मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

          ______________________________________________________________

 

चतुर्दश विधान सभा                                                                         षोडश सत्र

 

 

फरवरी-मार्च, 2018 सत्र

 

शुक्रवारदिनांक 16 मार्च, 2018

 

(25 फाल्‍गुनशक संवत्‌ 1939)

(खण्ड- 16 )                                                                                 (अंक- 11)

 

______________________________________________________________

 

 

 

 

 

 

 

मध्यप्रदेश विधान सभा

 
शुक्रवार
दिनांक 16 मार्च, 2018

 

(25 फाल्‍गुनशक संवत्‌ 1939)

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.02 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ. सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

 

प्रश्न संख्या--1 (अनुपस्थित)

प्रश्न संख्या--2 (अनुपस्थित)

आवंटन के विरुद्ध व्यय पर कार्यवाही

[लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]

3. ( *क्र. 4035 ) श्रीमती ऊषा चौधरी : क्या लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत मांग संख्या-19 के मुख्य शीर्ष 2210 एवं 2211 के अंतर्गत उद्देश्य शीर्ष कार्यालय व्यय-22-008, भोजन व्यवस्था-34-004, सुरक्षा व्यवस्था-31-005 एवं साफ-सफाई व्यवस्था-31-006 में विगत 03 वर्षों में कितना आवंटन दिया गया? जिलेवार जानकारी देवें। (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार आवंटन के विरुद्ध कितना व्यय किया गया? जिलेवार जानकारी देवें। (ग) विभाग द्वारा योजना शीर्ष 1508, 2283, 2777, 5998, 8150, 0621 एवं 2703 के अंतर्गत प्रदेश के समस्त जिलों को वर्ष 2016-17 एवं 2017-18 में कितना आवंटन दिया गया? जिलेवार जानकारी देवें। वर्तमान में साफ-सफाई, सुरक्षा व्यवस्था, वेतन, कार्यालय व्यय के कितने देयक भुगतान हेतु लंबित हैं? उक्त देयकों का भुगतान कब तक कर दिया जावेगा? (घ) क्या विभिन्न प्रकार के उद्देश्य शीर्ष के अनियमित रूप से वित्तीय आवंटन में संचालनालय स्तर से भारी भ्रष्टाचार किया जा रहा है? इसके लिए दोषी अपर संचालक वित्त, संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएँ के विरुद्ध क्या कार्यवाही की जावेगी? यदि नहीं तो क्यों?

 

 

 

लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री (श्री रूस्तम सिंह)--

श्रीमती ऊषा चौधरी--अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न के बिन्दु (ग) में साफ-सफाई पर रूपये 6 करोड़ 29 लाख 86 हजार 63 रूपये सुरक्षा व्यवस्था, 2 करोड़ 90 लाख 96 हजार 262 वेतन में 18 करोड़ 6 हजार 815, कार्यालय व्यय में 4 करोड़ 56 लाख 230 रूपये के देयक लंबित हैं. मंत्री जी बतायें कि इसका भुगतान क्यों नहीं किया गया तथा इसका भुगतान कब तक किया जाएगा ?

श्री रूस्तम सिंह--अध्यक्ष महोदय, लंबित भुगतान के बारे में माननीय सदस्या द्वारा कहा गया है. विभाग ने जो जानकारी उपलब्ध कराई है उसमें पेंडेंसी नहीं है. माननीय सदस्या चाहें तो मैं उनको एक एक चीज की उपलब्धता भी बता दूंगा और व्यय हुआ वह भी बता दूंगा, फिर भी कोई जानकारी माननीय सदस्या के पास पर्टिकुलर प्वाइस्ट्स की जानकारी है कि इस जगह पर यह पेंडेंसी है, तो उसका हम भुगतान करवा देंगे.

श्रीमती ऊषा चौधरी--अध्यक्ष महोदय, 6-6 महीने से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को वेतन का भुगतान नहीं हुआ है. अगर भुगतान नहीं हुआ है तो पैसा गया कहां ? जैसे बिन्दु (घ) में मैंने जानकारी चाही थी कि विभिन्न शेष की अनियमितताएं तथा आवंटन स्तर से संचालन में भारी भ्रष्टाचार किये जाने वाले अपर सचिव के विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी. उन्होंने छः महीने से वेतन नहीं दिया तो यह पैसा कहां गया ? तथा भुगतान क्यों नहीं किया गया. इन शीर्ष मदों में भुगतान हेतु लंबित है.

श्री रुस्तम सिंह - अध्यक्ष महोदय,वेतन मद में तो कोई भुगतान ही लंबित नहीं है.

अध्यक्ष महोदय - "" का आप उत्तर देखें. साफ सफाई में इतने रुपये,सुरक्षा में इतने रुपये,वेतन इतने रुपये,कार्यालय व्यय में इतनी राशि के देयक लंबित हैं. समय-सीमा बताना संभव नहीं है.

श्री रुस्तम सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, यह केवल सतना जिले का ही पूछ रही हैं कि प्रदेश का ?

श्रीमती ऊषा चौधरी -सतना जिले का भी और मध्यप्रदेश का भी.

अध्यक्ष महोदय - इनके जिले में पेंडेंसी नहीं होगी.

श्रीमती ऊषा चौधरी - मेरे जिले में भी है. 6 महीने से वेतन नहीं मिला है चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के जो साफसफाई में लगे हैं और जो कार्यालयों में कार्यरत् हैं.

श्री रुस्तम सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे यह बताना है कि 2 मद हमारे यहां होते हैं. एक सीएमएचओ का होता है,एक सिविल सर्जन का होता है. जिला चिकित्सालय का सिविल सर्जन का होता है और पूरे जिले का सीएमएचओ का होता है. तो सीएमएचओ में साफ-सफाई में लंबित राशि जीरो है, वेतन में जीरो लंबित राशि है,साफसफाई में अभी हाल के जो बिल हैं वे पेंडिंग होंगे. 6 महीने का एक भी बिल पेंडिंग नहीं है. दूसरे कार्यालय व्यय की बात है, इसमें भी कोई लंबित नहीं है. आप स्पेसिफिक बता देंगी कि इस व्यक्ति का यह बिल लंबित है. तो हम इसे दिखवा लेंगे और आपको बता देंगे तथा पेमेंट भी करवा देंगे.

अध्यक्ष महोदय - आपकी जानकारी में कोई स्पेसिफिक मामला हो तो बता दें.

श्रीमती ऊषा चौधरी - अध्यक्ष महोदय, जानकारी है. यह जो बताया जा रहा है कि लंबित नहीं है जीरो है. लंबित है.

अध्यक्ष महोदय - आप डिटेल्स दे दीजिये मंत्री जी को.

श्रीमती ऊषा चौधरी - धन्यवाद.

प्र.सं. 4 श्रीमती रेखा यादव ( अनुपस्थित )

 

 

 

इंदौर संभाग अंतर्गत पैथोलॉजी लेब/ब्लड कलेक्शन सेंटरों की संख्‍या

[लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]

5. ( *क्र. 1945 ) श्री कालुसिंह ठाकुर : क्या लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अलग-अलग स्थानों पर एवं अन्यत्र शहरों एवं गांवों मे ब्लड सेंपल कलेक्शन करने के सेंटर खोलने के शासन द्वारा क्या दिशा निर्देश दिये गये हैं? उक्त संबंध में प्रसारित दिशा निर्देशों की प्रति उपलब्ध करावें। (ख) इन्दौर संभाग में किन-किन पैथोलॉजी लेब के कितने ब्लड कलेक्शन सेंटर हैं? उन पैथोलॉजी लेब के नाम एवं उनके सेंटर कहाँ-कहाँ पर हैं? उनके नाम, पते सहित जानकारी उपलब्ध करावें

लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र अनुसार है।

 

श्री कालुसिंह ठाकुर - अध्यक्ष महोदय, मैंने मंत्री जी से जानकारी मांगी थी कि जो भी कलेक्शन सेंटर खोले जाते हैं उनके लिये शासन स्तर पर क्या दिशा-निर्देश हैं ? बहुत सी जगह ऐसे सेंटर खोले गये हैं, जो गैरकानूनी तरीके से चल रहे हैं. क्या उनकी जानकारी उपलब्ध कराएंगे ?

श्री रुस्तम सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, जहां तक सरकारी कलेक्शन सेंटर हैं,वे जितने भी हैं, वह अधिकृत होते हैं लेकिन जो प्रायवेट हैं, जैसे एक लाल पैथोलाजी है उनका कलेक्शन सेंटर तो मध्यप्रदेश के हर जिले में है लेकिन पेथ लैब उनकी दिल्ली में है. तो वह कलेक्शन करते हैं और भेजते हैं. कुछ ऐसे उपकरण हैं तो उनसे कुछ बीमारियों का तत्काल मौके पर बता देते हैं जैसे बी.पी.,शुगर,ब्लड ग्रुप है, वह तो हमारी ऊषा और आशा कार्यकर्ता भी बता देती है कि आपका ब्लड ग्रुप यह है,बी.पी.इतना है,शुगर इतना है. शेष जो जानकारी होती है, वह तो सेम्पल कलेक्ट के बाद ही दी जाती है. माननीय सदस्य ने जो बात कही है, मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि प्रायवेट अस्पताल,प्रायवेट पैथ लैब जहां से भी कलेक्शन करते हैं, जो लोग कलेक्शन करते हैं वह अधिकृत हैं, क्वालीफाईड हैं, नहीं हैं ? यह जानकारी भी मंगवा लेंगे और इस जानकारी की कापी इनको उपलब्ध करवा देंगे.

श्री कालुसिंह ठाकुर - धन्यवाद मंत्री जी. अनुरोध है कि ऐसे जो भी गैरकानूनी लैब खोल रहे हैं उनकी जांच की जाये और उन पर कार्यवाही की जाये.

अध्यक्ष महोदय - उन्होंने कह दिया.

श्री रुस्तम सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, गैरकानूनी जैसी बात ही नहीं है क्योंकि पैथोलाजी अधिकृत होती हैं.

श्री शैलेन्द्र जैन - कुछ नार्म्स निश्चित कर दीजिये. मेरा आपसे आग्रह इतना है. इसमें काफी अनियमितताएं हो रही हैं. अगर सेम्पल कलेक्शन प्वाइंट पर गलतियां हो जाएंगी उसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं.

श्री कालुसिंह ठाकुर - अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से अनुरोध कर रहा हूं कि वह कह रहे हैं कि ऐसा नहीं है परंतु कई जगह लोग बैठे हुए हैं जिनके पास अनुभव नहीं है. ग्रामीण क्षेत्र में लोग समझदार नहीं हैं.

अध्यक्ष महोदय - उसकी तो वह जांच करा लेंगे.

श्री कालुसिंह ठाकुर - बस यही चाहते हैं कि उनकी जांच कराकर उन पर कार्यवाही की जाये.

अध्यक्ष महोदय - इसके नार्म्स तय कर दें.

श्री रुस्तम सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं यह आग्रह करना चाह रहा था. थोड़ी सी मिसअण्डरस्टैंडिंग हो रही है.कलेक्शन सेंटर और पैथोलाजी बिल्कुल अलग-अलग चीजें हैं. ये पैथोलाजी लैब को भी कलेक्शन सेंटर बोल देते हैं. कोई भी पैथ लैब बिना क्वालिफाईड एलोपैथी के डॉक्टर के चल ही नहीं सकते, वे बकायदा हमारे यहां रजिस्टर्ड होते हैं, बकायदा उनकी जांच होती है, ऐसी कोई बात नहीं है.

अध्यक्ष महोदय- जो श्री शैलेन्द्र जैन जी ने कहा है वह पैथोलॉजी लैब के बारे में नहीं है, वह कलेक्शन सेंटर के बारे में ही है, कलेक्शन सेंटर में भी अलग-अलग सॉल्यूशन्स में अलग-अलग टेस्ट उसमें लिया जाता है.

श्री शैलेन्द्र जैन - अध्यक्ष महोदय, अनस्किल्ड लोग कलेक्शन कर रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय - उसमें भी ट्रेंड लोग होना चाहिए, उनका कहना है कि कलेक्शन सेंटर के भी कोई नॉर्म्स तय हो जायं, पैथोलॉजी लैब के तो नॉर्म्स है हीं, ऐसा उनका कहना है.

श्री रुस्तम सिंह - अध्यक्ष महोदय, मैं पहले ही आपको निवेदन कर दिया था कि हमने ऐसे निर्देश जारी किये हैं कि जितने भी प्राइवेट पैथोलॉजी की या कोई भी जो पैथ लैब हैं वे अधिकृत हैं टेस्ट करने के लिए, उनकी कोई भी एजेंसी कहीं भी जाती है तो उनकी जो मिनिमम क्वालिफिकेशन है वह है कि नहीं, यह जानकारी मिले और वे ठीक हैं कि नहीं हैं, यह 15 दिन में हम सुनिश्चित करा देंगे.

श्री कालुसिंह ठाकुर - ठीक है, मंत्री महोदय. धन्यवाद.

 

 

 

 

 

प्रसूता माताओं/आशा कार्यकर्ताओं को आर्थिक सहायता 

[लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]

 

6. ( *क्र. 2626 ) पं. रमेश दुबे : क्या लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म.प्र. प्रसूता माताओं एवं आशा कार्यकर्ताओं को किस योजना में कितनी राशि, प्रसूति के कितने दिनों के भीतर भुगतान किये जाने के नियम निर्देश हैं? क्‍या छिन्‍दवाड़ा जिले में नियम निर्देशों के अनुसार समय पर इस योजना का लाभ हितग्राहियों को मिल रहा है? यदि नहीं तो क्‍यों और यदि हाँ, तो विकासखण्‍ड चौरई एवं बिछुआ के विगत एक वर्ष में हुए प्रसूति का दिनांक एवं आर्थिक सहायता उपलब्‍ध कराने के दिनांक सहित दस्‍तावेज संलग्‍न करें (ख) छिन्‍दवाड़ा जिले के विकासखण्‍ड चौरई एवं बिछुआ में किन-किन प्रसूता माताओं एवं आशा कार्यकर्ताओं को उक्‍त योजना के तहत राशि का भुगतान होना कब से लंबित है? लंबित रहने का कारण स्‍पष्‍ट करते हुए यह बतावें कि इसके लिए कौन लोग जिम्‍मेदार हैं और इन्‍हें कब तक भुगतान कर दिया जावेगा? (ग) क्‍या विकासखण्‍ड चौरई में उक्‍त योजना की राशि नगद भुगतान करने, भुगतान करते समय राशि काटकर कम भुगतान करने की शिकायत प्राप्‍त होने पर प्रश्‍नकर्ता ने कलेक्‍टर छिन्‍दवाड़ा, जिला कार्यक्रम अधिकारी, छिन्‍दवाड़ा, प्रभारी मंत्री छिन्‍दवाड़ा को पत्र प्रेषित किया है? यदि हाँ, तो इस पत्र पर किस स्‍तर से क्‍या कार्यवाही की गयी है? (घ) क्‍या उक्‍त शिकायत की कोई जांच की गयी है? यदि हाँ, तो कौन लोग दोषी पाये गये? क्‍या कार्यवाही की गयी है? कथन व जांच प्रतिवेदन की प्रति संलग्‍न करें और यदि नहीं तो क्‍या जांच की जाकर इस प्रकार के नगद भुगतान करने वालों के विरूद्ध कार्यवाही कर नगद भुगतान प्रतिबंधित किया जावेगा?

लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) :

 

पं.रमेश दुबे - अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्नांश ग के उत्तर में जवाब दिया गया है कि मैंने जो पत्र दिया था, वह उन्हें प्राप्त हुआ है. मेरा पत्र दिनांक 5.8.16 का था. इस पत्र के विषय में जो जांच की गई, वह जानकारी मुझे नहीं दी गई और पत्र प्राप्ति की भी जानकारी नहीं दी गई. मेरे पत्र में मैंने पूछा था कि आशा कार्यकर्ताओं, प्रसूता महिलाओं की मातृत्व की जो राशि वितरित की जाती है और इसमें जो विसंगति है उस बात का उल्लेख इस पत्र में किया था. अध्यक्ष महोदय, मुझे जो उत्तर प्राप्त हुआ है, जिसमें जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत 10 दिवस के अंदर प्रसूति महिलाओं को भुगतान होना चाहिए. लगभग 4 से 5 माह के बाद यह भुगतान हुआ है, ऐसा उत्तर में परिलक्षित हो रहा है. साथ ही साथ मैंने मातृत्व सहायता योजना की भी जानकारी मांगी थी, वह जानकारी मुझे अभी तक प्राप्त नहीं हुई है. यह विसंगतियां मेरे अपने विकासखण्ड में सीएचसी सेंटर में हो रही हैं. मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि जो उत्तर दिया गया है तो चौरई विकासखण्ड में 150 के आसपास अभी तक जननी सुरक्षा योजना में भुगतान नहीं हुआ है. 50 के आसपास बिछुआ विकासखण्ड में भुगतान नहीं हुआ है. आखिर इसके लिए हमारे प्रशासनिक अधिकारी जिम्मेदार तो हैं और मातृत्व सहायता योजना की जानकारी मुझे प्रदान नहीं की गई है?

श्री रुस्तम सिंह - अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जो पहला प्रश्न किया है वह यह है कि कितने दिन में भुगतान होना चाहिए और कितने मामलों में भुगतान हो गया और विशेषकर इन्होंने दो विकासखण्डों के बारे में पूछा है. पहले प्रश्न में चौरई और बिछुआ के बारे में कहा है. अध्यक्ष महोदय, पूरे भुगतान हुए हैं. केवल यह बिछुआ में 153 मामले थे उनमें से अब भुगतान होने के बाद 31 मामले बचे हैं, चौरई के 47 मामले पेंडिंग थे, वे 47 अभी भी पेंडिंग हैं. मैं यह निवेदन करना चाहता था कि यह पेंडेंसी का जो कारण है, वह केवल इसलिए है कि उनके खाते नम्बर उपलब्ध नहीं हो पाए हैं. हमने निर्देश दिये हुए हैं कि हितग्राही जिसका हो गया, चाहे उसके गांव जाना पड़े, उसके घर जाना पड़े और बैंक भी जाना पड़े तो इसको लीजिए और इनके भुगतान कराइए. जल्दी से जल्दी भुगतान हों, अगर ऐसा हो कि किसी का खाता ही नहीं खुला है तो खाता खुलवाने के लिए भी प्रेरित करेंगे.

पं. रमेश दुबे - अध्यक्ष महोदय, हम आशा कार्यकर्ता को प्रोत्साहन राशि देते हैं. मैं ऐसा मानता हूं कि आपकी आशा कार्यकर्ता बैंक के नम्बर लेकर भी वह प्रसूता को लेकर अस्पताल आती है. लेकिन जो प्रशासनिक दृष्टि से कार्यवाही सीएचसी सेंटर पर होना चाहिए, उसके पीछे मुख्य जो कारण है कि मेरे चौरई विकासखण्ड में मात्र एक डॉक्टर है वह भी अप-डाउन छिंदवाड़ा से करता है. वहां प्रशासनिक नियंत्रण नहीं है और आने के बाद वह प्राइवेट प्रैक्टिस करता है, उसके पास बीएमओ का भी चार्ज है. लगातार आपसे संपर्क करके और प्रश्न के माध्यम से इस विषय को उठाया और इसके कारण जितनी शासन की योजना है, उसमें बहुत ज्यादा विलंब हो रहा है. यह स्थिति बन जाती है तो जब हम आपके बीएमओ से चर्चा करते हैं तो बीएमओ हमसे इस बात को कहता है कि साहब मुझे हटा दीजिए. इस प्रकार की बातचीत करता है, जिसके बारे में मैंने जिला अधिकारियों से चर्चा भी की है. मैं माननीय मंत्री जी से इस बात का आग्रह करना चाहता हूं, योजनाओं का समय के अंदर क्रियान्वयन हो सके. हितग्राही को उसका लाभ मिल सके. वह जो डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस करता है, छिंदवाड़ा से आता है. रात में कोई डॉक्टर सीएचसी सेंटर में नहीं है. 5 पीएचसी है और 1 सीएचसी है, जिसमें 1 ही डॉक्टर है, वह बीएमओ के चार्ज में भी है. उसको प्रशासनिक कार्यवाही भी करना पड़ती है और लोगों का इलाज भी करना पड़ता है, जिसके कारण यह बहुत ज्यादा असंतोष का विषय है. प्रशासनिक कार्यवाही भी करनी पड़ती है और लोगों का इलाज भी करना पड़ता है. जिसके कारण बहुत ज्‍यादा असंतोष है. मैं माननीय मंत्री जी से इतना आग्रह करना चाहता हूं कि उसको बीएमओ के चार्ज से हटा दें और मुझे वहां पर और डॉक्‍टर दे दें जिससे प्रशासनिक योजनाओं का क्रियान्‍वयन ठीक हो सके और लोगों का समय पर इलाज हो सके.

श्री रुस्‍तम सिंह- अध्‍यक्ष महोदय, आपके प्रश्‍न से जो अब आपने कहा है उससे कहीं भी यह प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता है.

पं. रमेश दुबे- अध्‍यक्ष महोदय, यह बात जरूर है, लेकिन हमारे यहां बीएमओ प्रशासनिक क्रियान्‍वयन को देखता है, सप्‍ताह में और मंथली बैठकें होती हैं, उसके बाद बीएमओ का चार्ज है. यह बात सही है कि प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता, लेकिन मैंने ही प्रश्‍न लगाया है. व्‍यवस्‍थाओं से यह उद्भूत होगा है, अगर आपके अधिकारी क्रियान्‍वयन नहीं करेंगे तो यह कैसे संभव होगा ?

अध्‍यक्ष महोदय- क्रियान्‍वयन नहीं होने का उन्‍होंने कारण भी बता दिया है. अब मंत्री जी आप वह कारण ठीक कर दीजिए.

श्री रुस्‍तम सिंह- अध्‍यक्ष महोदय, कारणों को ठीक कर देंगे और सदस्‍य का कहना है कि वह रहता नहीं है और ऐसा जबाब माननीय विधायक जी को देता है कि मेरा स्‍थानांतरण करा दीजिए, यह तो बिल्‍कुल गैर-जिम्‍मेदाराना और अनुशासन- हीनता वाला जवाब है. मैं आपके मार्फत विधायक जी को आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि वह अधिकारी आचरण सुधारें, बात संवेदनशीलता की करें और बाकी व्‍यवस्‍थाएं ठीक हों इसको हम सुनिश्चित करेंगे.

पं. रमेश दुबे- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने व्‍यवस्‍था सुनिश्चित करने के लिए कहा है मैं इतना आग्रह करना चाहता हूं कि इसकी समय सीमा सुनिश्चित भी कर दें.

श्री सुखेन्‍द्र सिंह- अध्‍यक्ष महोदय, जब तक डॉक्‍टर उपलब्‍ध नहीं कराएंगे तब तक इसका निदान कैसे होगा ? पूरे प्रदेश में यह हालत है.

अध्‍यक्ष महोदय- वे सक्षम और बहुत सीनियर सदस्‍य हैं.

श्री रुस्‍तम सिंह- माननीय सदस्‍य इतने वरिष्‍ठ हैं, आप ही बता दें कि इतने दिन में कर दें, तो हम उतने दिन में कर देंगे.

पं. रमेश दुबे- मैं आग्रह करना चाहता हूं कि आप वहां पर 15 दिन में व्‍यवस्‍था करवा दीजिए.

श्री रुस्‍तम सिंह- अध्‍यक्ष महोदय, हम 12 दिन में ही कर देंगे.

पर्यटन विकास की योजनाओं का क्रियान्‍वयन

[पर्यटन]

7. ( *क्र. 4319 ) श्री जितू पटवारी : क्या राज्‍यमंत्री, संस्कृति महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म.प्र. में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य से मुख्‍यमंत्री जी द्वारा विगत पांच वर्षों में क्‍या-क्‍या घोषणायें की हैं? वर्षवार जानकारी देवें। (ख) प्रश्‍नांश (क) के अनुसार की गई घोषणाओं की वर्तमान स्थिति क्‍या है? कितनी घोषणाओं पर प्रश्‍न दिनांक तक कोई कार्य नहीं हुआ है एवं जिन घोषणाओं पर कार्य चल रहा है अथवा पूर्ण हो चुका है, उन पर कितनी राशि व्‍यय की गई है? (ग) विगत तीन वर्षों में विभाग को केन्‍द्र सरकार के द्वारा किन-किन योजनाओं हेतु कितना-कितना फंड अनुदान के रूप में प्रदान किया गया है एवं विभाग द्वारा उनमें से किन-किन योजनाओं पर कितना-कितना व्‍यय किया गया है? योजनावार एवं वर्षवार जानकारी देवें। (घ) विभाग द्वारा सिंहस्‍थ महापर्व 2016 हेतु किन-किन योजनाओं के कार्यों हेतु कितना-कितना फंड रखा था? किन-किन योजनाओं या कार्यों में कितना-कितना व्‍यय हुआ, इसकी जानकारी देते हुए यह भी बतायें कि विभाग द्वारा सिंहस्‍थ महापर्व में कुल कितना व्‍यय किया गया है?

राज्‍यमंत्री, संस्कृति ( श्री सुरेन्द्र पटवा ) : (क) एवं (ख) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार। (ग) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार। (घ) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार।

कुंवर सौरभ सिंह सिसोदिया- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा मंत्री जी से यह प्रश्‍न है कि विगत जो घोषणाएं हुई हैं वर्ल्‍ड हैरिटेज को शामिल कराने के लिए इसमें क्‍या क्‍या प्रयास हुए हैं ?

