मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा दशम् सत्र

 

 

फरवरी-अप्रैल, 2016 सत्र

 

गुरुवार, दिनांक 17 मार्च, 2016

 

(27 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1937 )

 

 

[खण्ड- 10 ] [अंक- 17 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

गुरूवार, दिनांक 17 मार्च, 2016

 

(27 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1937 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.02 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ नरोत्‍तम मिश्र) :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि पूरे हाऊस में मात्र एक श्री आरिफ अकील जी अल्‍पसंख्‍यक हैं, इनको नेता प्रतिपक्ष बनाया जाये.

गृह मंत्री (श्री बाबूलाल गौर):- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं भी इसका समर्थन करता हूं. आप लोग क्‍या चाहते हैं. दो लोगों में झगड़ा हो रहा है कि किसको बनाये, किसको बनाये.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सर्वानुमति से बना दें.

श्री कैलाश चावला:- यह केवल अल्‍पसंख्‍यक ही नहीं, योग्‍य भी हैं.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया :-अध्‍यक्ष जी प्रतिपक्ष कब तक प्रभार पर जिंदा रहेगा.

डॉ नरोत्‍तम मिश्र :- अध्‍यक्ष महोदय, आपके दल के ही लोग सहमत नहीं हो रहे हैं तो क्‍या करें.

श्री बाबूलाल गौर :- अध्‍यक्ष महोदय, यह भोपाल के ही हैं और कई बार चुनकर आये हैं और आगे भी चुनकर आयेंगे, इनका तो भविष्‍य उज्‍जवल है. इनको नेता प्रतिपक्ष बनाया जाये.

डॉ नरोत्‍तम मिश्र :- उनके नाम पर उनके दल के लोग सहमत नहीं हैं.

 

तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

निर्माण कार्यों में अनियमितता की जाँच

1. ( *क्र. 4729 ) श्री कमलेश्‍वर पटेल : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्राम पंचायत दुधमनिया, जनपद पंचायत सिहावल जिला सीधी में वर्ष 2010 से 2015 के बीच कौन-कौन से निर्माण कार्य कराए गये एवं इस दौरान कुल कितनी राशि व्‍यय की गयी? (ख) क्‍या ग्राम पंचायत दुधमनिया, जनपद पंचायत सिहावल जिला सीधी में भ्रष्‍टाचार की जाँच के लिये मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी जिला सीधी द्वारा तीन सदस्‍यीय जाँच दल का गठन किया गया था? यदि हाँ, तो 08 सितंबर, 2015 के बाद जाँच दल द्वारा क्‍या जाँच की गई?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ अनुसार। प्रश्नाधीन अवधि में मनरेगा, पंचपरमेश्वर, शौचालय निर्माण एवं सांसद मद में कुल रू. 11351235/- की राशि व्यय की गई। (ख) जी हाँ। जी हाँ। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब अनुसार

श्री कमलेश्‍वर पटेल :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी द्वारा जो जवाब आया है, उस जवाब से मैं संतुष्‍ट नहीं हूं. पूरी तरह से असंतोष है. आधी अधूरी जानकारी दी गयी है. अध्‍यक्ष महोदय, जहां पर एक तरफ सरकार करोड़ों रूपये गांव के विकास के लिये आम जनता को सुविधा देने के लिये पैसे खर्च करती है. दूसरी तरफ पूरी की पूरी राशि भ्रष्‍टाचार की भेंट पर चढ़ जाति है. आपके माध्‍यम से मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि जो ग्राम पंचायत दुधमनिया, जिला सीधी में भ्रष्‍टाचार हुआ है, उसके दोषी अधिकारियों के खिलाफ क्‍या कार्यवाही करेंगे और कब तक करेंगे, अभी वहां पर बहुत दिनों के बाद वहां पर जांच दल गया था, सी ई ओ, जिला पंचायत ने चार महीने पहले, जांच समिति बनायी थी. विधान सभा में प्रश्‍न लगने के बाद वहां पर जांच दल गया था और जो जांच समिति गयी थी और उस संबंध में मुझे जानकारी है कि उन्‍होंने भी आधी अधूरी जानकारी सरकार को भेजी है. प्रश्‍न के उत्‍तर में भी जो जानकारी आयी है वह भी आधी अधूरी जानकारी है.

माननीय मंत्री से मेरा निवेदन है कि ऐसे भ्रष्‍ट अधिकारी जो सत्‍यापन के लिये जाते हैं, वह चाहे एई हो या जेईओ तो इस मेटर को दबाने के लिये, सिर्फ छोटे कर्मचारी को सस्‍पेंड नहीं किया जाये, जो भी इसमें दोषी हो जो भी संलिप्त हो सबके ऊपर कार्यवाही होनी चाहिये और सबसे बड़ी विसंगति यह है कि जो पंचायत की सरपंच थी उन्हीं के बेटे को ही रोजगार सहायक के रूप में भर्ती कर लिया और वह रोजगार सहायक आलरेडी सात साल का सजायाफ्ता है और जेल की सजा भी काट कर आया है तो क्या नियम है रोजगार सहायक भर्ती करने का क्या ऐसा कर सकते हैं मेरा यह प्रश्न है कि ऐसे जो भ्रष्ट अधिकारी,कर्मचारी हैं और पंचायत में जो भ्रष्टाचार हुआ है उनके विरुद्ध क्या कार्यवाही की जायेगी माननीय मंत्री जी बताएंगे.

श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्यक्ष महोदय, ग्राम पचायत में 3 सचिव थे जिन्होंने राशि का आहरण कर लिया काम नहीं कराये उन सभी को निलंबित कर दिया गया है.धर्मराज सिंह,सीतासरण सिंह और प्रीतम यादव ये निलंबित कर दिये गये हैं और जहां तक रोजगार सहायक का प्रश्न है शासन ने नियम बनाया था रोजगार सहायक की नियुक्ति का इसमें गांव का वह छात्र या युवा जो एक निश्चित आयु पूरी करके गांव में सबसे ज्यादा अंक जिसके होते हैं और जिसके पास में कम्प्यूटर प्रशिक्षण का डिप्लोमा होता है उसको सीधी नियुक्ति दे दी जाती है और उसको नहीं चाहिये होती है तो  उसके सेकंड वाले को दे दी जाती है इसके लिये सीधे नियम हैं.अब वह किसी का बेटा हो सकता है या किसी का भाई हो सकता है लेकिन इसमें कोई निषेध नहीं किया गया है.

श्री कमलेश्वर पटेल - माननीय अध्यक्ष महोदय, पूरी तरह से मां और बेटे ने मिलकर भ्रष्टाचार किया उनके ऊपर न एफआईआर सरकार दर्ज कर रही है और न उनके खिलाफ कार्यवाही कर रही है करोड़ों रुपयों का गबन हो गया उनके खिलाफ कार्यवाही करने के बजाय जो जे.ई. और ए.ई. थे.उन्होंने भी तो सत्यापन किया है क्या वे दोषी नहीं हैं. बार-बार सत्यापन होता है तब राशि का आहरण होता है और उस समय जो जनपद में सी.ई.ओ. रहे होंगे उनका भी साईन होता है तो आप सिर्फ पंचायत सचिवों को सस्पेंड करके और आज भी मैं मंत्री जी को बताना चाहता हूं कि जितना भी उनके समय में कार्य हुए हैं अभी भी जो वर्तमान में सरपंच हैं उनको किसी भी प्रकार के  कागजात नहीं मिले हैं. अभी भी पूर्व सरपंच और रोजगार सहायक के पास सारे कागजात हैं. मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि जिन्होंन इसमें भ्रष्टाचार किया है जो इसमें संलिप्त हैं उनके खिलाफ क्या यहां से अधिकारी भेजकर उच्च स्तरीय जांच कराएंगे ?

श्री गोपाल भार्गव - अध्यक्ष महोदय, जैसा मैंने बताया सचिवों के लिये तीन सचिवों को निलंबित कर दिया है. पर्यवेक्षण का उत्तरदायित्व जिन लोगों का था और उन्होंने मुकम्मल पर्यवेक्षण नहीं किया है उनकी हम जिम्मेदारी तय करने का काम कर देंगे और उनका पर्यवेक्षण में दोष होगा चाहे वह असिस्टेंट इंजीनियर हों,सब इंजीनियर हों,जनपद के सी.ई.ओ. हों या अन्य कोई अधिकारी हों यहां से अधिकारी भेजकर उसका भी परीक्षण करा लेंगे और यदि उन्होंने सुपरवीजन में लापरवाही बरती होगी तो उनके विरुद्ध भी हम कार्यवाही करेंगे.

श्री कमलेश्वर पटेल - अध्यक्ष महोदय,

अध्यक्ष महोदय - बहुत हो गया. सात-आठ प्रश्न आपके हो गये. कह तो रहे हैं कि अधिकारी को भेजकर जांच कराएंगे.

श्री कमलेश्वर पटेल - अध्यक्ष महोदय, कार्यवाही करके जांच कराएं ना, सचिव को ही क्यों निलंबित करना है. ए.ई.,जे.ई. को क्यों निलंबित नहीं करेंगे. मंत्री जी उनके ऊपर भी कार्यवाही करें. इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है.

अध्यक्ष महोदय - आप बैठ जाएं.

श्री कमलेश्वर पटेल - सरपंच और रोजगार सहायक के खिलाफ क्यों कार्यवाही नहीं होगी. रोजगार सहायक को भी वहां से हटाईये.

श्री गोपाल भार्गव - मैंने कहा कि सुपरवीजन में जिन-जिन लोगों ने लापरवाही की होगी उनके विरुद्ध भी कार्यवाही करेंगे.

श्री कमलेश्वर पटेल - रोजगार सहायक को क्यों नहीं निलंबित कर रहे.

अध्यक्ष महोदय - आप कृपया बैठ जाएं. दूसरों को बोलने दीजिये आप. इस तरह से काम नहीं चलेगा. दूसरों के प्रश्न भी हैं. आठ-दस मिनट एक ही प्रश्न पर हो गये.

 

 

 

 

 

 

अवैध निर्माण पर कार्यवाही

2. ( *क्र. 6214 ) श्री विजयपाल सिंह : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या तहसील पवई जिला पन्‍ना में श्री जगदीश प्रसाद नगायच पिता श्री रामप्रसाद नगायच, मनोहर नगायच के नाम नजूल भूखण्‍ड क्रमांक 2754, 2755 और 2412/6 पवई में राजस्‍व लीज़ कलेक्‍टर पन्‍ना द्वारा स्‍वीकृत की गई है? यदि की गई तो कब और किस दिनांक को और कितने क्षेत्रफल की? (ख) क्‍या यही स्‍वीकृत लीज़ कलेक्‍टर पन्‍ना द्वारा निरस्‍त की गयी है? यदि की गई तो कब और किस दिनांक को और उस पर क्‍या कार्यवाही की गई? क्‍या उक्‍त लीज़ पर मकान निर्मित है? यदि हाँ, तो कितने एरिया में। (ग) क्‍या उक्‍त निर्मित मकान वैध है या अवैध? यदि अवैध है तो क्‍या श्री ओमकार सिंह द्वारा इसकी शिकायत कलेक्‍टर पन्‍ना व राजस्‍व मंत्री को दिनांक 21/12/2015 को की गई थी, तो उस पर क्‍या कार्यवाही हुई। यदि नहीं, हुई तो कब तक होगी और शासन अतिक्रमण हटाने के लिये क्‍या कार्यवाही कब तक करेगा? समय-सीमा बतायें

 

 

 

 

 

 

राजस्व मंत्री(श्री रामपाल सिंह ) -

 

 

श्री ठाकुर दास नागवंशी - अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी को तहेदिल से धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने प्रश्न का उत्तर बड़ा सटीक दिया है और इसलिये मैं उनको साधुवाद भी देना चाहता हूं परन्तु मैं यह भी चाहता हूं क्योंकि उन्होंने प्रश्न में यह स्वीकारा है कि लीज निरस्त कर दी गई है और अतिक्रमण है मैं मंत्री जी से जानना चाहूंगा कि महिनों में नहीं तारीखों में बता दें कि  वह अतिक्रमण कब तक हट जायेगा ?

श्री रामपाल सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी का प्रश्न अतिक्रमण हटाने के बारे में था. अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही हम कर रहे हैं अतिक्रमण का प्रकरण भी दर्ज कर लिया है. शीघ्र ही अतिक्रमण हटवा देंगे. प्रश्न लगा है तो अधिकारीगण पहल करते हैं. हम पूरे प्रदेश में निर्देश जारी कर देते हैं कि सरकारी जमीन की वह चिन्ता करें ताकि सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण न हों.

श्री ठाकुरदास नागवंशी--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी घोषणा करें, जब उन्होंने प्रश्न में स्वीकार कर लिया है कि लीज निरस्त हो गई है केवल अतिक्रमण है तो हटना चाहिये इसकी घोषण सदन में कर दें. हटाने की कार्यवाही तारीखों में करें, महीने में न करें.

श्री रामपाल सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, ऐसे कुछ मामले होते हैं एक अपील भू-राजस्व संहिता में भी एक अपील हो जाती है, कोई न्यायालय में चले जाते हैं इसलिये इसमें खींचकर के कह पाना संभव नहीं है, लेकिन माननीय विधायक जी की भावना के अनुरूप हम शीघ्र ही निर्देशित करेंगे तुरंत इसका निराकरण भी करें तथा अतिक्रमण भी हटवाएं.

श्री ठाकुरदास नागवंशी--अध्यक्ष महोदय, मेरा जवाब नहीं आ रहा है. जब आप स्वीकार कर रहे हैं कि अतिक्रमण है इसमें न्यायालय प्रकरण की आवश्यकता ही नहीं है, यह प्रशासकीय व्यवस्था है आप अतिक्रमण हटाने का आदेश कर दें मैं इतना ही चाहता हूं.

श्री रामपाल सिंह--अध्यक्ष महोदय, इनका छोटा सा प्रकरण पड़ा हुआ है 4268 2015-16 में एक प्रकरण अभी दर्ज कर लिया है उसका तुरंत निराकरण करके उसका अतिक्रमण हटाएंगे.

श्री ठाकुरदास नागवंशी--अध्यक्ष महोदय, आप प्रश्न में स्वीकार भी कर रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय--तारीख का नहीं बताया है बाकी सब कुछ बोल दिया है.

श्री रामपाल सिंह-- अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी की चिन्ता है मैं 2 महीने के अंदर अतिक्रमण को हटवा दूंगा.

प्रश्न संख्या-3

मनरेगा द्वारा कराये गये कार्य

3. ( *क्र. 4430 ) श्रीमती पारूल साहू केशरी : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सागर जिले के सुरखी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत विगत तीन वर्षों में मनरेगा में नंदन फलोद्यान, निर्मल वाटिका (स्‍वच्‍छता अभियान), ग्रामीण क्रीड़ांगन और खेत सड़क के कितने कार्य कहाँ-कहाँ, कब-कब, किन-किन पंचायतों में कराये गये? व्‍यय सहित सूची देवें। (ख) क्‍या प्रश्‍नांश (क) में दर्शित कार्यों में से ग्रामीण क्रीड़ांगन एवं खेत सड़क जैसे कार्यों में मशीनरी का जमकर उपयोग किया जा रहा है और वास्‍तविक मजदूर पलायन करने पर मजबूर हो गये हैं? यदि नहीं, तो क्‍या प्रगतिरत कार्यों का स्‍थल निरीक्षण एवं मजदूरों का सत्‍यापन जिले के अधिकारियों की समिति बनाकर कलेक्‍टर सागर की अध्‍यक्षता में कराया जावेगा और कार्यवाही से प्रश्‍नकर्ता को भी अवगत कराया जावेगा? (ग) प्रश्‍नांश (क) अनुसार क्‍या मनरेगा द्वारा कराये गये नंदन फलोद्यान एवं निर्मल वाटिका के कार्यों में राहतगढ़ जनपद में भी गंभीर अनियमिततायें की गयी हैं?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) सागर जिले के सुरखी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत विगत तीन वर्षों में मनरेगा में नंदन फलोद्यान, निर्मल वाटिका (स्‍वच्‍छता अभियान), ग्रामीण क्रीड़ांगन और खेत सड़क के कार्यों की जनपदवार एवं ग्राम पंचायतवार व्‍यय सहित सूची पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी नहीं। निर्माण कार्यों में गुणवत्‍ता नियंत्रण हेतु आवश्‍यक मशीनरी को छोड़कर मानवीय श्रम के बदले उपयोग होने वाली मशीनरी का उपयोग नहीं किया गया, न ही मजदूरों के द्वारा योजना के प्रावधानों के अनुरूप काम की मांग के बावजूद रोजगार नहीं मिलने के कारण मजबूरीवश पलायन किया जा रहा है। शेष प्रश्‍न उपस्‍थित नहीं होता। (ग) जी नहीं। किसी भी प्रकार की गंभीर अनियमितता की शिकायत राज्‍य शासन के संज्ञान में आने पर नियमानुसार कार्यवाही की जावेगी।

 

श्रीमती पारूल साहू केशरी--माननीय अध्यक्ष महोदय, मनरेगा संबंधी कार्यों की जानकारी देने के लिये मंत्री जी का धन्यवाद देना चाहती हूं साथ में निवेदन करना चाहती हूं कि प्रश्न के दूसरे भाग में मैंने माननीय मंत्री जी से प्रगतिरत कार्यों का स्पॉट इंस्पेक्शन एवं मजदूरों का सत्यापन जिले के अधिकारियों की एक समिति बनाकर कलेक्टर सागर की अध्यक्षता में करने का आग्रह किया था इस पर माननीय मंत्री जी का कोई जवाब नहीं आया है.

श्री गोपाल भार्गव--माननीय अध्यक्ष महोदय, सत्यापन के लिये कलेक्टर स्वयं नहीं जाते हैं उनके पास में एक पंचायत में सैकड़ो काम रहते हैं, लेकिन मैं किसी वरिष्ठ अधिकारी से जो विषय का भी जानकार होगा उसको तकनीकी जानकारी भी होगी उसको भेजकर के करा लूंगा.

श्रीमती पारूल साहू केशरी--माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी से निवेदन करना चाहती हूं कि जो खेत-सड़क के प्रगतिरत् कार्य चल रहे हैं वह तो पहले से ही जानकारी में हैं मशीनरी द्वारा पूरे हो चुके हैं अब केवल हर सप्ताह कई पंचायतों में मस्टर जारी कर फर्जी भुगतान किये जा रहे हैं आप चाहें तो एक टीम भोपाल के वरिष्ठ अधिकारियों की गठित कर उसमें विधायक भी एक सदस्य हों टीम द्वारा एक संयुक्त निरीक्षण बुंदेलखंड के सभी विधायक अपने अपने क्षेत्र की पांच-पांच पंचायतों में करवा लें, यह मैं आपसे अनुरोध करती हैं.

श्री गोपाल भार्गव--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने आज विचार किया है रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत खेत-सड़क योजना हमारी चलती है कई ग्राम पंचायतों में चार-चार, पांच-पांच इकट्ठे स्वीकृत कर दिये जाते हैं हमने अभी पंचायतों को स्वतंत्रता दी थी कि 15 लाख रूपये के कार्य खेत-सड़क के अपने ही प्रशासनिक स्वीकृति के कर सकती हैं, लेकिन मैं समीक्षा के दौरान यह पाया है कि 5-6 काम एक पंचायत में संभव नहीं हो सकते हैं इस कारण से आज ही निर्देश दिये हैं कि एक ग्राम पंचायत में एक ही खेत सड़क का काम प्रारंभ किया जाएगा. पंचायत की बैठक में, उसकी प्रशासनिक स्‍वीकृति दी जाएगी, जब वह काम पूरा हो जाएगा, 90 प्रतिशत काम हो जाएगा, उसके बाद ही दूसरा काम प्रारंभ करेंगे, जहां तक पिछले कार्यों का प्रश्‍न है, यदि कोई गड़बड़ी हुई होगी तो परिषद से या फिर विकास आयुक्‍त कार्यालय के वरिष्‍ठ अधिकारी को भेजकर उसकी जांच करा लेंगे ।

श्रीमती पारूल साहू केशरी - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद ।

स्‍वच्‍छता सप्‍ताह आयोजन के मुद्रण कार्य की जाँच

4. ( *क्र. 4901 ) श्री कमल मर्सकोले : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या निर्मल भारत अभियान 20 से 25 फरवरी, 2014 स्‍वच्‍छता सप्‍ताह के आयोजन के लिए प्रचार-प्रसार हेतु छपवायी गई सामग्री में किए गए भुगतान की कोई जाँच कराई गई है? (ख) यदि हाँ, तो उससे संबंधित प्रतिवेदन और प्रतिवेदन पर की गई कार्यवाही से अवगत करावें।

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जी हाँ। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र एवं अनुसार है।

श्री कमल मर्सकोले- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, निर्मल भारत अभियान के अंतर्गत निर्धारित, जागरूकता सप्‍ताह 20 फरवरी से 25 फरवरी 2014 के बीच आयोजित होना था, उक्‍त कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया गया और निर्धारित तिथि के 4 माह बाद तत्‍कालीन सी.ई.ओ. जिला पंचायत, सिवनी के आदेश और सहमति उपरान्‍त प्रचार सामग्री छपवाई गई और उसका भुगतान कर दिया गया, प्रकरण की जांच में, जिला पंचायत, सिवनी के लेखा अधिकारी नितीश उइके को दोषी पाते हुए निलंबित कर दिया गया और 17 लाख 29 हजार 416 रूपए की वसूली के आदेश दिए गए, मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि क्‍या प्रटिंग कार्य का कार्यादेश और भुगतान आदेश देने वाली तत्‍कालीन सी.ई.ओ. जिला पंचायत, श्रीमती प्रियंका दास के विरूद्व भी कार्यवाही सुनिश्चित की जाकर, जो राशि गबन की गई है, जो घोटाला हुआ है, क्‍या उस राशि की वसूली की जाएगी ?

श्री गोपाल भार्गव- अध्‍यक्ष महोदय, जैसा उत्‍तर में स्‍पष्‍ट है कि एक अधिकारी को निलंबित कर दिया है, इसके साथ ही यदि और भी किसी अधिकारी की संलिप्‍तता पाई जाएगी और यदि उसने नियम विरूद्व स्‍वीकृति दी होगी, तो उसके विरूद्व भी कार्यवाही करेंगे ।

श्री कमल मर्सकोले - बहुत बहुत धन्‍यवाद ।

 

 

तालाबों की भूमि पर अतिक्रमण

5. ( *क्र. 630 ) श्री राजेश सोनकर : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) इंदौर जिला अंतर्गत कौन-कौन सी तहसीलों में कितने तालाब बने हुए हैं? तालाबों की पालों अथवा तालाबों हेतु आरक्षित भूमि से कितनी दूरी पर निर्माण अथवा अन्‍य गतिविधियां की जा सकती हैं व किस नियम के तहत्? (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में क्‍या इंदौर जिला अंतर्गत पुराने तालाबों के केचमेंट एरिया, तालाबों की पाल पर अतिक्रमण किया गया है? यदि हाँ, तो अतिक्रमणकर्ता पर संबंधित विभागों द्वारा क्‍या कार्यवाही की जा रही है? या की जायेगी? (ग) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में क्‍या इंदौर में स्थित बिलावली तालाब, सिरपुर तालाब, खजराना तालाब, यशवंत सागर एवं पिपल्‍याहाना तालाब की पाल/केचमेंट एरिये में कितनी भूमि पूर्व में तालाब हेतु चिन्हित की थी व वर्तमान में कितनी भूमि प्रश्‍न दिनांक तक शेष बची है? (घ) प्रश्नांश (ग) के संदर्भ में उक्‍त तालाबों की आरक्षित भूमि पर व तालाबों की पाल के आस-पास व्‍यवसायिक गतिविधियां एवं अवैध रूप से बहुमंजिला भवन/छोटे भवनों कै अवैध निर्माण के समय पदस्‍थ अधिकारी पर प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही की जायेगी? यदि हाँ, तो कब तक?

राजस्व मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) तालाबों की तहसीलवार खसरा नंबर, रकबा सहित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट पर है। इंदौर विकास योजना 2021 की कंडिका 6.15.3 अनुसार बड़े एवं छोटे तालाबों की एच.एफ.एल. से क्रमशः 60 एवं 30 मीटर की दूरी तक निर्माण प्रतिबंधित रखा गया है। (ख) जी हाँ। अतिक्रमण हटाने हेतु विस्तृत कार्य योजना हेतु कलेक्टर द्वारा नगर निगम इंदौर, अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदार को लिखा गया है। (ग) पूर्व में चिन्हित रकबे अनुसार बिलावली तालाब 304.76 हे., में से 234.6 हे., सिरपुर तालाब 93.030 हे., में से 93.958 हे., खजराना तालाब 3.137 हे. में से 3.137 हे., यशवंत सागर तालाब 1121.991 हे., में से, 1120.826 हे. एवं पिपल्याहाना तालाब का रकबा 3.674 हे. में से 3.674 हे., वर्तमान राजस्व अभिलेख में दर्ज पाया गया है। (घ) सिरपुर एवं खजराना तालाब को छोड़कर अन्य प्रश्नाधीन तालाबों में अतिक्रमण की स्थिति नहीं है। सिरपुर, खजराना तालाबों के पाल की भूमि पर आंशिक अतिक्रमण मकान आदि बनाकर किया गया है। अवैध निर्माण की जानकारी संज्ञान में आने पर नगर निगम, राजस्व विभाग एवं पुलिस प्रशासन द्वारा समय-समय पर अवैध निर्माण हटाने एवं गतिविधियों को बंद करने की कार्यवाही की जाती है। अतिक्रमण हटाना सतत् एवं निरंतर गतिशील न्यायालयीन प्रक्रिया है।

श्री राजेश सोनकर - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न इंदौर शहर और ग्रामीण क्षेत्र के तालाबों के संबंध में था, मैंने पूछा था कि इंदौर के बिलावली तालाब, सिरपुर तालाब, खजराना तालाब, यशवंत सागर एवं पिपल्‍हाना तालाब पर अतिक्रमण की क्‍या स्थिति है ? माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि मेरे सवाल का जो गोल- मोल जवाब मिला है, मुझे ही नहीं, बल्कि मंत्री जी के माध्‍यम से, सदन को गुमराह किए जाने का प्रयास अधिकारियों द्वारा किया गया है, जवाब में कहा गया है कि इंदौर के सिरपुर तालाब और खजराना तालाब पर ही अतिक्रमण है, जबकि इंदौर का बिलावली तालाब, जो कि एक समय में पूरे इंदौर की प्‍यास बुझाने का काम करता था, जहां विदेशी पक्षियों का आवागमन भी था, साथ ही इंदौर- खण्‍डवा मार्ग में स्थित इस तालाब के आस- पास इंदौर नई एजुकेशन सिटी के रूप में करवट ले रहा है, विश्‍वविद्यालय, महाविद्यालय, छात्रावास और बाहर से आने वाले छात्र- छात्राओं के छात्रावास और वहां पर उनका आवागमन रहता है लेकिन .......

