मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

          ______________________________________________________________

 

चतुर्दश विधान सभा                                                                        षोडश सत्र

 

 

फरवरी-मार्च, 2018 सत्र

 

बुधवारदिनांक 14 मार्च, 2018

 

(23 फाल्‍गुनशक संवत्‌ 1939)

[खण्ड- 16 ]                                                                                 [अंक- 9 ]

 

______________________________________________________________

 

 

 

 

 

 

 

मध्यप्रदेश विधान सभा

 

बुधवारदिनांक 14 मार्च, 2018

 

(23 फाल्‍गुनशक संवत्‌ 1939)

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.03 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ. सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

पेयजल समस्‍या का निराकरण

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

1. ( *क्र. 2276 ) श्री बलवीर सिंह डण्‍डौतिया : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) पी.एच.ई.डी. के द्वारा पेयजल समस्‍या के निराकरण हेतु शासन की क्‍या नीति व निर्देश प्रचलन में हैं? (ख) पी.एच.ई.डी. को मध्‍यप्रदेश से विगत चार वर्ष से खण्‍ड मुरैना को कितने हैंडपंप की स्‍वीकृति प्राप्‍त हुई? जानकारी वर्षवार दें (ग) उपरोक्‍त अनुसार मुरैना जिले के लिए प्राप्‍त हैंडपंप कितने स्‍वीकृत किये गये व स्‍वीकृति हेतु किन-किन जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत किये गये? जानकारी विधान सभा क्षेत्रवार दी जावे

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-2 अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-2 एवं 3 के अनुसार है।

श्री बलवीर सिंह डण्डौतिया--अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से अपने प्रश्न के उत्तर में पूछना चाहता हूं कि चार वर्षों में मेरे क्षेत्र में कुल 13 हैण्डपम्प लगाये गये हैं, जबकि 1047 हैण्डपम्प मंजूर हैं. मेरा क्षेत्र जंगल एवं बीहड़ है. वहां पर पिछले चार सालों से सूखा है. वहां पर 1047 में से 13 हैण्डपम्प मेरे क्षेत्र में लगाये गये हैं, ऐसा क्यों? मंत्री जी बताने की कृपा करें.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले--अध्यक्ष महोदय, पूरी जानकारी परिशिष्ट में दे दी गई है. अतिरिक्त जानकारी के रूप में बता रही हूं कि मुरैना में 200 हैण्डपम्पों की मंजूरी थी जिसमें से हम 187 लगवा चुके हैं 17 और बचे हैं जिनको मार्च तक पूरा कर देंगे.

श्री बलवीर सिंह डण्डौतिया--अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी द्वारा जो जानकारी दी जा रही है गलत है. चार वर्षों में 1047 हैण्डपम्प लगाने थे, यह आपकी जानकारी है इनमें से विगत् चार वर्षों में मेरे क्षेत्र में 13 हैण्डपम्प लगाये गये हैं.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले--अध्यक्ष महोदय, 191 हैण्डपम्प चालू हैं. कई हैण्डपम्पों के जल स्रोत सूख गये हैं, जिसकी वजह से हैण्डपम्पों में पानी नहीं आ रहा है. स्रोत बंद होने की वजह से अन्य वैकल्पिक व्यवस्था हम करने के लिये तैयार हैं.

श्री बलवीर सिंह डण्डौतिया--अध्यक्ष महोदय, पूरे क्षेत्र में पानी की समस्या है. वहां पर कुल 10 प्रतिशत हैण्डपम्प चालू हैं. जो सामान जाता है उसे ई.ई. और अधिकारीगण यहां भोपाल में ही बेच जाते हैं.कोई सामान वहां नहीं पहुंच रहा है. मैं यह पूछना चाहता हूं कि 1074 में से 1047 हैण्डपम्प लगे हैं और 1047 में से कुल 13 हैंडपंप मेरे विधान सभा क्षेत्र में 4 साल में लगे हैं.

सुश्री कुसुमसिंह महदेले - अध्यक्ष महोदय, हम अतिशीघ्र व्यवस्था करवा देंगे और मैंने जो जानकारी दी है वह सही जानकारी है और परिशिष्ट में सही जानकारी है.

श्री बलबीर सिंह डण्डौतिया - इसमें गलत जानकारी दी गई है. 4 साल में 1047 हैंडपंप दिये गये हैं और मेरे विधान सभा क्षेत्र में कुल 13 लगे हैं. यह भेदभाव किया गया है.

सुश्री कुसुमसिंह महदेले - इनके क्षेत्र में जो हैंडपंप बंद हैं,खराब हैं उनको हम सुधरवा देंगे और पानी की कमी नहीं होने देंगे.

श्री बलबीर सिंह डण्डौतिया - माननीय मंत्री जी से मेरा निवेदन है कि जिन अधिकारियों ने भेदभाव किया है उनके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी.

सुश्री कुसुमसिंह महदेले - जांच करवा लेंगे.यदि अधिकारी दोषी होंगे तो निश्चित कार्यवाही होगी.

मे. रॉयल केटर्स द्वारा निविदा की शर्तों का उल्‍लंघन

[तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोज़गार]

2. ( *क्र. 2418 ) डॉ. योगेन्‍द्र निर्मल : क्या राज्‍यमंत्री, तकनीकी शिक्षा महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विगत् 3 वर्ष में राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्‍वविद्यालय को केन्‍टीन ठेका मेसर्स, रॉयल केटर्स द्वारा वर्तमान कुल सचिव की कालावधि में कुल कितनी अवधि तक संचालित किया गया है? वर्षवार जानकारी देवें। (ख) राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्‍वविद्यालय द्वारा मेसर्स रॉयल केटर्स के केन्‍टीन आवंटन की अवधि में कुल कितनी रॉयल्‍टी राशि प्राप्‍त की जानी थी और कितनी रॉयल्‍टी राशि प्राप्‍त की गई? दिनांकवार एवं वर्षवार जानकारी देवें। (ग) क्‍या मेसर्स रॉयल केटर्स द्वारा निविदा की शर्तों के अनुसार ही रॉयल्‍टी की एक मुश्‍त राशि कुल सचिव द्वारा जमा कराई गई है? यदि हाँ, तो कब, नहीं तो क्‍यों? इस हेतु कौन उत्‍तरदायी है एवं उनके विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई है? (घ) एकमुश्‍त राशि कब तक जमा करा दी जावेगी? (ड.) क्‍या मेसर्स रॉयल केटर्स को निविदा की शर्त के उल्‍लंघन हेतु चेतावनी पत्र जारी किया गया है अथवा नहीं? यदि हाँ, तो कब-कब?

 

 

राज्‍यमंत्री, तकनीकी शिक्षा ( श्री दीपक कैलाश जोशी ) :

(घ) संबंधित ठेका निरस्‍त किया गया है, शेष राशि की वसूली हेतु कानूनी कार्यवाही की जा रही है। (ड.) विश्‍वविद्यालय द्वारा मेसर्स रॉयल केटर्स को पूर्ण बकाया राशि जमा करने हेतु पत्र दिनांक 03.02.2018 जारी किया गया है। जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र 3 अनुसार है।

परिशिष्ट - ''एक''

 

डॉ.योगेन्द्र निर्मल - अध्यक्ष महोदय, मेरा क से लेकर और घ तक के जो प्रश्न हैं. इसमें केटर्स द्वारा भारी अनियमितता है और अधिकारियों ने भी इस अनियमितता में सहयोग किया है. मंत्री जी इस पर क्या कार्यवाही करेंगे?

श्री दीपक कैलाश जोशी - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को अवगत कराना चाहता हूं. प्रथम दृष्टया इस संबंध में कुछ अनियमितता सामने आई थी विभाग ने त्वरित कार्यवाही करते हुए 1.2.2018 को एक जांच समिति का गठन कर दिया है. हम अतिशीघ्र समिति का निर्णय लेकर विधायक जी को भी अवगत करा देंगे.

डॉ.योगेन्द्र निर्मल - धन्यवाद.

सुमावली विधान सभा क्षेत्रांतर्गत नल-जल योजना का संचालन 

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

3. ( *क्र. 3881 ) श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) सुमावली विधान सभा क्षेत्र के ग्राम नन्‍दपुरा, बरौली, हेतमपुर की ग्रामीण नल-जल योजना की वर्तमान में क्‍या स्थिति है? ग्राम पंचायतवार जानकारी दी जावे। (ख) उक्‍त योजना में ग्रामों में खनन कब किये गये? विगत 02 वर्षों में उन पर संपूर्ण कार्यों सहित कितनी राशि खर्च की गई? वर्ष, राशि सहित पूर्ण जानकारी दी जावे। (ग) क्‍या शासन द्वारा उक्‍त योजना को बंद कर दिया है? यदि नहीं, तो पूर्ण नहीं करने में विलंब के क्‍या कारण रहे? (घ) क्‍या शासन उक्‍त नल-जल योजना को राशि आवंटित करेगा? यदि हाँ, तो कब तक?

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) एवं (ख) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) जी नहीं। योजनाओं में पर्याप्त क्षमता के स्त्रोतों का अभाव होने के कारण। (घ) जी हाँ। निश्चित समयावधि नहीं बताई जा सकती है।

परिशिष्ट - ''दो''

 

श्री सत्यपाल सिंह सिकरवार - माननीय अध्यक्ष महोदय,मैंने जो प्रश्न किये थे माननीय मंत्री महोदया से उनमें उन्होंने बड़ी सूक्ष्म जानकारी दी है. योजनाओं में पर्याप्त क्षमता के स्त्रोतों का अभाव होने के कारण निश्चित समयावधि बताई जाना संभव नहीं है. मैं जानना चाहता हूं कि 2007-08 की योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति हुईं और 2018 अभी यह वर्ष चल रहा है. अगर इन दस वर्षों में भी यही उत्तर आया तो मुझे लगता है कि ठीक नहीं होगा. यह काम कब खत्म हो जायेगा और यह नलजल योजना कब प्रारंभ हो जायेगी. गर्मी का समय है यदि दस सालों में भी विभाग समयावधि नहीं बता पा रहा है तो इससे ज्यादा शर्मनाक बात नहीं हो सकती.

सुश्री कुसुमसिंह महदेले - - माननीय अध्यक्ष महोदय, यह स्पष्ट नहीं किया है कि कहां की योजना चालू नहीं है. मैंने एक-एक जानकारी बड़े विस्तृत तरीके से परिशिष्ट में दे दी है और आपको अतिरिक्त जानकारी चाहिये तो प्वाइंटेड बताएं मैं जानकारी दे दूंगी.

श्री सत्यपाल सिंह सिकरवार - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने लिखा है ग्राम नन्दपुरा,बरौली,हेतमपुर की ग्रामीण नलजल योजनाओं की वर्तमान में क्या स्थिति है ग्राम पंचायतवा जानकारी दी जाए. मुझे जो जानकारी दी गई है. जो परिशिष्ट मेरे पास है उसमें दिया है किक 2007-08 की यह प्रशासनिक स्वीकृति है. आपने बताया है कि कहीं टंकी प्रारंभ हो गई है. आपने बताया कि बरौली में मोटर खराब है. मैं बताना चाहता हूं कि मोटर खराब होने के कारण नहीं वहां नलजल योजनाओं की पाईप लाईन भी पूर्णत: क्षति ग्रस्त है. उस पर भी काम नहीं हुआ है और हेतमपुर में तो आपने लिखा है कि हमें जगह ही नहीं मिली. दस वर्षों में अगर जगह नहीं मिली एक बार अधिकार मुझसे मिलते तो हम वहां जगह दिलवाते. नन्दपुरा में तो आज तक टंकी ही नहीं बनी है.

सुश्री कुसुमसिंह महदेले - माननीय अध्यक्ष महोदय,नन्दपुरा की योजना चालू है. यह सही है कि टंकी नहीं बनी. तो गांव के विवाद के कारण टंकी नहीं बनी है अगर हमें जगह उपलब्ध हो जायेगी तो हम टंकी बनवा देंगे और बरौली की जो बंद योजना है उसके टेण्डर हो गये हैं और मेरे ख्याल से आज से योजना चालू हो जायेगी.

श्री सत्यपाल सिंह सिकरवार - माननीय मंत्री जी धन्यवाद. मेरा एक और प्रश्न है कि गर्मी का समय चल रहा है जो 25-25 हैंडपंप विधायकों को दिये जाते थे वह भी मुझे लगता है कि हम लोगों को नहीं दिये जा रहे और यह मेरी नहीं पूरे सदन के विधायकों की मांग है तो जो कम से कम 25 हैंडपंप विधायकों को दिये जाते थे वह तो कम से कम उपलब्ध हो जाएं.

.. (व्यवधान)..

सुश्री कुसुम सिंह महदेले - अध्यक्ष महोदय, इस साल अवर्षा का साल है. इस साल पानी बरसा नहीं है. पृथ्वी में जमीन के अंदर पानी की बहुत कमी है,कम से कम 10 मीटर नीचे पानी चला गया है. जबर्दस्ती बोर कराएं तो शासन का पैसा ही खर्च होता है. जहां कहीं जांच कराकर पानी उपलब्ध होगा, वहां हम हैंडपंप खनन करवा देंगे.

अध्यक्ष महोदय - प्रश्न संख्या 4 श्री सुशील कुमार तिवारी..

एक माननीय सदस्य - अध्यक्ष महोदय, जांच कराने की मशीन ही नहीं हैं.

श्री दिलीप सिंह शेखावत - अध्यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र में भी लगभग 1000 फीट के आसपास पानी है.

श्री अनिल फिरोजिया - अध्यक्ष महोदय, जवाब तो दिलवाएं. हमें भी मौका दे दिया करें.

अध्यक्ष महोदय - नहीं-नहीं, इस तरह से सबको एलाउ नहीं करेंगे.

श्री अनिल फिरोजिया - हमारे विधान सभा क्षेत्र में भी सूखा है.

अध्यक्ष महोदय - यह समस्या सबके यहां पर है, आपके यहां पर ही नहीं है.

श्री अनिल फिरोजिया - मार्च हो गया है. अप्रैल आ रहा है, पानी कब देंगे?

अध्यक्ष महोदय - प्रतिपक्ष के नेता जी खड़े हैं, कृपा करके कुछ मर्यादा रखें.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) - अध्यक्ष महोदय, सिकरवार जी का जो प्रश्न है और उनकी जो पीड़ा है. आप ही भर की यह पीड़ा नहीं है. यह बहुत सारे माननीय विधायकों की पीड़ा है. खासतौर से सूखे का वर्ष है, जब भारतीय जनता पार्टी के विधायक के क्षेत्र में ही 10 साल से योजना चालू नहीं हुई तो आज हम यह उम्मीद करें कि कोई विधायक यह कहे कि हमें जल्दी से 25 हैंडपंप दे दें. यह 10 साल से नहीं हुआ तो 6-7 महीने और रुक लो, मंत्री जी पन्ना में वापिस जब चली जाएं, तब शायद हम लोग उम्मीद करें.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले - अध्यक्ष महोदय, मैं इस पर आपत्ति लेती हूं. मैं पहले ही कह चुकी हूं.

श्री अजय सिंह - आप जब तक रहेंगी पीएचई विभाग में कुछ नहीं होने वाला है मंत्री महोदया.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले - अध्यक्ष महोदय, यह उचित बात नहीं है.

श्री उमाशंकर गुप्ता - अध्यक्ष महोदय, यह मुझे लगता है कि उचित बात नहीं है कि आप जब तक रहेंगी, तब कुछ नहीं होने वाला है. माननीय नेता प्रतिपक्ष जी, महिलाओं के प्रति सम्मान तो रखें.

अध्यक्ष महोदय - श्री सुशील कुमार तिवारी अपना प्रश्न पूछिए. ( श्री अनिल फिरोजिया, सदस्य के अपने आसन से कुछ कहने पर) नहीं, कोई उत्तर नहीं आएगा, कोई मतलब नहीं है. अब शून्यकाल में बोलिए.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले - अध्यक्ष महोदय, इसमें महिला, पुरुष का सवाल नहीं है. मैं तो रहूंगी जब तक मुख्यमंत्री जी चाहेंगे मैं रहूंगी और काम करूंगी.

अध्यक्ष महोदय - श्री सुशील कुमार तिवारी जी प्रश्न पूछेंगे.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले- अध्यक्ष महोदय, मेरा यह कहना है कि योजना चालू है टंकी के लिए गांव वाले मिलकर जगह दे दें, टंकी बनवा देंगे और यह कहना गलत है कि योजना चालू नहीं है.

(व्यवधान).

अध्यक्ष महोदय - (कई माननीय सदस्यों के एक साथ खड़े होकर बोलने पर) सब अपने अपने क्षेत्र की बात बोलेंगे. ऐसा क्या प्रश्नकाल में होता है क्या? ऐसा नहीं होता है. श्री सुशील कुमार तिवारी कृपया अपना प्रश्न करें.

श्री अनिल फिरोजिया - अध्यक्ष महोदय, एक मिनट.

अध्यक्ष महोदय - एक मिनट नहीं, आधा मिनट भी नहीं. श्री तिवारी जी मैं आगे बढ़ूंगा.

श्री अनिल फिरोजिया - अध्यक्ष महोदय, नेता प्रतिपक्ष को तो आपने टाइम दिया. नेता प्रतिपक्ष ने पूरी बात ही पलट दी. अध्यक्ष महोदय, पानी की गंभीर समस्या है. नेता प्रतिपक्ष को आपने टाइम दिया, नेता प्रतिपक्ष ने तो पूरी बात ही घूमा दी.

अध्यक्ष महोदय - प्रतिपक्ष के नेता जी को कहने का अधिकार होता है, नियम पढ़ लीजिए.

श्री अनिल फिरोजिया - अध्यक्ष महोदय, जनता की समस्या का सवाल है. ऐसा थोड़े ही होता है. अध्यक्ष महोदय, एक मिनट तो सुनना पड़ेगा.

अध्यक्ष महोदय - ऐसा नहीं होता है. ऐसा नहीं कर सकते हैं . हर कभी हर कुछ आप नहीं कह सकते हैं. कभी भी कुछ भी बिना नियम के आप बोलेंगे क्या? आप बैठ जाइए.

जबलपुर जिले में प्रदूषणयुक्‍त वाहनों पर कार्यवाही

[परिवहन]

4. ( *क्र. 579 ) श्री सुशील कुमार तिवारी : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या म.प्र. पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जबलपुर जिले में पी.यू.सी. वाहन नियुक्त किये गये हैं? (ख) यदि हाँ, तो वर्ष 2017-18 में कितने वाहनों का निरीक्षण किया गया? (ग) क्या‍ निर्धारित मापदण्‍ड से अधिक प्रदूषण वाले वाहनों पर कार्यवाही की गई? (घ) यदि हाँ, तो कितने वाहनों पर कार्यवाही की गई?

गृह मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : (क) जी नहीं। परिवहन विभाग द्वारा जबलपुर जिले में 35 पी.यू.सी. सेन्टर नियुक्त किये गये हैं। (ख) से (घ) परिवहन विभाग द्वारा प्रश्‍नाधीन अवधि में 4568 वाहनों का निरीक्षण 35 पी.यू.सी. सेन्टर के माध्यम से किया गया है। विभाग द्वारा निर्धारित मापदण्ड से अधिक प्रदूषण फैलाने वाले 137 वाहनों पर नियमानुसार कार्यवाही की गई है।

श्री सुशील कुमार तिवारी - अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री ने जो उत्तर दिया है कि प्रदूषण फैलाने वाले 137 वाहनों पर कार्यवाही की है. यह कार्यवाही एक दिन की भी हो सकती है. हमारे जबलपुर में बहुत भारी मात्रा में मिट्टी के तेल से वाहन और ऑटो चल रहे हैं. इस पर कड़ी कार्यवाही होना चाहिए. रास्ते में राहगीर जब निकलते हैं तो आंखों में एक प्रकार से इतनी जलन होती है, इसलिए माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि बड़ी कार्यवाही की आवश्यकता है. इसमें निरंतर जांच की आवश्यकता है क्या इसकी जांच कराएंगे?

श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर - अध्यक्ष महोदय, जो माननीय विधायक जी ने अवधि के बारे में प्रश्न किया था. इस अवधि में 4588 वाहनों की जांच की गई. इसमें 137 वाहन ऐसे थे, जिनका प्रदूषण का स्तर निर्धारित स्तर से ऊपर था, उनके विरुद्ध विभाग के द्वारा कार्यवाही की गई है. जहां तक माननीय विधायक जी का प्रश्न है कि उनके यहां इस तरह के और भी वाहनों की संख्या ज्यादा है तो इसके लिए हम पूरा एक विशेष अभियान जबलपुर में चलाएंगे और अभियान चलाकर और भी जो इस तरह के वाहन हैं, उन वाहनों के विरुद्ध भी हम कार्यवाही करेंगे. साथ ही मैं हमने यह भी निर्णय लिया है कि अब जो भी वाहन अगर उसका प्रदूषण निर्धारित मानक से अधिक है तो उस वाहन की हम आरसी जप्त कर लेंगे. उस वाहन को हम परमिट नहीं देंगे और जब तक उसका प्रदूषण स्तर निर्धारित मानकों के अनुसार नहीं होता, तब तक न हम आरसी वापिस करेंगे, न उस वाहन को सड़क पर चलने की अनुमति देंगे.

श्री सुशील कुमार तिवारी - धन्यवाद, माननीय मंत्री जी.

श्री सुदर्शन गुप्‍ता आर्य - अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से कहना चाहूंगा कि इस तरह का अभियान सिर्फ जबलपुर में ही नहीं पूरे मध्‍यप्रदेश में चलाएं.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह - जी हां, यह पूरे मध्‍यप्रदेश के लिये रहेगा.

प्रश्‍न संख्‍या-5 - (अनुपस्थित)

झांसी-खजुराहो सड़क निर्माण में अधिगृहीत भूमि का मुआवजा

[राजस्व]

6. ( *क्र. 1360 ) श्रीमती चन्‍दा सुरेन्‍द्र सिंह गौर : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या झांसी-खजुराहो एन.एच. सड़क का निर्माण छतरपुर जिला मुख्‍यालय में बाई-पास सड़क निर्माण के रूप में राजनगर रोड पर किया जा रहा है? उक्‍त एन.एच. के निर्माण में जिन किसानों की पटैती भूमि/मालकाना हक की भूमि शासन द्वारा अधिग्रहण की है, उन किसानों को बहुत ही कम दर पर मुआवजा राशि दी जा रही है? (ख) क्‍या छतरपुर से राजनगर रोड पर कृषक राम अवतार S/o भान सिंह की कृषि भूमि खसरा क्र. 238/1, 241, 245 कुल रकबा 4,325 हे., जो पटवारी हल्‍का बरकुआं (‍पलौठाहार) तह. जिला छतरपुर में स्थित है, उक्‍त कृषक की भूमि में से उक्‍त झांसी-खजुराहो एन.एच. का निर्माण किया जा रहा है तथा उक्‍त किसान द्वारा मुआवजा राशि न लेकर उसकी भूमि के बदले पास से लगी हुई शासकीय भूमि खसरा क्र. 228/2/3 की मांग की जा रही है? यदि हाँ, तो क्‍या जिला कलेक्‍टरों को शासन के नियमानुसार भूमि तल-बदल किये जाने के अधिकार हैं? यदि हाँ, तो उक्‍त किसान को भूमि के बदले भूमि प्रदाय किये जाने के आदेश जारी करेंगे? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों? (ग) प्रश्नांश (क) से (ख) के संबंध में उक्‍त किसान को यदि भूमि के बदले भूमि नहीं मिले एवं मुआवजा भी नहीं ले रहा है, ऐसी स्थिति में उक्‍त किसान को किस प्रकार की योजना से उसकी पटैती भूमि अधिग्रहण की भरपाई करेंगे?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जी हाँ। जी नहीं। प्रावधान अनुसार मुआवजा निर्धारण किया गया है। (ख) जी हाँ। जी नहीं। खसरा क्रमांक 238/1 एवं खसरा क्रमांक 241 के अंश भाग पर निर्माण हो रहा है। जी हाँ। जी नहीं। भू-अर्जन की कार्यवाही होने से प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) उत्‍तरांश (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में कृषक को प्रचलित अधिनियम के तहत मुआवजा भुगतान ही किया जा सकता है।

श्रीमती चन्‍दा सुरेन्‍द्र सिंह गौर - अध्‍यक्ष महोदय, मैंने प्रश्‍न में माननीय मंत्री जी से यह पूछा था कि छतरपुर जिले के पटवारी हल्‍का बरकुआं (पलौठाहार) में झांसी-खजुराहो एनएच सड़क के निर्माण में कई किसानों की कृषि भूमि अधिकृत की गई है और कृषक राम अवतार सिंह द्वारा कम मुआवजा मिलने के कारण शासकीय भूमि खसरा नंबर 228 में भूमि के बदले भूमि की मांग की गई थी क्‍योंकि खसरा नंबर 228 में फर्जी पट्टे बनवा लिए है, तो इस किसान को भूमि के बदले भूमि क्‍यों नहीं दी जा सकती है ?

