मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा दशम् सत्र

 

 

फरवरी-अप्रैल, 2016 सत्र

 

बुधवार, दिनांक 16 मार्च, 2016

 

(26 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1937 )

 

 

[खण्ड- 10 ] [अंक- 16 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

बुधवार, दिनांक 16 मार्च, 2016

 

(26 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1937 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.02 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

डॉ.नरोत्तम मिश्र--आरिफ भाई के कारण आगे की बेंच का कोई भी नहीं आतै है और यह नहीं बता पाये कि इनकी निष्ठा किनके साथ है क्या बाला-बच्चन, मुकेश नायक, महेन्द्र सिंह जी के साथ है.

श्री आरिफ अकील--हमारी पार्टी तुम्हें मुख्यमंत्री बनायें तो तुम्हारे साथ हैं. शिवराज भाई को प्रधानमंत्री बनाकर के दिल्ली भेज दें. हम कांग्रेस के साथ हैं तुम्हारे साथ नहीं हैं.

श्री बाबूलाल गौर डॉ.नरोत्तम मिश्रा जी आपके कितने शुभचिन्तक हैं कि इनको नेता प्रतिपक्ष बनाना चाहते हैं.

श्री आरिफ अकील--आपका नाम नहीं लिया.

डॉ.नरोत्तम मिश्र--गौर साहब तो चीफ मिनिस्टर बन चुके हैं. मुझे तो आपकी चिन्ता है.

 

तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर

वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत पट्टों का बंटन

1. ( *क्र. 2532 ) श्री हितेन्द्र सिंह ध्‍यानसिंह सोलंकी : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वन अधिकार अधिनियम क्‍या है? इस नियम के अंतर्गत वन भूमि पर काबिज अनुसूचित जनजातियों को भूमि के पट्टे दिये जाने का क्‍या प्रावधान है? (ख) बड़वाह विधानसभा क्षेत्र में इस अधिनियम के अंतर्गत विगत 03 वर्षों में कितने पात्रों को वन भूमि के पट्टे दिये गये हैं एवं ऐसे कितने आवेदन पत्र हैं, जो किन कारणों से निरस्‍त किये गये हैं? (ग) प्रश्‍नकर्ता द्वारा वन अधिनियम के अंतर्गत वन भूमि पर काबिजों को कोई पट्टा दिये जाने की अनुशंसा करने पर कितनों को पट्टे दिये गये हैं एवं कितने किन कारणों से आवेदन पत्र निरस्‍त किये गये हैं?

आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) : (क) वन अधिकार अधिनियम 2006 पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। वनभूमि के अधिभोग के अधिकारों की मान्यता के प्रावधान अधिनियम में उल्लेखित हैं। (ख) बड़वाह विधानसभा क्षेत्र में इस अधिनियम के अंतर्गत विगत तीन वर्षों में 401 पात्रों को वन भूमि के वन अधिकार पत्र दिये गये एवं 818 आवेदन पत्र निम्न कारणों से निरस्त किये गये :- (1) दावा की गई भूमि वन भूमि न होना। (संख्या 50), (2) जनजाति के मामले में दिनांक 31.12.2005 के पूर्व का काबिज न होना। (संख्या 540), (3) दावा की गई भूमि पर वास्तविक रूप से काबिज न होना। (संख्या 178), (4) गैर आदिवासी के मामले में 75 वर्ष से निवास का साक्ष्य उपलब्ध न होना। (संख्या 50) (ग) माननीय विधायक की अनुशंसा पर अधिकार पत्र दिये जाने का प्रावधान अधिनियम में नहीं है। अतः इसका अभिलेख संधारित नहीं किया गया है।

 

श्री हितेन्द्र सिंह सोलंकी--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न आदिवासी भाईयों को वनाधिकार पट्टों से जुड़ा हुआ मामला है. 50 वनाधिकार में काबिज नहीं होना बताया गया है, 540 कब्जेधारक जो 31.12.2005 के पहले के हैं उनके बारे में भी नहीं बताया गया है. 187 दावाहीन भूमि पर काबिज हैं. 50 गैर आदिवासी भाई जो कि 75 वर्षों से वहां पर नहीं हैं, ऐसा बताया गया है. मैं मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं कि जिस अधिकारी ने इसकी जांच की है उसे हटाकर के भोपाल के किसी उच्च अधिकारी से जांच कराएंगे, जिनके पास में कब्जे हैं उन लोगों को वन विभाग के अधिकारीगण मारकूट कर के भगा रहे हैं उनकी फसलें नष्ट कर रहे हैं मैं चाहता हूं कि उस अधिकारी को हटाकर उसकी भोपाल से उच्च स्तरीय जांच करा लेंगे क्या ?

श्री ज्ञानसिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्य को आश्वस्त करना चाहता हूं कि जितने भी पात्र आदिवासी भाई जनजाति परिवार के सदस्य प्रदेश में होंगे या उनके क्षेत्र में पात्र परिवार वनाधिकार प्रमाण-पत्र पाने से वंचित नहीं होंगे, इसका विभाग की तरफ से पूरा प्रयास है. हमने तय किया है कि जून-या जुलाई के अंतराल तक ऐसे पात्रधारी हमारे जनजाति भाई के लोगों को वनाधिकार की मुहिम शुरू की है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप तो दिलाने का प्रयास कर रहे हैं, शासन भी दे रहा है, परन्‍तु जो अधिकारी उसमें गड़बड़ कर रहे हैं, आप उनके खिलाफ क्‍या कार्यवाही कर रहे हैं, मेरा निवेदन है कि आप उस अधिकारी को हटाकर, भोपाल से उच्‍च स्‍तरीय जांच कराएंगे, गरीब आदिवासी के साथ रोज मार पीट हो रही है, उनकी फसलें नुकसान हो रही है, मैंने कई बार पत्र भी लिखे हैं, पर कोई ध्‍यान नहीं दिया जा रहा है, इसलिए आज विधानसभा में प्रश्‍न लगाना पड़ा, मैं माननीय मंत्री जी से आश्‍वासन चाहता हूं कि आप उस अधिकारी को हटाकर भोपाल से जांच कराकर उनके साथ में न्‍याय करेंगे ।

श्री ज्ञान सिंह- माननीय अध्‍यक्ष जी,किसी अधिकारी .....

वन मंत्री (डॉं गौरीशंकर शेजवार)- वन विभाग से जुड़ा हुआ जितना भी मामला है, हम उसकी जांच करवा लेंगे ।

श्री हितेन्‍द्र सिंह सोलंकी- समय - सीमा बता दीजिए ।

डॉ गौरीशंकर शेजवार- जल्‍दी से जल्‍दी ।

श्री बाला बच्‍चन- माननीय अध्‍यक्ष जी, मेरा एक निवेदन है, माननीय मंत्री जी, वन अधिनियम 2006 बना था, उसको दस साल हो गए हैं, अभी तक आपकी सरकार पात्र और अपात्र की जांच कराने में लगी हुई है, आप कब तक उनको वन अधिकार पत्र देंगे, इतना धीमा काम क्‍यों चल रहा है, उसके बाद उनको कुंए मिलना है, दूसरी सुविधाएं मिलना हैं, सरकार इतने विलम्‍ब से कार्यवाही क्‍यों कर रही है, इसका उत्‍तरदायित्‍व किसका है ।

श्री ज्ञान सिंह- माननीय अध्‍यक्ष जी, कई कारण सामने आए हैं, वन विभाग की टीम और सामूहिक टीम रहती है, कभी - कभी ऐसा होता है कि जनजाति परिवार के लोग सामाजिक काम से कहीं दूसरे गांव में चले जाते हैं, बाहर चले जाते हैं, एक एक सप्‍ताह में लौटकर आते हैं, इसलिए अब नियमों में सरलीकरण किया गया है, यदि संबंधित व्‍यक्ति नहीं है तो उनके स्‍थान पर उनकी पत्नि को भी वन अधिकार के पट्टे दिए जाने का प्रावधान किया गया है ।

राष्‍ट्रीय उद्यानिकी मिशन योजनांतर्गत निष्‍पादित कार्य

2. ( *क्र. 6479 ) श्री हेमन्‍त विजय खण्‍डेलवाल : क्या पशुपालन मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) बैतूल जिले में राष्‍ट्रीय उद्यानिकी मिशन योजनांतर्गत विगत 3 वर्षों में कितने कार्य किए गए हैं? इनमें कितना अनुदान दिया गया है? शासकीय एवं निजी क्षेत्र की अलग-अलग वर्षवार जानकारी देवें। (ख) बैतूल जिले में विगत 3 वर्षों में सब्‍जी बीज उत्‍पादन कार्यक्रम/बीज अधोसंरचना विकास के लिए शासकीय एवं निजी क्षेत्र में कौन-कौन सी इकाई स्‍वीकृत की गई तथा कितना-कितना अनुदान दिया गया? इकाई की लागत, किए गए व्‍यय एवं दिए गये अनुदान की जानकारी देवें। (ग) क्‍या बैतूल जिले में पुष्‍प विकास/मसाला विकास/पुराने बगीचों का जीर्णोद्धार किया गया है? यदि हाँ, तो इस पर किए गए व्‍यय की वर्षवार जानकारी देवें?

पशुपालन मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) विगत तीन वर्षों में 38 कार्य किये गये जिसकी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-स अनुसार है।

श्री हेमन्‍त खण्‍डेलवाल- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से पशुपालन मंत्री जी से मेरे दो सवाल हैं, राष्‍ट्रीय उद्यानिकी मिशन में आपने मुझे पूरी सूची दी है, इसी से संबंधित 9 मार्च को 5539 नम्‍बर का मेरा एक सवाल था, जिसमें माननीय मंत्री जी ने अनियमितता स्‍वीकार की है और कहा है कि संबंधित को हमने नोटिस दिया है, मैं निश्चित समय सीमा चाहूंगा कि जिन अधिकारियों ने भ्रष्‍टाचार किया है, अनियमितता की है, कब कार्यवाही होगी और दूसरा ड्रिप सिस्‍टम या बगीचे विस्‍तार के लिए राष्‍ट्रीय उद्यानिकी मिशन में जो अनुदान दिया जाता है, अनुदान देने के बाद में अगले 6 माह, साल या दो साल में कोई उसका निरीक्षण होता होगा उस अनुदान का सही उपयोग हुआ है या नहीं हुआ है, ऐसी कोई निरीक्षण पुस्तिका होगी, मुझे उपलब्‍ध करा दें, ताकि अनुदान का सही उपयोग हो रहा है कि नहीं हो रहा है, उसकी जानकारी मिल पाए ।

सुश्री कुसुम सिंह महदेले- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जो मांग की है, उसको हम अतिशीघ्र पूरा कर देंगे ।

श्री हेमन्‍त खण्‍डेलवाल - धन्‍यवाद ।

प्राथमिक स्‍कूल के भवन का निर्माण

3. ( *क्र. 764 ) श्री जयवर्द्धन सिंह : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या ग्राम वरपनवाड़ी पंचायत मुहांसा वि.ख. आरोन में प्राथमिक स्‍कूल आंगनवाड़ी केन्‍द्र में लगता है? (ख) यदि हाँ, तो प्राथमिक स्‍कूल के नवीन भवन का निर्माण कार्य कब तक पूर्ण हो जाएगा एवं शासन द्वारा प्राथमिक स्‍कूल शाला निर्माण के क्‍या मापदण्‍ड हैं?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ। निर्मित शाला भवन का मरम्मत कार्य किया जाना है इस कारण आँगनवाड़ी के भवन में अस्थाई रूप से स्कूल संचालित किया जा रहा है। (ख) वर्ष 2016-17 की कार्य योजना में शाला भवन की मरम्मत प्रस्तावित है, भारत शासन से स्वीकृति प्राप्त होने पर भवन की मरम्मत कराई जा सकेगी। शाला भवन जीर्ण-शीर्ण होने पर नवीन भवन स्वीकृति का मापदण्ड है। 

श्री जयवर्द्धन सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से मेरे दो प्रश्‍न हैं, पहले प्रश्‍न में बहुत चिन्‍ता का विषय है, मध्‍यप्रदेश में ऐसे काफी स्‍कूल हैं, जहां भवन न होने के कारण, स्‍कूल आंगनवाड़ी केन्‍द्र में लग रहे हैं, जिसके कारण ठीक से शिक्षा नहीं मिल पाती है और न ही आंगनवाड़ी का काम ठीक से हो पाता है, हमने नवीन भवन की मांग की है, जबकि उत्‍तर में सिर्फ मरम्‍मत का कहा गया है । माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि वहां पर नवीन भवन का आश्‍वासन दिया जाए और साथ में समय - सीमा भी बताई जाए, दूसरा प्रश्‍न यह है कि डिस्ट्रिक्‍ट इन्‍फार्मेशन सिस्‍टम फॉर एजुकेशन के आंकड़े हैं कि पूरे प्रदेश में लगभग 25 हजार ऐसे स्‍कूल हैं, जहां पर अतिरिक्‍त कक्ष की आवश्‍यकता है और इस साल 2016-17 के बजट में नवीन भवन निर्माण के आंकड़े दिए गए हैं, वह करीब साढ़े चार सौ करोड़ रूपए है, जिससे भी यह काम पूरा नहीं हो पाएगा, मैं मानता हूं कि शिक्षा के लिए विशेषकर स्‍कूल शिक्षा के लिए जो नवीन भवन निर्माण का पूंजीगत खर्च हैं, वह भी उसमें वृद्वि होना चाहिए ।

श्री दीपक जोशी - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य द्वारा जो प्रश्‍न पूछा गया है, प्रश्‍नांकित भवन का निर्माण 1996 में हुआ था, विभाग के नियम के अनुसार निर्मित भवन यदि 10 वर्ष से पुराना हो जाता है तो उसकी मरम्‍मत के लिए हम प्रावधान करते हैं और 30 वर्ष के पश्‍चात यदि भवन इस स्थिति में होता है तो उसके पुननिर्माण की व्‍यवस्‍था की जाती है ।

लेकिन माननीय सदस्‍य की भावनाओं से अवगत होकर विभाग द्वारा 97,000/- रूपये की मांग भेज दी गई है, मंजूर होते ही जीर्ण-शीर्ण व्‍यवस्‍था को ठीक कर दिया जायेगा.

श्री जयवर्द्धन सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से एक बार फिर वही प्रार्थना है कि वहां पर एक नवीन भवन निर्मित किया जाये क्‍योंकि वहां की खराब स्थिति है एवं सवाल बच्‍चों का है, जो प्रायमरी स्‍कूल में पढ़ रहे हैं, तो कम से कम इतना तो संवेदनशील होना चाहिए कि कम से कम नया भवन वहां निर्मित किया जाये और साथ में, वर्ष 16-17 के लिए ऐसे कौन से गुना जिले में प्रायमरी स्‍कूल हैं, जहां पर नई बिल्डिंग बनने की क्षमता है, वह भी मुझे उपलब्‍ध की जाये.

अध्‍यक्ष महोदय - इससे प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता है.

श्री दीपक जोशी - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि बताया गया है कि हमने 97,000/- रू. की मरम्‍मत के लिए प्रस्‍ताव भेज दिया है. मैं समझता हूँ कि वह आने के बाद, भवन की जीर्ण-शीर्ण अवस्‍था को ठीक कर दिया जायेगा. फिर भी यदि, सदस्‍य को ऐसा लगता है तो हम इसको एक बार दिखवा लेंगे और पूरी कोशिश करेंगे तथा गुना जिले की सूची इन्‍होंने मांगी है, हम इनको भिजवा देंगे.

कटंगी में लिंक न्‍यायालय प्रारंभ किया जाना

प्रश्‍न 4. ( *क्र. 4797 ) श्री के.डी. देशमुख : क्या पशुपालन मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या मा. उच्‍च न्‍यायालय जबलपुर ने बालाघाट जिले के कटंगी में अतिरिक्‍त सत्र न्‍यायाधीश का लिंक न्‍यायालय प्रारंभ करने की स्‍वीकृति प्रदान की है? (ख) यदि हाँ, तो अतिरिक्‍त सत्र न्‍यायालय का लिंक न्‍यायालय प्रारंभ होने में विलंब के क्‍या कारण हैं?

पशुपालन मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) जी हाँ । (ख) कंटगी जिला बालाघाट में मूलभूत सुविधायें न्यायालय भवन, न्यायाधीश आवासगृह और उपजेल इत्यादि सुविधायें उपलब्ध नहीं हैं।

श्री के. डी. देशमुख - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूँ जब माननीय उच्‍च न्‍यायालय ने यह स्‍वीकार कर लिया है कि बालाघाट जिले कटंगी में 'लिंक न्‍यायालय' स्‍थापित किया जाता है तो माननीय उच्‍च न्‍यायालय की भावनाओं को ध्‍यान में रखते हुए, मैं शासन से कहना चाहता हूँ कि माननीय न्‍यायालय ने सिद्धान्‍त: स्‍वीकृति प्रदान कर दी है तो अब वहां न्‍यायालय भवन एवं न्‍यायाधीश आवास गृह नहीं तो माननीय न्‍यायालय की भावनाओं की कद्र करते हुए, क्‍या मध्‍यप्रदेश शासन का विधि विभाग, न्‍यायालय भवन एवं न्‍यायाधीश के आवास गृह निर्माण करने की कार्यवाही करेगा ?

सुश्री कुसुम सिंह महदेले - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, शासन जरूर करेगा. जैसे ही कलेक्‍टर हमें जमीन उपलब्‍ध कराते हैं वैसे ही न्‍यायालय भवन एवं न्‍यायाधीश आवास गृह बनवायेंगे.

श्री के. डी. देशमुख - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से, माननीय मंत्री जी को बताना चाहता हूँ कि कलेक्‍टर, बालाघाट ने न्‍यायाधीश आवास गृह के लिए जमीन आवंटित कर दी है, विधि विभाग के नाम पर कर दिया है. न्‍यायाधीश आवास गृह का भी कर दिया है. यदि यह बात सही पाई जाती है और कलेक्‍टर ने कर दिया है तो क्‍या आप न्‍यायालय भवन और न्‍यायाधीश आवास गृह के लिए राशि प्रदान करेंगे ?

सुश्री कुसुम सिंह महदेले - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कटंगी में न्‍यायालय कक्ष आवास हेतु कलेक्‍टर के प्रस्‍ताव पर, माननीय उच्‍च न्‍यायालय से अभी अभिमत नहीं आया है. जैसे ही अभिमत आ जायेगा, हम काम पूरा कर देंगे.

श्री के. डी. देशमुख - ठीक है.

कल्‍याणकारी योजनाओं से लाभांवित श्रमिक

प्रश्‍न 5. ( *क्र. 5784 ) श्री विष्‍णु खत्री : क्या श्रम मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विभाग द्वारा श्रमिकों के हित में कौन-कौन सी कल्‍याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं? (ख) बैरसिया विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत कितने श्रमिकों का रजिस्‍ट्रेशन म.प्र. भवन एवं अन्‍य संनिर्माण कर्मकार कल्‍याण मण्‍डल के माध्‍यम से किया गया है?(ग) प्रश्‍नांश (ख) के तारतम्‍य में बैरसिया विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत रजिस्‍टर्ड श्रमिकों को कौन-कौन सी योजनाओं का लाभ वित्‍तीय वर्ष 2013-14 से 2015-16 तक दिया गया?

श्रम मंत्री ( श्री अंतरसिंह आर्य ) : (क) मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल के अंतर्गत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों हेतु वर्तमान में कुल 23 कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिसकी जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) बैरसिया विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कुल 8480 निर्माण श्रमिकों का पंजीयन मण्डल के माध्यम से किया गया है। (ग) प्रश्नांश (ख) के परिप्रेक्ष्य में बैरसिया विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत मण्डल द्वारा पंजीकृत निर्माण श्रमिकों हेतु प्रश्नांकित अवधि में योजनांतर्गत लाभांवित हितग्राहियों की संख्यावार जानकारी निम्नानुसार है :-

क्र.

योजना का नाम

हितग्राही संख्या

1.

प्रसूति सहायता

364

2.

विवाह सहायता

09

3.

शिक्षा हेतु प्रोत्साहन राशि एवं मेधावी छात्र/छात्रा को नगद पुरस्कार

1153

4.

मृत्यु दशा में अंत्येष्टि सहायता एवं अनुग्रह भुगतान

03

परिशिष्ट - ''एक''

श्री विष्‍णु खत्री - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सर्वप्रथम माननीय मंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूँ कि कल उन्‍होंने अनुदान मांगों के बजट भाषण पर बैरसिया में श्रमिकों के लिए 15 लाख रूपये की राशि से शेड की घोषणा की है. इसमें मेरे पृष्‍ठ में, मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूँ कि मेरे बैरसिया विधानसभा क्षेत्र में क्रेशर बड़ी संख्‍या में हैं जो क्रेशर श्रमिक हैं- वहां पर उनके रजिस्‍ट्रेशन के लिए और योजनाओं की जानकारी के लिए, क्‍या विभाग वहां पर शिविर का आयोजन करेगा ? और साथ ही इन श्रमिकों के स्‍वास्‍थ्‍य परीक्षण के लिए भी क्‍या शिविरों का आयोजन होगा ?

श्री अंतर सिंह आर्य - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी ने स्‍वास्‍थ्‍य शिविरों और पंजीयन के लिए शिविर लगाने के लिए, जो बात कही है. हम विभाग से, इसके शिविर लगवायेंगे.

श्री विष्‍णु खत्री - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, केवल स्‍वास्‍थ्‍य परीक्षण नहीं, साथ में योजनाओं की जानकारी और रजिस्‍ट्रेशन भी.

श्री अंतर सिंह आर्य - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो माननीय सदस्‍य चाह रहे हैं, वह विभाग के माध्‍यम से हम करेंगे.

गाडरवारा विधान सभा क्षेत्र में संचालित नल-जल योजनाएं

प्रश्‍न 6. ( *क्र. 5903 ) श्री गोविन्‍द सिंह पटेल : क्या पशुपालन मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) गाडरवारा विधान सभा क्षेत्र में कितने ग्रामों में हैण्‍डपंप लगे हुये हैं, जिसमें कितने चालू हैं एवं कितने बंद हैं? बंद पड़े हैण्‍डपंपों को कब तक चालू किया जाएगा या उनकी जगह नयें हैण्‍डपंप लगाये जायेंगे? (ख) क्षेत्र के कितने ग्रामों में कितनी नल-जल योजनाएं संचालित हैं तथा जिन ग्रामों में नल-जल योजना नहीं है, उन ग्रामों में नल-जल योजना का निर्माण किया जायेगा? यदि हाँ, तो कब तक यदि नहीं, तो क्‍यों?

पशुपालन मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। बसाहट में निर्धारित मापदण्ड से कम पेयजल आपूर्ति होने की स्थिति में नये हैण्डपंप लगाने की कार्यवाही की जाती है। (ख) 97 ग्रामों में नल-जल योजना संचालित है। वर्तमान में नवीन नल-जल योजनाओं की स्वीकृति पर प्रतिबंध है। अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''दो''

श्री गोविन्‍द सिंह पटेल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न एक सामयिक प्रश्‍न है इसलिए आपका संरक्षण चाहूँगा. मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में आया है कि 180 ग्रामों में 2488 हैंड पम्‍प हैं, जिसमें 122 बन्‍द हैं. यह तो विभाग की जानकारी के अनुसार 122 बन्‍द हैं लेकिन मेरे पास उतनी जानकारी आ नहीं पाती है. मेरी जानकारी में 500 हैंड पम्‍प बन्‍द हैं और सूखे की स्थिति में जल-स्‍तर नीचे जा रहा है इसलिए मैं, मंत्री महोदय जी से यह पूछना चाहता हूँ कि जो 500 या जो यथार्थ जानकारी आये, क्‍या उतने हैंड पम्‍प इनके विरूद्ध लगवा दिये जायेंगे ?

सुश्री कुसुम सिंह महदेले -- अध्यक्ष महोदय, अभी 15 हैंडपम्प बंद हैं और जनसंख्या के मान से जितने भी हैंडपम्पों की जरुरत होगी, हम लगवा देंगे, बाकी तो चल रहे हैं.

श्री गोविन्द सिंह पटेल -- अध्यक्ष महोदय, जनसंख्या के आधार पर तो लगे हैं. जो डिमांड है, उसी के अनुसार वह लगे हैं. लेकिन डिमांड अनुसार लगे हुए हैंडपम्प बंद हो गये हैं. मेरा सिर्फ यह कहना है कि जितने हैंडपम्प बंद हैं, उनके विरुद्ध क्या हैंडपम्प लगवायेंगे. दूसरा (ख)उत्तर में बताया है कि 97 ग्रामों में नल जल योजनाएं संचालित हैं, लेकिन इनमें से 50 चालू होंगी और 47 बंद होंगी. मैंने चाहा था कि नई योजनाएं क्या बनवाई जायेंगी. मंत्री जी का जवाब आया है कि नवीन योजनाएं बनाने पर प्रतिबंध है. तो मेरा पहला प्रश्न यह है कि वहां हैंडपम्प खुदवा दें. दूसरा,जन भागीदारी योजना के द्वारा योजनायें लगाने का कार्यक्रम है, उस पर प्रतिबंध नहीं है. 3 प्रतिशत सामान्य जनसंख्या द्वारा जमा करने और 1 प्रतिशत आदिम जाति, अनुसूचित जनजाति बस्तियों में जमा करने पर लगाये जा सकते हैं. तो क्या जन भागीदारी के द्वारा, क्योंकि एक बहुत जल संकट अप्रैल में ही आने वाला है. उसके लिये हमारे बिजली विभाग और कृषि विभाग ने तैयारी की और खाद और बिजली की कमी नहीं आ पाई, लेकिन पीएचई विभाग की तैयारी अभी है नहीं. इसलिये क्या आदिम जाति कल्याण विभाग की विकास योजना के द्वारा पैसा लेकर एक प्रतिशत पैसा जमा करने की जहां डिमांड है, वहां नल जल योजनायें लगवाई जायेंगी. यह मेरा मंत्री जी से निवेदन है.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले -- अध्यक्ष महोदय, अभी नई नल जल योजनाओं पर प्रतिबंध लगा हुआ है. जब प्रतिबंध हटेगा, तो उस पर विचार करेंगे. अध्यक्ष महोदय, नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा विधान सभा के अंतर्गत 180 ग्रामों में 2488 हैंडपम्प स्थापित हैं, जिसमें से 112 हैंडपम्प विभिन्न कारणों से बंद हैं, जिसका विवरण परिशिष्ट में दिया है. सुधार योग्य हैंडपम्पों का सुधार कार्य नियमित रुप से किया जा रहा है. प्रति व्यक्ति 55 लीटर पानी हम दे रहे हैं. बंद हैंडपम्पों के स्थान पर नये हैंडपम्प लगाने का प्रावधान नहीं है. गाडरवारा विधान सभा के अंतर्गत 97 ग्रामों में नल जल योजनायें संचालित हैं और चल रही हैं. वर्तमान में नवीन नल जल योजनाओं की स्वीकृति पर प्रतिबंध है. अतः नई योजनायें स्वीकृत करना संभव नहीं है.

