मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा दशम् सत्र

 

 

फरवरी-अप्रैल, 2016 सत्र

 

सोमवार, दिनांक 14 मार्च, 2016

 

(24 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1937 )

 

 

[खण्ड- 10 ] [अंक- 14 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

सोमवार, दिनांक 14 मार्च, 2016

 

(24 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1937 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.03 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

 

विशेष उल्लेख

(क) सदन की बैठकों के समय में परिवर्तन विषयक

 

 

उच्च शिक्षा मंत्री(श्री उमाशंकर गुप्ता)-- अध्यक्ष महोदय, आज 11.00 बजे पहली बार यह विधानसभा का सदन शुरु हो रहा है और वास्तव में यह आधा घंटे का टाइम अभी काटे नहीं कट रहा था शायद धीरे धीरे हम लोगों की आदत में आ जाएगा. इसके लिए आपको आभार.

अध्यक्ष महोदय-- आज बहुत से माननीय सदस्य 10.30 के हिसाब से आ गये थे .

श्री सत्यपाल सिंह सिकरवार-- अध्यक्ष महोदय, वैसे यह हमारे जैसे लेट उठने वाले विधायकों के लिए तो ठीक है.

अध्यक्ष महोदय--- आपके धन्यवाद के लिए आभार.

नागरिक एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री(कुंवर विजय शाह)-- अध्यक्ष महोदय, आपने गोविंद सिंह जी का भी ध्यान रखा है, लेट उठते हैं.

डॉ. गोविंद सिंह-- मैं तो सही टाइम वाला हूं मैं तो 10.30 बजे का ही चाहता हूं.

संसदीय कार्यमंत्री(डॉ. नरोत्तम मिश्र)-- इस उम्र में तो नींद ही नहीं आती है यह कहना चाहते हैं वह.

श्री उमाशंकर गुप्ता--- अच्छा इसलिए गोविंद सिंह जी ने विरोध किया था कि सुबह 10.00 बजे से किया जाये.

 

 

 

 

 

 

(ख) राष्ट्रकुल दिवस पर अध्यक्षीय संदेश

 

 


गृह मंत्री (श्री बाबूलाल गौर)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह तो बहुत अच्छा है कि हम उन देशों के सदस्य हैं, जहाँ पहले अँग्रेजों का राज रहा. लेकिन उन देशों की जो प्रगति हुई, जो उसके अन्दर प्रजातांत्रिक व्यवस्थाएँ हैं, वहाँ हमें पहले बहुत बार जाने का मौका मिलता था. लेकिन अब मध्यप्रदेश की विधान सभा से सदस्यों के लिए ये कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए हैं और पिछले अनेकों वर्षों से उन देशों का भ्रमण करने से उस देश की प्रगति, उस देश का ज्ञान-विज्ञान, उन देशों की सामाजिक व्यवस्था, उस देश के प्रजातंत्र के बारे में, देश के अन्दर जो अँग्रेजों द्वारा स्थापित किया गया, प्रजांतत्र का डेमोक्रेटिक सेटअप, जैसे हाउस आफ कॉमन्स और हाउस आफ लार्ड्स के द्वारा, यहाँ भी अपनाई गई है. उसमें हम लोगों को घूमने का, देखने का, मौका दिया जाए.

अध्यक्ष महोदय-- माननीय गृह मंत्री जी का विचार और सुझाव समयोचित है. इस पर जरूर विचार करेंगे.

खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री(कुँवर विजय शाह)-- मंत्रियों को भी साथ में ले जाया जाय, विधायक ही विधायक जाते हैं.

11.06 बजे निधन का उल्लेख.

(1) पशुपालन मंत्री, सुश्री कुसुम सिंह महदेले के परिवार के सदस्यों,

(2)डी एस पी, श्री पाठक एवं अन्य 4 की दुर्घटनाओं में एवं

(3) प्रदेश में ओलावृष्टि से असामयिक मृत्यु होने संबंधी.

 

संसदीय कार्य मंत्री(डॉ.नरोत्तम मिश्र)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं इससे इतर विषय की ओर आपका ध्यानाकर्षित करना चाहूँगा. 11 मार्च की दुखद घटना है, हमारे सदन में सहयोगी मंत्री सुश्री कुसुम महदेले जी के परिवार के सदस्यों की असामयिक मृत्यु हुई तो उसके कारण से काफी उन पर वज्रापात जैसा हुआ है. इसी तरह से अशोक नगर में भी मुंगावली के पास में हमारे डी एस पी, वाहन चालक और अशोक, प्रधान आरक्षक की मौत हुई. प्रदेश में ओले से भी पिछले दिनों कुछ लोग मरे हैं तो इनमें भी शोक संवेदना है और सुश्री कुसुम महदेले जी हमारी, जिन्हें हम जीज्जी के नाम से बोलते रहते हैं. परम पिता परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं कि इन सभी के परिवारों को, डी एस पी पाठक और जीज्जी के परिवार को, यह गहन दुःख सहने की शक्ति प्रदान करे.

उपनेता प्रतिपक्ष श्री बाला बच्चन(राजपुर)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, आदरणीय डॉ.नरोत्तम मिश्र जी ने जिन दिवंगत आत्माओं का उल्लेख किया है. हम भी उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं. कुसुम महदेले जी जो कि बहुत सीनियर मोस्ट इस सदन की सदस्य हैं और उनके परिवार के बारे में जानकर हम सबको भी दुःख हुआ है और आदरणीय जो एस डी ओ पी की जो दुर्घटना में डेथ हुई है और अशोक नगर का भी उल्लेख किया है तो हम सब भी उन दिवंगत आत्माओं के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं और उसके अलावा भी कुछ डेथ हुई हैं उन सबके प्रति हम श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं और शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से यह प्रार्थना करते हैं कि दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें. शांति ऊँ.

अध्यक्ष महोदय-- जिन घटनाओं का उल्लेख माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी एवं नेता प्रतिपक्ष जी ने किया है, वे सभी घटनाएँ दुखद हैं. सड़क हादसे की दुर्घटना में सदन की वरिष्ठ सदस्य एवं मंत्री माननीया कुसुम महदेले जी के परिजनों की भी दुखद मृत्यु हुई है. मैं इस सदन की ओर से इन दुर्घटनाओं में प्रभावितों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूँ.

11.08 बजे तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर.

साक्षी हॉस्पिटल को मेडीकल कॉलेज का दर्जा

1. ( *क्र. 5674 ) श्रीमती ममता मीना : क्या लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या गुना जिले के गुना ब्‍लॉक के म्‍याना क्षेत्र में एक ही कैम्‍पस में साक्षी इंजीनियरिंग कॉलेज, साक्षी नर्सिंग कॉलेज तथा साक्षी हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेन्‍टर एवं एक स्‍कूल संचालित है? इसी कैम्‍पस में मेडीकल कॉलेज की अनुमति के लिये आवेदन किया है? क्‍या निर्धारित मापदण्‍ड में आता है या नहीं? (ख) यदि प्रश्‍नांश (क) में वर्णित तथ्‍य सत्‍य हैं तो विभाग की कौन सी नीति है, जिसके तहत नियम विरूद्ध साक्षी मेडीकल कॉलेज की विभाग ने अनुशंसा करके केन्‍द्र शासन को भेजी है? क्‍या जाँच कराकर निरस्‍त करेंगे? (ग) क्‍या साक्षी मेडीकल कॉलेज खोलने की अनुशंसा विभाग द्वारा दबाव में की गई है? यदि नहीं, की है तो बतायें कि नवीन मेडीकल कॉलेज खोलने के क्‍या नियम हैं? कितनी भूमि भवन तथा सुविधाएं हों तब कौन-कौन अनुमति देता है? (घ) क्‍या प्रश्‍नांश (क), (ख) एवं (ग) में वर्णित तथ्‍यों की जाँच करायेंगे? क्‍या विभाग से संबंधित योजनाओं में साक्षी कैम्‍पस में एक ही भवन और भूमि को सभी संस्‍थानों में अलग-अलग बताकर अवैध अनुमतियां ली हैं? क्‍या उन सभी को जाँच कराकर निरस्‍त करेंगे और संबंधित पर कार्यवाही करेंगे? कब तक?

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) सभी संस्था के लिए पृथक-पृथक भवन हैं। चिकित्सा महाविद्यालय संचालित करने की अनुमति एम.सी.आई. से प्राप्त करने हेतु चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा डी.एण्ड.एफ. जारी किया गया है, जो एम.सी.आई. के मानदण्ड के अंतर्गत है। (ख) नियमानुसार डी.एण्ड.एफ. जारी किया गया है, शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी नहीं। नवीन चिकित्सा महाविद्यालय स्थापित करने हेतु 25 एकड़ भूमि की आवश्यकता होती है। चिकित्सा महाविद्यालय की आवश्यकता दर्शाते हुए एम.सी.आई. के मानदण्डों की पूर्ति की शर्त पर चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा डी.एण्ड.एफ. जारी किया जाता है, एम.सी.आई. नई दिल्ली के मानदण्डों के अनुरूप सुविधायें होने पर एम.सी.आई. द्वारा गहन निरीक्षण उपरांत मान्यता प्रदान की जाती है। (घ) उत्तरांश के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

श्रीमती ममता मीना-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न यह था कि क्या गुना जिले के ग्राम म्याना में एक ही कैम्पस में साक्षी इंजीनियरिंग कॉलेज, साक्षी नर्सिंग कॉलेज एवं साक्षी हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर तथा स्कूल संचालित है? प्रश्न के जवाब में आया है कि हमने बड़ी बड़ी एजेन्सियों के द्वारा जाँच करवा ली है बड़ी बड़ी एजेन्सियों से जाँच करवाने के बाद भूमि पर्याप्त पाई गई. जबकि एक ही कैम्पस है और बाकी की जो अभी उसमें 25 हैक्टेयर भूमि कही गई है, 25 हैक्टेयर भूमि हो सकती है. लेकिन 25 हैक्टेयर भूमि में वह बना नहीं है. मात्र तीन एकड़ पर वह बना है. एक ही भूमि पर अलग-अलग नाम से मान्यता लेकर अलग-अलग संस्थान उस कैम्पस में संचालित हो रहे हैं. मैं आपके माध्यम से मंत्रीजी से पूछना चाहती हूँ कि क्या इसकी जांच उन्होंने कराई है ?

राज्य मंत्री, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण (श्री शरद जैन)--माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय विधायिका जी ने जानकारी दी है कि एक ही कैम्पस में यह संस्थान संचालित हो रहे हैं. यह जगह कुल मिलाकर 44 एकड़ से अधिक है उस स्थान पर साक्षी मेडिकल कॉलेज, साक्षी नर्सिंग कॉलेज, साक्षी इंजीनियरिंग कॉलेज और साक्षी पब्लिक स्कूल यह सब अलग-अलग संचालित हैं. स्वास्थ्य शिक्षा विभाग ने डीएनएपी की अनुमति दिनांक 27.9.2013 को दी है दो वर्ष के बाद उसका रिन्यूवल किया गया. एमसीआई की गाइडलाइन के अनुसार परमीशन दी है जो कि अनुरूप है. इसके पश्चात् ज्वाइंट डायरेक्टर के नेतृत्व में एक छह सदस्यीय समिति भी निरीक्षण हेतु गई थी उसने भी सब कुछ ठीक पाया है और विभाग ने जो अनुमति दी है वह नियमानुसार है जो एमसीआई के मापदंड हैं हम सब उनका पालन करते हैं.

श्रीमती ममता मीना--माननीय अध्यक्ष महोदय, जो जवाब आया है वह पूरी तरह से गलत है. मात्र तीन एकड़ में साक्षी हास्पिटल, साक्षी इंजीनियरिंग कॉलेज, छात्रावास कुल मिलाकर यह केवल तीन एकड़ में बना है. मैं मंत्रीजी से चाहती हूँ कि एक उच्च स्तरीय, प्रदेश स्तरीय जांच कमेटी बनाई जाए उस जांच कमेटी के माध्यम से जांच कराई जाए मैं रोज देखने वाली हूं यह जो बताया गया कि 44 हेक्टयर में यह कैम्पस संचालित है यह गलत है, मात्र तीन एकड़ में यह कैम्पस बना हुआ है इसकी एक उच्च स्तरीय कमेटी के माध्यम से जांच होना चाहिए.

श्री शरद जैन--माननीय अध्यक्ष महोदय, एक बार स्थल निरीक्षण हो चुका है जो समिति गई थी उसने हर बात का निरीक्षण किया और कैम्पस को एमसीआई के अनुरूप पाया फिर भी माननीय विधायिका जी कह रही हैं तो हम किसी उच्च अधिकारी को भेजकर इसका परीक्षण करा लेंगे.

श्रीमती ममता मीना--माननीय अध्यक्ष महोदय, किसी उच्च स्तरीय समिति से जांच करायें मंत्रीजी.

अध्यक्ष महोदय--मंत्रीजी ने बोल दिया है कि किसी वरिष्ठ अधिकारी से जांच करा लेंगे.

भाण्‍डेर थाने में पूर्णकालिक निरीक्षक की पदस्‍थी

2. ( *क्र. 3404 ) श्री घनश्‍याम पिरोनियाँ : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या भाण्‍डेर थाने में निरीक्षक का पद स्‍वीकृत है, लेकिन प्रभारी नियुक्‍त कर कार्य कराया जा रहा है? (ख) क्‍या पुलिस लाईन दतिया में कई निरीक्षक रिजर्व में मौजूद है? (ग) क्‍या भाण्‍डेर थाना उत्‍तर प्रदेश की सीमा से लगा हुआ है और वहां अवैध उत्‍खनन को लेकर खूनी हिंसक घटनायें होती रहती हैं? इस बावत् जनप्रतिनिधि ने कई बार शिकायत की है? (घ) यदि हाँ, तो भाण्‍डेर थाने में निरीक्षक पदस्‍थ न करते हुये प्रभारी क्‍यों पदस्‍थ किया गया? इसके लिए कौन जिम्‍मेदार है? कानून व्‍यवस्‍था से खिलवाड़ करने वालों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की जा रही है?

गृह मंत्री ( श्री बाबूलाल गौर ) : (क) जिले में निरीक्षकों की कमी के कारण कानून व्यवस्था एवं थाना कार्य सुचारू रूप से संपादित करने के लिये प्रभारी नियुक्त कर कार्य कराया जा रहा है। (ख) जी नहीं। (ग) जी हाँ। परन्तु विगत 03 वर्षों में अवैध उत्खनन को लेकर खूनी हिंसक घटनाएं नहीं हुईं हैं और न ही इस बावत् थाना भाण्डेर पर कोई शिकायत प्राप्त हुई है। (घ) प्रश्नांश के उत्तर के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

श्री घनश्याम पिरोनियां--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने मेरे प्रश्न क्रमांक 3404 में आपके माध्यम से वरिष्ठ नेता आदरणीय गृह मंत्रीजी से यह पूछने का प्रयास किया था कि दतिया जिले में मेरे विधान सभा क्षेत्र भांडेर में टीआई रेंक के व्यक्ति को पदस्थ रहना चाहिए वहां अभी दो स्टार के प्रभारी के माध्यम से काम चलाया जा रहा है. प्रश्न का जो उत्तर मुझे दिया गया है उससे मैं संतुष्ट नहीं हूँ. मैंने दिनांक 30.1.2016 को प्रश्न लगाया था. वहां पर रघुवीर सिंह तोमर, सुदीप सिंह सेंगर और जीतेन्द्र सिंह यादव यह तीन निरीक्षक थे लेकिन 21 फरवरी को विधान सभा प्रश्न पूछने के बाद श्री रघुवीर सिंह तोमर को ट्रेफिक, श्री सुदीप सिंह सेंगर को बढ़ोनी में और श्री जीतेन्द्र यादव को महिला सेल का प्रभारी बनाया गया है जबकि तीन-तीन टीआई वहां पर पदस्थ थे. मेरा निवेदन है कि चाहे भांडेर है या अन्य क्षेत्र हैं टीआई रेंक का अधिकारी वहां पदस्थ रहना चाहिए. यह आश्वासन में मंत्रीजी से चाहता हूँ.

श्री बाबूलाल गौर--माननीय अध्यक्ष महोदय, जिले में निरीक्षकों की कमी के कारण कानून व्यवस्था और थाना कार्य सुचारु रुप से संपादित करने के लिए प्रभारी नियुक्त किया जा रहा है. अब माननीय सदस्य का आदेश भी है और निवेदन भी है कि प्रभारी नियुक्त करें. अभी हमारे पास कमी है, ट्रेनिंग चल रही है कमी की पूर्ति हो जाएगी तो इनकी भावना के अनुसार विचार करेंगे.

श्री घनश्‍याम पिरोनियॉ:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने इसलिये पहले ही नाम पढ़े थे, उन तीनों के और वहां पर पदस्‍थ थे. अगर वह चाहते तो उस समय वहां पर कर सकते थे. इससे ध्‍यान में आता है कि सहयोगात्‍मक अवस्‍था में वह रहना नहीं चाहते होंगे.

अध्‍यक्ष महोदय:- आपके प्रश्‍न का उत्‍तर आ गया है.

श्री घनश्‍याम पिरोनियॉ:- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आश्‍वस्‍त तो हो जाऊं. मेरे और भी प्रश्‍न हैं. वहां पर अवैध उत्‍खनन हो गया है. वहां पर तमाम प्रकार की समस्‍या है. मैंने तमाम सारे प्रश्‍न किये हैं. अभी मेरे प्रश्‍न का उत्‍तर ही नहीं आया है.

अध्‍यक्ष महोदय:- आपको और कुछ पूछना है तो पूछ लीजिये. आपके प्रश्‍न का उत्‍तर आ गया है.

श्री घनश्‍याम पिरोनियॉ:- अध्‍यक्ष महोदय, मेरे पहले प्रश्‍न का उत्‍तर तो आ जाने दीजिये. वहां पर अभी पदस्‍थ हैं, अभी वहां पर महिला सेल में जिसको किया है.

अध्‍यक्ष महोदय :- यह बहस का विषय का थोड़े ही है.

श्री घनश्‍याम पिरोनियॉ:- अध्‍यक्ष महोदय, मेरे पहले प्रश्‍न का उत्‍तर तो आ जाये.

अध्‍यक्ष महोदय :- आप सीधा प्रश्‍न कर दीजिये.

श्री घनश्‍याम पिरोनियॉ:- मैंने मंत्री जी से पहले ही निवेदन कर लिया था.

अध्‍यक्ष महोदय :- उसका तो उत्‍तर आ गया है. आपको और कुछ प्रश्‍न करना है.

श्री घनश्‍याम पिरोनियॉं :- अध्‍यक्ष जी, अभी उसका उत्‍तर ही नहीं आया है.

श्री बाबूलाल गौर :- आवश्‍यकता अनुसार विचार करेंगे.

श्री घनश्‍याम पिरोनियॉं :- अध्‍यक्ष महोदय, महिला सेल वाली जो स‍ब इन्‍सपेक्‍टर रीवा टण्‍डन है, उसको महिला सेल में भेज दें और उसको यहां थाने में भेज दें.

अध्‍यक्ष महोदय :- आप पूछ कहां रहे हैं. आपकी वह वाली बात तो हो गयी है. आपको और कुछ पूछना है.

श्री बाबूलाल गौर :- आप मुझसे मिल लें. हम उस पर विचार करेंगे.

श्रीघनश्‍याम पिरोनियॉं :- पलहा टी. आई. को वहां पर भेज दें. वहां पर अवैध उत्‍खनन हो रहा है. वहां पर तमाम प्रकार की अव्‍यवस्‍था है. उसको भी सुधारने के लिये आश्‍वस्‍त करने का कष्‍ट करें. क्‍यों कल ही मैं बेजा पारा में एक उद्घाटन में था, मेरे सामने जे सी बी मशीन निकली मैने माननीय कलेक्‍टर महोदय को फोन से अवगत कराया.

श्री बाबूलाल गौर :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, '''' के उत्‍तर में लिखा है कि तीन वर्षों में अवैध उत्‍खनन को लेकर खूनी हिंसक की घटनाएं नहीं हुई हैं और न ही इस बाबत थाना भाण्‍डेर पर कोई शिकायत प्राप्‍त नहीं हुई है.

श्री घनश्‍याम पिरोनियॉ :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी विधान सभा में चार पांच थाने आते हैं. मेरे पास सबूत हैं, मैं प्रस्‍तुत कर सकता हूं. मैंने कल ही अवगत कराया है.

अध्‍यक्ष महोदय :- आपके प्रश्‍न का उत्‍तर आ गया है. अब और कोई प्रश्‍न नहीं होगा.

श्री अजय सिंह :- अध्‍यक्ष महोदय, यह गम्‍भीर विषय है. सभी भारतीय जनता पार्टी के सदस्‍य कह रहे हैं. अवैध उत्‍खनन हो रहा है. थाने में कोई पदस्‍थ नहीं है. गृह मंत्री जी आप थोड़ा तो ध्‍यान दीजिये.

अध्‍यक्ष महोदय :- बात हो गयी है.

अनुदान/वित्‍तीय सहायता प्राप्‍त बाल संरक्षण गृह

3. ( *क्र. 4863 ) श्री हर्ष यादव : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) प्रश्‍न दिनांक की स्थिति में जिला सागर में ऐसे कितने बाल संरक्षण गृह हैं, जिन्‍हें शासन से अनुदान-वित्‍तीय सहायता प्राप्‍त होती है? ऐसे संरक्षण गृहों का नाम, स्‍थान और वर्तमान में रहने वाले बच्‍चों की संख्‍या बतावें? (ख) कबीर सेवाधाम कुडारी में दिनांक 19/11/2013 को कितने बच्‍चे थे? यदि बच्‍चों की संख्‍या कम हुई तो बच्‍चे कहाँ गये? क्‍या शासन ने इसकी जाँच कराई? यदि नहीं, तो क्‍यों? कब तक कराई जायेगी? (ग) बाल सुधार गृहों, संरक्षण गृहों से बच्‍चे गायब होने के क्‍या कारण हैं? क्‍या मानव तस्‍करी अथवा अनैतिक कार्यों हेतु गायब हैं अथवा बेचे गये हैं? (घ) क्‍या शासन बच्‍चा गायब होने वाली संस्‍थाओं पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर रहा है? यदि नहीं, तो कारण बतावें? ऐसी संस्‍थाओं की वित्‍तीय मदद बंद क्‍यों नहीं की गई?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) प्रश्‍न दिनांक की स्थिति में जिला सागर में वित्‍तीय सहायता प्राप्‍त एक बाल संरक्षण गृह, संजीवनी बाल आश्रम रजाखेड़ी सागर है, जिसमें 56 बच्‍चे निवासरत हैं। (ख) कबीर सेवाधाम कुडारी में दिनांक 19/11/2013 को कुल 23 बच्‍चे निवासरत थे व बच्‍चों की संख्‍या कम नहीं हुई है। वर्तमान में बाल कल्‍याण समिति के आदेश द्वारा दिनांक 24/11/2015 को 13 बालिकाओं को संजीवनी बाल आश्रम एवं 08 बालकों को सेंट फ्रांसिस सेवा धाम आश्रम में स्‍थानांतरित किया गया है। दो बच्‍चे आश्रम की केयर टेकर श्रीमती चंदारानी शर्मा के थे, जो उन्‍हीं के पास छोड़ दिए गये। (ग) बाल संरक्षण गृहों से बच्‍चे गायब नहीं हुये हैं, अत: शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (घ) प्रश्‍नांश '' के उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थि‍त नहीं होता है।

 

श्री हर्ष यादव :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण भी चाहता हूं, क्‍योंकि यह सेंस्टिव मामला है. बच्‍चों से जुड़ा मामला है. इस मामले को जो आज मैंने सदन में उठाया है. वर्तमान सरकार के मंत्री भूपेन्‍द्र सिंह जी ने, वर्तमान सरकार के विधायक जी ने जांच करवाने के लिये लिखा है. यह जो बच्‍चों का मामला है, खास तौर से कभी मानव सेवा धाम और सेंट फ्रासिंस सेवा धाम आश्रम का, जिनमें चार बच्‍चों का गोल होने का उल्‍लेख मैंने किया है, इनको गायब किया गया है और बार बार यहां के बच्‍चे गायब होते हैं. वर्तमान सरकार के माननीय मंत्री जी द्वारा जो जवाब दिया गया है, वह भ्रामक है, त्रुटिपूर्ण है, मैं उससे संतुष्‍ट नहीं हूं. इसके संबंध में मेरा निवेदन है. इसके संबंध में मेरा प्रश्‍न है कि माननीय हाई कोर्ट ज‍बलपुर के द्वारा 31 जुलाई को जांच के आदेश भी दिये गये थे, इन संस्‍थाओं के. इसमें आर्थिक अनियमितताओं और वित्‍तीय अनियमिताओं का भी मामला है. मंत्री जी ने खुद स्‍वीकार किया है कि मात्र एक संस्‍था संजीवनी बाल आश्रम संस्‍था को वित्‍तीय सहायता प्राप्‍त होती है, मगर इसके पहले जो संचालित दो संस्‍थाएं है कबीर सेवा आश्रम और सेंट फ्रांसिस आश्रम को वित्‍तीय मदद मध्‍यप्रदेश संस्‍था को मध्‍यप्रदेश सरकार के द्वारा मिलती रही वह कैसे. एक तो जांच का विषय यह है और दूसरा विषय यह है कि बच्‍चों गायब होने की जो लगातार शिकायतें हो रही हैं उनकी जांच के लिये सदन या तो पूर्व न्‍यायाधीश से या सदन के विधायकों की समिति से जांच कराने का आदेश करेगी क्‍या.

श्री माया सिंह :- माननीय अध्‍यक्ष जी, सम्‍मानीय विधायक जी ने जो सवाल पूछा है कि मैं उनको बताना चाहती हूं कि उन्‍होंने जो कहा है कि जो कबीर मानव सेवा धाम कुडारी में बच्‍चे जो गायब हुए हैं वहां से बच्‍चे गायब नहीं हुए हैं, बच्‍चों को वहां से दूसरी संस्‍था में हस्‍तांतरित किया गया है. दूसरा वहां से 23 बच्‍चे इस संस्‍था में थे और उनकी किसी की भी संख्या कम नहीं हुई है और वहां के कलेक्टर महोदय और वहां की बाल कल्याण समिति,सागर के आदेश के अनुसार ही बच्चों को दूसरी संस्थाओं में स्थानांतरित किया गया.

श्री हर्ष यादव - माननीय अध्यक्ष महोदय, बाल कल्याण समिति सागर की भूमिका संदिग्ध रही है. मेरा निवेदन है 19.11.2013 से 24.11.2015 तक 4 बच्चे और आये थे जिनका कहीं कोई उल्लेख नहीं है दूसरा जो बच्चे स्थानांतरित किये गये हैं उनका कोई रिकार्ड नहीं है न उनका फोटोग्राफ्स है न संबंधित थाने को कोई जानकारी दी जाती है जबकि यह एक नीति है कि जब बच्चे स्थानांतरित किये जाते हैं उनका नाम,पता,जाति और किस जगह से किस जगह स्थानांतरित किये जा रहे हैं कहीं कोई रिकार्ड संधारित नहीं किया जा रहा है. मेरा निवेदन है कि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाये जांच करवाने में माननीय मंत्री जी को कोई दिक्कत नहीं होना चाहिये. विधायकों की कमेटी बना दें जिसमें सत्तारूढ़ पार्टी और विपक्ष के विधायक हों.

