मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा दशम् सत्र

 

 

फरवरी-अप्रैल, 2016 सत्र

 

शुक्रवार, दिनाँक 18 मार्च, 2016

 

(28 फाल्गुन, शक संवत्‌ 1937)

 

 

[खण्ड-10] [अंक- 18]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

शुक्रवार, दिनाँक 18 मार्च , 2016

 

(28 फाल्गुन शक संवत्1937)

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.03 बजे समवेत हुई.

 

{ अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

गृह मंत्री (श्री बाबूलाल गौर)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, संसदीय कार्य मंत्री जी की तरफ तो आप ध्यान दें. ये अनेकों रूपों में आते हैं. इनकी हर दिन की ड्रेस अलग है.

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ.नरोत्तम मिश्र)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, आप तो आज यह देखिए गुलबंद कितना लंबा है.

कुँवर विक्रम सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, आज जो माननीय गौर साहब कह रहे हैं वह स्वयं गौर साहब के ऊपर भी लागू होता है...(व्यवधान)..

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह दो दिन बाद फिर गुलबंद आ गया. ..(व्यवधान)..

डॉ.नरोत्तम मिश्र-- माननीय अध्यक्ष महोदय, आप हाउस में ए सी क्यों चलवा रहे हों? सर्दी है कि गर्मी है समझ में नहीं आ रहा. आप ए सी चलवा रहे हैं, इनको देखकर तो सर्दी का एहसास होता है. ए सी को देखते हैं तो गर्मी का एहसास होता है. चाचू, मुझे पसीने क्यों आ रहे हैं? मुझे वह एड समझ में आ रहा है.

श्री बाबूलाल गौर-- अध्यक्ष महोदय, विधायकों की कोई कॉम्पिटिशन हो तो इनको उसमें ड्रेस के मामले में नंबर एक दिया जाए.

श्री निशंक कुमार जैन-- दादा, आप मफलर का राज बच्चों को भी तो बता दो तो फिर हम लोग भी डाल लें.

श्री बाबूलाल गौर-- आप डाल नहीं पाओगे, जब इधर आओगे, तब मैं आपको बताऊँगा.

 

तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर.
ग्रेसिम उद्योग नागदा के विरूद्ध दर्ज प्रकरण

1. ( *क्र. 6354 ) श्री बहादुर सिंह चौहान : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍न क्र. 3270 दि. 30.07.2015 के उत्‍तरांश (क) में वर्णित प्रकरणों की अद्यतन स्थिति बतावें? (ख) इन प्रकरणों में विगत 6 माह में कितनी तारीखें लगी हैं, उनमें शासन की ओर से प्रकरण 25/15 में 22 तारीखों में अपना पक्ष न रखने के क्‍या कारण हैं? (ग) इसके लिए कौन जबावदेह है? उन पर क्‍या कार्यवाही की जावेगी? उन अधिकारियों के नाम, पदनाम सहित बतावें।

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) प्रश्न क्रमांक 3270 दिनांक 30/7/2015 के उत्तरांश में वर्णित ग्रेसिम उद्योग नागदा, जिला उज्जैन के विरूद्ध प्रकरणों की स्थिति इस प्रकार है :- (1) सब डिवीज़नल मजिस्ट्रेट नागदा के न्यायालय में सी.आर.पी.सी. 1973 की धारा 133 के तहत् प्रचलित प्रकरण 25/15 में आगामी तिथि दिनांक 06/04/2016 नियत है। (2) प्रकरण क्रमांक 11088/14 में आगामी तिथि दिनांक 21/04/16 नियत है। (ख) अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) नागदा से प्राप्त जानकारी के अनुसार विगत 06 माह में 13 तारीखें लगी हैं। अनुविभागीय दण्डाधिकारी, नागदा के द्वारा संयुक्त निरीक्षण के आधार पर सब डिवीज़नल मजिस्ट्रेट नागदा के न्यायालय में प्रकरण प्रारंभ किये जाने से शासन की ओर से पृथक से पक्ष रखने का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) उत्तरांश के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।

श्री बहादुर सिंह चौहान-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न ग्रेसिम उद्योग नागदा से जुड़ा हुआ है और आम जनता तथा गरीब मजदूरों से भी जुड़ा हुआ है. इसमें आपकी कृपा के कारण कार्यवाही कराना संभव होगा. अध्यक्ष महोदय, मैं सीधे सीधे प्रश्न करना चाहता हूँ कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक प्रकरण बनाकर एस डी एम, राजस्व को दे दिया और अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) नागदा को इस पर निर्णय करना था. अध्यक्ष महोदय, उन्होंने 15 से 20 तारीखें लगाईं और जैसे ही विधान सभा प्रश्न लगा तो अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ने एक संयुक्त निरीक्षण करके माननीय न्यायालय को यह केस दे दिया. इस केस को माननीय न्यायालय को देने की आवश्यकता ही नहीं है. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने केस बनाकर एसडीएम को दे दिया एसडीएम को इस पर निर्णय करना था ग्रेसिम उद्योग के विरुद्ध. मैं माननीय मंत्रीजी से चाहता हूं कि क्या वे अनुविभागीय अधिकारी के विरुद्ध भोपाल स्तर के वरिष्ठ अधिकारी से जांच करवायेंगे. मैं यह बताना चाहता हूं कि ग्रेसिम के कारण 5 प्रतिशत लोगों को कैंसर हो गया है मैं चाहता हूं कि स्थानीय विधायक श्री दिलीप सिंह शेखावत जी और मेरी उपस्थिति में एक समिति बना दी जाये जो इस बात कि जांच करे कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जो मानक हैं उनका वहां पालन हो रहा है. इस प्रकार दो समितियां बना दी जायें.

राज्यमंत्री, सामान्य प्रशासन (श्री लालसिंह आर्य)--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह बात सही है कि एसडीएम को पॉल्यूशन कन्ट्रोल बोर्ड ने जानकारी दी थी लेकिन यह भी सही है कि न्यायालय में दो लोगों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध भी हुआ है. जहां तक जांच कराने की बात है तो पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों का वहां अतिशीघ्र भेजेंगे उस समय दोनों माननीय सदस्यों को भी साथ रखेंगे क्योंकि जनहित में किसी भी औद्योगिक इकाई को यह छूट नहीं दी जा सकती है कि किसी से खिलवाड़ कर सके इसलिये पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों को 15 दिन में वहां पहुंचायेंगे वहां पर आप दोनों विधायक भी रहें और आने वाले समय में मैं भी उस स्थल का निरीक्षण करने जाऊंगा.

श्री बहादुर सिंह चौहान--माननीय अध्यक्ष महोदय, एक प्रश्न और पूछना चाहता हूँ समिति बन गई.

अध्यक्ष महोदय--आपके प्रश्न का उत्तर आ गया माननीय मंत्रीजी भी जाने के लिए तैयार हैं.

श्री बहादुर सिंह चौहान--मैंने कहा कि एसडीएम दोषी है न्यायालय को प्रकरण दिया जबकि 30 करोड़ 29 लाख के खनन के प्रकरण का निर्णय एसडीएम ने किया इस प्रकरण का निर्णय भी अनुविभागीय अधिकारी नागदा को करना था मैं आपके माध्यम से पूछना चाहता हूँ कि समिति बनाई उसके लिए धन्यवाद मंत्रीजी को, क्या एसडीएम ने यह जो कृत्य किया है भारी भ्रष्टाचार करके तो क्या 15 दिवस के अन्दर एसडीएम के विरद्ध जांच करवा लेंगे.

अध्यक्ष महोदय--क्या आप कोई समय सीमा देंगे अधिकारी भेज रहे हैं या आप जा रहे हैं उस विषय में.

श्री लालसिंह आर्य--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने कहा है कि मैं खुद जाउंगा और एसडीएम अगर दोषी होगा तो उसके खिलाफ भी कार्यवाही करेंगे.

श्री बहादुर सिंह चौहान--एक प्रश्न और पूछना चाहता हूं बस 30 सेकण्ड दे दीजिये.

अध्यक्ष महोदय--बहादुर सिंह जी अब उसमें कुछ बचा ही नहीं है.

श्री बहादुर सिंह चौहान--अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से सीधा प्रश्न पूछना चाहता हूँ कि ग्रेसिम उद्योग में लाभ की जो दो प्रतिशत राशि होती है, मैं जानता हूं यह उद्भूत नहीं हो रहा है परन्तु आपकी कृपा चाहिये. दो प्रतिशत राशि करोड़ों रुपयों की पड़ी हुई है मेरा विधान सभा क्षेत्र 1-2 किलोमीटर पर लगा हुआ है क्या ग्रेसिम स्वास्थ्य के लिए, शिक्षा के लिए अन्य कार्यों के लिए राशि मेरी विधान सभा क्षेत्र में खर्च करेगी.

अध्यक्ष महोदय--मंत्रीजी उद्भूत तो नहीं होता है. (मंत्रीजी के उत्तर न देने पर) मंत्रीजी को उत्तर नहीं देना है यह उद्भूत भी नहीं हो रहा है कोई जानकारी होगी भी नहीं.

श्री बहादुर सिंह चौहान--माननीय अध्यक्ष महोदय, वे उत्तर देना चाहते हैं.

अध्यक्ष महोदय--उनका समाधान हो गया (व्यवधान)

श्री बहादुर सिंह चौहान--माननीय अध्यक्ष महोदय, हां या न में उत्तर दिलवा दें, वे न ही कर दें. इसका उत्तर दिलवा दें यह ग्रेसिम से रिलेडेड है.

अध्यक्ष महोदय--आप वरिष्ठ सदस्य हैं धन्यवाद है आपको कि आपने खुद ने स्वीकार किया है कि यह प्रश्न उद्भूत नहीं होता है. आपने जो बात कही उसको मंत्रीजी उससे आगे बढ़कर स्वीकार किया अब इसके बाद में कोई प्रश्न नहीं रह जाता है. जब निराकरण ही हो गया बात का तो अब कोई प्रश्न नहीं रह जाता है.

श्री दिलीप सिंह शेखावत--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं एक प्रश्न पूछना चाहता हूँ गंभीर विषय है केवल एक सेकण्ड का समय चाहिए इसी से रिलेटड है.

अध्यक्ष महोदय--जब समिति बना दी है उसमें आप जायेंगे. शेखावत जी की बात रिकार्ड में नहीं आयेगी.

श्री दिलीप सिंह शेखावत--(XXX)

प्रश्न संख्या (2) अनुपस्थित.

 

अधिकारियों की गृह जिले में पदस्‍थापना

3. ( *क्र. 4457 ) श्री चन्‍दरसिंह सिसौदिया : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या ऊर्जा विभाग में वरिष्‍ठ अधिकारियों को उनके गृह क्षेत्र में पदस्‍थ करने का प्रावधान है? यदि हाँ, तो किस नियम व प्रावधान के अंतर्गत? (ख) क्‍या श्री अशोक कुमार बडोनिया अधीक्षण यंत्री जो कि गांधीसागर के ही निवासी हैं, उन्‍हें ऊर्जा विभाग ने गांधीसागर में ही पदस्‍थ कर रखा है? यदि हाँ, तो किसके आदेश से? (ग) 9 जनवरी, 2016 को उक्‍त संबंध में प्रश्‍नकर्ता द्वारा की गई शिकायत व माननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा विभाग को कार्यवाही के लिए प्रेषित पत्र पर अब तक क्‍या कार्यवाही की गई है तथा उक्‍त अधिकारी की अनियमितताओं की शिकायतों पर की गई कार्यवाहियों का भी ब्‍यौरा दें। उक्‍त अधिकारी का स्‍थानान्‍तरण कब तक कर दिया जाएगा?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) ऊर्जा विभाग में वरिष्‍ठ अधिकारियों को उनके गृह क्षेत्र में पदस्‍थ किए जाने का प्रावधान नहीं है। तथापि जिन अधिकारियों/कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के लिए दो वर्ष अथवा उससे कम समय शेष रह गया हो, उन्‍हें उनके आवेदन पर यथासंभव रिक्‍त पद उपलब्‍ध होने पर चाहे गए स्‍थान में पदस्‍थ किये जाने का प्रावधान है। (ख) जी हाँ, श्री अशोक कुमार बडोनियाअधीक्षण अभियंता (उत्‍पादन) को कंपनी प्रबंधन के आदेशानुसार संजय गांधी ताप विद्युत गृह, बिरसिंहपुर से गांधीनगर जल विद्युत गृह, गांधीसागर प्रशासनिक आधार पर स्‍थानांतरित कर पदस्‍थ किया गया है। (ग) माननीय विधायक महोदय के पत्र दिनांक 09.01.2016 में उल्‍लेखित शिकायतें उनके द्वारा पूर्व में प्रेषित शिकायती पत्र दिनांक 25.08.2015 के ही समान थी। शिकायती पत्र में उल्‍लेखित बिन्‍दुओं पर म.प्र. पावर जनरेटिंग कं.लि. द्वारा जाँच कराई गई। जाँच कार्यवाही के निष्‍कर्ष अनुसार शिकायतें सही नहीं पाई गईं। अत: उपरोक्‍त परिप्रेक्ष्‍य में किसी तरह की कार्यवाही का प्रश्‍न नहीं उठता।

श्री चन्दरसिंह सिसौदिया--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्रीजी से पूछना चाहता हूँ कि अशोक कुमार बडोनिया, एसई गांधी सागर पॉवर जनरेटिंग में लगातार पांच वर्षों से है. मंत्री महोदय यह बताना चाहेंगे कि नियमानुसार वरिष्ठ अधिकारी अपने गृह जिले में और गृह स्थान पर क्या पांच साल रह सकता है ? यदि नहीं तो उन्हें कब तक यहां से हटाया जायेगा.

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस सवाल का जवाब मैंने जो उत्‍तर दिया है उसमें है. यह बात सही है कि आमतौर पर अपने गृह जिले में नहीं रह सकते हैं. विशेष परिस्थितियों में काम के महत्‍व को देखते हुए, कभी कभी वहां पर पदस्‍थ कर भी दिया जाता है. लेकिन जैसा कि माननीय सदस्‍य चाहते हैं, अतिशीघ्र उनको वहां से स्‍थानांतरित कर दिया जायेगा.

श्री चन्‍दर सिंह सिसौदिया :- माननीय अध्‍यक्ष, मैं यह चाहता हूं कि मंत्री जी कोई समय सीमा दे दें, क्‍योंकि यह बहुत संवेदनशील मामला है. अध्‍यक्ष महोदय मुझे पहली बार मौका मिला है और आने के बाद पहली बार काम बताया है.

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जून में स्‍थानांतरित कर दिया जायेगा. कुछ आवश्‍यक कार्य हैं, जो जून तक पूरा करना आवश्‍यक है.

श्री चन्‍दर सिंह सिसौदिया :-माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपको भी धन्‍यवाद और माननीय मंत्री जी को भी बहुत बहुत धन्‍यवाद्.

शॉपिंग कॉम्‍पलेक्‍स एवं पार्किंग स्‍थल का निर्माण

4. ( *क्र. 6251 ) डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या रोजगार को बढ़ावा दिये जाने एवं यातायात के बढ़ते वाहनों की संख्‍या को दृष्टिगत रखते हुए नगरपालिका परिषद जावरा द्वारा अनेक शॉपिंग कॉम्‍पलेक्‍स का निर्माण एवं पार्किंग स्‍थल भी बनाए जाकर व्‍यवस्‍थाएं की जा रहीं हैं? (ख) यदि हाँ, तो शॉपिंग कॉम्‍पलेक्‍स एवं पार्किंग स्‍थलों का निर्माण होकर इनका उपयोग किया जा रहा है तथा क्‍या आगामी आवश्‍यकताओं को दृष्टिगत रख उक्‍ताशय के दोनों प्रकार के नवीन स्‍थान चयनित कर प्रस्‍तावित किये गये हैं? (ग) यदि हाँ, तो शहर में किन-किन स्‍थानों पर उक्‍ताशय के कितने स्‍थान जनउपयोगी होकर, उनसे कितना राजस्‍व प्राप्‍त होकर किस-किस प्रकार का रखरखाव, मरम्‍मत, सौंदर्यीकरण इत्‍यादि कार्य किये जा रहे हैं? (घ) अटल शॉपिंग कॉम्‍पलेक्‍स के विस्‍थापितों को पुन: दुकान आवंटन किस प्रकार किया जाकर सिविल हॉस्‍पि‍टल जावरा की भूमि पर बने शॉपिंग कॉम्‍पलेक्‍स की आय में से सिविल हॉस्‍पि‍टल जावरा को क्‍या दिया जा रहा है तथा नवीन शॉपिंग कॉम्‍पलेक्‍स एवं पार्किंग स्‍थलों के बारे में क्‍या किया जा रहा है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। (ख) सुभाष शॉपिंग कॉम्‍पलेक्‍स एवं पार्किंग तथा तिलक शॉपिंग कॉम्‍पलेक्‍स एवं पार्किंग का उपयोग किया जा रहा है। अटल शॉपिंग कॉम्‍पलेक्‍स की दुकानों के आवंटन की कार्यवाही प्रचलित है। शॉपिंग कॉम्‍पलेक्‍स मय पार्किंग हेतु पुराना हॉस्पिटल मार्ग पर स्थित पुराने धोबीघाट का चयन किया गया है। (ग) थाना रोड पर स्थित सुभाष शॉपिंग कॉम्‍पलेक्‍स एवं पार्किंग स्‍थल तथा सब्‍जी मण्‍डी (नजरबाग) क्षेत्र में स्थित तिलक शॉपिंग कॉम्‍पलेक्‍स एवं पास में स्थित पार्किंग स्‍थल का उपयोग किया जा रहा है। शॉपिंग कॉम्‍पलेक्‍स एवं अन्‍य दुकानों से 01.04.2015 से 29.02.2016 तक दुकान के किराये से राजस्‍व राशि रू. 23.00 लाख की आय निकाय को प्राप्‍त हुई। वर्तमान में शॉपिंग कॉम्‍पलेक्‍स में मरम्‍मत एवं सौंदर्यीकरण कार्य की आवश्‍यकता नहीं होने से कोई कार्य नहीं कराया जा रहा है। (घ) कलेक्‍टर रतलाम के पत्र क्र. 180 दिनांक 25.02.2016 में विहित निर्देशों के अनुसार अटल शॉपिंग कॉम्‍पलेक्‍स की दुकानों के आवंटन की कार्यवाही प्रचलन में है। सिविल हॉस्पिटल जावरा को कोई राशि नहीं दी जा रही है। नवीन शॉपिंग कॉम्‍पलेक्‍स एवं पार्किंग हेतु पुराने हॉस्पिटल मार्ग पर स्थित पुराने धोबीघाट का चयन किया जाकर उप संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश, रतलाम से पत्र क्र. 4814 दिनांक 27.02.2016 द्वारा स्‍थल के संबंध में अभिमत लिया जा रहा है।

डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न रोजगार को लेकर शॉपिंग काम्‍प्‍लेक्‍स और बढ़ते हुए यातायात वाहनों की समस्‍या को लेकर पॉकिंग स्‍थल के बारे में रहा है. जावरा नगर पुराना शहर होकर के इसमें पार्किंग स्‍थल की व्‍यवस्‍था नहीं है बेराजगारों को रोजगार देने के लिये शॉपिंग काम्‍प्‍लेक्‍स की आवश्‍यकताएं हैं मैंने जानना यह चाहा है कि जो शॉपिंग काम्‍प्‍लेक्‍स हैं, उनके रखरखाव किस प्रकार किया जा रहा है. उसी के साथ क्‍या नये प्रस्‍ताव बनाये गये हैं, जो जनप्रतिनिधियों के द्वारा प्रस्‍तावित किये गये हैं. हमने यह प्रस्‍तावित किया है कि बस स्‍टैंड के पीछे प्रीमियम आयल मिल की भूमि को अधिग्रहण करते हुए, वहां पर शापिंग काम्‍प्‍लेक्‍स का निर्माण किया जाना. इसी के साथ में सिविल अस्‍पताल की नाले को ठकते हुए वहां पर शॉपिंग काम्‍प्‍लेक्‍स, खाचरौद नाके पर पर एक शॉपिंग काम्‍प्‍लेक्‍स और एक मध्‍य शहर में एक घंटा घर है और वह पी.डब्‍ल्‍यू डी के अधीन आता है, लेकिन वह नगर पालिका के आधिपत्‍य में है. वह नगर पालिका को सौंपा जाकर उसे डिसमेंटल कर वहां पर मल्‍टीलेवन पॉर्किंग और शॅापिंग काम्‍प्‍लेक्‍स के प्रस्‍ताव तैयार किये गये हैं.

राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास (श्री लाल सिंह आर्य):-माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय विधायक ने जो पॉर्किंग की व्‍यवस्‍था के बारे में बात की है. सुभाष शॉपिंग काम्‍प्‍लेक्‍स और तिलक सब्‍जी मंडी के पीछे, इसी के तहत मुख्‍य बाजार के पीछे जवाहर पथ है, जवाहर खाना है, कोठी बाजार है और पुतली बाजार है इन सभी जगहों पर कहीं न कहीं पार्किंग की व्‍यवस्‍था है. दूसरा प्रश्‍न किया था कि जो जमीन के अधिग्रहण करने की बात है. हमारे नगरीय निकाय ने कलेक्‍टर को वह प्रस्‍ताव भेजा है. वह वहां पर विचाराधीन है. हम कलेक्‍टर को पत्र लिखेंगे कि वह जनहित में उसका परीक्षण करा लें और यदि आवश्‍यक है तो उस पर कार्यवाही करेंगे.

डॉ राजेन्‍द्र पाण्‍डेय :- अध्‍यक्ष महोदय, पूर्व में जब बस स्‍टैण्‍ड बना था. तब भी शासन ने और नगरीय निकाय ने एक पक्षीय अधिग्रहण करते हुए धारा 16(4 ) अंतर्गत उसका अधिग्रहण किया था और वहां पर बस स्‍टैण्‍ड बना था. लेकिन वहां पर फोर लेन बन जाने के कारण और विगत 25-30 वर्ष पूर्व वह बस स्‍टैण्‍ड बना था. अब अत्‍यधिक आवश्‍यकता होने के कारण इसका एक पक्षिय अधिग्रहण किया जाये, तो इसी के साथ में जैसा कि माननीय मंत्री महोदय बता रहे हैं कि बाजार में पीपली बाजार, कोठी बाजार, बजाज खानाऔर तम्‍बाखू बाजार इत्‍यादि में पार्किंग की व्‍यवस्‍था नहीं है, लेकिन वह नहीं है. यह जो नया, पुराना बाजार प्रस्‍तावित किया है, इसे अतिशिघ्र करवा दिया जाये. जैसा कि मैंने उल्‍लेख किया है घण्‍टा घर को ध्‍वस्‍त करते हुए, वहां पर मल्‍टी लेवल पार्किंग और शॉपिंग काम्‍प्‍लेक्‍स का आप अनुमोदन दें, प्रस्‍ताव को स्‍वीकृति दें. इसी के साथ एक और महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न इसमें मेरा है.एक चौपाटी स्थित अटल शॉपिंग काम्‍प्‍लेक्‍स है, जो कि फोर लेन बनाये जाने के कारण वहां पर जो पूर्व में दुकानें नगर पालिका और नगरीय निकाय की थी, उन्‍हें हटाया गया था. लगभग 116 दुकानों को वहां से हटाया गया था.

अध्‍यक्ष महोदय :- आप अपना प्रश्‍न करें.

डॉ राजेन्‍द्र पाण्‍डेय :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न यह है कि एम पी आर डी सी ने वहां पर 1 करोड़ रूपये की राशि दी और इसी के साथ फोर लेन कम्‍पनी ने राशि दी, वहां पर नगर निकाय और नगर पालिका की वहां पर राशि नहीं दी. दुकानदारों से 50 हजार से लेकर 80 हजार की राशि ली गयी. जब उन्‍हें वहां से विस्‍थापित कर दिया गया, विस्‍थापन की कार्यवाही हो रही है और वहां पर दुकानें आवंटित की जाना है तो उन पर गाईड लाईन लागू नहीं की जाकर नगर पालिका ने जो प्रस्‍ताव प्रस्‍तावित किया है कि उन्‍हें 1 लाख 54 हजार के आधार पर उन्‍हें दुकानें आवंटित कर दी जाये. मेरा कहना है कि बेरोजगार लोग हैं, तो जो वहां पर नगरपालिका का प्रस्‍ताव है, आप उसे स्‍वीकृति दे दें और उन्‍हें 1 लाख 54 हजार रूपये में और उन्‍हें गाईड लाईन उन पर लागू कर दी जाये और उन्‍हें राहत प्रदान की जाये.

राज्यमंत्री,नगरीय विकास,(श्री लालसिंह आर्य) - माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी ने जो बस स्टैंड की बात कही है. जावरा शहर में चौपाटी से बसस्टैंड के पीछे की जो खुली भूमि है वह विवादित होने से दिनांक 16.7.2009 को माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध शासन द्वारा अपील की गई. उस अपील को बेंच में खारिज किया गया परन्तु शासन द्वारा उसको स्टोर की एप्लीकेशन दिनांक 30.7.2015 को लगाई गई है. माननीय उच्च न्यायालय,इन्दौर खण्डपीठ द्वारा उसे स्वीकार किया गया. जो भी निर्णय आयेगा हम उस आदेश का पालन करेंगे और जो स्थान उन्होंने बताये हैं उसके बारे में मैं कहना चाहता हूं कि उप संचालक,नगर एवं ग्राम निवेश,रतलाम को पत्र क्रमांक 4814,दिनांक 27.2.16 को स्थल के संबंध में अभिमत चाहा गया. अभिमत आने के बाद ही इन पार्किंग स्थलों पर जो आप व्यवस्थाएं चाहते हैं जनहित में हम उसको भी करने का काम करेंगे. जहां गाईडलाईन का विषय है तो कलेक्टर ने एक गाईडलाईन के हिसाब से राशि निर्धारित की है लेकिन हम इसका परीक्षण करा लें और गरीबों के हित को ध्यान में रखते हुए जो आवश्यक होगा वह करेंगे.

डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय - धन्यवाद.

