मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा चतुर्दश सत्र

 

 

जुलाई, 2017 सत्र

 

मंगलवार, दिनांक 18 जुलाई, 2017

 

(27 आषाढ़, शक संवत्‌ 1939 )

 

 

[खण्ड- 14 ] [अंक- 2 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

मंगलवार, दिनांक 18 जुलाई, 2017

 

(27 आषाढ़, शक संवत्‌ 1939 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.03 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सदन डॉ. नरोत्‍तम मिश्र के बिना कुछ सुना-सुना सा लग रहा है एवं सदन बिना संसदीय कार्य मंत्री के चल रहा है.

वन मंत्री (डॉ. गौरीशंकर शेजवार) - अध्‍यक्ष महोदय, उसके लिए मैं आपका आभार मानता हूँ. आपने सदन में आते ही पहले विपक्ष की तरफ और विशेष रूप से नेता प्रतिपक्ष जी का अभिवादन किया. ( XXX ) इसमें क्‍या बुराई है ?

श्री रामनिवास रावत - क्‍या यह रिकॉर्ड में रहेगा ?

अध्‍यक्ष महोदय - यह रिकार्ड में नहीं आएगा.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) - मुझे शेजवार जी की बुद्धि पर तरस आता है.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार - मेरी बुद्धि पर कइयों ने ऐसे ही तरस खाया है. अब देखिये, आपका क्‍या होता है ?

 

 

 

11.04 बजे तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

बिजली के टूटे तारों/खंबों की मरम्‍मत

[ऊर्जा]

1. ( *क्र. 566 ) श्री रजनीश सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सिवनी जिले के विधान सभा क्षेत्र केवलारी के अंतर्गत विकासखण्‍ड धनौराकेवलारीछपारासिवनी में कितने वर्षों से बिजली के टूटे तारों व खंबों की मरम्‍मत नहीं की जा रही हैकारण सहित पूर्ण विवरण देवें। (ख) क्‍या केवलारी विधानसभा क्षेत्रांतर्गत ग्राम नसीपुरविकासखण्‍ड केवलारी में विगत 6 महीनों से विद्युत पोल टूटा हुआ हैयदि हाँ, तो अधीक्षण अभियंता/कार्यपालन अभियंता (संचा./संधा.) के पास इसकी कितनी शिकायत की गईशिकायत किन-किन जनप्रतिनिधियों द्वारा की गई हैशिकायतों पर विभाग द्वारा की गई कार्यवाही का भी विवरण देवें। (ग) केवलारी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत उगली पांडिया छपारा वितरण केन्‍द्र क्षेत्रान्‍तर्गत में कितने लाइनमेन कार्यरत हैं एवं इन कार्यरत लाइनमेन को कितने-कितने ग्रामों का प्रभार सौंपा गया हैलाइनमेन के नाम सहित ग्रामों के नाम देवें।

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) प्रश्‍नाधीन क्षेत्र सहित प्रदेश में संपूर्ण विद्युत वितरण लाईनों/उपकरणों का प्रत्‍येक वर्ष दो बार यथा-वर्षाकाल के पूर्व एवं वर्षाकाल के पश्‍चात् मेन्‍टेनेंस का कार्य किया जाता है। उक्‍त के अतिरिक्‍त प्राकृतिक आपदा अथवा तकनीकी कारणों एवं आकस्मिक दुर्घटनाओं की स्थिति में विद्युत अधोसंरचना के क्षतिग्रस्‍त होने पर आवश्‍यकतानुसार मेन्‍टेनेंस/सुधार के कार्य किये जाते हैं। वर्तमान में सिवनी जिले के विधानसभा क्षेत्र केवलारी के अंतर्गत विकास खण्‍ड सिवनी में कोई भी क्षतिग्रस्‍त पोल/तार बदलने हेतु शेष नहीं है तथा विकासखण्‍ड धनौराकेवलारी एवं छपारा में माह मई एवं जून, 2017 में आये आंधी-तूफान के कारण 22 ग्रामों के पोल क्षतिग्रस्‍त हुए हैं जो बदलने हेतु शेष हैं। उक्‍त 22 में से 18 ग्रामों का विद्युत प्रदाय वैकल्पिक व्‍यवस्‍था कर चालू कर दिया गया है। (ख) जी नहीं। तथापि दो माह पूर्व माननीय प्रश्‍नकर्ता विधायक महोदय एवं पूर्व सरपंच ग्राम पंचायत नसीपुर द्वारा दूरभाष पर पोल टूटने की जानकारी दी गई थी। उक्‍त तारतम्‍य में तत्‍काल निरीक्षण करने पर यह पाया गया कि ग्राम नसीपुर में ग्राम पंचायत भवन के पास पोल झुक गया है जिसे तुरन्‍त स्‍टेसैट लगाकर व्‍यवस्थित किया गया, किन्‍तु स्‍टेसैट को अज्ञात व्‍यक्तियों द्वारा बार-बार निकाले जाने के कारण स्‍टड पोल लगाकर उक्‍त पोल को सीधा कर दिया गया है। वर्तमान में उक्‍त पोल व्‍यवस्थित एवं सुरक्षित है। (ग) केवलारी विधान सभा क्षेत्रान्‍तर्गत उगली एवं पांडिया छपारा वितरण केन्‍द्रों में कुल 7लाईन कर्मचारी कार्यरत् हैं, जिन्‍हें 64 ग्रामों का प्रभार सौंपा गया है। उक्‍त लाईन कर्मचारियों के नाम एवं उनके कार्य क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्रामों के नाम सहित केन्‍द्रवार जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है।

परिशिष्ट - ''एक''

श्री रजनीश सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न क्रमांक 1 '' के उत्‍तर में माननीय मंत्री जी की ओर से जो उत्‍तर आया है, मैं उससे संतुष्‍ट नहीं हूँ. मेरा प्रश्‍न विद्युत पोल की मरम्‍मत के संबंध में था, पर दो महीने हो गए हैं, उसके बाद भी 22 ग्रामों के जो पोल क्षतिग्रस्‍त हुए थे, वे न ही बदले गए हैं और न ही उनकी रिपेयरिंग हुई है. मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में यह बताया गया है कि 18 ग्रामों की विद्युत प्रदाय वैकल्पिक व्‍यवस्‍था चालू तो कर दी गई है.वह सुचारू रूप से संचालित नहीं है, क्‍योंकि पोल टूट गए थे, तूफान के कारण और अभी भी वर्तमान में वैसी ही स्थिति बनी हुई है. दूसरा '' का जो उत्‍तर आया है, उसमें ग्राम नसीपुर में एक वर्ष से खंभों के ऊपर तार झूल रहे थे, उसके लिए मैंने जब दिनांक 20.06.2017 को प्रश्‍न लगाया उसके बाद 07.07.2017 को उस गांव में यह सुधार के काम किए गए. उसके बाद प्रश्‍न क्रमांक 1 के ही '' में 64 ग्राम में 7 लाइनमेन है और ग्राम और टोला, मजरा, पारा मिलाकर छोटे बड़े गांवों की संख्‍या 84 होती है, मेरा आपसे अनुरोध है कि 84 गांव में 7 लाइनमैन बहुत कम है, यदि उसमें और कर्मचारी बढ़ा देते हैं तो मेरे क्षेत्र की बिजली की व्‍यवस्‍था सुचारू रूप से चल सकेगी.

श्री पारस चन्‍द्र जैन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सदस्‍य ने जो पूछा है, उसमें केवल लोपा गांव का पोल बदलना शेष है, पहले 22 पोल में से 18 पोल बदल दिए थे, जिसके बाद 3 पोल फिर बदल दिए है, एक गांव में जहां खेत में रोपणी हो गई है वह शेष है, लेकिन जैसे ही वहां फसल निकाल ली जाएगी उसके बाद उसको भी बदल दिया जाएगा.

अध्‍यक्ष महोदय - मंत्री जी सदस्‍य का कहना है कि पोल धीरे बदले जाते हैं और लाइनमैन भी कम है.

श्री पारस चन्‍द्र जैन - लाइनमैन की कमी होती है तो उसकी पूर्ति हम आउटसोर्स से करते हैं.

श्री रजनीश सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लाइनमेनों की भी कमी है और पोल के तार वर्षों से झूल रहे हैं, मानसून के पहले एवं मानसून के बाद में की जानी वाली व्‍यवस्‍था नहीं हो पा रही है, मैं उसकी ओर माननीय मंत्री जी का ध्‍यान आकर्षण कराना चाहा रहा हूं एवं ट्रांसफार्मर भी तुरंत नहीं बदले जाते हैं. मेरी विधानसभा में खैरी गांव हैं वहां पर एक साल से ट्रांसफार्मर नहीं बदला जा रहा है. पहले जब पोल लगाने के लिए गड्ढे होते तो एक खचका होता था, जो एक डेढ़ फीट का रहता था, जिस पर खम्‍भे के पीछे का हिस्‍सा जमा होता था, आज यह स्थिति है कि ठेकेदार के द्वारा जे.सी.बी. और पोकलेन से एक ही दिन में 25 से 50 गड्ढे किए जाते हैं और उनमें मिट्टी डाल दी जाती है. अभी खभे लग गए तार खिंच गई, लेकिन करंट चालू नहीं हुआ है उसके पहले ही खंभे गिर गए हैं. मेरे जिले में इसकी जांच कराई जाए यही मेरा अनुरोध है.

श्री पारस चन्‍द्र जैन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सदस्‍य द्वारा जिस गांव का नाम बताया गया है, वहां पर हम इसकी जांच भी करा लेंगे और इसकी सूचना सदस्‍य को भी दे देंगे. खंभे यदि कहीं गिरे हैं तो उनको सुधारने का काम और जवाबदारी हमारी है, हम उनको सुधरवा देंगे.

श्री रजनीश सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी ने इस बात की ओर ध्‍यान देने के लिए कहा है, मैं इसके लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद देता हूं.

रीवा जिले में कराए गए नवीन कार्य/सुधार कार्य

[ऊर्जा]

2. ( *क्र. 432 ) श्री सुन्‍दरलाल तिवारी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रीवा जिले में गुढ़ विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा विभागीय स्‍तर पर कितने नवीन कार्य एवं कितने सुधार के कार्य वर्ष 2014-15 से 2016-17 तक में कराये गए(ख) प्रश्नांश (क) के कार्यों के कार्यादेश कब-कब किन-किन संविदाकारों/ठेकेदारों को कितनी अवधि में पूर्ण करने के लिए दिये गए, उनमें से कितने कार्य कब-कब पूर्ण कराये गए, का विवरण देवेंअगर कार्य समय पर पूर्ण नहीं किये गए तो संबंधितों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई? (ग) प्रश्नांश (क) के कार्यों के कार्यादेशों का भुगतान किन-किन माध्‍यमों से दिनांक 15.6.2017 तक कुल कितना किया गयाभुगतान के पूर्व भवन एवं संनिर्माण कल्‍याण उपकर अधिनियम 1996 के तहत कितनी उपकर राशि की वसूली की गईक्‍या अपूर्त मूल्‍य तथा पर निर्माण लागत दोनों में श्रमिक कल्‍याण उपकर लिए जाने के प्रावधान 2012 से लागू हैं(घ) प्रश्नांश (क) के कार्यों पर प्रश्‍नांश (ग) अनुसार कितने कल्‍याण उपकर की राशि की वसूली की जाकर श्रम विभाग में जमा करायी गईक्‍या प्रश्‍नकर्ता द्वारा भी पत्र क्र. 904, दिनांक 29.05.2017 के माध्‍यम से जानकारी चाही गई थीजो आज भी अप्राप्‍त है(ड.) प्रश्नांश (क) के ठेकेदार/संविदाकारों से कर्मकार कल्‍याण उपकर की राशि की वसूली न करके ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए कौन-कौन दोषी हैंदोषियों के विरूद्ध क्‍या राशि की वसूली प्रस्‍तावित कर गबन का मामला पंजीबद्ध करायेंगे एवं प्रश्‍नांश (घ) अनुसार चाही गई जानकारी को समय पर न देने के लिए दोषियों पर क्‍या कार्यवाही करेंगे?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) रीवा जिले में गुढ़ विधानसभा क्षेत्रांतर्गत पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा विभागीय स्‍तर पर वर्ष 2014-15 से 2016-17 तक कराये गये नवीन कार्यों एवं सुधार कार्यों से संबंधित जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट  के प्रपत्र ए-1, ए-2, ए-3, बी-1, बी-2, बी-3, सी-1, सी-2, सी-3, डी-1, डी-2, डी-3, ई-1, ई-2 एवं ई-3 अनुसार है। (ख) गुढ़ विधानसभा क्षेत्रांतर्गत प्रश्‍नावधि में जारी किये गये कार्यादेशों की दिनांकसंविदाकार/ठेकेदार के नामकार्य पूर्ण कराये जाने की अवधि तथा कार्य पूर्ण करने की दिनांक सहित जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ए-1, ए-2, ए-3, बी-1, बी-2, बी-3, सी-1, सी-2, सी-3, डी-1, डी-2, डी-3, ई-1, ई-2 एवं ई-3 अनुसार है। ग्रामीण क्षेत्र के कराये गये फीडर विभक्तिकरण के कार्यों हेतु स्‍वीकृत योजना के अंतर्गत दिये गये प्रावधानों एवं निर्देशों के अनुसार टर्न की आधार पर करवाये गये कार्यों में संबंधित ठेकेदार (फर्म) द्वारा निर्धारित समय-सीमा पर कार्य नहीं किये जाने के कारण संबंधित ठे‍केदार (फर्म) से प्राप्‍त होने वाले बिलों से संपूर्ण रीवा जिले के कार्यों हेतु एल.डी. रूपये 10.67 लाख की राशि की कटौती की गई है। राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में प्रोजेक्‍ट जिलेवार स्‍वीकृत होते हैं एवं निर्धारित समय-सीमा पर कार्य नहीं किये जाने पर रीवा जिले हेतु कुल रूपये 91 लाख एल.डी. की राशि की कटौती की गई है। (ग) प्रश्नांश (क) में उल्‍लेखित कार्यों का भुगतान संबंधित ठेकेदार/फर्म को चेक द्वारा एवं ठेकेदार/फर्म के खाते में ट्रांसफर करके किया गया हैजिसका विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र ए-3, बी-2, बी-3, सी-3, डी-1, डी-2, डी-3, ई-1,     ई-2 एवं ई-3 में दर्शाए अनुसार है। रूपये 978930 की राशि की कटौती भुगतान पूर्व बिलों से श्रम कल्‍याण उपकर के मद में काटी गई है। प्राप्‍त जानकारी अनुसार भवन एवं अन्‍य संनिर्माण कर्मकार कल्‍याण उपकर संनिर्माण कार्य की निर्माण लागत जिसमें अपूर्त मूल्‍य तथा विनिर्माण लागत दोनों सम्मिलित हैंदिनांक 10.4.2003 से देय है। (घ) प्रश्‍नांश (ग) के उत्‍तर में उल्‍लेखित कटौती की गई राशि श्रम विभाग में जमा कराई गई है। जी हाँ। अधीक्षण अभियंता (संचा./संधा) के पत्र क्रमांक 2397 दिनांक 15.06.2017 के द्वारा माननीय विधायक महोदय को जानकारी प्रेषित की गई है।  (ड.) प्रश्नांश (क) से संबंधित कार्यों के विरूद्ध ठेकेदारों/संविदाकारों द्वारा प्रस्‍तुत किये गये देयकों में से नियमानुसार श्रमिक कल्‍याण उपकर की राशि की कटौती की गई है। किसी भी ठेकेदार को लाभ नहीं पहुंचाया गया है। अत: इस संबंध में कोई अधिकारी/कर्मचारी दोषी नहीं है। चाही गई जानकारी माननीय विधायक को अधीक्षण अभियंता (संचा/संधा) रीवा के पत्र क्रमांक 2397, दिनांक 15.6.2017 के माध्‍यम से प्रेषित की गयी है। उक्‍त परिप्रेक्ष्‍य में किसी के दोषी नहीं होने से कार्यवाही करने की आवश्‍यकता नहीं है।

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री से जानना चाहता हूं कि सबसे बड़ी समस्‍या है कि मंत्री जी ने जो जवाब यहां दिया है, उस जवाब के विरूद्ध दोनों डाक्‍यूमेंट इस सदन के ही हैं, नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक का कहना है कि अपूर्त मूल्‍य तथा पर निर्माण लागत दोनों में श्रमिक कल्‍याण उपकर जो अधिरोपित था वह नहीं दिया गया है, यह आरोप है और नियंत्रक महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट में यह उल्‍लेख है. यहां जो जवाब आया है माननीय मंत्री जी का मंत्री जी ने एक राशि बताई है और यह कहा है कि हमने वह राशि उपलब्‍ध कराई और कर के रूप में जमा कराई है. हमारा प्रश्‍न था कि इसमें दो उपकर है अपूर्त मूल्‍य एवं पर निर्माण, दो यह अलग अलग है, न तो इनके जवाब अलग अलग दिए हैं कि कितना अधिरोपित किया. दूसरी बात माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह आपको निर्णय लेना पड़ेगा कि माननीय मंत्री जी का जवाब सही है या नियंत्रक महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट सही है, दोनों में से कौन सी रिपोर्ट सही है जिससे हम आगे बढ़ सके और जवाब पूछ सके.

अध्‍यक्ष महोदय - आपके प्रश्‍न में तो सी.ए.जी. का हवाला है ही नहीं.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--सीएजी के जवाब से ही प्रश्न की उत्पति हुई है. यह आप ही का डाक्यूमेन्ट है. इसी सदन में जिसको पेश किया गया है. दोनों में भिन्नताएं हैं. इतना ही नहीं एक प्रश्न मेरे द्वारा पहले भी पूछा गया था उसमें भी भिन्न तरह के जवाब हैं इसीलिये मैं कहना चाहता हूं कि इसमें किसको सत्य मानकर माननीय मंत्री जी से जवाब पूछें

श्री पारसचन्द्र जैन--माननीय अध्यक्ष महोदय, जो उपकर की बात की है. उसमें 9 करोड़ 30 लाख 86 हजार 77 रूपये का भुगतान तीन वर्ष में हमने किया है और उसमें से माननीय सदस्य को मैं बताना चाहता हूं कि 9 लाख 78 हजार 9 सौ 30 रूपये की कटौती श्रम विभाग में हमने जमा भी की है. जो सम्यक होकर काम में आती है. अब यदि यह जो कह रहे हैं कि दोनों ही सवालों की आपने जो बात कही है. यदि आप यह कहते कि इसमें जो भी अनियमितता है तो उसको हम दिखवा लेंगे.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--अध्यक्ष महोदय, हमारा यह कहना नहीं है. सीधा सा हमारा यह प्रश्न है कि महालेखा परीक्षण में यह एतराज जताया गया है कि यह कर वसूल नहीं किये गये हैं. आपने अपने जवाब में दिया है कि हमने कर वसूल किये हैं. तो मैं किस डाकूमेन्ट को हम सही मानकर माननीय मंत्री जी से जवाब पूछें यह आपके माध्यम से अध्यक्ष महोदय मंत्री जी से जानना चाहता हूं.

अध्यक्ष महोदय--जो कर्मकारों की राशि है उसमें काटी गई है कि नहीं. वह यह कह रहे हैं कि ए.जी. की रिपोर्ट कह रही है कि नहीं काटी गई है.

श्री पारसचन्द्र जैन--माननीय अध्यक्ष महोदय, जो माननीय सदस्य ने बताया है हम उसको और दिखवा लेंगे. लेकिन यह बात निश्चित है कि 9 लाख 78 हजार 9 सौ 30 रूपये की जो कटौती है वह श्रम विभाग के खाते में जमा हुई है. यह मैंने अपने प्रश्न के उत्तर में भी उल्लेख किया है.

श्री सुंदरलाल तिवारी--जवाब आया ही नहीं है अध्यक्ष महोदय इसमें सीधा सा सवाल है. इसमें आप अध्यक्ष महोदय आदेशित कर दें.

अध्यक्ष महोदय--आप प्वाईन्टेड प्रश्न करें कि क्या चाहते हैं.

श्री सुंदरलाल तिवारी--यह प्वाईन्टेड प्रश्न हैं. यह दो कंट्राडिक्ट् स्टेटमेंट हैं. दोनों ही अभिलेख जो हैं यह सदन के हैं. यह कह रहे हैं कि हमने दिया है. नियंत्रक कह रहे हैं कि नहीं दिया गया है. अब हम किसको सही मान लें. मेरा यह कहना है, उस पर मंत्री जी जवाब देने के लिये तैयार नहीं हैं. वह जवाब दे दें तो जवाब सदन के अंदर आ जाये. मैं यह समझता हूं कि सदन की इससे गंभीरता ही बनेगी. यह इसको बता दें कि यह डाकूमेन्ट्स (XXX) हैं. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट है, वह (XXX) है आपकी अच्छी वाली है. या आपकी (XXX) है, यह अच्छी वाली है.

अध्यक्ष महोदय--यह शब्द कार्यवाही से निकाल दें. इसका आप परीक्षण करवा लें.

श्री पारसचन्द्र जैन--माननीय अध्यक्ष महोदय, आपके आदेश का पालन किया जायेगा.

अध्यक्ष महोदय--इसका परीक्षण करवाकर माननीय सदस्य जी को अवगत करवा दें.

श्री सुंदरलाल तिवारी--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा दूसरा प्रश्न है कि हमारे यहां राजीव गांधी विद्युतीकरण के तहत बहुत सारे कार्य वर्ष 2013 के बाद से कराये गये इसमें से बहुत से ठेकेदार लापता हैं एवं कुछ भाग गये. इसमें जो महालेखाकार की जो रिपोर्ट है उसमें यह कहा गया कि जो ठेकेदारों की शर्तें थीं उन शर्तों को रिलेक्स कर दिया सरकार और कंपनियों ने और अंत में यह किया कि जोखिम लागत दायित्व को मूल ठेके की लागत के 10 प्रतिशत तक सीमित कर दिया. जोखिम की लागत को तथा उसके प्रतिशत को घटाते चले गये और अंत में वह 10 प्रतिशत लेकर के आये. उसका यह परिणाम हुआ कि ठेकेदारों को उसका लाभ मिलता गया उसके नुकसान की भरपाई होती गई. इस वजह से ठेकेदार भाग गये. उन्होंने काम नहीं किया उनसे रकम वसूली भी नहीं गई और आज भी काम पीछे चल रहा है, वह नहीं हुआ. अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से आपके माध्यम से यह जानना चाहता हूं कि यह किस कानून में निर्णय लिया गया और इसका कौन दोषी है कि ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया गया है.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार--यह जो प्रश्न का हवाला दे रहे हैं, क्या यह सदन के पटल पर रखा गया है.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी:- अध्‍यक्ष महोदय, यह डरपोक आदमी है, कल टी.व्‍ही में बोल रहे थे कि हम बहुत डरे हुए हैं.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता:- वह तो आपके लिये बोल रहे थे कि तिवारी जी बहुत डरे हुए हैं, रीवा संभाग के लोग बहुत डरे हुए हैं.

डॉ गौरीशंकर शेजवार :- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने तो बहुत छोटी से बात की है..

श्री रामनिवास रावत :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने बहुत ही गंभीर प्रश्‍न किया है. मंत्री जी इंट्रप्‍ट न करें.

डॉ गौरीशंकर शेजवार :- इसमें दो बातें हैं कि इसमें महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट का प्रश्‍न में संदर्भ नहीं है. आपने कहा कि यह रिपोर्ट ,तो मैं यह जानना चाहता हूं कि क्‍या रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी गयी है ?

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी :- जी हां, सदन के पटल पर आ चुकी है, तभी तो हमको मिली है.

डॉ गौरीशंकर शेजवार :- यदि आ चुकी है तो बहुत अच्‍छे से उसको उद्धत कर सकते हैं. यदि सदन के पटल पर नहीं आयी है तो उसका उदाहरण देना मेरे ख्‍याल से प्रासंगिग नहीं होगा.

अध्‍यक्ष महोदय :- अब आप अपने दूसरे प्रश्‍न का उत्‍तर ले लीजिये. वह विषय अब समाप्‍त हो चुका है.

