मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा एकादश सत्र

 

 

जुलाई, 2016 सत्र

 

सोमवार, दिनांक 18 जुलाई, 2016

 

(27 आषाढ़, शक संवत्‌ 1938 )

 

 

[खण्ड- 11 ] [अंक- 1 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

सोमवार, दिनांक 18 जुलाई, 2016

 

(27 आषाढ़, शक संवत्‌ 1938 )

 

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.04 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ. सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

राष्ट्रगीत

 

राष्ट्रगीत "वन्देमातरम्" का समूह गान

 

अध्यक्ष महोदय-- अब, राष्ट्रगीत "वन्देमातरम्" होगा. सदस्यों से अनुरोध है कि वे कृपया अपने स्थान पर खड़े हो जाएं.

 

 

 

 

 

 

 

( सदन में राष्ट्रगीत "वन्देमातरम्" का समूह गान किया गया.)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

11.05 बजे

 

 

निधन का उल्‍लेख

 

 

 

 

 

 

मुख्यमंत्री (श्री शिवराज सिंह चौहान) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मानसून सत्र के पहले दिन जब हमने सदन में प्रवेश किया तो मन भारी एवं दुःखी था इसलिये कि पिछले सत्र के हमारे साथी जो सदन में पिछले सत्र में मौजूद रहे, लंबे समय तक हमारे साथी रहे, अचानक एक सड़क दुर्घटना में सीहोर के पास में एक भीषण एक्सीडेन्ट में, उन्हें हमसे छीन लिया. माननीय अध्यक्ष महोदय, श्री राजेन्द्र श्यामलाल (दादू) बहुत ही सहज,सरल थे, जनता की सेवा का भाव उनके मन में अंदर तक कूट-कूट कर भरा था वह पूरी प्रमाणिकता के साथ, पूरी ईमानदारी से अपने क्षेत्र की जनता की सेवा में लगे थे. भारतीय जनता पार्टी के बहुत ही समर्पित कार्यकर्ता एवं नेता थे. उन्होंने जो दायित्व स्वीकार किया उसको बड़ी कर्मठता के साथ, समर्पण के साथ, निष्ठा के साथ निर्वाह करने का काम किया. वह अनेकों पदों पर रहे. अपने जिले के परियोजना सलाहकार मण्डल, आदिम जाति कल्याण विभाग बुरहानपुर, खण्डवा के सदस्य के रूप में और स्वयं जिस समाज से आते थे आदिवासी समाज कोरकू समाज में वह एक समाज सुधारक थे और अपने समाज में भी सुधार के उन्होंने अनेकों काम किये. उनका पूरा परिवार उच्च शिक्षित तथा प्रामाणिक था. पूरी ईमानदारी से एवं गरिमा के साथ वह विधायक के रूप में भी जनता की सेवा में लगे थे. अचानक उन्हें विधि ने हमारे बीच से छीन लिया, उनके निधन से जो स्थान रिक्त हुआ है उसकी भरपाई आसानी से नहीं की जा सकती है. मैं उनके अंतिम संस्कार में भाग लेने उनके गांव में गया था और उमड़ा हुआ जनसैलाब मैंने देखा, उससे उनकी लोकप्रियता का अंदाज लगा था. पार्टियों से ऊपर हट के हर दल के लोग, समाज के हर वर्ग के लोग उनको अंतिम विदाई देने पहुंचे थे.

बड़े गौर से सुन रहा था जमाना,

तुम्हीं सो गये दास्तां कहते कहते.