अध्‍यक्ष महोदय- कृपया प्रश्‍न करें ।

श्री राजेश सोनकर - मेरा सवाल था कि तालाब की जो आरक्षित भूमि है, उससे कितनी दूरी पर निर्माण किया जा सकता है, मुझे जवाब मिला है, 30 से 60 फीट की दूरी पर निर्माण किया जा सकता है, जबकि बिलावली तालाब की मेड़ पर पूरी तरह से अतिक्रमण किया गया है, वहां पर होटल है ।

अध्‍यक्ष महोदय- सीधा प्रश्‍न करें ।

श्री राजेश सोनकर- जी, उस मेड़ पर अवैध होटलें बनाई गई हैं, उन होटलों में शराब और मांस परोसा जा रहा है, मेरा मंत्री जी से यह आग्रह है कि बिलावली तालाब की मेड़ पर, अतिक्रमण किया है, उसके बाद भी जवाब में, उस बात को स्‍वीकार नहीं किया है कि अतिक्रमण है ।

अध्‍यक्ष महोदय- इतनी देर से भाषण दे रहे हैं, सीधा प्रश्‍न करें ।

श्री राजेश सोनकर- क्‍या उसकी जांच करवार, वहां पर जो अतिक्रमण है, उसको दूर किया जाएगा और जिन अधिकारियों ने यह जवाब बनाकर दिया है उन पर कोई कार्यवाही की जाएगी और क्‍या तालाब को अतिक्रमण से मुक्‍त कराया जाएगा ?

श्री रामपाल सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी ने जो सवाल पूछा था, जिले के तालाब पूछे थे, 282 तालाब हमने बताए थे, अतिक्रमण की स्थिति सिरपुर तालाब, खजराना में हमने बताया कि अतिक्रमण है, बाकी दूसरा तालाब जो माननीय विधायक जी बता रहे हैं, इस तालाब का भी हम पुन: परीक्षण कराएंगे और यदि तालाबों पर अतिक्रमण है, तो तुरन्‍त हटाने के निर्देश देंगे, विधायक जी लिखकर दे दे, यदि कोई गलत जानकरी दी गई है, उन पर भी सख्‍त कार्यवाही करेंगे ।

श्री राजेश सोनकर - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे पास बिलावली तालाब एवं और भी सूची है, ग्रामीण क्षेत्र के तालाबों की भी सूची है. बिलावली तालाब पर जो अतिक्रमण है, उसकी जांच करवाते समय, क्‍या हमको साथ में रखेंगे. माननीय मंत्री जी इसको स्‍पष्‍ट कर दें कि हम अधिकारियों के साथ जायेंगे.

श्री रामपाल सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, निश्चित रूप से, माननीय विधायक जी जो सहयोग कर रहे हैं. तालाबों की हम भी चिन्‍ता कर रहे हैं, हम यहां से अधिकारियों का कहेंगे कि जांच में विधायक जी को भी शामिल करें.

श्री जितू पटवारी - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपको धन्‍यवाद. मंत्री जी की इतनी सहृदयता के लिये उनको मैं धन्‍यवाद देता हूँ कि वे इतनी पारदर्शिता से कार्य कर रहे हैं. एक विषय तो है कि जिनने अतिक्रमण कर लिया है, वह आम जनता है या अतिक्रमणकारी हैं. एक पिपल्‍याहाना तालाब है, जिसका जिक्र इस प्रश्‍न में आया है. मंत्री जी, कल भी इस प्रश्‍न को उठाया था. यह शासन ने ही तालाब की जमीन विधि विभाग का अलॉट कर दी है. इस अतिक्रमण को हटाने की, क्‍या आप फिर से जांच करेंगे.

श्री रामपाल सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विद्वान सदस्‍य आपको पूरी जानकारी है. आपकी जब जिला सरकार थी, जब यह जगह कांग्रेस शासनकाल में न्‍यायालय को आवंटित कर दी है और हम इसका परीक्षण करा रहे हैं. लेकिन इसमें चर्चा करेंगे चूँकि यह आपकी सरकार ने आवंटित की थी और आप मामला उठा रहे हैं. जिला योजना समितियों को आपने अधिकार दिये थे और आपने सन् 1999-2000 में माननीय न्‍यायालय को दे दी है और हम इसका परीक्षण करायेंगे. बाकी जनता को भी कठिनाई न हो और काम भी हो जाये. यह व्‍यवस्‍था करने का काम कर रहे हैं और लेकिन आप थोड़ा पीछे भी मुड़कर देखो, आपके टाईम पर यह गलत काम हो जाते तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ज्‍यादा भार नहीं डालना चाहिये.

अध्‍यक्ष महोदय - वे ज्‍यादा भार नहीं डाल रहे हैं, आपकी तारीफ कर रहे हैं.

श्री जितू पटवारी - मंत्री जी, आपको धन्‍यवाद. आपने कहा कि आपके किये हुए कर्मों का फल है. हमने जो कर लिया, आप तो पुण्‍य कमाओ. क्‍या आप पुण्‍य कमायेंगे ?

अध्‍यक्ष महोदय - मंत्री जी ने कह दिया है कि परीक्षण करायेंगे.

श्री जितू पटवारी - अध्‍यक्ष जी, इसको लेकर वहां आम जनता आन्‍दोलित है. मंत्री जी, यह कांग्रेस और बीजेपी का प्रश्‍न नहीं है. इस पर विधि विभाग में कई जनहित यचिकाएं भी लग गई हैं. मेरा अनुरोध है कि इसको संज्ञान में लेकर, जांच में डालकर और क्‍या लीज निरस्‍त की जायेगी ? क्‍या आवंटन निरस्‍त किया जायेगा ?

श्री रामपाल सिंह - अध्‍यक्ष महोदय, इस मामले को हमारे माननीय गुप्‍ता जी ने भी, जो हमारे वहां के विधायक हैं, वे भी इस मामले को लाये थे. यह मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्‍यूनल में चल रहा है और हम लोग इस विषय को समझेंगे. माननीय विधायकगण जी भी पीछे हाथ ऊँचा कर रहे हैं लेकिन यह मामला हमारी माननीय लोकसभा अध्‍यक्ष जी (ताईजी) के भी ध्‍यान में है. हम लोग चर्चा करके, निराकरण करने का प्रयास कर रहे हैं.

श्री जितू पटवारी - उनके कहने पर कर देना पर मेरे कहने पर मत करना.

मनरेगा योजनांतर्गत पक्‍के निर्माण कार्य की स्‍वीकृति

प्रश्‍न 6. ( *क्र. 5716 ) श्री कुँवरजी कोठार : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) शासन द्वारा प्रदेश में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत बी.आर.जी.एफ. योजनांतर्गत वर्ष 2015-16 में निर्माण कार्य की स्‍वीकृति कब से समाप्‍त कर दी गई है? (ख) यदि हाँ, तो बी.आर.जी.एफ. योजना की राशि से कराये जाने वाले पक्‍के निर्माण कार्य यथा पुल, पुलिया, स्‍टॉप डेम भवन निर्माण आदि किस मद से कराये जावेंगे? यदि नहीं, तो जनपद पंचायत सारंगपुर अंतर्गत कौन-कौन से कार्य की स्‍वीकृति प्रदान की गयी है? ग्रामवार, कार्यवार राशि की जानकारी देवें। (ग) यदि मनरेगा से ही प्रश्‍नांश (ख) के कार्य करवाये जावेंगे तो क्‍या 20 प्रतिशत मजदूरी एवं 80 प्रतिशत सामग्री की राशि व्‍यय करने की स्‍वीकृति प्रदान की जावेगी?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) भारत शासन स्तर से दिनांक 31.03.2015 से बी.आर.जी.एफ. योजना डीलिंक होने से बंद कर दी गई। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार(ख) जी हाँ। बी.आर.जी.एफ. की स्वीकृत कार्य योजना अंतर्गत स्वीकृत कार्य बी.आर.जी.एफ. की मार्गदर्शिका अनुसार जिला/जनपद/ग्राम पंचायत एवं नगरीय निकायवार मद में उपलब्ध शेष राशि तथा उक्त राशि पर अर्जित ब्याज की राशि से जिले द्वारा कराये जायेंगे। वित्तीय वर्ष 2015-16 में जनपद पंचायत सारंगपुर में बी.आर.जी.एफ. योजनांतर्गत कोई नवीन कार्य स्वीकृत नहीं किया गया है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) जानकारी उत्तरांश अनुसार। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार

श्री कुँवर जी कोठार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी के उत्‍तर से संतुष्‍ट हूँ. लेकिन मेरा एक प्रश्‍न है कि जो बी.आर.जी.एफ. के अंतर्गत पक्‍के निर्माण कार्य भवन, पुलिया, स्‍टॉप डेम आदि कार्य कराये जाते थे. वे अब किस मद से करायेंगे? और यदि मनरेगा से उसकी स्‍वीकृति प्राप्‍त होती है तो उसमें सामग्री एवं मजदूरी का अनुपात 60:40 का है तो क्‍या उसे बढ़ाकर 80:20 का करने पर विचार करेंगे ?

श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी इस जिले में 1 करोड़ 59 लाख रूपये बी.आर.जी.एफ. की मद में शेष है, उसके ब्‍याज की राशि भी अभी वहां पर शेष है. इस सब को जोड़कर जितना भी काम वहां पर स्‍वीकृत हुआ होगा, उस काम के लिए हम पूर्ण करा लेगें. उसके पश्‍चात् यदि राशि की आवश्‍यकता होगी तो हम किसी अन्‍य मद से उसमें समायोजित करने का विचार करेंगे. जहां तक 80:20 की बात है तो मनरेगा के नियम इस बात की अनुमति नहीं देते हैं. इस कारण से, फिलहाल 1 करोड़ 59 लाख रूपये की राशि और ब्‍याज की राशि से काम करायेंगे और जो शेष कार्य होंगे, उसे अन्‍य मद से करवाने का विचार करेंगे.

श्री कुँवर जी कोठार - धन्‍यवाद.

उपसंचालक के पद पर अनियमित पदोन्‍नति

प्रश्‍न 7. ( *क्र. 6457 ) श्री के.पी. सिंह : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र. राज्‍य सहकारी विपणन संघ मर्यादित भोपाल के आदेश क्र./स्‍था.वि./6852/2015, दिनांक 23.11.2015 के अंतर्गत सहायक प्रबंधकों को अस्‍थाई रूप से उप-प्रबंधक के पदों पर पदोन्‍नति प्रदान की गई है? पदोन्‍नति प्रदान किये जाने के क्‍या निर्धारित मापदण्‍ड/प्रावधान हैं? प्रति उपलब्‍ध करावें। क्‍या उक्‍त पदोन्‍नति में शासन के पदोन्‍नति नियम 2002 का पालन किया गया है? यदि नहीं, तो क्‍यों? (ख) क्‍या उक्‍त पदोन्‍नति वरिष्‍ठता सूची के आधार पर की गई है? यदि नहीं, तो क्‍यों? वरिष्‍ठ होते हुये भी पदोन्‍नति से किन-किन कर्मचारियों को किन कारणों से वंचित किया गया है? (ग) क्‍या वरिष्‍ठ कर्मचारियों को पदोन्‍नति से वंचित कर उनसे कनिष्‍ठ कर्मचारियों को पदोन्‍नत किये जाने के संबंध में प्रबंध संचालक/सचिव विपणन संघ को अवगत कराते हुये, उन्‍हें भी उप-प्रबंधक के पद पर उक्‍त पदोन्‍नति दिनांक से पदोन्‍नत किये जाने का अनुरोध किया गया है? इस संबंध में प्रश्‍न दिनांक तक क्‍या कार्यवाही कब-कब की गई? उसके क्‍या निष्‍कर्ष निकले? (घ) क्‍या शासन/विभाग कनिष्‍ठ कर्मचारियों को पदोन्‍नति नियमों के विपरीत अनियमित रूप से पदोन्‍नति प्रदान किये जाने की उच्‍चस्‍तरीय जाँच कर वंचित कर दिये गये वरिष्‍ठ कर्मचारियों को उक्‍त पदोन्‍नति दिनांक से पदोन्‍नति प्रदान किये जाने के आदेश जारी करते हुये, अकारण पदोन्‍नति से वंचित करने वाले दोषियों के विरूद्ध कठोर अनुशासनात्‍मक कार्यवाही करेगा? यदि नहीं, तो क्‍यों?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जी हाँ, जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार, म.प्र. सहकारी सोसाइटी अधिनियम 1960 के अंतर्गत पंजीकृत संस्‍था होने से पंजीयक सहकारी संस्‍थाएं, म.प्र. द्वारा अनुमोदित सेवा नियम के प्रावधान अनुसार पदोन्‍नति दी गई है, शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता। (ख) पदोन्‍नति वरिष्‍ठता सह उपयुक्‍तता के आधार पर, शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता, जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार(ग) सहायक प्रबंधक श्रीमती सुनीता राय से अभ्‍यावेदन प्राप्‍त, आवेदिका को पदोन्‍नति हेतु उपयुक्‍त नहीं पाये जाने पर प्रकरण नस्‍तीबद्ध किया गया तथा पत्र दिनांक 04.1.2016 से सूचित किया गया। (घ) उत्‍तरांश '', '' '' के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''एक''

श्री के.पी. सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने मेरे प्रश्‍न के जवाब में जो उत्‍तर दिया है, उसमें लिखा है कि जिन कर्मचारियों-अधिकारियों को '' श्रेणी मिलती है, उनको पदोन्‍नति नहीं दी जाती है. इस परिप्रेक्ष्‍य में मैं, माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूँ कि क्‍या सी.आर. लिखने का अधिकार, किसी संविदा पर पदस्‍थ व्‍यक्ति को है ?

श्री गोपाल भार्गव -- अध्यक्ष महोदय, जो भी वरिष्ठ अधिकारी, प्राधिकृत अधिकारी चाहे वह संविदा पर हो, चाहे वह रेगुलर हो. जो भी उसके लिये प्राधिकृत किया जाता है, वह सीआर लिख सकता है.

श्री के.पी.सिंह -- अध्यक्ष महोदय, मेरी जानकारी के अनुसार जो साधारणतः नियम है कि कोई भी संविदा पर पदस्थ अधिकारी सीआर नहीं लिख सकता, क्योंकि वह कुछ समय के लिये पदस्थ होता है. ऐसा अगर नियम है, तो मैं मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि इसका परीक्षण करा लें कि जो व्यक्ति पूर्णकालिक नहीं है, संविदा के लिये, कुछ समय के लिये नियुक्त हुआ है, तो उसके मन में कभी कभी दुर्भाव पैदा होता है, उससे जो नियमित कर्मचारी काम कर रहे हैं वर्षों से, उनका बहुत बड़ा नुकसान होता है. इस प्रकरण में यही बात मैं मंत्री जी के ध्यान में लाना चाहता हूं. करीबन 7-8 लोग सिर्फ "" श्रेणी की सीआर लिखने की वजह से उसी वर्ष में प्रभावित हुए हैं और उसमें कभी कभी ऐसा प्रदर्शित होता है कि जानबूझकर तो यह नहीं किया गया. तो नियम क्या है, मंत्री जी को ज्यादा मुझसे जानकारी हो सकती है, लेकिन मुझे जितनी जानकारी है कि सामान्यतः जो वरिष्ठ अधिकारी, अगर वह संविदा पर नहीं है तो ही लिखेगा, तो इस केस में यही हुआ है कि संविदा पर पदस्थ किसी अधिकारी ने दुर्भावनावश 7-8 लोगों के खिलाफ सीआर खराब की है. तो मैं मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि इस नियम को आप दिखवा लीजिये और परीक्षण कराकर अगर ऐसा हुआ है तो 7-8 लोगों के खिलाफ जो अन्याय हुआ है, उनको पदोन्नति का अवसर मिलना चाहिये था. पदोन्नति के अवसर तो वैसे ही लोगों को बहुत कम मिलते हैं. कई लोग तो बिना पदोन्नति के रिटायर हो जाते हैं. तो ऐसी स्थिति में अगर एकाध साल किसी का बचा हो, तो उसको पदोन्नति का लाभ मिल जायेगा. इस नियम का आप ठीक से परीक्षण करा लें और अगर ऐसा हुआ है तो उसको कृपया दोबारा से पुनरीक्षण कर लें, ताकि जिसके जिसके साथ जो अन्याय हुआ है, उसको न्याय मिल सके.

श्री गोपाल भार्गव -- अध्यक्ष महोदय, हम परीक्षण करा लेंगे.

 

सूखा/ओलावृष्टि से फसलों को क्षति

8. ( *क्र. 1520 ) श्री दुर्गालाल विजय : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) श्‍योपुर जिले में वर्ष 2015-16 में सूखा/ओलावृष्टि के कारण कुल कितने ग्रामों में कितने-कितने कृषकों की कौन-कौन सी रबी फसलों में कितने-‍कितने प्रतिशत नुकसान सर्वे सूची में सर्वे दलों द्वारा दर्ज किया गया, के अनुसार वर्तमान तक कितनी मुआवज़ा राशि बांटी गई? इस हेतु कितनी राशि शासन ने जिले को प्रदाय की पूर्ण जानकारी तहसील/ग्रामवार देवें? (ख) सर्वे कार्य में सर्वे दलों की मनमानी के कारण ग्राम नयागांव, गुजरान, सेमल्‍दा हवेली, ब्रहमपुरा सहित दर्जनों ग्रामों के सैकड़ों पात्र कृषकों के नाम सर्वे सूची में नहीं जुड़ पाये व मुआवज़े से वंचित बने हुए हैं, जिनके नाम जोड़े गये उनमें से सैकड़ों कृषकों को वर्तमान तक मुआवजा नहीं मिला, दर्जनों अपात्र कृषकों को मुआवजा दिया गया? इसके क्‍या कारण हैं। (ग) उक्‍त अनियमितताओं के संबंध में कितने आवेदन वर्तमान तक सभी तहसीलदारों/जिला प्रशासन को प्राप्‍त हुए इन पर क्‍या कार्यवाही की गई? (घ) क्‍या शासन प्रश्‍नांश (ख) में वर्णित तथ्‍यों की जाँच कराकर दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही करेगा तथा वर्तमान तक मुआवज़े से वंचित पात्र कृषकों सहित सर्वे सूची में जुड़ने से वंचित रहे पात्र कृषकों के नाम सर्वे सूची में जुड़वाकर इन्‍हें शीघ्र मुआवजा दिलवाएगा? यदि नहीं, तो क्‍यों?

राजस्व मंत्री (श्री रामपाल सिंह ) : (क) जिला श्‍योपुर में वर्ष 2015-16 में सूखा/ओलावृष्टि से रबी फसल में किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नहीं हुआ है। अत: शेष प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता। (ख) से (घ) प्रश्‍नांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उदभूत नहीं होता।

श्री दुर्गालाल विजय -- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न श्योपुर जिले के किसान जो ओलावृष्टि, सूखे से प्रभावित हैं, उनको लेकर के है. मैंने पूछा था कि श्योपुर जिले में वर्ष 2015-16 में जिन किसानों की फसल सूखी है, ओला वृष्टि से नुकसान हुआ है, ऐसे नुकसान वाले बहुत सारे किसान और कई गांव छूट गये हैं. मैंने यह भी पूछा था कि जो पात्र किसान हैं, जिनका सूची में नाम है, उनको भी अभी तक मुआवजा नहीं मिला है. विभाग ने बहुत तकनीकी तरीके से उत्तर दे दिया है. इसमें खरीफ की जगह रबी प्रिंट हो जाने के कारण से उन्होंने कह दिया कि 2015-16 में कोई नुकसान ही नहीं हुआ. हमारा जिला सूखाग्रस्त घोषित जिला है, तीन तहसीलें श्योपुर, बड़ोदा, विजयपुर सूखाग्रस्त घोषित की गई हैं और बहुत नुकसान किसानों को हुआ है. ओलावृष्टि के कारण से भी किसानों का धान नष्ट हुआ है, बहुत नुकसान हुआ है. मैं मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं कि जो किसान सूची में हैं, उनको मुआवजा कब तक मिल जायेगा और जो किसान छूट गये हैं. क्या उनको पात्रता सूची में जोड़कर जैसे नयागांव, गुजरान, सेमल्दा हवेली, ब्रहमपुरा सहित बहुत सारे गांव हैं..

अध्यक्ष महोदय -- पहले इसका उत्तर तो आने दीजिये. मंत्री जी.

श्री रामपाल सिंह -- अध्यक्ष महोदय, श्योपुर की समस्या दुर्गालाल विजय जी ने रखी है. निश्चित रुप से गंभीर है. क्षेत्र की समस्याओं की वे चिंता कर रहे हैं. उनको मैं ध्यान में लाना चाहूंगा कि 4 तहसीलों के 237 गांव सूखा व कीट प्रकोप से प्रभावित हुए थे और 13444 कृषकों की संख्या हमारे पास आई थी और उसकी क्षति का जो हमने आंकलन किया, 17 करोड़ 36 लाख 87 हजार रुपये जिले ने मांगे थे, वह राशि जारी कर दी है और जो विषय विधायक जी ध्यान में लाये हैं, 17 करोड़ रुपये दिये हैं, जितनी राशि हम दे रहे हैं 17 करोड़ 36 लाख 87हजार रुपये तो हमने दे दिये. वहां से मांग पत्र क्षति के आंकलन के बाद में आयेगा तो वह राशि भी हम माननीय विधायक जी क्षेत्र मे तुरंत उपलब्ध करायेंगे. अध्यक्ष जी मैं आपके माध्यम से माननीय विधायक जी को यह विश्वास भी दिला रहा हूं कि किसानों के प्रति मध्यप्रदेश सरकार सजग है, किसानों के हित में हम तुरंत राशि जारी करते हैं , राशि सीधे किसानों के खाते में भेज रहे हैं. उसमें कोई विलंब नहीं होगा.

श्री दुर्गालाल विजय -- माननीय अध्यक्ष महोदय, इसके लिये मैं माननीय मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूं और यह भी निवेदन करना चाहता हूं कि वहां से क्षति का आंकलन आ गया है, जितना आंकलन आया है वह राशि श्योपुर जिले के लिये शीघ्र जारी कर दी जाये, जो लोग छूट गये हैं उनको उसमें जोड़ने के लिये मंत्री जी ने कुछ कहा नहीं है तो मैं चाहता हूं कि जो लोग छूट गये हैं उन्हें कब तक जोड़ लेंगे.

श्री रामपाल सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रक्रिया तो यह है कि तहसील से किसानों के प्रकरण बनाये जाते हैं फिर कलेक्टर के यहां से हमारे यहां पर मांग आती है और हम राशि जारी कर देते हैं लेकिन माननीय विधायक जी कह रहे हैं कि कुछ गांव छूट गये हैं तो फिर से परीक्षण के लिये हम निर्देश दे देंगे.

श्री दुर्गालाल विजय- मंत्री जी बहुत बहुत धन्यवाद.

प्रश्न क्रमांक -9 श्री आशीष गोविंद शर्मा (अनुपस्थित)

 

 

स्‍वीकृत निर्माण कार्यों की पूर्णता

10. ( *क्र. 6480 ) श्री हेमन्‍त खण्‍डेलवाल : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बैतूल जिले में विगत 03 वर्षों में अन्‍य विभागों के कौन-कौन से निर्माण कार्यों की एजेंसी ग्राम पंचायत को बनाया गया है? कार्यों के नाम, स्‍थान एवं स्‍वीकृति दिनांक सहित वर्षवार जानकारी देवें। (ख) क्‍या कुछ पंचायतों में सरपंचों द्वारा राशि आहरित कर ली है, किन्‍तु निर्माण कार्य या तो प्रारंभ नहीं हुए हैं या अपूर्ण हैं? यदि हाँ, तो ऐसे कौन-कौन से कार्य किस-किस पंचायत के हैं? (ग) प्रश्‍नांश (क) के अनुसार लंबी अवधि से स्‍वीकृत निर्माण कार्यों को पूर्ण कराने के क्‍या प्रयास किए जा रहे हैं? (घ) ये कार्य कब तक पूर्ण हो जाएंगे?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ अनुसार (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब अनुसार (ग) प्रश्नांश (क) के अनुसार लंबी अवधि से स्वीकृत निर्माण कार्यों को पूर्ण कराये जाने हेतु जिले में समीक्षा बैठकों में संबंधित निर्माण एजेंसियों को निर्देशित किया जा रहा है, एजेंसियों को नोटिस जारी किए गए हैं तथा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) न्यायालयों में प्रकरण दर्ज किए गए हैं। (घ) सभी एजेंसियों को निर्देशित किया गया है। अपूर्ण कार्यों को पूर्ण कराए जाने की निश्चित अवधि बताया जाना संभव नहीं है।

श्री हेमन्त खण्डेलवाल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय पंचायत मंत्री जी ने मेरे प्रश्न के भाग(ख) में जो जानकारी दी है उसमें कहा है कि 47 सरपंच सचिव ने राशि आहरित कर ली और बताया है कि एसडीएम कोर्ट में मामले चल रहे हैं. अध्यक्ष महोदय, मैं इससे आगे की जानकारी देना चाहता हूं कि 6 पंचायतें राकसी, पलासपानी, मजरवानी,जामनिया ऊती और कामोद यहां पर गबन सिद्ध हो गया और कलेक्टर ने इन सभी सचिवों को बर्खास्त कर दिया लेकिन एक साल पहले कमिश्नर ने इन सबको स्टे दे दिया. मेरा मंत्री जी से सवाल है कि क्या इस स्टे को वेकेट करने का आपके विभाग ने कोई प्रयास किया है. अगर किया है तो क्या किया है. और ऐसी क्या मजबूरी थी, क्योंकि स्टे में यह कहीं भी नहीं कहा गया है कि इन सचिवों को उसी पंचायत में पदस्थ किया जाये, सभी सचिवों को जब तक स्टे वेकेट नहीं होता, उसी पंचायत में पदस्थ किया गया है क्या उन्हें मंत्री जी हटायेंगे.

श्री गोपाल भार्गव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य का प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण है. यह बात सही है कि जहां तक मैं पृथम दृष्टया मानता हूं कि स्टे देना ऐसे विषयों में चाहे वह किसी भी अधिकारी के द्वारा दिया हो, उचित बात नहीं है. इसका मैं परीक्षण करा लूंगा और यदि स्टे गलत होगा तो स्टे वेकेट करके और उनसे वसूली की कार्यवाही भी की जायेगी और भी जो वैधानिक कार्यवाही होगी वह हम करेंगे.

श्री हेमन्त खण्डेलवाल-- अध्यक्ष महोदय, मेरा मंत्री जी से कहना है कि स्टे जब तक वेकेंट नहीं होता तब तक स्टे में उन्हें उसी पंचायत में रखने का कोई आदेश नहीं है तो उसे तो तत्काल हटा दें .

