मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा त्रयोदश सत्र

 

 

फरवरी-मार्च, 2017 सत्र

 

सोमवार, दिनांक 20 मार्च, 2017

 

(29 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1938)

 

 

[खण्ड- 13 ] [अंक- 14 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

सोमवार, दिनांक 20 मार्च, 2017

 

(29 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1938 )

 

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.02 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

बधाई

होली और रंग पंचमी पर्व की बधाई

डॉ नरोत्तम मिश्र-- अध्यक्ष महोदय, होली और रंग पंचमी की बधाई तथा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और अन्य राज्यों में भाजपा की जीत पर दीवाली के जश्न की बधाई. (मेजों की थपथपाहट)

अध्यक्ष महोदय-- आप सभी को होली और रंग पंचमी की बधाई.

डॉ नरोत्तम मिश्र- पहली बार देश में होली और दीवाली साथ-साथ मनायी गई. देश में लोकतंत्र का महापर्व था.

श्री बाबूलाल गौर--अध्यक्ष जी योगी, राजयोगी बन गए.

श्री जितू पटवारी-- होली और रंग पंचमी की सबको बधाई. देश में संविधान के अनुरुप सरकार चले, इस भावना के साथ उनको शुभकामनाएं.

डॉ नरोत्तम मिश्र-- आप तो उनकी सोचो जो आप डूबन के पंडा ले डूबे जजमान. (हंसी)

तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर

प्रश्न संख्या- 1 (अनुपस्थित)

भोपाल में अवैध नामांतरण पर कार्यवाही

[राजस्व]

2. ( *क्र. 5996 ) श्री हर्ष यादव : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्र.क्र. 2076, दिनांक 29.07.2016 के (ग) उत्‍तर अनुसार रोक के बावजूद 5 ग्रामों में नामांतरण की कार्यवाही कैसे हो गई? (ख) इन अधिकारियों पर अब तक की गई कार्यवाही की अद्यतन स्थिति बतावें? यदि कार्यवाही नहीं की गई तो क्‍यों? (ग) विधि विरूद्ध नामांतरण को ठीक करने के लिए पुनर्विलोकन की अनुमति क्‍या प्रदान कर दी गई है? यदि हाँ, तो इसकी छायाप्रति देवें? यदि नहीं, तो कारण बतावें। प्र.क्र. 2076, दि. 29.07.2016 के (घ) उत्‍तर अनुसार बतावें? (घ) यदि (घ) उत्‍तर (उपरोक्‍तानुसार) में यह माना गया है कि नामांतरण नियम विरूद्ध है तो फिर इसे निरस्‍त क्‍यों नहीं किया गया? इसे कब तक निरस्‍त कर दिया जाएगा? निरस्‍त न करने वाले अधिकारियों पर शासन कब तक कार्यवाही करेगा?

मंत्री, संसदीय कार्य,जल संसाधन एवं जनसंपर्क (डॉ नरोत्तम मिश्र)- अध्यक्ष महोदय,

श्री हर्ष यादव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, राजस्व विभाग का बहुत गंभीर मामला पुनः आया है. यह भोपाल से जुड़ा हुआ है. यह मर्जर भूमि के नामांतरण और बंटवारे के संबंध में है. अध्यक्ष महोदय, 2002 में कलेक्टर ने एक आदेश जारी किया था कि मर्जर भूमि का नामांतरण और बंटवारा नहीं किया जाएगा. उसका पालन नहीं करते हुए मध्यप्रदेश सरकार के जो राजस्व अधिकारी हैं उसमें कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार भी इन्वाल्व हैं. वर्ष 2002 से 2009 तक 13 गांवों के 149 नामांतरण, बंटवारे किए गए. इसमें अरबों रुपये का भ्रष्टाचार हुआ है. यह बहुत गंभीर मामला है. ऐसे मामले पूरे प्रदेश में लगातार हो रहे हैं. सागर के बाद यह दूसरा मामला है जिसमें अरबों रुपये का भ्रष्टाचार राजस्व विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों की मिलीभगत से किया जा रहा है.

अध्यक्ष महोदय-- प्रश्न क्या है?

श्री हर्ष यादव--अध्यक्ष जी, मर्जर की भूमि का नामांतरण, बंटवारा नहीं होता है. इसके लिए स्पष्ट प्रावधान है. कलेक्टर ने आदेश भी जारी किए थे. पिछली बार 29 जुलाई 2016 को इसी सदन में मंत्रीजी ने आश्वासन दिया था कि रजिस्ट्रियां, नामांतरण और बंटवारे हुए हैं, वह सब शून्य किए जाएंगे और संबंधितों पर कार्रवाई की जाएगी. उसके बावजूद भी आज दिनांक तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है. मुझे जो जवाब दिया गया है वह बिलकुल भी संतोषजनक नहीं है. मेरा प्रश्न यह है कि मर्जर भूमि के जो नामांतरण, बंटवारे हुए हैं वह निरस्त किए जाएं, शून्य घोषित किए जाएं और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, निलंबित किए जाएं और जो रिटायर हो गए हैं, उनके पेंशन की राशि जब्त की जाए, रोकी जाए.

संसदीय कार्य मंत्री(डॉ.नरोत्तम मिश्र) - माननीय अध्यक्ष जी, जैसा सम्मानित सदस्य ने कहा है, कुछ लोग रिटायर हो गये हैं, कुछ लोग जीवित भी नहीं हैं, कुछ लोग जी.ए.डी. के कर्मचारी हो गये हैं. यह मामला वर्ष 1950 का है. त्रुटि प्रारम्भ में ही हो गई थी जब 1950 में मर्जर एग्रीमेंट पर अमल होना था. वह अमल उस समय नहीं हो पाया. उसके बाद से यह विसंगति चलती रही. जहां तक इन्होंने कार्यवाही की बात कही है. निश्चित रूप से हमको भी इस मामले में प्रथम दृष्टया दोष प्रतीत होता है. अभी पिछले हफ्ते ही कलेक्टर का पत्र आया है और हम इन सभी अधिकारियों,कर्मचारियों को नोटिस जारी करने वाले हैं.

श्री हर्ष यादव - माननीय अध्यक्ष महोदय, कलेक्टर महोदय ने जो आदेश जारी किया है जो प्रमुख सचिव,राजस्व को लिखा गया है. वह मेरे प्रश्न लगाने के बाद दिनांक 8.3.2017 को लिखा गया है जबकि यह मामला जुलाई में विधान सभा में भी  उठा था और राजस्व मंत्री,माननीय उमाशंकर गुप्ता जी ने जो आश्वासन दिया था. मेरे पास उस प्रश्न की कापी भी है जिसमें उल्लेख किया गया था कि शीघ्र कार्यवाही की जायेगी. 8 महीने तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है. यह सरकार कितनी गंभीर है यह इस बात से प्रतीत होता है. मैं कैसे मान लूं कि उनके खिलाफ कार्यवाही होगी. जब भोपाल कलेक्टर ने दिनांक 8.3.2017 को प्रमुख सचिव,राजस्व को पत्र लिखा उसके बाद अभी तक कार्यवाही क्यों नहीं की गई ? मेरा पहला प्रश्न यह है कि जो नामांतरण,बटवारे जो हुए हैं उनको शून्य घोषित किया जाये ?

डॉ.नरोत्तम मिश्र - माननीय अध्यक्ष महोदय, इसमें पुनर्विलोकन के लिये कर दिया है और एक एन.जी.ओ. हाईकोर्ट में गया हुआ है. इस कारण से उसकी प्रतीक्षा में विलंब हो रहा है.

श्री हर्ष यादव - अध्यक्ष महोदय, मुझे जो जानकारी दी गयी है उसमें कहीं हाईकोर्ट का उल्लेख नहीं किया गया है. आज ही मुझे जवाब मिला है तो मैं कैसे मान लूं कि एन.जी.ओ. हाईकोर्ट गया है.

अध्यक्ष महोदय - जब हाऊस में कहा है तो मानना पड़ेगा.

श्री हर्ष यादव - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा दूसरा प्रश्न यह है कि यह 29 जुलाई का मामला है.

अध्यक्ष महोदय - माननीय गौर साहब,

श्री हर्ष यादव - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा  प्रश्न पूरा नहीं हुआ.

अध्यक्ष महोदय - वह आपके ही विषय को आगे बढ़ा रहे हैं.

श्री बाबूलाल गौर - मैं आपकी ही मदद कर रहा हूं.

अध्यक्ष महोदय - चलिये हर्ष यादव जी आप एक प्रश्न पूछ लीजिये आप भाषण दे रहे हैं एक प्रश्न पूछ लीजिये उसके बाद नहीं पूछने देंगे.

श्री हर्ष यादव - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा सीधा प्रश्न यह है कि नामांतरण,बटवारे शून्य घोषित किये जायें, संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही हो और एक विधान सभा की कमेटी बनाकर इसकी जांच कराई जाये ?

डॉ.नरोत्तम मिश्र - माननीय अध्यक्ष महोदय, बिल्कुल पूरी जांच होगी और जो दोषी होगा उस पर कार्यवाही होगी.

श्री बाबूलाल गौर - माननीय अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रायवेट जमीन को सरकारी कैसे घोषित कर दिया गया ? मेरे पास यह रिकार्ड है और आपकी अनुमति होगी तो मैं उसको पटल पर रख दूंगा कि किस प्रकार से मर्जर के नाम पर लोगों का नामांतरण कर दिया गया, प्रायवेट जमीन का. जो भूमि स्वामी है उसकी वह सम्पत्ति है, वे लोग पाकिस्तान चले गये थे. उसके बाद उनकी जो कस्टोडियन की संपत्ति है, यह वह संपत्ति है. इसको कैसे घोषित कर दिया गया ? और वह संपत्ति अभी भी उन्हीं के नाम दर्ज है जिनका नाम मेरे पास जो सूची है, इसमें लिखा है - हलका-हलालपुर,तहसील-हुजूर निवासी आलतिया हजरत,सुरैया नवाब,गोहर ताज,बेगम ताज ,इस तरह के 18 जो खसरा नम्बर हैं और उसकी जो जमीन है 84 एकड़ 40 डेसीमल, यह प्रायवेट जमीन होते हुए भी इसको मर्जर के अंदर कैसे घोषित कर दिया गया ? क्या उन अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की जायेगी जिन्होंने विधान सभा को गलत उत्तर दिया ? प्रश्न जांच का तो है ही नहीं. प्रश्न यह है कि विधान सभा को सही जानकारी भेजनी चाहिये थी वह क्यों नहीं भेजी गई ?

डॉ.नरोत्तम मिश्र - माननीय अध्यक्ष महोदय, दोनों अलग-अलग विषय हैं.

अध्यक्ष महोदय - एक दूसरे के विपरीत हैं.

डॉ.नरोत्तम मिश्र - माननीय अध्यक्ष महोदय, एकदम एक दूसरे के विपरीत हैं इसलिये मैंने यह बात कही थी कि मामला न्यायालय में भी है और इस मामले की जांच करवा लेते हैं कि वास्तविकता क्या है. जो रिपोर्ट आयेगी और जो दोषी पाया जायेगा वह दण्डित होगा.

अध्यक्ष महोदय - प्रश्न क्र.3 श्रीमती शकुंतला खटीक..(..व्यवधान..) उस पर बहुत लंबी चर्चा हो गई.

श्री जितू पटवारी - माननीय अध्यक्ष महोदय, समय-सीमा क्या होगी ?

अध्यक्ष महोदय - आप बैठ जाएं. आपका प्रश्न नहीं है.

श्री जयवर्द्धन सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, आठ महीने हो चुके हैं इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है. यह बहुत बड़ा मुद्दा है. इसमें बहुत बड़ा भ्रष्टाचार है.

श्री बाला बच्‍चन-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हर्ष यादव जी के लगातार प्रश्‍न लग रहे हैं और इससे संबंधित ही लग रहे हैं और सरकार हमेशा जवाब में भ्रमित करती है, गुमराह करती है. सही उत्‍तर सरकार के द्वारा नहीं आता है. मंत्री जी, आपको समय सीमा बताना चाहिये, आप संसदीय कार्यमंत्री भी हैं. हमारा केवल एक ही सवाल है, एक ही आर्ग्‍यूमेंट है कि इसकी समय सीमा क्‍या रहेगी जिससे कि इस तरह की पुनरावृत्तियां मध्‍यप्रदेश में न हों, इस तरह की घटनायें रूक सकें.

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र)-- न्‍यायालय का निर्णय आते ही कर देंगे.

ओलावृष्टि से क्षतिग्रस्‍त फसलों का मुआवज़ा

[राजस्व]

3. ( *क्र. 4588 ) श्रीमती शकुन्‍तला खटीक : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि () तहसील करैरा एवं नरवर जिला शिवपुरी में माह जनवरी 2017 में किन-किन ग्रामों में ओलावृष्टि होकर क्षति के आंकलन हेतु सर्वेक्षण किया गया। सर्वेक्षण के दौरान अधिकारी/कर्मचारियों के नाम विभाग बताते हुए कहाँ-कहाँ कितने कृषकों की ओलावृष्टि से फसल की क्षति हुई? क्षति का आंकलन (प्रतिशत में) बतायें। () क्‍या दैवीय प्रकोप से क्षति के आंकलन की प्रतिशत नुकसान की जानकारी संबंधित कृषक एवं सार्वजनिक स्‍थानों पर चस्‍पा भी करने का प्रावधान है? () यदि हाँ, तो क्‍या प्रश्‍नांश () के प्रकाश में सभी कृषक एवं सार्वजनिक स्‍थल पर क्षति की प्रति चस्‍पा कृषकगणों को दी गई थी।

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : () तहसील करैरा में ओलावृष्टि से ग्रामों में हुई क्षति एवं क्षति के प्रतिशत के संबंध में जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र "" अनुसार है एवं ओलावृष्टि से हुई क्षति में सर्वेक्षण में संलग्‍न अधिकारी/कर्मचारियों से संबंधित जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र "" अनुसार है। तहसील नरवर के ग्राम अंदोरा के 28 एवं रायपहाड़ी के 41 कृषकों की 10 प्रतिशत तक फसल ओलावृष्टि से नुकसान हुआ है। तहसील नरवर के ग्राम अंदौरा एवं रायपहाड़ी में माह जनवरी 2017 में ओलावृष्टि से हुई क्षति के सर्वेक्षण से संबंधित अधिकारी/कर्मचारियों की जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र "" अनुसार है। () प्रश्‍नांश ''ख'' के प्रकाश में सार्वजनिक स्‍थल पंचायत के नोटिस बोर्ड पर सूची चस्‍पा की गई है । () उत्‍तरांश () के अनुसार प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता ।

परिशिष्ट - HYPERLINK "http://mpvidhansabha.nic.in/house%20proceedings/14-2017-1/4588.pdf"''HYPERLINK "http://mpvidhansabha.nic.in/house%20proceedings/14-2017-1/4588.pdf"एक''

श्रीमती शकुन्‍तला खटीक-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस वर्ष जनवरी माह में ओलावृष्टि से जिन गांवों में नुकसान हुआ है और जो जानकारी मुझे उपलब्‍ध कराई गई है उसमें से दो गांव छूट गये हैं. माननीय मंत्री महोदय, करैरा तहसील के ग्राम टोढ़ा और बदरखा के कई किसानों का 25 से 30 प्रतिशत नुकसान हुआ है. इन गांवों में मैंने स्‍वयं जाकर नुकसान देखा है. माननीय मंत्री महोदय, क्‍या इन दो गांवों को जोड़ने की कृपा करेंगे ?

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अगर पुन: उस गांव का सर्वे होता है तो दिखवा लेंगे, लेकिन फिर भी बहन ने कहा है तो मैं आज ही किसी को भिजवा कर पुन: उन दोनों गांवों का सर्वे करा दूंगा.

श्रीमती शकुन्‍तला खटीक-- माननीय मंत्री महोदय, मैंने उधर जाकर के देखा है, वहां बहुत नुकसान हुआ है. माननीय मंत्री जी, गोरा, बदरखा दोनों गांव आप उसमें जुड़वा दें.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- मैं आपकी बात से सहमत हूं.

अध्‍यक्ष महोदय-- उसकी जांच के लिये आज ही भेज रहे हैं.

उचित मूल्‍य की दुकानों का निर्माण

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

4. ( *क्र. 1669 ) श्री शंकर लाल तिवारी : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि () प्रश्‍नकर्ता के विधान सभा क्षेत्र सतना अंतर्गत किन-किन ग्राम पंचायतों में उचित मूल्‍य की दुकानों के निर्माण को पूर्ण कराया जा चुका है? ग्राम पंचायतवार पूर्णता दिनांक के साथ विवरण दें () किन-किन ग्राम पंचायतों में स्‍वयं की उचित मूल्‍य की दुकानों में खाद्यान्‍न वितरण किया जा रहा है तथा किन-किन ग्राम पंचायतों में दुकान का निर्माण पूर्ण होने के बाद भी बंद पड़ी हैं? () किन-किन ग्राम पंचायतों में शासनादेश के बाद भी उचित मूल्‍य की दुकान ग्राम पंचायत मुख्‍यालय में नहीं खोली गयी है? इसके लिए दोषी कौन है? () दोषी अधिकारी को दण्डित करते हुए कब तक उचित मूल्‍य की दुकान ग्राम पंचायत मुख्‍यालय में खोलना सुनिश्चित कर दिया जायेगा?

खाद्य मंत्री ( श्री ओम प्रकाश धुर्वे ) : () जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। () ग्राम पंचायत कुंआ एवं नीमीवृत्‍त की शासकीय उचित मूल्‍य दुकानों में स्‍वयं के भवन में खाद्यान्‍न वितरण किया जा रहा है। ग्राम पंचायत मांद की दुकान का निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद ग्राम पंचायत द्वारा निर्मित भवन समिति को हस्‍तांतरित नहीं किया गया है। हस्‍तान्‍तरण की प्रक्रिया प्रचलन में है। () विधानसभा सतना के प्रत्‍येक ग्राम पंचायत अंतर्गत शासकीय उचित मूल्‍य दुकान स्‍थापित हैं। मध्‍यप्रदेश सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश, 2015 के 7 (2) के अंतर्गत प्रत्‍येक ग्राम पंचायत के अंतर्गत न्‍यूनतम 1 उचित मूल्‍य दुकान खोलने का प्रावधान है। नियंत्रण आदेश के प्रावधान अनुसार उचित मूल्‍य दुकान के स्‍थान का निर्धारण जिला पंचायत द्वारा किया जाना है। शेष भाग का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। () उत्‍तरांश () के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - HYPERLINK "http://mpvidhansabha.nic.in/house%20proceedings/14-2017-1/1669.pdf"''HYPERLINK "http://mpvidhansabha.nic.in/house%20proceedings/14-2017-1/1669.pdf"दो''

श्री शंकर लाल तिवारी-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर को इस ढंग से दिया गया है कि मैं उसी को पढ़-पढ़ कर परेशान हूं. मैंने प्रश्‍न में पूछा था कि मेरे विधान सभा क्षेत्र के ग्रामीण अंचल में कौन-कौन सी दुकानें स्‍वयं की दुकान में संचालित हो रही हैं और कौन-कौन सी दुकानें मुख्‍यालय में संचालित हो रही हैं. मुख्‍यालय में धारा बता दी गई है कि सब पंचायतों में एक-एक दुकान खोलना है, पर मैंने पूछा है मुख्‍यालय में कितनी जगह दुकान चल रही हैं. दूसरा मेरा प्रश्‍न था कि कौन सी दुकानें स्‍वयं की बिल्डिंग में चल रही हैं. इसमें दो नाम बताये गये कुंआ व नीमीवृत्‍त, बाकी क्षेत्र में कोई दुकान नहीं बनी हैं, यह कब तक बन जायेंगी ? दूसरा एक असत्‍य उत्‍तर आया है, मैंने मंत्री जी को भी यह कागज दिया है. असत्‍य उत्‍तर यह आया है कि रामस्‍थान, मांद और मटेहना इन तीन गांवों में बीआरजीएफ की तरफ से भवन बनाये गये हैं. उत्‍तर में आया है कि वह भवन अपूर्ण हैं, उत्‍तर में आया है कि हस्‍तानांतरण की कार्यवाही चल रही है, जबकि वर्ष 2015 में मांद पंचायत का भवन हस्‍तानांतरित किया जा चुका है और उसके बाद आज वर्ष 2017 चल रहा है, आज उत्‍तर में आ रहा है कि वह हस्‍तानांतरण की प्रक्रिया में है, यह गलत है. मेरी यह बिनती है कि जो भवन मेरे यहां नहीं बने हैं वह बनवाये जायें, पंचायत मुख्‍यालय में दुकानें खोली जायें और यह जो मांद का असत्‍य उत्‍तर आया है कि वर्ष 2015 में तो भवन मिल गया.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप एक-एक करके पूछेंगे तो वह क्‍लीयर होगा.

श्री शंकर लाल तिवारी-- मेरा कहना यही है कि मांद वाले मामले में जो यह कहा गया है कि हस्‍तानांतरण की कार्यवाही चल रही है, इस तरह के कपोल कल्पित उत्‍तर क्‍यों आ रहे हैं. वर्ष 2015 का हस्‍तानांतरण का पत्र मैंने स्‍वयं माननीय मंत्री जी को दिया है.

श्री ओम प्रकाश ध्रुर्वे-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी ने मुझे वर्ष 2015 के हस्‍तांतरण वाले आदेश की प्रति उपलब्‍ध कराई है. मैं माननीय सदस्‍य को आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि एक हफ्ते में आपसे उसका शुभारंभ करवा लिया जायेगा और वहां पर दुकान चालू करवा दी जायेगी.