डूब की जमीन से शेष भूमि पर कृषकों को खेती की सुविधा

5. ( *क्र. 4450 ) डॉ. रामकिशोर दोगने : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मा.मुख्‍यमंत्री को प्रश्‍नकर्ता द्वारा लिखे गये पत्र क्रमांक/854 दि. 09.01.16 अनुसार क्‍या बाणसागर बांध में डूब प्रभावित किसानों की तरह इंदिरा सागर परियोजना व अन्‍य जिले के डूब प्रभावित किसानों को भी बांध का पानी खाली होने पर उनकी जमीन पर खेती करने का कानूनी हक दिया जावेगा? (ख) यदि हाँ, तो उक्‍तानुसार आदेश कब तक जारी किये जावेंगे? (ग) मा.मुख्‍यमंत्री महोदय द्वारा मैहर प्रवास के दौरान की गई घोषणा अनुसार आदेश होने से प्रदेश के किन-किन जिलों में कितने किसानों को इसका लाभ प्राप्‍त होगा? (घ) प्रश्‍नांश (ख) अनुसार यदि आदेश जारी नहीं किये जाते हैं, तो उसका क्‍या कारण है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी नहीं। (ख) प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) एवं (घ) माननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा मैहर प्रवास के दौरान की गई घोषणा निम्‍नलिखित अनुसार थी :- डूब की जमीन से शेष निकली जमीन पर कृषकों के लिए खेती की व्‍यवस्‍था की जावेगी। उपरोक्‍तानुसार जहां पर डूब के लिए अधिगृहीत जमीन बांध में पूर्ण बांध लेवल तक पानी भरने के पश्‍चात भी डूब से अप्रभावित रहती है, तो ऐसी भूमि को कृषकों की खेती के लिए दिये जाने की घोषणा की गई है, जो कि प्रश्‍नांश (क) में लेख अनुसार डूब से खाली होने वाली भूमि के संबंध में नहीं होने से शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। माननीय मुख्‍यमंत्री की उपरोक्‍त घोषणा के संदर्भ में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

डॉ.रामकिशोर दोगने - अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न एक जनहित का प्रश्न है और जो लोग अपना जीवन,जमीन सब डुबो देते हैं उन लोगों के हित की बात है. जैसा प्रश्न में जवाब आया अप्रत्याशित जमीन, वह अप्रत्याशित जमीन तो दलदल बन जाती है अगर डैम में पानी भरा हुआ है तो 10-20 कि.मी. की जमीन उसको कहां देंगे. मेरा प्रश्न के माध्यम से यह निवेदन था कि जमीन से जब पानी खाली होता है तो उसके बाद एक फसल ले सकते हैं. वह जमीन उन किसानों को दे दी जाये जिनकी जमीन डूबी है. उन्होंने जो उल्लेख किया अप्रत्याशित जमीन का किया है.

अध्यक्ष महोदय - उनका कहना यह है कि जो डूब में जमीन है जब पानी नीचे उतर जाता है तो जो जमीन निकल जाती है उसमें खेती की अनुमति देंगे क्या.

राज्यमंत्री,नगरीय विकास,(श्री लालसिंह आर्य) - जी नहीं अध्यक्ष महोदय.

डॉ.रामकिशोर दोगने - अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है उस जमीन पर गुंडे,बदमाश,मवाली कब्जा कर लेते हैं खाली होने के बाद और उस पर वे फसल ले रहे हैं तो इसके बजाय उन किसानों को ही दे दी जाये जिनकी जमीन खाली होती है. ऐसी कोई योजना बनायें जिससे उन किसानों को लाभ मिल सके बेचारे गरीबों की जमीन भी चली गई,मकान भी चले गये उनको एकाध फसल उस खाली जमीन पर लेने की अनुमति मिल जाये. आपकी खाली जमीन है नहीं तो दूसरे लोग कब्जा कर रहे हैं. (XXX) उस जमीन पर और उस पर फसल ऊगा रहे हैं.

श्री बाबूलाल गौर - (XXX).

अध्यक्ष महोदय - इसे कार्यवाही से निकाल दें.

डॉ.रामकिशोर दोगने - अध्यक्ष महोदय,(XXX).

अध्यक्ष महोदय - इसे कार्यवाही से निकाल दें.

श्री लालसिंह आर्य - अध्यक्ष महोदय,अंतर्राज्यीय जो परियोजनाएं होती हैं उसमें बिना दूसरे राज्यों की सहमति के कोई भी निर्णय नहीं लिया जा सकता. हमारा जो केचमेंट एरिया है अनुमति हम दे देंगे तो शिल्ट हमारी जमना प्रारंभ हो जायेगी और जो हम पेयजल के लिये पानी सप्लाई करते हैं सिंचाई के लिये पानी सप्लाई करते हैं वह बाधित होगी.

खनिज उत्‍खनन/परिवहन की शिकायतों पर कार्यवाही

6. ( *क्र. 6372 ) श्री संजय शाह मकड़ाई : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) हरदा जिले में विभाग द्वारा किस-किस प्रकार की खदानें, खनिज पट्टे, पत्‍थर, गिट्टी, खनन आदि की अनुमति एवं खनिज परिवहन की अनुमति, किस-किस सर्वे क्रमांक की कितने-कितने, रकबे की किन-किन व्‍यक्तियों/फर्मों को कितनी-कितनी अवधि की प्रश्‍न दिनांक तक वैधानिक रूप से स्‍वीकृत है? (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में उपरोक्‍त अनुमति धारकों/फर्मों/ठेकेदारों द्वारा कौन-कौन से खनिजों के खनन से शासन को कितनी राशि 02 वर्षों से विभिन्‍न मदों में रॉयल्‍टी, जुर्माना शुल्‍क में दी? खनिज रॉयल्‍टी के रूप में कितनी राशि प्राप्‍त हुई? (ग) पिछले 02 वर्षों में अवैध खनन परिवहन, नियम विरूद्ध अनुमति इत्‍यादि के संबंध में जिला स्‍तर पर, किस-किस के विरूद्ध कितनी शिकायतें प्राप्‍त हुईं, उन पर क्‍या कार्यवाही की गई?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) एवं (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' पर दर्शित है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' पर दर्शित है।

श्री संजय शाह मकड़ाई - माननीय अध्यक्ष महोदय, खनिज विभाग का प्रश्न लगाना या पूछना मेरे लिये वैसा ही जैसे भूसे की ढेर में सुई ढूंढने जैसी बात है लेकिन फिर भी मैं प्रयास करता हूं कि मेरे हरदा जिले में अवैध उत्खनन को कैसे रोका जाये उसके लिये मैं अपनी तार्किक बुद्धि से प्रयास करता हूं.मेरा माननीय मंत्री जी से पहला सवाल है कि हमारे यहां जो भी रेत खदाने हैं,गिट्टी खदानें हैं,मुरम खदानें हैं उनमें क्या सिया की परमीशन ली गई थी और मैं दो-तीन प्रश्न एक साथ ले लेता हूं और जो अस्थाई खदानें 2014-15 में अस्थाई रूप से दी गई है उनमें भी क्या सिया की परमीशन ली गई है ? और दूसरा रेत खदानों में मेरे हिसाब से 25 हैक्टेयर से कम की जो खदाने होती हैं उसमें मशीनों से उत्खनन किया जाना उचित नहीं होता है, ऐसा नियमों में नहीं हैं, मेरे ज्ञान के अनुसार मंत्री जी बतायें कि पोकलेन वगैरह से खनन करना इन छोटी खदानों में क्या यह नियमानुसार है.

श्री राजेन्द्र शुक्ल--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य महोदय के सवाल का जवाब में कहना चाहता हूं कि सिया से परमीशन लेनी पड़ती है और इसीलिये हरदा जिले में 14 में से 13 खदाने नीलाम हुई हैं उसमें 2 की परमीशन सिया से परमीशन मिली है इन 2 का ही एग्रीमेन्ट हुआ है, बाकी सिया से परमीशन की कार्यवाही चल रही है. इसके अलावा अब तो सभी खदानों की सिया से परमीशन लेने के निर्देश हैं .

श्री संजय शाह मकड़ाई--माननीय अध्यक्ष महोदय, कई खदानें ऐसी हैं जहां पर अभी भी पूरी परमीशन नहीं है, तो अवैध उत्खनन की श्रेणी में यह आता है. चूंकि दिखावटी तौर पर वह खदाने लीज पर ले रही हैं जिनकी 2015 में समय सीमा भी समाप्त हो गई है, लेकिन वहां पर आज भी क्रेशर इतनी तेजी से कार्य कर रहे हैं क्या ऐसे क्रेशरों की जांच कराकर उनको तत्काल प्रभाव से बंद कर के और वहां पर उन्होंने स्टॉक गिट्टी एवं मुरूम का बनाकर के रखा है, उसकी जप्ती करके उन अधिकारियों के विरूद्ध भी क्या ठोस कार्यवाही करेंगे ? उनका स्थानांतरण करेंगे जिनके संरक्षण में हमारे जिले में यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है.

श्री राजेन्द्र शुक्ल--माननीय अध्यक्ष महोदय, इसकी निश्चित रूप से जांच कराकर इसमें यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो कार्यवाही भी करेंगे. जांच के बाद यह साबित होता है कि नियमों के उल्लंघन में किसी का संरक्षण है तो उसके खिलाफ भी कार्यवाही करेंगे.

श्री संजयशाह मकड़ाई--माननीय अध्यक्ष महोदय,सारसूद में प्रधानमंत्री रोड़ के किनारे से लगी हुई खदाने संचालित हैं इतना अच्छा रोड़ है उनको भी नुकसान हो रहा है, कृपया उनकी खदानों की लीज भी निरस्त करवा दें, जिससे हमारे रोड़ भी बच जाएगा. माननीय अध्यक्ष महोदय, दो माननीय सदस्यों का प्रश्न है इसका जवाब दिलवा दें.

अध्यक्ष महोदय--आपको जवाब दिलवा दिया है.

प्रश्न संख्या 7

गबन की शिकायत पर कार्यवाही

7. ( *क्र. 5638 ) श्री प्रदीप अग्रवाल : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या जल संसाधन विभाग में पदस्‍थ कार्यपालन यंत्री श्री अनिल अग्रवाल के खिलाफ गबन से संबंधित कोई F.I.R. दर्ज की गई है? यदि हाँ, तो कब व इन पर क्‍या-क्‍या आरोप लगाये गये हैं? वर्तमान में जाँच अधिकारी कौन है? जाँच के अंतर्गत क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई है? (ख) क्‍या हाईकोर्ट ने 27 अगस्‍त, 2015 को श्री अग्रवाल की जाँच 4 माह में पूरी करने के आदेश किये थे? यदि हाँ, तो 27 दिसंबर को अवधि पूर्ण होने के उपरांत क्‍या जाँच पूर्ण हो चुकी है? यदि हाँ, तो जानकारी उपलब्‍ध करायें? यदि नहीं, तो क्‍या स्थिति है? क्‍या उक्‍त कार्यपालन यंत्री से गबन की राशि वसूली जा चुकी है? यदि नहीं, तो क्‍या कारण है कि करोड़ों के गबन के बावजूद विभाग ने अभी तक न तो उन फर्मों को आरोपी बनाया, जिनके नाम पैसा निकाला और न वसूली की? (ग) क्‍या उक्‍त गबन के कार्य में विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत है? यदि हाँ, तो उन पर क्‍या कार्यवाही की जावेगी? यदि नहीं, तो क्‍या कारण रहे कि शासन के करोड़ों रूपये गबन होने के बाद भी विभाग द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है? (घ) जानकारी उपलब्‍ध कराई जावे कि उक्‍त प्रकरण में कब तक शासन की राशि संबंधित से वसूल की जावेगी एवं दोषी व्‍यक्तियों के खिलाफ कब तक कार्यवाही की जायेगी?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) से (घ) आर्थिक अपराध अन्‍वेषण ब्‍यूरो द्वारा दिनांक 06.08.2012 को कार्यपालन यंत्री श्री अनिल अग्रवाल के विरूद्ध अपराध की प्राथमिकी की जाना प्रतिवेदित है। ब्‍यूरो द्वारा दर्ज प्राथमिकी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। आर्थिक अपराध के प्रकरणों में अनुसंधान जल संसाधन विभाग के क्षेत्राधिकार में नहीं है और अनुसंधान के संबंध में विभाग को कोई आदेश मा. उच्‍च न्‍यायालय द्वारा नहीं दिया गया है। अत: शेष प्रश्न उत्‍पन्‍न नहीं होते हैं।

परिशिष्ट - ''एक''

श्री प्रदीप अग्रवाल--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न के उत्तर में जो जवाब आया है वह अधूरा है.

अध्यक्ष महोदय--आपका उत्तर सही है उसमें जांच कराने के लिये तथा कार्यवाही करने के लिये तैयार हैं अब क्या इसमें रह गया है.

श्री प्रदीप अग्रवाल--माननीय अध्यक्ष महोदय, उसमें जानकारी दी गई है तथा लिखा गया है कि एफआईआर दर्ज की गई है, जबकि इसमें एफआईआर तो 4 वर्ष पूर्व ही दर्ज कर दी गई थी. अनिल अग्रवाल द्वारा अपने रिश्तेदारों के साथ मिलकर के करोड़ो रूपये का गबन किया गया है उसके बाद भी आज तक न ही उस फर्म और न ही विभाग के द्वारा उनके खिलाफ 4 वर्ष में कोई ऐसी कार्यवाही की गई है जिससे कि उनसे राशि वसूली जा सके तथा उनको अरेस्ट किया जा सके. जिन फर्मों ने गबन किया है उनको कब तक आरोपी बना दिया जाएगा इसमें विभाग के द्वारा जो लापरवाही की गई है उन पर कब तक कार्यवाही की जाएगी.

श्री जयंत मलेया--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह बात सही है कि एक्जीक्यूटिव इंजीनियर पर श्री विजयकुमार तिवारी एडवोकेट द्वारा एफआईआर दर्ज की थी यह पूरा का पूरा प्रकरण ईओडब्ल्यू में है जब ईओडब्ल्यू से प्रकरण अदालत में जाएगा उसमें अदालत जैसा भी निर्देश देगी वैसी विभाग कार्यवाही करेगा.

श्री प्रदीप अग्रवाल--माननीय अध्यक्ष महोदय, 27 अगस्त 2015 को उच्च न्यायालय ने ईओडब्ल्यू तथा विभाग को भी यह निर्देशित किया था कि इसमें 4 माह में जांच पूरी कर उचित कार्यवाही करें इसमें 4 माह तो 27 दिसम्बर, में ही पूर्ण हो गये तीन माह इसमें और निकल चुके हैं अब तक विभाग ने क्या क्या कार्यवाही हुई उससे अवगत कराया जाए और बताया जाए कि उन्हें कब तक गिरफ्तार किया जाएगा इसमें विभाग का करोड़ो रूपया फंसा हुआ है.

श्री जयंत मलैया- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें जल संसाधन विभाग कोई कार्यवाही नहीं करेगा, क्‍योंकि हम कार्यवाही नहीं सकते हैं, यह पूरा का पूरा मामला हमारे ई.ओ.डब्‍लू. के पास है, ई.ओ.डब्‍लू के पास होने के साथ- साथ हाईकोर्ट ने निर्देश दिए होंगे, तो वह निर्देश ई.ओ. डब्‍लू को दिए होंगे, हमारे विभाग ने सामान्‍य प्रशासन विभाग से बात की थी और सामान्‍य प्रशासन विभाग ने ई.ओ.डब्‍लू. से बात की है, उसके बाद ई.ओ.डब्‍लू ने डिप्‍टी सेक्रेट्री, सामान्‍य प्रशासन विभाग को पत्र लिखा है, जिसकी दो तीन पंक्तियां मैं पढ़ना चाहूंगा, प्रकरण वर्तमान में विवेचनाधीन है, विवेचना में उपलब्‍ध साक्ष्‍य के आधार पर विधिसम्‍मत कार्यवाही का जाएगी, विवेचना में उपलब्‍ध साक्ष्‍य पर संभावित प्रश्‍न एवं उत्‍तर दिए जाने का प्रचलन नहीं है, क्‍योंकि विवेचना में पाए गए साक्ष्‍य का समग्र विश्‍लेषण सक्षम न्‍यायालय द्वारा विचारण के द्वारा किया जाता है ।

पूर्व प्रश्‍न की जानकारी का प्रदाय

8. ( *क्र. 5965 ) श्रीमती शीला त्‍यागी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या तारांकित प्रश्‍न संख्‍या 53 (क्रमांक 682), दिनांक 21 जुलाई, 2015 के उत्‍तर की जानकारी एकत्रित कर ली गई? हाँ तो उपलब्‍ध कराएं? यदि नहीं, कराई गई है, तो कब तक उक्‍त जानकारी उपलब्‍ध करा दी जायेगी? (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में अभी तक जानकारी उपलब्‍ध न कराने में कौन-कौन कर्मचारी/अधिकारी दोषी हैं? प्रश्‍न जैसे महत्‍वपूर्ण कार्यों का उत्‍तर समय से न देने वाले लापरवाह अधिकारी/कर्मचारी के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही करेंगे।

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) उत्‍तरांश (क) के प्रकाश में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''दो''

 

श्रीमती शीला त्‍यागी माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मांझी जनजाति के फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने वालों के विरूद्व, जांच के संबंध में, आपके माध्‍यम से मंत्री जी से पूछना चाहती हूं कि क्‍या मांझी जनजाति के लोग, जो फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर एस.टी. कोटे की सीटों पर नौकरी कर रहे हैं, क्‍या उन अधिकारी, कर्मचारियों को सेवा से पृथक करने की कार्यवाही करेंगे ?

श्री लालसिंह आर्य- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, फर्जी प्रमाण पत्र बने हैं या नहीं बने हैं, इसका परीक्षण कहीं न कहीं होता है, अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति के प्रमुख सचिव हैं, उनकी अध्‍यक्षता में छानबीन समिति कमेटी है माननीय सदस्‍या, प्रमाणित चीज हमें उपलब्‍ध करा दें, हम उसकी जांच करा लेंगे ।

श्रीमती शीला त्‍यागी - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दो पूरक प्रश्‍न बनते हैं ।

अध्‍यक्ष महोदय- एक प्रश्‍न कर दीजिए ।

श्रीमती शीला त्‍यागी- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से बताना चाहती हूं, मेरे पास पुख्‍ता प्रमाण है, फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर विभिन्‍न विभागों में नौकरी कर रहे हैं, जैसे कि रीवा के संभाग के अलावा प्रदेश के.........

अध्‍यक्ष महोदय- बताइए मत, आप तो यह बोल दीजिए कि आपके पास प्रमाण हैं, उनका क्‍या करना है, उनसे पूछिए ।

श्रीमती शीला त्‍यागी- जी, मैं यह कहना चाहती हूं कि यदि केवट, कहार, मुढ़ा, मलाह और रायकवार जाति के लोगों को मांझी जनजाति का प्रमाण पत्र किसी अधिकारी, एसडीएम, तहसीलदार, एनटी, डीईटी, एसई आदि ने गलत जारी किया है, तो क्‍या उसके विरूद्व कार्यवाही करेंगे ?

अध्‍यक्ष महोदय- काल्‍पनिक प्रश्‍न है ।

श्री लाल सिंह आर्य- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, स्‍वा‍भाविक है, परीक्षण होता है और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके विरूद्व कार्यवाही होती है और होगी, मैं सदस्‍या जी को बताना चाहता हूं, उन्‍होंने माझी का उल्‍लेख किया है, दो कर्मचारियों, श्रीमती कविता वर्मा एवं अमित कुमार सोंधिया के जाति प्रमाण पत्र की जांच चल रही है, जिसमें से कविता वर्मा की, राज्‍य स्‍तरीय छानबीन समिति में भी जांच चल रही है, लेकिन आपने अभी कहा है कि आपके पास दस्‍तावेज हैं, यदि कोई प्रमाणित चीज हैं, तो आपको भी यह अधिकार है कि आप छानबीन समिति को सीधे भेज सकते हैं, लेकिन आप मेरे माध्‍यम से भेजना चाहते हैं, तो मुझे दे दीजिए, मैं छानबीन समिति को भेज दूंगा और जिनके फर्जी जाति प्रमाण पत्र बने होंगे, छानबीन समिति उसकी सत्‍यता की जांच करेगी और जिनके फर्जी जाति प्रमाण पत्र पाए जाएंगे, उनको निरस्‍त किया जाएगा और जिन्‍होंने बनाए होंगे उनके खिलाफ कार्यवाही की जावेगी ।

श्रीमती शीला त्‍यागी- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी को धन्‍यवाद देती हूं ।

कटनी की बंद खदानों का संरक्षण

9. ( *क्र. 6374 ) श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या श्री आलोक दाहिया द्वारा 10/08/2007 को कलेक्‍टर कटनी को कटनी नगर की 07 खदानों को संरक्षित करने, पूरने की शिकायत/आवेदन दिया था एवं कार्यालय कलेक्‍टर कटनी की जनसुनवाई में श्री राजेश भास्‍कर की शिकायत क्रमांक-20181, 06/09/2011 एवं श्रीमती शोभा कुरील की शिकायत क्रमांक-20519, 13/09/2011 के द्वारा कावस जी वार्ड कटनी स्थित खदान के पूरे जाने की शिकायत की गई थी? (ख) क्‍या विवेकानंद वार्ड स्थित खदान को अवैध तौर पर पूरने की, कार्यालय कलेक्‍टर कटनी एवं कार्यालय कलेक्‍टर (खनिज शाखा) कटनी में 03/03/2015 को तथा मुख्‍य सचिव महोदय म.प्र. शासन को 16/03/2015 को ई-मेल के द्वारा शिकायत की गई थी? (ग) प्रश्‍नांश (क) (ख) में यदि हाँ, तो इन पर क्‍या और कब जाँच कर क्‍या प्रतिवेदन दिये गये? किस विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई? शिकायतवार बतायें। (घ) प्रश्‍नकर्ता सदस्‍य के परि.अता.प्र.सं. 130 (क्रं-2114), दिनांक 15/12/15 का क्‍या उत्‍तर दिया गया था? क्‍या प्रश्‍नांश (क) का उत्‍तर जानकारी संधारित किये जाने का प्रवधान ना होने एवं प्रश्‍नांश (ड.) में प्रश्‍नाधीन जानकारी भारतीय खान ब्‍यूरो से संबंधित होने का उत्‍तर दिया गया है? यदि हाँ, तो प्रश्‍नांश (क) से (ख) क्‍या है? क्‍या प्रश्‍नांश में उल्‍लेखित शिकायत विभाग एवं म.प्र. शासन के अन्‍य विभागों से संबंधित नहीं थी? (ड.) प्रश्‍नांश (घ) में जिम्‍मेदारी से बचकर, कार्यवाही भारतीय खान ब्‍यूरो से संबंधित बताने एवं माननीय सदन में असत्‍य, भ्रामक उत्‍तर देने के लिये कौन-कौन जिम्‍मेदार हैं? क्‍या इसकी जाँच एवं संबंधितों पर कार्यवाही की जायेगी? यदि हाँ, तो क्‍या और कब तक, यदि नहीं, तो क्‍यों?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) एवं (ख) जी हाँ। (ग) प्रश्‍नांश '' एवं '' में उल्‍लेखित शिकायतों के संबंध में की गई कार्यवाही की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' में दर्शित है। (घ) प्रश्‍नाधीन प्रश्‍न के उत्‍तर की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' पर दर्शित है। जी हाँ। खान नियंत्रक भारतीय खान ब्‍यूरो जबलपुर द्वारा प्रेषित उत्‍तर की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' पर दर्शित है। खनिज संरक्षण एवं विकास नियम 1988 के नियम 23 (ख) के तहत उत्‍तरोत्‍तर खान बंद करने की योजना अधिसूचना दिनांक 23.12.2003 द्वारा प्रतिस्‍थापित की गई है, जिसके संबंध में कार्यवाही सुनिश्चित किये जाने हेतु भारतीय खान ब्‍यूरों को अधिकार प्रदत्‍त किये गये हैं। प्रश्‍नांश '' एवं '' से संबंधित शासकीय एवं निजी भूमियों में संचालित रही खदानें, माइन क्‍लोजर प्‍लान लागू होने से पहले बंद हुई हैं। जी नहीं। प्रश्‍नांश '' एवं '' में उल्‍लेखित शिकायतें आमजन के हितों को ध्‍यान में रखते हुए कार्यवाही की गई है। (ड.) प्रश्‍नांश '' में दिये गये उत्‍तर के प्रकाश में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्री संदीप जायसवाल- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न के दो मुद्दे हैं, हमारी शहर की खदानें खुली होने के कारण उनमें दुर्घटनाएं होती हैं, कई मृत्‍यु हो चुकी हैं, दूसरा खदानों में उपलब्‍ध पानी का सदुपयोग, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय से चाहूंगा कि खुली हुई खदानों का संरक्षण हो और उनको सुरक्षित किया जाए, उपलब्‍ध पानी को फिल्‍टर प्‍लांट तक पहुंचाकर जनता को पेयजल के लिए उसकी उपलब्‍धतता सुनिश्चित की जाए, तीसरा जब पानी सप्‍लाई होगा तो वहां पर वर्षा के पानी को खदान तक ले जाने के लिए, इन तीनों बिन्‍दुओं पर एक कार्य योजना बनानकर उसको स्‍वीकृत कराने एवं क्रियान्वित कराने के लिए कलेकटर महोदय को निर्देश दिया जाए और खनिज विभाग के प्रमुख, नगर निगम आयुक्‍त, रेल्‍वे के अधिकारी और मुझ प्रश्‍नकर्ता विधायक को शामिल करते हुए एक कार्य योजना बनाने और स्‍वीकृत कराने के संबंध में चाहूंगा ।

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विधायक जी ने जैसी अपेक्षा की है, उस प्रकार के निर्देश जिले के कलेक्‍टर को दे दिए जाएंगे ।

श्री संदीप जायसवाल- धन्‍यवाद ।

वृहद सिंचाई परियोजनाओं की स्‍वीकृति

प्रश्‍न 10. ( *क्र. 42 ) श्री वेलसिंह भूरिया : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) माननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा वर्ष 2008 से सरदारपुर एवं गंधवानी तहसील में कितनी वृहद सिंचाई परियोजनाओं एवं तालाबों की स्‍वीकृति की घोषणा की गई थी? (ख) इनमें से कितनी योजनायें स्‍वीकृत हो चुकी हैं एवं कितनी शेष हैं? नामवार जानकारी दें। शेष योजनाओं की स्‍वीकृति कब तक की जायेगी? यदि नहीं, तो क्‍यों कारण बतायें?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) एवं (ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है।

परिशिष्ट - ''तीन''

श्री वेल सिंह भूरिया - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने मुझे जो जवाब दिया है. उससे, मैं संतुष्‍ट हूँ. मैं बधाई और धन्‍यवाद भी देना चाहता हूँ कि हमारी सरकार के माननीय मुख्‍यमंत्री श्री शिवराज सिंह जी ने, जो 5 घोषणाएं मेरे विधानसभा क्षेत्र में की थीं, उसमें से 3 स्‍वीकृत कर दी हैं.

