मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा षोडश सत्र

 

 

फरवरी-मार्च, 2018 सत्र

 

मंगलवार, दिनांक 13 मार्च, 2018

 

(22 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1939)

 

 

[खण्ड- 16 ] [अंक- 8 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

मंगलवार, दिनांक 13 मार्च, 2018

 

(22 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1939)

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.01 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ. सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

 

छात्रावासों में कम्‍प्‍यूटर की व्‍यवस्‍था

[जनजातीय कार्य]

1. ( *क्र. 1852 ) श्री जतन उईके : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रदेश के छिन्‍दवाड़ा के छात्रावासों में कम्‍प्‍यूटर की व्‍यवस्‍था की गई है? यदि हाँ, तो, कितने छात्रावासों में की गई है? (ख) प्रश्नांश (क) अंतर्गत कितने कम्‍प्‍यूटर सेट किस कम्‍पनी के क्रय किये गये हैं? कम्‍प्‍यूटर सेट किसके द्वारा क्रय किये गये हैं? (ग) क्‍या शासन द्वारा कम्‍प्‍यूटर क्रय हेतु निर्धारित मापदण्‍ड तय किया गया है? यदि हाँ, तो प्रति सेट का मूल्‍य बतायें तथा विज्ञापन का दिनांक व समाचार पत्र का नाम बतावें? (घ) कितने छात्रावासों में कम्‍प्‍यूटर की व्‍यवस्‍था नहीं है? वंचित छात्रावासों में कब तक कम्‍प्‍यूटर की व्‍यवस्‍था की जावेगी?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। छिन्‍दवाड़ा में 16 छात्रावासों में कम्‍प्‍यूटर की व्‍यवस्‍था की गई है। (ख) कम्‍प्‍यूटर सेट ''ACER'' कम्‍पनी के हैं, वर्ष 2015-16 में कुल 42 कम्‍प्‍यूटर सेट क्रय किये गये हैं। कम्‍प्‍यूटर सेट सहायक आयुक्‍त, आदिवासी विकास छिन्‍दवाड़ा द्वारा क्रय किये गये हैं। (ग) जी हाँ। रूपये 40,000/-, DGS &D से क्रय करने के कारण। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) 76 छात्रावासों में कम्‍प्‍यूटर की व्‍यवस्‍था नहीं है। कम्‍प्‍यूटर हेतु 28.40 लाख राशि का आवंटन प्राप्‍त हो गया है, वर्तमान में क्रय पर प्रतिबंध है, क्रय पर प्रतिबंध से छूट मिलने पर शीघ्र ही क्रय की कार्यवाही पूर्ण हो सकेगी।

अध्‍यक्ष महोदय प्रश्‍न क्रमांक 1 श्री जतन उईके.

श्री जतन उईके माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न अनुसूचित जाति और जनजाति के बालक एवं बालिका छात्रावासों में क्रय किए गए कम्‍प्‍यूटर के संबंध में था, जिसमें कुछ बातों से मैं सतुष्‍ट हूं, लेकिन मध्‍यप्रदेश सरकार का स्‍पष्‍ट निर्देश है कि 2 लाख रूपए से अधिक की खरीदी ई-टेण्‍डरिंग से की जाए, लेकिन इसमें डी.जी.एस. एंड डी. से खरीदी की गई है जो कि अनुचित है.

राज्‍य मंत्री, जनजातीय कार्य (श्री लाल सिंह आर्य) माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य को मैं बताना चाहता हूं जब यह कम्‍प्‍यूटर खरीदे गए थे, तब अधिकार थे. लेकिन अब जिस प्रकार से निर्देश आए हैं, शासन उस प्रकार से कार्यवाही करेगा.

श्री जतन उईके माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें बताया गया है कि लगभग 42 कप्‍यूटर खरीदे गए हैं. मेरी पांढुर्णा विधान सभा क्षेत्र में कितने छात्रावास में कम्‍प्‍यूटर दिए गए हैं. कृपया बताने का कष्‍ट करें.

श्री लाल सिंह आर्य माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह उत्‍तर में शायद आया है. 42 कम्‍प्‍यूटर खरीदे गए हैं 16 छात्रावासों में, शेष 76 जगह रह गई है, अभी खरीदी पर चूंकि बंदिश है, जैसे ही मार्च के बाद खरीदी प्रारंभ होगी उसके बाद शेष जगह छात्रावासों में कम्‍प्‍यूटर खरीदने की प्रक्रिया पूरी होगी.

श्री जतन उईके माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने यह पूछा था कि मेरी विधान सभा क्ष्‍ोत्र में कौन से कौन से छात्रावास में कम्‍प्‍यूटर दिए गए हैं?

श्री लाल सिंह आर्य आपकी विधान सभा पांढुर्णा के छात्रावासों को इसमें जोड़ लिया गया है, जिसमें आदिवासी बालक पाठई, रायवासा, नांदनवाड़ी, काराघाट कामठी, पांढुर्णा.

श्री जतन उईके अध्‍यक्ष महोदय, किन छात्रावासों को जोड़ा गया है, मैं यह नहीं पूछ रहा हूं, मैं केवल इतना पूछ रहा हूं कि पांढुर्णा विधान सभा क्षेत्र में किन किन छात्रावास में कम्‍प्‍यूटर प्रदाय किए गए हैं?

श्री लाल सिंह आर्य अध्‍यक्ष महोदय, इसमें कोई 2-4 साल नहीं लगना है, अभी मार्च में कुछ समय के लिए बेन लगा है, इसके बाद जैसे ही बेन खुलेगा तो पांढुर्णा विधान सभा के लिए कम्‍प्‍यूटर खरीदी की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी.

अध्‍यक्ष महोदय जल्‍दी ही कम्‍प्‍यूटर खरीद लेंगे.

श्री जतन उईके अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद.

 

 

तहसील मुख्यालय नागदा में उत्कृष्ट छात्रावास का संचालन

[अनुसूचित जाति कल्याण]

2. ( *क्र. 1115 ) श्री दिलीप सिंह शेखावत : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र. में लगभग सभी तहसील मुख्यालयों पर अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के द्वारा उत्कृष्ट छात्रावास संचालित हैं? नागदा नगर तहसील मुख्यालय होते हुए भी यहां उत्कृष्ट छात्रावास नहीं होने से यहां पर रहने वाले बालक-बालिकाओं को विभिन्न परेशानियों का सामना करना पड़ता है। (ख) यहां के अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के द्वारा संचालि‍त बालक/बालिका छात्रावासों को कब तक उत्कृष्ट छात्रावास घोषित कर दिया जावेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी नहीं। उत्‍कृष्‍ट छात्रावास योजनान्‍तर्गत विकासखण्‍ड मुख्‍यालय पर उत्‍कृष्‍ट छात्रावास संचालित किये जाने का प्रावधान है। नागदा तहसील मुख्‍यालय होने से उत्‍कृष्‍ट छात्रावास का संचालन नहीं किया जा रहा है। (ख) प्रश्‍नांश () के उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्री दिलीप सिंह शेखावत माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में आया है कि केवल ब्‍लाक स्‍तर पर ही उत्‍कृष्‍ट छात्रावास खोलते हैं, लेकिन कई योजनाओं में मैंने देखा है कि मानवीय आधार पर, आवश्‍यकताएं और जनभावना को देखते हुए भी नियमों को शिथिल करते हुए सुविधाएं देते हैं. नागदा उज्‍जैन के बाद सबसे बड़ा शहर है लगभग ढेड़ लाख की आबादी हैं उन्‍हेल और आसपास के 100 गांव और उसमें आते हैं. विशेषकर अनुसूचित जाति के हमारे भाई-बहनों को वह सुविधाएं नहीं मिलती हैं. माननीय मंत्री जी मेरा आपसे निवेदन है कि यदि नियमों को शिथिल करते हुए नागदा में जनभावना को देखते हुए यदि उत्‍कृष्‍ट छात्रावास देंगे तो ठीक होगा.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से दूसरा प्रश्‍न है कि नागदा में एक सीनियर बालक छात्रावास है उसमें केवल 20 सीट हैं. नागदा बहुत बड़ा शहर है यदि उस छात्रावास में सीटों की संख्‍या बढ़ा देंगे तो अच्‍छा होगा.

श्री लाल सिंह आर्य --माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य श्री दिलीप सिंह जी की भावना से मैं, सहमत हूं कि जनहित में और अनुसूचित जाति के बच्चों के हित में उन्होंने बात रखी है . जहां तक सीनियर छात्रावास की सीट बढ़ाने की बात है उसको हम 20 सीट से 50 सीट का करने का आदेश दे देंगे. दूसरी बात उन्होंने 1.50 लाख की आबादी के शहर की बात की, लेकिन अभी शासन के आदेश विकासखण्ड स्तर के हैं. हम लोग बातचीत कर रहे है और आगामी दिनों में इसका परीक्षण करवाकर के और किस स्तर पर लाया जाये इसके लिये भी हम प्रयास कर रहे है.

श्री दिलीप सिंह शेखावत- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी को इसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद.

बरगी परियोजना की दायीं तट मुख्‍य नहर से पेयजल व्‍यवस्‍था

[नर्मदा घाटी विकास]

3. ( *क्र. 3276 ) कुँवर सौरभ सिंह : क्या राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या कटनी जिले में नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा बरगी व्‍यपवर्तन परियोजना की दायीं तट मुख्‍य नहर से बहोरीबंद एवं रीठी पठार क्षेत्र में पेयजल हेतु पानी उपलब्‍ध कराया जावेगा? (ख) यदि हाँ, तो विधान सभा क्षेत्र बहोरीबंद की किन-किन पंचायतों में किस-किस माध्‍यम से ग्रामीणों को पेयजल उपलब्‍ध कराये जाने हेतु पी.एच.ई. विभाग के समन्‍वय से सर्वे/योजना बनाई गई है? (ग) क्‍या रीठी विकासखण्‍ड में पेयजल स्‍त्रोतों की कमी को देखते हुये नर्मदा नहर के पानी को रीठी क्षेत्र तक पहुंचाये जाने हेतु प्रश्‍नकर्ता सदस्‍य द्वारा प्रेषित पत्र के तारतम्‍य में जिला भू-अर्जन अधिकारी, जिला कटनी के पृ.पत्र क्रमांक 2745, दिनांक 09.03.2016 पर विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई? तिथिवार, कार्यवाहीवार, पृथक-पृथक विवरण दें। (घ) प्रश्नांश (क), (ख) एवं (ग) अनुसार पठार क्षेत्र में पेयजल संकट के निदान हेतु कब तक पेयजल की व्‍यवस्‍था की जावेगी?

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) वर्तमान में ऐसी कोई योजना नहीं है। बरगी व्‍यपवर्तन योजना की डी.पी.आर. में वर्तमान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। (ख) उत्‍तरांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग, कटनी के ज्ञाप क्रमांक 244/तक/57/2016, दिनांक 22.03.2016 के द्वारा कलेक्‍टर (भू-अर्जन शाखा) कटनी एवं ज्ञाप क्रमांक 222/कार्य/2018, कटनी दिनांक 22.02.2018 द्वारा माननीय विधायक को अवगत कराया गया है कि रीठी के भू-स्‍तर मुख्‍य नहर के पूर्ण प्रवाह जलस्‍तर से ऊँचे होने के कारण मुख्‍य नहर से रीठी विकासखण्‍ड को बहाव द्वारा जोड़ना संभव नहीं है। (घ) उत्तरांश (क) एवं (ग) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

कुँवर सौरभ सिंह : माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से जानना चाहूंगा कि क्या मेरे विधानसभा क्षेत्र से टनल के माध्यम से, नहरों के माध्यम से एक दायीं तट नहर निकल रही है और क्या एक इंच भी पानी हमारे क्षेत्र को मिल रहा है ?

श्री लाल सिंह आर्य -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य पेयजल की बात कर रहे हैं या सिंचाई की बात कर रहे हैं ?

कुँवर सौरभ सिंह : अध्यक्ष महोदय, मैं पेयजल और सिंचाई दोनों के बारे में बात कर रहा हूं.

श्री लाल सिंह आर्य -- किंतु आपने प्रश्न पेयजल से संबंधित किया है ? अगर सिंचाई का प्रश्न करते तो मैं उसकी तैयारी करके आता.

कुँवर सौरभ सिंह : ठीक है, आप पेयजल का ही बता दें .

श्री लाल सिंह आर्य -- माननीय अध्यक्ष महोदय, उसकी ऊंचाई बहुत है इस कारण से वहां पेयजल की व्यवस्था करना नामुंकिन है. वैसे मैंने माननीय सदस्य के प्रश्न का उत्तर प्रश्नोत्तरी में भेजा भी है.

कुँवर सौरभ सिंह : अध्यक्ष महोदय, मेरा अनुरोध है कि कई जगह सरकार ने जहां पर ऊंचाई है वहां पर पेजयल की व्यवस्था की है. क्षिप्रा-लिंक इस बात का उदाहरण है तो मेरी विधानसभा क्षेत्र में जहां पर पानी की बहुत ज्यादा दिक्कत है, 600 फिट तक पानी नहीं मिल रहा है तो क्या सरकार नर्मदा घाटी की योजना पर विचार करेगी ताकि हमारे क्षेत्र की जनता को पीने का पानी उपलब्ध हो सके.

श्री लाल सिंह आर्य-- अध्यक्ष महोदय, पेयजल की व्यवस्था नर्मदा घाटी विकास विभाग नहीं करता है. जहां विभिन्न साध्यता पानी की मिलती है, जहां पर लगता है कि यहां से पानी उपलब्ध कराया जा सकता है वहां नगरीय प्रशासन विभाग अथवा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग साध्यता के आधार पर परीक्षण के बाद यदि विभाग को लगता है कि यहां पानी आसानी से आ सकता है तो संबंधित विभाग निर्णय करते हैं और शासन व्यवस्था करता है. लेकिन कुंवर सौरभ जी जिस क्षेत्र की बात कर रहे हैं मुझे नहीं लगता है कि इसकी व्यवस्था हो सकती है लेकिन फिर भी जनभावना को देखते हुये माननीय सदस्य का अनुरोध है तो मैं एक बार पुन: उसका परीक्षण करा लूंगा.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी को स्मरण दिलाना चाहूंगा कि पूर्व के नर्मदा घाटी विकास मंत्री द्वारा 10 वर्ष पहले बरगी दायीं तट नहर से मैहर, सतना में पानी पहुंचाने की बात कही थी. नहरें बन गई हैं, माननीय सदस्य सौरभ सिंह जी जिस टनल की बात कर रहे हैं पता नहीं उस टनल में क्या दिक्कत आ गई है कि पानी जा नहीं रहा है. यदि आप प्रदेश के अन्य हिस्सों में ऊंचाई पर पानी दे सकते हैं तो यहां टनल बन गया है सिर्फ पानी नहीं जा रहा है तो इसके लिये व्यवस्था करें, इस अंचल की चिंता भी मंत्री जी कर लें क्योंकि 3-4 जिले पानी की गंभीर समस्या से ग्रस्त हैं. अध्यक्ष महोदय, आपसे अनुरोध है कि आप इस संबंध में मंत्री जी को उचित निर्देश देने का कष्ट करें. मंत्री जी बता दें कि कब तक पानी आयेगा.

श्री लाल सिंह आर्य-- माननीय अध्यक्ष महोदय, वैसे तो प्रश्न से उद्भुद नहीं हो रहा है लेकिन माननीय नेता प्रतिपक्ष द्वारा जनहित की बात की है तो मैं उनको बताना चाहता हूं कि टनल का काम बहुत तेज गति से चल रहा है, बीच में कुछ तकनीकी परेशानी आई थी, मशीन बंद हो गई थी, मशीन इतनी बड़ी है जिसको सुधारने में बहुत समय लगता है. जर्मनी से मशीन पानी के जहाज से आई है और उसको लाने में 6 माह का समय लगा है, 6 माह उस मशीन को स्थापित करने में समय लगता है, इतनी बड़ी बड़ी मशीने हैं लेकिन रीवा, सतना और कटनी जिले के कुछ हिस्से के लोगों को पानी की व्यवस्था हो सके इसके लिये माननीय मुख्यमंत्री द्वारा लगातार इस बात के प्रयास कर रहे हैं कि कैसे भी करके वहां पानी पहुंचाना है. अब हमारी दोनों मशीनें दोनों छोर से काम कर रही हैं और हमने संकल्प व्यक्त किया है कि 2018 के अंत तक हम पानी उस टनल के माध्यम से भेजने का काम करेंगे, हमारी मंशा पानी पहुंचाने की है और मंशा अच्छी नहीं होती तो दोनों मशीनों को, दोनों छोर से टनल बनाने का काम क्यों कर रहे होते .

 

विद्युत समस्‍या के निराकरण हेतु शिविरों का आयोजन

[ऊर्जा]

4. ( *क्र. 259 ) श्री सुशील कुमार तिवारी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा क्षेत्र पनागर के अंतर्गत गत 04 वर्षों में कहाँ-कहाँ विद्युत समस्‍या निवारण शिविर आयोजित किये गये? (ख) क्‍या शिविर में सक्षम अधिकारी उपस्थित नहीं रहते हैं? क्‍या यही कारण है कि मौके पर शिकायतों का निराकरण नहीं होता है एवं हितग्राही को विद्युत कार्यालयों के चक्‍कर लगाने पड़ते हैं? (ग) इन शिविरों में कितनी समस्‍यायें प्राप्‍त हुईं? मौके पर कितनी समस्‍याओं का निराकरण किया गया? शिविर समाप्ति उपरांत बाद में कार्यालय से कितनी शिकायतों का निराकरण किया गया? संख्‍यात्‍मक जानकारी देवें। (घ) प्रश्नांश (ग) के अंतर्गत मौके पर शिकायतों के निराकरण न होने का क्‍या कारण है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) विधानसभा क्षेत्र पनागर के अंतर्गत विगत 4 वर्षों यथा-वर्ष 2014-15 से 2017-18 (जनवरी-18 तक) में आयोजित विद्युत समस्‍या निवारण शिविरों का स्‍थानवार विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) शिविर सक्षम अधिकारियों की उपस्थिति में ही आयोजित किये जाते हैं तथा अधिकांश शिकायतों का निराकरण मौके पर ही किया जाता है। उल्‍लेखनीय है कि प्रश्‍नाधीन अवधि में आयोजित विद्युत समस्‍या निवारण शिविरों में प्राप्‍त कुल 1635 शिकायतों में से 1198 शिकायतों का निराकरण शिविर दिनांक को मौके पर ही किया गया है। (ग) प्रश्‍नाधीन अवधि में आयोजित विद्युत समस्‍या निवारण शिविरों में कुल 1635 शिकायतें प्राप्‍त हुईं, जिनमें से शिविर स्‍थल पर 1198 शिकायतों का निराकरण किया गया तथा शिविर उपरांत 436 शिकायतों का निराकरण किया गया। अतिरिक्‍त ट्रांसफार्मर लगाने से संबंधित एक शिकायत का कार्य प्रगति पर है। (घ) कुछ शिकायतों यथा-मीटर बदले जाने, ट्रांसफार्मर बदले जाने, विद्युत लाइनों संबंधी कार्य आदि में मैदानी जाँच आवश्‍यक होती है, अत: शिविर स्‍थल पर ही शिकायत की जाँच/निराकरण संभव नहीं हो पाता। ऐसे प्रकरणों में वितरण कंपनी द्वारा जाँच कराकर शिकायत का यथाशीघ्र निराकरण किया जाता है।

श्री सुशील कुमार तिवारी--अध्यक्ष महोदय, मैं प्रश्न करना चाहता हूं कि सक्षम अधिकारियों द्वारा विद्युत शिविर नहीं लगाये जा रहे हैं. सबसे पहले मंत्री जी बतायें कि मैंने 13.12.17 को बरेला शिविर में 14.12.17 को मैंने जानकारी दी थी कि सन् 1954 में एक स्कूल बना था उसके ऊपर से 11 के.व्ही.ए.लाईन लगा दी गई है. क्या मंत्री जी उसको हटाने की कार्यवाही करेंगे ? बहुत से बच्चे शिविर में शालीबाड़ा में भी गये थे इस विद्युत लाईन को हटाने के लिये.

श्री पारस चन्द्र जैन--अध्यक्ष महोदय, जहां स्कूल है, यदि स्कूल पहले है और लाईन बाद में डली है तो यह विषय अलग है और यदि लाईन बाद में डली है उसका हम परीक्षण करवा लेंगे और उसका निराकरण कर लेंगे.

श्री सुशील कुमार तिवारी--अध्यक्ष महोदय, हमारे पास में सूचना है. सूचनाओं के माध्यम से जानकारी मेरे पास आयी थी कि पनागर में 9 शिविर लगना हैं. परिशिष्ट में 175 शिविर लगाने का काम किया है. यह जो शिविर लगे हैं इसका कोई औचित्य नहीं था कि इतने बड़े परिशिष्ट में जानकारी देने का, लगभग इसके बहुत से निराकरण हो गये हैं, किन्तु 175 शिविर लगाये गये हैं तो यह जानकारी परिशिष्ट में आना चाहिये कि जो शेष 9 के अतिरिक्त शिविर लगे हैं वह चुपके-चुपके लगाये गये हैं. हालांकि इसमें पूरी कार्यवाही हो चुकी है, किन्तु यह चुपके-चुपके यह शिविर कैसे लगा दिये कि माननीय सदस्य को पता ही नहीं चला. यह शिविर कहां लगे और जिन गांवों के नाम दिये हैं इसका मैं परिशिष्ट में उदाहरण देना चाहता हूं कि परिशिष्ट के पृष्ठ तीन को देखें कि 6 तारीख में 7 शिविर इन्होंने लगाये हैं जिसकी दूरी आपस में 63 किलोमीटर है और यही मेरा प्रश्न है कि सक्षम अधिकारी इस शिविर को नहीं लगा रहे हैं. लाईनमेन वगैरह बैठालकर कार्यवाही को अंजाम दिया जा रहा है. 63 किलोमीटर में 7 शिविर लगाने का मतलब मैं समझता हूं कि यह केवल खानापूर्ति है. 9 हालांकि शिविर में जो बातें आयी थीं उनके निराकरण हो गये हैं. शिविर में जो संख्या 1600 दी है यह उन 9 शिविरों की संख्या है मंत्री जी कृपया बतायें ?

श्री पारस चन्द्र जैन--अध्यक्ष महोदय, जो सदस्य महोदय ने जानकारी मांगी थी वह 4 वर्षों की जानकारी है. दूसरी बात माननीय विधायक जी यह भी कह रहे हैं कि शिविर लगे थे और सब काम निपट भी गये हैं. वहां पर जे.ई. लेवल का अधिकारी रहता है. कनिष्ठ यंत्री या ऊपर का अधिकारी होता है उसको उनके यहां पर भेजते हैं और उसका निराकरण करते हैं. उनकी समस्या का निदान हो गया है.

अध्यक्ष महोदय--इनकी सूचना माननीय सदस्य जी को हो जाए.

श्री पारस चन्द्र जैन--अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य अपने तत्वाधान में यदि शिविर लगाना चाहते हैं तो उसके लिये तैयार हैं.

अध्यक्ष महोदय--शिविर लगे तो उसकी सूचना माननीय सदस्य को हो जाए.

श्री सुशील कुमार तिवारी-- अध्यक्ष महोदय, 175 शिविरों की जानकारी देने का औचित्य था क्या ?

श्री पारस चन्द्र जैन--अध्यक्ष महोदय, 4 वर्षों के शिविर की जानकारी मांगी थी इसलिये चार वर्षों की जानकारी दे दी.

श्री सुशील कुमार तिवारी--अध्यक्ष महोदय, परिशिष्ट में 17 की जानकारी को मंत्री जी देख लें.

प्रश्न संख्या-- 5 (अनुपस्थित)

देशी शराब दुकान का अन्‍यत्र स्‍थानांतरण

[वाणिज्यिक कर]

6. ( *क्र. 3064 ) श्री नीलेश अवस्‍थी : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में देशी शराब दुकान स्‍थापित करने के क्‍या दिशा-निर्देश हैं? निर्देशों की छाया प्रति देवें। देशी शराब दुकान उड़ना (सड़क) तहसील पाटन जिला जबलपुर वर्तमान समय में कब से किस स्‍थल पर संचालित है? (ख) क्‍या शासकीय माध्‍यमिक शाला उड़ना (सड़क) के मुख्‍य द्वार से 50 मीटर दूर स्‍कूल पहुँच मार्ग के बाजू में एवं उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र उड़ना (सड़क) से 80 मीटर दूर तथा सेवा सहकारी समिति उड़ना सड़क से 30 मीटर दूर स्थित है? (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) यदि हाँ, तो वित्‍त वर्ष 2017-18 से प्रश्‍न दिनांक तक उक्‍त शराब दुकान को अन्‍यत्र स्‍थानांतरण करने हेतु ग्रामीणजनों द्वारा धरना प्रदर्शन कब-कब किये गये तथा कब-कब, किस-किस को मांग पत्र प्रेषित किये गये? (घ) क्‍या प्रश्नांश (ग) में उल्‍लेखित धरना प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणजनों पर प्रकरण दर्ज कर उन्‍हें प्रताड़ि‍त किया गया? यदि हाँ, तो क्‍या शासन ग्रामीणजनों की न्‍यायोचित मांग को स्‍वीकार करते हुये देशी शराब दुकान उड़ना सड़क को अन्‍यत्र स्‍थानांतरित कर ग्रामीणजनों पर लगाये गये मुकदमों को वापिस लेगा? यदि हाँ, तो किस प्रकार से कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं?