श्री शंकर लाल तिवारी-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह तो केवल मांद की बात आई. चूंकि मैंने कागज बताये कि हस्‍तानांतरण वर्ष 2015 में हुआ है पर आपके परिशिष्‍ट में जो उत्‍तर आया है उसमें रामस्‍थान है, मटेहना है यहां के भी भवन पूर्ण हो गये हैं. समिति सेवक जो राशन की दुकान के हैं वह अपने स्‍वार्थों के कारण, अपनी काली कमाई के कारण पंचायत मुख्‍यालय में दुकान खोलना नहीं चाहते, शासन के बार-बार निर्देश के बाद भी अधिकारी वहां दुकान नहीं खुलवा पा रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि मेरे पूरे क्षेत्र में जिला पंचायत के मुख्यालयों में दुकान कब तक खोल दी जायेगी मंत्रीजी, यह बता दे और इनके भवन कब तक बन जायेंगे? मांद गांव का मंत्री जी ने बता दिया है लेकिन रामस्थान और मटेहना इन दो गांव में भी भवन पूर्ण हो गये हैं यहां भी दुकाने कब तक खुलवा दी जायेंगी ?

श्री ओम प्रकाश धुर्वे--माननीय अध्यक्ष महोदय, तीनों में एक हप्ते में चालू करवा देंगे.

श्री शंकर लाल तिवारी- अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं आया है, 2015 में दुकान का हस्तानांतरण हो चुका है 2017 तक दुकान नहीं खुली है तो इसके लिये दोषी लोगों को कब तक दंडित कर दिया जायेगा ? इसका उत्तर नहीं आय़ा है.

अध्यक्ष महोदय-- प्रश्न का उत्तर आ गया है. आगे और भी सदस्य के प्रश्न हैं. प्रश्न क्रमांक 5

 

चारागाह की भूमि का आवासीय उपयोग

[राजस्व]

5. ( *क्र. 5128 ) श्री वीरसिंह पंवार : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शासन को ज्ञात है कि कुरवाई विधान सभा क्षेत्र में ग्राम महलुआ चौराहा की भूमि सर्वे नंबर 363/2 रकबा 1.275 मद चारागाह में थी। उसे वर्ष 2011 में रकबा 0.405 आवासीय भूमि क्‍यों बदला गया था? इसमें किन-किन लोगों को आवासीय पट्टे दिये गये? इनका नाम विवरण सहित बतावें। इस भूमि पर किन लोगों ने दुकानें, शोरूम बनाये हैं? (ख) क्‍या शासकीय भूमि के पट्टेधारियों द्वारा भूमि का विक्रय किया गया है जबकि नियमानुसार पट्टे वाली भूमि का विक्रय नहीं किया जा स‍कता है? जो इस तरह की भूमि खरीद कर व्‍यवसाय, धंधा कर रहे हैं, शासन उनके विरूद्ध क्‍या कार्यवाही करेगा? क्‍या उक्‍त भूमि का पट्टा निरस्‍त कर भूमि शासन द्वारा वापिस की जावेगी? (ग) इस मुख्‍य स्‍थान और बेशकीमती जमीन को गौचर के स्‍थान पर आवासीय घोषित क्‍यों किया गया? क्‍या यह व्‍यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने के लिये किया गया था?

 

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) :

 

श्री वीर सिंह पंवार-- अध्यक्ष महोदय, मैंने प्रश्न में जो जानकारी चाही थी उसमें मंत्री जी ने उत्तर बहुत स्पष्ट कर दिया है. पहला प्रश्न यह है कि मेरे क्षेत्र में जो महलुआ चौराहा पाईंट है वहां पर जो व्यवसायिक भूमि थी उसको पट्टे के रूप में पंचायत द्वारा गलत तरीके से दिया गया है और अपात्र लोगों को दिया गया है जिससे पात्र लोग वंचित रह गये हैं. मंत्री जी से अनुरोध है कि अपात्र लोगों को जो पट्टे दिये गये हैं वह निरस्त किये जायें क्योंकि शासन की बेशकीमती जमीन है वहां पर शासकीय भवन या अन्य चीजों के लिये भूमि की आवश्यकता होती है उसके उपयोग के लिये यह जमीन छोड़ी जाये. दूसरा प्रश्न मेरा यह है कि जो आवासीय पट्टे दिये गये हैं इसमें आवासीय उपयोग होना चाहिये किंतु वहां पर शो रूम बनाकर के उसका व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है. मंत्री जी आवासीय पट्टे निरस्त करते हुये गलत तरीके से जिन्होंने पट्टा वितरण किया है उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की जाये.

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ.नरोत्तम मिश्र) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, सम्मानित सदस्य ने जैसा कहा है कि अपात्र लोगों को पट्टे दिये गये हैं और आवासीय के स्थान पर व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है हम भोपाल से एडिशनल कमिश्नर को भेजकर के उसकी जांच करा लेंगे. अगर पट्टे गलत दिये गये हैं तो उनका अतिक्रमण हटायेंगे.

श्री वीर सिंह पंवार- मंत्री जी इसके लिये आपको धन्यवाद. एक निवेदन और है कि जो जांच कमेटी जांए वह मुझे एक बार सूचना अवश्य कर दें.

डॉ.नरोत्तम मिश्र - सम्मानित विधायक को सूचना करके जायेंगी.

श्री वीरसिंह पंवार- बहुत बहुत धन्यवाद.

पूर्व जिला प्रबंधक कटनी के विरूद्ध दण्‍डात्‍मक कार्यवाही

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

6. ( *क्र. 6106 ) श्रीमती शीला त्‍यागी : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या नागरिक आपूर्ति निगम कटनी एवं रीवा में पदस्‍थ जिला प्रबंधक श्री शम्‍भू प्रसाद गुप्‍ता द्वारा अपने विभाग की महिला कर्मचारी श्रीमती रश्‍मि‍ जायसवाल के साथ किये गये अभद्र व्‍यवहार की घटना पश्‍चात् दिनांक 11-09-2015 को इनके विरूद्ध कोतवाली कटनी में अपराधिक प्रकरण क्र. 861/15 पंजीबद्ध किया गया है, तत्‍पश्‍चात् उक्‍त अधिकारी द्वारा न्‍यायालय में चालान प्रस्‍तुत पश्‍चात् जमानत करा ली गई है? (ख) प्रश्‍नांश (क) यदि हाँ, तो क्‍या उक्‍त प्रकरण में प्रमुख सचिव, खाद्य एवं उपभोक्‍ता संरक्षण द्वारा पत्र क्र. आर./4129/2775/2015, दिनांक 13-10-2015 से विभाग के प्रबंध संचालक को विभागीय अनियमितता एवं भ्रष्‍टाचार की जाँच तथा अनुशासनात्‍मक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया था? (ग) प्रश्‍नांश () के संदर्भ में यह बतायें की उपरोक्‍त प्रकरण में कार्यवाही न करते हुए प्रबंध संचालक नागरिक आपूर्ति निगम भोपाल द्वारा श्री गुप्‍ता को संभागीय मुख्‍यालय रीवा में दण्‍ड के बजाय पुरस्‍कृत कर पदस्‍थापना दी गई है? पदस्‍थापना आदेश की प्रति देवें। (घ) प्रश्‍नांश (क) (ख) एवं (ग) के संदर्भ में उक्‍त प्रकरण में शासन द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई है। ऐसे भ्रष्‍ट अधिकारी के विरूद्ध कौन-सी दण्‍डात्‍मक कार्यवाही करेंगे तथा ऐसे अधिकारी को संरक्षण देने वाला कौन अधिकारी है? दोनों के विरूद्ध कौन-सी कार्यवाही की जावेगी? समय-सीमा बतायें।

खाद्य मंत्री ( श्री ओम प्रकाश धुर्वे ) : (क) कार्पोरेशन में आउटर्सोसिंग से पूर्व में पदस्‍थ श्रीमती रश्मि जायसवाल द्वारा श्री एस.पी. गुप्‍ता के विरूद्ध थाना कोतवाली जिला कटनी में शिकायत करने पर थाना कोतवाली जिला कटनी द्वारा प्रथम सूचना प्रतिवेदन क्रमांक 861/2015 दिनांक 11.09.2015 पंजीबद्ध की गई है। श्री गुप्‍ता द्वारा माननीय उच्‍च न्‍यायालय जबलपुर से दिनांक 14.10.2015 को अग्रिम जमानत प्राप्‍त की गई है। (ख) प्रबंध संचालक को विभाग द्वारा पत्र क्रमांक आर. 4129/2775/2015/29-2 दिनांक 13.10.2015 से कटनी जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2014-15 में उपार्जित धान का भंडारण, भंडारण नीति के विपरीत कराये जाने के संबंध में प्राप्‍त शिकायत का जाँच प्रतिवेदन प्रेषित करते हुए जिला प्रबंधक मध्‍यप्रदेश स्‍टेट सिविल सप्‍लाईज कार्पोरेशन कटनी के विरूद्ध अनुशासनात्‍मक कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया गया था। (ग) प्रश्‍नांश (ख) में उल्‍लेखित प्रमुख सचिव के पत्र दिनांक 13.10.2015 के परिपालन में प्रबंध संचालक द्वारा कार्यवाही करते हुए श्री एस.पी. गुप्‍ता, तत्‍कालीन जिला प्रबंधक कटनी को कार्पोरेशन के ज्ञाप क्रमांक/स्‍था./2016/2026 दिनांक 23.02.2016 द्वारा कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया, श्री गुप्‍ता द्वारा प्रस्‍तुत प्रति उत्‍तर दिनांक 09.03.2016 समाधान कारक नहीं पाये जाने पर कार्पोरेशन के आदेश क्रमांक/स्‍था./2016/124 भोपाल दिनांक 25.04.2016 द्वारा श्री गुप्‍ता के विरूद्ध एक वार्षिक वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोके जाने की शास्ति अधिरोपित कर दंडात्‍मक कार्यवाही की गई। श्री गुप्‍ता को कार्पोरेशन के आदेश क्रमांक/स्‍था./2016/2244, दिनांक 22.03.2016 के द्वारा जिला कार्यालय कटनी से मुख्‍यालय भोपाल पदस्‍थ किया गया, इसके बाद मुख्‍यालय भोपाल से जिला कार्यालय बैतूल पदस्‍थ किया गया। आदेश क्रमांक स्‍थापना/2016/540, दिनांक 10.06.2016 से श्री गुप्‍ता को बैतूल से जबलपुर पदस्‍थ करने का आदेश जारी किया गया। जिसे आदेश क्रमांक स्‍थापना/2016/636 दिनांक 25.06.2016 से निरस्‍त किया गया। पश्‍चात् में आदेश क्रमांक/स्‍था./टी-2/2016/2064 दिनांक 18.11.2016 के द्वारा श्री गुप्‍ता को जिला कार्यालय बैतूल से जिला कार्यालय रीवा पदस्‍थ किया गया है। उक्‍त सभी स्‍थानांतरण प्रशासनिक तौर पर किये गये हैं। आदेश की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (घ) प्रश्‍नांश (क) प्रकरण न्‍यायालयीन है। प्रश्‍नांश () एवं () के परिप्रेक्ष्‍य में नियमानुसार विभागीय दण्‍डात्‍मक कार्यवाही की गई है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्रीमती शीला त्यागी-- माननीय अध्यक्ष महोदय,मैं आपके माध्यम से मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहती हूं कि मेरे प्रश्न का जवाब थोड़ा संतोषजनक दिया है.लेकिन मेरे दो पूरक प्रश्न हैं. पहला यह है कि रीवा जिले में खाद्य, नागरिक एवं आपूर्ति उपभोक्ता संरक्षण विभाग में हो रहे भ्रष्टाचार को रोकने के लिये क्या कोई विशेष जांच समिति का गठन करेंगे. दूसरा प्रश्न है कि जांच के उपरांत दोषी अधिकारी एवं कर्मचारी के विरूद्ध क्या कार्यवाही करेंगे.

अध्यक्ष महोदय- पहले जांच कमेटी की बात पर मंत्री जी हां तो करें. फिर जांच उपरांत की बात आयेगी.

श्रीमती शीला त्यागी-- अध्यक्ष महोदय, वह तो हां करेंगे ही, बहुत अच्छे हैं मंत्री जी.(हंसी).

श्री ओम प्रकाश धुर्वे-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्या का पिछले समय में प्रश्न था उसमें उत्तर आ गया है.जांच करके दोनों पर कार्यवाही की जा चुकी है.

श्रीमती शीला त्यागी--अध्यक्ष महोदय, कार्यवाही तो हुई लेकिन हटाया नहीं गया है.मंत्री जी बतायें कि आप उनको कब तक निलंबित करेंगे. आप सदन में घोषणा तो कर देते हैं, आप गंभीर हैं, चिंतनीय हैं, समाज के प्रति अच्छी सोच है आपकी, लेकिन आपका विभाग बिल्कुल आपके स्वभाव के विपरीत कार्य कर रहा है. अभी तक विभाग ने उनको निलंबित क्यों नहीं किया. वे अभी तक क्यों नहीं हटाये गये.

अध्यक्ष महोदय- यह कोई प्रश्न नहीं है.

श्रीमती शीला त्यागी- मंत्री जी , बतायें कि आपने अभी तक क्यों नहीं हटाया.इसी सदन में आपने घोषणा की और अभी तक कोई कार्यवाही विभाग ने क्यों नहीं की ?

श्री ओम प्रकाश धुर्वे--अध्यक्ष महोदय,दो तीन दिन में हटा देंगे. प्रमुख सचिव अवकाश पर हैं.

श्रीमती शीला त्यागी- दो तीन दिन क्यों, 15 लगाये हुये 15 से अधिक दिन हो गये हैं. भ्रष्टाचार मुक्त करना चाहते हैं तो जो विधानसभा में मंत्री जी के द्वारा घोषणा होती है उसका पालन क्यों नहीं होता है. मैं आपका संरक्षण चाहती हूं कि भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्यवाही की जाये और यह जो मेरा आज का प्रश्न है उसमें जांच के समय मुझे रखा जायेगा.

अध्यक्ष महोदय- कार्यवाही तो उसमें हो गई है. आपके प्रश्न का समाधान हो गया है.

श्रीमती शीला त्यागी- अध्यक्ष महोदय, उसके लिये आपको और मंत्री जी को धन्यवाद.

तहसील चीनोर में नामांतरण प्रकरणों की प्रविष्‍टि‍

[राजस्व]

7. ( *क्र. 6353 ) श्री लाखन सिंह यादव : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अनुविभागीय अधिकारी राजस्‍व अनुविभाग भितरवार जिला ग्‍वालियर द्वारा प्रकरण क्रमांक 17/14-15/अपील आदेश दिनांक 21/7/2016 को मिश्रोबाई वेबा छत्रपाल कुशवाह वगैराह निवासी ग्राम चीनोर तहसील चीनोर को वसीयत के आधार पर नामान्‍तरण किये जाने का आदेश पारित किया था? क्‍या आदेश का पालन तत्‍कालीन तहसीलदार ने अमल किया था? यदि हाँ, तो किस तारीख में स्‍पष्‍ट करें? क्‍या प्रश्‍न दिनांक तक कम्‍प्‍यूटर पर अमल किया गया है? यदि नहीं, तो क्‍यों? क्‍या वर्तमान तहसीलदार द्वारा कम्‍प्‍यूटर पर अमल न करने के पीछे कोई भ्रष्‍टाचार की मंशा है? यदि नहीं, तो फिर अभी तक अमल न करने का क्‍या कारण है? स्‍पष्‍ट करें (ख) क्‍या (क) प्रकरण में अभी तक अमल न कराने में वर्तमान तहसीलदार दोषी है? यदि हाँ, तो क्‍या दोषी के प्रति कोई दण्‍डात्‍मक कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो क्‍या और कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों? (ग) तहसील चीनोर में नामान्‍तरण तथा बंटवारे से सम्‍बंधित प्रश्‍न दिनांक तक कितने प्रकरण किस कारण से लंबित हैं, इन लंबित प्रकरणों का कब तक निराकरण कर नामान्‍तरण एवं बंटवारा करा दिया जावेगा?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जी हाँ। उक्‍त आदेश का तत्‍कालीन तहसीलदार द्वारा अमल नहीं किया गया, क्‍योंकि अनुविभागीय अधिकारी भितरवार द्वारा प्रकरण क्रमांक 17/14-15/अपील में पारित आदेश दिनांक 21.07.2016 की प्रति के साथ तहसील चीनोर की नामांतरण पंजी वापिस की जाना थी, किन्‍तु इसी नामांतरण पंजी की आवश्‍यकता अनुविभागीय दण्‍डाधिकारी न्‍यायालय में प्रचलित एक अन्‍य प्रकरण क्रमांक 10/15-16/अपील में होने के कारण यह पंजी प्रवाचक द्वारा इस प्रकरण में संलग्‍न कर दी गई, इस कारण प्रकरण क्रमांक 17/14-15/अपील आदेश दिनांक 21.07.2016 का कम्‍प्‍यूटर में अमल होने में विलंब हुआ। भष्‍टाचार की कोई मंशा नहीं है। (ख) जी नहीं। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) तहसील न्‍यायालय चीनोर में वर्तमान में नामांतरण के 23 एवं बंटवारा के 07 प्रकरण विवादित होने के कारण लंबित हैं, जिनमें जाँच एवं युक्तियुक्‍त सुनवाई उपरांत विधि अनुकूल निराकरण किया जायेगा।

श्री लाखन सिंह यादव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं बड़ी बिडम्‍बना के रूप में आपके बीच में बात रख रहा हूं. आज रात को 10 बजे माननीय मंत्री जी ने एक छोटी झींगा मछली के रूप में उसकी हत्‍या कर दी है और जो बड़ी बड़ी व्‍हेल और मगरमच्‍छ रूपी मछली है, उन्‍हें चुनने और चरने के लिए मेरे विधान सभा क्षेत्र में छोड़ रखा है. आज रात को आपने जिस छोटे से कर्मचारी को सस्‍पेंड कर दिया, मुझे नहीं लगता कि आपने सही किया है. एक बड़े स्‍तर के अधिकारी को सस्‍पेंड करना चाहिए था, जिन्‍होंने बड़े स्‍तर पर भ्रष्‍टाचार किया है लेकिन एक पटवारी को आपने सस्‍पेंड किया है, उसको 100 प्रतिशत आपने गलत सस्‍पेंड किया है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय मेरा प्रश्‍न था कि भितरवार तहसील में प्रकरण क्रमांक 17/14-15 एक अपील नामांतरण के लिए की गई थी. मैं यह जानना चाहता हूं कि वह नामांतरण आज दिनांक तक हुआ है या नहीं हुआ, यदि हुआ है तो किस तारीख को हुआ है. पहले आप यह बता दें बाकी दो तीन प्रश्‍न मैं बाद में कर लूंगा.

अध्‍यक्ष महोदय - दो तीन.

श्री लाखन सिंह यादव - अध्‍यक्ष महोदय, बहुत महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न है.

संसदीय कार्यमंत्री (डॉ नरोत्‍तम मिश्र) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो पटवारी थे, उन्‍होंने इस नामांतरण को नीचे से पुष्टि करते हुए, जो छत्रपाल सिंह जी दिवंगत हो गए थे तो 13 खसरे थे, उनको 14 खसरे करके तहसीलदार को भेजा, इसलिए पटवारी ने जो एक अतिरिक्‍त खसरा जोड़ा है प्रारंभिक त्रुटि वहीं से हुई है, इस कारण से पटवारी को निलंबित किया गया है. हम यह नहीं कर रहे कि ऊपर त्रुटि नहीं हुई है.

श्री लाखन सिंह यादव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने एक बात और रखी थी, पूरा उत्‍तर तो दे दें माननीय मंत्री जी. मैंने यह कहा था कि यह नामांतरण हो गया है कि नहीं हुआ है.

डॉ नरोत्‍तम मिश्र - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब यह संज्ञान में आ गया कि यह गलत हो गया है तो इसको कलेक्‍टर से पुन: अनुमति लेने के लिए रोका गया है कि खसरा 13 और 14 को अलग किया जा सके, जिससे गलती न हो.

श्री लाखन सिंह यादव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी असत्‍य जानकारी दे रहे हैं. मैंने मंत्री जी को रात को भी इस बात के लिए अवगत कराया था कि आपको गलत जानकारी दी गई है. मेरे पास प्रूफ है, दिनांक 11/08/2016 को यह नामांतरण हो गया है और आप सदन में असत्‍य जानकारी दे रहे हैं कि नामांतरण हुआ ही नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय - कलेक्‍टर से अनुमति मांगी है.

श्री लाखन सिंह यादव - माननीय अध्‍यक्ष, आप मेरी बात तो सुन लें यह नामांतरण दिनांक 11/08/2016 को हो चुका है, साढ़े छ: महीने हो गए अभी तक आपके तहसीलदार ने सिर्फ 30 हजार रूपए के चक्‍कर में इसको पेंडिंग रखा है और पर्टिक्‍यूलर उसी को डिलीट करा दिया है. मेरे पास रसीद है.

अध्‍यक्ष महोदय - आपका प्रश्‍न क्‍या है.

श्री लाखन सिंह यादव - माननीय अध्‍यक्ष्‍ाय, मेरा प्रश्‍न यह है कि जब दिनांक 11/08/2016 को इसका नामांतरण हो चुका है तो अभी तक यह अमल में क्‍यों नहीं आया. इसलिए अमल में नहीं आया क्‍योंकि उस तहसीलदार को अभी तक 30 हजार रूपए नहीं मिले. मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि ऐसे भ्रष्‍ट अधिकारी के विरूद्ध तत्‍काल कार्यवाही होनी चाहिए.

