मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा षोडश सत्र

 

 

फरवरी-मार्च, 2018 सत्र

 

सोमवार, दिनांक 12 मार्च, 2018

 

(21 फाल्गुन, शक संवत्‌ 1939 )

 

 

[खण्ड- 16 ] [अंक- 7 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

सोमवार, दिनांक 12 मार्च, 2018

 

(21 फाल्गुन, शक संवत्‌ 1939 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.03 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

 

राष्ट्रकुल दिवस पर अध्यक्षीय संदेश

 

 

 


 

11.05 बजे तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर

विभागीय योजनाओं से लाभांवित हितग्राहि‍यों की संख्‍या

[उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण]

1. ( *क्र. 677 ) श्री विजय सिंह सोलंकी : क्या राज्‍यमंत्री, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2016-17 में खरगोन जिले के उद्यानिकी विभाग की समस्त योजनाओं से लाभांवित अ.जा. एवं अ.ज.जा. हितग्राहि‍यों की संख्‍यात्‍मक जानकारी उपलब्‍ध कराएं। (ख) वर्ष 2016-17 तथा 2017-18 में खरगोन जिले के ड्रिप या स्प्रिंकलर अनुदान प्राप्त अ.जा. एवं अ.ज.जा. हितग्राहि‍यों की संख्‍या बतावें? (ग) उद्यानिकी विभाग की अ.जा. एवं अ.ज.जा. हितग्राहि‍यों के जाति प्रमाण-पत्र संबंधी विभागीय नीति/निर्देश की प्रति देवें। प्रश्‍नांश (ख) की सूची में किन-किन हितग्राहियों के जाति प्रमाण-पत्र विभागीय नीति/निर्देश अनुसार हैं?

राज्‍यमंत्री, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण ( श्री सूर्यप्रकाश मीना ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) वर्ष 2016-17 में अनुसूचित जाति वर्ग के 542 एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के 1473 कृषकों को तथा वर्ष 2017-18 में अनुसूचित जाति वर्ग के 32 एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के 26 कृषकों को ड्रिप का अनुदान दिया गया है। (ग) जाति प्रमाण संबंधी विभागीय नीति निर्देश जारी नहीं हुये हैं। उत्‍तरांश (ख) के सभी हितग्राहियों के जाति राजस्‍व रिकॉर्ड एवं ग्राम पंचायत से प्राप्‍त अनुमोदन अनुसार हैं।

परिशिष्ट - ''एक''

श्री विजय सिंह सोलंकी - अध्यक्ष महोदय, मैंने वर्ष 2016-17 के ड्रिप अनुदान में एसटी, एससी के हितग्राहियों के नाम की सूची मांगी थी और जाति प्रमाण-पत्र की फोटोकापी मांगी थी, यह नहीं देते हुए सिर्फ संख्या बताई है. यह संख्या तो हमें जिले से भी मिल जाती है. इसमें गड़बड़ी हुई है. ड्रिप लाइन के हितग्राहियों के नाम की सूची और जाति प्रमाण-पत्र की फोटोकापी चाहिए?

श्री सूर्यप्रकाश मीना - अध्यक्ष महोदय, जैसा कि आपने प्रश्नोत्तरी में देखा होगा, इसमें नामवार सूची का कहीं उल्लेख नहीं है, संख्यात्मक जानकारी मांगी थी. वह माननीय सदस्य को उपलब्ध करा दी गई है.

श्री विजय सिंह सोलंकी - अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न ऑन-लाइन किया गया, 6641 यह प्रश्न क्रमांक है, मैंने उसमें सूची और जाति प्रमाण-पत्र की फोटोकापी मांगी है.

श्री सूर्यप्रकाश मीना - अध्यक्ष महोदय, जो प्रश्नोत्तरी हमारे सामने है, इसमें माननीय सदस्य ने प्रश्नांश क में जो जानकारी मांगी है कि वर्ष 2017-17 में खरगौन जिले उद्यानिकी विभाग की समस्त योजनाओं से लाभांवित अ.जा. एवं अ.ज.जा. हितग्राहियों की संख्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराएं. इसमें कहीं पर नाम और फोटोकापी का उल्लेख नहीं है.

श्री विजय सिंह सोलंकी - अध्यक्ष महोदय, मेरे पास में यह सूची है, 6641 ऑन-लाइन प्रश्न क्रमांक है.

श्री सूर्यप्रकाश मीना - अध्यक्ष महोदय, आप अलग से जानकारी चाह रहे हैं तो वह हम उपलब्ध करा देंगे. लेकिन प्रश्न में वह यहां कहीं उद्भूत नहीं हो रहा है.

श्री विजय सिंह सोलंकी - अध्यक्ष महोदय, मेरे पास में जानकारी है, मैं यह पटल पर रखता हूं, क्योंकि संख्या से हमें मतलब नहीं है.

अध्यक्ष महोदय - उनको सूची उपलब्ध करा दें.

श्री सूर्यप्रकाश मीना - अध्यक्ष महोदय, नामवार उनको अलग से उपलब्ध करा देंगे.

अध्यक्ष महोदय - वह उपलब्ध करा देंगे.

श्री मुकेश नायक - अध्यक्ष महोदय, इस तरह से विधान सभा में जवाब आना, उन्होंने सूची इसलिए मांगी थी कि सूची में अपात्र लोगों को सुविधा दी गई है, इसलिए सूची मांगी थी.

अध्यक्ष महोदय - उन्होंने उपलब्ध कराने का बोल दिया है. अगला प्रश्न करिए.

श्री मुकेश नायक - और उन्होंने सूची इसलिए नहीं दी कि अगर सूची देंगे तो अपात्र आदमियों के नाम लिखना पड़ेंगे.

अध्यक्ष महोदय - आप बैठ जाएं. आपको सूची उपलब्ध करा देंगे.

श्री विजय सिंह सोलंकी - अध्यक्ष महोदय, फोटोकापी भी चाहिए और सूची चाहिए.

श्री सूर्यप्रकाश मीना - अध्यक्ष महोदय, अलग से हम उपलब्ध करा देंगे. लेकिन प्रश्न में इसका कोई उल्लेख नहीं है.

श्री विजय सिंह सोलंकी - अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा खरगौन जिले में अनुदान आया था, इसमें घपला हुआ है. आदिवासी, एससी को अनुदान न मिलते हुए अन्य को अनुदान ज्यादा मिला है, क्योंकि आदिवासियों को सब्सिडी ज्यादा है और अन्य को कम है, इन्होंने गड़बड़ी की है, उनकी सूची और फोटोकापी मुझे चाहिए और उसकी जांच होनी चाहिए?

श्री सूर्यप्रकाश मीना - अध्यक्ष महोदय, अलग से उनको हम उपलब्ध करवा देंगे.

श्री विजय सिंह सोलंकी - अध्यक्ष महोदय, क्योंकि अनुदान आदिवासी हितग्राहियों को नहीं मिला है?

श्री सूर्यप्रकाश मीना - अध्यक्ष महोदय, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के हितग्राहियों को जो हम लाभ देते हैं, उसमें सीधा नियम है कि हम बी-वन खतौनी, इसमें जाति का उल्लेख होता है, उन्हीं को हम लोग अनुदान की पात्रता देते हैं. ग्राम पंचायत का अनुमोदन भी उसमें आवश्यक होता है. पूरे प्रमाण लेने के बाद ही इस वर्ग के हितग्राहियों को हम लोग लाभ उपलब्ध कराते हैं.

अध्यक्ष महोदय - उनको आप सूची उपलब्ध करा दें.

श्री सूर्यप्रकाश मीना - अध्यक्ष महोदय, उनको सूची उपलब्ध करा देंगे.

श्री विजय सिंह सोलंकी - अध्यक्ष महोदय, सूची और फोटोकापी भी चाहिए.

श्री सूर्यप्रकाश मीना - अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य को उपलब्ध करवा देंगे.

श्री बाबूलाल गौर - अध्यक्ष महोदय, एक मिनट दे दें.

अध्यक्ष महोदय - अनुपूरक प्रश्नों को ज्यादा एलाउ नहीं करेंगे, प्रश्न रह जाते हैं फिर माननीय सदस्य आपत्ति उठाते हैं कि 12 ही प्रश्न हुए.

श्री बाबूलाल गौर - अध्यक्ष महोदय, प्रश्न में यह पूछा है कि अ.जा. और अ.ज.जाति के संबंध में क्या हितग्राहियों के जाति प्रमाण पत्र संबंधी विभागीय नीति/निर्देश जारी किये गये हैं?

अध्यक्ष महोदय - नहीं किये हैं, उन्होंने कहा है कि जो रेग्यूलर है उसी पर करते हैं.

श्री बाबूलाल गौर - अध्यक्ष महोदय, नीति निर्देश परिपत्र जारी करना क्या आवश्यक नहीं है?

श्री सूर्यप्रकाश मीना - अध्यक्ष महोदय, जब हम जाति प्रमाण-पत्र लेने जाते हैं, उसमें राजस्व रिकॉर्ड, हर स्थानीय पंचायत की जानकारी के अनुसार ही जो प्रमाण-पत्र जारी होते हैं, इसलिए हमारे विभाग में जो नीति है, बी-वन और खसरा में जो जाति अंकित है या ग्राम पंचायत का प्रमाणीकरण, इसको हम लोग मानते हैं.

श्री बाबूलाल गौर - अध्यक्ष महोदय, यह महत्वपूर्ण प्रश्न है, हर विभाग की पॉलिसी होती है. इस विभाग की पॉलिसी नहीं है, इसलिए इसमें भ्रष्टाचार होता है. (शेम-शेम की आवाज)..

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) - अध्यक्ष महोदय, आदरणीय गौर जी की बात का मैं समर्थन करता हूं और वही बात विधायक महोदय ने कहा कि भ्रष्टाचार है. मूल बात यह है कि हमारे विधायक साहब पूछ रहे हैं कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लोगों को लाभ न मिलकर..

वन मंत्री (डॉ. गौरीशंकर शेजवार) --..अध्यक्ष महोदय, इन्होंने कहा कि श्री बाबूलाल गौर जी का समर्थन करता हूं तो क्या बीजेपी में आ रहे हैं?

श्री अजय सिंह - उनकी बातों का समर्थन करता हूं.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार -- अध्‍यक्ष महोदय, आप अपनी नीति को स्‍पष्‍ट रखिये. एक बार आप भारतीय जनता पार्टी के सदस्‍य का आप समर्थन कर रहे हैं, फिर विपक्ष के नेता भी रहना चाहते हैं और बीजेपी का समर्थन भी करना चाहते हैं. यह हंसना और मॅुंह फुलाना दोनों एक साथ नहीं हो सकता.