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) प्रदेश में देशी शराब दुकान स्‍थापित करने के लिए मध्‍यप्रदेश आबकारी अधिनियम के तहत सामान्‍य प्रयुक्ति नियम-1 में दिशा निर्देश प्रावधानित हैं, नियमों की छायाप्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-एक अनुसार है। देशी शराब दुकान उड़ना दिनांक 23.04.2017 से श्री राघवेन्‍द्र सिंह ठाकुर के भवन उड़ना में संचालित है, जिसकी छायाप्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-दो अनुसार है। (ख) वर्तमान स्थिति में देशी शराब दुकान उड़ना से माध्‍यमिक शाला की दूरी 318 मीटर, उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र की दूरी 228 मीटर तथा देशी शराब दुकान से सहकारी समिति की उड़ना से दूरी 125 मीटर है, जिसकी जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-तीन अनुसार है। (ग) थाना प्रभारी थाना पाटन जिला जबलपुर से प्राप्‍त जानकारी अनुसार वर्ष 2017-18 में ग्राम उड़ना सड़क में स्थिति देशी शराब दुकान को अन्‍यत्र स्‍थानांतरित करने हेतु ग्रामीणजनों द्वारा ग्राम उड़ना (सड़क) में कोई धरना प्रदर्शन आयोजित नहीं किया। कार्यालय थाना प्रभारी थाना पाटन, जिला जबलपुर के पत्र की छायाप्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-चार अनुसार है, वर्ष 2017-18 में देशी शराब दुकान उड़ना को अन्‍यत्र स्‍थानांतरण करने हेतु अनुविभागीय अधिकारी राजस्‍व पाटन को समक्ष में ज्ञापन, दिनांक 13.04.2017 को दिया गया था, जिसकी जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-पाँच अनुसार है। (घ) जी नहीं। देशी शराब दुकान उड़ना सड़क मध्‍यप्रदेश आबकारी अधिनियम के तहत बनाए गए सामान्‍य प्रयुक्ति नियम-1 में दिए गए दिशा निर्देशों के अंतर्गत स्‍थापित होने से मदिरा दुकान को स्‍थानांतरित नहीं किया जा रहा है। अतएव शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता।

श्री नीलेश अवस्थी--अध्यक्ष महोदय,माननीय मंत्री जी का जवाब मुझे मिला है उसमें बताया है कि उड़ना सड़क पर देशी शराब की दुकान संचालित हो रही है. वह नियमानुसार है. मैं मंत्री जी को बताना चाहता हूं कि जहां पर शराब की दुकान है वहां पर एक रोड़ है. जहां पर माध्यमिक शाला भवन है, उप स्वास्थ्य केन्द्र है, उसके बगल में शराब की दुकान संचालित कर रहा है ? मंत्री जी से मेरा निवेदन है कि कम से कम वहां से शराब की दुकान अलग हो, क्योंकि छोटे-छोटे बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है उनको परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. जो महिलाएं हैं स्वास्थ्य केन्द्र में जाती हैं उनको परेशानी हो रही है. क्या मंत्री जी दुकान को वहां से अलग करने का प्रावधान करेंगे ?

श्री जयंत मलैया--अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 के अंतर्गत बने मदिरा दुकानों संबंधी नियमों में मदिरा उपभोग हेतु शराब की दुकान शैक्षणिक संस्था, अस्पताल, धार्मिक संस्था आदि से 50 या उससे अधिक दूर होना चाहिये. आपने इन तीनों का उल्लेख यहां पर किया है. माध्यमिक शाला उड़ना से दुकान की दूरी 318 मीटर है, उप स्वास्थ्य केन्द्र की दूरी 228 मीटर है. सहकारी समिति उड़ना से उसकी दूरी 125 मीटर है.

श्री नीलेश अवस्थी - माननीय अध्यक्ष महोदय,माननीय मंत्री जी जो आपने बताया है जो आपको जानकारी शासन ने भेजी है बिल्कुल गलत भेजी है क्योंकि स्कूल का प्रांगण वह 8 से 10 मीटर की दूरी पर आता है. अगर इसकी जांच कराई जायेगी तो आपको तथ्य सामने आयेंगे और मेरे सामने यह जांच हो तो ज्यादा बेहतर रहेगा.

श्री जयंत मलैया - अध्यक्ष महोदय, मैं विधायक जी के साथ में जिनको यह कहेंगे भेज दूंगा और जो यह कह रहे हैं वह सही है तो मैं हटा दूंगा.

श्री नीलेश अवस्थी - माननीय अध्यक्ष महोदय,माननीय मंत्री जी से मेरा एक और निवेदन है कि हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी का स्वर्णिम मध्यप्रदेश बनाने का सपना है और वह तब होगा जब हमारे लोगों का स्वास्थ्य अच्छा होगा, हमारे बच्चों का भविष्य अच्छा होगा.

अध्यक्ष महोदय - भाषण नहीं चलेगा.

श्री नीलेश अवस्थी - माननीय अध्यक्ष महोदय,पूर्ण शराब बंदी की जाये मेरा यह निवेदन है. इससे हमारे देश प्रदेश का भविष्य अच्छा होगा.

अध्यक्ष महोदय - प्रश्नकाल में नहीं.

श्री तरुण भनोत - अध्यक्ष जी, शराब बंदी के खिलाफ हैं.

श्री अजय सिंह - मंत्री जी, दिल पर हाथ रखकर कह दें.

श्री नीलेश अवस्थी - माननीय अध्यक्ष महोदय,वहां इनलीगल तरीके से अहाता भी चल रहा है. मैं जानकारी देना चाहता हूं.

अध्यक्ष महोदय - अब जांच हो रही है. आप बता देना.

नवीन विद्युत ग्रिड की स्‍थापना

[ऊर्जा]

7. ( *क्र. 1262 ) कुँवर हजारीलाल दांगी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विधानसभा क्षेत्र खिलचीपुर के अंतर्गत ग्राम दगल्‍या व ग्राम बाजरोन के मध्‍य तथा ग्राम रामगढ़ में 33/11 के.व्‍ही. विद्युत ग्रिड नहीं होने से क्रमश: ग्राम दगल्‍या-बाजरोन के मध्‍य 40 ग्रामों के कृषकों एवं ग्राम रामगढ़ अंतर्गत 25 ग्रामों के कृषकों को निरंतर अल्‍प वोल्‍टेज एवं लाईन के तार टूटने से विद्युत कटोत्री का दंश झेलना पड़ रहा है? यदि हाँ, तो उक्‍त समस्‍या के निराकरण हेतु प्रश्‍न दिनांक तक विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई? (ख) उपरोक्‍तानुसार क्‍या ग्रामों के किसानों की पुरजोर मांग पर प्रश्‍नकर्ता द्वारा उक्‍त वर्णित स्‍थानों पर 33/11 के व्‍ही. विद्युत ग्रिड स्‍थापित कराने हेतु निरंतर शासन से मांग की गई है? यदि हाँ, तो क्‍या शासन उक्‍त वर्णित स्‍थानों पर 33/11 के.व्‍ही. विद्युत ग्रिड की स्‍थापना करेगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी नहीं, विधानसभा क्षेत्र खिलचीपुर के अंतर्गत ग्राम बाजरोन व दगल्या एवं आस-पास के ग्रामों को 33/11 के.व्ही. उपकेन्द्र रनारा से नियमानुसार सुचारू रूप से विद्युत प्रदाय किया जा रहा है, तथापि उक्त क्षेत्र में प्रणाली सुदृढ़ीकरण हेतु ग्राम बाजरोन व दगल्या के मध्य 33/11 के.व्ही. उपकेन्द्र की स्थापना का कार्य वित्तीय उपलब्धतानुसार इसी प्रकार के अन्‍य कार्यों की प्राथमिकता के क्रम में अगामी योजनाओं में सम्मिलित किये जाने के प्रयास किये जा रहे हैं। ग्राम रामगढ़ एवं आस-पास के क्षेत्र में स्थित ग्रामों को लगभग 4 कि.मी. की दूरी पर स्थित 33/11 के.व्ही. उपकेन्द्र लखोनी से नियमानुसार सुचारू रूप से विद्युत प्रदाय किया जा रहा है, वर्तमान में ग्राम रामगढ़ में 33/11 के.व्ही. उपकेन्द्र की स्थापना का कार्य तकनीकी रूप से साध्य नहीं है। (ख) जी हाँ। उत्तरांश (क) में दर्शाए अनुसार कार्यवाही की जायेगी, जिस हेतु वर्तमान में समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

 

कुंवर हजारीलाल दांगी - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री महोदय से यह निवेदन करना चाहता हूं कि मेरे विधान सभा क्षेत्र का जो मैंने प्रश्न लगाया है. मेरे क्षेत्र के 40-50 गांव को संडावता ग्रिड से कनेक्शन दे रखा है. वे वहां से संचालित होते हैं. अगर एक गांव में तार टूट जाता है तो पूरे 40-50 गांवों की लाईट प्रभावित होती है,बंद हो जाती है उससे क्षेत्र में तनाव रहता है. सीजन के समय में रोड जाम तक करते हैं. मैं काफी लंबे समय से मंत्री जी से अनुरोध कर रहा हूं.मंत्री जी मेरे क्षेत्र में आये थे लोगों ने भी इनसे मांग की थी. संडावता काफी दूर है इतने गांव के किसान परेशान हैं. किसानों की मांग के अनुसार ग्राम दगल्या और बाजरोन के बीच में नया 33/11 के.वी.ए.का नया ग्रिड स्थापित करने की मांग है. अभी तक उसकी डी.पी.आर.बनकर स्वीकृति के लिये गया था लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं हुई तो मंत्री जी उसको स्वीकृत करकर इसी साल काम कराएंगे क्या ?

श्री पारस चन्द्र जैन - माननीय अध्यक्ष महोदय,मैं इनके क्षेत्र में जरूर गया था और वहां के गांव वालों की यह मांग थी. ग्राम बाजरोन-डागल्या में नवीन 33/11 के.वी.ए. उपकेन्द्र का प्रस्ताव शामिल किया गया है और रबी सीजन के पूर्व आपका काम हो जायेगा.

कुंवर हजारीलाल दांगी - बहुत-बहुत धन्यवाद.मंत्री जी, दूसरी मांग एक और की थी. हमारा रामगढ़ बेल्ट है, राजस्थान से लगा हुआ और वह आखिरी सीमा में है चूंकि उसके पास एक ग्रिड और है उस क्षेत्र के किसानों की सुविधा को देखते हुए वहां के लिये भी मैंने मांग की है यदि आप उचित समझे आप सर्वे करा लें यदि उपयुक्त हो तो उस पर भी कृपा माननीय मंत्री जी कर दें.

श्री पारस चन्द्र जैन - माननीय अध्यक्ष महोदय, ग्राम रामगढ़ में वर्तमान में 33/11 के.वी.ए. उपकेन्द्र लखोनी से विद्युत प्रदाय किया जा रहा है जो मात्र 4 कि.मी. दूर है. वर्तमान में ग्राम रामगढ़ में 33/11 के.वी.ए. उपकेन्द्र की स्थापना का कार्य तकनीकी रूप से साध्य नहीं है. इसलिये वहां उपकेन्द्र स्थापित होना संभव नहीं है.

कुंवर हजारीलाल दांगी - माननीय मंत्री जी सर्वे तो करवा लें शायद वह साध्य हो जाये.

श्री पारस चन्द्र जैन - माननीय सदस्य जो कह रहे हैं नियम में आयेगा तो हमें क्या दिक्कत है करवा लेंगे.

श्री अमर सिंह यादव - माननीय अध्यक्ष महोदय, राजगढ़ विधान सभा क्षेत्र में एक झंझाड़पुर और एक सड़यागुआ ग्रिड का प्रस्ताव शासन को प्रस्तावित है और मैंने अभी प्रश्न भी लगाया था. उसकी साध्यता भी हो गई. मंत्री जी उसकी भी घोषणा हो जाये.

अध्यक्ष महोदय - इससे उद्भूत नहीं हो रहा है फिर भी मंत्री जी जानकारी हो तो दे दीजिये.

श्री पारस चन्द्र जैन - माननीय अध्यक्ष महोदय,जानकारी लेकर दे देंगे.

 

 

धोबी/रजक जाति को अनुसूचित जाति का दर्जा

[अनुसूचित जाति कल्याण]

8. ( *क्र. 1758 ) श्री रामनिवास रावत : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश के संपूर्ण जिलों में धोबी/रजक जाति को अनुसूचित जाति की सूची में सम्मिलित किये जाने हेतु पारित अशासकीय संकल्‍प पर प्रदेश के आदिम जाति अनुसंधान एवं विकास संस्‍थान द्वारा संकल्‍प के पक्ष में/विभागीय टीप में क्‍या-क्‍या उल्‍लेख किया गया था? पृथक-पृथक दिनांकवार भेजी गई टीप की प्रति संलग्‍न करें (ख) क्‍या संस्‍थान से शासन को प्राप्त अभिमत/टीप के आधार पर ही शासन द्वारा अशासकीय संकल्‍प पारित करने की सहमति प्रदान की गई थी ? (ग) यदि हाँ, तो विभाग के पत्र दिनांक 14 जुलाई, 2006 के साथ प्रदेश के आदिम जाति अनुसंधान एवं विकास संस्‍थान द्वारा धोबी जाति के संबंध में 45 जिलों की सर्वेक्षण रिपोर्ट निष्‍कर्ष के साथ विभाग के पत्र दिनांक 07 जुलाई, 2006 संलग्‍न कर भारत सरकार को भेजी गई थी? इस रिपोर्ट में संस्‍थान द्वारा प्रदेश के सभी जिलों में धोबी जाति की सामाजिक स्थिति एक समान तथा संदर्भित साहित्‍यों में दिये गये विवरणों को दृष्टिगत रखते हुए प्रस्‍तावित किया गया था कि धोबी जाति के क्षेत्रीय बंधन को समाप्‍त करते हुए, इन्‍हें संपूर्ण म.प्र. में अनुसूचित जाति में मान्‍य किये जाने की अनुशंसा की गई थी? (घ) यदि हाँ, तो आदिम जाति अनुसंधान के प्रतिवेदन दिनांक 24 जुलाई, 2007 में प्रदेश में धोबी जाति की सामाजिक स्थिति भिन्‍न-भिन्‍न क्‍यों एवं किस आधार पर बतलायी जाकर म.प्र. शासन के विभागीय अधिकारियों द्वारा विभागीय मंत्री जी के अनुमोदन लिये बिना ही विधान सभा से पारित प्रस्‍ताव के मामले/नीतिगत निर्णय में सदन की भावना के विरूद्ध भारत सरकार को यह प्रस्‍तावित किया गया कि प्रदेश में धोबी समुदाय की स्थिति भिन्‍न-भिन्‍न है, इसलिए अनुसूचित जाति में सम्मिलित करने का पर्याप्‍त आधार नहीं है? (ड.) उपरोक्‍त प्रश्‍नांश के परिप्रेक्ष्‍य में क्‍या संस्‍थान द्वारा वर्ष 2006 तक की स्थिति में धोबी जाति की सामाजिक स्थिति एक समान बतायी गई थी एवं वर्ष 2007 में उनकी स्थिति भिन्‍न-भिन्‍न लेख किया जाकर प्रकरण को समाप्‍त करने की अनुशंसा भारत सरकार से कर विधान सभा की अवमानना की गई है ? (च) यदि नहीं, तो क्‍या शासन द्वारा इसकी उच्‍चस्‍तरीय जाँच कराकर संबंधित दोषी के विरूद्ध कार्यवाही करते हुए धोबी जाति के समर्थन में भारत सरकार द्वारा चाही गई अपेक्षित सर्वे रिपोर्ट भेजी जायेगी? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों?

 

मुख्यमंत्री(श्री शिवराज सिंह चौहान - माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, मुझे जहां तक जानकारी है, जो प्रश्न मैंने लगाया है, इसी प्रश्न के संदर्भ में कहना चाहता हूं कि आप अभी आसंदी पर विराजमान हैं, जब सदस्य हुआ करते थे तो दो बार यह प्रश्न आपने भी लगाया था और इसकी इतनी वकालत की कि आपने सदन को भी स्थगित कराया. अब आप चूंकि आसंदी पर बैठे हैं तो मैं समझता हूं कि इस भावना का आदर करते हुए आप इसमें पॉजिटिव निर्णय कराने की कृपा करेंगे.

श्री उमाशंकर गुप्ता - अध्यक्ष महोदय, यह भावनात्मक ब्लैकमेलिंग है.

श्री रामनिवास रावत - नहीं-नहीं. आप रिकॉर्ड उठाकर देख लें.

श्री बाबूलाल गौर - इस पर अशासकीय संकल्प पारित हुआ है.

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, वह तो हुआ है. अशासकीय संकल्पों से क्या होता है आप भी जानते हो, हम भी जानते हैं. मैंने प्रश्न पूछा था कि मध्यप्रदेश में सम्पूर्ण धोबी रजक जाति को अनुसूचित जाति में सम्मिलित कराने के संबंध में जो अशासकीय संकल्प पारित हुए थे, शासन से कब-कब प्रतिवेदन भेजे गये और क्या-क्या कार्यवाही की गई? उन्होंने जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट में दी है. इस परिशिष्ट में संकल्पों के पारित होने के बाद शासन ने जो कार्यवाही की है. वर्ष 2006 में एक बार आदिम जाति अनुसंधान एवं विकास संस्थान द्वारा यह सर्वेक्षण किया जाता है और रिपोर्ट भेजी जाती है. वर्ष 2006 में इस संकल्प के सहित शासन से कैबिनेट निर्णय भी पारित हुआ, उसके अंतर्गत आदिम जाति अनुसंधान एवं विकास संस्थान ने परीक्षण किया और प्रस्तावित किया कि धोबी जाति के सामाजिक एवं आर्थिक स्तर को मद्देनजर रखते हुए प्रदेश के सभी जिलों में कराए गए अध्ययन तथा संदर्भ साहित्यों में दिये गये विवरणों को दृष्टिगत रखते हुए प्रस्तावित है कि धोबी जाति के क्षेत्रीय बंधन को समाप्त करते हुए इन्हें सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति में मान्य किया जाय. यह आदिम जाति अनुसंधान एवं विकास संस्थान ने अपनी रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत की और शासन ने इस अनुशंसा के साथ भारत सरकार को इसको भेजा, फिर दोबारा वहां के रजिस्ट्रार जनरल ने पुनः परीक्षण के लिए भेजा तो वर्ष 2007 में आदिम जाति अनुसंधान एवं विकास संस्थान ने एक रिपोर्ट पुनः मध्यप्रदेश शासन को भेजी, प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन, आदिम जाति कल्याण विभाग को कि हमने पूरा सर्वेक्षण किया है और सर्वेक्षण के उपरांत इस प्रकार मध्यप्रदेश के भिन्न- भिन्न क्षेत्रों में धोबी समुदाय की सामाजिक स्थिति सभी जिलों में भिन्न-भिन्न है. धोबी जाति को सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति के रूप में सम्मिलित करने के पर्याप्त आधार नहीं हैं. आदिम जाति अनुसंधान एवं विकास संस्थान एक ही है, प्रकरण एक ही है, वस्तुस्थितियां एक ही हैं, जबकि अलग-अलग प्रतिवेदन दो बार भेजे गये? और दूसरा प्रतिवेदन जब भेजा गया तो अधिकारियों ने सीधे जो मंत्री विभाग के हैं, मंत्री के अनुमोदन लिये बगैर ही इसको भेज दिया. अध्यक्ष महोदय, प्रथमतः तो मैं समझता हूं कि विभागीय मंत्री के अनुमोदन के बिना इसको भेजा ही नहीं जाना चाहिए था. सरकार का अर्थ विभागीय मंत्री होता है. सरकार का अर्थ प्रमुख सचिव नहीं होता है, नहीं तो फिर प्रजातंत्र में इस सिस्टम की जरूरत नहीं होती. क्या प्रतिवेदन इस तरह से भेजा जा सकता है, माननीय मंत्री जी बताएंगे? अगर इस तरह से प्रतिवेदन भेजा गया है तो आप कार्यवाही करेंगे? इन प्रश्नों का उत्तर दे दें...आदिम जाति विभाग आपके पास है क्या?

श्री लाल सिंह आर्य - यस सर. अध्यक्ष महोदय, श्री रामनिवास जी बड़े विद्वान, वरिष्ठ विधायक हैं.

श्री रामनिवास रावत - इसमें विद्वान कहां से आ गया? आप प्रश्न का जवाब दें.

श्री लाल सिंह आर्य - मैं बता रहा हूं. आपकी विद्वत्ता को इसीलिए रेखांकित कर रहा हूं.

श्री गोपाल भार्गव - अध्यक्ष महोदय, मुझे आपत्ति है कि यह पूछना किसी मंत्री से कि यह विभाग आपके पास ही है क्या. अध्यक्ष महोदय, यह उचित बात नहीं है.

श्री रामनिवास रावत - इसमें कौन-सा हनन हो गया? हमें जानकारी नहीं है तो इसमें पूछने में क्या बुराई है?

श्री गोपाल भार्गव - जब मंत्री खड़े हुए हैं तो इसका अर्थ ही है.

श्री रामनिवास रावत - आप बड़ी देर में खड़े हुए थे इसलिए शंका हुई?

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) - अध्यक्ष महोदय, श्री गोपाल भार्गव जी तो हर विभाग में खड़े हो जाते हैं तो पूछना ही पड़ेगा कि आप किस विभाग के मंत्री हो.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार - अध्यक्ष महोदय, दोनों अपने आपमें सही हैं, इन्होंने मंत्री से यह पूछा..

श्री अजय सिंह - ..अध्यक्ष महोदय, इस बेंच की जांच कराई जाय, ये दोनों मंत्री हर समय खड़े हो जाते हैं, चाहे श्री गोपाल भार्गव हों, चाहे डॉ. शेजवार जी हों. (XXX)

अध्यक्ष महोदय - (संकेत से) इसे विलोपित करें.

श्री गोपाल भार्गव - अध्यक्ष महोदय, हम लोगों को सिर्फ विधान आता है, व्यवधान आप लोगों को आता है. हमको सिर्फ विधान आता है.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार -- आपने उनसे पूछा कि क्‍या यह विभाग आपके पास है, तो उन्‍होंने आपको विद्वान कह दिया इसमें क्‍या बुराई है ? मतलब विद्वान का अर्थ आप विद्वान मत समझिये ? आपके प्रश्‍न का उन्‍होंने उत्‍तर दिया है कि आप कितने विद्वान हैं. आपको यह नहीं मालूम कि मेरे पास यह विभाग है और यहां गलतफहमी बिलकुल मत पालिये रामनिवास जी, जरूरी नहीं है कि विद्वान को ही विद्वान कहा जाये.

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं उत्‍तर चाहता हूं डिस्‍टर्बेंस नहीं चाहता.

श्री लालसिंह आर्य -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं देर से इसलिये खड़ा हुआ कि आपकी तरफ से इशारा होगा, लेकिन मैंने इसलिये रेखांकित किया कि राजनैतिक दृष्टि से कितना, कौन सा पक्ष पूछना चाहिये कौन सा नहीं पूछना चाहिये इसमें उन्‍होंने बहुत होशियारी बरती. यह बात सही है कि मध्‍यप्रदेश के इस लोकतांत्रिक मंदिर में अशासकीय संकल्‍प पारित हुआ था. मध्‍यप्रदेश की सरकार ने 2006 में केन्‍द्र में तत्‍कालीन कांग्रेस की सरकार रहते हुए प्रस्‍ताव को भेजा था कि धोबी समाज को मध्‍यप्रदेश की अनुसूचित जाति में सम्मिलित किया जाये. मध्‍यप्रदेश शासन ने पत्र क्रमांक 2300-96/97/4/25 दिनांक 14.07.2006 को धोबी समाज जाति को पूरे प्रदेश में अनुसूचित जाति के रूप में सम्मिलित करने का प्रस्‍ताव केन्‍द्र सरकार को भेजा था. अध्‍यक्ष महोदय, चूंकि उस समय केन्‍द्र में कांग्रेस की सरकार थी वह चाहती तो उस प्रस्‍ताव को स्‍वीकार कर लेती, परंतु केन्‍द्र सरकार ने अपने पत्र क्रमांक 08.03.2007 को संचालक अनुसूचित जाति विकास, मध्‍यप्रदेश शासन ने जो सामाजिक न्‍याय विभाग के रजिस्‍ट्रार जनरल ने उनके पत्र क्रमांक 8/1/2006 एसएस एमपी, दिनांक 05.03.2007 से मध्‍यप्रदेश के प्रस्‍ताव पर असहमति व्‍यक्‍त कर दी कि इसको हम मान्‍य नहीं करेंगे. अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश की सरकार की भावना है कि धोबी समाज अनुसूचित जाति में सम्मिलित हो इसलिये हमने रिपोर्ट वहां भेजी, लेकिन तत्‍कालीन केन्‍द्र सरकार ने मध्‍यप्रदेश की सरकार के इस प्रस्‍ताव को अमान्‍य कर दिया. दूसरी बार जब रिपोर्ट गई है उसमें उन्‍होंने केन्‍द्र सरकार की इस रिपोर्ट से शायद सहमति दी है, लेकिन यह बात सही है कि मंत्री से अनुमोदन लेना चाहिये. इसलिये मैं इस प्रस्‍ताव का दोबारा परीक्षण कराऊंगा, यह मैं आपको आश्‍वस्‍त करता हूं.