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सुधार करके कब तक अमल करवा देंगे यही उत्‍तर दिलवा दीजिए.

डॉ नरोत्‍तम मिश्र - माननीय अध्‍यक्ष्‍ा महोदय, एक सप्‍ताह में अमल करवा देंगे.

श्री लाखन सिंह यादव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप मेरी बात सुनना नहीं चाहा रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - आपकी बात सुनी जा रही है, लेकिन आप भाषण दे रहे हैं, आप प्रश्‍न पूछिए, आप भाषण देते हैं (हंसी ...)

श्री लाखन सिंह यादव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, भाषण नहीं दे रहा हूं, मुझे आपका संरक्षण चाहिए, यह अधिकारी बहुत बड़ा भ्रष्‍टाचारी है, यदि मंत्री जी उसको हटा नहीं रहे हैं, उसके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं करना चाहा रहे हैं और यदि वह इतना अच्‍छा अधिकारी है तो दतिया ले जाओ न उसको, (XXX). माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न का जबाव नहीं आया है.

डॉ नरोत्‍तम मिश्र - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक बात यह कहना चाहा रहा हूं कि माननीय सदस्‍य ने कहा कि यह मामला साढ़े छ: महीने से लंबित है, जबकि तहसीलदार को वहां गए 6 महीने ही हुए हैं.

श्री लाखन सिंह यादव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तहसीलदार को वहां गए 6 महीने से ज्‍यादा हो गए हैं. अध्‍यक्ष महोदय, इसका कुछ तो जबाव दिलवा दीजिए, उसको हटवा दीजिए वहां से. (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय - आप इस तरह से आरोप नहीं लगा सकते, आपको बहुत समय दिया है .

श्री लाखन सिंह यादव - अध्‍यक्ष महोदय, मैं और क्‍या कहूं. (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय - आप दस रूप से प्रश्‍न पूछ रहे हैं और भी सदस्यों के प्रश्न हैं. सबके महत्वपूर्ण हैं. इस तरह से आप आरोप नहीं लगा सकते. क्या और सदस्यों के प्रश्न महत्वपूर्ण नहीं हैं. आपका ही प्रश्न महत्वपूर्ण है. आप एक ही प्रश्न पर बहस करेंगे. प्रश्न संख्या 8. श्री सुखेन्द्र सिंह. आप प्रश्न पूछिये.

..(व्यवधान)..

श्री लाखन सिंह यादव -- (xxx)

अध्यक्ष महोदय -- आप भाषण दे रहे हैं.

श्री लाखन सिंह यादव -- अध्यक्ष महोदय, हम यह कह रहे हैं कि उसकी जांच करवा लें. जांच कराने में क्या दिक्कत है.

अध्यक्ष महोदय -- यह सब रिकार्ड में नहीं आयेगा. प्रश्न संख्या 8. श्री सुखेन्द्र सिंह.

श्री लाखन सिंह यादव -- अध्यक्ष महोदय, यह तो बहुत गलत हो रहा है. हम लोगों के प्रश्न करने का फिर कोई मतलब ही नहीं है. फिर हम प्रश्न काहे के लिये लगा रहे हैं.

श्री बाला बच्चन -- अध्यक्ष महोदय, कृपया उनको उत्तर दिलवा दीजिये.

अध्यक्ष महोदय -- आप बताइये कि उनको बहुत समय दिया कि नहीं दिया.

श्री बाला बच्चन -- अध्यक्ष महोदय, आपने वक्त दिया, लेकिन उनका उत्तर नहीं आ पाया.

अध्यक्ष महोदय -- उन्होंने बजाये प्रश्न के भाषण किया. आप उनको वहां ले जायें, यहां ले जायें. मैं कह रहा हूं कि आप पाइंटेड प्रश्न पूछिये. वह पूछते नहीं हैं.

श्री बाला बच्चन -- अध्यक्ष महोदय, एक प्रश्न का भी उत्तर नहीं आया. आप प्रश्न का उत्तर दिलवा दीजिये.

अध्यक्ष महोदय -- नहीं सब प्रश्न के उत्तर आये हैं. प्रश्न संख्या 8.

..(व्यवधान)..

डॉ. गोविन्द सिंह -- अध्यक्ष महोदय, जब इसमें तहसीलदार ने गलत जानकारी दी, तो क्या उसकी आप जांच नहीं करा सकते. आप जांच तो करा सकते हैं.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- गोविन्द सिंह जी, हां जांच करा सकते हैं, जांच करायेंगे.

श्री लाखन सिंह यादव -- अध्यक्ष महोदय, क्या जांच करायेंगे.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- जो गोविन्द सिंह जी ने कहा और आपने जांच कराने का कहा , वह मैं कह रहा हूं कि जांच करायेंगे.

श्री लाखन सिंह यादव -- अध्यक्ष महोदय, जो जांच करायेंगे, उसमे हमें भी शामिल करेंगे.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- आपको शामिल नहीं करेंगे.

श्री रामनिवास रावत -- जांच कौन करेगा.

अध्यक्ष महोदय -- प्रश्न संख्या 8. श्री सुखेन्द्र सिंह.

''द्वार प्रदाय योजना'' अंतर्गत खाद्यान्‍न वितरण

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

8. ( *क्र. 3491 ) श्री सुखेन्‍द्र सिंह : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) गरीबों का सस्‍ता खाद्यान्न राशन की दुकान तक पहुंचाने के वाहनों में जी.पी.एस. सिस्‍टम लगाने का आदेश शासन एवं जिला प्रशासन को कब जारी किया गया था? आदेश की प्रति उपलब्‍ध करावें क्‍या विधानसभा चुनाव के समय इन वाहनों से जी.पी.एस. सिस्‍टम निकाल दिये गये जो दुबारा वाहनों में नहीं लगाये गये? (ख) क्‍या प्रश्‍नांश (क) के प्रकाश में नागरिक आपूर्ति निगम ''द्वार प्रदाय योजना'' में खाद्यान्न दुकान तक पहुँचा रहा है? यदि हाँ, तो यह नियम कब से प्रारंभ किया गया? आदेश की प्रति उपलब्‍ध करावें क्‍या लीड समितियों के परिवहन के दौरान इन्‍हीं परिवहनकर्ताओं के वाहन पर जी.पी.एस. सिस्‍टम लगे थे? यदि हाँ, तो ''द्वार प्रदाय योजना'' के प्रारंभ पर जी.पी.एस. क्‍यों नहीं लगे? कारण स्‍पष्‍ट करें। (ग) प्रश्‍नांश (ख) के प्रकाश में ''द्वार प्रदाय योजना'' प्रारंभ होने के बाद 8 महीने में खाद्यान्न चोरी के दो बड़े मामले हुये, जिसमें नागरिक आपूर्ति निगम से निकला राशन मई में लालगांव सेवा सहकारी समिति की दुकान में गेहूँ नहीं पहुंच कर वापस वेयर हाउस में पहुंच कर खरीदी के गेहूँ में बदलकर जमा हो रहा था? जिसे खाद्य विभाग ने पकड़ा था? अक्‍टूबर में खाद्यान्न रायपुर कर्चुलियान एवं गंगेव के लिये निकला जो सीधे मिर्जापुर जा रहा था, जिसे पुलिस ने हनुमना बार्डर में पकड़ा था? (घ) प्रश्‍नांश (ग) के प्रकाश में क्‍या पुलिस द्वारा एफ.आई.आर. दर्ज की गयी है एवं प्रश्‍न दिनांक तक (दोनों प्रकरण) में की गई कार्यवाही की जानकारी उपलब्‍ध करावें? प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) के प्रकाश में जी.पी.एस. सिस्‍टम नहीं लगवाने के लिये कौन से कर्मचारी अधिकारी जिम्‍मेदार हैं? जिम्‍मेदार के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही प्रस्‍तावित की गई? अगर नहीं हुई तो प्रकरण की जाँच का आदेश देकर जाँच करायेंगे? यदि हाँ, तो समय-सीमा बतावें? यदि नहीं, तो क्‍यों?

खाद्य मंत्री ( श्री ओम प्रकाश धुर्वे ) : (क) जी हाँ, सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत खाद्यान्न परिवहन के लिये वाहनों में जी.पी.एस. सिस्टम लगाने हेतु म.प्र. शासन, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण विभाग के आदेश क्र. 997 दिनांक 04.02.2012 एवं कार्यालय जिला कलेक्‍टर (खाद्य) जिला रीवा के आदेश क्र. 317 दिनांक 23.02.2012 द्वारा जारी किया गया था। आदेश की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। जिला रीवा में विधानसभा चुनाव के समय लीड संस्था द्वारा परिवहन कार्य में लगे वाहनों से चुनाव कार्य में उपयोग हेतु जी.पी.एस. सिस्टम निकाले गये थे, जो दुबारा वाहनों में नहीं लगाये गये। (ख) जी हाँ, शासन निर्देश क्र. एफ-7-17/2014/29-1 दिनांक 02.07.2014 के अनुपालन में जिला रीवा में मध्‍यप्रदेश स्‍टेट सिविल सप्‍लाईज कारपोरेशन लिमिटेड द्वारा माह सितम्बर 2014 से ''द्वार प्रदाय योजना'' के अंतर्गत खाद्यान्न उचित मूल्‍य दुकानों तक पहुंचाया जा रहा है। आदेश की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। जी हाँ, पूर्व में लीड समितियों के परिवहन के दौरान वर्तमान में संचालित ''द्वार प्रदाय योजना'' के परिवहनकर्ताओं के कुछ वाहन परिवहन कार्य में लगे थे, जिनमें जी.पी.एस. सिस्टम लगे थे। विभागीय समीक्षा बैठक दिनांक 23.05.2014 में लिये गये निर्णय अनुसार परिवहन हेतु उपयोग में लाये गये वाहनो में जी.पी.एस. सिस्टम लगाने का विचार प्रासंगिक नहीं होने के कारण वाहनो में जी.पी.एस. सिस्टम लगाने हेतु निर्देश ''द्वार प्रदाय योजना'' के अंतर्गत जारी नहीं किये गये। (ग) जी हाँ। (घ) जी हाँ, प्रश्नांश () के परिप्रेक्ष्‍य में पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज की गई है। प्रश्न दिनांक तक लालगाँव सेवा सहकारी समिति की उचित मूल्‍य दुकान को भेजा गया गेहूँ, जो लालगाँव खरीदी केन्द्र के माध्यम से चोरहटा एग्रोटेक गोदाम में जमा कराया जा रहा था, के प्रकरण में माननीय उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत हेतु प्रस्तुत याचिका में माननीय न्यायालय द्वारा विवेचक को मय-केस डायरी तलब की जाकर आरोपियों को अग्रिम अन्तरिम जमानत दी गई थी। तत्‍पश्‍चात् पुलिस द्वारा मय-केस डायरी माननीय न्यायालय में विवेचना हेतु प्रस्तुत किये गये थे, जिसमें माननीय उच्च न्यायालय द्वारा आरोपियों की अग्रिम जमानत खारिज कर गिरफ्तारी के आदेश जारी किये गये हैं। उक्‍त में वर्तमान में पुलिस द्वारा फरार आरोपी की तलाश एवं प्रकरण की विवेचना की जा रही है। हनुमना थाने में दर्ज प्राथमिकी में 17 आरोपी में से 11 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं, शेष में पुलिस द्वारा विवेचना की जा रही है। उपरोक्‍त दोनों प्रकरणों में मध्‍यप्रदेश स्‍टेट सिविल सप्‍लाईज कारपोरेशन लिमिटेड द्वारा संबंधित परिवहनकर्ताओं को काली सूचीबद्ध किया गया। उत्‍तरांश (ख) के उत्‍तर के आधार पर शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्री सुखेन्द्र सिंह -- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न खाद्यान्न की काला बाजारी में पकड़े गये बिना जीपीएस सिस्टम से संबंधित है, जिसमें मंत्री जी ने जितने भी हमने प्रश्न किये थे, उसमें सबका जवाब जी हां में दिया है, निश्चित रुप से स्वीकार किया है. लेकिन इसमें मेरा प्रश्न यह है कि खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्रालय, भोपाल के दिनांक 23 जनवरी,2012 के आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि जीपीएस सिस्टम स्थापित किया जावेगा, जो सदैव सुरक्षित तथा चालू हालत में रहेगा, किन्तु रीवा जिले में विधान सभा चुनाव,2013 के पहले जीपीएस यंत्र निकाले गये थे और चुनाव समाप्ति के बाद फिर उनको नहीं लगाया गया. यह भी मंत्री जी ने स्वीकारा है. तो जीपीएस यंत्र नहीं लगाने में कौन दोषी है, उन पर क्या कार्यवाही हुई, मैं इसका जवाब मंत्री जी से चाहता हूं.

श्री ओमप्रकाश धुर्वे -- अध्यक्ष महोदय, विभागीय समीक्षा बैठक दिनांक 23.5.2014 में लिये गये निर्णय अनुसार परिवहन वाहनों में जीपीएस सिस्टम को व्यावहारिक नहीं माना गया था, इसलिये वाहनों में पुनः जीपीएस सिस्टम नहीं लगे.

श्री सुखेन्द्र सिंह -- अध्यक्ष महोदय, तो क्या समीक्षा बैठक में निर्धारित कर दिया गया कि शासन से कोई निर्देश ऐसा हुआ. जब यह शासन का निर्देश था कि यह सिस्टम चलेगा और उसके कारण काला बाजारी रुकी थी. तो यह यंत्र क्यों निकाला गया, यही तो मेरा प्रश्न है. व्यावहारिक सिस्टम से ऐसा चलेगा कि शासन का आदेश माना जायेगा. अगर ऐसा नहीं किया गया तो जिसने ऐसा किया था, उसके खिलाफ क्या कार्यवाही होगी.

श्री ओमप्रकाश धुर्वे -- अध्यक्ष महोदय, नहीं, तात्कालिक समय में मैंने जैसा बताया कि दिनांक 23.5.2014 को समीक्षा बैठक हुई थी, उसमें सभी अधिकारी थे, संबंधित मंत्री जी भी थे, उस समय बैठक में यह निर्णय लिया गया होगा कि इसकी अब उतनी उपयोगिता नहीं है, व्यावहारिकता नहीं है, इसलिये संभवतः इस सिस्टम को पुनः लागू नहीं किया गया.

श्री सुखेन्द्र सिंह -- अध्यक्ष महोदय, मेरा पहला प्रश्न यह है कि क्या पूरे प्रदेश में यह है कि सिर्फ रीवा जिले में है,व्यावहारिक तौर पर.

श्री ओमप्रकाश धुर्वे -- अध्यक्ष महोदय, यह तो पूरे प्रदेश के लिये था, लेकिन अब हम लागू कर रहे हैं.

श्री सुखेन्द्र सिंह -- अध्यक्ष महोदय, यह अकेले पहले रीवा में व्यावहारिक तरीके से हो गया और इतनी बड़ी घटना घटी.

अध्यक्ष महोदय -- अब लागू कर रहे हैं.

श्री सुखेन्द्र सिंह -- अध्यक्ष महोदय, मेरा दूसरा प्रश्न यह है कि अक्टूबर,2016 में खाद्यान्न जो रायपुर कर्चुलियान एवं गंगेव के लिये निकला और हनुमना बार्डर पर पकड़ा गया और परिवहनकर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गयी, बल्कि जिसकी ट्रक थी, सिर्फ उसके ऊपर एफआईआर दर्ज हुई. मेरा मंत्री जी से अनुरोध है कि जो इसके टेंडर लेने वाले व्यक्ति हैं, उनको क्यों छोड़ा गया. क्या उनके ऊपर कार्यवाही होगी. मैं नाम नहीं लेना चाहता हूं, जिन्होंने इसका टेंडर लिया है, जो इनको चला रहे हैं, उनके ऊपर कार्यवाही होगी कि सिर्फ जिनकी गाड़ियां थीं, उनके ऊपर कार्यवाही होगी.

श्री ओमप्रकाश धुर्वे -- अध्यक्ष महोदय, न्यायालय में 17 लोगों के खिलाफ मामला चल रहा है, 11 अपराधी गिरफ्तार भी हो चुके हैं. कुछ फरार हैं, सब पर कार्यवाही प्रचलन में है.

श्री सुखेन्‍द्र सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा कहना यह है कि जो असली दोषी है, उनको छोड़ा गया है. यह मेरे विधानसभा क्षेत्र का मामला है. उत्‍तरप्रदेश गल्‍ला जाता है, उसमें अगर मैं नहीं बोलूँगा तो भी यह गलत बात है. मेरा कहना यह है कि जो असली दोषी हैं, उनको छोड़ दिया गया है. माननीय मंत्री जी बताएं कि उन पर कार्यवाही करेंगे कि नहीं करेंगे. आप कहें तो मैं नाम बता दूँ.

श्री ओम प्रकाश धुर्वे - उन पर कार्यवाही करेंगे.

श्री सुखेन्‍द्र सिंह - ठीक है.

भवन एवं संनिर्माण कर्मकार मण्‍डल योजनान्‍तर्गत छात्रवृत्ति वितरण

[श्रम]

9. ( *क्र. 2542 ) कुँवर सौरभ सिंह : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या भवन एवं अन्‍य संनिर्माण कर्मकार मण्‍डल योजनान्‍तर्गत श्रम विभाग द्वारा छात्रवृत्ति प्रदत्‍त की गई है? यदि हाँ, तो वर्ष 2012-13 से किस-किस को कितनी-कितनी राशि, कब-कब प्रदान की गई? कटनी जिले का विकासखण्‍डवार वर्षवार विवरण दें (ख) क्‍या छात्रवृत्ति की राशि बैंक खातों के माध्‍यम से या चेक के माध्‍यम से प्रदाय किये जाने के निर्देश हैं? यदि हाँ, तो किन-किन छात्रों को नगद भुगतान किया गया? कटनी जिले का विकासखण्‍डवार वर्षवार विवरण दें (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) अनुसार क्‍या छात्रवृत्ति वितरण में विलम्‍ब हुआ? शासन द्वारा प्राप्‍त छात्रवृत्ति की राशि से कितना-कितना ब्‍याज अर्जित किया गया? वर्षवार अवितरित शेष राशि को ब्‍याज सहित वापस न करने के लिये कौन उत्‍तरदायी है? इनके विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई है?

खाद्य मंत्री ( श्री ओम प्रकाश धुर्वे ) : (क) म.प्र. भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अंतर्गत पंजीकृत निर्माण श्रमिक के पुत्र/पुत्री/पत्नी को शिक्षा हेतु प्रोत्साहन राशि योजना, मेधावी छात्र/छात्राओं को नगद पुरूस्कार योजना में लाभ प्रदाय किये जाने का प्रावधान है। प्रश्नांकित अवधि में कटनी जिले में शिक्षा हेतु प्रोत्साहन राशि योजना के अंतर्गत वितरित हितलाभ राशि की विकासखण्डवार एवं वर्षवार विवरण की जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी हाँ। शिक्षा हेतु प्रोत्साहन राशि योजना, मेधावी छात्र/छात्राओं को नगद पुरूस्कार योजना की राशि बैंक खातों के माध्यम से प्रदाय किए जाने के निर्देश हैं। शेष प्रश्नांश की जानकारी का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी नहीं। म.प्र भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा विभिन्न निर्माण कार्यों की कुल लागत का 1 प्रतिशत की दर से उपकर जमा कराया जाता है। इस प्रकार जमा उपकर राशि से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जाती हैं। अतः प्रश्नांश (क) एवं (ख) के परिप्रेक्ष्य में किसी के विरूद्ध कार्यवाही का प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''तीन''

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से हमारे सम्‍मानित मित्र कुँवर सौरभ सिंह जी ने एक प्रश्‍न किया था. यह प्रश्‍न था कि भवन एवं अन्‍य संनिर्माण कर्मकार मण्‍डल योजना के अंतर्गत, जो छात्रवृत्ति वितरित की जाती है, इसमें शासन का आदेश यह है कि चेक के द्वारा छात्रवृत्ति छात्रों को वितरित की जाये, लेकिन कटनी जिले के कुछ स्‍कूलों में जो छात्रवृत्ति वितरित की गई, वह नकद राशि के रूप में वितरित की गई है. उसमें चेक नहीं दिया गया है, जबकि नकद राशि वितरित किये जाने का कोई प्रोवीजन नहीं था, यह हमारा प्रश्‍न था. लेकिन इसका जवाब माननीय मंत्री जी के यहां से नहीं आया कि यह कैश क्‍यों दिया गया, कितने लोगों को दिया गया है और किस-किस स्‍कूल में यह कैश वितरित किया गया है और किसके आदेश से इन्‍होंने कैश दे दिया है ? जबकि शासन के आदेश चेक के द्वारा दिये जाने के हैं. इसमें स्‍पष्‍ट नहीं है. आपने प्रश्‍न का जवाब नहीं दिया है. जो नकद देने की बात है, इसमें कहीं जवाब नहीं है. आप इसमें देखें.

श्री ओम प्रकाश धुर्वे - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब नकद नहीं दिया गया है, जो जवाब कैसे आएगा. कैश नहीं दिया गया है, बैंक के द्वारा दिया गया है.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से कहना है कि हम आपको स्‍कूलें और जनपदें बता रहे हैं. आपने इसमें यह नहीं लिखा है कि हालांकि कैश नहीं दिया गया है, यह प्रश्‍न आया नहीं है लेकिन आपने कहा है तो हम उसको स्‍वीकार कर रहे हैं. अब हमारा यह कहना है कि यह चेक नहीं, कैश दिये गये हैं और ये ब्‍लॉक हैं, जनपद भौंरीबन्‍द में प्राथमिक शाला छपरा, फेड़ा, जजावल और रीठी जनपद में नेगमा, बिलहरी और इस तरह की अन्‍य स्‍कूलें हैं, यहां कैश वितरित किया गया है. कैश या चैक वितरित किया गया है, क्‍या आप इसकी जांच करवाएंगे और वहां के स्‍थानीय विधायक उस जांच में रहें ? ऐसी अपेक्षा है.