उनकी कमी सदैव अखरती रहेगी.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, श्री दलपत सिंह परस्‍ते जी, एक सामान्‍य परिवार से, गरीब परिवार से, आदिवासी परिवार से आने के बाद अपनी कमर्ठता के बल पर अपने परिश्रम के बल पर, आगे बढ़े । टाकी टोला जो उनका गांव था, उसे देखने का मौका मुझे मिला इतने इंटीरियर का गांव था लोगों ने मुझे बताया कि वहां से वह पैदल चलते थे और पढ़ाई करने के लिए अपने गांव से शहडोल तक पहाड़ों के रास्‍ते से जाते थे । पैदल चलकर साईकिल चलाकर उन्‍होंने जनता की, विशेषकर आदिवासी भाईयों और बहनों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष किया और उनके बीच वह अत्‍यन्‍त लोक प्रिय नेता हो गए, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब वह जनता दल में थे तब भी जीते, बाद में भारतीय जनता पार्टी में आने के बाद उन्‍होंने फिर चुनाव जीते. 2008-09 में लोक सभा के चुनाव में उनको टिकट नहीं मिला था लेकिन 2014 में आने के बाद वह भारी बहुमत से जीते पूरे जीवन पूरी लगन से प्रमाणिकता के साथ ईमानदारी से जनता की सेवा करते रहे और पूरे प्रदेश के आदिवासी भाईयों बहनों के लिए समाज के वंचित वर्गों के लिए उन्‍होंने पूरी निष्‍ठा के साथ काम किया छटवीं, नवमी और तेरहवीं लोक सभा के वह सदस्‍य थे और सोलहवीं लोकसभा में भी वह निर्वाचित हुए थे जो भी संसदीय कार्य उनकी तरफ आया उसका निवर्हन उन्‍होंने बड़ी कर्त्‍तव्‍य निष्‍ठा के साथ किया । हमारे सिटिंग सांसद थे उनके जाने से मध्‍यप्रदेश ने गरीबों का आदिवासियों का एक ऐसा नेता खोया है जिसके स्‍थान की पूर्ति आसानी से नहीं की जा सकती ।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसी सदन के अध्‍यक्ष रहे माननीय यज्ञदत्‍त शर्मा जी वह कर्मठ थे जुझारू थे लगनशील थे नीचे से काम करते करते, नगर निगम से उन्‍होंने अपनी राजनीति प्रारंभ की थी और नगर निगम से काम करते करते वह विधानसभा में चौथी, छटवीं, सातवीं विधानसभा के सदस्‍य रहे और इसी सदन में वह 3 जुलाई 1980 को, विधानसभा का भवन दूसरा था । सर्वसम्मिति से अध्‍यक्ष चुने गए और सदन के अध्‍यक्ष के नाते भी उन्‍होंने पूरी गरिमा से सदन के संचालन का काम किया उनके निधन से संसदीय ज्ञान के जानकार एक विधिवेत्‍ता और लोकप्रिय नेता हमने खोया है ।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, डॉ. लक्ष्‍मी नारायण पाण्‍डेय जी एक ऐसे नेता थे जिनका सम्‍मान पार्टी लाईन से हटकर सभी दलों के नेता करते थे जब वह युवा थे अपने आप में एक रिकार्ड होता है एक इतिहास बनता है तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री जी को उन्‍होंने एक नौजवान सदस्‍य के नाते चुनाव लड़कर पराजित करके अपनी अलग ख्‍याति अर्जित की थी वह इतने निष्‍प्राय थे कि उनको निष्‍काम कर्मयोगी कहा जा सकता है सबके साथ सहज सरल और सामान्‍य व्‍यवहार अपने काम से काम जनता की सेवा और पार्टी का जो काम मिला वह काम वह पूरी लगन के साथ करते थे । माननीय अध्‍यक्ष महोदय मुझे सौभाग्‍य मिला उनके साथ लोक सभा में रहने का वह तृतीय विधानसभा फिर पांचवी छटवीं नवमीं ग्‍यारहवीं बारहवीं तेरहवीं चौदहवीं लोक सभा के सदस्‍य रहे और लोक सभा के सदस्‍य के नाते अनेकों समितियों के सभापति रहे, जिस समिति के वह सभापति होते थे, उसकी गरिमा बढ़ जाती थी पूरे परिश्रम के साथ वह काम को अंजाम देने का काम करते थे । अजातशत्रु रहे जीवन भर, उनके निधन से न केवल मालवा ने बल्कि पूरे प्रदेश ने अत्‍यन्‍त लोक प्रिय व निष्‍काम कर्मयोगी जन नेता को खोया है वह कर्मठ समाजसेवी भी थे ।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, श्रीमती राजेश नंदनी सिंह जी जन्‍म छत्‍तीसगढ़ में हुआ लेकिन जहां हमारा अमरकटंक आता है, पुष्‍पराजगढ़ विधानसभा क्षेत्र वहां उनका निवास था वह दलवीर सिंह जी के साथ कदम से कदम और कंधे से कंधा मिलाकर उनकी राजनीति में सहयोग करने का काम करती रहीं और मध्‍यप्रदेश की विधानसभा में कांग्रेस की तरफ से पहले कोतमा क्षेत्र का उन्‍होंने प्रतिनिधित्‍व किया और पन्‍द्रहवीं लोकसभा की वह सदस्‍य भी निर्वाचित हुईं । गरीबों की सच्‍ची सेवक थीं उनके निधन से भी सार्वजनिक जीवन में अपूरणीय क्षति हुई है ।