करेंगे और कब तक पूर्ण कराएंगे? दूसरा, मैंने प्रश्न में 21 सड़कों के बारे में पूछा था आपने वित्तीय संसाधनों की कमी बतायी जिससे काम पूरा नहीं हो पाएगा या नहीं कर पाएंगे. मैं जानना चाहता हूं कि ये काम आप कब तक प्रारंभ करेंगे इसकी भी मुझे जानकारी देने का कष्ट करें.

श्री गोपाल भार्गव-- अध्यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय सदस्य ने जानकारी चाही है इसमें मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत सड़कें जोड़ी जाना थीं. उन सड़कों के नाम पढ़ूंगा तो काफी समय लग जाएगा. इनमें से कुछ सड़कों की डीपीआर बन गई. कुछ सड़कें निरस्त हुई हैं क्योंकि वह पक्के मार्ग से पहले से जुड़ी हैं. एक तरफ से उनकी कनेक्टिविटी थी. हमारे नार्म्स और नियम इस बात को अलाउ नहीं करते कि हम उनको बनाये. कुछ ग्राम ऐसे हैं जो ग्रेवल मार्ग से जुड़े हैं इस कारण से उनकी पात्रता नहीं है. लेकिन 5 मार्ग जो मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना में हैं. उनको हम जल्दी से जल्दी ले रहे हैं और राशि की व्यवस्था भी हम उसके लिए कर रहे हैं.

श्री गोवर्धन उपाध्याय--धन्यवाद.

श्री गोपाल भार्गव-- अध्यक्ष महोदय, माननीय उपाध्याय जी ने यह तो बात तो कही कि हम लोगों ने 60 सड़कों की मंजूरी इनके यहां दी है.

श्री निशंक कुमार जैन-- माननीय मंत्री जी, आपने बहुत सारा काम किया इसमें कोई दो मत नहीं है. लेकिन मेरा इसमें आपसे एक अनुरोध है कि जो मजरे-टोले सड़कों से छूट गए उसके लिए भी आप घोषणा करें

श्री गोपाल भार्गव-- अध्यक्षजी, जैसा जैन साहब ने कहा उनके क्षेत्र को भी सड़कों से जोड़ेंगे. हम अगले साल तक 100% कनेक्टिविटी राज्य की कर लेंगे. मैंने माननीय सदस्यों को अवगत कराया कि मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत जो ग्रेवल सड़कें बनी हैं अब हम इस साल से उनके लिए गिट्टीकरण और डामरीकृत कर रहे हैं. माननीय सदस्यों को भी सूचना भेजी है.

अध्यक्ष महोदय--धन्यवाद.

 

प्रश्न क्रमांक- 7 (अनुपस्थित)

मेट्रो रेल परियोजना का क्रियान्‍वयन

[नगरीय विकास एवं आवास]

8. ( *क्र. 7 ) श्री बाबूलाल गौर : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) भोपाल एवं इंदौर में मेट्रो रेल परियोजना के क्रियान्‍वयन में शासन द्वारा प्रश्‍न दिनांक तक क्‍या कार्यवाही की गई है(ख)भोपाल एवं इंदौर में मेट्रो रेल परियोजना के क्रियान्‍वयन हेतु क्‍या शासन द्वारा धनराशि की व्‍यवस्‍था कर ली गई हैयदि हाँतो किस संस्‍था/केन्‍द्र सरकार द्वारा कितनी-कितनी धनराशि ऋण/अनुदान के रूप में देने हेतु सहमति प्रदान की गई है(ग) मेट्रो रेल परियोजना के क्रियान्‍वयन हेतु भोपाल एवं इंदौर में कितनी-कितनी निजी एवं शासकीय भूमि के अधिग्रहण का प्रस्‍ताव है(घ) विभाग द्वारा मेट्रो रेल परियोजना के क्रियान्‍वयन का कार्य कब तक प्रारंभ कर दिया जायेगा?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) भोपाल एवं इंदौर में मेट्रो रेल परियोजना के क्रियान्‍वयन के संबंध में कृत कार्यवाही विषयक जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) भोपाल एवं इंदौर में मेट्रो रेल परियोजना के क्रियान्‍वयन हेतु शासन द्वारा धनराशि की व्‍यवस्‍था की जा रही है। उभय परियोजनाओं कि लिए प्रस्‍तावित वित्‍तीय व्‍यवस्‍था पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) मेट्रो रेल परियोजना के क्रियान्‍वयन हेतु वर्तमान में भोपाल एवं इंदौर में निजी एवं शासकीय भूमि का अधिग्रहण प्रस्‍तावित नहीं है। (घ) विभाग द्वारा मेट्रो रेल परियोजना का कार्य वर्ष 2017-18 में प्रारंभ किया जाना प्रस्‍तावित है।

श्री बाबूलाल गौर - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि भोपाल और इन्दौर के मेट्रो ट्रेन का मामला नौ वर्षों से चल रहा है जबकि लखनऊ में शुरू हो चुकी है.कोच्चि में प्रधानमंत्री ने स्वयं जाकर मेट्रो ट्रेन का शुभारंभ किया. मंत्री महोदया ने बहुत लंबा परिशिष्ट दिया है. उन्होंने बहुत अच्छी जानकारी मुझे प्रदान की है जो 3-4 पेज में है. यह परिशिष्ट में दिया है, माननीय मंत्री जी ने बताया है कि भोपाल मेट्रो ट्रेन के लिये 6962.92 करोड़ रुपये और इन्दौर के लिये 7522.63 करोड़ रुपये, भारत सरकार का अंशदान भोपाल के लिये1295.07 करोड़ रुपये और इन्दौर के लिये 1403.79 करोड़ रुपये, अंशदान राज्य सरकार का है, भोपाल का 1782.66 करोड़ रुपये और इन्दौर का 2918.84 करोड़ रुपये. इसमें इन्होंने कहा है कि हम अन्य ऐजेंसियों से रुपये लेंगे उसमें EIB,ABD, और NDB तो इनको प्रस्ताव आपने किस तारीख को भेजे और कितनी-कितनी राशि के प्रस्ताव आपने उनको भेजे ?

श्रीमती माया सिंह - माननीय अध्यक्ष जी, मैं बाबूलाल जी, माननीय विधायक जी से कहना चाहती हूं कि आपने खुद ही पढ़ा है कि जो लागत है उसमें 20-20 का अनुपात है. 20 प्रतिशत भारत सरकार,20 प्रदेश सरकार और 60 प्रतिशत की जो राशि है वह हम EIB और साथ ही साथ इन्दौर के लिये ADB और NDB से ऋण प्राप्त करने का प्रस्ताव उनको भेजा है.

श्री बाबूलाल गौर - मैंने तारीख पूछी है आपने प्रस्ताव किस तारीख को भेजा है और वह कब तक मंजूर हो जायेगा क्योंकि यह बहुत लंबी योजना है. 9 साल हो गये हैं इसीलिये बड़ी चिंता का विषय है.

श्रीमती माया सिंह - माननीय अध्यक्ष जी, हमने जो प्रस्ताव वहां भेजा है तो 500 मिलियन डालर FIB से है और 500 मिलियन डालर ADB और NDB से हैं. यह दिनांक 7.1.2017 को भेजा गया है.

श्री बाबूलाल गौर - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं यह जानना चाहता हूं कि यह प्रस्ताव कब तक मंजूर हो जायेगा ? क्योंकि अभी तो कार्य प्रारंभ ही नहीं हुआ और आपने उत्तर में बता दिया है कि यह मेट्रो की परियोजना 2017-18 में प्रस्तावित है तो 2017-18 तो चल ही रहा है तो प्रस्तावित 2020 तक नहीं होगा.

श्रीमती माया सिंह - इसका प्रथम चरण हम 2018 में शुरू करेंगे और यह सारी की सारी प्रक्रियाऐं हैं इनको फालो करने में समय लगता है.

श्री बाबूलाल गौर - माननीय अध्यक्ष महोदय, आप मार्गदर्शन करने की कृपा करें. अभी प्रस्ताव की राशि प्राप्त ही नहीं हुई और प्रथम किश्त भी प्राप्त नहीं हुई और कह रहे हैं कि इसको  2018 में शुरू कर देंगे तो आप निश्चित तारीख बताएं कि वास्तविक रूप से यह कब तक शुरू हो जायेगी.

अध्यक्ष महोदय - मार्गर्शन तो आप ही से सब लेते हैं. माननीय मंत्री जी आप कोई अनुमानित तारीख बता सकती हैं ?

श्रीमती माया सिंह - माननीय अध्यक्ष जी, तारीख बताना संभव नहीं है लेकिन मैंने कहा है कि 2018 में हम इसको शुरू करेंगे.

श्री बाबूलाल गौर - जन्मदिन की तारीख ही पता नहीं तो उसका आयोजन कैसे होगा. जन्मदिन कैसे मनाएंगे.

श्रीमती माया सिंह - माननीय गौर जी, यह EIB की अप्रेजल की सहमति जो है वह 6 जुलाई की है और ADB की 21 अगस्त से 23 अगस्त को उनका मिशन आयेगा उसके बाद होगा.

श्री बाबूलाल गौर - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा आखिरी प्रश्न है. आपने प्रश्नांश "" के उत्तर में बताया है कि मेट्रो परियोजना के लिये वर्तमान में भोपाल एवं इन्दौर में निजी और शासकीय भूमि के अतिक्रमण का प्रस्ताव नहीं है जबकि परिशिष्ट "" के नीचे टीप में लिखा है कि परियोजना की लागत में भूमि का लागत शामिल है और आप कह रही हैं कि  अधिकरण की आवश्यक्ता नहीं है और आपने नीचे परिशिष्ट में लिखा है कि भूमि लागत, R&R एवं राज्य कर इत्यादि सम्मिलित हैं तो दोनों में सही बात कौन सी है ?

श्रीमती माया सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष जी, यह जो डीपीआर बनी है, नगर निगम के समन्‍वय से बनी है, वहां पर कालोनी और बस्‍ती नहीं है जो प्रभावित हो, यह भूमि की लागत शासकीय भूमि की कीमत है जो आप पूछ रहे हैं.

श्री बाबूलाल गौर-- अध्‍यक्ष महोदय, दोनों बातें उचित नहीं हैं. मैं यह दोनो पाइंट आपके ध्‍यान में लाना चाहता हूं, वास्‍तव में अधूरे मन से काम हो रहा है, इसके आगे परिशिष्‍ट में दूसरा पाइंट भी है कि भूमि लागत आर एण्‍ड आर तथा राज्‍य कर इत्‍यादि पीएमआरसीएल के अंशदान में सम्मिलित है, इसका क्‍या मतलब है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कोई भी बात गंभीरता से ली जाये. आप दोनों बातें कह रही हैं कि अतिक्रमण की आवश्‍यकता नहीं है, भूमि की आवश्‍यकता नहीं है तो फिर लागत के लिये परिशिष्‍ट में क्‍यों दिया गया है.

अध्‍यक्ष महोदय-- प्रश्‍न क्रमांक-9, श्री आरिफ अकील.

श्री बाबूलाल गौर-- अध्‍यक्ष महोदय, जवाब तो आये.

अध्‍यक्ष महोदय-- बहुत लंबा हो गया है.

श्री बाबूलाल गौर-- जवाब ही नहीं आयेगा तो लंबा तो होगा ही. आप कहेंगे तो मैं बैठ जाऊंगा. भोपाल के अंदर मेट्रो आना चाहिये. भोपाल और इंदौर में मेट्रो आना चाहिये.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री की हालत यह है तो हम लोग तो वैसे ही संतुष्‍ट हैं.

श्री बाबूलाल गौर-- मैं आपसे कोई मदद नहीं चाहता, आपके राज में तो मेट्रो चली ही नहीं.

श्री अजय सिंह-- मैं आपको मदद दे भी नहीं रहा हूं, पर आपकी हालत को देखकर दुख हो रहा है.

श्री बाबूलाल गौर-- आपको दुख नहीं होना चाहिये.

श्री गोपाल भार्गव-- गौर जी की हालत बिल्‍कुल ठीक है आप देख नहीं रहे, 90 साल की आयु में बगैर चश्‍मे के छोटे-छोटे से अक्षर पढ़ रहे हैं, छोटे-छोटे से प्रश्‍न पूछ रहे हैं.

श्री बाबूलाल गौर-- आपको बहुत धन्‍यवाद है. मैं आपसे प्रश्‍न पूछ रहा हूं, अगर आज उत्‍तर न दें तो फिर सूचना कार्यालय में दे दें.

श्रीमती माया सिंह-- गौर जी को विस्‍तृत जानकारी पहुंचा दूंगी, लेकिन आपने जो भूमि की लागत वाली बात की है तो भूमि की लागत जो है शासकीय भूमि की कीमत है, उसके हिसाब से है और शासकीय भूमि आवंटन द्वारा प्राप्‍त होगी और सरकारी भूमि की लागत कीमत शासन के जो प्रोजेक्‍ट में है उसके कंट्रीव्‍यूशन में है.

 

कब्रि‍स्‍तानों का जीर्णोद्धार/विकास कार्य

[नगरीय विकास एवं आवास]

9. ( *क्र. 1624 ) श्री आरिफ अकील : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या नगर पालिक निगम भोपाल के वित्‍तीय वर्ष 2016-17 के महापौर अभिभाषण में भोपाल के विभिन्‍न कब्रि‍स्‍तानों के जीर्णोद्धार/विकास/बाउण्‍ड्रीवाल निर्मित किए जाने हेतु राशि आवंटित किए जाने की घोषणा की थी(ख) यदि हाँ, तो भोपाल के किन-किन कब्रि‍स्‍तानों के लिए कितनी-कितनी राशि आवंटित की गई और किन-किन कब्रि‍स्‍तानों का कितनी-कितनी राशि का किस-किस कार्य हेतु प्राक्‍कलन तैयार किया जाकर कब-कब निविदा आमंत्रित की गई तथा कार्य की अद्यतन स्थिति से अवगत करावें(ग) प्रश्‍नांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में क्‍या बजट भाषण में की गई घोषणा के बावजूद कई कब्रि‍स्‍तानों के विकास/जीर्णोद्धार कार्य किए जाने हेतु न तो राशि आवंटित की गई और न ही प्राक्‍कलन तैयार किया गयायदि हाँ, तो घोषणा करने का क्‍या तात्‍पर्य हैयदि नहीं, तो कब तक पूर्ति की जावेगी तथा वार्डवार कब्रि‍स्‍तानों के नाम सहित सूची उपलब्‍ध करावें?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) वित्‍तीय वर्ष 2016-17 में भोपाल के विभिन्‍न कब्रिस्‍तानों के जीर्णोद्धार/विकास/ बाउण्‍ड्रीवाल निर्मित किये जाने हेतु बजट मद 230590513 कब्रिस्‍तान मरम्‍मत एवं निर्माण प्रावधान राशि रूपये 1.00 करोड़ का प्रावधान किया गया था। (ख) जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ग) कब्रिस्‍तानों के विकास/जीर्णोद्धार कार्य किये जाने हेतु राशि आंवटित की जाकर भोपाल के विभिन्‍न कब्रिस्‍तानों में कार्य कराये गये हैं स्‍वीकृत कार्यों की सूची संलग्न परिशिष्‍ट अनुसार है।

परिशिष्ट - ''चार''

श्री आरिफ अकील-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदया से पूछना चाहता हूं कि महापौर जी ने अपने बजट भाषण में जिन कब्रिस्‍तानों में पैसे लगाने की बात की है उसमें 58 लाख रूपये भोपाल टॉकीज के पास वाले कब्रिस्‍तान में लगाने की बात की है. अध्‍यक्ष जी, पूरे भोपाल के कब्रिस्‍तानों में न रोड है न बाउंड्रीवाल बनी है आजकल बारिश में तो यह हाल है कि लोग मैयत को लेकर दफनाने जाते हैं तो उनको जाना नहीं पड़ता. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदया से कहना चाहता हूं कि आप तो बहुत जल्‍दी-जल्‍दी सब मांगें स्‍वीकार कर लेती हैं, क्‍या मेरी यह मांग स्‍वीकार करेंगी कि भोपाल में जितने भी कब्रिस्‍तान हैं उनकी बाउंड्रीवाल और रोड बनाने के लिये आप खुद निरीक्षण करके आदेश देंगी ?

श्रीमती माया सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष जी, मैं विधायक जी को बताना चाहती हूं कि आपने जो सवाल उठाया है उसमें 1 करोड़ की राशि मंजूर की गई थी और उसमें 16 कार्य स्‍वीकृत हुये थे, उनमें से 14 कार्य तो आपके पूर्ण हो गये हैं, सिर्फ 2 कार्य रहे हैं छावनी कब्रिस्‍तान का और शांतिनगर कब्रिस्‍तान का, वह अनुबंध प्रक्रिया में है तो वह भी जल्‍दी हो जायेगा.

श्री आरिफ अकील-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं बजट भाषण साथ में लाया हूं उसमें लिखा हुआ है 58 लाख रूपये की राशि भोपाल टाकीज के कब्रिस्‍तान की स्‍वीकृत की गई. माननीय मंत्री महोदया जिन कामों का उल्‍लेख कर रही हैं वह काम तो हर साल शबे-बरात पर पुताई के लिये और वहां की साफ सफाई के लिये खर्चा होते हैं उसका 1 करोड़ में कोई समायोजन नहीं है कि 1 करोड़ उसमें खर्च होंगे. उन कामों के अलावा एक करोड़ रूपये खर्च करने की बात हुई थी उसमें हलालपुर कब्रिस्‍तान में जो पानी भर रहा है उसके बारे में भी बात थी.