श्री संजय शर्मा -- अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि मेरी विधान सभा के संबंध में एक ऐसा ही प्रश्न लगाया था..

अध्यक्ष महोदय -- शर्मा जी, इसी से संबंधित कुछ हो, तो पूछें.

श्री संजय शर्मा -- अध्यक्ष महोदय, इसी से संबंधित है. वहां पानी का बड़ा भीषण संकट है. तेंदूखेड़ा में नल जल योजना स्वीकृत है, टेंडर लग रहा है, पिछले 3 साल साल से वहां पर काम प्रारंभ नहीं हुआ है. पानी की बड़ी समस्या आने वाली है और बहुत से हैंडपम्प भी हमारे यहां पूर्ण बताये गये हैं, जो कि मजरों, टोलों पर लगे नहीं हैं. जानकारी गलत आई है. इसको सही कराया जाये.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले -- अध्यक्ष महोदय, मैं जवाब दे चुकी हूं कि नवीन योजनाओं पर प्रतिबंध लगा हुआ है.

श्री संजय शर्मा -- अध्यक्ष महोदय, नवीन नहीं, पुरानी स्वीकृत योजना है, काम चालू नहीं हो रहा है, टेंडर लग चुका है.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले -- पुरानी स्वीकृत नहीं है, यह मैं आपकी जानकारी में बता दूं.

श्री संजय शर्मा -- अध्यक्ष महोदय, आपकी जानकारी सही है, लेकिन मेरी जो जानकारी में है, वह मैं बता रहा हूं. टेंडर लग चुका है, काम नहीं लग रहा है.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले -- अध्यक्ष महोदय, कारण यह है कि तीन साल से पानी बरसा नहीं. जमीन के अंदर पानी है नहीं. तो नई योजनाओं को स्वीकृति देने का प्रश्न ही नहीं उठता.

अध्यक्ष महोदय -- विधायक जी, कल पीएचई विभाग की मांगों पर चर्चा भी है.

श्री संजय शर्मा -- अध्यक्ष महोदय, केवल हैंडपम्पों का हो जाये कि जहां पर गलत जानकारी आई है कि जनसंख्या के मान से पूर्ण है, लेकिन पूर्ण नहीं है, मजरे टोलों पर वहां हैंडपम्प नहीं लग रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय -- उसके लिये उनसे बात कर लीजिये. प्रश्न संख्या-7.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले -- अध्यक्ष महोदय, जो हैंडपम्प सुधार योग्य हैं, उनका हम राइजिंग का काम कराकर, पम्प लगाकर पानी दे देंगे.

..(व्यवधान)..

श्री अनिल फिरोजिया -- अध्यक्ष महोदय, हमारे यहां भी सूखा है और पानी नहीं है. अगर बोरिंग की परमीशन नहीं हुई, तो लोग प्यासे मर जायेंगे. हमारे विधान सभा क्षेत्र में बहुत जल संकट चल रहा है.

..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय -- मेरा माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि कल लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की डिमांड्स पर चर्चा है, उसमें अपनी अपनी बात कह देंगे, तो ठीक होगा. अभी कृपया बैठ जायें. ..(व्यवधान).. डण्डौतिया जी, बैठ जाइये. कोई अलाऊ नहीं होंगे. नहीं, व्यवस्था चलने दीजिये. रजौधा जी बैठ जाइये. अनुमति के बगैर कुछ नहीं लिखा जायेगा. गोविन्द सिंह पटेल जी एक बात कह दें.

श्री गोविंद सिंह पटेल --माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा मंत्री जी से कहना है कि मंत्री महोदया गंभीरता से जवाब नहीं दे रही हैं.

अध्यक्ष महोदय-- पूरी गंभीरता से जवाब दे रही हैं. आप प्रश्न पूछें.

श्री गोविंद सिंह पटेल --अध्यक्ष महोदय, गंभीरता से नहीं दे रही हैं और बहुत गंभीर विषय है . 2 वर्ष से मेरे विधानसभा क्षेत्र में एक भी हैंड पंप नहीं खुदा.400 बंद हो गये हैं तो उन बंद हैंपपंपों के विरूद्ध में हैंडपंप लगवा दें.

अध्यक्ष महोदय-- यह कोई प्रश्न नहीं है.

प्रश्न क्रमांक-7 (श्री विजय सिंह सोलंकी) (अनुपस्थित)

आवंटित बजट का उपयोग

8. ( *क्र. 6568 ) श्री चैतराम मानेकर : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बैतूल जिले में वर्ष 2015-16 में विभाग अंतर्गत SC/ST/OBC वर्ग/क्षेत्रों के लिये किस-किस मद में कितनी राशियां आवंटित हुईं? (ख) प्रश्‍नांश (क) में आवंटित राशि का पूर्ण उपयोग किस-किस मद में किया गया और कितनी राशि किस-किस मद में समर्पित की गयी? (ग) क्‍या विभाग जिले में आवंटित राशि का पूर्ण उपयोग नहीं करने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों की जिम्‍मेदारी तय करेगा? यदि हाँ, तो दोषी अधिकारियों के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही कब तक की जायेगी?

आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) : (क) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' एवं 'एक' अनुसार है। (ख) एवं (ग) अनुसूचित जनजाति की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है, जबकि अनुसूचित जाति की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र ''दो'' अनुसार है। अत: प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्री चैतराम मानेकर -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने मेरे प्रश्न के उत्तर में बैतूल जिले में वर्ष 2015-16 के प्रथम त्रैमास, द्वितीय त्रैमास तथा तृतीय त्रैमास में प्राप्त आवंटन एवं अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति योजना के अंतर्गत प्राप्त आवंटन के विरूद्ध करोड़ों रूपये समर्पित होना स्वीकार किया है. उसमें अधिकतर कारण त्रैमास के अंत तक देयक प्राप्त न होना बताया है. मैं, मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि बैतूल जिले के प्रभारी सहायक आयुक्त को किस कारण से त्रैमास के अंत तक देयक प्राप्त नहीं हो पाये? दूसरा प्रश्न मेरा मंत्री जी से यह है कि प्रभारी सहायक आयुक्त, बैतूल के द्वारा अनुसूचित जाति बस्ती विकास में 29.25 लाख रूपये समर्पित किये इसका क्या कारण है ? मेरा तीसरा प्रश्न मंत्री जी है ..

अध्यक्ष महोदय-- आप पहले इसका उत्तर ले लें.

श्री ज्ञान सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, पूरी राशि समर्पित नहीं हुई है, कार्य हुये हैं और वास्तव में जिन कार्यों की पूर्ति के लिये राशि आवंटित की गई थी, वे अति महत्वपूर्ण काम थे, जैसे शाला आश्रम, छात्रावास तथा छात्राओं को सायकिल के मेंटनेंस की राशि दिये जाने जैसे काम थे, मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को आश्वस्त करना चाहूंगा कि इस वर्ष का यह अंतिम महीना है और विभाग का प्रयास होगा कि इन जनकल्याणकारी योजनाओं की राशि का पत्र हमारी छात्राओं तक और संबंधित आश्रम छात्रावासों में, जिन कार्यों के लिये राशि आवंटित की गई थी, वह कार्य पूर्ण हो सकें.

श्री चैतराम मानेकर -- माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रभारी सहायक आयुक्त के द्वारा अनुसूचित जाति बस्ती विकास में 29.25 लाख रूपये समर्पित किये गये इसका क्या कारण रहा है. मंत्री जी द्वारा परिशिष्ट 2 में जो जानकारी मुझे दी गई है, उसमें कोई कारण नहीं बताया गया है. और इसी से जुड़ा हुआ प्रश्‍न है इसी अधिकारी के द्वारा मजरे टोलों के विद्युतीकरण में 210 लाख रूपये समर्पित किये और इसी से जुड़ा चौथा प्रश्‍न है, अनुसूचित जाति के कृषकों के कुंओं त‍क विद्युत लाइन को ले जाने में 220.74 लाख रूपये समर्पित किये, इसका क्‍या कारण है.

श्री ज्ञान सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय जी, जैसा कि आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍य को मैं अवगत करा चुका हूं और अधिकांश काम तो छात्रावास आश्रमों कई तरह के उपयोगों में लिये जाने के उद्देश्‍य से राशि जारी की गई थी. चूंकि अभी वर्ष का अंत है राशि उपयोग में खर्च हो सके इसके लिये विभाग की ओर से पूरा प्रयास किया जायेगा.

श्री बाला बच्‍चन-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने कल इस विभाग की अनुदान मांगों पर कितनी राशि जो खर्च नहीं हुई 600 करोड़, 1300 करोड़ उन सबका मैंने उल्‍लेख किया था अब माननीय मंत्री जी अंत समय की बात कर रहे हैं लेकिन अनुसूचित जाति जनजाति दोनों वर्गों पर जो खर्च होना था करोड़ों अरबों रूपये नहीं हो पाये हैं, माननीय मंत्री जी क्‍या देखते हैं आप, क्‍या जवाब देते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय-- प्रश्‍न क्रमांक 9, श्री आर.डी. प्रजापति, एक प्रश्‍न पूछिये खाली.

पानी की टंकी का हस्‍तांतरण

9. ( *क्र. 4132 ) श्रीमती रेखा यादव : क्या पशुपालन मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) वर्ष 2005-06 में स्‍वीकृत छतरपुर जिले की बड़ामलहरा नगर पंचायत में कितनी लागत की पानी की टंकी का विभाग ने किस दिनांक से निर्माण किया? यह टंकी किन-किन कारणों से प्रश्‍नांकित दिनांक तक नगर पंचायत को सौंपी नहीं जा सकी है? (ख) कितनी लागत के कौन-कौन से कार्य पूर्ण न होने के कारण नगर पंचायत टंकी का प्रभार लिए जाने से इंकार कर रहा है, उन अधूरे कार्यों को पूरा किए जाने के संबंध में विभाग ने कब और क्‍या कार्यवाही की है? (ग) कब तक टंकी पूरी की जाकर नगर पंचायत को सौंप दी जावेगी? समय-सीमा सहित बतावें।

पशुपालन मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) रूपये 32.10 लाख लागत की पानी टंकी का निर्माण 08.2.2006 से प्रारंभ किया एवं 23.1.2008 को पूर्ण। पेयजल योजना के अंतर्गत एनीकट का निर्माण व टरबाइन पंप का क्रय न होने से नगर पंचायत द्वारा टंकी आधिपत्य में नहीं ली गई। (ख) एनीकट लागत रूपये 28.85 लाख एवं टरबाइन पंप लागत रूपये 3.00 लाख के कार्य अपूर्ण रहने के कारण। विभाग द्वारा रूपये 322.33 लाख की पुनरीक्षित योजना तैयार की गई है, परंतु नगर पंचायत द्वारा अंशदान की राशि देने में असमर्थता व्यक्त की गई है। अतः विभाग द्वारा एनीकट को छोड़कर शेष कार्य पूर्ण करने की कार्यवाही की जा रही है। (ग) टंकी का कार्य एवं उसका परीक्षण पूर्ण किया जा चुका है। यदि नगर पंचायत सहमति‍ दे तो टंकी विभाग द्वारा तत्काल हस्तांतरित की जा सकती है।

श्री आर.डी. प्रजापति-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा मंत्री जी से आग्रह है कि ऐसे अधिकारी की जांच करा दें.

अध्‍यक्ष महोदय-- प्रश्‍न क्रमांक 9 फिर से ले लिया है.

श्री आर.डी; प्रजापति-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय जी, मेरा निवेदन एक ही है टंकी जो बनी है, क्‍या विभाग द्वारा, इसमें कौन दोषी है या तो नगर पंचायत या पीएचई, आम जनता परेशान है, टंकी बन नहीं पा रही है, अगर सहमति नहीं बनी थी तो ठीक इसका उत्‍तर दिया जाये, क्‍या वह टंकी चालू हो जायेगी, जो लोग दोषी हैं उनके ऊपर क्‍या कार्यवाही की जायेगी.

पशुपालन मंत्री (सुश्री कुसुम सिंह महदेले)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कोई भी दोषी नहीं है और मैं आपको विस्‍तार से जवाब दे रही हूं कि एनीकट की लागत 28.85 लाख, टरबाइन पम्‍प लागत 3 लाख रूपये के कार्य अपूर्ण रहने के कारण विभाग द्वारा 322.33 लाख की पुनरीक्षित योजना तैयार की गई है अध्‍यक्ष महोदय, परंतु नगर पंचायत द्वारा अंशदान की राशि नहीं दी जा रही जिसकी पहले सहमति थी, असमर्थता व्‍यक्‍त की है राशि देने में. अत: विभाग द्वारा एनीकट को छोड़कर शेष कार्य पूर्ण किये जा रहे हैं और टंकी का कार्य एवं उसका परीक्षण पूर्ण किया जा चुका है और नगर पंचायत सहमति दे तो टंकी विभाग द्वारा तत्‍काल हस्‍तांतरित की जा सकती है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक और निवेदन करना चाहती हूं कि टंकी बनकर चालू है.

सबलगढ़ विधानसभा क्षेत्रांतर्गत संपादित कार्य

10. ( *क्र. 4470 ) श्री मेहरबान सिंह रावत : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) आदिम जाति कल्‍याण विभाग द्वारा दिनांक 01.04.15 से 31.01.16 तक सबलगढ़ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कितनी राशि प्रदाय की गई? पंचायतवार एवं मदवार जानकारी बतावें। (ख) यह राशि किस-किस मद में किन-किन कार्यों में खर्च की गई? पंचायतवार, मदवार, कार्य का नाम, स्‍वीकृत राशि, व्‍यय राशि, शेष राशि का ब्‍यौरा दें। यह कार्य किन-किन क्षेत्रों में करवाए गए? (ग) प्रश्‍नकर्ता द्वारा ग्राम पंचायत खिरका जनपद पंचायत सबलगढ़ को अनुसूचित जाति बस्‍ती में सी.सी. खरंजा हेतु प्रस्‍ताव अधीक्षक अनुसूचित जनजाति कल्‍याण विभाग को देने के बाद भी प्रश्‍न दिनांक तक ए.एस. जारी नहीं की गई? कारण बतावें एवं कब तक राशि स्‍वीकृत कर दी जावेगी? (घ) किन-किन जनप्रतिनिधियों ने प्रश्‍नांश (क) की अवधि में अनुशंसा पत्र किन-किन कार्यों की स्‍वीकृति हेतु विभाग को इस अवधि में प्रेषित किये हैं? उन पर क्‍या कार्यवाही की गई?

आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) : (क) एवं (ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '' एवं '' अनुसार है। (ग) प्रश्‍नकर्ता के प्रस्‍ताव पर दिनांक 24.02.2016 को रूपये 2.00 लाख की प्रशासकीय एवं वित्‍तीय स्‍वीकृति जारी कर दी गई है। (घ) जनप्रतिनिधियों से प्राप्‍त अनुशंसा पत्रों का विवरण संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। अनुशंसित कार्यों हेतु बस्‍ती विकास योजना के नियमों के अंतर्गत कार्यों की स्‍वीकृति जारी की गई है। अनुशंसा के आधार पर राशि जारी करने के प्रावधान नहीं हैं। शेष जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '' एवं '' अनुसार है।

परिशिष्ट - ''तीन''

 

श्री मेहरबान सिंह रावत-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने मंत्री जी से जानना चाहा कि आदिम जाति कल्‍याण विभाग के द्वारा सबलगढ़ विधानसभा क्षेत्र में कितनी राशि दी गई, इनके जवाब में आया दो पंचायतों में बेरखेड़ा और एक खिरका, खिरका की तो अभी स्‍वीकृति जारी हुई है. पहला प्रश्‍न तो यह है कि कुल राशि सबलगढ़ विधानसभा में वित्‍तीय वर्ष समाप्‍त होने जा रहा है, कितनी राशि जारी की है, हमारी दोनों पंचायतों को ही मिलेगी क्‍या, अन्‍य विधानसभा में कितनी दी है, और कुल जिले में कितना पैसा आया वित्‍तीय वर्ष 2015-16 में.

आदिम जाति कल्‍याण मंत्री (श्री ज्ञान सिंह)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय जी, माननीय सदस्‍य आदरणीय मेहरबान सिंह जी रावत ने संबंधित अपने विधानसभा क्षेत्र में बस्‍ती विकास के माध्‍यम से आवंटित की गई राशि और कराये गये कार्यों के बारे में जो जानकारी पूछी थी, परिशिष्‍ट में सारे कार्य उपलब्‍ध है, स्‍वीकृति की तारीख भी, आपके द्वारा जो प्रस्‍तावित किये गये थे उनका भी जिक्र है.

मेहरबान सिंह रावत--अध्यक्ष महोदय,आपने एक जगह लिखा है कि अनुशंसा नहीं की जाती और एक जगह लिख रहे हैं कि अनुशंसा की गई है. मेरे पास स्वीकृत राशि की लिस्ट है. इन्होंने परिशिष्ट में दिया है. केवल 2 पंचायतों में दिया. अध्यक्ष महोदय, जिले में कितनी राशि आयी. वित्तीय वर्ष समाप्त हो रहा है. दूसरा यह कि आपने लिखा की अनुशंसा नहीं की जाती है तो क्या अधिकारी कुछ भी करते रहेंगे? एक तरफ अनुशंसा के लिए मना कर रहे हैं और दूसरी तरफ अनुशंसा की हां कर रहे हैं. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय-- बैठ जाईये दंढोतिया जी. आप हर प्रश्न पर खड़े हो रहे हैं. आप दूसरों को प्रश्न पूछने दीजिए.

श्री ज्ञानसिंह--अध्यक्षजी, राशि आवंटित की जाने के संबंध में माननीय विधायकों के पत्रों को प्राथमिकता दी जाती है. उस अनुपात में माननीय विधायकजी के क्षेत्र में ग्राम कदघर में 2 लाख, ग्राम बिलसैया में 2 लाख, ग्राम पंचायत मऊड़ा में 4 लाख, ग्राम बिलालपुरा में 4 लाख,ग्राम रपताडोंगरी में 6 लाख,ग्राम पंचायत अतारी में 5 लाख, ग्राम पंचायत पचेर में 3 लाख, ग्राम पंचायत पहाड़ी में 3 लाख और ग्राम पंचुरी में 3 लाख रुपये स्वीकृत किये गये.

श्री मेहरबान सिंह रावत--अध्यक्ष महोदय, मंत्रीजी से यह जानना चाहता हूं कि आपने अभी जो नाम पढ़े हैं वहां पर कोई काम नहीं हुआ है. क्या इसकी जांच करायेंगे? और वहां आदिम जाति कल्याण विभाग में एक बाबू 30 वर्ष से उसी जगह पर है. वह जिस तरह से लिस्ट बनाकर देता है, उस तरह से कार्य मंजूर होते हैं. उसे हटायेंगे और जांच करायेंगे क्या?

श्री ज्ञानसिंह-- अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्य को आश्वस्त कराना चाहूंगा कि वह बाबू भी जायेगा और काम की जांच भी होगी. (व्यवधान)

प्रश्न क्रमांक--11 (अनुपस्थित)

 

वरिष्‍ठ अध्‍यापकों को क्रमोन्‍नति का लाभ

12. ( *क्र. 5064 ) श्रीमती ऊषा चौधरी : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र. शासन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्रालय वल्‍लभ भवन भोपाल के आदेश क्रमांक/एफ.1-2/2013/22 /पं.2 दिनांक 21 फरवरी 2013 द्वारा समस्‍त विभागाध्‍यक्षों को अध्‍यापक संवर्ग में संविदा शाला शिक्षकों को नियुक्ति दिनांक से वरिष्‍ठता देने हेतु निर्देश दिये गये थे? (ख) क्‍या सतना जिले के मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत एवं जिला शिक्षा अधिकारी सतना द्वारा आज दिनांक तक उक्‍त आदेश के परिपालन में वरिष्‍ठ अध्‍यापकों की क्रमोन्‍नति नहीं की जा रही है? कारण सहित बताएं। () क्‍या आयुक्‍त नगर निगम भोपाल द्वारा संचालक लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल को पत्र भेज कर मार्गदर्शन मांगा गया था, जिस पर संचालनालय द्वारा आयुक्‍त नगर निगम भोपाल जिला भोपाल को आदेश क्रमांक 1457 दिनांक 26.03.14 के द्वारा बिंदु क्रमांक 04 में स्‍पष्‍ट रूप से अंकित किया है कि संविदा शाला शिक्षक से अध्‍यापक संवर्ग में नियुक्‍त सहायक अध्‍यापक/अध्‍यापक/वरिष्‍ठ अध्‍यापक के क्रमोन्‍नति के प्रकरणों में 12/24 वर्ष की अवधि की गणना वर्ष 2001 या इसके उपरांत वास्‍तविक रूप से संविदा शाला शिक्षक के रूप में नियुक्ति दिनांक से की गई कार्य अवधि को 12/24 वर्ष के अनुभव के रूप में सम्मिलित करते हुए अनुभव की गणना की जाएगी?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) अध्‍यापक संवर्ग में संविदा शाला शिक्षक को नियुक्ति दिनांक से नियम में उल्‍लेखित अनुसार योग्‍यता एवं अन्‍य शर्तों की पूर्ति करने पर वरिष्‍ठता का लाभ पदोन्‍नति एवं क्रमो‍न्‍नति के लिए प्राप्‍त होता है। (ख) सतना जिले में वरिष्ठ अध्यापकों को क्रमोन्नति का लाभ दिये जाने की कार्यवाही प्रचलन में है। अतः शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता (ग) जी हाँ। अध्यापक संवर्ग में क्रमोन्नति की सेवा गणना संविदा शाला शिक्षक के पद पर नियुक्ति दिनांक से करने के उपरान्त 12 अथवा 24 वर्ष की क्रमोन्नति का लाभ दिये जाने का प्रावधान है।

 

श्रीमती ऊषा चौधरी-- अध्यक्ष महोदय,माननीय मंत्रीजी ने मेरे प्रश्न ख के उत्तर में असत्य जानकारी दी गई है कि क्रमोन्नति की कार्रवाई प्रचलन में है. सतना जिले में पदस्थ वरिष्ठ अध्यापकों की सेवा अगस्त 2013 में 12 वर्ष पूर्ण हो गई है बल्कि 3 वर्ष अधिक भी हो गई है. इस प्रकार 12+3= 15 हो गये हैं किन्तु आज दिनांक तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई है. माननीय मंत्रीजी गलत जानकारी देने वाले अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करेंगे?

श्री दीपक जोशी--अध्यक्ष महोदय, चूंकि अध्यापक संवर्ग की नियुक्ति निकायों द्वारा की जाती है. इस कारण से निकायों की व्यवस्था में थोड़ा सा विलंब होने के कारण यह समय पर नहीं हो पाया. हमने निकायों को लिख दिया है कि शीघ्रातिशीघ्र करने का प्रयास करें.

श्रीमती ऊषा चौधरी--अध्यक्ष महोदय, मेरा दूसरा प्रश्न यह है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पदस्थ स्थापना लिपिक अंजनी तिवारी जो अधिकारियों को गुमराह करके, क्रमोन्नति नहीं होने देने के लिए शासन के आदेश को गलत ढंग से समझा कर, उलझाने का काम किया क्या ऐसे लापरवाह लिपिक को निलंबित किया जायेगा?

श्री दीपक जोशी--अध्यक्ष महोदय,जैसा मैंने पहले कहा कि यह निकाय की व्यवस्था होती है. लेकिन फिर माननीय सदस्या ने जिस लिपिक के बारे में कहा है, वह हमको पेपर उपलब्ध करा दे, हम जांच करवा लेंगे.

श्रीमती ऊषा चौधरी--अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्रीजी से मैं पूछना चाहती हूं कि प्रदेश के कई जिलों में जैसे होशंगाबाद,धार,राजगढ़,नरसिंहपुर जिले में क्रमोन्नति के आदेश जारी हो चुके हैं लेकिन सतना जिले में 2001-02 और 2003 के शिक्षकों की पदोन्नति नहीं हुई. जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जो कटनी जिले के हैं, सतना जिले में पदस्थ हैं, वे कटनी जिले में यह काम करके आये हैं

अध्यक्ष महोदय--आपके प्रश्न का समाधान भी कर दिया. आपकी मांग भी मान ली.(व्यवधान)

श्रीमती ऊषा चौधरी--अध्यक्ष महोदय, गलत जानकारी देने वाले अधिकारी के संबंध में मंत्रीजी ने कोई आश्वासन नहीं दिया है. (व्यवधान)

प्रश्न क्रमांक--13 (अनुपस्थित)

अध्यक्ष महोदय--प्रश्न क्रमांक 14 श्री यशपाल सिंह सिसोदिया...

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया--(श्री मुरलीधर पाटीदार,सदस्य के खड़े होकर बोलने पर) पाटीदार जी मूल प्रश्नकर्ता को तो प्रश्न करने दो. आप तो विषय विशेषज्ञ हो लेकिन मूल प्रश्न करने वाले को पूछ लेने दो. आप सप्लीमेंट्री की अनुमति मांग लेना.

 

अध्‍यापक संवर्ग की पदोन्‍नतियां

 

14. ( *क्र. 6004 ) श्री यशपालसिंह सिसौदिया : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मंदसौर जिले में कितने ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में 1 जनवरी, 2011 के पश्‍चात किस-किस दिनांक को जिला पंचायत एवं नगरीय निकायों द्वारा अध्‍यापक संवर्ग की पदोन्‍नति किस अधिकारी द्वारा की गई है? (ख) क्‍या अध्‍यापकों की पदोन्‍नति हर 6 माह में की जाना आवश्‍यक है? यदि हाँ, तो इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय एवं विभाग द्वारा कब-कब दिशा-निर्देश जारी किये गये? दिनांकवार जानकारी देवें। (ग) क्‍या कुछ जिलों में अध्‍यापकों की पदोन्‍नतियां समय पर हो रही हैं तथा कुछ में 3 से 4 वर्ष के बावजूद भी पदोन्‍नति प्रक्रिया शुरू भी नहीं हुई है, जिससे अध्‍यापकों को अपनी वरिष्‍ठता का नुकसान भुगतना पड़ रहा है? इसके लिए कौन जिम्‍मेदार है? (घ) रतलाम मंदसौर जिले में ऐसे कितने अध्‍यापक हैं, जिनकी अर्हता एवं योग्‍यता के पूर्ण होने के बाद एवं पद होने के बावजूद भी पदोन्‍नतियाँ गत दो वर्षों से नहीं मिली हैं?