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, स्‍वर्गीय रणबहादुर सिंह जी एक ऐसा व्‍यक्तित्‍व थे जो सचमुच में कीचड़ में जैसे अलग रहने का प्रयास करता है । वे निर्दलीय जीते. उनकी लोकप्रियता थी, लेकिन बाद में उनका झुकाव आध्‍यात्‍म की तरफ हो गया और उन्‍होंने सन्‍यास ग्रहण कर लिया. वे चिन्‍मय मिशन से जुड़े, पर आध्‍यात्‍म के माध्‍यम से मानवता की सेवा में वे जब तक इस संसार में रहे- हमेशा समर्पित रहे. उनके निधन से प्रदेश के सार्वजनिक जीवन में अपूरणीय क्षति हुई है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, श्री सत्‍येन्‍द्र पाठक जी एक अत्‍यन्‍त प्रभावी नेता थे, कुशल प्रशासक थे और लोकप्रिय जन-सेवक थे. उन्‍होंने सन् 1975 से 1980 तक युवक कांग्रेस से अपनी यात्रा प्रारम्‍भ की थी और युवक कांग्रेस से काम करते हुए, कांग्रेस के विभिन्‍न पदों पर रहते हुए, वे दसवीं एवं ग्‍यारहवीं विधानसभा के सदस्‍य रहे. वे केवल विधानसभा के सदस्‍य ही नहीं रहे, पूर्व मंत्री के नाते उन्‍होंने अपनी प्रशासनिक क्षमता का परिचय दिया. खाद्य, नागरिक आपूर्ति उपभोक्‍ता संरक्षण विभाग के राज्‍यमंत्री रहे, फिर मंत्री रहे और उन्‍होंने इन विभागों के माध्‍यम से पूरी कर्मठता से मध्‍यप्रदेश की जनता की सेवा की. उनके निधन से भी हमने एक लोकप्रिय नेता और कुशल प्रशासक खोया है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, श्री नरनारायण सिंह जी, छठवीं विधानसभा में जनता पार्टी की ओर से सदस्‍य रहे और मध्‍यप्रदेश शासन में सन् 1980 में गृह, विधि एवं विधायी विभाग के मंत्री रहे थे. वे भी एक कुशल प्रशासक एवं कर्मठ समाजसेवी थे. उनके निधन से भी एक ऐसी क्षति हुई है, जिसकी पूर्ति आसानी से नहीं की जा सकती.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, श्री कामता प्रसाद कुशवाह जी, पहले राज्‍य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्‍य रहे, राज्‍य भण्‍डार गृह निगम के अध्‍यक्ष रहे. उन्‍होंने पिछड़े समाज की उन्‍नति में, पिछड़े वर्ग को आगे लाने के प्रयास में अपना पूरा जीवन समर्पित किया था और इन वर्गों के उत्‍थान के लिए उल्‍लेखनीय प्रयास किए. उन्‍होंने आठवीं विधानसभा में कांग्रेस पार्टी की ओर से लश्‍कर पश्चिम क्षेत्र का प्रतिनिधित्‍व किया था. उनके निधन से हमने एक लोकप्रिय जन नेता और कर्मठ समाजसेवी खोया है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, श्री इब्राहिम कुरैशी जी को हम सब लोग जानते थे. उन्‍होंने विज्ञान, टेक्‍नोलॉजी, धार्मिक न्‍यास, धर्मस्‍व और संस्‍कृति एवं सार्वजनिक उपक्रम के मंत्री के नाते अपनी कुशल प्रशासनिक दक्षता का परिचय प्रदेश को करवाया था और वे अल्‍पसंख्‍यक आयोग के लगातार 12 वर्षों तक सदस्‍य रहे. उन्‍होंने अपने जीवन में अनेकों उल्‍लेखनीय कार्य किये थे- उनमें से एक मदरसों के आधुनिकीकरण का काम था. उन्‍होंने अल्‍पसंख्‍यक भाईयों और बहनों की शिक्षा-दीक्षा में कैसे बेहतरी हो ? उसके लिए जीवन भर प्रयास किया एवं वक्‍फ संपत्तियों के संरक्षण के प्रयास में भी वे लगातार लगे रहे. उनके निधन से भी हमने एक कर्मठ समाजसेवी एवं एक कुशल नेता खोया है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, डॉ. ए.के.पयासी जी, इसी सदन में प्रमुख सचिव थे. जिन्‍होंने विधानसभा के कार्य में अपना दिन और रात एक किया था और कुशलता के साथ 17 वर्षों तक विधानसभा सचिवालयीन सेवा के माध्‍यम से उन्‍होंने प्रदेश की सेवा की. वे एक कवि एवं साहित्‍यकार थे. उनके निधन से भी हमने एक साहित्‍यकार एवं विधिवेत्‍ता को खोया है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं अपनी ओर से, सदन की ओर से एवं प्रदेश की साढ़े सात करोड़ जनता की ओर से दिवंगत आत्‍माओं के चरणों में अपने श्रद्धा के सुमन अर्पित करता हूँ और परमपिता परमात्‍मा से यह प्रार्थना करता हूँ कि वह दिवंगत आत्‍माओं को शांति दे और उनके परिजनों, मित्रों, सहयोगियों एवं अनुयायियों को यह गहन दुख सहने की शक्ति दे. ऊँ शान्ति.