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, कितने बड़े दुर्भाग्‍य की बात है कि मैं एक प्रदेश की.. (व्‍यवधान)..

श्री वेलसिंह भूरिया -- (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय -- वेलसिंह जी का कुछ भी रिकार्ड नहीं किया जाएगा. रामनिवास रावत जी का प्रश्‍न लिखा जाएगा. वेलसिंह जी, आप बैठ जाइये आपको अनुमति नहीं दी है.

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने जवाब दिया. मैंने प्रश्‍न में एक बार भी नहीं कहा कि कौन सी पार्टी की सरकार ने प्रस्‍ताव भेजा, कौन सी पार्टी की सरकार ने उसे वापस किया या दोबारा परीक्षण के लिये भेजा. आपने कहा कांग्रेस पार्टी की सरकार, भारतीय जनता पार्टी की सरकार. अध्‍यक्ष महोदय, जब केन्‍द्र सरकार ने परीक्षण के लिये पुन: भेजा तो आपकी ही सरकार थी 2007 में आपने ही भेजा है. यह आपकी आदिम जाति अनुसंधान विकास संस्‍थान, मध्‍यप्रदेश शासन की रिपोर्ट है. मैंने जैसा बताया कि 2006 में तो उन्‍होंने अनुशंसा की है कि सभी जिलों में एक समान अनुसूचित जाति में सम्मिलित करने के लिये और 2007 में आपने यह अनुशंसा की है. इस प्रकार मध्‍यप्रदेश के भिन्‍न-भिन्‍न क्षेत्रों में धोबी समुदाय की सामाजिक स्थिति भिन्‍न-भिन्‍न है. धोबी जाति को संपूर्ण मध्‍यप्रदेश में अनुसूचित जाति के रूप में सम्मिलित करने के पर्याप्‍त आधार नहीं हैं और इस पत्र को आधार मानकर आपके विभागीय अधिकारियों ने विभागीय मंत्री का अनुमोदन लिये बगैर सीधे जानकारी भेज दी. अब मैं इसमें कहूं कि आपकी सरकार है और आप नहीं चाहते, तो इससे कोई हल होने वाला नहीं है. जो जाति तीन जिलों में एससी में आती है उस जाति के लगभग सभी बिंदु पूरे प्रदेश के सभी जिलों में समान हैं और इतना ही नहीं राजस्‍थान राज्‍य में पूरे में एससी में आती है, उत्‍तरप्रदेश में राज्‍य में पूरे में अनुसूचित जाति में आती है. तो यहां पर क्‍या आपत्ति है ? आपके अधिकारियों ने क्‍यों भेज दिया ? अध्‍यक्ष महोदय, मेरा माननीय मंत्री जी से सीधा-सीधा सवाल है कि आदिम जाति अनुसंधान संस्थान की पुनः परीक्षण कराकर के पोजीटिव्ह रिपोर्ट 2006 में जो भेजी थी, उसी तरह से आप केबिनेट की अनुशंसा सहित और आपकी सररकारी की तरफ से इनको अनुसूचित जाति में सम्मिलित करने का प्रस्ताव भेजेंगे और जिस अधिकारी ने विभागीय मंत्री का अनुमोदन लिये बगैर आपकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दी, उसके खिलाफ आप क्या कार्यवाही करेंगे.

श्री लालसिंह आर्य -- अध्यक्ष महोदय, मैंने पहले ही उनकी भावना से सहमति व्यक्ति की है कि मैं पुनः उसका परीक्षण करा लूंगा. पुनः परीक्षण कराने के बाद पोजीटिव्ह जो भी रुख आयेगा, मैं केंद्र सरकार को पुनः भेज दूंगा.

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, कब तक करा लेंगे, ये कब तक भेज देंगे. पहले परीक्षण हुआ 2006 में अनुशंसा कर दी. फिर परीक्षण हुआ 2007 में, उन्होंने ही जिन्होंने पहले किया, उन्होंने डिसक्वालीफाई कर दिया कि इनको नहीं सम्मिलित किया जाये. तो यह क्या स्थिति है.

श्री लालसिंह आर्य -- अध्यक्ष महोदय, 2 महीने में परीक्षण करा देंगे.

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, मैंने विभागीय मंत्री की, जो आपने कहा, मैंने मंत्री का इसलिये पूछा, हम चाहते हैं कि मंत्री जी पूरा काम करें. (XXX).

अध्यक्ष महोदय -- नहीं, यह निकाल दीजिये उसमें से. पर उन्होंने यह स्वीकार किया कि गलत किया था उन्होंने.

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, गलत किया था, तो मंत्री जी कार्यवाही क्यों नहीं करते. आपकी कोई सुनता ही नहीं है. अब हम भी क्या विश्वास करें कि यह कर देंगे कि नहीं कर देंगे.

अध्यक्ष महोदय -- करेंगे, दो महीने का कहा है.

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, आप निर्देश दे दें.

अध्यक्ष महोदय -- दो महीने का समय उन्होंने कहा है.

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, आप निर्देश दे दें, आपने विधानसभा स्थगित करवाई थी.

श्री लालसिंह आर्य -- अध्यक्ष महोदय, यह आपत्तिजनक है. अगर हम यह करेंगे, तो फिर हमको पीछे जाना पड़ेगा. आप 57 साल केंद्र में रहे हैं और मध्यप्रदेश में 43 साल रहे हैं. आपको तब याद नहीं आई धोबी समाज की. आज आप आपत्ति उठा रहे हैं.

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, यह कोई बात हुई.

श्री लालसिंह आर्य -- अध्यक्ष महोदय, लेकिन मेरा कहना यह है कि जब मैंने आपकी पोजीटिव्ह बात का जवाब दिया है. मैं कह रहा हूं, मैं आज भी धोबी समाज के पक्ष में हूं और इसलिये मैंने कहा था कि परीक्षण कराऊंगा.

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, आप ही की सरकार ने 2006 में पोजीटिव्ह रिपोर्ट भेजी थी.

अध्यक्ष महोदय -- आपकी बात को उन्होंने करीब करीब शब्दशः स्वीकार किया. आपने समय मांगा, तो उन्होंने अतिशीघ्र नहीं बोलकर 2 महीने कह दिया. तो कृपा करके अब तो आप संतुष्ट हों.

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, संतुष्ट तो तब होंगे, जब वह अनुसूचित जाति में सम्मिलित हो जायेंगे.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) -- अध्यक्ष महोदय, संतुष्ट सही में, जैसा कि रावत जी ने कहा तब हम होंगे. मान लीजिये हमसे गलती हुई. हमारे समय में नहीं हुआ. लेकिन आज आपकी सरकार यहां पर भी है और आपकी सरकार वहां पर भी है. यदि आप सही में इच्छुक हैं, तो अगले दो महीने में यहां से भेजने की बात नहीं है. अगले 3 महीने में आप ही केंद्र सरकार से जाकर अनुमति ले लें, तब तो पता चलेगा कि आप सही में रुचि लेते हैं.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया -- अध्यक्ष महोदय, इस प्रश्न को मेरे माध्यम से भी पिछली बार ध्यान आकर्षण की सूचना भी, तारांकित प्रश्न और अशासकीय संकल्प में भी मैंने अपनी बात रखी थी. आज पुनः यह लाटरी में तारांकित प्रश्न के माध्यम से आया है. भोपाल, सीहोर और रायसेन ये तीन जिले ऐसे हैं, पूरे मध्यप्रदेश में जहां पर धोबी समाज को अनुसूचित जाति में शामिल किया गया है. मेरा सीधा प्रश्न है. अध्यक्ष महोदय, आपने भी बहुत विद्वता के साथ 26 जुलाई,1984 का केंद्र सरकार का वह सर्कुलर, सरकुलर क्रमांक 56/84, जिसमें आपने 8 अगस्त,2003 को विधान सभा में धोबी समाज को सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति में शामिल करने की बात कही थी. मेरा सीधा सीधा कहना है. मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से अपेक्षा करुंगा कि सही प्रारुप में सही जानकारी नहीं भेजे जाने कारण इसमें कहीं न कहीं विलम्ब हो रहा है.

अध्यक्ष महोदय -- सही प्रारुप में सह जानकारी भिजवा दें, जो आपने कहा है समय सीमा में.

श्री लालसिंह आर्य -- अध्यक्ष महोदय, मैंने पहले ही कहा है कि मैं धोबी समाज के इस अधिकार के प्रति पक्ष में हूं और मैं पुनः परीक्षण कराऊंगा, वह सारे हम बिन्दु देखेंगे, जो कोई छूट गये हैं, रह गये हैं, कुछ भी है.

विद्युत खंभों की नीलामी

[ऊर्जा]

9. ( *क्र. 2502 ) श्री शैलेन्‍द्र पटेल : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सीहोर शहर के विभिन्‍न क्षेत्रों में विद्युत खंभों को बदला गया है? यदि हाँ, तो विगत 3 वर्ष के दौरान कितने-कितने विद्युत खंभे किन कारणों से बदले गए? खंभों की संख्‍या का ब्‍यौरा दें। (ख) क्‍या प्रश्नांश (क) अनुसार पुराने खंभों को नीलाम किया गया है? यदि हाँ, तो ब्‍यौरा दें? यदि नहीं, तो विगत 3 वर्ष के दौरान निकाले गए विद्युत खंभे और तार केबल आदि कहाँ पर रखे गए हैं, वहां संधारित पंजी की छायाप्रति उपलब्‍ध कराएं। (ग) क्‍या सीहोर शहर में पदस्‍थ जूनियर इंजीनियर की निगरानी में शहर के विभिन्‍न स्‍थानों और कॉलोनियों में विद्युत खंभे लगाए गए हैं? यदि हाँ, तो किस-किस इंजीनियर की निगरानी में किस-किस कंपनी ठेकेदार द्वारा किन-किन स्‍थानों पर विद्युत खंभे लगाए गए हैं? प्रश्‍नांकित दिनांक से 03 वर्ष का ब्‍यौरा वर्षवार, स्‍थानवार, कंपनीवार ठेकेदारवार उपलब्‍ध कराएं।

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ। सीहोर शहर के विभिन्न क्षेत्रों में विगत तीन वर्षों यथा-वर्ष 2015-16, 2016-17 एवं 2017-18 में बदले गये विद्युत खम्बों की संख्‍या सहित प्रश्नाधीन जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) उत्तरांश (क) में दर्शाये गये पुराने खंभों/तारों आदि को स्थानीय स्तर पर नीलाम नहीं किया जाता है, अपितु कार्यों के विरूद्ध निकाली गई पुरानी सामग्री को क्षेत्रीय भण्डार भोपाल में वापिस कर नीलामी आदि की कार्यवाही की जाती है, जिसका शहरवार विवरण संधारित नहीं किया जाता। सीहोर शहर में विगत 03 वर्षों के दौरान निकाले गये खंभों, तार, केबल आदि की क्षेत्रीय भण्डार, भोपाल में वापसी का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'ब-1', प्रपत्र 'ब-2' एवं प्रपत्र 'ब-3' अनुसार है। उक्‍त सामग्री की क्षेत्रीय भण्‍डार, भोपाल में प्राप्ति से संबंधित संधारित किये गये रिकार्ड/मटेरियल रिसिप्‍ट एडवाइस की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) सीहोर शहर में विभिन्न स्थानों और कॉलोनियों में विद्युत खंभे एस.टी.सी. संभाग सीहोर में पदस्थ इंजीनियरों एवं प्रोजेक्ट नोडल अधिकारी (सहायक यंत्री) की निगरानी (पर्यवेक्षण) में लगाये गये हैं। प्रश्‍नांकित दिनांक से विगत तीन वर्ष का वर्षवार, स्थानवार, कंपनीवार/ठेकेदार-वार एवं निगरानी (पर्यवेक्षण) अधिकारी की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'ब-1', प्रपत्र 'ब-2' एवं प्रपत्र 'ब-3' अनुसार है।

श्री शैलेन्द्र पटेल -- अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न में जो बिजली विभाग द्वारा पुराने खम्भों को निकाल कर नीलाम किया जाता है, उसके बारे में प्रश्न किया था और उसमें यह उत्तर दिया गया है कि स्थानीय स्तर पर नीलाम न कर पुरानी सामग्री को क्षेत्रीय भण्डार भोपाल में वापस कर नीलामी आदि की कार्यवाही की जाती है. मेरा मंत्री जी से प्रश्न यह है कि पिछले 3 वर्षों में कितनी राशि वर्षवार नीलामी से क्षेत्रीय कार्यालय को प्राप्त हुई है, उस राशि का हवाला दे दें. दूसरा, उस नीलामी की क्या प्रक्रिया अपनाई गई हैं, क्योंकि वह सारा सामान अलग अलग जगह से आता है क्षेत्रीय भण्डार में, वहां पर किस प्रक्रिया के अंतर्गत उसको नीलामी की प्रक्रिया की गई है, मंत्री जी यह बता दें.

श्री पारस चन्‍द्र जैन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नीलामी की प्रक्रिया यह है कि सामान भोपाल स्‍टोर में आता है और भोपाल स्‍टोर में जो काम लायक हैं, उनको ले लेते हैं और बाकी को नीलाम कर दिया जाता है. इन्‍होंने जो यह पूछा है कि 3 साल की जानकारी चाही है, वह जानकारी लेकर मैं इनको दे दूंगा.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा उत्‍तर नहीं आया है. मैंने यह पूछा है कि नीलामी के लिए क्‍या प्रक्रिया अपनाई जाती है ? क्‍या टेंडर करते हैं ? ई-टेंडर होते हैं या क्‍या प्रक्रिया अपनाई जाती है ?

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी, प्रक्रिया बता दें.

श्री पारस चन्‍द्र जैन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो लोहा बचता है तो उसका टेंडर ही होता है.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी भी क्‍लियर नहीं बता रहे हैं, कौन सा टेंडर होता है ? ई-टेंडरिंग होती है या डायरेक्‍ट टेंडरिंग ?

अध्‍यक्ष महोदय -- जानकारी तो दे दी उन्‍होंने.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, वे स्‍पष्‍ट कहां बता रहे हैं ? स्‍पष्‍ट उत्‍तर आ ही नहीं रहा है ? मेरा एक प्रश्‍न और छुपा हुआ है, जिस बात को मैं सदन के माध्‍यम से लाना चाहता हूँ, जब तक क्‍लियर उत्‍तर नहीं मिलेगा, वह बात कैसे आएगी ?

श्री पारस चन्‍द्र जैन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ऑक्‍शन के द्वारा भी उसकी नीलामी की जाती है.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अब ऑक्‍शन आ गया, अभी तक टेंडर था ? ..(व्‍यवधान)..

श्री तरूण भनोत -- अध्‍यक्ष महोदय, दीर्घा से पर्ची आई तो ऑक्‍शन बोलने लगे. पहले टेंडर बोल रहे थे. इनको खुद ही जानकारी नहीं है. ..(व्‍यवधान)..

श्री शैलेन्‍द्र पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न लाने का कारण यही है कि माननीय मंत्री जी को ही नहीं पता कि वहां क्‍या प्रक्रिया अपनाई जाती है ?

अध्‍यक्ष महोदय -- नीलामी होती है.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, उन्‍हें पता ही नहीं है, वे टेंडर का कह रहे थे, अब ऑक्‍शन का कह रहे हैं. मुझे तो पता है कि ऑक्‍शन होता है. दूसरी बात मेरी यह है कि ऑक्‍शन के पहले क्‍या योग्‍य खंभों को निकाल लिया जाता है, क्‍योंकि कई बार एक-दो साल में भी खंभे उखाड़ दिए जाते हैं जिन्‍हें कि पुन: इस्‍तेमाल किया जा सकता है, क्‍या उनकी छंटाई होती है ताकि विभाग का पैसा बचे, कि सीधे सारे के सारों को भंगार मानकर नीलाम कर दिया जाता है ?

अध्‍यक्ष महोदय -- वह तो उन्‍होंने बोल दिया था कि छंटाई होती है. यह कोई प्रश्‍न नहीं है. उन्‍होंने कहा है छांट के काम में ले लेते हैं, आप सुनते नहीं हैं. मंत्री जी, एक बार और बोल दीजिए.

श्री पारस चन्‍द्र जैन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने पहले भी बोला कि जो काम के लायक होते हैं उनको काम में ले लिया जाता है और बाकी जो बचते हैं, उनका ऑक्‍शन किया जाता है.

कर्मचारियों/अधिकारि‍यों का स्‍थायीकरण

[सामान्य प्रशासन]

10. ( *क्र. 1232 ) श्री जितेन्‍द्र गेहलोत : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश के वन, स्‍वास्‍थ्‍य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय विकास एवं आवास आदि विभागों में 10 वर्षों अथवा इससे अधिक समय से कार्यरत कुशल, अकुशल एवं अर्द्धकुशल अधिकारियों व कर्मचारियों को स्‍थाई होने की पात्रता है, या नहीं? (ख) उक्‍त संबंध में जी.ए.डी. का (निर्णय 2016) क्‍या निर्णय है? उक्‍त निर्णयों के पालन में प्रश्नांश (क) कर्मचारियों, अधिकारियों को कब तक स्‍थाई करेगें? यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं? (ग) प्रश्नांश (क) अंतर्गत अधिकारियों एवं कर्मचारियों की संख्‍या लगभग कितनी है? इन्‍हें स्‍थाई करने पर शासन पर क्‍या भार पड़ेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) एवं (ख) दिनांक 07 अक्‍टूबर, 2016 को जारी निर्देश दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को स्‍थायी कर्मी घोषित करने से संबंधित है। स्‍थाई के नहीं। अत: शेषांश प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) लगभग 48000। शेषांश उत्तरांश (क) एवं (ख) अनुसार।

श्री जितेन्‍द्र गेहलोत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से जो मैं पूछना चाहता हूँ, उससे पहले मैं माननीय मंत्री जी को और सरकार को धन्‍यवाद देना चाहता हूँ कि शिक्षाकर्मियों का शिक्षकों में संविलियन किया.

अध्‍यक्ष महोदय, इसी प्रकार मैंने जो विभाग पूछे हैं - वन विभाग, स्‍वास्‍थ्‍य विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, आवास विभाग और निगम, मंडलों के कर्मचारियों के बारे में जिनको 10 वर्ष हुए हैं, जिनको कुशल, अर्द्धकुशल और अकुशल के रूप में देखा जाता है, पर उनके संविलियन में कई विभागों के अंदर आज भी 10 वर्ष पूर्ण होने के बाद भी कर्मचारियों का स्‍थायीकरण नहीं किया गया है, माननीय मंत्री जी, कब तक यह करेंगे, यह जवाब दें, फिर मैं आगे प्रश्‍न पूछता हूँ ?

अध्‍यक्ष महोदय -- वैसे तो जवाब इसमें दिया हुआ है.

राज्‍यमंत्री, सामान्‍य प्रशासन (श्री लालसिंह आर्य) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दिनांक 7 अक्‍टूबर, 2016 को सभी विभागाध्‍यक्षों को शासन ने एक पत्र जारी किया है, स्‍थायीकर्मी करने के लिए जो निर्णय कैबिनेट में हमने किया था, क्‍योंकि पिछले 70 सालों से दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी वास्‍तव में आहत थे. उनकी तरफ ध्‍यान नहीं दिया गया था, लेकिन मुख्‍यमंत्री श्री शिवराज सिंह जी के नेतृत्‍व में कैबिनेट में हमने यह फैसला किया कि 48 हजार जो दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी हैं, उनको स्‍थाईकर्मी करने का काम हमने किया है. जो हमने पत्र बताया है, वह आदेश हमने जारी किए हैं और उसके तहत ही जितेन्‍द्र जी, 12695 लोगों को 10 वर्ष पूर्ण होने पर उनके स्‍थाईकर्मी के आदेश जारी कर दिए गए हैं. अध्‍यक्ष महोदय, जो विभाग इन्‍होंने पूछे हैं, उनमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में 140, नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग में 7012, जनजातीय कार्य विभाग में 1468, लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकीय विभाग में 1186, इस तरह से कुल मिलाकर 12695 लोगों को स्‍थाई कर दिया है और यह प्रक्रिया अभी निरंतर चलेगी.

श्री जितेन्‍द्र गेहलोत -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से मैं यह पूछना चाहता हूँ कि जिनको स्‍थाई किया गया है, केन्‍द्र और राज्‍य शासन की जो योजनाएं हैं, क्‍या उन्‍हें इनका पूर्ण लाभ मिलेगा ?

श्री लालसिंह आर्य -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश शासन ने स्‍थाईकर्मी का जो कैडर बनाया है, उसमें हम उनको अलग वेतनमान दे रहे हैं, जबकि पहले यह व्‍यवस्‍था नहीं थी. उनको स्‍थाईकर्मी हमने नाम दिया है. उनको हम महंगाई भत्‍ता देंगे और ग्रेच्‍युईटी देने का काम भी हम करेंगे.

श्री जितेन्‍द्र गेहलोत -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी को धन्‍यवाद.

सौर ऊर्जा संयंत्र की स्‍थापना

[नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा]

11. ( *क्र. 2929 ) श्री रामपाल सिंह : क्या नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या किसानों के पंपों को चलाने के लिये सौर ऊर्जा संयंत्र स्‍थापित किये जाने की योजना संचालित की गई है? (ख) यदि हाँ, तो शहडोल जिले में कितने कृषकों द्वारा सौर ऊर्जा संयंत्र स्‍थापित किये जाने का आवेदन पत्र प्रस्‍तुत किया गया है? प्रश्‍नांकित जिले की विभिन्‍न तहसीलों में तहसीलवार आवेदन प्रस्‍तुतकर्ता एवं किसानवार जानकारी उपलब्‍ध करायी जावे। (ग) सौर ऊर्जा स्‍थापना हेतु आवेदनकर्ता किसानों में से कितने कृषकों के जल स्‍त्रोत स्‍थल पर सौर ऊर्जा स्‍थापित कर दी गई है तथा कितने कृषकों को उपलब्‍ध नहीं करायी गयी है? विलंब का कारण क्‍या है और कब तक उपलब्‍ध करा दी जावेगी?

नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री ( श्री नारायण सिंह कुशवाह ) : (क) जी हाँ। (ख) शहडोल जिले से प्रश्‍न दिनांक तक 181 किसानों से सोलर पम्‍प की स्‍थापना के आवेदन प्राप्‍त हुये हैं, जिसकी तहसीलवार एवं किसानवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (ग) शहडोल जिले के प्रथम चरण में 60 एवं द्वितीय चरण में 121 (कुल 181) किसानों से सोलर पम्‍पों की स्‍थापना हेतु आवेदन प्राप्‍त हुये हैं। जहां द्वितीय चरण के आवेदन प्रक्रियाधीन हैं, प्रथम चरण के 60 आवेदकों द्वारा निर्धारित राशि जमा की गई है और तदोपरान्‍त सभी प्रकरणों में सोलर पंपों की स्‍थापना हेतु कार्यादेश जारी किये जा चुके हैं। उक्‍त में से 16 नग सोलर पम्‍पों की स्‍थापना की जा चुकी है। शेष 44 सोलर पम्‍पों की स्‍थापना का कार्य प्रगति पर है और निर्धारित अवधि में कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। अत: प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्री रामपाल सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न पूरे शहडोल जिले में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा से संबंधित है. सौर ऊर्जा संयंत्र की स्‍थापना किसानों के जल स्‍त्रोत पर स्‍थापित किये जाने की यह योजना है और जैसा कि उत्‍तर में आया है कि शहडोल जिले में प्रथम चरण में 60 और द्वितीय चरण में 121 (कुल 181) आवेदन प्राप्‍त हुए हैं. इनमें आवेदन फॉर्म के साथ 5000 रूपए का ड्रॉफ्ट लिया जाता है और आवेदन किया जाता है. आवेदन होने के बाद इनको सूचना दी जाती है और 10 परसेंट निर्धारित जो राशि है वह जमा करवायी जाती है. मेरा प्रश्‍न यह है कि पूरे किसानों को आज तक 5000 रूपए का ड्रॉफ्ट जमा करवाने के बाद एक माह नहीं, दो माह नहीं बल्कि वर्षों से अधिक समय से यह प्रकरण लंबित है, ऐसा क्‍यों ? माननीय मंत्री जी कृपया बताएं कि प्रकरणों में इतना विलंब क्‍यों है, जहां किसानों के हित की बात है.