 

स्कूल शिक्षा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-एक अनुसार(ख) जी नहीं। म.प्र. शासन, सामान्य प्रशासन विभाग के ज्ञाप दिनांक 24.04.13 एवं 12.05.14 के अनुसार प्रत्येक वर्ष में दो बार पदोन्नति समिति की बैठक आयोजित करने के निर्देश हैं। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-दो अनुसार(ग) पदोन्नति एक सतत् प्रक्रिया है। पदों की उपलब्धता, वरिष्ठता, निर्धारित योग्यता, पात्रता के आधार पर पदोन्नति का प्रावधान है। शेषांश अध्यापक संवर्ग स्थानीय निकाय के अधीन एवं नियंत्रण में है। ये पद स्थानीय निकाय स्तरीय होते हैं। निकाय अंतर्गत पदोन्नति होने से वरिष्ठता प्रभावित नहीं होती है। अतः शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) रतलाम जिले में ऐसे कोई अध्यापक नहीं हैं, जिन्हें पात्रता होने के बावजूद पदोन्नत नहीं किया गया। मन्दसौर जिले में अध्यापक से वरिष्ठ अध्यापक (विषयमान) के पद पर पदोन्नति की कार्यवाही प्रचलन में है। ग्रामीण क्षेत्र मन्दसौर जिलान्तर्गत ग्रामीण निकाय जिला पंचायत मन्दसौर क्षेत्रान्तर्गत कार्यरत 1110 अध्यापक में से 634 अध्यापक स्नातकोत्तर उत्तीर्ण होकर पदोन्नति हेतु संबंधित विषय में पात्रताधारी हैं। वर्ष 2015 में पदोन्नति अंतर्गत उपलब्ध 118 पदों पर विषयमान से पदोन्नति किये जाने हेतु दिनांक 01.04.15 की स्थिति में अंतरिम पदक्रम सूची दिनांक 12.10.15 के द्वारा जारी की जाकर दावे आपत्ति उपरान्त अंतिम पदक्रम सूची जारी करने की कार्यवाही प्रचलन में है। नगरीय क्षेत्र अंतर्गत नगर पालिका मन्दसौर में रिक्त 10 पदों पर पदोन्नति की कार्यवाही पूर्ण की जाकर काउंसलिंग दिनांक 08.03.16 को संपन्न होगी। नगर पालिका सुवासरा में 07 पदों पर पदोन्नति हेतु प्रक्रिया प्रचलन में है। नगर पंचायत नगरी, सीतामऊ, शामगढ़, गरोठ, भानपुरा एवं पिपल्यिा मण्डी में पदोन्नति हेतु पद रिक्त नहीं है।

 

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया- अध्यक्ष महोदय, श्रीमती ऊषा चौधरी जी का जो प्रश्न था, कमोबेश उसी से मिलता जुलता मेरा भी प्रश्न है. अध्यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहूंगा, यह बात ठीक है कि माननीय मंत्री जी का अभी अभी मैंने अध्यापक संवर्ग की पदोन्नति को लेकर उत्तर सुना है. माननीय मंत्री जी ने इस बात को कहा है कि स्थानीय निकाय और जिला पंचायत, इनकी पदोन्नति की प्रक्रिया को पूरी करते हैं क्योंकि नियोक्ताकर्ता वही है. अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहूंगा कि जब निकायों और पंचायतों को उनकी पदोन्नति करने के अधिकार हैं. वे समीक्षा करते हैं और उनकी बैठकों को आहुत करने का उनको अधिकार है. सामान्य प्रशासन विभाग के इसमें स्पष्ट निर्देश हैं कि वर्ष में 2 बार बैठकें होंगी, जिनका पालन नहीं होता है. यह परिशिष्ट में सामान्य प्रशासन विभाग ने स्वयं ने इन्हीं मामलों को लेकर स्वीकार किया है. उन्होंने यह भी तय किया है कि सामान्यतः जनवरी-फरवरी में तथा अगस्त-सितम्बर में पदोन्नतियों को लेकर आवश्यक रूप से बैठकें आयोजित करना पड़ेगी. अध्यक्ष महोदय, दूसरा दिनांक 12 मई, 2014 का एक पत्र परिशिष्ट से में मुझे जानकारी में आया है. यह सामान्य प्रशासन विभाग ने लिखा है और यह स्पष्ट किया है कि समय पर बैठकें नहीं होने के कारण से पदोन्नतियों का लाभ कर्मचारियों को नहीं मिलता है. कई बार कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति हो जाती है और उसकी पदोन्नति भी नहीं होती है. कुल मिलाकर यह गंभीर मामला है. आपकी तरफ से निर्देश तो जाते हैं लेकिन स्थानीय निकाय और जिला पंचायतें इसका पालन नहीं करते हैं.

अध्यक्ष महोदय - आप प्रश्न करें. इसमें इतनी लंबी भूमिका मत बनाइए.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया- अध्यक्ष महोदय, मैं प्रश्न पर ही आ रहा हूं. सामान्य प्रशासन विभाग स्थानीय निकाय पर ढोलता है और स्थानीय निकाय इंतजार करता रहता है, बैठकें नहीं करता है. मैं सिर्फ यह जानना चाहूंगा क्योंकि यह मेरे विधान सभा क्षेत्र का विशेष इसमें मामला है, रतलाम में जब समय पर पदोन्नतियां हो सकती हैं तो मंदसौर जिले में 1110 अध्यापकों में से 634 पात्रताधारी हैं, इनमें 118 की सूची जारी नहीं हो पा रही है, वह प्रचलन में है. अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहूंगा कि यह सूची कब तक जारी हो जाएगी? साथ ही अंतरिम पदक्रम सूची को दिनांक 12.10.15 को जारी किये हुए 5 माह हो गये हैं. यह अभी भी मामले लटके पड़े हैं. सुवासरा में भी 7 पद अध्यापकों के पदोन्नति के लंबित हैं. मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहूंगा और मैं आश्वासन चाहूंगा कि आप स्थानीय निकायों और जिला पंचायतों को सख्त निर्देश दें कि पदोन्नतियां समय पर हो जाएं, यह कब तक हो जाएगी?

 

राज्यमंत्री, स्कूल शिक्षा (श्री दीपक कैलाश जोशी) - अध्यक्ष महोदय, जैसा कि मैंने पहला बताया कि ये निकायों के पद होने के कारण उनकी तरफ से देर होने के कारण बहुत-सी बार यह कारण उपस्थित होते हैं. लेकिन जैसा माननीय सदस्य ने कहा कि स्पष्ट निर्देश के बावजूद यह काम समय सीमा पर नहीं हो पाते हैं, इसलिए माननीय दोनों सदस्यों की भावना से अवगत होकर हमने प्रयोग के तौर पर इंदौर जिले में परीक्षाओं के बाद जब हमारे पास में समय रहता है, तब एक मंच पर इनको बुलाकर इनकी समस्याओं का निराकरण का करने का प्रयास किया था, उसमें काफी हद तक हमें सफलता मिली थी. अब भी इन सब विसंगतियों के लिए अलग-अलग हमारे शिक्षण साथियों की पदोन्नति, क्रमोन्नति में कहीं देरी होती है, इनको एक मंच पर बुलाकर इनकी व्यवस्थाओं को हम शॉर्ट आउट करेंगे, उसके बाद 15 दिवस के अंदर इनका निराकरण करने का प्रयास करेंगे. माननीय सदस्य की मंदसौर नगर पालिका में 10 पद थे, उनके विरुद्ध हमने 9 पदों में पदोन्नति दे दी है.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया- अध्यक्ष महोदय, एक मेरा निवेदन है कि आप प्रभारी मंत्री जी हैं और हमारे माननीय स्कूल शिक्षा मंत्री जी भी हैं.

अध्यक्ष महोदय - जब उन्होंने आपकी समस्या का निराकरण ही कर दिया तो अब प्रश्न कहां उठता है?

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया- अध्यक्ष महोदय, अभी निराकरण नहीं हुआ है. मैं फिर कह रहा हूं कि निराकरण नहीं हुआ है.

अध्यक्ष महोदय - वह समय-सीमा दे रहे हैं. श्री मुरलीधर पाटीदार..

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया- अध्यक्ष महोदय, नगरपालिका मंदसौर ने अभी काउंसलिंग की है.

अध्यक्ष महोदय - उन्होंने कह दिया कि कर देंगे. अब इसके बाद क्या रह गया?

श्री दीपक कैलाश जोशी - अध्यक्ष महोदय, 10 में से 9 को पदोन्नति दे दी गई है.

(कई माननीय सदस्यों के एक साथ खड़े होकर बोलने पर)

अध्यक्ष महोदय -- मुरलीधर पाटीदार जी के अलावा किसी का नहीं लिखा जायेगा.

श्री प्रदीप अग्रवाल -- ( X X X )

श्री रणजीत सिंह गुणवान -- ( X X X )

श्री मुरलीधर पाटीदार -- अध्यक्ष महोदय मैं मंत्री जी से पूछना चाहता हूंकि वरिष्ठ अध्यापक के एप्वाइंटमेंट हुए 21 वर्ष हुए हैं अभी तक विभाग ने उनकी पदोन्नति के नियम ही नहीं बनाये हैं. करेगा या नहीं करेगा विभाग उनको हाई स्कूल के पद पर पदोन्नति.

अध्यक्ष महोदय -- यदि इससे उद्भुत नहीं हो रहा है आप चाहें तो बता दें.

श्री दीपक जोशी -- अध्यक्ष महोदय यह इसमें सम्मिलित नहीं है लेकिन फिर भी चूंकि सरकार संवेदनशील है. अ भी अध्यापक साथियों को 6वां वेतनमान देने के लिए हमने राशि उपलब्ध करायी है. यदि इस प्रकार की विसंगतियां होंगी तो इसको भी हम शीघ्रातिशीघ्र दूर करने का माननीय सदस्य को विश्वास दिलाते हैं.

 

म.प्र. राज्‍य वक्‍फ न्‍यायाधिकरण में लंबित प्रकरण

15. ( *क्र. 4984 ) श्री जितेन्‍द्र गेहलोत : क्या श्रम मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म.प्र. राज्‍य वक्‍फ न्‍यायाधिकरण में कितने प्रकरण विगत पाँच वर्ष एवं इससे अधिक समय से लंबित हैं? (ख) वर्ष 2015 तक संपत्ति विवाद के लंबित प्रकरणों की जिलेवार संख्‍या क्‍या है? (ग) वर्ष 2012 से दिसंबर 2015 तक म.प्र. वक्‍फ बोर्ड के कितने प्रकरण लंबित हैं?

श्रम मंत्री ( श्री अंतरसिंह आर्य ) : (क) म.प्र. राज्य वक्फ न्यायाधिकरण में विगत पाँच वर्ष एवं इससे अधिक समय से 60 प्रकरण लंबित हैं। (ख) जिलेवार जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट‍ अनुसार है। (ग) प्रश्नाधीन अवधि में 308 प्रकरण लंबित हैं।

परिशिष्ट - ''चार''

 

श्री जितेन्द्र गेहलोत -- अध्यक्ष महोदय मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि वक्फ बोर्ड समिति के जिस प्रकरण के बारे में पूछा था 5 वर्ष की अवधि के कारण जो 60 प्रकरण हैं जिसमें 308 प्रकण लंबित हैं तो इनके निराकरण के लिए कितने दिन और लगेंगे जो कि 5 वर्ष के अंदर वक्फ बोर्ड समिति का मध्यप्रदेश शासन को काफी नुकसान हो रहा है. मंत्री जी बतायें कि यह प्रकरण कब तक समाप्त हो जायेंगे.

( X X X) ---आदेशानुसार रिकार्ड नहीं किया गया.

श्री अंतरसिंह आर्य --अध्यक्ष महोदय मैं आपके माध्यम से माननीय विधायक को जानकारी देना चाहूंगा क्योंकि यह ट्रिब्यूनल का न्यायालयीन मामला है कब इसका निराकरण हो जाय यह हम नहीं बता पायेंगेच क्योंकि वक्फ बोर्ड के कितने लंबित प्रकरण है उसकी यहां परसदन में जानकारी दी है. अध्यक्ष महोदय न्यायालय का मामला है इसलिए हम यहां पर नहीं बता पायेंगे.

श्री जितेन्द्र गेहलोत -- अध्यक्ष महोदय मैं मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि प्रकरण न्यायालय में चल रहेहैं, न्यायालय में चलने के बाद में मध्यप्रदेश शासन को और वक्फ बोर्ड समिति को करोड़ों रूपये का नुकसान हो रहा है उसकी भरपाई के लिए इन प्रकरणों का जल्दी से जल्दी निराकरण हो तो समिति के जितने भी सदस्य हैं उनको भीलाभ मिल सकेगा.

 

गोड़ गोवारी को अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र जारी किया जाना

16. ( *क्र. 6412 ) पं. रमेश दुबे : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र. आदिम जाति अनुसंधान संस्‍थान भोपाल के द्वारा छिन्‍दवाड़ा जिले में गोड़ की उप जाति गोड़ गोवारी, जिन्‍हें स्‍थानीय बोली में गोड़ेरा अहीर कहा जाता है, के सदस्‍यों को अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र प्रदाय किये जाने हेतु पत्र क्रमांक 1404 दिनांक 06.08.2014 कलेक्‍टर छिन्‍दवाड़ा को प्रेषित किया है? (ख) क्‍या तहसील छिन्‍दवाड़ा, परासिया एवं बिछुआ में गोड़ गोवारी के सदस्‍यों के पूर्व में अनुसूचित‍जनजाति का प्रमाण पत्र जारी किया गया है? शेष तहसीलों में और वर्तमान में उक्‍त तहसीलों में भी अब उक्‍त वर्ग के लोगों को अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र प्रदाय नहीं किया जा रहा है? हाँ तो क्‍यों? कारण स्‍पष्‍ट करें। (ग) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में म.प्र. आदिम जाति अनुसंधान संस्‍थान भोपाल के द्वारा कलेक्‍टर छिन्‍दवाड़ा को स्‍पष्‍ट निर्देश दिये जाने के पश्‍चात भी गुडेरा अहीर जो गोड़ की उप जाति गोड़ गोवारी है, को अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र प्रदाय क्‍यों नहीं किया जा रहा है? (घ) क्‍या शासन उक्‍त को संज्ञान में लेकर इसकी जाँच कराने तथा गुडेरा अहीर जो गोड़ की उपजाति गोड़ गोवारी है, को जाति प्रमाण पत्र जारी किये जाने के आदेश के साथ उन्‍हें जाति प्रमाण पत्र जारी किया जा रहा है या नहीं, इसकी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करेगा? यदि नहीं, तो क्‍यों?

आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) : (क) जी हाँ। (ख) से (घ) सामान्‍य प्रशासन विभाग से संबंधित।

 

पं. रमेश दुबे-- माननीय अध्यक्ष महोदय मेरे प्रश्न क के उत्तरमें माननीय मंत्री जी ने उत्तर दिया है कि जी हां. उसी के तारतम्य में मेरे प्रश्न घ में मैंने जो जाति प्रमाण पत्र जारी किये जा रहे हैं इसकी मानिटरिंग सुनिश्चित की जायेगी या नहीं इस बात का मैंने उल्लेख किया है. जिसके उत्तर में मंत्री जी ने कहा है कि यह सामान्य प्रशासन विभाग देखेगा. मध्यप्रदेश आदिमजाति अनुसंधान संस्थान भोपाल के द्वारा कलेक्टर छिंदवाड़ा को निर्देशित किया गया कि जो आपके जिले में गोड की उपजाति गोड गोवारी जिनको स्थानीय बोली में गोडेरा अहीर कहा जाता है इनके प्रमाण पत्र जारी हो रहे हैं. आदिवासी सहायक आयुक्त ने भी जो आवेदन प्राप्त हुए हैं वह आवेदन भी अनुविभागीय अधिकारी चौरई, छिंदवाड़ा और परासिया को दिया है. वह वर्ष 2014 में दिये गये हैं. मैंने यह बहुत स्पष्ट पूछा है कि इसकी मानिटरिंग सुनिश्चित की जावेगी या नहीं. इस प्रकार का उत्तर देंगे कि सामान्य प्रशासन विभाग देखेगा. मैं चाहता हूं कि जो आवेदन सहायक आयुक्त ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व चौरई, छिंदवाड़ा और परासिया को दिये हैं क्या उसकी मानिटरिंग करके सुनिश्चित किया जायेगा कि उनको अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र मिल सके.

श्री ज्ञान सिंह -- माननीय अध्यक्ष जी मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को अवगत कराना चाहूंगा यह स्पष्ट है कि गोड गोडारी को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल है माननीय सदस्य का जो पूछना है अहीर,अहीर जाति को या जो भाषा से जानी जाती है उनको अनुसूचित जनजाति में लिये जाने का प्रावधान नहीं है. वास्तव में कलेक्टर एसडीएम जो होते हैं वह सामान्य प्रशासन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी होते हैं. हमारा विभाग प्रयास करेगा कि माननीय सदस्य ने जिस तरह की अव्यवस्था की बात वहां पर की है. हमारा आयुक्त, कलेक्टर एसडीएम जो त्रुटियां हुई हैं उसकी बारीकी से जांचकरा लेंगे.

पं. रमेश दुबे -- अध्‍यक्ष महोदय, गुडेरा अहीर उसमें दर्ज है और इसके पहले भी उनको अनुसूचित जनजाति के प्रमाण-पत्र जारी हुए हैं. सहायक आयुक्‍त, आदिवासी ने इस प्रकार के प्रमाण-पत्र दिए हैं. लेकिन दो वर्ष से नहीं बन रहे हैं जबकि इसके पहले उनके अनुसूचित जनजाति के प्रमाण-पत्र बने हैं. गुडेरा अहीर का चूँकि उल्‍लेख है तो उनको अनुसूचित जनजाति के प्रमाण-पत्र मिलने चाहिए, इस प्रकार की विभाग को मॉनिटरिंग करनी चाहिए.

श्री ज्ञान सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, मॉनिटरिंग करा ली जाएगी.

प्रश्‍न संख्‍या - 17 -- (अनुपस्‍थित)

आदिवासी विकास की स्‍थापना अंतर्गत कार्यरत कर्मचारी

18. ( *क्र. 6448 ) डॉ. योगेन्‍द्र निर्मल : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बालाघाट जिले में सहायक आयुक्‍त आदिवासी विकास की स्‍थापना अंतर्गत कार्यालय एवं संस्‍थाओं में ऐसे कौन-कौन कर्मचारी हैं, जिनका वेतन अन्‍यत्र किस-किस कार्यालयों में आहरण किया जा रहा है और कब से तिथि बतावें? (ख) प्रश्‍नांश (क) में बताये गये कर्मचारियों को संलग्‍न रखने संबंधी शासन के आदेश बतावें? यदि शासन आदेश नहीं हैं, तो किस आधार पर रखा गया? अनियमित भुगतान के लिए दोषी सहायक आयुक्‍त से वसूली की जाकर दण्‍डात्‍मक कार्यवाही की जावेगी? (ग) सहायक आयुक्‍त आदिवासी विकास कार्यालय से किस-किस लेखापाल एवं सहायक ग्रेड-2 का वेतन उ.मा.शा. मद से आहरण किया जा रहा है? उ.मा.शा. के लेखापालों के पद जिला कार्यालय में अधिग्रहण करने के कोई शासन आदेश हैं, तो बतावें? यदि नहीं, तो अनियमित भुगतान की वसूली भुगतान करने वाले दोषी अधिकारी से की जाकर दण्‍डात्‍मक कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक? नहीं तो क्‍यों?

आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) : (क) कोई नहीं। शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ख) उत्‍तरांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) सहायक आयुक्‍त, आदिवासी विकास, बालाघाट स्‍तर पर इस मद से एक लेखापाल का वेतन आहरण किया जा रहा है। पद अधिग्रहण नहीं किये गये हैं। हैड मेंपिंग सहायक आयुक्‍त बालाघाट के डी.डी.ओ. कोड में दर्ज है। शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

डॉ. योगेन्‍द्र निर्मल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं मंत्री जी से पूछना चाहूंगा, मेरे प्रश्‍न (क) के उत्‍तर में आपने ''कोई नहीं'' कहा है जबकि संलग्‍नीकरण के अंतर्गत बहुत सारे छात्रावासों में उच्‍च शिक्षा के लोगों को लगाया गया है. क्‍या मंत्री जी इसकी जांच कराएंगे ? और जबकि ''कोई नहीं'' बोलने के बाद (ग) में आपने स्‍वीकार किया है कि संलग्‍नीकरण किया गया है और उसका वेतन आहरण किया जाता है. शासन के नियम हैं कि इसकी अनुमति लेना चाहिए, किसी अधिकारी को इसकी पात्रता भी नहीं है कि वह बगैर शासन की अनुमति के किसी का संलग्‍नीकरण करे जबकि संविदा अधीक्षक एवं सहायक शिक्षकों को छात्रावास में लगाया जाना चाहिए, इसके बावजूद उच्‍च श्रेणी शिक्षकों को और अन्‍यत्र विभाग के लोगों को वहां पदस्‍थ किया गया है. क्‍या माननीय मंत्री जी इसकी जांच कराएंगे ? और दोषी अधिकारी पर कोई कार्यवाही करेंगे ?

श्री ज्ञान सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय जी, मैं स्‍पष्‍ट करना चाहूंगा कि विभाग में अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कमी है और यह कई वर्षों से है लेकिन विभाग की जिम्‍मेदारी का निर्वहन करने के उद्देश्‍य से विशेषकर छात्रावासों में समय-समय पर इस तरह की व्‍यवस्‍था की जाती है. अगर माननीय सदस्‍य की जानकारी में ऐसी कोई बात है कि जिन्‍हें वहां पर पदस्‍थ नहीं होना चाहिए उन्‍हें पदस्‍थ कर दिया गया है तो अवश्‍य उनकी उपस्‍थिति में जांच करा दी जाएगी.

डॉ. योगेन्‍द्र निर्मल -- धन्‍यवाद मंत्री जी.

भाण्‍डेर विधान सभा क्षेत्रांतर्गत संचालित नल-जल योजनाएं

19. ( *क्र. 5622 ) श्री घनश्‍याम पिरोनियाँ : क्या पशुपालन मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या शासन द्वारा ग्रामीणों से राशि जमा कराकर नल-जल योजनायें बनाने का प्रावधान है? यदि हाँ, तो ग्राम सिकौआ के ग्रामवासियों से राशि जमा कराने के बाद अभी तक नल-जल योजना क्‍यों नहीं बनाई गई है और इसके लिए कौन जिम्‍मेदार है? य‍ह योजना कब तक पूर्ण होगी? (ख) क्‍या भाण्‍डेर विधान सभा क्षेत्र में मुख्‍यमंत्री संकल्‍प पेयजल योजना एवं बुन्‍देलखण्‍ड पैकेज के अंतर्गत नल-जल योजनायें संचालित हैं? (ग) यदि प्रश्‍नांश (ख) हाँ तो कौन-कौन सी योजनाएं चालू हैं एवं कितनी योजनायें ग्राम पंचायतों को हस्‍तांतरित हैं और शेष योजनायें कब तक पूर्ण कर ग्राम पंचायतों को हस्‍तांतरित कर दी जावेंगी? (घ) प्रश्‍नांश (ख) एवं (ग) की अहस्‍तांतरित योजनायों के लिए कौन जिम्‍मेदार है और उनके विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई है?

पशुपालन मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) जी हाँ। नल-जल योजना रूपये 20.55 लाख लागत की तैयार की गई है। योजना की स्वीकृति हेतु ग्राम पंचायत का ठहराव एवं प्रस्ताव व योजना से हितग्राहियों द्वारा नल कनेक्शन लेने की सहमति प्रस्तुत न करने एवं नवीन नल-जल योजनाओं की स्वीकृति पर प्रतिबंध होने के कारण। शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता। (ख) जी हाँ। (ग) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (घ) योजनाएं विभिन्न कारणों से अहस्तांतरित हैं, कोई जिम्मेवार नहीं है। कार्यवाही का प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''छ:''

श्री घनश्‍याम पिरोनियां -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने माननीय मंत्री महोदया से मेरी भाण्‍डेर विधान सभा क्षेत्र में संचालित नल-जल योजनाओं के बारे में जानना चाहा था. मेरे प्रश्‍न (क) के उत्‍तर में माननीय मंत्री जी ने कहा है कि नल-जल योजना 20.55 लाख रुपये की लागत से तैयार की गई है और योजना की स्‍वीकृति हेतु ग्राम पंचायत का ठहराव एवं प्रस्‍ताव व योजना से हितग्राहियों द्वारा नल कनेक्‍शन लेने की सहमति प्रस्‍तुत न करते एवं नवीन नल-जल योजनाओं की स्‍वीकृति पर प्रतिबंध होने के कारण प्रारंभ नहीं हो पाई है तो मेरा निवेदन है कि वर्तमान में अभी भी अनेक प्रकार के ऐसे शुभारंभ हुए हैं और यह गलत जानकारी दी जा रही है तो मंत्री जी कृपया इसका जवाब दें और माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दूसरी बात यह है कि अतारांकित प्रश्‍न में भी मेरा इसी विषय से संबंधित प्रश्‍न है तो उसमें भी मैं माननीय मंत्री जी से चाहूंगा कि जो उन्‍होंने मुझे जवाब भेजा है कि गोंदन, उड़िना, पंडोखर, दुर्सड़ा, पिररूआकलां, भर्रोली और बरका आदि में ये कार्ययोजनाएं वर्तमान में बंद बताई गई हैं और बंद के कारणों में उन्‍होंने एक जगह विद्युत अवरोध बताया है और बाकी जगह पाइप-लाइन एवं विद्युत अवरोध, पाइप-लाइन प्रगतिरत, कम जल आवक एवं पाइप-लाइन प्रगतिरत आदि बताया है, अब यह समझ में नहीं आ रहा है कि वर्ष 2002 में योजनाएं स्‍वीकृत हो रही हैं और अभी वर्ष 2016 चल रहा है और अभी भी हम पाइप-लाइन नहीं डाल पा रहे हैं. तो ठेकेदारों को प्रोत्‍साहित करने के लिए टंकियां बनाई जा रही हैं क्‍या ? मेरा यह भी निवेदन है कि ऐसे अधिकारी जो समय पर काम पूरा कराने में सक्षम नहीं हैं और ऐसे ठेकेदार जो काम नहीं कर रहे हैं क्‍या इनके खिलाफ माननीय मंत्री महोदया कुछ ठोस कदम उठाते हुए दिशा देने का काम करेंगी, जिससे आगे मई के महीने में जो पानी की समस्‍या आने वाली है उसका निराकरण हो सके ?