श्री पारस चन्‍द्र जैन :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी माननीय सदस्‍य यह कह रहे थे कि जिन कंपनियों ने काम किया उनके पैसे नहीं काटे गये. माननीय, ठेकेदार की फर्म से राजीव गांधी योजना में 91 लाख रूपये की पेनाल्‍टी काटी गयी है, बराबर उनके खिलाफ कार्यवाही भी गयी है.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री मेरा प्रश्‍न ही ठीक से नहीं सुन रहे हैं, मेरा कहना है कि शर्तें रिलेक्‍स की गयी हैं. शर्तों को रिड्यूज करके 10 प्रतिशत पर ले आये. आपने इतना लंबा लाभ उन कम्‍पनियों को आपनी तरफ से दिया है. वह कंपनियां भाग गयी हैं.

अध्‍यक्ष महोदय :- मंत्री जी ने कहा है कि 91 लाख रूपये काटे हैं.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी :- अध्‍यक्ष महोदय, मैं वही तो कह रहा हूं कि जहां पर 20 करोड़ रूपये काटना चाहिये थे, वहां पर इन्‍होंने 91 लाख रूपये काटकर छुट्टी कर दी, वह भाग गये, इसका दोषी कौन है. यह परीक्षण में आपत्ति आयी है. यह लिखित आपत्ति आयी है कि सरकार को करोड़ों रूपयों का नुकसान हुआ है. मेरा यह प्रश्‍न है.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी :- मेरा यह कहना है कि इन्‍होंने किस कानून में रिलेक्‍स कर दिया, मैं यह मंत्री जी से पूछ रहा हूं.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह ):- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय तिवारी जी ने एक बहुत ही गंभीर विषय, शायद एक ही जगह के लिये उठाया है. मेरा आपसे अनुरोध है कि आप, आपके माध्‍यम से मंत्री जी को ऐसा निर्देश दें कि राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना में प्रत्‍येक जिलों में इस तरह से लापरवाही हुई है. ठेकेदार आधा-अधूरा काम करके चले गये हैं. उनसे सही पेनॉल्‍टी ली गयी या नहीं, इसकी एक जांच समिति बना दें.

श्री पारस चन्‍द्र जैन :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी एक नाम मैंने आपको बताया, दूसरा भी जिन कंपनियों ने ऐसा किया है, उनकी भी राशि काटी गयी है. ऐसा नहीं है जिन लोगों ने काम नहीं किया, उनकी हमने राशि काटी है. यदि कोई और भी ऐसा स्‍पैसिफिक होगा तो हम उसको दिखवा लेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय :- यदि और भी कोई ऐसा स्‍पैसिफिक मामला होगा तो वह उसको दिखवाने को तैयार हैं.

श्री अजय सिंह :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राशि काटी गयी यह बात नहीं है, जो तिवारी जी कह रहे हैं कि यदि 20 प्रतिशत राशि यानि 4 करोड़ रूपये काटी जानी थी वह नहीं काटी गयी है.

अध्‍यक्ष महोदय :- मंत्री जी कह हैं कि यदि आप कोई स्‍पैसिफिक मामला देंगे तो वह उसकी जांच करा लेंगे.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी :- मेरा यह कहना है कि जो संविदा हुई थी, उस संविदा को रिलेक्‍स करके उनको छूट दी गयी है. मैं यह जानना चाहता हूं कि यह छूट किस कानून में दी गयी है. मैं यह जानना चाहता हूं.

अध्‍यक्ष महोदय :- नेता प्रतिपक्ष जी ने भी यही बात की है कि यदि कोई ऐसे प्रकरण है, जो स्‍पैसिफिक है तो उनकी जांच हो जायेगी.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी :- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको पढ़कर बता देता हूं कि कंपनी ने ठेके कि विशेष शर्तों में परिवर्तन कर ठेकेदारों की जोखिम लागत दायित्‍व को मूल ठेके की लागत के..

अध्‍यक्ष महोदय :- यह आप किस चीज में से पढ़ रहे हैं. यह मैं नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में से पढ़ रहा हूं.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी :- अध्‍यक्ष महोदय, आप सुन लीजिये 10 प्रतिशत कर दिया जिसके कारण कंपनियों को निरस्‍त ठेके के शेष कार्यों पर 11.94 करोड़ रूपये का अतिरिक्‍त भार उठाना पड़ा.

विद्युत चोरी के प्रकरणो में फर्जी पंचनामों की जाँच

[ऊर्जा]

3. ( *क्र. 781 ) श्री मुरलीधर पाटीदार : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्नकर्ता द्वारा शून्यकाल सूचना क्रमांक 165, फरवरी-मार्च 2017 में विद्युत चोरी के प्रकरणों में नियम विरूद्ध कार्यवाही करने के संदर्भ में नगर सुसनेर में सिराज खाँ बोहरा के विरूद्ध पंचनामा नियमानुसार नहीं बनाने के प्रकरण में क्या जाँच की जावेगी(ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में क्‍या क्षेत्रान्तर्गत विगत 02 वर्षों में बनाए गए पंचनामों की विस्तृत जाँच की जाकर उचित कार्यवाही की जावेगीयदि हाँ, तो कब तक व क्या कार्यवाही की जावेगी(ग) वितरण केन्द्र सुसनेर अन्तर्गत विद्युत देयकों में अनियमितता संबंधी कितनी शिकायतें विगत 02 वर्षों में प्राप्त हुई हैंजिनका निराकरण कर देयकों में सुधार किया गयायदि हाँतो शिकायतवार पूर्ण विवरण देवें ? (घ) क्या ग्राम मोड़ी के उपभोक्ताओं द्वारा देयक में उल्लेखित राशि जमा करने के उपरांत भी राशि बिलों में कम नहीं हो रही हैउदाहरणार्थ-गोवर्धन पिता पीरूलाल सर्विस क्र. 31-31-3201586 के देयक में जमा उपरांत भी राशि कम नहीं हुई हैक्या विस्तृत जाँच करवाई जाकर उपभोक्ताओं के हित में कार्यवाही की जावेगीयदि हाँ, तो क्या व कब तक? विवरण देवें।

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) म.प्र. पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के सुसनेर वितरण केन्‍द्र के अंतर्गत विद्युत उपभोक्‍ता श्री सिराजखां बोहरा के विरुद्ध विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 135 के तहत नियमानुसार प्रकरण/पंचनामा बनाया गया है। अतः उक्‍त प्रकरण में किसी प्रकार की जाँच की आवश्यकता नहीं है। (ख) सुसनेर वितरण केन्द्र के क्षेत्रान्तर्गत विगत 2 वर्षों में बनाये गये प्रकरण/पंचनामें विद्युत अधिनियम 2003 के प्रावधानों के अनुरूप नियमानुसार बनाए गये हैंअतः तत्संबंध में किसी प्रकार की जाँच/कार्यवाही किया जाना अपेक्षित नहीं है। (ग) सुसनेर वितरण केन्द्र के अंतर्गत विद्युत देयकों में त्रुटि संबंधी शिकायतें उपभोक्ताओं द्वारा लिखित में नहीं की गई, किन्तु प्राप्त बिलों से संतुष्ट नहीं होने पर उपभोक्ताओं द्वारा कार्यालय में उपस्थित होकर आवश्यक सुधार हेतु बिल प्रस्तुत किये। बिल सुधार के ऐसे 314 प्रकरण विगत 2 वर्षों में सुसनेर वितरण केन्द्र कार्यालय में प्राप्त हुए,जिन्हें नियमानुसार सुधारा गया। प्रकरणवार विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (घ) ग्राम मोड़ी के उपभोक्ताओं द्वारा देयक में उल्लेखित राशि जमा करने के उपरांत नियमानुसार आगामी बिलों से जमा की गई राशि कम की जा रही है। प्रश्‍नांश में वर्णित उपभोक्ता श्री गोवर्धन पिता पीरूलाल (सर्विस क्रमांक 31-31-3201586) के प्रकरण की जाँच की गई। उक्‍त उपभोक्ता द्वारा सिंचाई श्रेणी का रू. 3000/- का बिल रसीद क्र. बी-10 दिनांक 13.04.2016 को जमा करवाया गया था, किन्तु उनके द्वारा जमा की गई राशि कम्प्यूटर में पंचिंग करते समय छूट गई थी। दिनांक 22.06.2017 को आवश्‍यक सुधार उपरांत उक्‍त उपभोक्‍ता को रू. 4008/- राशि का बिल जारी कर दिया गया है।

श्री मुरलीधर पाटीदार- माननीय अध्‍यक्ष महोदय मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से आग्रह करना चाहूंगा कि मेरे द्वारा अपने प्रश्‍न में दो व्‍यक्तियों के नाम का उल्‍लेख किया गया था. जिनमें से श्री सिराजखां बोहरा को मेरे द्वारा विधान सभा में प्रश्‍न लगाए जाने के बाद से विद्युत विभाग के कर्मचारी परेशान कर रहे हैं. मेरा निवेदन है कि उस व्‍यक्ति को अनावश्‍यक रूप से परेशान न किया जाये. दूसरे व्‍यक्ति श्री गोवर्धन लाल पिता पीरूलाल के संबंध में की गई गलती को विभाग द्वारा माना गया कि उसने दिनांक 13.4.2016 को बिल जमा किया था. मेरे द्वारा विधान सभा में लगाए गए प्रश्‍न का उत्‍तर जब वहां तक पहुंचा तब जाकर विभाग द्वारा दिनांक 25.6.2017 को अपनी गलती का सुधार किया गया.

मैं माननीय मंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि उनके विभाग द्वारा अपनी गलती को माना गया. परंतु मैं यह जानना चाहता हूं कि क्‍या मेरे द्वारा सदन में उल्‍लेखित प्रकरणों में ही ऐसी गलती हो सकती है ? क्‍या अन्‍य प्रकरणों में इस प्रकार की गलती नहीं हो सकती ? यदि मेरी विधान सभा में बिजली बिलों की गड़बड़ी के और भी प्रकरण संज्ञान में आते हैं तो क्‍या मंत्री जी उन प्रकरणों में भी सुधार करवायेंगे.

श्री पारस चन्‍द्र जैन- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह बात स्‍वीकार करता हूं कि माननीय सदस्‍य के कहने पर ही हमने कार्यवाही की है. पूर्व में भी माननीय सदस्‍य के जिले में एक व्‍यक्ति जो कि संविदा में कार्यरत था, उसे डिसमिस किया गया है. हम गलत लोगों को बचाने का प्रयास नहीं करते हैं. यदि माननीय सदस्‍य बतायेंगे तो हम पहले पूरे प्रकरण का परीक्षण करवा लेंगे और यदि व्‍यक्ति दोषी होगा तो उसके खिलाफ सरकार द्वारा कार्यवाही की जायेगी. सरकार किसी को नहीं बचायेगी.

श्री मुरलीधर पाटीदार- माननीय अध्‍यक्ष्‍ा महोदय, मैं मंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि मेरे द्वारा उल्‍लेख करने के बाद प्रकरण में जांच करके एक सहायक लाईनमैन की सेवायें समाप्‍त की गई हैं. मैं एक और आग्रह मंत्री जी से करना चाहता हूं कि मेरी विधान सभा में कनिष्‍ठ यंत्री श्री गोपाल मालवीय और इमरान खान हैं. जिनके द्वारा उल्‍टे-सीधे काम करके कई कारनामे किए गए हैं. उन्‍हें निलंबित करके जांच करवाई जाये.

अध्‍यक्ष महोदय- प्रश्‍न क्रमांक 4

श्री मुरलीधर पाटीदार- अध्‍यक्ष महोदय, बहुत ही मुश्किल से पहली बार सदन में मेरा विद्युत विभाग का प्रश्‍न लगा है और आप हमें बोलने का मौका ही नहीं दे रहे हैं. तिवारी जी ने 15 मिनट का समय ले लिया और हमें समय ही नहीं दिया जा रहा है.

अध्‍यक्ष महोदय- आप केवल एक प्‍वाईंटेड प्रश्‍न पूछिये.

श्री मुरलीधर पाटीदार- मैं माननीय मंत्री जी से केवल यह आग्रह करना चाहता हूं कि मेरे विधान सभा क्षेत्र के कनिष्‍ठ यंत्री श्री गोपाल मालवीय और इमरान खान द्वारा कई कारनामे किए गए हैं. मैं चाहता हूं कि उन्‍हें निलंबित करके जांच करवाई जाये.

श्री बहादुर सिंह चौहान- उस कनिष्‍ठ यंत्री को वहां से हटाकर मेरे क्षेत्र में भेज दिया गया है. य‍ह तो गलत है.

अध्‍यक्ष महोदय- पाटीदार जी आपकी बात आ गई है. मंत्री जी ने आपका आग्रह सुन लिया है.

श्री मुरलीधर पाटीदार- अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि मेरे द्वारा उठाये गए बिंदु पर उनका अभिमत क्‍या है ? मंत्री जी कुछ बोल ही नहीं रहे हैं. मंत्री जी मना कर दें कि वे इस मामले में कुछ नहीं कर सकेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय- कुशवाह जी, आप बैठ जायें.

श्री मुरलीधर पाटीदार- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या सदन की आखिरी लाईन में बैठे विधायकों का कोई महत्‍व नहीं है ? बड़ी मुश्किल से कभी-कभी हमारा प्रश्‍न आता है और हमें कोई जवाब ही नहीं मिल पाता है.

अध्‍यक्ष महोदय- ऐसा नहीं है. सभी विधायकों का महत्‍व है. आप कोई स्‍पेसिफिक शिकायत करिये. आपने कोई प्‍वाईंटेड प्रश्‍न नहीं किया है. आपने किसी प्रकार की जांच की मांग नहीं की और आप सीधे निलंबन की बात कर रहे हैं.

श्री मुरलीधर पाटीदार- मैं किसानों के हित में बोल रहा हूं. कनिष्‍ठ यंत्री श्री गोपाल मालवीय और इमरान खान के बहुत से गलत काम जांच के दौरान निकलेंगे. मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी से आग्रह करता हूं कि दोनों की विभागीय जांच करवाई जाये.

श्री पारस चन्‍द्र जैन- अध्‍यक्ष महोदय, जिन दोनों का उल्‍लेख माननीय सदस्‍य ने किया है, हम उनकी जांच करवा लेंगे. मैं एक बात और कहना चाहता हूं कि अभी हमारे एक विधायक जी कह रहे थे कि उस व्‍यक्ति को हमारे यहां भेज दिया, यह गलत है. परंतु कर्मचारी कहीं तो काम करने के लिए जायेगा.

अपराध प्रकरण दर्ज किया जाना

[सामान्य प्रशासन]

4. ( *क्र. 478 ) श्री नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या आर्थिक अपराध प्रकोष्‍ठ ग्‍वालियर में प्राथमिक जाँच प्रकरण 9/2011 पंजीबद्ध किया गया हैयदि हाँ, तो प्रश्‍न दिनांक तक क्‍या कार्यवाही की गई(ख) सांसद निधि से 23 विद्यालयों में कम्‍प्‍यूटर प्रोजेक्‍टर लगाने में गंभीर अनियमितता होने के उपरांत भी प्रश्‍न दिनांक तक अपराध पंजीबद्ध क्‍यों नहीं किया गया, इसके लिए कौन दोषी है तथा उसके विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की जावेगी(ग) प्रश्नांश (क) में प्राथमिक जाँच प्रकरण 9/2011 में पंजीबद्ध होने के बाद भी अपराध पंजीबद्ध न होने के क्‍या कारण हैंक्‍या दोषी लोगों को बचाया जा रहा है(घ) जिला कलेक्‍टर भिण्‍ड के प्रशासकीय स्‍वीकृति आदेश क्र. 794/4.11.1999  835/16.11/1999  71/29.1.2000  1605/22.12.2000 में निहित शर्तों का पालन न करने के उपरांत अभी तक शिथिल कार्यवाही क्‍यों की जा रही हैकब तक कार्यवाही पूर्ण हो जायेगी?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। जाँच प्रक्रियाधीन है। (ख) जाँच प्रक्रियाधीन है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) उत्‍तरांश (कके प्रकाश में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) जाँच प्रक्रियाधीन है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

श्री नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे द्वारा कम्‍प्‍यूटर के संबंध में पूर्व में भी तारांकित प्रश्‍न 1286 दिनांक 23.2.2017 को लगाया गया था. तब माननीय मंत्री द्वारा मुझे सदन में आश्‍वस्‍त किया गया था. भिण्‍ड में हुए कम्‍प्‍यूटर घोटाले में मेरी विधान सभा में 1 करोड़ 15 लाख का घोटाला हुआ था. यह एक बहुत बड़ा घोटाला है. इस घोटाले को 16 साल हो चुके हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पिछले 7 सालों से ई.ओ.डब्‍लू. कार्यवाही कर रहा है. परंतु आज तक इस प्रकरण में दोषी व्‍यक्तियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई है. जब प्रकरण दर्ज हो गया है तो पिछले 7 सालों से ई.ओ.डब्‍लू. के अधिकारी क्‍या कर रहे हैं ? उन्‍होंने बहुत बड़ा भ्रष्‍टाचार किया है.

मैंने पहले भी आग्रह किया था.(XXX)

अध्‍यक्ष महोदय--- यह कार्यवाही से निकाल दीजिए. आप सीधा प्रश्‍न करिए आरोप मत लगाइए.

श्री नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह मामला हाईकोर्ट में गया. हाईकोर्ट ने डायरेक्‍शन दिया, सुप्रीम कोर्ट का डायरेक्‍शन भी हमारे पास है.

अध्‍यक्ष महोदय-- आपका प्रश्‍न क्‍या है?

श्री नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह-- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि एक करोड़ पैंतीस लाख का जो घपला हुआ है उसमें16 वर्ष हो गए. सात वर्ष से ई.ओ.डब्‍ल्‍यू. के अधि‍कारी जांच कर रहे हैं. मंत्री महोदय के पास रिपोर्ट नहीं होगी. इनकी रिपोर्ट भी हमारे पास है. जांच में यह दोषी पाए गए हैं उप निरीक्षक की रिपोर्ट है. जांच अधिकारी दोषी हैं इनके खिलाफ केस का काम अभी कराइए.

राज्‍यमंत्री, सामान्‍य प्रशासन (श्री लाल सिंह आर्य)-- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने कई आरोप लगा दिए. मैं आपके माध्‍यम से उनको बताना चाहता हूं कि इसमें 17 वर्ष नहीं हुए हैं. इसमें प्रारम्‍भ में जांच कराई गई थी उसके बाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में मामला गया और उसके बाद कहीं न कहीं ई.ओ.डब्‍ल्‍यू. में मामला पंजीबद्ध करने के लिए कलेक्‍टर भेजें यह आयुक्‍त की एक रिपोर्ट आई थी. वर्ष 2011 में यह प्रकरण आर्थिक अपराध प्रकोष्‍ठ को दिया गया. भिण्‍ड कलेक्‍टर ने जांच पंजीबद्ध कर ली. चूंकि कोई भी जांच होती है तो उसमें जब तक तथ्‍यात्‍मक जानकारियां नहीं ली जातीं तब तक किसी भी अंतिम बिंदु पर नहीं पहुंचा जाता. वर्ष 2011 में कलेक्‍टर, भिण्‍ड से जानकारी चाही गई थी तो उन्‍होंने आंशिक जानकारी दी. वर्ष 2016 में दिनांक 18.01.2016 को फिर 4 बिंदुओं पर उनसे जानकारी चाही गई कि आप 4 बिंदुओं पर जानकारी भेजें उन्‍होंने फिर आंशिक जानकारी ई.ओ.डब्‍ल्‍यू. को दी है. यह जो आंशिक जानकारी दी है वह भी कहीं न कहीं संज्ञान में ले ली गई लेकिन हमको और भी कोई जानकारी चाहिए. अभी उन्‍होंने आंशिक जानकारी दी है. मैंने पहले भी कहा था अभी भी कह रहा हूं जैसे ही पूरी जानकारी प्राप्‍त हो जाएगी जांच पूरी कर ली जाएगी और कोई एक सब इंस्‍पेक्‍टर की जांच के आधार पर रिपोर्ट प्रस्‍तुत नहीं की जाती है. ई.ओ.डब्‍ल्‍यू. में डी.जी.पी. हैं जब वह अंतिम बिंदु पर पहुंचते हैं तब कहीं जांच प्रस्‍तुत की जाती है.

श्री नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी कह रहे हैं कि आंशिक जानकारी आई है 6 साल हो गए हैं कब तक आंशिक जानकारी लेते रहेंगे.

(बहुजन समाज पार्टी के सदस्‍य एडवोकेट सत्‍यप्रकाश सखवार, सदन में नारे लगाते हुए अपने आसन पर आए.)

अध्‍यक्ष महोदय-- वकील साहब आप बैठ जाइए. कुशवाह जी आप एक प्‍वाइंटेड प्रश्‍न करिए.

श्री नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह-- अध्‍यक्ष महोदय, आपका संरक्षण चाहिए जवाब नहीं आ रहा है. जानकारी एकत्रित की जा रही है. करोड़ों रुपए का भ्रष्‍टाचार हो गया है.

अध्‍यक्ष महोदय- आप प्रश्‍न तो करें.

श्री नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह-- अध्‍यक्ष महोदय, अधिकारी पैसा खा रहे हैं, मंत्री जवाब नहीं दे पा रहे हैं. मेरा कहना है कि अगर 6 वर्ष हो गए हैं तो 6 वर्ष में अभी तक क्‍या कार्यवाही हुई है केवल आंशिक जानकारी चल रही है. जिन लोगों ने भ्रष्‍टाचार किया है उनकी उम्र 75 साल की हो गई है. एक आई.ए.एस. अधिकारी की उम्र 75 साल दूसरे पूर्व सांसद उनकी उम्र भी 75 वर्ष है. (XXX) और जानकारी ऐसे ही चली जाएगी.

अध्‍यक्ष महोदय-- यह कार्यवाही से निकाल दें.

श्री नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप कार्यवाही से निकाल सकते हो लेकिन मेरा आग्रह यह है कि इसमें केस क्‍यों दर्ज नहीं हो रहा है. बार बार प्रश्‍न उठाना पड़ता है.

अध्‍यक्ष महोदय-- कुशवाह साहब, आप सीधा प्रश्‍न करिये आप भाषण ज्‍यादा देते हैं प्रश्‍न नहीं करते हैं.

श्री नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह-- अध्‍यक्ष महोदय, आप निर्देश जारी करें. सात साल बहुत होते हैं. ई.ओ.डब्‍ल्‍यू. की जांच के लिए .

अध्‍यक्ष महोदय-- आप इस पर कोई प्रश्‍न पूछ लीजिए.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह--केस पंजीबद्ध करके उन्हें जेल में डालो. एफआईआर दर्ज करो. एफआईआर कब तक हो जाएगी मुझे दिन बताइए. चार महीने बाद विधान सभा का सत्र आता है.

अध्यक्ष महोदय--मंत्री जी, आप जांच की कार्यवाही जल्दी पूरी करा दें ऐसा मुझे उनका आग्रह दिखता है. क्योंकि प्रश्न तो उन्होंने कुछ पूछा नहीं है. माननीय सदस्य की आपत्ति यह है कि छह साल हो गए हैं.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह--अध्यक्ष महोदय, एफआईआर कब दर्ज होगी और मुल्जिमों को कब गिरफ्तार किया जाएगा.

श्री लाल सिंह आर्य--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को बताना चाहता हूँ कि जब तक पूरे साक्ष्य नहीं आ जाएंगे, EOW में तो मामला दर्ज कर लिया गया है. सरकार EOW और लोकायुक्त पर दबाब नहीं बना सकती है. EOW जांच कर रही है.

श्री नरेन्द्र कुशवाह--भ्रष्टाचार में लिप्त है लोकायुक्त. 7 साल हो गए हैं. (व्यवधान)

श्री लाल सिंह आर्य--माननीय अध्यक्ष महोदय, सरकार EOW और लोकायुक्त पर दबाब नहीं बना सकती है.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह--माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारा आपसे निवेदन है हम तो आपके बच्चे हैं. मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं आ रहा है.

अध्यक्ष महोदय--आपके प्रश्न का उत्तर आ गया है. इस तरह से आप जिद नहीं कर सकते हैं.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह--अध्यक्ष महोदय, मुझे आपका संरक्षण चाहिए. क्या आप मान रहे हैं कि सही जवाब आ गया है ?

अध्यक्ष महोदय--आपके प्रश्न को बहुत समय दिया गया और आपकी बात का उत्तर भी आ गया. दूसरे सदस्यों के प्रश्न भी महत्वपूर्ण हैं.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह--अध्यक्ष महोदय, आपने समय दिया उसके लिए धन्यवाद लेकिन प्रश्न का उत्तर नहीं आ रहा है. मंत्री जी कह रहे हैं कि जांच रिपोर्ट आने के बाद.

