मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा दशम् सत्र

 

 

फरवरी-अप्रैल, 2016 सत्र

 

मंगलवार, दिनांक 15 मार्च, 2016

 

(25 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1937 )

 

 

[खण्ड- 10 ] [अंक- 15 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

मंगलवार, दिनांक 15 फरवरी, 2016

 

(25 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1937 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.04 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

 

नेवज/पार्वती नदी पर पुल निर्माण

1. ( *क्र. 5985 ) श्री इन्‍दर सिंह परमार : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) कालापीपल विधानसभा क्षेत्रांतर्गत लोक निर्माण विभाग सेतु संभाग द्वारा वर्ष 2011-12 से 2015-16 तक किन-किन नदियों पर पुल निर्माण की प्रशासकीय स्‍वीकृति प्राप्‍त हुई है? (ख) नेवज नदी पर ग्राम बोल्‍दा के पास एवं पार्वती नदी पर देहरी घाट के पास क्‍या पुल स्‍वीकृत किये गये हैं? यदि हाँ, तो क्‍या पुल निर्माण हेतु निविदा आमंत्रित की गई है? कार्यादेश किस एजेंसी को दिया गया है, कार्यादेश अनुसार कार्य पूर्ण करने की अवधि क्‍या है? कार्यवार जानकारी देवें।

लोक निर्माण मंत्री ( श्री सरताज सिंह ) : (क) एवं (ख) जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट अनुसार है।

परिशिष्ट - ''एक''

श्री इन्‍दर सिंह परमार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में जो जवाब दिया गया है उसके अनुसार बोल्‍दा का जो पुल है नेवज नदी पर, वह आज बन कर तैयार हो जाना चाहिए था लेकिन इसमें कारण बताया गया है कि एक किसान ने सहमति नहीं दी है इस कारण मुआवजे की प्रक्रिया नहीं हुई है, मैं माननीय मंत्री महोदय से पूछना चाहता हूँ कि वह एक किसान कौन है ? उसका नाम बताने की कृपा करें ? दूसरी बात उस किसान से सहमति से सहमति लेने के लिए क्‍या संबंधित विभाग के अधिकारियों ने कलेक्‍टर या एसडीएम से कोई बातचीत की सहमति प्राप्‍त करने के लिए? यदि विधायक से या जनप्रतिनिधि से विभाग के लोग बात नहीं करना चाहते हैं तो कम से कम प्रशासन से तो बात करके उस समस्‍या का निदान करना चाहिए था जो नहीं किया गया है.

श्री सरताज सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वर्ष 2013 में दिनांक 25.09.2013 को वर्क ऑर्डर इश्‍यू किया गया था और उस काम को दिनांक 15.03.2016 तक पूरा होना है. यह बात सही है कि भूमि विवाद के कारण थोड़ा सा विलंब हुआ लेकिन अब विवाद समाप्‍त हो गया है, बातचीत हो चुकी है, उसकी सहमति प्राप्‍त हो चुकी है, इसमें काम चल रहा है. 8 पिल्‍लर में से 7 बन चुके हैं और शेष भी पूरा हो जाएगा.

श्री इन्‍दर सिंह परमार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी जो जानकारी दे रहे हैं, मेरे ख्‍याल से विभाग ने इनको गलत जानकारी दी है, अभी मात्र 6 पिल्‍लर वहां बनकर तैयार हुए हैं, 3 अभी अधूरे हैं. रात को ही मैं वहां से होकर आया हूँ और मैं चाहता हूँ कि उस किसान का नाम नाम बताएं जिसने सहमति नहीं दी. यदि सहमति प्राप्‍त हो गई थी तो इसमें यह कारण क्‍यों बताया गया ?

श्री सरताज सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा मैंने बताया कि सहमति थोड़ी विलंब से प्राप्‍त हुई है लेकिन अब सहमति प्राप्‍त हो चुकी है. माननीय विधायक जी ने किसान का नाम तो पूछा नहीं इसलिए मुझे उसके नाम की जानकारी नहीं है.

श्री इन्‍दर सिंह परमार -- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने किसान का नाम पूछा था, अब मेरा माननीय मंत्री जी से यह कहना है कि वहां पर उसका जो ठेकेदार है, दो किसानों के नाम मेरे पास हैं, वह उनके पास गया है और कहा कि आप इस पर अपनी आपत्‍ति दर्ज करा दो कि हमको मुआवजा नहीं मिला है, वे किसान मेरे पास पूछने के लिए आए, जब जाकर मैंने विधान सभा में प्रश्‍न किया है. ये धंधा ठेकेदार और विभाग के लोग मिलकर के सब कामों को विलंब करने के लिए कर रहे हैं. माननीय मंत्री जी उनके खिलाफ क्‍या कार्यवाही करेंगे ?

श्री सरताज सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह कार्य 15.03.2016 तक पूरा होना था.

श्री इन्‍दर सिंह परमार -- माननीय मंत्री जी, आज का ही वह दिन है, आज ही 15.03.2016 है.

श्री सरताज सिंह -- हां-हां, आज का ही दिन है, अब कोई पीडब्‍ल्‍यूडी के काम में ऐसे थोड़ी होता है कि एक दिन आगे-पीछे नहीं हो पाते. थोड़ा सा समय लगेगा लेकिन काम पूरा हो जाएगा. विवाद हल हो चुका है यह मैं आपसे कह रहा हूँ.

श्री इन्‍दर सिंह परमार -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरी आपत्‍ति इस बात पर है कि वह ठेकदार जाकर किसानों को भड़काता है. पीडब्‍ल्‍यूडी विभाग के हर काम में ही ऐसा किया जा रहा है, पीडब्‍ल्‍यूडी विभाग के हर काम ऐसे ही प्रभावित हो रहे हैं. इसमें अधिकारी लोग लिप्‍त हैं जो जान-बूझकर ये करवाते हैं और लेट करवाते हैं, शासन के पैसे का दुरुपयोग होता है.

अध्‍यक्ष महोदय -- काम पूरा होने का आश्‍वासन दे दिया है. आप बैठ जाएं.

श्री सरताज सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या आपके कोई निर्देश हैं इस संबंध में ?

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं कोई निर्देश नहीं हैं, वह तो आपने कह दिया है काम कराएंगे.

श्री सरताज सिंह -- काम शुरू हो चुका है, काम जल्‍दी पूरा हो जाएगा.

श्री इन्‍दर सिंह परमार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सब जगह गड़बड़ हो रही है और माननीय मंत्री जी ठीक से प्रश्‍न का जवाब नहीं दे रहे हैं. मैं जवाब चाहता हूँ कि उसके खिलाफ कार्यवाही करेंगे क्‍या ?

अध्‍यक्ष महोदय -- बैठ जाएं, काम हो रहा है आपका.

श्री सरताज सिंह -- माननीय विधायक जी यह चाहें कि कौन सा किसान किस ठेकेदार के पास गया, या कौन सा ठेकेदार किसान के पास गया, यह सारा हिसाब-किताब तो मैं नहीं बता सकता.

श्री इन्‍दर सिंह परमार -- माननीय मंत्री जी, आपने जो लेट होने का कारण बताया वह गलत कारण बताया, मुझे आपत्‍ति इस पर है.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप बैठ जाएं. काम हो जाएगा आपका उसके बाद क्‍या चाहिए.

श्री इन्‍दर सिंह परमार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सारे जिले भर में ठेकेदारों ने षड्यंत्र करके सारे काम प्रभावित किए हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- परमार जी का नहीं लिखा जाएगा. श्री पुष्‍पेन्‍द्र नाथ पाठक, आप अपना प्रश्‍न करें.

श्री इन्‍दर सिंह परमार -- (XXX)

कौशल विकास केन्‍द्र के कर्मियों की वेतन वृद्धि

2. ( *क्र. 6312 ) श्री पुष्‍पेन्‍द्र नाथ पाठक : क्या तकनीकी शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या औद्योगिक प्रशिक्षण संस्‍थान से प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण प्राप्‍त करने के बाद सरकारी नौकरी प्राप्‍त कर सकते हैं और कौशल विकास केन्‍द्र के प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण उपरांत स्‍वयं का धंधा छोटा सा स्‍थापित कर सकते हैं? क्‍या दोनों का काम प्रशिक्षण देना है? (ख) प्रश्नांश (क) के आधार पर संस्‍थान के अधिकारी एवं कर्मचारी नियमित हैं और वेतनवृद्धियों के साथ-साथ संपूर्ण वेतन प्राप्‍त कर रहे हैं, जबकि कौशल विकास केन्‍द्र के अधिकारी एवं कर्मचारी बिना वेतनवृद्धि के वर्षों से संविदा पर कार्य कर रहे हैं, ऐसा क्‍यों? (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) के आधार पर जब दोनों का कार्य प्रशिक्षण देना है तो फिर नियमित एवं संविदा जैसा नियुक्ति दोष इन अधिकारी एवं कर्मचारियों की स्‍थापना में क्‍यों है? (घ) प्रश्नांश (क), (ख) एवं (ग) के आधार पर क्‍या कौशल विकास के अधिकारी एवं कर्मचारियों का नियमित या संविदा वेतन बढ़ाया जाएगा?

तकनीकी शिक्षा मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जी हाँ। जी हाँ। (ख) जी हाँ। कौशल विकास केन्‍द्रों में अल्‍प अवधि के आवश्‍यकतानुसार प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित होने के कारण संविदा नियुक्ति का प्रावधान है। (ग) प्रश्‍नांश '''' अनुसार। (घ) संविदा पर नियुक्‍त कर्मचारी/अधिकारियों के मानदेय बढ़ाये जाने की कार्यवाही प्रचलन में है।

श्री पुष्‍पेन्‍द्र नाथ पाठक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍नांश (ख) के उत्‍तर में आया है कि अल्‍प अवधि के प्रशिक्षण कार्यक्रम हेतु संविदा नियुक्‍ति होती है, मेरा प्रश्‍न यह है कि कितने समय के लिए होती है ?

श्री उमाशंकर गुप्‍ता -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, काम की आवश्‍यकतानुसार संविदा नियुक्‍ति करते हैं लेकिन माननीय विधायक जी ने जिस तरफ इंगित किया है मैं उनकी भावनाओं से सहमत हूँ कि हम जो कौशल विकास केन्‍द्र में प्रशिक्षण के लिए लोग रखते हैं उनको अभी 7200 रुपये मानदेय देते हैं और आईटीआई में वही हम 10000 रुपये देते हैं, उस प्रस्‍ताव पर हम शीघ्र निर्णय कर रहे हैं और उनका मानदेय उनके समकक्ष करने की नस्‍ती हमारे विचाराधीन है.

श्री पुष्‍पेन्‍द्र नाथ पाठक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक ही सवाल से सारे जवाब आ गए, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

नरसिंहपुर एवं इंदौर जिले में पी.आई.यू. के तहत निर्माण कार्य

3. ( *क्र. 6373 ) श्री जालम सिंह पटेल : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नरसिंहपुर एवं इंदौर जिले में पी.आई.यू. के तहत कुल कितने निर्माण कार्य कितनी-कितनी लागत के किए जा रहे हैं? (कार्यवार 1 जनवरी, 2013 से प्रश्‍न दिनांक तक की जानकारी दें.) (ख) उपरोक्‍त में से कौन-कौन से कार्य में कितना-कितना विलंब हुआ है एवं उसके कारण लागत में कितनी-कितनी वृद्धि हुई है? (ग) क्‍या उपरोक्‍त कार्यों के गुणवत्‍ताहीन होने संबंधी शिकायतें प्राप्‍त हुईं हैं, हाँ तो उनका भौतिक सत्‍यापन किस अधिकारी द्वारा किया गया एवं क्‍या-क्‍या कमियां पाईं गईं? (घ) उक्‍त निर्माण कार्य किस-किस एजेंसी के माध्‍यम से कराए जा रहे हैं?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री सरताज सिंह ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' एवं ''अ-1'' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' एवं '''' अनुसार है। (ग) जिला इन्‍दौर में शिकायत निरंक अत: भौतिक सत्‍यापन का प्रश्‍न ही नहीं उठता, नरसिंहपुर की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र ''ब-1'' अनुसार है। (घ) जिला नरसिंहपुर की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' एवं ''अ-1'' अनुसार है।

श्री जालम सिंह पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न के उत्‍तर में जो जवाब दिया गया है उसमें आवंटन के अभाव और ठेकेदार की धीमी गति के कारण से निर्माण कार्य अपूर्ण होना बताया गया है. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री से निवेदन करता हूँ कि आवंटन कब तक दिया जाएगा और जो ठेकेदार हैं जिन्‍होंने कि धीमी गति से कार्य किया है क्‍या उन पर कोई कार्यवाही होगी ?

श्री सरताजसिंह-- अध्यक्ष महोदय, यह सारे कार्य पी.आई.यू. के हैं. पी.आई.यू. पी.डब्ल्यू.डी. का एक विभाग है जो अन्य विभागों द्वारा दी गयी राशि के आधार पर अन्य विभागों के लिए काम करता है, उनके भवन बनाता है और कई बार ऐसा होता है कि अन्य विभाग की तरफ आवंटन आने में विलम्ब होता है चूंकि इसके लिए हमारे बजट से कोई राशि नहीं दी जाती इसलिए विलम्ब होता है और उसके कारण कार्य में विलम्ब होता है. जो माननीय विधायक जी ने जानना चाहा है वह पूरी जानकारी मैं उनको बता रहा हूँ कि नरसिंहपुर में 80 काम स्वीकृत हुए थे जिसमें 57 पूर्ण हो गये. 19 प्रगतिरत् हैं और 4 अभी शुरु नहीं हुए हैं और इसी प्रकार इन्दौर में 56 काम स्वीकृत हुए थे. 23 पूर्ण हो चुके है और 23 प्रगतिरत् हैं.विलम्ब का कारण भी मैंने आपको बता दिया है.

श्री जालम सिंह पटेल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, करेली जो मिनि स्टेडियम है, मुख्यमंत्री जी की घोषणा के अनुसार अभी भी प्रगति पर है,12 महीने से विलम्ब है, चूंकि वह ठेकेदार नगरपालिका अध्यक्ष है और गुणवत्ताविहीन बहुत काम है और मैंने अभी कलेक्टर महोदय को पत्र भी लिखा था. वहां की दीवार गिरने लगी. मैं निवेदन करता हूँ कि उसकी जांच करा लें और वह कार्य पूर्ण करा लें. वहां पर अभी मैच वगैरह भी होने थे वह भी नहीं हो पाये, उसमें वह ताला डाले हुए हैं , उसमें रेत जमा किये हुए हैं,आपसे निवेदन है कि या तो कार्य पूर्ण करा दें या ठेका निरस्त करा को दूसरे किसी ठेकेदार को टेन्डर करवा दें.

श्री सरताज सिंह-- अध्यक्ष महोदय, करेली स्टेडियम का काम लगभग पूर्ण हो चुका है. जो सपोर्ट फाउण्डेशन थी उसमें उसमें काली मिट्टी भरी, जो नहीं भरनी चाहिए थी और इस बात के लिए उसको नोटिस दिया गया तो उसने वह पूरी मिट्टी बदल दी. अब बहुत साधारण काम बचा है, विशेष काम नहीं है. जल्दी उसको पूर्ण होकर विभाग को हैण्ड ओवर कर दिया जाएगा.

श्री जालम सिंह पटेल-- अध्यक्ष महोदय,ऐसा नहीं है, बाकी निर्माण कार्य बहुत अच्छे चल रहे हैं, मगर वह एक ऐसा काम जो गुणवत्ताविहीन है .उसकी जांच करवा दें. उसकी दीवाल भी गिर रही है. आप किसी अधिकारी से उसकी जांच करवा दें.

श्री सरताज सिंह-- जांच करा दी जाएगी.

श्री गोविन्द सिंह पटेल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, राशि के विलम्ब के कारण तो बात अलग है, जो राशि के विलम्ब की बात जो आयी है लेकिन ठेकेदारों के धीमी गति के कारण मेरे यहां भी दो हाई स्कूल भवन के कार्य दो वर्ष से अपूर्ण पड़े हैं और वहां बच्चों को बैठने की जगह नहीं है इसलिए एक बम्हौरीकला और बरहैटा तो वह ठेकेदार की धीमी गति के कारण लिखा है तो ठेकेदार काम नहीं कर रहा है तो उसको टर्मीनेट करके दूसरा ठेकेदार करे लेकिन काम तो करा दें जिससे कि बच्चे वहां बैठ सकें.

अध्यक्ष महोदय-- जल्दी करा दें,कह रहे हैं.

श्री सरताज सिंह-- ठीक है अध्यक्ष महोदय, उसको दिखवा लेंगे.

 

वन मण्‍डल ग्‍वालियर में कराये गये कार्य

4. ( *क्र. 5810 ) श्री लाखन सिंह यादव : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) 1 अप्रैल, 2013 से 31 अक्‍टूबर, 2015 तक वन मण्‍डल ग्‍वालियर में कितने कूपों में परकोलेशन टैंक वन्‍य प्राणियों के पीने के पानी हेतु तालाब, पानी रोकने की खन्‍ती कन्‍टूर ट्रैंच निर्माण कराया गया है? कूपवार, परिक्षेत्रवार, स्‍थलवार, लम्‍बाई एवं घनमीटर वाईज़ स्‍पष्‍ट करें। (ख) प्रश्‍नांक (क) अनुसार उक्‍त निर्माण कार्यों में प्रत्‍येक कार्य वाइज़ कितनी-कितनी वित्‍तीय स्‍वीकृति थी तथा कितना-कितना व्‍यय किया गया, निर्माण कार्य किस-किस कर्मचारी/अधिकारी के सुपरवि‍ज़न में किस-किस निर्माण एजेन्‍सी/ठेकेदार से कराया गया? क्‍या उक्‍त निर्माण कार्य पूर्ण होने के उपरान्‍त सं‍बंधित तकनीकी विभाग से उनकी गुणवत्‍ता का सर्टीफिकेट लिया गया है? यदि हाँ, तो कार्य तथा परिक्षेत्र वाईज़ स्‍पष्‍ट करें? यदि नहीं, तो क्‍यों? कारण सहित स्‍पष्‍ट करें। (ग) ग्‍वालियर जिले में किन-किन वन समितियों द्वारा वाहन चालकों, वन सुरक्षा कार्यों पर 1 अप्रैल, 2012 से 31 मार्च, 2015 तक कितनी राशि व्‍यय की गयी? समिति का नाम कार्य एवं व्‍यय की गयी राशि की जानकारी दें।

वन मंत्री ( डॉ. गौरीशंकर शेजवार ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 1, 2 एवं 3 अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 3 अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 4 अनुसार है।

 

श्री लाखन सिंह यादव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न क, ख और ग के उत्तर में माननीय मंत्री जी के द्वारा कल शाम को मेरे पास परिशिष्ट पहुंचा. मैंने उसका अध्ययन किया और अध्ययन में यह पाया कि जो जानकारी परिशिष्ट द्वारा भेजी गयी है, वह पूर्णत: असत्य है और यह बात मैं दृढ़ता से इसलिए कह रहा हूँ कि ग्वालियर जिले का 75 से 80 प्रतिशत जो वन क्षेत्र है वह मेरी विधानसभा भितरवार में आता है और आपने मेरे प्रश्न (क) के उत्तर में जो लिखा है, परकोलेशन टैंक वन्य प्राणियों के पीने के पानी हेतु तालाब, पानी रोकने की खन्ती कन्टूर ट्रैंच निर्माण कराया गया है,ऐसा आपने लिखा है. मैं आपके माध्यम से यह जानना चाहता हूँ कि यह परकोलेशन टैंक वन्य प्राणियों के पीने के पानी हेतु तालाब, खन्ती और कन्टूर ट्रैंच में क्या डिफरेंस है,पहली चीज. इनमें डिफरेंस क्या है. दूसरा जो है इनकी उपयोगिता क्या है. इन तीनों की उपयोगिता भी आप बता दें अलग अलग, क्यों इनको आपने बनवाया, इनके अलग अलग कारण भी बता दें. तीसरा आपने इसको एस्टीमेट के हिसाब से बनवाया है. मेरी जो जानकारी है वह यह है कि परकोलेशन टैंक का एक बार बहुत पहले काम हुआ था और उस पर तीन तीन बार राशि का आहरण किया गया है . इसी तरह कन्टूर ट्रैंच का, मेरा आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन है, यदि आपने, जैसा इस परिशिष्ट में लिखा है तो मैं आप से यह जानना चाहता हूँ कि यदि आपने यह सत्य जानकारी दी है तो आप सदन से एक समिति गठित करा दें और समिति गठित कराकर उसकी जाँच करा लें तो दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा. माननीय अध्यक्ष महोदय, इसमें लाखों का हेरफेर है. मेरा गाँव भी उसी जंगल की तलहटी में मैं रहता हूँ. इसमें मुझे एक एक चीज की जानकारी है. इसमें हंड्रेड परसेंट असत्य जानकारी है.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार-- माननीय अध्यक्ष महोदय, हम यह चाहते हैं कि इतने स्थान हैं, यदि हम जाँच अधिकारी सब पर भेजेंगे.

श्री लाखन सिंह यादव-- अध्यक्ष महोदय, इसमें मेरा कहना यह है कि सब में नहीं मैं अपनी विधान सभा की बात कर रहा हूँ और 70-80 परसेंट वन क्षेत्र मेरे ही क्षेत्र में है.

अध्यक्ष महोदय-- आप उत्तर आ जाने दें फिर आपको अभी और अनुमति देंगे.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार-- तो सदस्य तो इतनी जगह जा नहीं सकते.

श्री रामनिवास रावत-- जाएँगे.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार-- ठहरो जरा. बात सुन लो. व्यावहारिक बात करें. आपकी जानकारी में यह जो परिशिष्ट 1, 2, 3 है, इनमें से आप रेण्डम सिलेक्ट कर लीजिए और यह बता दीजिए कि हम इन इन स्थानों की जाँच करवाना चाहते हैं और आप हमको लिख कर दे दीजिए. जाँच किस स्तर पर करवाना चाहते हैं, यह भी आप बता दीजिए कि हम इस अधिकारी से जाँच करवाना चाहते हैं और हमें इसमें कहीं कोई आपत्ति नहीं है. यदि कहीं कोई गड़बड़ी है और किसी ने की है तो निश्चित रूप से वह पकड़ में भी आना चाहिए और गलती करने वाले को सजा भी मिलना चाहिए. लेकिन इतने स्थानों पर काम हुए हैं. अलग अलग रेंज के हिसाब से और बीट के हिसाब से इसमें विवरण है. जैसा कि आपने पूछा था, तो इन पूरे की करवाना चाहते हैं तो इसमें जाँच में समय लग जाएगा. हमारा यह कहना है कि जहाँ आप पहले से गए हैं या आपके व्यक्ति गए हैं और जिन्होंने आपको सूचना दी है ऐसे 10-20 प्वाईंट बता दें रेंडम, तो उनमें जाँच करवाना ज्यादा सुविधाजनक रहेगा और परिणाम भी जल्दी आएगा तो आप इनमें से नाम दे दीजिए. कहाँ कहाँ कि आप जाँच करवाना चाहते हैं. पढ़ लें. 2-4 दिन बाद दे दीजिए और किस स्तर पर आप जाँच करवाना चाहते हैं यह बता दीजिए.

श्री लाखन सिंह यादव-- अध्यक्ष महोदय, मैं पूरे जिले की जाँच की बात नहीं कर रहा हूँ. मैं मात्र अपने विधान सभा के जो प्वाईंट हैं उन्हीं की जाँच करवाना चाहता हूँ. एक तो यह है कि मेरी विधान सभा में जितने भी आपने काम करवाए हैं और यह कराए नहीं हैं अभी आपका टेबिल वर्क है. ये काम अभी हुए नहीं हैं इसलिए मैं चाहता हूँ कि मेरे विधान सभा क्षेत्र में जितने भी काम हुए हैं उनकी जाँच करा लें. दूसरा मैंने यह कहा था कि जो आपने परक्यूलेशन टैंक और ये वन्य प्राणी...

श्री गोपाल भार्गव-- अध्यक्ष महोदय, इन्होंने प्रश्न में पूछा है घनमीटर वाइज, कार्य वाइज, परिक्षेत्र वाइज, क्षेत्र वाइज, यह हिन्दी और अँग्रेजी दोनों है. कार्यवार लिख देते..

श्री लाखन सिंह यादव-- भैय्या मेरा निवेदन है मेरा बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है. आप बैठ तो जाओ.

अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह है कि मेरे विधान सभा क्षेत्र के ही करवा लें. मैं जिले की बात नहीं कर रहा हूँ. आपने मुझे यह नहीं बताया कि इनका ऑब्जेक्ट क्या है? जो परक्यूलेशन टैंक हैं, इनमें डिफ्रेंस क्या है? इनका थोड़ा सा अलग अलग बता दें. इनमें डिफ्रेंस क्या है? यह क्यों बनवाए हैं?

डॉ.गौरीशंकर शेजवार-- अध्यक्ष महोदय, भूमि में जो पानी का संरक्षण करते हैं ताकि वॉटर लेवल ऊपर आ जाए इसलिए ये सब होते हैं और विधायक जी ने भी जो पूछा है कि वन्य प्राणियों के पीने के पानी हेतु तालाब, इन्होंने उद्देश्य खुद ने भी बताए हैं. पानी रोकने के लिए खंती, कन्टूर ट्रैंच का निर्माण, तो आपने स्वयं ने भी इसमें उद्देश्य बताया है.

श्री लाखन सिंह यादव-- यह मैंने बताया लेकिन मेरा इस प्रश्न से तात्पर्य यह था...

अध्यक्ष महोदय-- उसका उत्तर आ गया कि क्यों बनाए जाते हैं.

श्री लाखन सिंह यादव-- अध्यक्ष महोदय, मेरे ग का, आपने वन समितियाँ बनाई हैं. इन वन समितियों में आपने करीब 11 सौ लोगों के नाम इसमें दिए हैं. मैं आपको यह बता देना चाहता हूँ इनके वन विभाग के जिन लोगों ने यह चार्ट तैयार किया, बड़ी सफाई से किया है लेकिन एक गलती कर गये इसमें कई ऐसे लोगों के नाम दे दिये जो इस दुनिया में नहीं हैं जो 3 साल पहले चले गये. मैं चाहता हूँ कि वन समितियों की एक समिति बनाकर किसी उच्च अधिकारी के साथ क्षेत्रीय विधायक के साथ जांच करवा लेंगे क्या ?

डॉ. गौरीशंकर शेजवार--अध्यक्ष महोदय, वन समितियां 5 साल के लिए गठित होती हैं.

श्री लाखन सिंह यादव--अभी जो नाम दिये गए हैं उसमें से कई लोग मर चुके हैं.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार--माननीय अध्यक्ष महोदय, ग्राम सभायें इनका चुनाव करती हैं उसके बाद ही उनकी कार्यकारिणी बनती है तो कोई समिति 5 साल पहले बनी होगी और उसमें से...

श्री लाखन सिंह यादव--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह ऐसे जवाब देते हैं इतने वरिष्ठ होकर आगे की सीट पर बैठकर पूरे सदन में कुछ न कुछ कमेंट करते रहते हैं पूरे हाउस के टाइम पर और जवाब ऐसे देते हैं.

अध्यक्ष महोदय--आप अपने प्रश्न तक सीमित रहिये, आप उत्तर तो ले लें पहले.