सुश्री कुसुम सिंह महदेले-- अध्यक्ष महोदय, स्पष्ट लिखा है कि ग्रामवासी सहमति दे देंगे, वह नल कनेक्शन लेंगे तो हम चालू कर देंगे.

श्री घनश्याम पिरोनियां-- अध्यक्ष महोदय, यह तो आपने भेज दिया था लेकिन मेरा निवेदन है कि यह जो मैंने आपको दूसरा पत्र पढ़ के सुनाया है,इतनी सारी हमारी नल जल योजनाएँ बंद हैं और वर्षों से बंद हैं. इसमे समय सीमा लिखी हुई है, सब दिया है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है और इसके खिलाफ आप कोई कार्यवाही करेंगे या नहीं?

सुश्री कुसुम सिंह महदेले-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं स्पष्ट जवाब दे रही हूँ कि भाण्डेर विधानसभा में  कुल स्थापित हैण्डपम्प 1955 हैं, चालू 1837 हैं, 118 बंद हैं, साधारण खराबी से 18 और असुधार योग्य 110 हैं और जल स्तर गिरने से 11 बंद हैं. 55 लीटर के हिसाब से हम पूरे भाण्डेर में पानी दे रहे हैं. ऐसा कहीं कोई हाहाकार या संकट नहीं है. मैंने पूरी जानकारी दे दी है.

श्री घनश्याम पिरोनियाँ-- अध्यक्ष महोदय, मैं बिलकुल विधानसभा क्षेत्र में रहता हूँ. यह जो अधिकारी कह रहे हैं कि हाहाकार नहीं है और पानी की समस्या नहीं है. मैं निवेदन करुंगा कि दीदी किसी को वहां पर भिजवा दें, देख लें कि वहां टंकियां चालू हैं कि नहीं. आप कहेंगी तो मैं अगली बार प्रश्न उठाना बंद कर दूंगा.मेरा निवेदन है कि केवल एक बार दिखवा तो लें.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले--अध्यक्ष महोदय,वैसे हमारी तरफ से कोई लापरवाही नहीं है फिर भी यदि विधायक जी कहते हैं तो हम अधिकारी को भिजवा देंगे.

 

कसरावद विधानसभा क्षेत्रांतर्गत लाभांवित हितग्राही

20. ( *क्र. 3164 ) श्री सचिन यादव : क्या पशुपालन मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) पशुपालन विभाग द्वारा मध्‍य प्रदेश में राज्‍य योजनाएं एवं केन्‍द्र प्रवर्तित योजनाओं के अंतर्गत विगत 03 वर्षों से कुल कितनी-कितनी राशि प्राप्‍त हुई? योजनावार बतायें तथा जिला पश्चिम निमाड़ में कितनी-कितनी राशि खर्च की गई? उक्‍त राशि खर्च के संबंध में कितनी-कितनी अनियमितताओं की शिकायतें प्राप्‍त हुईं और उस पर प्रश्‍न दिनांक तक क्‍या कार्यवाही की गई? (ख) प्रश्‍नांश (क) में दर्शित योजनाओं के अंतर्गत कसरावद विधानसभा क्षेत्र में कौन-कौन सी हितग्राहीमूलक योजनाएं संचालित हैं और उनके उद्देश्‍यों के तहत कितने-कितने हितग्राहियों को लाभांवित किया जा रहा है? हितग्राहीवार एवं ग्रामवार जानकारी दें।

पशुपालन मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' एवं '''' अनुसार है। उक्त राशि खर्च के संबंध में अनियमितताओं की कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' एवं '''' अनुसार है।

श्री सचिन यादव--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा माननीय मंत्री जी से प्रश्न है कि मेरे विधानसभा क्षेत्र में पशु चिकित्सकों की और स्टाफ की भारी कमी है और मेरे विधानसभा क्षेत्र में पशुपालनकर्ता बार बार शिकायत करते हैं, चिकित्सकों के अभाव में जो जानवर बीमार होते हैं उनकी मृत्यु हो जाती है जिसमें दुधारू गाय और बैल भी शामिल हैं, जो काफी महंगे हैं. मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूँ कि आपके विभाग की शासन की जो योजनाएँ संचालित हो रही हैं उनका लाभ लोगों तक पहुंचाने के लिए और जो चिकित्सकों की कमी है जिसके कारण पशुपालकर्ताओं को समस्याएँ आ रही हैं, क्या इनको दूर करने का प्रयास करेंगे?

सुश्री कुसुम सिंह महदेले-- अध्यक्ष महोदय, किस स्थान पर पशु चिकित्सक नहीं हैं, माननीय सदस्य बता दें.

अध्यक्ष महोदय-- आप उनको सूची उपलब्ध करा दें.

श्री सचिन यादव-- अध्यक्ष महोदय,सूची हम उपलब्ध करा देंगे.

 

कटनी जिले में समितियों का गठन

21. ( *क्र. 6378 ) श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या राज्‍य केन्‍द्र के पत्र क्रमांक-राशि के/03/2016/368 भोपाल, दिनांक 14.01.2016 के अनुसार जिला एवं विकासखण्‍ड स्‍तर पर गठित जिला इकाई विकासखण्‍ड इकाई एवं अन्‍य समितियों की नियमित बैठक आयोजित करने के प्रावधान हैं? (ख) क्‍या प्रश्‍नांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में कटनी जिले में समितियों का गठन किया गया है? यदि हाँ, तो इनमें कौन-कौन सी समितियां हैं एवं वर्तमान तक उनका पूर्ण विवरण देवें? (ग) क्‍या उक्‍त समितियों की बैठकें समय-सीमा में आयोजित करने के संबंध में स्‍कूल शिक्षा मंत्री म.प्र. शासन द्वारा पत्र क्र. 6381, भोपाल, दिनांक 22.12.2015 द्वारा अधिकारियों को निर्देशित किया गया था? (घ) क्‍या प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में कटनी जिले में मान. मंत्री महोदय के समय-सीमा के निर्देशों का पालन हुआ? यदि नहीं, तो स्‍वयं शिक्षा मंत्री महोदय एवं शासन के निर्देशों का पालन न करने वाले कटनी जिले के संबंधित अधिकारियों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही कब तक की जावेगी? यदि नहीं, तो क्‍यों?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ। (ख) जी हाँ। सर्व शिक्षा अभियान अंतर्गत जिले में जिला इकाई, जिला क्रय समिति, जिला नियुक्ति समिति, जिला अनुदान समिति, जिला निर्माण कार्य समितियां होती हैं, जिसमें पदेन शासकीय एवं मनोनीत अशासकीय सदस्‍यों का समावेश होता है। अशासकीय सदस्‍यों के मनोनयन की प्रक्रिया प्रचलन में है। (ग) जी हाँ। (घ) उत्‍तरांश '' के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

श्री संदीप जायसवाल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि आपके द्वारा जो जवाब दिया गया है उसमें अशासकीय सदस्यों का समावेश होता है समितियों में, मनोनयन की प्रक्रिया प्रचलन में है. क्या अशासकीय सदस्यों के मनोनयन के बिना समिति की बैठक संभावित हो सकती हैं. अगर नहीं तो अशासकीय सदस्यों के मनोनयन की प्रक्रिया कब तक पूरी हो जाएगी? उसकी कोई निश्चित समयावधि बता दें.

राज्य मंत्री, स्कूल शिक्षा(श्री दीपक जोशी)- अध्यक्ष महोदय, चूंकि शासकीय कार्य आवश्यक कार्य होते हैं इसलिए शासन के नियमानुसार मनोनीत सदस्य के बिना भी बैठक की जा सकती है और अशासकीय सदस्यों का मनोनयन प्रभारी मंत्री के द्वारा किया जाता है जिलाध्यक्ष के माध्यम से. प्रभारी मंत्री जैसे ही अनुमोदन करके जिलाध्यक्ष को भेजेंगे, हम इनको जोड़ लेंगे.

श्रीमती अर्चना चिटनिस-- माननीय मंत्री जी, आप कृपया जिलाध्यक्ष को क्लीयर कर दें कि जिलाध्यक्ष मतलब कौन तो बेहतर रहेगा?

श्री दीपक जोशी-- जिलाध्यक्ष मतलब संबंधित जिले के कलेक्टर महोदय.

 

अनु. ज.जा. एवं परंपरागत वन निवासी अधिनियम का क्रियान्‍वयन

22. ( *क्र. 5732 ) श्री मधु भगत : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बालाघाट जिले के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति एवं परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्‍यता) अधिनियम 2006 तथा नियम 2008 के क्रियान्‍वयन हेतु क्‍या-क्‍या, कार्यवाही कब-कब की गई? (ख) परसवाड़ा विधान सभा क्षेत्र के कितने प्रकरण उक्‍त अधिनियम/नियम के मापदण्‍डों के अनुसार बनाये गये हैं, कितने बनाये जाना शेष हैं? ग्रामवार बतायें। (ग) क्रियान्‍वयन में हो रहे विलंब का क्‍या कारण है? क्‍या शासन स्‍तर/आयुक्‍त स्‍तर/विभागाध्‍यक्ष स्‍तर पर विलंब के कारण आपत्तियों, कठिनाइयों के निराकरण, हेतु चर्चा/बैठक कब-कब की गई? यदि नहीं, तो क्‍यों? (घ) क्‍या विभाग द्वारा मामले वन विभाग को भेजे गये? तिथि सहित बतायें। क्‍या वन विभाग द्वारा प्रकरणों को निराकृत करने के उद्देश्‍य से कोई कार्यवाही की? यदि हाँ, तो ब्‍यौरा दें?

आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र-एक अनुसार है। (ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र-दो अनुसार है। (ग) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र-तीन अनुसार है। (घ) जी नहीं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''सात''

श्री संजय उइके-- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूँ कि प्रश्न के उत्तर में वन अधिकार अधिनियम के तहत् पट्टा आवंटन के दावा प्रकरण में परसवाड़ा विधानसभा में 122 प्रकरण और बालाघाट जिले में 524 प्रकरण शेष हैं, इसका क्या कारण हैं और कब तक इसका निराकरण कर दिया जाएगा?

श्री ज्ञान सिंह-- माननीय अध्यक्ष जी, वन अधिकार से संबंधित पात्र जनजाति परिवारों को, जनजाति व्यक्ति को समय पर वन अधिकार के पट्टे प्राप्त हो सकें, इसके लिए माननीय मुख्यमंत्री जी के स्पष्ट निर्देश हैं. मैं आपके माध्यम से उनको आश्वस्त करना चाहूंगा कि जून या जुलाई के अंतराल में पूरे प्रदेश में ऐसे जो प्रकरण हैं उन सब का निराकरण कर दिया जाएगा.

भिण्‍ड जिले में परीक्षा केन्‍द्रों का निर्धारण

23. ( *क्र. 4088 ) श्री नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्‍यप्रदेश शासन द्वारा कक्षा 10वीं12वीं हेतु वर्ष 2015-16 में शासकीय हाईस्‍कूल हवलदारसिंह का पुरा व शासकीय कन्‍या हाईस्‍कूल नुन्‍हाटा विकासखण्‍ड भिण्‍ड में परीक्षा केन्‍द्र बनाने के लिए शासन से क्‍या मापदण्‍ड निर्धारित किए गए? (ख) प्रश्‍नांश (क) में वर्णित विद्यालय देहात कोतवाली भिण्‍ड, दूरी 6 कि.मी. और थाना उमरी भिण्‍ड से करीब 5 कि.मी. दूरी है? शासकीय हाईस्‍कूल हवलदार सिंह का पुरा का परीक्षा केन्‍द्र अशासकीय विद्यालय के.व्‍ही.एम. ग्‍वालियर रोड भिण्‍ड, दूरी 17 कि.मी. पर परीक्षा केन्‍द्र रखने की क्‍या आवश्‍यकता थी? परीक्षा केन्‍द्र को बदलने के क्‍या कारण हैं? (ग) प्रश्‍नांश (क) में छात्राओं की संख्‍या 59 और 55 है, परीक्षा केन्‍द्र बदलने से असुरक्षित, आवागमन भिण्‍ड शहर से करीब तीन कि.मी. दूर रखने के लिए जिला योजना समिति से अनुमोदन कराया गया? यदि नहीं, तो क्‍यों? परिवर्तन करने के क्‍या कारण हैं? (घ) प्रश्‍नांश (क) में भिण्‍ड विधान सभा क्षेत्र में शासकीय विद्यालय से अशासकीय विद्यालय में परीक्षा केन्‍द्र बनाने के क्‍या कारण हैं? निर्धारित परीक्षा केन्‍द्र में से कितने परीक्षा केन्‍द्र बदले/परिवर्तन/परिवर्धन किए गए? क्‍या कारण हैं?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) परीक्षा केन्द्र निर्धारण में मण्डल द्वारा निर्धारित मापदण्डों का पालन किया गया है एवं कानून व्यवस्था को दृष्टिगत रखते हुये किया गया है। परीक्षा केन्द्र निर्धारण में मापदण्ड के बिन्दु क्रमांक-05 का पालन किया गया है। (ग) मण्डल द्वारा निर्धारित मापदण्डों में छात्राओं के लिये पृथक से कोई निर्देश नहीं हैं। म.प्र.शासन, स्कूल शिक्षा विभाग, मंत्रालय, वल्लभ भवन के निर्देश क्रमांक-1139/1151/2015/20-3, भोपाल, दिनांक 24.7.2015 द्वारा निर्धारित मापदण्ड अनुसार केन्द्र निर्धारण हेतु गठित चयन समिति द्वारा परीक्षा केन्द्रों का निर्धारण किया गया। केन्द्र निर्धारण का कार्य समय-सीमा में संपादित कराया जाना था, तत्समय जिला योजना समिति की बैठक प्रस्तावित नहीं थी। (घ) मण्डल द्वारा निर्धारित मापदण्डों के बिन्दु क्रमांक-15 के अनुसार परीक्षा केन्द्र निर्धारित किये गये हैं। निर्धारण के पश्चात किसी भी केन्द्र में परिवर्तन/परिवर्धन नहीं कराया गया है।

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, सबसे पहले तो मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूँ.

अध्यक्ष महोदय-- कृपया संक्षेप में.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा शिक्षा से संबंधित प्रश्न था. मध्यप्रदेश शासन द्वारा 10 वीं एवं 12 वीं की परीक्षा हेतु 2015-16 में शासकीय हाई स्कूल हवलदार सिंह का पुरा, शासकीय कन्या हाई स्कूल नुन्हाटा, विकासखंड भिण्ड में परीक्षा केन्द्र बनाने के लिए शासन के क्या मापदंड थे? अध्यक्ष महोदय, उन्होंने जो जानकारी दी है, क्योंकि भिण्ड जिले में सेंटर बनाने में बहुत बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ हुई हैं और इसी कारण 20 हजार छात्र परीक्षा से वंचित हो गए हैं. जो इन्होंने दूसरी जानकारी दी है उसमें बताया गया है कि परीक्षा केन्द्र निर्धारण में मण्डल द्वारा निर्धारित मापदंडों का पालन किया गया है एवं कानून व्यवस्था को दृष्टिगत रखते हुए किया गया है. परीक्षा केन्द्र निर्धारण में मापदंड के बिन्दु क्रमांक-05 का पालन किया गया है. अध्यक्ष महोदय, बिन्दु क्रमांक 05 क्या कह रहा है, जिला शाला के परीक्षा केन्द्र बनाया जाना प्रस्तावित हो. उसमें अध्ययन अनुसार छात्राओं को निकटतम किसी अन्य परीक्षा केन्द्रों में संलग्न किया जाए. अध्यक्ष महोदय, हमारा हवलदार सिंह का पुरा का जो सेंटर बनाया गया, वहीं शासकीय हाई स्कूल नुन्हाटा, जिसकी दूरी 2 किलोमीटर थी, शासकीय हाई स्कूल जामना, जिसकी दूरी 3 किलोमीटर थी, वह सेंटर वहाँ न बनाते हुए, हमारे भिण्ड विधान सभा का सेंटर अटेर क्षेत्र में बनाया गया, दूरी 17 किलोमीटर, इसमें बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ हुई हैं. जो हमारा टेन्गुर अंतिम छोर का गाँव है, आधा हिस्सा उत्तर प्रदेश में पड़ता है और आधा हिस्सा मध्यप्रदेश में पड़ता है. उसका सेंटर, 50 किलोमीटर दूर भिण्ड में बनाया गया है और दूसरा...

अध्यक्ष महोदय-- आप उत्तर तो ले लें. आपका समय ही खतम हो जाएगा, आपके प्रश्न का उत्तर ही नहीं आ पाएगा.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह-- अध्यक्ष महोदय, अब तो चलेगा. आपकी कृपा है. अध्यक्ष महोदय, किसान संस्कार उच्चतर विद्यालय नयागाँव, जिसका सेंटर प्रायवेट में बना दिया. शासकीय स्कूल के सेंटर प्रायवेट में बना दिए गए. जबकि शासकीय स्कूल में बच्चे, बच्चियाँ, गरीब लोग पढ़ते हैं. उनके सेंटर प्रायवेट स्कूल में बनाए गए हैं.

राज्य मंत्री, स्कूल शिक्षा(श्री दीपक जोशी)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, पारदर्शी परीक्षा कराना बोर्ड का पहला उद्देश्य है इसलिए लगातार प्रक्रिया में सुधार की दृष्टि से नवाचार होते रहते हैं और विगत वर्ष भी जो परीक्षाएँ संचालित हुई हैं, उसमें चिन्हित जिले, मैं नाम तो नहीं ले सकता, लेकिन सीमावर्ती जिले, जहाँ पर सामूहिक नकल के बड़ी संख्या में प्रकरण होते थे. विगत परीक्षा में एक भी प्रकरण देखने में नहीं आया क्योंकि व्यवस्था इस प्रकार से परिवर्तित की गई थी कि जिससे पारदर्शिता पूर्वक परीक्षा संपन्न हो सके. फिर भी माननीय सदस्य द्वारा जो प्रश्नांश केन्द्रों के बारे में पूछा गया, वे निर्धारित मापदण्ड के अनुसार ही हैं और इनका मापदंड जिला स्तर की हमारी एक कमेटी होती है, जिसमें माननीय कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, प्राचार्य उत्कृष्ठ विद्यालय और संभागीय अधिकारी उच्च शिक्षा विभाग, ये लोग बैठ कर तय करते हैं कि किसको सेंटर बनाना, किसको सेंटर नहीं बनाना. इसके बाद जिला योजना समिति से भी इसकी सहमति ली जाती है. लेकिन भिण्ड जिले में तत्समय जिला योजना समिति प्रस्तावित नहीं होने के कारण जिला योजना समिति से इसकी सहमति नहीं ले पाए और इस कारण से शायद सदस्य को कहीं न कहीं संशय रह गया. मैं माननीय सदस्य से यही अनुरोध करता हूँ कि अगली बार इन सेंटर्स के बारे में जब भी सूची आए तो जिला योजना समिति के माध्यम से, चूँकि वे जनप्रतिनिधि हैं, अपनी बात को पूरी कर सकते हैं और जहाँ कहीं विसंगतियाँ हैं, उनको दूर करने का हम प्रयास भी कर सकते हैं.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह-- अध्यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय मंत्री जी बोल रहे हैं, जिला योजना समिति की बैठक हुई थी, जिसमें महाराज सिंह उपाध्याय, जिला पंचायत भिण्ड, द्वारा परीक्षा केन्द्र का अनुमोदन चाहा गया था. लेकिन उसका मना कर दिया गया था. यह कहा गया अनुमोदन की जरूरत ही नहीं है. एक ओर माननीय मंत्री जी कह रहे हैं योजना समिति में आना चाहिए और दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारी कह रहे हैं कि योजना समिति में प्रकरण नहीं आते हैं.

जो कि रिकार्ड में है. दूसरी बात मैं यह कह रहा हूँ कि भिण्ड जिले को पहले डाकुओं के नाम पर कलंकित किया गया और अब नकल के नाम पर कलंकित कर रहे हैं, 20-25 हजार छात्र अनुपस्थित रहे हैं यह किसकी जिम्मेदारी है. अधिकारियों को सस्पेंड करें...(व्यवधान)

श्री सत्यपाल सिंह सिकरवार--माननीय अध्यक्ष महोदय, 20 हजार छात्र-छात्रायें परीक्षा नहीं दे पाये केवल इस कारण कि उनके सेन्टर 50 किलोमीटर दूर बना दिये गए गरीब छात्र-छात्रायें केवल इसलिये सेंटर तक नहीं पहुंच पाये (व्यवधान)

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह--माननीय अध्यक्ष महोदय, पहले संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करना चाहिये.

श्री दीपक जोशी--पहले तो मैं माननीय सदस्य की इस भावना से असहमत हूं जिसमें उन्होंने भिण्ड जिले को चिह्नित करके बात कही. शासन की ऐसी कोई मंशा नहीं रही है और भिण्ड जिला तो हमेशा से देश की सेवा करने वाले सैनिकों की भर्ती करने वाला जिला रहा है इसलिये यह तो हमारे लिये बहुत ही सम्माननीय जिला है. मैंने भिण्ड जिला नहीं कहा मैंने कहा कि भिण्ड जिला सीमावर्ती जिला होने के कारण कहीं-न-कहीं इन परीक्षाओं में दिक्कत आती है उस दिक्कत को दूर करने के लिए हमने यह व्यवस्था की है. यदि इसके बाद भी माननीय सदस्य असंतुष्ट हैं तो वे अगली बार अपनी तरफ से सूची बनाकर दे दें जिसके माध्यम से हम उस काम को कर सकते हैं.

डॉ. गोविन्द सिंह--योजना समिति को अधिकार नहीं है यह मना किया गया है जिला प्रशासन द्वारा (व्यवधान)

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह--माननीय अध्यक्ष महोदय, अगली बार नहीं इस बार क्या कर रहे हैं. (व्यवधान) इसमें बहुत बड़ा घोटाला हुआ है.

अध्यक्ष महोदय--आपकी बात आ गई है. आप मंत्रीजी से मिल लीजिएगा.

( प्रश्नकाल समाप्त)

 

12.02 बजे नियम 267-क के अधीन विषय

अध्यक्ष महोदय--निम्नलिखित माननीय सदस्यों की सूचनायें सदन में पढ़ी हुई मानी जायेंगी--

 

 

11.58 बजे शून्यकाल में उल्लेख

श्री बाला बच्चन--अध्यक्ष महोदय, मैंने शुक्रवार से स्थगन प्रस्ताव दिया हुआ है. प्रदेश के कर्मचारी धरने, आन्दोलन और हड़ताल पर हैं. शासकीय कामकाज हो नहीं रहे हैं आपने अभी तक मेरे स्थगन प्रस्ताव पर विचार नहीं किया है. मैं फिर से इस बात को बोल रहा हूँ कि आप उस पर विचार करें और व्यवस्था दें. संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी अभी भी हड़ताल पर हैं इसके अलावा और भी कर्मचारी हड़ताल पर हैं आन्दोलन कर रहे हैं.

डॉ. गोविन्द सिंह--अभी भी आन्दोलन चल रहा है (व्यवधान) लगातार स्वास्थ्य संविदा कर्मी हड़ताल कर रहे हैं (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--आप बैठ जायें कृपा करके, प्रतिपक्ष के नेता जी बोल रहे हैं (व्यवधान) आप सब लोग खड़े हो गये. अब सिर्फ माननीय बाला बच्चन जी बोलेंगे और कोई नहीं बोलेगा और आपसे एक अनुरोध है बिलकुल संक्षेप में अपनी बात कहें क्योंकि यह कोई बहस का समय नहीं है माननीय मंत्रीजी संक्षेप में उत्तर दे देंगे.

श्री बाला बच्चन--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने आपको शुक्रवार से स्थगन प्रस्ताव दिया हुआ है. संविदा कर्मचारी अभी भी हड़ताल पर हैं अभी भी आंदोलन पर हैं सरकार इसका जवाब क्यों नहीं दे रही है. मैं आपसे यह आग्रह करना चाहता हूँ कि सरकार इस पर जवाब दे इस पर चर्चा हो जिससे की सारी चीजें स्पष्ट हो सकें.

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, सम्मानित नेता प्रतिपक्ष जी ने जो उल्लेख किया है उसमें से अधिकांश संगठनों से कल बात हो गई है बहुउद्देशीय वाले और दूसरे संगठन, पंचायत कर्मियों के संगठन सभी की लगभग हड़ताल समाप्त हो गई है सिर्फ एक संविदा स्वास्थ्य वाले बचे हैं. उनसे भी लगभग सारगर्भित चर्चा हुई है और मैं समझता हूँ आज सभी का समापन हो जायेगा.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री गोपाल भार्गव):- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे विभाग के जो कर्मचारी, पंचायत के सचिव, रोजगार सहायक या जो भी कर्मचारी और संविदा के भी कर्मचारी और मनरेगा के कर्मचारी हड़ताल पर थे, कल रात को उन्‍होंने हड़ताल समाप्‍त कर दी है. उन्‍होंने यह भी कहा है कि जो 20 दिन की हड़ताल हुई है और 20 दिन का जो काम लंबित था उसको हम 20 घण्‍टे में हम आपको निपटाकर देंगे. इससे बड़ी खुशी की क्‍या बात होगी.

(व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय :- श्री तिवारी जी भी बोल रहे हैं,वह रिकार्ड में नहीं आयेगा.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी :- (x x x)

(व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय :- आप सभी लोग बैठ जाईये.

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ नरोत्‍तम मिश्र):- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह घोर आपत्तिजनक है. अखबारों में नाम छपने के लिये कुछ भी कहते रहते हैं. (व्‍यवधान) यह विधायकों का अपमान है, इसको सहन नहीं किया जायेगा. (व्‍यवधान)

 

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी :- (x x x)

अध्‍यक्ष महोदय :- आप कृपा करके बैठ जाईये. तिवारी जी आप कृपा करके मर्यादा में रहे. तिवारी जी आपका कुछ भी रिकार्ड में नहीं आ रहा है. (व्‍यवधान)

श्री सुन्‍दर लाल तिवारी :- (x x x)

(व्‍यवधान)

डॉ नरोत्‍तम मिश्र :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, असम्‍मानित व्‍यक्ति सम्‍मान की बात करते हैं.