राज्‍यमंत्री, स्‍कूल शिक्षा (श्री दीपक कैलाश जोशी)- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य के प्रश्‍न का विस्‍तृत उत्‍तर हमने दे दिया है और कुल 83 घोषणाएं की थीं जिसमें से 29 घोषणाएं पूर्ण कर ली गई हैं और 51 घोषणाएं प्रचलन में हैं और तीन घोषणाएं जो दूसरे विभागों से जुड़ी हुई थीं उनके बीच कार्यवाही चल रही है.

कुंवर सौरभ सिंह सिसोदिया- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न यह है कि ओंकारेश्‍वर और मांडव को वर्ल्‍ड हैरिटेज के लिए हम क्‍या कर सकते हैं ? इसमें शासन क्‍या पहल करेगा ?

श्री दीपक कैलाश जोशी- अध्‍यक्ष महोदय, वर्ल्‍ड हैरिटेज बनाने के लिए केन्‍द्र सरकार के साथ मिलकर काम करना पड़ता है. प्रस्‍ताव हमने प्रस्‍तावित किए हैं. उसमें अभी कार्यवाही प्रचलन में है.

सिविल चिकित्‍सालय रांझी का उन्‍नयन व विस्‍तार

[लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]

8. ( *क्र. 1691 ) श्री अशोक रोहाणी : क्या लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा क्षेत्र केंट जबलपुर के तहत स्थित सिविल चिकित्‍सालय रांझी में आसपास के कितने गांवों के मरीज इलाज हेतु आते हैं? ओ.पी.डी. में औसतन प्रतिमाह कितने मरीजों की जांच कर उनका उपचार किया जाता है? कितने मरीजों को भर्ती किया गया एवं कितने मरीजों को अन्‍यत्र रेफर किया गया है? वर्ष 2014-15 से वर्ष 2017-18 तक की माहवार जानकारी दें। (ख) क्‍या प्रश्‍नांकित सिविल चिकित्‍सालय की ओ.पी.डी. में मरीजों के इलाज व स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी सभी सुविधाएं व संसाधन पर्याप्‍त हैं? यदि नहीं, तो इसके लिये कौन-कौन सी व्‍यवस्‍थाएं, संसाधन उपकरण व मशीनरी की आवश्‍यकता है? चिकित्‍सकों के कितने पद खाली हैं एवं क्‍यों? इसके लिये जिला प्रशासन व शासन ने क्‍या प्रयास किये हैं? (ग) क्‍या प्रश्‍नांकित सिविल चिकित्‍सालय में मरीजों की बढ़ती हुई संख्‍या को देखते हुये इसकी ओ.पी.डी. व चिकित्‍सालय का उन्‍नयन व विस्‍तार कराने की आवश्‍यकता है? यदि हाँ, तो जिला प्रशासन व शासन ने इसका उन्‍नयन व विस्‍तार कराने की क्‍या योजना बनाई है? यदि नहीं तो क्‍यों? (घ) प्रश्‍नांकित सिविल चिकित्‍सालय में व्‍याप्‍त अव्‍यवस्‍थाओं, संसाधनों, उपकरणों आदि का अभाव चिकित्‍सकों की कमी को दूर करने हेतु शासन ने क्‍या प्रयास किये हैं? इसमें कब-कब, क्‍या-क्‍या सुधार व्‍यवस्‍थाएं, संसाधनों, उपकरणों/मशीनरी की पूर्ति की है? वर्ष 2014-15 से 2017-18 तक वर्षवार पृथक-पृथक जानकारी दें।

मंत्री, लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण (श्री रुस्‍तम सिंह)-

श्री अशोक रोहाणी- अध्‍यक्ष महोदय, आज आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी का सबसे पहले आभार और धन्‍यवाद प्रकट करूंगा कि उन्‍होंने रांझी अस्‍पताल जो डॉक्‍टर्स के लिए तरसता था वहां पर 12-12 डॉक्‍टर्स हमको एक साथ दिए हैं, इसके लिए मैं उनका आभार और धन्‍यवाद प्रकट करता हूं और जब उम्‍मीद पूरी होती है तो उम्‍मीद और बढ़ती भी है. मैं आपके माध्‍यम से जो अस्‍पताल में संसाधनों की कमी है, डॉक्‍टरों के कारण मरीजों की संख्‍या भी बढ़ी है, लेकिन संसाधन नहीं हैं, तो मैं इस सदन में आग्रह करूंगा कि मुझे रांझी अस्‍पताल के लिए वे संसाधन प्रदान किए जाएं. वहां पर आकस्मिक चिकित्‍सा कक्ष विभाग नहीं है जिसके कारण इमरजेंसी में गंभीर रूप से पीडि़त मरीज की विक्‍टोरिया और मेडिकल पहुंचते-पहुंचते डेथ हो जाती है. इसलिए आकस्मिक चिकित्‍सा विभाग खोला जाए. वर्तमान में अस्‍पताल में चार वार्ड हैं. दो वार्ड मेडिसिन वार्ड और सर्जिकल वार्ड की और आवश्‍यकता है. वर्तमान में एक्‍सरे मशीन 100 एमए पोर्टेबल मशीन है जिससे संपूर्ण जांच पूरी नहीं हो पाती हैं. अत: मेरा आग्रह है कि 300 एमए पोर्टेबल मशीन उपलब्‍ध कराने का कष्‍ट करें. डॉक्टरों में स्टॉफ के लिये 4 स्टॉफ क्वार्टर्स की आवश्यकता है. ओपीडी रुम की आवश्यकता है. आज मैं मंत्री जी से आग्रह करुंगा कि इस अस्पताल को आस पास के क्षेत्र के हिसाब से और सर्व सुविधायुक्त बनाया जाये, क्योंकि आस पास बहुत बड़े गांव और रांझी का बहुत बड़ा एरिया उससे जुड़ा हुआ है, उनको बहुत लाभ मिलेगा.

श्री रुस्तम सिंह -- अध्यक्ष महोदय, हम वैसे तो आपके मार्फत में यही कहना चाहते हैं कि इन्होंने आनुपातिक दृष्टि से बहुत सुविधाएं प्राप्त की हैं. इनकी विनम्रता भी और इनके मांग करने के तरीके भी, अब और जो बचा है, जिस-जिस चीज की जरुरत है, यह हमें बतायें, बता भी देंगे अलग से और उसको भी कराने का हम पूरा प्रयास करेंगे, क्योंकि मेरा व्यक्तिगत भी इनके प्रति भाव रहता है कि इनके कहने से अधिक से अधिक काम हों. इनके पिताजी मेरे बहुत करीबी मित्र रहे, क्योंकि मैं जबलपुर में साढ़े चार साल एसपी रहा, तब से मेरे इनसे अच्छे संबंध हैं. मैं इनका वह काम भी करवा दूंगा.

श्री अशोक रोहाणी -- अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्री जी का बहुत बहुत धन्यवाद करता हूं.

पं. रमेश दुबे -- अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि आपके डॉक्टरों के पदों की पूर्ति के लिये तरीका क्या है. वह हमें पता नहीं है, मैं मंत्री जी से जानना चाहूंगा कि वे तीरका बता दें, हम वैसा तरीका अपनायें और इतने बड़े अस्पताल में चूंकि रात में हमारे यहां डॉक्टर नहीं रहने के कारण दुर्घटना होने के कारण लोगों का इलाज नहीं करा पाते हैं. मंत्री जी, जो तरीका आप बतायें, वह तरीका मैं करने के लिये तैयार हूं, लेकिन मेरे यहां तो कम से कम व्यवस्था हो जाये.

..(हंसी)..

डॉ. गोविन्द सिंह -- मंत्री जी, सामने नहीं बता सकते तो गुपचुप तरीके से बता दे, कौन सी व्यवस्था हम ढूंढे. आज भी तमाम संविदा के लिये एमबीबीएस डॉक्टर घूम रहे हैं. आपने उन पर प्रतिबंध लगा दिया. आप उनकी भर्ती क्यों नहीं कर रहे हैं.

 

अध्यक्ष महोदय -- डॉक्टर साहब, अभी उनके विभाग की डिमांड्स आयेंगी, तब आप पूरी बात कर लेंगें, तो अच्छा रहेगा. प्रश्न संख्या-9.

निजी एवं शा. चिकित्सालयों में संचालित भोजन शालाएं

[लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]

9. ( *क्र. 686 ) श्री यशपालसिंह सिसोदिया : क्या लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) उज्जैन, इंदौर संभाग के कितने शासकीय एव निजी चिकित्सालय आई.एस.ओ. एवं नेशनल क्वालिटी इंश्‍योरेंस जैसी संस्थाओं से रजिस्टर्ड हैं? सूची उपलब्ध करायें। क्या निजी चिकित्सालयों को उक्त संस्थाओं से रजिस्टर्ड नहीं होने के बाद भी चिकित्सालय संचालन की अनुमति दी जा सकती है? (ख) उक्त संभाग के कितने चिकित्सालयों, नर्सिंग होम ने अस्पताल में ही भोजनशाला प्रारम्भ करने हेतु फूड लायसेंस रजिस्ट्रेशन ले रखा है, उनकी प्रतिलिपि चिकित्सालयों के नाम सहित उपलब्ध करायें क्या उक्त संभाग के निजी चिकित्सालयों में मरीजों एवं परिवारजनों के भोजन की दर स्वास्‍थ्‍य विभाग के किसी सक्षम अधिकारियों की उपस्थिति में तय किये जाते हैं? यदि हाँ, तो निजी चिकित्सालयों में तय दर चिकित्सालयवार उपलब्ध करायें (ग) गत 1 जनवरी 2010 के पश्चात उक्त संभाग के कितने-कितने निजी चिकित्सालयों में फूड-पॉयजनिंग के प्रकरण कहाँ-कहाँ सामने आये? क्या चिकित्सालयों में भोजन मरीज की डाईट अनुसार दिया जाता है? यदि हाँ, तो कम मात्रा के भोजन के 200-300 रु. क्यों लिए जाते हैं? क्या उक्त अवधि में उपसंचालक खाद्य व औषधि प्रशासन ने इन निजी चिकित्सालयों के भोजन के सेम्पल की जाँच की है? यदि हाँ, तो उसमें क्या-क्या कमियाँ कहाँ-कहाँ पायी गयी? सेम्पल की दिनांकवार जानकारी देवें। यदि नहीं तो क्यों?

लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) :

 

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया -- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न वैसे तो पूरे मध्यप्रदेश के निजी और सरकारी अस्पतालों से संबद्ध था,लेकिन संक्षिप्त करते हुए इन्दौर एवं उज्जैन संभाग तक इसको सीमित किया गया है. आप स्वयं एक चिकित्सक रहे हैं और मैं आपसे संरक्षण चाहूंगा. जीवन से जुड़ा मामला है, उन निजी चिकित्सालयों एवं सरकारी अस्पतालों में जहां पर औषधि के साथ साथ भोजन की सामग्रियां निजी केंटीन्स के माध्यम से, भोजन शालाओं के माध्यम से या यूं कहें कि निजी चिकित्सालयों में स्वयं के द्वारा वितरित करने को लेकर के है, एक तो उसका जो रेट है, अगर किसी मरीज की न्यूनतम डाइट है, उस दिन जिस दिन भर्ती होता है, उस दिन भी 300 रुपये, 400 रुपये वसूल किये जाते हैं प्रायवेट अस्पतालों में और जिस समय वह ठीक होने की स्थिति में होता है, तब भी डाइट के 300-400 रुपये लिये जाते हैं. मेरा एक आपसे यह निवेदन था. अध्यक्ष महोदय, मुझे मंत्री जी के विभाग से प्राप्त प्रश्नांश (क) के उत्तर में इंदौर एवं उज्जैन संभाग के नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस एवं आई.एस.ओ. रजिस्ट्रेशन की बाध्यता से इंकार किया है. इसी के साथ साथ दोनों संभागों में परिशिष्ट दो को अगर आप देखेंगे, तो संभाग में 13 ने निजी में आई.एस.ओ. रिजस्ट्रेशन हैं, जबकि 7 की जानकारी निरंक है. मैं मंत्री जी की बात से सहमत हो सकता हूं कि नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस में एवं आई.एस.ओ. में रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता के लिये बाध्यता नहीं है. मैं मंत्री जी का ध्यान आकर्षित भी करना चाहूंगा और यह भी आग्रह करना चाहूंगा कि माननीय केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, श्री जे.पी. नड्डा जी का एक पत्र 12 जनवरी,2017 का आप और आपका विभाग अवलोकन कर लें और उसके बारे में आप जब भी चाहें मुझे अवगत करा दें. एन.क्यू.ए.एस की बाध्यता को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जी ने बेहतरीन सेवा देने के लिये और कायाकल्प के संदर्भ में 3 सदस्यीय टीम का भारत शासन के मूल्यांकन के आधार पर दिनांक 6.12.2016 से लेकर के 8.12.2016 तक के लिये एक असिस्मेंट समिति बनाई थी. जिला तापी, गुजरात के व्यास जनरल हास्पीटल में 85 प्रतिशत उपयुक्त मानदण्डों के आधार पर एन.क्यू.ए.एस. में प्रथम है, पूरे हिन्दुस्तान में..

अध्यक्ष महोदय -- आपका प्रश्न क्या है.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया -- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न इसी से उद्भूत हो रहा है. साथ में स्वास्थ्य मंत्री जी ने नड़ियाद और मेहसाणा में भी कुछ शर्तों के साथ एनक्यूएएस की प्रामाणिकता को सशर्त दिया गया था. मैं मंत्री जी से आग्रह करुंगा कि अगर भारत सरकार ने गुजरात को कोट करते हुए अगर इतना महत्वपूर्ण पत्र प्रेषित किया और पूरे देश पर लागू करने की बात की है, तो क्या आपका विभाग और आप स्वयं इन शर्तों के आधार पर, ताकि उसकी बेहतरीन सुविधा के लिये एनक्यूएएस का प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा सके, इसके बारे में कोई कार्यवाही करेंगे. यह मेरा एक प्रश्न है.

श्री रुस्‍तम सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी ने व्‍यवस्‍थाओं को बेहतर करने के लिए सजेस्‍टिव और सुधारात्‍मक उपाय करने के केन्‍द्रीय मंत्री जी के पत्र का उल्‍लेख किया है, हम उसका गहन परीक्षण भी कराएंगे और उसके परिप्रेक्ष्‍य में बेहतरी के लिए और क्‍या-क्‍या हो सकता है, वह जरूर करेंगे.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा दूसरा प्रश्‍न निजी चिकित्‍सालयों और शासकीय चिकित्‍सालयों में भोजन की व्‍यवस्‍था को लेकर है. माननीय मंत्री जी ने इस बात से इंकार किया है कि हमारे विभाग का मामला नहीं है, यह खाद्य विभाग का मामला है. लेकिन परिसर तो लोक स्‍वास्‍थ्‍य परिवार कल्‍याण मंत्रालय का है और उसमें अगर भोजन केन्‍टीन से आता है, कहीं किसी भण्‍डारे से आता है और अगर प्रदूषित तथा अमानक भोजन मरीजों को मिलता है तो अनेक घटनाएं घटित हुई हैं. अगर आप परिशिष्‍ट-तीन देखें तो पता चलता है कि 9 में से 4 की जांच रिपोर्ट विभाग ने, संयुक्‍त नियंत्रक, खाद्य एवं औषधीय प्रशासन ने अभी भी अप्राप्‍त बताई है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इंदौर का अरबिंदो चिकित्‍सालय बड़ा नामचीन चिकित्‍सालय है. माननीय मंत्री जी, मगज, तरबूज और कोकोनट पाऊडर मानक स्‍तर से कम पाया गया था और उस पर मिथ्‍या छाप थी, उसके ऊपर फर्जी छाप था, इसको लेकर प्रकरण क्रमांक 78, दिनांक 17.02.2016 माननीय न्‍याय निर्णय अधिकारी, जिला इंदौर में दायर किया गया था. आरोपी यानि अरबिंदो अस्‍पताल पर 20 हजार रुपये का अर्थदण्‍ड आरोपित किया गया था. मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूँ कि आपकी जवाबदारी है या नहीं है, लेकिन संयुक्‍त जवाबदारी होती है कि आप खाद्य विभाग के महकमे के साथ, विशेषकर खाद्य एवं औषधि विभाग तो आपका स्‍वयं का है, आप उनकी संयुक्‍त टीम का गठन करें और इस प्रकार अमानक जो खाद्य सामग्रियां जा रही हैं और अर्थदण्‍ड हो रहे हैं, इस पर ध्‍यान दें. मुझे जो जवाब मिला है उसमें से 9 में से 4 की रिपोर्ट्स अभी भी अप्राप्‍त हैं, ये चारों रिपोर्ट्स मुझे कब तक प्राप्‍त हो जाएंगी, इसकी समय-सीमा आप बताने का कष्‍ट करें.

श्री रुस्‍तम सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, फूड एंड ड्रग्‍स वाला जो विभाग है, यह विभाग भी स्‍वास्‍थ्‍य विभाग में ही आता है. यह स्‍वास्‍थ्‍य विभाग का ही एक हिस्‍सा है. इसलिए वह जवाबदारी भी स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की है. मैं आपके मार्फत माननीय विधायक जी को यह बताना चाहता हूँ कि विभाग पूरी तरह से मुस्‍तैद है. जहां भी हमको लगता है, शिकायत मिलती है या मोटे तौर पर भी जानकारी मिलती है तो स्‍वास्‍थ्‍य विभाग का हमारा अमला, जैसा वे चाहते हैं, टीम बनाकर इन हॉस्‍पिटल्‍स में, जो प्राइवेट हॉस्‍पिटल्‍स हैं, उनमें भी जो खाद्य सामग्री तैयार की जा रही है, उनके सैम्‍पल भी लिए जाएंगे और त्‍वरित गति से कार्यवाही की जाएगी. मैं आपके मार्फत पूरे सदन को यह बताना चाहता हूँ कि इसके लिए पहले केवल एक ही लैब भोपाल में थी, अब इंदौर और जबलपुर में भी लैब खोली जा रही है, इस तरह से 3 लैब हो गई हैं तो जो देरी लगती थी, वह नहीं होगी और रिजल्‍ट्स जल्‍दी मिलेंगे. यह विशेषकर इंदौर में हुआ है तो इंदौर उज्‍जैन संभाग में बहुत जल्‍दी इसके रिजल्‍ट्स हमें मिलेंगे. पहले पेंडेंसी होती थी, यह कार्यवाही भी स्‍वास्‍थ्‍य विभाग ने कराई है. यह स्‍वीकृत हो चुकी हैं, जल्‍दी चालू हो जाएंगी.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा उत्‍तर नहीं आया है. 9 में से 4 की जांच रिपोर्ट्स अभी भी अप्राप्‍त हैं, मैं परिशिष्‍ट-तीन की बात कर रहा हूँ, इसकी जानकारी मुझे कब तक उपलब्‍ध करा देंगे, समय-सीमा बता दें.

श्री रुस्‍तम सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी वैसे तो बहुत विद्वान हैं, समय-सीमा मैं क्‍या बताऊँ, जब रिपोर्ट्स उपलब्‍ध हो जाएंगी तभी तो दी जाएंगी. मैंने कह भी दिया कि एक ही लैब है, बहुत पेंडेंसी रहती है, इंदौर में भी शुरू हो जाएगी तो पेंडेंसी नहीं रह जाएगी. लेकिन इतना विश्‍वास दिलाता हूँ कि जिस दिन भी इसकी रिपोर्ट आ जाएगी, उसी दिन माननीय सदस्‍य को उपलब्‍ध करा दी जाएगी.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने रेट का तो कुछ बताया ही नहीं, 200 रुपये डाईट, 300 रुपये डाईट, 400 रुपये डाईट, मनमाना पैसा ले रहे हैं, रेट का आप बता दें, आपका अस्‍पताल परिसर है ?

श्री रुस्‍तम सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ये प्राइवेट हॉस्‍पिटल्‍स हैं, जिनमें बाम्‍बे हॉस्‍पिटल, चोईथराम हॉस्‍पिटल हैं या और भी हॉस्‍पिल्‍स हैं, उनके रेट वे स्‍वयं तय करते हैं. उस पर शासकीय तौर पर हम लोगों की तरफ से कोई बंधन नहीं है कि आप इस चीज को इस रेट में देंगे क्‍योंकि फिर यह बात आती है कि हम क्‍वालिटी मेन्‍टेन नहीं कर पाएंगे. इसलिए इस झमेले में स्‍वास्‍थ्‍य विभाग अभी तक नहीं पड़ा है. फिर भी विधायक जी इस पर भी कोई सजेशन देंगे तो उस पर कार्यवाही करने का जरूर प्रयास करेंगे.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया -- अध्‍यक्ष महोदय, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

श्री शंकरलाल तिवारी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बहुत संवेदनशील विषय है, मुझे एक सेंकड कह लेने दीजिए.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं तिवारी जी, श्री सोलंकी जी अपना प्रश्‍न करें.

श्री शंकरलाल तिवारी -- अध्‍यक्ष महोदय, बहुत संवेदनशील मामला है, सिर्फ एक सेकंड.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, सिर्फ प्रश्‍नकर्ता ही एलाऊड है.

श्री शंकरलाल तिवारी -- अध्‍यक्ष महोदय, सोनोग्रॉफी, सिटी स्‍केन, एमआरआई, यह सारा एक ही मशीन से होता है. कहीं 5 हजार रुपये, कहीं 3 हजार रुपये लिये जाते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- यह विषय नहीं है. यह प्रश्‍न उद्भुत नहीं होता. सोलंकी जी, प्रश्‍न पूछे.

 

चिकित्सकों एवं उपकरणों की पूर्ति

[लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]

10. ( *क्र. 124 ) श्री हितेन्द्र सिंह ध्‍यान सिंह सोलंकी : क्या लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बड़वाह विधान सभा क्षेत्र में शासकीय अस्पतालों में सेटअप अनुसार शासन द्वारा चिकित्सकों एवं स्टॉफ के कितने पद स्वीकृत हैं? अस्पतालवार सूची देवें। (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार स्वीकृत पद के अनुसार कितने चिकित्सक एवं स्टॉफ कार्यरत हैं? विगत 4 वर्षों में प्रश्नकर्ता के द्वारा चिकित्सकों एवं स्टॉफ, चिकित्‍सा उपकरणों की पूर्ति हेतु कब-कब प्रस्ताव प्रस्तुत किये गए हैं? प्राप्त प्रस्ताव अनुसार विभाग द्वारा क्या कार्यवाही की गई है? (ग) क्या बड़वाह अस्पताल में दन्त चिकित्‍सक की पदपूर्ति तो हो गई, किन्तु उपकरण उपलब्ध नहीं कराये गए हैं? यदि हाँ, तो ऐसी पदपूर्ति का क्या औचित्य है? उपकरणों की पूर्ति कब तक की जावेगी? इसी प्रकार अन्य अस्पतालों में भी पद एवं उपकरणों की पूर्ति कब तक की जावेगी?

लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। विभाग निरंतर पदपूर्ति हेतु प्रयासरत है, विगत 04 वर्षों में उपलब्धता अनुसार बड़वाह विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत 12 चिकित्सक, 07 स्‍टॉफ नर्स, 03 फार्मासिस्ट, 04.एन.एम. की पदस्थापना की गई है। मांग अनुसार डेंटल चेयर एवं डेंटल स्टुल की आपूर्ति की जा चुकी है। मांग अनुसार एवं निर्धारित मापदण्ड अनुसार संस्था की पात्रता अनुसार उपकरण प्रदान किए जाने संबंधी कार्यवाही निरंतर जारी है। (ग) उत्तरांश () अनुसार। निर्धारित मापदण्ड अनुसार एवं मांग अनुसार परीक्षण उपरांत निरंतर उपकरणों की पूर्ति की कार्यवाही जारी है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

 

श्री हितेन्‍द्र सिंह ध्‍यान सिंह सोलंकी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी को धन्‍यवाद देता हॅूं कि उन्‍होंने जो सामान डेंटिस्‍ट के लिए भेजा है, वे धन्‍यवाद के पात्र हैं. लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के अधिकारी, कर्मचारी कहीं न कहीं थोड़ा बहुत इसमें लापरवाही कर रहे हैं और जब डेंटिस्‍ट साल भर से वहां पर था तो मैंने जब प्रश्‍न लगाया उसके बाद से कोई सामग्री उन्‍होंने भेज दी तो मैं यह चाहूंगा कि डेंटिस्‍ट की स्‍थापना कब हुई और इन्‍होंने यह सामग्री इतने विलंब से क्‍यो भेजी, इसमें दोषी कौन था ? क्‍योंकि डॉक्‍टर को तो भेज दिया और यदि वहां पर टेबल नहीं होगी, कोई चेयर नहीं होगी या सामान नहीं होगा तो, वह क्‍या काम कर पाएगा ? दूसरी बात मैं यह कहूंगा कि बड़वाह नगर, सनावद नगर हमारा ग्राम काटकूट और ग्राम बेडि़या इनमें दवाखाना बहुत बडे़-बड़े हैं. यहां पर स्‍त्री रोग विशेषज्ञ नहीं हैं और आपने अपने जवाब में भी स्‍वीकार किया है कि यहां पर स्‍त्री रोग विशेषज्ञ पदस्‍थ नहीं हैं. दो की स्‍थापना होनी चाहिए और दोनों पद रिक्‍त हैं तो एक न एक डॉक्‍टर की स्‍थापना हो जाए, ताकि महिलाओं को इसकी सुविधा मिल सके. आप कब तक इसकी पद पूर्ति कर देंगे ?