श्री लाखन सिंह यादव--वनराज जी आपसे मेरा विनम्रतापूर्वक अनुरोध है कि आप इसकी जांच करा लेंगे कि नहीं आपके वन में बड़ा भारी घोटाला हो रहा है.

अध्यक्ष महोदय--लाखन सिंह जी आप कृपया उत्तर ले लें, बहुत समय हो गया है.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार--अध्यक्ष महोदय, यह मुझसे वनराज, वनराज कह रहे हैं सबसे पहले तो आपने मेरी श्रेणी बदल दी मनुष्य से जानवरों में कह दिया मुझको. वनराज का अर्थ होता है शेर मैं तो छोटी मोटी बकरी भी नहीं हूँ साहब कैसे आप अकारण मुझे वनराज, वनराज कहते हैं.

श्री लाखन सिंह यादव--ऐसे ही तो जवाब देते रहते हैं इनसे कहो कि मेरा जवाब दे दें.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार--अब इनके जवाब में मैं बोलता हूँ कि जहां-जहां सदस्यों की और उनकी मृत्यु हो गई है उनके स्थान पर हम लोगों को परिवर्तित करेंगे और इसके बाद जिन समितियों का कार्यकाल 5 साल से ज्यादा हो गया है उनमें नये चुनाव करवा देंगे और प्रश्न का उत्तर जो आप मांग रहे थे उसमें जा जानकारी हमारे पास है चुनाव के हिसाब से और समितियों को हिसाब से वह आपको प्रेषित की गई है.

श्री लाखन सिंह यादव--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं जांच कराने की बात कर रहा हूँ.

श्री रामनिवास रावत--जांच के लिए आश्वासन दे दें.

श्री लाखन सिंह यादव--माननीय अध्यक्ष महोदय, कई लोग 4-4 साल से पैसा आहरण कर रहे हैं उनके नाम पर कर रहे हैं जो लोग हैं हीं नहीं मैं उसकी जांच की बात कर रहा हूँ आपको जांच कराने में क्या आपत्ति है आपके विभाग के लोगों ने इतने सिस्टमेटिक ढंग से इसको संजोया है लेकिन बहुत सारी गल्तियां..

डॉ. गौरीशंकर शेजवार--मेरी जानकारी जहां तक है किसी भी ऐसे व्यक्ति के नाम पर आहरण नहीं किया गया है.

श्री लाखन सिंह यादव--तो जांच कर लें.

श्री रामनिवास रावत--जो आरोप है उसकी जांच करा लें.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार--अध्यक्ष महोदय, पहले तो हम इसकी जांच करायेंगे कि विधायक जी ने जो आरोप लगाया है कि आदमी जिंदा है कि नहीं है और इनका आरोप सही है या हमारा जवाब सही है. जब आरोप लगायेंगे तो सुनना पड़ेगा मेरा ऐसा कहना है कि विभाग ने ऐसी जानकारी दी है विधायक जी ने यह जानकारी दी है विधायक जी से पहले हम पूछेंगे कि लिस्ट दो कि कौन-कौन हैं और कौन-कौन नहीं है और उस लिस्ट के हिसाब से चलेंगे. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--आप लोग बैठ जायें उत्तर ही नहीं लेना चाहते हैं (व्यवधान) मंत्रीजी लिस्ट ही तो मांग रहे हैं (व्यवधान)

डॉ. गौरीशंकर शेजवार--अध्यक्ष महोदय, मेरी पूरी बात ही नहीं आई है और उसमें से जो सही होगा वह हम सदन के सामने रखेंगे. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--लाखन सिंह जी बैठ जाइये.(व्यवधान)

डॉ. गौरीशंकर शेजवार--आप जो मरने की बात कह रहे हैं यह आपने आरोप लगाया है विभाग ने हमें जानकारी दी दोनों की तुलनात्मक जांच हम करवायेंगे कि कौन सही है आपका आरोप सही है या विभाग का उत्तर सही है (व्यवधान)

श्री लाखन सिंह यादव--अध्यक्ष महोदय, (XXX).

डॉ. गौरीशंकर शेजवार--यह आपत्तिजनक है कभी (XXX) को इंगित नहीं किया जाता है यह अवहेलना कर रहे हैं (व्यवधान) नियमों में ऐसा नहीं है (व्यवधान)

श्री लाखन सिंह यादव--इसलिए कह रहा हूँ कि (व्यवधान)

श्री रामनिवास रावत--आप तो किसी से भी जांच कराने की बात कह रहे हो (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--बैठ जाइये आप, लाखन सिंह जी ने जो उल्लेख किया उसे विलोपित कर दें. (व्यवधान)

श्री निशंक कुमार जैन--अध्यक्ष महोदय, सच्चाई से यह तिलमिला गये (व्यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय :- दोनों की जांच के आदेश दे दिये है. एक का तो कह दिया कि आप रेंडम कर दीजिये और वह जांच करा लेंगे और दूसरा वह यह कि वह यह जांच करायेंगे कि जो सूची है वह डिफेक्टिव है या कोई मृत है. अब उसमें कोई बात नहीं उठती है.

श्री रामनिवास रावत:- इसमें बात यह उठती है कि अगर वह डिफेक्टिव है और पैसे जारी कर दिये और उनके खाते में पहुंच गये. मतलब यह है कि भ्रष्‍टाचार है तो उसकी जांच नहीं करायेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय:- उन्‍होंन जांच कराने के लिये बोल दिया है. उसमें अब क्‍या रह गया है.

श्री राम निवास रावत:- जांच कराने के लिये कहां बोला है. वह तो सूची की जांच कराने का बोला है.

अध्‍यक्ष महोदय :- उन्‍होंने जांच कराने का बोल दिया है.

डॉ गौरीशंकर शेजवार :- अध्‍यक्ष महोदय, जांच में विधायक जी भी एक एक स्‍थान पर जायेंगे और साथ में रहेंगे. जांच में रावत जी भी जायेंगे. दोनों लोग जांच कमेटी में साथ में रहेंगे और पूरे स्‍थानों में जायेंगे और एक एक स्‍थान में साथ में रहेंगे. विभाग इनके लिये वाहन उपलब्‍ध करायेंगे. इनके घर वाहन जायेगा और इनको लेकर आयेगा. इस बात की जांच भी इनके सामने होगी. आप और बोलिये क्‍या चाहते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय:- आप लोग बैठ जायें आप वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं. आप लोग दूसरे सदस्‍यों को भी प्रश्‍न पूछने दें.

श्री अजय सिंह :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिस तरह से शेजवार जी ने बारीकी से जांच की बात की है उसी के संबंध में उदाहरण दे रहा हूं. उन्‍होंने कहा कि दोनों सदस्‍य साथ में जायेंगे. लेकिन आरोप यह है कि जो पिछले वर्ष में आहरण हुआ है उसकी जांच करायेंगे क्‍या.

अध्‍यक्ष महोदय :- अब यह प्रश्‍न नहीं उठता है.

डॉ गौरीशंकर शेजवार:- जांच होगी, तभी तो यह पता चलेगा कि आहरण सही हुआ या गलत हुआ है. जांच होगी तभी तो पता चलेगा और जांच शब्‍द जब आ जाता है तो उसमें आहरण भी शामिल है. आप लोग अखबारों में नाम छपने के लिये खडे हो जाते हैं.

 

कटनी वन मंडल अंतर्गत स्‍थापित वन जाँच नाके

5. ( *क्र. 3332 ) कुँवर सौरभ सिंह : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या कटनी वन मंडल के अंतर्गत वन जाँच नाके कहाँ-कहाँ कब से स्‍थापित हैं तथा उक्‍त नाके स्‍थापित किए जाने के क्‍या प्रावधान/निर्देश हैं? की प्रति उपलब्‍ध करावें। (ख) प्रश्नांश (क) के स्‍थापित जाँच नाके, यदि नियम विरूद्ध हैं तो उन्‍हें कब समाप्‍त किया जावेगा तथा उक्‍त नाकों में वर्ष 2013-14 से प्रश्‍न दिनांक तक किन-किन कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई? उक्‍त कर्मचारियों में से कौन-कौन दैनिक वेतन में कार्यरत हैं? इनमें किन-किन की उक्‍त अवधि में क्‍या शिकायतें हैं, उनकी जाँच कब-किसने की?

वन मंत्री ( डॉ. गौरीशंकर शेजवार ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र एवं अनुसार है। (ख) उत्तरांश (क) में स्थापित कोई भी जाँच नाका नियम विरूद्ध नहीं है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। वर्ष 2013-14 से पदस्थ कर्मचारियों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है। इनमें से श्री अनिल कुमार मिश्रा, वनपाल के विरूद्ध अवैध वसूली के संबंध में शिकायत प्राप्त हुई है, जिसकी जाँच फरवरी, 2016 में सहायक वन संरक्षक एवं संलग्नाधिकारी, श्री टी.सी. पाल द्वारा की गई है।

कुंवर सौरभ सिंह :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा माननीय मंत्री जी से प्रश्‍न वन जांच नाके के विषय में है कि माननीय प्रश्‍न के उत्‍तर में चार नाकों के विषय में लिखा गया है. मैं सीधा प्रश्‍न करना चाहता हूं कि इन नाकों के होने के बावजूद हमारे जिले में वन क्षेत्र घटता जा रहा है. माननीय स्थिति परिवर्तित हो गयी है. जांच नाकों में लकडी की सायकियों से और अन्‍य माध्‍यमों से परिवहन करके लकडी आ रही है. कटनी में सिंधी केंप में एक टाल है, जिस टाल का लगातार आपके विभाग द्वारा तीन चार बार कटर जब्‍त किया गया है. उसके बाद भी वह टाल संचालित है. लगभग तीन सौ से चार सौ सायकिलों वहां के व्‍यापारी फायनेंस करके चलवाते हैं. मेरा निवेदन यह है कि क्‍या इस संबंध में जांच करके इस अवैध लकड़ी के परिवहन को रोका जायेगा क्‍या ?

डॉ गौरीशंकर शेजवार :- जांच में एक तो आप चाहते हैं कि जो एक कटर जब्‍त हुआ था उसकी जांच करवा लें.

कुंवर सौरभ सिंह :-उसकी नहीं . लगातार उसके बाद भी परिवहन हो रहा है.

डॉ गौरीशंकर शेजवार :- अध्‍यक्ष महोदय, दो विषय अलग अलग हैं. एक तो वह स्‍थान बताया है, जहां पर कटर जब्‍त हुआ है. उसकी जांच करवा देते हैं.

कुंवर सौरभ सिंह :- मंत्री जी उस कटर का स्‍थान बदलता रहता है. व्‍यापारी स्‍थन बदलता रहता है. वहां पर आपकी जो चार चौकियां हैं. इसके सहयोग से वहां पर लगातार लकडी आती है.

डॉ गौरीशंकर शेजवार :- नहीं, इनका कोई सहयोग नहीं मिलेगा. इसकी भी जांच करवा लेंगे और जो इसमें कर्मचारी तैनात हैं. उनकी भी जांच करवा लेंगे और आपकी जो आशंका है, उसको बिल्‍‍कुल रोक देंगे.

श्री अजय सिंह :- मंत्री जी आप यह बताने का कष्‍ट करें कि प्रावधान क्‍या है,क्‍या वह सायकिल से भी ला सकता है या सिर्फ हेड रोड का प्रावधान है. अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर आ जाने दीजिये. सायकिल से परिवहन हो रहा है.

 

प्राचीन मंदिरों का जीर्णोद्धार/घाट निर्माण

6. ( *क्र. 6294 ) श्री सचिन यादव : क्या उद्योग मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) कसरावद विधान सभा क्षेत्रांतर्गत मां नर्मदा किनारे ग्राम सांयता में विगत 500 वर्ष पुराने शालीवाहन शिव मंदिर परिसर में दर्शनार्थियों के ठहरने हेतु धर्मशाला के निर्माण, ग्राम पानवा माता मंदिर के जीर्णोद्धार एवं घाट निर्माण, ग्राम कठोरा में 200 वर्ष पुराने श्रीराम मंदिर के जीर्णोद्धार एवं ग्राम सगूर भगूर विकासखण्‍ड भीकनगांव में माता मंदिर के जीर्णोद्धार तथा घाट निर्माण को पूर्ण कराये जाने के लिए प्रश्‍नकर्ता द्वारा जिला कलेक्‍टर खरगोन, धार्मिक न्‍यास एवं धर्मस्‍व विभाग एवं माननीय मंत्री जी को लिखे कितने पत्र प्राप्‍त हुए और उस पर प्रश्‍न दिनांक तक क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई? (ख) प्रश्नांश (क) में दर्शित मंदिरों के निर्माण कार्यों की स्‍वीकृति कब तक जारी की जायेगी और उक्‍त सभी कार्यों को कब तक पूर्ण करा दिया जायेगा?

उद्योग मंत्री ( श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया ) : (क) कसरावद विधानसभा क्षेत्रांतर्गत मां नर्मदा किनारे ग्राम सांयता में विगत 500 वर्ष पुराने शालीवाहन शिव मंदिर परिसर में दर्शनार्थियों के ठहरने हेतु धर्मशाला के निर्माण, ग्राम पानवा के जीर्णोद्धार एवं घाट निर्माण, ग्राम कठोरा में 200 वर्ष पुराने श्रीराम मंदिर के जीर्णोद्धार संबंधी विषय पर माननीय विधायक का पत्र दिनांक 11.2.2016 विभाग को प्राप्त हुआ है. प्रस्ताव विचाराधीन है. जनपद पंचायत भीकनगांव ग्राम सगूर भगूर तहसील भीकनगांव में छोटी माता मंदिर के घाट निर्माण हेतु विधायक निधि से 5 लाख रुपये वर्ष 2007-08 में स्वीकृत किये जाकर ग्राम पंचायत द्वारा उक्त घाटों का निर्माण करा दिया गया है एवं सांसद निधि से वर्ष 2011-12 में बड़ी माता मंदिर के घाट निर्माण व मंदिर में जीर्णोद्धार हेतु ग्रामीण यांत्रिकी विभाग को कार्य हेतु 8 लाख रुपये स्वीकृत किये गये थे. संबंधित विभाग द्वारा कार्य पूर्ण करा दिया गया है। (ख) प्रस्‍ताव प्राप्‍त होने पर कार्यवाही की जाती है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

 

श्री सचिन यादव - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि मेरे विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत नर्मदा किनारे ग्राम सांयता में लगभग 500 वर्ष पुराना शालीवाहन शिव मंदिर है. ग्राम कठोरा में लगभग200 वर्ष पुराना श्रीराम मंदिर है और ग्राम सगूर भगूर तहसील भीकनगांव में छोटी माता का मंदिर है. इसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन आते हैं. मैं पूछना चाहता हूं कि क्या उक्त मंदिर शासकीय रिकार्ड में दर्ज है और दर्ज हैं तो कब से दर्ज हैं और इनके रखरखाव में कितनी राशि खर्च की गई.

श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया - माननीय अध्यक्ष महोदय, एक चिट्ठी आई थी जो 11.2.2016 को मेरे विभाग में प्राप्त हुई थी वह थी श्रीराम मंदिर के जीर्णोद्धार के लिये वह कलेक्टर साहब के पास गई है तीन और मंदिर हैं ग्राम पानवा माता मंदिर,ग्राम कठोरा में श्रीराम मंदिर और ग्राम सगूर भगूर में इन तीनों मंदिरों का इस्टीमेट बनाकर प्रस्ताव फिर से स्वीकृति के लिये दे दूंगी.

श्री सचिन यादव - बहुत-बहुत धन्यवाद.

पशु मेले के आयोजन हेतु बजट का आवंटन

7. ( *क्र. 2538 ) श्री हितेन्द्र सिंह ध्‍यानसिंह सोलंकी : क्या उद्योग मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) खरगोन जिला अंतर्गत जनपद पंचायत, बड़वाहा के ग्राम पंचायत बॉगरदा में प्रतिवर्ष शहीद दिवस 30 जनवरी से पशु मेले का आयोजन जनपद पंचायत द्वारा किया जाता है, उक्‍त मेले में पशुओं की बिक्री में आई गिरावट से मेला आयोजन में बजट आवंटन किये जाने एवं ग्राम बॉगरदा में प्रदेश का एक मात्र भारत माता के मंदिर के जीर्णोद्धार के लिये शासन स्‍तर पर क्‍या कार्यवाही की जा रही है। (ख) पशु मेला आयोजन करने के लिये बजट आवंटन एवं भारत माता मंदिर के जीर्णोद्धार के लिये प्रश्‍नकर्ता द्वारा शासन स्‍तर पर कितने पत्र जारी किये गये हैं एवं विभाग द्वारा इस पर क्‍या कार्यवाही की गई है? (ग) क्‍या राज्‍य शासन प्रश्नांश (ख) के अनुसार प्रश्‍नकर्ता के प्रस्‍ताव पर कोई विचार कर आवंटन स्‍वीकृत करेगा? यदि हाँ, तो कब तक यदि नहीं, तो कारण स्‍पष्‍ट करें?

उद्योग मंत्री ( श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया ) : (क) जी हां. बांगरदा स्थित भारत माता मंदिर शासन संधारित मंदिर नहीं है. अत: मंदिर के जीर्णोद्धार हेतु राशि स्वीकृत किया जाना उचित नहीं है. (ख) विभाग को पत्र प्राप्त नहीं हुआ है. कलेक्टर,खरगौन को माननीय विधायक का एक पत्र दिनांक 20.1.2016 को प्राप्त हुआ है. जिस पर कलेक्टर,खरगौन ने मेला के आयोजन हेतु संचालक संस्कृति विभाग को प त्र लिखा है.(ग) जी नहीं. धार्मिक मेला न होने के कारण राशि स्वीकृत की जाना उचित नहीं है.

 

श्री हितेन्द्र सिंह सोलंकी - माननीय अध्यक्ष महोदय, 30 नवंबर को हम सब शहीद दिवस के रूप में मनाते हैं और ग्राम बांगरदा में यह एक मात्र भारत माता का मंदिर है और धार्मिक आस्था का केन्द्र है. यहां पशु मेरा तो नहीं लगता और शहीद मेले के नाम से यह प्रसिद्ध है. यहां छोटा सा मेला 15 दिन का लगता है 30 नवंबर से 15 दिसंबर तक का. इसमें जो छोटी मोटी राशि देकर उस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाएंगे और उस मेले को प्रतिवर्ष लगवाएंगे.

श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया - माननीय अध्यक्ष महोदय, भारत माता मंदिर शासन के अधीन नहीं है. इसीलिये इसकी प्रविष्टि कलेक्टर के रिकार्ड में आ जाये तभी हम इसकी जीर्णोद्धार  कर सकते हैं. मैं कलेक्टर साहब से और माननीय सदस्य से यही कहूंगी कि आप अपना प्रस्ताव इसकी प्रविष्टि के लिये कलेक्टर को दें और उसके ऊपर फिर काम किया जाये कि कैसे इसकी एंट्री शासन अधीन हो सकती है. जहां तक मेले का सवाल है वह पशु मेला है और वह पशु मेला ग्रामीण विकास के अंतर्गत आता है क्योंकि जनपद से जुड़ा हुआ है वह हमारे  अधीन नहीं है न हमारे मेला प्राधिकरण में आ सकता है. जब भारत माता मंदिर शासन अधीन आ जायेगा तब हम देख सकते हैं कि पशु मेला को भी हम अपने दायरे में ला सकते हैं कि नहीं.

श्री हितेन्द्र सिंह सोलंकी - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह है कि वह पशु मेला नहीं पशुओं का बाजार मेले में लगता है वहां शहीद मेले के नाम से भारत माता का मंदिर है. शहीद मेले के नाम से मेला लगता है 30 नवंबर से शुरू होता है पहले जनपद इसमें खर्च किया करती थी पर पशुओं की आवाजाही वहां कम हो गई है. इसलिये हम यह चाहते हैं कि आप इसका प्रस्ताव भेजकर इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाएं और भविष्य में मेला लगवाएंगी.

श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं फिर से दोहरा देती हूं कि पहले भारत माता मंदिर को शासन के अधीन लाया जाये फिर दूसरी चीजें देख सकते हैं तो पहला काम पहले होना चाहिये फिर दूसरा आयेगा.

प्राचीन मंदिरों का जीर्णोद्धार

8. ( *क्र. 2919 ) श्री राजेश सोनकर : क्या उद्योग मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय द्वारा ग्राम पंचायत देवगुराड़ि‍या एवं ग्राम पंचायत मुण्‍डला दोस्‍तदार में मंदिर निर्माण हेतु कोई घोषण की थी? (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में प्राचीन गुटकेश्‍वर मंदिर एवं केवड़ेश्‍वर मंदिर, जो कि लोक माता अहिल्‍याबाई द्वारा बनाये गये हैं, के जीर्णोद्धार हेतु धार्मिक न्‍यास एवं धर्मस्‍व विभाग ने जिला प्रशासन को मंदिर जीर्णोद्धार हेतु कोई राशि आवंटित की थी? (ग) प्रश्नांश (ख) के संदर्भ में यदि हाँ, तो उक्‍त प्राचीन मंदिरों का जीर्णोद्धार किस विभाग द्वारा कराया जायेगा? क्‍या मंदिर निर्माण ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के माध्‍यम से कराये जाने की कोई योजना थी? क्‍या विभाग द्वारा प्रश्‍न दिनांक तक टेण्‍डर प्रक्रिया की गई है? यदि नहीं, तो संबंधित विभाग द्वारा टेण्‍डर क्‍यों नहीं बुलाये जा रहे हैं? (घ) प्रश्नांश (ग) के संदर्भ में धार्मिक न्‍यास एवं धर्मस्‍व विभाग द्वारा मंदिरों के जीर्णोद्धार हेतु स्‍वीकृत राशि यदि लेप्‍स होती है, तो क्‍या आगामी वित्‍तीय वर्ष में पुन: स्‍वीकृति दी जायेगी? राशि लेप्‍स होने के पीछे जिम्‍मेदारों पर कोई कार्यवाही की जा रही है व कब तक मंदिर जीर्णोद्धार कार्य प्रारंभ करा लिया जायेगा?

उद्योग मंत्री ( श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया ) : (क) जी हाँ। (ख) जी हाँ, प्राचीन मंदिर गुटकेश्‍वर मंदिर हेतु रूपये 25.00 लाख एवं केवड़ेश्‍वर महादेव मंदिर हेतु रूपये 25.34 लाख की प्रशासकीय स्‍वीकृति सहित राशि ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग इंदौर को दी गई है। (ग) उक्‍त कार्यों की निर्माण एजेंसी ग्रामीण यांत्रिकी सेवा है। प्रथम आमंत्रण ई-निविदा क्रमांक 19 दिनांक 15/1/2016 को आमंत्रित की गई थी, जिसमें एकल निविदा प्राप्‍त होने से पुन: द्वितीय आमंत्रण ई-निविदा सूचना क्रमांक 22 दिनांक 9/2/2016 को आमंत्रित की गई, जो दिनांक 26/2/2016 को खोली गई। जिसे स्‍वीकृति हेतु दिनांक 27/2/2016 को सक्षम अधिकारी को प्रस्‍तुत की गई। (घ) निर्माण एजेंसी द्वारा कार्यवाही प्रारंभ की गई है। जीर्णोद्धार का कार्य शीघ्र ही प्रारंभ किया जा रहा है। शेष का प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता। समय-सीमा में निर्माण कार्य न होने पर पुन: आवंटन दिये जाने पर विचार किया जावेगा।

 

श्री राजेश सोनकर - माननीय अध्यक्ष महोदय, इन्दौर जिले के ग्रामीण क्षेत्र में केवड़ेश्वर महादेव एवं गुटकेश्वर महादेव के प्राचीन मंदिर हैं जिसका निर्माण लोक माता अहिल्याबाई द्वारा किया गया था. माननीय मुख्यमंत्री जी ने दोनों के जीर्णोद्धार के लिये 25-25 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की थी लेकिन वह कार्य अभी तक प्रारंभ नहीं हो पाया जो मैंने प्रश्न पूछा था उसका जवाब आ गया है वहां एजेंसी तय हो गई है. मैं मंत्री महोदया से निवेदन करना चाहती हूं कि चूंकि सिंहस्थ महापर्व शुरू होने वाला है दोनों ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ होने वाली है तो उसका जीर्णोद्धार का काम कब तक कर दिया जायेगा उसका कार्यादेश कब तक जारी कर दिया जायेगा ?

श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया--माननीय अध्यक्ष महोदय, 11.3.16 को हमारे विभाग ने ए.सी.से मौखिक रूप से बात की थी, उसकी सेंक्शन की गई है, अब विभाग फॉलोअप करेगा, जैसे ही माननीय सदस्यगण चाहते हैं उसका जल्दी से जल्दी निर्माण होगा.

प्रश्न संख्या-9

ग्राम नरसिंगा से पिरझलार तक मार्ग का निर्माण

9. ( *क्र. 6206 ) श्री मुकेश पण्‍ड्या : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बड़नगर विधानसभा क्षेत्र में ग्राम नरसिंगा से पिरझलार तक का मार्ग किस योजना के तहत किस वर्ष में स्‍वीकृत किया गया तथा कितनी राशि का तथा कितने कि.मी. का स्‍वीकृत किया गया है? उपरोक्‍त मार्ग के लिए किस एजेंसी को अधिकृत किया गया है? (ख) वर्तमान में उपरोक्‍त कार्य की क्‍या स्थिति है? एजेंसी द्वारा कितना कार्य पूर्ण कर लिया गया है तथा किस अधिकारी द्वारा कार्य की गुणवत्‍ता को देखे बिना ही भुगतान कर दिया गया तथा कितनी राशि का भुगतान किया गया है? (ग) उपरोक्‍त मार्ग बनने के समय ही जीर्ण-शीर्ण हो गया है? इसके संदर्भ में ठेकेदार को कितनी बार नोटिस जारी किया गया है? क्‍या ठेकेदार को इस कार्य के लिए उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी किया गया है? यदि हाँ, तो किस इंजीनियर के द्वारा उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी किया गया है? (घ) उक्‍त मार्ग का निर्माण कब तक पूर्ण हो जायेगा? प्रश्‍न दिनांक तक कार्य पूर्ण क्‍यों नहीं किया गया? क्‍या कार्य एजेंसी के द्वारा किये गये कार्य की जाँच की जायेगी? यदि हाँ, तो कब तक?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री सरताज सिंह ) : (क) एवं (ख) जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ग) जी नहीं। जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट अनुसार है। जी नहीं। शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता है। (घ) विस्‍तृत जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट अनुसार है।

परिशिष्ट - ''दो''

 

श्री मुकेश पण्डया--माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि मेरी विधान सभा नरसिंगा, से पिरझलार सड़क 2007 से निर्माणाधीन है, परन्तु प्रश्न दिनांक तक निर्माण अधूरा है. उक्त मार्ग की रिवाईज्ड प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर स्थायी वित्त समिति से स्वीकृति प्रदान कर, यह कार्य कब से प्रारंभ कर दिया जाएगा.

