मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा चतुर्दश सत्र

 

 

जुलाई, 2017 सत्र

 

सोमवार, दिनांक 17 जुलाई, 2017

 

(26 आषाढ़, शक संवत्‌ 1939)

 

 

[खण्ड- 14 ] [अंक-1 ]

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

सोमवार, दिनांक 17 जुलाई, 2017

 

(26 आषाढ़, शक संवत्‌ 1939)

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.02 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

राष्‍ट्रगीत

 

राष्‍ट्रगीत ''वंदेमातरम्'' का समूहगान

 

अध्‍यक्ष महोदय -- अब, राष्‍ट्रगीत ''वंदेमातरम्'' होगा. सदस्‍यों से अनुरोध है कि वे कृपया अपने स्‍थान पर खड़े हो जाए.

 

(सदन में राष्‍ट्रगीत ''वंदेमातरम्'' का समूहगान किया गया.)

समय 11.03 बजे निधन का उल्‍लेख

 

(1) श्री अनिल माधव दवे, केन्‍द्रीय राज्‍य मंत्री,

(2) श्री प्रेम सिंह, सदस्‍य विधान सभा,

(3) डॉ. दासारि नारायण राव, भूतपूर्व केन्‍द्रीय मंत्री,

(4) श्री फतेहभानु सिंह चौहान, भूतपूर्व संसद सदस्‍य,

(5) श्री सत्‍यनारायण अग्रवाल, भूतपूर्व सदस्‍य विधान सभा,

(6) श्री नारायण सिंह पवार, भूतपूर्व सदस्‍य विधान सभा,

(7) श्री के.पी.एस. गिल, भूतपूर्व पुलिस महानिदेशक, पंजाब,

(8) मंदसौर में किसान आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में मृत व्‍यक्‍ति,

(9) बालाघाट जिले के ग्राम खैरी में पटाखा फैक्‍ट्री में हुए विस्‍फोट में मृत व्‍यक्‍ति एवं

(10) कश्‍मीर के अनंतनाग में अमरनाथ यात्रियों की बस पर हुए आतंकी हमले में मृत व्‍यक्‍ति.

अध्‍यक्ष महोदय -- मुझे सदन को सूचित करते हुए अत्‍यन्‍त दु:ख हो रहा है कि केन्‍द्रीय राज्‍य मंत्री श्री अनिल माधव दवे का 18 मई, मध्‍यप्रदेश विधान सभा के सदस्‍य श्री प्रेम सिंह का 29 मई, पूर्व केन्‍द्रीय मंत्री डॉ. दासारि नारायण राव का 30 मई, भूतपूर्व सांसद श्री फतेहभानु सिंह चौहान का 8 फरवरी, भूतपूर्व विधान सभा सदस्‍य श्री सत्‍यनारायण अग्रवाल का 8 जून, श्री नारायण सिंह पवार का 26 मई एवं पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक श्री के.पी.एस. गिल का 26 मई, 2017 को निधन हो गया है.

श्री अनिल माधव दवे का जन्‍म 6 जुलाई, 1956 को बड़नगर, उज्‍जैन में हुआ था. आप सन् 1964 से राष्‍ट्रीय स्‍वयं संघ के स्‍वयंसेवक एवं 1988 से 2004 तक प्रचारक रहे. श्री दवे 2009, 2010 एवं 2016 में राज्‍यसभा के सदस्‍य निर्वाचित हुए एवं 5 जुलाई, 2016 से केन्‍द्र सरकार में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्‍यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) थे. आप अनेक सभा समितियों के सदस्‍य एवं विभिन्‍न संस्‍थाओं में पदाधिकारी तथा भा.ज.पा. मध्‍यप्रदेश के उपाध्‍यक्ष रहे. श्री दवे जन अभियान परिषद् के संस्‍थापक एवं इसके उपाध्‍यक्ष रहे. आपने नर्मदा समग्र के माध्‍यम से नर्मदा नदी और पर्यावरण संरक्षण के लिए उल्‍लेखनीय कार्य किए. आप चरैवेति के मुख्‍य संपादक भी रहे तथा आपने विभिन्‍न विषयों पर अनेक पुस्‍तकें लिखीं. आपके निधन से देश ने एक विचारक एवं कुशल प्रशासक व संगठक खो दिया है.

श्री प्रेम सिंह का जन्‍म 08 सितम्‍बर, 1951 को कोलौहा जिला बांदा (उत्‍तर प्रदेश) में हुआ था. श्री सिंह विभिन्‍न समयावधियों में जिला बीस सूत्रीय समिति, जिला तेंदूपत्‍ता समिति के सदस्‍य तथा कृषि उपज मंडी के डायरेक्‍टर रहे. श्री सिंह कांग्रेस की ओर से प्रदेश की ग्‍यारहवीं, बारहवीं एवं वर्तमान चौदहवीं विधान सभा के लिए चित्रकूट क्षेत्र से सदस्‍य निर्वाचित हुए थे.

आपके निधन से प्रदेश ने एक लोकप्रिय नेता और समाजसेवी खो दिया है.

डॉ.दासारि नारायण राव का जन्‍म 04 मई, 1947 को पालाकोल जिला पश्चिम गोदावरी (आंध्रप्रदेश) में हुआ था. डॉ. राव वर्ष 2000 एवं 2006 में राज्‍यसभा के सदस्‍य निर्वाचित हुए तथा वर्ष 2004 से 2008 तक केन्‍द्र सरकार में राज्‍यमंत्री रहे. आप एक प्रसिद्ध फिल्‍म अभिनेता, निर्माता, निर्देशक, संवाद लेखक एवं गीतकार थे. आपको कई पुरस्‍कारों से सम्‍मानित किया गया था.