श्री उमाशंकर गुप्‍ता - अध्‍यक्ष महोदय, हमारे विभाग में अदला-बदली की कोई एप्‍लीकेशन नहीं है और अधिग्रहण के मामले में भूमि बदली की व्‍यवस्‍था नहीं है. शासन ने इस पर रोक लगा रखी है. इसमें उचित मुआवजा दिया जाता है.

श्रीमती चन्‍दा सुरेन्‍द्र सिंह गौर - अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी बात मानती हूं भूमि के बदले भूमि दिये जाने की कोई परम्‍परा नहीं है. खसरा नंबर 228 में रोड निर्माण का पता लगते ही कुछ लोगों के नाम फर्जी पट्टे बन गए हैं. उन फर्जी पट्टों की जांच कराकर क्‍या वे निरस्‍त किए जाएंगे ? माननीय मंत्री जी, पट्टे निरस्‍त किये जाने की घोषणा सदन में कर दें.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता - अध्‍यक्ष महोदय, वैसे यह इस प्रश्‍न से उद्भूत नहीं होता, लेकिन माननीय सदस्‍या ने जो बताया है हम इसकी जांच करा लेंगे और कोई गड़बड़ होगी तो उसको ठीक करेंगे.

श्रीमती चन्‍दा सुरेन्‍द्र सिंह गौर - मंत्री जी, समय सीमा तो बता दें. किससे जांच कराएंगे ? पहले समय सीमा तो बताएं फिर हम आपको धन्‍यवाद देंगे. समय सीमा तो कुछ होती है, 10 दिन, 15 दिन, महीने, दो महीने.

अध्‍यक्ष महोदय - इससे वह प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता है.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता - अध्‍यक्ष महोदय, इस प्रश्‍न से यह उद्भूत ही नहीं होता है, लेकिन मैं जल्‍दी से जल्‍दी करा दूंगा.

श्रीमती चन्‍दा सुरेन्‍द्र सिंह गौर - अध्‍यक्ष महोदय, अगर फर्जी पट्टे हैं तो समय सीमा में निरस्‍त कराएंगे ? समय सीमा बता दें.

अध्‍यक्ष महोदय - मंत्री जी ने जांच कराने के लिये बोल दिया है.

औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान खोला जाना

[तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोज़गार]

7. ( *क्र. 329 ) श्री कुँवरजी कोठार : क्या राज्‍यमंत्री, तकनीकी शिक्षा महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रत्येक विकासखण्ड में शासन द्वारा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान खोले जाने के निर्देश हैं? यदि हाँ, तो राजगढ़ जिले के कौन-कौन से विकासखण्ड के किस स्थान पर औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान खोले गये हैं एवं उनमें कौन-कौन से विषय कितनी-कितनी सीटों हेतु स्वीकृत किये गये हैं? विषयवार सीटों की संख्या से अवगत करावें (ख) सारंगपुर विकासखण्ड के अंतर्गत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान ना खोले जाने के क्या कारण हैं एवं भविष्य में कब तक सारंगपुर विधानसभा क्षेत्र के पचोर एवं सारंगपुर नगर में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना की जावेगी? (ग) क्या कौशल उन्नयन केन्द्र को औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में उन्नयन किये जाने के शासन के निर्देश हैं? यदि हाँ, तो क्या विकासखण्ड सारंगपुर में संचालित कौशल उन्नयन केन्द्र को औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में उन्नयन किया जा सकता है? यदि हाँ, तो कब तक?

राज्‍यमंत्री, तकनीकी शिक्षा ( श्री दीपक कैलाश जोशी ) : (क) जी हाँ। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) विभाग की नीति प्रत्‍येक विकासखण्‍ड में एक आई.टी.आई. खोलने की है। राजगढ़ जिले में जीरापुर एवं सारंगपुर विकासखण्‍ड में कोई शासकीय आई.टी.आई. संचालित नहीं है। जीरापुर विकासखण्‍ड में 01 प्रायवेट आई.टी.आई. तथा सारंगपुर विकासखण्‍ड में 02 प्रायवेट आई.टी.आई. संचालित हैं। वर्तमान में 119 विकासखण्‍ड ऐसे हैं, जिनमें शासकीय आई.टी.आई. नहीं है तथा 58 विकासखण्‍ड ऐसे हैं, जिनमें शासकीय/प्रायवेट आई.टी.आई. संचालित नहीं है। इतनी अधिक संख्‍या में शासकीय आई.टी.आई. एक साथ खोलना संभव नहीं है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं। (ग) जी नहीं। प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''तीन''

श्री कुंवरजी कोठार - अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने मेरे प्रश्‍नांश (ख) के उत्‍तर में बताया है कि विभाग की नीति प्रत्‍येक विकासखण्‍ड में एक आईटीआई खोलने की है, तो मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि मेरे विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत सारंगपुर में क्‍या इसी बजट में आईटीआई भवन स्‍वीकृत करेंगे ?

श्री दीपक कैलाश जोशी - अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍य को अवगत कराना चाहता हूं कि शासन की नीति के अनुरूप जो अनुसूचित जाति, जनजाति बाहुल्‍य ब्‍लॉक आईटीआई विहीन हैं, उसमें सारंगपुर है और साथ ही औद्योगिक क्षेत्र भी है, अभी हमने नवीन 29 आईटीआई प्रस्‍तावित की हैं उसमें सारंगपुर का नाम सम्मिलित है.

श्री सोहन लाल बाल्‍मीक - अध्‍यक्ष महोदय, चूंकि एससी, एसटी क्षेत्र मेरा भी है वहां पर आईटीआई नहीं खुल पाया है, तो मेरा निवेदन है कि वहां पर भी आईटीआई खोली जावे.

अध्‍यक्ष महोदय - सोहन लाल जी, दूसरे के प्रश्‍न में यदि नीतिगत मामला हो तो अनुमति दी जाती है, परंतु अपने-अपने क्षेत्र की बात जब बजट की मांगें आएं तब करिए.

श्री कुंवरजी कोठार - अध्‍यक्ष महोदय, यह आईटीआई कौन-कौन से विषय के साथ खोली जाएगी ? यह मंत्री जी अवगत करा दें और साथ में भवन की स्‍वीकृति भी कर दें.

श्री दीपक कैलाश जोशी - अध्‍यक्ष महोदय, चूंकि हम 4 ट्रेड से आईटीआई की शुरुआत करते हैं, तो इसमें भी 4 ट्रेड से आईटीआई प्रारंभ की जाएगी.

अपराधों की जानकारी

[गृह]

8. ( *क्र. 3889 ) श्री जितू पटवारी : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में जनवरी 2017 से दिसम्‍बर 2017 तक महिलाओं के प्रति विभिन्‍न अपराधों की शीर्ष (head) अनुसार संख्‍या क्‍या है तथा वर्ष 2016 की तुलना में कितने प्रतिशत किस head में वृद्धि या कमी हुई? वर्ष 2017 में प्रतिदिन औसतन कितनी महिलाओं के साथ बलात्‍कार हुआ तथा औसतन प्रतिदिन कितनी महिलाओं का अपहरण हुआ? (ख) जनवरी 2017 से दिसम्‍बर 2017 तक महिलाओं के प्रति विभिन्‍न अपराधों पर न्‍यायालय में कितने प्रकरणों में फैसले दिये गए, उनमें से कितने प्रकरणों में दोषमुक्‍त हुये तथा कितनों को सजा हुई? सजा का प्रतिशत कितना है? बलात्‍कार (376), गैंग रेप, अपहरण (363, 364, 366 आई.पी.सी.) के प्रकरणों में न्‍यायालय द्वारा वर्ष 2017 में दिये गये फैसलों में सजा का प्रतिशत बतायें। (ग) क्‍या वर्ष 2016 में एस.सी. तथा एस.टी. पर घटित अपराध में क्रमश: 36 % तथा 47 % की वृद्धि हुई है? यदि हाँ, तो इसका कारण बतावें तथा 2017 में इसमें कितने प्रतिशत की वृद्धि या कमी हुई तथा बतावें कि वर्ष 2016 तथा 2017 में न्‍यायालय द्वारा एस.सी. तथा एस.टी. के खिलाफ घटित अपराध पर दिये गये फैसले में सजा का प्रतिशत क्‍या है? (घ) प्रशासकीय प्रतिवदेन 2016-17 के पृष्‍ठ 27 पर विधि विभाग द्वारा की गई कार्यवाही की टेबल में क्रमांक 8, 9, 10 तथा 14 को छोड़कर शेष क्रमांक के बारे में बतावें कि पत्राचार क्र. 1 से 4, 6, 11 से 13 आवश्‍यक कार्यवाही (क 5) तथा जाँच प्रतिवेदन (क 7) के परिणाम क्‍या हैं? क्‍या सारे प्रकरणों में कार्यवाही संपन्‍न हो गई है? यदि नहीं, तो संख्‍या बतावें तथा 2017 में भी विधि विभाग की कार्यवाही का विवरण ऊपर अनुसार प्रस्‍तुत करें।

गृह मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) :

श्री जितू पटवारी - अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूं कि महिला हैल्‍पलाइन, निर्भया पेट्रोलिंग, शौर्य दल, दण्‍ड विधि में मृत्‍युदण्‍ड का प्रावधान, महिला अपराध शाखा का गठन फास्ट ट्रेक कोर्ट की व्यवस्था से प्रदेश में क्या लाभ हुआ. सारी व्यवस्थाओं के बावजूद महिला उत्पीड़न के अपराधों में 37 प्रतिशत वृद्धि हो गई और अभी एनसीईआरटी की रिपोर्ट आई थी, जिसमें हर दूसरा व्यक्ति महिलाओं के उत्पीड़न में पति से लेकर, परिवार से लेकर और समाज में उत्पीड़न मध्यप्रदेश में होता है. तो जो एनसीईआरटी की रिपोर्ट कहती है, उससे आप थोड़ा सा नीचे 100 में से 50 महिलाओं का उत्पीड़न बताते हैं. आपने 35 प्रतिशत मेरे उत्तर के जवाब में दिया है. मैं मंत्री जी से अनुरोध यह करना चाहता हूं कि इतनी व्यवस्थाओं के बावजूद अपराध क्यों बढ़ रहे हैं, इसके क्या कारण हैं.

श्री भूपेन्द्र सिंह -- अध्यक्ष महोदय, जैसा माननीय सदस्य ने महिला अपराधों के संबंध में कहा है. महिला अपराधों को रोकने के लिये जो शासन स्तर पर विभिन्न प्रयास किये गये, वह पूरी जानकारी हमने इसमें दी है. दूसरा महिला अपराध बढ़ने का एक कारण जिस तरह के सख्त कानूनी प्रावधान इस अपराध को रोकने के लिये होने चाहिये, उसमें सख्त कानूनी प्रावधानों की आवश्यकता है. अध्यक्ष महोदय, इसलिये आपकी अनुमति से मध्यप्रदेश विधान सभा से हम लोगों ने दण्ड विधि विधेयक, 2017 में फांसी की सजा तक के सख्त प्रावधान इस विधेयक के माध्यम से किये हैं, जिससे कि इस तरह के अपराधों को हम रोक सकें. जहां तक यह समस्या जो है, यह कोई अकेले मध्यप्रदेश में समस्या बढ़ी हो या अकेले यहां पर ऐसी स्थिति हो, अगर हम इसको देखेंगे तो महिला अपराध में 1993 से 2005 तक मध्यप्रदेश टॉप थ्री में था. आज की स्थिति में मध्यप्रदेश, 2016 में अपराध घटकर आठवीं रेंक पर, हम 3 से 8वें स्थान पर मध्यप्रदेश में रेप के मामले में आये. इसी तरह से अपहरण के प्रकरणों में हम देखेंगे, तो मध्यप्रदेश का 10वां स्थान है आज देश के अंदर. सामूहिक बलात्कार की दृष्टि से हम देखेंगे, तो मध्यप्रदेश 21वें स्थान पर आज देश के अंदर हम हैं. तो सभी अपराधों में अगर हम जनसंख्या के मान से देखेंगे, तो सभी अपराधों में कमी हुई है, परंतु उसके बाद भी जैसा कि माननीय सदस्य, जितू पटवारी जी ने कहा है कि महिला अपराध हम लोगों के लिये एक चुनौती है और निश्चित रुप से यह अपराध घट रहे हैं, अपराध हो रहे हैं, कई जघन्य अपराध हो रहे हैं. आपको भी ज्ञात है कि हम लोगों ने कुछ जघन्य अपराधों में 15 दिन से लेकर के 37 दिन के अंदर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किये हैं और अपराधियों को सजा दिलाने में भी हम लोगों को सफलता मिली है. सबसे ज्यादा जो घटनाओं की शिकायत आ रही है, वह सबसे ज्यादा छेड़-छाड़ की घटनाओं की शिकायत पिछले दिनों में बढ़ी है. इसलिये हम लोगों ने यह निर्णय लिया है कि कानूनी प्रावधान तो हम लोग कर ही रहे हैं, इसके साथ साथ जो बड़े शहर हैं, उन बड़े शहरों में हम एक स्वतंत्र एजेंसी से एक वैज्ञानिक सर्वे करायेंगे और इसमें हम यह जानकारी संकलित करेंगे कि जो विभिन्न क्षेत्र, मौहल्ले, कॉलेज एवं स्कूल्स हैं, वहां पर ये एजेंसी के लोग हैं, ये महिलाओं एवं बच्चियों से जाकर इस बात की जानकारी लेंगे कि जो असुरक्षा उनके मन में है या वहां पर असुरक्षा है, तो उसके क्या कारण हैं, असुविधा कोई है, तो उसके क्या कारण हैं. एक हम वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराकर इसके लिये हम जो कालेजों में स्टूडेंट्स हैं, जो सोशल एक्टिविटीज में काम करते हैं, विभिन्न एनजीओज़ हैं, इन सबकी मदद हम लेंगे, जिससे एक वित्‍तीय भार भी नहीं आएगा और प्राइवेट लोग जाएंगे तो लोग बताएंगे क्‍योंकि पुलिस के सामने कई बार लोग खुलकर बात नहीं कर पाते, तो हमारे पास इस बात का पूरा एक सर्वेक्षण भी आएगा कि ऐेसे कौन से स्‍थान हैं जहां पर इस तरह के लोग बड़ी संख्‍या में एकत्रित होते हैं. बड़ी संख्‍या में छेड़-छाड़ करते हैं, ऐसी घटनाएं करते हैं. अध्‍यक्ष महोदय, वहां पर हम विशेष अभियान चलाएंगे और हम लोगों ने यह निर्णय किया है कि जो ऐसे स्‍थान हैं जहां पर इस तरह के लोग एकत्रित होते हैं, सार्वजनिक स्‍थान हैं, जहां पर बच्‍चियों पर कमेंट्स किए जाते हैं या उनके सामने इस तरह की बातें की जाती हैं जिससे उनको पीड़ा पहुँचती है. इन सबको चिह्नित करके उनके विरुद्ध हम सख्‍त अभियान चलाएंगे. ऐसे लोगों की गिरफ्तारी कर जेल में डालने का काम करेंगे. मध्‍यप्रदेश के अंदर किसी भी स्‍थिति में सरकार महिलाओं की सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं करेगी. अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको और आपके माध्‍यम से इस सदन को यह आश्‍वस्‍त करना चाहता हूँ कि महिला सुरक्षा के मामले में हम पूरी तरह से संवेदनशील हैं तथा महिला अपराध रोकने के लिए और भी जो-जो प्रयास करने होंगे, वे सारे प्रयास हम लोग करेंगे.

श्री जितू पटवारी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूँ कि उन्‍होंने बातें बहुत अच्‍छी और सकारात्‍मक कहीं, पर डिसीजन क्‍या हुए या रिजल्‍ट क्‍या है ? मेरे पास वर्ष 2017 की आप ही की सरकार की रिपोर्ट है, इसमें आपका उत्‍तर है. मंत्री जी, इसमें 2199 रेप के केसेज में 1765 लोग बरी हो गए. आप यह देखेंगे, जैसा आपने कहा कि गैंगरैप के केसेज में हमने 35 दिन में ही निर्णय करा दिया, इसमें 84 में से 60 केस में लोग दोषमुक्‍त हो गए, यह आपने उत्‍तर दिया है. इसी तरह से अलग-अलग प्रक्ररणों को हम देखें, वे चाहे अपहरण के हों, चाहे अन्‍य अपराध हों, इनको सजा मिलने का जो प्रतिशत है, वह किसी का भी 100 में 20 से ज्‍यादा नहीं है. 100 में से 20 से ज्‍यादा को सजा नहीं मिली. मंत्री जी, कहीं न कहीं तो चूक है, कहीं न कहीं तो सरकार का फेल्‍योर है, यह आप मानते हैं या नहीं मानते ?

श्री भूपेन्‍द्र सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा माननीय सदस्‍य ने कहा है, यह बात सही है कि कुछ अपराधों में सजा का प्रतिशत कम है, परंतु जिन अपराधों में सजा नहीं हुई है, उन सारे के सारे अपराधों में हम लोग अपील में जा रहे हैं. हम इसके आगे की कार्यवाही कर रहे हैं. यह एक न्‍यायालय का फैसला है, अभी हमारे पास आगे के न्‍यायालय हैं और हम इसमें अपील करेंगे और सरकार की यह कोशिश होगी कि अपील करके ऐसे जो भी लोग अगर दोषमुक्‍त हो गए हैं तो उनको कड़ी सजा मिले. इसके लिए हम पूरा प्रयास करेंगे.

श्री जितू पटवारी -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं तीन प्रश्‍न कर सकता हूँ. मेरा माननीय मंत्री जी से आखिरी प्रश्‍न है कि इसके लिए जो पूरी कानून-व्‍यवस्‍था गड़बड़ाई है, ये आपके आंकड़ों से सीधे क्‍लियर दिखती है कि प्रदेश में कानून-व्‍यवस्‍था लचर हो गई है, गड़बड़ा गई है. इसके कसावट के लिए आपने कई प्रोविजन बताए कि हम ऐसा करेंगे, अलग-अलग बात बताई, वह लंबी बात हो जाएगी, पर अल्‍टीमेटली इसकी जिम्‍मेदारी तय नहीं होती है, अधिकारी के पार्ट पर या मंत्री के पार्ट पर या सरकार के पार्ट पर, माननीय मंत्री जी, यह स्‍वीकार तो आपको करना चाहिए ? मैं समझता हूँ कि करना चाहिए.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह विषय तब आता जब हमारे राज्‍य में अन्‍य राज्‍यों की तुलना में अगर अपराध बढ़ रहे होते या हम लोग अपराध नहीं रोक पा रहे होते. जो भी अपराध जहां पर हुए, सरकार ने तत्‍काल कार्यवाही की. जहां जितनी सख्‍त कार्यवाही हो सकती थी, सरकार ने तत्‍काल वह कार्यवाही करने का काम किया. समय-समय पर हम लोगों को यह लगता है कि इसमें किसी अधिकारी की, हमारे डिपार्टमेंट के किसी व्‍यक्‍ति की कोई लापरवाही है तो हम लोग समय-समय पर कार्यवाही भी करते हैं और इसलिए माननीय सदस्‍य से मैं फिर आग्रह करूंगा कि वे आश्‍वस्‍त रहें. मध्‍यप्रदेश सरकार पूरी तरह से संवेदनशील है और मध्‍यप्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा के प्रति हम संकल्‍पित हैं. इसके लिए आप कोई सुझाव देंगे तो हम वह सुझाव भी मानने को तैयार हैं. यह सबकी चिंता का विषय है. हम सब समाज के प्रति जिम्‍मेदार हैं और इसलिए यह जो सामाजिक विकृति है, जैसा पूर्व में भी कई बार कहा गया कि 98 प्रतिशत अपराध एक-दूसरे को जानने वालों के बीच में होते हैं तो यह समाज के समक्ष एक चुनौती है और इस चुनौती को हम सबको मिलकर इसका सामना करना है और हम सब मिलकर इसका सामना करेंगे. मध्‍यप्रदेश सरकार महिलाओं की सुरक्षा में कोई कमी बाकी नहीं छोडे़गी. मैं आपके माध्‍यम से इस सदन को आश्‍वस्‍त करता हॅूं.

श्री तरूण भनोत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय श्री नीलेश अवस्‍थी जी ने परसों शून्‍यकाल की सूचना पढ़ी थी, जबलपुर में एक वीडियों वायरल हो रहा है जिसमें एक महिला के साथ अत्‍याचार किया जा रहा है उसके ऊपर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप बैठ जाएं और किसी अवसर पर उठाइए, प्रश्‍नकाल में नहीं.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय ने बहुत विस्‍तार से उत्‍तर दिया. यह श्री जितू पटवारी जी का बहुत महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न था. सवाल यह उठता है कि माननीय मंत्री महोदय ने आखिरी में कुछ ऐसी बातें कहीं कि दूसरे प्रान्‍तों की तुलना में हम बेहतर हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 14 साल से आपकी सरकार है. अभी भी हमें वर्ष 1993, वर्ष 2005 के आंकडे़ बताए जाते हैं कि तब क्‍या संख्‍या थी और अब क्‍या संख्‍या है.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने वर्ष 2008 तक का दिया है.

श्री अजय सिंह -- पहले आपने उसका भी दिया था. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, महिला सशक्तिकरण आपकी प्रथम प्राथमिकता है और लगातार मध्‍यप्रदेश में इस तरह से महिलाओं के साथ अत्‍याचार, अन्‍याय, दुष्‍कर्म हो रहे हैं. सिर्फ और सिर्फ इस तरह से उत्‍तर देने से कुछ काम नहीं होगा. बात बिल्‍कुल सही है, समाज हमारी भी चिन्‍ता है और आपकी भी चिन्‍ता है, लेकिन जिस कठोरता के साथ, जिस ताकत के साथ आपको यह कदम उठाना चाहिए वह नहीं हो रहा है, यह चिन्‍ता हम लोगों की है. इस पर माननीय मंत्री महोदय विस्‍तार से चुस्‍त-दुरूस्‍त करें. मध्‍यप्रदेश की पुलिस बहुत अच्‍छी मानी जाती है. थोड़ा दिशा-निर्देश में तेजी लाएं. जो संसाधन नहीं हैं उसमें व्‍यवस्‍था करें. भोपाल को ही ले लिया जाए. वैज्ञानिक कोई बात कर रहे हैं.

श्री देवेन्‍द्र वर्मा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा 23 नंबर का प्रश्‍न कब आएगा ? यह भाषण हो रहा है. अन्‍य-अन्‍य में यह व्‍यवस्‍था उठा सकते हैं. हमारा प्रश्‍न कब आएगा?

श्री अजय सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा स्‍वयं का 25 नंबर का प्रश्‍न है.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप बैठ जाइए. जल्‍दी ही कर रहे हैं.

श्री देवेन्‍द्र वर्मा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बहुत लंबी बात कर रहे हैं. ..(व्‍यवधान)...

श्री अजय सिंह -- महिलाओं के अपराध पर ही तो बात कर रहे हैं...(व्‍यवधान)....

श्री देवेन्‍द्र वर्मा -- शून्‍यकाल में आप देना यह भाषण.... (व्‍यवधान)...ध्‍यानाकर्षण में यह विषय उठाना चाहिए. क्‍या यह महिलाओं और किसानों का विषय है ? हमारा प्रश्‍न कब आएगा ?...(व्‍यवधान)....

श्री तरूण भनोत -- यह व्‍यवस्‍था आप देंगे क्‍या ? ...(व्‍यवधान)....

श्री सचिन यादव -- ये कोई बात है, यह कोई तरीका है ?

डॉ.कैलाश जाटव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो सदस्‍य सदन में बातचीत करने के लिए भी...(व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय -- बैठ जाएं आप.

डॉ.कैलाश जाटव -- व्‍यवस्‍था की बात नहीं है तरूण भाई. सबके प्रश्‍न आते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- डॉ.कैलाश जी,आप बैठ जाएं...(व्‍यवधान)...

श्री देवेन्‍द्र वर्मा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारा प्रश्‍न कब आएगा. बहुत मुश्किल से प्रश्‍न लगता है...(व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय -- संसदीय परम्‍पराओं का शिष्‍टाचार यह है कि जब सदन के नेता या प्रतिपक्ष के नेता बोलें तो उनको यह अवसर दिया जाता है. कृपा करके यह इन परम्‍पराओं का ही पालन कर रहे हैं. माननीय नेता जी भी इनका पालन करते हैं और संक्षेप में कोई महत्‍वपूर्ण बात होती है तो उसको सदन के सामने रखते हैं जिसके लिए अनुमति भी है और जिसकी परम्‍परा भी है. आप सब कृपया बैठ जाएं. माननीय नेता प्रतिपक्ष जी, आपको और कुछ कहना है.

श्री अजय सिंह -- जी नहीं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय.

अध्‍यक्ष महोदय -- ...(व्‍यवधान)...आप लोग आपस में बहस नहीं करेंगे. कृपया बैठ जाएं. एक मिनट श्री मंगल सिंह जी बैठ जाइए. श्री भनोत जी बैठ जाइए. गृह मंत्री जी नेता प्रतिपक्ष जी की बात पर कुछ कह रहे हैं.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय नेता प्रतिपक्ष जी ने जो सुझाव दिया है हम पूरी तरह से उस सुझाव पर उनसे और बातचीत कर लेंगे और उनकी तरफ से और जो भी सुझाव आएंगे, सरकार उसको मानेगी. महिला सुरक्षा के प्रति जो गंभीरता उनकी है उसी गंभीरता के साथ हम लोग मिलकर आगे बढे़गे.

