मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा                                                                     चतुर्दश सत्र

 

 

जुलाई, 2017 सत्र

 

बुधवार, दिनांक 19 जुलाई, 2017

 

(28 आषाढ़, शक संवत्‌ 1939 )

 

 

[खण्ड-  14 ]                                                                                    [अंक- 3 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

बुधवार, दिनांक 19 जुलाई, 2017

 

(28 आषाढ़, शक संवत्‌ 1939 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.01 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

                                      तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर

कर्मचारी के विरूद्ध कार्यवाही

[खाद्यनागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

1. ( *क्र. 26 ) श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नकर्ता के 03 मार्च 2017 के परि.अता. प्रश्न क्रमांक 29 के संदर्भ में बताएं कि राशन माफिया कर्मचारी जगदीश कुशवाह जिसके न्यायालय में जाने से व स्थगन लाने से खाद्य प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल अधिकारी सुकृति सिंह व चंदेल की सिफारिशों पर पिछले 7 वर्ष से कार्यवाही नहीं हो पा रही हैक्‍या जगदीश कुशवाह को दण्ड स्वरूप पनवारीहार आरोन स्थानांतरण किया गया थाक्‍या पुनः उसे महोली चंदेरी स्थानांतरण किया व उसे अशोकनगर जिले की कालाबाजारी व राशन की व्यवस्था से अलग किया था(ख) यदि हाँ, तो क्‍या उसको महोली भेजकर राशन वितरण में शामिल कर लिया हैक्‍या पुनः जिलाधीश को इसकी शिकायत हुईयदि हाँ, तो उसका विवरण दें।

        खाद्य मंत्री ( श्री ओम प्रकाश धुर्वे ) : (क) श्री जगदीश कुशवाह से संबंधित प्रकरणों में माननीय उच्‍च न्‍यायालय खण्‍डपीठ ग्‍वालियर में दायर याचिका क्रमांक डब्‍ल्‍यू.पी. 4747/2010 में स्‍थगन दिया गया है। जिला सहकारी केन्‍द्रीय बैंक मर्या. गुना द्वारा श्री जगदीश कुशवाह का स्थानांतरण आदेश क्रमांक/स्‍थापना/केडर/2016-17/534, दिनांक 14.06.2016 को संस्‍था डोंगर (चंदेरी)जिला अशोकनगर से पनवाडीहाट (आरोन)जिला गुना किया गया तथा पुन: आदेश क्रमांक स्‍थापना/2016-17/2469 दिनांक 14.10.2016 के द्वारा पनवाडीहाट (आरोन)जिला गुना से प्राथमिक साख सहकारी संस्‍था महोली (चंदेरी)जिला अशोकनगर किया गया है। (ख) श्री जगदीश कुशवाह का स्थानांतरण जिला सहकारी केन्‍द्रीय बैंक मर्या. गुना द्वारा प्रशासनिक प्रक्रिया अनुसार किया जाकर पुन: पदस्‍थापना सेवा सहकारी समिति महोली तहसील चंदेरी पर की गई हैजिसमें संबंधित संस्‍था द्वारा राशन वितरण का कार्य किया जा रहा है। उक्‍त के संबंध में माननीय विधायक मुंगावली के पत्र क्रमांक 945, दिनांक 16.03.2017 से श्री जगदीश कुशवाह का स्थानांतरण पुन: चंदेरी किये जाने पर शिकायत की गई है।

          श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा - अध्यक्ष महोदय, एक डेलीवेजेज वाला मामूली संविदा कर्मचारी राशन माफिया का uncrown king है. इसके तीन मकान,कोठियां,फतेहाबाद में,दो चंदेरी में, एक अशोक नगर में, एक ग्वालियर में है. इसके पास जे.सी.बी.,डंपर गाड़ियां हैं. वह खनन माफिया और भूमाफिया भी है. चंदेरी के भाजपा विधायक श्री राजकुमार सिंह वर्ष,2010 में ध्यानाकर्षण विधान सभा में लाये थे कि यह व्यक्ति करोड़ों रुपये की राशि एस.सी,एस.टी,बी.पी.एल. के लोगो की करोड़ों रुपये की राशि राशन की कालाबाजारी करके खा जाता है उसके बाद भी उस पर उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है. विभाग गलत आदेश निकालते हैं और वह उस पर कोर्ट से स्टे ले आता है. इससे गुना,अशोक नगर के कलेक्टर,चंदेरी,मुंगावली के एस.डी.ओ.,खाद्य और सहाकरिता विभाग के सभी कर्मचारी इसकी उंगलियों पर नाचते हैं. मैं मंत्री जी से पूछना चाहूंगा कि पिछले 7 वर्ष से जो अधिकारी इसकी सेवा प्रतिवर्ष 11 महीने बढ़ा रहे हैं और इसको बर्खास्त नहीं कर रहे हैं और इससे मिले हुए हैं. इसके कहने पर राशन की दुकानें अटैच करते हैं. उन पर कार्यवाही करेंगे और दूसरे इतनी सारी संपत्ति इस गरीब कर्मचारी ने एकत्रित कर ली है तो इसकी जांच करवाएंगे ?

            श्री ओमप्रकाश धुर्वे - माननीय अध्यक्ष महोदय, यह बात सही है कि अनियमितता की शिकायतें कई बार हमारे विभाग को और कलेक्टर साहब को प्राप्त होती रही हैं लेकिन इन्होंने माननीय न्यायालय से स्थगन आदेश ले रखा था, इस कारण इस  पर कार्यवाही नहीं हो पाई थी लेकिन अब हम इस पर कार्यवाही कर कर रहे हैं. जैसी माननीय विधायक जी ने शिकायत की है तो सेवा से हम इस कर्मचारी को  पृथक कर देंगे. इसकी ढेर सारी शिकायतें हैं.

          श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा - अध्यक्ष महोदय, मेरा अनुरोध है कि इसकी आय से अधिक सम्पत्ति की जांच आप करवाएंगे क्योंकि बहुत गरीब,एस.सी.एस.टी.,बी.पी.एल. के लोगों का राशन यह पिछले सात सालों से कालाबाजारी करके बेच रहा है और इतना बड़ा अपराध इसने किया  है. तो उन सबकी आह उसको तो लगेगी ही लगेगी आप और हम सबको भी लगेगी अगर आपने इसकी सम्पत्ति की जांच नहीं की. बर्खास्त करने से कुछ नहीं होगा.

          श्री ओमप्रकाश धुर्वे - माननीय अध्यक्ष महोदय, यह संविदा सेवा में है. इसका ट्रांसफर नहीं होना चाहिये. ट्रांसफर नहीं करना चाहिये. इसको संविदा सेवा से अलग कर देना चाहिये तो हम इसको सेवा से अलग कर रहे हैं  और जांच करवा लेंगे.

                                     

 

                                         सीमांकन प्रकरणों का निराकरण

[राजस्व]

2. ( *क्र. 1188 ) डॉ. मोहन यादव : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) 01 जनवरी 2016 से प्रश्‍न दिनांक तक उज्‍जैन जिले की समस्‍त तहसीलों में सीमांकन हेतु कितने आवेदन प्राप्‍त हुए?दिनांकवारग्रामवारतहसीलवार जानकारी प्रदान करें। उनमें से कितने प्रकरणों में सीमांकन कर दिया गया हैकितने प्रकरणों में सीमांकन होना शेष हैशेष प्रकरणों में सीमांकन नहीं होने के क्‍या कारण हैंग्रामवारतहसीलवार जानकारी प्रदान करें। (ख) प्रश्नांश (क) की जानकारी अनुसार क्‍या जिन कृषकों ने अवैध राशि प्रदान की सिर्फ उन्‍हीं कृषकों का सीमांकन किया गया है तथा बाद में प्राप्‍त आवेदन पर पहले सीमांकन कर दिया गया है तथा जिन्‍होंने पहले आवेदन दिया उनका सीमांकन नहीं किया गया है?

       

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) :-

          डॉ. मोहन यादव - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न में मैंने वैसे तो इस जिले की बात कही लेकिन यह पूरे प्रदेश के लिये अत्यंत प्रभावी और समसामयिक है. बड़े पैमाने पर सीमांकन के आवेदन हम अपने-अपने जिलों,तहसीलों में लगाते हैं तो जिनके निर्धारित क्रम आते हैं और वे नपती कराने जाते हैं लेकिन उनकी नपती न होकर अन्य लोगों की नपती हो जाती है. कई दिनों तक किसान परेशान होते हैं और यह दिक्कत का विषय बनता है. मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहूंगा कि उज्जैन जिले का जो मैंने प्रश्न पूछा था तो क्या प्रश्न दिनांक तक जिनके आवेदन लगे थे उसी क्रम में उनकी नपती हुई है ? क्योंकि जो जानकारी आई है उसमें थोड़ा अंतर आया है.

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं धन्‍यवाद देता हूं माननीय विधायक जी को कि एक बड़ी विसंगति पर हमारा ध्‍यान इन्‍होंने आकर्षित किया. अभी तक कोई रिकार्ड नहीं रहता था, एप्‍लीकेशन किस क्रम में आ रही हैं, किसकी नपती कब हो रही है, यह नपती करने वालों के मन पर निर्भर करता था और इसलिये कल ही हमने इस प्रश्‍न के बाद आदेश निकाल दिये हैं कि साधारणत: फर्स्‍ट कम फर्स्‍ट के आधार पर ही नपती होगी, जब तक कोई विशेष, कोई अपवाद स्‍वरूप बात नहीं हो, कोई आदेश नहीं हो और इसलिये भविष्‍य में अब जो भी नपती होगी वैसे भी अब आरसीएमएस सिस्‍टम में सब एंट्री होने लगी है फर्स्‍ट कम फर्स्‍ट के आधार पर ही करेंगे.

          डॉ. मोहन यादव--  बहुत-बहुत धन्‍यवाद माननीय मंत्री जी और माननीय अध्‍यक्ष महोदय.

          श्री रामनिवास रावत--  माननीय मंत्री जी इसे लोक सेवा गारंटी में लेंगे ? समय  सीमा निर्धारित करेंगे ? यह बहुत महत्‍वपूर्ण बात है, जबरदस्‍त रूप से भ्रष्‍टाचार होता है, साल-साल भर तक पड़े रहते हैं.

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता--  मुझे लगता है इसमें थोड़ा सा समय लगेगा, आप बिलकुल ठीक कह रहे हैं. एक तो हमारा आरसीएमएस सिस्‍टम जो लागू हुआ है इसमें प्रतिदिन की स्थिति हर जिले कि आप खुद वेबसाइट पर देख सकते हैं और अधिकारी भी मॉनीटरिंग कर सकेंगे और मुझे लगता थोड़ा समय दीजिये इसे और ठीक कर देंगे.

 

सीमांकन के प्रकरणों के निराकरण हेतु ऑनलाईन सुविधा

[राजस्व]

3. ( *क्र. 1098 ) श्री मुकेश पण्‍ड्या : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रदेश में सीमांकन के प्रकरणों के संदर्भ में आवेदन प्राप्त करने तथा उनके निराकरण के लिये ऑनलाईन व्यवस्था है? यदि हाँ, तो उसकी प्रक्रिया क्या है और यह कब से लागू है और यदि नहीं, तो क्‍या शासन भूमिधारकों की सुविधा हेतु ऑनलाईन आवेदन प्राप्त करने की योजना लागू करेगा? यदि हाँ, तो कब तक लागू की जावेगी? (ख) क्या सीमांकन के संदर्भ में आवेदन प्राप्त करने एवं सीमांकन कार्य पूर्ण करने की समय-सीमा है? यदि हाँ, तो वह क्या है और आवेदन प्राप्ति के कितने दिनों के अंदर सीमांकन का कार्य पूर्ण किया जाना अनिवार्य है(ग) बड़नगर विधानसभा क्षेत्र में पिछले 3 वर्षों में सीमांकन के कितने प्रकरण प्राप्त हुए? उसमें से कितने प्रकरणों का निराकरण किया गया तथा कितने प्रकरणों का निराकरण नहीं किया जा सका? क्या जिन प्रकरणों का निराकरण नहीं हो पाया है, उनके आवेदकों को सूचना प्रदान की गई है या नहीं। पिछले 3 वर्षों में स्वीकृत प्रकरण एवं अस्वीकृत प्रकरणों की संख्‍यात्‍मक जानकारी ग्राम सहित प्रदान करें?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जी हां. म.प्र.शासन राजस्‍व विभाग द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 2 जून 2017 से उक्‍त प्रक्रिया निर्धारित की गई. शेष जानकारी परिशिष्‍ट ''अ'' पुस्‍तकालय में रखे अनुसार. (ख) जी हां. सामान्‍यत: सीमांकन के आवेदन 15 अक्‍टूबर से 15 जून तक प्राप्‍त किये जाते हैं. सीमांकन कार्य पूर्ण करने के लिये 30 दिवस निश्चित हैं. (ग) उज्‍जैन जिले की बड़नगर विधानसभा क्षेत्र में पिछले तीन वर्षों में सीमांकन के 1402 प्रकरण प्राप्‍त हुये उसमें 1211 प्रकरणों का निराकरण किया गया. सीमांकन हेतु शेष रहे 191 प्रकरणों में पटवारियों की हड़ताल, किसानों का सम्‍मेलन लो एण्‍ड ऑर्डर में ड्यूटी, प्‍याज उपार्जन में ड्यूटी, खरीफ फसल की बोवनी होने के कारण नहीं किये जा सके हैं. विगत तीन वर्षों में प्राप्‍त आवेदन पत्रों के निराकरण की स्‍वीकृत एवं अस्‍वीकृत की जानकारी ग्रामवार सूची परिशिष्‍ट ''ब'' पुस्‍तकालय में रखे अनुसार.

          श्री मुकेश पण्‍ड्या--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा भी सीमांकन के संबंध में प्रकरण था. मेरे द्वारा प्रश्‍न में मुख्‍य रूप से पूछा गया है कि सीमांकन के निराकरण के लिये ऑनलाइन व्‍यवस्‍था है, यदि हां तो उसकी प्रक्रिया क्‍या है और यह कब से लागू हुई ? इस संबंध में जानकारी पूछी गई थी किंतु मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में जानकारी बिलकुल नहीं आई है. मुझे कृपया यह जानकारी प्रदान करने का कष्‍ट करें ?

          अध्‍यक्ष महोदय--  इसका उत्‍तर तो अलग से आया है.

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वैसे जो प्रश्‍न में कहा है 23 सितम्‍बर 2010 से है, ऑनलाइन का आप पूछ रहे हैं वह 2 जून से यह प्रक्रिया शुरू हुई है.

          श्री मुकेश पण्‍ड्या--  ठीक है, धन्‍यवाद.

विवादित/अविवादित/नामांतरण/बंटवारा एवं सीमांकन के प्रकरण

[राजस्व]

4. ( *क्र. 1005 ) कुँवर हजारीलाल दांगी : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधान सभा क्षेत्र खिलचीपुर के अंतर्गत वर्ष 2016-17 से प्रश्‍न दिनांक तक कितने विवादित एवं अविवादित नामांतरणबंटवारा व सीमांकन के प्रकरण प्राप्‍त हुयेप्राप्‍त प्रकरणों में से प्रश्‍न दिनांक तक कितने प्रकरणों का निराकरण किया गया तथा कितने प्रकरणों का निराकरण किन कारणों से किया जाना शेष है(ख) प्रश्नांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में क्‍या उपरोक्‍तानुसार प्रकरणों का निराकरण करने हेतु कोई समय-सीमा निर्धारित हैयदि हाँतो ऐसे कितने प्रकरण हैं, जिनका निराकरण निर्धारित समय-सीमा उपरांत भी नहीं किया जा सका हैइसके लिये कौन दोषी हैक्‍या शासन ऐसे दोषियों के विरूद्ध कोई कार्यवाही करेगायदि हाँतो कब तक तथा लंबित प्रकरणों का निराकरण कब तक कर दिया जावेगा?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) एवं (ख) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

 

          कुंवर हजारी लाल दांगी--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने मेरे प्रश्‍न में यह पूछा था कि अविवादित नामांतरण और अविवादित बंटवारे जो लंबित हैं, क्‍या इनकी समय-सीमा निर्धारित करके उनका समय-सीमा में निपटारा करायेंगे और इतने ज्‍यादा लंबित है कि उसकी वजह से किसान पटवारियों के और तहसील के चक्‍कर लगाते रहते हैं, परेशान होते रहते हैं तो उसकी समय-सीमा निर्धारित करेंगे क्‍या ताकि किसान परेशान न हो ?

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इनकी समय-सीमा निर्धारित है और मैं माननीय सदस्‍य को बताना चाहता हूं कि जो प्रश्‍न आपने पूछा है यहां निर्धारित समय-सीमा के अंदर के ही जो अविवादित प्रकरण हैं वही पेंडिंग हैं, उस सीमा के बाहर का कोई नहीं है जो विवादित नहीं है.

          कुंवर हजारी लाल दांगी--  माननीय मंत्री जी इसमें 138 अवि‍वादित नामांतरण पेंडिंग हैं मेरी विधान सभा क्षेत्र में, अगर यह अविवादित हैं तो फिर पेंडिंग क्‍यों रहे ?

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता--  जो समय-सीमा है उसके अंदर में ही हैं, जितने दिन में उनको करना चाहिये, जो तत्‍काल आती हैं, रोज एप्‍लीकेशन आती हैं वही पेंडिंग हैं, समय-सीमा के बाहर का कोई भी एक भी पेंडिंग नहीं है.

           कुंवर हजारी लाल दांगी--  ऐसे ही नामांतरण और बंटवारा, इनका भी समय सीमा में निपटारा होगा क्‍या  ?

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता--  दोनों ही, यह चार्ट लगा है, यह सभी समय-सीमा के अंदर के ही हैं.

          कुंवर हजारी लाल दांगी--  धन्‍यवाद.

प्रदेश में स्वीकृत श्रमोदय विद्यालय

[श्रम]

5. ( *क्र. 393 ) श्री शैलेन्द्र जैन : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या मध्‍यप्रदेश भवन एवं अन्‍य संनिर्माण कर्मकार मण्‍डल के अंतर्गत प्रदेश में श्रमोदय विद्यालय स्‍वीकृत किये गये हैंयदि हाँतो किन-किन शहरों में स्‍वीकृत किये गये हैंस्‍वीकृत राशि सहित विद्यालयवार बतावें। (ख) क्‍या सागर संभाग में कर्मकार मण्‍डल के अंतर्गत लगभग 3 लाख श्रमिक पंजीकृत हैंक्‍या संभागीय मुख्‍यालय सागर में श्रमोदय विद्यालय खोले जाने का प्रस्‍ताव शासन के समक्ष विचाराधीन हैयदि हाँतो उक्‍त प्रस्‍ताव कब तक स्‍वीकृत कर दिया जायेगा(ग) प्रश्नांश (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में यदि नहीं, तो क्‍या शासन श्रमिक परिवारों के हित में श्रमोदय विद्यालय खोले जाने हेतु सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगायदि हाँतो कब तक?

खाद्य मंत्री ( श्री ओम प्रकाश धुर्वे ) : (क) जी हाँ। मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल के अंतर्गत प्रदेश में स्वीकृत श्रमोदय विद्यालय एवं स्वीकृत राशि की विद्यालयवार जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख)जी हाँ। मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अंतर्गत सागर संभाग में मई 2017 की स्थिति में कुल 338739 निर्माण श्रमिक पंजीकृत हैं। संभागीय मुख्यालय सागर में वर्तमान में मंडल द्वारा श्रमोदय विद्यालय खोला जाना विचाराधीन नहीं है। अतः प्रश्नांश की शेष जानकारी का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) प्रश्नांश (ख) के परिप्रेक्ष्य में मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अंतर्गत सागर संभाग में पंजीबद्ध निर्माण श्रमिकों हेतु वर्तमान में श्रमोदय विद्यालय खोला जाना विचाराधीन नहीं है।

परिशिष्ट - ''एक''

          श्री शैलेन्‍द्र जैन--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न के जवाब में माननीय मंत्री महोदय ने जवाब दिया है कि सागर संभाग में 3 लाख 38 हजार 739 पंजीकृत श्रमिक हैं और मैं मानता हूं कि लगभग इससे दोगुनी संख्‍या जो है अपंजीकृत श्रमिकों की होगी. इतनी बड़ी श्रमिकों के परिवारों की संख्‍या को दृष्टिगत रखते हुये मैं समझता हूं माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सागर संभाग में श्रमिकों के लिये जो श्रमोदय विद्यालय लगभग 4 स्‍थानों पर वर्ष 2015 में खोले गये थे, हालांकि उनका निर्माण कार्य अभी चालू है. वर्ष 2015 के बाद 2016, 2017 में कोई भी नया विद्यालय नहीं खोला गया है. आपके माध्‍यम से मैं मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं कि बुंदेलखंड रीजन में हमारे श्रमिकों की बड़ी संख्‍या को देखते हुये और श्रमिकों के परिवार के बच्‍चों की अच्‍छी शिक्षा-दीक्षा के लिये इस तरह के श्रमोदय विद्यालय खोलने की घोषणा करेंगे क्‍या ?

          श्री ओमप्रकाश धुर्वे -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सर्वोच्य न्यायालय में दायर रिट पिटीशन क्रमांक 318/2006 में दिये गये निर्देश के परिपालन में भारत सरकार श्रम मंत्रालय द्वारा अधिनियम की धारा 60 के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुये 7.6.2016 को यह निर्देश प्रसारित किये गये हैं कि कर्मकार मण्डल में जमा उप कर की राशि में से हास्पीटल, विद्यालय आदि हेतु भवनों का निर्माण नहीं किया जाये. इस संबंध में भारत सरकार, श्रम मंत्रालय द्वारा माननीय सर्वोच्य न्यायालय में दिनांक 9.7.2016 को दायर शपथ पत्र में इस भी इसका उल्लेख किया गया है. इसलिये अब इस तरीके से भवन निर्माण आदि का कार्य कर्मकार मण्डल के द्वारा होना संभव नहीं हो पायेगा.

          श्री शैलेन्द्र जैन- माननीय अध्यक्ष महोदय, अगर उस राशि से नहीं किया जा सकता है जिस राशि का उल्लेख आदेश में है तो शासन अपने स्तर पर पृथक से अपने बजट में इसको शामिल करे और मैं तो समझता हूं कि हरेक संभाग में इस तरह का महाविद्यालय श्रमिकों के हित में खोला जाना आवश्यक है. हमारी सरकार श्रमिकों की हितकारी सरकार है, इसलिये मंत्री जी से पुन: एक बार निवेदन है कि राज्य सरकार अपने बजट से ऐसे विद्यालय खोलने के लिये पृथक से बजट की घोषणा करेगी तो बहुत अच्छा होगा.

          श्री ओमप्रकाश धुर्वे-- माननीय अध्यक्ष महोदय, श्रम विभाग में ऐसा कोई बजट नहीं है, कर्मकार मण्डल में शेष की राशि आती है उससे ही यह संभव हो पाता है लेकिन सर्वोच्य न्यायालय के स्पष्ट निर्देश हैं इसलिये अब इस प्रकार की संस्थायें खोलना संभव नहीं है.

          श्री शैलेन्द्र जैन- धन्यवाद.