भी

प्रभारी नेता प्रतिपक्ष (श्री बाला बच्‍चन) माननीय अध्‍यक्ष महोदय, श्री राजेन्‍द्र श्‍यामलाल दादू का जन्‍म दिनांक 30 अगस्‍त, 1962 को दन्‍तेवाड़ा, छत्‍तीसगढ़ में हुआ था. उन्‍होंने अपनी राज‍नीतिक शुरूआत जनपद पंचायत खकनार से की थी. वे जिला पंचायत के सदस्‍य भी रहे थे और उसके बाद वे जिला पंचायत के संचार एवं संकर्म समिति के सभापति भी रहे थे और जिला परियोजना सलाहकार मण्‍डल आदिम जाति कल्‍याण विभाग बुरहानपुर- खण्‍डवा के सदस्‍य भी रहे थे. वे तेरहवीं एवं चौहदवीं विधानसभा के सदस्‍य भी थे. वे भारतीय जनता पार्टी की टिकट पर नेपानगर विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक चुने गए.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बहुत दु:ख की बात है कि जब वह भोपाल के पास पहुंच चुके थे, भोपाल के आसपास आ चुके थे, सीहोर के आसपास उनका जो एक्‍सीडेंट हुआ था और मैं समझता हूं कि हम सभी लोगों को लगभग मेरी जानकारी में जहां तक है सभी दलों के विधायक भोपाल में ही थे और जब हमें सूचना मिली कि आदरणीय दादू नहीं रहे तो हम सभी को काफी दुख हुआ हम सभी काफी आहत हुए माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वाकई में वह बहुत मिलनसार थे सबसे मिलते थे, सबसे उनके अच्‍छे सबंध थे, मधुर संबंध थे अपनी विधानसभा क्षेत्र में तो उनके संबंध थे ही. आदरणीय मुख्‍यमंत्री जी ने जिस तरह से कहा है कि उनके दाह संस्‍कार में हजारों की संख्‍या में लोग थे ऐसा मिलनसार हम सबका विधानसभा का एक विधायक साथी जो हम सबसे बहुत अच्‍छे से मिलते थे और सबकी कुशलता का हाल वह जानते थे आज वह हमारे बीच में नहीं रहे. मैं समझता हूं कि न केवल हमने प्रदेश के कर्मठ समाज सेवी एवं आदिवासी नेता को ही नहीं बल्कि हम लोगों ने इस विधानसभा के एक अच्‍छे विधायक साथी को खो दिया है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उनके साथ में उनके पी.ए. रवीन्‍द्र अत्रे जी भी थे और उनका भी उसी समय स्‍पॉट पर ही निधन हो गया था मैं उन्‍हें भी याद करता हूं और माननीय श्री राजेन्‍द्र श्‍यामलाल दादू को भी याद करता हूं इससे हम सभी लोगों को बहुत दु:ख हुआ है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, श्री दलपत सिंह परस्‍ते जी का जन्‍म 30 मई 1950 को ग्राम टा‍की टोला, जिला शहडोल में हुआ था. वह भी एक बड़े राजनेता थे और छठी, नौवीं, तेरहवीं, और चौदहवीं लोकसभा के सदस्‍य निर्वाचित हुए. वर्तमान में सोलहवीं लोकसभा के भी वह सदस्‍य थे और जैसा आदरणीय ने अभी कहा है तो दोनों दल से, जनता दल से भी वह चुने गए, भारतीय जनता पार्टी से भी वह चुने गए इससे उनकी लोकप्रियता का पता चलता है कि वह अपने लोकसभा क्षेत्र में कितने