अध्यक्ष महोदय--आपके प्रश्न का उत्तर आ गया है.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह--अध्यक्ष महोदय, ठीक है धन्यवाद.

कृषि भूमि में विद्युतीकरण/पम्प उर्जीकरण

[अनुसूचित जाति कल्याण]

5. ( *क्र. 762 ) श्रीमती ऊषा चौधरी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि-- (क) अ.जा. कल्याण विभाग के अंतर्गत रीवा संभाग के कितने जिलों में वर्ष 2013-14 से 2015-16 तक अ.जा./अ.ज.जा. वर्ग के किसानों की कृषि भूमि में विद्युतीकरण/पम्प उर्जीकरण के कार्य कराये गए तथा किस वर्ष से अ.जा. वर्ग के किसानों के विद्युतीकरण के कार्य बंद कर दिए गएबंद करने के क्या कारण थे? विवरण सहित जानकारी देवें। (ख) वर्ष 2016-17 में सतना जिले के अंतर्गत विभाग द्वारा कितनी राशि अ.जा./अ.ज.जा. वर्ग के लिए स्वीकृत की गई थीस्वीकृत राशि में से कितने किसानों के कार्यों पर राशि खर्च की गई? विधानसभा क्षेत्रवार कृषक संख्‍यावार जानकारी देवें। (ग) क्या वित्तीय वर्ष2016-17 में विभाग द्वारा अ.जा./अ.ज.जा. वर्ग के किसानों की कृषि भूमि में पम्प उर्जीकरण एवं विद्युतीकरण के कार्य नहीं कराये जाने से अधिकांश प्रकरण लंबित हैं?   (घ) वित्तीय वर्ष 2017-18 में विभाग द्वारा अ.जा./अ.ज.जा. वर्ग के किसानों की कृषि भूमि में पम्प उर्जीकरण व बस्ती में विद्युतीकरण हेतु कितनी राशि जारी की गई हैप्रश्नकर्ता सदस्य द्वारा विगत दो वर्षों में कितने अ.जा./अ.ज.जा. वर्ग के किसानों/हितग्राहियों के प्रस्ताव अनुशंसा सहित भेजे गए हैं?यदि भेजे गए तो प्रस्तावित किये गए प्रकरणों में स्वीकृति क्यों नहीं दी गई?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) रीवा संभाग के समस्‍त जिलों में अनुसूचित जाति के कृषकों के पम्‍प उर्जीकरण के कार्य कराये गये हैं। यह कार्य बंद नहीं किया गया है। (ख) अनुसूचित जाति अंतर्गत कोई राशि स्‍वीकृत नहीं की गई है। (ग) जी हाँ। (घ) विभाग द्वारा रीवा जिले को बस्‍ती में विद्युतीकरण हेतु राशि रू. 11.24 लाखपम्‍प उर्जीकरण हेतु राशि रू. 169.07 लाखसतना जिले को बस्‍ती में विद्युतीकरण हेतु राशि रू. 11.68 लाखपम्‍प उर्जीकरण हेतु राशि रू.175.71 लाखसीधी जिले को बस्‍ती में विद्युतीकरण हेतु निरंकपम्‍प उर्जीकरण हेतु राशि रू. 57.40 लाख एवं सिंगरौली जिले को बस्‍ती में विद्युतीकरण हेतु निरंक और पम्‍प उर्जीकरण हेतु राशि रू. 468.60 लाख की राशि जारी की गई है। प्रश्‍नकर्ता विधायक द्वारा पाँच अनुसूचित जाति के प्रस्‍ताव जिला कार्यालय को प्राप्‍त हुए। 3 प्रकरणों के प्राक्‍कलन तैयार हो चुके हैं। समिति के अनुमोदन के उपरांत स्‍वीकृति की कार्यवाही की जायेगी। शेष 2 प्रकरणों में आवश्‍यक अभिलेख आवेदन पत्र के साथ न होने के कारण आवेदक को सूचित किया गया है।

श्रीमती ऊषा चौधरी--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न था कि रीवा और सतना जिले के अनुसूचित जाति विभाग से मुख्यमंत्री उर्जीकरण किस-किस वर्ष में कितना-कितना किया गया ? उत्तर यह आया है कि यह कार्य बंद तो नहीं किया गया है लेकिन अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों को उर्जीकरण की कोई भी राशि नहीं दी गई है न ही वर्षवार इसका जवाब आया है.

अध्यक्ष महोदय--आपका प्रश्न क्या था.

श्रीमती ऊषा चौधरी--माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रश्न यह था कि किस-किस वर्ष में अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों के आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा मुख्यमंत्री उर्जीकरण के कितने-कितने कार्य कराए गए.

राज्यमंत्री, सामान्य प्रशासन (श्री लाल सिंह आर्य)--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्या से शायद प्रश्न के उत्तर को ठीक ढंग से पढ़ा नहीं है. मैंने पूरा उत्तर दिया है. वर्ष 2017-18 में भी 169.07 लाख रुपए और 175.71 लाख रुपए का सतना जिले को आवंटन दिया गया है.

श्रीमती ऊषा चौधरी--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह शायद मंत्री जी ने जवाब भी दिया है कि अनुसूचित जाति के अन्तर्गत कोई राशि स्वीकृत नहीं की गई है. एक तरफ मंत्री जी कह रहे हैं कि राशि दी गई है और दूसरी तरफ कह रहे हैं कि कोई राशि स्वीकृत नहीं की गई है. रैगांव विधान सभा क्षेत्र में सतना जिले में अनुसूचित जाति विभाग की राशि दूसरे फण्ड में खर्च कर दी जाती है परन्तु अनुसूचित जाति के लोगों को नहीं दी जाती है. मेरे विधान सभा क्षेत्र में दुर्गापुर के नवस्ता गांव में रामदेव अहिरवार का वर्ष 2014-15, 2015-16 से आवेदन लगा हुआ है. पूरे डाक्यूमेंट्स लगे हुए हैं. ऐसे और भी नाम हैं जैसे गप्पू चौधरी शिवराजपुर के हैं, बबलू प्रजापति खनगढ़, कल्लू कोल खनगढ़ के. यह तमाम ऐसे प्रकरण हैं जो लंबित पड़े हैं.

अध्यक्ष महोदय--आप सीधा प्रश्न पूछ लीजिए न कि सतना जिले में कोई राशि स्वीकृत करेंगे क्या जो प्रकरण लंबित हैं.

श्रीमती ऊषा चौधरी--माननीय अध्यक्ष महोदय, राशि तो स्वीकृत करेंगे लेकिन जिन्होंने यह अनियमितता की है क्या उन्हें सजा देंगे.

अध्यक्ष महोदय--मंत्री जी दोनों बातों का उत्तर दे दीजिए.

श्री लाल सिंह आर्य--माननीय अध्यक्ष महोदय, पंप उर्जीकरण व विद्युतीकरण में पहले आओ पहले पाओ के आधार पर हितग्राहियों के कार्य स्वीकृत किये जाते है. माननीय सदस्या ने जो नाम बताए हैं वे मुझे दे दें. अगर प्रक्रिया से हटकर कोई कार्यवाही हुई होगी. आप सुन लें....

श्रीमती ऊषा चौधरी--माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने कहा कि पहले आओ पहले पाओ. मैं वर्ष 2013-14, 2014-15, 2015-16 की राशि की बात कर रही हूँ. यह उसी समय के पुराने नाम हैं उनके फार्म जमा हैं. सारे डाक्यूमेंट्स संलग्ग हैं उसके बाद भी उनका काम नहीं हो रहा है क्योंकि संबंधित अधिकारी अविनाश पाण्डे...

अध्यक्ष महोदय--आप उत्तर तो ले लें.

श्री लाल सिंह आर्य--आप पूरी बात सुन तो लें.

श्रीमती ऊषा चौधरी--माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे पता है गलत सलत उत्तर देना है आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है. मैं इतना जानना चाहती हूँ कि जिस अधिकारी ने अनियमितता की है क्या आप उसे सतना जिले से हटायेंगे.

श्री लाल सिंह आर्य-- माननीय अध्यक्ष महोदय, बहन जी लिख कर दे दें. यदि प्रक्रिया से हटकर कोई काम हुआ होगा तो हम कार्यवाही करेंगे. लेकिन अब विभाग ने निर्णय कर लिया है कि पूरे मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति, जनजाति, की पापुलेशन के अनुपात में अब साल भर की राशि जारी कर दी जाती है. अब ऐसा नहीं होगा कि कहीं से मांग आएगी, कहीं से आवेदन आएँगे, यह प्रक्रिया विभाग ने निर्णय ले लिया है इसलिए किसी भी सदस्य को अब इसमें कोई शिकवा-शिकायत का मौका नहीं मिलेगा.

अध्यक्ष महोदय-- प्रश्न क्रमांक 6...

श्रीमती ऊषा चौधरी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने सही जवाब नहीं दिया.

अध्यक्ष महोदय-- सब प्रश्नों की आपको अनुमति नहीं देंगे.

श्रीमती ऊषा चौधरी-- अध्यक्ष महोदय, जिस संबंधित अधिकारी ने अनियमितताएँ की हैं, उनकी सजा की बात इन्होंने नहीं कही है.

अध्यक्ष महोदय-- वह कही है, उन्होंने कहा कि आप लिख कर दे दीजिए तो वे जाँच कराएँगे.

श्रीमती ऊषा चौधरी-- अध्यक्ष महोदय, लिख कर नहीं, सदन में कहें ना. अध्यक्ष महोदय, डीओ दूसरे आ गए हैं, लेकिन अविनाश पाण्डे अभी वहीं जमे हुए हैं, वे वहाँ पर बाबू के पद पर जमे हुए हैं और डीओगिरी पूरी वही चला रहे हैं. अध्यक्ष महोदय, नये व्यक्ति को वहाँ काम करने ही नहीं दे रहे हैं. दूसरी बात, अध्यक्ष महोदय, मैंने कहा है 2013-14 में पुष्पराज बागरी के घर में आठ लाख का एक ट्रांसफार्मर का प्रकरण बनाया गया था, लेकिन इन गरीबों को एक-एक, डेढ़-डेढ़, लाख नहीं दिए गए हैं. ये अनियमितताएँ अगर डीओ ने की, अविनाश पाण्डे ने, तो क्या उसको माननीय मंत्री जी सस्पेण्ड करेंगे और सतना जिले से हटाकर दूसरी जगह करेंगे?

अध्यक्ष महोदय-- जो प्रकरण इन्होंने बताए हैं, उनकी आप जाँच करा लें और जाँच उपरान्त उपयुक्त कार्यवाही करें.

श्री लाल सिंह आर्य-- अध्यक्ष महोदय, मैंने कहा ना, आप लिख कर दे दें. मैं उसकी जाँच करा लूँगा और जाँच में अगर दोषी पाए जाएंगे तो कार्यवाही करेंगे.

श्री यादवेन्द्र सिंह-- अध्यक्ष महोदय, एक साल से पैसा पड़ा है उसका कोई मालिक है? आपके ट्रायबल विभाग का पैसा पड़ा हुआ है, विद्युत विभाग का, एक साल से करोड़ों रुपया है...(व्यवधान)..

श्रीमती ऊषा चौधरी-- इस सदन के अन्दर जाँच नहीं हो रही है क्या? सदन से बड़ी कार्यवाही क्या हो सकती है?

अध्यक्ष महोदय-- यहाँ जाँच नहीं होती है. प्रश्न क्रमांक 6 श्री शैलेन्द्र जैन.

श्रीमती ऊषा चौधरी-- जाँच में ही तो आया है. अध्यक्ष महोदय, जाँच से ही तो विधान सभा में आता है. माननीय मंत्री जी बचाने का काम क्यों कर रहे है?

अध्यक्ष महोदय-- आपको बहुत समय दिया. आपकी बात भी आ गई, आपका काम भी हो रहा है. प्रश्न क्रमांक 6.

श्रीमती ऊषा चौधरी-- अध्यक्ष महोदय, जवाब नहीं आ रहा है, मैं बैठूंगी नहीं. (XXX) क्यों बचाना चाह रहे हैं?

अध्यक्ष महोदय-- आप बैठ जाएँ, यह कार्यवाही से निकालिए. यह बात ठीक नहीं है.

श्रीमती ऊषा चौधरी-- अध्यक्ष महोदय, रिश्ता कोई असंवैधानिक शब्द नहीं है. रिश्ते अगर खतम हो जाएँगे तो यह भारत खतम हो जाएगा. रिश्ता कोई असंवैधानिक शब्द नहीं है कार्यवाही से न निकाला जाए. (xxx)

अध्यक्ष महोदय-- प्रतिपक्ष के नेता जी खड़े हैं आप कृपा करके बैठ जाएँ. यह कार्यवाही में नहीं लिखा जाएगा.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह जो माननीय मंत्री महोदय ने अभी कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति, का पैसा इस साल से वह हो जाएगा. बात यह नहीं है कि इस साल से हो जाएगा, लेकिन जो यादवेन्द्र सिंह जी ने अभी बात कही, जो ऊषा चौधरी जी कर रही हैं, उनका मसला दूसरा है, अनेक जिलों में अनुसूचित जाति, जनजाति, के विद्युत पंपों के लिए जो पैसे पड़े हैं, उसका उपयोग नहीं हो रहा है. उस पर आप कुछ कार्यवाही करेंगे?

श्री शंकरलाल तिवारी-- अध्यक्ष महोदय, किसी जाति विशेष पर अनर्गल आरोप लगा करके और उस अधिकारी को प्रताड़ित करने का प्रयास भी नहीं होना चाहिए...(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- तिवारी जी, बैठ जाएँ.

श्री अजय सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, हम सिर्फ पैसे की बात.... ...(व्यवधान)..

श्री शंकरलाल तिवारी-- मैं बोलना नहीं चाहता था. अधिकारियों पर अनर्गल दबाव बनेगा और उन्हें प्रताड़ित करना, यह भी ठीक नहीं है...(व्यवधान)..

श्री अजय सिंह-- हमरे ऊपर काहे हल्ला कर रहे हों? ...(व्यवधान)..

श्रीमती ऊषा चौधरी-- (xxx)

अध्यक्ष महोदय-- आप कृपया बैठ जाएँ. नेता प्रतिपक्ष जी खड़े हैं, वे प्रश्न पूछ रहे हैं. ऊषा चौधरी जी का कुछ नहीं लिखा जाएगा.

श्री अजय सिंह-- अध्यक्ष महोदय, मैंने नीतिगत बात कही, आदरणीय तिवारी जी पता नहीं किस तरफ चले गए? मैंने तो सिर्फ यह कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति, का पैसा विद्युत विभाग में अनेक जिलों में पड़ा है, उपयोग नहीं हो रहा है, उसके लिए कोई समय सीमा बना दें और कार्यवाही हो जाए, चिन्ता यह है.

श्री लालसिंह आर्य-- माननीय अध्यक्ष महोदय, पहले यह होता था कि विभाग में कोई भी प्रकरण आया, कोई भी अधिकारी आया और अपने हिसाब से पैसा ले गया लेकिन हमने इस प्रक्रिया को बंद कर दिया है. विभाग ने अभी निर्णय लिया है और हमने बस्ती विकास की, ऊर्जाकरण की और विद्युतीकरण की एक साल की पूरी एकमुश्त राशि भेज दी है और हमने यह भी तय कर दिया है कि 45 परसेंट राशि छह महीने के अंदर आपको खर्च करना ही पड़ेगी शेष राशि फिर आपको साल भर के भीतर खर्च करना पड़ेगी इसीलिये हम एक ऐसी प्रक्रिया पूरे मध्यप्रदेश के लिए लाये हैं जिससे सभी विधान सभा क्षेत्रों के साथ, सभी गाँवों के साथ न्याय हो सके.

श्रीमती ऊषा चौधरी-- मुझे एक और प्रश्न पूछ लेने दीजिये.

अध्यक्ष महोदय-- आप बैठ जाइए इस प्रश्न पर बहुत लंबा समय हो गया. प्रश्न क्रमांक 6 श्री शैलेन्द्र जैन अपना प्रश्न करें.

 

सागर जिले में विभागीय योजनाओं का क्रियान्‍वयन  

[आदिम जाति कल्याण]

6. ( *क्र. 392 ) श्री शैलेन्द्र जैन : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सागर जिले में अनुसूचित जनजाति वित्‍त एवं विकास निगम द्वारा वर्ष 2014-15 से प्रश्‍न दिनांक तक कौन-कौन से कार्य किये गये हैंप्रत्‍येक कार्य पर व्‍यय राशि सहित बतायें। (ख) सागर जिले में विभाग का कितना अमला हैनामपदकार्यालय स्‍थान सहित बतायेंक्‍या विभाग में प्रश्नांश (क) उल्लेखित समय में जिले में कार्यशाला/प्रशिक्षण किया हैयदि हाँ, तो स्‍थानदिनांकव्‍यय राशि सहित बतायें। (ग) सागर जिले में प्रश्नांश (क) समय में कितने लोगों को कौन-कौन सी गतिविधि से कितने रूपये की राशि एवं अनुदान राशि से लाभान्वित किया गया हैहितग्राही की संख्‍यादिया गया लाभअनुदान राशि वर्ष सहित बतायें। (घ) हितग्राही चयन की क्‍या प्रक्रिया हैयोजनाओं का लाभ लेने हेतु क्‍या दैनिक समाचार पत्रों में विज्ञापन जारी किये गये हैंयदि हाँ, तो प्रति उपलब्‍ध करायें।

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) निगम द्वारा वित्‍तीय वर्ष 2014-15 से मुख्‍यमंत्री स्‍वरोजगार योजना एवं वित्‍तीय वर्ष 2016-17 से मुख्‍यमंत्री आर्थिक कल्‍याण योजना एवं मुख्‍यमंत्री युवा उद्यमी योजना संचालित है। संचालित की जा रही सभी योजनायें बैंकों के माध्‍यम से संचालित हैं एवं अनुदान राशि नोडल बैंक के माध्‍यम से ऑनलाईन प्रदान की जाती है। (ख) सागर जिले में मध्‍यप्रदेश आदिवासी वित्‍त एवं विकास निगम जिला शाखा सागर में श्री शैलेन्‍द्र कुमार,लिपिक सह फील्‍ड इंस्‍पेक्‍टर एवं श्रीमती प्रीति ठाकुरलिपिक सह फील्‍ड इंस्‍पेक्‍टर कुल 02 कर्मचारी कार्यरत हैं निगम कार्यालय सहायक आयुक्‍त आदिवासी विकास टी.सी.पी.सी. परिसर खुरई रोड सागर में संचालित है। प्रश्‍नांश (ककी समयावधि में निगम द्वारा किसी प्रकार की कार्यशाला/प्रशिक्षण का आयोजन नहीं किया गया है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (घ) हितग्राहियों का चयन जिला टास्‍क फोर्स समिति द्वारा किया जाता है योजना का लाभ लेने हेतु सूचना एवं प्रकाशन विभाग के माध्‍यम से प्रेस नोट जारी किया जाता है। समाचार पत्र की छायाप्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।

 

श्री शैलेन्द्र जैन-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न के जवाब में मंत्री महोदय ने जो पत्रक मुझे दिया है उसमें उन्होंने वर्ष 2014-15, 2015-16, 2016-17 की राशि के बारे में जानकारी दी है लेकिन उसमें इस बात का उल्लेख नहीं है कि अनुदान की राशि उनको प्राप्त हुई है अथवा नहीं हुई है. मेरा कहना यह है कि अनुदान राशि के अभाव में इस लोन की राशि का डिस्बर्समेंट नहीं हो पा रहा है और वास्तविक रूप से उनको लाभ नहीं मिल पा रहा है तो यह जो अनुदान की प्रक्रिया है उसका सरलीकरण करने का काम करेंगे क्या. क्योंकि पिछड़ा वर्ग विभाग में जिला स्तर पर अनुदान देने की व्यवस्था है क्या वही व्यवस्था हमारे इस विभाग में भी की जाएगी यह मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं.

राज्य मंत्री, सामान्य प्रशासन विभाग(श्री लाल सिंह आर्य)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, अनुसूचित जाति और जनजाति विभाग में भी अनुदान देने की प्रक्रिया है और परिशिष्ट (क) में मैंने इसका उत्तर भी दिया है उस उत्तर में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना वर्ष 2014-15, 2015-16 मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना वर्ष 2016-17 और मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना वर्ष 2017-18, इनमें आप देखेंगे तो हमने अनुदान की राशि जारी की है.

श्री शैलेन्द्र जैन-- अध्यक्ष महोदय, अनुदान की राशि के बारे में कोई उल्लेख नहीं है यह राशि का जो लोन का प्रकरण है यह स्वीकृत राशि का उल्लेख किया जा रहा है. अनुदान राशि के अभाव में वह राशियों का डिस्बर्समेंट नहीं हो पा रहा है उसका सरलीकरण करेंगे क्या ?

श्री लाल सिंह आर्य-- माननीय अध्यक्ष महोदय, पहले ही निर्देश जारी हो चुके हैं आप कहें तो मैं पूरी सूची पढ़ देता है और कहें तो माननीय सदस्य को उपलब्ध करा दूँगा. पूरी अनुदान की राशि हमने जारी की है. जिन-जिन के भी प्रकरण हैं. यह किराना दुकान जो है, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में, इसमें 15 हितग्राही थे, इसकी स्वीकृत राशि 10.50 लाख रुपये थी और इसकी अनुदान राशि 3.15 लाख हमने जारी की है. जनरल स्टोर में 5 हितग्राही थे और इसकी स्वीकृत राशि ढाई लाख रुपये थी इसमें 75 हजार हमने अनुदान राशि जारी की है. इसी प्रकार से हमने पांचों वर्षों में अनुदान राशि जारी की है.

अध्यक्ष महोदय-- वह यह कह रहे हैं कि यह प्रक्रिया जटिल है इसीलिये अनुदान राशि देर से आती है या कई बार वह नहीं आ पाती है तो क्या इस प्रक्रिया का सरलीकरण करेंगे ताकि वह राशि समय सीमा में आ सके.

श्री शैलेन्द्र जैन-- अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न दिनाँक के पहले वर्ष 2014-15 से प्रश्न दिनाँक तक कितनी अनुदान की राशि बकाया है?

अध्यक्ष महोदय-- आप सिर्फ बकाया राशि बता दीजिये यदि आपके पास फिगर्स हों तो और उन्होंने जो कहा कि सरलीकरण करें ताकि राशि समय पर आ सके.

श्री लाल सिंह आर्य-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे पास जहाँ तक जानकारी है, अनुदान की जो राशि है जितने प्रकरण स्वीकृत हुए थे, उसमें जारी कर दी गई है. प्रक्रिया के सरलीकरण की जो बात वह कह रहे हैं उसकी हम समीक्षा करेंगे और उसका और सरलीकरण कर देंगे.

अध्यक्ष महोदय-- माननीय सदस्य कह रहे हैं कि सब में राशि जारी नहीं हुई है. आप उसकी जाँच करा लें.

श्री शैलेन्द्र जैन-- माननीय अध्यक्ष महोदय, सालों बीत जाते हैं अनुदान की राशि नहीं आ पा रही है यह वास्तविकता है इसको स्वीकार करना पड़ेगा और जैसे पिछड़ा वर्ग विभाग में व्यवस्था है वैसी व्यवस्था क्या इस विभाग में लागू की जा सकती है.

अध्यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी, जैसी व्यवस्था पिछड़ा वर्ग विभाग में है वैसी व्यवस्था लागू कर सकते हैं क्या?

श्री लाल सिंह आर्य-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने आपके माध्यम से माननीय सदस्य को कहा है कि जो प्रक्रिया है उसकी समीक्षा हम दुबारा करेंगे और सरलीकरण की प्रक्रिया हम उसमें कर देंगे और किसी स्पेसीफिक प्रकरण में आपको लग रहा है कि अनुदान की राशि नहीं पहुँची है उसकी जानकारी हमको दे देंगे तो हम उसका भी अनुदान पहुंचाने का काम करेंगे.

श्री शैलेन्‍द्र जैन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक प्रश्‍न और कहना चाहूंगा. इन्‍होंने कहा है कि एक भी शिविर, एक भी कार्यशाला आयोजित नहीं की गई है. ये वर्ग उतने शिक्षित नहीं होते. उनको योजनाओं के बारे में जानकारी नहीं होती है. क्‍या माननीय मंत्री महोदय ऐसी व्‍यवस्‍था करेंगे कि ऐसे स्‍थानों पर, ऐसे कस्‍बों में कम से कम कुछ शिविर लगा दें. कुछ कार्यशालाएं आयोजित हो जाएं, ताकि उनकी जानकारी लग जाए.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप बैठ जाइए. माननीय मंत्री जी क्‍या ऐसी कार्यशालाएं आयोजित करने के कोई प्रावधान हैं ?