मेरी विधानसभा के ग्राम रिंगनोद और अंजनमाल पोशिया जो डेम हैं, उसकी भी माननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा घोषणा की गई थी. लेकिन कुछ अधिकारियों की मिली-जुली भगत के कारण, उन्‍होंने माननीय मंत्री जी को गुमराह किया है, साईटें असाध्‍य बनाकर भेज दी गई हैं. मैं माननीय मंत्री जी से 2 प्रश्‍न करूँगा, इससे समय भी बचेगा. क्‍या माननीय मंत्री जी यह बतायेंगे कि रिंगनोद जलाशय जो हैं, बैढ़ा और बिल्‍ली वाली घाटी तक का सर्वे पुन: करायेंगे ? और क्‍या रिंगनोद जलाशय में बिल्‍ली वाली घाटी और बैढ़ा, जो रिंगनोद जलाशय की साईट है, उसका पुन: सर्वेक्षण करायेंगे ?

श्री जयंत मलैया - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब माननीय मुख्‍यमंत्री जी, माननीय सदस्‍य के क्षेत्र में गए थे तो उन्‍होंने 7 योजनाओं का सर्वेक्षण किया था. जिसमें से हमने लगभग-लगभग 5 योजनाएं तो स्‍वीकृत कर दी हैं. उसमें से कुछ के टेण्‍डर भी हो गए हैं और जो आप रिंगनोद का बता रहे हैं, उसमें चूँकि इसकी प्रति हैक्‍टेयर लागत जितनी लागत आनी चाहिए, उससे दुगुनी आ रही है- इसलिए उसको नहीं किया जा रहा है. परन्‍तु आप कहते हैं तो उसको एक बार फिर से परीक्षण करा लेंगे.

श्री वेल सिंह भूरिया - एक प्रश्‍न और है. जो मैंने रिंगनोद जलाशय की साईट बताई है, अधिकारियों ने सर्वे गलत कर दिया था.

अध्‍यक्ष महोदय - मंत्री जी फिर से सर्वे कराने को तैयार हैं.

श्री वेल सिंह भूरिया - माननीय अध्‍यक्ष महोदय एक प्रश्‍न है. माननीय मंत्री जी, अंजनमाल पोशिया जो डेम है, उसका भी पुन: सर्वेक्षण करा लें, रिंगनोद जलाशय और पोशिया दोनों ही मेरी उपस्थिति में स्‍थल निरीक्षण और सर्वे करवा लें तो बहुत अच्‍छा रहेगा.

श्री जयंत मलैया - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सर्वे का काम आसान नहीं होता है कि माननीय सदस्‍य की उपस्थिति में करा दें. अगर इनको सुविधा होगी और उतना समय होगा तो मैं रिंगनोद जलाशय और पोशिया जलाशय, दोनों का सर्वेक्षण अगर आप उपस्थित रहें तो बहुत अच्‍छी बात है. आप करवा लीजिएगा.

श्री वेल सिंह भूरिया - माननीय मंत्री जी, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

नियोजित व्‍यक्तियों की संख्‍या

प्रश्‍न 11. ( *क्र. 6367 ) श्री मुकेश नायक : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विभाग में संधारित जानकारी अनुसार राज्‍य के सार्वजनिक उपक्रमों, सरकारी कार्यालयों, प्रतिष्‍ठानों में नियोजित व्‍यक्तियों की संख्‍या वर्ष 2010-11, 2011-12, 2012-13 और 2013-14 में क्‍या रही? वर्षवार जानकारी दें। (ख) सरकारी क्षेत्र में नौकरियों में कमी आने के क्‍या कारण हैं और क्‍या सरकार नौकरियों में वृद्धि करने की कोई नीति बना रही है? यदि हाँ, तो जानकारी दें?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) सरकारी क्षेत्र में नौकरियों की संख्‍या में अनापेक्षित परिवर्तन नहीं है। अत: प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

परिशिष्ट - ''चार''

श्री मुकेश नायक - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न पूछने का आशय शायद माननीय मंत्री जी समझ नहीं पाये. उन्‍होंने सार्वजनिक उपक्रमों, अर्द्धशासकीय संस्‍थानों एवं सरकारी कार्यालयों में जो कर्मचारी कार्य कर रहे हैं. सन् 2011 से सन् 2014 तक की वह सूची दी है. मैं माननीय मंत्री महोदय से यह जानना चाहता हूँ कि कार्यरत् कर्मचारियों की संख्‍या तो आपने बताई है, वे 5,69,058 कर्मचारी हैं.

मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि आप उन कर्मचारियों की संख्‍या बतायें कि जो पद स्‍वीकृत हैं और खाली हैं. फिर ऐसे पद, जिस पर एडमिनिस्‍ट्रेटिव और फायनेन्शियल एप्रूवल हो चुकी है, उसके बावजूद भी वे पद नहीं भरे गए हैं और उन पदों में से अनुसूचित जाति एवं जनजाति के कितने पद हैं, जो स्‍वीकृत होने के बाद भी खाली पड़े हैं ?

श्री जयंत मलैया - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस प्रश्‍न से उद्भूत नहीं होता और अगर आप कहेंगे तो मैं आपको जानकारी निकालकर दे दूँगा. अभी, वर्तमान में वह जानकारी मेरे पास उपलब्‍ध नहीं है. चूँकि यह प्रश्‍न से उद्भूत नहीं होता था.

श्री मुकेश नायक - अध्‍यक्ष महोदय, यह प्रश्‍न से तो रिलीवेन्‍ट है. यह प्रश्‍न से उद्भूत होता है. मध्‍यप्रदेश में जो प्रशासनिक ढांचा है, वह किस तरह से मैदानी स्‍तर पर कार्यरत् है.

अध्‍यक्ष महोदय - आपको इसमें सीधा पूछना चाहिए था कि कितने पद खाली हैं, जो स्‍वीकृत हैं. वह उसमें नहीं पूछा गया है. इसमें आपने केवल दो प्रश्‍न पूछे हैं. एक, तो संख्‍या तथा दूसरा, यह कि संख्‍या क्‍यों घट रही है ?

श्री मुकेश नायक - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इससे उद्भूत होता है. अगर मंत्री जी को होम वर्क के लिए समय चाहिए तो मैं इसके लिए तैयार हूँ.

श्री जयंत मलैया - अध्‍यक्ष महोदय, जो इस प्रश्‍न में है और जो इस प्रश्‍न से उद्भूत होता है. मैं आपसे बहुत विनम्रता से निवेदन करना चाहता हूँ, उसका मैं उत्‍तर दे सकता हूँ.

श्री मुकेश नायक - अध्‍यक्ष महोदय, मैंने प्रश्‍न इसलिए पूछा था कि प्रदेश की जनता को फायदा हो. तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों, पटवारियों, आर.आई, डॉक्‍टर्स एवं शिक्षकों के हजारों पद खाली पड़े हुए हैं. जब आपके पास मैदानी स्‍तर पर प्रशासनिक ढांचा ही नहीं है.तो जनसेवा का काम कैसे पूरा होगा. जो मध्यप्रदेश शासन ने जिस नीति, सिद्धांत और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की बात कही है, वह कैसे पूरी होगी. अगर उसको ले जाने वाला केटेलिस्ट ग्रुप ही आपके पास नहीं होगा. इसलिये अगर आप इसकी जानकारी खासतौर से अनुसूचित जाति, जनजाति की उपलब्ध करा दें, तो मुझे संतोष होगा.

अध्यक्ष महोदय -- प्रश्न संख्या -12

ककरवाहा पिकअप बियर का सर्वेक्षण

12. ( *क्र. 6652 ) श्री के. के. श्रीवास्‍तव : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा तारांकित प्रश्‍न संख्‍या-25 (क्रमांक 2198) के अनुसार ककरवाहा पिकअप बियर परियोजना के विस्‍तृत सर्वेक्षण के आदेश कब तक जारी होंगे? (ख) परियोजना में बांध की ऊंचाई, उसकी लागत कितनी है तथा रबी की फसल में कितना रकबा सिंचित होगा? क्‍या इस योजना में उत्‍तरप्रदेश की भूमि भी डूब क्षेत्र में आयेगी? (ग) उत्‍तरप्रदेश की भूमि को डूब क्षेत्र से बचाने के लिये क्‍या बांध की ऊंचाई कम की जा सकती है, तो कितनी? (घ) इस योजना की कब तक तकनीकी और प्रशासकीय स्‍वीकृति हो जायेगी?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) से (घ) जी नहीं। परियोजना साध्‍य नहीं होने से शेष प्रश्‍न उत्‍पन्‍न नहीं होते हैं।

श्री के.के.श्रीवास्तव -- अध्यक्ष महोदय, मेरा जो प्रश्न था, उसका जो उत्तर आया है, मैं मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि जो प्रश्नाधीन ककरवाहा पिकअप बियर परियोजना है, इसका सामान्य सर्वे 10 दिसम्बर,2015 को मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर हुआ था, जिसमें परियोजना से 3400 हेक्टेयर भूमि सिंचित होने एवं 15 चंदेल कालीन तालाबों के भरे जाने की बात कही गयी थी. तो योजना साध्य क्यों नहीं है. जैसे कहा गया कि योजना साध्य नहीं है, तो मैं जानना चाहता हूं कि साध्य क्यों नहीं है. मंत्री जी, क्या योजना का विस्तृत सर्वेक्षण करवायेंगे.

श्री जयंत मलैया -- अध्यक्ष महोदय, इसमें उत्तर प्रदेश का और मध्यप्रदेश का डूब क्षेत्र 20 प्रतिशत से भी अधिक है. इसलिये यह योजना साध्य नहीं है.

श्री के.के.श्रीवास्तव -- अध्यक्ष महोदय, जब उत्तर प्रदेश का क्षेत्र आ रहा है, तो एक बार पुनः विस्तृत सर्वेक्षण करवा लें कि जिसमें उत्तर प्रदेश का क्षेत्र वंचित हो जाये और बाकी मध्यप्रदेश में ही केचमेंट एरिया रहे और मध्यप्रदेश में जल संग्रहण की स्थिति बने. तो पुनः विस्तृत सर्वे हो जाये. अभी तो सामान्य सर्वे हुआ है. हम योजना को लम्बी लटकाने के लिये अधिकारियों ने जो उत्तर दे दिया, उसको हम क्यों मान्य करें.

श्री जयंत मलैया -- अध्यक्ष महोदय, यह तो माननीय सदस्य जी को पता है कि जो अधिकारी बना कर देते हैं, उनमें से मैं कितना और क्या बोलता हूं. परंतु इन्होंने कहा है, मैं श्री के.के.श्रीवास्तव जी, माननीय सदस्य की उपस्थिति में इसका जैसा चाहेंगे, हम परीक्षण भी करवा लेंगे और यदि साध्य होगी योजना, तो हम करा भी देंगे.

श्री के.के.श्रीवास्तव -- अध्यक्ष महोदय, यू.पी. वाला पोर्शन हटाकर करा लेंगे सर्वेक्षण. धन्यवाद.

वित्‍तीय अनियमितताओं की जाँच एवं कार्यवाही

13. ( *क्र. 5720 ) श्री कुँवरजी कोठार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या जिला राजगढ़ की नगर पालिका परिषद सारंगपुर एवं नगर पंचायत परिषद पचोर में स्‍थानीय प्रशासन के मद को छोड़ कर अन्‍य विभाग की योजनाएं जैसे बी.आर.जी.एफ., सांसद निधि, विधायक निधि, सर्व शिक्षा अभियान, अनुसूचित जाति/जनजाति विभाग एवं जनभागीदारी मद से निर्माण कार्य हेतु वित्‍तीय वर्ष 2013-14, 2014-15 एवं 2015-16 में प्रश्‍न दिनांक तक कितनी-कितनी राशि किस-किस विभाग से किस-किस कार्य हेतु प्राप्‍त हुई है? (ख) प्रश्‍नांश (क) के सदंर्भ में सारंगपुर एवं पचोर में कितने कार्य पूर्ण, अपूर्ण एवं अप्रांरभ हैं? (ग) प्रश्‍नांश (ख) के संदर्भ में जो कार्य अप्रांरभ/अपूर्ण हैं, उन कार्यों की राशि नगर पालिका/पंचायत के किस मद एवं किस खातों में कितनी-कितनी राशि प्रश्‍न दिनांक तक जमा है एवं शेष कार्य को प्रश्‍न दिनांक तक प्रारंभ न किये जाने के क्‍या कारण हैं? अपूर्ण एवं अप्रांरभ कार्य की जानकारी वर्षवार, कार्यवार, जमा राशि की जानकारी से अवगत कराते हुये कार्य प्रांरभ न कराये जाने के कारण बतावें। (घ) प्रश्‍नांश (ग) अनुसार यदि अप्रांरभ कार्य की राशि परिषद/पंचायत के खाते में शेष नहीं है, तो व‍ह राशि किस कार्य पर खर्च की गई है? वर्षवार, कार्यवार विस्‍तृत विवरण देवें। यदि अप्रांरभ एवं अपूर्ण कार्य की राशि बगैर कार्य के आहरण की गई है, तो दोषी अधिकारियों के विरूद्ध विभाग द्वारा क्‍या-क्‍या कार्यवाही की जावेगी?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) एवं (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) एवं (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्री कुंवरजी कोठार -- अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी को यह बताना चाहता हूं कि जो विभाग द्वारा परिशिष्ट अ में जानकारी दी गई है, वह जानकारी असत्य है. जिसमें कई काम पूर्ण नहीं हुए हैं. उन्हें भी व्यय राशि के अनुसार पूर्ण बता दिया गया है और कुछ काम ऐसे हैं, जो अपूर्ण हैं, उन्हें भी पूर्ण बता दिया गया है. ऐसे ही वर्ष 2013-14 में विभिन्न मदों में राशि दी गयी थी. मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना, जिसके 200 लाख के टेंडर अभी प्रक्रियाधीन हैं. उसके विरुद्ध 38 लाख प्रदाय किये थे. फायर ब्रिगेड के लिये 22 लाख थे. ऐसे ही मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजना में 4 करोड़ रुपये एडवांस दिये थे. जन भागीदारी सांसद मद में 108 लाख, मुख्यमंत्री शहरी स्वच्छता मिशन में 2013-14 में 24.75 लाख, बीपीएल के हितग्राहियों के विभिन्न पेंशन योजना के लिये लंबित राशि 18 लाख..

अध्यक्ष महोदय -- आप सीधा सीधा प्रश्न पूछें.

श्री कुंवरजी कोठार -- अध्यक्ष महोदय, इस राशि का कहीं अता पता नहीं है. इस राशि का संबंधित अधिकारी ने कहां, क्या किया है या किस कार्य पर व्यय किया है, इसकी जांच मेरे द्वारा पहले भी विभाग से पिछली परिषद् के टाइम 1.4.2010 से 31.3.2015 तक की जांच की मांग की गई थी. लेकिन उसकी जांच अभी तक भी नहीं कराई गई है. तो मैं मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि क्या दिनांक 1.4.2010 से 31.3.2015 तक सारंगपुर नगरपालिका परिषद् की जांच उच्च स्तरीय दल से करायेंगे क्या.

राज्यमंत्री, सामान्य प्रशासन (श्री लाल सिंह आर्य) -- अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने कहा है कि काम प्रारंभ नहीं हुए, अपूर्ण हैं. मैंने आपकी जानकारी के लिये आपके प्रश्न के उत्तर में जवाब भी दिया है. 98 काम 2013-14 में पूर्ण हो गये और 3 काम अपूर्ण हैं. सारंगपुर के 3 और पचोर के 2 यह काम अपूर्ण हैं या प्रारंभ हैं. मैं बताना चाहता हूं कि आपने कहा है कि यह राशि निकाल ली गयी है. यह जो सारंगपुर में विधायक निधि के 3 काम थे, इनकी राशि एसबीआई बैंक, सारंगपुर के खाता क्रमांक 53036359613 मैं जमा है. इसी प्रकार से ये तीनों राशियां जमा हैं एसबीआई में, पैसा अभी निकाला नहीं गया है. पचोर नगर पंचायत में भी बीआरजीएफ के जो काम थे दो, एक काम जन भागीदारी का, इसका भी मैं बताना चाहता हूं कि यह पैसा निकला नहीं है. SBI के खाता क्रमांक 63036339454 इसमें BRGF का पैसा इसमें जमा है. जन भागीदारी का पैसा बैंक के खाता नंबर 996310110011030 में जमा है. लेकिन फिर भी माननीय सदस्य का कहना है तो मैं उनको बताना चाहूंगा कि आपके प्रश्न के आधार पर ही पहले CMO को सस्पेंड किया गया दूसरा जो काम अभी तक प्रारंभ नहीं हुय़े हैं, 15 दिवस के अंदर उन कामों को हम प्रारंभ करा देंगे और तीन माह के अंदर उन कार्यों को पूरा करा देंगे.

श्री कुंवरजी कोठार-- माननीय अध्यक्ष महोदय, वर्ष 2013-14 में जो राशि 686.75 लाख की राशि के बारे में जानकारी नहीं दी गई है. उसकी आज तक जांच ही नहीं हो रही है. जांच लंबित पड़ी हुई है.

अध्यक्ष महोदय-- निलंबित कर दिया है .कार्य का भी आश्वासन मंत्री जी ने दे दिया है.

श्री कुंवरजी कोठार- निलंबित होना तो ठीक है लेकिन जांच तो उसके बाद आगे बढ़ना चाहिये. अध्यक्ष महोदय, हम चाहते हैं कि जो रूपये 686.75 लाख का जो गबन है उसका तो पता चले कि वह पैसा आखिर गया कहां है.

श्री लाल सिंह आर्य-- माननीय अध्यक्ष महोदय, इसकी हम जांच करा लेंगे. भोपाल से किसी अधिकारी को भेजकर के जांच करा लेंगे.

श्री कुंवरजी कोठार-- मंत्री जी मैं उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहा हूं.

श्री लालसिंह आर्य-- अध्यक्ष महोदय,उच्च स्तरीय क्या, आप जांच चाहते हैं न. कोठार जी आपकी भावना को मैं समझ रहा हूं. 1 माह के अंदर हम जांच पूर्ण करा लेंगे और जो भी दोषी और पाया जायेगा उसके खिलाफ कार्यवाही करेंगे.

श्री कुंवरजी कोठार-- मंत्री जी इसके लिये आपको धन्यवाद.

 

 

 

 

भू-जल स्‍त्रोतों के पेयजल के उपचार/निवारण हेतु कार्यवाही

14. ( *क्र. 4799 ) श्री सुशील कुमार तिवारी : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या जबलपुर जिले सहित प्रदेश के 18 जिलों के 93 विकासखंडों में म.प्र. के भू-जल संसाधन का पेयजल एवं कृषि हेतु आंकलन कर उपचार/निवारण के उपाय एवं जन जागरूकता हेतु अध्‍ययन रिपोर्ट का प्रकाशन किया गया है? (ख) क्‍या रिपोर्ट के अनुसार एक या एक से अधिक घुलनशील घातक तत्‍वों के कारण पानी पीने या सिंचाई योग्‍य नहीं पाया गया है? (ग) यदि हाँ, तो क्‍या इस भू-जल स्‍त्रोतों के पेयजल के उपचार/निवारण के उपाय हेतु कार्यवाही की जावेगी? (घ) यदि हाँ, तो क्‍या कार्यवाही कब तक की जावेगी?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) एवं (ख) जी हाँ। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) एवं (घ) रिपोर्ट का उद्देश्‍य संबंधितों में जागरूकता पैदा करना था, जिसकी पूर्ति रिपोर्ट के प्रकाशन से की गई है। लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग पेयजल योजनाएं बनाते समय जल की गुणवत्‍ता को ध्‍यान में रखकर आवश्‍यकतानुसार उपचार की व्‍यवस्‍था करता है।

श्री सुशील कुमार तिवारी : माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न भू-जल से संबंधित है. मंत्री जी ने परिशिष्ट में उत्तर दिया है उसमें उल्लेख है कि 4 वार्ड गुप्तेश्वर वार्ड, मदन महल, रानी दुर्गावती और त्रिपुरी वार्ड में प्रदूषित जल पाया गया है. मैं बताना चाहता हूं कि मेरे विधानसभा क्षेत्र के 17 स्थान ऐसे हैं जहां पर संचालनालय द्वारा उन जलस्तोत को बंद करने के निर्देश जारी किये गये हैं वह रिपोर्ट में नहीं है. दूसरा प्रश्न यह है कि रिपोर्ट में जन जागरण के बारे में बताया गया है कि जन जागरण के तहत यह रिपोर्ट प्रकाशित हुई है. अध्यक्ष महोदय हम बताना चाहते हैं कि उसमें सलाह दी गई है कि वहां पर व्यक्ति आंवला, अमरूद,अखरोट मूंगफली, लहसुन, अदरक, गाजर, पपीता खाये इससे इस बीमारी का क्षरण होगा. अध्यक्ष महोदय, यहां पर अत्यंत गरीब लोग निवास करते हैं ,उन गरीबों के पास में इतना पैसा नहीं होता है कि वह यह चीजें खाकर के बीमारी से बच सकें. विभाग इसमें क्या करना चाहता है वह मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं.

श्री जयंत मलैया-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह भूजल पेय और कृषि हेतु आंकलन उपचारी की जो अध्ययन रिपोर्ट है यह जल संसाधन विभाग द्वारा आम लोगों के जागरण के लिये बनाई है. अण्डर ग्रांउड वॉटर ग्रामीण क्षेत्र में और शहरी क्षेत्र में 18 जिलों के 90 या ब्लाक में उसकी स्थिति क्या है. जहां तक अण्डर ग्रांउड वॉटर के ट्रीटमेंन्ट का सवाल उठता है या वाटर सप्लाई का आता है तो यह जल संसाधन विभाग नहीं करता है, यह लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग से होता है.

श्री सुशील कुमार तिवारी : माननीय अध्यक्ष महोदय, हम यह जानना चाहते हैं कि यह रिपोर्ट अधूरी है क्योंकि केवल चार वार्ड ही इसमें सम्मलित हैं . मैं बताना चाहता हूं कि लगभग 17 वार्ड तो मेरी ही विधानसभा के इसमें प्रभावित हैं. दूसरी बात यह है कि रिपोर्ट में जो उपचार बताये गये हैं कि लोग वहां पर अंगूर खायें, पपीता खायें, काजू खायें, किशमिश खायें, जो व्यक्ति एक रूपये किलो गेहूं और एक रूपये किलो चावल खा रहा हो वह लोग इस सलाह का क्या फायदा ले पायेंगे. और विभाग इसमें क्या उपलब्ध करायेगा.

अध्यक्ष महोदय-- आप क्या चाहते हैं.

श्री सुशील कुमार तिवारी :अध्यक्ष महोदय, हम चाहते हैं कि वहा पर प्रदूषित जल समाप्त हो वहां पर सलाह दे रहे हैं कि आप अंगूर खायें, पपीता खायें. काजू खायें बतायें इससे वहां पर पानी की समस्या का क्या हल होगा. परिशिष्ट में यह बात दी गई है.

श्री जयंत मलैया --माननीय अध्यक्ष महोदय, जो रिपोर्ट आई है उसमें लोगों को यह एडवाइज किया गया है परंतु इसके साथ साथ लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग जैसी उन्होंने मुझे जानकारी दी है अण्डर ग्राउन्ड वॉटर में अमूमन फ्लोराइड और नाइट्रेड पाया जाता है.नाइट्रेड सामान्य तौर से सतह से जो सीवेज और अन्य प्रकार का प्रदूषित जल नीचे जाता है उसको अलग करने के लिये नाईट्रेड रिमूवल प्लान्ट लगाये जाते, जिससे जल दूषित नहीं रहता . जैसा कि माननीय सदस्य ने बताया है तो मैं कहना चाहता हूं कि यदि कहीं पर शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं होता है तो फ्लोलाइड से प्रभावित जितनी भी बसाहटें हैं उन सारी बसाहटों में लगभग लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने 903 फ्लोराइड रिमूवल संयंत्र स्थापित किये हैं, वर्तमान में फ्लोराइड युक्त पेयजल किसी भी बसाहट में प्रदाय नहीं हो रहा है. ऐसी जानकारी मुझे लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग से मिली है.