लोकप्रिय थे उनके नहीं रहने से हमने प्रदेश के कर्मठ समाजसेवी लोकप्रिय नेता को खोया है वह एक अपूरणीय क्षति है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, श्री यज्ञदत्‍त शर्मा जी का जन्‍म 5 अप्रैल 1930 को हुआ है और उन्‍होंने अपनी राजनीतिक शुरूआत नगर निगम इंदौर से की और 1965 में वह एल्‍डरमेन के रूप में निर्वाचित हुए. उसके बाद वह वहां के विपक्ष के नेता भी रहे. इंदौर नगर निगम के एल्‍डरमेन चुने जाने के बाद 1967 में चौथी और 1977 में छठी तथा 1980 में सातवीं विधानसभा के सदस्‍य रहे हैं. 3 जुलाई 1980 को सर्वानुमति से वह इसी विधानसभा के अध्‍यक्ष चुने गए और 1983 तक इस पद को उन्‍होंने बहुत अच्‍छे से चलाया है. उनके निधन से भी प्रदेश ने एक संसदविद्, विधिवेत्‍ता एवं एक लोकप्रिय नेता खोया है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, डॉ. लक्ष्‍मीनारायण पाण्‍डे जी का जन्‍म 28 मार्च 1928 को ग्राम सूजापुर, तहसील जावरा, जिला रतलाम, मध्‍यप्रदेश में हुआ है आदरणीय डॉ. पाण्‍डे जी 1962 से 1967 में प्रदेश की इस विधानसभा की तृतीय विधानसभा के सदस्‍य चुने गए उसके बाद पांचवीं, छठी, नौवीं, दसवीं, ग्‍यारहवीं, बारहवीं, तेरहवीं लोकसभा के सदस्‍य चुने गए हैं और वाकई में वह बहुत सारी संसदीय समीतियों के सभापति भी थे, सदस्‍य भी रहे हैं शासकीय और गैर शासकीय जो संस्‍थाएं थीं उनके भी वह पदाधिकारी रहे हैं और वह मध्‍यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्‍यक्ष भी रहे हैं उनके निधन से भी देश एवं प्रदेश ने एक कर्मठ समाजसेवी एवं लोकप्रिय नेता को खोया है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, श्रीमती राजेश नन्दिनी सिंह का जन्‍म 23 मार्च 1957 को गांव बीरड़ा जिला बिलासपुर छत्‍तीसढ़ में हुआ था. श्रीमती सिंह प्रदेश की दसवीं विधानसभा में कोतमा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी के टिकिट पर जीतकर आईं थीं और उसके बाद आप 2009 में पंद्रहवीं लोकसभा की भी सदस्‍य रही हैं और विभिन्‍न विभा‍गीय समितियों की भी सदस्‍य रही हैं जो विभागीय समितियां बनी उनमें श्रीमती सिंह के निधन से प्रदेश के सार्वजनिक जीवन की अपूरणीय क्षति हुई है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, श्री रणबहादुर सिंह जी का जन्‍म 21 दिसम्‍बर 1958 को हुआ था श्री सिंह 1971 में सीधी से निर्दलीय सदस्‍य के रूप में पांचवीं लोकसभा के सदस्‍य निर्वाचित हुए थे और उसके बाद आपने सन्‍यास ग्रहण किया. और चिन्मय मिशन से जुड़े और धर्म तथा आध्यात्म के माध्यम से मानवता की सेवा के लिये आप समर्पित रहे हैं. आपके निधन से भी प्रदेश के सार्वजनिक जीवन की अपूरणीय क्षति हुई है.