श्री बाला बच्‍चन -- अध्‍यक्ष महोदय, सरकार को लाईन में लाने के लिये गौर साहब का समर्थन कर रहे हैं.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- अध्‍यक्ष महोदय, अभी तक का आप रिकार्ड देख लें जितनी बार गौर साहब खड़े हुए हैं उतनी बार नेता प्रतिपक्ष जरूर खड़े हुए हैं. इसलिये डॉक्‍टर साहब का जो कहना है मैं उसका समर्थन करता हँ.

श्री राम निवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, जो गौर साहब ने कहा है क्‍या आप उसका समर्थन नहीं करते ?

श्री आरिफ अकील -- अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या आप संबंधों में भी बंदिश लगाओगे कि अगर संबंध हैं तो खड़े नहीं हो सकते ? गौर साहब को आप बीजेपी में नहीं मानते हैं ?

डॉ. गौरीशंकर शेजवार -- अध्‍यक्ष महोदय, आपका नेता भारतीय जनता पार्टी का सदन में खुले आम समर्थन कर रहा है और इसके बाद आप किस मुहं से बोल रहे हो ? ..व्‍यवधान..

श्री अजय सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, आदरणीय शेजवार जी ने पिछले दो-तीन दिन सदन में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करवाई थी, आपका स्‍वागत है. मैंने शुद्ध रूप से कहा था कि आदरणीय बाबूलाल गौर जी की बातों का मैं समर्थन करता हूं कि इसमें भ्रष्‍टाचार हुआ है. इसमें क्‍या गलत हो गया ? भ्रष्‍टाचार के खिलाफ जो लड़ेगा हम उसका समर्थन करेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप क्‍या प्रश्‍न कर रहे थे ?

श्री अजय सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय विधायक महोदय ने इस योजना के तहत अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों को जो पात्र हैं उनको लाभ नहीं मिला अन्‍य लोगों को मिला, उसकी चिंता है. क्‍या इस पर माननीय मंत्री महोदय, खरगोन जिले में जांच करवा देंगे कि अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों को मिला या नहीं मिला ? सही मिला कि गलत मिला ?

श्री सूर्यप्रकाश मीना -- अध्‍यक्ष महोदय, कोई पर्टिक्‍यूलर मामला यदि माननीय सदस्‍यगण, जिसमें बी-1 या खसरा में जाति का उल्‍लेख न हो या ग्राम पंचायत का प्रमाणीकरण न हो, उनके अनुसूचित जाति, जनजाति होने का कोई मामला बताएंगे तो जांच करा लेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय -- जब उनको सूची मिलेगी तब तो वह बताएंगे.

श्री सूर्यप्रकाश मीना -- अध्‍यक्ष महोदय, सूची उपलब्‍ध करा देंगे.

भीकनगांव विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत पुलिया का निर्माण

[लोक निर्माण]

2. ( *क्र. 3175 ) श्रीमती झूमा सोलंकी : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या भीकनगांव जनपद क्षेत्रान्तर्गत ग्राम नुरियाखेड़ी से मेहत्याखेड़ी के मध्यम मार्ग का निर्माण, डामरीकरण कार्य विभाग द्वारा किया गया है? यदि हाँ, तो इस मार्ग के बीच नालों पर पुलिया निर्माण कार्य क्यों नहीं कराया गया है? (ख) क्या विभाग द्वारा डी.पी.आर. बनाकर शासन स्तर पर स्‍वीकृति हेतु भेजी गयी है? यदि हाँ, तो वर्तमान तक स्वीकृति प्राप्त क्यों नहीं हुई है? कहाँ पर लंबित है? यदि नहीं, भेजी तो क्या कारण है? (ग) क्या उपरोक्त मार्ग की पुलिया निर्माण की स्वीकृति हेतु विभाग द्वारा डी.पी.आर. बनवाने एवं सक्षम स्तर से स्वीकृति प्रदान करने हेतु कोई कार्यवाही की जावेगी, जिससे ग्रामीणजनों को सुविधा प्राप्त हो सके?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) जी हाँ। वार्षिक संधारण के अंतर्गत नवीनीकरण का कार्य किया गया है, नवीनीकरण कार्य में पुलियाओं का निर्माण नहीं कराया जाता है। (ख) जी नहीं। प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। प्राथमिकता सूची में सम्मिलित नहीं होने से कार्यवाही संभव नहीं है। (ग) प्रश्‍नांश (ख) के उत्‍तर अनुसार।

श्रीमती झूमा सोलंकी -- अध्‍यक्ष महोदय, नुरियाखेड़ी और मेहत्‍याखेड़ी के मध्‍य लोक निर्माण विभाग के द्वारा सड़क निर्माण किया गया और उसमें पुलिया छोड़ दी गई है. वहां पर हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल के बच्‍चे भी जाते हैं और ग्रामीणजनों को भी पुलिया के बगैर बहुत ज्‍यादा असुविधा होती है. क्‍या आप पुलिया का निर्माण कराएंगे ?

श्री रामपाल सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, यह कार्य 85-सी राहत कार्य में किया गया है. अभी 2011-12 में यह सड़क जो कि दो किलोमीटर है, डामरीकृत कराई गई है. इसमें पुलियों की जो मांग माननीय विधायक जी ने की है उसका प्रस्‍ताव मंगाकर हम परीक्षण करा लेंगे.

श्रीमती झूमा सोलंकी -- अध्‍यक्ष महोदय, जवाब क्‍लीयर नहीं हुआ. क्‍या माननीय मंत्री जी, पुल-पुलिया बनवाएंगे, क्‍योंकि यह बहुत आवश्‍यक है ?

श्री रामपाल सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, उसको प्रक्रिया में लेकर प्रस्‍ताव बुलाकर देखेंगे. हर गांव को सड़क से जोड़ने की सरकार की योजना चल रही है उसमें हम लोग इसको शामिल करेंगे.

श्रीमती झूमा सोलंकी -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं सड़क की बात नहीं कर रही पुलिया की बात कर रही हूं. आप सीधी बात बताएं कि आप पुलिया बनवाएंगे ?

श्री रामपाल सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, आप भी महसूस कर रहे हैं कि यह आखिरी बजट है और मैं अगर यहां कोई बात कह दूं और कल को नहीं होगी तो हमारे विपक्ष के साथी कहेंगे. इसका प्रस्‍ताव हम बुला रहे हैं और गंभीरता से लेंगे.

श्री बाला बच्‍चन -- अध्‍यक्ष महोदय, इसका मतलब 100 परसेंट वह पुलिया नहीं बनेगी. अंतिम बजट है तो उसमें तो 100 परसेंट करना चाहिये और इससे क्‍लीयर हो गया कि सरकार की इच्‍छाशक्ति करने की नहीं है.

श्री सुखेन्‍द्र सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, आपने जो पुराने बजट में घोषणा की थी उसमें से एक भी पूरी नहीं हो रही है. मेरे क्षेत्र में ही एक रोड की घोषणा आपने की थी लेकिन वह आज भी पूरी नहीं हुई है.

श्रीमती झूमा सोलंकी -- अध्‍यक्ष महोदय, जवाब से लगता है कि नहीं बनवाएंगे.

अध्‍यक्ष महोदय -- मंत्री जी कह रहे हैं कि प्रस्‍ताव बुलाएंगे उसके बाद देखेंगे.

श्रीमती झूमा सोलंकी -- अध्‍यक्ष महोदय, प्रस्‍ताव तो आते रहेंगे. माननीय मंत्री जी घोषणा करें कि आप पुलिया बनवाएंगे क्‍योंकि पुलिया के बगैर रोड कोई महत्‍व नहीं रखता है.

 

 

लेबड से मुलथान फोरलेन मार्ग की मरम्‍मत

[लोक निर्माण]

3. ( *क्र. 1603 ) श्रीमती नीना विक्रम वर्मा : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) एस.एच. 31 लेबड से मुलथान फोरलेन मार्ग का बी.ओ.टी. के आधार पर निर्माण किस वर्ष पूर्ण होकर वाहनों से टोल वसूली प्रारंभ हुई तथा किस समयावधि तक टोल वसूली की जावेगी? (ख) क्‍या टोल वसूली अवधि में उक्‍त मार्ग का संधारण टोल वसूली करने वाली कंपनी द्वारा किया जाना अनुबंध की शर्तानुसार अनिवार्य किया गया है? (ग) यदि हाँ, तो उक्‍त मार्ग के निर्माण के पश्‍चात् से कब-कब किस हिस्‍से का संधारण किया गया तथा कितनी बार मार्ग पर पूर्ण डामरीकरण किस दिनांक को किया गया? (घ) समय-समय पर समाचार पत्रों में इस मार्ग के टूट-फूट की खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने तथा वर्तमान में भी कई स्‍थलों पर मार्ग के टूट-फूट की स्थिति में ही होने पर, विभाग द्वारा संबंधित कंपनी के विरूध्‍द क्‍या कार्यवाही की गई? (ड.) क्‍या मार्ग के पूर्णरूपेण मरम्‍मत नहीं किये जाने तक गड्ढों भरी सड़क से गुजरने वाले वाहनों को टोल शुल्‍क में रियायत दिये जाने हेतु विभाग पहल करेगा?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) लेबड से जावरा फोरलेन मार्ग का बी.ओ.टी. के आधार पर वर्ष 2011 में पूर्ण होकर वाहनों से टोल वसूली प्रारंभ की गई है तथा मार्ग की कन्‍शेसन अवधि 25 वर्ष है। (ख) जी हाँ। (ग) मार्ग निर्माण के पश्‍चात् मार्ग को अनुबंध के विभिन्‍न प्रावधानों अनुसार निर्धारित समय-सीमा में संधारित किये जाने का उत्‍तरदायित्‍व निवेशकर्ता कंपनी का है। मार्ग के कुछ भाग में निवेशकर्ता कंपनी द्वारा रिन्‍यूअल कार्य किया गया है। पूर्ण डामरीकरण नहीं किया गया है। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (घ) मार्ग के विभिन्‍न स्‍थानों पर क्षतिग्रस्‍त हो जाने के कारण निवेशकर्ता कंपनी को मार्ग का संधारण अनुबंध के प्रावधान अनुसार किये जाने के निर्देश दिये गये हैं। (ड.) जी नहीं। मार्ग पर गड्ढे नहीं हैं, अपितु कुछ स्‍थानों पर सतह असमतल हुई है। निवेशकर्ता कंपनी को टोल वसूलने के अधिकार सड़क निर्माण एवं अनुबंधानुसार मरम्‍मत के आधार पर दिये गये हैं, मात्र सड़क की मरम्‍मत के आधार पर नहीं। अत: टोल वसूलने के अधिकार को सीमित किये जाने का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