श्री ओम प्रकाश धुर्वे - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी जानकारी में नकद भुगतान नहीं किया गया है. चेक के द्वारा, बैंक के द्वारा भुगतान किया गया है. अगर माननीय सदस्‍य कह रहे हैं, अगर हमारे संज्ञान में यह बात आती है तो निश्चित रूप से कार्यवाही करेंगे.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - धन्‍यवाद.

सोनकच्‍छ विधान सभा क्षेत्रांतर्गत संचालित पशुपालन केन्‍द्र

[पशुपालन]

10. ( *क्र. 4067 ) श्री राजेन्द्र फूलचं‍द वर्मा : क्या पशुपालन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सोनकच्‍छ विधान सभा क्षेत्र में मान्‍यता प्राप्‍त गोसेवा/पशुपालन केन्‍द्र हैं। यदि हैं तो कहाँ-कहाँ पर तथा इसका संचालन कौन करता है। (ख) क्‍या इन केन्‍द्रों को शासन द्वारा कोई राशि अथवा अनुदान दिया जाता है? यदि हाँ, तो वर्षवार कितनी राशि अथवा अनुदान दिया जाता है तथा उसकी प्रक्रिया क्‍या है? (ग) क्‍या सोनकच्‍छ विधानसभा क्षेत्र में शासन द्वारा उत्‍तम गोवंश/भैंस आदि किसानों को उचित दामों पर दी जाती है? यदि हाँ, तो उसकी क्‍या प्रक्रिया है? यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं।

पशुपालन मंत्री ( श्री अंतर सिंह आर्य ) : (क) जी हाँ। जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार(ख) जी हाँ। जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार(ग) जी हाँ। विभागीय योजनाएं ''नन्दीशाला योजना'' में गौवंशीय सांड तथा ''सम्मुनत पशु प्रजनन योजना'' में मुर्रा सांड, मध्यप्रदेश पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम के माध्यम से प्रदाय किये जाते हैं। ग्रामसभा में हितग्राही का नाम, अनुमोदित होने पर वह नजदीकी पशु चिकित्सा संस्था में आवेदन कर सकता है। आवेदक के पात्र होने पर प्रकरण स्वीकृत कर लाभ दिया जाता है।

परिशिष्ट - ''चार''

श्री राजेन्‍द्र फूलचंद वर्मा - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न मेरी विधानसभा में चलने वाली गौशालाओं से संबंधित है. उसमें माननीय मंत्री जी ने उत्‍तर में कहा है कि ग्रामसभा से इसका अनुमोदन होना चाहिए. लेकिन मैं माननीय मंत्री जी को बताना चाहता हूँ कि अभी भी ग्रामसभाएं जागरूक नहीं हैं. हम कई बार जब दौरे करते हैं तो ग्रामसभाएं तो होती ही नहीं हैं, कई बार उनकी औपचारिकता हो जाती हैं. मेरा माननीय मंत्री जी से यह अनुरोध है कि यह जो प्रत्‍येक गौशाला के लिये 40,000 रुपये प्रतिवर्ष की राशि है. यह राशि 'ऊँट के मुँह में जीरा' के समान है तो क्‍या माननीय मंत्री जी इसमें बढ़ोत्‍तरी करेंगे. दूसरा, मण्‍डी बोर्ड से गौशाला के लिए 20 करोड़ रुपये पूरे प्रदेश में आता है और उसमें जिला गोपाल एवं पशु संवर्धन समिति में केवल कलेक्‍टर और डायरेक्‍टर, पशुपालन होते हैं तो मेरा माननीय मंत्री जी से अनुरोध है कि क्‍या निर्वाचित जन-प्रतिनिधियों को उसमें स्‍थान देंगे ? हम लोग बार-बार दौरे करते हैं और लोग हमसे कहते हैं कि गौशाला खोलना है तो क्‍या उसमें हम लोगों की भागीदारी होगी ?

श्री अंतर सिंह आर्य - माननीय अध्‍यक्ष जी, माननीय सदस्‍य जी ने जो गौशाला में सहायता राशि दी जाती है, उसको बढ़ाने की मांग की है और इस विषय में शासन भी विचार कर रहा है कि यह राशि कम होती है क्‍योंकि मण्‍डी बोर्ड के माध्‍यम से हमको पैसा मिलता है.15 से 20 करोड़ रुपए पूरे मध्‍यप्रदेश के लिए मिलते हैं. हम विचार करके इस प्रकार का प्रयास करेंगे कि कुछ मण्‍डी बोर्ड का पैसा और कुछ शासन का पैसा मिलाकर बढ़ोतरी हो. दूसरी बात जिले के अंदर जो समितियां हैं उसके जनप्रतिनिधि भी इसके विचार-विमर्श में शामिल होने चाहिए. यह अच्‍छा सुझाव है. इसके ऊपर शासन विचार करेगा.

श्री राजेन्‍द्र फूलचन्‍द वर्मा-- अध्‍यक्ष महोदय, आपका बहुत बहुत धन्‍यवाद. 

बीना में अनुविभागीय कार्यालय/स्‍टॉफ की पदस्‍थापना

[राजस्व]

11. ( *क्र. 5264 ) श्री महेश राय : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या बीना को अनुविभागीय का दर्जा प्रदान कर दिया गया है? (ख) यदि हाँ, तो क्‍या अनुविभागीय कार्यालय एवं स्‍टॉफ की पदस्‍थापना कर दी गयी है? यदि हाँ, तो कार्यालयों में पदस्‍थ अधिकारियों के नाम सहित जानकारी उपलब्‍ध करावें? (ग) यदि नहीं, तो कब तक अनुविभागीय अधिकारियों की पदस्‍थापना कर दी जावेगी?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जी हाँ। (ख) जी हाँ। श्रीमती रजनी सिंह (आई.ए.एस.) अनुविभागीय अधिकारी बीना में पदस्थ हैं। तहसील कार्यालय बीना में पदस्थ स्टाफ से कार्य लिया जा रहा है। (ग) प्रश्नांश (ख) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

श्री महेश राय-- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न बीना ब्‍लॉक में अनुविभागीय कार्यालय एवं स्‍टॉफ की पदस्‍थापना करने बावत् था. इसको लंबे समय से पूर्ण अनुविभाग का दर्जा प्राप्‍त है इसके बावजूद भी यहां पर कार्यालय और स्‍टॉफ की कमी बनी हुई है. मंत्री जी कृपया इस संबंध में जानकारी दें.

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, निश्वित रूप से स्‍टॉफ की कमी है. भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है. शीघ्र ही भर्ती करके उसकी कमी को दूर करेंगे.

श्री महेश राय-- अध्‍यक्ष महोदय, 20 साल पहले इसको अनुविभाग का दर्जा प्राप्‍त हुआ था. उसके बाद 8 साल पहले इसको पूर्ण दर्जा प्राप्‍त हुआ. इरीगेशन के एस.डी.ओ., पी.एच.ई. के एस.डी.ओ. और भी अन्‍य विभागों के एस.डी.ओ यहां पर नहीं बैठते हैं. यह बड़ा ब्‍लॉक है. रिफायनरी, जे.पी.पॉवर, पॉवर हब जैसे बड़े-बडे़ कारखाने यहां पर हैं. यहां के लोगों को दिक्‍कत का सामना करना पड़ता है. कृपया समय सीमा बता दें ताकि वहां कामकाज अच्‍छी तरह से चलने लगे?

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- अध्‍यक्ष महोदय, बाकी विभागों का प्रश्‍न तो इसमें उद्भूत नहीं हो रहा है. फिर भी बाकी के विभागों की उन विभागों से भी चर्चा करके जल्‍दी पदस्‍थापना करा देंगे.

श्री महेश राय-- धन्‍यवाद मंत्री जी.

प्रश्‍न संख्‍या 12- (अनुपस्थित)

प्रश्‍न संख्‍या 13- (अनुपस्थित)

विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का क्रियान्‍वयन

[श्रम]

14. ( *क्र. 3562 ) डॉ. रामकिशोर दोगने : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) हरदा जिला अन्तर्गत श्रम विभाग द्वारा कौन-कौन सी योजनाओं का संचालन किया जा रहा है? योजनावार पूर्ण विवरण देवें। (ख) हरदा जिले में विगत पाँच वर्षों में संचालित योजनाओं पर कितना व्यय हुआ व कितने हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया? (ग) विगत पाँच वर्षों में श्रम विभाग के अधिकारियों द्वारा बाल श्रम व बाल शोषण रोकने हेतु क्या-क्या कार्यवाही की गई व कितनी व कौन-कौन सी जगहों पर जाँच व आकस्मिक निरीक्षण किस अधिकारी के द्वारा किया गया? (घ) प्रश्‍नांश (ग) अनुसार की गई कार्यवाही में कौन-कौन दोषी पाये गये व उन पर क्या कार्यवाही की गई?

खाद्य मंत्री ( श्री ओम प्रकाश धुर्वे ) : (क) म.प्र. भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अंतर्गत हरदा जिले में वर्तमान में संचालित विभिन्न 22 योजनाओं का योजनावार पूर्ण विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) म.प्र. भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अंतर्गत हरदा जिले में विगत पाँच वर्षों में योजनावार लाभान्वित हितग्राहियों एवं वितरित राशि की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) बाल श्रम व बाल शोषण रोकने हेतु श्रम निरीक्षक एवं टास्‍क फोर्स समिति द्वारा अधिनियम 1986 के अंतर्गत निरीक्षण किये जाते हैं, गत पाँच वर्षों में बाल श्रम अधिनियम 1986 के अंतर्गत अनुभाग हरदा, टिमरनी एवं खिरकिया क्षेत्र में श्री जी.के. श्रीवास्‍तव व श्री एस.के. लोध तथा श्री आर.बी. पटेल श्रम निरीक्षकों द्वारा कुल 314 निरीक्षण किये गये हैं। (घ) निरीक्षण के दौरान किसी भी संस्‍थान में बाल श्रमिक नियोजित नहीं पाये गये हैं। अभिलेखों के संधारण में अनियमितता पाये जाने पर 86 दोषी संस्‍थानों/नियोजकों के विरूद्ध न्‍यायालय में अभियोजन दायर किये गये हैं। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है, जिसमें न्‍यायालय द्वारा 52 प्रकरणों में 1,10,500/- रूपये का अर्थदण्‍ड अधिरोपित किया गया है।

डॉ. रामकिशोर दोगने-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न श्रम विभाग से संबंधित है और मेरे प्रश्‍न के जवाब में कुछ रिकार्ड दिया गया है, परंतु रिकार्ड की जो कॉपी उपलब्‍ध कराई गई है वह कॉपी अस्‍पष्‍ट है. कृपया दूसरी कॉपी उपलब्‍ध करा दी जाए तो ज्‍यादा अच्‍छा रहेगा. इसके साथ ही मैंने पूछा था कि श्रम विभाग में बाल श्रमिक और बाल शोषण के संबंध में हरदा जिले में कितने प्रकरण पंजीबद्ध हुए हैं. मंत्री जी द्वारा बताया गया है कि कोई प्रकरण पंजीबद्ध नहीं हुए हैं. यह बड़ी ही गम्‍भीर बात है इससे ऐसा प्रतीत होता है कि हरदा में बाल श्रमिक हैं ही नहीं या फिर पूरे मध्‍यप्रदेश में नहीं हैं जबकि बाल श्रमिक हर दुकान पर मिल जाएंगे. हर कल- कारखाने में मिल जाएंगे, हर जगह काम करते हुए मिल जाएंगे, परंतु उस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है. मुझे लगता है कि यह गलत जानकारी दी गई है. इसके साथ ही निरीक्षण की बात की गई है. निरीक्षण में 314 संस्‍थानों के निरीक्षण किए हैं. उसमें 86 दोषी पाए गए हैं. यह भी बड़ी विडंबना की बात है. मैं मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं कि बाल श्रमिक पूरे मध्‍यप्रदेश में नहीं हैं या सिर्फ हरदा जिले में नहीं हैं.

श्री ओम प्रकाश धुर्वे -- अध्‍यक्ष महोदय, यह कहना गलत है कि निरीक्षण नहीं किया गया है. 314 निरीक्षण किए गए हैं. उनमें से 86 प्रकरण न्‍यायालय में दायर भी किए गए हैं और 52 प्रकरणों का न्‍यायालय द्वारा निराकरण भी किया गया है.

डॉ. रामकिशोर दोगने-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से बाल श्रमिक संबंधी प्रश्‍न पूछ रहा हूं आपने उसमें अभिलेखों संबंधी जानकारी दी है. बाल श्रमिक के संबंध में आपने बताया है कि कोई प्रकरण पंजीबद्ध नहीं हुआ है. अभी तक कोई बाल श्रमिक नहीं पकड़े गए हैं. क्‍या यह संभव है आप भी विधायक हैं आप भी क्षेत्र में घूमते हैं. आपको कहीं बाल श्रमि‍क नहीं दिखते हैं. जैसे हरदा भी होगा क्‍या.

अध्‍यक्ष महोदय-- यह काल्‍पनिक प्रश्‍न है.

डॉ. रामकिशोर दोगने-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बता रहे हैं कि बाल श्रमिक हैं ही नहीं, पाए ही नहीं गए हैं. कोई केस ही नहीं बना. क्‍या यह संभव हो सकता है?

अध्‍यक्ष महोदय-- यह काल्‍पनिक प्रश्‍न है आप कुछ सीधा प्रश्‍न करना हो तो करें.

श्री ओम प्रकाश धुर्वे-- अध्‍यक्ष महोदय, कोई शिकायत करे कोई संज्ञान में हो हमारे पास कोई उपलब्‍ध हो तो बताइए कार्यवाही करेंगे.

डॉ. रामकिशोर दोगने-- माननीय मंत्री महोदय, आपके अधिकारी गलत जानकारी दे रहे हैं. मेरे यहां अभी केस बना है. 7 बच्‍चे बोरिंग मशीन पर काम करते हुए पकड़े गए और पुलिस में भी केस बना है. आपके अधिकारियों ने बाल श्रमिक संबंधी कोई कार्यवाही नहीं की है. न गए हैं, न जांच की है. इसी तरह के बहुत सारे केस हैं. हर होटलों पर आपको बाल श्रमि‍क मिल जाएंगे.

अध्यक्ष महोदय--आपका प्रश्न क्या है.

डॉ. रामकिशोर दोगने--मैंने प्रश्न के भाग (ग) में पूछा है कि विभाग के अधिकारियों द्वारा बाल श्रम व बाल शोषण रोकने हेतु क्या कार्यवाही की गई है. मेरा यह कहना है कि विभाग द्वारा गलत जानकारी दी गई है. क्या मंत्री जी फिर से जाँच कराएंगे और जिन अधिकारियों ने गलत जानकारी दी है क्या उन पर कार्यवाही करेंगे.

श्री ओम प्रकाश धुर्वे--अध्यक्ष महोदय, निश्चित रुप से करेंगे. सदस्य द्वारा संज्ञान में लाया गया है कि पुलिस द्वारा उनको पकड़ा गया है या जिस संस्था या जिन लोगों द्वारा संज्ञान में लाया गया है और कार्यवाही नहीं हुई है तो हम भी कार्यवाही करेंगे.

डॉ. रामकिशोर दोगने--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं संज्ञान की बात नहीं कर रहा हूं, मैं सबूत सहित बता रहा हूँ कि पुलिस में अपराध पंजीबद्ध है. क्या आप अपने अधिकारियों पर कार्यवाही करेंगे.

अध्यक्ष महोदय--बोल दिया है मंत्री जी ने पहले उन्हें जांच तो कर लेने दें.

मछुआ समितियों को मुआवजा वितरण

[मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास]

15. ( *क्र. 1742 ) श्रीमती चन्‍दा सुरेन्‍द्र सिंह गौर : क्या पशुपालन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या टीकमगढ़ जिले सहित खरगापुर विधानसभा क्षेत्र में विगत वर्षों में भारी सूखा पड़ने के कारण तालाबों में पानी सूख गया था और मछली पालन करने वाली मछुआ समितियों द्वारा लागत लगाकर कई तालाबों में मछली का बीज (यानि बच्‍चा) डाला गया था, जिसके कारण उन समितियों की पूंजी नष्‍ट हो गई? (ख) क्‍या उन समितियों पर कर्ज भी है और तालाबों की लीज़ चुकाने में वे असमर्थ हैं? क्‍या मछुआ समितियों को शासन स्‍तर पर सूखा राहत राशि दिये जाने की ऐसी कोई योजना थी या है? यदि हाँ, तो उक्‍त समितियों को कब तक सूखा राहत राशि प्रदाय कर दी जावेगी? यदि नहीं, तो क्‍यों? कारण स्‍पष्‍ट करें (ग) क्‍या खरगापुर विधानसभा सहित टीकमगढ़ जिले के अलावा प्रदेश में किसी भी मछुआ समिति को सूखा राहत राशि नहीं दी गई?

पशुपालन मंत्री ( श्री अंतर सिंह आर्य ) : (क) जी हाँ। समितियों की पूंजी नष्‍ट होने की जानकारी नहीं है। (ख) समितियों पर कर्ज की स्थिति नहीं है। प्राकृतिक आपदा से जिस वर्ष तालाब/जलाशय में मत्‍स्‍य बीज संचयन न होने एवं मत्‍स्‍य बीज तथा संबंधित मत्‍स्‍य की क्षति होती है, तो उस वर्ष की पट्टा राशि हितग्राही को देय नहीं होगी तथा राजस्‍व पुस्‍तक परिपत्र की धारा 6 (4) के प्रावधान अनुसार नैसर्गिक आपदा से मछली फार्म क्षतिग्रस्‍त होने पर मरम्‍मत के लिये रूपये 6000/- प्रति हेक्‍टेयर एव मछली पालने वालों को मछली बीज नष्‍ट होने पर रूपये 4000/- प्रति हेक्‍टेयर सहायता अनुदान दिये जाने का प्रावधान है। प्राप्‍त आवेदनों पर पात्र पायी गयी समितियों/समूहों को राहत सहायता प्रदाय कर दी गई है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) जी हाँ।

श्रीमती चन्दा सुरेन्द्र सिंह गौर--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न इस प्रकार है कि दो वर्ष पहले टीकमगढ़ जिले के खरगापुर विधान सभा क्षेत्र में मछली पालन करने वाली सोसायटियों, मछुआ समितियों द्वारा लागत लगाकर मछली का बीज (बच्चा) डाला गया था. सूखा पड़ जाने के कारण वहां के तालाब सूख जाने पर मछुआ समितियों को शासन स्तर पर सूखा राहत राशि नहीं दी गई है. क्या उनको मुआवजा राशि दिए जाने का कोई प्रावधान है.

श्री अंतर सिंह आर्य--माननीय अध्यक्ष महोदय, नैसर्गिक आपदा, अतिवृष्टि, बाढ़, भूस्खलन, भूकंप आदि से मछली फार्म क्षतिग्रस्त होने पर मरम्मत के लिए प्रभावित को रुपए 6000 प्रति हेक्टेयर के मान से सहायता अनुदान दिया जाता है. दूसरा नैसर्गिक आपदा, सूखा, अतिवृष्टि, बाढ़, भूस्खलन आदि से मछली पालने वाले को मछली का बीज नष्ट हो जाने पर 4000 रुपए प्रति हेक्टेयर के मान से आरबीसी 6 (4) के अन्तर्गत राहत राशि दी जाती है.

श्रीमती चन्दा सुरेन्द्र सिंह गौर--माननीय अध्यक्ष महोदय, अभी तक खरगापुर विधान सभा क्षेत्र में यह राहत राशि नहीं पहुंची है. माननीय मंत्री जी से पूछना चाहती हूँ कि राहत राशि नहीं पहुंची है तो क्या आप सूखा राहत राशि वहां भेजेंगे.

श्री अंतर सिंह आर्य--माननीय अध्यक्ष महोदय, जिले में 113 समितियां पंजीकृत हैं 34 समितियों को राहत राशि दी गई है. खरगापुर विधान सत्रा क्षेत्र में 6 समितियों को 1,82,400 रुपए दिए गए हैं. माननीय सदस्या की चिंता है कि कुछ सोसायटियां छूट गईं हैं वे किस कारण छूट गई हैं इसका परीक्षण कराकर हम इस पर कार्यवाही करेंगे.

श्रीमती चन्दा सुरेन्द्र सिंह गौर--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी को धन्यवाद.