उसमें पुलिस कन्ट्रोल रूम के पास में जो कब्रिस्तान है, जहां पर पुलिस की गाड़ियां खड़ी हैं वहां पर वाउन्ड्रीवाल बनाने की बात हुई थी. मैंने पत्र लिखा था उसके जवाब में उन्होंने दो कार्य स्वीकृत करते हुये अपने बजट भाषण के पेज 37 में उल्लेख है कि रूपये 55 लाख की राशि भोपाल टाकीज के कब्रिस्तान के उन्नयन के लिये दी है. उसका काम आज तक शुरू नहीं हुआ है. मंत्री जी से मैं कह रहा हूं कि आपके पास में धनराशि की कोई कमी नहीं है बाकी जगहों पर तो खूब धनराशि खर्च की जा रही है. अध्यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्यम से मंत्री से यह अनुरोध है कि मेहरबानी करके मंत्री जी आप भोपाल के कब्रिस्तानों का भ्रमण कर लीजिये जहां पर पानी भर रहा है उसको ठीक करा दीजिये और जहां पर दीवाल टूटी हुई है वह दीवाल बना दें.

श्रीमती माया सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जो सवाल पूछा है उसके जवाब प्रश्न के परिशिष्ट में संलग्न किये गये हैं. आप उनको देख लें.

श्री आरिफ अकील-- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी को अधिकारी गुमराह किये हुये हैं. मैं बजट भाषण में आपको दिखा रहा हूं कि 1 करोड़ स्वीकृत किये हैं एक कार्य के लिये 58 लाख रूपये और एक काम के लिये 55 लाख रूपये स्वीकृत किये हुये हैं. यह भोपाल नगर निगम के महापौर का बजट भाषण है. मंत्री जी जो 1 करोड़ रूपये के काम बता रही हैं यह तो हर साल शब्बेरात के मौके पर कब्रिस्तान की देख रेख की व्यवस्था के लिये,सफाई व्यवस्था के लिये जो होते हैं उसका उल्लेख कर रही हैं.

अध्यक्ष महोदय- आरिफ जी आप सीधा सा प्रश्न कर दें कि आप इसके अलावा क्या चाहते हैं.

श्री आरिफ अकील -- अध्यक्ष महोदय, महापौर के बजट भाषण में एक काम के लिये 58 लाख रूपये और एक काम के लिये 55 लाख रूपये स्वीकृत हैं ....

राजस्व मंत्री(श्री उमाशंकर गुप्ता) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, नगर निगम के बजट भाषण का यहां पर कैसे जवाब दिया जा सकता है.

अध्यक्ष महोदय- हां उसका संबंध तो नहीं है.

श्री आरिफ अकील-- मेरा तो प्रश्न ही उसी से संबंधित है.

श्री उमाशंकर गुप्ता-- वह ठीक है लेकिन नगर निगम के बजट भाषण में कोई घोषणा की गई है, आप काम करवाने के लिये बात कर रहे हैं यह अलग बात है, लेकिन उसका संबंध इससे नहीं है.

श्री आरिफ अकील --अरे रफूगर जी इतना रफू मत करो. अभी रफू करना सीखने में आपको समय लगेगा. नये नये रफूगर हो इसलिये जवाब आने दो.

श्री उमाशंकर गुप्ता- हां मैं नया-नया रफूगर हूं.लेकिन आपसे तो पुराना ही हूं. नगर निगम के काम की बात आप नहीं जानते हैं. आप परिषद में नहीं रहे हैं.

श्री आरिफ अकील- अरे उसी से संबंधित मेरा प्रश्न है.

श्री उमाशंकर गुप्ता-नगर निगम के बजट की बात है इस सदन में चर्चा का विषय कैसे हो सकता है.

श्री आरिफ अकील -- अध्यक्ष महोदय, आप इन्हें प्रश्न पढ़कर के बता दो.यह नये नये रफूगर हैं, ज्यादा रफू करेंगे.

अध्यक्ष महोदय- आप तो सीधा प्रश्न कर लें कि आप और अतिरिक्त राशि क्या देंगी .

श्री आरिफ अकील-- मैं तो बार बार यह कह रहा हूं कि भोपाल टाकीज के कब्रिस्तान की वाउन्ड्रीवाल के लिये जो 58 लाख रूपये दिये थे वह और दूसरे कब्रिस्तानों के जो हाल हैं उसको आप भ्रमण करके ठीक करवाने की व्यवस्था करेंगी .

स्कूल शिक्षा मंत्री (कुंवर विजय शाह) -- आरिफ भाई कब्रिस्तान का निरीक्षण करने अपन साथ में चलेंगे.

श्री रामेश्वर शर्मा - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न भी इसी से जुड़ा हुआ है..

अध्यक्ष महोदय- अभी 8 मिनट बचे हैं, आरिफ भाई का प्रश्न हो जाने दें.

श्री रामेश्वर शर्मा-- नहीं, नहीं, वो तो ठीक है.

अध्यक्ष महोदय-- मंत्री जी आप उत्तर दे दीजिये इसके बाद आगे बढ़ेंगे.

श्री रामेश्वर शर्मा- माननीय अध्यक्ष महोदय, कब्रिस्तानों में तो पानी भर रहा है लेकिन अभी 8 ग्राम पंचायतें जो नगर निगम में सम्मलित हुई हैं वहां हाल ही में दो दिन पहले एक मौत हुई है वहां पर श्मशान घाट के लिये पैसों की क्या व्यवस्था है.

श्री आरिफ अकील -- अध्यक्ष महोदय, जवाब नहीं आ रहा है. यह तो हमारे साथ में ना-इंसाफी है.आप जवाब दिलवाईये.

अध्यक्ष महोदय-बैठ जाईये रामेश्वर जी, उनका उत्तर तो आ जाने दीजिये.

श्री आरिफ अकील-- रामेश्वर भाई आप तो जब चाहो पूछ सकते हो, मेरा प्रश्न मुश्किल से लगा है, मेरा मौका निकल जायेगा भाई साहब. प्रश्न आगे बढ़ जायेगा. मेहरबानी करो भाई.

अध्यक्ष महोदय- रामेश्वर जी आप बैठ जायें. मंत्री जी आरिफ अकील जी का कहना यह है कि अतिरिक्त राशि आप कोई देंगी क्या ?

श्रीमती माया सिंह --माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जो बात उठाई है उसके लिये उनको 1 करोड़ रूपये की राशि दी जा चुकी है. वास्तव में यह मुद्दा नगर निगम की परिषद में ही उठाया जाना चाहिये.

श्री रामेश्वर शर्मा -- माननीय अध्यक्ष महोदय, श्मशान घाटों की चिंता कौन करेगा.8 पंचायतें नगर निगम में शामिल हुई हैं, 8 पंचायतों के लिये श्मशान घाटों का क्या होगा.

श्री आरिफ अकील -- अध्यक्ष महोदय, मेरा पुन: अनुरोध है, माननीय सदस्य मेरे प्रश्न पर व्यवधान करके मेरे सवाल को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, कोई गांव की चिंता कर रहा है कोई श्मशान घाट में पानी भरे जाने की चिंता कर रहा है. अगर तराजू के पड़ले में तोले और ईमानदारी से ऐलान करवा दो कि जितना पैसा श्मशान घाट में लगा है उतना पैसा कब्रिस्तान में लगायेगे क्या .

अध्यक्ष महोदय- आरिफ भाई आपने सीधा प्रश्न नहीं पूछा. प्रश्न क्रमांक 10..

श्री आरिफ अकील-- अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न का जवाब दिलवा दीजिये मैंने एक बात कही थी कि माननीय मंत्री महोदय, स्वयं दौरा कर लें और यदि उनको लगता है कि यहां पर नाली, रोड और वाउन्ड्रीवाल की आवश्यकता है तो क्या आप मेरी मदद करेंगी.

श्रीमती माया सिंह -- आरिफ जी यह जो मुद्दा है नगर निगम की परिषद में उठाया जाना चाहिये वहां के बजट से आपको आलरेडी 1 करोड़ रूपये की राशि इसके लिये मिल गई है आप उसके सदस्य भी हैं और यह नगर निगम के बजट से संबंधित मामला भी है. इसलिये आपने जो 16 कार्य चिह्नित किये थे उसमें से 14 कार्य पूर्ण हो गये हैं.

श्री आरिफ अकील-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से अनुरोध है कि अध्यक्ष महोदय ने मेरा प्रश्न स्वीकार किया है और उसी प्रश्न पर आपको यहां पर जवाब देने के लिये कहा है. आपको क्या हो रहा है, अगर आप गाड़ी में बैठे बैठे कब्रिस्तानों की वाउन्ड्रीवाल का भ्रमण कर लें तो आपका क्या जायेगा. आपकी गाड़ी में अगर पेट्रोल की व्यवस्था नहीं होगी तो हम उसकी व्यवस्था करा देंगे. अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न का जवाब आना चाहिये.

अध्यक्ष महोदय- वही वही बात कहां तक रिपीट करेंगे.

श्री आरिफ अकील - अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आखिरी सवाल है. (व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय - आप एक ही बात कब तक रिपीट करेंगे.आप बैठ जाएं दूसरे लोगों के भी प्रश्‍न हैं. (व्‍यवधान)..

श्री आरिफ अकील - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप जब भी बोलते हैं मैं हमेशा बैठ जाता हूं. आप कम से कम इतना तो कह दें कि मंत्री जी भ्रमण करके देख लें. (व्‍यवधान)..

कुंवर विजय शाह - भाईजान कब्रिस्‍तान का निरीक्षण साथ में करेंगे. (व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय - मंत्री जी परीक्षण करा रहें हैं. (व्‍यवधान)..

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री गोपाल भार्गव) - अकील भाई मैं भोपाल का प्रभारी मंत्री हूं मैं आपके साथ में निरीक्षण करने चलूंगा. (व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय - मंत्री जी इनकी बात का परीक्षण करा लें. (व्‍यवधान)..

श्री आरिफ अकील - आज तक आपने एक रूपया भी नहीं दिया है. (व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय - अब आप बैठ जाएं. (व्‍यवधान)..

श्री गोपाल भार्गव - विधायक निधि दो करोड़ रूपये कर दी है आप उसी में से इसमें पैसा लगा दें. (व्‍यवधान)..

कुंवर विजय शाह - हम बोल रहे हैं साथ में चलेंगे. (व्‍यवधान)..

श्री आरिफ अकील - अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय का भ्रमण करवा दें तो हमें राशि मिल जाएगी. (व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय - आपने ध्‍यान नहीं दिया है, मैंने मंत्री जी से बोल दिया है. (व्‍यवधान)..

श्री गोपाल भार्गव - मैं प्रभारी मंत्री हूं मैं चला जाउंगा. (व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय - मंत्री जी आप परीक्षण करा लीजिएगा. (व्‍यवधान)..

श्री रामेश्‍वर शर्मा - माननीय अध्‍यक्ष महोदय. (व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय - नहीं अब किसी का नहीं लिखा जाएगा, सिर्फ श्री शैलेन्‍द्र पटेल जी का लिखा जाएगा. श्री शैलेन्‍द्र पटेल जी आप बोलें.

श्री रामेश्‍वर शर्मा - (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय - श्री रामेश्‍वर जी आप जो भी बोल रहे हैं वह कार्यवाही में नहीं आ रहा है. श्री शैलेन्‍द्र पटेल जी आप अपना प्रश्‍न पूछें.

अल्‍फा प्रोटीन्‍स संयंत्र के विरूद्ध प्राप्‍त शिकायतें

[सूक्ष्‍मलघु और मध्‍यम उद्यम]

10. ( *क्र. 314 ) श्री शैलेन्‍द्र पटेल : क्या राज्‍यमंत्रीसूक्ष्‍मलघु और मध्‍यम उद्यम महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या इछावर विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कांकरखेड़ा में अल्‍फा प्रोटीन नामक संयंत्र स्‍थापित हैयदि हाँतो कब और किस फर्म द्वारा किस प्रकार के उत्‍पादन के लिए संयंत्र की स्‍थापना की है। (ख) क्‍या प्रश्‍नांश (क) अनुसार संयंत्र की स्‍थापना के लिए वांछित वैध अनुज्ञप्तियां प्राप्‍त की गई हैंयदि हाँतो ब्‍यौरा दें(ग) क्‍या प्रश्‍नांश (क) अनुसार संयंत्रNGT के मापदण्‍डों को पूरा करता हैयदि हाँतो NGT की टीम ने संयंत्र का कब-कब निरीक्षण कियायदि नहीं, तो क्‍यों(घ) क्‍या उक्‍त संयंत्र से उत्‍सर्जित पानी से वातावरण एवं स्‍थानीय ग्रामीणों व पशुओं पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा हैयदि हाँतो विगत 3 वर्षों में ग्रामीणों ने इस संबंध में कब-कब शिकायत कीशिकायतों पर क्‍या कार्यवाही की गईशिकायतवार ब्‍यौरा देंयदि नहीं, तो क्‍यों और कब तक कार्यवाही की जाएगी?

राज्‍यमंत्रीसूक्ष्‍मलघु और मध्‍यम उद्यम ( श्री संजय पाठक ) : (क) इछावर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कांकरखेडा (भाउखेडी) में मेसर्स अल्‍फा प्रोटीन प्रा.लि. नामक संयंत्र स्‍थापित है। अल्‍फा प्रोटीन का प्रथम उत्‍पादन दिनांक 05.04.2001 से प्रारंभ किया है तथा डायवर्सीफिकेशन अंतर्गत दिनांक 02.07.2015 से उत्‍पादन प्रारंभ किया गया। मेसर्स अल्‍फा प्रोटीन प्रा.लि. के नाम से टेक्‍नीकल जिलेटिन एवं ग्‍लूस (एनीमल ग्‍लूस) एवं एग्री केमीकल प्रोटीन (हाईड्रोलाइज्ड पाउडर) का उत्‍पादन किया जाता है। (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार संयंत्र की स्‍थापना के लिए वांछित वैध अनुज्ञप्तियां प्राप्‍त की गई हैं। जैसे मध्‍यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्डवाणिज्‍यक कर विभागऊर्जा विभागवाष्‍पयंत्र संचालनालयग्राम पंचायतकांकरखेडा आदि।  (ग) मध्‍यप्रदेश शासन,पर्यावरण विभाग अनुसार एन.जी.टी. द्वारा उक्‍त उद्योग के लिए कोई मापदण्‍ड निर्धारित किये जाने की अथवा एन.जी.टी. की किसी टीम द्वारा उक्‍त उद्योग का निरीक्षण किये जाने की मध्‍यप्रदेशप्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जानकारी नहीं है। (घ) मध्‍यप्रदेश शासनपर्यावरण विभाग अनुसार उद्योग के उत्‍सर्जित पानी को परिसर से बाहर निस्‍सारण नहीं किया जाता है। पर्यावरण विभाग अनुसार पर्यावरण विभाग को खण्‍ड चिकित्‍सा अधिकारी सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रइछावर एवं जिला पशु प्रजनन कार्यक्रम अधिकारीसीहोर से प्राप्‍त जानकारी अनुसार स्‍थानीय ग्रामीणों एवं पशुओं पर विपरीत प्रभाव पड़ने की कोई सूचना नहीं है। विगत तीन वर्षों में सी.एम. हेल्‍पलाईन के माध्‍यम से पर्यावरण विभाग को ग्रामीणों से प्राप्‍त शिकायतों एवं उस पर मध्‍यप्रदेशप्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा की गई कार्यवाही की जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट अनुसार है।

परिशिष्ट - ''पाँच''

श्री शैलेन्‍द्र पटेल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने जो प्रश्‍न '''' लगाया था उसके उत्‍तर में मुझे जवाब मिला है कि वहां पर टेक्‍नीकल जिलेटिन एवं ग्‍लूस(एनीमल ग्‍लूस) एवं एग्री केमीकल प्रोटीन(हाईड्रोलाइज्‍ड पावडर) का उत्‍पादन किया जाता है. इस संबंध में मेरा पूरक प्रश्‍न यह है कि यह बनता किस चीज से है, इसका रॉ मटेरियल क्‍या है ?

श्री संजय पाठक - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसका रॉ मटेरियल रॉ हाईड, लाईम और केमीकल्‍स हैं. रॉ हाईड मतलब होता है कच्‍चा चमड़ा .

श्री शैलेन्‍द्र पटेल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न '''' के उत्‍तर में जो जवाब आया है, उसके संबंध में मेरा पूरक प्रश्‍न यह है कि उससे जो वेस्‍ट मटेरियल निकलता है क्‍या वह वनस्‍पति के लिये, जीव जंतु के लिये और इंसान के लिये हानिकारक होता है ?

श्री संजय पाठक - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसको बनाने में जो पानी निकलता है वह हानिकारक होता है और उसको वहां पर ही ई.टी.पी. प्‍लांट लगाकर उस प्‍लांट के अंदर ही, प्रायमेसिस के अंदर ही समाप्‍त किये जाने के निर्देश दिये गये थे, इसकी शिकायत प्राप्‍त होने पर जांच की गई थी और प्‍लांट खराब पाये जाने पर इससे संबंधित उद्योग को बंद करने के आदेश भी दे दिये गये थे.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल - अध्‍यक्ष महोदय, मेरा तीसरा प्रश्‍न भी है.

अध्‍यक्ष महोदय - अब आप बैठ जाएं.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल - अध्‍यक्ष महोदय, अध्‍यक्ष महोदय मैंने दो ही सीधे प्‍वाइंटेड प्रश्‍न पूछें हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - हां आप दो ही प्रश्‍न पूछ सकते हैं, आपकी सभी बातें आ गई हैं.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल - अध्‍यक्ष महोदय एक चीज रह गई है यदि आप सुनेंगे तो समझ जाएंगे कि इसकी पहली शिकायत 11/05/2017 को हुई थी और एफ.आई.आर. 17/07/2017 को हुई थी.

अध्‍यक्ष महोदय - आपके प्रश्‍न का निराकरण हो गया है, आप बैठ जाएं.