श्री रूस्‍तम सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपकी पहले जो डिमांड थी कि दंत चिकित्‍सक के पास चेयर और टेबल भी नहीं है वह सब तो उपलब्‍ध हो गए हैं उसके लिए वे धन्‍यवाद भी दे रहे हैं लेकिन मैं उनको यह विश्‍वास दिलाना चाहता हॅूं कि विभाग के और डायरेक्‍टोरेट के यह निर्देश हैं कि केवल कोई भी साधन उपलब्‍ध करा देना ही पर्याप्‍त नहीं है, उसका पूरी तरह से उपयोग होना चाहिए. माननीय सदस्‍य ने जो चिन्‍ता व्‍यक्‍त की है उसमें क्‍यों कमी रह गई, कौन दोषी है, क्‍यों पूरा नहीं हो पाया, शीघ्रातिशीघ्र 8 दिवस, एक हफ्ते के अंदर इसकी मैं पूर्ति करवा दूंगा. आप महिला गॉयनिक डॉक्‍टर की बात कर रहे हैं मैं आपके मार्फत यह अवगत कराना चाहता हॅूं कि अभी पुन: हमने लगभग 1400 पद पीएससी से आग्रह किया है कि भर्ती कर दें. हमारे प्रदेश में महिला गॉयनिक डॉक्‍टरों की बहुत कमी है. इसलिए मैं यह नहीं कह पाउंगा कि मैं इनको कब उपलब्‍ध करा दूंगा.

श्री हितेन्‍द्र सिंह ध्‍यान सिंह सोलंकी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एनेस्थिसिया वाले जो सूंघाते हैं वह हम बाहर से अवेलेबल कराते हैं. हमारे पास खरगोन जिले में कई जगह है. परन्‍तु विसंगतियां यह हैं कि कई जगह दो हैं, कई जगह तीन हैं और कई जगह हैं ही नहीं, तो इसको जरूर दिखवा दें. डॉक्‍टर जब एनेस्थिसिया नहीं कर पाएगा तो वह ऑपरेशन किस प्रकार से कर पाएगा और यदि ऑपरेशन नहीं होगा तो मरीज को वहां से ट्रांसफर करना पड़ता है कि मरीज को बड़वाह भेज दो, इंदौर, खरगोन भेज दो, तो इसे एक बार जरूर दिखवा लीजिए. इसकी जांच हो जाएगी, तो ठीक रहेगा.

श्री रूस्‍तम सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य का जो सुझाव है इसको करा देंगे.

तालाबों से पानी लिफ्ट किया जाना

[जल संसाधन]

11. ( *क्र. 4060 ) श्री लाखन सिंह यादव : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या ककेटो, अपर-ककेटो एवं पेहसारी तालाब से जो पानी तिघरा डेम में लिफ्ट कर लाया जा रहा है, क्‍या यह स्थाई निदान है? यदि हाँ, तो कैसे? यदि नहीं तो इस वर्ष कितने दिनों तक इस ककेटो डेम से कितना पानी लिफ्ट किया गया तथा कितना पानी तिघरा डेम में पहुंचा तथा कितना वेस्टेज गया? इस पानी को लिफ्ट कर तिघरा तक लाने में सरकार का कितना खर्चा आया? इतना खर्चा कर उक्त तालाब क्षेत्रों के किसानों की फसलों को सिंचाई से वंचित रखा जाना क्या इन तालाब क्षेत्र के किसानों के साथ अन्याय नहीं है? यदि हाँ, तो ऐसा क्यों किया जा रहा है? क्या स्थाई निदान हेतु ग्वालियर शहर को पेयजल पूर्ति के लिये चम्बल नहर से पानी लाना है? यदि हाँ, तो इस संकट के पैदा होने तक इस सम्बन्ध में विलम्ब किन-किन अधिकारियों की लापरवाही के कारण हुआ? कब तक चम्बल नहर से तिघरा डेम में पानी लाने की स्थाई व्यवस्था कर पानी पहुंचा दिया जावेगा? (ख) क्या ककेटो, अपर ककेटो, पेहसारी तालाब से हिम्मतगढ़, रायपुर एवं बरई चौरसिया तालाब को लिंक कर जलभराव की शासन की योजना थी? यदि हाँ, तो क्‍या इन तालाबों से लगने वाले ग्राम पंचायत, बड़ा गांव, मोहना, ददौरी, सहसारी, दौरार, चराई श्‍यामपुर, रेहट, महारामपुरा, सिरसा, घाटीगांव, धुआँ, बरई, पनिहार, रायपुर, नयागांव, हिम्मतगढ़, पार, सिमरिया, हुकुमगढ़, बनवार, उर्वा, मऊछ, धिरौली, अमरौल इत्यादि जहाँ पिछले 10-12 वर्षों से वर्षा बहुत कम होती जा रही है? यदि हाँ, तो इन पंचायतों तथा तालाब क्षेत्र के कैचमेन्ट ऐरिया में क्या इतनी कम वर्षा से इन ग्रामों में पेयजल एवं फसलों की सिंचाई का संकट पैदा हो गया है? यदि हाँ, तो क्या आने वाले वर्षों में इन तालाबों का पानी तिघरा तालाब को न देकर हिम्मतगढ़, रायपुर एवं बरई चौरसिया तालाबों को भरकर इन तालाब क्षेत्रों में आने वाली ग्राम पंचायतों के ग्रामवासियों को उपलब्ध कराया जावेगा? यदि हाँ, तो कब तक?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) जी नहीं। अल्‍प वर्षा से उत्‍पन्‍न गंभीर स्थिति के कारण ककेटो बांध से दिनांक 13.11.2017 से दिनांक 10.02.2018 तक 32.03 मिघमी. पानी उद्वहन किया जाकर तिघरा बांध में 22.71 मिघमी. पानी पहुंचाया गया। मार्ग में 9.32 मिघमी. पानी की हानि हुई। उद्वहन करने पर रू. 544.96 लाख व्‍यय हुआ। जी नहीं। उद्वहन किया गया पानी डेड स्‍टोरेज का है, जिसे नहर में प्रवाहित नहीं किया जा सकता। चंबल नहर केवल रबी में संचालित होने से ग्‍वालियर शहर के लिए पेयजल की व्‍यवस्‍था चंबल नहर से की जाना तकनीकी रूप से साध्‍य नहीं है। अल्‍प वर्षा भौगोलिक आपदा है जिसके लिए किसी अधिकारी के जिम्‍मेदार होने की स्थिति नहीं है। जी नहीं। (ख) विभाग की कोई योजना नहीं है। प्रश्‍न उत्‍पन्‍न नहीं होता है। जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। अल्‍प वर्षा से जल की कमी उत्‍पन्‍न हुई है। जी नहीं, पेयजल सर्वोच्‍च प्राथमिकता होने के कारण प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

परिशिष्ट - ''एक''

श्री लाखन सिंह यादव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ग्‍वालियर जिले में पिछले 10-12 सालों से पानी बहुत कम गिरा है जिसकी वजह से समूचा ग्‍वालियर जिला सूखे की स्थिति में है. अभी पिछले साल जो रेन फॉल हुआ है जहां से तिघरा केचमेंट एरिया है जहां से पूरे शहर को पानी पिलाया जाता है, वहां मात्र 246 एम.एम. बारिश हुई है. उसकी परिणति यह हुई कि जो ककेटो डेम है जो मेरी विधानसभा का बड़ा डेम है, हरसी और ककेटो बडे़ डेम हैं वहां से शहर के लिए 82-83 दिन पानी लगातार छोड़ा गया. उसकी वजह यह रही कि मेरे विधानसभा क्षेत्र के किसानों का जो पानी था जिन्‍हें सिंचाई के लिए पानी मिलना था, जिन्‍हें पीने के लिए पानी मिलना था, पशु और जानवरों के पानी रहता था वह सारा का सारा पानी तिघरा डेम के लिए पिछले 82-83 दिन में ड्रॉप कर दिया गया. मेरा आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि यह अभी आपने जो टेम्‍पररी व्‍यवस्‍था की है इस टेम्‍पररी व्‍यवस्‍था के लिए मैं पिछली जिला योजना समिति की मीटिंग में भी बोलता रहा हॅूं. केन्‍द्रीय मंत्री माननीय श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर जी से भी मैं निवेदन करता रहा हॅूं.

अध्‍यक्ष महोदय -- कृपया प्रश्‍न कर दें. लंबी भूमिका हो गयी है.

श्री लाखन सिंह यादव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रश्‍न ही कर रहा हॅूं. यह ककेटो डेम का जो पानी है जब इस ककेटो डेम का निर्माण हुआ था तब इस ककेटो डेम का निर्माण इसलिए कराया गया था कि यह जो बरई चौरसिया डेम, रायपुर डेम, हिम्‍मतगढ़ डेम और ग्‍वालियर का डेम है हमारे माननीय मंत्री जी बैठे हैं इनके गांव का डेम है, इन डेमों के लिए पानी देने के लिए उस प्‍लॉनिंग से इसका निर्माण किया गया था. लेकिन अभी पिछले कुछ समय से तिघरा के लिए पानी दिया जा रहा है चूंकि माननीय अध्‍यक्ष जी, हम यह भी जानते हैं कि पानी कम गिर रहा है. सबसे पहले इंसान को पानी पीने की आवश्‍यकता होती है.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप पहले प्रश्‍न तो करें ?

श्री लाखन सिंह यादव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इसलिए कह रहा हॅूं कि ग्‍वालियर के तीन-तीन कद्दावर मिनिस्‍टर यहां बैठे हैं लेकिन लगातार लंबे समय से टेम्‍पररी आपने 11 करोड़ रूपए के टेण्‍डर किए. साढ़े 5 करोड़ रुपये आप सिर्फ लिफ्ट करने के लिए दे रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय-- आप प्रश्न तो करें.

श्री लाखन सिंह यादव-- मैं वही तो कह रहा हूँ.

अध्यक्ष महोदय-- पृष्ठभूमि मत बताओ.

श्री लाखन सिंह यादव-- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न यह है कि मैं पिछले लगातार कई वर्षों से यह निवेदन कर रहा हूँ कि इस समय वर्षा की स्थिति ठीक नहीं रह रही है मैं चाहता हूँ कि इसका एक परमानेंट निदान हम निकालें और उसके लिए मैंने चंबल नदी से...

अध्यक्ष महोदय-- आप फिर भाषण करने लगे.

श्री लाखन सिंह यादव-- अध्यक्ष महोदय, मैं वही तो कह रहा हूँ यह मेरे प्रश्न में है मैंने चंबल नदी से तिघरा तक पानी लाने के लिए अनुरोध किया था. मेरा प्रश्न है कि इसकी समय सीमा बता दें. माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे ग्वालियर के यहाँ बड़े बड़े मंत्री बैठ हैं,केंद्र में बैठें हैं, यह चाहे तो बहुत जल्दी इसका निदान हो जाएगा. मुझे पूरा विश्वास है कि..

अध्यक्ष महोदय-- आप बैठ जाएं, भाषण ना दें.

श्री लाखन सिंह यादव--मैं भाषण नहीं दे रहा हूँ. ग्वालियर में त्राहि-त्राहि मची हुई है.

अध्यक्ष महोदय-- आप तो भाषण दे रहे हैं. आप प्रश्न पूछ लें.

श्री लाखन सिंह यादव-- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी यह बता दें कि चंबल नदी का पानी आप तिघरा में लाएंगे या नहीं लाएंगे और लाएंगे तो कब तक लाएंगे?

अध्यक्ष महोदय-- इतनी बात के लिए आपने कितना लंबा समय ले लिया दूसरे सदस्यों का.

श्री लाखन सिंह यादव-- अध्यक्ष महोदय, बहुत परेशानी है वहाँ.

डॉ. नरोत्तम मिश्र-- माननीय अध्यक्ष महोदय, सम्मानित सदस्य ने बहुत बड़ा प्रश्न किया है आप कहें तो अपर ककेटो, ककेटो, तिघरा ऐसे होते हुए ग्वालियर पर आऊँ या उन्होंने जो स्पेसीफिक आखिरी में पूछा है उसका उत्तर दूँ?

अध्यक्ष महोदय-- असल में वही इम्पॉर्टेंट है यह तो जबर्दस्ती उन्होंने सबका दूसरे सदस्यों का भी प्रश्न किया है.

श्री लाखन सिंह यादव-- आपको इसलिए समझा रहा था मंत्रीजी कि आपका गाँव भी उसी में आता है मैं चाहता हूँ कि आप कुछ तो आश्वासन दे दें.

अध्यक्ष महोदय-- बैठ जाएं, वह सब समझते हैं. अरे, भई क्या है यह?

श्री लाखन सिंह यादव-- अध्यक्ष महोदय, पूर्व में भी जो आश्वासन दिये हैं वही पूरे नहीं हुए हैं.

अध्यक्ष महोदय-- आपको उत्तर लेना है या नहीं लेना है. यह क्या है आप प्रश्नकाल में भाषण दे रहे हैं.दूसरों के प्रश्न भी हैं.

डॉ. नरोत्तम मिश्र-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी आपसे इतनी प्रार्थना यह थी कि आखिरी वाले प्रश्न का उत्तर देना है? उन्होंने मुझे समझाया, वह समझदार हैं यह सिद्ध हो गया.मैं आखिरी प्रश्न का उत्तर दूँ या पूरे का उत्तर दूँ?(हंसी)

अध्यक्ष महोदय-- आप तो कृपा करके आखिरी का दे दें कि पानी कब देंगे, चंबल से देंगे या नहीं.

डॉ. नरोत्तम मिश्र-- माननीय अध्यक्ष महोदय, दो अलग-अलग तरह की बात है. यह जो वर्तमान में ककेटो से पानी तिघरा जा रहा है, तिघरा से पानी ग्वालियर जा रहा है, उसमें हम सिर्फ एजेंसी है. नगर निगम के द्वारा यह पानी ले जाया जा रहा है. हम उसमें नोडल एजेंसी हैं, पेयजल का वह पानी है. दूसरी बात चंबल से पानी ग्वालियर लाने के लिए हमारी सम्मानित मंत्री महोदया माया सिंह जी ने यह प्रस्ताव केंद्र को भी भेजा है और उनको भी भेजा है. जहाँ तक तिघरा में पानी डालने का सवाल है , तिघरा, चंबल की जो नहर निकलती है उससे काफी ऊँचाई पर है.

अध्यक्ष महोदय-- लाखन सिंह जी, एक प्रश्न और पूछ लें वह भी बिना भाषण के.

श्री लाखन सिंह यादव-- अध्यक्ष महोदय, जैसे माननीय मंत्री जी ने कहा है कि यह प्रस्ताव भेजा है और आपने कह दिया कि तिघरा की हाईट चंबल से ज्यादा है.जब हाईट ज्यादा है तो मंत्री जी ने वह प्रस्ताव कहाँ के लिए भेजा है. क्या शहर के लिए डायरेक्ट पानी आएगा क्या?

डॉ. नरोत्तम मिश्र-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जी हाँ.

श्री लाखन सिंह यादव-- अध्यक्ष महोदय, मैं तो यह कह रहा हूँ कि आप तो मोटर से लिफ्ट करवाओ ना, पंपों से लिफ्ट करवा दें.

अध्यक्ष महोदय-- मंत्री जी, पानी डायरेक्ट आएगा?

डॉ. नरोत्तम मिश्र-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जी हाँ.

वेतन विसंगति का निराकरण

[लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]

12. ( *क्र. 4084 ) श्री तरूण भनोत : क्या लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सामान्‍य प्रशासन विभाग द्वारा अक्‍टूबर, 2006 में ब्रह्मस्‍वरूप समिति की अनुशंसायें लागू की गई थीं? यदि हाँ, तो स्‍वास्‍थ्‍य विभाग में किन-किन पदों पर उक्‍त अनुशंसायें की गई थीं? जानकारी पदों के नामवार पृथक-पृथक से दी जावे। (ख) प्रदेश के स्‍वास्‍थ्‍य विभाग में विभिन्‍न पदों पर आई.टी.आई. से उत्‍तीर्ण योग्‍यता वाले पदों में वेतन विसंगतियां हैं, जिसमें स्‍टेनोग्राफर पद पर 1 वर्ष आई.टी.आई. योग्‍यता वाले पद को अधिक वेतनमान और रेफ्रि‍जरेटर मैकेनिक पद पर दो वर्ष की आई.टी.आई. योग्‍यता वाले को कम वेतनमान दिया जा रहा है? (ग) यदि प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) सही है तो इस वेतन विसंगति के लिये कौन-कौन अधिकारी एवं कर्मचारी जिम्‍मेदार हैं और इन पर कब तक अनुशासनात्‍मक कार्यवाही की जायेगी? (घ) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) अनुसार ब्रह्मस्‍वरूप समिति की अनुशंसाओं में रेफ्रि‍जरेटर मैकेनिक के वेतनमान की वेतन विसंगति कब तक दूर कर स्‍टेनोग्राफर के समान वेतनमान दिया जावेगा?

लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) जी हाँ। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधीन स्वीकृत पदों हेतु नियमानुसार सेवा भर्ती नियम बनाये जाकर वेतनमान स्वीकृत किये गये हैं। विभाग के अधीन क्रमशः मध्यप्रदेश लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण (संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें) तृतीय श्रेणी, लिपिक वर्गीय भर्ती नियम 1989 तथा मध्यप्रदेश लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग अलिपिकीय (संचालनालय स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित) तृतीय श्रेणी, सेवा भर्ती नियम, 1989 प्रचलित है। जिनमें विभिन्न पदों हेतु निर्धारित योग्यता तथा वेतनमान निर्धारित है। उक्त नियमों के तहत् कर्मचारियों को वेतनमान प्रदत्त किये जा रहे हैं। (ग) उत्तरांश (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा अक्टूबर 2006 में ब्रह्मस्वरूप समिति की अनुशंसाओं के बिन्दु 5.3 परिशिष्ट-1 एवं परिशिष्ट-2 के अतिरिक्त शेष समस्त पदों का वेतनमान यथावत रखा जाकर अपरिवर्तित रहेगा। अनुसार अन्य पदों सहित रेफ्रि‍जरेटर मैकेनिक का वेतनमान अपरिवर्तित रखा गया है।

डॉ. गोविंद सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न है कि..

डॉ. नरोत्तम मिश्र-- माननीय अध्यक्ष महोदय,(XXX).

अध्यक्ष महोदय-- इसको कार्यवाही से निकाल दें.

डॉ. गोविंद सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय,इनके आश्वासन का तो कोई भरोसा नहीं है.

डॉ. नरोत्तम मिश्र-- माननीय अध्यक्ष महोदय,आपकी थोड़ी तवज्जो चाहूँगा, ध्यान चाहूँगा आप देखिये क्या स्थिति है. गोविंद सिंह जी को आप देखो. नेता प्रतिपक्ष गये तो चार्ज इनको नहीं देकर गये वह राजा को नेता प्रतिपक्ष का चार्ज दे गये हैं और (XXX).

अध्यक्ष महोदय-- यह निकाल दें.

डॉ. गोविंद सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय,मुझे आज बीच में जाना है. हम लोगों का चार्ज सामूहिक है. चार्ज होता काहे का है.

डॉ. नरोत्तम मिश्र-- माननीय अध्यक्ष महोदय, चार्ज या तो उपनेता को दिया जाता, मुख्य सचेतक को दिया जाता है, सीनियर को दिया जाता है, लेकिन राव विक्रम सिंह जूदेव महाराजाधिराज को चार्ज दिया गया है, आपको मालूम है.

डॉ. गोविंद सिंह-- हाँ तो उनको शाम तक रहना है, मुझे नहीं रहना है.

अध्यक्ष महोदय-- डॉ. साहब प्रश्न करें.

डॉ.गोविंद सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, तरुण भनोत जी ने जो प्रश्न किया था उसमें पूछा है कि ब्रम्ह स्वरूप कमेटी वेतन विसंगतियों के लिए बनाई गई थी. तो मैं यह जानना चाहता हूँ कि ब्रम्ह स्वरूप कमेटी की रिपोर्ट आई है और उसमें एक वर्ष की आईटीआई को, जो स्टेनोग्राफर है, उसको अधिक वेतन और जिसने दो वर्ष आईटीआई का कोर्स किया है, उसको वेतन कम, रेफ्रिजरेटर मेकेनिक को दिया जा रहा है, तो क्या अगर वेतन विसंगति रह गई है, तो दुबारा क्या उसको रिओपन करके दूसरी कमेटी के द्वारा इसका पुनर्निर्धारण किया जा सकता है कि नहीं?

अध्यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री रुस्तम सिंह जी, वेतन विसंगति है, वे कह रहे हैं इसको ठीक करें.

श्री रुस्तम सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, संविदा कर्मचारियों के बारे में यह पूरी जानकारी मेरे पास है, चर्चाएँ भी उनसे होती रही हैं और जब जब इनकी मांगें आईं हम लोगों ने सहानुभूतिपूर्वक इन पर विचार भी किया. लेकिन उनकी कुछ ऐसी मांगें हैं जिनका संभवतः पालन हो नहीं हो सकता है. वे रेग्युलर होना चाहते हैं, अध्यक्ष महोदय, रेग्युलर होने के लिए कुछ अर्हताएँ होती हैं, कुछ क्वालिफिकेशंस होती हैं, उसकी परीक्षाएँ होती हैं, हमने इनको, जितने संविदा कर्मचारी हैं, जब जब रेग्युलर पद निकाले हैं, तो इनको बोनस मार्किंग देकर, अभी कुछ पद स्वीकृत होकर, भर्ती किए गए थे, 1800, ये संविदा कैडर के ही कर्मचारी 80-90 परसेंट उसमें भर्ती हुए हैं. उनको 2 परसेंट बोनस मार्क्स, सर्विस के हिसाब से, लैंथ आफ सर्विस से, हम लोग देते हैं, जितना संभव है इनको हम लोग करते हैं, बार बार हमेशा, जो दूसरी वाली उन्होंने इसमें जो चिन्ता व्यक्त की है, उनका हमारी तरफ से, शासन की तरफ से, एक समिति गठित करके, उस पर अपना प्रस्ताव भी, फायनेंस विभाग को भेजा जा चुका है. वह काफी सकारात्मक है, उससे सभी को लाभ भी होगा.

डॉ.गोविन्द सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने जो प्रश्न किया है, माननीय मंत्री जी पहले तो सोच रहे थे कि भनोत जी हैं नहीं, ये बैठे बैठे यह सोच रहे थे. अब आपने पढ़ा नहीं है. आपने स्वयं कहा है कि वेतनमान निर्धारित है, ये संविदा कर्मचारी नहीं हैं, ये नियमित कर्मचारी हैं और नियमित कर्मचारी के साथ आपने जो दिया है परिशिष्ट 5 (3) में, इन्होंने कहा है कि इनका अभी फिलहाल वेतन अपरिवर्तित रहेगा. 20-25 वर्षों की इनकी सेवाएँ हो चुकी हैं, सबका पुनर्निर्धारण हो रहा है, तो क्या रेफ्रिजरेटर मेकेनिक के वेतनमान का निर्धारण करने के लिए शासन कोई नीति बनाएगा और बनाएगा तो कब तक बनाएगा?

श्री रुस्तम सिंह-- अध्यक्ष महोदय, सामान्यतः मैंने डॉक्टर साहब को पहले सब्सिट्यूट के रूप में नहीं देखा, आज वे सब्सिट्यूट कर रहे हैं भनोत जी को इसलिए मैंने पहले इसको बहुत उससे नहीं लिया. मैंने कहा आपको तो चिन्ता संविदा कर्मियों की है तो मैंने बताया लेकिन वे खुद विद्वान हैं, सब जानते हैं कि जो वे कह रहे हैं वह हो नहीं सकता, ये जानते हैं. अध्यक्ष महोदय, मेरा आग्रह यह है कि आईटीआई से स्टेनो भी होता है, आईटीआई से रेफ्रिजरेटर का मेकेनिक भी होता है. ये रेफ्रिजरेटर के मेकेनिक को स्टेनो के बराबर तनख्वाह दिलाने की बात कर रहे हैं, यह जो है, वह संभव नहीं है, वह हो नहीं पाएगा, मैं गलत आश्वासन देना भी बिल्कुल भी उचित नहीं समझता.

डॉ.गोविन्द सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, तो फिर क्या सेवानिवृत्ति तक एक ही वेतनमान रहेगा, अपरिवर्तनीय ही रहेगा जो आपने जवाब दिया है? इसमें परिवर्तन, बढ़ोत्तरी होगा या नहीं होगा कि जितना आपने जो 30 साल पहले तय कर दिया उतना ही रहेगा?

श्री रुस्तम सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जब वे भर्ती हुए, इन्हीं शर्तों के साथ हुए. वे जानते थे कि हमें इस तरह की सर्विस करनी है. लेकिन फिर भी आप चिन्ता कर रहे हैं तो हम इस पर जरूर एक बार आंकलन कराएँगे, तनख्वाह तो बढ़नी चाहिए.

संविदा कर्मचारियों की मांगों का निराकरण

[लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]

13. ( *क्र. 4168 ) श्री सुरेन्‍द्र सिंह बघेल : क्या लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या कारण है कि म.प्र. के ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं प्रदान करने वाले संविदा कर्मचारियों की मांगों का निराकरण विभाग द्वारा नहीं किया जा रहा है? (ख) वर्ष 2013- 2016 के हड़ताल/आंदोलन के समय इन्‍हें दिए गए आश्‍वासन प्रश्‍न दिनांक तक क्‍यों लंबित है? स्‍वास्‍थ्‍य संचालक भोपाल के पत्र क्र.-3/ए/क्र./स्‍था./2013/785 भोपाल, दि. 19.03.2013 पर की गई समस्‍त कार्यवाही की छायाप्रति देवें। (ग) यदि उपरोक्‍तानुसार कार्यवाही नहीं की गई है तो कारण बतावें। क्‍या यह पत्र हड़ताल/आंदोलन समाप्‍त कराने का कोई षड्यंत्र था? (घ) इनकी मांगों का निराकरण कब तक कर दिया जाएगा?

लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) :

श्री सुरेन्द्र सिंह बघेल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश के लगभग 22,800 बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी विगत 7 दिनों से हड़ताल पर हैं. जिसमें एएनएम, एमपीएचडब्ल्यू, एलएचव्ही, एमपीएस, जेएमआई और बीके स्वास्थ्य कर्मचारी हैं. जिससे मध्यप्रदेश की ग्रामीण क्षेत्र की पूरी स्वास्थ्य सेवाएँ ठप्प पड़ी हुई हैं और गाँवों में रहने वाला व्यक्ति स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं ले पा रहा है.

अध्यक्ष महोदय-- आप कृपया प्रश्न करें.

श्री सुरेन्द्र सिंह बघेल-- अध्यक्ष महोदय, मेरा पहला प्रश्न माननीय मंत्री जी से है, क्या माननीय मंत्री जी यह बताने की कृपा करेंगे कि श्रीमान स्वास्थ्य संचालक महोदय के पत्र क्रमांक 2013/785/ दिनांक 19.3.2013 के लिखित आश्वासन के बावजूद स्वास्थ्य कर्मचारियों की 20 सूत्रीय मांगों का निराकरण क्यों नहीं किया गया है ?

श्री रुस्तम सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, इसके पहले मैंने इन्हीं की बातों की चर्चा संविदा कर्मियों को लेकर की थी. मेरा आग्रह इतना सा है कि जो मांगें नियमों के अन्तर्गत नहीं आती हैं. मूल मांग उनकी नियमितीकरण की रहती है बाकी उसके साथ अटैच रहती हैं. जो मांगें होने लायक थीं वे हमने स्वीकृत की भी हैं. समय-समय पर संविदा कर्मियों का वेतनमान भी बढ़ा है लेकिन मूल मांग है कि हम सबको रेग्यूलर कर दिया जाए. इसके लिए परीक्षा होती है इसके लिए मैंने अभी आपके द्वारा आग्रह किया था कि पिछली बार भी जो 1800 एएनएम नर्सिंग स्टाफ की भर्ती की गई थी उसमें 1400-1500 यही संविदा कर्मी ही भर्ती किेए गए थे. इनको बोनस मार्किंग दी गई थी और इनको प्रायरिटी भी दी गई थी. इसमें यह कहना कि सरकार इसमें संवेदनशील नहीं है कतई उचित नहीं है. शासन पूरी संवेदनशीलता रखता है. मेरी लगातार इनसे चर्चाएं होती हैं. कई मांगें इनकी मानी गईं पहले भी इनने आन्दोलन किया. मेरा आपके द्वारा इस सदन के सभी सदस्यों से आग्रह है कि यह सेवा अतिआवश्यक सेवा है इन्हें इस सेवा में हड़ताल बिलकुल नहीं करना चाहिए. यह सेवा लोगों के जीवन-मरण का सवाल होता है, यह ठीक नहीं है, यह अमानवीय है. दूसरी सेवाएं बाधित हो सकती हैं. स्वास्थ्य सेवाएं बाधित करना बिलकुल उचित नहीं है. जब हम उनकी मानने लायक मांगों को यूं ही मानने को तैयार रहते हैं. इसमें यह तरीका उचित नहीं है.

श्री सुरेन्द्र सिंह हनी बघेल--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी को मैं दूसरे प्रश्न का उल्लेख करके बताना चाहता हूँ कि इनकी सरकार और इनका विभाग उनके प्रति कितना संवेदनशील है. पत्र क्रमांक 703/1257/2016. वापिस स्वास्थ्य कर्मचारियों ने हड़ताल की अपनी 20 सूत्रीय मांगों को लेकर उस हड़ताल को खत्म करने के लिए, स्वास्थ्य कर्मचारियों को समझाने के लिए स्वास्थ्य मंत्री स्वयं, प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य विभाग, आयुक्त, स्वास्थ्य एवं संचालक महोदय ने चर्चा की और एक संचालक समिति फिर बना दी.

अध्यक्ष महोदय--आपका प्रश्न क्या है ?

श्री सुरेन्द्र सिंह हनी बघेल--अध्यक्ष महोदय, समिति की समयावधि निर्धारित कर दी कि 3 महीने में इनकी मांगों का निराकरण कर देंगे. इस समिति को बनाने के बाद भी इन मांगों का निराकरण आपकी सरकार ने, आपके विभाग ने क्यों नहीं किया ?

श्री रुस्तम सिंह--अध्यक्ष महोदय, यह गतवर्ष की बात कह रहे हैं उसमें से नियमितीकरण की मांग को छोड़कर लगभग जो भी व्यावहारिक मांगें थीं वे समस्त मांगें मान ली गईं थीं. लेकिन वे पुन: उन्हीं से लगी हुई कुछ न कुछ चीजों को लेकर मांग कर रहे हैं मैंने जो आग्रह किया यदि उस पर यह विचार करेंगे तो इनके विधान सभा क्षेत्र में यह भी परेशान होंगे. यह तरीका ठीक नहीं है. हड़ताल करना कतई जायज नहीं है.

श्री सुरेन्द्र सिंह हनी बघेल--अध्यक्ष महोदय, और मंत्री जी का तरीका सही है बार-बार उनकी हड़ताल समाप्त कराने उनके पास चले जाते हैं और उनकी मांगें मानते नहीं हैं. वर्ष 2018 में इस महीने में 7 दिन से फिर से कर्मचारी हड़ताल पर बैठे हुए हैं और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं और वे लोग 12 से 2 मांगों पर आ गए हैं. वे दो मांगें मैं आपको बताना चाहता हूँ एक वेतन विसंगति को लेकर है और दूसरी आरसीएच संविदा, एएनएम, एमपीडब्ल्यू, मलेरिया वर्कर के आधार पर नियुक्त कर्मचारियों को नियमित किए जाने को लेकर है. मैं आपसे फिर विनम्र निवेदन करता हूँ कि हर बार इस तरह से हड़ताल खत्म न करवाएं कि बस हड़ताल खत्म करवाना है. आप वहां जाकर वापिस एक कमेटी का गठन करिए, उनसे मिलिए और जो मांगें हैं वह पूरी हो सकती हैं तो वह मांगें पूरी कर दीजिए. ताकि वे वापिस जाकर ग्रामीण क्षेत्र में अपनी सेवाएं दें. यह आपसे और आपकी सरकार ने विनम्र निवेदन है.

श्री रुस्‍तम सिंह --माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे बहुत अच्‍छा लगता है कि स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के कर्मियों के प्रति आपकी अतिसंवेदनशीलता है बहुत अच्‍छी बात है लेकिन मैंने जो आग्रह किया कि जो नियमित कर्मचारी हैं. जो हड़ताल की बात की है उनसे मेरी प्रतिदिन प्राय: कल सवेरे मुलाकात हुई. वे कल रात को 11 बजे आए तो मैंने मुलाकात की और मैं उनसे सतत् संपर्क में हूं. वह आज प्रश्‍नकाल के तत्‍काल बाद पुन: मेरे पास आने वाले हैं. सकारात्‍मक जो संभव थी वह मांगे पूरी करके फायनेंस विभाग को भेजी गई हैं. उनमें भी मैं वित्‍त मत्री जी से आग्रह करूंगा, फायनेंस विभाग से कि जल्‍दी से जल्‍दी इनकी मांगे मान ली जाएं. जो संभव है वह जरूर हम कराते हैं लेकिन मैं उनसे बराबर यह आग्रह करता हूं कि यह चीजें आप हड़ताल पर न भी जाते तब भी हम करते क्‍योंकि हम मानते हैं कि विभाग अतिसंवेदनशील है. मैं पुन: आपके मार्फत कहना चाहता हूं कि कर्मचारियों को इस तरह के कदम स्‍वास्‍थ्‍य विभाग में नहीं उठाना चाहिए.

श्री सुरेन्‍द्र सिंह हनी बघेल-- वर्ष 2003 से वर्ष 2018 हो गया है अभी तक कुछ भी नहीं हुआ है. अभी तक आप उसमें कोई निराकरण नहीं कर पाए हैं.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप बैठ जाइए. श्री सुरेन्‍द्र सिंह हनी बघेल जो भी बोल रहे हैं उनका कुछ नहीं लिखा जाएगा. (व्‍यवधान)...

श्री सुरेन्‍द्र सिंह हनी बघेल-- (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय-- इनका कुछ नहीं लिखा जाएगा. आपका प्रश्‍न हो गया है. (व्‍यवधान)...

प्रश्‍न संख्‍या-14 (अनुपस्थित)

प्रश्‍न संख्‍या-15 (अनुपस्थित)

श्री बहादुर सिंह चौहान-- यह हड़ताल करके वोटों की राजनीति करना चाहते हैं. उनका वेतन नहीं बढ़ाना चाहते हैं. (व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय-- बहादुर सिंह चौहान जी आप अपना प्रश्‍न करें. यह कुछ नहीं लिखा जाएगा. (व्‍यवधान)...

श्री सुरेन्‍द्र सिंह बघेल-- (XXX)

श्री नीलेश अवस्‍थी-- (XXX)

डॉ. गोविन्‍द सिंह-- (XXX)

श्री यादवेन्‍द्र सिंह-- (XXX)

कॅुंवर सौरभ सिंह सिसोदिया-- (XXX)

श्री सुखेन्‍द्र सिंह-- (XXX)

श्री जयवर्द्धन सिंह -- (XXX)

कॅुंवर विक्रम सिंह -- (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय-- आप तो अपना प्रश्‍न करिए.

11.52 बजे बहिर्गमन

इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यों द्वारा सदन से बहिर्गमन

 

कॅुंवर विक्रम सिंह-- अध्‍यक्ष महोदय, हम बहिर्गमन करते हैं. (व्‍यवधान)...

श्री सुरेन्‍द्र सिंह बघेल-- हम शासन के उत्‍तर से असंतुष्‍ट होकर बहिर्गमन करते हैं. (व्‍यवधान)...

(इंडियन नेशनल के कांग्रेस के सदस्‍यों द्वारा शासन के उत्‍तर से असंतुष्‍ट होकर सदन से बहिर्गमन किया गया)

 

एडवोकेट सत्‍यप्रकाश सखवार-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह पूरे प्रदेश की समस्‍या है यह संविदा, अति‍थि और यह सारी भर्तियां बंद करके सीधी भर्ती कराने का प्रबंध किया जाए.

अध्‍यक्ष महोदय-- आपकी बात आ गई है.

 

अमानक खाद्य सामग्री विक्रेताओं पर कार्यवाही

[लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]

16. ( *क्र. 4166 ) श्री बहादुर सिंह चौहान : क्या लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दिनांक 01.02.2017 से 31.01.18 तक उज्‍जैन जिले में अमानक, मिथ्‍याछाप, मिलावटी, नकली खाद्य सामग्री के कितने प्रकरण बनाये गये? इस अवधि में फूड पॉयजनिंग की घटनाओं की जानकारी भी स्‍थान का नाम, व्‍यक्ति का नाम (जिसके यहाँ घटना हुई हो) पीड़‍ित संख्‍या सहित देवें। (ख) उपरोक्‍त घटनाओं में सक्षम न्‍यायालयों में प्रश्‍न दिनांक तक कितनी तारीखें लगीं? कितने प्रकरणों में शास्ति अधिरोपित की गई? राशि सहित जानकारी देवें। वसूली की जानकारी भी देवें। (ग) प्रश्‍न क्र. 3175 दिनांक 01.03.17 के (क) उत्‍तर के अनुसार 140 में से 80 प्रकरणों का निराकरण बताया गया, शेष 60 प्रकरणों की अद्यतन स्थिति देवें। इन 80 प्रकरणों में प्रश्‍न दिनांक तक कितनी वसूली शेष है? (घ) उपरोक्‍त फूड पॉयजनिंग की घटनाओं पर विभाग ने क्‍या-क्‍या कार्यवाही की है।

लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) उज्‍जैन जिले में दिनांक 01/02/2017 से 31/01/2018 तक अवमानक, मिथ्‍याछाप, असुरक्षित एवं अधिनियम में प्रावधानित अन्‍य धाराओं के अन्‍तर्गत कुल 50 प्रकरण बनाये गये हैं शेष जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ग) विधानसभा प्रश्‍न क्रमांक 3175 दिनांक 01/03/2017 के प्रश्‍नांश (क) शेष प्रकरणों में से 22 प्रकरणों में सक्षम न्‍यायालय द्वारा कुल 2085000/- रूपये शास्ति संबंधित आरोपी विक्रेताओं के विरूद्ध अधिरोपित की गई है। निर्णित 80 प्रकरणों में प्रश्‍न दिनांक तक राशि रूपये 655000/- की वसूली हेतु शेष है। (घ) फूड पॉयजनिंग की घटित घटना पर अभिहित अधिकारी खाद्य सुरक्षा प्रशासन जिला उज्‍जैन द्वारा श्री पियूष सकलेचा पिता श्री विमलचंद जैन श्री जैन नाश्‍ता पाईन्‍ट महिदपुर को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 32 अन्‍तर्गत सुधार सूचना नोटिस जारी किया गया था जिस पर दिये गये निर्देशों का पालन नहीं किये जाने पर संबंधित फर्म का खाद्य पंजीयन 15 दिवस के लिए निरस्‍त किया गया है, साथ ही संबंधित फर्म के विरूद्ध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 58 अन्‍तर्गत परिवाद सक्षम न्‍यायालय में दर्ज किया गया है।

श्री बहादुर सिंह चौहान-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न स्‍वास्‍थ्‍य विभाग से है. मेरे द्वारा प्रश्‍न लगाया गया था कि दिनांक 1.2.2017 से लेकर 1.1.2018 तक उज्‍जैन जिले में अमानक मिथ्‍याछाप ऐसे कितने प्रकरण बनाए गए हैं उत्‍तर में आया है कि 50 प्रकरण बनाए गए हैं. मैं इससे संतुष्‍ट हूं लेकिन मेरा पूर्व का प्रश्‍न मैंने इसमें पूछा है कि 1.3.2017 को मेरे द्वारा प्रश्‍न क्रमांक 3175 पूछा गया था उसमें क्‍या क्‍या कार्यवाही हुई. विभाग ने बहुत ही अच्‍छी कार्यवाही की है. उसमें से 22 प्रकरणों में से 20 लाख 85 हजार शास्ति सं‍बंधित विक्रेताओं के विरूद्ध आरोपित कर दी है. इसके लिए मैं मंत्री जी को धन्‍यवाद करना चाहता हूं और वर्णित 80 प्रकरणों में से 6 लाख 55 हजार वसूली शेष है यह वसूली भी माननीय मंत्री जी अतिशीघ्र करवा लेंगे. मैं इस प्रश्‍न में क, ख और ग तीनों के उत्‍तर से संतुष्‍ट हूं, पर घ में मुझे माननीय मंत्री जी से पूछना है कि यह प्रश्‍न मैं बार-बार लगा रहा हूं इसको लेकर हमारे नगर में लॉ एण्‍ड ऑर्डर की स्थिति खराब हो गई थी आपने दोनों फर्मों के विरूद्ध खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम 2006 की धारा (58) के तहत प्रकरण सक्षम न्‍यायालय में दे दिया है. मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी से इतना जानना चाहता हूं सक्षम न्‍यायालय चूंकि न्‍यायालय है लेकिन फिर भी आपके विभाग के जो जिले के अधिकारी हैं वह इसमें रुचि लेकर इसका जल्‍द से जल्‍द निर्णय करवाने की कृपा करें.

श्री रुस्‍तम सिंह --माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वैसे तो विधायक जी ने जो बात कही है वह स्‍वयं अपने आप में काफी स्‍पष्‍ट है. वह पर्टिकुलर एक इश्‍यू था जिसके बारे में अभी आपने उल्‍लेख किया उसमें पुलिस केस भी कायम हुआ है. पुलिस ने भी उसका चालान किया है. अपनी तरफ से उसमें पूरी प्रभावी कार्यवाही करने का प्रयास हुआ है. जहां तक केस को जल्‍दी निपटाने का, जो स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के अमले का जो उत्‍तरदायित्‍व है वह पूरा करे और जल्‍दी निपटाएं, इसके लिए हम प्रयास करेंगे.

श्री बहादुर सिंह चौहान- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कुछ ऐसे विषय हैं जिसके संबंध में मैं एक पत्र मंत्री जी को लिखकर दे रहा हूं. उस पर कार्यवाही हो जाए, मंत्री जी ऐसा आश्‍वासन दे दें.

अध्‍यक्ष महोदय- मंत्री जी ने बोल दिया लेकिन आप पत्र में क्‍या लिखेंगे, वे यहां कैसे आश्‍वासन दे दें ? (हंसी)

श्री बहादुर सिंह चौहान- यह पत्र कार्यवाही के संबंध में ही है. ये ऐसी फर्में हैं, आप कहें तो मैं पढ़ दूं.

अध्‍यक्ष महोदय- मत पढि़ये. आप मंत्री जी को पत्र दे दें और उनके विवेक पर छोड़ दीजिये.

श्री बहादुर सिंह चौहान- धन्‍यवाद.

सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र खिलचीपुर का उन्‍नयन

[लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]

17. ( *क्र. 1264 ) कुँवर हजारीलाल दांगी : क्या लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र खिलचीपुर के अंतर्गत 125-130 ग्राम उपचार हेतु आश्रित हैं? यदि हाँ, तो क्‍या खिलचीपुर नगर स्थित सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र पर पर्याप्‍त स्‍टॉफ एवं सुविधाओं की अनुपलब्‍धता तथा सिविल अस्‍पताल में उन्‍नयन न हो पाने से नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्र के आमजनों को हायर सेंटर इन्‍दौर, भोपाल तथा राजस्‍थान राज्‍य के जिला झालावाड़ के चिकित्‍सालयों पर आश्रित होना पड़ता है, लेकिन निर्धन एवं वंचित वर्ग समूह के लोगों को समय पर उचित उपचार नहीं मिल पाता है? यदि हाँ, तो प्रश्‍न दिनांक तक शासन द्वारा सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र खिलचीपुर का सिविल अस्‍पताल में विस्‍तार करने हेतु कोई ठोस कार्यवाही की गई है? यदि हाँ, तो क्‍या? यदि नहीं तो क्‍यों? (ख) क्‍या शासन सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र खिलचीपुर पर आश्रित नगरीय जनसंख्‍या 30 हजार एवं 125-130 ग्रामों के निर्धन वर्ग के लोगों को उचित उपचार प्रदान करने की दृष्टि से सिविल अस्‍पताल में उन्‍नत करेगा? यदि हाँ, तो कब तक?

लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) :

(ख) जी नहीं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

कुँवर हजारीलाल दांगी- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे द्वारा स्‍वास्‍थ्‍य विभाग से संबंधित रखे गए प्रश्‍न के जवाब में जो उत्‍तर आया है चूंकि मंत्री जी ने उत्‍तर दिया है इसलिए मैं उससे संतुष्‍ट हूं परंतु फिर भी मैं अनुरोध करना चाहूंगा कि मेरे विधान सभा क्षेत्र खिलचीपुर में मैंने सिविल अस्‍पताल प्रारंभ करने की मांग की थी. मंत्री जी ने इसका जवाब दिया है- जी नहीं. जी नहीं. जी नहीं और फिर उसमें संशोधन करके उत्‍तर दिया है, जी हां. राजगढ़ विधान सभा क्षेत्र के विधायक जी भी यहां बैठे हैं. खिलचीपुर अस्‍पताल, खिलचीपुर विधान सभा क्षेत्र का तो है ही लेकिन 40-50 पंचायतें जिसमें से कम से कम सौ गांव राजगढ़ विधान सभा क्षेत्र के भी लगते हैं. मेरे विधान सभा में खिलचीपुर, जीरापुर और माचलपुर, तीन अस्‍पताल ऐसे हैं जो राजस्‍थान के बॉर्डर से लगे हुए हैं.

अध्‍यक्ष महोदय- आपका प्रश्‍न क्‍या है ?

कुँवर हजारीलाल दांगी- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न यह है कि मैंने कई बार मंत्री जी से इस बारे में अनुरोध भी किया है कि सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र का सिविल अस्‍पताल में उन्‍नयन किया जाये. वह क्षेत्र राजस्‍थान की बॉर्डर से लगा हुआ होने के कारण वहां काफी परेशानी है.

अध्‍यक्ष महोदय- आप सीधा प्रश्‍न कर लें कि क्‍या सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र का सिविल अस्‍पताल में उन्‍नयन करेंगे ?

कुँवर हजारीलाल दांगी- मेरा सीधा प्रश्‍न यह है कि अभी जो सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र है वहां केवल दो डॉक्‍टर पदस्‍थ हैं. वहां डॉक्‍टर पदस्‍थ करने के लिए कई बार मंत्री जी ने आदेश भी किए हैं कि तत्‍काल पदस्‍थ किया जाये. मेरे विधान सभा क्षेत्र में महिला डॉक्‍टर एक भी नहीं है. मंत्री जी के आदेश के बाद भी आज तक महिला डॉक्‍टर वहां पदस्‍थ नहीं हुई है. मेरा मंत्री जी से अनुरोध है कि राजस्‍थान से लगा होने के कारण मेरे खिलचीपुर विधान सभा क्षेत्र के सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र का उन्‍नयन सिविल अस्‍पताल में करने की घोषणा कब तक करेंगे ? या चालू करवा देंगे, या परीक्षण करायेंगे ? माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे कुछ संतोषप्रद जवाब मिले.

श्री रूस्‍तम सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे विद्वान विधायक आज बहुत ही विनम्र हैं. मुझे बहुत अच्‍छा लग रहा है. अभी बीच में कुछ दिन पूर्व बड़ी जोरदार नोंक-झोंक हुई थी. आज इनका प्रश्‍न आया तो मुझे लगा कि मुझे बहुत तैयारी के साथ जाना चाहिए. अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके मार्फत् उन्‍हें धन्‍यवाद देना चाहता हूं.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इनके प्रश्‍न के संबंध में कहना चाहता हूं कि सिविल अस्‍पताल के लिए जो आवश्‍यक नॉर्म्‍स हैं, उसकी पूर्ति इनका क्षेत्र नहीं करता है लेकिन इनके आग्रह, राजस्‍थान का बॉर्डर एवं अन्‍य बातों को ध्‍यान में रखते हुए, हम पुन: इसका परीक्षण करवायेंगे. यदि वह क्षेत्र उस कैटेगरी में आयेगा तो सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र को सिविल अस्‍पताल बनाने के लिए हम अपनी तरफ से पूरा प्रयास करेंगे.

कुँवर हजारीलाल दांगी- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा दूसरा प्रश्‍न यह है कि चूंकि यह क्षेत्र राजस्‍थान के बॉर्डर से लगा हुआ है इसलिए वहां बहुत अधिक एक्‍सीडेंट होते हैं और गरीब मरीज इतने अधिक होते हैं कि उन्‍हें राजस्‍थान रैफर करना पड़ता है.

अध्‍यक्ष महोदय- उन्‍होंने स्‍वीकार तो कर लिया.

कुँवर हजारीलाल दांगी- मेरा कहना यह है कि खिलचीपुर में 6 डॉक्‍टरों के पद स्‍वीकृत हैं और केवल 2 डॉक्‍टर पदस्‍थ हैं. महिला डॉक्‍टर तो जब से मैं विधायक हूं और उससे पहले से भी मैंने नहीं देखी है. मंत्री जी ने डॉक्‍टर के लिए मेरे सामने बैठकर आदेश भी किया था. यदि मंत्री जी वहां डॉक्‍टरों और स्‍टाफ की पदस्‍थापना करवा देंगे तो वहां के गरीबों को सुविधा हो जायेगी.

श्री रूस्‍तम सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विधायक जी भली-भाँति जानते हैं कि महिला डॉक्‍टर उपलब्‍ध नहीं हो सकीं. अभी हमने पुन: 1400 डॉक्‍टरों की भर्ती का आग्रह किया है. इसके अलावा एन.आर.एच.एम. से डॉक्‍टर उपलब्‍ध होते हैं तो हम आपके यहां शीघ्र एक डॉक्‍टर और जरूर भिजवा देंगे.

कुँवर हजारीलाल दांगी- धन्‍यवाद.

 

 

भवन विहीन स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों के भवन का निर्माण

[लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]

18. ( *क्र. 1379 ) श्री यादवेन्‍द्र सिंह : क्या लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नागौद विधान सभा क्षेत्र के वि.खं. उचेहरा के अंतर्गत उपस्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र, प्राथमिक उपस्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र के भवनों के संबंध में प्रश्‍नकर्ता सदस्‍य को खण्‍ड चिकित्‍सा अधिकारी सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र उचेहरा जिला सतना द्वारा अपने पत्र क्रमांक 363 दिनांक 15/07/2017 द्वारा जानकारी दी है कि कौन-कौन से उपस्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र भवन विहीन, मरम्‍मत योग्‍य हैं तथा समुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र उचेहरा 100 बिस्‍तरीय सिविल अस्‍पताल में उन्‍नयन किये जाने हेतु संचालनालय स्‍वास्‍थ्‍य सेवायें भोपाल के पत्र क्रमांक 5/विकास-सेल-3/2017/248 दिनांक 04/05/2017 द्वारा जानकारी चाही गई थी, जिसका प्रतिवेदन 25/05/2016 को मुख्‍य चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी जिला सतना को भेजा गया था? (ख) प्रश्‍नांश (क) यदि हाँ, तो भवन विहीन एवं मरम्‍मत योग्‍य उपस्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र, प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र के निर्माण्‍ा हेतु प्रश्‍न दिनांक तक क्‍या कार्यवाही की गई? तथा सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र उचेहरा को 100 बिस्‍तरीय को सिविल अस्‍पताल में उन्‍नयन करने हेतु क्‍या कार्यवाही की गई?

लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) जी हाँखण्ड चिकित्सा अधिकारी उचेहरा द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र उचेहरा को 100 बिस्तरीय सिविल अस्पताल में उन्नयन किये जाने हेतु प्रतिवेदन दिनांक 25.05.2016 को नहीं अपितु दिनांक 12.05.2017 को मुख्य चिकित्सा एवं अधिकारी जिला सतना को भेजा गया था।

अध्‍यक्ष महोदय- कृपया एक ही प्रश्‍न करेंगे तो बेहतर होगा क्‍योंकि समय हो रहा था और मैंने जल्‍दी करवाकर आपका प्रश्‍न पुकारा है.

श्री यादवेन्‍द्र सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी से मैं जानना चाहता हूं कि मैंने उचेहरा सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र में 100 बिस्‍तर सिविल अस्‍पताल का जिक्र किया है. मेरे विधान सभा क्षेत्र में उचेहरा और नागौद में दो सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र हैं. उनमें से कहीं भी चाहे उचेहरा पात्र हो या नागौद पात्र हो. मंत्री जी के जवाब में पहले आया है कि हम उन्‍नयन करेंगे. बाद में जो संशाधित उत्‍तर में दिया है कि अपात्र, जो भी दो में पात्र हों, उसमें आप 100 बेड का अस्‍पताल अभी सामुदायिक अस्‍पताल में 30 बेड हैं, उसको 30 की जगह 60 कर दें. उसको 100 न करें, 10-20 और बढ़ा दें. पर माननीय मंत्री जी ने सीधे सीधे अपात्र लिख दिया है. दूसरी बात मैंने पूछी थी कि मेरी विधान सभा में कितने उप - स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र मरम्‍मत योग्‍य हैं, कितने भवन विहीन हैं, उसमें तीन सामुदायिक भवनों का उत्‍तर आया है कि तीन उप- स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों की मरम्‍मत करायी जायेगी, जबकि काफी उप-स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र योग्‍य हैं और काफी नये बनाने की आवश्‍यकता है, तो इसका मंत्री जी के द्वारा कोई उत्‍तर नहीं दिया गया है. अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से पूछना चाहता हूं कि क्‍या 30 बेड से कुछ और बेड बढ़ाने का कष्‍ट करेंगे ?

श्री रूस्‍तम सिंह :- आपने स्‍पेसिफिक प्रश्‍न 100 बिस्‍तरों का किया है. उसका जवाब मुझे विभाग से प्राप्‍त हुआ है, वह मैंने दिया है, लेकिन अब विधायक जी यह चाहते हैं कि कुछ ही बढ़ जायें तो उस तरीके से हम उसका आंकलन करा लेंगे और केटेगरी में आयेगा तो उस पर विचार करेंगे. दूसरा जो मरम्‍मत योग्‍य उप-स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र हैं, उसकी मरम्‍मत सुनिश्चित कर दी जायेगी और काफी जल्‍दी कर दी जायेगी.

श्री यादवेन्‍द्र सिंह:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नये नहीं खोलेंगे ? 15 साल से न तो सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र, उचेहरा का सिविल अस्‍पताल में उन्‍नयन नहीं किया गया है.

अध्‍यक्ष महोदय:- नहीं अब समय हो गया है, मंत्री जी ने बोल दिया है कि वह बढ़ाने का परीक्षण करा रहे हैं और मरम्‍मत के लिये उन्‍होंने सुनिश्चित कर दिया है.

श्री यादवेन्‍द्र सिंह:-मेरे प्रश्‍न का पूरा उत्‍तर तो जाये.

अध्‍यक्ष महोदय:- आपके प्रश्‍न का उत्‍तर आ गया है.

श्री यादवेन्‍द्र सिंह:- नहीं आया है, अभी तक. मेरा एक उप-स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र है, उसका प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र में उन्‍नयन कर दिया जाये.श्री

अध्‍यक्ष महोदय:- आपके प्रश्‍न का उत्‍तर आ गया है. मैंने बाकी सदस्‍यों के प्रश्‍नों को जल्‍दी-जल्‍दी करवाकर आपके प्रश्‍न को चर्चा में लाया है.

आज 18 प्रश्‍नों में से 2 प्रश्‍न छोड़कर के 16 प्रश्‍नों के उत्‍तर माननीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जी ने दिये हैं और उनके उत्‍तर लगभग समाधानकारक दिये हैं. उसके लिये मैं उनको बधाई देता हूं, सभी प्रश्‍न एक ही तरफा थे.

श्री रूस्‍तम सिंह :- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको बहुत धन्‍यवाद देता हूं.

अध्‍यक्ष महोदय:- प्रश्‍नकाल समाप्‍त.

 

 

 

 

 

 

(प्रश्‍नकाल समाप्‍त)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.03 बजे नियम 267-क‍ के अधीन विषय

 

 

12.04 बजे शून्‍यकाल में मौखिक उल्‍लेख

(1)प्रदेश में दुष्‍कर्म की शिकार छात्राओं द्वारा आत्‍महत्‍या की जाना.

डॉ. गोविन्‍द सिंह (लहार) :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय गृह मंत्री के जिले में कल फिर एक बेटी ने दुष्‍कर्म की शिकार होकर आत्‍महत्‍या कर ली है. प्रदेश में 5 दिन के अन्‍दर तीन मासूम बेटियों ने दुष्‍कर्म के कारण आत्‍महत्‍या कर ली है. पूरे प्रदेश में बलात्‍कारियों का राज कायम हो गया है. मैं माननीय गृह मंत्री जी से और सरकार में बैठे मंत्रियों से चाहता हूं कि कोई कठोर कार्यवाही करें, ताकि प्रदेश की बालिकाएं और छात्राएं सुरक्षित रहें, प्रदेश में भय का वातावरण हो गया है. तमाम छात्राएं भोपाल छोड़कर बाहर जाने को तैयार हैं. आप कठोर कार्यवाही करें, यही हमारा सरकार से अनुरोध है.

(2) मऊगंज के गाड़ाबांध में एकपकरा के निवासी का डूब जाना.

श्री सुखेन्‍द्र सिंह (मऊगंज) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत गाड़ाबांध में 3 दिन से एकपकरा के निवासी अय्यूब खान डूब गए हैं, लेकिन उनकी लाश 3 दिनों से नहीं मिल पा रही है. मेरा आपके माध्‍यम से शासन, प्रशासन से अनुरोध है कि उसकी लाश सुचारू रूप से मिल सके, इसके लिए व्‍यवस्‍था बनाई जाये एवं राहत राशि प्रदान की जाये. धन्‍यवाद.

(3) बहोरीबंद में गांव-गांव में शराब बिकना.

कुँवर सौरभ सिंह सिसोदिया (बहोरीबंद) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी विधानसभा क्षेत्र में शराब गांव-गांव में बिक रही है और जब महिलाएं विरोध कर रही हैं तो पुलिस उनके खिलाफ 107/16 का मुकदमा कायम कर रही है. मैं इस विषय में यह चाहूँगा कि माननीय गृह मंत्री जी इस पर ध्‍यान दें.

(4) सागर में मेडीकल कॉलेज में व्‍यवस्‍था की जाना .

श्री शैलेन्‍द्र जैन (सागर) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक मेरा विषय था. सागर में हमारा मेडीकल कॉलेज बनकर तैयार हो गया है. उसमें ऑडिटोरियम भी बनकर तैयार हो गया है, लेकिन उसमें जो सिटिंग अरेन्‍जमेंट होना चाहिए, एयर कंडीशनिंग होनी चाहिए और इकोसिस्‍टम होना चाहिए, वह नहीं लग पाया है, इसकी वजह से वह डीफंक्‍ट पड़ा हुआ है. इस संबंध में मैंने प्रश्‍न भी लगाया था. अध्‍यक्ष महोदय, आपसे मेरी गुजारिश है कि हमारा 3.22 करोड़ रुपये का प्रस्‍ताव है, उसको शासन अविलम्‍ब स्‍वीकृति देने की कष्‍ट करे.

 

(5) मंदसौर में मण्‍डी जी के बाग के नजदीक एक बालक का लापता होना.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया (मंदसौर) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंदसौर शहर में मण्‍डी जी के बाग के नजदीक लगभग 3-4 दिनों से, मेरे शहर का एक बालक उम्र करीब 12 से 14 वर्ष है, वह लापता है. उसके परिवार के सदस्‍यों ने आशंका व्‍यक्‍त की है कि उसका अपहरण हो गया है. पुलिस तथा प्रशासन अभी तीन-चार दिनों से उसका पता नहीं लगा पाई है. यह मेरे शून्‍यकाल का विषय है.

 

(6) जौरा के कैलाश नगर में अलोपीशंकर मंदिर के पास खनन किया जाना .

श्री सूबेदार सिंह रजौधा (जौरा) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधानसभा में कैलाश नगर में अलोपीशंकर मन्दिर है, उसमें रोजाना हजारों श्रद्धालु दर्शन करने जाते हैं और यह पता नहीं है कि वहां राजस्‍व विभाग ने खनन का ठेका दे दिया है या वे वैसे ही खनन कर रहे हैं. यदि ऐसे ही खनन होते रहा तो वह मन्दिर नष्‍ट हो जायेगा. शहरवासियों में तथा भक्‍तों में बहुत आक्रोश है. इसे तत्‍काल रोकने की कृपा करें.

(7) नीमच में ट्रामा सेन्‍टर एवं इक्‍यूपमेंट तथा स्‍टाफ की पूर्ति किया जाना.

श्री दिलीप सिंह परिहार (नीमच) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे शून्‍यकाल की सूचना स्‍वास्‍थ्‍य विभाग से संबंधित है. वहां ट्रामा सेन्‍टर तैयार हो गया है, उसमें इक्‍यूपमेंट और स्‍टाफ की पूर्ति हो जाये और माननीय खुमान सिंह शिवाजी के नाम से उसका नाम रखा जाये. ऐसा मेरा निवेदन है.

(8) पुष्‍पराजगढ़ में जनपद पंचायत जतहरी में गूजर नाले में पुलिया बनाई जाना.

श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को (पुष्‍पराजगढ़) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत ढ़लवां उमरिया, जनपत पंचायत जतहरी में एक गूजर नाला है, जो छत्‍तीसगढ़ को जोड़ने वाली नदी है. उसमें यदि पुलिया बना दी जाये तो बड़ी कृपा होगी.

(9) पाटन में भीषण जल संकट पैदा होना.

श्री नीलेश अवस्‍थी (पाटन) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे शून्‍यकाल में विषय इस प्रकार है कि हमारे क्षेत्र में भीषण जल संकट पैदा हो रहा है क्‍योंकि जहां-जहां जिस गांव में बोर हुए हैं, वहां 30 फुट एवं 60 फुट से ज्‍यादा नहीं हुए हैं. पानी नीचे जाने के कारण कई बस्तियों में बहुत हाहाकार मचा हुआ है. मैं चाहता हूँ कि वहां नये बोर कराए जाएं.

 

 

(10) पथरिया में विकासखण्‍ड बटियागढ़ में भीषण जल संकट हेतु 2 सबमर्सिबल उपलब्‍ध कराया जाना.

श्री लखन पटेल (पथरिया) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे शून्‍यकाल में विषय इस प्रकार है कि मेरे निर्वाचन क्षेत्र के विकासखण्‍ड बटियागढ़ में भीषण जल संकट है. मैं आपके माध्‍यम से ध्‍यान आकर्षित कराना चाहता हूँ कि प्रत्‍येक गांव में लगभग 2 सबमर्सिबल उपलब्‍ध कराने की कृपा करें.

 

12.08 बजे पत्रों का पटल पर रखा जाना

(1) जीवाजी विश्‍वविद्यालय, ग्‍वालियर (मध्‍यप्रदेश) का वार्षिक प्रतिवेदन

वर्ष 2016-2017.

 

 

(2) मध्‍यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड का पंचदश वार्षिक प्रतिवेदन वित्‍तीय वर्ष 2016-2017.

 

 

 

12.09 बजे ध्‍यानाकर्षण

 


(1) बालाघाट जिले में नियमित रूप से बिजली का प्रदाय न किया जाना

सुश्री हिना लिखीराम कांवरे (लांजी) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी ध्‍यान आकर्षण की सूचना का विषय इस प्रकार है कि

 

ऊर्जा मंत्री (श्री पारसचंद्र जैन) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

सुश्री हिना लिखीराम कावरे माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब से छत्‍तीसगढ़ अलग हुआ है, तब से पूरे मध्‍यप्रदेश में बालाघाट जिला ही एक ऐसा जिला है, जहां पर धान उत्‍पादकता सबसे ज्‍यादा होती है. यदि वहां लगातार 10 घंटे विद्युत सप्‍लाई नहीं की जाएगी तो जिस उद्देश्‍य से आपने किसानों को 10 घंटे बिजली देने की बात की है उसकी पूर्ति संभव ही नहीं है. अध्‍यक्ष जी, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहती हूं कि क्‍या ए.जी. फीडर में एक ही शिफ्ट में लगातार 10 घंटे बिजली देने का अधिकार क्‍या राज्‍य शासन को है? या विद्युत वितरण कंपनी को है? या आपके विद्युत नियामक आयोग को है, कृपया बताएं?

श्री पारस चन्‍द्र जैन हम 10 घंटे बिजली पर्याप्‍त मात्रा में धान उत्‍पादन के क्षेत्र में देते हैं, लेकिन एक साथ बिजली देने में हमें तकनीकी समस्‍या है, यदि समस्‍या नहीं होती हमको देने में कोई समस्‍या नहीं थी. लेकिन हम नियमानुसार बराबर मात्रा में 10 घंटे बिजली दे रहे हैं, एक साथ लगातार 10 घंटे बिजली देने में तकनीकी समस्‍या है इसलिए 10 घंटे बिजली साथ देना उचित नहीं समझते.

सुश्री हिना लिखीराम कावरे माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न का अभी जवाब ही नहीं आया.

अध्‍यक्ष महोदय माननीय सदस्‍या पूछ रही हैं कि बिजली देने का अधिकार विद्युत वितरण कंपनी को है या राज्‍य शासन को?

श्री पारस चन्‍द्र जैन माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विद्युत वितरण कंपनी राज्‍य शासन के समन्‍वय से समय समय पर विचार करके इस बात को निर्धारित करती हैं .

सुश्री हिना लिखीराम कावरे माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से यह निवेदन करना चाहती हूं कि क्‍या राज्‍य शासन पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के माध्‍यम से विद्युत नियामक आयोग को क्‍या यह सिफारिश भेजेगा कि बालाघाट जिले में चूंकि धान की खेती होती है, अगर वहां लगातार 10 घंटे बिजली नहीं दी गई तो निश्चित रूप से उत्‍पादकता में भी अंतर आयेगा और किसानों को 10 घंटे बिजली का लाभ नहीं मिलेगा, हम सीधे सीधे शब्‍दों में कह सकते हैं कि किसानों को सिर्फ 6 घंटे का ही लाभ बालाघाट के किसानों को मिल रहा है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय मेरा निवेदन है व्‍यवहारिकता के अनुसार भी इस बात पर विचार करें. हमारे कृषि मंत्री जी यहां पर उपस्थित नहीं हैं, मैं जानती हूं कृषि मंत्री जी हमारे जिले के हैं और वे भी इस बात को भलीभांति जानते हैं कि अगर बालाघाट के किसानों को 10 घंटे विद्युत नहीं मिलेगी तो वहां पर खेती संभव नहीं है.

श्री पारस चन्‍द्र जैन माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विद्युत नियामक आयोग बिजली के घंटे निर्धारित नहीं करता है और यह बात जरूर है कि हम एक दिन में सुबह शाम, 10 घंटे बिजली बराबर दे रहे हैं, हम यही व्‍यवस्‍था कर करते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय आप वही प्रश्‍न करेंगी और उत्‍तर भी वही आयेगा इसलिए बार बार प्रश्‍न करने का क्‍या मतलब है.

सुश्री हिना लिखीराम कावरे माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आसंदी से यह अपेक्षा करती हूं कि कम से कम बालाघाट की परिस्‍थतियों को ध्‍यान में रखकर सरकार यह निर्णय ले लें, खासकर जब धान की फसल का समय होता है उस समय यदि यह व्‍यवस्‍था करने के लिए माननीय अध्‍यक्ष महोदय यदि आप माननीय मंत्री जी से उत्‍तर दिलवा दें तो बालाघाट के किसानों की समस्‍या हल हो जाएगी.

अध्‍यक्ष महोदय मंत्री जी ने आपके प्रश्‍न का उत्‍तर तो दे दिया और आपका आग्रह भी सुन लिया.

 

 

 

 

 

2)                        दमोह जिले के ग्राम गीदन में लौह संयंत्र स्‍थापित न किया जाना.

श्री लखन पटेल (पथरिया) माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी ध्‍यान आकर्षण की सूचना का विषय इस प्रकार है:-

मंत्री, उद्योग नीति एवं निवेश प्रोत्साहन (श्री राजेन्द्र शुक्ल, )-- अध्यक्ष महोदय, ध्यानाकर्षण सूचना पर विभाग का उत्तर इस प्रकार है -

श्री लखन पटेल--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि क्या इसकी जगह किसी दूसरी कंपनी को उद्योग लगाने के लिये प्रोत्साहित करेंगे, अगर नहीं तो क्या फिर यह जमीन राजस्व विभाग को वापस करेंगे ताकि वहां पर अन्य दूसरे कार्य हो सकें.

श्री राजेन्द्र शुक्ल -- अध्यक्ष महोदय, अभी उक्त भूमि को राजस्व विभाग को वापस करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि एस.पी.जे. स्टील एण्ड मिनरल्स लिमिटेड कंपनी ने आयरन हेतु पी.एल. के लिये आवेदन किया था, उन्होंने एमएल के लिये एप्लाई किया है.इसका मतलब यह है कि उनको ऐसा लगता है कि वहां पर कुछ लोह अयस्क उनको प्राप्त हुआ है. इसलिये हम उसका परीक्षण कर रहे हैं और जैसे ही वह कन्फरमेशन होगा उनको एमएल.ग्रांट होगी और फिर एक अवसर उस कंपनी को और देंगे कि वह कंपनी यदि वहां पर स्टील का प्लांट लगाना चाहे तो वह आगे आ सकती है.

श्री लखन पटेल -- माननीय अध्यक्ष महोदय, आज के ध्यानाकर्षण के माध्यम से एक बात तो जानकारी में आई कि वह कंपनी अभी इसमें एक्टिव रोल कर रही है. मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि यह फेक्ट्री बहुत जल्दी शुरू हो जाये या कब तक शुरू करा देंगे ?

श्री राजेन्द्र शुक्ल -- माननीय अध्यक्ष महोदय, हम लोग तो चाहते हैं कि फेक्ट्री जल्दी से जल्दी आये और ज्यादा से ज्यादा निवेश हमारे मध्यप्रदेश में आये.लेकिन निर्भर करता है उस कंपनी पर कि वह कितनी सक्रियता से आगे आती है. यदि उन्होंने अपनी रूचि दिखाई तो एक बार भूमि फिर से उनको आफर करके आवंटित करने का काम किया जायेगा. और यदि उनकी रुचि नहीं होगी तो दूसरे निवेशकों को आमंत्रित करने का प्रयास किया जायेगा.

श्री लखन पटेल -- मंत्री जी हालांकि इस बात को 10 से 11 वर्ष हो गये हैं. लेकिन फिर भी मंत्री जी को धन्यवाद.

श्री शैलेन्द्र जैन (सागर) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री के ध्यान में इस बात को लाना चाहता हूं कि न केवल यह एस.पी.जे. स्टील की बात है, हमारे बुंदेलखण्ड के संबंध में लगभग 2 दर्जन एम.ओ.यू. साइन हुये थे, उसमें से एक भी धरातल पर नहीं आ पाया है. अध्यक्ष महोदय, औद्योगिक क्षेत्र में बुंदेलखण्ड का विकास रूक गया है इसलिये मंत्री जी से आग्रह है कि बुंदेलखण्ड के लिये कुछ ऐसे इंसेटिव देने की आवश्यकता है ताकि लोग वहां पर उद्योग लगाने के लिये आकर्षित हों.

श्री राजेन्द्र शुक्ल -- माननीय सदस्य का बहुत अच्छा सुझाव है. हम लोग जरूर विचार करेंगे.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.24 बजे प्रतिवेदनों की प्रस्तुति

याचिका समिति का इकसठवां,बासठवां एवं तिरेसठवां प्रतिवेदन

 

अध्यक्ष महोदय -- श्री शंकरलाल तिवारी...(श्री शंकरलाल तिवारी दूसरे सदस्यों से चर्चा करते हुये ) श्री शंकरलाल तिवारी....

राजस्व मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्ता ) -- अध्यक्ष महोदय, सदन में श्री सुंदरलाल तिवारी जी आ रहे हैं, इसलिये शंकरलाल तिवारी जी का ध्यान वहां है.

श्री शंकरलाल तिवारी -- अध्यक्ष महोदय, एक को तो आप तिवारी जी कहते हैं, एक को आप शंकरलाल तिवारी कहते हैं उसमें धोखा हो जाता है. नाम तो आप प्यार से मेरा ही लेते हैं इसके लिये आपको हृदय से धन्यवाद.

अध्यक्ष महोदय- और सुंदरलाल जी का नाम कैसे लेते हैं (हंसी)

श्री शंकरलाल तिवारी(सभापति) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मै याचिका समिति का याचिकाओं से संबंधित इकसठवां, बासठवां एवं तिरेसठवां प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूं.

 

 

 

 

 

12.25 बजे याचिकाओं की प्रस्‍तुति

अध्‍यक्ष महोदय-- आज की कार्यसूची में सम्मिलित सभी याचिकायें प्रस्‍तु‍त की हुई मानी जायेंगीं.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.26 बजे वर्ष 2018-2019 की अनुदानों की मांगों पर मतदान (क्रमश:)

(1)

मांग संख्या 8

भू-राजस्‍व तथा जिला प्रशासन

 

मांग संख्या 9

राजस्‍व विभाग से संबंधित व्‍यय

 

मांग संख्या 46

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

 

मांग संख्या 58

प्राकृतिक आपदाओं एवं सूखा ग्रस्‍त क्षेत्रों में राहत पर व्‍यय.

 

 

 

अध्‍यक्ष महोदय-- उपस्थित सदस्‍यों के कटौती प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुये, अब मांगों के कटौती प्रस्‍तावों पर एक साथ चर्चा होगी.

श्री रामपाल सिंह (ब्‍यौहारी)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मांग संख्‍या 8, 9, 46 एवं 58 के विरोध में बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं. राजस्‍व विभाग में वर्ष 2011-2012 में खसरे का कम्‍प्‍यूटरीकरण किया गया, उसमें तमाम् विसंगतियां हैं. कृषकों के कहीं-कहीं खसरे नंबर सही नहीं है, रकबों में भी गड़बड़ी है जिससे किसान काफी परेशान हैं. मात्रा पाइयों की काफी व्‍यापक रूप में त्रुटियां हैं और मैं यह मानता हूं कि इसकी गहन रूप से एक समीक्षा होनी चाहिये और समीक्षा करने की जरूरत भी है जिससे इनमें सुधार हो सके. आज किसानों को इस प्रदेश में नि:शुल्‍क खसरा खतौनी देने का काम इस सरकार के द्वारा किया जाता है. मैं यह मानता हूं कि यह महज एक औपचारिकता है. नि:शुल्‍क कहीं नहीं मिल रहे हैं. वन अधिकार के जो पट्टे प्राप्‍त हुये हैं, वर्ष 2006 के बाद वह भूमि तो किसी खसरे में भूमि स्‍वामी के रूप में दर्ज है ही नहीं. मैं तो यह कहता हूं कि वनाधिकार के जो पट्टे दिये गये हैं इनको भी खसरे में दर्ज होना चाहिये. जिनको वन अधिकार के पट्टे मिले हैं उनको सूखा राहत की राशि का मुआवजा भी नहीं मिलता है, इसमें भी सुधार करने की आवश्‍यकता है. फसल बीमा की बात करें, सहकारी संस्‍थाओं के माध्‍यम से या कृषि विभाग के माध्‍यम से जो किसानों को प्रदाय किया जाता है वह कागज में सिमटकर रह गया है. अगर सच्‍चाई देखें तो कई ऐसे किसान हैं जो आज भी इस योजना से वंचित हैं. वर्ष 2015-16 में जब सूखा पड़ा था उस समय भी फसल बीमा के प्रमाण पत्र बांटे गये थे, किंतु उन कृषकों को आज भी उनके मुआवजें की राशि नहीं मिल पाई है, इसमें मैं माननीय मंत्री जी से यह चाहता हूं कि उच्‍च स्‍तरीय जांच होनी चाहिये. जंगली जानवरों जैसे सुअर, नीलगाय किसानों की फसलों का इतना नुकसान करते हैं कि जहां हमारा 50 हजार का नुकसान है उसमें मात्र 5 हजार मुआवजा मिलता है, इस राशि को बढ़ाने का विचार किया जाना चाहिये.

 

12.31 बजे माननीय सभापति (श्री कैलाश चावला) पीठासीन हुये.