दतिया जिले में शस्त्र लायसेंस के लंबित प्रकरण

[गृह]

16. ( *क्र. 5016 ) श्री घनश्‍याम पिरोनियाँ : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दतिया जिले में दिनांक 01-01-2013 से प्रश्न दिनांक तक कितने शस्त्र लायसेंस वर्षवार बनाये गये हैं? (ख) दतिया जिले हेतु कितने शस्त्र लायसेंस का वार्षिक कोटा नियत है और उसमें किस-किस वर्ग के लिए आरक्षण है या नहीं। (ग) दतिया जिले में वर्तमान में कितने शस्त्र लायसेंस आवेदन किन कारणों से लंबित हैं। (घ) दतिया जिले में वर्तमान में कितने फौती लायसेंस एवं कितने वृद्धों के वारिसान के लायसेंस किस कारण लंबित हैं एवं कितने निलंबित लायसेंस हैं और कितने बहाल किये गये हैं।

गृह मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : (क) दतिया जिले में दिनांक 01.01.2013 से प्रश्न दिनांक तक वर्षवार निम्नानुसार शस्त्र लायसेंस स्वीकृत किये गये - वर्ष 2013 में 106, वर्ष 2014 में 18, वर्ष 2015 में 63, वर्ष 2016 में 26, वर्ष 2017 में 05, इस प्रकार प्रश्न दिनांक तक कुल 218 लायसेंस जारी किये गये। (ख) जी नहीं शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) 795 आवेदन पत्र थाना/अनुभाग स्तर पर जाँच में होने के कारण लंबित हैं। (घ) फौती के 89 प्रकरण एवं वृद्धावस्था के 63 प्रकरण लायसेंस विधिवत जाँच हेतु विचाराधीन हैं। 2- लायसेंसधारियों पर विभिन्न धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध होने से प्राप्त प्रतिवेदन के अनुसार 88 लायसेंसधारियों के लायसेंस निलंबित किये गये तथा निलंबित लायसेंसों में से 34 लायसेंसियों के लायसेंस बहाल किये गये।

श्री घनश्याम पिरोनियाँ--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय गृह मंत्री जी का आभार व्यक्त करता हूँ कि उन्होंने मुझे संतुष्ट किया है. मैं इतना ही निवेदन करना चाहता हूँ कि प्रश्न के (ग) भाग के उत्तर में उन्होंने जो उत्तर दिया है कि 795 आवेदन पत्र थाना/अनुभाग स्तर पर जाँच में होने के कारण लंबित हैं. प्रश्न के(घ) भाग में मैंने पूछा था कि दतिया जिले में वर्तमान में कितने फौती लायसेंस एवं कितने वृद्धों के वारिसान के लायसेंस किस कारण लंबित हैं. मैं यह चाहता हूँ कि इन लोगों का काम शीघ्र हो जाए ऐसा आदेश माननीय मंत्री जी कर दें.

श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर--माननीय अध्यक्ष महोदय, आर्म्स लायसेंस में मुख्य रुप से पुलिस वेरीफिकेशन ही महत्वपूर्ण होता है इसके आधार पर आर्म्स लायसेंस जारी किए जाते हैं. माननीय विधायक जी ने कुछ लायसेंसों के बारे में ध्यान आकर्षित किया है. मैं वहाँ के पुलिस अधीक्षक को कह दूंगा कि वे माननीय विधायक जी से चर्चा कर लें और जो ऐसे लायसेंस हैं जो पुलिस वेरीफिकेशन के अनुसार हो सकते हैं उनको प्राथमिकता के आधार पर करेंगे.

श्री घनश्‍याम पिरोनियॉ- मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि सभी कार्य नियम-कायदों के अनुसार होने ही चाहिए. लेकिन कभी-कभी स्थिति बड़ी विचित्र हो जाती है. मेरे पास एक व्‍यक्ति का फोन आया कि मैं समाजवादी पार्टी का सदस्‍य बोल रहा हूं. SDO(P) साहब ने कहा है कि यदि विधायक जी फोन करेंगे तो वे लायसेंस का काम कर देंगे. मैंने उस व्‍यक्ति से कहा कि पहले के जो आवेदन हमने भेजे हैं, उनका निराकरण आज त‍क SDO(P) द्वारा नहीं किया गया है. इस प्रकार से जो लोग गड़बड़ी करते हैं, उन पर हमें सख्‍ती करनी चाहिए.

श्री गोपाल भार्गव- दतिया में नरोत्‍तम मिश्र जी हैं. जब वहां इतनी बड़ी तोप रखी है तो फिर अन्‍य शस्‍त्रों की क्‍या जरूरत है ?

श्री घनश्‍याम पिरोनियॉ- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा मंत्री जी से आग्रह है कि वहां के अधिकारियों-कर्मचारियों पर थोड़ी सख्‍ती की जाए और दूसरी बात मैं यह कहना चाहता हूं कि अतारांकित प्रश्‍नों में भी मेरा एक प्रश्‍न है कि मेरे बंशकार समाज के एक बच्‍चे की हत्‍या बडौनी में हुई है और इसके अतिरिक्‍त एक और हत्‍या भी वहां हुई है. एक समुदाय विशेष के लोग उन्‍हें अभी भी धमका रहे हैं. मैं मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि वहां थोड़ी और सख्‍ती की आवश्‍यकता है. मंत्री जी का आर्शीवाद रहेगा तो वहां कानून-व्‍यवस्‍था की स्थिति और भी बेहतर हो जाएगी. इस संबंध में मैं मंत्री जी से आश्‍वासन चाहता हूं.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह ठाकुर- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह प्रश्‍न यहां उद्भूत नहीं होता है फिर भी मैं विधायक जी से चर्चा कर लूंगा और जहां कार्यवाही आवश्‍यक होगी, वहां हम कार्यवाही करेंगे.

श्री घनश्‍याम पिरोनियॉ- धन्‍यवाद, मंत्री जी.

डॉ.गोविन्‍द सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि जब माननीय बाबूलाल गौर जी प्रदेश के गृह मंत्री थे तो आपने पूरे प्रदेश के लिए एक आदेश जारी किया था. जिसमें वृद्धावस्‍था के कारण जो लोग बच्‍चों के लिए लाइसेंस बदलवाना चाहते हैं और जो फौती लायसेंस हैं, उनके लिए यदि कुछ विचाराधीन न हो तो कोई समय-सीमा यहां से निर्धारित कर दी जाए क्‍योंकि नियमों का कहीं अनुपालन नहीं हो पा रहा है. पुलिस के वेरीफिकेशन के बाद, वह थाने जाता है. सबसे पहले तो कलेक्‍टर के पास आवेदन दो, फिर एस.पी. के यहां आवेदन जाता है वहां से थाने और फिर SDO(P) के पास जाकर फिर एस.पी. और फिर कलेक्‍टर के पास जाता है. 7-8 प्रक्रियाओं के बाद आवेदन पहुंचता है. उसके बाद भी आवेदन साल-साल भर पड़े रहते हैं.

मेरा माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि पहले जो प्रक्रिया जारी की गई थी, उसका पालन किया जाए. जिनके पुलिस वे‍रीफिकेशन आ चुके है, उन्‍हें कम से कम 15 दिनों या महीने भर की समय-सीमा के भीतर लायसेंस जारी कर दिया जाना चाहिए.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह ठाकुर- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम इसका परीक्षण करवा लेंगे.

डॉ.गोविन्‍द सिंह- माननीय मंत्री जी, इसमें परीक्षण करवाने के लिए क्‍या रखा है. जिनका पुलिस वेरीफिकेशन पहुंच चुका है, उन्‍हें लायसेंस जारी करने हेतु एक-दो महीने की कोई समय-सीमा तो निर्धारित करनी ही चाहिए.

अध्‍यक्ष महोदय- लायसेंस जारी करने हेतु कोई समय-सीमा तो अवश्‍य ही निर्धारित होनी चाहिए. वृद्धजनों के भी लायसेंस रहते हैं. प्रक्रिया पूर्ण होने तक कई बार वे दुनिया में ही नहीं रहते हैं और फिर मामला फौती हो जाता है.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह ठाकुर- अध्‍यक्ष जी, मैं यही निवेदन कर रहा हूं कि मेरी जानकारी में इस प्रकार का कोई नियम नहीं है. मैं इसका परीक्षण करवा लूंगा यदि ऐसे कोई निर्देश होंगे तो उनका हम पालन करेंगे.

श्री घनश्‍याम पिरोनियॉ- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि यह मुख्‍यत: मेरा प्रश्‍न था और मंत्री जी मुझे आश्‍वासन दे चुके हैं.

अध्‍यक्ष महोदय- आपका प्रश्‍न आ गया है और आपके प्रश्‍न का समाधान भी हो चुका है.

सिवनी जिलान्‍तर्गत खाद्यान्‍न से वंचित हितग्राही

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

17. ( *क्र. 6111 ) श्री दिनेश राय (मुनमुन) : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सिवनी जिलान्‍तर्गत खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत कितने प्रकार के कूपन की पात्रता है और कितनों को मिल रही है? (ख) सिवनी जिले में कितने अनुसूचित जाति/जनजाति हितग्राही कूपन प्राप्‍त कर रहे हैं और कितनों की मेपिंग शेष है और कितनों को खाद्यान्‍न नहीं मिल रहा है? (ग) पात्र हितग्राही जो खाद्यान्‍न से वंचित हैं, उन्‍हें कब तक लाभान्वित किया जावेगा? (घ) क्‍या विभाग द्वारा सिवनी जिले में विगत सितम्‍बर-अक्‍टूबर 2016 माह से मेपिंग का कार्य न किये जाने के कारण हजारों की संख्‍या में पात्र हितग्राहियों को खाद्यान्‍न पर्ची अप्राप्‍त होने के कारण खाद्यान्‍न नहीं मिल पा रहा है? यदि हाँ, तो ऐसे दोषी अधिकारी-कर्मचारी के विरूद्ध शासन कोई कार्यवाही करेगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो कारण स्‍पष्‍ट करें?

खाद्य मंत्री ( श्री ओम प्रकाश धुर्वे ) : (क) राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत सम्मिलित 25 पात्र परिवार श्रेणियों के परिवारों को सत्‍यापन उपरांत पात्रता पर्ची प्राप्‍त करने की पात्रता है। सिवनी जिले में पात्रता पर्चीधारी परिवारों श्रेणी एवं संख्‍या की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) सिवनी जिले में अनुसूचित जाति/जनजाति की श्रेणी अंतर्गत 54,266 परिवारों को सत्‍यापन उपरांत पात्रता पर्ची जारी की गई है। इन परिवारों में अनुसूचित जाति/जनजाति के वह परिवार सम्मिलित नहीं हैं, जिनको अन्‍य पात्र परिवार श्रेणी के अंतर्गत सत्‍यापित किया जाकर पात्रता पर्ची जारी की गई है। जिले में अनुसूचित जाति/जनजाति के परिवारों की मेपिंग की जाना शेष नहीं है। अनुसूचित जाति/जनजाति के पात्रता पर्चीधारी समस्‍त 54,266 परिवारों को खाद्यान्‍न का वितरण किया जा रहा है। (ग) सिवनी जिले में अनुसूचित जाति/जनजाति श्रेणी के समस्‍त सत्‍यापित पात्र परिवारों को पात्रता पर्ची जारी कर खाद्यान्‍न का लाभ दिया जा रहा है। पात्र परिवारों का सत्‍यापन एक सतत् प्रक्रिया है। (घ) प्रदेश को भारत सरकार द्वारा निर्धारित खाद्यान्‍न आवंटन की सीमा से अधिक खाद्यान्‍न की आवश्‍यकता होने के कारण माह अगस्‍त, 2016 के पश्‍चात् सत्‍यापित नवीन परिवारों को पात्रता पर्ची जारी नहीं की गई है। पात्र परिवार के रूप में सम्मिलित परिवारों के डी-डुप्‍लीकेशन की कार्यवाही प्रचलित है, उसके उपरांत अपात्र परिवारों को हटाने पर निर्धारित खाद्यान्‍न आवंटन की सीमा के अंतर्गत ही नवीन सत्‍यापित परिवारों को सम्मिलित कर पात्रता पर्ची जारी की जा सकेगी। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''छ:''

श्री दिनेश राय (मुनमुन)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मंत्री जी से आग्रह है कि आपके विभाग से मेरे प्रश्‍न का जो उत्‍तर मिला है, इसमें मेरे प्रश्‍न के बिंदु (ग) और (घ) के उत्‍तरों को घूमा दिया गया है. दोनों बिंदुओं पर असत्‍य जानकारी विभाग द्वारा दी गई है. सर्वप्रथम मैं बताना चाहता हूं कि मेरे यहां के सैकड़ों-हजारों लोगों को पर्चियां नहीं मिल रही हैं. 6-6 महीनों से ज्‍यादा समय हो गया है और पात्र व्‍यक्तियों को पर्चियां नहीं दी गई हैं. सोसायटियों का अवैध माल हमारे यहां बड़े-बड़े कार्यालयों में पकड़ा जा रहा है. मेरा आग्रह है कि मेरे प्रश्‍न के बिंदु (ग) के उत्‍तर में आपने बताया है कि सभी को खाद्यान्‍न मिल रहा है और प्रचलित है. इसी बात को जब मैंने प्रश्‍न के बिंदु (घ) में पूछा कि जिन्‍हें खाद्यान्‍न पर्ची नहीं मिल रही है, तो इस हेतु दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर आप क्‍या कार्यवाही करेंगे तो आपने उत्‍तर में बता दिया कि केंद्र शासन से हमें इतना ही बजट-फण्‍ड मिल रहा है. इतने ही हितग्राहियों को हमें देना है. इसका मतलब हमारे यहां के जो सैकड़ों लोग गरीबी रेखा में हैं और पात्र हैं, अगर केंद्र शासन मध्‍यप्रदेश सरकार को खाद्यान्‍न नहीं देगा तो क्‍या पात्र व्‍यक्ति भूखे रहेंगे ? उन्‍हें आप खाद्यान्‍न कैसे उपलब्‍ध करायेंगे. क्‍या आप पात्र व्‍यक्ति को काटकर ही उन्‍हें खाद्यान्‍न उपलब्‍ध करायेंगे. विभाग के जिन दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा असत्‍य जानकारी दी गई है क्‍या आप उनकी जांच करवायेंगे और क्‍या आप उन पर कार्यवाही करेंगे ?

श्री ओम प्रकाश धुर्वे- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सदस्‍य जी द्वारा किए गए एक-एक प्रश्‍न का बिल्‍कुल सटीक एवं सत्‍यता से परिपूर्ण जवाब दिया गया है. हमारी एक सिलिंग है. हम अधिनियम के अंतर्गत जनसंख्‍या के 75 प्रतिशत को इसका लाभ दे सकते हैं. लगभग 5 करोड़ 44 लाख लोगों को हम लोग दे रहे हैं. हमारा जो आवंटन है 5 करोड़ 30 लाख मिलता है. लेकिन इसके बाद भी 64 लाख से ज्यादा लोगों को हम इसका राशन दे रहे हैं. निश्चित रूप से मध्यप्रदेश के हमारे यशस्वी माननीय मुख्यमंत्री जी का कहना है कि जो भी गरीब लोग हैं, जो पात्रता रखते हैं, उसके साथ कोई भूखा न रहे इसलिए ही हम लोग, जो हमारी सीलिंग है, उससे ज्यादा पात्र व्यक्तियों को हम इसका लाभ दे रहे हैं.

श्री दिनेश राय-- माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे यहाँ जो पात्र व्यक्ति हैं उनको जब आपने पर्ची ही नहीं दी है तो खाद्यान्न कैसे देंगे? आप से आग्रह है कि पर्ची तो उपलब्ध करा दें और सीलिंग हटा दें और ज्यादा फिर आप कहाँ से दे रहे हैं, आप उत्तर में ही दे रहे हैं कि केन्द्र से प्राप्त होने पर ही दिया जाएगा. ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- वैसे उसका साफ उत्तर आ गया है.

श्री दिनेश राय-- आप 64 लाख को कहाँ से दे रहे हैं? ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- इसमें आपका प्रश्न क्या है? आप सब बैठ तो जाएँ, उनको प्रश्न पूछने दीजिए. ..(व्यवधान)..

श्री दिनेश राय-- अध्यक्ष महोदय, आप पात्र व्यक्तियों को पर्ची उपलब्ध करा दें. आप उत्तर में ही खुद बोल रहे हैं कि 6 माह से पर्ची नहीं दी गई है. माननीय मंत्री जी, आप उत्तर में ही दे रहे हैं सम्मिलित परिवारों के लिए डी-डुप्लीकेशन की कार्यवाही प्रचलित है. माननीय मंत्री जी, आप डी-डुप्लीकेशन टेक्निकल वर्ड डाल कर इसमें क्यों गुमराह रहे हैं? आप बता दें डी-डुप्लीकेशन क्या है?

अध्यक्ष महोदय-- आप प्वाईंटेड प्रश्न पूछिए इसमें सब उत्तर है.

श्री दिनेश राय-- अध्यक्ष महोदय, पात्र व्यक्तियों को पर्चियाँ देंगे और डी-डुप्लीकेशन क्या है, यह बता दें.

श्री ओम प्रकाश धुर्वे-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह बात भी सही है कि माह सितंबर से, चूँकि हमारी जो सीलिंग है 75 प्रतिशत से ज्यादा होने के कारण से वह हम जारी नहीं कर पा रहे हैं.

श्री दिनेश राय-- अध्यक्ष महोदय, वही तो पूछ रहे हैं. वही तो जारी नहीं हो रही हैं. समय पर जारी कर दें. दे दें, वे 6-6 माह से घूम रहे हैं. आप उनको दिलवा दें. अध्यक्ष महोदय, आप समय सीमा बता दें, समय सीमा में जारी करा दें. गरीबों का एक रुपये का दाना है. ..(व्यवधान)..मैं पूछ लेता हूँ मेरा भी यही है.. ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- प्रश्न क्रमांक 18 श्री लखन पटेल अपना प्रश्न पूछें.

श्री दिनेश राय-- अध्यक्ष महोदय, मेरा समय सीमा का जवाब दिलवा दें.

अध्यक्ष महोदय-- आपका जवाब आ गया. मंत्री जी उत्तर दे रहे हैं, उत्तर ले लें.

श्री ओम प्रकाश धुर्वे-- अध्यक्ष महोदय, सत्यापन की सतत् प्रक्रिया है. ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- उनका तो प्रश्न आ ही नहीं रहा है. ..(व्यवधान)..

श्री ओम प्रकाश धुर्वे-- सीलिंग से अधिक होने के कारण से पोर्टल बंद है.

श्री मुकेश नायक-- अध्यक्ष महोदय, 8-8 महीने से पोर्टल बंद है. ..(व्यवधान)..

श्री दिनेश राय-- 6 माह से पर्ची नहीं मिल रही. ..(व्यवधान)..एक एक सोसायटी वाले के पास अनाज है. ..(व्यवधान)..

श्री ओम प्रकाश धुर्वे-- पोर्टल खोल दिया जाएगा और पुनः नाम जोड़े जाएँगे. ..(व्यवधान)..

श्री दिनेश राय-- उनको पर्ची मिले. उनको 6 माह का अनाज तत्काल दिलाएँ. ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- कृपया बैठ जाएँ, आपका स्पष्ट उत्तर आ गया है. अब इसके बाद में कोई पूरक की गुंजाईश नहीं है.

श्री मुकेश नायक-- अध्यक्ष महोदय, मेरे पवई तहसील मुख्यालय पर 6 महीने से गरीबों को अनाज नहीं बँटा है. ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- इससे ज्यादा स्पष्ट क्या है?

श्री दिनेश राय-- 6 माह से अनाज नहीं मिला, आप 15 दिन या 1 माह के अन्दर वितरित करा दें. ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- प्रश्न क्रमांक 18 श्री लखन पटेल अपना प्रश्न पूछें. कुछ नहीं लिखा जाएगा सिर्फ लखन पटेल जी का लिखा जाएगा. आप अपना प्रश्न पूछिए, उसका उत्तर आएगा. ..(व्यवधान)..

श्री मुकेश नायक-- (xxx) ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- सब बात आ गई, आप बैठ जाइये.

श्री मुकेश नायक-- (xxx) ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- आप प्रश्न का उत्तर पढ़िए और उनका उत्तर सुनिए. बिल्कुल स्पष्ट कहा है.

श्री दिनेश राय-- (xxx)

श्री मुकेश नायक-- (xxx) ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- कृपया सब बैठ जाएँ. लखन पटेल जी, आप अपना प्रश्न करें.

श्री दिनेश राय-- (xxx) ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- आपका जवाब आ गया. ..(व्यवधान)..

श्री दिनेश राय -- (XXX)....

श्री मुकेश नायक -- (XXX)....

खाद्य सुरक्षा अधिनियम अंतर्गत राशन वितरण

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

 

18. ( *क्र. 144 ) श्री लखन पटेल : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) पथरिया विधानसभा क्षेत्र की किस ग्राम पंचायत के कितने परिवारों को राशन दुकान से खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत लाभ प्राप्‍त हो रहा है? प्रश्‍न दिनांक तक की स्थिति से अवगत करावें। (ख) उक्‍त क्षेत्रान्‍तर्गत कितने परिवारों को खाद्य सुरक्षा पर्चियों का वितरण किया गया? कितने परिवारों को राशन कार्ड, प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा जारी किए गये हैं एवं कितने शेष हैं? (ग) पथरि‍या विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत कितने परिवारों को समग्र सामाजिक सुरक्षा मिशन के तहत सर्वेक्षित किया गया है? वर्तमान में कितने हितग्राही कार्ड/कूपन से वंचित हैं और इनके कूपन कब तक बनेंगे? (घ) उक्‍त क्षेत्र में खाद्यान्‍न सुरक्षा मिशन अ.जा./अ.ज.जा. वर्ग में कितने परिवारों को लाभ दिया जा चुका है व कितने शेष हैं? शेष को कब तक लाभान्वित किया जावेगा?

