मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा षोडश सत्र

 

 

फरवरी-मार्च, 2018 सत्र

 

गुरूवार, दिनांक 15 मार्च, 2018

 

(24 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1939)

 

 

[खण्ड- 16 ] [अंक- 10 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

गुरूवार, दिनांक 15 मार्च, 2018

 

(24 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1939)

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.03 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ. सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

 

तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

 

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र) -- राम निवास जी, चीफ व्हिप आप हो. देखिए क्‍या स्थिति है?

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया-- खाली-खाली तम्‍बू है खाली-खाली मंच.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- कांग्रेस की दयनीय स्थिति है. उप चुनाव तुम जीता करो. मुख्‍य चुनाव हम जीतेंगे.

राज्‍य मंत्री, सहकारिता (श्री विश्‍वास सारंग)-- कांग्रेस की जमानत जब्‍त हुई है. यहां पार्षदों को उससे ज्‍यादा मिलते हैं. पांच हजार मिले हैं. ज्‍यादा खुशी मत मनाना. (व्‍यवधान)...

श्री रामनिवास रावत-- तुम तो कोलारस की बात करो. (व्‍यवधान)...

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया-- कांग्रेस की जमानत जब्‍त हुई है. विश्‍वास भाई उसी की खुशी में पटाके फोड़े हैं. जमानत जब्‍त होने की खुशी में. (व्‍यवधान)...

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- ललना को पलना में खिलाकर ही खुश हो. खुद तो एक बच्‍चा पैदा करो. (व्‍यवधान)...

श्री रामनिवास रावत-- दोनों मंत्री कोलारस की बात करो.. (व्‍यवधान)...

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी--उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री की सीट हारी है. (व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय-- तिवारी जी प्रश्‍नकाल हो जाने दें. फिर जो बोलना है बोलना. (व्‍यवधान)...

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- कांग्रेस की जमानत जब्‍त हुई है. दूसरे के ललना को पलना में खिलाओ. मिलकर ही लड़ सकते हो अकेले-अकेले लड़ने लायक नहीं रहे. यह तो तय है कि अकेले-अकेले लड़ने लायक नहीं रहे. (व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय-- कृपया व्‍यवधान न करें. (व्‍यवधान)...

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- इतना तो मान जाओ.

 

बरझा बाईपास का निर्माण

[नगरीय विकास एवं आवास]

1. ( *क्र. 94 ) श्रीमती नंदनी मरावी : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या सिहोरा नगर पालिका के अंतर्गत बरझा बाईपास के निर्माण की मांग नगरवासियों द्वारा दीर्घ समय से की जा रही है एवं प्रश्‍नकर्ता द्वारा भी समय-समय पर इस मार्ग का निर्माण किये जाने के संबंध में ज्ञापन दिये गये हैं? (ख) यदि हाँ, तो मार्ग निर्माण का कार्य कब आरंभ किया जावेगा तथा कब तक यह मार्ग पूर्ण करा लिया जावेगा?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जी हाँ। (ख) विधान सभा तारांकित प्रश्‍न क्रमांक 1142, सत्र नवंबर 2017 में दिए गए उत्‍तर अनुसार संचालनालय, नगरीय प्रशासन एवं विकास म.प्र. भोपाल द्वारा नगर पालिका परिषद, सिहोरा के बरझा रोड निर्माण कार्य के प्रस्‍ताव को परीक्षण उपरांत युक्तिसंगत नहीं पाए जाने से अमान्‍य कर दिया गया है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्रीमती नंदनी मरावी- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने सिहोरा-खितौला के बीच बाईपास निर्माण के संबंध में प्रश्‍न लगाया था और उसके जवाब में आया है कि निरीक्षण में युक्तिसंगत नहीं पाये जाने के कारण उसे अमान्‍य कर दिया गया है. इससे मैं सहमत नहीं हूं क्‍योंकि 2008 से निरंतर मैं इस सड़क के लिए प्रयासरत हूं और यह जनता की बहुत बड़ी मांग भी है. सिहोरा-खितौला नेशनल हाईवे पर बसा हुआ नगर है और इसके अं‍तर्गत 60 पंचायतें कवर होती हैं. क्‍या मंत्री महोदया इस सड़क के निर्माण की स‍हमति देंगी ?

श्रीमती माया सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विधायक महोदया ने जो प्रश्‍न उठाया है, खितौला से सिहोरा को जोड़ने वाली बरझा लिंक रोड में 29 खसरों की भूमि सड़क निर्माण में आ रही है. जिसमें से केवल 5 शास‍कीय भूमियां हैं शेष 24 विभिन्‍न भू-स्‍वामियों की भूमियां हैं. प्रस्‍तावित सड़क निर्माण में आबादी नहीं होने से ये युक्तिसंगत नहीं है और खितौला से सिहोरा के लिए एक और सड़क वहां पर है. जिससे प्रस्‍तावित सड़क निर्माण का औचित्‍य नहीं उठता है इसलिए इसे अमान्‍य किया गया है.

श्रीमती नंदनी मरावी- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी से मैं निवेदन करूंगी कि यदि नगर पालिका सड़क नहीं बनाना चाहती है तो कम से कम किसी दूसरे विभाग से यह काम हो जाए क्‍योंकि वास्‍तव में इस सड़क की बहुत आवश्‍यकता है और इसके अलावा वहां कोई दूसरा रोड नहीं है. मैं वहां इतने सालों से रह रही हूं इसलिए उस सड़क की महती आवश्‍यकता को समझती हूं यदि इसमें मंत्री महोदया से मुझे कोई ठोस जवाब मिल जाये तो बेहतर होगा.

श्रीमती माया सिंह- मैंने आपको ठोस जवाब नहीं अपितु सही जवाब दिया है. मैं आपकी मदद अवश्‍य करूंगी परंतु मैं किसी अन्‍य विभाग के विषय में यहां क्‍या कह सकती हूं ?

श्रीमती नंदनी मरावी- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा दूसरा प्रश्‍न यह है कि सिहोरा का मास्‍टर-प्‍लान 2005 में बनाया गया था जो कि 2011 में समाप्‍त भी हो चुका है. मेरा मंत्री जी से पूछना चाहती हूं कि सिहोरा के लिए नया मास्‍टर-प्‍लान कब तक बनेगा और यदि नया मास्‍टर-प्‍लान तैयार नहीं हो पाया है तो क्‍या पुराने मास्‍टर-प्‍लान को निरस्‍त कर दिया जायेगा क्‍योंकि वहां लोगों की जमीनें हैं और लोग वहां अवैध रूप से मकान बनाते जा रहे हैं जिससे बाद में वहां अवैध कॉलोनी के समस्‍या सामने आयेगी.

अध्‍यक्ष महोदय- यह प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता है फिर भी यदि मंत्री महोदया कुछ कहना चाहें या आश्‍वासन देना चाहें तो कह सकती हैं.

श्रीमती माया सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब तक नया मास्‍टर-प्‍लान तैयार नहीं होता है तब तक पुराने मास्‍टर-प्‍लान पर ही कार्य होता है.

अध्‍यक्ष महोदय- जल्‍दी करवा दें.

श्रीमती नंदनी मरावी- लेकिन प्‍लान कब तक बन जायेगा. मेरा प्रश्‍न लगा है, नगर पालिका से संबंधित मुझे कुछ तो आश्‍वासन मिले.

श्रीमती माया सिंह- जानकारी हासिल कर ली गई है, जल्‍दी ही करेंगे.

 

बैकलॉग श्रेणी के पदों की पूर्ति

[नगरीय विकास एवं आवास]

2. ( *क्र. 1756 ) डॉ. मोहन यादव : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) म.प्र. में विकास प्राधिकरणों में बैकलॉग श्रेणी के तृतीय एवं चतृर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पदों पर नियुक्ति के संबंध में क्या नियम हैं? (ख) दिनांक 01 जनवरी, 2014 से प्रश्न दिनांक तक नियमों की प्रति उपलब्ध कराते हुये वर्तमान में उज्जैन विकास प्राधिकरण में बैकलॉग के रिक्त पदों की जानकारी प्रदान करें? उ.वि.प्रा. में उक्त अवधि में कब कब किन किन बैकलॉग पदों पर भर्ती के लिये विज्ञप्ति जारी की गई है? भर्ती के लिये कौन से नियमों एवं उपनियमों के अनुसार कार्यवाही की गई? नियुक्ति वैध है अथवा अवैध? यदि अवैध हैं तो क्यों? (ग) प्रश्नांश (क) की जानकारी अनुसार उज्‍जैन विकास प्राधिकरण में बैकलॉग श्रेणी के तृतीय एवं चतृर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पदों हेतु रिक्त आरक्षित पदों की भर्ती के लिये किन नियमों का पालन किया जावेगा? नियमों की प्रति उपलब्ध करावें? (घ) प्रश्‍न (ख) की जानकारी अनुसार यदि म.प्र. विकास प्राधिकरण सेवा (अधिकारी तथा सेवक) भर्ती नियम 1988 के विपरीत प्रक्रिया का पालन कर की जा रही भर्ती किस नियम के तहत वैध है? कारण बतायें। यदि सेवा भर्ती नियम 1988 में कोई परिवर्तन या निरस्‍त की गई हो, तो प्रति उपलब्ध करावें?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) :

डॉ.मोहन यादव- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न बहुत ही सामयिक है और उसकी गंभीरता के नाते, जब पहला जवाब आया तो उसमें कहा गया कि नियम विरूद्ध कोई कार्यवाही नहीं हुई है. दूसरा प्रश्‍न मैंने बैकलॉग की भर्ती के संबंध में उठाया था. दूसरी बार मुझे संशोधित जवाब प्राप्‍त हुआ जिसमें स्‍वीकार किया गया कि वाकई गलती हुई है और अब इसकी जांच की जा रही है. मैं केवल इतना निवेदन करना चाहता हूं कि मंत्री महोदया बहुत अच्‍छे से विभाग चला रही हैं और उतनी ही गंभीरता के साथ यह स्‍वीकार कर लिया गया कि वाकई गलती हुई है. मैं कहना चाहता हूं कि वर्ष 2013 का परिपत्र, जिसमें गजट प्रकाशन हुआ था और नियम विरूद्ध भर्ती के संबंध में 2013 में स्‍पष्‍ट कर दिया गया था कि जो भी भर्ती होगी, व्‍यापम से भर्ती होगी. उसके बजाय 2014 में उसे छोड़कर मध्‍यप्रदेश विकास प्राधिकरण सेवा भर्ती नियम, 1988 के नियमानुसार भर्ती कर ली गई. यह एक गंभीर त्रुटि है. जब आपके पास नियम, परिपत्र सब कुछ है फिर यह मान लिया गया कि वर्ष 2013 में प्रकाशित राजपत्र, हमारे पास वर्ष 2016 में आया. एक विभाग द्वारा ऐसी त्रुटिपूर्ण कार्यवाही को देखते हुए नजरअंदाज करना एक गंभीर गलती है. इसमें कौन-कौन से अधिकारी सम्मिलित हैं, किस प्रकार से गलती हुई ? यह तो अच्‍छा हुआ कि प्रश्‍न काल में प्रश्‍न लग गया अन्‍यथा हम यह किस प्रकार समझ पाते कि किस तरह अपने अधिकारों का दुरूपयोग किया गया है.

श्रीमती माया सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रथमदृष्‍टया भर्ती में यह देखने में आता है कि सामान्‍य प्रशासन विभाग और मध्‍यप्रदेश विकास प्राधिकरण सेवा भर्ती नियम, 1988 के कतिपय प्रावधानों के पालन में प्रक्रियात्‍मक त्रुटि हुई है. मैं इसे स्‍वीकार करती हूं इसलिए मैं संचनालय स्‍तर से जांच किये जाने के आदेश देती हूं. जांच में जो निर्णय आयेगा, गुण-दोष के आधार पर हम कार्यवाही करेंगे.

डॉ. मोहन यादव:- अध्‍यक्ष महोदय, वैसे मैं, माननीय मंत्री जी का धन्‍यवाद भी अदा करता हूं. इसमें इतना सा और जोड़ना चाहता चाहता हूं कि जिस प्रकार से माननीय मंत्री जी ने कहा है कि यह प्रक्रिया की गलती है और गंभीर गलती है, तो इसमें जांच में विधायक को साथ में रखें. एक छोटा सा निवेदन यह भी है कि इसकी समय-सीमा में, एक-दो महीने में जांच हो जाये, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा.

श्रीमती माया सिंह:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम एक महीने में जांच पूरी कर लेंगे.

डॉ. मोहन यादव:- माननीय मंत्री जी, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

प्रधानमंत्री आवास योजना का क्रियान्‍वयन

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

3. ( *क्र. 3588 ) डॉ. योगेन्‍द्र निर्मल : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या ग्राम उदय से भारत उदय अभियान के दौरान एस.ई.सी.सी. 2011 में जो परिवार सूचीबद्ध नहीं हैं, लेकिन मौके पर आवासहीन हैं अथवा कच्‍चा मकान है, उनका परीक्षण कर सूची बनाने के निर्देश हैं? यदि हाँ, तो बालाघाट जिले की विधानसभा क्षेत्र 112 में विकासखण्‍ड वारासिवनी-खैरलांजी की ग्राम पंचायतों में कितने नाम जोड़े गये? नामवार सूची देवें (ख) विधानसभा क्षेत्र 112 में विकासखण्‍ड वारासिवनी-खैरलांजी में ऐसे कितने ग्राम एवं कितनी पंचायतें हैं, जिन्‍हें प्रधानमंत्री आवास योजना का एक भी आवास नहीं मिला है? संख्‍या एवं नाम सहित जानकारी देवें (ग) उक्‍त योजना में किस कारण से जो पंचायतें एवं ग्राम छूटे हैं तथा कब तक इन छूटे हुये गांवों को इस योजना का लाभ दिलाया जावेगा एवं कैसे? जो पंचायतें एवं गांव इस योजना से पिछड़ गये हैं, उनकी भरपाई विभाग किस प्रकार करेगा? यदि विभाग द्वारा भारत सरकार के पोर्टल पर छूटे हुये हितग्राहियों को जोड़ने का अनुरोध किया गया है, तो प्रश्‍न दिनांक तक भारत सरकार द्वारा विभाग को क्‍या जवाब दिया गया? छायाप्रति देवें (घ) क्‍या विभाग ग्रामों का पुन: परीक्षण कर आवासहीन अथवा कच्‍चे मकान के हितग्राहियों को इस योजना के तहत आवास प्रदान करेगा? यदि हाँ, तो कब तक?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जी हाँ। नाम जोड़ने का प्रावधान वर्तमान में नहीं है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। समय-सीमा निर्धारित किया जाना संभव नहीं है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। जी हाँ। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है।

डॉ. योगेन्‍द्र निर्मल:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मंत्री जी से पूछना चाहूंगा कि मेरा प्रश्‍न '''' से लेकर '''' तक है. इसमें खापा पंचायत को नगर पालिका क्षेत्र में बताया है, जबकि यह नगर पालिका क्षेत्र में नहीं है, यह पंचायत है.

अध्‍यक्ष महोदय:- आपका प्रश्‍न क्‍या है ?

डॉ. योगेन्‍द्र निर्मल:- अध्‍यक्ष महोदय, यहां प्रधानमंत्री आवास नहीं आये हैं और जब प्रधान मंत्री आवास के लिये मैंने चर्चा हेतु प्रश्‍न लगाया तो इसमें यह बताया गया कि यह खापा पंचायत, नगर पालिका क्षेत्र में है.

अध्‍यक्ष महोदय:- मूल प्रश्‍न में यह नहीं है.

श्री गोपाल भार्गव:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वैसे मूल प्रश्‍न में खापा पंचायत का कोई उल्‍लेख नहीं है. लेकिन माननीय सदस्‍य ने जो कहा है, इसके संबंध में, मैं एक व्‍यापक स्‍वरूप में बताना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत जो आवास कुटीरें स्‍वीकृत हुई हैं, जो हमें भारत सरकार से लक्ष्‍य प्राप्‍त हुआ है, एसईसीसी 2011 के जो भारत सरकार ने आर्थिक और सामाजिक सर्वेक्षण कराया था. उसके आधार पर यह पूरी सूची बनी थी.

माननीय सदस्‍य का यह कहना भी सही है और मैं भी इस बात को स्‍वीकार कर रहा हूं कि बहुत से गांव इसमें छूट गये हैं और बहुत से पात्र लोग भी इसमें से छूट गये हैं. भारत सरकार ने ही यह निर्देश दिये हैं कि जो लोग छूट गये हैं, उनके बारे में सूची बनाकर जानकारी भारत सरकार को भेजें. हम यह प्रक्रिया पूरी करने जा रहे हैं, निर्देश भी सीईओ, जिला पंचायत के लिये जारी कर दिये गये हैं. भारत सरकार के निर्देश दिनांक 24.01.2018 के परिप्रेक्ष्‍य में दिनांक 19.02.2018 को समस्‍त मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायतों को प्रधानमंत्री आवास योजना- ग्रामीण की स्‍थायी प्रतीक्षा सूची अद्यतन करने की प्रक्रिया निर्देश प्रसारित किये गये हैं. अत: भारत सरकार की अनुमति प्राप्‍त होने के उपरांत ही पात्र पाये गये हितग्राहियों को हम लाभांवित करेंगे, इसमें इनकी पंचायत भी हो जायेगी और बाकी जो भी छूट गये होंगे, वह भी हो जायेंगे.

डॉ. योगेन्‍द्र निर्मल:- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी के बजट उदबोधन में भी आ गया था. हम संतुष्‍ट थे, लेकिन आप इस कार्यवाही को शीघ्र करवा दें. अध्‍यक्ष महोदय, ऐसा मेरा आपके माध्‍यम से आग्रह है.

अध्‍यक्ष महोदय:- खापा जो है, वह आपके उत्‍तर में है. बारासिवनी में खापा नगर पालिका क्षेत्र में शामिल होने से इसको शामिल नहीं किया. इसका तो आप परीक्षण करवा लें, वह कह रहे हैं कि खापा, ग्राम पंचायत है.

श्री गोपाल भार्गव:- अध्‍यक्ष महोदय, खापा सहित प्रदेश के ऐसी सारी ग्राम पंचायतें या गांव, जहां पर वंचित रह गये हैं या किसी त्रुटि के कारण से, खामी से उनको पुन‍रीक्षित करने का, भारत सरकार का आदेश आ गया है, यह हम सूची बनाकर भारत सरकार को भेज देंगे. वहां से जैसे ही सूची का एप्रुवल आयेगा, जो भी पात्र हितग्राही हैं, उनको प्रधानमंत्री आवास आवंटित कर दिया जायेगा.

श्री कैलाश चावला:- अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से कहना चाहूंगा कि नगर पालिका क्षेत्र के 5 किलोमीटर के दायरे में, जो गांव आते हैं, उनको न तो गांव मानकर लाभ दिया जा रहा है, न ही नगर पालिका मानकर लाभ दे रहे हैं. इसी कारण जो सदस्‍य ने प्रश्‍न उठाया है कि खापा पंचायत नजदीक की पंचायत हैं, ऐसी कई पंचायतें प्रदेश में हैं. जिसमें लोगों को आवास भी नहीं मिल रहे हैं और मनरेगा का काम भी नहीं हो पा रहा है. उसके कारण परे‍शानियां खड़ी हो रही हैं तो क्‍या जो ग्राम पंचायत स्‍टेटस है, उन गांवों में यह सब सुविधा आप उपलब्‍ध करायेंगे?

अध्‍यक्ष महोदय:- यह प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता है. यह पॉलिसी मैटर है.

श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अब मैं क्‍या बताऊँ ? एक फैशन चल गया है, गांव की जनसंख्‍या जैसे ही 5- 7 हजार हुई और मांग शुरू हो जाती है कि नगर परिषद् घोषित कर दो, वे घोषित भी हो जाते हैं. वे तमाम प्रकार के लाभ आवास से लेकर कपिलधारा के कुओं से लेकर, सीसी रोड और अन्‍य योजनाओं से वंचित हो जाते थे. मैं माननीय सदस्‍य को अवगत कराना चाहता हूँ कि भारत सरकार के जो निर्देश हैं कि कितने रेडियस के अन्‍दर है ? क्‍योंकि शहर से लगी हुई जो ग्राम पंचायतें हैं, वे इतनी सेचुरेशन में आ गई हैं कि उनमें हम काम कराना मुनासिब नहीं समझते तो इस बात का शायद भारत सरकार को भी आभास होगा, ये उन्‍हीं के निर्देश थे. मैं एक बात का परीक्षण फिर करा लूँगा कि यदि इसमें कुछ गुंजाइश है, संभावना है तो पंचायत क्षेत्र में रहने वाला कोई भी पात्र हितग्राही इससे वंचित न रहे. उनके निर्देशों के चलते हुए यह सब हुआ है लेकिन हम इसमें से कोई संभावना निकालने की कोशिश करेंगे. यदि संभावना होगी तो उस काम को भी कर देंगे.

श्री निशंक कुमार जैन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा पिन प्‍वाइंट एक प्रश्‍न है. मैं माननीय मंत्री जी से अनुरोध करना चाहूँगा.

अध्‍यक्ष महोदय - आपको एलाऊ नहीं किया है.

श्री निशंक कुमार जैन - अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से अनुरोध करना चाहूँगा कि 2011 में प्रधानमंत्री आवास के लिए 2 लाख रुपये रखे गए थे.

अध्‍यक्ष महोदय - श्री निशंक जैन का कुछ नहीं लिखा जायेगा.

श्री निशंक कुमार जैन - (XXX)

खरगापुर में शासकीय महाविद्यालय खोला जाना

[उच्च शिक्षा]

4. ( *क्र. 1358 ) श्रीमती चन्‍दा सुरेन्‍द्र सिंह गौर : क्या उच्च शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या खरगापुर विधान सभा क्षेत्र के नगर खरगापुर में शासकीय महाविद्यालय नहीं होने के कारण छात्र-छात्राओं को जिला मुख्‍यालय तथा अन्‍य स्‍थानों पर उच्‍च शिक्षा ग्रहण करने हेतु भटकना पड़ता है तथा मुख्‍यालय खरगापुर के आस-पास का क्षेत्र काफी बड़ा है, जिसमें 5-6 शास. हा.से. स्‍कूल भी आते हैं तथा खरगापुर में महाविद्यालय खोले जाने की मांग को लेकर क्षेत्र के छात्रों का प्रतिनिधि मण्‍डल तथा प्रश्‍नकर्ता द्वारा उच्‍च शिक्षा मंत्री को पत्र भी दिया गया था, जिस पर क्‍या कार्यवाही की गई? (ख) क्‍या खरगापुर नगर के छात्र-छात्राओं द्वारा एवं आम नागरिकों द्वारा तहसीलदार खरगापुर को ज्ञापन देकर माननीय मुख्‍य मंत्री महोदय म.प्र. शासन से भी मांग की है? क्‍या छात्र-छात्राओं की सुविधा एवं मांग तथा शिक्षा के लोक व्‍यापीकरण को ध्‍यान में रखते हुये खरगापुर नगर में शासकीय महाविद्यालय खोले जाने की घोषणा करेगें? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों?

उच्च शिक्षा मंत्री ( श्री जयभान सिंह पवैया ) : (क) जी नहीं। खरगापुर में 02 विद्यालय संचालित हैं तथा 01 अशासकीय महाविद्यालय संचालित है। खरगापुर से 28 कि.मी. की दूरी पर शासकीय महाविद्यालय पलेरा, 33 कि.मी. की दूरी पर शासकीय महाविद्यालय जतारा एवं 40 कि.मी. की दूरी पर टीकमगढ़ में 02 शासकीय महाविद्यालय संचालित हैं। इन महाविद्यालयों में खरगापुर के विद्यार्थी अध्ययन कर सकते हैं। माननीय मुख्यमंत्री जी की घोषणा क्रमांक बी. 3502 के निर्देशानुसार खरगापुर से 10 कि.मी. की दूरी पर बल्देवगढ़ में शासकीय महाविद्यालय प्रारम्भ किया जाना प्रस्तावित है, जिससे खरगापुर की आवश्यकताओं की भी पूर्ति होगी। अतः वर्तमान में खरगापुर में महाविद्यालय प्रारम्भ किया जाना प्रस्‍तावित नहीं है। (ख) जी हाँ। शेष उत्तरांश (क) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है ।

श्रीमती चन्‍दा सुरेन्‍द्र सिंह गौर - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न यह है कि नगर खरगापुर के अंतर्गत 6-7 हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल आते हैं, उन स्‍कूलों से उत्‍तीर्ण छात्र-छात्राएं की आर्थिक स्थिति कमजोर है, छात्र-छात्राएं अशासकीय महाविद्यालय में प्रवेश नहीं ले पाती हैं. वे जिला मुख्‍यालय में रहने एवं उनके आने-जाने का खर्च भी नहीं उठा पाते हैं इसलिए काफी संख्‍या में होनहार बेटा-बेटियां उच्‍च शिक्षा ग्रहण करने से संचित रह जाते हैं इसलिए छात्र-छात्राओं की दशा और दिशा देखकर बेटा और बेटियों के हित में खरगापुर में शासकीय महाविद्यालय खोले जाने का मेरा माननीय मंत्री जी से विशेष अनुरोध है.