श्री नारायण सिंह कुशवाह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रथम चरण के 60 किसानों के पंजीयन थे और इसमें 16 नग सोलर पंप स्‍थापित हो गए हैं. यह केन्‍द्र सरकार की योजना है और इसमें किसान से 3 हॉर्स पॉवर तक के 10 परसेंट हैं, 5 से 10 हॉर्सपॉवर तक के 15 परसेंट हैं. यह पूरी राशि हितग्राही से ली जाती है और केन्‍द्र सरकार से इसकी स्‍वीकृति मिलती है क्‍योंकि केन्‍द्र सरकार के अनुदान के द्वारा ही स्‍थापित हो रहे हैं. जैसे-जैसे इनके अनुदान केन्‍द्र सरकार से प्राप्‍त होते जाते हैं वैसे-वैसे हितग्राहियों के सोलर पंप स्‍थापित किए जाते हैं चूंकि अभी 16 सोलर पंप स्‍थापित हुए हैं. 44 में 14 का पैसा जमा हुआ है और अभी 30 किसानों के पैसे जमा नहीं हुए हैं, केवल पंजीयन फीस जमा हुई है. किसान को जो अपना अंशदान देना है वह अभी 60 में से 3 किसानों के नहीं हुए हैं. जैसे ही किसानों के अंशदान की राशि जमा हो जाएगी वैसे ही 60 में से 30 जो शेष हैं उन पर भी 15 मार्च तक सोलर पंप स्‍थापित करने की कार्यवाही पूरी हो जाएगी.

श्री रामपाल सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिन किसानों के आवेदन किया है निश्चित तौर पर आप यह कह सकते हैं कि अगर उन्‍होंने आवेदन के समय 5000 रूपए जमा किए हैं तो यह निश्चित है कि उस संयंत्र को लगवाने की उनकी मंशा है. तो आप यह बताइए कि 60 में से 44 में तो काम ही नहीं हो रहा है. सिर्फ शहडोल जिले में मात्र 16 सोलर संयंत्र लगाएं गए हैं मतलब पूरे शहडोल जिले की संख्‍या आप ले लें तो वह नगण्‍य है. इतना विलंब क्‍यों हो रहा है ? अगर अधिकारी विलंब कर रहे हैं कृषकों को सूचना नहीं दे रहे हैं तो उनके ऊपर आप क्‍या कार्यवाही करेंगे ? माननीय मंत्री जी आप कार्यवाही क्‍यों नहीं कर रहे हैं?

श्री नारायण सिंह कुशवाह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि मैंने बताया है कि 16 सोलर पंप स्‍थापित हो गए हैं और 44 में से केवल 14 का ही पैसा जमा हुआ है और यह 15 मार्च तक उनके खेतों में सोलर पंप स्‍थापित हो जाएंगे.

श्री रामनिवास रावत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कौन-सी 15 मार्च है ? क्‍या यह 15 मार्च को चालू हो जाएंगे, क्‍योंकि 15 मार्च तो परसों ही है.

श्री नारायण सिंह कुशवाह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कार्यवाही चालू है. यही 15 मार्च को 14 लोगों के यहां स्‍थापित हो जाएंगे. इससे कुल 30 लोगों के यहां सोलर पंप स्‍थापित हो जाएंगे. बाकी भी 31 मार्च तक हो जाएंगे.

श्री रामनिवास रावत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं केवल इतना चाहता हॅूं कि किसान आवेदन करता है और आवेदन फीस के साथ जमा करता है. फीस के साथ आवेदन जमा करने के पश्‍चात माननीय मंत्री जी या सरकार निर्धारित करेगी कि उसका अंशदान जमा कराके एक निश्चित समयावधि में उसके यहां सोलर पंप स्‍थापित कर दिए जाएं तो किसान लंबे समय तक इंतजार न करें. माननीय अध्‍यक्ष्‍ा महोदय, इसका उत्‍तर दिलवा दें.

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी ने इसका उत्‍तर दे दिया है.

श्री रामनिवास रावत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 1-1 साल पडे़ रहते हैं, 2-2 साल पडे़ रहते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- 30 और लगा रहे हैं.

श्री रामपाल सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि हमारे वरिष्‍ठ सदस्‍य माननीय रावत जी ने जो बात कही है, उसका उत्‍तर आ जाए.

अध्‍यक्ष महोदय -- आपका तो उत्‍तर आ गया. आप बैठ जाइए.

श्री रामनिवास रावत-- आपके यहाँ तो सोलर पंप की आवश्यकता है नहीं लेकिन जिन जिन जगहों में आवश्यकता है वहाँ दे दें.

अध्यक्ष महोदय-- वह प्रश्न का उत्तर दे चुके हैं.

श्री रामपाल सिंह-- अध्यक्ष महोदय, इसकी समय सीमा बता दी जाये कि कब तक काम पूर्ण हो जाएगा?

अध्यक्ष महोदय--उन्होंने समयावधि बता तो दी है.

श्री रामपाल सिंह-- उन्होंने 15 मार्च 2018 बताया है लेकिन 15 मार्च अभी परसों ही हैं.

अध्यक्ष महोदय-- उन्होंने बताया है कि 15 मार्च को वह 14 संयंत्र लगा देंगे.

श्री रामपाल सिंह-- मैं पूछना चाहता हूं कि क्या मंत्री जी, 15 मार्च 2019 बता रहे हैं? मंत्री जी समय-सीमा तो बतायें आप?

अध्यक्ष महोदय-- मंत्री जी, फिर से बता दीजिये.

श्री नारायण सिंह कुशवाह--- अध्यक्ष महोदय, जिन 14 संयंत्रों का पैसा जमा हो गया है उनके यहाँ कार्यवाही स्थापित होने का काम चल रहा है और यह 15 मार्च तक कंपलीट हो जाएगा बाकी 30 प्रकरणों में किसानों ने पैसे जमा नहीं किये हैं यदि किसान पैसे जमा कर देते हैं तो 31 मार्च तक बाकी के यहाँ भी संयंत्रों की स्थापना हो जाएगी.

अधिकारी के विरूद्ध प्राप्‍त शिकायत की जाँच

[जनजातीय कार्य]

12. ( *क्र. 1623 ) एडवोकेट सत्‍यप्रकाश सखवार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2018 की स्थिति में जनजातीय कार्य विभाग अंतर्गत पदस्‍थ पी.एच.डी. उपाधि धारक अपर संचालक के सेवाकाल की संपूर्ण पदस्‍थापनाओं का विवरण दें? (ख) वर्ष 2009 से अद्यतन स्थिति तक में, आदिम जाति कल्‍याण और अनुसूचित जाति कल्‍याण विभाग एवं अधीनस्‍थ कार्यालयों में पदस्‍थापना के दौरान उक्‍त अधिकारी के विरूद्ध प्राप्‍त शिकायतों का ब्‍यौरा दें? शिकायतों पर शासन स्‍तर पर की जा रही कार्यवाहियों की फाइलवार अद्यतन स्थिति बतावें? (ग) उक्‍त अधिकारी द्वारा आदिम जाति कल्‍याण और अनुसूचित जाति कल्‍याण विभाग के विरूद्ध कितनी कौन सी न्‍यायालयीन याचिकाएं प्रस्‍तुत की गई हैं? प्रकरणों की अद्यतन स्थिति बतावें प्रकरणवार ओ.आई.सी. द्वारा शीघ्र निराकरण हेतु क्‍या प्रयास किये गये हैं? (घ) उक्‍त अधिकारी के खिलाफ कब-कब आपराधिक चालान पेश हुए हैं? चालानों पर कार्यवाही की अद्यतन स्थिति बतावें

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे गये परिशिष्ट के प्रपत्र "-1" अनुसार (ग)जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार। (घ) अपराध क्रमांक 889/13 में चालान क्रमांक 206/14, दिनांक 10.04.2014 को पेश किया गया है। श्री भण्‍डारी द्वारा माननीय उच्‍च न्‍यायालय जबलपुर में एम.सी.आर.सी. 3667/2014 दायर की गई है, जिसमें माननीय उच्‍च न्‍यायालय द्वारा किसी भी प्रकार की कार्यवाही पर रोक लगा दी गई है।

परिशिष्ट - ''दो''

 

एडवोकेट सत्यप्रकाश सखवार-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने प्रश्नांश (क) में पूछा था कि वर्ष 2018 की स्थिति में जनजातीय कार्य विभाग अंतर्गत पदस्थ पीएचडी उपाधि धारक अपर संचालक के सेवाकाल की संपूर्ण पदस्थापना का विवरण दें उसका उत्तर दिया गया है कि जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है. माननीय अध्यक्ष महोदय, जनजातीय कार्य विभाग माननीय मुख्यमंत्री जी के अधीन है और ऐसी स्थिति में विभाग के अधिकारियों द्वारा भ्रष्ट आचरण कर अपराधी को बचाने के लिए सदन में सरेआम गुमराह किया जा रहा है. सदन की गरिमा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. इस मामले को विशेषाधिकार हनन के तहत् विचार में लाया जाये. मेरे पास इसके प्रामाणिक दस्तावेज भी हैं.

अध्यक्ष महोदय-- आप उसका उत्तर तो पढ़ लीजिये उसमें दिया है कि हाईकोर्ट में रोक है इस प्रकरण में. आपको कोई और प्रश्न पूछना है तो सीधे पूछ लीजिये.

एडवोकेट सत्यप्रकाश सखवार-- माननीय अध्यक्ष महोदय, उत्तर (ख) में जानकारी एकत्रित करना बताया गया है. इस अधिकारी के खिलाफ विभाग में सैंकड़ों शिकायतें दबाई जा रही हैं. अनुसूचित वर्ग की एक महिला अधिकारी को प्रताड़ित करने का मामला विभाग के वरिष्ठ अधिकारी दबा रहे हैं. दोषी की पदस्थापना भोपाल से बाहर कर उच्च स्तरीय जाँच इस मामले में कराई जाए.अध्यक्ष महोदय, उत्तर (घ) में भी वास्तविकता को छिपाते हुए गलत जानकारी दी जा रही है. इस अधिकारी के खिलाफ पत्रकारों के साथ मार-पीट करने और कैमरे तोड़ने के मामले में जहाँगीराबाद थाने में एफआईआर क्र 205 दिनाँक 28 मार्च 2012 पर, दिनाँक 17.12.2012 को पूर्व में भी चालान पेश किया जा चुका है.

अध्यक्ष महोदय-- आप तो प्रश्न पूछ लें.

एडवोकेट सत्यप्रकाश सखवार-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न यह है कि इस प्रकार का फर्जीवाड़ा करने वाले, फर्जी डिग्रीधारक ऐसे अधिकारियों को जिनका भ्रष्ट आचरण हैं, उनको विभाग में रखा जा रहा है. मेरा कहना है कि विभाग उनके खिलाफ में पूर्ण जानकारी एकत्र करके कार्यवाही सुनिश्चित करे.

श्री लालसिंह आर्य-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा माननीय सदस्य ने कहा है, शासन की मंशा अगर खराब होती तो उनके खिलाफ चालान ही प्रस्तुत नहीं किया जाता, जाँच नही की जाती. माननीय अध्यक्ष महोदय,जो भी जाँच सरकार ने प्रचलित की उसके बाद उनका निलंबन किया और उसके बाद वह हाईकोर्ट में चले गये. हाईकोर्ट, जबलपुर ने उसमें उनको स्टे दे दिया और इस पर पुनः विचार करने की दृष्टि से बात की तो माननीय अध्यक्ष महोदय, विभागीय जाँच आयुक्त को उनकी जाँच करने के लिए आदेश शासन ने दिये और यह जाँच भी अंतिम चरण में है और बहुत जल्दी इस जाँच की रिपोर्ट आ जाएगी और जैसे ही वह जाँच रिपोर्ट आएगी एवं जाँच में जो तथ्य प्रकट किये जाएंगे उसके अनुसार कार्यवाही की जाएगी.

एडवोकेट सत्यप्रकाश सखवार-- माननीय अध्यक्ष महोदय,बहुत-बहुत धन्यवाद.

 

बिजारिया/बिजौरिया जाति को जाति प्रमाण-पत्र का प्रदाय

[सामान्य प्रशासन]

13. ( *क्र. 3271 ) श्री विष्‍णु खत्री : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या गुना, राजगढ़, अशोकनगर, शाजापुर आदि जिलों में बिजारिया/बिजौरिया जाति के व्‍यक्तियों को कंजर जाति अंतर्गत अनुसूचित जाति के जाति प्रमाण-पत्र जारी किये जा रहे हैं? (ख) क्‍या बैरसिया विधानसभा क्षेत्र में निवासरत् बिजारिया/बिजौरिया जाति के व्‍यक्तियों को कंजर जाति अंतर्गत अनुसूचित जाति के जाति प्रमाण-पत्र जा‍री किये जा रहे हैं? यदि नहीं, तो इसके क्‍या कारण हैं। (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में क्‍या विभाग द्वारा बैरसिया विधानसभा क्षेत्र में निवासरत् इन जाति के व्‍यक्तियों को अनुसूचित जाति के जाति प्रमाण-पत्र जारी किये जाने के संबंध में कोई कार्ययोजना बनायी जा रही है? यदि नहीं, तो विभाग इस पर कब तक कार्यवाही करेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) से (ग) भारत सरकार द्वारा मध्‍यप्रदेश राज्‍य के लिए अधिसूचित अनुसूचित जाति की सूची में अनुक्रमांक 28 पर अंकित ''कंजर'' जाति के व्‍यक्तियों को अनुसूचित जाति के अंतर्गत जाति प्रमाण-पत्र जारी किए जा रहे हैं। इस सूची में बिजारिया/बिजौरिया जाति अंकित नहीं होने के कारण बिजारिया/बिजौरिया जाति के जाति प्रमाण-पत्र जारी नहीं किए जा रहे हैं। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्री विष्णु खत्री-- माननीय अध्यक्ष महोदय, बैरसिया विधान सभा में चार-पाँच गाँवों में कंजर जाति के लोग निवासरत् हैं. राजस्व रिकार्ड में उनकी बिजोरिया या बिजौरी इस प्रकार से जाति का उल्लेख है और इसके कारण उनका अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र नहीं बन पाता है और जबकि उनका रोटी व्यवहार, बेटी व्यवहार, पूरा कंजर जाति के लोगों में है और उनके राजगढ़, अशोकनगर, गुना, शाजापुर जिलों में उनके अनुसूचित जाति के जाति प्रमाणपत्र बनते हैं. उस समय तात्कालिक परिस्थिति जो भी रही हो, जैसे परसराम को कोई परसु, परसा, परसराम, ऐसे संबोधन करते हैं, इस प्रकार इन्हें बिजोरिया, ऐसा इनका संबोधन रहा होगा और ऐसे 400 बच्चे हैं, जो पढ़-लिख गए हैं, लेकिन उनको जाति प्रमाण-पत्रों के अभाव के कारण अनुसूचित जाति का लाभ नहीं मिल पा रहा है और उसके कारण वे बहुत सारे आपराधिक कृत्यों में, गाहे-ब-गाहे समाज में जो चर्चा का विषय रहता है कि ये लोग...

अध्यक्ष महोदय-- आप सीधे प्रश्न कर दें.

श्री विष्णु खत्री-- तो मेरा माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि एक बार इसकी व्यवस्थित जाँच कराकर और इन लोगों को जो बिजोरी, जिनको संबोधन किया गया, मूलतः ये कंजर जाति के लोग हैं....

अध्यक्ष महोदय-- अब आप बैठ जाइये.

श्री विष्णु खत्री-- इनको अनुसूचित जाति के प्रमाण-पत्र जारी हो जाएँ इस संबंध में उचित कार्यवाही करें.

राज्य मंत्री, सामान्य प्रशासन (श्री लाल सिंह आर्य)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय विष्णु खत्री जी का जो भाव है, वह वास्तव में संवेदनशील हैं, अध्यक्ष महोदय, यह जो बजोरिया और बिजौरिया है, यह शायद गोत्र है और गोत्रों का उल्लेख अनुसूची में कहीं होता नहीं है. लेकिन उन्होंने कहा है कि वे कंजर जाति के हैं और इसलिए उनको लाभ मिलना चाहिए. शासकीय दस्तावेज जो होते हैं, अभी मैंने एक जाँच गौंड की कराई थी और हमने उसमें पाया कि वास्तव में वे गौंड थे, गोडावे, हम इसकी भी एक महीने के अन्दर उप सचिव स्तर से जाँच करा लेंगे और यदि उनके जो शासकीय दस्तावेज हैं, खेती के दस्तावेज हैं, उन सब में अगर वे कंजर ही पाए जाते हैं तो उनको लाभ देने का हम काम करेंगे.

श्री विष्णु खत्री-- माननीय अध्यक्ष महोदय, शासकीय दस्तावेजों में बिजौरी दर्ज है क्योंकि पटवारी.....

अध्यक्ष महोदय-- उन्होंने एक महीने का बोल तो दिया है. अब क्या रह गया है?

श्री विष्णु खत्री-- उसमें मेरा आशय यह है कि उनके जो बेटी व्यवहार हैं, रोटी व्यवहार हैं...

अध्यक्ष महोदय-- बस हो गया. उसी बात को फिर कह रहे हैं.

श्री विष्णु खत्री-- उसको थोड़ा सा ध्यान में रख कर और जो जाँच समिति बने उसमें मुझे भी शामिल किया जाए...(व्यवधान)..

श्री रामेश्वर शर्मा-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जो विष्णु जी का प्रश्न है, उस मूल प्रश्न को समझिए. अगर उनके पास दस्तावेज होते तो वे उसमें सम्मिलित हो जाते. अब उनके नाते, रिश्तेदारों के, दस्तावेज भी अगर उसमें सम्मिलित किए जाएँगे तब जाकर वे जुड़ेंगे. ऐसे ही मेरे यहाँ अनुसूचित जनजाति के गौड़, भील, भिलारे, के तीन गाँव हैं, झाबुआ जाओ तो वे सब अनुसूचित जाति में माने जाते हैं और यहाँ पर कोड़िया और भानपुर केकड़िया में रह रहे तो...(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी, बताइये. आप बैठ जाएँ, अब हम आगे बढ़ जाएँगे.

श्री रामेश्वर शर्मा-- उनके अनुसूचित जनजाति के हैं ही नहीं, राहुल भैय्या के पीछे जो बने हुए मकान हैं, तो आखिर उनको भी तो जोड़ा जाए और अगर आप इसको जाँच में डाल देंगे तो कोई प्रमाण नहीं मिलेंगे उनके.

अध्यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी, आप कुछ कह रहे हैं?

श्री विष्णु खत्री-- अध्यक्ष महोदय, मेरा एक निवेदन है जो जाँच समिति बने उसमें मुझे भी सम्मिलित किया जाए. कृपया माननीय मंत्री जी आश्वस्त करें...(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- आप बैठ तो जाएँ माननीय मंत्री जी कुछ कह रहे है?प्रश्न क्रमांक 14....(व्यवधान)...

श्री विष्णु खत्री-- अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी कुछ कह रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय-- मंत्री जी कहना चाह रहे हैं आप वही-वही बात बार बार बोल रहे हैं.

श्री लाल सिंह आर्य-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं विष्णु जी को भी उस जाँच में सम्मिलित करा दूँगा...(व्यवधान)..

श्री रामेश्वर शर्मा-- अध्यक्ष महोदय, एक मिनट.

अध्यक्ष महोदय-- उससे कोई संबंध नहीं है उसका.

श्री रामेश्वर शर्मा-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जनजाति का मामला है.

अध्यक्ष महोदय-- उसका अलग से प्रश्न करिए.

श्री रामेश्वर शर्मा-- अध्यक्ष महोदय, जनजाति का मामला है, केवल 3 गाँव हैं. उसको भी जाँच में ले लिया जाए. माननीय मंत्री जी, उसको भी जाँच में ले लें 3 गाँव हैं. बोल तो दो मैं लिख कर दे दूँगा. बोल दीजिए. माननीय अध्यक्ष जी, मंत्री जी कुछ बोल रहे हैं.

श्री लाल सिंह आर्य-- उसको भी ले लेंगे, कोई दिक्कत नहीं.

अध्यक्ष महोदय-- प्रश्न उद्भूत होता नहीं, कुछ होता नहीं. प्रश्न कौनसा, बात कौनसी.

राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना अंतर्गत लाभांवित हितग्राही

[ऊर्जा]

14. ( *क्र. 1076 ) श्रीमती चन्‍दा सुरेन्‍द्र सिंह गौर : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) खरगापुर विधान सभा क्षेत्र में स्‍वीकृत 11 वीं, 12 वी पंचवर्षीय एवं ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत कितने ग्रामों के मजरे, टोले, मोहल्‍ले विद्युतीकरण हेतु स्‍वीकृत थे एवं कितने ग्रामों के शेष हैं, जिनमें विद्युतीकरण का कार्य नहीं किया गया है? (ख) प्रश्नांश (क) में उल्‍लेखित योजनान्‍तर्गत कितने गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले हितग्राहियों को नि:शुल्‍क बी.पी.एल. विद्युत कनेक्‍शन दिये हैं? वितरण केन्‍द्रवार हितग्राहियों की संख्‍या उपलब्‍ध करायें (ग) उक्‍त प्रश्‍न के उत्‍तर में बताया गया कि 188 ग्रामों को विद्युतीकरण योजना से जोड़ा गया, परन्‍तु वस्‍तुस्थिति यह है कि दऊवन का पुरा (भानपुरा) में ठेकेदार द्वारा लाईन खड़ी करके आज दिनांक तक ट्रांसफार्मर नहीं रखा गया, बिल दिये जा रहे हैं एवं राजनगर अमुसया में लाईन खड़ी कर दी है, तार नहीं हैं, बिल दिये जा रहे हैं एवं चौधरन खेरा, जंगलन खेरा में वुदौरा में मात्र खम्‍बे जमीन में पड़े हैं, बिल दिये जा रहे हैं। इसी तरह भरवा खेरा, बुयरा खेरा भानपुरा में अभी तक खम्‍बे भी नहीं लगाये गये, ऐसे इतने ग्रामीण क्षेत्र हैं, जो 100 से अधिक की आबादी वाले हैं, परन्‍तु उन स्‍थानों पर प्रश्‍न दिनांक तक बिजली नहीं लगाई गई है, क्‍या शीघ्र ही जाँच कराकर उक्‍त शेष ग्रामों में विद्युतीकरण करा दिया जावेगा? (घ) क्‍या वर्णित प्रश्‍न क्र. 1301 में 188 ग्रामों को विद्युतीकरण से जोड़ा गया बताया गया था, परन्‍तु प्रश्‍नकर्ता को जानकारी 175 ग्रामों की दी गई सदन में इस प्रकार की असत्‍य जानकारी देने वालों के विरूद्ध कार्यवाही प्रस्‍तावित करेंगे? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) विधानसभा क्षेत्र खरगापुर में 11 वीं पंचवर्षीय योजना में स्‍वीकृत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत सम्मिलित कार्य योग्‍य सभी 119 विद्युतीकृत ग्रामों के 100 एवं 100 से अधिक आबादी वाले मजरों/टोलों के विद्युतीकरण सहित सघन विद्युतीकरण का कार्य एवं 12 वीं पंचवर्षीय योजना में स्‍वीकृत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत सम्मिलित कार्य योग्‍य एक अविद्युतीकृत ग्राम के विद्युतीकरण एवं 69 विद्युतीकृत ग्रामों के 100 एवं 100 से अधिक आबादी वाले मजरों/टोलों के विद्युतीकरण सहित सघन विद्युतीकरण के कार्य पूर्ण कर योजनान्‍तर्गत समस्‍त कार्य पूर्ण किया जा चुका है। उक्‍त योजनाओं में प्रश्‍नाधीन क्षेत्र हेतु स्‍वीकृत किसी भी कार्य योग्‍य ग्राम के विद्युतीकरण/सघन विद्युतीकरण का कार्य किये जाने हेतु शेष नहीं है। (ख) 11 वीं एवं 12 वीं पंचवर्षीय योजना में स्‍वीकृत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में प्रश्‍नाधीन क्षेत्र के अंतर्गत वितरण केन्‍द्र खरगापुर में क्रमश: 3212 एवं 438 तथा वितरण केन्‍द्र बल्‍देवगढ़ में क्रमश: 2987 एवं 398 गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले सभी श्रेणी के हितग्राहियों को नि:शुल्‍क बी.पी.एल. कनेक्‍शन प्रदान किये गये हैं। (ग) जी हाँ, ग्राम भानपुरा के दऊवन कापुरा टोले का विद्युतीकरण 12वीं पंचवर्षीय योजना में स्‍वीकृत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत माह फरवरी-17 में पूर्ण किया जा चुका है एवं वर्तमान में उक्‍त टोले में 17 घरेलू विद्युत कनेक्शन हैं, वर्तमान में ग्राम राजनगर के अमुसया टोला में 6 घरेलू विद्युत कनेक्शन, ग्राम बुदौरा के चौधरन खेरा में 12 एवं जंगलन खेरा में 10 घरेलू विद्युत कनेक्शन हैं। ग्राम बुदौरा के भरवा खेरा टोला की आबादी 100 से कम होने के कारण उक्त योजनांतर्गत इसके विद्युतीकरण का कार्य नहीं किया गया है। सौभाग्य योजनांतर्गत उक्त टोले के अविद्युतीकृत घरों को विद्युत कनेक्‍शन दिया जाना प्रस्तावित है। ग्राम भानपुरा के बुयराखेरा नहीं अपितु बोपरा खेरा में 25 के.व्ही.ए. क्षमता का ट्रांसफार्मर लगा हुआ है, जिस पर 2 घरेलू कनेक्‍शन हैं, जो वर्तमान में चालू हैं। उक्‍त सभी मजरों/टोलों में उपभोक्‍ताओं को नियमानुसार विद्युत बिल जारी किये जा रहे हैं, वर्तमान में विधानसभा क्षेत्र खरगापुर के अंतर्गत स्वीकृत कार्य योग्य 100 या 100 से अधिक आबादी वाला कोई मजरा/टोला विद्युतीकरण हेतु शेष नहीं है। (घ) विधानसभा प्रश्न क्रमांक 1301, दिनांक 28.11.2017 के उत्‍तर में 11 वीं पंचवर्षीय योजना में स्‍वीकृत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत 119 ग्रामों एवं 12 वीं पंचवर्षीय योजना में स्‍वीकृत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में 69 ग्रामों के 100 एवं 100 से अधिक आबादी वाले मजरों/टोलों इस प्रकार कुल 188 ग्रामों के मजरों/टोलों के विद्युतीकरण सहित सघन विद्युतीकरण का कार्य किये जाने की जानकारी दी गई थी, जो पूर्णत: सत्य है। अत: किसी के विरूद्ध कार्यवाही किये जाने का प्रश्‍न नहीं उठता।

श्रीमती चन्दा सुरेन्द्र सिंह गौर-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से अपने प्रश्न में माननीय मंत्री जी से पूछना चाहती हूँ कि खरगापुर विधान सभा के जितने मजरे, टोले, मोहल्ले, विद्युतीकरण, योजना से छूट गए हैं, उन स्थानों पर विद्युतीकरण कराकर बिजली लगाए जाने का कार्य कब तक पूर्ण करा दिया जाएगा?