खाद्य मंत्री ( श्री ओम प्रकाश धुर्वे ) : (क) राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत पथरिया विधानसभा क्षेत्र में ग्रामवार लाभ प्राप्‍त करने वाले पात्र परिवारों की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) पथरिया विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत वर्तमान में राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 में 73,023 पात्र परिवारों को प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा पात्रता पर्ची जारी की गई है। माह अगस्‍त, 2016 के पश्‍चात् सत्‍यापित 619 नवीन परिवारों को पात्रता पर्ची जारी नहीं की जा सकी है। (ग) समग्र सामाजिक सुरक्षा मिशन के पोर्टल पर प्रदेश के सभी निवासियों का सर्वेक्षण उपरांत डाटाबेस तैयार किया गया है, जिसमें पथरिया विधानसभा क्षेत्र के 93,901 परिवारों का डाटाबेस उपलब्‍ध है, इनमें से 619 परिवारों को पात्रता पर्ची जारी की जाना शेष है एवं 20,259 परिवार राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत सम्मिलित पात्रता श्रेणी के अंतर्गत न आने के कारण पात्रता पर्ची हेतु पात्र नहीं है। प्रदेश को भारत सरकार द्वारा निर्धारित खाद्यान्‍न आवंटन की सीमा से अधिक खाद्यान्‍न की आवश्‍यकता होने के कारण दमोह जिले में माह अगस्‍त, 2016 के पश्‍चात् सत्‍यापित नवीन 619 परिवारों को वर्तमान में सम्मिलित परिवारों के डी-डुप्‍लीकेशन की कार्यवाही पूर्ण होने एवं अपात्र परिवारों को हटाए जाने पर निर्धारित खाद्यान्‍न आवंटन की सीमा के अंतर्गत ही सम्मिलित कर पात्रता पर्ची जारी की जा सकेगी। (घ) पथरिया विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति श्रेणी (आयकर दाता एवं प्रथम, द्वितीय व तृतीय श्रेणी के अधिकारी/कर्मचारियों के परिवार छोड़कर) अंतर्गत 26,351 परिवारों को पात्रता पर्ची जारी कर लाभान्वित किया जा रहा है, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति श्रेणी के 83 परिवारों को पात्रता पर्ची जारी किया जाना शेष है। शेष प्रश्‍न का उत्‍तर प्रश्‍नांश (ग) के उत्‍तर अनुसार है।

श्री लखन पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी विधानसभा पथरिया में कितने पात्र परिवार रह गए हैं जिनकी पर्चियां अभी तक नहीं दी गई हैं ? इनकी पर्चियां कब तक दी जाएंगी ? ....... (व्‍यवधान)......

अध्‍यक्ष महोदय -- आप लोग बैठ तो जाएं.

श्री ओमप्रकाश धुर्वे -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जवाब देने के लिए मैं स्‍वयं सक्षम हॅूं. ...(व्‍यवधान)......

अध्‍यक्ष महोदय -- कृपया आप लोग बैठ तो जाएं. दूसरे वक्‍ताओं के प्रश्‍न ही नहीं आए, यह कोई तरीका है ? ....(व्‍यवधान)......

श्री ओमप्रकाश धुर्वे -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं तो माननीय सदस्‍य का जवाब दे रहा हॅूं कि आप जवाब ले लें. क्‍या मैं सक्षम नहीं हॅूं ? मैं आपसे भी ज्‍यादा सक्षम हॅूं. इसलिए इधर बैठा हॅूं.

श्री मुकेश नायक -- कम से कम इतना बता दें.....(व्‍यवधान)......

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ.नरोत्‍तम मिश्र) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सम्‍मानित हमारे मंत्री जी ने स्‍पष्‍ट कर दिया है मैं उसी बात को कह देता हॅूं जिससे सारा समाधान हो जाएगा. उन्‍होंने कहा है कि जो पात्र हितग्राही हैं उनको अनाज बंट रहा है....(व्‍यवधान).....पूरी बात तो सुन लें. उन्‍होंने कहा कि जो पात्र हितग्राही हैं जिनकी पर्ची है उन सबको अनाज मिल रहा है जिनको नहीं मिल रहा है ऐसे छ: लाख लोग हैं चूंकि आवंटन उसका नहीं आया है. जहां तक सम्‍मानित नायक जी ने कहा है उसकी समय-सीमा बता दें. एक महीने में वह कम्‍प्‍लीट हो जाएगी. माननीय मंत्री जी ने कहा है कि उन सबको सम्मिलित कर दिया जाएगा.

श्री दिनेश राय -- समय-सीमा ही तो मांग रहा हॅूं. एक माह में छ: माह का बचा हुआ बांट देंगे ?

अध्‍यक्ष महोदय -- कृपया आप लोग बैठ जाएं.

श्री लखन पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न भी पर्ची से संबंधित है.....(व्‍यवधान).....

अध्‍यक्ष महोदय -- श्री लखन पटेल जी आप तो पूछिए. कार्यवाही में अब किसी का नहीं लिखा जाएगा. केवल पटेल जी का ही लिखा जाएगा.

 

 

11.58 बजे गर्भगृह में प्रवेश एवं वापसी

श्री दिनेश राय, सदस्‍य द्वारा गर्भगृह में प्रवेश एवं वापसी

( श्री दिनेश राय, सदस्‍य अपनी बात कहते हुए गर्भगृह में आए एवं अध्‍यक्ष महोदय की समझाइश पर वापस अपने आसन पर गए)

 

 

 

 

तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर (क्रमश:)

 

श्री लखन पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न भी खाद्यान्‍न पर्ची ये संबंधित है. मेरी विधानसभा क्षेत्र में माननीय मंत्री जी ने उत्‍तर में कहा है कि 619 परिवार एक में और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के 83 परिवारों की पर्ची नहीं दी गई है तो मैं यह जानना चाहता हॅूं कि ये पर्चियां कब तक दे दी जाएंगी और मेरी जानकारी के हिसाब से तो जो पात्र परिवार हैं जो उत्‍तर में आया है यह ये पर्चियां कम हैं. इससे ज्‍यादा पात्र परिवार हैं जिनके पास पर्चियां नहीं हैं तो उनकी जाँच कराकर उनको पर्चियां कब तक देंगे?

अध्‍यक्ष महोदय -- आप फिर से प्रश्‍न बोल दीजिए.

श्री लखन पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न खाद्यान्‍न पर्ची से संबंधित है. माननीय मंत्री जी ने उत्‍तर में दिया है कि 619 परिवार हैं जो पात्र हैं और उनकी पर्चियां नहीं दी गईं. ऐसे ही एसटी/एसटी वर्ग में 83 परिवार हैं जिनकी पर्चियां नहीं दी गईं. पहले तो आप यह बता दीजिए कि इन्‍हें कब तक पर्चियां देकर खाद्यान्‍न वितरण हो जाएगा ? दूसरा प्रश्‍न यह है कि मेरे विधान सभा क्षेत्र में बहुत सारे पात्र परिवार हैं जिनको पर्चियॉं आवंटित नहीं की गईं तो क्‍या उनकी जाँच कराकर उनको पर्चियॉं दी जाएंगी ?

श्री ओमप्रकाश धुर्वे -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अगल महीने पर्चियॉं दे दी जाएंगी.

श्री रा‍मनिवास रावत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ये अगले महीने दूसरों को छोड़ देंगे. इनको दे देंगे.

श्री लखन पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरी विधानसभा का मामला है. मेरी विधानसभा पथरिया में ......(व्‍यवधान).......

श्री बाला बच्‍चन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 19 नंबर पर मेरा प्रश्‍न है.

श्री रामनिवास रावत -- हर माह छोड़ते हैं. छ: लाख गरीब परिवारों को पर्चियॉं नहीं दी गई हैं. छ: लाख गरीब परिवारों को बीपीएल का अनाज नहीं मिल रहा है....(व्‍यवधान)......

श्री लखन पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हॅूं हालांकि...(व्‍यवधान)......

श्री रामनिवास रावत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह गरीबो के साथ अन्‍याय है. आपके विधानसभा क्षेत्र में भी यही स्थिति है. सभी विधानसभा क्षेत्रों में भी यही स्थिति है.

श्री ओमप्रकाश धुर्वे -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कोई अन्‍याय नहीं है. पूरे देश में मध्‍यप्रदेश एक ऐसा राज्‍य है जहां एक रूपये किलो दिया जा रहा है.....(व्‍यवधान).....आपके समय में ....(व्‍यवधान)......यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार है .

अध्‍यक्ष महोदय -- कृपया दूसरा प्रश्‍न पूछने दें, समय हो गया है.

श्री ओमप्रकाश धुर्वे -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश एकलौता राज्‍य है जहां एक रूपया किलो दिया जा रहा है.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप अपना प्रश्‍न करो.

श्री लखन पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी विधानसभा में नगर पंचायत पथरिया है जहां की जनसंख्‍या लगभग 23 हजार है. मैंने पूर्व में शिकायत की थी कि यहां पर साढ़े तेइस हजार लोगों को खाद्यान्‍न पर्ची दी जा रही है. उसकी जाँच भी हुई. लेकिन आज तक उस जाँच का मुझे कोई सूचना मिली है और न ही मेरे इस प्रश्‍न में आया है कि कितने लोगों को पर्ची दी जा रही है. मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हॅूं कि पथरिया नगर पंचायत की पर्चियों में जो गड़बड़ी है क्‍या उसकी जाँच फिर से कराएंगे और मुझे उस जाँच में शामिल करेंगे ?

श्री ओम प्रकाश धुर्वे-- माननीय अध्यक्ष महोदय, इसको दिखवा लेंगे.

श्री लखन पटेल-- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी मुझे भी जाँच में शामिल करेंगे क्या?

श्री ओम प्रकाश धुर्वे-- माननीय अध्यक्ष महोदय, वैसे जाँच हो चुकी है और जो अपात्र परिवार हैं उनको हटा दिया गया है. आप कह रहे हैं तो हम पुनः एक बार इसको दिखवा लेंगे.

श्री लखन पटेल-- धन्यवाद मंत्री जी.

अध्यक्ष महोदय-- प्रश्नकाल समाप्त.

 

 

 

 

(प्रश्नकाल समाप्त)

 

 

 

 

 

 

12.01 बजे नियम 267-क के अधीन विषय

 

अध्यक्ष महोदय-- निम्नलिखित माननीय सदस्यों की सूचनायें सदन में पढ़ी हुई मानी जाएंगी.

1. श्री केदारनाथ शुक्ल

2. श्री कालू सिंह ठाकुर

3. श्री पुष्पेन्द्रनाथ पाठक

4. श्री के.पी. सिंह

5. श्री नारायण सिंह पंवार

6. श्री गोवर्धन उपाध्याय

7. श्री मनोज निर्भय सिंह पटेल

8. श्री रामनिवास रावत

9. श्री प्रताप सिंह

10. श्री रजनीश सिंह

 

12.02 बजे शून्यकाल में उल्लेख

 

(1) श्री कमलेश्वर पटेल (सिहावल)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे सिहावल विधानसभा क्षेत्र के कई ग्रामों की बिजली डिस्कनेक्ट कर दी गई है जबकि अभी दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षायें चल रही हैं और लगभग सभी कक्षाओं की परीक्षायें स्कूलों में संचालित है. छात्रों में भारी आक्रोश है और दूसरी तरफ खेती किसानी का गेहूँ उत्पादन का अंतिम दौर चल रहा है किसान भारी परेशान हैं. इस विषय में हमने स्थगन और ध्यानाकर्षण भी दिया है. आपसे मेरा निवेदन है कि इस पर चर्चा कराई जाये.

(2) श्री बहादुर सिंह चौहान (महिदपुर)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मालवा क्षेत्र में गेहूँ की बम्पर आवक है और मंडियों में जो किसान को समय पर पैसा देना चाहिए, आरटीजीएस नहीं होते हुए चेक दिये जा रहे हैं और चेक के कारण 15 से 20 दिन तक किसानों को पेमेंट नहीं हो पा रहा है.

 

(3) श्री निशंक कुमार जैन (बासौदा)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, गंज बासौदा ग्यारसपुर विधानसभा क्षेत्र के 1200 पात्र व्यक्ति पिछले आठ महीने से पर्ची के लिये परेशान हैं. एनआईसी के अधिकारियों का कहना है कि शासन के निर्देश पर हमने पर्ची जनरेट करना बंद कर रखा है इससे लोगों में रोष व्याप्त है.

 

(4) श्री यशपाल सिंह सिसौदिया (मंदसौर)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन में नित नये अजूबे सामने आ रहे हैं मेरी विधानसभा क्षेत्र मंदसौर के कन्या महाविद्यालय में बीएससी प्रथम सेम की 131 छात्राओं में से 127 छात्राओं को एटिकेटी प्रदत्त कर दी गई है.अध्यक्ष महोदय, जीरो नंबर से लेकर के 11 नंबर कुल अधिकांश छात्राओं को प्राप्त हुए हैं जिसके कारण से छात्राओं में असंतोष है, छात्राओं के द्वारा प्रदर्शन किया जा रहा है, वह ज्ञापन दे रही हैं और विश्वविद्यालय द्वारा सिर्फ यह कह देना कि एटिकेटी के लिए आगामी वर्ष में वह पूरक परीक्षा दे देंगी यह कतई न्यायोचित नही हैं.

 

(5) श्री मधु भगत (परसवाड़ा)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी बालाघाट विकासखंड के अंतर्गत टवेझरी मंझारा में प्रधानमंत्री सड़क योजना के अंतर्गत बनाई गई रोड है जिसमें सड़क के मध्य नाला बनाया गया है उसमें थोड़ा सा भी पानी आने पर वह नाला हमेशा भर जाता है उसमें तीन मौतें हो चुकी हैं. कृपा करके उस नाले का पुनर्निर्माण कराया जाये.

 

(6) श्री बाबूलाल गौर (गोविन्दपुरा)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी विधानसभा क्षेत्र में एक भी शासकीय कन्या महाविद्यालय नहीं है 6 लाख की आबादी के बाद भी गरीब छात्राओं को पढ़ने के लिए निजी महाविद्यालयों में जाना पड़ता है. मैं माननीय शिक्षा मंत्री जी से अनुरोध करूँगा कि गोविन्दपुरा क्षेत्र के अंदर एक शासकीय कन्या महाविद्यालय खोला जाये.

 

(7) श्री मुकेश नायक (पवई)-- अध्यक्ष महोदय, मेरी विधानसभा क्षेत्र रैपुरा से लगे हुए एक माध्यमिक शाला में जो 15 वर्षों से संचालित था जिसमें 100 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत् हैं उसमें एक व्यक्ति ने ताला डाल दिया है कि यह स्कूल मेरा है और पिछले 15 दिन से स्कूल बंद है जनता में असंतोष है. बच्चे पढ़ नहीं पा रहे हैं. मैं शिक्षा मंत्री जी से अनुरोध करता हूं कि तत्काल इस पर प्रभावी कार्यवाही करें.


 

(8) श्री सुखेन्‍द्र सिंह (मऊगंज) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नोटबंदी से आज भी सभी बैंकों में लाइनें लगी हुई हैं, ए.टी.एम. मशीनों पर भी लाइनें लगी हुई हैं. इसी तारतम्‍य में रीवा जिले के मऊगंज विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत मध्‍यांचल बैंक, शाहपुर में नोटबंदी से परेशान किसान श्री वाल्‍मिकी मिश्रा पिता श्री मनमोहन मिश्रा, निवासी ग्राम-राजाधौ, उम्र-70 वर्ष की दोपहर डेढ़ बजे लाइन में लगे रहने से गिरकर मौत हो गई. इस घटना में मौत के जिम्‍मेदार कौन हैं, इसमें जो भी दोषी हों, उनके विरुद्ध कार्यवाही हो तथा मृतक को मुआवजा दिया जाए. सरकार की इस नीति से क्षेत्र में व्‍यापक असंतोष है.

 

(9) डॉ. मोहन यादव (उज्‍जैन-दक्षिण) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उज्‍जैन में श्री सिंथेटिक के कर्मचारी, अधिकारी और साथ ही साथ इंदौर टैक्‍सटाइल मिल में कार्यरत अधिकारी, कर्मचारियों का बकाया भुगतान का मसला लगभग 10 साल से पेंडिंग है. मैं आपके माध्‍यम से माननीय श्रम मंत्री जी से निवेदन करना चाहूँगा कि ऐसे जो बकाएदार हैं जो बूढ़े हो गए हैं, वृद्ध हो गए हैं, उनको पैसों की अत्‍यंत आवश्‍यकता है, अत: शासकीय योजनाओं का भी उनको लाभ दिलाया जाए, साथ ही साथ उनका जो बकाया भुगतान है, वह भी उन्‍हें दिलाने का कष्‍ट करें.

 

(10) श्री दिनेश राय (सिवनी) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 29 मार्च को हिंदू नववर्ष का शुभारंभ हो रहा है जिसमें हमारे क्षेत्र में प्रतिवर्ष एक विशाल जुलूस निकलता है. इसकी अनुमति के लिए हमारे क्षेत्र के लोगों ने मांग की है किंतु अनुमति शर्तों के आधार पर दी जा रही है कि फोर व्‍हीलर रहेंगे तो टू व्‍हीलर नहीं रहेंगे. मेरा आग्रह है कि यह एक धार्मिक कार्यक्रम है और इसमें हमारे तमाम् हिंदू समाज के लोग जुड़े हुए हैं, यह एक परंपरा के आधार पर है अत: इसमें कोई अनुमति की आवश्‍यकता न हो बल्‍कि प्रशासन की उसमें सहभागिता हो और वह मदद करे.

 

(11) श्री कैलाश चावला (मनासा) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रधानमंत्री आवास योजना में जो सर्वे किया गया है, उस सर्वे में बहुत से गाव छूट गए हैं, अत: मेरा अनुरोध है कि जो गाव छूट गए हैं उन गावों का पुन: सर्वे कराके उनको जोड़ा जाए ताकि वहा के हितग्राहियों को लाभ मिल सके.

 

(12) श्री घनश्‍याम पिरौनिया (भांडेर) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी भांडेर विधान सभा में उनाव है और वहा मेले लगते हैं, मैंने निवेदन किया था और कलेक्‍टर महोदय को भी लिखकर दिया था लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है. वहाँ पर शमशान घाट में जब लोग अंतिम संस्‍कार करने के लिए जा रहे थे तो सड़क में पानी भरने के कारण एक व्‍यक्‍ति की मृत्‍यु हो गई. जो मर गया उसको ठिकाने लगाने जा रहे थे लेकिन एक व्‍यक्‍ति और मर गया. अत: मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूँ कि पैदल निकलने के लिए वहा पर एक रास्‍ता जिसे कि फुटपाथ बोलते हैं वह बनाने की कृपा करें.

 

(13) श्री शैलेन्‍द्र जैन (सागर) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सागर विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत शहरी क्षेत्र में जो पट्टों का सर्वे हुआ है, वह प्रॉपर नहीं हो पाया है, उस सर्वे को पुन: कराने के आदेश यहा से जारी हो जाए ताकि मुख्‍यमंत्री जी की जैसी इच्‍छा है उस इच्‍छा के अनुरूप सारे लोगों को पट्टे प्राप्‍त हो जाए.

12.08 बजे पत्रों का पटल पर रखा जाना

1. (क) मध्‍यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड, जबलपुर का चौदहवा वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2015-2016, तथा

(ख) मध्‍यप्रदेश मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, भोपाल का 14वा

वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2015-16.

2. संत रविदास मध्‍यप्रदेश हस्‍तशिल्‍प एवं हाथकरघा विकास निगम लिमिटेड, भोपाल का 34वा वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखा 31 मार्च, 2015.

 

 

3. महाराजा छत्रसाल बुन्‍देलखण्‍ड विश्‍वविद्यालय, छतरपुर (म.प्र.) का प्रथम

वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2015-2016.

डॉ. गोविन्‍द सिंह(लहार) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी ध्‍यानाकर्षण की सूचना में एनकाउंटर से संबंधित बात आई है, लेकिन उसमें मैंने इस बात का उल्‍लेख नहीं किया था कि एनकाउंटर नहीं किया गया है. यह तथ्‍य शायद और किसी सदस्‍य का जोड़ा गया है.

अध्‍यक्ष महोदय - उसे समेकित कर दिया गया है और विभाग को सूचना पूरी भेजी है.

डॉ. गोविन्‍द सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लेकिन अगर कोई सरेंडर करता है तो उसका एनकाउंटर करना अमानवीय है. उन्‍हें पकड़ने से जानकारी मिलती है और उनका एनकाउंटर करने पर वह जानकारी नहीं मिल पाती है.

अध्‍यक्ष महोदय - उसे समेकित कर दिया गया है.

श्री रामनिवास रावत - मैंने भी जो ध्‍यानाकर्षण दिया था, उसमें मेरे द्वारा एनकाउंटर की बात नहीं लिखी गई है.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ऐसे बहुत से लोग हैं, जिनके द्वारा यह बात नहीं लिखी गई है. आप पूछोगे तो हम बता भी देंगे.

श्री रामनिवास रावत - आप सफाई दे रहे हैं तो उनके नाम बता दें ?

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - श्री आरिफ अकील जी ने लिखी थी.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.12 बजे ध्‍यानाकर्षण

डॉ. गोविन्‍द सिंह (लहार), (सर्व श्री रामनिवास रावत, शैलेन्‍द्र पटेल)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

 

 

 

गृहमंत्री (श्री भूपेन्‍द्र सिंह ठाकुर) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

 

डॉ. गोविन्द सिंह - अध्यक्ष महोदय, एटीएस ने आईएसआईएस के संबंध में और ट्रेन विस्फोट करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही की, उन्हें गिरफ्तार किया, इसके लिए तो आप धन्यवाद के पात्र हैं. लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि लगातार 10 वर्षों से क्या कारण है कि पूरे प्रदेश में सिमी की, आईएसआई की गतिविधियां लगातार बढ़ रही है? जो आपका खुफिया तंत्र है, जो सुरक्षा तंत्र है, क्या वह पूरी तरह असफल नहीं है? लगातार घटनाएं घटने के बाद फिर आप एक्शन लेते हैं. आपने घटना के पूर्व एक्शन लेने के कौन-कौन से काम किये? दूसरा, जितने अपराधी आपके संज्ञान में आए, जिनके विरुद्ध आपने प्रकरण दर्ज किये, जो उनके परिवार के लोग, जो उनसे संबंधित लोग थे, जो एक-दूसरे को सूचनाएं पहुंचाने का काम करते थे, उनके घर में आपने छापामारी की तो यह छापामारी कहां-कहां की? जो अपराधियों के अतिरिक्त लोग थे, जो अपराधियों से संबंधित थे, क्या उनके भी गतिविधियों में शामिल होने की जानकारी प्राप्त हुई है? अगर जानकारी है तो उनके नाम बता दें? अभी तक आपने दोनों घटनाओं में कितने अपराधी जेल भेजे हैं? एनआईए जांच कर रही है तो अब क्या आपकी जांच बंद हो गई है?