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के द्वितीय चरण का सर्वे  

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

11. ( *क्र. 279 ) श्री विष्‍णु खत्री : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नकर्ता के विधान सभा क्षेत्रांतर्गत प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-2 में कौन-कौन से मार्गों को जोड़ा जाना प्रस्‍तावित किया गया है(ख) क्‍या प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-2 का सर्वे विधानसभा क्षेत्र बैरसिया में किया गया है अथवा नहीं(ग) प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चरण 2 का कार्य बैरसिया विधानसभा में कब से प्रारंभ हो जावेगा?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) विधानसभा क्षेत्र बैरसिया में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-2 के अंतर्गत भोपाल बायपास (डोबरा) से बैरसिया मार्ग को जोड़ा जाना प्रस्तावित किया गया है। (ख) जी हाँप्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-2का सर्वे विधानसभा क्षेत्र बैरसिया में किया गया है। (ग) वर्तमान में डी.पी.आर. तैयार करने का कार्य प्रगतिरत्‌ है। भारत सरकार से स्वीकृति उपरांत निर्माण कार्य किया जावेगा। समय-सीमा बताना संभव नहीं है।

श्री विष्‍णु खत्री - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बैरसिया विधानसभा में पी.एम.जी.एस.वाय चरण दो में एक सड़क डोबरा से बैरसिया मार्ग को लिया गया है, इसके लिये मैं माननीय मंत्री जी का धन्‍यवाद देना चाहता हूं. लेकिन साथ में मैं यह भी कहना चाहता हूं कि हमारी दो अन्‍य और सड़कें इस योजनांतर्गत प्रस्‍तावित हैं, जिसमें एक सड़क मुगालिया हाट से प्रारंभ होकर गोलखेड़ी में आकर मिलती है इसकी दूरी लगभग 25 किलोमीटर की है. दूसरी एक सड़क सूरजपुरा से प्रारंभ होकर बैरसिया में आकर समाप्‍त होती है. इस संबंध में मेरे दो पूरक प्रश्‍न यह हैं कि यह जो सड़क सूरजपुरा से आकर बैरसिया में मिलती है, इसमें नायसमन के पास में एक ग्राम है पसैया, इनके बीच की दूरी पर कोई मार्ग नहीं है. माननीय मंत्री जी जब यह मार्ग इस योजना में शामिल होगा तब तक इस मार्ग को नायसमन से पसैया तक सुदूर संपर्क में इसको जुड़वाने की आप कृपा करें. दूसरा प्रश्‍न यह है कि यह जो मुगालिया हाट से गोल खेड़ी वाला मार्ग है, इसमें चंदेरी से गोलखेड़ी तक रोड की स्थिति बहुत खराब है और माननीय मंत्री जी हमारे प्रभारी मंत्री हैं, इसलिए आप इस मार्ग की मरम्‍मत करवा दें, मेरा आपसे इतना ही अनुरोध है.

श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा सदस्‍य जी स्‍वयं अवगत हैं. बैरसिया ब्‍लॉक के भोपाल-बैरसिया बायपास, जो डोबरा होकर जाता है, 41.23 किलोमीटर की सड़क हम लोगों ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के फेस-2 के लिये प्रस्‍तावित की थी, जो मंजूर हो गई है. फंदा ब्‍लॉक की भी एक सड़क प्रक्रियाधीन है, उसकी डी.पी.आर. बनाई जा रही है. टी07 से कोलार रोड से टी05 रतनपुर तक, 9.60 किलोमीटर है, जिन सड़कों के बारे में माननीय सदस्‍य ने प्रश्‍न किया है कि इनका भी उन्‍नयन हो, इसके बारे में हम शीघ्रातिशीघ्र कार्यवाही करके नियम और नॉर्म्‍स प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के पार्ट-2 के होंगे, उनके अंतर्गत हम इनको लेकर जल्‍दी से जल्‍दी इसका निराकरण कर लेंगे.

श्री विष्‍णु खत्री - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी, नायसमन से पसैया इसे सुदूर सम्‍पर्क में जोड़ने की घोषणा कर दें. यह मात्र 3 किलोमीटर का मार्ग है, नागरिकों को आवागमन में बड़ी असुविधा होती है.

श्री गोपाल भार्गव - इसका परीक्षण करवा लेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय - प्रश्‍नकाल समाप्‍त.

(प्रश्‍नकाल समाप्‍त)

 

 

 

 

 

 

 

श्री रामनिवास रावत (विजयपुर) - अध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधानसभा क्षेत्र में दिनांक 18 को एक किसान की हार्ट अटैक से मौत हो गई, एक किसान हार्ट अटैक से डुमनी में मर गया. अध्‍यक्ष महोदय, प्रदेश का किसान कर्जे के बोझ तले दबा है.

अध्‍यक्ष महोदय - पहले आप एक मिनट सुन लें. जो लिखित शून्‍यकाल हैं, उन्‍हें माननीय सदस्‍यों को पढ़ लेने दें, इसके बाद में आपको बोलने देंगे. पहले यह आ जाने दें.

12.02 बजे नियम 267-क के अधीन विषय

अध्‍यक्ष महोदय - श्री कैलाश चावला, अपनी शून्‍यकाल की सूचना पढ़ें.

(1) श्री कैलाश चावला - (अनुपस्थित)

(2) छिन्‍दवाड़ा के चौरई विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति, जनजाति व बी.पी.एल. कार्डधारकों को खाद्यान्‍न कूपन न दिया जाना

पं. रमेश दुबे (चौरई) - अध्‍यक्ष महोदय, मेरे शून्‍यकाल की सूचना इस प्रकार है. मेरे विधानसभा क्षेत्र चौरई, जिला-छिन्‍दवाड़ा में क्षेत्र भ्रमण के दौरान अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति के सदस्‍य एवं बी.पी.एल. कार्डधारी के द्वारा मुझसे शिकायत की जाती है कि उन्‍हें खाद्यान्‍न कूपन विभाग द्वारा बनाकर नहीं दिया जा रहा है. इस प्रकार के प्राप्‍त आवेदन एवं भ्रमण की टीप मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत चौरई को लेख किया जाता है तो उनसे उत्‍तर प्राप्‍त होता है कि ऐसे पात्र हितग्राहियों को पोर्टल पर दर्ज कर दिया गया है. खाद्य नागरिक आपूर्ति और उपभोक्‍ता संरक्षण विभाग के द्वारा खाद्यान्‍न कूपन प्रदाय नहीं किये जा रहे हैं. पात्र हितग्राही खाद्यान्‍न कूपन हेतु ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और खाद्य विभाग के चक्‍कर काट रहे हैं. शासन इस ओर ध्‍यान देकर पात्र हितग्राहियों को खाद्यान्‍न कूपन जारी करवाए.

श्री बाबूलाल गौर - अध्‍यक्ष महोदय, मेरी शून्‍यकाल की सूचना नहीं आई. दो-तीन दिन हो गए हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - कल ले लेंगे. कृपया रास्‍ते में भीड़ न लगायें. माननीय सदस्‍यगण एवं माननीय मंत्रीगणों से यह अनुरोध है कि वे वक्‍ता सदस्‍य के सामने खड़े न हों.

(3) सीधी एवं सिंगरौली में लोक निर्माण विभाग द्वारा गुणवत्‍ताहीन कार्य कराया जाना

श्री केदारनाथ शुक्‍ल (सीधी) - अध्‍यक्ष महोदय, मेरे शून्‍यकाल की सूचना इस प्रकार है. शासन द्वारा लोक निर्माण विभाग के सिंगरौली सब डिवीजन अंतर्गत रैला कनपुरा में 1 करोड़ लागत से गुणवत्‍ताविहीन सामग्रियों से निर्मित कराये गये 1 करोड़ की लागत का रपटा एक साल में ही बह गया है, जिससे शासन की क्षति के साथ-साथ साख पर भी इस प्रकार के निर्माण कार्य प्रश्‍न चिन्‍ह लगा रहे हैं, साथ ही इनसे आम जनता का भी भारी नुकसान होता है और शासन को उनके आक्रोश का शिकार होना पड़ता है.

अत: सिंगरौली एवं सीधी में विगत 3 वर्षों में कराये गए इस प्रकार के कार्यों की शीघ्रातिशीघ्र जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही की जाये और गुणवत्‍ताविहीन पाये गये कार्यों को गुणवत्‍तापूर्ण बनाने की कार्यवाही शीघ्र की जाये, जिससे प्रभावित आम जनता पर शासन के प्रति विश्‍वास कायम रह सके.

(4) श्री सुशील कुमार तिवारी - (अनुपस्थित)

(5) श्री आशीष गोविन्‍द शर्मा - (अनुपस्थित)

(6) श्री दिनेश राय - (अनुपस्थित)

(7) नरसिंहपुर विधानसभा क्षेत्र गन्‍ना उत्‍पादक किसानों को क्रेशर संचालन हेतु कमर्शियल दरों पर विद्युत प्रदाय न करना

श्री जालम सिंह पटेल (नरसिंहपुर) - अध्‍यक्ष महोदय, मेरे शून्‍यकाल की सूचना इस प्रकार है. नरसिंहपुर में अधिकांश किसान अपनी गन्‍ना फसल से गुड़ बनाते हैं, गुड़ छोटी कुल्‍होरों से गन्‍ना क्रेशरों से पेरकर गन्‍ना के बचे हुये छिलकों (छोतों) को जलाकर लोहे की कढ़ाइयों में उबालकर बनाते हैं. गन्‍ना क्रेशर में गन्‍ना को पेरने के लिये विद्युत विभाग से विद्युत कनेक्‍शन दिया जाता है, विद्युत मंडल गन्‍ना क्रेशर को उद्योग के समान कमर्शियल मानकर महंगी बिजली देता है, वह भी 10 घंटे, रात्रि और दिन में अलग-अलग दो शिफ्टों 5-5 घंटे विद्युत दी जाती है. गन्‍ने का रस निकालने का काम दिन में किया जाता है, रात्रि को विद्युत का कोई उपयोग नहीं होता है. इसके बाद भी विद्युत दरों में पांच गुना इजाफा है, इसके कारण किसानों को आर्थिक हानि होती है जबकि बिजली का उपयोग सिर्फ गन्‍ने का रस निकालने मात्र में किया है, शेष कार्यों में बिजली का कोई उपयोग नहीं किया जाता है. गन्‍ना क्रेशर को भी विद्युत पम्‍पों के समान मानकर किसानों को हो रही आर्थिक हानि से बचाया जावे.

 

 

(8) नागदा की खाचरौद तहसील में कृषि भूमि सीमांकन, नामांतरण व बंटवारे आदि में अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा शासन के नियमों की अव्‍हेलना करना

श्री रामकिशोर दोगने (हरदा) - अध्‍यक्ष महोदय, मेरी शून्‍यकाल की सूचना इस प्रकार है-

शासन के स्‍पष्‍ट निर्देश है कि कृषि भूमि सीमांकन, नामांतरण, बंटवारे के आवेदनों का निराकरण समय सीमा में किया जाए, परन्‍तु शासन के निर्देशों की अव्‍हेलना नागदा-खाचरौद तहसील में सरेआम की जा रही है. विगत 3 वर्षों में कृषि भूमि के सीमांकन, बंटवारे, नामांतरण के सैकड़ों प्रकरणों का निराकरण नहीं किया गया है, उन्‍हीं प्रकरणों का निराकरण किया गया है, जिनमें उनक लाभ-शुभ हो और यदि सीमांकन, बंटवारा भी किया गया है तो प्रतिवेदन समय सीमा में तहसील में जमा नहीं किया गय है तथा उनका राजस्‍व रिकार्ड में अमल दरामत नहीं किया है तथा कई प्रकरणों में बंटवारा बनाकर पेश नहीं की गई है तथा सीमांकन प्रतिवेदन पअवारी द्वारा स्‍पष्‍ट रूप से न लिखते हुए गोलमाल रूप से लिखे जाने से किसानों में आपसी विवाद के मामले बड़े हैं. राजस्‍व निरीक्षक वृत-1 नागदा के हल्‍कों में सीमांकन, बंटवारे, नामांतरण के संबंध में ज्‍यादा शिकायत है. इस संबंध में शासन से तीन वर्षों के सीमांकन, बंटवारे, नामांतरण के मामले की जांच उच्‍च स्‍तरीय अधिकारियों से कराया जाता है तो शासन के समक्ष विभाग का पूरा कच्‍चा चिट्ठा सामने आ जाएगा. परन्‍तु शासन द्वारा इस ओर ध्‍यान नहीं दिया जा रहा है, जिसके कारण किसानों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है तथा शासन द्वारा राजस्‍व अधिकारियों, कर्मचारियों पर कार्यवाही नहीं करने पर किसानों में शासन के प्रति आक्रोश व्‍याप्‍त है. अध्‍यक्ष महोदय, मेरे हरदा में अभी मूंग खरीदी नहीं हो रही है, जबकि 31 तक शासन ने दिया है मेरा निवेदन है कि मूंग खरीदी के लिए मंत्री जी से आदेश दिलवाया जाए.

अध्‍यक्ष महोदय - नहीं, बस हो गया, बाद में बोल देना.

(9) रीवा के हनुमना विकासखंड की माध्‍यमिक शाला बालक खटखरी को पुन: संचालन करने संबंधी

श्री सुखेन्‍द्र (बन्‍ना) सिंह (मऊगंज)- अध्‍यक्ष महोदय, मेरी शून्‍यकाल की सूचना का विषय इस प्रकार है-

रीवा जिले के विकासखंड हनुमना अंतगर्त माध्‍यमिक शाला बालक खटखरी का युक्तियुक्‍त कारण माध्‍यमिक शाला कन्‍या खटखरी में किए जाने संशोधन हेतु प्राचार्य शासकीय बालक उच्‍चतर माध्‍यमिक, विद्यालय खटखरी का पत्र क्रमांक 86 दिनांक 06.07.2016 में उल्‍लेखित युक्तियुक्‍त करण परिधि से बाहर है. शासकीय उच्‍चतर बालक खटखरी से संबद्ध 6-12 तक संचालित कक्षा का नवीन भवन शासकीय कन्‍या माध्‍यमिक विद्यालय खटखरी से 2 किलोमीटर की दूरी पर निर्मित है, जिससे स्‍पष्‍ट है कि परिसर भिन्‍न है. इस युक्तियुक्‍तकरण के विसंगत के संबंध में ध्‍यानाकर्षण कर्ता द्वारा विधान सभा के माध्‍यम से एवं पत्रों के माध्‍यम से कई बार अवगत कराया गया एवं जिला शिक्षा केन्‍द्र रीवा द्वारा आश्‍वासन भी प्राप्‍त हुआ कि सत्र 2017-18 में पुन: संचालित कर दिया जाएगा, किन्‍तु आज दिनांक तक किसी भी प्रकार से कार्यवाही नहीं किए जाने से क्षेत्रीय जनता एवं छात्रों में भारी आक्रोश उत्‍पन्‍न हो गया है, जो सड़क पर उतरने की तैयार कर रहा है. ऐसी स्थिति में अगर तत्‍काल विद्यालय पुन: संचालित नहीं किया गया तो शांति व्‍यवस्‍था बनाए रखने में परेशानी होगी.

(10) जबलपुर में कर्मचारी गृह निर्माण सहकारी समिति द्वारा नियम विरूद्ध कार्य किया जाना

श्री नीलेश अवस्‍थी (पाटन) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी शून्‍यकाल की सूचना इस प्रकार है-

कमिश्‍नर कार्यालय कर्मचारी गृह निमा्रण सहकारी समिति मर्यादित, जबलपुर के फाउन्‍डर सदस्‍यों को भूखण्‍ड आवंटन हेतु वर्ष 2005 में नगर तथा ग्राम निवेश विभाग द्वारा 1500 वर्गफीट का अभिन्‍यास स्‍वीकृत हुआ था, परन्‍तु वर्ष 2006 में अध्‍यक्ष गृह निर्माण समिति द्वारा आमसभा में निर्णय लिये बगैर भूखण्‍ड का साइज 1500 वर्गफीट से 900 वर्गफीट कर दिया गया. जबकि मध्‍यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 के प्रावधानों के अंतर्गत संचालक नगर तथा ग्राम निवेश द्वारा अभिन्‍यास स्‍वीकृत होने के पश्‍चात अधिनियम के अंतर्गत स्‍वीकृत अभिन्‍यास में संशोधन केवल धारा 31 एवं 32 में दिए गए वैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत ही किया ज सकता है.

इस संबंध में शासन को शिकायतें प्राप्‍त होने पर अपर कलेक्‍टर, जबलपुर द्वारा जांच कर अपना प्रतिवेदन दिनांक 26.10.12 को प्रस्‍तुत कर तत्‍कालीन अध्‍यक्ष के द्वारा व्‍यक्तिगत हैसियत से नियम विरूद्ध किए गए समस्‍त भूखंडों के आवंटन को निरस्‍त करने तथा उपरोक्‍त कृत्‍य को अपराध मानकर धारा 76 के अंतर्गत कार्यवाही की अनुसंशा की गई थी. परन्‍तु आज दिनांक तक अध्‍यक्ष कमिश्‍नर कार्यालय कम्रचारी गृह निर्माण सहकारी समिति जबलपुर द्वारा नियम विरूद्ध की गई सभी रजिस्ट्रियां शून्‍य घोषित न करने तथा धारा 76 के अंतर्गत अध्‍यक्ष पर कार्यवाही न करने से आमजन में आक्रोष व्‍याप्‍त है.

अध्‍यक्ष महोदय - मैं जिनके नाम पुकारूंग वे एक एक मिनट में अपनी बात कहेंगे.

 

 

 

12:09 बजे उपाध्‍यक्ष महोदय (डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुए.