आपके निधन से देश ने एक लोकप्रिय फिल्‍मकार एवं कुशल प्रशासक खो दिया है.

श्री फतेहभानु सिंह चौहान का जन्‍म दिनांक 05 जनवरी, 1935 को ग्राम भवानियां जिला-धार में हुआ था. श्री चौहान प्रदेश की तीसरी, चौथी और पांचवीं विधान सभा और सन् 1980 में सातवीं लोकसभा के सदस्‍य निर्वाचित हुए थे. आप संविद शासन काल में प्रदेश सरकार में राज्‍यमंत्री, कृषि तथा सूचना एवं प्रकाशन रहे.

आपके निधन से प्रदेश ने एक लोकप्रिय नेता एवं कुशल प्रशासक खो दिया है.

श्री सत्‍यनारायण अग्रवाल का जन्‍म दिनांक 14 फरवरी, 1940 को हुआ था. श्री अग्रवाल मध्‍यप्रदेश विद्यार्थी युवक कांग्रेस के संस्‍थापक सदस्‍य, भोपाल जिला कांग्रेस के अध्‍यक्ष तथा जिला बीस सूत्रीय कार्यान्‍वयन समिति के सदस्‍य रहे. आप सन 1980 में कांग्रेस (ई) की ओर से भोपाल दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से प्रदेश की सातवीं विधान सभा के सदस्‍य निर्वाचित हुए तथा राज्‍यमंत्री, गृह एवं सामान्‍य प्रशासन रहे.

आपके निधन से प्रदेश ने एक लोकप्रिय नेता एवं कुशल प्रशासक खो दिया है.

श्री नारायण सिंह पवार का जन्‍म दिनांक 06 जनवरी, 1942 को हुआ था. आप 1968 में जनसंघ के सदस्‍य बने. श्री पवार आपातकाल में जेल में निरुद्ध रहे. श्री पवार ने प्रदेश की छठवीं विधान सभा में जनता पार्टी की ओर से खिलचीपुर क्षेत्र का प्रतिनिधित्‍व किया था.

आपके निधन से प्रदेश के सार्वजनिक जीवन की अपूरणीय क्षति हुई है.

श्री के.पी.एस. गिल का जन्‍म दिनांक 29 दिसम्‍बर, 1934 को लुधियाना में हुआ था. श्री गिल पंजाब एवं असम के पुलिस महानिदेशक रहे. नक्‍सल समस्‍या से निपटने के लिए छत्‍तीसगढ़ सरकार ने आपको सुरक्षा सलाहकार बनाया था. आपने पंजाब में ऑपरेशन ब्‍लैक थंडर के जरिए आतंकवाद का सफाया करने में अग्रणी भूमिका निभाई थी. आपने इंडियन हॉकी फेडरेशन के अध्‍यक्ष के रुप में कार्य किया तथा आपको भारत सरकार ने 1989 में पद्मश्री से अलंकृत किया था.

आपके निधन से देश ने एक अनुभवी एवं निष्‍ठावान पूर्व पुलिस अधिकारी को खो दिया है.

दिनांक 06 जून, 2017 को मंदसौर में किसान आन्‍दोलन के दौरान हुई हिंसा में कुछ किसानों की मृत्‍यु हो गई,

दिनांक 07 जून, 2017 को बालाघाट जिले के ग्राम खैरी में एक पटाखा फैक्‍ट्री में हुए विस्‍फोट से अनेक श्रमिकों की मृत्‍यु हो गई तथा कई घायल हुए, तथा

दिनांक 10 जुलाई, 2017 को कश्‍मीर के अनंतनाग में अमरनाथ यात्रियों की बस पर हुए आतंकी हमले में अनेक श्रद्धालुओं की मृत्‍यु हो गई तथा कई घायल हुए.

यह सदन इस दुःखद घटनाक्रम व हादसे में मृत किसानों एवं मृत व्‍यक्तियों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट करता है.

मुख्यमंत्री (श्री शिवराज सिंह चौहान) -- अध्यक्ष महोदय, मृत्यु अवश्यंभावी है, जो आया है, उसे जाना है. अमर होकर कोई नहीं आया है, लेकिन जब कोई अनिल जी की तरह जाता है, तो मन में गहरा दर्द छोड़ जाता है. अनिल जी को हम बरसों से जानते थे. वे बाल्यकाल से ही संघ के स्वयं सेवक थे. उन्होंने अपना पूरा जीवन भारत माता की सेवा के लिये समर्पित किया था. वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे. कुशल संगठक, मौलिक चिंतक, बहुत अच्छे रणनीतिकार, मैं उनको मेन ऑफ आइडियाज़ भी कहूं, तो अतिश्योक्ति नहीं होगी. पायलेट से लेकर अनेक विधाओं में, वे हवाई जहाज भी उड़ाते थे. वे पर्यावरण की चिंता भी करते थे. नदियों के संरक्षण में, विशेषकर नर्मदा जी के संरक्षण में उन्होंने अपने आपको खपाकर काम किया था. नर्मदा समग्र नाम का एक संगठन बनाकर उसके माध्यम से कैसे प्रदूषण समाप्त हो, पर्यावरण बचाया जाये, इसके लिये वे पूरे जीवन भर प्रयत्नशील रहे.

माननीय अध्यक्ष महोदय, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक के नाते भी उन्होंने भारतमाता के चरणों में समर्पित अनेकों कार्यकर्ता तैयार किये. वह भारतीय जनता पार्टी के भी कार्यकर्ता थे. इधर बैठे हुए हमारे सब साथी जानते हैं. 2003, 2008 और 2013 तीनों चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की ओर से रणनीति बनाने का काम उनके जिम्मे था , वे एक कुशल रणनीतिकार थे.