श्री लालसिंह आर्य -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अनुसूचित जाति, जनजाति वित्‍त विकास निगम में जो योजनाएं हितग्राही मूलक हैं वहां ऋण स्‍वीकृत किया जाता है. वहां किसी प्रकार के प्रयोगशाला प्रशिक्षण का प्रावधान नहीं है.

फीडर सेपरेशन योजना का क्रियान्‍वयन

[ऊर्जा]

7. ( *क्र. 853 ) श्री लाखन सिंह यादव : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्‍वालियर जिले के भितरवार विधानसभा क्षेत्र में फीडर सेपरेशन योजना कब प्रारंभ हुई तब से वर्तमान तक कितने व कौन-कौन से ग्रामों को योजना में शामिल किया गयाइन ग्रामों में से कौन-कौन से ग्रामों में विद्युतीकरण कार्य निर्धारित अवधि में पूर्ण हुआगांवों के नाम स्‍पष्‍ट करें। किन-किन ग्रामों में नहीं हुआ तथा क्‍योंअब कब तक पूर्ण कराये जावेंगेस्‍पष्‍ट करें(ख) प्रश्‍न (क) अनुसार क्‍या उक्‍त में से जिन ग्रामों में विद्युतीकरण कार्य पूर्ण हो चुका हैउनमें घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया तथा अब भी कई ग्रामों में खम्‍भे नहीं गड़ेंकई तार नहीं खिचें जहां दोनों कार्य हो गये वहां ट्रांसफार्मर नहीं लगेजहां लगे वहां खराब पड़े हैंइन्‍हें नहीं बदला जा रहा हैइसका कारण बतावें(ग) क्‍या शासन पूर्ण हो चुके ग्रामों में विद्युतीकरण कार्यों की गुणवत्‍ता व कार्यों के अपूर्ण रहने के कारणों की जाँच करायेगा तथा शेष अविद्युतीकरण ग्रामों में विद्युतीकरण के कार्य एक निश्चित समय-सीमा में पूर्ण करवायेगायदि हाँतो कब तकयदि नहींतो क्‍योंकारण सहित स्‍पष्‍ट करें। (घ) विद्युत विभाग में कौन-कौन कर्मचारी/अधिकारी भितरवार विधानसभा क्षेत्र में पदस्‍थ हैंउनका नामपदमुख्‍यालय तथा पदस्‍थापना दिनांक स्‍पष्‍ट करें।

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) भितरवार विधानसभा क्षेत्र के 169 ग्रामों सहित ग्‍वालियर जिले में फीडर विभक्तिकरण योजना के अंतर्गत कार्यों के क्रियान्‍वयन हेतु टर्नकी ठेकेदार मेसर्स ज्‍योति स्‍ट्रक्‍चर्स लि. मुम्‍बई को दिनांक09.8.2011 को अवार्ड जारी किया गया था एवं उक्‍त ठेकेदार एजेन्‍सी द्वारा दिनांक 20.8.2011 को कार्य प्रारंभ किये गये। उक्‍त ठेकेदार एजेंसी द्वारा कार्य में विलंब किये जाने के कारण उससे किया गया अनुबंध अप्रैल-2015 में निरस्‍त कर दिया गया एवं योजना में सम्मिलित शेष कार्यों के क्रियान्‍वयन हेतु निविदा के आधार पर ठेकेदार एजेन्‍सी मेसर्स बजाज इलेक्ट्रिकल्‍स लि. मुंबई को दिनांक 05.07.2016 को अवार्ड जारी किया गया। प्रश्‍न दिनांक तक उक्‍त 169 ग्रामों में से 77ग्रामों में फीडर विभक्तिकरण का कार्य पूर्ण किया जा चुका है तथा 92 ग्रामों में कार्य शेष हैजिसे ठेकेदार एजेन्‍सी से किये गये अनुबंध अनुसार निर्धारित अवधि 28.02.2018 के पूर्व पूर्ण किया जाना संभावित है। उक्‍त योजना में सम्मिलित ग्रामों की वर्तमान में निर्धारित कार्य पूर्णता की अवधिकार्य प्रगति एवं कार्य पूर्ण किये जाने की संभावित तिथि के विवरण सहित ग्रामवार सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। उक्‍तानुसार पूर्व अनुबंधित ठेकेदार एजेन्‍सी द्वारा निर्धारित समयावधि में कार्य नहीं किये जाने के कारण योजना के क्रियान्‍वयन में विलंब हुआ है। (ख) जी नहीं। प्रश्‍नाधीन योजना अंतर्गत पूर्ण किये गये कार्यों में निर्माण सामग्री की गुणवत्‍ता सुनिश्चित किये जाने हेतु सामग्री प्रदाय करने से पूर्व थर्ड पार्टी निरीक्षण एजेन्‍सी के माध्‍यम से सामग्री का निरीक्षण कराने के उपरांत निर्धारित मानक स्‍तर के अनुरूप पाये जाने के बाद ही सामग्री प्रदाय करने हेतु आदेशित किया गया है। टर्नकी ठेकेदार एजेंसी के स्‍टोर में सामग्री प्राप्‍त होने के पश्‍चात् भी मुख्‍य सामग्रियों की रेंडम सेंपलिंग कराई जाकर एन.ए.बी.एल. द्वारा अधिकृत प्रयोगशालाओं में टेस्टिंग कराई जाकर सामग्री की गुणवत्‍ता सुनिश्चित कराई गई है। अत: यह कहना सही नहीं है कि निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है। फीडर विभक्तिकरण योजना के अंतर्गत कृषि एवं गैर-कृषि फीडरों को पृथक करने के साथ-साथ ग्रामों में विद्यमान निम्‍नदाब लाईन के कंडक्‍टर को ए.बी. केबिल द्वारा बदलने एवं मीटरीकरण के कार्य सम्‍पादित किये जा रहे हैं। प्रश्‍नाधीन क्षेत्रान्‍तर्गत उक्‍त योजना में स्‍थापित किये गये ट्रांसफार्मरों में से वर्तमान में एक भी ट्रांसफार्मर खराब नहीं है। जिन ग्रामों में उक्‍त योजनांतर्गत कार्य पूर्ण हो गया हैउनमें योजना में प्रावधानित सभी कार्य पूर्ण कर लिये गये हैं। (ग) उत्‍तरांश (खअनुसार निर्धारित प्रक्रिया के तहत थर्ड पार्टी निरीक्षण एजेन्‍सी द्वारा निर्माण सामग्री की गुणवत्‍ता सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही थर्ड पार्टी निरीक्षण एजेन्‍सी द्वारा कार्य की गुणवत्‍ता में कमी/त्रुटि पाए जाने पर उसका निराकरण संबंधित ठेकेदार एजेन्‍सी से कराया जाता है। अत: गुणवत्‍ता संबंधी जाँच कराए जाने का प्रश्‍न नहीं उठता। उत्‍तरांश (ख) में दर्शाए अनुसार उक्‍त योजना अंतर्गत जिन ग्रामों में कार्य पूर्ण हो गया हैउनमें योजना में प्रावधानित सभी कार्य पूर्ण कर लिये गये हैं। योजना के अंतर्गत शेष 92 ग्रामों में कार्य पूर्ण किये जाने की संभावित तिथि की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'अनुसार है। (घ) भितरवार विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी एवं म.प्र. पावर ट्रांसमिशन कंपनी के कार्यालयों में पदस्‍थ अधिकारियों/कर्मचारियों की पदस्‍थापना दिनांक सहित प्रश्‍नाधीन चाही गई जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र 'एवं 'अनुसार है।

श्री लाखन सिंह यादव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ग्‍वालियर जिले में फीडर सेपरेशन के कार्यों हेतु दिनांक 09.08.2011 को ज्‍योति स्‍ट्रक्‍चर्स लि.मुंबई को एक अवार्ड जारी किया है और उस कम्‍पनी के द्वारा दिनांक 20.08.2011 से कार्य शुरू किया है. लगातार 4 साल यह काम उन्‍होंने किया है और इतनी धीमी गति से उनके द्वारा काम किया गया, जिसकी वजह से इस कम्‍पनी को वहां से ब्‍लैक लिस्‍टेड करके भगा दिया गया. फिर उसके बाद दिनांक 06.07.2016 को बजाज इलेक्ट्रिकल्‍स लि. मुंबई की कम्‍पनी को यह काम दोबारा दिया गया और उस कम्‍पनी के द्वारा आज दिनांक तक लगातार वह काम जारी है. इन दोनों कम्‍पनियों में जो काम किया गया है उसमें बड़ी विसंगतियॉं हैं. विसंगति इस बात की है कि माननीय मंत्री जी ने जो जवाब दिया है उस जवाब में ऐसे कई मजरे-टोले के गांव इसमें चिन्‍ह्ति किए हैं और उसमें लिखा है कि इन गांवों में काम पूर्ण हो चुका है. इसमें गांव के नाम तो ज्‍यादा हैं लेकिन मैं कुछ गांवों के नाम पिन प्‍वाइंट करके उन गांवों के नाम बता देना चाहता हॅूं.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप सीधा प्रश्‍न कर दें. समय कम है. आप नाम मत बताइए.

श्री लाखन सिंह यादव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बोरी पंचायत में चकशीतलपुर गांव है. उसमें बताया गया है कि इसमें काम पूर्ण हो चुका है. जबकि हकीकत यह है कि उस गांव में इस विभाग द्वारा एक भी पोल बिजली का खड़ा नहीं किया गया है और आपने लिख दिया कि काम पूर्ण है. इसी तरह रिचारीकलां के बारे में बताया गया कि काम पूर्ण हो चुका है इसी तरह से बारसबढ़ेरा में न्‍योना, नाथोकापुरा टोढ़ा और नाथोकापुरा ये दो गांवों के लिए लिखा है कि काम पूरा हो चुका है इसी तरह ररूआ में आपके द्वारा जो उत्‍तर दिया गया है कि इनमें काम पूर्ण हो चुके हैं तो मेरा आपके माध्‍यम से यह निवेदन है कि यदि ये काम पूर्ण हो चुके हैं तो आसंदी से निर्देश कर दिए जाएं कि इनकी जॉंच करा ली जाएंगी जिससे पता लग जाएगा कि सच्‍चाई क्‍या है. यह असत्‍य जानकारी इस सदन को दी जा रही है. आपको जानकारी नहीं है और आपने लिख दिया कि पूरे का काम पूर्ण है.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप बैठ जाइए. उत्‍तर आ गया है उनको उत्‍तर तो देने दीजिए.

श्री पारस चन्‍द्र जैन -- यादव जी आप बैठेंगे, तो ही मैं बोलूंगा और आपके अनुकूल ही बोलूंगा आप चिन्‍ता मत कीजिए. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो गावं माननीय सदस्‍य ने बताएं हैं उन सब गांवों की जॉंच की जाएगी और यदि कोई दोषी है तो उसके खिलाफ कार्यवाही भी की जाएगी.

श्री लाखन सिंह यादव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह मेरी विधानसभा के गांव हैं. मैं यह चाहता हॅूं कि जब आपकी जॉंच समिति जाए, क्‍या आप क्षेत्रीय विधायक को उस जॉंच में शामिल करेंगे जिन गांवों का मैंने उल्‍लेख किया है ? कि आपने इनको विद्युत से पूर्ण कर दिया है. मैं चाहता हॅूं कि जब जॉंच समि‍ति जाए तो उस समिति में मुझे शामिल किया जाए.

श्री पारस चन्‍द्र जैन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य को इस जॉंच में बिल्‍कुल शामिल जाएगा.

श्री लाखन सिंह यादव -- माननीय मंत्री जी, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

जनपद पंचायत महेश्‍वर एवं बड़वाह में नई परियोजनाओं की स्‍वीकृति

[नर्मदा घाटी विकास]

8. ( *क्र. 901 ) श्री राजकुमार मेव : क्या राज्‍यमंत्रीनर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विभाग द्वारा किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराने हेतु नर्मदा नदी से सामूहिक सिंचाई एवं माईक्रो सिंचाई परियोजनाएं तैयार कर स्‍वीकृत करने की कार्यवाही की गई हैयदि हाँ, तो वर्ष 2017-18 में प्रदेश में कौन-कौन सी सिंचाई परियोजनाएं कितनी लागत की स्‍वीकृत की गई हैं(ख) क्‍या खरगौन जिले में महेश्‍वर विधानसभा क्षेत्र की जनपद पंचायत महेश्‍वर एवं बड़वाह के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराने हेतु कोई नई परियोजना स्‍वीकृति हेतु प्रस्‍तावित हैयदि हाँ, तो कौन-कौन सी(ग) क्‍या प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) के संबंध में महेश्‍वर विधानसभा क्षेत्र की जनपद पंचायत महेश्‍वर एवं बड़वाह के क्षेत्र बड़कीचौकी कवाणाघटयाबैडीरामदढबलसगांवआशाखोपेमपुराकरोंदियाखुर्दहा‍थीदग्‍गड़जिरात,रोस्‍याबारीबाकानेरकुसुम्‍भ्‍याभवनतलाईछोटाभेडल्‍याबडाभेडल्‍याहेलाबाबर आदि के किसानों की कृषि सिंचाई हेतु सुविधा उपलब्‍ध नहीं हैयदि हाँ, तो विभाग द्वारा क्‍या कार्ययोजना तैयार की गईयदि नहीं, तो क्‍यों?  (घ) क्‍या प्रश्‍नांश (ग) के संदर्भ में नर्मदा नदी से किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराने हेतु बजट सत्र फरवरी 2017 में मान. मंत्री महोदय द्वारा आश्‍वासन दिया गया था कि परियोजना हेतु पुन: सर्वे कराया जाकर सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराने हेतु योजना तैयार की जाकर स्‍वीकृति प्रदान की जावेगीक्‍या इस संबंध में विभाग द्वारा कोई योजना तैयार की गई है?यदि हाँ, तो किस प्रकार की योजना तैयार की गई है?

राज्‍यमंत्रीनर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) जी हाँ। वर्ष 2017-18 में नर्मदा नदी से कोई सिंचाई परियोजना स्‍वीकृत नहीं की गई है। (ख) जी नहीं। (ग) जी हाँ। इन ग्रामों में सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराने हेतु ओंकारेश्‍वर परियोजना की नहर में अतिरिक्‍त जल उपलब्‍ध नहीं हैइसलिए कोई भी योजना प्रस्‍तावित नहीं की गई है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) माननीय मंत्री महोदय द्वारा आश्‍वासन दिया गया था कि इन ग्रामों में ओंकारेश्‍वर परियोजना की नहर से सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराने हेतु परीक्षण किया जावेगा। परीक्षण उपरांत परिलक्षित हुआ है कि इन ग्रामों में सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराने हेतु ओंकारेश्‍वर परियोजना की नहर में अतिरिक्‍त जल शेष नहीं है। अत: कोई योजना तैयार नहीं की गई है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्री राजकुमार मेव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सबसे पहले मैं माननीय मंत्री जी और माननीय मुख्‍यमंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि उन्‍होंने महेश्‍वर विधानसभा क्षेत्र में एक-एक खेत में पानी पहुंचाया, उसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद. चूंकि ये हमारे 15 गांव जो अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के हैं. यहां छोटे-छोटे किसान हैं 3 बीघा, 4 बीघा, 5 बीघा, 10 बीघा के किसान है जिनको पानी की अत्‍यंत आवश्‍यकता है वहां पर भी पानी पहुंचाने की कृपा करें. माननीय मंत्री जी का जवाब है कि वहां हम पानी नहीं भेज सकते क्‍योंकि पानी पर्याप्‍त नहीं है. पानी और भी विधानसभाओं में भेजा जा रहा है. पानी इंदौर तक और उज्‍जैन तक भेजा जा रहा है. तो हमारे ये 15 गाव क्‍यों प्‍यासे रहेंगे, मेरा मंत्री जी से सहानुभूतिपूर्वक निवेदन है कि पानी की व्‍यवस्‍था करें, चूँकि आप अनुसूचित जाति कल्‍याण विभाग के मंत्री भी हैं और मेरी विधान सभा भी अनुसूचित जाति की है तथा वहां पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के किसान हैं, उनके लिए पानी की व्‍यवस्‍था कैसे करेंगे, उनके खेत कैसे सिंचित होंगे, कृपया पानी की व्‍यवस्‍था करें, ऐसा मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहूँगा.

श्री लालसिंह आर्य -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे पास ओंकारेश्‍वर बांध से कुल उपलब्‍ध जल की क्षमता 102.80 क्‍यूमेक्‍स है और इस पूरे के पूरे पानी का कहीं न कहीं वितरण किया जा रहा है. माननीय सदस्‍य जिन गावों को पानी देने की व्‍यवस्‍था की बात कर रहे हैं, उतना पानी देने के लिए हमारे पास कलेक्‍शन नहीं है. मैं उनकी संवेदनाए समझ सकता हूँ कि वे उन गावों में पानी चाहते हैं, हमने पहले इसका परीक्षण भी करवा लिया है जल की उतनी क्षमता नहीं होने के कारण यह नहीं हो पा रहा है, भविष्‍य में यदि कभी कोई परियोजना या लाइनिंग का कोई कार्य होता है और कहीं ऐसा संभव होता है तब हम कुछ विचार कर सकते हैं.

श्री राजकुमार मेव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, स्‍थिति यह है कि पूरी विधान सभा पानी से तृप्‍त है, मुख्‍यमंत्री जी के आशीर्वाद से सारे खेतों में पानी पहुँच रहा है, लेकिन हम वे 15 गाव पानी से वंचित रख दें, जोकि अनुसूचित जाति और जनजाति के हैं और वे गरीब किसान हैं, यह ठीक नहीं है. उनके लिए पानी की व्‍यवस्‍था करनी चाहिए, मंत्री जी कम से कम आश्‍वासन तो दें कि हम इतने दिन में या इतने महीने में या इतने साल में वहां पानी की कोई न कोई व्‍यवस्‍था करेंगे, ताकि वे गाव भी सिंचित हो जाएं.

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी, अगर कहीं से वैकल्‍पिक व्‍यवस्‍था की जा सकती हो, तो उसका परीक्षण करा लें.

श्री लालसिंह आर्य -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पिछली बार मैंने आश्‍वासन दिया था, उसका परीक्षण कराया था, क्‍योंकि एक भी गाव को हम नहीं छोड़ना चाहते, जब हम पूरी विधान सभा को ले रहे हैं तो क्‍यों 10-15 गावों को छोड़ दें. हमारे पास पानी ही नहीं है तो हम कहां से देंगे ?

श्री राजकुमार मेव -- अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या उन गाव वालों के साथ यह व्‍यवहार ठीक हो रहा है ? 15 गाव प्‍यासे हैं और पूरी विधान सभा को पानी मिल रहा है, यह व्‍यवहार ठीक नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप वही-वही बातें कर रहे हैं.

श्री राजकुमार मेव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री से निवेदन करना चाहूँगा कि वे कहीं से कुछ तो रास्‍ता निकालें, मैं विधान सभा में जाकर जवाब क्‍या दूंगा कि आपको पानी नहीं मिल पाएगा ? अध्‍यक्ष जी, माननीय मंत्री जी से कुछ तो आश्‍वासन दिलवाएँ.

अध्‍यक्ष महोदय -- वे फिर से परीक्षण करवाएंगे.

श्री राजकुमार मेव -- अध्‍यक्ष महोदय, वे परीक्षण का बोल नहीं रहे हैं, वे परीक्षण का कहें तो सही, कहीं से तो पानी की व्‍यवस्‍था कराएँ.

अध्‍यक्ष महोदय -- मंत्री जी, अन्‍य व्‍यवस्‍था हो सकती हो तो दिखवाएं, अंडरग्राउंड वाटर या किसी और तरह से.

श्री लालसिंह आर्य -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पूर्वी निमाड़, पश्‍चिमी निमाड़ में पठारी इलाकों में भी कभी पानी नहीं पहुँच रहा था, हमने पानी उपलब्‍ध कराया है, योजनाएँ मंजूर की हैं, लेकिन इन गावों को पानी देने के लिए हमारे पास क्षमता ही नहीं है. मैंने आपको पहले ही बताया कि हमारे पास जल की क्षमता 102.80 क्‍यूमेक्‍स है, इतना ही पानी हम बांट सकते हैं. मैंने कहा है कि भविष्‍य में यदि कोई योजना आई या लाइनिंग निकली तो हमारा क्‍या है, हम उन गावों को भी पानी देंगे, हमें कोई दिक्‍कत नहीं है.

श्री राजकुमार मेव -- मंत्री जी, नर्मदा-क्षिप्रा से वहां पानी उपलब्‍ध करवा सकते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- राजकुमार जी, कृपया बैठ जाइये, बहुत देर हो गई है.

 

 

 

सोन नदी में 11 के.व्‍ही. लाइन क्रासिंग टॉवर की स्‍थापना  

[ऊर्जा]

9. ( *क्र. 533 ) श्रीमती सरस्‍वती सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सिंगरौली जिले के चितरंगी विधान सभा क्षेत्र अन्‍तर्गत खटाई माची खुर्द/माचींकला के मध्‍य सोन नदी में 11 के.व्‍ही. लाइन के क्रासिंग टॉवर लगाने के लिए शासन स्‍तर से स्‍वीकृति प्राप्‍त हुई हैयदि हाँतो अभी तक विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही हुई(ख) क्‍या उक्‍त निर्माण कार्य के लिये (अभ्‍यारण्य) सोन घड़‍ियाल क्षेत्र संचालक संजय टाईगर रिर्जव सीधी द्वारा अनापत्ति की गई हैयदि हाँतो विवरण दें। यदि नहीं, तो कारण बताएं। (ग) प्रश्नांश (क) और (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में उक्‍त सोन नदी पर क्रासिंग स्‍थल पर टॉवर का निर्माण कार्य कब तक प्रारम्‍भ करा दिया जावेगा?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) प्रश्‍नांश में उल्‍लेखित 11 के.व्‍ही. लाईन की सोन नदी क्रासिंग हेतु टॉवर लगाए जाने के कार्य की स्‍वीकृति पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा प्रदान की गयी है। उक्‍तानुसार टॉवर लगाये जाने का कार्य म.प्र. पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा किया जाना है। म.प्र. पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा उक्‍त कार्य हेतु प्राक्‍कलन स्‍वीकृत कर सर्वे का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। (ख) सोन नदी क्रासिंग में सोन घड़ि‍याल अभ्‍यारण्‍य होने के कारण प्रश्‍नाधीन प्रकरण में टॉवर लगाये जाने की अनुमति प्रदान करने हेतु मुख्‍य वन संरक्षक एवं क्षेत्र संचालक संजय टाईगर रिजर्व सीधी को पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा पत्र दिनांक 08.02.2017 द्वारा प्रस्‍ताव प्रेषित किया गया है जिस पर कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। (ग) उत्‍तरांश (ख) में दर्शाए अनुसार स्‍वीकृति प्राप्‍त होने पर म.प्र. पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा टॉवर लगाये जाने का कार्य प्रारम्‍भ किया जा सकेगा। अत: वर्तमान में कार्य प्रारंभ किये जाने की निश्चित समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

श्रीमती सरस्‍वती सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने सोन नदी में 11 के.व्‍ही. लाइन के क्रासिंग टॉवर लगाने के लिए प्रश्‍न लगाया था, तो मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहती हूँ कि यह कब तक स्‍वीकृत कर दिया जाएगा ?

श्री पारस चन्‍द्र जैन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सोन नदी क्रासिंग में सोन घड़ियाल अभ्‍यारण्‍य होने के कारण वन विभाग की अनुमति की हमें आवश्‍यकता है. इसके लिए दो मीटिंग्‍स हो चुकी हैं, अगली मीटिंग में यह हो जाएगा. म.प्र. पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा टेंडर भी जारी कर दिए गए हैं. बरसात के कारण देरी हो रही है, जैसे ही वन विभाग से हमें परमिशन मिल जाएगी, यह कार्य अतिशीघ्र कर दिया जाएगा.

श्रीमती सरस्‍वती सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहती हूँ कि कब तक बैठक बुला ली जाएगी, कब तक अनुमति मिल जाएगी, क्‍योंकि यह बहुत जरूरी है.

श्री पारस चन्‍द्र जैन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वन विभाग का मामला है, हम देरी नहीं कर रहे हैं, हमने तो टेंडर तक कर लिए हैं, जैसे ही वन विभाग से हमें अनुमति प्राप्‍त हो जाएगी, हम यह कार्य करा देंगे.