श्री पारस चन्द्र जैन-- माननीय अध्यक्ष महोदय, सौ से ज्यादा आबादी वाले जो रहते हैं, उनको तो हम दीनदयाल योजना में जोड़ते हैं और सौ से कम संख्या वाले जो रहते हैं, उनको अभी नई सौभाग्य योजना है, उसके माध्यम से हम करते हैं और इनका बल्देवगढ़, माननीय विधायक क्षेत्र का पूरा का पूरा सौभाग्य योजना में, पूरी की पूरी तहसील हमने सौभाग्य योजना में कर दी है.

अध्यक्ष महोदय-- और कुछ कहना है आपको? सब कर रहे हैं आपका काम पूरा.

श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर-- धन्यवाद कर रहे हैं, बहुत अच्छी बात है, धन्यवाद.

बी.एल.ओ. के रूप में शिक्षकों का संलग्‍नीकरण

[सामान्य प्रशासन]

15. ( *क्र. 2531 ) श्री बाबूलाल गौर : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) निर्वाचन के कार्य में किन शासकीय सेवकों को बी.एल.ओ. का कार्य दिया जा सकता हैं? क्‍या निर्वाचन कार्यालय में एवं बी.एल.ओ. के कार्य में शिक्षकों को कार्य करने के लिये जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा कार्य आवंटित किया गया है? (ख) कुल कितने शिक्षक बी.एल.ओ. का कार्य एवं कितने शिक्षक निर्वाचन कार्यालय में संलग्‍न होकर कार्य कर रहे हैं? (ग) निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव की घोषणा के पश्‍चात् ही निर्वाचन प्रक्रिया प्रारंभ होती है, तो क्‍या निर्वाचन कार्यालय में शिक्षकों के संलग्‍नीकरण एवं बी.एल.ओ. के कार्य में संलग्‍न शिक्षकों को इस कार्य से पृथक रहने के लिये क्‍या निर्देश जारी किए गए हैं? (घ) प्रश्नांश (ग) के परिप्रेक्ष्‍य में किन-किन जिलों में कितने-कितने शिक्षक निर्वाचन संबंधी कार्य हेतु संलग्‍न किये गये हैं? क्‍या निर्वाचन कार्य में लगे शिक्षकों के स्‍थान पर कोई वैकल्पिक व्‍यवस्‍था की गई है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) बूथ लेवल अधिकारी, सरकार या स्‍थानीय निकायों के सेवारत अधिकारी होते हैं, उन्‍हें जिला निर्वाचन अधिकारी का अनुमोदन प्राप्‍त करने के बाद लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम 1950 की धारा 13ख (2) के आधीन निर्वाचक रजिस्‍ट्रीकरण अधिकारी द्वारा नियुक्त किया जाता है। निम्‍नलिखित श्रेणी के कर्मचारियों को बूथ लेवल अधिकारी के रूप में नियुक्‍त किया जा सकता है :- 1. शिक्षक, 2 .आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, 3 .पटवारी/अमीन/लेखपाल, 4. पंचायत सचिव, 5. ग्राम स्‍तरीय कार्यकर्ता, 6. बिजली बिल रीडर, 7. डाकिया, 8. सहायक नर्स एवं मिड वाईफ, 9. स्‍वास्‍थ्‍य कार्यकर्ता, 10. दोपहर का भोजन कार्यकर्ता 11. संविदा शिक्षक, 12. निगम कर संग्रह, 13. शहरी क्षेत्र में लिपकीय स्‍टॉफ (अपर श्रेणी लिपिक/अवर श्रेणी लिपिक आदि) आयोग के निर्देशों के अंतर्गत उपरोक्‍तानुसार जिलों में निर्वाचक रजिस्‍ट्रीकरण अधिकारियों द्वारा शिक्षकों को बी.एल.ओ. नियुक्‍त किया जाता है। बी.एल.ओ. अपनी ड्यूटी के समय को छोड़कर अतिरिक्‍त समय में सुबह, शाम या अवकाश के दिन बी.एल.ओ. का कार्य करते हैं। इसके लिये इन्‍हें रूपये 6000/- अतिरिक्‍त मानदेय दिया जाता है। बी.एल.ओ. की ड्यूटी से विभाग का कार्य प्रभावित नहीं होता है। (ख) राज्‍य में 65200 मतदान केन्‍द्रों में 41340 शिक्षक फोटो निर्वाचक नामावली के कार्य हेतु बी.एल.ओ. नियुक्‍त हैं एवं जिला निर्वाचन कार्यालयों में 86 शिक्षक की ड्यूटी अस्‍थायी रूप से निर्वाचन कार्य हेतु लगायी गयी है। यह स्‍थायी स्‍वरूप की नहीं है। बी.एल.ओ. भी स्‍थायी स्‍थापना के नहीं है। ड्यूटी बदलती रहती है। प्राय: बी.एल.ओ. की ड्यूटी हेतु शिक्षक को छोड़कर अन्‍य संवर्ग के कर्मचारियों को बी.एल.ओ. नियुक्‍त किया जाता है। जब अन्‍य कर्मचारी नहीं मिलते तो शिक्षकों को लगाया जाता है। बी.एल.ओ. की ड्यूटी स्‍थायी स्‍वरूप की नहीं है। यह बदलती रहती है। अधिकतर मतदान केन्‍द्रों में वर्षभर में 2-3 बी.एल.ओ. बदल जाते हैं। (ग) लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम 1950 के नियम 13गग मुख्‍य निर्वाचन ऑफिसरों, जिला निर्वाचन ऑफिसरों आदि का निर्वाचन आयोग में प्रतिनियुक्‍त समझा जाना - इस भाग में निर्दिष्‍ट और सभी निर्वाचनों के लिये निर्वाचक नामावली की तैयारी, पुनरीक्षण और शुद्धि‍ करने और ऐसे निर्वाचनों का संचालन करने के संबंध में नियोजित कोई अन्‍य ऑफिसर या कर्मचारीवृन्‍द, उस अवधि में जिसके दौरान उन्‍हें इस प्रकार नियोजित किया जाता है, निर्वाचन आयोग में प्रतिनियुक्‍त पर समझे जायेंगे और ऐसे ऑफिसर और कर्मचारीवृन्‍द उस अवधि के दौरान, निर्वाचन आयोग के नियंत्रण, अधीक्षण और अनुशासन के अध्‍यधीन होंगे, फोटो निर्वाचक नामावली का कार्य सतत् अद्यतन के तहत लगातार चलता है, जिसमें बी.एल.ओ. में कार्यरत संलग्‍न शिक्षक इस कार्य को अवकाश दिनों और गैर शिक्षण समय तथा गैर शिक्षण दिवसों के दौरान बूथ लेवल अधिकारी के कार्य को सम्‍पन्‍न करते हैं। (घ) अन्‍य कर्मचारी उपलब्‍ध नहीं होने से 86 शिक्षक निर्वाचन संबंधी कार्य के लिये जिला निर्वाचन कार्यालयों में आफिस कार्य के लिये लगाये हैं। चुनाव के लिये अन्‍य कर्मचारी उपलब्‍ध होने पर इन्‍हें मुक्‍त कर दिया जाता है। प्राय: शिक्षकों को तब ही लगाया जाता है, जब अन्‍य कर्मचारी उपलब्‍ध न हो।

श्री बाबूलाल गौर--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न यह है कि माननीय मंत्री जी ने जो उत्तर दिया है उसका विषय है "बीएलओ के रुप में शिक्षकों का संलग्नीकरण." इसके उत्तर के (ख) भाग में बताया है कि "राज्य में 65200 मतदान केन्द्रों में 41340 शिक्षक फोटो निर्वाचक नामावली के कार्य हेतु बी.एल.ओ. नियुक्त हैं एवं जिला निर्वाचन कार्यालयों में 86 शिक्षक की ड्यूटी अस्थायी रुप से निर्वाचन कार्य हेतु लगाई गयी है. यह स्थायी स्वरुप की नहीं है."

अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से यह जानना चाहता हूँ कि प्रदेश के अन्दर 45654 शिक्षकों के पद रिक्त हैं और उनको शिक्षण कार्य से हटाकर बी.एल.ओ. का काम ले रहे हैं. शिक्षा व्यवस्था चौपट हो गई है. यह इनका उत्तर है. मेरा प्रश्न आप ध्यान से सुनिए आपकी मदद होगी तो बाद में ले लूंगा (विपक्ष की तरफ इशारा करते हुए)

अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि मंत्री जी ने कहा है कि अन्य विभागों के अधिकारियों को भी बी.एल.ओ. के कार्य के लिए लिया जाता है. मैं पूछना चाहता हूँ कि किन-किन विभाग के किस-किस अधिकारी को बी.एल.ओ. के काम में लगाया गया है.

अध्यक्ष महोदय--उत्तर में यह लिखा हुआ है.

राज्यमंत्री, सामान्य प्रशासन(श्री लालसिंह आर्य)--अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को बताना चाहता हूँ कि एक तो यह बात आई है कि मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था चौपट हो गई है. किसी कीमत पर मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था चौपट नहीं होगी. रिजल्ट बहुत अच्छे आ रहे हैं और अनुसूचित जाति, जनजाति के रिजल्ट तो ग्रामोदय में गुरुकुलम में 95 और 96 प्रतिशत आ रहे हैं. (मेजों की थपथपाहट)

अध्यक्ष महोदय, दूसरी बात निर्वाचन आयोग का कोई केडर नहीं होता है और उसमें विभिन्न विभागों से अधिकारी कर्मचारी लगाए जाते हैं. यह आज से नहीं जब से निर्वाचन प्रक्रिया चल रही है तब से लगातार विभिन्न विभाग के कर्मचारियों को कहीं-न-कहीं अस्थायी रुप से संलग्न किया जाता है. एक चीज और बता दूं जिससे स्पष्ट हो जाएगा. जिस समय यह कर्मचारी शासकीय कार्य करते हैं उस समय इनसे निर्वाचन प्रक्रिया का काम नहीं लिया जाता है. सरकारी कार्य से अलग हटकर निर्वाचन प्रक्रिया का काम लिया जाता है और यह काम पूरे दिन नहीं लिया जाता है. यह साल भर का उन पर काम होता है वे शनिवार, रविवार छुट्टियों के समय यह काम करें ताकि शिक्षा व्यवस्था भी चौपट न हो और निर्वाचन प्रक्रिया का जो काम है, यह लोकतंत्र में एक बड़ा काम है जिससे हम लोग चुनकर आते हैं इस प्रक्रिया को बिना विघ्न के पूरा नहीं किया जाएगा तो फिर यह काम कौन करेगा. इसमें लगाए गए कर्मचारियों को मानदेय भी दिया जाता है. यह अस्थायी काम होता है.

श्री बाबूलाल गौर--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी के उत्तर से संतुष्ट नहीं हूं. मैं बताना चाहता हूँ कि जो ऑल इंडिया रिपोर्ट छपी है उसमें गणित में मध्यप्रदेश 29 वें स्थान पर है और भाषा में 26 वें स्थान पर है. यह आज स्थान है और आप कह रहे हैं कि हम बहुत आगे बढ़ रहे हैं. शिक्षा का कार्य तो चौपट हो गया है. मैं माननीय मंत्री जी से अनुरोध करुंगा कि आप अन्य विभाग के अधिकारियों की ड्युटी क्यों नहीं लगाते हैं. केवल शिक्षक ही लगाए जाते हैं. मंत्री जी आपने उत्तर में बताया है कि :- 1. शिक्षक, 2 .आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, 3 .पटवारी/अमीन/लेखपाल, 4. पंचायत सचिव, 5. ग्राम स्‍तरीय कार्यकर्ता, 6. बिजली बिल रीडर, 7. डाकिया, 8. सहायक नर्स एवं मिड वाईफ, 9. स्‍वास्‍थ्‍य कार्यकर्ता, 10. दोपहर का भोजन कार्यकर्ता 11. संविदा शिक्षक, 12. निगम कर संग्रह, 13. शहरी क्षेत्र में लिपकीय स्‍टॉफ (अपर श्रेणी लिपिक/अवर श्रेणी लिपिक आदि). मैंने पूछा है कि किस किस विभाग के कितने कितने कर्मचारी आपके द्वारा लगाए गए यह बताएं.

वन मंत्री (डॉ. गौरीशंकर शेजवार)--गौर साहब जब बोलें तो विपक्ष के नेता का बोलना अनिवार्य है नहीं तो प्रोटोकॉल पूरा नहीं होता है.

श्री बाला बच्चन--अध्यक्ष महोदय, क्या मंत्री जी जवाब नहीं देना चाहते हैं ?

अध्यक्ष महोदय--माननीय सदस्य किस विभाग के कितने कर्मचारी लगाए गए यह जानकारी मांग रहे हैं.

श्री लालसिंह आर्य--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय गौर साहब ने जो प्रथम प्रश्न किया था उसका उत्तर भी स्वयं दे दिया है कि इन-इन विभागों के कर्मचारी लगाए गए हैं.

श्री बाबूलाल गौर--आप संख्या बताइए न.

श्री लालसिंह आर्य--गौर साहब पूरी डिटेल आपके पास पहुंचा दी जाएगी.

श्री बाबूलाल गौर--अध्यक्ष महोदय, यह उत्तर नहीं है. आज ही उत्तर आना चाहिए और इसी समय आना चाहिए. यह विधान सभा की कार्यवाही होती है. (विपक्ष की ओर से शेम-शेम के नारे)

 

 

 

 

 

 

12.00 बजे

श्री तरुण भनोत-- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने कहा 95 प्रतिशत नतीजे आए हैं. 95 प्रतिशत नतीजों की भी सूची दीजिए.

अध्‍यक्ष महोदय- यह प्रश्‍न में कहां है.  

श्री लालसिंह आर्य-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सूची दे दूंगा.

कॅुंवर विजय शाह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हर जिले के अलग-अलग विभाग के अलग-अलग कर्मचारी आवश्‍यकता पड़ने पर कलेक्‍टर को अधिकार है और इसीलिए अभी बताना संभव नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय-- यह प्रश्‍न में भी नहीं था. प्रश्‍नकाल समाप्‍त.

 

 

 

(प्रश्‍नकाल समाप्‍त)

 

 

 

 

 

12.01 बजे अध्‍यक्षीय घोषणा

मध्‍यप्रदेश के विभिन्‍न उत्‍पादों से माननीय सदस्‍यों को अवगत कराने हेतु प्रदर्शन सह विक्रय केन्‍द्रों का संचालन

 

अध्‍यक्ष महोदय-- मध्‍यप्रदेश के विभिन्‍न उत्‍पादों से माननीय सदस्‍यों को अवगत कराने तथा उनके प्रचार-प्रसार हेतु बजट सत्रावधि में दिनांक 13 से 28 मार्च, 2018 तक प्रात: 10.30 से सायं 06.00 बजे तक प्रदर्शन सह विक्रय केन्‍द्रों का संचालन विधान सभा परिसर में संबंधित संस्‍थाओं द्वारा किया जायेगा.

माननीय सदस्‍यों से अनुरोध है कि उक्‍त स्‍टालों पर उपलब्‍ध विभिन्‍न उत्‍पादों की क्रय सुविधा का लाभ लेने का कष्‍ट करें.

 

12.01 बजे नियम 267-क के अधीन विषय

 

अध्‍यक्ष महोदय-- निम्‍नलिखित माननीय सदस्‍यों की शून्‍यकाल की सूचनाएं पढ़ी हुई मानी जाएंगी.

1. श्री बाला बच्‍चन

2. श्री सूबेदार सिंह रजौधा

3. श्री मधु भगत

4. डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय

5. श्री सुशील कुमार तिवारी

6. श्री नीलांशु चतुर्वेदी

7. श्री रणजीत सिंह गुणवान

8. श्री अजय सिंह

9. श्री रामनिवास रावत

10. श्री शैलेन्‍द्र जैन

 

 

 

 

 

12.02 बजे शून्‍यकाल में मौखिक उल्‍लेख

 

(1) देवास जिले के खातेगांव में बोरवेल में गिरा बच्‍चा सुरक्षित निकाला जाना

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया (मंदसौर)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, परसों की घटना थी. कल सदन में व्‍यवधान के कारण दो बार सदन की कार्यवाही स्‍थगित हुई जिसके कारण हम शून्‍यकाल में अपनी बात नहीं रख पाए. देवास जिले के खातेगांव का 4 वर्ष का बालक रोशन उसको नई जिंदगी दी गई. माननीय मुख्‍यमंत्री जी की चिन्‍ता और प्रशासनिक अमले ने वहां पर जिस मुस्‍तैदी से काम किया फिर चाहे देवास जिले के कलेक्‍टर हों देवास जिले के एस.पी. हों और हमारे सदन के माननीय सदस्‍य भाई आशीष जी शर्मा लगातार 30 से 35 घण्‍टे तक उस पूरी घटना पर निगाह रखे हुए थे और सब की आंखे टी.वी. पर टकटकी लगाए थीं कि इसका क्‍या होगा.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मुख्‍यमंत्री जी को प्रशासकीय अधिकारी को, आशीष भाई को साथ ही साथ सेना के जवानों ने जो काम किया मैं उनका अभिनंदन करते हुए तमाम चैनल जी एम.पी.सी.जी. आई.बी.सी 24, समय ई टी.वी. सबने जो कवरेज किया और जी एम.पी.सी.जी.ने तो लगातार घटनाक्रम को जोड़कर दुआएं देने का काम किया है. बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

(2) ओपन ट्यूबवेल पर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाईन का पालन न किया जाना.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी इसी विषय पर शून्‍यकाल की सूचना थी. यह घटनाएं क्‍यों हो रही हैं. सुप्रीम कोर्ट की स्‍पष्‍ट गाइडलाईन है लेकिन उन गाइडलाईनों का मध्‍यप्रदेश सरकार पालन नहीं कर रही है. ओपन ट्यूबवेल बंद करना चाहिए और यदि आप बंद नहीं करते तो इस तरह की घटनाएं होंगी. पहली बात तो है कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाईन के तह‍त इनको आप पालन कराइए.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया-- मैंने देखा था माननीय मंत्री जी ने इसके लिए कल ही निर्देश जारी किए हैं.

श्री अजय सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी दूसरी बात यह है कि कुछ दिन पहले मुख्‍यमंत्री महोदय ने घोषणा की थी कि स्‍व-सहायता समूह के माध्‍यम से दलिया का उत्‍पादन होगा लेकिन उसके बाद भी (XXX).

अध्‍यक्ष महोदय-- यह उचित नहीं है.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह आपत्तिजनक है, घोर आपत्तिजनक है. (व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय-- मैंने भी यही कहा है कि यह उचित नहीं है. (व्‍यवधान)..

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह घोर आपत्तिजनक है. इसे आप विलोपित कराइए. (व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय-- इसे कार्यवाही से निकाल दें. (व्‍यवधान)..

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 17 हजार यह किस आधार पर बच्‍चों की मौत का उल्‍लेख कर रहे हैं. किस आधार पर बच्‍चों की मौत का आंकड़ा दे रहे हैं. (व्‍यवधान)..

श्री अजय सिंह-- माननीय हाई कोर्ट के निर्देश हुए. (व्‍यवधान)..

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- यह विषयांतर्गत नहीं है जो मुख्‍यमंत्री जी ने घोषणा की है उसका अक्षरश: पालन हो रहा है. (व्‍यवधान)..

 

श्री अजय सिंह-- माननीय हाई कोर्ट के निर्देश के बाद तुरंत पालन हो जाना चाहिए. (व्‍यवधान)..

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- आज की केबिनेट में स्‍व-सहायता समूहों को दिया जा रहा है और पारदर्शी तरीके से दिया जा रहा है. हिन्‍दुस्‍तान के अंदर कोई नहीं कर रहा है जैसा मध्‍यप्रदेश करने जा रहा है. आपकी अपनी सरकार नहीं कर रही है यह सिर्फ शिवराज सिंह चौहान है. (व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय- इसे नियमों के तहत उठाना चाहिए. (व्‍यवधान)..

श्री अजय सिंह- हजारों बच्‍चों की रोज मौत हो रही है.

अध्‍यक्ष महोदय- इस तरह से विषय को उठाना ठीक नहीं है.

(...व्‍यवधान...)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र- अध्‍यक्ष महोदय, आपने इन्‍हें किस बात की अनुमति दी. ये किस नियम प्रक्रिया के तहत ऐसा कर रहे हैं ?

श्री रामनिवास रावत- कुपोषण के कारण 92 बच्‍चे रोज मर रहे हैं.

(...व्‍यवधान...)

श्री मुकेश नायक- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं विनम्रतापूर्वक आपसे कहना चाहता हूं कि (XXX).

अध्‍यक्ष महोदय- इसे कार्यवाही से निकाल दें.

(...व्‍यवधान...)

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ''इशारों पर चलाना'' यह भी आपत्तिजनक है.

श्री जितू पटवारी- संसदीय कार्य मंत्री, आसंदी की गरिमा नहीं रखते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय- आप मेरी गरिमा की चिंता मत करिये. मुझे मालूम है आप किस-किस की गरिमा की चिंता करते हैं. इसकी चिंता करने की आपको जरूरत नहीं है.

श्री सोहनलाल बाल्‍मीक- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आसंदी की गरिमा नहीं रखी जाती है तो हमें यहां बैठकर, यह बुरा लगता है.

अध्‍यक्ष महोदय- बुरा लगता है तो आप बाहर जाईये.

श्री अजय सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हाईकोर्ट ने स्‍पष्‍ट निर्देश दिए थे कि अप्रैल 2017 से स्‍वसहायता समूह के माध्‍यम से कार्य किया जायेगा. हाईकोर्ट ने चीफ सेक्रेटरी को निर्देश दिए और उसकी अवमानना की गई.

अध्‍यक्ष महोदय- यह विषय किसी नियम के अंतर्गत आप उठाते तो मैं आपको बिल्‍कुल अनुमति देता परंतु शून्‍यकाल में इस तरह के विषय नहीं उठाने चाहिए. ऐसी कोई परंपरा नहीं है. आप इसे नियम के तहत उठायें.

(...व्‍यवधान...)

श्री अजय सिंह- लाखों की संख्‍या में बच्‍चों की मौत हो रही है.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नियम के तहत विषय उठाने के बाद ही हम जवाब देंगे.

अध्‍यक्ष महोदय- आप प्रतिपक्ष के नेता हैं परंतु कोई भी विषय आप नियम के तहत उठायेंगे. श्री जितू पटवारी.

श्री जितू पटवारी- आदणीय अध्‍यक्ष महोदय धन्‍यवाद.

अध्‍यक्ष महोदय- मुझे पता है आप मेरी गरिमा की चिंता करते हैं.