अध्यक्ष महोदय, श्री सत्येन्द्र पाठक जी का जन्म 7 अप्रैल, 1942 को कटनी में हुआ था. आप 1975 से 1980 तक युवक कांग्रेस के अध्यक्ष रहे हैं. उसके बाद 1982 से 1990 तक आप कांग्रेस कमेटी के जिला अध्यक्ष रहे हैं और आपने कटनी एवं नगर सुधार न्यास के अध्यक्ष पद पर रहकर काफी काम किया है. मेरे साथ भी और मैं समझता हूं कि इस सदन के बहुत सारे विधायक गण हैं, उनके साथ भी वे विधायक के रुप में भी यहां रहे हैं. वे मंत्री भी रहे हैं. मेरे साथ भी, मैं उस समय मंत्री था. वे काफी मिलनसार थे और जो मिलता था, जिनके जो काम होते थे, उन सबके वे काम भी करते थे. वे राज्यमंत्री भी रहे हैं. उनके पास उस समय खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण राज्यमंत्री का पद था और उसके बाद उनका प्रमोशन हुआ. बाद में उनको स्वतंत्र प्रभार मिला और अलग अलग विभागों में उन्होंने बहुत अच्छा काम किया. वे केवल जबलपुर, कटनी में ही प्रसिद्ध नहीं थे, वे यहां हाउस में भी प्रसिद्ध थे और उनमें काफी मिलनसारिता थी. वे सबका मन और दिल जीतते थे. ऐसे नेता जो आज हमारे बीच में नहीं रहे हैं, उनके निधन से भी प्रदेश ने एक कर्मठ समाजसेवी एवं कुशल प्रशासक को खोया है.

अध्यक्ष महोदय, श्री नरनारायण सिंह जी का जन्म 19 मई,1935 को ग्राम बलुवां जिला आरा वर्तमान जिला भोजपुर, बिहार में हुआ था. आप प्रारम्भ में शासकीय सेवा में रहे. उसके बाद जिला जनसंघ के मंत्री रहे. जनता पार्टी के महामंत्री रहे और छठवीं विधान सभा में जनता पार्टी की ओर से पिलखा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भी आपने किया है. 1980 में मध्यप्रदेश शासन में गृह, विधि एवं विधायी कार्य के राज्यमंत्री भी रहे हैं. आपके निधन से भी प्रदेश ने एक कर्मठ समाजसेवी एवं कुशल प्रशासक को खोया है.

अध्यक्ष महोदय, श्री कामता प्रसाद कुशवाहा का जन्म 1 जनवरी,1941 को हुआ था. श्री कुशवाहा वर्ष 1980 में मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य रहे हैं तथा 1984 में मध्यप्रदेश राज्य भण्डार गृह निगम के अध्यक्ष भी बने हैं. वे वास्तव में शोषित एवं पिछड़ा वर्ग के कल्याण के लिये विशेष कर काम करते थे. इन वर्गों के उत्थान के लिये उल्लेखनीय उन्होंने प्रयास भी किये हैं. श्री कुशवाहा ने प्रदेश की आठवीं विधान सभा में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से लश्कर पश्चिम क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था. वे भी आज हमारे बीच में नहीं रहे हैं. आपके निधन से भी प्रदेश ने एक लोकप्रिय नेता और कर्मठ समाजसेवी को खोया है.

अध्यक्ष महोदय, श्री इब्राहिम कुरैशी जी का जन्म 9 अगस्त,1947 को जौरा जिला- मुरैना में हुआ था. आप हमारे साथ, मैं भी 1993 से 1998 तक की जो विधान सभा थी, वे जब राज्यमंत्री थे, उस समय मैं मंत्री था और उनके पास विज्ञान और टेक्नालॉजी , धार्मिक न्यास और धर्मस्व, संस्कृति विभाग था. केवल उर्दू अकादमी नहीं, सार्वजनिक उपक्रम विभाग भी उनके पास था. आप मध्यप्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के लगातार 12 वर्ष तक अध्यक्ष रहकर मध्यप्रदेश के मदरसों के आधुनिकीकरण के लिये बहुत काम किया है. आपने अल्पसंख्यकों की शिक्षा के लिये भी काफी काम किया है और वक्फ बोर्ड की संपत्तियों के लिये भी हमेशा उनका किस तरह से संरक्षण बना रहे, इसके लिये भी काफी काम किया है. वे भी आज हमारे बीच में नहीं रहे हैं. आपके निधन से प्रदेश ने एक कर्मठ समाजसेवी एवं लोकप्रिया नेता खोया है.