श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर - अध्यक्ष महोदय, आतंकवाद पूरे देश के लिए एक चुनौती है. परन्तु मैं यह कहना चाहूंगा कि पूरे देश में आतंकवाद के विरुद्ध जितनी सख्त कार्यवाही मध्यप्रदेश में हुई है, देश के किसी राज्य में आज तक इतनी सख्त कार्यवही नहीं हुई. (मेजों की थपथपाहट)

माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा माननीय सदस्य गोविन्द सिंह जी ने इंटेलीजेंस के बारे में कहा मैं उनसे निवेदन करूंगा कि मध्यप्रदेश के सूचनाओं के आधार पर तथा उनकी सक्रियता के कारण हम पिछली तीन घटनाएं जो आतंकवाद से जुड़ी हुईं थीं उन घटनाओं में जिस तरह की सफलता मध्यप्रदेश को मिली है उसमें इंटेलीजेंस, सूचनाओं की बहुत बड़ी भूमिका है. जहां तक आपने कहा कि पैरेलल एक्सचेन्ज वाला मामला हुआ है उसमें जिन लोगों के नाम थे, जब तक जांच हमारे पास में थी उसमें सारे के सारे लोगों की गिरफ्तारी की गई. जो उसमें सख्त कार्यवाही हो सकती थी जिन धाराओं में कार्यवाही हो सकती थी वह सारी की सारी कार्यवाही की गई. अब चूंकि पूरा मामला एन.आई.ए.के पास है उसमें आगे की कार्यवाही के बारे में यहां पर बताना संभव नहीं है. परन्तु इसके पूर्व जितनी भी कार्यवाहियां की गई हैं वह पूरी कार्यवाही के बारे में हमने निवेदन किया है.

डॉ.गोविन्द सिंह--अध्यक्ष महोदय, उसमें कितने आरोपी पकड़े गये ?

श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर--माननीय अध्यक्ष महोदय, जिन 15 लोगों के नाम शुरू में आये थे उन सारे आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है.

डॉ.गोविन्द सिंह--अध्यक्ष महोदय, जो लोग उनको सहयोग पहुंचा रहे थे उनके ऊपर क्या कार्यवाही की गई ?

श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह 15 लोग हैं उसमें वह लोग भी हैं जो सहयोगी थे, वह लोग भी हैं जो कि सीधे तौर पर इनवाल्व थे अब चूंकि मामला एन.आई.के पास है वह डिटेल में इन्क्वायरी करेंगे उसमें जो भी नाम आयेंगे उन पर कार्यवाही होगी.

श्री रामनिवास रावत--माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रदेश की सवा सात करोड़ जनता का काफी गंभीर विषय तथा उनकी सुरक्षा से जुड़ा हुआ मामला है. जैसा कि माननीय मंत्री जी ने उत्तर में बताया कि नवम्बर 2016 में जम्मू-कश्मीर के थाना आरएसपुरा में अपराध पंजीबद्ध कर दो अपराधी श्री सतवेन्द्र सिंह एवं श्री दादू उनकी जांच में यह पाया गया कि इनके बैंक एकाऊंट्स सतना में संचालित होते हैं उस आधार पर इनके बारे में जानकारी मिली उसके बाद से कार्यवाही शुरू की. मंत्री जी के जवाब में ही प्रश्न पूछना चाहता हूं कि प्रकरण तो आपने दर्ज किया है फरवरी, 2017 में जो सिमी के लोग सामान्तर एक्सचेन्ज चला रहे थे. जांच आपकी पहले शुरू हो गई. आपको, मध्यप्रदेश की पुलिस को जानकारी कब मिली कि संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकवादियों को सूचनाएं उपलब्ध कराने के एवज में राशि सतना के बैंक खातों से उपलब्ध करायी गई.क्योंकि इसमें कहीं न कहीं विलंब हुआ है. पुलिस ने इसमें कार्यवाही की है हम इसके लिये धन्यवाद भी देंगे, लेकिन जानकारी मिलने के बाद तथा प्रकरण दर्ज होने के प्रक्रिया में कहीं न कहीं विलंब हुआ है. यह सब लेनदेन तथा सम्पत्ति का मामला है. उन्होंने अवैध सम्पत्ति प्राप्त करने के लिये ऐसी सूचनाएं क्यों उपलब्ध करायीं? आपने इन लोगों को गिरफ्तार किया. सूचनाएं देने तथा सामान्तर एक्सचेंज चलाने के एवज में कितनी कितनी राशि, सम्पत्ति प्राप्त की क्या इसकी जांच की गई? अगर प्राप्त की है तो उसकी सम्पत्ति को जप्त करने के लिये अभी तक क्या कार्यवाही की? यह मेरा दूसरा प्रश्न है. तीसरा मेरा प्रश्न यह है---

अध्यक्ष महोदय--बहुत लंबा प्रश्न हो जाएगा इसमें दो प्रश्न पूछने का अधिकार है.

श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर--माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा कि पूर्व में अपने उत्तर में बताया है कि नवम्बर में जब जम्मू-कश्मीर में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया उनसे पूछताछ के दौरान हमारी पुलिस को जो जानकारी मिली उस जानकारी के आधार पर उसकी विवेचना प्रारंभ की गई. शुरूआत में सिर्फ इतनी जानकारी थी कि सतना में राशि का लेनदेन हुआ है इस जानकारी के आधार पर हम गहराई तक गये और एक ऐसा एक्सचेंज का पता चला जो आतंकवादियों को या जो विदेशी कॉल हैं उनका ट्रांसफर करके और जानकारियां देने का काम करते थे. यह एक्सचेंज अकेले मध्यप्रदेश में नहीं चल रहे थे यह पूरे देश में चल रहे थे. यह काम पूरे में अगर किसी ने किया है तो मध्यप्रदेश पुलिस ने किया है. पुलिस ने पेरेलल एक्सचेंज पकड़ने का काम किया है. पूरे देश में जो पेरेलल एक्सचेंज चल रहा था इससे भारत सरकार के अकेले टेलिफोन डिपार्टमेंट को लगभग 3 हजार करोड़ रुपये की राशि का नुकसान हुआ है. इसका पता लगाने का काम मध्यप्रदेश की पुलिस ने किया. हम लोगों ने सारी की सारी कार्रवाई की इसके लिए आप लोगों को हमारा धन्यवाद ज्ञापित करना चाहिए कि हमने पता लगा लिया और पता लगाने के बाद जो देशद्रोही काम हो रहा था, उसमें जो लोग लिप्त थे, उनको पकड़ लिया. एक्सचेंज का पता लगा लिया. सारी कार्रवाई हमने कर दी तो आपको तो हमारा धन्यवाद करना चाहिए, पुलिस का और सरकार का धन्यवाद करना चाहिए.

श्री रामनिवास रावत--अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद करने में मुझे कोई आपत्ति नहीं है. डॉ गोविन्द सिंह जी ने भी धन्यवाद किया और हम भी कर रहे हैं. अध्यक्ष जी, पहले जेल ब्रेक की घटना हुई उसके बाद यह समानान्तर एक्सचेंज मिला. मेरा सीधा सा प्रश्न था कि वहां सतविंदर और दादू को पकड़ने के बाद किस दिनांक को मध्यप्रदेश को सूचना मिली और उस दिनांक से कब जांच में प्रकरण आया. आपने नवम्बर से लेकर फरवरी में प्रकरण दर्ज किया है. आपने डॉ गोविन्द सिंह के प्रश्न के उत्तर में बताया कि यह प्रकरण भी एनआईए को ट्रांसफर कर दिया जबकि आपके उत्तर में यह कहीं नहीं है कि यह प्रकरण एनआईए को ट्रांसफर किया है. आखरी में भी केवल ट्रेन विस्फोट का प्रकरण आपने एनआईए को ट्रांसफर किया है. इस प्रकरण का कहीं उल्लेख नहीं किया. आप अपना उत्तर देख लें, पढ़ लें. जबकि आपने मौखिक जवाब में बताया कि एनआईए को दिया.

अध्यक्ष महोदय, मेरा दूसरा प्रश्न था कि जो जो वॉयस ओवर इंटरनल प्रोटोकॉल GSM एक्सचेंज चलाने की व्यवस्था है क्या इसका लायसेंस लेना पड़ता है? या इसका अवैध रुप से चल रहा था? और इसका साफ्टवेयर किसने तैयार किया था? क्या इन पकड़े गए 15 अपराधियों में से किसी ने स्वीकार किया कि इन्होंने साफ्टवेयर तैयार किया है. या साफ्टवेयर तैयार करने वाले तक आप पहुंच नहीं पाये यह स्पष्ट कर दें.

श्री भूपेन्द्र सिंह-- अध्यक्ष जी, जैसे नवम्बर में यह घटना हुई हमने सारी की सारी कार्रवाई तीन महीने में कर ली.

श्री रामनिवास रावत--इसके लिए तो आपको और पुलिस को धन्यवाद.

श्री भूपेन्द्र सिंह-- अध्यक्ष जी, मैंने पहले भी कहा कि यह पेरेलल एक्सचेंज चला रहे थे. इसकी चेन पूरे देश में भी थी और पूरे देश में चेन के माध्यम से चल रहा था. इसमें सारी कार्रवाई जब्ती आदि की वह सारी कार्रवाई की है. अब साफ्टवेयर कहां से बना, पैसा कहां से आया चूंकि पूरे देश में यह काम कर रहा था और इसके तार पाकिस्तान से जुड़े थे. पाकिस्तान के हैंडलर से तार जुड़े थे इसलिए डिटेल इंवेस्टीगेशन चल रहा है उसके आधार पर बाकी चीजें सामने आएंगी.

श्री रामनिवास रावत--अध्यक्ष महोदय, इसका मुख्य अपराधी साफ्टवेयर निर्माण करने वाला है. जिसने यह पूरा सिस्टम बनाया और पूरा सिस्टम चलाया. इससे हमारे प्रदेश ही नहीं पूरे देश को खतरा है. सभी जगह कार्रवाईयां हुई है, सभी जगह लोग पकड़े गए हैं. हम देश की सभी जगहों की पुलिस को भी धन्यवाद देंगे की सभी लोग सुरक्षा व्यवस्था में लगे हुए हैं वह अलग विषय है लेकिन मेरा पर्टिकुलर प्रश्न था साफ्टवेयर तैयार करने वाले व्यक्ति तक आप पहुंच पाये कि नहीं पहुंच पाये और कितने समानान्तर एक्सचेंज और जानकारी भेजने के माध्यम से कितनी संपत्ति इन 15 लोगों ने प्राप्त की और उस संपत्ति के विरुद्ध आपने क्या कार्रवाई की?

श्री भूपेन्द्र सिंह-- अध्यक्ष महोदय, जिन लोगों के भी बैंक खाते थे और जिनको पकड़ा गया सब सील कर दिए?

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, उन्होंने संपत्ति कितनी प्राप्त की? उस धनराशि की जांच नहीं करायी. अवैध कामों में लिप्त होकर संपत्ति एकत्रित करने की प्रवृत्ति इसीलिए बढ़ती जा रही है कि अवैध कामों के द्वारा संपत्ति प्राप्त करने के बाद उस संपत्ति के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हो पाती. उनके घर वाले उस संपत्ति का उपयोग करते हैं. अगर उस संपत्ति को जब्त करने की कार्रवाई होगी तो आगे आने वाले समय में भी कोई इस तरह के कामों में लिप्त होने की हिम्मत नहीं करेगा. मैं यह बात कहना नहीं चाहूंगा कि पकड़े गए लोग किस पार्टी के थे और किससे नहीं जुड़े थे. यह कहलवाने के लिए क्यों मजबूर कर रहे हैं? संपत्ति के विरुद्ध भी कार्रवाई करें.

डॉ.नरोत्तम मिश्र - इतने गंभीर विषय को ऐसे कहकर ट्विस्ट करोगे तो कैसे चलेगा. (XXX) कितना गंभीर विषय चल रहा है.

श्री रामनिवास रावत - माननीय नरोत्तम जी,कतई ट्विस्ट नहीं कर रहा हूं. यह बात न डाक्टर गोविन्द सिंह ने ने कही न मैं कह रहा हूं. मेरा जवाब आ जाये.

अध्यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी.

श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर - आप बताएं क्या चाहते हैं ?

अध्यक्ष महोदय - इनका प्रश्न यह है कि जो संपत्ति ट्रांसफर हुई हैं उसमें से क्या कोई जप्त हुई हैं और क्या उनको सील किया गया ?

श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर - अध्यक्ष महोदय, मैंने पहले ही निवेदन किया कि 5 लोगों के बैंक खाते सील कर दिये गये हैं.

अध्यक्ष महोदय - रावत जी आप विस्फोट के बारे में एक प्रश्न और पूछ लीजिये.

श्री रामनिवास रावत - साफ्टवेअर किसने तैयार किया इसकी जांच जारी है कि नहीं.

श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर - इसकी जांच मैंने पूर्व में भी कहा कि इसकी जांच चल रही है और यह मामला हमने एन.आई.ए. को नहीं दिया हमारी ए.टी.एस. जांच कर रही है.

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश शांति का टापू कहा जाता है. इन सब चीजों को हम देखें तो धीरे-धीरे पुलिस कार्यवाही कर रही है लेकिन ये आतंकी गतिविधियां भी कहीं न कहीं बढ़ रही हैं. उसके कारण हमारा पूरा प्रदेश असुरक्षा के माहौल में रह रहा है. आपने कार्यवाही की है उसके लिये धन्यवाद देने में हम कोताही नहीं बरतेंगे लेकिन सारे विषय सुरक्षा से संबंधित हैं. अगर हम जेल ब्रेक की बात करेंगे तो जेल ब्रेक की जांच रिपोर्ट भी अभी तक नहीं आई है कि उस दिन सी.सी.टी.वी. कैमरे क्यों बंद थे, किस तरह से उन्होंने जेल ब्रेक किया ? यदि उस समय इन पर कंट्रोल किया जाता तो जेल ब्रेक नहीं होता और बम विस्फोट जैसी घटनाएं नहीं होतीं. बम विस्फोट से ज्यादा नुकसान नहीं हुआ क्योंकि बम ऊपर की सीट पर रखा हुआ था.आपने बम विस्फोट के अपराधियों को जल्दी पकड़ा उसके लिये धन्यवाद लेकिन हमारे प्रदेश में जो आतंकी गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं तो इस तरह की घटनाएं रोकने के लिये विशेष निर्देश देकर प्रयास करेंगे और जो घायल हुए हैं उनको आपने क्या-क्या सहायता दी यह बता दें.

श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर - अध्यक्ष महोदय, देश में जितनी भी आतंकी घटनाएं हुईं उसमें शाजापुर में जो घटना हुई वह देश के इतिहास में पहली ऐसी आतंकी घटना है जिसमें 5 घंटे में मध्यप्रदेश पुलिस ने आतंकवादियो को पकड़ने का काम किया. यह देश के इतिहास की सबसे त्वरित कार्यवाही हुई है जो मध्यप्रदेश पुलिस ने की है और जितनी कार्यवाही हो सकती थी उतनी मध्यप्रदेश पुलिस ने की है और आगे इस तरह की घटनाएं हमारे प्रदेश में न हो पाएं इसके लिये हम लोग पूरी तरह से सतर्क हैं और कोई ऐसी घटना मध्यप्रदेश में आगे नहीं होने देंगे.

श्री रामनिवास रावत - पहले  रेलवे थाने में प्रकरण कायम हुआ उसके बाद ए.टी.एस. में प्रकरण कायम हुआ उसके बाद आपने एन.आई.ए. को भेजा. यह प्रकरण एन.आई.ए. को कब ट्रंसफर किया गया ?

श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर- दिनांक 16 मार्च को.

श्री रामनिवास रावत - दिनांक17 मार्च को रेलवे थाने में प्रकरण कायम हुआ है.

श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर - रेलवे में तो उसी दिन हो गया था.

अध्यक्ष महोदय - दिनांक 16 मार्च का उत्तर में भी दिया है.

श्री शैलेन्द्र पटेल(इछावर) - अध्यक्ष महोदय, आपको धन्यवाद और सरकार को भी धन्यवाद देता हूं. सारी बात हमारे काबिल मंत्री जी ने बड़ी साफगोई से कही है और एक बात सीधी समझ में आती है किसी भी क्राईम में इंवेस्टीगेशन और इंटेलीजेंस दोनों की भूमिका होती है. रावत जी ने जैसा कहा और सारी बातें जो जवाब में आई उसमें इंवेस्टीगेशन की सारी बातें आई हैं कि क्राईम की घटना घटित हुई. इंटेलीजेंस घटना की रोकथाम करता है. तीन घटनाओं की यहां बात हो रही है चाहे वह जेल ब्रेक की बात हो,चाहे ट्रेन विस्फोट की बात हो,चाहे पेरलल एक्सचेंज की बात हो, तीनों घटनाओं में घटना घटित होने के बाद कार्यवाही का हवाला सरकार दे रही है. मेरा प्रश्न यह है कि जो सरकार पिछले तीन वर्षों में अपना बजट पुलिस के आधुनिकीकरण के ऊपर खर्च कररही है उसमें कितना खर्च गाड़ियां खरीदने पर हुआ और कितना इक्यूपमेंट्स पर खर्च हुआ ? दूसरी बात जितने भी क्राईम हो रहे हैं उसमें साईबर क्राईम ज्यादा हैं. साईबर सेल के लिये सरकार क्या प्रक्रिया अपना रही है और क्या इस वर्ष के बजट में पुलिस आधुनिकीकरण में यह राशि बढ़ी है या घटी है यह मंत्री जी बता दें ?

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र)-- अध्‍यक्ष जी, इसमें मेरा निवेदन है कि गृह विभाग के बजट पर अभी चर्चा होगी, यह बहुत गंभीर विषय है. कितनी गाड़ी खरीदी गईं, कितनी नहीं खरीदी गईं, कितना पैसा खर्च हुआ, कितना नहीं हुआ, यह बजट में मंत्री जी बता देंगे. इसकी गंभीरता को बनाये रखने की प्रार्थना कर रहा हूं.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल-- माननीय अध्‍यक्ष जी, गंभीरता इसलिये है कि सारी बातें जो मंत्री जी ने कहीं वह इन्‍वेस्‍टीगेशन की बात की है.

श्री रामनिवास रावत-- आप गंभीर होते तो इसको स्‍थगन के रूप में स्‍वीकार करते. यह तो अध्‍यक्ष जी की कृपा है, आप तो चर्चा ही नहीं चाहते.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- रामनिवास जी इसी विषय पर आपने पहले आरिफ भाई की बात कराई और इस विषय को किस रूप में लेना है इस पर हमने नेता प्रतिपक्ष से बात की थी.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री गोपाल भार्गव)-- जिस तरह से आप प्रश्‍नोत्‍तर कर रहे हैं, लगता है यह न स्‍थगन लायक था और न ध्‍यानाकर्षण के लायक.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल-- अध्‍यक्ष जी, सीधी सी बात है सारी कार्यवाही हुई, पुलिस ने कार्यवाही की उसके लिये धन्‍यवाद देते हैं, लेकिन जो चिंता का विषय है कहीं न कहीं मध्‍यप्रदेश में इंटेलीजेंस की कमी है. सरकार इसमें क्‍या कदम उठा रही है. माननीय मंत्री जी इंटेलीजेंस के लिये आप आगे क्‍या प्रक्रिया अपना रहे हैं ताकि आगे ऐसी घटना न हो, यह सदन को अवगत करायें.

अध्‍यक्ष महोदय-- आपकी चिंता रिकार्ड में आई है.

श्री रामनिवास रावत-- (श्री गोपाल भार्गव जी की तरफ इशारा करते हुये) बिना आरोप लगाये आपको मजा नहीं आया.

श्री गोपाल भार्गव-- आरोप का विषय नहीं है, एक मरी हुई बंदरिया को कब तक चिपकाये रहोगे.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल-- माननीय अध्‍यक्ष जी, मैं सिर्फ यह चाहता हूं कि आगे सरकार क्‍या कदम उठायेगी ताकि ऐसी घटनायें न हों, सरकार ने क्‍या रोडमेप बनाया है, कम से कम यह तो बता दें.

गृह मंत्री (श्री भूपेन्‍द्र सिंह)-- माननीय अध्‍यक्ष जी, अगर हमारे मध्‍यप्रदेश का इंटेलीजेंस सक्रिय और सक्षम न होता, जैसा मैंने कहा कि देश में सबसे पहले आतंकवाद के विरूद्ध अगर इतने कम समय में कार्यवाही हुई है तो वह मध्‍यप्रदेश में हुई. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जेल ब्रेक हुआ, अभी रामनिवास जी ने जेल ब्रेक की बात कही, जेल ब्रेक के 5-6 घंटे में हमारी पुलिस ने आठों के आठों आतंकवादियों को एनकाउंटर में मार गिराने का काम किया है और स्थिति यह हो गई कि अब लोग यह कहते हैं कि जेल के गेट भी खोल दोगे तो आतंकवादी बाहर निकलकर नहीं जायेंगे, इतनी सक्षम है हमारी मध्‍यप्रदेश की पुलिस.