अध्‍यक्ष महोदय -- वन मंत्री जी बैठे हैं, कुछ कह रहे हैं.

वन मंत्री (डॉ. गौरीशंकर शेजवार) -- अध्यक्ष महोदय, स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड से पास करके इसको सेंट्रल वाइल्ड लाइफ बोर्ड को भेज दिया है. मेरे पास अभी इसका कागज नहीं है, इसलिये मैं अधिकृत जानकारी से नहीं कह सकता.  लेकिन ऐसा मेरा अनुमान है कि इस प्रकरण को भेज दिया है. केंद्र से पास हो जायेगा, तब इसका काम होगा. अध्यक्ष महोदय, आपने क्योंकि एकदम से मुझसे पूछा, तो मैं बिलकुल परफेक्ट जानकारी तो नहीं दे सकता,लेकिन मेरा ऐसा अनुमान है कि भेज दिया गया है.

श्रीमती सरस्वती सिंह -- अध्यक्ष महोदय, वहां पुरानी लाइट पहले से खींची गई है और वहां सोन नदी में जब बाढ़ आ जाती है, तो वह तार उसमें खराब हो जाते हैं. मैं चाहती हूं कि इसको तत्काल किया जाये.

अध्यक्ष महोदय -- वह प्रक्रिया में है. वह जल्दी कर रहे हैं.

ग्रामीण बस्तियों/मजरे टोलों में विद्युतीकरण

[ऊर्जा]

10. ( *क्र. 870 ) श्री गिरीश भंडारी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र. शासन द्वारा घरेलू विद्युत (सिंगल फेस) 24 घण्‍टे विद्युत सप्‍लाई देने का नियम हैयदि हाँतो क्‍या नरसिंहगढ़ विधान सभा क्षेत्र के ग्रामों की बस्‍तियाँ/मजरे टोले व जो किसान खेतों पर रह रहे हैं, उनको 24 घण्‍टे बिजली दी जा रही है? (ख) प्रश्‍न की कण्डिका (क) की जानकारी अनुसार यदि 24 घण्‍टे बिजली दी जा रही है, तो उन ग्रामों की सूची उपलब्‍ध करावें(ग)नरसिंहगढ़ विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत कितने ग्राम हैं, जहां किसानों को 24 घण्‍टे बिजली नहीं मिल रही है व उक्‍त ग्रामों को 24 घण्‍टे बिजली कब तक उपलब्‍ध करा दी जावेगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँविद्युतीकृत राजस्‍व ग्रामों के मुख्‍य आबाद क्षेत्र एवं ऐसे ग्रामों के विद्युतीकृत मजरों/टोलों/बस्तियों में गैर कृषि फीडरों के माध्‍यम से 24 घंटे विद्युत प्रदाय किये जाने का प्रावधान है तथा उक्‍तानुसार प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में भी विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। तथापि नरसिंहगढ़ विधानसभा क्षेत्र की 12 बस्तियों/मजरों/टोलों तथा खेतों में निवासरत किसानों को कृषि फीडर के माध्‍यम से 10 घन्‍टे विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। उक्‍त12 बस्तियों/मजरों/टोलोंजिनकी सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'अनुसार हैको 24 घंटे विद्युत प्रदाय करने हेतु गैर-कृषि फीडर से जोड़ने का कार्य दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना में स्‍वीकृत है। (ख) प्रश्‍नाधीन चाही गई ग्रामवार जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'अनुसार है। (ग) उत्‍तरांश (क) में दर्शाए अनुसार नरसिंहगढ़ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत सभी राजस्‍व ग्रामों में गैर-कृषि फीडरों से 24 घंटे विद्युत प्रदाय किया जा रहा है तथा पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' में दर्शाए गए 12 बस्तियों/मजरों/टोलों को गैर-कृषि फीडरों से जोड़कर 24 घंटे विद्युत प्रदाय उपलब्‍ध कराने का कार्य दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना में टर्न-की आधार पर कराए जाने हेतु निविदा कार्यवाही प्रक्रियाधीन हैअत: कार्य पूर्णता की समय-सीमा वर्तमान में बताया जाना संभव नहीं है।

 

श्री गिरीश भंडारी -- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने मेरे प्रश्नांश (ग) के उत्तर में यह कहा है कि नरसिंहगढ़ विधान सभा क्षेत्र के सिर्फ 12 मजरों/टोलों को छोड़कर बाकी सभी गांवों को 24 घण्टे बिजली दी जा रही है. यह इन्होंने इस प्रश्न के उत्तर में दिया है. अध्यक्ष महोदय, मेरा एक अतारांकित प्रश्न इसी को लेकर है और उसमें यह लिख रहे हैं कि 86 गांवों में कार्य प्रगति पर है. अब या तो यह उत्तर सही है या वह उत्तर गलत है, यह मुझे वे बता दें. यह तारांकित प्रश्न संख्या 10 (क्र.870) है और अतारांकित प्रश्न क्र. 873 पर वे अलग जानकारी दे रहे हैं. आप अतारांकित प्रश्न क्र. 873 देख लीजिये. उसमें लिख रहे हैं कि ऐसे ग्रामों में कार्य प्रगति पर है और तारांकित प्रश्न क्र.870 में लिख रहे हैं कि पूरी विधान सभा में 24 घण्टे बिजली दी जा रही है.

अध्यक्ष महोदय -- आप अपना प्रश्न कर दें.

श्री गिरीश भंडारी -- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न यही तो है. आप मेरा प्रश्न समझ चुके हैं कि अभी मेरा जो तारांकित प्रश्न है, उसमें लिख रहे हैं, आप देख लीजिये प्रश्नांश (ग) के उत्तर में लिखा है कि नरसिंहगढ़ विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत सभी राजस्व ग्रामों में 24 घण्टे बिजली दी जा रही है, सिर्फ 12 मजरो/टोलों को छोड़कर. लेकिन अतारांकित प्रश्न क्र. 873 में यह लिखा है कि 86 गांवों में कार्य प्रगति पर है और अभी वहां बिजली नहीं दी जा रही है. यह आप देख लीजिये. यह आज ही की प्रश्नोंत्तरी में दोनों प्रश्न हैं. एक तारांकित है और एक अतारांकित है.

श्री पारस चन्द्र जैन -- अध्यक्ष महोदय, 100 से अधिक आबादी वाले जो होते हैं, उन मजरों, टोलों को हम शामिल करते हैं. 12 बस्तियों/मजरों/टोलों को दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत हमने स्वीकृति दे दी है और मैं सदस्य को बताना चाहता हूं कि जो 12 बस्ती/मजरे/टोले रह गये हैं, इनके ठेकेदार भी तय हो गये हैं और मैं सदस्य को विश्वास दिलाता हूं कि हम इस काम को अतिशीघ्र, बहुत जल्दी कर देंगे.

श्री गिरीश भंडारी -- अध्यक्ष महोदय, आप मेरे दोनों प्रश्न देख लीजिये. एक तरफ यह जानकारी दे रहे हैं कि कार्य पूर्ण हो चुका है और एक तरफ लिख रहे हैं कि कार्य प्रगति पर है. वहां अभी काम चालू ही नहीं हुआ है, जहां इन्होंने लिखा है कि 86 गांवों में कार्य प्रगति पर है और दूसरी तरफ ये लिख रहे हैं कि पूरी विधान सभा क्षेत्र के सब गांव कम्पलीट कर दिये गये हैं, सिर्फ 12 मजरे,टोलों को छोड़कर. अतारांकित प्रश्न क्र. 873 के उत्तर में लिख रहे हैं कि 86 गांवों में कार्य प्रगति पर है, जबकि अभी तक वहां काम चालू ही नहीं हुआ है. वह एक दो गांव नहीं 86 गांव हैं.

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय, एक ही दिन में एक ही विधान सभा से संबंधित दो एक ही जैसे प्रश्नों के अलग अलग उत्तर हैं. तो मंत्री जी स्पष्ट करें कि कौन सा उत्तर सही है. इसी तरह से अधिकारी कुछ भी उत्तर विधान सभा में भेजते हैं, विधान सभा की अवमानना या डर किसी को नहीं बचा है. अध्यक्ष महोदय, आपकी तरफ से भी निर्देश जाने चाहिये.

अध्यक्ष महोदय -- आप बैठ जायें. मंत्री जी, आपको कुछ कहना है.

श्री पारस चन्द्र जैन -- अध्यक्ष महोदय, यदि माननीय सदस्य ऐसी बात कह रहे हैं, लेकिन मेरे ख्याल से ये काम पूरे हो गये हैं, जो 12 बस्तियां,मजरे, टोले ऐसे रह गये हैं, उनको हमने योजना में शामिल भी कर लिया है. अध्यक्ष महोदय, इनका जो उद्देश्य है, वह पूरा भी हो गया है.

श्री गिरीश भंडारी -- अध्यक्ष महोदय, यह अतारांकित प्रश्न संख्या 873 के उत्तर में लिखा है कि 86 गांवों में कार्य प्रगति पर है. यह प्रश्न का जवाब है मेरे पास.

अध्यक्ष महोदय -- उसमें क्या लिखा है.

श्री गिरीश भंडारी -- अध्यक्ष महोदय, इसमें लिखा है कि 86 ग्रामों में कार्य प्रगति पर है.

अध्यक्ष महोदय -- फीडर सेप्रेशन का.

श्री गिरीश भंडारी -- अध्यक्ष महोदय, जी हां, मेरा प्रश्न भी तो विद्युत फीडर सेप्रेशन का ही है.

अध्यक्ष महोदय -- इसमें लिखा है कि फीडर सेप्रेशन का कार्य प्रगति पर है.

श्री गिरीश भंडारी -- अध्यक्ष महोदय, मेरा भी तो वही प्रश्न है. तारांकित प्रश्न क्र. 870 में भी वही प्रश्न है और अतारांकित प्रश्न क्र. 873 में भी वही प्रश्न है.

अध्यक्ष महोदय -- वहां बिजली देने, नहीं देने का प्रश्न नहीं है.फीडर सेप्रेशन का कार्य प्रगति पर है. फीडर सेप्रेशन के साथ अलग अलग व्यवस्था होती है, किन्तु वहां बिजली दी जा रही होगी, इसलिये फीडर सेप्रेशन हो रहा है.

श्री गिरीश भंडारी -- अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि आप मेरा प्रश्न समझ गये हैं कि एक ही विधान सभा में..

अध्यक्ष महोदय -- नहीं, आप तो कोई पाइंटेड प्रश्न पूछ लीजिये, जो आपको काम करवाना हो.

श्री गिरीश भंडारी -- अध्यक्ष महोदय, मेरा यह पाइंटेड प्रश्न है कि यह जो उत्तर दिया है कि पूरे नरसिंहगढ़ विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत सभी राजस्व ग्रामों में गैर-कृषि फीडरों से 24 घण्टे विद्युत प्रदाय किया जा रहा है. इन्होंने यह गलत उत्तर दिया है. यह मैं कह रहा हूं. इसकी जांच कराई जाये.

 

12.00 बजे.

 

अध्यक्ष महोदय -- आप इसकी जांच करा लें.

श्री पारस चन्द्र जैन -- अध्यक्ष महोदय जो सदस्य ने बताया है उसकी हम जांच करा लेंगे.

श्री गिरीश भंडारी -- इसमें लिखा है कि जहां पर गैर कृषि फीडरों के माध्यम से 24 घंटे विद्युत प्रदाय किया जा रहा है. यह सूची मुझे दी गई है. वहीं पर प्रश्न क्रमांक 873 में लिखा जा रहा है कि 86 गावों में कार्य प्रगति पर है. लेकिन उन 86 गावों में आज तक काम चालू नहीं हुआ है. इसकी जांच करा लें.

अध्यक्ष महोदय -- मंत्री जी जिन गांवों में कार्य प्रगति पर लिखा है वहां पर कार्य प्रारम्भ नहीं हुआ है इसकी भी जांच करा लें.

श्री पारस चन्द्र जैन -- आपने भी व्यवस्था दी है हम उस प्रकरण की जांच करा लेंगे. हमें कोई दिक्कत नहीं है.

अध्यक्ष महोदय -- प्रश्नकाल समाप्त.

( प्रश्नकाल समाप्त )

 

 

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, कांग्रेस विधायक दल की तरफ से किसानों के मुद्दे को लेकर एक स्थगन प्रस्ताव दिया है. मैं आपसे आग्रह करना चाहता हूं कि उसे ग्राह्य कर तुरंत चर्चा करवाई जाय.

अध्यक्ष महोदय -- अभी कुछ शासकीय कार्य बाकी रह गया हैं. यदि आप इसको पूरा कर लेने देंगे तो उसके बाद में इस विषय पर विचार कर लेंगे कि चर्चा कराना है या नहीं, ध्यानाकर्षण को छोड़कर, बहुत संक्षेप में इसे कर लेते हैं.

श्री अजय सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, अगर 2 - 4 मिनट में आप अपना काम कर लें तो ठीक है.

अध्यक्ष महोदय -- आज की कार्य सूची में.

श्री अजय सिंह -- नहीं आज की कार्य सूची में तो बहुत सारी चीजें हैं.

अध्यक्ष महोदय -- ध्यानाकर्षण बहुत लंबे हैं इनको कल ले सकते हैं और क्रम 11 तक काम पूरा करना है.

श्री अजय सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, स्थगन का अर्थ क्या है.

अध्यक्ष महोदय -- यह इसलिए कि अभी आपके प्रस्ताव पर विचार चल रहा था. अब आप कह रहे हैं कि चर्चा तत्काल करवायें, शासन से भी पूछ लें क्योंकि बहुत से स्थगन प्रस्ताव कल भी आये हैं.

श्री रामनिवास रावत -- माननीय अध्यक्ष महोदय, सामान्यत: नियमों में यह व्यवस्था है और आपके स्थायी आदेशों में भी यह है कि प्रश्नकाल के बाद में तुरंत स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा ली जाती है, स्थगन प्रस्ताव को उठाया जाता है. हमारा कहना है कि सरकार का जवाब आ जाय. इतने दिन पहले से दिया है. सरकार का जवाब आ जाय ग्राह्य कर लें उसके बाद में 3 बजे से चर्चा कर लें, कौन मना कर रहा है.

अध्यक्ष महोदय -- अभी तो ग्राह्यता पर कोई निर्णय नहीं हुआ है. ग्राह्य करने के बाद में सामान्यत: 3 बजे उसको लेने का नियमों में व्यवस्था है. हालांकि पूर्व में भी सीधे लिये गये हैं. यह तो मैंने प्रतिपक्ष के नेता जी से आग्रह किया था.

श्री रामनिवास रावत -- प्रस्तुत करने की व्यवस्था तो प्रश्नकाल के तुरंत बाद की है. आपके ही नियमों में है, आपके स्थायी आदेशों में है.

अध्यक्ष महोदय -- उठाने की व्यवस्था है, यदि ग्राह्य हो जाय तो 3 बजे चर्चा कराई जायेगी और 2 घंटे में समाप्त हो जायेगी.

श्री रामनिवास रावत -- इसी पर तो निर्णय देना है आपको.

श्री अजय सिंह -- आप माननीय मुख्यमंत्री जी से पूछ लें.

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) -- माननीय अध्यक्ष महोदय बहुत महत्वपूर्ण विषय है. सदन को इस पर चर्चा करना चाहिए. नेता प्रतिपक्ष जी ने जो कहा है कि इसकी ग्राह्यता पर तुरंत चर्चा हो, सरकार इससे सहमत है आप तुरंत चर्चा करवायें.

अध्यक्ष महोदय -- पहले शासन का उत्तर सुन लें फिर ग्राह्यता और अग्राह्यता के बारे में चर्चा करेंगे. अगर दोनों पक्ष सहमत हों तो औपचारिक कार्यवाही पूरी कर लें. ध्यानाकर्षण छोड़कर बाकी में आधा घंटा लगेगा.

श्री अजय सिंह -- ठीक है कर लीजिये.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार -- अध्यक्ष महोदय, मेरा आपसे निवेदन है कि पहले प्रस्ताव तो सदन के सामने आये. अध्यक्ष महोदय सामान्य तौर पर प्रक्रिया यह है कि आप स्थगन प्रस्ताव पढ़ देंगे. सरकार की तरफ से उसका जवाब आ जायेगा. इसके बाद में अगर ग्राह्यता पर चर्चा करना है तो ग्राह्यता पर करवायें और अगर स्वीकृत करके चर्चा करवाना है और माननीय मुख्यमंत्री जी ने तो यह कह ही दिया है कि हम चर्चा के लिए तैयार हैं तो औपचारिक रूप से प्रस्ताव आ जाय. इसके बाद में आपको अन्य कार्य निपटाना है तो चर्चा के लिए आप आधा घंटे बाद या 15 मिनट के बाद में या 3 बजे जब आप उचित समझें तब चर्चा प्रारम्भ करवा सकते हैं. मुख्यमंत्री जी ने तो यह कहा है कि आप तत्काल चर्चा प्रारम्भ करवा लें हमें कोई तकलीफ नहीं है.

श्री रामनिवास रावत - आसंदी के निर्देश में भी आप हस्तक्षेप करेंगे?

अध्यक्ष महोदय - दोनों बात कर सकते हैं. वहां से यह प्रस्ताव आया कि स्थगन प्रस्ताव के रूप में भी चर्चा कराई जाय.

श्री गोपाल भार्गव - अध्यक्ष जी, समझ में आ गया, पूत के गुण पालने में दिख गये. तैयारी-वय्यारी कुछ है नहीं, अब 3 बजे का समय है?

श्री रामनिवास रावत (XXX) आप इस तरह की बातें कर रहे हैं. कराओ चर्चा शुरू, किसने मना किया है? आप चर्चा शुरू कराओ.

श्री गोपाल भार्गव - मुख्यमंत्री जी कह रहे हैं तुरन्त चर्चा कराएं, क्यों 3 बजे, क्यों 5 बजे?

श्री रामनिवास रावत - चर्चा कराओ, कैसे कह रहे हैं कि तैयारी नहीं हैं, किसान आज परेशान है. किसान रोज आत्महत्या कर रहा है.

श्री गोपाल भार्गव -..अध्यक्ष महोदय, आप अभी चर्चा कराएं, इसी वक्त चर्चा कराएं, इसी मिनट करवाएं. आप चर्चा शुरू करवाएं, चुनौती है. चुनौती है, चर्चा शुरू करवाएं.

श्री रामनिवास रावत -तुम मुख्यमंत्री नहीं हो. (व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय - मेरा माननीय मंत्रीगण से अनुरोध है...

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, आसंदी के निर्णयों पर, आसंदी के निर्देशों पर आपत्ति नहीं किया करें.

श्री गोपाल भार्गव - एक महीने से बाहर चिल्ला रहे हैं, (XXX)

अध्यक्ष महोदय - यह कार्यवाही से निकाल दें.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) - अध्यक्ष महोदय, यह क्या बात हो रही है? (व्यवधान)..माननीय मुख्यमंत्री महोदय, यह किस तरह से बात कर रहे हैं?

अध्यक्ष महोदय - यह कार्यवाही से निकाल दिया है.

श्री अजय सिंह - लेकिन यह किस तरह से बात कर रहे हैं?

श्री रामनिवास रावत - यह किसानों की समस्या के लिए कितने संवेदनशील हैं, यह स्पष्ट हो रहा है.

श्री अजय सिंह - गोपाल भार्गव ने मानसिक संतुलन खो दिया है.

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी को माफी मांगना चाहिए. यह घोर आपत्तिजनक है. क्या सदन में इसी तरह से कोई भी सदस्य किसी के लिए कुछ भी बोलेगा? कभी आज तक व्यक्तिगत अपमानजनक बातें नहीं कही हैं. अध्यक्ष महोदय, उनसे माफी मंगवाएं. यह गलत तरीका है.

राजस्व मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्ता) - वह नहीं बोलना चाहिए, अध्यक्ष जी ने वह हटा भी दिया है.

अध्यक्ष महोदय - वह कार्यवाही से निकाल दिया है.

श्री रामनिवास रावत -अध्यक्ष महोदय, हम आपसे कुछ भी कह दें और माफी मांग लें? यह कार्यवाही से निकलना क्या पर्याप्त है?

अध्यक्ष महोदय - एक मिनट आप सुन तो लें.

श्री रामनिवास रावत - कम से कम आप तो डांट दो, सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए?

अध्यक्ष महोदय - आप बैठ तो जाएं. माननीय मंत्रीगण से अनुरोध है.

श्री रामनिवास रावत - आप इतने कमजोर नहीं हैं कि अनुरोध करो, सदन में कोई कैसे बोलेगा, इसके लिए आप डांट सकते हो.

अध्यक्ष महोदय - यह भी आप डिक्टेट करेंगे क्या कि मैं क्या बोलूं? कृपया करके आप भी अपनी सीमा में रहें.

श्री रामनिवास रावत - मैं निवेदन कर रहा हूं. मैं सीमा में हूं. मैंने कुछ अपशब्द नहीं कहे.

अध्यक्ष महोदय - मैं आपकी बात का संज्ञान लेकर ही उनसे बात कर रहा हूं. इसके बाद में आप डिक्टेट करना चाहते हैं, यह बात ठीक नहीं है.

श्री रामनिवास रावत - डिक्टेट करने का अधिकार तो सत्तापक्ष को ही है, मैं डिक्टेट नहीं कर रहा हूं.

अध्यक्ष महोदय - आप बैठ जायं. माननीय मंत्रीगण से मेरा अनुरोध है किसी प्रकार की ऐसी भाषा का उपयोग न करें जिससे सदन में अव्यवस्था फैले, उसकी गरिमा को ठेस पहुंचे. अब आप बैठ जाइए, बात समाप्त हो गई है. डॉ. शेजवार साहब ने जो कहा, उस पर मेरा मत यह है कि प्रतिपक्ष के नेता जी की ओर से एक प्रस्ताव आया था कि इस पर चर्चा शुरू कराई जाय. माननीय सदन के नेता जी ने भी उस पर अपनी सहमति दी है, किन्तु मैंने दोनों पक्षों से अनुरोध किया कि औपचारिक कार्यवाही के बाद में उस प्रस्ताव को पढ़कर आगे कार्यवाही करेंगे और दोनों ने सहमति दे दी, इसलिए अब उसमें कोई नियम प्रक्रियाओं के उल्लंघन का प्रश्न नहीं है.

 

12.08 बजे नियम 267-क के अधीन विषय

अध्यक्ष महोदय - निम्नलिखित माननीय सदस्यों की सूचनाएं सदन में पढ़ी हुई मानी जाएगी.

(1) श्री बलवीर सिंह डंडौतिया

(2) श्री सत्यपाल सिंह सिकरवार

(3) श्री यादवेन्द्र सिंह

(4) श्री मुरलीधर पाटीदार

(5) श्री यशपाल सिंह सिसौदिया

(6) श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा

(7) श्री सुखेन्द्र सिंह

(8) श्री शैलेन्द्र पटेल

(9) श्री सुन्दरलाल तिवारी

(10) सुश्री हिना लिखीराम कावरे

 

12.09 बजे अध्यादेशों का पटल पर रखा जाना

 

(1) मध्यप्रदेश जैव अनाश्य अपशिष्ट (नियंत्रण) संशोधन अध्यादेश, 2017 (क्रमांक 1 सन् 2017),

(2) मध्यप्रदेश मंत्री (वेतन तथा भत्ता) संशोधन अध्यादेश, 2017 (क्रमांक 2 सन् 2017),

(3) मध्यप्रदेश करों की पुरानी बकाया राशि का समाधान अध्यादेश, 2017 (क्रमांक 3 सन् 2017), तथा

(4) मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन अध्यादेश, 2017 (क्रमांक 4 सन् 2017).

 

विधि और विधायी कार्य मंत्री (श्री रामपाल सिंह) - अध्यक्ष महोदय, मैं, भारत के संविधान के अनुच्छेद 213 की अपेक्षानुसार निम्न अध्यादेश -

(1) मध्यप्रदेश जैव अनाश्य अपशिष्ट (नियंत्रण) संशोधन अध्यादेश, 2017 (क्रमांक 1 सन् 2017),

(2) मध्यप्रदेश मंत्री (वेतन तथा भत्ता) संशोधन अध्यादेश, 2017 (क्रमांक 2 सन् 2017),

(3) मध्यप्रदेश करों की पुरानी बकाया राशि का समाधान अध्यादेश, 2017 (क्रमांक 3 सन् 2017), तथा

(4) मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन अध्यादेश, 2017 (क्रमांक 4 सन् 2017)

पटल पर रखता हूं.