श्री गोपाल भार्गव -- आज ही हटा देंगे. आज ही.

श्री हेमन्त खण्डेलवाल-- मंत्री जी बहुत बहुत धन्यवाद.

 

वन विभाग की भूमि का आवंटन

11. ( *क्र. 5582 ) एडवोकेट सत्‍यप्रकाश सखवार : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या 24-4-2012 को अनुविभागीय अधिकारी राजस्‍व विजयपुर (श्‍योपुर) को श्री क्षिमक्षिमा हनुमान जी मंदिर ट्रस्‍ट द्वारा मंदिर के लिये वन विभाग की भूमि को आवंटन करने बाबत् निर्धारित प्रारूप 11 (1) के अनुसार प्रकरण तैयार कराकर भेजा गया है? यदि हाँ, तो उक्‍त प्रकरण पर अभी तक क्‍या कार्यवाही की गई है? (ख) यदि कार्यवाही अभी तक नहीं की गई है, तो कब तक करा ली जावेगी? (ग) श्री क्षिमक्षिमा हनुमान मंदिर की वन भूमि लगभग कितने वर्षों से मंदिर एवं आश्रम के उपयोग में आ रही है?

 

 

राजस्व मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) :

एडवोकेट सत्‍यप्रकाश सखवार : माननीय अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मैं माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि श्री क्षिमक्षिमा हनुमान मंदिर ट्रस्ट विजयपुर-श्योपुर द्वारा मंदिर के लिये भूमि आवंटन हेतु राजस्व विभाग से मांग की गई थी किंतु आज तक मंदिर हेतु जमीन का आवंटन नहीं किया गया है. मैं मंत्री जी से चाहूंगा कि विधिवत मंदिर हेतु जमीन कब तक आवंटित करा देंगे, समय सीमा बताने का कष्ट करें.

श्री रामपाल सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, बहुत अच्छा प्रश्न माननीय विधायक जी लाये हैं, बजरंगबली जी के मंदिर का मामला है. वन विभाग का मामला फंसा है नहीं तो मैं तो आज ही कर देता. मैं इस काम में पीछे नहीं हटता . क्योंकि शुभ कार्य करने में मैं गौरव का अनुभव करता.

अध्यक्ष महोदय-- आपने वन विभाग जोर से क्यों कहा. (हंसी)

श्री मुकेश नायक -- अध्यक्ष महोदय (डॉ.शैजवार की और इंगित करते हुये) मंत्री जी यह कहना चाह रहे हैं कि वन विभाग हनुमान जी का विरोध कर रहा है.

श्री रामपाल सिंह-- अरे नहीं. प्रक्रिया है, वन विभाग की अलग प्रक्रिया है. राजस्व विभाग की अलग प्रक्रिया है. अध्यक्ष महोदय हमारे वन मंत्री डॉ. शैजवार भी नंबर वन हैं आप चिंता मत करें.

श्री निशंक कुमार जैन-- डॉ. शैजवार नंबर वन हैं तो मुख्यमंत्री जी क्या हैं.

श्री रामपाल सिंह-- अध्यक्ष महोदय, अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी ( वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 नियम 2007 के नियम 11(1) के अधीन यह आवेदन अनुविभागीय अधिकारी को प्राप्‍त हुआ था, अब वह ग्राम सभा को एक प्रस्‍ताव भेजा है, वहां से वह करेंगे और विधिवत जब प्रस्‍ताव जिले में आयेगा तो विधिवत हम भी आपकी वकालत करेंगे और जरूरत पढ़ी तो डॉक्‍टर साहब से भी चर्चा करेंगे.

एडवोकेट सत्‍यप्रकाश सखवार-- धन्‍यवाद माननीय मंत्री जी.

मजरों/टोलों को राजस्‍व ग्राम की मान्‍यता

12. ( *क्र. 4645 ) श्रीमती नीना विक्रम वर्मा : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या माननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा ग्राम उज्‍जैनी तहसील धार जिला धार में प्रश्‍नकर्ता विधायक की मांग पर शंकरपुरा, पातलिया, चंदरपुरा, नयापुरा आदि मजरों को राजस्‍व ग्राम घोषित किये जाने की घोषणा की थी? (ख) यदि हाँ, तो क्‍या कलेक्‍टर जिला धार द्वारा इस बाबत् प्रस्‍ताव तैयार कर शासन को प्रेषित कर दिये गये हैं? (ग) इन मजरों को राजस्‍व ग्राम की मान्‍यता प्रदान करने हेतु अब तक क्‍या कार्रवाई हुई है तथा कब तक राजस्‍व ग्राम घोषित किये जा सकेंगे?

राजस्व मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) जी नहीं। (ख) एवं (ग) उत्‍तरांश '''' के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

श्रीमती नीना विक्रम वर्मा-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से कहना चाहती हूं‍ कि मेरे सवाल के जवाब में जिसमें मैंने माननीय मंत्री जी से निवेदन किया था कि मैंने कुछ मजरे टोले की मांग की थी और मेरे यहां शंकरपुरा, पातलिया, चंदरपुरा, नयापुरा यह चार गांव के लिये मैंने कहा था कि इसकी आबादी क्‍योंकि 300 से ज्‍यादा है, तो मेरा निवेदन था कि इनको मजरे टोलों से ग्राम में परिवर्तित किया जाये और मेरा निवेदन इसलिये था क्‍योंकि माननीय मुख्‍यमंत्री जी उज्‍जैनी गांव में मेक इन इंडिया के भूमि पूजन में जब वह आये थे, तब उनके स्‍वागत के बाद मैंने उनसे एक डिमांड पत्र रखा था उसके अंदर मैंने इन सब चीजों का निवेदन किया था और माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने उस समय कहा था कि मैं कड़की में हूं, तो मैंने कहा था कि इससे कड़की का कोई लेना देना नहीं है, आप बाकी मांग बाद में कर लेना, लेकिन ग्राम राजस्‍व की मांग तो आप मेरी स्‍वीकार कर सकते हैं, उस समय माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने गांव वालों के सामने मेरी मांग मानी थी और मेरा माननीय मंत्री जी से इसी संदर्भ में निवेदन था कि काफी समय बीत गया है, क्‍या इस बारे में कोई कार्यवाही की है.

अध्‍यक्ष महोदय-- सीधा प्रश्‍न कर दें आप.

श्रीमती नीना विक्रम वर्मा-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा यही निवेदन था कि क्‍या इस बारे में कोई कार्य हुआ तो उनका जवाब आया है जी नहीं, ऐसी कोई माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने घोषणा नहीं की थी तो मेरा आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि मैं स्‍वयं एक जनप्रतिनिधि वहां थी मेरे सामने माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने कहा था तो क्‍या मेरी बात असत्‍य है और अगर नहीं है तो माननीय मुख्‍यमंत्री जी की घोषणा के बाद भी अभी तक इस पर कार्यवाही क्‍यों नहीं की गई, क्‍या माननीय मुख्‍यमंत्री जी मुझे बता सकते हैं.

राजस्‍व मंत्री (श्री रामपाल सिंह)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अपने क्षेत्र के प्र‍ति माननीय विधायक जी गंभीर हैं, उन्‍होंने जो मांग की है, शंकरपुरा, पातलिया मजरे राजस्‍व ग्राम की श्रेणी में करने के लिये चंदनपुरा, नयापुरा, कुछ मापदंड माननीय अध्‍यक्ष महोदय हमारे बने हुये हैं, 200, 2 किलोमीटर, 200 एकड़ जमीन, 2-3 गांव मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि वह उस श्रेणी में आ नहीं रहे हैं, आपकी घोषणा भी हमें पर्याप्‍त हैं, आपने भी पत्र लिखा है, मुख्‍यमंत्री जी ने, आपने जो पत्र लिखा है तो हम अधिकारियों को निर्देश कर रहे हैं कि तुरंत इसका निराकरण करके आपको भी अवगत करायेंगे, आप सम्‍मानीय सदस्‍य हैं, आपके सम्‍मान में कोई कमी कैसे हम लोग छोड़ेंगे इसके लिये अधिकारियों को कहेंगे माननीय अध्‍यक्ष महोदय कि वह तुरंत कार्यवाही भी करें और आपको अवगत भी करायें.

श्रीमती नीना विक्रम वर्मा-- जी धन्‍यवाद, माननीय मंत्री जी.

 

अमानक कपास बीज से कृषकों को हुई क्षति का भुगतान

13. ( *क्र. 6429 ) श्री राजकुमार मेव : क्या किसान कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विगत तीन वर्षों में इंदौर संभाग के किसानों द्वारा बायर कंपनी का 1037 कपास खराब होने की शिकायत की गई? यदि हाँ, तो विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई? (ख) क्‍या इंदौर संभाग के किसानों द्वारा बायर कंपनी के कपास की अच्‍छी गुणवत्‍ता न होने एवं नुकसानी के संबंध में जिला उपभोक्‍ता फोरम में प्रकरण पंजीबद्ध कराया गया था? (ग) क्‍या राज्‍य उपभोक्‍ता फोरम में उक्‍त प्रकरण विचाराधीन है? यदि हाँ, तो कितनी अवधि से लंबित है? प्रकरण का निराकरण कितनी अवधि में किया जाकर किसानों को नुकसानी की राशि का भुगतान कब तक किया जावेगा?

किसान कल्याण मंत्री ( श्री गौरीशंकर बिसेन ) : (क) विगत तीन वर्षों में इंदौर संभाग के किसानों द्वारा बायर कंपनी का 1037 कपास खराब होने की कोई शिकायत विभाग को प्राप्‍त होना नहीं पाया गया। (ख) जी हाँ। इंदौर संभाग अंतर्गत खरगोन जिले के किसानों द्वारा बायर कंपनी के कपास 1037 की अच्‍छी गुणवत्‍ता न होने एवं नुकसानी के संबंध में जिला उपभोक्‍ता फोरम में वर्ष 2010-11 में प्रकरण पंजीबद्ध कराया था। (ग) जी हाँ। म.प्र. राज्‍य उपभोक्‍ता फोरम विवाद प्रतितोषण आयोग में उक्‍त प्रकरण वर्ष 2013-14 से विचाराधीन है। चूंकि म.प्र. राज्‍य उपभोक्‍ता फोरम न्‍यायालयीन व्‍यवस्‍था है, अत: समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

श्री राजकुमार मेव-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी का जवाब आया है कि मैंने जो प्रश्‍न किया है इसका मामला राज्‍य उपभोक्‍ता फोरम में चल रहा है, पर मैं मंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगा कि क्‍या इस जिला उपभोक्‍ता फर्म में जो डिसीजन आया है कि 10 हजार रूपये प्रति पैकेट मुआवजे के रूप में किसानों को दिलाया जाये, उसके अगेंस्‍ट में राज्‍य उपभोक्‍ता फोरम में चले गये, यह 2011 का मामला है अध्‍यक्ष जी और 2011 से अभी तक 4 वर्ष हो चुके हैं, इसका कोई निराकरण नहीं हुआ है, जब तक के लिये निराकरण हो, तब तक के लिये इस कंपनी का म.प्र. में वेन लगा दिया जाये, ऐसा हो सकता है क्‍या, प्रतिबंधित किया जा सकता है क्‍या.

किसान कल्‍याण मंत्री (श्री गौरीशंकर बिसेन)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह जो बायर कंपनी है इसने बीटी कॉटन वर्ष 2009-10 में 4 हजार पैकेट और 2010-11 में 29 हजार पैकिट वितरित किया, इसमें से कि 1037 वेरायटी के 5888 हेक्‍टेयर खरगोन जिले में वोबनी हुई. इसमें से 1 हजार हेक्‍टेयर की जो हमारी खराब थी वह खराब होने की शिकायत आई और शिकायत सही पाई गई, इसमें उप संचालक ने टीम बनाकर जांच की और उसके बाद हमारे पास बीज अधिनियम में सीधे कोई इन्‍हें ग्रांट देने का प्रावधान न होने के कारण उपभोक्‍ता फोरम और उपभोक्‍ता फोरम के बाद आवश्‍यकता पड़े तो कोर्ट तक जाने की स्थिति बनती है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय इसमें हमारे विभाग ने किसानों को पूरा-पूरा सहयोग किया, हमारे उपसंचालक ने वहां के एसडीओ को और अधिकारियों को निर्देशित करके किसानों के प्रकरण उपभोक्‍ता फोरम में बनाये. उपभोक्‍ता फोरम प्रथम स्‍टेज में 690 कृषकों ने जिला उपभोक्‍ता फोरम में अपनी रिट दायर की. जिसमें से 300 फैसले किसानों के पक्ष में हुए,जैसा माननीय सदस्य ने कहा कि एक एक पैकेट पर 10-10 हजार रुपये का कम्पसेशन दिया जायेगा. इसी के साथ साथ सात दिन में उसका निपटारा करना तथा उनकी मानसिक प्रताड़ना के लिए 5-5 हजार रुपये और उनके परिवार को 500-500 रुपये देने का फैसला माननीय उपभोक्ता फोरम ने किया है. जिला उपभोक्ता फोरम के विरुद्ध यह कंपनी राज्य उपभोक्ता फोरम में गई है. वहां पर प्रकरण विचाराधीन है. बाकी जो 390 प्रकरण जिला उपभोक्ता फोरम में हैं इसकी राज्य उपभोक्ता फोरम की तारीख अगस्त,2016 निर्धारित है. हमारा विभाग इसमें इनको पूरा सहयोग करेगा.

अध्यक्ष महोदय, मैं यह भी कहना चाहता हूं कि हालांकि माननीय सदस्य का उद्देश्य है कि इसमें विधिक सहायता मिले. हम कलेक्टर खरगोन को पत्र लिख रहे हैं कि वह हमारे किसानों के हित में विधिक सहायता उपलब्ध करायें. इस कंपनी के 1037 प्रोडक्ट को बंद तो कर दिया गया लेकिन इसके बाद इसके अन्य BT कॉटन है उसकी कोई शिकायत नहीं आयी.

श्री राजकुमार मेव--अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्रीजी से निवेदन करना चाहूंगा कि जब तक न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन है तब तक प्रतिबंध लग जाये.

श्री गौरीशंकर बिसेन--अध्यक्ष महोदय, 1037 वेरायटी को पूर्ण प्रतिबंधित कर दिया गया. यह मध्यप्रदेश में नहीं बिकेगी.

श्री राजकुमार मेव--अध्यक्ष महोदय, इसी मामले और कंपनी को लेकर महाराष्ट्र विधानसभा में भी काफी हंगामा हुआ. इस कंपनी पर प्रतिबंध लगना चाहिए. उन्होंने सिर्फ एक बीज पर प्रतिबंध लगाया है.

श्री गौरीशंकर बिसेन--अध्यक्ष महोदय, हम भारत सरकार को लिख देंगे.

श्री राजकुमार मेव--धन्यवाद.

 

 

प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजनांतर्गत सड़कों का निर्माण

14. ( *क्र. 6562 ) श्री संजय शाह मकड़ाई : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) टिमरनी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत कायदा से डेहरिया एवं छिरपुरा से बोथी सड़कों का कार्य पूर्ण कराये जाने की समय-सीमा क्‍या थी? कितनी राशि स्‍वीकृत की गई। (ख) क्‍या छिरपुरा से बोथी मार्ग की दोनों साईड नियम विरूद्ध खुदाई कर ग्रेवल निकाल कर गहरी खाई बनाई है? यदि हाँ, तो क्‍यों? उक्‍त सड़क का निरीक्षण किन-किन अधिकारियों द्वारा कब-कब किया गया एवं दोषी कर्मचारी/अधिकारी/ठेकेदार पर क्‍या कार्यवाही की गई?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) टिमरनी विधानसभा क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजनांतर्गत कायदा से डेहरिया एवं छिरपुरा से बोथी सड़कों का कार्य पूर्ण कराये जाने की अनुबंधानुसार समय-सीमा क्रमश: दिनांक 29/06/2015 तथा दिनांक 03/07/2014 थी एवं उक्त सड़कों हेतु क्रमश: रू. 245.04 लाख एवं रू. 675.06 लाख की राशि‍ स्वीकृत की गई है। (ख) जी नहीं। प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। चूंकि नियम विरूद्ध खुदाई कर ग्रेवल नहीं निकाला गया है, अतः कर्मचारी/अधिकारी/ठेकेदार पर कार्यवाही का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

श्री संजय शाह मकड़ाई--अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न के जवाब में माननीय मंत्रीजी ने यह कहा है कि कायदा से डेहरिया एवं छिरपुरा रोड़ में कोई अनियमितता नहीं हुई और अवैध उत्खनन भी नहीं हुआ है. मेरा मंत्रीजी से सिर्फ इतना आग्रह है कि रवांग राजस्व गांव है. यह रोड़ जो बन रहा है वह राजस्व गांव में बन रहा है. लेकिन पास में ही एक राजस्व गांव रवांग है, वहां से मुरम आदि अवैध उत्खनन करके यहां डेहरिया रोड़ पर डाली जा रही है तो क्या मंत्रीजी इसकी उच्च स्तरीय जांच करा लेंगे? दूसरा, प्रश्नांश में लिखा है कि छिरपुरा से बोथी मार्ग के दोनों साईड में नियम विरुद्ध कोई खुदाई नहीं हुई. अध्यक्षजी, मुझे नहीं लगता कि प्रधानमंत्रीजी सड़क योजना के नियम में इतनी गहरी खाई बनाने का कोई मापदंड रहा होगा क्योंकि रोड़ के दोनों तरफ जो खाई बनायी है, वह इतनी गहरी है कि यदि भेंस भी गिर जाये तो वह दिखेगी नहीं. मंत्रीजी इसकी उच्च स्तरीय जांच करवा लें और अगर असुविधा नहीं हो तो मैं भी चलूंगा.

श्री गोपाल भार्गव--अध्यक्ष महोदय,वहां के सीजीएम से जांच करा लेंगे और माननीय विधायक महोदय को भी साथ में रख लेंगे.

श्री संजय शाह मकड़ाई--अध्यक्षजी, समय सीमा बता दें.

श्री गोपाल भार्गव-- एक सप्ताह में.

श्री संजय शाह मकड़ाई--धन्यवाद.

प्रश्न क्रमांक--15 राजस्‍व अभिलेखों में दर्ज राजस्‍व भूमि

15. ( *क्र. 5815 ) श्री लाखन सिंह यादव : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नर्मदापुरम संभाग के किस जिले में कितने राजस्‍व ग्राम, कितने वन ग्राम हैं, कितने राजस्‍व ग्राम वीरान हैं, कितने राजस्‍व ग्राम नगरीय सीमा में शामिल हैं, कितने राजस्‍व ग्रामों में जनवरी 2008 के बाद वन अधिकार समितियां बनाई हैं। (ख) किस जिले में कितने राजस्‍व ग्रामों के निस्‍तार पत्रक उपलब्‍ध हैं? उनमें से कितनी भूमि दर्ज की गई थी, उस भूमि में से कितनी भूमि वर्तमान में भी दर्ज है? इन दर्ज भूमियों में से कितनी भूमि का नियंत्रण, प्रबंधन एवं अधिकार पंचायती राज व्‍यवस्‍था को प्रश्‍नांकित दिनांक तक सौंप दिया गया है? यदि नहीं, सौंपा हो तो कारण बतावें। (ग) किस जिले के वर्तमान राजस्‍व अभिलेखों में, खाते में कितनी भूमि दर्ज है? गैरखाते की किस मद में कितनी भूमि दर्ज है? गैरखातों की कितनी भूमि वन विभाग की कार्ययोजना में भी सम्मिलित कर ली गई है। इन सम्मिलित भूमियों को गैर खाते से प्रश्‍नांकित दिनांक तक भी पृथक न किए जाने का क्‍या कारण रहा है? (घ) गैरखाते में दर्ज भूमियों में से कार्ययोजना में सम्मिलित भूमियों को राजस्‍व अभिलेख या वानिकी अभिलेख से पृथक किए जाने के संबंध में शासन क्‍या कार्यवाही कब तक करेगा?

राजस्वमंत्री(श्रीरामपालसिंह)--

श्री लाखन सिंह यादव--अध्यक्ष महोदय, मंत्रीजी से दो प्रश्न करना चाहता हूं और इस आशा के साथ कि मंत्रीजी ठीक ठीक जवाब देंगे. अध्यक्ष महोदय,वन अधिकार कानून 2006 में एक आदेश पारित हुआ था और उस आदेश में यह प्रावधान थे कि मध्यप्रदेश में जितने भी वन ग्राम हैं. मेरे ख्याल से प्रदेश में 925 वन ग्राम हैं, इन वन ग्रामों को तत्काल प्रभाव से राजस्व ग्रामों तब्दील कर दिया जाये. आज 2006 से 2016 लगभग 10 साल हो गये तो क्या कारण रहे कि इन वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में घोषित क्यों नहीं किया? आप कब तक घोषित कर देंगे, इसकी समय सीमा बता दें.

अध्यक्ष महोदय, अगर आप आदेश करें तो दूसरा प्रश्न भी कर लूं.

अध्यक्ष महोदय-- उसके बाद तो कुछ नहीं पूछेंगे?

श्री लाखन सिंह यादव-- नहीं पूछूंगा. मेरा दूसरा प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश में ऐसे तमाम गांव हैं जो विरान हैं, बे-चिराग हैं. आपने तीन जिलों का आंकडा दिया है. होशंगाबाद में 55, बैतूल में 65 और हरदा में 77 कुल 195 गांवों का आंकड़ा दिया है. माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्यम से यह निवेदन है कि ये 195 तो 3 जिलों के गांव हैं, जो वीरान हैं या जहां कोई आबादी नहीं रहती, बे-चिराग हैं, मेरा आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से अनुरोध है कि जो बे-चिराग गांव हैं इनको क्यों नहीं फॉरेस्ट में ले लें तो कम से कम फॉरेस्ट वहां कायम हो जाय. हमारे मंत्री जी (XXX) बैठे हैं इनको भी फायदा हो जाएगा, इनका ज्यादा नुकसान होता रहता है?

माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्यम से यह निवेदन है कि मध्यप्रदेश में हजारों की तादाद में गांव हैं, जो बे-चिराग हैं, जिनका कोई उपयोग नहीं हैं न उनको रेवेन्यू वाले मान रहे हैं, न फॉरेस्ट वाले मान रहे हैं. मैं चाहता हूं कि इन सबको फॉरेस्ट ग्राम घोषित कराएं, जिससे कि कम से कम जो जंगल की कटाई हो रही है, उसकी कुछ क्षतिपूर्ति हो जाय. माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे यह दो प्रश्न हैं, मैं चाहता हूं कि आपके माध्यम से ठीक-ठीक उत्तर आ जाय.

डॉ. नरोत्तम मिश्र - अध्यक्ष जी, हमारे वन मंत्री जी को कभी (XXX), कभी व्यवधानपुरष, अलग-अलग नाम से अंलकृत कर रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय - इसे कार्यवाही से निकाल दीजिए.

श्री के.पी. सिंह - इसमें क्या गलत है?

अध्यक्ष महोदय - वनराज में तो गलत है. (व्यवधान)..

खाद्य मंत्री (कुंवर विजय शाह) -माननीय अध्यक्ष महोदय, सबसे सीनियर दोस्त हैं हमारे, उनके बारे में इस तरीके की बात करना ठीक नहीं है. यह गलत बात है.

अध्यक्ष महोदय - उत्तर आने दे, व्यवस्था हो गई है. आप कृपया बैठ जाइए. माननीय मंत्री जी..

श्री रामपाल सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, निश्चित रूप से जो माननीय विधायक जी ने सवाल पूछा है, यह पूरे नर्मदापुरम संभाग का है और नर्मदापुरम संभाग अपना ही संभाग है और आप दूसरे संभाग के हमारे माननीय सदस्य हैं. अपने संभाग में आकर आप चिंता कर रहे हैं, उसके लिए तो मैं आपको धन्यवाद दे रहा हूं. लेकिन आपने जो बात की है वन ग्रामों को राजस्व ग्राम घोषित करने की, एक दो मामले न्यायालय में उलझे हुए हैं इस पर हम लोग कार्यवाही कर रहे हैं. इसमें पहल करके जल्दी ही इस कार्यवाही को हम लोग करेंगे. माननीय वन मंत्री जी से मिलकर चर्चा करके इसके लिए हम लोग पूरा प्रयास करेंगे. वीरान गांवों के विषय में राजस्व रिकॉर्ड में लिखे हुए हैं. लेकिन माननीय विधायक जी जो सुझाव दे रहे हैं कि उनको वन ग्राम कर दें तो एक बड़ी दिक्कत आने लगती है कि वन ग्राम आप एक बार कर देंगे तो फिर उसमें और कठिनाई निवासियों को आती है, नलकूप खनन से लेकर सड़कों तक उसमें काम करने की अनुमति लेना पड़ती है. लेकिन इस सुझाव को अगर नहीं मानें तो आप बुरा नहीं मानेंगे क्योंकि यह जनहित में ठीक नहीं रहेगा, वीरान के नाम से राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज हैं, उनको रखेंगे और वहां के निवासियों को सुविधाएं देंगे.

श्री लाखन सिंह यादव - माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने कहा कि व्यावहारिक दिक्कत है. मैं यह कह रहा हूं कि यह न्यायालय में चल रहा है, वर्ष 2006 से अब वर्ष 2016 हो गया, 10 साल हो गये हैं तो कब तक आप इसको और चलाते रहेंगे? आप इस पर थोड़ा मॉनिटरिंग करके यह जल्दी हो जाय तो मेरे ख्याल से ज्यादा ठीक रहेगा.

श्री रामपाल सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, हम भी इस बात की चिंता कर रहे हैं. बड़ी गंभीरता से इस बात को रख रहे हैं. यह माननीय न्यायालय में भी है.

श्री लाखन सिंह यादव - धन्यवाद.