श्री जयभान सिंह पवैया - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न के उत्‍तर में हमने स्‍पष्‍ट किया है कि माननीय सदस्‍या ने खरगापुर के लिए अनुरोध किया है और उत्‍तर में कहा है कि खरगापुर से 10 किलोमीटर दूर बल्‍देवगढ़ तहसील केन्‍द्र है, यह आपकी विधानसभा में है. आपने ही दिनांक 8 दिसम्‍बर, 2016 को तारांकित प्रश्‍न क्रमांक 493 में यह मांग की थी कि बल्‍देवगढ़ में शासकीय महाविद्यालय प्रारंभ किया जाये. हमने आपको यह जानकारी दी है और वह जानकारी आपके लिए प्रसन्‍नतादायक होनी चाहिए कि दिनांक 7 मई, 2017 को माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने घोषणा क्रमांक 3502 के द्वारा बल्‍देवगढ़ में नया महाविद्यालय प्रारंभ करने की घोषणा की है और उसको खोलने की कार्यवाही प्रचलन में है. हम कोशिश करेंगे कि नये सत्र से खोल दें. 10 किलोमीटर के अन्‍दर फिर दूसरा कॉलेज स्‍वीकृत करना, यह न ही व्‍यावहारिक है और न ही संभव है.

श्रीमती चन्‍दा सुरेन्‍द्र सिंह गौर - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, खरगापुर विधानसभा क्षेत्र, टीकमगढ़ जिले में सबसे पिछड़ा हुआ क्षेत्र है.

अध्‍यक्ष महोदय - आपकी ही डिमाण्‍ड पर तो मंत्री जी ने बल्‍देवगढ़ किया है.

14 वें वित्‍त आयोग अन्‍तर्गत संपादित कार्य

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

5. ( *क्र. 3877 ) श्री मधु भगत : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) परसवाड़ा विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत विभाग द्वारा विगत तीन वर्ष में 14 वें वित्‍त आयोग अन्‍तर्गत ग्राम पंचायतों में क्‍या-क्‍या कार्य, कितनी-कितनी राशि से कराये गये हैं? (ख) क्‍या उपरोक्‍त कार्यों का भुगतान मूल्‍यांकन के उपरांत किया गया है? यदि हाँ, तो पूर्ण कार्यों के प्रमाण-पत्र जारी करने की तिथि बतायें? (ग) एन.आर.एल.एम. योजना के अन्‍तर्गत विगत एक वर्ष में बालाघाट जिलें में क्‍या-क्‍या गतिविधि ली गई एवं इनमें से कितनी परसवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में सम्मि‍लित हैं? व्‍यय राशि एवं हितग्राही लाभान्वित की संख्‍या बतावें? (घ) एन.आर.एल.एम. योजना अन्‍तर्गत व्‍यय का भुगतान किस आधार पर किया गया?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) जी हाँ। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) बालाघाट जिले में विगत 1 वर्ष में एन.आर.एल.एम. योजना अंतर्गत स्व-सहायता समूह गठन, ग्राम संगठन गठन एवं उसका क्षमतावर्धन गतिविधियां की गई हैं। उक्त समस्त गतिविधियां परसवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में भी की गई हैं। परसवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में व्यय राशि 73.86 लाख है। लाभान्वित हितग्राहियों की संख्या 256 है। (घ) एन.आर.एल.एम. योजना के अंतर्गत व्यय का भुगतान आर.बी.आई. परिपत्र दिनांक 01 जुलाई, 2017 एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन कार्यालय द्वारा जारी पत्र क्रमांक 6539/वित्तीय समावेषन/एन.आर.एल.एम./2017 भोपाल दिनांक 28.09.2017 के प्रावधानों के अनुसार किया गया है।

श्री मधु भगत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैंने माननीय मंत्री जी से प्रश्‍न किया था कि 14 वें वित्‍त से ग्राम पंचायतों में कौन-सी सड़क, कितनी सड़कें, कहां से कहां तक और कितनी पंचायतों को बनीं. उन्‍होंने मुझे आंकड़े दिए हैं कि आधी पंचायतों की, एक घर से दूसरे घर का नाम बताया है लेकिन बालाघाट पंचायत के अंतर्गत यह नहीं बताया गया है कि प्रति पंचायत कितनी सड़क बनी ? फिर भी मैं संतुष्‍ट हूँ. 14 वें वित्‍त योजना के अंतर्गत सड़क का जो निर्माण हो रहा है. लेकिन मैं एक आश्‍वासन मंत्री जी से इस पर चाहता हूँ कि छोटी पंचायत की राशि कम है और बड़ी पंचायत को राशि ज्‍यादा है लेकिन मौके पर जाओ तो बड़ी पंचायत भी पूरी नहीं हो रही है और छोटी पंचायत की सड़कें भी पूरी नहीं हो रही हैं. पहले मुझे 14 वें वित्‍त पर एक आश्‍वासन दे दें, फिर मैं दूसरा प्रश्‍न करता हूँ.

श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमको भारत सरकार से चौदहवें वित्‍त आयोग की राशि प्राप्‍त होती है. अभी नये वित्‍त आयोग की सिफारिशें आ जायेंगी. यह जनसंख्‍या के आधार पर होता था. यदि वहां का क्षेत्रफल ज्‍यादा होता है तो उसके लिये 10 प्रतिशत की राशि अधिक दी जाती है. हम इस राशि में घट बढ़ नहीं कर सकते हैं क्‍योंकि वह राशि सीधे पंचायत के खाते में जाकर जमा होती है. यदि श्री मधु भगत जी किसी बात को कहेंगे तो मैं उसके संबंध में यह कहना चाहूंगा कि हम इस काम को कराने में सक्षम भी नहीं है और हम इसके लिये प्राधिकृत भी नहीं है क्‍योंकि यह भारत सरकार के चौदहवें वित्‍त आयोग की राशि पंचायत के खाते में सीधे ही जमा हो जाती है और जनसंख्‍या के आधार पर पंचायतें उसे लेती हैं. पंचायतें वह राशि अपने-अपने कार्यों की प्राथमिकता के आधार पर व्‍यय करती हैं. माननीय सदस्‍य सड़क के लिये जितनी राशि कह रहे हैं उसके संबंध में कहना चाहता हूं कि यदि कोई छोटा गांव हैं लेकिन ज्‍यादा काम होना और राशि कम है तो अन्‍य किसी योजना में उस गांव को लाभांवित किया जा सकता है और गांव में व्‍यवस्‍था की जा सकती है.

श्री मधु भगत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने माननीय मंत्री जी से आश्‍वासन मांगा है कि क्‍या आप केंद्र सरकार से इस बात की जानकारी देंगे कि यदि भविष्‍य में ऐसी योजना जब भी बनायें तो उसमें इस बात का ध्‍यान रखें कि प्रति पंचायत के अंदर कितनी सड़कों का निर्माण पूरा हो सकता है ? उस हिसाब से बजट का निर्धारण कर दें, भविष्‍य के हिसाब से निर्धारण कर दें ?

श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्‍य को जानकारी देना चाहता हूं कि हमारी मुख्‍यमंत्री ग्राम सड़क योजना, स्‍टेट कनेक्‍टविटी योजना, ग्रेवल सड़क योजना और भी दूसरी योजनाएं जैसे पंच परमेश्‍वर के अंतर्गत सी.सी. रोड बनाने की योजनाएं आदि बहुत सी योजनाएं सड़कें बनाने के लिये चल रही हैं. जहां तक हमारी बाध्‍यता है कि भारत सरकार चौदहवें वित्‍त आयोग की जो राशि देती है, उस राशि में हम कोई परिवर्तन नहीं कर सकते हैं, वह जनसंख्‍या के मापदंड से सभी राज्‍यों और निकायों के लिये मिलती है, इस कारण से हम उसमें हस्‍तक्षेप नहीं कर सकते हैं. लेकिन मैं माननीय सदस्‍य को अवगत कराना चाहता हूं कि यदि वह किसी कार्य विशेष के बारे में या अपने क्षेत्र के बारे में बतायेंगे कि वहां पर सड़क बनना आवश्‍यक है तो हम उसके बारे में विचार कर लेंगे.

श्री मधु भगत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे तीन प्रश्‍न थे.

अध्‍यक्ष महोदय - आप बस एक ओर प्रश्‍न कर लें.

श्री मधु भगत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक ही प्रश्‍न करूंगा. प्रश्‍न '''' में मेरे द्वारा माननीय मंत्री जी से एक प्रश्‍न किया गया था कि एनआरएलएम योजना के अंतर्गत विगत एक वर्ष में क्‍या-क्‍या गतिविधियां की गई ? इस प्रश्‍न के उत्‍तर में बताया गया है कि स्‍व सहायता समूह का गठन, ग्राम संगठन गठन एवं उसकी दक्षतावर्धन गतिविधियां की गई हैं. कृपया मंत्री जी मुझे बताने की कृपा करें कि ग्राम संगठन से उनका क्‍या आशय है एवं क्‍या ग्राम संगठन एनआरएलएम के कार्यों में शामिल है यदि हां तो उसके क्‍या कार्य हैं ?

श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे ग्रामों में जो महिला स्‍व सहायता समूह हैं, इनका गठन करके हम स्‍वरोजगार की व्‍यवस्‍था के लिये कुछ रिवालविंग फंड देते हैं और बैंकों के साथ कन्‍वरजेंस करके स्‍वरोजगार के लिये प्रेरित करते हैं और उन्‍हें ट्रेनिंग देते हैं. 2016-17 से 2017-18 तक यहां पर 202 स्‍वसहायता समूहों को आरएफ की राशि 26 लाख जारी की गई और 2017-18 तक अभी तक कुल 5407 स्‍वसहायता समूहों को सीआईएफ की राशि 74 लाख 85 हजार रूपये जारी की गई है. इस के अंतर्गत स्‍वरोजगार के लिये ट्रेनिंग देते हैं और महिलाएं अपना खुद का रोजगार सृजन कर सकें इसके लिये एनआरएलएम काम करता है.

श्री मधु भगत - अभी मेरा प्रश्‍न आधा ही हुआ है. अभी मेरा प्रश्‍न पूरा नहीं हुआ है.

अध्‍यक्ष महोदय - आपका प्रश्‍न हो गया है, आप बैठ जायें. आप अनंतकाल तक नहीं पूछ सकते.

श्री मधु भगत - मेरा प्रश्‍न पूरा नहीं हुआ है, इसमें आपको बताना पड़ेगा. इसमें बहुत बड़ा भ्रष्‍टाचार हुआ है, इसका जवाब देना पड़ेगा.

अध्‍यक्ष महोदय - आपका प्रश्‍न हो गया है, कृपया बैठ जायें. आपने तीन प्रश्‍न पूछ लिये हैं जबकि आप दो ही प्रश्‍न पूछ सकते थे.

श्री मधु भगत - मेरा प्रश्‍न अभी अधूरा है. इसमें 73 लाख 86 हजार रूपये 256 हितग्राहियों को दिया गया है, जबकि इनकी योजना और कार्यों का पता नहीं है. यह किस योजना में दिया गया है कौन सी तकनीकी शिक्षा प्राप्‍त की गई है इसमें किसी भी प्रकार से कोई भी आंकलन नहीं है? इसमें कुल 73 लाख 86 हजार रूपये का भ्रष्‍टाचार हुआ है. यह भ्रष्‍टाचार का प्रश्‍न है यह बहुत जरूरी है.

अध्‍यक्ष महोदय - आप अनंतकाल तक नहीं पूछ सकते हैं. (व्‍यवधान)...

श्री मधु भगत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहता हूं. मैंने प्रश्‍न किया था उसका जवाब पूरा आया नहीं है. (व्‍यवधान)...

श्री दिलीप सिंह परिहार - माननीय सदस्‍य आपका प्रश्‍न हो गया है, आप बैठ जायें. (व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय - आप एक ही प्रश्‍न में दस प्रश्‍न पूछ रहे हैं. आपने पूछा ग्राम संगठन का क्‍या अर्थ है. आपको पहले ही सीधा प्रश्‍न पूछना चाहिए था, जो आप पूछना चाह रहे थे लेकिन आपने एक प्रश्‍न उसमें जाया कर दिया. अब आप आखिरी प्रश्‍न पूछ लें, उसके बाद में आप बिल्‍कुल बैठ जायें और भाषण नहीं दें बिल्‍कुल बिंदुबार अपना प्रश्‍न करें.

श्री मधु भगत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा यह कहना है कि 73 लाख 86 हजार रूपये का जो आवंटन किया है, उसमें इसमें दर्शाया हुआ है कि इस आजीविका के लिये 15 हजार,11 हजार, 10 हजार, 12 हजार ऐसे 256 लोगों को दिया है, क्‍या आपके पास उसकी जानकारी है कि किस संस्‍था को दिया गया उसने कौन सी तकनीकी शिक्षा दी है, कौन सा कौशल विकास किया है, किस माध्‍यम से उसका विकास क्षेत्र में हुआ है ? यह हम किस संगठन को तैयार कर रहे हैं ?

श्री गोपाल भार्गव माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसे मैंने पूर्व में उत्‍तर में बताया कि हम महिला स्‍वसहायता समूह के लिए रिवाल्‍विंग फंड देते हैं. साथ ही ग्रामों में जो संगठन बनाया जाता है, उस संगठन को ट्रेनिंग देने का कार्य भी किया जाता है और उन समूहों के खातों में ही राशि अंतरित की जाती है, किसी व्‍यक्ति के खाते में राशि नहीं दी जाती है. संगठन अपनी आवश्‍यकतानुसार काम करते हैं, जैसे कालीन बनाना, मोमबत्‍ती बनाना, अगरबत्‍ती बनाना, वस्‍त्र बनाना, बच्चियों के लिए आजकल ड्रेस भी बनाते हैं, भोजन बनाने और अन्‍य तरह के कार्य भी ये संगठन करते हैं, उनके आर्थिक स्‍वावलंबन और सुदृढ़ीकरण करने के लिए यह योजना चलती है. दो वर्षों में आपने जो 73 लाख रूपए की राशि बताई इसके बारे में आपको हम अवगत करा देंगे. यदि माननीय सदस्‍य के पास में ऐसी कोई शिकायत हो जिसमें कहीं भी फर्जी तरीके से आहरण किया गया हो तो, हमें बता दें मैं आज ही जांच करवा लेता हूं.

श्री मधु भगत धन्‍यवाद.

तहसील जीरन में नवीन महाविद्यालय की स्वीकृति

[उच्च शिक्षा]

6. ( *क्र. 2688 ) श्री दिलीप सिंह परिहार : क्या उच्च शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विगत 4 वर्षों में नीमच जिले में नवीन महाविद्यालय खोले जाने के प्रस्ताव शासन को प्राप्त हुए हैं? यदि हाँ, तो विधानसभा क्षेत्रवार बतायें। (ख) प्रश्नांश (क) में प्राप्त प्रस्ताव में से किन-किन विधानसभा क्षेत्र में कहाँ-कहाँ पर नवीन महाविद्यालय खोले जाने की शासन स्वीकृति प्रदान की गयी और कितने स्वीकृति हेतु लंबित हैं? (ग) क्या प्रश्‍नांश (ख) में नीमच विधानसभा क्षेत्र की जीरन तहसील में नवीन महाविद्यालय खोले जाने के प्रस्ताव शासन स्वीकृति हेतु लंबित हैं? यदि हाँ, तो शासन स्वीकृति कब तक प्रदान की जावेगी?

उच्च शिक्षा मंत्री ( श्री जयभान सिंह पवैया ) : (क) जी हाँ। नीमच जिले के विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत तहसील जीरन में महाविद्यालय खोले जाने का प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। माननीय मुख्यमंत्री जी की घोषणा क्रमांक बी. 4286 के अनुसार जीरन में महाविद्यालय खोलने के निर्देश हैं, जिस पर यथोचित कार्यवाही प्रचलन में है। (ख) एवं (ग) उत्तरांश (क) अनुसार।

श्री दिलीप सिंह परिहार माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि जन आशीर्वाद यात्रा में दिनांक 20 अगस्‍त 2013 को मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी जीरन आए थे, तो उन्‍होंने जनसमूह के बीच में कहा था कि जीरन में कालेज खोल दिया जाएगा. 2013 के बाद अभी 20 जनवरी 2018 को दलोदा कृषि उपज मंडी में जब मुख्‍यमंत्री जी आए थे तो मैंने और मंडल अध्‍यक्ष जी ने भी मुख्‍यमंत्री जी को वह घोषणा याद दिलाई थी, तो उन्‍होंने कहा था कि जनवरी में कालेज खोल दिया जाएगा, लेकिन मुख्‍यमंत्री जी की घोषणा के बाद भी कालेज खोलने के कार्य को प्राथमिकता नहीं दी गई. मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि जीरन में शीघ्र कालेज प्रारंभ करवाने की कृपा करें.

श्री जयभान सिंह पवैया अध्‍यक्ष जी, श्री दिलीप परिहार जी ने जीरन में महाविद्यालय खोलने का प्रश्‍न उठाया है. मुख्‍यमंत्री जी की जीरन में कालेज खोले जाने की घोषणा है. मंत्री परिषद का निर्णय प्राप्‍त किया जाना यद्यपि शेष है. पदो का सृजन भी होता है, उसकी भी एक प्रक्रिया है, लेकिन मैं माननीय विधायक जी से कहूंगा कि जीरन में यदि कोई निजी भवन किराए पर उपलब्‍ध कराने में हमारी मदद कर दें तो हम इसी सत्र से महाविद्यालय की प्रक्रिया पूरी करके कालेज शुरू करवा देंगे.

श्री दिलीप सिंह परिहार माननीय अध्‍यक्ष जी, अभी मंदसौर कलेक्‍टर श्रीवास्‍तव जी और नीमच कलेक्‍टर श्री विक्रम सिंह जी भी जीरन गए थे, मैंने उनको कालेज के लिए कुछ स्‍थान भी बताए थे. हम निश्चित ही स्‍थान उपलब्‍ध करवा देंगे. अत: इसी सत्र से मंत्री जी जीरन में कालेज खोलने की घोषणा कर दें. जीरन आदिवासी बाहुल्‍य है, वहां की जनता को इसका लाभ होगा, बेटे-बेटियों को 30 किलोमीटर नीमच तक दूर जाना पड़ता है, वह नही जाना पड़ेगा.

श्री जयभान सिंह पवैया अध्‍यक्ष जी, 2018-19 से जीरन में महाविद्यालय प्रारंभ हो जाएगा.

श्री दिलीप सिंह परिहार माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं मंत्री जी को बहुत बहुत धन्‍यवाद देता हूं.

 

शामगढ़ जल आवर्धन योजना हेतु राशि की स्‍वीकृति

[नगरीय विकास एवं आवास]

7. ( *क्र. 3731 ) श्री हरदीप सिंह डंग : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) शामगढ़ जल आवर्धन योजना हेतु कितनी राशि स्वीकृत की गई है एवं डी.पी.आर. की प्रतिलिपि उपलब्ध करावें? (ख) उपरोक्त स्वीकृत जल आवर्धन योजना का कार्य डी.पी.आर. के अनुरूप पूर्ण किया गया है या नहीं? (ग) सम्‍पवेल पम्प, पुल की लम्बाई एवं विद्युत कनेक्शन कितनी दूरी से सम्‍पवेल पर लगाया गया है तथा कितने कि.मी. की पाईप लाईन डाली गई है? डी.पी.आर. में जितनी लम्बाई पुल की विद्युत कनेक्शन केबल की और पाईप लाईन की डी.पी.आर. में जो दर्शाई गई, उसमें और वर्तमान में जो लगाई गई है, दोनों में क्या अन्तर है? (घ) शामगढ़ नगर परिषद द्वारा जल आवर्धन योजना हेतु ठेकेदार को पूरा भुगतान कर दिया गया है या भुगतान बा‍की है? यदि बाकी है, तो इसका कारण बतावें।

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) नगर परिषद शामगढ़ की जल आवर्धन योजना यू.आई.डी.एस.एस.एम.टी. योजना अंतर्गत भारत सरकार द्वारा राशि रू. 2374.00 लाख की स्‍वीकृत हुई है। डी.पी.आर. की छायाप्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) योजना के कार्य को लमसम निविदा के आधार पर करवाया गया है, जिसमें ठेकेदार को सर्वेक्षण एवं इन्‍वेस्टिगेशन कर स्‍वयं की डिजाईन बनाकर कार्य करने का प्रावधान था। तद्नुसार ठेकेदार द्वारा किये गये सर्वेक्षण के आधार पर वास्‍तविक कार्य करवाया गया है, जिसमें डी.पी.आर. से आंशिक परिवर्तन हुआ है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (घ) जल आवर्धन योजना में स्‍थल पर हुये वा‍स्‍तविक कार्य के मान से समानुपातिक कटौत्रा कर ठेकेदार को भुगतान किया जा चुका है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

श्री हरदीप सिंह डंग : माननीय अध्यक्ष महोदय, शामगढ़ जल आवर्धन योजना के बारे में मेरे द्वारा जो जानकारी मंत्री जी से चाही गई थी उसकी लागत 2374.00 लाख बताई गई है. मैंने यह प्रश्न पूछा था कि जो डी.पी.आर. बनी थी जो सर्वेक्षण इन्वेस्टिगेशन डिजाईन तैयार की गई थी उसमें जो आंशिक परिवर्तन करना बताया गया है, मंत्री जी उस डी.पी.आर. में कितने प्रतिशत आंशिक परिवर्तन कर सकते हैं ? पहले तो यह जानकारी उपलब्ध करा दें ?

श्रीमती माया सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं सम्माननीय सदस्य श्री हरदीप सिंह डंग को जानकारी देना चाहती हूं कि निविदा में इस बात का जिक्र है कि ठेकेदार को सर्वेक्षण और इन्वेस्टिगेशन कर स्वयं की डिजाईन बनाकर कार्य करने का प्रावधान है. उसके आधार पर और तत्कालीन आवश्यकताओं को देखते हुये उसमें फेरबदल किया गया है.

श्री हरदीप सिंह डंग -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी द्वारा जो आंशिक परिवर्तन की बात की जा रही है, किसी भी कार्य की जो राशि मंजूर होती है वह डी.पी.आर. के तहत होती है. 2374.00 लाख जो मंजूर हुये थे उसमें पुल 1500 मीटर बनाना था लेकिन 1044 मीटर बनाया गया, 466 मीटर कम बनाया गया. इसी तरह से विद्युत कनेक्शन केवल की लंबाई 26 किलोमीटर बताई गई थी मात्र 4 किलोमीटर डाली गई है मतलब 22 किलोमीटर की नई केवल लाईन 11 के.वी की डाली जानी थी, किंतु डाली गई 33 के.वी. की. कुल मिलाकर के ठेकेदार के द्वारा इस काम में करोड़ों रूपये की बचत की गई है, यहां से सेटिंग करके कम कार्य के अधिक पैसे लिये गये हैं. मेरा आरोप है पक्का कि जो रूपये ठेकेदार को भुगतान होना था यहां से सेटिंग करके करोड़ों रूपये ज्यादा का भुगतान ठेकेदार को किया गया है. जबकि योजना में कम काम हुआ है.

श्री बहादुर सिंह चौहान -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य से कहना है कि यहां आरोप नहीं चलता यहां पर प्रमाण चाहिये. यदि प्रमाण हो तो बात करें.

श्री हरदीप सिंह डंग -- हां मैं प्रमाण दे रहा हूं.

श्री बहादुर सिंह चौहान -- ऐसे तो हम भी आरोप लगा देंगे. इसलिये आप प्रमाण के साथ में बात करें.

श्री हरदीप सिंह डंग-- अरे मैं प्रमाण दे रहा हूं. अरे यार तुम मेरे टाइम पर ही बोलते हो.

अध्यक्ष महोदय-- बहादुर सिंह जी, बैठ जायें. सदस्य को कहने का अधिकार है.

श्री हरदीप सिंह डंग-- चक्कर क्या है भाई. अपन पड़ोसी हैं, थोड़ा मन मारा करो. (हंसी) अध्यक्ष महोदय, इसी योजना के बारे में जब मैंने विधानसभा में ध्यानाकर्षण लगाया था, उसकी जांच के आदेश हुये थे लेकिन वह जांच की रिपोर्ट आज तक प्रस्तुत नहीं हो पाई है. सुवासरा विधानसभा क्षेत्र में इस योजना के माध्यम से 15-15 दिन में एक दिन पानी की सप्लाई हो रही है.