भू-राजस्‍व संहिता 1959 की धारा 172  अंतर्गत भूमि का व्‍यपवर्तन

[राजस्व]

9. ( *क्र. 1483 ) श्री नथनशाह कवरेती : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या मध्‍यप्रदेश भू-राजस्‍व संहिता 1959 में प्रदेश के कुछ अनुसूचित जनजाति के क्षेत्रों को शेड्यूल 5 के तहत रखा गया है? इस नियम के कारण शेड्यूल 5 के तहत इन अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के सदस्‍यों के नागरिक मुख्‍यालय में अनुसूचित जनजाति की जनसंख्‍या न होते हुए भी सामान्‍य सहित अन्‍य वर्गों को अपनी भूमि का व्‍यपवर्तन अर्थात् डायवर्सन करने में लंबी प्रक्रिया का सामना करना पड़ रहा है? (ख) क्‍या मध्‍यप्रदेश भू-राजस्‍व संहिता 1959 की धारा 172 के तहत अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के 815 के नियम में इस आदिवासी वर्ग की जनसंख्‍या के न होने के कारण नगरीय निकाय में उक्‍त नियम में शिथिलता प्रदान की जायेगी? (ग) क्‍या प्रश्नांश (क) के प्रकाश में भूमि का व्‍यपवर्तन अर्थात डायवर्सन में मध्‍यप्रदेश भू-राजस्‍व संहिता 1959 में प्रदेश के कुछ अनुसूचित जनजाति के क्षेत्रों को शेड्यूल 5 में छूट प्रदान की जायेगी?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जी हाँ। जी नहीं। मध्‍यप्रदेश भू-राजस्‍व संहिता 1959 की धारा 165 (6-ड.ड.) के अनुसार आदिम जनजाति के भूमि स्‍वामि से भिन्‍न भूमि स्‍वामी द्वारा अन्‍य व्‍यक्ति जो आदिम जनजाति का न हो, को अंतरित भूमि, अंतरण के दिनांक से 10 वर्ष तक व्‍यपवर्तन के लिये प्रतिबंधित है। स्‍पष्‍ट प्रतिबंध होने से व्‍यपवर्तन नहीं किये जा सकते, अत: विलंब का प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता। (ख) वर्तमान में कोई प्रस्‍ताव विचाराधीन नहीं है। (ग) प्रश्नांश (क) के उत्‍तर के प्रकाश में प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता।

श्री मंगल सिंह धुर्वे -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रश्‍न क्रमांक 1483 के (ख) के संबंध में प्रश्‍न पूछ रहा हॅूं कि क्‍या मध्‍यप्रदेश भू-राजस्‍व संहिता 1959 की धारा 172 के तहत अनुसूचित जनजाति के क्षेत्र के 815 के नियम में इस आदिवासी वर्ग की जनसंख्‍या के न होने के कारण नगरीय निकाय में उक्‍त नियम में शिथिलता प्रदाय की जाएगी ?

श्री उमाशंकर गुप्ता-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने जवाब दिया है.

अध्यक्ष महोदय-- आपने कहा है कि विचाराधीन नहीं है उनका अनुरोध यही है कि इस पर विचार करिये.

श्री उमाशंकर गुप्ता--अध्यक्ष महोदय, अभी तो कोई विचाराधीन नहीं है आगे देखते हैं.

अध्यक्ष महोदय-- लेकिन यह समस्या है.

श्री मंगल सिंह धुर्वे-- अध्यक्ष महोदय, हाँ यह समस्या है और अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में शेड्यूल 5 के तहत छूट प्रदान की जाएगी क्या?

श्री उमाशंकर गुप्ता-- अध्यक्ष महोदय, इसको देखते हैं, इसके दोनों ही पक्ष हैं और इसीलिये यह गंभीर विषय है इस पर विचार जरूर कर लेंगे.

अध्यक्ष महोदय-- सभी पक्षों पर विचार करके वह निर्णय करेंगे.

श्री मंगल सिंह धुर्वे-- धन्यवाद.

थाना सिटी कोतवाली सतना में दर्ज अपराध पर कार्यवाही  

[गृह]

10. ( *क्र. 1727 ) श्रीमती ऊषा चौधरी : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या सतना जिले के धवारी मोहल्ला निवासी रामनरेश पांडे द्वारा थाना सिटी कोतवाली में गंगा गृह निर्माण समिति धवारी के विरुद्ध दिनांक 16.01.2016 को मय दस्तावेज शिकायत पत्र के साथ संलग्न कर जाँच हेतु दिया गया था? यदि हाँ, तो क्या उक्त पत्र की जाँच पश्चात् समिति के खिलाफ अपराध क्रमांक 782, दिनांक 23.11.2017 पंजीबद्ध किया गया था? (ख) प्रश्नांश (क) यदि हाँ, तो क्या शिकायतकर्ता द्वारा पुनः दिनांक 06.12.2017 को पुलिस अधीक्षक सतना को पत्र प्रस्तुत कर मूल डायरी के मूल दस्तावेजों की हेराफेरी करने पर मूल डायरी का अवलोकन कर अन्य राजपत्रित अधिकारी से जाँच करवाए जाने का अनुरोध किया गया है? उक्त पत्र पर विभाग द्वारा क्या कार्यवाही की गई? यदि कार्यवाही नहीं की गई तो क्यों? (ग) क्या संबंधित प्रकरण के संबंध में जाँच अधिकारी द्वारा समिति के सदस्यों से मूल राशन कार्ड/मूल श्‍ापथ पत्रों को संकलित कर लिया गया है? यदि हाँ, तो मूल राशन कार्डों के ऊपरी पृष्‍ठों सहित सभी पन्नों की तथा मूल शपथ-पत्र की छायाप्रति उपलब्ध करावें? (घ) क्या जाँच अधिकारी द्वारा, समिति द्वारा संचालित गंगापुरम कॉलोनी धवारी में जाकर अपराधियों की पतासाजी की गई? यदि हाँ, तो उनका मकान नंबर, गली नंबर, मोहल्ला/वार्ड तथा आधार कार्ड/परिचय पत्र की छायाप्रति सहित जानकारी देवें?

गृह मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : (क) जी हाँ। जी हाँ। (ख) जी हाँ। जाँच कार्यवाही नगर पुलिस अधीक्षक सतना द्वारा प्रचलन में है। (ग) जी नहीं। (घ) जी हाँ। विवेचना की कार्यवाही का विवरण देना न्यायसंगत नहीं है।

 

श्रीमती ऊषा चौधरी-- माननीय अध्यक्ष महोदय,मेरे प्रश्न में बिंदुवार जानकारी में माननीय मंत्री जी का जवाब जी हाँ, जी हाँ में आया है. (ख) में जवाब आया है कि जी हाँ, जाँच कार्यवाही नगर पुलिस अधीक्षक सतना द्वारा प्रचलन में है. अध्यक्ष महोदय, मेरे द्वारा इस मामले को तारांकित प्रश्न क्रमांक 4275, 26.7.2017 को एवं प्रश्न क्रमांक 2907, दिनाँक 6.12.2017 के द्वारा भी सदन में उठाया गया था उसमें भी इनका उत्तर इसी तरह से आया था कि जी हाँ, जाँच कार्यवाही प्रचलन में है. जबकि शिकायतकर्ता रामनरेश पांडे के पत्र दिनाँक 16.1.2016 के साथ मय दस्तावेज संलग्न किये गये थे उसी आधार पर गंगा गृह निर्माण समिति,धवारी के विरुद्ध कार्यवाही क्रमांक 782 दिनाँक 23.11.2017 को पंजीबद्ध की गई थी लेकिन आज तक बार-बार सदन को गुमराह किया जाता है कि जाँच प्रचलन में है. जबकि जाँच हो चुकी है लेकिन नगर निरीक्षक, थाना पुलिस कोतवाली में राजकुमार सिंह, उपनिरीक्षक द्वारा अपराधियों के पक्ष में मूल दस्तावेजों की हेरा-फेरी करके बचाने का काम किया जा रहा है. अध्यक्ष महोदय, जब मुकदमा कायम हो चुका है. जाँच हो चुकी है तो अपराधियों को गिरफ्तार क्यों नहीं किया जा रहा है?

श्री भूपेन्द्र सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक का प्रश्न बिल्कुल सही है इस प्रकरण में विलंब हुआ है मैं आपकी बात से सहमत हूँ और मैं आज इस बात के निर्देश जारी कर रहा हूँ कि इस पूरे प्रकरण की संपूर्ण कार्यवाही करके हम इसके लिए एक विशेष टीम बनाएंगे और तीन माह के अंदर हम न्यायालय में चालान प्रस्तुत कर देंगे.

श्रीमती ऊषा चौधरी-- माननीय अध्यक्ष महोदय,जाँच हो चुकी है पंजीबद्ध मुकदमा कायम है, मैंने बताया भी है और अध्यक्ष महोदय, राशन कार्ड नगरपालिका ने भी बनाकर नहीं दिये, खाद्य विभाग ने भी राशन कार्ड बनाकर नहीं दिया है और समिति ने जिस तरह से फर्जी दस्तावेज शामिल करके फर्जी राशन कार्ड बनाये हैं....

अध्यक्ष महोदय-- इसलिए तो जाँच हो गई है और चालान भी पुटअप हो गया है.

श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने सब कुछ स्वीकार कर लिया है आपकी हर बात को स्वीकार किया और आदेश भी दे दिये हैं.

श्रीमती ऊषा चौधरी-- माननीय अध्यक्ष महोदय,मैं यह कहना चाह रही हूँ कि जिस तरह से अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग के नाम से यह समिति बनाई गई थी, फर्जी दस्तावेज बनाये गये थे, इस समिति को मंत्रीजी भंग करने का काम करेंगे और जो 30 एकड़ फर्जीवाड़े की जमीन का मामला था उसमें से 6 एकड़ जमीन एसटी,एससी, ओबीसी के नाम पंजीबद्ध कराएंगे क्या?

श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जब समिति ही जेल चली जाएगी तो सारी कार्यवाही हो जाएगी, भंग भी हो जाएगी, सब हो जाएगी.

श्रीमती ऊषा चौधरी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी आप घोषणा कर दें कि भंग कर दी जाती है.

श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर-- माननीय अध्यक्ष महोदय,समिति बनाना और भंग करने का अधिकार गृह विभाग को नहीं है. जो अपराध होता है उसकी कार्यवाही करने का हमको अधिकार है.

श्रीमती ऊषा चौधरी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जेल भेजने का तो आपको अधिकार है?

श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर-- माननीय अध्यक्ष महोदय, तीन महीने के अंदर जेल भेज देंगे.

श्रीमती ऊषा चौधरी-- माननीय अध्यक्ष महोदय,बहुत-बहुत धन्यवाद.

 

 

ग्वालियर पुलिस द्वारा दर्ज अपराध

[गृह]

11. ( *क्र. 2673 ) श्री लाखन सिंह यादव : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दिनांक 14 नवम्बर, 2017 को युवा काँग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष श्री कुणाल चौधरी, पूर्व विधायक श्री रमेश अग्रवाल एवं ग्वालियर युवक काँग्रेस के लोकसभा अध्यक्ष श्री संजय सिंह यादव के नेतृत्व में क्षेत्र की जनता की समस्याओं को लेकर आयुक्त ग्वालियर संभाग ग्वालियर को मोतीमहल में ज्ञापन देना था? क्या इस ज्ञापन के लिये कलेक्‍टर ग्वालियर को दिनांक 02 नबम्वर, 2017 को विधिवत स्वीकृत हेतु ऑनलाईन आवेदन किया था? क्या इस ऑनलाईन आवेदन की प्रति एवं लोकसभा अध्यक्ष संजय सिह यादव द्वारा पत्र क्र. 508 एवं 509 दिनांक 10 नवम्बर, 2017 को सी.एस.पी. लश्‍कर एवं झांसी रोड को दिया गया था? यदि हाँ, तो पत्रों की छायाप्रति दें? फिर दिनांक 14 नवम्बर, 2017 को समस्याओं के निराकरण के लिये आयुक्त महोदय को ज्ञापन देने जाते समय रास्ते में लाठियों, डन्डों एवं वाटर कैनन से रोककर क्यों मारा-पीटा गया? (ख) किस कारण से पुलिस द्वारा किन-किन नेताओं एवं जनता पर किस-किस धारा के अंतर्गत झूठे केस लगाये गये? इसके लिये कौन-कौन पुलिस अधिकारी दोषी हैं? क्या दोषियों के प्रति कोई दण्डात्मक कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो क्या और कब तक? (ग) क्या नेताओं एवं जनता पर लगाये गये झूठे, गलत केसों को वापिस लिया जावेगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्यों? (घ) ग्वालियर जिले के थाना जनकगंज, इन्दरगंज, पड़ाव, माधौगंज एवं गिरवाई तथा भितरवार विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले थानों में कौन-कौन पुलिस अधिकारी/कर्मचारी पदस्‍थ हैं? उनका नाम, पद, पदस्थापना दिनांक बतावें

गृहमंत्री( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) --

(ख) किसी के भी विरुद्ध कोई झूठा केस नहीं लगाया गया है, अतः किसी भी पुलिस अधिकारी के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही का प्रश्न उत्पन्न नहीं होता। (ग) अभी तक की विवेचना में पंजीबद्ध अपराधिक प्रकरण गलत नहीं पाया गया है। अतः प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) प्रश्नानुसार पूछे गये थानों में पदस्थ अधिकारी/कर्मचारी की सूची पुस्तकालय में रखे गये परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।

 

श्री लाखन सिंह यादव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, दिनाँक 14 नवंबर 2017 को ग्वालियर जिले के किसानों की समस्याओं को लेकर मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कुणाल चौधरी जी, हमारे पूर्व विधायक रमेश अग्रवाल जी और युवा कांग्रेस के लोकसभा के अध्यक्ष आदरणीय संजय सिंह यादव जी हजारों किसानों के साथ कमिश्नर साहब को ज्ञापन देने के लिए जा रहे थे तब रास्ते में उनके ऊपर और तमाम सारे किसानों के ऊपर किसके इशारे पर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज और वाटर केनन का उपयोग किया गया है और यहाँ तक ही नहीं माननीय अध्यक्ष महोदय, तमाम सारे किसानों को पुलिस के द्वारा खदेड़-खदेड़ कर, दौड़ा-दौड़ा कर, मारा गया, जिससे हमारे ग्वालियर जिले के तमाम सारे किसानों को तमाम सारी चोटें आईं और उसके बाद हमारे किसानों के ऊपर प्रकरण कायम किए गए. अध्यक्ष महोदय, मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि क्या हम लोगों को, किसानों को, अपनी समस्याओं के बारे में किसी अधिकारी को ज्ञापन देने के अधिकार नहीं हैं? क्या आपने इन सबको बैन कर रखा है? यदि बैन नहीं किया तो क्यों हमारे किसानों के ऊपर आपने लाठीचार्ज करवाया और लाठीचार्ज के बाद....

अध्यक्ष महोदय-- अब बैठ जाएँ, प्रश्न का उत्तर सुन लें.

श्री लाखन सिंह यादव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, लाठीचार्ज के बाद प्रकरण कायम करवा रखे हैं. रोज पुलिस चक्कर लगा रही है और रोज फोन्स पर टेरर दे रहे हैं. मेरा निवेदन है कि माननीय मंत्री जी....

अध्यक्ष महोदय-- प्रश्न तो करिए.

श्री लाखन सिंह यादव-- मैं यही कह रहा हूँ अध्यक्ष महोदय, कि वे प्रकरण वापस ले लें और इस तरह से ये बर्बरता पूर्वक आप जो लाठीचार्ज करवाते हैं, ऐसा नहीं करवाएँ. लोग अपनी परेशानियों को लेकर जाते हैं तो मेरा आप से निवेदन है कि ये प्रकरण आप वापस ले लें.पाँच-सात सौ किसानों के ऊपर आपने प्रकरण कायम किए, यह आपने उत्तर में दिया है.

श्री भूपेन्द्र सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह जो काँग्रेस की ओर से आयोजन था, इसमें ग्वालियर एडीएम से, वहाँ पर जो फूलपुर बाग मैदान है, वहाँ पर सभा की अनुमति एडीएम के माध्यम से ली गई थी और सभा की अनुमति फूलपुर मैदान में दी थी परन्तु अध्यक्ष महोदय, उस सभा के पश्चात् सभी लोगों ने, वहाँ पर जो पुलिस बैरिकैड्स लगे थे, वे बैरिकेड्स हटा कर और कमिश्नर कार्यालय में अन्दर जाने की कोशिश की, उसको रोकने के लिए, पुलिस के द्वारा वॉटर केनिन का उपयोग हुआ, इसमें किसी को चोट नहीं आई. किसी की कोई एमएलसी नहीं हुई और सारा जो आन्दोलन था, वह शांतिपूर्वक तरीके से, पुलिस की तरफ से कोई ऐसा प्रयास नहीं हुआ परन्तु चूँकि वहाँ पर बैरिकेड्स को तोड़कर और कमिश्नर कार्यालय में अन्दर घुसने की कोशिश की इसलिए पुलिस को मजबूरन वॉटर केनिन का उपयोग करना पड़ा और इस पूरे उसमें संजय यादव जी, जो वहाँ की लोकसभा के आपकी पार्टी के जो भी हों और आपके भतीजे हैं, मेरे भी भतीजे ही हुए. आपके भतीजे भी हैं, तो पुलिस के द्वारा ऐसी कोई कार्यवाही नहीं की गई और अभी न कोई गिरफ्तारी की गई है, न पुलिस घर गई है और इसमें कोई इस तरह की कार्यवाही नहीं हुई.

श्री लाखन सिंह यादव-- अध्यक्ष महोदय, मैंने अनुरोध किया था कि कई किसानों पर प्रकरण कायम कर दिए हैं उनको वापस ले लें, वे बड़े भारी नहीं हैं और यह होता रहा है, आपके जमाने में भी यह होता था. मेरा विनम्रतापूर्वक अनुरोध है कि आप घोषणा करें कि ये जो किसानों पर तमाम सारे प्रकरण कायम किए हैं, उनको वापस ले रहे हैं.

श्री भूपेन्द्र सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, राजनैतिक आन्दोलनों में इस तरह के प्रकरण बनते हैं, सामान्य प्रकरण हैं, कोई ऐसे गंभीर अपराध नहीं हैं, इसको देख लेंगे.

श्री लाखन सिंह यादव-- अध्यक्ष महोदय, देख लेंगे, यह कौनसा उत्तर है.

अध्यक्ष महोदय-- देखना तो पड़ेगा ही ना.

श्री लाखन सिंह यादव-- अध्यक्ष महोदय, मेरा अनुरोध है कि प्रकरण वापस ले लें. लोगों को अपनी समस्याओं को ले जाने में भी उनको तकलीफ होती है. आप प्रकरणों को वापस लेने की घोषणा कर दें, मेरे पर बड़ा भारी प्रेशर है, कि साहब हम लोग अपनी बात रखने के लिए प्रशासन के....(व्यवधान)..

श्री भूपेन्द्र सिंह-- आप ये तो कहो कि आपका भतीजा है.

श्री लाखन सिंह यादव-- भतीजा मेरा नहीं है, जनता का, किसान का, है, मेरा कोई भतीजा नहीं. मैं यही निवेदन कर रहा हूँ कि ये किसानों से जुड़ा हुआ मुद्दा है क्या किसान अपनी बात रखने के लिए नहीं जाएँगे?

श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह बहुत महत्वपूर्ण है...(व्यवधान)..ये पूरे प्रजातांत्रिक सिस्टम को ध्वस्त कर रहे हैं. लोगों के संवैधानिक अधिकारों का हनन कर रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय-- अब नहीं.

श्री रामनिवास रावत-- मेरा निवेदन है...

श्री लाखन सिंह यादव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मुख्यमंत्री जी मंच से कहते हैं कि ये किसानों की सरकार है और किसानों के साथ आप अन्याय कर रहे हों, प्रकरण कायम कर रहे हैं.

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, प्रजातंत्र में आन्दोलन करना, अपनी बात रखना, आदमी का संवैधानिक अधिकार है.

श्री उमाशंकर गुप्ता-- हम पर भी 93-93 मुकदमे दर्ज हुए हैं.

श्री रामनिवास रावत-- ऐसा नहीं करते थे कभी.

श्री उमाशंकर गुप्ता-- यह तो सामान्य प्रक्रिया है कानून व्यवस्था बना कर रखना पड़ती है.

श्री रामनिवास रावत-- केवल कमिश्नर को ज्ञापन देने जा रहे थे...(व्यवधान).. उसकी मनाही थी क्या?..(व्यवधान)..क्या कोई अपनी पीड़ा को प्रस्तुत नहीं कर सकता?..(व्यवधान)..

गलत नामांतरण की जाँच/कार्यवाही

[राजस्व]

12. ( *क्र. 3606 ) श्री सुदर्शन गुप्‍ता (आर्य) : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या इन्दौर जिले के तहसील कार्यालयों में कार्यरत तहसीलदारों द्वारा किये जाने वाले जमीनों के नामांतरण के संबंध में गलत नामांतरण करने संबंधी शिकायत अथवा विभागीय जाँच चल रही है? (ख) यदि हाँ, तो इन्दौर जिले में पिछले पाँच वर्षों में ऐसे कितने तहसीलदारों द्वारा जमीनों का गलत नामांतरण किया गया है व उन पर क्या कार्यवाही की गई है? साथ ही संबंधित अधिकारी व उसके विरूध्द प्राप्त शिकायत या जाँच प्रकरण व की गई कार्यवाही की सूची उपलब्ध करावें।

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जी नहीं। विभागीय जाँच प्रचलित नहीं है। (ख) वर्ष 2013-14 में कार्यरत तहसीलदार श्री बिहारी सिंह एवं श्री बजरंग बहादुर के गलत नामांतरण करने पर श्री बिहारी सिंह की एक वेतन वृद्धि तथा श्री बजरंग बहादुर की तीन वेतन वृद्धियां आयुक्‍त इंदौर संभाग द्वारा असंचयी प्रभाव से रोकी गईं थीं। श्री श्रीकांत तिवारी, राजस्‍व निरीक्षक जिन्‍हें शासन द्वारा नायब तहसीलदार की शक्तियां प्रदान की गई हैं, के द्वारा दिनांक 27.10.2016 को त्रुटिपूर्ण नामांतरण किए जाने पर श्री तिवारी को निलंबित किया जा चुका है। विभागीय कार्यवाही प्रचलित है।

श्री सुदर्शन गुप्ता आर्य--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न के भाग (ख) के उत्तर में माननीय मंत्री जी ने जवाब दिया है कि जिन कार्यरत् तहसीलदारों व राजस्व निरीक्षक ने जमीनों का गलत नामान्तरण किया था उनकी वेतन वृद्धियां रोकी गईं तथा निलंबित किया जा चुका है. इसके लिए मैं मंत्री जी और शासन को धन्यवाद देता हूँ किन्तु जो पीड़ित पक्षकार हैं उन्हें अभी तक न्याय नहीं मिला है उनके पक्ष में भूमि के नामान्तरण की कार्यवाही अभी तक नहीं हुई है. मैं मंत्री जी से पूछना चाहता हूँ कि क्या वे पीड़ित पक्षकार के पक्ष में नामान्तरण करने का आदेश पारित करेंगे और भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति न हो इसकी व्यवस्था करेंगे ?

श्री उमाशंकर गुप्ता--माननीय अध्यक्ष महोदय, गलती ध्यान में आई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की है. पीड़ित पक्ष की बात इस प्रश्न में नहीं थी वह दिखवा लेंगे इससे संबंधित निर्णय होना है तो वह करा देंगे.

श्री सुदर्शन गुप्ता आर्य--धन्यवाद माननीय मंत्री जी.