श्रीमती नीना विक्रमा वर्मा -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न थोड़ा सेंसिटिव है मैं आपका फेवर चाहूंगी. मंत्री जी से मैं यह पूछना चाहती हूं कि आपने मेरे जवाब में यह बताया है कि फोरलेन जो लेबड़ से जावरा नया गांव होती हुई जाती है और कई विधान सभाओं को जोड़ती हुई सड़क है. इसका निर्माण हमने सुविधाओं के लिये किया था और इसमें मेंटेनेंस का जो काम कम्पनी कर रही है, आपका कहना है कि वह एग्रीमेंट के अकार्डिंग कर रही है. लेकिन मैं मंत्री जी से यह पूछना चाहूंगी कि यदि मेंटेंनेस के जो अनुबंध हैं, उनके हिसाब से यदि मेंटेनेंस हो रहा है, तो जो लगातार होती हुई दुर्घटनाएं हैं, इसके बारे में मंत्री जी आप क्या कहना चाहेंगे और इसके बारे में आपने क्या उपाय किये हैं, क्योंकि मैंने जुलाई,2017 में भी इसके संबंध में मेरा प्रश्न क्रमांक 2067 था. उसमें मैंने पूछा था, तब भी यह बताया गया था कि जो स्पाट, जहां ज्यादा दुर्घटनाएं होती हैं, उनका चयन करके सुरक्षा के उपाय किये जायेंगे. लेकिन आज तक वहां कुछ भी नहीं हुआ है. वैसे ही लगातार गड्ढे हैं और इसके कारण बढ़ती हुई दुर्घटनाएं, जो कि आज करीब 2000 के पहुंच चुकी हैं. यह सड़क 2011 में हैंड-ओव्हर हुई थी और हैंडओव्हर होने के बाद आप यदि ग्रॉफ देंखेंगे, तो 2011 में 117, 2012 में 158, 2013 में 202, 2014 में 232, 2015 में 246, 2016 में 217 और 2017 में ठीक डबल होते हुए 254 ऑन रिकार्ड जो है, जो कि पुलिस के उसमें सूचीबद्ध है. इतनी सारी दुर्घटनाएं हैं और इनके बारे में सवाल में यही बताया गया है कि यहां पर कुछ नहीं है, ऐसा है, मेंटेन है, जबकि पूटी-फूटी सड़क, असंतुलित सड़क है.

अध्यक्ष महोदय -- इसमें दुर्घटना का प्रश्न नहीं है. इसमें यह है कि मरम्मत..

श्रीमती नीना विक्रम वर्मा-- नहीं-नहीं, अध्यक्ष महोदय, मेरा यह कहना है कि जब तक इसके बारे में बताया नहीं जायेगा. तब तक हमारा जवाब नहीं मिलेगा. इसलिये कि जब तक यह डिटेल नहीं बताई जायेगी कि वहां पर जो घनी आबादी के बीच में सड़क जा रही है, वहां पर अंधेरा है. रेलिंग टूटी हुई है, सड़क टूटी-फूटी है, उसमें गड्ढे हैं. मतलब दरार चली हुई है. इसके कारण वहां पर इतना ज्यादा अंध विश्वास हो गया है कि वहां पर महिलाएं ..

अध्यक्ष महोदय -- आपका भाषण हो रहा है और भी प्रश्न हैं.

श्रीमती नीना विक्रम वर्मा-- अध्यक्ष महोदय, एक मिनट. वहां पर महिलाओं में अंध विश्वास को बढ़ावा मिला है. वहां पर महिलाएं सड़क की पूजा कर रही हैं. नारियल चढ़ा रही हैं, अगरबत्ती लगा रही हैं. मैंने खुद देखा है. मैं वहां से क्रॉस हुई थी और मैं बढ़ते हुए अंधविश्वास को रोकने के लिये ही यहां आज सदन में खड़ी हुई हूं कि यह जो अंध विश्वास बढ़ रहा है, इसको हम रोकने के लिये क्या कर रहे हैं.

..(व्यवधान)..

श्री मुकेश नायक -- अध्यक्ष महोदय, अमेरिका, वाशिंगटन से अच्छी हैं सड़कें.

अध्यक्ष महोदय -- आप सब लोग बैठ जायें. उनको प्रश्न पूछने दें. उनका समाधान होने दें. (श्री तरुण भनोत, सदस्य के खड़े होने पर) यह क्या है. हर बार खड़े हो जाते हैं. मंत्री जी.

श्रीमती नीना विक्रम वर्मा-- अध्यक्ष महोदय, यशपाल जी जब सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति का दौरा लेकर के वहां पर गये थे...

अध्यक्ष महोदय -- नहीं आपका प्रश्न बहुत लम्बा हो गया है. वे भूल ही जायेंगे.

श्रीमती नीना विक्रम वर्मा-- अध्यक्ष महोदय, बताना तो पड़ेगा, तभी तो सही जवाब देंगे.

अध्यक्ष महोदय -- फिर वे उत्तर ही भूल जायेंगे. आपने इतना लम्बा प्रश्न कर दिया है.

श्रीमती नीना विक्रम वर्मा-- अध्यक्ष महोदय, मेरा सीधा सीधा प्रश्न यह है कि अभी तक वहां दुर्घटनाओं को रोकने के लिये क्या उपाय किये गये. कम्पनी के साथ जो एग्रीमेंट हुआ था, अगर वह कम्पनी शर्तों का उल्लंघन कर रही है, तो क्या उस पर कोई दण्ड का प्रावधान करेंगे.

श्री रामपाल सिंह -- अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्या जी ने लेबड़ से मुलथान फोरलेन मार्ग के संबंध में जो प्रश्न किया है, यह पूर्व में भी इस विषय पर चर्चा एक बार हुई है. मैं माननीय सदस्या जी से निवेदन करुंगा कि पहले तो यह 54 किलोमीटर का नवीनीकरण कर दिया है. शेष 76 किलोमीटर है, उसका कार्य भी तुरन्त प्रारम्भ करा दिया जायेगा, जहां तक दुर्घटनाओं की बात है, तो दुर्घटनाओं के लिये, अगर वह हो रही हैं, तो उसके लिये भी हम एक चीफ इंजीनियर स्तर के अधिकारी से परीक्षण माननीय सदस्या के समक्ष करा देंगे और जो भी जरुरी होगा, वह करेंगे.

श्रीमती नीना विक्रम वर्मा-- अध्यक्ष महोदय, परीक्षण हो चुका है. पहले भी यशपाल सिंह जी की समिति वहां जाकर के देख चुकी है. अभी 7 फरवरी को यहां के उच्च अधिकारी, एमपीआरडीसी के गये थे. उन्होंने भी परीक्षण किया और उन्होंने भी वहां पाया, नई दुनिया वगैरह सारे समाचार पत्रों में यह छपा है. कई पत्रकारों के परिवार वहां पर मर चुके हैं. तो मेरा मंत्री जी से एक ही निवेदन है कि वहां आप काम करवायें..

अध्यक्ष महोदय --परीक्षण में जो नोट आया है, उसके अनुसार कार्यवाही करा देंगे क्या.

श्री रामपाल सिंह -- अध्यक्ष महोदय, निश्चित रुप से जो माननीय सदस्या जी की चिंता है, उसको हम गंभीरता से लेते हुए काम भी शीघ्र प्रारंभ करायेंगे और साथ साथ में ये जो दुर्घटनाएं हो रही हैं, उसका भी परीक्षण होगा.

अध्यक्ष महोदय --परीक्षण का जो नोट है, वह भी उनको उपलब्ध करा दें, ताकि वह जान सकें कि परीक्षण में क्या रिजल्ट आये.

श्री रामपाल सिंह -- अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्या के साथ अधिकारी जायेंगे, उनको पूरा अवगत करायेंगे.

अध्यक्ष महोदय -- यशपाल सिंह जी गये थे जांच करने.

श्री रामपाल सिंह -- अध्यक्ष महोदय, सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति में आप गये थे.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया -- अध्यक्ष महोदय, आसंदी से मुझे इस पूरे मार्ग के लिये संयोजक बनाया था. 9 विधायकों ने हमने तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री, नागन्द्र सिंह जी के नेतृत्व में, उन्होंने पूरी सड़क को नापा 260 किलोमीटर. दो दिन लगे हमको.  लेकिन यह बात सही है कि जहां डिजाइन की गई है, अगर कर्व है, तो उनको ठीक नहीं किया जा रहा है. अभी लगातार दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं. और उसमें जो मरम्मत का सवाल है. वास्‍तव में माननीय सदस्‍या ने ठीक कहा है.

अध्‍यक्ष महोदय -- ठीक है, आपकी बात आ गई है, आपने उनका समर्थन कर दिया. माननीय मंत्री जी, जो जांच की रिपोर्ट आई है...

श्री रामपाल सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जांच भी कराएंगे और अगर अनुबंधों का उल्‍लंघन किया है तो उस पर कार्यवाही करेंगे.

श्रीमती नीना विक्रम वर्मा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जांच बहुत बार हो चुकी है. काम कब शुरू कराएंगे, कृपया यह बता दें.

श्री रामपाल सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, शीघ्र कार्य प्रारंभ किया जाएगा.

श्री आरिफ अकील -- माननीय मंत्री जी, शीघ्र की परिभाषा बता दें, शीघ्र किसे कहते हैं, कितने दिन में कर दिया जाएगा ?

श्री रामपाल सिंह -- परिभाषा आपको हम बताएंगे.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह गंभीर विषय है. इसमें एक आपत्‍ति यह भी है, जो यशपाल सिंह जी ने बात कही कि इसमें डिजाइन फ्लॉ है. इसमें दो प्रश्‍न हैं, जांच हो गई, रिपोर्ट आ गई, उसके बाद भी कह रहे हैं कि हम जांच कराएंगे.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं जांच नहीं करवाएंगे, अब रिपोर्ट पर कार्यवाही करेंगे.

श्री अजय सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, यदि डिजाइन फ्लॉ है तो पहले उसको ठीक कराएं. अध्‍यक्ष महोदय, दूसरी मेरी मूल बात यह है कि जितनी इस तरह की सड़कें हैं, इनमें दुर्घटनाएं ज्‍यादा हो रही हैं, क्‍योंकि जो अनुबंध होता है उसका पालन नहीं होता है. मेन्‍टेनेन्‍स वाली जितनी सड़कें हैं, उनमें पालन नहीं होता है. इस तरह की सड़कें सभी माननीय सदस्‍यों के क्षेत्रों में हैं जो बीओटी में चली गईं, लेकिन उनका रख-रखाव ठीक नहीं है. उसके लिए भी माननीय मंत्री महोदय अपने विभाग का थोड़ा रिव्‍यू कर लें, यह ज्‍यादा अच्‍छा रहेगा.

श्री रामपाल सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, इनका सुझाव अच्‍छा है, इसे हम गंभीरता से लेंगे.