 

(3) संविदाकर्मियों द्वारा अपनी मांगों की पूर्ति हेतु हड़ताल किया जाना

श्री जितू पटवारी (राऊ)- अध्‍यक्ष महोदय, पिछले 27 दिनों से संविदा कर्मचारी हड़ताल पर हैं और पूरे प्रदेश के कई विभागों का काम ठप्‍प पड़ा हुआ है. सरकार और मुख्‍यमंत्री जी ने कई बार अलग-अलग पंचायतें करके उन्‍हें आश्‍वासन दिए हैं. संविदाकर्मी के अध्‍यक्ष ने भोपाल में ऊपर चढ़कर आत्‍महत्‍या करने का प्रयास भी किया. आप और हम, पूरा सदन और पूरा मध्‍यप्रदेश इस बात को लेकर चिंतित है कि उन परिवारों को रोजगार दिया जाये जिससे कि उनका जीवनयापन सुनिश्चित किया जा सके. क्‍या कारण है कि सरकार उन पर ध्‍यान नहीं दे रही है ?

अध्‍यक्ष महोदय- ज्‍यादा लंबा भाषण न दें. श्री रामनिवास रावत.

श्री जितू पटवारी- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपसे अनुरोध है कि संविदा शिक्षक, संविदा कर्मचारी, अलग-अलग विभागों के संविदाकर्मी दुखी हैं.

 

अध्‍यक्ष महोदय- श्री रामनिवास रावत. अब श्री जितू पटवारी का नहीं लिखा जायेगा. आप कृपया बैठ जायें.

श्री जितू पटवारी- (XXX)

 

 

 

(4) भोपाल में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाओं का बढ़ता जाना

श्री रामनिवास रावत (विजयपुर)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, भोपाल में 10 मार्च 2018 को गौतम नगर की बी.कॉम.‍ द्वितीय वर्ष की एक होनहार छात्रा, आरती राय ने छेड़खानी से तंग आकर आत्‍महत्‍या कर ली. इसी प्रकार मिसरोद थाने के अंतर्गत 35 वर्षीय युवक द्वारा 7 साल की बच्‍ची के साथ ज्‍यादती की गई. एम्‍स की डॉक्‍टर के साथ लगातार छेड़खानी की घटनायें हो रही हैं और उसने रिपोर्ट भी की लेकिन आरोपी गिरफ्तार नहीं किया गया. इंदौर के ट्रेज़र आइलैण्‍ड में एक 9 वर्षीय मासूम बच्‍ची के साथ ज्‍यादती की गई, उसके खिलाफ भी कोई कार्यवाही नहीं हुई.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सरकार ने महिला स्‍कवॉड बनाया हुआ है. प्रदेश में महिलायें लगातार असुरक्षित होती जा रही हैं. संरक्षण का माहौल नहीं है. मैंने इस संबंध में स्‍थगन दिया है. प्रदेश में महिलायें पूरी तरह से असुरक्षित हैं. प्रतिदिन 13 महिलाओं के साथ ज्‍यादती हो रही है. हम चाहते हैं कि यह चर्चा सदन में आ जाये. लोग अपनी बच्चियों को कॉलेज भेजने में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. प्रदेश के सभी गर्ल्‍स कॉलेजों में इस प्रकार की व्‍यवस्‍था की जाये कि छेड़खानी की घटनायें कम हों. अध्‍यक्ष महोदय, इस पर हमारा स्‍थगन दिया हुआ है. पूरा भोपाल आंदोलित है. पूरे भोपाल की बच्चियां आंदोलित हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा कहना है कि सदन चल रहा है तो उस पर चर्चा होनी चाहिए.

अध्‍यक्ष महोदय- आपकी बात पर विचार कर लिया जायेगा.

 

 

 

(5) आशा कार्यकर्ताओं का डिलेवरी मानदेय बढ़ाया जाना

श्री बहादुर सिंह चौहान (महिदपुर)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पूरे प्रदेश की आशा कार्यकर्ता, यदि रात के दो बजे भी डिलेवरी का काम होता है तो वे करवाती हैं. उन्‍हें एक डिलवरी पर मात्र 600 रुपये मिलते हैं. मैं कहना चाहता हूं कि उन्‍हें सरकार की ओर से छोटा-मोटा मानदेय मिले और प्रति डिलेवरी के पैसों को भी बढ़ाया जाए. धन्‍यवाद.

 

(6) भोपाल के गैस राहत अस्‍पतालों में दवाओं का उपलब्‍ध न होना

श्री आरिफ अकील (भोपाल-उत्‍तर)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, भोपाल के सभी गैस राहत अस्‍पतालों में दवायें नहीं मिल रही हैं. मैं आपके माध्‍यम से अनुरोध करना चाहता हूं कि दवाओं की व्‍यवस्‍था हो जाए जिससे की लोगों का भला हो सके.

(7) बेनगंगा नदी के उद्गगम का इतिहास परिवर्तित किया जाना

श्री दिनेश राय (सिवनी)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसे मां नर्मदा और गंगा-यमुना हैं उसी प्रकार हमारे जिले की बेनगंगा नदी, जहां पर लोगों द्वारा अस्थि कलशों का विसर्जन किया जाता है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे जिले की बेनगंगा नदी, जिसमें पूरे जिले के लोगों की की श्रद्धा जुड़ी हुई है, जिसमें अस्थिकलश का भी विसर्जन किया जाता है. जिसमें हर त्‍यौहार मनाया जाता है, जिसका उद्गम स्‍थल मुंडारा, सिवनी जिले से है और व‍ह सिवनी जिले से निकलने के बाद बालाघाट जाती है, यहां पर मंत्री जी भी बैठें हैं, लेकिन यहां मध्‍यप्रदेश के इतिहासकारों ने उसका उद्गम छिन्‍दवाड़ा बताया गया है और उसका प्रस्‍थान जबलपुर बताया गया है. यह घोर निन्‍दनीय है, मेरे जिले में माहौल बहुत खराब है. मैं निवेदन करता हूं कि इसको तत्‍काल काटकर इतिहासकार इसकी सत्‍यता सामने लायें. इसका उद्गम स्‍थल सिवनी और इसका आगे जो प्रस्‍थान है वह बालाघाट है. यहां पर बालाघाट के मंत्री जी भी बैठे हैं और छिन्‍दवाड़ा के विधायक भी बैठे हैं, उनसे पूछ लीजिये वह छिन्‍दवाड़ा से नहीं निकलती है और न ही जबलपुर जाती है. उसका सिर्फ सिवनी से उद्गम होता है और बालाघाट जाती है, जिससे हमारे जिले में भारी आक्रोश है. हमारे जिले में कुछ मिला नहीं, यदि हमारी सिवनी जिले की जमीन को प्रकृति ने कुछ दिया है तो उसको भी छीनने का इतिहासकार काम कर रहे हैं.

(8)मध्‍यप्रदेश के थानों में चालान के नाम पर अवैध वसूली किया जाना.

श्री के.पी.सिंह (पिछोर):- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पूरे मध्‍यप्रदेश के थानों के इलाकों में रोजाना चेकिंग होती है और पिछले कई वर्षों से हो रही है. अब उस चेकिंग का रूप अवैध वसूली में परिवर्तित हो गया है. तमाम लोग परेशान है, रोजाना उनसे चालान के नाम से अवैध वसूली की जा रही है, माननीय गृह मंत्री भूपेन्‍द्र सिंह जी विराजमान हैं. अध्‍यक्ष महोदय, इस संबंध में मैंने ध्‍यानाकर्षण दिया है. अगर आप इसको ग्राह्य कर लेंगे तो चर्चा हो जायेगी और कुछ सार्थक उत्‍तर माननीय गृह मंत्री जी की और से आ जायेगा. मेरी आपसे प्रार्थना है कि आप इसको ध्‍यानाकर्षण के रूप में ले लें.

(9) पोलियो की दवा शिक्षकों से न पिलवाया जाना.

कुँवर सौरभ सिंह सिसोदिया(बहोरीबंद):- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों के हड़ताल में होने से शिक्षकों के द्वारा पोलियो की दवा पिलायी जा रही है, जिससे कोई बड़ी घटना हो सकती है. मेरा निवेदन है कि शासन इस विषय पर ध्‍यान दे, क्‍योंकि जो शिक्षक पोलियो की दवा पिला रहे हैं, वह इस लायक नहीं हैं, जहां पिलायी जा रही है.

(10)मेरे विधान सभा क्षेत्र मऊगंज में हनुमना-बहरी मार्ग पर बायपास बनाया जाना.

श्री सुखेन्‍द्र सिंह (मऊगंज):- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधान क्षेत्र मऊगंज में हनुमना- बहरी मार्ग है. वहां पर आये दिन एक्‍सीडेंट होते हैं और उसका कारण यह है कि वहां पर बहुत ज्‍यादा क्रेशर मशीनों की मंजूरी दे दी गयी है. वहां से बड़े वाहन निकलने से एक्‍सीडेंट होते हैं. अत: वहां पर एक बायपास की आवश्‍यकता है, इसलिये मैं आपके माध्‍यम से अनुरोध करना चाहता हूं कि शासन इस ओर ध्‍यान दें.

श्री हरदीप सिंह डंग(सुवासरा):- अध्‍यक्ष महोदय, मेरे द्वारा आज जो प्रश्‍न पूछा था वह 21 नंबर पर था. मेरा प्रश्‍न यह है कि मेरा प्रश्‍न ही आधा गायब कर दिया गया है.

अध्‍यक्ष महोदय:- आप इस संबंध में मेरे से पहले ही कक्ष में कुछ  बात कर चुके हैं, यह ठीक बात नहीं है. आप उनके रास्‍ते पर मत चलिये.

श्री हरदीप सिंह डंग:- ठीक है.

 

(11) परमार समाज के देवतुल्‍य सम्राट राजाभोज का अपमान किया जाना.

श्री मधु भगत(परसवाड़ा):- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी कुछ दिन पूर्व एक समाचार पत्र के माध्‍यम से दिनांक 28.2 को प्रकाशित भोपाल के सरोकार परिशिष्‍ट में पवार क्षत्रिय, परमार समाज जिनके देवतुल्‍य आराध्‍य चक्रवर्ती सम्राट राजाभोज के हाथ में, स्‍थल में इनके झाड़ू लगायी गयी है. (सदन में समाचार पत्र आसंदी की ओर दिखाते हुए)

अध्‍यक्ष महोदय:- नहीं, आप यह नहीं दिखा स‍कते हैं.

श्री मधु भगत:- यह सरकार के द्वारा स्‍वच्‍छता अभियान के चलते हम स्‍वच्‍छता का सम्‍मान करते हैं. पर यह राजाभोज जो हमारे देवतुल्‍य हैं, यह आराध्‍य का अपमान है, यह अखबार में प्रकाशित हुआ है. नगर-निगम इसका दोषी है, इसको चर्चा में लिया जाये.

अध्‍यक्ष महोदय:- आपकी बात सदन में आ गयी है.

(12) रामपुर विधान सभा क्षेत्र के ग्राम खरवाही ग्राम पंचायत में हुई हत्‍या की जांच सीबीआई से कराया जाना.

श्रीमती ऊषा चौधरी(रैगांव):- अध्‍यक्ष महोदय, मैं सदन में आपसे अनुरोध करना चाहती हूं कि सतना जिले के रामपुर विधान सभा में खरवाही ग्राम पंचायत में एक स्‍वामीदीन कुशवाह को धारा 302 के मुकदमें और उसके लड़के को फर्जी 302 के मुकदमें में जेल भेजा गया है. अध्‍यक्ष महोदय यह प्रमाणित है कि जिसकी हत्‍या हुई है कि वह जिलाबदर था और उस पर कई मुकदमें कायम थे और उस गांव से हटकर दूसरी जगह उसकी हत्‍या हुई और जिस व्‍यक्ति पर हत्‍या का आरोप लगाकर जेल भेजा गया. वह व्‍यक्ति गांव में ही बरहवौं संस्‍कार में उपस्थित है, उनके बच्‍चे पर धारा 302 का आरोप लगाया गया है, वह इंदौर के कॉलेज में अध्‍ययनरत् था. वह सारे प्रमाण मैंने माननीय मंत्रीजी को दिये हैं और मैं चाहती हूं कि इस मामले की सीबीआई जांच करायी जाये और निरपराध को मुकदमे से मुक्‍त किया जाये. धन्‍यवाद्.

 

(13) खाद्यान्‍न की दुकानों को पुन: सोसाटियों को दिया जाना.

श्री यादवेन्‍द्र सिंह (नागौद):- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र में प्रभारी एसडीओ, उचेहरा कुछ दिन के लिये थे, उनके द्वारा कम से कम, जो सोसायटियों में खाद्यान्‍नों की दुकानें थीं, उन दुकानों को, जो प्रायवेट डीलर हैं, उनमें लेन-देन करके अटैच कर दिया गया है. उन्‍हें पुन: उन्‍हीं सोसायटियों में कलेक्‍टर द्वारा वापस किया जाये.

 

(14) पुष्‍पराजगढ़ विधानसभा क्षेत्र में कुपोषित बच्‍चों की संख्‍या बढ़ती जाना.

श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को (पुष्‍पराजगढ़) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी पुष्‍पराजगढ़ विधानसभा क्षेत्र में कुपोषित बच्‍चों की संख्‍या बढ़ती जा रही है, जो कि पुष्‍पराजगढ़ में लगभग 7,000 हो गई है. मैं शासन का ध्‍यान आकृष्‍ट कर निवेदन करता हूँ कि वहां जनजातीय समुदाय के लोग निवास करते हैं और इस दिशा में सरकार तत्‍काल कार्यवाही करे.

 

 

(15) ग्राम पंचायत बिरौना के सरपंच के ट्रेक्‍टर पर रखी फसल को आग लगाने

की कोशिश की जाना.

कुँवर विक्रम सिंह (राजनगर) - अध्‍यक्ष महोदय, मेरी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत बिरौना के सरपंच जब अपने ट्रेक्‍टर पर चना कटवाकर लेकर आ रहे थे तो कुछ ग्राम के ही विपक्षी लोगों ने उनका ट्रेक्‍टर फसल को आग लगाने के लिए रोका, परन्‍तु उन लोगों ने उनका विरोध किया. वे आग नहीं लगा पाए परन्‍तु जो उन लोगों के विपक्षी लोग थे, उन्‍होंने वहां पर 6-7 हवाई फायर असलाहों से किए और उन्‍होंने थाने में जाकर रिपोर्ट डाली कि वे एक महिला को ले गए. उन्‍होंने थाने में फर्जी तरीके से रिपोर्ट डाली, एस.पी. को भी बताया कि उसको सरपंच और उनके लोगों ने गोली मारी है. यह मेरा शून्‍यकाल का प्रश्‍न है.

 

 

12.16 बजे पत्रों का पटल पर रखा जाना

1. (क) आयुक्‍त, नि:शक्‍तजन, मध्‍यप्रदेश का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2016-2017

(ख) महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्‍कीम, म.प्र. की वार्षिक रिपोर्ट वर्ष 2016-17.

2. मध्‍यप्रदेश राज्‍य वन विकास निगम लिमिटेड का 42 वां वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखे वर्ष 2016-2017.

 

 

 

3. राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्‍वविद्यालय, ग्‍वालियर (म.प्र.) की वैधानिक आडिट रिपोर्ट वर्ष 2015 - 2016.

12.18 बजे ध्‍यानाकर्षण

(1) प्रदेश में व्‍यावसायिक पट्टों के नवीनीकरण की दर में वृद्धि किया जाना.

श्री हेमन्‍त विजय खण्‍डेलवाल (बैतूल) अध्‍यक्ष महोदय, मेरी ध्‍यान आकर्षण की सूचना का विषय इस प्रकार है:-

 

 

 

 

राजस्‍व मंत्री( श्री उमाशंकर गुप्‍ता) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, स्‍थायी पट्टों के नवीनीकरण तथा अस्‍थाई पट्टों की शर्त उल्‍लंघन/अपालन के मामलों के निराकरण के संबंध में विभागीय परिपत्र क्रमांक एफ 6-75/सात/नजूल/2001, दिनांक- 04/05/2002 एवं समय-समय पर तत्‍संबंधी जारी निर्देशों को अधिक्रमित करते हुए स्‍थायी पट्टों के नवीनीकरण तथा शर्त उल्‍लंघन के प्रकरणों के निराकरण के लिये परिपत्र क्रमांक एफ-48/2014/सात/नजूल, दिनांक 11/07/2014 द्वारा प्रक्रिया निर्धारित करते हुए निर्देश जारी किये गये थे, जो वर्तमान में अस्तित्‍व में है. शासन स्‍तर पर विभिन्‍न ज्ञापनों के माध्‍यम से यह जानकारी प्राप्‍त हुई है कि इस परिपत्र में विसंगति के कारण नजूल भूमि के पट्टे के नवीनीकरण की कार्यवाही नहीं हो पा रही है. शासन इस विषय पर गंभीर है तथा परिपत्र क्रमांक एफ 6-48/2014/सात/नजूल दिनांक-11/07/2014 में विसंगति पर विचार किया जा रहा है. शीघ्र ही निर्णय लिया जावेगा.

श्री हेमंत विजय खण्‍डेलवाल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूं लेकिन इसके साथ ही मैं उदाहरण बताना चाहता हूं कि उसमें कितनी विसंगति है. पहले जो आबादी को आधार माना था उसमें एक लाख से कम की आबादी थी, उसमें नौ रूपये प्रति स्‍क्‍वायर फिट का टैक्‍स था और 2009 और 2014 में गाईडलाइन को आधार मानकर बैतूल जैसे शहर में लगभग 430 स्‍क्‍वायर फिट की वृद्धि हो गई, जो 50 गुना ज्‍यादा है. इसी प्रकार अस्‍थाई पट्टों में वर्ष 1989-90 में पांच रूपये स्‍क्‍वायर फिट था, वह आज की तारीख में 1420 स्‍क्‍वायर फिट हो गया है. मैं अपने ही शहर का उदाहरण दे रहा हूं लेकिन पूरे प्रदेश में लगभग कमोवेश यही स्थिति है, कहीं दो सौ गुना, कहीं सौ गुना की वृद्धि हो गई है. यह सिर्फ इसलिए हुआ है कि आपने जनसंख्‍या का आधार खत्‍म करके गाइडलाईन का आधार कर दिया है और इसके कारण करोड़ों रूपये का राजस्‍व लोग भर ही ना पा रहे हैं. मैं इसलिए मंत्री जी को बताना चाहूंगा कि पिछले एक वर्ष से मैं और कई विधायक इस मामले में सक्रिय हैं लेकिन निर्णय अभी तक नहीं हुआ है. कृपया मंत्री जी बतायें कि क्‍या यह 31 मार्च तक होगा या हमारा कार्यकाल खत्‍म होने के पहले हो जायेगा, यह स्‍पष्‍ट करें और समय सीमा बतायें ?

श्री उमाशंकर गुप्‍ता - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम चाहते हैं कि श्री हेमंत जी का कार्यकाल लंबा चले, इसलिए मैं कार्यकाल खत्‍म होने का इंतजार नहीं करूंगा. माननीय सदस्‍य ने जो बात बताई है, वह बहुत ही गंभीर है. हमारा भी ध्‍यान उस पर गया है और विभाग ने इसके लिये काफी तैयारी भी कर ली है. मुझे लगता है बहुत जल्‍दी ही हम इसको लागू करवा देंगे.

श्री हेमंत विजय खण्‍डेलवाल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वित्‍त विभाग में यह मामला दो माह से अटका हुआ है. अगर मार्च के पहले हो जायेगा तो विभाग को भी राजस्‍व प्राप्‍त होगा और व्‍यापारियों को भी अपने टैक्‍स और जो दीगर छूटें होती हैं उनका लाभ होगा. मेरा अनुरोध है कि मार्च के ऊपर की समय सीमा न जाये. आपके द्वारा पूरा प्‍लान और पूरा प्रारूप बना लिया गया है. मैं एक साल से मंत्री जी के संपर्क में हूँ.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम बहुत जल्‍दी करेंगे, एकदम तारीख देना संभव नहीं है. मुझे लगता है, हम जल्‍दी कर देंगे.

अध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी वह सही कह रहें हैं, यह पूरे प्रदेश की समस्‍या है

श्री हेमंत विजय खण्‍डेलवाल - क्‍या हम मार्च तक मान लें ?

अध्‍यक्ष महोदय - आप समय सीमा दे दें, यह सिर्फ बैतूल की ही समस्‍या नहीं है, यह सारे प्रदेश की समस्‍या है.

श्री हेमंत विजय खण्‍डेलवाल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस संबंध में सारी चीजें हो चुकी है, सिर्फ निर्णय कैबिनेट में होना बाकी है.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं विश्‍वास करता हूं कि हम 31 मार्च तक कर देंगे.

श्री हेमंत विजय खण्‍डेलवाल - मंत्री जी आपका धन्‍यवाद.

श्री विजयपाल सिंह(सोहागपुर) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह है कि जो गाईडलाइन बनती है, उस गाईडलाइन को भी देखा जाये. गांव की गाईडलाइन के रेट अधिक होते हैं और शहर के गाईडलाइन के रेट कुछ अलग होते हैं. इसके कारण नामांतरण की प्रक्रिया में कहीं न कहीं असुविधा हो रही हैं, इस पर भी कुछ सुधार किया जाये, जिससे कम से कम उपभोक्‍ता को जो अधिक राशि देना पड़ रही, उससे उन्‍हें लाभ मिल सके.

अध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्री यह सही कह रहे हैं.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पंजीयन विभाग के अंतर्गत गाईडलाइन तय होती है.

अध्‍यक्ष महोदय - आपके कलेक्‍टर जो गाईडलाइन करते हैं, माननीय सदस्‍य उसकी बात कर रहे हैं.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, गाईडलाइन का मामला पंजीयन विभाग के अंतर्गत आता है. हम भी उससे ही पीडि़त हैं. मैं जरूरत वाणिज्‍य कर मंत्री जी से कहूंगा.

श्री विजयपाल सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, गाईडलाइन की स्थिति यह है कि जब किसी को नामांतरण कराना होता है, तो उसकी जमीन की उतनी कीमत नहीं होती है, उससे ज्‍यादा नामांतरण शुल्‍क लगा रहा है. इसमें कहीं न कहीं सुधार होना चाहिए जिससे आम उपभोक्‍ता को लाभ मिल सके.

अध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी इसको आप कोआर्डिनेट करें. वह सही कह रहे हैं, यह बहुत जरूरी है.

श्री उमांशकर गुप्‍ता - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, गाईडलाइन का निर्धारण कलेक्‍टर की अध्‍यक्षता में जिला मूल्‍यांकन समिति करती है और उसमें कई बार मामला उठाया गया है और कोशिश भी की जा रही है. इस संबंध में मुख्‍यमंत्री जी ने भी निर्देश दिये हैं कि यह अव्‍यावहारिक नहीं हो जो लोगों को तकलीफ दे.

श्री ओमप्रकाश सखलेचा (जावद) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, गाईडलाइन के संबंध में एक विषय पर पिछली बार इस सदन में चर्चा हुई थी कि कलेक्‍टर्स आखिरी समय पर बैठक बुलाते हैं, जबकि इसकी एक समिति होती है, उसमें उसकी कोई चर्चा नहीं होती है.आखिरी दिन सब होता है. दूसरी बात यह है कि उनके ऊपर दबाव रहता है कि इतने प्रतिशत बढ़ाया जाये, तीसरी बात यह है कि वह जनप्रतिनिधियों की बात को पूरा नोट में डालकर भोपाल तक भी भेजना उचित नहीं समझते हैं, इस पर भी अगर कुछ निर्देश हो जायें तो बड़ा उचित रहेगा और इसके संबंध में कम से कम दो माह पहले चर्चा अनिवार्य रूप से हो जाये. धन्‍यवाद.

अध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी कृपया इन सुधारों पर ध्‍यान दें और वैसा निर्णय कर लें.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता - जी हम कर लेंगे.

(2) प्रदेश में कृषि यंत्रों पर सब्सिडी प्राप्‍त करने हेतु ऑन लाइन पंजीयन प्रक्रिया दोषपूर्ण होना.

श्रीमती झूमा सोलंकी (भीकनगांव) अध्‍यक्ष महोदय, मेरी ध्‍यानाकर्षण की सूचना इस प्रकार है :-

किसान कल्‍याण तथा कृषि विकास मंत्री (श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन) माननीय अध्‍यक्ष महोदय

 

श्रीमती झूमा सोलंकी --माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने जो जबाव दिया है वैसी स्थिति धरातल पर नहीं है. वास्तव में पोर्टल का न खुलना ही सबसे बड़ी समस्या है और एक माह में लगभग दो दिन वह पोर्टल खुलता है वह भी कुछ समय के लिये.यदि हम कृषि को लाभ का धंधा बनाने की बात करते हैं और किसानों को उसका फायदा नहीं मिल रहा है तो कृषि लाभ का धंधा बन पायेगा ? मंत्री जी से जानना चाहूंगी कि पोर्टल का समय बढ़ाया जाये, किसानों की इसकी जानकारी समयसीमा में पहुंचे विभाग इसके लिये क्या प्रयास करेगा.अध्यक्ष जी, दूसरा प्रश्न मेरा यह है कि कृषि यंत्र प्रदाय हेतु शासन ने जो लक्ष्य निर्धारित किया है वह बहुत कम है इसलिये शासन के लक्ष्य को बढाया जाये ? तीसरा प्रश्न मेरा यह है कि प्रत्येक जिले में कृषि अभियांत्रिकी अधिकारियों की बेहद कमी है, तीन-चार जिलों में एक अधिकारी पदस्थ है तो कम से कम एक जिले में एक अधिकारी की पदस्थापना किये जाने हेतु क्या मंत्री जी व्यवस्था करेंगे ?