फसल मुआवजा राशि का आवंटन 

[राजस्व]

13. ( *क्र. 3290 ) श्री रजनीश सिंह : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सिवनी जिले में वर्ष 2017 में अल्‍पवृष्टि के कारण खरीफ फसल धान एवं सोयाबीन की फसल नष्‍ट हो जाने के कारण शासन द्वारा प्रभावित किसानों को सहायता राशि उपलब्‍ध कराये जाने हेतु शासन से राशि आवंटित की गई है? (ख) यदि हाँ, तो उक्‍त जिले के प्रत्‍येक तहसीलों में सहायता राशि प्राप्‍त करने हेतु कितने आवेदन प्राप्‍त हुये हैं? कितने लोगों को कितनी राशि की सहायता प्रदान की गई है? तहसीलवार हितग्राही की संख्‍या, प्रदाय राशि की जानकारी उपलब्‍ध करायी जावे तथा लंबित प्रकरणों की संख्‍या उपलब्‍ध कराई जावे।

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) सिवनी जिले के अंतर्गत वर्ष 2017 में खरीफ मौसम में अल्‍पवृष्टि से फसल नष्‍ट नहीं हुई है। (ख) उत्‍तरांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता है।

श्री रजनीश हरवंश सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न में माननीय मंत्री जी की ओर से जो उत्तर आया है उससे मैं संतुष्ट नहीं हूँ. मेरे जिले में और विधान सभा क्षेत्र में अल्प वर्षा हुई है. इस बात का प्रमाण उस क्षेत्र का मिट्टी का एशिया का सबसे बड़ा बांध है. माननीय कृषि मंत्री जी सदन में बैठे हुए हैं इन्होंने भी वहां का चार दिन का दौरा किया था. सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते जी ने भी दौरा किया, मैंने स्वयं ने दौरा किया था. इसके बाद 15 सितम्बर को मुख्यमंत्री महोदय पलारी क्षेत्र में आते हैं सूखे की घोषणा करते हैं. उनके साथ चार वैज्ञानिक भी आए थे वे सलाह देते हैं कि अल्पवर्षा के कारण आने वाली फसल कौन सी बोना है और कौन सी नहीं बोना है. अधिकारियों के द्वारा शायद मंत्री जी को गलत जानकारी दी गई है. रिकार्ड दुरुस्त कराएं और हमारे जिले को सूखा घोषित कराएं ताकि किसानों को फसल बीमा और मुआवजे की राशि मिल सके. यह मेरी प्रार्थना है.

श्री उमाशंकर गुप्ता--माननीय अध्यक्ष महोदय, यही प्रश्न पिछले दिनों भी पूछा गया था. यह हमारे मापदण्ड में नहीं आता है इसलिए सूखा घोषित नहीं किया गया है यही जवाब पहले भी दिया है और आज भी यही जवाब है. यदि माननीय विधायक कोई नए तथ्य हमारे ध्यान में लाएंगे तो हम उनका परीक्षण करा लेंगे.

श्री रजनीश हरवंश सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह जिले के तमाम अखबार हैं (अखबार दिखाते हुए). अखबारों ने औसतन वर्षा छापी है. बड़े-बड़े नेता क्यों गए ? अगर अल्प वर्षा नहीं होती तो प्रदेश के मुखिया व्यस्त कार्यक्रमों में से समय निकालकर पलारी क्यों जाते ?

अध्यक्ष महोदय--यह बात पहले भी आ चुकी है.

श्री रजनीश हरवंश सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, फिर से जांच कराएं, अधिकारिओं से डाटा तो लें. मेरे पास तो सारे प्रमाण रखे हुए हैं. मंत्री जी खुद मेरे प्रमाण के रुप में बैठे हुए हैं. इससे बड़ी और क्या बात हो सकती है, कृषि मंत्री खुद चिंतित हैं.

श्री उमाशंकर गुप्ता--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य यदि कुछ नए तथ्य दे देंगे तो हम दिखवा लेंगे वे मापदण्ड में आते होंगे तो हो जाएगा.

श्री रजनीश हरवंश सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, आप तो कृषि मंत्री जी से जांच करवा लीजिए. कृषि मंत्री जी खुद खेत-खेत घूमे हैं.

श्री उमाशंकर गुप्ता--अध्यक्ष महोदय, ऐसे बोलने से नहीं होता है. मेरा कहना है कि सूखा घोषित होने के केन्द्र सरकार के मापदण्ड हैं.

श्री रजनीश हरवंश सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह ज्ञापन मुझे सौंपे गए हैं, मेरे पास उसकी कापी है (ज्ञापन दिखाते हुए).

श्री उमाशंकर गुप्ता--अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य के पास अगर उस समय के कोई आंकड़े हैं.... बैठ जाइए रावत जी वे सक्षम हैं (श्री रामनिवास रावत जी के खड़े होने पर) वे दो बार इस मामले को उठा चुके हैं. यही प्रश्न पिछले दिनों भी आया था मैंने यही जवाब दिया था. मैं यह कह रहा हूँ कि जैसा माननीय सदस्य कह रहे हैं उनके पास कोई नए तथ्य हैं हमारे आंकड़े में कोई गलती है जो विभाग के पास हैं. आप आंकड़े उपलब्ध कराएंगे और वे उस मापदण्ड में आते हैं तो उस हिसाब से हम कार्यवाही कर देंगे.

अध्यक्ष महोदय--अब इसमें क्या रह गया है ?

श्री रामनिवास रावत--अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहूंगा कि यही माननीय सदस्य की चिंता भी है कि सिवनी जिले की औसत वर्षा कितने मिलीमीटर है और इस वर्ष कितने मिलीमीटर वर्षा हुई है ? दूसरा प्रश्न यह है कि आपने कहा है कि अल्पवृष्टि से फसलें नष्ट नहीं हुई हैं. राजस्व की टीम बनाकर आपके द्वारा किन-किन ग्रामों का सर्वे किया गया और कितनी-कितनी नुकसानी आपने पाई यह आप बता दें. सर्वे कराया है या नहीं कराया है ?

श्री उमाशंकर गुप्ता--माननीय अध्यक्ष महोदय, नजरी सर्वेक्षण होता है उसकी रिपोर्ट में उपलब्ध करा दूंगा.

श्री रामनिवास रावत--वर्षा कितने मिलीमीटर हुई ?

श्री उमाशंकर गुप्ता--वह भी उपलब्ध करा देंगे.

श्री रामनिवास रावत--आप कैसे कह रहे हैं कि अल्पवृष्टि से फसलें नष्ट हुईं या नहीं हुईं ?

अध्यक्ष महोदय--मंत्री जी आपको जानकारी उपलब्ध करा देंगे उसके बाद आपको कुछ कहना हो तो आप आधे घंटे की चर्चा में विषय उठा लेना.

श्री रामनिवास रावत--अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने सर्वे ही नहीं कराया है और कह रहे हैं कि फसलें नष्ट नहीं हुई हैं. फसलें नष्ट हुई हैं. हमारे सदस्य की चिन्ता है. मुख्यमंत्री जी खुद भी गए हैं उसके बाद इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है.

अध्यक्ष महोदय--आप तथ्य दे देंगे और आपने जो तथ्य मांगे हैं वे तथ्य मंत्री जी आपको देंगे उसके बाद निर्णय होगा.

श्री रामनिवास रावत--अध्यक्ष महोदय, उन्हें हाउस में तथ्य देना चाहिए घोषणा तो हाउस में कर रहे हैं.

श्री रजनीश हरवंश सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद.

प्रश्न संख्या--14 (अनुपस्थित)

धार जिलांतर्गत लंबित विवादित/अविवादित नामांतरण प्रकरण

[राजस्व]

15. ( *क्र. 2006 ) श्रीमती रंजना बघेल (किराड़े) : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) धार जिले में वर्ष 2013 से वर्तमान तक कितने विवादित, अविवादित नामांतरण/बंटवारे किये गये हैं? वर्षवार, विधानसभा क्षेत्रवार जानकारी देवें (ख) वर्ष 2013 से वर्तमान तक धार जिले में विधानसभा क्षेत्रवार कितने नामांतरण/बंटवारे के प्रकरण लंबित हैं? कारण सहित बतावें।

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जिला धार में वर्ष 2013 से वर्तमान तक कुल विवादित नामांतरण-5436, अविवादित नामांतरण-50616, विवादित बंटवारा-5991, अविवादित बंटवारा-6756 किये गये हैं। प्रश्‍नांकित अवधि में किये गये विवादित, अविवादित, नामांतरण, बंटवारे की वर्षवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जिला धार में वर्ष 2013 से वर्तमान तक कुल विवादित/अविवादित नामांतरण के कुल प्रकरण 837 लंबित/प्रचलित हैं। सिटीजन चार्टर की निर्धारित समय-सीमा के होकर तामिली/साक्ष्य/अभिलेख आदि कारणों से लंबित हैं।

श्रीमती रंजना बघेल (किराड़े) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने मुझे नामांतरण और बंटवारे के संबंध में बहुत ही अच्‍छी तरह से बिंदुवार सूची उपलब्‍ध कराई है लेकिन मेरे प्रश्‍न के (ख) भाग के उत्‍तर में जिला धार में वर्ष 2013 में वर्तमान तक कुल विवादित, अविवादित नामांकन के 837 प्रकरण लंबित, प्रचलित हैं. सिटीजन चार्टर की निर्धारित समय सीमा के होकर तामिली साक्ष्‍य, अभिलेख आदि प्रकरणों से अभाव में लंबित हैं. मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहती हूं कि आपने मुझे जो प्रश्‍न के (ख) भाग के उत्‍तर में जवाब दिया है कि मात्र 837 प्रकरण उपलब्‍ध हैं. क्‍या पता माननीय मंत्री जी ही बता पाएंगे कि यह सूची में मिसप्रिंट है कि कैसे है क्‍योंकि जो सूची मुझे उपलब्‍ध कराई है उसमें लगभग 2461 नामांतरण के विवादित प्रकरण लंबित हैं. जिसमें धार में 133, बदनावर के 66, सरदारपुर के 1208, 426 मनावर के, 70 धर्मपुरी के, 36 गंगवानी के और 31 कुक्षी के हैं. कुल मिलाकर 2461 लंबित प्रकरण नामांतरण के हैं. ऐसे ही बंटवारे के भी उन्‍होंने कुल 300 प्रकरण लंबित बताएं हैं. मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहूंगी कि यह जो लंबित प्रकरण हैं सिर्फ (ख) भाग के उत्‍तर में सन् 2013 के दिए हैं लेकिन इसमें वर्ष 2014, 2015, 2016 और 2018 तक के कुल लंबित‍ नामांतरण के विवादित प्रकरण कुल 2461 हैं और 300 बंटवारे के हैं. मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहूंगी कि इतने दिन में कई लोगों के साक्ष्‍य भी दे चुके हैं लेकिन अभी तक उनके नामांतरण और बंटवारे नहीं हो पाए हैं. क्‍या माननीय मंत्री जी शिविर लगाकर और दोनों पार्टियों को बुलाकर इस तरह के प्रकरणों का निपटारा करने का प्रयास करेंगे?

श्री उमाशंकर गुप्‍ता-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विवादित प्रकरण राजस्‍व न्‍यायालयों में विभिन्‍न स्‍तर पर चलते हैं. उनका निपटारा ठीक से हो जाए, जल्‍दी हो जाय हम यही कोशिश कर रहे हैं. कोई भी अविवादित प्रकरण समय सीमा के बाहर का लंबित नहीं है और यह जो प्रकरण लंबित हैं, विवादित के लिए भी हमने निर्देश दिए हैं कि दो माह के अंदर इन सारे प्रकरणों पर तेजी से सुनवाई करके निपटारा किया जाए.

श्रीमती रंजना बघेल(किराड़े) -- धन्‍यवाद.

 

 

 

शासकीय/पट्टे की भूमि के राजस्व मण्डलों में लंबित प्रकरण

[राजस्व]

16. ( *क्र. 1990 ) श्रीमती नीना विक्रम वर्मा : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या शासकीय भूमियों व कृषि पट्टा भूमि/आवासीय पट्टा भूमियों के जिला स्तरीय/अनुभाग स्तरीय/तहसील स्तरीय न्यायालयों में प्रचलित विभिन्न प्रकरणों को राजस्व मण्डल द्वारा सुनवाई हेतु मूल नस्ती सहित प्रकरण बुलवाये जाने का प्रावधान है? (ख) यदि हाँ, तो इस हेतु शासन द्वारा क्या-क्या प्रावधान किन-किन नियमों व शर्तों के अधीन किये गये हैं? (ग) क्या मूल नस्ती सहित राजस्व मण्डल द्वारा इस प्रकार सुनवाई हेतु बुलवाये गये प्रकरणों की सुनवाई हेतु कोई समय-सीमा का निर्धारण किया गया है? (घ) यदि नहीं, तो निचले स्तर के राजस्व न्यायालयों के प्रकरण विभिन्न कारणों से राजस्व मण्डल के पास लम्बे समय से लंबित चले आने के कारण, शासकीय भूमियों की हेरा-फेरी व दुरूपयोग रोकने हेतु विभाग अपने स्तर से क्या प्रयास कर रहा है? (ड.) धार जिले में शासकीय भूमियों व कृषि पट्टा भूमि/आवासीय पट्टा भूमियों के कितने प्रकरण कितनी समयावधि से राजस्व मण्डल में सुनवाई हेतु लंबित चले आ रहे हैं?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जी हाँ। (ख) मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 4950 के अन्तर्गत प्रावधान है। (ग) नियमों में कोई समय-सीमा निधारित नहीं है। (घ) विधि अनुसार कार्यवाही की जाती है। (ड.) धार जिले के 207 प्रकरण राजस्‍व मण्‍डल में प्रचलन में हैं। राजस्व मण्‍डल में प्रचलित व्‍यवस्‍था अनुसार प्रकरणों को शासकीय भूमि एवं कृषि पट्टा भूमि के रूप में पृथक से वर्गीकृत नहीं किया जाता है।

श्रीमती नीना विक्रम वर्मा-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा विषय आदिवासियों को लेकर है. आदिवासियों को हम लोग कृषि के पट्टे और आवासीय पट्टे इसीलिए देते हैं ताकि वह सक्षम हो सकें, अपना जीवन यापन कर सकें लेकिन कुछ तथाकथित लोग माफिया टाईप के जो होते हैं वह उन पर कब्‍जा करके उस पर होटल निर्माण, आवास या उनका गलत इस्‍तेमाल होता है. उसके संबंध में जो प्रकरण दायर होते हैं उसके लिए मेरा यह प्रश्‍न था. मेरा यह कहना है कि जिला एवं तहसील स्‍तर पर जब प्रकरण की सुनवाई चल रही होती है तब सुनवाई के दौरान निर्णय के पूर्व बिना स्‍टे दिए मूल नस्‍ती बुलाकर प्रकरण को लंबित कर दिया जाता है. कोई आदेश पारित नहीं किया जाता है. इस बीच शासकीय भूमि की हेरा-फेरी व अवैध निर्माण हो जाते हैं. यह अनियमितीकरण को बढ़ावा देता है तथा निचले न्‍यायालयों को प्रभावित करता है. इसके रोकने हेतु मंत्री जी क्‍या उपाय करेंगे य‍ह बताएंगे ? अकेले धार जिले में फोरलेन की भूमि पर 207 प्रकरण चल रहे हैं और वह वर्षों से राजस्‍व न्‍यायालय ग्‍वालियर में लंबित हैं. अत: मूल नस्‍ती को जिस आधार पर बुलाया जाता है उसका शीघ्र निराकरण कर वापस अधीनस्‍थ न्‍यायालय को पूर्व सुनवाई एवं निर्णय पारित करने हेतु तत्‍काल भेजे जाने का क्‍या कदम उठाएंगे ? क्‍योंकि एक फाईल के साथ तीन-तीन, चार-चार प्रकरण यहां आ जाते हैं और एक सुनवाई भी पूरी नहीं होती है इसके कारण चारों प्रकरण उसके साथ लंबित हो जाते हैं. जिला स्‍तर, तहसील स्‍तर की सुनवाई को रोककर मूल नस्‍ती बुलाकर भ्रष्‍टाचार की तरफ बढ़ावा हो जाता है क्‍योंकि स्‍वाभाविक है कि इसको फाइल बढ़ाने के लिए सालों लग जाते हैं और इसको जल्‍दी करना नहीं समझते हैं. निर्माण के विरूद्ध अपील होने पर फाईल बुलवाने का प्रावधान है जो बिना आदेश के पारित किए विधिवत स्‍टे किये केवल मूल नस्‍ती बुलाकर वर्षों तक लंबित रखना, न्‍याय से वंचित करना है. इसे रोकने के लिए आप क्‍या प्रयास करेंगे? क्‍या धारा में संशोधन कर इसकी जल्‍दी सुनवाई करेंगे या कुछ समय सीमा निर्धारित करेंगे ?

श्री उमाशंकर गुप्‍ता-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍व मंडल एक न्‍यायालयीन व्‍यवस्‍था है और उनको पॉवर है. कोई भी प्रकरण उनके सामने सुनवाई के लिए आते हैं तो वह मूल फाईल बुलवा सकते हैं लेकिन माननीय सदस्‍या ने जो बात उठाई है राजस्‍व मंडल के कामों की हम समीक्षा कर रहे हैं और उसमें इस बात का भी ध्‍यान रखेंगे कि इसमें क्‍या व्‍यवस्‍था की जा सकती है ताकि नीचे मामले नहीं सुनें, यह हम कोशिश करेंगे.

श्रीमती नीना विक्रम वर्मा- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक ही निवेदन है कि इसके अंदर यदि संशोधन हो सकता है तो संशोधित करके समय-सीमा निर्धारित कर दी जाये और मूल फाईल के साथ अन्‍य 3-4 केस भी साथ में आ जाते हैं उनको अलग करने का यदि कोई प्रावधान हो तो बेहतर होगा क्‍योंकि एक ही विषय की सारी फाईलें यहां आ जाती हैं इसलिए शेष प्रकरणों में निर्णय नहीं हो पाता है. क्‍या मंत्री जी इसकी कोई समय-सीमा निर्धारित करेंगे ?

श्री उमाशंकर गुप्‍ता- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, समय-सीमा निर्धारित करना संभव नहीं है लेकिन जैसा मैंने कहा कि राजस्‍व मंडल के बारे में हम विचार कर रहे हैं. एक कमेटी बनाई गई है. इस बारे में भी उसमें विचार किया जायेगा कि सारी न्‍यायालयीन व्‍यवस्‍थाओं को ध्‍यान में रखते हुए क्‍या किया जा सकता है.

 

 

 

 

 

धार जिले में दर्ज प्रकरणों पर कार्यवाही

[गृह]

17. ( *क्र. 1783 ) श्री वेलसिंह भूरिया : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधान सभा क्षेत्र सरदारपुर एवं संपूर्ण धार जिले में वर्ष 2015-16 से 2017-18 में कितनी महिलाओं के ऊपर दुष्‍कर्म एवं हत्‍याओं की घटनायें घटित हुईं? (ख) इनमें से कितनी घटनाओं में एफ.आई.आर. दर्ज हुईं एवं कितनी घटनाओं में एफ.आई.आर. दर्ज नहीं हुईं, जिन घटनाओं में एफ.आई.आर. दर्ज नहीं हुईं है, तो क्‍यों नहीं हुई? एफ.आई.आर. दर्ज नहीं करने वाले अधिकारियों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई? (ग) उपरोक्‍त में से कितने प्रकरणों की विवेचना पूर्ण होकर चालान न्‍यायालय में प्रस्‍तुत कर दिये हैं? कितने प्रकरण ऐसे हैं, जिनमें विवेचना पूर्ण हो चुकी है, परन्‍तु चालान न्‍यायालय में प्रस्‍तुत नहीं किये गये? इसके लिए कौन दोषी है? अपूर्ण विवेचना का कार्य कब तक पूर्ण होगा?

गृह मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' एवं '''' अनुसार है। (ख) इन सभी घटनाओं में एफ.आई.आर. दर्ज हुई है। शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता। (ग) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। विवेचना पूर्ण प्रकरणों में नियत दिनांक को चालान न्यायालय में प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके लिए कोई दोषी नहीं है। विवेचना पूर्ण करने की समय-सीमा बताना संभव नहीं है।

परिशिष्ट - ''चार''

श्री वेलसिंह भूरिया- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह विषय बहुत ही गंभीर है और इसके संबंध में मेरा प्रश्‍न है कि विधान सभा क्षेत्र सरदारपुर एवं संपूर्ण धार जिले में वर्ष 2015-16 से 2017-18 में कितनी महिलाओं के ऊपर दुष्‍कर्म एवं हत्‍याओं की घटनायें घटित हुई ?

श्री भूपेन्‍द्र सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसकी जानकारी दी गई है.

अध्‍यक्ष महोदय- यह जानकारी तो दी गई है. इस पर आपका पूरक प्रश्‍न क्‍या है ?

श्री वेलसिंह भूरिया- अध्‍यक्ष महोदय, मुझे केवल सरदारपुर की जानकारी दी गई है. मैंने संपूर्ण धार जिले की जानकारी चाही थी. मुझे घुमा दिया गया है और मंत्री जी को भी घुमाने का प्रयास अधिकारी कर रहे हैं.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह- आपके प्रश्‍न में स्‍पष्‍ट है संपूर्ण धार जिले एवं सरदारपुर. इसलिए दोनों की जानकारी दी गई है.

श्री वेलसिंह भूरिया- दोनों की जानकारी नहीं है.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह- आप क्‍या चाहते हैं, वह पूछ लीजिये.

श्री वेलसिंह भूरिया- मैं पूछना चाहता हूं कि 299 अपराध लंबित हैं. अभी तक इन पर कार्यवाही क्‍यों नहीं हो पाई है ? ये 299 अपराधी कब तक पकड़ लिए जायेंगे ?

श्री भूपेन्‍द्र सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, परिशिष्‍ट '''' में, जो भी प्रकरण हैं उनके न्‍यायालय में चालान की जो अवधि है, उस अवधि में न्‍यायालय में उनके चालान प्रस्‍तुत हुए हैं और जिन प्रकरणों में अभी चालान की अवधि बाकी है उन प्रकरणों को हम समय-सीमा में चालान के साथ प्रस्‍तुत कर देंगे. विधायक जी, कोई विशेष प्रकरण हो तो आप बतायें.

अध्‍यक्ष महोदय- जो लंबित हैं उनको समय-सीमा में कर देंगे.

श्री वेलसिंह भूरिया- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि जामदा-भूतिया, होलीबेड़ा के गंधवानी क्षेत्र एवं सरदारपुर क्षेत्र में महिलाओं पर ज्‍यादा अत्‍याचार होता है और अपराधों पर कोई अंकुश नहीं लगा है. मेरा निवेदन है कि वहां पुलिस फोर्स पर्याप्‍त हो जाये क्‍योंकि आये-दिन वहां लूटपाट, चोरी-डकैती, हत्‍यायें होती हैं और महिलाओं पर अत्‍याचार होते हैं. क्‍या मंत्री जी रिंगनौद चौकी, सरदारपुर थाने, तिरला चौकी और राजगढ़ थाने पर पर्याप्‍त पुलिस बल की व्‍यवस्‍था करेंगे?
श्री भूपेन्‍द्र सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय
, वहां पर्याप्‍त पुलिस बल की व्‍यवस्‍था की जायेगी.

श्री वेलसिंह भूरिया- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी के जवाब से संतुष्‍ट हूं. धन्‍यवाद.

प्रश्‍न संख्‍या 18 (अनुपस्थित)

फर्जी खाद्यान्न पर्ची जारी करने पर कार्यवाही

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

19. ( *क्र. 3968 ) श्री जयवर्द्धन सिंह : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) गुना जिले में खाद्य सुरक्षा अधिनियम जारी होने के बाद से फर्जी खाद्यान्न जारी करने के कितने प्रकरण सामने आये हैं? जिलेवार बतायें। (ख) गुना जिले में फर्जी परिवार तैयार कर कितने प्रकरणों में कितनी राशि का खाद्यान्न जारी किया गया है। कितने प्रकरणों में एफ.आई.आर. दर्ज कराई गई है? किन अधिकारियों और संस्‍थाओं पर क्‍या कार्यवाही की गई है? (ग) गुना जिले में खाद्य सुरक्षा अधिनियम के क्रियान्‍वयन में गड़बड़ी करने वाले कितने उपभोक्‍ता भण्‍डार और उचित मूल्‍य की दुकानों और सोसायटियों पर अब तक क्‍या कार्यवाही की गई है? राघौगढ़ विधानसभा क्षेत्र में कितने परिवारों के नाम खाद्यान पात्रता पर्ची में जोड़े जाने के लिए ल‍ंबित हैं ?(घ) कितने अधिकारी, कर्मचारियों पर फर्जी खाद्यान्‍न पर्ची जारी करने पर विभाग द्वारा अनुशासनात्‍मक कार्यवाही की गई ?

श्री जयवर्द्धन सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में कहा गया है कि गुना जिले में खाद्यान्‍न पर्चियों के एक प्रकरण में अनियमिततायें पाई गई थीं और उसमें नगर परिषद आरोन के चार कर्मचारियों को निलंबित किया गया है और उन पर एफ.आई.आर. भी दर्ज की गई है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि जिन चार कर्मचारियों का इस प्रकरण में उल्‍लेख किया गया है वे सभी संविदाकर्मी थे. सदन के सभी सदस्‍य यह जानते हैं कि खाद्यान्‍न पर्चियों में किसका नाम आना चाहिए यह नगर पालिका में सी.एम.ओ. के स्‍तर पर तय होता है और ग्रामीण क्षेत्रों में जनपद सी.ई.ओ., पटवारी, तहसीलदार और एस.डी.एम. के स्‍तर पर तय होता है. मैं जानना चाहता हूं कि उन पर कार्यवाही क्‍यों नहीं हुई ? नगर पालिका के वर्ग तीन-चार के संविदा कर्मियों पर कार्यवाही क्‍यों हुई ? मैं मानता हूं कि यह कार्यवाही गलत हुई है और इसकी पुन: जांच की जानी चाहिए और उस समय आरोन नगर परिषद में पदस्‍थ सी.एम.ओ., एस.डी.एम. पर कार्यवाही होनी चाहिए.