.

 

(व्‍यवधान)

 

 

 

 

पत्रों का पटल पर रखा जाना.

 

 

(क) मध्‍यप्रदेश राज्‍य सहकारी बैंक मर्यादित भोपाल का संपरीक्षित वित्‍तीय पत्रक वर्ष 2014-2015,

(ख) मध्‍यप्रदेश राज्‍य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक मर्यादित, भोपाल का संपरीक्षित वित्‍तीय पत्रक वर्ष 2014-15

(ग) मध्‍यप्रदेश राज्‍य पावरलूम बुनकर सहकारी संघ मर्यादित, बुरहानपुर (म.प्र)का

संपरीक्षित वित्‍तीय पत्रक वर्ष 2014-15

 

सहकारिता मंत्री (श्री गोपाल भार्गव):- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मध्‍यप्रदेश सहकारी सोसाइटी (संशोधन) अधिनियम, 2015 (क्रमांक 10 सन् 2015) की धारा 58 की उपधारा (1) (दो) की अपेक्षानुसार -

(क) मध्‍यप्रदेश राज्‍य सहकारी बैंक मर्यादित भोपाल का संपरीक्षित वित्‍तीय पत्रक वर्ष 2014-2015,

(ख) मध्‍यप्रदेश राज्‍य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक मर्यादित, भोपाल का संपरीक्षित वित्‍तीय पत्रक वर्ष 2014-15 तथा

(ग) मध्‍यप्रदेश राज्‍य पावरलूम बुनकर सहकारी संघ मर्यादित, बुरहानपुर (म.प्र) का संपरीक्षित वित्‍तीय पत्रक वर्ष 2014-15 पटल पर रखता हूं.

बहिर्गमन

उप नेता प्रतिपक्ष (श्री बाला बच्‍चन ):- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने एक स्‍थगन प्रस्‍ताव दिया है. स्‍थगन प्रस्‍ताव पर आप चर्चा नहीं करा रहे हैं. कर्मचारी हड़ताल कर रहे हैं. हम हड़ताली कर्मचारियों के समर्थन में सदन से बहिर्गमन करते हैं.

(श्री बाला बच्‍चन,उप नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्‍व में इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यगण द्वारा स्‍थगन प्रस्‍ताव पर चर्चा न कराये जाने के विरोध एवं हड़ताली कर्मचारियों के समर्थन में सदन से बहिर्गन किया गया. )

गृह मंत्री (श्री बाबूलाल गौर):- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे अनुरोध करना है कि अखबारों में कोई समाचार छपे, तो उसके आधार पर यहां कोई प्रश्‍न नहीं उठाया जा सकता है. अखबारों में मुख्‍यमंत्री के बारे में कहा या विधायकों की तनख्‍वाह नहीं बढ़ायी, इसके आधार पर क्‍या चर्चा हो सकती है. उसको कार्यवाही से निकाला जाये.

अध्‍यक्ष महोदय:- अब उनको कैसे समझायें,उसका उपाय भी आप बता दें. श्री सुन्‍दर लाल तिवारी का कार्यवाही में लिखा ही नहीं गया है. माननीय मंत्री जी उसको निकालने की बात क्‍या उसको एन्‍टर ही नहीं होने दिया कार्यवाही में.

वन मंत्री (डॉ. गौरीशंकर शेजवार) :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा विधायकों से निवेदन है कि वह जो गस्‍से में आकर आपकी तरफ ऐसे ऐसे करते हैं. (आसंदी की तरफ इशारा करते हुए) कुछ लोग ऐसे करते हैं. वह थोड़ा संयम बरतें. दूसरी बात यह है कि कभी गुस्‍से में इसको ऐसे मारते हैं. (मेज की ओर इशारा करते हुए.) कुछ चीजों पर कुछ लोग संयम बरतें.

श्री जितू पटवारी :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने तो गलती की होगी. मैं तो पहली बार का विधायक हूं. लेकिन कल आप तो बार बार बोल रहे थे कि मंत्री जी, मंत्री जी. तो उसका क्‍या.

डॉ गोविन्‍द सिंह :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, (XXX).

डॉ नरोत्‍तम मिश्र :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसको कार्यवाही से निकलवा दें.

अध्‍यक्ष महोदय :- इसको कार्यवाही से निकलवा दें.

 

ध्यान आकर्षण

(1)इन्दौर नगर में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर पुराने रिहाइशी मकानों को तोड़े जाने से उत्पन्न स्थिति

 

श्री जितू पटवारी(राऊ) - अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

 

 

 

श्री लाल सिंह आर्य,राज्यमंत्री,नगरीय विकास एवं पर्यावरण - अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

श्री जितू पटवारी --माननीय अध्यक्ष महोदय, दो बातें मंत्री जी के जवाब में आयी हैं एक तो जिन भूमिस्वामियों को वहां से हटाया जा रहा है उनका पूर्ण मकान टूटता है उनको भूरी टेकरी पर गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले मकानों में जगह दी जाएगी. एक उत्तर आया है कि उनको एफएआर दिया जाएगा जिनके पास में जमीन ही नहीं बची वह एफएआर के कागज को लेकर के क्या करेगा मालगंज एक पुराना इन्दौर है वहां पर रहने वाला व्यक्ति जैन परिवार है अथवा जो भी है मैं जाति पर नहीं जाना चाहता हूं. क्या उनको गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले एक मकान में कम्पनसेशन देकर, यह न्याय है इसका उत्तर दें.

श्री लालसिंह आर्य--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जो ध्यानाकर्षण लगाया है पहले तो उनसे कहना चाहता हूं कि डबल बेंच में यह प्रकरण एक याचिका के रूप में कोर्ट में सुनवाई लगा हुआ है वहां पर शासन का उत्तर भी पहुंच गया है. न्यायालय में जो प्रकरण चलता है उस पर इस सदन में चर्चा नहीं हो सकती है, यह मध्यप्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन संबंधी नियम 28 नंबर पेज पर हैं.

अध्यक्ष महोदय--यह उससे सहमत हैं आप इनको पढ़कर के सुना दें.

श्री लालसिंह आर्य--माननीय अध्यक्ष महोदय, लेकिन हो सकता है कि माननीय जितु पटवारी को जानकारी नहीं होगी इसीलिये किसी भी प्रकार की घोषणा अथवा आश्वासन यहां पर नहीं दिया जा सकता है.

डॉ.गोविन्द सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, सरकार का प्रतिबंध नहीं है, इसमें स्टे नहीं लगा है. शासकीय निर्णय यहां पर लिये जा सकते हैं विधान सभा न्यायालय से नहीं चलेगी विधान सभा अपने नियम-कायदे से चलेगी.

श्री लालसिंह आर्य--माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे लगता है कि माननीय गोविन्द सिंह जी ने ज्यादा ज्ञान प्राप्त कर लिया है, मुझे ऐसा लगता है. इसी सदन में बहुत सारी व्यवस्थाएं इसी प्रकार से कोर्ट में जब कोई चीज संज्ञान में रहती है, तब नहीं उठायी जाती है, लेकिन फिर भी मैं आपको उतना पक्ष तो बताना चाहता हूं कि जैसा कि जितू जी ने कहा है कि जिनके पास किसी प्रकार का मकान नहीं होगा, जमीन नहीं होगी, उनको हम शासन की नीति के अनुसार दूसरी जगह विस्‍थापित करेंगे ही, इसमें कहने की कोई आवश्‍यकता नहीं है ।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अतिक्रमण में जिनके मकान दो, चार, पांच फीट टूटे होंगे, उनके पास यदि कोई जगह नहीं है तो वह ऊपर निर्माण कर सकते हैं, ऐसे 144 लोगों को एफ.ए.आर. का लाभ दिए जाने के लिए पत्र जारी कर दिया है, पहले 36 लोगों को मिल चुका है, जितू पटवारी जी या तो वहां गए नहीं हैं या पेपर की कटिंग के आधार पर ध्‍यानाकर्षण लगाया है, इसके साथ ही 26 लोगों ने स्‍वयं अपना अतिक्रमण हटा लिया है ।

श्री जितू पटवारी - मैं गौर साहब से अनुरोध करना चाहता हूं कि कभी भी किसी सदस्‍य के अपमान करने की मेरा द्वारा चेष्‍टा नहीं की जाती है, अगर आपको कुछ लगा हो तो मैं माफी चाहता हूं, दूसरा जो कानून और कोर्ट के आदेशों की बात हुई थी, एक भोपाल के प्रकरण का जबलपुर में ......

अध्‍यक्ष महोदय- यह बहस का विषय नहीं है, जब मैंने कॉल अटेंशन अलाऊ कर दिया है और अब प्रश्‍न भी अलाऊ कर रहा हूं, इसलिए वह बात समाप्‍त हो गई है, मंत्री जी ने नियम ठीक पढ़ा है, किन्‍तु वह बहस का विषय नहीं है, मैं आपको अलाऊ कर रहा हूं, आप सीधा प्रश्‍न करिए ।

श्री जितू पटवारी- जो उन्‍होंने कहा है, उसके संदर्भ में बात नहीं कर रहा हूं, मैं तो उस संदर्भ में कर रहा हूं कि जो नगर निगम के नाम से नियम, कानून की कण्डिकाओं का जो वर्णन उन्‍होंने किया है, उसमें भोपाल का प्रकरण ऐसा था, जिसमें संबंधित का मकान टूटा था, उसके पक्ष में उन्‍होंने न्‍याय किया है और कोर्ट ने भी यह बात रखी, मैं उस बात को कोड कर रहा हूं कि मुख्‍यमंत्री जी एक ओर तो कहते हैं कि किसी गरीब की झोपड़ी नहीं टूटेगी और टूटेगी तो पहले व्‍यवस्‍थापन होगा तब टूटेगी, मैं आपसे सिर्फ इतना अनुरोध करना चाहता हूं, नियम क्‍या है, कायदे क्‍या हैं, कानून क्‍या है, यह सब अपनी जगह होगें पर मानवीय आधार पर जिनकी पांच मंजिल 50 साल से बनी हुई है या पुराना मकान जो पुराने इंदौर में है, भूमि अधिग्रहण नियम में, उसको तोड़ने के लिए, शहरी क्षेत्र में डबल मुआवजा दिया जाता है, कांग्रेस की केन्‍द्र सरकार ने लागू किया था, क्‍या उसके अंतर्गत कोई प्रावधान करेंगे ।

श्री लाल सिंह आर्य- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य जी को यह बताना चाहता हूं कि किसी की भूमि को यदि शासन लेती है, तो मुआवजा दिया जाता है, 74 लोग जो कि कमजोर आय वर्ग के थे, उनके व्‍यवस्‍थापन की कार्यवाही हमने की और बताना चाहता हूं इसमें याचिकाएं भी लगीं, जिला न्‍यायालय में, 11.3.16 को खारिज हो गई, फिर तीन लोगों ने उच्‍च न्‍यायालय में लगाया, फिर खारिज हो गई, नगर निगम को कहा है कि आप सात दिवस में कार्यवाही करें, अब डबल बेंच में वह याचिका लगी हैं, तो न्‍यायालय, शासन को जो भी आदेश करता है, यह मध्‍यप्रदेश की सरकार है, न्‍यायालय के आदेश का पालन करती है, न्‍यायालय हमें कोई आदेश देगा और यदि हमारी नियम प्रक्रिया में वह चीज आ रही है, तो हम संतुष्‍ट करने का प्रयास करेंगे ।

श्री जितू पटवारी- मेरा उत्‍तर नहीं आया है, मेरा अनुरोध यह है कि कानून अपनी जगह है ।

अध्‍यक्ष महोदय- आपकी बात आ गई है, आपको पर्याप्‍त समय भी दिया इंदौर के और माननीय सदस्‍य भी हैं, वह भी आप की बात को रखेंगे, इसलिए वह भी एक - एक प्रश्‍न से अधिक नहीं पूछेंगे, ध्‍यानाकर्षण इंदौर के हैं, इसलिए यह विशेष अनुमति दी जा रही है ।

श्री सुदर्शन गुप्‍ता (इंदौर)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो अतिक्रमण हटाया जा रहा है, उसमें से कुछ हिस्‍सा मेरी विधानसभा में भी आता है, इंदौर, स्‍मार्ट सिटी के लिए चयनित हुआ है और जिस क्षेत्र से अतिक्रमण हटाया गया है, वह क्षेत्र स्‍मार्ट सिटी विकास क्षेत्र के अंतर्गत आता है, इस मार्ग पर भारी यातायात रहता है और आए दिन वहां पर ट्रेफिक जाम हो जाता है, यातायात सुगमता के लिए सड़क का चौड़ीकरण अति - आवश्‍यक है, नागरिकों द्वारा पूर्व में विरोध किया गया था, किन्‍तु अब नागरिक स्‍वेच्‍छा से अतिक्रमण हटा रहे हैं, मेरा अनुरोध है, जैसा कि माननीय मंत्री जी ने कहा है कि उनको विस्‍थापित करने के लिए जगह दी जाएगी, उसका पालन हो जाए ।

श्री मनोज पटेल (देपालपुर) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह इन्‍दौर का निश्चित रूप से गम्‍भीर मामला है. इस प्रकरण में, चूँकि यातायात को सुगम करने के लिए इन्‍दौर के लिए यह योजना बनी है एवं यातायात भी सुगम हो और नागरिक परेशान भी न हों. ऐसा कोई हल सरकार निकाले, वहां पर 50 वर्ष, 60 वर्ष एवं 70 वर्ष पहले से जो रहवासी रह रहे हैं, जिनकी प्रायवेट जमीनें है, उन प्रायवेट जमीनों को, जो तोड़ा जा रहा है. अब किसी की 25 फीट है, उसका 20 फीट टूट जायेगा, वह बेचारा 5 फीट में, कचोड़ी की दुकान या फूल बेचकर व्‍यवसाय कर रहा है.

अध्‍यक्ष महोदय - कृपया प्रश्‍न या सुझाव दे दें.

श्री मनोज पटेल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अगर 5 फीट की उसकी जगह बचेगी तो वह 5 फीट में एफ.ए.आर. कैसे बनायेगा. वह वैसे ही रोज कमाकर खाता है. मेरा माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि उनको एफ.ए.आर. की जगह, मुआवजा दिया जाये, जिससे कि वे कहीं और रहने की व्‍यवस्‍था और व्‍यवसाय स्‍थापित कर सकें.

अध्‍यक्ष महोदय - आपकी बात आ गई है.

श्री राजेन्‍द्र वर्मा (सोनकच्‍छ) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह जो विषय है, इसमें हमें दोनों साईडें देखनी पड़ेगीं. यह बात‍ बिल्‍कुल सत्‍य है कि टोरीकानी से बियाबानी तक का रास्‍ता, बहुत कन्‍जस्‍टेड है. वहां कई बार एम्‍बूलेन्‍स एवं कई मरीज तथा वहां आग लग जाये तो फायर ब्रिगेड तक नहीं पहुँच सकती है तो उसको ट्रैफिक के लिए क्‍लीयर करना पड़ेगा. लेकिन मेरा उसके साथ, एक कहना और है कि इन्‍दौर में पाटनीपुरा से अतिक्रमण हटायें. उस समय भी यही स्थिति आई थी लेकिन आज वहां पर जमीन के भाव क्‍या हो गए हैं ? मेरा आपसे आग्रह यह है कि हमको मुआवजे की साईड और डेव्‍हलपमेन्‍ट की साईड भी देखना पड़ेगा.

अध्‍यक्ष महोदय, कोई ऐसे उच्‍चस्‍तरीय अधिकारी को भेजकर क्‍योंकि कोर्ट का भी विषय आया है, मुआवजे को लेकर भी आया है, 2021 के मास्‍टर प्‍लान को लेकर भी अनेक कन्‍प्यूजन्‍स यहां आए हैं. यह सारे कन्‍प्‍यूजन को क्‍लीयर करने के लिये, कोई अधिकारी और जन-प्रतिनिधियों की एक समिति बना दें, जो जाकर मास्‍टर प्‍लान, मुआवजे का एवं सारी विसंगतियों को देखकर उसका हल निकालें और आम आदमी को उसका मुआवजा मिल जाये. आपने बोलने का अवसर दिया, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

श्री मनोज पटेल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सही में सदन की एक समिति बना दें तो ज्‍यादा अच्‍छा रहेगा.

अध्‍यक्ष महोदय - बैठ जाइये.

श्री लाल सिंह आर्य - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय 3 सदस्‍यों ने अपनी जो अपनी बात रखी है. मैं फिर कहना चाहता हूँ कि अगर किसी की जमीन पर सरकार अधिग्रहण करती है तभी मुआवजा दिया जाता है, न कि अतिक्रमण के आधार पर. मैंने यह भी कहा है कि जिनके पास भूमि का टुकड़ा कुछ भी नहीं बचा है, हम उनका व्‍यवस्‍थापन भी कर रहे हैं.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश नगर पालिक अधिनियम, 1956 की धारा 305 के प्रावधानों के अंतर्गत मुआवजें का कोई प्रावधान नहीं है. लेकिन फिर भी माननीय सदस्‍यों ने जो बात कही है. हम उनकी भावनाओं का ख्‍याल रखेंगे और अधिकारियों को निर्देश देंगे कि नियम के तहत, कोई कार्यवाही है तो आप उसको संचालित करें.

श्री जितू पटवारी - अध्‍यक्ष जी, क्‍या आप कमेटी बनायेंगे ? यह तो पारदर्शिता होगी.

अध्‍यक्ष महोदय - मैं किसी को अलाउ नहीं करना चाहता हूँ. श्री के.के.श्रीवास्‍तव बोलेंगे.

श्री मनोज पटेल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा यह निवेदन है कि जिनका 100 वर्षों से मालिकाना हक है, जिन्‍होंने जमीन खरीदी है, क्‍या उनको मुआवजा देंगे. (व्‍यवधान)

श्री जितू पटवारी - अध्‍यक्ष महोदय, मैं समझता हूँ कि इस प्रश्‍न को उठाने का मूल संदर्भ क्‍लीयर नहीं हुआ है. मेरा अनुरोध है कि शासन की यह गोल-मोल बातें तो रोज हो रही हैं. कोई स्‍पष्‍ट निराकरण वाली बात नहीं हुई है. (व्‍यवधान)

श्री मनोज पटेल - माननीय, जो पैतृक जमीन है, मेरे माता-पिता ने खरीदी है. अगर उस जमीन में से, सरकार कोई जमीन लेती है तो उसका तो मुआवजा मिलना चाहिए. यहां सदन को एवं माननीय मंत्री जी को अधिकारीगण गुमराह कर रहे हैं.

श्री लाल सिंह आर्य - मैं, मित्र श्री मनोज पटेल जी को बताना चाहता हूँ कि हम ऐसी कोई जमीन नहीं ले रहे हैं, जो किसी की स्‍वयं की है. हम केवल, जो सरकारी जमीन थी, सन् 1975 में, जिसका उल्‍लेख 24 मीटर किया गया था. (व्‍यवधान)

श्री मनोज पटेल - अध्‍यक्ष महोदय, मेरे पास रिकॉर्ड है.

अध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी, जो रिकॉर्ड लाये हैं, उनको आप बाद में देख लीजियेगा. आप माननीय मंत्री जी को उपलब्‍ध करा दीजिये.

श्री जितू पटवारी -- अध्यक्ष जी, मैं एक मिनट और लूंगा. मंत्री जी, वहां एक जैन परिवार है, 19 लोग उसमें निवास करते हैं. ..

अध्यक्ष महोदय -- अब नहीं, आप मंत्री जी को उपलब्ध करवा दें. श्री के.के.श्रीवास्तव, अपने ध्यान आकर्षण की सूचना पढ़ें.

श्री जितू पटवारी -- ..पूरा घर टूट गया. आज से 60 साल पहले का वह घर है. आप कह रहे हैं कि नहीं, आपका और मेरा जन्म नहीं हुआ था, उससे पहले का घर है उनका. आप इस तरीके से बात कर रहे हैं. अध्यक्ष महोदय, यह तो गलत तरीका है, इसका निराकरण ही नहीं हुआ. बात का संदर्भ ही नहीं निकल पाया. कुछ आश्वासन तो मिले कि हमने सदन का इतना बहुमूल्य समय लिया है.

अध्यक्ष महोदय -- कृपा करके बैठ जायें, श्री के.के. श्रीवास्तव.

..(व्यवधान)..

श्री जितू पटवारी -- मैं समझता हूं कि यह ठीक नहीं है.

अध्यक्ष महोदय -- नहीं, आपके समझने से नहीं होता. श्री के.के.श्रीवास्तव.

श्री जितू पटवारी -- अध्यक्ष महोदय, मेरी आपसे हाथ जोड़कर प्रार्थना है कि आपने अनुमति दी. इस विषय पर गंभीरता रखी. सरकार की तरफ से कोई ऐसी बात ही नहीं आई.

अध्यक्ष महोदय -- आप कृपया बैठ जायें.

श्री जितू पटवारी -- अध्यक्ष महोदय, इस पर कोई एक जांच समिति बनवा दें.

अध्यक्ष महोदय -- इसमें अब किसी को कोई प्रश्न एलाऊ नहीं होगा. सिर्फ के.के. श्रीवास्तव जी का लिखा जायेगा. के.के.श्रीवास्वत,अब आप ध्यान आकर्षण सूचना पढ़िये.

 

 

 

12.31 बजे बहिर्गमन

श्री जितू पटवारी, सदस्य द्वारा शासन के उत्तर से असंतुष्ट होकर सदन से बहिर्गमन.

श्री जितू पटवारी -- अध्यक्ष महोदय, सरकार की तरफ से इसके उत्तर में ऐसी कोई बात नहीं आई है. इसलिये मैं सदन से बहिर्गमन करता हूं.

(श्री जितू पटवारी, सदस्य द्वारा शासन के उत्तर से असंतुष्ट होकर सदन से बहिर्गमन किया गया.)

12.32 बजे ध्यान आकर्षण (क्रमशः)

(2) भोपाल स्थित राजीव गांधी कालेज समिति प्रबंधन द्वारा अनियमितता की जाना.

 

श्री के.के.श्रीवास्तव (टीकमगढ़) -- अध्यक्ष महोदय,

उच्च शिक्षा मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्ता) -- अध्यक्ष महोदय,

श्री के.के.श्रीवास्तव -- अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि भोपाल के अंदर इस समिति का पूरा कारोबार चल रहा है. उसको बड़े बड़े नेता और शिक्षा माफियाओं का पूरा संरक्षण है. वहां शिक्षा की थोक दुकान चलाई जा रही है. मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि क्या उसमें भर्ती किये गये कर्मचारी, प्राध्यापकों की भर्ती प्रकिया की जांच करायेंगे. क्या इसमें आरक्षण की शर्तों का पालन किया गया है. सोसायटी के कौन कौन सदस्य हैं, इसके जो सदस्य हैं,यह आप सदन को अवगत करायेंगे.

श्री उमाशंकर गुप्ता -- अध्यक्ष महोदय, जो जानकारी माननीय सदस्य कह रहे हैं, वह हम उपलब्ध करा देंगे. जानकारी प्राप्त कर लेंगे, अभी जो मेरे पास जानकारी थी, वह मैंने उपलब्ध कराई है और मैं एक धन्यवाद जरुर देना चाहता हूं सदस्य जी को. इस कारण मुझे प्रायवेट कालेज के सिस्टम को समझने को और अवसर मिला. इन जनरल दो-तीन बातें हमारे ध्यान में और भी आई हैं कि सिस्टम में जो ठीक करने की जरुरत है. प्रवेश को लेकर भी, पाठ्यक्रम जो हम परमीशन देते हैं. अभी जो मुझे ध्यान में आया है कि उच्च शिक्षा विभाग के निर्धारित पाठ्यक्रम जो हैं विश्वविद्यालय के उसके लिये तो इन्फ्रास्ट्रक्चर का ध्यान रखा जाता है लेकिन जो पाठ्यक्रम सूचीबद्ध नहीं है..

श्री के.के.श्रीवास्तव -- माननीय अध्यक्ष महोदय, पहले मेरे प्रश्न का उत्तर तो आने दें. मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं आया है, मैं पूछ कुछ रहा हूं और उत्तर कुछ आ रहा है.

अध्यक्ष महोदय-- पहले आप उत्तर तो सुन लें.(हंसी)

श्री के.के. श्रीवास्तव -- मंत्री जी, मैं पूछ रहा हूं कि भर्ती किये गये कर्मचारी और अधिकारियों के लिये जो प्रक्रिया अपनाई गई है, उस प्रक्रिया की क्या मंत्री जी जांच करायेंगे ? और सोसायटी के कौन कौन से सदस्य हैं, उसकी सूची क्या सदन को उपलब्ध करायेंगे, क्या इसमें भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण का पालन किया गया है क्या पहले इस बात का मंत्री जी उत्तर दें फिर हम अपना दूसरा प्रश्न करेंगे.

अध्यक्ष महोदय-- बाद में नहीं , एक ही प्रश्न बस.

श्री के.के.श्रीवास्तव- तो माननीय अध्यक्ष महोदय, पूरी बात मैं अभी कर लेता हूं.

अध्यक्ष महोदय--चलिये मंत्री जी का उत्तर ले लीजिये. नहीं तो प्रश्न बहुत लंबा हो जायेगा.सब प्रश्नों का इकट्ठा उत्तर मंत्री जी दे दीजिये.

श्री उमाशंकर गुप्ता -- मैं इसकी जांच करा लूंगा.

श्री के.के. श्रीवास्तव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, कितने पाठ्यक्रम चल रहे हैं,उसके नामदंड के हिसाब से क्या संस्था ने फर्नीचर, भवन, इन्फ्रास्ट्रक्चर, निर्माण किये हैं, क्या उस आधार पर प्रयोगशाला, लायब्रेरी, प्राध्यापकों की संख्या है. अगर मापदंड के अनुसार नहीं है और पाठ्यक्रम अधिक हैं, भवन नहीं है, फर्नीचर नहीं है, तो क्या उसकी मान्यता समाप्त करेंगे. मंत्री जी यह बता दें.

श्री उमाशंकर गुप्ता -- अध्यक्ष महोदय, मैंने कहा है कि मैं जांच करा लूंगा. मैं तो इससे अतिरिक्त बता रहा था कि मुझे कुछ और बातें पता चली हैं.