श्रीमती माया सिंह - अध्यक्ष महोदय, मैं बताना चाहती हूं कि यह बच्चे जो संस्था में भेजे जाते हैं जो निराश्रित,अनाथ बच्चे,जरूरतमंद बच्चों को बालगृह में प्रवेश कराते हैं उसके द्वारा पुलिस के द्वारा,सामाजिक कार्यकर्ता के द्वारा,आम नागरिक के द्वारा बच्चों को पहले तो बाल कल्याण समिति में भेजा जाता है वहां प्रस्तुत किया जाता है उसके बाद संस्थाओं में प्रवेश दिया जाता है जो आपने कहा कि पता नहीं चलता और कोई रिकार्ड नहीं रखा जाता तो रिकार्ड रखा जाता है.

श्री हर्ष यादव - माननीय अध्यक्ष महोदय,कोई रिकार्ड नहीं रखा जाता है. रखा जाता है तो उपलब्ध कराएं.

श्री शैलेन्द्र जैन - अध्यक्ष महोदय, सेंट्र फ्रासिस जो सेवाधाम है इसके खिलाफ अनेक गंभीर अनियमितताओं के आरोप अनेक वर्षों से लग रहे हैं और इसके जो भी रिकार्ड है यह कागजों में हेराफेरी करके सब रिकार्ड ठीक रखते हैं लेकिन वास्तव में वहां पर गंभीर किस्म की अनियमितताएं हो रही हैं. धर्म परिवर्तन के काम वहां पर चल रहे हैं. एक अंतर्राष्ट्रीय रेकेट के रूप में वह संस्था काम कर रही हैं. क्या उसकी किसी रिटायर्ड जज से माननीय मंत्री जी जांच कराएंगी ?

इंजी.प्रदीप लारिया - अध्यक्ष महोदय, यह विषय मैंने इस पूरे प्रकरण पर जो वहां धर्मान्तरण हो रहा है,वहां पर वित्तीय अनियमितताएं हो रही हैं और कुल मिलाकर जो बच्चे हैं उनका जाति,धर्म,पहचान सब बदलने का प्रयास हो रहा है. इस संबंध में मैंने 16 मई,2015 को जिला प्रशासन और सरकार के समक्ष पूरी बिन्दुवार शिकायत की थी एक तो उस पर क्या कार्यवाही हुई इसकी एक रिटायर्ड जज से माननीय मंत्री जी जांच कराएंगी और इसमें विधायकों को भी शामिल करेंगी क्या. चूंकि मेरे विधान सभा क्षेत्र का मामला है और मैं लगातार इसकी शिकायत कर रहा हूं.

श्रीमती माया सिंह - अध्यक्ष महोदय, पहली बात तो बच्चों का रिकार्ड संधारित है. आप कहते हैं कि उनकी कोई जानकारी ही वहां उपलब्ध नहीं है. जानकारी है. दूसरा बालगृह के बालकों को दूसरे बालगृह में स्थानांतरण करने पर पुलिस को सूचना देने की आवश्यकता नहीं है. वहां पर कलेक्टर और आयुक्त से जांच करा सकते हैं और बच्चों के संस्थाओं से पलायन करने पर कलेक्टर वहां जांच करते भी हैं और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो कार्यवाही होती है. ऐसे अनेक उदाहरण हैं जहां-जहां इस तरीके की कोई शिकायतें हमारे पास आई हैं उन शिकायतों का निराकरण किया है. इस संबंध में एक संस्था से दूसरी संस्था में बच्चे स्थानांतरित किये हैं बच्चे गायब नहीं हुए हैं.

इंजी. प्रदीप लारिया--अध्यक्ष महोदय, मैंने जांच के लिये 16 मई को सरकार को लिखकर के दिया था, पूरा बिन्दुवार लिखकर के दिया था, उस पर क्या कार्यवाही हुई ? वहां पर धर्म परिवर्तन हो रहा है. यह बहुत ही गंभीर मामला है इसमें एक हाईपॉवर कमेटी से जांच करायी जाए.

श्री शैलेन्द्र जैन--अध्यक्ष महोदय, इसमें विधान सभा की विधायकों की समिति बनाकर इसकी जांच करायी जाए.

(व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--किसी बड़ी एजेन्सी से जांच कराएंगी क्या ?

श्रीमती माया सिंह--अध्यक्ष महोदय, कलेक्टर एवं आयुक्त के माध्यम से इसकी जांच करा देंगे.

इंजी. प्रदीप लारिया--इनकी जांच का कोई मतलब ही नहीं रह जाता. मेरा निवेदन है कि एक रिटायर्ड जज के नेतृत्व में एक कमेटी गठित करेंगे.

श्रीमती मायासिंह--अध्यक्ष महोदय, मैं यह कहना चाहती हूं कि मैंने पहले भी कहा वहां कलेक्टर एवं आयुक्त के माध्यम से इसकी जांच करा लेंगे. मुझे इस बात की खुशी है कि मेरा विभाग भी बहुत संवेदनशील बच्चों के लिये सेवाएं दे रहा है, पर आप उसकी चिन्ता कर रहे हैं. सम्मानीय विधायक जी ने जो सवाल उठाया है, यह अच्छी बात है, लेकिन मेरा कहना है कि जो बात इस प्रश्न के माध्यम से यहां पर पूछी है उसका मैंने जवाब दिया है कि वहां पर बच्चे गायब नहीं हुए हैं बच्चे दूसरी संस्था में स्थानांतरित किये गये हैं.

(व्यवधान)

श्री सत्यपाल सिंह सिकरवार--अध्यक्ष महोदय, मासूम बच्चों की जिन्दगी से जुड़ा हुआ मामला है, माननीय मंत्री जी इसमें जांच क्यों नहीं करा रही हैं.

डॉ.नरोत्तम मिश्र--अध्यक्ष महोदय, आपने आसंदी से आदेश दे दिये हैं माननीय मंत्री महोदया ने भी कह दिया कि इसकी जांच कलेक्टर एवं आयुक्त के माध्यम से करा लेंगे.

(व्यवधान)

श्री शैलेन्द्र जैन--अध्यक्ष महोदय, पहले इनके माध्यम से जांच हो चुकी है इसमें बड़ी ही लीपा-पोती हुई है, इसमें एक विधान सभा की समिति बना दीजियेगा.

श्रीमती माया सिंह--अध्यक्ष महोदय, मैं एक बात और कहना चाह रही हूं कि कबीर सेवा धाम कुडारी में बच्चे वहां से गायब हुए हैं, नहीं हुए हैं. मैं आपसे कहना चाहती हूं कि वहां पर 23 बच्चे निवासरत् थे वहां पर बच्चों की संख्या कम नहीं है वर्तमान में कलेक्टर महोदय एवं बाल कल्याण समिति के आदेश पर 13 बालिकाओं को संजीवनी बाल आश्रम में, 8 बच्चों को सेन्ट फ्रांसिस सेवाधाम में स्थानांतरित किया गया है, 2 बच्चे जो कि वहां की केयर-टेकर हैं चन्दारानी हैं, उनके सुपुर्द हैं.

अध्यक्ष महोदय--यह तो स्पष्ट रूप से इसमें लिखा है.

इंजी. प्रदीप लारिया--यह सेन्टफ्रांसिस सेवाधाम का मामला है अध्यक्ष महोदय, जो वहां पर धर्मान्तरण हो रहा है उसका विषय है.

अध्यक्ष महोदय--यह तो उत्तर में आ गया है कि वहां से बच्चे गायब नहीं हुए हैं. आपने आयुक्त से इसकी जांच कराने के लिये बोला है.

इंजीनियर प्रदीप लारिया--अध्यक्ष महोदय,इसमें जांच समिति से जांच कराकर दूध का दूध एवं पानी का पानी हो जाएगा.

अध्यक्ष महोदय--इसमें विधायकों की समिति बनाकर विधायकों को इसमें शामिल करेंगे क्या ?

श्रीमती माया सिंह--अध्यक्ष महोदय, हम यहां पर एक समिति का गठन कर देंगे जिसमें सम्मानित सदस्यों की सहभागिता होगी, हम इसकी जांच करवा देंगे.

प्रश्न क्रमांक 4 श्रीमती शकुंतला खटीक (अनुपस्थित)

 

 

 

प्रश्न संख्या-5

धार जिले में दवाईयों का क्रय

5. ( *क्र. 5726 ) श्री सुरेन्‍द्र सिंह बघेल : क्या लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) धार जिले में मुख्‍य चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी द्वारा दिनांक 01.01.2012 से 31.12.2015 तक खरीदी हेतु कितनी राशि व्‍यय की गई? (ख) उपरोक्‍त खरीदी के लिये किन-किन अखबारों में विज्ञप्ति निकलवाई गई, इस प्रक्रिया में किन-किन फर्मों ने भाग लिया और सफल फर्में कौन सी थीं? (ग) जिन फर्मों ने निविदायें नहीं डाली थीं, उन्‍हें किस आधार पर खरीदी आर्डर दिये गये? कारण स्‍पष्‍ट करें। ऐसी कितनी फर्में हैं, जिन्‍होंने प्रश्‍नांश (ख) अनुसार निविदा प्रक्रिया में भाग नहीं लिया था और उन्‍हें सप्‍लाय आर्डर दिये गये? इसके लिये दोषी अधिकारियों पर कब तक कार्यवाही की जावेगी? (घ) ऐसे कितने वर्क आर्डर थे, जिनमें दवा सप्‍लायर ने 60 दिन या उससे अधिक समय-सीमा में दवा सप्‍लाय नहीं की, उस पर कितनी पेनाल्‍टी लगाई गई? नाम दण्‍ड राशि सहित बतायें। सी.ए.जी. की 31 मार्च, 2014 की रिपोर्ट के अनुसार जिन फर्मों पर कार्यवाही के लिये कहा गया था? उन पर क्‍या कार्यवाही की गई? यदि नहीं, तो इसकी अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर शासन कब तक कार्यवाही करेगा?

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) :

 

श्री सुरेन्‍द्र सिंह बघेल- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दवाईयों के क्रय में पारदर्शिता और उपलब्‍धता के संबंध में मेरा प्रश्‍न है । मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से प्रश्‍न करना चाहूंगा कि क्‍या मंत्री महोदय, यह बताने की कृपा करेंगे कि मेरे प्रश्‍न के प्रश्‍नांश घ के परिशिष्टि में दी गई जानकारी के अनुसार वित्‍तीय वर्ष 2013-14 की पैनाल्‍टी की राशि, प्रश्‍न चर्चा में आने के बाद दिनांक 11.3.2016 को जमा कराई गई, ऐसा क्‍यों ? इतने समय राशि वसूली क्‍यों नही की गई ? क्‍या माननीय मंत्री महोदय प्रदेश स्‍तर का एक जांच दल गठित कर, इसकी उचित कार्यवाही करेंगे ?

श्री शरद जैन- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा माननीय विधायक जी ने प्रश्‍न किया है, उक्‍त राशि की कटौती पहले से ही कर ली गई थी । इस प्रकरण में सी.ए.जी. द्वारा 2 लाख 37 करोड़ की रिकवरी का हमको परामर्श दिया गया था, इसमें से 4.97 लाख की वसूली हाईकोर्ट द्वारा निरस्‍त कर दी गई थी,शेष राशि 2.32 करोड़ के विरूद्व 82 लाख 35 हजार की वसूली की जा चुकी है, शेष राशि की वसूली की कार्यवाही प्रचलन में है, हम उसको शीघ्र कर लेंगे ।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह बघेल- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो जानकारी दी गई है, उसके संबंध में मेरा एक और प्रश्‍न है, प्रश्‍न क्रमांक ग के परिशिष्टि ब में केवल वसूली राशि दर्शाई गई है,आरोपित राशि और वसूली का विवरण डिमांड ड्राफ्ट का दिनांक नहीं दर्शाया गया है, ऐसा क्‍यों ? यह पैसा कब जमा किया गया ? क्‍या मंत्री महोदय, मुझे इसकी जानकारी उपलब्‍ध करा देंगे ?

श्री शरद जैन- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि मैंने अभी कहा कि 4.97 की वसूली हाईकोर्ट द्वारा निरस्‍त कर दी गई, ऐसी भी संभावनाएं हैं कि कुछ फर्में और भी न्‍यायालय में जा सकती हैं, लेकिन हम वसूली की कार्यवाही पूरी सक्षमता के साथ करेंगे ।

 

छतरपुर जिले में ट्राफिक वार्डन योजना का क्रियान्‍वयन

6. ( *क्र. 1622 ) कुँवर विक्रम सिंह : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) छतरपुर जिले में सड़क दुर्घटनाओं में वर्ष 2011 से प्रश्‍न दिनांक तक कितने व्‍यक्तियों की मौतें हुईं, उनकी संख्‍या कितनी है? (ख) सामुदायिक पुलिसिंग के अंतर्गत ट्राफिक वार्डन योजना को छतरपुर जिले को सुगम एवं दुर्घटना विहीन बनाने हेतु अब तक क्‍या प्रयास किये गये? (ग) सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम एवं कमी लाने हेतु क्रेन प्राप्‍त करने हेतु कोई प्रस्‍ताव गृह विभाग को दिया गया? यदि हाँ, तो कब? नहीं, तो क्‍यों?

गृह मंत्री ( श्री बाबूलाल गौर ) : (क) छतरपुर जिले में वर्ष 2011 से प्रश्न दिनांक तक सड़क दुर्घटनाओं के दौरान 934 व्यक्तियों की मृत्यु हुई। (ख) छतरपुर जिले में सामुदायिक पुलिसिंग के अंतर्गत ट्राफिक वार्डन योजना को सुगम एवं दुर्घटना विहीन बनाने हेतु स्वेच्छा से कार्य करने वाले इच्छुक नागरिकों से आवेदन मांगे गये हैं, जिनका वेरीफिकेशन कराने के उपरांत उनको ट्राफिक वार्डन के रूप में नियुक्त कर यातायात संचालन हेतु आवश्यक प्रशिक्षण देकर जिले में तैनात किया जावेगा। (ग) जिला छतरपुर को पुलिस मुख्यालय, भोपाल के आदेश क्रमांक पु.मु./पुमनि/पी.टी.आर.आई./2844/2011, दिनांक 09.12.2011 के द्वारा 01 क्रेन आवंटित की गई है, जो दिनांक 18.01.2012 को जिला छतरपुर को प्राप्त हो चुकी है।

कुंवर विक्रम सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से, मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि इतनी अधिक संख्‍या में 934 एक्‍सीडेंट हुए हैं, प्रश्‍न दिनांक तक 934 लोग इसमें मृत हुए हैं, आज दिनांक कितने लोगों को शासन की तरफ से सहायता राशि दी गई है, पहला प्रश्‍न है,आगे मैं मंत्री जी से पूछ लूंगा ।

श्री बाबूलाल गौर- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,यह प्रश्‍न में पूछा ही नही है कि कितने लोगों को आर्थिक सहायता दी गई ।

कुंवर विक्रम सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक्‍सीडेंट से संबंधित है ।

श्री बाबूलाल गौर- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो एक्‍सीडेंट होते हैं और एक्‍सीडेंट में मृत्‍यु होती है, उसके लिए कोर्ट में जाना पड़ता है ।

कुंवर विक्रम सिंह- सरकार के माध्‍यम से......

श्री रामनिवास रावत- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सरकार के माध्‍यम से भी आर्थिक सहायता दी जाती है, सामान्‍य प्रशासन विभाग की पुस्‍तक में भी प्रावधान है, सरकार ने प्रावधान कर रखा है ।

श्री बाबूलाल गौर- कुछ विशेष घटनाओं पर दी जाती है ।

श्री रामनिवास रावत- सामान्‍य एक्‍सीडेंट में ।

श्री बाबूलाल गौर- आपने प्रश्‍न इतना पूछा है कि कितनी घटनाएं हुई हैं, पांच साल की घटनाएं आप पूछते हैं, एकाध साल की पूछें तो बता दें ।

कुँवर विक्रम सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा माननीय मंत्री जी से यह पूछना है कि आर.टी.ओ. विभाग और अपने यातायात पुलिस विभाग द्वारा कितने वाहनों की चेकिंग की गई, जो वाहन फिटनेस सहित हैं, वह तो ठीक हैं, लेकिन कितने वाहनों की फिटनेस नहीं है और कितने वाहन जैसे डग्‍गामारी में जीपें चलती हैं,क्रूजर गाडियां भी चलती हैं,लम्‍बे-लम्‍बे तूफान मेल भी चलते हैं, इनमें क्षमता से अधिक ओव्‍हर लोडिंग की जाती है ।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या माननीय मंत्री जी, इसकी व्‍यवस्‍था करेंगे कि एक वाहन में जितने लोगों को ले जाने की क्षमता है, उतने लोग ही चलें।

श्री बाबूलाल गौर- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,माननीय सदस्‍य जो प्रश्‍न पूछ रहे हैं, वह परिवहन विभाग से संबंध रखता है । आपने यह प्रश्‍न पूछा ही नहीं है कि कितने वाहन आए और कितनों का रजिस्‍ट्रेशन हुआ है, ओव्‍हर लोडिंग और फिटनेस परिवहन विभाग से संबंधित है ।

कुंवर विक्रम सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,ओव्‍हर लोडिंग यदि ट्रांसपोर्ट व्‍हीकल की हो तो वह परिवहन विभाग की जिम्‍मेदारी है, वैसे व्‍यक्त्यिों की संख्‍या ओव्‍हर लोडिंग यह जिम्‍मेदारी पुलिस विभाग की है, गृह विभाग की है ।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक बात और पूछना चाहता हूं . मेरा एक अंतिम प्रश्‍न है. हर बड़े शहर में ब्रेथ एनेलाईजर का इस्‍तेमाल किया जाता है. क्‍या मध्‍यप्रदेश में ऐसी व्‍यवस्‍था है कि ब्रेथ एनेलाईजर का प्रयोग किया जाये ताकि रात्रि के समय, जो एक्‍सीडेन्‍ट शराब पीकर होते हैं, उन पर रोकथाम लग सके.

श्री बाबूलाल गौर - हम इसे परिवहन विभाग को भेज देंगे.

श्री राम निवास रावत - आप एक्‍सीडेन्‍ट रोकने के लिए क्‍या करेंगे ?

हीरानगर आरक्षी केन्‍द्र पर लंबित शिकायतों का निराकरण

प्रश्‍न 7. ( *क्र. 5916 ) श्री रमेश मेन्दोला : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या इन्‍दौर के हीरानगर आरक्षी केन्‍द्र पर दिनांक 20.01.16 को एक विद्युत उपभोक्‍ता ने इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स काम्‍प्‍लेक्‍स इलेक्‍ट्रि‍कल जोन के कर्मचारी दीपक बाँदिल के विरूद्ध मारपीट, दुर्व्‍यवहार, गालीगलोच की शिकायत की गई? हाँ तो शिकायत महेश सिंह, 22, सुभाष नगर द्वारा की गई? प्रश्‍न भाग (क) की शिकायत पर 15.02.16 तक क्‍या कार्यवाही की गई? अगर नहीं की गई तो कारण बतावें। (ख) क्‍या विद्युत विभाग के कर्मचारी पर कार्यवाही करने की बजाय शिकायतकर्ता महेश सिंह के विरूद्ध ही एफ.आई.आर. पंजीबद्ध की गई? हाँ तो किन धाराओं में अगर कर्मचारी द्वारा शिकायत की गई तो उसकी प्रति देवें? (ग) हीरानगर आरक्षी केन्‍द्र पर दि. 15.02.16 की स्थिति में कितनी शिकायतें किस प्रकार की लंबित हैं?

गृह मंत्री ( श्री बाबूलाल गौर ) : (क) जी हाँ। जी हाँ। आवेदक श्री महेश सिंह द्वारा दिनांक 20.01.2016 को थाना हीरानगर जिला इंदौर में प्रस्तुत किये गये आवेदन पत्र में श्री दीपक बांदिल के विरूद्ध लाइट काटने, विवाद करने एवं अपशब्द बोलने के तथ्य उल्लेखित किये गये थे। शिकायत आवेदन पत्र के अवलोकन करने पर शिकायत के भीतर ऐसी कोई तात्विक शिकायती शब्दावली नहीं पायी गई, जो संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आ सके और शिकायत पर ही सीधे धारा 154 सी.आर.पी.सी. के प्रावधानों के अंतर्गत संज्ञेय अपराध की प्रथम सूचना दर्ज की जा सके। उक्त आवेदन पत्र प्रस्तुत किये जाने के पूर्व ही प्रथम सूचनाकर्ता श्री दीपक बांदिल, सहायक यंत्री, इलेक्ट्रॉनिक्स काम्प्लेक्स इलेट्रिकल जोन, इंदौर की रिपोर्ट पर श्री महेश सिंह के विरूद्ध अपराध क्रमांक 22/16 धारा 353, 294, 506 भादवि दिनांक 20.01.2016 को 18:52 बजे पंजीबद्ध किया जा चुका था। आवेदक श्री महेश के विरूद्ध इसी घटना के संबंध में अपराध पंजीबद्ध होने के कारण उनके द्वारा प्रस्तुत आवेदन पत्र को जाँच में लिया गया है। जाँच में आवेदक श्री महेश सिंह को सूचित किये जाने के उपरांत भी उपस्थित न होने के कारण आवेदन पत्र जांचाधीन है। जाँच में आये निष्कर्ष के आधार पर विधि अनुरूप कार्यवाही की जावेगी। (ख) जी नहीं। दिनांक 20.01.2016 को शिकायतकर्ता श्री महेश सिंह द्वारा थाना हीरानगर में आवेदन पत्र प्रस्तुत किये जाने के पूर्व ही प्रथम सूचनाकर्ता श्री दीपक बांदिल, सहायक यंत्री, इलेक्ट्रानिक्स काम्प्लेक्स इलेक्ट्रिकल जोन, इंदौर की रिपोर्ट पर श्री महेश सिंह के विरूद्ध अपराध क्रमांक 22/16 धारा 353, 294, 506 भादवि का दिनांक 20.01.2016 को 18:52 बजे पंजीबद्ध किया गया था। कर्मचारी द्वारा शिकायत की प्रति संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) हीरानगर आरक्षी केन्द्र इंदौर में दिनांक 15.02.2016 की स्थिति में मारपीट रूपये हड़पने, दहेज की मांग, पारिवारिक विवाद, मकान एवं प्लाटों पर अवैध कब्जे आदि की कुल 116 शिकायतें लंबित हैं। जाँच में आये निष्कर्ष के आधार पर विधि अनुरूप कार्यवाही की जावेगी।

परिशिष्ट - ''एक''

श्री रमेश मेन्‍दोला - आदरणीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से, माननीय मंत्री महोदय से यह जानना चाहता हूँ कि एक घटना, जो मेरे विधानसभा क्षेत्र में हुई थी. एक बुजुर्ग व्‍यक्ति जो स्‍कूल चलाते हैं, उनका कभी कोई क्रिमिनल अपराध नहीं रहा पर उनका बिजली बिल ज्‍यादा आने के कारण, वे विभाग में गए और अधिकारी से चर्चा करने गए कि यह जो बिल आया है, गलत आया है, इसको ठीक करें. उन्‍होंने ठीक तो नहीं किया, वहीं से आदेश करके उनके स्‍कूल की बिजली काट दी, उनको धौंस दी, गाली-गलौच की एवं धक्‍के देकर बाहर निकाला‍ दिया और उसकी वे शिकायत लेकर थाने पर गए. यह घटना 2 बजे की है, 3 बजे थाने पर जाकर शिकायत लिखाते हैं तो थाने से लिखित में शिकायत मांगने के बाद, वे वापिस आते हैं और बाद में 6.30 बजे अधिकारी थाने पर जाते हैं और उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराते हैं. यह जो मुकदमा दर्ज किया है, वह गलत है, असत्‍य है, यह जो उन्‍होंने कार्यवाही की है, एक बुजुर्ग आदमी के खिलाफ, जिसका कभी कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रहा है. जो स्‍वयं शिकायत लेकर गया था, कोई ऐसा भी नहीं कि शासकीय कार्य में बाधा डाल रहा हो कि कोई बिजली काटने गया था तो उसको रोकने की कोशिश की हो. केवल शिकायत लेकर ऑफिस में गए थे और वहीं से आदेश कर, उसका विद्युत बिल भरे होने के बावजूद, बिजली काटी. उस पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया.

मैं, माननीय मंत्री जी से यह निवेदन करना चाहता हूँ कि क्‍या यह जो गलत रिपोर्ट हुई, उसको वापिस लेंगे ? जो उन्‍होंने थाने में शिकायत की है, जो पहले शिकायत 3 बजे की है, अधिकारियों ने 6.30 बजे शिकायत की है. 5.30 बजे ऑफिस बन्‍द होने के बाद, 6.30 बजे थाने में रिपोर्ट कराते हैं तो मुकदमा वापिस लेंगे और अधिकारियों ने जो दुर्व्‍यवहार किया है, उनके खिलाफ मुकदमा कायम करेंगे.

श्री बाबूलाल गौर - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न का विस्‍तृत रूप से उत्‍तर जवाब में दिया गया है. मैं यह पढ़कर इसलिए सुनाना चाहता हूँ कि इन्‍होंने पूछा था कि हीरानगर आरक्षी केन्‍द्र पर, उसके उत्‍तर में आया कि जी हां, आवेदक श्री महेश सिंह द्वारा दि. 20.1.2016 को थाना हीरानगर जिला इन्‍दौर में प्रस्‍तुत किये गये आवेदन-पत्र में श्री दीपक बांदिल के विरूद्ध लाइट काटने, विवाद करने एवं अपशब्‍द बोलने के तथ्‍य उल्‍लेखित किये गये थे. शिकायत आवेदन पत्र के अवलोकन करने पर शिकायत के भीतर ऐसी कोई तात्विक शिकायत शब्‍दावली नहीं पायी गयी, जो संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आ सके और शिकायत पर ही सीधे धारा 154 सी.आर.पी.सी. के प्रावधानों के अन्‍तर्गत संज्ञेय अपराध की प्रथम सूचना दर्ज की जा सके. उक्‍त आवेदन-पत्र प्रस्‍तुत किये जाने के पूर्व ही प्रथम सूचनाकर्ता श्री दीपक बांदिल, सहायक यंत्री, इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स काम्‍प्‍लेक्‍स इलेक्ट्रिकल जोन, इन्‍दौर की रिपोर्ट पर श्री महेश सिंह के विरूद्ध अपराध क्रमांक 22/16 धारा 353, 294, 506 भादवि दिनांक 20.1.2016 को 18.52 बजे पंजीबद्ध किया जा चुका है. आवेदक श्री महेश के विरूद्ध इसी घटना के संबंध में अपराध पंजीबद्ध होने के कारण उनके द्वारा प्रस्‍तुत आवेदन-पत्र को जांच में लिया गया है. जांच में आवेदक श्री महेश सिंह को सूचित किये जाने के उपरान्‍त भी वे उपस्थित नहीं न होने के कारण आवेदन-पत्र जांचाधीन है. जांच हो रही है, इनके आवेदन-पत्र में भी जांच हो रही है. लेकिन वे उपस्थित ही नहीं हो रहे हैं. आज मैं, इनको विश्‍वास दिलाता हूँ कि आप विधायक जी स्‍वयं लेकर जायें, हम जांच करा देंगे.