श्री ओम प्रकाश धुर्वे- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रकरण में जो दोषी पाये गए, जिन्‍होंने कृत्‍य किया है, उनके ऊपर ही कार्यवाही हुई है.

श्री जयवर्द्धन सिंह:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा मैंने कहा है कि यह बात गंभीर है और स्‍वाभाविक है कि जब भी खाद्यान्‍न में नाम आते हैं तो वह नाम बड़े स्‍तर पर तय किये जाते हैं. कोई भी संविदा कर्मचारी के पास नाम तय करने का अधिकार नहीं है. इसलिये मैंने मंत्री जी से निवेदन किया है कि इसकी पुन: जांच हो. आखिर संविदा कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज क्‍यों हुई है ? कहीं भी नगर पालिका, जनपद में संविदा कर्मचारी यह तय नहीं करते हैं कि कौन बीपीएल में आता है या नहीं आता है तो इसमें मंत्री जी पुन: जांच के आदेश करें. इसमें स्‍पष्‍टीकरण हो कि उस समय जो नगर परिषद में सीएमओ थे, उन पर जांच की जाये?

श्री ओमप्रकाश धुर्वे:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जांच में स्‍पष्‍ट हो गया है कि जो कम्‍प्‍यूटर ऑपरेटर हैं, उन्‍होंने ही डेटाबेस में गड़बड़ी की है.उनके ऊपर कार्यवाही हुई है. इसमें एसडीएम और नगर पालिका के सीएमओ के ऊपर कार्यवाही का प्रश्‍न ही नहीं उठता है.

श्री जयवर्द्धन सिंह :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उठता है, क्‍योंकि लिस्‍ट उन्‍हीं से फायनल होती है.

अध्‍यक्ष महोदय:- मंत्री जी ने बता दिया है कि कम्‍प्‍यूटर ऑपरेटर ने डेटाबेस में गड़बड़ी की है.

श्री जयवर्द्धन सिंह :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप एक बार माननीय मंत्री जी से बोल दें कि वह इस पर एक बार कार्यवाही कर लें, क्‍योंकि वास्‍तव में यह एक गंभीर मामला है कि उसमें जांच करा लें.

अध्‍यक्ष महोदय:- आपको 12 बजे के बाद भी दो प्रश्‍न पूछने की अनुमति दी.

अब समय नहीं है. प्रश्‍नकाल समाप्‍त.

(प्रश्‍नकाल समाप्‍त)

12.01 बजे नियम 267-क के अधीन विषय

 

अध्‍यक्ष महोदय:- निम्‍नलिखित माननीय सदस्‍यों की सूचनाएं सदन में पढ़ी हुई मानी जायेंगी.

1. श्री आशीष गोविन्‍द शर्मा

2. डॉ रामकिशोर दोगने

3. श्री आर.डी. प्रजापति

4. श्री सुखेन्‍द्र सिंह

5. श्रीमती शीला त्‍यागी

6. श्री सुन्‍दरलाल तिवारी

7. श्री तरूण भनोत

8. श्री हरदीप सिंह डंग

9. श्री नीलेश अवस्‍थी

10. श्री गोविन्‍द सिंह पटेल

12.02 बजे शून्‍यकाल में मौखिक उल्‍लेख

 

(1)  मध्‍यप्रदेश विद्युत मण्‍डल द्वारा कृषि पंपों के बिजली का बिल समय पर नहीं दिया जाना.

श्री कैलाश चावला(मनासा):- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश विद्युत मण्‍डल, नीमच द्वारा कृषि पंप के सिंचाई के जो बिल हैं, वह अप्रैल माह में दिये जाना चाहिये, वह मार्च में दिये जा रहे हैं और बिल अदायगी न करने पर कनेक्‍शन काटने की धमकियां दी जा रही हैं. जबकि 6 महीने में जो बिल देने चाहिये, वह नहीं दिये जा रहे हैं. इससे कृषकों में असंतोष व्‍याप्‍त है. बिल‍ नियमानुसार ही दिये जाने चाहिये.

(2) जिला चिकित्‍सालय और बीएमसी की मर्जर की कार्यवाही समाप्‍त की जाना

श्री हर्ष यादव(देवरी):- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, डेढ़ महीने पहले मुख्‍यमंत्री जी ने हमारे जिले के दोनों मंत्रियों की उपस्थिति में जिला चिकित्‍सालय और बीएमसी(बुन्‍देलखण्‍ड मेडिकल कॉलेज) का मर्जर समाप्‍त करने की घोषणा की थी. लेकिन दुर्भाग्‍य की बात है कि डेढ़ महीना हो गया है, लेकिन आज तक मर्जर की कार्यवाही नहीं हुई है. जब मर्जर की घोषणा हुई थी तो पूरे जिले में उत्‍साह का वातावरण था और खुशी मनायी गयी थी.

अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से आग्रह है कि जो मर्जर की कार्यवाही की गयी थी, वह समाप्‍त की जाये.

(3) अतिथि शिक्षकों का मानदेय बढ़ाया जाना.

श्री बहादुर सिंह चौहान (महिदपुर):- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से आग्रह है कि प्रदेश में अतिथि शिक्षक बहुत कम मानदेय पर अपनी सेवाएं प्राथमिक विद्यालय, माध्‍यमिक विद्यालय और अन्‍य स्‍थान पर दे रहे हैं. उनके संबंध में भी कोई नीति बनाकर, उस विषय पर भी गंभीरता से विचार किया जाये.

(4) सीधी, सिंगरौली जिले में विद्युत कटौती और कुर्की की कार्यवाही न की जाना

श्री कमलेश्‍वर पटेल (सिहावल):- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी शून्‍यकाल की सूचना का विषय इस प्रकार है कि सीधी, सिंगरौली जिले में कई जगह विद्युत काट दी गयी है. इस समय दसवीं और बारहवीं की परीक्षाएं चल रही हैं और गरीबों को कुर्की के नोटिस जारी हो गये हैं. इस संबंध में, मैंने ध्‍यानाकर्षण भी लगाया है. आपसे आग्रह है कि आप इसको संज्ञान में लें और इस पर चर्चा करायें और यह जो वसूली अभियान चला रहे हैं, कुर्की का आदेश दिया है, उस रोक लगायी जाये.

(5) पथरिया में विद्युत कनेक्‍शन काट दिया जाना.

श्री लखन पटेल (पथरिया) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे शून्‍यकाल की सूचना इस प्रकार है. हमारे यहां विद्युत कनेक्‍शन काट दिए गए हैं. बच्‍चों की परीक्षा चल रही हैं और वहां पर बिजली के कनेक्‍शन काट दिए गए हैं. ऐसे लोगों के बिजली के कनेक्‍शन भी काट दिए गए हैं, जिन्‍होंने बिजली के बिल भरे हुए हैं. कृपया अभी परीक्षा के समय वह लाईट तुरन्‍त चालू कराई जाये.

 

(6) चन्‍दला में पानी की व्‍यवस्‍था किया जाना.

श्री आर.डी.प्रजापति (चन्‍दला) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे क्षेत्र में तीन वर्षों से सूखा पड़ा हुआ है, हैंडपम्‍प बिल्‍कुल सूख गए हैं. नदियों में कहीं भी पानी नहीं है, पशु प्‍यास के कारण मर रहे हैं. मेरा आपसे निवेदन है कि पानी की व्‍यवस्‍था करवाई जाये और अगर वहां पानी की व्‍यवस्‍था नहीं होती है तो जीव-जंतु और पशु-पक्षी पूरी तरह से मरने की कगार पर हैं. अध्‍यक्ष महोदय, जो पानी आपके बांधों में है, उस पानी को थोड़ा छुड़वा दिया जाये, जिससे की जानवर न मर सकें और जो गाय हैं, वे पूरी तरह से मरने लगी हैं.

 

(7) भोपाल में गीतांजलि कॉलेज की छात्रा द्वारा उसके साथ छेड़छाड़ किये जाने पर आत्‍महत्‍या किये जाने संबंधी दिये गए स्‍थगन प्रस्‍ताव पर चर्चा कराई जाना.

श्री रामनिवास रावत (विजयपुर) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने कल भी यह बात उठाई थी. मैं एक स्‍थगत दिया हुआ है कि गीतांजलि कॉलेज की छात्रा आरती राय ने छेड़छाड़ के कारण आत्‍महत्‍या कर ली और इससे पूरा भोपाल शहर आंदोलित है. पूरे भोपाल शहर में आंदोलन चल रहा है. इस समय विधानसभा का सत्र चल रहा है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी हाल ही में प्रश्‍न भी था कि पूरे प्रदेश में महिलाएं असुरक्षित हैं, हमारी बालिकाएं असुरक्षित हैं, बालिकाएं कॉलेज और स्‍कूल जाने की हिम्‍मत नहीं कर रही हैं, पूरे प्रदेश के पालक और बालिकाओं के माता-पिता आंदोलित हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - आपकी बात आ गई है. आज निर्णय कर लेंगे.

श्री रामनिवास रावत - बात आने के लिए थोड़े ही खड़े हुए हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - आपको बोल तो दिया है कि आज निर्णय कर लेंगे.

श्री रामनिवास रावत - चर्चा कराएं या स्‍थगन स्‍वीकार कराएं. पूरे भोपाल में आंदोलन चल रहा है, पूरा भोपाल आंदोलित है. अध्‍यक्ष महोदय, इस विषय पर भी आप चर्चा नहीं कराएंगे. क्‍या सदन प्रदेश की बालिकाओं की सुरक्षा के प्रति जिम्‍मेदार नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय - अभी तो कहा है. आपने सुना है कि नहीं सुना. आज निर्णय कर लेंगे कि क्‍या करना है ?

श्री रामनिवास रावत - निर्णय कब कर दोगे ?

अध्‍यक्ष महोदय - आज.

श्री रामनिवास रावत -आज निर्णय कर दोगे. हमने स्‍थगन दिया हुआ है, उसमें कुछ तो निर्णय आना चाहिए.

अध्‍यक्ष महोदय - आपको बोल तो रहे हैं.

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पूरा भोपाल आंदोलित है, तोड़-फोड़ हो रही है.

अध्‍यक्ष महोदय - नेताजी, आपको कुछ कहना है.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो बात रामनिवास रावत जी ने रखी कि हमने स्‍थगन भी दिया हुआ है, पूरे भोपाल में महिला उत्‍पीड़न के बारे में हाहाकार मच रहा है और आप मुस्‍कुराकर कह देते हैं, हम चर्चा करेंगे. कुछ तो उत्‍तर आए. यह बड़ा विशेष और गंभीर मामला है. राजधानी भोपाल में लगातार यह तक हैडिंग आ गई हैं कि क्‍या महिला बेटी होना एक कलंक हो गया है ? इसके बाद भी आप हमारी बात नहीं सुन रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - सुन रहे हैं. आपने शायद सुना नहीं है. मैंने रावत जी से कहा था. आप शायद मेरी बात नहीं सुन रहे हैं.

श्री अजय सिंह - सुनाइये.

अध्‍यक्ष महोदय - मैंने तब भी रावत जी से कहा कि आज उस पर निर्णय कर लेंगे. अब आप और क्‍या चाहते हैं ?

श्री रामनिवास रावत - पूरे भोपाल के सभी प्रमुख समाचार-पत्र इससे भरे पड़े हैं एवं भोपाल की घटना के आंदोलन से भरे पड़े हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - आप स्‍थगन देते हैं, जानकारी बुलवाते हैं.....(व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत - समाचार-पत्र भरे पड़े हैं, तीन दिन हो गए हैं (हाथ में अखबार की कटिंग दिखाते हुए)

अध्‍यक्ष महोदय - आप वरिष्‍ठ विधायक हैं, मंत्री रह चुके हैं. उस पेपर कटिंग को आप रख दें.

श्री रामनिवास रावत - स्‍थगन का मतलब यह होता है कि यह सुबह दिया जाता है और इस पर सरकार का जवाब आना चाहिए.

अध्‍यक्ष महोदय - पेपर को डिस्‍प्‍ले न करें. आप नियम मत बताइये. बैठ जाइये.

श्री रामनिवास रावत - पूरे भोपाल शहर में आंदोलन हो रहा है.

श्री निशंक कुमार जैन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पूरे विदिशा जिले में कैंडिल मार्च निकल रहा है.

श्री रामनिवास रावत - इस घटना को लेकर समाचार-पत्र भरे पड़े हुए हैं. पूरा शहर आंदोलित है. सरकार का जवाब तो आए.

अध्‍यक्ष महोदय - आपसे बोल तो दिया है.

श्री रामनिवास रावत - आप जवाब दिलाएं. यह बहुत दुर्भाग्‍यपूर्ण है. आप चर्चा में कल ले लें.

अध्‍यक्ष महोदय - आप जबर्दस्‍ती नहीं कर सकते.

श्री आरिफ अकील - अध्‍यक्ष महोदय, आप कल ले लीजिए.

श्री अजय सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस मामले में पूरे प्रदेश की राजधानी में इतना हाहाकार मचा हुआ है. आप सदन में उत्‍तर भी नहीं दिलवा सकते हैं. इसमें कार्यवाही रोकर चर्चा होनी चाहिए. यह महिला उत्‍पीड़न की बात है.

संसदीय कार्यमंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र) - अध्‍यक्ष महोदय, फिर भी सरकार पूरी तरह से गंभीर है. अभी नेता प्रतिपक्ष जी को माननीय गृह मंत्री जी ने जवाब भी दिया है. आज ही बातचीत की बात कही.

अध्‍यक्ष महोदय - अभी प्रश्‍न पर चर्चा हुई.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - आसंदी ने भी यही कहा.

श्री रामनिवास रावत - फिर आंदोलन क्‍यों हो रहा है ?

श्री अजय सिंह - मैं राजधानी की बात कर रहा हूँ.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - हम भी राजधानी की बात कर रहे हैं. गंभीर विषय पर सरकार पूरी तरह से गंभीर है और आपने भी कहा, आप भी गंभीर हैं. अध्‍यक्ष जी, आज ही उस पर निर्णय करेंगे.

श्री अजय सिंह - निर्णय नहीं, चर्चा. इसका कोई उत्‍तर तो आए. स्‍थगन का मतलब क्‍या होता है ?

(...व्‍यवधान.)

 

 

 

 

12.08 बजे बहिर्गमन

श्री अजय सिंह, नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्‍व में इण्डियन नेशनल कांग्रेस के

सदस्‍यगण द्वारा सदन से बहिर्गमन.

 

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, महिलाओं के लिए यह सरकार चिन्तित नहीं है. हम बहिर्गमन करते हैं.

(श्री अजय सिंह, नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्‍व में इण्डियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यों द्वारा दिये गये स्‍थगन प्रस्‍ताव पर चर्चा न कराये जाने से असंतुष्‍ट होकर सदन से बहिर्गमन किया गया).

डॉ. रामकिशोर दोगने - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी शून्‍यकाल की सूचना थी.

अध्‍यक्ष महोदय - अब नहीं, हो गया. आपके बहिर्गमन में वह चला गया है. आपको बोलना था तो बैठे रहना था. यही परम्‍परा है, बहिर्गमन होता है किन्‍तु जिनको बोलना होता है, वे बैठे रहते हैं. आप कल बोलिएगा.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.09 बजे ध्‍यानाकर्षण

(1) भोपाल नगर निगम द्वारा झील संरक्षण एवं साफ-सफाई के नाम पर

अनियमितता किया जाना.

श्री आरिफ अकील (भोपाल उत्‍तर) अध्‍यक्ष महोदय, मेरी ध्‍यान आकर्षण की सूचना का विषय इस प्रकार है :-

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री (श्रीमती माया सिंह) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय,


 

श्री आरिफ अकील माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी ने जो जवाब पढ़ा है, उससे 210 करोड़ रूपए सीवरेज को खत्‍म करने के लिए दिए और कहा गया कि 95 प्रतिशत गंदा पानी को रोक दिया है और जो सीवरेज लाइन डाली गई है वह लाइन आज तक काम ही नहीं कर रही है और जो मशीनें आई हैं उनका इस्‍तेमाल भी नहीं हो रहा है. मैं मंत्री महोदया से यह पूछना चाहता हूं कृपया यह बताए कि बड़े तालाब में कहां से गंदा पानी आ रहा है? मिल रहा है? या आप हमें बिल्‍कुल शुद्ध पानी दे रही हैं, उस पानी में कोई मिलावट नहीं है, कोई गंदगी नहीं है, कोई खराब पानी नहीं है?

श्रीमती माया सिंह माननीय अध्‍यक्ष जी, बड़े तालाब के पानी से संबंधित मैंने जो जवाब अभी दिया है, उसमें उसका उत्‍तर सम्‍मानीय विधायक जी को दिया है कि उसमें 95 प्रतिशत गंदे पानी को रोकने के लिए सीवरेज का नेटवर्क जोड़ा गया है और कोशिश की गई है कि वहां पर गंदा पानी न जाए.

श्री आरिफ अकील माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह कहा जा रहा है कि 210 करोड़ रूपए खर्च करके 95 प्रतिशत गंदा पानी को रोका गया है. मैं कह रहा हूं जो सीवरेज लाइन डाली गई है वह लाइन काम नहीं कर रही है. पूरे भोपाल में नर्मदा का पानी, कोलार का पानी देने के लिए पाइन लाइन भी बिछाई है. मेरे विधान सभा क्षेत्र में भी पाइप लाइन बिछाई गई है, सभी को कनेक्‍शन दिए जा रहे हैं, लेकिन हमको यह कहा जा रहा है कि यही गंदा पानी पीयो. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदया से कहना चाहता हूं कि आपने सभी के लिए व्‍यवस्‍था की है. मेरे विधान सभा क्ष्‍ोत्र में भी जिन बस्तियों में लाइन डाली जा चुकी है, मात्र कनेक्‍शन देना है, क्‍या कनेक्‍शन के माध्‍यम से गंदे पानी पीने से हमारे क्षेत्र के लोगों को बचाया जाएगा, यह बताने की कृपा करें.

श्रीमती माया सिंह माननीय अध्‍यक्ष जी, मैं सम्‍माननीय विधायक जी से कहना चाहती हूं कि हम आपको शुद्ध पानी पीने के लिए देंगे, गंदा पानी पीने के लिए क्‍यों पहुंचाया जाएगा. आप यह कह रहे हैं कि हमसे कहा जा रहा है कि गंदा पानी पीजिए, ऐसी बात बिल्‍कुल नहीं है. यह पहली बार अमृत योजना के तहत पूरे प्रदेश के 34 शहरों में सीवरेज की लाइन डाली जा रही है, नालों में जहां गंध जाती थी, उसकी भी सफाई का काम किया जा रहा है. निश्चित मानिए आपने नर्मदा और कोलार से कनेक्‍शन की जो बात उठाई है, उसमें मैं यह कहना चाहती हूं कि इसके लिए जल की मात्रा और नेटवर्क की स्थिति का परीक्षण करना जरूरी है और परीक्षण के उपरांत अतिशीघ्र ही निर्णय से माननीय सदस्‍य को अवगत करा देंगे.

श्री आरिफ अकील माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दो सवाल और है, पहला सवाल यह है कि करोड़ों रूपए खर्च करके मेरे विधान सभा क्षेत्र में लाइन डाल दी गई है और पानी नहीं है. ओवरहैड टैंक बने हैं वह भरे नहीं जा रहे है. अध्‍यक्ष जी, पहले पानी देने की योजना बनती है या लाइन डाल दी जाती है. अब, जब लाइन डलकर तैयार हो गई है तो माननीय मंत्री जी कह रही हैं कि हम शीघ्र परीक्षण करवाएंगे, लेकिन जिन लोगों ने यह लाइन डाली है उन्‍होंने करोड़ों रूपए का भ्रष्‍टाचार कर दिया है उन लोगों की और इस पूरी योजना में जो 210 करोड़ रूपए खर्च किया गया है क्‍या उच्‍च स्‍तरीय कमेटी बनाकर इसकी जांच की जाएगी कि यह 210 करोड़ रूपए खर्च हुआ है या नहीं? जब आप पूरे भोपाल के विधान सभा क्षेत्रों में नर्मदा का पानी दे रहे हैं, तो हमें नर्मदा का पानी भी मत दो, आपकी योजना में यह था लेकिन हमें इसका लाभ नहीं मिल रहा है तो क्‍या जो लाइन डाली गई है उस लाइन से इस योजना का कनेक्‍शन कर देंगे? मंत्री महोदया जी, अब तो इसके लिए हां कर दीजिए. (..हंसी)

श्रीमती माया सिंह माननीय अध्‍यक्ष जी, विधायक जी से कहना चाहती हूं कि हमने मना ही नहीं किया है कि हम आपको शुद्ध पानी नहीं दे रहे हैं. शुद्ध पानी देना जिम्‍मेदारी है, हमारा कर्तव्‍य है और दिया भी जा रहा है. इसमें वास्‍तविकता नहीं है कि शुद्ध पानी नहीं दिया जा रहा है.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री गोपाल भार्गव) विधायक जी, यदि नर्मदा का पानी पीना है तो एक बार नर्मदा मैया की जोर से जय बोलो.

श्री आरिफ अकील क्‍या नर्मदा मैया की जोर से जय बोलने के बाद नर्मदा का पानी एक महीने के अंदर मेरे विधान सभा क्षेत्र में दिया जाएगा? पहले यह घोषणा करो.

श्री गोपाल भार्गव हम लोग कोशिश करेंगे.

श्री आरिफ अकील पहले यह घोषणा करो.

श्री गोपाल भार्गव मैं भोपाल का प्रभारी मंत्री हूं.

श्री सोहनलाल बाल्‍मीक हमारे नेता आदरणीय श्री दिग्विजय सिंह जी, पैदल नर्मदा जी की परिक्रम कर रहे हैं और यहां तो हेलीकाप्‍टर से परिक्रम की है.

 


 

श्री आरिफ अकील -- मंत्री जी बोलो, मैं जय बोलने के लिये तैयार हूं क्या आप पानी देंगे. बोलो..बोलो.... मैं एक मर्तबा नहीं पांच मर्तबा बोलूंगा .आप मेरे विधानसभा क्षेत्र में नर्मदा का पानी दे दीजिये. चलो मैं पांच मर्तबा बोलूंगा.

श्री गोपाल भार्गव-- आप पहले बोलें इसके बाद मैं बताऊंगा.

श्री आरिफ अकील - वॉह...वॉह.. हाउस में कहने के बाद में मुकर रहे हैं. यही चरित्र है इनका. अध्यक्ष महोदय, हाउस में कहने के बाद मुकर रहे हैं यह हमारे भोपाल के प्रभारी मंत्री हैं.

श्री गोपाल भार्गव- मै अपनी बात पर स्थिर हूं. मैं भोपाल जिले का प्रभारी मंत्री हूं. मंत्री जी के साथ में मैं भी आपके लिये प्रयास करूंगा.

श्री आरिफ अकील- वह तो आप हर बार कहते हो लेकिन करते कुछ नहीं हो.माननीय अध्यक्ष जी, मेरे उस सवाल का जबाव दिलवा दीजिये कि 210 करोड़ रूपये खर्च हुये हैं या नहीं इसकी जांच एक उच्च स्तरीय समिति बनाकर जिसमें क्षेत्रीय विधायक भी शामिल हो और वह समिति इस बात की भी जांच करे पेड़ लगाये हैं या नहीं, सीवरेज की लाईन डाली है तो उसमें गंदा पानी आ रहा है या नहीं आ रहा है. मंत्री जी इसकी जांच करा लेंगी ?

श्रीमती माया सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, दोनो बातें बता रही हूं. पहले माननीय सदस्य ने जो अमृत योजना का सवाल उठाया था उसके बारे में कहना चाहती हूं कि अमृत योजना में पूर्व में डाली गई लाइन का उपयोग करके पेयजल योजना के गेप को पूर्ण किया जा रहा है. यह चिंता हमारी है कि पूरे भोपाल को शुद्ध पेयजल उपलब्ध करायें. दूसरी बात जो ..

श्री आरिफ अकील -- मंत्री जी, आपसे निवेदन है कि इस मामले में आप अपने विवेक से फैसला कर लीजिये,(सदन की अधिकारीदीर्घा की ओर इंगित करते हुये) आपको जो लोग भ्रमित कर रहे हैं आप उनकी बातों में मत आयें, अच्छा पीने का पानी मेरे क्षेत्र में नहीं मिल रहा है. आप मेरी बात पर यकीन करें..

श्री बाबूलाल गौर -- अध्यक्ष महोदय, अमृत योजना पुराने भोपाल में कब तक पूर्ण कर ली जायेगी? और मंत्री जी अगर आपको पता न हो तो विवेक अग्रवाल जी से पूछ लीजिये.

श्रीमती माया सिंह-- अध्यक्ष महोदय, वह काम ऐसा है कि जल्दी से जल्दी करेंगे उसके लिये समय सीमा बताना अभी संभव नहीं है. लेकिन जैसा कि माननीय सदस्य ने समिति से जांच की मांग की है तो हम एक उच्च स्तरीय समिति बनाकर के इसकी जांच करा लेंगे.