शून्‍यकाल में उल्‍लेख

 

(1) श्री मधु भगत(परसवाड़ा)- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, बालाघाट विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बटवा के ग्राम बसेगांव में माध्‍यमिक विद्यालय संचालित है. ग्राम बसेगांव के आसपास लगभग 10 से 12 ग्राम संपर्क में आते हैं. ग्राम बसेगांव में हाईस्‍कूल की व्‍यवस्‍था न होने के कारण उक्‍त समस्‍त ग्राम के बच्‍चे लगभग 10 से 12 किलोमीटर दूर ग्राम चागूटोला या कुकड़ा हाईस्‍कूल में अध्‍ययन करने आते हैं. उक्‍त क्षेत्र अति संवेदनशील, घने जंगलों के बीच अतिनक्‍सलवादी क्षेत्र हैं, जिससे छात्रों को आने जाने में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है. परेशानियों के चलते कई छात्र छात्राएं आठवीं के बाद आगे की शिक्षा नहीं ले पाते, उक्‍त परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए प्रशासन के नियमानुसार 3 किलोमीटर के अंतराल में स्‍कूल होना अनिवार्य है. अत: शासन से अनुरोध करता हूं कि ग्राम बसेगांव में हाईस्‍कूल प्रारंभ करने की अनुमति प्रदान करें.

(2) श्री हर्ष यादव (देवरी)--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मेरे गृह जिले सागर में बंडा अनुभाग में अवैध संग्रहण एवं उत्खन्न का मामला उजागर हुआ है. लगातार चार दिन से इलेक्ट्रानिक एवं प्रिन्ट मीडिया में यह मामला उजागर हो रहा है. एक हजार ट्रक एक्सपोर्ट क्वालिटी का काला पत्थर पकड़ा गया है. प्रशासन द्वारा इस कार्य में लीपा-पोती करने का प्रयास किया जा रहा है. मेरा निवेदन है कि प्रदेश के प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारियों से उक्त प्रकरण की जांच करवाई जाये. चूंकि यह बहुत बड़ा मामला है. कलेक्टर ने स्वयं माना है कि एक हजार ट्रक अवैध रूप से खनन किया गया था उसकी कीमत प्रशासन ने 50 करोड़ रूपये है. आज जो स्थितियां निर्मित हो रही हैं जिला प्रशासन के अधिकारियों द्वारा लीपा-पोती की जा रही है. मेरा आपसे निवेदन है कि इसकी जांच राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी से करवाई जाये.

 

 

(3) श्री के.पी.सिंह (पिछोर)--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैंने पिछले सत्र में और अभी इस सत्र में प्रदेश में पूर्ण शराब बंदी लागू करने संबंधी संकल्प दिया है. माननीय मलैया जी उससे सहमत हैं, लेकिन दुर्भाग्य से चर्चा के लिये इस सदन में संकल्प नहीं आ पा रहा है. इसके क्या कारण हैं ? उपाध्यक्ष महोदय, चूंकि अध्यक्ष महोदय नहीं हैं मेरा आपसे अनुरोध है कि अध्यक्ष महोदय से इसको स्वीकृत करा दें. इस सत्र में इसकी चर्चा हो जाये. स्वीकर करें न करें, यह अलग बात है. इसकी चर्चा तो कम से कम इस सदन में हो जाए.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार--उपाध्यक्ष महोदय, माननीय के.पी.सिंह जी वरिष्ठ सदस्य हैं, लेकिन मेरा कहना है कि बिना जानकारी के तथा बिना जिम्मेदारी के ऐसा कह दें कि माननीय मलैया जी इससे सहमत हैं.

श्री के.पी.सिंह--मैंने माननीय मलैया जी बोला है, माननीय मंत्री जी नहीं बोला है. आप बीच में कहां से बोल पड़े.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार--आप अपनी बात कहें.

श्री के.पी. सिंह--कौन सहमत नहीं है, यब बता दें.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार--आप जो चाहते हैं वह सदन में आना चाहिये दूसरों के व्यूज हम बताने लगेंगे कि क्या उनकी राय है, यह बात न्यायसंगत नहीं है.

श्री के.पी.सिंह--आपको इसमें क्या दिक्कत है. मैंने नाम लिया है. मंत्री जी नहीं बोला है.

उपाध्यक्ष महोदय--यह रिएक्ट नहीं कर रहे हैं.

श्री के.पी.सिंह--शेजवार जी आप अच्छे कार्य में बाधा उत्पन्न करते हैं.

उपाध्यक्ष महोदय--के.पी.सिंह जी आपकी बात आ गई है.

 

(4) श्री आरिफ अकील (भोपाल उत्तर)--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मेरी शून्यकाल का विषय यह है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री जी के विधान सभा क्षेत्र में 20 अल्पसंख्यक लोगों के मकानों को जला दिया. वह वहां से पलायन कर गये हैं. अभी दो तीन दिन पहले एक मस्जिद में आग लगा दी थी, इस बारे में मैंने ध्यानाकर्षण भी दिया है. कृपया करके किसी भी रूप में इस पर चर्चा कराईये ताकि मुख्यमंत्री जी के राज में अल्पसंख्यक लोग सुरक्षित नहीं है तो कहां पर सुरक्षित हो सकते हैं, इसकी व्यवस्था हो जाए.

 

 

(5) श्री हरदीप सिंह डंग (सुवासरा)--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, सुवासरा में पहले ही स्वास्थ्य व्यवस्थाएं गड़बड़ हैं. सीतामऊ में कल ही एक आदेश आया है कि बीएमओ के अलावा दो डॉक्टर थे उनका वहां से स्थानांतरण कर दिया गया है. मेरा निवेदन है कि इनके ट्रांसफर को रोका जाए, जब तक वहां पर नवीन डॉक्टरों की स्थापना न हो जाये. नहीं तो इसके लिये आगे आंदोलन की कार्यवाही की जाएगी.

उपाध्यक्ष महोदय---यह कौन सी सूचना हो गई ?

 

 

(6) श्री नीलेश अवस्थी (पाटन)--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, शासन के द्वारा आदेश है कि 31 जुलाई तक उड़द-मूंग की खरीदी की जाएगी, लेकिन कल से जानकारी आ रही थी उड़द-मूंग की खरीदी बंद है. सिहोरा मंडी तथा पाटन मंडी में भी बंद हो गई है.(व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय--सभी एक साथ खड़े हो जाते हैं. मैं एक एक माननीय सदस्य को बोलने के लिये मौका दे रहा हूं. मैं कार्यवाही को आगे बढ़ा दूंगा. सभी सदस्य कृपया बैठ जाएं. यह चर्चा का विषय नहीं है सिर्फ आप इस नियम के तहत अपनी बात कह सकते हैं.

श्री रामनिवास रावत (विजयपुर):-माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह चर्चा का विषय इसलिये है कि किसान लगातार कर्ज के बोझ तले दब मर रहा है.

उपाध्‍यक्ष महोदय :- रावत जी, आपके ही दल के अन्‍य सदस्‍य बोल रहे हैं. कृपया उन्‍हें बोलने दें.

 

(7) श्री गिरीष भंडारी (नरसिंहगढ़):- मेरे राजगढ़ जिले के न‍रसिंहगढ़ तहसील में अभी तक मसूर और उड़द के समर्थन मूल्‍य का खरीदी केन्‍द्र नहीं खोला गया है. नरसिंहगढ़ तहसील में ही नहीं पूरे राजगढ़ जिले में ही नहीं खोला गया है. मैं यह मांग करता हूं कि तत्‍काल नरसिंहगढ़ में मसूर और उड़द खरीदी का समर्थन मूल्‍य केन्‍द्र खोला जाये.

 

(8) श्री रामनिवास रावत (विजयपुर):- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यही कारण है कि किसान कर्ज के बोझ तले मर रहा है. परसों 18 तारीख को मेरे यहां, मेरे गांव इकलौद में खेत में ही हार्ट अटैक से एक किसान की मृत्‍यु हो गयी. ऐसे मुरैना और श्‍योपुर जिले में तीन किसान मर गये हैं. सरकार कर्ज माफी नहीं कर रही है. मूंग खरीदी की कोई स्‍पष्‍ट नीति नहीं है. मूंग खरीदी का केन्‍द्र श्‍योपुर बनाया है, वह मेरे विधान सभा क्षेत्र से 180 किलोमीटर दूर है. उसमें किसानों का ट्रांसपोर्टेशन का कितना खर्चा होगा.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह कितनी दुर्भाग्‍यपूर्ण स्थिति है कि सरकार कुछ न कुछ किसानों के साथ खड़ी हो, किसानों के लिये कुछ करे यह बड़ा दुर्भाग्‍यपूर्ण स्थिति है. (व्‍यवधान)

उपाध्‍यक्ष महोदय :- आप लोग बैठ जायें, नेता प्रतिपक्ष जी कुछ कहना चाह रहे हैं.

(9) नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह):- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सवाल इस बात का नहीं है कि आपकी बात आ गयी है. कल स्‍थगन प्रस्‍ताव के दौरान माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय ने बहुत साफ शब्‍दों में कहा था कि कहा था कि 31 जुलाई तक उड़द और मूंग की खरीदी होगी. यदि तब तक नहीं होगी तो हम उसके आगे भी तारीख बढ़ा देंगे.माननीय विधायक लोग यह कह रहे हैं कि आज ही खरीदी नहीं हो रही है तो क्‍या यह किसान विरोधी सरकार है, या किसान हितैषी सरकार है.

श्री दिलीप सिंह परिहार:- किसान हितैषी सरकार है, इसीलिये तो खरीदी हो रही है.

श्री अजय सिंह :- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, खरीदी नहीं हो रही है. (व्‍यवधान)

श्री दिलीप सिंह परिहार:- फिर से खरीदी हो जायेगी, मुख्‍यमंत्रीजी ने कहा है कि खरीदी होगी. (व्‍यवधान)

उपाध्‍यक्ष महोदय :- नेता प्रतिपक्ष महोदय, आपकी बात रिकार्ड में आ गयी है.

कुंवर विक्रम सिंह :- किसानों पर अन्‍याय बंद करो, बंद करो.

 

12.13 बजे गर्भगृह में प्रवेश

इण्डियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यगण द्वारा मूंग और उड़द का समर्थन मूल्‍य पर खरीदी न किये जाने के विरोध में गर्भगृह में प्रवेश

(इण्डियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यों द्वारा मूंग और उड़द का समर्थन मूल्‍य पर खरीदी न किये जाने के विरोध में गर्भगृह में प्रवेश किया गया और सदन में नारेबाजी की गई.)

(व्‍यवधान)

उपाध्‍यक्ष महोदय:- सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिये स्‍थगित.

(12.13 बजे सदन की कार्यवाही 5 मिनट के लिये स्‍थगित की गई.)

 

12.26 बजे

विधान सभा पुन: समवेत हुई

{उपाध्‍यक्ष महोदय(डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुए}

 

 

12.27 बजे

पत्रों का पटल पर रखा जाना

1. मध्‍यप्रदेश वित्‍त निगम के 31 मार्च, 2016 को समाप्‍त हुए वर्ष के लेखों पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक का पृथक लेखा परीक्षा प्रतिवेदन

 

वित्‍त मंत्री (श्री जयंत मलैया)- उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं द स्‍टेट फायनेंशियल कार्पोरेशन एक्‍ट, 1951 (क्रमांक 63 सन् 1951) की धारा 37 की उपधारा (7) की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश वित्‍त निगम के 31 मार्च, 2016 को समाप्‍त हुए वर्ष के लेखों पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक का पृथक लेखा परीक्षा प्रतिवेदन पटल पर रखता हूं.

2. मध्‍यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग की अधिसूचना क्रमांक 987/म.प्र.वि.नि.आ./2017 दिनांक 06 जुलाई, 2017, तथा (ख) ऊर्जा विभाग की अधिसूचना क्रमांक एफ-3-28-2014-तेरह. दिनांक 16 मई, 2017

 

ऊर्जा मंत्री (श्री पारस चंद्र जैन)- उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं विद्युत अधिनियम, 2003 (क्रमांक 36 सन् 2003) की धारा 182 की अपेक्षानुसार (क) मध्‍यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग की अधिसूचना क्रमांक 987/म.प्र.वि.नि.आ./2017 दिनांक 06 जुलाई, 2017, तथा (ख) ऊर्जा विभाग की अधिसूचना क्रमांक एफ-3-28-2014-तेरह. दिनांक 16 मई, 2017 पटल पर रखता हूं.

3. मध्‍यप्रदेश सड़क विकास निगम मर्यादित का बारहवां वार्षिक लेखा एवं प्रतिवेदन वर्ष 2015-2016

 

लोक निर्माण मंत्री (श्री रामपाल सिंह)- उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं कंपनी अधिनियम, 2013 (क्रमांक 18 सन् 2013) की धारा 395 की उपधारा (1) (ख) की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश सड़क विकास निगम मर्यादित का बारहवां वार्षिक लेखा एवं प्रतिवेदन वर्ष 2015-2016 पटल पर रखता हूं.

 

4. मध्‍यप्रदेश लोक सेवा आयोग का 59 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2015-2016

राजस्‍व मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्‍ता)- उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं भारत के संविधान के अनुच्‍छेद 323 (2) की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश लोक सेवा आयोग का 59 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2015-2016 (01 अप्रैल, 2015 से 31 मार्च, 2016 तक) के साथ ही उक्‍त वार्षिक प्रतिवेदन का स्‍पष्‍टीकरणात्‍मक ज्ञापन पटल पर रखता हूं.

उपाध्‍यक्ष महोदय- कृपया भविष्‍य में यह सुनिश्चित करें कि पत्रों को पटल पर रखते समय मंत्री जी, सदन में उपस्थि‍त रहें.

5. मध्‍यप्रदेश निजी व्‍यावसायिक शिक्षण संस्‍था (प्रवेश का विनियमन एवं शुल्‍क का निर्धारण) अधिनियम, 2007

 

राज्‍यमंत्री, चिकित्‍सा शिक्षा (श्री शरद जैन)- उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मध्‍यप्रदेश निजी व्‍यावसायिक शिक्षण संस्‍था (प्रवेश का विनियमन एवं शुल्‍क का निर्धारण) अधिनियम, 2007 (क्रमांक 21 सन् 2007) की धारा 14 की अपेक्षानुसार चिकित्‍सा शिक्षा विभाग की अधिसूचना क्रमांक एफ 5-30/2017/1/55 दिनांक 10 अप्रैल, 2017 पटल पर रखता हूं.

6. मध्‍यप्रदेश पिछड़ा वर्ग तथा अल्‍पसंख्‍यक वित्‍त एवं विकास निगम का सोलहवां वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखा

 

राज्‍यमंत्री, पिछड़ा वर्ग एवं अल्‍पसंख्‍यक कल्‍याण (श्रीमती ललिता यादव)- उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मध्‍यप्रदेश पिछड़ा वर्ग तथा अल्‍पसंख्‍यक वित्‍त एवं विकास निगम के आर्टीकल ऑफ एसोसियेशन की कंडिका 83 की उप कंडिका (ख) की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश पिछड़ा वर्ग तथा अल्‍पसंख्‍यक वित्‍त एवं विकास निगम का सोलहवां वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखा (31 मार्च, 2010 को समाप्‍त वर्ष के लिए) पटल पर रखती हूं.

(इंडियन नेशनल कांग्रेस के कई सदस्‍यों द्वारा नारे लगाते एक साथ सदन में प्रवेश किया गया)

उपाध्‍यक्ष महोदय- ध्‍यानाकर्षण की सूचनायें. ....(व्‍यवधान)....

डॉ. रामकिशोर दोगने (हरदा)- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, किसान परेशान है. 4-4 दिनों से ट्रालियों में अनाज लदाकर मंडियों में खड़ा हुआ है. मूंग खरीदी नहीं जा रही है.

राजस्‍व मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्‍ता)- उपाध्‍यक्ष महोदय, पिछले दो दिन इसी मुद्दे पर चर्चा हुई है. ये लोग सदन में अराजकता फैलाकर कोई काम नहीं होने देना चाहते हैं. इतिहास में कभी किसानों से संबंधित स्‍थगन पर इतनी चर्चा नहीं हुई है. किसानों के नाम पर दो दिन की चर्चा में इन्‍होंने बोला है और उसके बाद भी सदन की कार्यवाही नहीं चलने दे रहे हैं. क्‍या इनका लोकतंत्र में भरोसा नहीं है ? इनकी पोल खुल गई है इसलिए पीठ दिखा रहे हैं.

....(व्‍यवधान)....