 

 

राज्‍य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत कम्‍प्‍यूटर प्रशिक्षण कार्यक्रम

16. ( *क्र. 6361 ) श्री बाला बच्‍चन : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सैडमेप द्वारा दि. 01.01.13 से 31.12.15 तक म.प्र. के विभिन्‍न जिलों में C.R.P. (कम्‍प्‍यूटर ट्रेनिंग) के लिए म.प्र. राज्‍य ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ सैडमेप द्वारा किए गये अनुबंध एवं अनुबंध के साथ संलग्‍न दस्‍तावेजों की जानकारी देवें? (ख) इसके लिए इन्‍हें कितना भुगतान किया गया? वर्षवार बतावें। अन्‍य संस्‍थाओं को प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए चयनित किस आधार पर किया गया? पूरी प्रक्रिया बतावें। (ग) राजगढ़, खरगोन एवं उज्‍जैन जिले में प्रश्‍नांश (क) अवधि में कितने प्रशिक्षण कार्यक्रम किन-किन संस्‍थाओं को किस प्रक्रिया के तहत दिये गये? पूर्ण विवरण, संस्‍था की जानकारी सहित देवें। किन-किन जगहों पर चयन प्रक्रिया किस प्रकार की गई? (घ) प्रश्‍नांश (ग) अनुसार मनमाने तरीके से संस्‍थाओं को कार्य आवंटित करने वाले अधिकारियों पर शासन कब तक कार्यवाही करेगा?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) प्रश्नांश में उल्लेखित अवधि में म.प्र. राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा मध्यप्रदेश के 9 जिलों में सी.आर.पी. को कम्प्यूटर ट्रेनिंग प्रदान करने के उद्देश्य से सैडमेप को कार्यादेश जारी किए गए। दस्तावेजों का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र- अनुसार है। (ख) संस्था सैडमेप को वर्षवार किये गये भुगतानों का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र- अनुसार है। अन्य संस्थाओं को प्रश्नांश (क) में उल्लेखित प्रशिक्षण कार्य हेतु चयनित नहीं किये जाने से प्रश्नांश (ख) की शेष जानकारी निरंक है। (ग) राजगढ़, खरगोन एवं उज्जैन जिलों में सी.आर.पी. (कम्प्यूटर ट्रेनिंग) उक्त अवधि में नहीं कराई गई, परन्तु इस अवधि के आयोजित अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र- अनुसार है। (घ) मनमाने तरीके से कार्य आंवटित करने के प्रकरण प्रकाश में नहीं आए हैं, अतः प्रश्न उत्पन्न नहीं होता।

 

अध्यक्ष महोदय - (उप नेता प्रतिपक्ष श्री बाला बच्चन के थोड़ी देर प्रश्न नहीं पूछने पर) आज प्रश्नोत्तरी नहीं देख पाए?

श्री बाला बच्चन - अध्यक्ष महोदय, मैं इसे देख ही नहीं पाया. मैं विनियोग विधेयक की तैयारी में लगा था.

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र)- आप सदन के प्रति गंभीर नहीं हैं. (हंसी)..

उच्च शिक्षा मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्ता) - डॉ. गोविन्द सिंह जी बातों में उलझाकर रखे हुए हैं.

अध्यक्ष महोदय - आप अनुमति दें तो आगे बढ़ जाएं?

श्री उमाशंकर गुप्ता - अध्यक्ष महोदय, द्वितीय चक्र में ले लेना.

अध्यक्ष महोदय - इसे द्वितीय चक्र में ले लेंगे, जब तक आप देख लीजिए. प्रश्न संख्या 17 श्री जय सिंह मरावी..

श्री बाला बच्चन - माननीय अध्यक्ष महोदय, आप समय दे रहे हैं? प्रश्न संख्या 16, इसमें मैंने पूछा था कि पंचायत मंत्री महोदय बताने की कृपा करेंगे, उसमें जवाब दिया है..

वन मंत्री (डॉ. गौरीशंकर शेजवार) - आपने एक नया रिकॉर्ड बना दिया है. अभी तक विधान सभा में ऐसा नहीं हुआ कि सदस्य उपस्थित हों और इसके बाद उनके प्रश्न को ही यह कहा गया हो कि ठीक है अगले प्रश्न को लेते हैं और आपका द्वितीय चक्र में ले लेंगे तो आपने जो यह नया रिकॉर्ड बनाया है. इसके लिए आपको बहुत-बहुत बधाई.

अध्यक्ष महोदय - द्वितीय चक्र में तो लेते ही हैं.

डॉ. गोविन्द सिंह - अध्यक्ष महोदय को यह जानकारी थी कि द्वितीय चक्र आप आने ही नहीं देंगे. (हंसी)..अध्यक्ष जी को यह मालूम था.

डॉ. नरोत्तम मिश्र - बाला भाई, आप डॉ. गोविन्द सिंह जी से सावधान रहना, यह ऐसी ही चुका देंगे आगे भी.

श्री बाला बच्चन - नहीं, नहीं. मैं विनियोग विधेयक के विषय पर चर्चा कर रहा था माननीय अध्यक्ष महोदय.

अध्यक्ष महोदय - ठीक है, आप प्रश्न पूछिए, कोई दिक्कत नहीं है.

श्री बाला बच्चन --माननीय अध्यक्ष महोदय जो पूछा था कि क्या पंचायत मंत्री महोदय बताने की कृपा करेंगे इसमें आपने आजीविका मिशन में जो कंपयूटर प्रशिक्षण से संबंधित मेरा प्रश्न था. आपने इससे संबंधित जो जवाब दिया है उसको देखा है उसको कृपया करके आप इससे रिलेवेंट जवाब देते हैं तो मैं समझता हूं कि ज्यादा बेटर होगा, जिससे जिस मकसद से यह प्रश्न पूछा है उस पर आपका सही उत्तर आ जाय तो ज्यादा अच्छा होगा. क्या इस संबंध में आप कुछ ऐसी व्यवस्था देंगे ताकि प्रश्न की सार्थकता सिद्ध हो.

श्री गोपाल भार्गव -- माननीय अध्यक्ष महोदय माननीय सदस्य ने जो अंतर्यामी प्रश्न किया है उसके बारे में मैं उनसे बाद में चर्चा कर लूंगा और जो उनकी अपेक्षा होगी उसके हिसाब से काम कर देंगे.

अध्यक्ष महोदय -- वह आपसे चर्चा कर लेंगे और आपकी अपेक्षा के अनुसार कर देंगे.

श्री बाला बच्चन -- मंत्री जी जिस उद्देश्य को लेकर मैंने प्रश्न लगाया था और मैं उसके बारे में लिखकर देता हूं उस पर व्यवस्था दे देंगे तो मैं समझता हूं कि मेरे प्रश्न लगाने की सार्थकता भी होगी और जिस कारण से लगाया गया है उसका महत्व भी होगा.

श्री गोपाल भार्गव-- मैं आपसे मिलकर आपके मन की भावना समझ लूंगा उसके बाद में जैसा भी होगा वैसी कार्यवाही करेंगे..

सेवा सहकारी समिति अमरपाटन की जाँच

17. ( *क्र. 4548 ) श्री जय सिंह मरावी : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या श्री अखिलेश मिश्रा तत्‍कालीन अध्‍यक्ष सेवा सहकारी समिति, अमरपाटन जिला-सतना ने पत्र दिनांक 14.07.2015 के द्वारा समिति में पदस्‍थ कैशियर श्रीमती रेशमा बेगम के विरूद्ध वित्‍तीय अनियमितताओं एवं भ्रष्‍टाचार करने की शिकायत उपायुक्‍त सहकारी संस्‍थाएं जिला-सतना एवं पंजीयक सहकारी संस्‍थाएं भोपाल तथा प्रबन्‍ध संचालक म.प्र. राज्‍य सहकारी बैंक भोपाल को की गई थी? (ख) यदि हाँ, तो उक्‍त अधिकारियों द्वारा शिकायती पत्र के परिप्रेक्ष्‍य में क्‍या कार्यवाही की गई?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जी हाँ। (ख) शिकायत की जाँच उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं, जिला सतना से कराई गई। जाँच प्रतिवेदन में बैंक सेवायुक्त श्री बाबूलाल पटेल शाखा प्रबंधक, शाखा अमरपाटन एवं श्री मुन्नालाल वर्मा, समिति प्रबंधक तथा संस्था कर्मचारी श्रीमती रेशमा बेगम दोषी पाई गई हैं। बैंक कर्मचारियों के विरूद्ध कार्यवाही हेतु मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित, सतना तथा संस्था कर्मचारी के विरूद्ध कार्यवाही हेतु प्रशासक, सेवा सहकारी संस्था मर्यादित, अमरपाटन को उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं, जिला सतना द्वारा निर्देश दिये गये हैं।

श्री जयसिंह मरावी -- अध्यक्ष महोदय मैं माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि उनको दोषी पाया भी गया है तो क्या आज उनको यहां पर निलंबित करेंगे.

श्री गोपाल भार्गव -- अध्यक्ष महोदय अमरपाटन का प्रश्न है. तीन प्रश्न सोसायटियों के लगे हैं. इसमें जो संबंधित कर्मचारी हैं श्रीमती रेश्मा बेगम इनके विरूद्ध कार्यवाही कर दी गई है, और भी जो संबंधित कर्मचारी हैं इनकी जांच करवा रहे हैं. उ समें जो भी दोषी पाये जायेंगे उनके विरूद्ध जल्दी से जल्दा कार्यवाही कर देंगे.

श्री जयसिंह मरावी -- अध्यक्ष महोदय यह कब तक जांच की कार्यवाही कर लेंगे कृपा करके यह बता दें.

श्री गोपाल भार्गव -- एक सप्ताह में कर लेंगे.

 

शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्‍त किया जाना

18. ( *क्र. 6317 ) श्री आरिफ अकील : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या ग्राम देहण्‍डी व किसोनी तहसील शुजालपुर जिला शाजापुर की शासकीय भूमि पर मेसर्स अडानी विल्‍मर लिमिटेड द्वारा अतिक्रमण किया गया था? यदि हाँ, तो प्रकरण क्रमांक 92/अ-68/09-10 के अंतर्गत शासकीय भूमि पर अतिक्रमण का दोषी मानते हुए दिनांक 06/05/2011 को 1500/- रूपये के अर्थदण्‍ड से दण्डित किया गया था? (ख) यदि हाँ, तो क्‍या 4 वर्ष से अधिक समय व्‍यतीत हो जाने के पश्‍चात् भी भू-माफियाओं एवं राजनैतिक दबाव के कारण शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्‍त नहीं कराया गया है? (ग) यदि हाँ, तो तहसीलदार एवं अनुविभागीय अधिकारी के आदेश का पालन नहीं करने के कौन-कौन दोषी हैं? उनके नाम व पद सहित यह अवगत करावें कि कब तक उक्‍त शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्‍त किया जावेगा? यदि नहीं, तो क्‍यों?

 

 

 

 

राजस्व मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) --

श्री आरिफ अकील -- अध्यक्ष महोदय मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि जब आपने अर्थ दण्ड लगा दिया है उन पर तो उनको अतिक्रमण मुक्त क्यों नहीं किया गया है. उसके लिए कौन लोग दोषी हैं उनके ऊपर कार्यवाही करेंगे और वहां पर जो अतिक्रमण हैं वह भले ही कितने भी पावरफुल लोगों का हो, आप भी तो हनुमान जी हो, आप मेहरबानी करके उस अतिक्रमण को हटाने की घोषणा करेंगे.

श्री रामपाल सिंह -- अध्यक्ष महोदय आपने बड़ी उपाधि दे दी है लेकिन हमारे संसदीय कार्य मंत्री जी ने यह प्रस्ताव रखा था कि अल्पसंख्यक मंत्री अकील साहब हैं तो उनको नेता प्रतिपक्ष बनाया जाय तो क्या आप इस पर सहमत रहेंगे.

डॉ नरोत्तम मिश्रा -- आप बतायें कि आपके दल का कोई सहमत है इस बात पर . हमारे दल के सब सहमत हैं...(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय -- उनके प्रश्न का उत्तर आने दें और भी माननीय सदस्यों के प्रस्न हैं. आगे की लाइन पूरी हो गई है आप इस विवादास्पद प्रश्न को नहीं उठायें.

श्री रामपाल सिंह -- माननीय आरिफ अकील साहब ने जो प्रश्न किया है उन पर जुर्माना भी किया है वह उत्तर में आपको मिल गया है. शीघ्र ही अतिक्रमण भी वहां का हटाया जायेगा और आपको मैं पूरी तरह से आश्वस्त करता हूं कि किसी तरह की कोई कमी नहीं रहने देंगे.

श्री आरिफ अकील -- अध्यक्ष महोदय यह शीघ्र ही का कोई समय होता है. शीघ्र तो अर्थ दण्ड हो गयाहै पावर फुल लोग हैं बचे हुए हैं. मैंने तो आपको कहा है कि आप तो हनुमान जी हो, जैसा गोपाल भार्गव जी ने कहा है कि आज, आप भी कहें कि आज अतिक्रमण हट जायेगा, कल हट जायेगा एक सप्ताह में हट जायेगा, ऐसा कुछ कहें.

श्री रामपाल सिंह -- अध्यक्ष महोदय मेरी विनम्र प्रार्थना यह है कि कई बार प्रकरण न्यायालय में च ले जाते हैं, उसमें हम लोगों को प्रक्रिया का सम्मान भी करना होता है. इसलिए मैं आपको अपने शासन की ओर से 3 माह के अंदर हटा देंगे, यदि न्यायालयीन व्यवधान न हो तो.

श्री आरिफ अकील -- आपने अर्थ दण्ड लगा दिया है आपने अपने जवाब में कहीं पर नहीं कहा है कि इसकी अपील हो गई है. मैंने जैसा कहा कि पावरफुल लोग हैं. आप कृपा करके यह बतायें आप सक्षम हैं. आप मेहरबानी करके समय बता दें कि एक सप्ताह में अतिक्रमण हटा देंगे.

श्री रामपाल सिंह -- तीन माह में करने का निवेदन है.

श्री आरिफ अकील -- और कम कर दो मेहरबानी करके.

श्री रामपाल सिंह -- चलिए आपकी बात को रखते हुए और कम, दो माह कर देते हैं.

श्री आरिफ अकील -- एक माह कर दो.

अध्‍यक्ष महोदय -- आपके कहने पर दो माह कर दिया उन्‍होंने.

श्री बाबूलाल गौर -- अंगद की तरह डटे रहो नेता प्रतिपक्ष के लिए, हटना नहीं.

वाटर शेड योजना में निर्माण कार्य की गुणवत्‍ता

19. ( *क्र. 5577 ) श्री अनिल फिरोजिया : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) एकीकृत जलगृहण क्षेत्र प्रबंधन कार्यक्रम क्‍या है? उज्‍जैन जिले में किन-किन स्‍थानों पर योजना संचालित है? विगत पाँच वर्षों में उक्‍त स्‍थानों पर क्‍या-क्‍या निर्माण कार्य कराये गये हैं? उनकी लागत क्‍या थी? (ख) क्‍या उक्‍त निर्माण गुणवत्‍ता के आधार पर कराये गये हैं? उक्‍त निर्माण कार्यों का निरीक्षण/भौतिक सत्‍यापन किस अधिकारी द्वारा कराया गया? क्‍या निरीक्षण तकनीकी विशेषज्ञ से कराया गया? यदि नहीं, तो क्‍यों? (ग) क्‍या उक्‍त योजनाओं के संचालन हेतु कोई समितियां गठित की गई हैं? क्‍या उक्‍त समितियों का नवगठन किया जावेगा? यदि हाँ, तो कब? (घ) उक्‍त योजना से कितने किसान लाभांवित हो रहे हैं? ग्रामवार ब्‍यौर देवें। क्‍या योजना अन्‍य नवीन स्‍थानों पर लागू की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) एकीकृत जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन कार्यक्रम भारत सरकार, ग्रामीण विकास मंत्रालय, भूमि संसाधन विभाग द्वारा प्रवर्तित योजना है, जिसके अंतर्गत जल संरक्षण व संवर्धन, मृदा संरक्षण, उत्पादन प्रणाली व लघु उद्यम तथा आजीविका उन्नयन के कार्य किये जाते हैं। शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ अनुसार है। (ख) जी हाँ। निरीक्षण/भौतिक सत्यापन मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, अनुविभागीय अधिकारी, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, उद्यान अधीक्षक, उद्यानिकी द्वारा कराया गया है। तकनीकी विशेषज्ञ, जिला पंचायत से भी निरीक्षण कराया गया है। (ग) जी हाँ। वाटरशेड समितियां गठित की गई हैं। इन समितियों का गठन नियमानुसार किया गया है, अतः नवगठन नहीं किया जायेगा। (घ) लाभांवित किसानों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब अनुसार है। योजना नवीन स्थानों पर नहीं लागू की जायेगी, क्योंकि भारत सरकार, ग्रामीण विकास मंत्रालय, भूमि संसाधन विभाग ने नवीन परियोजनायें स्वीकृत करने के बजाय पूर्व में स्वीकृत परियोजनाओं को प्राथमिकता पर पूर्ण करने के निर्देश जारी किये हैं।

श्री अनिल फिरोजिया -- मैंने माननीय मंत्री महोदय से जो प्रश्‍न किए थे उनके जवाब तो आए हैं लेकिन मेरा यह निवेदन है कि इसमें जो जवाब दिए गए हैं और पूरी लिस्‍ट दी गई है और यह भी कहा गया है कि भौतिक सत्‍यापन हो गया है जो मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, अनुविभागीय अधिकारी, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, उद्यान अधीक्षक, उद्यानिकी की टीम द्वारा किया गया है, लेकिन मेरा आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से निवेदन है कि साहब, यह जो रिपोर्ट आई है यह असत्‍य रिपोर्ट दी गई है, अगर वास्‍तव में वहां जाकर भौतिक सत्‍यापन करें तो पता चलेगा कि यह जो भी जानकारी दी गई है यह सब भ्रमित करने के लिए दी गई है, असत्‍य जानकारी दी गई है, तो क्‍या मंत्री जी इसकी पुन: जांच करवा देंगे और क्‍या जांच टीम में हमारे जिले के विधायकों को ले लेंगे ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए.

श्री गोपाल भार्गव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ये आईडब्‍ल्‍यूएमपी के जल ग्रहण मिशन हैं इसके काम छोटे-छोटे, फुटकर-फुटकर होते हैं. अब विधायकों को जंगल-जंगल, गांव-गांव घूमना पड़ेगा, मैं यह भी मानकर चलता हूँ कि हर टीम में विधायकों को साथ में ले जाना व्‍यावहारिक रूप से संभव नहीं है. कभी अधिकारी, कर्मचारी उपलब्‍ध होते हैं तो विधायक उपलब्‍ध नहीं होते हैं और कभी विधायक उपलब्‍ध होते हैं तो अधिकारी, कर्मचारी उपलब्‍ध नहीं होते हैं इस कारण से भी यह नहीं हो सकता है. यदि माननीय सदस्‍य को इसमें कोई गड़बड़ी लग रही है तो हम एक वरिष्‍ठ अधिकारी को यहां से भेजकर उसकी फिर से जांच करवा लेंगे.

श्री अनिल फिरोजिया -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह है कि हम जनप्रतिनिधि हैं, हम जमीन से जुड़े हुए लोग हैं, जंगल हो या गांव हो या शहर हो, जाना तो पड़ेगा साहब, जनता के हित के लिए, तो आप तो समिति बनाओ ना साहब, हम लोग धरती पकड़ हैं. हम बिल्‍कुल जाएंगे.

श्री दिलीप सिंह शेखावत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिला पंचायत सीईओ को दो-दो, तीन-तीन बार लिखकर दिया है लेकिन जांच अधिकारियों को निर्देशित करने के बाद भी नहीं करते. इसलिए अगर आप टीम बनाएंगे तो कई चीजें स्‍पष्‍ट हो जाएंगी.

अध्‍यक्ष महोदय -- ठीक है, आ गई बात.

सतीश मालवीय -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसी प्रश्‍न से संबंधित मेरी भी बात है. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से अनुरोध करना चाहूंगा कि जिस प्रकार बात आई है कि ये छोटे-छोटे काम हैं, मैं नहीं मानता हूँ कि किसी भी काम के लिए सरकार का पैसा आता है तो सिर्फ भ्रष्‍टाचार करने के लिए आता है. इस कागज में जितनी भी जानकारी आई है मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि सिर्फ कागजों पर ही काम हुआ है, 80 प्रतिशत भ्रष्‍टाचार इन मामलों में हुआ है. माननीय मंत्री जी का अपने आपमें एक महत्‍व है, इनकी बहुत ज्‍यादा इनके विभाग पर कसावट है और मैं आपसे विनम्र अनुरोध करना चाहूंगा कि जिस प्रकार से आपकी विभाग पर कसावट है उसी प्रकार से अधिकारियों की जांच की जाए और दोषी अधिकारी हों तो उनको दंडित किया जाए. चाहे जांच में विधायकों को रखें या न रखें लेकिन जांच सच हो, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की जाए.

श्री गोपाल भार्गव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उज्‍जैन जिले का प्रश्‍न है, वहां पर सिंहस्‍थ में सारे के सारे अधिकारी फिलहाल लगे हुए हैं क्‍योंकि अगले महीने से सिंहस्‍थ का मेला शुरू होना है. मैं भोपाल से अधिकारियों का एक दल भेजकर फिर से इसकी जांच करा लूंगा और जो भी जानकारी मिलेगी उससे विधायक जी को अवगत भी करा दूंगा.

श्री सतीश मालवीय -- अध्‍यक्ष जी, आपके माध्‍यम से मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

प्रश्‍न संख्‍या -- 20 -- (अनुपस्‍थित)

 

 

 

 

पंचायतों में ई-गवर्नेंस योजना का क्रियान्‍वयन

21. ( *क्र. 4353 ) डॉ. कैलाश जाटव : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) गोटेगांव विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत कितनी पंचायतों में शासन की योजनानुसार ई-गवर्नेंस व्‍यवस्‍था चालू हो गई है? पंचायतवार सूची प्रदान करें। (ख) क्‍या कई पंचायतों में ई-गवर्नेंस हेतु मशीनरी की व्‍यवस्‍था हो चुकी है, लेकिन मानव संसाधन न होने से कार्य नहीं हो रहा है? यदि हाँ, तो विभाग द्वारा इस हेतु क्‍या कार्यवाही की जा रही है?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) गोटेगांव विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत सभी कुल 139 ग्राम पंचायतों में शासन की योजना अनुसार ई-गवर्नेंस की व्यवस्था चालू है। इसके अंतर्गत सभी ग्राम पंचायतों में कम्प्यूटर एवं नेट कनेक्टिविटी की सुविधा है। पंचायतवार सूची पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार(ख) जी हाँ। ग्राम पंचायत स्तर पर मानव संसाधन हेतु संबंधित ग्राम पंचायत के ग्राम रोजगार सहायक को प्रशिक्षण दिया जाकर ई-गवर्नेंस का कार्य किया जा रहा है। शेष प्रश्न ही उपस्थित नहीं होता।

डॉ. कैलाश जाटव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ई-गवर्नेंस के बारे में मैंने निवेदन किया था. इसमें जो जवाब आपका आया है उसमें कहीं पर भी पूरे विधानसभा क्षेत्र में कम्प्यूटरीकरण का काम शुरु नहीं हुआ है और जो भी आपने कम्प्यूटर यंत्र दिये थे वह सभी पंचायतों में सचिवों के घर में रखे हुए हैं. उसकी जानकारी आपके यहां से अधूरी आयी है. माननीय मंत्री जी कृपया बताने का कष्ट करेंगे कि यह कब तक अपने यहां चालू हो जाएगा?

श्री गोपाल भार्गव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, कम्प्यूटरीकरण तो पूरे ब्लाक में हो ही गया .

डॉ. कैलाश जाटव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, इसमें जो जानकारी अधिकारियों ने दी है, वह गलत दी है. कम्प्यूटरीकरण का सामान उपलब्ध है लेकिन इसमें सब जगह पंचिंग हो रही है, ऐसा कहीं पर भी नहीं है. सारा सामान सचिवों के घर पर रखा है. टी.व्ही भी सचिवों के घर पर रखी हुई है. मैंने यह अपनी आंखों से देखा है और आपके जो जीआरएस हैं, वह प्रायवेट ठेकेदारी में जाकर बाहर काम करते हैं.

श्री गोपाल भार्गव-- अध्यक्ष महोदय, यह बात हो सकती है, मुझे जो जानकारी जिले से प्राप्त हुई है कि इस जिले की सभी ग्राम पंचायतों में कम्प्यूटर एवं नेट कनेक्टिविटी की सुविधा है और पंचायतवार सूची भी हमने उपलब्ध करायी है. यदि पंचायत भवन नहीं है, वहां सुरक्षा की व्यवस्था नहीं है, हो सकता है कि यह लोग घर पर रखे हुए हों.हालांकि पंचायत विभाग के हमारे कमिश्नर ने निर्देश जारी किये हैं, अनिवार्य रुप से पंचायत का जो कार्यालय है, जो पंचायत भवन है उसमें ही सारे उपकरण रखे जाएं, अऩ्य स्थान पर नहीं रखे जाएँ और उसके निरीक्षण के लिए जनपद और जिला पंचायत के सीईओ को कहा है कि उसका रेण्डम इन्स्पेक्शन कर लें और यदि नहीं हो तो उस पर कार्यवाही भी करें.

डॉ. कैलाश जाटव--मंत्री जी,इसमें कहीं पर भी फाइबर केबल बिछा नहीं है, नेट का काम बिलकुल नहीं हुआ, यह जानकारी आपको गलत आयी है, इसकी आप जांच करवा लें.

अध्यक्ष महोदय-- प्रश्नकाल समाप्त.

 

(प्रश्नकाल समाप्त)

 

 

 

 

12.02 बजे नियम 267-क के अधीन विषय

अध्यक्ष महोदय-- निम्नलिखित माननीय सदस्यों की सूचनाएँ सदन में पढ़ी हुई मानी जाएंगी--

1. इंजी. प्रदीप लारिया

2. श्री नीलेश अवस्थी

3. श्री घनश्याम पिरौनिया

4. श्री विजयपाल सिंह

5. श्री शैलेन्द्र पटेल

6. श्री विष्णु खत्री

7. श्री प्रदीप अग्रवाल

8. श्री जितू पटवारी

9. श्री बलवीर सिंह डण्डोतिया

10. श्री सचिव यादव

 

 

 

 

 

शून्यकाल में उल्लेख

(1) श्रीमती अर्चना चिटनिस(बुरहानपुर)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, सरकार के निर्णय अनुसार व शासन के निर्देशानुसार कल बुरहानपुर में प्रशासन के अधिकारी जब अवैध उत्खनन रोकने गये तब वहां बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटित हुई. एसडीएम व उनके साथ गये अधिकारी बड़ी मुश्किल से जान बचाकर वापस आ पाये. माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा आपसे आग्रह है कि एक उच्चस्तरीय जांच दल गठित हो जो सप्ताह भर में दोषियों का पता लगाये और दोषियों पर कठोर से कठोर कार्यवाही हो ताकि बुरहानपुर का जनजीवन सामान्य बना रहे और आपराधिक तत्वों पर अंकुश लगे.

(2) डॉ.गोविन्द सिंह(लहार)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने आपसे निवेदन किया था और आपने मुझे आश्वासन भी दिया था. मुरैना जिले में नरेन्द्र शर्मा नाम के वनरक्षक को खनिज माफियाओं द्वारा रेत का डंपर चढ़ा के मार डाला और लगातार यह घटनाएँ प्रदेश भर में हो रही हैं. भिण्ड में भी अभी गोलियां चली हैं, लोग घायल भी हुए हैं.आपसे निवेदन है कि आपने इसमें आश्वासन भी दिया था लेकिन अभी तक चर्चा में आया नहीं है, कृपया कल इसको ले लें.