अध्यक्ष महोदय- आप तो सीधे प्रश्न कर दें.

श्री हरदीप सिंह डंग -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न है कि इस प्रकरण की जांच कराई जाये, जो पेमेंट ठेकेदार को करोड़ों रूपये अतिरिक्त दिये गये हैं वह गलत दिये हैं जबकि उसका पेमेंट इतना नहीं बनता है. क्या मंत्री जी इसकी जांच करायेंगी ?

श्रीमती माया सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, जो बात सम्माननीय विधायक जी कह रहे हैं उनको जानकारी देना चाहती हूं कि नगर परिषद शामगढ़ के इंटकवेल पर एप्रोच ब्रिज की लंबाई डी.पी.आर. के अनुसार 1500 मीटर थी लेकिन वास्तविक कार्य के अनुसार पुल की लंबाई का कार्य 466 मीटर कम होने से कार्य की राशि 104.67 लाख का भुगतान ठेकेदार को कम किया गया है. सारा डिटेल्स मेरे पास में है हम उसको भेज देंगे. सदस्य को लिखित में उत्तर दिया गया है. माननीय सदस्य ने (ख) के जबाव में लिखा है कि योजना के कार्य को लमसम निविदा के आधार पर करवाया गया है, जिसमें ठेकेदार को सर्वेक्षण एवं इन्वेस्टिगेशन कर स्वयं की डिजाईन बनाकर कार्य करने का प्रावधान है तो उसी के अनुसार है. मतलब डी.पी.आर. के अनुसार वास्तविक कार्य में तत्कालीन आवश्यकताओं को देखते हुये फेरबदल भी हुआ है तो वास्तविक कार्य के मान से भुगतान हुआ है. इसमे कई मदों में कार्य कम होने से समानुपातिक राशि काटी गई है तो कहीं वास्तविक कार्य ज्यादा होने से राशि उस हिसाब से दी गई है. माननीय सदस्य को एक बात और बताना चाहती हूं कि अनुबंध के अनुसार ऑर्बिट्रेशन( Arbitration.) का प्रावधान है, अपील चल रही है, निर्णय के अनुसार कार्य़वाही होगी.

श्री हरदीप सिंह डंग -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से जो पढ़कर के बताया है बिल्कुल सही बताया है लेकिन मेरा यह कहना है कि 26 किलोमीटर की जगह मात्र 4 किलोमीटर लाइन डाली गई, जहां 11 केवी की लाईन डाली जानी थी वहां पर 33 केवी  की डाली जाती है 22 किलोमीटर का अंतर है और अगर आपने डेढ़ करोड़ रूपये कम कर दिये, वहां पर अगर आपको 6 से 7 करोड़ रूपये कम देने पड़ते और आप मात्र डेढ़ करोड़ रूपया कम देते हो तो कितना डिफरेंस है. वहां पर ठेकेदार ने सेटिंग करके रूपये थोड़े-बहुत कम कराये, जबकि उसको 5 से 7 करोड़ रूपये कम देने थे, ज्‍यादा रूपये का भुगतान किया गया है, इसकी जांच कराई जाये और सीतामऊ की रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है, सुवासरा जल आवर्धन है उसकी भी रिपोर्ट नहीं आई है, यह तीनों जो योजना है नगर पंचायत सुवासरा, शामगढ़ और सीतामऊ की, तीनों की जांच कराई जाये, लाखों और करोड़ों रूपये का भ्रष्‍टाचार सामने आयेगा और जो पुरानी पाइप लाइन डाली गई थी उसको भी नई पाइप लाइन में जोड़ा गया है, जो अधिक बताई है उसको भी पुरानी पाइप लाइन से जोड़कर उसकी लंबाई भी ज्‍यादा बताई गई है, उसका भुगतान भी गलत किया गया है. इसलिये मेरा माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि एक तो सीतामऊ की जांच सामने लाई जाये, शामगढ़ और सुवासरा की जांच कराई जाये, सुवासरा में अभी 20-20 दिन में पानी आ रहा है, इस पर भी ध्‍यान दिया जाये.

श्रीमती माया सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष जी, बचत के हिसाब से ही राशि काटकर ही भुगतान किया जा रहा है और डिजाइन में सिविल शासन और नगर पालिका के हित में है और आपने जो बात कही है मैं फिर कह रही हूं कि अनुबंध में आर्बीट्रेशन का प्रावधान है और उसमें अपील चल रही है, निर्णय के अनुसार हम कार्यवाही करेंगे. आपने जो बातें की हैं उनको हम ध्‍यान में रखेंगे.

श्री हरदीप सिंह डंग-- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा कहना यह है.

अध्‍यक्ष महोदय-- उनका कहना यह है कि प्रपोज रेट राशि काटना चाहिये अनुपातिक, उसकी जांच करा लें कि जो राशि काटी गई है वह अनुपातिक है कि नहीं है.

श्रीमती माया सिंह-- अध्‍यक्ष महोदय, हम उसकी जांच करवा लेंगे.

श्री हरदीप सिंह डंग-- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि तीनों नगर पंचायत, सुवासरा, शामगढ़ और सीतामऊ, मैं मंत्री जी को धन्‍यवाद दूंगा कि इन्‍होंने सीतामऊ में जांच टीम भेजी, परंतु सीतामऊ की जांच टीम की रिपोर्ट आज तक नहीं आई, वहां सड़कों के बाहर पाइप दिख रहे हैं और वह करोड़ों रूपये की योजना है.

अध्‍यक्ष महोदय-- जांच करवा लेंगे.

श्री हरदीप सिंह डंग-- यह जो मैं प्रश्‍न लगाता हूं यह प्रेक्टिकली देखकर लगाता हूं.

अध्‍यक्ष महोदय-- आपका प्रश्‍न तो टू दी पाइंट रहता है.

श्री हरदीप सिंह डंग-- मेरा निवेदन है कि तीनों नगर पंचायत की जांच करवायें, क्‍योंकि अगर पीछे से जांच होगी तो फिर लीपापोती होगी. इमसें मुझे भी शामिल रखें.

अध्‍यक्ष महोदय-- जांच प्रक्रिया से अवगत करा देंगे, शामिल चाहे न करें.

श्री हरदीप सिंह डंग-- अध्‍यक्ष महोदय, एक बात और मेरी सुन लें.

अध्‍यक्ष महोदय-- अरे उनकी बात पर मत जाओ (बाजू में बैठे हुये निशंक कुमार जैन, सदस्‍य की तरफ संकेत करते हुये) वह तो डिस्‍टरबेंस करवाते हैं. ऐसे में आपका प्रश्‍न बिगड़ जायेगा, और कुछ गड़बड़ी हो जायेगी, अभी लाइन पर है.

श्री हरदीप सिंह डंग-- आप संरक्षण दे दें. जांच में जब दूसरे विधायकों को शामिल करते हैं तो मुझे करने में क्‍या बुराई है.

अध्‍यक्ष महोदय-- आपको अवगत करायेंगे.

श्री हरदीप सिंह डंग-- अवगत नहीं, उसमें शामिल करें. क्‍योंकि मैं वहां का विधायक हूं, मैं जानता हूं, वहां गलती मैं ही बता सकता हूं, दूसरा कोई नहीं बतायेगा.

अध्‍यक्ष महोदय-- निशंक जैन जी ने समझा दिया, आप बैठकर समझ गये.

श्री मधु भगत-- निशंक जी ने बोला है कि पोल खुल जायेगी, उन्‍होंने समझा दिया है कि पोल खुल जायेगी.

श्री हरदीप सिंह डंग-- आप अगर सही को सही करना चाहते हैं तो मुझे शामिल करें.

अध्‍यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी इनका एक सेंटेंस में जवाब दे दें, फिर शिवनारायण जी पूछेंगे.

श्रीमती माया सिंह-- जब जांच होगी, विधायक जी को सूचना कर दी जायेगी और आप उसमें शामिल हो सकते हैं.

श्री हरदीप सिंह डंग-- धन्‍यवाद.

प्रधानमंत्री आवास हेतु राशि का आवंटन 

[नगरीय विकास एवं आवास]

8. ( *क्र. 3838 ) श्री शिवनारायण सिंह लल्‍लू भैया : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) उमरिया जिला अंतर्गत नगर परिषद चंदिया एवं नौरोजाबाद में प्रधानमंत्री आवास वर्ष 2017-18 व प्रश्‍न दिनांक तक कितने आवास स्‍वीकृत किए हैं? पृथक-पृथक स्‍पष्‍ट व पूर्ण जानकारी देवें। (ख) प्रश्नांश (क) निकाय से स्‍वीकृत प्रधानमंत्री आवास की सूची तथा हितग्राहियों को जारी राशि व दिनांक की जानकारी देवें? (ग) क्‍या राज्‍य शासन ने प्रश्नांश (क) के निकाय में राशि स्‍वीकृत कर आदेश जारी किया है? यदि नहीं, तो कब तक इस महत्‍वाकांक्षी योजना में राशि आवंटित की जाएगी।

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) भारत सरकार द्वारा नगर परिषद, चंदिया में दिनांक 30.10.2017 को 424 आवास एवं दिनांक 27.12.2017 को 1388 आवास, इस प्रकार चंदिया में कुल 1812 आवास लागत राशि रू. 72.23 करोड़ स्‍वीकृत किये गये हैं। भारत सरकार द्वारा नगर परिषद, नौरोजाबाद में दिनांक 29.05.2017 को 893 आवास, लागत राशि रू. 38.49 करोड़ स्‍वीकृत कराये गये हैं। (ख) भारत सरकार द्वारा नगर परिषद, चंदिया हेतु आज दिनांक तक राशि आवंटित नहीं की गई है, जिससे निकाय को राशि अंतरित नहीं की गई है। हितग्राहियों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। नगर परिषद, नौरोजाबाद की स्‍वीकृत परियोजना हेतु निकाय को राज्‍यांश की प्रथम किश्‍त की राशि रू. 40 हजार प्रति हितग्राही के मान से दिनांक 07.10.2017 को कुल राशि रू. 357.20 लाख आवंटित की गई है। हितग्रहियों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) नगर परिषद, चंदिया को भारत सरकार से राशि प्राप्‍त नहीं होने के कारण राज्‍य शासन द्वारा अभी तक निकाय को राशि जारी नहीं की गई है। भारत सरकार से राशि प्राप्‍त होने पर निकाय को राशि अंतरित की जाएगी। नगर परिषद, नौरोजाबाद को राज्‍य शासन द्वारा अब तक निकाय को प्रथम किश्‍त की राज्‍यांश राशि आवंटित की गई है, निकाय द्वारा राशि उपयोग किये जाने के उपरांत शेष राशि आवंटित की जाएगी।

श्री शिवनारायण सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि उमरिया जिले के नगर परिषद नौरोजाबाद, नगर परिषद चंदिया में प्रधानमंत्री आवास की प्रथम किश्‍त उन्‍होंने जारी कर दी है इसलिये मैं बहुत-बहुत धन्‍यवाद देना चाहूंगा. माननीय मंत्री जी से एक अनुरोध करूंगा कि प्रथम किश्‍त का प्रमाण पत्र, नगर परिषद नौरोजाबाद एवं नगर परिषद चंदिया में वितरण कराये जायें जिससे हितग्राहियों को संतुष्टि मिले.

श्रीमती माया सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष जी, उमरिया जिले की नगरीय निकायों में उमरिया, पाली, नौरोजाबाद और चंदिया में कुल 4777 आवास स्‍वीकृत हुये जिसमें संचालनालय द्वारा उमरिया, पाली और नौरोजाबाद में कुछ 685.20 लाख की राशि जारी की है, सिर्फ चंदिया में राशि जारी नहीं की गई है. उमरिया, पाली और नौरोजाबाद में कुल 723 हितग्राहियों को 296.40 रूपये की राशि आवंटित की गई है. बाकी के शेष हितग्राही जो नौरोजागाद के हैं वह कोलफील्‍ड की भूमि पर रहने के कारण उनकी राशि आवंटित नहीं की है, लेकिन हमें जैसे ही राशि प्राप्‍त होगी, हितग्राहियों को आवंटित कर दी जायेगी.

 

श्री शिवनारायण सिंह लल्लू भैया--अध्यक्ष महोदय, चंदिया में कब तक प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि जारी होगी?

श्रीमती माया सिंह--अध्यक्ष महोदय, मैं स्वयं केन्द्रीय मंत्री जी से मिलकर राशि जारी करने के संबंध में चर्चा कर चुकी हूं. उन्होंने शीघ्र ही राशि जारी करने के लिये आश्वस्त किया है. जैसे ही राशि प्राप्त होगी, हम जारी कर देंगे.

बीना नगर की विकास कार्य योजना की स्‍वीकृति

[नगरीय विकास एवं आवास]

9. ( *क्र. 3526 ) श्री महेश राय : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) बीना नगर की विकास कार्य योजना 2011-12 का प्रकाशन प्रश्‍न दिनांक तक क्‍यों नहीं किया गया? (ख) यदि योजना लंबित है तो किस स्‍तर पर कब तक निराकृत कर ली जावेगी? (ग) क्‍या योजना लंबित होने से बीना शहर के विकास कार्य बाधित हो रहे हैं, दोषी अधिकारियों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही प्रस्‍तावित की गयी है? (घ) प्रश्नांश (क) के अनुसार विकास कार्य योजना का प्रकाशन कब तक होगा?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) बीना विकास योजना 2011 राज्‍य शासन की अधिसूचना दिनांक 01.02.2000 द्वारा अनुमोदित होकर प्रभावशील की जा चुकी है। (ख) से (घ) प्रश्‍नांश (क) के उत्‍तर के अनुसार।

श्री महेश राय--अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि बीना विकास योजना 2011-12 का प्रकाशन कब तक होगा, क्योंकि नगर निगम क्षेत्र के पूरे विकास कार्य काफी समय से अवरूद्ध है.

श्रीमती माया सिंह--अध्यक्ष महोदय, बीना विकास योजना का 2021 में वर्तमान प्रचलित जी.आई.एस. तकनीक के आधार पर बनाये जाने और नियमन के प्रावधान मध्यप्रदेश के भूमि विकास निगम 2012 के प्रावधान के अनुरूप नहीं होने के कारण बीना विकास योजना का प्रारूप 2021 को वापस करते हुए प्रचलित जी.आई.एस. तकनीक के आधार पर आगामी दशक के लिये तैयार करने के लिये नगरीय विकास आवास विभाग के द्वारा आयुक्त सह संचालक नगर तथा ग्राम निवेश मध्यप्रदेश को निर्देशित किया गया है.

श्री महेश राय--अध्यक्ष महोदय, कृपया इसमें समय सीमा बताएंगी ?

श्रीमती माया सिंह--अध्यक्ष महोदय, जल्दी से जल्दी इसको पूर्ण कर लेंगे.

 

मुख्‍यमंत्री सड़क योजना में छूटे हुए ग्रामों को मुख्‍य मार्ग से जोड़ा जाना

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

10. ( *क्र. 2600 ) श्री बाला बच्‍चन : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या वर्ष 2017-18 में प्रदेश में मुख्‍यमंत्री सड़क योजना में छूटे हुए ग्रामों को जोड़ने के लिए शासन द्वारा निर्णय किया गया? यदि हाँ, तो बड़वानी जिले में स्‍वीकृत कुल कि.मी. दूरी तथा अनुमानित व्‍यय की जानकारी देवें। (ख) क्‍या प्रश्नांश (क) के वर्णित मार्गों की निविदा आम‍ंत्रित होने के बाद कार्यादेश तत्‍काल जारी नहीं हुये हैं? (ग) ऐसे कौन-कौन से मार्ग इंदौर संभाग के हैं, जहाँ निविदा स्‍वीकृत होने तथा कार्यादेश जारी होने में एक माह से अधिक का समय लगा है? नाम सहित देवें। (घ) निविदा स्‍वीकृत होने तथा कार्यादेश जारी होने में विलंब को विभाग क्‍या अनियमितता मानता है? यदि हाँ, तो इस अनावश्‍यक विलंब के लिए उत्तरदायित्‍व निर्धारित कर क्‍या जाँच कराई जावेगी?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जी हाँ। बड़वानी जिले में वर्ष 2017-18 में कोई सड़क स्वीकृत नहीं की गई। (ख) उत्‍तरांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) इंदौर संभाग में ऐसे कोई मार्ग नहीं हैं, जहां निविदा स्वीकृत होने तथा कार्यादेश जारी होने में एक माह से अधिक का समय लगा है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (घ) उत्‍तरांश (ग) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

कुंवर सौरभ सिंह सिसौदिया--अध्यक्ष महोदय, निवेदन है कि विधान सभा का अधिकार क्षेत्र विभाग सीमित करता जा रहा है. जबकि कोई प्रदेशव्यापी या कोई समस्या का प्रश्न किया जाए उसको सीमित कर दिया जाता है.

अध्यक्ष महोदय--ऐसा नियमों में है. बहुत व्यापक प्रश्न नहीं पूछना चाहिये वह भी आप नियम पढ़ लीजिये.

कुंवर सौरभ सिंह सिसौदिया-- अध्यक्ष महोदय, कई जगह पर बिना पूछे कर दिया जाता है.

अध्यक्ष महोदय--बिना पूछे ही कर दिया जाता है.

कुंवर सौरभ सिंह सिसौदिया-- अध्यक्ष महोदय, इसमें विभाग सीमित करता है या विधान सभा.

अध्यक्ष महोदय--विधान सभा सीमित करती है उसकी सहमति देती है.इसका पॉवर विधान सभा को ही है.

कुंवर सौरभ सिंह सिसौदिया-- अध्यक्ष महोदय, मुख्यमंत्री सड़क योजना के विषय में है प्रश्न (क) का उत्तर आया है जी हां. मेरा मंत्री जी से कहना है कि कुछ गांव हैं कोडिया से चिंबाडिया, मंडवारा से बाणी, मंडवारा से उचावद इन गांवों का परीक्षण करवा कर इन गांवों को जोड़ने का निर्णय करेंगे ?

श्री गोपाल भार्गव--अध्यक्ष महोदय, वैसे तो मेरे पास में विभाग से जो उत्तर आया है उसमें 2017-18 में कोई भी सड़क स्वीकृत नहीं की गई है और न ही बड़वानी जिले में सड़क का कार्य शेष है जो कि कनेक्टिविटी से वंचित हो. लेकिन जिन गांवों के नाम माननीय सदस्य जी ने दिये हैं उसका हम परीक्षण करवा लेंगे यदि किसी कारण से यह गांव छूट गये होंगे तो वहां भी जल्दी से जल्दी सड़क निर्माण की स्वीकृति दे देंगे.

प्रश्न संख्या 11 (अनुपस्थित)

बुंदेलखण्‍ड पैकेज से दमोह जिले में कराये गये कार्य 

[योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी]

12. ( *क्र. 86 ) श्री लखन पटेल : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या दमोह जिले को आज प्रश्‍न दिनांक तक बुंदेलखंड पैकेज से कोई राशि दी गई है? यदि हाँ, तो विकास खण्‍ड वार कितनी-कितनी राशि प्रदान की गई? (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में प्राप्‍त राशि से दमोह जिले में कौन-कौन से कार्य किस-किस विभाग द्वारा कराये गये? अलग-अलग विभागवार, विकासखण्‍डवार कार्य विवरण स्‍वीकृत राशि सहित सूची उपलब्‍ध करावें (ग) क्‍या अधिकारियों की मिलीभगत से दमोह जिले में आई बुंदेलखण्‍ड पैकेज की राशि का दुरूपयोग हुआ है? यदि नहीं, तो बुंदेलखण्‍ड पैकेज से कराये गये कार्यों की आज क्‍या स्थिति है? विभागवार अलग-अलग जाँच प्रतिवेदन प्रस्‍तुत कर संबंधित कार्य का स्‍थल निरीक्षण रिपोर्ट बनाकर जानकारी प्रदान करें? (घ) बुंदेलखण्‍ड पैकेज से दमोह जिले में कराये गये प्रत्‍येक विभागवार अलग-अलग कराये गये कार्यों की क्‍या उपयोगिता है एवं आम लोगों को इसका क्‍या लाभ मिला वस्‍तुस्थिति से अवगत करावें? क्‍या कराये गये निर्माण कार्यों का आज की स्थिति में कोई नामोनिशान ही नहीं बचा? यदि ऐसा है तो इसके लिए जबावदार अधिकारियों पर कोई कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो क्‍या कार्यवाही की जावेगी?

श्री लखन पटेल--अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न बड़ा गंभीर है, सीधा जनता से जुड़ा हुआ है. बुंदेलखण्ड पैकेज में बहुत सारे विभागों के द्वारा काम कराये गये, लेकिन बुंदेलखण्ड पैकेज को बंद हुए लगभग तीन साल हो गये हैं. बहुत सारे विभागों के काम अभी बकाया है. जैसे उदाहरण के तौर कई तालाब बनाये गये, लेकिन उन तालाबों से नहरें नहीं बन पायीं. नहरे नहीं बनी हैं, उसमें काम बकाया है उसमें काम कब तक पूरे किये जाएंगे? मंत्री जी दूसरा प्रश्न पूछना चाहता हूं कि हाई कोर्ट के निर्देशानुसार इस पूरे पैकेज की जांच हो रही है? उत्तर में आया है कि जांच जारी है और अधिकारियों के खिलाफ डी.ई. हो रही है. मैं दूसरी बात यह जानना चाहता हूं कि जांच कब तक होगी उसको चार साल हो गये हैं. डॉ.गौरीशंकर शेजवार - माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण है और गंभीर भी है.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री(श्री गोपाल भार्गव) - माननीय अध्यक्ष महोदय,आजकल डाक्टर साहब बहुत नयी-नयी ब्रांडेड शर्टें,कपड़े पहनकर आ रहे हैं. मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि वन विभाग में ऐसी क्या तब्दीली आ गयी है.मुझे क्या पता था कि हार्ट के आपरेशन से ऐसा परिवर्तन आ जाता है. मै भी अपना करवा लेता.

संसदीय कार्य मंत्री(डॉ.नरोत्तम मिश्र) - अध्यक्ष महोदय,कोई भी इंजन बोर हो तो उसकी क्षमता बढ़ ही जाती है.

ऊर्जा मंत्री(श्री पारस चन्द्र जैन) - अध्यक्ष महोदय,गोपाल भार्गव जी पीछे देख लें मैंने भी हार्ट का आपरेशन करवाया है पहले से अच्छा हो गया हूं. आप भी करा लो.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार - माननीय अध्यक्ष महोदय,माननीय सदस्यों ने अधूरे कार्यों को पूरा करने की मांग की है. बुंदेलखण्ड पैकेज के तहत हमने भारत सरकार से राशि मांगी है जो निर्धारित समय में उन्हें देना था लेकिन नहीं दी गई और यह राशि है 359.53 करोड़. यह मांग हमने उनसे की है और जैसे ही यह राशि आयेगी, पहले हम उसका प्राक्कलन करवा लेते हैं कि कितने कार्य शेष हैं और उस पर कितना व्यय होगा ? और जैसे ही केन्द्र सरकार से हमें राशि प्राप्त होगी तो उन्हें करवाने का हम पूरा पूरा प्रयास करेंगे. यह सत्य है कि इसमें स्थल निरीक्षण भी किया गया है. जिन विभागों को यह काम दिया गया था. उसमें जांच भी हुई है और उसमें अनियमितताएं भी पाई गई हैं. अनियमितताओं की जांच भी हो रही है और उन अधिकारियों को आरोपपत्र भी दिये गये हैं और उनकी विभागीय जांच हम जल्दी से जल्दी संस्थित करेंगे. जांच में या स्थल निरीक्षण में जैसी माननीय सदस्य ने शंका व्यक्त की है आप हमें बता दें कि आपकी क्या अपेक्षा है,कैसी जांच होना चाहिये. जांच अच्छे से हो सके तो आपकी जो राय होगी हम वैसी जांच करवा सकते हैं.

श्री लखन पटेल - माननीय अध्यक्ष महोदय, इसके स्थल निरीक्षण की फिर से जांच करवा दें क्योंकि बहुत सारी जगहों पर कार्य नहीं हुए हैं तो उसकी जांच करवा दें और मुझे भी इसमें शामिल कर लें.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह है कि पूरे कार्यों का स्थल निरक्षण हो चुका है और हम फिर से पूरा रिपीट करेंगे तो उसमें समय लगेगा और जांच में देर होगी. आप रेण्डम कुछ अपने क्षेत्र में,बगल के क्षेत्र में या जहां की आपको जानकारी हो. आप उसकी लिस्ट दे दीजिये. हम उनका स्थल निरीक्षण करवा लेंगे और जो अधिकारी यह कार्य करेंगे, वह हम आपको बता देंगे और आपको उसमें साथ में सम्मिलित करेंगे. बाकी जो आपके मन में जांच के प्रति शंका है कि जांच में कमी है, देर हो रही है तो जांच भी हम जल्दी करवाने की कोशिश कर रहे हैं.