 

 

 

शासकीय भूमि पर काबिज पट्टेधारियों का विस्‍थापन   

[राजस्व]

6. ( *क्र. 830 ) श्री वीरसिंह पंवार : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि    (क) क्‍या प्रश्‍नकर्ता के तारांकित प्रश्‍न क्रमांक 5128 के उत्‍तर में माननीय मंत्री जी ने दिनांक 20.03.2017 में मौखिक चर्चा में यह माना था कि महलुआ चौराहा पर शासकीय भूमि वर्ष 2011 और 2013 में अपात्र लोगों को गलत तरीके से पट्टे के रूप में दी गई थी और आश्‍वस्‍त किया था कि एडीशनल कमिश्‍नर भोपाल को वहां भेजकर कार्यवाही की जावेगी तथा अतिक्रमण हटाकर संलिप्‍त लोगों के खिलाफ कार्यवाही की जावेगी(ख) यदि हाँ, तो क्‍या आवास हेतु पट्टे पर दी गई भूमि पर व्‍यवसायिक रूप में बजाज का शोरूम खोलकर दुरूपयोग किया जा रहा हैशासन को मालूम होने पर भी ऐसे दोषियों पर अभी तक कार्यवाही क्‍यों नहीं की गईप्रश्‍नकर्ता द्वारा पत्र के माध्‍यम से राजस्‍व मंत्रीजी एवं राजस्‍व सचिव को बार-बार लिखने पर भी दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही नहीं की जा रही, क्‍या कारण है? स्‍पष्‍ट करें। (ग) क्‍या सरपंच ने स्‍वयं अपने पुत्र तथा देवेन्‍द्र पुत्र जमुनाप्रसाद तिवारी एवं देवेन्‍द्र की पत्‍नी श्रीमती कालेन्‍द्री तिवारी जो तत्‍कालीन जिला पंचायत सदस्‍य के भाई हैं, को 30 X 30 के पट्टे उनके प्रभाव में दिये तथा यह तीनों शासकीय पट्टे पाने के हकदार नहीं थेइनके पास कई बीघा जमीन और पक्‍के बहुमंजिला मकान हैं, दिए गए पट्टे गलत हैं, क्‍या इन्‍हें तत्‍काल शासकीय भूमि से बेदखल कराया जावेगा(घ) क्‍या शासन द्वारा इन षड्यन्‍त्रकारी दोषियों पर तथा इसमें संलग्‍न शासकीय कर्मचारी और अधिकारियों पर समय-सीमा निश्चित करके कार्यवाही की जावेगी?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) विभागीय पत्र क्रमांक एफ 20/129/2017/सात/2दिनांक 11.7.2017 से प्रश्‍नाधीन कथित गलत आवंटित पट्टों एवं अतिक्रमण की जाँच एडीशनल कमिश्‍नर भोपाल से कराये जाने हेतु कमिश्‍नर भोपाल को लिखा गया है। (ख) से (घ) जांचोपरांत अपात्र लोगों को बेदखल किया जाकरदोषी पाये जाने पर संबंधित अधिकारी/कर्मचारी के विरूद् नियमानुसार कार्यवाही की जावेगी।

 

          श्री वीरसिंह पंवार -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय राजस्व मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि 20 मार्च को इसी विधानसभा में मेरे द्वारा महलुआ चौराहा पर गलत तरीके से पट्टे वितरण संबंधी प्रश्न लगाया गया था, तब मंत्री जी के द्वारा मुझे आश्वासन दिया गया था कि अतिरिक्त आयुक्त को भेजकर मामले की जांच करायेंगे और मुझे जांच के समय सूचना दी जायेगी. यह विधानसभा की प्रतिवेदित कार्यवाही  मेरे पास में है. लेकिन जब पुन: मैंने यह प्रश्न लगाया तो अतिरिक्त आयुक्त परसों के दिन गये थे, मुझे सूचना भी नहीं दी. इसके बाद वहां के जो पंचायत के सचिव और सरपंच जो थे उनको मामले में दोषी मानते हुये उनके खिलाफ एफआईआर के आदेश दे दिये.वास्तव में जो भूमि माफिया हैं जिन्होंने करोड़ों-अरबों रूपये की शासन की संपत्ति पर अवैध तरीके से पट्टे लेकर के अपने मकानों का निर्माण किया है, उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई है. इसलिये अध्यक्ष महोदय मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से यह निवेदन करना चाहता हूं कि जो भूमि माफिया लाभान्वित हुये हैं, जिन्होंने करोड़ों रूपये की संपत्ति के पट्टे लिये हैं क्या शासन उन पट्टों को निरस्त करेगा और शासन उनके द्वारा जो अवैध कब्जा किया गया है उनको तोड़ेगा ? कृपया समय सीमा भी बतायें. दूसरा निवेदन मेरा मंत्री जी से यह है कि पंचायत सचिव और सरपंच के ऊपर जो एफआईआर कराई गई है तो क्या जिन्होंने कब्जा किया उन भू-माफियाओं के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करायेंगे.

          श्री उमाशंकर गुप्ता -- माननीय अध्यक्ष महोदय, प्राइमाफेसी पंचायत सचिव और सरपंच की मिलीभगत ध्यान में आई है कि उनके प्लाट नहीं होने के बाद भी उनको बेच दिये. दे दिये हैं . रिपार्ट में जो बात आई है उसके आधार पर सरपंच और पंचायत सचिव के खिलाफ एफआईआर की गई है. जैसा कि माननीय सदस्य कह रहे हैं कि जिन्होंने खरीदा है उनके खिलाफ कार्यवाही का तो जब तक जांच नहीं होती कि वह कितने इसमें इन्वाल्व हैं, लेकिन जो पट्टा निरस्त करने की बात माननीय सदस्य कह रहे हैं वह कार्यवाही तो शुरू हो गई है नोटिस जारी कर दिये गये हैं और पट्टा निरस्त करने की कार्यवाही भी करेंगे और यह सारी वैधानिक कार्यवाही करके, अवैधानिक सारी जो बातें हैं उनको तोड़ेगे भी अगर जरूरत पड़ी तो अगर किसी भू-माफिया की मिलीभगत ध्यान में आती है तो उसके खिलाफ कार्यवाही भी करेंगे.

          श्री वीरसिंह पंवार -- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह बेचे नहीं गये हैं इन पर तो अवैध रूप से कब्जा किया है पंचायत के माध्यम से एक वैसे ही जनरल पट्टा बना लिया और अवैध रूप से कब्जा कर लिया बेचारे पंचायत सचिव और सरपंच का क्या दोष है. प्रभावी लोग हैं उन्होंने दवाब देकर के उनसे करा लिया तो जो प्रभावी लोग हैं, जो इन पट्टों के मालिक हैं जिन्होंने निर्माण किया है उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाये. यह मेरा मंत्री जी से निवेदन है और इसकी कोई समय सीमा निश्चित कराई जाये.

          श्री उमाशंकर गुप्ता -- माननीय अध्यक्ष महोदय, अगर सरपंच  और पंचायत सचिव यह लिखकर के दे देंगे कि दवाब में हुये हैं तो कार्यवाही हो जायेगी. लेकिन उनके दस्तखत से ही पट्टे दिये गये हैं. अभी एकदम प्राइमाफेसी वह आरोपी नहीं बनते हैं लेकिन यदि प्रकरण की जांच में यह बात निकलकर आई कि उन्होंने दवाब से या मिलीभगत से किया है तो अगर वो भी होगे तो उनके खिलाफ भी एफआईआर की जायेगी.

          श्री वीरसिंह पंवार -- माननीय अध्यक्ष महोदय,  सबसे ज्यादा लाभान्वित तो वही पक्ष है जो आलरेडी उस जमीन पर कब्जा करके रह रहा है, उस पर शोरूम बनाकर के शोरूम चला रहे हैं, गरीबों के हक पर डाका डाल रहा है, वह टोटल भू-माफियां हैं उस जांच में क्या सिद्ध होगा यह सारी चीजें मंत्री जी आपके जवाब में पहले भी आ चुकी है 20 मार्च को, इसी सदन की कार्यवाही में सारी बातें आ चुकी हैं कि गलत तरीके से शो रूम का इन्होंने निर्माण किया है और रह रहे हैं. अध्यक्ष जी मेरा आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि इन पर कार्यवाही की जाये, इन पर आपराधिक मुकद्दमे दर्ज कराये जायें ताकि इसकी पुनरावृत्ति न हो और दूसरे लोग कब्जे न कर पाये और इन सब पर कार्यवाही के लिये समय सीमा बताई जाये कि एक-दो माह के अंदर उनको तुड़वा दिया जायेगा.

            श्री उमाशंकर गुप्‍ता - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी यह बात आई है और जैसा माननीय सदस्‍य कह रहे हैं कि इन्‍होंने प्‍लॉट दिया है, अब इन्‍होंने प्‍लॉट दबाव में दिया या कैसे दिया यह तथ्‍य सिद्ध होने के बाद अगर गड़बड़ है तो उसे तोड़ेंगे, इस संबंध में हमने नोटिस भी दिया है और पट्टा निरस्‍ती की कार्यवाही भी कर रहे हैं, हमने यह स्‍वीकार किया है कि उन्‍होंने अधिकार के बाहर जाकर दिया है, उनको नहीं देना चाहिए था, इसलिए उनके खिलाफ एफ.आई.आर. की गई है, लेकिन अभी बिना जांच के एकदम किसी के खिलाफ कुछ नहीं किया जा सकता है.

          श्री वीरसिंह पंवार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसकी समय अवधि दिलवा दी जाए कि इन पर कब तक कार्यवाही करेंगे और जांच कब तक पूरी हो जाएगी.

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता -  माननीय अध्‍यक्ष महोदय,हम कार्यवाही बहुत जल्‍दी करेंगे, इसमें कोई विलंब नहीं होने देंगे.

          श्री वीरसिंह पंवार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, समय सीमा तो निश्चित कराना ही चाहिए. वहां पर जाकर एडिशनल कमिश्‍नर देख आये हैं और यह सारी बातें आपने भी पहले अपने जवाब में दे दी हैं फिर अब इसके बाद कौन सा जांच का विषय रह जाता है.

          श्री के.पी.सिंह - अब इसके बाद फिर क्‍या जांच होना हैं ?

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता - श्री के.पी.सिंह आप तो बहुत वरिष्‍ठ रहे हैं और मंत्री भी रहे हैं. अगर किसी सरपंच और पंच ने आपको पट्टा दे दिया है तो आपको भी एकदम कैसे आरोपी मान लें. मेरा यह कहना है कि पहले पट्टा निरस्‍त हो जाए फिर ही तो उस पर कार्यवाही होगी कम से कम आप इतना तो ध्‍यान रखें.

          श्री के.पी.सिंह - आप खुद ही तो कह रहे हैं कि आपको पता है कि पट्टा गलत हुआ है तो आप पट्टा निरस्‍ती की कार्यवाही करें.

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता - मैंने यही कहा है आपने सुना नहीं है आपका ध्‍यान शायद यहां पर नहीं था शायद. मैंने यह बोला है कि यह पट्टा निरस्‍त करने की कार्यवाही शुरू कर दी है और उसके बाद फिर आगे कार्यवाही करेंगे. आपके शायद ऊपर से निकल गया होगा.

          श्री के.पी.सिंह - आपके बाल हैं और मेरे नहीं है इसलिए ऊपर से निकल जाता है (हंसी)

          अध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी यही कह रहे हैं कि पट्टा निरस्‍त हो जाए उसके बाद कार्यवाही करेंगे.

          श्री वीरसिंह पंवार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपसे निवेदन है कि उसमें जो लाभांवित लोग हैं, उन पर कार्यवाही होना चाहिए.

          अध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी इससे सहमत हैं.

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सहमत हूं.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रकरण में यह पता लगा लीजिए कि कौन- कौन से प्रभावशाली व्‍यक्ति हैं जिनकी वजह से कार्यवाही नहीं हो पा रही है. माननीय विधायक जी बहुत चिंतित हैं और वह बाहर कह चुके हैं कि कोई कार्यवाही नहीं होगी क्‍योंकि बहुत ही प्रभावशाली लोग उसमें शामिल हैं.

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अब मैं कहना नहीं चाहता था, लेकिन आप कहो तो कह दूं कि ऊधर के ही लोग हैं और इधर का ही संरक्षण हैं.(हंसी)

          श्री अजय सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इधर के हों या ऊधर के हों उचित कार्यवाही आप करिए.

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता - किधर के भी हों आप गलतफहमी में मत रहो हम बिल्‍कुल नहीं छोड़ेंगे.

          श्री कैलाश चावला - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी का ध्‍यान इस और आकर्षित करना चाहता हूं कि पट्टा आवासीय दिया गया था और उसने व्‍यावसायिक उपयोग कर लिया है तो क्‍या जो गलत उपयोग किया गया है उस बिल्डिंग को तोड़ा जाएगा ?

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता - यह जो पट्टा दिया गया है, उसके बारे में मैंने कहा कि अभी रिपोर्ट आई है और हमने तत्‍काल एफ.आई.आर. की है. इस संबंध में जो भी वैधानिक कार्यवाही होगी सब की जाएगी.

          श्री कैलाश चावला - यह आपके जवाब में भी आया है कि पट्टा पंचायत ने आवासीय दिया था और उसने शोरूम बना लिया. इस प्रकार प्रथम दृष्‍ट्या यह समझ में आ रहा है कि उसने नियम के विरूद्ध काम किया है तो क्‍या आप उसके खिलाफ कार्यवाही करेंगे ? आपने मंत्री और सचिव के खिलाफ कार्यवाही की है यहां तक तो ठीक हैं लेकिन उन्‍होंने एक पट्टा दिया, पट्टा गलत दिया परंतु अगर उसने पट्टा आवासीय लिया था और उसका व्‍यावसायिक उपयोग किया है तो उसके खिलाफ कार्यवाही अभी तक क्‍यों नहीं हुई ?

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता - माननीय हम उसके खिलाफ भी कार्यवाही करेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय - श्री कैलाश चावला जी आपका प्रश्‍न आ गया और उन्‍होंने उत्‍तर भी दिया, श्री वीरसिंह जी आपके प्रश्‍न का भी समाधान हो गया है. अब श्री कैलाश चावला जी आप बैठ जाएं.

          श्री वीरसिंह पंवार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय मैं आपका संरक्षण चाहता हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय - श्री वीरसिंह पंवार जी वैसे आपके प्रश्‍न का समाधान हो गया है लेकिन फिर भी आप एक आखिरी प्रश्‍न पूछ लीजिए.

          श्री वीरसिंह पंवार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप पंचायत सचिव और पंचायत अध्‍यक्ष को दोषी मान रहे हैं लेकिन जो प्रापटी का लाभ ले रहे हैं और आलरेडी वहां पर बनाकर रह रहे हैं और शो रूम चला रहे हैं, क्‍या वह दोषी नहीं   है ? यह सारी चीजें प्रथमदृष्‍ट्या ही स्‍पष्‍ट हो रही है और यह पहले भी 20 मार्च को इसी सदन में आपके जवाब में आ चुका है और इसके बाद भी आप कह रहे हैं कि जांच करायेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय - श्री वीरसिंह पंवार जी पट्टा निरस्‍त हो जाए उसके बाद ही तो कार्यवाही होगी. पट्टा निरस्‍ती की कार्यवाही प्रारंभ है.

          श्री वीरसिंह पंवार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मार्च के बाद आज तक क्‍या कार्यवाही हुई यह भी तो देखें. जब दूसरी बार प्रश्‍न लगा तब परसों वहां एडिशनल  कमिश्‍नर जांच करने गये हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय - ठीक है चलिए आप सीधा एक प्‍वाइंटेड प्रश्‍न कोई हो तो पूछ लीजिए उसके बाद फिर आगे बढ़ेंगे.

          श्री वीरसिंह पंवार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं तो समय अवधि चाह रहा हूं और जिसका उस पर कब्‍जा है उसको हटाया जाए, उसको तोड़ा जाए और जिन्‍होंने षड़यंत्र पूर्वक पट्टे लिये हैं उन पर कार्यवाही की जाए. यह मेरे तीन बिंदु हैं और इसकी समय सीमा बता दी जाए.

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं बार-बार कह चुका हूं कि पट्टा निरस्‍ती की कार्यवाही कर रहे हैं जो भी अवैधानिक हैं उन सबके खिलाफ कार्यवाही करेंगे, किसी को नहीं बचाएंगे और जो बिल्‍डिंग अवैध है उसको भी तोड़ेंगे.

                                                               

नल-जल योजनाओं की स्‍वीकृति

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

        7. ( *क्र. 855 ) श्री लाखन सिंह यादव : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या ग्रामों में पेयजल उपलब्‍ध कराने हेतु शासन द्वारा जनभागीदारी योजनान्‍तर्गत आदिवासी ग्रामों में कुल योजना लागत के1 प्रतिशत तथा सामान्‍य बाहुल्‍य क्षेत्रों में 3 प्रतिशत जनभागीदारी की उन ग्रामों में शेष राशि शासन द्वारा स्‍वीकृत कर पेयजल की योजना स्‍वीकृत की जाती है(ख) यदि हाँ, तो विधान सभा क्षेत्र भितरवार अंतर्गत कितनी ग्राम पंचायतों द्वारा यह जनभागीदारी राशि जमा कर योजना बनाने हेतु प्रस्‍ताव 01 अप्रैल, 2014 से प्रश्‍न दिनांक तक किया गया है तथा ग्रामीणों द्वारा यह जनभागीदारी राशि कब जमा की गई हैदिनांक सहित ग्रामों के नाम तथा जमा का विवरण देवें(ग)क्‍या भितरवार विधान सभा क्षेत्र में पेयजल की गम्‍भीर समस्‍या हैकिन-किन ग्राम पंचायतों में 01 जून, 2017 की स्थिति में नल-जल योजना चालू है तथा किन-किन ग्राम पंचायतों में किन-किन कारणों से बन्‍द है? इतनी भीषण गर्मी में नल जल योजना बन्‍द होने के लिये कौन-कौन कर्मचारी/अधिकारी दोषी हैं? क्‍या दोषियों के प्रति कोई दण्‍डात्‍मक कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो क्‍याअब बन्‍द नल-जल योजनाओं को कब तक चालू कर दिया जावेगा? एक निश्चित समय-सीमा स्‍पष्‍ट करें।

        लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री (सुश्री कुसुम सिंह महदेले) : (क) जी हाँपरंतु प्राप्त जनभागीदारी की राशि विभाग में संचित रखी जाकर योजना स्वीकृति के पश्चात् पूर्ण लागत शासन द्वारा उपलब्ध कराई जाती है। (ख) विधानसभा क्षेत्र भितरवार के अंतर्गत प्रश्नांकित अवधि में किसी भी ग्राम पंचायत द्वारा कोई जनभागीदारी की राशि जमा नहीं की गई है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) जी नहीं। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। नल-जल योजनाओं के संचालन-संधारण एवं मरम्मत कार्य कराने का दायित्व संबंधित ग्राम पंचायतों का है। स्त्रोत अनुपयोगी होने पर विभाग द्वारा नये स्त्रोत खनन/निर्माण की कार्यवाही की जाती है। अतः योजना बंद होने के लिए विभाग का कोई अधिकारी/कर्मचारी दोषी नहीं हैशेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''दो''

          श्री लाखन सिंह यादव - मेरा प्रश्‍न बहुत महत्‍वपूर्ण है और मैं चाहता हूँ कि मुझे आपका संरक्षण मिले.

          अध्‍यक्ष महोदय - सभी माननीय सदस्‍यों के प्रश्‍न महत्‍वपूर्ण रहते हैं.

          श्री लाखन सिंह यादव - अध्‍यक्ष महोदय, मेरा ज्‍यादा ही महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न है. मैं यह आपको इसलिए बताना चाहता हूँ और इसकी महत्‍वपूर्णता इसलिए भी है कि पिछले 7-8 वर्षों में समूचे मध्‍यप्रदेश में रेनफाल हुआ है. मैं पिछले वर्ष का आपको आंकड़ा बता देना चाहता हूँ कि पिछले साल समूचे मध्‍यप्रदेश में औसतन रेनफाल हुआ, कई जगह औसत से ज्‍यादा हुआ लेकिन सबसे कम रेनफाल ग्‍वालियर जिले में हुआ और ग्‍वालियर जिले में मेरी विधानसभा का एक घाटीगांव ब्‍लॉक है, उसमें मात्र 275 से 280 एम.एम. के करीब बारिश हुई थी और मैंने माननीय मंत्री जी से अपने में प्रश्‍न पूछा था कि क्‍या भितरवार विधानसभा क्षेत्र में पेयजल का संकट है ? तो उन्‍होंने उत्‍तर में लिख दिया कि 'जी नहीं'. दूसरा, मैंने उसमें लिखा था कि हमारे भितरवार विधानसभा क्षेत्र में नल-जल योजनाएं कितनी संचालित और कितनी बन्‍द पड़ी हैं ? अध्‍यक्ष महोदय, आप परिशिष्टि देखें. उन्‍होंने 90 नल-जल योजनाएं दिखाई हैं, 90 नल-जल योजनाओं में 81 चालू हैं और मात्र 9 नल-जल योजनाएं बन्‍द हैं. क्‍या आप इस उत्‍तर से सहमत हैं ?

          अध्‍यक्ष महोदय - आपको मालूम होगा, आपका विधानसभा क्षेत्र है. मैं असहमति या सहमति कैसे जता सकता हूँ ?

          श्री लाखन सिंह यादव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे यह जानना चाहता हूँ कि आपने 90 नल-जल योजनाएं बताईं, उसमें 9 नल-जल योजनाएं बन्‍द बताई हैं. क्‍या यह बात सही है कि आपने जो लिखा है, वह सत्‍य है.

          अध्‍यक्ष महोदय - आप प्रश्‍न क्लियर कीजिये. 

          श्री लाखन सिंह यादव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको बता देना चाहता हूँ कि मैं अपने विधानसभा क्षेत्र में महीने में कम से कम 20 दिन रहता हूँ और जो आपने 90 नल-जल योजनाएं शो की हैं, इनमें से मात्र 9 नल-जल योजनाएं चालू होंगी और 81 बन्‍द पड़ी हैं. आपने इसमें लिख दिया कि 81 नल-जल योजनाएं चालू हैं और 9 नल-जल योजनाएं बन्‍द हैं. मैं यह जानना चाहता हूँ कि आपने यह उल्‍टा सिस्‍टम कर दिया है.

          अध्‍यक्ष महोदय - आप बैठ जाइये, उत्‍तर ले लीजिए.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी जानकारी में 90 में से 9 बन्‍द हैं और बाकी 81 योजनाएं चालू हैं, जिसमें 4 सुधार योग्‍य हैं और आमी आमा बरई ग्राम पंचायत का मामला है.

          श्री लाखन सिंह यादव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप थोड़ा जोर से बोलें. सभी सुन लें कि आप क्‍या कह रही हैं ?

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 5 नल-जल योजनाएं सुधार योग्‍य नहीं हैं.

          श्री लाखन सिंह यादव - आपने क्‍या कह दिया ? हमारी समझ में नहीं आया.

          अध्‍यक्ष महोदय - आप श्रवण यंत्र लगवाइये.

          श्री लाखन सिंह यादव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदया आप रिपीट कर दें कि कितनी चालू हैं एवं कितनी बन्‍द हैं ?

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 90 में से 9 बन्‍द हैं, 81 योजनाएं चालू हैं, 4 सुधार योग्‍य हैं एवं 5 सुधार योग्‍य नहीं हैं.

          श्री लाखन सिंह यादव - अध्‍यक्ष महोदय, आप बड़ी गंभीरता से जवाब दे रही हैं कि 9 बन्‍द हैं एवं बाकी सभी चालू हैं. 9 नल-जल योजनाएं बन्‍द में भी 5 सुधार योग्‍य हैं, वह 9 में ही इनक्‍लूड हैं. अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूँ कि यदि आप इस सदन में सत्‍य उत्‍तर दे रही हैं तो मैं यह चाहता हूँ कि आप एक समिति बनाकर जांच करवा लें.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं तो सत्‍य ही बता रही हूँ अगर आप आदेश दें तो समिति बन जाये, हमें क्‍या तकलीफ है ?

          श्री लाखन सिंह यादव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको बता देना चाहता हूँ कि 90 में से 81 नल-जल योजनाएं आप छोडि़ये, मैं 5-7 नल-जल योजनाओं का उल्‍लेख करना चाहता हूँ, आरोन पंचायत परिशिष्‍ट-7 में अंकित है.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने अभी प्रश्‍नोत्‍तर में कहा है कि 5 चालू होंगी और बाकी बन्‍द होंगी. अध्‍यक्ष महोदय, 'होंगी' और 'है' में बड़ा अन्‍तर होता है.

          श्री लाखन सिंह यादव - अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे कह रहा हूँ. आप कम से कम मेरी बात तो सुन लीजिये. 81 नल-जल योजनाएंबन्‍द पड़ी होंगी. मैं तो यह कह रहा हूँ कि अगर आप सदन में सत्‍य उत्‍तर दे रही हैं तो एक समिति बनाकर इसकी जांच करवा लें और उसमें क्षेत्रीय विधायक को साथ रखें तो 'सब दूध का दूध और पानी का पानी' हो जायेगा.

          अध्‍यक्ष महोदय - क्‍या आप इससे संतुष्‍ट हैं ?

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसका मतलब यह है कि आप अंदाज से कह रहे हैं कि इतनी बन्‍द होंगी और इतनी चालू होंगी. आप कृपा कर देखकर आयें.

          श्री लाखन सिंह यादव - माननीय मंत्री महोदया, मैं आपसे देखकर ही बात कर रहा हूँ.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले - अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे निवेदन कर रही हूँ कि आप देखकर बात नहीं कर रहे हैं.

          श्री लाखन सिंह यादव - अध्‍यक्ष महोदय,आप जरूर देखकर आई हैं.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले - आप एक बार देख आयें और जितनी भी नल-जल योजनाएं बन्‍द होंगी, सबको चालू करवा देंगे.