मण्‍डी बोर्ड द्वारा स्‍वीकृत सड़कें

[किसान कल्याण तथा कृषि विकास]

4. ( *क्र. 3194 ) डॉ. कैलाश जाटव : क्या किसान कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कृषि मण्डी बोर्ड से सड़क निर्माण कार्य स्वीकृत किया जाता है? (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार यदि हाँ, तो सड़क किस मद से स्वीकृत की जाती है एवं इस योजना में किन ग्रामों को शामिल किये जाने का प्रावधान है? (ग) प्रश्नांश (क) अनुसार यदि हाँ, तो विधानसभा क्षेत्र गोटेगांव अंतर्गत कृषि मण्डी बोर्ड से कितनी सड़कें जनवरी 2014 से प्रश्‍न दिनांक तक स्वीकृत की गईं हैं? राशिवार, स्थानवार, वर्षवार, कार्य पूर्णता का समय, जनपदवार जानकारी देवें। (घ) प्रश्‍नांश (ग) अनुसार स्वीकृत सड़कों में से कितनी सड़कों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है एवं कितनी सड़कें अपूर्ण हैं, जिन सड़कों का निर्माण कार्य अपूर्ण है, वे कब तक पूर्ण हो जावेंगी?

किसान कल्याण मंत्री ( श्री गौरीशंकर बिसेन ) : (क) जी हाँ। विधानसभा क्षेत्रांतर्गत मण्डी क्षेत्रों में मण्डी बोर्ड द्वारा सड़क निर्माण कार्य स्‍वीकृत किया जाता है। (ख) सड़कों के निर्माण की स्‍वीकृति बोर्ड निधि तथा किसान सड़क निधि मद से आवश्‍यकता तथा राशि की उपलब्‍धता के आधार पर की जाती है, जो किसी योजना के तहत् नहीं होने से शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) विधान सभा क्षेत्र गोटेगांव अंतर्गत मण्डी क्षेत्र गोटेगांव (जनपद गोटेगांव) में बोर्ड निधि से प्रश्‍नाधीन अवधि के वर्ष 2015-16 में 01 सड़क कार्य मुगली से समनापुर, लंबाई 2.50 कि.मी., लागत राशि रू. 210.00 लाख की स्‍वीकृत की गई थी, जिसका निर्माण कार्य दिनांक 28.04.2017 को पूर्ण हो चुका है। (घ) उत्‍तरां‍श (ग) के परिप्रेक्ष्‍य में शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

डॉ. कैलाश जाटव -- मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में जो जानकारी दी गई है, उसके संबंध में मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहूंगा कि वर्ष 2015-16 में जो मुगली से समनापुर एक सड़क स्‍वीकृत हुई है, यह किसकी अनुशंसा से स्‍वीकृत हुई है, इतना केवल मुझे बता दें ?

अध्‍यक्ष महोदय -- यह गौरीशंकर बिसेन जी से पूछा गया है. उत्‍तर पाटीदार जी दे रहे हैं.

डॉ. कैलाश जाटव -- राज्‍ममंत्री जी उपस्‍थित हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह मंडी बोर्ड से संबंधित प्रश्‍न है, इसलिए किसान कल्‍याण तथा कृषि विकास मंत्री जी से पूछा गया है.

श्री रामनिवास रावत -- सरकार ऐसे चल रही है.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, पाटीदार जी उत्‍तर दे रहे हैं.

राज्‍यमंत्री, किसान कल्‍याण तथा कृषि विकास (श्री बालकृष्‍ण पाटीदार) -- मैं पहले ही खड़ा हो गया हूँ भाई, आप थोड़ा तसल्‍ली रखें, सरकार जिम्‍मेवारी से काम करती है और करेगी. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, डॉ. जाटव जी का जो प्रश्‍न है, यह सड़क जो गोटेगांव में स्‍वीकृत हुई थी, वह लगभग पूर्ण हो गई है. अब इसमें स्‍वाभाविक रूप से वहां के विधायक ने अनुशंसा की होगी. यह साधिकार समिति के अध्‍यक्ष द्वारा स्‍वीकृत की गई है. स्‍वाभाविक है कि वहां के विधायक ने मांग की होगी.

डॉ. कैलाश जाटव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा सिम्‍पल सवाल था कि यह रोड किसकी अनुशंसा से स्‍वीकृत हुई है, माननीय मंत्री जी ने बोला है कि यह गोटेगांव विधायक की अनुशंसा से स्‍वीकृत हुई है तो मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि मेरी अनुशंसा का पत्र वे मुझे उपलब्‍ध करा दें, उसके लिए मैं उनको धन्‍यवाद दे दूंगा.

श्री बालकृष्‍ण पाटीदार -- अध्‍यक्ष जी, सड़क की वहां आवश्‍यकता होगी, विधायक जी ने नहीं भी रखी होगी, जनता की तरफ से मांग आई होगी, वहां पर सड़क बन गई है.

अध्‍यक्ष महोदय -- जाटव जी, सड़क निर्माण हुआ है ना, आपको क्‍या एतराज है.

डॉ. कैलाश जाटव -- माननीय अध्‍यक्ष जी, मेरा बहुत सिम्‍पल सवाल था कि अगर वहां रोड स्‍वीकृत हुई है, मंडी बोर्ड ने रोड स्‍वीकृत की है तो मुझे माननीय मंत्री जी यह बता दें कि यह स्‍वीकृति कौन करता है और किसकी अनुशंसा से होती है. अगर विधान सभा क्षेत्र के प्रतिनिधि को नहीं मालूम है तो यह उसे कौन बताएगा, अध्‍यक्ष महोदय, इसका मुझे जवाब दिलवा दें.

श्री बालकृष्‍ण पाटीदार -- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने जैसा बताया कि जो साधिकार समिति होती है वह समिति स्‍वीकृत करती है. वहां पर जनता की मांग, विधायक की मांग, सांसद की मांग या तात्‍कालिक परिस्‍थिति, यदि लगता है कि वहां पर सड़क बनाने की आवश्‍यकता है तो सरकार सड़क बनाती है.

डॉ. कैलाश जाटव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अगर जनता की मांग हुई है तो उसका पत्र उपलब्‍ध करवा दें, अगर सांसद जी की तरफ से हुआ है तो उनका पत्र उपलब्‍ध करवा दें या अगर मेरा पत्र लगा है तो वह उपलब्‍ध करवा दें, इन तीनों में से जो भी पत्र उपलब्‍ध करवा देंगे तो बड़ी कृपा होगी.

अध्‍यक्ष महोदय -- यह तो ठीक है आपका प्रश्‍न आ गया, क्‍या आपको और कुछ पूछना है ?

डॉ. कैलाश जाटव -- अध्‍यक्ष महोदय, बस मुझे इतना ही पूछना है, उसी का जवाब आ जाए.

अध्‍यक्ष महोदय -- दे दिया उन्‍होंने.

डॉ. कैलाश जाटव -- अध्‍यक्ष महोदय, उन्‍होंने नहीं दिया. आप सिर्फ इन तीनों में से कोई भी पत्र उपलब्‍ध करवा दें.

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी, जिस आधार पर जो प्रस्‍ताव वहां से आया होगा, वह उनको उपलब्‍ध करा देना.

श्री बालकृष्‍ण पाटीदार -- अध्‍यक्ष महोदय, जरूर करवा देंगे.

अध्‍यक्ष महोदय -- और आपको कुछ पूछना है ?

डॉ. कैलाश जाटव -- अध्‍यक्ष महोदय, बस इतना ही सवाल था, धन्‍यवाद.

प्रश्‍न संख्‍या - 5 (अनुपस्थित)

 

6. ( *क्र. 3191 ) श्री सूबेदार सिंह रजौधा : क्या किसान कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या वर्ष 2016-17 में कैलारस विकासखण्‍ड में किसानों को बन्‍डफार्मर अनुदान पर वितरण किये गये थे? यदि हाँ, तो अनुदान राशि की जानकारी देवें? (ख) विकासखण्‍ड के आर.ए.ई.ओ. समई, सुजर्मा, लाभकंद, दिपेरा, बुडसिरथरा में वर्ष 2016-17 एवं 2017-18 में किसानों को मिनीकिट, अन्‍नपूर्णा एवं बीजग्राम योजना अन्‍तर्गत कितना बीज वितरण किया गया है और बीज पर कितना अनुदान दिया गया है? योजनावार, संख्‍यावार जानकारी देवें (ग) क्‍या प्रश्नांश (क) के संबंध में फर्जी तरीके से किसानों के नाम दर्शित कर लाखों रूपये की अनुदान राशि का एस.डी.ओ. कैलारस द्वारा भ्रष्‍टाचार किया गया है? यदि हाँ, तो क्‍या शासन की राशि के दुरूपयोग पर कार्यवाही की जावेगी?

किसान कल्याण मंत्री ( श्री गौरीशंकर बिसेन ) : (क) जी हाँ, जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र 1 अनुसार है। (ख) जी हाँ। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र 2 अनुसार है। (ग) विकासखण्‍ड कैलारस में एस.डी.ओ. का पद स्‍वीकृत नहीं है, एस.ए.डी.ओ. का पद स्‍वीकृत है। एस.ए.डी.ओ. विकासखण्‍ड कैलारस की भ्रष्‍टाचार से संबंधित कोई शिकायत प्राप्‍त होना प्रतिवेदित नहीं है। शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने किसान कल्‍याण मंत्री जी से प्रश्‍न किया था कि कैलारस विकासखण्‍ड में किसानों को बन्‍डफॉर्मर अनुदान पर दिए गए हैं, वह कितने लोगों को दिए गए हैं इसकी जानकारी मैंने माननीय मंत्री जी से चाही थी. किसानों को मिनीकिट, अन्‍नपूर्णा एवं बीजग्राम योजना के अंतर्गत कितना बीज वितरण किया गया ?

अध्‍यक्ष महोदय -- आपका प्रश्‍न तो आ गया, आप पूरक प्रश्‍न करें.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बन्‍डफॉर्मर अलग है और बीजग्राम योजना अलग है.

अध्‍यक्ष महोदय -- आपने प्रश्‍न पूछा है आप इस प्रश्‍न का कुछ पूरक पूछना चाहते हैं तो इसकी सूची भी आ गई है.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह सूची आयी है इसके बारे में जवाब आया है. जैसा वहां से नीचे से भेजा है वैसा माननीय मंत्री जी ने सदन को भेज दिया है. इसमें मैं दावे से यह कह सकता हॅूं कि किसानों को 1520 बन्‍डफॉर्मर वितरित किए गए हैं और जो सूची बनायी है, वह बिल्‍कुल फर्जी है. इसमें किसानों को कतई बन्‍डफॉर्मर नहीं मिले. 720 की सूची भेजी है उसमें से ज्‍यादा से ज्‍यादा 50-60 किसानों को बन्‍डफॉर्मर बंटे हैं. अध्‍यक्ष महोदय, यह इतना प्रभावशाली व्‍यक्ति है कि इसका तीन बार ट्रांसफर हो गया और तीनों बार इस व्‍यक्ति ने अपना ट्रांसफर केंसिल करवा लिया. उसके नीचे आरआई भी बैठते हैं तो वह व्‍यक्ति आरआई से कहता है कि मैं जो कर रहा हॅूं वह ठीक कर रहा हॅूं. आप इस पर दस्‍तखत करिए. मेरा तो प्रभाव तुमने देखा ही है कि मेरा हर साल ट्रांसफर होता है और मैं ट्रांसफर निरस्‍त करवा लेता हॅूं.