श्री लखन पटेल - माननीय मंत्री जी बहुत-बहुत धन्यवाद.

प्रश्नकर्ता के पत्रों पर कार्यवाही

[वन]

13. ( *क्र. 3397 ) श्री निशंक कुमार जैन : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या दक्षिण वनमण्डल बैतूल के वन अपराध प्रकरण क्रमांक 453/65, दिनांक 02 जून, 2014 के संबंध में प्रश्‍नकर्ता ने पत्र क्रमांक 8101, दिनांक 10 अक्टूबर, 2017 प्रेषित कर प्रधान मुख्य वन संरक्षक सतपुड़ा भवन भोपाल से चाहे गए दस प्रश्‍नों में से किसी भी प्रश्‍न का कोई उत्तर प्रश्‍नांकित दिनांक तक भी प्रश्‍नकर्ता को नहीं दिया गया? (ख) यदि हाँ, तो प्रश्नकर्ता ने अपने पत्र में कौन-कौन से प्रश्‍न का उत्तर दिए जाने का अनुरोध किया? दस प्रश्‍नों में से किस प्रश्‍न का उत्तर प्रश्‍नांकित दिनांक तक भी प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने प्रश्‍नकर्ता को किन-किन कारणों से दिया जाना उचित नहीं समझा? (ग) प्रकरण क्रमांक 453/65 में 02 जून, 2014 को म.प्र. वनोपज व्यापार विनियमन 1969 की धारा 2घ एवं 5 लगाकर क्या कार्यवाही की गई? इस धारा को निरस्त किए जाने के संबंध में 02 मार्च, 2016 को किसे पत्र लिखा गया? यह धारा 2घ एवं 5 लगाने और उसे निरस्त किए जाने का पत्र लिखने का क्या कारण रहा है? (घ) प्रश्नकर्ता के दस प्रश्‍नों में से किस प्रश्‍न का उत्तर प्रधान मुख्य वन संरक्षक कब तक प्रश्‍नकर्ता को उपलब्ध करवा देगें?

वन मंत्री ( डॉ. गौरीशंकर शेजवार ) : (क) जी हाँ। कार्यालयीन पत्र क्रमांक 3941, दिनांक 23.10.2017 के माध्यम से प्रश्नकर्ता माननीय विधायक श्री निशंक कुमार जैन को अवगत कराया गया है कि ''वर्तमान में उक्त प्रकरण में अपील माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर में विचाराधीन है।'' अतः प्रश्नवार विस्तृत उत्तर नहीं दिया गया। (ख) प्रश्नकर्ता द्वारा प्रेषित पत्र क्रमांक 8101, दिनांक 10 अक्टूबर, 2017 की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। पत्र में उल्लेखित वन अपराध प्रकरण क्रमांक 453/65, दिनांक 02 जून, 2014 पर माननीय प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश मुलताई, जिला बैतूल द्वारा पारित आदेश दिनांक 20.09.2016 के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर में अपील विचाराधीन है। अतः विषय Subjudice होने के कारण प्रश्नकर्ता को प्रश्नवार उत्तर नहीं दिया गया। (ग) प्राथमिक वन अपराध प्रकरण क्रमांक 453/65, दिनांक 02 जून, 2014 में भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26 (च), 33-1 (ए), 66 (क), 69 के साथ-साथ मध्यप्रदेश वनोपज (व्यापार विनियमन) अधिनियम 1969 की धारा 2 (घ) एवं 5 जैव विविधता अधिनियम 2002 की धारा 3, 7 सहपठित धारा 55 भी अधिरोपित की जाकर अवैध संग्रहित 892.05 कि.ग्रा. धावड़ा गोंद को जप्त किया गया। शासन द्वारा धावड़ा गोंद को विनिर्दिष्ट वनोपज की सूची से हटा दिये जाने के कारण वन अपराध प्रकरण में अधिरोपित धारा 2 (घ) एवं 5 त्रुटिपूर्ण होने के कारण वन परिक्षेत्राधिकारी, मुलताई ने अपने पत्र क्रमांक 375, दिनांक 02.03.2016 द्वारा माननीय न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी मुलताई को प्रकरण में अधिरोपित मध्यप्रदेश वनोपज (व्यापार विनियमन) अधिनियम 1969 की धारा 2 (घ) एवं 5 को हटाने का अनुरोध किया गया। (घ) उत्तरांश (क) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

श्री निशंक कुमार जैन - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने माननीय वन मंत्री जी से पूछा था कि क्या वन मंत्री जी यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या दक्षिण वन मण्डल बैतूल के..

अध्यक्ष महोदय - वह तो लिखा है. आप तो वरिष्ठ विधायक हैं.

श्री निशंक कुमार जैन - माननीय अध्यक्ष महोदय,मैंने पी.सी.सी.एफ. से 10 प्वाइंट पूछे थे और जब मेरे पास उत्तर नहीं आया तो मैंने प्रश्न लगाया. आज दुर्भाग्य देखिये कि सरकार न्यायालय की आड़ लेकर उन 10 प्रश्नों का उत्तर नहीं देने को जस्टीफाईड कर रही है जबकि माननीय उच्च न्यायालय ने,किसी भी न्यायालय ने उत्तर देने से नहीं रोका तो क्या जिसने उत्तर नहीं दिया उसके खिलाफ आप कोई कार्यवाही करेंगे. मेरा पहला प्रश्न है. मंत्री जी इसका उत्तर दे दें इसके बाद मेरे तीन-चार और पूरक प्रश्न हैं.

अध्यक्ष महोदय - आप एक और अभी पूछ लीजिये उसके बाद एक और पूछ लीजिये.

श्री निशंक कुमार जैन - माननीय अध्यक्ष महोदय, बड़ा मामला है. दूसरी बात क्या लघु वनोपज के अंतर्गत धावड़ा गोंद आती है या नहीं, नोटिफाईड और डि-नोटिफाईड, किस केटेगरी में आती है?

अध्यक्ष महोदय - आप बैठ जाएं, पहले उसका उत्तर ले लें, जो पहले प्रश्न पूछा है. 10 प्रश्नों की उन्होंने जानकारी मांगी है.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार - अध्यक्ष महोदय, 10 प्रश्नों में एक-एक प्रश्न में भी फिर 10-10 प्रश्न हैं.

श्री निशंक कुमार जैन - आप तो सबकी जानकारी दिलवा देते, कहीं न कहीं आप क्यों किसी को बचाने का प्रयास कर रहे हैं?

अध्यक्ष महोदय - निशंक जी, जवाब तो सुन लें.

श्री गोपाल भार्गव - यह तो खैरियत है एक बार डॉक्टर साहब ने 5 पृष्ठों का ध्यानाकर्षण सूचना का उत्तर पढ़ा था.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार - अध्यक्ष महोदय, मैं बुराई नहीं कर रहा हूं, मैं प्रशंसा कर रहा हूं.

श्री निशंक कुमार जैन - अध्यक्ष महोदय, जैसा माननीय श्री भार्गव जी का काम है यदि ऐसा आप भी करने लगें तो मजा ही आ जाए. आपका चश्मा दूसरा है, उनके जैसा सफेद चश्मा तो लगा लें.

अध्यक्ष महोदय - आप बैठ जाएं, आपको उत्तर लेना है कि नहीं, नहीं तो मैं आगे बढूंगा, आप यहीं प्रश्नोत्तर कर लेंगे? उनकी तरफ से कुछ उत्तर आया ही नहीं है.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार - अध्यक्ष महोदय, मैं तारीफ कर रहा हूं कि जनता के हित में और विषय को उजागर करने के लिए यदि प्रश्न पूछने की कला यदि कोई सीखे तो जैन साहब से सीखे.

श्री निशंक कुमार जैन - गुरू आप ही हो, सरकार गुरू आप ही हो.

अध्यक्ष महोदय - आप प्रश्न का उत्तर लेंगे कि नहीं? अब यदि आप उत्तर के बीच में बोले तो मैं 14 नम्बर बुलाऊंगा.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार - अध्यक्ष महोदय, 10 प्रश्न जो हैं, प्रश्न भी इन्होंने ही पूछे और फिर उसकी यह भी प्रतिलिपि मांगी कि क्या-क्या वे प्रश्न थे? हमने परिशिष्ट अ में उनको जानकारी दी है, एक पेज, दो पेज, तीन पेज, चार पेज और भी इसमें पेज हैं. मैं इस पर आपत्ति नहीं कर रहा हूं, लेकिन प्रश्न का उत्तर मैं इसलिए नहीं दे सकता कि जो मामला सबजूडिस है और विधान सभा में चर्चा के बाद कहीं कोई न्याय प्रभावित होता है, उसका उत्तर नहीं देना चाहिए. अब मैंने विभाग को यह निर्देश दिये हैं कि इनके प्रश्नों की जो लिस्ट है इसमें से ऐसे कितने उत्तर दिये जा सकते हैं, जो सबजूडिस होने के बाद भी न्याय को प्रभावित नहीं करते तो उसमें से सक्रूटनी कर लेंगे और आप चाहें तो आपकी एक बैठक हम अधिकारियों के साथ करवा सकते हैं.

श्री निशंक कुमार जैन - अध्यक्ष महोदय, मेरा किसी बैठक में कोई इंट्रेस्ट नहीं है. मेरा प्रश्न टू द पाइंट है.

अध्यक्ष महोदय - आप उत्तर तो पूरा होने दें.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार - अध्यक्ष महोदय, टू द पाइंट यदि बात है तो टू द पाइंट उत्तर आ गया है. यह मेरा निवेदन है. इसके अतिरिक्त यदि कुछ है तो वह मैंने इनसे कह दिया है.

अध्यक्ष महोदय - जो दूसरा प्रश्न लघु वनोपज का पूछा था, वह और बता दें.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार - अध्यक्ष महोदय, लघु वनोपज वाले में यह बात सही है कि धावड़ा गोंद वह विनिर्दिष्ट सूची में नहीं आती थी. अधिकारियों ने उसको इस सूची में लिया है, लेकिन इसके अलावा दूसरी धाराओं में प्रकरण और रजिस्टर्ड था. धाराओं का उल्लेख है, आप कहें? आवश्यकता नहीं है उनका उल्लेख करने की, लेकिन बाद में जब विभागीय अधिकारियों ने उसे समझा और देखा कि ये विनिर्दिष्ट सूची से बाहर बाद में निकाल लिया गया है तो जैसे ही बाद वाला नोटिफिकेशन उनके सामने आया तो उन्होंने अदालत में सप्लीमेंट्री चालान पेश किया और कहा कि हम इस प्रकरण में इन-इन धाराओं में को कम करना चाहते हैं फिर वहां न्यायालय से विभाग के खिलाफ निर्णय हुआ और लोकेश निकाजू और संजय शिवहरे के पक्ष में निर्णय हुआ तो कुछ धाराएं उसमें ऐसी थीं जो जैव विविधता से और अन्य से संबंधित थीं, उन धाराओं में चूंकि प्रकरण चलाना अनिवार्य था और फिर हाईकोर्ट में अपील में सरकार गई है. अब मुझे यह बता दें कि जब निर्णय आएगा या तो हम उसका इंतजार करें या धाराओं का हम एक बार परीक्षण करवा लेंगे कि क्या ये धाराएं गलत तो नहीं लगाई गई हैं. यदि कहीं ऐसा लगता है कि धाराएं गलत लगाई गई हैं तो हम एडव्होकेट जनरल से भी राय ले सकते हैं और जैसी एडव्होकेट जनरल हमको राय देंगे, हम केस के बारे में वैसा आगे चलेंगे.

श्री निशंक कुमार जैन - अध्यक्ष महोदय, यह बड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न है. मैं आपका संरक्षण चाहूंगा. मेरा कहना यह है कि जब सरकार ने खुद धावड़ा गोंद को डि-नोटिफाईड की सूची में डाला है. उसके बाद प्रकरण क्‍यों पंजीबद्ध किया गया ? जब 2008 का वन अधिनियम लागू हो गया उसके बाद 2014 में प्रकरण क्‍यों पंजीबद्ध किया गया ? जिस अधिकारी ने प्रकरण पंजीबद्ध किया है क्‍या उसके खिलाफ माननीय मंत्री जी कोई कार्यवाही करेंगे ? अध्‍यक्ष महोदय, आपका संरक्षण चाहूंगा. मेरा प्रश्‍न पिन प्‍वाइंट है.

अध्‍यक्ष महोदय - उन्‍होंने सारी बात कह दी. जांच कराने के लिये भी तैयार हैं.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार - अध्‍यक्ष महोदय, गोंद एकत्रित करके पकड़ी गई अकेला इतना मामला नहीं है, यहां जैव विविधता को भी नष्‍ट किया गया है. एक तो गोंद प्राकृतिक रूप में निकलती है उसका कलेक्‍शन होता है. दूसरा इनके ऊपर जो प्रकरण दर्ज हुआ है वह यह हुआ है कि पौधों को केमिकल के माध्‍यम से ज्‍यादा मात्रा में निकालकर गोंद ज्‍यादा एकत्रित की जिससे वह पौधे नष्‍ट हो गए. यदि 50-50 और 100-100 पौधे गोंद निकालने से नष्‍ट हो जाएंगे तो ऐसे लोगों के खिलाफ प्रकरण चलाना अनिवार्य है. प्रकरण में जांच के उपरांत जैव विविधता अधिनियम 2002 की धारा 3(7) सहपठित धारा 355 भी इसमें जोड़ी गई है.

प्रश्‍न संख्‍या 14 - (अनुपस्थित)

प्रश्‍न संख्‍या 15 - (अनुपस्थित)

''एकात्‍म यात्रा'' के आयोजन पर व्‍यय

[योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी]

16. ( *क्र. 15 ) डॉ. गोविन्द सिंह : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में माह दिसम्‍बर 2017 एवं जनवरी 2018 में ''एकात्‍म यात्रा'' के प्रारंभ दिनांक से समापन दिनांक तक राज्‍य के खजाने से कुल कितनी राशि किन-किन कार्यों पर व्‍यय की गई? इस एकात्‍म यात्रा से प्रदेश की आम जनता को क्‍या लाभ हुआ है? (ख) ''एकात्‍म यात्रा'' के समापन समारोह में शामिल होने के लिए ओंकारेश्‍वर में आमजनों को लाने-ले जाने के लिए किस-किस जिले से कितनी-कितनी निजी बसों का अधिग्रहण किया गया था तथा इन बसों का किराया, भुगतान किये जाने के क्‍या मापदण्‍ड निर्धारित किये गये थे? क्‍या मापदण्‍डों के अनुसार बस ऑपरेटरों को बसों के किराये का भुगतान किया गया है? यदि हाँ, तो बस संचालकों के नाम एवं बस क्रमांक सहित भुगतान की गई राशि का ब्‍यौरा दें? (ग) क्‍या इस यात्रा की नोड्ल एजेंसी ''जन अभियान परिषद'' को बनाया गया था? यदि हाँ, तो जन अभियान परिषद को किस-किस मद से कितनी-कितनी राशि कब-कब दी गई? उक्‍त राशि में से कितनी राशि किस-किस कार्य पर परिषद द्वारा व्‍यय की गई तथा कितनी-कितनी राशि शेष है? (घ) क्‍या भारतीय संविधान में ''एकात्‍म यात्रा'' जैसे धार्मिक कार्यक्रमों को शासकीय व्‍यय पर आयोजित किए जाने के प्रावधान हैं? (ड.) यदि हाँ, तो क्‍या प्रावधान हैं? यदि नहीं, तो विधि विरूद्ध किए गए उक्‍त आयोजन हेतु शासकीय धन के दुरूपयोग की क्‍या उच्‍च स्‍तरीय जाँच कराई जाएगी? यदि नहीं, तो क्‍यों?

डॉ. गोविन्‍द सिंह - अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या एकात्‍म यात्रा का आयोजन धार्मिक है ? आपके जवाब में आया है कि यह धार्मिक नहीं है. मैं पूछना चाहता हूं कि जो खर्चा आपने जन अभियान परिषद से किया है, जन अभियान परिषद के हमारे पास उद्देश्‍य हैं, उन 16 उद्देश्‍यों में कहीं भी इसका उल्‍लेख नहीं है कि ये गतिविधियां कर सकते हैं. 12 करोड़, 2 लाख रुपये आपने इसमें खर्च किया है. क्‍या मंत्री जी, संविधान में ऐसा प्रावधान है कि हम किसी भी धार्मिक गतिविधि के लिए शासन की राशि व्‍यय कर सकते हैं ? अगर है तो कृपा करके उसका उत्‍तर दे दें.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार - अध्‍यक्ष महोदय, एकात्‍म यात्रा का काम जन अभियान परिषद को भी दिया गया था.

श्री रामनिवास रावत - आप अपने जवाब में मना कर रहे हैं. प्रश्‍नांश (ग) में दिया है कि क्‍या इस यात्रा की नोडल एजेंसी जन अभियान परिषद को बनाया गया था, तो आपके उत्‍तर में आया है कि जी नहीं.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार - वकीलों की एक कला होती है कि जितना उनके मतलब का होता है केवल उतना ही पढ़ते हैं और जैसे ही विषय उनके खिलाफ जाने लगता है तो वह भूल जाते हैं इस बात का भी ख्‍याल नहीं रखते कि उसमें कॉमा, फुल स्‍टॉप भी है.

डॉ. गोविन्‍द सिंह - आपने अपने उत्‍तर में स्‍वीकार किया है कि जी नहीं. जब नोडल एजेंसी नहीं बनाया गया तो किस हैसियत से जन अभियान परिषद को राशि दी गई है ?

डॉ. गौरीशंकर शेजवार - अध्‍यक्ष महोदय, नोडल एजेंसी बनाना अलग विषय है और काम करवाना अलग विषय है. यह विभाग की उदारता है कि त्रुटिपूर्ण प्रश्‍न का भी जवाब दिया है. ..(व्‍यवधान)...

डॉ. गोविन्‍द सिंह - अध्‍यक्ष महोदय, भाषण नहीं जवाब चाहिए. आप यह बताइए कि क्‍या संविधान में कहीं ऐसा उल्‍लेख है कि आप धार्मिक गतिविधियों में राशि खर्च कर सकते हैं ? शासन की राशि का दुरुपयोग करेंगे ? दूसरी बात जन अभियान परिषद के 13 उद्देश्‍यों में कहीं भी यह काम शामिल नहीं है.

श्री गोपाल भार्गव - अध्‍यक्ष महोदय, जब आत्‍मा एक हो रही है तो कहां आपत्ति होना चाहिए कि किसके द्वारा एक हो रही है, किसके द्वारा नहीं हो रही है ?

श्री रामनिवास रावत - अध्‍यक्ष महोदय, एकात्‍म यात्रा से प्रदेश की जनता को क्‍या लाभ हुआ है ? ..(व्‍यवधान)...

डॉ. गोविंद सिंह - आपने मेरे प्रश्‍न का जवाब नहीं दिया. आप सरकारी धन का संवैधानिक धज्जियां उड़ाते हुए जनता की गाढ़ी कमाई का धन अपनी छवि बनाने के लिए उपयोग करेंगे ? यह है कोई प्रावधान. न उद्देश्य है, न कानून है, न जन अभियान परिषद् के उद्देश्य में है. करोड़ों रुपये आपने फूंक डाला. यह आपने किस नियम के तहत किया है.

श्री रामनिवास रावत -- आप जनता के पैसे को लूट रहे हो, उड़ा रहे हो.

डॉ. गोविन्द सिंह -- आप कह रहे हैं कि धार्मिक नहीं है. तो मुख्यमंत्री जी ने धार्मिक क्यों कहा कि यह धार्मिक यात्रा है. मुख्यमंत्री जी का बयान है. तो फिर एकात्म यात्रा में आपने साधु संतों पर किस हैसियत से खर्चा किया. मुख्यमंत्री निवास का खर्चा इसमें क्यों नहीं जोड़ा.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार -- गोविन्द सिंह जी, आप जब मंत्री थे, तो वहां जो मीटिंग होती थी, उसके चाय पानी का और मीटिंग का खर्चा भी लिखा गया है उसमें. मेरा ऐसा कहना है कि जहां सरकारी बैठकें होंगी, उनका व्यय सरकारी होगा.

अध्यक्ष महोदय -- प्रश्नकाल समाप्त.

 

 

(प्रश्नकाल समाप्त)

 

 

 

 

..(व्यवधान)..

12.01 बजे नियम 267-क के अधीन विषय

अध्यक्ष महोदय -- निम्नलिखित माननीय सदस्यों की शून्यकाल की सूचनाएं सदन में पढ़ी हुई मानी जायेंगी-

1. श्री के.डी.देशमुख

2. श्री प्रताप सिंह लोधी

3. डॉ. रामकिशोर दोगने

4. पं. रमेश दुबे

5. श्री बहादुर सिंह चौहान

6. श्री सचिन यादव

7. श्री शैलेन्द्र जैन

8. श्री बाबूलाल गौर

9. श्री सुखेन्द्र सिंह

10. श्री यादवेन्द्र सिंह

..(व्यवधान)..

 

 

 

 

 

 

 

12.02 बजे शून्यकाल में मौखिक उल्लेख

(1) भोपाल में आरती राय एवं बैतूल जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कामठी में 20 वर्षीय युवती द्वारा आत्महत्या की जाना.

 

श्री रामनिवास रावत (विजयपुर)-- भोपाल में आरती राय का तो मामला चल ही रहा है. ..

अध्यक्ष महोदय -- उसका कॉल अटेंशन ले रहे हैं.

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय, जी. लेकिन कल की तारीख में बैतूल जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम कामठी में 20 वर्षीय जया ने भी कल आत्महत्या कर ली. उसने अपनी छेड़खानी की रिपोर्ट थाने में सुबह 11.00 बजे की. पुलिस द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की तो शाम को उसने आत्महत्या कर ली..

अध्यक्ष महोदय -- आप उसको नियम में लगा दें.

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय, प्रदेश में बालिकाएं पूरी तरह से असुरक्षित हैं. महिलाएं पूरी तरह से असुरक्षित हैं. अभिभावक अपनी बच्चियों को कालेज और स्कूल भेजने में डर रहे हैं..

अध्यक्ष महोदय -- आपने इसमें कुछ दिया है.

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय, हां स्थगन दिया है. पूरा भोपाल शहर आंदोलित है. पूरा प्रदेश आंदोलित है...

अध्यक्ष महोदय -- उस पर चर्चा करा रहे हैं, इस विषय को भी उसमें जोड़ देंगे.

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय, स्थगन दिया हुआ है. सरकार को चिंता करना चाहिये कि हमारी मां ,बहनें एवं बंटियां सुरक्षित रहें..

अध्यक्ष महोदय -- चर्चा के लिये सहमत हैं, उसमें यह विषय भी ले लेंगे और दोनों विषय जोड़ करके चर्चा करायेंगे.

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय, जी. लेकिन उत्तर आना चाहिये. इस पर तो स्थगन ग्राह्य होना चाहिये. इतना गंभीर विषय है.

अध्यक्ष महोदय -- गंभीर विषय है, उस पर काल अटेंशन ले रहे हैं. आपको मैंने बता दिया है.

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय, पूरा भोपाल शहर, जो प्रदेश की राजधानी है, वह आंदोलित है. पूरे प्रदेश की जनता आंदोलित है.

अध्यक्ष महोदय -- 20 तारीख को उस पर ले रहे हैं.

(2) आदिवासियों को बोनस का नगद भुगतान किया जाना.

डॉ. गोविन्द सिंह (लहार) -- अध्यक्ष महोदय, आदिवासियों की गाढ़ी कमाई जो बोनस का पैसा उनको मिलना चाहिये था, मैं सरकार से कहना चाहता हूं कि जनता की गाढ़ी कमाई जो बोनस का, मजदूरों का पैसा है, उस पैसे से 260 रुपये की साड़ी, जूता चप्पल देने का सरकार प्रयास कर रही है और जो साड़ियां 260 रुपये की हैं, वह साड़ी सूरत में 70 रुपये की आ रही है. हमारा सरकार से अनुरोध है कि जो मजदूर आदिवासी भाइयों का पैसा है, बोनस का, वह उनको मिलना चाहिये और वह उनको नगद भुगतान किया जाये. उसमें मुख्यमंत्री जी और प्रधानमंत्री जी का फोटो छपवाकर चुनाव में राशि का दुरुपयोग करना उचित नहीं है. इसलिये मैं इसका विरोध करता हूं और सरकार से मांग करता हूं कि इस प्रकार से शासन के धन का दुरुपयोग न करें. जनता के, गरीबों का, आदिवासियों का पैसा न लूटे, वह उनकी मेहनत का पैसा है..