 

3. पत्रों का पटल पर रखा जाना.

 

1. जवाहरलाल नेहरु कृषि विश्‍वविद्यालय, जबलपुर (म.प्र.) की वैधानिक आडिट रिपोर्ट वर्ष 2014- 2015(उप संचालक, स्‍थानीय निधि संपरीक्षा, जबलपुर (म.प्र.) द्वारा प्रेषित प्रमुख आपत्तियां, स्‍पष्‍टीकरण हेतु उत्‍तर एवं प्रमण्‍डल की टिप्‍प्‍णियां)

 

किसान कल्‍याण तथा कृषि विकास मंत्री(श्री गौरीशंकर बिसेन)-- अध्यक्ष महोदय, मैं, जवाहरलाल नेहरु कृषि विश्‍वविद्यालय अधिनियम, 1963 की धारा 40 की उपधारा (3) की अपेक्षानुसार जवाहरलाल नेहरु कृषि विश्‍वविद्यालय, जबलपुर (म.प्र.) की वैधानिक आडिट रिपोर्ट वर्ष 2014-2015 (उप संचालक, स्‍थानीय निधि संपरीक्षा, जबलपुर (म.प्र.) द्वारा प्रेषित प्रमुख आपत्तियां, स्‍पष्‍टीकरण हेतु उत्‍तर एवं प्रमण्‍डल की टिप्‍प्‍णियां) पटल पर रखता हूं.

2. मध्‍यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्‍डल का लेखा परीक्षा प्रतिवेदन वर्ष 2015- 2016 (दिनांक 01.04.2015 से 31.03.2016 तक)

 

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री(श्रीमती माया सिंह)-- अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्‍डल (संशोधन) अधिनियम, 1972 की धारा 74 की उपधारा (3) की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्‍डल का लेखा परीक्षा प्रतिवेदन वर्ष 2015-2016 (दिनांक 01.04.2015 से 31.03.2016 तक) पटल पर रखती हूं,

 

3. मध्‍यप्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय विनियामक आयोग का वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखा संपरीक्षण रिपोर्ट वर्ष 2016-2017

 

श्री जयभान सिंह पवैया, उच्‍च शिक्षा मंत्री(श्री जयभान सिंह पबैया)-- अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय (स्‍थापना एवं संचालन) अधिनियम, 2007 (क्रमांक 17 सन् 2007) के तहत बनाये गये नियम, 2008 की धारा 22 एवं 23 की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय विनियामक आयोग का वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखा संपरीक्षण रिपोर्ट वर्ष 2016-2017 पटल पर रखता हूं.

 

 

फरवरी-मार्च, 2017 सत्र के प्रश्नों के अपूर्ण उत्‍तरों के पूर्ण उत्‍तरों का संकलन पटल पर रखा जाना.

अध्यक्ष महोदय-- फरवरी-मार्च 2017 सत्र के प्रश्नों के अपूर्ण उत्तरों के पूर्ण उत्तर खण्ड 10 का संकलन पटल पर रखा गया.

 

नियम 267 - क के अधीन फरवरी-मार्च, 2017 सत्र में पढ़ी गई सूचनाओं तथा

उनके उत्‍तरों का संकलन पटल पर रखा जाना.

 

अध्यक्ष महोदय-- नियम 267-क के अधीन फरवरी-मार्च 2017 सत्र में सदन में पढ़ी गई शून्यकाल की सूचनाएं तथा उनके संबंध में शासन से प्राप्त उत्तरों का संकलन सदन के पटल पर रखा गया.

 

 

 

राज्यपाल की अनुमति प्राप्त विधेयकों की सूचना.

 

अध्यक्ष महोदय-- विधानसभा के विगत सत्र में पारित 11 विधेयकों को माननीय राज्यपाल महोदय की अनुमति प्राप्त हो गई है. अनुमति प्राप्त विधेयकों के नाम दर्शाने वाले विवरण की प्रतियां माननीय सदस्यों को वितरित कर दी गई है. इन विधेयकों के नाम कार्यवाही में मुद्रित किए जाएंगे.

 

 

 

 

अध्यक्षीय घोषणा.

नियम 138(1) के अधीन ध्यानाकर्षण सूचना के संबंध में.

अध्यक्ष महोदय-- आज की कार्यसूची में उल्लेखित ध्यानाकर्षण की सूचनाएं कल दिनांक 19 जुलाई 2017 को ली जाएंगी.

 

 

 

 

 

 

सभापति तालिका की घोषणा.

 

अध्यक्ष महोदय-- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 9 के उपनियम(1) के अधीन, मैं, निम्नलिखित सदस्यों को सभापति तालिका के लिए नाम-निर्दिष्ट करता हूं--

1. श्री कैलाश चावला

2 श्री शंकरलाल तिवारी

3 श्रीमती नीना विक्रम वर्मा

4 श्री ओमप्रकाश वीरेन्द्र कुमार सखलेचा

5 श्री रामनिवास रावत

6 श्री के पी सिंह

 

राज्यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास का वक्तव्य.

 

 

दिनांक 24 मार्च, 2017 को पूछे गये परिवर्तित अतारांकित प्रश्न संख्या 41 (क्रमांक 5453) के उत्तर में संशोधन के संबंध में.

अध्यक्ष महोदय-- अब श्री लाल सिंह आर्य, राज्य मंत्री,नर्मदा घाटी विकास दिनांक 24 मार्च, 2017 को पूछे गए परिवर्तित अतारांकित प्रश्न संख्या 41(क्रमांक 5453) के उत्तर के भाग (ग) में संशोधन करने के संबंध में वक्तव्य देंगे.

 

गृह मंत्री (श्री भूपेन्द्र सिंह)-- विधान सभा के बजट सत्र,फरवरी-मार्च,2017 में दिनांक 24.03.2017 की प्रश्नोत्तर सूची के पृष्ठ क्रमांक 33 में मुद्रित परिवर्तित अतारांकित प्रश्न संख्या 41(क्रमांक 5453) में निम्नानुसार संशोधन करना चाहता हूं-

प्रश्नोत्तर सूची में मुद्रित उत्तर के भाग -

"वर्तमान परिदृश्य में अभी बताया जाना संभव नहीं है."

 

के स्थान पर कृपया निम्नानुसार संशोधित उत्तर पढ़ा जावे-

 

"जी हां"

 

 

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के प्रबंध मण्डल हेतु तीन सदस्यों का निर्वाचन.

 

किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री(श्री गौरीशंकर बिसेन)-- अध्यक्ष महोदय, मैं, प्रस्ताव करता हूं कि-

 

यह सभा उस रीति से जैसी अध्यक्ष महोदय निर्दिष्ट करें, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम, 1963 (क्रमांक 12 सन् 1963) की धारा 25 की उपधारा (1) के पद (नौ) की अपेक्षानुसार जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के प्रबंध मंडल के लिए राज्य विधान सभा के सदस्यों में से तीन सदस्यों के निर्वाचन के लिए अग्रसर हो.

 

अध्यक्ष महोदय-- प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ.

प्रश्न यह है कि--

 

यह सभा उस रीति से जैसी अध्यक्ष महोदय निर्दिष्ट करें, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम, 1963 (क्रमांक 12 सन् 1963) की धारा 25 की उपधारा (1) के पद (नौ) की अपेक्षानुसार जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के प्रबंध मंडल के लिए राज्य विधान सभा के सदस्यों में से तीन सदस्यों के निर्वाचन के लिए अग्रसर हो.

 

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

 

 

 

11. राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय,ग्वालियर के प्रबंध मण्डल हेतु तीन सदस्यों का निर्वाचन

किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री (श्री गौरीशंकर बिसेन) - अध्यक्ष महोदय, मैं, प्रस्ताव करता हूं कि-

" यह सभा उस रीति से जैसी अध्यक्ष महोदय निर्दिष्ट करें,राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम,2009(क्रमांक 4 सन् 2009) की धारा 27 की उपधारा(2) के पद (नौ) की अपेक्षानुसार राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय,ग्वालियर के प्रबंध मंडल के लिए राज्य विधान सभा के सदस्यों में से तीन सदस्यों के निर्वाचन के लिए अग्रसर हो "

अध्यक्ष महोदय - प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ

प्रश्न यह है कि-

" यह सभा उस रीति से जैसी अध्यक्ष महोदय निर्दिष्ट करें,राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम,2009(क्रमांक 4 सन् 2009) की धारा 27 की उपधारा(2) के पद (नौ) की अपेक्षानुसार राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय,ग्वालियर के प्रबंध मंडल के लिए राज्य विधान सभा के सदस्यों में से तीन सदस्यों के निर्वाचन के लिए अग्रसर हो "

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

 

निर्वाचन का कार्यक्रम

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय,जबलपुर तथा राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय,ग्वालियर के प्रबंध मण्डल हेतु विधान सभा के तीन-तीन सदस्यों के निर्वाचन का कार्यक्रम निम्नानुसार निर्धारित किया जाता है:-

1. नाम-निर्देशन प्रपत्र विधान सभा सचिवालय में मंगलवार,दिनांक 18

जुलाई,2017 को अपराह्न 1.00 बजे तक दिये जा सकते हैं.

2. नाम-निर्देशन प्रपत्रों की जांच मंगलवार,दिनांक 18 जुलाई,2017 को

अपराह्न 2.00 बजे से विधान सभा स्थित समिति कक्ष क्रमांक-6 में होगी.

3. उम्मीदवारी से नाम वापस लेने की सूचना मंगलवार,दिनांक 18 जुलाई,

2017 को अपराह्न 3.00 बजे तक इस सचिवालय में दी जा सकती है.

4. निर्वाचन, यदि आवश्यक हुआ तो मतदान बुधवार,दिनांक 19 जुलाई,

2017 को पूर्वाह्न 11.00 बजे से अपराह्न 3.00 बजे तक होगा.

5. निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व के सिद्धांत के अनुसार एकल संक्रमणीय

मत द्वारा किया जाएगा.

उपर्युक्त निर्वाचन हेतु अभ्यर्थियों के नाम प्रस्तावित करने के प्रपत्र एवं उम्मीदवारी से नाम वापस लेने की सूचना देने के प्रपत्र विधान सभा सचिवालय स्थित सूचना कार्यालय से प्राप्त किये जा सकते हैं.

 

12.17 बजे स्थगन प्रस्ताव

प्रदेश के आंदोलनरत् किसानों पर लाठी चार्ज एवं गोलीचालन होना

अध्यक्ष महोदय - प्रदेश के आंदोलनरत् किसानों पर लाठी चार्ज एवं गोलीचालन से उत्पन्न स्थिति के संबंध में स्थगन प्रस्ताव की 47 सूचनायें प्राप्त हुई हैं.

पहली सूचना डॉ.गोविन्द सिंह

दूसरी सूचना श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा

तीसरी सूचना श्री जितू पटवारी

चौथी सूचना श्री रामनिवास रावत

पांचवीं सूचना श्री शैलेन्द्र पटेल

छठवीं सूचना श्री अजय सिंह

सातवीं सूचना श्री आरिफ अकील

आठवीं सूचना श्री के.पी.सिंह

नौवीं सूचना श्री मुकेश नायक

दसवीं सूचना श्री विक्रम सिंह

ग्यारहवीं सूचना श्री लाखन सिंह यादव

बारहवीं सूचना श्री जयवर्द्धन सिंह

तेरहवीं सूचना श्री हरदीप सिंह डंग

चौदहवीं सूचना श्री कमलेश्वर पटेल

पन्द्रहवीं सूचना श्री महेन्द्र सिंह सिसोदिया

सोलहवीं सूचना श्री नीलेश अवस्थी

सत्रहवीं सूचना सुश्री हिना लिखीराम कावरे

अठारहवीं सूचना श्री ओमकार सिंह मरकाम

उन्नीसवीं सूचना श्री सुन्दरलाल तिवारी

बीसवीं सूचना श्री तरुण भनोत

इक्कीसवीं सूचना कुं.सौरभ सिंह

बाईसवीं सूचना श्री सुखेन्द्र सिंह बना

तेईसवीं सूचना श्री रजनीश सिंह

चौबीसवीं सूचना श्री निशंक कुमार जैन

पच्चीसवीं सूचना श्री यादवेन्द्र सिंह

छब्बीसवीं सूचना श्री हर्ष यादव

सत्ताईसवीं सूचना श्रीमती झूमा सोलंकी

अट्ठाईसवींसूचना श्री रामपाल सिंह

उन्तीसवीं सूचना श्री उमंग सिंघार

तीसवीं सूचना डॉ.रामकिशोर दोगने

इक्तीसवीं सूचना श्री सचिन यादव

बत्तीसवीं सूचना श्री सोहनलाल बाल्मीक

तेतीसवीं सूचना श्री गिरीष भण्डारी

चौतीसवीं सूचना श्री मधु भगत

पैंतीसवीं सूचना श्री संजय उइके

छत्तीसवीं सूचना प्रो.संजीव छोटेलाल उइके

सैंतीसवीं सूचना श्री फुन्देलाल सिंह मार्को

अड़तीसवीं सूचना श्री गोवर्धन उपाध्याय

उन्तालीसवीं सूचना श्री प्रताप सिंह

चालीसवीं सूचना श्री जतन उइके

इकतालीसवीं सूचना श्री योगेन्द्र सिंह

बयालीसवीं सूचना श्रीमती इमरती देवी

तैंतालीसवीं सूचना श्री राम सिंह यादव

चवालीसवीं सूचना श्रीमती सरस्वती सिंह

पैंतालीसवीं सूचना श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर

छियालीसवीं सूचना श्री हेमन्त कटारे

सैंतालीसवीं सूचना श्रीमती शकुन्तला खटीक

सदस्य की हैं.

चूंकि डॉ.गोविन्द सिंह,सदस्य की सूचना पहले प्राप्त हुई है अत: मैं उसे पढ़कर सुनाता हूं :-

प्रदेश में किसानों को फसल की लागत से कम मूल्य मिलने व अन्य मांगों को लेकर 01 जून 2017 से आंदोलन करने की चेतावनी दी गई थी किन्तु राज्य सरकार द्वारा उनकी मांगों की ओर ध्यान नहीं दिया गया तब मजबूर होकर किसान लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को विवश हुए. मालवांचल के पिपल्या हाट में आंदोलनकारी किसानों पर चर्चा कराने की बजाए सरकार ने आंदोलन को कुचलने के लिए निहत्थे किसानों पर लाठी चार्ज कराया. आंसू गैस के गोले दागे गये. इतना ही नहीं गोलीचालन भी किया गया तथा किसानों पर अफीम तस्करी आदि के झूठे मामले दर्ज कर जेल में भेजने का काम किया जिससे किसान आंदोलन समूचे प्रदेश में फैल गया. सरकार द्वरा एक जाति विशेष के लोगों/किसानों को अफीम माफिया घोषित कर उनके विरुद्ध झूठे प्रकरण पंजीबद्ध कर उन्हें जेल भेजने से इस जाति वर्ग के लोगों में सरकार के प्रति तीव्र आक्रोष उत्पन्न हो गया है. सरकार की किसान वोरोधी नीति के चलते विगत कई वर्षों से प्राकृतिक आपदाओं से पीड़ित किसान कर्ज के बोझ तले बुरी तरह से दब गया है और सरकार द्वारा उन्हें कर्ज मुक्त नहीं किये जाने से 10 जून 2017 के बाद से लगातार सीहोर,विदिशा,होशंगाबाद जिले सहित समूचे प्रदेश में लगभग 65 से अधिक किसानों ने कर्ज,फसल खराब होने,फसल बीमा का मुआवजा नहीं मिलने,बिजली के मनमाने बिल आदि को लेकर आत्महत्याएं कर लीं और यह सिलसिला लगातार जारी है. बैतूल जिले में आदिवासी किसान द्वारा खेत में कुंआ खुदवाने के लिए अपने बेटे को 15 हजार रुपये में गिरवी रख दिया गया. प्रदेश में किसानों की आर्थिक स्थिति दयनीय हो चुकी है. खरीफ की फसल हेतु उन्हें खाद,बीज उपलब्ध नहीं हो पा रहा है वहीं दूसरी ओर नकली खाद,बीज बाजार में खुलेआम बिक रहा है. मृतक किसानों के निकटतम् परिजनों को आर्थिक सहायता नहीं दिये जाने तथा आंदोलनकारी किसानों पर दर्ज किये गये प्रकरण वापस नहीं किये जाने से राज्य सरकार के प्रति किसानों में भीषण रोष उत्पन्न हो गया है. स्थिति विस्फोटक बनी हुई है.

अत: इस अविलम्बनीय लोक महत्व के विषय पर आज सदन की कार्यवाही स्थगित र चर्चा कराई जावे.

इसके संबंध में शासन का क्या कहना है.

गृह मंत्री (श्री भूपेन्‍द्र सिंह)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश में कृषकों के हित में निरंतर अनेक फैसले लिये जाते रहे हैं. देश के अन्‍य प्रदेशों महाराष्‍ट्र, गुजरात व उत्‍तरप्रदेश में कृषकों द्वारा सब्‍जी व दूध को नगरों में आने से रोकने की तर्ज पर प्रदेश में कतिपय किसान संगठनों द्वारा कृषक आंदोलन का आव्‍हान दिनांक 01.06.2017 से किया गया. इनकी मुख्‍य मांग ''किसानों को समस्‍त कर्जों से मुक्ति और लाभकारी मूल्‍य पर सभी उपजों को क्रय करने की गारंटी दे केन्‍द्र सरकार'' थी. इस आंदोलन को दृष्टिगत रखे हुये प्रदेश के सभी जिलों को दिनांक 01.06.2017 को निर्देशित किया गया था कि स्‍थानीय स्‍तर पर कृषकों को शासन की नीतियों के संबंध में अवगत करावें तथा आंदौलन की स्थिति में उनसे संवाद कर यह सुनिश्चित करें कि जनजीवन सामान्‍य रहे तथा हिंसा न हो पाये.

दिनांक 01.06.2017 से 10.06.2017 तक ''हाहाकर आंदोलन'' के रूप में किया गया. इस आंदोलन का प्रचार प्रसार मुख्‍यत: सोशल मीडिया के माध्‍यम से किया गया था तथा अलग-अलग जिलों में उनके पृथक-पृथक नेतृत्‍वकर्ता नहीं थे. विगत कुछ माहों से इन चल रही कृषक गतिविधियों तथा आंदोलन की पृष्‍ठभूमि के संबंध में न केवल पूर्ण जानकारी उपलब्‍ध थी अपितु कृषकों के हित में समयोचित निर्णय लिये जाते रहे हैं.

प्रदेश में किसान संगठनों द्वारा फसलों का उचित दाम दिये जाने व अन्‍य जायज मांगों को लेकर किसान संगठनों द्वारा आंदोलन किये गये परंतु किसानों की मांगों के संबंध में विभिन्‍न स्‍तर पर सरकार द्वारा चर्चा कर समाधान किया गया. यह कहना गलत है कि किसान संगठनों की मांगों के संबंध में सरकार गंभीर नहीं है. सरकार द्वारा समय-समय पर समस्‍याओं/मांगों का समाधान किया गया है तथा निरंतर मांगों के संबंध में विशेष ध्‍यान देकर समाधान किया जा रहा है.

दिनांक 01.06.2017 एवं 02.06.2017 को कुछ जिलों में कृषक आंदोलन सड़कों पर आया तथा जिसमें राजनीति से प्रेरित अफवाहों के फैलने के कारण आंदोलनकारियों द्वारा दूध पलटने, सब्‍जी फेंके जाने के प्रयास किये गये. सभी थानों पर पुलिस व प्रशासन द्वारा इन आंदोलनकारियों तथा व्‍यापारियों के मध्‍य हुये विवादों को रोका गया तथा धैर्यपूर्वक समझा कर कानून व्‍यवस्‍था की स्थिति को सामान्‍य बनाये रखा गया.

सोशल मीडिया से हो रहे निरंतर भ्रामक प्रचार के कारण विभिन्‍न स्‍थानों पर सामान्‍य कृषकों को उकसाया जाने लगा कि वे इस आंदोलन में सक्रिय हों. इस घटनाक्रम की गंभीरता को भांपते हुये माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय द्वारा न केवल किसानों के हित के निर्णयों पर विचार किया एवं मुख्‍य सचिव व पुलिस महानिदेशक को निर्देशित किया गया कि वे इस संबंध में सभी जिलों को पुन: व्‍यवस्‍था बनाये रखने हेतु निर्देश प्रसारित करें. दिनांक 03.06.2017 को मुख्‍य सचिव एवं पुलिस महानिदेशक के द्वारा वरिष्‍ठ अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंस ली व पुन: निर्देशित किया कि किसान आंदोलन में किसान नेताओं से संवाद स्‍थापित कर समाधान निकाला जावे तथा यथासंभव बल प्रयोग न करते हुये भी हिंसा को रोका जावे. दिनांक 03.06.2017 को दूध बहाने, सब्जियां फेंकने, नारेबाजी, धरना करने के अतिरिक्‍त चक्‍काजाम व पुलिस बल पर पथराव व हमला करने की घटनायें घटित होना प्रारंभ हो गईं.

माननीय अध्यक्ष महोदय, दिनांक 4.6.2017 को माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा उज्जैन में किसानों के हित में लिये गये निर्णयों को सार्वजनिक रूप से बताया गया परंतु तब तक निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा विभिन्न जिलों में हुये नेतृत्व विहीन आंदोलन को अपने कब्जे में ले लिया गया जिसके कारण आंदोलन में हिंसक घटनायें प्रारंभ हो गईं.

दिनांक 4.6.2017 को रतलाम में कतिपय आंदोलनकारियों एवं असामाजिक तत्वों के द्वारा पुलिस बल पर गंभीर हमले प्रारंभ हो गये, जिसमें पुलिस बल के अधिकारियों को गंभीर क्षति एवं स्थाई क्षति हुई व पुलिस के वाहनों में तोड़फोड़ व आगजनी की गई. रतलाम में सहायक उप निरीक्षक पवन कुमार यादव की आंख में गंभीर चोट आई, जिससे उनकी बांयी आंख की रोशनी स्थाई रूप से चली गई.

दिनांक 5.6.2017 को माननीय मुख्यमंत्री महोदय की घोषणाओं के उपरांत भी मंदसौर में आंदोलन सक्रिय रहा, जिसमें चक्काजाम, रैली, आगजनी, सब्जियां फेंकने एवं हाईवे जाम कर पुलिस पर पथराव के साथ रेलवे की संपत्ति एवं छोटे-छोटे ठेले वालों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास भी होने लगा. इन घटनाओं में असंतुष्ट किसान संगठन, राजनैतिक पार्टियों के कार्यकर्ता शामिल रहे. मंदसौर जिले मे व्यापारियों और आंदोलनकारियों में झड़प भी हुई , जिसके पश्चात आंदोलनकारियों ने व्यापारियों के प्रतिष्ठानों को चिन्हित कर हमला किया. इस टकराव को बढ़ने से रोकने के लिये पुलिस ने न केवल समझाइश देकर प्रयास किया, अपितु आवश्यकतानुसार टियर गैस आदि का भी प्रयोग किया.

दिनांक 5.6.2017 को मंदसौर में जिलादण्डाधिकारी व पुलिस अधीक्षक की आंदोलनकारियों से चर्चा होने के पश्चात भी मंडीरोड दलौदा में दूध डेयरी को नुकसान पहुंचाया गया. सीतामउ में हुई पत्थरबाजी से साम्प्रदायिक तनाव उत्पन्न हुआ. सुवासरा में आंदोलनकारियों द्वारा व्यापारियों की सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाया.

दलोदा में नेश्नल हाईवे पर लगभग 8 घंटे जाम रखा व रेल फाटक की तोड़फोड़ एवं रेल पटरी को नुकसान पहुंचाया गया व रेल यातायात बाघित किया गया. पिपल्यामंडी में व्यापारियों के घर व दुकान में तोड़फोड़ की गई. ऐसी स्थिति में दलौदा में रात्रि 23.00 बजे पुलिस द्वारा टीयरगैस व लाठी चार्ज कर आंदोलनकारियों को खदेड़ा गया.

पुलिस मुख्यालय द्वारा प्रभावित जिलों में अतिरिक्त बल जिसमें केन्द्रीय अर्द्ध सैनिक बल, विसबल की कंपनियां व जिला पुलिस बल को भेजा गया.