शिकायतों की जाँच/निराकरण

15. ( *क्र. 4432 ) श्रीमती पारूल साहू केशरी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सागर जिले के सुरखी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कितने अनुविभागीय अधिकारी पदस्‍थ हैं? इन अधिकारियों के पास दिनांक 01 जनवरी, 2013 से प्रश्‍न दिनांक तक किस-किस विभाग की, कुल कितनी-कितनी शिकायतें प्राप्‍त हुई हैं? (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार प्राप्‍त शिकायतों में से कितनी शिकायतों की जाँच करायी जाकर क्‍या कार्यवाही की गयी है? (ग) क्‍या स्‍कूलों में मध्‍यान्‍ह भोजन, समय पर राशन वितरण, राशन पात्रता पर्ची, पंचायतों पर धारा 40 की कार्यवाही, सोसायटी की अनियमितताओं जैसे गंभीर प्रकरणों पर लंबे समय से कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है, जिससे अनियमिततायें करने वाले दोषी संरक्षित हैं? किस-किस विभाग की कितनी शिकायतें लंबित हैं, जिन पर कार्यवाही होना अपेक्षित है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) :

श्रीमती पारूल साहू (सुरखी)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दिये गये उत्‍तर से मैं संतुष्‍ट नहीं हूं. मध्‍यान्‍ह भोजन के विषय में उत्‍तर गलत है. राहतगढ़ में कई स्‍कूलों में 6-6 महीने से मध्‍यान्‍ह भोजन की शिकायतों के बारे में न्‍यूज पेपर में भी प्रकाशित हुआ है. इसी प्रकार राष्‍ट्रीय परिवार स‍हायता के पात्र हितग्राहियों को भी परेशान किया जा रहा है. साथ ही साथ पिछले वर्ष एसडीएम राहतगढ़ द्वारा सागर कमिश्‍नर को मुआवजा राशि के वितरण में भी गलत जानकारी दी गई थी. अंत्‍योदय मेला जो पिछले वर्ष 6 महीने पूर्व हुआ था, उसी दौरान माननीय गोपाल भार्गव मंत्री पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग कार्यक्रम भी अव्‍यवस्‍थाओं के कारण रद्द हुआ था. अध्‍यक्ष महोदय राहतगढ़ में साम्‍प्रदायिक हिंसा भी प्रशासनिक चूक के कारण ही हुई है. अध्‍यक्ष महोदय, मैं आदरणीय मंत्री जी से यह कहना चाहूंगी कि लगातार जो शिकायतें राहतगढ़ में आ रहीं हैं, इसको ध्‍यान में रखते हुये एसडीएम को तत्‍काल सस्‍पेंड किया जाये. करेंगे क्‍यो.

सामान्‍य प्रशासन राज्‍य मंत्री (श्री लाल सिंह आर्य)-- अध्‍यक्ष महोदय, जी नहीं.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप अनियमितता के संबंध में कोई जानकारी पूछना चाहती हैं तो पूछ लीजिये.

श्री लालसिंह आर्य-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍या बहुत सजग हैं वह वहां पर जनसमस्‍या निवारण के लिये केम्‍प भी लगाती हैं और उन्‍होंने वहां जो केम्‍प लगाये थे, उनमें पेंशन के प्रकरण, राशन कार्ड, गरीबी रेखा की सूची में नाम जोड़ने वाले, भूमि के पट्टे की मांग, पात्रता पर्चियों के संबंध में बहुत सारे आपने प्रकरण वहां दिये थे, 381 शिकायतें आपने पहुंचाई थीं, 324 का हमने पात्रता की दृष्टि से निराकरण कर दिया है, जो कि 85 प्रतिशत है. जहां तक राहतगढ़ का मामला है, कुल जो हमने निराकृत शिकायतें की हैं 269, जो कि 89 प्रतिशत है. लंबित शिकायतें 33 हैं, लेकिन उनका भी परीक्षण हो रहा है, बहुत सारी ऐसी चीजें हैं उसमें किसी चीज के लिये पैसा स्‍वीकृत करना है तो उसकी एक प्रक्रिया है, तो जहां तक माननीय सदस्‍या का कोई प्रश्‍न है तो उसमें अथेंटिक जानकारी हो तो हमें दे दें, उसका भी हम परीक्षण करा लें.

श्रीमती पारूल साहू-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे अपनी बात पूरी करने दी जाये. मैं माननीय मंत्री जी से आश्‍वासन चाहती हूं कि यह जो भी बातें बताई गई हैं, अगर सत्‍य हैं तो इसको ध्‍यान में रखते हुये प्रमुख सचिव को भेजकर सभी शिकायतें जो हैं उनकी समीक्षा बैठक की जाये और उसमें विधायकों को भी सम्मिलित किया जाये.

श्री लालसिंह आर्य-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वैसे तो कोई प्रश्‍न अब इसमें बनता नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप कुछ कांक्रीट दे दीजिये उनको.

श्री लालसिंह आर्य-- लेकिन फिर भी माननीय अध्‍यक्ष महोदय माननीय सदस्‍या जी को हम संतुष्‍ट करना चाहते हैं, हम कलेक्‍टर को निर्देश जारी करेंगे कि पुन उसकी बैठक करके समीक्षा कर लें और माननीय विधायिका उसमें सम्मिलित हों.

श्रीमती पारूल साहू-- अध्‍यक्ष महोदय, अगर पीएस को भेजा जायेगा तो इसमें बेहतर जांच होगी, आपसे निवेदन है.

प्रश्‍न क्रमांक 16-- श्री चंद्रशेखर देशमुख (अनुपस्थित)

प्रश्‍न क्रमांक 17-- श्री यादवेन्‍द्र सिंह (अनुपस्थित)

ग्रामों का विद्युतीकरण

18. ( *क्र. 6577 ) श्री वीरसिंह पंवार : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रायसेन एवं विदिशा जिले में फरवरी, 2016 की स्थिति में कितने ग्रामों की विद्युत सप्‍लाई बंद है तथा क्‍यों? कारण बतावें। (ख) किसानों/मजदूरों/एस.सी./एस.टी. वर्ग के उपभोक्‍ताओं से बकाया राशि वसूलने के संबंध में विभाग के क्‍या-क्‍या निर्देश हैं? (ग) उक्‍त जिलों में अस्‍थायी विद्युत कनेक्‍शन को स्‍थाई करने के संबंध में क्‍या-क्‍या कार्यवाही की जा रही है? (घ) उक्‍त जिलों के कितने ग्राम विद्युत विहीन हैं तथा उनके विद्युतीकरण हेतु क्‍या-क्‍या कार्यवाही की जा रही है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) फरवरी-16 की स्थिति में रायसेन जिले के किसी भी ग्राम की विद्युत सप्‍लाई बंद नहीं है तथा विदिशा जिले के अंतर्गत 14 ग्रामों की विद्युत सप्‍लाई बकाया राशि होने के कारण बंद है। (ख) प्रश्‍नांश '' के परिप्रेक्ष्‍य में उपभोक्‍ताओं के बिजली बिलों की बकाया राशि के निराकरण हेतु मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा बकाया राशि समाधान योजना दिनांक 25.02.16 से लागू की गयी है। उक्‍त योजना के अंतर्गत सामान्‍य घरेलू उपभोक्‍ताओं के बकाया बिल की सरचार्ज की संपूर्ण राशि माफ की गई है तथा बी.पी.एल. उपभोक्‍ताओं एवं शहरी क्षेत्र में अधिसूचित मलि‍न बस्‍ती में निवास कर रहे घरेलू उपभोक्‍ताओं की बकाया राशि में से सरचार्ज के साथ ऊर्जा प्रभार की 50 प्रतिशत राशि भी माफ करने का प्रावधान किया गया है। उक्‍त योजना/निर्देशों की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) म.प्र.म.क्षे.वि.वि. कंपनी क्षेत्रान्‍तर्गत वर्तमान में अस्‍थायी से स्‍थायी कृषि पंप में परिवर्तित किए जाने के लिये अनुदान योजना एवं स्‍वयं का ट्रांसफार्मर योजना लागू है। इसके अतिरिक्‍त जिन कृषकों का पंप/कुआं विद्यमान निम्‍न दाब लाइन से 150 फीट की दूरी तक है, ऐसे कृषकों को औपचारिकताएँ पूर्ण करने पर तकनीकी साध्‍यता अनुसार स्‍थायी कृषि पंप कनेक्‍शन जारी किये जा रहें हैं। (घ) विदिशा जिले के सभी ग्राम विद्युतीकृत हैं। रायसेन जिले के ग्राम-सुआगढ़, महुआखेड़ा (बघेडी) रामगढ़ एवं चौका बैरागी सघन वन क्षेत्र में स्थित होने के कारण अविद्युतीकृत हैं तथा इन ग्रामों को गैर परंपरागत ऊर्जा स्‍त्रोतों से विद्युतीकृत किये जाने हेतु प्रस्‍तावित किया गया है। इन ग्रामों का गैर-परंपरागत ऊर्जा स्‍त्रोतों से विद्युतीकरण का कार्य नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग द्वारा किया जायेगा।

 

श्री वीरसिंह पंवार (कुरवाई)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से जो जानकारी उपलब्‍ध हुई है, उससे संतुष्‍ट नहीं हूं और माननीय मंत्री जी को जो अधिकारियों ने जानकारी दी है वह पूर्णत असत्‍य है, मेरे ही क्षेत्र के लगभग 50 से 60 ग्राम बंद हैं अभी वर्तमान में जो गोदरेज कंपनी द्वारा जो काम किया गया था, उसके करीब 100 से ज्‍यादा ट्रांसफार्मर जले पड़े हैं, जिले में मैं 25 बार अधिकारियों से कह चुका हूं, बस बदलते हैं, बदलते हैं, कोई ट्रांसफार्मर नहीं बदला है और फर्जी बिल गांव में दिये जा रहे हैं, जब लाइट ही नहीं है 4-4, 6-6 महीने से तो वह बिल कैसे जमा करेंगे. मेरा निवेदन यह है कि जो जले हुये ट्रांसफार्मर हैं वह बदले जायें, दूसरा विद्युत विहीन गांव की जो जानकारी मैंने चाही गई थी उसमें बताया गया कि कोई भी गांव विद्युत विहीन नहीं है, मैंने 61 गांव जो विद्युत वि‍हीन मजरे टोले थे उसका आदिम जाति कल्‍याण विभाग से अभी प्रस्‍ताव बनवाकर भिजवाये हैं तो 61 गांव तो वही हैं मेरे, एक मूल गांव मेरा बेंदीगढ़ हैं उसमें 50-60 साल से आज तक कोई विद्युत का काम हुआ ही नहीं है, उस गांव में विद्युतीकरण किया जाये, यह माननीय मंत्री जी से प्रश्‍न है मेरा.

श्री राजेन्द्र शुक्ल--अध्यक्ष महोदय, जहां विद्युतीकरण नहीं हैं, अभी दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना आ रही है, उस योजना के माध्यम से या अन्य किसी योजना के माध्यम से वहां शत प्रतिशत विद्युतीकरण कराना हमारा लक्ष्य है.

श्री वीरसिंह पंवार--अध्यक्ष महोदय,बेंदीगढ़ गांव है उसको प्राथमिकता से लें. वह कुशवाह समाज का गांव है. वहां अन्य किसी योजना से विद्युतीकरण नहीं हो पाता. मंत्रीजी से निवेदन है कि इसको विशेष रुप से देखें.

श्री राजेन्द्र शुक्ल-- ठीक है.

श्री वीरसिंह पंवार--अध्यक्ष महोदय, जो जले हुए गोदरेज कंपनी ट्रांसफार्मर हैं, उनको शीघ्र बदला जाये.

श्री राजेन्द्र शुक्ल--अध्यक्ष महोदय, जो समाधान योजना लायी गई है, उसका बहुत लाभ सामने आ रहा है. विदिशा जिले में 42 लाख रुपये की वसूली के बाद लगभग 39 लाख रुपये की माफी की गई है. इसका मतलब कि अब कोई भी गांव ऐसा नहीं बचेगा, जो 10 प्रतिशत भी भुगतान न कर पाने के कारण बिजली से नहीं जुड़ पा रहा था, अब वहां बहुत तेजी से पैसा भी जमा हो रहा है और वहां पर कनेक्शन भी जोड़े जा रहे हैं.

श्री वीरसिंह पंवार-- मंत्रीजी, ट्रांसफार्मर जले हुए हैं, बिजली नहीं है तो लोग पैसा कैसे जमा करेंगे. 6-6 माह हो गये हैं, उनके पास लिखित में है कि ट्रांसफार्मर जले हैं. मेरा निवेदन है कि वह गोदरेज कंपनी के ट्रांसफार्मर बदले जायें.

श्री राजेन्द्र शुक्ल--ठीक है.

सौर ऊर्जा एवं पवन ऊर्जा प्‍लांट की स्‍थापना

19. ( *क्र. 5919 ) श्री हरदीप सिंह डंग : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मंदसौर जिले में सौर ऊर्जा एवं पवन ऊर्जा उत्‍पादन हेतु कितनी कंपनियों द्वारा उत्‍पादन कार्य किया जा रहा है? (ख) सुवासरा विधानसभा क्षेत्र में कितने पंचायत क्षेत्रों में किन-किन स्‍थानों पर सौर ऊर्जा एवं पवन ऊर्जा प्‍लांट लगाने की स्‍वीकृति शासन द्वारा दी गई है एवं प्रश्‍नांकित दिनांक तक किस-किस स्‍थान पर ये प्‍लांट लग चुके हैं? (ग) उपरोक्‍त कं‍पनियों के द्वारा किन-किन व्‍यक्तियों/संस्‍थाओं से प्‍लांट लगाने हेतु भूमियां क्रय की गई हैं? ग्राम का नाम, पंचायत का नाम, व्‍यक्ति का नाम, भूमि का क्षेत्रफल एवं विक्रेता को दी गई राशि की नाम सहित जानकारी देवें।

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-स अनुसार है।

 

श्री हरदीप सिंह डंग--अध्यक्ष महोदय, मेरे द्वारा जो प्रश्न यहां पर पूछा गया है, उसमें जो उत्तर आया है उसके प्रपत्र में 6 नंबर पर पोकल एनर्जी सोलर वन इंडिया के 20 मेगावॉट का उत्पादन बताया गया है. उसी प्रश्न को मैंने 3 मार्च को पूछा था, प्रश्न क्रमांक 58 /948 में यह बताया कि कलेक्टर के यहां माननीय न्यायालय के स्टे आर्डर का पालन करते हुए काम रोक दिया गया है लेकिन आज जो उत्तर दिया है, उसमें बताया कि 20 मेगावॉट का उत्पादन किया गया है. मेरा प्रश्न है कि उस स्टे का पालन हुआ है तो यह 20 मेगावॉट कैसे पैदा हुई है. उसमें काम रोकने का स्टे आ चुका था. पहले उत्तर दिया कि हां, काम रोक दिया गया है, आज उत्पादन की बात की गई है. दोनों में से कौन सा उत्तर सही है.

श्री राजेन्द्र शुक्ल--अध्यक्ष महोदय, यह सवाल सीधे उद्भूत तो नहीं होता है लेकिन जो सवाल आपने पूछा है, उसकी जानकारी लेकर,आपको संतुष्ट कर देंगे.

श्री हरदीप सिंह डंग--अध्यक्ष महोदय, 3 मार्च की प्रश्नोत्तरी भी लाया हूं. इसमें कलेक्टर ने स्वयं लिखा है कि कार्य बंद कर दिया गया है. मेरा दूसरा प्रश्न कि एक ही कंपनी बार बार नाम बदल कर वहां पर उत्पादन का काम कर रही है. जिस नाम से स्वीकृति मिली है, उस बाहर सम एडीशन (फोटो दिखाते हुए) का बोर्ड लगा दिया गया है जबकि इस नाम से वहां कोई अनुमति नहीं है. जबकि अनुमति दूसरे नाम से मिली है. और जिन व्यक्तियों से जमीन खरीदी है, उनके जो मुझे आंकड़े दिये हैं कि 14 लाख, 15 लाख और 16 लाख रुपये का भुगतान है, वहां उनको मात्र डेढ़ लाख, 50 हजार, 60 हजार और 70 हजार रुपये का पेमेंट किया गया है.यहां पर जो लिस्ट दी गई है इसमें 15-15 लाख रुपये बताये गये हैं. मेरा निवेदन है कि इसकी आप जांच करायेंगे और कब तक करायेंगे?

श्री राजेन्द्र शुक्ल--अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य श्री हरदीप सिंह जी डंग बड़े भाग्यशाली विधायक हैं. उनके यहां विंड एनर्जी का भी हब बन रहा है और सोलर एनर्जी का भी हब बन रहा है. मेरे पास बहुत से सदस्य आते हैं कि हमारे यहां विंड पावर प्लांट या सोलर पावर प्लांट लगवा दें. लेकिन जो आपने बात पूछी है वह सीधे आपके सवाल से उद्भूत नहीं हो रहा है. इसमें अंदर घुसकर, बारिक मामले हैं, हम जानकारी प्राप्त कर लेंगे क्योंकि बाकायदा रजिस्ट्री हुई है, लगभग पचास प्रतिशत जमीन निजी लोगों से ली गई है और पचास प्रतिशत सरकारी जमीनें मिली हैं.

श्री हरदीप सिंह डंग--मेरा निवेदन है कि क्या आप जांच करायेंगे?

अध्यक्ष महोदय-- किस बात की?

श्री राजेन्द्र शुक्ल--निश्चित जांच करा लेंगे.

अध्यक्ष महोदय-- किस बात की जांच करायेंगे, स्पेसिफिक तो बताईये.

श्री हरदीप सिंह डंग-- अभी एक स्वास्थ्य विभाग की जांच थी, उसमें हमको शामिल नहीं किया गया और लीपा पोती करके आ गये. इसलिए इसकी जांच करायें और उसमें हमें भी शामिल करें.

श्री राजेन्द्र शुक्ल--देखिये, आपकी गरिमा के अनुकूल नहीं होगा, आपको जांच में शामिल करना, लेकिन जांच हो जायेगी.

श्री हरदीप सिंह डंग-- फिर तो कुछ भी नहीं होगा. (व्यवधान)मंत्रीजी, जब बाकी विधायकों को शामिल किया जाता है तो यहां पर क्या दिक्कत है? (व्यवधान)मेरा निवेदन है कि जब दूसरे विधायकों को शामिल किया जा रहा है.(व्यवधान)

श्री सुखेन्द्र सिंह - जब जांच की बात है तो..यह गलत बात है. (व्यवधान)..

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, यह मामला गंभीर है. जमीन के अधिग्रहण का मामला है, आप कह रहे हैं कि सरकारी जमीन अधिग्रहण की गई है, 50 प्रतिशत किसानों को पैसा देकर की है, माननीय विधायक का कहना यह है कि ऐसा नहीं है, किसानों की जमीन भी ले ली है और किसानों को पता भी नहीं है.

अध्यक्ष महोदय - स्पेसिफिक पूछें कि क्या चाहते हैं?

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, यह चाहते हैं कि जांच करें.

अध्यक्ष महोदय - किस बात की?

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, इस बात की कि किसानों की जमीन का अधिग्रहण हुआ है तो उन्हें पैसे दिये हैं या जिस किसान की जमीन का अधिग्रहण हुआ है तो वह उसे सरकारी बनाकर अधिग्रहण करना बता रहे हैं और किसान को मुआवजा नहीं मिल रहा है, इस बात की जांच करें.

श्री राजेन्द्र शुक्ल - अध्यक्ष महोदय, इस बात की जांच कराने में कोई आपत्ति नहीं है कि किसानों से जो जमीन ली गई है, उसका भुगतान हुआ है कि नहीं हुआ है.

अध्यक्ष महोदय - आप ठहरिए, उत्तर तो आने दीजिए.

श्री हरदीप सिंह डंग - अध्यक्ष महोदय, स्टे आने के बाद भी काम नहीं हुआ है, उसमें जांच में मुझे सम्मिलित किया जाय.

श्री राजेन्द्र शुक्ल - अध्यक्ष महोदय, निजी लोगों से जो जमीन ली गई उसकी जांच हो जाएगी कि उनके साथ कोई अन्याय तो नहीं हुआ है.

अध्यक्ष महोदय - प्रश्न संख्या 20 (श्री रामलाल रौतेल)..

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, जांच में सम्मिलित करा दें.

अध्यक्ष महोदय - नहीं, हर जांच में ठीक नहीं है?

(व्यवधान)..

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, कोई न कोई बात है इसलिए मंत्री जी हां नहीं कर रहे हैं.

श्री रामलाल रौतेल - अध्यक्ष महोदय, शहरी नगरपालिका..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय - दूसरों के प्रश्न भी जरूरी हैं, कृपा करके प्रश्न होने दें, आप कृपा करके बैठ जाएं.

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, अब जांच करा ही रहे हैं तो जांच में साथ रखने में क्या आपत्ति है? विधायक थोड़ी जांच करेगा

(व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय - नहीं आप बैठ जाएं, उनके 4-5 प्रश्न हो गये हैं. रावत जी को भी मौका दिया. वे जांच के लिए भी तैयार हैं और क्या चाहते हैं?

(व्यवधान)...

श्री घनश्याम पिरोनियां - अध्यक्ष महोदय, हमारा समय निकल रहा है, ये समय खराब कर रहे हैं, हमारे भी प्रश्न हैं. बड़ी मुश्किल से समय मिला है. अध्यक्ष महोदय, इन्हें बैठने के लिए कहा जाय इसके बाद में हमारा भी प्रश्न है.

श्री कमलेश्वर पटेल - अध्यक्ष महोदय, आप व्यवस्था दे दीजिए.

उप नेता प्रतिपक्ष (श्री बाला बच्चन) - अध्यक्ष महोदय, जैसा हमारे विधायकगण चाह रहे हैं कि विधायकों की उपस्थिति में जांच करा ली जाय तो मैं समझता हूं कि इसमें गलत क्या है? इसमें आपको व्यवस्था देना चाहिए, माननीय मंत्री जी को बोलना चाहिए. माननीय विधायक को भी जांच में रखें. हमारा आपसे निवेदन है, हम आपसे ही तो संरक्षण चाहेंगे.

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, विधायकों का संरक्षण हम आपसे ही तो मांगेंगे. जांच वह करा ही रहे हैं तो विधायकों की उपस्थिति में जांच कराने में क्या परेशानी है?

श्री बाला बच्चन - आप जांच के आदेश दे ही रहे हैं तो जिनका प्रश्न है उनको भी साथ में रख लें.

अध्यक्ष महोदय - आजकल यह प्रवृत्ति हो गई है, मैं यह कहना नहीं चाहता था कि कोई भी जांच या कोई भी बात होती है तो उसमें सारे माननीय विधायक बोलते हैं कि क्या हमको शामिल करेंगे, क्या सर्वे में करेंगे, क्या जांच में करेंगे. यह मैं नहीं सोचता कि यह उचित प्रवृत्ति है. यह हमारा काम नहीं है. बहुत बड़ा संदेह होता है तो विधान सभा की समितियां बनती हैं और वह जाती हैं उसके लिए विधान सभा में अनेक समितियां हैं जो जांच करने जाती हैं. आपको भी यह जानकारी है, आप वरिष्ठ सदस्य हैं. इसलिए हर विषय में इसके लिए विवश करना उचित नहीं समझता. फिर भी माननीय मंत्री जी यदि कुछ कहना चाहें तो कहें.

श्री राजेन्द्र शुक्ल - अध्यक्ष महोदय, जैसा आपने व्यवस्था दी है, विधायक का बहुत बड़ा स्टेचर होता है. विधायक का काम है जांच करवाना, न कि जांच करना. आपकी मांग पर जांच स्थापित होगी, जिम्मेदार अधिकारी उसकी जांच करेंगे और हमें यह भरोसा करना चाहिए कि जो जांच करेंगे, उसमें यदि किसी के साथ अन्याय हुआ है तो बात पकड़ में आ जाएगी.

(व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय - (कई माननीय सदस्यों के एक साथ खड़े होकर बोलने पर) आपकी यह बात ठीक नहीं है. मैंने व्यवस्था दे दी है, जिसका काम है उसको ही करने दीजिए. माननीय विधायकगण न तो आप विशेषज्ञ हैं, मैं कुछ कहना नहीं चाहता, आप बैठ जाएं और उनको प्रश्न करने दें.

श्री हरदीप सिंह डंग - अध्यक्ष महोदय, आज के बाद कोई विधायक किसी की जांच में नहीं जाना चाहिए, आज के बाद कोई भी विधायक किसी भी जांच समिति में नहीं जाना चाहिए.

श्री निशंक कुमार जैन - और जो पहले गये हैं, उन्हें डिलीट किया जाय.

श्री हरदीप सिंह डंग - हां और जो पहले गये हैं, उनको डिलीट करें.

(व्यवधान)..

एक माननीय सदस्य - यह कागजों पर है जमीन पर कुछ भी नहीं है.

श्री के.के. श्रीवास्तव - जहां पर लगता है कि जाना चाहिए तो वहां पर जाएगा. (व्यवधान)..सरकार आपके हिसाब से नहीं चलेगी. यह क्या तरीका है.

(व्यवधान)..

श्री जितू पटवारी - अध्यक्ष जी, जो जांच होगी इससे दूध का दूध और पानी का पानी आएगा, अगर ऐसे में विधायक चला भी जाय तो क्या दिक्कत हो सकती है?

श्री के.के. श्रीवास्तव - यह कोई तरीका नहीं है कि आज के बाद विधायक नहीं जाएगा, सरकार को लगेगा तो विधायक जाएगा, नहीं तो नहीं जाएगा.

श्री जितू पटवारी - मेरा अनुरोध है कि अगर विधायक जी की इच्छा है तो जाना चाहिए, इसमें बुरा क्या हो जाएगा?

एक माननीय सदस्य - जो जवाब आ रहे हैं वह गलत आ रहे हैं तो जांच कहां से सही होगी? (व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय - प्रश्नकाल समाप्त.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

(प्रश्नकाल समाप्त)


 

समय 12.00 बजे.

नियम 267 क के अधीन

 

 

 

 

 

समय 12.02 बजे.

पत्रों का पटल पर रखा जाना.

 

मध्यप्रदेश वेअर हाऊसिंह एण्ड लाजिस्टिक कार्पोरेशन का बारहवां वार्षिक प्रतिवेदन एवं हिसाब पत्रक वित्तीय वर्ष 2014-15

 

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री ( कुंवर विजय शाह ) -- अध्यक्ष महोदय मैं मध्यप्रेदश वेअर हाउसिंग एण्ड लाजिस्टिक कार्पोरेशन एक्ट 1962 की धारा 31 की उपधारा (11) की अपेक्षानुसार मध्यप्रदेश वेअर हाउसिंग एण्ड लाजिस्टिक कार्पोरेशन का बारहवां वार्षिक प्रतिवेदन एवं हिसाब पत्रक वित्तीय वर्ष 2014-15 पटल पर रखता हूं.

पं. रमेश दुबे -- अध्यक्ष महोदय मैंने दिया है एक महत्वपूर्ण विषय है उ सको नहीं लिया गया है आज 28 ध्यानाकर्षण लिये गये हैं और एक मजदूर की लापरवाही से मौत हुई है.