श्री के.के.श्रीवास्तव-- अध्यक्ष महोदय, मैं पूछ रहा हूं कि प्रवेश के समय छात्रों की संख्या कम होती है, परीक्षा के समय में छात्रों की संख्या कम होती..

श्री उमाशंकर गुप्ता -- मैं इस बात से सहमत हूं कि प्रवेश के समय छात्र और परीक्षा के समय छात्रों की संख्या में अंतर है.

श्री के.के.श्रीवास्तव -- अध्यक्ष महोदय, भोपाल का मामला है.

अध्यक्ष महोदय- बैठ जाईये, मंत्री जी आपकी बात से सहमत हो रहे हैं, जांच कराने की बात कह दी अब और क्या चाहते हैं.

श्री के.के. श्रीवास्तव- बहुत बहुत धन्यवाद.

12.36 बजे याचिकाओं की प्रस्तुति

 

अध्यक्ष महोदय-- आज की कार्यसूची में सम्मलित सभी याचिकायें प्रस्तुत की हुई मानी जायेंगी.

12.27 बजे वर्ष 2016-17 की अनुदानों की मांगों पर मतदान

मांग संख्या-22 नगरीय विकास एवं पर्यावरण

मांग संख्या-71 सिंहस्थ, 2016 से संबंधित व्यय

मांग संख्या-75 नगरीय निकायों को वित्तीय सहायता.

उपस्थित सदस्यों के कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत हुए. अब मांगों और कटौती प्रस्तावों पर एक साथ चर्चा होगी.

श्री कमलेश्वर पटेल(सिहावल) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 22, 71 और 75 के विरोध में तथा कटौती प्रस्ताव के समर्थन मे अपनी बात कहने के लिये खड़ा हुआ हूं. माननीय अध्यक्ष महोदय,शहरों को सुनियोजित ढंग से संचालित करने के लिये नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका होती है. अध्यक्ष जी आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि आये दिन पूरे प्रदेश नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत में जो अव्यवस्थाओं का आलम है उसके बारे में मंत्री जी को बताना चाहता हूं. आजकल एक बहुत बड़ा जुमला पूरे देश में चल रहा है वह है स्मार्ट सिटी का, यह स्मार्ट सिटी कौन सी स्मार्ट सिटी बनेगी, कैसी स्मार्ट सिटी बनेगी, किसी को पता नहीं है कि कहां से राशि आयेगी, कितनी राशि आयेगी, राशि कौन देगा, क्या व्यवस्थायें होगी और सीधे सीधे अभी तक जो हमें समझ में आ रहा है स्मार्ट सिटी बनाने का औचित्य वह यह है कि बड़े बड़े उद्योगपतियों को बड़े बड़े बिल्डरों को सरकारी जमीनें देकर के उनको उपकृत करने का मामला ही नजर आ रहा है.

माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारा आपके माध्यम से इस सरकार से और विभाग के मंत्री जी से प्रश्न है और हम मंत्री जी से यह जानना चाहते हैं कि जिस तरह से आज पूरे मध्यप्रदेश में जितने नगरीय निकाय, नगर पालिका और नगर पंचायतें हैं, वहां पर जिस तरह की अव्यवस्थायें देखने को मिल रही है, उसको देखते हुये मुझे नही लगता कि आपको अभी स्मार्ट सिटी के बारे में सोचना चाहिये. पहले आपके पास में जो व्यवस्थायें हैं उनको तो आप स्मार्ट बनायें. आप नालियों की सफाई कर नहीं पा रहे हैं, सुनियोजित सड़कें दे नहीं पा रहे हैं, आपकी नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत आम नागरिकों को बेसिक सुविधायें दे नहीं पा रही हैं लोग मच्छरों से लोग परेशान हैं, पीने के पानी की सप्लाई बराबर दे नहीं पा रहे हैं, और बात करते हैं कि हम स्मार्ट सिटी बनायेंगे. जो आपके पास में मौजूदा नगर निगम, नगर पालिकायें और नगर पंचायतें हैं उनकी व्यवस्थायें तो आप सुधार नहीं पा रहे हैं और कौन सी स्मार्ट सिटी आप बनायेंगे. यह बड़ी चिंता का विषय है.

माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न में ही पूरे मध्यप्रदेश की जनता का प्रश्न है और स्थानीय और बुद्धीजीवि लोग भी इस बात को लेकर के चिंतित हैं. भोपाल में जिस जगह को स्मार्ट सिटी के नाम पर चिह्नित किया गया है मंत्री जी वहां के हजारों पेड़ काटे जायेंगे.

 

12.42 बजे {उपाध्यक्ष महोदय(डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह)पीठासीन हुए}

 

माननीय उपाध्यक्ष महोदय, यह स्मार्ट सिटी कौन बनायेगा. सुना है कि प्रायवेट बिल्टर्स को दे रहे हैं. कौन से बिल्डर्स को देंगे, क्या नियम-कायदा होगा, किस शर्त पर देंगे. क्या मध्यप्रदेश सरकार के पास में इतना आर्थिक संकट आ गया है कि सरकारी जमीनें बेचकर के मध्यप्रदेश का विकास करेंगे, इस पर सरकार को चिंता करने की आवश्यकता है. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, एक तरफ पर्यावरण संरक्षण के लिये करोड़ों रूपये साल में खर्च किये जाते हैं. पर्यावरण की क्या दुर्दशा है कि आज जो शेर हैं, चीता हैं,वन्य प्राणी हैं जिनको जंगल में जिनको विचरण करना चाहिये वह आज शहर की ओर आ रहे हैं और जब शहर की और आते हैं तो प्रदेश के मुख्यमंत्री जी का हमने वक्तव्य पढ़ा था, जिनको जंगल में विचरण करना चाहिये, जिनकी जगह जंगल में है, जिनका संरक्षण जंगल में होना चाहिये अगर वह शहर में दिखाई देते हैं तो मुख्यमंत्री जी खुशी जाहिर करते हैं.

माननीय उपाध्यक्ष महोदय, इसी से आप अंदाजा लगा लीजिये कि क्या वन्य प्राणियों के संरक्षण की यह सरकार कितनी चिंता कर रही है. किस तरह से वन्य प्राणियों का हरासमेंट हो रहा है किस तरह से जंगलों की कटाई हो रही है. और सत्य बात यही है कि जंगलों की अंधाधुंध कटाई होने की वजह से वन्य प्राणी अब शहर और गांव की और आ रहे हैं. जिनको जंगल में रहना चाहिये वह आये दिन शहर में दिखाई दे रहे हैं. एक जगह नहीं मध्यप्रदेश में आये दिन किसी न किसी दिन, किसी न किसी हिस्से में कहीं चीता कुंए में गिरा मिलता है कहीं शेर मिलता है, हमारे क्षेत्र में भी एक दिन चीता एक आदिवासी के घर पर आ गया था 24 घंटा विचरण किया. उपाध्यक्ष महोदय, एक तरफ जहां पर्यावरण संरक्षण का काम सरकार का है वह यह सरकार नहीं कर रही है. जंगल विभाग का काम पर्यावरण का संरक्षण करना है, इनको पौधों का संरक्षण करना चाहिये परंतु वहां पर ऐसे अधिकारी की पोस्टिंग सरकार के द्वारा की जाती है जो भ्रष्टाचार में लिप्त रहते हैं जो लेन देन ज्यादा करते हैं उनको उपकृत करते हैं, उनको बड़ी बड़ी पोस्टिंग देते हैं. यह सरकार का कृत्य है.

माननीय उपाध्यक्ष महोदय, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बड़ा महत्वपूर्ण विभाग है पर सच बात तो यह है कि वहां पर अध्यक्ष को लेकर ही लड़ाई कई वर्षों से चली आ रही है, वह लड़ाई ही खतम नहीं हो रही है. अब जो विभाग प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष की नियुक्ति को व्यवस्थित करने में ही लगातार लड़ रहे हैं तो आम जनता को न्याय दिलाने के लिये, उद्योगों को कन्ट्रोल करने के लिये जो प्रदेश को प्रदूषित करते हैं उनको कन्ट्रोल करने के लिये यह कैसे काम करेंगे . यह बड़ी चिंता का विषय है. National_Green_Tribunal बोर्ड ने मध्यप्रदेश सरकार की कड़ी आलोचना की है. सिंगरोली में पॉवर प्रोजेक्ट के कारण वायु प्रदूषण बहुत बढ़ गया है और इसके लिये सरकार ने कुछ नहीं किया यह हमारा नहीं, जो प्रदेश की सर्वोच्य संस्था National_Green_Tribunal है उसका स्टेटमेंट है. यहीं भोपाल में आये दिन गांव से लगे हुये जो जंगल हैं उनको उजाड़कर बस्तियां बसाई जा रही है, बिल्डरों को मकान बनाने की अनुमतियां दी जा रही हैं.कैसे संरक्षण होगा यह बड़ी चिंता का विषय है. आज लोग परेशान हैं. सरकार एक तरफ पर्यावरण दिवस मनाती है, योग करवाती है और करोड़ों रुपये खर्च करती है. उपाध्यक्षजी, हमने सरकार से एक प्रदुषण के संबंध में एक प्रश्न किया था कि प्रदेश में प्रदुषण बहुत फैल रहा है यह चिन्ता का विषय है. सरकार की तरफ से एक लाईन में जवाब आया था कि मध्यप्रदेश में पाल्युशन है ही नहीं. पिछले सत्र में ही हमको इस तरह का जवाब मिला था. यह कितना गैर जिम्मेदाराना जवाब है.

उपाध्यक्ष महोदय, अगर सही में स्मार्ट सिटी बनाने का थोड़ा बहुत काम हुआ है तो केन्द्र सरकार ने जो जवाहर लाल नेहरु अर्बन डेवलपमेंट के तहत जब मनमोहन सिंह जी प्रधानमंत्री थे, कई करोड़ रुपये प्रदेश सरकार को दिये. भोपाल में थोड़ी बहुत सूरत बदली हुई देखते हैं या आप इंदौर, जबलपुर या बड़े बड़े महानगरों में सूरत बदली हुई देखते हैं तो जो राशि आयी है, उससे बदली है. हालांकि उसमें भी भारी भ्रष्टाचार हुआ है. फिर भी थोड़ी बहुत सड़कें दिख रही है. प्लांटेशन दिख रहा है तो वह जवाहरलाल नेहरु अर्बन डेवलपमेंट के तहत जो राशि मध्यप्रदेश सरकार को मिली थी, उससे दिख रहा है.

उपाध्यक्ष महोदय, सिंगरौली नगर निगम के अंतर्गत एनटीपीसी, एनसीएल के तहत जो विस्थापित लोग बहुत दिनों से बसे हुए थे, नगर निगम ने वहां पूरा विकास किया और उन कॉलोनियों के विकास में एनटीपीसी, एनसीएल ने भी भागीदारी निभाई और आज उनको विस्थापित कर रहे हैं. क्या मुख्यमंत्रीजी या यह सरकार इसी तरह से सिंगरौली को सिंगापुर बनायेगी. एक तरफ प्रदुषण की वजह से लोग परेशान हैं. श्वांस लेना मुश्किल हो रहा है. वन्य जीव भी खत्म हो रहे हैं. प्रदुषण के कारण किसानों की फसलें चौपट हो रही है. सतना,सिंगरौली, सीधी पूरे संभाग में सीमेंट फैक्ट्रियों की वजह से,पावर प्रोजेक्ट के कारण प्रदुषण हो रहा है. दूसरी तरफ कई वर्षों से जो गरीब विस्थापित बसे हुए हैं. सरकार ने उनको विधिवत् बसाया था आज उनको विस्थापित कर रहे हैं, उजाड़ रहे हैं. यह नहीं होना चाहिए. उनको न्याय मिलना चाहिए.

उपाध्यक्ष महोदय, आये दिन समाचार पत्रों में छपता है. भोपाल में केपिटल प्रोजेक्ट CPA है जिसने भोपाल में विकास में काफी योगदान दिया वह कई बार भ्रष्टाचार का अड्डा भी बन जाता है जैसा कि अभी बना हुआ है. यह हम नहीं बोल रहे हैं यह भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय विधायक बोल रहे हैं. कई लोगों ने पेपर में स्टेटमेंट दिया है. अभी दो-चार दिनों में ही पढ़ा है कि कितने सौ करोड़ रुपये भोपाल के तालाब संरक्षण के लिए खर्चा हुए लेकिन उस राशि का सदुपयोग नहीं हुआ और राशि लगातार निकलती गई. आज भी जो ड्रेनेज सिस्टम है, गंदा पानी तालाब में जाने से रुकना चाहिए, वह पानी आज भी तालाब मिल रहा है. वह तालाब का पानी हम लोग पीते हैं. उपाध्यक्ष महोदय, हम इतनी व्यवस्था तो कर नहीं पाये तो हम कौन सी स्मार्ट सिटी बनायेंगे !

उपाध्यक्ष महोदय, पहले हमारी जो पुरानी व्यवस्था है, नगर पालिका, नगर पंचायत,नगर निगम की साफ-सफाई व्यवस्था और ड्रेनेज सिस्टम है, नालियां है उसको पहले व्यवस्थित करना चाहिए. सड़कें बनाना चाहिए. हमारे सीधी जिला मुख्यालय में धूल उड़ती है.सड़कें इतनी खराब है कि लोगों का पैदल चलना मुश्किल है. आप भी ध्वजारोहण के लिए गये हैं, आपने भी देखा होगा कि लोग कितना परेशान हैं. कितना प्रदुषण है. इस तरह के तो हालात हैं और बोलते हैं कि स्मार्ट सिटी बनायेंगे. कौन सी स्मार्ट सिटी बनायेंगे. जिस तरह से स्मार्ट विलेज की बात की थी. आपने आदर्श गांव बनाये थे, जिसके लिए केन्द्र सरकार ने कोई राशि नहीं दी. उपाध्यक्षजी,नाम देकर, काम खत्म कर देंगे. जिस तरह से गोकूल गांव की भी परिकल्पना की थी. उसकी क्या स्थिति है. आप विजिट करिये. सरकार के मंत्रिगण देख कर आयें कि गोकूल धाम आज कहां और किस स्थिति में है. इस तरह से स्लोगन देने से काम नहीं बनेगा. सरकार को लोगों के लिए काम करना पड़ेगा. बुनियादें सुविधाएं हैं, वह मुहैया कराना पड़ेगा.

उपाध्यक्ष महोदय, आज आप किसी कॉलोनी में भी चले जाईये, मच्छरों का प्रकोप है. नगर पालिका, नगर निगम मच्छर मारने के लिए लाखों रुपया खर्चा कर रही है. यह राशि कहां जाती है. माननीय मंत्रीजी, सरकार को और चूंकि यह विभाग माननीय मुख्यमंत्रीजी के पास है, तो उनको चिन्ता करना चाहिए. एक बड़ी चिन्ता का विषय है. जब आप मंत्री थे, उस समय मध्यप्रदेश के कई शहरों के मास्टर प्लान बने थे. मास्टर प्लान बन नहीं रहे हैं, कितने वर्ष हो गये हैं. मध्यप्रदेश के कई नगर पंचायत, नगर निगम,नगर पालिका के मास्टर प्लान कई वर्षों से नहीं आये और कहते हैं हम स्मार्ट सिटी बनायेंगे. कैसी स्मार्ट सिटी बनायेंगे? उपाध्यक्ष महोदय, पूरे प्रदेश की हर नगर पालिका,नगर निगम, नगर पंचायतों में जो सुनियोजित विकास होना चाहिए, वह न होकर (XXX)...क्षमा कीजिएगा हम उनको अवैध कॉलोनियां कह सकते हैं. उस शब्द को विलोपित करा दीजिए.

उपाध्यक्ष महोदय-- उस शब्द को कार्यवाही से निकाल दें.

श्री कमलेश्वर पटेल--उपाध्यक्ष महोदय, अवैध कॉलोनियों का पूरे प्रदेश में भण्डार हो गया है. चाहे इंदौर हो, चाहे भोपाल, जबलपुर हो, ग्वालियर हो, सतना या रीवा हो, हम जिस शहर पर भी नजर दौड़ायेंगे अवैध कॉलोनियां बढ़ती जा रही है. फिर सरकार कहती है हम उनको नियमित कर देंगे. अब अगर गरीब जनता ने पैसा लगा दिया है तो ठीक है आप उनको नियमित करिये लेकिन आपका पहले से मास्टर प्लान आ जाये तो यह स्थिति न बने. कई शहरों का मास्टर प्लान कई वर्षों से लंबित है. आप मास्टर प्लान बना नहीं पा रहे हैं. राजधानी,भोपाल का लंबित है. विदिशा जहां के मुख्यमंत्रीजी हैं वहां का भी लंबित है. हमने एक प्रश्न पूछा था तो जवाब आया कि समय सीमा बताना संभव नहीं है. अगर समय सीमा सरकार नहीं बतायेगी, सरकार नहीं तय करेगी तो हम तय करने आयेगें? उपाध्यक्ष महोदय, या तो यह सरकार हम लोगों की सरकार का इंतजार कर रही है कि यह काम हम नहीं कर सकते, जब कांग्रेस सरकार आयेगी वही सुनियोजित काम कर सकती है.

उपाध्यक्ष महोदय, अभी भी वही नीति चल रही है जो 1999 में माननीय दिग्विजय सिंह जी की सरकार के समय चलती थी.

उपाध्यक्ष महोदय--कितना समय लेंगे?

श्री कमलेश्वर पटेल--उपाध्यक्षजी, बहुत सारा मटेरियल है लेकिन आप जितना समय दे देंगे हम समाप्त कर देंगे.

उपाध्यक्ष महोदय--अपने भाषण को नियोजित कर लीजिए. 4 मिनट में समाप्त कर दीजिए.

श्री कमलेश्वर पटेल--उपाध्यक्ष महोदय, सरकार को हमारा सुझाव भी है कि जिस तरह से केन्द्र में वन और पर्यावरण मंत्रालय एक साथ हैं. अगर मध्यप्रदेश सरकार भी उस तरह की व्यवस्था बनाती है तो हमारा ख्याल है कि हो सकता है कि वन और पर्यावरण के एक ही मंत्री हो जाने से जो पेड़ कटाई वाला मामला है उसमें कंट्रोल होगा और पर्यावरण को संरक्षण देने में कुछ सहयोग मिले. और वन विभाग के जो अधिकारी कर्मचारी हैं, उनको पर्यावरण के बारे में काफी कुछ अध्ययन भी रहता है और केन्द्र और राज्य सरकार को भी आपस में तालमेल बैठाने में काफी सुविधा होगी.

उपाध्यक्ष महोदय, अभी सिंहस्थ होने जा रहा है. सिंहस्थ के बारे में आप भी रोज पढ़ते होंगे कि अलग अलग अखाड़ें जो धर्मगुरु लोग हैं वह रोज धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं. यह बड़ा चिन्ता का विषय है. हालांकि अभी सिंहस्थ में समय है. हम लोग पिछले सत्र से लेकर अभी तक सुन रहे हैं कि सरकार ने सिंहस्थ के लिए यह कर दिया वह कर दिया लेकिन यह जो व्यवस्था है मुझे लगता है कि वह अभी अनुकूल नहीं है. जिस तरह से भ्रष्टाचार की सुगबुगाहट आती रहती है. पेपरों में छपता रहता है.

श्री वेलसिंह भूरिया--कमलेश्वर जी जाकर देख आना कितनी अच्छी सड़कें बन रही हैं, कितना बेहतरीन काम हो रहा है और क्षिप्रा में एकाध डुबकी भी लगा आना, आपके थोड़े-बहुत जो पाप हैं, वह धुल जायेंगे..

श्री कमलेश्वर पटेल-- जो पाप किये हों,आपके जैसे लोग, उनको डुबकी लगाना चाहिए. हम बराबर बाबा महाकाल की नगरी में साल में दो बार, कभी चार बार जाते हैं, दर्शन करते हैं, भस्म आरती में भी शामिल होते हैं और बराबर श्रद्धा है.

उच्च शिक्षा मंत्री(श्री उमाशंकर गुप्ता)-- इनका कहना है कि क्षिप्रा में पापी ही डुबकी लगाते हैं, यह कहना ठीक नहीं है. क्षिप्रा एक पवित्र नदी है. सिहंस्थ में करोड़ों धर्मालु श्रद्धालु आते हैं. देश विदेश के लोग आते हैं. कमलेश्वरजी का यह कहना कि वहां पापी लोग डुबकी लगाते हैं, मेरे ख्याल से सबका अपमान है. बोलते समय थोड़ा संयम रखना चाहिए.

श्री कमलेश्वर पटेल--माननीय मंत्रीजी, हमने नहीं बोला. यह बात आपके माननीय सदस्य ने कही है.

श्री उमाशंकर गुप्ता--पापी लोग डुबकी लगाते हैं. यह मेरे ख्याल से उचित नहीं है. यह शब्द अगर आप वापस लेंगे तो ज्यादा अच्छा है.

उपाध्यक्ष महोदय--माननीय मंत्रीजी, कार्यवाही में देखना पड़ेगा कि कमलेश्वर जी ने कहा है या वेलसिंह भूरिया जी ने कहा है.

श्री कमलेश्‍वर पटेल (जारी)-- माननीय मंत्री जी हमने नहीं बोला है, यह आपके माननीय सदस्‍य ने बोला है इस बात को. ...(व्‍यवधान)...

श्री उमाशंकर गुप्‍ता-- पापी लोग डुबकी लगाते हैं यह मेरे ख्‍याल से उचित नहीं है, यह शब्‍द अगर आप वापस लेंगे तो अच्‍छा है.

उपाध्‍यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी कार्यवाही में देखना पड़ेगा, कलेश्‍वर जी ने कहा है या वेल सिंह भूरिया जी ने कहा है.

श्री रामेश्‍वर शर्मा-- उन्‍होंने यह बोला है कि आपके पाप कम करने के लिये आप धोकर आयें तो इन्‍होंने कहा कि जो पाप करते हैं वह नहाकर आयें, मेरा कहना है कि इन शब्‍दों को निकाला जाये.

श्री कमलेश्‍वर पटेल-- हमने गलत कहां बोला, हमने तो कोई पाप किया नहीं है ..... (व्‍यवधान)...

श्री रामेश्‍वर शर्मा-- माननीय उपाध्‍यक्ष जी न यह तय कर रहे न मैं तय कर रहा लेकिन गंगा में नहाना, नर्मदा में नहाना, छिप्रा में नहाना, गंगोत्री में नहाना, इससे पाप का उदाहरण देना गलत है, मेरा अर्थ यह है कि इसमें जो पापी हैं वही नहायें, ये शब्‍द गलत हैं, मैं चाहता हूं इनको निकाला जाये.

श्री कमलेश्‍वर पटेल-- यह आप वेल सिंह जी को समझाइये. हम समझते हैं. हम गलत नहीं ले रहे शर्मा जी.

उपाध्‍यक्ष महोदय-- आपकी बात आ गई शर्मा जी, आप बैठ जायें.

श्री महेन्‍द्र सिंह-- माननीय उपाध्‍यक्ष जी, पाप के ऊपर इतना डिस्‍कशन नहीं होना चाहिये.

उपाध्‍यक्ष महोदय-- हां होना तो नहीं चाहिये था.

श्री कमलेश्‍वर पटेल-- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक बड़ा महत्‍वपूर्ण और टेक्‍नीकल पाइंट है, अभी तक नर्मदा, छिप्रा परियोजना को पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार की मंजूरी नहीं मिली है और उसके बाद भी छिप्रा और नर्मदा जी को जोड़ने का जो अभियान है वह पूरी तरह से अंतिम छोर पर है, भले ही पानी अभी वहां नहीं पहुंचा हो, असंतोष है लोगों के मन में. ऐसी कई परियोनायें हैं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जो बिना केन्‍द्रीय पर्यावरण मंत्रालय के अनुमति के चल रही है, यदि पर्यावरण के लिये अब तक काम हुआ होता तो छिप्रा नदी के लिये नया जीवन मिल गया होता. अगर सरकार इतनी गंभीर और इतनी चिंतित होती तो नर्मदा जी को वहां ले जाने की जरूरत नहीं थी, छिप्रा नदी के जो वहाव थे उसके संरक्षण के लिये भी सरकार बहुत अच्‍छे से काम कर सकती थी पर इतने वर्षों में काम नहीं किया, जब नर्मदा जी का पानी अन्‍य नदियों जैसे पार्वती, कालीसिंध में डालने की बात कर रही है सरकार, फिर से वही गलती दोहराने पर सरकार उतारू है, जब पानी का बहाव कम हो जायेगा, नर्मदा जी के जीवन को भी खतरा हो जायेगा, नर्मदा जी से दूसरी नदियों की सेहत बनाने की तो बात सरकार करती है, लेकिन नर्मदा जी आज किस हालत में है, किस तरह से दोहन हो रहा है, अवैद्य उत्‍खनन से लेकर और किस तरह से आज उनका बहाव भी जितना था वह भी कम होता जा रह है, हमें तो चिंता है कि आगे चलकर कहीं नर्मदा मैया का अस्तित्‍व खतने में नहीं पड़ जाये और मां नर्मदा इस सरकार को माफ नहीं करने वाली जिस तरह से मां नर्मदा जी के साथ ये सरकार अन्‍याय कर रही है. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, निगम के दफ्तर में बदबू के मारे बुरा हाल, हल नहीं हो रही समस्‍या.

उपाध्‍यक्ष महोदय-- सब अखबार आप पढ़ेंगे क्‍या, यह सब माननीय सदस्‍य पढ़ते हैं.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया-- कमलेश्‍वर जी जितू पटवारी दे गये होंगे आपको.

श्री कमलेश्‍वर पटेल-- हमें किसी की जरूरत नहीं है, मेरा एक और छोटा सा निवेदन है, हाउसिंग बोर्ड एक बड़ी महत्‍वपूर्ण संस्‍था है मध्‍यप्रदेश की और जिसका जो उदद्यदेश्‍य था कि हम मध्‍यम वर्गीय लोगों के लिये आवास बनाकर देंगे, उससे कहीं न कहीं हाउसिंग बोर्ड भटक गई है, सरकार को उस पर विचार करना चाहिये और जिस तरह की व्‍यवस्‍थायें बीडीए और हाउसिंग बोर्ड का जो उद्देश्‍य था मध्‍यम वर्गीय गरीब लोगों के लिये आवास मुहैया कराने का उस पर सरकार को काम करना चाहिये. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने बोलने का अवसर दिया, बहुत-बहुत‍ धन्‍यवाद. बस मेरा आखिरी निवेदन है कि सरकार ने जो राशि का प्रावधान किया है वह भ्रष्‍टाचार की भेंट नहीं चढ़े, आम नागरिकों को न्‍याय मिले और इसका सदुपयोग हो, धन्‍यवाद.