डॉ.रामकिशोर दोगने-- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरे हरदा में किसान चार दिन से हरदा में ट्राली लेकर खड़ा हुआ है. खरीदी नहीं हो रही है, किसान परेशान है. (व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत-- उपाध्‍यक्ष महोदय, पहले इसका जवाब दें कि मूंग की खरीदी क्‍यों बंद कर दी गई है. (व्‍यवधान)

12.30 बजे गर्भगृह में प्रवेश (क्रमश:)

इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यगण द्वारा किसानों की कर्ज माफी की मांग करते हुए गर्भगृह में प्रवेश

 

(इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यगण द्वारा किसानों की कर्ज माफी की मांग करते हुए एवं नारे लगाते हुए गर्भगृह में प्रवेश किया)

 

उपाध्‍यक्ष महोदय-- माननीय सदस्‍यगण आपकी बात आ गई है. (व्‍यवधान)

डॉ. रामकिशोर दोगने-- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कल मुख्‍यमंत्री जी ने घोषणा की है कि 31 जुलाई तक मूंग की खरीदी की जाएगी और आज बंद कर दी गई है, यहां सदन में कुछ बोलेंगे और बाहर कुछ और कार्यवाही होगी यह मुख्‍यमंत्री के भाषण में था कि 31 जुलाई तक मूंग की खरीदी की जाएगी. (व्‍यवधान)

उपाध्‍यक्ष महोदय-- सरकार के संज्ञान में बात आ गई है. आप उनका ध्‍यानाकर्षण नहीं आने देना चाहते हैं. यह क्‍या है आप लोग चाहते क्‍या हैं बताइए? नारा भर लगाना है कि कोई बात भी करना है आप अपनी कोई बात रखिए. बात संज्ञान में आ गई है. शासन कार्यवाही करेगा. (व्‍यवधान)

श्री दिलीप सिंह परिहार-- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, दो दिन तक इन्‍होंने अपनी बात बोली तब इन्‍होंने क्‍यों नहीं बोला. यह विधानसभा में बाधा डालना चाहते हैं. (व्‍यवधान)

श्री रणजीत सिंह गुणवान-- जो बात कही वह चैनल पर आ गई है, अखबार में आ गई है और उसके बाद भी आपने अखबार नहीं पढ़ा है क्‍या? जो कुछ हुआ कल आपने सुना नहीं क्‍या. सब हो गया उसके बाद नया और क्‍या हो गया आपको. (व्‍यवधान)

श्री दिलीप सिंह परिहार-- सत्‍ता के लिए मछली जैसे तड़प रहे हैं. दो दिन तक इनको सुना इसके बाद भी यह हरकत कर रहे हैं. विधानसभा की कार्यवाही नहीं चलने दे रहे हैं. (व्‍यवधान)

किसान कल्‍याण तथा कृषि विकास मंत्री (श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन)-- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हम सभी खरीदी केन्‍द्रों को निर्देशित करेंगे कि... (व्‍यवधान)

उपाध्‍यक्ष महोदय-- आप लोगों को बात सुनना भी है कि सिर्फ नारा लगाना है. (व्‍यवधान)

श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन-- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं सरकार का पक्ष रखना चाहता हूं. (व्‍यवधान)

 

12.32 बजे { अध्‍यक्ष महोदय (डॉ. सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए}

अध्‍यक्ष महोदय-- आप बात सुन लें. (व्‍यवधान)

श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यदि माननीय सदस्‍य सुनना चाहते हैं तो मैं सरकार का पक्ष रखना चाहता हूं. (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय-- आप कृपया अपने स्‍थान पर बैठ जाएं. माननीय कृषि मंत्री जी कुछ कहना चाहते हैं. आप उनकी बात तो सुनो वह क्‍या कह रहे हैं. (व्‍यवधान)

श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन-- हम आपकी समस्‍या का जो कुछ समाधान होगा वह करेंगे. (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय--आप कृपा करके सुन लीजिए. आप क्‍या कह रहें हैं वहां से सुनाई नहीं पड़ रहा है. आप अपने स्‍‍थान पर बैठ तो जाएं. नहीं बैठेंगे. (व्‍यवधान)

श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन-- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इनको यदि कुछ नहीं सुनना है तो मुझे नहीं कहना है. इनका मकसद समस्‍या रखकर इलाज नहीं सुनना है. (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय-- आप यदि नहीं सुनेंगे तो कैसे काम चलेगा. घोषणा हम नहीं कर सकते सरकार करेगी. विधानसभा की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्‍थगित.

( 12.34 बजे से सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्‍थगित की गई)

 

12.51 बजे विधान सभा पुन: समवेत् हुई.

{अध्यक्ष महोदय (डॉ. सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए}

 

 

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह)--माननीय अध्यक्ष महोदय, कल आदरणीय मुख्यमंत्री महोदय ने अपने भाषण में स्पष्ट किया था कि मूंग, उड़द की खरीदी 31 जुलाई तक होगी, समय और बढ़ाने की कोशिश होगी यदि खरीदी न हो पाए. लेकिन बहुत सारे विधायक उत्तेजित हैं उनके जिलों में मूंग, उड़द की खरीदी अभी नहीं हो रही है. माननीय मंत्री महोदय सदन में हैं मुख्यमंत्री महोदय तो हैं नहीं. मंत्री जी की तरफ से इस बारे में कुछ जानकारी आ जाए.

श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से सदन को, माननीय नेता प्रतिपक्ष जी को और सभी माननीय सदस्यों को अवगत कराना चाहूंगा कि अभी 1.30 बजे जैसे जी सदन का अन्तराल होगा उस समय मैं अधिकारियों की बैठक बुलाउंगा और जिन-जिन जिलों में खरीदी बंद हो गई है वहाँ खरीदी चालू की जाएगी. 30 जुलाई तक हम पूरा प्रयास करेंगे कि किसानों के पास में जो ग्रीष्मकालीन मूंग, उड़द की फसल है उसकी खरीदी की जाएगी. (मेजों की थपथपाहट)

श्री अजय सिंह--अध्यक्ष महोदय, जिन फसलों के बारे में मंत्री महोदय ने कहा है वह खरीदी वे चालू करें. यह बात स्पष्ट है कि कर्ज माफी तो आप कर नहीं सकते हैं, समर्थन मूल्य आप दे नहीं सकते हैं चलिए इतने में ही रखो. लेकिन जब कांग्रेस की सरकार बनेगी तो किसानों का कर्ज भी माफ होगा और समर्थन मूल्य भी दिया जाएगा.

राजस्व मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्ता)--अध्यक्ष महोदय, दो दिन हो गए मुख्यमंत्री जी के जवाब के बाद सन्नाटा हो गया है. अब कर क्या रहे हो.

श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन--अध्यक्ष महोदय, अभी मैं, इस सदन में कुछ नहीं कहना चाहूंगा लेकिन मेरे बड़े भाई मुंगेरीलाल के सपने न देखें. (व्यवधान)

राज्यमंत्री सामान्य प्रशासन (श्री लाल सिंह आर्य)--अध्यक्ष महोदय, सरकार फसल का मूल्य तो दे रही है उड़द की, मूंग की, अरहर की, प्याज की. (व्यवधान)

श्री अजय सिंह--और प्याज में आप जो कर रहे हो वह बड़ा अच्छा कर रहे हो. प्याज खरीदी और उसमें क्या लफड़ा हो रहा है शासन के पैसे का कितना लूट खसोट कर रहे हो वह बहुत अच्छा कर रहे हो. अरे टीवी में देख लो वह सोनी क्या कर रहा है. (व्यवधान)

राज्यमंत्री, सहकारिता (श्री विश्वास सारंग)--माननीय अध्यक्ष महोदय, कल जो पिटाई हुई है उसके बाद यह रेपिंग हो रही है यह भूल सुधार नहीं होगी. कब क्या होगा. मेरी मौसी को मूंछें होंगी तो मैं उन्हें मामा कहूंगा. न मौसी को मूंछे होंगी न मामा कह पाओगे. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--कृपया बैठ जाएं. डॉक्टर साहब, सचिन जी बैठ जाएं(व्यवधान)

श्री अजय सिंह-- अब की तो शबनम मौसी आएगी. (व्यवधान)

डॉ. गोविन्द सिंह--अध्यक्ष महोदय, जो कल सोनी, जनरल मैनेजर ने रिश्वत ली है और जो हिस्सा पाया है. हमें जानकारी है उसमें से आधा हिस्सा खाद्य मंत्री को जाना था. खाद्य मंत्री के निर्देश पर जनरल मैनेजर सोनी ने वह रिश्वत लेने की हिम्मत दिखाई है. आधा पैसा खाद्य मंत्री को देना था (व्यवधान)

श्री विश्वास सारंग--कोई भी बख्शा नहीं जाएगा, गिरफ्तार भी हो गया है. कोई भी भ्रष्टाचार करेगा बख्शा नहीं जाएगा. (व्यवधान)

श्री हर्ष यादव--ऐसी स्थिति में सरकार अपने दायित्व से भाग रही है. इतनी किसान हितैषी सरकार है तो कर्ज माफी की घोषणा करे (व्यवधान)

 

डॉ. गोविन्द सिंह--मंत्री को गिरफ्तार करवाओ. मंत्री ने तो कहा था कि वसूली करो, कमीशन लो प्याज में, हर जगह मंत्री के इशारे पर काम हुआ है. जनरल मैनेजर सोनी ने खाद्य मंत्री के इशारे पर रिश्वत लेने की हिम्मत दिखाई है. आधा पैसा खाद्य मंत्री को लेना था. खाद्य मंत्री को गिरफ्तार करवाओ.(व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--अभी ध्यानाकर्षण प्रस्ताव है. सदन चलने देना है कि नहीं चलने देना है. (व्यवधान)

श्री विश्वास सारंग--कोई भी जो भ्रष्टाचार करेगा बख्शा नहीं जाएगा. वह गिरफ्तार भी हो गया,सस्पेंड भी हो गया और यदि कोई भी भ्रष्टाचार करेगा तो वह बख्शा नहीं जाएगा(व्यवधान)

श्री उमाशंकर गुप्ता--माननीय अध्यक्ष महोदय, दो दिन इसी विषय पर सदन में चर्चा हुई. पूरा रिकार्ड हो गया.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--कर्ज माफ क्यों नहीं किया (व्यवधान)

श्री उमाशंकर गुप्ता--अरे सुनो तो. कर्ज माफ नहीं होगा. मुख्यमंत्री कह चुके हैं, कर्ज माफ नहीं होगा. कल मुख्यमंत्री सब क्लियर कर चुके हैं. खरीदी की बात भी कह चुके हैं. 31 जुलाई तक खरीदी करेंगे यह कह चुके हैं फिर आज यह नौटंकी क्यों हो रही है. यह सब बातें हो चुकी हैं . 31 जुलाई तक खरीदी करेंगे यह बात हो गई है. मुख्यमंत्री ने कल भाषण..(व्यवधान)..दिया सन्नाटा खिंच गया, पूरे प्रदेश में पिट गए. असलियत सामने आ गई...(व्यवधान)..लीपापोती कर रहे हों. कल मुख्यमंत्री जी कह चुके 31 जुलाई तक खरीदी होगी. फिर यह विषय कहाँ रह गया. विषय रह ही नहीं गया. मुख्यमंत्री जी ने कहा है कि किसान से खरीदी होगी...(व्यवधान)..

 

 

 

 

12.56 बजे ध्यानाकर्षण

बालाघाट जिले में बंदोबस्त कार्य न होने से उत्पन्न स्थिति.

सुश्री हिना लिखीराम कावरे(लांजी)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी ध्यान आकर्षण सूचना का विषय इस प्रकार है--

बालाघाट जिले में ब्रिटिश शासन काल में वर्ष 1913-14 के बाद से बंदोबस्त कार्य न होने के कारण इतने वर्षों में भूमि का स्वरूप बदल जाने के कारण राजस्व प्रकरणों सीमा विवाद तथा न्यायालयीन प्रकरणों में दिनों दिन वृद्धि हो रही है. बंदोबस्त कार्य हो जाने पर उक्त वर्णित विवादों का हल अपने आप हो जाएगा. खसरा नंबर इतने ज्यादा बँट चुके हैं कि नये कम्प्यूटराईज्ड सिस्टम वेब जीआईएस इन्हें स्वीकार नहीं करते जिससे आपसी विवाद बढ़ने के साथ साथ आम जनता की परेशानियाँ भी बढ़ रही हैं. शासकीय राजस्व अमले को बेवजह आमजन के आक्रोश का सामना करना पड़ता है. रिकार्ड में जरीब से की गई नाप अंकित है किन्तु वर्तमान में इस्तेमाल की जा रही ईटीएसएम मशीनों तथा जरीब के नाप में अन्तर होने के कारण विवाद बढ़ रहे हैं. इससे आमजन में रोष है. ..(व्यवधान)..

12.57 बजे गर्भ गृह में प्रवेश एवं धरना.

किसानों की कर्ज माफी की मांग करते हुए गर्भ गृह में प्रवेश एवं धरना.

(इंडियन नेश्नल काँग्रेस के अनेक सदस्य किसानों की कर्ज माफी की मांग करते हुए गर्भगृह में आकर नारेबाजी करने लगे एवं धरने पर बैठ गए) ..(व्यवधान)..

 

अध्यक्ष महोदय-- कृपया अपने स्थान पर जाएँ...(व्यवधान)..

 

12.58 बजे ध्यानाकर्षण (क्रमशः)

राजस्व मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्ता)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, बन्दोबस्त कार्य वर्ष 2000 से प्रदेश में बन्द है. बन्दोबस्त नहीं होने के कारण बटांकनों की संख्या में वृद्धि हुई है. नया कम्प्यूटराइड सिस्टम वेब जीआईएस में बटांकनों को दर्ज करने की व्यवस्था है किन्तु मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 70 की उप खण्ड धारा 2 के साथ पठित धारा 258 की उपधारा (1) उपधारा (2) के खण्ड-7 के अन्तर्गत निर्मित नियम 1 (क) के अनुसार जिस भूमि का क्षेत्रफल 0.05 एकड़ से कम हो या जिस भूमि का भू-राजस्व 5 नये पैसे से कम हो एवं यदि भूमि का उपयोग कृषि प्रयोजन के लिए होता हो उसे पृथक् उपखण्ड नहीं बनाया जाएगा. अतः 0.05 एकड़ में से कम भूमि के बटांकन कृषि भूमि के लिए नहीं किए जाने का प्रावधान है. बालाघाट जिले में न्यायालयीन राजस्व प्रकरणों का निराकरण विधिवत किया जा रहा है. भूमि का माप करने हेतु पूर्व में जरीब का प्रयोग किया जाता था. अब वर्तमान में सीमांकन के लिए ईटीएस मशीन का उपयोग किया जा रहा है जिसमें यह व्यवस्था है कि नक्शे के मान से ही नक्शे के अनुसार स्थल पर सीमाएँ कायम कर सीमांकन किया जाता है. अतः मशीन की दूरी मापन की शुद्धता का प्रभाव सीमांकन पर नहीं पड़ता है.

अध्यक्ष महोदय-- (गर्भ गृह में आए इंडियन नेश्नल काँग्रेस के सदस्यों से) कृपया आप लोग अपने स्थान पर जाएँ. ध्यानाकर्षण पूरा होने दें.

सुश्री हिना लिखीराम कावरे-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं प्रश्न पूछने से पहले, जो जवाब मेरे पास आया है, उस पर मैं कहना चाहती हूँ कि नया कम्प्यूटराईज्ड सिस्टम वेब जीआईएस में बटांकनों को दर्ज करने की व्यवस्था है. अध्यक्ष महोदय, मैं यह बताना चाहती हूँ कि 10 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में सीएम ने स्वीकार किया है कि वेब जीआईएस सिस्टम में दिक्कत है और इसे बदलने की जरुरत है. दूसरा, जब पटवारियों की ट्रेनिंग हो रही थी उसमें भी वेब जीआईएस सिस्टम से दिक्कत पर पुनर्विचार करने की बात कही गई है. अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से यह पूछना चाहती हूँ कि बालाघाट जिले में बंदोबस्त कार्य कब से प्रारंभ करवा रहे हैं?

श्री उमाशंकर गुप्ता-- माननीय अध्यक्ष महोदय, बंदोबस्त का काम काँग्रेस की सरकार में वर्ष 2000 से तत्कालीन मुख्यमंत्री जी ने बन्द करा दिया, (शेम शेम की आवाज) 9 जून से बंद करा दिया इसलिए यह समस्या आई है. ..(व्यवधान)..अब सुन तो लो और जीआईएस में, जो आपने कहा है, उसकी जहाँ विसंगतियाँ हैं, उनको हम दूर कर रहे हैं और जिन जिलों में ज्यादा दिक्कत है और वहाँ से रिपोर्ट आ रही है, वहाँ उनका काम बन्द करके जो एनआईसी है, उसी को हम काम दे रहे हैं और उसका पूरा परीक्षण कर रहे हैं. अगर वह सिस्टम ठीक नहीं हुआ तो हम उस सिस्टम को खतम कर देंगे. कुछ नया सिस्टम लागू करेंगे.

सुश्री हिना लिखीराम कावरे-- अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से यह पूछना चाहती हूँ कि क्या बंदोबस्त बालाघाट जिले में किया जाएगा?

अध्यक्ष महोदय-- बालाघाट में बंदोबस्त करेंगे क्या?

श्री उमाशंकर गुप्ता-- माननीय अध्यक्ष जी, हम इस पर विचार करेंगे, यह केवल बालाघाट का ही प्रश्न नहीं है, पूरे प्रदेश का प्रश्न है. लेकिन हम इस पर विचार करके, इसको कैसे शुरू कर सकते हैं, जरूर करेंगे.

अध्यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी, एक प्रश्न की अनुमति मैंने प्रताप सिंह जी को दी है.

सुश्री हिना लिखीराम कावरे-- अध्यक्ष महोदय, मैं एक और प्रश्न पूछना चाहती हूँ.

अध्यक्ष महोदय-- प्रताप सिंह जी, अभी आप बैठ जाइये, उनको पूछ लेने दीजिए.

कुँवर विक्रम सिंह-- गुप्ता जी, जीपीएस मशीन के साथ में कंपास भी प्रोवाइड करवा दीजिए.

सुश्री हिना लिखीराम कावरे-- अध्यक्ष महोदय, बंदोबस्त की बात के साथ मैं यह कहना चाहती हूँ कि बंदोबस्त हुए लगभग 102 वर्ष हो गए हैं. पूरे प्रदेश में इतने सालों बाद भी नक्शों के माप नहीं बदले गए हैं. जिससे राजस्व अमले को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. क्या शासन पूरे प्रदेश में नक्शे का माप बढ़ाने के लिए आदेश जारी करेगा?

 

(इंडियन नेशनल कांग्रेस के अनेक माननीय सदस्यों द्वारा गर्भगृह से नारेबाजी की जाती रही)

...(व्यवधान)...

श्री उमाशंकर गुप्ता-- माननीय अध्यक्ष महोदय, आजकल डिजिटलाईज नक्शे मिल गये हैं कोई दिक्कत नहीं है लेकिन उसको वेरीफिकेशन करना है और हम इसकी योजना बनाकर पूरे प्रदेश में बंदोबस्त का कार्यक्रम कैसे चला सकते हैं, इसको अभियान के रूप में चलाएंगे.

सुश्री हिना लिखीराम कावरे-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा माप संबंधी प्रश्न था चूंकि आज बहुत ज्यादा शोर हो रहा है इसलिए मैं आपसे निवेदन करना चाहती हूं कि इस बंदोबस्त संबंधी विषय पर 139 चर्चा मैंने बनाकर रखी है तो क्या आप इस पर चर्चा करवाने की अनुमति देंगे.

अध्यक्ष महोदय-- यहाँ उसकी बात नहीं करेंगे.प्रताप सिंह अपनी बात रखे.