अध्‍यक्ष महोदय -- आपका प्रश्‍न क्‍या है ?

श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न यह है कि इसमें एस.डी.ओ. शब्‍द लिखा है वह गलत लिखा है. वह एस.ए.डी.ओ. है. इन्‍होंने इतना व्‍यापक भ्रष्‍टाचार किया है चाहे वह बन्‍डफॉर्मर हो...

अध्‍यक्ष महोदय -- आप चाहते क्‍या हैं ?

श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं चाहता हॅूं कि इस व्‍यक्ति को हटाकर निष्‍पक्ष जॉंच करवायी जाए. इसने कई लाख रूपए का घोटाला किया है.

राज्‍यमंत्री, किसान कल्‍याण तथा कृषि विकास (श्री बालकृष्‍ण पाटीदार) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कोई भ्रष्‍टाचार यदि वहां हुआ है तो माननीय सदस्‍य उसके लिए लिखित में बताएं कि कैसे भ्रष्‍टाचार हुआ है तो निश्चित रूप से उसकी जॉंच करा ली जाएगी. अभी आपने जो जानकारी मांगी है, वह सब जानकारी दी गई है.

श्री बहादुर सिंह चौहान -- माननीय सदस्‍य क्‍या भ्रष्‍टाचार का प्रमाण देते रहेंगे. जॉंच मांग रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- आपके पास कोई स्‍पेसिफिक मामला है ?

श्री बाला बच्‍चन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सब सदस्‍य ही करेंगे तो सरकार क्‍या करेगी ?

अध्‍यक्ष महोदय -- आप बैठ जाएं.

श्री बाला बच्‍चन -- अध्‍यक्ष महोदय जी, उत्‍तर ठीक नहीं आ रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप बैठ तो जाएं.

डॉ. कैलाश जाटव -- माननीय अध्‍यक्ष जी, मेरा एक निवेदन है कि हमारे नेता प्रतिपक्ष और उपनेता प्रतिपक्ष.....

अध्‍यक्ष महोदय -- आप इस झंझट में मत पडि़ए. आप तो उनका उत्‍तर आने दीजिए.

डॉ. कैलाश जाटव -- माननीय अध्‍यक्ष जी, झंझट तो यही लोग करते हैं हर प्रश्‍न पर बोलते हैं.

श्री बाला बच्‍चन -- आपकी ही पार्टी के विधायकों के ऊपर आपका विश्‍वास और भरोसा नहीं है. अभी तो दोनों विधायकगण आपकी ही पार्टी के हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- श्री बाला बच्‍चन जी बैठ जाइए. बैठ जाइए. माननीय सदस्‍यों के भी प्रश्‍न हैं.

डॉ. कैलाश जाटव -- हमारे सदस्‍य उसमें सक्षम हैं वह बात कर रहे हैं.

श्री बालकृष्‍ण पाटीदार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य कुछ प्रमाण देंगे या लिखित में देंगे कि वहां पर भ्रष्‍टाचार हुआ है और तथ्‍यात्‍मक देंगे तो हम उसकी जॉंच करा लेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय सदस्‍य का सीधा प्रश्‍न है कि आप उनको हटाकर जॉंच कराएंगे ? आप उसका हॉं या ना में उत्‍तर दे दीजिए.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी के जवाब से पहले आपसे अनुरोध करना चाहता हॅूं कि माननीय मंत्री जी कृषि विभाग के लिए नए हैं जो वहां से पर्ची आती है....

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, आप बैठ जाइए, यह कोई बात नहीं हुई.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह उनका विभाग नहीं है. मैं आपका संरक्षण चाहता हॅूं.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप माननीय मंत्री जी का उत्‍तर तो सुन लीजिए.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप सुन तो लीजिए. माननीय मंत्री जी कह रहे हैं कि शिकायत करें तो मैं जॉंच करवा लूंगा. इसमें कई बार शिकायतों के बाद उस व्‍यक्ति का ट्रांसफर हुआ है. पूरी तरह से घोटाले में लिप्‍त है और माननीय मंत्री जी, यह एक-दो लाख रूपए का नहीं है, दसों लाख रूपए का घोटाला है. एक आदमी ने भ्रष्‍टाचार किया है और उसका तीन बार ट्रांसफर होने के बाद भी उसका ट्रांसफर बार-बार निरस्‍त हो जाता है.

श्री बालकृष्ण पाटीदार-- अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य उसको हटाना चाहते हैं कि जाँच कराना चाहते हैं?

श्री सूबेदार सिंह रजौधा-- अध्यक्ष महोदय, मैं उसको हटाकर जाँच कराना चाहता हूँ.

श्री बालकृष्ण पाटीदार-- उसको हटाकर जाँच करा लेंगे.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा-- अध्यक्ष महोदय, उसको कब हटा देंगे उसकी समय सीमा बता दीजिये.

श्री बालकृष्ण पाटीदार-- अध्यक्ष महोदय, उसको तत्काल हटाकर जाँच करा लेंगे.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा-- मंत्री जी, धन्यवाद.

 

 

 

 

 

इंदौर-अहमदाबाद मार्ग पर फ्लाई ओव्‍हर का निर्माण

[लोक निर्माण]

7. ( *क्र. 1777 ) श्री वेलसिंह भूरिया : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या धार जिले के राजगढ़ कुक्षी रोड स्थित इंदौर-अहमदाबाद रोड फोर-लेन एवं सरदारपुर-भोपावर मार्ग पर इंदौर अहमदाबाद फोर-लेन क्रासिंग पर आये दिन हो रही दुर्घटनायें तथा इन दुर्घटनाओं में लगभग 100 से अधिक व्‍यक्तियों की मृत्‍यु हो चुकी है? इन दुर्घटनाओं को रोकने के लिये शासन के पास क्‍या योजना है? (ख) फोर-लेन पर क्रासिंग होने के बावजूद भी उस पर फ्लाई ओवर ब्रिज के निर्माण का प्रस्‍ताव प्राक्‍कलन में निर्माण एजेंसी द्वारा क्‍यों नहीं किया गया? इस गंभीर लापरवाही के लिये कौन जिम्‍मेदार है? क्‍या जिम्‍मेदार लोगों के खिलाफ शासन कोई वैधानिक कार्यवाही करेगा? हाँ तो कब तक? नहीं तो क्‍यों?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) एवं (ख) उक्‍त प्रश्‍न भारतीय राष्‍ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से संबधित है। भारतीय राष्‍ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से प्राप्‍त उत्‍तर संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है।

परिशिष्ट - ''दो''

 

श्री वेलसिंह भूरिया-- अध्यक्ष महोदय, मेरा विषय और प्रश्न बहुत गंभीर है मैं आपका संरक्षण चाहूंगा. इन्दौर-अहमदाबाद रोड फोर-लेन एवं सरदारपुर-भोपावर रोड पर दुर्घटनायें हो रही हैं.

अध्यक्ष महोदय-- आपका प्रश्न आ गया है आप इस पर पूरक प्रश्न पूछ लीजिये.

श्री वेलसिंह भूरिया-- अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से सीधा प्रश्न पूछ लेता हूं कि भोपावर-सरदारपुर रोड में फ्लाई ओवर बनना था, विभाग के कर्मचारियों की गल्ती के कारण वह नहीं बन पाया और राजगढ़ कुक्षी रोड पर भी फ्लाई ओवर बनना था वह भी नहीं बना है तो मंत्री जी यह बताने की कृपा करेंगे कि इन दोनों जगहों पर ब्रिज का निर्माण कब तक किया जाएगा?

श्री रामपाल सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जो प्रश्न पूछा है वह मुख्य रूप से भारत सरकार के राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से संबंधित है. मैं माननीय सदस्य से निवेदन करूंगा कि जो बात लोकसभा के अंदर उठना था उसको आपने विधान सभा में उठाया है लेकिन आपने जो भावना व्यक्त की इसके लिए हम दिल्ली पत्र लिख कर आपकी भावना से अवगत कराँएगे.

श्री वेलसिंह भूरिया-- अध्यक्ष महोदय, मामला बहुत गंभीर है सौ अधिक लोगों की मृत्यु उस रोड पर हो चुकी है. मेरा निवेदन है कि कितने दिन में आप ब्रिज निर्माण के लिए भारत शासन को प्रस्ताव भेजेंगे? समय सीमा बता दें.

श्री रामपाल सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपकी भावना को हम शीघ्र निवेदन कर देंगे.

श्री वेलसिंह भूरिया-- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्यवाद.

श्रीमती नीना विक्रम वर्मा-- अध्यक्ष महोदय, तब तक वहाँ संकेतक या डिवाइडर इस तरह की कुछ व्यवस्था करवा दें ताकि लोग वहाँ संभलकर चलें क्योंकि वहाँ दुर्घटना जोन है.

अध्यक्ष महोदय-- आपने प्रश्न डिवाईड कर दिया, बोल देंगे उनसे.

ग्रीन कार्डधारी अध्यापकों को वेतनवृद्धि का लाभ

[स्कूल शिक्षा]

8. ( *क्र. 1411 ) श्री प्रताप सिंह : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या मध्यप्रदेश में शिक्षा विभाग में कार्यरत अध्यापक संवर्ग के ग्रीन कार्डधारियों को इन्क्रीमेंट लगाये जाने का प्रावधान है? यदि हाँ, तो आदेश की प्रति उपलब्ध करावें? (ख) क्या अध्यापक संवर्ग को 6 वें वेतनमान के आदेश के पश्चात् से ग्रीन कार्डधारी अध्यापकों को इन्क्रीमेंट बंद कर दिये गये हैं? यदि हाँ, तो शासन के किस आदेश से? उस आदेश की प्रति उपलब्ध करावें

स्कूल शिक्षा मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी नहीं। अत: शेषांश का प्रश्‍न उपस्‍थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''तीन''

 

श्री प्रताप सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न अध्यापक संवर्ग से संबंधित है मैंने प्रश्न किया है कि क्या ग्रीन कार्डधारी अध्यापकों को इंक्रीमेंट बंद कर दिया गया है. इसका जवाब आया है कि जी नहीं. लेकिन 22 दिसंबर 2017 को छठवें वेतन के गणना पत्रक में ग्रीनकार्ड की वेतनवृद्धि का जिक्र ना होने के कारण 1 फरवरी 2017 के पूर्व के पात्र कर्मचारियों को जिनको एक इंक्रीमेंट मिलना था उनको नहीं दिया जा रहा है अतः अध्यापक संवर्ग को छठवें वेतन के गणना पत्रक में ग्रीनकार्ड वेतनवृद्धि का लाभ देने का शासन अलग-से निर्देश जारी करेगा? यह मेरा प्रश्न है.