          श्री लाखन सिंह यादव - नहीं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे विनम्रतापूर्वक निवेदन करना चाहता हूँ कि मेरे यहां काफी लम्‍बे समय 8-9 वर्ष से रेनफाल बहुत कम हुआ है. आप डाटा निकलवा लें. मैं चाहता हूँ कि मेरे क्षेत्र की जो नल-जल योजनाएं बन्‍द पड़ी हैं. आप एक समिति बनाकर जांच करवा दें और उस समिति में मुझे भी रखें चूँकि यह मेरा विधानसभा क्षेत्र है.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें समिति की जरूरत नहीं है. मैं विधायक जी से निवेदन करती हूँ कि आप खुद एक बार जाकर देख आएं.  

            श्री लाखन सिंह यादव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत जरूरी है, जांच समिति बननी चाहिए, जब आप बोल रही हैं तो आपको समिति बनाने में क्‍या दिक्‍कत हैं.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले - आप खुद एक बार जाकर देख लें, आप होंगी कह रहे हैं, हैं और होंगी में बड़ा अंतर होता है.

          श्री लाखन यादव सिंह - आप तो जांच के लिए समिति बना लें, सच्‍चाई का पता लग जाएगा.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जाकर देख लीजिए जहां भी बंद होगी उसको ठीक करवा देंगे.

          श्री महेन्‍द्र सिंह कालूखेड़ा - अध्‍यक्ष महोदय, आप आदेश कीजिए कि समिति बनाए और जांच की जाए.

          अध्‍यक्ष महोदय - एक मिनट जयवर्द्धन सिंह जी, इनका मंत्री जी का उत्‍तर तो आ जाने दीजिए.

          श्री जयवर्द्धन सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा भी यही प्रश्‍न था, तारांकित प्रश्‍न क्रमांक 274, उसमें उत्‍तर दिया गया है कि मेरे विधान सभा क्षेत्र में 78 नल जल योजनाओं में से सिर्फ 5 पांच बंद है, जो कि उल्‍टा है.

          अध्‍यक्ष महोदय - उससे यह प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता है.

          श्री जयवर्द्धन सिंह  -  मेरी भी समस्‍या वही है, जबकि 78 नल जल योजनाओं में से 5 चालू है, बाकी सब बंद है, अगर विधायक जांच समिति की मांग कर रहे हैं, तो उसमें क्‍या गलत है. अगर मंत्री महोदया, आदेश दे दें कि जांच समिति गठित की जाए और विधायक शामिल हो तो क्‍या गलत है.

          अध्‍यक्ष महोदय - जयवर्द्धन सिंह जी, बैठ जाये, सिर्फ आखिरी राय ही उद्भूत होती है.

          श्री जयवर्द्धन सिंह - अध्‍यक्ष महोदय, इन दो विधान सभा में जांच समिति गठित की जाए और विधायक उसमें शामिल रहे.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले - जब आपका प्रश्‍न आए तो पूछ लीजिए, अभी उनको उनका प्रश्‍न करने दीजिए, वे सक्षम है प्रश्‍न पूछने में.

          श्री लाखन सिंह यादव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा तो निवेदन है कि मंत्री महोदया ने जो जानकारी दी है, उसकी जांच करा लें, और जांच समिति में मुझे भी रखा जाए, चूंकि मैं क्षेत्रीय विधायक हूं.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले - मैं अपने अधिकारियों को भेजकर जांच करवा लूंगी और जितनी भी योजनाएं बंद हैं, उनको ठीक करवा दूंगी.

          श्री लाखन सिंह यादव - आपके अधिकारियों के द्वारा ही यह रिपोर्ट दी गई है. यह जानकारी असत्‍य है, मुझे आप समिति में रखेंगे तो सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा.

          अध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी आप जांच कराने के लिए राजी हैं और माननीय विधायक को भी यदि आपके अधिकारी सूचना दे दें तो विधायक जी भी उनके साथ जाकर फिजिकल वेरीफिकेशन कर लेंगे.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे पहले ही निवेदन कर चुकी हूं कि हम अधिकारियों को भेजकर जांच करवा लेंगे. माननीय विधायक जी की यदि इच्‍छा होगी तो वह भी साथ में जा सकते हैं.

          श्री लाखन सिंह यादव - मंत्री महोदया, आप अपने क्षेत्र में नहीं जाती क्‍या. आप तो यह घोषणा करें कि क्षेत्रीय विधायक को उस जांच समिति में साथ में रखेंगे और जांच कराएंगे.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे अधिकारी जांच करने जाएंगे और उनके साथ माननीय विधायक भी जाएंगे और जो भी योजना चालू नहीं होंगी हम वादा करते हैं कि हम उसको चालू कराएंगे.

          श्री लाखन सिंह यादव - बहुत बहुत धन्‍यवाद, बड़ी देर में हमारा निवेदन स्‍वीकार किया.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले - (बैठे-बैठे) अनावश्‍यक पूछेंगे तो हम क्‍या करेंगे (हंसी ...)

कसरावद तहसील कार्यालय भवन का निर्माण

[राजस्व]

        8. ( क्र. 1274 ) श्री सचिन यादव : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) तारांकित प्रश्‍न क्रमांक 2004, दिनांक 27.02.2017 के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न दिनांक तक क्‍या कार्यवाही की गई(ख) क्‍या अन्‍य प्रस्‍तावित भूमि पर कसरावद तहसील कार्यालय के भवन निर्माण से संबंधित कार्यवाही पूर्ण कर ली गई है? हाँ तो बतायें नहीं तो कारण दें(ग) उक्‍त तहसील कार्यालय के भवन निर्माण में विलंब के क्‍या कारण हैं और इसे कब तक पूर्ण कर लिया जायेगा?

        राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) निविदा स्‍वीकृत होकर दिनांक 19 मई, 2017 को कार्यादेश जारी कर दिया गया है। (ख) जी नहीं। पूर्व से प्रस्‍तावित भूमि। (ग) मानक मानचित्र प्राप्‍त करने में समय लगा है। दिनांक 18 मई, 2018तक पूर्ण करने हेतु अनुबंध किया गया है।

          श्री सचिन यादव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा कसरावद के तहसील कार्यालय के भवन निर्माण को लेकर मैं पिछले कई वर्षों से प्रयासरत हूं. इसी सदन में प्रश्‍नों के माध्‍यम से माननीय मंत्री जी का ध्‍यान आकर्षण करने की कोशिश की हूं. मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि हमारी तहसील कसरावद में भवन का जो निर्माण हो रहा है वह कितने क्षेत्रफल में हो रहा है, कितनी राशि आवंटित की गई है और कौन सी एजेंसी को किन किन शर्तों में यह कार्य करने के लिए दिया गया है.

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता - अध्‍यक्ष महोदय, इतनी जानकारी तो मेरे पास नहीं है और इस प्रश्‍न से उद्भूत भी नहीं होता है, वर्क-आर्डर हो गया है यह जानकारी जो आप चाह रहे हैं, मैं आपको उपलब्‍ध करवा दूंगा.

          श्री सचिन यादव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी जानकारी में आया है कि जांच राशि स्‍वीकृत की गई है वह राशि बहुत कम है, क्‍योंकि वहां पर तहसील भवन के साथ एसडीएम का कार्यालय भी बनना है, इसके लिए अतिरिक्‍त राशि की आवश्‍यकता भी होगी. अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहते हुए मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि उसके बजट को बढ़ाया जाए ताकि तहसील कार्यालय और एसडीएम आफिस दोनों एक साथ बन जाए.

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि मैंने बताया हूं, उसका वर्कआर्डर हो गया है 18 मई 2018 तक काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं, इस काम में कहीं बजट की कमी आड़े नहीं आने देंगे.

          श्री सचिव यादव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सिर्फ तहसील भवन के लिए 1 करोड़ 58 लाख रूपए की स्‍वीकृति दी गई है, इसमें एसडीएम भवन नहीं बन पाएगा, तहसील कार्यालय कहीं और बनेगा, एसडीएम कार्यालय कहीं और बनेगा तो इससे क्षेत्रीय जनता को समस्‍या होगी. अध्‍यक्ष जी आपके माध्‍यम से मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि कृपा करके दोनों काम एक साथ हो जाए इसलिए बजट की राशि का प्रावधान करने का कष्‍ट करें.

          अध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी, सदस्‍य चाहते हैं कि दोनों कार्यालय एक ही जगह हो.

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता - अध्‍यक्ष महोदय, यदि संभव होगा तो नया प्रस्‍ताव बनाकर दोनों कार्यालय को एक ही जगह में बनवा देंगे.

         

          सीधी/सिंगरौली जिले में संचालित नल-जल योजनाएं

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

9. ( *क्र. 931 ) श्री कुंवर सिंह टेकाम : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) सीधी/सिंगरौली जिले के अंतर्गत विधान सभा क्षेत्र धौहनी में कितनी                 नल-जल योजनाएं एवं मुख्‍यमंत्री पेयजल योजनायें संचालित हैं(ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में कितनी नल-जल योजनायें एवं मुख्‍यमंत्री पेयजल योजनायें बंद व खराब हैंइन नल-जल योजनाओं के संधारण व संचालन के लिये शासन स्‍तर पर क्‍या कार्यवाही की गई हैयोजनावार कितनी राशि स्‍वीकृत की गई है(ग) प्रश्नांश (ख) के संदर्भ में नल-जल योजनाएं कब तक संचालित कर दी जावेंगीकुसमी की पेयजल योजना की वर्तमान स्थिति क्‍या हैबंद पड़ी पेयजल योजना को संचालित करने के लिये विभाग के द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई हैकब तक योजना को चालू कर दिया जावेगा(घ) समूह नल-जल योजना मझौली की स्‍वीकृति कब एवं कितनी राशि की दी गई थीधीमी गति से नल-जल योजना का निर्माण कार्य चल रहा हैशीघ्र पूर्ण किये जाने के संबंध में विभाग के द्वारा क्‍या कदम उठाये गये हैंकब तक योजना को पूर्ण कर लिया जावेगाविलम्‍ब होने के क्‍या कारण हैंदोषीजनों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की जाएगी?

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) 29 नल-जल योजनाएं एवं 29 मुख्यमंत्री पेयजल योजनाएं संचालित हैं। (ख) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। ''नल से जल आज और कल'' कार्यक्रम के अन्तर्गत लघु सुधार (रू. 2 लाख से कम सुधार लागत) वाली बंद नल-जल योजनाओं को चालू करने हेतु संबंधित ग्राम पंचायतों को जिला पंचायत के माध्यम से धनराशि उपलब्ध करवाई गई है तथा वृहद सुधार (रूपये 2.00 लाख से अधिक सुधार लागत) वाली बंद नल-जल योजनाओं को विभाग द्वारा निविदा आमंत्रण कर चालू करने की कार्यवाही की जा रही है। शेष जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) कुसमी की योजना चालू है। शेष उत्तरांश (ख)अनुसार। निश्चित समयावधि नहीं बताई जा सकती।             (घ) 19 जुलाई, 2013 को एवं रूपये 8166.21 लाख की। योजनांतर्गत इंटेकवेलसोनघड़ियाल वन्य प्राणी अभ्यारण्य एवं ग्राम बडकाडोल में प्रस्तावित पेयजल टंकी एवं पाईप लाईन कार्य संजय दुबरी टाईगर रिजर्व के अंतर्गत आने के कारण राष्ट्रीय वन्य प्राणी बोर्ड एवं राज्य वन्य प्राणी बोर्ड से अनुमति प्राप्त करने के प्रयास किये गये तथा ठेकेदार को अन्य कार्य शीघ्र पूर्ण करने हेतु सूचना-पत्र जारी किये गये। राज्य वन्य प्राणी बोर्ड से अनुमति प्राप्त होने के उपरांत योजना के कार्य पूर्ण कराये जा सकेंगे। वर्तमान में निश्चित समय अवधि बताया जाना संभव नहीं है। सोनघड़ियाल वन्य प्राणी अभ्यारण्य एवं संजय दुबरी टाईगर रिजर्व के अंतर्गत प्रस्तावित कार्यों के क्रियान्वयन हेतु राज्य वन्य प्राणी बोर्ड से अनुमति प्राप्त न होने के कारण विलम्ब हुआ। शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''तीन

          श्री कुंवर सिंह टेकाम--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी विधान सभा में 29 नल-जल योजनाएं हैं, लेकिन इसमें से कई बंद हैं. आपने जानकारी में दिया है कि चालू हैं. मुझे इसकी पूरी जानकारी है कि 27 नल जल योजनाएं बंद हैं. या इसमें बोर नहीं हैं या कई जगहों पर बोल फेल हो गये हैं, कहीं पर स्रोत नहीं मिला है. मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि इसमें जो नल-जल योजनाएं बंद पड़ी हैं उनको आप कब तक चालू करवा देंगे ?

            सुश्री कुसुम सिंह महदेले--अध्यक्ष महोदय, मेरी जानकारी में तो कुल 31 योजनाएं हैं जिनमें से 25 चालू हैं, 6 बंद हैं. जिसमें 4 के मोटर पम्प खराब हैं, 2 स्रोत सूख गये हैं. माननीय सदस्य से निवेदन करना चाहती हूं कि आपकी जानकारी में अगर ज्यादा बंद हों आप मुझे सूचना दे देंगे तो मैं सुधरवा लूंगी.

          श्री कुंवर सिंह टेकाम--अध्यक्ष महोदय, मैं आपको लिखित में अलग से दे दूंगा. इस तरह से प्रश्न की जानकारी गलत आती है. इससे आम जनमानस को पानी नहीं मिलता है.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह)--अध्यक्ष महोदय, यह 2-3 तीन उदाहरण हाल ही में 10 मिनट के अंदर हो चुके हैं. कहीं गुना, ग्वालियर की बात, कहीं भितरवार की बात, तो कहीं सिंगरौली की बात. मेरे ख्याल से हमारे क्षेत्र की भी इसी तरह के हालात हैं. पूछेंगी तो 72 नल जल योजनाएं स्वीकृत हैं, 71 चालू हैं. बल्कि चालू 6 हैं. मैं अनुरोध करना चाहता हूं कि सत्तापक्ष के विपक्ष के दोनों विधायकों की तरफ से आप प्रदेश में अच्छे तरह से जांच कर लें. नल जल योजनाओं पर शासन का पैसा लगा हुआ है. नल जल योजनाएं एक गरीब आदमी के लिये पेयजल के लिये है. अधिकांश बंद होने से किसको लाभ हो रहा है. आप सदन में जानकारी कुछ भी दे दें, लेकिन जमीनी हकीकत दूसरी है. माननीय मंत्री जी से अनुरोध है कि या तो यह कह दें कि पन्ना अथवा दो चार संभागों का दौरा करके वहां पर इसकी जांच कर लें तो ज्यादा सोन घड़ियाल

 उचित रहेगा.

          श्री कुंवर सिंह टेकाम--अध्यक्ष महोदय, मैं आदिवासी विकासखण्ड कुसुमी की नल-जल योजनाओं के बारे में मैंने पूछा था इसमें जानकारी दी कि नल जल योजनाएं चालू हैं. वहां पर पुरानी एक नल-जल योजना थी वह भी आंशिक रूप से चालू है. उसमें भी पांच-सात लोगों को लाभ हो रहा है, लेकिन एक और योजना स्वीकृत थी उसमें एक ओव्हरहेड टेंक बना है लेकिन उसमें पाईप-लाईन और इंटकवेल का अभी तक निर्माण नहीं हुआ है इसमें जानकारी नहीं आयी है. मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि उसकी स्वीकृति कब तक देकर के निर्माण कार्य करवाएंगी.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले--अध्यक्ष महोदय, सोन घड़ियाल वन क्षेत्र रिजर्व एरिया वन विभाग में आता है.

          श्री कुंवर सिंह टेकाम--अध्यक्ष महोदय, यह सोन घड़ियाल में नहीं है. कुसुमी आदिवासी विकासखंड है. सोन घड़ियाल वहां से 200 किलोमीटर दूर है. आपको इसकी गलत जानकारी है. मैं अपने विकासखंड मुख्यालय की बात कर रहा हूं. उसमें जो नल जल योजनाएं थीं. तीसरी मंझौली वाली समूह नल जल योजना है. यह सोन घड़ियाल का मामला है. अभी तो मैं दूसरे नंबर पर बात कर रहा हूं. कुसुमी की बात कह रहा हूं. कुसुमी की एक जानकारी नहीं आयी है.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले--अध्यक्ष महोदय, कुसुमी में योजना चालू है. 4 पंचायते हैं जिनको पैसा दे दिया है. दो मैं टेन्डर की प्रक्रिया चालू है.

          श्री कुंवर सिंह टेकाम--अध्यक्ष महोदय, आप गलत जानकारी बता रही हैं.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले--अध्यक्ष महोदय, योजना चालू है तो गलत जानकारी बता रही हूं.

          श्री कुंवर सिंह टेकाम--अध्यक्ष महोदय, इसकी जानकारी मैं बता रहा हूं. आप सुन लीजिये. इसमें एक नल-जल आंशिक रूप से चालू है. एक नल जल योजना और स्वीकृत थी जिसका कि ओव्हरहेड टेंक का निर्माण हो चुका है. पाईप लाईन एवं इंटकवेल का निर्माण कार्य अभी नहीं हुआ है. टेन्डर हुआ था वह निरस्त हो गया है. मैं जानना चाहता हूं कि उसका पुनरीक्षित मांग-पत्र आया था उसकी स्वीकृति कब तक प्रदान करेंगे तथा निर्माण कार्य कब तक चालू करवा देंगी.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले--अध्यक्ष महोदय, अतिशीघ्र.

          श्री कुंवर सिंह टेकाम--अध्यक्ष महोदय, नल-जल योजना मंझौली की है यह सबसे बड़ी योजना है. जुलाई 2013 में इसकी स्वीकृति मिली थी अभी तक इसकी वाईट लाईफ बोर्ड से इसकी स्वीकृति नहीं मिली है. चार साल बीत गये हैं इसकी स्वीकृति कब तक मिलेगी.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले--अध्यक्ष महोदय,10.7.17 को इसकी स्वीकृति प्राप्त हो गई है.

          श्री कुंवर सिंह टेकाम--अध्यक्ष महोदय,इसका निर्माण कार्य पूरा करवाकर कब तक पेयजल उपलब्ध कराएंगी.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले--अध्यक्ष महोदय, पहले ही निवेदन किया था कि अतिशीघ्र.

                                                                                                         

खाद्यान्‍न कूपन जारी किये जाने हेतु पात्रता की शर्तें

[खाद्यनागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

10. ( क्र. 1297 ) श्री कमलेश्‍वर पटेल : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्रामीणजनों को खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत खाद्यान कूपन जारी किये जाने हेतु पात्रता की कौन-कौन सी शर्तें हैंखाद्यान्न कूपन जारी कराये जाने के लिए क्‍या-क्‍या प्रक्रिया हैचरणबद्ध बतायें। जनपद पंचायत सिंहावल से लगभग 600 एस.सी./एस.टी. परिवारों को चिन्‍हांकन करके सूची जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी को भेजने के बावजूद भी खाद्यान्न कूपन क्‍यों नहीं जारी किये जा रहे हैं(ख) सीधी व सिंगरौली जिले में जनपदवार कितने परिवारों को राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ दिया जा रहा है और कितने परिवारों को प्रदाय किया जाना शेष हैयदि शेष है तो वंचित संबंधित हितग्राहियों को आज दिनांक तक खाद्यान्न प्रदाय क्‍यों नहीं किया जा रहा है?    (ग) क्‍या खाद्यान्न कूपन में किसी भी प्रकार का संसोधन नहीं हो रहा हैतो क्‍या मृतकों के नाम भी आवंटन जारी किया जा रहा है और नवीन चिन्‍हांकित परिवारों के खाद्यान कूपन जारी नहीं हो रहे हैं?

खाद्य मंत्री ( श्री ओम प्रकाश धुर्वे ) : (क) राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत हितग्राहियों को पात्रता पर्ची प्राप्‍त करने हेतु अधिनियम के अंतर्गत निर्धारित 25 पात्रता श्रेणियों में होना अनिवार्य है। पात्रता पर्ची जारी करने हेतु स्‍थानीय निकाय द्वारा संबंधित परिवार की संपूर्ण जानकारी समग्र सामाजिक सुरक्षा मिशन के पोर्टल पर प्रविष्‍टी उपरांत समग्र परिवार आईडी निर्मित करानासंबंधित पात्रता श्रेणी में सत्‍यापन एवं खाद्य विभाग के अमले द्वारा उचित मूल्‍य दुकान से मेपिंग उपरांत खाद्यान्‍न आवंटन सीमा के अंतर्गत पात्रता पर्ची एन.आई.सी. द्वारा जारी की जाती है। जनपद पंचायत सिंहावल के एस.सी./एस.टी. परिवारों का सत्‍यापन पोर्टल पर किया जा चुका है। भारत सरकार द्वारा निर्धारित खाद्यान्‍न आवंटन की सीमा से अधिक खाद्यान्‍न की आवश्‍यकता होने के कारण सत्‍यापित नवीन परिवारों को पात्रता पर्ची जारी नहीं की जा सकी है। (ख) राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत सीधी एवं सिंगरौली जिले में जनपदवार लाभान्वित एवं शेष परिवारों की जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। भारत सरकार द्वारा निर्धारित खाद्यान्‍न आवंटन की सीमा से अधिक खाद्यान्‍न की आवश्‍यकता होने के कारण सत्‍यापित नवीन परिवारों को पात्रता पर्ची जारी नहीं की जा सकी है। (ग) पात्र परिवारों के डाटाबेस में अपात्र परिवारों को विलोपित/अनमेप करना तथा नवीन सत्‍यापित परिवारों को पात्रता पर्ची जारी करने हेतु चिन्‍हांकन करने की सुविधा समग्र पोर्टल पर जिला अधिकारी को उपलब्‍ध करा दी गई है, जिन हितग्राहियों द्वारा किसी कारण से राशन प्राप्‍त नहीं किया जाता हैउनको आवंटित सामग्री का समायोजन कर आगामी माह का आवंटन जारी किया जाता है। जिला कलेक्‍टर को निर्देश दिए गए हैं कि जिले में 01 मई, 2017 की स्थिति में जितनी संख्‍या में अपात्र व्‍यक्तियों के नाम पोर्टल पर विलोपित किए जाएंगे उतनी ही संख्‍या में संबंधित जिले के नवीन सत्‍यापित व्‍यक्तियों के नाम सम्मिलित किए जा सकेंगे। जिले में जुड़ने वाले नवीन हितग्राही के लिए पात्र बी.पी.एल. परिवारों को प्राथमिकता दी जाएइसके पश्‍चात् अनुसूचित जाति/जनजाति के नवीन सत्‍यापित व्‍यक्तियों को प्राथमिकता दी जाए। मृतकों के नाम से आवंटन जारी करने का कोई मामला प्रकाश में नहीं आया है।

परिशिष्ट - ''चार ''

          श्री सुन्‍दरलाल तिवारी :- अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह समझता हूं कि खाद्य पर्ची जरनेट करने की समस्‍या मध्‍यप्रदेश के हर जिले की है. गरीबों के नाम अनुसूचित जाति, जनजाति, विकलांग और विधवा पांच किलो अनाज के लिये तड़प रही हैं, जबकि इस देश के अंदर कानून बनाया गया है. गरीबी रेखा में लाखों लोगों के नाम हैं, लेकिन पिछले लगभग 9-10 महीनों से कोई पर्ची जनरेट नहीं हो रही है. जिसकी वजह से गरीबों को अनाज उपलब्‍ध नहीं हो पा रहा है. राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में उनके यह अधिकार सुरक्षित किये गये हैं कि हर गरीब को पांच किलो अनाज जो पात्र हैं, उनको दिया जायेगा. कई बार यह सवाल विधान सभा के अंदर आया, लेकिन इसका हल नहीं निकल पाया और उनमें से बहुत सारे गरीब हर रोज मर रहे हैं. अब उनकी क्‍या गलती है, जिन बेचारों को अनाज नहीं मिल रहा है. इस पर सरकार क्‍या करेगी, उन गरीबों के लिये सरकार क्‍या व्‍यवस्‍था कर रही है. हम यही आपके माध्‍यम से मंत्री जी से जानना चाहते हैं.

          श्री ओम प्रकाश धुर्वे :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिस नियम कानून की किताब माननीय विधायक जी लेकर आये हैं और वह बहुत वरिष्‍ठ विधायक हैं. खाद्य अधिनियम में यह भी उल्‍लेख भी है कि हम उन  लोगों को तो अनाज उपलब्‍ध कराते ही हैं. लेकिन आवंटन की भी एक सीमा है, उससे ज्‍यादा हम उनको अनाज नहीं दे सकते हैं.