(3) श्री जितू पटवारी(राऊ)-- अध्यक्ष जी, दो घटनाएँ दो दिन पहले हुई हैं. एक उज्जैन में एक महिला को निर्वस्त्र करके घुमाया गया. ऐसे ही टीकमगढ़ में एक महिला को पंचायत द्वारा सामूहिक रुप से प्रताड़ित कर उस पर चरित्र हनन का आरोप लगाया, उसने उसके बाद आत्महत्या कर ली. महिलाओं पर इस तरह से बड़े अत्याचार हो रहे हैं तो प्रशासन द्वारा इसके लिए कोई योजना क्यों नहीं बनायी जा रही है कि यह घटनाएँ न घटें. इस तरह की घटनाएँ मध्यप्रदेश में दिन-प्रति-दिन बढ़ती जा रही हैं और गौर साहब से पूछो तो कहते हैं कि कार्यवाही कर रहे हैं तो कार्यवाही आखिर करेंगे कब?

(4) श्री गिरीश भण्डारी(नरसिंहगढ़)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, राजगढ़ जिले की नरसिंहगढ़ विधानसभा क्षेत्र के नगर नरसिंहगढ़ में विद्युत मण्डल द्वारा तार हटाकर केबल लगाने का कार्य किया जा रहा है. वह कार्य बहुत घटिया स्तर का है. कार्य घटिया स्तर का होने के कारण आये दिन केबल एवं बक्सों में आग लग रही है. नरसिंहगढ़ नगर में अभी एक शिवरात्रि का मेला लगा हुआ है उसमें 11 मार्च को केबल में आग लगने के कारण एक दुकान जल गयी और बड़ी जनहानि होने से बच गई है. इसी के अंतर्गत नरसिंहगढ़ नगर में घरों के मीटर जबर्दस्ती बदले जा रहे हैं जिससे आये दिन विवाद की स्थिति बन रही है. जो मीटर अभी पिछले वर्ष ही बदले गये थे लेकिन उन मीटरों को पुन: पूरे नरसिंहगढ़ शहर में बदला जा रहा है.जिससे जनता में आक्रोश है.

(5) श्री निशंक कुमार जैन(बासौदा)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, कल गंजबासौदा तहसील में दो अनुसूचित जनजाति के बच्चों को जला कर मार दिया गया. एक तरफ सरकार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के कल्याण के लिए असत्य ढिंढोरे पीट रही है. असत्य घोषणाएँ कर रही हैं और कल गंजबासौदा तहसील के ग्राम सुनारी में दो अनुसूचित जनजाति के बच्चों को घर के अन्दर जला कर खतम कर दिया गया उनके माता-पिता को बंधक बना लिया गया. मैं सरकार से अनुरोध करना चाहता हूँ कि उच्च स्तरीय जाँच दल गठित कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाए.

(6) श्री तरूण भनोत(जबलपुर-पश्चिम)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, कल जबलपुर में एक घटना घटी है....

(7) श्री नीलेश अवस्थी(पाटन)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, कल जबलपुर में अंतर्राज्यीय बस अड्डे पर खूनी संघर्ष हुआ है.

श्री तरूण भनोत-- खूनी संघर्ष हुआ है. जिसमें कई लोग घायल हैं और बहुत गंभीर रूप से घायल हैं. उसमें आरोप लग रहा है कि एक पक्ष से सत्तापक्ष के मंत्री और दूसरे पक्ष से विधायक, उनके गुटों के बीच में संघर्ष हुआ है और 3 दिन से जबलपुर में बस सेवाएँ बंद हैं.

श्री नीलेश अवस्थी-- हड़ताल चल रही है.

श्री तरूण भनोत-- अध्यक्ष महोदय, इसका संज्ञान लिया जाए.

श्री नीलेश अवस्थी-- वर्चस्व की लड़ाई चल रही है.

श्री तरूण भनोत-- जबलपुर से न बसें आ रही हैं और न जा रही हैं. इसमें आरोप लग रहा है कि..(व्यवधान).. दो ग्रुप आपस में झगड़ा कर रहे हैं इसके कारण हजारों लोग परेशान हो रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय-- भनोत जी, अब कृपया बैठ जाइये. आप दोनों की बात रिकार्ड में आ गई. अब श्री हरदीप सिंह डंग अपनी बात कहें.

(8) श्री हरदीप सिंह डंग(सुवासरा)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, कल रात्रि 12 से 1 बजे सुवासरा विधान सभा के शामगढ़ क्षेत्र में एक शो रूम में आग लगी है, हरिवल्लभ पोरवाल जी के यहाँ, सोनालिका ट्रेक्टर में, एक करोड़ का नुकसान हुआ है. उसका मुख्य कारण यह रहा कि नगर पंचायत में जो दो फायर ब्रिगेड पड़ी हैं, एक में डीजल नहीं था और एक में पानी नहीं था. डेढ़ साल पहले भी ऐसी घटना घटी थी इसलिए जो यह नगर पंचायत में पड़ी हैं. थोड़ा आप इसको देखें और जाँच करवाएँ.

(9) श्री सुखेन्द्र सिंह(मऊगंज)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, रीवा जिले में फोर लेन हनमना-मऊगंज-रीवा रोड है जिसमें आए दिन दुर्घटनाएँ होती हैं और वहाँ पर ऐसे मोड़ हैं. एक बौती है, एक मऊगंज पटेहरा है, एक खटखरी है, एक हनमना सलैया है, कल भी एक पेपर बेचने वाले एक कुशवाह परिवार के नये लड़के का एक्सीडेंट हुआ. जो बड़ा दर्दनाक हुआ और ऐसे आए दिन पचासों दुर्घटनाएँ हो चुकी हैं, उसमें मौतें हो चुकी हैं इसलिए मैं इस ओर सरकार का ध्यानाकर्षित कराना चाहता हूँ तो उसमें कम से कम ओव्हर ब्रिज का निर्माण हो और ये जो मौतें हो रही हैं इनको रोका जाए.

(10) श्री मुकेश नायक(पवई)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, कलदा और शामगिरी के पहाड़ों पर पिछले दिनों एक अनुसूचित जनजाति की अज्ञात लोगों ने हत्या कर दी. हत्या का कारण पता नहीं लगता है और लोग यह कहते हैं कि यह हत्या कलदा शामगिरी के पहाड़ पर जो अवैध उत्खनन है उसके संघर्ष को लेकर है. मैं सदन का ध्यानाकर्षित करना चाहता हूँ कि पिछले दिनों एक पूरा का पूरा अवैध क्रेशर वहाँ पर पकड़ा गया जो पाँच साल से चल रहा था. पूरे पहाड़ पर अवैध उत्खनन चल रहा है मेरे ध्यानाकर्षण की सूचना भी आपके पास लंबित है. कृपया सरकार इसको संज्ञान में ले और आवश्यक कार्यवाही करे.

 

 

 

12.09 बजे पत्रों का पटल पर रखा जाना.

 

(क) (I) भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक का 31 मार्च 2015 को समाप्त हुए वर्ष का प्रतिवेदन (राज्य का वित्त)

(II) भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक का 31 मार्च 2015 को समाप्त हुए वर्ष का प्रतिवेदन सामान्य एवं सामाजिक क्षेत्र (गैर-सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम) वर्ष 2016 का प्रतिवेदन संख्या- 1

(III) भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक का 31 मार्च 2015 को समाप्त हुए वर्ष का (राजस्व क्षेत्र पर) प्रतिवेदन वर्ष 2016 का प्रतिवेदन क्रमांक-2

(IV) भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक का 31 मार्च 2015 को समाप्त हुए वर्ष का आथिक (गैर सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम) पर वर्ष 2016 का प्रतिवेदन क्रमांक- 3 तथा

(V) भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक का 31 मार्च 2015 को समाप्त हुए वर्ष का (सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों पर) वर्ष 2015 का प्रतिवेदन संख्या- 4 एवं

(ख) दि प्रोविडेंट इन्वेस्टमेंट कंपनी लिमिटेड का वर्ष 2010-2011 का वार्षिक प्रतिवेदन (31 मार्च 2011 को समाप्त हुए वर्ष हेतु), वर्ष 2011-2012 का वार्षिक प्रतिवेदन (31 मार्च 2012 को समाप्त हुए वर्ष हेतु) एवं वर्ष 2012-2013 का वार्षिक प्रतिवेदन (31 मार्च 2013 को समाप्त हुए वर्ष हेतु)

 


 

आयुक्त नि:शक्तजन मध्यप्रदेश का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2014-15

 

 

मध्यप्रदेश राजमार्ग निधि का तृतीय वार्षिक लेखा एवं प्रतिवेदन वर्ष 2014-15

 

 

 

 

 

 

 

 

12.11 बजे ध्यानाकर्षण

नीमच जिले में कृषि हेतु पुजारियों को मुआवजा राशि न दी जाना

श्री कैलाश चावला (मनासा)-- माननीय अध्यक्ष महोदय,

राजस्व मंत्री (श्री रामपाल सिंह)--माननीय अध्यक्ष महोदय,

श्री कैलाश चावला--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्रीजी से यह निवेदन करना चाहूंगा कि गत खरीफ की फसल में जो नुकसान हुआ है उसमें ऐसे मंदिरों के पुजारी जिनके पास सेवा भूमि उपलब्ध है उनको भी मुआवजा नहीं दिया जा रहा है. जैसा आपने जवाब में बताया है कि धर्मस्व विभाग द्वारा एक परिपत्र जारी किया गया है उसके तहत उनको मुआवजा नहीं मिल रहा है किन्तु राजस्व विभाग द्वारा यह निर्णय किया गया था कि जो सेवा भूमि है उसका मुआवजा कृषकों को, पुजारियों को मिलेगा यह दोनों विभागों में जो परिपत्र की विसंगति है इसी के परिणामस्वरुप उनको मुआवजा नहीं मिल पा रहा है तो क्या माननीय मंत्रीजी जो राजस्व विभाग ने निर्णय किया है उसके अनुसार पुजारियों को जो सेवा भूमि है उसका मुआवजा दिए जाने का आदेश प्रदान करेंगे.

श्री रामपाल सिंह :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय चावला जी ने पुजारियों को लेकर जो प्रश्‍न किया है. मेरा उनसे निवेदन है कि राजस्‍व विभाग की तरफ से खुला मामला हे, जो वह है, वही काट है उसको ही हम सहायता देते हैं और तो और सरकारी जमीन में भी उसको अभी हम बांट रहे हैं, पट्टों में भी हम दे रहे हैं. अध्‍यक्ष महोदय, हमने मंदिरों को भी राशि जारी कर दी है. अब धर्मस्‍व विभाग बीच में आकर एक पत्र लिख देते हैं. उन्‍होंने कह दिया कि उनके खाते में राशि जमा करिये. यह चूंकि पुजारियों से संबंधित मामला है, इसलिये हम इसको गंभीरता से लेगें, हमने तो कुल राशि 1 करोड़, 5 लाख जारी कर दी है. हमारे विभाग की तरफ से हमने राशि जारी कर दी है. 1300 के लगभग मंदिरों को हमने राशि दी है. लेकिन धर्मस्‍व विभाग से जो पत्र गया हुआ है, उसका भी परीक्षण करायेंगे और निश्चित रूप से माननीय चावला जी ने बात रखी है, उसका समाधान हम करेंगे.

श्री कैलाश चावला :- अध्‍यक्ष महोदय, मैं सोचता हूं कि यह मंत्रिमण्‍डल की सामूहिक जिम्‍मेदारी है. अगर परिपत्र के परिणाम स्‍वरूप राजस्‍व विभाग ने राशि भी दे दी है और इसमें पुजारियों को नुकसान भी हुआ है. माननीय मंत्री जी को यह घोषणा करना चाहिये की राजस्‍व विभाग को सर्क्‍युलर है, उसके अनुसार कार्यवाही की जायेगी अगर वह सेवाभूमि है तो.

अध्‍यक्ष महोदय :- को - आर्डिनेशन तो करना पड़ेगा. मंत्री जी आप कुछ कहना चाहते हैं तो कह दीजिये.

श्री प्रदीप अग्रवाल :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह केवल एक जिले की नहीं, संम्‍पूर्ण मध्‍यप्रदेश की स्थिति है. जब पुजारी अपने पैसे से फसल बोता है, तो धर्मस्‍व विभाग का इसमें कोई राईट्स ही नहीं है, वही बोयेगा और वही काटेगा.

अध्‍यक्ष महोदय:- आपकी बात आ गयी है. आप लोग बैठ जायें.

श्री रामपाल सिंह :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय चावला जी और माननीय सदस्‍यों ने जो भावना व्‍यक्‍त की है. इसको गंभीरता से लेते हुए हमारा तो निर्देश जारी है पूरे प्रदेश में माननीय चावला जी, लेकिन बीच में धर्मस्‍व विभाग का पत्र आ गया है, इस पत्र की भी चर्चा करके माननीय मंत्री जी, इसका निराकरण करके और आपकी जो भावना है उससे मैं सहमत हूं और माननीय सदस्‍य की भावना से भी मैं सहमत हूं.

श्री कैलाश चावला :- मंत्री जी यदि आप सहमत हैं तो आपको धन्‍यवाद्.

(2) सीधी एवं सिंगरौली जिले में पेयजल संकट होने से उत्‍पन्‍न स्थिति.

श्री कमलेश्‍वर पटेल :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी मंत्री(सुश्री कुसुम महदेले):-

श्री कमलेश्वर पटेल - माननीय अध्यक्ष महोदय, हमने जो ध्यानाकर्षण लगाया था इस ध्यानाकर्षण लगाने का मतलब कोई राजनीतिक मुद्दा बनाने का नहीं है. जो विभाग की तरफ से जानकारी है वह सत्य पर आधारित नहीं है. सच बात तो यह है कि आधी से ज्यादा नलजल परियोजनाएं बंद हैं और बहुत सारे हैंडपंप सूख गये हैं और बहुत सारे हैंडपंपों का जल स्तर नीचे चला गया है और जब राईजर पाईप और संधारण की जब बात होती है तो पीएचई और पंचायत विभाग के विवाद की वजह से अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में बराबर विवाद बना हुआ है और उसकी वजह से संधारण का काम नहीं हो पा रहा है मेरा मंत्री जी से सिर्फ यह निवेदन है माननीय मंत्री महोदया सिर्फ यह व्यवस्था दे दें कि आने वाले मार्च के बाद और ज्यादा संकट आने वाला है और ज्यादातर  सीधी और सिंगरौली का एरिया पहाड़ी है और वहां दूर-दूर आबादी है. पीने के पानी का भारी संकट है तो ऐसी व्यवस्था बना दें कि आने वाले समय में और ज्यादा गहरा संकट न हो और कोई अप्रिय स्थिति निर्मित न हो. क्योंकि इसमें जो प्रतिशत दिया है वह बिल्कुल सत्यता से परे है जो जानकारी विभाग से आई है.

सुश्री कुसुमसिंह महदेले - माननीय अध्यक्ष महोदय, ग्रामीण विकास विभाग और पीएचई विभाग का जो आपने कहा कि विवाद है तो कोई विवाद नहीं है. पंचायत ग्रामीण विकास विभाग से हमको  100 करोड़ रुपये प्राप्त हो गये हैं जिसमें से 50 करोड़ रुपये बिजली के बिल के लिये है और बाकी संधारण के लिये और हम अतिशीघ्र जहां राईजिंग पाईप बढ़ाने की जरूरत है और जो बिल्कुल सूख चुके हैं उनको हमने उखाड़ दिया है हम पानी का बिल्कुल संकट नहीं आने देंगे यह मैं माननीय सदस्य को अवगत कराना चाहती हूं.

श्री कमलेश्वर पटेल - अध्यक्ष महोदय,

(..व्यवधान..)

अध्यक्ष महोदय - आप पहले सुन लीजिये फिर आपकी बात भी सुन लेंगे आप लोग कृपया बैठ जाएं. इस संबंध में 139 की सूचना भी माननीय सदस्यों ने दी है और अलग से इसलिये कोई बात नहीं कहने दी जायेगी. उस 139 की चर्चा के दौरान आपको सबको सुविधा रहेगी. श्री कमलेश्वर पटेल सिर्फ एक प्रश्न बिना भाषण के पूछेंगे.

(..व्यवधान..)

अध्यक्ष महोदय - यह रिकार्ड में नहीं आयेगा.

श्री कमलेश्वर पटेल- हम कोई भाषण नहीं दे रहे अध्यक्ष महोदय, सिर्फ माननीय मंत्री जी को यह जानकारी दे रहे हैं कि हमारे सहजी ग्राम पंचायत में बहेरा की जो नलजल परियोजना है ग्यारह महिने से बंद है सिर्फ इसी विवाद के चलते जो माननीय मंत्री जी ने विभाग की ओर से जो भी जानकारी दी है इसी तरह और भी उदाहरण हैं और जहां हैण्डपंप सूख गये हैं वहां क्या मंत्री जी दूसरे हैंडपंप खनन की व्यवस्था कराएंगी ?

सुश्री कुसुमसिंह महदेले - माननीय अध्यक्ष महोदय, निश्चित रूप से  यदि राईजिंग पाईप बढ़़ाने की जरूरत है तो राईजिंग पाईप बढ़ाएंगे और जिस नलजल योजना की बात इन्होंने कही है अब हमें पंचायत ग्रामीण विकास विभाग से राशि प्राप्त हो गई है हम उसको भी अतिशीघ्र सुधरवाएंगे.

प्रतिवेदनों की प्रस्तुति/स्वीकृति

प्रतिवेदनों की प्रस्तुति

याचिका समिति का तीसवां, इक्तीसवां एवं बत्सीसवां प्रतिवेदन

 

श्री केदारनाथ शुक्ल (सभापति)--अध्यक्ष महोदय, मैं याचिका समिति का तीसवां इक्तीसवां एवं बत्तीसवां प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूं.

 

सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति का पिचासीवां से नब्बेवां प्रतिवेदन

 

श्री यशपालसिंह सिसोदिया (सभापति)--अध्यक्ष महोदय, मैं सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति के पिचासीवां से नब्बेवां प्रतिवेदन सदन में प्रस्तुत करता हूं.

 

याचिकाओं की प्रस्तुति

 

अध्यक्ष महोदय--आज की कार्यसूची में सम्मिलित सभी याचिकाएं प्रस्तुत की हुई मानी जाएंगी.

शासकीय विधि विषयक कार्य

(सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


 

12:30 बजे वर्ष 2016-17 की अनुदान की मांगो पर मतदान की चर्चा का पुनर्ग्रहण (क्रमश:)

 

(1) मांग संख्‍या- 55 महिला एवं बाल विकास

 

अध्‍यक्ष महोदय- जैसा कि कल माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी ने प्रस्‍ताव रखा था, महिला एवं बाल विकास विभाग की चर्चाएं हैं, यह महिला वर्ष भी है, इस सदन में जो हमारी सम्‍मानीय महिला सदस्‍य हैं, यदि वही चर्चा करेंगी तो उचित रहेगा, प्रतिपक्ष के नेता जी ने आधी सहमति दी थी, उसी के परिप्रेक्ष्‍य में एक सदस्‍य ले लिए गए थे, परन्‍तु आज दोनों पक्ष स‍हमति दें, तो इसे आगे बढ़ाया जा सकता है ।

संसदीय कार्य मंत्री(डॉं नरोत्‍तम मिश्र) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक निवेदन और है, जब यह चर्चा चल रही हो तो अपनी सभापति तालिका में अगर कोई महिला हों, तो वह उस समय वहां पर रहें ।

नेता प्रतिपक्ष (श्री बाला बच्‍चन) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा अभी आपने बोला और माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी का भी उल्‍लेख किया, लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूं, महिलाओं के अलावा कुछ पुरूषों के नाम भी हमारी तरफ से चले गए हैं और वह बोलना चाहते हैं, उन्‍होंने तैयारी भी की है, तो थोड़ा थोड़ा समय आप उन्‍हें भी दें, अध्‍यक्ष महोदय, हम आपके प्रस्‍ताव से सहमत हैं, हमारे पास भी बोलने के लिए पर्याप्‍त महिलाओं की संख्‍या है, संसदीय कार्य मंत्री जी की तरफ से जो प्रस्‍ताव आया है, हम भी इसको स्‍वीकार करते हैं और आप चर्चा करवाएं ।

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र- मैं आपको धन्‍यवाद देता हूं ।

अध्‍यक्ष महोदय- पूरे सदन की ओर से आपको धन्‍यवाद, सभापति के लिए जैसा कि माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी ने कहा है, हमने सूचना भेजी है ।

श्रीमती पारूल साहू केशरी(सुरखी) - आदरणीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मांग संख्‍या 55, महिला बाल विकास के समर्थन में खड़ी हुई हूं, आदरणीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं महिला बाल विकास की मंत्री महोदय को, उनके द्वारा किए गए प्रयासों के लिए बहुत - बहुत बधाई देना चाहूंगी, आपके प्रयासों से विभाग में एक नवीन ऊर्जा का संचार हुआ है, जिसका असर आज जमीनी हकीकत में पूरे प्रदेश में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, आज जो आंगनवाड़ी केन्‍द्र काम कर रहे हैं, वह पूरे प्रदेश में महिलाओं और बच्‍चों के जीवन में संजीवनी से कम नहीं हैं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय मध्‍यप्रदेश के मुखिया आदरणीय शिवराज सिंह जी चौहान द्वारा 1 मार्च को दिए गए भाषण में यह बताया गया था कि मध्‍यप्रदेश में लगातार शिशु मृत्‍यु दर, आईएमआर और मातृ मृत्‍यु दर में लगातार गिरावत आई है, लेकिन वह प्रसन्‍न नहीं हैं, वह तो इसको सुधारना चाहते हैं, मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी को, इस सेल्‍फ कांपटीशन की भावना के लिए, काम करने के लिए, बहुत- बहुत बधाई देना चाहूंगी, कहीं मैंने यह पढ़ा है, माननीय मंत्री जी को भी बताना चाहूंगी कि हर व्‍यक्ति के 100 भाग्‍य होते हैं, पर उन भाग्‍यों में से जब एक भाग्‍य अच्‍छा होता है तो उनके घर में बेटा होता है और जब व्‍यक्ति के 100 में से 100 भाग्‍य अच्‍छे होते हैं, तब उनके घर में बेटी का जन्‍म होता है, इसलिए ऐसा भी कहा गया है कि लड़के तो भाग्‍य से होते हैं, पर लड़की जब होती हैं तो सौभाग्‍य से होती हैं और इस सौभाग्‍य को सुरक्षित करने के लिए और आगे बढ़ाने के लिए अगर किसी ने काम किया है, तो मध्‍यप्रदेश के महिला बाल विकास विभाग ने और हमारे प्रदेश की सरकार ने किया है ।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं बताना चाहूंगी कि 5 और 6 मार्च को नई दिल्‍ली में लोकसभा स्‍पीकर के प्रयासों से, हमारी ताई जी के प्रयासों से, एक महिला प्रतिनिधि की राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी का आयोजन किया गया था, इस संगोष्‍ठी में इस बात पर व्‍यापक जोर दिया गया था कि महिलाओं की शिक्षा एवं स्‍वास्‍थ्‍य की चिंता आज हमारे बच्‍चों के उज्‍जवल भविष्‍य के लिए अनिवार्य है, इसके साथ- साथ जो समाज महिला शक्ति और कौशल विकास को महत्‍व देता है, उस समाज एवं राष्‍ट्र की अर्थ- व्‍यवस्‍था सबसे बेहतर हो सकती है ।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं विधानसभा में यह भी कहना चाहूंगी कि महिला बाल विकास विभाग की मंत्री जी, आपके प्रभाव से ही आज विभाग की गतिविधियों से पूरे प्रदेश में महिलाओं के स्‍वास्‍थ्‍य की जो व्‍यापक चिंता की जा रही है और बच्‍चों के पोषण साथ ही साथ संस्‍कार एवं प्रारंभिक शिक्षा पर ध्‍यान दिया जा रहा है, उसके लिए मैं आपको धन्‍यवाद देना चाहूंगी क्‍योंकि किसी भी समाज, प्रदेश या देश की मजबूती अगर कोई है तो वह महिलाएं और बच्‍चे ही हैं, यह एक रीढ़ की हड्डी का काम करते हैं और इनकी मजबूती के लिए अगर आज कोई काम कर रहा है, तो मध्‍यप्रदेश सरकार में महिला बाल विकास विभाग कर रहा है, ताकि हमारे बच्‍चों की, बेटियों की इनकी नीव मजबूत हो सके और आने वाले समय में जैसा कि सभी को पता है, पूरे विश्‍व में हमारा देश, भारत देश एक यंग नेशन से आगे बढ़ रहा है और यह जिम्‍मेदारी हमारे ऊपर है कि जो हमारी आने वाले युवा हैं, हमारे बच्‍चें हैं, उनका स्‍वास्‍थ्‍य, उनकी शिक्षा बेहतर हो, यह काम आज महिला बाल विकास मध्‍यप्रदेश में कर रहा है और इसकी मजबूती के लिए जो कार्य किए जा रहे है, उसके लिए मैं बहुत- बहुत बधाई देना चाहूंगीं, साथ ही साथ ज्‍यादा समय न लेते हुए, मैं इतना ही कहूंगी कि आज पूरे प्रदेश में हम सबको चिन्‍ता है, हमारे बच्‍चों की और महिलाओं को मजबूत करना, उनको समय पर ज्ञान देना और साथ ही साथ किस तरह से ग्रामीण क्षेत्र में जाकर हमारी आंगनवाडि़यां जो काम कर रही हैं, उसके बारे में हमने कभी सोचा नहीं था, उनको जो शिक्षा दी जा रही है, हमारे बच्‍चों के लिए जो किया जा रहा है, महिला बाल विकास विभाग की ओर से बहुत अच्‍छी पहल की जा रही है ।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अंत में, मैं माननीय मंत्री जी को अपनी ओर से दो सुझाव देना चाहूंगी, मध्‍यप्रदेश में जो नवीन आंगनवाड़ी भवन स्‍वीकृत हो रहे हैं, उन्‍हें ग्राम पंचायतों में, जनसंख्‍या के आधार पर स्‍वीकृत किए जाएं, मेरा कहने का अर्थ यह है कि जिन गांवों की जनसंख्‍या अधिक है, वहां पर पहले आंगनवाड़ी भवन बनाए जाएं और स्‍वीकृत कराए जाएं, कम से कम एक भवन उन जगह पर होना चाहिए, दूसरी मांग मैं यह करूंगी कि जिन आंगनवाड़ी केन्‍द्रों पर बच्‍चों की संख्‍या अधिक है या जो जनपद मुख्‍यालय पर हैं या नगरीय क्षेत्र में हैं, उनमें डिजीटल एजुकेशन 3 से 6 वर्ष के बच्‍चों के लिए प्रारंभ किए जाएं, जिसमें नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी का सिलेब्‍स ऑडियो वीडियो के माध्‍यम से एलसीडी, टी.व्‍ही में दिखाया जाए, इसमें एक एलसीडी, टी.व्‍ही और पेन ड्राइव के उपयोग से सरकार के कम खर्चे पर मुझे लगगता है, बहुत अच्‍छा एजुकेशन सिस्‍टम बनाया जा सकता है, गरीब वर्ग के बच्‍चों के लिए आंगनवाड़ी में इस तरह की शिक्षा भारत में एक बड़ी पहल हो सकती ह, इसका प्रयोग मैंने खुद अपने विधानसभा क्षेत्र में भी किया है, राहतगढ़ ब्‍लाक में शासकीय प्राथमिक शाला में, उस गांव का नाम कल्‍याणपुर है, इसमें मैंने एक एलसीडी टी व्‍ही और पेन ड्राइव के माध्‍यम से सिलेब्‍स, बड़े बड़े स्‍कूल में होता है, वह रेम्‍स के साथ पूरा सिलेब्‍स दिया है और आज पूरे विधानसभा में जो भी लोग उपस्थित हैं, अगर कल्‍याणपुर गांव में जाकर उस स्‍कूल को देखेंगे तो आप यकीन नहीं मानेंगे कि वह ऐसा स्‍कूल है, जहां छोटे छोटे बच्‍चे इतने बेहतरीन तरीके से चाहे इंग्लिश रीडिंग की बात हो, चाहे राइटिंग की बात हो, They are excelling like anything बहुत एक्‍सेल किया है उन्‍होंने इस प्रयोग को, मैं चाहती हूं कि हमारी आंगनवाड़ी में भी लाया जाए, इससे बहुत बड़ा परिवर्तन आएगा, समाप्‍त करने से पहले मैं एक बात और करना चाहूंगी, इस संबंध में राज्‍यसभा के सदस्‍य माननीय जावेद अख्‍तर जी द्वारा उनके कार्यकाल के लास्‍ट वर्किंग डे पर जो बात कही गई है, बहुत ही सुन्‍दर भाषण उनकी ओर से दिया गया है, मैं उनके भाषण को सलाम करती हूं और भारत माता की जय कहती हूं, क्‍योंकि यह हम सभी का अधिकार है और हमें फक्र हैं कि हम भारतीय हैं, जय हिन्‍द, जय भारत ।