अध्यक्ष महोदय, डॉ. ए.के.पयासी जी का जन्म 8 मई,1951 को हुआ था. आदरणीय पयासी जी ने सन् 1977 में शासकीय सेवा में प्रवेश किया. आप मध्यप्रदेश विधान सभा सचिवालय के अपर सचिव रहे हैं. उसके बाद आप सचिव रहे हैं और उसके बाद आप प्रमुख सचिव भी रहे हैं. वे 2011 में सेवा निवृत्त हुए. यह बात मुझे याद है कि हम लोगों का, बहुत सारे विधायक साथी यहां बैठे हैं. यूरोप टूर हम लोगों का शायद 2010 या 2011 में हुआ था. आदरणीय पयासी जी हम लोगों के साथ थे. लम्बे समय तक हम लोगों की काफी उनके साथ चर्चाएं हुई हैं, हमने उनके व्यक्तित्व को काफी समझा था और हम लोगों ने वहां पर विधान सभा से संबंधित काफी बातें उनसे सीखी भी थीं. आज हमारे बीच में उनके नहीं रहने से, उनके निधन से प्रदेश ने एक कुशल प्रशासक एवं साहित्यकार भी खो दिया है. क्योंकि वे कवि भी थे और साहित्यकार भी थे.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इन सभी दिवंगत आत्‍माओं को मैं मेरी तरफ से तथा मेरे दल की तरफ से श्रद्धासुमन अर्पित करता हूँ, श्रद्धांजलि देता हूँ और ईश्‍वर से इस बात की प्रार्थना करता हूँ. उनकी दिवंगत आत्‍माओं को ईश्‍वर शांति प्रदान करे और उनके शोक संतप्‍त परिवारों के प्रति मैं संवेदना व्‍यक्‍त करता हूँ, ओम शांति.

श्री सत्‍यप्रकाश सखवार (अम्‍बाह) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि आपके द्वारा निधन का उल्‍लेख किया गया है. मध्‍यप्रदेश विधानसभा में वर्तमान सदस्‍य विधानसभा श्री राजेन्‍द्र श्‍यामलाल दादू जी का दिनांक-09 जून, श्री दलपत सिंह परस्‍ते, संसद सदस्‍य का दिनांक-01 जून, मध्‍यप्रदेश विधानसभा के भूतपूर्व अध्‍यक्ष श्री यज्ञदत्‍त शर्मा का दिनांक-20 मई, पूर्व संसद सदस्‍यगण डॉ.लक्ष्‍मीनारायण पाण्‍डेय जी का दिनांक-19 मई, श्रीमती राजेश नंदिनी सिंह का दिनांक-08 मई, श्री रणबहादुर सिंह का दिनांक-04 अप्रैल तथा पूर्व विधान सभा सदस्‍यगण श्री सत्‍येन्‍द्र पाठक का दिनांक-28 अप्रैल, श्री नरनारायण सिंह, भूतपूर्व विधान सभा सदस्‍य का दिनांक-30 मार्च, श्री कामता प्रसाद कुशवाह का दिनांक-18 अप्रैल, पूर्व राज्‍यमंत्री श्री इब्राहिम कुरैशी का दिनांक-18 जून तथा मध्‍यप्रदेश विधानसभा के भूतपूर्व प्रमुख सचिव डॉ. ए.के.पयासी का दिनांक-23 जून 2016 को निधन हो गया है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजेन्‍द्र श्‍यामलाल दादू जी का जन्‍म 30 अगस्‍त, 1962 को दंतेवाड़ा बस्‍तर (छत्‍तीसगढ़) में हुआ था. श्री दादू जनपद पंचायत, खकनार एवं जिला पंचायत के सदस्‍य एवं जिला पंचायत खंडवा की संचार एवं संकर्म समिति के सभापति रहे. आपने जिला परियोजना सलाहकार मंडल आदिम जाति कल्‍याण विभाग, बुरहानपुर खंडवा के सदस्‍य एवं आदिवासी कोरकू समाज सुधार संघ के जिला संरक्षक के रूप में कार्य किया. आप 2008 में तेरहवीं विधानसभा के सदस्‍य निर्वाचित हुए. तदुपरांत आपने वर्तमान चौदहवीं विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी की ओर से नेपानगर क्षेत्र का प्रतिनिधित्‍व. आपके आकस्मिक निधन से एक कर्मठ समाजसेवी एवं आदिवासी नेता को खो दिया है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सभी महानुभाव अपने सामाजिक, राजनैतिक जीवन में काफी ऊंचाइयों पर पहुंचे. जिनके कारण उनके निधन से, उनके चले जाने से आज उनके परिवार के सदस्‍यों को और उनके मित्रजनों, उनके सहयोगियों को, जो क्षति हुई है, मैं ईश्‍वर से कामना करता हूँ कि उन्‍हें इस दु:ख की घड़ी में इस दु:ख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे. मैं अपनी ओर से, अपने दल की ओर से सभी विधायकों की ओर से उन्‍हें हृदय से शोक श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ.