          हमारे प्रदेश की आबादी के 75 प्रतिशत से ज्‍यादा लोगों को नहीं दे सकते हैं. यदि हम उससे ज्‍यादा को देंगे तो हमारे यहां सरकार की इतनी योजनाएं चल रही हैं, क्‍या उसका उनको लाभ उन लोगों को नहीं मिल पा रहा है. मैं माननीय सदस्‍य से निवेदन करना चाहता हूं कि (श्री सुन्‍दरलाल तिवारी के हंसने पर) आप हंस रहे हैं. आप पढ़ लीजिये उस अधिनियम में है, आपने उसको पूरा पढ़ कर नहीं बताया है. आपने दूसरी बात नहीं की है. अधिनियम में इसका भी उल्‍लेख है कि आबादी का 75 प्रतिशत का ही आवंटन हमको प्राप्‍त होता है. इससे ज्‍यादा लोगों को हम नहीं दे सकते हैं. इसीलिये हमने पूरे प्रदेश के कलेक्‍टरों को एक निर्देश जारी किया है कि जहां-जहां पर बोगस राशन कार्ड हैं, उनको विलोपित करवायें और उनके स्‍थान पर जो सत्‍यापित हुए हैं, उनको पात्रता पर्ची जारी करें.

          श्री सुन्‍दरलाल तिवारी :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी ने बात सही कही है कि इस कानून में उल्‍लेख है कि प्रदेश की जो जनसंख्‍या है उसकी 75 प्रतिशत जनसंख्‍या को अनाज उपलब्‍ध कराया जायेगा, उसकी सीमा निर्धारित की गयी है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से जानना चाहता हूं कि अभी एक महीने पहले ग्राम उदय और भारत उदय पूरे मध्‍यप्रदेश में आपका रथ चल रहा था. उसमें गरीबों से इस बात के आवेदन पत्र लिये गये कि आपका नाम गरीबी रेखा में नाम जोड़ा जायेगा. हितग्राहियों को जो लाभ मिलना चाहिये वह आपको लाभ दिलाया जायेगा. उसमें लोगों ने गरीबी रेखा में नाम जोड़ने के लिये आवेदन पत्र दिया, उन्‍होंने यह शिकायत दर्ज करायी कि किसी भी गरीब आदमी को लाभ नहीं मिला. मेरा कहना यह है कि मंत्री जी ने कहा है कि आबादी के 75 प्रतिशत लोगों को लाभ दिया जायेगा. मैं यह बात दावे से कह सकता हूं कि किसी भी गांव की आबादी के 75 प्रतिशत लोगों को अनाज उपलब्‍ध नहीं हो रहा है. बल्कि यह संख्‍या 50 प्रतिशत से भी कम है. माननीय मंत्री जी आपका कहना यह है कि मध्‍यप्रदेश में 75 प्रतिशत लोग गरीब हैं, यह आपका कहना है. अभी 75 प्रतिशत की सीमा मध्‍यप्रदेश में नहीं गयी है, यह मंत्री जी का कहना गलत है, अगर यह सही है तो आंकड़ा बता दें कि इतने लोग अनाज पा रहे हैं और यह मध्‍यप्रदेश की जनसंख्‍या है, मैं यह जानना चाहता हूं.

          श्री ओम प्रकाश धुर्वे :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यदि माननीय सदस्‍य ने पहले से बता दिया होता तो संख्‍या निकालकर बता देते. अभी इंतजार करिये. मैं जानकारी दे रहा हूं, आप धैर्य तो रखिये.

          श्री सुन्‍दरलाल तिवारी :- अध्‍यक्ष महोदय, अभी मंत्री जी ने ही कहा है कि 75 प्रतिशत की सीमा है. देखिये वह आपके पास असत्‍य रिकार्ड आ गया है.                                       

            श्री ओम प्रकाश धुर्वे-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पूरे देश में मध्‍यप्रदेश ही एक ऐसा राज्‍य है, जहां हमारे मुख्‍यमंत्री जी ऐसी व्‍यवस्‍था की है.

          श्री सुन्‍दरलाल तिवारी-  आप मुख्‍यमंत्री की बात छोडि़ये. यहां गरीब 5 किलो अनाज के लिए मर रहा है.

          श्री ओम प्रकाश धुर्वे-  आप मेरी बात सुनने का साहस रखिये. मैं आपको जवाब दे रहा हूं. क्‍या आप मेरी बात नहीं सुनेंगे ? तिवारी जी, आप लोग लाल गेहूं गरीब जनता को खिलाते थे. पूरे देश में मध्‍यप्रदेश पहला राज्‍य है, जहां भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने हमारे आदिवासी भाइयों को 1 रूपये किलो में गेहूं और चावल उपलब्‍ध करवाया है.

....(व्‍यवधान)....

          अध्‍यक्ष महोदय-  यह एक महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न है. कृपया जवाब आने दें.

          श्री सुन्‍दरलाल तिवारी-  आपने 75 प्रतिशत की बात कही है. आप हितग्राहियों की संख्‍या बताईये.

          श्री रणजीत सिंह गुणवान-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश में 1 रूपये किलो में अनाज देने का जो कार्य प्रारंभ किया गया है, उसके अंतर्गत सभी को अनाज मिल रहा है. कहीं कोई कमी नहीं है. तिवारी जी, आप ज़रा इसके आंकड़े उठाकर देखिये. आप सदन में गलत जानकारी दे रहे हैं. आज तक किसी व्‍यक्ति ने इस संबंध में शिकायत नहीं की है. सभी को अनाज मिल रहा है.

          अध्‍यक्ष महोदय-  गुणवान जी, कृपया आप बैठ जायें.

          श्री सुदर्शन गुप्‍ता-  तिवारी जी, को अनाज नहीं मिल रहा होगा, इसलिए उनको तकलीफ हो रही है.

          अध्‍यक्ष महोदय-  कृपया आप सभी बैठ जायें. महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न है, उत्‍तर आने दीजिये.

           श्री ओम प्रकाश धुर्वे-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश की जनसंख्‍या लगभग 7.5 करोड़ है. उसमें से 5 करोड़ 47 लाख लोगों को हम राशन दे रहे हैं.

          श्री सुन्‍दरलाल तिवारी-  अध्‍यक्ष महोदय, यहां जो आंकड़े दिए गए हैं, इसके संबंध में मैं यह कहना चाहता हूं कि किसी भी गांव में, किसी पंचायत में अथवा किसी कस्‍बे में 75 प्रतिशत का आंकड़ा आज तक पूरा नहीं हुआ है. आप केंद्र सरकार की बात करते हैं और अपनी पीठ थपथपाते हैं. जब तक आपको केंद्र सरकार अनाज नहीं देती है क्‍या तब तक आप लोगों को 5 किलो अनाज मुहैया करा पाने में समर्थ होते हैं ? आप बताईये कि आप क्‍या व्‍यवस्‍था कर रहे हैं ?

            अध्‍यक्ष महोदय-  तिवारी जी, आप प्‍वाईंटेड प्रश्‍न पूछिये. आपने जो प्रश्‍न किया था, मंत्री जी ने उसका उत्‍तर दे दिया है. अब आप एक मिनट में केवल प्‍वाईंटेड प्रश्‍न करिये.

          श्री सुन्‍दरलाल तिवारी-  अध्‍यक्ष महोदय, मेरा कहना है कि सरकार उन लाखों गरीबों की पर्ची कब तक जनरेट करवा देगी, जो मध्‍यप्रदेश में अनाज लेने से वंचित हैं. दूसरी बात यह है कि इसके निवारण की व्‍यवस्‍था की गई है. इसमें कमीशन बनाने का प्रावधान है और जिलों में मॉनिटरिंग कमेटी बनाने का भी प्रावधान है. लेकिन आज तक न ही कोई कमेटी बनी है और न ही कोई बैठक हुई है. मंत्री जी, बतायें कि यह कमेटी कब बनेगी और जिलों में उसकी बैठक कब तक शुरू करवा देंगे.

          श्री ओम प्रकाश धुर्वे-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्राय: सभी जिलों में कमेटियां बन गई हैं.

          श्री हर्ष यादव-  कहीं कोई बैठक नहीं होती है.

          श्री ओम प्रकाश धुर्वे-  अध्‍यक्ष महोदय, जारी किए गए निर्देशों के अनुसार बोगस राशन-कार्डों के नाम कटते जा रहे हैं और नए नाम जुड़ते भी जा रहे हैं. इस प्रश्‍न में सिंगरौली और सीधी जिले का उल्‍लेख किया गया है. बोगस राशन कार्ड संज्ञान में आने के कारण हमें लगभग 1 सौ 26 मीट्रिक टन खाद्यान्‍न की बचत हुई है. ''ग्राम उदय'' और ''भारत उदय'' अभियान के अंतर्गत सत्‍यापित लोगों के नाम जोड़ने का कार्य भी प्रारंभ हो गया है.

          श्री निशंक कुमार जैन-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी गलत जानकारी दे रहे हैं. आप हमें संरक्षण नहीं देंगे तो कैसे काम चलेगा ? इनके विभाग ने गलत उत्‍तर दिया है.

....(व्‍यवधान)....

          श्री ओम प्रकाश धुर्वे-  जैन जी, मैं एक-एक ब्‍लॉक का नाम बता दूंगा. मैंने कोई गलत जानकारी नहीं दी है.

....(व्‍यवधान)....

          अध्‍यक्ष महोदय-  जैन जी, आप बीच में 5 बार बोल चुके हैं. अब आप बैठ जायें. रावत जी, आप केवल एक प्रश्‍न करें.

          श्री रामनिवास रावत-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से सीधा-सीधा प्रश्‍न करना चाहता हूं. मंत्री जी, ने राष्‍ट्रीय खाद्यान्‍न सुरक्षा अधिनियम का हवाला दिया है कि हम निर्धारित खाद्यान्‍न की सीमा से अधिक खाद्यान्‍न नहीं दे सकते हैं. क्‍या माननीय मंत्री जी यह बताने का कष्‍ट करेंगे कि राष्‍ट्रीय खाद्यान्‍न सुरक्षा अधिनियम में अनुसूचित जाति और जनजाति के समस्‍त परिवारों को खाद्यान्‍न पर्ची दिए जाने का प्रावधान है ? यदि प्रावधान है तो आपके उत्‍तर में जनपद पंचायत सिंहावल के एस.सी./एस.टी. परिवारों का सत्‍यापन पोर्टल पर किया जा चुका है. भारत सरकार द्वारा निर्धारित खाद्यान्‍न आवंटन की सीमा से अधिक खाद्यान्‍न की आवश्‍यकता होने के कारण सत्‍यापित नवीन परिवारों को पात्रता पर्ची जारी नहीं की जा सकी है. इसी प्रश्‍न से संबंधित इसी क्षेत्र के ऐसे कितने एस.सी./एस.टी. के परिवार हैं जिनको अभी खाद्यान्‍न नहीं मिल रहा है और क्‍या राष्‍ट्रीय खाद्यान्‍न सुरक्षा अधिनियम में एस.सी./एस.टी. के समस्‍त परिवारों को खाद्यान्‍न दिये जाने का प्रावधान है.

          श्री ओम प्रकाश धुर्वे-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सरकार जो राष्‍ट्रीय  खाद्य अधिनियम है उससे एक कदम बढ़कर भी हम काम कर रहे हैं. उसमें दो रुपए किलो देने का उल्‍लेख है हम तो एक रुपए किलो दे रहे हैं. आपके समय तो इतना भी नहीं हुआ था. (व्‍यवधान)

          श्री रामनिवास रावत-- मैं अनुसूचित जाति या जनजाति की बात कर रहा हूं. आप तो अनुसूचित जनजाति के मंत्री हैं. मेरा पाइंटेड प्रश्‍न है (व्‍यवधान)

          अध्‍यक्ष महोदय-- आप उत्‍तर तो ले लें. (व्‍यवधान)

          श्री  ओम प्रकाश धुर्वे--  मैं एस.सी./एस.टी. की बात कर रहा हूं. पूरे प्रदेश में एस.सी./एस.टी. को एक रुपए किलो अनाज मुहैया करवाने वाला भारत वर्ष में मध्‍यप्रदेश पहला राज्‍य है. (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य आप जो बोल रहे थे जो आयकर दाता हैं उनको छोड़कर  सभी एस.सी./एस.टी. को देने की पात्रता है.

          श्री रामनिवास रावत-- ऐसे कितने एस.सी./एस.टी. के परिवार हैं जिनको प्रदेश में खाद्यान्‍न नहीं मिल रहा है  और कब‍ तक दिलवाएंगे?

          अध्‍यक्ष महोदय-- इससे प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता है.

          श्री रामनिवास रावत-- यह एस.सी./एस.टी. के परिवारों का पूछा है. प्रश्‍न के जवाब में लिखा हुआ है कि अनुसूचित जाति और जनजाति के परिवारों को खाद्यान्‍न सीमा अधिक होने के कारण खाद्यान्‍न नहीं दिया जा रहा है. उनके लिए सीमा नहीं लगा सकते, सीमा का हवाला नहीं दे सकते.

          अध्‍यक्ष महोदय-- इसमें प्रश्‍न कहां है.

          श्री रामनिवास रावत-- यह प्रश्‍न क्रमांक पहले का आप अंतिम शब्‍द पढि़ए कि जनपद पंचायत सिंहावल के एस.सी./एस.टी. परिवारों का सत्‍यापन पोर्टल पर किया जा चुका है भारत सरकार द्वारा निर्धारित खाद्यान्‍न आवंटन की सीमा से अधिक.....

          अध्‍यक्ष महोदय-- आपने पूरे प्रदेश भर का पूछा है.

          श्री रामनिवास रावत-- सिंहावल में ऐसे कितने एस.सी./एस.टी. के परिवारों को खाद्यान्‍न नहीं मिल रहा है जो पात्र हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय-- क्‍या आपके पास इसके आंकड़े हैं. वैसे इसमें पूछा नहीं गया है.

          श्री ओम प्रकाश धुर्वे -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं बता रहा हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय-- उन्‍होंने खुद ही 600 एस.सी./एस.टी. परिवार बताया है.

          श्री ओम प्रकाश धुर्वे-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 618 परिवार शेष हैं

          अध्‍यक्ष महोदय-- आप पढि़ए तो उस प्रश्‍न को.

          श्री ओम प्रकाश धुर्वे--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सिंहावल में 618 परिवार बाकी हैं जो सत्‍यापित हैं उनको भी दिया जाएगा.

          अध्‍यक्ष महोदय-- रावत जी, यह प्रश्‍न में ही लिखा है आपने प्रश्‍न ठीक से नहीं पढ़ा है.

          विधिक सलाह हेतु भेजे गए प्रकरण

[गृह]

11. ( *क्र. 1108 ) श्री पुष्‍पेन्‍द्र नाथ पाठक : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) छतरपुर जिले में ए.डी.पी.ओ एवं डी.पी.ओ. के पद पर कौन कब से पदस्थ हैइन पदों पर नियुक्ति और पदस्थापना हेतु क्या नियम और निर्देश हैंइनके क्या कार्य हैंकार्यों को करने की समय-सीमा क्या है(ख) छतरपुर जिले में जनवरी 2014 से प्रश्न दिनांक तक कितने प्रकरण ए.डी.पी.ओ./डी.पी.ओ. के पास विधिक सलाह हेतु आएकितने प्रकरण पर अभिमत दियाकितने लंबित हैं(ग) प्रश्नांश (खके अनुक्रम में थानों से आए प्रकरणों को निराकृत करने की क्या समय-सीमा हैजिले में ऐसे कितने प्रकरण हैं, जिनका निराकरण समय-सीमा के भीतर नहीं किया गयाप्रत्येक प्रकरणों की जानकारीलंबित होने के कारणों सहित प्रदाय करें।

गृह मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। ए.डी.पी.ओ एवं डी.पी.ओ. की नियुक्ति म.प्र. लोक अभियोजन (राजपत्रित) सेवा भरती नियम 1991 के अनुसार लोक सेवा आयोग के चयन के आधार पर की जाती है। अभियोजकों का कार्य न्यायालय में आपराधिक प्रकरणों में शासन की ओर से पैरवी करना है। अभियोजकों का कार्यसमयन्यायालयीन कार्य समय अनुसार प्रातः 10.30 से 5.30 तक समय-सीमा निर्धारित है। (ख) छतरपुर जिले में193 प्रकरण प्राप्त एवं 193 प्रकरण पर विधिक अभिमत दिया गया। कोई प्रकरण लंबित नहीं है। (ग) थानों सेप्राप्त प्रकरण यथासंभव 2 दिवस में विधिक अभिमत प्रदान कर वापस किए जाते हैं। सभी प्रकरणों में विधिक अभिमत प्रदाय किया जा चुका है। कोई प्रकरण लंबित नहीं है।

         

          श्री पुष्‍पेन्‍द्र नाथ पाठक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा माननीय गृह मंत्री महोदय से यह प्रश्‍न है कि जिला छतरपुर थाना नौगांव की चौकी गर्रौली में ए.डी.पी.ओ. की अक्षमता के कारण ब्रजकिशोर चौबे पर एक फर्जी 307 का मुकदमा लंबित है.  जो पूरी तहर से असत्‍य है क्‍या गृह मंत्री जी उसको तीन दिन में खत्‍म कराने के आदेश करेंगे.

          श्री  भूपेन्‍द्र सिंह ठाकुर -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिस प्रकरण के बारे में माननीय सदस्‍य ने प्रश्‍न किया है उस प्रकरण में ए.डी.पी.ओ. ने अपनी राय दे दी है और उसमें बृजकिशोर चौबे जी निर्दोष पाए गए हैं. प्रकरण निर्दोषता के साथ न्‍यायालय में भेज दिया गया है.

            श्री पुष्‍पेन्‍द्र नाथ पाठक-- बहुत बहुत धन्‍यवाद. एक और विषय था इसी केस में इस झूठे मुकदमे में मूरत सिंह और उनके पुत्र पप्‍पू को भी इसी केस में गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया है. वे जेल जा चुके हैं तो क्‍या उनके साथ कोई न्‍याय संगत राहत का काम पुलिस विभाग करेगा.

          श्री  भूपेन्‍द्र सिंह ठाकुर -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें कुल तीन आरोपी थे. तीन आरोपियों में से दो आरोपियों पर अपराध सिद्ध पाया गया है. एक आरोपी जो बृजकिशोर चौबे हैं उन पर अपराध सिद्ध नहीं पाया गया इसलिए उनका नाम निकालकर बाकी दो लोगों के विरुद्ध चालान पेश हो  जाएगा.

          श्री पुष्‍पेन्‍द्र नाथ पाठक-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तीसरा प्रश्‍न यह है कि कृष्‍ण कुमार गौतम ए.डी.पी.ओ. ने पांच माह तक इस मामले को उलझाकर रखा क्‍या माननीय गृह मंत्री महोदय उनके खिलाफ कोई कार्यवाही करके उनको हटाने की कृपा करेंगे?

           


 

            श्री भूपेन्द्र सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, जो विलंब हुआ है उसके कारणों की भी हमने जानकारी ली है. मुख्य रुप से राइटिंग एक्सपर्ट की रिपोर्ट नहीं आई थी यह रिपोर्ट न आ पाने के कारण एडीपीओ समय पर रिप्लाई नहीं कर पाए. जैसे ही राइटिंग एक्सपर्ट की रिपोर्ट आई,  तत्काल एडीपीओ ने अपने अभिमत सहित प्रकरण भेज दिया.

          श्री पुष्पेन्द्र नाथ पाठक--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा समाधान हुआ बहुत-बहुत धन्यवाद.

          किसान आंदोलन में गोली चालन की घटना

[गृह]

12. ( *क्र. 592 ) श्री मुकेश नायक (श्री रामनिवास रावतश्री शैलेन्‍द्र पटेल) : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्‍यप्रदेश में दिनांक 01 जून, 2017 से 16 जून, 2017 की अवधि में हुये राज्‍य व्‍यापी किसान आंदोलन में कहाँ-कहाँ किन-किन व्‍यक्तियों की मृत्‍यु हुई और उनके परिजनों को मुआवजे के रूप में कितनी-कितनी धनराशि का वितरण कब-कब किया गया(ख) आंदोलन के दौरान पुलिस गोली चालन से नागरिकों की मृत्‍यु पर मुआवजा देने के लिये क्‍या शासन ने कोई नियम बनाये हैं या केवल मुख्‍यमंत्री या अफसरों के विवेक पर मुआवजा निर्धारण तय किया जाता हैइस बारे में स्थिति स्‍पष्‍ट करें। (ग) इस आंदोलन के दौरान 15 दिनों में आगजनी लूटपाट आदि घटनाओं में नागरिकों की चल-अचल संपत्ति को जो नुकसान हुआ हैक्‍या उसका आंकलन कराया गया हैयदि हाँ, तो स्‍थान अनुसार नुकसान का और वितरित मुआवजे का विवरण देवें। (घ) क्‍या आंदोलन से पीड़ि‍त अनेक लोगों को अभी तक किसी प्रकार का मुआवजा नहीं मिला हैयदि हाँ, तो क्‍या कारण है(ड.) क्‍या मंदसौर एवं नीमच जिले में प्रदर्शन कर रहे किसान हथियारों से लैस थेयदि हाँ, तो कितने किसानों के पास हथियार थे?

गृह मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) आंदोलन के दौरान आगजनीलूटपाट आदि घटनाओं में नागरिकों की अचल-चल सम्पत्ति के नुकसान के आंकलन एवं मुआवजे के संबंध में कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। (घ) प्रश्नांश (ग) में उल्लेखित प्रक्रियाधीन कार्यवाही पूर्ण होने के उपरांत नियमानुसार कार्यवाही की जावेगी। (ड.) मंदसौर जिले के घटनाक्रम की जांच हेतु न्‍यायिक आयोग गठित है। अत: टीप दिया जाना न्‍याय संगत नहीं है। नीमच जिले में दर्ज प्रकरणों में विवेचना जारी है। अत: विवेचना पूर्ण होने के उपरांत ही जानकारी देना संभव हो पायेगा।

          श्री मुकेश नायक--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा मूल प्रश्न मैंने मंदसौर के संदर्भ में पूछा है लेकिन मेरा आशय मध्यप्रदेश में होने वाली इस तरह की दुर्घटनाओं और घटनाओं से संबंधित है. जब इस तरह की दुर्भाग्यजनक घटनाएं होती हैं और उसमें नागरिक मारे जाते हैं. ऐसी स्थिति में मुआवजे की पॉलिसी सरकार द्वारा बनाई गई है या माननीय मुख्यमंत्री जी या सरकार के विवेक पर ही यह निर्भर करता है कि किस व्यक्ति को कितना मुआवजा दिया जाएगा. क्या सरकार भविष्य में ऐसे तमाम विषयों को लेकर कोई पॉलिसी निर्धारण पर काम करेगी.

          श्री भूपेन्द्र सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, कहीं पर भी यदि किसी की सम्पत्ति का नुकसान होता है या अन्य किसी प्रकार से नुकसान होता है तो सामान्यत: इसके लिए आरबीसी में प्रावधान हैं, परन्तु माननीय मुख्यमंत्री जी को यह विशेष अधिकार होता है कि अगर कोई प्रकरण ऐसा है जिसमें मुख्यमंत्री जी को यह लगता है कि यह प्रकरण गंभीर है और प्रकरण के अनुसार इसमें सहायता राशि अधिक करना उचित है तो उन परिस्थितियों में माननीय मुख्यमंत्री जी अपने स्वेच्छानुदान से आरबीसी में जो राहत के प्रावधान हैं उससे हटकर भी सहायता राशि प्रदान करते हैं. माननीय मुकेश नायक जी ने पूछा है कि इसके बारे में कोई स्पष्ट प्रावधान हैं क्या. यह बात सही है कि इस बारे में अभी शासन स्तर पर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं. इस बारे में शासन विचार करेगा कि इसके स्पष्ट प्रावधान भी हम लोग बनाएं.

          श्री रामनिवास रावत--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं विनम्रतापूर्वक निवेदन करना चाहता हूँ कि मैंने आज एक पत्र सचिवालय को भेजा है.

          अध्यक्ष महोदय--वह पत्र मेरे ध्यान में आया है.