माननीय अध्यक्ष महोदय उनके काम करने का अपना एक तरीका अपना एक ढंग था. राज्य सभा के सदस्य चुनने के बाद जब भारत के प्रधानमंत्री श्रीमान नरेन्द्र मोदी जी को एक ऐसे पर्यावरणविद की तलाश थी जो वन और पर्यावरण मंत्रालय को न केवल चलाये बल्कि उसे ठीक दिशा भी दे पाये. विकास और पर्यावरण में संतुलन रखे, तब उन्हें एक ही नाम याद आया और वह है अनिल माधव दवे जी. इस दौरान भारत सरकार के मंत्री के नाते उनको काम करने का समय कम मिला, लेकिन जितने दिनों उन्होंने काम किया, एक अलग और एक अमिट छाप छोड़ी थी. जलवायु परिवर्तन के मामले पर जब देश का प्रतिनिधित्व उन्होंने किया, बहुत प्रभावशाली तरीके से किया. एक अद्भुत प्रतिभाशाली नेता बहुत ही कम उम्र में , अभी भविष्य में बहुत उम्मीदें थीं उनसे. उनका व्यवहार ऐसा था कि यहां पर बैठे हुए हममें से अनेकों मित्र जानते हैं, सामने बैठे हुए मेरे मित्र भी जो व्यक्तिगत रूप से जो उनसे परिचित थे वह जानते थे. वह काम करते थे तो पूरे जीवट के साथ करते थे लेकिन व्यक्तिगत विद्वेष किसी के खिलाफ उनके मन में नहीं रहता था.

मुक्तसग्डोsनहंवादी धृत्युत्साहसमन्वित:

सिद्ध्यसिद्धयोर्निर्विकार: कर्ता सात्विक उच्यते .

यह जो गीता का श्लोक था सही अर्थों में वह उऩके जीवन में हमको उनकी पूरी कार्य प्रणाली के दौरान चरितार्थ होता हुआ नजर आता था. नर्मदा सेवा यात्रा के दौरान वह अस्वास्थ्य लेकिन मैंने उनसे जिद पूर्वक आग्रह किया था कि आप आइये आपके बिना यह यात्रा पूरी नहीं होगी. वे अस्वस्थ होने के बावजूद भी इस यात्रा में आये थे और वह ही दिन मेरा उनसे मुलाकात का अंतिम दिन था. नर्मदा जी के संरक्षण को लेकर अनेकों चर्चा हम लोगों के बीच हुई थीं, लेकिन उऩ चर्चाओं को जमीन पर उतारने का समय नियती ने उनको नहीं दिया, जिस तेजस्विता के साथ में वह काम कर रहे थे बिना कुछ कहे चुपचाप चले गये और जब हम सबको पता चला तो हम सब आश्चर्यचकित रह गये. उनके निधन ने एक चिंतक, एक विचारक, एक संगठक और एक कुशल प्रशासक को खोया है.

माननीय अध्यक्ष महोदय, स्वर्गीय श्री प्रेम सिंह जी चित्रकूट विधान सभा से विधायक थे. वे अत्यंत लोकप्रिय नेता थे. इसका उदाहरण लगातार, एक बार केवल 2008 को छोड़ दें, तो तीन चुनाव में वे लगातार विधान सभा के सदस्य रहे थे. मैं उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए गया था. वहां पर मैंने जो गरीब, गुरबा और आदिवासी भाई और बहनों की जो भीड़ देखी उससे यह अंदाज लगाया जा सकता था कि गरीबों में वह कितने लोकप्रिय थे. लो प्रोफाइल में रहते हुए अपनी जनता की सेवा के काम में , और गरीबों की हर समय मदद करने के लिए वह तत्पर रहते थे, वहां पर लोगों ने मुझे बताया कि जब भी कोई परिवार संकट में रहता था या शादी विवाह में कोई परेशानी रहती थी तो प्रेम सिंह जी उनके लिए आशा और विश्वास बनकर प्रगट होते थे और उनकी मदद करते थे उनके निधन से भी हमने एक लोकप्रिय नेता को और एक समाजसेवी को खोया है.

माननीय अध्यक्ष महोदय, डॉ दासारि नारायण राव. वे बहुत कुशल कलाकार थे. फिल्म जगत की हर एक विधा, अभिनेता, निर्माता निर्देशक यहां तक की संवाद लेखक भी वे बहुत अच्छे थे और वे गीतकार थे वे अपने आपमें एक संस्था थे. 2006 में वे राज्य सभा के सदस्य के रूप में निर्वाचित भी हुए थे. 2004 से 2008 तक केन्द्र सरकार के राज्यमंत्री के रूप में उऩ्होंने कुशल प्रशासक रहने का भी परिचय दिया था. उनके निधन से भी एक लोकप्रिय फिल्म कलाकार, एक लोकप्रिय नेता को हमने खोया है.

श्री फतेहभानु सिंह चौहान जी, धार जिले के रहने वाले थे. वे लोकप्रिय नेता थे, तीसरी, चौथी और पांचवीं विधान सभा के सदस्य चुने गये थे. वर्ष 1980 में वे सातवीं लोकसभा के सदस्य के नाते भी निर्वाचित हुए थे. संविद शासन जब प्रदेश में आया था तो संविद शासन में प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री के नाते उन्होंने कृषि, सूचना और प्रकाशन विभाग संभाला था और कुशल प्रशासक होने का परिचय दिया था.