श्री रमेश मेन्‍दोला - धन्‍यवाद.

प्रश्‍न संख्‍या 8 - (अनुपस्थित)

 

 

स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों में चिकित्‍सकों की पूर्ति

प्रश्‍न 9. ( *क्र. 4732 ) श्री कमलेश्‍वर पटेल : क्या लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में आदिवासी बाहुल्‍य जिलों में सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों एवं प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों में डॉक्‍टरों की कमी क्‍यों है एवं उसे कब तक पूरा किया जावेगा? (ख) सीधी सिंगरौली जिलों के स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों एवं प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों में कितने डॉक्‍टरों एवं स्‍टॉफ की कमी है? पर्याप्‍त स्‍टॉफ की नियुक्ति कब तक की जावेगी?

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) प्रदेश में विशेषज्ञों/चिकित्सकों की अत्यधिक कमी के कारण पद रिक्त हैं। पदपूर्ति हेतु विभाग निरंतर प्रयासरत है, निश्चित समयावधि बताई जाना संभव नहीं है। (ख) सीधी जिले की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार एवं सिंगरोली जिले की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। विशेषज्ञ के पद पर पदोन्नति की कार्यवाही निरंतर जारी है, लोक सेवा आयोग के माध्यम से 1896 चिकित्सकों की भर्ती प्रक्रिया प्रचलन में है, पदपूर्ति हेतु निश्चित समयावधि बताई जाना संभव नहीं है। 

श्री कमलेश्‍वर पटेल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी का जो जवाब आया है, यह पूरी तरह से असंतोषजनक है. यह बार-बार, इस बात का जो सदन में पिछली बार भी प्रश्‍न किया था. पिछली बार भी प्रश्न किया था, वही जवाब पिछली बार भी आया था और अभी भी वही जवाब आया है और हम समझते हैं कि यह पूरे प्रदेश में, अध्यक्ष महोदय, आपके जिले में भी कमी होगी. यहां सरकार की तरफ से जवाब आ रहा है कि निश्चित समयावधि बताया जाना संभव नहीं है. मैं मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि यह सरकार अगर निश्चित समयावधि नहीं बतायेगी, तो डॉक्टरों की कमी पूर्ति करने की, सपोर्टिंग स्टॉफ की कमी पूर्ति करने की एक निश्चित समयावधि कोई और दूसरी सरकार बतायेगी क्या. मंत्री जी से दूसरा मेरा निवेदन यह है कि एक तरफ सभी जगह उल्लेख किया है कि संविदा कर्मियों से हम काम चला रहे हैं. संविदा कर्मी भी विगत् 15 दिनों से आदोलनरत् हैं, तो क्या ऐसे संविदा कर्मी या सपोर्टिंग स्टाफ है, उनकी मांगों को सरकार मानेगी कि नहीं मानेगी या ऐसे ही उनका आंदोलन चलता रहेगा और प्रायवेट जो हास्पीटल्स हैं, वही जाकर गरीबों को इलाज कराना पड़ेगा.

राज्यमंत्री, लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण (श्री शरद जैन) -- अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य एक बार फिर से प्रश्न दोहरा दें.

श्री कमलेश्वर पटेल -- अध्यक्ष महोदय, हम मंत्री जी से यह जानना चाहेंगे कि यह जो डॉक्टरों की कमी के संबंध में आपने बताया कि भर्ती प्रक्रिया प्रचलन में है और समयावधि बताया जाना संभव नहीं है. हम नहीं बता सकते. सरकार नहीं बता सकती कि यह समयावधि कि कब डाक्टरों की कमी और सपोर्टिंग स्टाफ की कमी की पूर्ति हो जायेगी. दूसरा, जो सपोर्टिंग स्टाफ संविदा कर्मी हैं, लगातार पूरे मध्यप्रदेश में आंदोलनरत् हैं, जिसकी वजह से पूरी स्वास्थ्य की जो व्यवस्था है, पूरी तरह से चरमरा गयी है. संविदा कर्मी जो आंदोलनरत् हैं, उनकी मांगें सरकार पूरी करेगी कि या ऐसे ही चलता रहेगा.

श्री शरद जैन -- अध्यक्ष महोदय, संविदा कर्मियों के आंदोलन का जो प्रश्न किया गया है, वह प्रश्न में उल्लेख नहीं है.

अध्यक्ष महोदय -- पहले डॉक्टरों का बता दीजिये. वह कह रहे हैं कि कब तक कर देंगे.

श्री निशंक कुमार जैन -- मंत्री जी, संविदा कर्मी आंदोलनरत् हैं. पूरे प्रदेश में ऐसा हो रहा है. आप पूरे प्रदेश का बता दीजिये.

अध्यक्ष महोदय -- उन्हीं को आप पूछ लेने दीजिये.

श्री शरद जैन -- अध्यक्ष महोदय, आप एक काम करते पूरे प्रदेश का प्रश्न पूछ लेते. तो हम पूरे प्रदेश का जवाब भी दे देते.

अध्यक्ष महोदय -- आप कमलेश्वर पटेल जी का जवाब दे दें.

श्री कमलेश्वर पटेल -- अध्यक्ष महोदय, हमने डॉक्टर के साथ साथ सपोर्टिंग स्टाफ का भी पूछा है. यह मंत्री जी असत्य जानकारी दे रहे हैं.

श्री शरद जैन -- अध्यक्ष महोदय, संविदा कर्मियों की जो आपने बात की, चूंकि वह प्रश्न में नहीं है. फिर भी मैं आपको जानकारी दे रहा हूं. विधायक जी, सुन लें. संविदा कर्मियों से चर्चा जारी है और अतिशीघ्र निराकरण कर लिया जायेगा...(व्यवधान).. एक मिनट पूरा जवाब ले लें.

श्री मुकेश नायक -- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी का इतना गैर गंभीर रवैया इस सदन के अंदर इतने गंभीर प्रश्न पर आप विधान सभा में सो रहे हैं,तो आप घर और ऑफिस में क्या करते होंगे.

श्री के.पी. सिंह -- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने पहली बार में प्रश्न ही नहीं सुना.

अध्यक्ष महोदय -- आप कृपया बैठ जायें और उत्तर आने दें. आप उत्तर सुन लें. आपने आधी बात सुनी है.

श्री शरद जैन -- अध्यक्ष महोदय, मुकेश जी आप हमारी बात सुन लें और हमें शिक्षा नहीं दें. हमें मालूम है कि आप बहुत विद्वान सदस्य हैं. लेकिन विद्वान हैं अपनी..

श्री मुकेश नायक -- मंत्री जी, बहुत साधारण सी बात पूछी है. कृपया समय सीमा बता दें. आपने कहा कि नहीं बता सकते.

श्री के.पी. सिंह. -- नरोत्तम जी, आप प्रश्न के उत्तर में बोलिये. मेरा नरोत्तम जी से निवेदन है कि कृपया वे प्रश्न का उत्तर दे दें. उन्हें तो पता ही नहीं है कि क्या पूछ रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय -- कृपया बैठ जायें.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष महोदय, 1875 डॉक्टरों की पीएससी ने वेकेंसी निकाल दी है. उसकी स्क्रूटनी भी हो गयी है, इंटरव्यू भी हो गये हैं. मैं समझता हूं कि अतिशीघ्र प्राथमिकता पर वह नियुक्ति की जायेगी और सम्मानीय सदस्य के जिले में हम पदस्थ कर देंगे.

श्री कमलेश्वर पटेल ‑ अध्यक्ष महोदय, अतिशीघ्र, यह तो पिछली बार भी बोला था. ..

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष महोदय, हमने पिछली बार बता भी दिया था. चूंकि वह पीएससी की प्रक्रिया है. पीएससी कर रही है. मैं समझता हूं कि जैसे ही प्रक्रिया हो जायेगी, हम प्राथमिकता पर इनके यहां पदस्थ कर देंगे.

श्री कमलेश्वर पटेल -- अध्यक्ष महोदय, पूरे मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य अमले को लेकर हाहाकार मचा हुआ है. मरीज परेशान हैं. समय सीमा सरकार क्यों नहीं बता सकती. बड़ा गंभीर विषय है. कई जगह तो ऐसा है कि कुछ अस्पताल चपरासियों के भरोसे चल रहे हैं. एक भी कर्मचारी नहीं है. पूरे मध्यप्रदेश में ऐसा हो रहा है, दूसरी जो प्रायवेट हास्पीटल हैं, वे बड़े तेजी से फल फूल रहे हैं और यह सरकारी डॉक्टर वहां जाकर इलाज करते हैं. बड़ा गंभीर विषय है.

अध्यक्ष महोदय -- प्रश्न संख्या-10.

श्री के.पी. सिंह -- अध्यक्ष महोदय, 12 साल से इसका जवाब अतिशीघ्र आ रहा है. माननीय अध्यक्ष महोदय,यह अतिशीघ्र कब समाप्त होगा. माननीय नरोत्तम मिश्रा के पहले जवाब में भी अतिशीघ्र आया था.

अध्यक्ष महोदय-- आप कृपया बैठ जायें.

11.45 बजे बहिर्गमन

ता.प्रश्न संख्या-9 पर शासन के उत्तर से असंतुष्ट होकर श्री कमलेश्वर पटेल,सदस्य का बहिर्गमन

श्री कमलेश्वर पटेल -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं शासन के जवाब से असंतुष्ट होकर के सदन से बहिर्गमन करता हूं.

(इंडियन नेश्नल कांग्रेस के सदस्य श्री कमलेश्वर पटेल, द्वारा ता.प्र.सं.9 पर शासन के उत्तर से असंतुष्ट होकर सदन से बहिर्गमन किया गया.)

 

प्रश्न क्रमांक-10 श्री मधु भगत (अनुपस्थित)

प्रश्न क्रमांक-11 श्री विजय सिंह सोलंकी (अनुपस्थित)

सड़क दुर्घटना के प्रकरणों पर कार्यवाही

12. ( *क्र. 3026 ) श्री मुरलीधर पाटीदार : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विभाग द्वारा दुर्घटना होने पर किस तरह की कार्यवाही किये जाने की व्‍यवस्‍था है? विधानसभा क्षेत्र सुसनेर में विगत 02 वर्षों में ऐसे प्रकरण हुए हों तो पूर्ण जानकारी देवें। (ख) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित सड़क दुर्घटना में क्‍या वाहन परमिट, ड्रायविंग लायसेन्‍स, परमिट हेतु नियत रूट व अन्‍य मानकों की सूक्ष्‍मता से जाँच की गई? यदि हाँ, तो क्‍या निष्‍कर्ष निकाले गए? विवरण उपलब्‍ध करावें। (ग) विधान सभा क्षेत्र सुसनेर अंतर्गत (क) अवधि में गुराड़ी बंगला के निकट सड़क दुर्घटना के प्रकरण में विभाग द्वारा कोई कार्यवाही की गई? यदि हाँ, तो क्‍या? (घ) प्रश्‍नांश (ग) के संदर्भ में घटित प्रकरणों में वाहनों के यातायात मानकों के अनुरूप दस्‍तावेज उपलब्‍ध थे? यदि नहीं, तो की गई कार्यवाही का विवरण उपलब्‍ध करावें?

गृह मंत्री ( श्री बाबूलाल गौर ) : (क) किसी भी दुर्घटना की सूचना प्राप्त होने पर विभाग द्वारा तत्काल मौके पर पहुंचकर घायल व्यक्ति को उपचार के लिये भेजा जाता है एवं घटना में वाहन चालक की लापरवाही या अपराधिक दायित्व पाये जाने पर वाहन चालक के विरूद्ध प्रथम सूचना पत्र दर्ज किया जाकर वैधानिक कार्यवाही की जाती है। विधानसभा क्षेत्र सुसनेर के अंतर्गत जिला शाजापुर के थाना मोमन बड़ोदिया में सड़क दुर्घटना के विगत दो वर्षों में 45 प्रकरण दर्ज किये गये हैं एवं जिला आगर मालवा के विधानसभा क्षेत्र सुसनेर, थाना सुसनेर, सोयत एवं नलखेड़ा में दो वर्षों में 288 प्रकरण पंजीबद्ध हुए हैं। कुल 333 प्रकरण पंजीबद्ध हुए हैं। (ख) विधानसभा क्षेत्र सुसनेर के अंतर्गत थाना सोयत के अपराध क्रमांक 172/15 एवं थाना सुसनेर के अपराध क्रमांक 366/15 में दस्तावेजों में कमी पायी गई, जिन पर विधि अनुरूप कार्यवाही की गई। शेष प्रकरणों में दस्तावेजों में कमी नहीं पाई गई। (ग) गुराड़ी बंगला के निकट थाना सुसनेर, में सड़क दुर्घटना के अपराध क्रमांक 266/15 तथा थाना सोयत के अपराध क्रमांक 172/15 में प्रकरण में मान. न्यायालय में चालान पेश किया गया है। (घ) प्रश्नांश के संदर्भ में सड़क दुर्घटना के थाना सुसनेर अपराध क्र. 266/15 में दस्तावेज वैध नहीं पाए जाने पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत चालान मान. न्यायायल में पेश किया गया है।

श्री मुरलीधर पाटीदार-- माननीय अध्यक्ष महोदय,माननीय मंत्री जी के द्वारा जो जवाब दिया गया है उस पर आपका ध्यानाकर्षण भी करना चाहूंगा और आपका संरक्षण चाहूंगा कि दशहरे के दूसरे दिन सारे मजदूर लोग दशहरा मनाकर के बापस मजदूरी करने सुसनेर विधानसभा से राजस्थान जो पास में है वहां पर खदानों में काम के लिये जाते हैं.मान्यवर एक बस की दुर्घटना हुआ और दुर्घटना में बस का परमिट 48 सीट का था और 72 सवारी उसमें भरी हुई थीं उसमें 8 लोग मर गये. वह तो माननीय मुख्यमंत्री जी की सहृदयता है कि उनको तत्काल 1-1 लाख रूपये मृतकों के परिवार को दिये और 50-50 हजार रूपये घायलों को दिये. मेरा प्रश्न है कि बस के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई और संबंधित थाना प्रभारी की घोर लापरवाही थी. मैं मंत्री जी से इतना पूछना चाहता हूं कि जब बस का प्रकरण दर्ज हुआ और घटना का प्रकरण दर्ज हुआ. दोनों के प्रकरण क्रमांक अलग अलग है जिसमें लगभग 100 क्रमांक का अंतर है. बस का प्रकरण 266 क्रमांक पर है और बस के खिलाफ जब कोर्ट ने स्वयं संज्ञान लिया कि बस का कोई हवाला ही नहीं है तो उसका प्रकरण क्रमांक 366 था. मैं मंत्री जी से इतना जानना चाहता हूं कि जिनकी घोर लापरवाही है उनके खिलाफ क्या शासन कोई कार्यवाही करेगा. अध्यक्ष महोदय वह तो गनीमत है कि यह तारांकित प्रश्न लगा और प्रश्न लगने के बाद यह लाटरी में भी आ गया तो टीआई को लाईन अटैच किया. अगर यह प्रश्न लाटरी में नहीं आता तो कोई कार्यवाही नहीं होती.

श्री बाबूलाल गौर--(श्री मुरलीधर पाटीदार के खड़े रहने पर) हो गया आपका प्रश्न तो बैठ जाईये. प्रेम से बैठ जाईये.

श्री मुरलीधर पाटीदर- जी.

श्री बाबूलाल गौर-- माननीय अध्यक्ष महोदय,माननीय सदस्य का प्रश्न बड़ा महत्वपूर्ण है. थाना प्रभारी के द्वारा बहुत लापरवाही हुई है. मैं इसको स्वीकार करता हूं. और इसलिये उसको सस्पेंड किया जाता है.

श्री मुरलीधर पाटीदार-- धन्यवाद मंत्री जी.

श्री घनश्याम पिरोनिया-- मंत्री जी आपको धन्यवाद. मंत्री जी हमने शुरूवात की थी फल माननीय सदस्य को मिल गया.

निजी चिकित्‍सालय एवं नर्सिंग होम्‍स के विरूद्ध शिकायतों पर कार्यवाही

13. ( *क्र. 5818 ) श्री नारायण सिंह पँवार : क्या लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राजगढ़ जिले की विधानसभा क्षेत्र ब्‍यावरा अंतर्गत किन-किन स्‍थानों पर निजी चिकित्‍सालय एवं नर्सिंग होम किन-किन शर्तों के अधीन कब से संचालित किये जा रहे हैं? शर्तों की प्रति उपलब्‍ध कराते हुये बतावें कि इन निजी चिकित्सालय एवं नर्सिंग होम्‍स को किन-किन रोगों, ऑपरेशन आदि के लिये अनुमति प्रदान की गई है? (ख) प्रश्‍नांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में क्‍या उक्‍त सभी निजी चिकित्‍सालय एवं नर्सिंग होम्‍स में अनुमति अनुसार ही पात्र चिकित्‍सकों से कार्य कराया जा रहा है? यदि नहीं, तो विगत दो वर्षों में इनके विरूद्ध क्‍या-क्‍या शिकायतें किस-किस स्‍तर पर कब-कब प्राप्‍त हुईं तथा प्राप्‍त शिकायतों में कब-कब, क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई? (ग) क्‍या ब्‍यावरा नगर में संचालित अर्शी नर्सिंग होम में दिनांक 26 जनवरी 2016 को तहसील ब्‍यावरा के ग्राम बैलास की एक प्रसूता महिला की नर्सिंग होम प्रबंधन की लापरवाही के कारण मृत्‍यु हो जाने एवं बिना पोस्‍टमार्टम के प्रसूता की मृत्यु उपरांत शव को एम्‍बुलेंस में डालकर बल पूर्वक परिवार के सदस्‍यों को डरा-धमका कर ग्राम बैलास पहुँचाने व परिजनों से अभद्र व्‍यवहार की स्‍थानीय एवं जिला प्रशासन को शिकायतें प्राप्‍त हुईं हैं? यदि हाँ, तो उक्‍त संबंध में प्रश्‍न दिनांक तक क्‍या कार्यवाही की गई? यदि नहीं, तो क्‍यों?

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) राजगढ़ जिले के विधानसभा क्षेत्र ब्यावरा में निम्नलिखित निजी चिकित्सालय एवं नर्सिंग होम मध्यप्रदेश उपचार्या गृह तथा रूजोपचार संबंधी स्थापनाएं अधिनियम 1973 एवं नियम 1997 के अंतर्गत संचालित हैं। 1. पंजाबी नर्सिंग होम, राजगढ़ रोड ब्यावरा वर्ष 2007 से संचालित है। 2. अर्शी नर्सिंग होम, राजगढ़ रोड ब्यावरा वर्ष 2007 से संचालित है। 3. वरदान हॉस्पिटल, राजगढ़ रोड ब्यावरा वर्ष 2013 से संचालित है। 4. पटवा जनरल हॉस्पिटल एवं मेटरनिटी केयर, राजगढ़ रोड ब्यावरा वर्ष 2013 से संचालित है। 5. कान्ताश्री हॉस्पिटल पुराना सुठालिया रोड़ ब्यावरा वर्ष 2013 से संचालित है। शर्तों की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। नर्सिंग होम/चिकित्सालयों में उपलब्ध चिकित्सकों की योग्यता अनुसार रोगों के ईलाज एवं ऑपरेशन करने की अनुमति होती है। (ख) जी हाँ। उक्त चिकित्सालय में अनुमति अनुसार ही पात्र चिकित्सकों से कार्य कराया जा रहा है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी हाँ। इस संबंध में शिकायत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी राजगढ़ को दिनांक 12/02/2016 को प्राप्त हुई है। प्रकरण की जाँच हेतु जाँच अधिकारी नियुक्त किया गया है। जाँच प्रक्रिया प्रचलन में है।

परिशिष्ट - ''दो''

श्री नारायण सिंह पँवार : माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न बहुत सामान्य था कि राजगढ़ जिला के ब्यावरा क्षेत्र के अंतर्गत जितने भी प्रायवेट नर्सिंग होम्स चलते हैं उनमें लगातार अनियमितताएं होती हैं . निरंतर लोगों का वहां पर शोषण होता है और कई प्रकार की फीस की अवैध वसूली भी होती है. स्वास्थ्य विभाग का अमला कभी भी जांच करने की जहमत नहीं उठाता है जिसके कारण लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ होता है और असमय लोगों की मृत्यु भी होती है खास तौर से प्रसूता महिलाओं की..

अध्यक्ष महोदय-- आप सीधे सीधे प्रश्न कर दें.

श्री नारायण सिंह पँवार : माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने निवेदन किया था कि एक निजी नर्सिंग होम अर्शी में एक बैलास ग्राम की महिला की प्रसूती के दौरान मौत हो गई थी. लेकिन बलात महिला के मृत शरीर को बिना किसी पोस्टमार्टम के गांव पहुंचा दिया गया.मैं उसकी जांच की मांग करता हूं साथ ही यह भी मांग करता हूं कि उस प्रसूता का जो एक माह का जीवित बालक है उसके लालन पालन के लिये सरकार क्या संबंधित दोषी से कुछ क्षतिपूर्ति हेतु राशि दिलायेगी.

राज्य मंत्री, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण (श्री शरद जैन)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जिस प्रकरण की जानकारी माननीय विधायक जी ने दी है. हम उसकी जांच करा लेंगे.

श्री नारायण सिंह पँवार : माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने क्षतिपूर्ति के लिये भी निवेदन किया है. उसका एक माह का जीवित बालक उसके लालन पालन के लिये क्या सरकार संबंधित दोषी से क्षतिपूर्ति राशि दिलवायेगी.

श्री शरद जैन -- माननीय अध्यक्ष महोदय, हम उसकी जांच करा लेंगे. जांच में जो आयेगा. हम उसको करेंगे.

श्री नारायण सिंह पँवार :अध्यक्ष महोदय, लगातार विभाग के मानीटरिंग की आवश्यकता है. सारे नर्सिंग होम्स बेलगाम होकर के काम कर रहे हैं.

श्री शरद जैन -- इस मामले में हम आज ही सीएमओ को इस बात के निर्देश जारी किये जायेंगे कि जो भी आपके जिले में प्रायवेट नर्सिंग होम्स हैं हम उनकी मानीटरिंग भी करेंगे और इस प्रकरण की जांच भी करायेंगे.

श्री नारायण सिंह पँवार : मंत्री जी धन्यवाद.

नामजद आरोपियों के विरूद्ध न्‍यायालय में चालान पेश किया जाना

14. ( *क्र. 524 ) श्रीमती ऊषा चौधरी : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सतना जिले के थाना उचेहरा अंतर्गत बड़ी छिपहटी उचेहरा निवासी भूरा उर्फ मुबारक अली पिता श्री लाल मोहम्‍मद के घर में घटी घटना दिनांक 13.07.2012 को लेकर एफ.आई.आर. दर्ज कराई गई थी, जिस पर पुलिस द्वारा दिनांक 19.07.2012 को अपराध क्रमांक 223/12, 294, 323, 506, 34 का मुकदमा नामजद आरोपीगणों के विरूद्ध कायम किया गया था? (ख) क्‍या उपरोक्‍त नामजद आरोपीगणों के विरूद्ध दर्ज मुकदमा अपराध क्रमांक 223/12, 294, 323, 506, 34 का चालान न्‍यायालय में आज दिनांक तक पेश हुआ है या नहीं? यदि नहीं, तो पेश न होने का क्‍या कारण है? (ग) क्‍या उपरोक्‍त अपराध क्रमांकों के सभी आरोपियों की गिरफ्तारी आज दिनांक तक की गई है या नहीं? यदि नहीं, तो गिरफ्तार न करने एवं इतना समय बीत जाने का क्‍या कारण है? (घ) क्‍या पुलिस द्वारा घोर लापरवाही करते हुए प्रभावशील एवं सरहंगों के दबाव के कारण न्‍यायालय में चालान पेश न किये जाने के कारण फरियादी न्‍याय से वंचित हैं, इसी के चलते फरियादी एवं इनके परिवार के ऊपर दिनांक 01.01.2016 को पुन: इन्‍हीं अपराधियों के इशारे एवं शह पर घर में घुस कर हमला कराया गया है, जबकि पुलिस द्वारा उल्‍टा फरियादियों के विरूद्ध झूठी रिपोर्ट अपराध क्रमांक 3 में दर्ज की गई है? यदि हाँ, तो क्‍यों, क्‍या दर्ज किये गये झूठे मुकदमें पर खात्‍मा लगाया जाएगा?

गृह मंत्री ( श्री बाबूलाल गौर ) : (क) जी हाँ। (ख) प्रश्नांश में उल्लेखित अपराध में कुल 05 आरोपियों के विरूद्ध अभियोग पत्र सक्षम न्यायालय में दिनांक 22.02.2016 को प्रस्तुत किया गया है। प्रकरण में नामजद शेष 02 आरोपी श्री कृष्णदेव सिंह एवं श्री छत्रपाल सिंह के विरूद्ध विवेचना में पर्याप्त साक्ष्य न होने से उक्त प्रकरण से पृथक किया गया है। (ग) प्रकरण में नामजद कुल 07 आरोपियों में से आरोपी 1- श्री निसार पिता श्री अब्दुल सत्तार 2- श्री जयबहादुर सिंह को दिनांक 30.09.2012 एवं आरोपी 1- श्री कौशलेन्द्र सिंह उर्फ बबलू, 2- श्री अशोक द्विवेदी, 3- श्री सुनील गुप्ता को दिनांक 08.10.2012 को साक्ष्य के आधार पर गिरफ्तार किया गया है, शेष 02 आरोपी श्री कृष्णदेव सिंह एवं श्री छत्रपाल सिंह के विरूद्ध पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध न होने से आरोपियों के नाम विवेचना से पृथक किये गये हैं। (घ) जी नहीं। अपराध क्रमांक 223/12 में अभियोग पत्र सक्षम न्यायालय में दिनांक 22.02.2016 को प्रस्तुत किया जा चुका है। थाना उचेहरा में दिनांक 01.01.2016 को दो पक्षों में आपस में झगड़ा होने से क्रमशः फरियादिया श्रीमती जमीला बेगम की सूचना पर अपराध क्र. 02/16 धारा 147, 323, 294, 506 भादवि का अपराध आरोपी श्री शोकत अली एवं उसके अन्य 09 साथियों के विरूद्ध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया एवं फरियादिया श्रीमती आयशा बी की सूचना पर अपराध क्रमांक 3/16 धारा 147, 323, 294, 506 भादवि का आरोपी श्री मुबारक अली उर्फ भूरा तथा श्रीमती जमीला बेगम एवं अन्य 08 नामजद आरोपियों के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध किया गया है। अपराध क्रमांक 2/16 में सभी आरोपियान गिरफ्तार होने पर अभियोग पत्र क्रमांक 56/2016 तैयार कर दिनांक 22.02.2016 को माननीय न्यायालय प्रस्तुत किया गया एवं अपराध क्र. 3/16 के समस्त आरोपियान फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। प्रकरण वर्तमान में विवेचनाधीन है। विवेचना में आये साक्ष्य एवं तथ्यों के आधार पर प्रकरण में विधि अनुरूप कार्यवाही की जाएगी।

श्रीमती उषा चौधरी -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न था कि 2012 में नामजद प्रकरण आया था उसमें रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी लेकिन 2 अभियुक्तों को छोड़ दिया गया है. और 4 साल से चालान पेश नहीं किया गया है. क्या पुलिस के दवाब में आकर के ऐसा किया गया है. मंत्री जी बताने की कृपा करें.