श्रीमती शकुन्‍तला खटीक(करैरा)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, महिला बाल विकास के अंतर्गत संचालित आंगनवाड़ी केन्‍द्र समय पर नहीं खुलते हैं, इनका खुलने का समय सुबह 9 बजे का है, दूरदराज के क्षेत्रों में इनका कोई समय निश्चित नहीं है, आंगनवाड़ी केन्‍द्रों पर कार्यकर्ता और सहायिका दोनों को उपस्थित रहना चाहिए, कई केन्‍द्रों पर केवल सहायिका मिलती हैं, कार्यक्रर्ता नहीं मिलती हैं, आंगनवाड़ी केन्‍द्रों में जिन बच्‍चों के नाम दर्ज हैं, उनमें से कुछ बच्‍चों के नाम स्‍कूलों में भी दर्ज हैं, उनकी उपस्थिति स्‍कूल और आंगनवाड़ी में दोनों में दर्ज रहती है, किसी भी आंगनवाड़ी केन्‍द्र में बच्‍चों की उपस्थिति 15 या 20 प्रतिशत से अधिक नहीं होती है जबकि 50 प्रतिशत से अधिक दिखाई जाती है, बच्‍चों को और गर्भवती महिलाओं को पोषण आहार समय पर नहीं दिया जाता है, कभी कभी दिया जाता है, महिला बाल विकास विभाग की सुपरवाईजर आंगनवाड़ी केन्‍द्रों का समय समय पर निरीक्षण नहीं करती हैं, अगर समय समय पर निरीक्षण किया जावे तो कुछ सुधार हो सकता है, आंगनवाड़ी केन्‍द्रों में नाश्‍ता व खाना मेनू अनुसार नहीं दिया जाता है, इसकी सूचना आंगनवाड़ी केन्‍द्रों पर चस्‍पा नहीं की जाती है ।

श्रीमती संगीता चारेल(सैलाना)--अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 55 के समर्थन में बोलने के लिए खड़ी हुई हूं.

अध्यक्ष महोदय, लाड़ली लक्ष्मी योजना सबसे पहले देश में मध्यप्रदेश में लागू की गई. यह माननीय मुख्यमंत्रीजी श्री शिवराज सिंह चौहान की परिकल्पना और दृढ़ इच्छा शक्ति से ही लागू की गई है. इस योजना का प्रभावी असर यह रहा कि देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी ने न केवल मुख्यमंत्रीजी की प्रशंसा की बल्कि केन्द्र सरकार द्वारा इस योजना को पूरे देश भर में लागू किया गया. लाड़ली लक्ष्मी योजना का सिर्फ यह उद्देश्य नहीं है कि 18 वर्ष पूर्ण होने पर लाड़ली बेटियों के खाते में 1.18 लाख रुपये जमा हो जाये बल्कि इसके पीछे जो चिन्तन है वह कि लिंगानुपात में बेटियों का जन्म बालकों की तुलना में बढ़े तथा भ्रूण हत्या न हो. बेटियों को इस योजना से न केवल शिक्षित होने हेतु प्रोत्साहित किया गया बल्कि 18 वर्ष की आयु में ही उसका विवाह हो ऐसी परिकल्पना हमारे मुख्यमंत्रीजी की है.

अध्यक्ष महोदय, सरकार के संवेदना एवं सहयोग के चलते लाडली लक्ष्मी योजना को लागू कर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ को प्राथमिकता दी गई है. बेटी के जन्म उत्सव को महा उत्सव से जोड़ने का अनुसरण किया गया.

अध्यक्ष महोदय,इसी के तहत सबला योजना के अंतर्गत 15 जिलों में गत वर्ष 8.50 लाख किशोरियों को पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराया गया है. 11 से 18 वर्ष की किशोर बालिकाओं को उनके स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर पर सुधार, घरेलू कार्य के संपादन एवं दक्षता, जीवन कौशल को बढ़ावा देना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है. इसके क्रियान्वयन हेतु बालिकाओं को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण व्यक्ति साफ-सफाई तथा प्रचलित जन कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी एवं परिवार आधारित जीवन उपयोगी कौशल उन्नयन परामर्श किया जा रहा है.

अध्यक्ष महोदय,इस योजना से इसके बेहतर परिणाम प्राप्त हो रहे हैं. इस योजना को प्रदेश के सभी जिलों में लागू किया गया है. इससे 11 से 14 वर्ष की शाला त्यागी एवं 14 से 18 वर्ष की सभी किशोर बालिकाओं को इस योजना का लाभ मिल सकेगा.

अध्यक्ष महोदय, इसी के तहत किशोरियों में माहवारी स्वच्छता संबंधी जागरुकता हेतु प्रोजेक्ट उदिता प्रदेश के तीन जिले ग्वालियर, झाबुआ और इंदौर में पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर 19 मई 2015 से प्रारंभ किया गया. इसके तहत किशोरियों में सेनेटरी नेपकीन के प्रयोग एवं व्यवहार में लाने हेतु प्रोत्साहित करने हेतु गांव स्तर पर बालिकाओं को आंगनवाड़ी केन्द्रों के सहयोग से सेनेटरी नेपकीन कराये गये. योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु इसका विस्तार सीहोर,राजगढ़,रायसेन,बुरहानपुर,भोपाल और विदिशा में किया गया. इसके तहत जन सहयोग एवं समन्वय से 597 वेंडिंग स्थापित की गई तथा 11226 आंगनवाड़ी केन्द्रों पर उदिता कार्नर स्थापित किये गये.

अध्यक्ष महोदय, पहले महिला बाल विकास विभाग को कोई जानता-पहचानता नहीं था लेकिन आज की स्थिति में विभाग की योजनाओं के माध्यम से महिलाओं एवं बालिकाओं को समग्र विकास के कई कार्यक्रम निरन्तर संचालित किये हैं. इस हेतु माननीय मुख्यमंत्रीजी और माननीय मंत्रीजी को बहुत बहुत धन्यवाद.

अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्रीजी से निवेदन करना चाहती हूं कि हमारी सैलाना विधानसभा में कुछ आंगनवाड़ी भवन अपूर्ण हैं, उन्हें पूर्ण करा दें ताकि वहां बच्चों को बैठने की सुविधा मिल जाये और आंगनवाड़ी व्यवस्थित तरीके से चल सके. धन्यवाद.

श्रीमती शीला त्यागी(मनगवां)--अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 55 के विरोध में अपनी बात रखने के लिए खड़ी हुई हूं.

अध्यक्ष महोदय, जैसा कि इस समय पूरे देश और प्रदेश में महिला सशक्किकरण की बयार चल रही है. आज बेटी और महिलाएं विद्यालय, महाविद्यालय में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही है. वे पढ़ लिख कर पुरुषों के बराबरी पर आ रही हैं. चाहे उद्योग हो, चाहे खेल हो, तकनीकी, चिकित्सा, संगीत, आईटी, कला,साहित्य और प्रशासनिक सेवाओं के साथ राजनीति में भी राष्ट्र की सेवा में अग्रणी रही हैं.

अध्यक्ष महोदय, वर्तमान में महिलाओं के सशक्तिकरण की जितनी भी योजनाएं चल रही हैं, मैं आपसे कहना चाहती हूं कि देश में आधी आबादी होने के बाद भी महिलाओं से संबंधित जितनी भी महिलाओं से संबंधित कल्याणकारी योजनाएं बनायी गई हैं, उनका धरातल में क्रियान्वयन सही नहीं हो रहा है. धीमी गति से हो रहा है.

अध्यक्ष महोदय, महिलाओं के साथ आज भी बड़े पैमाने पर भेदभाव हो रहा है. खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में. महिलाएं खेत, खलिहान और कारखानों में काम कर रही हैं लेकिन उनको प्रताड़ना मिलती है. मध्यप्रदेश सरकार ने इनके विकास के लिए जो योजनाएं बनायी हैं वह थोडी व्यवस्थित तो चल रही हैं लेकिन मैं मंत्रीजी को अपनी ओर से सुझाव देना चाहती हूं कि मेरी विधानसभा में जो भी आंगनवाड़ी केन्द्र चल रहे हैं लगभग 200-300 आंगनवाड़ी केन्द्र हैं, वह किराये पर चल रहे हैं. आपकी सांझा चूल्हा की जो स्कीम है, उसके तहत आज भी एसटी/एससी/ओबीसी घर में तो किराये से चलते नहीं हैं, ये सक्षम लोगों के घर पर चलते हैं. जब वे सांझा चूल्हा के लिए जाते हैं तो उनके साथ भेदभाव होता है. बच्चों को कहते हैं गंदे-कुचले कपड़े पहने हैं, नाक बह रही है, मेरी आपसे गुजारिश है, सुझाव है कि अभी मध्यप्रदेश सरकार मार्च से ईजीएस स्कूल बंद कर रही है, जहां 15-20 बच्चे पढ़ते थे. वहां के शिक्षकों की पोस्टिंग की जा रही है. बच्चों को दूसरी स्कूलों में भेजा जा रहा है तो ईजीएस स्कूल के जो भवन खाली हो रहे हैं, उनको यदि आंगनवाड़ी भवन के नाम से अलाट कर देंगे तो सांझा चूल्हा की जो व्यवस्था है वह सही तरीके से चलने लगेगी और लोगों का भला हो जायेगा.अध्यक्ष महोदय, पोषण आहार के नाम पर उनके साथ जो भेदभाव होता है वह नहीं होगा.

अध्यक्ष महोदय, मंत्रीजी से मैं एक और गुजारिश करुंगी कि आंगनवाड़ी केन्द्रों में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग से खाद्यान्न तो आ जाता है लेकिन आपके विभाग के माध्यम से पोषण आहार के लिए, खाना बनाने के लिए, सब्जी, तेल, मसाले के लिए जो नकद राशि भुगतान की जा रही है, मेरे ख्याल से वह ठप पड़ी है. अभी आंगनवाड़ी में नहीं पहुंची है इसलिए बच्चों की संख्या भी कम हो रही है और प्रदेश में कुपोषण का स्तर भी बढ़ता जा रहा है. मैं आपसे गुजारिश करती हूं कि साझा चूल्हा की व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त किया जाये, और पूरे प्रदेश में कुपोषण पर नियंत्रण की शपथ माननीय मुख्यमंत्रीजी ने ली है और कहा कि मैं उनका मामा हूं तो उनके मामा के रहते हुए, मुख्यमंत्री रहते हुए प्रदेश के बच्चे कुपोषित नहीं होंगे. उनके साथ अन्याय नहीं होगा. मैं मंत्रीजी को धन्यवाद देना चाहती हूं कि आप लोगों के नेतृत्व में मुझे दिल्ली भी जाने का मौका मिला. वहां पर महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए जो अभियान चलाया गया, उसमें हम शामिल हुए. हमे वहां जानकारी मिली कि किस तरह से महिलाएं समाज को आगे बढ़ाने और अपने विकास के लिए आगे काम कर सकती है. मैं मंत्रीजी बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहती हूं कि उनके सानिध्य में हम लोगों ने उस कार्यक्रम से बहुत कुछ सीखा. भविष्य में प्रदेश सरकार की ओर इसी प्रकार के कार्यक्रमों में हमको जाने को मिलेगा तो हम लोग अपने अपने क्षेत्र में और भी सशक्त रुप से काम कर पायेंगे. धन्यवाद.

श्रीमती ममता मीना(चाचौड़ा)--अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 55 के समर्थन में खड़ी हुई हूं.

अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्रीजी और माननीय मुख्यमंत्रीजी को बहुत बहुत बधाई देती हूं कि आपने महिलाओं को बराबरी का दर्जा इस प्रदेश में दिलाया है. मैं महिलाओं के लिए कहना चाहूंगी यत्र नारियेस्तु पूजन्ते,रमन्ते तत्र देवता जहां नारियों की पूजा होती है वहां देवता वास करते हैं. इसी तरह से महिला बाल विकास विभाग ने जो महिलाओं, बालिकाओं के लिए योजनाएं बनायी हैं, वह सराहनीय योजनाएं हैं. इसके लिए माननीय मुख्यमंत्रीजी को जितनी बधाई और धन्यवाद दिया जाये उतना कम है.

अध्यक्ष महोदय, 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया, चूंकि यह महिला सशक्तिकरण का युग है. महिलाएं हमेशा विकास की धुरी रही है. अगर महिला को आगे किया है तो महिला विकास की धुरी के रुप में समाज को विकास की ओर और आगे की पंक्ति में ले जाकर खड़ी करेगी.समाज को विकास की ओर और अग्रिम पंक्ति में महिलाएं खड़ा करेंगी. उसी के साथ, मामी जी ने जो 8 मार्च का आयोजन करवाया है, जो अन्‍तर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस के रूप में, पूरे देश में मनाया जाता है और हमारे मध्‍यप्रदेश में उसे अलग तरीके से मनाया गया है. कहते हैं कि सशक्‍त नारी का पहला कदम अधिकारों की ओर क्‍योंकि मामी जी ने विशेष जन सुनवाई का कार्यक्रम 8 मार्च को रखवाया है. जिसमें महिलाओं ने अपने से संबंधित समस्‍याएं रखी हैं.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसी तरह से विशेष महिला ग्राम सभाओं का आयोजन करवाया है. जिसमें महिलाएं खुलकर ग्रामसभा में अपनी बात कह पाईं एवं ग्राम पंचायत से अपने गांव की बात कर पाई क्‍योंकि 50 प्रतिशत का आरक्षण, माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने महिलाओं को दिया हुआ है. पंच से लेकर जिला पंचायत तक, पार्षद से लेकर महापौर तक 50 प्रतिशत महिलाएं ग्राम पंचायत और नगरीय निकायों में बैठी हुई है इसलिए जो ग्राम सभा की गई है, उस ग्राम सभा के माध्‍यम से महिलाओं की उपस्थिति के माध्‍यम से, विकास की बात की गई. इसलिए नारी शक्ति चौपाल, सांस्‍कृतिक कार्यक्रमों एवं प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया है, इसी तरह संघर्षशील महिलाओं का भी सम्‍मान किया गया है, जिन्‍होंने गांव के अन्‍दर विकास की बात कर, गांव के अन्‍दर जागरूकता की बात करके, ऐसी महिलाएं जो गांव में कुछ हट कर कार्य करती हैं, उन महिलाओं का 8 मार्च को सम्‍मान किया गया.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उसी तरह से सशक्‍त नारी का दूसरा कदम, कहते हैं कि महिला अबला, यह कहना बहुत गलत है, महिला अब अबला नहीं, सबला हो गई हैं. हमारे महिला शौर्य दल के माध्‍यम से, माननीय मंत्री जी ने जो 2013 में इस योजना को लागू किया, जैसे ही मंत्री बनी वैसे ही मामी जी ने लागू किया और महिला अपने अधिकारों के प्रति उनसे लड़ाई लड़ती हैं एवं उनके प्रति अत्‍याचार भी होते हैं, हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी ने शौर्य दल को सम्‍मा‍नित भी किया और शौर्य दल को हर क्षेत्र में पुरस्‍कार मिला है. हमारे शौर्य दल की महिलायें थाने में गईं, किस तरह से एफ.आई.आर. होती है और किस तरह से वे अपनी बात थाने में जाकर रखें.

12.53 [सभापति महोदया (श्रीमती अर्चना चिटनिस) पीठासीन हुईं]

 

माननीय सभापति महोदया, तीसरा कदम, सशक्‍त नारी का तीसरा कदम अदालत की ओर है. महिलाओं का शौर्य दल न्‍यायालय में गया और विधिक सहायता अधिकारी से संवाद करके अपनी समस्‍याओं के बारे में बताया. इसी तरह से चौथे दिन नारी शक्ति का चौथा कदम, रोजगार की ओर. स्‍वरोजगार मेले का आयोजन किया गया क्‍योंकि हमारी महिला बाल विकास विभाग की ओर से प्रशिक्षण के माध्‍यम से उनको बताया गया कि ब्‍यूटी पार्लर में प्रशिक्षण दिया जाता है कि वे अपनी आजीविका का साधन कैसे करें. उसी के साथ, उनको ज्‍वैलरी बनाना सिखाया जाता है और ज्‍वैलरी के माध्‍यम से कि वे अपनी परिवार की आजीविका को कैसे चलायें ? उसी के तहत रोजगार मेले का आयोजन किया गया. सशक्‍त नारी का पांचवां कदम, निवेश की ओर. जो हमारी शौर्य दल की महिलायें हैं, पूरा दल सभी सदस्‍यों को लेकर बैंक एवं पोस्‍ट-ऑफिस गये और बचत कैसे की जाये ? कैसे खाते खोले जाये ? कैसे पैसे निकाले जायें ? अधिकारियों से संवाद किया. उसी तरह सशक्‍त नारी का छटवां कदम, अपने परिवार और स्‍वास्‍थ्‍य की ओर विशेष महिला स्‍वास्‍थ्‍य शिविर का आयोजन किया गया, राष्‍ट्रीय महिला और अन्‍तर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस के शुभ अवसर पर, स्‍त्री रोग विशेषज्ञों और नेत्र रोग विशेषज्ञों से पोषण आहार कैसे सुनिश्‍चत किया जाये ?

माननीय सभापति महोदया, इसी तरह से बी.पी. एवं शुगर आदि हेतु शौर्य दल की महिलाओं ने आयोजन किया. सशक्‍त नारी का सातवां कदम जैसे कल बात आई थी, नशे से संबंधित. हमारे शौर्य दल में महिलाएं हैं, जो हमारा दल है, ग्राम पंचायत के अन्‍दर गठित होता है, वह शौर्य दल नशा मुक्ति केन्‍द्र का पूरा भ्रमण करता है, नशा मुक्ति अधिकारियों का स्‍वागत, नशे के संबंधित में फिल्‍म दिखा कर कि नशा समाज के लिए कलंक है. हमारे शौर्य दल ने इस चीज को बताया है कि नशे से क्‍या-क्‍या हानिकारक होता है ? फिल्‍म के द्वारा बताया गया और उसके बाद में बहुत सारे लोगों ने मौके पर शपथ भी ली कि नशा हमारे मध्‍यप्रदेश में बन्‍द होना चाहिए.

सभापति महोदया - आपके विशेष सुझाव हों तो बताएं. मैं आपको बोलने से नहीं रोक रही हूँ. लेकिन सुझावात्‍मक हों तो बताइये.

श्रीमती ममता मीना - सभापति महोदया, महिला सशक्तिकरण का दिवस है इसलिए मैं महिलाओं के ऊपर बोल रही हूँ. हमारी लाडो अभियान यह कितना अच्‍छा अभियान रहा, जिसमें बाल-विवाह, हमारी लाडो अभियान ने रूकवाया. हमारे प्रधानमंत्री जी ने इस तरह की बालिकाओं का सम्‍मान भी किया है. इस समाज के अन्‍दर जो कुरीतियां थीं जैसे बाल-विवाह करना. इस बाल-विवाह को हमारी लाडो अभियान के तहत महिला बाल-विकास के प्रचार-प्रसार के माध्‍यम से, हमारी बालिकाओं को इतना जागरूक किया. उस जागरूकता के माध्‍यम से, ऐसे कई विवाह रूकवाये गये और उस विवाह को शून्‍य भी घोषित किया गया. साथ में, जो लोग नहीं माने उन पर अपराध भी दर्ज कराये गये हैं. लाड़ली लक्ष्‍मी योजना एक बहुत बड़ी योजना है कि सन् 2006 से प्रारम्‍भ हुई. अब तो हमारी लाड़लियां 22 लाख के लगभग पहुँच गई है. यह हमारी सरकार ने बड़ा कार्य किया है. पहले लड़कियां अभिशाप एवं बोझ कही जाती थीं. आज वे वरदान के रूप में बन गई हैं.

माननीय सभापति महोदया, इसी तरह से 'अनमोल' है. आज, अगर किसी स्‍त्री को बच्‍चा नहीं है, अगर उसे बच्‍चा मिल जाये तो वह उसके लिए बहुत अनमोल है. उस अनमोल के साथ-साथ, हमारे जिस आश्रम से, वे बच्‍चा लेकर आ रहे हैं. वे हमारे लिए अनमोल हैं. उसके तहत ऐसा नहीं है कि बच्‍चा दे दिया, उसकी देख-रेख पूरी तरह से होती है. इस धरती पर अनुसूइया एवं सीता जैसी स्त्रियां हुईं, जिन्‍होंने समाज में महिला नारी को एक सम्‍मान की दृष्टि एवं नारी जाति को बहुत कुछ दिया है. मैं माननीय मंत्री जी से कहना चाहती हूँ कि जो आदर्श आंगनवाड़ी केन्‍द्र आपने गांव-गांव में स्‍थापित किये हैं, यह बहुत सराहनीय कदम आपकी ओर से और माननीय मुख्‍यमंत्री जी की ओर से है. उसी के साथ, उनमें भी आप मिनी आंगनवाड़ी केन्‍द्र बनायें. इससे एक मिनी आंगनवाड़ी केन्‍द्र पूरी तरह से मजबूत हो, सजग हो. मिनी आंगनवाड़ी केन्‍द्र जरूर बनाये जायें. यह मेरा सुझाव भी है. आदर्श आंगनवाड़ी केन्‍द्र, जो आपने ब्‍लॉक स्‍तर पर दिये हैं, उनकी संख्‍या भी बढ़ाई जाये क्‍योंकि आदर्श आंगनवाड़ी केन्‍द्र शानदार, सुन्‍दर और सुसज्जित तरीके से हों, अगर उनकी ज्‍यादा संख्‍या बढ़ेगी तो सरकार का प्रचार-प्रसार भी बढ़ेगा.

माननीय सभापति महोदया, आपके माध्‍यम से, हमारी बालिकाओं को इतने सुन्‍दर-सुन्‍दर नामों से, जब वह शादी करके ससुराल में जाये तो 1 लाख 18 हजार रूपये का चैक लेकर एवं हमारी लाड़ली लेकर जाये तो आपने इतना बड़ा सम्‍मान, इस समाज में हमारी लड़कियों को दिलवाया, इसके लिये मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी एवं माननीय मंत्री जी को धन्‍यवाद देती हूँ. मैं नारियों के सम्‍मान में एक बात और कहना चाहती हूँ कि:

नारी तुम केवल श्रद्धा हो,

विश्‍वास रजत नग पग तल में,

पीयूष श्रोत सी बहा करो,

जीवन के सुन्‍दर समतल में, (जीवन के सुन्‍दर ...)

आपने मुझे बोलने का समय दिया, उसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

श्रीमती चन्‍दा सिंह गौर (खरगापुर) - माननीय सभापति महोदया, मैं मांग संख्‍या 55 का विरोध करते हुए, अपनी बात रखते हुए आपके माध्‍यम से, माननीय मंत्री जी के समक्ष कुछ सुझाव रखना चाहती हूँ. जो मेरी विधासनभा खरगापुर से जुड़े विषय हैं. आंगनवाड़ी केन्‍द्रों में जो गोद भराई कार्यक्रम होता है और जो राशि महिलाओं की दी जाती है, वह कम है. उसे बढ़ाये जाने की व्‍यवस्‍था की जाये एवं ऐसे आयोजनों में महिला जन-प्रतिनिधियों को अवश्‍य रूप से बुलाया जाये. मेरी विधानसभा खरगापुर में जो आदिवासी परिवार, जिन ग्रामों में एवं मोहल्‍लों में अधिक संख्‍या में निवास करते हैं. जैसे एकता नगर चरी, पचेर, हीरापुर नजदीक सरकनपुर, सेवार, सौरयाखिरक, बाबा खेरा, करमासन, करमासन, राहुल ग्राम टपरियन, आदिवासी मोहल्ला है. दौनपटार, आदिवासी मोहल्ला जनकपुर एवं रैकवार मोहल्ला बुढ़की खेरा आदि इन स्थानों पर नये आंगनवाड़ी केन्द्र खोले जायें, तो आम जनता के हित में होगा. मैं मंत्री जी से निवेदन करना चाहती हूं कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं का वेतन बढ़ाया जाये. जिससे इन छोटे पदों पर पदस्थ महिलाओं के परिवारों के लिये आजीविका अच्छी तरह से चल सके. परियोजना अधिकारियों एवं सहायिकाओं तथा कार्यकर्ताओं की कार्यशैली क्षेत्र में किस तरह की चल रही है, जिसकी जांच किये जाने हेतु प्रत्येक विधायक को अपने विधान सभा क्षेत्र में देख-रेख हेतु शासन के नियम अनुसार महिला एवं बाल विकास विभाग द्वरा स्पष्ट आदेश जारी किये जायें, जिससे कुपोषित, गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों को शासन की योजनाओं का पूर्ण लाभ मिल सके और समय समय पर केंद्रों का ओचक निरीक्षण हो सके. महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रचारित किया जा रहा है कि महिलाओं के विरुद्ध हिंसा के प्रकरणों में कमी आई है. घरेलू निर्णय में उनकी भागीदारी का प्रतिशत बढ़ा है. यह बात राज्य सरकार किस आधार पर बात कर रही है, यह सदन में भी आना चाहिये, उसके लिये क्या कोई सर्वेक्षण किया गया है, किया गया है तो किसने किया है, सर्वेक्षण का तरीका क्या था. यह सब बातें सदन में आती हैं, तो अन्य विधायकों को भी समझने में आसानी होती है. सभापति महोदया, आपने बोलने के लिये समय दिया, धन्यवाद.