श्री सत्यनारायण अग्रवाल जी, भोपाल के स्थापित नेताओं में थे. जब हम भोपाल में पढ़ते थे, तब हम उनका नाम सुनते थे. मुझे याद आता है कि जब भोपाल के नेताओं की बात होती थी तो कांग्रेस के तो वे स्तम्भ थे ही. यहां के बहुत लोकप्रिय जननेता के नाते वे जाने जाते थे. भोपाल में कांग्रेस के संगठन को खड़ा करने में उनका अतुलनीय योगदान था. बचपन से ही युवक कांग्रेस के एक कार्यकर्ता के नाते उन्होंने राजनीतिक क्षेत्र में काम प्रारंभ किया था. सातवीं विधान सभा के भोपाल दक्षिण क्षेत्र से वे सदस्य रहे हैं और मंत्री के नाते भी उन्होंने बड़ी कुशलता के साथ अपने दायित्वों का, अपने कर्तव्यों का निर्वाह किया था. उनके निधन से भी लोकप्रिय नेता और कुशल प्रशासक को हमने खोया है.

श्री नारायण सिंह पवार जी, जनसंघ के बहुत समर्पित कार्यकर्ता थे और आपातकाल के दौरान उन्होंने जेल में रहकर यातनाएं भी सहीं. बाद में उन्होंने छठवीं विधान सभा में जनता पार्टी की ओर से खिलचीपुर विधान सभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था. वे भी लोकप्रिय जनसेवी थे और बड़े समर्पित राजनीतिक कार्यकर्ता थे.

श्री के.पी.एस. गिल, उनको हम सब लोग इस नाते जानते हैं कि जब पंजाब में आतंकवाद अपने चरम पर था और कई बार मन में यह डर लगता था कि इस आतंकवाद का खात्मा हो सकेगा कि नहीं हो सकेगा, तब आतंकवाद से निपटने के लिए ऑपरेशन ब्लैक थंडर के रूप में जो अभियान चला था, उस समय भारत सरकार ने उनको जवाबदारी आतंकवाद को समाप्त करने की सौंपी थी. मुझे कहते हुए गर्व भी है कि पंजाब से आतंकवाद को निर्मूल करके उन्होंने देश की निश्चित तौर पर बहुत बड़ी सेवा की है. बाद में नक्सल समस्या से निपटने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने भी उनको सुरक्षा सलाहकार बनाया था.

माननीय अध्यक्ष महोदय, भारत सरकार ने उल्लेखनीय सेवाओं के लिए उनको वर्ष 1989 में पद्मश्री से अलंकृत करने का काम किया था. इंडियन हॉकी फेडरेशन के अध्यक्ष के नाते भी उन्होने काम किया था. एक अनुभवी और एक निष्ठावान पूर्व पुलिस अधिकारी को जिन्होंने देश की बड़ी सेवा की, उनको हमने खोया है.

दिनांक 6 जून, 2017 किसान आन्दोलन के दौरान दुर्भाग्यपूर्ण हिंसा में अपने कुछ भाइयों को हमने गंवाया है. मेरे सीने में भी वह ऐसी पीड़ा और दर्द है कि जो मिटाए नहीं मिटती. हम पीड़ित परिवारों के साथ में खड़े हैं.

माननीय अध्यक्ष महोदय, बालाघाट जिले के खैरी ग्राम में दिनांक 7 जून, 2017 को एक पटाखा फेक्ट्री में हुए विस्फोट के कारण श्रमिकों की मृत्यु हुई है. कई लोग घायल हुए थे, जिनका उपचार जारी है. आतंकवाद के खिलाफ देश निर्णायक जंग लड़ रहा है. लेकिन माननीय अध्यक्ष महोदय, श्रद्धा और विश्वास से भरे अमरनाथ यात्रा पर गये यात्रियों पर जो आतंकी हमला हुआ, उसमें अनेकों श्रद्धालुओं ने अपनी जान गंवाई. कई लोग घायल भी हुए. हमारा देश आतंकवाद के खिलाफ जो निर्णायक लड़ाई लड़ रहा है, उसको ऐसे कायराना आतंकी हमले प्रभावित नहीं कर सकते. आतंकवाद को जड़ से उखाड़कर फेंकने का संकल्प यह देश का है और इसमें हम सफल होंगे.

माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं अपनी ओर से, सदन की ओर से जो दिवंगत आत्माएं हैं, उनके चरणों में प्रणाम करता हूं. परमपिता परमात्मा से यह प्रार्थना करता हूं कि वह दिवंगत आत्मा को शांति दे और उनके परिजनों को, उनके अनुयायियों को, उनके मित्रों को यह गहन दुःख सहन करने की क्षमता दे, ओम शांति.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मुख्यमंत्री जी ने दिवंगत व्यक्तियों के बारे में बात कही है, खासतौर से माननीय श्री अनिल माधव दवे जी की. मैं उनके साथ अपनी पार्टी की तरफ से भी संवेदना व्यक्त करता हूं.

अध्यक्ष महोदय, श्री दवे के बारे में माननीय मुख्यमंत्री जी ने कईं बातें कही कि वे कुशल प्रशासक थे, बहुत अच्छे व्यक्ति, विशेषज्ञ, नर्मदा नदी पर उनका चिन्तन और केन्द्रीय मंत्री रहते हुए, विदेशी कंपनियों के खिलाफ एक स्थान रखने के लिए भी कि जीएम क्राप हिन्दुस्तान में किसानों की समस्याओं को बढ़ाएगा. उसके लिए भी उन्होंने पूरी ताकत लगायी थी, इसके लिए वे हरदम हिन्दुस्तान के किसानों के लिए एक Icon रहेंगे.