श्री आरिफ अकील -- अध्यक्ष महोदय, विधायकों को भी शामिल करेंगी या नहीं. 210 करोड़ रूपये की योजना है. इतना पैसा खर्चा होने का बाद भी मेरे क्षेत्र के लाखों लोगों को पीने के लिये गंदा पानी मिल रहा है.

अध्यक्ष महोदय- एक ही ध्यानाकर्षण पर बहुत समय हो गया है.

श्री आऱिफ अकील -- अध्यक्ष महोदय, मेरे विधानसभा के क्षेत्र के लोगों को गंदा पानी मिल रहा है और आप कह रहे हैं कि बहुत समय हो गया. 210 करोड़ रूपये का खर्चा होने के बाद भी गंदा पानी मिल रहा है. अध्यक्ष जी मंत्री जी से जबाव दिलवा दीजिये.

श्रीमती माया सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, आदरणीय गौर साहब जी ने जो सवाल उठाया कि अमृत योजना पुराने भोपाल में कब तक पूर्ण कर ली जायेगी,माननीय विधायक जी की भी यह जानने की इच्छा है तो मैं कहना चाहूंगी कि डेढ़ वर्ष में यह योजना पूरी करना प्रस्तावित है.

श्री आरिफ अकील -- अध्यक्ष महोदय, मेरे सवाल का जबाव अभी भी नहीं आया है.

अध्यक्ष महोदय- दे तो दिया है कि जांच करायेंगे.

श्री आरिफ अकील -- मैंने पूछा है कि जांच समिति में विधायकों को भी शामिल करेंगे , इसका उत्तर नहीं आया है. जांच रिपोर्ट कब तक आ जायेगी यह बता दीजिये. अध्यक्ष महोदय, इतना जबाव दिलवा दें.

श्रीमती माया सिंह -- अतिशीघ्र..

अध्यक्ष महोदय-- अतिशीघ्र कह तो दिया.

श्री आरिफ अकील -- अतिशीघ्र . अध्यक्ष जी यह तो अन्याय है. आप समझ गये हैं.

अध्यक्ष महोदय- आपको इस ध्यानाकर्षण में बहुत समय दिया. अब नहीं.

श्री आरिफ अकील -- 210 करोड़ रूपये डकार गये. खा गये. आज भी मेरे क्षेत्र के लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

2. बालाघाट जिले में पंजीकृत मछुआरों को नीलामी से रोके जाने संबंधी

डॉ.योगेन्द्र निर्मल (वारासिवनी) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी ध्यानाकर्षण की सूचना का विषय इस प्रकार है :-

मछुआ कल्‍याण तथा मत्‍स्‍य विकास मंत्री (श्री अंतरसिंह आर्य)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

डॉ. योगेन्‍द्र निर्मल-- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी को बताना चाहूंगा कि मेरी विधान सभा खैरलांजी में ठीक इसके विपरीत हो रहा है और हर बार एक नये नाम से नीलामी लेने वाले आते हैं, उन पर लाखों रूपये बाकी रहते हैं. वह 14-14, 15-15 लाख रूपये में नावघाट लेते हैं. सरकार के राजस्‍व का भी नुकसान यह लोग कर रहे हैं. अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपसे आग्रह है कि आप आदेश करवायें कि जो यह नावघाट हैं वह मछुआरों को दिये जायें, चूंकि यह ढीमर, मछुआरे लोग बहुत गरीब हैं और इनको पूर्व में अनुसूचित जनजाति में जोड़ने के लिये विधान सभा में प्रस्‍ताव भी आया है. मैं आग्रह करूंगा कि इन मछुआरों को प्राथमिकता के साथ यह नावघाट दिये जाये.

श्री अंतरसिंह आर्य-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह पंचायती राज के अंतर्गत जनपद पंचायत को अधिकार प्राप्‍त हैं. मध्‍यप्रदेश शासन ने जो मछुआ कल्‍याण बोर्ड बनाया है यदि उनसे अनुशंसा आ जायेगी तो शासन इस पर निर्णय करेगा.

डॉ. योगेन्‍द्र निर्मल-- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आग्रह है कि मछुआ कल्‍याण बोर्ड को एक पत्र लिखकर के माननीय जी भेजेंगे और मछुआरों को न्‍याय दिलायेंगे. पंचायत विभाग के मंत्री भी बैठे हैं आपको भी एक पत्र लिख दें कि पंचायत में भी इसको संशोधन में लिया जाये.

श्री अंतरसिंह आर्य-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय विधायक जी को आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं, सरकार इसके ऊपर गंभीर है और जो सुझाव आयेंगे उसके ऊपर हम निर्णय लेंगे.

डॉ. योगेन्‍द्र निर्मल-- धन्‍यवाद.

श्री के.डी.देशमुख(कटंगी)--अध्यक्ष महोदय, बालाघाट जिले में पवनखेड़ी नदी और वैनगंगा नदी और बड़ी बड़ी नदिया हैं. इन नदियों के किनारे बड़े बड़े गांव हैं. इन गांवों में मछुआ समाज के लोग निवास करते हैं. हमारे बालाघाट जिले में खैरलांजी विकासखण्ड में भेंडारा गांव के मछुआरों ने नावघाट समिति बनायी. सिवनघाट गांव के मछुआरों ने नावघाट समिति बनायी, घोटीगांव के मछुआरों ने नावघाट समिति बनायी और लालबर्रा विकासखण्ड में ददिया गांव के मछुआरों ने नावघाट समिति बनायी. नावघाट समिति के द्वारा जब आवेदन जनपद पंचायत में किया जाता है, तो जनपद पंचायत में प्रायः यह देखा जाता है कि पुरानी नावघाट समितियां जो कि डिफाल्टर रहती हैं वह नाम बदल-बदल कर के आवेदन लगाती हैं और उच्चतम बोली पर दूसरे लोग उसमें शामिल हो जाते हैं और नावघाट में मुछआरे लोग हैं वह उच्चतम बोली पर नीलामी पर नावघाट नहीं ले सकते हैं. मेरा इसमें कहना है कि अभी जनपद पंचायत को नीलामी का अधिकार खत्म करके उनको पट्टे पर दिया जाए इस प्रक्रिया को सरलीकृत किया जाए. यह मामला बहुत सालों से चल रहा है.

श्री अंतर सिंह आर्य--अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्य को कहना चाहता हूं कि जो हमारा बोर्ड है उसमें सुझाव आ जाएंगे तो उसमें इसका समाधान भी हो जाएगा.

श्री के.डी.देशमुख--अध्यक्ष महोदय, बोर्ड तो आपके अधीन है उसमें आपके यहां से सिफारिश की जाएगी तभी तो समस्या का हल होगा.

श्री अंतर सिंह आर्य--अध्यक्ष महोदय, आप चिन्ता न करें इसका समाधान हो जाएगा.

याचिकाओं की प्रस्तुति

 

अध्यक्ष महोदय--आज की कार्यसूची में सम्मिलित सभी याचिकाएं प्रस्तुत की हुई मानी जाएंगी.

 

 

 

वर्ष 2018-19 की अनुदानों की मांगों पर मतदान (पूर्वानुबद्ध)

मांग संख्या 30

ग्रामीण विकास

मांग संख्या 34

सामाजिक न्‍याय एवं नि:शक्‍तजन कल्‍याण

मांग संख्या 53

त्रिस्तरीय पंचायतीराज संस्थाओं को वित्तीय सहायता

मांग संख्या 59

ग्रामीण विकास विभाग से संबंधित विदेशों से सहायता प्राप् परियोजनाएं

मांग संख्या 62

पंचायत.

 

 

श्री बहादुर सिंह चौहान (महिदपुर)--अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 30, 34, 53, 59, 92 का समर्थन करते हुए अपनी बात रखना चाहता हूं. प्रधानमंत्री आवास योजना इस विभाग की बहुत ही महत्वपूर्ण योजना है. मध्यप्रदेश के ऐसे गरीब जिनके कच्चे मकान हैं इस योजना के तहत अभी तक इस विभाग के द्वारा 7 लाख 56 हजार मकान स्वीकृत कर दिये गये हैं. इसमें गरीबों को मकान उपलब्ध भी हो चुके हैं. इन मकानों को सरकार द्वारा 2022 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा है. बजट वर्ष 2018-19 में इन मकानों के निर्माण के लिये 6 हजार 6 सौ करोड़ रूपये का प्रावधान वित्तमंत्री जी ने रखा है. प्रधानमंत्री सड़क योजना भाग-1 के तहत 16881 सड़कों का निर्माण किया गया है जिसकी लंबाई 68771 किलोमीटर है और 188 पुल इस योजना के तहत बनाये गये हैं. इन सड़कों ने निर्माण से मध्यप्रदेश के 17305 ग्राम जुड़े हैं. प्रधानमंत्री सड़क योजना भाग-2 के अंतर्गत इस विभाग ने बहुत ही महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. इसमें अभी तक 172 मार्गों को स्वीकृत किया गया है जिसकी लंबाई 2156 किलोमीटर है तथा 25 पुलों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है. इसमें कुल रूपये 1 लाख 14 हजार 25 करोड़ रूपये खर्च होना है. प्रधानमंत्री सड़क योजना भाग-2 को पूर्ण करने के लिये 2 हजार 5 सौ करोड़ रूपये का प्रावधान इस बजट में किया गया है. मैं इसमें महत्वपूर्ण सुझाव देना चाहता हूं कि मेरी विधान सभा में इस योजना के तहत 34 किलोमीटर का रोड़ स्वीकृत हुआ है 7 मीटर लंबा एवं 7 करोड़ रूपये का है. इतना बड़ा मध्यप्रदेश का पहला रोड़ है, लेकिन उसमें एक यह दिक्कत आ रही है कि ठेकेदार अपनी मशीनरी 25 करोड़ रूपये की लेकर आया है. रोड़ बनाने का पेमेन्ट विभाग 28 दिन बाद करता है, जबकि आधा किलोमीटर की रोड़ रोज बना रहा है. मेरा आग्रह है कि उसके भुगतान का सरलीकरण करने की कृपा माननीय मंत्री जी निश्चित रूप से करेंगे. पहले एक किलोमीटर-आधा किलोमीटर बनाते थे अब तो इसमें 34 किलोमीटर की रोड़ 7 करोड़ रूपये की बना रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय, महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना यह गांव के लिये बहुत ही महत्वपूर्ण योजना साबित हुई है. गांव में ऐसे व्यस्क व्यक्ति रोजगार नहीं है. इस योजना के तहत 100 दिन के रोजगार देने की गारंटी है. इसके लिये इस बजट में 2 हजार करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है.

अध्यक्ष महोदय, पंच-परमेश्वर योजना के तहत गांव में जो भी विकास होता है वह पंचायतों के माध्यम से होता है इसके तहत 12699 सी.सी.रोड़ व नालियों का निर्माण किया गया है. इससे राशि के तहत लगभग 18 हजार किलोमीटर के सी.सी.रोड़ बनकर के पूरे मध्यप्रदेश के गांवों में तैयार हो गये हैं. इस वित्तीय वर्ष में वर्ष 2018-19 में इसके लिये 2 हजार 342 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है.

अध्यक्ष महोदय, मध्याह्न भोजन योजना यह योजना भी महत्वपूर्ण साबित हुई है इसमें प्राथमिक विद्यालय, माध्यमिक विद्यालय में जो बच्चे पढ़ रहे हैं उनके लिये यह मध्याह्न भोजन होता है. इस वर्ष इसमें 1100 करोड़ रूपये का प्रावधान इस योजना के तहत किया गया है.

अध्यक्ष महोदय, पूरे मध्यप्रदेश में 22816 पंचायतें उसमें आज भी 5166 पंचायतें ऐसी हैं जो भवनविहीन थीं उसमें से 1189 पंचायों में पंचायत भवन का निर्माण हो चुका है. जो 3977 पंचायतें बची हैं उसमें 2931 पंचायत-भवन निर्माणाधीन हैं. मात्र 1046 भवन बनाना बाकी हैं उसके लिये 15 करोड़ रूपये का प्रावधान इस बजट में किया गया है.

अध्यक्ष महोदय, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना इसके तहत 285 करोड़ का प्रावधान इस बजट में किया गया है. स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत 2234 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है.

अध्यक्ष महोदय, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना यह बहुत ही महत्वपूर्ण योजना साबित हुई है उसके तहत अभी तक 3 लाख 80517 कन्याओं का विवाह हो चुका है. इसके तहत मुख्यमंत्री निकाह योजना में भी 10425 निकाह हो चुके हैं. यह योजना 1 अप्रैल 2006 को प्रारंभ हुई थी आज इस योजना के तहत प्रारंभ में 5 हजार रूपये का प्रावधान किया गया था. अब इसमें 28 हजार रूपये का प्रावधान किया गया है. इसमें जिस कन्या का विवाह हो रहा हैं उनके खाते में 17 हजार रूपये डाले जाते हैं, 3 हजार रूपये स्मार्ट फोन के लिये तथा 5 हजार रूपये सामूहिक शादी के लिये दिये जाते हैं.

अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी को एक सुझाव देना चाहता हूं कि आप मंत्री जी इसको नोट करें. यह मध्यप्रदेश का बहुत ही महत्वपूर्ण सुझाव है कि ग्राम पंचायतें 15 हजार की जनसंख्या वाली और उससे भी अधिक हो चुकी हैं और वहां की मूलभूत सुविधाओं के लिये पंचायत ही उसका कार्य करती है और मेरे विधान सभा क्षेत्र का ग्राम झालडा जहां की 15 हजार की जनसंख्या है. वहां माननीय मंत्री महोदय ने सर्वसुविधायुक्त बसस्टैंड वहां बनाने के लिये आदेश कर दिया कि यदि पंचायत के पास पैसा है तो अपना स्वयं का बस स्टैंड निर्मित कर लें. पंचायत द्वारा जो दुकानें बनाई गई हैं उसके द्वारा 2 करोड़ 5 लाख रुपये आय हो चुकी है और खाते में जमा हो चुकी है. चूंकि उसको बनाने की परमीशन भी मिल चुकी है लेकिन समस्या यह खड़ी हो रही है कि पंचायत को 15 लाख से अधिक का कार्य करने का प्रावधान नहीं है. मैं चाहता हूं कि उसके लिये पंचायत ने जितनी राशि अपने संसाधनों से प्राप्त की है तो उस बस स्टैंड को बनाने के लिये 1 करोड़, 2 करोड़ जैसी भी उसकी डी.पी.आर. बने, उस मान से,जिस स्थान पर भी पंचायत बनाना चाहे, उसे बस स्टैंड बनाने की की स्वीकृति प्रदान करने की कृपा करें. आपने बोलने का मौका दिया बहुत-बहुत धन्यवाद.

श्री रामपाल सिंह (ब्यौहारी) - -माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 30,34,53,59,62 पर बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं. प्रधानमंत्री आवास योजना जो संचालित है. 2011 में पारिवारिक सर्वेक्षण के आधार पर आवास देने का निर्णय किया गया. इस योजना के अंतर्गत कई ऐसे परिवार हैं जो विभाजित हो गये हैं और पृथक परिवार के रूप में रह रहे हैं और 2011 के बाद विभाजित हुए जो परिवार हैं इस प्रधानंत्री आवास योजना के लाभ से वंचित हैं. योजना की प्रथम किश्त हितग्राहियों को उपलब्ध करा दी गई और उससे अपना कच्चा मकान तोड़कर प्लिंथ लेबल तक का काम पूरा कर लिया गया और इसी बीच में एक नया नियम लागू कर दिया गया जिससे कई हितग्राहियों के मकान स्वीकृति पश्चात् निरस्त कर दिये गये हैं और प्रथम किश्त की वसूली की कार्यवाही भी की जाने लगी है. इस तरह हितग्राही मकान विहीन हो गया और दूसरी ओर उसे प्रथम किश्त देकर वसूली की मार भी झेलना पड़ रही है. क्षेत्र में विषम स्थिति पैदा हो गई है. योजना प्रारंभ करने के पूर्व हर स्तर पर विचार क्यों नहीं किया गया. क्या सरकार इस पर कोई ठोस कदम उठाएगी जिससे प्रधानमंत्री आवास योजना के स्वीकृत मकानों को पूर्ण करवाया जा सके और प्रदेश के गरीबों को आवास उपलब्ध हो सके. नि:शक्तजनों की बात करना चाहूंगा. कई ऐसे नि:शक्त जन हैं जिनको शासन की विभिन्न योजनाओं जैसे पेंशन है औ अन्य सुविधाओं से वे आज भी वंचित हैं. बी.पी.एल. की जो अनिवार्यता रखी गई है मैं मंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगा कि उस अनिवार्यता को समाप्त कर जो दिव्यांग हैं उनको इसका लाभ देने के लिये सरलीकृत तरीका बनाया जाना चाहिये. बहुत सी ऐसी सड़कें हैं जो गांव की आंतरिक बस्ती से गुजरती हैं जिनकी लंबाई 3 कि.मी.,4 कि.मी. है. ऐसी कई सड़कें हैं जिनके लिये हम लोगों ने कई बार प्रस्ताव दिये हैं किन्तु आज भी वे सड़कें अधूरी हैं. बन नहीं पा रही हैं. मैं पंचायतों एवं पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों के संबंध में बात करना चाहूंगा कि मध्यप्रदेश में पंचायती राज वर्ष 1994-95 में लागू किया गया था. उस समय त्रिस्तरीय पंचायती राज का गठन हुआ और उन्हें व्यापक अधिकार भी दिया गया था. हमने यहां तक देखा कि नामांतरण है, पुल्ली करने का अधिकार भी पंचायतों को था. आज पंचायत राज जिला स्तर पर जिला सरकार गठित की गई थी उससमय प्रत्येक पंचायत में अपने क्षेत्र के कर्मचारियों के क्रियाकलापों पर नियंत्रण रखते थे. क्षेत्रों में कर्मचारियों का जो स्थानांतरण होता था वह भी अधिकार उनको दिया गया था वह अधिकार पंचायतों से छीन लिया गया है उनका नियंत्रण समाप्त हो गया है. पंचायत प्रतिनिधि लगातार अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है. स्वच्छता मिशन की बात करें आज गांवों में जो शौचालय बने हैं अगर इसका भौतिक रूप से सत्यापन करा लिया जाये. उसकी लंबाई चौड़ाई कितनी है. शौचालय का जो सही मापदण्ड होना चाहिये वह आज भी नहीं है और आपके ग्रामीण अंचलों में जितने शौचालय हैं कागजों पर बने हैं.यह दिख रहा है कि आपका पूर्ण ओ.डी.एफ. हो गया किन्तु आज भी आपके बहुत सारे शौचालयों का उपयोग नहीं हो पा रहा है चूंकि वह गुणवत्ता विहीन बने हैं बस औपचारिकता कर दी गई है. इसको भी मंत्री जी को दिखवाना चाहिये. आज की परिस्थिति में जो कियोस्क बैंक खोले गये हैं हर गांव में. जो बड़े-बड़े गांव हैं जहां कियोस्क बैंक से मजदूरी भुगतान और पेंशन का भुगतान होता है उन कियोस्क बैंकों में इतनी लापरवाही की जारही है जो हितग्राही गये या जोपढ़े लिखे नहीं है उनके अंगूठे लगवा लिये गये और उसके बाद यह कह दिया गया कि सर्वर डाऊन है,कल आ जाओ और  उनके पैसे निकल जाते हैं उनको पता नहीं चलता जब वह मुख्य शाखा में खाता दिखवाते हैं तो उन्हें पता चलता है कि हमारे पैसे तो निकल गये. मैं यह चाहता हूं कि इस पर प्रभावी तरीके से माननीय मंत्री जी को कदम उठाना चाहिये. धन्यवाद.

अध्यक्ष महोदय - श्री हजारी लाल दांगी...अनुपस्थित

श्री प्रदीप अग्रवाल..... अनुपस्थित

श्रीमती चन्दा सिंह गौर(खरगापुर) - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 30,34,53,59,62 की अनुदान मांगों के विरोध में अपनी बात रख रही हूं. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पूरे प्रदेश की ग्रामीण आबादी के जनमानस के हित में संजीवनी का कार्य किया जाता है परन्तु मुझे ऐसा कहते हुए खेद हो रहा है कि प्रदेश की ग्रामीण जनता आज मूर्छित पड़ी है.

अध्यक्ष महोदय - प्रश्न लिखकर लाए हैं तो ठीक है क्योंकि पूरक प्रश्न याद नहीं रहते किन्तु पूरा भाषण पढ़कर न दें. प्वाइंट पर बोलें.

श्रीमती चन्दा सिंह गौर - अध्यक्ष महोदय,मंत्री जी पढ़-पढ़कर बोल रहे हैं मैं तो पहली बार की विधायक हूं मुझे बोलने दिया जाये. कौन से मंत्री पढ़कर नहीं बोल रहे. आप बता दें. आप कह दें मैं बिल्कुल नहीं बोलूंगी.

अध्यक्ष महोदय - उनके लिये स्वीकृति है.

श्रीमती चन्दा सिंह गौर - अध्यक्ष महोदय,अगर आप कह दें तो मैं बिल्कुल नहीं बोलूंगी.

अध्यक्ष महोदय - आंकड़े पढ़कर बोलें. बाकी भाषण अपने मन से दें.

श्रीमती चन्दा सिंह गौर - प्रदेश की ग्रामीण जनता आज मूर्छित पड़ी हुई है. यह विभाग अपनी मनमानी करने में बहुत अग्रसर है जबकि इस विभाग के माननीय मंत्री जी बहुत वरिष्ठ और दयालु हैं किन्तु इस विभाग के अधिकारी मनमाने करने में बहुत आगे निकल गये हैं. यह बात मैं इसलिये कह रही हूं कि मैंने अपने एक प्रश्न में पूछा था कि विधान सभा खरगापुर एवं टीकमगढ़ जिले से मजदूर क्यों पलायन कररहे हैं. मुझे जवाब दिया गया था कि विभाग को कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई है. मैं पूछना चाहती हूं कि खरगापुर विधान सभा क्षेत्र के गांव के गांव खाली पड़े हुए हैं. ऐसा क्यों हो रहा है क्योंकि ग्राम पंचायतों में शासन द्वारा नवीन कार्य खोले ही नहीं जा रहे हैं.

इसलिए मध्यप्रदेश के मजदूरों को पलायन करना पड़ रहा है. खरगापुर विधान क्षेत्र सूखे की चपेट में है. क्षेत्र में आम जनता को पानी नहीं मिल पा रहा है और भेलसी, देरी, कुड़याला, लखेरी, पतेहरी, गणेशपुरा सहित पूरे स्थानों पर नलजल योजना बंद पड़ी हैं. विभाग के अधिकारी सुधार का आश्वासन हर वर्ष देते हैं, परन्तु कोई सुधार नहीं होता है. मैं कहना चाहती हूं कि मैं जब भी अपने क्षेत्र में जाती हूं, 60-65 वर्ष की माताएं, बहनें मेरे गले से लिपटकर रोती हैं और मुझसे बताती हैं कि मुझे वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिल रही है. अध्यक्ष महोदय, गरीबी की रेखा में इनके नाम नहीं होने के कारण इनको वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिलती है. मेरा माननीय मंत्री जी से अनुरोध है कि जो ये 60-65 वर्ष की महिलाएं हैं, जिसके बारे में श्री रामपाल जी ने भी बोला है कि इनकी सूची में नाम होने की अनिवार्यता समाप्त की जाय और पूरे प्रदेश की इन माताओं, बहनों को योजना में शामिल कर आप आशीर्वाद प्राप्त करें.

अध्यक्ष महोदय, इसके बाद मैं एक बात और कहना चाहती हूं कि मध्यप्रदेश में ग्राम पंचायतों में फर्जी ग्राम सभाओं का आयोजन किया जा रहा है. इस विषय से जुड़ा हुआ मामला टीकमगढ़ जिले की जतारा जनपद पंचायत अपदाबमौरी से संबंधित है वहां पर फर्जी आम सभा का आयोजन करके बिना एनओसी लिये क्रेशर संचालित किये जा रहे हैं. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कोई जांच नहीं की जाती है. अध्यक्ष महोदय, वर्ष 2016-17 में खरगापुर विधान सभा क्षेत्र में, पूरे टीकगमढ़ जिले में, वित्त आयोग की राशि से हर ग्राम पंचायत में जहां अच्छे पीने के पानी के स्रोत, बोर थे, वहां पर मोटर डलवाई गई थी और हौदी, टंकी बनाकर पशुओं को पानी मिला था.

अध्यक्ष महोदय - कृपया समाप्त करें.