महिला एवं बाल विकास मंत्री (श्रीमती अर्चना चिटनिस) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, भाई राजेन्‍द्र दादू जी मेरे जिले बुरहानपुर के विधायक थे और उस जिले से हम मात्र दो विधायक छोटे से जिले से चुनकर आते थे. वे एक लोकप्रिय, संवेदनशील, परिश्रमी सहज-सरल जनप्रतिनिधि ही नहीं थे, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के निष्‍ठावान कार्यकर्ता भी थे. व्‍यक्तिगत जीवन में वे एक सेवाभावी पुत्र, एक श्रेष्‍ठ पिता थे. चार अविवाहित बेटियों एवं मात्र 16 साल के आयु के बेटे की मॉं उनकी पत्‍नी पर जो घोर विपदा और कष्‍ट आन पड़ा है, उसकी कल्‍पना नहीं की जा सकती. बैडमिंटन के वे राज्‍यस्‍तरीय खिलाड़ी थे. विद्यार्थी जीवन से ही वे लोकप्रिय नेता थे और पीएससी में चयनित होने के बाद उन्‍होंने जनसेवा को अपनाया. माननीय मुख्‍यमंत्री जी जैसा बता रहे थे कि उनका सारा ही परिवार बहुत पढ़ा-लिखा है और उनके पिता अविभाज्‍य मध्‍यप्रदेश के प्रथम आदिवासी आईएएस ऑफिसर थे. सहकारिता के क्षेत्र से अपना सार्वजनिक जीवन प्रारम्‍भ करने वाले, जनपद जिला पंचायत में प्रतिनिधित्‍व करने वाले एक ऐसे नेता, जिन्‍हें आज भी क्षेत्र की जनता और कार्यकर्ता एक बहुत ईमानदार नेता के तौर पर याद कर रही है. पिछले ही वर्ष उन्‍होंने बीएससी एग्रीकल्‍चर तक शिक्षा प्राप्‍त की. उनमें कृषि के लिए बहुत रूचि थी और उन्‍होंने को-ऑपरेटिव कृषि का एक नया प्रयोग अपने क्षेत्र में, अपने स्‍वयं के खेत में प्रारम्‍भ किया था. मैं उनकी सादगी, उनकी सहजता, सरलता, उनकी कर्मठता, उनका जनता के प्रति और कार्यकर्ताओं के प्रति अपनेपन का जो एक स्वभाव था उसको मैं प्रणाम करती हूं. अध्यक्ष महोदय, विधानसभा और भारतीय जनता पार्टी में तो उनकी कमी सदा ही रहेगी, परंतु उनके निधन से बुरहानपुर जिले में जो रिक्तिता बनी है वह कभी भी भर नहीं पायेगी. अध्यक्ष महोदय, अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करने हेतु आपने मुझे मौका दिया इसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद.

अध्यक्ष महोदय--मैं, सदन की ओर से शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं .

अब सदन दो मिनट मौन खड़े रहकर दिवंगतों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करेगा.

(सदन द्वारा दो मिनट मौन खड़े रहकर दिवंगतों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की गई)

दिवंगतों के सम्मान में सदन की कार्यवाही बुधवार दिनांक 20 जुलाई, 2016 को प्रात: 11.00 बजे तक के लिये स्थगित.

पूर्वाह्न 11.42 बजे विधानसभा की कार्यवाही, बुधवार दिनांक 20 जुलाई, 2016 (आषाढ़ 29, शक संवत् 1938) के पूर्वाह्न 11.00 बजे तक के लिये स्थगित की गई.

 

 

भोपाल: अवधेश प्रताप सिंह

दिनांक-18 जुलाई,2016. प्रमुख सचिव

मध्यप्रदेश विधानसभा.