अध्यक्ष महोदय -- आपने आग्रह किया था उसको चर्चा में लेने के लिए इसलिए रोका है. चूंकि अभी सदन और चलेगा तो उ स समय उसको ले लेंगे.

निंदा प्रस्ताव

श्री जितू पटवारी ( राऊ ) -- अध्यक्ष महोदय मैं आपसे निवेदन करता हूं और पूरे सदन को भी इस ओर आकर्षित करना चाहता हूं कि आप सबकी कृपा होगी कि आप लोग मेरी बात को पूरे ध्यान से सुनें. मैंने एक निंदा का प्रस्ताव धारा 130 के अंतर्गत आपको दिया है. देश में एक अजीब तरीके का घटनाएं होने लगी हैं. अभी लातूर में एक एमआईएम के नेता ने जिस तरह से भारत माता की जय बोलने से इंकार किया है. आ ज देश में जिस तरह से भाई चारे की आवश्यकता है, और भारत माता के संदर्भ में भारत माता की जय की व्याख्या करते हुए पंडित नेहरू जी ने डिस्कवरी आफ इंडिया में पूरा वक्तव्य उनका देखते हैं, तो जब देश की जनता से उन्होंने पूछा कि आप बतायें कि भारत माता की जय क्या है. उसमें नेहरू जी ने कहा है कि यहां पर रहने वाले लोग, यहां की नदियां,यहां के पहाड़, यहां की सभ्यता,यहां का भाईचारा, यहां की मिली जुली संस्कृति और हिन्दु मुस्लिम सिख ईसाई का एक अनोखा व्यवहार यह ही भारत माता है और इसी की हम रोज जय करते हैं. हमारा संविधान यह कहता है कि जोर जबर्दस्ती से किसी पर कोई विचार थोपे नहीं जा सकते हैं और किसी को कोई बात जबर्दस्ती मनवाकर बोलने के लिए मजबूर भी नहीं किया जा सकता है. लेकिन आजादी के आंदोलन में कई नारे हमारे निकले हैं. जब अंग्रेजों के सामने लोगों ने अलग अलग तरीके से लोगों ने नारे उस समय के हमारे आंदोलनकारियों ने या आजादी के शहीदों ने या आजादी के क्रांतिवीरों ने कई नारे निकाले हैं उसमें उन्होंने भारत माता की जय, जय हिन्द, इंकलाब जिन्‍दाबाद ऐसी अनेकों बातें कहीं. इस अवसर पर मैं इस बात पर भी आपका ध्‍यान केंद्रित करना चाहता हूँ कि ए.आर. रहमान, जो एक अच्‍छे संगीतकार हैं, उन्‍होंने भी एक गीत बनाया और भारत मां की वंदना की, उसमें उन्‍होंने कहा - मां तुझे सलाम. मैं समझता हूँ कि ये सब बातें वही हैं, भारत का संविधान उदारवादी है, भारत का संविधान सबको महत्‍व देने वाला है पर इस तरह राजनीतिक लाभ के लिए भारत मां का अपमान करना और जोर-जबरदस्‍ती से यह कहना कि मैं भारत मां की जय नहीं बोलूंगा, मैं समझता हूँ कि यह निंदनीय है और सर्वसम्‍मति से इसकी पूरे सदन ने निंदा करनी चाहिए.

अध्‍यक्ष महोदय, दूसरी बात इस अवसर पर मैं यह भी कहना चाहता हूँ कि इस देश के संविधान और भाईचारे को और इस देश की अखण्‍डता को बनाने में हर तरह की कट्टरपंथिता है, वह चाहे हिंदू की हो, चाहे मुसलमान की हो, चाहे सिक्‍ख की हो, चाहे ईसाई की हो, हर तरह की कट्टरपंथिता का हम जब तक सर्वसम्‍मति से प्रतिकार नहीं करेंगे, मैं समझता हूँ कि भारत मां का असली सम्‍मान नहीं हो सकता. मैं सदन के सम्‍माननीय सभी सदस्‍यों से अनुरोध करना चाहता हूँ कि भारत मां के जय के नारे को या भारत मां के जयकारे को एक मां से उसे रिलेटेड करके देखना चाहिए, जिस तरह से संविधान में नहीं लिखा रहता है कि मां की सेवा करनी है, मां का मान करना है, फिर भी हम सब यह करते हैं, उसी तरह से हमें भारत मां का सम्‍मान करना चाहिए. कोई कहने नहीं जाता, पर जो नहीं करता है उसको लोग कहने जाते हैं मैं समझता हूँ कि उनको कोई कहने नहीं गया उसके बाद भी उन्‍होंने इस तरह का वक्‍तव्‍य दिया, इसकी मैं निंदा करता हूँ और इस सदन के सभी सम्‍माननीय सदस्‍यों से पुन: अनुरोध करता हूँ कि सर्वसम्‍मति से यह निंदा प्रस्‍ताव पास करें. धन्‍यवाद अध्‍यक्ष जी.

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र) -- अध्‍यक्ष महोदय, एक बहुत अच्‍छा विषय पटवारी जी लेकर आए हैं. इस बारे में मेरा सिर्फ इतना निवेदन है कि सवाल भारत मां की जय बोलने का नहीं है, सवाल उस मानसिकता का है जो लंबे समय से इस देश में विभाजन की रेखा खींचने की कोशिश कर रही है. ये वे लोग हैं जो सिर्फ वोटों की राजनीति करने के लिए समाज को या देश को बांटना चाहते हैं. इनके मुंह से अल्‍पसंख्‍यकों का ध्रवीकरण करने के लिए इस तरह की बात तो आपने सुनी होगी लेकिन कभी अल्‍पसंख्‍यकों की बेरोजगारी के बारे में, अल्‍पसंख्‍यकों को रोजगार देने के बारे में इनके मुंह से आपने एक शब्‍द नहीं सुना होगा.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पिछले कुछ डेढ़-दो साल से आप देख रहे होंगे कि इस देश के अंदर इस तरह का वातवारण बनाने की कोशिश की जा रही है जैसा जितू भाई ने कहा. असहिष्‍णुता शब्‍द भी पिछले डेढ़-दो साल से ही आया है. यह सिर्फ इसलिए आया है कि देश के अंदर इस देश की जनता को मुद्दों से भटकाया जाए, जो विषय आज चल रहे हैं उन विषयों से भटकाया जाए. देश के अंदर बेरोजगारी का विषय न रहे, देश के अंदर भ्रष्‍टाचार का विषय न रहे, जिन विषयों पर पूर्व में चर्चा होती थी वे न रहें. भारत तेरे टुकड़े होंगे - इंशा अल्‍लाह, इंशा अल्‍लाह - ऐसे नारे इस देश के अंदर गुंजेंगे तो इससे बड़ी निंदा की बात कोई नहीं हो सकती, इससे ज्‍यादा बुरी बात कोई नहीं हो सकती. कहा जा रहा है कि अफजल हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिंदा हैं, कौन हैं कातिल उसके ? क्‍या न्‍यायाधीश कातिल हैं ? क्‍या सुप्रीम कोर्ट कातिल है उसका ? माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम जिस संस्‍कृति के जनक हैं या हम जिस संस्‍कृति की पूजा करते हैं, उसमें तो हम रहीम की भी पूजा करते हैं और रसखान की भी पूजा करते हैं. हम उस रहीम की पूजा करते हैं जो कहता था -

धूर लेत सर पे धरें कौ रहीम के ही काज,

जेहिं रज मुन पत्‍नि तजी तेहीं ढूंढे गजराज,

हम उस रसखान की पूजा करते हैं जो कहता था -

मानस हों तो वही रसखान बसौ

ब्रज गोकुल गांव के ग्‍वालन बीच,

लेकिन हम इस मानसिकता का विरोध करते हैं जो भारत के अंदर रहते हैं और पाकिस्‍तान जिंदाबाद के नारे लगाते हैं. हम उस मानसिकता के विरोधी हैं जो ओवैसी की तरह की मानसिकता है. खून-खराबे की बात नहीं करते वे कहते हैं गला काट देंगे, किसका गला -

मंदिर और मस्‍जिद की या किसी ईमारत की,

माटी तो लगी इसमें भाई मेरे भारत की,

लहू था हिंदू का अल्‍लाह शर्मिन्‍दा हुआ,

मरा मुसलमान तो राम कब जिंदा रहा

बिखरे-बिखरे हैं सभी, आओ इस घर में रहें,

क्‍या पता तुम न रहो, क्‍या पता हम न रहें.

माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी गुजारिश सिर्फ इतनी सी है कि जो जितू पटवारी जी ने प्रस्ताव रखा है. यह पूरा का पूरा सदन उसके लिए, इन दोनों घटनाओं के लिए अफजल गुरु के लिए भी और इस औवेसी के लिए भी समवेत इसकी निन्दा करे. आपने बोलने का समय दिया उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद.

अध्यक्ष महोदय-- ( कई माननीय सदस्यों के खड़े होने पर) बहुत से लोगों ने हाथ उठाये हैं,फिर सब को अनुमति देना पड़ेगा. यह विषय फिर बहस का हो जाएगा. कृपया सहयोग करें. किसी को अनुमति नहीं है (व्यवधान) ठीक है, हम आपसे सहमत हैं. माननीय जितू पटवारी जी ने जो बात रखी है और माननीय संसदीय कार्य मंत्री श्री नरोत्तम मिश्रा जी ने इसको बढ़ाया है, उन भावनाओं से सदन भी सहमत है. ऐसा कृत्य MIM के नेता श्री औवेसी एवं उनके दल के कुछ सदस्यों द्वारा जो यह कृत्य किया जा रहा है, यह सर्वथा निंदनीय है.

माननीय संसदीय कार्यमंत्री एवं अन्य माननीय सदस्यों द्वारा MIM के नेता श्री औवेसी द्वारा भारत माता की जय ना बोलने संबंधी विवादास्पद बयान के परिप्रेक्ष्य में जो भावनायें व्यक्त की गई है वह सही हैं, किसी भी धर्म या संप्रदाय में मातृभूमि को प्रति इस तरह के भाव का कोई स्थान नहीं है.

ऐसा कृत्य देश के सम्मान के विरुद्ध है तथा सर्वथा निंदा किये जाने योग्य है. यह हर्ष का विषय है कि राज्यसभा में भी श्री जावेद अख्तर ने इस बयान की निंदा की है और अलग अलग अवसरों पर देश के कई स्थानों पर इस्लामिक धर्म गुरुओं द्वारा भी इस बयान की निंदा की गई है. स्वयं को सदन की भावनाओं से जोड़ता हूँ, अत: यह सदन एक मत से MIM के नेता के विवादास्पद बयान व कृत्य तथा जे.एन.यू.,दिल्ली में अफजल गुरु के पक्ष में देश विरोधी नारो की निंदा करता है.

( इण्डियन नेशनल कांग्रेस एवं भारतीय जनता पार्टी के कई मानननीय सदस्यों द्वारा खड़े होकर भारत माता की जय एवं वंदे मातरम् के नारे लगाये गये )

 

 

 

 

 

 

 

12.12 बजे ध्यान आकर्षण

 

 

(सदन द्वारा सहमति प्रदान की गयी)

 

 

 

 

 

 

 

 

(1) सीधी जिले में अपात्र लोगों को इंदिरा आवास का आवंटन किया जाना

श्री केदारनाथ शुक्ल(सीधी)-- माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

पंचायत एवं ग्रामीम विकास मंत्री(श्री गोपाल भार्गव)-- माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

श्री केदारनाथ शुक्ल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, 333 आवास स्वीकृत हुए. 115 पंचायतें, जवाब में 102 आया है, वहाँ 115 पंचायतें हैं. 115 पंचायतों में से केवल 57 पंचायतों के आवास आवंटित हुए. कुछ पंचायतें तो ऐसी हैं, जिनको 15 से अधिक आवास आवंटित कर दिए गए. प्रतीक्षा सूची का पालन नहीं हुआ. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों को और वेटिंग लिस्ट में जिनका नाम था, ऐसे लोगों को नहीं दिया गया, अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों को नहीं दिया गया. जनपद पंचायत का जो वास्तविक प्रस्ताव है, उसे दरकिनार किया गया. पिछले वर्षों में जिनको आवास दिया गया था उन्हीं की पत्नी को, उनके पुत्र को या बेटे को दे दिया गया. जिला पंचायत में एक रत्नेश सिंह करके संविदा कर्मी है, उसको यह काम सौंपा गया है. उसने तमाम लोगों से आधा पैसा लेकर के दिया है. पिछले 3-4 वर्षों से यह धंधा चालू है. लक्ष्य के विपरीत आवास आवंटित किए गए हैं. मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूँ कि जाँच तो आप करवाएँगे ही, जाँच का आपने आश्वासन दिया है. क्या इस रत्नेश सिंह को, संविदा कर्मी है, इसको हटा करके, इसको नौकरी से अलग करके, संविदा कर्मी से अलग करके, इसकी पूरी जाँच करवाएँगे?

श्री कमलेश्वर पटेल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र सिहावल ब्लाक में भी इसी तरह का हुआ है. सीधी जिले का ही मामला है.

अध्यक्ष महोदय-- आप दूसरों का आने दीजिए. आप बोलते हैं तब तो कोई दूसरा बीच में नहीं बोलता. दूसरे जिले का नहीं पूछने देंगे.

श्री कमलेश्वर पटेल-- हम भी उसी जिले से हैं.

अध्यक्ष महोदय-- अभी आप बैठ जाइये.

श्री गोपाल भार्गव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, ये आई ए वाय योजना के अंतर्गत जो आवास कुटीरों का आवंटन इस जिले में हुआ है. मैंने इसको देखा है प्रथमदृष्टया इसमें अनियमित और नियम विरुद्ध आवंटन मुझे समझ में आया है और जैसा कि माननीय सदस्य ने अपेक्षा व्यक्त की है, मैंने इसकी प्रथमदृष्टया जाँच के दौरान यह पाया है कि इसमें यह जो कर्मचारी है, आवंटन करने वाला, इसका दोष है, इस कारण से इसको नौकरी से पृथक किया जाता है. (मेजों की थपथपाहट)

श्री केदारनाथ शुक्ल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे सिहावल के विधायक जी भी बोल रहे हैं. हमारे विधान सभा क्षेत्र में सिहावल जनपद का भी कुछ हिस्सा है. प्रश्न लगाने के बाद मुझे ज्ञात हुआ कि वहाँ भी यही काम इसने किया है इसलिए सिहावल जनपद पंचायत को भी इस जाँच में शामिल किया जाए.

अध्यक्ष महोदय-- कमलेश्वर जी, आपका प्रश्न भी उन्होंने ही पूछ लिया.

श्री कमलेश्वर पटेल-- अध्यक्ष महोदय, इसी से संबंधित है.

अध्यक्ष महोदय-- इसी के साथ जोड़ लीजिए.

श्री कमलेश्वर पटेल-- अध्यक्ष महोदय, इसी से संबंधित है. एक तो जो अभी आवंटन हुआ है इसमें भारी अनियमितता हुई, जैसा माननीय विधायक जी ने बताया....

अध्यक्ष महोदय-- आप भाषण देते हैं इसलिए हम आपको एलाऊ नहीं करते.

श्री कमलेश्वर पटेल-- दूसरा, इंदिरा आवास की द्वितीय किश्त दो दो साल से पैंडिंग है. माननीय मंत्री जी से यह भी हम चाहेंगे कि उसका भी निराकरण करा दें और इसमें जो गड़बड़ी हुई है इसको निरस्त करके फिर से, हम आप से निवेदन करेंगे कि दुबारा से फिर इसका सिलेक्शन कराएँ और सही हितग्राहियों को मिले.

अध्यक्ष महोदय-- जिनका मूल था उन्होंने इतना समय नहीं लगाया प्रश्न पूछने में. माननीय मंत्री जी, दोनों का समेकित उत्तर दे दीजिए. एक ही ब्लाक से संबंधित है.

श्री गोपाल भार्गव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा मैंने कहा है कि जिले की आवंटन सूची में, मैंने देखा है कुछ ग्राम पंचायतें बिल्कुल छोड़ दी गईं, निरंक रहीं. कुछ के लिए संख्या से ज्यादा दे दिया गया है. अध्यक्ष महोदय, ग्रामसभा में आवासहीनों की सूची बनी थी उस सूची को अलग करके और मनमाने तरीके से आवंटन किया गया है इसलिए मैं सारा आवंटन निरस्त करके और नये सिरे से सूची बनवा दूँगा.

श्री कमलेश्वर पटेल-- अध्यक्ष महोदय, दूसरी किश्त के बारे में भी बता दें.

अध्यक्ष महोदय-- अब हो गया. धन्यवाद दो आपके कहने पर कर दिया.

 

श्री कमलेश्वर पटेल-- अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री महोदय को बहुत बहुत धन्यवाद देता हूँ. लेकिन हमारे सिहावल ब्लाक में दूसरी किश्त दो साल से 300 लोगों की पैंडिंग है....

अध्यक्ष महोदय-- आप बड़ी मुश्किल से धन्यवाद देते हैं. मूल प्रश्नकर्ता की बात आ गई. बैठ जाएँ.

 

 

 

 

 

(2) शिवपुरी जिले के पिछोर क्षेत्र में हैंडपंप एवं नल जल योजना बंद होना.

श्री के.पी.सिंह(पिछोर)-- माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

 

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ.नरोत्तम मिश्र)--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं क्षमा के साथ कहना चाहता हूँ मेरी गुजारिश है कि आपने जो निंदा प्रस्ताव पास किया है सदन उससे सहमत है उसमें मैंने एक उल्लेख किया था जिनने भारत विरोधी नारे लगाये हैं वह शब्द भी इसमें आ जायें. "अफज़ल हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल ज़िंदा हैं."

श्री बाबूलाल गौर--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह बहुत आवश्यक है इसको जोड़ा जाना चाहिए.

अध्यक्ष महोदय-- वैसे तो वह मूल प्रस्ताव में नहीं था किन्तु यदि सदन की भावना है तो उसको जोड़ा जा सकता है.

श्री विश्वास सारंग--जेएनयू की घटना की भी निंदा होना चाहिये.

अध्यक्ष महोदय--हो गई बात. माननीय मंत्रीजी ध्यानाकर्षण का उत्तर दें.

वन मंत्री (डॉ.गौरीशंकर शेजवार)--माननीय अध्यक्ष महोदय, ध्यानाकर्षण सूचना के उत्तर में मेरा वक्तव्य इस प्रकार है--

श्री के.पी. सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा जो विषय है सदन के लगभग सारे सदस्य इसकी चिंता करते होंगे. मंत्रीजी के पास जो शासकीय वक्तव्य आया वह उन्होंने पढ़ दिया. मेरा सौभाग्य है कि गौरीशंकर शेजवार जी बहुत विद्वान, वरिष्ठ, जानकार मंत्री हैं और वे इस ध्यानाकर्षण का जवाब दे रहे हैं इसलिये मैं दो-तीन उदाहरण माननीय मंत्रीजी के सामने रखना चाहता हूँ. एक पत्र है जनवरी 2016 का यह पत्र ईएनसी डामोर ने लिखा है. आपने कहा है कि दो विभाग इसमें इनवाल्व नहीं हैं. पत्र में जो लिखा है वह मैं पढ़ रहा हूं "स्त्रोत के निर्माण लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा कराये जायेंगे, परन्तु मोटर पंप, मुख्य पाइप लाईन जोड़ने तथा ग्राम पंचायत के नाम स्थायी विद्युत कनेक्शन प्राप्त करने का प्रावधान प्राक्कलन तैयार कर, प्राक्कलन का मुख्य अभियंता कार्यालय अनुमोदन कर उससे संबंधित जिला पंचायत को उपलब्ध कराया जायेगा." एक तो आपके जवाब में यह आ रहा है कि एक ही विभाग इसके लिये जवाबदार है यह आपके ही ईएनसी का जारी किया हुआ पत्र है. अध्यक्ष महोदय, यदि मंत्रीजी इसकी कॉपी चाहेंगे तो मैं उपलब्ध करा दूंगा. इसी की व्यवस्था के बाद जब यह व्यवस्था ठीक नहीं हुई यह 23 जनवरी का पत्र था . फिर 23.2 को मुख्‍य सचिव को एक पत्र ई एन सी को लिखना पड़ा. जिसमें उन्‍होंने लिखा है कि 6 माह पूर्व यह निर्णय लिया गया था कि ऐसी पेयजल योजनाओं को छोड़ जिनका संचालन पंचायत विभाग द्वारा सुचारू रूप से किया जा रहा है, शेष समस्‍त ग्रामीण पेयजल योजनाएं लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग को स्‍थानां‍तरित की जाये. इसके साथ ही बंद समस्‍त योजनाओं को पुन: प्रारंभ करने हेतु प्राक्‍कलन के आधार पर राशि भी लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को उपलब्‍ध करा दी जायेगी. आश्‍चर्य की बात यह है कि 6 माह अवधि बीतने के पश्‍चात् भी और प्राक्‍कलन तैयार होने के बाद भी यह स्‍थानांतरण नहीं हुआ है, यह गंभीर लापरवाही है. मैं चाहूंगा कि उच्‍च स्‍तर पर लिये गये निर्णय का पालन तत्‍काल किया जाये. यह मुख्‍य सचिव की फरवरी का पत्र है.अगर जनवरी की व्‍यवस्‍था के अनुसार व्‍यवस्‍था ठीक हो गयी होती तो मैं समझता हूं कि मुख्‍य सचिव को यह पत्र नहीं लिखना पड़ता. यह एक उदाहरण है, जो आप कह रहे हैं कि सब ठीक ठाक है.

अध्‍यक्ष महोदय,मेरा प्रश्‍न यह है कि इस व्‍यवस्‍था में तीन विभाग इनवाल्‍व है एक तो पी एच ई, पंचायत और एम पी ई बी तीनों विभाग इसमें इनवाल्‍व हैं. इन तीनों विभागों की वजह से नलजल योजना और हैंडपम्‍पों की दिक्‍कत हो रही है. यह जो जवाब आया है, चूंकि यह मेरी विधान सभा का है और पिछले महिने मैंने समीक्षा बैठक की थी उस बैठक में यह जो जानकारी यहां पर भेजी गयी है, यह सारी जानकारी गलत साबित हुई हैं.

मेरा आपके माध्‍यम से मंत्री जी से आग्रह है कि यह सूखे का वक्‍त है और कई जिले सूखाग्रस्‍त से घोषित हो गये और कई तहसीलें सूखे से घोषित हो गये हैं और कई जिले और तहसीलें सूखे से घोषित नहीं हो पायीं हैं. मैं मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि क्‍या आप एक ऐसी व्‍यवस्‍था पूरे मध्‍यप्रदेश के उन जिलों और तहसीलों में जो सूखे से पीडि़त हैं, सिर्फ तीन महिने के लिये, जिसमें एक रूपता हो और उस व्‍यवस्‍था के अनुरूप हर सप्‍ताह, चूंकि अप्रैल से मार्च तक तो उतनी दिक्‍कत नहीं थी, लेकिन अप्रैल, मई और जून में भयावह स्थिति बन जायेगी. ऐसी स्थिति से निपटने के लिये विकास खण्‍ड स्‍तर पर एक समिति का गठन जिसमें बिजली विभाग के लोग हों, पी एच ई के लोग हों और पंचायत विभाग के लोग हों और साथ ही उसमें स्‍थानीय विधायक या विधायक का प्रतिनिध उसमें होना इसलिये जरूरी है कि हम पब्लिक में जाते हैं तो इन चार लोगों की एक समिति विकास खण्‍ड स्‍तर पर बना देंगे और सप्‍ताह इसके रिव्‍यू की व्‍यवस्‍था होना चाहिये, अगर हर सप्‍ताह रिव्‍यू होगा तो हमको मालूम होगा की यह व्‍यवस्‍था चालू है या नहीं. क्‍योंकि हम लोग भी दौरे पर जाते हैं तो हम लोगों को भी जानकारी होना चाहिये, तो हम भी लोगों को जानकारी दे देंगे. सरकारी जवाब से हमको काम नहीं चलाना पड़ेगा. जिले स्‍तर पर व्‍यवस्‍था इसलिये नहीं चल सकती क्‍योंकि जिले स्‍तर पर कभी प्रभारी मंत्री नहीं जा सकते, कलेक्‍टर की बैठकें नहीं हो पाती. मेरा मंत्री जी से आग्रह है कि इन चार लोगों की जनप्रतिनिधियों के साथ एक समिति क्‍या बना देंगे.