श्री रामनिवास रावत-- जेल ब्रेक होना आपकी असफलता नहीं है ?

श्री सुन्‍दर लाल तिवारी-- आपने उन आठों को आतंकवादी कैसे कह दिया जो जेल से भागे थे.

अध्‍यक्ष महोदय-- तिवारी जी, यह गंभीर मामला है इसमें हर कुछ न बोलें, बैठ जायें आप.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह-- यह कानूनी विषय नहीं है. आप बैठिये.

स्‍कूल शिक्षा मंत्री (कुंवर विजय शाह)-- (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय-- यह कार्यवाही से निकाल दीजिये. तिवारी जी आप बैठ जायें.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारी पुलिस ने पूरे देश के लिये जो एक खतरा था, जो पेरेलल एक्‍सचेंज चल रहा था उस पूरे पेरेलल एक्‍सचेंज को ध्‍वस्‍त करने का काम मध्‍यप्रदेश की पुलिस ने किया. आतंकवादियों के तार तोड़ने का काम मध्‍यप्रदेश की पुलिस ने किया. अगर ट्रेन में कोई ब्‍लास्‍ट हुआ तो क्‍या इससे पहले कभी देश में 5 घंटों में आतंकवादियों को पकड़ा गया. यह हमारे इंटेलीजेंस के कारण ही तो हुआ है. इसलिये देश में अगर सबसे सक्षम इंटेलीजेंस है तो वह मध्‍यप्रदेश का है.

श्री के.पी सिंह (पिछोर)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी का जो जवाब आया है उसमें इन्‍होंने साफ-साफ कहा है कि दो आरोपियों सतबिन्‍दर और दादू को स्‍थानीय पुलिस जम्‍मू द्वारा गिरफ्तार किया गया है तब जाकर कहीं मध्‍यप्रदेश पुलिस की जानकारी में यह सब आया. मैं माननीय मंत्री जी, आपसे जानना चाहता हूं कि यह एक्‍सचेंज जो चल रहा था, यह कब से चल रहा था और जिनके संचालनकर्ता जो पकड़े गये हैं इनके अलावा इनके तार क्‍या मध्‍यप्रदेश के बाहर, उत्‍तर प्रदेश में सैफुल्‍ला वाली एक घटना अभी हुई, या जो पिपरिया में आपने गिरफ्तार किये या गुजरात में जो लोग गिरफ्तार हुये. चूंकि जबलपुर, सतना, भोपाल और ग्वालियर के अलावा बहुत सारी जगहों पर इनका नेटवर्क था तो क्या इन सब लोगों का लिंक होना आपकी जांच में होना पाया गया ?

श्री भूपेन्द्र सिंह -- अध्यक्ष महोदय, मैंने पूर्व में भी इस बात को कहा है कि यह पेरेलल एक्सचेंज मध्यप्रदेश में नहीं पूरे देश में चल रहा था. इसकी डिटेल्स में जांच एटीएस कर रही है कि यह कब से चल रहा था, कौन कौन से लोग इसमें और थे, जो दूसरे राज्यों में हैं वहां की पुलिस को इंटेलीजेंस को सूचना देने का काम मध्यप्रदेश की एटीएस के माध्यम से हम कर रहे हैं. इनका पूरे देश में नेटवर्क था. इसकी डिटेल्स जांच एटीएस के द्वारा जारी है.

श्री के.पी.सिंह -- दो मामले प्रकाश में आये. एक मामला आपने सौंपा एनआईए को, दूसरा जो एक्सचेंज वाला मामला है वह आपके पास में है, एक्सचेंज वाले मामले में आपको कोई जानकारी नहीं है कि कब से यह एक्सचेंज चल रहे थे.मंत्री जी इसका यही अर्थ निकालें ? अध्यक्ष महोदय, यह मामला पूरे प्रदेश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है. हमारा सौभाग्य है कि जरा-सी दुर्घटना हुई. एक तरफ आप कह रहे हैं कि हमारे प्रदेश में इस तरह का कोई नेटवर्क नहीं है, कुछ नहीं है. एक तरफ आप कह रहे हैं कि घटना के 5 घंटे में पुलिस द्वारा सबको गिरफ्तार कर लिया, सभी ने इसके लिये पुलिस को धन्यवाद भी दिया. लेकिन यह लंबे समय से जो एक्सचेंज चल रहा था, क्योंकि ऐसी गतिविधियां दो चार माह में हो गई ऐसा नहीं है, इस घटना से यह साबित हो रहा है कि अब कोई धर्म के नाम पर कोई विशेष वर्ग मात्र इसमें शामिल नहीं है, इसमें सीधा सीधा लगता है कि पैसा इसमें इन्वाल्व है. पैसे की खातिर हमारे आसपास के लोग जिन पर हम कभी शंका नहीं करते, मैं आप पर कोई आरोप नहीं लगा रहा हूं, किसी के साथ कोई भी हो सकता है तो ऐसे लोग भी इन गतिविधियों में अब शामिल होने लगे हैं जो हमारे आसपास रहते हैं. मेरा मंत्री जी से सीधा प्रश्न है कि क्या ऐसे लोगों के बारे में हमारी कोई नीति बनी है, क्योंकि अब यह विशेष वर्ग से जुड़ा हुआ मामला नहीं रह गया, एक्सचेंज का मामला जब से सामने आया है तब से ऐसा लगता है कि पैसे की खातिर, निजी स्वार्थ की खातिर कोई भी व्यक्ति चाहे वह किसी भी धर्म का हो वह कुछ भी कर सकता है. मंत्री जी, क्या ऐसे मामलों में आप ऐसे डायरेक्शन देंगे जिसकी जांच हो और यह पता लगे कि जितने पकड़े गये हैं उसके अलावा भी मध्यप्रदेश में और कितने लोग थे जो पैसे या स्वार्थ की खातिर इस तरह की गतिविधियों में इन्वाल्व रहे हैं.

श्री भूपेन्द्र सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय के.पी.सिंह जी ने कहा है. यह बात सही है कि इसमें पैसे का इन्वाल्वमेंट बहुत बड़ी मात्रा में है. एक बड़ा कारण इसमें पैसा है और यह आज भी पूरे देश में इस तरह का फ्रॉड चल रहा है. आपने भी देखा होगा कि आपके ही फोन पर कभी वाइस कॉल आ जायेगा, एसएमएस आ जायेगा जिसमें लिखा होगा कि इस कंपनी में इतना पैसा डाल दें तो इतना गुना हो जायेगा, आज भी यह पूरे देश में चल रहा है. कई लोगों के फोन पर इस तरह के मैसेज लगातार आते रहते हैं इसलिये पैसे का लेनदेन भी इसमें एक बड़ा कारण है. पैसे की लालच में भी लोग इस काम में बड़ी मात्रा में जुड़े . इसलिये मेरा कहना है कि विस्तार से इस मामले में जांच चल रही है. जांच में और भी फेक्ट्स सामने आयेंगे . कुछ बातें ऐसी हैं कि सुरक्षा की दृष्टि से यहां पर बताना उचित नहीं है इसलिये जांच में जितनी चीजें आवश्यक हैं, उतना मैंने आपको बताया है.

श्री दिनेश राय "मुनमुन" -- (अनुपस्थित)

श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा(मुगावली)- माननीय अध्यक्ष महोदय, सरकार इसके लिये बधाई की पात्र है. मेरा अनुरोध सिर्फ यह है कि किसी भी पार्टी से जुड़ा हुआ कोई भी व्यक्ति हो, उसको बख्शा नहीं जाना चाहिये, सरकार का साफ्ट कार्नर नहीं होना चाहिये.इन पर बिल्कुल दया मत करें और सख्ती से इस कार्य को करें. यही अनुरोध है.

अध्यक्ष महोदय- मंत्री जी चाहें तो आश्वस्त कर दें.

श्री भूपेन्द्र सिंह -- अध्यक्ष महोदय, कोई भी हो किसी को भी मध्यप्रदेश पुलिस बख्शेगी नहीं.

श्री बाला बच्‍चन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इससे बड़ा मैं समझता हूं कि और क्‍या अपराध हो सकता है कि फर्जी टेलीफोन एक्‍सचेंज खोलकर हमारे प्रदेश और देश की खुफिया जानकारी पाकिस्‍तान को देना और वहां की आईएसआई एजेंसी के एजेंट के रूप में काम करना. मैं समझता हूं कि इनको पूरी तरह से जब तक हमारे कहीं न कहीं इनका प्रभाव किसी भी रूप से पूरी तरह किसी भी पाइंट आफ व्‍यू से समाप्‍त नहीं होगा, तब तक ऐसी गतिविधिया चलने की फिर संभावना बनी रहेगी. भोपाल जेल ब्रेक, मुरैना जेल ब्रेक होना, रेलवे बम विस्‍फोट होने वाली घटना, भविष्‍य में ऐसी घटनाओं का पुनरावृत्तियां न हो और माननीय गृहमंत्री जी ने अभी तक जो कड़ी कार्यवाही की है, उसके लिए हम धन्‍यवाद करते हैं, लेकिन इस तरह की पुनरावृत्ति न हो और इससे संबंधित वातावरण एवं ऐसे आसामाजिक तत्‍वों पर भय भी बनाना पड़ेगा, हमारा आपसे यह आग्रह है, जो एक्‍शन आपने लिया है, उसके लिए धन्‍यवाद. लेकिन भविष्‍य में इस तरह की पुनरावृत्ति न हो. आप हमें और मध्‍यप्रदेश की जनता को इस संबंध में आश्‍वस्‍त करें.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्‍य बाला बच्‍चन जी को और इस सदन के माध्‍यम से सभी माननीय सदस्‍यों को और मध्‍यप्रदेश की जनता को यह आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि मध्‍यप्रदेश पुलिस, जो भी लोग इस तरह की गतिविधियों में शामिल होंगे, उनके विरूद्ध सख्‍ती से कार्यवाही करेंगी, किसी भी कीमत पर हम मध्‍यप्रदेश में आतंकवाद को पनपने नहीं देंगे, आतंकवाद को कुचलने का काम हमारे हमारे राज्‍य में मध्‍यप्रदेश की पुलिस करेगी.

 

 

(2) छतरपुर तहसील में पदस्‍थ तहसीलदार द्वारा दुर्भावनावश की जा रही कार्यवाही से उत्‍पन्‍न स्थिति.

श्री शंकर लाल तिवारी (सतना) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

और असुरक्षा की भावना है.

 

 

 

 

 

 

 

संसदीय कार्यमंत्री (डॉ नरोत्‍तम मिश्र) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

श्री शंकर लाल तिवारी - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह जो बाउंड्रीबाल तोड़ी गई है, मेरे ध्‍यानाकर्षण में था कि इसमें साजिशन और राजनैतिक षडयंत्र है. अध्‍यक्ष महोदय, आप मुझे कृपया संरक्षण दें क्‍योंकि यह बाउंड्रीवाल शुद्ध तरीके से षडयंत्रपूर्वक तोड़ी गई है. पटवारी का प्रतिवेदन है कि जिस जमीन पर बाउंड्रीवाल बनी है, उस जमीन पर भूमि स्‍वामी के स्‍वयं के हक है, उसमें बाउंड्रीवाल बनी है, यह पटवारी का प्रतिवेदन है. नगर परिषद के चुनाव के समय फर्जी जाति प्रमाण पत्र तहसीलदार महोदय ने बनाकर दिया गया था, इस आधार पर वहां पर चुनाव लड़ा गया था, इसकी शिकायत इस पार्टी ने सीजेएम की कोर्ट में की थी और वहां से आदेश हुआ था कि तहसीलदार और जो फर्जी प्रमाण पत्र लेकर के नगरपरिषद में देता है वह इनके विरुद्ध धारा 468, 471,420,467 एवं 120 का मामला चलाया जाये, फर्जी प्रमाण पत्र के कारण और उससे प्रभावित होकर के नगर परिषद् और तहसीलदार दोनों ने मिल करके षडयंत्र किया. पटवारी का प्रतिवेदन है कि भूमि स्वामी की जमीन है. यदि नगर परिषद् से मंजूरी नहीं ली गई थी, तो उसमें सीधे तोड़ने का नियम नहीं था, बल्कि नियम यह था कि 15 गुना जमीन की कीमत की राशि जमा करवाकर, जुर्माना करवाकर के बहाल किया जाये.यह शासकीय जमीन नहीं थी. इसको शासकीय जमीन कहना पूर्णतः असत्य है. मेरा कहना है कि श्री राकेश शुक्ला को क्या हटायेंगे, क्योंकि इससे वहां पूरी असुरक्षा की भावना है. ये टीकमगढ़ जिले में ही निरन्तर रहे हैं और ये इस तरह के काम के कारण और सीजीएम का आदेश है कि इनके ऊपर 420 का प्रकरण चलायें. ऐसे व्यक्ति को हटायेंगे क्या. अध्यक्ष महोदय, इस तरहसे निरीह आदमी का 20 लाख रुपये का नुकसान हो गया.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष महोदय, विवाद किसी से है, हटाना किसी को कह रहे हैं. तोड़ी नगरपालिका ने, तहसीलदार को हटवाने की कह रहे हैं. कागज में ही नहीं है, तहसीलदार का कोई आदेश हो, तो सम्मानित सदस्य बतायें.

श्री शंकरलाल तिवारी -- अध्यक्ष महोदय, तहसीलदार के आदेश पर ही स्टे दिया था पहले और स्टे के बाद फैसला नहीं आया और तहसीलदार तथा नगर परिषद् के लोगों ने खड़े होकर तोड़ दिया.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष महोदय, फिर भी सम्मानित सदस्य, वरिष्ठ सदस्य हैं, अगर इनके मन में कोई जिज्ञासा या भ्रम है,तो मैं यहां से अधिकारी भेज करके पूरे केस की जांच करा लेता हूं. उस जांच में जो भी दोषी पाया जायेगा, हम उसके ऊपर कार्यवाही करेंगे.

श्री शंकरलाल तिवारी -- अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं, पर यह विनती करता हूं कि नगरीय निकाय और साथ में राजस्व यह दोनों के वरिष्ठ अधिकारी भेजे जायें और उनसे जांच कराई जाये.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष महोदय, जी हां.

 

 

 

 

12.52 बजे याचिकाओं की प्रस्तुति

 

अध्यक्ष महोदय -- आज की कार्य सूची में सम्मिलित सभी याचिकायें प्रस्तुत की हुई मानी जायेंगी.

 

 

 

 

 

12.52 बजे वक्तव्य

राज्य वन सेवा में चतुर्थ स्तरीय वेतनमान स्वीकृत करने के संबंध में वन मंत्री का वक्तव्य.

 

वन मंत्री (डॉ. गौरीशंकर शेजवार) -- अध्यक्ष महोदय,

 

12.53 बजे अध्यक्षीय घोषणा

भोजनावकाश विषयक

 

अध्यक्ष महोदय -- आज भोजनावकाश नहीं होगा. भोजन की व्यवस्था सदन की लॉबी में की गई है. माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि सुविधानुसार भोजन ग्रहण करने का कष्ट करें.

12.54 बजे वर्ष 2017-2018 की अनुदानों की मांगों पर मतदान ....... (क्रमश:).

 

(1)

मांग संख्या 12

ऊर्जा

 

मांग संख्या 68

 

नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा.

 

 

उपस्थित सदस्यों के कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत हुए.

अब मांगों और कटौती प्रस्तावों पर एक साथ चर्चा होगी.

इन मांगों पर चर्चा हेतु डेढ़ घण्टे का समय नियत है. तद्नुसार दल संख्यावार भारतीय जनता पार्टी के लिये 1 घण्टा 4 मिनट, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लिये 21 मिनट, बहुजन समाज पार्टी के लिये 3 मिनट एवं निर्दलीय सदस्यों हेतु 2 मिनट का समय आवंटित है. मंत्री का उत्तर भी इसी समय में शामिल है. मैं समस्त सदस्यों से अनुरोध करता हूं कि वे समय सीमा का ध्यान रखकर संक्षेप में अपने क्षेत्र की समस्याएं रखने का कष्ट करेंगे.

श्री जितू पटवारी (राऊ) -- अध्यक्ष महोदय, आपने मांग संख्या 12 एवं 68 पर बोलने के लिये मुझे अवसर दिया, इसके लिये मैं आपको धन्यवाद देता हूं.आदरणीय वित्त मंत्री जी ने अपने बजट भाषण में एक शेर पढ़ा था कि पंछी ने जब जब किया पंखों पर विश्वास,दूर-दूर तक हो गया उसका ही आकाश. बिजली विभाग ने पंखों से आकाश में कैसे उड़ान भरी है, मैं उसको 10-15 मिनट में बताने की कोशिश करुंगा. विद्युत वितरण कम्पनियों के ऋण के भार को लेकर 7361 करोड़ रुपये की मांग की गई है, जिसमें 3 हजार करोड़ रुपये के लगभग अनुदान, जो देय नहीं होगा और बाकी देय राशि का प्रावधान किया गया है. ऊर्जा मंत्री जी को कोयले को लेकर शायद इतना पता है कि कोयला काला होता है और यह भी पता है कि वह जलता भी है. पर यह नहीं पता कि इस कोयले ने कैसे भ्रष्टाचार के रुप में सरकार का मुंह काला किया है, यह मैं बताने की कोशिश करुंगा. लागत से 3 गुनी महंगी आप बिजली जनता को देते हैं. सरकारी बिजली घर में बनी बिजली 2.57 रुपये प्रति यूनिट उत्पादित होती है. आप जो बिजली खरीदते हैं, आपके प्रश्नों के उत्तर से सारी बातें कहना चाहता हूं. सरकार जो बिजली खरीदती है, वह 4 रुपये से 6 रुपये प्रायवेट कम्पनियों से लगभग खरीदती है और जो जनता को अलग अलग श्रेणी में आप देते हैं, उसकी भी सूची मैं लेकर आया हूं कि किस बिजली को किस संदर्भ में, किस तरीके से आप देते हैं.

12.58 बजे {उपाध्यक्ष महोदय (डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुए.}

उपाध्यक्ष महोदय, घरेलू वाणिज्य बिजली 6 रुपये 58 पैसे एवं 7 रुपये 84 पैसे अधिभार मिलाकर 2015-16 की. घरेलू बिजली 5 रुपये 56 पैसे पर यूनिट. आप कृषि में उपयोग करने की, जिसको 24 घण्टे और 15 घण्टे की बात अभी ये सब सदस्य करेंगे, मैं समझता हूं कि यह सभी सदस्यों की पीड़ा भी है 4 रुपये 74 पैसे, 7 रुपये 30 पैसे औद्योगिक बिजली और औद्योगिक उच्च दाब 7 रुपये 20 पैसे और आप बनाते कैसे हैं, उसका भी आंकड़ा लेकर आया हूं. आप जो बनाते हैं, वह 2013-14 में आपने 4 रुपये 90 पैसे का आंकड़ा दिया, उससे पहले 2 रुपये 57 पैसे का दिया, फिर 4 रुपये 69 पैसे का दिया, 2014-15 में 4 रुपये 84 पैसे का और 2015-16 में 5 रुपये 29 पैसे का. जब आप इतनी सस्ती बिजली बनाते हैं और इतनी महंगी बिजली बेचते हैं, फिर भी 5 हजार करोड़ रुपये का घाटा, मंत्री जी आपका कैसा मेनेजमेंट है ,यह मुझे समझ में नहीं आया. मैं आपसे एक अनुरोध करना चाहता हूं कि इसका मूल कारण है कि आपकी विद्युत इकाई, जो मध्यप्रदेश शासन की है, आप ही के उत्तर में आपने कहा है कि हम जितनी उसकी बिजली क्षमता पैदा करने की है, उससे 20 से 25 प्रतिशत बिजली ही आप पैदा कर पा रहे हैं. मैं समझता हूं कि आपके मंत्री बनने के बाद आप इतने कर्मठ आदमी हैं, बचपन से लेकर आज तक इतनी मेहनत की है, खुद के दम पर राजनीति में आपने अपना स्थान बनाया है, मैं समझता हूं कि विद्युत सुधार के लिये भी आप प्रयास करेंगे, इसकी मैं आपसे कल्पना करता हूं कि सरकार 35 प्रतिशत से 40 प्रतिशत क्षमता से ही प्‍लांटों पर अपना उत्‍पादन कर पा रही हैं. यह सरकार का फैल्‍युअर है और साथ ही इसका भी फैल्‍युअर है कि जो कोयला इन कम्‍पनियों को मंत्री जी आप देते हैं और खासकर जो अधिकारी इधर बैठे हैं. मैं आपके माध्‍यम से अनुरोध करना चाहता हूँ, उसमें भारी मात्रा में भ्रष्‍टाचार है.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार - उपाध्‍यक्ष महोदय, सामान्‍य तौर पर परम्‍परा यही है कि अधिकारी दीर्घा, अध्‍यक्षीय दीर्घा या दर्शक दीर्घाओं का उल्‍लेख सदन में नहीं किया जाता.

उपाध्‍यक्ष महोदय - आप ठीक कह रहे हैं.

श्री जितू पटवारी - उपाध्‍यक्ष जी, मैंने कहा है कि अधिकारियों का भ्रष्‍टाचार.....

उपाध्‍यक्ष महोदय - पटवारी जी, आपने कहा है. आप उनके माध्‍यम से अधिकारियों को बता रहे हैं. यह उचित नहीं है.

श्री जितू पटवारी - ठीक है. मैं यह अनुरोध करना चाह रहा था कि क्षमता जितनी कम हो रही है, उसके पीछे कोयले का जो उपयोग किया जाता है. कितने ग्रेड का कोयला खरीदना चाहिए