 

माननीय सभापति महोदय, पटवारियों की आप बात करें, विभाग में पटवारियों की इतनी कमी है कि 5-5, 6-6 हल्‍के एक पटवारी के पास हैं, अर्थात यह कह लें कि एक नायब तहसीलदार के बराबर इनके हल्‍के हैं. आपके पटवारियों के कहीं आवास भी नहीं हैं, बहुत कम आवास बने हैं, एक निश्चित जगह हो कि सप्‍ताह में पटवारी यहां मिलेंगे तो किसानों को परेशानी न हो, कृपया इसे भी तय होना चाहिये कि पटवारी अपने हल्‍कों में रहें. पटवारी कब-कब रहेंगे यह तय हो जाये, किस-किस दिनांक को मिलेंगे, तो किसानों को सुविधा होगी. शहडोल लोकसभा का जब उप चुनाव था, पूरे संभाग में आवासीय पट्टे का वितरण किया गया. वह मात्र एक प्रमाण-पत्र टाइप से एक अधिकार पत्र टाइप से दिये हैं वह न कहीं खसरे में दर्ज है, न कहीं कुछ है, मात्र एक औपचारिकता है. सीमांकन का काम जो पहले होता था, मध्‍यप्रदेश भू-राजस्‍व संहिता की धारा 139 के तहत जो अधिकार पहले तहसीलदार को था, आज वह राजस्‍व निरीक्षक को दे दिया गया है. राजस्‍व निरीक्षक अगर किसी प्रभावशाली व्‍यक्ति के प्रभाव में आकर अगर गलत सीमांकन करता है तो उसकी अपील पहले तहसीलदार के यहां हो जाती थी, कलेक्‍टर के यहां हो जाती थी किंतु अब उसे राजस्‍व मंडल ग्‍वालियर जाना पड़ेगा. मतलब एक किसान जो गरीब है उसके साथ कितना अन्‍याय हो रहा है, यह उसके लिये बहुत बड़ी चीज है, इस पर विचार करना चाहिये, इसमें संशोधन होना चाहिये. जैसा पहले नियम था उसी नियम को लागू करना चाहिये. मध्‍यप्रदेश भू-राजस्‍व संहिता की धारा 44 में अपील का प्रॉवीजन है. पहले अनुविभागीय अधिकारी को 45 दिन की जो समयावधि रहती थी, आयुक्‍त को 60 दिन की और राजस्‍व मंडल को 90 दिन की समयावधि अपील करने की जो रहती थी, आज वर्तमान में उसको घटाकर क्रमश: 30, 45 और 60 दिन कर दिया गया है. इस प्रॉवीजन को भी पूर्ववत संशोधन करना चाहिये. माननीय सभापति महोदय, मैं ऐसा मानता हूं कि इसमें भी सुधार करने की जरूरत है जिससे किसानों को पर्याप्‍त समय मिले और वह अपील कर सकें. धारा 50 के पुनर्विलोकन में संबंधित राजस्‍व न्‍यायालय में कोई त्रुटि हुई है, उसमें 90 दिन के भीतर अपील करने का समय रहता था, वह घटाकर 75 दिन कर दिया गया है, इसमें भी सुधार करने की आवश्‍यकता है. मध्‍यप्रदेश भू-राजस्‍व संहिता की धारा 51 में जो निगरानी का प्रॉवीजन पहले था, पहले कलेक्‍टर को सीमांकन या व्‍यवस्‍थापन आदि के संबंध में अधिकार थे, उसे संशोधित कर राजस्‍व मंडल को दे दिये गये हैं. किसान राजस्‍व मंडल नहीं पहुंच पाते, चूंकि कई किसान इतने गरीब हैं कि वह कलेक्‍टर के पास नहीं पहुंच पाते, राजस्‍व मंडल तो उनके लिये बहुत बड़ी चीज है. निगरानी का जो प्रॉवीजन है जैसे पहले था अगर आप ऐसा करते हैं तो उन मध्‍यम और गरीब तबके के जो किसान हैं उनको बड़ी आसानी से, सहजता के साथ न्‍याय सुलभ हो सकेगा. मध्‍यप्रदेश भू-राजस्‍व संहिता की धारा 248 संशोधन कर जैसे पहले शासकीय जमीन का जुर्माना करने का अधिकार तहसीलदार को 1500 रूपये अधिकतम था, एसडीओ को 500 रूपये अधिकतम था, किंतु आज यह स्थिति है कि शासकीय जमीन पर कहीं कोई कृषक या कोई व्यक्ति काबिज किया है. हर हल्के का जो बाजार वेल्यू अलग अलग है और उसका 20 प्रतिशत जुर्माना लगाया जाता है. मेरे विधान सभा क्षेत्र में मैंने देखा कि कई ऐसे गरीब हैं, छोटे-छोटे धंधे कर रहे हैं, ठेले रखते हैं, या गुमटी रखते हैं उनको 10 हजार अथवा 20 हजार रूपये जुर्माना कर रहे हैं. मेरे यहां पर ऐसे बहुत सारे कृषक हैं जिनको इतना ज्यादा जुर्माना किया है कि वह अपना जुर्माना नहीं दे सकते हैं. इसमें आपको सुधार करना चाहिये. इसमें सबसे ज्यादा नीचे तबके के लोग परेशान हो रहे हैं, यह सोचने की बात है. जंगली जानवरों के द्वारा जो नुकसान हो रहा है उसका किसान को त्वरित मुआवजा मिलना चाहिये, वह नहीं मिलता है, उस पर विचार करना चाहिये.

सभापति महोदय, जहां सूखा-पाला पड़ता है उसमें व्यापक रूप से गड़बड़ी होती है. जैसे अभी ब्यौहारी एवं शहडोल जिले में सूखा घोषित है, किन्तु आज भी बहुत सारे कृषक हैं वह मुआवजे के लिये भटक रहे हैं या हो सकता है कि उनका खाता गलत हो. कईयों के तो नाम ही नहीं हैं उनकी फसल का नुकसान हुआ है. इसका आप पुनः परीक्षण करवा लें. जो किसान इससे छूट गये हैं उनको मुआवजा मिलना चाहिये. आपने समय दिय धन्यवाद.

श्री हेमंत विजय खंडेलवाल--(अटेर)--सभापति महोदय, मैं मांग संख्या 8, 9, 46 के समर्थन में अपनी बात कहने के लिये खड़ा हुआ हूं. मैं माननीय मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि पहली बार हमारे राजस्व विभाग के कोर्ट हैं उन्हें निर्णय करने के लिये पूरी तरह से कम्प्यूटरीकृत किया है. हमारे सीमांकन में किसी तरह का विवाद न आये इसलिये ई.टी.एस. मशीन के माध्यम से आपने प्रक्रिया को शुरू किया अब लोगों का सीमांकन पर भरोसा भी बढ़ा है और समस्याओं में भी कमी आयी है. सीमांकन प्रक्रिया में सुधार के लिये यू.आर.एस. की स्थापनी भी की जा रही है तथा इसके लिये 30 करोड़ रूपये का बजट भी रखा गया है. हमारे मंत्री जी के नेतृत्व में राजस्व अमला मुख्यमंत्री हेल्प लाईन में सबसे आगे है और उसने सबसे ज्यादा समस्याओं का निवारण किया है उसके लिये धन्यवाद देता हूं. एक जमाना था जब चाहे किसान हों, आम नागरिक हों वह सारे के सारे पटवारी, आर.आई को ढूंढते थे अब वह दौर आ गया है कि आर.आई एवं पटवारी लोगों को ढूंढते हैं कि आपका कोई काम हो तो बता दें. अगर काम बच गया हमें दिक्कत आ जाएगी. ऐसा दौर पहली बार राजस्व मंत्रालय के लाया गया है मैं सबकी तरफ से धन्यवाद देता हूं. हमारे किसान भाई तहसील के चक्कर न लगायें इसके लिये उनको खसरा-किश्त बंदी को घर पर पहुंचाने का काम किया. भू-राजस्व, भू-भाटक ऑन-लाईन जमा करने की प्रक्रिया भी शीघ्र शुरू की जा रही है. किसानों की भूमि के सीमांकन अविवादित नामांतरण, अविवादित बंटवारे तीन माह में पूरे कर लिये जाएं इसका एक अभियान आपके द्वारा चलाया जा रहा है. इसमें 3 हजार 940 करोड़ का प्रावधान आपने राजस्व मंत्रालय के लिये किया है इसमें 1582 करोड़ रूपये सूखा राहत जिलों में भेजने का भी है. पटवारियों की कमी से पूरा प्रदेश जूझ रहा है और पहली बार जितने पटवारी मैदान में हैं उतने ही पटवारियों का चयन आपके द्वारा किया गया है. 9 हजार पटवारी शीघ्र ही प्रदेश में और आयेंगे. इस प्रदेश में जो भी थोड़ी बहुत समस्याएं हैं उनका निपटारा करेंगे. हमारा राजस्व मंत्रालय लगातार अच्छे काम कर रहा है इसमें और भी सुझाव एवं सुधार की गुंजाइश रहती है, क्योंकि लोगों के आम जीवन से जुड़ा हुआ मंत्रालय है. मैं आपको धन्यवाद के साथ कुछ सुझाव भी देना चाहूंगा कि गृह मंत्रालय में एक परिवार परामर्श केन्द्र होता है, पुलिस थानों में जिन परिवारों के विवाद जाते हैं उससे पहले वह परिवार परामर्श केन्द्र पति-पत्नी, सास-बहुओं को बिठाकर उनके झगड़े निपटाने का काम करता है. मेरा आपसे अनुरोध है कि राजस्व कोर्ट भी बनाया जाए जिसमें पारिवारिक मसलों को वहीं पर हल करने की कोशिश की जाए. कई बार परिवारों में विवाद नहीं रहता छोटा-मोटा व्यक्ति अगर समझा दे तो मैं समझता हूं कि परिवार में एकता भी आयेगी और वह मसले आपसी सहमति से हल हो सकते हैं. ग्रामीण सचिवालय को हमारे माननीय पटवा जी तथा माननीय शिवराज सिंह जी चाहते थे कि एक ग्रामीण सचिवालय शुरू हो. मैं मंत्री जी से अनुरोध करूंगा कि एक बड़ी पंचायत को लें और उसके आसपास की 5-6 छोटी पंचायत अथवा छोटे हल्कों को मिलाकर एक राजस्व हमारा ग्रामीण सचिवालय है उसके प्रारूप को फिर से जिन्दा करें उसके कारण जो लाभ होंगे. मैं बताना चाहूंगा कि प्रधानमंत्री आवास माननीय नरेन्द्र मोदी जी द्वारा बड़ी संख्या में दे रहे हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की एक रूलिंग है कि जिसमें किसी भी गांव में 2 प्रतिशत से कम कोई चरनोई भूमि होती है, तो वहां पट्टे नहीं दिये जा सकते हैं. अगर हमारा हल्का 5-6 पंचायतों को मिलाकर बन जाएगा तो एक बड़ा राजस्व हल्का बन जाएगा तो किसी गांव में 4 प्रतिशत चरनोई भूमि तो किसी गांव में डेढ़ प्रतिशत है उसका हल 5-7 गांव के किसी न किसी गांव में चरनोई को चिन्हित करके ही हो जाएगा और मैं समझता हूं कि हमारे पट्टे देने की तथा प्रधानमंत्री आवास की बहुत बड़ी योजना है वह इस छोटे से काम से हल हो जाएगी. हमारी तहसीलों के चक्कर लोग न लगायें इसके लिये हमारा ग्रामीण सचिवालय बहुत कारगर सिद्ध होगा. मैं मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन्होंने ई.टी.एस. मशीन का उपयोग शुरू किया, लेकिन ई.टी.एस. मशीन कम है. एक तहसील में एक है. मेरी बैतूल तहसील है वहां पर पूछा तो बताया कि पांच सौ सीमांकन पेंडिंग हैं. मेरा आपसे अनुरोध है कि कम से कम एक तहसील में चार-पांच मशीनें दी जाएं उसी के साथ साथ मेरा सुझाव है कि हमारे प्रदेश में बहुत सारे बेरोजगार बच्चे हैं, इंजीनियर हैं, वह ई.टी.एस. मशीन ले लें और ऐसे सीमांकन जिसमें विवाद नहीं हैं उसमें दोनों पक्ष सहमत हो जाते हैं उसे भी हम कानूनी प्रक्रिया में लें उनसे थोड़ा शुल्क लेकर के उनका सीमांकन कर दें जिससे चार-छः महीने में लोगों के सीमांकन हो जाएंगे. आपके राजस्व अमले पर बोझ कम हो जाएगा. मेरा ध्यानाकर्षण था उसमें पूरे प्रदेश की समस्या थी स्थायी आवासीय पट्टे, स्थायी व्यावसायिक पट्टे और अस्थायी व्यावसायिक पट्टे उसमें 2009 में एक निर्णय लिया जिसमें आबादी के हिसाब से जो पहले 9 रूपये प्रति वर्ग फिट होता था उसे छोड़कर उसको गाईड लाईन से जोड़ दिया इसके कारण बैतूल शहर में ही लगभग 50 गुना की वृद्धि हो गई और यह स्थिति पूरे प्रदेश में है. अस्थायी पट्टे का 1990 में प्रति वर्ग फिट का 5 रूपये का रेन्ट लगता था उसको गाईड-लाईन से जोड़ने में मेरे यहां पर 1450 रूपये हो गया है. उसमें लगभग 300 गुना वृद्धि हो गई है. यह स्थिति पूरे प्रदेश की है जिसके कारण पूरे प्रदेश में कोई पैसा भर नहीं पा रहा है इसलिये राजस्व की बहुत बड़ी राशि लंबित हो रही है इसमें हमें नीतिगत निर्णय लेने चाहिये. मंत्री जी को धन्यवाद दूंगा कि आपने ध्यानाकर्षण के जवाब में 30 मार्च तक उसको हल करने के लिये कहा है, आपकी तरफ से पूरा काम हो गया है, लेकिन वित्त विभाग में अटका हुआ है. मैं इसको बार बार इसीलिये बोल रहा हैं कि यह बड़ी बीमारी है. कोई बीमारी एक इंजेक्शन से ठीक नहीं होती उसको बार बार बताना भी पड़ता है और आप इस दिशा में लगे हैं इसलिये आपको पुनः धन्यवाद देता हूं. एक लोकल समस्या बताकर अपनी बात समाप्त करूंगा मेरे जिले के मुल्ताई और बैतूल बाजार को 1980 में आपने राजस्व से हटार नजूल में लिया है, लेकिन उसकी प्रक्रिया 25 साल से अधूरी पड़ी है. लोगों के वहां न तो पट्टे बन पाये हैं और न ही लोगों का सीमांकन हुआ है, न ही लोग जमीन खरीद-बेच पा रहे हैं. यह समस्या पिछले 25 वर्षों से है. किसी अधिकारी को लगायें ताकि वह मेरे साथी चन्द्रशेखर देशमुख जी ने भी यह मामला उठाया था. यह समस्या अगर हल होती है तो दोनों शहरों में हम प्रधानमंत्री आवास दे पाएंगे पुन: सभापति जी, आपके माध्यम से मैं मंत्री जी और हमारे मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद करूंगा. आपके कारण जब हम विधायक लोग गांवों में जाते हैं तो हमसे भी कोई राजस्व विभाग की शिकायत नहीं करता. बड़ी तेजी से आपके नेतृत्व में मंत्रालय काम कर रहा है. आपने पारदर्शिता बनाई है. पुन: इस अच्छे काम को आपको धन्यवाद देते हुए मैंने जो आपको दो-तीन सुझाव दिये हैं उन पर अमल करने से हमारी और पारदर्शिता बढ़ेगी. धन्यवाद.

डॉ.गोविन्द सिंह(लहार) - माननीय सभापति महोदय,मध्यप्रदेश में जब-जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनती तो पूरे प्रदेश में कहां-कहां मुख्य जमीनें हैं. अरबों की जमीनें हैं, शहरों के पाश इलाके की जमीनों पर कब्जा करने की नीति बनाई जाती है.1990 में जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी तो पूरे प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने अपने-अपने संगठनों को,अपने-अपने चहेतों को करोड़ों की जमीन कौड़ियों के भाव बांटी और उसकी जांच जगतपति कमेटी जब बनी थी उस जगतपति कमेटी की जो रिपोर्ट आयी उसमें विस्तार से चर्चा थी लेकिन वह जमीनें आज भी जैसी की तैसी उन्हीं लोगों के पास हैं. इसी प्रकार से मैं पुन: कहना चाहता हूं कि लगभग पंद्रह साल को यह सरकार होने को आयी इस सरकार ने पूरे प्रदेश में, हमने एक प्रश्न लगाया था विधान सभा में आज से दो वर्ष पहले. उसमें 86 प्रमुख शहरों की जमीनें 1 रुपये में,2 रुपये में संस्थाओं को और निजी अस्पतालों के नाम पर बांट दीं और इसके बाद जो बची खुची जमीनें थीं उन पर अन्य लोगों के माध्यम से कब्जा करने की योजना बनाई. पिछली विधान सभा में हम कई प्रश्न लगा चुके, चर्चा हो चुकी,ध्यानाकर्षण भी लग चुके. सतना के पास एयरबेस के पास करीब 1 हजार करोड़ से अधिक की जमीन है. इस जमीन पर नेता प्रतिपक्ष जी ने भी इस मुद्दे को विधान सभा में उठाया लेकिन लगातार विधान सभा में शिकायतें करने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई और उस पर कालोनी बन गई और गैस के गोदाम भी बन गये.सागर का भी एक मुद्दा हर्ष सिंह जी ने  उठाया था. उस प र जब कोर्ट में गये तब न्याय मिला. इसी प्रकार मैं कहना चाहता हूं कि भोपाल में आज माननीय ललिता यादव जी,आज मंत्री हैं, उन्होंने विधान सभा में 16 दिसम्बर,2015 को इसी प्रकार छतरपुर जिले में जमीनों पर कब्जा होने का मुद्दा उठाया था. जांच कमेटी भी बनाई थी. आदरणीय देवड़ा जी की अध्यक्षता में, उस कमेटी की रिपोर्ट आज तक नहीं आई. इसके साथ ही भोपाल मेमोरियल अस्पताल के पास 7 एकड़ शासकीय जमीन पर भूमाफियाओं ने अधिकारियों और कुछ राजनेताओं से सांठगांठ करके उस पर कब्जा करके डुप्लेक्स मकान बना लिये. तमाम कार्यवाही हुई,आंदोलन भी हुए, कुछ तोड़फोड़ भी कराई गई लेकिन दो-चार मकान तोड़कर चले आये,आज भी उसका यथावत कब्जा है. मामला न्यायालय में चला गया.विवादित हो गया. सरकार को जो पैरवी जमीन बचाने के लिये करनी चाहिये वह सरकार नहीं कर रही है. आपके राज्य सभा के सदस्य माननीय शर्मा जी ने भी कहा कि सरकार सो रही है हम शिकायत करने कहां जाएं. आखिर दिग्गज नेता का छलका दर्द. सरकारी जमीनों के मामले में संगठन से लेकर सरकार तक सब जगह शिकायत कर चुके और उन्होंने 8-19 उदाहरण दिये हैं. मैं बताऊंगा तो देर लगेगी लेकिन आज तक भी उन जमीनों पर कब्जा नहीं हटाया गया,न कोई कार्यवाही की गई. इस तरह की हालत है. जब कांग्रेस में दिग्विजय सिंह जी मुख्यमंत्री थे उस समय जहां 10 परसेंट से ज्यादा चरनोई जमीन थी, उस जमीन के अनुसूचित जाति,जनजाति के भूमिहीनों को पट्टे बांटे गये थे. पूरे प्रदेश में व्यापक रूप से पट्टे बंटे लेकिन मुरैना में तमाम पट्टे जो गैरकानूनी तरीके से कलेक्टरों ने दे दिये,प्रतिबंध है कि ये पट्टे गरीब भूमिहीनों को दिये गये थे तो कलेक्टर यह देखेगा कि वह क्यों बेचना चाहता है, इसकी आवश्यकता क्यों है,अगर उसके यहां कोई पारिवारिक कठिनाई है या घर में कोई नहीं है तो अनुमति लेकर वह बेच सकता है. ग्वालियर में भी हुआ और हमारे आपकी पार्टी के सदस्य हैं सत्यप्रकाश सिकरवार "नीटू" उन्होंने भी कई प्रश्न लगाये लेकिन विधान सभा में जवाब आये कि कार्यवाही होगी लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई और मैंने भी सूचना के अधिकार के तहत् आवेदन लगाये ग्वालियर,मुरैना और कई जगह लगाये,अपीलें कीं लेकिन सूचना के अधिकार की धज्जियां, सरकार में शीर्षस्थ में बैठे हुए अधिकारियों के संरक्षण के चलते वह भी दबा दी गईं. श्योपुर जिले के करहल की बात बताना चाहता हूं. करहल में आदिवासियों को जो पट्टे मिले थे. हमने वहां देखा कि आदिवासियों के पास पट्टे हैं. कई लोगों ने पट्टे पर नोटरी लिखा ली और बेचारे आदिवासी पत्थरों को मकान बनाए,घास और पत्ता लगाकर रह रहे हैं. इतनी भीषण गर्मी में भी कैसी जिंदगी काट रहे हैं यह सोचनीय विषय है. गांव से बाहर के तमाम लोग वहां पहुंच गये और कुछ लोग तो हमारे क्षेत्र से भी पहुंच गये. मैंने देखा कि उनकी वहां तमाम गाड़ी,ट्रेक्टर,जे.सी.बी. चल रही हैं. बंगले बने हुए हैं. हमने कहा कि तुम कहां से इतने पैसे वाले हो गये.

श्री दुर्गालाल विजय - ज्यादातर भिण्ड जिले के लोग हैं.

डॉ.गोविन्द सिंह - अगर भिण्ड के अपराधी हैं तो कार्यवाही करो उन पर. हो सकते हैं हम नहीं कहते हमारी पार्टी के भी हो सकते हैं किसी भी दल के हो सकते हैं. उन्होंने गरीबों की जमीन छीनकर बड़े-बड़े महल बना लिये और दुर्गालाल जी को सब पता है लेकिन उस पर कार्यवाही नहीं हो रही और जो सचिव हैं ग्राम पंचायत विभाग के, तो जितने भी सचिव हैं उनकी भी जांच कराई जाए तो उन्होंने अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति,गरीब आदिवासियों की जमीन लिखाकर अवैध कब्जा करके खेती कर रहे हैं. सिंचाई कर रहे हैं और 15-20 सालों से वहां काबिज हैं और पैसा कमा रहे हैं और आदिवासी दर-दर भटक कर भूखों मरने की स्थिति में हैं. मेरा मंत्री जी आपसे अनुरोध है कि इस प्रकार का कोई एक अभियान चलायें ताकि गरीबों के साथ न्याय हो और अनुसूचित जाति,जनजाति के जो पट्टे बंटे हैं इनकी भी अगर आप कमेटी बनाकर जांच कराएंगे तो अवैध रूप से कई दिल्ली के,मुंबई के बिल्डर आ गये उन्होंने भी आकर महानगरों में जमीनें खरीद लीं. उन्होंने कलेक्टर से परमीशन ले ली,कलेक्टर ने आर्डर कर दिये. जबकि दूसरी जगह जमीन खरीदने की शर्त के साथ परमीशन दी जाती है. दूसरी जगह जमीन नहीं खरीदी गईं लेकिन जमीनें बिक गईं. इस पर ध्यान दें. इसके साथ हमारा आपसे कहना है मैं प्रश्न भी लगा चुका विधान सभा में मंदिरों की जमीन का. मंदिरों की जमीन पर भारी पैमाने पर पुजारियों ने अपने नाम कब्जा कर रखा है. हमारे दबोह क्षेत्र में शासन ने जो कृषि उपज मण्डी को जमीन दी थी. वहां एक पुजारी उत्तराखण्ड से आ गया. उसने नाम लिखाकर,अधिकारियों से सांठगांठ करके,वह जमीन अब बीच बस्ती में आ गयी है. करीब 100 एकड़ जमीन है. डेढ़-दो हजार करोड़ रुपये की जमीन पर कब्जा कर लिया. लगातार हमने कई प्रयास किये.लड़ाई भी लड़ रहे हैं. हाईकोर्ट भी चले गये. अधिकारियों से सांठगांठ करके वह जमीन दबा ली गई. कोई पैरवी नहीं होती. तो मंदिरों की जमीनों की भी आप समीक्षा कराएं. करोड़ों रुपयों की जमीनें हैं.

सभापति महोदय - गोविन्द सिंह जी,थोड़ा संक्षिप्त करें. बहुत लोगों के नाम हैं.

डॉ. गोविन्द सिंह - सभापति महोदय, उस पर भी आप देखें. मैं समाप्त ही कर रहा हूं. हमारे यहां पर एक मंदिर है नारदेश्वर मंदिर, वहां पर नारद जी ने तपस्या की है, ऐसा शास्त्रों में उल्लेख है. शिवजी का मंदिर है, हमारी भी सरकार रही है, उसकी जमीन के लिए तब भी हमने प्रश्न लगाए और वर्ष 1990 से लेकर अभी तक 47 प्रश्न विधान सभा में लगा चुके हैं, लेकिन उस जमीन से कब्जा नहीं हट पा रहा है. दतिया में कुछ जमीन है, यह सवा सौ बीघा जमीन है. कुछ जमीन का कब्जा तो हट गया है. श्री रामपाल सिंह जी जब राजस्व मंत्री थे, उन्होंने भी आश्वासन दिया था कि एक महीने में कर देंगे. दिनांक 16.12.2015 की बात है. आपकी धार्मिक भावना दिख रही है. आपने कहा था कि मैं कठोर कार्यवाही करूंगा, तुरन्त एक माह के अंदर कब्जा हटाकर सीमांकर कराएंगे. कई जगहों पर कब्जा हट गया. आपको भी हमने चिट्ठी लिखी थी. आपके समय भी हमने प्रश्न लगाया है. आपके प्रमुख सचिव ने भी कलेक्टर दतिया, भिण्ड को पत्र लिखा कि इस जमीन का सीमांकन कराओ, लेकिन जो विधान सभा प्रश्न लगाया, कल ही उसमें जवाब आ गया है कि सीमांकन हो गया है, यह असत्य जवाब दिया गया है. सीमांकन तो हुआ नहीं है, यह जरूर है कि कई जगहों पर कब्जा हट गया है. 2 गांवों की जमीनों पर कब्जा रह गया है, लेकिन सीमांकन अभी तक नहीं हुआ है. कई लोग अभी भी कब्जा किये हुए हैं.