श्री सरताज सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, 2007-08 में पहली बार इस कार्य का ठेका निकाला गया था जिसमें ठेकेदार द्वारा 6 किलोमीटर में मिट्टी एवं जीएसबी की गई उसमें उसको 70 लाख रूपये का भुगतान किया गया, उसके बाद ठेकेदार काम छोड़कर के चला गया, उस ठेकेदार का ठेका भी निरस्त कर दिया गया. धारा 3 सी में जो उसका अधिक खर्चा लगेगा उस ठेकेदार से वसूल किया जाएगा इस धारा के अंतर्गत उसके दोबारा टेन्डर निकालने के लिये हमने सात बार टेन्डर निकाले, लेकिन किसी का भी कोई टेन्डर नहीं आया एक टेन्डर आठवीं बार आया 5.4.2012 को उस ठेकेदार ने 4.4 किलोमीटर डॉमर का काम किया,200 मीटर में सीसी रोड़ बनायी, 12 पुलियाओं का काम किया उसमें उसको 178 लाख रूपये का भुगतान किया गया है. उस कार्य का एस्टीमेट था 341.5 लाख इसके बाद उस ठेकेदार ने भी काम करना बंद कर दिया उसने जो 2 किलोमीटर का कार्य किया था वह क्षतिग्रस्त हो गया है इसके कारण उस ठेकेदार एवं अधिकारियों पर कार्यवाही की जा रही है. अब पुनः नया टेण्डर लगाया गया है जो कल 16.3.2016 को खुलेगा उसके बाद ही कार्य की प्रगति आगे बढ़ेगी.

श्री मुकेश पण्ड्या--माननीय अध्यक्ष महोदय, 2007 में जो निर्माण कार्य शुरू हुआ था उसके बाद ठेकेदार ने जो कार्य किया है, वह गुणवत्तापूर्ण कार्य नहीं किया गया है तो क्या संबंधित अधिकारियों पर कार्यवाही की जाएगी, जिन्होंने कार्य से अधिक का भुगतान किया गया ?

श्री सरताज सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने ठेकेदार एवं संबंधित अधिकारी दोनों पर कार्यवाही का कहा है. अब सवाल सड़क को पूरा करने का है अब टेन्डर निकाल दिया गया है जो कि कल खुलेगा.

 

 

प्रश्न संख्या-10

बागली विधान सभा क्षेत्र में वन परिक्षेत्रों की संख्‍या

10. ( *क्र. 6394 ) श्री चम्पालाल देवड़ा : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) देवास जिले के बागली विधान सभा क्षेत्र में कुल कितने वन परिक्षेत्र हैं? इनमें कितने बीट हैं? कितनी सब रेंज हैं? इनमें वन परिक्षेत्र उदयनगर में कौन-कौन से विभिन्‍न पद स्‍वीकृत हैं व कहाँ-कहाँ कब से रिक्‍त हैं? (ख) वन परिक्षेत्र उदयनगर से जून-जुलाई 2015 में कितने वन रक्षक, वनपाल, उपवन क्षेत्रपाल के स्‍थानांतरण किये गये? क्‍या यह शासन की निर्धारित ट्रांसफर नीति के अंतर्गत किये गये? एक साथ अधिक संख्‍या में इन क्षेत्रों से स्‍थानांतरण किये जाने का क्‍या कारण था? (ग) प्रश्‍नांकित वन परिक्षेत्र तीन जिलों की सीमाओं से संलग्‍न है? इसके उपरांत भी अधिक संख्‍या में स्‍थानांतरण से विभाग में अस्थिरता व वन परिक्षेत्र की सीमाओं की सुरक्षा का संकट उत्‍पन्‍न नहीं होगा?

वन मंत्री ( डॉ. गौरीशंकर शेजवार ) : (क) देवास जिले के बागली विधान सभा क्षेत्र में कुल 07 वन परिक्षेत्र हैं। इनमें 133 बीट व 35 सबरेंज हैं। शेष जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) प्रश्‍नाधीन अवधि में परिक्षेत्र उदयनगर से किसी वन रक्षक, वनपाल, उप वनक्षेत्रपाल के स्‍थानांतरण नहीं किये गये हैं। शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) वन परिक्षेत्र उदयनगर की सीमा 3 जिलों की सीमाओं से संलग्‍न है। रिक्‍त बीटों की सुरक्षा समीप के कर्मचारियों को अतिरिक्‍त प्रभार में रखकर कराये जाने से अस्थिरता व वनों की सुरक्षा का कोई संकट नहीं है।

परिशिष्ट - ''तीन''

 

श्री चम्पालाल देवड़ा--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न (ख) के उत्तर में माननीय मंत्री जी ने बताया है कि उदयनगर वन परिक्षेत्र के वन रक्षक, वनपाल, वनक्षेत्रपाल के स्थानांतरण नहीं किये गये हैं, जबकि मेरी जानकारी के अनुसार उदयनगर परिक्षेत्र में 17 लोगों का स्टॉफ है उसमें से 12 लोगों का स्थानांतरण कर दिया गया है मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि ऐसे कौन से अधिकारियों ने 17 में से 12 लोगों के स्थानांतरण कर दिये और मेरी इसमें चिन्ता इसलिये थी कि देवास नगर का सबसे संवेदनशील वन परिसर है जिसमें इंदौर, खरगौन, खण्डवा एवं देवास जिला लगता है वहां पर अगर कर्मचारी ही नहीं रहेंगे तो हमारे जंगल की सुरक्षा कैसे कर पाएंगे.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार--माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रश्न में जो समयावधि बतायी थी उसमें स्थानांतरण नहीं हुए हैं उनकी संख्या उदयनगर में 11 स्थानांतरण हुए हैं.

डॉं. गौरीशंकर शेजवार- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मई 2015 का आदेश है, एक डिप्‍टी रेंजर, एक फारेस्‍टर और 9 वनरक्षक, इनमें से 2 वनरक्षक रिलीव नहीं हुए हैं, जो भी स्‍थानान्‍तरण हुए हैं, वह स्‍थानान्‍तरण नीति के अंतर्गत होते हैं और देवास जिले में जो संवर्ग है, 20 प्रतिशत और 16 प्रतिशत स्‍थानान्‍तरण उसके हिसाब से किए जाते हैं, प्रशासनिक दृष्टि से भी होते हैं और स्‍वयं के व्‍यय पर, आवेदन पर, उनकी व्‍यक्तिगत समस्‍याओं के आधार पर, स्‍थानान्‍तरण होते हैं और यदि माननीय सदस्‍य इसकी विस्‍तार से जानकारी चाहते हैं तो वह जानकारी हम उन तक पहुंचा देंगे कि किसका स्‍थानान्‍तरण किस आधार पर हुआ है ।

श्री चम्‍पालाल देवड़ा- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय से यह जानना चाहता हूं कि उदयनगर वन परिक्षेत्र अति संवदेनशील क्षेत्र है और उसमें वहां पर अभी भी कमी है, अभी भी वहां पर प्रभारी रेंज अधिकारी के माध्‍यम से रेंज चल रही है और बहुत सारे वन रक्षक और वन क्षेत्रपाल के पद रिक्‍त हैं अगर उनकी पूर्ति कर दी जाएगी तो वहां पर हमको काम करने में सुविधा होगी ।

डॉ. गौरीशंकर शेजवार- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वहां पर जिस अधिकारी का स्‍थानान्‍तण हुआ है, वह प्रमोशन पर गए हैं और हम शीघ्र उसको भर देंगे और वन रक्षक,छोटे पदों का जहां तक सवाल है, तो वनरक्षक की भर्ती प्रचलन में है, जल्‍दी से हमारे पास पद आ रहे हैं और हम जल्‍दी से जल्‍दी उदयनगर रेंज में जो भी पद खाली हैं, उनको हम भर देंगे ।

श्री चम्‍पालाल देवड़ा- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी को बहुत बहुत धन्‍यवाद ।

 

 

 

कन्‍या महाविद्यालय के भवन का उपयोग

11. ( *क्र. 6334 ) श्री अमर सिंह यादव : क्या तकनीकी शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या राजगढ़ जिले के जिला मुख्‍यालय पर कन्‍या महाविद्यालय स्‍वीकृत किया गया था? यदि हाँ, तो स्‍वीकृति की दिनांक एवं वर्ष बतावें एवं आदेश की प्रति उपलब्‍ध करावें? (ख) क्‍या यह वर्तमान में संचालित है? यदि नहीं, तो इसके बंद होने का क्‍या कारण है? क्‍या बालिकाओं के अध्‍ययन की सुविधा को देखते हुये शासन इसे पुन: प्रारंभ करेगा? यदि हाँ, तो कब तक और नहीं तो क्‍यों नहीं? (ग) क्‍या कन्‍या महाविद्यालय के स्‍वीकृत होने के बाद इसके लिये नवीन भवन भी निर्माण कराया गया था? यदि हाँ, तो उक्‍त महाविद्यालय बंद करने के बाद उस महाविद्यालय के भवन का किसके द्वारा और क्‍या उपयोग किया जा रहा है? (घ) क्‍या भवन का उपयोग नहीं होने तथा देखरेख नहीं होने से भवन क्षतिग्रस्‍त नहीं हो रहा है? क्‍या शासन उक्‍त भवन को क्षतिग्रस्‍त होने से बचाने के लिये किसी अन्‍य शासकीय विभाग को भवन किराये पर देगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं?

तकनीकी शिक्षा मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जी हाँ। म.प्र. शासन, उच्च शिक्षा विभाग के आदेश क्रमांक 487/37/यो./87, दिनांक 13.07.1987 के द्वारा सत्र 1987-88 से राजगढ़ में कन्या महाविद्यालय स्वीकृत किया गया। (ख) जी नहीं। जिला योजना समिति के निर्णय के परिप्रेक्ष्य में कलेक्टर जिला राजगढ़ के आदेश क्रमांक 1720/जीयोस/2002, दिनांक 28.06.2002 द्वारा शासकीय बालक महाविद्यालय राजगढ़ में कन्या महाविद्यालय सम्मिलित किया गया। जी नहीं। वर्तमान में शासन द्वारा पूर्व से संचालित महाविद्यालयों के सुदृढ़ीकरण गुणवत्ता एवं उनके विकास के प्रयास किये जा रहे हैं। अत: कन्या महाविद्यालय को प्रारंभ करने में कठिनाई है। (ग) जी नहीं। शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता। (घ) शासकीय कन्या महाविद्यालय प्रारंभ तिथि से पुराने बस स्टैण्‍ड पर स्थित शासकीय पी.जी. महाविद्यालय के भवन में संचालित था। कलेक्टर के आदेश क्रमांक 1722/जी.यो.स./02, दिनांक 28.06.2002 द्वारा उक्त भवन हाईस्कूल, पुरा राजगढ़ को आवंटित किया गया तथा कन्या महाविद्यालय का शासकीय पी.जी. महाविद्यालय, राजगढ़ में विलय किया गया। विलय होने के उपरांत महाविद्यालय की कक्षाएँ कन्या छात्रावास में संचालित की गईं। वर्तमान में पूर्व में संचालित किये जा रहे कन्या महाविद्यालय का भवन पूर्णत: ध्वस्त हो चुका है। अत: किराये पर दिये जाने का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। वर्तमान में कन्या छात्रावास भवन में विधि की कक्षाएँ संचालित की जा रही हैं ।

श्री अमर सिंह यादव- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, शिक्षा विभाग द्वारा आदेश क्रमांक 447 / 13.7.1987 में कन्‍या महाविद्यालय स्‍वीकृति प्रदान की गई थी, माननीय अध्‍यक्ष महोदय जिला योजना समिति द्वारा......

अध्‍यक्ष महोदय- वह तो आ गया है, दोनों कॉलेजों को मिला दिया है, आप तो प्रश्‍न पूछिए ।

श्री अमर सिंह यादव- माननीय मंत्री महोदय से यही आग्रह है क्‍या कन्‍या महाविद्यालय, राजगढ़ जिले को सौगात मिलेगी, स्‍वीकृति प्रदान की जावेगी ।

श्री उमाशंकर गुप्‍ता - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने बजट भाषण में कहा है, 10 जिले ऐसे हैं, जहां कन्‍या महाविद्यालय नहीं है, राजगढ़ को पिछली सरकार के समय विलय कर दिया गया था, लेकिन मैं माननीय सदस्‍य को आश्‍वस्‍त करता हूं कि हम प्राथमिकता से वहां कन्‍या महाविद्यालय खोलने का प्रयास करेंगे ।

श्री अमर सिंह यादव- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, स्‍वीकृति प्रदान की जाए और कांग्रेस की सरकार ने 28.6.2002 को कन्‍या महाविद्यालय को शासकीय महाविद्यालय में विलय किया था, इसकी सामग्री और इसका जो भवन था, उसको भी हमारे हाईस्‍कूल, डोडीशाला को आवंटित कर दिया गया । मैं माननीय मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहूंगा कि उस भवन को पुन: कन्‍या महाविद्यालय को आवंटन किया जाए और इसकी बहुत बड़ी संपत्ति है, महाविद्यालय की वहां पर सामग्री रखी हुई है, वहां पर प्रोफेसर की पोस्‍ट स्‍वीकृत की गई थी, वह भी अभी तक वापस नही की गई है ।

श्री उमाशंकर गुप्‍ता- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तत्‍कालीन सरकार ने कन्‍या पाठशाला को उपयोग के लिए अनुमति दे दी थी, मुझे ऐसा लगता है कि जब संविलियन होता है तो पोस्‍ट वहां की बची नहीं है, लेकिन कन्‍या महाविद्यालय हम शुरू करेंगे, यह मैं माननीय सदस्‍य को कह रहा हूं ।

श्री अमर सिंह यादव- माननीय मंत्री जी, बहुत बहुत धन्‍यवाद ।

 

कुलपति के विरूद्ध प्रचलित जाँच

प्रश्‍न 12. ( *क्र. 6036 ) श्री आरिफ अकील : क्या तकनीकी शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या बरकतउल्‍लाह विश्‍वविद्यालय के कुलपति श्री एम.डी. तिवारी के विरूद्ध प्रदेश में व अन्‍य प्रदेश में पदस्‍थी के दौरान गबन, वित्‍तीय अनियमितताएं व अवैध नियुक्तियों आदि की जाँच प्रचलन में हैं? यदि हाँ, तो कौन-कौन सी जांचें कब-कब से प्रचलन में हैं और कौन-कौन सी जांचों में दोषी पाये गये? पद व पदस्‍थी स्‍थान सहित वर्षवार बतावें। (ख) प्रश्‍नांश (क) (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में श्री एम.डी. तिवारी की गोपनीय चरित्रावली का अवलोकन एवं अधिनियम का पालन किए बगैर कुलपति के पद पर पदस्‍थ किए जाने के लिए कौन-कौन दोषी हैं तथा श्री तिवारी की डी.पी.सी. में किन-किन अधिकारियों द्वारा अनुसंशा की गई? उनके नाम, पद सहित बतावें

तकनीकी शिक्षा मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल में श्री एम.डी. तिवारी के कुलपति पदस्थ होने के दौरान विभिन्न अनियमितताओं की शिकायतों की जाँच हेतु कुलाधिपति सचिवालय के आदेश क्रमांक एफ-3-3/2015/रास/ यूए-1/1218 दिनांक 09.10.2015 द्वारा मान. न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) श्री ए.के. गोहिल भोपाल को जाँच अधिकारी नियुक्त किया गया, जिसके अनुसार छ: सप्ताह में जाँच प्रतिवेदन प्रस्तुत करना था। इसके पश्चात क्रमश: पत्र दिनांक 24.11.2015 द्वारा 08 सप्ताह एवं 25.01.2016 द्वारा जाँच अवधि को दिनांक 30.03.2016 तक बढ़ाया गया है। श्री तिवारी के विरूद्ध आई.आई.आई.टी. इलाहाबाद में डायरेक्टर पद पर पदस्थगी के दौरान की गई अनियमितता की शिकायत उच्च शिक्षा विभाग को प्राप्त हुई थी। जिसे पत्र क्रमांक 615/819/2015/38-3 दिनांक 15.04.2015 द्वारा नियमानुसार आगामी कार्यवाही हेतु कुलाधिपति सचिवालय को अग्रेषित की गई। जाँच कार्यवाही प्रचलित होने से शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता। (ख) म.प्र. विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 के प्रावधान अनुसार कुलाधिपति सचिवालय की अधिसूचना दिनांक 19.02.2014 द्वारा तीन सदस्यीय समिति (डी.पी.सी. नहीं) नियुक्त की गई थी, जिसके अध्यक्ष प्रो. देवस्वरूप, कुलपति राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर थे एवं सदस्य प्रो. दिनेश सिंह, कुलपति, ​दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली एवं श्री विवेक कृष्ण तन्खा, वरिष्ठ अधिवक्ता, नई दिल्ली थे। समिति द्वारा अनुशंसित पैनल में से कुलाधिपति जी ने आदेश दिनांक 25.04.2014 द्वारा श्री एम.डी. तिवारी को 04 वर्ष के लिए कुलपति नियुक्त किया।

श्री आरिफ अकील - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मध्‍यप्रदेश के शिक्षा मंत्री से भोपाल बरकतउल्‍ला विश्‍वविद्यालय की अनियमितताओं के बारे में सवाल कर रहा हूँ. मुझे यकीनन, आपके माध्‍यम से उम्‍मीद है कि जब जवाब देंगे तो उनको लगेगा कि भोपाल के लोगों का भविष्‍य बर्बाद न हो. आज शिक्षा मंत्री हो, कल हो सकता है कि आप मुख्‍यमंत्री बनें और परसों इधर आ जाओ, पर काम ऐसा करना जिससे लोगों का मान-सम्‍मान बढ़े.

मैं आपके माध्‍यम से पूछना चाहता हूँ कि भाईसाहब जिन साहब को आपने बरकतउल्‍ला विश्‍वविद्यालय का वाइस चान्‍सलर बनाया है. उससे पहले, उन्‍होंने काम कहां-कहां किया था ? उनकी अनियमितताओं की जांच तथा आपके पास उनकी गोपनीय रिपोर्ट थी, उसके बाद उसको नजरअंदाज कर, उनको वाइस चान्‍सलर क्‍यों बनाया गया ?

श्री उमाशंकर गुप्‍ता - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आरिफ भाई, अभी आप चिन्‍ता नहीं करें, आपको वहीं बैठना पड़ेगा. लेकिन मुझे बड़ा आश्‍चर्य है कि आरिफ अकील साहब जैसा छात्र नेता, जिसको सारे नियम-कायदों की जानकारी है. वह कुलपति की नियुक्ति का आरोप हम पर लगा रहे हैं. कुलपति की नियुक्ति में शासन का कोई रोल नहीं होता है. आरिफ भाई भी अच्‍छी तरह जानते हैं कि कुलपति की नियुक्ति कहां से और कैसे होती है ? कुलपति की नियुक्ति में शासन की न कोई राय, न पैनल और न ही चयन समिति में कोई सदस्‍य होता है. महामहिम को यह पॉवर हैं, राजभवन सचिवालय यह सारी कार्यवाही करता है और राज्‍यपाल किनके द्वारा नियुक्‍त हैं ? आरिफ भाई, वह भी आपको एवं पूरे मध्‍यप्रदेश को मालूम है कि वे हमारी सरकार के द्वारा नियुक्‍त नहीं किये गये हैं. कम से कम, ये आरोप मत लगाइये कि कुलपति को हमने नियुक्‍त किया है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कुलपति जी के खिलाफ हमें जो भी शिकायतें प्राप्‍त हुई हैं, मैंने उत्‍तर में भी बताया है कि हमें कोई सीधे जांच करने का पॉवर नहीं है. हमने कुलाधिपति महोदय कार्यालय को शिकायतों की जांच के लिये करीब 6 पत्र भेजे हैं. दि.15.4.15, 20.5.15, 18.6.15, 30.7.15, 14.8.15 और दि.25.8.15 हमें, जो भी शिकायतें मिली हैं, हमने जांच के लिए वहां भेजी हैं और एक उत्‍तर में, मैंने बताया है कि हमें वहां से जानकारी मिली है कि वह जांच के लिए कुलाधिपति सचिवालय के आदेश दि. 9.10.2015 द्वारा रिटायर्ड जस्टिस श्री ए.के.गोहिल साहब, भोपाल को जांच अधिकारी नियुक्‍त किया गया और जांच चल रही है. इसलिए हम अपने स्‍तर पर शिकायतों के लिए जो कर सकते थे, उसको हमने पूरी तन्‍मयता से किया है और उसमें कहीं कोई कोताही नहीं की है.

श्री आरिफ अकील - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह तो ऐसे ही हुआ कि -

''पीछे बंधे हैं हाथ और शर्त है सफर,

किससे कहें कि पैर के कांटे निकाल दे ।''

खुद जानते हैं और इनके विभाग ने अनियमितताओं की शिकायत की है और इत्‍तेफाक से उनकी और मेरी टेलीफोन लाईन कनेक्‍ट हो गई तो मुझे मालूम हो गया कि दिल्‍ली और भोपाल से किस कदर वाइस चान्‍सलर को बचाने के लिए टेलीफोन आ रहे हैं.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो गवर्नर साहब के यहां नहीं जा रहे हैं, व्‍यापम के नामी-गिरामी व्‍यक्ति के पास नहीं आ रहे हैं, इन्‍हीं के पास उनको बचाने के लिए आ रहे हैं. महामहिम जी ने 3 मर्तबा, जो जांच अधिकारी हैं, उनको एक्‍सटेंशन दिया है, एक मर्तबा 6 हफ्ते का, एक मर्तबा 4 हफ्ते का और एक मर्तबा 8 हफ्ते का. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूँ कि अगर आपका शिक्षा जगत में नाम है एवं आप बहुत ही नामी-गिरामी व्‍यक्ति हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - आप सीधे प्रश्‍न करें.

श्री आरिफ अकील - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा सीधा प्रश्‍न यह है कि जब आपके विभाग ने धारा 52 लगाने की अनुशंसा की है तो बगैर किसी डर एवं झिझक के कौन उनको बचाने में इनवाल्‍व है ? बचाना चाह रहा है. उनकी बात नहीं मानोगे तो व्‍यवस्‍था बचेगी, नहीं बचेगी. यह बात आप वहां बैठकर भी तय करें. यह बतायें कि धारा 52 लगाने में सक्षम नहीं हुए तो क्‍या इस पद से इस्‍तीफा दोगे ? या धारा 52 लगवाने का प्रयास करोगे ?

श्री उमाशंकर गुप्‍ता - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आरिफ भाई भी यह जानते हैं और साधारणत: मेरे ऊपर कोई दबाव काम नहीं करता है. आप इससे तो आश्‍वस्‍त रहिये. कोई दबाव में कार्यवाही नहीं होती. जो माननीय सदस्‍य ने कहा कि दिल्‍ली या कहीं से मेरे पास कोई एक फोन दबाव का नहीं आया. लेकिन जो प्रक्रिया है और कुलाधिपति कार्यालय की जो मर्यादाएं हैं, जो हमारी सीमाएं हैं, उनको ध्‍यान में रखते हुए हम लगातार प्रयत्‍नशील हैं कि इन शिकायतों पर तत्‍काल कार्यवाही हो और जरूरत पड़ी तो आरिफ भाई ने जो कहा है कि सरकार फिर धारा 52 लगाने में भी नहीं चूंकेगी.

श्री आरिफ अकील -- अध्यक्ष महोदय, यह धारा 52 लगाने के लिये इन्होंने मुख्यमंत्री जी को फाइल दी. मुख्यमंत्री जी के पास दबाव आया, वह वहां नहीं गई फाइल. (व्यवधान).. कृपया बैठ जायें. हमारा कभी कभी तो नंबर आता है. हम चेम्बर में जाकर व्यवस्था नहीं मांगते हैं. कृपा करें. बच्चों के भविष्य का सवाल है.

अध्यक्ष महोदय-- आरिफ जी, कृपया संक्षेप में प्रश्न पूछ लीजिये.

श्री आरिफ अकील -- अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से यह कहना चाहता हूं कि आप दबाव कभी बर्दाश्त नहीं करते , लेकिन टेलीफोन आ रहे हैं, जो प्रयास हो रहे हैं. हो सकता है कि टेलीफोन किसी और के पास आया हो. मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि आप कोशिश, प्रयास कर लीजिये अनियमितताएं हैं, वे जहां जहां रहे हैं, वहां वहां अनियमितताएं की हैं. तो क्या ऐसे आदमी को  हटाने के लिये जल्दी से जल्दी आप कार्यवाही करने का प्रयास करेंगे.

अध्यक्ष महोदय -- उन्होंने उत्तर दे दिया.

श्री उमाशंकर गुप्ता -- अध्यक्ष महोदय, यह तो मैं पहले ही कह चुका हूं.

फोरलेन मार्ग निर्माण की जाँच

13. ( *क्र. 4087 ) श्री नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रश्‍नकर्ता द्वारा दिनांक 23.01.2016 को अटेर रोड पुलिया से पुस्‍तक बाजार भिण्‍ड तक फोरलेन मार्ग का निर्माण घटिया होने के संबंध में शिकायती पत्र प्रमुख अभियंता लोक निर्माण विभाग को दिया था? यदि हाँ, तो प्रश्‍नांश दिनांक तक क्‍या कार्यवाही की गई? (ख) कार्यालय प्रमुख अभियंता लोक निर्माण विभाग भोपाल के पत्र क्रमांक 17/सी/उत्‍तर/2016/80, दिनांक 28.1.2016 मुख्‍य अभियंता लोक निर्माण ग्‍वालियर को जाँच कर प्रतिवेदन भेजने हेतु निर्देशित किया गया? यदि हाँ, तो क्‍या जाँच प्रतिवेदन प्रश्‍नांश दिनांक तक प्राप्‍त हो चुका है? (ग) प्रश्नांश (ख) में जाँच में क्‍या कमियाँ पायी गई? कमियों को दूर करने के लिए क्‍या उपाय किए गए? किस प्रयोग शाला में प्रयुक्‍त सामग्री का परीक्षण किया गया? परीक्षण रिपोर्ट क्‍या प्राप्‍त हुई? (घ) प्रश्नांश (क) में निर्माण कार्य कब तक पूर्ण हो जायेगा, वर्णित मार्ग के किनारे कितनी पट्टी सुरक्षित रखी गई है? कहाँ पर नाला निर्माण हुआ? कहाँ पर नाला निर्माण नहीं हुआ?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री सरताज सिंह ) : (क) जी हाँ। शिकायत की जाँच प्रचलित है। (ख) जी हाँ। जी नहीं। (ग) जाँच प्रचलन में है। शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता है। (घ) 31/03/2016 तक पूर्ण होने की संभावना है। वर्णित मार्ग के दोनों ओर के नालों के पश्चात् आर.ओ.डब्ल्यू. से बची हुयी भूमि सुरक्षित पट्टी के रूप में मान्य होगी। मार्ग के दाहिनी ओर चैनेज 10 मी. से 230 मी. तक (लं. 220 मी.) चैनेज 255 मी. से 570 मी. तक (315 मी.) एवं चैनेज 590 मी. से 640 मी तक (लं. 50 मी.) तथा मार्ग की बायीं ओर 10 मी. से 230 मी. तक (लं. 220 मी.) कुल लंबाई 805 मी. में नाला निर्माण कार्य हुआ है। मार्ग के शेष भाग में नाला निर्माण कार्य प्रगति पर है।

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह -- अध्यक्ष महोदय, अटेर रोड पुलिया से पुस्तक बाजार भिण्ड तक फोरलेन मार्ग का निर्माण घटिया होने के संबंध में दो महीने पहले शिकायत की थी. यह जो सड़क बनने जा रही है. एक वर्ष तक इसमें आंदोलन चला था. मुख्यमंत्री जी से लेकर मंत्री तक इस सड़क के लिये प्रयास किया गया था. इसके लिये मैं धन्यवाद देना चाहता हूं कि 7 करोड़ की सड़क बनने जा रही है. लेकिन जो विभाग का जवाब आया है. उसमें जवाब कुछ ही नहीं है. जी हां, शिकायत की जांच प्रचलित है. न तो कभी जांच हुई उसकी. एक बहुत बड़ी सड़क, जिसमें रेल्वे स्टेशन पड़ता है. हमारा निवेदन यह है कि जब तक मार्ग पूर्ण हो जायेगा, पूर्ण रुप से घटिया रोड बन जायेगी, तब जांच होगी क्या. आज तक जांच क्यों नहीं हुई.