          श्री रामनिवास रावत--अध्यक्ष महोदय, हमारे विशेषाधिकारों को आप संरक्षित नहीं करेंगे तो कौन करेगा. इस प्रश्न में मेरा नाम जोड़ दिया गया है. मेरा मूल प्रश्न ही अलग है. मैं अपना प्रश्न पढ़कर सुनाता हूँ. मेरा प्रश्न था कि किया यह सही है कि प्रदेश में 1 जून 2017 से प्रश्न दिनांक तक विभिन्न किसान संगठनों द्वारा किसानों की उत्पादित फसल के लागत मूल्य से डेढ़ गुना मूल्य दिलाने हेतु समस्त प्रकार की कर्ज माफी देने, उद्यानिकी उत्पादित सब्जी आदि का समर्थन मूल्य घोषित करने आदि मांगों को लेकर व्यापक स्तर पर आंदोलन किया गया था. यदि हाँ तो उक्त आंदोलन का किन-किन जिलों में क्या-क्या प्रभाव रहा. दूसरा प्रश्न था कि क्या यह सही है कि दिनांक 6 जून 2017 को मंदसौर जिले में आंदोलन कर रहे निहत्थे किसानों पर पुलिस द्वारा बिना किसी सक्षम आदेश के गोली चलाई गई जिसमें 6 किसानों की मौत हो गई. यदि हाँ तो मृतकों के नाम पिता के नाम सहित जानकारी दें. तीसरा था गोली चालन के आदेश किस अधिकारी द्वारा दिए गए. चौथा था किसानों को राहत पहुंचाने के लिए माननीय मुख्यमंत्री जी ने किसान आन्दोलन के दौरान मांगों सहित माननीय मुख्यमंत्री जी ने अभी तक क्या-क्या घोषणाएं कीं और प्रश्न के संदर्भ में किन-किन थानों में कितने-कितने किसानों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किए गए उनमें से कितने-कितने किसान अभी तक जेलों में बंद हैं. मेरा यह मूल प्रश्न था.

          राजस्व मंत्री(श्री उमाशंकर गुप्ता)--माननीय अध्यक्ष महोदय, कल से मेरे ख्याल से सदन लगातार इन्हीं मुद्दों पर चल रहा है. स्थगन भी इन्हीं बातों पर चल रहा है.

          श्री रामनिवास रावत--क्या प्रश्न लगाना हमारा विशेषाधिकार नहीं है.

          श्री उमाशंकर गुप्ता-- पूरा अधिकार है.

          श्री रामनिवास रावत--मैं माननीय अध्यक्ष जी से बात कर रहा हूँ आप बीच में क्यों बोल रहे हैं. आप तो कह देते हो जानकारी एकत्रित की जा रही है. क्या हमारा विशेष अधिकार नहीं है.

          श्री उमाशंकर गुप्ता--आपका पूरा अधिकार है. सब तरह का अधिकार है. मैं यह कह रहा हूँ कि जब सदन इस विषय पर चल ही रहा है उससे किसी दूसरे को मौका मिल जाएगा.

          श्री रामनिवास रावत--यह चर्चा की बात नहीं है. मैं अपना जवाब चाहता हूँ.

          अध्यक्ष महोदय--मैं जवाब दूंगा.

          वन मंत्री (डॉ. गौरीशंकर शेजवार)--माननीय अध्यक्ष महोदय, मूलत: इनका जो प्रश्न था उसे सचिवालय ने रिजेक्ट कर दिया. सचिवालय में नियम है उसके अनुसार इन्हें अनुमति नहीं दी गई.                                                      

          श्री रामनिवास रावत--  मुझे सूचना किसने दी? ये बताएँ सूचना दी गई क्या?

            वन मंत्री (डॉ.गौरीशंकर शेजवार)--  आपकी विशेष कृपा से दूसरे प्रश्न में इनका नाम जोड़ दिया.

          श्री रामनिवास रावत--  मुझे कोई कृपा की जरुरत नहीं है, आपकी कृपा की जरुरत नहीं है.

          डॉ.गौरीशंकर शेजवार--  नियम प्रक्रिया के अंतर्गत ये प्रश्न नहीं कर सकते.

          श्री रामनिवास रावत--  मैं आसन्दी से निवेदन कर रहा हूँ.       

          डॉ.गौरीशंकर शेजवार--  ये जो इन्होंने पढ़ा है वह कुछ नहीं पढ़ सकते. यह विधान सभा का नियम है.

          श्री रामनिवास रावत--  अस्वीकृत करने वाले आप कौन होते हों?

            अध्यक्ष महोदय--  मैं उत्तर दे रहा हूँ.

          श्री रामनिवास रावत--  मुझे अस्वीकृत करने की कोई सूचना अभी तक नहीं दी गई है.

          अध्यक्ष महोदय--  रावत जी, आप सुन लें. मेरे को वस्तु स्थिति मालूम है. आपका पत्र भी मैंने पढ़ा है. ये मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन संबंधी जो नियम हैं इसका नियम 40 (1), आप कृपया इसको देख लें,

          "यदि अध्यक्ष की राय में किसी प्रश्न में जिसकी सूचना सदस्य से प्राप्त हुई हो, रूप भेद करना या उसको पृथक् प्रश्नों में विभाजित करना आवश्यक हो या दो या अधिक प्रश्नों को एक ही प्रश्न में एकत्रित करना आवश्यक हो तो अध्यक्ष आवश्यक रूप भेदों के साथ उस प्रश्न को स्वीकार कर सकेगा या उस प्रश्न को विभाजित कर सकेगा या सुसंगत प्रश्नों को एक में समेकित कर सकेगा."

          डॉ.गौरीशंकर शेजवार--  अध्यक्ष महोदय, अब आप लाख नियम बताओ पर ये नियमों पर चलते ही नहीं हैं. इनको नियम पढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है.

          अध्यक्ष महोदय--  डॉक्टर साहब, एक मिनट. बैठ जाएँ. अध्यक्ष के स्थायी आदेश क्रमांक 12, कृपया उस पर भी ध्यान दें,

          " जब एक ही विषय पर या संबद्ध विषय पर अनेक सदस्यों से प्रश्नों की सूचनाएँ प्राप्त हों तो यदि अध्यक्ष सदस्यों द्वारा पूछी गई सभी महत्वपूर्ण बातों को सम्मिलित करके एक सम्पूर्ण प्रश्न बनाना उचित समझे तो यह निदेश देगा कि सभी सूचनाओं को एक सूचना में समेकित कर दिया जाएः

          परन्तु ऐसी अवस्था में उन सभी संबंधित सदस्यों के नाम, उनकी सूचनाओं को प्राथमिकता क्रम में, समेकित प्रश्न के सामने एक कोष्ठक में दिखाए जाएँगे."

         

          यह मैंने नियम बता दिया कि यह अधिकार है. (श्री रामनिवास रावत जी के खड़े होने पर) अब बात पूरी तो सुन लो. आपने जो पत्र लिखा है उसमें आपने दो बात लिखी हैं, न तो आपकी भाषा और आपकी भावना इनके विपरीत है. भाषा की बात मैं कर सकता हूँ भाषा का मूल प्रश्न यह था कि किसानों के संबंध में, विशेषकर मंदसौर के किसानों के संबंध में था, पर जैसा कि मुकेश नायक जी ने भी पूरे एक समेकित प्रश्न में, प्रदेश भर में क्या ऐसी कोई नीति बनाई गई, ऐसा ही आपका भी मिलाजुला था.  भावनाएँ आप अभी यहाँ बता दीजिए इसलिए उद्भूत करने की व्यवस्था है, तो आप अब अपना प्रश्न करिए.

          राजस्व मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्ता)--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मूल बात यह नहीं है. अब मुकेश नायक जी के साथ रामनिवास रावत जी का नाम आपने कैसे लिख दिया, यह समस्या है.

          श्री रामनिवास रावत--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं प्रथमतः आपकी बात से सहमत हूँ. अगर मेरे प्रश्न और मुकेश नायक जी के प्रश्न का एक ही भावार्थ होता तो मुझे कोई आपत्ति नहीं होती.

          अध्यक्ष महोदय--  विषय एक ही है.

          श्री रामनिवास रावत--  नहीं, मुकेश जी का जो प्रश्न है वह केवल गोली से मरने वाले किसानों एवं मुआवजे से संबंधित है.

          अध्यक्ष महोदय--  गोली से मरने वाले नहीं, जो नुकसान दूसरों को होता है, उस पर भी है. आपने गुस्से में पढ़ा ही नहीं है.

          श्री रामनिवास रावत--  मैंने नुकसान के बारे में बिल्कुल नहीं पूछा. मैंने नुकसान के संबंध में मेरे प्रश्न में एक बात नहीं पूछी. आप प्रश्न पढ़ कर देख लें और दूसरी बात, अध्यक्ष महोदय, आसन्दी से मुझे निर्देश मिला है, उसको मैं स्वीकार कर रहा हूँ. मंत्री जी ने अभी कहा कि रिजेक्ट कर दिया, किस हैसियत से किया.

          अध्यक्ष महोदय--  रिजेक्ट नहीं किया. उनको जानकारी नहीं थी.

          श्री रामनिवास रावत--  इन्हें आप डाँटें. ये माफी मांगें. ये क्या सचिवालय चलाएँगे?

            अध्यक्ष महोदय--  आप तो अब अपना प्रश्न पूछिए. श्री शैलेन्द्र पटेल को भी पूछना है.

          डॉ.गौरीशंकर शेजवार--  अध्यक्ष महोदय, टेक्निकली हम समझ लें कि मैंने कोई प्रश्न दिया, आपने उसे प्रक्रिया में नहीं लिया, किताब में नहीं छपा, इसका अर्थ यह है कि उसे रिजेक्ट कर दिया.

          अध्यक्ष महोदय--  डॉक्टर साहब, प्रश्नकाल समाप्त हो रहा है, शैलेन्द्र पटेल जी को भी   पूछना है. आप एक प्रश्न पूछ लीजिए फिर शैलेन्द्र पटेल एक प्रश्न पूछेंगे, इस विषय पर अब कोई विवाद नहीं होगा. श्री रामनिवास जी एक प्रश्न पूछेंगे और उसके बाद श्री शैलेन्द्र पटेल जी एक प्रश्न पूछेंगे.

          श्री रामनिवास रावत--  अध्यक्ष महोदय, मेरा मूल प्रश्न यह था, एक तो मुझे जवाब दिला दें. दूसरा मैंने प्रथम प्रश्न यह किया है कि क्या विभिन्न किसान संगठनों द्वारा किसानों की उत्पादित फसल का लागत मूल्य दिलाने, डेढ़ गुना मूल्य दिलाने, समस्त प्रकार की कर्ज माफी करने का,  किन किन मांगों को लेकर आन्दोलन किया था, किसान संघ ने भी आन्दोलन किया था, मुख्यमंत्री जी ने भी बुलाया था, मंदसौर के किसानों की मांगें क्या क्या थीं, स्पष्ट कर दें.

          अध्यक्ष महोदय--  यह बड़ा विस्तृत प्रश्न है...

          श्री रामनिवास रावत--  विस्तृत प्रश्न है ही नहीं. मांगें क्या क्या थीं और मुख्यमंत्री ने क्या घोषणा की.

          अध्यक्ष महोदय--  स्थगन में सब आ गया. ..(व्यवधान)..

          श्री रामनिवास रावत--  (श्री उमाशंकर गुप्ता जी के खड़े होने पर) आप शांत बैठे रहो. क्यों मध्यप्रदेश के किसानों का मजाक उड़ा रहे हों? तुम्हें किसानी से मतलब है नहीं.

          अध्यक्ष महोदय--  12 बज गया है, समय समाप्त हो गया है पर मैं विशेष रूप से शैलेन्द्र पटेल जी को अनुमति दूँगा.इनका उत्तर आप दे दीजिए इसके बाद में आपका समय समाप्त.

          श्री रामनिवास रावत--  अध्यक्ष महोदय, यह तो निर्देश दे दें कि मेरे प्रश्न का जवाब जरूर आ जाए. चर्चा न हो. जवाब तो आ जाए.

          डॉ. गौरीशंकर शेजवार-- जो प्रश्न आया ही नहीं है जो प्रक्रिया में लगा नहीं हैं और ना वह सप्लीमेंटरी में आ रहा है उसका जवाब कैसे दिया जाएगा?

          अध्यक्ष महोदय-- आप बैठें. भूपेन्द्र सिंह जी बोलें.

          श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न के जवाब के लिए निवेदन कर रहा हूं.

          अध्यक्ष महोदय-- आपका उत्तर आ रहा है.

          श्री रामनिवास रावत--अध्यक्ष महोदय, इसका लिखित में जवाब आ जाये इसलिए निवेदन कर रहा हूं.

          अध्यक्ष महोदय-- मंत्री जी, आप इसका लिखित में जवाब दे दीजिये. श्री शैलेन्द्र पटेल अपना प्रश्न करें , सिर्फ एक प्रश्न करेंगे.

          श्री रामनिवास रावत-- जवाब कब तक आ जाएगा?

          अध्यक्ष महोदय-- आज ही लिखित में जवाब पहुंचा देंगे.

          श्री शैलेन्द्र पटेल--  माननीय अध्यक्ष महोदय,गृह मंत्री जी ने पॉलिसी बनाने की बात की है उसके लिए धन्यवाद देना चाहता हूं. मेरा एक प्रश्न है कि ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण यदि कहीं पर घटना होती है, मंदसौर में तो जो दुकानें जली हैं, नुकसान हुआ है उनको राहत देने की बात की गई है लेकिन  प्रदेश में अन्य जगह भी इस तरह का नुकसान हुआ है उसके लिए सरकार क्या विचार करेगी, क्या उसी अनुरूप जिस अनुरूप मंदसौर में राशि दी गई उसी हिसाब से दूसरे जो नुकसान हुए हैं, क्या उसकी भी भरपाई सरकार करेगी?

          श्री भूपेन्द्र सिंह--  माननीय अध्यक्ष महोदय, जहाँ पर भी नुकसान हुआ है सभी जगह का आंकलन शासन करा रहा है और आंकलन के आधार पर जो नुकसान जहाँ पर भी हुआ है हम उनको सहायता राशि देंगे. मंदसौर के अलावा किसी भी जिले में अगर कहीं पर भी कोई नुकसान किसान आंदोलन में हुआ है या आपके द्वारा हुआ है तो उसमें हम लोग मदद करेंगे.

          अध्यक्ष महोदय-- प्रश्न काल समाप्त.

 

(प्रश्न काल समाप्त)

12.02 बजे

  स्थगन प्रस्ताव पर अध्यक्षीय व्यवस्था

 

         

            अध्यक्ष महोदय-- कल सदन की सहमति अनुसार किसान आंदोलन संबंधी स्थगन प्रस्ताव पर आज चर्चा पूर्ण की जाना है. वैसे तो कल इस प्रस्ताव पर लंबी एवं पर्याप्त चर्चा हो चुकी है इसीलिए अब माननीय नेता प्रतिपक्ष का वक्तव्य एवं माननीय मुख्यमंत्री का जवाब आना है . इस बारे में यदि नेता प्रतिपक्ष कुछ कहना चाहते हैं कि आपको और मुख्यमंत्री जी को ही बोलना है?

          नेता प्रतिपक्ष(श्री अजय सिंह)--  माननीय अध्यक्ष महोदय, साधारण तौर से, सामान्य तौर से, परंपरा के हिसाब से जो लोग स्थगन देते हैं उनकी बात सुनी जाती है और उस पार से, सत्ता पक्ष के तरफ से सिर्फ एकाध मंत्री लोग उत्तर देते हैं. हम लोगों ने स्थगन दिया सिर्फ 9 लोग बोल पाये हैं. मेरा आपसे अनुरोध है कि जो बाकी कुछ नाम हैं उनको भी थोड़े-थोड़े समय के लिए बोलने दिया जाये जिससे वह अपनी भावना रख सकें.

          अध्यक्ष महोदय-- आपसे एक अनुरोध है जो आपने अनुरोध किया है, जो आपने प्रस्ताव किया है उससे सहमत होते हुए यदि दो-दो मिनट में अपनी बात रखे तो ठीक होगा. अभी 9 लोग बोल चुके हैं. आपको छोड़ दें तो 16 लोग अभी बोलना बाकी हैं और दूसरे पक्ष के लोग भी अभी बोलना शेष हैं.(श्री उमंग सिंघार जी के बोलने पर) श्री उमंग सिंघार जी, आप 5 मिनट के 10 मिनट कर देंगे.

          श्री रामनिवास रावत--  अध्यक्ष महोदय, प्रदेश की 80 प्रतिशत आबादी की बात दो मिनट में कैसे संभव है?

          अध्यक्ष महोदय-- देखिये, सारी बात आ चुकी है. नेता प्रतिपक्ष जी उसको फिर सम अप भी करेंगे और इसीलिये आपसे अनुरोध है कि अब 2 मिनट हम कहते हैं 4 मिनट आप खुद कर लोगे. 5 कहेंगे तो 10 मिनट कर लोगे तो आपसे अनुरोध है कि 2-2 मिनट में अपनी बात कहें ताकि 1 घंटे में यह 16 सदस्यों की बात हो सके और कुछ सत्ता पक्ष के सदस्य भी बोलना चाहेंगे.

          श्री अजय सिंह--  माननीय अध्यक्ष महोदय,  5-5 मिनट सबको बोलने दिया जाये.

          अध्यक्ष महोदय-- पर इसका कठोरता से पालन हो मेरा यह आपसे अनुरोध है.

          श्री अजय सिंह--  अध्यक्ष महोदय, यह तो आपको करना है.कल जब गोपाल भार्गव जी बोल रहे थे तब आपने नहीं किया, रामेश्वर शर्मा धारा प्रवाह  25-30 मिनट  बोल रहे थे.

          अध्यक्ष महोदय-- गोपाल भार्गव जी पहले वक्ता थे.

          श्री अजय सिंह--  तब तो आपने कठोरता नहीं दिखाई क्या हम लोगों पर ही कठोरता होगी.

          अध्यक्ष महोदय-- नहीं, आप पर बिल्कुल नहीं होगी. आपकी सहमति से ही सदन चलेगा.श्री उमंग सिंघार अपना भाषण प्रारंभ करें.

 

 

 

 

12.05 बजे                                  स्‍थगन प्रस्‍ताव (क्रमश:)

 

प्रदेश के आंदोलनरत् किसानों पर लाठीचार्ज एवं गोलीचालन से

उत्‍पन्‍न स्थिति पर चर्चा का पुनर्ग्रहण

 

          श्री उमंग सिंघार (गंधवानी) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने नेता प्रतिपक्ष जी के अनुरोध को स्‍वीकार किया, उसके लिए आपको सहृदय से धन्‍यवाद देना चाहता हॅूं.

          अध्‍यक्ष महोदय -- आपका ही प्रस्‍ताव है.

          श्री उमंग सिंघार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रदेश में इतनी बड़ी घटना हुई. यह मेरे व्‍यक्तिगत विचार हो सकते हैं. कल मैंने विधानसभा में देखा जिस प्रकार इस संवेदनशील मुद्दे को कुछ लोगों ने हास-परिहास में बदलने की कोशिश की और उस मुद्दे की गंभीरता को कम किया. कुछ लोगों को चर्चा के समय यह अहसास नहीं रहा कि जिसके घर में जिस किसान की मृत्‍यु हुई, उसके परिवार को एक करोड़ रूपए देने से उसके परिवार में उसका पति, उसका बेटा वापस नहीं आएगा. वह परिवार कैसे संघर्ष करेगा. कैसे अपने परिवार का भरण-पोषण करेगा, यह हमारे लिए एक सोचने का विषय हो सकता है. माननीय गृहमंत्री जी ने स्‍थगन का जवाब देते समय आखिर में एक बात कही थी कि प्रदेश के अंदर किसानों में कोई असंतोष व्‍याप्‍त नहीं है. कोई रोष व्‍याप्‍त नहीं है लेकिन उनके चेहरे पर जो मुस्‍कान थी उससे लग रहा था कि वे सत्‍य बोल रहे हैं या असत्‍य बोल रहे हैं. यह वे खुद ही अपनी अंतरात्‍मा से समझ सकते हैं. 12 साल के बाद माननीय शिवराज सिंह चौहान जी मेधावी छात्रों को भोपाल में पुरस्‍कार दे रहे थे और उन्‍होंने कहा कि कृषि लाभ का धंधा नहीं है टाटा, अंबानी बनो. आपने 5 कृषि कर्मण पुरस्‍कार प्राप्‍त किया. इतने साल सरकार चलाई, किसान का बेटा कहा, किसानों का हितैषी कहा और आज उन मेधावी छात्रों को, जो इस प्रदेश के युवा होनहार भविष्‍य हैं उनसे कहते हैं कि कृषि लाभ का धंधा नहीं रहा. मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहूंगा कि केन्‍द्र में आपकी सरकार है. आपकी सरकार मध्‍यप्रदेश में है. सरकार की गलत नीतियों के कारण पूरे हिन्‍दुस्‍तान में यह स्थिति बन रही है. आज आप इतनी बात करते हैं तो यहां से शासकीय संकल्‍प पारित क्‍यों नहीं करते. आप केन्‍द्र से अनुरोध क्‍यों नहीं करते कि आयात नीति में कंट्रोल करें. ट्रैक्‍स बढ़ाएं, इम्‍पोर्ट पर टैक्‍स लगाएं, यहां के जो गेहूं उत्‍पादक, दलहन उत्‍पादक हैं उन लोगों को लाभ मिले. लेकिन मुझे नहीं लगता कि अभी तक सरकार ने इस प्रकार का कोई शासकीय संकल्‍प यहां से पारित करवाने के लिए कोई बात की है. एक मेरा सुझाव है कि चाहें तो इस बात को आप सरकार तक पहुंचा सकते हैं. यह बात सही है कि पिछले 8 महीनों में नोटबंदी, जीएसटी के कारण हर वर्ग को नुकसान हुआ है लेकिन दिल्‍ली स्‍तर तक के हमारे प्रयास भी होने चाहिए कि हम हमारे प्रदेश को कैसे मजबूत रखें और कैसे हम हर वर्ग के लोगों के, किसानों के हितैषी बनें. माननीय शिवराज सिंह जी कई बार बोल चुके हैं जब कांग्रेस की सरकार थी तो आप कोयले के मुद्दे को लेकर, बिजली के मुद्दे को लेकर धरने पर बैठ जाते थे लेकिन इस मुद्दे को लेकर आप कितनी बार गए और कितनी बार आपने इस बात को कहा. आज तक मुझे नहीं लगा और न ही मैंने मीडिया में पढ़ा कि आपने किसानों को लेकर इस मुद्दे पर बात की हो.  मैं आपसे अनुरोध करना चाहूंगा कि इस बात को आप सरकार तक पहुंचाएं और मुझे नहीं लगता कि राज्‍य सरकार आज किसानों के कर्ज की भरपाई कर सकती है. किसानों के कर्ज की भरपाई केन्‍द्र सरकार कर सकती है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- कृपया समाप्‍त करें.

          श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, दो मिनट में समाप्‍त करता हॅूं. विशेष रूप से मैं कहना चाहूंगा कि आत्‍महत्‍या की घटनाएं हुईं, गोलीबारी हुई. किसान कर्ज से मर रहा है तो प्रदेश में एक नई नीति चालू हो गई है कि वह किसान निजी कारणों से मरा है. उसके ऊपर कर्जा नहीं था. मेरे विधानसभा क्षेत्र गंधवानी में चुम्‍पिया गांव के अंदर विलाम पिता मालसिंह है, जिसके दोनों बच्‍चे गूंगे-बहरे हैं. वह किसान कर्ज से मर रहा है. सरकार प्रतिवेदन में दे रही है कि 23000 रूपए कर्जा था. 60000 रूपए का साहूकारों का कर्जा था, 60000 रूपए का अन्‍य कर्जा था लेकिन उसकी पत्‍नी से बयान नहीं लिया गया. उसके बच्‍चों से, उसके परिवार में बहुओं से किसी से नहीं पूछा गया, उसके घर के पास में रहने वाले भाई से हस्‍ताक्षर करवा दिए कि यह तो निजी कारण से, बीमारी के कारण से मर गया.

          अध्‍यक्ष महोदय -- उमंग जी, कृपया समाप्‍त करें.

          श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, इस प्रकार की घटना बालाघाट में भी हुई.

          अध्‍यक्ष महोदय -- श्री राजेन्‍द्र पाण्‍डेय अपनी बात रखें.

          श्री उमंघ सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, अत: मेरा आपसे निवेदन है कि सरकार को जो अति संवेदनशील होना चाहिए, यह तो इतनी संवेदनहीन हो गई है कि जिनको आर्थिक सहायता, सामाजिक सहायता, राष्‍ट्रीय सहायता मिलनी चाहिए, उन परिवारों पर ऐसे प्रकरण बनाए जा रहे हैं ताकि उनको सरकार की योजनाओं का लाभ न मिले.

          अध्‍यक्ष महोदय -- कृपया बैठें, अब नहीं.

          श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, एक बात मैं कहना चाहूँगा कि ऐसी जो आत्‍महत्‍याएं हुई हैं, उन पर विशेष रूप से सरकार को संज्ञान लेना चाहिए.

          अध्‍यक्ष महोदय -- बैठ जाएं, अब नहीं, इस तरह से समय बढ़ता जाएगा.

          श्री उमंग सिंघार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंदसौर के बारे में बात कहना चाह रहा था कि दलोदा के जो घनश्‍याम जी धाकड़ थे.