दिनांक 6.6.2017 को व्यापारियों व आंदोलनकारियों के बीच हुये विवाद का स्वरूप बड़े रूप में मंदसौर में सामने आया तथा जिले के कई कस्बों में आंदोलनकारियों द्वारा व्यापारियों पर तथा पुलिस कर्मियों पर गंभीर हमले प्रारंभ किये गये. यह स्थिति मंदसौर जिले के कई कस्बों में हुई. प्रात: से ही प्रगति चौराहा, दलौदा, डिगांव चौपाटी, चिरमोलिया, अरनिया, निजामुद्दीन, सीतामउ, सुवासरा, दलौदा रेल, माल्याखेड़ी, पिपल्यामंडी, श्यामगढ़, खात्याखेड़ी, नाहरगढ़, गुराडिया फंटा, सुवासरा में उपद्रव हो रहा था. जहां पर हाइवे जाम कर व्यापारियों की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाना, टोल टैक्स बेरियर पर तोड़फोड़, बीएसएनएल टॉवर में तोड़फोड़, फैक्ट्री में तोड़फोड़, थाना घेराव एवं आगजनी, शासकीय वाहनों को नुकसान एवं पुलिस अधिकारियों पर गंभीर हमलों की घटनायें हो रही थीं. पुलिस के द्वारा जगह जगह पहुंचकर आंदोलनकारियों को लगातार नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा था.

दिनांक 6.6.2017 को मंदसौर में पिपल्या मंडी में आंदोलन के दौरान न केवल हाइवे पर चक्काजाम किया गया बल्कि वाहनों मे तोड़फोड़ व आगजनी की गई व पुलिस पर पथराव किया गया व ऐसी स्थिति में व्यवस्था बनाने आये पुलिस बल पर जानलेवा हमला करने का प्रयास किया गया जिसकी परिणती गोली चालन में हुई. बलवा रोकने के प्रयासों के दौरान 6 लोगों की मृत्यु हुई व 6 घायल हुए. स्थिति को नियंत्रित करने के लिये मंदसौर व पिपल्या मंडी में कर्फ्यू लगाया गया. शासन ने मंदसौर गोली चालन की घटना की न्यायिक जांच आदेशित की है.

दिनांक 7.6.2017 को कर्फ्यू के बावजूद मंदसौर जिले के सुवासरा, टोलप्लाजा, बोतलगंज, नाहरगढ़, कात्याखेड़ी, पिपल्यामंडी, क्यामपुर, भानपुरा, मेलखेड़ा में आगजनी व तोड़ फोड़ की घटनायें घटित हुई, जिसमें पेट्रोल पंप व यूको बैंक में आग लगाने का प्रयास किया गया. वेयर हाउस में आगजनी की गई. हाइवे पर कंटेनरों में आगजनी की गई एवं शासकीय वाहनों व फायर बिग्रेड में आगजनी के अतिरिक्त रेल लाइन को क्षतिग्रस्त किया गया. इस पूरे आंदोलन के दौरान 109 पुलिस अधिकारी, कर्मचारी घायल हुए. इस पूरे आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा 895 टियर गैस सेल का उपयोग किया है. अभी तक की प्राप्‍त जानकारी के अनुसार 29 व्‍यक्तियों को भी आंदोलन के दौरान चोटें आई हैं, जिस पर आंदोलनकारियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कार्यवाही की जा रही है. इस पूरे आंदोलन के दौरान लगभग 325 प्रकरण कायम किये जाकर विवेचना में लिये गये हैं. आंदोलन के दौरान निजी संपत्ति को हुई हानि का आंकलन वर्तमान में प्रक्रियाधीन है एवं अब तक 127 व्‍यक्तियों को रूपये 1 करोड़ 64 लाख की राहत राशि प्रदाय की जा चुकी है.

यह कहना सही नहीं है कि किसानों पर झूठे अफीम तस्‍करी आदि के मामले दर्ज कर जेल भेजने का काम किया गया है, तथ्‍यात्‍मक स्थिति इस प्रकार है कि पुलिस द्वारा साक्ष्‍य के आधार पर ही आरोपी पाये जाने पर आंदोलन में घटित हिंसा के संबंध में आवश्‍यक विधि सम्‍मत कार्यवाही की जा रही है.

यह कहना भी सही नहीं है कि सरकार द्वारा एक जाति विशेष के लोगों, किसानों को अफीम माफिया घोषित कर उनके विरूद्ध झूठे प्रकरण पंजीबद्ध कर जेल भेजा गया तथा जेल भेजने से वर्ग विशेष के लोगों में आक्रोश है आंदोलन के दौरान घटित हिंसा में साक्ष्‍य के आधार पर दोषियों पर कार्यवाही की जा रही है.

यह कहना सही नहीं है कि 10 जून 2017 के बाद से लगातार सिहोर, विदिशा, होशंगाबाद जिले सहित समूचे प्रदेश में लगभग 65 से अधिक किसानों ने कर्ज, फसल खराब होने, फसल बीमा के मुआवजा नहीं मिलने, बिजली के मनमाने बिल को लेकर आत्‍महत्‍या कर ली है.

यह कहना सही नहीं है कि बैतूल जिले में आदिवासी किसान द्वारा खेत में कुंआ खुदवाने के लिये अपने बेटे को पंद्रह हजार रूपये में गिरवी रख दिया गया था. वस्‍तुस्थिति यह है कि दिनांक 07.07.2017 को चाइल्‍ड लाईन बैतूल की चाइल्‍ड हेल्‍प लाईन नंबर 1098 पर कॉलर द्वारा सूचना प्राप्‍त होने पर जिला टॉस्‍क फोर्स समिति द्वारा कार्यवाही संपादित करते हुए बाल श्रमिक को भद्धू झर्रे के निवास स्‍थन पर से मुक्‍त कराया जाकर टॉस्‍क फोर्स के द्वारा श्रमिक की बालिग बहन अनिता पिता किशनलाल के सुपुर्द किया गया. श्रम निरीक्षक बैतूल द्वारा पुलिस अधीक्षक बैतूल को अवगत कराया कि आदतन जांच में बाल श्रमिक को पंद्रह हजार रूपये की प्राप्ति हेतु गिरवी रखना नहीं पाया गया.

वर्तमान में श्रम निरीक्षक बैतूल के अधीन भद्धू झर्रे पिता चिरौंजीलाल झर्रे के विरूद्ध बाल श्रमिक से श्रम कराये जाने के संबंध में बाल श्रमिक (प्रतिषेध एवं विनियम) अधिनियम 1968 के अंतर्गत जांच कार्यवाही प्रचलन में है.

यह कहना भी सही नहीं है कि खेती को लाभ का धंधा बनाने, कृषि रथ घुमाने तथा बलराम तालाब आदि किसानों के हितार्थ के लिये चलाई गई तमाम योजनाएं कागजी साबित हुई हैं. सरकार द्वारा कृषकों के लिये विभिन्‍न कल्‍याणकारी योजनाओं का संचालन सुचारू रूप से किया गया है, जिससे नवीन योजनाओं के बारे में कृषकों को जानकारी प्राप्‍त हुई है, फलस्‍वरूप उत्‍पादन एवं उत्‍पादकता में वृद्धि हुई है, इसका प्रमाण लगातार पांचवी बार प्रदेश को कृषि कर्मण प्राप्‍त हुआ है.

मई 2010 में स्‍वर्णिम मध्‍यप्रदेश बनाने की कल्‍पना एवं कृषि को लाभ का धंधा बनाने के उद्देश्‍य को लेकर चार दिवसीय विधानसभा सत्र बुलाया गया. जिसमें किसानों के हित में घोषणा की गई जो कि धरातल पर आज तक नहीं उतरी यह कहना सही नहीं है, जबकि सरकार द्वारा किसानों के हित में जो घोषणा की गई है, उनका पालन किया गया है, तथा सतत् क्रियान्‍वयन जारी है.

यह कहना भी गलत है कि मुख्‍यमंत्री द्वारा किसान पंचायत भी बुलाई गई जिसमें घोषणाएं की गई और वह घोषणाएं ही रह गई एवं कृषि केबिनेट भी असफल साबित हुई है. सरकार द्वारा मुख्‍यमंत्री की तमाम घोषणाओं की पूर्ति की गई तथा कृषि में विशेष ध्‍यान देकर कृषकों के हित में घोषणाओं की पूर्ति की गई है. जहां त‍क कृषि केबिनेट का सवाल है तो मध्‍यप्रदेश देश में पहला राज्‍य है जहां कृषि केबिनेट का गठन किया गया है, जिसमें किसानों की तमाम समस्‍याओं के नीतिगत निर्णय लिये जाकर उसे अमल में लिया जाता है तथा कृषि केबिनेट सफल सरकार की उपलब्धि है, जिसे देश के अन्‍य राज्‍य भी अपना रहे हैं.

यह कहना भी सही नहीं है कि जैसे-जैसे हम खाद्यान्‍न उत्‍पादन में आत्‍मनिर्भर और हरितक्रांति की उपलब्धि की लहर पर सवार हुए उसका पूरा बोझ ज्‍यादा उपज के दबाव में किसानों को ही झेलना पड़ रहा है. वास्‍तविकता यह है कि कृषि के लिये आवश्‍यक आदान उर्वरक पर भारत सरकार द्वारा अनुदान दिया जाकर उचित मूल्‍य पर कृषकों को उपलब्‍ध कराया जा रहा है.

यह कहना सही नहीं है कि उपज को कई गुना बढ़ाने की मुहिम खाद-कीटनाशकों का प्रयोग बढ़ने से धरती अन उपजाऊ हुई है. सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्‍वयन भारत सरकार की वेबसाइट पर उपलब्‍ध आंकड़ों अनुसार प्रदेश में उर्वरक एवं कीटनाशक का उपयोग अत्‍यन्‍त अल्‍प है एवं प्रदेश में खाद कीटनाशक के उपयोग से भूमि दूषित या अन उपजाऊ जैसी कोई समस्‍या नहीं है.

यह कहना भी सही नहीं है कि म.प्र. में ही बीते डेढ़ माह में करीब 64 से अधिक किसान कर्ज के बोझ को बर्दाश्‍त नहीं करने के बाद फांसी के फंदे पर झूल गए या साहूकारों से तंग आकर कीटनाशक पीकर दुनिया छोड़ गए. पहले ज्‍यादा दरों पर कर्ज दिया जाता था फिर कर्ज की दर घटाते-घटाते शून्‍य कर दिये जाने की बातें सामने आईं लेकिन जिस श्रेणी के कर्ज को ब्‍याज रहित बनाया गया है उससे किसान कर्जदार से और ज्‍यादा कर्जदार बनने के चक्रव्‍यूह में उलझ गया. वास्‍तविकता यह है कि माननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा कृषक सहकारी ऋण सहायता योजना में प्राथमिक सहकारी साख समितियों द्वारा रबी 2015-16 से अल्‍प अवधि फसल ऋण में वस्‍तु ऋण की राशि 10 प्रतिशत अधिकतम रुपये 10,000 प्रति कृषक प्रति वर्ष अनुदान राज्‍य शासन के आदेश दिनांक 31.12.15 से देय है. योजनान्‍तर्गत उन्‍हीं कृषकों को लाभ मिलेगा जिनके द्वारा प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों से लिये गये अल्‍प अवधि ऋण में से नकद ऋण शत प्रतिशत एवं वस्‍तु ऋण की 90 प्रतिशत राशि की अदायगी ड्यू डेट तक जमा की गई, साथ ही शून्‍य प्रतिशत ब्‍याज दर पर अल्‍पकालीन कृषि ऋण सुविधा भी कृषकों के लिये उपलब्‍ध है.

यह कहना सही नहीं है कि किसानों को नकली खाद एवं बीज खुलेआम बाजार में बेचा जा रहा है. पत्र म0प्र0 राज्‍य बीज प्रमाणीकरण संस्‍था के मानकों के आधार पर प्रमाणित बीज ही कृषकों को प्रदाय किया जा रहा है.

कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा नकली बीज सप्‍लाई करने वाली कम्‍पनियों को किसी प्रकार का संरक्षण प्रदान नहीं किया जा रहा है अपितु बीज अधिनियम 1966, बीज नियम 1968 तथा बीज (नियंत्रण) आदेश 1983 के प्रावधानों के तहत कार्यवाही कर उच्‍च गुणवत्‍ता युक्‍त बीज प्रदाय किया जा रहा है.

यह कहना भी सही नहीं है कि प्रदेश में किसान हर तरफ से त्रस्‍त हैं एवं हताश तथा निराश होकर सरकार की उपेक्षा से आत्‍महत्‍या करने के लिए विवश हो रहा है. सरकार की किसान विरोधी नीति को लेकर प्रदेश के किसानों में भीषण रोष एवं आक्रोश व्‍याप्‍त है, स्थिति विस्‍फोटक है. मध्‍यप्रदेश में किसानों की आर्थिक प्रगति उन्‍नयन विभिन्‍न हेतु विभागीय योजनान्‍तर्गत प्रदाय लाभ विवरण निम्‍नानुसार हैं -

        मध्‍यप्रदेश भारत का दूसरा बड़ा कृषि प्रधान राज्‍य है तथा जनसंख्‍या की दृष्टि से इसका स्‍थान सातवां है.

        प्रदेश की वर्ष 2011-12 में कृषि विकास दर 18.91 प्रतिशत आंकी गई है. राज्‍य के लिये 11 वीं पंचवर्षीय योजना में लक्षित 5 प्रतिशत कृषि विकास दर की तुलना में 9.2 प्रतिशत कृषि विकास दर हासिल की गई.

        मध्‍यप्रदेश में किसानों की जोत संख्‍या 79.08 लाख हैक्‍टर है. इनमें से एक हैक्‍टर से कम रकबे वाले किसानों का 40.45% तथा एक से दो हैक्‍टर वाले किसानों का 27.15% है. इन किसानों के पास कुल क्षेत्रफल का 46.05% है. स्‍पष्‍टत: प्रदेश में लघु सीमान्‍त कृषकों का बाहुल्‍य है. इनमें से 9.09% अ.जा. तथा 15.04% अनु.जनजाति के कृषक हैं. सभी वर्गों के किसानों के कल्‍याण के लिये अनेक योजनाएं संचालित हैं. इन योजनाओं में अ.जा. तथा अ.ज.जा. किसानों और लघु सीमान्‍त कृषकों को प्राथमिकता के आधार पर अनुदान दिया जाता है.

        मध्‍यप्रदेश में सहकारी कृषि ऋण पर ब्‍याज की वर्तमान दर शून्‍य प्रतिशत है. इससे पूर्व भी सहकारी ऋण पर ब्‍याज की दर अन्‍य राज्‍यों की अपेक्षा तुलनात्‍मक रूप से कम ही रही है.

पूर्व में किसानों को 15-16 प्रतिशत ब्‍याज दर पर कृषि ऋण मिलता था किन्‍तु वर्ष 2006 से 2008 में 7% वर्ष 2008 - 2010 में 5% वर्ष, 2010 -11 में 3% और 2011 -12 में 1% ब्‍याज दर पर ऋण उपलब्‍ध कराया गया. वर्तमान में ब्‍याज मुक्‍त कृषि ऋण देकर किसानों का वित्‍तीय भार कम करने का प्रयत्‍न राज्‍य शासन द्वारा किया गया है. इस प्रकार साहूकारों और निजी कर्जदाताओं से किसानों को बचाने की पूरी कोशिश शासन द्वारा की जा रही है.

विगत वर्षों में लगातार खेती का रकबा और ज्‍यादातर फसलों का उत्‍पादन तथा उत्‍पादकता बढ़ रही है, धान और गेहूं के समर्थन मूल्‍यों पर अतिरिक्‍त बोनस दिया जा रहा है, जिससे किसानों को उनके परिश्रम का सम्‍मानजनक मूल्‍य प्राप्‍त हो रहा है. सोयाबीन और अन्‍य फसलों के दामों में काफी अच्‍छी वृद्धि हुई है.

प्रधानमंत्री फसल-बीमा योजना अंतर्गत निर्धारित दावा राशि बीमित कृषकों को प्रदान किए जाने का प्रावधान है. तदानुसार कृषकों को योजना अंतर्गत बीमा लाभ प्राप्‍त हो रहा है.

मंडी समितियों से सुगमतापूर्वक आवक तथा विपणन के लिए भी किसानों को कई तरह की सुविधाएं दी जा रही है.

राज्‍य सरकार द्वारा लघु-सीमान्‍त किसानों और कमजोर तथा पिछड़ी सामाजिक स्थिति वाले समुदायों के लिए कई अनुदान योजनाओं में राज्‍य सरकार की ओर से टाप-अप अनुदान देकर आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है.

कृषि कार्यक्रम निर्धारण में किसानों की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है. प्रत्‍येक ग्राम के महिला और पुरुष किसानों को प्रशिक्षण देकर सम्‍पर्क किसान अथवा स्‍थानीय परामर्शदाता के रूप में पहचान स्‍थापित की गई है, जिससे क्षेत्रीय समस्‍याओं को चिन्हित करना आसान हुआ है. प्रदेश में खेती को लाभकारी बनाने के लिए विभाग द्वारा शासन की विभिन्‍न योजनांतर्गत किसानों को अनुदान एवं अन्‍य सुविधाओं का लाभ दिया जा रहा है.

प्रदेश में सहकारी क्षेत्र में 4523 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्‍यम से कृषकों को फसल ऋण, जिसमें नगद, खाद एवं बीज उपलब्‍ध कराया जाता है. वर्ष 2016-17 में राशि रूपए रूपए 11941 करोड़ का अल्‍पकालीन फसल ऋण वितरण किया गया है.

कृषि को लाभ का धंधा बनाने एवं कृषि की लागत कम करने हेतु 2012-13 से 2015-16 तक के लिए राशि रूपए 1819 करोड़ ब्‍याज सहायता कृषकों को उपलब्‍ध कराई गई है.

रबी 2015-16 से मुख्‍यमंत्री कृषक ऋण सहायता योजना लागू की गई, जिसके अंतर्गत अल्‍पकालीन फसल ऋण के वस्‍तु ऋण के भाग पर 10 प्रतिशत प्रतिवर्ष प्रतिकृषक सहायता दी जा रही है. योजनांतर्गत रबी 2015-16 से अभी तक राशि 265 करोड़ कृषकों को उपलब्‍ध कराया गया है.

प्राकृतिक आपदा के कारण फसल क्षति से प्रभावित कृषकों के अल्‍पकालीन फसल ऋण को शून्‍य प्रतिशत ब्‍याज दर पर मध्‍यकालीन ऋण में परिवर्तित किया जाता है. रबी 2012-2013 से 2015-16 तक राशि रूपए 5776.58 करोड़ का ऋण परिवर्तित किया गया है. इस हेतु राशि रूपए 198 करोड़ ब्‍याज अनुदान कृषकों के लिए उपलब्‍ध कराया गया है.

कृषकों को समय पर खाद की उपलब्‍धता सुनिश्चित कराए जाने हेतु खरीफ 2012 से खाद के अग्रिम भंडारण की योजना लागू है. मध्‍यप्रदेश राज्‍य विपणन सहकारी संघ द्वारा वर्ष 2012-13 से 71.76 लाख मीटर टन खाद का अग्रिम भंडारण किया गया है.

मध्‍यप्रदेश राज्‍य बीज सहकारी संघ द्वारा बीज उत्‍पादक सहकारी समितियों के माध्‍यम से वर्ष 2016-17 में 9.08 लाख क्विंटल का बीज का वितरण किया गया है.

राज्‍य शासन द्वारा कृषकों को अपनी उपज का उचित मूल्‍य दिलाए जाने हेतु मध्‍यप्रदेश राज्‍य सहकारी विपणन संघ द्वारा सहकारी समितियों के माध्‍यम से गत वर्ष 2016-17 में 1.04 लाख मी. टन राशि रूपए 62.40 करोड़ तथा वर्ष 2017-18 में 8.76 लाख मी. टन राशि रूपए 700.80 करोड़ का प्‍याज खरीदा गया है.

अत: यह कहना ठीक नहीं है कि स्थिति विस्‍फोटक है और किसानों में भीषण रोष है.

अध्‍यक्ष महोदय - प्रकरण की गंभीरता तथा महत्‍व को देखते हुए इसे चर्चा के लिए ग्राह्य करता हूं तथा दोनों पक्षों की सहमति अनुसार इस पर चर्चा प्रारंभ की जाए. इसके साथ ही माननीय सदस्‍यों से यह अनुरोध है कि प्रकरण में न्‍यायिक जांच की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है, इसलिए इस तरह से चर्चा की जाए ताकि जांच पर कोई प्रभाव न पड़े. साथ ही कृपया पुनरावृत्ति से बचे जिससे यथाशीघ्र चर्चा पूर्ण हो सके और चर्चा की गंभीरता भी बनी रहे.

डॉ गोविन्‍द सिंह (लहार) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय गृह मंत्री जी ने शासन के जवाब में अनेक ऐसी बातों का उल्‍लेख किया जिससे किसान पूरे मध्‍यप्रदेश में ही नहीं समूचे भारत वर्ष में लाभ अर्जित करके आनंद मना रहा है. आपने कहा किसानों को समर्थन मूल्‍य पर बोनस दिया जा रहा है. पिछले तीन वर्षों से न तो आपका समर्थन मूल्‍य धान पर है न ही गेहूं पर है, यह आपने बंद किया है, तमाम और जिसका उल्‍लेख किया था आखिर यह स्थिति बनी क्‍यों पिछले कई वर्षों से माननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा कृषि को लाभ का धंधा बनाने की घोषणा की जाती रही है, पूरे प्रदेश की जनता और किसान, जब लाभ का धंधा बनाने की घोषणाएं करने के साथ इतनी सुविधाएं दी जा रही है तो आखिर किसान आंदोलन करने को क्‍यों मजबूर है. माननीय गृह मंत्री जी ने यह उल्‍लेख नहीं किया, अपने जवाब में कि आखिर गोलीकांड की स्थिति कैसे निर्मित हुई, किसके आदेश से हुई, जबकि वहां के कलेक्‍टर ने स्‍वयं घोषणा की मैंने कोई गोली चालने का आदेश नहीं दिया. माननीय अध्यक्ष महोदय, पिछले 15 वर्षों से खाद,बीज,दवाई, डीजल, कृषि उपकरण, कल्टीवेटर, ट्रेक्टर आदि में लगातार 15 वर्षों में 8 से 10 प्रतिशत मूल्यों में वृद्धि हुई है. जब किसानों को इतना लाभ हो रहा है मुख्यमंत्री जी इतनी घोषणाएं कर रहे हैं, किसानों को लाभ पहुंचा रहे हैं, उनको सुविधाएं दे रहे हैं तो फिर आपकी पार्टी के सांसद प्रहलाद पटेल जी ने क्यों कहा कि मैं किसान हूं मुझे ऋण चुकाने में लाले पड़ते हैं. माननीय मुख्यमंत्री जी ने 28 जून 2017 को मेघावी छात्रों को भोपाल में कहा कि खेती अब लाभ का धन्धा नहीं है इसलिये आप उद्योग लगाईये, खेती बंद करें. यह मुख्यमंत्री जी की घोषणाएं हैं. अगर इस तरह का लाभ किसानों को खेती में हो रहा है तो फिर आज किसान लगातार मध्यप्रदेश में किसान आत्महत्याएं क्यों कर रहे हैं. जहां उत्तरप्रदेश के बाद मध्यप्रदेश देश में ऐसा दूसरा राज्य है. मध्यप्रदेश में 77 लाख 41 हजार 4 सौ किसान आज कर्जदार हैं. विधान सभा प्रश्न क्रमांक 1518 दिनांक 7 दिसम्बर, 2016 इसमें सरकार ने स्वयं स्वीकार किया है कि 1 जुलाई, 2016 से 15 नवम्बर, 2017 तक 521 किसानों, खेतिहर मजदूरों ने आत्महत्याएं कीं. केवल चार-पांच महीने में 600 के आसपास किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं तो फिर खेती को लाभ के धन्धे बताने की घोषणाएं कहां हैं. माननीय मुख्यमंत्री तथा पूरे प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों प्रधानमंत्री को वहां जाकर के अच्छी प्रस्तुतिकरण देते हैं. इस तरह से खेती लाभकारी बनायी गई है और आप भी बनाईये. आप ऐसी कौन सी कला बता रहे हैं कि जिससे किसान आज आत्महत्या करने के लिये मजबूर हैं. अभी तो मध्यप्रदेश में ही इतने किसान मर रहे हैं तो क्या इस प्रकार से आपकी कला से पूरे देश का किसान सुनिश्चित रहेगा. पिछले 7 माह में 215 दिनों में मध्यप्रदेश में 818 कृषक और मजदूरों ने आत्म-हत्याएं की हैं. पूरे मध्यप्रदेश में आत्म हत्याओं का एवरेज लगाएं तो तीन किसान आत्म-हत्या करने को मजबूर हुए हैं. माननीय मुख्यमंत्री जी ने आनन्द मंत्रालय बना दिया. आनन्द मंत्रालय किसके लिये बना. मैं सरकार से पूछना चाहता हूं कि सरकार में बैठे हुए मंत्री, सरकार में बैठे हुए वल्लभ-भवन में बैठे हुए अधिकारी उनके लिये आनन्द मंत्रालय बनाया है या किसानों के लिये. आज मध्यप्रदेश के किसान आनन्द मंत्रालय की योजनाओं से आनन्दित होकर के आत्म-हत्याएं करने को मजबूर हैं. क्यों मध्यप्रदेश में प्रतिदिन तीन किसान मर रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय गृहमंत्री जी ने बताया कि किसानों की जायज मांगों के लिये भी उन्होंने अपना आंदोलन घोषित किया था, परन्तु सरकार ने किसानों की समस्याओं की लगातार अनदेखी की जिससे आंदोलन धीरे धीरे उग्र होता गया. आपने केवल जो आपकी मातृ संस्था है उसका एक मजदूर जो कि आन्दोलन में था ही नहीं उनसे वाहवाही लूटने के लिये उनसे आपने समझौता किया और घोषणा कर दी कि किसानों की सब मांगें मान ली गई हैं. जो किसानों के आंदोलनकारी संगठन थे, पीड़ित थे, परेशान थे, लगातार आंदोलन की सरकार को चेतावनी दे रहे थे कि हमारी मांगें सुनों. खेती की लागत लगातार गिर रही है, उनको खेती का लागत मूल्य मिल नहीं रहा है. खेती घाटे का धन्धा हो गई है. इस प्रकार सरकार ने तानाशाही तरीके से यहां से फरमान दिया माननीय मुख्यमंत्री जी और कहा कि आंदोलन को सख्ती के साथ दबाया जाये और उसका नतीजा यह हुआ कि मध्यप्रदेश की पुलिस ने लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने वाले 6 निर्दोष किसानों की हत्या कर दी. हत्या के लिये सरकार पूरी तरह से दोषी है. जिन लोगों ने हत्याएं कीं और जिनने आदेश दिया उसकी भी जांच होकर के उनके विरूद्ध कार्यवाही होना चाहिये. किसानों पर गोली-चालन हुआ.