श्री शैलेन्‍द्र जैन (सागर)-- उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मांग संख्‍या 22, 71, 75 का समर्थन करता हूं. शहरी क्षेत्र जो हैं वह किसी भी देश और प्रदेश का आइना होते हैं, किसी भी देश और प्रदेश की पहचान जो है, शहरी क्षेत्र से होती है, इस नाते से शहरी क्षेत्रों के विकास के लिये वहां पर सुविधायें मुहैया कराने के लिये सरकार इस मामले में बहुत ही चिंति‍त है और सक्रिय है. अभी जो जनगणना 2011 के आंकड़े सामने आये हैं, उसके हिसाब से मध्‍यप्रदेश की कुल जनसंख्‍या जो है, वह 7 करोड़ 25 लाख मानी गई है, उसके हिसाब से शहरी क्षेत्र में लगभग 2 करोड़ 59 लाख जनसंख्‍या शहरी क्षेत्र की है, अगर इसको हम अनुपात के रूप में देखें तो हम पायेंगे कि लगभग 27.58 प्रतिशत जनसंख्‍या कुल जनसंख्‍या का इतनी बड़ी जनसंख्‍या हमारी शहरी क्षेत्र में रहती है. 74वें संविधान संशोधन के पश्‍चात जो 12वीं अनुसूची उसमें जोड़ी गई है, उसमें नगरीय क्षेत्रों के कार्यों का और उसके उत्‍तरदायित्‍व में काफी वृद्धि की गई है. अब यह वृद्धि हुई है इसके लिये हमारी नगरीय क्षेत्र की कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिये एक बहुत बड़ी चुनौति है, हमारी सरकार ने इस चुनौति को स्‍वीकार किया है और हमने अपने बजट में उस चुनौति को स्‍वीकार करने के लिये जो आवश्‍यक कदम है वह उठाने के लिये हमने कार्य किया है.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, शहरी क्षेत्र जो है वह हमारी आर्थिक उन्‍नति के एक बहुत बड़े घटक होते हैं और इस नाते से हमने शहरी क्षेत्रों के विकास के लिये निरंतर बजट में वृद्धि करते आये हैं, अभी माननीय कमलेश्‍वर पटेल जी अपने जमाने का याद करना चाह रहे थे, मैं उसको भूलना चाहता हूं. वर्ष 2003-04 के आंकड़े हमारे पास उपलब्‍ध हैं, उस समय नगरीय क्षेत्र के विकास के लिये महज 807 करोड़ रूपये खर्च होते थे, और आज उन नगरीय क्षेत्रों के विकास के लिये पिछले वर्ष 2015-16 में हमने लगभग 7374 करोड़ रूपये खर्च किये हैं और वर्तमान में वर्ष 2016-17 में जो हमारा बजट अनुमान है वह लगभग 10 हजार 7 करोड़ का है, 2003‑04 से तुलना करें तो यह बजट 14 गुना अधिक है और अगर हम पिछले बजट 2015-16 से तुलना करें तो हमारा वर्तमान का जो प्रोजेक्‍टेट बजट है वह ढाई हजार करोड़ अधिक है. शहरी क्षेत्र की अपनी आवश्‍यकतायें हैं, चाहे पेयजल की आवश्‍यकता हो, सफाई की व्‍यवस्‍था हो, बिजली की समस्‍या हो, सीवर का काम हो, इन तमाम कामों के लिये बहुत बड़ी धनराशि की आवश्‍यकता होती है. लेकिन मुझे कहते हुये अत्‍यंत दुख हो रहा है कि जिस कार्यकाल का कमलेश्‍वर पटेल जी जिक्र कर रहे थे उस कार्यकाल में कुछ करने को था ही नहीं वह कह रहे थे उस समय हमने कुछ नहीं किया, स्‍मार्ट सिटी की कल्‍पना करना आपके बस की बात नहीं थी क्‍योंकि स्‍मार्ट सिटी के लिये पैसे की आवश्‍यकता होती है, उसके लिये मैचिंग ग्रांट की आवश्‍यकता होती है, अकेले केन्‍द्र सरकार की मदद से स्‍मार्ट सिटी नहीं बन पती. इन तमाम कामों के लिये हमने एक बड़ी रचना बनाई है, इन तमाम कामों के लिये, शहरी क्षेत्र के विकास के लिये आगामी पांच वर्षों में हमारी सरकार 75 हजार करोड़ रूपये खर्च करने वाली है.

 

अध्‍यक्षीय घोषणा

माननीय सदस्‍यों के भोजन विषयक

 

उपाध्‍यक्ष महोदय-- माननीय सदस्‍यों के लिये सदन की लॉबी में भोजन की व्‍यवस्‍था की गई है, माननीय सदस्‍यों से अनुरोध है कि अपनी सुविधानुसार भोजन ग्रहण करने का कष्‍ट करें.

श्री शैलेन्‍द्र जैन-- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूं किसी ने कहा है कि-

अपनी ही करनी का फल है नेकियां और रूसवाईयां,

आपके पीछे चलेंगीं आपकी परछाइयां.

 

आपने जो कुछ भी वर्ष 2003-04 तक किया है उसी की परिणिती है कि आज हमारे सदस्‍यगण सामने बैठे हैं और हम यहां बैठे हैं. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इस समय हमारे पूरे के पूरे शहर हैं उनकी छबि जो है, एकदम बदल रही है, आज तेज गति से काम शुरू हो रहे हैं और उन तेज गति से काम शुरू करने के लिये निश्चित रूप से हम केन्‍द्र सरकार को और मध्‍यप्रदेश की सरकार को बहुत बधाई देना चाहते हैं. बात कर रहे थे कमलेश्‍वर जी स्‍मार्ट सिटी की, स्‍मार्ट सिटी की हमने कल्‍पना की है, स्‍मार्ट सिटी की भारत वर्ष के प्रधानमंत्री जी ने कल्‍पना की है और हमें इस बात की अत्‍यंत प्रसन्‍नता है कि एक शहर का विकास किस तरह से होना चाहिये. जो एक इनक्लुसिव डेव्हलपमेंट की हमने कल्पना की है. एक समग्र विकास कैसे होना चाहिए,  उसकी जो हमने कल्पना की है, उसकी पूर्ति के लिए निश्चित रूप से स्मार्ट सिटी जैसी योजनाओं की महती आवश्यकता है. स्मार्ट सिटी की जो कल्पना है, यह महज एक कल्पना नहीं है. इसको कार्यरूप में लेने के लिए हमारी सरकार ने गंभीर प्रयत्न शुरु किये हैं. यह राशि केवल केन्द्र सरकार से ही नहीं मिल रही है, स्मार्ट सिटी की 50 प्रतिशत राशि हमें केन्द्र से मिल रही है और 50 प्रतिशत की राशि का अंशदान राज्य सरकार का है. स्मार्ट सिटी के लिए हमें प्रत्येक वर्ष लगभग 100 करोड़ रुपए प्राप्त होने वाले हैं. इन आगामी 5 वर्षों में यह राशि लगभग 500 करोड़ रुपए से अधिक की होगी. हमें यह कहते हुए अत्यंत प्रसन्नता है कि हमारे 100 शहरों का चयन जो पूरे देश भर में स्मार्ट सिटी के रूप में हुआ है उसमें 7 शहर मध्यप्रदेश के हैं और द्वितीय चरण में जब इनमें आपस में प्रतिस्पर्धा करके टॉप 20 का चयन किया गया तो टॉप 20 में मध्यप्रदेश के 3 शहरों का चयन हुआ है. मैं मध्यप्रदेश की सरकार को इस बात के लिए बधाई देना चाहता हूं कि इस दिशा में जो उन्होंने तैयारियां की थी. हमारे नगरीय विकास मंत्री जी ने जो तैयारी की थी, मैं उसकी प्रशंसा करता हूं और यह कुल 20 में से 3 शहरों का चयन हुआ है, पूरे भारत वर्ष में किसी भी प्रदेश के 3 शहरों का चयन नहीं हुआ. मध्यप्रदेश इस मामले में बहुत भाग्यशाली है. मैं इस सरकार को इस बात के लिए बधाई देना चाहता हूं. इस योजना में वर्ष 2015-16 में भारत सरकार ने लगभग 596 करोड़ की स्वीकृति दी है और इस योजना में मध्यप्रदेश सरकार ने अपने बजट वर्ष 2016-17 में 400 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है. यह बहुत ही प्रशंसनीय है.

उपाध्यक्ष महोदय, अब मैं 'Atal Mission for Rejuvenation and Urban Transformation' (AMRUT) अमृत योजना की बात करना चाहता हूं. यह योजना भी हमारी एक बहुत महत्वपूर्ण योजना है. यह केन्द्र सरकार की प्रतिपादित योजना है. इसमें 1 लाख की जनसंख्या से अधिक की जनसंख्या वाले जितने भी देश भर के शहर हैं उनको अमृत योजना में लेकर उनका विकास करने का काम हाथ में लिया है. मध्यप्रदेश के 33 शहर और 1 हमारा धार्मिक शहर ऐसे कुल मिलाकर 34 शहरों का चयन इस अमृत योजना में हुआ है. अमृत योजना में पेयजल की समस्या, सेनिटेशन की, वर्षा से उत्पन्न जो जनहित की समस्याएं होती हैं, उनका निष्पादन कैसे किया जाए, जो शहरों के ट्रांसपोर्टेशन का मामला है उसको कैसे निपटेंगे, इन तमाम विषयों पर हमने अमृत योजना के माध्यम से काम करने का संकल्प लिया है. मुझे यह कहते हुए भी अत्यंत प्रसन्नता है कि अमृत योजना में भी मध्यप्रदेश पूरे भारत वर्ष में अग्रणी है, एक नम्बर पर है. इस योजना में मध्यप्रदेश ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है. भारत सरकार द्वारा हमारी 5 वर्ष की जो योजना है, उसको सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई है और लगभग 8579 करोड़ रुपए की स्वीकृति भारत सरकार से मिल चुकी है.

उपाध्यक्ष महोदय, वित्तीय वर्ष 2016-17 में इस हेतु हमारी सरकार ने 1712 करोड़ रुपए का बजट का प्रावधान किया है. उपाध्यक्ष महोदय, 'Housing for All' आज पूरे देश में और हमारे प्रदेश में ऐसे अनेक हजारों लाखों परिवार हैं, जिनके सिर पर छत नहीं है. सारे के सारे हिन्दुस्तान और मध्यप्रदेश के सारे परिवारों के सिर पर छत हो, यह हमारी सरकार का संकल्प है. इसके लिए हमारी सरकार ने बहुत गंभीर प्रयत्न शुरु किये हैं. इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना एक बहुत महत्वपूर्ण योजना है, इसके हेतु भी मध्यप्रदेश की सरकार ने बहुत त्वरित कार्यवाही की है. लगभग 39 शहरों का एक्शन प्लॉन, housing for all तैयार करके इसको भारत सरकार के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है. इस दृष्टि से भी मध्यप्रदेश देश का सबसे पहला राज्य है, जिसने अपना housing for all का जो प्रपोजल है, वह भारत सरकार के समक्ष रखा है.

उपाध्यक्ष महोदय, एक विषय और भी महत्वपूर्ण है, जो हमारे ग्वालियर का एक्शन प्लान है, उस एक्शन प्लान को पूरे के पूरे देश में मॉडल प्लॉन के रूप में माना गया है. उसको पूरे देश में उसी के हिसाब से लागू करने का काम किया जा रहा है. इस बात के लिए मैं मंत्री महोदय को बधाई देना चाहता हूं. भारत सरकार द्वारा प्रदेश के 16 शहरों के लगभग 19241 आवासीय इकाइयों की 890 करोड़ रुपए की राशि की उन्होंने स्वीकृति दी है. मैं उसके लिए भी मध्यप्रदेश की सरकार को बधाई देना चाहता हूं. यह हमारी केन्द्र से पोषित योजनाएं थी. कुछ योजनाएं ऐसी है जिनको हमने मध्यप्रदेश की सरकार ने अपने बूते पर चालू की हैं. उसमें एक योजना मुख्यमंत्री जी के नाम पर मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजना है. वे शहर, जिनकी आबादी 1 लाख से कम की है, ऐसे तमाम शहर अमृत योजना में कवर नहीं हो रहे थे और अन्य किसी योजना में उन शहरों के लिए कोई योजना नहीं थी, ऐसे तमाम शहर जो पेयजल की समस्या से जूझ रहे थे,वहां के लोगों की कंठ की प्यास बूझाने का काम माननीय मुख्यमंत्री जी ने किया है. मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजना की शुरुआत की है. वर्तमान में लगभग 135 नगरीय निकायों में 1889 करोड़ रुपए की योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं. मैं इस सरकार को बहुत बहुत बधाई देना चाहता हूं. उपाध्यक्ष महोदय, एक योजना और हमारी सरकार ने शुरू की थी वर्ष 2012 से, 'मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना योजना.' किसी भी शहर के लिए मुझे लगता है कि पूरे भारतवर्ष की सबसे अनूठी योजना होगी, जो किसी भी राज्य के द्वारा संचालित की जा रही है. अपने ही संसाधनों से हमने अपने महत्वपूर्ण सड़कों की महत्वपूर्ण शहरों की सड़क व्यवस्थाएं हैं, नाली व्यवस्थाएं हैं, बिजली की व्यवस्थाएं हैं, इन तमाम व्यवस्थाओं को ठीक करने का काम हम इसके माध्यम से कर रहे हैं.

उपाध्यक्ष महोदय, 277 नगरी निकायों की लगभग 1419 करोड़ की योजनाओं की स्वीकृति दी जा चुकी है. इसमें एक कंपोनेंट बहुत महत्वपूर्ण है, जिसका उल्लेख मैं आपके माध्यम से इस सदन में करना चाहता हूं, इसके लिए हमारी सरकार ने हुडको से लोन लिया है. लेकिन इस लोन का जो रिपेमेंट है, लोन के रिपेमेंट के लिए नगरीय निकायों पर लोड कम करने के लिए लगभग 75 प्रतिशत का हिस्सा सरकार वहन कर रही है और रिमेनिंग जो 25 प्रतिशत भी नहीं आता है, लगभग 18 प्रतिशत की राशि पड़ती है, वह राशि नगरीय निकायों को भरनी पड़ रही है. यह भी एक बहुत महत्वपूर्ण बात है, जिस बात के लिए मैं बधाई देना चाहता हूं. एक काम और हमारी सरकार ने किया है जो इसकी पूर्व की सरकारों ने नहीं किया था थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन का काम, जो निर्माण कार्य की गुणवत्ता है, हमेशा उस पर प्रश्न चिह्न लगता रहा है, उन तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन की और इस तरह के क्वालिटी कंट्रोल एजेंसी की नियुक्ति करने की हमारी सरकार ने शुरुआत की है. मैं उस बात के लिए भी सरकार को बहुत बहुत बधाई देना चाहता हूं.

उपाध्यक्ष महोदय, बहुत सारे नगरीय निकाय ऐसे हैं जहां पर स्कील्ड मैन पॉवर की बहुत कमी है. उनके चलते बड़ी बड़ी योजनाएं जो केन्द्र से पोषित हैं, राज्य से पोषित हैं इन योजनाओं के क्रियान्वयन में बहुत तकनीकी तकलीफ आती थी और उनकी कभी कभी तो प्रॉपर डीपीआर नहीं बन पाती थी. इन सब के अभाव में वह योजनाएं न बन पाती थीं, न क्रियान्वित हो पाती थीं.इस काम के लिए मध्यप्रदेश की सरकार ने बहुत महत्वपूर्ण क्रांतिकारी कदम उठाया और 'मध्यप्रदेश अर्बन डेव्हलपमेंट कंपनी' की उन्होंने स्थापना की है. स्थानीय निकायों को न केवल वित्तीय सहायता वरन् तकनीकी सहायता देकर उसमें सहयोग करके इन योजनाओं के क्रियान्वयन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

उपाध्यक्ष महोदय - आप कितना समय लगें.

श्री शैलेन्द्र जैन -- उपाध्यक्ष महोदय मैं 5 मिनट में समाप्त कर देता हूं. स्वच्छता मिशन न केवल केन्द्र सरकार की वरन मध्यप्रदेश सरकार का भी एक मिशन है. इस मिशन मोड में हम लोग काम कर रहे हैं और हमारी सरकार ने 4 लाख निजी शौचालय के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की है. उसमें एक लाख पचास हजार निजी शौचालय हमारी सरकार के द्वारा अभी तक बनाये जा चुके हैं . यह भी पूरे देश में हमारा द्वितीय स्थान है. यह भी प्रसन्नता का विषय है.

उपाध्यक्ष महोदय सोलिड बेस मैनेजमेंट का काम पूर्व के वर्षों में न के बराबर हुआ है. हमारी सरकार ने इस पर तेजी से साथ काम शुरू किया है और सागर व कटनी जैसे हमारे नगरीय निकाय में सोलिड बेस के मैनेजमेंट की शुरूवात हो गई है. हम बहुत जल्दी डोर टू डोर कचरा कलेक्शन से लेकर लेण्ड फिल साइड तक ले जाकर वैज्ञानिक पद्धति से कचरे को निष्पादन का काम हम लोग वहां पर करने वाले हैं . यह भी एक प्रसन्नता का विषय है.

उपाध्यक्ष महोदय नगरीय निकायों में एडमिनिस्ट्रेशन अपने आप मेंहमेशा एक विवाद का विषय रहा है. ई गर्वनेंस की व्यवस्था सबसे पहले हमारी सरकार ने नगरीय निकायों में शुरू की है और ई नगरपालिका की परियोजना की शुरूवात की है. इसके लिए सबसे ज्यादा समस्या जो आती थी भवन अनुज्ञा की आती थी, उसके नक्शे आदि पास कराने को लेकर . इ स काम को सुविधाजनक बनाने के लिए, आटोमेटिक बिल्डिंग प्लान एप्रूवल सिस्टम सरकारने शुरू किया है. यह भी एक प्रशंसनीय विषय है.

उपाध्यक्ष महोदय जीआईएस सिस्टम से हमारी नगरीय निकायों की आय बढ़ाने का काम भी हमारी सरकार के द्वारा किया जा रहा है, जियोग्राफीकल इंफार्मेशन सिस्टम के माध्यम से सेटेलाइट मेपिंग के माध्यम से हम एक एक घर के डिटेल लेकर करेक्ट तरीके से उनके घर का केलकूलेशन कर पा रहे हैं.

उपाध्यक्ष महोदय मैं अपने क्षेत्र की एक दो बातें रखकर अपनी बात को समाप्त करूंगा. हाऊसिंग फार आल में हमारी सरकार बहुत अच्छा काम कर रही है. इसकी पूर्व की हमारी जो योजना थी. राजीव आवासीय योजना इसके तहत सागर में एक पायलेट प्रोजेक्ट और एक प्रथम राउण्ड का प्रोजेक्ट शुरू हुआ था. अर्थाभाव केकारण हमारे वह प्रोजेक्ट कंपलीट नहीं हो पारहे हैं अर्धनिर्मित अवस्था में वह हमारे प्रोजेक्ट पड़े हुए हैं. मैं आपके माध्यम से सरकार से और मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हू कि हमारे जो प्रथम राउण्ड के जो प्रोजेक्ट हैं उसको किसी तरह से पूरा करवानेकी व्यवस्था करें.

उपाध्यक्ष महोदय अभी बीच में मंत्री जी का सागर आगमन हुआ था. हमारे सागर विधान सभा क्षेत्र के श्मशान घाट की स्थिति अच्छी नहीं थी. मैंने उनका ध्यानाकर्षित किया तो उसके लिए उन्होंने 1 करोड़ रूपये की राशि प्रदान की है. मैं इसके लिए उनका धन्यवाद करता हूं. लेकिन निवेदन करना चाहता हूं कि यह राशि अपर्याप्त है इस नये बजट में लगभग इतनी ही राशि और वह देंगे तो निश्चित रूप से सागर के श्मशान घाट को हम उन्नत करने में सफल होंगे.

उपाध्यक्ष महोदय सागर की झील के बगैर हमारी बात समाप्त नहीं होगी. सागर की झील के लिए एक योजना बनायी है उस योजना को केन्द्र को भेजा गया है लेकिन मैं मध्यप्रदेश की सरकार के मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि उ समें डीसिलटिंग का कंपोनेंट तकनीकी कारण से छूट गया है. डीसिलटिंग के बगैर वह तालाब अपनी गरिमा और विस्तार खोते जा रहे हैं अगर उस दिशा में हमारी सरकार कुछ विशेष प्रयास करेगी क्योंकि सागर का जो तालाब है मेन मेड मध्यप्रदेश का दूसरे नंबर का तालाब है. इस दृष्टि से हमें झील संरक्षण केलिए तालाब के संरक्षण के लिए आपके संरक्षण की बहुत आवश्यकता है. उपाध्यक्ष महोदय अंत में माननीय मुख्यमंत्री जी को मंत्री जी को सरकार के लिए इन लाइनों के साथ में अपनी बात को समाप्त करूंगा-- कहते हैं कि कदम निरंतर चलते जिनके, श्रम जिनका अविराम है, विजय सुनिश्चित होती उनकी घोषित यह परिणाम है. बहुत बहुत धन्यवाद्.

डॉ गोविन्द सिंह ( लहार ) -- माननीय उपाध्यक्ष महोदय नगरीय प्रशासन की मागें प्रदेश की जनता की सुख सुविधाओं को सुधारने के लिए रखी गई हैं. मैं इ सके बारे में कहना चाहता हूं कि इसकी बड़ी जोर शोर से हमारे तमाम साथी, प्रदेश मेंचर्चा चल रही हैकि स्मार्ट सिटी.

भारत सरकार ने स्मार्ट सिटी योजना को बड़े जोर शोर से प्रचारित किया है. भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को जून 2015 में सपना दिखाई दिया. वे लगातार दौरा कर रहे थे और वह विदेशों देख आये तो पूछा कि यह क्या है स्मार्ट सिटी वहां से पता करके आये और यहां पर भी चालू कर दिया है स्मार्ट सिटी, स्मार्ट सिटी, और उसके बाद में पूरे देश में कहा गया कि आप प्रस्ताव लायें. उसके बाद में योजनाएं बन गई करोड़ो रूपये उसकेलिए खर्च कर दिये गये. हमारी मध्यप्रदेश की सरकार ने भी प्रस्ताव भेजा. पहले यह आया कि केवल 7 शहरों में स्मार्ट सिटी बनायेंगे. इसके बाद में आया कि केवल तीन शहरों को बनायेंगे. भोपाल इंदौर जबलपुर को, और स्मार्ट सिटी में भी प्रतिवर्ष पांच वर्ष तक भारत सरकार 100 - 100 करोड़ रूपये देगी और उतना ही राशि सरकार और नगरीय निकाय मिलकर मिलायेंगे.

उपाध्यक्ष महोदय मेरा कहना है कि कई नगरीय निकायों की हालत तो यह है कि उनके पास में वेतन बांटने का पैसा नहीं है लेकिन आपने अभी शुरूवात की है तीन शहरों से और फिर आपने स्मार्ट सिटी में भी क्या कर दिया है. पूरा शहर नहीं है शहर का कुछ हिस्सा ले लिया है, वास्तव में आप देखें तो यह स्मार्ट सिटी नहीं है स्मार्ट मोहल्ला है. एक ही मोहल्ले को स्मार्ट कर रहे हैं. लोगों को उजाड़ने का काम कर रहे हैं. हजारों लाखों जो खूबसूरत मोहल्ला हैं, जहां पर आपने देखा कि यह खूवसूरत है तो आप वहां स्मार्ट सिटी के नाम पर पेड़ काट रहे हैं. लोगों को उजाड़ रहे हैं पेड़ों को काट रहेहैं 100 - 100 साल के बने हुए मकानों को तोड़ने का प्लान कर रहे हैं, आपने यह काम तो इंदौर में चालू कर दिया है.

उपाध्यक्ष महोदय जहां पर लोग वर्षों से 100 साल से अपना मकान बनाकर रह रहे थे उनके मकान भी तोड़ने का काम कर रहे हैं. न तो उनके बसाहट के इंतजाम हैं और न ही कोई सुविधा है उनको कह रहेहैं कि मुआवजा देंगे, तब तक सड़कों परही घूमों.

इसलिए मेरा कहना है कि यह स्मार्ट सिटी में स्मार्ट मोहल्ले को क्यों बीच में ला रहे हैं. आप हंस क्यों रहेहैं आप उसमें भी पूरा वार्ड नहीं ले रहेहैं.( डॉ नरोत्तम मिश्र जी को हंसते हुए देखने पर ) भोपाल और इंदौर के आप पूरा एक वार्ड भी नहीं ले रहे हैं एक वार्ड पूरा क्यों नहीं ले रहे हैं. यह स्मार्ट मोहल्ले को स्मार्ट सिटी का नाम देकर प्रचारित कर रहे हैं. यह हालत है इनकी. इसके अलावा मैं यहभी बता देना चाहता हूं कि यह स्मार्ट सिटी बनाने के पहले रिंग रोड बना रहे हैं कई शहरों में, इंदौर जैसे महानगर की स्मार्ट सिटी का प्लान बिल्डर बना रहे हैं, उन्होंने कहा कि यहां पर पहले रिंग रोड बना दो तो नेताओं ने बैठक की बिल्डरों को बुलाया, भू माफियाओं को बुलाकर , पहले तो इन्होने प्लानिंग की कि कहां पर रिंग रोड निकलेगी तो वहां पर ज्यादा से ज्यादा जमीनें खरीद लीं, नेताओं और भू माफियाओं के द्वारा और उसके बाद में वहां पर रिंग रोड डाल दी. जो जमीन गरीब किसानों को उजाड़कर 2 - 4 लाख रूपये बीघा ली थी आज वह एक एक करोड़ रूपये बीघा हो गई है.

चौधरी मुकेश सिंह चतु्र्वेदी -- उपाध्यक्ष महोदय डॉक्टर साहब बड़े अनुभव से बोलते हैं. पुराना बहुत तगड़ा अनुभव है.

डॉ गोविन्द सिंह -- आपकी तरह नहीं है पंडित जी. इसके साथ ही साथ आपने जो प्लान किया है यहतो नई परंपरा है, प्लान बनायें जमीनें खरीदें और फिर पैसा कमाओ वहीं आसपास की जमीनें, करोड़ो रूपये में बिक गई , जो कि किसानों के खेत उजाड़कर कौड़ियों के मोल खरीदी थीं. स्कूलों के लिए बिल्डरों के लिए कालोनी बनाने के लिए.