माननीय अध्यक्ष महोदय, अनिल माधव दवे जी एक बहुत अच्छे लेखक भी थे. मुझे बताने में प्रसन्नता है कि जब-जब उनने अपनी नई किताब लिखी है वह एक लिफाफे में रखकर मेरे निवास पर भेज देते थे. यह एक छोटा सा उदाहरण है कि कैसे राजनैतिक समाज में वे हरदम लोकप्रिय रहे. माननीय मुख्यमंत्री महोदय ने 2003, 2008 और 2013 के लिए उनको रणनीतिकार कहा है. उनके दुखद निधन से भारतीय जनता पार्टी को निश्चित रुप एक बड़ी क्षति हुई है. पार्टी ने एक बड़ी ताकत खोई है.

अध्यक्ष महोदय, आदरणीय प्रेमसिंह जी कांग्रेस के तीसरी बार के विधायक थे. विश्वास नहीं होता कि आज प्रेमसिंह जी हमारे बीच में नहीं है. मुझे उनके परिवार से भतीजे ने फोन किया प्रेमसिंह जी की तबियत ठीक नहीं है, कहां ले जाऊं? मैंने कहा कि सतना में बिरला हास्पिटल पहुंचाओ. वह वहां पहुंचे हैं और मुझे डॉक्टर का फोन आता, क्योंकि मैं डॉक्टर को फोन कर चुका था कि इमरजेंसी हो सकती है, तैयारी रखना. डॉक्टर महेश्वरी का फोन आता है कि वे मृत अवस्था में यहां पहुंचे. प्रेमसिंह जी का चेहरा भी शायद बहुत सारे लोग न जानते हों. वह एक अलग किस्म के विधायक थे. उनको उस एरिया में सन्त कहा जाता था. उनकी एक दिनचर्या थी कि उनके गांव में जितने भी बच्चे थे वह शाम को उनके घर में इकट्ठा होते थे. हर बच्चे को वह एक-दो रुपया दे देते थे. उन्होंने हिसाब लगा रखा था कि हमारी तनख्वाह इतनी है महीने के अंत तक खत्म हो जाये. आज के युग में शायद ही कोई नेता हो जिसके घर पर उसके निधन के बाद आगे-पीछे कोई पूछने वाला न हो. ऐसे प्रतिभा के धनी आदरणीय प्रेमसिंह जी थे. जैसा मुख्यमंत्री महोदय ने कहा अंतिम संस्कार में जो भीड़ थी वह कोई बड़े आदमियों की भीड़ नहीं थी. सबसे अंतिम छोर का व्यक्ति जो गरीब, बेसहारा रो रहा था. उसी से पता चलता है कि प्रेमसिंह जी का स्थान जनता के बीच में क्या था, गरीबों के बीच में क्या था. हमारे लिए तो उनके निधन से व्यक्तिगत क्षति हुई है. प्रेमसिंह जी हमारे साथ, हमारे पिताजी के साथ हरदम कंधे-से-कंधा लगाकर संघर्ष किया है. उनकी कमी जीवन भर हमें महसूस होगी.

अध्यक्ष महोदय, डॉक्टर दसारी नारायण राव, जैसा मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता, निर्माता, निदेशक सभी कुछ वह थे. उनके भी निधन से देश ने एक बहुत कलाकार और राजनेता को खोया है.

अध्यक्ष महोदय, आदरणीय फतेहभानु सिंह चौहान, धार जिले के विधायक, सांसद और एसवीडी में मंत्री रहते हुए उन्होंने भी एक पहचान एक कुशल प्रशासक और समाजसेवी की बनायी थी. उनके निधन पर प्रदेश ने एक लोकप्रिय नेता और कुशल प्रशासक खोया है.

अध्यक्ष महोदय, श्री सत्यनारायण अग्रवाल जी भोपाल के कांग्रेस पार्टी के एक स्तम्भ थे. उन्होंने भोपाल में अपनी पहचान एक अलग रुप में बनायी थी. 1980 में वे दक्षिण भोपाल से विधायक बने. कांग्रेस मंत्रिमण्डल में सदस्य भी रहे लेकिन मंत्री रहते हुए भी ऐसा प्रतीत नहीं होता था कि ये मंत्री हैं. हमेशा उनके घर के दरवाजे खुले रहते थे और जो उस समय की राजनीति के लोग यहां पर हैं उनको मालूम होगा कि श्री सत्यनारायण अग्रवाल जी कितने लोकप्रिय थे. खास तौर से पुराने भोपाल में उनकी अलगही पहचान थी. चाहे वह जैन समाज हो, चाहे कायस्थ समाज हो, चाहे वैश्य समाज हो, वे हरदम गरीबों के हक की लड़ाई लड़ते थे. उनके निधन से प्रदेश ने एक लोकप्रिय नेता और कांग्रेस पार्टी ने एक स्तम्भ खोया है.

आदणीय अध्यक्ष महोदय, श्री नारायण सिंह पवार जनसंघ के सदस्य रहे. खिलचीपुर से वे विधायक रहे लेकिन शुद्ध रूप से एक बहुत अच्छे किसान भी थे और उन्होंने हमेशा किसानों के हक की लड़ाई निर्भीक रूप से लड़ी. खिलचीपुर क्षेत्र से उन्होंने जनता पार्टी की तरफ से छठवीं विधान सभा में प्रतिनिधित्व किया. उनके निधन से मध्यप्रदेश में सार्वजनिक जीवन में एक अपूरणीय क्षति हुई है.