श्रीमती चन्दा सिंह गौर - अध्यक्ष महोदय, लेकिन इस वर्ष वे मोटरें कहां गई? माननीय मंत्री जी अपने जवाब में कहेंगे. एक भी मोटर वहां पर नहीं है. टीकमगढ़ जिले में खरगापुर क्षेत्र में पानी का बहुत संकट है. अध्यक्ष महोदय, खरगापुर विधान सभा क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना में भारी अनियमितताएं हो रही हैं. साथ ही में बड़ी तेजी से बहुत पैसे वसूले जा रहे हैं. देखरेख में जो अधिकारी बैठे हैं, सुविधा शुल्क लेकर पंचायत और ग्रामीण विकास की रखवाली बड़ी ताकत से कर रहे हैं. सचिवों के स्थानांतरण तो इस कदर होते हैं कि आज दूसरी नीति बनाई जाती है, कल दूसरी नीति बनाई जाती है. आज उनका ट्रांसफर इधर कर दिया जाता है, कल वहां से बुलाकर यहां पर कर दिया जाता है. ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जो कल्याण शिविर लगाए जाते हैं, जो अंत्योदय मेले आयोजित किये जाते हैं, इनमें किसी भी जनमानस का हित नहीं होता है. न किसी को आज तक कोई फायदा मिला है.

अध्यक्ष महोदय - कृपया समाप्त करें.

श्रीमती चन्दा सिंह गौर - अध्यक्ष महोदय, यदि इसी राशि को कहीं और बढ़ाया जाय तो गरीबों के हक में यह राशि आएगी. लेकिन ऐसा करने से तो बर्बाद होती है. अधिकारी उसका दुरुपयोग करते हैं. मैं यह भी बताना चाहती हूं कि विकलांग भाइयों का पूरे टीकमगढ़ जिले में बार-बार परीक्षण करवाया जाता है, बार-बार उनको परेशान किया जाता है, लेकिन उनको आज तक उपकरण कुछ नहीं दिया गया है. माननीय मंत्री जी इस पर भी ध्यान दें. अध्यक्ष महोदय, आपने जो बोलने का समय दिया उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.

 

12.55 बजे {उपाध्यक्ष महोदय (डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुए.}

डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय (जावरा) - उपाध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 30, 34, 53, 59 एवं 62 का समर्थन में अपनी बात रखने के लिए खड़ा हुआ हूं. निश्चित रूप से जब से मैंने कार्यकर्ता के रूप में कार्य प्रारंभ किया है. लगभग 40-42 वर्ष मुझे काम करते हुए हो गये हैं. राजनीतिक क्षेत्र में काम करना, सामाजिक क्षेत्र में काम करना और ग्रामीण क्षेत्र में जाना, मेरा परिवार भी ग्रामीण क्षेत्र से रहा, पिता का जन्म भी ग्राम में हुआ. अगर इन विगत वर्षों में देखें और पहले गांवों के भीतर से लेकर गांवों को जोड़ने वाली सड़कें नहीं हुआ करती थी या तो पगडंडिंया हुआ करती थी या गाड़ी गडार हुआ करती थी. पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री माननीय श्री गोपाल भार्गव जी की निश्चित रूप से उसमें गंभीरता है. वे चिंता भी करते हैं. मैं प्रशंसा मात्र इसलिए नहीं कर रहा हूं कि उन्होंने काम मंजूर किये हैं. कांग्रेस के मित्रों ने भी इस बात की प्रशंसा की है. कल श्री यादवेन्द्र सिंह जी ने भी कहा है कि भले आदमी हैं पं. गोपाल भार्गव जी, सहज और सरल हैं. उन्होंने जो ग्राम पंचायतों में मांगलिक भवन नहीं हुआ करते थे, आगे रहकर उन्होंने विधायकों को फोन लगवाए, आगे रहकर विधायकों को सूचनाएं दीं कि अपने यहां से नाम भेजें. आप अपने यहां पर किन-किन स्थानों पर मांगलिक भवन चाहते हैं. पिछले वर्ष 12-12 लाख रुपए के 3-3 मांगलिक भवन प्रत्येक विधान सभा क्षेत्र में और इसी के साथ-साथ इस वर्ष भी 10 लाख रुपए के भी और  20-20 लाख रुपए के भी फिर से मांगलिक भवन प्रदान किये हैं.

उपाध्यक्ष महोदय, मैं इसमें सुझाव भी सम्मलित करना चाहता हूं कि प्रत्येक गांव में मांगलिक भवन की आवश्यकता होती है. प्रत्येक गांव में किसी भी माध्यम से चाहे 5000 स्क.फीट का एक डोम बनाया जाय. कोई जो रिक्त भूमि हो, वहां पर डोम बना दिया जाय, दुख-सुख के काम होते हैं. वहां अगर गांव में एक डोम बना दिया जाएगा तो उसकी लागत 15-20 लाख रुपए से ज्यादा नहीं और बल्कि कम ही आएगी. एक डोम के माध्यम से वहां पर जो सुख-दुख के काम होते हैं उसमें काफी सुविधा मिलेगी. आपने निश्चित रूप से ग्रामीण क्षेत्र में स्व-सहायता समूह के माध्यम से लगभग पूरे प्रदेश भर में 2 लाख से अधिक परिवारों को लाभ पहुंचाया है. इससे निश्चित रूप से उन्हें काफी सहारा भी मिला है. उपाध्यक्ष महोदय, 24 लाख परिवार लगभग 2 लाख से ज्यादा स्व-सहायता समूहों में जोड़े गये और उनको 2000 करोड़ रुपए से ज्यादा का ऋण दिया जाना, ग्रामीण क्षेत्र में स्व-सहायता समूह के माध्यम से प्रत्येक कार्य किया जाना, गांवों के आदमी को आत्म-निर्भर बनाना, सक्षम बनाना, न केवल वहां पर स्वच्छता के कार्यों के साथ में, जैसा कि अभी माननीय सदस्य कह रहे थे. वह राशि तो सीधे-सीधे शौचालय की उस हितग्राही के खाते में जा रही है. वह अपनी निगरानी में, अपनी देख-रेख में करे. हमारे विधान सभा क्षेत्र में हम जब जा रहे हैं गांवों में, हमने खुद ने भी खड़े रहकर वहां पर जितनी मदद हम कर सकते थे कि करें. मुझे प्रसन्नता इस बात की है कि हमारे मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, लगभग 10 मिनट तक शौचालय का गड्ढा खोदने का काम करते हैं तो उसी के साथ-साथ में हमारे पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री अपनी सारी मर्यादाओं को छोड़ते हुए एक आदमी के रूप में उस शौचालय को बनाने के लिए प्रदेश में प्रेरणा देने के लिए वे भी गड्ढा खोदने का काम करते हैं कि यहां पर शौचालय बने और स्वच्छता को प्राथमिकता मिले. मैं यह भी कहना चाहता हूं कि इसके साथ-साथ गांव में और भी आवश्यकताएं महसूस की जा रही हैं. पहले यह कहा जाता था कि गांव का व्यक्ति पलायन कर रहा है, शहरों की ओर जा रहा है. लेकिन अब गांव विकसित हो चुके हैं. कहीं पर प्रधानमंत्री सड़क योजना के माध्यम से, मुख्यमंत्री सड़क योजना के माध्यम से, सुदूर ग्राम संपर्क सड़क योजना के माध्यम से, मुख्यमंत्री खेत सड़क योजना के माध्यम से गांव लगभग-लगभग चहुदिशाओं में जुड़ गये हैं. प्रधानमंत्री आवास योजना में लगातार इतने आवास बने हैं. कुछ गांव में तो लगभग 150-200 तक प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुए हैं. लेकिन इसमें भी माननीय मंत्री जी का मैं ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा कि वर्ष 2011 में जब यह सर्वे किया गया, हो सकता है उस सर्वे में किस प्रकार की क्या स्थिति आ रही होगी, मैं कोई आरोप, आक्षेप नहीं लगाना चाहता हूं. लेकिन बाद में जो ग्राम सभाएं हुई हैं और उन ग्राम सभाओं में जो नाम जोड़े गये हैं, उन्हें प्राथमिकता मिल सके, ऐसी कोई कार्य योजना निश्चित करें. एक विकासखण्ड में जितना मुख्यमंत्री आवास योजना में पहले निश्चित किया गया था कि 500 आवास या 1000 आवास, हम एक वर्ष में बनाएंगे. इसी प्रकार से इसमें भी किया जा सकता है. एक विकासखण्ड में इतने आवास बनाएंगे, एक ग्राम पंचायत के अंदर इतने आवास और एक ग्राम में इतने आवास बनाएंगे, कुछ ऐसी प्राथमिकता हो जाय. हो क्या रहा है कि एक गांव कहता है कि मेरे यहां पर 150-200 प्रधानमंत्री आवास बन गये, वह भी प्रशंसा की बात है, खुशी होती है. लेकिन उसके नजदीक का गांव कहता है कि मेरे यहां पर तो दो ही मंजूर हुए, तीन ही मंजूर हुए तो वहां पर थोड़ा असहजता का भाव हमें आता है, उस सूची को कैसे ठीक किया जा सकता है, उसको नियम अंतर्गत लेते हुए, वह भी करेंगे तो निश्चित रूप से काफी स्वागत योग्य होगा. उपाध्यक्ष महोदय, अब ग्रामीण क्षेत्र पूरी तरह से विकसित होकर विकास की ओर बढ़ रहे हैं. माननीय मंत्री जी और माननीय मुख्यमंत्री जी लगातार गांवों को प्राथमिकता दे रहे हैं. लेकिन एक कठिनाई जो देखने में आती है, माननीय मंत्री जी का ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा कि कई जगह हमें फोन आते हैं कि भैया मदद करें दें, भले गौशाला में 31 हजार, 21 हजार की रसीद कटवा दें, मेरे यहां के मवेशी आप गौशाला में छुड़वा दें. मेरे स्‍वयं के अनुभव से मैं सुझाव देना चाहता हूं कि क्‍यों न गांव की जो रिक्‍त भूमि है वहां पर एक अच्‍छा पशु शेड बनाया जाए ? उसमें पानी की खैर लगा दी जाए, ट्यूबवेल की व्‍यवस्‍था कर दी जाए और इससे निश्चित रूप से रोजगार भी सृजन होगा, यह मनरेगा के माध्‍यम से यदि करवाया जा सके तो इस पर विचार करना चाहिए. रोजगार इस प्रकार से सृजन होगा कि एक तो देशी खाद वहां मिलने लगेगी, मवेशियों को वहां पर देखभाल और सुरक्षा मिल जाएगी और उस शेड में वहां पर खाद के साथ दूध इत्‍यादि अन्‍य व्‍यवस्‍था भी स्‍थानीय रूप से की जाए तो वह भी स्‍थाई कार्य होगा.

उपाध्‍यक्ष महोदय, इसी के साथ-साथ जब शौचालय बन गए, मांगलिक भवन बन रहे हैं, पंचायत भवन इतने सुंदर बने हैं कि माननीय मंत्री जी जब मेरे निर्वाचन क्षेत्र में दौरे पर निकले थे तो वह चौक गए और उन्‍होंने कहा इतना सुंदर क्‍या यह पंचायत भवन है ? इतने अच्‍छे पंचायत भवन बन गए हैं, लेकिन इसी के साथ-साथ सड़के भी बन गई हैं. जैसा कि मैंने अभी पशु शेड के बारे में निवेदन किया. इसके साथ-साथ मैं एक आग्रह सुझाव के रूप में माननीय मंत्री जी से और करना चाहूंगा कि अभी भी गांवों में परम्‍परा है कि महिलाएं जब दु:ख अथवा उनको अन्‍य पारिवारिक कठिनाई आती है तो वह घरों में स्‍नान नहीं करती हैं, दु:ख के समय वे नदी-नाले या अन्‍य जगहों पर स्‍नान करती हैं, तो एक नई मांग आने लगी है कि क्‍यों न महिलाओं के लिए महिला स्‍नानगृह गांवों में बनाए जाएं ? महिला स्‍नान गृह किस प्रकार से बनवाए जा सकते हैं उसको भी आप प्राथमिकता में लेंगे तो निश्चित रूप से गांवों में काफी सुविधा होगी. अभी गांव में स्‍वसहायता समूह और रोजगार के साथ में बहुत सारी चीजें की हैं, माननीय मंत्री जी ने तो इतनी अच्‍छी व्‍यवस्‍था कर दी है कि सिंगल क्लिक पर पेंशन सबको उसी तारीख पर मिलने लग जाएगी और सीधे उनके खाते में वह राशि पहुंच जाएगी. बार-बार बात आती है कि जो राशि है वह कम रहती है, क्‍यों न कम से कम एक हजार रुपये तक की पेंशन की व्‍यवस्‍था की जाए ताकि उन वृद्धजनों, विकलांगों, असहायों, विधवा, परित्‍यक्‍ता महिलाओं को एक हजार रुपये तक की पेंशन मिल सके, इसके बारे में थोड़ा विचार करें तो अच्‍छा होगा. उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरे क्षेत्र की कुछ सड़कें हैं उनके बारे में मैं मंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगा.

उपाध्‍यक्ष महोदय - पाण्‍डेय जी, अब आप मंत्री जी को लिखकर दे दीजिए, मंत्री जी वैसे ही बहुत उदार हैं.

श्रीमती ऊषा चौधरी (रैगांव) - उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मांग संख्‍या 53, 62, 30 पर बोलना चाहती हूं. मेरे विधानसभा क्षेत्र में मैं जबसे विधायक बनी हूं तबसे यह पांचवा बजट सत्र है, ग्राम पंचायत खरुआ, सेमरवारा में कम से कम चार किलोमीटर की सड़क है जो आज तक नहीं बनी है. किसी प्रकार का रास्‍ता नहीं है, मिट्टी तक नहीं पड़ी है. वहां पर बरसात के महीनों में जब महिला जननी सुरक्षा गांव में जाती है, गर्भवती महिला को जब हॉस्पिटल लाया जाता है तो गाडि़यां फंस जाती हैं और उसकी वहीं पर मृत्‍यु हो जाती है. दो गाडि़यां फंस चुकी हैं, इसका प्रमाणीकरण मैं दे चुकी हूं. कई बार मैंने लोक निर्माण विभाग चूंकि मैं कमेटी में सदस्‍य भी हूं, लिखकर दिया, माननीय मंत्री जी को भी लिखकर दिया है, परंतु वह सड़कें आज तक स्‍वीकृत नहीं हुईं. फाईल में तो आ जाती हैं लेकिन आज तक नहीं बनी हैं. इसी तरह से कई सड़कें मेरे विधानसभा क्षेत्र में हैं. मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करना चाहती हूं कि यह अंतिम बजट है अगर इसमें आप इन सड़कों को जैसे खरुआ से चुरहाई, सेमरवारा से चुरहाई है, कोई भी एक सड़क बन जाती है तो गांव वासियों के लिये मार्ग बन जाएगा और उनके लिए सुविधा होगी.

उपाध्‍यक्ष महोदय, इसी तरह से मध्‍यप्रदेश में समस्‍त ग्राम पंचायतों में कार्यरत चौकीदारों, भृत्‍यों को अगर माननीय मंत्री जी वेतन, मानदेय देने का काम कर देंगे तो उन गरीबों को जो सदियों से गांव की, पंचायत की चौकीदारी करते आए हैं उनको आज तक मानदेय नहीं मिलता है, अगर उनका मानदेय तय कर दिया जाए तो बड़ी कृपा होगी. मंत्री जी से मैं यह भी कहना चाहूंगी कि उसी तरह से ग्राम पंचायतों में रोजगार सहायकों का वेतन भी तय कर दिया जाए तो बड़ी कृपा होगी. उपाध्‍यक्ष महोदय, तमाम मध्‍यप्रदेश में शौचालय की बात की जाती है परंतु हमारे विधानसभा क्षेत्र में अगर सर्वे करा लिया जाए, टोटल फर्जी शौचालय कागजों में बने हैं और ग्राम पंचायत में अगर किसी ने थोड़ा बहुत शौचालय बनाया भी है ग्रामीण लोगों ने पैसा इकट्ठा करके, तो उनका पैसा सीईओ जारी नहीं करते. इसी तरह पीएम आवास योजना के तहत हमारे नेता खड़े होकर फोटो तो खिंचवा लेते हैं लेकिन उनकी छत नहीं डल पाती और पूर्ण रूप से पीएम आवास नहीं बने हैं और उनकी मजदूरी का पैसा जो 18 हजार रुपया दिया जाता है वह भी आज तक सीईओ जिला पंचायत और सीईओ जनपद पंचायत ने जारी नहीं किया है. हमारी ग्राम पंचायतें जिस तरह संचालित हैं उनमें बहुत सी पंचायतों में सचिव और रोजगार सहायक नहीं हैं. कभी रोजगार सहायक को अधिकार दे दिया जाता है, कभी पंचायत सचिव को अधिकार दे दिया जाता है इस तरह से समय जाता रहता है और विकास कार्य में बाधा होती है. मैंने कई पंचायतों को सड़क बनाने के लिए, डब्‍ल्‍यूबीएम के लिए कई जगह पैसा दिया है, उसकी राशि केवल सचिवों के कारण आज तक जारी नहीं हुई है. कहीं सचिव नहीं है तो कहीं रोजगार सहायक नहीं है. इस तरह से ग्राम पंचायतों में काम बहुत अवरुद्ध हो रहे हैं. उपाध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी मैं कहना चाहूंगी कि मेरे विधानसभा क्षेत्र में नागौद और सोहावल दो ब्‍लॉक हैं, वहां पर दोनों सीईओ काम नहीं कर रहे हैं केवल प्रोपेगेण्‍डा करते हैं. मैंने हैण्‍डपम्‍पों के लिये राशि जारी की थी लेकिन नागौद सीईओ ने एक साल से राशि जारी नहीं की है, आज तक वह पैसा पंचायतों में नहीं गया है. सरपंच परेशान हैं और मैं चाहती हूं कि मेरे यहां नागौद और सोहावल ब्‍लॉक के सीईओ बदल दिए जाएं ताकि जो पानी की भीषण समस्‍या इस समय गांवों में है, हैण्‍डपम्‍प बंद पड़े हैं, उनमें कहीं पाईप नहीं है, कहीं मोटर नहीं डली हैं और अगर कहीं मोटर डली है तो बिजली गोल रहती है, यह परीक्षाओं का समय चल रहा है, तो इससे राहत होगी. हालांकि मंत्री जी का कार्य बहुत अच्‍छा है, आप सभी विधायकों से पूछकर जैसा अभी माननीय सदस्‍य कह रहे थे, मंगल भवन दिया है, परंतु तीन मंगल भवन में साल भर में कुछ नही होता है क्‍योंकि जो शासन की नीति है वह बना दी गई है कि ग्रामीण क्षेत्र में जो स्‍कूल हैं वह गांव के लोगों को शादी ब्‍याज के लिये नहीं दिये जाते. यह अच्‍छा भी है, लेकिन तीन मंगल भवन से तीन गांवों, तीन पंचायतों का ही हित होगा बाकी पंचायतों में बड़ी दिक्‍कत है. उन गांवों में जिन गरीब परिवार के यहां शादी ब्‍याह या कोई कार्यक्रम होता है तो उनको बड़ी दिक्‍कत होती है. मैं मंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगी कि मंगल भवन तीन की बजाय 10 कर दिए जाएं तो बड़ी कृपा होगी. उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने बोलने का समय दिया उसके लिये धन्‍यवाद.

 

1.09 बजे अध्‍यक्षीय घोषणा

भोजनावकाश न होना

 

उपाध्‍यक्ष महोदय - आज भोजन अवकाश नहीं होगा. भोजन की व्‍यवस्‍था सदन की लॉबी में की गई है. माननीय सदस्‍यों से अनुरोध है कि सुविधानुसार भोजन ग्रहण करने का कष्‍ट करें.

 

1.10 बजे वर्ष 2018-2019 की अनुदान मांगों पर मतदान (क्रमश:)

श्री कमलेश्‍वर पटेल (सिहावल) - उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय पंचायत मंत्री जी वाकई उनकी प्रशंसा दोनों दल के लोग इस मामले में कर रहे हैं कि उन्‍होंने बड़ी सहृदयता दिखाई. दलगत राजनीति से ऊपर उठकर मंत्री जी ने सबसे पत्राचार किया और सबसे प्रस्‍ताव भी लिये हैं.आपके माध्यम से मंत्री जी को तो हम सारे लोग शुभकामना एवं बधाई देते ही हैं और दूसरे मंत्रियों से भी निवेदन करते हैं कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री जी ने जो कार्य किया है, चाहे वह पक्ष का साथी हो, चाहे विपक्ष का साथी हो, सभी विधायकों से जिस तरह से जनहित के मुद्दों पर उनसे एक जैसा प्रस्ताव लिया. मुझे लग रहा था कि हो सकता है कि विपक्ष के साथियों से मंगल भवन के लिये या पंचायत भवन के लिये कुछ कम नाम मांगे हों, सत्ता पक्ष के साथियों से ज्यादा नाम लिये हों, पर पंचायत मंत्री जी ने सब से एक जैसा नाम लिया, इसलिये हम मंत्री जी को बधाई एवं शुभकामना देते हैं, क्योंकि विभागीय बजट पर चर्चा हो रही है. मंत्री जी के संज्ञान में विभाग में जो कुछ कमियां हैं, जो विभाग में कसावट होनी चाहिये, उसके बारे में भी हम बात करेंगे. ज्यादातर हमारे मध्यप्रदेश का जो ग्रामीण अंचल का एरिया है, वह पंचायतों से जुड़ा हुआ है और जिस तरह से कसावट, कंट्रोल होना चाहिये, उसका कहीं न कहीं अभाव दिखाई देता है. हम जनप्रतिनिधियों के साथ मंत्री जी अच्छा सद्भाव दिखायें, अच्छी बात है. अधिकारी लोग भी जो अच्छा कार्य कर रहे हैं, उनके साथ भी अच्छा सद्भाव होना चाहिये, पर जो अधिकारी गड़बड़ कर रहे हैं, चाहे वह निचले अधिकारी, कर्मचारी हों, जनपद के सीईओ हों, चाहे पंचायत या जिले के अधिकारी हों, भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है. गरीब अगर सबसे ज्यादा वास करता है, गरीबों का अगर सबसे ज्यादा काम पड़ता है, तो वह ग्राम पंचायतों से ही गरीबों का काम पड़ता है, जनपद से पड़ता है. ग्राम उदय से भारत उदय अभियान के तहत पूरे प्रदेश में अभियान चलाया गया और लोगों से आवेदन लिये गये. गरीबों ने बड़ी आशा और उम्मीद के साथ आवेदन दिये थे. यहां मंत्रालय से भी कई सचिव लोग जाकर के हमारे क्षेत्र में भी आये थे, आईएएस अधिकारी लोग जब गांवों में घूमे थे, लगा था कि पता नहीं सरकार कौन सा ग्राम उदय से भारत उदय कौन सा कल्याण कर देगी, पर कहीं न कहीं जो सबने आशा लगाई थी, उसमें पानी फिरा है. इस पर विचार करना चाहिये कि जिन लोगों ने आवेदन दिया था, वह आवेदन कहां गये. आज तक निराकरण नहीं हुआ. पंचायतों में जो शिविर लगे, उसका आज तक निराकरण नहीं हुआ. आपका अंत्योदय मेले में जैसा साथी हमारे चर्चा कर रहे थे, अंत्योदय मेले में आवेदन तो लिये जाते हैं, अंत्योदय मेले का जिस तरह से प्रचार, प्रसार होता है और लोग आवेदन देते हैं. चाहे वह विधवा, विक्लांग, वृद्धा पेंशन हो,पर उसका निराकरण नहीं होता है. मंत्री जी से और मंत्रिमण्डल के सभी सदस्यों से मेरा निवेदन है कि जो पहले व्यवस्था थी, विधवा पेंशन, विक्लांगता पेंशन और वृद्धा पेंशन में जो गरीबी रेखा की बाध्यता कर दी है. अभी हमने पढ़ा है कि अभी 1 अप्रैल से विधवा पेंशन में बाध्यता खत्म कर रहे हैं. मेरा आपसे निवेदन है कि जो 40 प्रतिशत से ऊपर विक्लांग हैं और जो वृद्ध हैं 60 वर्ष से ऊपर जो लोग हैं, उनमें जरुर गरीबी रेखा की बाध्यता आपको खत्म करनी चाहिये, क्योंकि बहुत सारे ऐसे गरीब, असहाय हैं, जो पेंशन से वंचित हैं. जब हम लोग भ्रमण में जाते हैं या कहीं भी, आये दिन आवेदन लेकर खड़े हो जाते हैं कि हम लोगों को पेंशन नहीं मिल रही है, इस पर जरुर सरकार को विचार करना चाहिये. एक तरफ हम गरीब कल्याण वर्ष भी मनाते हैं और दूसरी तरफ अगर गरीबों का कल्याण नही होता है, तो कहीं न कहीं यह चिंता का विषय बनता है. दूसरा, इंदिरा आवास योजना तो सरकार ने बंद कर दी,पर उनकी द्वितीय किश्त के लिये हमारे जिले में अभी भी बहुत सारे लोग चक्कर लगा रहे हैं. मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि आप आदेशित करें कि जिन लोगों ने मकान बना लिया है, इससे शासन की राशि का भी दुरुपयोग होता है, अगर एक किश्त चली गई, दूसरी किश्त नहीं जा रही है, तो कहीं न कहीं लोग परेशानी में हैं, उनकी द्वितीय किश्त तत्काल जारी कराई जाये और प्रधानमंत्री आवास योजना में जो सर्वे हुआ था, उसमें बहुत सारे गांव के गांव छूट गये हैं और पंचायतों, सरपंचों से भी, जनप्रतिनिधि होता है पंचायत का प्रतिनिधि भी, जन प्रतिनिधि विधायक लोग भी होते हैं, उनकी भी अनुशंसा का ध्यान रखें और उनसे भी प्रस्ताव लिये जाये. पहले ऐसी व्यवस्था थी. इंदिरा आवास योजना वगैरह में जब पंचायत से प्रस्ताव जाता था, उसके बाद ही निराकरण होता था अभी पता नहीं किस एजेंसी ने किया, कैसे किया, जो गरीब हैं, उनका नाम ही नहीं है. इस पर जरुर ध्यान देना चाहिये.