(3) पन्ना जिले में पेयजल संकट होना.

श्री मुकेश नायक (पवई) -- अध्यक्ष महोदय, पन्ना जिला सूखाग्रस्त घोषित हुआ है. कम पानी गिरने के कारण भूजल स्तर बहुत नीचे चला गया है और पेयजल की भारी समस्या का सामना आम जनता को करना पड़ रहा है. मेरा आपसे निवेदन है कि पीएचई विभाग को ज्यादा ज्‍यादा सतर्कतापूर्वक नल सुधारने के लिए, नल-जल योजनाओं को सुधारने के लिए, पेयजल के परिवहन के लिए तत्‍परतापूर्वक जो काम पन्‍ना जिले में करना चाहिए, वह अभी नहीं हो पा रहा है. मैं आपका संरक्षण चाहता हूँ. कृपया शासन इस पर ध्‍यान दे.

(4) भोपाल और इंदौर में मेट्रो ट्रेन चलाई जाना

श्री बाबूलाल गौर (गोविन्‍दपुरा) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा बहुत गंभीर मामला है. भोपाल और इंदौर में मेट्रो ट्रेन नहीं चलाने के कारण हमारा प्रदेश पिछड़ता जा रहा है. सरकार की कोई इच्‍छा-शक्‍ति नहीं है कि मध्‍यप्रदेश के अंदर मेट्रो ट्रेन चलाई जाए.

अध्‍यक्ष महोदय -- यह विषय पहले कॉल-अटेंशन में आ चुका है.

श्री बाबूलाल गौर -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा सरकार से निवेदन है कि इसे गोरखधंधे में न फंसाया जाए. हमारे प्रदेश के अंदर मेट्रो ट्रेन की बहुत आवश्‍यकता है. इसलिए मैं सरकार से आग्रह करता हूँ.

अध्‍यक्ष महोदय -- इस विषय पर आपका कॉल-अटेंशन ले लिया.

श्री बाबूलाल गौर -- अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद.

अध्‍यक्ष महोदय -- पहले ले लिया था, अब नहीं लेंगे.

(5) राघोगढ़ विधानसभा क्षेत्र में किसानों को नियमानुसार नगद राशि का

भुगतान न होना

 

श्री जयवर्द्धन सिंह (राघोगढ़) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, गुना जिले के राघोगढ़ विधान सभा क्षेत्र में कृष उपज मंडी, आरोन में वर्तमान समय में गेहूँ, चना और धनिया की खरीदी का कार्य चल रहा है. इसमें व्‍यापारियों द्वारा वर्तमान में सिर्फ 10 हजार रुपये का भुगतान किसानों को किया जा रहा है और बाकी राशि आरटीजीएस के माध्‍यम से दी जा रही है, जबकि शासन के नियमानुसार किसानों को न्‍यूनतम 50 हजार रुपये तक की धनराशि का भुगतान नकद करने के आदेश हैं, परंतु शासन द्वारा आज दिनांक तक 50 हजार रुपये तक का नकद भुगतान नहीं किया जा रहा है. यह मुद्दा किसानों द्वारा उठाया जा रहा है. इस प्रकार की विसंगति होने के कारण क्षेत्र के किसानों एवं व्‍यापारियों में भारी आक्रोष है.

(6) जौरा विधान सभा क्षेत्र में नहरों से पानी छोड़ा जाना.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा (जौरा) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र में दो नहरें निकलती हैं, एक एलएमसी और एक एबीसी. दोनों बारी-बारी से चलीं, खूब पानी मिला, लेकिन लास्‍ट में जो अरहर की फसल को काटकर गेहूँ बोया गया था, वह गेहूँ कच्‍चा है, अगर उसको एक पानी नहीं मिला तो वह फसल पूरी तरह से नष्‍ट हो जाएगी. इसलिए जनता में भारी आक्रोष है. वहां दो दिन के लिए एक पानी छोड़ दिया जाए तो पंपों से किसान पानी दे देंगे.

(7) दमोह जिले में पेयजल संकट होना

श्री प्रताप सिंह (जबेरा) -- अध्‍यक्ष महोदय, दमोह जिले के तेंदूखेड़ा विकासखण्‍ड के ग्राम जरुआ में भीषण पेयजल संकट आ गया है. यहां के कुएं सूख गए हैं, साथ ही लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग द्वारा एक भी हैंडपंप का खनन नहीं किया गया है. लगभग 10 किलोमीटर के एरिए में कहीं पर ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल की व्‍यवस्‍था नहीं है. इसके चलते ग्रामीण आसपास के पोखरों का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं. इससे बच्‍चों में कुपोषण की बीमारी फैल रही है और दो बच्‍चों की मृत्‍यु हो चुकी है एवं 4 बच्‍चे अभी भी इलाजरत हैं. इसके चलते वहां की जनता में रोष व्‍याप्‍त है. उक्‍त समस्‍या के निराकरण के लिए शासन जल्‍दी ही कोई कार्यवाही करे.

 

 

(8) बालाघाट जिले की भरवेली माइन्‍स से वायु प्रदूषण होना

श्री मधु भगत (परसवाड़ा) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बालाघाट जिले के अंतर्गत भरवेली में स्‍थित मैंगनीज माइन्‍स के द्वारा वायु प्रदूषण हो रहा है, जिससे क्षेत्र के करीबी ग्रामों की जनता में कई प्रकार की बीमारियां हो रही हैं. कम्‍पनी द्वारा ग्रामवासियों के इलाज के लिए कोई व्‍यवस्‍था नहीं है, जिसके द्वारा वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियों का प्रशिक्षण तथा इलाज किया जा सके. इसी प्रकार जिले के चिकित्‍सालय में पल्‍मोनरी बीमारियों से संबंधित न तो विशेषज्ञ डॉक्‍टर हैं और न ही मशीनें हैं. यह क्रम वर्षों से जारी है. ग्राम मंझारा, टवेझरी एवं भरवेली में माइन्‍स में द्वारा वायु प्रदूषण से होने वाली अस्‍थमा जैसी बीमारियों की जांच हेतु न तो कोई शिविर लगाए गए हैं और न ही जांच हेतु किसी चिकित्‍सक को भेजा जाता है. क्‍या बालाघाट जिले की मैंगनीज ओर इंडिया लिमिटेड, भरवेली माइन्‍स मध्‍यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वायु प्रदूषण निवारक एवं नियंत्रण के अधिनियम, 1981 का उल्‍लंघन कर रही है. क्‍या ये सभी बातें विभाग के संज्ञान में हैं, यदि हां, तो क्‍या विभाग द्वारा माइन्‍स के आसपास के ग्रामों में निवासरत ग्रामीणों की अस्‍थमा की जांच करवाई जाएगी. मैं माननीय सदन की ओर शून्‍यकाल की सूचना प्रेषित करता हूँ.

(9) सुवासरा विधान सभा क्षेत्र में पेयजल संकट होना

श्री हरदीप सिंह डंग (सुवासरा) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सुवासरा विधान सभा क्षेत्र की नाहरगढ़ और क्‍यामपुर पंचायत में पेयजल का संकट है. अभी एक सप्‍ताह पहले पेयजल के लिए पूरे नाहरगढ़ को जनता के द्वारा बंद रखा गया था. पीने का पानी वहां पर नहीं है, 5-5, 7-7 किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है.

अध्‍यक्ष महोदय -- आज पीएचई विभाग की डिमांड्स हैं, तब बोल लीजिएगा.

श्री हरदीप सिंह डंग -- अध्‍यक्ष महोदय, क्‍यामपुर में वहां के युवा पानी के कारण भूख-हड़ताल पर बैठे हुए है. नाहरगढ़ और क्‍यामपुर में पानी की तुरंत व्‍यवस्‍था कराई जाए, मुझे यह सूचना देनी है. धन्‍यवाद.

(10) बासौदा विधान सभा क्षेत्र में पेयजल संकट होना

श्री निशंक कुमार जैन (बासौदा) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बासौदा विधान सभा की गंजबासौदा, त्‍यौंदा और ग्‍यारसपुर तहसील के करीब 100 गांवों में भीषण पेयजल संकट व्‍याप्‍त है, इसलिए जनता में जबरदस्‍त रोष व्‍याप्‍त है.

अध्‍यक्ष महोदय -- आज पीएचई विभाग की चर्चा है.


12.10 बजे पत्रों का पटल पर रखा जाना

 

1. मध्‍यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (क्रमांक 19 सन् 2017) वाणज्यिक कर विभाग की अधिसूचनाएं क्रमांक 1 से 111.

 

 

 

2. मध्‍यप्रदेश राज्‍य जैव विविधता बोर्ड का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2016-2017

 

 

 

 

 

 

 

 

 

3. मध्‍यप्रदेश स्‍टेट सिविल सप्‍लाईज कार्पोरेशन लिमिटेड का 42 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2015-2016

 

4. मध्‍यप्रदेश पाठ्य पुस्‍तक निगम का वार्षिक प्रतिवेदन एवं अंकेक्षित लेखे वर्ष 2016-2017

 

 

 

12.12 बजे अध्‍यक्षीय घोषणा

 

श्री बाला बच्‍चन, सदस्‍य की ध्‍यानाकर्षण सूचना को आगामी कार्य दिवस

में लिया जाना

 

अध्‍यक्ष महोदय -- प्रथम ध्‍यानाकर्षण सूचना के प्रस्‍तुतकर्ता श्री बाला बच्‍चन, सदस्‍य के आज अपरिहार्य कारण से उपस्थित न हो पाने के कारण माननीय सदस्‍य के अनुरोध अनुसार यह ध्‍यानाकर्षण आगामी दिवस में लिया जाएगा.

 

12.13 बजे ध्‍यान आकर्षण

 

श्‍योपुर जिले के अनेक ग्रामों में चकबंदी को निरस्‍त कर काबिज भूमि के आधार पर राजस्‍व अभिलेख में नाम दर्ज न किया जाना

 

श्री दुर्गालाल विजय (श्‍योपुर) -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरी ध्‍यान आकर्षण की सूचना का विषय इस प्रकार है :-

 

 

 

 

 

 

 

 

राजस्‍व मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्‍ता) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

श्री दुर्गालाल विजय-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जमीन उन किसानों के नाम हैं ही नहीं जो किसान वहाँ पर काबिज हैं फिर खाद-बीज लेने में और केसीसी में कठिनाई क्यों नहीं आएगी मंत्री जी बतायें? क्योंकि केसीसी या खाद-बीज का लेन-देन तो खातों में दर्ज नाम के आधार पर ही होगा. दूसरी बात मैं यह पूछना चाहता हूँ कि यह अधिसूचना कब जारी हुई है और माननीय अध्यक्ष महोदय, पिछले लगातार दस वर्षों से यह आश्वासन दिया जा रहा है कि इसमें कार्यवाही प्रचलित है और पिछले समय जब यह आया था उसको भी एक वर्ष हो गया है उस समय आपने एक वर्ष के अंदर इस कार्य को पूर्ण करने का आश्वासन दिया था. मैं मंत्री जी से पूछना चाहता हूँ कि एक तो अधिसूचना जारी करने की तारीख बतायें दूसरा इसको कब तक शासकीय कागजातों में अमल करके इसका क्रियान्वयन हो जाएगा इसकी समय सीमा निश्चित करें.

श्री उमाशंकर गुप्ता--- माननीय अध्यक्ष महोदय, सूचना की तारीख तो मैंने उत्तर में पढ़ी है, 7 फरवरी 2017 से अधिसूचना जारी हो गई है, मेरे उत्तर में मैंने पढ़ा था और इसलिए तकलीफ नहीं है कि अभी वह काबिज हैं. सवाल त्रुटि सुधार का है.वर्ष 1960 में जो चकबंदी हुई थी उसके कारण स्थान का परिवर्तन, रकबे का नंबर परिवर्तन इत्यादि हुआ था तो इसके कारण कोई दिक्कत नहीं है. वह अभी खेती पर काबिज हैं, खेती कर रहे हैं और कोई ऐसी बात नहीं है लेकिन हाँ, यह जल्दी होना चाहिए. हमने कोशिश भी की है लेकिन माननीय अध्यक्ष महोदय, आप जानते हैं कि साल भर में करने का हमने प्लान भी बनाया था, काम चल भी रहा है लेकिन हमारे पास पटवारी, आरआई की संख्या भी कम है और बहुत से काम हमारे पास बीच में आ जाते हैं. कहीं ओलावृष्टि का काम, कहीं क्षतिपूर्ति का काम आ जाता है. इस कारण थोड़ा विलंब हुआ है. लेकिन वह काम चल ही रहा है और हमने आज ही कलेक्टर को निर्देश दिये हैं कि उसको बहुत जल्दी पूरा करा दें. लेकिन अगर किसी किसान को जिन कामों में कोई तकलीफ बता रहे हैं अगर वह स्पेसीफिक मुझे बता देंगे तो तकलीफ हम नहीं आने देंगे और इस काम को भी जल्दी पूरा करा लेंगे.

श्री दुर्गालाल विजय-- अध्यक्ष महोदय, सब किसानों को तकलीफ है,स्पेसीफिक क्या बताएंगे. अध्यक्ष महोदय, जमीन दूसरों के नाम है अब हमको कैसे लोन मिलेगा, किस प्रकार से हमें खाद बीज लेने का मौका मिलेगा. इसमें कोई स्पेसीफिक बताने की आवश्यकता नहीं है और यह बात वर्ष 2007 में तय हो गई थी कि इसको 6 महीने में करा देंगे तब श्री नारायण सिंह कुशवाह जी राजस्व मंत्री थे उस समय तय हुआ था कि इसको हम 6 माह में कर देंगे तबसे लेकर अभी तक 10 वर्ष का समय गुजर गया लेकिन अभी तक तो कुछ हुआ नहीं है मेरा निवेदन है कि आप समय सीमा बतायें कि कब तक आप ठीक कर देंगे.साथ ही सरकार का यह जवाब कि हमारे अमला नहीं है पटवारी नहीं, गिरदावर नहीं है तो क्या होगा किसानों का? यह मेरा निवेदन है.

श्री उमाशंकर गुप्ता-- अध्यक्ष महोदय, जो वास्तविकता है वह मैंने बताई है. 9235 पटवारी हम भर्ती कर रहे हैं और वहाँ जो समस्या क्रय-विक्रय में आती है वह आदिवासी जमीन के कारण आती है लेकिन मैंने कहा है क्योंकि जमीन तो उनके पास है ही.

श्री दुर्गालाल विजय-- अध्यक्ष महोदय, बात पटवारियों की भर्ती की नहीं है. बात यह है कि पांच गांवों किसानों का आप कब कितने समय में निश्चित कर देंगे. इसकी कोई समय सीमा बता दीजिये.

श्री उमाशंकर गुप्ता-- अध्यक्ष महोदय,एक साल में कर देंगे.

श्री दुर्गालाल विजय-- अध्यक्ष महोदय, एक साल का आश्वासन तो मंत्री जी पहले ही दिया हुआ है. एक वर्ष का तो पहले से ही कह रखा है.

श्री उमाशंकर गुप्ता-- अध्यक्ष महोदय,वर्ष 2007 से चल रहा है रेवेन्यू में हमने काफी परिवर्तन लाये हैं.

श्री दुर्गालाल विजय-- अध्यक्ष महोदय,एक साल तो आपकी विज्ञप्ति जारी होकर हो गये हैं.

श्री उमाशंकर गुप्ता-- अध्यक्ष महोदय, मेरा वही कहना है कि हम जल्दी कर देंगे साल भर का आश्वासन तो पिछला दिया ही हुआ है.

श्री दुर्गालाल विजय-- अध्यक्ष महोदय, साल भर ज्यादा है छह महीने का आश्वासन दे दें.

श्री उमाशंकर गुप्ता-- आप असत्य आश्वासन क्यों दिलवाना चाहते हैं. मेरा यह कहना है कि जो अमला काम कर रहा है..

श्री दुर्गालाल विजय-- अध्यक्ष महोदय, इसमें असत्य आश्वासन देने का कोई प्रश्न ही नहीं है. सवाल यह है कि अगर एक साल बाद नहीं होगा तो इसका क्या अर्थ निकलेगा.

अध्यक्ष महोदय -- आप तो बीच का कर दें, वह छह महीने की कह रहे हैं, आप साल भर की कह रहे हैं तो आप मंत्री जी नौ महीने में कर दें, कम से कम इस कार्यकाल में यह काम हो जाएगा.

श्री दुर्गालाल विजय-- अध्यक्ष महोदय,इस कार्यकाल में तो करना ही चाहिए एक साल बाद करने का क्या अर्थ.पिछले समय भी आपने एक साल का कहा था.

श्री उमाशंकर गुप्ता-- अध्यक्ष महोदय, छह महीने के पहले ही करवा देंगे.

अध्यक्ष महोदय-- मंत्री जी, दूसरी बात यह है कि यह समस्या जहाँ-जहाँ चकबन्दी हुई है वहाँ सब जगह है. हमारे जिले में भी यह समस्या है और रिकार्ड दुरुस्त नहीं हो रहा है. अभी जो रोड निकल रही है तो कंपनसेशन दूसरे के नाम जमा होगा तो यह समस्या सब जगह है मैं तो आपको स्पेसीफिक बता रहा हूं. कृपा करके आप इसको सारे प्रदेश में एक अभियान के रूप में लें.

श्री उमाशंकर गुप्ता-- अध्यक्ष महोदय, इसको हम करेंगे और प्रदेश में जगह-जगह यह काम चल भी रहा है लेकिन कई जगह तकलीफ है.

श्री दुर्गालाल विजय-- धन्यवाद मंत्री जी.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने भी इसी में ध्यानाकर्षण लगाया था.

अध्यक्ष महोदय-- अब उन्होंने कहा है सब जगह के लिए.

 

 

 

 

 

 

 

12.21 बजे

प्रतिवेदनों की प्रस्तुति एवं स्वीकृति.

 

 

 

याचिका समिति के अट्ठावनवें, उनसठवें एवं साठवें प्रतिवेदनों की प्रस्तुति.

श्री इन्दर सिंह परमार, सदस्य-- अध्यक्ष महोदय, मैं, याचिका समिति का याचिकाओं से संबंधित अट्ठावनवाँ, उनसठवाँ एवं साठवाँ प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूँ.

 

 

 

12.22 बजे

याचिकाओं की प्रस्तुति.

अध्यक्ष महोदय-- आज की कार्य सूची में सम्मिलित सभी याचिकाएँ प्रस्तुत की हुई मानी जाएँगी.

12.23 बजे

वक्तव्य.

दिनाँक 28 मार्च, 2017 को पूछे गए अतारांकित प्रश्न संख्या 176 (क्रमांक 7543) के उत्तर भाग (क) एवं (घ) में संशोधन संबंधी.

अध्यक्ष महोदय-- अब डॉ.गौरीशंकर शेजवार, वन मंत्री, दिनाँक 28 मार्च, 2017 को पूछे गए अतारांकित प्रश्न संख्या 176 (क्रमांक 7543) के उत्तर भाग (क) एवं (घ) में संशोधन करने के संबंध में वक्तव्य देंगे.

वन मंत्री (डॉ.गौरीशंकर शेजवार)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, दिनाँक 28.3.2017 की प्रश्नोत्तर सूची के पृष्ठ क्रमांक 288 में मुद्रित अतारांकित प्रश्न संख्या 176 (क्रमांक 7543) में, मैं निम्नानुसार संशोधन करना चाहता हूँ--

प्रश्नोत्तर सूची में मुद्रित उत्तर के भाग "" एवं "" के स्थान पर कृपया निम्नानुसार संशोधित उत्तर पढ़ा जावे--

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.25 बजे

 

 

 

 

 

 

12.26 बजे

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.27 बजे

9. वर्ष 2018-2019 की अनुदानों की मांगों पर मतदान (क्रमश:)

 

(1) मांग संख्या - 20 लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी

 

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री (सुश्री कुसुम सिंह महदेले)--अध्यक्ष महोदय, मैं, राज्यपाल महोदय की सिफारिश के अनुसार प्रस्ताव करती हूँ कि 31 मार्च, 2019 को समाप्त होने वाले वर्ष में राज्य की संचित निधि में से प्रस्तावित व्यय के निमित्त राज्यपाल महोदय को--

अनुदान संख्या - 20 लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के लिए दो हजार पांच सौ

अट्ठानबे करोड़, तीन लाख सत्तर हजार रुपए

तक की राशि दी जाए.

अध्यक्ष महोदय-- प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ.

अब, इस मांग पर कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत होंगे. कटौती प्रस्तावों की सूची पृथकत: वितरित की जा चुकी है. प्रस्तावक सदस्य का नाम पुकारे जाने पर जो माननीय सदस्य हाथ उठाकर कटौती प्रस्ताव प्रस्तु किए जाने हेतु सहमति देंगे उनके ही कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत हुए माने जायेंगे.

मांग संख्या - 20 लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी

श्री आरिफ अकील 2

श्री नीलेश अवस्थी 6

श्री मधु भगत 11

श्री रामनिवास रावत 12

उपस्थित सदस्यों के कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत हुए.

अब, मांग और कटौती प्रस्तावों पर एक साथ चर्चा होगी.

 

 

श्री जयवर्द्धन सिंह (राघोगढ़)--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 20, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की अनुदान की मांगों पर कटौती प्रस्ताव का समर्थन करता हूँ.

माननीय अध्यक्ष महोदय, वर्तमान में मध्यप्रदेश में पेयजल की जो स्थिति है, हर जिले में पानी का संकट है. पानी से स्त्रोतों का अतिदोहन हुआ है जिसके कारण हर जगह भू जल का स्तर बहुत नीचे चला गया है. चाहे वह गांव में हैण्डपंप या ट्यूबवेल की बात हो या फिर शहरी क्षेत्र में भी कुछ जगह 2-3 दिन में एक बार पानी आता है और कई शहरों में हफ्ते में एक बार पानी आता है. जिसके कारण मध्यप्रदेश के आम नागरिकों के भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है. मैं मानता हूँ कि विभाग की उपेक्षा और गलतियों से यह स्थिति पैदा हुई है. मैं सदन का ध्यान इस बात की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ कि वर्तमान में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग पर चर्चा हो रही है और इस विभाग से संबंधित बहुत कम अधिकारी आज सदन की अधिकारी दीर्घा में मौजूद हैं. इस पर भी माननीय मंत्री महोदया को विशेष ध्यान देना चाहिए. यह गंभीर बात है. पूरे वर्ष के बजट पर चर्चा हो रही है. विभाग से बहुत कम अधिकारी यहां पर उपस्थित हैं. अध्यक्ष महोदय आप भी इस बात को नोट करें.

अध्यक्ष महोदय--इतनी लंबी चर्चा इस पर नहीं होती है. मंत्री जी बैठी हैं.

श्री रामनिवास रावत--मंत्री जी सक्षम हैं पूरे प्रदेश को पानी पिला रही हैं.

वन मंत्री (डॉ. गौरीशंकर शेजवार)--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी प्रार्थना है यह कभी परम्परा नहीं रही है कि हम अधिकारी दीर्घा की चर्चा करें. मैं माननीय सदस्य से आपत्ति नहीं कर रहा हूँ. मैं तो अध्यक्ष महोदय से कह रहा हूँ कि हम अप्रत्यक्ष रुप से उनसे क्यों बात करें. जब मंत्री और माननीय सदस्य यहां मौजूद हैं तो जो कुछ कहना है इनसे ही कहें. अब यह विभाग की व्यवस्था है. मंत्री हमारी इतनी योग्य हैं, स्वयं लिख रही हैं, उन्हें दुनिया का ज्ञान है वे आपका जवाब देंगी.

श्री जयवर्द्धन सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग राज्य सरकार का ऐसा पहला विभाग है जो वेंटिलेटर पर आ चुका है. पिछले दिनों नीति आयोग के सदस्य रमेशचन्द्र जी ने मध्यप्रदेश का दौरा किया था. उन्होंने इस बात का उल्लेख किया था कि मध्यप्रदेश में 61 प्रतिशत आबादी के घरों में पेयजल की व्यवस्था नहीं पहुंच पा रही है. यह बहुत गंभीर विषय है. 21 प्रतिशत घरों में आज भी पेयजल की व्यवस्था नहीं है. यह बात नीति आयोग ने उठायी है. यह संख्या सबसे अधिक मध्यप्रदेश में है. जबकि गुजरात में 95 प्रतिशत घरों में पेयजल की उपलब्धता है. छत्तीसगढ़ में भी 50 प्रतिशत से अधिक घरों में पेयजल की उपलब्धता है. मध्यप्रदेश में इतनी खराब स्थिति क्यों है इस पर मंत्री महोदया जब अपना भाषण दें तो उसमें इसका उल्लेख करें.