          अध्‍यक्ष महोदय -- श्री उमंग सिंघार जी का अब कुछ नहीं लिखा जाएगा.

          श्री उमंग सिंघार -- (XXX)

     अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, प्‍लीज, अब नहीं, 10 मिनट सबके हो जाएंगे. आप कृपया सहयोग करें, आप सहयोग नहीं कर रहे हैं. श्री राजेन्‍द्र पाण्‍डेय अपनी बात रखें.       

          श्री राजेन्‍द्र पाण्‍डेय (जावरा) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कल से स्‍थगन पर चर्चा चल रही है और पूरा सदन और पूरा प्रदेश भी इसे गंभीरता से देख रहा है.

          अध्‍यक्ष महोदय, कांग्रेस ने जिस ढंग से स्‍थगन प्रस्‍ताव लाया, उनकी भावना क्‍या रही, उनके विचार क्‍या रहे, कांग्रेस के लोग अभी तक यह स्‍पष्‍ट नहीं कर पाए हैं. इस स्‍थगन में घटना घटित होने के बाद कांग्रेस का चेहरा सामने आया था, उन्‍होंने उन लाशों पर राजनीति करने का प्रयास किया, लाशों पर रोटियां सेंकने का काम किया, और यह चरित्र तो प्रारंभ से कांग्रेस का रहा है, चाहे यहां पर महात्‍माओं का नाम लेकर, चाहे इनके बड़े नेतृत्‍व का नाम लेकर, इन्‍होंने हमेशा लाशों पर राजनीति करने का काम किया है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मंदसौर की घटना दु:खद है, निश्‍चित रूप से दु:खद है और उस पर दु:ख भी व्‍यक्‍त किया, माननीय मुख्‍यमंत्री श्री शिवराज सिंह जी चौहान के बारे में तो न केवल मध्‍यप्रदेश वरन् पूरा देश इस बात को भलिभांति जानता है और जानने के साथ-साथ इस बात को स्‍पष्‍ट रूप से मानने भी लगा है कि प्रजातंत्र में ऐसा मुख्‍यमंत्री पहले देखने को नहीं मिला, जो स्‍वयं जनता से जाने कि मैं तुम्‍हारे लिए क्‍या कर सकता हूँ ? जो समस्‍त वर्गों को अपने निवास पर बुलाकर पूछे कि तुम्‍हारे दु:ख-दर्द क्‍या हैं ? कठिनाइयां क्‍या हैं और मैं उसमें क्‍या मदद कर सकता हूँ ? जनता ने जैसा कहा, वह माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने लगातार करने का काम किया है और यही कारण रहा कि आज मध्‍यप्रदेश स्‍वर्णीम मध्‍यप्रदेश बन रहा है, मध्‍यप्रदेश में लगातार उत्‍पादन बढ़ रहा है, लेकिन कांग्रेस, जिसको यहां पर मध्‍यप्रदेश में तो विपक्ष का अधिकार है, भले ही देश में इन्‍हें विपक्ष की भूमिका निभाने का भी अवसर देश की जनता ने नहीं दिया, देश की जनता ने इनको नकार दिया. अध्‍यक्ष महोदय, जब माननीय मुख्‍यमंत्री जी प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति से मिल रहे हैं, उसके आवेदन ले रहे हैं, उसके पास दौड़कर चले जाते हैं, उसकी परेशानी पूछते हैं, वे किसी को मना नहीं करते हैं, मंदसौर में घटना हुई है, उससे लगा हुआ जिला हमारा रतलाम जिला है, रतलाम जिले में माननीय मुख्‍यमंत्री जी के आने की घोषणा कि रतलाम जिले में माननीय मुख्‍यमंत्री जी आएंगे, और वे रतलाम में न केवल आएंगे, वरन् रतलाम में रात्रि-विश्राम भी करेंगे, इन सब बातों की जानकारी समस्‍त लोगों को रही. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कांग्रेस अगर विपक्ष में है, विरोध में है, कोई मांग रखना चाहती है, कोई आवेदन देना चाहती है, किसी मांग-पत्र के बारे में चर्चा करना चाहती है, तो माननीय मुख्‍यमंत्री जी से समय लिया जाना चाहिए था जब उनके रतलाम आने की सूचना अधिकृत रूप से जारी हो गई थी, माननीय मुख्‍यमंत्री जी को जानकारी दी जानी चाहिए थी कि हम आपसे इस बारे में मिलना चाहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं किया गया, क्‍योंकि कांग्रेस के लोग तो प्रदेश में अशांति फैलाना चाहते थे, कांग्रेस के लोग निश्‍चित रूप से प्रदेश में हा-हाकार मचाना चाहते थे, कांग्रेस के लोगों का यह षड्यंत्र था.

          श्री उमंग सिंघार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहता हूँ कि मांग-पत्र की बात बार-बार की जा रही है, हम तो चाहते हैं कि किसानों का कर्जा माफ हो. ये कौन-सी बात कर रहे हैं.

                        डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय -- उमंग सिंघार जी,  मैं  मेरे जिले की  बात कर रहा हूं.  मेरे जिले में जो हुआ, वह मैं बता रहा हूं.

                   अध्यक्ष महोदय -- उमंग जी, यह उनके जिले का मामला है.

                   डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय -- उमंग जी,  आप एक काम करें. आप मेरे साथ आ जायें, मैं आपको उस स्थान पर ले जा सकता हूं,  जहां पर  घटना  जानबूझकर  षडयंत्र के साथ की गई.  वहां पर आपको ले जा  सकता हूं.  उन ग्रामीण लोगों से मैं बात करवा सकता हूं.  उनसे मैं आपकी मुलाकात करवा सकता हूं.

                   श्री उमंग सिंघार -- मैं आपकी जानकारी के लिये बता दूं कि  वहां पर मैं जा चुका हूं.

                   अध्यक्ष महोदय -- उमंग जी, आप बैठ जायें.  आमने-सामने बहस नहीं होगी.  पाण्डेय जी, आप भी उनका उत्तर मत दीजिये.  सीधे आसंदी की तरफ बात कीजिये.  उनका उत्तर देने की जरुरत नहीं है.  अब आप कृपया समाप्त करें.

                   डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय -- अध्यक्ष महोदय, मैं निवेदन यह कर रहा था कि यदि  वहां  के  जिला पंचायत के उपाध्यक्ष, श्री डी.पी. धाकड़ मुख्यमंत्री जी से मिलने का समय लेते, तो उनकी मुख्यमंत्री जी से आसानी से मुलाकात हो जाती, लेकिन वह ऐसा नहीं चाहते थे.  उन्होंने जानबूझकर षडयंत्र किया.  मुख्यमंत्री जी जब सैलाना जाना चाहते थे,बाय रोड उनके जाने का कार्यक्रम था और निश्चित रुप से वहां पर  मुलाकात के लिये अगर समय लेते तो सर्किट हाउस में उनकी मुलाकात हो जाती.  उन्होंने ऐसा नहीं किया.  ढेलनपुर में  अज्ञात लोगों को वहां पर  इकट्ठा किया. ढेलनपुर  में आस पास के  गांव के लोग इकट्ठा हो गये. वहां के स्थानीय  लोग तब वहां पर पहुंचे नहीं थे और जब वहां पर  वह खड़े हो गये, तो  उन्होंने जो भाषण दिया, भाषण में उनका  पहला वाक्य   यह था कि जो पहली गाड़ी आये, उसमें आग लगा देना.  जो पहली  गाड़ी दिखे, उसको तोड़ देना.  जो पहली गाड़ी दिखाई दे,  उसको फोड़ देना, उसको खत्म कर देना.  जैसा होगा, हम देख लेंगे.  क्या नेता यह वक्तव्य देता है, क्या नेता का  नेतृत्व  इस तरह का होता है.  अगर जनता की कोई मांग थी,  तो निश्चित रुप से  मुख्यमंत्री जी  से आकर के वे मिलते,लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और उसके कारण वहां पर  भगदड़ मची. वहां पर लाठी-चार्ज हुआ.  मंदसौर की घटना  बाद में हुई है.  पहले तो वहां पर  पुलिस अधिकारी की  आंख चली गई.  उसके प्रति  इनकी कोई सहानुभूति नहीं रही  और उसके बाद भी जो इन्होंने  नौटंकी की है, माननखेड़ा टोल पर जाकर के  नाटक नौटंकी करना,  राहुल  गांधी जी का वहां पर पहुंचना. अध्यक्ष महोदय, कांग्रेस मध्यप्रदेश में  हो रहे लगातार विकास के कार्यों, कांग्रेस  मुख्यमंत्री जी की छबि  को खराब करने के लिये ऐसा कर रही है, मैं इसका विरोध करता हूं. बहुत बहुत धन्यवाद.

                   कुंवर विक्रम सिंह (राजनगर) --  अध्यक्ष महोदय,  यह घटना  अपने आप में  बहुत दुखद घटना है  और पूरे मध्यप्रदेश  के लिये यह बड़ा  दुख का विषय है.  मैं ज्यादा समय न लेते हुए बहुत सी बातें इस पर  हो चुकी हैं और रिपीटेशन न हो, इसलिये  मैं अपनी बात सीधे पाइंट पर  आकर करना चाहता हूं. यह तमाम  साथी मित्रों ने एक दूसरे  के ऊपर आरोप लगाये,परंतु जड़ तक  कोई नहीं पहुंचा.  भारतीय किसान संघ द्वारा यह आंदोलन किया जा  रहा था. यह  भारतीय किसान संघ द्वारा  आंदोलन  बीच बीच  में किये जाते हैं, बल्कि करवाये जाते हैं और इस आंदोलन  के फलस्वरुप  जब बात बिगड़ गई और वह हेंडल  नहीं हो पाई, तो यह  किसान लोग उग्र प्रदर्शन के रुप में  आ गये, जिस पर गोली चालन हुआ.  गोली चालन एक आखिरी स्टेज का काम होता है  और  इसकी आवश्यकता  उस समय  नहीं थी,  जो हुआ, वह बहुत  ही दुखद हुआ. मैं  मुख्यमंत्री जी और गृह मंत्री जी  से यह  कहना चाहूंगा कि  ऐसी घटना  आगे चलकर न हो.  मैं एक बात  और कहना चाहूंगा कि जो कारतूस इशू होते हैं एक कांस्टेबल को या  किसी भी अधिकारी को, क्या उन जिंदा कारतूसों  की गिनती  वापस ली गई और जिनके कारतूस  कम पाये गये, उनके ऊपर  प्रकरण दर्ज किया जाये. दूसरी बात मैं कहना चाहूंगा कि  सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में  किसानों के ऊपर  जो  कर्ज है,  वह कर्ज माफ किया जाये, ऐसी   मैं सदन के मुखिया
और प्रदेश के मुखिया आदरणीय मुख्यमंत्री जी से करबद्ध  प्रार्थना करता हूं. अध्यक्ष महोदय, आपने बोलने के लिये समय दिया, धन्यवाद.

            श्री ओम प्रकाश सखलेचा ( जावद) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, सदन के समस्त सदस्य इस बात से तो सहमत हैं कि यह घटना बहुत दुखद हुई है. लेकिन जिस तरीके से इस घटना की चर्चा हो रही है वह उससे भी ज्यादा दुखद है, क्योंकि बजाय मुद्दे के राजनीतिक रोटियां सेंकी जा रही हैं. कहीं न कहीं मैं यह बात चर्चा में लाना चाहता हूं कि 3 - 4 प्रमुख बातें जो मेरे ध्यान में आयीं सबसे पहली बात आयी कि किसान के प्रति माननीय मुख्यमंत्री जी की कितनी चिंता है. एक साल में किसानों पर 24 हजार करोड़ रूपये का विभिन्न मदों में अनुदान मिल रहा है. इन्हें सिर्फ राजनीतिक दृष्टि से यह बात चाहिए कि यह माफ कर दो या वह माफ कर दो, और काम करने वाले को जो माफी मांगे केवल उसका भला हो जाय एक का और दूसरे का बंटवारा कर दें. बंटवारे की जो रणनीति कांग्रेस की आजादी के समय से शुरू हुई है वह  आज इस दुखद घटना में भी उनकी सबसे ज्यादा बात वह ही घटना आ रही है कि जो  किसान समय ऋण चुकता करता है उ से छोड़ो और जो बचे हुए हैं उनको मदद देकर अलग करें न कि नीतिगत इस बात पर चर्चा करें कि सबको प्रपोशनेटली बराबर कैसे दिया जाय. खेती को फायदा का धंधा बनाया जाय, दूसरी महत्वपूर्ण बात यह आई, महत्वपूर्ण  बात में सिर्फ एक वर्ग एक ही बात  कि कीमतों को कैसे बढ़ाया जाय, अगर कीमतें बढ़ें तो आप कंज्यूमर की तरफ से चिल्लाना शुरू कर देंगे कि महंगाई का इंडेक्स बढ़ रहा है, महंगाई बढ़ रही है और कीमत कम हो जाय तो यह कहेंगे तो विपक्ष का काम और ड्यूटी केवल विरोध करना है. उ सके बजाय अगर आप मध्यप्रदेश की क्षमता जो कि तेजी से बढ़ रही है उसके बारे में सोचें. अब यहां पर लागत कम करने के बारे में कितनी बातें हो रही हैं. लागत कैसे कम हो ताकि किसान को  शुद्ध नफा बढ़ाने की हमारे मुख्यमंत्री जी ने हर बार चर्चा की है और हर संभव प्रयास उस पर किया गया है तो लागत कम करने के प्रस्ताव के बारे में और चिंतन करना चाहिए ताकि और उसको कैसे फायदे का सौदा, कैसे किसान की आमदनी बढ़े यह मूल्य वाक्य होना चाहिए. उस भाव को बढ़ाने के लिए क्या हमने आयोग बनाकर उसकी लागत के बारे में चर्चा कर रहे हैं.

          अध्यक्ष महोदय हम थोड़ा सा इसके बारे में भी चर्चा कर सकते हैं कि कैसे उनको और तकनीकी खेती में और  नये उपकरण में अनुदान देकर कैसे उनके उत्पादन को बढ़ाया जाय. यहां पर यह बात किसी ने नहीं कही है कि सिंचाई का रकबा बढ़ाकर किसानों का टोटल सिंचित रकबा 7 लाख हेक्टेयर से 40 लाख हेक्टेयर तक गया है. नर्मदा जी के पानी का बंटवारा जो कि सन् 1979 में हुआ था उसका 30 साल तक, वर्ष 2005 तक किसी ने पानी रोकने का उसके अतिरिक्त उपयोग का किसी ने  नहीं सोचा था,  इसके बारे में 28 और 29 सालों तक किसी ने कोई काम नहीं किया है, उसकी चर्चा यहां पर नहीं की है. क्या यह सबसे बड़ा प्रदेश की जनता के साथ, जितनी भी 1980 से लेकर  2005 तक कोई काम नहीं हुआ है उसके बारे में एक बार भी चर्चा नहीं आयी है.आप यहां पर किसानों के हित की बात कर रहे हैं. सबसे बड़ा नुकसान तो इस विषय पर है, 40 लाख हेक्टेयर की जमीन अगर आज अगर पानी से अतिरिक्त रूप से सिंचित हुई है तो कितने लाख किसानों का फायदा इ स सरकार ने आते ही किया है, उसके बारें में कहीं पर चर्चा हुई है. केवल हम यह बात  करें कि यहां पर यह नुकसान हुआ है. मैं अगर थोड़ी और हटकर बात करूं. क्या केवल एक विषय से पूरे प्रदेश को चलाना चाहिए, क्या उद्योग के बारे में बात करना गलत बात है, मैं इस बात को बहुत गंभीरता से कहता हूं और  माननीय मुख्यमंत्री जी का इस बात पर बहुत अभिनंदन करता हूं क्योंकि मैंने यह बात कई बार माननीय मुख्यमंत्री जी से कही है कि उद्योग को भी बढ़ावा देना चाहिए, छोटे और बड़े उद्योग जो कि सबसे ज्यादा रोजगार देते हैं. क्योंकि जैसे-जैसे तकनीकी खेती में बढ़ेगी..

अध्यक्ष महोदय - कृपया समाप्त करें.

श्री ओमप्रकाश सखलेचा - अध्यक्ष महोदय, मैंने कोई भी वाक्य रिपीट नहीं किया है. फिर भी आप जब बोलेंगे, मैं बैठ जाऊंगा.

अध्यक्ष महोदय - परन्तु समय की मर्यादा है, एक मिनट में अपनी बात समाप्त कर दें.

श्री ओमप्रकाश सखलेचा - अध्यक्ष महोदय, क्या यह शब्द बोलूं कि जैसे-जैसे शिक्षा बढ़ेगी हमें दूसरे रोजगार के बारे में सोचना नहीं चाहिए, नवयुवकों को दूसरी दिशा में दिशा-निर्देश देकर माननीय मुख्यमंत्री जी ने जो बातें कहीं हैं वे क्या गलत हैं, क्या उनमें किसानों के बच्चे नहीं हैं. उन बच्चों को भी उद्योग लगाकर आगे बढ़ने का मौका देना क्या गलत बात है? स्पष्ट लाइन में यदि बात कहें कि केवल राजनीतिक भाषाओं का उपयोग करके जनता को गुमराह करना और किसी एक दुखद घटना पर राजनीतिक रोटी सेंकने से बड़ा कोई पाप नहीं हो सकता है. मैं अपनी बात को इसी वाक्य के साथ समाप्त करना चाहता हूं कि राजनीतिक रोटियां सेंकना बंद करें और व्यवस्थित उनको आगे बढ़ाने के लिए, किसानों की लागत कम करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए. साथ ही उन्हें दूसरे रोजगार धंधे में आगे बढ़ाने के लिए उचित बढ़ावा देना चाहिए. इसी के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूं. धन्यवाद.

श्री ओमकार सिंह मरकाम (डिण्डोरी) - अध्यक्ष महोदय, लोकतंत्र के पवित्र मंदिर पर लोकतंत्र तक आने के लिए ऊर्जा देने वाला वह एक ईमानदार शब्द, जिनका जीवन सच्चाई, मेहनत और कर्तव्यों से भरा रहता है, उसके दर्द पर आज हम चर्चा कर रहे हैं. अफसोस की बात है कि जब हमने विधायक बनने का निश्चय किया था, उस समय यह कभी नहीं सोचा था कि उस ईमानदार व्यक्ति की मृत्यु पर कभी सदन में चर्चा करनी पड़ेगी. आज जिस विषय पर चर्चा कर रहे हैं. एक किसान, किसान का मैंने अपने शब्दों में वर्गीकरण किया है. 'कि' शब्द से होता है, किस्मत के भरोसे जीने वाला. 'सा' शब्द से होता है, सम्पूर्ण जीवन समर्पित करने वाला. '' शब्द से होता है, न्यायपूर्ण जीवन जीने वाला. यह किसान मैं समझता हूं, उस किसान के जीवन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. चार प्रकार के किसान होते हैं; बड़े किसान, मध्यम किसान, छोटे किसान और अधियार किसान. जब किसान सवेरे 4 बजे उठता है तो अपने मवेशियों को पेरा भूसा देकर उसको तैयार करता है. अपने बाल-बच्चों को घर में छोड़कर खेत के लिए निकल जाता है. खुर्रा फांदता है. जब खुर्रा फांदने के बाद धान की फसल डालता है. वह फसल डालने के बाद जब खेत पर  जाता है तो वहां पर सांप, बिच्छू निकलते हैं. किसान कभी डरता नहीं है. किसान अपने जीवन को लगाता है. अध्यक्ष महोदय, धान की गुहाई जब हमारे पिताजी हमें कराते थे, हम 3 बजे रात उठते थे. बर्फ रहता था. परन्तु उससे हम डरते नहीं थे, हम धान को पैदा करते थे. इसके बाद हम चावल लाते हैं. आज वह लोग उस पर चर्चा कर रहे हैं जिन्हें धान के पेड़ को पहचानने के लिए भी मैं समझता हूं कि उनको मुसीबत होगी. आज इस विषय पर मैं तो कहना चाहता हूं. माननीय मुख्यमंत्री जी लोकतंत्र के विषय में मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि हम जानते हैं कि लोकतंत्र में सत्तापक्ष और विपक्ष रहता है. परन्तु आज कहां गयी, दीनदयाल उपाध्याय जी की वह जनता पार्टी, कहां गया अटल बिहारी वाजपेयी जी का वह संदेश, जो कर्तव्यों पर बात करते थे. आज कहते हैं कि  स्क्रिप्ट कांग्रेस के सदस्यों द्वारा लिखी गयी है. माननीय मुख्यमंत्री महोदय जी, मैं आपसे निवेदन कर रहा हूं, आप इसको समझिए. आपका बढ़ते हुए जनादेश से कहीं न कहीं आपके कक्का जी भारतीय जनता पार्टी के सदस्य थे और जिस तरह से 15 मई को अमरकंटक में आपने अपनी पवित्र भावनाओं का प्रदर्शन किया. आपके विरुद्ध वहीं स्क्रिप्ट लिखी गयी कि यह मुख्यमंत्री को कैसे हम किसी तरह से फंसाएं और मैं आपको बताना चाहता हूं, इसमें कोई कांग्रेसी का कहीं हाथ नहीं है. इसमें भारतीय जनता पार्टी के केन्द्र के लोगों का हाथ है कि आपको अस्थिर किया जाय.

एक माननीय सदस्य - मीडिया में किसको बताया? चिल्ला-चिल्ला कह  रहे थे कि तोड़ दो, जला दो. मीडिया में किसको बताया? वे कौन-से नेता थे?

श्री उमाशंकर गुप्ता - इनको दिल्ली का बड़ा ज्ञान है? आप डिण्डौरी तक ही रहें.

श्री ओमकार सिंह मरकाम- आप किसान का दर्द नहीं समझते. आप वाजपेयी जी के विचारों के समर्थक नहीं हैं. आज तो आप उनके समर्थक हैं, जिनको वाजपेयी जी ने कहा था, अध्यक्ष महोदय, मैं एक शब्द के साथ अपनी बात समाप्त करना चाहता हूं. माननीय मुख्यमंत्री जी मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं. मैं राजनीतिक भाषण इसलिए नहीं दे रहा हूं कि मैं किसानी का दर्द जानता हूं और मैं आज ब्यूरोक्रेट्स की बात भी करता हूं कि ये एसी में बैठकर किसानों के लिए योजना बनाते हैं. हमारे साथ चलें फराह लगाकर अभी बता दें तो अक्ल आ जाएगी.

अध्यक्ष महोदय - कृपया समाप्त करें.

श्री प्रदीप अग्रवाल - एसी में बैठकर ही 70 साल तक योजनाएं बनाते रहे, तब आज आप लोगों ने किसानों की यह स्थिति कर दी.

श्री ओमकार सिंह मरकाम- अध्यक्ष महोदय, आपने जो समय दिया उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.

          वन मंत्री(डॉ गौरीशंकर शेजवार)-- अध्यक्ष महोदय, मैं कहना नहीं चाहता था लेकिन मैं कह देता हूं कि धान का पेड़ नहीं पौधा होता है.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम-- डॉक्टर साहब आप पढ़-लिख कर डॉक्टर बन गए. हमने डॉक्टरी नहीं की है. माननीय मुख्यमंत्री जी मैं आपसे एक निवेदन करना चाहता हूं. आपके 13 सालों में कोई ऐसी घटना नहीं हुई जिससे आपकी छबि को कलंकित करने का मौका मिला. धन्यवाद.

          डॉ मोहन यादव(उज्जैन-दक्षिण )--अध्यक्ष महोदय, किसानों के हित में सोचने वाली, आनंद के साथ चलने वाली अच्छी-खासी सरकार पर जिस प्रकार एक राजनैतिक षडयंत्र के कारण और मैं राजनैतिक षड़यंत्र सोच-समझ कर कह रहा हूं क्योंकि जब यह घटना घटी, मेरी अपनी विधान सभा में इंदौर और बड़नगर रोड़ पर दोनों रोड्स पर जहां आम जन अपने बच्चों को स्कूल पहुंचाने के लिए घर से निकल रहे हैं, इंदौर जाने के लिए निकल रहे हैं उसी समय सरेआम टंकियां पकड़-पकड़ कर दूध ऐसा गिराया जा रहा है जितना पानी भी इतनी बेदर्दी से नहीं गिराया जाता है. बच्चें, यात्री, महिलाएं सड़कों पर स्लीप हो रहे हैं, बच्चे गिर रहे हैं, महिलाएं गिर रही हैं, घायल हो रहे हैं. किसी का हाथ, किसी का पांव टूट रहा है. किसी पर, किसी को दया नहीं आ रही. सांची का दूध का टेंकर आता उस टेंकर में नमक और फिटकरी डालकर सबके सामने फाड़ा जाता है. जिस प्रकार से हालात बनाये गए उससे ऐसा लगा कि हम अपने मध्यप्रदेश में उज्जैन के आसपास हैं या अफगानिस्तान या दूसरी अरब कंट्री में खड़े  हैं. जिस प्रकार से फसलों,सब्जियों को नष्ट कराया गया. जो माहौल यहां पर बनाया गया. लकड़ी से मारा गया. पुलिस बचाने आ रही है तो पुलिस पर हमला करने का जो माहौल बना,मंजर बना वास्तव में वह बहुत डरावना  था.