श्री सरताज सिंह -- अध्यक्ष महोदय, विधायक जी ने स्वयं इस बात के लिये आभार व्यक्त किया है कि यह सड़क बहुत आवश्यक थी. स्वीकृत हो गई है और बन रही है. जो उसकी गुणवत्ता की जांच का सवाल है, इसमें दो प्रकार से जांच होती है. एक तो बीच बीच में हम, क्योंकि यह कांक्रीट रोड है, तो बीच बीच में हम सेम्पल्स लेते हैं और सेम्पल्स को लैब टेस्टिंग के लिये भेजते हैं. तो जो लैब टेस्टिंग की रिपोर्ट आई है, उसके हिसाब से गुणवत्ता ठीक है. लेकिन उसके बाद भी जांच की मांग की गई है और जांच के आदेश भी दिये जा चुके हैं. और उस पूरी सड़क की जांच की जायेगी.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह -- जो जांच कराई है, वह जांच रिपोर्ट कहां हैं. इसमें लगी नहीं है.

श्री सरताज सिंह -- अध्यक्ष महोदय, विधायक जी चाहें, तो जो लैब की रिपोर्ट्स हैं, वह हम इनको सबमिट कर सकते हैं.

अध्यक्ष महोदय -- आपको रिपोर्ट्स दिखा देंगे.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह -- अध्यक्ष महोदय, दो किलोमीटर में दोनों ओर नाले बन रहे हैं. नालों की स्थिति यह है कि कहीं 20 फिट का नाला बन रहा है, 30 फिट छूट गया, फिर बीच में 40 फिट का नाला बन रहा है. नाले की लेवलिंग ठीक नहीं होगी, तो शहर के बीचों बीच का नाला है. नाला एक साथ बनता है, तो अच्छा बनता है. उसकी मंत्री जी जांच करायेंगे क्या.

अध्यक्ष महोदय -- आप सीधा पूछ लें, आप क्या चाहते हैं.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह -- हमारा निवेदन यह है कि वरिष्ठ अधिकारियों से इसकी जांच कराई जाये. जांच की हम पहले से मांग कर रहे हैं. आज तक जांच नहीं हुई. काली गिट्टी डालना थी, सफेद गिट्टी डाल दी.

श्री सरताज सिंह -- अध्यक्ष महोदय, दोनों प्रकार की जांच का उल्लेख कर दिया है. पहले जो सेम्पल्स साथ साथ में लिये जाते हैं, काम चलते हुए वह लिये गये हैं और उसमें जो लैब रिपोर्ट्स आई हैं, वह हम इनको बता देंगे और दूसरा पूरी सड़क की जांच के आदेश दे दिये गये हैं. उसकी जांच भी हो जायेगी. नाले का काम चल रहा है जैसे जैसे जितनी जमीन कहीं ज्यादा उपलब्ध है, कहीं कम उपलब्ध है, समस्या आती है. शहर के बीच का मामला है. लेकिन नाले का काम भी चल रहा है और सड़क का काम भी चल रहा है. जो पूरा कर दिया जायेगा.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह -- अध्यक्ष महोदय, इसका जो मेन ठेकेदार था, उस ठेकेदार ने पेटी कांट्रेक्ट पर दूसरे ठेकेदार को ठेका दे दिया है. मेन ठेकेदार तो भाग गया. जिन शर्तों पर ठेका दिया गया, तीन प्रकार की मशीनें होती हैं. तो उन मशीनों का इसमें प्रयोग ही नहीं हुआ.

अध्यक्ष महोदय -- आप क्या चाहते हैं, आप प्रश्न पूछिये.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह-- अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यही है कि वरिष्ठ अधिकारी से जांच कराई जाये.

अध्यक्ष महोदय-- मंत्री जी ने हां कर तो दिया है. दो बार कर दिया कि जांच करवा रहे हैं.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह-- धन्यवाद.

प्रश्न क्रमांक - 14 श्री लखन पटेल (अनुपस्थित)

श्रीमती उमादेवी खटीक -- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह प्रश्न मेरी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है. आपकी अनुमति हो तो मैं एक प्रश्न पूछ लूं. मै प्रश्न क्रमांक 14 की बात कर रही हूं जो कि अनुपस्थित हैं.

अध्यक्ष महोदय--उन्होंने लिखकर के नहीं दिया है. इसलिये अनुमति नहीं है.

 

जय किसान .org द्वारा वित्‍तीय अनियमितता

15. ( *क्र. 2778 ) श्री सुखेन्‍द्र सिंह : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या जय किसान .org ने प्रदेश सरकार से अनुमति लेकर बैंक की समस्‍त सुविधाएं मुहैया कराने हेतु बैकिंग सिस्‍टम लागू करने का कार्य किया है? (ख) यदि हाँ, तो प्रदेश के किन-किन जिलों में यह कार्य किया गया है? विवरण सहित बतावें। (ग) क्‍या जय किसान .org द्वारा छल पूर्वक आम लोगों एवं इस कंपनी में कार्यरत लोगों से ठगी गई राशि को ऐंठ कर लापता हुए संस्‍थान के मालिक को गिरफ्तार कर ठगी गई राशि को वसूलकर संबंधित हितग्र‍ाहियों को प्रदान की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक समय-सीमा बतावें एवं यदि नहीं, तो क्‍यों?

वन मंत्री (डॉ. गौरीशंकर शेजवार) --(क) जी नहीं.(ख) प्रश्नांश "" के आलोक में प्रश्न उपस्थित नहीं होता. (ग) जय किसान org. द्वारा छलपूर्वक ठगी के संबंध में कोई प्रकरण प्रकाश में नहीं है. अत: प्रश्न उपस्थित नहीं होता.

श्री सुखेन्द्र सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने वन मंत्री जी से पूछा है कि जय किसान org. मध्यप्रदेश सरकार से अनुमति लेकर के बैंक की समस्त सुविधायें मुहैया कराने हेतु बैंकिंग सिस्टम लागू करने का कार्य किया है. मंत्री जी ने सीधे सीधे जवाब दिया है कि जी नहीं. जबकि यह जानकारी पूर्णतया असत्य है और सदन को पूरी तरह से गुमराह किया जा रहा है. मेरे पास रिकार्ड. रजित आर ओखंडकर,सीईओ, लघु वनोपज संघ के अधिकारी और संजीव शर्मा के बीच में यह कान्ट्रेक्ट हुआ है . मेरे पास में इसकी प्रति है. अध्यक्ष जी आप कहें तो मैं इस कान्ट्रेक्ट की प्रति पटल पर रखने को तैयार हूं.

(वन मंत्री द्वारा एक माननीय सदस्य से बैठे बैठे बात करने पर )

अध्यक्ष महोदय-- माननीय वन मंत्री जी आपका प्रश्न हैं. (वन मंत्री द्वारा चर्चा में व्यस्त रहने पर ) माननीय वन मंत्री जी , ध्यान दें आपका प्रश्न है.

श्री सुखेन्द्र सिंह -- माननीय वन मंत्री जी इस मुद्दे पर कुछ बोलना नहीं चाहते हैं.

अध्यक्ष महोदय-- मैंने खुद उनका ध्यान दिलाया है न. आप सीधे प्रश्न पूछ लें.

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, आप उनको हिदायत दें.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार --साहब में यह नहीं कह रहा हूं कि माननीय विधायक मेरे पास में आ गये थे, आप प्रश्न पूछें मैं जवाब दूंगा.

श्री सुखेन्द्र सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, हमने पूछा कि जय किसान org..

अध्यक्ष महोदय--वह तो प्रश्न में लिखा हुआ है.

श्री सुखेन्द्र सिंह -- मंत्री जी ने सीधे सीधे कह दिया कि इसकी हमको कोई जानकारी नहीं है जबकि जो एग्रीमेंट हुआ है उसकी प्रति मेरे पास में है .

डॉ.गौरीशंकर शेजवार-- संशोधित उत्तर मैंने दिया है. वह सदस्य को मिल गया है क्या? (श्री सुखेन्द्र सिंह , सदस्य द्वारा वह मुझे मिल गया है कहने पर) तो आपने कहा कि जानकारी एकत्रित की जा रही है तो प्रश्नोत्तरी में तो यह था. लेकिन संशोधित उत्तर हमने दिया है.

अध्यक्ष महोदय--मंत्री जी संशोधित उत्तर माननीय सदस्य को मिल गया है.उसी आधार पर वह प्रश्न कर रहे हैं.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार -- तो संशोधित उत्तर के हिसाब से आप पूछ लीजिये.

अध्यक्ष महोदय-- उसी में से सदस्य पूछ रहे हैं.

श्री सुखेन्द्र सिंह --मंत्री जी एग्रीमेंट हुआ कि नहीं हुआ इसका जवाब तो आप देंगे.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार -- संशोधित उत्तर में "जी नहीं" लिखा है.

अध्यक्ष महोदय-- अब प्रश्न करें आप.

श्री सुखेन्द्र सिंह --अध्यक्ष जी, मेरे पास में एग्रीमेंट की प्रति है, अध्यक्ष जी आप कहें तो इसको हम पटल पर रख दें(एग्रीमेंट की प्रति हाथ में लहराते हुये) मेरे पास में इसकी प्रति है. एग्रीमेंट हुआ है, इसीलिये कह रहा हूं कि असत्य जानकारी सदन में दी है. इसके बाद मेरा दूसरा प्रश्न है कि यदि हां तो किन किन जिलों में कार्य किया गया. कुल 37 जिलों में यह कार्य किया गया है . मेरे पास में यह जानकारी है लेकिन माननीय मंत्री जी इसके बारे में कह रहे हैं कि कोई जानकारी नही है.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार -- माननीय अध्यक्ष महोदय, पहले प्रश्न पूछा गया था कि क्या जय किसान org. ने प्रदेश सरकार से अनुमति लेकर के बैंक की समस्त सुविधायें मुहैया कराने हेतु बैंकिंग सिस्टम लागू करने का कार्य किया है . हमने कहा कि जी नहीं. इसके बाद इन्होंने दूसरा प्रश्न पूछा था कि क्या सरकार की अनुमति लेकर बैंक ..

अध्यक्ष महोदय-- वह तो आ गया है. वह तो लिखा है इसमें.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार--यदि हां तो प्रदेश में .. अध्यक्ष महोदय हां है नहीं तो प्रश्न उपस्थित नही होता. और यह जो हमने जानकारी दी है यह सही दी है.

श्री सुखेन्द्र सिंह -- मंत्री जी आपने सीधे सीधे असत्य जानकारी दी है. आप नहीं कह रहे हैं, मेरे पास में एग्रीमेंट की प्रति है.

अध्यक्ष महोदय-- प्रश्न क्रमांक 16......

श्री सुखेन्द्र सिंह -- अध्यक्ष महोदय, तीसरा प्रश्न मेरा यह है कि जय किसान org. द्वारा छलपूर्वक आम लोगों को इस कंपनी में कार्यरत लोगों में गबन की गई राशि को ऐंठकर लापता हुई संस्था ने मालिक को गिरफ्तार करने और वसूली के संबंध में हितग्राहियों को..अध्यक्ष महोदय इसमें हितग्राहियों के साथ में न्याय नहीं हुआ है, यह बहुत बड़ा व्यापम जैसा घोटाला है. इस पर सरे आम युवाओं के साथ में अन्याय हुआ है और मंत्री जी इस पर कुछ बोल नहीं रहे हैं.

श्री बाला बच्चन -- अध्यक्ष महोदय, यह क्या है. माननीय सदस्य का प्रश्न चल रहा है.अलग से माननीय सदस्य और मंत्री जी 16 नंबर पर चर्चा कर रहे हैं. प्रश्न 15 का उत्तर आ नहीं पा रहा है. माननीय मंत्री जी जान बूझकर के प्रश्न को टाल रहे हैं .हम इसकी निंदा करते हैं. एक तो मंत्री जी जान बूझकर के समय को टालते हैं. आपको मंत्री जी से उत्तर दिलवाना चाहिये.

श्री सुखेन्द्र सिंह-- अध्यक्ष महोदय, टोटल गबन का मामला है . इसकी जांच करायें.

श्री बाला बच्चन -- स्पेसिफिक प्रश्न है और माननीय मंत्री जी उत्तर से बचना चाहते हैं और अध्यक्ष महोदय आपको उत्तर दिलवाना चाहिये, इसकी जांच कराना चाहिये.

अध्यक्ष महोदय‑ कृपया बैठ तो जायें.

श्री सुखेन्द्र सिंह -- अध्यक्ष महोदय, इस पूरे प्रकरण की माननीय मंत्री जी को जांच करानी चाहिये.

अध्यक्ष महोदय-- अब उत्तर ही नहीं सुनना चाहते हैं.

डॉ.गौरींशंकर शेजवार -- माननीय अध्यक्ष महोदय, 1 मिनट चाहूंगा मैं. वन विभाग से आपने प्रश्न पूछा और अन्य विभागों से भी हमने जानकारी मंगाई. विभागों के द्वारा जो जानकारी हमको प्राप्त हुई और हमारे विभाग की जानकारी प्राप्त हुई उसके हिसाब से हमने संशोधित उत्तर आपके सामने दिया . अब अध्यक्ष महोदय जो निर्देशित करेंगे हमें कोई तकलीफ नहीं है. आप निर्देशित कर दीजिये जांच का तो हम जांच करवा लेंगे.

अध्यक्ष महोदय--(श्री सुखेन्द्र सिंह द्वारा बैठे बैठे कुछ कहने पर) आप बैठे बैठे हाथ हिला रहे हो, आप बात ही नहीं सुनेंगे और हाथ हिलायेंगे तो क्या पता चलेगा.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार-- देखिये जांच की शिकायत कोई नहीं है, माननीय विधायक द्वारा कहीं कोई जांच की शिकायत नहीं है.आप हमको शिकायत कर दीजिये हम उसकी जांच करवा लेंगे

अध्यक्ष महोदय--माननीय मंत्री जी आप बैठ जाईये. माननीय मंत्री जी कृपया बैठ जायें.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार -- शिकायत कर दीजिये आप.

अध्यक्ष महोदय-- माननीय सदस्य, आपने जो प्रश्न पूछा उसका उत्तर तो इसमें आ गया है. मेरी बात को ध्यान से सुन लेना. किंतु उसमें यदि आपको कोई संदेह है तो आप कृपा करके उसको लिखकर के दे दें . माननीय मंत्री जी उसकी जांच भी करा लेंगे और आपको जानकारी भी दे देंगे.

श्री बाला बच्चन -- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपको धन्यवाद.

 

प्रश्‍न क्रमांक 16

गबन के दोषियों पर कार्यवाही

16. ( *क्र. 6390 ) श्री दिलीप सिंह परिहार : क्या तकनीकी शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या संयुक्‍त विभागीय जाँच का निर्णय केवल ऐसे मामलों में ही लिया जाता है, जिसमें बहुत से शासकीय अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ सांठगांठ का आरोप हो और एक प्रतिवादी अपना उत्‍तरदायित्‍व दूसरे प्रतिवादियों पर डालने का प्रयत्‍न न करे? (ख) यदि हाँ, तो स्‍वामी विवेकानंद शासकीय स्‍नातकोत्‍तर महाविद्यालय नीमच में गत वर्ष 48 लाख के गबन के आरोप में संबद्ध अधिकारियों/कर्मचारियों के विरूद्ध म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 18 के तहत संयुक्‍त विभागीय जाँच क्‍यों नहीं की जा रही है? (ग) क्‍या शासन वर्तमान में संचालित विभागीय जाँच प्रक्रिया नियम-14 को निरस्‍त कर नियम 18 के तहत संयुक्‍त विभागीय जाँच आदेशित करेगा? यदि नहीं, तो क्‍यों? (घ) क्‍या प्रश्नांश (ख) में उल्‍लेखित की गई राशि की वसूली संबंधितों की संपत्ति अधिग्रहित कर की जाएगी? यदि हाँ, तो तत्‍संबंधी ब्‍यौरा दें? (ड.) क्‍या शासन इस गबन के मामले की विस्‍तृत जाँच आर्थिक अपराध अन्‍वेषण ब्‍यूरों के माध्‍यम से कराएगा? यदि नहीं, तो क्‍यों?

तकनीकी शिक्षा मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जी हाँ। (ख) जी नहीं, नियमानुसार म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 14 के अतंर्गत विभागीय जाँच कराई जा रही है, जिसमें जाँचकर्ता एवं प्रस्तुतकर्ता अधिकारी की नियुक्ति की जा चुकी है। (ग) जी नहीं। विभागीय जाँच नियमानुसार की जा रही है। (घ) जाँच प्रतिवेदन प्राप्त होने पर उसके निष्कर्षों के अनुसार गुण-दोष पर नियमानुसार कार्यवाही की जावेगी। (ड.) जी नहीं। विभागीय जाँच में दोषी पाये जाने पर नियमानुसार कार्यवाही की जावेगी।

 

श्री दिलीप सिंह परिहार-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, स्‍वामी विवेकानंद कॉलेज में दोषियों के ऊपर कार्यवाही का मामला है, बहुत गंभीर मामला है जहां मैंने विद्या अध्‍ययन की है, इस गबन की उच्‍च अधिकारी से म.प्र. नियम 1966 में नियम 18 के तहत संयुक्‍त विभागीय जांच करा ली जायेगी माननीय मंत्री जी.

उच्‍च शिक्षा मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्‍ता)-- इसमें 4 लोग दोषी है, 3 की जांच पूरी हो गई है और उनके खिलाफ एफआईआर हो गई, गिरफ्तारी हो गई, आरोप पत्र जारी कर दिये गये हैं, चारों पर कार्यवाही हो रही है.

अध्‍यक्ष महोदय-- प्रश्‍न काल समाप्‍त.

 

 

 

 

 

 

प्रश्‍नकाल समाप्‍त

 

 

 

 

 

 

 

 

नियम 267-क के अधीन विषय

अध्‍यक्ष महोदय-- शून्‍यकाल, पहले बैठ तो जाओ मुझे यह पढ़ लेने दो. निम्‍नलिखित माननीय सदस्‍यों की सूचनायें सदन में पढ़ी हुई मानी जायेंगी-

1. श्री सुखेन्‍द्र सिंह

2. श्री घनश्‍याम पिरौनिया

3. श्री नारायण सिंह पंवार

4. श्री दुर्गालाल विजय

5. श्री प्रदीप अग्रवाल

6. श्री सुरेन्‍द्र सिंह हनी बघेल

7. श्री संजय उइके

8. श्री गोविंद सिंह पटेल

9. कुंवर विक्रम सिंह

10. श्री यशपाल सिंह सिसौदिया

अध्‍यक्ष महोदय-- बैठ जाइये, पहले बाला बच्‍चन जी, बैठ जाइये.

 

शून्‍यकाल में उल्‍लेख

1. श्री बाला बच्‍चन-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने शुक्रवार को स्‍थगन दिया है, मैं यह चाहता हूं कि मेरे उस स्‍थगन पर चर्चा हो, सरकार उसका जवाब दे, जो कर्मचारी हड़ताल पर हैं पूरे मध्‍यप्रदेश में, उस संबंध में मैंने दिया है माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा यह आग्रह है कि पंचायत सचिव है, रोजगार सहायक हैं, संविदा स्‍वास्‍थ्‍य कर्मचारी हैं, इसके अलावा अन्‍य कर्मचारी हैं, आप कृपा करके इस पर चर्चा करवायें और सरकार से जवाब मंगवायें और कर्मचारी काम से लग सकें और प्रदेश की सेवाओं के लिये उनका सहयोग मिलता रहे, पहले उनकी बात को मानी जायें इसके संबंध में मैंने स्‍थगन दिया है माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उस पर चर्चा करायें आप यह मेरा आपसे आग्रह है.

अध्‍यक्ष महोदय-- माननीय प्रतिपक्ष के नेता जी उसकी जानकारी मंगवाई है और जानकारी उपलब्‍ध होने के बाद में उसका निर्णय करेंगे.

2. श्री जितू पटवारी-- अध्‍यक्ष जी, इंदौर में एक बहुत महत्‍वपूर्ण करीब 100 सालों से पुराने मकानों के अतिक्रमण तोड़े जा रहे हैं और इंदौर मास्‍टर प्‍लान के अंतर्गत जितने भी नियम होते हैं उसकी भी अवहेलना की जा रही है, इंदौर नगर निगम की हडधर्मिता के कारण वहां 100-100 साल पुराने रोजगार और रहने वाले लोगों के साथ अन्‍याय हो रहा है, मेरा आपके माध्‍यम से सरकार से अनुरोध है कि उसमें हस्‍तक्षेप करके 100 साल पुराने मकानों को तोड़ने के बाद उनको कम से कम मुआवजा मिले ऐसी व्‍यवस्‍था कराने की कृपा करें और मैंने इस पर ध्‍यानाकर्षण दिया है तो कृपा करके इसको ग्राह्य करने की कृपा करें.

श्री निशंक कुमार जैन-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसे तैसे हमने पीडब्‍ल्‍यूडी मंत्री जी को सेट किया अब वह चले ही गये.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप कह दीजिये, क्‍या कह रहे हैं आप.

श्री निशंक कुमार जैन-- अब माननीय मंत्री जी आयेंगे त‍ब बात कर लूंगा अध्‍यक्ष महोदय, तब निवेदन कर लूंगा मैं, हमारे स्‍कूलों की सड़क का मामला था ...

अध्‍यक्ष महोदय-- कल बोल दीजिये आप. श्री हर्ष यादव.

3. श्री हर्ष यादव-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 10वीं और 12वीं की परीक्षायें चल रही हैं, जो प्राइवेट परीक्षार्थी हैं मध्‍यप्रदेश सरकार के एक आदेश के द्वारा जो अखबार में भी आया है जितने प्राइवेट परीक्षार्थियों के केन्‍द्र हैं उनको अति संवेदनशील परीक्षा केन्‍द्रों में परिवर्तित कर दिया गया है, इससे छात्र मानसिक दवाब में हैं, मानसिक प्रताड़ना झेल रहे हैं, आप समझ सकते हैं कि अति संवेदनशील जो परीक्षा केन्‍द्र होते हैं उनमें पुलिस बल भी रहता है, परीक्षक भी रहते हैं, वैसे ही तो लोग आत्‍महत्‍या कर रहे हैं, सरकार इस पर विचार करेगी क्‍या, मेरा इसमें निवेदन है.

श्री आरिफ अकील(भोपाल-उत्तर)--अध्यक्ष महोदय,मैंने एक ध्यानाकर्षण दिया है. सरकार पुरातत्व विभाग की एक इमारत को बेच दिया है. मैं आपसे एक अनुरोध करना चाहता हूं कि हम ध्यानाकर्षण की सूची बड़े शौक से देखते हैं कि शायद हमारा नाम उसमें आ जाये लेकिन समझ में नहीं आता ऐसे ऐसे मुद्दों पर ध्यानाकर्षण रखते हैं हम चेम्बर में आने वाले नहीं तो क्या हमारा ध्यानाकर्षण नहीं आयेगा. उसको देख लीजिए अगर योग्य हो तो मेहरबानी करके बगैर चेम्बर में आये उसको कंसीडर कर लीजिए.

अध्यक्ष महोदय-- आपका ध्यानाकर्षण तो शुरु में ही ले लिया था.

पं. रमेश दुबे(चौरई)--अध्यक्ष महोदय,मैंने 10 तारीख को एक ध्यानाकर्षण दिया है. मेरे विधानसभा क्षेत्र के माचामोर डेम में नाला क्लोजर के समय जयराम मजदूर को रोलर से प्रेस कर दिया गया जिससे उसकी दर्दनाक मृत्यु हो गई. जिससे पूरे क्षेत्र में बहुत जनआक्रोश है. वहां 2 दिन से लगातार काम बंद है. मैंने इस संबंध में ध्यानाकर्षण दिया है. आपसे उसको लेने का आग्रह है.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री(श्री गोपाल भार्गव)--अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य श्री आरिफ अकीलजी ने अभी जो बात कही है कि चेम्बर में ही आने से ध्यानाकर्षण स्वीकृत होते हैं नहीं होते हैं. हम यहां पर जो बात कहते हैं उसी आधार पर आप स्वीकार कर लिया करें अध्यक्षजी, मैं यह मानकर चलता हूं कि यह आपके और विधानसभा सचिवालय के ऊपर आक्षेप है.

अध्यक्ष महोदय--उन्होंने सद्भावना पूर्वक कहा है.

श्री गोपाल भार्गव-- इस तरह की बात नहीं होना चाहिए.

अध्यक्ष महोदय--वह हमेशा सद्भावना रखते हैं. ऐसी कोई बात नहीं है.

श्री कैलाश चावला(मनासा)--अध्यक्ष महोदय, पिछले खरीफ की राहत राशि दी जा रही है. उसमें पुजारियों को राहत राशि न देते हुए, कलेक्टर के खाते में वह राशि जमा हो रही है. जिससे पुजारियों में असंतोष है. इस बारे में मैंने एक ध्यानाकर्षण दिया है. कृपया उसको स्वीकार करें.

श्री रामनिवास रावत(विजयपुर)--अध्यक्ष महोदय, प्रदेश के आदिवासी जिले झाबुआ, अलीराजपुर और बड़वानी में प्रदेश की सरकार ने राज्य स्वास्थ्य सोसायटी ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं एक निजी फाऊंडेशन दीपक फाऊंडेशन जो गुजरात का फाऊंडेशन है उसको ठेके पर दे दिया. उससे अनुबंध कर लिया, एमओयू कर लिया. प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पूरी तरह से बिगड़ी हुई है. प्रदेश सरकार का पूरा इन्फ्रास्ट्रक्चर उसको किन शर्तों पर, किन नियमों पर दिया है यह बतायें. आदिवासी क्षेत्र के गरीब जो बेचारे बोल नहीं सकते, देख नहीं सकते उनको सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की आवश्यकता है. अगर सरकार को देना थी भोपाल की दे देते. यह बहुत महत्वपूर्ण मामला है. इससे कल्याणकारी राज्य की भावना समाप्त हो जाती है. इसके लिए हमने स्थगन दिया है.

अध्यक्ष महोदय--आपकी बात आ गई.

श्री रामनिवास रावत--बात तो आ गई. बात आने से थोड़ी ना कुछ होता है.

अध्यक्ष महोदय-- शून्य काल में तो बात ही आती है.

श्री रामनिवास रावत-- अभी स्वास्थ्य व्यवस्था को बेचेंगे फिर शिक्षा को बेचेंगे, सबको बेच देंगे.

अध्यक्ष महोदय-- शून्य काल में बात ही आती है, उत्तर नहीं आता. आप वरिष्ठ सदस्य हैं,

श्री रामनिवास रावत--मेरा आपसे अनुरोध है कि इस महत्वपूर्ण विषय को आप स्थगन के माध्यम से या ध्यानाकर्षण के माध्यम से या किसी न किसी तरह से विधानसभा की समाप्ति से पूर्व इस पर चर्चा कराने की मेरी विनम्र प्रार्थना है.