माननीय अध्यक्ष महोदय, श्री के.पी.एस.गिल साहब को हिन्दुस्तान में कौन व्यक्ति नहीं जानता. यदि दो-चार पुलिस अफसरों की फोटो दिमाग में किसी के आती है तो उसमें एक फोटो छह फुट चार इंच के के.पी.एस.गिल जी की वह सफेद मूंछें याद आती हैं जिससे अपराधियों में दहशत हो जाती थी . हमारे पिताजी के साथ पंजाब में आतंकवाद समाप्त करने के लिये श्री के.पी.एस.गिल ने बहुत बेहतरीन सहयोग किया. उसके बाद वे छत्तीसगढ़ में भी सलाहकार बने. भारतीय हाकी फेडरेशन के भी अध्यक्ष वे रहे लेकिन यदि कोई सिपाही से भी उस समय कोई पूछता था कि उनका किस व्यक्ति पर पूरा भरोसा है, तो जहां-जहां वे रहे चाहे पंजाब में रहे,छत्तीसगढ़ में वे रहे, वहां का एक साधारण से साधारण सिपाही कहता था कि आदरणीय गिल साहब हैं, हमें कोई चिंता नहीं है. वे एक भावना पैदा करते थे और उसी के कारण वह हमेशा आगे रहते थे. उनके निधन से पूरे देश ने एक अनुभवी,निष्ठावान्, पूर्व पुलिस अधिकारी खोया है.

माननीय अध्यक्ष महोदय, 6 जून,2017 को मन्दसौर के पिपल्यामण्डी में जो अपरिहार्य कारणों से हमारे किसानों की मृत्यु हुई है उसके लिये भी पूरे प्रदेश में एक वातावरण निर्मित हुआ है. हम उन किसान भाईयों के परिवारों के साथ खड़े हैं. कभी भी कोई नहीं चाहता कि ऐसी अपरिहार्य घटना किसी प्रांत में हो, खास तौर से हमारे प्रांत में ही यह घटना हो जाये यह अच्छी बात नहीं है.

आदरणीय अध्यक्ष महोदय, 7 जून,2017 को बालाघाट जिले के ग्राम खैरी में पटाखा फैक्ट्री में जो विस्फोट हुआ उसमें अनेक श्रमिकों की मृत्यु हुई. इस घटना में मृत व्यक्तियों के लिये भी और घायल हुए लोगों के प्रति कांग्रेस पार्टी की तरफ से हम शोक व्यक्त करते हैं.

आदरणीय अध्यक्ष महोदय, 10 जुलाई,2017 को कश्मीर के अनंतनाग में अमरनाथ यात्रियों के ऊपर जो आतंकी हमला हुआ. जैसा मुख्यमंत्री महोदय ने कहा कि आतंकवाद के हम सख्त खिलाफ हैं. आतंकवाद से हम हरदम निपटने को तैयार हैं और ऐसी घटनाएं हमारे देश को न हिला सकती हैं न कमजोर कर सकती हैं. मैं इस घटना में जो लोग मृत हुए और जो लोग इस घटना में घायल हुए उनके प्रति शोक व्यक्त करता हूं.

आदरणीय अध्यक्ष महोदय, पिछले एक-डेढ़ महिने में जो मध्यप्रदेश में अनेक किसान भाईयों ने आत्महत्या की उसके लिये भी हम शोक व्यक्त करते हैं.

आदरणीय अध्यक्ष महोदय, मैं कांग्रेस पार्टी की तरफ से इन सभी आत्माओं की शांति के लिये ईश्वर से कामना करता हूं कि उनके परिवार के परिजनों को ईश्वर यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करे.

एडवोकेट सत्‍यप्रकाश सखवार (अम्‍बाह)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके द्वारा निधन का उल्‍लेख, माननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा और हमारे नेता प्रतिपक्ष द्वारा निधन का उल्‍लेख व्‍यक्‍त किया जा चुका है. उसी श्रृंखला में हमारे बीच में केन्‍द्रीय मंत्री श्री अनिल माधव दवे 18 मई, मध्‍यप्रदेश विधान सभा के सदस्‍य श्री प्रेम सिंह जी का 29 मई, पूर्व केन्‍द्रीय मंत्री श्री दासारि नारायण राव का 30 मई, भूतपूर्व सांसद श्री फतेहभान सिंह चौहान का 8 फरवरी, भूतपूर्व विधान सभा सदस्‍य श्री सत्‍यनारायण अग्रवाल का 8 जून, श्री नारायण सिंह पंवार का 26 मई, पंजाब के पूर्व महानिदेशक श्री के.पी.एस. गिल का 26 मई 2017 को निधन हो गया. दिनांक 06 जून 1917 को मंदसौर में किसानों के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में कुछ किसानों की मृत्‍यु हो गई. दिनांक 7 जून 2017 को बालाघाट जिले के ग्राम खैरी में एक फटाखा फैक्‍ट्री में विस्‍फाट से अनेक श्रमिकों की मृत्‍यु हो गई और कुछ घायल हुये. दिनांक 10 जुलाई 2017 को अनंतनाग में अमरनाथ यात्रियों की बस पर हुये आतंकी हमले में अनेक श्रृद्धालुओं की मृत्‍यु हो गई तथा कई गंभीर रूप से घायल हुये.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, संसार का नियम है जो आया है, वह जायेगा, कोई भी अजय-अमर नहीं है. फिर भी संयोग कितना भी लंबा हो एक दिन वियोग में बदलेगा और वियोग दुख का कारण है. इस मौके पर मैं उन सभी महानुभाव जो आज इस दुनिया में नहीं रहे उनके लिये हृदय की गहराइयों से शोक संवेदना व्‍यक्‍त करता हूं और कुदरत से कामना करता हूं कि उनके परिजनों को इस दुख की घड़ी में इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे और मैं सभी दिवंगत आत्‍माओं के प्रति अपनी ओर से अपनी पार्टी की ओर से शोक संवेदना प्रकट करता हूं.