श्री उमाशंकर गुप्ता - कुछ अच्छा हुआ हो तो वह भी बोल लें.

डॉ. गोविन्द सिंह - कुछ कब्जा हटा है. लेकिन विधान सभा जैसे पवित्र मंदिर में गलत जानकारी आती है. आप जरा कड़क मंत्री हैं तो कार्यवाही करें कि प्रमुख सचिव ने 2-2, 3-3 पत्र लिखे उनको गलत जवाब दे दिया. सीमांकन हुआ नहीं है तो सीमांकन करा दें. दतिया जिले के 2 गांवों बिजौरा और गुमानपुरा में अभी भी कब्जा किये हुए हैं, उस पर कार्यवाही करें. सभापति महोदय, अंतिम बात कहना चाहता हूं कि यह आप सुधार करें. जो खसरा, खतौनी की नकल है वह आपने लोक सेवा गारंटी से कर दी है, किसान वहां जाता है, पहले वह10 रुपये फीस जमा करता था, तहसील में वह कापी मिल जाती थी. अब वहां इसके 35 रुपये जमा करना पड़ते हैं. इसके बाद आपने एक आदेश दिया, यह केवल राजस्व विभाग का है, न्यायालय का नहीं है. राजस्व विभाग में कमिश्नर, तहसीलदार, नायब तहसीलदार के यहां से पहले एक नकल ले आते थे, पटवारी फार्म लेकर भर देता था. अब कम्प्यूटर से कापी लेते हैं पहले तब भी कापी 10 रुपये में तहसीलदार के यहां से मिल जाती थी. अब एक नम्बर की 20 रुपए फीस कर दी है. अब छोटे-छोटे किसान है. भाइयों का बंटवारा हो जाता है.

श्री उमाशंकर गुप्ता - सभापति महोदय, एक तो साल में हम निःशुल्क बांट रहे हैं, घर-घर जाकर बांट रहे हैं. इस साल की बंट गई हैं. दूसरा आप जो कह रहे हैं कि अगर एक ही किसान के 4 भी खाते होंगे, 5 भी खाते होंगे. एक पेज की फीस है 30 रुपये है, वह आदेश निकल गये हैं.

डॉ. गोविन्द सिंह - वह आदेश पहुंचे नहीं हैं.

श्री उमाशंकर गुप्ता - इसको सालभर हो गया है. अगर कहीं दिक्कत है तो बताएं.

डॉ. गोविन्द सिंह - लेकिन भिंड जिले में नहीं पहुंचे हैं, हमें वकीलों ने ज्ञापन दिया है.

डॉ. कैलाश जाटव- माननीय मंत्री जी, वह 30 रुपए लग रहे हैं.

श्री अनिल फिरोजिया - सभी जगहों पर यह शुल्क लग रहा है.

श्री उमाशंकर गुप्ता -आप बात सुन लें 30 रुपए लग रहे हैं लेकिन अगर एक किसान के 4 खाते हैं तो 30-30 रुपये चारों खातों पर नहीं लग रहे हैं.

डॉ. कैलाश जाटव - माननीय मंत्री जी, चारों खातों पर लग रहे हैं.

श्री अनिल फिरोजिया - चारों खातों पर लग रहे हैं.

श्री कुंवर विक्रम सिंह - माननीय मंत्री जी, सब पर शुल्क लग रहा है.

श्री उमाशंकर गुप्ता -सभापति महोदय, यह आदेश निकल गया है, उसकी कापी आप सबको उपलब्ध करवा दूंगा.

डॉ. कैलाश जाटव -माननीय मंत्री जी, आदेश की कापी उपलब्ध करा दें.

श्री अनिल फिरोजिया - यहां से निर्देश जाएं तो ठीक रहेगा.

डॉ. गोविन्द सिंह -हमारी आपसे यही प्रार्थना है कि एक कापी तो हम लोगों को भिजवा दिया करें ताकि असलियत पता चल जाय. दूसरा, इसमें निर्देश दोबारा जारी करा दें क्योंकि यह प्रक्रिया अभी लागू नहीं हुई है. 8 दिन पहले हमें वकीलों ने ज्ञापन दिया है, उसमें लिखा है कि 1 नम्बर, सगे दो भाई हैं उनमें बंटवारा हो गया तो उनको भी शुल्क लग रहा है, एक सर्वे क्रमांक के 20 रुपये लग रहे हैं, अगर 10 सर्वे क्रमांक हैं तो 200 रुपए लग रहे हैं.

सभापति महोदय - माननीय मंत्री जी, इसके आदेश आप सबको भिजवा दें.

डॉ. गोविन्द सिंह - इसमें एक फीस निर्धारित कर दें.

श्री उमाशंकर गुप्ता -सभापति महोदय, यह मैं उपलब्ध करा दूंगा. यह साल भर से हो गया है. अगर शिकायत है, पैसे लिये गये हैं तो हम उन पर कार्यवाही भी करेंगे. अगर एक ही व्यक्ति के नाम पर अगर बंटवारा हो गया है 2 नाम हो गये तो अलग-अलग पैसा लगेगा. लेकिन एक ही व्यक्ति के नाम पर एक पेज में साधारणतः 4 खाते आ जाते हैं तो उस एक पेज का शुल्क 30 रुपये है और एक ही व्यक्ति के नाम पर वह 4 खाते हैं तो 30 ही रुपये लगेंगे.

सभापति महोदय - माननीय मंत्री जी, आदेश की कापी सभी विधायकों को दे दें.

श्री उमाशंकर गुप्ता -सभापति महोदय, मैं सब विधायकों को कापी दे दूंगा.

डॉ. गोविन्द सिंह - ठीक है, आप कापी दिलवा दें, आपका धन्यवाद. अगर ऐसा आदेश हो गया है तो अच्छा है.

श्री जसवंत सिंह हाड़ा - सभापति महोदय, मैं अनुरोध करता हूं कि मंत्री जी कह रहे हैं यह बात भी सही है. लेकिन व्यावहारिक रूप से जैसा उन्होंने बताया है, वह पैसा लग रहा है. मैं सोच रहा हूं कि जो आदेश दे रहे हैं अगर उसकी कापी हम विधायकों को भी मिल जाएगी तो हम उसको देख लेंगे.

सभापति महोदय - वह बता दिया है, वही बात अभी कही है.

डॉ. गोविन्द सिंह - 20 रुपए प्रति नम्बर लग रहे हैं तो आप फिक्स कर दें, 30 रुपये किये हैं तो अच्छा है धन्यवाद. इसी प्रकार से अगर राजस्व के तहसीलदार ने कोई निर्णय दिया तो तहसीलदार के निर्णय पर भी 40 रुपये प्रति पेज लग रहे हैं, अगर वह निर्णय 5 पेज में है तो 200 रुपये हो गये. इस प्रकार इसकी फीस फिक्स कर दें. नम्बर का हिसाब है. यह सब बोझ किसान पर ही पड़ रहा है. हमारा आपसे अनुरोध है कि किसानों के हित में तमाम निर्णय ले रहे हैं तो कृपया इसको भी देखें. सदन में मुख्यमंत्री जी ने घोषणा की थी और आदेश भी शायद निकले हैं लेकिन वह पहुंचे नहीं हैं. नामांतरण, बंटवारे के भी जो प्रकरण हैं. पटवारी एक-एक साल से यह नहीं कर रहे थे, पंचायतों को जब आपने इसको दे दिया है तो आदेश पंचायतों को भी दे दें और उसकी कापी हम लोगों को दे दें ताकि ग्राम पंचायत में नामांतरणों का निराकरण हो सके. धन्यवाद.

श्री इन्दर सिंह परमार (कालापीपल) - सभापति महोदय, राजस्व विभाग में हमारी सरकार बनने के बाद में सुधार करने का काम मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री जी और राजस्व मंत्री जी के द्वारा किया गया है. इसके लिए हमारे प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री और माननीय मंत्री जी को मैं धन्यवाद देना चाहता हूं. जिस प्रकार से विभिन्न प्रकार के राहत कार्यों में आरबीसी 6 (4) में संशोधन किये गये हैं. मैं समझता हूं कि आजादी के बाद में वर्ष 2006 से बदलाव की जो प्रक्रिया प्रारंभ की गई और समय समय पर उस काम को आगे बढ़ाते गये. अभी जो सिंचित जमीन है उस पर 30,000 रुपये प्रति हैक्टेयर का जो सरकार के द्वारा निर्णय लिया गया है, मैं उसके लिए माननीय मुख्यमंत्री जी और राजस्व मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं. इसके कारण किसानों को वास्तविक राहत का लाभ मिल सकेगा. हमारे प्रदेश में 18 जिलों को सूखा राहत प्रदान की गई है. सूखा क्षेत्र घोषित किया गया, जो फसलों को नुकसान हुआ, उसमें राहत देने का काम किया गया है. 1582 करोड़ रुपये का आवंटन मध्यप्रदेश में किया गया है. मेरे जिले शाजापुर में ही 87 करोड़ रुपये देकर माननीय मुख्यमंत्री जी और माननीय राजस्व मंत्री जी ने हमारे किसानों का जो दर्द था, उसको समझा है. आज किसानों को सभी राशि वितरित हो रही है. इसी प्रकार से जो बिजली के करंट से या पानी में डूबने के कारण से किसी की मृत्यु हो जाती थी तो 1 लाख रुपये का प्रावधान भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किया था, लेकिन उसको बढ़ाकर अब 4 लाख रुपये कर दिया गया है. इसके लिए भी माननीय मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं.

श्री यादवेन्द्र सिंह - माननीय सभापति महोदय, अभी करंट का प्रावधान नहीं हुआ.

श्री इन्दर सिंह परमार - यह हो गया है. आप देख लें.

श्री यादवेन्द्र सिंह - माननीय मंत्री जी बताएं कि करंट का प्रावधान हुआ है कि नहीं?

श्री इन्दर सिंह परमार - वह बताएंगे. सभापति महोदय, जिस प्रकार से लगातार ग्रामीण क्षेत्र में कृषि कार्य का जो दबाव है. किसानों को समय पर सेवाएं उपलब्ध हो सकें, इसलिए पटवारी हल्के बढ़ाने का काम पिछले सालों में किया गया है. लेकिन उसमें जो पटवारियों की कमी थी, उसके लिए भी 9000 पटवारियों की भर्ती करने का काम मध्यप्रदेश की सरकार करने जा रही है. तहसीलदार, नायब तहसीलदारों के पदों के लिए भी लोक सेवा आयोग के माध्यम से 400 से अधिक पद भरने सरकार जा रही है. मैं सोचता हूं कि इन सब प्रयासों के कारण से जल्दी लोगों को न्याय मिलेगा. जल्दी लोगों की समस्याओं का निराकरण हो सकेगा बाकि विषय हम सब लोगों की जानकारी में हैं कि राजस्व विभाग में जो कम्प्यूराइज्ड मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है, उसके कारण काफी बदलाव हो रहा है. लेकिन मैं समझता हूं कि हमारे यहां राजस्व न्यायालय का जो सिस्टम है उसमें थोड़ा और परिवर्तन करने की जरूरत है क्योंकि कई बार जैसा देखने में आता है कि लोग शासकीय जमीन पर अतिक्रमण कर लेते हैं, रास्ता रोक देते हैं यहां तक कि कई जगहों पर तो जो जमीनें शासन ने शासकीय स्कूलों को आवंटित कर रखी है, कृषि उपज मंडियों समितियों को आवंटित कर रखी है, जिसका गजट नोटिफिकेशन हुआ है उन जमीनों पर भी लोगों ने कब्जे कर लिये हैं, गलत ढंग से दस्तावेज बना लिये हैं और उन जमीनों को अपने नाम करने का प्रयास करते है और बाद में जाकर उसमें राजस्व न्यायालयों से स्टे मिल जाता है. उन जमीनों को अपने नाम से करने का प्रयास और उसमें बाद में राजस्‍व न्‍यायालय से स्‍टे मिल जाता है. इसलिए मेरी प्रार्थना है कि कम से कम ऐसे प्रकरणों में राजस्‍व न्‍यायालय प्रकरण को सुन ले और स्‍टे देना है कि नहीं देना यह निर्णय भी थोड़ा जल्‍दी करेंगे तो अच्‍छा रहेगा. अभी हमारे सम्‍माननीय गोविंद सिंह जी उल्‍लेख कर रहे थे कि जब-जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार मध्‍यप्रदेश में बनती है तो सामाजिक संगठनों एवं संस्‍थाओं को भूमि का आवंटन करते हैं, लेकिन मैं गोविंद सिंह जी से एक प्रश्‍न पूछना चाहता हूं कि जिस समय हमारे प्रदेश में बीस सूत्रीय समितियों को पट्टे देने का अधिकार दिया गया था उस समय का आंकड़ा यदि हम उठाकर देखेंगे तो सारे पट्टे अपने नौकरों को दे दिए और उसके बाद वह पट्टे उन मालिकों के नाम से ट्रांसफर हो गए जो बीस सूत्रीय समितियों में सदस्‍य थे.

 

1.06 बजे अध्‍यक्षीय घोषणा

भोजनावकाश न होना

सभापति महोदय- आज भोजनावकाश नहीं होगा. भोजन की व्‍यवस्‍था सदन की लॉबी में की गई है. माननीय सदस्‍यों से अनुरोध है कि सुविधानुसार भोजन ग्रहण करने का कष्‍ट करें.

 

1.07 बजे वर्ष 2018-2019 की अनुदानों की मांगों पर मतदान (क्रमश:)

श्री इन्‍दर सिंह परमार- सभापति महोदय, पूरे मध्‍यप्रदेश में हजारों प्रकरण ऐसे होंगे, लेकिन मैं जिस स्‍थान का प्रतिनिधित्‍व करता हूं, कालापीपल में ऐसे पचासों पट्टे जो किसी नाम से लिए थे और बाद में समिति के सदस्‍यों ने अपने नाम पर करा लिये. मैंने बीच में जानकारी ली कि हमारा भू-राजस्‍व अधिनियम, 1959 लागू हुआ उस समय शासकीय जमीन का जो रकबा था बाद में वह रकबा कैसे कम हुआ ? वे पट्टे दिए गए जिनमें सारी जानकारी आई है और थोड़ा-बहुत नहीं 500 हैक्‍टेयर जमीन को इस प्रकार से हेराफेरी करने का काम कांग्रेस की सरकार में बीस सूत्रीय समितियों के माध्‍यम से हुआ है.

डॉ. गोविन्‍द सिंह- बीस सूत्रीय समितियां कब थीं ? जब आप पढ़ रहे होंगे, जब आप बच्‍चे रहे होंगे. उस समय जब पढ़ते थे तब समाजवादी पार्टी थी.

श्री इन्‍दर सिंह परमार- मैं उस समय भले ही पढ़ रहा था, परंतु रिकार्ड तो है.

श्री अनिल फिरोजिया- बीस सूत्रीय समिति माननीय अर्जुन सिंह जी ने चालू की थी.

श्री इन्‍दर सिंह परमार- सभापति महोदय, मैं उसका रिकार्ड दे दूंगा. मैं अपने विधानसभा क्षेत्र का आपको रिकार्ड दे दूंगा बाकी मध्‍यप्रदेश का आप ढूंढ़ लेना. मंत्री जी से मेरी प्रार्थना है कि ग्रामीण क्षेत्र में किसानों ने जो अपने बाड़े की जमीन थी और कृषि कार्य के यंत्र रखने के लिए वहां पर छोटे-मोटे मकान बना लिए हैं, हमारे जिले में उन पर डायवर्शन शुल्‍क अनाप-शनाप लगाने का काम किया है. मेरा निवेदन है कि ग्रामीण क्षेत्र में कम से कम डायवर्शन शुल्‍क न लगाया जाए और हमारे छोटे नगरीय क्षेत्र हैं उनमें भी कुएं पर और जंगल में जो घर बने हैं उन पर भी डायवर्शन लगाया गया है, जिसके कारण किसानों में बेचैनी है. इस व्‍यवस्‍था को समाप्‍त करें.

सभापति महोदय- अब आप अपनी बात समाप्‍त करें.

श्री इन्‍दर सिंह परमार- सभापति महोदय, जी मैं समाप्‍त कर रहा हूं. हमारे यहां पर पर श्‍मशान, सामुदायिक भवन को भूमि आरक्षित करने के बहुत सारे प्रकरण तहसीलदार और कलेक्‍टर के पास लंबित हैं, लंबे समय तक उनमें निर्णय नहीं होता है. मैं आपसे प्रार्थना करना चाहता हूं कि शाजापुर जिले के विशेषकर शुजालपुर अनुभाग के जितने प्रकरण हैं, उनका तत्‍काल निराकरण करें क्‍योंकि उसके कारण भवन नहीं बन रहे हैं और शमशान के लिए भी पर्याप्‍त जगह की उपलब्‍धता नहीं हो रही है. साथ ही जिन ग्रामों में ग्राम पंचायतों के द्वारा नवीन आबादी बनाने के लिए आवासीय जमीन की मांग की गई थी, उन प्रकरणों का भी अभी तक निराकरण नहीं किया गया है. इसलिये मंत्री जी से निवेदन है कि शाजापुर जिले के 4-5 बिन्‍दु हैं, इनकी ओर ध्‍यान देंगे. सभापति महोदय, आपने बोलने का समय दिया बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

श्री रजनीश हरवंश सिंह (केवलारी)- सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय राजस्‍व मंत्री जी से कुछ बिन्‍दुओं पर निवेदन करना चाहूंगा. जैसे व्‍यक्ति की कमाई का पैसा बैंक में उसका अकाउण्‍ट, बही खाता मेन्‍टेन रहता है उससे बढ़कर गांव, देहात में अगर किसानों का, गांव में रहने वाले व्‍यक्ति का, अगर किसी के पास कोई बही या खाता होता है, जिंदगीभर की कमाई का, तो वह राजस्‍व विभाग के पास होता है और राजस्‍व विभाग एक ऐसा विभाग है जो व्‍यक्ति की जमीन का ऐसा आंकलन करता है कि वह पीढ़ी दर पीढ़ी उसके नाम से अंकित होती है. किसी दुर्घटनावश अचानक अगर घर का मुखिया चला गया तो नामांतरण और फौती के बंटवारे में आज सबसे ज्‍यादा दिक्‍कत का सामना ग्रामवासियों को करना पड़ता है. आज शासन ने एक ओर अधिकार दिया, दूसरी ओर उस पर स्‍टॉम्‍प ड्यूटी पर सरचार्ज लगा दिए. गांव के लोग हैं. बड़ी मुश्किल से एकड़, दो एकड़, घर बनाने की स्थिति में रहते हैं और तहसील के चक्‍कर लगाते रहते हैं. कभी पटवारी नहीं मिलते, पटवारी मिल गए तो आरआई नहीं मिलते, आरआई मिल गए तो तहसीलदार नहीं मिलते, तहसीलदार मिल गए तो पेशी आगे बढ़ गई. मेरा कहने का आशय यह है कि यह फौती नामांतरण का बंटवारा ग्रामवासियों के लिए एक अहम बिन्‍दु और विषय है इसमें सरलीकरण होना चाहिए. इसका अधिकार ग्राम पंचायत को ही राजस्‍व विभाग के द्वारा देना चाहिए और 100 रुपये के स्‍टॉम्‍प पर ही लोगों की उपस्थिति में उसको मान्‍य करना चाहिए. अगर घर-परिवार में 4 बेटा-बेटी हैं, मां है और वह कहती है कि परिवार के एक व्‍यक्ति का उसमें नाम होना चाहिए और अगर बाकी के तीन लोग तहसीलदार के समक्ष सहमति देते हैं तो वहीं पर उसको मान्‍य करके बिना स्‍टाम्‍प ड्यूटी के उसका खाते में नाम आ जाना चाहिए. सभापति महोदय, पूर्व में भी यह व्‍यवस्‍था हमारे प्रदेश में लागू थी.

सभापति महोदय, आपके माध्‍यम से मेरा दूसरा निवेदन माननीय मंत्री जी से यह है कि आपने डिसमिल बनाया, आपने जरीब बनाई, आपने कड़ी बनाई, आपने आरे बनाए, यही राजस्‍व विभाग का माप करने का पैमाना है. जो भी पटवारी आता है, चांदा बिखर चुके हैं, लोगों को जमीन की आवश्‍यकता है, परिवार बढ़ रहे हैं, बखर-बखर के, जोत-जोत के जो चांदों के आसपास की जगह थी वह बिलकुल पास में आ गई है. चांदों का कई जगह से नामो-निशान मिट चुका है. शासन हमेशा कहता है कि चांदों को पक्‍का किया जाए. कहीं-कहीं पर हैं भी, परंतु अधिकांश जगहों पर चांदों ने अपनी जगह को ही राजस्‍व विभाग से खो दिया है. वहां पक्‍के चांदे बनने चाहिए. कोई पटवारी आया, नप्‍ती हुई, कोई मामला आया, इस पटवारी ने दो कड़ी उसके यहां ज्‍यादा निकाल दी, उसके यहां तीन कड़ी कम कर दी और यह गोलमाल, पूरे परिवार में जब तक एक-दो पीढ़ी नहीं चली जाती तब तक केस निरंतर चलते रहते हैं. रजिस्‍ट्री हुई, पटवारी जी के पास गए उन्‍होंने नक्‍शा बनाया और एक स्‍केल और प्रकार रहता है जिससे हम पढ़ते थे, प्रकार से नापा और नक्‍शा बना दिया, परंतु जब वही किसानी की जमीन शहर के पास आ गई और हमने मकान बनाने का काम चालू कर दिया तो जब स्‍क्‍वायर फुट की बात आती है तो वह स्‍केल और वह नक्‍शा उस दिन काम नहीं आता क्‍योंकि वह आरे, डिसमिल में रहता है. अगर फ्रंट में उसका निश्चित मापदंड हो जाए तो यह अव्‍यवस्‍था नहीं होगी. दूसरा पटवारी को अपने मुख्‍यालय पर रहना चाहिए, ब्‍लॉक मुख्‍यालय पर रहना चाहिए. यह अधिकांश जगह नहीं होता है. मेरा आपके माध्‍यम से मंत्री जी से अनुरोध है कि आपके पास अधिकार हैं, आप इसमें भर्ती खोल सकते हैं, युवाओं को रोजगार मिल सकता है.

सभापति महोदय- आप अपनी बात संक्षिप्‍त में कीजिए.

श्री रजनीश हरवंश सिंह- सभापति महोदय, मैं बड़े महत्‍वपूर्ण विषय पर चर्चा कर रहा हूं, मैं आपसे संरक्षण चाहता हूं. मुझे समय दिया जाए. सभापति महोदय, एक पटवारी के पास 4-4 पटवारी हलका के प्रभार रहते हैं. एक पटवारी को सिर्फ एक हलका मिलना चाहिए, अतिरिक्‍त प्रभार उसके पास नहीं रहना चाहिए. इस सदन में बैठे सभी लोगों की जनभावना का विषय है कि जब आपदा-विपदा आती है तो आरबीसी 6(4) में शासन के जो नियम हैं .उसमें शासन भी बंध कर रह जाता है. नियमावली एवं कानून से शासन भी बंधा है. मेरा निवेदन है कि अगर आपदा,विपदा के समय पर आपने सीलिंग एक्ट लगाया और एक व्यक्ति के खाते में आप 100 एकड़ का अधिकार नहीं दे रहे हैं, आप सिंचित और असिंचित मिलाकर लगभभग 45 एकड़ का अधिकार दे रहे हैं, तो जब आपदा, विपदा आती है, तो फिर क्यों 2 हेक्टेयर तक का मुआवजा और 60 हजार रुपये की लिमिट बांधने का काम करते हैं. एक तरफ तो आपने किसान की जमीन की लिमिट बांध दी, दूसरी तरफ जब आपदा, विपदा आई, तो लघु किसान भी उतना ही खाद,बीज डालता है और सीमांत किसान भी उतना ही खाद, बीज डालता है. आपने 30 हजार रुपया हेक्टेयर का एलान किया,पर आज अगर किसी की 10 एकड़ जमीन है, तो उसको उस 30 हजार रुपये हेक्टेयर के हिसाब से नहीं मिलेगा. 60 हजार रुपये से ज्यादा सीमांत किसान को मुआवजा सरकार नहीं देगी. इस आरबीसी की धारा 6(4) में संशोधन होना चाहिये. जिसके रिकार्ड में जितनी जमीन में वह काश्त कर रहा है, उसके हिसाब से आपदा और विपदा के समय में सरकार को पैसा देना चाहिये. दूसरा मेरा निवेदन यह है कि आपने चना, गेहूं,मसूर,तेवड़ा,बटरी जिस समय आपदा आई, उस समय तो आंकलन करा लिया, जो आज खेती को लाभ का धंधा बनाने का प्रदेश के मुखिया का जो ध्येय है, जो आपकी सरकार हमेशा किसानों को कहती है कि खेती को लाभ का धंधा बनाओ. फूल, साग, सब्जी लगाओ एवं अच्छी अच्छी हाईब्रीड की वेरायटियों का काम करो. उसका क्या प्रतिफल है. जब विपिदा आई, तो साग, सब्जी, भाजी भी उसी तराजू में तुल रहे हैं और गेहूं, चना, मसूर,तेवड़ा,बटरी भी उसी तराजू में तुल रहे हैं..

श्री इन्दर सिंह परमार -- सभापति महोदय, जब इनकी सरकार थी ती आपने कभी आरबीसी में संशोधन नहीं किया, न कभी किसानों ने मुआवजा देखा. न कभी साग,सब्जी उगाने वालों ने देखा. आज इनका केवल मांग करने का काम बचा है.

सभापति महोदय -- कृपया माननीय सदस्य को बोलने दें.