अध्यक्ष महोदय, दूसरा कल आपने ओलावृष्टि का ध्यानाकर्षण लिया था. उसके लिए हम आपके आभारी हैं लेकिन कल पुनः कुछ जिलों में भारी ओलावृष्टि हुई है कि सड़कों पर गाड़ियां नहीं चल पायी.बड़ी विडम्बना है. यह ओलावृष्टि के मामले में सरकार को थोड़ा चेता दें.

श्री कमलेश्वर पटेल(सिहावल)--अध्यक्ष महोदय, हमारे सिहावल विधानसभा क्षेत्र के ग्राम चितवरिया, ग्राम महुआ में बाणसागर की नहर फूट जाने से किसानों की फसल का काफी नुकसान हो गया है. पूरा पानी भर गया. एक तरफ प्राकृतिक आपदा और दूसरी तरफ यह घटना हो गई. अध्यक्षजी, आये दिन इस तरह की घटनाएं घटित होती रहती हैं. कई गांवों में पूर्व में भी इस तरह से फसल का नुकसान हुआ है. मेरा निवेदन है कि जिन किसानों की फसल का नुकसान हुआ है,उनका सर्वे कराकर, उनको लाभ दिलायें.

श्री दिनेश राय (सिवनी) - अध्यक्ष महोदय, हमारे जिले में स्वास्थ्य से संबंधित पूरी व्यवस्था लड़खड़ा गई है. मेरा निवेदन है कि स्वास्थ्य कर्मचारी चाहे वे संविदा के हों, या जो भी हैं उनकी बातों को माने और समस्या हल करें. हमारे क्षेत्र में आज की तारीख में कोई भी अस्पताल में कोई भी प्रकार की सुविधाएं नहीं हैं. दिनोंदिन लोग प्राइवेट अस्पताल में जा रहे हैं. दूसरा, अभी ओला पुनः गिरा है, जिसके कारण से मैं कल नहीं आ पाया, उस पर भी ध्यान देने की कृपा करें. हमारे यहां पर फोर लेन में आदमी ज्यादा खत्म हो रहे हैं, जानवर कम खत्म हो रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय - एक बार में एक विषय, आपने तीन विषय कर दिये.

श्री दिनेश राय - अध्यक्ष महोदय, मैं चाहता हूं कि तीनों शून्यकाल पर शासन का जवाब आए.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

समय 12.11 बजे पत्रों का पटल पर रखा जाना

 

मध्यप्रदेश स्टेट इंडस्ट्रियल डेव्हलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड का 47 वां वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखा वर्ष 2012-13

 

उद्योग एवं रोजगार मंत्री (श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया) - अध्यक्ष

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

समय 12.12 बजे ध्यान आकर्षण

 

(1) होशंगाबाद में फर्जी सहकारी संस्था पर विभाग द्वारा कार्यवाही न किया जाना

 

डॉ. रामकिशोर दोगने (हरदा) - अध्यक्ष महोदय, मेरी ध्यान आकर्षण सूचना का विषय इस प्रकार है -

 

 

 

 

 

सहकारिता मंत्री (श्री गोपाल भार्गव) - अध्यक्ष महोदय,

 

 

समय 12.14 बजे {सभापति महोदय (श्री केदारनाथ शुक्ल) पीठासीन हुए.}

 

सभापति महोदय,

 

 


 

डॉ. रामकिशोर दोगने -- माननीय सभापति महोदय,10 तारीख को भी एक प्रश्न सोसायटियों के संबंध में था 5355 नंबर पर था. उसमें भी आपराधिक प्रकरण के आदेश हो गये हैं. लेकिन आ ज तक आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध नहीं हुए हैं. उसमें भी सिर्फ नोटिस दिया जा रहा है या उनको सूचित किया जा रहा है उनको कारण बताओ नोटिस दिये जा रहे हैं तो मेरा मंत्री जी से अनुरोध है कि ऐसी जैविक संस्थाओं के विरूद्ध तत्काल परिसमापन की कार्यवाही करना चाहिए जिससे दूसरी संस्थाएं खड़ी न हों, इसके साथ में ऐसे संचालक मंडल को भंग करके इनके विरूद्ध आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध करना चाहिए, जो संस्था 17000 का लेनदेन कर रही हो और वह एक बैंक में डायरेक्टर बनकर बैठा हुआ हो, वह बैंक में भ्रष्टाचार कर रहा हो, खाद सप्लाई कर रहा हो, दवाई सप्लाई कर रहा हो. मेरा प्रश्न यह है सभापति महोदय कि ऐसी संस्था का परिसमापन कितनी जल्दी कर देंगे मुझे समय सीमा बतायें. ऐसी संस्थाओं में जो फर्जी लोग बैठे हुए हैं क्या कार्यवाही कर रहे हैं क्या आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध कर रहे हैं या नहीं स्थिति स्पष्ट करें.

श्री गोपाल भार्गव -- सभापति महोदय जैसा कि उत्तर में स्पष्ट किया है कि प्रथम दृष्टया यह संस्था हमें काम चलाऊ या फर्जी समझ में आ रही है. इसका विधिवत आडिट और इसका पर्यवेक्षण जिन अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है, किया गया है, उनका भी हमें प्रथम दृष्टया दोष प्रतीत होता है. इसलिए उनको नोटिस दिया गया है. उनके विरूद्ध कार्यवाही शीघ्रातिशीघ्र शुरू कर दी जायेगी. जहां तक संस्था के फर्जी होने का सवाल है जांच के उपरांत हम 15 दिन के अंदर ताकि किसी प्रकार का स्थगन आदेश किसी न्यायालय से उसको नहीं मिले, विधिसम्मत कार्यवाही करके संचालक मंडल के लिए उसके विरूद्ध भी कार्यवाही करेंगे.

डॉ रामकिशोर दोगने -- आप आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध करेंगे ऐसे संस्था के संचालकों के विरूद्ध, क्योंकि यह बहुति बड़ा मामला है और पूरे मध्यप्रदेश में यह चल रहा है. तो क्या ऐसी संस्थाओं के विरूद्ध आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध करेंगे.

श्री गोपाल भार्गव -- सभापति महोदय जैसे ही रिपोर्ट आयेगी उसके विरूद्ध जो भी धारा बनेगी और जो भी दोष सिद्ध होगा. उसके ऊपर दोष सिद्ध करके कार्यवाही की जायेगी.

सभापति महोदय -- धन्‍यवाद करिए, आपकी बात आ गई, आपकी मांग पूरी हो गई.

डॉ. रामकिशोर दोगने -- माननीय सभापति जी, पूर्व में भी हुआ है, पिछले सत्र में भी मैंने प्रश्‍न लगाया था उसमें उनको सस्‍पेंड कर दिया गया था और सत्र जैसे ही खत्‍म हुआ वैसे ही उनको बहाल कर दिया गया था. एक और प्रश्‍न हरदा का था तो ऐसी प्रक्रिया अगर करना है कि जब तक विधान सभा चले तब तक के लिए सस्‍पेंड कर दिया फिर बाद में वापस ले लिया. ऐसी प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए बल्‍कि स्‍पष्‍ट प्रक्रिया होनी चाहिए.

सभापति महोदय -- आपके मामले में आपको स्‍पष्‍ट आश्‍वासन मिल रहा है अब आप क्‍यों बात कर रहे हैं. अब दूसरों का ध्‍यान आकर्षण आने दें.

डॉ. रामकिशोर दोगने -- मैं यह पूछना चाहता हूँ कि क्‍या संचालक मण्‍डल के खिलाफ आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध होगा ?

श्री गोपाल भार्गव -- माननीय सभापति महोदय, जैसा मैंने कहा दोष यदि प्रमाणित होता है तो 15 दिवस के अंदर हम जांच कराके उसके विरुद्ध आपराधिक मामला भी बनाएंगे और संचालक मण्‍डल के विरुद्ध भी कार्यवाही करेंगे.

डॉ. रामकिशोर दोगने -- एक छोटा सा प्रश्‍न और, सहकारी बैंक में वह डॉयरेक्‍टर बना बैठा है तो क्‍या उसे उससे भी पृथक करेंगे ?

श्री गोपाल भार्गव -- सभापति महोदय, जैसा मैंने कहा इस तरह से यदि हम कमिटमेंट करेंगे, अभी न्‍यायालय में कोई जाएगा और स्‍टे ले आएगा, तो विधि-सम्‍मत कार्यवाही करेंगे ताकि किसी प्रकार की उसको रिलीफ न मिले, कार्यवाही हम सुनिश्‍चित करेंगे. मैंने स्‍वीकार किया है प्रथम दृष्‍टया इसमें कि वह संस्‍था हमें बहुत प्रामाणिक नहीं लग रही है उसमें जो ऋण लिया गया है और उसका जो कारोबार है वह भी बहुत ज्‍यादा पारदर्शी नहीं है. बहुत ज्‍यादा खरीद-फरोख्‍त का या किसी रजिस्‍ट्रेशन का या फूड प्रोसेसिंग का वह कार्य करता है उसके रजिस्‍ट्रेशन का कहीं कोई प्रमाण नहीं है, इस कारण से वह तो प्रथम दृष्‍टया लग ही रहा है लेकिन सप्रमाण इसके साथ हम पुलिस थाने में रिपोर्ट कराएंगे और एफआईआर कराएंगे.

डॉ. रामकिशोर दोगने -- धन्‍यवाद मंत्री जी.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

2. जबलपुर स्‍थित पुरूषार्थ को-ऑपरेटिव सोसायटी द्वारा सदस्‍यों के साथ धोखाधड़ी किया जाना

डॉ. कैलाश जाटव (गोटेगांव) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

 

सहकारिता मंत्री (श्री गोपाल भार्गव) -- माननीय सभापति महोदय,

 

 

 

श्री तरुण भनोत-- सभापति महोदय, इसी से संबंधित इसमें मेरा प्रश्न भी लगा है. मेरा सिर्फ आपसे एक निवेदन है, इसमें सबसे बड़ी जो गलती हुई है वह यह हुई है..

सभापति महोदय-- जब आपका प्रश्न आयेगा, तब कर लीजिएगा. ऐसा नियम नहीं है. डॉ. कैलाश जाटव जी अपना प्रश्न करें.

डॉ. कैलाश जाटव- माननीय सभापति जी, माननीय मंत्री जी जो जवाब आपके पास आया है, उसमें एसडीएम, तहसीलदार और आर.आई. इनकी मिलीभगत से 64 नम्बर के प्लाट की रजिस्ट्री, जिसके मकान की 64 नम्बर की रजिस्ट्री हुई है उनको 65 नम्बर खसरे पर मकान बनवा दिये गये हैं. आप चाहें तो मैं सदन के पटल पर उसकी सूची रख सकता हूँ. आपके पास में यह जानकारी पूरी गलत आयी है और जहां तक हाउसिंग बोर्ड की जमीन सरेण्डर करने का सवाल है. हाऊसिंग बोर्ड ने कभी सरेण्डर किया ही नहीं है और जो जमीन पर हाऊसिंग बोर्ड ने जो गरीबों के लिए बनाये थे, वह वहीं पर यथावत बन हुए हैं.

सभापति महोदय-- डॉ. साहब आप अपना प्रश्न कर लीजिए.

डॉ. कैलाश जाटव-- माननीय सभापति जी, 65 नम्बर पर जो मकान बने हुए हैं वह उनकी पूरी रजिस्ट्रियां 64 नम्बर की हैं और पुरुषार्थ सोसायटी द्वारा जो हमारे नगर निगम क्षेत्र में आने वाला जो नाला है, उस नाले के ऊपर भी प्लाट बेच दिये गये हैं. मैं सिर्फ माननीय मंत्री महोदय से यह पूछना चाहता हूँ कि 64 नम्बर में जितना उन्होंने जमीन आवंटन किया था, जो उनका ले आउट प्लान जैसा आप बता रहे हैं, उस ले आउट प्लान के आधार पर क्या सोसायटी की प्लाटिंग की गयी है और अगर नहीं की गयी है तो फिर 65 नम्बर में मकान कहां से बना दिये गये और 64 नम्बर की रजिस्ट्रियों के मकान 65 नम्बर पर अगर बनाये गये हैं तो उनकी क्या माननीय मंत्री महोदय जांच करायेंगे क्योंकि मेरे पास जिस तरीके की सूची है वहां पर जिनके मकान बनाये गये हैं उन सब के मकानों की रजिस्ट्रियां 64 नम्बर खसरे की हैं और मकान 65 नम्बर पर बनाये गये हैं, यह माननीय मंत्री महोदय अगर थोड़ा बता देंगे तो बड़ी कृपा होगी?

श्री गोपाल भार्गव-- माननीय सभापति जी, बहुत पुरानी संस्था है, 1953 में इसका पंजीयन हुआ था. इसके बाद में लगातार यह डिस्प्यूट चल रहे हैं. इसमें सेशन कोर्ट का भी, हाईकोर्ट का भी इन सभी के न्यायालय जो है, जो इन्होंने अदब पैरवी में खारिज कर दिये थे. अब विषय यह है कि यदि तहसीलदार ने बाद में इऩ्हीं मामलों में संज्ञान लेकर के इसके पक्ष में निर्णय लिया है जो यह संस्था है मेसर्स परफेक्ट स्टोन वेयर पाईपस कंपनी लिमिटेड. सभापति जी, हाईकोर्ट से, सेशन कोर्ट से, जब इसी संबंध में आदेश हो गए हैं. इसके बाद तहसीलदार ने संज्ञान लेकर और इसमें इस तरह का आदेश किया है कि नहीं ये भूमि उनकी नहीं है. इसके बाद में अब उसकी अपील एस डी एम के कोर्ट में चल रही है. सभापति जी, मेरा आग्रह है कि इनके पास जो भी रिकार्ड उपलब्ध हो वे हमें दे दें. मैं परीक्षण करवा लूँगा और यदि वास्तव में इस प्रकार की कोई बात पाई जाएगी तो हम कार्यवाही भी कर देंगे.

श्री तरूण भनोत-- सभापति महोदय, इसमें मेरा एक पूरक प्रश्न बहुत जरूरी है.

सभापति महोदय-- इसमें पूरक प्रश्न नहीं होता. यह प्रश्नकाल नहीं है. ध्यानाकर्षण है, जिसका ध्यानाकर्षण है केवल वही प्रश्न करेगा...(व्यवधान)..ऐसा नहीं होता. ध्यानाकर्षण में पूरक प्रश्न का प्रावधान नहीं है. जाटव जी, आप प्रश्न करिए...(व्यवधान)..

डॉ.कैलाश जाटव-- माननीय मंत्री महोदय जी, मेरा आप से सिर्फ इतना निवेदन है कि जितनी 64 नंबर की रजिस्ट्रियाँ हैं वो खसरा नंबर 65 पर जो मकान बने हैं क्या आप उनकी इनक्वायरी करा देंगे?

सभापति महोदय-- माननीय मंत्री जी ने कहा है कि आपके पास जो कागजात हो आप दे दीजिए उनकी जाँच हो जाएगी.

डॉ.कैलाश जाटव-- सभापति जी, मैं सिर्फ सदन में माननीय मंत्री जी से इतना जानना चाहता हूँ कि जिनकी 64 नंबर की रजिस्ट्रियाँ हैं वह 65 नंबर की जाँच करवा देंगे क्या?

श्री तरूण भनोत-- माननीय सभापति महोदय, बहुत जरूरी बात है. मैं सदन के संज्ञान में लाना चाहता हूँ. अगर आप सिर्फ एक मिनट की अनुमति दें. इसमें माननीय मंत्री जी, तहसीलदार ने बाध्य किया, जो नजूल की जमीन है उसको सोसायटी नहीं चाहती है कि सोसायटी के नाम पर चढ़ाए पर सोसायटी के नाम पर चढ़वा कर एक व्यक्ति विशेष के नाम पर 20 हजार फुट का प्लाट काट दिया गया. जबकि सोसायटी खुद कह रही है कि हमारे ले-आउट में जमीन नहीं है, यह हमारी जमीन नहीं है. यह नाले की जमीन है, नगर निगम की जमीन है. नाले का मार्ग अवरुद्ध करके वह प्लाट आवंटित कर दिया गया. जबकि सोसायटी के ले-आउट में वह जमीन है ही नहीं. तहसीलदार ने बाध्य किया कि नहीं, आपको यह जमीन लेना पड़ेगी और फलाने आदमी को आवंटित करना पड़ेगी. क्या इसकी जाँच कराएँगे?

डॉ.कैलाश जाटव-- माननीय मंत्री जी, इसमें एस डी एम, तहसीलदार और आर आई ये सालों से, जो भी वहाँ पदस्थ हो रहे हैं पुरुषार्थ सोसायटी से इन्होंने लाखों का घोटाला किया है, मिलकर किया है और आज पूरा नाला अवरुद्ध हो चुका है. पूरे नाले पर कब्जा किया गया. मेरा सिर्फ इतना निवेदन है कि सोसायटी के 64 नंबर रकबे में जितनी उनको ले-आउट प्लान में जमीन दी गई थी, उसकी पूरी जाँच होगी कि वह जमीन पर बनाया गया है कि नहीं बनाया गया. उसके अलावा अगर उन्होंने और भी रजिस्ट्रियाँ की हैं तो उन सबको निरस्त किया जाए और उनकी जाँच बैठाई जाए.

सभापति महोदय-- आप सारे कागजात मंत्री जी को दे दें. उन्होंने कहा है कि आप सारे कागजात दे दीजिए जाँच हो जाएगी. बात खतम. प्रतिवेदनों की प्रस्तुति...(व्यवधान)..

श्री तरुण भनोत-- तहसीलदार बाध्य कर रहा है कि यह खरीद लो...(व्यवधान)..हमारे प्रश्न का जवाब तो देने दीजिए.

सभापति महोदय-- किस लिए जवाब भाई? वह जवाब आ गया.

श्री आरिफ अकील-- वे जवाब दे रहे हैं.

सभापति महोदय-- ऐसा जवाब नहीं होता भाई. ध्यानाकर्षण में सप्लीमेंट्री नहीं होता.

श्री के पी सिंह-- जवाब आ जाने दो उससे क्या अंतर पड़ना है.

सभापति महोदय-- डॉ.कैलाश जाटव के प्रश्न में कह दिया...

श्री अजय सिंह-- माननीय सभापति महोदय, यदि माननीय मंत्री जी कुछ उत्तर देना चाहते हैं तो यह सवाल उनके ऊपर छोड़ा जाए.

सभापति महोदय-- मंत्री जी कहाँ उत्तर देना चाहते हैं, क्यों देना चाहते हैं. वे नहीं दे रहे हैं. उन्होंने दे दिया उत्तर.

श्री अजय सिंह-- देना चाहते हैं.

डॉ.गोविन्द सिंह-- माननीय सभापति जी, आपने कहा कि ध्यानाकर्षण में सप्लीमेंट्री नहीं होता कौनसी नियम प्रक्रिया में है कि सप्लीमेंट्री नहीं होता.

सभापति महोदय-- आप निकाल कर पढ़ लीजिए. आप बता दीजिए जिस नियम प्रक्रिया में हो.

डॉ.गोविन्द सिंह-- ध्यानाकर्षण के बाद सप्लीमेंट्री तो होता ही है.

सभापति महोदय-- जिसका ध्यानाकर्षण है वह सप्लीमेंट्री करेगा. कोई तीसरा नहीं कर सकता. जिसका ध्यानाकर्षण है वही करेगा.

डॉ.गोविन्द सिंह-- दूसरा जो प्रश्न पूछा जाता है वह सप्लीमेंट्री ही पूछा जाता है.

सभापति महोदय-- डॉक्टर साहब, जिसका ध्यानाकर्षण है वही करेगा. दूसरा नहीं करेगा. आप ध्यानाकर्षण में पहले नाम जुड़वा लिए होते.

डॉ.गोविन्द सिंह-- अगर समस्या है, जनहित का कोई मामला है तो....(व्यवधान)..

सभापति महोदय-- प्रतिवेदनों की प्रस्तुति....(व्यवधान)..

डॉ.गोविन्द सिंह-- अन्य माननीय सदस्यों को भी पूछने का अधिकार दिया जाता है.

श्री आरिफ अकील-- सभापति महोदय, अगर आपकी कृपा रहे, अगर आप अनुमति दोगे, ऐसी पहले भी परंपरा रही है.(व्यवधान)..

सभापति महोदय-- नियम कायदे के तहत बात करिए भाई साहब वरिष्ठ सदस्य हैं. आप सब वरिष्ठ सदस्य हैं नियम कायदे से बात करिए. आप हमको नियम बता दीजिए हम अभी एलाऊ कर देते हैं.

श्री आरिफ अकील-- एक मिनट हमारा निवेदन सुन लें..(व्यवधान)..

श्री के पी सिंह-- सभापति महोदय, ऐसे कई अवसर हैं जब ध्यानाकर्षण पर दूसरों को भी अनुमति दी गई है. कल ओला पीड़ित पर हुआ था. उस पर ध्यानाकर्षण किसी और ने लगाया था और सारे विधायकों को अनुमति दी गई थी. कल इसी सदन में हुआ है तो उसमें परंपरा है कोई नियम थोड़े ही बने हुए हैं.

सभापति महोदय-- माननीय मंत्री जी, क्या आप जवाब देना चाहते हैं?

श्री गोपाल भार्गव-- जी हाँ.

श्री आरिफ अकील-- धन्यवाद.

श्री गोपाल भार्गव-- माननीय सभापति जी, इस प्रश्न की जो विषय वस्तु है और विवाद है, पूरा इश्यु, यह वास्तव में मैंने समझा कि यह राजस्व विभाग से संबंधित है इससे सहकारिता का कोई बहुत ज्यादा लेना देना नहीं है. सभापति महोदय, मैं जबलपुर जिले के राजस्व अधिकारियों को पत्र लिख कर और उनसे पूरे प्रकरण की जाँच कराने का और जो सही होगा दूध का दूध पानी का पानी वह करने का काम करेंगे...(व्यवधान)...

श्री तरूण भनोत-- मेरा कहना यह है कि सोसायटी खुद यह कह रही है कि हमारे ले आउट में नहीं है उसको बाध्य करके प्लाट दूसरे के नाम पर आवंटित करा दिया.

सभापति महोदय-- अब जाँच कराने का कह तो रहे हैं. अब क्या चाहते हों?

डॉ. कैलाश जाटव-- कृपया यह बता दें कि इसकी जाँच कब तक करा देंगे?

श्री गोपाल भार्गव-- शीघ्रातिशीघ्र.

 

 

 

 

 

12.35 बजे प्रतिवेदनों की प्रस्तुति

लोक लेखा समिति का दो सौ चौवनवां से तीन सौ पचपनवां प्रतिवेदन

श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा (सभापति)-- सभापति महोदय, मैं, लोक लेखा समिति का दो सौ चौवन वां से तीन सौ पचपन वां प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूं.

माननीय सभापति महोदय, लोक लेखा समिति ने इस वर्ष 58+205+102 कुल 355 प्रतिवेदन प्रस्तुत किए हैं. पिछली बार नरोत्तम मिश्रा जी, शेजवार जी और माननीय अध्यक्ष महोदय जी ने प्रोत्साहन दिया इसलिये समिति ने दोबारा 102 प्रतिवेदन और रख दिए हैं अब केवल 50 प्रतिवेदन बचे हैं, बैकलॉग क्लियर हो जाएगा.

12.36 बजे बधाई

लोक लेखा समिति के 355 प्रतिवेदन प्रस्तुत किये जाने पर बधाई.

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र)--माननीय सभापति जी, वास्तव में आप इसके लिए साधुवाद और बधाई के पात्र हैं. माननीय कालूखेड़ा जी के सभापतित्व में बहुत अच्छा कार्य हुआ है आप बधाई के पात्र हैं.

श्री कैलाश चावला--माननीय सभापति महोदय, आपको स्मरण होगा माननीय अध्यक्ष महोदय ने इस बारे में सभी समितियों को मार्गदर्शन दिया था कि वे बैकलॉग क्लियर करने के लिए ज्यादा बैठकें करें. माननीय महेन्द्र सिंह जी की अध्यक्षता में लोक लेखा समिति ने बड़ी जल्दी जल्दी बैठकें आयोजित कीं और 355 प्रतिवेदन इस बार प्रस्तुत किए गए हैं जिससे बैकलॉग समाप्त होने की स्थिति बनी है. मैं इस अवसर पर माननीय सभापति जी को, सदस्यों को और विशेषकर हमारे सचिवालय के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को व महालेखाकार के अधिकारियों को बहुत-बहुत साधुवाद देता हूँ जिन्होंने यह लक्ष्य प्राप्त करने में हम सबकी मदद की.

श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा--समिति के सभी सदस्यों के सहयोग से और स्टाफ से प्रमुख सचिव और विधान सभा के अधिकारियों और कर्मचारियों के सहयोग से यह संभव हुआ है मैं सारा क्रेडिट उनको देना चाहता हूँ.

 

12.37 बजे याचिकाओं की प्रस्तुति

सभापति महोदय--आज की कार्यसूची में सम्मिलित सभी याचिकाएं प्रस्तुत की हुई मानी जायेंगी.

 

 

12.38 बजे वक्तव्य

किसानों की ऋण वसूली स्थगित करने के संबंध में सहकारिता मंत्री का वक्तव्य

सहकारिता मंत्री (श्री गोपाल भार्गव)--माननीय सभापति महोदय,

 

श्री बाला बच्चन--माननीय सभापति महोदय, माननीय मंत्रीजी ने जो वक्तव्य दिया है उसमें मेरा यह कहना है कि पिछले 3 वर्षों से मध्यप्रदेश के किसान प्राकृतिक आपदा की चपेट में हैं और बहुत परेशान हैं आर्थिक रुप से किसान टूट चुका है. मेरा आपके माध्यम से मंत्रीजी और सरकार से आग्रह है कि जब तत्कालीन केन्द्र की मनमोहन सिंह जी की सरकार ने 74 हजार करोड़ रुपये किसानों के माफ कर दिए थे तो आपके इस वक्तव्य से काम नहीं चलेगा आपको भी उनका कर्ज माफ करना पड़ेगा केवल वसूली स्थगित करने से काम नहीं चलेगा. सभापति महोदय, मैं आपकी जानकारी में यह भी लाना चाहता हूँ कि जो कमजोर वर्ग के किसान हैं अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्ग के उनके खेतों में अभी तक सरकारी तंत्र पहुंचा नहीं है. ग्राम सेवक, पटवारी, तहसीलदार अभी तक पहुंचे नहीं हैं उनके खेतों का सर्वे नहीं हुआ है उनको जो मुआवजा राशि मिलना चाहिये वह नहीं मिल पाई है. केवल इस वक्तव्य से काम नहीं चलेगा आपको यदि किसानों के हितों पर ध्यान देना है, मुआवजा राशि मिलना चाहिये वह नहीं मिल पायी है. केवल वक्‍तव्‍य से काम नहीं चलेगा. आपको किसानों के हितों का ध्‍यान देना है तो जिस तरह से मनमोहन जी की सरकार ने 74 हजार करोड़ रूपये देश के किसानों का माफ किया है इस तरह से आपको भी माफ करना पड़ेगा तब हम समझेंगे कि आप और आपकी सरकार किसान हितैषी सरकार है.सभापति महोदय धन्‍यवाद्.