अध्‍यक्ष महोदय, मानवाधिकार आयोग और उच्‍च न्‍यायालय का भी निर्देश है कि यदि कोई हिंसक आंदोलन होता है औद यदि गोली चलाने को मजबूर होना पड़े तो गोली कमर के नीचे चलायी जाये, लेकिन वहां पर जो 6 किसानों की हत्‍या हुई है, उन सभी किसानों को जो गोली लगी है, वह किसी के पेट में, कमर में, सीने में, गर्दन में और किसी को भागते हुए गोली लगी है. इसमें तमाम नौजवान किसान पीडि़त और घायल हुए हैं. आंदोलन हुआ तो पहले मुख्‍यमंत्री जी ने कहा कि पुलिस ने गोली चलायी. फिर आपकी सरकार के गृह मंत्री, मुख्‍यमंत्री और आपकी पार्टी के अध्‍यक्ष ने कहा कि गोली पुलिस ने नहीं चलायी है. फिर बाद में सच्‍चाई स्‍वीकार की कि जो किसान मारे गये हैं, वह पुलिस की गोली से मारे गये हैं. इसके बाद सरकार का बयान आता है कि आंदोलन में असामाजिक तत्‍व शामिल हो गये और उन्‍होंने आंदोलन भड़काया. फिर चार दिन बाद बयान आता है कि आंदोलन को कांग्रेसी लोगों ने भड़काने का काम किया. मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि यदि आंदोलन में कांग्रेसी लोग थे, जब आपने छोटे-मोटे किसानों पर गंभीर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर दिये तो उसमें आपको कौन से कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता को उस अपराध में शामिल होने के प्रमाण मिले. इसके बाद 29 जून को मुख्‍यमंत्री जी ने फिर कहा कि इस आंदोलन को भड़काने में अफीम तस्‍करों की साजिश थी, उन्‍होंने ही इस आंदोलन को भड़काया.

आपकी पार्टी के अध्‍यक्ष चौहान साहब कहते हैं कि कोटा में बैठकर यह सारा षड़यंत्र रचा गया. मेरा कहना है कि आप क्‍या कर रहे हैं, आपकी सरकार है, सारे नियम कायदे आपके पास हैं, पुलिस, सीआईडी आपके पास है, फिर आप क्‍या कर रहे हैं. यदि उन्‍होंने भड़काया तो आपने अभी तक कितने लोगों को गिरफ्तार किया. आप सिर्फ निर्दोष किसानों पर आपराधिक मुकदमें लगाकर उनको परेशन कर जेल भेजने का काम कर रहे हैं. मुख्‍यमंत्री जी आप किसान हैं. आप एक एकड़ में 16 लाख रूपये से लेकर 20 लाख रूपये तक कमा सकते हैं. हमारा भी खेती के अलावा और कोई आमदनी का धंधा नहीं है.

मैं आपसे कहना चाहता हूं कि भारत सरकार ने जो समर्थन मूल्‍य जारी किए थे. उसमें अरहर का समर्थन मूल्‍य प्रति क्विंटल 5050 रूपये, मूंग का प्रति क्विंटल 5250 रूपये, उड़द का प्रति क्विंटल मूल्‍य 5000 रूपये, मसूर की दाल का प्रति क्विंटल मूल्‍य 3950 रूपये और सरसों का प्रति क्विंटल मूल्‍य 3700 रूपये. अध्‍यक्ष महोदय, मैं पूछना चाहता हूं कि आज से डेढ़ वर्ष पहले करीब 105 क्विंटल सरसों मैंने खुद बेची थी और उस समय 4800 रूपये प्रति क्विंटल का भाव था. आज पूरे मध्‍यप्रदेश में ग्‍वालियर और चंबल संभाग में सबसे ज्‍यादा सरसों होती है. परंतु आज वहां पर 3100 - 3200 रूपये से ज्‍यादा प्रति क्विंटल का भाव नहीं मिल रहा है. इसी प्रकार मसूर का भाव पिछले दो साल पहले 4800-5800 रूपये क्विंटल रूपये तक बिकी है. लेकिन आज उसका 2700-2800 रूपये तक का भाव है. अर्किल मटर का बीज हम लोग इस वर्ष उत्‍तर प्रदेश से 12000 रूपये क्विंटल में लाये थे. वह खेतों में बोया. पिछले साल अर्किल मटर का बीज मेरठ के व्‍यापारी जो लेकर गये थे, उन्‍होंने 12000 रूपये क्विंटल में खरीद लिये था. लेकिन इस बार सरकार की नीति के चलते उन्‍होंने कह दिया कि इसमें तमाम बीमारियां पैदा हो रही हैं. आज किसान वह जो अर्किल मटर है, वह 100 रूपये किलो में बिकती थी, वह मटर आज 1200-1300 रूपये क्विंटल में बेचने को मजबूर है और वह पशुओं के आहार में जा रही है. उस मटर को कोई लेने को तैयार नहीं है. यह आपकी भारत सरकार की नीति के तहत किसानों को पीडि़त करने का काम चल रहा है.

इसी प्रकार मालवा क्षेत्र में 2015 में सोयाबीन 4500 रूपये क्विंटल बिकता था, उसका वर्तमान मूल्‍य 2500-3000 रूपये है. चना जो 2015 में 6000-8000 रूपये प्रति क्विंटल था, वह आज 4000-5000 रूपये प्रति क्विंटल है. मैथी 5000-6000 क्विंटल थी वह आज 2000-2700 क्विंटल बिक रही है. धनिया 5000-6000 रूपये प्रति क्विंटल था, आज 2500-4000 रूपये धनिया का भाव है. अलसी का भाव पहले 4500-6000 था जो आज 3800-4000 रूपये प्रति क्विंटल हो गया है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, किसानों की दुर्दशा हो गई है वे बहुत परेशान हैं. मैं बताना चाहता हूं कि सरकार की नीति है कि वह बीज के बिचौलिओं और व्‍यापारियों को लाभ पहुंचाये. आलू का उत्‍पादन हमारे क्षेत्र में ही अधिक होता है. हमारे क्षेत्र से उत्‍तरप्रदेश लगा हुआ है. इटावा, फिरोज़ाबाद और कानपुर के प्रत्‍येक जिले में 100-200 कोल्‍ड-स्‍टोरेज हैं. वहां गांव-गावं में कोल्‍ड-स्‍टोरेज बने हुए हैं. मैं जनवरी का उदाहरण देना चाहता हूं. जनवरी में टमाटर 4 रूपये प्रति किलो की दर से बिक रहा था. आज भोपाल की मंडी में टमाटर 120 रूपये प्रति किलो बिक रहा है. जब किसान के यहां फसल आती है तो भाव पूरी तरह से गिर जाते हैं और जब व्‍यापारी कोल्‍ड-स्‍टोरेज में माल इकट्ठा कर लेता है तो भाव बड़ी तेजी से बढ़ा दिए जाते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय, इसी प्रकार जनवरी में आलू 500 रूपये प्रति क्विंटल बिक रहा था. वही आलू चिप्‍स के रूप में बनकर आ जाता है. यदि एक किलो आलू को सूखाया जाए तो वह सूखकर आधा किलो रह जाता है. आलू का चिप्‍स बनाते समय 5 रूपये किलो का आलू, नमक और मसाले का 5-10 रूपये, तेल में सेंका जाए तो 5 रूपये लगभग तेल का, और मजदूरी 5 रूपये, इस प्रकार पैकेट में पैक आलू के चिप्‍स की लागत कुल-मिलाकर 30 रूपये के करीब आती है. आलू का वह ''अंकल चिप्‍स'' 40 ग्राम, 10 रूपये में बिकता है और इस प्रकार एक किलो अंकल चिप्‍स की कीमत 250 रूपये हो जाती है. जो किसान खेत में मेहनत-मजूरी करता है. खाद, बीज लाता है, सिंचाई करता है और यदि खेत की कीमत का ब्‍याज जोड़ा जाए तो वह किसान अंतत:घाटे में ही रहता है. ''अंकल चिप्‍स'' बनाने वाला व्‍यापारी 250 प्रति किलो आलू का चिप्‍स बेचकर प्रति किलो पर लगभग 220 रूपये का मुनाफा कमाता है.

मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी से कहना चाहता हूं कि गृह मंत्री जी ने जवाब दिया कि हम फसलों के लिए किसानों को जीरो प्रतिशत ब्‍याज दर पर ऋण दे रहे हैं. मैं पूछना चाहता हूं कि ये ऋण किन्‍हें दिए जा रहे हैं. सरकार केवल 2-3 लाख रूपये का ऋण 4-6 माह के लिए देती है.

इंजीनियर प्रदीप लारिया- एक साल के लिए दिया जाता है.

डॉ.गोविन्‍द सिंह- एक साल के लिए नहीं दिया जाता है. आप बैंक जाकर पता कर लीजिए.

श्री मनोज निर्भय सिंह पटेल- 6 माह के लिए ऋण दिया जाता है. 6 माह पूरे होने पर 8 दिनों के बाद वापस पलटाकर 6 माह के लिए फिर से दिया जाता है.

इंजीनियर प्रदीप लारिया- माननयी अध्‍यक्ष महोदय, जब इनकी सरकार थी, तब 18 प्रतिशत की दर से ऋण मिलता था. ....(व्‍यवधान).....

अध्‍यक्ष महोदय- कृपया सभी सदस्‍य बैठ जायें.

श्री शंकर लाल तिवारी- मैं बताना चाहता हूं कि पूर्व में ही मुख्‍यमंत्री जी ने सालभर के ऋण का पैसा एक ही बार में दे देने की घोषणा कर दी है. कृपया पढ़ लीजिए, जान लीजिए. ....(व्‍यवधान).....

डॉ.गोविन्‍द सिंह- मैं सरकार से पूछना चाहता हूं कि यदि सरकार इतना सब कुछ कर रही है तो फिर किसान आंदोलन क्‍यों कर रहा है ?

श्री वैलसिंह भूरिया- डॉ.गोविन्‍द सिंह जी इतने पुराने सदस्‍य हैं. आप सदन में इतने असत्‍य आंकड़े क्‍यों पेश कर रहे हैं.

श्री आरिफ अकील- अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या सदन में हो रही यह शुरूआत उचित है ? क्‍या विधायकों को ये आदेश दिए गए हैं कि जब भी कांग्रेस का कोई विधायक बोले तो बीच में बोलना शुरू कर दें. ....(व्‍यवधान).....

श्री मनोज निर्भय सिंह पटेल- अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या कांग्रेस के सदस्‍यों को सदन में कुछ भी बोलने का अधिकार प्राप्‍त है ?

 

1.00 बजे

श्री अजय सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके आदेश पर स्‍थगन पर चर्चा शुरु हुई यदि इसी तरह रोक-टोक होगी तो चर्चा का कोई भी मतलब नहीं रहेगा. किसानों की समस्‍या है. मान लीजिए यदि हम कोई आंकड़ा गलत भी दे दें तो आपको सुनना चाहिए और जवाब देते समय आप हमारी बातों का खंडन कर दीजिए, लेकिन साहस रखिए. यदि मध्‍यप्रदेश में कुछ कांड हुआ है तो स्‍वीकार करिए हम लोग विपक्ष में हैं लेकिन जनता की चिंता है, किसानों की चिंता है. हम लोग यहां पर फालतू बातचीत करने नहीं आए हैं.

श्री के.के. श्रीवास्‍तव-- साहस है तभी तो चर्चा कराने के लिए कहा है.

श्री मनोज निर्भय सिंह‍ पटेल-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक निवेदन है कि जब माननीय मुख्‍यमंत्री जी जवाब दें तब यह सदन से बहिर्गमन नहीं करें.

श्री अजय सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं विधायक महोदय से कहना चाह‍ता हूं कि यदि आप रोक-टोक करोगे तो...

श्री शंकरलाल तिवारी--आप सीधे विधायक जी की तरफ उंगली उठाकर बात मत करिए. आप अध्‍यक्ष महोदय से कहिए.

श्री अजय सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इन तिवारी जी को तो बिठा दीजिए.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता-- राहुल भइया किस-किस तिवारी को बिठाओगे.

श्री अजय सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम लोग पूरी चर्चा के दौरान यहां पर रहेंगे. मुख्‍यमंत्री जी का जवाब भी सुनेंगे लेकिन आप थोड़ा धीरज रखिए.

अध्‍यक्ष महोदय-- कृपया अब कोई न बोलें. डॉक्‍टर साहब कृपया संक्षेप में समाप्‍त करें.

डॉ. गोविन्‍द सिंह- अध्‍यक्ष महोदय, मैं ज्‍यादा समय नहीं लूंगा. मैं सरकार से पूछना चाहता हूं कि अगर आपने इतनी सुविधाए दी हैं शून्‍य प्रतिशत ब्‍याज दर पर ऋण दिया है तो क्‍या आपने आनंद मंत्रालय किसानों को आत्‍महत्‍या करने के लिए बनाया है? आपने यह आनंद मंत्रालय किसलिए बनाया है? क्‍या मध्‍यप्रदेश का किसान और मजदूर आनंदित होकर आत्‍महत्‍या कर रहा है? यह मैं आपसे पूछना चाहता हूं. आप इसका जवाब जरूर दें. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने कहा है कि केवल लघु किसानों को 6 महीने का ऋण दिया जाता है यदि किसी को ट्रैक्‍टर लेना है, कर्ज लेना है, मेढ़ बंधान करना है, खेती के लिए कुछ उपकरण खरीदना है तो उसके लिए पैसा जो कृषि ग्रामीण विकास विभाग से किसानों को जो लांग टर्म ऋण का लाभ मिलता था वह भी आपने बंद कर दिया है केवल शार्ट टर्म ऋण देते हैं और कई किसान जिसमें ऋण जमा किया जाता है, जिसमें गेहूं की खरीदी होती है तो गेहूं की खरीदी के समय जब कृषक समर्थन मूल्‍य पर गेहूं बेचने जाते हैं तो वहां उनकी कटौती कर ली जाती है. किसान ऋणमय हो जाता है. किसान की मर्जी के बिना बीमा किया जाता है और वहां कटौती होती है. इस बार भिण्‍ड जिले में भी 40 प्रतिशत किसानों ने जो समर्थन मूल्‍य के लिए रजिस्‍ट्रेशन कराया था उन किसानों ने गेहूं नहीं बेचा है. बिजली के बिल का आदेश दे दिया गया कि अगर बिजली का बिल बकाया है तो वह भी चुकाइए और व्‍यापारी वहां नगद देकर पहुंच गया. नगदी नहीं देकर केवल उनको चेक दे दिए . 15-15, 20-20 दिन व्‍यापारियों के पास पैसा नहीं रहता है. किसान उनके चक्‍कर लगाता रहता है, परेशान होता है इसलिए किसान अपना गेहूं और सरसों कम भाव में बाजार में बेचने को मजबूर होता है. सरकार की नीतियों के कारण किसान लगातार घाटे में चला जा रहा है. किसान मजबूर होकर आत्‍महत्‍या कर रहा है. मैं आपसे फसल बीमा के संबंध में कहना चाहता हूं व भिण्‍ड जिले का उदाहरण दे रहा हूं. वर्ष 2015-2016 में किसानों ने 53 लाख 88 हजार रुपए का कृषि बीमा का प्रीमियम जमा किया लेकिन उन किसानों को मिला कितना. 13805 किसानों ने बीमा की अपनी प्रीमियम दी. लेकिन ओला, पाला, सूखा भारी पैमाने पर हुआ था. किसानों को केवल 5 लाख 31 हजार 638 रुपए राशि का भुगतान हुआ. इसी प्रकार वर्ष 2016-2017 में 22 हजार 486 किसानों ने 1 करोड़ 84 लाख 69 हजार 152 रुपए की बीमा का प्रीमियम जमा किया. लेकिन इस साल भी ओला पड़ा है ओला पड़े हुए 6 महीने से अधिक का समय हो गया है. अभी तक किसानों को बीमे का प्रीमियम नहीं मिला है. सरकार सचेत नहीं है. मैं मुख्यमंत्री जी और सरकार से कहना चाहता हूँ कि आप प्रयास करते हैं लेकिन आपके प्रयास कहां दिखाई देते हैं. यह धरातल पर दिखाई देना चाहिए किसानों को इसका लाभ मिलना चाहिए. अगर आपकी नीयत साफ है आप किसानों को लाभ देना चाहते हैं खेती को लाभ का धंधा बनाना चाहते हैं तो भारतीय जनता पार्टी के वर्ष 2014 के घोषणा पत्र में माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी ने वादा किया है कि हम लागत मूल्य का ड्योढ़ा किसानों को देंगे. अगर 100 रुपए लागत है तो उस पर 50 रुपए मुनाफा देंगे. अगर आप किसानों के हितैषी हैं तो कृषि की जमीन पर लगने वाले जितने भी टैक्स हैं, किसान अगर खेती बेचता है तो पहले 100 रुपए लगते थे अब ज्यादा लगते हैं. इसी प्रकार ट्रेक्टर, डीजल, कृषि उपकरण पर जीएसटी में और टैक्स लगा दिया है. आपने हल, बघर, खुरपी, कुल्हाड़ी पर भी 5 प्रतिशत टैक्स लगा दिया है. ऐसे में किसान कृषि को कैसे लाभ का धंधा बना सकता है. मुख्यमंत्री जी मेरा सुझाव है कि किसानों की सिंचाई चाहे बिजली से हो चाहे नहर से हो आप सिंचाई को मुफ्त करें. कृषि उत्पाद जो आयात हो रहे हैं आप उसका विरोध करें. कृषि उत्पादों का यदि आयात होता है तो आप उस पर 100 से 200 प्रतिशत टैक्स लगाएं. ताकि देश के किसान को वाजिब मूल्य मिल सके. यह बहुत सस्ते में आयात हो जाते हैं इसलिये किसान को सही मूल्य नहीं मिल पाता है. आपने पिछले वर्ष कोल्ड स्टोरेज बनाने की घोषणा की थी. कोल्ड स्टोरेज आप बनाइए. आपके बहुत से गोदाम बने हुए हैं जिनको वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन आधे दर पर भी लेने को तैयार है परन्तु भिण्ड जिले में तमाम गोदाम खाली पड़े हैं उन्हें नहीं भरा जा रहा है. यदि आपको सस्ते में गोदाम मिल रहे हैं तो आप उनको लें. कोल्ड स्टोरेज बनाने के लिए सरकार गारंटी दे. सहकारी और शासकीय संस्थाओं को बनाने के लिए आप प्रोत्साहित करें. आप गारंटी नहीं देते हैं इसलिये बैंक ऋण नहीं देती है. टमाटर, आलू, मटर और प्याज उनमें रखी जा सकती है. जब इनका उचित समय आये उस समय किसानों को वाजिब मूल्य मिल सकता है. यदि आपने यह प्रक्रियाएं निभाईं तो खेती किसानों के लिए लाभ का धंधा हो जाएगा और उनको वाजिब मुनाफा मिलेगा व किसान आत्महत्या के लिए मजबूर नहीं होंगे. हमारी मांग है कि जिन लोगों ने किसानों पर गोली चलाकर उनकी हत्या की है उन पर भी प्रकरण दर्ज किए जाएं उन पर कार्यवाही हो उनकी गिरफ्तारी की जाए.

पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री (श्री गोपाल भार्गव)--माननीय अध्यक्ष महोदय, पिछले 1 जून से आज 18 जुलाई है. 1 महीने 18 दिन अर्थात् डेढ़ महीने से ज्यादा का समय हो गया है. किसान, किसान, गोली चालन यह सारी बातें, किसान स्वाभिमान यात्रा, यहां सम्मेलन, वहां सम्मेलन, चुरहट में भी सम्मेलन, डबरा में सम्मेलन, खलघाट में सम्मेलन. पूरे प्रदेश और देश की जनता देख रही है. आप लोगों को लग रहा है कि बिल्ली के भाग्य से झीका टूट रहा है. बिल्ली देखती रहेगी झीका कभी नहीं टूटेगा यह मैं सामने वालों से कहना चाहता हूँ. आपको इस मुगालते में नहीं रहना चाहिए. इसलिए भी कहना चाहता हूँ कि आपने कभी किसानों का, गरीबों का, मुफलिसों का, कभी बेबसों का दर्द नहीं जाना है. मंदसौर की पूरी घटना के लिए जांच कमीशन बैठा है उसके सामने तथ्य तो आएंगे ही लेकिन इसके पहले जो सूचनाएं मिली हैं और गृह मंत्री जी ने अपने उत्तर में बातें बताई हैं. सभी लोग जानते हैं कि डोडा-चूरा का, अफीम का उससे निकले हुए जो एक्सट्रेक्ट हैं उनका सबका अवैध व्यापार हमारे पूरे देश में फैला हुआ है. अध्यक्ष महोदय, हमारी सख्ती के कारण, सरकार और पुलिस की सख्ती के कारण से तस्कर जो हैं, यह अफीम, राज्य और राज्य के बाहर नहीं ले जा पा रहे हैं. उन्होंने षड्यंत्र किया कि किस तरह से पुलिस को डायव्हर्ट किया जाए, किस तरह से प्रशासन को डायव्हर्ट किया जाए, किस तरह से नॉरकोटिक्स वालों को डायव्हर्ट किया जाए, उसी की परिणिती मंदसौर का काण्ड है, जिसके लिए काँग्रेस के बन्धु बैठे हुए हैं और असत्य आँसू रो रहे हैं. (मेजों की थपथपाहट) अध्यक्ष महोदय, मैं यह भी कहना चाहता हूँ कि ये सहानुभूति की बातें हैं, ये सदाशयता की बातें हैं, उनके घरों में जाकर मिलना, घरों में जाकर ढोंग बताना, अध्यक्ष महोदय, भारतीय जनता पार्टी की सरकार, हमारे मुख्यमंत्री जी और हमारा तमाम संगठन....

डॉ.गोविन्द सिंह-- हम लोग ढोंग बनाने गए थे? फिर मुख्यमंत्री जी ने क्यों यहाँ उनको बुलाकर फर्जी उपवास तुड़वाया?

श्री सुखेन्द्र सिंह (बन्ना)-- एक करोड़ का मुआवजा क्यों दिया?

श्री गोपाल भार्गव-- इसके बारे में भी आपको अभी बताऊँगा. अध्यक्ष महोदय, सारी की सारी बातें लोग जानते हैं. क्या कोई &#