श्री प्रताप सिंह(जबेरा)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से चर्चा करना चाहता हूं जीआईएस सिस्टम हमारे दमोह जिले में भी चालू हो और हमारे यहाँ के पूरे पटवारियों ने इस संबंध में कलेक्टर को ज्ञापन दिया है कि वहाँ पर सिस्टम काम नहीं कर रहा है तो उसको बंद करवा कर एनआईसी सिस्टम चालू करवाएंगे?

श्री उमाशंकर गुप्ता-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने अभी कहा है कि जिन भी जिलों से ऐसी शिकायत आ रही हैं और कलेक्टर लिख रहे हैं वहाँ हम उस सिस्टम की जगह एनआईसी सिस्टम को लागू कर रहे हैं अगर दमोह से शिकायत आएगी तो वहाँ भी करेंगे.

अध्यक्ष महोदय-- माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि कृपा करके अपने स्थान पर जायें. श्री मुरलीधर पाटीदार अपने ध्यानाकर्षण की सूचना पढ़े.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया-- कांग्रेस की आज दयनीय हालत है.

श्री सुन्दर लाल तिवारी-- किसानों का कर्जा माफ करवाइए..(व्यवधान)..किसानों का कर्जा माफ होना चाहिए.

श्री जसवंत सिंह हाड़ा-- थोड़ा और जोर से बोलिये.

अध्यक्ष महोदय-- पाटीदार जी अपना ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पढ़िये.

1.02 बजे बहिर्गमन

इंडियन नेशनल काँग्रेस के सदस्यों द्वारा किसानों की कर्ज माफी न होने के विरोध में सदन से बहिर्गमन

 

नेता प्रतिपक्ष(श्री अजय सिंह)-- अध्यक्ष महोदय, किसानों का कर्जा माफी ना होने के विरोध में हम सदन से वॉक आउट करते हैं.

(किसानों की कर्ज माफी न होने के विरोध में इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यों द्वारा नेता

प्रतिपक्ष श्री अजय सिंह के नेतृत्व में सदन से बहिर्गमन किया)

 

1.03 बजे ध्यानाकर्षण(क्रमशः)

2.सुसनेर क्षेत्र में अटल ज्योति अभियान के तहत फीडर विभक्तिकरण का कार्य सुचारू रूप से न होना

 

श्री मुरलीधर पाटीदार (सुसनेर)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, सबसे पहले आपको मेरी ओर से बहुत-बहुत धन्यवाद कि आपने मेरा कई वर्षों पुराना लंबित ध्यानाकर्षण स्वीकार किया. माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी ध्यानाकर्षण की सूचना इस प्रकार है कि विधान सभा क्षेत्र सुसनेर में अटल ज्योति अभियान अंतर्गत फीडर विभक्तिकरण के कार्य हेतु जो ट्रांसफार्मर विद्युत प्रदाय हेतु स्थापित किए गए हैं उनका संचालन सुचारू रूप से नहीं हो रहा है एवं मानिटरिंग भी प्रभावी नहीं है ऐसी शिकायतें प्राप्त हुई हैं कि ट्रांसफार्मर जितनी अवधि में बंद रहे हैं उस अवधि की राशि भी उपभोक्ताओं के विद्युत देयकों में अंकित कर विद्युत उपयोग नहीं करने पर भी राशि वसूली जा रही है. अपने पत्र क्रमांक 465-1 दिनाँक 8.6.2017 से इस संबंध में प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र वि.वि.कं. इंदौर एवं अधीक्षण यंत्री आगर को अवगत कराया था एवं जानकारी भी चाही थी. विद्युत प्रदाय/ट्रासंफार्मर बंद होने पर भी विद्युत बिलों के चालू होने से क्षेत्र के उपभोक्ताओं में विद्युत वितरण कंपनी के प्रति भ्रम एवं असंतोष का माहौल बना हुआ है. इसकी सघन जांच करवाई जाकर दोषियों पर ठोस कार्यवाही की जाए एवं विद्युत देयकों में सुधार कर उपभोक्ताओं द्वारा जमा राशि का समायोजन किया जाए. आगामी बिलों में त्रुटि न हो इसका भी ध्यान रखा जाए ताकि आम उपभोक्ताओं को बेवजह परेशान न होना पड़े.

श्री शंकर लाल तिवारी-- (कांग्रेस पार्टी के सदस्यों के बहिर्गमन पर) अध्यक्ष महोदय,(XXX).

अध्यक्ष महोदय-- तिवारी जी, बैठ जाइए उनका ध्यानाकर्षण होने दीजिये और यह जो शब्द बोला है वह कार्यवाही से निकाल दीजिये.

श्री शंकर लाल तिवारी-- अध्यक्ष महोदय, मैंने ऐसा क्या बोला है मुझ पर दया करें मैं आपसे बहस करने लायक नहीं हूं पर एक शब्द भी दुनिया का कोई आदमी कह दें कि मैंने गलत बोला है तो मुझे सजा सुनाइए. जबरन विलोपित मत कराइए. इस तरह का अपमान लोकतंत्र में और सदन में हो रहा है, आपकी उदारता थी आपने स्थगन ग्रहण किया और स्थगन के लिए दो दिन तक विधान सभा चलाई और हम लोग रात के 9 बजे तक बैठे रहे (XXX) और मेरी बात को विलोपित कर रहे हैं. व्हाट अबाउट दिस?

श्री विश्वास सारंग--- अध्यक्ष जी, यह तो पिक्चर का गाना दोहराया है.

अध्यक्ष महोदय-- यह कार्यवाही से निकाल दीजिये.

श्री शंकर लाल तिवारी-- क्यों निकाल देंगे, मुझे निकाल दीजिये.

अध्यक्ष महोदय-- आपको नहीं निकालेंगे. आपको जनता ने भेजा है आपको नहीं निकाल सकते हैं.

श्री शंकर लाल तिवारी-- तो कृपा करके मुझे बताइए मैंने क्या गलत शब्द इस्तेमाल किया है. मैं शिष्टाचार सीख लूँ इन दादाओं से, जो लोकतंत्र के गुंडागर्दी करने वाले लोग हैं विधान सभा में इनसे कैसी शिष्टता करनी चाहिए इसकी एक क्लास ले लीजिये आप हम लोगों की. दो दिन तक स्थगन पर चर्चा हुई है. शैलेन्द्र पटेल कांग्रेस के विधायक हैं उनको 11 लाख रुपये का मुआवजा आरबीसी एक्ट के अंतर्गत मिला है और वह भाषण कर रहे थे.

अध्यक्ष महोदय-- बैठ जाएँ तिवारी जी. सभी सदस्‍यों से मेरा आग्रह है कि क्‍या आप विधानसभा नहीं चलने देंगे. यह क्‍या तरीका है ? तिवारी जी, इस तरह से आपको बहस नहीं करना चाहिए.

..

(XXX) : आदेशानुसार रिकार्ड से निकाला गया.

 

श्री उमाशंकर गुप्‍ता -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं केवल एक निवेदन करना चाहता हॅूं कि प्रतिपक्ष कितना गंभीर है. कल आपने समय से ज्‍यादा 12 घंटे लगातार स्‍थगन पर चर्चा करायी, विस्‍तार से स्‍थगन पर चर्चा हुई, किसानों से जुड़ी हुई सारी बातचीत हुई. नेता प्रतिपक्ष जी का भाषण हो गया. माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने एक-एक बात का जवाब दिया और जिस बात को कल मुख्‍यमंत्री जी बोल चुके हैं कि हम 31 जुलाई तक सारी व्‍यवस्‍था कर देंगे.

श्री गोपाल भार्गव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसके अलावा अनुपूरक पर भी चर्चा होना है. इस पर भी पर्याप्‍त चर्चा कर सकते हैं इसके बावजूद भी विपक्ष के माननीय सदस्‍य सदन से जा रहे हैं.

अध्‍यक्ष्‍ा महोदय -- माननीय मंत्री जी, कृपया अपना उत्‍तर दें.

ऊर्जा मंत्री (श्री पारसचन्‍द्र जैन) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्राप्‍त जानकारी के अनुसार विधानसभा क्षेत्र सुसनेर में वर्तमान में 2945 वितरण ट्रांसफॉर्मर स्‍थापित हैं, जिनमें से 412 वितरण ट्रांसफॉर्मर फीडर विभक्तिकरण योजना के अन्‍तर्गत स्‍थापित किये गये हैं. फीडर विभक्तिकरण योजना के अन्‍तर्गत स्‍थापित इन 412 ट्रांसफॉर्मरों में से 68 वितरण ट्रांसफॉर्मर खराब हुए थे, जिनमें से अद्यतन स्थिति में 43 वितरण ट्रांसफॉर्मर बदले जा चुके हैं एवं 25 वितरण ट्रासंफॉर्मर, इनसे संबद्ध उपभोक्‍ताओं द्वारा नियमानुसार विद्युत बिलों की बकाया राशि जमा नहीं किये जाने के कारण बदले जाना शेष हैं तथा शत् प्रतिशत उपभोक्‍ताओं पर विद्युत बिल की बकाया राशि होने के कारण 21 वितरण ट्रांसफॉर्मर उतारे गए हैं. इन जले/खराब एवं शत् प्रतिशत बकाया राशि के कारण उतारे गए वितरण ट्रांसफॉर्मरों को छोड़कर सुसनेर विधानसभा क्षेत्र में फीडर विभक्तिकरण योजना के अंतर्गत स्‍थापित सभी ट्रांसफॉर्मरों से सुचारू रूप से विद्युत प्रदाय किया जा रहा है. उक्‍त वितरण ट्रांसफॉर्मर नियमानुसार संबद्ध 75 प्रतिशत उपभोक्‍ताओं अथवा बकाया राशि की 40 प्रतिशत राशि जमा होने के उपरांत चालू किए जा सकेंगे.

सूचना में उल्‍लेखित माननीय विधायक महोदय के पत्र में सुसनेर विधानसभा क्षेत्र के अन्‍तर्गत स्‍थापित वितरण ट्रांसफॉर्मरों की लोकेशन कोडवार जानकारी, स्‍थापित ट्रांसफॉर्मरों में से बंद/जले वितरण ट्रांसफॉर्मरों की बंद रहने की अवधि एवं वितरण ट्रांसफॉर्मर बंद रहने की अवधि में जारी किये गये विद्युत बिलों की उपभोक्‍तावार जानकारी चाही गई है. उल्‍लेखनीय है कि माननीय विधायक महोदय द्वारा वांछित जानकारी वृहद् स्‍वरूप की है, जिसे कंपनी के दैनंदिनी कार्यों को संपादित करते हुए संकलित करने में कुछ समय लगेगा. वांछित जानकारी संकलित की जा रही है, जिसे यथाशीघ्र माननीय विधायक महोदय को उपलब्‍ध कराया जाएगा.

सुसनेर विधानसभा क्षेत्र में वितरण ट्रांसफॉर्मर फेल होने पर नियमानुसार विद्युत बिल जमा करने वाले उपभोक्‍ताओं को यथासंभव वैकल्पिक व्‍यवस्‍था कर विद्युत प्रदाय उपलब्‍ध कराया जा रहा है. अत: ऐसे उपभोक्‍ताओं को जले/खराब वितरण ट्रांसफॉर्मरों से विद्युत प्रदाय बंद रहने की अवधि में बिजली बिल की राशि के समायोजन हेतु कोई कार्यवाही किया जाना अपेक्षित नहीं है.

उल्‍लेखनीय है कि अटल ज्‍योति अभियान के अंतर्गत प्रदेश में गैर कृषि उपभोक्‍ताओं को 24 घंटे तथा कृषि उपभोक्‍ताओं के लिए 10 घंटे विद्युत प्रदाय की व्‍यवस्‍था बनाई गई है, जिसके परिणाम स्‍वरूप संपूर्ण प्रदेश में विगत वर्षों में विद्युत प्रदाय की स्थिति में व्‍यापक सुधार हुआ है. इस व्‍यवस्‍था को सुचारू बनाए रखने हेतु विद्युत क्रय एवं कोयला क्रय के बिलों का समय से भुगतान आवश्‍यक है. प्रदेश में लगभग 5.98 लाख वितरण ट्रांसफॉर्मर स्‍थापित हैं, जिनमें से मात्र लगभग 4 हजार ट्रांसफॉर्मर बकाया राशि के कारण बंद हैं, जो कि कुल ट्रांसफॉर्मरों का मात्र 1 प्रतिशत से भी कम है. संपूर्ण प्रदेश में विद्युत प्रदाय की सुचारू व्‍यवस्‍था बनाए रखने के लिए बकाया राशि की वसूली हेतु उक्‍त अनुसार कार्यवाही करने की आवश्‍यकता होती है, जिसके अंतर्गत भी बकाया राशि का मात्र 40 प्रतिशत अथवा 75 प्रतिशत उपभोक्‍ताओं द्वारा राशि जमा करने पर ट्रांसफॉर्मर बदलने/चालू करने का प्रावधान है.

उक्‍तानुसार नियमों के अनुरूप की जा रही कार्यवाही के परिप्रेक्ष्‍य में यह कहना सही नहीं है कि त्रुटिपूर्ण बिलों के कारण एवं जले/खराब वितरण ट्रांसफॉर्मर नहीं बदले जाने के कारण सूचना क्षेत्र में किसी प्रकार के रोष/असंतोष की स्थिति है.

श्री मुरलीधर पाटीदार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी के जवाब से पूर्ण रूप से संतुष्‍ट नहीं हूँ. पहली बात तो यह है कि मैंने 8 जून को पत्र लिखा है, उसका जवाब अभी तक नहीं मिला है, कब तक जानकारी मिलेगी, यह भी उन्‍होंने नहीं बताया है. मैं माननीय मंत्री जी से सिर्फ इतना आग्रह कर रहा हूँ कि दो गा, पड़ाना, जिसमें अटल ज्‍योति लगी, मीटर लगे और पूरी 40 पोल की लाइट चोरी हो गई, आज तक वहां लाइट सप्‍लाई नहीं की गई है, मंत्री जी मुझे यह बता दें कि वहां विभाग कहां से लाइट दे रहा है, और अभी भी उनके बिल चालू हैं, 40-40 हजार रुपये के उनके बिल हो गए हैं. इसी तरह से भेसोदा गाव में, जहां पर मंत्री जी स्‍वयं दौरे के दौरान निर्देश देकर आए थे कि वहां की लाइट चालू कर दें, लेकिन लाइट नहीं हुई, गाव वालों ने 9 निजी ट्रांसफार्मर अटल ज्‍योति योजना के अंतर्गत अपने पैसे से लगाए, अब उपभोक्‍ता बिल भरना चाहता है, उसको बिजली चाहिए, बिजली हम दे नहीं रहे हैं. कुछ लोग ऐसे हैं जिन्‍होंने एमपीईबी के दर्शन ही नहीं किए, उन पर कोई कार्यवाही होती नहीं है और उसका दंड वह उपभोक्‍ता भुगतता है जो रेग्‍युलर बिल जमा करता है. मेरा मंत्री जी से यह आग्रह है कि आपका विभाग तो काम नहीं कर सकता है तो जिले के कलेक्‍टर के माध्‍यम से उसकी जाच करवाई जाए और जो दोषी हैं, जिन्‍होंने साठ-गाठ करके पीछे के रास्‍ते से लेन-देन करके बिना बिल जमा करे बिजली चालू करवाई है, उन पर कार्यवाही हो, जो जिले का कलेक्‍टर अपने स्‍तर से करवाए.

श्री पारस चंद्र जैन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विधायक जी के पत्र क्रमांक 465, दिनांक 8.6.2017 की बात मैंने अपने जवाब में की है. यह बात जरूर है कि हमने जवाब नहीं दिया है लेकिन बहुत विस्‍तृत जवाब इन्‍होंने मांगा था, इसलिए 15 दिन के अंदर इनको पूरा जवाब हम भिजवा देंगे. दूसरी बात जो इन्‍होंने दो गावों की कही है, हमारी नीति स्‍पष्‍ट है कि वे यदि 40 प्रतिशत भर देते हैं तो हम बराबर उनको बिजली दे पाते हैं. जहां भेसोदा में बिजली चालू है, मिक्‍स फीडर 24 घंटे बताए हैं, दूसरे गाव की जांच यदि हमारे विधायक जी कह रहे हैं तो हम उसकी जांच करा लेंगे और यदि ये कहेंगे तो हम इनको भी जांच में साथ में रख लेंगे, हमें कोई दिक्‍कत नहीं है, क्‍योंकि हमारी सरकार किसानों की सरकार है, हमारी सरकार 24 घंटे घरेलू बिजली देना चाहती है, और दे भी रही है और 10 घंटे किसान के लिए भी बिजली देने का हमारा मापदंड है, लेकिन कई जगह जो पैसे नहीं भरते हैं, इस कारण ऐसे मामले आते हैं. नियम है कि यदि 40 प्रतिशत से ज्‍यादा भरा हुआ हो, और यदि ट्रांसफार्मर नहीं बदला हो, तो हमको बता दें, हम बदलवा देंगे. हमने एक और नया अमेंडमेंट किया है कि यदि 75 लोगों ने भर दिया हो, तो भी हम ट्रांसफार्मर बदल देंगे. इसके अलावा एक और अमेंडमेंट किया है कि यदि गाव छोड़कर तीन साल में चला गया तो हम उसको भी बदल देंगे. इन्‍होंने जो पड़ाना गाव की बात कही है, इसकी मैं जाच करवा लूंगा.

श्री मुरलीधर पाटीदार -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आग्रह यह है कि क्‍या जिलाधीश के माध्‍यम से जांच कराएंगे क्‍योंकि आपके विभाग के कर्मचारियों पर तो भरोसा ही नहीं बचा.

अध्‍यक्ष महोदय -- वे जांच में आपको साथ रखने के लिए तैयार हैं.