श्री गोपाल भार्गव :- माननीय सभापति महोदय, मनमोहन जी की सरकार ने तो पांच हमार करोड़ रूपये का एन पी ए कर दिया. बईमानों के लिये और उद्योगपतियों के लिये और बैंको के लोगों के लिये आपने पैसा दे दिया है कुछ विदेश भाग गये, कुछ यहीं पर हैं और कुछ जेल जाने वाले हैं. सभापति महोदय, यह फैसला मध्‍यप्रदेश की सरकार का अभूतपूर्व है. जिसमें हम 900 करोड़ रूपये शार्टटर्म लोन के लिये मिड टर्म लोन में कनवर्ट कर रहे हैं और सारा का सारा पैसा मध्‍यप्रदेश की सरकार सहकारी बैंको को भरपाई के रूप में देगी.यह मध्‍यप्रदेश के इतिहास में पहली बार उदाहरण है. माननीय नेता प्रतिपक्ष को धन्‍यवाद् देना चाहिये. यह काम पहले कभी नहीं हुआ है आजादी के बाद कभी नहीं हुआ है.

श्री बाला बच्‍चन :- सभापति महोदय, माननीय मंत्री जी आपके वक्‍तव्‍य मात्र से और आपने अपने वक्‍तव्‍य में जो चीजें समाहित की हैं उससे मध्‍यप्रदेश के किसानों की आत्‍महत्‍याएं रूक नहीं पायेगी इस कारण से, अभी दो दिन पहले अतिवृष्टि ओला वृष्टि हुई है, उसमें 14 किसानों की हत्‍याएं हुई हैं. उसके पहले कितने किसानों ने आत्‍महत्‍यायें कर्ज के कारण की है इसलिये आपको यह ध्‍यान देना पड़ेगा, अगर मध्‍यप्रदेश में किसानों की आत्‍महत्‍याओं को रोकना है तो आपको उनका कर्ज माफ करना पड़ेगा.

डॉ नरोत्‍तम मिश्र :- माननीय सभापति महोदय, हत्‍या, आत्‍महत्‍या यह मेरी समझ में नहीं आ रहा है, यह विषय को डायवर्ट कर रहे हैं. यह तो आपत्तिजनक बात है.

सभापति महोदय :- यह विषय भटक रहा है.

श्री बाला बच्‍चन :- नहीं, 14 लोगों की तो प्राकृतिक आपदा के कारण मौत हुई है. बाकी इसके पहले रोज किसान आत्‍महत्‍या कर रहे हैं आपको उसको रोकना होगा.

 

 

 

 

12.42 बजे {माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय (डॉ राजेन्‍द्र कुमार सिंह )पीठासीन हुए.}

वर्ष 2016 -2017 की अनुदानों की मांगों पर मतदान (क्रमश:)

मांग संख्‍या -18 श्रम

मांग संख्‍या - 63 अल्‍प संख्‍यक कल्‍याण

मांग संख्‍या - 66 पिछड़ा वर्ग कल्‍याण

मांग संख्‍या - 69 विमुक्‍त, घुमक्‍कड़ एवं अर्द्ध घुमक्‍कड़ जाति कल्‍याण

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

उपाध्‍यक्ष महोदय :- प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत.

 

 

उपस्थित सदस्‍यों के कटौती प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुए. अब मांगों और कटौती प्रस्‍तावों पर एक साथ चर्चा होगी.

सुश्री हिना कांवरे (लांजी):- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मांग संख्‍या 18, 63, 66 और 69 पर अपनी बात रख रही हूं.

उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं सबसे पहले न्‍यूनतम मजदूरी के बारे में बात करना चाहती हूं. न्‍यूनतम दैनिक मजदूरी, यह जो शब्‍द है न्‍यूनतम इस शब्‍द का पूरे प्रदेश में सही तरह से क्रियान्‍वयन नहीं हो पा रहा है. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय जब भी कोई मजदूर जब काम करने जाता है और जब वह काम करने जाता है तो चाहे वह पंचायत में काम करे, अक्‍सर यह बात देखने में आयी है कि जब पंचायत में कोई मजदूर काम करने आता है तो हमारे यहां जो न्‍यूनतम मजदूरी है उसका भुगतान उसके हिसाब से होना चाहिये. परन्‍तु पंचायतों में जो काम होता है, वहां पर जितना काम होना चाहिये और वहां पर उस काम में जितने मजदूरों की आवश्‍यकता होती है , अक्‍सर यह देखने में आया है कि सरपंच जितने मजदूर काम कर रहे होते हैं , उनसे कहीं ज्‍यादा लोगों के नाम मजदूरी में जोड़ देते हैं और जोड़ने के बाद अक्‍सरउसका जब वेल्‍यूएशन किया जाता है और उसका वेल्‍यूएशन चाहे एस डी ओ करे या सब इंजीनियर करता है तो उस वेल्‍यूएशन में मजदूरों की ज्‍यादा संख्‍या दिखाई जाती है, इसलिये मजदूरी का भुगतान सही तरीके से नहीं किया जाता है. मैं आपको बताना चाहती हूं कि अक्‍सर जब हम पंचायत में काम देखते हैं तो टास्‍क रेट के आधार पर काम की बात होती है. मैंने यह बात अक्‍सर देखी है कि पंचायत में जब भी मजदूरी के भुगतान की बात आती है तो उस समय यह बात बोल दी जाती है कि टास्‍क रेट के अनुसार ही मजदूरी का भुगतान होगा. उपाध्‍यक्ष महोदय, टास्‍क हम इसलिये निर्धारित करते हैं कि एक व्‍यक्ति जब काम करने जा रहा है, मजदूरी करने जा रहा है तो वह सुबह से लेकर शाम तक जब मजदूरी करता है तो उसको जो मजदूरी शासन ने तय की है उतना भुगतान उनको देना ही पड़ेगा और टास्‍क इसलिये तय किया जाता है कि यदि वह मजदूर उस टास्‍क से ज्‍यादा काम करता है तो जो न्‍यूनतम मजदूरी तय हुई है, उस न्‍यूनतम मजदूरी से ज्‍यादा, उनको मजदूरी का भुगतान करना पड़ेगा. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं यह बात इसलिये कहना चाहती हूं कि कहीं भी खासकर जहां जहां पर निर्माण कार्य चलते हैं, जहां जहां पेटी कांट्रेक्‍ट पर जो हमारे ठेकेदार मजदूरों से काम करवाते हैं, क्‍योंकि पेटी कांट्रेक्‍ट में जब काम होता है तो उसमें हमने अक्‍सर यह देखा है कि मजदूरों को भुगतान सही नहीं होता है. हमारे यहां पर पुल का काम चल रहा था तो मैंने जब मजदूरों से बात की तो मुझे वहां पर एक नयी बात पता चली, मुझे लगता है कि यह केवल मेरी बात नहीं है, पूरे सदन में यहां पर जो लोग बैठे हैं निश्चित रूप से उनके साथ भी यह बात होगी. जब मैंने महिलाओं से वहां पर पूछा कि आपको कितनी मजदूरी दी जा रही है तो उन्‍होंने बताया कि हमें 80 रूपये मजदूरी दी जा रही है और ज‍ब पुरूषों से बात की कि आपको कितनी मजदूरी दी जा रही है तो उन्‍होंने बताया कि हमें 100 रूपये मजदूरी दी जा रही है.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कानून की किसी भी किताब में मजदूरी का भुगतान महिला या पुरूष देखकर नहीं किया जाता है, लेकिन यह सच्‍चाई है कि फील्‍ड में यह सच्‍चाई है. महिलाओं को मजदूरी का भुगतान कम दिया जाता है और पुरूषों को मजदूरी का भुगतान ज्‍यादा किया जाता है. निश्चित रूप से जब हम इस बात को लेकर अधिकारियों से बात करते हैं तो अधिकारी हमें एक ही बात बता देते हैं कि वह तो ठेकेदार काम करवा रहे हैं. ठेकेदार काम करवाते हैं , लेकिन उस पूरे काम पर निगरानी करने की जवाबदारी अधिकारियों की होती है. कहीं न कहीं मजदूरी का भुगतान कम हो पा रहा है. इस बात पर मैं सबसे ज्‍यादा ध्‍यान मंत्री जी ध्‍यान आकर्षित करवाना चाहती हूं. क्‍योंकि यह समस्‍या किसी एक क्षेत्र की नहीं है. यह समस्‍या पूरे प्रदेश की है. एक और बात मैं कहना चाहती हूं कि हमारे यहां पर मनरेगा, महात्‍मा गांधी रोजगार योजना यह योजना जब से लागू हुई है तो निश्चित रूप से मजदूरों को रोजगार मिल रहा है, 100 दिन का रोजगार देना इसमें मूलभूत रूप से विद्यमान है और उनको रोजगार भी मिल रहा है. लेकिन वहीं सबसे बड़ी दिक्‍कत, जब से मनरेगा लागू हुआ है.

श्री वैल सिंह भूरिया :- अभी सरकार ने मजदूरों की मजदूरी 150 दिन कर दी है.

सुश्री हिना कांवरे :- वैल सिंह जी आप मेरी बात को ध्‍यान से सुन लिया करें, क्‍योंकि मैं कभी भी पाईंट से हटकर बात नहीं करती हूं. क्‍योंकि मनरेगा जिस दिन से लागू हुआ है, किसान और मनरेगा दोनों में आपस में बनती नहीं है. मैंने अक्‍सर देखा है कि जब से खेती का काम आता है तो किसान सरपंच से कह देता है कि अभी आप मनरेगा का काम बंद करवा दें. क्‍योंकि हमको मजदूर नहीं मिलते हैं और क्‍यूं न हो, क्‍योंकि मनरेगा में जो रेट मिल रहा है वह रेट किसान अपने खेतों में काम करवाने वाले मजदूरों को किसी भी परिस्थिति में नहीं दे सकता है. यदि सरकारी रेट जो तय हुआ है उसी रेट पर यदि किसान अपने खेत में काम करने वाले लोगों को यदि मजदूरी देगा तो वह अनाज का एक दाना भी अपने घर नहीं ला सकता इसलिये मैं मंत्री जी से निवेदन करना चाहती हूं मुझे खुशी होती कि आज इस सभा में यदि माननीय मुख्यमंत्री जी होते तो मैं यह बात कहना चाहती हूं कि हमारा जो मनरेगा है उस मनरेगा से हमें किसान को दोस्ती करवानी पड़ेगी और वह तभी संभव है जब मनरेगा में जो मजदूर काम करते हैं वे यदि किसान के खेत में काम करें और किसान के खेत में मैं यह नहीं कहती कि सारे किसानों को आप करवा दीजिये. आप पांच एकड़ के किसान से शुरुआत कीजिये कि जिस किसान की भूमि 5 एकड़ है उस किसान के एकड़ में यदि मजदूर काम कर रहे हैं उसका भुगतान मनरेगा के तहत् हो और उसका भुगतान शासन करे तो निश्चित रूप से किसानों के खेत में काम करने से मजदूरों को उसका पूरा रोजगार भी मिलेगा और किसान भी खुश होंगे और हमारा प्रदेश कृषि प्रधान प्रदेश है उसमें हमें निश्चित रूप से लाभ मिलेगा. मनरेगा में आज भी हमारे यहां मेड़ बंधान के काम किसानों के खेत में हो रहे हैं तो मेड़ बंधान तक इसको सीमित न किया जाये. एक क्रांतिकारी कदम सरकार उठाये और किसान के खेत में मजदूरों को काम दिया जाये और उसका पेमेंट सरकारी दर से किया जाये. मैं एक और बात कहना चाहती हूं. जब मैं बहुत छोटी थी मुझे अच्छे से याद है कि हमारे मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह जी ने तेंदू पत्ता के राष्ट्रीयकरण किया था और आज जब मैं तेंदू पत्ते के मजदूरों को देखती हूं तो मुझे इतनी खुशी होती है कि राष्ट्रीयकरण के बाद जो हमारे मजदूर हैं उनको मालिकाना हक मिल गया है आज उनकी स्थिति निश्चित रूप से बहुत अच्छी है और यही चीज जो हमारे बीड़ी बनाने वाले मजदूर हैं उनके लिये भी यदि हम कहीं कोई योजना बनायें मैं इसलिये कहना चाहती हूं कि जब हम किसी गांव से गुजरते हैं तो पूछते हैं कि यह किसका घर है तो पता चलता है कि यह बीड़ी ठेकेदार का घर है. बीड़ी ठेकेदार का काम क्या होता है उसका काम केवल इतना होता है कि जो मजदूर होते हैं उनको वे पत्ता उपलब्ध करवाते हैं तम्बाखू और धागा उपलब्ध करवाते हैं. सारा कच्चा माल मजदूरों को दे देते हैं और जब बीड़ी बनकर तैयार हो जाती है तो माल को व्यापारियों को दे देते हैं. केवल इतना सा काम है लेकिन इसमें जो मीडियेटर है वह तो भला चंगा हो जाता है उसका तो घर द्वार संभल जाता है लेकिन जो बीड़ी बनाने वाले मजदूर हैं उनकी स्थिति आज भी जैसे पहले थी वैसी अभी है. मैं माननीय मंत्री जी से यह निवेदन करना चाहती हूं कि लघु वन उपज जैसी कोई संस्था बनाकर बीड़ी बनाने वालों के लिये भी ऐसी कोई संस्था बनाई जाये और शासन इस पर गंभीरता से विचार करे क्योंकि मैंने यह प्रशासनिक प्रतिवेदन पढ़ा है इसमें कई सारी योजनाएं बीड़ी बनाने वाले मजदूरों के लिये हैं लेकिन योजनायें बना देने से बात नहीं बनती. कितनी सारी योजनाएं हैं मैं तो खुद पहली बार पढ़ रही हूं लेकिन जिन लोगों के लिये हम यह योजनाएं बना रहे हैं उन लोगों तक हमको यह योजनाएं पहुंचानी हैं. मैं मंत्री जी से निवेदन करना चाहती हूं कि इन योजनाओं की जानकारी उन लोगों तक पहुंचाने का सबसे बढ़िया माध्यम यदि हमारे पाठ्यक्रम है इन योजनाओं को यदि हमारे पाठ्यक्रम में शामिल कर दिया जाये तो एक-एक परिवार का बच्चा जब पढ़ाई करने जायेगा तो निश्चित रूप से उसको पूरी योजनाओं की जानकारी होगी क्योंकि जब तक योजनाओं की जानकारी अगर हमारे लोगों को नहीं होगी तब तक उनके लिये आप ढेरों योजनाएं बनायें चाहे केन्द्र सरकार बनाये या राज्य सरकार बने लेकिन उसका लाभ जिन लोगों के लिये यह योजनाएं बना रहे हैं उनको नहीं मिल पाता है.एक और बात मैं कहना चाहती हूं अक्सर जो वेलफेयर की योजनाएं होती हैं वह फंड के अभाव में पूरी नहीं हो पाती हैं लेकिन जो आपका कर्मकार शुल्क है. एक पेपर है मेरे पास मैंने इसमें देखा है कि कर्मकार शुल्क 1439 करोड़ रुपये वसूल हुआ है लेकिन श्रमिकों के वेलफेयर में 434 करोड़ रुपये ही खर्च हुए हैं. मैं यह बात माननीय मंत्री जी से पूछना चाहती हूं कि आप पिछले दो वित्तीय वर्ष के आंकड़े जब आपजवाब दें तो उसमें शामिल करिये कि कर्मकार शुल्क कितना आपके पास आया और आपने श्रमिकों के वेलफेयर में कितना खर्च किया है. अक्सर हम यह बात सुनते हैं और देखते हैं मैं पेपर को बहुत ज्यादा एथ्रेंटिक नहीं मानती और न ही मैं कोई बहुत ज्यादा बुराई करने के मूड में हूं क्योंकि पेपर में अक्सर हम लोग यह देखते रहते हैं कि हमारे विधायकों के लिये भी दिसम्बर का महिना आया पेपर वाले छाप देते हैं कि विधायकों ने अभी तक 30 परसेंट राशि विधायक निधि की खर्च की है और उनका अभी बहुत सारा फंड बचा हुआ है वह किस हिसाब से छापते हैं मैं नहीं जानती लेकिन इस पेप र के माध्यम से एक बात मैं मंत्री जी से जरूर कहना चाहती हूं कि आपके पास जो यह राशि आती है और कितनी खर्च होती है इसे आप जरूर बताएं क्योंकि यह बात सामने आई है क्योंकि आनलाईन सिस्टम की वजह से लोग कहते हैं कि आनलाईन सिस्टम कर दिया है. आवेदन आया न हीं है और आवेदन आया नहीं है इसीलिये हमने उनको सुविधाएं नहीं दी हैं. तो ये जो बातें हैं सिस्टम हम इसलिये लागू करते हैं कि हमें लोगों को सुविधाएं देने में आसानी हो,सरलता जाये लेकिन यह सिस्टम यदि हमारे लोगों को सुविधा देने में परेशानी बन जाये तो उसमें सुधार करना चाहिये और जब तक सिस्टम बहुत अच्छे से लागू नहीं हो जाता हमें इन सिस्टमों को लागू नहीं करना चाहिये जैसे हम जब आनलाईन सिस्टम नहीं हुआ करता था उसी सिस्टम के आधार पर हमें काम करना चाहिये क्योंकि आज जो श्रमिक काम करते हैं मैं उदाहरण देना चाहती हूं कि श्रम न्यायालयों की स्थिति देख लीजिये कई ऐसे प्रकरण जो श्रमिकों के माध्यम से जाते हैं पेंडिंग पड़े रहते हैं और जो साल्व होते हैं वह भी ऐसे होते हैं कि यदि एक श्रमिक ने काम किया जो ठेकेदार हैं वे श्रमिकों के पास पहुंच जाते हैं वे पैसों का लेनदेन कर लेते हैं और श्रमिक अपनी शिकायत वापस ले लेते हैं. यह धरातल की सच्चाई है इसलिये शासन श्रमिकों को उनके अधिकार दिलाये शासन इसके लिये कटिबद्ध है इसमें कहीं दो मत नहीं है लेकिन कुछ सुधार करने की जरूरत है. मेरी जानकारी में यह बात आई है कि मुतावली कमेटी में आरटीआई लागू नहीं है. मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहती हूं कि वह आरटीआई के तहत मुतावली कमेटी को लाये और दूसरा जो वक्फ बोर्ड का गठन हुआ है निश्चित रूप से इसकी बैठकें समय-समय पर होती रहनी चाहिये यह हम सबके लिये आवश्यक है. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया बहुत-बहुत धन्यवाद.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया(मंदसौर) - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 18,63,66 और 69 का समर्थन करता हूं. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, श्रम विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा करने का मुझे अवसर मिला. सत्यमेव जयते,श्रममेव जयते, इसका हम हमेशा स्मरण करते हैं उल्लेख करते हैं और उसी के आधार पर हम समाज के निर्माण की बात करते हैं. श्रमिकों के लिये कल्याणकारी योजनाएं माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी के नेतृत्व में और उनकी मन:स्थिति के आधार पर पूरे प्रदेश भर में श्रम कानूनों के दायरे में रहकर श्रम कानूनों के दायरे में रहकर किये जाने का उल्लेखनीय काम हुआ है. एक समय था जब पूरे प्रदेश भर में श्रमिकों के आंदोलन हुआ करते थे. उद्योगों के मामले हों,कारखानों के मामले हों और वहां पर कभी भी श्रमिक बहुत आसानी से जो अपने कामों को अंजाम देता था उसे उतना महत्व सरकारों द्वारा नहीं मिलता था. ग्वालियर हो,उज्जैन,हो,जबलपुर हो,भोपाल हो,इन्दौर हो, इन महानगरों में श्रमिकों की जो दुर्दशा हुआ करती थी, आज कहीं न कहीं एक वातावरण का निर्माण हुआ है. श्रमिक आंदोलन लगभग समाप्त हो गये हैं. मैं जिस राजनैतिक पार्टी का कार्यकर्ता हूं उनके संदर्भों के साथ आनुषंगिक संगठन का भी उल्लेख करूंगा. भारतीय मजदूर संघ से हम कुछ सीखें देशहित में करेंगे काम, काम के लेंगे पूरे दाम. यह वह नारा नहीं है कि हमारी मांगें पूरी हों, चाहे जो मजबूरी हो. मुझे लगता है कि सरकार ने श्रमिकों के हित को लेकर के जो काम किये हैं उनकी भावना के अनुरुप काम करके बताये हैं. यह सत्य है कि श्रमिकों के परिश्रम के बिना निर्माण की इमारत खड़ी नहीं की जा सकती. उसी निर्माण कार्य में संलग्न उस श्रमिक के लिये संनिर्माण योजनाओं को लेकर के माननीय मुख्यमंत्री जी ने श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा मिले, उनका आर्थिक विकास हो, उसको लेकर के अनुकरणीय काम किये गये हैं. श्रमिकों की पंचायत, महापंचायत, तेन्दूपत्ता से जुड़े उन श्रमिकों का पूरा सम्मान एक समय था पूरी मध्यप्रदेश की राजनीति तेन्दूपत्ता श्रमिकों के इर्द-गिर्द रहती थी. आज उनके सम्मान में इजाफा हुआ है, उनको लेकर के माननीय मुख्यमंत्री जी निरंतर चिन्ता करते हैं. मध्यप्रदेश भवन एवं संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा पूरे मध्यप्रदेश में मजदूरों का पंजीयन करने का महत्वपूर्ण काम किया है उसमें 25 लाख से अधिक पंजीयन इसकी एक उपलब्धि है. संगठित व्यक्ति, संस्था, यूनियनों हर कोई चर्चा करता था, लेकिन शायद मध्यप्रदेश की वर्तमान सरकार यशस्वी मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी ने जिन्होंने इधर-उधर फैले असंगठित मजदूरों को संगठित करने को लेकर के उनको हक, कानून देने का काम किया है. असंगठित मजदूर हमेशा शोषण का शिकार हुआ करता था उसका गठन करते हुए असंगठित मजदूरों को भी एक ताकत देने का काम सरकार के माध्यम से किया गया है. श्रमिकों के हितार्थ कल्याणकारी योजनाएं वास्तव में उन श्रमिकों को भी उसी प्रकार से जिस प्रकार से गरीबी रेखा के नीचे यीवन-यापन करने वाला या माननीय मुख्यमंत्री जी की हितग्राहीमूलक योजना है वह अलग अलग विभागों से जुड़ी हुई है, लेकिन माननीय मुख्यमंत्री एवं श्रममंत्री जी ने ऐसी हितग्राहीमूलक योजनाओं में श्रमिकों को एक स्थान दिया है उसके लिये व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं. प्रस्तुति सहायता योजना में उस श्रमिका का जो कार्ड होता है उसके पंजीयन के आधार पर दिलाये जाने का काम किया है. चिकित्सा दुर्घटना योजना, शिक्षा प्रोत्साहन योजना, मेघावी छात्र प्रोत्साहन योजना, विवाह योजना, अंतयेष्टि के समय आर्थिक मदद, पंडित दीनदयाल उपाध्याय श्रमिक आश्रय शेड निर्माण, दुर्घटना में भी 1 लाख रूपये की राशि एवं सामान्य मृत्यु होने पर 75 हजार रूपये की राशि का प्रावधान किया गया है. एक श्रमिक के पास में उसका पंजीयन किया हुआ कार्ड है उसमें अगर बिटिया का विवाह किया है उसके लिये पृथक से 25 हजार रूपये की राशि विभाग के द्वारा दिये जाने का प्रावधान किया गया है. मेघावी छात्रों को पुरस्कृत, प्रोत्साहित करने के लिये 2 हजार रूपये से 12 हजार रूपये तक की राशि का प्रावधान बजट में किया जाना स्वागत योग्य है. व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में भी श्रमिकों की बेटे-बेटियों को उच्च शिक्षा उसमें भी मेडिकल, डेन्टल, फिजियोथेरेपी, नरसिंग, पेरा मेडिकाल, एवं इंजीनियरिंग का ले लें उस सबमें प्रतिभावान छात्रों को पृथक-पृथक से एक वर्ष में कहीं पर 20‑15-10 रूपये का प्रावधान है. इस प्रकार से राशियों का जो समावेश किया गया है इसको लेकर के श्रमिकों के परिवारों बेटे-बेटियों को एक सम्मानजनक स्थिति में सरकार ने ला खड़ा किया है. श्रमिकों को भी जीवन-यापन करने का हक है वह भी चाहते हैं कि वह पेंशन के पात्र बने उन्हें लगातार पांच वर्ष तक वैध परिचय-पत्र, स्वालंबन पेंशन के आधार पर 1 हजार रूपये तक की व्यवस्था पेंशन की सरकार के द्वारा व्यवस्था की गई है. दूसरों का भवन, मकान, आश्रय बनाने वाले उस संनिर्माण मजदूर के लिये सरकार ने सोचा है तथा उसका पृथक से काम किया है. नगरीय क्षेत्रों में भी आवास की योजना स्वयं के लिये बनायी है, जो दूसरों के लिये मकान बनाते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में भी आवास योजना उन श्रमिकों के लिये बनायी गई है, जो कि पंजीकृत श्रमिक हैं उनको भी इंदिरा आवास, मुख्यमंत्री आवास योजना से जोड़ने का अनुकरणीय काम किया है. मध्यप्रदेश के 14 नगरीय क्षेत्रों-नगरपालिका क्षेत्रों में जिसमें महानगर भी हैं जैसे ग्वालियर, सागर, रीवा, सिंगरौली, सतना, कटनी, खंडवा, बुरहानपुर, देवास, इन्दौर, रतलाम, जबलपुर एवं उज्जैन है इनमें ऐसे श्रमिकों को भवन की सुविधा देने के लिये हितग्राहीमूलक योजनाओं का चयन किया गया है, जिसके अंतर्गत 7 लाख 50 हजार रूपये का ऋण का प्रस्ताव किया गया है उसमें 50 प्रतिशत ऋण की स्थिति में 1 लाख रूपये का अनुदान राज्य सरकार की ओर से उस आवास निर्माण करवाने वाले हितग्राही श्रमिकों को दिया गया है. इसी प्रकार से ग्रामीण क्षेत्रों में भी आवास योजना का लाभ दिया गया है, जो कि प्रदेश भर में लागू है. 225 वर्गफीट में भवन बनाने की एक सुविधा उपलब्ध की है उसमें टायलेट,रसोई एवं आंगन, अहाता होगा, एवं पूरे परिक्षेत्र में अगर सामूहिक रूप से श्रमिक इस प्रकार से बस्ती का निर्माण करते हैं उसमें मांगलिक भवन, वेलफेयर की गतिविधियां, बगीचे भी होगें यह सारी सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं. स्थानीय स्तर पर भी सलाहकार समितियों का गठन इस बात को लेकर के किया गया है जिले के कलेक्टर एवं श्रम अधिकारी सब मिलकर के श्रमिकों की जो छोटी-छोटी समस्याएं हैं उसका निराकरण करने के लिये स्थानीय स्तर पर सलाहकार समितियों के माध्यम से उन्हें सम्मान मिले. जिस प्रकार से चिकित्सों, शिक्षकों, की जो आयु सीमा सेवा में बढ़ाई है उसी प्रकार से माननीय मुख्यमंत्री जी ने विशेष ध्यान देकर के श्रमिकों की आयु-सीमा भी 58 वर्ष से बढ़ाकर के अब 60 वर्ष कर दी गई है. माननीय सदस्या हिना जी कह रही थीं कि महिला श्रमिकों को ठीक ढंग से उनके हक की राशि नहीं मिलती है महिला श्रमिकों की वृद्धि उद्योगों, कारखानों में हुई है उससे यह बात परिलक्षित होती है कि मध्यप्रदेश की सरकार के द्वारा कल-कारखानों में भी महिलाओं को जो स्थान, रोजगार से जोड़ दिया गया है वास्तव में यह अनुकरणीय प्रयास है. पिछड़े वर्ग की दो बात रखने की कोशिश करूंगा उनके कल्याण के लिये सरकार ने बहुत ही अनुकरणीय काम किये हैं. पिछड़ा वर्ग में स्वरोजगार, कौशल उन्नयन, छात्रवृत्तियां, प्रशिक्षण, विदेशी अध्ययन तक की छात्रवृत्ति पिछड़े वर्ग के लोगों को देने का काम किया है उसमें जो होनहार छात्र-छात्राएं हैं उनकी प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रोत्साहन योजना लागू करते हुए विभिन्न श्रेणियों में 15-20-25- तथा 50 हजार रूपये तक की राशि का प्रावधान सरकार के द्वारा पिछड़ा वर्ग के होनहार छात्र-छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रतिभागी बनते हुए प्रावधान किया गया है. इसमें 1 करोड़ 50 लाख रूपये का बजट में प्रावधान किया गया है मैं मंत्री जी इसके लिये आपको बधाई देना चाहता हूं. सफलता को लेकर के इन परीक्षाओं में निरंतर छात्रों की वृद्धि होती जा रही है इससे रोजगार की दिशा में पिछड़े वर्ग के छात्रों को आवासीय व्यवस्था में सम्मिलित करते हुए उन्हें निशुल्क प्रशिक्षण देने की बात की गई है.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आवासीय व्‍यवस्‍था भी मिले, साथ में उनको नि:शुल्‍क प्रशिक्षण भी मिले । माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पिछड़ा वर्ग के लोगों के लिए 2015 से लेकर आने वाले 2025 तक का, रोड मेप तय हुआ है, 2025 तक की जो संकल्‍पना सरकार ने की है, माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने की है, माननीय मंत्री महोदय ने की है, मैं उसका थोड़ा सा उल्‍लेख करना चाहूंगा, लक्ष्‍य और रोड मेप तैयार किया जा रहा है, मध्‍यप्रदेश में 3 करोड़ छात्रों को छात्रवृत्ति का लाभ मिल सके, पिछड़ा वर्ग पोस्‍ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में 50 लाख विद्यार्थी इससे लाभान्वित हो सकें, आश्रम और छात्रावास के निर्माण में भी लगभग 1 लाख 50 हजार विद्यार्थियों को लाभान्वित किया जा सके और 500 छात्रावासों का निर्माण किया जा सके, मेघावी छात्र पुरस्‍कार में भी 2000 विद्यार्थी इससे लाभान्वित हो सकें, विदेशी अध्‍ययन के लिए 150 अभ्‍यार्थी विदेशों तक अध्‍ययन करने के लिए पहुंच सकें, इसकी पूरी संकल्‍पना सरकार के द्वारा की जा रही है । अल्‍पसंख्‍यक कल्‍याण वर्ग के उत्‍थान के लिए मैं आपके माध्‍यम से मुख्‍यमंत्री जी और मंत्री जी को धन्‍यवाद देता हूं कि जिस राजनैतिक पार्टी का मैं कार्यकर्ता हूं और जिस राजनैतिक पार्टी का मैं विधायक हूं, उस पर हमेशा इस प्रकार का दुराभाव का आरोप लगाया जाता है कि अल्‍पसंख्‍यक विरोधी हैं, फूट डालों राज करो की नीति के अंतर्गत भड़काने का काम किया जाता रहा है, लेकिन मैं बानगी देना चाहता हूं कि मध्‍यप्रदेश के यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री जी ने, शिवराज सिंह जी ने अल्‍पसंख्‍यक वर्ग के लिए मध्‍यप्रदेश में मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्व, जैन एवं पारसी जितने समाज के लोग हैं, आबादी का लगभग 8.15 प्रतिशत इनका स्‍थान है और इन सब को लेकर के सरकार ने बड़ी चिन्‍ता की है, 60 मदरसों में दो अतिरिक्‍त कक्ष निर्माण के लिए 360 लाख रूपए का प्रावधान स्‍वागत योग्‍य है, 200 आंगनवाड़ी इसी वर्ग के लिए, अल्‍पसंख्‍यक वर्ग के लिए, निर्माण किए जाने के लिए 600 लाख रूपए का प्रावधान प्रशंसनीय है, 1000 इंदिरा आवास योजना, अल्‍पसंख्‍यक वर्ग के परिवारों के लिए 337.50 लाख रूपए की राशि का प्रावधान, 100 सीटर कन्‍या छात्रावास अल्‍पसंख्‍यक परिवार हेतु किए जाने के लिए 190 लाख रूपए का प्रावधान और आई.टी. सेल का गठन करते हुए अल्‍पसंख्‍यक परिवार के हितग्राहियों को 12.50 लाख रूपए का प्रावधान किया जाना स्‍वागत योग्‍य है ।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कल श्री दीपक जोशी जी ने अनुदान मांगों पर अपना उद्बोधन दिया था, सरकार का स्‍कूल शिक्षा विभाग जिस प्रकार से प्रयास कर रहा है, उसके अंतर्गत अल्‍पसंख्‍यक परिवार से जुड़े जो मदरसे हैं, उन मदरसों की रंगाई पुताई का काम भी प्रत्‍येक विद्यालय के लिए, प्रत्‍येक मदरसा के लिए, 25-25 हजार की राशि, स्‍कूल शिक्षा विभाग के माध्‍यम से मदरसों को दिए जाने की बात आई है, मैं समझता हूं, यह स्‍वागत योग्‍य है, अल्‍पसंख्‍यक कल्‍याण के लिए जो योजनाएं संचालित की जा रही हैं, उसके साथ मध्‍य्रपदेश के यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री आदरणीय शिवराज सिंह चौहान ने श्रीराम जी महाजन पिछड़ा वर्ग सेवा राज्‍य पुरस्‍कार से मेघावी छात्र- छात्राओं को पुरस्‍कृत किया है । इसके साथ साथ कोई भेदभाव नहीं हिन्‍दू - मुसलमान का कोई विरोध नहीं, माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने अल्‍पसंख्‍यक पुरस्‍कारों की श्रृंखलाबद्ध घोषणा की है और उसको यर्थाथता में उतारने की कोशिश की है, मौलाना अब्‍दुल कलाम आजाद अल्‍पसंख्‍यक सेवा राज्‍य सेवा पुरस्‍कार 2014, शहीद अशफॉक उल्‍ला खॉ सेवा राज्‍य पुरस्‍कार 2014, शहीद हमीद खां शोल्‍जर अल्‍पसंख्‍यक सेवा राज्‍य पुरस्‍कार योजना, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय यह जो पुरस्‍कार दिए गए हैं, राष्‍ट्रीय एकता और अखण्‍डता को लेकर के, सामाजिक सद्भावना को लेकर के, वीरता को लेकर के, नागरिकों की सुरक्षा देने में, अद्मय साहस का परिचय देने वालों को लेकर के, साहित्‍य कला, रंगकर्मी, शिक्षक, उत्‍कृष्‍ट कार्य करने वाले, इन तमाम प्रकार के वे बहु-आयामी, वे धनी लोग हैं, उनको इस प्रकार के पुरस्‍कार से नवाजा गया है ।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक बात कहकर अपनी बात को समाप्‍त करता हूं मध्‍यप्रदेश की राजधानी भोपाल में पूरे प्रदेश से अनेक हज यात्री, मकका- मदीना की यात्रा, हज की यात्रा, एक पवित्र यात्रा मानी जाती है, उसके लिए तत्‍कालीन सरकार ने कभी नहीं सोचा, मुझे बताते हुए अत्‍यन्‍त प्रसन्‍नता है कि आज सर्व-सुविधायुक्‍त अगर मध्‍यप्रदेश में कहीं हज हाउस बन रहा है तो वह भोपाल के ग्राम सिंगरचोली के पास सर्वसुविधायुक्‍त हज हाउस बनकर के लगभग निर्माण के अंतिम चरण में में है, मैं समझता हूं, इससे पूरे मध्‍यप्रदेश के अल्‍पसंख्‍यक परिवार के लोगों को, लाभ मिलेगा जो हज के लिए जाते हैं, उनको सुकून मिलेगा और सुविधाएं मिलेगी, इस प्रकार से निष्‍पक्ष भाव रखने वाली सरकार का यह श्रम, पिछड़ा वर्ग तथा अल्‍पसंख्‍यक कल्‍याण वर्ग के लिए जो अनुदान मांगों की जो चर्चा बजट पर आई है, उसका मैं स्‍वागत करता हूं, अभिनंदन भी करता हूं और मंत्री जी को, मैं विशेष रूप से धन्‍यवाद देना चाहता हूं ।