अध्यक्ष महोदय, इस बार बजट में ग्रामीण जल आपूर्ति के लिए लगभग 1051 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है. मैं मद क्रमांक-1201, 1202 एवं 1203 का उल्लेख करना चाहूंगा. जिनमें विदेशी सहायता के माध्यम से कुल 450 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है. ग्रामीण समूह में जल प्रदाय योजना हेतु. मैं मंत्री महोदया से निवेदन करुंगा कि वे अपने भाषण में उल्लेख करें कि जो विदेशी मद से पैसा मिल रहा है यह किन-किन योजनाओं के लिए उपयोग किया जाएगा. यह अच्छी बात है कि बाहर से पैसा मिल रहा है. कौन-कौन सी बड़ी परियोजनाएं जिनके माध्यम से जल स्तर बेहतर हो सके जिसके माध्यम से पानी की उपलब्धता और बेहतर हो सके. वे कौन-कौन सी योजनाएं हैं उनके बारे में आप जरुर उल्लेख करना. जिस प्रकार से इस बार लगभग 1000 करोड़ रुपए ग्रामीण जल के लिए और पूंजीगत व्यय 2000 करोड़ रुपए दिया गया है. लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का जो वार्षिक प्रतिवेदन है उसमें पिछले 3 साल में कितनी राशि विभाग को आवंटित हुई, कितनी राशि का उपयोग हुआ उसके बारे में मैं सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ. वर्ष 2014-2015 में कुल 1470 करोड़ रुपए की राशि आवंटित हुई थी जिसमें से 325 करोड़ रुपए व्यय नहीं हो पाया. वर्ष 2015-2016 में 1160 करोड़ रुपए की राशि आवंटित हुई थी जिसमें से 375 करोड़ रुपए के आवंटन का व्‍यय नहीं हो पाया था. वर्ष 2016-2017 में 2000 करोड़ रुपए में से सिर्फ 473 करोड़ रुपए ही खर्च हो पाए. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसका मतलब है कि विभाग तीन साल में कुल जितनी राशि नहीं खर्च कर पाया वह लगभग 2000 करोड़ रुपए तक है. इसीलिए आज यह स्थिति है कि इतना सारा पैसा पी.एच.ई. के लिए आवंटित किया जा रहा है लेकिन उसमें से भी पिछले तीन, चार सालों में लगभग 2 हजार करोड़ रुपए बर्बाद हो गए हैं. इसी प्रकार से राष्‍ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम में हर साल जो आवंटन है वह कम होता गया. ऐसा क्‍यों हुआ? जबकि केन्‍द्र से हमारी मांग होनी चाहिए कि हर साल केन्‍द्र के माध्‍यम से आवंटन में वृद्धि हो. राष्‍ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम में वर्ष 2014-2015 में 540 करोड़ रुपए दिये गये थे. वर्ष 2015-2016 में राशि 500 से 365 करोड़ हो जाती है और वर्ष 2016-2017 में उससे कम 300 करोड़ रुपए दिया गया. इस राशि से, इस मद से भी लगभग 200 करोड़ रुपए ऐसे हैं जो विभाग खर्च नहीं कर पाया है. मैं माननीय मंत्री महोदया से विशेष रूप से निवेदन करूंगा कि इस पर भी विभाग केन्‍द्र के साथ आपत्ति दर्ज करे कि इसमें और राशि विभाग को क्‍यों नहीं दी गई. हम इसमें केन्‍द्र के माध्‍यम से मांग करें कि इसमें भी प्रदेश को और राशि दी जाए क्‍योंकि वर्तमान में 18 जिलों में सूखा घोषित हुआ है. 138 तहसीलें ऐसी हैं जहां पर सूखा घोषित हुआ है. साथ में ऐसे अन्‍य जिलों में भी जहां पर सूखा घोषित नहीं हुआ है वहां पर भी वर्तमान में भारी जल संकट है. मेरा विभाग से विनम्र आग्रह है कि पूरी राशि खर्च हो और ठीक से खर्च हो. नियमानुसार प्रतिव्‍यक्ति पेयजल की उपलब्‍धता 55 लीटर होनी चाहिए. रिपोर्ट में इस बात का उल्‍लेख है कि आज भी लगभग 20 हजार ऐसी बसाहटें हैं जहां पर पर्याप्‍त पेयजल 55 लीटर प्रति हाऊस होल्‍ड आज तक नहीं मिल रहा है. एक और जो बहुत बड़ी समस्‍या मध्‍यप्रदेश में  है वह पानी में अधिक फ्लोराइड कन्‍टेन्‍ट की है और यह समस्‍या अधिकतर आदिवासी बस्तियों में है. वर्ष 2016-2017 में ऐसी लगभग 100 बसाहटें थीं जहां पर फ्लोराइड की समस्‍या थी जिसके कारण यह पानी काफी हानिकारक रहता है. आश्‍चर्य की बात यह है कि जो शासकीय प्रतिवेदन इस साल का दिया गया है उसमें इन बसाहटों की संख्‍या बढ़ गई है. अब लगभग 170 ऐसी बसाहटें हैं जहां पर आज भी फ्लोराइड कन्‍टेन्‍ट पानी में अधिक है. यह सब ऐसे बिंदु हैं जो शासकीय प्रतिवेदन में शामिल हैं. मेरा माननीय मंत्री महोदया से निवेदन है कि हम एक ऐसी योजना चलाएं जिसके माध्‍यम से पूरे मध्‍यप्रदेश में पेयजल फ्लोराइड से मुक्‍त हो क्‍योंकि यह एक बड़ा मुद्दा है जिसके कारण जो हमारे आदिवासी भाई बंधु हैं उनको इससे काफी सहायता मिलेगी.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मानता हूं कि पी.एच.ई. विभाग में सबसे बड़ी समस्‍या अगर कोई है और जो पूरे संकट की जड़ है वह एक नियम है जिसके बारे में प्रतिवेदन में भी उल्‍लेख किया गया है. उसमें यह लिखा गया है कि ग्रामीण क्षेत्र में जो नलजल योजनाएं हैं उनका संचालन और उनका संधारण का पूरा दायित्‍व ग्राम पंचायतों को है. मैं मानता हूं कि यह बहुत गलत नियम है क्‍योंकि वर्तमान में जो स्थिति ग्राम पंचायतों की है. ग्राम पंचायतों के पास पर्याप्‍त साधन नहीं हैं जिनके माध्‍यम से वह खराब नलजल योजना को ठीक कर सकें, हैण्‍डपम्‍प को ठीक कर सकें. कल जब ग्रामीण विकास विभाग की चर्चा हो रही थी उस समय भी उसके बारे में चर्चा हुई थी. इसमें भी मैं माननीय मंत्री महोदया से निवेदन करूंगा कि पी.एच.ई. विभाग के जो कर्मचारी हैं उनकी पर्याप्‍त संख्‍या में हर तहसील में उपस्थिति नहीं है और अगर पंचायतों का काम सौंपा जाता है अभी जो काम सौंपा गया है पंचायतों के पास भी पर्याप्‍त ऐसे इंजीनियर नहीं हैं जिनके माध्‍यम से पेयजल व्‍यवस्‍था ठीक हो सके और इसी कारण जब भी प्रश्‍न आते हैं नलजल योजनाओं के बारे में और जब भी विधायकों के द्वारा यह पूछा जाता है कि वर्तमान में तहसील में, ब्‍लॉक में या विधानसभा में जो चालू हैं ऐसी कितनी नलजल योजनाएं हैं तो विभाग से उत्‍तर आता है कि 100 में से 90 चालू हैं जबकि वास्‍‍तविकता यह होती है कि 100 में से 90 बंद होती हैं और मुश्किल से पांच या दस चालू होती हैं. यह इसीलिए हो रहा है कि वर्तमान में संचालन का पूरा काम पंचायतों को दिया गया है. जबकि मैं मानता हूं कि पूरी नलजल योजना की देखरेख, उसका संचालन का काम पी.एच.ई. विभाग को खुद करना चाहिए. क्‍योंकि उनके पास विशेषज्ञता है, उनके पास ऐसे इंजीनियर्स हैं जो यह काम कर सकते हैं. मैं मंत्री महोदया से निवेदन करूंगा कि इस पर विभाग विशेष ध्‍यान दे. पिछले चार पांच सालों में भ्रष्‍टाचार के कुछ ऐसे बड़े मुद्दे सामने आए हैं उन पर भी माननीय मंत्री महोदया को विशेष ध्‍यान देना चाहिए. शिवपुरी में एक मुद्दा आया था जहां पर ऑनलाईन टेंडर जिसका कम से कम दस दिन का समय होना चाहिए वह 25 मिनट बाद ही क्‍लोज़ हो गया था. इसका उल्‍लेख सी.ए.जी. रिपोर्ट में हुआ है. कुछ साल पहले अनूपपुर में मोटर और पाईप का एक बहुत बड़ा घोटाला हुआ था. जिसमें पी.एच.ई. विभाग के कुछ इंजीनियर और कुछ कर्मचारी भी सस्‍पेंड हुए थे और मेरा आरोप है कि इस प्रकार का घोटाला अन्‍य जिलों में हो रहा है, अन्‍य ब्‍लॉक में हो रहा है. जहां पर जो सबडिवीजन ऑफिसर है या फिर जो पी.एच.ई. का इंजीनियर है उनकी पाईप और मोटरों के सप्‍लायरों के साथ मिलीभगत है. उनके रिश्‍तेदार की दुकानें हैं जहां से टेंडर होता है और वह बहुत कमाते हैं. मेरा माननीय मंत्री महोदया से विशेष आग्रह है कि जिलों में कौन-कौन सी कं‍पनियां हैं जो पाईप सप्‍लाई कर रही हैं. कौन-कौन सी कंपनियां हैं जिनके द्वारा मोटर की सप्‍लाई हो रही है उन पर एक बार फिर पूरा सर्वे हो उनकी निगरानी हो. हर जिले में ऐसे लोग हैं जो इसमें अनाप-शनाप कमीशन कमा रहे हैं. मेरा ऐसा मानना है कि इस पर भी ध्‍यान दिया जाना चाहिए. 

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे दो सुझाव हैं जिन पर मैं माननीय मंत्री महोदया का ध्‍यानाकर्षित करना चाहता हूं. सबसे पहले जल स्‍तर को और ऊपर करने के लिए हमें बहुत विशेष ध्‍यान देना चाहिए. ऐसे बहुत सारे जिले हैं, बहुत सारी तहसील हैं, बहुत सारे गांव हैं जो पानी के स्‍त्रोत के पास बसे हैं लेकिन वहां भी पानी का संकट आता है. वहां पर जहां पर कोई ऐसा बड़ा डेम हो, बड़ा तालाब हो, बड़ी नदी हो तो उसके द्वारा हम पानी कैसे लिफ्ट कर सकते हैं उसके द्वारा कैसे बेहतर पेयजल व्‍यवस्‍था हो सकती है उसके बारे में माननीय मंत्री महोदया कुछ विचार करें. कुछ ऐसी परियोजनाएं इसमें शामिल हों जिसके द्वारा बडे़ डेमों के माध्‍यम से, बड़े तालाब के माध्‍यम से, नदियों के माध्‍यम से पानी लिफ्ट करके पेयजल की व्‍यवस्‍था ग्रामीण क्षेत्र में मिल पाए उस पर विशेष ध्‍यान दिया जाए. साथ में मैं मानता हूं कि सिर्फ अधिक हैण्‍डपम्‍प बोर करने से, ट्यूबवेल बोर करने से समस्‍या का हल नहीं होगा. हमको साथ में इस बात पर ध्‍यान देना चाहिए कि वॉटर शेड के माध्‍यम से हम जल स्‍तर को और बेहतर कैसे कर सकते हैं इसके लिए एक अंडरग्राउंड स्‍टडी हो कि एक्‍वाफोर्स कहां-कहां पर हैं, ऐसी केविटीज़ कहां पर हैं जिसमें बारिश के समय पानी वापस डायवर्ट हो सके. अगर हम ऐसी स्‍टडीज़ करेंगे तो उसके माध्‍यम से विभाग के द्वारा हम पहचान कर पाएंगे कि कहां-कहां पर पानी का जल स्‍तर बेहतर हो रहा है. और कहां-कहां पर सक्‍सेसफुल बोर हो सकता है क्‍योंकि इस साल लगभग जनवरी, फरवरी में ही पानी का स्‍तर बहुत नीचे चला गया है. इसीलिए इस बार हर गांव में पानी का संकट है, हर गांव में कहीं न कहीं ट्यूबवेल फेल हो चुकी है, हैण्‍डपम्‍प खराब हो चुका है और अगले तीन महीने भी विशेषकर मार्च तो आधा खत्‍म हो ही गया है लेकिन अप्रैल, मई और जून में भी पानी का संकट और बहुत गंभीर होने वाला है. जिस पर मैं माननीय मंत्री महोदया से आग्रह करूंगा कि वह उनके भाषण में हमको ऐसे सुझाव दें जिसके द्वारा दीर्घावधि के लिए ऐसे सुझाव मिले जिसके माध्‍यम से हमारे पूरे मध्‍यप्रदेश में जल स्‍तर बेहतर हो. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का मौका दिया इसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

अध्‍यक्ष महोदय- श्री हेमंत विजय खण्‍डेलवाल. श्री के.के. श्रीवास्‍तव.

श्री के.के. श्रीवास्‍तव (टीकमगढ़)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मांग संख्‍या 20 में लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग द्वारा प्रस्‍तुत मांगों का समर्थन करता हूं. ग्रामीण क्षेत्रों में हैण्‍डपंप और नल-जल योजनाओं के माध्‍यम से पेयजल उपलब्‍ध करवाया जा रहा है. हम सभी जानते हैं कि जल स्‍तर निरंतर अवर्षा के कारण जमीन के अंदर नीचे खिसकता चला जा रहा है. लगभग 3 मीटर, इसी वर्ष भू-जल नीचे चला गया है इसलिए अब भू-जल पर हमें अपनी निर्भरता कम करनी पड़ेगी और सतही जल का प्रबंधन करने की संरचनायें ज्‍यादा से ज्‍यादा निर्मित करनी पड़ेंगी. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग इस दिशा में व्‍यापक स्‍तर पर काम कर रहा है. मध्‍यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की इसी सरकार ने यह चिंता की कि कैसे सतही जल का उपयोग अधिक से अधिक संरचनायें खड़ी करके हम कर सकते हैं. लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग की तरफ से एक जल-निगम बनाया गया है. इस जल-निगम के माध्‍यम से समूह नल-जल योजनाओं की एक श्रृंखला पूरे प्रदेश में खड़ी की गई हैं. इन श्रृखंलाओं में चाहे सीहोर जिले की मरदानपुर, रायसेन जिले की उदयपुरा, देवास जिले की पुंजापुरा, बालाघाट जिले की भटेरा एवं पीपरझिरी, सिवनी जिले की झुरकी, बड़वानी जिले की तलुनखुर्द, छिंदवाड़ा जिले की मोहखेड़, ये सारी समूह जल प्रदाय योजनायें हैं और इन्‍हें जल प्रदाय योजना के तहत प्रारंभ कर लिया गया है. इसके अतिरिक्‍त राजगढ़ जिले की कुण्‍डलिया, मोहनपुरा, पहाड़गढ़, पन्‍ना जिले की पवई, सतना जिले की सतना बाणसागर समूह जल प्रदाय परियोजनायें. इन सभी परियोजनाओं की संरचनायें भू-जल से हटकर सतही जल खड़ी की गई हैं और ये नल-जल योजनायें तैयार की गई हैं. इसी तरह से शहडोल जिले की गोहपारू, ब्‍यौहारी, उमरिया जिले की बल्‍लोढ़ समूह जल प्रदाय योजनाओं का भी शीघ्र काम प्रारंभ किया जा रहा है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम इसके लिए गौरवान्‍वित हैं. टीकमगढ़ जिले में निवाड़ी की समूह जल प्रदाय योजना का कार्य अंतिम चरण में है. निकट भविष्‍य में इस योजना से हम जल प्रदाय करने की स्थिति में हैं और टीकमगढ़ जिले में ही बानसुजारा, बांध परियोजना, 526 गांव, जिसमें 4 विधान सभा क्षेत्रों को सम्मिलित किया गया हैं. 974.54 करोड़ रुपये की स्‍वीकृति इस योजना हेतु मिली है लेकिन जल संसाधन विभाग द्वारा पानी की इतनी उपलब्‍धता नहीं होने के कारण हमें इसमें दो चरण करने पड़े. दो फेस में हम इसका कार्य करेंगे. जिसमें से 201 गांवों के लिए 270 करोड़ रुपये की योजना बनाई गई है, जो 10 एम.सी.एम. पानी पर है. धसान नदी से बानसुजारा का कार्य प्रारंभ होगा. वित्‍तीय प्रबंधन के संयोजन करने की बात मंत्री महोदया ने मेरे ध्‍यानाकर्षण में उस समय कही थी और मैं फिर मंत्री महोदया से आग्रह करता हूं कि बुंदेलखण्‍ड सूखा प्रभावित है. यह एक सूखा जिला है और बुंदेलखण्‍ड के 201 गांवों में पीने के पानी संकट न हो पाये. आपकी व्‍यवस्‍थायें ठीक चल रही हैं. नल-जल योजनायें हों या छोटे-छोटे हैण्‍डपंपों का बसाहटों में संचालन और संधारण करने का कार्य, बेहतर स्‍तर पर चल रहा है लेकिन 55 लीटर पानी, गांव में प्रति व्‍यक्ति हम कैसे उपलब्‍ध करवा पायें इसकी दिशा में हमें इस योजना को शीघ्र संचालित करने के लिए बजट के आवंटन की आवश्‍यकता है इसलिए इसे भी बजट में शामिल कर लिया जाये. 526 गांवों में से 201 गांवों के बाद शेष गांवों के लिए इसी धसान नदी पर नीचे गणेशपुरा बैराज बनाने की आवश्‍यकता है. इस हेतु मध्‍यप्रदेश शासन के अधिकारी-कर्मचारी वर्क-आउट कर रहे हैं. मुझे विश्‍वास है कि शीघ्र ही हम गणेशपुरा का कार्य भी प्रारंभ कर लेंगे.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ग्रामीण क्षेत्रों में नल-जल योजनाओं के माध्‍यम से घरेलू कनेक्‍शन का प्रावधान एक बड़ी ही विचित्र बात है. पहले इसकी कोई कल्‍पना भी नहीं थी. प्रतिपक्षी दल अभी इस बारे में बात कर रहे थे. आरोप लगाना बहुत आसान है. यदि ये लोग एक पार्ट भी पूरा कर देते, यदि ये सतही जल संधारित कर संरचनायें खड़ी कर देते तो हम केवल नल-जल योजनाओं के माध्‍यम से लोगों को पानी पिला सकते थे लेकिन इन्‍होंने तो कुछ किया ही नहीं. सारा काम हमें ही करना पड़ रहा है. हमारी सरकार को करना पड़ रहा है. आज ये लोग बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं और खुद कुछ किया नहीं.

श्री सुखेन्‍द्र सिंह- बरसात करवा दो भाई.

श्री के.के. श्रीवास्‍तव- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं बताना चाहूंगा कि हमारी सरकार के लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग द्वारा पेयजल की गुणवत्‍ता सुनिश्‍चित करने हेतु ग्राम पंचायतों को ''फील्‍ड टेस्‍ट कि‍ट'' उपलब्‍ध करवा रही है.

 

12.50 बजे {उपाध्‍यक्ष महोदय (डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुए.}

 

श्री के.के. श्रीवास्‍तव- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पंचायत प्रतिनिधियों को फील्‍ड टेस्‍ट कि‍ट के माध्‍यम से कैसे पानी की गुणवत्‍ता की जांच की जाये, इस हेतु प्रशिक्षित भी किया गया है. मुख्‍यमंत्री ग्राम नल-जल योजना से मेरे क्षेत्र की जनता को घरेलू कनेक्‍शन के माध्‍यम से शुद्ध पेयजल उपलब्‍ध होगा. इसके लिए मैं हमारे प्रदेश की मंत्री महोदया एवं उनकी टीम को धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि उन्‍होंने एक बहुत बड़ी योजना बनाकर ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल उपलब्‍ध करवाने की व्‍यवस्‍था बनाई है. छोटी-छोटी बसाहटों में लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग द्वारा नल-जल योजनाओं एवं हैण्‍डपंप संधारण की व्‍यवस्‍था बनाई गई है, उसके लिए बजट की आवश्‍यकता तो पड़ेगी ही और बजट कम न पड़े इसलिए मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदया से निवेदन करना चाहूंगा कि इसके लिए भी बजट की उपलब्‍धता सुनिश्चित कर दी जाये.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, टीकमगढ़ जिले में वर्ष 2017-18 में अभी तक 203 बसाहटों में नलकूपों का खनन कर हैण्‍डपंप स्‍थापित किए गए हैं. जिससे इन बसाहटों में ग्रामीणों को 55 लीटर प्रति व्‍यक्ति मापदण्‍ड के हिसाब से पेयजल की आपूर्ति करने की दिशा में लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग कार्य कर रहा है. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं अपने टीकमगढ़ जिले की बात कर रहा हूं जहां हमने ग्रामीण विकास विभाग के माध्‍यम से भी नल-जल योजनाओं को ठीक किया और लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग के सहयोग से हैण्‍डपंपों का संधारण, नई योजनायें- मिशन भागीरथी चलाकर हमने टीकमगढ़ जिले में 107 पानी की टंकियां, अपनी विधायक निधि के माध्‍यम से बनवाई हैं. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि केवल काम करने की आवश्‍यकता है. यदि दो किलोमीटर दूर भी कहीं पानी मिलता है तो हमारे लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग की टीम, हमारी जनपद पंचायत की टीम एवं सारे लोगों ने मिलकर उस दिशा में काम किया और बसाहटों में, गांवों में चौक-चौराहों में पानी की व्‍यवस्‍था की गई है. मैं मानता हूं टीकमगढ़ जिले में हम घर-घर पानी नहीं पहुंचा पाये लेकिन हमने गांवों के चौक-चौराहों में पानी को पहुंचाने का प्रयास किया है. लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग की टीम हमें निरंतर सहयोग करती है. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से निवेदन है कि समूह नल-जल की जो भी योजनायें बन रही हैं, उनके लिए बजट की कोई कमी न रहे. सिंचाई के लिए हम साधन उपलब्‍ध करवायें लेकिन सिंचाई करने वाले लोग कैसे रहेंगे, वे कैसे जीवित रहेंगे, यह पहले देखने की आवश्‍यकता है इसलिए उनके लिए पेयजल की व्‍यवस्‍था हो. मैं कहना चाहता हूं कि सिंचाई की संरचनायें भी खड़ी हों और साथ ही पीने के पानी की उपलब्‍धता के लिए भी बजट में कोई कमी न आये. इस पर भी मंत्री महोदया को काम करने की आवश्‍यकता है एवं बजट में प्रावधान करने की आवश्‍यकता है. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग जिस द्रुतगति से वर्तमान समय में काम कर रहा है, उसके लिए मैं विभाग की पूरी टीम और मंत्री महोदया को धन्‍यवाद देते हुए अपनी बात समाप्‍त करना चाहूंगा. आपने मुझे समय दिया, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

उपाध्‍यक्ष महोदय- श्री रामपाल सिंह. श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को.