कुँवर विजय शाह-- माननीय अध्यक्ष जी, जो माननीय विधायक जी की मंशा है, तो पहली बात तो बंद नहीं किया गया है. जो एक बच्चे पर नसबंदी कराते हैं उन्हें दो वेतनवृद्धि दिए जाने का प्रावधान है और जो दो बच्चों के बाद अगर नसबंदी कराते हैं, उन्हें एक वेतनवृद्धि दी जाएगी. छठे वेतन आयोग के गणना पत्रक के साथ यह सारा मामला क्लियर हो जाएगा, कोई रोक नहीं लगाई.

श्री प्रताप सिंह-- लेकिन अध्यक्ष महोदय, इसमें कोई निर्देश तो जारी हों, जो छठे वेतनमान में अभी तक इन कर्मचारियों को, पात्र कर्मचारियों के इन्क्रीमेंट बंद कर दिए गए हैं. आपने, "जी हाँ" जरूर लिखा है लेकिन अभी भी इन लोगों की मांग है कि ग्रीन कार्डधारियों को वेतनवृद्धि का लाभ देने के लिए शासन अलग से निर्देश जारी करे.

कुँवर विजय शाह-- माननीय अध्यक्ष जी, अभी सारे अध्यापकों को हम शिक्षक संवर्ग में मिला रहे हैं इसलिए जब छठा वेतनमान का जो आएगा उसके बाद जैसे ही पोर्टल पर आएगा. यह शिकायतें अपने आप दूर हो जाएँगी.

अध्यक्ष महोदय-- जब गणना होगी, तब हो जाएगा.

प्राचार्य शा.उ.मा.वि. ईशानगर के विरूद्ध जाँच/कार्यवाही

[स्कूल शिक्षा]

9. ( *क्र. 527 ) श्री आर.डी. प्रजापति : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या आयुक्‍त लोक शिक्षण संचालनालय म.प्र. भोपाल द्वारा पत्र क्रमांक/स्‍था.-1/सत/सी/वि.स./ छतरपुर/2017/2558, दिनांक 29.11.2017 के अनुसार संयुक्‍त संचालक लोक शिक्षण संभाग सागर को जाँच कर दोषी व्‍यक्ति को चिन्हित कर जाँच प्रतिवेदन प्रस्‍तुत करने का कार्य सौंपा गया था? (ख) क्‍या संयुक्‍त संचालक लोक शिक्षण संभाग सागर द्वारा पत्र क्रमांक/वि.स./शिक्षा/2017/5027, दिनांक 30.11.2017 द्वारा तीन सदस्‍यीय जाँच कमेटी का निर्माण कर जाँच करवायी गयी थी? (ग) क्‍या जाँच कमेटी द्वारा राशि 14,09,022/- के अनाधिकृत आहरण एवं गलत भुगतान के लिये तत्‍कालीन प्राचार्य शास. उच्‍च. माध्‍य. विद्यालय ईशानगर जिला छतरपुर म.प्र. श्री हरीश कुमार रैकवार को उत्‍तरदायी पाते हुये पत्र क्रमांक/जाँच/वि.स./2017/6779, दिनांक 05.12.2017 संयुक्‍त संचालक लोक शिक्षण सागर संभाग सागर के समक्ष प्रस्‍तुत किया गया? (घ) प्रश्‍नांश (ग) अनुसार संयुक्‍त संचा‍लक ने प्रकरण आयुक्‍त लोक शिक्षण भोपाल को भेजा, किन्‍तु आज दिनांक तक दोषी प्राचार्य श्री हरीश कुमार रैकवार के विरूद्ध कोई कार्यवाही नहीं हुई। उक्‍त संबंध में दोषी के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही कब तक की जावेगी?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) से (ग) जी हाँ। (घ) लोक शिक्षण संचालनालय के आदेश क्रमांक 340, दिनांक 28.02.2018 द्वारा श्री हरीश कुमार रैकवार, प्राचार्य के विरूद्ध विभागीय जाँच संस्थित की गई है। जाँच प्रतिवेदन प्राप्त होने पर गुण-दोष के आधार पर कार्यवाही की जा सकेगी। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

श्री आर.डी.प्रजापति-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा जो प्रश्न था, क से ग तक, माननीय मंत्री जी ने बताया है कि अधिकारी दोषी पाए गए हैं और उसकी कमेटी द्वारा जाँच भी करा ली गई है और जब कमेटी द्वारा जाँच करा ली गई और दोषी भी पाए गए, तो फिर विभागीय जाँच का क्या मतलब निकलता है? अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह है कि यह भी कहा जा रहा है कि समय सीमा नहीं बताई जाएगी, तो जब तक वे सेवानिवृत्त नहीं होंगे तब तक उसकी जाँच नहीं होगी. अब आपने दल गठित किया, मेरा निवेदन है कि जब आपने दल गठित कर दिया है और जाँच में दोषी पाया गया है तो फिर कार्यवाही क्यों नहीं हो रही है? मेरा माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि इसमें तत्काल कार्यवाही की जाए और आज ही की जाए.

कुँवर विजय शाह-- माननीय अध्यक्ष जी, आज शाम तक सस्पेण्ड कर दिया जाएगा.

श्री आर.डी.प्रजापति-- थैंक यू, थैंक यू.

प्रश्न संख्या-- 10 (अनुपस्थित)

प्रश्न संख्या-- 11 (अनुपस्थित)

प्रश्न संख्या-- 12(अनुपस्थित)

 

 

 

 

प्रश्‍नकर्ता के पत्र पर कार्यवाही

[उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण]

13. ( *क्र. 3224 ) श्रीमती शीला त्‍यागी : क्या राज्‍यमंत्री, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रश्‍नकर्ता द्वारा दिनांक 04.01.2018 को रीवा जिले में उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्‍करण द्वारा संचालित योजनाओं के द्वारा किसानों को देने वाले लाभ व अन्‍य की जानकारी चाही गई है? (ख) प्रश्नांश (क) यदि हाँ, तो प्रश्‍न दिनांक तक जानकारी क्‍यों नहीं दी गई है, जानकारी कब तक प्रदान की जावेगी? (ग) प्रश्‍नांश (ख) के संदर्भ में जानकारी न देने के लिये कौन अधिकारी दोषी है, उसके विरूद्ध कौन सी दण्‍डात्‍मक कार्यवाही कब तक की जावेगी? (घ) प्रश्नांश (क) एवं (ख) में दी गई जानकारी में हुए भ्रष्‍टाचार के लिये कौन दोषी है, भ्रष्‍ट अधिकारी के विरूद्ध कौन सी दण्‍डात्‍मक कार्यवाही कब तक की जावेगी?

राज्‍यमंत्री, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण ( श्री सूर्यप्रकाश मीना ) : (क) जी हाँ। (ख) प्रश्‍नकर्ता को जानकारी कार्यालय सहायक संचालक उद्यान, जिला रीवा के पत्र क्रमांक 1105, दिनांक 22.02.2018 द्वारा पंजीकृत पत्र के माध्‍यम से भेजी गई है, शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) उत्‍तरांश (ख) के अनुक्रम में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (घ) प्रश्‍नकर्ता को दी गई जानकारी में अनियमितता प्रकाश में नहीं आई है, अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

श्रीमती शीला त्यागी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रश्न क में मैंने जो जानकारी मांगी थी, वह देर से प्राप्त हुई, खैर कोई बात नहीं, अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी देर से भी आए और दुरुस्त भी नहीं आए हैं. मैंने अपने प्रश्न में जो अकुशल और कुशल मजदूर या श्रमिक नियुक्त किए हैं उनकी जन्म दिनाँक और उनकी नियुक्ति दिनाँक का पूछा था, तो आज तक जानकारी प्राप्त नहीं हुई. क्या माननीय मंत्री जी इसकी जानकारी समय पर देंगे?

श्री सूर्यप्रकाश मीना-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जो विधान सभा की प्रश्नावली है उसमें इस तरह का कोई उल्लेख नहीं है, यदि अलग से आप कहेंगे, नाम सहित, तो वह हम उपलब्ध करा देंगे.

श्रीमती शीला त्यागी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा दूसरा प्रश्न यह है कि माननीय मंत्री जी खुद उस कैटेगरी से आते हैं और जनता ने आपको अपना प्रतिनिधि बनाकर भेजा है तो उस संबंध में मेरा यह प्रश्न है कि क्या एसटी, एससी, ओबीसी, के आरक्षण का और उनकी जो योजनाएँ हैं उनका आप लाभ देंगे?

अध्यक्ष महोदय-- इसमें कहाँ है?

श्रीमती शीला त्यागी-- अध्यक्ष महोदय, है.

श्री सूर्यप्रकाश मीना-- माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रश्न में इस तरह का कोई उल्लेख नहीं है.

श्रीमती शीला त्यागी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जो मैंने अपना पत्र लिखा था उसमें मैंने यही पूछा था. लेकिन माननीय मंत्री जी ने देर से जवाब दिया इसलिए मैं उसको अच्छे से देख नहीं पाई. अभी जाकर पहुँचा है. मैं माननीय मंत्री जी से कहना चाहती हूँ कि आप रिजर्व कैटेगरी से हैं और खास कर एसटी, एससी, ओबीसी, के जो भी पद हैं, क्या आप अपने मंत्रित्व कार्यकाल में उनको भरवाएँगे?

अध्यक्ष महोदय-- यह इसमें नहीं है.

श्री सूर्यप्रकाश मीना-- माननीय अध्यक्ष महोदय, फिर भी मैं जवाब दे देता हूँ. समय समय पर विभाग में रिक्त स्थानों की पूर्ति के लिए नियमानुसार हम लोग भर्ती प्रक्रिया जारी रखे हुए हैं और जो खाली स्थान है उनको हम बहुत शीघ्र भरने का प्रयास करेंगे.

श्रीमती शीला त्यागी-- माननीय मंत्री जी धन्यवाद.