 

 

अध्‍यक्षीय घोषणा

माननीय सदस्‍यों के लिए भोजन विषयक

उपाध्‍यक्ष महोदय- माननीय सदस्‍यों के लिए भोजन की व्‍यवस्‍था सदन की लॉबी में की गई है, माननीय सदस्‍यों से अनुरोध है कि सुविधानुसार भोजन ग्रहण करने का कष्‍ट करें ।

 

वर्ष 2016-17 की अनुदान मांगों पर (क्रमश)

कुंवर सौरभ सिंह (बहोरीबंद)- माननीय उपाध्‍यक्ष जी, मैं मांग संख्‍या 18,63,66 और 69 के विरोध में खड़ा हूं, हम जिस वर्ग के बारे में बात करने के लिए खड़े हैं, उसने राजस्‍थान के मरूस्‍थल से लेकर के, पश्चिम बंगाल से लेकर जम्‍मू कश्‍मीर से लेकर कन्‍या कुमारी तक, न जाने कितने निर्माण किए, किले बनाए और जलाश्‍य बनाए, जिनका आज हम उपभोग कर रहे हैं, यहां तक कि जिस भवन में बैठे हैं, यह भी उन्‍हीं के द्वारा बनाया गया है, तकलीफ यह है कि जो हम चर्चा कर रहे हैं, क्‍या वह उन तक पहुंच पाएगी, इसके लाभ उन तक पहुंच पाएंगे, इस बात पर प्रश्‍न चिन्‍ह लगा हुआ है । मैं दो पक्तियां बोलते हुए अपनी बात आगे रखूंगा

होके मायूस न शाम की तरह ढलते रहिए,

जिन्‍दगी एक भोर है सूरज की तरह निकलते रहिए ।

ठहरोगे एक पांव पर तो थक जाओगे,

धीरे धीरे ही सही मगर राह पर चलते रहिए । ।

 

 

2:17 बजे सभापति महोदय(श्री रामनिवास रावत) पीठासीन हुए।

 

31 दिसम्‍बर 2015 तक 1634.32 करोड़ की राशि उपकर के रूप में प्राप्‍त हुई, इस प्रतिवेदन में 24.60 लाख हितग्राही का निर्माण में पंजीयन हुआ है, हकीकत में इतने बड़े प्रदेश की जनसंख्‍या में, बहुत कम है, बाल श्रम के बारे में कहा गया है कि बाल श्रम मध्‍यप्रदेश में नहीं हो रहा है, सभी सम्‍मानीय सदस्‍य जानते हैं, सुबह शाम जब भी हम गाडि़यों से निकलते हैं, आपको छोटे - छोटे बच्‍चे पेपर बेचते हुए और ढाबों पर खाना खिलाते हुए मिल जाएंगे । औद्योगिक सुरक्षा के विषय में कारखानों में दुर्घटना की दर 2013 में .62 प्रति हजार थी, जो .49 हो गई है, मेरा आपसे निवेदन है कि यह जो आंकड़े हैं, यह कागजी आंकड़े हैं, हकीकत में बहुत परिवर्तन है । पेज क्रमांक 27, 4.25 में पंजीकृत कारखानों में 1.1.16 को आपने कुल 15 हजार 378 श्रमिक बताए हैं, मेरा मंत्री जी से निवेदन है 15,378 से अधिक रजिस्‍टर्ड तो आपके कारखाने हैं, यह सदन को गुमराह कर रहे हैं । पेज क्रमांक 29, 4.3 क्षतिपूर्ति 1923 अधिनियम के तहत लेबर ऑफिसर और इंस्‍पेक्‍टर की सांठ - गांठ के चलते अपंजीकृत मजदूरों को लाभ नहीं मिल रहा है । हमारे कटनी जिले में लगभग 300 दालमिलें हैं, 50 राईस मिल हैं, आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं पर इसका कहीं कोई उल्‍लेख नहीं होता है । पेज क्रमांक 29, 4.4 कटनी में एक फैक्‍ट्री है, अजय फूल, स्‍वयं के उपयोग के लिए पॉवर जनरेशन करते हैं, वहां पर भूंसी के स्‍थान पर कोल का उपयोग होता है, जो स्‍वास्‍थ्‍य के लिए खतरनाक है । बड़वारा में बुझबुझा प्‍लांट है, बिरला व्‍हाईट है, लमतरा है, हमारे यहां बहुत से ऐसे प्‍लांट आए हैं, जो एम.ओ.यू. के माध्‍यम से साईन होकर के जिसकी रोज हम लोग फ्लेक्‍सों में बड़ाई लेते हैं, सत्‍ता पक्ष के लोग तालियां ठोकते हैं पर इनमें स्‍थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिलता है । स्‍थानीय लोग रोजगार से वंचित है और बाहरी लोगों को कम रेट पर रखा जा रहा है । पेज नं 42, 7.2 में बीड़ी के बारे में लिखा गया है, बीड़ी श्रमिकों का पंजीयन हमारे जिले में बंद है, जो बीड़ी बनाते हैं, 5 रूपए, प्रति हजार उनसे लिया जाता है, कितना टोटल है, यह प्रतिवेदन में उल्‍लेख नहीं है और कितना इनके ऊपर खर्च होता है, इसका उल्‍लेख नहीं है, हर जगह ब्‍लाक स्‍तर पर एजेंट बन गए हैं जो 60 से 40 प्रतिशत में इनसे सौदा तय करते हैं, फिर उनसे प्रसव में और बाकी कार्यों में शादी में पैसा लेकर उनका कार्य करते हैं, मजदूरों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है । वास्‍तव में बीड़ी श्रमिकों के लिए आवास बने हैं, जो नहीं मिल रहे हैं । पेज 48 ,8.4 में उपकर निर्धारण अधिनियम है, इसमें 10 लाख रूपए से ऊपर जो भी मकान बनेगा, उसमें एक प्रतिशत टैक्‍स लगेगा, अवैध मकानों के बनने से जो नक्‍शे पास नहीं होते हैं और जब हम यहां प्रश्‍न लगाकर नियमितीकरण करते हैं तो एक प्रतिशत टैक्‍स को छोड़ दिया जाता है. यह वही पैसा जाता है जो मजदूरों के उपयोग का है, इससे इन मजदूरों के लिए कॉलोनी बनानी चाहिए. माननीय पेज नं.498.4 में कटनी में हम्‍मालों के लिये 100 आवास बनाये गये हैं, यह प्रतिवेदन में बताया गया था. कृषि मण्‍डी में लगभग 500 हम्‍माल रजिस्‍टर्ड हैं, दाल मिल और राईस मिल कटनी में लगभग 400 हैं. वेयरहाउस, रेल्‍वे यार्ड, पार्सल एवं सीमेन्‍ट फैक्‍ट्री में हमारे यहां लगभग 10,000 रजिस्‍टर्ड लोग हैं और कुल 100 आवास दिये हैं. यह कहीं से न्‍यायसंगत नहीं है. यह तो ऊँट के मुँह में जीरा के समान है.

माननीय सभापति महोदय, पेज नं. 87 में नि:शक्‍त भरण-पोषण योजना के तहत 40 से 70 प्रतिशत विकलांग को 750 रूपये प्रतिमाह और 71 से 100 प्रतिशत विकलांग को 1,500 रूपये प्रतिमाह दिया जाता है. प्रतिवेदन में दिया है कि मात्र 36 हितग्राही प्रदेश में लाभान्वित हुए हैं.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - सभापति जी, आप इतनी गम्‍भीर मुद्रा में बैठे थे तो हमारे संसदीय कार्य मंत्री जी कह रहे थे कि आप मुकेश नायक जी को देखकर गम्‍भीर हैं या श्री गोविन्‍द सिंह जी को देखकर.

सभापति महोदय - श्रम विभाग की मांगें चल रही हैं. श्रमिकों की समस्‍याएं सुनने के लिए गम्‍भीर हैं. आप जारी रखिये.

कुँवर सौरभ सिंह - माननीय सभापति महोदय, मेरा निवेदन है कि पूरे प्रदेश में मात्र 36 हितग्राहियों को लाभ मिला है. आप इसको भी फ्लैक्‍स में लगा लीजिये कि बहुत काम किया है. हकीकत तो यह है कि मजदूरों ने काम मांगना बन्‍द कर दिया है, इसका उदाहरण मनरेगा है. लोगों का विश्‍वास उठ गया है, लोग प्रदेश से बाहर जाकर काम कर रहे हैं, काम ढूँढते हैं, हमारे यहां से गुजरात, महाराष्‍ट्र एवं बॉम्‍बे, बहुत जगह जा रहे हैं एवं काम कर रहे हैं. वहां न उनको सैलेरी पूरी मिलती है और कोई दुर्घटना घटित होती है तो उन लोगों की डेथ बॉडी लाने का भी इन्‍तजाम नहीं होता. पिछले दिनों हमारे यहां पठार क्षेत्र में 2 लड़के मारे गए थे. वहां के मालिक ने लौटने तक की व्‍यवस्‍था नहीं की और सैलेरी तो छोड़ ही दीजिये. मेरा माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि इस विषय पर ध्‍यान रखकर कि जो भी श्रमिक मध्‍यप्रदेश के बाहर काम करने जा रहे हैं, उनके लिए योजना बननी चाहिए. जिसमें उनका पंजीयन होना चाहिए और मालूम होना चाहिए कि वह किस फैक्‍ट्री में और कौन-सा कार्य कर रहे हैं ? अगर हमको यह नहीं मालूम होगा तो बहुत-सी ऐसी फैक्ट्रियां हैं, जहां पर कैमिकल का उपयोग होता है और उस कैमिकल से लोगों को बहुत नुकसान होता है. मेरा आपसे निवेदन है कि इस विषय पर ध्‍यान दें. हकीकत यह है कि मजदूरों की जो मजदूरी हो, वे चाहे मनरेगा में हों, प्रायवेट संस्‍थानों में हों, कहीं भी पूरी नहीं मिल रही है. पर किताबी आंकड़े पूरे हैं. केन्‍द्र सरकार ने सच्‍चर आयोग की रिपोर्ट, जो केन्‍द्र सरकार की आई है उसको अनदेखा कर दिया है. अल्‍पसंख्‍यक समाज आज पूरे देश में अपने आप को देश से कटा हुआ महसूस करता है. चूँकि सरकार उस पर उतना बजट व्‍यय नहीं करती है. माननीय उनकी शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य एवं रोजगार ऐसी समस्‍याएं हैं, जिन पर विशेष रूप से अध्‍ययन करके निराकरण किया जा सकता है. इसके लिए सरकार को एक अध्‍ययन दल बनाना चाहिए, जिसमें क्‍या वास्‍तविकता है, इसको देखना चाहिए. पिछड़े वर्ग की जो योजनाएं हैं, वे जमीनी हकीकत में नहीं बदली गई हैं. सिर्फ वे किताबों में हैं, दोनों वर्गों के लिए जो लक्ष्‍य तय किये गये हैं, वे केवल आंकड़ों में पूरे हैं. मेरे कटनी जिले में जब भी कोई व्‍यक्ति बैंक पहुँचता है तो बैंक में जब तक वह दलाल के पास नहीं जाए, तब तक उसका काम पूरा नहीं होता है. मेरा निवेदन है इस विषय पर ध्‍यान दिया जाये.

सभापति महोदय, दोनों वर्गों का बहुत बड़ा हिस्‍सा हमारे क्षेत्र में कृषि पर निर्भर है और जब उनको कोई लाभ नहीं हो रहा हो तो अपनी जमीन बेचकर अन्‍यत्र पलायन करने को मजबूर हैं. मेरा निवेदन है कि माननीय इस पर ध्‍यान दें. पिछड़े वर्गों के लिये जो पद आरक्षित हैं, उनकी भर्ती पर सरकार ध्‍यान देकर समयबद्ध कार्यक्रम चलाये. जिस तरह बाकी वर्गों के लिए, एक विशेष अभियान चलाया जाता है, उसी प्रकार पिछड़ा वर्ग एवं अल्‍पसंख्‍यक वर्ग के लिये भी किया जाये. वक्‍फ बोर्ड लगभग निष्क्रिय हो रहा है, उसकी सारी सम्‍पत्ति पर लोग कब्‍जा कर रहे हैं.

सभापति महोदय, पुराने समय में एक कहानी होती थी. एक बहुत चालाक व्‍यक्ति था. वह एक गांव में पहुँचा, उसको भूख लगी हुई थी तो एक बुढि़या के मकान में पहुँचा और कहा कि माताराम कुछ खाने को दो. चूँकि बुढि़या भिक्षा मांगकर जीवन-यापन करती थी तो उसने कहा कि मेरे पास खाने को नहीं है. उस चालाक व्‍यक्ति ने कहा कि मैं कंकण से खिचड़ी बनाऊँगा तो बुढि़या को उसने कुछ कंकण बीनकर दिये और कहा कि माताराम, मैं इससे खिचड़ी बनाऊँगा. उसने एक भगोने, बर्तन में कंकण डाल दिये, उसने बोला पानी होगा. बुढि़या लालच में आ गई तो उसने सोचा, पानी दे दूँ तो शायद कंकण की खिचड़ी, पत्‍थर की खिचड़ी मुझे भी खाने को मिल जायेगी. मैं सीख जाऊँ एवं बिना भिक्षा के काम चल जाये. उसने पहले पानी मांगा, फिर उसने बोला थोड़ा-सा चावल और दाल मिल जाये तो बुढि़या ने चावल और दाल भी दे दी. फिर थोड़ा नमक, हल्‍दी एवं मिर्चा मांग लिया, उसने सब डाल दिया. उसने पूरा का पूरा सामान, उस बुढि़या से ले लिया और खिचड़ी बनाई. खिचड़ी बनाने के बाद थाली में जब परोसा तो उसने कंकड़-कंकड़ उस बुढि़या को दे दिया एवं दाल-चावल की खिचड़ी खुद खा ली.

सभापति महोदय - माननीय सदस्‍य, आप कितना समय लेंगे ? अपनी बात जारी रखें.

कुँवर सौरभ सिंह - सभापति महोदय, मेरा यह निवेदन है कि ये सरकारी आंकड़े हकीकत से बहुत दूर हैं. मैं मांग संख्‍या का विरोध करता हूँ और सिर्फ इतना कहता हूँ कि -

आंखें तालाब नहीं, फिर भी भर आती हैं,

दुश्‍मनी बीज नहीं फिर भी बोई जाती है,

होंठ कपड़ा नहीं, फिर भी सिल जाते हैं,

किस्‍मत सखी नहीं, फिर भी रूठ जाती है,

बुद्धि लोहा नहीं, फिर भी जंग लग जाती है,

आदमी का मन शरीर नहीं, फिर भी घायल हो जाता है,

और इन्‍सान मौसम नहीं, फिर भी बदल जाता है.

धन्‍यवाद.

श्री दिलीप सिंह शेखावत (नागदा-खाचरोद) - माननीय सभापति महोदय, मैं मांग संख्‍या 18, 63, 66 एवं 69 के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ. जहां मध्‍यप्रदेश के माननीय मुख्‍यमंत्री जी एवं मंत्री जी ने श्रम के लिए 169 करोड़ 40 लाख 97 हजार रूपये का प्रावधान किया है. अल्‍पसंख्‍यकों के कल्‍याण के लिये 25 करोड़ 1 लाख 42 हजार रूपये का प्रावधान किया है, पिछड़ा वर्ग कल्‍याण के लिये 932 करोड़ 27 लाख 23 हजार रूपये का प्रावधान किया है.

माननीय सभापति महोदय, मैं बताना चाहूँगा कि जबसे मध्‍यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आई है. इन 11-12 वर्षों में लगभग, जो मध्‍यप्रदेश में औद्योगिक अशांति होती थी और एक समय यह होता था कि 'चाहे जो मजबूरी हो, मांग हमारी पूरी हो', लगभग 12 वर्षों से जो मेरे देखने में आया है कि कहीं भी उद्योगों में हड़ताल नहीं हुई है. उद्योग प्रबन्‍धकों और श्रमिकों में कहीं कोई विवाद नहीं हुआ है. मैं यह मानता हूँ कि यह माननीय मंत्री जी की कार्य-कुशलता थी कि हर विवाद को कहीं न कहीं चर्चाओं में कर, उन चीजों का ठीक प्रकार से निदान किया है. आज 51 जिलों में श्रम कार्यालय का प्रारम्‍भ होना, हम सबके लिए गर्व की बात है. मैं माननीय सभापति जी, बताना चहूँगा कि जहां पंजीयन की इतनी बड़ी व्‍यवस्‍था करी है, जो श्रमिक छोटी-छोटी मजदूरी करते थे. मैं इस बात के लिये माननीय मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूँ कि मध्‍यप्रदेश की जहां आबादी साढ़े 7 करोड़ है. उसमें लगभग 3 करोड़ असंगठित मजदूर हैं. उन 3 करोड़ असंगठित मजदूरों के लिए भी शहरी ग्रामीण असंगठित बोर्ड का गठन किया है.

माननीय सभापति महोदय, माननीय मंत्री जी से, इतना निवेदन जरूर करना चाहता हूँ कि यह बोर्ड तेज गति से अपने लक्ष्‍य को प्राप्‍त करे. इसके लिये बजट का प्रावधान अगर आप ठीक प्रकार से करेंगे तो ठीक होगा. मैं निर्माण श्रमिकों के लिए जहां पेन्‍शन योजना, कौशल परीक्षण और उन गरीब श्रमिकों के लिए चाहे शहरी या ग्रामीण हों, उनमें जो भवन बनाने और उसमें 1 लाख रूपये तक अनुदान देने की अभिनव योजना आपने प्रारंभ की है, उसके लिये भी धन्‍यवाद देना चाहता हूँ. मैं एक निवेदन माननीय मंत्री जी से जरूर करना चाहूँगा कि जो न्‍यूनतम वेतन है, उस न्‍यूनतम वेतन को भारत सरकार के सातवां वेतनमान में फोर्थ क्‍लास कर्मचारियों की न्‍यूनतम वेतन तय की है और दूसरी समाजिक सुरक्षा अलग से है. अगर न्‍यूनतम वेतन ठेका श्रमिकों का बढ़ेगा तो निश्चित रूप से एक ठीक वातावरण होगा. उनको भी सम्‍मान के साथ जीवन जीने का अधिकार होगा. आप स्‍थायी श्रमिकों के हित के लिए कई बार की योजनाएं बनती हैं और ठीक प्रकार से आपने वातावरण बनाया है, उसके कारण नये उद्योग भी आए हैं और पुराने उद्योग भी बन्‍द होने से बचे हैं. लेकिन मैं आपसे इतना निवेदन जरूरत करेंगे कि आप स्‍थायी श्रमिकों के लिये आप ठीक प्रकार से एक योजना बनाते हैं लेकिन जो ठेकेदारी श्रमिक होते हैं, विशेषकर अगर उद्योग चालू स्थिति में हैं और जो श्रमिक 10-15 वर्षों से कार्य कर रहे हैं. 10-15 वर्षों से कार्य करने के बाद भी, उद्योग प्रबन्‍धक द्वारा उनको कई बार निकाल दिया जाता है. अगर ठेका श्रमिकों का आप संरक्षण करेंगे तो मेरी दृष्टि से ठीक होगा.