          अध्यक्ष महोदय, पुलिस रिकार्ड में वे नाम मौजूद हैं. मैं बताना चाहूंगा कि जो जो नाम थे वह सब कांग्रेस के वर्तमान में पदाधिकारी हैं. वो दूध को गिरा रहे हैं, सब्जियां फैंक रहे हैं. 1 तारीख से 3 तारीख तक की घटना में पहले दिन तो मैंने स्वयं किसान होने के नाते भले कांग्रेस के लोग थे, उनकी मदद की कि चलो कोई  बात नहीं, ये माफी मांग रहे हैं, इनको छोड़ दीजिए. लेकिन दूसरे दिन फिर देखते हैं तो यह लोग आते हैं और हमारे सब इंस्पेक्टर जाधव से सरेआम मारपीट करते हैं.  माननीय मुख्यमंत्री जी क्षिप्रा परिक्रमा में उज्जैन आते हैं और सब काम छोड़ कर सारे किसानों से बात करते हैं. बात करने के बाद यह घोषणा हो जाती है कि प्याज 8 रुपये किलो में खरीदा जाएगा. सारी बात समाप्त हो गई. इतना अच्छा माहौल बनाया उसके बाद 5 तारीख छोड़कर, 6 तारीख को वापस वही घटना होती है. जिस तरह की घटना 6 तारीख को बड़नगर रोड़ पर घटी है जब कांग्रेस के लोगों ने आंदोलन करने के लिए  कहा कि हम शांतिपूर्ण चक्काजाम करेंगे. पुलिस ने कहा ठीक है, आप चक्काजाम कर लीजिए. जब चक्काजाम शांतिपूर्ण समाप्त होने की स्थिति बनी तो उनको लगा कि मजा नहीं आया अभी तो और बाकी रह गया. उसी समय फूलों से भरी एक गाड़ी(वेन) आती है उसको 15 फीट ऊपर उठाकर ऐसा उछाला जैसे कोई गेंद उछाल रहे हैं. जिस प्रकार से पत्थरबाजी हुई है चार चार डम्पर पत्थर इकट्ठे हो जायें, इतने पत्थर थे जबकि वहां मिट्टी वाले खेत हैं, जहां पत्थर आ ही नहीं सकते थे लेकिन इतने सारे पत्थर लाकर जो माहौल बनाया. उस माहौल में टीआई, सीएसपी घायल होते हैं और 15 पुलिस वालों को चोट लगती है. जिस प्रकार से माहौल बनाया गया उससे लगता है कि यह घटना बहुत सुनियोजित षड़यंत्र के तहत हुई. जिन जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर होती. जिनकी रिपोर्ट होती है वह सारे के सारे कांग्रेस के पदाधिकारी होते और बाद में भाग कर जाते और भाजपा के लोगों के नाम बताने लग जाते. दुर्भाग्य के साथ कहना पड़ रहा है कांग्रेस ने लंबे समय तक शासन किया उन्होंने भी देखा कि अपोजिशन का समय कैसे निकलता है. अपोजिशन का काम ऐसी अराजकता फैलाने के लिए होता है? ऐसे आंदोलन करके वह क्या साबित करना चाहते हैं. कौन सा संदेश देना चाहते हैं. अपने ही लोगों को घायल करके,अपने लोगों को मार कर दूध को गिरा कर, सब्जी को फैंक कर आखिर क्या हासिल करना चाहते हैं. किस प्रकार का वातावरण बनाना चाहते हैं? मैं उज्जैन के मामले में माननीय मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि सबसे ज्यादा जहां खेती का मामला है वहां पूरे मालवा में नर्मदा का पानी लाये. नर्मदा-क्षिप्रा, नर्मदा-पार्वती और अब तो नर्मदा-गंभीर भी आ गई और नर्मदा-कालीसिंध की जिस प्रकार से लंबी योजनाएं बनी  हैं. एक के बाद एक पूरा क्षेत्र किसानों के लिये ही बना दिया है ऐसा लगता है कि सरकार ने सारा पैसा हमारे लिये ही दिया है.जितना माननीय मुख्यमंत्री जी ने किसानों के लिये किया है वह किसी ने नहीं किया. वाकई हमने दर्द,कष्ट सहा है. हम यह देख-देख कर परेशान हैं कि किसी भी दल का आदमी यह काम कैसे कर सकता है, यह हो कैसे सकता है, अगर हम यह करने लगेंगे तो यह नक्सलाईटों को मात करने वाला व्यवहार हो जायेगा. सरकार द्वारा किये गये अच्छे कामों के बारे में हम कभी सोच नहीं सकते. इसी सदन के अंदर दर्ज है माननीय पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह जी का वह कथन, जब उन्होंने कहा था कि नर्मदा-क्षिप्रा कभी आ नहीं सकती हैं. नर्मदा का पानी कभी मालवा में नहीं मिल सकता है लेकिन हम सबने सोचा कि  नर्मदा के पानी से कुम्भ का स्नान हुआ. न केवल नर्मदा बल्कि नर्मदा-गंभीर लाईन भी चालू हुई है. जिस प्रकार से जो माहौल बना है उसके लिये मैं मुख्यमंत्री जी को बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहूंगा  कि जहां सिंहस्थ में लगभग चार हजार करोड़ रुपये से सिंहस्थ का काम हुआ,  वरन् साढ़े अठारह सौ करोड़ रुपये की लागत से नर्मदा-गंभीर लाईन का एक फेज और अब तीन हजार करोड़ की लागत से नर्मदा-क्षिप्रा का दूसरा फेज का काम हो रहा है. इसके अलावा कालीसिंध,पार्वती नदियों पर लगभग बीस हजार करोड़ खर्च करने की योजना है. वे पूरे मालवा को मरुस्थल से बचाने के लिये काम कर रहे हैं तो वह अपराध नहीं कर रहे हैं. मैं कांग्रेस के मित्रों से भी कहना चाहूंगा कि किसी बात से किसी के मतभेद हो सकते होंगे,मतभिन्नता हो सकती होगी लेकिन अगर ऐसा आचरण करेंगे तो हमारी राजनीतिक दिशा कौन सी होगी. हम कहां जाना चाहेंगे. इस प्रकार से प्रशासन कैसे व्यवस्था देखेगा. आने वाला पत्थर न कोई सरकारी अधिकारी देखता है न कोई नागरिक देखता है. आंदोलन जरूर करें लेकिन हाथ जोड़कर निवेदन है कि इस प्रकार किसान की आड़ में बदनाम करने का प्रयास न करें. बहुत-बहुत धन्यवाद.

         

          श्री हर्ष यादव(देवरी) - माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का समय दिया बहुत-बहुत धन्यवाद. 6 जून की घटना देश के सामने मध्यप्रदेश को कलंकित करने वाली है. काला अध्याय है. मेरा ऐसा मानना है कि मध्यप्रदेश को किसानों के द्वारा अपने श्रम,खून-पसीने से 5 बार लगातार कृषि कर्मण अवार्ड सरकार को दिलाया है. आज उन किसानों कि यह हालत है कि मध्यप्रदेश के पुलिस के लोग लाठी चार्ज करते हैं, गोली चालन करते हैं. यह निश्चित रूप से मध्यप्रदेश को शर्मसार करने वाली है. हमारा बुंदेलखण्ड का ऐरिया है. पांच जिलों का आर्थिक सर्वेक्षण पत्रिका समूह ने किया है, जिसमें किसानों की दुर्दशा के बारे में कहा गया है कि 90 प्रतिशत किसान कर्ज के बोझ से दबे हुए हैं. चाहे वह कर्ज बैंक का हो, चाहे सेठ,साहूकार का हो, उन किसानों में से 60 प्रतिशत किसानों ने यह माना है कि हमारी अगली पीढ़ी किसानी करे. उनकी आर्थिक स्थिति जर्जर है. बुंदेलखण्ड का हर किसान कर्ज के बोझ से दबा हुआ है. 6 जून की घटना के बाद से वहां 4 किसानों ने आत्महत्या की है. चाहे खुरई की घटना  हो,चाहे बीना की घटना हो, चाहे सुरखी की घटना हो, चाहे बण्डा की घटना हो. उनकी बात सरकार नहीं मानती है न माने किसानों ने आत्महत्या की है. मुख्यमंत्री जी किसान पुत्र की बात करते हैं. आज यह हालत है कि मध्यप्रदेश की बात हो चाहे देश की बात हो किसान की स्थिति सबसे बुरी है. अभी 2016 का आर्थिक सर्वेक्षण आया है जिसमें 45 बरसों का रिकार्ड है. जिसमें सरकार ने माना है कि अधिकारी,कर्मचारियों की आय 300 प्रतिशत बढ़ी है और किसानों की आय मात्र 19 प्रतिशत बढ़ी है. यह किसानों की हालत है. आज अधिकतर किसान  कर्ज में हैं. बहुत ढिंढोरा पीटा गया था प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का, मुख्यमंत्री जी ने कहा था कि खसरा नंबर को खेत की इकाई बनाएंगे उसके बाद भी आज खेत को इकाई नहीं  बनाया गया है. किसानों की यह मांग है मैं भी किसान हूं. यहां अधिकतर किसान विधायक साथी बैठे हैं. हमारी मांग है कि जब तक खसरे को बीमा में शामिल नहीं किया जायेगा, किसान को वास्तविक हक नहीं मिलेगा.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि किसानों के सभी प्रकार के कर्ज माफ हों चाहे वह सीमांत किसान हों, चाहे लघु किसान हों, चाहे कोई भी किसान हों उनके कर्ज माफ हों. लगातार बिजली से परेशान हमारा किसान है, अटल ज्‍योति अभियान में 10 घंटे की बात मुख्‍यमंत्री जी कहते हैं. आज हालत यह है कि बहुत सारे गांव लाइट से वंचित हैं. 6 महीने पहले टेम्‍परेरी कनेक्‍शनधारियों के एडवांस में बिल भरवा लिये जाते हैं और जब लाइट देने की बात आती है तो स्थिति यह होती है कि गांव के गांव बंद किये जाते हैं. बिजली विभाग के अधिकारियों के द्वारा कहा जाता है कि गांव की वसूली नहीं हुई है इसलिये हम खेतों को लाइट नहीं दे पायेंगे. जब आप 6 महीने पहले टेम्‍परेरी कनेक्‍शन का बिल ले रहे हो तो उन किसानों का हक बनता है कि उनको लाइट मिले. इन 13 साढ़े 13 वर्षों में मध्‍यप्रदेश में 21 हजार किसानों ने आत्‍महत्‍या की. यदि उनकी आर्थिक स्थिति सुधरी होती तो मध्‍यप्रदेश की यह हालत नहीं होती, किसानों को आत्‍महत्‍या नहीं करनी पड़ती. आज पूरे प्रदेश का किसान जागृत हो चुका है, सड़क पर आ चुका है, वह हक की लड़ाई समझ चुका है कि हमारे हक का शोषण कैसे हो रहा है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने बोलने का मौका दिया, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          डॉ. रामकिशोर दोगने (हरदा)--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने बोलने के लिये मौका दिया इसके लिये बहुत-बहुत धन्‍यवाद. मैं बताना चाहता हूं कि जो मंदसौर की घटना और उसके बाद पूरे मध्‍यप्रदेश में जो हाहाकार मचा हुआ है वह बड़ा निंदनीय और दंडनीय भी है. यह हाहाकार हर आदमी को पीडि़त कर रहा है और सोचने के लिये मजबूर कर रहा है. अभी आपने देखा हमारे माननीय मुख्‍यमंत्री जी भी इससे पीडि़त हैं और बीच-बीच में बातें जब आती थीं तो निश्चित ही वह अंदर से हिल जाते थे और अपनी बातों में कहते थे कि मौत के बारे में मैंने नहीं बोला. बाकी हम देख रहे हैं कि हमारे जो सभी सदस्‍यगण यहां बैठे हैं और मंत्रीगण भी इस घटना को हास्‍य परिहास में लेकर चर्चा कर रहे हैं, यह बड़े दुख की बात है. किसानों की हत्‍या होती है और यहां बैठे हुये भी 80 प्रतिशत लोग किसान हैं, परंतु किसानों की जब बात आती है तो वह उस चीज को हास्‍य परिहास में निकाल देते हैं. मेरा आपसे अनुरोध है कि कुछ पाइंट मैं देना चाहता हूं, उस पाइंट पर हमारे मुख्‍यमंत्री जी विचार करें और अपने भाषण में घोषणा करेंगे तो निश्चित ही किसानों का भला होगा क्‍योंकि जो घटना हुई थी वह घटना मैं आपको बताना चाहता हूं क्‍योंकि मैं भी मंदसौर, नीमच का प्रभारी हूं संगठन की तरफ से, कांग्रेस पार्टी की तरफ से और मैंने भी नजदीक से जाकर उस घटना को देखा है. वह घटना जो हुई थी एक टीआई के कारण हुई है, उस टीआई ने एक भारतीय जनता पार्टी के नेता की दुकान किसान बंद कराने गये थे और उस किसान को जो बंद कराने गया था उसको दुकानदार ने भगाया और पुलिस को बुलवाकर खूब पिटवाया. उसे पिटवाने के कारण पूरा माहौल खराब हुआ और माहौल खराब होने के कारण यह घटना हुई है, इसके ऊपर ध्‍यान नहीं दिया जा रहा है, दूसरी अनर्गल बातें बहुत सारी की जा रही हैं. बड़े दुर्भाग्‍य की बात है कि हमारे सत्‍तापक्ष के लोग वहां संसदीय क्षेत्र मंदसौर, नीमच अगर देखें तो नीमच में परिहार जी विधायक हैं, मंदसौर में सिसोदिया जी हैं, मनासा में चावला जी है, पिपल्‍यामंडी में जगदीश देवड़ा जी हैं, गरोठ में चंदर सिंह जी हैं, जावद में सखलेचा जी है, जावरा में पाण्‍डेय जी हैं. वहां कहां कांग्रेस के लोग हैं, कांग्रेस के विधायक हैं वहां तो कांग्रेस के लोगों ने घटना कर दी, यह सोचने की बात है. मेरा आपसे अनुरोध है कि जिस तरह से यह बातें हो रही हैं यह बातें नहीं होना चाहिये. किसान के बारे में सजेशन दो, किसानी कैसे अच्‍छी हो सकती है, किसान को कैसे लाभ पहुंचाया जा सकता है, इस संबंध में बात करेंगे तो ज्‍यादा अच्‍छा होगा. मेरा निवेदन है आपके माध्‍यम से, समय कम है इसलिये मैं निवेदन करना चाहता हूं मुख्‍यमंत्री जी से कि स्‍वामीनाथन आयोग की रिर्पोट आप कब लागू करेंगे जिसका बार-बार आपने उल्‍लेख किया है. दूसरा पाइंट है लागत के अनुसार फसल का मूल्‍य कब देंगे, यह भी आपने उल्‍लेख किया है. किसानों का ऋण कब माफ करेंगे, इसका भी बार-बार उल्‍लेख आपने किया है, इसका भी निर्णय कब करेंगे यह स्‍पष्‍ट करें. जिन किसानों की आंदोलन के दौरान मौत हुई है उनको शहीद का दर्जा कब देंगे. किसानों की मौत के जवाबदार पुलिस अधिकारियों पर कार्यवाही कब करेंगे, किसानों पर जो गलत मुकदमे लगाये गये हैं उनको कब वापस करेंगे. किसानों को कर्ज होने या फसल न होने पर जो किसान आत्‍महत्‍या कर रहे हैं उन्‍हें भी क्‍या मुआवजा देंगे, जैसा कि दूसरे लोगों को मुआवजा दिया जा रहा है क्‍या उनको भी मुआवजा देंगे. किसानों के बिजली बिल बड़े-बड़े आ रहे हैं उन्‍हें कब माफ करेंगे और फसल बीमा की पॉलिसी सरल करवायें जिससे किसानों को उसका लाभ मिल सके. जिस तरह की टेक्निकली छोटी-छोटी बातों के कारण लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है उनको लाभ मिले यह मेरा निवेदन है. इसका उल्‍लेख माननीय मुख्‍यमंत्री जी अपने भाषण में करें तो ज्‍यादा अच्‍छा रहेगा. आपने बोलने का मौका दिया उसके लिये धन्‍यवाद.

             श्री पुष्‍पेन्‍द्रनाथ पाठक (बिजावर) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कल जो स्‍थगन प्रस्‍ताव यहां पढ़ा गया उसकी तीसरी लाईन में आया है कि लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को मालवांचल में किसान विवश हुए. मेरा निवेदन है कि मैं उस समय अपने विधानसभा क्षेत्र में था, तब बुंदेलखंड के लोगों ने वहां यह जानना चाहा कि '' काय भईया जे कौन मेर के किसान हते जिनने दूध लुढ़का दओ, हमाये इते तो ऐसो होत कि दूध की बूंद अगर गिर जाए तो औरतें अपने पल्‍लू से पोंछती हैं'' वास्‍तविकता यह है कि दूध के एक ग्‍लास में अगर मक्‍खी गिर जाए और यदि दूध पीने के उपयोग का न रहे तो उसको कहीं क्‍यारी में, कहीं पेड़ की जड़ों के पास सिरा दिया जाता है. बुंदेलखंडी में विसर्जन को सिराना कहते हैं. विसर्जन एक बहुत पवित्र शब्‍द है. किसी भी पूजा पाठ की सामग्री को यदि सम्‍मानजनक तरीके से कहीं रखना हैं तो उसको विसर्जन कहते हैं. बुंदेलखंड क्षेत्र में यदि दूध में कहीं कोई अपवित्रता आ जाए और वह उपयोग के लायक नहीं रहे तो उसको विसर्जित किया जाता है. वहां के लोगों ने न केवल इस बात को बताया बल्कि लोगों ने तो यह भी बताया कि '' भईया अपने इते तो जब मठ्ठा भी मुरत है और मठ्ठा भी अगर एक दूसरे के घरे जाए, अगर चार बूंदे भी गिर जाएं तो उखों भी पल्‍लों से पोंछकर उको सम्‍मान करो जात, जे कौन मेर के किसान हते '' वास्‍तविता यह है कि बुंदेलखंड में जो सुख शांति है, जो सद्भाव है और किसानों की जो भावना सरकार को लेकर है, इसे देखकर उन किसान लोगों को आश्‍चर्य हुआ कि इस तरह का मध्‍यप्रदेश के किस कोने में यह आंदोलन हुआ है और क्‍यों हुआ है, इससे यह परिलक्षित होता है कि कहीं न कहीं किसानों के बीच में दूसरे लोग भी सम्मिलित रहे हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कल जो स्‍थगन प्रस्‍ताव यहां पढ़ा गया उसमें  आठवी और नौंवी लाईन में यह आई है कि प्राकृतिक आपदाओं से पीडि़त किसान. मेरा इसमें निवेदन यह है कि मानव विज्ञान में यह आया है कि जब मनुष्‍य आखेट से धीरे- धीरे कृषि की तरफ बढ़ा है, तब से लेकर आज के आधुनिक समाज तक लगातार प्राकृतिक आपदाएं आती रहीं हैं और किसान इनसे जूझता रहा है. सरकार अनेकानेक रहीं और सरकार नहीं भी रहीं, तब भी प्रकृति से जूझने का काम हमारे किसान भाई करते रहे हैं. इस प्रकार का उनका प्रकृति के साथ सामंजस्‍य रहता आया है. लेकिन मुझे एक घटना याद है, जब श्री शिवराज सिंह चौहान जी, मुख्‍यमंत्री बनने के बाद पहली बार छतरपुर जिले में प्राकृतिक आपदा को देखने के लिये आये थे, उस समय मैं जिले का महामंत्री था और जब हम लोग ओला पीडि़त क्षेत्र  में एक जगह गये तो वहां पर लगभग तीन-तीन, चार-चार इंच के गहरे गड्ढे ओलों की वजह से धरती में हो गये थे और वह ओले वहां से नष्‍ट हो चुके थे. वह सब देखने के बाद जब यह बात चली की आखिर इनको मुआवजा कैसे दिया जाता है, तब यह बताया गया कि अभी  नियमावली में यह है कि यदि कोई भी प्राकृतिक आपदा आती है और उसमें एक तहसील क्षेत्र प्रभावित होता है तो वहां इसका मुआवजा दिया जा सकता है. तब जाकर यह संशोधन की पहली प्रक्रिया वहां से चालू हुई थी और तब से लेकर आज तक सरकार ने किसानों के हित में जितने काम किये हैं, वह अवर्णनीय हैं. मेरा ख्‍याल है कि उनका पर्याप्‍त जिक्र यहां भी हो चुका है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक और विषय मैं आपके ध्‍यान में लाना चाहता हूं कि लगातार बार-बार यह बात की जा रही है कि किसानों के कर्ज माफ किये जाएं, यह किसानों के कर्ज माफ करने की जो महानुभाव बात कर रहे हैं दरअसल वह किसानों की कमर, रीढ़ तोड़ना चाहते हैं. मध्‍यप्रदेश की सरकार ने जो काम किये हैं या जो लगातार काम हो रहे हैं, वह किसानों को सक्षम बनाने के लिये हो रहे हैं. किसान यदि मजबूती से खड़ा होगा तो तमाम तरह की प्राकृतिक आपदाओं के साथ- साथ जो भी विसंगतियां उनके इस काम में आती हैं, उनसे वह निपटने में सक्षम होगा. मेरा ख्‍याल है कि उसको सक्षम करने की आवश्‍यकता है न कि उसका कर्ज माफ करके उसकी कमर तोड़ने की जरूरत है.

          माननीय अध्‍यक्ष्‍ा महोदय, कल जो स्‍थगन प्रस्‍ताव यहां पढ़ा गया उसकी आखिरी लाईन में यह लिखा है कि आज सदन की कार्यवाही रोक कर विस्‍तृत चर्चा करवाई जाए. मेरा निवेदन है कि यह प्रस्‍ताव सदन की कार्यवाही रोककर चर्चा कराने का नहीं है. मध्‍यप्रदेश में किसानों के हित में चलती बयार को रोकने का प्रयास है, मध्‍यप्रदेश में बढ़ती विकास दर को नीचे पटकने का प्रयास है. यह प्रस्‍ताव पूरे उत्‍साह और उमंग से मध्‍यप्रदेश की जनता और किसानों के हित में काम कर रही मुख्‍यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी और उनके मंत्रिमंडल के उत्‍साह को क्षीण करने का है. मैं इस प्रस्‍ताव को सिरे से खारिज करता हूं. बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          अध्‍यक्ष महोदय - कुंवर सौरभ सिंह आप बोलें.

          कुंवर सौरभ सिंह (बहोरीबंद) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अन्‍न ब्रम्‍हा अर्थात अन्‍न में ही भगवान बसते हैं लेकिन यहां तो अन्‍नदाता ही परेशान है. लगातार सभी साथियों द्वारा यह कहा जा रहा है कि हम लोग इस मुद्दे पर रोटी सेक रहे हैं. माननीय अगर आग नहीं होती तो यह धुँआ नहीं उठता. इस आन्‍दोलन का मतलब यह है कि किसान को सरकार की सूझ-बूझ और नीयत पर भरोसा नहीं है. यहां पर दो विषय हैं, एक केन्‍द्र से संबंधित है और दूसरा, बोनस से संबंधित है, दोनों विषयों की चर्चा अलग-अलग करना संभव नहीं है, यहां पर हम दोनों विषयों की बात करेंगे. किसानों की समस्‍याएं जो समाचार-पत्रों एवं अन्‍य माध्‍यमों से चल रही हैं. एक आत्‍महत्‍या है, खेती का लागत मूल्‍य है, समर्थन मूल्‍य है, ऋण का प्राप्‍त न होना, बिचौलियों के कीमतों के फसल पर आने पर, बाजार में फसल आने पर कीमतों का घट जाना, क्षेत्रवाद उत्‍पादित जितनी भी समस्‍याएं हैं, ये बहुत ही चिन्‍तनीय समस्‍याएं हैं पर जब माननीय भार्गव जी ने, हमारे वरिष्‍ठ आदरणीय रावत जी ने किसी विषय पर किसानों के बारे में कहा तो उन्‍होंने एक शब्‍द कह दिया था. जिसको आपने विलोपित करवाया था.