डॉ गौरीशंकर शेजवार :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने अपना जो वक्‍तव्‍य पढ़ा है, वह बिल्‍कुल सही है. पता नहीं माननीय सदस्‍य को सुनने में कमी रह गयी. मैंने यह कहा है कि हैंडपम्‍पों का काम पी एच ई विभाग देखता है और नलजल योजनाओं का काम ग्राम पंचायतों को सौंपा गया है. समय समय पर जैसी आवश्‍यकता होती है तो विभाग द्वारा और यह सूखे का साल है, इसलिये अगर मुख्‍य सचिव भी इसमें रूचि ले रहे हैं तो और विभागों को आगाह कर रहे हैं, तो इसका मतलब यह है कि शासन सतर्क है और लोग परेशान न हों. इसकी शासन को पूरी चिंता है. आपने जो पत्र यहां पर पढ़ें है वह इस बात का प्रमाण है. आपने जहां तक यह बात कही है कि इसकी एक समिति होना चाहिये. अध्‍यक्ष महोदय एस डी एम और कलेक्‍टर, कलेक्‍टर पूरे जिले का और एस डी एम एक विधान सभा के आसपास का होता है. पूरी इन सब की मानीटरिंग भी करते हैं और समीक्षा बैठक करके पूरी जानकारी भी लेते हैं. पी.एच.ई.विभाग के इंजीनियर और आवश्यकता पड़ने पर जनपद या आर.ई.एस. में जो इंजीनियर काम करते हैं उनका भी सहयोग लिया जाता है. कई क्षेत्रों में ऐसे सर्वे भी हो रहे हैं. एक बात आपने सही कही है कि एकरूपता होनी चाहिये और सर्वे और जानकारी को सुनिश्चित करने के लिये एक कमेटी का आपने प्रारूप बताया है इसमें कोई बुराई नहीं है आपका अच्छा सुझाव है चूंकि कई विभागों के लोगों को इसमें शामिल करना है तो मैं माननीय मुख्यमंत्री जी से यह आग्रह करूंगा कि इन तीन महिनों में वस्तुस्थिति से अवगत होने के लिये और वास्तव में पीने के पानी की कहां कमी है. कहां सब संसाधन उपलब्ध कराने की आवश्यकता है तो एक कमेटी इसकी जानकारी के लिये बन जाये तो इसमें कोई बुराई नहीं है लेकिन चूंकि मुख्यमंत्री जी से इसमें बातचीत करना पड़ेगी और आपकी भावनाओं से हम और सरकार सहमत है लेकिन जहां तक मैं आपको आश्वासन देना चाहता हूं और सदन को आपके माध्यम से यह विश्वास दिलाना चाहता हूं कि सरकार ने जो आवश्यक चीजें हैं उसकी पूर्ति सरकार के विभागों को करवा दी है पर्याप्त बजट का आवंटन है. जिला स्तर और विकासखण्ड स्तर पर और पी.एच.ई. विभाग के अधिकारियों के पास पर्याप्त बजट पहुंच चुका है और जहां-जहां से आवश्यकता होती है वहां पाईपों को उनकी लंबाई बढ़ाने का भी काम किया जा रहा है. अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से यह बात सदन की जानकारी में लाना चाहता हूं कि हमने यह भी सर्वे करवा लिया है कि जहां ज्यादा पाईप बढ़ाने के बजाय हम सिंगल फेज की मोटर डालकर और पानी मोटर के माध्यम से खींचकर लोगों को सप्लाई करेंगे. चूंकि प्रश्न में इसका उल्लेख नहीं था, नहीं तो वह जानकारी मैं आपको देता कि कितनी जगह हमने सिंगल फेज की मोटरें डलवाई हैं लेकिन हम आपको विश्वास दिलाना चाहते हैं कि पानी की कहीं कोई कमी नहीं रहने देंगे और जहां से हमें सूचना मिलेगी आवश्यकता के अनुसार हम पानी के परिवहन की भी व्यवस्था पर्याप्त करवाएंगे लेकिन आपने अच्छी सलाह दी है और इसके लिये मैं आपको धन्यवाद मानता हूं.

श्री के.पी.सिंह - धन्यवाद.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री(श्री गोपाल भार्गव) - अध्यक्ष महोदय, ध्यानाकर्षण सूचना में दो विभागों के संबंध में उल्लेख किया गया था. मैं माननीय सदस्य को और सदन को इस विषय में अवगत कराना प्रासंगिक समझता हूं. अध्यक्ष महोदय, हम लोगों ने तय किया है कि कोई भी ग्राम पंचायत की नलजल योजना का बिजली कनेक्शन नहीं काटा जायेगा इसके लिये 2015-16 में पूरे प्रदेश में हमने 188 करोड़ रुपये की राशि नलजल योजनाओं के मद में जो पंचायतों की बाकी राशि थी वह हमने विद्युत मण्डल की तीनों कंपनियों के लिये राशि जमा कर दी है. मध्य क्षेत्र विद्युत कंपनी को 37करोड़ 41 लाख,पूर्व क्षेत्र विद्युत कंपनी को 51 करोड़ 8 लाख और पश्चिम क्षेत्र विद्युत कंपनी को 100 करोड़ रुपये की राशि हमारी तरफ से दी गई है. इस कारण से कोई भी बिजली के कनेक्शन विच्छेद के कारण से कोई भी नलजल योजना बंद नहीं होनी चाहिये. मैं सदन को अवगत कराना चाहता हूं कि यदि कहीं ऐसा विषय आये कि बिजली के बिल न भरने के कारण कनेक्शन काटा गया है तो माननीय सदस्य इस बात को कह सकते हैं. दूसरी बात शिवपुरी जिले का जहां तक सवाल है इसके लिये 2 करोड़ 65 लाख रुपये की राशि इस हेतु दी गई है. बंद पड़ी नलजल योजनाओं के लिये अभी हमने 100 करोड़ रुपये की राशि पी.एच.ई. विभाग को हस्तांतरित की है वे मेंटेनेंस का काम कर सके. इस तरह से चौदहवें वित्त आयोग में भी हमने पेयजल के लिये और जहां-जहां नलजल योजनाएं बंद हैं उनको चालू करने के लिये, मेंटेनेंस करने के लिये चौदह सौ करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया है अर्थाभाव नहीं है. निचले स्तर की व्यवस्था के बारे में माननीय मंत्री जी ने अवगत करा दिया है. जिले और सबडिविजन के अधिकारियों की बैठक करके उसको दुरुस्त कर सकते हैं.

अध्यक्ष महोदय--के.पी.सिंह, तथा श्री राजेन्द्र पाण्डेय जी सिर्फ मंत्री जो सुझाव दें, उसका उत्तर नहीं मांगे.

श्री के.पी.सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने जो कुछ मेरे जवाब में कहा है उन्होंने मेरे सुझाव को स्वीकार किया है, इसके लिये धन्यवाद. लेकिन मेरा निवेदन है कि यह जो पांच-सात दिन की छुट्टी पड़ रही है इसमें माननीय मुख्यमंत्री जी से चर्चा कर लें और जब अगला सत्र 29.30.31 तारीख को तब आपकी तरफ से एक बयान भी आ जाए कि व्यवस्था हमने कर दी है तो मैं समझता हूं कि निचले स्तर पर सभी चीजें हो जाएंगी. मैं चाहूंगा श्री राजेन्द्र शुक्ल जी बिजली मंत्री हैं यहां पर विराजमान हैं जैसे गोपाल भार्गव जी का इसमें वक्तव्य आया उसी तरह मंत्री जी का आ जाये. मेहरबानी इनके विभाग का इसमें क्या कहना है अपनी तरफ से उचित समझतें हैं तो जवाब दे दें.

अध्यक्ष महोदय--राजेन्द्र पाण्डेय जी का सुन लें उसके बाद दोनों के बारे इकट्टे बोल लेना.

डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा सुझाव है कि शासन माननीय मुख्यमंत्री जी की बात पर 24 घंटे बिजली दे रहा है और जिस तरह से ग्रामीण क्षेत्रों में नल-जल योजानाओं की स्थिति है, यह स्वागत योग्य है माननीय मंत्री जी ने इसमें प्रयास किये हैं.

अध्यक्ष महोदय--आपका क्या सुझाव है.

डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा सुझाव यह है कि जिस तरह से स्ट्रीट लाईटें हैं, स्ट्रीट लाईटों का बकाया बिल होने के कारण बंद पड़ी रहती है, भले ही गांवों में 24 घंटे बिजली मिल रही है, लेकिन गांव तो अंधेरे में ही रहता है, छः बजे के बाद जानवर आ जाते हैं. जैसे स्ट्रीट लाईट के बकाया बिल हैं उनको भी जमा कराने की व्यवस्था की जाए. उनका समायोजन ग्राम पंचायत की राशि से किया जाए.

अध्यक्ष महोदय--यह विषय नहीं है, वैसे पंचायत मंत्री जी ने बता दिया है. आपकी बात आ गई है. आप इस बात को नहीं सुन पाये इस बात को क्लियर कर दिया था.

श्री राजेन्द्र शुक्ल--माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय भार्गव जी ने बताया ग्रामीण विकास विभाग नल-जल योजनाओं के लिये विद्युत योजनाओं के लंबित बिल लेते हैं उसकी राशि ड्रिस्टीब्यूशन कम्पनी को जमा करते हैं इसलिये विद्युत के भुगतान न हो पाने के कारण किसी भी नल-जल योजना को डिसकनेक्ट नहीं किया जाता है.

श्री रामनिवास रावत--माननीय अध्यक्ष महोदय, आज जुम्मा होने के कारण माननीय आरिफ अकील जी का ध्यानाकर्षण वैसे 4 नंबर पर हैं. मैं चाहता हूं कि माननीय तिवारी जी के पहले उनका ध्यानाकर्षण लिया जाए.

अध्यक्ष महोदय--ठीक है. श्री आरिफ अकील.

 

 

 

 

 

 

 

(3) भोपाल नगर में आपराधिक घटनाएं घटित होना

 

श्री आरिफ अकील (भोपाल उत्तर)-- अध्यक्ष महोदय, मेरी ध्यान आकर्षण सूचना का विषय इस प्रकार है-

 

 

 

 

 

गृह मंत्री (श्री बाबूलाल गौर)-


श्री आरिफ अकील(भोपाल उत्‍तर)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, गौर साहब की तरफ देखकर जवाब लूंगा, तो ज्‍यादा अच्‍छा लगेगा । माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं, शहर में, चौराहों पर छोटे छोटे बच्‍चे, 11 और 12 साल के लड़के और लडकियां रूमाल में कोई चीज लेकर सूघतें हैं, जिससे उनको नशा होता है, आए दिन बस स्‍टेण्‍ड, रेल्‍वे स्‍टेशन और दूसरे एरिया में देखे जाते हैं और आप कह रहे हैं कि ऐसा नहीं है, खुले आम यह पदार्थ बिक रहे हैं, छोटे छोटे नाबालिक बच्‍चों पर इसका असर हो रहा है ।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दूसरी बात, आपने फरमाया है कि भोपाल में तीन साल से अधिक का कोई अधिकारी पदस्‍थ नही है, यदि तीन साल से ज्‍यादा जिनको हो गए हैं, उनके यहां लॉ एण्‍ड आर्डर की स्थिति अच्‍छी नहीं है, तो क्‍या उन अधिकारियों को वहां से हटाएंगे और ऐसे लोग जो नशीले पदार्थ बेच रहे हैं, जिनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण पंजीबद्व हो गए हैं, बच्‍चे नशे कर रहे हैं, उनको हेल्‍प लाइन में कहीं भेजेंगे, उनकी व्‍यवस्‍था करेंगे साथ ही जो दुकानें बच्‍चों को नशीले पदार्थ बेच रही हैं, ऐसी दुकानों पर कार्यवाही करके उनको सख्‍ती से बंद करवाएंगे ।

श्री बाबूलाल गौर - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो सुझाव दिए हैं, उन पर विचार करेंगे ।

श्री आरिफ अकील- यह सुझाव हैं ।

श्री बाबूलाल गौर- आपने कहा है कि छोटे छोटे बच्‍चे बेच रहे हैं, मादक पदार्थ बेच रहे हैं तो उनके खिलाफ कार्यवाही भी करेंगे, आपके सुझाव पर कार्यवाही करेंगे और क्‍या चाहिए । आप नमाज पढ़ने जाइए ।

श्री आरिफ अकील - अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी मजाक में टाल रहे हैं. मैं यह बयान दे सकता हूँ कि छोटे-छोटे बच्‍चों को नशीले पदार्थ दिये जा रहे हैं, बेचे जा रहे हैं. उन पर अंकुश नहीं लग रहा है और मैंने कई मर्तबा पकड़कर थाने वालों को कहा कि....

अध्‍यक्ष महोदय - आप सीधे प्रश्‍न करें.

श्री आरिफ अकील - अध्‍यक्ष महोदय, मैंने पहला प्रश्‍न यह पूछा था कि जिन लोगों को 3 वर्ष से ज्‍यादा भोपाल में हो गए हैं, क्‍या उनको हटायेंगे. उस मामले में, आपने कोई जवाब नहीं दिया.

अध्‍यक्ष महोदय, एक बात और मैं आपके माध्‍यम से पूछना चाहता हूँ कि भोपाल शहर में ट्रैफिक व्‍यवस्‍था, लॉ एण्‍ड ऑर्डर स्थिति अच्‍छी नहीं है. ऐसी स्थिति बनाकर रख दी है कि किसी भी मोहल्‍ले में चले जाओ, जाम मिलता है. मैंने आपसे उस दिन कहा था कि इन्‍दौर की व्‍यवस्‍था देख लीजिये, बहुत अच्‍छी लगती है. भोपाल में केवल पर्ची, रसीद काटने के अलावा कोई काम नहीं होता है.

अध्‍यक्ष महोदय - जवाब ले लें.

श्री आरिफ अकील - मैं आपसे इतना कहना चाहता हूँ कि जिन लोगों को 3 वर्ष हो गए हैं, क्‍या आप उनको हटायेंगे ? और जो अपराध बढ़ रहे हैं, उन पर अंकुश लगाने की कार्यवाही करेंगे.

श्री बाबूलाल गौर - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ट्रेफिक के मामले में मैंने, इनके साथ दौरा किया है. आप इस बात को स्‍वीकार करेंगे.

श्री आरिफ अकील - आपने अतिक्रमण हटाने के लिये दौरा किया था, ट्रैफिक ठीक करने के लिए नहीं. आपने भोपाल टॉकीज से सिंधी कॉलोनी तक दौरा किया था, वहां ट्रैफिक व्‍यवस्‍था के बारे में आपने डिवाईडर लगाने का कहा था. उस पर कुछ नहीं हुआ है.

श्री बाबूलाल गौर - अध्‍यक्ष महोदय, काम शुरू हो गया है और ट्रैफिक भी ठीक होगा तथा आपने जो कहा है कि जो नशे को बेचते हैं, उसके खिलाफ हम विशेष अभियान चलायेंगे.

श्री आरिफ अकील - अध्‍यक्ष जी, मैंने एक बात और पूछी थी कि वे कौन-से लालटके हैं, जिनको 3 वर्ष से ज्‍यादा हो गए हैं, उनके क्षेत्र में अपराध हो रहे हैं, (XXX) ? आप यह बता दीजिये.

अध्‍यक्ष महोदय - यह कार्यवाही से निकाल दें.

श्री बाबूलाल गौर - अध्‍यक्ष महोदय, यह जनरल बातें पूछी हैं. अगर कोई अच्‍छा काम कर रहा है और कोई शिकायत होगी तो हटा देंगे.

श्री आरिफ अकील - 3 वर्ष का नियम है.

श्री बाबूलाल गौर - अध्‍यक्ष महोदय, 4 वर्ष से जो ज्‍यादा होंगे. उनको हम दूसरी जगह शिफ्ट कर देंगे.

श्री आरिफ अकील - दूसरी जगह शिफ्ट कर देंगे लेकिन रखेंगे हम भोपाल में ही.

श्री बाबूलाल गौर - भोपाल में नहीं.

श्री आरिफ अकील - देखने में यह आया है कि कोई भी अधिकारी कहीं जाये एकाध महीने में आपसे रिक्‍वेस्‍ट करके भोपाल में आ जाता है. ऐसा लगता है कि भोपाल में माल गढ़ा है, वह भोपाल से जाने को तैयार ही नहीं है.

श्री बाबूलाल गौर - अधिकारी मिलते ही नहीं हैं.

श्री आरिफ अकील - क्‍या आप हटायेंगे ?

श्री बाबूलाल गौर - अवश्‍य हटायेंगे. जिनको 4 वर्ष हो गए हैं, उनको अवश्‍यक हटा देंगे.

श्री आरिफ अकील - धन्‍यवाद.

 

 

12.47

 

(3) प्रदेश के उद्यमिता विकास केन्‍द्र के दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही

न किया जाना

श्री शंकरलाल तिवारी (सतना) [श्री रामनिवास रावत, डॉ. गोविन्‍द सिंह] अध्‍यक्ष महोदय,

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र) -- अध्यक्ष महोदय,

श्री शंकरलाल तिवारी -- अध्यक्ष महोदय, उत्तर में मंत्री जी ने कहा है कि यह शासकीय संस्था नहीं है. मेरा निवेदन है कि उक्त संस्था पूर्ण रुप से सरकारी संस्था है और यह उचित नहीं कहा जा रहा है कि वह सरकारी संस्था नहीं है. इसका संचालन उद्योग विभाग करता है. उद्योग विभाग के आयुक्त, संयुक्त संचालक, माननीय राज्यपाल के आदेशानुसार, जिसके सरकारी पत्र हैं कि यह सरकारी संस्था है. शासन द्वारा वित्त पोषित है. यदि आप कहें तो राज्यपाल जी के, उद्योग विभाग के आयुक्त, संयुक्त संचालक के पत्र मेरे पास हैं. मैं उन्हें पटल पर रख सकता हूं. यह शासन से अनुदान और फंड प्राप्त करती रही है. बजट मांग संख्या 8133 वर्ष 2003-04 में 12 लाख रुपये, 87.75 लाख रुपये दिये गये. एमपी फायनेंस कारपोरेशन ने 5 लाख रुपये, एमपी स्टेट डेव्हलपमेंट कारपोरेशन ने 5 लाख रुपये, लघु उद्योग निगम ने 11 लाख , एमपी औद्योगिक विकास निगम ने 5 लाख रुपये दिये और फिर इन अनुदानों के बाद भी यह कहना कि वह शासकीय संबद्धता नहीं रखती, मैं सोचता हूं कि उचित नहीं है. तत्कालीन कार्यकारी संचालक ने भी एक पत्र में स्वीकार किया है कि इस संस्था का गठन माननीय राज्यपाल महोदय, मध्यप्रदेश शासन के आदेशानुसार हुआ और संस्था के गठन में पूर्ण पूंजी निवेश शासकीय है. हाई कोर्ट में उच्च न्यायालय में चल रहे एक प्रकरण में भी उच्च न्यायालय के आदेश में लिखा गया है कि, चूंकि यह शासन से फंड प्राप्त करती है और इसलिये यह एक सरकारी संस्था है. अध्यक्ष महोदय, इसलिये मेरी आपके माध्यम से विनती है कि यह कह करके कि यह सरकारी संस्था नहीं है, इसका सरकार से कोई लेना देना नहीं है. 100 लोगों की रोजी रोटी, 100 लोगों के परिवार के 500 लोग जीवन यापन के संकट में हैं. मैं मंत्री जी से इतना ही निवेदन करुंगा कि जब इनका शुरु में पहला वेतन प्रारंभ हुआ तो इनका कोई अनुबंध हुआ ही नहीं था और जब अनुबंध नहीं हुआ तो अनुबंध का आधार लेकर के 100-100 लोगों को एक बार में ही निकालने का प्रयास करना और दूसरा यह कह रहे हैं कि शासकीय नहीं है. इनको शासकीय भूमि का आवंटन जो किया गया है अरेरा हिल्स में और वह शासन की संस्था न होने के बावजूद किया गया है, यह कैसे संभव है. इसलिये मैं इसमें एक ही प्रश्न करुंगा कि कई बार इस तरह के काम अगर कम हो जाते हैं, तो दूसरी जगह भी इनको खपा लिया जाता है. इनकी उम्र 40 वर्ष पार कर चुकी है. 5 वर्ष से नौकरी कर चुके हैं. 8 हजार, 10 हजार रूपये तनख्वाह पाने वाले किसी तरह रोजी रोटी चलाने वाले यह लोग हैं . मेरी विनती है कि इस तरह अधिकारियों के कुकृत्यों का फल छोटे कर्मचारियों को, पेट चलाने वाले कर्मचारियों को न भोगना पड़े. उनको काम पर रखने की और नियमित करने की बात माननीय मंत्री जी से कृपापूर्वक चाहता हूं.

डॉ.नरोत्तम मिश्र-- माननीय अध्यक्ष महोदय, सम्मानीय सदस्य ने सारगर्भित विचार रखे हैं. वे हमारे वरिष्ठ सदस्य हैं , उनसे मैं गुजारिश करना चाहता था और शायद वे समझ भी जायेंगे. अध्यक्ष महोदय, अब 108 एम्बूलेंस भी चलती है. 108 जो मध्यप्रदेश में चलती है उसको चलाने के लिये सरकार पैसा देती है. परंतु 108 के अंदर हम कोई कर्मचारी को नहीं रखते हैं. न ही उन कर्मचारियों के रखने पर या उनके हटाने पर हमारा कोई सीधा नियंत्रण होता है. सरकार की जो गाइड लाइन होती है उसके तहत यह 108 चलती है . जहां तक सैडमेप (उद्यमिता विकास केंद्र) की बात है यह उद्योग विभाग द्वारा उद्यमियों को प्रशिक्षित करने के लिये अच्छे उद्यमी ट्रेन्ड होकर के आयें इस तरह का काम यह सैडमेप करता है . इस पर शासन के द्वारा न तो इनकी भर्ती की गई है और न ही ऐसा कोई विषय है जो सम्मानित सदस्य ने उठाये.

श्री शंकरलाल तिवारी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, बड़े स्पष्ट ढंग से और सबने इनको शासकीय कर्मचारी तो नहीं पर शासन के द्वारा संचालित संस्था का कर्मचारी माना है. इनको यह सजा इसलिये मिल रही है कि पूर्व में जो अधिकारियों ने अपने कुकृत्यों से सैडमेट को आर्थिक बदहाली का शिकार बना दिया और कुछ कर्मचारियों ने इस बात को उजागर किया उसके कारण इन कर्मचारियों को प्रताड़ित करने के लिये यह नोटिसें दी गई हैं. मेरा मंत्री जी से पुन: निवेदन है कि काम तो खतम हुआ नहीं है, सैडमेप हम बंद नहीं कर रहे हैं. मंत्री जी ने कहा है कि हम अच्छे उद्यमी प्रशिक्षित होकर के निकलें इसलिये इस संस्था का गठन किया है तो इस संस्था को राज्यपाल महोदय के अनुमोदन पश्चात उनसे स्वीकृति लेकर के खोला है वहां पर काम बंद नहीं हो रहा है तो ऐसी परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुये मेरी माननीय मंत्री जी से पुरजोर विनती है कि अभी 15 लाख रूपये वेतन पर नये कार्यकारी निदेशक (ईडी) को रखने की विज्ञप्ति अभी अखबार में आई है. अगर 15 लाख रूपये का वेतन देकर के जो एक आईएएस का वेतन होता है और आप ईडी की विज्ञप्ति निकाल रहे हैं कि हमें उसे नौकरी पर रखना है, हमें जरूरत है . तो इन लोगों की भी जरूरत बनाने का प्रयास करें और यह कहकर के सरकार अपने कर्तव्य की इतिश्री न करे कि सरकार का इससे कोई लेना देना नहीं है. 100-100 लोगों की नौकरी प्रायवेट कंपनी में कहीं जा रही है, कहीं भी 100 लोगों का रोजगार प्रभावित हो रहा है..

अध्यक्ष महोदय-- आपका प्रश्न क्या है ?

श्री शंकरलाल तिवारी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, 100 लोगों का रोजगार प्रभावित हो रहा है. सरकार की जवाबदारी है कि उनके रोजगार का संरक्षण करें. अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्री जी इनके रोजगार का संरक्षण करने का आश्वासन दें, यह मेरी उनसे विनती है.

डॉ.नरोत्तम मिश्र-- सम्मानित वरिष्ठ सदस्य ने कहा है कि इनकी जरूरत को बनाने का प्रयास इसमें करें, हम प्रयास करेंगे कि इनकी जरूरत बनी रहे.

श्री रामनिवास रावत -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी का उत्तर देने का मूड तो दिख नहीं रहा है.

अध्यक्ष महोदय-- आप प्रश्न कर दें.

डॉ.नरोत्तम मिश्र-- माननीय अध्यक्ष महोदय, रावत जी दूसरे लोगों का मूड कैसे भांप जाते हैं, कोई तरीका हमें भी बता दें.

अध्यक्ष महोदय-- अभी 2 ध्यानाकर्षण और लेना हैं. कृपा करके रावत जी प्रश्न करें.

श्री रामनिवास रावत-- अध्‍यक्ष महोदय, सीधी-सीधा मेरा प्रश्‍न यही है कि आपने केवल एक ही बात मानी है कि यह सरकारी संस्‍था नहीं है, तो यह सरकारी संस्‍था नहीं है यह आपने कहा. हाईकोर्ट का डिसीजन पढ़ लें कि हाईकोर्ट ने क्‍या कहा है कि जब पूरी तरह से राज्‍य सरकार जिन संस्‍थाओं को प्रायोजित करती है और आपने केवल इंफ्रास्‍ट्रेक्‍चर नहीं दिया, आपने जो तुलना की कि हम 108 चला रहे हैं उसमें तो सीधा-सीध आप फंड किराये से रख रहे हैं, 108 का और इस संस्‍था से तुलना मैं समझता हूं कि आप ही की बुद्धिमानी है और कोई तो दूसरा कर नहीं सकता, उद्यमिता विकास की 108 से तुलना करना, इसीलिये मैं कह रहा था माननीय अध्‍यक्ष महोदय कि मंत्री जी जवाब देने के मूड में नहीं हैं.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- मैं जवाब के मूड में हूं कि नहीं हूं यह तो माननीय अध्‍यक्ष जी तय करेंगे आप सवाल के मूड में तो हो.

श्री रामनिवास रावत-- बिलकुल.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- तो करो.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप प्रश्‍न कर दें सीधा, समय कम है.

श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से स्‍पष्‍ट जानना चाहूंगा कि इस उद्यमिता विकास प्रशिक्षण केन्‍द्र की स्‍थापना हेतु और छात्रावास हेतु आपने 45 लाख रूपये का अनुदान दिया है और आपने भूमि भी नॉमिनल प्रीमियम पर आवंटित की है उसके बाद माननीय हाईकोर्ट ने भी यह निर्णय दिया है कि जो सरकार द्वारा प्रायोजित संस्‍थायें हैं वह सरकार के नियंत्रण में रहती हैं. सबसे पहले तो यही बात बतायें कि जो सरकार द्वारा प्रायोजित संस्‍थायें हैं तो क्‍या सरकार का नियंत्रण इस संस्‍था पर है कि नहीं है, मैं यह बात जानना चाहूगा.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- सीधा नियंत्रण नहीं है.

श्री रामनिवास रावत-- नियंत्रण तो है कि नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय-- वह तो उनके उत्‍तर में अंतर्निहित हो गया न.

श्री रामनिवास रावत-- इसीलिये तो कह रहा था कि सीधा-सीधा उत्‍तर देने का मूड नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय-- चलिये इसी पर से दूसरा पूछ लीजिये.