श्री बाबूलाल गौर-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने जो पूछा है कि क्‍या आपने नामजद आरोपियों के विरूद्ध दर्ज मुकदमा अपराध क्रमांक इतने-इतने का चालान न्‍यायालय में आज दिनांक तक पेश हुआ है या नहीं. प्रश्‍नांश में उल्‍लेखित अपराध में कुल 05 आरोपियों के विरूद्घ अभियोग पत्र सक्षम न्‍यायालय में दिनांक 22.2.2016 को प्रस्‍तुत किया गया है. प्रकरण में नामजद शेष 02 आरोपी श्री कृष्‍णदेव सिंह एवं श्री छत्रपाल सिंह के विरूद्ध विवेचना में पर्याप्‍त साक्ष्‍य न होने से उक्‍त प्रकरण से पृथक किया गया है. अब उनके खिलाफ कोई साक्ष्‍य नहीं हैं तो कैसे गिरफ्तार कर लें. न्‍यायपूर्ण कार्यवाही होती है.

श्रीमती ऊषा चौधरी-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इन पर मुकदमा कायम था 7 लोगों के प्रति तो 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, 2 लोगों को राजनीतिक दवाब के कारण पुलिस दवाब के कारण इनको छोड़ दिया गया है और फिर अभी चालन पेश किया गया, फिर उसके बाद भी उनको छोड़ दिया गया है.

श्री बाबूलाल गौर-- मैंने पहले ही उत्‍तर दिया है कि अगर आप और चाहें तो और जांच करा देंगे.

श्रीमती ऊषा चौधरी-- जी बि‍ल्‍कुल माननीय मंत्री महोदय.

अध्‍यक्ष महोदय-- प्रश्‍न क्रमांक 15, श्री कमल मर्सकोले

प्रश्‍न क्रमांक 15, श्री कमल मर्सकोले (अनुपस्थित)

केवलारी विधानसभा क्षेत्रांतर्गत चिकित्‍सकों के पद की पूर्ति

16. ( *क्र. 4048 ) श्री रजनीश सिंह : क्या लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) केवलारी विधानसभा क्षेत्रांतर्गत स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के कितने खण्‍ड हैं? (ख) प्रश्‍नांश (क) के उक्‍त खण्‍डों में महिला एवं पुरूष चिकित्‍सक के कितने पद रिक्‍त हैं एवं कितने पूर्ण हैं? कार्यरत कर्मचारी की जानकारी देवें। (ग) क्‍या विकासखण्‍ड छपारा सामुदायिक केन्‍द्र में महिला चिकित्‍सक का पद स्‍वीकृत है? यदि हाँ, तो कार्यरत कर्मचारी का नाम बतायें? यदि नहीं, तो रिक्‍त पद की पूर्ति कब तक की जावेगी? (घ) तारांकित प्रश्‍न क्रमांक 2303 दिनांक 04 मार्च 2015 के संदर्भ में बतायें कि प्रश्‍न दिनांक तक पदों को भरने की कार्यवाही में कितने कौन से रिक्‍त पद भरे गये? यदि नहीं, तो क्‍यों?

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) केवलारी विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत केवलारी, छपारा, धनौरा, सिवनी विकासखण्ड संचालित हैं। (ख) प्रश्नांकित विकासखण्डों के अंतर्गत संचालित स्वास्थ्य केन्द्रों में पदस्थ चिकित्सकों की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) जी नहीं, विभागीय संरचना अनुसार महिला चिकित्सक के पदनाम से पद स्वीकृत नहीं है। जिला चिकित्सालय, सिविल अस्पताल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र स्तर की संस्थाओं में स्त्रीरोग विशेषज्ञ के नाम से पद स्वीकृत हैं। छपारा में विशेषज्ञों के 03 (मेडिसिन, सर्जरी एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ) के एक-एक पद तथा चिकित्सा अधिकारी के 02 पद स्वीकृत हैं। विशेषज्ञों की अत्यधिक कमी के कारण पदपूर्ति नहीं की जा सकी है, स्वीकृत 02 पदों के विरूद्ध 02 चिकित्सा अधिकारियों की पदस्थापना है एवं एक आर.सी.एच. संविदा चिकित्सक पदस्थ है। लोक सेवा आयोग से चयनित चिकित्सकों में स्त्री रोग योग्यता की चिकित्सकों की उपलब्धता अनुसार पदस्थापना संबंधी कार्यवाही की जा सकेगी। निश्चित समयावधि बताई जाना संभव नहीं है। (घ) विभाग रिक्त पदों की पूर्ति हेतु निरंतर प्रयासरत् है। पदोन्नति में पर्याप्त मात्रा में विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने से पदपूर्ति नहीं की जा सकी है, हाल ही में पैरामेडिकल कर्मचारियों की नवीन नियुक्ति पश्चात पदस्थापना अंतर्गत 02 लेब टेक्नीशियन, 01 रेडियोग्राफर एवं 02 फार्मासिस्ट ग्रेड-2, कुल 05 कर्मचारियों की पदस्थापना विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत संस्थाओं में की गई है। वर्ष 2015 में लोक सेवा आयोग से चयन पश्चात 17 चिकित्सकों की पदस्थापना सिवनी जिले के अंतर्गत स्वास्थ्य संस्थाओं में की गई है। पदपूर्ति हेतु विभाग निरंतर प्रयास कर रहा है।

 

श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, घुमा फिराकर स्थिति वही है, सम्‍मानीय सदस्‍य रजनीश सिंह की केवलारी विधानसभा में जितने भी सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र, प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र, जितने भी उनमें 32 पद स्‍वीकृत हैं और 32 पद के विरूद्ध 10 पद भरे हुये हैं, 22 पद रिक्‍त हैं और इसके लिये सम्‍मानित सदस्‍य जिनका प्रश्‍न है वह कई बार माननीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जी से भी अनुरोध कर चुके हैं, यह 22 पद रिक्‍त हैं और बाकी सभी संविदाकर्मी सभी लोग हड़ताल पर चले गये हैं, सारे अस्‍पताल खाली पड़े हैं, स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यवस्‍थायें पूरी तरह से से ठप्‍प हो गई हैं, माननीय मंत्री जी नंबर 1 तो कब तक इनकी आप प्रतिपूर्ति कर देंगे और दूसरा माननीय सदस्‍य ने प्रश्‍न पूछा था कि आप विकासखंड छपरा सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र में महिला चिकित्‍सक का पद स्‍वीकृत है, आपने कहा जी नहीं, इसका आशय स्‍त्री रोग विशेषज्ञ के पद से ही है, पीडियाट्रिक चिकित्‍सक फीमेल को महिला चिकित्‍सक नहीं कहते. जबकि आप दूसरी तरफ कह रहे हैं कि स्‍त्री रोग विशेषज्ञ का ...

अध्‍यक्ष महोदय-- आप तो सीधा प्रश्‍न कर दें, वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं आप.

श्री रामनिवास रावत-- कब तक आप पदस्‍थापना इनकी कर देंगे, कब त‍क वहां की स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यवस्‍थायें जो ठप्‍प पड़ी हैं उनको ठीक करा देंगे.

लोक स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण राज्‍य मंत्री (श्री शरद जैन)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 2015 में हमने जिला सिवनी में 17 चिकित्‍सक नियुक्‍त किये थे.

श्री रामनिवास रावत-- सिवनी का प्रश्‍न ही नहीं है, केवलारी विधानसभा का प्रश्‍न है. ब्रीफिंग तो कर लिया करो.

श्री शरद जैन-- मेरे भाई जवाब तो सुन लो, माननीय नियुक्‍त विधायक जी जवाब सुन लो, आपको जवाब सुनने में भी कष्‍ट है.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप जवाब सुन लीजिये.

श्री शरद जैन-- 17 डाक्‍टर हमने वर्ष 2015 में नियुक्‍त किये और यह बात सर्वविदित है कि जैसी अभी जानकारी आई थी कि 1896 चिकित्‍सकों की भरती की प्रक्रिया प्रचन में है और अतिशीघ्र हम उनकी और नियुक्ति करेंगे और छपारा का आपने जो जिक्र किया है, हम भी महसूस करते हैं कि वहां लेडीज डॉक्‍टर होना चाहिये. एक सप्‍ताह लेडीज डाक्‍टर की छपारा में नियुक्ति कर दी जायेगी.

श्री रामनिवास रावत-- चलो इतने से ही संतुष्‍ट हो लेते हैं, एक सप्‍ताह का बोला है न.

श्री शरद जैन-- संतुष्‍ट तो हो गये, धन्‍यवाद नहीं दे रहे.

श्री रामनिवास रावत-- धन्‍यवाद दे रहे हैं, न.

श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार (सुमावली)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह रामनिवास जी का प्रश्‍न होता तो बड़े जोरदारी से पूछते, रजनीश जी का प्रश्‍न बड़े आराम से पूछा आपने.

श्री रामनिवास रावत-- आपको क्‍या परेशानी हो रही है.

 

शासकीय उचित मूल्‍य की दुकानों का संचालन

17. ( *क्र. 2509 ) श्री रामप्यारे कुलस्ते : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मण्‍डला जिले में वर्तमान समय में कितनी उचित मूल्‍य की दुकानें कहाँ-कहाँ संचालित हैं? (ख) मध्‍यप्रदेश की योजनानुसार प्रत्‍येक ग्राम पंचायत स्‍तर पर उचित मूल्‍य की दुकान संचालित करने की योजना अनुरूप अभी तक मण्‍डला जिले में कितनी पंचायतों में उचित मूल्‍य की दुकानों का संचालन किया जा चुका है? (ग) राशन कार्डधारियों की संख्‍या, आवागमन एवं दूरी को ध्‍यान में रखकर के प्रश्‍नकर्ता के विधानसभा क्षेत्रांतर्गत निवास के सुदूर गांव में काफी लंबे समय से उचित मूल्‍य की दुकान की मांग निरन्‍तर चली आ रही है, उक्‍त सभी ग्रामों में पंचायत स्‍तर पर दुकानों का संचालन कब तक कर दिया जावेगा?

खाद्य मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) मण्‍डला जिले में प्रत्‍येक पंचायत में उचित मूल्‍य दुकान खोलने के प्रावधान का अभी क्रियान्‍वयन नहीं हो सका है, क्‍योंकि मध्‍यप्रदेश सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश, 2015 में संशोधन प्रक्रियाधीन है। (ग) मध्‍यप्रदेश सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश, 2015 में संशोधन उपरांत प्रश्‍नांकित विधानसभा क्षेत्रांतर्गत प्रत्‍येक पंचायत में उचित मूल्‍य दुकानों के आवंटन की कार्यवाही सक्षम अधिकारी द्वारा की जा सकेगी।

श्री रामप्‍यारे कुलस्‍ते-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न मध्‍यप्रदेश सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत उचित मूल्‍य दुकान के माध्‍यम से गरीबी रेखा और अति गरीबी रेखा के नीचे जो खाद्यान्‍न वितरण केन्‍द्र के बारे में था. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्रीजी से जानना चाहता हूं जैसा उत्तर में दिया गया है कि आदेश 2015 में संशोधन अधिनियम प्रक्रियाधीन है. अध्यक्ष महोदय, उचित मूल्य की दुकानें तो संचालित हैं और निरन्तर खुलती भी जा रही हैं. परन्तु मेरा स्पेसिफिक प्रश्न यह था कि कुछेक क्षेत्र काफी सुदूर हैं और बरगी डूब से प्रभावित भी हैं जिसमें आने-जाने में कठिनाई होती है. कई बार ऐसी दुर्घटनाएं हुई हैं.

अध्यक्ष महोदय--कृपया प्रश्न करें.

श्री रामप्यारे कुलस्ते--मैं प्रश्न पर ही आ रहा हूं. खाद्यान्न लेने लोग उचित मूल्य की दुकान जाते हैं तो वे डोंगी में बैठकर जाते हैं. डोंगी पलट जाने से पूरा राशन गिर जाता है और गंभीर दुर्घटना घटित होते बची है. ऐसी स्थिति में मेरा मानना है कि कुछेक जो चिन्हित गांव हैं कुमठी,मेली,मूसाखो,बेलखेड़ी,पीपरडाही,पापलीकला,पापलीखुर्द,हिनोतिया,चौरई,निवारीमाल, जामुनपानी,पिण्डरई, चुटका, टाटीघाट...

अध्यक्ष महोदय--सीधा प्रश्न कर दें.

श्री रामप्यारे कुलस्ते--इन गांवों में उचित मूल्य की दुकानें अगर खोल दें तो गरीबों के लिए बड़ी मेहरबानी होगी.

कुंवर विजय शाह--अध्यक्षजी, हमारे माननीय विधायक जी ने बहुत जनहित का मुद्दा उठाया है. यह सरकार इन लोगों के लिए समर्पित है और गरीब लोगों को राशन के लिए दुकान पर दूर न जाना पड़े इसलिए हमने पहले ही यह निर्देश जारी कर दिये हैं कि प्रत्येक पंचायत में दुकान खुलेगी और हम, हमारी बात पर कायम हैं. अध्यक्षजी, इसमें विलंब इसलिए हुआ कि कुछ लोग इस आदेश के विरुद्ध कोर्ट में चले गये कि हर पंचायत में दुकान नहीं खोलना चाहिए. कोर्ट ने स्टे हटा लिया है और मंडला जिले में ही और 137 दुकानें हम बहुत जल्दी खोलने जा रहे हैं. आपकी विधानसभा में 46 दुकानें ग्राम पंचायत स्तर पर 2-3 माह में खोल दी जायेगी और इसके अलावा भी जिन गांवों के आपने नाम बतायें हैं, उनका भी परीक्षण करके और जैसा कहा कि डोंगी से जाना पड़ता है उनका परीक्षण कर लेते हैं अगर आवश्यकता होगी तो सरकार वहां भी खोलेगी.

श्री रामप्यारे कुलस्ते--धन्यवाद.

 

 

 

आंगनवाड़ी केन्‍द्रों के भवन का निर्माण

18. ( *क्र. 1838 ) श्री मुकेश नायक : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) पन्‍ना जिले में संचालित कौन-कौन से आंगनवाड़ी केन्‍द्रों हेतु वर्ष 2013-14, 2014-15 तक की अवधि में किस-किस योजना में कहाँ-कहाँ कितने-कितने भवन निर्माण स्‍वीकृत किये गये? (ख) उक्‍त में से कौन-कौन से भवनों का निर्माण कार्य निर्धारित अवधि में पूर्ण हो चुका है एवं कौन-कौन से भवन का कार्य अब तक अपूर्ण/अप्रारंभ पड़ा है? कारण बतावें। (ग) उक्‍त अपूर्ण/अप्रारंभ कार्यों को पूर्ण कराने हेतु विभाग द्वारा वर्तमान तक क्‍या कार्यवही की गई? कब-कब संबंधित एजेंसियों को इस हेतु पत्र लिखे गये? यदि नहीं, लिखे गये तो कारण बतायें? (घ) क्‍या शासन उक्‍त निर्माण कार्यों में हो रहे विलम्‍ब के कारणों की जाँच करायेगा तथा जाँच में पाये गये अधिकारियों/कर्मचारियों के विरूद्ध कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जिले में 1170 संचालित आंगनवाड़ी केन्द्रों में से वर्ष 2013-14 एवं 2014-15 की अवधि में बी.आर.जी.एफ. योजना अंतर्गत 20 आंगनवाड़ी भवन निर्माण एवं आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा 05 आंगनवाड़ी भवन निर्माण स्वीकृत किये गये हैं। विस्तृत जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट पर है। (ख) पन्ना जिले में स्वीकृत इन आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण की कोई निश्चित समय-सीमा नियत नहीं की गई है। उत्तरांश अनुसार स्वीकृत 25 आंगनवाड़ी भवनों में से 16 आंगनवाड़ी भवन पूर्ण हो चुके हैं तथा 09 आंगनवाड़ी भवन निर्माण एजेंसी द्वारा धीमी गति से कार्य करने के कारण अपूर्ण हैं। (ग) निर्माणाधीन/अपूर्ण 09 आंगनवाड़ी भवनों को पूर्ण कराने हेतु जिला स्तर पर निर्माण एजेंसी एवं पंचायत विभाग के साथ समय-समय पर समीक्षा की गई है। किसी प्रकार का विशिष्ट पत्राचार पृथक से नहीं किया गया है। अतः शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (घ) निर्माणाधीन/अपूर्ण 09 आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण कार्य प्रगतिरत है, जिसे शीघ्रता से पूर्ण कराने की कार्यवाही की जा रही हैं। अतः शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

 

श्री मुकेश नायक--अध्यक्ष महोदय,मंत्रीजी ने मेरे प्रश्न के उत्तर में बताया है कि मेरे विधानसभा क्षेत्र में कुल 439 आंगनवाड़ी केन्द्र हैं. इसमें से 332 आंगनवाड़ी केन्द्र ऐसे हैं जो भवन विहीन हैं और भिन्न भिन्न शासकीय संस्थाओं में संचालित हैं. इसमें 35 किराये के भवनों में लगते हैं. मैं मंत्रीजी से यह पूछना चाहता हूं कि आंगनवाड़ी केन्द्र खोलने के पीछे भवन निर्माण की क्या नीति है. किराये के भवन देने के क्या स्पेसिफिकेशन्स हैं?

श्रीमती माया सिंह--अध्यक्ष महोदय,भवन विहीन आंगनवाड़ी केन्द्र संचालित हो रहे हैं, उनमें ग्रामीण क्षेत्र में तो मनरेगा के अभिसरण से आंगनवाड़ी भवन निर्माण की कार्ययोजना अभी विचाराधीन है. शहरी क्षेत्र में राज्य आयोजना मद से राशि उपलब्ध होने पर हम आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण करवाते हैं. ये वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर है.

श्री मुकेश नायक--अध्यक्ष महोदय, मंत्रीजी ने यह कहा है कि ज्यादातर बालबाड़ी केन्द्र प्राथमिक स्कूलों में संचालित हैं. ऐसी अनेक प्राथमिक शालाएं हैं जिनमें मात्र 2 या 3 कमरें हैं. एक कमरे में आहार-पोषण के लिए बच्चों का मध्यान्ह भोजन बनता है. एक कमरे में भोजन परोसा जाता है. एक कमरे में प्राथमिक स्कूल की पांचों कक्षाएं संचालित कर दी जाती हैं. इसमें बहुत अव्यवस्था है. मेरी आपसे विनम्र प्रार्थना है कि क्या आप शासन द्वारा शीघ्र बजट का प्रावधान करायेंगी खासतौर से उन सुदूर ग्रामीण अंचलों में जहां प्राथमिक शैक्षणिक संस्थान हैं, वह बहुत छोटे छोटे हैं.

श्रीमती माया सिंह - अध्यक्ष महोदय, हमारे विभाग की खुद भी यह प्राथमिकता है कि हम आंगनवाड़ी केन्द्रों को खासतौर से सुदूर अंचल में गांव में जहां इस तरीके की दिक्कतें हैं, वहां अच्छे आंगनवाड़ी भवन निर्मित करें और प्राथमिकताओं के आधार पर, बजट की उपलब्धता के आधार पर हम इस पर जरूर ध्यान रखेंगे और पूरा कराने की कोशिश करेंगे.

अध्यक्ष महोदय - प्रश्नकाल समाप्त.

 

 

 

(प्रश्नकाल समाप्त)

 

 

 

 

 

 

 

 

(व्यवधान)..

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह - अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न है. (व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय - आपका हार्ड लक है.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह - अध्यक्ष महोदय, बहुत गंभीर प्रश्न है.

अध्यक्ष महोदय - मैंने कोशिश की, लेकिन वह नहीं आ पाया.

श्री कमलेश्वर पटेल - अध्यक्ष महोदय, हमारे यहां ओला वृष्टि से किसानों का भारी नुकसान हुआ है.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह - बहुत गंभीर प्रश्न है, महिलाओं से संबंधित है.

अध्यक्ष महोदय - आप माननीय मंत्री जी से बाद में समय लेकर बात कर लीजिए, क्योंकि अब प्रश्नकाल समाप्त हो गया. हमारे पूरे प्रयत्न रहते हैं कि पूरे 25 प्रश्न हो जाएं.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह - अध्यक्ष महोदय, आप 19 नम्बर का प्रश्न देखें, एक महिला के साथ दुष्कर्म हुआ है और एक साल में चालान पेश नहीं हुआ है. इस तरह से अपराधियों को बचाया जा रहा है.

 

समय 12.00 बजे नियम 267-क के अधीन विषय

 

अध्यक्ष महोदय - आप कृपया सहयोग करें. अब संभव नहीं है. (व्यवधान)..माननीय श्री नरेन्द्र सिंह जी, अब कुछ नहीं किया जा सकता. निम्नलिखित माननीय सदस्यों की शून्यकाल की सूचनाएं सदन में पढ़ी हुई मानी जाएंगी. (व्यवधान)..

(1) श्री यशपाल सिंह सिसोदिया

(2) इंजी. श्री प्रदीप लारिया

(3) श्री घनश्याम पिरौनिया

(4) डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय

(5) श्री दिनेश राय

(6) श्री अरूण भीमावद

(7) श्री सुदर्शन गुप्ता

(8) श्री शैलेन्द्र पटेल

(9) श्री रामनिवास रावत

(10) श्री के.के. श्रीवास्तव

शून्यकाल में उल्लेख

श्री रामनिवास रावत (विजयपुर) - अध्यक्ष महोदय, प्रदेश के पंचायत सचिव, मनरेगा के कर्मचारी, संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी, ये सभी सामूहिक रूप से हड़ताल पर हैं और पूरे प्रदेश में रोजगार के काम बाधित हो रहे हैं. सदन चल रहा है, हमने स्थगन प्रस्ताव दिया हुआ है, इस पर सरकार गंभीर नहीं है, कृपया इस पर आप चर्चा करा लें. लोग बेरोजगार घूम रहे हैं. प्रदेश में रोजगार गारंटी के सारे काम रोजगार प्रदान करने के सारे काम 23 तारीख से ठप्प पड़े हुए हैं. इस पर गंभीरता से विचार करके इसे चर्चा के लिए ले लें.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह - अध्यक्ष महोदय, हमारा बहुत गंभीर प्रसंग है. माननीय मंत्री जी को निर्देशित कर दें.

श्री सुखेन्द्र सिंह (मऊगंज) - अध्यक्ष महोदय, रीवा जिले में कल रात भयानक बारिश और ओले पड़े हैं. रीवा जिले के साथ-साथ मऊगंज क्षेत्र में भयानक ओला, बारिश हुई है.

अध्यक्ष महोदय - आप कार्य सूची तो पढ़ लीजिए, उसमें ध्यान आकर्षण है. (व्यवधान)..(कई माननीय सदस्यों के एक साथ खड़े होकर बोलने पर) एक मिनट सुन लें. ओले के संबंध में कुछ माननीय सदस्य विषय को उठा रहे हैं. आज जो दूसरा ध्यान आकर्षण है, यह ओले के संबंध में लिया गया है. जिन सदस्यों ने उसमें ध्यान आकर्षण या स्थगन प्रस्ताव या जो भी प्रस्ताव लगाए थे, उनके नाम पढ़े जाएंगे, उनको एक-एक प्रश्न पूछने की अनुमति दी जाएगी और जिनके यहां पर तत्काल में कुछ घटनाएं घट गई हैं, वह भी हाथ उठा देंगे, परन्तु जिनके यहां पर घटनाएं घटी हैं सिर्फ वे ही, अकारण कोई नहीं, उनको भी अनुमति दी जाएगी. कृपा करके अभी उस विषय को नहीं उठाएं.

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, आपने कृपा की कि इस पर चर्चा की आवश्यकता समझते हुए ध्यान आकर्षण ग्राह्य किया है. मेरा इसमें विनम्रतापूर्वक आपसे निवेदन है, आपके माध्यम से सरकार से भी निवेदन है कि लगभग प्रदेश के 50 प्रतिशत जिलों में ओला वृष्टि हुई है. किसान पहले से सूखे से परेशान था. अब ओला वृष्टि से पूरी फसलें नष्ट हो गई हैं. सत्ता पक्ष की तरफ से यह बात भी आती रही थी. इसमें स्थगन भी लगा हुआ था, नियम 139 की चर्चा भी दी है. ध्यान आकर्षण एक सीमित विषय होता है, एक-एक प्रश्न पूछकर अपनी बात समाप्त करना पड़ेगी. मेरा आपसे निवेदन है और आपके माध्यम से सरकार से भी निवेदन है कि इसमें हम लोगों के स्थगन भी लगे हुए हैं या तो स्थगन के माध्यम से दिन भर की चर्चा स्वीकार कर लें या नियम 139 की चर्चा स्वीकार कर लें तो सारे सदस्य इसमें सत्ता पक्ष के सदस्य भी अपनी बात कहना चाहते हैं. सभी लोगों के यहां पर ओले पड़े हैं तो आपकी कृपा होगी और ध्यान आकर्षण में एक-एक प्रश्न पूछकर लोगों को संतुष्ट होना पड़ेगा. सारी बातें नहीं आ पाएंगी और पूरे प्रदेश के किसानों के साथ भी यह अन्याय होगा कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद भी आप मात्र ध्यान आकर्षण में उनकी चर्चा निकाल दें.