1.02 बजे अध्यक्षीय घोषणा

माननीय सदस्यों के लिये भोजन विषयक

 

सभापति महोदया -- माननीय सदस्यों के लिये सदन की लॉबी में भोजन की व्यवस्था की गई है. माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि वे सुविधानुसार भोजन ग्रहण करने का कष्ट करें.

 

 

1.03 वर्ष 2016-17 की अनुदानों की मांगों पर मतदान (क्रमशः)

श्रीमती उमादेवी खटीक (हटा) -- सभापति महोदया, मैं महिला एवं बाल विकास मंत्री जी द्वारा प्रस्तुत मांग संख्या 55 का समर्थन करती हूं और कटौती प्रस्तावों का विरोध करती हूं. हमारे हिन्दुस्तान के पूर्व साहित्यकारों ने सोच कर महिला शब्द बनाया होगा. महिला में 3 अक्षर जो हमारे लिये महत्वपूर्ण है. मां से ममता, ह से हिम्मत और ल से लड़ाई. महिला अपनी ममता को आंचल में समेटकर समाज में हिम्मत से अपने परिवार को संभालने के लिये लड़ाई लड़कर आगे बढ़ती है. हमारे मध्यप्रदेश में हम सब के भाई लोकप्रिय ऊर्जावान, स्वप्नदृष्टा मुख्यमंत्री जी, भैया शिवराज सिंह जी ने प्रदेश की महिलाओं, बालिकाओं के उत्थान के लिये सामाजिक, आर्थिक, स्वास्थ्य और पोषण की स्थिति में व्यवस्थाओं को प्राथमिकताओं में शामिल कर नित्य नई योजनाएं बनाकर नई ऊंचाइयों की ओर कदम बढ़ाया है. यही कारण है कि पंचायत स्तर से 50 प्रतिशत का आरक्षण का अधिकार हमें मिला. शासन का लक्ष्य महिलाओं का पूर्ण सशक्तिकरण है. राज्य की महिला नीति की मूल अवधारणा महिलाओं के प्रति समाज की मानसिकता में सकारात्मक परिवर्तन लाना है, जिससे साथ में विराजमान अधिकारियों में असामनता की स्थिति समाप्त हो, महिलाओं के प्रति समानता एवं सम्मान की भावना एवं उसकी सुरक्षा, आर्थिक आत्म निर्भरता एवं विकास में समान भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिये. इस बात का ध्यान भी विभाग ने रखते हुए महिला नीति बनाई. इसी प्रकार लाड़ली लक्ष्मी योजना अंतर्गत किसी प्रकार का भेदभाव न रखते हुए सभी वर्गों के समाज के लिये योजना बनाई, इसलिये समाज में बहुत हर्ष व्याप्त है. आज हमारे प्रदेश के 51 जिलों के 313 विकास खण्डों में 52117 ग्रामों में योजना अंतर्गत अब तक लगभग 22 लाख लाड़लियों का पंजीयन कराया गया. इसी प्रकार बालिकायें बिना हिचक के स्वछंद रुप से अपने घर से निकलें और आत्मनिर्भर बनें, इसके लिये शौर्य दल योजना बनाकर महिलाओं के प्रति हिंसा को रोकने तथा जागरुकता बढ़ाने के लिये सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में शौर्य दल की स्थापना की.

सभापति महोदया, मेरी विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत कुछ सुझाव भी हैं और कुछ कार्य भी हैं. मेरी विधान सभा हटा में एक वृद्ध आश्रम की आवश्यकता है, ताकि हटा के असहाय परित्यक्त बुजुर्ग लाभान्वित हो सकें. विकास खण्ड में खुले आश्रय देख भाल तथा संरक्षण की भी आवश्यकता है. बच्चों, विशेषतया अनाथ बच्चों, भीख मांगने वाले, आवारा तथा काम काजी, कूड़ा बीनने वाले, धूम घूमकर तमाशा दिखाने वाले बच्चों के लिये खुले आश्रय का निर्माण होना बहुत ही जरुरी है. मेरी विधान सभा में लगभग 120 आंगनवाड़ी केंद्र भवन विहीन हैं. उनके निर्माण के लिये जिले में राशि भेजी जाये. मैं मंत्री जी से हमारे यहां जो भवन विहीन आंगनवाड़ी केंद्र हैं, उन्हें पूरा कराने के लिये निवेदन करती हूं. जनसंख्या के आधार पर कुछ ग्राम एवं मजरों टोलों में नये आंगनवाड़ी केंद्र खोले जाने की भी अनुशंसा की जाये. जिला स्तर के अधिकारियों को भी निर्देश किया जाये. सभापति महोदया, अंत में मैं दो लाइन बोलकर अपनी बता को समाप्त करती हूं. नारी निभायेगी नये दायित्व सारे, अब न कोई उसे अबला कहकर पुकारे. नारी अब सरिता सी बहेगी आगे और उसके कष्ट होंगे किनारे, क्योंकि शिवराज जी जैसे भाई हैं हमारे. सभापति महोदया, आपने बोलने के लिये अवसर दिया, धन्यवाद.

सभापति महोदया -- अगर नाम न दिया हो और कोई हमारी विधायक बहन बोलना चाहती है, तो वह भी अपनी बात संक्षिप्त में रखे. आज जब यह लिबर्टी हमको मिली है, महिला सदस्यों को कि अपनी बात कहें , तो इसका हमें पूरा पूरा उपयोग करना चाहिये.

श्री बहादुर सिंह चौहान -- सभापति महोदया, आज आप भी महिला के रुप में आसंदी पर विराजमान हैं और सदन में महिला विधायक बोल रही हैं, इसके लिये आपको धन्यवाद.

सभापति महोदया -- पर धन्यवाद देने वाला पुरुष है, इसकी मुझे खुशी है.

श्री वैलसिंह भूरिया -- सभापति जी, वास्तव में आप आज माननीय अध्यक्ष जैसे लग रहे हैं.

खाद्य मंत्री (कुंवर विजय शाह) -- सभापति जी, आपके पिताजी, श्री बृजमोहन मिश्र जी विधान सभा के माननीय अध्यक्ष रह चुके हैं और वह कहीं न कहीं आपके ब्लड में है. मैं समझता हूं कि जो कुछ है, वह हमें पुरातत्व में मिला है, पिताजी से मिला है.

सभापति महोदया -- भैया धन्यवाद.

श्रीमती योगिता नवलसिंग बोरकर (पंधाना) -- सभापति महोदया, मैं आपको बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहूंगी कि मेरा नाम लिस्ट में न होते हुए भी आज आपने बोलने के लिये हमें समय दिया. मैं महिला बाल विकास मंत्री जी को बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहूंगी, जिनके नेतृत्व में यह विभाग इतना अच्छा संचालित हो रहा है. प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री, हमारे भाई, बच्चों के मामा और बहनों के भाई को भी मैं बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहूंगी, जिन्होंने मातृ शक्ति को बढ़ाने के लिये नये नये आयाम खड़े किये हैं. आज अगर पंचायत राज में 50 प्रतिशत महिलाएं जीतकर आई हैं, तो वह हमारे माननीय मुख्यमंत्री, श्री शिवराज सिंह चौहान जी की देन है. मैं उनको बहुत बहुत धन्यवाद और बधाई देना चाहूंगी. मैं उनको बहनों की ओर से एक आशीर्वाद और देना चाहूंगी कि ऐसे भाई हमेशा ऐसी सीट पर बैठते रहें और देश एवं प्रदेश विकास करता रहे तथा महिलाएं आगे बढ़ती रहें. जैसे लड़के और लड़कियों का लिंग अनुपात कम हो गया था, उसी को ध्यान में रखते हुए महिलाओं की संख्या बढ़ाने के लिये उन्होंने लाड़ली लक्ष्मी योजना बनाई, जो आज बेटियों को जीने का अधिकार मिला और एक नया आयाम मिला है. हमारे क्षेत्र में हमारी मंत्री जी गयी थीं, उनके आगमन से हमें भी बहुत खुशी मिली और बहुत अच्छे नये आंगनवाड़ी भवन बनाये हैं, जिनके माध्यम से कुपोषण भी दूर हो रहा है. सभापति महोदय पहले हमारे प्रदेश को बीमारू राज्य की श्रेणी में रखा जाता था, कुपोषण की संख्या भी बहुत थी किंतु जब से मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की शासन आया है तब से बीमारू राज्य से स्वस्थ्य राज्य में इसका नाम परिवर्तित हुआ है, कुपोषण भी दूर हुआ है. यह प्रदेश के मुख्यमंत्री जी की बड़ी उपलब्धि है. माननीय मंत्री महोदय को जब से विभाग की बागडोर सोंपी गई है बहुत अच्छा काम प्रदेश में हो रहा है, नये नये आंगनवाडी केन्द्र बनाये जा रहे हैं. माननीय मंत्री महोदय जब मेरे क्षेत्र में गये थे तो वहां की आंगनवाडी के कर्मचारियों ने समस्यायें रखीं थी कि इतनी मंहगाई के दौर में 5000 के वेतन से गुजारा नहीं होता है. मैं माननीय मुख्यमंत्री जी से माननीय मंत्री जी से अनुरोध करूंगी कि यदि उनके वेतन को बढ़ाने की घोषणा करेंगे तो अच्छा होगा. सभापति महोदया, अंतिम निवेदन मैं माननीय मंत्री महोदय से करना चाहूंगा कि मेरे क्षेत्र में 2 वर्षों में उन्होंने बहुत से आंगनवाड़ी केन्द्र केन्द्र स्वीकृत किये हैं, कुछ बनना बाकी हैं उनको यथाशीघ्र पूर्ण कराने का आश्वासन वे देंगी. आपने समय दिया उसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद, जय हिंद, जय भारत, भारत माता की जय.

श्रीमती ललिता यादव(छतरपुर) -- माननीय सभापति महोदय, अपनी बात प्रारंभ करूं उसके पहले महिलाओं के सम्मान में मैं कुछ कहना चाहती हूं

ओस की बूंदों सी होती हैं बेटियां, जरा भी दर्द हो तो रोती हैं बेटियां

रोशन करेगा बेटा एक ही कुल को, दो दो कुलों की लाज रखती हैं बेटियां.

आदरणीय सभापति महोदय, मैं आज आपके माध्यम से मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी को, हमारी माननीय मंत्री जी जिनको पूरा प्रदेश लाड़ली मामीजी बोलता है उनको ढेर सारी शुभकामनायें और बधाई देना चाहती हूं जिनके निर्णय और उस पर सभापति महोदया के निर्णय किया कि आज महिला एवं बाल विकास विभाग की मांगों पर सिर्फ महिलायें ही बोलेंगी इसके लिये आपको बहुत बहुत शुभकामनायें.

माननीय सभापति महोदय माननीय मुख्यमंत्री और मंत्री महोदया ने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये महिला पंचायत के माध्यम से कई अनुकरणीय योजनायें महिलाओं के हित में बनाई हैं जिसकी सराहना पूरे देश में हुई है. वर्तमान में महिला सशक्तीकरण वर्ष चल रहा है. इसका जीता जागता उदाहरण यही है कि आज सदन में केवल महिलायें ही बोल रही हैं. मैं सदन के माध्यम से माननीय प्रधान मंत्री जी को भी बधाई देना चाहती हूं कि उन्होंने गुलाबी गेंग की संपत पाल का सम्मान किया है, उनके सम्मान में 8 मार्च को प्रदेश में पिंक ड्रेस कोड लागू किया, इसके लिये मंत्री जी को बधाई. प्रधान मंत्री जी ने एक बात और कही है कि महिलायें तो पहले ही सशक्त थीं पुरूष उनको सशक्त बनाने वाले होते कौन हैं. इस बात के लिये हम प्रधान मंत्री जी सम्मान करते हैं, बधाई देते हैं. यह हमारे मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री और महिला बाल विकास मंत्री जी ने यह भी कहा है कि "बेटी है तो कल है," और "बेटी है तो सृष्टि है. बेटी सृष्टि की रचयिता है". इससे निश्चित रूप से महिलाओं का मान और सम्मान बढ़ा है. मैं इसके लिये भी बधाई देना चाहती हूं.

राज्य मंत्री, लोक स्वा.परिवार कल्याण (श्री शरद जैन) -- माननीय सभापति महोदया जी, एक छोटा सा निवेदन है, जैसा कि माननीय विधायिका जी बोल रही हैं कि पुरूष होते कौन हैं महिला को सशक्त करने वाले, ऐसा नहीं लगता कि मामा के सामने प्रश्नचिह्न लग गया.

श्रीमती ललिता यादव- मामा ने तो बहनों को सशक्त बनाया है यह प्रश्नचिह्न की बात नहीं है यह माननीय प्रधानमंत्री जी ने कहा है.

श्री शरद जैन-- ठीक है आप मामी जी की तारीफ करें लेकिन बीच में मामा का जिक्र भी करें.

श्रीमती ललिता यादव-- मामी जी की तारीफ में मामा जी की तारीफ स्वयं आ जाती है.

सभापति महोदय-- आप अपनी बात बहुत अच्छी तरह से कह रही हैं. हम महिलायें यह पक्की तौर पर निर्णय कर लें कि किसी की बात का रियेक्शन नहीं करेंगी तो आधी परेशानी स्वत: ही साल्व हो जायेगी. कृपया बात रखें.

श्रीमती ललिता यादव- सभापति महोदया, पहले जब बेटी पैदा होती थी, मां बाप के सीने का बोझ मानी जाती थी और जिस घर में बेटी पैदा होती थी उस बहू की कद्र कम हो जाती थी. प्रदेश के मुख्यमंत्री जी और आदरणीय महिला एवं बाल विकास मंत्री जी ने इस बात पर बहुत अच्छी तरह से मनन किया, बेटियों की संख्या निरंतर कम होती जा रही थी, समाज में उनका कद भी कम होता जा रहा था. इस बात को लेकर के लाड़ली लक्ष्मी योजना जो हमारी सरकार ने बनाई उसकी तारीफ पूरे देश में हुई है. देश की पूर्व राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल ने भी इसकी सराहना की थी. लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत एक निश्चित राशि का प्रावधान हमारी सरकार ने किया है. जब बेटी पैदा होगी एक निश्चित राशि देंगे, बेटी को निशुल्क पढ़ायेंगे और जब बेटी श्वसुराल जायेगी 1 लाख 18 हजार रूपये की राशि लेकर के जायेगी तो उस बेटी का मान बढेगा. पूरे प्रदेश में जिस तरह से बेटियां शिक्षित हुई हैं , मैं इस सदन के माध्यम से इसके लिये भी मुख्यमंत्री जी को मंत्री जी को बहुत बहुत शुभकामनाएं देती हूं.

सभापति महोदया, आदरणीय मामी जी महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री हैं उन्होंने संगठन में रहते हुये भी हम सब लोगों का..

सभापति महोदय- कृपया सरकार के संदर्भ में बात करेंगे तो उचित होगा.

श्रीमती ललिता यादव-- ठीक है. आदरणीय मंत्री महोदया ने विभाग की बागडोस सम्हालने के बाद में महिलाओं को आगे लाने के लिये सतत कार्य किया है. 20 वर्षों से मैं देख रही हूं जिस तरह से उन्होंने महिलाओं के महत्व को बढ़ाया है, आगे बढ़ाने का काम किया है, महिलाओं को प्रोत्साहित किया है, मैं सदन में उसका उल्लेख करना चाहूंगी आदरणीय मामी जी का स्नेह जिस तरह से बहनों को मिला है, पूरे प्रदेश की बहनों को मिला है इसकी में सराहना करती हूं. बधाई देना चाहती हूं. सभापति जी, विभाग द्वारा लाडो अभियान के तहत बाल विवाह को रोकने का भी प्रयास किया है.

सभापति महोदय-- अगर आप नई ईश्यू पर बात करेंगी तो बेहतर रहेगा. पुनरावृत्ति न हों, आप सुझाव दें, मांग करें, अच्छे कार्यों की प्रशंसा करें. लेकिन पुनरावृत्ति न करें.

श्रीमती ललिता यादव--सभापति जी, लाडो अभियान के तहत प्रदेश में बाल विवाह रोकने का कार्य विभाग की मंत्री ने किया है, इस अभियान से 40 लाख लोगों को जोड़ा गया,इसके लिये शुभकामनायें. इसका परिणाम यह हुआ कि 81 हजार 724 बाल विवाह को सम्पन्न होने से रोका गया. सभापति जी, गांव में लोग बाल विवाह कर देते हैं उसका कारण यह होता है कि जो गरीब तबके के लोग होते हैं उनको लगता है कि बेटी की शादी जल्दी कर दें, इसके लिये विभाग द्वारा प्रचार प्रसार तो किया जा रहा है लेकिन और अधिक प्रचार प्रसार की आवश्यकता है. इससे गांव में निवास करने वालों की सोच बदलेगी.

सभापति महोदय शौर्य दल का गठन महिला हिंसा को रोकने के लिये, अत्याचार, अपराध, योन शोषण रोकने के शौर्य दल का गठन किया है .24 जून 2013 को इस दल का गठन किया गया है. इसमें हमारा छतरपुर जिला भी शामिल है. इसके लिये शुभकामनायें. उषा किरण योजना के तहत महिलाओं एवं बच्चों को, 18 साल से कम वर्ष की बालिकाओं के लिये घरेलू हिंसा रोकने के लिये महिला संरक्षक अधिनियम 2005, नियम 2006 के तहत राज्य सरकार द्वारा उषा किरण योजना संचालित की जा रही है . इसमें महिलाओं एवं बच्चों को घरेलू हिंसा के संरक्षण के अधिकार प्राप्त हुये हैं. मानसिक, लेंगिक, आर्थिक, बोद्धिक और भावनात्मक आदि प्रकार की हिंसा को इसमें शामिल किया गया है.

सभापति जी, जिस तरह से प्रदेश के मुख्यमंत्री के नेतृत्व में माननीय महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदय ने महिलाओं को आगे बढ़ाने का काम किया है, उनको सशक्त करने का काम किया है, इसके लिये महिलाओं को अभी निशुल्क ड्रायविंग लाईसेंस बनाने की सौगात दी है उसके लिये शुभकामनायें. मंत्री जी हमारे क्षेत्र में कुछ जगहों पर आंगनवाडी अधूरी हैं , कई जगहों पर आंगनवाडी केन्द्र स्थापित नहीं हुय़े हैं, अनुरोध है कि आंगनवाड़ी का निर्माण करने की कृपा करेंगी. आंगनवाड़ी केन्द्र के जो कार्यकर्ता या सहयोगी रहती हैं तो अपने घर में ही वे आंगनवाड़ी संचालित करती हैं तो उसका संचालन ठीक से नहीं हो पाता है इसलिये यह भी निर्देश जारी करें कि घर में आंगनवाड़ी संचालित न हो. इन्हीं शब्दों के साथ आदरणीय मामी जी को, आदरणीय मुख्यमंत्री जी को और आदरणीय सभापति जी को ढेर सारी शुभकामनायें देती हूं जिन्होंने महिला विधायकों के नाम मांग में शामिल न होने के बाद भी हमें अपनी बात को रखने का अवसर प्रदान किया इसके लिये बहुत बहुत बधाई, बहुत बहुत शुभकामनायें, धन्यवाद.

सभापति महोदया-- मैं आज माननीय महिला बाल विकास मंत्री जी को आमंत्रित करने से पहले कुछ 2-3 बातें अपनी ओर से भी विनम्रता पूर्वक कहना चाहती हूं. जब हम महिला बाल विकास की बात करते हैं तो हम महिलाओं के कल्‍याण की बात नहीं करते, हम संपूर्ण जगत के कल्‍याण की बात करते हैं और सबसे बड़ा जो संकट महिलाओं के सामने होता है वह यह होता है कि अगर उनको हर बात के लिये पुरूषों के आगे हाथ फैलाना पड़ें, हर छोटी बड़ी आवश्‍यकता के पीछे उनको कहीं न कहीं मांगना पड़े, अगर ईश्‍वर और महिला बाल विकास मंत्री और माननीय मुख्‍यमंत्री जी एक ही चीज महिलाओं के लिये कर सकें तो महिलाओं को आर्थिक तौर पर स्‍वावलंबी बनाना, महिलाओं का सबसे बड़ा महिलाओं के ऊपर किया गया अनुग्रह होगा, उनके साथ में बड़ा सपोर्ट होगा. कहा गया है कि-

Life is bitter to the very bone, if you are Women poor and alone.

मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करती हूं कि नेशनल अर्बन लाइवलीहुड मिशन, नेशनल रूरल लाइवलीहुड मिशन और ग्रामोद्योग इन सबके साथ कोऑर्डीनेट कर महिलाओं की ट्रेनिंग भी करें, उनको हम स्किल्‍ड भी करें ओर उनके बनाये गये उत्‍पाद के लिये मार्केटिंग की व्‍यवस्‍था बनायें तो महिलाओं को परिवार और सरकार पर आश्रित होने की आवश्‍यकता ही कम से कम होगी. महिलाओं की आजीविका की तरफ अधिक से अधिक हम अगर उनको सेल्‍फ डिपेन्‍डेन्‍ट बनाने के लिये हम म‍हती काम करेंगे तो बहुत बड़ा काम हम देश और दुनिया के सामने रख सकेंगे. वैसे मध्‍यप्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण की दृष्टि से बहुत अच्‍छा काम किया गया है, देश उसका अनुकरण कर रहा है. मैं आदरणीय माया सिंह जी को आमंत्रित करने से पहले यह कहूंगी कि हम मोटर साइकिल पर बैठे हुये पुरूष की कल्‍पना करते हैं, हम जीप या कार चलाते हुये पुरूष की कल्‍पना करते हैं, हम घोड़ा चलाते हुये भी पुरूष की कल्‍पना करते हैं पर शेर पर बैठी हुई हम केवल महिला की ही कल्‍पना कर सकते हैं. मैं माया सिंह जी को कहती हूं कि वह अपनी मांगों पर अपना चर्चा आगे बढ़ायें.

सभापति महोदय-- जी रंजना जी.

श्रीमती रंजना बघेल (मनावर)-- माननीय सभापति महोदय, मुझे बहुत खुशी और प्रसन्‍नता होती है कि देश के राज्‍यों में पहला ऐसा मध्‍यप्रदेश है जो माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने 64 हजार महिलाओं को स्‍वावलंबी बनाया है और 50 प्रतिशत आरक्षण देकर के नगरीय निकायों में और आत्‍मनिर्भर बनाया है, सर्विस में 33 प्रतिशत आरक्षण दिया है तो हमें बहुत खुशी होती है कि एक समय वह था जब मध्‍यकाल में राजाराम मोहन राय जी को महिलाओं के आंदोलन के लिये अग्रदूत होना पड़ा, उसी के बाद डॉ. अंबेडकर जैसे नेतृत्‍व ने हमारे लिये मताधिकार का महिलाओं के लिये किया है, स्‍वावलंबी बनाया है और आज उसी तर्ज पर माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने पूरे देश में जिसका हमारे मध्‍यप्रदेश का दूसरे प्रदेशों में भी, महिला बाल विकास विभाग का नाम रोशन किया है और हमारी अभिनव योजनाओं को भी दूसरे प्रदेशों में लागू भी की है. कुपोषण के क्षेत्र में भी जब कांग्रेस के समय 62 प्रतिशत कुपोषण था आज 36 प्रतिशत कम कर दिया है माननीय सभापति महोदय.

सभापति महोदय-- रंजना जी ने भी महिला बाल विकास मंत्री रहते हुये बहुत अच्‍छा काम किया.

श्रीमती रंजना बघेल-- मैं एक शेर कहना चाहूंगी--

बलम चंदों, बलम सूर्यो, बलम श्रवण ब्राह्मणा,

बलम बेला समुदस्‍य, बलम बेला थी इच्‍छो.

मतलब यह कहा गया है कि समुद्र की लहरें भी बलवान हैं, ब्रह्मा भी बलवान है, सूर्य भी बलवान है, सूर्य की किरणें भी बलवान हैं, लेकिन महिला से अधिक कोई बलवान हो ही नहीं सकती, यह है माननीय सभापति महोदय और मैं माननीय मामी जी को धन्‍यवाद देना चाहती हूं कि 900 करोड़ रूपये के बजट से शुरूआत कांग्रेस के समय से हुई थी और आज बहुत ज्‍यादा बजट के साथ आज लाडो अभियान, सूर्यदल अभियान और आत्‍मनिर्भर बनाने के लिये बहुत ही सराहनीय कदम उठाये हैं, मैं आदरणीय मामी जी को और माननीय मुख्‍यमंत्री जी को बहुत-बहुत धन्‍यवाद देती हूं.

सभापति महोदय-- निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिला का शामिल होना बहुत बड़ी बात है.

खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण मंत्री (श्री विजय शाह)-- माननीय सभापति जी, आपने और माननीय सदस्‍याओं ने यहां बहुत अच्‍छे सुझाव दिये. मैं भाषण नहीं दे रहा हूं, खाली एक लाइन में आपको बता रहा हूं कि जितनी माननीय हमारी बहनों ने, सदस्‍यों ने विचार यहां व्‍यक्‍त किये. हमारी गौरवशाली विधानसभा अपने आप में गौरवांवित इसलिये हो रही है कि यहां का मुखिया और यहां की हमारी मंत्री महोदया जिन्‍होंने न सिर्फ कामों के माध्‍यम से, नियमों के माध्‍यम से बल्कि अपने आचरण से भी संबंध बनाये हैं. आज हमारे मुखिया को मामा कहते हैं, हमारी मंत्री को मामी के नाम से पूरा सदन पुकार रहा है, इस मामा मामी के सरकार को मैं बधाई देना चाहता हूं कि पारिवारिक रूप में इस प्रदेश में महिलाओं का विकास करें, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

श्रीमती सरस्‍वती सिंह (चितरंगी)-- सभापति जी आज महिला बाल दिवस की चर्चा हो रही है और खासकर हमारे दर्शकगण में सबसे ज्‍यादा महिलायें भी उपस्थित हैं मैं इनको बहुत-बहुत बधाई देना चाहती हूं, धन्‍यवाद.