किसान कल्‍याण तथा कृषि विकास मंत्री (श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, परम श्रृद्धेय अनिल दवे जी सहित निधन के उल्‍लेख में श्री के.पी.एस. गिल तक जो हमारे देश के ऐसे लोग हैं जिनका उल्‍लेख हुआ है, माननीय मुख्‍यमंत्री जी और माननीय नेता प्रतिपक्ष तथा हमारे बसपा के साथी ने जो शोक संवेदना की उसमें मैं अपने आप को समाहित करते हुये 6 जून की जो घटना घटी है उस संबंध में मैं कहना चाहूंगा कि हम लोग काफी दुखी हैं और जो कुछ हुआ है वह कभी भी हमारे मन से बाहर नहीं जा सकेगा. इसी के साथ-साथ 7 जून को बालाघाट में मेरे अपने विधान सभा क्षेत्र खैरी में फटाखा बनाने की दुकान में मानवीय त्रुटि से 26 लोग दिवंगत हो गये, उन दिवंगत आत्‍माओं की शांति के लिये मैं प्रार्थना करना चाहता हूं. साथ ही साथ 10 जुलाई को जो कश्‍मीर के अनंतनाग की घटना घटी है उसने हम सबको हिला दिया है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपकी अनुमति से 21 अप्रैल को हर्रई में 13 बीपीएल के लोग मिट्टी का तेल लेने गये थे और वहां रिसाव होने से उनका भी निधन हो गया, उसको भी समाहित कर लेते ऐसा मेरा आपसे निवेदन है. मैं इस शोक प्रस्‍ताव में माननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा रखे गये विचारों में अपने आपको समाहित करते हुये दिवंगत आत्‍माओं की शां‍ति के लिये ईश्‍वर से प्रार्थना करता हूं.

डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह (उपाध्यक्ष महोदय) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माननीय मुख्यमंत्री, माननीय नेता प्रतिपक्ष, माननीय सखवार जी, एवं माननीय श्री गौरीशंकर बिसेन जी द्वारा जिन मृत आत्माओं और व्यक्तियों के संबंध में अपनी शोक संवेदनायें और ऋद्धांजलि अर्पित की है, मैं भी आप सबकी भावनाओं से अपनी भावना को जोड़ते हुये श्री अनिल माधव दवे, केन्द्रीय राज्यमंत्री, श्री प्रेम सिंह जी, सदस्य विधानसभा, डॉ.दासारि नारायण राव, भूतपूर्व केन्द्रीय मंत्री, श्री फतेहभानु सिंह चौहान, भूतपूर्व संसद सदस्य, श्री सत्यनारायण अग्रवाल, भूतपूर्व सदस्य विधानसभा, श्री नारायण सिंह पवार, भूतपूर्व सदस्य विधानसभा, श्री के.पी.एस.गिल, भूतपूर्व पुलिस महानिदेशक, पंजाब, मंदसौर में किसान आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में मृत व्यक्ति, बालाघाट जिले के ग्राम खेरी में पटाखा फेक्ट्री में हुये विस्फोट में मृत व्यक्ति एवं कश्मीर के अनंतनाग में अमरनाथ यात्रियों की बस पर हुए आतंकी हमले में मृत व्यक्ति को ऋद्धांजलि अर्पित करता हूं.

माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे अनुमति चाहूंगा कि कल ही एक बड़ा एक्सीडेंट तीर्थयात्रियों का अमरनाथ यात्रा में पुन: हुआ है.यह जम्मू-कश्मीर हाईवे की घटना है. इस घटना में लगभग 17 तीर्थयात्रियों की मृत्यु हुई है और बहुत सारे तीर्थयात्री गंभीर रूप से घायल हैं. यहां पर एक बस एक खाई में गिर गई थी. अध्यक्ष महोदय, इसके साथ ही एक और दुर्भाग्यपूर्ण घटना गुना जिले के मकसूदनगढ़ में हुई है. यहां पर पांच कृषक दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से कुंए में करेंट आ जाने के कारण मृत हो गये. इन सबके प्रति मैं अपनी शोक संवेदनाएं व्यक्त करता हूं.

माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं विशेष रूप से स्व.श्री अनिव माधव दवे और स्व श्री प्रेम सिंह जी का उल्लेख करना चाहता हूं. अध्यक्ष महोदय, स्व.श्री अनिल माधव दवे के बारे में जैसा कि सर्वविदित है, भारतीय जनता पार्टी के थिंक टेंक में से एक सदस्य वह हुआ करते थे. वह न सिर्फ एक अच्छे राजनेता थे बल्कि एक लेखक और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अभूतपूर्व कार्य करने वाले व्यक्ति, साहित्यकार और जैसा कि मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पायलेट जैसे, वह बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे. प्रतिभायें उनमें भरपूर थीं. ऐसा व्यक्ति हम लोगों ने खो दिया है .स्व.श्री अनिव माधव दवे के निधन से प्रदेश ही नहीं राष्ट्र के लिये भी अपूरणीय क्षति है जिसकी कमी को कभी पूरी नहीं की जा सकती है. स्व. श्री दवे इसके साथ साथ अनेकों स्वयं सेवी संस्थाओं, जन अभियान परिषद से भी जुडे रहे, नर्मदा समग्र के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उन्होंने महत्वपूर्ण काम किया है. "चरैवेती" के वह संपादक भी थे तो इतनी सारी प्रतिभायें इनमें थीं और जब वह केन्द्रीय मंत्री बने तो मंत्री बनने के बाद उन्होंने कई नवाचार अपने वन एवं पर्यावरण मंत्रालय में किये. एक बहुत बड़ा काम जो उन्होंने किया वह यह कि पर्यावरण की अनुमति न मिलने के कारण बहुत सारे भवनों का निर्माण और निर्माण कार्य रूका हुआ था उसके अधिकार उन्होंने राज्य सरकार को डेलीगेट कर दिये . यह बहुत बड़ा ऐतिहासिक काम उनके द्वारा किया गया. बेतवा चंबल लिंक परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी और स्वीकृति उन्होंने दी, इसके कारण बुंदेलखण्ड का वह अंचल जो गरीबी से संतप्त है वहां लगभग साढे पांच लाख हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी और बुंदेलखण्ड भी पूरे प्रदेश की मुख्य धारा से जुड़ सकेगा.