 

जुन्‍नारदेव के व्‍यवहार न्‍यायालय में न्‍यायाधीशों की पदस्‍थापना

[विधि और विधायी कार्य]

14. ( *क्र. 1635 ) श्री नथनशाह कवरेती : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या उच्‍च न्‍यायालय, मध्‍यप्रदेश जबलपुर की अधिसूचना क्रमांक सी 4666-तीन-10-47/78 सात दिनांक 18.11.2016 के द्वारा सारणी के बिन्‍दु 11 में जुन्‍नारदेव के व्‍यवहार न्‍यायालय में अपर जिला न्‍यायाधीश, सिविल न्‍यायाधीश प्रथम एवं द्वितीय वर्ग को बैठने के निर्णय हुये थे? (ख) यदि हाँ, तो इस अधिसूचना को किस कारण निरस्‍त किया गया है? (ग) आदिवासी/ग्रामीणों को न्‍याय हेतु दूरस्‍थ न जाना पड़े इस हेतु प्रश्नांश (क) पुन: बहाल किया जायेगा? यदि हाँ, तो कब तक? नहीं तो क्‍यों?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) जी हाँ। (ख) उक्त अधिसूचना निरस्त नहीं की गई। (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) के उत्तर के आलोक में प्रश्न उत्पन्न नहीं होता है।

श्री नथनशाह कवरेती-- माननीय अध्यक्ष जी, छिन्दवाड़ा जिले के जुन्नारदेव विधान सभा में व्यवहार न्यायालय 2013 में बन चुका है और उस व्यवहार न्यायालय में जो एडीजे कोर्ट की व्यवस्था है वह पूरी है और भवन भी बन कर तैयार है, जिससे हमारे ग्रामीण आदिवासी भाइयों को जो बहुत दूर छिन्दवाड़ा जाना पड़ता है, मेरा निवेदन है कि हमारे जुन्नारदेव विधान सभा में एडीजे कोर्ट का भवन बनकर तैयार है एडीजे कोर्ट जल्दी से जल्दी खुले यही मेरा निवेदन है.


श्री रामपाल सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, सक्षम स्थायी वित्तीय समिति की बैठक में यह प्रस्ताव आ चुका है यहां से इसको जल्दी ही शुरु करने का आग्रह करेंगे.

अध्यक्ष महोदय--जल्दी कर देंगे.

श्री नथनशाह कवरेती--माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी समय-सीमा बता दें.

श्री रामपाल सिंह--अध्यक्ष महोदय, एक माह में सक्षम स्थायी वित्तीय समिति की बैठक हो जाएगी.

अध्यक्ष महोदय--एक माह में बैठक हो जाएगी उसके बाद निर्णय हो जाएगा.

श्री रामपाल सिंह--अध्यक्ष महोदय, उसके बाद माननीय विधायक जी को अवगत करा दिया जाएगा.

श्री नथनशाह कवरेती--अध्यक्ष महोदय, बैठक तो एक माह में हो जाएगी, चालू कब होगा यह बता दीजिए.

श्री रामपाल सिंह--जल्दी ही चालू होगा.

श्री नथनशाह कवरेती--अध्यक्ष महोदय, क्योंकि हमारे जो आदिवासी भाई हैं वे बहुत दूर हैं. पहाड़ी क्षेत्र है, उनको छिन्दवाड़ा में रुकना पड़ता है. मेरा निवेदन है कि जुन्नानदेव पास में पड़ता है.

अध्यक्ष महोदय--बैठक होने के बाद जितना जल्दी हो सकता है किया जाएगा.

श्री रामपाल सिंह--जल्दी ही चालू होगा.

शाजापुर मुख्‍यालय अंतर्गत मार्ग का दोहरीकरण

[लोक निर्माण]

15. ( *क्र. 975 ) श्री अरूण भीमावद : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍न क्रमांक 1595, दिनांक 04.12.2017 में बताया गया है कि जिला मुख्‍यालय शाजापुर व्‍हाया सतगाँव-बिजाना से चौमा मार्ग कुल लम्‍बाई 29.1 कि.मी. के दोहरीकरण का प्रस्‍ताव प्राक्‍कलन राशि रु. 2950.08 लाख का मण्‍डल कार्यालय उज्‍जैन में परीक्षणाधीन है? (ख) क्‍या उक्‍त मार्ग का दोहरीकरण/उन्‍नयन हेतु सर्वे के निर्देश दिये गये हैं? (ग) क्‍या वित्‍तीय वर्ष 2018-19 में उक्‍त मार्ग के दोहरीकरण की प्रशासकीय स्‍वीकृत प्रदान होगी? (घ) प्रश्नांश (क), (ख) एवं (ग) अनुसार उक्‍त मार्ग के दोहरीकरण की स्‍वीकृति की समयावधि बतलाएं।

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) एवं (ख) जी हाँ। (ग) वित्‍तीय संसाधनों की उपलब्‍धतानुसार स्‍वीकृति हेतु विचार किया जा सकेगा। (घ) समय-सीमा बताना संभव नहीं है।

श्री अरुण भीमावद--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न के उत्तर में माननीय मंत्री जी ने बहुत सहानुभूतिपूर्वक उत्तर दिया है. यह सड़क स्वीकृति की ओर है लेकिन समय-सीमा नहीं बता रहे हैं. मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि वे इस सड़क को इसी समय स्वीकृत कर देंगे तो कृपा होगी. यह शाजापुर जिला मुख्यालय को आगर से जोड़ने वाला मार्ग है. इससे 22 गांव जुड़ते हैं. मेरा आपके माध्यम से मंत्री जी से निवेदन है कि इसे स्वीकृत करें.

श्री रामपाल सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी के क्षेत्र में अच्छे कार्य हो रहे हैं. लगभग 140 करोड़ रुपए के कार्य स्वीकृत हैं, कार्य चल भी रहे हैं. यह जो आपने प्रस्ताव दिया है इस सड़क की लंबाई 30 किलोमीटर है. इस प्रस्ताव को भी हम गंभीरता से लेंगे और इस पर शीघ्र कार्यवाही करेंगे.

श्री अरुण भीमावद--माननीय अध्यक्ष महोदय, आज दिन भी अच्छा है, प्रश्न बड़ी मुश्किल से लगा है आप स्वीकृति प्रदान कर देंगे तो मेहरबानी होगी.

अध्यक्ष महोदय--मंत्री जी आज अच्छा दिन है. (हंसी)

श्री रामपाल सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ेगा.

अध्यक्ष महोदय--प्रक्रिया का पालन करके कर देंगे.

श्री अरुण भीमावद--माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रक्रिया का पालन हो चुका है. केवल मंत्री जी के हाँ की देर है.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह)--मंत्री जी, हाँ भर तो करना है कर दीजिए. बने या न बने. (हंसी)

श्री रामपाल सिंह--अध्यक्ष महोदय, नेता प्रतिपक्ष जी का धन्यवाद है. झूमा सोलंकी जी के प्रश्न में भी आपने बात रखी थी. उनके क्षेत्र में भी हमने बहुत काम कराए हैं. मध्यप्रदेश में सभी चीजों का ध्यान रखते हुए हमने सड़कों का जो काम किया है उससे हम विपक्ष के साथियों को भी अवगत कराते हैं. प्रदेश में हम अच्छा काम कर रहे हैं. माननीय विधायक जी की भावना को देखते हुए. जिस सड़क के निर्माण की उन्होंने मांग रखी है इसको हम गंभीरता से लेते हुए जल्दी परीक्षण कराकर कार्यवाही करेंगे.

श्री अरुण भीमावद--माननीय अध्यक्ष महोदय, परीक्षण हो चुका है. सारा परीक्षण हो चुका है.

अध्यक्ष महोदय--यह प्रश्न में आ गया है. वही वही बात कहां तक करेंगे. फिर वही उत्तर आएगा.

श्री अरुण भीमावद--माननीय अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद.

 

शाला भवन के निर्माण की स्‍वीकृति

[स्कूल शिक्षा]

16. ( *क्र. 1267 ) कुँवर हजारीलाल दांगी : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विधान सभा क्षेत्र खिलचीपुर के अंतर्गत शासकीय हाई स्‍कूल भाटखेड़ा, दिलावरी, भानपुरा एवं गोघटपुर ऐसे हाई स्‍कूल हैं, जिनका हाईस्‍कूल में उन्‍नयन हुए काफी वर्ष हो चुके हैं, लेकिन उक्‍त हाई स्‍कूल शालाओं का स्‍वयं का भवन नहीं है। यदि हाँ, तो क्‍या उक्‍त हाईस्‍कूलों के छात्र-छात्राओं का अध्‍यापन कार्य माध्‍यमिक एवं प्राथमिक शाला के भवनों में कराया जा रहा है, जिसमें निरंतर अध्‍ययन कार्य बाधित होकर बच्‍चों की बैठक व्‍यवस्‍था भी प्रभावित हो रही है? यदि हाँ, तो प्रश्‍न दिनांक तक उक्‍त हाई स्‍कूल शालाओं के भवन निर्माण हेतु शासन द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई? (ख) प्रश्नांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में क्‍या शासन छात्र-छात्राओं के भविष्‍य को दृष्टिगत रखते हुये उक्‍त हाईस्‍कूल शालाओं के भवन निर्माण की स्‍वीकृति मुख्‍य बजट वर्ष 2018-19 में प्रदान करेगा? यदि नहीं, तो उक्‍त समस्‍या के निराकरण के लिये शासन द्वारा क्‍या कार्यवाही की जावेगी?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) जी हाँ। उक्त हाई स्कूल माध्यमिक एवं प्राथमिक शाला के भवनों में संचालित हो रहे हैं। (ख) उक्‍त भवनों का निर्माण बजट उपलब्‍धता पर निर्भर करता है।

कुँवर हजारीलाल दांगी--माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने मेरे प्रश्न के उत्तर में एक बात तो स्वीकार कर ली है कि हाई-स्कूल, प्रायमरी स्कूल की बिल्डिंग में लगता है. मैं मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूँ कि 15 साल पहले जो हाई स्कूल खुले हैं और प्रायमरी स्कूल की बिल्डिंग में लग रहे हैं. बारिश में प्रायमरी, मिडिल और हाई स्कूल एक ही बिल्डिंग में लगाना पड़ता है. उस समय जब छत टपकती है तो स्कूल के बच्चों की बारिश के मौसम में छुट्टी करना पड़ती है. ऐसी स्थिति में इतने पुराने स्कूल भवन निर्माण की मैंने मांग की थी परन्तु वर्तमान बजट में उसको शरीक नहीं किया गया है. मैं माननीय मंत्री जी से अनुरोध करुंगा कि क्या वर्तमान विभागीय कार्य योजना में इन भवनों को इसी साल सम्मिलित करेंगे ?

कुँवर विजय शाह--माननीय अध्यक्ष जी, शिक्षा विभाग में पहली बार मैं आपके माध्यम से इस सदन को बताना चाहता हूँ कि बहुत पहले से स्कूल खुलते रहे लेकिन भवन बनाने का गंभीरता से कोई प्रयास नहीं किया गया. यह पहली बार है कि हमने इस बार केबिनेट में 900 करोड़ रुपए तीन साल के लिए हायर सेकेण्डरी और हाई स्कूल भवनों के लिए स्वीकृत किए हैं. इस वर्ष 200 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि हायर सेकेण्डरी स्कूल के लिए जारी कर रहे हैं और 573 हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल के भवन इस साल बन जाएंगे और लगभग 125 हाई स्‍कूल के भवन जो इस साल बनेंगे जिसमें 200 करोड़ रुपए से ज्‍यादा की राशि मंजूर कर रहे हैं. एक-एक भवन डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपए का है. इस बार मैंने आपके यहां पर भी एक-एक करोड़ रुपए की और डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपए की चार स्‍कूल बिल्डिंग मंजूर की हैं. हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल बमन गांव, हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल मोहन, हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल भाटखेड़ा, हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल जैतपुरा, हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल मंडावर जहां पर लगभग चार साढे़ चार करोड़ रुपया हमने मंजूर किया है. जो सवाल गंभीरता से माननीय विधायक जी ने उठाया है कि जो जीर्ण-शीर्ण स्‍कूल हैं जहां पर पानी टपकता है उसकी जांच करवा कर बरसात के पहले रिपेयरिंग करवा दी जाएगी.