श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को (पुष्‍पराजगढ़)- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वर्तमान में पूरे प्रदेश के विभिन्‍न तहसील, ब्‍लॉकों में सूखे की स्थिति निर्मित हुई है और कम वर्षा के कारण पेयजल के संकट की स्थिति बनी है. खासकर जंगल, पहाड़ों में निवासरत ऐसे जनजाति समुदाय के लोग, जो मजरे-टोलों में 5-10-20 घरों के समूह बनाकर निवास करते हैं उन बसाहटों में सबसे ज्‍यादा पेयजल की समस्‍या है. मेरे द्वारा कई बार इस विषय पर इस सदन के माध्‍यम से विभाग और मंत्री महोदया का ध्‍यान आकर्षित किया गया है और पिछले बजट सत्र में भी मेरे द्वारा अनुरोध किया गया था कि आप कृपा करके उन जनजाति समुदाय के लोगों के लिए कुछ विचार करें जो वर्षा के पानी पर निर्भर हैं, जल स्‍त्रोतों पर निर्भर हैं एवं सतही जल में कुंए, बावडि़यों से निस्‍तार करते हैं, वर्षा कम होने के कारण ऐसे स्‍त्रोत धीरे-धीरे सूखते जा रहे हैं. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा मंत्री महोदया से पुन: निवेदन है कि आप कृपा करके जहां 10-15-20 घरों की बसाहटें हैं उन बसाहटों में पेयजल के लिए कम से कम एक-एक हैण्‍डपंप का खनन करवा दें और वहां क्षेत्र में कई बार अधिकारियों ने भ्रमण भी किया है, इसके प्रस्‍ताव भी बनाये गये. परन्‍तु पता नहीं वह प्रस्‍ताव कहां जाते हैं और उन प्रस्‍तावों को कब स्‍वीकृ‍ति प्रदान की जायेगी ? यह कार्यालयों में लंबित पड़े रहते हैं. मैं चाहता हूं कि जहां पर पहाड़ी क्षेत्र हैं, उन क्षेत्रों में खासकर के इस विषय पर सरकार को ध्‍यान देना चाहिये. वर्तमान में जो वर्षा की स्थिति है, वह बहुत कम है और जल स्‍तर दिन-प्रतिदिन गिरता जा रहा है. इसलिये मैं चाहता हूं कि आपको यह जो संधारण का कार्य है, जिसको आपने ठेके पद्धति से देकर रखा है. वहां ठेकेदार को मोबाईल लगाते रहिये, विभाग को मोबाईल लगाते रहिये तो विभाग बोलता है कि काम ठेकेदार को दे दिया है और ठेकेदार का पता नहीं है. मैं यह चाहता हूं कि आप विभाग के मंत्री हैं और आपके विभाग का पूरा अमला कार्यरत है, जिस तरह से पहले विभाग के जो मैकेनिक हैं, कर्मचारी हैं, जिस काम के लिये आपने उनको पदस्‍थ किया है, उनको काम दिया है. कृपा करके आपने पूरे प्रदेश में जो ठेकेदारी पद्धति अपनाकर, नल संधारण का काम ठे‍के पर देकर रखा है, उसको परिवर्तित करिये. क्‍योंकि आपने जिन कामों के लिये विभाग में कर्मचारियों को पदस्‍थ किया है, वह काम उन कर्मचारियों से कराने का निर्देश दें.

उपाध्‍यक्ष महोदय, दूसरा पिछले वि‍त्‍तीय वर्ष में 51 गांव की किरगी जल-प्रदाय योजना हेतु आपने लगभग 60 करोड़ रूपये प्रदान किये थे, इस‍के लिये मैं आपको धन्‍यवाद भी देता हूं. लेकिन हमारी 81 गांव की जल-प्रदाय योजना, दमेहड़ी और मुख्‍यमंत्री महोदय जी की घोषणा भी है, अभी उप चुनाव में घोषणा भी करके आये थे कि यह 81 गांवों की दमेहड़ी सामूहिक जल-प्रदाय योजना को स्‍वीकृति प्रदान कर दी जायेगी और इसको गांव के लोग आशा की निगाहों से देख रहे हैं. वैसे भी मुख्‍यमंत्री जी घोषणावीर हैं. यह तो सभी लोग जानते हैं, लेकिन मैं सदन के माध्‍यम से आपको ध्‍यान आकृष्‍ट करना चाहता हूं कि चूंकि यह मेरे क्षेत्र का मामला है और आपने जनता के बीच में वादा किया है, इसलिये मैं संबंधित विभाग के मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि इस बार जब आप अपना उदबोधन करें तो 81 गांवों की दमेहड़ी सामूहिक जल-प्रदाय योजना का उल्‍लेख जरूरे करें और उसको स्‍वीकृति प्रदान करने का कष्‍ट करें.

उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं यह भी निवेदन करना चाहता हूं कि मेरे क्षेत्र में आज भी 135 ऐसे मजरे-टोलों की बसाहटें हैं, जहां पर हैंड पंपों की व्‍यवस्‍था नहीं की गयी है. इसके संबंध में हमने विभागीय कर्मचारियों से सर्वे भी कराया है और विभाग को प्रस्‍ताव भी भेजा है, परन्‍तु आज दिनांक तक उसका खनन न होने से लोगों में काफी रोष व्‍याप्‍त है.हम चाहते हैं वहां भी आप तत्‍काल खनन कराकर, लोगों को सुविधा प्रदान करने का कष्‍ट करेंगे. हमारे यहां जो विभिन्‍न जल-प्रदाय योजना स्‍थापित हैं, उसमें कई ऐसे गांव हैं, ग्राम पंचायतें हैं, जहां पर नलजल योजना चलायी जा रही हैं, लेकिन उनके संधारण के अभाव में आपने उनको ग्राम पंचायत में समर्पित किया है. ग्राम पंचायत के पास अपनी कोई आय नहीं है, उनके आय के स्‍त्रोत न होने के कारण उन नलजल योजनाओं को चलाने वह असफल हैं, जिसके कारण बहुत सारी नलजल योजनाएं बंद पड़ी हुई हैं. हम चाहते हैं कि आप तत्‍काल कोई ऐसी व्‍यवस्‍था करें कि जो नलजल योजनाएं बंद पड़ी हैं, वह प्रारंभ हों. गर्मी के दिन प्रारंभ हो गये हैं, जिससे कि गांव के लोगों को शुद्ध पीने के पानी से निजात मिल सके. अभी बहुत सारी शिकायतें भी प्राप्‍त हुई हैं. लोग तरह-तरह की बातें भी कर रहे हैं कि आज पीएचई विभाग में जिस तरह से भ्रष्‍टाचार व्‍याप्‍त है,उस पर भी आप लगाम कसें, वैसे भी आप तेज-तर्रार मंत्री हैं, आप विभाग को कसकर रखिये. मेरे अनुपपूर जिले में अभी आदरणीय जयवर्द्धन सिंह जी बोल रहे थे कि (XXX)

उपाध्‍यक्ष महोदय:- इसे विलोपित करें.

श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को:- एक हमारा ट्रायबल का कार्यपालन यंत्री है, उसके ऊपर दबाव बनाकर सारे काम कराये जा रहे हैं. उस पर भी आप निगाह रखें कि जिले में जितने भी कार्यपालन यंत्री हैं, वह काम कर रहे हैं, जो खासकर के ट्रायबल के लोग हैं वह काम करें. वह अपनी इच्‍छानुसार शासन की योजनाओं का लाभ नहीं दे पा रहे हैं. उन पर दबाव बनाकर के, शासन-प्रशासन की धौंस देकर के वहां स्‍थानीय लोग जो आपसे जुड़े हैं, वहां के ठेकेदार बने हुए हैं और वहां पर बहुत ज्‍यादा घपले हुए हैं. मैं चाहता हूं कि आप इसकी जांच करायें और जब भी जांच समिति बनायें तो जांच समिति में भी हम लोगों को भी शामिल करें. हम सही तथ्‍य सामने लाने का प्रयास करेंगे ताकि जिसके हित के लिये आपने योजना बनायी है और यहां से राशि भेजी जा रही है, उस राशि का वास्‍तव में सदुपयोग होना चाहिये.

उपाध्‍यक्ष महोदय, पूरे अनुपपूर से कई कर्मचारियों को यहां मंत्रालय में अटैच कर के रखा है. हमारे यहां एक डोले नाम का एक उपयंत्री है, वह साल भर से यहां पर पदस्‍थ है. पता नहीं यहां पर कौन सा प्रोजेक्‍ट तैयार कर रहे हैं. अनुपपूर जो यहां से 750 किलोमीटर दूर है, वहां से यहां पर पदस्‍थ कर दिया है. हमारा आदिवासी क्षेत्र है, वहां पर कर्मचारियों की कमी है, ऐसे दुर्गम क्षेत्रों में जो लोग नहीं जाना चाहते हैं, ऐसे क्षेत्रों के कर्मचारियों को आपने मुख्‍यालय, भोपाल में संलग्‍न करके रखा है. सामान्‍य प्रशासन विभाग के आदेश हैं और आपने ही आदेश जारी किये कि संलग्‍नीकरण समाप्‍त किया जाता है,फिर भी आपने उनको यहीं पर संलग्‍न करके रखा है. मैं चाहता हूं कि ऐसे कर्मचारी जो विभिन्‍न कार्यों में संलग्‍न हैं, जो क्षेत्र में काम न करके किसी न किसी रूप में यहां पर संलग्‍न हैं, उनको कार्यमुक्‍त करें. गर्मी के दिन आ रहे हैं, वह अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर काम करें, जिससे कि लोगों को वहां पर लाभ मिले, ऐसी मेरी आपसे अपेक्षा है. इन्‍हीं शब्‍दों के साथ मैं एक बार पुन: विनम्रतापूर्वक निवेदन करता हूं कि मेरे 81 गांवों की दमेहड़ी जल प्रदाय योजन, जो तीन वर्ष से लंबित है, वह आपकी अनुमति के बिना स्‍वीकृत होना संभव नहीं है. माननीय मुख्‍यमंत्री जी की घोषणा है, इसलिये उसे आज ही स्‍वीकृत करने की कृपा करने की करेंगे.आपने मुझे बोलने का समय दिया, इसके लिये धन्‍यवाद.

 

1.03 बजे अध्‍यक्षीय घोषणा

भोजनावकाश न होना

उपाध्‍यक्ष महोदय:- आज भोजन अवकाश नहीं होगा. भोजन की व्‍यवस्‍था सदन की लॉबी में की गयी है. माननीय सदस्‍यों से अनुरोध है कि सुविधानुसार भोजन ग्रहण करने का कष्‍ट करेंगे.

 

 

 

1.04 बजे वर्ष 2018-19 की अनुदान मांगों पर मतदान (क्रमश:)

श्री हेमन्‍त विजय खण्‍डेलवाल(बैतूल):- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मांग संख्‍या 20 के समर्थन में अपनी बात कहना चाहता हूं. मैं आपके माध्‍यम से प्रदेश के मुखिया शिवराज जी और पीएचई मंत्री जी को बधाई देना चाहूंगा कि आपने प्रदेश के 1 लाख, 28 हजार ग्रामीण बसाहटों में से 84 प्रतिशत बसाहटों को पानी उपलब्‍ध कराने का कार्य किया है. आपको इस बात के लिये भी बधाई देना चाहूंगा कि सोलर पंप आ‍धारित, क्‍योंकि हर जगह बिजली नहीं पहुंच पाती है,छोटी-छोटी बसाहटों में आपने लगभग डेढ़ हजार योजनाओं को मंजूरी देने का काम किया है. मुख्‍यमंत्री ग्रामीण पेयजल योजना में आपने लगभग 255 गांव की योजनाओं को बजट में शामिल किया है. इसके साथ ही साथ आने वाले भविष्‍य की योजनाएं, जिसमें सामूहिक नलजल योजनाएं, जिसमें कई गांवों को मिलाकर करोड़ों रूपये की योजनाएं, ऐसी आपकी 27 योजनाएं प्रस्‍तावित हैं. मेरे जिले की भी पारसडो आधारित योजना है उसके लिये भी मैं आपका धन्‍यवाद करता हूं.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं सरकार को इस बात के लिये धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि पेयजल जैसी समस्‍या के लिये आपने पीएचई 2 हजार 986 करोड़ रूपये का बजट आवंटित किया है. ऐसी नलजल योजनाएं जो पीएचई विभाग के द्वारा संचालित हैं, उनके स्‍त्रोत सूख गये हैं. मैं पीएचई विभाग को धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि इन सब योजनाओं में स्‍त्रोत के लिये आपने भरपूर राशि देने का काम कर रहे हैं.मेरा आपसे अनुरोध है कि ऐसी योजनाओं के लिये आप भरपूर राशि दे रहे हैं, लेकिन ऐसी योजनाएं जहां पर, आपकी योजनाएं नहीं हैं और वहां पर भी पानी का संकट है, यदि आप वहां पर भी ध्‍यान देंगे तो उचित होगा. मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहता हूँ कि पीएचई और ऊर्जा विभाग मिलकर, हमारे गांव की जो नल-जल योजनाएं हैं, उन्‍हें बिजली के बिल के बोझ के कारण कामर्शियल बिल देना पड़ता है, वे नहीं चल पातीं और इसलिए हम किसानों को सब्सिडी देते हैं तो पेयजल को भी हम सस्‍ते में बिजली दें, पीएचई के माध्‍यम से ऐसा अनुरोध सरकार से किया जाये, जिससे हमारी नल-जल योजनाएं बिजली के बिल के कारण बन्‍द न हो पाएं.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से पीएचई विभाग से अनुरोध है कि हम अगर चर्चा करें तो मध्‍यप्रदेश ही नहीं, पूरे देश की करें. जमीन में जो पानी का स्‍तर है, वह लगातार कम हो रहा है. इसका कारण यह है कि पहले एक व्‍यक्ति को 20 से 25 लीटर पानी लगता था और आज आधुनिकता के कारण 100 से 150 लीटर एक व्‍यक्ति को पानी लग रहा है और भूजल स्‍तर लगातार कम होता जा रहा है. हम ट्यूबवेल खुदवाने का शॉर्ट टर्म काम तो कर लेते हैं, हमें लांग टर्म काम करने होंगे. अगर हम दीर्घकालीन उपाय नहीं करेंगे तो आने वाले समय में हम पेयजल समस्‍या से निपटारा नहीं पा पाएंगे. मेरा आपके माध्‍यम से मुख्‍यमंत्री जी और पीएचई मंत्री जी से अनुरोध है कि पहले तो पीएचई विभाग और पंचायत विभाग मिलकर, वाटर रिचार्जिंग के लिए एक अलग नीति बनाएं और उसके लिए एक अलग कोष पंचायतों को दें. मेरा आपसे अनुरोध है कि श्री राजेन्‍द्र सिंह जैसे कई एक्‍सपर्टस् हैं, जो जिलों में जाकर कार्यशालाएं लगा सकते हैं, जिससे वाटर रिचार्जिंग एक आंदोलन बन जाये. जैसे इस देश में सफाई आंदोलन बन गया. वाटर रिचार्जिंग एक आंदोलन बन जाये तभी हम इस समस्‍या से निपट पाएंगे.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, महाराष्‍ट्र का एक जिला सिरपुर है. वहां पर मध्‍यप्रदेश के जिलों से आधा पानी गिरता है लेकिन वहां उन्‍होंने एक पैटर्न को अपनाया है. उन्‍होंने नदी-नालों को 6-6 मीटर गहरा किया और उसे 20 मीटर तक चौड़ा किया तथा श्रृंखलाबद्ध 6-7 डेम बनाए. उसमें जन सहयोग भी लिया, उसे पूरे देश में सिरपुर पैटर्न कहते हैं. हाइड्रोलॉजिस्‍ट श्री सुरेश खानापुरकर हैं, जिन्‍हें हमने बैतूल इन्‍वाइट किया था और इस पद्धति पर हम अपने बैतूल जिले में माइनिंग निधि और बाकी निधि से मिलकर काम करने जा रहे हैं. आज सिरपुर में मई और जून में भी सारे नदी-नाले बहते हैं, जो आज से 5-10 वर्ष पहले सूख जाया करते थे, हम उस पद्धति को भी अपनाएं. पीएचई में सभी विभागों का समन्‍वय बनाएं. अब मैं आपके माध्‍यम से आखिरी में अपने जिले की बात करना चाहूँगा. मेरे जिले में 22 नल-जल योजनाएं और 664 हैंडपम्‍प बन्‍द हो गए हैं, लगातार इनकी स्थिति बिगड़ती जा रही है क्‍योंकि इस वर्ष पानी कम गिरा है, उसके कारण लगातार भूजल स्‍तर कम होता जा रहा है तो हमारे जिले में 500 ट्यूबवेल की अनुमति दें, 6 से 8 इंच के ट्यूबवेल के लिए अतिरिक्‍त राशि उपलब्‍ध कराएं. अगर यह राशि हमारे जिले को उपलब्‍ध हो जाती है तो हम इस समस्‍या से त्‍वरित निजात पा लेंगे. मैं अन्‍त में, आपके माध्‍यम से हमारी पीएचई मंत्री जी एवं माननीय मुख्‍यमंत्री जी से यह अनुरोध करूँगा कि मैंने जो सुझाव दिए हैं कि हम एक्‍सपर्ट की मदद लें, दीर्घकालीन उपायों पर विचार करें और पीने के पानी के लिए पूरे मध्‍यप्रदेश की समस्‍या को हल कर पाएंगे बल्कि पूरे देश में एक उदाहरण बनकर भी सामने आएंगे. मुझे अपनी बात को बोलने के लिए समय देने के लिए धन्‍यवाद देते हुए अपनी बात समाप्‍त करने की इजाजत चाहूँगा. धन्‍यवाद.

उपाध्‍यक्ष महोदय - धन्‍यवाद. श्रीमती चन्‍दा सुरेन्‍द्र सिंह गौर. श्री रजनीश हरवंश सिंह जी, प्रारंभ करें.

श्री रजनीश हरवंश सिंह (केवलारी) - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग एक महत्‍वपूर्ण विभाग है. जल ही जीवन है और जल है तो कल है. मैं आपके माध्‍यम से आदरणीय मंत्री महोदया का ध्‍यान आकर्षित कराना चाहता हूँ कि मेरे यहां पर अपार जल की संभावना है और समूह नल-जल योजना भी माननीय मंत्री जी के द्वारा स्‍वीकृत की गई है. मैं अपनी ओर से एवं अपने क्षेत्र की जनता की ओर से उनका धन्‍यवाद भी ज्ञापित करता हूँ कि आपने मेरे क्षेत्र में जहां फ्लोराइड था, वहां पर तीन-तीन समूह नल-जल योजनाएं स्‍वीकृत कीं.

उपाध्‍यक्ष महोदय, सरकार और माननीय मंत्री जी तो यहां से योजनाओं को स्‍वीकृत कर देते हैं पर जो योजना 2016 में स्‍वीकृत होती है, उसका लगभग एक महीने पूर्व उसमें सिर्फ पाईप आने का काम चालू हुआ है. इतनी महत्‍वपूर्ण योजना है, जिनसे की कहीं 86 गांव, तो कहीं 189 गांव, तो कहीं पर 86 गांव, यदि कुल गांव मिलाएं तो 250-300 गांवों के लोगों को दो वक्‍त के पीने का पानी और निस्‍तार के पानी की यह बहुमूल्‍य व्‍यवस्‍था पीएचई विभाग के द्वारा मेरे क्षेत्र में की गई है पर उसका धरातल पर, गांव पर अभी उपयोग नहीं हो रहा है. मेरी आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से प्रार्थना है कि इस पर जरूर अधिकारियों को बुलाकर, इस योजना के कार्य में तेजी से गति प्रदान करने की कृपा करें. मेरी महत्‍वपूर्ण बात यह है कि मेरी विधानसभा क्षेत्र का मुख्‍यालय केवलारी है और 35 वर्ष पुरानी नल-जल योजना जर्जर हालत में हैं, पाईप विस्‍तारीकरण का काम है, इसमें पाईपों की आवश्‍यकता है, बोर की आवश्‍यकता है एवं उसमें अतिरिक्‍त दो-दो बोर करके मोटर सप्‍लाई की व्‍यवस्‍था करने की जरूरत है. जहां पर आबादी 3,000 हजार थी, आज वहां पर आबादी 35 वर्ष में 15,000 से 20,000 की हो गई है पर वही पुरानी नल-जल योजना कुछ ही वार्डों तक सीमित होकर रह गई है तो केवलारी के लिए पाईप लाईनें जो टूटी-फूटी हैं, जो बोर नहीं हुए हैं, उसके लिए अतिरिक्‍त व्‍यवस्‍था करने की कृपा करें. यह मेरा माननीय मंत्री महोदया से निवेदन है कि इसके लिए मैंने समय-समय पर जिले के लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग में अधिकारियों से चर्चा की थी और उन्‍होंने इस नगर की नवीन जल आवर्धन योजना का 2.82 करोड़ रुपये का एस्‍टीमेट विभाग को विगत वर्ष प्रेषित किया था. इसकी अभी स्‍वीकृति नहीं हुई है. माननीय मंत्री महोदया से मेरी प्रार्थना है कि इस योजना को स्‍वीकृत करें क्‍योंकि 30,000 आबादी का मामला है.

लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी मंत्री (सुश्री कुसुम सिंह महदेले) - नगर पंचायत, नगरपालिका की व्‍यवस्‍था पीएचई विभाग नहीं करता है.

श्री रजनीश हरवंश सिंह - वह ग्राम पंचायत है. मैंने इसके लिए नगर परिषद् बनाने के लिए निवेदन मुख्‍यमंत्री जी से किया है.

उपाध्‍यक्ष महोदय - अभी वह ग्राम पंचायत ही है.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले - केवलारी यदि पंचायत है तो हम करवा देंगे.

श्री रजनीश हरवंश सिंह - उपाध्‍यक्ष महोदय, 35 वर्ष पुरानी नल-जल योजना है. दूसरा मेरा निवेदन है कि दिनांक 23 फरवरी, 2010 को छपारा ग्राम पंचायत में 2.75 करोड़ रुपये की राशि स्‍वीकृत की गई, 8 वर्ष हो गए हैं. इस शासन की 2.75 करोड़ रुपये की राशि शासन के ही पास जमा है, आज दिनांक तक छपारा की जल आवर्धन योजना चालू नहीं हुई है. जब भी मैंने प्रश्‍न लगाया कि दिनांक 2 जुलाई, 2014 को प्रश्‍न क्रमांक 955 के माध्‍यम से मैंने माननीय मंत्री महोदय से जानकारी मांगी तो उसमें यही कहा गया कि यह काम तकनीकी कारण से चालू हो रहा है, स्‍थान परिवर्तित करना पड़ रहा है. इस कारण से इस योजना में विलम्‍ब हो रहा है और इस योजना में दिनांक 2 जुलाई, 2014 तक 80.00 लाख रुपये शासन का खर्च हो चुका था. आज उस योजना की यह स्थिति है कि पाईप लाईन विस्‍तारीकरण का काम हो गया है पर मंत्री महोदया आज भी जल आवर्धन योजना 2.75 करोड़ रुपये की चालू नहीं हुई है और आज सदन में वह कहावत चरितार्थ हो रही है कि 'भरे तालाब में घेंघा प्‍यासा'.

उपाध्‍यक्ष महोदय, एशिया का सबसे बड़ा मिट्टी का बांध उसी छपारा में बना हुआ है, 2.5 लाख एकड़ जमीन में मां बेन गंगा के पानी को रोककर, उससे किसानों की जमीन सिंचित हो रही है पर उस नगर के ग्रामवासियों को क्‍या मिला ? हम दो वक्‍त के पीने का पानी भी 8 वर्ष में मुहैया नहीं करा पाए. माननीय मंत्री महोदया, आपने तो स्‍वीकृत कर दिया, इसमें आपका बहुत बड़प्‍पन है. जब भी मैं बुआ को देखता हूं, तब मुझे माननीय मंत्री महोदया की पुरानी साथी और हम सबकी बुआ आदरणीय जमुना देवी जी की याद आ जाती है. पहले एक बुआ इस तरफ भी थी और एक बुआ उस तरफ भी हैं. माननीय मंत्री महोदया बहुत सीनियर हैं, मुझे उनसे डर लगता हैं क्‍योंकि वह मेरे पिताजी को भी डांट देती थीं. हम माननीय मंत्री महोदया का बहुत आदर करते हैं और इसी कारण बुआ जी का प्रेम भी आ जाने से यह योजनायें स्‍वीकृत हो गई हैं. मैं माननीय मंत्री महोदया का ताउम्र, जीवन पर्यंत आभारी रहूंगा कि क्‍योंकि उन्‍होंने मेरे क्षेत्र में तीन-तीन समूह नल-जल योजना लगभग 250 गांव के लोगों को दो वक्‍त के पीने का पानी मुहैया कराने का काम किया है. यह काम उन्‍होंने मेरे निवेदन पर किया है, इसके लिये बहुत बहुत धन्‍यवाद.

श्री बहादुर सिंह चौहान - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इनके क्षेत्र में तीन-तीन योजनाएं पास हो गई हैं जबकि यह कांग्रेस के विधायक हैं और हमारे क्षेत्र में अन्‍य विधायकों के क्षेत्रों में यह योजनायें पास ही नहीं हुई हैं, इसके बावजूद यह तारीफ के बजाय बुराई भी कर रहे हैं. इनको माननीय मंत्री महोदया को धन्‍यवाद देना चाहिये.

श्री रजनीश हरवंश सिंह - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, श्री बहादुर भाई मुझे इंगित कर रहे हैं कि मैं बोलते-बोलते कुछ और भी करूं परंतु मैं ऐसा नहीं करने वाला हूं. मैं यह कहना चाहूंगा पहले नगरपालिका में, नगर परिषद में, शहर में नल की टोंटियां खुला करती थीं. यह वहीं कांग्रेस है, जिसने शहर की टोंटियों को सुरक्षित रखकर गांव के लोगों के घरों में टोंटी लगाने का काम किया है, टंकी बनाने का काम किया है, पाईपलाइन डालने का काम किया है, नहीं तो गांव के लोग पंचायत के सार्वजनिक कुएं से पानी लेकर आने का काम करते थे वर्ष 1993 में गांव-गांव टंकी का निर्माण, बड़ी बड़ी ऊंची-ऊंची टंकियों को बनाने का काम कांग्रेस पार्टी ने किया है और अब बुआ जी उस काम को समूह नल-जल योजना में गति प्रदान करने का काम कर रही हैं. वह उसी रोड पर गाड़ी को और तेज दौड़ाने का काम कर रही है, जिस रोड को बनाने का काम कांग्रेस ने किया था. इस प्रकार कांग्रेस ने धरातल पर काम किया था (मेजों की थपथपाहट). अब मैं विषय पर आना चाहता हूं.