श्री मुरलीधर पाटीदार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं साथ रहूंगा, लेकिन मैं टेक्‍निकल आदमी नहीं हूँ, कलेक्‍टर एक टीम बनाएं और वे जांच करा लें, उसमें इनके विभाग के अधिकारी भी रहे. दूसरा मेरा आग्रह यह है कि अगर 5 साल में, 7 साल में, मैं भेसोदा गाव की बात कर रहा हूँ, 9 ट्रांसफार्मर लोगों ने अटल ज्‍योति के निजी लगवाए, यह अपने आपमें रिकॉर्ड है, और ये कह रहे हैं कि लाइट चालू है, उन्‍होंने तो निजी 1 लाख 10 हजार रुपये जमा किए.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप बैठ जाएं, मंत्री जी, क्‍या कलेक्‍टर से जांच कराएंगे ?

श्री पारस चंद्र जैन -- अध्‍यक्ष महोदय, भोपाल से अधिकारी भेजकर हम जांच करा लेंगे.

श्री मुरलीधर पाटीदार -- अध्‍यक्ष महोदय, इसके लिए धन्‍यवाद. मेरा एक और आग्रह है, जो इसका मूल उद्देश्‍य है कि जितने समय ट्रांसफार्मर बंद रहे, उतने समय का बिल उन उपभोक्‍ताओं से न लिया जाए, क्‍योंकि 1 से 7 साल तक गाव में लाइट ही नहीं गई, उनके सब ट्रांसफार्मर जले पड़े हैं, फिर भी उपभोक्‍ताओं के बिल आ रहे हैं, इससे लोगों में असंतोष नहीं होगा तो क्‍या होगा ?

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी, जितने समय ट्रांसफार्मर बंद रहे, उतने समय के लिए बिजली के बिल के बारे में क्‍या कहेंगे ?

श्री पारस चंद्र जैन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यहां से हम जांच करा लेंगे और उसमें यदि यह चीज आएगी तो हम बराबर उनके खिलाफ कार्यवाही करेंगे.

श्री बलवीर सिंह डण्‍डौतिया -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे प्रश्‍न करना है.

अध्‍यक्ष महोदय -- डण्‍डौतिया जी, आपको एक प्रश्‍न पूछने की अनुमति दी है, एक ही प्रश्‍न कीजिएगा.

श्री बलवीर सिंह डण्‍डौतिया -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह तो बीजेपी के विधायक हैं, इनका यह हाल है तो मैं तो बहुजन समाज पार्टी का विधायक हूँ.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप अपनी बात बोलिए.

श्री बलवीर सिंह डण्‍डौतिया -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह पूछ रहा हूँ कि मैं 25 बार लिखकर दे चुका हूँ, मेरे क्षेत्र में जो बिजली के बिल आ रहे हैं, उनका करेक्‍शन करवाना है, बिजली के बिल 40-40 हजार रुपये के आ रहे हैं, जबकि वहां डीपी रखी नहीं गई है.

अध्‍यक्ष महोदय -- यह नहीं चलेगा, नीतिगत प्रश्‍न होता तो ठीक था.

श्री बलवीर सिंह डण्‍डौतिया -- मैंने कल भी मंत्री महोदय से निवेदन किया था, पहले चंबल में डकैत थे, अब बिजली वाले गरीब लोगों को बहुत परेशान करते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- उनके पास में कोई जानकारी नहीं है.

 

 

 

 

01.15 बजे.

प्रतिवेदन की प्रस्तुति एवं स्वीकृति

 

गैर सरकारी सदस्यों के विधेयकों तथा संकल्पों संबंधी समिति के बीसवें प्रतिवेदन

की प्रस्तुति एवं स्वीकृति

 

श्रीमती योगिता नवलसिंह बोरकर, सदस्य -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं, गैर सरकारी सदस्यों के विधेयकों तथा संकल्पों संबंधी समिति का बीसवां प्रतिवेदन प्रस्तुत करती हूं --

प्रतिवेदन इस प्रकार -- समिति ने शुक्रवार, दिनांक 21 जुलाई, 2017 को चर्चा के लिये आने वाले गैर सकरारी सदस्यों के कार्य पर विचार किया तथा निम्नलिखित समय अशासकीय संकल्पों पर चर्चा के लिये निर्धारित करने की सिफारिश की है --

अशासकीय शुक्रवार, दिनांक 21 जुलाई,2017 निर्धारित समय

संकल्प

1(क्रमांक-1) श्री शंकरलाल तिवारी 50 मिनिट

2(क्रमांक-4,20) सर्वश्री के.पी.सिंह,शैलेन्द्र पटॆल 50 मिनिट

3(क्रमांक-26) श्री यशपाल सिंह सिसौदिया 50 मिनिट

अध्यक्ष महोदय, मैं, प्रस्ताव करती हूं कि सदन गैर सरकारी सदस्यों के विधेयकों तथा संकल्पों संबंधी समिति के बीसवें प्रतिवेदन से सहमत है.

अध्यक्ष महोदय -- प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ.

प्रश्न यह है कि -

सदन गैर सरकारी सदस्यों के विधेयकों तथा संकल्पों संबंधी समिति के बीसवें प्रतिवेदन से सहमत है.

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

 

 

 

 

 

 

 

01.16 बजे.

याचिकाओं की प्रस्तुति

 

अध्यक्ष महोदय -- आज की कार्यसूची में सम्मिलित सभी याचिकाएं प्रस्तुत की हुई मानी जायेंगी.

 

01.17 बजे.

मंत्री का वक्तव्य

सहायक प्राध्यापकों की भर्ती हेतु अधिकतम आयु सीमा में छूट संबंधी

राज्यमंत्री, उच्च शिक्षा ( श्री संजय पाठक) --

1.18 बजे.

वर्ष 2017-18 के प्रथम अनुपूरक अनुमान का उपस्थापन

 

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) -- अध्यक्ष महोदय, मैं, राज्यपाल महोदय के निर्देशानुसार वर्ष 2017-2018 के प्रथम अनुपूरक अनुमान का उपस्थापन करता हूं.

अधयक्ष महोदय -- मैं, इस प्रथम अनुपूरक अनुमान पर चर्चा और मतदन के लिए दिनांक 21 जुलाई, 2017 को 2 घंटे का समय नियत करता हूं.

01.19 बजे.

शासकीय विधि विषयक कार्य

मध्यप्रदेश ग्रामों में की दखलरहित भूमि (विशेष उपबंध) संशोधन विधेयक,2017

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) -- अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश ग्रामों में की दखलरहित भूमि ( विशेष उपबंध ) संशोधन विधेयक, 2017 पर विचार किया जाय.

अध्यक्ष महोदय -- प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ कि मध्यप्रदेश ग्रामों में की दखलरहित भूमि (विशेष उपबंध) संशोधन विधेयक, 2017 पर विचार किया जाय.

प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश ग्रामों में की दखलरहित भूमि (विशेष उपबंध) संशोधन विधेयक, 2017 पर विचार किया जाय.

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

श्री बहादुर सिंह चौहान (महिदपुर) - अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश के ग्रामों की दखलरहित भूमि (विशेष उपबंध) संशोधन विधेयक, 2017 का मैं समर्थन करता हूं. पहले ऐसे गांव में बंजर और जो काश्त योग्य भूमि नहीं थी, वहां उस गांव में निवास करने वाले लोगों ने अपने भवन निर्माण कर लिये थे और उसकी जो अवधि थी वह दिनांक 31 दिसम्बर, 2011 तक थी. इस दखलरहित विधेयक, 2011 के संशोधन करने पर यह अवधि अब मध्यप्रदेश में ऐसे ग्रामवासी, ऐसे गरीब, दलित, शोषित, पीड़ित, जिन्होंने बंजर भूमि पर अपना आशियाना बना लिया और उनको भूमिस्वामी का अधिकार प्राप्त नहीं हो रहा है. इस संशोधन से दिनांक 31 दिसम्बर, 2014 तक यह लागू हो गया है. मध्यप्रदेश में ऐसे गांवों में निवास करने वाले जिन लोगों ने दिनांक 31 दिसम्बर, 2014 तक बंजर भूमि पर, जो काश्त योग्य भूमि नहीं है उस पर अपना आशियाना बना लिया है तो उनको भूमिस्वामी का अधिकार भी इस विधेयक के पास होने के बाद मिल जाएगा. यह हमारे देश के माननीय प्रधानमंत्री जी ने कहा है कि वर्ष 2022 तक हिन्दुस्तान में रहने वाले समस्त लोगों को घर मिलना चाहिए, छत मिलना चाहिए, उसके लिए भी यह विधेयक एक मील का पत्थर साबित होगा.

अध्यक्ष महोदय, देखने में यह आया है कि धीरे-धीरे हर गांव की आबादी बढ़ रही है और नयी-नयी कालोनियां बन रही हैं. चूंकि वे लोग वहां पर रह तो रहे हैं, परन्तु उनके लिए न तो बिजली का कनेक्शन हो पाता है, न उनको अन्य सुविधाएं प्राप्त हो पा रही है. इस विधेयक के पारित होने के बाद, उनको भूमिस्वामी का अधिकार प्राप्त हो जाएगा. यह पहले दिनांक 31 दिसम्बर, 2011 तक ही था. हमारी भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने और माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी ने और विशेषकर हमारे राजस्व मंत्री जी को मैं धन्यवाद देना चाहता हूं कि अब इसकी अवधि दिनांक 31 दिसम्बर, 2011 से बढाकर दिनांक 31 दिसम्बर, 2014 तक कर रहे हैं. इससे मध्यप्रदेश के ऐसे गरीब जिन्होंने बंजर भूमि पर अपना आशियाना बना रखा है, उनको भूमिस्वामी का अधिकार प्राप्त हो जाएगा ताकि सब सुविधाएं वे इस विधेयक के कारण प्राप्त कर पाएंगे. चूंकि अभी तक वे इससे वंचित हैं. अध्यक्ष महोदय, मैं एक बार पुनः आपके माध्यम से राजस्व मंत्री जी का मैं धन्यवाद देना चाहता हूं कि यह बहुत ही अच्छा गरीबों के लिए आप विधेयक लाए हैं, इसलिए धन्यवाद देते हुए मेरी बात को विराम देता हूं. बहुत-बहुत धन्यवाद.

 

श्री दुर्गालाल विजय (श्योपुर) - अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश ग्रामों में दखलरहित भूमि (विशेष उपबंध) संशोधन विधेयक, 2017 जो माननीय मंत्री जी ने प्रस्तुत किया है, इस संशोधन का समर्थन करते हुए मैं निवेदन करना चाहता हूं कि पिछले 203 वर्षों से लगातार इस बात के लिए गांव के लोग मांग करते थे कि वर्ष 2011 के बाद जिन लोगों ने ऐसी भूमि पर अपने रहने का स्थान बना लिया है और जो लगातार 2-3-4 वर्षों से उस पर काबिज हैं. ऐसे लोगों को कोई स्वत्व न प्राप्त होने के कारण से उनको बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था. माननीय मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूं कि ऐसे लोगों के बारे में विचार करके उन्होंने, माननीय मुख्यमंत्री जी ने इस विषय पर कि उन लोगों को भी लाभ प्राप्त हो जाय, जो लोग दिसम्बर, 2014 तक भूमि पर अपना स्थान बनाए हुए हैं..

अध्यक्ष महोदय, इस संशोधन विधेयक के पारित होने के बाद उन लोगों को अपना भूमि स्वामी हक भी प्राप्त होगा जिन्होंने अपने रहने के लिए वर्षों से आवास या छोटी-मोटी झोपड़ी बनायी. ऐसे व्यक्तियों को मप्र की सरकार ने और मप्र के राजस्व विभाग ने जो चिन्ता की है वास्तव में वह धन्यवाद के पात्र है. इस विधेयक के पारित होने के बाद उन लोगों को जो सुविधाएं प्राप्त होना चाहिए, उन सुविधाओं का लाभ भी वह ले सकेंगे.

अध्यक्ष महोदय, जितने स्थानों पर लोगों ने अपने आवास बनाये हैं. ऐसी दखलरहित भूमि पर जिनका कब्जा है उन सब लोगों को भूमि स्वामी स्वत्व मिलने के पश्चात उन्हें शासन की ओर से दी जाने वाली सहायता और सहयोग तो मिलेगा ही लेकिन स्वत्व प्राप्त व्यक्ति की तरह वह जब उस स्थान का उपयोग कर स्वत्वाधिकारी के रुप में करेंगे तो उनके मन में निरन्तर यह भावना बनी रहती है कि हम इस स्थान पर काबिज हैं, कोई हटा देगा अथवा दिसम्बर 2014 तक हम यहां पर रह रहे थे लेकिन फिर भी इसके बाद उनके मन में जो थोड़ा-बहुत डर बना रहता था वह तो दूर होगा ही लेकिन उनकी भावना जो हर व्यक्ति के मन में होती है कि चाहे स्थान छोटा हो या बड़ा हो उसके मन में बड़ी आकांक्षा होती है कि जिस स्थान पर मैं रहता हूं वह मेरे स्वत्व का हो जाये, मालिकाना हक का हो जाये. उसकी भावना के अनुरुप स्वत्वाधिकार देने का जो काम किया जा रहा है वह वास्तव में सराहनीय और प्रशंसनीय है. मैं इस संशोधन विधेयक का समर्थन करते हुए पुनः सरकार को धन्यवाद देता हूं.

श्री भारत सिंह कुशवाह(ग्वालियर-ग्रामीण)-- अध्यक्ष महोदय, मप्र ग्रामों में की दखलरहित भूमि संशोधन 2017 के संबंध में कहना चाहता हूं कि जिस प्रकार से मप्र की सरकार ने माननीय मुख्यमंत्री जी, राजस्व मंत्री जी ने गरीब व्यक्तियों के हित में कई बदलाव किए हैं, उसमें यह संशोधन भी बहुत महत्वपूर्ण है. सरकार की जो सोच है कि गरीबों को जो मध्यप्रदेश में निवासरत् हैं उनके पास रहने के लिए कोई भूमि नहीं है. आवासीय पट्टा नहीं है उसके लिए हमारे राजस्व विभाग ने, राजस्व मंत्री जी ने 2011 तक काबिज लोगों को पट्टे देने का निर्णय लिया है निश्चित रुप से वह स्वागत योग्य है. इसमें मेरा एक अनुरोध और है कि 2011 तक के स्थानीय निवासी जो कच्ची झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं उनको जो पट्टे दिए जा रहे हैं वहां 2011 की जगह वर्ष 2014 किया जाये तो निश्चित रुप से जो गरीब इससे वंचित रह रहे हैं उनको भी इस निर्णय संशोधन का लाभ मिलेगा.

अध्यक्ष महोदय, इसमें मेरा एक सुझाव है. मैं माननीय मंत्री जी से यह भी निवेदन करना चाहूंगा कि पूर्व में राजस्व विभाग की तरफ से एक निर्णय लिया गया था. उस निर्णय के तहत नगर निगम सीमा से 8 किलोमीटर की दूरी के गांव में पट्टे का प्रतिबंध लगा था. इसमें मेरा अनुरोध है कि जिस प्रकार से सरकार की सोच है गांव में ,आबादी में जो लोग रह रहे हैं, उनको भी आवासीय पट्टा मिले. शहर में जो लोग रह रहे हैं उनको भी आवासीय पट्टी मिले. मेरा निवेदन है कि 8 किलोमीटर की दूरी का जो प्रतिबंध लगा हुआ है उसको भी हटाया जाये तो निश्चित रुप से जो ग्राम इस योजना से वंचित रह हैं उनको भी आने वाले समय में इस आवासीय पट्टे का लाभ मिलेगा. जिस प्रकार से माननीय मंत्री जी ने यह निर्णय लिया है उसके लिए मैं सरकार को और माननीय मंत्री जी को बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहूंगा. धन्यवाद.

 

 

(1.30 बजे) अध्यक्षीय घोषणा

सदन के समय में वृद्धि विषयक

अध्यक्ष महोदय - आज की कार्यसूची के पद क्रमांक 7 तक का कार्य पूर्ण होने तक सदन के समय में वृद्धि की जाय. मैं समझता हूं सदन इससे सहमत है.

सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई.

 

शासकीय विधि विषयक कार्य(क्रमश:)

श्री उमाशंकर गुप्ता - माननीय अध्यक्ष महोदय, यह जो संशोधन हम लाये हैं वह 2014 का ही लेकर आये हैं. अभी यह व्यवस्था थी कि 2011 तक जो काबिज थे उन्हीं का ही व्यवस्थापन हो रहा था लेकिन माननीय मुख्यमंत्री जी के ध्यान में यह बात आई और जो भारत सिंह जी ने कहा कि 2014 तक होना चाहिये यह संशोधन विधेयक 2011 से बढ़ाकर 2014 तक का ही है. 31 दिसम्बर,2014 तक जो काबिज हैं उन सबके लिये है.

अध्यक्ष महोदय - उनका कहना है कि गांव की शहर से लगी हुई जमीन का.

श्री भारत सिंह कुशवाह - जी हां.

श्री उमाशंकर गुप्ता - माननीय अध्यक्ष महोदय, इसको दिखवाना पड़ेगा.

अध्यक्ष महोदय - प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश ग्रामों की दखलरहित भूमि(विशेष उपबंध) संशोधन विधेयक,2017 पर विचार किया जाये.

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

अब विधेयक के खण्डों पर विचार होगा.

प्रश्न यह है कि खण्ड 2 तथा 3 इस विधेयक का अंग बने

खण्ड 2 तथा 3 इस विधेयक का अंग बने

प्रश्न यह है कि खण्ड 1 इस विधेयक का अंग बने

खण्ड 1 इस विधेयक का अंग बने

प्रश्न यह है कि पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने

पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने

श्री उमाशंकर गुप्ता - अध्यक्ष महोदय, मैं, प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश ग्रामों की दखलरहित भूमि(विशेष उपबंध) संशोधन विधेयक,2017 पारित किया जाये.

अध्यक्ष महोदय - प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ कि मध्यप्रदेश ग्रामों की दखलरहित भूमि(विशेष उपबंध) संशोधन विधेयक,2017 पारित किया जाये.

प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश ग्रामों की दखलरहित भूमि(विशेष उपबंध) संशोधन विधेयक,2017 पारित किया जाये.