अध्यक्ष महोदय - विषय की गंभीरता को देखते हुए ही ध्यान आकर्षण को इतने हल्के से नहीं लें. ध्यान आकर्षण भी बहुत गंभीर विषयों में और तात्कालिक विषयों में ही लिया जाता है और इसलिए इसको लिया है. इससे सब माननीय सदस्यों की इंडविजुअल बात भी आ जाएगी और अपने क्षेत्र से संबंधित यदि कोई विशिष्ट प्रश्न होगा जो कि अन्य नियमों में नहीं आ पाता, उसमें सीधे प्रश्न नहीं हो पाता, इसमें वह भी हो जाएगा तो अपने क्षेत्र से संबंधित कोई, यदि जनरल बात है तो कोई बात नहीं, किन्तु यदि कोई स्पेसिफिक बात है तो उसको भी वह बता सकेंगे, इसलिए यह भी महत्वपूर्ण है. दूसरी बात यह है कि राजस्व विभाग की मांग अभी आना बाकी हैं. उसमें भी सभी सदस्य जो कि विस्तार से आप कह रहे हैं वह चर्चा उसमें कर सकते हैं, और आपको भी यह जानकारी है कि सामान्यत: बजट के समय स्थगन प्रस्ताव नहीं लिये जाते हैं. खासकर चूंकि अभी विभाग की मांगे आना ही हैं, इसलिए उस समय चर्चा हो ही जायेगी. अब आप लोगों से अनुरोध है कि सहयोग करेंगे. एक एक मिनट में अपनी बात को समाप्त करेंगे.

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय आपकी भावना और आपके प्रति कृतज्ञ हैं, लेकिन सरकार के संसदीय मंत्री जिस तरह से चिल्ला चिल्लाकर , बड़े जोर जोर से कह रहे थे कि विपक्ष चर्चा नहीं करना चाहता है. उनसे निवेदन कर रहा हूं कि वह उठकर खुद कहें कि 139 की चर्चा स्वीकार करेंगे . सरकार क्यों ध्यानाकर्षण में समेटना चाहती है. सरकार को इसमें चर्चा कराने के लिए आगे आना चाहिए.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष महोदय इन्होंने तीन बार विधान सभा से बहिर्गमन किया, एक भी बार ओले पाले पर नहीं किया है. मेरा उस बात पर कहना था. मेरा अभी भी कहना है कि इनका एक भी नेता अभी तक ओला प्रभावित क्षेत्र में नहीं गया है. मैं उस बात के संदर्भ में कह रहा था. हमने यहां ध्यानाकर्षण पर चर्चा करवायी है..(व्यवधान).. अभी तक एक भी नेता नहीं गया है. बड़े बड़े नेता हैं जो कि केवल वोट मांगने के लिए जाते हैं..(व्यवधान).. उसके बाद पूछने नहीं जाते हैं. आपने मुझे कहा है तो फिर सुनो, आपने मेरा नाम लिया है तब मैं उठा हूं,इसलिए मैं कह रहा हूं. हमने आपको सुना है आप हमें सुनें. यह तो तरीका है.

श्री रामनिवास रावत -- आप क्या कहना चाहते हैं यहां अभी सभी सदस्य अपने अपने क्षेत्र में होकर आये हैं. अध्यक्ष महोदय यह आपत्तिजनक मामला है इसलिए हम चर्चा कराना चाहते हैं, 139 की चर्चा चाहते हैं, स्थगन प्रस्ताव लाना चाहते हैं, यह घोर आपत्तिजनक है, आप किसानों के हितैषी बन रहे हैं,(व्यवधान).. आप किसानों के साथ में मजाक कर रहे हैं. आपका तरीका है . आप किसानों के मसीहा बनना चाहते हैं तो क्यों नहीं चर्चा को स्वीकार कर लेते,..(व्यवधान).. आप क्यों नहीं सदन में कहते कि चर्चा स्वीकार करते हैं...(व्यवधान)..

डॉ नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष महोदय चर्चा है , ध्यानाकर्षण के रूप में चर्चा करा रहे हैं,..(व्यवधान).. चर्चा आज के बजट में 800 करोड़ रूपये का है उस समय चर्चा करना..(व्यवधान) ..

अध्यक्ष महोदय -- कृपया सभी सदस्य बैठ जायें. अब इस पर ज्यादा चर्चा न करें.

श्री रामनिवास रावत -- ध्यानाकर्षण पर चर्चा नहीं होगी..(व्यवधान ) ..

डॉ नरोत्तम मिश्र -- इनके जितने नेता यहां पर बैठे हैं यह अपने क्षेत्र के बाहर नहीं जाते हैं किसी किसान के पास में..(व्यवधान).. मुख्यमंत्री जी एक एक गांव में जा रहे हैं..इनके जब तीन तीन केन्द्र में मंत्री थे तो एक भी जगह पर नहीं गये हैं..(व्यवधान).. अध्यक्ष महोदय आज यहां पर चर्चा करने से कौन कतरा रहा है चर्चा ली है तब ही तो ध्यानाकर्षण लिया है.

अध्यक्ष महोदय -- अभी चर्चा होने वाली है, जो चर्चा 5 - 10 मिनट में शुरू होने वाली है उस पर ज्यादा चर्चा करने की आवश्यकता नहीं है.

श्री बाला बच्चन -- माननीय अध्यक्ष महोदय जब भी हम नियम 139 के अंतर्गत चर्चा की बात करते हैं तो संसदीय कार्य मंत्री जी खड़े होते हैं और वह कहते हैं विधायक अपने अपने क्षेत्र में नहीं गये हैं.

डॉ नरोत्तम मिश्र -- मैं खड़ा नहीं हुआ हूं. आपके सदस्य ने कहा कि जवाब दें तब मैं खड़ा हुआ हूं. पहले तो आप संशोधन कर लें. दूसरा मैंने ये कहा कि आपने इसके पहले तीन बार बहिर्गमन किया था ऐसे विषय पर किया जिस विषय का जनहित से कोई लेना देना नहीं था और आप एक बार भी किसानों के बीच में नहीं गये हैं..(व्यवधान)..

श्री रामनिवास रावत -- आप आरक्षण समाप्त करने की बात करेंगे और हम विरोध में कहेंगे तो आप कहेंगे कि यह जनहित का मुद्दा नहीं है.

अध्यक्ष महोदय -- आप सब लोग बैठ जायें कृपा करके सहयोग करें.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष म होदय जनहित से जुड़े मुद्दों से कांग्रेस क्यों कतराती है, हम खुद कह रहे हैं कि चर्चा करें.

श्री बाला बच्चन -- अध्यक्ष मैं अपनी बात को पूरा करना चाहता हूं. माननीय मंत्री जी आप हमेशा इस प्रकार की बात करते हैं कि विधायक अपने अपने क्षेत्र में नहीं गये हैं. हम सभी लोग अभी अपने क्षेत्र में जाकर आये हैं, हम तो यह चाहते हैं कि नियम 139 के अंतर्गत चर्चा होना चाहिए, सरकार का उस पर जवाब आना चाहिए और जो किसान प्रभावित हुए हैं उनको मुआवजा मिलना चाहिए.

डॉ नरोत्तम मिश्र -- हमने ऐसा कोई बात नहीं कही है, मैंने यह नहीं कहा है, मैंने कहा है कि आपके नेता अपने क्षेत्र सेबाहर कभी किसानों के लिए नहीं जाते हैं. जो मैंने पहले कहा है वह अभी भी कह रहा हूं. आज तक कोई गया हो तो बोलो..(व्यवधान).. आपका एक भी नेता जिसमें आप भी शामिल हैं. एक भी व्यक्ति अगर किसी किसान के खेत पर गया हो तो बताओ...(व्यवधान).. हमारे मुख्यमंत्री जी अकेले गांव गांव में जा रहेहैं आपका एक भी नेता नहीं गया है.. (व्यवधान) एक भी नेता नहीं गया है बतायें कौन गया है आप लोग केवल वोट मांगने के लिए जाते है...(व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय -- कृपया करके सदन की कार्यवाही चलने दें...(व्यवधान)

श्री कमलेश्वर पटेल -- अध्यक्ष महोदय कोई किसानों का हित नहीं हो रहा है केवल भाषणबाजी और नौटंकी बाजी की बात हो रही है..(व्यवधान)..

श्री शंकरलाल तिवारी -- अध्यक्ष महोदय ओले पर बोलने के बहाने से राजनीतिक फफोले न फोड़ें अपने कलेजे के...(व्यवधान)..

डॉ. गौरीशंकर शेजवार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, संसदीय कार्य मंत्री ने जो वक्‍तव्‍य दिया है, बड़ा विरोधाभासी है और सदन में ऐसी स्‍थिति उत्‍पन्‍न हो गई है कि जिस पर विचार करना पड़ेगा. इन्‍होंने कहा कि कांग्रेस का कोई नेता नहीं गया, तो नेता तो कोई है नहीं कांग्रेस में, आप कह रहे हैं कि कांग्रेस का कोई नेता नहीं गया, अरे कोई नेता होता तो जाता. (हंसी)

अध्‍यक्ष महोदय -- श्री सुंदर लाल तिवारी, एक मिनट में अपनी बात कहें.

श्री रामनिवास रावत -- ये कोई प्रश्‍न ही नहीं है जिसका उत्‍तर दिया जाए. (...व्‍यवधान...)

डॉ. गौरीशंकर शेजवार -- मेरा प्रश्‍न यदि अप्रासंगिक है तो किसी को यहां से बोलना चाहिए. (...व्‍यवधान...)

श्री बाला बच्‍चन -- माननीय शेजवार जी, हम बोल रहे हैं. (...व्‍यवधान...)

श्री अजय सिंह -- व्‍यवधान पुरुष, कृपा करके बैठ जाएं.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार -- मैंने कार्यकारी नेता की बात नहीं कही है, ये सब कार्यकारी हैं. कोई नेता हो तो बात करें. अजय सिंह जी किस अधिकार से कह रहे हैं किसने इनको नेता नियुक्‍त किया. (...व्‍यवधान...)

अध्‍यक्ष महोदय -- उनका उत्‍तर देने की जरूरत नहीं आप तो अपनी बात कहें.

कुंवर विक्रम सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, व्‍यवधान पुरुष व्‍यवधान करते रहते हैं. (...व्‍यवधान...)

डॉ. गौरीशंकर शेजवार -- अकेले बाला बच्‍चन कार्यवाहक नहीं हैं आप सब कार्यवाहक हैं. कोई एक नेता हो तो बोलो भाई, हमारे संसदीय कार्य मंत्री जी का जवाब दो. (...व्‍यवधान...)

श्री बाला बच्‍चन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट.

अध्‍यक्ष महोदय -- अब वह विषय समाप्‍त हो गया है. के.पी. सिंह साहब, अब कोई विषय नहीं है. बैठ जाएं. (...व्‍यवधान...)

श्री गोपाल भार्गव -- डॉ. साहब के प्रश्‍न का मैं उत्‍तर दे रहा हूँ. इन सभी में आंचलिक नेता हैं और एक-एक जिले के नेता हैं इनके राष्‍ट्रीय नेता जो हैं, हर जिले का एक नेता है, जिले का ही दौरा कर लें आपके राष्‍ट्रीय नेता. (...व्‍यवधान...)

अध्‍यक्ष महोदय -- मेरा माननीय मंत्रिगणों से और माननीय सदस्‍यों से अनुरोध है कि ओले पर चर्चा होने के लिए कॉल-अटेंशन लिया है विषय की गंभीरता को आप समझें और इस चर्चा को होने दें. पहले माननीय सदस्‍य श्री सुंदरलाल तिवारी जी अपनी बात एक मिनट में कहेंगे, उसके बाद श्री हरदीप सिंह डंग जी और निशंक कुमार जैन, इसके बाद मैं अगली कार्यवाही करूंगा.

श्री बाला बच्‍चन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय शेजवार जी ने मेरा नाम लिया है. (...व्‍यवधान...)

अध्‍यक्ष महोदय -- कोई एलाऊड नहीं है, अब सहयोग करें.

श्री बाला बच्‍चन -- माननीय शेजवार जी आपके लिए और पूरी सरकार के लिए 1 मार्च को महामहिम राज्‍यपाल जी के अभिभाषण पर हमने इतनी बातें बोलीं, इतने प्रश्‍न दागे, क्‍या एक का भी जवाब दिया है. पूरी सरकार कठघरे में है. इतने सारे हमने कारनामे उजागर किए थे उनमें से एक का भी जवाब आपने और आपके मंत्रियों ने नहीं दिया. (...व्‍यवधान...)

अध्‍यक्ष महोदय -- कृपया बैठ जाएं, यह विषय नहीं है. के.पी. साहब आप भी बैठ जाइये आप, आप भी वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं.

श्री के.पी. सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ कि हमारे विपक्ष के नेता अगर बीमार हैं और किसी बीमारी से ग्रसित होने की वजह से यहां नहीं आ सकते हैं तो क्‍या शेजवार जी का इस तरह का कटाक्ष उचित है. (...व्‍यवधान...)

अध्‍यक्ष महोदय -- कृपा करके, इस विषय को समाप्‍त करिए अब. सभी बैठ जाएं. आप लोग विषय की गंभीरता नहीं समझ रहे हैं.

श्री के.पी. सिंह -- (XXX) इस तरह की बात कहते हुए, कभी आपके साथ भी ऐसा हो सकता है. यह कभी भी किसी के भी साथ हो सकता है. (...व्‍यवधान...)

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय तिवारी जी अपनी बात कहें नहीं तो मैं आगे बढ़ रहा हूँ. आप बोलिए जो आपको बोलना है आप किसी के लिए मत रूकिए.

श्री सुंदरलाल तिवारी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक गंभीर विषय के लिए हमने स्‍थगन प्रस्‍ताव दिया है. वह विषय किसी पार्टी का नहीं है, विधान सभा के सम्‍मान का प्रश्‍न है और उस पर हमने स्‍थगन प्रस्‍ताव दिया है. मेरा निवेदन यह है कि बजट के डिमांड फॉर ग्रांट्स बजट प्रस्‍तुत हुआ है, एप्रोप्रिएशन बिल भी आएगा, एक कानूनी त्रुटि हो रही है.

अध्‍यक्ष महोदय -- पहले मेरी बात सुन लें, आपने पहले लिखकर के प्रिविलेज का नोटिस दिया उसको आपने प्रेस में भी दे दिया.

श्री सुंदरलाल तिवारी -- अध्‍यक्ष महोदय, नहीं, हमने नहीं दिया साहब.

अध्‍यक्ष महोदय -- फिर एड्जर्नमेंट मोशन आपने दिया उसकी चर्चा भी अभी कर ली, अब इस विषय में सदन में चर्चा नहीं होती, आपको भी परंपराएं मालूम हैं.

श्री सुंदरलाल तिवारी -- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने विशेषाधिकार की सूचना या जानकारी किसी प्रेस को नहीं दी.

अध्‍यक्ष महोदय -- आपकी यह बात भी आ गई कि आपने एड्जर्नमेंट मोशन दिया है, एक तो वह एड्जर्नमेंट का विषय नहीं है, किंतु आपने दिया है यह बात भी सदन में आ गई है, अब कृपया अपनी बात समाप्‍त करें, इसके संबंध में यदि कोई चर्चा करना हो तो कक्ष में कर लें.

श्री सुंदरलाल तिवारी-- अध्यक्ष महोदय, यह विषय इतना गंभीर है..

अध्यक्ष महोदय-- यहां चर्चा का विषय नहीं है. उसकी चर्चा मैंने अलाऊ नहीं की है.

श्री सुंदरलाल तिवारी-- अध्यक्ष महोदय, बहुत बड़ी त्रुटि हो रही है, इस पर विचार कर लें.

अध्यक्ष महोदय-- ठीक है, आपकी बात आ गयी.

श्री अजय सिंह-- अध्यक्ष महोदय, तिवारी जी ने जो बात उठायी है. बहुत ही गंभीर विषय है. आप चाहें लें,ग्राह्य करें या न करें. सरकारी की त्रुटि है.

अध्यक्ष महोदय-- उन्होंने नोटिस दिया है. अभी आप डिसीजन न दें.

श्री अजय सिंह-- मैं डिसीजन नहीं ले रहा हूँ. मैं आपसे अनुरोध कर रहा हूँ कि सरकार का इस विषय पर जवाब आना चाहिए.

श्री हरदीप सिंह डंग(सुवासरा)--माननीय अध्यक्ष महोदय, सुवासरा विधानसभा क्षेत्र के खेताखेड़ा ग्राम में कल रात्रि को 9 और 11 के बीच में कंजरों द्वारा जो डकैती का प्लान बनाया गया और उसमें ग्रामीण क्षेत्र के लोगों और कंजरों के बीच में जो मुठभेड़ हुई है उसमें दो से तीन कंजर मारे गये और ग्रामीण क्षेत्र के कई लोग फायरिंग के दौरान घायल हो गये हैं और उनको हास्पीटल में भर्ती करा रखा है. वहां पर पहले भी जो घटनाएँ घटी हैं उसमें कई बार शिकायत की गयी, आज तक उसकी कोई सुनवाई नहीं हो पायी. उसके कारण यह बड़ी घटना घटी है. यह क्षेत्र पूरा कंजर प्रभावित है इसलिए थोड़ा उस पर ध्यान दिया जाए, यह हमारा निवेदन है.

श्री निशंक कुमार जैन(बासौदा)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मुख्यमंत्री जी ने ग्राम तथा नगर रक्षा समिति के सदस्यों की महापंचायत की थी. माननीय हिम्मतलाल कोठारी जी गृह मंत्री थे और जो घोषणाएँ उन्होंने महापंचायत में की थीं आज तक एक भी घोषणा पूरी नहीं हुईं.

अध्यक्ष महोदय-- यह शून्यकाल का विषय नहीं है. आपका प्रश्न भी है इस पर. इनका रिकार्ड में नहीं आयेगा कुछ.

श्री निशंक कुमार जैन-- (xxx)

अध्यक्ष महोदय-- यह रिकार्ड में नहीं आयेगा.इस तरह का आप शून्यकाल का उपयोग नहीं कर सकते.

श्री निशंक कुमार जैन-- (xxx)

अध्यक्ष महोदय-- यह कुछ रिकार्ड में नहीं आयेगा. आपका प्रश्न लगा है.सारी बात आप जाकर के प्रेस में वैसे भी दे सकते हैं.कोई चीज रिकार्ड में नहीं आयेगा. श्री कमलेश्वर पटेल एक मिनट में अपनी बात बोलें.

श्री निशंक कुमार जैन-(xxx)

श्री कमलेश्वर पटेल(सिहावल)-- माननीय अध्यक्ष महोदय,सीधी सिंगरौली जिले में आज आधी रात को ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से फसल का काफी नुकसान हो गया.

अध्यक्ष महोदय- ओले की बात अभी आपसे की. अभी आपको अलाऊ करेंगे. अगर अभी बोलेंगे तो बाद में अलाऊ नहीं करेंगे. पांच मिनट के बाद आपका विषय आ रहा है.

 

 

 

 

 

 

 

12.17 बजे पत्रों का पटल पर रखा जाना

(1) मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम लिमिटेड का 40 वां वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखे वर्ष 2014-15

 

 

 

(2) वाणिज्य,उद्योग और रोजगार विभाग की अधिसूचना क्रमांक एफ-1-102-2011-अ-ग्यारह, दिनांक 4 जून,2015

संसदीय कार्य मंत्री(डॉ. नरोत्तम मिश्र)-- अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1973( क्रमांक 44 सन् 1973) की धारा 43 की उपधारा (2) की अपेक्षानुसार वाणिज्य,उद्योग और रोजगार विभाग की अधिसूचना क्रमांक एफ-1-102 2011-अ-ग्यारह, दिनांक 4 जून,2015 पटल पर रखता हूँ.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

(3) मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड का 33 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2014-2015

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.19 बजे ध्यान आकर्षण

(1) कटनी नगर निगम सीमा अंतर्गत कालोनियों के नियमितीकरण में विसंगति होना

श्री संदीप जायसवाल(मुड़वारा)-- माननीय अध्यक्ष महोदय,


राज्यमंत्री नगरीय विकास एवं पर्यावरण विभाग(श्री लाल सिंह आर्य)अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

 

 

 

श्री रामलल्लू वैश्यमाननीय अध्यक्ष महोदय, इसी तरह का हमारे सिंगरौली नगरपालिक निगम में भी है . नगरनिगम में 22 अवैध कालोनियाँ हैं. वहाँ का विकास रूका हुआ है वहाँ के भी नियमितिकरण की कार्यवाही करे तब ही विकास संभव हो सकेगा.

अध्यक्ष महोदय-- काल अटेंशन में यह विषय नहीं आते हैं संबंधित को ही पूछने दीजिये और उससे उद्भूत नहीं होता है. कृपया आप अलग से पूछवा लें. आपको अनुमति नहीं दे रहे हैं, श्री जायसवाल अपना प्रश्न करें.

श्री संदीप जायसवाल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, न सिर्फ मेरी विधान सभा बल्कि पूरे प्रदेश में जिस तरह से अवैध कॉलोनियाँ बनी हैं. उससे कई परेशानियाँ हम लोगों के सामने आती है. जैसे कॉलोनियों के बनने से पहले जो बारिश का पानी आसानी से निकल जाता था वह न निकलने से थोड़ी सी बारिश में बाढ़ की स्थितियाँ बनती हैं, अव्यवस्थित निर्माण हैं, इन सबको देखते हुए और जैसा कि माननीय मंत्री महोदय ने जवाब दिया है कि 90 कॉलोनियाँ अवैध हैं जिनको वैध करने की प्रक्रिया होनी है. 90 कॉलोनियाँ अवैध होने का मतलब है कि 30 से 40 परसेंट नगर निगम क्षेत्र का नागरिक वहाँ पर निवास कर रहा है. इस अति महत्वपूर्ण आँकड़े को ध्यान में रखते हुए नगर निगम अगर यह कहती है कि उसने समाचार पत्रों के माध्यम से लोगों से आवेदन मंगाए हैं, उसको जानकारी नहीं मिल रही है, तो सिर्फ इस आधार पर लोगों को अपनी स्थितियों पर नहीं छोड़ा जा सकता कि अगर नहीं आ रहे हैं तो वहाँ पर लोगों को....

अध्यक्ष महोदय-- कृपया प्रश्न करें.

श्री संदीप जायसवाल-- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न यह है कि क्या नगर निगम एक कदम आगे बढ़कर, मैं तो चाहूँगा पूरे प्रदेश में ये हो, मैं प्रश्नकर्ता विधायक हूँ नगर निगम हमारी उपस्थिति में, उन कॉलोनियों में शिविर लगाकर, वहाँ के लोगों को प्रेरित करते हुए कॉलोनियों को वैध करने की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी? इसके बाद मेरे दो प्रश्न और हैं....

अध्यक्ष महोदय-- दो नहीं, एक ही प्रश्न पूछा जाता है एक और एलाऊ कर देंगे.

श्री संदीप जायसवाल-- अध्यक्ष महोदय, इसमें दूसरा मेरा कहना यह है कि जो एक महत्वपूर्ण सुविधा के नाम पर नल संयोजन के लिए प्रारूप 7 में प्रावधान किया गया है कि आप घोषणा पत्र देंगे तो आपको नल और विद्युत संयोजन वहाँ पर मिल जाएगा. भले ही अवैध कॉलोनी है. लेकिन उसमें शर्त डाल दी गई है कि आपका व्यपवर्तन हो चुका है आपको लिखना पड़ेगा. व्यपवर्तन हो चुका होता तो वह अवैध कॉलोनी क्यों होती? क्या उसको हटाया जाएगा? तीसरा नये नियमों में....

अध्यक्ष महोदय-- अब इसके बाद पूछ लेना. दोनों प्रश्न भूल ही जाएँगे.

श्री लाल सिंह आर्य-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी ने जनहित में जो प्रश्न पूछा है मैं उनको संतुष्ट करना चाहता हूँ. एक महीने के अन्दर ही अवैध कॉलोनियों में शिविर लगाकर वैध करने की कार्यवाही प्रारंभ कर दी जाएगी.

श्री संदीप जायसवाल-- अध्यक्ष महोदय, इसमें नियमों में जो व्यपवर्तन का है उसके संबंध में जो सरलीकरण हो रहा उसमें प्रावधान पर विचार किया जाए. दूसरा, नगर पालिका और नगर पंचायतों में कलेक्टर और नगर निगम में आयुक्त को अवैध कॉलोनियों के संबंध में अधिकार दिए हुए हैं, नई अवैध कॉलोनियाँ न बनें इसकी जवाबदेही इन अधिकारियों पर सुनिश्चित करना और इस संबंध में इनकी जवाबदेही तय की जाना चाहिए.

अध्यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी, कुछ कहना है? प्रश्न नहीं है, उनका सुझाव है पर आपको कुछ कहना हो तो कह दीजिए.

श्री लाल सिंह आर्य-- अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जो सुझाव दिया है. इस प्रकार के अन्य कोई सदस्य भी, चाहे सत्तापक्ष के हों चाहे विपक्ष के हों, अवैध कॉलोनियों के नियमितीकरण करने में कोई उनके सुझाव हों तो उन सुझावों को हम गंभीरता से लेंगे और पूरे मध्यप्रदेश में लेंगे और हम उन पर क्या कार्यवाही ठीक ढंग से हो सकती है, उसमें हम उन सुझावों को सम्मिलित करेंगे..(व्यवधान)..

श्री सचिन यादव-- अध्यक्ष महोदय, मेरा एक छोटा सा सुझाव है पूरे प्रदेश का मामला है...(व्यवधान)..

श्री संदीप जायसवाल-- अध्यक्ष महोदय, मेरे एक प्रश्न का जवाब नहीं आया है. कलेक्टर और कमिश्नर की जवाबदेही सुनिश्चित हो जाए कि नई अवैध कॉलोनियाँ न बनें...(व्यवधान)..

श्री तरूण भनोत-- मेरा भी एक छोटा सा सुझाव है. माननीय मंत्री जी ने कहा है कि सुझाव दे सकते हैं.

 

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, अब कुछ नहीं. ओला एवं अतिवृष्टि के संबंध में अनेक माननीय सदस्यों ने ध्यानाकर्षण स्थगन प्रस्ताव दिए हैं और अभी भी सदन के अनेक माननीय सदस्यों ने इस विषय पर चिन्ता जताई है और इसलिए विषय की गंभीरता को देखते हुए यह ध्यानाकर्षण लिया गया है क्योंकि अलग अलग क्षेत्रों के विषय हैं उनको इकट्ठा कर दिया गया. मेरा माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि समय की सीमा में, भाषण न दें, अपना विषय रख दें तो कार्य में सहूलियत होगी. माननीय मंत्री जी भी उनका सबका समाधान कर सकेंगे.

उप नेता प्रतिपक्ष(श्री बाला बच्चन)-- लेकिन इसमें थोड़ा आप समय का भी उल्लेख कर दें. नहीं तो फिर समय के लिए बाउंडेड करेंगे तो थोड़ा उसको...

अध्यक्ष महोदय-- भाषण कोई न दे. ध्यानाकर्षण पढ़ लें. ध्यानाकर्षण बड़ा विस्तृत है. इसको पढ़ दें इसके बाद में अपने अपने क्षेत्र की बात एक एक मिनट में कह दें.

श्री रामनिवास रावत-- यही निवेदन है कि जिनका नाम भी नहीं है और उनके क्षेत्र में ओले पड़े हैं उन्हें भी परमिट कर दें.