श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन-- माननीय अध्यक्ष महोदय, आन लाइन पोर्टल पर प्रति घण्टा समयवार प्राप्त आवेदन पत्रों का 27 तारीख से आज दिनांक तक का मेरे पास में विवरण है. जिसमें एक भी ऐसा समय नहीं है जिसमें विभाग को आवेदन प्राप्त न हुये हों. 12 बजे से 1 बजे तक 36310 आवेदन आते है, वहीं रात के 1.00 बजे में 22 आवेदन भी आये हैं, 24 घण्टे पोर्टल ओपन रहता है. 11 बजे हमने देखा कि 1836 आवेदन आये हैं. इस तरह से 1,80,451 आवेदन 27 जून से लेकर के कल तक की स्थिति में थे. यह पोर्टल लाईव है, एक मिनट भी पोर्टल बंद नहीं रहता है. आज 11 बजकर 5 मिनट पर 28,565 कृषकों ने उपकरण के लिये और 1,51,924 कृषकों ने सिंचाई पंप और अन्य स्प्रिंकलर इत्यादि के लिये अपना पंजीयन कराया है. भारत सरकार भी चाहती है कि हम आन लाइन व्यवस्था को रखें.

माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्या को अवगत कराना चाहता हूं कि आज जो मनरेगा के पेमेन्ट होते हैं उसमें भी बॉयोमेट्रिक मशीन के द्वारा सारी व्यवस्थायें हो गई हैं और नेट लगभग सभी जगहों पर उपलब्ध है. 22 हजार कॉमन सर्विस सेन्टर मध्यप्रदेश में हैं. इसमें किसान चाहे तो अपने कम्प्यूटर के द्वारा भी आवेदन कर सकता है और फिंगर प्रिंट के द्वारा भी कर सकता है इसमें कहीं पर भी रजिस्ट्रेशन को बंद नहीं किया है इसीलिये भारत सरकार के द्वारा हमारे प्रदेश के मॉडल को देखने के लिये अन्य राज्य के लोग आ रहे हैं. बिहार राज्य के कृषि मंत्री जी आये थे उन्होंने प्रदेश के मॉडल के संबंध में कहा है कि आपका मॉडल अच्छा है, उड़ीसा राज्य के लोग भी आये हैं. भारत सरकार 1 अप्रैल, 2018 से इस मॉडल को पूरे देश में लागू कर रही है. मध्यप्रदेश प्रदेश देशा का पहला राज्य है जिसने 27 जून, 2017 से मध्यप्रदेश में इसको प्रारंभ किया है.

माननीय अध्यक्ष महोदय, इसके और भी बहुत से लाभ हैं. जब हमारे प्रदेश में पोर्टल की व्यवस्था नहीं थी तब मार्कफेड अथवा एमपी एग्रो के माध्यम से जो रेट थे उन रेट्स में और नये रेट्स में बहुत अंतर है. इसके लिये मैं एक उदाहरण सदन में प्रस्तुत करना चाहता हूं कि महेन्द्रा एंड महेन्द्रा का टेक्टर-470 का 6 लाख 1 हजार 504 रूपये का था जो कि आन लाइन में 5 लाख 68 हजार का आ रहा है. कुल मिलाकर के मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि आन लाइन व्यवस्था से रेट भी कम आये हैं. किसान अगर चाहे तो रजिस्ट्रेशन करने के बाद में निगोशियशन कर सकता है, मोल भाव करके भी कम रेट पर इसको प्राप्त कर सकता है.

माननीय अध्यक्ष महोदय, जहां तक सवाल है अमले की कमी का तो असिस्टेंट इंजीनियर के कार्यालय प्रदेश में 32 जगहों पर संचालित हो रहे हैं. अमले में वृद्धि हेतु प्रस्ताव विभाग के द्वारा वित्त विभाग को भेजा गया है. हमारा पूरा प्रयास है कि मध्यप्रदेश के सभी जिलों में असिस्टेंट इंजीनियर के कार्यालय खुल जायें. हम चाहते हैं कि किसानों को अधिकतम लाभ मिले और इसमें पूरी तरह से पारदर्शिता रहे, किसी तरह का कोई लेन देन न हो, इसलिये प्रदेश में आन लाइन व्यवस्था को सरकार ने चालू किया है.

श्रीमती झूमा सोलंकी -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न का जबाव मंत्री जी ने नहीं दिया है कि लक्ष्य बढायेंगे अथवा नहीं और पोर्टल का समय और जिलों का अमला कब तक बढायेंगे.

अध्यक्ष महोदय- पोर्टल का तो कह दिया है कि 24 घण्टे खुला रहता है.

श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेनः- अध्यक्ष महोदय, पोर्टल तो 24 घंटे चल रहा है.

श्रीमती झूमा सोलंकी--अध्यक्ष महोदय, 24 घंटे बिल्कुल नहीं है.

श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेनः- अध्यक्ष महोदय, मैं इसकी जानकारी पटल पर रख सकता हूं कि किस किस घंटे में कितने कितने घंटे में आवेदन प्राप्त हुए.

श्रीमती झूमा सोलंकी--अध्यक्ष महोदय, मैं लक्ष्य बढ़ाने के बारे में कहना चाहती हूं.

श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेनः- अध्यक्ष महोदय,जहां पर किसान ने आवेदन किया और वह पात्र नहीं हुआ तो उसके नीचे के किसान को उसका नंबर दिया जाता है. माननीय सदस्य के क्षेत्र में यदि ऐसा कुछ कहेंगे तो उस पर जरूर विचार करेंगे.

सुश्री हिना लिखीराम कांवरे--अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने जो बात कही यदि पहला किसान उपकरण लेकर नहीं जाता है तो दूसरे किसान का नंबर लग जाता है. मैं उसी संबंध में निवेदन करना चाहती हूं कि उसका अंतर जो है मात्र 10 दिन का है. जो 10 दिन का अंतर है उसमें कल वीडियो कांफ्रेसिंग के दौरान प्रमुख सचिव जी ने भी इस बात को स्वीकार किया कि केवल 10 दिन में यदि उपकरण नहीं ले जाता है तो अगल किसान को उपकरण दे दिये जाते हैं उसमें दिक्कत होती है. उस 10 दिन के समय को कम से कम 1 महीने का समय किसान को मिलना चाहिये, क्योंकि किसान को तुरंत पैसे की व्यवस्था करने में दिक्कत होती है.

अध्यक्ष महोदय-- मंत्री जी आप दोनों माननीय सदस्यों का इकट्ठा उत्तर दे देना.

श्री अनिल फिरोजिया--अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी से बोलना चाहता हूं कि पहले भी यह बात सदन में बोली गई थी कि जो छोटे किसान हैं जिनकी एक-दो एकड़ जमीन है उनको भी आपने ऑन-लाईन, टीडीपी से जोड़ा है, पर उनके पास पैसों की व्यवस्था नहीं होती. पहले वे खरीदें फिर वह बिल लगायें वह पैसा कहां से लाएंगे. ऐसे छोटे किसानों को इससे मुक्त रखा जाए. जैसा माननीय विधायिका जी ने भी बोला कि 10 दिन का समय आपने दिया है. वास्तव में यह बात सही है कि 10 दिन में किसान पैसे की व्यवस्था नहीं कर पाता है और वह लाभ लेने से वंचित रह जाता है इसको ध्यान में रखते हुए मंत्री जी आप छोटे किसानों को टीडीपी से मुक्त किया जाए.

श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेनः- अध्यक्ष महोदय, हमारे पास में जो लक्ष्य आते हैं उसको निश्चित अवधि के अंदर किसानों तक पहुंचाना होता है. इसमें बहुत ज्यादा समय बढ़ाने की गुंजाइश नहीं है, लेकिन फिर भी इसमें विचार करके जितना समय बढ़ सकता है, उतना बढ़ाएंगे. इसमें किसान को पैसा नहीं देना है. किसान को अपना अंश देना है जो अनुदान की राशि के अतिरिक्त है. यदि वह पूरा पैसा जमा करके लेना चाहता है तो सबसिडी का पैसा उसके खाते में आयेगा. यदि वह सबसिडी का पैसा नहीं देना चाहता है तो जो खाते का मैन्यूफेक्चर है उसके खाते में पैसा जाएगा. उसको सिर्फ अंश का पैसा देना है इसमें छोटे एवं बड़े दोनों किसानों के लिये एक ही नीति है.

( 12. 38 बजे ) याचिकाओं की प्रस्तुति

अध्यक्ष महोदय--आज की कार्यसूची में सम्मिलित सभी याचिकाएं प्रस्तुत की हुई मानी जायेंगी.

( 12.39 बजे ) वर्ष 2018-2019 की अनुदानों की मांगों पर मतदान

 

मांग संख्या-1 सामान्य प्रशासन

मांग संख्या-2 सामान्य प्रशासन विभाग से संबंधित अन्य व्यय

मांग संख्या 65 विमानन

मांग संख्या 72 आनंद

 

 

 

 

 

अब मांगों एवं कटौती प्रस्ताव पर एक साथ चर्चा होगी.

श्री कमलेश्वर पटेल ( सिंहावल )--अध्यक्ष महोदय, मांग संख्या 1, 2, 65, 72 के प्रस्ताव के विरोध में चर्चा करने के लिये खड़ा हुआ हूं. आपका विशेष संरक्षण चाहेंगे कि जो कहूंगा सच कहूंगा. झूठ कुछ भी नहीं कहूंगा. आपका संरक्षण चाहिये. मैं समझता हूं कि आदरणीय सत्तापक्ष के साथी हैं उनको सच्चाई को कबूल करना चाहिये तथा विपक्ष की बातों को ध्यान से सुनना चाहिये और जो कमियां हैं उनमें सुधार करना चाहिये. सामान्य प्रशासन विभाग का सबसे महत्वपूर्ण काम है सुशासन की व्यवस्था करना. मध्यप्रदेश में इस दिशा में काम करने में सामान्य प्रशासन विभाग कितना नाकाम साबित हुआ है, इसके उदाहरण हर दिन देखने को मिल रहे हैं. कुशासन का सबसे बड़ा उदाहरण माननीय मुख्यमंत्री जी का सचिवालय है. जहां पर कई रिटायर्ड अधिकारी संविदा पर काम कर रहे हैं. इनकी संख्या में हर साल बढ़ोतरी हो रही है. मुख्यमंत्री जी के प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी भी संविदा पर काम कर रहे हैं जिनके लिये सामान्य प्रशासन विभाग ने आनन-फानन में संविदा के नियमों में बदलाव भी कर दिये हैं. देश के इतिहास की अनोखी घटना यह है कि संविदा के नियमों में बदलाव कर हर विभाग में प्रायवेट लोगों को सलाहकार बनाने का कौन सा सुशासन सरकार देना चाहती है. भर्ती के नियमों को भी बदल दिया गया है और यहां तक कि कई राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के जो जुड़े हुए लोग हैं वह प्रदेश शासन में सीधा दखल दे रहे हैं तथा उनकी भी नियुक्तियां हुई हैं.

राज्यमंत्री, चिकित्सा शिक्षा (श्री शरद जैन)--अध्यक्ष महोदय, उनको राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का नाम लेने की क्या आवश्यकता है ?

श्री के.पी.सिंह--अगर कोई संस्था का सदस्य है तो इसमें गलत क्या है ?

श्री शरद जैन--संस्था का नाम लेने की जरूरत क्या है ?

श्री कमलेश्वर पटेल--आप भी वहां से निकले हैं. आप क्यों आपत्ति ले रहे हैं.

श्री वैलसिंह भूरिया--व्यक्तिगत किसी संस्था का नाम लेना गलत बात है.

श्री कमलेश्वर पटेल--अध्यक्ष महोदय, सरकार तथा पूरा देश ही वह लोग चला रहे हैं इसका क्या दिक्कत है.

श्री शरद जैन--इसको आपको अलग करना चाहिये.

श्री कमलेश्वर पटेल--अध्यक्ष महोदय, सामान्य प्रशासन विभाग को इस दिशा में पहला करनी चाहिये, न कि रिटायर्ड हो चुके अधिकारियों को संविदा पर लाकर नये अधिकारियों के हक को छीनने का कोई अधिकार नहीं है. पदोन्नति के अवसर को समाप्त करने की कोशिश नहीं करना चाहिये. संविदा पर ऐसे अधिकारी हैं जिनको पूरे वित्तीय अधिकार दिये गये हैं.

(12.44 बजे) उपाध्यक्ष महोदय (डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुए

उपाध्यक्ष महोदय, यह एक प्रकार से आर्थिक अपराध जैसा है. जो सामान्य प्रशासन को बंद करना चाहिये. इस पर हम चाहेंगे कि मंत्री जी तथा प्रशासन की ओर से एक वक्तव्य आये. इसमें स्पष्ट भी होना चाहिये कि इस तरह से रिटायर्ड अधिकारी/कर्मचारियों को संविदा पर ले रहे हैं और हमारे नौजवान भटक रहे हैं. नये अधिकारी/कर्मचारी जो भर्ती हुए हैं उनको मौका नहीं मिल रहा है. एक तरफ हमारे देश के प्रधानमंत्री जी दो दिन पहले ही वक्तव्य आया था कि 40 साल की उम्र पार कर चुके आई.ए.एस. के ऊपर प्रश्नचिन्ह लगाया है. यह भी स्पष्ट करना चाहिये कि देश के प्रधानमंत्री जी ने जो वक्तव्य दिया है. क्या उससे मध्यप्रदेश की सरकार सहमत है ? क्या बाकी जो अधिकारी हैं क्या अपने पारिवारिक जीवन या पारिवारिक जो एक व्यवस्था है क्या उसका निर्वहन करते हुए इतने सालों से जो लोग सेवा कर रहे हैं क्या वह अक्षम हैं. यह बातें आना चाहिये क्योंकि इस तरह से देश के प्रधानमंत्री ने संज्ञान में लिया है इस पर प्रदेश सरकार का रुख भी स्पष्ट होना चाहिये. एक गंभीर बात है पदोन्नति में आरक्षण का विषय है. आरक्षण सरकार देना चाहती है या नहीं यह भी स्पष्ट होना चाहिये.इस विषय पर सामान्य प्रशासन विभाग को स्पष्ट मत सदन के सामने रखना चाहिये क्योंकि इसके कारण कई विभागों में पदोन्नतियां रुकी हुई हैं और हमारे कई अधिकारी,कर्मचारियों में अवसाद बढ़ता जा रहा है. कई ऐसे अधिकारी,कर्मचारी हैं जिनकी समय पर  पदोन्नति नहीं हुई.कई रिटायर हो गये और आज वह बीमारी की श्रेणी में है या परेशान है इस पर भी सामान्य प्रशासन विभाग को चिंतन करना चाहिये. यदि सामान्य प्रशासन विभाग यह स्पष्ट कर दे कि प्रमोशन में आरक्षण देना है या नहीं देना है तो कानून प्रक्रिया अपनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. अगर सदन में माननीय मंत्री जी इसको स्पष्ट करेंगे. सरकार यह कह दे कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जो निर्णय दिया है हम उसे अपनाएंगे तो फिर सरकार यह बताए कि सुप्रीम कोर्ट सरकार क्यों गई ?

श्री शैलेन्द्र जैन - उपाध्यक्ष महोय, आप कांग्रेस पार्टी का स्टैंड बता दें कि वह क्या पदोन्नति में आरक्षण चाहते हैं ?

श्री कमलेश्वर पटेल - कांग्रेस सरकार ने तो व्यवस्था ही बनाई थी. इस सरकार के द्वारा पहल नहीं हुई. हम अपना कोई व्यक्तिगत मामला होता है तो उसके लिये दस लाख का वकील खड़ा करते हैं. सरकार ने नया मंत्र सीख लिया है कि किसी भी विषय पर स्पष्टता रखो. यह कहने से काम नहीं चलेगा कि मामला कोर्ट में है. सरकार को अपना मत सदन के सामने रखना चाहिये. यदि सदन को याद हो तो सिंहस्थ,2016 का बड़ी भव्यता से आयोजन हुआ था और वहां पर सार्वभौमिक संदेश राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की मदद से तैयार किया गया था. प्रधानमंत्री जी ने इसका उद्घोष किया था. उसे देश के सभी राज्यों,अन्य देशों और संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्यालय में भेजने की जिम्मेदारी सामान्य प्रशासन विभाग को दी गई थी.बड़े जोर-शोर से प्रचारित कर यह कहा गया था कि सिंहस्थ का यह सार्वभौमिक संदेश सुशासन का एक दस्तावेज है जो सभी राज्य सरकारों को अपनाया जाना अनिवार्य है. इसे सामान्य प्रशासन विभाग की तरफ से ओर से संयुक्त राष्ट्र संघ,केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों को भेजा जाना था. मजेदार बात यह है कि 2016 के बाद इसका कुछ अतापता नहीं है. कभी भी इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई न कभी सदन को जानकारी दी.

वन मंत्री(डॉ.गौरीशंकर शेजवार) - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में कई बार आपने बातचीत की है. बहुत अच्छी बात है. आपकी रुचि को देखकर हम आपकी प्रशंसा करते हैं. अब आपसे हमारा निवेदन है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संघ शिक्षा वर्ग होते हैं. प्रथम वर्ष,द्वितीय वर्ष,तृतीय वर्ष तो आप इनमें अवश्य जाएं ताकि आपका जो अपूर्ण ज्ञान है वह आप पूरा कर सकें और आपकी जो रुचि और आपका जो आकर्षण है राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रति इसकी तुष्टि हो सके. यही मेरा आपसे निवेदन है.

श्री बहादुर सिंह चौहान - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, यह प्रथम वर्ष,द्वितीय वर्ष और तृतीय वर्ष के पहले एक सप्ताह का वर्ग होता है. पहले वर्ग में इनको बैठना पड़ेगा. सीधे-सीधे प्रथम,द्वितीय,तृतीय वर्ष में नहीं भेजना है इनको. सब सीख जाओगे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ क्या है ?

(..व्यवधान..)

श्री रामनिवास रावत - ऐसी सलाह कोई देता है.

श्री अजय सिंह - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, रावत जी कह रहे हैं कि वह प्रथम,द्वितीय,तृतीय वर्ष की बात विलोपित की जाये. कोई मतलब नहीं है.

उपाध्यक्ष महोदय - अवमाननापूर्ण कोई ऐसी बात नहीं है.

श्री रामनिवास रावत - इस तरह की सलाह देना क्या उचित है ?

उपाध्यक्ष महोदय - वह अधिकतर दे देते हैं.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, फिर तो वह आर.एस.एस. की पूरी बात ही विलोपित होगी.

श्री रामनिवास रावत - डाक्टर साहब फर्स्ट्रेशन में हैं. अपने विभाग से संतुष्ट नहीं हैं.

श्री शंकरलाल तिवारी - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं नेता प्रतिपक्ष जी से विनती करूंगा कि आप भी जाकर देखें नजदीक से. महात्मा गांधी गये थे,सरदार वल्लभभाई पटेल गये थे. आप भी एक बार जाकर देखिये केवल आलोचना करने से भी शायद कुछ मिल जाये.

श्री बहादुर सिंह चौहान - माननीय शेजवार जी ने बहुत सारगर्भित टिप्पणी की है.

श्री अजय सिंह - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, आलोचना नहीं की. कमलेश्वर पटेल जी ने बड़े व्यवस्थित रूप से कहा कि आर.एस.एस. के सामने,सब लोगों के सामने एक ब्लू्प्रिंट बनाया गया सुशासन का, उसका 2016 में पालन करने के लिये जी.ए.डी. विभाग को दिया गया और उस समय से लेकर 2018 तक क्या हुआ. यदि आप इस पर टिप्पणी करें तो फिर आप तृतीय श्रेणी में हैं या चतुर्थ श्रेणी में हैं तो पता चल जायेगा.

श्री कमलेश्वर पटेल - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने क्या कहा उस पर हमारे नेता प्रतिपक्ष जी ने अपनी बात कह दी. सबसे बड़ी बात तो यही है कि जब किसी चीज के लिये रणनीति बनाई गई जहां देश के प्रधानमंत्री और पूरे मंत्रिमण्डल के सदस्य और पूरी सरकार और सब लोगों को बैठाकर,पूरे देश भर के लोग एकत्रित हुए और कोई मंथन हुआ और सामान्य प्रशासन विभाग को सौंपा गया था तो सरकार ने क्यों तत्परता नहीं दिखाई. सरकार ने क्या सिर्फ दिग्भ्रमित करने के लिये या सिर्फ मंत्री जी जिस चरित्र की बात कर रहे हैं. हम लोग उस पर नहीं जाना चाहते. असत्य बोलने का,इस सबसे यही तो साबित होता है. यही तो चरित्र है. इसके अलावा जो सबसे बड़ी चिंता का विषय है वह यह कि सामान्य प्रशासन विभाग मानव अधिकारों के उल्लंघन के मामले में भी नोडल विभाग का काम करता है. पिछले एक दशक में ऐसा कोई भी उदाहरण प्रस्तुत नहीं हुआ है जब सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से मानव अधिकार के संरक्षण की कोई पहल की गई हो. इसका कारण साफ है कि राज्य मानव अधिकार आयोग में कोई पूर्णकालिक अध्यक्ष ही नहीं है तो मानव अधिकार आयोग की अनुशंसाओं को सामान्य प्रशासन विभाग गंभीरता से क्यों लेगा ? मानव अधिकार आयोग में अध्यक्ष न होने के कारण मानव अधिकार उल्लंघन के महत्वपूर्ण प्रकरणों का निराकरण नहीं हो पा रहा है. यह गंभीर स्थिति है जो यह दर्शाती है कि सरकार की शासन,प्रशासन कितना लचर,लापरवाह और असंवेदनशील हो गया है. सरकार अपने सुशासन का बहुत जोर शोर से बखान करती है लेकिन नैतिकता में निष्ठुर नजर आती है. (XXX)

डॉ.गौरीशंकर शेजवार - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, पूरा प्रकरण सबज्यूडिश है. निर्णय उसमें आना है. हमारी परंपराएं रही हैं कि जो प्रकरण सबज्यूडिश हैं. ऐसे प्रकरणों में हमें कटाक्ष,कमेंट और उसके बारे में यहां बुराई या अपनी राय जाहिर नहीं करना चाहिये. देखिये, कोर्ट ने जो निर्देश दिये हैं,कोर्ट ने जो आदेश दिये हैं और वैधानिक तरीके से नियम के अनुरूप मंत्री जी यहां मंत्री हैं और सदन के सदस्य भी हैं. मुझे उन्होंने आज अधिकृत किया है तो मैं दो हैसियत से बोल रहा हूं. एक तो नरोत्तम मिश्रा जी मुझे अधिकृत करके गये हैं. हम केवल यह कहकर बच नहीं सकते कि मैंने नाम नहीं लिया. भाव तो स्पष्ट हुआ है. मेरी आपसे विनम्र प्रार्थना है कि इन्होंने जो मंत्री जी के बारे में और चुनाव आयोग के बारे में और अयोग्यता के बारे में जो टिप्पणी की है इसे विलोपित किया जाये.

उपाध्यक्ष महोदय - उसे विलोपित कर दें.

श्री कमलेश्वर पटेल - उपाध्यक्ष महोदय, वैसे उसमें कोई असंसदीय नहीं था.

उपाध्यक्ष महोदय - वह अभी ऊपर के न्यायालय में पेंडिंग है, अंतिम फैसला नहीं हुआ है.

श्री रामनिवास रावत - न्यायालय में निर्णय लंबित है, निरस्त तो नहीं किया है?

श्री कमलेश्वर पटेल - हमने न्यायालय की बात ही नहीं की है. हमने तो निर्वाचन आयोग की बात की है और निर्वाचन से संबंधित काम में लगाकर रखा है.

श्री रामनिवास रावत - न्यायालय में निर्णय लंबित है, निरस्त तो नहीं किया है, स्थगित ही तो किया है. स्थगित होने का मतलब यह तो नहीं है कि निरस्त हो गया?

उपाध्यक्ष महोदय - स्थगित तो है. आज वह कायम नहीं है अगर स्थगित है तो.

श्री रामनिवास रावत - स्थगित ही तो है, इसका मतलब अपराध से मुक्त नहीं हो जाता है, निर्दोष सिद्ध नहीं हो जाता है. दोष सिद्ध तो है.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार - उपाध्यक्ष महोदय, यह नियम और परंपरा बनाने के पीछे यह भाव रहा है कि न्याय कहीं प्रभावित न हो. हमारे कमेंट करने से सदन में कोई बात करने से न्याय प्रभावित न हो, इसीलिए मैंने यह निवेदन किया है.

उपाध्यक्ष महोदय - आप तो बहुत विद्वान विधायक हैं श्री रामनिवास जी, आप कैसे गुमराह हो गये?

श्री रामनिवास रावत - उपाध्यक्ष महोदय, मैं गुमराह नहीं हो रहा हूं. स्थगन का मतलब निर्दोष साबित होना नहीं है.