मंत्री जी, मैं एक निवेदन आपसे और करना चाहता हूं कि मिनिमम वेज सब को मिले, बैंक के द्वारा मिले. लेकिन कई बार देखने में यह आता है कि जो स्कूल होते हैं, अस्पताल, होटल होते हैं, उनमें ठीक से मिनिमम वेज मिले, इसकी अगर आप सुनिश्चितता करेंगे, तो बहुत ठीक होगा. क्योंकि मैं स्कूलों में देखता हूं कि कई बार जो मिनिमम वेज मध्यप्रदेश शासन के द्वारा, केंद्र की सरकार के द्वारा तय है, वह भी नहीं मिल पाता है. तो अगर आप यह करेंगे तो ठीक होगा. मैं मंत्री जी से एक निवेदन और करना चाहता हूं कि जो बड़े उद्योग होते हैं, इन बड़े उद्योगों में जो सीसा होता है, उनका जो एक प्रकार से, उसकी राशि सोशल एक्टिविटी में वह खर्च करते हैं, उस राशि के प्रति वह जवादेही हो, वह पर्यावरण के उसमें एवं अन्य सोशल एक्टिविटी में पूरी खर्च करें, अगर आप यह सुनिश्चित करेंगे, तो मैं आपको बहुत बहुत धन्यवाद दूंगा. मंत्री जी, एक चीज के लिये मैं आपको और धन्यवाद देता हूं. जो 58 से 60 साल आपने निजी उद्योगो में किया है, उसके लिये मध्यप्रदेश की सरकार के लिये, मुख्यमंत्री जी के लिये जितनी तारीफ की जाये, उतनी कम है. लेकिन जो मेरे यहां नागदा में तो आपके द्वारा त्रिपक्षीय वार्ता बुलाकर उस नियम को लागू किया, मैं उसके लिये भी आपको धन्यवाद देना चाहता हूं. लेकिन जब वह गजट नेटिफिकेशन हुआ था और जो त्रिपक्षीय वार्ता हुई थी, उसके बीच में जिन श्रमिकों को निकाल दिया था, अगर उन श्रमिकों को वापस हित लाभ दिलाने का आप काम करेंगे तो निश्चित रुप से आपको बहुत बहुत धन्यवाद दूंगा. आपकी जो एक अभिनव योजना है, एक बार आपसे मेरी चर्चा हुई थी, जो श्रमिकों के बच्चों के लिये आवासीय विद्यालय खोलने की योजना थी, अगर यह चीज पूरे मध्यप्रदेश में लागू होगी, तो उन श्रमिकों के बच्चे बड़े स्कूलों में, उन आवासीय विद्यालयों में पढ़कर आगे बढ़ पायेंगे. पिछड़ा वर्ग के लिये जो आपने पोस्ट मेट्रिक छात्रवृत्ति, विदेश अध्ययन की छात्रवृत्ति, मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग स्वरोजगार योजना और पिछड़ा वर्ग के मेघावी विद्यार्थियों को जो आप पुरस्कार देते हैं, 10वीं के छात्रों को 5 हजार, 12वीं के छात्रों को 10 हजार रुपये और विशेष करके जो व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा आयोजित परीक्षाओं में पिछड़े वर्ग के सर्वाधिक अंक जो आप पीईटी,पीपीटी और एमसीए में देते हैं, प्रथम पुरस्कार एक लाख, द्वितीय पुरस्कार 50 हजार और तृतीय पुरस्कार 25 हजार रुपये, मैं इसके लिये भी आपको बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं. मैं आपकी एक योजना के लिये जो अल्पसंख्यक समाज के लिये भोपाल में आप हज यात्रियों के लिये सुविधायुक्त 6 करोड़ की लागत से एक हज हाउस बना रहे हैं, मैं उसके लिये भी आपको बहुत बहुत धन्यवाद देता हूं. सभापति महोदय, आपने बोलने के लिये जो अवसर दिया, उसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद.

श्री कमलेश्वर पटेल (सिहावल) -- सभापति महोदय, हम समझते हैं कि गरीबों का सबसे ज्यादा अगर हितैषी कहना चाहिये, तो यह विभाग है. पर गरीबों, मजदूरों के संरक्षण के लिये जिस तरह से काम होना चाहिये, उस तरह से बिलकुल काम नहीं हो रहा है. बड़ा दुख होता है, जब गरीब,मजदूर परेशान होता है. मजदूरी के लिये परेशान है, मजदूरी करने के बाद भी जब अपने भुगतान के लिये परेशान है. 3-3,6-6 महीने वह भटकता रहता है. सरकार, सरकार के अधिकारी कर्मचारी सोते रहते हैं. अगर किसी औद्योगिक, प्रायवेट संस्थान में काम कर रहा है और कोई गरीब अपनी लड़ाई लड़ना चाहता है, अपनी मजदूरी की लड़ाई लड़ना चाहता है तो उसकी शासकीय संस्थाएं मदद न करके औद्योगिक संस्थाओं की मदद करते हैं. बड़ा दुख होता है. कई ऐसी घटनायें आये दिन घटती रहती हैं. और तो और हम तो बोलते हैं, सरकार से मेरा निवेदन है कि जिन भी संस्थाओं ने चाहे वह शासकीय,अर्द्ध शासकीय, प्रायवेट इंडस्ट्रियां हों, बिल्डर हों. जहां जिस क्षेत्र में भी अगर गरीब श्रमिक मजदूरी कर रहा है और अगर उसकी मजदूरी समय पर भुगतान नहीं होती है, तो उसके लिये सरकार को प्रावधान करना चाहिये. चाहे वह मनरेगा में काम किया हो, 6-6 महीने अगर सरकार भुगतान नहीं कर रही है या अन्य योजनाओं में या कहीं प्रायवेट संस्थान में काम किया है, अगर मजदूरी नहीं मिल रही है, तो गरीबों को मजदूरी दिलाने के लिये सरकार को कड़े नियम बनाना चाहिये. चाहे वह शासकीय या प्रायवेट संस्थान हो और उनका समय पर मजदूरी का भुगतान हो, इसके लिये प्रावधान करना चाहिये. न कि इंसपेक्टर राज श्रम विभाग में भी है, उसके माध्यम से जो थोड़ा तालमेल करके और व्यवस्था बना लेते हैं. यह बड़ा चिंता का विषय है. योजनायें तो हमारे बहुत सारे साथियों ने गिनाईं, पर अगर सही में आप देखेंगे, अगर किसी मजदूर, श्रमिक की मृत्यु हो जाती है और जो उसको अंत्येष्टि के लिये 3 हजार रुपये देने का प्रावधान है, उसके लिये भी वह महीनों भटकता है. वह भी उसको नहीं मिल पाता है. यह एक चिंता का विषय है, इस पर सरकार को सोचना चाहिये. सरकार ने इंदिरा आवास के लिये भी बहुत प्रावधान किया है. अन्य योजनाओं, राजीव आश्रय योजना भी इसके पहले थी, अभी मुख्यमंत्री आवास योजना चल रही है. पर सच बात तो यह है कि गरीब के जेब में अगर पैसा है तो उन योजनाओं का लाभ मिलता है. नहीं तो मजदूर भटकता रहता है. उसको न्याय नहीं मिलता है. इस पर सरकार को चिंता करना चाहिये. इसको सख्ती से क्रियान्वयन करना चाहिये. कई संस्थाएं ऐसी भी हैं, जहां मजदूर काम करता है, कोई गार्ड की नौकरी करता है, कई अन्य छोटे कर्मचारी होते हैं. जो सरकार की तरफ से एक निश्चित वेज है, एक शासकीय उचित राशि तय है, वह राशि तो मिलती है, उसके साथ जो पीएफ का पैसा काटते हैं, उसको पीएफ का पैसा समय पर नहीं मिलता है. कई कम्पनियां खा जाती हैं. पीएफ कई गरीबों को नहीं मिल पाता है. इसके लिये भी कड़ाई से, सख्ती से पालन कराना चाहिये. तेंदूपत्ता के बोनस, मजदूरी के लिये सालों इंतेजार करते हैं. 2-3 साल बाद भी उनके खाते में पैसा नहीं जा पा रहा है. अल्पसंख्यक कल्याण की भी बहुत सारी बातें तो होती हैं. योजनाएं भी बहुत सारी गिनाई जाती हैं. पर जिस तरह से इसका प्रचार प्रसार, लाभ जो भी अल्पसंख्यक संस्थाएं हैं, उनको जिस तरह से मिलना चाहिये, नहीं मिल पाता है. इसके लिये भी सरकार को चिंता करना चाहिये और जो जो मद के बारे में हमारे साथी सिंह साहब बोल रहे थे, बड़ा प्रचार प्रसार करके कि हमने इन इन में प्रावधान किया है. सरकार की तरफ से वक्तव्य आ रहा था, पर मिलता नहीं है. हमें तो मेरे विधान सभा क्षेत्र में एक भी ऐसी संस्था, जगह नहीं दिखाई दी, जहां पर शासकीय अनुदान सरकार द्वारा अल्पसंख्यक संस्थाओं को मिल पाया हो. तो इस पर भी व्यवस्था होना चाहिये. उन्हीं को मिलता है, जिन्होंने लेनदेन कर दिया, सांठ-गांठ कर ली, उन्हीं तक यह लाभ पहुंचा, बाकी संस्थाओं को पहुंचा ही नहीं. इस पर भी व्यवस्था बनाने की आवश्यकता है. एक बड़ा महत्वपूर्ण विभाग मुख्यमंत्री जी ने बड़ा प्रचार प्रसार करके बनाया था और मुख्यमंत्री आवास में भोजन भी कराया था. घुमक्कड़ और अर्द्ध घुमक्कड़ आयोग का भी गठन कर दिया था, अध्यक्ष भी बना दिया था. शायद मेरी जानकारी में है एक अध्यक्ष अभी वर्तमान में है कि नहीं. लेकिन पता नहीं, पर दो कर्मचारी हैं, दो या तीन कर्मचारी से ज्यादा नहीं हैं उस विभाग में. कैसे चलेगा. आपने प्रचार प्रसार तो बहुत किया. उससे ज्यादा तो प्रचार प्रसार में पैसा खर्चा कर दिया और वहीं यह घुमक्कड़ अर्द्ध घुमक्कड़ आयोग बनाया था, उनको एससी,एसटी में शामिल करने की बात सरकार ने की थी. सरकार क्यों भूल गई. क्या केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है कि इस वर्ग के लिये हमने प्रचार प्रसार तो बहुत किया, बहुत बड़ा सम्मेलन बुलाया सरकार के बहुत पैसे भी खर्च कर दिये. उसके बाद क्यों नहीं उनको एससी,एसटी में शामिल करने संबंधी प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा. उनको दर्जा देने का आपने लालच दिया था, क्यों नहीं उनके लिये बात की. क्यों सरकार सिर्फ बातों तक ही सीमति है. सिर्फ सरकार बड़ी बड़ी बातें तो करती है, पर सरकार उनके लिये किसी भी प्रकार का प्रयास नहीं करती है. हम समझते हैं कि अलग से विभाग बनाने से काम नहीं बनेगा. जितने विभाग हैं और जो विभाग हमारे पास पहले से थे, उसमें व्यवस्थाएं सुधार करने की सरकार को ज्यादा आवश्यकता है. बजाये विभाग बनाने के और सरकार का खर्चा बढ़ाने में. अगर हम पिछड़ा वर्ग कल्याण की बात करें, तो बातें तो बहुत करते हैं. पिछली बार ही हमने विधान सभा में प्रश्न लगाया था. जवाब आया था कि एक भी विदेश पढ़ने के लिये छात्र नहीं गया मध्यप्रदेश से. तो पिछड़ा वर्ग के कल्याण के लिये योजनाएं तो बहुत सारी संचालित हैं, परंतु व्यवस्थाओं के नाम पर अगर देखेंगे, इनके छात्रावास में विजिट कीजिये, तो जिस तरह की व्यवस्थाएं होनी चाहिये, बिलकुल व्यवस्था समुचित नहीं हैं. सिर्फ भ्रष्टाचार के अड्डे बने हुए हैं. मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि जो बजट का प्रावधान किया गया है, यह भ्रष्टाचार की भेंट नहीं चढ़े, इसका सही ढंग से उपयोग हो. हम मंत्री जी द्वारा प्रस्तुत मांगों का विरोध करते हैं, धन्यवाद.

श्री लोकेन्द्र सिंह तोमर(मांधाता) -- माननीय सभापति महोदय, मैं मांग संख्या 18, 63, 66 और 69 के समर्थन मे अपनी बात कहन के लिये खड़ा हुआ हूं. श्रम, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक पर बहुत चर्चा हो चुकी है. एक ऐसा वर्ग भी इस मध्यप्रदेश के अंदर रहता है जिसकी चर्चा 2003 से पहले किसी ने नहीं की थी, न किसी सरकार ने सुध ली थी ,न उस पर कभी विचार किया था वह थे धुमक्कड़, अर्द्ध-घुमक्कड़, विमुक्त जाति के लोग. इसके लिये हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री जी ने एक अलग से विभाग बनाया है और जो अलग से विभाग बनाया है उसमें 51 जातियों को सम्मलित किया गया है जिसके पीछे उद्देश्य एक ही है कि इन जनजातियों की प्रमुख समस्या, शैक्षणिक, पिछड़ापन, आर्थिक रूप से विपन्नता, घुमक्कड़ प्रवृत्ति के कारण स्थाई आवास का नहीं होना. जब इस विभाग का गठन हुआ तो गठन के पश्चात प्रदेश के मुख्यमंत्री जी ने, हमारे मंत्री जी अंतर सिंह आर्य ने जिस गति के साथ में विभाग का काम शुरू किया है तो मैं दावे के साथ में कह सकता हूं, प्रमाणिकता के साथ में कह सकता हूं कि आज उन जातियों के लोगों का शैक्षणिक स्तर सुधरा है, उनका पिछड़ापन जो बहुत पिछड़ गये थे, इसके लिये सरकार ने अनेक योजनायें बनाकर सरकार ने उनको आगे लाने का काम किया है.

मान्यवर सभापति महोदय, इनका जीवन परेशानियों से भरा रहता हू और इसी को देखते हुये 2011-12 में इसके लिये विभाग का गठन किया गया. इस वर्ग के लोग मजरे,टोले,मोहल्ले बस्तियों में रहते हैं और इसी में विमुक्त जाति में बंजारा समाज भी आता है . यह समाज तो कहीं एक जगह रहता ही नहीं है टांडे उनके रहते हैं गांव गांव में वहां पर यह निवास करते हैं, इन सब वर्गों के लोगों के लिये सरकार ने सड़क, नाली, सीसी रोड, सामुदायिक भवन, पीने के पानी की व्यवस्था, लाईटिंग की व्यवस्था इसके लिये बजट में प्रावधान भी हमारी सरकार ने किया है. इसके साथ ही मैं कमलेश्वर पटेल जी से कहना चाहता हूं क्योंकि यह कह रहे थे कि इसमें कुछ नहीं है एक आयोग का गठन कर दिया. आयोग का गठन नहीं वह एक अभिकरण है, परंतु जब इस विभाग का गठन किया गया तो इसमें इन समाज के लोगों को पढ़ने के लिये छात्रावास की व्यवस्था भी की गई. अब कमलेश्वर भाई आप देखकर के आना जहां जहां यह छात्रावास खुले हैं, आप चाहें तो मेरे यहां चले चलना. मैं आपको आमंत्रित करता हूं. खंडवा जिले में मेरे विधानसभा क्षेत्र में विमुक्त जाति का कन्या छात्रावास , पिछले वर्ष खुला है, हरसूद में खुला है . बुरहानपुर में खोला है.

श्री सुखेन्द्र सिंह -- अभी मांग करेंगे कि यह खोला जाये.

सभापति महोदय- कृपा करके समाप्त करें.

श्री लोकेन्द्र सिंह तोमर --सभापति महोदय, मैं कह दूंगा कि 1 बच्चे तक ही सीमित रहो तो क्या रह पाते हो. इसलिये आवश्यकता के आधार पर मांग की जाती है. हमारी जो सरकार ने किया है कांग्रेस की सरकार ने 50 साल तक नहीं किया है , आप लोगों ने सिर्फ शोषण करने का काम किया है. छात्रावास हमने खोले हैं और वहां पर विमुक्त जाति के, घुमक्कड, अर्द्ध घुमक्कड जाति के बालक और बालिकायें उन छात्रावासों में अध्ययन कर रही हैं. उसके साथ ही अध्ययनरत छात्र छात्राओं को छात्रवृत्ति देने का काम भी हमारी सरकार के मुख्य मंत्री और आदरणीय मंत्री जी ने किया है .

1.44 बजे {सभापति महोदय(श्री केदारनाथ शुक्ल) पीठासीन हुए}

आदरणीय सभापति महोदय, विमुक्त जाति के लोगों के पढने के लिये छात्रावास चालू हो गये हैं. छात्रवृत्ति योजना है ही और साथ ही साथ उनको रोजगार की सहायता के लिये ,उनको रोजगार प्राप्त हो इसके लिये ऋण और ऋण में भी अनुदान देने का काम हमारी सरकार ने किया है. विमुक्त जाति के लोगों के लिये आवास योजना भी है. उस आवास योजना में वह एक जगह रहकर अपना रोजगार चालू कर सकते हैं उसमें 60 हजार रूपये का अनुदान और 10 हजार रूपये उसमें श्रम अनुदान दिया जाता है. मान्यवर सभापति महोदय, जाति प्रमाण पत्र के बारे में कहना चाहता हूं. कभी कभी क्या होता है कि घुमक्कड़, अर्द्ध घुमक्कड़, जाति के लोग अलग अलग जगह पर ठहरते हैं और जब जाति प्रमाण पत्र की बात आती है तो जाति प्रमाण पत्र बनाने में उनको दिक्कत आती है इसलिये जाति प्रमाण पत्र बनाने में भी बहुत सरलीकरण कर लिया गया है. अब उनको यहां वहां भटकने की आवश्यकता नहीं है. विमुक्त जाति के लिये अब 10 नवीन छात्रावास यह सरकार और खोलने जा रही है. अब हमारे कांग्रेस के मित्र कहेंगे कि कहां खुले हैं तो मैं उनको बताना चाहता हूं कि इसी धरती पर खुले हैं. 50 साल में मैंने कल भी कहा था और आज भी कह रहा हूं आपकी सरकार जब थी, आपके मुख्यमंत्री जो घोषणायें करते थे, निर्माण कार्यों का भूमि पूजन करते थे, आज भी वो पत्थर लगे हुये हैं, (XXX) . मैं आपको बताना चाहता हूं....

श्री कमलेश्वर पटेल-- तोमर साहब आपके मुख्यमंत्री जी ने हजारों की संख्या में भूमि पूजन किया है लेकिन कोई काम शुरू नहीं हुआ है.

श्री लोकेन्द्र सिंह तोमर-- मान्यवर सभापति महोदय. इस विभाग के गठन के लिये मुख्यमंत्री जी को और मंत्री जी को बहुत बहुत बधाई दूंगा इसमें अभी भी बहुत कुछ करने की आवश्यकता है. आपने मेरे यहां पर कन्या छात्रावास चालू कर दिया है पर मंत्री जी भवन भी बना दें, बच्चियों का मामला है, बेटियों का मामला है.

सभापति महोदय--कृपया समाप्त करें. 8 मिनट हो गये आपको बोलते हुये.

श्री लोकेन्द्र सिंह तोमर -- अभी कहां साहब. मान्यवर सभापति महोदय, एक छात्रावास हेतु भवन निर्माण की मेरी मंत्री जी से मांग है. दूसरा श्रम विभाग के बारे में कहना चाहता हूं . श्रम विभाग में जो श्रमिक काम करते हैं, श्रम न्यायालय हैं वहां पर उनको न्याय मिलता है परंतु बहुत सारे ऐसे श्रमिक भी हैं जो असंगठित हैं जिनका पंजीयन नहीं है उनको उस सुविधा का लाभ मिलना चाहिये. मेरे यहां पर सिंघाजी थर्मल पॉवर है वहां पर ठेकेदारी प्रथा से ठेकेदार श्रमिकों को काम पर लगाता है. पिछले दिनों मैंने एक प्रश्न लगाया था कभी कभी कुछ गलती के कारण वहां पर राज सिक्यूरिटी वाले ने मात्र 4200 रूपये वो श्रमिकों को भुगतान कर रहा है जबकि श्रमिक नियम के अनुसार उसको श्रमिकों का भुगतान कलेक्टर रेट के आधार पर करना चाहिये. अब उसको कहां पकड़े इसके लिये मैं मंत्री जी को एक सुझाव देना चाहता हूं कि वह श्रमिक की तनख्वाह उसके बैंक के एकाउन्ट में डाली जाये. अब एकाउन्ट में डले इसके लिये एक दो जगह पर जांच करने के लिये बैंक से बैलेंस शीट बुलाई जाये कि कितना पैसा इसके खाते में हर माह डाला जा रहा है. तो पता लग जायेगा, पीएफ की राशि जमा हो जाये, और मान्यवर सभापति महोदय, जब हम मंडियों में जाते हैं हम्मालों का पंजीयन नहीं है. इसलिये जो श्रमिक जिनिंग फेक्ट्री में काम करते हैं उनका पंजीयन नहीं होता है, जो श्रमिक दाल मिल में काम करते हैं उनका पंजीयन नहीं होता है, जो श्रमिक सीमेन्ट की फेक्ट्री में काम करते हैं उन श्रमिकों का पंजीयन नहीं होता है, वेयर हाउस में काम करने वाले जो हमारे श्रमिक हैं उनका भी पंजीयन बराबर रूप से नहीं होता है. मैं माननीय मंत्री जी से मांग करता हूं कि अलग अलग क्षेत्रों में जाकर अपने अधिकारियों को भेजें वे वहां पर पंजीयन शिविर लगायें और श्रमिकों का पंजीयन करायें और जो कम वेतन श्रमिकों को मिलता है इस पर विशेष रूप से मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि इस ओर ज्यादा ध्यान देंगे तो श्रमिकों को फायदा होगा. मान्यवर सभापति महोदय, आपने मुझे मांग पर अपनी बात रखने के लिये जो अवसर प्रदान किया है उसके लिये आपको बहुत बहुत धन्यवाद.

श्री लोकेन्‍द्र सिंह तोमर-- माननीय सभापति महोदय, पिछड़ावर्ग, अल्‍पसंख्‍यक, श्रम और विमुक्‍त जातियों की इन अनुदान मांगों के लिये यशपाल सिंह जी, दिलीप सिंह शेखावत जी, सौरभ सिंह जी, सुखेन्‍द्र सिंह जी और मैं खुद, हमको बोलने का अवसर मिला है, पिछड़ा वर्ग पर, जिस पर आप विशेष रूप से ध्‍यान दें क्‍योंकि हम सब सामान्‍य वर्ग से आते हैं और हमको यह सौभाग्‍य मिला है तो मंत्री जी आप ज्‍यादा काम करें.

श्री वेलसिंह भूरिया-- माननीय सभापति महोदय, दरबार यह नहीं सोचें कि हम ही बोलते हैं, हम भी बोलेंगे आदिवासी भी, गरीब और मजदूरों के ऊपर, ठाकुर ही ठाकुर नहीं बोलेंगे, भील भी बोलेगा.

श्री सुखेन्‍द्र सिंह (मऊगंज)-- माननीय सभापति महोदय, मैं मांग संख्‍या 18, 63, 66, 69 के विरोध में बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं. यह श्रम विभाग निश्चित रूप से अपने देश के लिये बड़ा ही महत्‍वपूर्ण विभाग है, जैसा कि अभी साथी विधायक ने कहा कि बोलने वालों की संख्‍या कम है, लेकिन यह बहुत बड़ी चिंता का विषय है, इसलिये कि भारत की आबादी में आज भी 80 प्रतिशत किसान हैं, किसाने अपने खेत में मजदूरी करने वाला एक व्‍यक्ति है और उसी तरह से जो किसान हैं उनके पास जमीनें हैं, आज वह भी अधिया पर, मजदूरी पर अपना खेत दे रहे हैं, लेकिन जब ओला पाला पड़ता है तो किसान तो कुछ न कुछ मुआवजा पा जाता है लेकिन जो बंटाई का मजदूर होता है जो और होता है, उनके बारे में शायद सरकार की कोई चिंता नहीं है यह भी एक बहुत बड़ा विषय है. दूसरी बात माननीय सभापति महोदय, जो बड़े उद्योग लगे हुये हैं, जिस समय उद्योग लगाये गये, उस समय जब जमीनें ली गईं किसानों की तो उनको मजदूरी का काम दे दिया गया, लेकिन आज उनके लड़कों, बच्‍चों को वह मजदूरी भी नहीं दी जा रही, यह भी एक चिंता का विषय है, उनके लिये भी यह बात आनी चाहिये.

मनरेगा में पहले मजदूरी नियत थी कि कोई मजदूर काम करे या न करे, उसको 100 दिन का काम दिया जायेगा, लेकिन अब वह बढ़ाकर 150 कर दी गई है, लेकिन जब मनरेगा का मजदूर आज काम करता है तो उसकी जो मजदूरी नियत है 150 या 170 उसमें भी कटौती कर दी जाती है, उसको पूरे दिन की मजदूरी नहीं दी जाती, सब इंजीनियर उसको काट देता है कि इतनी मजदूरी नहीं हो पाई है, यह भी एक गंभीर विषय है. अभी हमारे साथी विधायक कह रहे थे कि बहुत बड़ी चिंता हो रही है. आज मशीनी युग का बहुत इस्‍तेमाल हो रहा है, मजदूर लगातार पलायन कर रहे हैं. भाई सौरभ सिंह ने बड़ी गंभीर बात इसमें बोली कि जो हमारे प्रदेश का मजदूर काम करने के लिये बाहर जाता है, जब कतिपय कारणों से एक्‍सीडेंटल लाश उसकी गिर जाती है तो उसको आने जाने के लिये कोई व्‍यवस्‍था नहीं बनाई गई, माननीय सभापति महोदय मैं समझता हूं आपके क्षेत्र से, पूरे मध्‍यप्रदेश से, हर विधानसभा क्षेत्र से मजदूर बाहर काम करने के लिये जा रहे हैं, उनके साथ आये दिन कोई न कोई घटना होती है, हम लोगे किसी तरह से वहां के टीआई को फोन करते हैं, आप भी करते होंगे, इस पर एक निश्चित रूप से कानून बनना चाहिये, जब भी हमारे प्रदेश का मजदूर कहीं दूसरी जगह काम करने जाये तो कम से कम उसकी लाश वापस हमारे घर, गांव में सुरक्षित आ सके, यह बड़ा गंभीर विषय है.

अभी मांग संख्‍या 63 अल्‍पसंख्‍यक पर बहुत सारे हमारे साथी विधायकों ने चर्चा की लेकिन मैं बताना चाहता हूं कि हज के लिये 2015-16 में जो बजट निर्धारित किया गया है, सिर्फ उतना ही बजट निर्