माननीय अध्यक्ष महोदय, स्व.श्री प्रेम सिंह जी को मैं 1979 से जानता हूं. मेरे पास जब वे मिलने के लिये घर में आये और मैंने जब उनको पहली बार देखा तो एक हट्टा कट्टा व्यक्ति पहलवान जैसा बड़ी बड़ी काली और घनी मूछें उनकी थी, सर पर घने बाल भी थे और पीछे रायफल लेकर के उनका बॉडीगार्ड खड़ा था, मैं हतप्रभ रह गया, मैं बहुत देर तक उनको बरबस निहारता ही रहा, देखता ही रहा तब प्रेमसिंह जी से मेरी पहली मुलाकात हुई थी. वह उत्तरप्रदेश में जरूर जन्में थे लेकिन कर्मभूमी उन्होंने मध्यप्रदेश में ही बनाई और चित्रकूट अंचल के मझगंवा इलाके में आकर बरोंदा में वह बस गये और उन्‍होंने शुरूआत में तेंदुपत्‍ते के साथ अन्‍य दूसरे व्‍यापारिक काम भी किए लेकिन इसके साथ ही वह जनसेवा भी शुरू से ही करते रहते थे. जैसा कि माननीय नेता प्रतिपक्ष ने कहा है कि उनका व्‍यक्तिव बहुत सरल था, उनका जन्‍म किसान परिवार में ग्रामीण परिवेश में हुआ था, उसे उन्‍होंने जन्‍म से लेकर आखिरी सांस लेने तक बनाये रखा, उनके अंदर कभी कोई परिवर्तन नहीं आया और उन्‍हें आधुनिकता ने दूर-दूर तक नहीं छुआ. वह बड़े मृदुभाषी थे. वे गरीब से गरीब व्‍यक्ति की बात सुनने के लिये हमेशा तत्‍पर रहते थे और इसके लिये उन्‍होंने समय का कोई बंधन नहीं रखा था. ऐसे व्‍यक्तिव के धनी थे, प्रेम सिंह.

अध्‍यक्ष महोदय, स्‍व.श्री प्रेमसिंह जी 1993 में पहली बार जब निर्दलीय लड़े उन्‍हें बहुत वोट मिले थे और शायद इसलिए 1998 में कांग्रेस पार्टी ने उन्‍हें टिकिट दिया और वह जीते भी थे. सन् 2003 में वह पुन: विधायक बने और इस विधानसभा के सदस्‍य रहे. मेरा और उनका बहुत पुराना संबंध रहा है. हम लोगों ने बहुत से स्‍थानीय चुनावों में मिलकर काम किया था, आज उनके हमारे बीच में नहीं होने से सहसा एक टीस सी पैदा होती है और विश्‍वास नहीं होता है कि स्‍व. श्री प्रेमसिंह हमारे बीच से चले गये हैं. वह मुझसे उम्र में दो वर्ष छोटे थे लेकिन वह पहले काल के गाल में समा गये, यह हम सब लोगों के लिये बड़े दुख की बात है.

अध्‍यक्ष महोदय, मैं इसी के साथ-साथ श्री सत्‍यनारायण अग्रवाल जी के निधन का भी उल्‍लेख करना चाहूंगा. 1980 के पहले मुझे उनके साथ काम करने का मौका मिला था. इसके साथ ही 1980 में उनके विधायक बनने के बाद भी जब वह जिला कांग्रेस के अध्‍यक्ष थे, तब भी मुझे उनके साथ काम करने का मौका मिला था, उन्‍होंने संगठन को बहुत अच्‍छा बनाया था और लोगों को जोड़ा था. वह जब 1980 में विधायक बने थे, उस समय मैं भी विधायक बना था लेकिन कुछ समय पश्‍चात् ही वह मंत्री बन गये थे. यहां मैं यह उल्‍लेखनीय बात कहना चाहता हूं कि इसके बाद भी उनके स्‍वभाव में किंचित मात्र भी कोई फर्क नहीं आया था, वह पहले जैसे विधायक थे उसी तरह से वह मंत्री भी रहे, यह उनकी विशेषता थी, लेकिन वह आज हमारे बीच में नहीं है. मैं इन सभी दिवंगत आत्‍माओं को अपने श्रृद्धा सुमन अर्पित करता हूं और ईश्‍वर से प्राथना करता हूं कि उनकी आत्‍माओं को शांति दे, ओम शांति ..

 अध्यक्ष महोदय--मैं, सदन की ओर से शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं .

          अब सदन दो मिनट मौन खड़े रहकर दिवंगतों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करेगा.

         (सदन द्वारा दो मिनट मौन खड़े रहकर दिवंगतों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की गई)

          अध्‍यक्ष महोदय:- दिवंगतों के सम्मान में सदन की कार्यवाही मंगलवार दिनांक 18 जुलाई, 2017 को प्रात: 11.00 बजे तक के लिये स्थगित.

          पूर्वाह्न 11.43 बजे विधानसभा की कार्यवाही, मंगलवार दिनांक 18 जुलाई, 2017 (आषाढ़ 27, शक संवत् 1939 ) के पूर्वाह्न 11.00 बजे तक के लिये स्थगित की गई.

  

भोपाल:                                                                      अवधेश प्रताप सिंह

दिनांक: 17 जुलाई,2017                                                 प्रमुख सचिव

                                                                              मध्यप्रदेश विधानसभा.