उपाध्यक्ष महोदय -- मंत्री जी, कई जिलों में यह आम शिकायत है कि 3-4 वर्ष पहले इंदिरा आवास के लिये एक एक किश्त जारी हुई थी, लोगों ने उसका इस्तेमाल किया, उसके बाद उनको द्वितीय किश्त नहीं मिली है. यह आम जिलों से शिकायत है, इसका परीक्षण करवा लें.

पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री (श्री गोपाल भार्गव) -- अध्यक्ष महोदय, इंदिरा आवास की जिनको एक किश्त मिल चुकी है या अंत्योदय आवास या किसी भी योजना की जो पूर्व में प्रचलित थी, उनके शेष काम के लिये भी राशि भारत सरकार से देने के लिये हम लोगों ने कहा था और कुछ के लिये हमने राशि प्राप्त भी कर ली है, राशि दे भी दी है. इसके बारे में हम लोग लगातार चिंतित हैं और उनके पूरे आवास कर दिये जायेंगे.

श्री कमलेश्वर पटेल -- उपाध्यक्ष महोदय, 2-3 और पाइंट्स हैं, जो बहुत महत्वपूर्ण हैं. हम आपके माध्यम से निवेदन करना चाहेंगे. मंत्री जी, लोगों ने शौचालय तो बनाये, हम लोग खुद गये थे, जब शौचालय बनाने का अभियान शुरु हुआ था. शुरु में भी गये थे, प्रोत्साहित भी किया था और कई जगह तो ओडीएफ हो गया और शौचालय बने ही नहीं हैं. कई जगह जो हितग्राहियों ने सीधे शौचालय बना लिया, उनका भुगतान नहीं हो रहा है. कई जगह मनरेगा की मजदूरी का भुगतान नहीं हो रहा है. ऐसे बहुत महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, इन पर जरुर आपको ध्यान देना चाहिये. आप बहुत अच्छे मंत्री जी हैं और थोड़ी कसावट लाइये. मुझे लगता है कि बुंदेलखण्ड से बाहर आप निकलते नहीं हैं. आप मुख्यमंत्री जी से इतना मत डरिये. आपको पूरे प्रदेश का दौरा करना चाहिये. आपको जाना चाहिये. आपके भ्रमण से थोड़ी कसावट आती है. कभी विंध्य रीजन में भी आइये. मंत्री जी बैठे बैठे कह रहे हैं कि अलग से चर्चा कर लीजिये. पर जो तकलीफ है, जो पेंशन की तकलीफ है, जिनका कई जगह अंगूठा नहीं लग पाता है, बुजुर्ग लोग बार-बार चक्कर लगाते हैं, बैंकों में जाते हैं, जितना उनको मिलना है, उससे ज्यादा उनका किराये में पैसा खर्चा हो जाता है. इसकी जरुर सहृदयता दिखाई जानी चाहिये और व्यवस्था बनानी चाहिये. ऐसा नहीं हो कि जब चुनाव नजदीक आता है, तो फिर पिटारा खोल देते हैं कि अब सचिव लोग बांटेंगे. कई जगह ऐसा भी होता है कि रोजगार सहायक और सचिव बिना सरपंच की साईन के राशि आहरण कर लेते हैं. यह भ्रष्टाचार की शिकायत बहुत जगह है. इस पर अंकुश लगना चाहिये और हम लोग जानकारी भी देते हैं जनपद सीईओ की जानकारी में रहता है. उसके बाद भी निराकरण नहीं करते हैं. हमारे विधान सभा क्षेत्र के जनपद पंचायत सिंहावल और देवसर दोनों जगह इस तरह का उदाहरण है. एक निलवार पंचायत का है, एक जगह मझोना पंचायत का है.

उपाध्यक्ष महोदय -- कमलेश्वर जी, जहां सरपंच की अनुमति के बिना या उनके हस्ताक्षर के बिना राशि आहरित कर ली है, वह आप मंत्री जी को लिखित में दे दें.

श्री कमलेश्वर पटेल -- उपाध्यक्ष महोदय, मैंने लिखित में कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ, जनपद पंचायत सीईओ से कई बार दूरभाष पर भी चर्चा की, पता नहीं कौन सा ऐसा राजनैतिक दबाव है.

उपाध्यक्ष महोदय -- मैं कह रहा हूं न कि आप मंत्री जी को लिखित में दे दीजिये, मैं यहां से कह रहा हूं.

श्री कमलेश्वर पटेल -- उपाध्यक्ष महोदय, जी बिलकुल. बहुत बहुत धन्यवाद. मंत्री जी से अपेक्षा है कि जो हमने चर्चा की है, उस पर ध्यान देंगे, धन्यवाद.

श्री दुर्गालाल विजय (श्योपुर) -- उपाध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 30,34,53,59 और 62 का समर्थन करता हूं. जैसा कि अभी सभी माननीय सदस्यों ने मंत्री जी को इस बात के लिये बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार प्रकट किया है कि उन्होंने ग्रामीम अंचल में 3-3,4-4 स्थानों पर सामुदायिक एवं मांगलिक भवन बनाने के लिये जो निर्णय किया और वह निर्णय भी उन्होंने दलीय भेदभाव से हटकर के सभी विधायकों के लिये और सब क्षेत्रों में यह मांगलिक भवन बनाने का जो फैसला किया और उससे ग्रामीण अंचल में लाभान्वित हुए हैं. इसके लिये मैं मंत्री जी को बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं. पिछले समय से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में जिस प्रकार से गतिविधियां संचालित होकर के ग्रामीण क्षेत्र का विकास करने का प्रयत्न किया जा रहा है, बहुत ही प्रशंसनीय है और जितनी प्रशंसा एवं तारीफ की जाये, कम है. खामियां तो इस मानवीय जीवन में कार्य करने में कहीं न कहीं किसी न किसी प्रकार से आ जाती हैं, लेकिन अगर ग्रामीण विकास विभाग का समग्र चिंतन किया जाये, उसको ठीक तरीके से देखा जाये, तो यह बात सबके समझ में आ रही है कि अभी पिछले वर्षों में जिस तेजी के साथ ग्रामों का विकास करने का जो संकल्प सरकार ने व्यक्त किया था, उसको विक्रियान्वित करने का कार्य मंत्री जी के नेतृत्व में बहुत ठीक तरीके से चल रहा है. ग्रामीण सड़कों का एक जाल बिछाया गया और पिछले वर्षों में चाहे वह मुख्यमंत्री सड़क योजना के माध्यम से, प्रधानमंत्री सड़क योजना के माध्यम से अथवा ग्रामीण अंचल में कच्ची सड़कें बनाने के माध्यम से जो कार्य हुआ है, उसके कारण से ग्रामीण अंचल में लोगों को आवागमन का ठीक तरीके से साधन उपलब्ध हो गया. जहां पर इतना दुर्गम और कच्चे मार्ग हुआ करते थे कि लोगों को एक गांव से दूसरे गांव में जाने में और शहरी क्षेत्र में जाने में बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ता था. रास्‍ता खराब होने के कारण लोग विचार करके भी त्‍याग देते थे कि रास्‍ते के कारण जाना संभव नहीं होगा. आज अगर हम ग्रामीण अंचलों को देखें, भले ही वह वन क्षेत्र हों अथवा ग्रामीण अंचल हों, वहां पर प्रधानमंत्री सड़क योजना और मुख्‍यमंत्री सड़क योजना के माध्‍यम से बहुत अच्‍छी सड़कें बनाई गई हैं. यह जो सड़कों का निर्माण हुआ है, जो लगातार आगे भी जारी है, इसके कारण गांव में रहने वाले किसानों को निश्‍चित रूप से समृद्धि का एक अच्‍छा अवसर प्राप्‍त हुआ है. ग्रामीण अंचल से मंडी जाने के लिए, चिकित्‍सालय जाने के लिए या अन्‍य स्‍थानों पर जाने के लिए जो कठिनाइयां होती थीं, उन कठिनाइयों का ठीक तरीके से निवारण करने का कार्य माननीय पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री जी ने किया है.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, ग्रामों की आंतरिक सड़कों का जो मामला था, बहुत लंबे अर्से से लोग इस बात की निरंतर मांग करते थे कि ग्रामों की आंतरिक सड़कें खराब हैं, सीसी और पक्‍के मार्ग बनने चाहिए. उनकी मांग थी कि इन मार्गों को बनाने के लिए ठीक तरह से कोई योजना बनाकर कार्य किया जाए. हमारे माननीय मंत्री जी और पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने जो पंच परमेश्‍वर योजना बनाई, उस योजना के अंतर्गत ग्रामों को आंतरिक पक्‍की सड़कों से जोड़ने का जो काम चल रहा है और जैसा कि संकल्‍प व्‍यक्‍त किया गया है, यह हम सब लोग भी जानते हैं कि वर्ष 2022 तक शायद ही ऐसा कोई गांव बचेगा जिसकी आंतरिक सड़कें पक्‍के सीसी सड़क मार्ग से न जुड़ी हों.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वर्ष 2011-12 से अभी तक 12699 करोड़ रुपये पंच परमेश्‍वर योजना के अंतर्गत खर्च करके 18 हजार किलोमीटर सड़कें बनाने का काम किया गया है. इस योजना के अंतर्गत अब बहुत तेजी के साथ गांवों को पक्‍की सड़कों से जोड़ने का काम किया जा रहा है. अभी इसी वित्‍तीय वर्ष में प्रधानमंत्री सड़क योजना के अंतर्गत 3 हजार 8 सौ किलोमीटर लंबी सड़कों द्वारा 1747 बसाहटों को जोड़ने का काम हुआ है, जो वास्‍तव में बहुत प्रशंसनीय कार्य है. हमारे माननीय मंत्री जी के नेतृत्‍व में ऐसे गांवों को भी कनेक्‍ट करने का काम चल रहा है जहां आधा किलोमीटर, एक किलोमीटर सड़क मार्ग से गांवों को जोड़ना है. इसका ठीक तरीके से उपाय होना चाहिए और ज्‍यादातर ग्रामवासी बंधु इस बात की मांग करते हैं, अत: यह काम भी बहुत तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है और हमें विश्‍वास है कि आने वाले समय में इस प्रकार की कनेक्‍टिविटी गांवों में हो जाएगी.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, स्‍टेट कनेक्‍टिविटी में भी बहुत सारे मार्गों को जोड़ने का काम हमारे माननीय मंत्री जी ने किया है. मेरे क्षेत्र में भी पिछले वर्ष 2 ऐसे गांव हैं जिनको स्‍टेट कनेक्‍टिविटी से जोड़ा गया है जिनकी बहुत आवश्‍यकता थी. हमारे क्षेत्र में दुर्गापुरी मंदिर न केवल श्‍योपुर क्षेत्र में बल्‍कि चंबल, ग्‍वालियर अंचल और राजस्‍थान का भी श्रद्धा का केन्‍द्र है. बहुत वर्षों से लोग इसकी मांग कर रहे थे, माननीय मंत्री जी ने उसको स्‍टेट कनेक्‍टिविटी से जोड़कर वहां सड़क मार्ग बना दिया, इसके लिए मैं माननीय मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्‍यवाद देता हूँ. एक और मार्ग है-देवरी हनुमान मंदिर मार्ग, जो श्‍योपुर जिले का बहुत प्रसिद्ध मंदिर है, इस स्‍थान पर भी सड़क मार्ग बनाने के लिए फैसला किया गया और यह मार्ग बन गया.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- अब आप समाप्‍त करें.

श्री दुर्गालाल विजय -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से एक निवेदन करना चाहता हूँ कि अभी हमारे यहां दो ऐसे धार्मिक स्‍थल हैं जिनमें मेनरोड तो है लेकिन कोई 600 मीटर या 800 मीटर की दूरी पर है. वहां पर बारिश में श्रद्धालुओं को जाने में बहुत कठिनाई होती है. उन्‍होंने आश्‍वासन भी दिया है, एक मार्ग अनगढ़ बाबाजी के स्‍थान के लिए है और एक बासबंद गांव में भैरव बाबा जी के स्‍थान के लिए है, इन दोनों स्‍थानों को भी स्‍टेट कनेक्‍टिविटी से जोड़ देंगे तो वहां उन स्‍थानों में आने वाले श्रद्धालुओं को बहुत लाभ मिलेगा.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक और काम हमारे प्रदेश के अंदर और विशेषकर मेरे श्‍योपुर जिले में पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग द्वारा बहुत तेजी के साथ चलाया जा रहा है. मैं इसके लिए माननीय मंत्री जी को बहुत धन्‍यवाद देना चाहता हूँ कि हमारे श्‍योपुर जिले में और पूरे प्रदेश में लगभग 24 लाख परिवारों को जोड़कर आपने 2 लाख से अधिक स्‍व-सहायता समूह बनाए और इन स्‍व-सहायता समूहों के माध्‍यम से लगभग 2 हजार करोड़ रुपये का जो इनको ऋण प्राप्‍त हुआ है, इसके माध्‍यम से इनको समृद्ध होने का, सशक्‍त होने का अच्‍छा अवसर मिला है. इन स्‍व-सहायता समूहों के माध्‍यम से जो आजीविका मिशन के द्वारा काम कराया जा रहा है, इसमें ऐसी कई महिलाओं को और परिवारों को कार्य करने का अवसर प्राप्‍त हुआ है जिनके पास रोजगार के साधन नहीं थे और इसके कारण उनके पलायन करने की स्‍थिति आ रही थी, इसको रोकने में यह योजना बड़ी कारगर साबित हुई है.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- अब समाप्‍त करें.

श्री दुर्गालाल विजय -- उपाध्‍यक्ष महोदय, एक-डेढ़ मिनट में समाप्‍त करता हूँ.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- केवल एक मिनट में समाप्‍त करें.

श्री दुर्गालाल विजय -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, ऐसे तो बहुत बड़ा विभाग है पर मैं एक बात यह निवेदन करना चाहता हूँ कि अभी सामाजिक न्‍याय विभाग के अंतर्गत मुख्‍यमंत्री कन्‍यादान योजना का जो कार्य प्रारंभ हुआ है, निश्‍चित रूप से लाखों-लाख कन्‍याओं का विवाह संपन्‍न कराने का कार्य हमारे मुख्‍यमंत्री जी ने, हमारे माननीय मंत्री जी ने किया है. एक आदर्श भी हमारे मंत्री जी ने प्रस्‍तुत किया कि अपने बेटे का विवाह भी इस मुख्‍यमंत्री कन्‍यादान योजना के अंतर्गत कराया और पूरे प्रदेश के लोगों को एक संदेश दिया. मैं इसके लिए उनको धन्‍यवाद देता हूँ. लाखों-लाख कन्‍याओं का विवाह तो संपन्‍न हो रहा है पर इस योजना में जो राशि दी जा रही है, वह कम रहती है. अगर इसको और बढ़ाएंगे तो उन गरीब कन्‍याओं का विवाह और धूमधाम से करने के लिए बहुत अच्‍छा मौका मिलेगा. मजदूर सुरक्षा योजना के बारे में मैं कहना चाहता हूँ.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, अब आपका एक मिनट समाप्‍त हो गया है.

श्री दुर्गालाल विजय -- उपाध्‍यक्ष महोदय, समाप्‍त कर ही रहा हूँ.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, ऐसे नहीं, आप तो अनुशासित सदस्‍य हैं. हमेशा अनुशासन में रहते हैं.

श्री दुर्गालाल विजय -- उपाध्‍यक्ष महोदय, क्षेत्र की एक बात कहकर अपनी बात समाप्‍त कर दूंगा.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- यह गलत बात है, आपने एक मिनट मांगा था, मैंने दे दिया. अब आप अपने सुझाव माननीय मंत्री जी को लिखकर दे दीजिएगा.

श्री दुर्गालाल विजय -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद.

श्री के.पी. सिंह (पिछोर) -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से स्‍वच्‍छ भारत के ऊपर अपनी बात कहना चाहूँगा.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार -- पहले तारीफ तो कर दो भाई.

श्री के.पी. सिंह -- डॉक्‍टर साहब, तारीफ तो इसलिए नहीं कर सकता कि जैसा आप यहां कहते हैं वैसा नीचे हो ही नहीं रहा है. यहां आप कुछ कहते हैं, नीचे कुछ हो रहा है.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- डॉ. शेजवार जी, खड़े होकर कुछ कह दीजिए, ज्‍यादा बेहतर रहेगा.

श्री कमलेश्‍वर पटेल -- उपाध्‍यक्ष महोदय, हमने माननीय मंत्री जी की तारीफ की थी, व्‍यवस्‍थाओं की तारीफ नहीं की थी, व्‍यवस्‍था तो पूरी अव्‍यवस्‍थित है.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- डॉ. साहब, अमूमन आप बैठकर कहते नहीं, खड़े होकर ही बात करते हैं.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार -- उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं क्षमा चाहता हूँ. हम कल से सदन में देख रहे हैं कि अभी तक पक्ष और विपक्ष, दोनों पक्षों के सीनियर और जूनियर, महिला और पुरुष माननीय सदस्‍य भी, सभी ने किसी न किसी रूप में हमारे पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री जी की प्रशंसा की है और उसमें विशेष रूप से मंगल भवन, सामुदायिक भवन, जिस तरीके से उन्‍होंने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी विधायकों से अपने-अपने क्षेत्रों में नाम मांगे हैं और उनको स्‍वीकृति दी है तो सब उनकी प्रशंसा कर रहे हैं. एक परम्‍परा जैसा माहौल बना था तो के.पी. सिंह जी ने उस माहौल को तोड़ दिया. सभी ने सबसे पहले मंत्री जी तारीफ की, लेकिन इन्‍होंने नहीं की तो मैंने इन्‍हें टोका कि कम से कम प्रशंसा तो करें.

श्री सुंदरलाल तिवारी -- उपाध्‍यक्ष महोदय, भार्गव जी की प्रशंसा हो रही है और शेजवार साहब से सुनी नहीं जा रही है, इसलिए उसको बंद कराने के लिए उन्‍होंने यह बात की ताकि उनकी प्रशंसा बंद हो जाए.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, ऐसी कोई उनकी मंशा नहीं है.

श्री कमलेश्‍वर पटेल -- उपाध्‍यक्ष महोदय, जंगली पशु किसानों का इतना नुकसान करते हैं, आप भी बाड़ा लगवा दीजिए, हम आपकी भी प्रशंसा करने लगेंगे.

श्री गोपाल भार्गव -- उपाध्‍यक्ष महोदय, इनके जंगल में ही मंगल होगा.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार -- उपाध्‍यक्ष महोदय, देखिए हम तो न्‍याय की बात करते हैं, या तो आप प्रशंसा करिए या वह मंगल भवन वापस कर दीजिए कि मुझे अपने क्षेत्र में नहीं बनवाना है. (हंसी). भार्गव जी, मेरा यह कहना है कि यदि ये आपकी प्रशंसा नहीं करते तो भी आप इन्‍हें मंगल भवन दीजिए, आपकी उदारता की हम प्रशंसा करते हैं.

श्री कमलेश्‍वर पटेल -- उपाध्‍यक्ष महोदय, वह पर्याप्‍त नहीं है, बहुत सीमित है, चार-चार दिया, जब सभी पंचायतों में बनेगा तब अच्‍छा होगा.

श्री गोपाल भार्गव -- उपाध्‍यक्ष महोदय, एक सड़क जितने की बनती है, उतने में 10 मंगल भवन बन जाते, आप अपने क्षेत्र की देखें, आपके यहां जितनी सड़कें मंजूर की हैं, आप उसका मूल्‍यांकन क्‍यों नहीं करते. आप सिर्फ मंगल भवन की ही बात क्‍यों करते हैं क्‍योंकि वह ऊपर दिखता है, सड़क सबके चलने की होती है, इसलिए आप ऐसा कह रहे हैं.हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम 10-10, 20-20 करोड़ रूपए की सड़कें इसी साल स्‍वीकृत हुई हैं. अभी टेण्‍डर की प्रक्रिया में हैं. सारी चीजें आप देखिए. आपके लिए पत्र भी पहुंचे होंगे. (मेजों की थपथपाहट) आपके यहां इलेक्ट्रिफिकेशन कर रहे हैं. आपके यहां भी कुछ चीजें मैं अपने बजट भाषण में दूंगा. अच्‍छी बात यदि आप करते हैं तो मैं आपके लिए हृदय से धन्‍यवाद देता हॅूं. कम से कम हमें एक सकारात्‍मक राजनीति करने की परम्‍परा बनाना चाहिए. आपके लिए धन्‍यवाद.

श्री के.पी. सिंह (पिछोर) -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, स्‍वच्‍छ भारत मिशन के तहत शौचालय की जो योजना है उसकी ओर माननीय मंत्री जी का आपका ध्‍यान दिलाना चाहता हॅूं. आप भी बुन्‍देलखण्‍ड में रहते हैं और थोड़ा बहुत पार्ट हमारा भी पड़ता है. एक साल में मैं अपने विधानसभा क्षेत्र के हर गांव में जाता हॅूं बाकी जिलों में जहां भी जाने का अवसर मिलता है वहां जाता हॅूं. लेकिन जितनी भी जगह जाकर देखते हैं कहीं भी शौचालयों का उपयोग नहीं हो रहा है और उसका बेसिक कारण यह है कि आपने 6000 और 6012 रूपए हितग्राही को दे दिया तो शौचालय तो बन जाता है लेकिन जब तक पानी की व्‍यवस्‍था आप नहीं करेंगे, तब तक शौचालय बनाने का कोई अर्थ नहीं है. मैंने माननीय मुख्‍यमंत्री जी को भी पत्र लिखा था और माननीय मंत्री जी को भी इसकी कॉपी भेजी थी, आपको कॉपी मिली या नहीं, इसकी मुझे जानकारी नहीं है. जितने गांवों में जाते हैं ज्‍यादातर लोग या तो कंडे रख लेते हैं या लकड़ी रख लेते हैं या अन्‍य कोई सामान रख लेते हैं, यह हकीकत है. आप स्‍वीकार करें या न करें लेकिन हकीकत यह है कि उनका सदुपयोग नहीं हो पा रहा है. अगर आप वास्‍तव में उन शौचालयों का सदुपयोग करवाना चाहते हैं और इस प्रदेश के गांवों को खुले में शौच से मुक्‍त करवाना चाहते हैं तो आपको पानी की व्‍यवस्‍था करनी पडे़गी और जब से शौचालय की योजना चली है तब से मैंने तीन पत्र लिख चुका हॅूं. केन्‍द्र सरकार से आपको शौचालय का पैसा मिल रहा है. वह पैसा आप दे देते हैं. लेकिन अगर आप पानी की व्‍यवस्‍था नहीं करते हैं और केन्‍द्र सरकार ने उसमें व्‍यवस्‍था नहीं की है तो क्‍या आप अपने विभाग से या पीएचई विभाग जो दूसरे मंत्री जी देखते हैं क्‍या उस विभाग से पानी की व्‍यवस्‍था नहीं की जा सकती ? अब गांवों में लोगों पीने के लिए पानी नहीं है. हैण्‍डपंप सूख रहे हैं. नल-जल योजना संचालित नहीं हो रही हैं. कागजों में नल-जल योजना की स्‍वीकृति हो जाती है. यह आपकी विधानसभा में होगा, यह अकेले मेरी विधानसभा की बात नहीं है जब तक आप पानी की व्‍यवस्‍था नहीं कर सकते, तब तक शौचालय का उपयोग नहीं हो सकता. कहने को भले ही आप किसी गांव को ओडीएफ करा दें. माननीय भार्गव जी, मैं एक गांव का किस्‍सा बताता हॅूं. हमारे यहां एक एसडीएम साहब थे. उन्‍होंने मुझे फोन किया कि साहब आप हमारे साथ चलिए और एक गांव को हम ओडीएफ घोषित कर रहे हैं. मैंने कहा ठीक है, आप चलिए मैं बाद में आता हॅूं. जब मैं उस गांव में पहुंचा तो सरकारी मशीनरी सब पहुंच गयी. उनका जो उद्घाटन होना था, वह हो गया. फिर मैंने एसडीएम को लेकर उस गांव का दौरा किया और एसडीएम से कहा कि एक भी घर बता दो जिसमें शौचालय का उपयोग हो रहा है. पूरा गांव ओडीएफ घोषित हो गया. अखबारों में भी छप गया. उस गांव का नाम कैढर है वह शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र में है और मेरी विधानसभा क्षेत्र से लगा हुआ है. चूंकि माननीय मंत्री जी का प्रेशर था, ऊपर से प्रेशर था कि गांव को ओडीएफ घोषित करो तो वह गांव ओडीएफ घोषित तो हो &#