श्री रामनिवास रावत-- आप सरकारी संस्‍थाओं पर कार्यवाही करते हैं, आप अन्‍य संस्‍थाओं पर कार्यवाही करते हैं, सार्वजनिक उपक्रमों की कई संस्‍थायें हैं, उन पर कार्यवाही करते हैं.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- इस पर भी कार्यवाही कर दें.

श्री रामनिवास रावत-- इस पर कार्यवाही तो लोकायुक्‍त कर रहा है. इस यह कार्यवाही करें कि जो 100 लोग गलत तरीके से निकाले हैं, उनको वापस लें.

श्री शंकरलाल तिवारी-- मंत्री जी ने अपनी संवेदनशीलता का परिचय दे दिया है, उन्‍होंने कह दिया है कि हम व्‍यवस्‍था करेंगे. नेतागिरी में न फंसाओ भैया, गरीबों को रोजी रोटी मिल जाने दो.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह जो 100 लोग निकाले हैं, ऐसा कोई आदेश है क्‍या इनके पास जरा पढ़ कर सुनायें आप भी सुन लें मैं भी सुन लूं. 100 में से एकाध का अगर आदेश हो तो पढ़कर सुनायें, मैं भी सुन लूं.

श्री रामनिवास रावत-- आदेश की कापी मैं उपलब्‍ध करा दूंगा, जिनको निकाला गया है.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- शब्‍द बयानी करते हो आप, आपको आदत ही पड़ गई है, शब्‍द बयानी की.

श्री रामनिवास रावत-- उनको मौखिक आदेश के निकाल दिया गया है और आपकी सरकार केन्‍द्र की सरकार स्किल डेवलपमेंट के काम को बढ़ावा देने की बात कर रही है और यह लोग सारे के सारे स्किल डेवलपमेंट के लिये लगे हुये हैं. क्‍या आप स्किल डेवलपमेंट के काम को आप बंद करना चाहते हैं.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- सरकार स्किल डेवलपमेंट के कार्य को आगे बढ़ाना चाह रही है.

श्री रामनिवास रावत-- तो यह संस्‍था क्‍या काम करती है, यह तो बता दें. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं वही तो पूछना चाह रहा हूं, सरकार की मंशा क्‍या है, कहते कुछ हैं, करते कुछ हैं, यह लोग किस लिये लगे थे, स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग देने के लिये लगे थे यह लोग.

अध्‍यक्ष महोदय-- डॉ. गोविंद सिंह अपना प्रश्‍न करें कृपया, अभी और सदस्‍य भी हैं कमलेश्‍वर पटेल भी हैं.

श्री शंकरलाल तिवारी-- उन्‍होंने उन कर्मचारियों को व्‍यवस्थित करने की बात कही है माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विषय आ चुका है और संतोषजनक उत्‍तर संवेदनशीलता के साथ माननीय मंत्री जी ने दिया है कि उन 100 लोगों को कहीं न कहीं रोजगार से जोड़ रखेंगे. माननीय अध्‍यक्ष महोदय मेरी विनती है कि उन 100 लोगों के पेट को नेतागिरी में न लाया जाये. ...(व्‍यवधान)..

श्री रामनिवास रावत-- इसमें नेतागिरी की क्‍या बात हो गई.

अध्‍यक्ष महोदय-- श्री रावत जी बैठ जायें, डॉ. गोविंद सिंह

श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय प्रश्‍नों का उत्‍तर तो आ जाने दें.

अध्‍यक्ष महोदय-- दोनों का इकट्ठा उत्‍तर दे देंगे.

डॉ. गोविंद सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने अपने जवाब में दिया है कि राज्‍य शासन से अनुदान नहीं विधानसभा की कंडिका 7 में है कोई प्रश्‍न नहीं आयेगा, तीसरा है कि स्‍वायत्‍त संस्‍था शासकीय है ही नही पहली बात तो यह कि आपने अनुदान दिया तो किस नियम के तहत दिया, एक. दूसरा आपने इसी में स्‍वायतता का लिया, विधानसभा में नहीं था तो प्रश्‍न आया क्‍यों, क्‍यों लिया आपने. तीसरा संस्‍था का मामला जब लोकायुक्‍त में है, अगर शासन से संबंधित कोई बात नहीं है तो लोकायुक्‍त को उन संस्‍थाओं में कार्यवाही करने का अधिकार नहीं है. माननीय मंत्री जी यह तीनों बातें जो हुई हैं इससे प्रमाणित होता है कि यह संस्‍था सरकार के अधीनस्‍थ है, उपक्रम है सरकार का और सरकार इसमें अनुदान देती रही है, फिर आपने विधानसभा को गुमराह किया और आपकी बुद्धि पर तरस आता है कि कम से कम जब आप स्‍वयं स्‍वीकार कर रहे हैं तो फिर इस प्रकार कहना कि यह शासकीय संस्‍था नहीं है. यह किस नियम के तहत है नंबर 1, और दूसरा आप यह बता दें, आपने कहा कि हमने नहीं निकाला है तो कृपया करके यह बतायें कि यह वहीं बने रहेंगे क्‍या, इसका जवाब दीजिये. कर्मचारियों को निकालोगे तो नहीं.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- स्‍वाभाविक रूप से माननीय अध्‍यक्ष महोदय मेरी बुद्धि पर गोविंद सिंह जी को तरस आयेगा ही, मैं आपको धन्‍यवाद देता हूं, आप इसी तरह से तरसते रहें ... (हंसी)..

अध्‍यक्ष महोदय-- आप उत्‍तर दीजिये उनका.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सवाल अगर आयेगा तो जवाब तो दूंगा मैं, उन्‍होंने तरस की बात कही है तो मैं चाहता हूं कि वह तरसते रहें.

डॉ. गोविंद सिंह-- इसमें तीनों बातें, विधानसभा में नहीं आ सकता, वह भी आ गया. लोकायुक्‍त कार्यवाही नहीं कर सकता, वह आ गया, अनुदान नहीं दे सकते, अनुदान भी दिया.

डॉ नरोत्तम मिश्र-- आपने तीनों बातें रिपीट कर दीं. विधानसभा में क्या आयेगा और क्या नहीं आयेगा, यह मैं नहीं तय नहीं, विधानसभा अध्यक्ष और विधानसभा करता है. दूसरी बात उन्होंने कहा कि अनुदान नहीं दिया तो अनुदान नहीं दिया.

डॉ गोविन्द सिंह--अध्यक्षजी, आपने रावत जी के प्रश्न के उत्तर में कहा कि मैंने कर्मचारियों को नहीं निकाला है, कोई आदेश नहीं है.

डॉ नरोत्तम मिश्र-- अध्यक्षजी, ये यहां पर रहते हैं लेकिन किसी बात को सुनते नहीं हैं. (व्यवधान) मैंने रावत जी के प्रश्न पर यह नहीं कहा. रावत जी ने कहा कि आपने 100 लोगों को निकाल दिया, तो मैंने कहा कि आपके पास उन 100 लोगों में से एकाध किसी का आदेश हो तो पढ़ कर सुनाओ. आप जाने कहां रहते हैं सर है सजदे, दिल में मान लिया ख्याल.

डॉ गोविन्द सिंह-- मैंने मान लिया कि आपने नहीं निकाला लेकिन अब तो नहीं निकालोगे.(व्यवधान) आपने नहीं निकाला तो उनको निकालने का प्रयास तो नहीं होगा.यह बताईये.

श्री रामनिवास रावत--लोकायुक्त के छापे में करोड़ों रुपये बरामद हुए हैं, उनको क्यों बचा रहे हो.

डॉ नरोत्तम मिश्र--अध्यक्षजी, हम किसको बचा रहे हैं. अभी शंकर लाल तिवारी जी ने कहा कि ये नेतागिरी कर रहे हैं. जिस पर लोकायुक्त ने छापा मारा, जिस व्यक्ति पर केस रजिस्टर्ड है, वह नौकरी में ही नहीं है. आप कह रहे हैं कि बचा रहे हैं.पहले जानकारी तो लेकर आओ.

अध्यक्ष महोदय--गोविन्द सिंह जी ने सीधा प्रश्न किया है. रावत जी बैठ जायें.

डॉ गोविन्द सिंह--अध्यक्षजी, मेरा सीधा प्रश्न था कि अभी आपने रावत जी से कहा कि नौकरी से नहीं निकाला तो कृपा करके इनको निकालने की कार्रवाई नहीं की जायेगी, ये नौकरी में बने रहेंगे, इतना बता दें.

डॉ नरोत्तम मिश्र-- अध्यक्षजी, मैं कोई कार्रवाई नहीं करने वाला.

श्री कमलेश्वर पटेल--अध्यक्ष महोदय...

अध्यक्ष महोदय-- सीधा प्रश्न कर लें. भाषण मत दीजिए. समय कम है.

श्री कमलेश्वर पटेल--अध्यक्ष महोदय, हम भाषण नहीं दे रहे हैं. अध्यक्ष महोदय, विभाग, सरकारी अधिकारी, माननीय मंत्रीजी सदन को पूरी तरह से गुमराह कर रहे हैं. क्योंकि मेरे द्वारा ही एक साल पहले इस उद्यमिता विकास केन्द्र के संबंध में प्रश्न पूछा गया था. जो उत्तर आया था वह जवाब और आज जो बातें हो रही हैं,उन दोनों में धरती-आसमान का अंतर है.

अध्यक्ष महोदय--आप सीधा प्रश्न करें.

श्री कमलेश्वर पटेल--अध्यक्ष महोदय, एक तरफ पहले स्वीकार किया कि उद्यमिता विकास केन्द्र अर्ध शासकीय संस्था है, शासन से अनुदान प्राप्त है तो मतलब शासन के कंट्रोल में है. अगर शासन के कंट्रोल में नहीं है तो फिर सरकार विज्ञापन क्यों निकालता है. उद्योग विभाग विज्ञापन के जरिये ED के आवेदन बुलाता है और चयन कमेटी बनाता है. फिर उसके बाद जब भ्रष्टाचार की शिकायतें आती हैं, जो लोग शिकायतें करते हैं, उनको पृथक कर दिया जाता है. हमारे जिले के भी 1-2 लोग हैं. मेरा निवेदन है कि अगर उद्यमिता विकास केन्द्र अर्ध शासकीय संस्था नहीं है तो क्या लोकायुक्त संगठन उसके ED पर छापा मार सकता है?

अध्यक्ष महोदय--लोकायुक्त संगठन की बात यहां कैसे कर सकते हैं.

श्री कमलेश्वर पटेल-- मंत्रीजी बता दें कि उद्यमिता विकास केन्द्र के ED के यहां छापा पड़ा था या नहीं?

डॉ नरोत्तम मिश्र-- हां, छापा पड़ा था और वह छापा मार सकता है.

श्री रामनिवास रावत--मंत्रीजी, इसके चेअरमेन कौन हैं? लोगों के साथ न्याय नहीं करना अन्याय करोगे.(व्यवधान)

श्री शंकरलाल तिवारी-- उन गरीबों को नेतागिरी में मत डालो. उनके साथ न्याय करने से कहां इंकार किया है.(व्यवधान)

श्री कमलेश्वर पटेल--अध्यक्ष महोदय, बाकी मुझे उम्मीद नहीं है कि कोई कार्रवाई करेंगे. आप इतनी व्यवस्था दे दें क्योंकि कर्मचारी पृथक किये जा चुके हैं. जिन 100 लोगों की बात हो रही है उनको निकाला जा चुका है. क्या मंत्रीजी उनको दुबारा सेवा का अवसर देंगे?

डॉ नरोत्तम मिश्र-- निकाला नहीं गया है. (व्यवधान)

श्री कमलेश्वर पटेल--हमारे पास आदेश की क़ॉपी है.

डॉ नरोत्तम मिश्र--आदेश की कॉपी है तो दिखा देना.

अध्यक्षीय व्यवस्था

 

विभागीय अधिकारियों द्वारा प्रश्‍न एवं ध्‍यानाकर्षण की जानकारी ठीक तरीके से भेजने संबंधी

अध्यक्ष महोदय-- आप बैठ जायें. जिनके नाम थे उनको बुलाया था. माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी आपका ध्यान में इस उत्तर की ओर आकर्षित करना चाहता हूं. इसकी कंडिका 5 में विधानसभा ने यह काल अटेंशन ग्राह्य कर लिया..

डॉ नरोत्तम मिश्र-- मैंने देखा..

अध्यक्ष महोदय--यह अत्यंत गंभीर बात है. पहली बात, अगर अग्राह्य करना हो तो शासन की ओर से अग्राह्य करने का हमारे पास आग्रह आता है लेकिन यदि वह ग्राह्य कर लिया जाये तो उसकी ग्राह्यता पर कभी कोई प्रश्न नहीं उठाया जाता. उन्होंने उठाया यह गंभीर बात है. दूसरी बात कि उन्होंने जिस चीज का हवाला दिया. आपके विभाग ने प्रश्न का हवाला दिया है, और यह ध्यानाकर्षण है. कृपया ध्यानाकर्षण में ऐसा कोई नियम नहीं है कि सिर्फ शासन से संबंधित विभागों के विषय पूछे जायेंगे. अविलंबनीय महत्व की कोई भी घटना जो प्रदेश में घटित होती है, उस पर प्रश्न पूछा जा सकता है. उस पर ध्यानाकर्षण लाया जा सकता है. यही नियम है. कृपया विभाग के अधिकारियों को बतायें कि भविष्य में ऐसी गलती वे ना करें और ध्यानाकर्षण और प्रश्नों के संबंध यदि उनको कुछ कहना ही है तो ठीक से पढ़ें.

डॉ. गोविन्द सिंह - माफी मांगो.

श्री जितू पटवारी - माफी तो मांगना चाहिए.

संसदीय कार्यमंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र)- अध्यक्ष महोदय, आज विभाग की सम्मानित मंत्री जी भी नहीं हैं और उनके प्रमुख सचिव भी नहीं है. हैदराबाद में एक बहुत बड़ी उद्योग समिट चल रही है उसमें गये हुए हैं. आपने जिस ओर ध्यान आकर्षित किया है. मैंने भी उस विषय को देखा था और वास्तव में यह अधिकारियों की गलती है, ऐसा मैं मानता हूं. चूंकि मैं भार साधक मंत्री ही सही, मैं इस पर खेद व्यक्त करता हूं और भविष्य में पुनरावृत्ति नहीं हो इसके लिए भी ताकीद करूंगा.

श्री जितू पटवारी - अधिकारियों को पनिश करेंगे क्या?

अध्यक्ष महोदय - श्री दुर्गालाल विजय अपना ध्यान आकर्षण पढ़ें.

श्री दुर्गालाल विजय - (अनुपस्थित)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

ध्‍यानाकर्षण (क्रमश:)

 

 

(6) मुरैना-ग्वालियर मार्ग पर खनिज माफिया द्वारा वन कर्मी की हत्या किया जाना

 

डॉ. गोविन्द सिंह (लहार) श्री रामनिवास रावत, श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह - अध्यक्ष महोदय,


 

गृह मंत्री ( श्री बाबूलाल गौर ) -- माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

 

 

 

 

1.20 बजे {उपाध्‍यक्ष महोदय (डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह)पीठासीन हुए}

डॉ. गोविंद सिंह -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, रेत और पत्‍थरों के संबंध में समूचे प्रदेश में प्रतिदिन घटनाएं घट रही हैं, यह समाचार-पत्रों में भी आता है. ऐसा शायद ही कोई जिला हो जहां नदी न हो. मैं माननीय मंत्री को बताना चाहता हॅूं कि आपके रिकार्ड में भले ही न आया हो लेकिन सच्‍चाई यह है कि पिछले 7 वर्षों में भिंड जिले में 13 हत्‍याएं हुई हैं जिसमें रेत के आपसी झगड़े और अवैध उत्‍खनन के लिए जबरन किसानों के खेत में जाना सम्‍मिलित है. अकेले गिरवासा गांव में 3 लोगों की हत्‍या हुई, निवसाई गांव में 2 राजपूतों की हत्‍या हो गई और मुरैना में 7 लोगों की हत्‍या हुई है यह हमारी जानकारी में है. मैं माननीय मंत्री जी को बताना चाहता हूँ कि यह सच्‍चाई है कि पुलिस विभाग आपका मजबूत है, डीजीपी साहब बड़े ताकतवर हैं लेकिन पता नहीं इस मामले पर सख्‍ती क्‍यों नहीं हो रही है, अगर थाना प्रभारी चाहे तो एक दाना भी रेत का नहीं उठ सकता, ऊपर स्‍तर के अधिकारी भले ही ईमानदार हैं लेकिन नीचे स्‍तर के अधिकारियों के हर थाने में टैक्‍ट बंधे हुए हैं वे पैसे लेते हैं तब जाते हैं. अत: मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हॅूं कि अवैध उत्‍खनन रोकने के लिए पुलिस सख्‍त कार्यवाही करेगी या नहीं ? दूसरी बात मेरी यह भी है कि कितनी और बलि लोगे तब आपकी सरकार को शांति मिलेगी ?

श्री बाबूलाल गौर -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, तीनों विभाग - वन विभाग, खनिज विभाग और पुलिस विभाग द्वारा संयुक्‍त कार्यवाही की जा रही है. जो आपने प्रश्‍न इस ध्‍यान आकर्षण में रखे हैं हमने तीनों घटनाओं का उत्‍तर दिया है. अब जनरल बात आप कहेंगे कि इतने साल में इतने हुए, वह अलग बात है लेकिन हम आपको पूरी तरह से विश्‍वास दिलाते हैं कि जो रेत का उत्‍खनन कर रहे हैं उनके खिलाफ हम सख्‍त कार्यवाही करेंगे.

डॉ. गोविंद सिंह -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हमने रेत उत्‍खनन के बारे में लहार क्षेत्र का और मिहोना का जिक्र किया है इसके अलावा एक और तहसील रोम है ये सभी सिंद नदी के किनारे बसे हैं और एक अमायन थाना भी है. इन चारों थानों में विशेष व्‍यवस्‍था पुलिस की होनी चाहिए और कड़ी निगरानी होनी चाहिए तो क्‍या कड़ी कार्यवाही करेंगे और क्‍या आप इन चारों थानों को निर्देश देंगे ताकि अवैध उत्‍खनन रूक जाए ? खनिज विभाग की भी जरूरत नहीं है अगर केवल पुलिस कड़ी कार्यवाही करे तो सब रूक जाएगा, यह हमारा मानना है और आपसे पुन: अनुरोध है कि इन चारों थानों को आप निर्देशित करें तो अवैध उत्‍खनन हमेशा के लिए बंद हो सकता है.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी, उनका कहना है कि आपने जवाब में यह कहा है तीनों विभाग मिलकर कार्यवाही कर रहे हैं, अगर पुलिस विभाग अकेले ही प्रभावी कार्यवाही करे, सख्‍ती करे तो यह रोका जा सकता है. अब आप बताएं ?

श्री बाबूलाल गौर-- उपाध्यक्ष महोदय, जो रेत है और जिस क्षेत्र से अवैध खनन होता है, कुछ क्षेत्र राजस्व का है, कुछ वन का है, कुछ नदी किनारे का है तो उनका काम है और वे जब तक हमसे शिकायत नहीं करते और हमसे पुलिस नहीं मांगते तब तक अकेले हम कार्यवाही नहीं कर सकते. संयुक्त कार्यवाही कर रहे हैं, इसमें क्या आपत्ति है.

डॉ.गोविन्द सिंह-- कार्यवाही करने के लिए उनके पास अमला नहीं है. दूसरा इस समय भिण्ड जिले में, मुरैना में रेत खदानों की मंजूरी नहीं है, यह सब अवैध चल रही हैं और खुलेआम सड़कों से गाड़ियां जा रही हैं तो अभी अगर विधिवत मंजूरी हो तो खनिज विभाग कार्यवाही करें. अगर खनिज विभाग खदानें स्वीकृत कर रायल्टी वसूल करे फिर तो उनकी कार्यवाही करने की जिम्मेदारी बनती है. अभी तो अवैध रुप से खनन होकर जा रहा है, उसमें अभी उनका कहीं रोल ही नहीं है तो उस पर आप कार्यवाही करें.

श्री बाबूलाल गौर-- उपाध्यक्ष महोदय, मैंने कहा कि कार्यवाही करेंगे और अगर वहां पुलिस की कमी होगी तो वहां पुलिस बल को बढ़ा देंगे.

श्री रामनिवास रावत(विजयपुर)-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, बात वहीं आकर के अटकती है कि पूरे प्रदेश में यह रेत माफिया, खनन माफिया...

श्री बाबूलाल गौर-- उपाध्यक्ष महोदय, पूरे प्रदेश का प्रश्न नहीं है. ध्यानाकर्षण के विषय की सीमा में रहें.

उपाध्यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी, अभी तो उऩ्होंने प्रश्न किया नहीं है. अगर पूरे प्रदेश का प्रश्न करेंगे तो मैं अलाऊ नहीं करुंगा.

श्री बाबूलाल गौर-- ठीक है. उन्होंने शुरु किया पूरे प्रदेश से(हंसी) हम खत का मजमून भांप लेते हैं लिफाफा देख के.

श्री रामनिवास रावत-- मैं प्रश्न केवल आपसे संबंधित पूछूंगा

वन मंत्री(डॉ. गौरीशंकर शेजवार)-- पूरे प्रदेश का भाषण करेंगे तो उसे भी विलोपित करेंगे?

उपाध्यक्ष महोदय-- विचार करेंगे.(हंसी)

श्री रामनिवास रावत-- आप तो चाहे जो विलोपित कर दें. आप तो आप ही हैं.

डॉ. गोविन्द सिंह-- शेजवार जी, मैंने यह कहा था कि कितनी और बलि लेंगे तब शासन को शांति मिलेगी, इसका जवाब आप दे दो.

उपाध्यक्ष महोदय-- रामनिवास जी, आप कृपया प्रश्न कर लें.

श्री रामनिवास रावत-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, जैसा डाक्टर साहब ने कहा, पूरे प्रदेश का कोई प्रश्न नहीं है लेकिन यह बात सही है कि पुलिस की बिना अनुमति के या बिना सहमति के अवैध उत्खनन नहीं हो सकता,जो स्थानीय थाना प्रभारी हैं, जहां से ट्रेक्टर निकलते हैं, जिसके आगे से ट्रेक्टर गुजरते हैं उसकी बगैर सहमति के अवैध उत्खनन या खनिज का अवैध परिवहन संभव ही नहीं है, हो ही नहीं सकता. आपने कहा कि टास्कफोर्स बना हुआ है. इसकी बड़ी उच्चस्तरीय समिति भी बनी हुई है ( डॉ. गौरीशंकर शेजवार के उठकर जाने पर) बैठें माननीय वन मंत्री जी, मेरा पर्टीक्यूलर प्रश्न है, माननीय मंत्री जी ने बताया है कि 5.3.2016 की शाम को वन रक्षक वन मण्डल ग्वालियर को सूचना दी गयी. पहले से ही टास्कफोर्स बना हुआ है. आपको सूचना मिली. यह जो नरेन्द्र शर्मा, इन्होंने पूरे ग्वालियर और चम्बल डिवीजन का फोर्स एकत्रित किया. शाम को 11 बजे वह उठ के संबलगढ़ मे, वहां पदस्थ भी नहीं था, न उसका क्षेत्र था, उसको बुलाया और पूरे फोर्स को बुलाया, आपका कहना है कि पुलिस साथ थी, सब साथ थे और ट्रेक्टर केवल एक था. उसको पकड़ने की कोशिश की. मेरा प्रश्न है कि वह नरेन्द्र शर्मा और इससे पहले आरक्षण धर्मेन्द्र चौहान भी एक्सपायर हुआ है, मैं माननीय मंत्री जी से सीधा सीधा यह अनुरोध करुंगा कि वह सर्विस में था तो आप अनुकम्पा नियुक्ति देंगे. माननीय मंत्री जी ने कह भी दिया कि 5 लाख रुपये, पहुंच गये? सरकार के या विभाग के?मैं यह इसलिए पूछ रहा हूँ कि उनके पूरे विभाग ने भी पैसा एकत्रित करके दस लाख रुपये, मुझे जो जानकारी मिली है, उसको दिये हैं और इस लड़के ने एक छोटी सी बच्ची को भी एडाप्ट किया हुआ है, जो लावारिस हालत में मिली. मेरा मंत्री जी से सीधा सीधा प्रश्न है कि इस तरह जो पकड़ने में मृत्यु हो जाती है इनको रोकने का प्रयास करें, क्या इनको आप शहीद का दर्जा देंगे,क्योंकि शासकीय कार्य करते हुए इनकी जानें गयी है, इनकी हत्या हुई हैं

 

1.30 बजे अध्यक्षीय घोषणा

सदन के समय में वृद्धि विषयक

उपाध्यक्ष महोदय-- कार्यवाही में उल्लेखित ध्यानाकर्षण पर कार्यवाही पूर्ण होने तक सदन के समय में वृद्धि की जाय.

मैं समझता हूँ कि सदन इससे सहमत है?

 

(सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई)

ध्यानाकर्षण (क्रमशः)

 

श्री बाबूलाल गौर-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, दो विभागों से पूछा है. अब वन रक्षक को जो रिलीफ दी गई है वह माननीय गौरीशंकर जी शेजवार साहब बता पाएँगे क्योंकि आपने मुझसे यह प्रश्न इसमें नहीं पूछा है, यह मेरा निवेदन है.

वन मंत्री (डॉ.गौरीशंकर शेजवार)-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा 5 लाख रुपये दिए गए हैं और 10 लाख रुपये विभाग की तरफ से और उनके अधिकारियों के और उसके उससे दिए गए हैं.

श्री रामनिवास रावत-- सिर्फ धर्मेन्द्र चौहान का उल्लेख किया, जो आरक्षक है उसका भी उल्लेख किया है. उन्होंने वन रक्षक का बता दिया. अब यह धर्मेन्द्र चौहान आपके विभाग का आरक्षक है. इसके बारे में आप बता दें.

श्री बाबूलाल गौर-- आप क्या जानकारी लेना चाहते हैं?

श्री रामनिवास रावत-- उपाध्यक्ष महोदय, मैं यह जानकारी लेना चाहता हूँ कि अभी तक क्या सहायता दी गई और क्या इन दोनों वन आरक्षक और पुलिस आरक्षक को आप शहीद का दर्जा देंगे?