डॉ नरोत्तम मिश्र -- पर्चा आपने दुबारा उठा लिया रिपीट हो गया वह.

डॉ गोविंद सिंह -- हम तो अपने प्वाइंट यहीं बैठे बैठे बनाये हैं.

श्री मुकेश नायक -- यह वही पर्चा नहीं है इन्होंने दुबारा नहीं उठाया है. इन्होंने मध्यप्रदेश में रिंग रोड की बात की है. जो रिंग रोड बन रहीहैं बनाने के पहले बड़े बड़े नेताओं ने सत्ताधारी दल के गठबंधन के साथ में काम करने वाले लोगों ने वह रिंग रोड़ो के आस पास बड़े पैमाने परजमीनें खरीदी हैं.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- गोविंद सिंह जी आपसे दुगुनी बार जीत के आए हैं आपके ट्यूशन की जरूरत नहीं है इनको.

श्री मुकेश नायक -- जमीनों का हेर-फेर ऐसे मजाक से दूर नहीं होगा.

डॉ. गोविन्‍द सिंह -- मुकेश नायक जी, हमसे बहुत सीनियर रहे हैं, वे 1980 वाले हैं हम 1990 वाले हैं. हम तो 10 साल पीछे वाले हैं उनसे.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- मैंने बात 6 बार और 3 बार की की है.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- गोविंद सिंह जी आप जारी रखें.

डॉ. गोविन्‍द सिंह -- क्‍या साहब ?

उपाध्‍यक्ष महोदय -- मैं कह रहा हूँ कि आप जारी रखें, आपके तेवर एकदम बदल गए थे, आपने सोचना मैं बैठने के लिए कह रहा हूँ, नहीं आप जारी रखें.

डॉ. गोविंद सिंह -- बीच-बीच में ये डिस्‍टर्ब कर देते हैं, आप इनको रोक दिया करो.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- जितना व्‍यवधान होता है मैं नोट करता हूँ. आप जारी रखें.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार -- आप उस पर्चे को हटा दो और अगले को देखो.

डॉ. गोविंद सिंह -- बैठ जाइये, व्‍यवधान पुरुष जी.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार -- उसमें कोई नोयडा वगैरह तो नहीं लिखा है.

डॉ. गोविंद सिंह -- इसमें एक पर्चा है व्‍यवधान पुरुष के नाम का, पूरा लेख लिखा है इस पर. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हाऊसिंग बोर्ड जमीनें ले लेता है और प्‍लॉट बनाकर बेचता है, उपभोक्‍ताओं को मकान उपलब्‍ध कराता है लेकिन मकान 4-4, 5-5 वर्ष तक वे देते नहीं हैं जबकि लोग बैंकों से ब्‍याज से लोन लेकर मकान खरीदते हैं, उनको ब्‍याज का भुगतान भी नहीं किया जाता है. इस तरह हाऊसिंग बोर्ड एक लूट का जरिया बन चुका है यहां आम जनता को लूटा जा रहा है. मेरा सरकार से अनुरोध है कि वह इस पर कार्यवाही करे उनके विरुद्ध कार्यवाही करे ताकि नियत समय में उनको मकान मिल सकें. रिवेरा टाऊन में भी तमाम विधायकों ने मकान खरीदे लेकिन ठेकेदार भाग गया, वहां पर ठेकेदार से 20 प्रतिशत कमीशन मांगा जाता था, ठेकेदार ने नहीं दिया तो छोड़कर ही भाग गए. 3-3, 4-4 वर्षों का ब्‍याज विधायकों ने दिया लेकिन हाऊसिंग बोर्ड ने नहीं दिया.

उपाध्‍यक्ष महोदय, पर्यावरण की सुरक्षा के लिए ग्रीन ट्रिब्‍यूनल ने तमाम निर्देश जारी किए परंतु उनपर कोई असर नहीं हो रहा है. जैसे हमारा मालनपुर विधान सभा क्षेत्र है वहां कैडबरी फैक्‍ट्री है तो उससे पानी गंदा हो रहा है और गंदा पानी पीकर बस्‍ती के लोग बीमार हो रहे हैं. वहां के मंत्री बैठे हुए हैं लेकिन उनको भी चिंता नहीं है, उनको जनता से कोई मतलब नहीं है, वाहवाही लूटकर और जनता को गुमराह करके जीतकर आ गए लेकिन जनता कोई ध्‍यान नहीं है. वहां पर जो क्रेशर चल रहे हैं उनको पर्यावरण की मंजूरी नहीं मिली है, मैं चुनौती देता हूँ वहां पर 15-20 क्रेशर लगे हुए हैं लेकिन 1-2 को छोड़कर किसी ने परमीशन नहीं ली है. अत: मैं कहना चाहता हूँ कि कम से कम अपना जमीर जगाइये लाल सिंह जी, वहां से रोजाना निकलते हैं देखते हैं कि गंदगी कैसे फैल रही है, खदानों से धूल कैसे उड़ रही है, वहां पर मकान चटक रहे हैं तो आपके पास प्रदूषण विभाग है तो इन सब चीजों पर रोक लगाएं और जो क्रेशर वहां अवैध रूप से चल रहे हैं उन पर भी आप अंकुश लगाएं. अभी तक यह होता था कि किसी विभाग का भारसाधक मंत्री होता था तो उसे चार्ज की अधिसूचना जारी होती थी लेकिन बिना अधिसूचना के आप फुलफ्लेस मंत्री बन गए, यह नगरीय प्रशासन विभाग बहुत बड़ा विभाग है, लेकिन अधिसूचना भी जारी कराइये.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सिंहस्‍थ और पेंशन घोटाले के बारे में कहना चाहता हूँ. इसी विभाग के तहत पेंशन घोटाला हुआ है. जैन आयोग की रिपोर्ट आ गई, वह वर्षों से रखी हुई है, मंत्रियों की समिति बना दी गई, उसकी समीक्षा हो गई लेकिन क्‍या कारण है वह रिपोर्ट अभी तक जारी नहीं हुई है. आपकी हिम्‍मत क्‍यों नहीं हो रही है, लाल सिंह जी, भिंड का पानी पिया है जरा हिम्‍मत दिखाओ, इसकी रिपोर्ट जल्‍दी जारी करो, और अगर ऐसा नहीं कर सकते तो तत्‍काल इस्‍तीफा दे दो, क्‍यों बैठे हुए हो. इसी प्रकार सिंहस्‍थ में भी जो गड़बड़ियां हुई थीं उसकी भी जांच रिपोर्ट आ गई, दोनों रिपोर्ट पर कार्यवाही करें तो मैं लाल सिंह को रेड लॉयन घोषित करूंगा.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- रेड और लाल में अंतर क्‍या है ये बता देना.

डॉ. गोविंद सिंह -- अंग्रेजी नाम हो जाएगा.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- डॉक्‍टर साहब, उसको फिर रेड लॉयन करना पड़ेगा क्‍योंकि पूरे नाम का अंग्रेजी अनुवाद करना पड़ेगा.

डॉ. गोविंद सिंह -- मैंने भी तो रेड लॉयन ही कहा था.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- कहीं रेड लॉयन डेड लॉयन न हो जाए.

डॉ. गोविंद सिंह -- ऐसा नहीं होगा.

श्री यादवेन्‍द्र सिंह -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, डॉक्‍टर साहब को बोर नहीं लगता, एक देशी कहावत है हमारे यहां कि -- आंधर के आगे रौवे आपन दीदा खाबे -- पौधा नहीं लग रहा है हो जाएंगे तो कुछ नहीं. धन्‍यवाद.

डॉ. गोविंद सिंह -- मैं कहना चाहता हूँ कि कई छोटी-छोटी नगर-परिषदें हैं, नगर पालिकाएं हैं वहां पर स्‍टाफ की कमी है. जनवरी, 2015 में नई नगर-परिषदों और नगर-पालिकाओं ने अपना कार्यभार ग्रहण कर लिया और जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों ने भी अपना-अपना कार्यभार ग्रहण कर लिया. लेकिन वहां पर स्‍टाफ नहीं है, वहां पर सब-इंजीनियर नहीं हैं, सीएमओ नहीं हैं, नाकेदार नहीं हैं, पंप ड्रायवर नहीं हैं. पहले एक चयन-समिति होती थी जिसमें उपसंचालक रहते थे, जिले के सीनियर सीएमओ और नगर-पालिका के सीएमओ रहते थे और वे चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की तथा सब-इंजीनियर्स आदि की भरती करते थे तो कम से कम भरती हो जाती थी. अब जबकि नाकेदारों के, चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के पद खाली हैं, सब-इंजीनियर नहीं हैं तो स्‍टाफ की कमी के कारण शहरों का विकास कैसे होगा. हम सुझाव देना चाहते हैं कि यदि आपके पास सब-इंजीनियर नहीं है तो लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग और आरईएस विभाग में जो सब-इंजीनियर हैं वे ले लिए जाएं, आप जिले में कलेक्‍टर को यह अधिकार दें वह उनकी पूर्ति करे.

उपाध्‍यक्ष महोदय, एक निविदा-समिति है, जो कि हर नगर-परिषद् और नगर-पालिका में बनाई गई है, इसमें तीन लोग हैं - सीएमओ, उपयंत्री और उपसंचालक. अब अगर एक जेसीबी खरीदना है तो वह निविदा-समिति में जाता है यहां महीनों लग जाते हैं. हमारी मिहोना नगर-परिषद् है उनके पास पैसे हैं एक वर्ष से उनको जेसीबी मशीन खरीदना है लेकिन निविदा-समिति का सब-इंजीनियर 15 प्रतिशत कमीशन मांग रहा है बोल रहा है मुझे दो तभी मैं दस्‍तखत करूंगा. जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों का ये क्‍या मान कर रहे हैं, यह स्‍थिति है कि जैसे गांव में कहावत है कि बच्‍चे बिच्‍छू लेकर घूमते हैं. हमने कहा कि ये क्‍या कर रहे हो तो बोले डंक कटा हुआ है डंक में ही जहर होता है तो चुने हुए प्रतिनिधियों के डंक काटे जा रहे हैं. अध्‍यक्ष को कोई उनको पावर नहीं है, इनके अधिकार सीमित कर दिए गए हैं. इसी तरह एक मूल्‍यांकन समिति है, मूल्‍यांकन के लिए पहले तो सब-इंजीनियर नहीं है, ग्‍वालियर में महीनों-महीनों पड़े रहते हैं, विकास कार्य हो ही नहीं पा रहे हैं. पहले जाओ तो कहते हैं कि एस्‍टीमेट बनाइये, केवल 5 लाख रु. तक का नगर-परिषद् को अधिकार दिया गया है आजकल 5 लाख रुपये में होता क्‍या है. 5 लाख के ऊपर कलेक्‍टर करेगा, कलेक्‍टर के बाद ज्‍वाइंट डायरेक्‍टर ग्‍वालियर करेगा फिर वह भोपाल आएगा. आखिर चुनाव कराते ही क्‍यों हो. नामिनेशन कर दो,(XXX). 5 प्रतिशत सब-इंजीनियर, 5 प्रतिशत कार्यपालन यंत्री ले लेते हैं, सालों तक एस्‍टीमेट और बिल पड़े रहते हैं, ठेकेदार लोग नगर-परिषदों के चक्‍कर लगाते रहते हैं.

श्री मनोज निर्भय सिंह पटेल -- डॉक्‍टर साहब, (XXX)?

डॉ. गोविंद सिंह -- बैठ जाइये, हरी नहीं पहनी है न काली टोपी लगाए हैं.

श्री जितु पटवारी -- डॉक्‍टर साहब, मेरी आपत्‍ति है पेंट हो गया है, बार-बार चड्डी का नाम नहीं लेंगे.

डॉ. गोविंद सिंह -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपसे अनुरोध है कि पुराने आदेश को ही लागू करें और आप लोग उन अधिकारों को अपने तक ही केन्‍द्रीयकृत न करें. जो नीतिगत निर्णय हैं वह नगर-परिषदों को दें, उसमें नगर-परिषदों के अध्‍यक्षों को बैठाएं ताकि भ्रष्‍टाचार न हो और अंकुश लगा रहे. उनको पावर है नहीं.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- आपके हाथ में बहुत कागज हैं, अब आप क्षेत्र पर आ जाएं.

डॉ. गोविंद सिंह -- चलो दो कागज फेंक दिए हमने, अब एक ही रह गया है.उपाध्यक्ष महोदय, लहार नगर परिषद है उसमें तमाम् पद खाली है. मिहोना में साल से सीएमओ नहीं है. दबोह में सीएमओ नहीं है. अभी तक क्या था कि बिल बनते थे तो सब इन्जीनियर अकेला था. अब नये कुछ प्रमोशन हो गये अब असिस्टेंट इंजीनियर तक फाइल जाने लगी. अब 5 प्रतिशत उसको भी चढ़ौती चढ़ाओ.कितनी जगह चढ़ौती चढ़ेगी. कृपा करके इसमें सुधार करो, समीक्षा करो. आप जब बैठते हैं विभाग में तो कभी कभी जनप्रतिनिधियों को बुला लिया करो, एकाध बार उनसे भी बात कर लो. उनको जनता ने चुना है. उनसे पूछो क्या कठिनाई आ रही है, क्यों काम में व्यवधान हो रहा है, क्यों काम की क्वालिटी नहीं बन पा रही है. अब 30-30 प्रतिशत अगर वहीं वसूल कर लेंगे तो काम कहां से होगा? मजबूरी में उनको देना पड़ रहा है. इसके साथ ही हमारा कौरव-पाण्डवों के समय का भाटनताल है उस समय जब लाख का महल जला था तो उस समय पाण्डवों ने उस भाटनताल में जाकर स्नान किया था, वह ऐतिहासिक तालाब है उसके जीर्णोद्धार के लिए हमने मांग की है. मुख्यमंत्री जी से भी अनुरोध किया था. उन्होंने कहा था कि हम भेजेंगे लेकिन अभी तक हुआ नहीं है. पता नहीं कागज कहां चले जाते हैं. इसके साथ ही हमारे लहार में 1930 की नगरपालिका है उसको नगर परिषद् बना दिया. नगरपालिका का 1930 का जो भवन बना था एक दिन मीटिंग चल रही थी वह पूरा गिर पड़ा है. अब भवन के लिए पैसे नहीं हैं. हमने कहा कि भवन मंजूर करा दो लेकिन अभी तक पैसा नहीं मिला है. इसके साथ ही हमारा अनुरोध है कि आईडीएसएमटी की योजना है उसके तहत् 10 वर्ष पहले दुकाने बनाने की मंजूरी मिली थी. 10 वर्ष पहले दुकानें बन गयीं, वहां 90 दुकानें बनी हैं लेकिन वह दुकानें ऐसी जगह बनी है कि उनको किसी ने लिया नहीं, बिक नहीं रही थीं, अभी नगर परिषद ने काफी प्रयास करके 30 दुकानों की नीलामी कर दी है, 50 हजार से ऊपर की उनकी नीलामी आयी है. अधिकार है कि 50 हजार से ऊपर सरकार तक पहुंचेगी, अब उसकी दुकाने हैं, बाकी की फिर टूटने लगी हैं क्योंकि अब नीलामी के बाद कब्जा नहीं दे पा रहे हैं, पैसा जमा हो चुका है, दो-दो, चार-चार महीने प्रस्ताव पड़े रहते हैं तो यह छोटे मोटे काम हैं, नगर परिषदों को ताकतवर बनाइये,जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों का सम्मान करो, भोपाल में हमारे भाई हैं उन्होंने कई शिकायतें कर रखी हैं, मंत्री जी ने जांच के आदेश भी दिये थे, दो चार महीने हो गये, उसमें कार्यवाही करें. भोपाल में आप नर्मदा का पानी ला रहे हैं. उस पानी के लिए बहुत पैसा ले रहे हैं, जितना मिनरल वाटर के लिए पैसा लगता है उस हिसाब से पैसा ले रहे हैं. हमारा अनुरोध है कि नर्मदा का पानी दें, एक दिन छोड़ के पानी दे रहे हैं, जल्दी प्रारम्भ करें. लेकिन गरीब आदमी से पीने के पानी के लिए मिनरल वाटर के समान पैसा न लें. उपाध्यक्ष महोदय, आपको बहुत बहुत धन्यवाद.

श्री रामेश्वर शर्मा( हुजूर)-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 22,71 और 75 के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ. जिस तरह हम पूरे मध्यप्रदेश की कल्पना करते हैं उस कल्पना में अगर जोड़ा जाए तो शहरी अधोसंरचना एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. अगर हम शहरी अधोसंरचना को इससे बाहर करें तो पूरे मध्यप्रदेश की कल्पना नहीं की जा सकती और इसलिए अगर इस कल्पना पर करें तो पहली बार एक ऐतिहासिक फैसला मध्यप्रदेश की सरकार करती है, माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान करते हैं. मैं भी चूंकि जहां से मेरी राजनैतिक शुरुआत हुई. नगर निगम के पार्षद से जब हम लोग चुनकर आते थे और माननीय आप भी उस समय मंत्री हुआ करते थे, डाक्टर साहब भी मंत्री हुआ करते थे और भी अनेक लोग मंत्री हुआ करते थे.जब कभी हम नगरीय प्रशासन से किसी से मिलने आये या सेक्रेट्री से या माननीय मंत्री से मिले, अगर दो चार लाख के कोई काम की घोषणा हो जाती थी या 2-4 लाख रुपये का कोई काम मिल जाता था तो एक बड़ी बात होती थी लेकिन आज बताने की बड़ी खुशी की बात है कि माननीय शिवराज सिंह चौहान ने एक मध्यप्रदेश में नवीन परिवर्तन किया है. जब हम गांव का विचार करेंगे तो गांव में उन्होंने एक पंच परमेश्वर योजना लागू करके गांव के जनकल्याण की योजना बनायी, गांव के विकास की योजना बनायी. जब हम शहरी अधोसंरचना की बात करेंगे तो हमको वहां पर दो लाख, तीन लाख रुपये के लिए ढूंढना पड़ता था लेकिन आज एक शहर एक शहर का विचार करें तो मुख्यमंत्री अधोसंरचना में करोड़ो रुपये की राशि उस शहर के विकास के लिए दी जाती है. शहरों की तस्वीर बदली है, शहरों की तकदीर बदली है और केवल एक ही नहीं है. आप देखिये, वहां पर हर योजना, चाहे पीने का पानी हो, चाहे सीवेज हो, चाहे सड़क हो, चाहे खेल का मैदान हो या और भी कोई काम हो, सब उस अधोसंरचना के तहत् काम हो रहे हैं, वहां पर परिवर्तन हुआ है. हमने उन बस्तियों की भी बात की जो अवैध कालोनियां मानी जाती हैं. उन अवैध कालोनियों में भी परिवर्तन हुआ. वहां भी अब खुशहाली की लहर है और इसलिए अगर इस बात के लिए किसी को बधाई दी जाए तो माननीय शिवराजसिंह जी चौहान को बधाई दी जाए, माननीय लालसिंह जी को बधाई दी जाए कि शहर के विकास के लिए सरकार ने कोई अधोसंरचना बनायी. अभी हमारे कमलेश्वर जी थे नहीं, वह बात कर रहे थे कि क्षिप्रा, आखिर क्षिप्रा है क्या, हमने तो अपने पूर्वजों से कहानी से सुना है, हमने धर्मशास्त्र से सुना है कि एक भागीरथ पैदा हुआ जिसने अखण्ड तपस्या की और तपस्या करके गंगा की धरा पर गंगा को अवतरित किया तो भागीरथी रुप से गंगा हो गयी. आज अगर शिवराज जी को इस बात के लिए धन्यवाद दिया जाए कि नर्मदा और क्षिप्रा जोड़ने में कोई भागीरथी है तो उसका नाम शिवराजसिंह चौहान है जिसने मध्यप्रदेश के अऩ्दर यह तो सत्य करके दिखा दिया कि नर्मदा का पानी क्षिप्रा के तट में मिल सकता है और जब नर्मदा और क्षिप्रा दो महान पुण्य नदियां जब एक साथ मिलेंगी,जो भी जाएगा, पापी है या नहीं, नहायेगा, जिन्दगी जरुर उसकी धन्य हो जाएगी, जिन्दगी में जरुर उसके परिवर्तन ला देगा और यह परिवर्तन का काम माननीय मुख्यमंत्री जी ने किया और आज मैं बता देना चाहता हूँ, आपने एक भी कुम्भ कराया है, आपके भाग्य में कभी कोई कुम्भ है? नहीं है. अगर भारतीय जनता पार्टी ने कुम्भ कराया है तो आज 2016 का कुम्भ आने वाले 12 साल बाद जो कुम्भ है उसमें कोई अलग से काम कराने की जरुरत नहीं पड़ेगी. आने वाले कुम्भ की तैयारी भी आज शिवराज सिंह जी चौहान सरकार ने कर दी है. वहां पर आज जो विकास के कार्य किये गये, वहां पर जितने रेलवे स्टेशनों पर कार्य कराये, केवल अकेले उज्जैन ही नहीं, उज्जैन से लगे हुए जो गांव थे, उज्जैन से लगे हुए जो शहर थे, उज्जैन, इन्दौर, देवासओंकारेश्वर,महेश्वर,मंदसौर आदि क्षेत्रों में भी विकास की योजनाएं इसलिए ली गयीं कि वहां पर जब धार्मिक श्रृद्धालु आयेंगे, करोड़ों की संख्या में लोग आयेंगे, इनके लिए रहने की व्यवस्था होगी, इनके लिए रेलवे स्टेशन लगेगा, इनके लिए बस स्टैण्ड लगेगा और जब इतनी व्यवस्थाएँ वहां पर करनी पड़ेंगी तो अकेला उज्जैन कैसे झेलेगा और आज आप उज्जैन में जाइये, मैं यह कहना चाहता हूँ और मैं माननीय मंत्री श्री लालसिंह जी से आग्रह भी करुंगा कि इस सदन के पूरे सदस्यों को आप उज्जैन के महाकुम्भ प्रारम्भ होने के पहले एक बार दिखा दो कि यह वह उज्जैन नहीं जो पहले था. अब वह उज्जैन है जो परिवर्तन करके एक विकास का आकार ले लिया है. हम स्मार्ट सिटी की कल्पना कर रहे हैं लेकिन स्मार्ट सिटी का अगर सौंदर्य कोई रुप देखा जाए, वैसे तो सत्यम् शिवम् सुन्दरम्, शिव तो अपने आप में सुन्दर हैं, अद्भुत हैं लेकिन उज्जैन की नगरी को देखा जाए तो स्मार्ट सिटी का अंग उसमें झलकता है. आज वहां पर व्यवस्थाएँ नजर आ रही हैं, वहां पर आज कितने पुल बन गये, कितनी नवीन सड़कें बन गयीं, कितने करोड़ों यात्रियों के रुकने की व्यवस्था हो गयी, यह हम वहां पर देख सकते हैं और इसलिए मैं चाहूंगा कि माननीय मंत्री जी आप पूरे सदन को आग्रह करिये,एक बार जरुर ले जाकर दिखाइये. महाकाल में दूसरे लोग आयेंगे, दूसरे प्रदेशों के लोग आयेंगे, साधु समाज आयेगा,विदेशों से लोग आयेंगे लेकिन इससे पहले मध्यप्रदेश की विधानसभा के सदस्य जाकर देखें कि महाकाल श्रृंगार करके तैयार है, लोगों के कल्याण के लिए दर्शन देने के लिए महाकाल तैयार है. वह महाकाल की पुण्य नगरी आज लोगों का आव्हान कर रही है कि आइये क्षिप्रा के तट में, अमृत का मेला लगेगा, आज देश विदेश में इसका आकार ले रहा है, इसका प्रचार हो रहा है, अमृत के मेले का इस तरह माहौल बनाया जा रहा है जिससे लोगों को लगना चाहिए कि वास्तव में केवल वहां पर लोग आयेंगे, स्नान करके नहीं बल्कि वैचारिक कुम्भ का भी वहां पर अधिष्ठान होगा, वहां पर विचार किया जाएगा कि हमारा धर्म क्या है, हमारा पर्यावरण क्या है, हमारे पेड़ क्या हैं, हमारे पशु क्या हैं, हमारे पक्षी क्या हैं, हमारे जीव-जन्तु क्या हैं इनके कल्याण के लिए कैसा विकास होना चाहिए, इस पर भी वहां पर बातचीत होगी.

श्री मनोज निर्भय सिंह पटेल-- वैसे भी पूरे सदन को ले जायेंगे तो इधर के सत्ता पक्ष के लोग तो जाते रहते हैं, विपक्ष के लोग भी जाएं तो सभी के पाप धुल जाएंगे क्योंकि क्षिप्रा नदी को पापनाशिनी बोलते हैं.

श्री रामेश्वर शर्मा-- वह बाद में बता देना. वैसे सब को पता है और उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपसे एक और प्रार्थना करना चाहता हूँ कि शहरी विकास में कुछ महत्वपूर्ण और भी जवाबदारियां हैं.जैसे कि आज चर्चा हो रही थी, डॉक्टर साहब ने हाउसिंग बोर्ड के विषय उठाए थे. हाउसिंग बोर्ड और विकास प्राधिकरण, यह भी एक हिस्सा है और टी एंड सी पी, यह भी एक हिस्सा है. पहली बार सरकार ने योजना बनाई कि अलग अलग विकास हुआ करते थे, अलग अलग योजनाएँ, जब नगरीय से संबंधित कोई एजेन्सियाँ हैं, उनको एक विभाग के अंतर्गत कर दिया गया और एक मंत्री को उसको चार्ज दे दिया गया. उसमें विकास की योजनाएँ बनाई जाएँगी, सामंजस्य बैठाया जाएगा और वह सामंजस्य बैठेगा, तो शहर का सौन्दर्य होगा. अब लोग कह रहे थे कि शहर के अन्दर शेर आ गए. मैं धन्यवाद देना चाहता हूँ कि भोपाल राजधानी में आज हमारे सी पी ए द्वारा कम से कम इतने बड़े बड़े बगीचे तो तैयार कर दिए गए हैं कि शेर भी आकर वहाँ रात गुजारे तो लोगों को परेशानी नहीं होगी. हमने पर्यावरण को बढ़ाया कि पर्यावरण निपटाया? हमने पर्यावरण को बढ़ाया. एकांत पार्क देख लीजिए. आप श्यामाप्रसाद मुखर्जी पार्क देख लीजिए. स्वर्ण जयन्ती पार्क देख लीजिए. इंदिरा गाँधी पार्क देख लीजिए और तो औ&