अध्यक्ष महोदय-- जिनका नाम नहीं है और यदि ओले पड़े हैं तो उनको एलाऊ करेंगे. आपकी बात स्वीकार है.

श्री रामनिवास रावत-- धन्यवाद.


 

(2) प्रदेश के अनेक जिलों में ओला एवं अतिवृष्टि से फसलें नष्ट होने से उत्पन्न स्थिति

 

श्री हितेन्द्र सिंह सोलंकी (बड़वाह) (श्री रजनीश सिंह, श्री रामनिवास रावत) माननीय अध्यक्ष महोदय,


 

राजस्‍व मंत्री (श्री रामपाल सिंह):-माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

श्री हितेन्‍द्र सिंह सोलंकी :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने भी माना है कि ओला वृष्टि हुई है और जिन गांवों का हम लोगों ने उल्‍लेख किया था, उन गांवों में सर्वे का काम चल रहा है. मैं माननीय मंत्री जी को और माननीय मुख्‍यमंत्री जी को भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने जब से यह काम अपने हाथ में लिया है, वास्‍तव में बधाई के पात्र है और धन्‍यवाद देता हूं कि पिछली बार हमारे खरगौन जिले में 13 करोड़ रूपये के लगभग की राहत राशि दी गयी थी और अभी वर्तमान में भी किसानों की यही इच्‍छा है और वह सरकार की तरफ आंख उठाकर देख रहे हैं कि सर्वे कब तक पूरा हो जायेगा. मेरा माननीय मंत्री जी से यही पूछना है कि जो सर्वे अधिकारी थे, उनका नाम क्‍या है और वह कब सर्वे करने गये और किन किन गांवों में उन्‍होंने सर्वे किया है और सर्वे की राशि कब तक वितरित हो जायेगी और जो गांव छूट गये हैं. जैसे कि मैंने लेटर पेड पर अधिकारियों को लिखकर भी दिया है कि यह गांव छूट गये हैं, वहां पर गेहूं कि फसल पूरी आड़ी हो गयी है और उसके कारण पूरी गेंहूं की फसल बारीक हो जाती है और चने की फसल जो कटने आ गयी थी और जो उसके बीनोले थे वह गिर गये थे. वह भी फसल थोड़ी सी खराब हो गयी है. उसका सर्वे कब तक हो जायेगा. कब तक मुआवजा राशि बांट दी जायेगी और इस सर्वे में कौन कौन से अधिकारी थे इनके नाम मुझे बता दें.

अध्यक्ष महोदय - मैं ऐसा सोचता हूं कि सभी सदस्यों का एकजाई उत्तर मंत्री जी दे दें.क्योंकि बहुत सदस्यों के नाम हैं. सबको अलग-अलग बोलने देने में समय लगेगा.

श्री रामपाल सिंह - अध्यक्ष महोदय, एकजाई के लिये समय दे दें तो मैं एक घंटे में पूरा विवरण विस्तार से रख सकता हूं.

अध्यक्ष महोदय - अपनी-अपनी बात पूछें वे उत्तर देंगे.

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, चूंकि ध्यानाकर्षण लिया है हम तो निवेदन कर रहे थे कि ध्यानाकर्षण की जगह 139 की चर्चा हो. ध्यानाकर्षण लिया है तो हर सदस्य अपने-अपने विधान सभा क्षेत्र का पूछेगा.

अध्यक्ष महोदय - फिर तो एक-एक प्रश्न पूछेंगे.

श्री रामपाल सिंह - अध्यक्ष महोदय, माननीय हितेन्द्र सिंह जी ने जो विषय रखा है उसमें एक महिने के अन्दर चूंकि सरकार की तरफ से जो पहल हो रही है. ओलावृष्टि जब हुई तो स्वयं माननीय मुख्यमंत्री जी ने जिलों में फोन किया जनप्रतिनिधियों को फोन किया और सबने पहल की. विगत वर्ष भी जब किसानों पर आपदा आई थी जब भी सरकार ने पहल की थी और अभी भी हम लोगों ने जैसे ही सूचना मिली तुरंत निर्देश दिये गये हैं माननीय विधायक जी को मैं आश्वस्त करता हूं उन्होंने समय-सीमा पूछी है तो एक महिने के अन्दर वहां राहत राशि 6(4) के अंतर्गत दे दी जायेगी. दूसरा उन्होंने अधिकारियों के नाम पूछे हैं तो स्पष्ट निर्देश दिये हैं हमने. व्यवस्थाओं में बहुत बड़ा सुधार किया है. पहले राजस्व विभाग की शिकायतें आती थीं उसमें सुधार करने का हमने प्रयास किया है उसके अच्छे परिणाम विगत वर्षों में आये हैं. कोई शिकायत नहीं आ रही. पारदर्शिता से नुकसान,क्षति का आंकलन हो और इसीलिये हमने तय किया है कि राजस्व विभाग के पटवारियों एवं राजस्व निरीक्षक, कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी,पंचायत विभाग के सचिव एवं रोजगार सहायक,जनप्रतिनिधियों को भी पहली बार सरकार ने प्रयास किया उसमें पंच,सरपंच,ग्राम पटेल एवं अन्य प्रतिनिधिगण,चौकीदार सभी प्रतिनिधि उपस्थित हों क्षति का आकलन हो और सूची भी पंचायत सचिवालय में लगे. यह प्रयास पहली बार सरकार ने अच्छे किये हैं.

एक माननीय सदस्य - यह टोटल गलत बात है. एक व्यक्ति रिपोर्ट बनाकर देता है उसी पर सबके हस्ताक्षर हो जाते हैं.

श्री निशंक कुमार जैन - माननीय मंत्री जी ने ठीक कहा मगर मौके पर कुछ भी नहीं है.

अध्यक्ष महोदय - यह बहस का विषय नहीं है. उत्तर आने दें.

श्री रामपाल सिंह - यह जो सुधार किया है उसके अच्छे परिणाम आ रहे हैं. मौके पर पंचनामा भी किया जायेगा यह निर्देश जारी हुए हैं इसके बाद क्षतिपत्र तैयार किया जायेगा और कृषक का नाम,खसरा,रकबा,नुकसानी,प्रतिशत आदि का विवरण भी वहां किया जायेगा.

श्री रामनिवास रावत - यह भाषण हो गया.

श्री रामपाल सिंह - आप श्रवण करें. ध्यानपूर्वक सुनिये.कमियां सुधारी हैं.

अध्यक्ष महोदय - आप उत्तर सुन लें.

श्री रामपाल सिंह - माननीय विधायक जी ने जो पूछा है उसका जवाब दे रहा हूं. क्षतिपत्रक का प्रकाशन पंचायत भवन पर कराया जाये यह भी निर्देश कर दिये हैं. यह भी बहुत बड़ी उपलब्धि है सरकार की. आप इसकी तारीफ करेंगे तो हमें अच्छा लगेगा. सरकार किसानों के लिये काम कर रही है. सूची लगाने के बाद हमने कहा कि दावे आपत्ति लो और उनको शामिल कीजिये किसान को जवाब दीजिये. वहीं पर निराकरण कीजिये शिकायत यहां तक नहीं आनी चाहिये.

(..व्यवधान..)

अध्यक्ष महोदय - इतनी अधीरता ठीक नहीं है. सबका नंबर आयेगा जब मैं कह रहा हूं तो आप अधीरता न करें. पहले माननीय मंत्री जी का जवाब आयेगा फिर रावत जी पूछेंगे इसके बाद जो लिस्ट है इस लिस्ट से मैं नाम पुकारूंगा इसके बाद हाथ उठाने वाले सदस्यों को अनुमति दूंगा. कृपा करके बिल्कुल भी उतावलापन न करें. माननीय मंत्री जी.

श्री रामपाल सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश में सरकार की तरफ से किसानों के हित में निर्णय लिये गये उनका यह प्रत्यक्ष उदाहरण है कि हम लोग यहां पर काम कर रहे हैं. क्षति-पत्रक के बाद फिर राशि की मांग करेंगे तहसीलदार केस बनाएंगे वह राशि मांगेगे उसमें ई पेमेन्ट के द्वारा राशि किसानों के खाते में जमा कर दी जाएगी, यह हमने व्यवस्था दी है. इसी तरह यह भी तय कर दिया है कि इनके जमाने में कहीं चार-सौ-पांच सौ बंटते थे आज मुख्यमंत्री जी ने तय कर दिया है कि किसी भी किसान को 2000 रूपये से कम नुकसान की राशि नहीं देंगे.

श्री रामनिवास रावत--यह बोलने का तरीका गलत है, यह तो किसानों के साथ कैसा मजाक कर रहे हैं.

(व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--मंत्री जी आप उत्तर को संक्षेप में करिये.

श्री रामपाल सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, बहुत से सवाल पूछेंगे मैं उनका समाधान पहले से ही कर रहा हूं और भी दूसरे प्रश्न कर सकें मैं आपका सहयोग कर रहा हूं. अध्यक्ष महोदय, जो निर्देश जारी किये हैं.

श्री रामलखन यादव--इन निर्देशों का धरातल पर अमल हो रहा अथवा नहीं हो रहा है, यह देखना चाहिये.

श्री रामपाल सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह तय कर दिया है कि कितना भी छोटा किसान क्यों न हो उनको 2000 रूपये से कम राशि नहीं देंगे. इसी राशि आरबीसी (64) में जो प्रावधान किया गया है उसकी जानकारी माननीय सदस्यों को उपलब्ध करवा देंगे, यह विषय पहले ही दिन आना था, यह विषय विलंब से लिया इसके लिये धन्यवाद, लेकिन हमने खुद ही इसकी पहल की. पिछली बार भी पहल कर निवेदन किया था.

अध्यक्ष महोदय--आप इसके पहले अपनी बात उठाएं मैंने इसलिये आपसे अनुरोध किया था कि सभी इसमें पूछ लें ताकि एक समेकित उत्तर आ जाए, पर उसके लिये भी आप लोग राजी नहीं हुए . मंत्री जी समेकित उत्तर ही पढ़ रहे हैं. कृपया करके स्पेसिफिक प्रश्न पूछें.

श्री रामनिवास रावत--माननीय अध्यक्ष महोदय, आज प्रदेश में भारी ओलावृष्टि हुई है मंत्री जी ने भी स्वीकार किया है. कई जगहों पर कल जैसे खरगापुर विधान सभा क्षेत्र में भी ओलावृष्टि हो गई, इसमें 14 लोग मर गये हैं अब मरने वालों की संख्या 16 हो गई है. मैं मंत्री जी से यह बात जानना चाहता हूं कि प्रारंभिक आंकलन के अनुसार पूरे प्रदेश में कितनी राशि की फसलों का नुकसान किसानों का हुआ है. आपने राशि का बता दिया है कि एक माह में उपलब्ध करवा देंगे. दूसरा प्रश्न यह है कि राहत राशि खातों में पहुंचने के बाद बैंक में किसी किसान पर कर्ज होता है तो उनके ऋण पेटे में समायोजित कर देती हैं. क्या मंत्री जी ऐसा आदेश सरकार की तरफ से निकालेंगे जो किसानों को राहत की राशि दी जा रही है किसी भी किसान के ऋण पेटे में समायोजित नहीं की जाएगी. तीसरा प्रश्न प्रदेश में सदन चल रहा है आपने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री जी इसके लिये दौरा कर रहे हैं, हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं है. अभी माननीय मंत्री जी का भी जवाब मैंने सुना है. भ्रमण के दौरान माननीय मुख्यमंत्री जी ने कुछ घोषणाएं की हैं ओलापीड़ितों के लिये 1 रूपये किलो गेहूं-चॉवल-नमक दिया जाए, कर्ज वसूली पूरी तरह से स्थगित रहेगी, बिजली के बिलों की वसूली भी स्थगित रहेगी, किसानों की बेटी की शादी के लिये 25 हजार रूपये का राहत राशि दी जाएगी.

श्री रामनिवास रावत- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,राजस्‍व,जिला पंचायत और कृषि तीनों विभाग संयुक्‍त सर्वे करेंगे,पीडि़तों की लिस्‍ट हर पंचायत में चस्‍पा होगी, प्रति हेक्‍टेयर 15 हजार रूपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी, 100 प्रतिशत नुकसान मानकर मुआवजा दिया जाएगा, तालाब अन्‍य निर्माण के जरिए मजदूरी की व्‍यवस्‍था की जाएगी और किसानों का ब्‍याज सरकार भरेगी एवं आगामी वर्ष में खाद, बीज पर कोई ब्‍याज नहीं लिया जाएगा ।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब सदन चल रहा है,सदन के बाहर घोषणा की है, मैं चाहता हूं कि यह घोषणाएं सदन में आना चाहिए हूं । माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने भी अपने जवाब में घोषित कर दिया है, मेरा सीधा सीधा प्रश्‍न है,दो प्रश्‍न मैंने पहले कर दिए, यह जो घोषणाएं हैं, नम्‍बर 1 ओलापीडि़त किसानों को एक रूपए किलो गेंहू,चावल,नमक इसके आादेश की कॉपी, क्‍या सरकार ने इसके आदेश प्रसारित कर दिए, इसके आदेश की कॉपी हम सभी सदस्‍यों को चाहिए? किसानों की कर्ज वसूली पूरी तरह से स्‍थगित रहेगी, इसके आदेश की कॉपी चाहिए ?

अध्‍यक्ष महोदय- घोषणाओं के बारे में आप इकट्टा पूछ लीजिए ।

श्री रामनिवास रावत- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,मैं आदेश की कॉपी मांग रहा हूं, इसलिए पढ़ कर बता रहा हूं ।

अध्‍यक्ष महोदय- एक बार पढ़ दिया, दोबारा फिर आप पढ़कर बता रहे हैं, उतनी देर में वह भूल ही जाएंगे ।

श्री रामनिवास रावत- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,जब सदन चल रहा है तो सदन के बाहर इस तरह घोषणाएं नहीं होना चाहिए, यदि हो भी गई हैं तो क्‍या इन घोषणाओं के परिपालन में आदेश जारी कर दिए गए हैं,बिजली के बिलों का स्‍थगन,किसान की बेटी को 25 हजार रूपए और पीडि़तों की लिस्‍ट हर पंचायत पर चस्‍पा की जाएगी ।

अध्‍यक्ष महोदय- आप इकट्टा पूछ लें,आप सीधा पूछ लें कि जो घोषणाएं हुई हैं, उनके कौन कौन से आदेश जारी हो गए हैं ।

श्री रामनिवास रावत- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,क्‍या माननीय मंत्री जी, मुझे इन घोषणाओं की कॉपी उपलब्‍ध कराएंगे, यदि आदेश जारी हो गए हैं तो सभी सदस्‍यों को तुरन्‍त उपलब्‍ध करा दें, जिससे आपकी घोषणाओं का जमीन पर पालन कराने में सदस्‍य भी सहभागी बन सकें ।

डॉं. गौरीशंकर शेजवार- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने जो दौरे किए हैं और उन्‍होंने जो घोषणाएं की हैं, हम उनका आभार मानते हैं । माननीय अध्‍यक्ष महोदय,मैं जिस बात को कहना चाहता हूं, माननीय मुख्‍यमंत्री जी दौरे पर जाएंगे,पीडि़त व्‍यक्तियों से मिलेंगे, ओला पीडि़तों से मिलेंगे तो क्‍या वहां पर घोषणाएं नहीं करेंगे, जो आप ऐसी आपत्ति कर रहे हैं ।

श्री रामनिवास रावत- फर्जी घोषणाएं करते हो,प्रदेश के किसानों को बरगलाते हो । (व्‍यवधान)

डॉं गौरीशंकर शेजवार- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दूसरी बात यह है कि आज तक कौन कौन से आदेश देने की परंपरा है, आदेश उपलब्‍ध कराने की परंपरा कब रही है । (व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा ध्‍यानाकर्षण है .......

(व्‍यवधान)...अध्‍यक्ष महोदय- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,इतने सीनियर होते हुए,संसदीय प्रक्रिया का ज्ञान होते हुए भी व्‍यवधान पैदा कर रहे हैं ।

अध्‍यक्ष महोदय- आप बैठ जाइए,अब उत्‍तर जान लें, माननीय मंत्री जी ।

श्री सचिन यादव- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक भी घोषणा पर अमल नहीं किया गया है ।

अध्‍यक्ष महोदय- बैठ जाएं तोमर जी ।

श्री रामपाल सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सम्‍मानीय रावत जी ने जो प्रश्‍न किया है, एक तो राशि का मैंने बता दिया है दूसरा ......

श्री रामनिवास रावत- बता दिया है, वह तो मुझे मालूम है आदेश की कॉपी...

श्री रामपाल सिंह- एक मिनट आप सुनें आपको देंगे, आप जरा सुनिए जरा कृपा करें, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 1086 गांव के नुकसान की जानकारी मिली है, 25 मकान छति का मैंने बता दिया है, 14जनहानि हुई है, उनको 4-4 लाख रूपए देंगे । माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 128 पशु हानि हुई है, उनको भी आर.बी.सी. 6.4 के माध्‍यम से राशि देंगे । आपने क्षति के आंकलन का कहा है, क्षति का आंकलन कागजी नहीं होता है, वास्‍तव में जो अमला हमने बताया है, वह गांव गांव,खेत खेत में जा रहा है और क्षति का पत्रक तैयार कर रहा है, उसको विधिवत् यहां भेजेंगे और उसका आंकलन जब आएगा, उसकी राशि का हम आपको उल्‍लेख कर पाएंगे ।

श्री रामनिवास रावत- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रारंभिक आंकलन फौरी तौर पर फील्‍ड से मंगाया जाता है,आपके नियमों में भी यह व्‍यवस्‍था है ।

अध्‍यक्ष महोदय- यह बहस का विषय नहीं है, जो वह कह रहे हैं, वह सुन लीजिए,सभी को अलाऊ करेंगे, धीरज तो रखिए अवस्‍थी जी ।

श्री रामपाल सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अब वास्‍तविक क्षति का आंकलन होगा, टीमें बनी हुई हैं और जैसे ही जिले से राशि की मांग आएगी, किसानों का विधिवत् केस बनेगा, वास्‍तविक नुकसान होगा, हम राशि भेजेंगें और जैसे ही आंकड़े आएंगे, हम राशि भेजेंगे, अभी गांव की जानकारी मैंने आपको उपलब्‍ध करा दी, दूसरा अध्‍यक्ष महोदय, इनके प्रश्‍न का दूसरा उत्‍तर है ।

श्री रामनिवास रावत - अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍नों के उत्‍तर आ जायें. आप क्‍यों जल्‍दी करवा रहे हैं ?

अध्‍यक्ष महोदय - जल्‍दी तो करना पड़ेगा. (व्‍यवधान)

श्री राम निवास रावत - आपकी तो कृपा चाहिए.

अध्‍यक्ष महोदय - दूसरा प्रश्‍न कौन-सा ? बिना भाषण के, एक ही प्‍वाइन्‍टेड प्रश्‍न पूछिये. (व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत - पाइन्‍टेड यही थे. एक तो मैंने यह पूछा था कि प्रारम्भिक आकलन नहीं बता पाये. दूसरा मैंने पूछा कि जो राहत राशि बैंकों में भेजी जायेगी, वह किसानों के ऋण से काट ली जाये और सबसे महत्‍वपूर्ण जो घोषणा की है, उसके आदेशों की कॉपी दी जाये. आपने भी अपने वक्‍तव्‍य में कहा है कि इनके आदेशों की कॉपियां सदस्‍यों को चाहिए क्‍योंकि आपके प्रशासन की हालत खराब है और सदस्‍यों को कॉपी नहीं मिलेगी तो सब झूठी घोषणाएं हैं, असत्‍य भाषण कर रहे हो. आप जो घोषणाएं करेंगे, क्‍या आप सदन के सदस्‍यों को अवगत नहीं करायेंगे ?

श्री लोकेन्‍द्र सिंह तोमर - मान्‍यवर महोदय, मैं रावत जी से पूछना चाहता हूँ कि मध्‍यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी. जितने निर्माण कार्य (व्‍यवधान)

श्री शंकरलाल तिवारी - विपक्ष के लोग कुछ सुनना नहीं चाह रहे हैं. कांग्रेसी कोई बात सुनना नहीं चाह रहे हैं. केवल हंगामा कर रहे हैं. इनका मकसद केवल हंगामा करना है. (व्‍यवधान)

श्री नीलेश अवस्‍थी - आप घोषणा कर रहे हैं तो आपको कॉपी देने में क्‍या दिक्‍कत है.

श्री सचिन यादव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, रोना रो रहे हैं, हर बार, सदन में जब भी कोई मुद्दा आता है तो हर बार ये विषय की गम्‍भीरता को समाप्‍त कर देते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - सुन लें, उनके महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न हैं. पहले उनके उत्‍तर सुन लें.

श्री रामपाल सिंह - आप अपने अन्‍दर उत्‍तर सुनने की क्षमता उत्‍पन्‍न करें तो अति कृपा होगी. विद्वान सदस्‍य श्री रावत जी जो कह रहे हैं नई कॉपी की जरूरत नहीं है. जब सूखा पड़ा था, 80 प्रतिशत पहले ही सूखा घोषित कर दिया था, कन्‍यादान के पहले से आदेश हैं. (व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत - आदेशों की कॉपी चाहिए.

श्री रामपाल सिंह - पुराने आदेश पर्याप्‍त हैं. (व्‍यवधान)

श्री लोकेन्‍द्र सिंह तोमर - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कल ही पंधाना में 90 जोड़ों की शादियां हुई हैं, अब उसमें आदेश मांगोगे. (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय - मेरा माननीय सदस्‍यों से आग्रह है कि इन्‍ट्रप्‍शन न करें. बहुत से सदस्‍यों को बोलना है इसलिए कहीं न कहीं सारी बातें आ जायेंगी. माननीय मंत्री जी, कृपा करके थोड़ा धीरज रखेंगे. (व्‍यवधान)

श्री शंकर लाल तिवारी - अध्‍यक्ष महोदय, श्री रामनिवास जी छपने लायक बहुत बोल चुके हैं. कांग्रेस पक्ष खूब कर चुकी ओले के मामले में 'हाय हुसैन हम न हुए'. आप यह बता दें कि एक भी बेटी की शादी हुई हो. (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय - आप संक्षेप में वक्‍तव्‍य दें.

श्री रामनिवास रावत - यह आपत्तिजनक है. मेरी यह आपत्ति नहीं है. मुझे तिवारी जी की बुद्धिमता पर तरस आता है. प्रदेश के किसानों के बारे में क्‍या सोचते हैं, मुझे बड़ा दुख है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूँ कि इसको प्रोसिडिंग से मत निकालियेगा. तिवारी जी जो भी बोलेंगे, वह पूरा लिखा जाये. (व्‍यवधान)

श्री सुखेन्‍द्र सिंह - आप अध्‍यक्ष महोदय पर छोड़ दें कि क्‍या लिखना है, क्‍या नहीं लिखना है. तिवारी जी, आप व्‍यापारियों के विधायक हैं. आपको किसानों की पीड़ा नहीं समझ में आयेगी. आप खेतों में नहीं जाते हैं. (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय - कृपया बैठ जायें.

श्री तरूण भनोत - आप लोग मंत्री बनने के लिए कर रहे हो.

अध्‍यक्ष महोदय - भनोत जी आप बैठ जाएं. (व्‍यवधान)

श्री शंकर लाल तिवारी - बीजेपी का एक-एक विधायक मंत्री है.

डॉ. रामकिशोर दोगने - इनकी कोई नहीं सुन रहा है तो विधायकों की कौन सुनेगा. तिवारी जी अभी मंत्री बनने में समय लगेगा. (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय - तिवारी जी बैठ जाइये. आप सीधी चर्चा नहीं करेंगे. मेरा सदस्‍यों से अनुरोध है कि सदन का समय व्‍यर्थ न करें और मेरा प्रश्‍न पूछने वाले सदस्‍यों से भी आग्रह है कि वे अब क्रास क्‍वेश्‍चन्‍स न करें. सब लोग और भी दूसरे सदस्य होशियार हैं. वह बात करेंगे जो रह जायेंगे प्रश्न , वह पूछ लेंगे. सब प्रश्न आपको ही नहीं पूछना है. मंत्री जी से भी अनुरोध है कि बहुत संक्षेप में सभी सदस्यों के उत्तर दे दें.

श्री रामपाल सिंह -- अध्यक्ष महोदय, जो चिंता रावत जी की है, एक तो रावत जी जो कह रहे हैं, यह सूखा संबंधी निर्देश राजपत्र में पहले से जारी है, उसमें यह सब सुविधायें शादी, सस्ते अनाज की हैं और काफी जिले एवं तहसीलें उसमें शामिल हैं. उसका अध्ययन आप कर लेंगे. दूसरा हम मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद देंगे, निर्देश तो पहले से जारी है और भी जो उन्होंने किसानों के हित में बड़े साहसिक निर्णय लिये हैं. उनके भी निर्देश आरबीसी 6 (4) में संशोधन करेंगे. आदेश की पहले से कोई परंपरा रही नहीं है,लेकिन आपको आदेश की प्रति जब आदेश होंगे, तो उसकी प्रति जरुर हम आपको पहले भिजवायेंगे. यह हम आपको पूरा विश्वास दिलाते हैं.

अध्यक्ष महोदय -- उनका एक प्रश्न और था. ..

श्री रामनिवास रावत -- मंत्री जी, आदेश नहीं हुआ ना. यही तो मैं चाहता हूं.

अध्यक्ष महोदय -- आप कृपया बैठ जायें.

श्री रामनिवास रावत -- मैं यही तो कह रहा हूं कि आप असत्य घोषणायें करते हैं. मुख्यमंत्री जी असत्य घोषणायें करते हैं.

..(व्यवधान)..

उच्च शिक्षा मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्ता) -- ..मध्यप्रदेश सरकार के आदेश हो गये. यह कोई आपकी सरकार थोड़ी है कि मुख्यमंत्री जी की नहीं चलगी.

अध्यक्ष महोदय --श्री निशंक कुमार जैन, कृपया अपना प्रश्न करें. ..(व्यवधान).. निशंक कुमार जैन के अलावा किसी का नहीं लिखा जायेगा.

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय, एक बैंकों वाले प्रश्न का उत्तर और आ जाये.

अध्यक्ष महोदय -- अब यह प्रश्न कोई दूसरे सदस्य पूछ लेंगे.

श्री रामनिवास रावत -- मंत्री जी, बैंक्स राहत राशि के पैसे को ऋण में समायोजित कर लेती हैं.

अध्यक्ष महोदय -- रावत जी, कृपया बैठ जायें. आपके इस प्रश्न का उत्तर आ जायेगा, इतने लोग हैं, इनमें से कोई भी पूछ लेंगे. क्या आप ही प्रश्न पूछ लेंगे सब की तरफ से.

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय, जो प्रश्न पूछा था, उसका ही उत्तर आ जाये. आप इस प्रश्न का ध्यान रखना, उत्तर नहीं आया है.