श्री राजेन्‍द्र पाण्‍डेय-- माननीय मंत्री जी ने जो वक्‍तव्‍य दिया है वह भी महिलाओं की तरु से ही माना जाये.

श्री घनश्‍याम पिरौनिया-- माननीय सभापति महोदय, मामी जी को मामी जी इसलिये पुकारा जाता है कि वह हमारे श्रीमंत माधवराव सिंधिया जी की मामी जी हैं, इसलिये हमारा पूरा संभाग मामी जी के नाम से पहचानता है. मैं थोड़ा संसोधन करने के लिये खड़ा हुआ था.

महिला एवं बाल विकास मंत्री (श्रीमती माया सिंह)-- माननीय सभापति महोदया, मेरा विभाग जरूरतमंद महिलाओं और बच्‍चों को बहुत ही संवेदनाओं और भावनाओं के साथ उनसे जुड़कर अपनी सेवायें दे रहा है. यह विभाग ऐसा विभाग है जो जरूरतमंद इंसान की जिंदगियों से जुड़ा हुआ है. मेरे विभाग का जो पूरा अमला है वह प्रदेश के गांव-गांव में बहुत ही सजगता के साथ अपनी सेवायें दे रहा है, ऐसे विभाग का दायित्‍व मुझे मुख्‍यमंत्री जी ने सौंपा है, मैं उनकी हृदय से आभारी हूं, माननीय मुख्‍यमंत्री जी के नेतृत्‍व में हम कृ‍तसंकल्पि हैं कि प्रदेश की महिलायें सशक्‍त और आत्‍मनिर्भर बनें और साथ ही बच्‍चों को उनके मूलभूत अधिकार स्‍वत मिलें. मुझे आज यहां बहुत सम्‍मानीय विधायिकाओं ने बहुत महत्‍वपूर्ण सुझाव दिये हैं और बहुत सारी जानकारियां मुझे उपलब्‍ध कराई हैं. आज के लिये मैं हिना कांवरे जी को, ऊषा ठाकुर जी को, ओमकार सिंह मरकाम जी को, पारूल साहू जी, संगीता चारोल जी, शीला त्‍यागी जी, ममता मीणा जी, चंदा सुरेन्‍द्र सिंह गौर जी, उमादेवी खटीक जी, योगिता बोरकर जी, ललिता यादव जी और साथ ही साथ हमारी बहन रंजना जी और मंच से भी मुझे सुझाव प्राप्‍त हुये हैं, मैं उन सभी का दिल से धन्‍यवाद देती हूं और फिर पुन कहती हूं कि जो भी मुझे महत्‍वपूर्ण सुझाव और अच्‍छे सुझाव मिले हैं, निश्चित तौर पर मैं उनका लाभ लेते हुये विभाग के कार्यक्रमों को और बेहतर बनाने का प्रयास करूंगी.

सभापति महोदया, हमें सब पता है कि यह विभाग 1986 में इसकी स्‍थापना हुई और बाद में 1988 और 1989 में यह पृथक विभाग के रूप में अस्तित्‍व में आया और उसके बाद 2012 और 2013 में माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने विभाग के कार्यों में और अधिक अच्‍छे-अच्‍छे कदम उठाये जायें और इसका काम और बेहतर हो, इसके लिये इस विभाग के दो हिस्‍से किये, एक है एकीकृत बाल विकास सेवा और दूसरा महिला सशक्तिकरण, ये दो संचालनालय बने और इन दोनों का ही अलग-अलग पृथक रूप से उन्‍होंने बजट किया है. इसके साथ ही साथ अध्‍यक्ष जी मैं बताना चाहूंगी कि मेरा विभाग, सबसे पहले मैं बच्‍चों से जुड़े हुये एकीकृत बाल विकास सेवा के बारे में यहां चर्चा करना चाहूंगी. हम सब जानते हैं बच्‍चे हमारे अनमोल है, उनकी जिंदगी हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण है और हमारे देश का ये बच्‍चे भविष्‍य भी हैं, हमारा भविष्‍य कैसा होगा यह हमारे इन बच्‍चों की परवरिश, तालीम और इनकी जो हम शिक्षा कराते हैं उसके ऊपर निर्भर करता है. यह जरूरी है कि इनका पूरा-पूरा ध्‍यान रखा जाये. बच्‍चा अगर सुपोषित और स्‍वस्‍थ होगा तो स्‍वस्‍थ नागरिक बनेगा, अपनी रूचि, योग्‍यता और क्षमताओं के आधार पर वह प्रदेश और देश को योगदान दे सकेगा. इसके लिए बेहतर पोषण के लिए एकीकृत बाल विकास सेवा योजना के तहत आंगनवाड़ियों में मंगल दिवस के कार्यक्रम और अटल बाल आरोग्य पोषण मिशन और खास तौर से पोषण आहार योजना में किशोरी बालिकाओं के सर्वांगीण विकास और उनके कौशल उन्नयन हेतु सबला और किशोरी शक्ति योजना और ISSNIP जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं चलाई हैं. समेकित बाल विकास योजना में आंगनवाड़ियों की पहुंच आज मैं कहना चाहती हूं कि गांव-गांव तक हो गई है. इससे न सिर्फ बच्चे बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण में भी सुधार हुआ है, बहुत सारी महिलाओं को इससे रोजगार भी मिला है. आज इन 52000 से अधिक आंगनवाड़ी केन्द्रों में हमारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका, साथ ही साथ मिनी आंगनवाड़ी केन्द्रों में जो 80180 आंगनवाड़ी केन्द्र हैं और 12070 मिनी आंगनवाड़ी केन्द्र हैं इनमें बहनें अपनी सेवाएं दे रही हैं.

साथ ही साथ 452 परियोजनाएं हैं, इन परियोजनाओं को मिलाकर मैं कहना चाहती हूं कि इन आंगनवाड़ी केन्द्रों में तकरीबन 105 लाख हितग्राही जो हैं वह आईसीडीएस की सेवाओं का लाभ ले रहे हैं. मैं वर्ष 2016-17 के लिए भारत सरकार के द्वारा निर्धारित सीमा के अंतर्गत रुपए 2012.85 करोड़ रुपए का बजट प्रस्तावित किया गया है. इसलिए सभापति महोदया मैं बताना चाहूंगी कि हमारे विभाग में जो आंगनवाड़ी कार्यकर्ता है और सहायिका के रूप इतनी बड़ी संख्या में हैं, वह हमारे विभाग की जो योजनाएं हैं और विभाग में जो हितग्राही हैं, उनके बीच की महत्वपूर्ण कड़ी है. एक तरह से कहें तो यह विभाग की रीढ़ हैं. मुख्यमंत्री जी ने, सम्मानीय विधायकों ने अपने सुझावों में उनके मानदेय को बढ़ाने की बात कही है तो मैं कहना चाहती हूं कि वर्ष 2003-04 में हमारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को 1000 रुपए, आंगनवाड़ी सहायिका को 500 रुपए मिलता था. वह वर्तमान में बढ़कर अब 5000 और 2500 रुपए प्रतिमाह हुआ है. इसी तरीके से जो हमारी मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता है, उसको भी राज्य शासन अपनी ओर से 1000 रुपए दे रहा है, जिससे 3250 रुपए प्रतिमाह उनकी भी राशि बढ़ी है. बच्चों में कुपोषण की रोकथाम के लिए भी हमने जो सबसे पहले मध्यप्रदेश के ऊपर उंगली उठती है कि मध्यप्रदेश में कुपोषित बच्चे सर्वाधिक हैं तो इसको अपने हाथ में लिया और कुपोषण को समाप्त करने के लिए सुपोषण अभियान हमने चलाया है.

सभापति महोदया, मैं यह बताना चाहूंगी कि वर्ष 2014 से हमने अभी तक कुल 17976 स्नेह शिविरों के आयोजन किये. इन शिविरों में लगभग 198752 बच्चे लाभान्वित हुए हैं. इन शिविरों से 59.4 प्रतिशत बच्चों के पोषण श्रेणी में गुणात्मक सुधार आया है. इसमें मैं यह कहना चाहूंगी कि स्नेह शिविर के पीछे हमारा जो सोच था, वह यह था कि हम स्थानों में चिह्नित करके जहां कुपोषित बच्चे ज्यादा हैं, उनको कुपोषित बच्चों को और उसकी मां को स्नेह शिविर में 12 दिन रखते हैं. वहां उसके स्वास्थ्य की जांच और उसके साथ ही साथ उसे किस तरीके का पोषण आहार देना चाहिए और टीएचआर के माध्यम से हम उसे रेसिपी बनाना भी सिखाते हैं. 12 दिन में बच्चे का वजन 200 से 300 ग्राम बढ़ाकर उसे फिर घर भेजते हैं. उसके बाद उसका फालोअप भी करते हैं. यह प्रक्रिया है. साथ ही साथ गर्भ से लेकर 5 साल तक के बच्चों की सजग देखभाल करने का दायित्व भी मेरा विभाग बहुत ही अच्छे तरीके से निभा रहा है. परन्तु कभी कभी क्या होता है कि छोटे-छोटे कारणों की वजह से जैसे कि जब बच्चा पैदा होता है, उसे मां का दूध न मिले, 6 महीने में शुरुआत से ही मां का दूध न मिले या 6 महीने के बाद उसे ऊपरी आहार न दिया जाय और साफ सफाई का ध्यान नहीं रखें. दूषित खाना उसको दें या गांदा पानी उसको पिलाएं तो इसकी वजह से बच्चे कुपोषित होते हैं और उस श्रेणी में आते हैं. मेरा विभाग ऐसे परिवारों से मिलकर उन्हें लगातार समझाईश देता है और अगर ये सारे प्रयास और इन सारी बातों का ख्याल हम रखें तो मैं कहना चाहती हूं कि इसकी वजह से 22 प्रतिशत बच्चों की मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है. विभाग के द्वारा जो धात्री माताएं हैं, ऐसी माताएं जिनको छोटे-छोटे बच्चे गोद में होते हैं, सफर कर रही हैं, बस स्टेण्ड पर खड़ी हैं, चौक-चौराहे पर खड़ी हैं, सार्वजनिक स्थानों पर बस स्टेण्ड इन सब जगह और शासकीय कार्यालयों में ब्रेस्ट फीडिंग कॉर्नर तैयार करने का भी प्रयास मेरे विभाग ने किया है.

सभापति महोदया, मैं कहना चाहती हूं कि अब तक 406 ब्रेस्ट फीडिंग कॉर्नर तैयार हो चुके हैं. आंगनवाड़ी की सेवाएं अति कम बच्चों के पोषण स्तर में सुधार के लिए, फिर हमने एक कदम और आगे बढ़ाया, वह मैं सदन को बताना चाहती हूं स्नेह सरोकार का, जब विभाग के कुपोषण को समाप्त करने के प्रयास स्नेह शिविर और उसके बाद फॉलोअप, उसके बाद जब बच्चा उसी परिस्थिति में घर में जब वापस जाता है तो मन यह सोचा कि सरकार ने जो प्रयास किया उसमें जो सफलता प्राप्त की, वह कहीं ऐसा न हो कि बेकार जाय और बच्चा उन्हीं परिस्थितियों में फिर लौटकर वापस न आ जाय. इसके लिए हमने स्नेह सरोकार का कार्यक्रम प्रारंभ किया. मुझे बताते हुए खुशी होती है कि इसकी शुरुआत दतिया से हमने की. दतिया में एक डॉक्टर ने 10 बच्चियों के बारे में बताया कि वे कुपोषित हैं और बच्चियां जीवित भी रह सकती हैं, यह देखभाल के ऊपर है या फिर एक महीने में मृत्यु भी हो सकती है. मन में घबराहट हुई लेकिन मैंने उसी योजना समिति की बैठक में वहां के अधिकारियों से कहा कि एक-एक बच्ची की जिम्मेदारी वे लें. घर की परिस्थितियों पर नजर डाली, उनके लिए थोड़ी-सी व्यवस्थाएं बता दीं. आज मुझे बताते हुए खुशी होती है कि वे बच्चियां इतनी स्वस्थ, इतनी सुंदर, जरा-सी देखभाल की वजह से उनका जीवन बदल गया है. (मेजों की थपथपाहट)...

सभापति महोदया, हमने इस स्नेह सरोकार की योजना को आगे बढ़ाया. मुझे कहते हुए खुशी होती है कि समुदाय, समाज, चुने हुए जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, उद्योगपतियों ने, जो व्यापारी वर्ग है या समाज के जो सामर्थ्यवान व्यक्ति हैं उन्होंने आगे बढ़कर यह उत्तरदायित्व खुशी-खुशी निभाया है. 87000 बच्चों को स्नेह सरोकार के तहत स्वस्थ और सुपोषित करने की जिम्मेदारी ली है. ( मजों की थपथपाहट)..यह अपने आप में बहुत बड़ी बात है. अभी आसंदी पर अध्यक्ष महोदय नहीं हैं, मैं यह कहना चाहती हूं कि होशंगाबाद जिले को भी बहुत बधाई देना चाहती हूं कि होशंगाबाद जिला एक ऐसा जिला है कि जिसने उस जिले के शत-प्रतिशत कुपोषित और गंभीर कुपोषण के शिकार बच्चों को समाज के एक-एक सामर्थ्यवान व्यक्ति को स्वस्थ करने की जिम्मेदारी दी है. उनकी एक डायरेक्ट्री भी बनाई है कि बच्चा किस हालात में था और 8 और 10 महीने के बाद बच्चे के स्वास्थ्य में कितना परिवर्तन आया है. इस तरीके से मध्यप्रदेश के सारे जिलों में यह पहल की गई है और उसी का असर है कि आज 87000 बच्चे जो किसी न किसी जिम्मेदार व्यक्ति के स्नेह को पा रहे हैं. उन बच्चों को स्वस्थ बनाने की जो पहल है, वह पहल भी हमारी सफल साबित हो रही है. इसके लिए माननीय मुख्यमंत्री जी ने उन सभी को अपनी ओर से एक बधाई का पत्र भी भेजा है और वे सब इस बात से बहुत खुश थे. इन बच्चों के वजन की ऑन-लाइन निगरानी भी विभाग कर रहा है. साथ ही साथ मुख्यमंत्री जी ने यह भी कहा है कि स्नेह सरोकार कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले जिलों को पुरस्कृत करने के भी निर्देश दिये हैं, जिस पर हम कार्यवाही कर रहे हैं.

सभापति महोदया, इसके साथ ही साथ मैं यह बताना चाहती हूं कि राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे जो कार्यक्रम हैं, उनमें कम वजन के बच्चों की संख्या लगातार गिर रही है और अभी जो भारत सरकार के द्वारा वर्ष 2005-06 में जिसका जिक्र हमारे सम्मानीय विधायिकाओं ने किया है कि एनएफएचएस 3 के सर्वे के अनुसार वर्ष 2005-06 में कम वजन वाले बच्चों का प्रतिशत 60 प्रतिशत था, जो वर्ष 2015-16 में एनएफएचएस 4 के अनुसार घटकर 42.8 प्रतिशत हो गया है. इसी प्रकार गंभीर कुपोषण के शिकार बच्चे जिनका प्रतिशत 12.6 था, जो अब घटकर 9.2 प्रतिशत हो गया है. यह अपने आप में एक अच्छी बात है. हम थोड़ा और आगे चले हैं तो जो सर्वाधिक कम वजन वाले बच्चे मध्यप्रदेश के जिन जिलों में हैं, उन 5 जिलों में हमने सतना, बड़वानी, अलीराजपुर, उमरिया और डिण्डौरी में इनमें 2 अगस्त 2015 से गर्भवती और जो धात्री माताएं हैं उनको फुल मील देना आरंभ किया है तो इन माताओं को दोपहर में ताजा पका हुआ गर्म भोजन दिया जा रहा है, मेन्यू के अनुसार मौसमी फल दो लड्डू और हलुवा दिया जा रहा है ताकि इसमें जो बच्चे आयें स्वस्थ हों, कुपोषित न हों.

इसी तरह से मैं कहना चाहती हूंकि हमारे आंगनबाड़ी केन्द्रों में जो मंगल दिवस के कार्यक्रम होते हैं. उसकी तारीफ सभी ने की है. मंगल दिवस के कार्यक्रम सामान्य रूप से गर्भवती जो माताएं होती हैं उनके घर में गोद भराई का है यह होते हैं. इनमें सामुदायिक सहभागिता की दिशा में , हमने भी एक उल्लेखनीय काम किया है वह सारे कार्यक्रम हमारे आंगनबाड़ी केन्द्र में बहुत ही सुन्दर तरीके से किये जाते हैं. हमारी बहन ने कहा था कि बहुत ही अच्छे हो रहे हैं लेकिन उसमें मैं इस बात का ध्यान रखूंगी कि जितने भी योजनाएं या कार्यक्रम आईसीडीएस के माध्यम से आंगनबाड़ी केन्द्र अपनी सेवाएं दे रहे हैं उनकी जानकारी हमारे चुने हुए जनप्रतिनिधि हैं चाहे पंचायत से लेकर हमारे विधायक तक जो भी वहां पर मौजूद हो उनको जरूर दी जाय और वह वहां पर उपस्थित रहें तो और भी अच्छा लगेगा और इस तरह से करने के हमने निर्देश भी दिये हैं.

मैं कहना चाहती हूं कि हमारे उज्जैन भोपाल ग्वालियर इंदौर जिले हैं . यहां पर हमने देखा है कि जो गर्भवती और धाती माताएं हैं जो कि शहरी क्षेत्र में मजदूरी कर रही हैं और किन्हीं किन्हीं के छोटे बच्चे हैं आपने देखा होगा कि पेड़ के किनारे वह कपड़ा बांध देती है और बच्चा गर्मी में पड़ा रहता है और कई कई घंटों तक उसको कुछ दूध या पानी वगैरह दिया जाता है. मैं आपको यहां पर बताना चाहती हूं कि हमने इन जिलों में चलित आंगनबाड़ी की सेवा प्रारम्भ की है . उसका नाम हमने जुगनू दिया है, जुगनू जैसे कहीं कहीं चमकता है वैसे ही जहां पर जरूरत है, जहां पर मजदूर वर्ग की बहनें काम कर रही हैं, वहां पर यह जुगनू आंगनबाड़ी केन्द्र जाते हैं और अटल बाल मिशन के तहत चलित आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों का वजन लेना या गंभीर कुपोषित बच्चे हैं उनकी पहचान करके उनको एनआरसी में भर्ती कराना या फिर विजिट के दिन हितग्राहियों को गर्म खाना देते हैं. साथ ही साथ अन्य दिवसों के लिए पीएचआर उपलब्ध कराना , एएनएम के द्वारा वहां पर अगर कोई गर्भवती महिला है या धाती महिला है तो उसका स्वास्थ्य परीक्षण कराना. इस तरह से 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए वहां पर जो इसीसी की गतिविधियां हैं वह भी शुरू कर रहे हैं. किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य की शिक्षा यह सारी सेवाएं आईसीडीएस की सेवाओं की पहुंच को बढ़ाने की दृष्टि से हमने यह कदम उठाया है और यह कदम हमारा बड़ा सार्थक रहा है और लोग इसको सराह भी रहे हैं.

इसी तरीके से मैं पूरक पोषण आहार के संबंध में बताना चाहती हूं. यहां पर भी सामान्यतया शिकायतें आती हैं कि पूरक पोषण आहार हम देते हैं टीएचआर देते हैं उसमें कम ज्यादा दिखाया जाता है लोगों को कम दिया जाता है. सांझा चूल्हा के तहत बच्चों को भोजन , वहां पर बच्चों की उपस्थिति कम होती है और उसे दर्ज ज्यादा करते हैं .हमने इसमें भी एक कदम उठाया है कि एक आंगनबाड़ी केन्द्रों में प्रतिदिन पंचनामा तैयार किया जा रहा है. पांच लोगों के बाद में जो भी बच्चे वहां पर उपस्थित होंगे उन्हीं बच्चों की संख्या दर्ज की जायेगी और यह व्यवस्था वहां पर की है. इससे जहां पर भी शिकायतें आती हैं वहां पर इनमें सुधार हुआ है.

इसी के साथ हमारा एक कार्यक्रम किशोरी बालिकाओं के लिए, सबला नाम से जो हमारी योजना चल रही है उसमें किशोरी शक्ति सबला योजना के तहत हमने 15 जिलों में 8.5 लाख बच्चियों को पूरक पोषण आहार दिया है और किशोरी बालिकाओं को अलग अलग उनकी जो रूचि थी, उनके अनुसार प्रशिक्षण दिये हैं, ताकि उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हो और उनकी नेतृत्व क्षमता में विकास हो. मैं यहां पर बताना चाहती हूं कि इसमें से बहुत सी बच्चियों ने तो फोटोग्राफी सीखी है. उसके बाद वह आज अलग अलग कहीं अखबारों में और कार्यक्रमों में काम कर रही हैं उनको अच्छा भी लग रहा है. साथ ही हमारी बहुत सारी सबला की बालिकाएं कुपोषण सहयोगिनी बनी हुई हैं, वे समाज की दूसरी महत्वपूर्ण सेवाएं हैं वहां पर अपनी भूमिका का निर्वहन कर रही हैं. हमने किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए सेनेटरी नेपकिन के उपयोग में जागरूकता लाने के लिए ग्वालियर, झाबुआ, इंदौर में पायलेट प्रोजेक्ट के आधार पर यह प्रोजेक्ट उदिता शुरू किया है और प्रोजेक्ट उदिता का विस्तार अब सीहोर, राजगढ़, बुरहानपुर, भोपाल और विदिशा में किया है इसके तहत हमने जनसहयोग और समन्वय से 597 वेंडिंग मशीनें स्थापित की है, 11226 आंगनबाड़ी केन्द्रों में यह उदिता कार्नर स्थापित किये गये हैं, जिनके माध्यम से बहनों महिलाओं और किशोरियों को यह नेपकिन वहां पर उपलब्ध कराये जा रहे हैं.

मैं यह भी बताना चाहती हूं कि मध्यप्रदेश की सारी आंगनबाड़ियां किस तरीके से चल रही हैं किस स्थिति में हैं इसकी एक बार हम जानकारी हासिल करें तो2014 और 2015 में दो बार आंगनबाड़ी चलो अभियान की शुरूवात की है और उसके तहत हर आंगनबाड़ी केन्द्र में दस्तक दी गई है, आंगनबाड़ी के सुदृढ़ीकरण का भी अभियान इसकेसाथ में चलाया है. मैं बताना चाहती हूं कि इसमें हमारे प्रभावी व्यक्ति हैं हितग्राही हैं पंचायत के प्रतिनिधि भी हैं उन्होंने इन सारी गतिविधियों में बहुत उत्साह से भाग लिया है. इस अभियान में लगभग 65712 अतिरिक्त बच्चों का वजन रटिस्टर्ड किया गया है, जो बच्चों का वजन आंगनबाड़ी केन्द्रों में रजिस्टर किया जाता है उसके अतिरिक्त यह किया गया है. उसके साथ ही 48156 जो गर्भवती और धातरी माताएं हमारे नवीन आंगनबाड़ी केन्द्र में पंजीकृत हुई हैं, क्योंकि प्रचार प्रसार से उनको जानकारी हासिल हुई है और इस तरह से यह लाभ आंगनबाड़ी चलो अभियान के तहत हुआ है. आंगनबाड़ी केन्द्रों में शौचालय के निर्माण की और वहां पर हैण्ड पंप पानी की व्यवस्था और बच्चों के खेल खिलौने और अन्य व्यवस्थाओं का भी जन सहयोग से और अन्य तरीकों से कोशिश की है किवह आंगनबाड़ी अच्छी हों और उसकी सेवाओं के प्रति समुदाय में रूचि भी बढ़ी है.

मैं यह भी कहना चाहती हूं कि शहर में जो आंगनबाड़ी केन्द्र चल रहे हैं लेकिन इसके अलावा जो ग्रामीण अंचल में जो केन्द्र चल रहे हैं हम चाहते हैं कि वह हमारे आंगनबाड़ी केन्द्र आकर्षण के केन्द्र बनें . गांव के अंदर हमारे बच्चे जो पढ़ाई करते हैं वहां पर नर्सरी एलकेजी और यूकेजी की पढ़ाई के लिए ऐसे कोई व्यवस्था नहीं है. इसलिए हमने आंगनबाड़ी केन्द्रों में ही उन केन्द्रों को आकर्षक बनाया है, वहां पर हर चीज की जानकारी बच्चों को खेल खेल में शिक्षा देने का भी प्रयास किया है. सबसे बड़ी बात है कि हमने आंगनबाड़ी केन्द्रों में शिशु विकास कार्ड भी शुरूकिये हैं ताकि वहां पर बच्चे का पूरा रिकार्ड रहे. गांव में बच्चों को जो हमारी अर्ली चाइल्ड केयर एजुकेशन है वह आंगनबाड़ी केन्द्रों में दें, उसके बाद में सीधे बच्चे को हम सीधे पहली क्लास में भर्ती करा सकें.

मैं कहना चाहती हूं कि इस प्रयास से भी हमारे बच्चों में उत्साह बढ़ा है. हम चाहते हैं कि बच्चे आंगनबाड़ी केन्द्रों में जोर जबरदस्ती से नहीं लाये जायें, बल्कि बच्चों की आंख खुले तो वह अपने मां बाप से जिद करके आंगनबाड़ी केन्द्रों में लायें इसलिए आंगनबाड़ी केन्द्र वायपब्रेंड बनें, आंगनबाड़ी केन्द्र हमारे आदर्श बनें. हमारा सोच उसी तरफ है और इसके तहत हमने अपना काम प्रारम्भ किया है. बहुत सारे इस तरह के आंगनबाड़ी केन्द्रों का निर्माण भी किया है आंगनबाड़ी केन्द्रों में इस तरह की शिक्षा के साथ साथ बच्चों के जो आयु समूह हैं उसमें हमने तीन एक्टिविटी बुक और बच्चों के विकास के लिए जैसा मैंने कहा कि शिशु विकास कार्ड हैं वह बनायें हैं. इसके साथ ही हमने यह भी तय किया कि यह जो पाठ्यक्रम बच्चों का शुरू किया है अर्ली चाइल्ड एजूकेशन वाला तो उसको पूरे प्रदेश में लागू करने से पहले इसे प्रदेश के 8 जिलों में 14 परियोजनाओं के 2559 केन्द्रों में इसका पायलेट किया जा रहा है .

इसी के साथ साथ मैं आगे बताना चाहती हूं कि विभाग के कार्यों की बेहतर मानिटरिंग के लिए इनफारमेशन टेक्नालाजी का भी हम उपयोग कर रहे हैं. इस वर्ष हमने तकनीकी सहयोग के माध्यम से एक ऐसा पोषण आहार का सप्लाई चैन मैनेजमेंट जो कि बच्चों के वजन की निग