उपाध्‍यक्ष महोदय - अब आप समाप्‍त करें.

श्री रजनीश हरवंश सिंह - मैं आधा मिनट में समाप्‍त कर दूंगा.

उपाध्‍यक्ष महोदय - आप किसी की बात का जवाब न दें, आप सिर्फ अपनी बात रखें.

श्री जसवंत सिंह हाड़ा - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, क्‍या आप इन्‍होंने पहले जो बोला है, उसे विलोपित करेंगे ? क्‍योंकि यह अपने विषय पर अब आ रहे हैं.

उपाध्‍यक्ष महोदय - उसे विलोपित नहीं करेंगे क्‍योंकि उन्‍होंने कुछ असंसदीय नहीं कहा है. श्री रजनीश हरवंश सिंह - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 58 नल-जल योजनायें पूर्व में स्‍वीकृत हैं परंतु माननीय मंत्री महोदया वह अभी तक चालू नहीं हुई हैं वह बंद पड़ी हुई हैं. मेरा निवेदन है कि 58 नल-जल योजना एक विधानसभा में बहुत होती है, जब शासन का पैसा स्‍वीकृत है, तो वह पैसा बेकार में रखा हुआ है, इस पर भी जरूर अधिकारियों से जांच पड़ताल करवायें. आज भी पांच टंकियों का निर्माण अधूरा है. मैंने दिनांक-16.12.2015 को शीतकालीन सत्र में इस संबंध में प्रश्‍न उठाया था ,तब उसका जवाब यह आया था कि हम जल्‍दी ही इसे पूर्ण करवा देंगे परंतु आज तक वह पांच टंकिया और 58 नल-जल योजना का काम अधूरा है. मैं यह कहना चाहता हूं कि वह कार्य बहुत ज्‍यादा अधूरा नहीं है बल्कि कहीं पर सिर्फ पाईपलाइन विस्‍तारीकरण का काम बाकी है, कहीं पर टंकियों पर सीढि़यां बनाने का काम हैं, कहीं पर कनेक्‍टविटी करना हैं, कहीं बोर में मोटर डालना है. मैं अंतिम बात यह कहना चाहता हूं कि इसके संधारण का काम पंचायत की जगह पीएचई विभाग करे क्‍योंकि काम पीएचई विभाग कर रहा है और आहते में ताले खोलने का काम पंचायतें कर रही है. इसलिए इसको पीएचई विभाग के अंतर्गत रखा जाये. ब्‍लॉक स्‍तर पर पीएचई का आफिस होता था, सब इंजीनियर होता था, उनका टेक्‍नीशियन होता था, उनकी गाड़ी रहती थी, पाईप एक्‍सट्रा रहते थे इसलिए वह तुरंत बोर और मोटर का काम करते थे. मेरा निवेदन यह है कि यह व्‍यवस्‍था पुन: लागू की जाये. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने बोलने का समय दिया इसके लिये बहुत-बहुत धन्‍यवाद और माननीय मंत्री महोदया आपका भी बहुत-बहुत धन्‍यवाद. (मेजों की थपथपाहट)

उपाध्‍यक्ष महोदय - चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी जी आप बोलें, वह नहीं हैं श्री बहादुर सिंह चौहान जी आप बोलें.

श्री बहादुर सिंह चौहान (महिदपुर) - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मांग संख्‍या का समर्थन करते हुए लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग के संबंध में अपने विचार रखना चाहता हूं. मध्‍यप्रदेश में इस वर्ष अधिकांश तहसीलों में सूखे की स्थिति बनी हुई है, इस‍ दृष्टि से भी इस विभाग पर महती जवाबदारी आ गई है. विभाग द्वारा जिला कलेक्‍टरों को निर्देशित किया जा चुका है कि जो भी नल-जल योजना जिले में बनी हुई है, उसके संधारण के लिये, उसको चालू करने के लिये यदि पाईप की कमी है या मोटर की कमी है या बोर नहीं है, तो इसके लिये जिला स्‍तर पर एक कमेटी है जिसको बीस लाख रूपये खर्च करने का अधिकार शासन द्वारा दिया गया है, उसके तहत कार्य हो रहा है.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह विभाग जब से बना है, तब से बोरिंग कर रहा है. पहले छोटे बोर होते थे, फिर बड़े बोर होने लगे. इनके विभाग में दो प्रकार के बोर होते हैं एक डीटीच 6 इंची का बोर होता है और दूसरा काम्‍बीनेशन बोर 8 इंची का होता है. मैं माननीय मंत्री जी को एक सुझाव देना चाहता हूं कि यदि 100 डीटीएच बोर लगे हुए हैं और 100 काम्‍बीनेशन बोर लगे हुए हैं तो उसका आप परीक्षण करा लें. इस संबंध में मेरा अपना दावा इस सदन के अंदर यह है कि जब इनका परीक्षण करायेंगे तो पायेंगे कि इनमें से मात्र पांच डीटीएच बोर चल रहे हैं और काम्‍बीनेशन 90 प्रतिशत बोर चल रहे हैं क्‍योंकि डीटीएच बोर में मोटरे फंस जाती हैं और पाईप अंदर रह जाता है. लेकिन फिर भी विभाग डीटीएच बोर इसलिए करवाता है क्‍योंकि इसकी लागत कम है और यह आधे पैसे में ही हो जाता है और काम्‍बीनेशन बोर डबल खर्चे में होता है. लेकिन काम्‍बीनेशन बोर में एक बार स्‍त्रोत का पानी मिल जाता है तो उस स्‍त्रोत से गांव की पानी की समस्‍या हमेशा के लिये हल हो जाती है. मेरा आपसे आग्रह और निवेदन है कि आप 25 बोर की जगह 15 बोर ही लगायें, लेकिन जब भी बोर लगायें तो काम्‍बीनेशन बोर ही लगायें, इस पर विभाग जरूर विचार करे. मैं एमएस पाईप और जीआई पाईप के बारे में कहना चाहता हूं कि ठेकेदार लोग कई बार जितने पाईप उस बोर के अंदर डालना चाहिए उतने पाईप नहीं डालते हैं, उस कारण वह बोर कोलेप्‍स हो जाता है और बोर हमेशा के लिये खराब हो जाता है. मेरा आग्रह है कि इस पर भी यदि विभाग की पकड़ बनेगी तो बोर हमेशा के लिये गांव वालों के लिये काम में आयेगा. इस प्रकार एक स्‍त्रोत ड्रिलिंग करके हो गया और दूसरा जल स्‍तर पर जहां पर नदी बह रही है, जहां पर जल संसाधन विभाग टैंक बना हुआ है, वह योजना वहां पर बनाई जा सकती है. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी को एक बहुत ही महत्‍वपूर्ण सुझाव देना चाहता हूं. यह बात सत्‍य है कि जमीनी स्‍तर पर इस विभाग के पास इतना अमला नहीं है, यह स्‍वीकार करना चाहिए. लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि पानी हर व्‍यक्ति को सुबह लगता है और हमेशा पानी की आवश्‍यकता रहती है. अधिकांश नल-जल योजनायें बनने के बाद सब ग्राम पंचायतों को हैंडओवर कर दी गई है. मैं एक महत्‍वपूर्ण सुझाव देना चाहता हूं कि लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग और पंचायत ग्रामीण विकास विभाग की संयुक्‍त बैठक होना चाहिए और यह छोटी-छोटी योजनायें जिसमें एक -एक गांव की हजार और पंद्रह सौ की नल जल योजनायें जो चल रही हैं, इनका संधारण और इनको बनाने और स्‍वीकृत करने का कार्य भी ग्राम पंचायत को दे देना चाहिए ताकि उसका रख रखाव अच्‍छे से हो सके. लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग मात्र मध्‍यप्रदेश के अंदर उस स्‍थान पर  कार्य करे जहां पर नदी बह रही है, जहां पर टैंक बना हुआ है. यदि यह विभाग 16 गांव, 20 गांव, 25 गांव, 40 गांव की बड़ी से बड़ी करोड़ों रूपये की योजना बनाकर उसका संधारण करेगा तो यह विभाग उसमें बहुत ही सफल होगा यह मेरा व्‍यक्तिगत सुझाव है. इसके साथ ही मैं यह भी कहना चाहता हूं कि इनके विभाग का एक जल निगम बना हुआ है, जिसमें 32 योजनायें स्‍वीकृत की गई हैं और सात बनकर चालू हो गई है और बाकी पर कार्य प्रगति पर है. पूरे मध्‍यप्रदेश में 32 योजनायें जल निगम के द्वारा बनाई गई हैं. मैं यह कह रहा हूं कि इनको 320 योजनायें बनाना चाहिए और आने वाले 25-30 वर्षों की जरूरतों के मान से जितना पानी उपलब्‍ध हो उतनी योजनाएं बनना चाहिए. अकसर ऐसा होता है कि16 गांव की योजना बन गई, फिर डिमांड आ गई, फिर पानी कम पड़ गया. पहले आपने आठ इंची पाईप डाला था, अब 16 इंची पाईप डालिये, लेकिन देखने में यह आ रहा है कि आने वाले तीस वर्षों में कितनी जनसंख्‍या यहां पर होने वाली है और कितने गांव और जुड़ सकते हैं, वह जोड़ना चाहिए.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जल निगम के द्वारा बहुत अच्‍छा कार्य प्रदेश स्‍तर पर किया जा रहा है, वह लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग से ही जुड़ा हुआ है. मैं एक जानकारी और देना चाहता हूं कि जहां बोर खनन होता है वहां कहीं हार्ड स्‍टेटा होता है, कहीं लूज स्‍टेटा होता है और जो प्रायवेट डीलर होते हैं वह टेण्‍डर तो डाल देते हैं, लेकिन बाद में उस बोर को छोड़कर चले जाते हैं और वह बोर कई दिनों तक नहीं होता नहीं है. लेकिन यह बात सत्‍य है कि जहां पर कहीं नदी या टैंक नहीं है वहां पर तो बोर खनन करना ही पड़ेगा, वहां की जनता को तो तत्‍काल नल जल योजना बनाकर पानी दिया जाना चाहिए. जैसे सिंहस्‍थ का मामला था, उज्‍जैन में सिंहस्‍थ में पीएचई विभाग की बहुत अहम भूमिका रही है, यह मैंने अपनी आंखों से देखा है. इनके विभाग की जो नवीन हाईपावर की मशीनें है, 11300 की जो मशीनें है वह 24 घंटे में दो-दो बोर कर देती हैं और मोटरें लगाकर सिंहस्‍थ में पानी उपलब्‍ध करवाया है. नर्मदा का पानी भी क्षिप्रा में आया था और स्‍नान करने के लिए नदी बहती भी रही, लेकिन सिंहस्‍थ का क्षेत्र बहुत बड़ा था, उसमें लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग द्वारा बहुत ही अच्‍छा कार्य किया गया है.

उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं एक और सुझाव यह देना चाहता हूं कि विभाग की जो मशीनें हैं वे बहुत पुरानी हो गई हैं और मेंटेनेंस पर उसमें राशि खर्च हो रही है. मेरा कहना है कि हर एक जिले में नवीन तकनीकी की मशीनें जो आई है त्रिचेंगगोडे से, साउथ तमिलनाडु, त्रिचि, नामक्‍कल, आत्‍तुर में पूरे भारत में बहुत ही अच्‍छी मशीन हैं वे लोग विदेशों में अपनी मशीनें भेजकर कार्य कर रहे हैं. मेरा सुझाव है कि वहां से टाइअप करके प्रत्‍येक 51 जिले में मॉडल के रूप में एक एक मशीन तो विभाग को खरीदकर इसी वर्ष देना चाहिए, क्‍योंकि यह सूखे का वर्ष है. एक इनका मेकेनिकल विभाग भी है, इस विभाग की जो गाड़ी ड्रिलिंग के लिए गांव में आती है वह सात दिन तक ड्रिलिंग करती रहती है, उसमें स्‍टाफ भी नहीं होता, डीजल भी नहीं होता और मशीन की केपेसिटी भी नहीं होती है. इसलिए मेरा आग्रह है कि लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग की मेकेनिकल ब्रांच को मजबूत करने के लिए इस मशीन को प्रत्‍येक जिला स्‍तर देना चाहिए. उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने बोलने का मौका दिया इसके लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद.

उपाध्‍यक्ष महोदय बहुत बहुत धन्‍यवाद बहादुर सिंह जी.

श्री यादवेन्‍द्र सिंह (नागौद) माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सतना जिले में पेयजल का संकट सबसे ज्‍यादा है और सतना जिला सूखे से प्रभावित है और सूखा घोषित है. वहां पर जनवरी से पेयजल की समस्‍या है.

श्री जसवंत सिंह हाड़ा - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सतना आपका गृह जिला है, यादवेन्‍द्र सिंह जी अच्‍छी बात बताने की बजाये सूखे की बात बता रहे हैं वह तो जहां जाते हैं वहां सूखा पड़ जाता है. मैं एक कमेटी में गया था वहां पानी था, लेकिन सूखा गया, ये तो अगस्‍त ऋषि से भी बड़े आदमी है. (..हंसी)

श्री यादवेन्‍द्र सिंह यह दैवीय प्रकाप है (..हंसी) सतना जिले में तीन माह से जनवरी से सूखा है. नगर पंचायत नागौद में कम से कम 300-400 टैंकर पानी परिवहन कर शहर के अंदर भेजा जाता है. रामपुर ब्‍लाक में जहां बाणसागर का पानी आ रहा है वहां की बात नहीं कर रहा हूं, लेकिन इसी तरह पूरे जिले में चाहे वह चित्रकूट हो, नागौद हो, चिरेगांव हो, जहां बरगी का पानी अभी तक 30 वर्षों से नहीं आया है. इस वजह से नाले नदियां सब सूख गए हैं. तीन महीने से राइजर पाइप नहीं है, न ही मोटर है, न ही जल का परिवहन हो रहा है. मेरी विधान सभा में लगभग 3000 हैण्‍डपम्‍प हैं जिनमें से लगभग 1000-1200 के ऊपर बंद हैं और 42 नलजल योजना है जिसमें से 15-20 नलजल योजना बंद है और उसमें भी पानी गहरे में चले जाने के कारण पम्‍प सूख गए हैं. उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करूंगा कि सतना जिले में हर ग्राम पंचायतों में एक एक बोर 500 फीट तक कराया जाए, तभी इस समस्‍या का हल हो सकता है. 84 गांव पहाड़ में मेरे परसोनिया क्षेत्र में भी इसी तरह का पेयजल संकट है. 5-6 किलोमीटर दूर पानी का उद्गम है, इसी तरह से पूरे क्षेत्र की हालत खराब है नागौद ब्‍लाक हो, चाहे वह डचेहरा ब्‍लाक हो. पानी के लिए राइजर पाइप और मोटरों की व्‍यवस्‍था की जाना जरूरी है. दो साल पहले सूखे की स्थिति में जो मोटर खराब हुई है वह मोटर दोबारा किसी काम के लायक नहीं बची. पिछली बार बहुत ही खराब मोटरें सप्‍लाई की गई थीं. इस बात का भी ध्‍यान रखा जाए कि अच्‍छी किस्‍म की मोटरें सप्‍लाई हों. जहां तक नागौद शहर का सवाल है तो हमारी माननीय मंत्री जी के यहां पन्‍ना में एक मशीन ऐसी है जो बालू में बोर कर लेती है. दीदी जी से निवेदन है कि पन्‍ना में जो बोरिंग मशीन है वह हमारी नागौद नगर पंचायत में एक दिन के लिए भेज दें, हम पैसा भी जमा करा देंगे, अगर तीन बोर हमारे यहां हो जाए, तो नागौद की काफी समस्‍या का हल हो जाएगा. पूरी रात 24 घंटे लोग पानी के लिए लाइन लगाए सड़क पर खड़े रहते हैं, इसलिए मेरा निवेदन है कि आप अपनी बोरिंग मशीन का पैसा जमा करवा ले जो भी कीमत हो. एक दिन के लिए पन्‍ना जिला से नागौद के लिए बोरिंग मशीन भेज दें तो हमारे शहर की समस्‍या का निदान हो जाएगा. हमारे संभाग में सिर्फ एक ही वह मशीन है उसको देने का कष्‍ट करें. राइजर पाइप और जहां पानी की व्‍यवस्‍था न हो तो वहां जल परिवहन कराने का अनुरोध है. अभी राइजर पाइप नहीं है, हम आपके एग्‍जीक्‍यूटिव इंजीनियर से कोई सामग्री के बारे में बात करते हैं तो वे कहते हैं कि हमारे पास कोई सामग्री नहीं है. यही आपसे अनुरोध है कि जितनी जल्‍दी हो सके पेयजल के संकट से निदान के लिए आवश्‍यकतानुसार व्‍यवस्‍था करें. उपाध्‍यक्ष जी आपने बोलने का समय दिया इसके लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद.

उपाध्‍यक्ष महोदय यादवेन्‍द्र जी आज आपने बहुत सधा हुआ भाषण दिया. बहुत अच्‍छा भाषण दिया.

श्री बहादुर सिंह चौहान उपाध्‍यक्ष जी, यादवेन्‍द्र जी दिल के साफ है, जो मन में आता है वही कहते हैं.

उपाध्‍यक्ष महोदय माननीय मंत्री जी, सतना जिले की मैं बात करना चाहता हूं, अभी आपने प्रति विकासखंड 20-20 या 25-25 पावर पम्‍पस भेजे हैं. यदि औसत हर गांव में एक पावर पम्‍प भेजा जाए तो ही कुछ समस्‍या का निदान होगा, पेयजल की स्थिति बहुत खराब है. मान लीजिए एक जनपद में 250 गांव हैं तो कम से कम 250-250 पावर पम्‍प एक-एक जनपद या ब्‍लाक में देना चाहिए.

डॉ. कैलाश जाटव उपाध्‍यक्ष जी, मैं आपको धन्‍यवाद देता हूं, पूरा सदन इस बात से सहमत है.

श्री यादवेन्‍द्र सिंह उपाध्‍यक्ष जी, हर गांव में एक गहरा बोर होना चाहिए.

लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी मंत्री (सुश्री कुसुम सिंह महदेले) माननीय उपाध्‍यक्ष जी, मैं भी आपको धन्‍यवाद देती हूं कि आपने स्‍वीकार किया कि हमने पम्‍प भेजे हैं, और आपने जो अपेक्षा की हैं उनको भी भेजेंगे.

श्री यादवेन्‍द्र सिंह उपाध्‍यक्ष जी, हर गांव में दो-दो पम्‍प चाहिए.

श्री रामलाल रौतेल (अनूपपुर) -- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, निश्चित रूप से हम सब इस बात से परिचित हैं कि मानव जीवन के लिये पानी कितना आवश्यक है और मध्यप्रदेश की सरकार ने बड़ी संवेदनशीलता के आधार पर अपने मापदंडों के आधार पर योजनाबद्ध तरीके से प्रत्येक गांव में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की दृष्टि से व्यवस्था सुनिश्चित की है. मैं इस मंच के माध्यम से माननीय मंत्री जी को धन्यवाद ज्ञापित करूंगा कि जिन्होंने लगातार, विशेषकर के मेरे विधानसभा क्षेत्र अनूपपुर में लगभग 42 नल जल योजनाओं की स्वीकृति प्रदान की है. उस 42 नल जल योजनाओं में से लगभग 25 ऐसी नल जल योजनायें हैं जो बिगड़ी हुई हैं. उसके अनेक कारण हैं, किसी का स्त्रोत सूख गया है, किसी की लाईन क्षतिग्रस्त हो गई है, किसी मे मोटर पंप खराब है, किसी ग्राम पंचायत ने उसकी राशि की अदायगी नहीं की है. इन पर गंभीरता से ध्यान देकर उन नल जल योजना को चालू कराने की आवश्यकता है.

माननीय उपाध्यक्ष महोदय, सूखा पड़ा है. मेरा विधानसभा क्षेत्र अनूपपुर पूर्णत: आदिवासी क्षेत्र है और वहां पानी का बहुत संकट है. हमने इस बारे में विभागीय अधिकारियों से अनुरोध किया, सरकार बहुत अच्छा काम कर रही है, सरकार ने एक छोटी सी विधानसभा में 42 नल जल योजनायें स्वीकृत की हैं यह बहुत बड़ी उपलब्धि है. लेकिन स्थानीय स्तर पर जो विभागीय अमला पदस्थ है कहीं न कहीं उस अमले के दोष होने के कारण किसानों को और आम आदमी को पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. मैं माननीय मंत्री जी के ध्यान में इस बात को लाना चाहता हूं कि मेरे विधानसभा क्षेत्र अनूपपुर में लगभग 3 ऐसे विभाग के सब इंजीनियर हैं जो कि विगत 15 वर्षो से अनूपपुर में पदस्थ हैं. मैंने अनेक बार विधानसभा में प्रश्न लगाये हैं. उसमें मंत्री जी ने इस बात को स्वीकार किया है कि जांच में सिद्ध पाये गये और सिद्धता के आधार पर उनको वहां से अलग कर दिया गया है लेकिन स्थिति यह है कि आज भी वह वहीं पर मौजूद हैं. प्रभावित यह लोग करते हैं और इनकी गलती का खामियाजा जनप्रतिनिधि भुगतते हैं. अगर हम किसी गांव में जाते हैं तो पानी न मिलने का मुद्दा उठाकर के गांव के लोग जनप्रतिनियों के ऊपर गुस्से का इजहार करते हैं. इसलिये मेरा मंत्री जी से व्यक्तिगत अनुरोध है कि ऐसे संबंधित अधिकारी जिनका सरकार ने दोष भी सिद्ध पाया है अगर वहां से हटाकर के किसी अच्छे कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी को वहां पर पदस्थ करें तो मुझे लगता है कि अच्छा होगा और बेहतर व्यवस्था बनेगी.

माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मेरे विधानसभा क्षेत्र विशेषकर के अनूपपुर जिले की पुष्पराजगढ़ विधानसभा क्षेत्र के हमारे भाई श्री फुन्देलाल सिंह मार्कों जी बैठे हुये हैं, इनका और मेरा पूरा क्षेत्र ग्रामीण आदिवासी क्षेत्र है, अनूपपुर में 177 नल जल योजनायें है जिसमें से लगभग 100 नल जल योजनायें बंद पड़ी हुई हैं. अगर हम इस संबंध में स्थानीय अधिकारियों से बैठक बुलाने की बात करते हैं, प्रभारी मंत्री जब बैठक लेते हैं तो विभागीय प्रतिवेदन आता है कि शत प्रतिशत नल जल योजनायें चालू हैं . अगर इनका भौतिक सत्यापन करेंगे तो मुश्किल से 60 या 70 नल जल योजनायें ही चालू हालत में मिलेगी. इसमें सरकार का कहीं कोई दोष नहीं है. जनप्रतिनिधियों का भी कहीं किसी प्रकार का कोई दोष नहीं है. इसमें अगर कोई दोषी है तो संबंधित अमला दोषी है जो क्रियान्वयन एजेंसी है वह जिम्मेदार है और उस अधिकारी की जिम्मेदारी का खामियाजा जनप्रतिनिधियो को भुगतना पड़ता है. इसलिये मैं मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूं, वैसे मैंने विधानसभा प्रश्न किया था उस विधानसभा के प्रश्न के संदर्भ मे 3 कमेटियां बनी, जांच में अधिकारी की सिद्धता को पाया गया लेकिन आज भी वह अधिकारी वहां पर मौजूद हैं. इसलिये मै मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूं कि शुद्ध पेयजल पहुंचाने की शासन की मंशा है, लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो, साफ पानी उपलब्ध हो, सरकार की जो इस संबंध में नीति है, जो मापदंड हैं उसके आधार पर अगर हम लोगों को पेयजल उपलब्ध करा सकें तो बेहतर होगा कि आप संबंधित अधिकारी को मेरी विधानसभा क्षेत्र विशेष से पृथक करने के आदेश जारी करेंगी.

माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मै आपके सुझाव से शत प्रतिशत सहमत हूं कि प्रत्येक गांव में अगर एक नल जल योजना और चालू कर दें तो बेहतर होगा. एक सुझाव मेरा यह भी है कि अगर हम नल जल योजना प्रत्येक गांव में संचालि