उपाध्यक्ष महोदय - श्री रामनिवास जी, किसी अधिकारी का स्थानांतरण हो जाता है, उसको स्थगित कर दिया जाता है तो क्या मतलब हुआ कि वहीं रहेगा वह, यथास्थिति हुई.

श्री रामनिवास रावत - नहीं, निरस्त तो नहीं हुआ?

उपाध्यक्ष महोदय - वह अलग बात है. वह तो अंतिम फैसला फिर न्यायालय करेगा. इसको विलोपित कर दीजिए न्यायालय का जो उल्लेख है.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार - आज विद्वान की संज्ञा दोबारा दी गई है और आसंदी से विद्वान कहा गया है, मैं आपको बधाई देना चाहता हूं.

उपाध्यक्ष महोदय - डॉक्टर साहब संसदीय कार्यमंत्री का भी काम देख रहे हैं, आज उनको अधिकृत किया गया है.

डॉ. गोविन्द सिंह - कई निर्णय में फैसला होने के बाद भी शासन न्यायालय के आदेशों की धज्जियां उड़ाता है. फरार अपराधियों को भी मंत्रिमंडल में और विधान सभा में बैठे रहने देता है, इसका भी उल्लेख नहीं कर सकते हैं क्या? ..मैं कहां किसी का नाम ले रहा हूं?

उपाध्यक्ष महोदय - उसमें अंतिम निर्णय नहीं आया है. (संकेत से) इसे विलोपित करें. आप अपनी बात जारी रखें.

श्री कमलेश्वर पटेल - उपाध्यक्ष महोदय, सरकार ने सुशासन की बहुत सारी व्यवस्थाएं अपनाई हुई है, उसका जीता-जागता उदाहरण है, जिसका मैंने पहले भी उल्लेख किया था, सेवानिवृत्त अधिकारियों, कर्मचारियों को सेवा में रखा हुआ है, उनको बहुत सारे अधिकार भी देकर रखे हैं, जिसका लगातार दुरुपयोग हो रहा है. एक तरफ जहां देश के प्रधानमंत्री 40 वर्ष के कलेक्टर्स को बोल रहे हैं कि पिछड़े जिलों में या ऐसी जगह पदस्थ किया जाय और दूसरी तरफ जो जन-सुनवाई है अगर इसको आप देखें तो जन-सुनवाई उदाहरण के लिए ही रह गई है. जन-सुनवाई सिर्फ आवेदन लेने की व्यवस्था बनकर रह गई है, चाहे वह जिला स्तर पर हो..

उपाध्यक्ष महोदय - आप दो मिनट में समाप्त करेंगे.

श्री कमलेश्वर पटेल - उपाध्यक्ष महोदय, अभी तो शुरू किया है.

उपाध्यक्ष महोदय - आपको बोलते हुए 18 मिनट से ज्यादा हो गये हैं.

श्री कमलेश्वर पटेल - उपाध्यक्ष महोदय, समाधानकारक निराकरण नहीं हो रहा है, जो सरकार की व्यवस्था है. जिलों में जन-सुनवाई की व्यवस्था मात्र औपचारिकता बनकर रह गई है.

1.00 बजे अध्यक्षीय घोषणा

भोजनावकाश न होना

 

उपाध्यक्ष महोदय - आज भोजनावकाश नहीं होगा. भोजन की व्यवस्था सदन की लॉबी में की गई है. माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि सुविधानुसार भोजन ग्रहण करने का कष्ट करें.

श्री कमलेश्वर पटेल - उपाध्यक्ष महोदय, जन-सुनवाई व्यवस्था मात्र औपचारिकता बनकर रह गई है. जन-सुनवाई में न्याय नहीं मिलने से परेशान होकर लोग समाधान ऑन-लाइन में मुख्यमंत्री से गुहार लगाते हैं. जिले में अर्जियां लेकर हर मंगलवार को जन-सुनवाई में लोग जाते हैं. हर जिले में अलग-अलग व्यवस्था है. परन्तु समाधान नहीं होता है. हम लोगों के पास भी कई बार लोग आते हैं कि हमने जन-सुनवाई में आवेदन दिया है. दोबारा जाते हैं तिबारा जाते हैं. कलेक्टर साहब आवेदन तहसीलदार को, एसडीएम को मार्क कर देते हैं. परन्तु जन-सुनवाई उनकी तभी होती है जब तक वह शिष्टाचार जो इस सरकार में भ्रष्टाचार का चलन पड़ा हुआ है, तब तक उनका समाधान नहीं होता है. हम समझते हैं कि यह बहुत चिंता विषय है. सरकार ने व्यवस्थाएं तो बहुत बनाई है. परन्तु कहीं न कहीं सामान्य प्रशासन विभाग असामान्य हो गया है, यह हम कह सकते हैं क्योंकि विभागों में कंट्रोल नहीं बचा है. छोटे कर्मचारियों को कई बार सस्पेंड कर दिया जाता है. बड़े अधिकारियों, कर्मचारियों पर कोई कार्यवाही नहीं होती है. कहीं कोई गलती पकड़ में आती है, जन-सुनवाई में या समाधान ऑन-लाइन में तो छोटे कर्मचारियों को दंडित करते हैं. परन्तु जो असली दोषी होता है, उसके ऊपर कार्यवाही नहीं होती है. इस पर भी माननीय मंत्री जी को अपना मत स्पष्ट करना चाहिए. सामान्य प्रशासन विभाग की यह भी जिम्मेदारी है कि वह भ्रष्ट अधिकारियों को सजा दिलवाए. कई ऐसे अधिकारी हैं जिन पर लोकायुक्त के मामले दर्ज हैं और उन्हें सजा दिलाने शासन से अनुमति की मांग करते हैं. सामान्य प्रशासन विभाग का कोई सहयोग लोकायुक्त को नहीं मिल रहा है. आज तक ऐसा कोई आंकड़ा नहीं आया है कि सामान्य प्रशासन विभाग के सहयोग से दोषी अधिकारियों को दंड मिला हो.

उपाध्यक्ष महोदय, लोकायुक्त संगठन बड़ा महत्वपूर्ण संगठन है. पूरे प्रदेश के जो अधिकारी, कर्मचारी हैं, उनके ऊपर कसावट आती है. यहां तक कि लोकायुक्त का इतना अधिकार है कि हम लोग भी यदि कोई व्याभिचार, भ्रष्टाचार करते हैं, चाहे मंत्री हों, चाहे विधायक हों, उनके ऊपर भी कसावट करने का लोकायुक्त को अधिकार है. लोकायुक्त संगठन जैसा काम करना चाहता है, लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग की तरफ से या सरकार का हस्तक्षेप है या किसके हस्तक्षेप में इस तरह से कार्यवाही हो रही है, यह चिंता का विषय है. इस पर आपके माध्यम से हम चाहते हैं कि सरकार, माननीय मुख्यमंत्री जी ध्यान दें.

उपाध्यक्ष महोदय - कमलेश्वर जी, इसका नाम ही सिर्फ सामान्य प्रशासन है, इसको तो हम भी 38 साल की राजनीति में समझ नहीं पाए हैं.

श्री कमलेश्वर पटेल - उपाध्यक्ष महोदय, सरकार ने एक आनन्द मंत्रालय का भी गठन किया है, वह अजूबा ही है. आज तक उसको समझ नहीं पाए कि उसमें किसी भी मंत्री या विधायक को इसके कोई कानूनी स्वरूप का ज्ञान नहीं है. यह मंत्रालय विभाग है या संस्थान है.

श्री शंकरलाल तिवारी - मैं एक मिनट व्यवधान कर रहा हूं. आपने इतनी सुंदर और महत्वपूर्ण कमेंट दिया है सामान्य प्रशासन विभाग के मामले में कि हम दोनों विधायकों को लगा कि आपका जो अनुभव है वह आपने हम लोगों को दे दिया.

श्री कमलेश्वर पटेल - उपाध्यक्ष महोदय, यह सच्चाई है. जिस प्रयास की शुरुआत असत्य पर टिकी हो, उस आनन्द मंत्रालय का भविष्य क्या होगा, यह अंदाजा लगाया जा सकता है? माननीय मुख्यमंत्री के हवाले से कई बार कहा गया है कि केवल धन से आनन्द नहीं मिलता है. हमारे आदिवासी समुदाय का उदाहरण हमेशा दिया जाता है. आदिवासी बंधु अपनी मस्ती में नाचते-गाते खुश रहते हैं. उन्हें चिंता नहीं रहती है, बिना धन के भी वे आनन्द में रहते हैं. यदि वे प्रसन्न हैं ऐसा कहते हैं, ऐसा है तो इतना सारा बजट आदिवासी विकास विभाग किसके विकास पर खर्च कर रहा है? इस सोच के मुताबिक उपाध्यक्ष महोदय, तो आदिवासी समुदायों को तो धन की बिल्कुल जरूरत नहीं पड़नी चाहिए, न ही उन्हें किसी प्रकार की आर्थिक गतिविधि की जरूरत है, वे तो नाच-गाकर ही खुश रह लेते हैं. उपाध्यक्ष महोदय, सीधी सच्ची बात तो यह है कि सरकार अच्छे काम करे तो जनता खुश हो जाय. लोगों को जबर्दस्ती आनन्द देने का सरकार जो काम कर रही है, जबर्दस्ती लोगों से कह रही है कि आप खुश रहो. प्रधानमंत्री जी कह रहे हैं कि अच्छे दिन आने वाले हैं और इधर जनता परेशान हो रही है. बैंकों को लुटते देख रहे हैं. एक तरफ किसान, गरीब है. बिजली के बिल में किसान ने अगर थोड़ा सा कर्जा लिया है उनकी कुर्कियां हो रही हैं. हजारों की संख्या में किसान हमारे क्षेत्र मे भी पीड़ित हैं. इस तरह के हालत है और आनन्द उत्सव ग्राम पंचायतों में मनाया गया. लोगों की कोई रुचि नहीं थी. राशि भी खर्च की गई. परन्तु यह किस तरह का आनंदम है, यह समझ में नहीं आया. सरकार के माननीय मंत्री, हो सकता है मंत्रालय में बैठने वाले कुछ अधिकारी, कर्मचारी आनंद में हो. प्रदेश की जनता और गरीब तो नहीं है. एक और महत्वपूर्ण विभाग है विमानन.

उपाध्यक्ष महोदय - अब आप समाप्त करें.

श्री कमलेश्वर पटेल - उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मुख्यमंत्री जी जब कहीं दौर पर जाते हैं. सरकार हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर कई कंपनियों से हायर करती है और किस प्रॉविजन से करती है, कितना उसमें खर्चा किया है, कौन-कौन लोग हैं, यह जानकारी हम भी चाहते हैं. हमें इसकी जानकारी हो. दूसरा हमने यह कई बार देखा है कि मुख्यमंत्री जी अगर सीधी के दौरे पर जा रहे हैं तो हेलीकॉप्टर भी साथ-साथ जाता है. यह हम समझते हैं कि अपव्यय है. कई जगह ऐसा है कि हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर भी साथ-साथ जाता है. सरकारी धन का दुरुपयोग नहीं होना चाहिये. एक तरफ सूखे का संकट है, गरीब, किसान, मजदूर परेशान है, नौजवान बेरोजगार है, रोजगार के अवसर नहीं मिल रहे हैं.

उपाध्‍यक्ष महोदय - अब आप समाप्‍त करिये आपको काफी समय दे दिया है.

श्री कमलेश्‍वर पटेल - उपाध्‍यक्ष महोदय, बस दो मिनट में समाप्‍त कर रहा हूं. माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने बहुत सारी घोषणाएं की हैं. कहीं हमारे सिंगरौली को सिंगापुर बनाने की बात की थी. ऐसे ही कई जगह स्‍मार्ट सिटी बनाने की बात जब चुनाव आता है, तो करते हैं, लेकिन घोषणाओं पर अमल नहीं होता है. हमारे विधानसभा क्षेत्र में ही माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने सोन नदी में पुल बनाने की बात की थी उसका कोई अता-पता नहीं है.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) - उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने 38 साल का अनुभव बताया. कुछ अनुभव हम भी बता दें. स्‍वर्गीय डी.पी. मिश्रा जी मुख्‍यमंत्री थे, उन्‍होंने कहा कि सरकार चलती है सामान्‍य प्रशासन विभाग से. मैं आपके माध्‍यम से पूछना चाहता हूं कि सामान्‍य प्रशासन विभाग का मंत्री कौन है ? किस तरह सरकार प्रदेश की जनता के लिये चिंता करती है यह प्रजातंत्र का सर्वोच्‍च मंदिर है और इस सर्वोच्‍च मंदिर में सामान्‍य प्रशासन विभाग के मंत्री हमारे आदरणीय मुख्‍यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी कम से कम अपने विभाग की अनुदान मांगों में उत्‍तर न दें, लेकिन बैठें तो. पता तो चले कि विभाग के बारे में हम लोगों की क्‍या राय है, आपकी क्‍या राय है. जब उपस्थित ही नहीं रहेंगे तो कैसे मालूम पड़ेगा ?

उपाध्‍यक्ष महोदय - कभी-कभी आपको अपने छोटे भाई को क्षमा कर देना चाहिए.

श्री अजय सिंह - उपाध्‍यक्ष महोदय, क्षमा तो कर ही रहा हूं, परंतु छोटे भाई को भी सोचना चाहिए कि उनको क्‍या करना चाहिए.

श्री कमलेश्‍वर पटेल - उपाध्‍यक्ष महोदय, बस दो मिनट मेरी बात सुनी जाए.

उपाध्‍यक्ष महोदय - नहीं, कमलेश्‍वर जी, आपको 26 मिनट दिये गये हैं अब आप बैठ जाइए.

राज्‍यमंत्री (श्री लालसिंह आर्य) - उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी के साथ सामान्‍य प्रशासन विभाग का राज्‍यमंत्री हूं और उत्‍तर देने के लिये उन्‍होंने मुझे अधिकृत किया है. मैं आपके सुझाव भी लिखूंगा और जो जनहित में होंगे उनको संज्ञान में भी लेंगे.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया (मंदसौर) - उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मांग संख्‍या 1, 2, 65 और 72 का समर्थन करने के लिये यहां उपस्थित हुआ हूं. सामान्‍य प्रशासन विभाग सरकार का, सरकार के संचालन का सबसे अहम और अभिन्‍न एक विभाग होता है. प्रशासन की डोर सुशासन की ओर, इस बात को इंगित करते हुए समन्‍वय की भूमिका में सामान्‍य प्रशासन विभाग सेतु का काम करता है. वे सारे विभाग के तंत्र, पूरे प्रदेश भर के कर्मचारी, अधिकारियों के माध्‍यम से चाहे जन कल्‍याणकारी योजना हो, चाहे हितग्राही मूलक योजना हो, चाहे विकास की अवधारणा को सुनिश्चित करने वाली योजना हो, इनमें गरीब सम्‍मेलन भी आ गये हैं, वे अंत्‍योदय मेले भी आ गये हैं जहां पर पूरा परिवार सामान्‍य प्रशासन विभाग से जुड़ने वाला है. वे अपने दायित्‍वों को निर्वहन करने में आपने आपको सुढृढ़ और सक्षमता तभी प्राप्‍त करते हैं जब सामान्‍य प्रशासन विभाग का मुखिया, मध्‍यप्रदेश की सरकार के मुख्‍यमंत्री, उनके दिशा निर्देश के अंतर्गत इस विभाग ने अहम भूमिका निभाई है. महत्‍वपूर्ण दायित्‍व की भूमिका में है. लोकायुक्‍त संगठन, मानवाधिकार आयोग, लोकसेवा आयोग, राज्‍य सूचना आयोग जैसी संवैधानिक संस्‍थाओं के साथ-साथ राज्‍य आर्थिक अपराध प्रकोष्‍ठ, मुख्‍य तकनीकी परीक्षक जांच आयुक्‍त जैसी संस्‍थाओं के अलावा आरसीव्‍हीपी नरोन्‍हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी जैसी राष्‍ट्रीय स्‍तर की प्रशिक्षण संस्‍था का सुचारू संचालन करने का दायित्‍व भी सामान्‍य प्रशासन विभाग के कंधों पर है.

उपाध्‍यक्ष महोदय, नये नवाचार भी इस विभाग के माध्‍यम से पूरे प्रदेश के लिये, पूरे प्रदेश की जनता के लिये, और हम सभी जनप्रतिनिधियों के लिये और कभी-कभी तो जिला पंचायत के अध्‍यक्षों, माननीय सांसदों, नगर पालिका, नगर निगम के मेयर, अध्‍यक्ष, महापौरों को भी सीधे संवाद के साथ जो हमारा एनआईसी सिस्‍टम है, जब माननीय मुख्‍यमंत्री जी बैठते हैं तब हम सबको समय-समय पर आहूत करते हैं. समाधान ऑनलाईन 181, मुख्‍यमंत्री हैल्‍पलाइन, परख, जनसुनवाई जैसे अनेक नवाचार इसी विभाग के माध्‍यम से हुये हैं और उसके परिणाम भी साथ-साथ सामने आ रहे हैं. कर्मचारी-अधिकारी जो विभिन्‍न विभागों के माध्‍यम से अपने कर्तव्‍यों का निर्वाह करते हैं उसकी डोर अगर किसी के हाथ में है तो वह सामान्‍य प्रशासन विभाग के हाथ में है. सुशासन यही है कि हम पूरे मध्‍यप्रदेश की 7 करोड़, 50 लाख जनता के साथ न्‍याय कर सकें. उसमें अधिकारी, कर्मचारी भी हैं, उसमें गरीब भी हैं, उसमें उद्योगपति भी हैं. उपाध्‍यक्ष महोदय, भर्ती नियम में संशोधन समय की आवश्‍यकता होती है. इसमें पारदर्शिता की आवश्‍यकता है और जब ऑनलाईन का सिस्‍टम हो गया है फिर सारी प्रक्रियाएं बहुत पारदर्शिता के साथ होने लगी हैं. भर्ती नियमों में भी कहीं न कहीं परिवर्तन की संभावनाएं बनती हैं. अब वह जमाने गये कि नियमों को शिथिल करते हुये नियुक्ति दी जाती थी, सिगरेट का पैकेट अगर पास में है तो उसमें लिख दिया, यदि कोई छोटी सी पर्ची है तो उसमें लिख दिया, नोटशीट के पते ही नहीं चलते थे. मैं बहुत विस्‍तार में नहीं जाना चाहता, लेकिन तब भूल हुआ करती थी या यह कहें कि उस समय का सिस्‍टम हुआ करता था, लेकिन आज सामान्‍य प्रशासन विभाग ने अपनी अहम भूमिका का निर्वहन किया है. वर्ष 2018-19 के लिये 448.72 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है. यह वास्‍तव में अभिनंदन और स्‍वागत योग्‍य है. शासकीय सेवकों और शासकीय सेवा के बाद अधिकारी, कर्मचारी जो सेवा निवृत हो जाते हैं उनके लिये यूनिक इम्‍पलाई कोड द्वारा ई-भुगतान जैसा प्रशंसनीय कार्य विभाग के माध्‍यम से किया जा रहा है. वेंडर कोड अंतर्गत ई-भुगतान कार्य प्रचलन में है. मंत्रालय में कार्यरत अशासकीय व्‍यक्तियों तथा सामग्री का प्रदाय करने का काम भी ई-भुगतान के माध्‍यम से बखूबी किया जा रहा है. उपाध्‍यक्ष महोदय, सीधी भर्ती खुली प्रतियोगिता. मैं फिर कहूंगा कि स्‍पष्‍ट पारदर्शिता, उसके माध्‍यम से लोक सेवा आयोग से भरे जाने वाले पद 12 से 17 वर्ष एवं आयोग की परिधि के बाहर से भरे जाने वाले युवाओं के 15 से 20 वर्ष की आयु छूट प्रदान की गई है. 05 जून 2017 द्वारा लोक सेवा आयोग से भरे जाने वाले गृह, आबकारी, जेल, परिवहन, वन विभाग वर्दीधारी पदों के लिये 5 से 10 वर्ष आयु सीमा में छूट और परिधि के बाहर के युवाओं को 8 वर्ष से 13 वर्ष की छूट का प्रावधान इस विभाग के माध्‍यम से किया गया है. मध्‍यप्रदेश मूल अनारक्षित पुरुष सीमा छूट 33 वर्ष से अन्‍य के लिये 38 वर्ष तक नियत करने का एक महत्‍वपूर्ण काम किया गया है. उपाध्‍यक्ष महोदय, बीच में चर्चा बंद करवा दें.

उपाध्‍यक्ष महोदय - थोड़ा सा चर्चा बंद कर दें व्‍यवधान हो रहा है.

श्री के.पी. सिंह - सिसोदिया जी, आप सरकार की तारीफ करके थके नहीं हैं ? आपको अभी तक मंत्रिमंडल में नहीं लिया गया. आगे भी उम्‍मीद नहीं दिख रही है.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया - आप विरोध कर-करके नहीं थक रहे हैं हमको तारीफ तो करने दो.

श्री बहादुर सिंह चौहान - के.पी. सिंह जी, एक विस्‍तार और होगा और उसमें यशपाल जी मंत्री बनेंगे.

डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय - उपाध्‍यक्ष महोदय, हमारे यशपाल सिंह जी को प्रदेश का सर्वश्रेष्‍ठ विधायक घोषित किया गया है, यह हम सबके लिये प्रसन्‍नता की बात है.

उपाध्‍यक्ष महोदय - बहादुर सिंह जी, हमको मालूम है कि आप मुख्‍यमंत्री नहीं हैं तो क्‍या आप भविष्‍य वक्‍ता हैं ?

श्री बहादुर सिंह चौहान - उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं जाति से ब्राह्मण भी नहीं हूं और पंचांग देखना भी नहीं जानता, लेकिन मेरी भविष्‍यवाणी कभी-कभी साकार हो जाती है.

श्री कमलेश्‍वर पटेल - उपाध्‍यक्ष महोदय, वह ठीक भविष्‍यवाणी कर रहे हैं कि अभी जिनको मंत्री बनना होगा वह बन जाएंगे क्‍योंकि आगे कोई भविष्‍य नहीं है और उन्‍होंने अगले साल की बात नहीं की है.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया - उपाध्‍यक्ष महोदय, आरक्षण को लेकर राज्‍य शासन द्वारा अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग इसके तहत कुल 59857, अनुसूचित जाति के 17575, अनुसूचित जनजाति के 29778 एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के 12504 बैकलॉग पदों की पूर्ति प्रतिवेदित हो चुकी है. पिछड़ी जनजातियों के लिये भी विशेष उपबंध इसमें किये गये हैं. इसके अंतर्गत यदि कोई आवेदक जिला श्योपुर, मुरैना, दतिया, ग्वालियर, भिण्ड , शिवपुरी, गुना तथा अशोक नगर की सहारिया आदिम जनजाति, जिला मण्डला, डिण्डौरी, शहडोल, उमरिया,बालाघाट तथा अनूपपुर की बैगा आदि जनजाति तथा जिला छिंदवाड़ा के तामिया विकासखण्ड की भारिया जनजाति का है और वह न्यूनतम अर्हरता रखता हो, तो उसके लिये भर्ती प्रक्रिया अपनाये बिना उक्त पद पर नियुक्त किया जायेगा. ऐसा प्रावधानित किया गया है. सहारिया जनजाति के साथ साथ सहरिया को भी विशेष पिछड़ी जनजाति में शामिल किया गया है. साथ ही गृह विभाग के अंतर्गत आरक्षक एवं राजस्व विभाग के अंतर्गत पटवारी जैसे पदों के लिये भी कार्यपालक पद से उनको नवाजने का काम किया गया है. लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत ऑन लाइन और डिजिटल हस्ताक्षर के माध्यम से अनेक उल्लेखनीय काम इसमें किये जा रहे हैं. 1 करोड़ 26 लाख 68 हजार 712 जाति प्रमाण पत्र आवेदन पत्रों के माध्यम से प्राप्त हुए, जिसमें से 1 करोड़ 26 लाख, 16 हजार 52 आवेदन पत्रों का निराकरण किया जा चुका है. यह बड़ी उपलब्धि है. लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत अभूतपूर्व काम चल रहे हैं. लोकायुक्त संगठन के द्वारा सरकार भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिये भरसक प्रयास कर रही है. इस कड़ी में लोकायुक्त संगठन द्वारा 254 ट्रेप प्रकरण पंजीबद्ध किये गये हैं. कुल 12 छापे मारे गये हैं, जिसमें से आनुपातिक सम्पत्ति 25.10 करोड़ रुपये की राशि उजागर हुई है और पुलिस स्थापना द्वारा 238 प्रकरणों में माननीय विशेष न्यायालय में चालान प्रस्तुत किये गये हैं. आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के द्वारा भी 2017 में 64 आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किये गये हैं, जिनमें 12 प्रकरणों में चालान एवं पूरक चालान प्रस्तुत किये जा चुके हैं. मुख्य तकनीकी परीक्षक (सतर्कता) संगठन, सदस्यों को मैं जानकारी देना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच के लिये कार्यरत् एजेंसी मुख्य तकनीकी परीक