श्री बाबूलाल गौर-- नहीं, शहीद का तो सेना में होता है.

श्री रामनिवास रावत-- आप काम तो लेते हों.

श्री बाबूलाल गौर-- उपाध्यक्ष महोदय, अपराधियों को पकड़ने में कभी कभी इस प्रकार की घटनाएँ होती हैं. लेकिन हम नियमानुसार कार्यवाही करेंगे.

श्री रामनिवास रावत-- लेकिन कभी कभी यह होता है, सरकार ऐसे लोगों को प्रोत्साहन नहीं देगी तो कोई अपराधियों को पकड़ने नहीं जाएगा.

उपाध्यक्ष महोदय-- रावत जी का जो प्रश्न था कि आर्थिक सहायता देंगे कि नहीं देंगे. वह बता दें.

श्री रामनिवास रावत-- इसके साथ साथ में सम्मान भी चाहते हैं. जिससे लोगों में एक भावना बनें और लोग इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए अपराधियों को पकड़ने के लिए प्रयास करें. उन्हें सम्मान देने में क्या बुराई है?

श्री बाबूलाल गौर-- आपने जो सुझाव दिया है उसको हम स्वीकार कर रहे हैं.

श्री रामनिवास रावत-- धर्मेन्द्र चौहान आरक्षक को सहायता क्या क्या दी है?

श्री बाबूलाल गौर-- अभी सहायता के लिए कार्यवाही चल रही है.

श्री रामनिवास रावत-- उपाध्यक्ष महोदय, कौनसी घटना, इसकी किस दिनाँक को मृत्यु हुई है, 5.4.2015 को...

श्री बाबूलाल गौर-- सहायता जो दी गई थी तथा विशेष पेंशन भी दी गई है और अनुकंपा नियुक्ति भी दी गई है. अभी जानकारी प्राप्त हुई.

श्री रामनिवास रावत-- अनुकंपा नियुक्ति एक सामान्य प्रक्रिया है, उसका अधिकार है, उसमें आप क्या करेंगे. इसको आर्थिक सहायता, जैसे वन विभाग ने आर्थिक सहायता दी तो इस धर्मेन्द्र चौहान को भी....

उपाध्यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी, आर्थिक सहायता का बता दें.

श्री बाबूलाल गौर-- आर्थिक सहायता दी जाएगी और उसकी राशि तय करेंगे.

श्री रामनिवास रावत-- उपाध्यक्ष महोदय, मैं माननीय वन मंत्री जी से जानना चाहूँगा कि इस लड़के ने, जो नरेन्द्र शर्मा एक्सपायर हुआ है, इसने एक छोटी सी नवजात बालिका जिसे कोई झाड़ी में फेंक गया था, उसको एडॉप्ट किया हुआ है. वन विभाग तो उसको देख ही रहा है. अब उसका एकमात्र संरक्षण का सहारा नरेन्द्र शर्मा था. ठीक है उसके भाई हैं, नरेन्द्र शर्मा के बेटे हैं पर उनका व्यवहार और उनकी परिस्थिति क्या रहेगी, तो उस बेटी के लिए भी, जब तक वह बड़ी हो जाए, शादी हो जाए, उसके लिए भी एक दो लाख की एफ डी करा दें तो ज्यादा अच्छा रहेगा, उसका भरण पोषण होता रहेगा. वन मंत्री जी, कुछ कहेंगे?

डॉ.गौरीशंकर शेजवार-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, 5 लाख माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा दिए गए हैं और 10 लाख रुपये विभाग के सहयोग से दिया गया है. आश्रितों में वह लड़की भी आती है, यदि उसको एडॉप्ट किया गया है तो.

उपाध्यक्ष महोदय-- ऑफिशियली अगर एडॉप्ट किया है तो.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार-- यह राशि उसके भी काम आएगी...(व्यवधान)..पैसे में ऐसा कोई यह नहीं कहा गया कि लड़की को वे न दें.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह(भिण्ड)-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, भिण्ड जिले में अवैध खनन के संबंध में हमने भी ध्यानाकर्षण की सूचना दी थी. उपाध्यक्ष महोदय, जो उत्तर आया है कि भिण्ड शहर के बीचोंबीच 3.3.2016 को दोपहर 2 बजे जो अवैध खनन चलाने वाले व्यापारियों ने, असामाजिक तत्वों द्वारा, जो खनिज अधिकारी गया था उसकी पिटाई लगाई और पिटाई लगाने के बाद जब उसने कलेक्टर महोदय को सूचना दी तो टी आई पहुँचे. टी आई साहब की यह हालत थी, जो अवैध व्यापार कर रहे थे उन्होंने ढेर सारी गाड़ियाँ दीं और टी आई को बुरी तरह भागना पड़ा. जब इसके बाद एस पी को सूचना मिली तो एस पी ने एडिश्नल एस पी भेजा, जिसका जिक्र अभी नहीं आया. उसके बाद सरेआम शहर में छत पर चढ़ कर 5-5, 6-6 गोलियाँ चलाई गईं, उसके बाद एडिश्नल एसपी ने भी फायर किया वह उत्तर में नहीं आया है हमारा निवेदन है कि यह अवैध खनन कब तक चलता रहेगा. हमारे टेनगुर द्वारगांव में 6 हत्यायें हो चुकी हैं नदियों में लोग सुरक्षित नहीं हैं दूसरी ओर शहरों में भी लोग सुरक्षित नहीं हैं. भिण्ड जिले में 10-15 हत्यायें हो चुकी हैं इन असामाजिक तत्वों के खिलाफ ठोस कार्यवाही क्यों नहीं हो रही है. एक गरीब व्यक्ति पकड़ा जाता है उसे धारा 151 में पुलिस तीन दिन तक रखती है तब पेश करती है इन असामाजिक तत्वों को दो बजे पकड़ा गया और शाम को 5 बजे कचहरी में पेश कर दिया गया इसका क्या कारण है. क्या इनका रिमांड लिया गया ? किसके दबाव में यह कार्यवाही हुई ?

उपाध्यक्ष महोदय--यह तो आपका भाषण हुआ, आप तो प्रश्न पूछ लीजिये.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह--उपाध्यक्ष महोदय, मैं यह पूछ रहा हूँ कि यह अवैध उत्खनन बंद होगा कि नहीं होगा या लोग मरते रहेंगे और पुलिस कार्यवाही नहीं करेगी. क्या कानून आम आदमी, गरीब आदमी के लिए बनाया गया है. कब तक कार्यवाही करेंगे ?

उपाध्यक्ष महोदय-- अवैध उत्खनन बंद करना तो खनिज विभाग का काम है.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह--उपाध्यक्ष महोदय, जवाब में यह नहीं आया कि एडिश्नल एसपी था और तीन फायर किये गये है. छोटी सी कार्यवाही करके दोपहर दो बजे पकड़ा और शाम को कचहरी में पेश कर दिया गया.

उपाध्यक्ष महोदय--गृह विभाग से जो संबंधित प्रश्न है वह पूछिये आप.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह--उपाध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह है कि जब खनन पूरे जिले का बंद है परमीशन नहीं है तो किसके आदेश से भिण्ड में अवैध खनन हो रहा है. जहां लोग मारे जा रहे हैं गोलियां चल रही हैं ऐसा दिन नहीं जाता है जब गोलियां नहीं चलती हों.

उपाध्यक्ष महोदय--अभी भी आपका प्रश्न नहीं आया, प्रश्न पूछ लीजिये. आप माननीय मंत्रीजी से क्या जानना चाहते हैं.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह--उपाध्यक्ष महोदय, इसमें बहुत छोटी कार्यवाही हुई है दो बजे बंद किया और शाम को पेश कर दिया. मेरा प्रश्न यह है कि अवैध खनन भिण्ड जिले का बंद होगा कि नहीं होगा दूसरा प्रश्न छोटी कार्यवाही क्यों की गई.

श्री बाबूलाल गौर--उपाध्यक्ष महोदय, यह रेत के अवैध खनन का जो मामला है वह खनिज विभाग का है. जब कोई अपराध करता है तो हम उस पर कार्यवाही करते हैं पूरी ताकत से करते हैं.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह--उपाध्यक्ष महोदय, पुलिस की गोलियां चल रही हैं और आप कह रहे हो सामान्य घटना है एडिश्नल एसपी ने तीन फायर किये हैं, असामाजिक तत्वों ने पांच फायर किये. पूरा भिण्ड दहशत में है.

श्री बाबूलाल गौर--जो गंभीर धारायें हैं उसके अन्तर्गत धारा 307 भी हम लगाते हैं और पूरी कार्यवाही करते हैं.

श्रीमती अर्चना चिटनिस--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, अवैध उत्खनन आर्गेनाइज्ड क्राईम है जहां अवैध उत्खनन होता है वह चोरी छिपे नहीं हो रहा होता है वह सबको पता रहता है जिला प्रशासन को पता रहता है कि कहां पर अवैध उत्खनन नियमित तौर पर चल रहा है. मेरा यह सुझाव है कि माईनिंग डिपार्टमेंट, पुलिस डिपार्टमेंट और जहां वन या राजस्व जो भी रिलेवेंट हो उनकी ज्वाइंट चौकियां वहां पर शासन स्थापित करेगा क्या ? दूसरा पुलिस विभाग के पास फोर्स मांगने पर उपलब्ध नहीं है तो पुलिस विभाग को हाँ या नहीं में उत्तर राजस्व या माईनिंग को देना चाहिये और अगर फोर्स उपलब्ध नहीं है माईनिंग डिपार्टमेंट को एटकास्ट फोर्स की अरेजमेंट करना चाहिए. क्या विभाग और सरकार इस दिशा में निर्णय करेगी ?

श्री बाबूलाल गौर--उपाध्यक्ष महोदय, तीन विभाग मिलकर संयुक्त कार्यवाही करते हैं यह मैंने अपने उत्तर में बताया है और हम यह कोशिश करते हैं कि अपराधी को पकड़ने का काम गृह विभाग करे.

उपाध्यक्ष महोदय--इसमें अहम् प्रश्न यह है कि जब उस इलाके में लीज अलाटेड नहीं है फिर कैसे कार्यवाही हो रही है सबसे मुख्य प्रश्न यह है.

श्री बाबूलाल गौर--महोदय यह काम खनिज विभाग का है और वह हमको शिकायत करते हैं और हमसे फोर्स मांगते हैं तो हम कार्यवाही करते हैं.

डॉ गोविन्‍द सिंह :- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, खनिज विभाग तो ले जा रहा है, लेकिन गोली क्‍यों चल रही है. आप गोलियों पर तो कंट्रोल लगाईये. (व्‍यवधान) आदमी मर रहे हैं.

श्री रामनिवास रावत:- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, खनिज माफिया पावरफुल लोग हैं. बिना पुलिस के वहां पर कौन रूकेगा. (व्‍यवधान) इतनी सारी हत्‍याएं हो गयी हैं. आपका टास्‍क फोर्स बना हुआ है.

श्री घनश्‍याम पिरोनियां :- आपका वहां पर थाना है, चौकी है, (व्‍यवधान) जो भी ट्रैक्‍टर टाली होगा या डम्‍पर होगा तो वह थाने से गुजरेगा, यदि वहां पर थाने पर न‍हीं रोका गया तो निश्चित रूप से वहां थाने का थानेदार उसमें लिप्‍त है.

श्री नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह:- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जहां से भी रेत की गाडि़यां गुजरती है, वहां पर थाना है, चौकी है, अगर उस चौकी का थानेदार या टी आई तय कर लेगा तो किसी की ताकत नहीं है.

उपाध्‍यक्ष महोदय :- माननीय मंत्री जी क्‍या आप वहां के वरिष्‍ठ अधिकारियों को इस पर प्रभावी नियंत्रण लगाने के आदेश देंगे.

श्री बाबूलाल गौर :- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि आपने आदेश दिया है, हम प्रभावी कार्यवाही करेंगे.

श्री कैलाश चावला :- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जैसी सदन में जानकारी आयी है. यह मामला केवल अवैध रेत उत्‍खनन का नहीं है, बल्कि आज यह मामला कानून व्‍यवस्‍था का भी बन चुका है. वहां पर गोलियां चल रही हैं और हम एक दूसरे विभाग के ऊपर टाले तो मुझे लगता है कि इसमें शासन की छवि भी खराब हो रही है. इसलिये गृह विभाग को सख्‍ती से कार्यवाही करना चाहिये. मैं गृह मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि इसमें वह सक्षम कार्यवाही करें. क्‍योंकि वहां पर जब गोलियां चल रही है तो इसमें खनिज विभाग का इसमें कोई लेना देना नहीं रहा है. इसमें गृह विभाग को सक्षम कार्यवाही करना चाहिये. क्‍या आप कार्यवाही करने की कृपा करेंगे.

उपाध्‍यक्ष महोदय :- यह तो आपका सुझाव है.

श्री बाबूलाल गौर :- हम इस पर अवश्‍य कार्यवाही करेंगे. आपने जो सुझाव रखा है, हम उस बात को मानेंगे.

उपाध्‍यक्ष महोदय :- ठीक है.

डॉ गोविन्‍द सिंह :-(XXX). (व्‍यवधान)

उपाध्‍यक्ष महोदय :- इसको कार्यवाही से निकाल दें.

श्री घनश्‍याम पिरोनियां :- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं रविवार को अपने विधान सभा भाण्‍डेर के ग्राम बैजापारा में था तो मेरे सामने, वहां से जे सी बी मशीन जा रही था और वहां से भरी हुई रेत की ट्राली जा रही थी. मैंने दतिया कलेक्‍टर को भी कहा, लेकिन वहां पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं होती है. (व्‍यवधान)

उपाध्‍यक्ष महोदय :- अब इस पर बात समाप्‍त हो गयी है. (व्‍यवधान)

बहिर्गमन

श्री बाला बच्‍चन, उप नेता प्रतिपक्ष एवं इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यगण द्वारा शासन के उत्‍तर से असंतुष्‍ट होकर सदन से बहिर्गमन

 

श्री बाला बच्‍चन :- उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी द्वारा कोई ठोस कार्यवाही का आश्‍वासन न‍हीं दिया जा रहा है, प्रदेश में अवैध उत्‍खनन लगातार हो रहा है, शासन द्वारा समुचित कार्यवाही नहीं की जा रही है, इसलिये हम अपने दल के साथ सदन से बहिर्गमन करते हैं.

 

(श्री बाला बच्‍चन, उप नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्‍व में इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यगण द्वारा ध्‍यानाकर्षण क्रमांक (6) पर शासन के उत्‍तर से असंतुष्‍ट होकर सदन से बहिर्गमन किया. )

 

उपाध्‍यक्ष महोदय :- आज की कार्यसूची के पद क्रमांक तीन के 7 से 28 तक सूचना देने वाले निम्‍नानुसार सदस्‍यों की सूचना पढ़ी हुई मानी जायेंगे एवं उसके उत्‍तर विभागीय मंत्री जी के द्वारा पढ़े हुए माने जायेंगे.

(7) श्री राजेन्‍द्र पाण्‍डेय

(8) श्री संजय पाठक

(9) श्री के. के.श्रीवास्‍तव

(10) श्री कालुसिंह ठाकुर

(11) सुश्री हिना कांवरे

(12) श्री लाखन सिंह यादव

(13) श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार

(14) श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को

(15) श्रीमती अर्चना चिटनिस

(16) डॉ गोविन्‍द सिंह

(17) श्री सुदर्शन गुप्‍ता

(18) कुंवर सौरभ सिंह

(19) श्री रणजीत सिंह गुणवान

(20) श्री वेल सिंह भूरिया

(21) सर्वश्री आरिफ अकील (ओंकार सिंह मरकाम, कैलाश चावला)

(22) श्री रामपाल सिंह

(23) श्री आरिफ अकील

(24) श्री कमलेश्‍वर पटेल

(25) श्रीमती झूमा सोलंकी

(26) श्री गिरीश भण्‍डारी

(27) इंजी. प्रदीप लारिया

(28) श्री केदारनाथ शुक्‍ल

उपाध्‍यक्ष महोदय:- विधान सभा की कार्यवाही दोपहर 3.15 बजे तक के लिये स्‍थगित.

(1.44 बजे से 3.15 बजे तक के लिये स्‍थगित)

 

(3.21बजे) अध्यक्ष महोदय(डॉ.सीतासरन शर्मा)पीठासीन हुए.

 

 

 

 

 

 

प्रतिवेदनों की प्रस्तुति

(1) शासकीय आश्वासनों संबंधी समिति का दशम्,एकादश,द्वादश,त्रयोदश,चतुर्दश,

पंचदश तथा षोडश प्रतिवेदन

डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय(सभापति) - अध्यक्ष महोदय, मैं,शासकीय आश्वसनों संबंधी समिति का दशम्,एकादश,द्वादश,त्रयोदश,चतुर्दश,पंचदश तथा षोडश प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूं.

(2) विशेषाधिकार समिति का प्रथम एवं द्वितीय प्रतिवेदन

श्री कैलाश चावला(सभापति) - अध्यक्ष महोदय, मैं विशेषाधिकार समिति का प्रथम एवं द्वितीय प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूं.

याचिकाओं की प्रस्तुति

अध्यक्ष महोदय - आज की कार्यसूची में उल्लिखित सभी याचिकाएं पढ़ी हुई मानी जावेंगी.

विशेषाधिकार समिति के प्रतिवेदन पर विचार एवं स्वीकृति

श्री कैलाश चावला(सभापति) - अध्यक्ष महोदय, मैं मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया एवं कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 229 के अंतर्गत प्रस्ताव प्रस्तुत करता हूं कि:-

" यह सदन आज दिनांक 18 मार्च,2016 को प्रस्तुत विशेषाधिकार समिति के प्रथम एवं द्वितीय प्रतिवेदनों पर विचार कर उन्हें स्वीकार करे "

अध्यक्ष महोदय - प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ.

अध्यक्ष महोदय - प्रश्न यह है कि -

" यह सदन आज दिनांक 18 मार्च,2016 को प्रस्तुत विशेषाधिकार समिति के प्रथम एवं द्वितीय प्रतिवेदनों पर विचार कर उन्हें स्वीकार करे "

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

अध्यक्षीय घोषणा

विनियोग विधेयक पर चर्चा उपरांत अशासकीय कार्य लेने विषयक

अध्यक्ष महोदय - आज शुक्रवार होने की वजह से आखिरी ढाई घंटे अशासकीय कार्य हेतु नियत हैं परन्तु आज विनियोग विधेयक पर चर्चा उपरांत अशासकीय कार्य लिया जायेगा. मैं समझता हूं सदन इससे सहमत है.

सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई.

 

शासकीय विधि विषयक कार्य

(3.24 बजे) मध्यप्रदेश विनियोग (क्रमांक-2) विधेयक,2016 (क्रमांक 2 सन् 2016)

वित्त मंत्री(श्री जयंत मलैया) - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश विनियोग (क्रमांक-2) विधेयक,2016 (क्रमांक 2 सन् 2016) पर विचार किया जाय.

अध्यक्ष महोदय - प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ कि -

मध्यप्रदेश विनियोग (क्रमांक-2) विधेयक,2016(क्रमांक 2, सन् 2016) पर विचार किया जाय.

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्यक्ष महोदय,आज माननीय मंत्री जी बजट पारित करा रहे हैं और यह अकेले मंत्री जी का ही उत्तरदायित्व नहीं है मंत्री जी के विभागों को ही नहीं मिलेगा सरकार के सभी मंत्रियों के विभागों को राशि विधान सभा से पारित होगी और सम्माननीय मंत्रियों की सदन में उपस्थिति कम है. कम से कम जिस दिन विनियोग विधेयक पारित हो उस दिन तो सारे मंत्री उपस्थित रहें पता लगे कि उन्हें अपने विभाग की और राशि प्राप्त करने की चिंता है भी कि नहीं.सभी मंत्रियों को उपस्थित रहना चाहिये.

श्री सुन्दरलाल तिवारी (गुढ़)--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय वित्तमंत्री जी ने आपके समक्ष आज जो विनियोग विधेयक प्रस्तुत किया है. यह विधेयक राज्य का, सरकार का, राज्य की जनता का बड़ा ही महत्वपूर्ण विधेयक है और इसका पूरे राज्य से संबंद्ध है. मेरा निवेदन है कि बजट के संबंध में जब से सदन में चर्चा शुरू हुई है मैंने एक आपत्ति बार-बार लगायी है. हमने माननीय अध्यक्ष महोदय का उस त्रुटि के बारे में ध्यानाकर्षण के माध्यम से, विशेषाधिकार हनन का नोटिस देकर तथा विभिन्न प्रावधानों के माध्यम से ध्यानाकृष्ट किया है. मैं माननीय मंत्री जी को धन्यवाद दूंगा कि मैंने जब यह मामला डिमाण्ड फॉर ग्रान्ट्स में उठाया तो माननीय मंत्री जी ने कुछ जवाब देने का प्रयास किया है, लेकिन वह जो जवाब था वह संतोषजनक नहीं था, विधि के अनुकूल नहीं था, प्रक्रिया के अनुकूल नहीं था इसीलिये इस सदन की गरिमा के लिये मैंने यह उचित समझा कि मैं यह बात बार-बार उठाऊं और जब तक यह सरकार उस बात को मान न जाए और वित्तमंत्री जी इसमें जो विधिक त्रुटि हुई है उस विधिय त्रुटि में सुधार न जाएं.

अध्यक्ष महोदय, यह मान्य सिद्धांत है कि -Nobody is above the law. चाहे वह सरकार हो, चाहे यह सदन हो, चाहे सदन की जनता हो, लेकिन जिस तरह से इस बार इस विधान मण्डल के अंदर कानून में सुधार किया गया है और जो हठधर्मिता इस सरकार के सामने आयी है उससे यह प्रतीत होता है कि जैसे ही हमारी मध्यप्रदेश की सरकार कानून से ऊपर है और कानून की फिक्र इस सरकार को नहीं है. अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि उस सदन में हम हैं जिस सदन में विधान बनता है, बिगड़ता है, संशोधित होता है, एवं रद्द होता है, ऐसे विधान पर हम बैठे हैं और यह हमारी कार्य-कुशलता होना चाहिये होना चाहिये कि जो विधान हमारे यहां पर बने देश की सबसे बड़ी अदालत में भी जाए तो वह रद्द न हो और उस पर अदालत भी टिप्पणी न कर पाये, ऐसा विधान बनाने की शक्ति इस विधान मण्डल में है. मुझे खेद है कि इस सदन की गरिमा को बिना ध्यान दिये जो राजकोषीय घाटा, उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम 2015 में संशोधन लाया गया उस संशोधन में सारे सदन को गुमराह किया गया. यह मामला टेक्निकल था वह संशोधन आया और वह संशोधन इस सदन से पास हो गया उसमें मैं अकेले माननीय वित्तमंत्री जी की गलती नहीं बताना चाहता हूं उसमें उस पक्ष में बैठे सदस्य तथा विपक्ष में बैठे सदस्य उसमें हम भी शामिल हैं कि वह अवैधानिक कार्य जो सरकार करवाना चाह रही है इस विधान मण्डल में उसको हमने समय से देखा नहीं और हमने समय से सुधार करने की बात नहीं की. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसे ही मेरे संज्ञान में आया, मैंने उसको सुधार करने की बात की, भारत सरकार ने घाटे की सीमा को अभी मात्र 3 प्रतिशत पर रखा है । अध्‍यक्ष महोदय, मैं क्षमता चाहता हूं, चश्मे का केस तो ले आया, पर चश्मा छूट गया । (हंसी)

श्री विजय शाह- क्‍या हमारा चश्मा चलेगा ।

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी- वित्‍त मंत्री जी के बगल में बैठे हैं, आपके चश्मे से तो बिल्‍कुल गलत दिखने लगेगा ।

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया- पूरी कांग्रेस को चश्मे की आवश्‍यकता है ।

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी- अध्‍यक्ष महोदय, इस सदन के अंदर जो संशोधन पेश किया गया, उस संशोधन में माननीय वित्‍त मंत्री जी ने उद्देश्‍य और कारणों में, कथन किया कि 14वें वित्‍त आयोग की सिफारिश को केन्‍द्र सरकार ने समावेशित कर लिया है, इसलिए घाटे की सीमा को 3 से बढ़ाकर 3.5 राज्‍य सरकार इस कानून के माध्‍यम से करने जा रही है और सदन में पेश कर लिया, सदन द्वारा संशोधन पास भी हो गया ।

अध्‍यक्ष महोदय, मैं आज भी इस सदन के समक्ष पूरी जिम्मेदारी के साथ यह कह रहा हूं कि केन्‍द्र सरकार ने आज तक 14 वें वित्‍त आयोग की सिफारिश को स्‍वीकार नहीं किया है और किसी भी फायनेंस कमीशन की सिफारिशें तब तक लागू नहीं की जा सकती हैं, जब तक या तो केन्‍द्र सरकार और अगर वह राज्‍य के अधीनस्‍थ है, तो राज्‍य सरकार उसको स्‍वीकार करे, यहां मामला केन्‍द्र का है ।

अध्‍यक्ष महोदय, आपका ध्‍यान आकर्षित करूंगा, इस दरमियान मैंने जब सदन में अपनी यह बात रखी, तो वित्‍त मंत्री जी ने इसको स्‍वीकार तो किया, लेकिन बड़ी हास्‍यास्‍पद बात सदन के अंदर कही कि हमने चर्चा की है, ईश्‍वर जाने यह चर्चा किससे की, केन्‍द्र के किसी मंत्री से चर्चा की या प्रधान मंत्री से चर्चा की, यह चर्चा किससे हुई, माननीय मंत्रीजी ने यहां नहीं बताया है, अब सवाल यह उठता है कि गलत जानकारी देकर, जो संशोधन आपने सदन से कराया है, क्‍या उस संशोधन को आप वापस नहीं कर सकते थे, उस संशोधन को वापस करके आप बजट प्रस्‍तुत करते तो प्रदेश के सामने और प्रदेश की जनता के सामने सही आंकड़े आते, यह जानकारी जो आपने दी है, इसलिए हमने विशेषाधिकार का नोटिस दिया, वह कहां लंबित है, अध्‍यक्ष महोदय की जानकारी में होग&#