अध्यक्ष महोदय -- ध्यान रखा है मैंने.

श्री निशंक कुमार जैन (बासौदा) -- अध्यक्ष महोदय, मैं राजस्व मंत्री जी की भावनाओं से बिलकुल सहमत हूं और आपकी सहृदयता और सरलता पर हमें कहीं कोई संदेह नहीं है. मगर आप जो बात बोलते हैं, जो बात आप चाहे सदन में बोलें या सरकार के तौर पर बोलें, उसको अमलीजामा आपके अधिकारी, कर्मचारी नहीं पहना रहे हैं. आज सुबह की ही बात है. कल रात गंजबासौदा विधान सभा क्षेत्र में ओले गिरे. उसी के लिये मैंने आपसे अनुरोध किया था कि मुझे जाना है. 80 से 90 प्रतिशत नुकसान था गांव में और आपके तहसीलदार ने कह दिया कि 30 से 40 प्रतिशत नुकसान नहीं है. अब मुझे समझ में नहीं आता कि राजस्व मंत्री जी सही बोल रहे हैं या तहसीलदार सही बोल रहे हैं या मुख्यमंत्री जी सही बोल रहे हैं. दूसरी बात पीछे से बिजली विभाग के अधिकारी कर्मचारी जा रहे हैं, बिजली काट रहे हैं, सहकारिता वाले कर्मचारी मोटर साइकिल उठा रहे हैं. अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मंत्री जी से अनुरोध है कि सदन में आप घोषणा कर दें कि किसी की भी सहाकारिता की वसूली नहीं की जायेगी. किसी की बिजली की वसूली नहीं की जायेगी और एक रुपये किलो गेहूं और चावल रावत जी ने कहा और मंत्री जी आपने भी कहा, वह शीघ्र वितरित किया जायेगा. और पिछली बार का जो अनुभव है कि एक खेत में दो तरह का मुआवजा नहीं दिया जायेगा, क्योंकि एक किसान भाजपा का कार्यकर्ता है और दूसरा किसान किसान है. उसको एक सा मुआवजा दिया जायेगा. नहीं तो राजस्व विभाग के पटवारी (XXX) और वे खाली खेत में खेती बता रहे हैं. राजस्व मंत्री जी, मेरा आपसे अनुरोध है कि बासौदा विधान सभा क्षेत्र में निष्पक्षता के साथ पूर्ण सर्वे करवा लें, तो आपकी बड़ी महती कृपा होगी.

अध्यक्ष महोदय -- अब आप कृपया बैठ जायें.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार -- अध्यक्ष महोदय, यह (XXX) का आरोप लगा रहे हैं, जरा क्षेत्र में जाना पटवारी आपका घेराव करेंगे आज.

श्री निशंक कुमार जैन -- अध्यक्ष महोदय, वन मंत्री जी तो जंगल के मंत्री हैं. (XXX)

1.04 बजे अध्यक्षीय घोषणा

माननीय सदस्यों के लिये भोजन विषयक

अध्यक्ष महोदय -- माननीय सदस्यों के लिये भोजन की व्यवस्था सदन की लॉबी में की गयी है. माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि सुविधानुसार भोजन ग्रहण करने का कष्ट करें.

ध्यान आकर्षण सूचना (क्रमशः)

अध्यक्ष महोदय -- मेरा एक और अनुरोध है कि यह बहुत महत्वपूर्ण विषय है, इस पर भाषण देने की आवश्यकता नहीं है. राजस्व विभाग की बजट मांगें अभी आने वाली हैं. उन पर भी चर्चा का अवसर आयेगा. कृपा करके एक एक बात अपनी क्षेत्र की कहकर के समाप्त कर देंगे. सीधा यदि कोई प्रश्न होगा और जो बहुत जरुरी होगा, क्योंकि सामान्यतः वही वही बात रिपीट होगी. तो इसलिये रिपिटेशन न हो, ताकि सदन का समय भी बच सके, कृपया ऐसा ध्यान रखेंगे.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार -- अध्यक्ष महोदय, यह जो निशंक कुमार जी ने बोला है, यह विलोपित किया जाये. यह अकारण फालतू की बातें करते हैं, इसका कोई औचित्य नहीं है, कृपया उनके द्वारा कहे गये शब्दों को विलोपित किया जाये. यह गलत बात है.

..(व्यवधान)..

इंजी. प्रदीप लारिया-- अध्यक्ष महोदय, निशंक कुमार जैन किसानों के प्रति कितने गंभीर है इसी बात से पता चलता है कि वह अपनी सीट से प्रश्न पूछकर के चले गये हैं.

अध्यक्ष महोदय--मैंने उन शब्दों को कार्यवाही से निकाल दिया है.कृपया सहयोग करें.

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ.नरोत्तम मिश्र) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा यह कहना है कि माननीय निशंक कुमार जैन, सदस्य थे, उन्होंने कहा कि..

अध्यक्ष महोदय-- मैंने वह कार्यवाही से निकाल दिया है.

डॉ.नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष जी, मैं दूसरी बात कह रहा हूं. उन्होंने कहा कि मैं बाकी सम्मानीय सदस्यों का ध्यानाकर्षित कर रहा हूं कि आज रात को उनके यहां पर ओले गिरे. उसमें 80 प्रतिशत किसानों की फसल को नुकसान हुआ है, किसानों के बिजली के कनेक्शन काटे जा रहे हैं..अध्यक्ष महोदय, वे स्वयं अभी तक क्षेत्र में गये नहीं है. अध्यक्ष जी आप रिकार्ड उठाकर के देख लें आज की बात निशंक जी ने कही है. मैं आज की बात कर रहा हूं. और उन्होंने घोषणा भी कर दी कि 80 प्रतिशत नुकसान उनके क्षेत्र में हुआ है. यह इस बात का द्योतक है कि किस तरह से बनावटी बातें सम्माननीय सदस्य कर रहे हैं. नुकसान वाली बात अगर कोई होती है, तो राजस्व मंत्री जी विदिशा जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं, विदिशा जिले से सांसद भी रहे हैं. उनके पास में एक एक चीज की जानकारी है, वे एक एक जानकारी देने का प्रयास कर रहे हैं.

श्री रामनिवास रावत -- जरूरी नहीं है कि व्यक्ति वहां जब जाये तभी आंकलन की जानकारी दे, सूचना तंत्र से भी जानकारी हासिल की जाती है.

डॉ.नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष महोदय, निशंक जी जिन्होंने सवाल किया है वह कहां हैं, सदन में तो उपस्थित नहीं है.

श्री रामनिवास रावत-- इस तरह से तो मंत्री जी सदन में बात उठाने से रोकने का प्रयास कर रहे हैं.

डॉ.नरोत्तम मिश्र-- निशंक कुमार जैन जी कहां हैं ? अगर मैं गलत कह रहा हूं तो वह जवाब दें.आप क्यो खड़े हो रहे हैं. मैं निशंक कुमार जैन का नाम लेकर के कह रहा हूं. असत्य वाचन करते हैं.

अध्यक्ष महोदय -- डॉ.गोविंद सिंह जी अपनी बात रखेंगे.

डॉ.नरोत्तम मिश्र -- -- असत्य वाचन करते हैं, यहां पर खड़े होकर के क्यों जवाब नहीं देते.

अध्यक्ष महोदय-- सभी बैठ जायें. वरिष्ठ सदस्य डॉ. गोविंद सिंह जी खड़े हैं. उनको अपनी बात कहने दें.

श्री रामनिवास रावत-- इस तरह से आरोप लगाना. क्या सदस्य सदन में अपने क्षेत्र की बात नहीं उठायेगा. क्या उनके पास में अपने सूचना तंत्र नहीं हैं.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार-- उनको इस तरह से डिमोरलाइज करके क्या करना चाहते हैं.मेरी प्रार्थना है कि पटवारियों से हमें काम लेना है, उनसे सर्वे करवाना है, उनसे मुआवजा दिलवाना है, यह इस तरह के अनर्गल आरोप उनके ऊपर लगा रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय--डॉ.साहब आप बैठ जाएं. डॉ.गोविंद सिंह जी अपनी बात रखें.

डॉ.गोविंद सिंह(लहार) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से मैं केवल इतना पूछना चाहता हूं कि एक तो आपने कहा कि पंचायत में सूची टंगेगी उसमें आपत्ति कहां लगेगीं और उसका निराकरण कौन करेगा यह बता दें. दूसरी बात कल की स्थिति बता रहा हूं . मैं कल गांव में ही था. गांव में कल भी बैंक वालों के पास पीड़ित किसानों से वसूली न करने के शासन के आदेश अभी तक नहीं पहुंचे हैं, वसूली स्थगित के आदेश और बिजली के बिल वसूल न करने के लिये मंत्री जी आप आज ही मेरे जिले के लिये तत्काल निर्देश देंगे ? आपने आरबीसी के तहत जो राहत देने की बात की है, उसमें कितनी कितनी राशि किस किस व्यक्ति को देने की बात की है. क्या इसमें छोटे और बड़े किसानों का कोई फर्क है और कितनी कितनी राशि आप देंगे कृपा करके बताने की कृपा करें.

श्री रामपाल सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, भिंड जिले से यह सूचना आई है उसके अनुसार वहां पर 77 गांव प्रभावित हुये हैं.

श्री रामनिवास रावत-- मंत्री जी आदेश की कापी कहां है.

श्री रामपाल सिंह -- डॉक्टर साहब, आपने जो सवाल किया है, उसमें दिक्कत नहीं आने देंगे.

डॉ.गोविंद सिंह -- पूछ रहे हैं खेत की बता रहे हैं खलिहान की.मैंने जो प्रश्न किया है उसका जवाब आप दे दें.

श्री रामपाल सिंह - क्या है कि थोड़ी पुरानी उधारी है. आप भी ऐसे ही करते थे जब मंत्री थे. पुरानी दोस्ती रखनी पडेगी.

डॉ.गोविंद सिंह --अध्यक्ष महोदय, मैं पाइंटेड प्रश्न पूछ रहा हूं.

श्री रामपाल सिंह -- जब आप मंत्री थे तब हम पूर्व का पूछते थे और आप पश्चिम का बताते थे.मुझे मालूम है. लेकिन मैं उत्तर दे रहा हूं.

अध्यक्ष महोदय- आप तो उत्तर दीजिये.

श्री रामपाल सिंह -- अध्यक्ष महोदय, डॉ. साहब ने जो प्रश्न किया है उसके बारे में कहना चाहता हूं कि हमने निर्देश जारी किये हैं कि पंचायत भवन में सूची लगायेंगे, वहां जाकर के दावे आपत्ति करेंगे, वहां के सरपंच भी रहेंगे और डॉक्टर साहब आप भी वहां के सम्माननीय विधायक हैं , आप सूची को देंगे. अगर सूची नहीं लगती है तो आप लिखकर के दें तो हम सख्त कार्यवाही करेंगे. आपको पूरा भरोसा हम यहां दिलाना चाहते हैं. दूसरा बैंकों के मामले में, उनके बैंक और बिजली के जो मामले हैं उनमें मैं तो राजस्‍व विभाग की तरफ से इतना आपको विश्‍वास दिला रहा हूं कि तुरंत किसान भाईयों को सहायता राशि दी जायेगी, इस पर आप लोग अलग से जब चर्चा हो तो बैंकों का और दूसरा जो बिजली वाला है इसकी जानकारी हम प्राप्‍त करके इसका भी समाधान निकालने की पूरी कोशिश करेंगे.

श्री रामनिवास रावत-- अभी तक नहीं हुआ है न.

डॉ. गोविंद सिंह-- मैंने माननीय मंत्री जी से पूछा था कि इसमें केटेगरी आपने क्‍या, एक तो उन्‍हें रोकने के लिये जो घोषणा है आज ही जारी कर दें, दूसरा आपने किसानों में क्‍या केटेगरी की है, छोटे किसान बड़े किसान क्‍या सबको बराबर है और क्‍या, किस रेट से कितना-कितना देंगे, यह बता दें.

श्री रामपाल सिंह-- एक तो हमने तय कर दिया है 2000 रूपये से कम किसी किसान को, कितना भी छोटा किसान हो, नहीं देंगे. यह हमने तय कर दिया है, एक बड़ी खबर आपको यह बता रहे हैं. दूसरा लघु सीमांत कृषकों को हमने जो तय किया है राशि बढ़ाकर असिंचित जमीन है तो 25 से 33 प्रतिशत तक हम 5 हजार प्रति हेक्‍टेयर देंगे असिंचित पर और 33 से अधिक वाले पर 8 हजार रूपये प्रति हेक्‍टर सीमांत कृषक को देंगे और बड़े किसानों को 4500, 6800 रूपये प्रति हेक्‍टेयर के हिसाब से देंगे. सिंचित के लिये अलग से रखा गया है माननीय अध्‍यक्ष जी, 25 से 35 प्रतिशत नुकसान तक 9 हजार प्रति हेक्‍टेयर और 33 से अधिक वाले किसानों को 15 हजार रूपये प्रति हेक्‍टेयर हम देंगे. मुर्गा-मुर्गी का भी जिक्र कर सकता हूं.

अध्‍यक्ष महोदय-- नहीं रहने दीजिये.

श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार (सुमावली)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुरैना जिले के, मेरी विधानसभा के ग्राम फराह, चिरायतनी, ढोंगरपुर, मुंदावली, कांसपुरा, सिलायथा ऐसे अनेक गांवों में भारी ओलावृष्टि हुई, मैं बहुत लंबी बात नहीं करूंगा, मैं केवल आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय से यह कहना चाहता हूं कि पिछली बार भी मैंने एक प्रश्‍न किया था, माननीय मंत्री महोदय से मेरी बात हुई थी उसमें सूखे के कारण कई गांव प्रभावित थे, लेकिन गलत आंकड़े के कारण उनको मुआवजा नहीं मिल पाया, मैं केवल माननीय मंत्री महोदय से यह कहना चाहता हूं कि ऐसा न हो कि ओलावृष्टि में हुये नुकसान का ठीक तरह से आंकलन न हो पाये और फिर वह गांव छूट जायें. मैं केवल माननीय मंत्री जी से यह कहना चाहता हूं कि जो प्रशासनिक अमला है उसमें और कसावट की जाये जिससे ठीक तरह से आंकड़े निकलकर बाहर आयें.

अध्‍यक्ष महोदय-- उत्‍तर दे दिया उन्‍होंने, वह बोल देंगे.

श्री रामपाल सिंह-- इन सब चीजों को ध्‍यान में रखकर ही यह नये निर्देश जारी हुये हैं और किसी तरह की कोई शिकायत नहीं आने देंगे और मैं आश्‍वस्‍त करता हूं माननीय विधायक जी को कि किसी तरह की कमी नहीं आने देंगे.

अध्‍यक्ष महोदय-- श्रीमती उमादेवी खटीक.

श्रीमती उमादेवी खटीक. (अनुपस्थित)

अध्‍यक्ष महोदय-- मेरा सभी माननीय सदस्‍यों से अनुरोध है कि अभी हाथ न उठायें यह लिस्‍ट पूरी हो जाने दें, इसके बाद में. श्री सुंदरलाल तिवारी, कृपया संक्षेप में.

श्री रामनिवास रावत-- आपने ऐसा क्‍यों सोचा कि संक्षेप में नहीं बोलेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय-- अभी सुवह वाला विषय फिर उठा देंगे, वही चल रहा है उनके दिमाग में.

1.14 बजे उपाध्‍यक्ष महोदय (डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुये.

 

श्री सुंदरलाल तिवारी-- अध्‍यक्ष महोदय रीवा जिला सूखाग्रस्‍त जिला घोषित है. खरीफ की फसल नष्‍ट हो चुकी है, रवी फसल भी हमारी रीवा जिले में नष्‍ट हुई है. आज रात्रि, बीती रात करीब पौने 3 बजे पूरे जिले में अलग-अलग गांव में ओलावृष्टि हुई है, हमारे विधानसभा क्षेत्र गुढ़ में वैसा, पड़ोखर, ओटकी, बम्‍हनगवां, नीगा, छिरेहटा, डिदिया, वांसा, बांसी, चुआं, टीकर, शुकलगवां, गड़ागांव, तमरा, दुआरी, गुढ़, बदवार, हर्दी, जल्‍दर, बांधी इस तरह के सेकड़ों गांव इस ओलावृष्टि से प्रभावित हुये हैं तो मेरा यह कहना है आपके माध्‍यम से माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय माननीय मंत्री जी से कि अविलंब सर्वे कराकर और सही ढंग से इनका सर्वे कराया जाये जो वास्‍तविक क्षति हुई उसका मूल्‍यांकन कराकर हमारे क्षेत्र के और रीवा जिले के किसानों को क्षतिपूर्ति अविलंब दिलवाने का कष्‍ट करें.

उपाध्यक्ष महोदय--यह तो सुझाव हो गया. आपका प्रश्न क्या है?

श्री सुन्दरलाल तिवारी--उपाध्यक्ष महोदय, एक बात और कहनी है कि जो सर्वे का काम होता है और फिर उस हिसाब से मुआवजा वितरण का काम होता है. पटवारी से सर्वे कराते हैं और आपने बताया कि बहुत सा अमला रहता है. फिर यह मामला तहसीलदार के पास जाता है. फिर यह मामला एसडीओ के पास जाता है. फिर कलेक्टर के पास जाता है.

उपाध्यक्ष महोदय--तिवारी जी, हम नहीं समझ पा रहे हैं कि आपका प्रश्न क्या है? यह तो आपने प्रक्रिया बता दी.यह तो मंत्रीजी को मालूम है.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--यह प्रक्रिया में ही जो गड़बड़ है वह निवेदन करना चाहता हूं.

उपाध्यक्ष महोदय-- क्या गड़बड़ी है वह ही प्रश्न पूछ लीजिए. प्वाइंटेड पूछ लीजिए.

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- अगर किसी किसान के खेत को छोड़ दिया गया है. उसका सर्वे नहीं किया गया. वह संतुष्ट नहीं है तो उन्हीं रेवेन्यू अधिकारियों के पास आप पुनः भेजते हैं कि आप आवेदन दें.मेरा मंत्रीजी से प्रश्न है कि ऐसी कोई व्यवस्था करेंगे कि सर्वे और वितरण की टीम में जो अधिकारी लगे हैं, उनसे हटकर चाहे जिला स्तर पर एक ट्रिब्यूनल बने या आप कोई व्यवस्था करें जहां किसान अपना...

उपाध्यक्ष महोदय-- फिर आप भाषण देने लगें. आप भी समझ रहे हैं, आप क्या कह रहे हैं, हम भी समझ रहे हैं. आप मंत्रीजी से प्रश्न पूछ लीजिए. आप प्रश्न पूछने की मुद्रा में आते हैं फिर भाषण देने लग जाते हैं. (व्यवधान)

श्री सुन्दरलाल तिवारी--हमारा प्रश्न यह है कि जो अधिकारी सर्वे में शामिल रहते हैं उनके सर्वे से अगर किसान संतुष्ट नहीं है तो क्या कोई ट्रिब्यूनल या इस तरह की व्यवस्था करेंगे कि उन अधिकारियों से हटकर किसान आवेदन दे और वह विचार करे कि सही हुआ है कि गलत हुआ है.

उपाध्यक्ष महोदय-- मंत्रीजी, अगर किसान संतुष्ट नहीं है तो आप कोई दूसरी व्यवस्था करेंगे?आपका प्रश्न आ गया.

श्री रामपाल सिंह--उपाध्यक्षजी, माननीय तिवारीजी के पुराने अनुभव हैं. पहले कच्ची कलम से लिखा जाता था फिर राजस्व विभाग अकेला सर्वे करता था. इन सब चीजों को ध्यान में रखकर सरकार ने एक मजबूत व्यवस्था की है. अब पंचायत भवन में सूची लगेगी. दावे-आपत्ति में जनता की भी सहभागिता की है. सरपंच,मुकद्दम,चौकीदार,पटेल सब लोगों को जोड़कर पारदर्शिता की गई. इसलिए कोई गड़बड़ी नहीं होगी. शासन की ओर से बहुत अच्छी व्यवस्था की है.

उपाध्यक्ष महोदय--माननीय मंत्रीजी, जो तिवारी जी पूछ रहे हैं कि जो व्यवस्था आपने बनायी उससे यदि किसान संतुष्ट नहीं है तो कहीं और अपील कर सकता है?

श्री रामपाल सिंह-- उपाध्यक्ष महोदय, पहला ग्राम पंचायत में सूची लगेगी, वहां भी आपत्ति कर सकते हैं. यदि वहां सुनवाई नहीं होती तहसील और अनुविभागीय अधिकारी को आपत्ति कर सकते हैं और कार्रवाई होगी.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--उपाध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं आया है.

उपाध्यक्ष महोदय-- उत्तर आ गया है. अगर किसान संतुष्ट नहीं है तो एस़डीएम को, तहसीलदार को आवेदन कर सकता है.

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- वो ही रेवेन्यू विभाग को फिर आप आवेदन देने की बात कर रहे हैं. किसान को जिससे निष्पक्ष न्याय मिल सके ऐसा कोई ट्रिब्यूनल या जिला स्तर पर ऐसी व्यवस्था करेंगे?

उपाध्यक्ष महोदय--तिवारीजी, आप स्वयं अधिवक्ता हैं. बड़े विद्वान, अऩुभवी हैं. क्या इसके लिए कोई ट्रिब्यूनल बनाया जा सकता है निचले स्तर पर?

श्री सुन्दरलाल तिवारी--उपाध्यक्ष महोदय, बनाया जा सकता है. मेरा यह कहना है कि आप इसी आरबीसी में संशोधन करिये.

श्री रामपाल सिंह-- उपाध्यक्ष महोदय, किसानों की चिन्ता के लिए मध्यप्रदेश की सरकार कृतसंकल्पित है. उसने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है और जनता को भी शामिल किया है, सरपंच को,जनपद सदस्य को भी शामिल किया है, आपको सम्मान करना चाहिए.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--उपाध्यक्ष महोदय,प्रश्न क्या है और आप जवाब क्या दे रहे हैं.

उपाध्यक्ष महोदय--चिन्ता के लिए इनको भी तो धन्यवाद दे दीजिए.ये चिन्तित तो हैं.

श्री रामपाल सिंह--उपाध्यक्ष महोदय, आप बहुत गंभीर हैं. (व्यवधान)

श्री सुन्दरलाल तिवारी--उपाध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न का जवाब नहीं मिला.

उपाध्यक्ष महोदय--आप तो ऐसा प्रश्न पूछ रहे हैं कि दिनभर चर्चा हो सकती है.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--उपाध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह है कि जो आप कह रहे हैं, यह व्यवस्थाएं तो हैं लेकिन पीड़ित किसान संतुष्ट नहीं होता तो कोई स्वतंत्र एजेन्सी को इन्वाल्व करना चाहिए. वह तहसीलदार, वो ही एसडीएम, वो ही कलेक्टर इन्वाल्व है.

उपाध्यक्ष महोदय-- एसडीएम जिम्मेदार अधिकारी है.

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- उनकी जिम्मेदारी पर मैं प्रश्नचिह्न नहीं उठा रहा हूं. सवाल यह कि जो किसान असंतुष्ट है तो कहीं एक व्यवस्था बनायें जहां वह आवेदन दे और उसकी सुनवाई हो, फिर निर्णय हो जाये. उसको एक फोरम दीजिए जहां किसान संतुष्ट हो सके.

श्री नथन शाह कवरेती (जुन्नारदेव) - उपाध्यक्ष महोदय, जुन्नारदेव विधान सभा में 6 तारीख को ओलावृष्टि हुई और 7 तारीख के दौरान मैंने भ्रमण किया. मेरे क्षेत्र में चावलपानी, बमनी, दइयर, चाखला, मानेगांव, देहगांव, घाना, बिंदरई, बैलगांव, बोमलिया, आदि स्थानों में भारी क्षति हुई है. हमारे यहां एसडीएम भी दौरे पर थीं, लेकिन कहीं कहीं किसानों को उन्होंने चमकाया कि आपकी फसलें क्षति नहीं हुई हैं. परन्तु जब मैं भ्रमण में गया था तो वहां पर चने में काफी क्षति हुई थी और गेहूं को भी कहीं न कहीं क्षति पहुंची है. अभी कल फिर फोन आया है कि छिंदी मंडल में किसानों की फसलों को काफी क्षति हुई है और काफी मकान भी आंधी से उजड़े हैं. माननीय मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं कि हमारे किसानों को मुआवजा मिले.

श्री रामपाल सिंह - उपाध्यक्ष महोदय, जो विधायक जी ने चिंता की है, वे वहां के जनप्रतिनिधि हैं. अगर कहीं किसी तरह की पारदर्शिता में या किसी तरह की कोई बात है तो वह सीधे भी लिखेंगे तो वहां सीधे पत्र भी लिखेंगे और वहां के अधिकारियों को भी कहेंगे कि हमारे सम्मानीय जनप्रतिनिधि विधायक हैं. वह सूची का अवलोकन आप भी करें और कोई कमी है तो वहीं उसका निराकरण कराएं और उसके बाद भी कोई दिक्कत आती है तो यहां बताएं, उसका निराकरण करेंगे.

श्री गोवर्धन उपाध्याय (सिरोंज) - उपाध्यक्ष महोदय, विदिशा जिले की तहसील सिंरोज एवं लटेरी में दिनांक 5.3.16 को शाम को लगभग 5 बजे कई ग्रामों में बारिश के साथ साथ भारी ओलावृष्टि हुई है. इस ओलावृष्टि में फसलों का 100 प्रतिशत से ऊपर नुकसान हुआ है. बड़े अधिकारियों के साथ मैंने भी दौरा किया. दौरों में उन अधिकारियों ने भी महसूस किया है कि वाकई 100 प्रतिशत यहां पर नुकसान हुआ है. मैं यह चाहता हूं कि सिंरोज, लटेरी के जिन ग्रामों में नुकसान हुआ है, जिसमें खास तौर से अहमदाबाद खिल्ली, सिद्दीकगंज, भौरिया, किशनपुरा, गरेंठा, भीकमपुर, कोरवासा, बासखेड़ीगूगल, नारायणपुर, कचनारिया, रामनगर, पीपलखेड़ा, झूकरहौज, बरेंड़ा, सारंगपुर, असदखेड़ी, पारदा, सालपुरखुर्द, पठेरा, विशनपुर एवं तहसील लटेरी क्षेत्र के ग्राम बलरामपुर, इस्लामनगर, खलीलपुर, धरगा, सगड़ा, रूसिया जमालपुर, इन ग्रामों में ओलावृष्टि से भारी नुकसान हुआ है. खेतों की सारी फसल नष्ट हो चुकी है. यहां तक कि बच्चे, व्यक्ति और महिलाएं घायल भी हुए हैं और हम लोगों ने उनको सिंरोज का जो राजीव गांधी अस्पताल हैं वहां पर भर्ती भी करवाया है. मेरा आपसे यही निवेदन है कि इस समय किसान दुखी है, जिन गांवों में ओलावृष्टि हुई है, पिछली बार भी हम ओला से काफी दुखी हुए थे, सूखे से दुखी हुए थे. इसके अलावा बिजली के बिलों का किसानों पर भारी दबाव है कि बार-बार बिजली के बिल आते हैं, वसूली होती है और कनेक्शन डिसकनेक्ट करते हैं, उन्हें परेशान किया जाता है. उन पर केस तक बनाए गये हैं. मेरा यही प्रश्न है कि उनको मदद दी जाय और जहां पर ओलावृष्टि हुई है वहां के किसानों के बिल माफ किये जाएं.