श्री रजनीश हरवंश सिंह -- सभापति महोदय, आप बड़े वरिष्ठ हैं, आप भी खुद शासन में मंत्री के रुप में रहे हैं. मैं आपसे एक निवेदन करना चाहता हूं, जो मेरे माननीय सदस्य कहते हैं,पहले क्या था. आप भूतकाल में, उस अतीत में क्यों जाते हैं. वर्तमान की बात करें. जिससे विकास होगा, समुद्धि आयेगी. आप भूतकाल की बात में क्यों जाते हैं. भविष्य की बात करें.

श्री इन्दर सिंह परमार -- सभापति महोदय, हम तो कर रहे हैं. सरकार ने एक महीने पहले ही 30 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर किया है. ओले से नुकसान हुआ, उन किसानों के लिये.

श्री रजनीश हरवंश सिंह -- सभापति महोदय, मैं माननीय सदस्य जी से निवेदन करता हूं कि जब आपने जन्म लिया, तो जो आयु आपकी है, इस आयु में आपने जन्म लिया क्या. आप इतने से थे, 9 महीने गर्भ धारण में लग गये. धीरे धीरे आपकी आयु बढ़ी. धीरे धीरे हमने इस प्रदेश एवं देश को इस मुकाम पर लाकर खड़ा किया और आपने तो गजब कर दिया. एक दिन में आप मंगलयान में चले गये, वाह. मेहनत करने वाला कोई, फल खाने वाला कोई और फिर भी स्वीकार नहीं करते. एक दिन में 100 किलोमीटर कोई आदमी नहीं चल सकता. उसको 1,2,3,4 किलोमीटर चल करके ही दूरी तय करनी पड़ती है. सभापति महोदय, 13 फरवरी को हमारे सिवनी जिले और जिसमें मेरी केवलारी विधान सभा के 276 गांवों में ओले गिरे और ओले सामान्य नहीं गिरे. आधे-आधे किलो के ओले गिरे. मेरी विधान सभा के 118 गांव प्रभावित हुए. न केवल फसल, अन्न, बल्कि हमारा पशुधन है, उसके लिये चारे तक हम अपने खेत से भूसा तक नहीं ला सके. यह विकराल समस्या है. इस विकराल समस्या को देखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री जी ने संवेदना प्रकट की. वे आये, उन्होंने देखा, 30 हजार रुपया हेक्टेयर की घोषणा की, जो हमारे किसानों के हिसाब से कम है, उसके लिये हमने उनसे आग्रह किया है, पर कवैलू टूटे,लोगों की शीट्स, चादरें टूटीं, लोगों की गाड़ियां टूटीं. जो बाहर में शौचलाय बने, शौचालय के दरवाजे टूटे. 1200 एवं 3200 रुपया कैसा मापदण्ड है. इसमें किसान क्या करेगा. मेरा आपसे अनुरोध है कि यह मुआवजा राशि बढ़ाई जाये, कवैलू और घरों के जो नुकसान हुए हैं, उसकी राशि बढ़ाई जाये. सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने के लिये समय दिया, मैं आपका आभारी हूं, धन्यवाद.

श्री रामलाल रौतेल (अनूपपुर) -- सभापति महोदय, मैं मांग संख्या 8,9,46 एवं 58 के पक्ष में बात करने के लिये यहां पर खड़ा हुआ हूं. मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता,1959 जब से यहां पर लागू हुई और लागू करने के पश्चात् जब भी समय समय पर जो भी आवश्यकता हुई, जिस काल खण्ड में, निश्चित रुप से शासन ने उसमें परिवर्तन, संवर्द्धन और नई चीज जोड़ने का प्रयास किया है. मैं मध्यप्रदेश सरकार, मुख्यमंत्री जी एवं राजस्व मंत्री जी के प्रति आभार प्रकट करता हूं, जिन्होंने लगातार अनेक हमारे साथियों ने कहा है, उसको मै पुनरावृत्ति नहीं करना चाहता. चाहे वह पटवारियों की भर्ती हो, आवासीय निशुल्क पट्टा देने की बात हो, भू- अभिलेख के आधुनिकीकरण की बात हो, तहसीलों में अभिलेखागार के आधुनिकीरण करने की बात हो और पूरे प्रदेश में, जिसके लिये पूरा किसान बहुत पीड़ित रहता था. खसरा, नक्शा निशुल्क देने का काम मध्यप्रदेश की सरकार ने निश्चित तौर पर किया है. राजस्व विभाग एक ऐसा विभाग है, जो आम जनता से बिलकुल जुड़ा हुआ है. बुनियादी, छोटी छोटी समस्याओं को लेकर किसान बहुत पीड़ित रहता था. लेकिन मध्यप्रदेश की सरकार ने लगातार, अभी हमारे साथी ने कहा कि पटवारियों की भर्ती की. लगभग आज भी 9 हजार के आस पास पटवारियों के रिक्त पद हैं. मैं मंत्री जी से निवेदन करता हूं कि छोटे सेछोटे, जो गरीब तबके का व्यक्ति है, उसका पटवारी से बहुत वास्ता पड़ता है. इसकी अगर प्रतिपूर्ति कर दें, तो निश्चित तौर से बहुत ही अच्छा होगा. राजस्व प्रशासन को सुदृढ़ करने के लिये लगभग 9 हजार पटवारियों की भर्ती की, इसके लिये मैं धन्यवाद ज्ञापित करता हूं और लगभग 400 के आस पास नायब तहसीलदारों की उन्होंने पद स्थापना की है, इसके लिये भी मंत्री जी के प्रति आभार प्रकट करता हूं. मैं कुछ सुझाव देना चाहता हूं. एक, आज ई-रजिस्ट्री होती है. सबसे पहले हमारे अनूपपुर जिले में , जब मध्यप्रदेश में शुरुआत हुई, तो अनूपपुर जिले से यह काम प्रारंभ हुआ था. मैं मंत्री जी को धन्यवाद ज्ञापित करुंगा कि जो हमारे जिले से प्रारंभ हुआ, लेकिन मैं एक बात कहना चाहता हूं कि जैसे ई-रजिस्ट्री होती है और ई-रजिस्ट्री करने के पश्चात् वह व्यक्ति पुनः तहसीलदार के यहां नामांतरण का आवेदन करता है. तो हम चाहते हैं कि फिर वह तहसीलदार के यहां जायेगा, फिर पटवारी प्रतिवेदन देगा, फिर राजस्व अभिलेख में सुधार होगा. अगर वह ई-रजिस्ट्री हो रही है, तो अपने आप उस भू-अभिलेख के परिशिष्ट में अंकित हो जाये, तो बेहतर होगा. जो यह किसान भटकता है, वह कम हो जायेगा. एक ऋण पुस्तिका के बारे में कहना चाहता हूं. ऋण पुस्तिका सरकार ने बहुत बांटने का अभियान चलाया. हम खुद गये थे. मैंने एवं संबंधित विधायक गण अपने अपने क्षेत्र के ढेर सारे लोगों को ऋण पुस्तिका का वितरण किया. इसमें भी ऐसा कोई टोकन सिस्टम कर दिया जाये कि उनको ऋण पुस्तिका जैसे अपने एटीएम कार्ड रखते हैं, ऐसी एक ऋण पुस्तिका उपलब्ध करा दें, ताकि समय पर उनको हमेशा ध्यान में रहे कि अमुख अमुख आराजी खसरा नम्बर का मैं भूमि स्वामी हूं. ऐसी अगर व्यवस्था भी सुनिश्चित करेंगे, तो बहुत अच्छा रहेगा. इसी तरह से लोक सेवा गांरीट में, अगर खसरा लेना है, तो 7 दिन का समय लगता है और अगर नक्शा लेना है, तो उसको 15 दिन का समय लगता है. तो पहले सरकार ने एक सिस्टम बनाया था, एकल खिड़की, मतलब आज आवेदन करिये, तुरन्त उसको शाम के वक्त आपको खसरे की नकल मिल जाती थी. लेकिन आज किसान आवेदन करता है और 5,10 एवं 15 दिन तक तहसील कार्यालय में भटकता है. एक विनम्र अनुरोध है कि इसका भी अगर सरलीकरण कर दें, तो बहुत ही अच्छा होगा. एक बात हमारे रामपाल सिंह जी ब्यौहारी ने बहुत अच्छी कही, मैं उसको पुनः दोहराना चाहता हूं. अगर न्यायालयीन प्रक्रिया है, तहसीलदार के यहां से कोई प्रकरण है, उसकी अपील पहले एसडीएम के पश्चात् कमिश्नर के यहां होती थी, अब वह रेवेन्यू बोर्ड में जाती है. सभापति महोदय, हमारे यहां अनूपपुर से लेकर के ग्वालियर बहुत दूर पड़ता है. वह रीवा में भी आते हैं, लेकिन मतलब कोई सुनवाई नहीं होती है. मैं यह चाह रहा था कि अगर कमिश्नर को इसको अधिकृत कर दिया जाये, तो निश्चित तौर से वहां के किसानों को लाभ मिल सकता है. एक खसरे की नकल में जैसे 30 रुपये लगते हैं. अभी मंत्री जी ने कहा, हमारे पास पत्र तो नहीं है, कुछ लोग अवगत होंगे. लेकिन हमारे यहां तक वह सर्कुलर सर्कुलेट नहीं हुआ है. एक आराजी खसरा नम्बर की नकल लेने में 30 रुपये लगते हैं. अब वह 30 रुपये एक ही खसरा नम्बर उसमें अंकित रहता है. मुश्किल से वह 5 रुपये का कागज आता है. अगर मैं 10 आराजी का भूमि स्‍वामी हूँ तो 10 आराजी खसरा नंबर उसमें अंकित कर दिया जाए. हमारा काम बहुत कम राशि में हो जाएगा. 50 पैसे का कागज लगता है, अगर यह सस्‍ते दर पर मिल जाए तो बहुत अच्‍छा हो जाएगा. अभी मैं समाचार-पत्र में पढ़ रहा था कि सीमांकन के लगभग 65 हजार मामले लंबित हैं और इसमें लिखा है कि यह काम निजी कंपनियों को सौंपा जा रहा है. माननीय मंत्री जी काफी सजग हैं, सहज हैं, सरल हैं, अनुभवी हैं, निजी कंपनियों की काम करने की शैली अलग होती है. खसरे में अगर ये 30 रुपये, 50 रुपये ले रहे हैं तो निजी कंपनी अगर इस दिशा में पहल करेगी तो बहुत नुकसान होगा, इसलिए हम चाह रहे हैं कि जो व्‍यवस्‍था सुनिश्‍चित है, उसी व्‍यवस्‍था के आधार पर अगर किसानों को मिलता रहे तो मुझे लगता है कि बहुत लाभ होगा.

माननीय सभापति महोदय, मैं अपने क्षेत्र की समस्‍याओं की बात करना चाहता हूँ. मेरे विधान सभा क्षेत्र के अनेक ऐसे गांव हैं, जिन्‍हें मैं गिना भी सकता हूँ, इनमें अनूपपुर है, जैतहरी है, पुष्‍पराजगढ़ हैं, वेंकटनगर है, इन गांवों में नजूल की भूमि पर सैकड़ों लोगों ने कब्‍जा किया हुआ है. तहसीलदार प्रसन्‍न हैं तो ठीक है और अगर कभी नाराज हो गए तो एक नोटिस जारी करते हैं कि अमुख-अमुख आराजी खसरे नंबर में, इतने रकबे में आपने बेजा कब्‍जा किया हुआ है, क्‍यों न आपको बेदखल कर दिया जाए. जब वे बेदखल करने के नोटिस देते हैं तो वे लोग बहुत परेशान हो जाते हैं. इसमें मेरा एक सुझाव है कि एक निर्धारित शुल्‍क लेकर अगर संबंधित व्‍यक्‍ति को हम मालिकाना हक दे दें तो हमें राजस्‍व की प्राप्‍ति भी होगी और उस व्‍यक्‍ति को आराजी खसरा नंबर मिल सकता है.

माननीय सभापति महोदय, क्षेत्र के विषय में एक और निवेदन मैं यह करना चाहता हूँ कि अभिलेखों में त्रुटि हो जाती है. अभी रामपाल सिंह जी ने जो बात कही, उसी को मैं दोहराना चाहता हूँ. कंप्‍यूटर सॉफ्टवेयर के कारण किसी व्‍यक्‍ति के नाम में गलती हो गई, रामलाल के स्‍थान पर रामलला हो गया, तो इसमें सुधार के लिए उसका नक्‍शा निकालिए, पटवारी के यहां आवेदन करिए, फिर धारा-115 और 116 के तहत रिकार्ड सुधार का आवेदन लगता है और संबंधित व्‍यक्‍ति महीने भटकता रहता है. मेरा सुझाव है कि कुछ नहीं, तहसीलदार एक साधारण आवेदन पत्र लें, आवेदन पत्र स्‍व-मोटो में लेकर उस अभिलेख को दुरुस्‍त कर दिया जाए. इससे संबंधित व्‍यक्‍ति को कहीं भटकने की आवश्‍यकता नहीं पड़ेगी.

माननीय सभापति महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र में दो-तीन गांव ऐसे हैं, जिनमें पॉवर प्रोजेक्‍ट ने भू अर्जित किया है, भू अर्जित किए हुए आज 10 वर्ष हो गए, लेकिन आराजी में जिस प्रयोजन हेतु भू अर्जित की गई थी, आज तक उस भूमि का उपयोग नहीं हुआ. हम चाहते हैं कि उसका उपयोग हो.

सभापति महोदय, अंत में मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूँ कि माननीय मंत्री हमारे क्षेत्र में गए थे. हमारे यहां एक उप तहसील फुनगा है. माननीय मुख्‍यमंत्री जी और माननीय राजस्‍व मंत्री जी के समक्ष लोगों ने आवेदन किया था कि यह फुनगा नामक उप तहसील अनूपपुर में लगती है, नायब तहसीलदार वहां बैठते हैं, अगर वह फुनगा में ही संचालित हो, तो मैं माननीय मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्‍यवाद दूंगा. इतना ही मेरा कहना है.

माननीय सभापति महोदय, मैं अवगत कराना चाहता हूँ कि हमारे यहां 5वीं अनुसूची लागू है. आदिवासी क्षेत्र है. वहां किसी आदिवासी की भूमि गैर-आदिवासी नहीं खरीद सकता है. लेकिन बड़ी विडंबना है, बड़ा कष्‍ट है कि वहां आदिवासी के नाम से दूसरा व्‍यक्‍ति जमीन खरीदकर बेजा कब्‍जा किए हुए है. आदिवासी के पास जमीन के अलावा कुछ हो ही नहीं सकता. वह अच्‍छा व्‍यवसाय नहीं कर सकता है, हालांकि सर्विस कर सकता है. मैं उदाहरण के रूप में एक छोटा सा प्रसंग सुनाकर अपनी बात समाप्‍त करूंगा. एक बैगा समाज का आदिवासी था, हम लोगों ने उसकी किराना दुकान खुलवाई. उसने मुझे बुलाया कि विधायक जी आप फीता काट दें, मैं फीता काटने गया, उद्घाटन किया. मैं जब एक महीने बाद उसके यहां गया और उस बैगा से पूछा कि दुकान का क्‍या हाल-चाल है तो उसने कहा कि साहब, पूरी दुकान बिक गई, मैंने बेच डाला. मेरे कहने का मतलब यह है कि वह यह नहीं जानता था कि दुकान में सामान बेचने के बाद पुन: सामान खरीदा जाता है. वह दुकान बेचने पर बहुत खुश था. मैंने पूछा कि किसको बेचा, तो उसने कहा कि फलां गुप्‍ता जी आए थे, मैंने उनको बेच दिया. मैं उस गुप्‍ता जी के पास गया कि गुप्‍ता जी, आपने ऐसा क्‍यों किया तो गुप्‍ता जी बोले कि साहब, 4 रुपये किलो सुपारी दे रहा था तो मैंने उसकी पूरी दुकान ही खरीद डाली. यह आदिवासी की दशा है. इसलिए मैं चाहता हूँ कि आदिवासी को जमीन से बेदखल न किया जाए. आदिवासी का जीवन, मरण, सब कुछ यदि कोई चीज है तो वह भूमि है. सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

सभापति महोदय -- मेरा अनुरोध है कि अभी कई माननीय सदस्‍यों को बोलना है, अत: 5 मिनट में सदस्‍य अपनी बात कह दें.

श्री सुखेन्‍द्र सिंह (मऊगंज) -- माननीय सभापति महोदय, मैं मांग संख्‍या 8, 9, 46 और 58 के विरोध में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ. अभी हमारे बहुत से साथी राजस्‍व विभाग पर बोल रहे हैं. हमारे रजनीश भाई ने बड़े ही सार्थक सुझाव भी रखे, मैं उन्‍हें दोहराना नहीं चाहता, लेकिन कल कृषि विभाग की मांगों के दौरान हमारे बिसेन साहब ने बड़े विस्‍तार से किसानों के हित में बात कही. बड़े-बड़े वादे किए गए. सभापति महोदय, आप भी किसान होंगे, किसानों से जुड़े हुए हैं, किसानों की क्‍या दुर्दशा है, किसान मेहनत से, मजदूरी से, सूखे से निपटकर जो भी गाढ़ी कमाई करता है, यह बड़ी विडम्‍बना है कि अपनी कमाई का आधे से अधिक पैसा वह तहसीलों में जाकर जमा कर देता है. लगभग 14 वर्षों से माननीय मुख्‍यमंत्री, श्री शिवराज सिंह चौहान जी की भारतीय जनता पार्टी की सरकार प्रदेश में है. माननीय उमाशंकर गुप्‍ता जी राजस्‍व मंत्री हैं, लेकिन किसानों की दुर्दशा लगातार बढ़ रही है और राजस्‍व विभाग ज्‍यों का त्‍यों पड़ा हुआ है. अभी बीस-सूत्रीय कार्यक्रम की बात आई. बात यह हुई कि कौन पैदा हुआ था, कौन नहीं पैदा हुआ था. मैं समझता हूँ कि उस समय श्री अर्जुन सिंह जी तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री थे. उन्‍होंने आदिवासियों के हित में, भूमिहीनों के हित में बीस-सूत्रीय कार्यक्रम लागू किये और उसमें पट्टे बांटे गए. वह पट्टा आज भी आदिवासियों के पास सुरक्षित है और उसी में आदिवासी बसे हुए हैं. इस सरकार में लगातार कई कार्यक्रम चलाए गए, भारत उदय, ग्रामोदय, क्‍या-क्‍या, कैसे-कैसे कार्यक्रम, उसमें आवेदन लिए गए लेकिन उन आवेदनों का कोई ठोस निराकरण नहीं हुआ है. जनसंख्‍या बढ़ रही है, जहां भी सरकारी जमीनें हैं, आज भी जो भूमिहीन हैं, उनके पट्टे पेंडिंग हैं. पटवारियों के पास जाते हैं, तहसीलों में जाते हैं, उसका कोई निराकरण नहीं होता. हम भी 4 साल से विधायक हैं. ऐसे बहुत सारे प्रकरण आए, लेकिन उनका निदान नहीं हुआ. हम लोगों ने विधान सभा में भी प्रश्‍न लगाया. बहुत सारी बातें कीं, लेकिन आज तक उनका कोई निदान नहीं हुआ है.

माननीय सभापति महोदय, पटवारियों की क्‍या हालत है. अभी हमारे कुछ साथी कह रहे थे कि पटवारियों के पद खाली हैं. पटवारी के 9 हजार पदों के लिए एग्‍जाम ले लिया गया. उसका क्‍या निराकरण हुआ, उसका निराकरण सिर्फ यह हुआ कि जो भी हमारे यहां का बेरोजगार युवा था, आवेदन के नाम पर उसको लूटा गया, अभी तक पटवारियों की नियुक्‍ति नहीं हुई है. बेरोजगारों को और किसानों को एक साथ इस सरकार में लूटा जा रहा है.

माननीय सभापति महोदय, भू-माफियाओं का आतंक बढ़ रहा है. यह बात कोई छिपी हुई नहीं है कि हमने कई बार रीवा शहर के बारे में ध्‍यानाकर्षण लगाया, मऊगंज के बारे में ध्‍यानाकर्षण लगाया. मुझे यह कहने में कतई संकोच नहीं है, इसलिए कि सदन में कई बार ये बातें आ चुकी हैं कि हमारा पूरा रीवा शहर एक व्‍यापारी के हाथों बिक चुका है. समदड़िया के नाम से बिक चुका है. यह बात मैं नहीं बोल रहा हूँ, इसका पूरा रिकार्ड है, पेपरों में छपा है, सारी बातें हैं. अभी पिछले सत्र में हमने ध्‍यानाकर्षण लगाया था, तहसील कोर्ट, जिला कोर्ट शिफ्ट किया जा रहा है. भू-माफियाओं के दबाव में आकर इंजीनियरिंग कॉलेज की जमीन उनको औने-पौने दाम पर बेच दी गई है. यह स्‍थिति रीवा शहर की है. पूरा रीवा शहर बिक चुका है. नामों-निशान नहीं है, भविष्‍य में अगर कोई जमीन किसी जरूरी चीज के लिए चाहिए तो वहां जमीन नहीं बची है. वहां पर सिर्फ बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल बनाए जा रहे हैं और सारी सरकारी जमीनें बेची जा रही हैं.

माननीय सभापति महोदय, इसी तरीके से हमारे मऊगंज क्षेत्र में जमीनों की हेरा-फेरी की जा रही है. रीवा सभांग में चार जिले रीवा, सतना, सीधी और सिंगरौली आते हैं. हमारे रीवा जिले को सूखाग्रस्‍त घोषित नहीं किया गया. यह बडे़ दुर्भाग्‍य का विषय है. आपके माध्‍यम से मैं कहना चाहता हूँ कि क्‍या रीवा जिले में ज्‍यादा बरसात हो गई थी, वैसे तो हम लोग प्रश्‍न पूछते हैं तो उसका कोई जवाब नहीं आता है. मंत्री जी कभी भी इस बारे में नहीं सोचते, सीधे-सीधे जवाब यह आता है कि जानकारी एकत्रित की जा रही है और तमाम तरह की बातें होती हैं. अत: मेरा आपके माध्‍यम से यह अनुरोध है कि हमारे रीवा जिले को सूखाग्रस्‍त घोषित किया जाए और जो रीवा जिले के किसानों के साथ अन्‍याय हुआ है, उनके साथ न्‍याय किया जाए.

माननीय सभापति महोदय, हमारे विधानसभा क्षेत्र में एक आदिवासी अंचल पिपराही आता है वहां के आदिवासी हनुमना आते हैं वहां की दूरी लगभग 70 किलोमीटर पड़ती है. इसमें मेरा आपके माध्‍यम से अनुरोध है कि अगर पिपराही में एक उप-तहसील के लिए सदन में एक घोषणा हो जाएगी तो निश्चित रूप से मैं समझूंगा कि आदिवासियों के लिए सरकार है और जैसा कि लगातार भाषण दिया जाता है तो हमारे क्षेत्र में कुछ हित हो सकेगा. वैसे माननीय सभापति जी, मैं अंतिम बात यह बोलना चाहता हॅूं कि कि यह सरकार किसान हितैषी नहीं है सिर्फ व्‍यापारी हितैषी है और क्‍या कारण हैं मैं नहीं जानता. (XXX).

सभापति महोदय -- इसे कार्यवाही से निकाल दें.

श्री सुखेन्‍द्र सिंह -- माननीय सभापति महोदय जी, हमारा रीवा बिक रहा है. मेरा माननीय मंत्री जी से अनुरोध है कि रीवा को बिकने से बचाएं. मेरा आपके माध्‍यम से अनुरोध है कि इसका ख्‍याल रखा जाए. धन्‍यवाद.

श्री बहादुर सिंह चौहान -- माननीय सभापति महोदय, पूरा रीवा कैसे खरीदेंगे ? माननीय सदस्‍य, कौन है ऐसा, जिसने मध्‍यप्रदेश खरीद लिया है. माननीय सभापति जी, पूरा रीवा कैसे खरीद लेगा ? यह कार्यवाही से निकलना चाहिए...(व्‍यवधान)...

सभापति महोदय -- आप बैठिए. अभी आपका अवसर नहीं है...(व्‍यवधान)...

श्री यादवेन्‍द्र सिंह -- बहादुर सिंह जी, आप जाकर देख आइए. सरकारी जमीनें वहां पर कई हैं.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- तिवारी जी का हाथ है...(व्‍यवधान).. आप ही का साम्राज्‍य है. सभापति महोदय -- डॉ.कैलाश जाटव.

डॉ.कैलाश जाटव (गोटेगांव) -- माननीय सभापति महोदय, मैं मांग संख्‍या 8, 9, 46 और 58 के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हॅूं. हमारे राजस्‍व मंत्री और यशस्‍वी माननीय मुख्‍यमंत्री जी को मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि उन्‍होंने राजस्‍व विभाग के लिए बहुत सारे क्रांतिकारी कदम उठाए हैं. राजस्‍व के बारे में बहुत लोगों ने चर्चा की है लेकिन मैं माननीय मंत्री जी को इस बात के लिए धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि वर्तमान में डिजिटल इंडिया की बात हो रही है और आईटी के क्षेत्र में मध्‍यप्रदेश ने जिन-जिन कामों को हाथ में लिया है वह भारतवर्ष में नंबर वन पर है. आज हमारी सरकार ने वर्ष 2018-19 के लिए लक्ष्‍य निर्धारित किए हैं. प्रदेश के सभी शासकीय सेवाओं को ऑनलाइन करने का प्रयास हमारी सरकार करने जा रही है. ग्राम पंचायत स्‍तर पर नागरिक सुविधा केन्‍द्र की स्‍थापना का भी लक्ष्‍य वर्ष 2018-19 में रखा गया है. मध्‍यप्रदेश उन राज्‍यों में भी शामिल है जहां ग्राम पंचायतों में टेलीफोन और ब्राडबैंड नेटवर्क का कार्य शुरू हो चुका है और प्रदेश

.

XXX : आदेशानुसार