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ

विधेयक पारित हुआ

(2) मध्यप्रदेश जैव अनाशय अपशिष्ट(नियंत्रण)संशोधन विधेयक,2017

(क्रमांक 13 सन् 2017)

पर्यावरण मंत्री(श्री अंतर सिंह आर्य) - अध्यक्ष महोदय, मैं, प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश जैव अनाशय अपशिष्ट(नियंत्रण)संशोधन विधेयक,2017 पर विचार किया जाय.

अध्यक्ष महोदय - प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ कि मध्यप्रदेश जैव अनाशय अपशिष्ट(नियंत्रण) संशोधन विधेयक,2017 पर विचार किया जाय.

श्री दुर्गालाल विजय(श्योपुर) - माननीय अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश सरकार द्वारा मध्यप्रदेश जैव अनाशय अपशिष्ट(नियंत्रण) अधिनियम 2004 के अंतर्गत जो संशोधन विधेयक,2017 प्रस्तुत किया गया है मै उसका समर्थन करता हूं. यह पूरे प्रदेश में प्लास्टिक की थैलीयों पर प्रतिबंध लगाए जाने का प्रस्ताव है और शासन की ओर से जो यह पहल की गई है यह बहुत सराहनीय पहल है. पूरे देश भर में इस बात पर चिंता व्यक्त की जा रही है कि हमारे देश,प्रदेश का पर्यावरण ठीक रहना चाहिये. इस प्रकार के दूषित थैलियां बनाई जाने के कारण कहीं भी जहां कचरा फेंकने का स्थान होता था अथवा दूसरी जगहों पर इन प्लास्टिक की थैलियों में कचरा इकट्ठा होता था इस कारण बहुत सारे पशुओं को भी अपने जीवन से हाथ धोना पड़ा जो इस प्रकार की थैलियों को बिना समझ के कारण खा जाते हैं या वह किसी न किसी प्रकार से उनके शरीर में प्रवेश कर जाती हैं. प्लास्टिक की थैलियों से और भी बहुत सारी मनुष्य के जीवन में रोग पैदा करने वाली परिस्थितियां उत्पन्न हो रही थीं. नासमझी के कारण और विशेष जानकारियां न होने के कारण बहुत सारी ऐसी वस्‍तुयें जो गर्म पदार्थ के रूप में होती हैं, चाहे वह चाय हो, गर्म सब्जियां हों अथवा अन्‍य ऐसे कोई खाद्य पदार्थ जिनको गर्म होने के बाद भी उन थैलियों में डालने के बाद लोग उपयोग करने की दृष्टि से घरों पर ले जाते हैं या ऐसे स्‍थानों पर ले जाते हैं जहां पर बैठकर के उसे ग्रहण करते हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सब लोगों के सामने यह जानकारी आ गई है कि इस प्रकार के गर्म पदार्थों को थैलियों में डालकर और उन पदार्थों को खाने से कई प्रकार के रोगों से लोग ग्रसित हुये हैं और ऐसी-ऐसी गंभीर बीमारियां, केंसर जैसी बीमारी, किडनी का खराब होना, लीवर का खराब होना यह उन थैलियों के कारण से ही हुआ है. उसमें बहुत सारी बातें सबके सामने आई हैं, अनेक कारण रोगों के होते हैं पर रोग को बढ़ाने का एक काम प्‍लास्टिक की थैलियों ने भी किया और सभी लोग इसके जानकार हैं कि बहुत से पशुओं ने इनको खाकर के जान दे दी. बीच में वर्ष 2016 में भारत सरकार के द्वारा एक नियम बनाया गया था, उस नियम में माइक्रो ग्राम की मोटाई का कुछ तय करना बताया गया था, लेकिन प्‍लास्टिक की थैलियों में माइक्रो ग्राम का सुनिश्चित किया जाना बहुत कठिन काम था और उसको ठीक तरह से समझ पाना भी बहुत दिक्‍कत का काम हो जाता था. अब देश के अंदर पर्यावरण ठीक करने की दृष्टि से चिंता की जा रही है. हमारे देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेन्‍द्र मोदी जी लगातार देश में स्‍वच्‍छता का अभियान, राष्‍ट्र के अंदर पर्यावरण शुद्ध रह सके इसका प्रयत्‍न कर रहे हैं और यह सब हम लोगों की भी चिंता का विषय है. इसके कारण मध्‍यप्रदेश की सरकार के द्वारा प्‍लास्टिक की थैलियों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाये लाने की दृष्टि से यह जो संशोधन विधेयक लाया गया है इसका मैं समर्थन करता हूं और मुझे उम्‍मीद है कि पूरा सदन सर्वसम्‍मति से इस संशोधन को पारित करते हुये इस अधिनियम को पारित करते हुये हमारे इस प्रदेश के अंदर प्‍लास्टिक के कैरीबेग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिये सहमत होंगे जिससे आने वाले समय में मानव जीवन में जो बीमारियां इन प्‍लास्टिक की थैलियों के कारण या पशुओं को जो हानि हो रही है उनको मृत्‍यु का भी सामना करना पड़ रहा है, इन सब परिस्थितियों से दूर होने की दृष्टि से बहुत प्रशंसनीय यह फैसला मध्‍यप्रदेश की सरकार के द्वारा लिया गया है. मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी को और माननीय मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्‍यवाद देता हूं कि वास्‍तव में पर्यावरण को ठीक करने की दृष्टि से और मानव जीवन के और पशुओं के संरक्षण की दृष्टि से आपने बहुत अच्‍छा कार्य किया है, बहुत-बहुत धन्‍यवाद. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने बोलने का समय दिया आपको भी बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया (मंदसौर)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैव अनाशय अपशिष्‍ट (नियंत्रण) संशोधन विधेयक 2017, इस संशोधन की महती आवश्‍यकता थी. यदि देश के प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जी स्‍वच्‍छता अभियान को लेकर के आमजन के बीच में जनजागृति पैदा करने की कोशिश करते हैं और मध्‍यप्रदेश के यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री आदरणीय श्री शिवराज सिंह जी चौहान नर्मदा सेवा यात्रा के दौरान ही नदियों के संरक्षण में प्‍लास्टिक की थैलियों की भूमिका को यदि चिन्हित करते हैं और उसके बाद मध्‍यप्रदेश की सरकार के यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री का यदि संकल्‍प हो कि पूरे मध्‍यप्रदेश से उस 50 माइक्रान की मोटाई से कम के कैरीबेग पर प्रतिबंध को लेकर के माननीय अध्‍यक्ष महोदय बिलकुल ठीक बात है कि उस 50 माइक्रो ग्राम भारत सरकार द्वारा प्‍लास्टिक नियम 2016 के अंतर्गत जो नियम बने हुये हैं उसकी आड़ में यह जो 50 माइक्रान से कम की पॉलीथीन कैरीबेग थैलियों का जो प्रचलन था उस पर प्रतिबंध लगाया जाना नितांत आवश्‍यक था. माननीय अध्यक्ष महोदय, मै माननीय मंत्री जी को बधाई और धन्यवाद देना चाहता हूं कि इस विषय पर मंत्री जी की तरफ से मुझे भी बोलने का आग्रह किया गया था.यत्र-तत्र, ईधर-उधर, जिधर देखो, रेलवे स्टेशनों, सार्वजनिक स्थानों, मंदिर इन तमाम परिसरों के आसपास उन नागरिकों के द्वारा जिन्होंने प्रसाद के लिये कैरीबेग-थैली तो प्राप्त कर ली लेकिन उसको फेकने का काम सार्वजनिक स्थान पर करेगा. प्रसाद तो भगवान पर चढ़ा दिया लेकिन उस कैरीबेग का क्या किया जायेगा तो नर्मदा, शिवना, क्षिप्रा, गंभीर इत्यादि में डाल दिया जाये. आप देखते होंगे कि जो फूल माला पुजारियों द्वारा भेंट स्वरूप दी जाती है उसको भी धार्मिक व्यक्ति प्लास्टिक की थैली में रखता है प्रसाद खा लेता है, मिठाई भी बांट देता है लेकिन उसमें जो फूल और माला होती है, जो अनुपयोगी चीज होती हैं उसको सीधा नदी में फेकता है. एक बड़ा प्रदूषण इन थैलियों के कारण से होता था और इनके सेवन से अकारण गाय की मौतें होती थीं. मानव स्वभाव है हमारे घर की जो बची हुई खाद्य सामग्री है, अनुपयोगी है हमने प्लास्टिक की थैली में गठान लगाई और पीछे जाकर के फेंक दी, नगर पालिका के जो टंचिग स्टेशन हैं, कूड़ा कचरा दान रखे रहते हैं, वह भर गये तो कूड़ा कचरा नीचे बिखर जाता है और गाय और अन्य जानवर उसका उपयोग करते थे, जिसके कारण कई गाय और अन्य जानवर असमय ही काल के गाल में समा जाते थे. नगर पालिका, नगर निगम और नगर परिषदों के लिये भी प्लास्टिक की थैलियां एक बड़ा अवरोध है. जब नाली-नालों में बहुतायत संख्या में इन थैलियों का उपयोग करने के बाद फेंक दिया जाता था जहां चेंबर होते है वहां जाली लगी हुई होती है तो यह प्लास्टिक की थैलियां अटक जाती थीं उसके कारण जो सीवेज का पानी है वह बेक वाटरिंग होता था,पानी पीछे पलटकर आ जाता है, उससे नाली भर जाती है, नालियां भर जाने के बाद ऊफान आने पर यही कचरा सड़क पर आ जाता है. उस प्लास्टिक की थैली के कारण जो डॉट लगाने का काम करता था, रूकावट पैदा करने का काम करता है.

माननीय अध्यक्ष महोदय, नगर पालिका, नगर निगम और नगर परिषदों की भी परेशानी थी , इसलिये यह संशोधन विधेयक लाने का कदम प्रशंसनीय और सराहनीय है. माननीय प्रधान मंत्री जी के सपने को साकार करने वाला यह संशोधन विधेयक है. स्वच्छ भारत की जो योजना है उसमें इसको प्रोत्साहन मिलेगा. मध्यप्रदेश की सरकार पहली सरकार है जिसने इतना बड़ा निर्णय लिया है. यह अलग बात है कि प्लास्टिक की थैली के जो उत्पादककर्ता हैं, फेक्ट्री वाले हैं, व्यवसायी हैं उनको परेशानी होगी लेकिन एक नियम बना दिया जायेगा. जैसे ही इस विधेयक को लाने की भूमिका बनी अनेक सामाजिक और स्वयं सेवी संगठनों ने कपड़े और कागज की थैली को बांटना भी प्रारंभ कर दिया. इसलिये यह सराहनीय प्रयास है.

माननीय अध्यक्ष महोदय, एक प्रश्न मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि कुछ अति आवश्यक चीजें होती है उनका विकल्प वे कैसे खोजेंगे. वन और पर्यावरण को संरक्षण देने के लिये हम वानिकी तैयार करते हैं, सामाजिक वानिकी है पौधरोपण का काम करती हैं . पिछले देढ़ दशक से हम देख रहे हैं कि जब हम पौधे लगाने जाते हैं तो प्लास्टिक की थैलियों में ही पौधे को सुरक्षित रखा जाता है. वह 20 माइक्रॉन से कम वाली प्लास्टिक की थैलियां होती हैं क्योंकि बड़ी प्लास्टिक की थैलियां उसमें कारगर नहीं होती क्योंकि उसमें मिट्टी होती है और मिट्टी को पानी चाहिये होता है. जो वानिकी का काम होगा जिसमें प्लास्टिक की थैली का उपयोग होता था इसका विकल्प किस प्रकार खोजा जायेगा यह मंत्री जी से मैं जानना चाहूंगा. कुल मिलाकर के पर्यावरण पर जो प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था उस पर विराम लगेगा. यह एक बड़ा और साहसिक निर्णय है. जो कार्यवाही हो रही थी उस चुनौती को सार्थकता प्रदान करने की सरकार की मंशा है. मै इस संशोधन विधेयक का स्वागत करता हूं और अपने वक्तव्य को समाप्त करता हूं.

पर्यावरण मंत्री (श्री अंतर सिंह आर्य) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक जानकारी पर्यावरण को लेकर देना भी चाहूंगा कि हमारे देश के प्रधानमंत्री जी ने देश में पहली बार मध्‍यप्रदेश के तीन जिलों के तीन विधानसभा क्षेत्रों को क्‍लाइमेट स्‍मार्ट विलेज प्रोजेक्‍ट स्‍वीकृत किया है. मैं ठीक आधे घण्‍टे पहले मध्‍यप्रदेश में जो कार्यशाला लगी है उसकी ओपनिंग करने गया था. मैं इस सदन के माध्‍यम से माननीय प्रधानमंत्री जी का आभार व्‍यक्‍त करता हूं कि यह सौभाग्‍य हमारे मध्‍यप्रदेश को मिला है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय प्रधानमंत्री जी का स्‍वच्‍छ भारत का जो सपना है उसको साकार करने के लिये हमारे प्रदेश के संवेदनशील मुख्‍यमंत्री आदरणीय शिवराज सिंह चौहान ने स्‍वच्‍छता और पर्यावरण को ध्‍यान में रखते हुए 26 जनवरी, 2017 को प्‍लास्टिक कैरीबेग को 01 जुलाई, 2017 से पूर्ण रूप से प्रति‍बंधित करने की घोषणा की थी, उस घोषणा को पूर्ण रूप देते हुए हमने मध्‍यप्रदेश की केबिनेट में अध्‍यादेश लाये और उस अध्‍यादेश को केबिनेट में मंजूर करते हुए भारत सरकार को माननीय महामहिम राष्‍ट्रपति से अनुमति लेने के लिये संशोधन अध्‍यादेश भेजा और उसकी अनुमति प्राप्‍त होने के बाद बीच में हमारी विधानसभा का सत्र नहीं चल रहा था और जी.एस.टी. का विशेष सत्र होने के कारण हम उस विधेयक को यहां पर प्रस्‍तुत नहीं कर पाये थे. हमने अध्‍यादेश के माध्‍यम से 24 मई, 2017 को अधिसूचना जारी करके माननीय प्रधानमंत्री जी के सपने और माननीय मुख्‍यमंत्री जी की घोषणा को 24, मई 2017 से पूरे मध्‍यप्रदेश के अंदर प्‍लास्टिक कैरीबेग को पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कर दिया है और हमने इस विधेयक को संशोधन के लिये विधानसभा में प्रस्‍तुत किया है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी माननीय विधायक सिसोदिया जी चिंता कर रहे थे कि प्‍लांटेशन के अंदर पौध तैयार करने के लिये भी उसका उपयोग किया जाता है, इस संबंध में यह कहना चाहता हूं कि हम उसके ऊपर भी विचार करेंगे. इसके लिये हम पूरे मध्‍यप्रदेश के अंदर धीरे-धीरे जन जागृति नगर पंचायत, नगर निगम और नगर पालिका के सहयोग से लायेंगे और इसके लिये हम पूरा अभियान चला रहे हैं. इसी कृम में हमने 27 जिलों के अंदर करीब 123 कार्यशाला प्रारंभ की थी जिसमें लोगों को जन जागृत किया गया है. हमारा यह अभियान नगर निगम के माध्‍यम से चल रहा है. हमने अभी तक 11.25 टन प्‍लास्टिक कैरीबेग को जप्‍त किया है और कुछ उद्योगों के लाईसेंस निरस्‍त किये हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय मैं आपके माध्‍यम से माननीय सभी सदस्‍यों से अनुरोध करूंगा कि सर्वसम्‍मति से इस विधेयक को पारित करना चाहिए ताकि हम पर्यावरण को बचा सकें क्‍योंकि आज के समय में पर्यावरण को बचाना बहुत आवश्‍यक है.

अध्‍यक्ष महोदय - प्रश्‍न यह है कि मध्यप्रदेश जैव अनाशय अपशिष्ट (नियंत्रण) संशोधन विधेयक, 2017 (क्रमांक 13 सन् 2017) पर विचार किया जाए.

प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ.

अब विधेयक के खण्‍डों पर विचार होगा.

प्रश्‍न यह है कि खण्‍ड 2, 3 तथा 4 इस विधेयक का अंग बने.

खण्‍ड 2, 3 तथा 4 इस विधेयक का अंग बने.

अध्‍यक्ष महोदय - प्रश्‍न यह है कि खण्‍ड 1 इस विधेयक का अंगे बने.

खण्‍ड 1 इस विधेयक का अंगे बना.

अध्‍यक्ष महोदय - प्रश्‍न यह है कि पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंगे बने.

पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बना.

श्री जसवंत सिंह हाड़ा - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, न कहने वाले ही नहीं है तो हां की जीत हुई, यह समझ में नहीं आ रहा है. यह सर्वसम्‍मति से हुआ ऐसा भी तो हो सकता है.

श्री अंतर सिंह आर्य - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूँ कि मध्‍यप्रदेश जैव अनाश्‍य अपशिष्‍ट (नियंत्रण) संशोधन विधेयक, 2017 पारित किया जाये.

अध्‍यक्ष महोदय - प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ कि मध्‍यप्रदेश जैव अनाश्‍य अपशिष्‍ट (नियंत्रण) संशोधन विधेयक, 2017 पारित किया जाए.

प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश जैव अनाश्‍य अपशिष्‍ट (नियंत्रण) संशोधन विधेयक, 2017 पारित किया जाए.

प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ

विधेयक पारित हुआ.

1.51 बजे मंत्री का वक्‍तव्‍य

मध्‍यप्रदेश ट्रेड एण्‍ड इन्‍वेस्‍टमेंट फेसीलिटेशन कार्पोरेशन लिमिटेड एवं समस्‍त एकेवीएन तथा आई.आई.डी.सी. ग्‍वालियर के विलय/पुनर्गठन करने के संबंध में

वाणिज्‍य, उद्योग और रोजगार मंत्री का वक्‍तव्‍य

अध्‍यक्ष महोदय - अब श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल, वाणिजî