          अध्‍यक्ष महोदय - वह कार्यवाही से निकल गया था.

          कुँवर सौरभ सिंह - अध्‍यक्ष महोदय, विषय यह है कि क्‍या इस प्रदेश के किसान अपनी समस्‍या को उठाकर उनका स्‍तर डैश-डैश-डैश का है ? मैं मध्‍यप्रदेश विधानसभा की कृषि समिति का पिछले बार का सदस्‍य था. माननीय सभापति महोदय से मेरे, साथी विधायकों एवं भाजपा विधायकों द्वारा भी यह विषय रखा गया कि हमको समर्थन मूल्‍य और बोनस पर बात करनी चाहिए. मैं पहली बार का विधायक हूँ तो हो सकता है कि मुझसे कोई त्रुटि हो रही हो पर जब हमने यह विषय रखा तो हमसे यह कहा गया कि यह विषय आपका नहीं है, इसको छोड़ दो बाकी विषयों पर बात करो. अगर इस विधानसभा में हम लोग किसानों की समस्‍या समिति के माध्‍यम से न रख सकें तो हम लोगों के बात करने का कोई औचित्‍य ही नहीं है. जो चर्चा लगातार कल से चल रही है, सारे सत्‍ता पक्ष के लोग अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, ऐसा लग रहा है कि और कोई समस्‍या ही नहीं है. यह जो पीडीएस का गल्‍ला है, यह दोबारा दुकानों में जाता है, बोरे बदले जाते हैं, तौला जाता है और अन्‍य प्रदेशों एवं सटे हुए प्रदेशों का गल्‍ला बिचौलिया के माध्‍यम से आता है. मैं यहां पर कहना चाहूँगा कि अभी हमारे प्रदेश में लगभग 2 लाख हैक्‍टेयर मूँग की पैदावार होती है. जो कि केन्‍द्र के समर्थन मूल्‍य में नहीं है, जब मीडिया को किसानों ने बताया तब यह बात सरकार की संज्ञान में आई. सरकार कह रही है कि सब उचित चल रहा है, सब बढि़या चल रहा है. कल कटनी मण्‍डी में 500 से ज्‍यादा कृषक उनकी उड़द और मूँग को तुलवाने के लिए खड़े थे और जब वे 50 रुपये से 100 रुपये प्रति क्विंटल दलाली न दें, उनकी दाल नहीं तुलती. एक कृषक श्री राम पटेल, निवासी कूड़ा, ब्‍लॉक बहोरीबन्‍द का है, उसकी 53 कट्टी उड़द, 28 कट्टी मूँग उसकी चोरी हो गई, उसको फोन करने पर मालूम पड़ा कि मात्र 18 कट्टी मिली, उसके पास पावती है. यह आपका सिस्‍टम है, जिसको आप फुल प्रूफ बताते हैं. माननीय उत्‍पादन की कीमत बढ़ी लेकिन किसान के उत्‍पादन की नहीं बढ़ी.

          अध्‍यक्ष महोदय, सन् 1975-76 में 150 रुपये क्विंटल गेहूँ था. उस समय सोना 500 रुपये तोला था यानी 4 से 5 बोरे में एक तोला सोना आता था, आज सोना 30,000 रुपये तोला है. किसान कहां से जिन्‍दा रहेगा ? किसान को लगने वाले सामान की कीमत विक्रेता तय करता है पर किसान के उत्‍पाद की कीमत व्‍यापारी तय करता है और व्‍यापारी बिना लाभ के काम ही नहीं कर सकता है. मालवा में चर्चा चल रही है कि प्‍याज ज्‍यादा हुई. क्‍या सरकार को पता नहीं था कि प्‍याज की बौनी कितने हैक्‍टेयर में हो रही है? अगर यह नहीं पता था तो आपका सिस्‍टम फेल है.

          अध्‍यक्ष महोदय, हमारा दुर्भाग्‍य है कि जब भी फसल अच्‍छी होती है तो रेट कम हो जाता है. आप उत्‍पादन की बात कर रहे हैं, अगर उत्‍पादन वाकई में ज्‍यादा है तो वेयरहाउस खाली क्‍यों पड़े हैं ? आप प्रोसेसिंग यूनिट कहीं नहीं डाल पा रहे हैं. आपने 10 साल से पुराने बीजों की सब्सिडी खत्‍म कर दी है. आपने लोकमन, नर्मदाचार, सी 306 एवं डब्‍ल्‍यू.एच. 147 की सब्सिडी खत्‍म कर दी है. धान में क्रांति आई.आर. 36 जो पुराने बीज हैं, जो एक या दो पानी में होते हैं. हमारे देश में स्‍वामीनाथन की रिपोर्ट में लिखा गया है कि मात्र 100 दिन में साल भर की वर्षा होती है. 100 दिन में वर्षा में हमारा क्षेत्र असिंचित है. मेरा निवेदन यह है कि जो कह रहे हैं कि एक लाख रुपये ले जाओ और नब्‍बे हजार रुपये दे जाओ. मैं माननीय मुख्‍यमंत्री से चाहूँगा कि हमारे जिले का एक किसान आप बता दीजिये जो नम्‍बे हजार रुपये ले गया हो. मैं उनकी बात सुनना चाहूँगा. समर्थन मूल्‍य, छोटे किसान जिनकी लिमिट नहीं है कुल मिलाकर जो गल्‍ला सरकार खरीदती है, 2 हैक्‍टेयर से छोटे किसान का गल्‍ला मण्‍डी में नहीं पहुँचता है. जो 2 हैक्‍टेयर से ऊपर के किसान हैं, वे ले जा पाते हैं.   माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है और सरकार के लिए मेरी सलाह है कि जब आप हमसे गल्‍ला खरीदते हैं तो आप उस समय हमको खाद दे सकते हैं, जबकि आप खाद देना जुलाई में और अक्‍टूबर में चालू करते हैं, यदि किसान को उस समय खाद दे देंगे तो ठीक होगा, दुकान में मात्र एक कमरा है जिसमें तेल का भंडारण और पीडीएस के गल्‍ले का भंडारण हो सकता है. आपने जीएसटी में कृषि उपकरणों में टैक्‍स लगा दिया, जो 12 प्रतिशत हो गया है, हम मुआवजे के लिए पटवारी के चक्‍कर में घूमते रहते हैं. जब कचरा ले सकते हैं तो किसान से घर में जाकर गल्‍ला क्‍यों नहीं ले सकते.

          अध्‍यक्ष महोदय - आप बैठ जाइए हो गया, आप अच्‍छी बात करते हैं, लेकिन लंबी बात करते हैं.

          श्री नीलेश अवस्‍थी (पाटन) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने बोलने का अवसर दिया इसलिए बहुत बहुत धन्‍यवाद. हमारे सभी लोगों ने, सभी साथी ने किसानों के पक्ष की बात रखी. लगभग सभी बातें शासन के ध्‍यानाकर्षण में आ चुकी है. 6 जून को मंदसौर में जो गोलीकांड हुआ है, यह मध्‍यप्रदेश के लिए काला दिवस के रूप में है, इसलिए इसकी हम घोर निन्‍दा करते हैं. मध्‍यप्रदेश सरकार लगातार किसानों की बात करती हैं, किसानों की उन्‍नति की बात करती हैं, लेकिन मध्‍यप्रदेश में जिस तरह  किसानों के द्वारा लगातार आत्‍महत्‍या की जा रही है, इसमें कहीं न कहीं बहुत बड़ी नाकामी सरकार की सामने आ रही है. मैं अभी बालाजी के दर्शन करके आया हूं, किसानों की सुरक्षा के लिए और किसानों की खुशहाली के लिए. मैं  प्रदेश के माननीय मुख्‍यमंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं किसानों की सभी बातें आ चुकी हैं, अपनी मेहनत से जो अवार्ड लगातार किसान मध्‍यप्रदेश सरकार को दे रहे हैं वह सामने दिख रहा है, उसके लिए अगर सच्‍ची श्रद्धांजलि माननीय मुख्‍यमंत्री जी देना चाहे तो मैं चाहता हूं कि हमारे पूरे प्रदेश के किसानों का ऋण माफ किया जाए और किसानों को उनकी फसल उचित मूल्‍य मिलना चाहिए, किसानों के बिजली के बिल माफ होना चाहिए. पूर्व में मैंने एक प्रश्‍न लगाया था, उसके जवाब में आया कि 2016 से फसल बीमा लागू हुआ है, लेकिन जबलपुर जिले के एक भी किसान को इसका लाभ नहीं मिला है, यह लाभ तुरंत मिलना चाहिए और स्‍वामीनाथन आयोग को तुरंत लागू होना चाहिए. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया इसके लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद.

          श्री सुखेन्‍द्र (बन्‍ना) सिंह (मऊगंज) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश में 6 तारीख को मंदसौर में घटना हुई, जिसके बारे में आज स्‍थगन प्रस्‍ताव चल रहा है, उसके बारे में सत्‍ता पक्ष के और विपक्ष के विधायक लगातार चर्चा कर रहे हैं. हम लोग विन्‍ध्‍य क्षेत्र के हैं, हमें भी पेपरों और टी.वी के माध्‍यम से यह जानकारी लगी कि मंदसौर में किसानों की हत्‍या हुई, हत्‍या क्‍यों हुई, कैसे हुई यह अलग विषय है. लेकिन जब कोई एक दिन का आंदोलन होता है, चाहे किसान आंदोलन हो, चाहे छात्र आंदोलन हो, तमाम तरह के आंदोलन हो. यदि एक दिन के इस तरह के आंदोलन होते हैं तो इसमें भीड़ ज्‍यादा रहती है, यदि प्रशासन इस तरह के आंदोलन को कंट्रोल नहीं करती है तो माना जाता है कि इस तरह की घटना हो गई, लेकिन किसान आंदोलन जो जानकारी में है, तो इससे यह प्रतीत होता है कि यह काफी दिन से चल रहा था, इसके बाद गोली के माध्‍यम से यह आंदोलन रोका गया, इससे प्रतीत होता है कि निश्चित रूप से शासन प्रशासन इसको कंट्रोल नहीं कर पाया और गोली से इसको रोका गया, इसका मतलब प्रशासन इसको रोकने में पूरी तरह से असक्षम था. कश्‍मीर में पत्‍थर चल रहे, गोलियां चल रहीं, अभी अमरनाथ यात्रियों पर भी हमला हुआ, लेकिन वहां पर भी जहां इस तरफ से गोली चलनी चाहिए थी वहां गोली नहीं चल रही, लेकिन यहां किसानों के ऊपर गोलियां चलाकर के आंदोलन को कंट्रोल किया गया, यह बड़े दुर्भाग्‍य का विषय है.

          अध्‍यक्ष महोदय, राहुल गांधी जी के बारे में  कल से लगातार मजाक उड़ाया जा रहा था सदन में, क्‍यों मजाक उड़ाया जा रहा था, वह हमारे राष्‍ट्रीय स्‍तर के नेता है, क्‍या राहुल गांधी जी मंदसौर में पहली बार आए. मैं आपके माध्‍यम से पूछना चाहता हूं कि जब देश के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन थे तो उन्‍होंने 72 हजार करोड़ का कर्ज माफ किया था. इसके बाद जब देश के प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जी हुए तो उन्‍होंने भू-अधिग्रहण कानून लाया जिस पर किसानों की जमीन मनमानी तरीके से हड़प ली जाए, लेकिन राहुल गांधी ने पूरा देशव्‍यापी आंदोलन किया और उसका परिणाम यह हुआ कि नरेन्‍द्र मोदी जी को झुकना पड़ा और उन्‍होंने भू अधिग्रहण कानून वापस लिया. यह आपके माध्यम से बताना चाहता हूं. आप भी जानते हैं. राहुल गांधी देश में पहली घटना में नहीं आये जहां जहां भी किसान, छात्र आंदोलन हुए देश में तमाम तरह के आंदोलन होते हैं तो राहुल गांधी पूरे देश में जाते हैं, उनके साथ में खड़े होते हैं तथा अपनी सहभागिता करते हैं. अभी मुख्यमंत्री जी का भाषण होना है.

          श्री घनश्याम पिरोनिया --    (xxx)

            श्री सुदर्शन गुप्ता --              (xxx)

          अध्यक्ष महोदय--बीच में श्री घनश्याम पिरोनिया एवं श्री सुदर्शन गुप्ता बोल रहे हैं उनका नहीं लिखा जाएगा.

            श्री सुखेन्द्र(बन्ना) सिंह-- अध्यक्ष महोदय, अभी मुख्यमंत्री जी का भाषण होगा. मुख्यमंत्री जी के एक शब्द आयेंगे कि हम किसान हैं निश्चित रूप से मुख्यमंत्री जी किसान हैं. जो सामने बैठे हैं, वह सामंतवादी हैं, यही बात आयेगी. आप मुख्यमंत्री जी किसान हैं निश्चित रूप से मुख्यमंत्री किसान हैं मध्यप्रदेश के किसानों ने आप पर भरोसा किया था यही कारण है कि आप 13 साल से मुख्यमंत्री हैं और पांच साल तक कृषि कर्मण पुरस्कार ले रहे हैं, लेकिन मध्यप्रदेश में हम भी किसान हैं. यह भरोसा नहीं किया था कि आप किसानों पर गोली चलवाएंगे. इसके बाद जाकर के उपवास पर बैठ जाएंगे. उपवास पर बैठने की कीमत क्या एक गिलास का जूस मैं समझता हूं कि करोड़ो रूपये का पड़ा होगा.

          अध्यक्ष महोदय--कृपया समाप्त करें.

 

 

                                                अध्यक्षीय घोषणा

                                             भोजनावकाश विषयक

          अध्यक्ष महोदय--आज भोजनावकाश नहीं होगा. भोजन की व्यवस्था सदन की लॉबी में की गई है. माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि सुविधानुसार भोजन ग्रहण करने का कष्ट करें.

                                                स्थगन प्रस्ताव (क्रमशः)

 1.03 बजे     प्रदेश के आंदोलनरत् किसानों पर लाठी चार्ज एवं गोलीचालन होना.

          महिला एवं बाल विकास मंत्री (श्रीमती अर्चना चिटनीस)--अध्यक्ष महोदय, मैं कम से कम समय में अपनी बात रखने का प्रयास करूंगी. मैं कुछ बातों पर सदन का ध्यानाकर्षित कराना चाहती हूं. यह अच्छी बात है कि संवेदनशीलता से नेता प्रतिपक्ष एवं हमारे विधायक बंधुओं ने स्थगन पर चर्चा मांगी तो हमारे मुख्यमंत्री जी ने उसे तत्काल स्वीकार किया और आप लगातार कल से उस पर चर्चा करवा रहे हैं. एक बड़ी विचित्र परन्तु सत्य घटना सदन के सामने रखना चाहती हूं. 5 तारीख को पिपिल्या मंडी के अनिल घी वाले की दुकान बंद कराने का प्रयास किया गया. उस दुकानदार का दुकान नीचे है और मकान ऊपर है. चूंकि जाने आने का रास्ता वहीं से है. उनके दुकान का आधा शटर खुला था. उस आधे शटर को बंद कराने के लिये जबरदस्ती की और शटर बंद करने के प्रयास में थोड़ी बहुत झूमा-झटकी हुई और अगले ही दिन बोलचाल थोड़ी बहुत हुई उसने कहा कि मेरे घर का रास्ता यहीं से है, मेरे बीवी बच्चे ऊपर रहते हैं. अगले दिन 6 तारीख को अनिल घी वाले के दुकान और मकान में आग लगा दी गई. मैं प्रशासन के अधिकारियों को इस सदन की ओर से तथा उनकी बीवी बच्चों की ओर से धन्यवाद देना चाहती हूं जिनके कारण उनके बीवी बच्चे जिन्दा नहीं जले. उनका मकान ऊपर था और दुकान नीचे थी. मैं सदन को बताना चाहती हूं कि एक छोटा सा व्यापारी. झमटलाल सिंधी उसकी फल की दुकान लूट ली गयी. मल्‍हारगढ़ में सैंकड़ो क्विंटल अनाज जला दिया गया. मैं यह भी बताना चाहती हूं कि श्‍यामगढ़ थाने में बिलखेड़ा गांव में टी.व्‍ही का टावर तोड़ दिया गया, विद्युत मण्‍डल की अनेकों गाडि़यां जला दी गयी और बी.एस.एन.एल के कार्यालय में तोड़फोड़ की और आग लगाने की कोशिश की गयी. कस्‍बा दलौदा में 12-13 घण्‍टे ट्रेफिक रोका गया और उसके साथ ही मैं यह भी जवाबदारी के साथ कहना चाहती हूं कि दलौदा में यह सारा कृत्‍य करने वालों के लिये भोजन व्‍यवस्‍था किसने की, यह सारा कृत्‍य करने वालों के लिये निरंतर पेयजल की व्‍यवस्‍था कौन लोग करते रहे. जब ज्‍यूडिशियल इंक्‍वायरी की रिपोर्ट हमारे सामने आयेगी तो सबके सामने स्‍पष्‍ट हो जायेगा.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सिलेक्‍शन रेडिमेट की दुकान, शगुन फायबर वाले की फेक्‍ट्री, सुरभी ब्रेसल्‍स को जलाया गया. इन सबको तो जलाते रहे लेकिन जहां पशुपतिनाथ वेयर हाऊस जहां जलाया गया. अध्‍यक्ष महादेय, जो दुकानें जला रहे थे, जो टोल नाके में तोड़-फोड़ कर रहे थे, जिन्‍होंने सुवासरा के पेट्रोल पंप को जलाने का प्रयास किया, उन्‍होंने नमकीन की फैक्‍ट्री, जहां पर नमकीन वाले का परिवार रहता था, जिसको जलाने का प्रयास किया. मैं सबसे पहले तो परमपिता परमेश्‍वर का धन्‍यवाद देती हूं कि उन सब उपद्रवियों के कुकृत्‍यों के कारण जिंदा लोग नहीं जल पाये. यह ईश्‍वर की बड़ी कृपा हमारे प्रदेश के ऊपर है और यह सब जो जलाते रहे, वे जब शराब की दुकान के पास पहुंचे तो शराब की दुकान को जलाया नहीं, वहां से 10 लाख रूपये की शराब लूट कर ले गये.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं पशुपतिनाथ वेयर हाऊस की बात कर रही हूं, मैं 21 तारीख को सिंधपन गांव में गयी 3 घण्‍टे तक वहां के लोगों से बात करती रही. वहां के सरपंच मिश्रालाल माली के घर पर भोजन किया. एक हमारे वहीं के गांव के रहने वाले कंवरलाल-मोहनलाल बांवरी के घर पर में रात को रूकी. वहां कहीं के असंतोष का विषय नहीं, कहीं कोई परेशानी दिखती हो, कोई लोग शिकायत करते हों, कोई विषय सामने आता हो ऐसा कहीं दूर-दूर तक नहीं था. मैं सार भर में लगभग 10 से 11 बार मैं मंदसौर आयी और इतने ही बार नीमच भी गयी. ग्रामोदय में हम लोग गांव-गांव घूमे, कहीं तो कोई विषय निकलकर आता, कहीं तो कोई बात आती, कहीं तो कोई बात आती, कहीं तो लोग हैरान- परेशान दिखते.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इस बात को बहुत दु:ख के साथ इस बात को कह रही हूं कि जो किसानों के साथ घटना हुई, वह दुर्भाग्‍यपूर्ण है. वह हम स‍बके दिल को दहलाने वाली है. ऐसा नहीं होना चाहिये था, लेकिन मध्‍यप्रदेश जो शांति का टापू है, यह मध्‍यप्रदेश का स्‍वभाव नहीं है. यह मध्‍यप्रदेश के लोगों का मंदसौर, नीमच के लोगों का, मालवा अंचल के लोगों का यह स्‍वभाव नहीं है, यह हमारी प्रकृति नहीं है. मालवा में तो लोग किसी को ऊंचा भी जल्‍दी नहीं बोलते हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, हमारे इस सदन के विधायक रह चुके, हमारे पूर्व विधायक राधेश्‍याम जी पाटीदार, बबलू पाटीदार की अंत्‍येष्टि में भाग लेने जाते हैं और वहां वह अभी एक गाड़ी से उतर रहे हैं, अभी वह गाड़ी से उतरे नहीं हैं. उनकी गाड़ी को आग लगा दी जाती है. इस सदन में रह चुका हमारा विधायक, यह ईश्‍वर की कृपा है कि सदन की शुरूआत में वह जिंदा जले हुए विधायक के लिये हमें शोक संवेदनाएं व्‍यक्‍त नहीं करनी पड़ी. वह अपने किसी दूसरे कार्यकर्ता की मोटर सायकिल पर बैठकर अपनी जान बचाकर भागते हैं, तब भी उन्‍हें तलवार से मारने का प्रयास किया जाता है, मैंने उनकी लगभग एक आधी कटी हुई ऊंगली खुद देखी है. 

          अध्‍यक्ष महोदय, 4 तारीख तक शांतिपूर्ण आंदोलन चला. मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी से और माननीय गृह मंत्री जी से इस बात आग्रह करना चाहती हूं कि 4 तारीख को वहां बैठक किन्‍होंने करी. वहां बैठक करके वहां उत्‍तेजना किन्‍होंने फैलायी और आंदोलन को उपद्रव में बदलने का षड़यंत्र किसने किया. और 4 तारीख के बाद जो घटनाक्रम हुआ, वह मंदसौर के लोगों द्वारा नहीं किया गया था अपितु वह सारा घटनाक्रम बाहर से गए हुए लोगों द्वारा किया गया है. बाहर से गए हुए लोगों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत वहां कार्य किया, जिसे हम सभी ने सुना, अखबारों में पढ़ा और हमारे वहां के जनप्रतिनिधियों ने उसे देखा भी है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहती हूं कि 4 से 6 तारीख के बीच जो परिस्थितियां वहां बनी, वे असामान्‍य थीं. वहां ऐसी स्थिति नहीं थी कि मंदसौर उबल रहा था और वह अचानक फट पड़ा. 21 जून को अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस पर मैं वहां योग करने गई थी. अगर मंदसौर के लोगों द्वारा यह घटना की गई होती तो इतनी बड़ी संख्‍या में बारिश के बावजूद, छात्र-छात्रायें, वहां के सामाजिक संगठन, जन सामान्‍य योग करने की स्थिति में नहीं होते. वहां के लोग इस योग दिवस का भी बहिष्‍कार कर देते. 

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं पूरे प्रदेश के बारे में नहीं अपितु अपने मंदसौर जिले के संबंध में सदन को कुछ जानकारी देना चाहती हूं. मैं सरकार द्वारा किए गए प्रयासों को प्रणाम करती हूं. साथ ही वहां के किसानों के पौरूष, पराक्रम, आत्‍मविश्‍वास और उनकी प्रगति करने की ललक को भी इस सदन से सलाम करना चाहूंगी. हमारे किसान बंधुओं ने वर्ष 2003 में केवल 1500 हेक्‍टेयर से मसाले की खेती शुरू की थी. आज 2017 में 66000 हेक्‍टेयर में वहां मसालों की खेती होती है. मेरे क्षेत्र में 3500 हेक्‍टेयर में फलोद्यान थे, आज 12000 हेक्‍टेयर में फलोद्यान हैं. पहले ड्रिप-इरीगेशन मात्र 2300 हेक्‍टेयर में था, मुख्‍यमंत्री जी की बदौलत आज 6900 हेक्‍टेयर में ड्रिप-इरीगेशन हो रहा है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं बहुत जवाबदारी के साथ सदन में यह बात कहूंगी कि वहां 1500 किलोमीटर से अधिक की सड़कें ''प्रधानमंत्री सड़क योजना'' के तहत बनी हैं. वहां 432 किलोमीटर दूरी की चार और साढ़े पांच मीटर से अधिक चौड़ी सड़कें बनी हैं. मैं अपने प्रभार के जिले की जनता की ओर से स्‍वास्‍थ्‍य विभाग को धन्‍यवाद देना चाहूंगी कि 160 उप स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र वहां निर्मित हुए हैं. मैं और विस्‍तार में नहीं जाऊंगी. अंत में मैं अपनी बात को समाप्‍त करते हुए कहूंगी कि मेरी बात से कोई आहत हो, इसलिए मैं पहले क्षमा मांगती हूं. यह लोकतंत्र का मंदिर है. विपक्ष मजबूत हो, सशक्‍त हो, ताकि हम और बेहतर सरकार चला सकें.

          श्री वेलसिंह भूरिया-  दीदी, कोई आस नहीं है. कांग्रेस के लोगों ने ही वहां आग लगाई है.

          श्रीमती अर्चना चिटनिस-  अध्‍यक्ष महोदय, जैसी चर्चा कल हमने सदन में देखी, जो उस घटना के समय हमने &#