श्री रामपाल सिंह - उपाध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी ने जो बातें ध्यान में लाई है. अधिकारियों की टीम वहां पर गठित होचुकी है. आपके साथ भी अधिकारी गये थे. विगत वर्ष भी आपने कहा था तो आपने धन्यवाद भी दिया था, पर्याप्त राशि आपके क्षेत्र में बंटी थी और कोई भेदभाव नहीं हुआ था. इस साल भी आपने जो बातें ध्यान में लाई है, उसको और माननीय विधायक जी लिखकर देंगे तो उस पर भी सीधी कार्यवाही करेंगे. चूंकि मैं वहां का प्रभारी मंत्री भी हूं तो वहां किसी तरह की कमी नहीं आने देंगे, किसान के हित में निर्णय लेंगे.

श्री गोवर्धन उपाध्याय- आपके लिए पुनः धन्यवाद इस बार भी देना चाहता हूं. मुझे भरोसा है कि आप इसे पूरा करेंगे. परन्तु जो बिजली के बिल हैं, वह माफ करना बहुत आवश्यक है. धन्यवाद.

श्री सुबेदार सिंह रजौधा - उपाध्यक्ष महोदय, मैं भी कहना चाहता हूं. अध्यक्षी जी ने एलाऊ कर दिया है कि जिनके नाम नहीं हैं और जिनके यहां पर ओले पड़े हैं उनको बुलाएंगे.

उपाध्यक्ष महोदय - श्रीमान् जी, जो अभी नाम हैं ये जब सूची समाप्त हो जाएगी, उसके बाद जो माननीय सदस्य हाथ उठाएंगे, मैं सबको अवसर दूंगा. लेकिन एक प्रश्न करने के लिए भाषण देने के लिए नहीं.

कुंवर सौरभ सिंह ( बरोहीबंद ) -- उपाध्यक्ष महोदय मेरे विधान सभा क्षेत्र में सुगमा, निटर्रा, इमलिया, कठारे, इमलाज बांधा, नैगवा, खुसरा, रमपुरा, कुड़ाई, हथकुरी, गुड़ाबाधा और बहोरीबंद विकास खण्ड में गिदुरहा, रामपाटन, कुआं, छपरा, अमांच, नैगंवा ( लखापतेरी), अमाड़ी, पाकर चरगवां, जमुनिया, मोहगंवा, सुपेली, दिहोंटा, पटवा, गाताखेड़ा, मोहतरा, क्योलरहा, कचारगांव, हाथीमार, सलैयाखुर्द में विगत दो तीन दिनों में ओलावृष्टि हुई है. माननीय आपके माध्यम से यहबताना चाहता हूं कि जैसा कि मंत्री जी कह रहे हैं कि ग्राम पंचायतों में सूची टंग जाती है सूची लेट टंगती है यह बहुत व्यावहारिक समस्या है. उसमें किसान आपत्ति नहीं कर पाता है उसमें सबसे बड़ी समस्या यह है कि वहां के पटवारी खसरों के साथ में वहां की जो राशि बनती है, तो उनकी कितनी राशि बनी है उस हिस्से को फाड़ देते हैं, केवल रकबा और कितना प्रतिशत नुकसान हुआ है इतना ही रहता है उसमें से राशि जब गायब हो जाती है तो किसान नहीं समझ पाता है. मेरा आपके माध्यम से केवल एक निवेदन है कि क्या आप एक दिन की समीक्षा कटनी जिले में रख सकेंगे.

श्री रामपाल सिंह -- उपाध्यक्ष महोदय नई व्यवस्था बनाने में दिक्कत होती है हम नया शूट भी पहनते हैं तो थोड़ा सा नया सा लगता है, नया सिस्टम बनाया है इसमें खामियां है इसको सुधारने में हमें माननीय सदस्यों का सहयोग चाहिए. जैसा विधायक जी कह रहे हैं समीक्षा करने के लिए तो हम वहां के अधिकारियों को कह देंगे कि वह विधायक जी के साथ में समीक्षा करें और कोई कमी होगी तो वह रिपोर्ट हम बुला लेंगे.

श्रीमती चन्दा सुरेन्द्र सिंह गौर ( खरगापुर ) -- माननीय अध्यक्ष महोदय मैं अभी सुन रही थी माननीय मंत्री जी बोल रहे थे कि टीकमगढ़ जिलेमें ओला वृष्टि नहीं हुई है. मंत्री जी से निवेदन है कि कल 13 तारीख को इतनी ओलावृष्टि हुई है टीकमगढ़ जिले में कि 100 ग्राम से लेकर 200 ग्राम तक का ओला गिरा है. लेकिन मुझे यह नहीं पता है कि किस विधान सभा क्षेत्र के किस गांव में ओलावृष्टि हुई है. मैं अपनी खरगापुर विधान सभा के ग्रामों के नाम बताना चाहती हूं ग्राम खरीला, सहपुरा, मऔकड़वाह, बारबरने में ओलावृष्टि बहुत हुई है इसलिए माननीय मंत्री जी से आग्रह है कि इन ग्रामों का स्रर्वे करवाकर मुआवजा देने का कष्ट करेंगे.

श्री रामपाल सिंह -- उपाध्यक्ष महोदय कल शाम तक की जानकारी और बुलवायी है परसों तक की जानकारी है लेकिन जो चिंता सदस्य की है वहां के अधिकारियों को निर्देशित करेंगे वह क्षति का आंकलन करेंगे.

श्री हरदीप सिंह डंग ( सुवासरा ) -- माननीय उपाध्यक्ष महोदय मैं यहां पर ओलावृष्टि की बात करूं तो किसानों की बात यहां पर हो रही है तो मंत्री जी भी यहां पर बैठे हैं, मंदसौर जिला सूखे के कारण वंचित रह गया है और उसके कारण जो मुआवजे की राहत राशि बंटना थी वह आज तक नहीं बंट पायी है. अभी रावत साहब और अन्य साथियों ने कहा है आपने उत्तर भी दिया है कि पंचायतों में लिस्ट लगाई जाती है. एक पूरी टीम गठित होती है. तहसीलदार एसडीएम साहब को रिपोर्ट देते हैं, वह रिपोर्ट फिर कलेक्टर कार्यालय जाती है और वहां से होकर कमीश्नर राशि देते हैं. जब तहसीलदार ने रिपोर्ट एसडीएम कार्यालय में पहुंचा दी हो, और कलेक्टर कार्यालय में रिपोर्ट आ गई हो तो उसमें 33 प्रतिशत से ज्यादा का नुकसान फार्मेट में भरा हो और उसकी प्रतिलिपि हमारे पास हो और उसके बाद में भी वहां के किसान मुआवजे से वंचित रह जाते हैं, जबकि हमारे पास में उसके पूरे प्रूफ है कि 33 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान हुआ है लेकिऩ उसके बाद में भी किसान कोमुआवजा नहीं मिला है . एक तो मुझे यह उत्तर दें कि वास्तव में जो रिपोर्ट गई है वह रिपोर्ट पर एक्शन क्यों नहीं लिया जा रहा है. उस रिपोर्ट पर पहले एक्शन लें. हम यहां पर किसानों की और मुआवजा राशि की बात कर रहे हैं लेकिन जो पूरा जिला बचा हुआ है. उसके बारे में एक उत्तर दे दें कि वहां पर नहीं दे रहे हैं तो क्यों नहीं दे रहे हैं दूसरे जिलों को मुआवजा मिला है तो क्यों मिला है. हमारे पास में प्रूफ है कि 33 प्रतिशत से ज्यादा वहां पर नुकसान हुआ है. इतना उत्तर दिला दें उसके बाद मैं ओलावृष्टि की बात करूंगा.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- डंग जी, बात सिर्फ एक प्रश्‍न की हुई थी और ओलावृष्‍टि की हुई थी. माननीय अध्‍यक्ष महोदय जब आसंदी पर थे तो उन्‍होंने एक प्रश्‍न की अनुमति दी थी और विषय था ओलावृष्‍टि. पुरानी बात की नहीं, आप सिर्फ ओलावृष्‍टि की बात करें.

श्री हरदीप सिंह डंग -- मैं तो वही बोलूंगा कि जांच की जाए, जहां पर ओले गिरे हैं उनको मुआवजा दिया जाए पर पहले जो प्रश्‍न है उसका उत्‍तर आ जाए तो मैं अच्‍छा समझूंगा.

श्री रामपाल सिंह -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मंदसौर जिले में निर्देश जारी कर दिए गए हैं जहां ओलावृष्‍टि और अतिवृष्‍टि से नुकसान हुआ है उसका पूरा आंकलन करें और किसान भाइयों को शीघ्र सहायता राशि दिलाने का हम प्रयास कर रहे हैं.

श्री हरदीप सिंह डंग -- यह बहुत बड़ा मुद्दा है, एक उत्‍तर तो दे दें. वह किसानों की बात है. केवल एक बात बता दें कि आखिर में क्‍यों नहीं दे रहे हैं.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- डंग जी, वह विषय इस चर्चा में नहीं है.

श्री हरदीप सिंह डंग -- चर्चा में नहीं है लेकिन वह किसानों की बात है, मैं आज यहां नहीं बोलूंगा तो कहां बोलूंगा.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- किसानों के तो बहुत सारे मुद्दे हैं. अब आप बैठ जाइये.

श्री हरदीप सिंह डंग -- यहां मंत्री जी भी बैठे हैं. इनके हाथ में पॉवर है. एक बयान तो दे दें उस पर कम से कम.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- जो माननीय सदस्‍य हाथ उठाकर अनुमति चाहेंगे उन्‍हें अनुमति दी जाएगी लेकिन एक शर्त है कि सिर्फ एक प्रश्‍न करेंगे, भाषण कोई नहीं देगा.

श्री हरदीप सिंह डंग -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, उसमें आश्‍वासन दिया गया था. मंत्री जी, कुछ तो बोल दो कि उसका क्‍या होगा.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- देखिए आसंदी से जो व्‍यवस्‍था हुई थी उसका आपको पालन करना चाहिए.

श्री जसवंत सिंह हाड़ा -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरे शाजापुर जिले में शुजालपुर विधान सभा के अंतर्गत किठोर एक गांव है, यहां पर पानी तो कम पर आंधी ज्‍यादा आई, और आंधी में उस गांव के श्री कैलाश नारायण पिता भगवती प्रसाद का मकान उड़ गया और उसमें से जो लकड़ी गिरी तो वे उसमें दब गए थे और उनके पैर में चोट आई है और जांघ भी टूट गई है तो उनका देवास में अमनदीप हॉस्‍पीटल में उपचार चल रहा है, वे अत्‍यंत गरीब हैं. इसी प्रकार से नारायण पिता सिद्धू भी गरीब आदमी है वह अजा वर्ग का है, उसके पास धंधे के लिए बकरियां थीं तो बकरी के बच्‍चे दबकर मर गए हैं. इसी तरह सूरज सिंह और गोपाल सिंह के मकानों को भी क्षति हुई है, आंशिक रूप से तो सभी गांवों में हुई है लेकिन एक गांव ज्‍यादा प्रभावित हुआ है, मैं माननीय मंत्री जी से अनुरोध करूंगा कि कैलाश नारायण का अमनदीप हॉस्‍पीटल में ऑपरेशन हो रहा है तो यदि उपचार के लिए मदद मिल जाए और नारायण पिता सिद्धू को बकरी के बच्‍चे मरने से यदि उसको कुछ मदद मिल जाए और सूरज सिंह और गोपाल सिंह के मकानों के लिए यदि सरकार की तरफ से कुछ सहायता मिल जाए तो बड़ी कृपा होगी.

श्री रामपाल सिंह -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जो चिंता व्‍यक्‍त की है पूरा उनको सहयोग कराएंगे और बकरी या और भी जो क्षति है अधिकारियों को और कह रहे हैं कि परीक्षण करें और कहां किस जिस की और जरूरत है वह सब चीजें उपलब्‍ध कराएंगे.

श्री जसवंत सिंह हाड़ा -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कैलाश नारायण के उपचार के लिए मैं चाहता हूँ.

श्री रामपाल सिंह -- उपाध्‍यक्ष महोदय, उपचार की जहां तक बात है तो हम लोग पूरा उपचार मध्‍यप्रदेश सरकार की तरफ से वैसे भी करा रहे हैं लेकिन जिनका ये उल्‍लेख कर रहे हैं उनका भी उपचार हम कराएंगे.

श्री चंद्रभान सिंह चौधरी -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, ओले से जो क्षति हुई है वह तो दिखती है मगर जो हवा और तूफान आता है और उसके कारण जो फसल गिर जाती है वह पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्‍त हो जाती है फिर उस फसल में न दाने पड़ते और जब उसकी कटाई होती है तो कुल मिलाकर उस फसल में कुछ भी नहीं निकलता. मेरा माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि जहां भी हवा और तूफान से फसल गिरी है उसको भी इसमें सम्‍मिलित करेंगे कि नहीं करेंगे ?

श्री रामपाल सिंह -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, चौधरी चंद्रभान सिंह जी पूर्व मंत्री भी रह चुके हैं और वैद्यराज भी हैं किसान भी हैं, किसानों के दर्द को वे समझ रहे हैं और इस चीज को निश्‍चित रूप से हम भी समझते हैं कि ऐसी क्षति होती है क्‍योंकि हम भी किसान हैं तो उसका भी आंकलन हम कराएंगे, जो उनकी चिंता है उसे हम ध्‍यान में रखेंगे.

श्री बाला बच्‍चन -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे यह आग्रह करने के लिए खड़ा हुआ हूँ कि माननीय हरदीप सिंह डंग जी पूरे एक दिन तक धरने पर बैठे थे, उस समय भी उनके यहां जो नुकसान हुआ उसके सर्वे के लिए टीम नहीं पहुँची, सर्वे नहीं हुआ, अभी तक मुआवजा नहीं मिला और अभी भी माननीय मंत्री जी ने उनकी बात का जवाब नहीं दिया तो कृपा करके आप उनसे जवाब दिलवाइये.

उपाध्यक्ष महोदय-- बाला बच्चन जी, चर्चा क्यों शुरु हुई, विषय क्या था, यह भी आपको ध्यान देना पड़ेगा. यह ओलावृष्टि पर चर्चा है और आसंदी पर अध्यक्ष जी बैठे थे, उन्होंने व्यवस्था दी थी. सब माननीय सदस्य जिन्होंने नाम भेजा है, एक एक प्रश्न पूछेंगे. कोई भाषण नहीं देंगे. दूसरा उसके बाद जो माननीय सदस्य हाथ उठाकर अनुमति मांगेंगे उनको भी अनुमति दी जाएगी लेकिन संक्षेप में अपनी बात रखेंगे और प्रश्न पूछेंगे.

श्री शंकरलाल तिवारी(सतना)-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, अभी अभी माननीय राजस्व मंत्री जी ने जो कहा कि आंधी आयी, मेरे सतना में भी कल रात में आंधी आयी और आसपास मैहर में तो पहले ओले भी पड़ चुके थे, मैहर का तो शुरु है पर कल जो आंधी आयी उससे सच में ओले तो छोटे थे पर उससे पूरी जो गेहूं की फसल लदी हुई थी, वह एकदम पसर गयी है और उसमें कुछ होना नहीं है इसलिए कृपापूर्वक जो अभी मंत्री जी ने कहा कि मैं उसका भी सर्वे कराऊंगाउसका भी मुआवजा दूंगा, इसके लिए मैं उनका धन्यवाद करता हूँ. मेरा मंत्री जी से एक प्रश्न है कि भगवान, प्रकृति तो हमसे रुठी है, मुख्यमंत्री जी संवेदनशील हैं, राजस्व मंत्री जी संवेदनशील हैं पर एक बिन्दु है जो आज तक चर्चा में नहीं आया..

उपाध्यक्ष महोदय-- आप वित्त मंत्री जी को क्यों छोड़ रहे हैं.

श्री शंकरलाल तिवारी-- वित्त मंत्री जी भी, आप भी हैं. आप स्वयं भी संवेदनशील हैं मेरी मदद करेंगे. मैं विनती यह कर रहा हूँ कि हम हर अकाल, हर दुकाल को स्वीकार करते हैं ,किसानों को राहत देते हैं, जितना बनता है वह करते हैं पर खेतिहर मजदूर, जब अकाल पड़ गया, जब दुकान पड़ गया, जब अन्नदाता के घर में उसकी गुठली में अन्न नहीं आया तो जो खेतिहर मजदूर उसके कामधाम में लगा रहता है उसका रोजगार भी जाता है, उसका पेट भी मरता है, किसान को तो किसी तरह आधा चौथाई मिलता है लेकिन मैं पूछ रहा हूँ कि खेतिहर मजदूरों के लिए जो इस अकाल-दुकाल में किसान के बाद सर्वाधिक प्रभावित व्यक्ति है उसके लिए भी संवेदनशील मुख्यमंत्री जी, राजस्व मंत्री जी कोई राहत, कोई नगद अनुदान कि वह भी चार महीने, छ: महीने नोन-तेल, लकड़ी,चाय की पत्ती, तम्बाकू खरीद सके, खा सके, ऐसी कोई व्यवस्था सोचेंगे, करेंगे?

उपाध्यक्ष महोदय-- आपकी बात आ गयी. यह ओलावृष्टि से प्रभावित जो किसान हैं उनके यहां काम करने वाले खेतिहर मजदूरों की आप बात कर रहे हैं. माननीय मंत्री जी, है कोई व्यवस्था?

श्री रामपाल सिंह-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, बंटाईदार और जो किसानी करते हैं,कृषि करते हैं हमारे किसान भाई, उनके लिए हम लोग एक संशोधन ला रहे हैं, उसको नियम बदल रहे हैं.

श्री शंकरलाल तिवारी-- मैं बंटाईदार की बात नहीं कर रहा हूँ. वह खेतिहर मजदूर जब वहां काम करता है, जब किसान के घर में, मेरे घर में खाना नहीं है तो उसका क्या होगा, उसकी चिन्ता चाहता हूँ, उस पर निर्णय चाहता हूँ.

श्री रामपाल सिंह-- उपाध्यक्ष महोदय, उसको सस्ते अनाज की सुविधा दी जाएगी.

श्री शंकरलाल तिवारी-- ऐसे समय में उसकी नोन तेल, लकड़ी, कपड़ा, बीमारी की दवाई ये सब बंद हो जाती है.

श्री के.के. श्रीवास्तव(टीकमगढ़)-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्री महोदय से अनुरोध करना चाहता हूँ कि टीकमगढ़ जिले में कल रात में बहुत ओलावृष्टि हुई है. टीकमगढ़ जिले की तीन विधानसभाएँ हैं जिसमें टीकमगढ़ मेरी खुद की विधानसभा, जतारा विधानसभा और खरगापुर विधानसभा इनमें ओलावृष्टि की जानकारी लगी है. गांव का पूरा अभी सर्वे का पता नहीं लगा. मैं अनुरोध करना चाहता हूँ कि क्या उसमें शीघ्र ही दल गठित करके एसडीएम, कलेक्टर को निर्देश देकर के वहां का सर्वे काम प्रारम्भ करवा लेंगे?

श्री रामपाल सिंह-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, जी हां, बिलकुल निश्चित रुप से करायेंगे.

उपाध्यक्ष महोदय-- आज आपके उठने बैठने का रिकार्ड बन जाएगा, ऐसा लगता है(हंसी)

श्री नीलेश अवस्थी(पाटन)-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी का ध्यान आकर्षित कराना चाहता हूँ कि पाटन और मझौली तहसील में सूखे के बाद अति ओलावृष्टि से हमारे कई गांव प्रभावित हुए हैं. माननीय मंत्री जी से मेरा निवेदन है कि जो शासन की मंशा है तो शासन ने नियम जारी किये हैं किसानों को राहत के लिए उसमें वास्तविक तौर पर वहां पर अमल नहीं हो रहा है. जैसे कि सूखा घोषित होने के बाद ओलावृष्टि में हमारे किसानों के पास बिजली के बिल आ रहे हैं, नोटिस भी जारी हो रहे हैं उनको जेल भेजने के, बैंक के ऋण वसूली के नोटिस भी जारी हो रहे हैं.

उपाध्यक्ष महोदय-- नीलेश आपके यहाँ ओले कब गिरे हैं.

श्री नीलेश अवस्थी-- 7 और 8 तारीख को गिरे हैं और निरंतर दौरा किया है, करीब 70 से 75 गांव हमारे क्षेत्र के प्रभावित हुए हैं. मेरा मंत्रीजी से निवेदन है कि जो शासन के नियम और जो आपने किसानों के राहत के लिए घोषणायें की है, उस पर जो अधिकारी अमल नहीं कर रहे हैं उन पर कार्यवाही करेंगे.

श्री रामपाल सिंह-- माननीय उपाध्यक्ष मेरी बात हुई थी, उसी दिन जब ओले गिरे थे, यह खेत में थे, वहाँ के कलेक्टर , अधिकारी , सम्मानीय विधायक, सांसद वहाँ मौजूद थे लेकिन जो सरकार की तरफ से जो निर्देश हैं अगर उनके पालन में कोई गड़बड़ी करते हैं तो माननीय विधायक जी लिख दें उस पर हम सख्त कार्यवाही करेंगे.

श्री नीलेश अवस्थी-- धन्यवाद मंत्री जी.

इंजी. प्रदीप लारिया(नरयावली)माननीय उपाध्यक्ष महोदय, कल मेरे विधानसभा क्षेत्र में मौठी, सेवारा, सेवारी, धौहा और लौहारी में ओलावृष्टि भी हुई है, तेज आंधी भी चली है उसके कारण फसल बिछ गई है. एक तो उसका जल्दी सर्वे हो जाए दूसरा 5 मार्च को भी राहतगढ़ विकासखंड के नरियावली विधानसभा क्षेत्र के कानोनी, सेवारा,सेवारी,धौहा , पिपरियाखंगार, मौठी , लौहारी इत्यादि गांवों में भी ओलावृष्टि हुई थी, तत्काल वहाँ पर राजस्व की टीम गई लेकिन प्रारंभिक सर्वे के जो आंकलन आए हैं. मुझे लगता है कि उसमें गड़बड़ी हुई है मेरा मंत्री जी से आग्रह है कि क्या दुबारा उसका सर्वे आजू-बाजू के आरआई और पटवारी से,जो वहाँ पंचायत में उस हलके में आरआई और पटवारी पदस्थ हैं व अन्य पटवारी की टीम बनाकर क्या सर्वे कराएंगे और जो कल ओलावृष्टि हुई है, उन गांवों का भी अतिशीघ्र सर्वे करा लिया जाएगा.

श्री रामपाल सिंह--- उपाध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जिस तरह से क्षेत्र की चिंता कर रहे हैं वह लिखकर दे दें दुबारा नहीं तिबारा सर्वे करा लेंगे और चिंता न करें क्षति का आंकलन करा लेंगे.

चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी(मेहगांव)-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मेरा माईक सही कराया जाये. उपाध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मेरा मंत्री जी से अनुरोध है कि भिंड जिले की मेहगांव तहसील में कतरोल,चिरोल,दंदरौआ,खल्ली, सुकांड, मेहरा और मढ़ईयन इन गांवों में लगभग बेर के बराबर ओले गिरे और सरसों की पकी हुई फसल जो खड़ी थी, वह वही झड़ गई इस ओले के कारण. तो क्या मंत्री महोदय, उसका सर्वे कराएंगे और उनको पर्याप्त मुआवजा दिलवाएंगे मेरा मात्र इतना अनुरोध है.

श्री रामपाल सिंह --- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, निश्चित रूप से सर्वे भी कराएंगे और दूसरा आपके माध्यम से मैं सदस्यों से निवेदन करूंगा कि तूफान, भूकंप, अतिवृष्टि भी हमारे आरबीसी में सम्मिलित है अगर ओले नहीं पानी से भी नुकसान हुआ है तो उसको भी हम सम्मिलित करेंगे और सहायता देंगे.

श्री प्रताप सिंह (जबेरा)--- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने दमोह जिले की हटा तहसील एवं दमोह तहसील के बारे में तो स्वीकार किया है कि वहाँ ओले से नुकसान हुआ है लेकिन मैं तेंदूखेड़ा तहसील के सिर्फ पांच गांव नरगुवा,खखरियाकलां, खखरियाखुर्द, हुलासपुरा,भौड़ी और झरोली में भी 5 और 6 तारीख में बड़े बड़े ओले गिरे हैं, वहाँ फसलें बिल्कुल चौपट हो गई हैं तो मैं माननीय मंत्री जी का ध्यान उस ओर आकर्षित करता हूं कि उनकी भी जांच करवाएंगे.

श्री रामपाल सिंह--- उपाध्यक्ष महोदय, जो तेंदूखेड़ा तहसील ब्लाक के पांच गांवों के नाम दिये हैं, उनका भी सर्वे कराएंगे और भी कहीं नुकसान हो तो ध्यान में लाते जायें उनका भी सर्वे करा लेंगे.

श्रीमती ममता मीना(चाचौड़ा)-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मेरी विधान सभा में चाचौड़ा और कुंभराज क्षेत्र में ज्यादा तेज हवा के कारण से काफी किसानों की फसलें उड़ गईं. जैसे कोटरा गाँव है, माड़ाखेड़ा है, झारेड़ा है कुंभराज में और चाचौड़ा तहसील में कोटरा गाँव है. जिसकी पूरी फसलें उड़ गईं और सबसे बड़ी बात है ओले भी गिरे और पानी तेज गिरा उसके कारण से, क्योंकि हमारी चाचौड़ा विधान सभा में धनिया की खेती होती है, थोड़ा सा पानी गिरने से धनिया खराब हो जाता है तो एक तो माननीय मंत्री जी उसका सर्वे करा लें. साथ ही एक तेलीगाँव में किसान अपने परिवार के साथ काम कर रहा था और उस समय आकाशीय बिजली गिरी तो उसका 15 साल का एक ही बेटा था उस पर आकाशीय बिजली गिरने के कारण से उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी और उसका पूरा मेडिकल भी हुआ. पुलिस के यहाँ एफ आई आर भी हुई तो...

उपाध्यक्ष महोदय-- आपका प्रश्न क्या है?

श्रीमती ममता मीना-- मेरा यह कहना था चूँकि काम करते वक्त उसका बेटा आकाशीय बिजली से चला गया तो उसका मुआवजा उसके परिजनों को मिलना चाहिए. ऐसा माननीय मंत्री जी कहे और पानी के कारण से जो धनिया खराब हुआ उसका भी सर्वे करवाएँ.

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