कॅुंवर हजारीलाल दांगी-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं कि स्‍कूल के लिए शिक्षा विभाग को जमीन आवंटित कर दी गई है. बिल्डिंग नहीं है परंतु अभी बिल्डिंग बनाने के लिए जमीन आवंटित कर दी गई है. उस जमीन पर भी लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है प्राइमरी स्‍कूल की बिल्डिंग में और मिडिल स्‍कूल की बिल्डिंग में लग रही है. मंत्री जी ने जो हायर सेकेण्‍डरी के लिए बात की है मैं उसके लिए आपको धन्‍यवाद देता हूं कि मेरे क्षेत्र में नए हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल खुले हैं उसके लिए आपने बिल्डिंग स्‍वीकृत की है लेकिन यह इतने पुराने स्‍कूल हैं जिनमे बच्‍चों का भविष्‍य बिलकुल अंधकार में है. बारिश में स्‍कूल ही नहीं लगता है. मैं इन स्‍कूल के लिए मांग कर रहा हूं. क्‍या उन बच्‍चों के भविष्‍य के लिए इस साल विभागीय मद में स्‍वीकृत करके कार्य प्रारंभ कर देगें ? मुझे समय सीमा चाहिए.

कॅुंवर विजय शाह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विधायक जी ने दो बात कही हैं. एक तो यह बात कही है कि स्‍कूलों की जमीन पर अतिक्रमण है मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहूंगा कि मध्‍यप्रदेश के खेल मैदान और मध्‍यप्रदेश की स्‍कूल बिल्डिंग में जहां-जहां जिस-जिस भी दबंग ने अतिक्रमण किया है हम एक माह के अंदर निर्देश जारी कर रहे हैं कि सारे अतिक्रमण हटा दिए जाएंगे. दूसरी बात यह कि आप जिन जीर्ण-शीर्ण बिल्डिंग की बात कर रहे हैं उसकी जांच करवाकर पात्रता तय कर लेंगे.

कॅुंवर हजारीलाल दांगी-- माननीय मंत्री महोदय, पूरे मध्‍यप्रदेश में इतनी कृपा कर रहे हो तो क्‍या फर्क पड़ता है मेरे विधान सभा क्षेत्र में और कर दीजिए. हजारों करोड़ रुपया स्‍वीकृत कर रहे हैं. मेरा पहली बार प्रश्‍न लगा है और पहली बार ही मेरी बात नहीं मानी जा रही है तो फिर क्‍या फायदा.

अध्‍यक्ष महोदय-- कोई पूरक प्रश्‍न नहीं.

कॅुंवर हजारीलाल दांगी-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा पहली बार प्रश्‍न लगा है और पहली बार ही मेरी बात नहीं मानी जा रही है तो फिर क्‍या फायदा.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप एक प्रश्‍न और पूछ लीजिए.

कॅुंवर हजारीलाल दांगी-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से यही अनुरोध करूंगा कि क्‍या विभागीय योजना में इसको शरीक करके इस साल कार्य प्रारंभ करा देंगे ? समय सीमा बता दें.

कॅुंवर विजय शाह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पहली बात तो जो विधायक जी ने कही है कि जहां जमीन स्‍वीकृत हुई है वहां अतिक्रमण है तो सबसे पहले जहां जमीन स्‍वीकृत हुई है वहां अतिक्रमण हटाना पड़ेगा. मैं अधिकारियों को निर्देश दे रहा हूं. एक माह में पूरे प्रदेश से अतिक्रमण हट जाएगा.

कॅुंवर हजारीलाल दांगी-- वो तो बिल्डिंग का काम ही चालू कर दिया. चार बिल्डिंग की बात है आप चार बिल्डिंग कर दो.

श्री के.पी. सिंह-- माननीय मंत्री जी लंबी मत दो एक माह में कुछ नहीं होने वाला यह अतिक्रमण आपको हटाने का अधिकार है क्‍या?

कॅुंवर विजय शाह-- देखिए, सरकार हम हमारे हिसाब से चलाते हैं.

श्री के.पी. सिंह-- 14 साल मे हटा नहीं पाए और एक महीने की बात कर रहे हो. आप 14 साल से क्‍या कर रहे थे?

कॅुंवर हजारीलाल दांगी-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विधायक जी से एक निवेदन है.

अध्‍यक्ष महोदय-- मंत्री जी विधायक जी का निवेदन सुन लें. संक्षेप में कहें.

कॅुंवर हजारीलाल दांगी-- मेरा निवेदन है कि चार बिल्डिंग का मामला है आप जांच करा लीजिए मंत्री जी अगर भाटखेड़ा में चलकर आप जांच करा लो अगर बैठने की भी जगह हो तो आप जो कहेंगे मैं करूगा.

अध्‍यक्ष महोदय-- वह जांच करवा रहे हैं.

कॅुंवर हजारीलाल दांगी-- जांच नहीं मैं तो स्‍वीकृत करने की बात कह रहा हूं. दुनिया की स्‍वीकृत कर रहे हैं मेरे क्षेत्र में कुछ तो कर दीजिए.

कॅुंवर विजय शाह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, भाटखेड़ा की स्थिति के लिए अधिकारी भिजवा दिए जाएंगे और सात-आठ दिन में जांच करके संभव हुआ तो बिल्डिंग को मंजूर.... (व्‍यवधान)

कॅुंवर हजारीलाल दांगी-- आप यह आश्‍वासन तो दे दीजिए कि बिल्डिंग तो मंजूर कर देंगे. इतना तो करिए. मेरा तो निराकरण ही नहीं हुआ क्‍या फायदा इतनी बहस करने से. एक, दो बिल्डिंग तो मंजूर कर देते.

श्री हरदीपसिंह डंग-- अध्‍यक्ष महोदय, खजूरी मांडा में बच्‍चे बिना कक्ष के बैठै हुए हैं. उनके पास कक्ष नहीं है खुली हवा में बैठे हैं. (व्‍यवधान) ...

अध्‍यक्ष महोदय-- मैंने आपको बहुत समय दिया.

कॅुंवर हजारीलाल दांगी-- अध्‍यक्ष महोदय, समय दिया तो नतीजा क्‍या निकला?

अध्‍यक्ष महोदय-- उसका हम कुछ नहीं कर सकते.

कॅुंवर हजारीलाल दांगी-- मैं अपना प्रश्‍न ही नहीं रखूंगा क्‍या फायदा यहां पर बात करने से. मंत्री जी इतने नाराज हैं दुनिया का 200 करोड़ का सेंग्‍शन..(व्‍यवधान)

कॅुंवर विजय शाह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विधायक जी के विधान सभा क्षेत्र में मैंने 4 बिल्डिंग दी हैं मैं एक बिल्डिंग काट कर जहां बता रहे हैं भाटखेड़ा वहां मंजूर कर देता हूं.

कुँवर हजारीलाल दांगी- मंत्री जी आप मेरी बात सुन लें. मैं आज के बाद आपसे कोई बात ही नहीं करूंगा. (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय- इसे कार्यवाही से निकाल दें.

कुँवर हजारीलाल दांगी- यदि आप मेरे क्षेत्र की एक बिल्डिंग निरस्‍त करके दूसरी मंजूर करेंगे तो क्‍या मतलब होगा ? क्‍या आप एक और बिल्डिंग मंजूर नहीं कर सकते हैं ?

(....व्‍यवधान...)

अध्‍यक्ष महोदय- दांगी जी आप बैठ जाईये.

कुँवर हजारीलाल दांगी- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आज के बाद इनसे बात भी नहीं करूंगा. (XXX)

(....व्‍यवधान...)

अध्‍यक्ष महोदय- ये कार्यवाही से निकाल दें.

श्री अजय सिंह- (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय- ये नहीं लिखा जायेगा.

 

प्रश्‍न संख्‍या 17 (अनुपस्थित)

 

जिला शिक्षा अधिकारी रीवा के विरूद्ध जाँच/कार्यवाही

[स्कूल शिक्षा]

18. ( *क्र. 1516 ) श्री शंकर लाल तिवारी : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला शिक्षा अधिकारी रीवा के पद पर दिनांक 04.08.2005 से 15.05.2006 एवं 11.04.2010 से 28.04.2010 तक तथा 07.01.2015 से 05.03.2015 तक वर्तमान अवधि में कार्यरत जिला शिक्षा अधिकारी की कुल कितनी शिकायतें हुईं तथा उक्‍त अवधि में कितनी बार निलं‍बित हुआ? निलंबन आदेश एवं शासन विभाग को प्राप्‍त शिकायतों और उन पर की गयी कार्यवाही की प्रति के साथ जानकारी देवें। (ख) क्‍या प्रश्नांश (क) की अवधि एवं अधिकारी को कक्षा 5 वीं, 8 वीं के परीक्षा में व्‍यापक गड़बड़ी करने पर निलंबित किया गया था? यदि हाँ, तो क्‍या निलंबन उपरांत आरोप पत्र जारी कर विभागीय जाँच पूरी होने के उपरांत बहाल किया गया था? सहपत्रों के साथ जानकारी देवें। यदि समय पर आरोप पत्र जारी न होने के कारण स्‍वमेव बहाल होकर कार्य में उपस्थित हो गया था तो उक्‍त प्रकरण में पुन: निलंबित कर उस प्रकरण की जाँच करायेंगे? यदि नहीं, तो क्‍या कारण है तथा ऐसे प्रकरणों में कार्यवाही के क्‍या नियम हैं? नियम की प्रति के साथ जानकारी दें (ग) प्रश्नांश (क) के अवधि के अधिकारी का उक्‍त अवधि में मूल पद क्‍या था तथा उसका कितनी बार रीवा जिले एवं जिले से बाहर स्‍थानांतरण किया गया है? किन-किन आदेशों का पालन किया, किन किन का नहीं? आदेश प्रति के साथ जानकारी देवें। क्‍या उक्‍त भ्रष्‍ट अधिकारी की नियुक्ति रीवा जिले के लिए ही की गयी है? (घ) प्रश्नांश (क), (ख) के वर्तमान अधिकारी स्‍थानांतरण में हैं तो इसे भारमुक्‍त क्‍यों नहीं किया जा रहा है? जिला पंचायत की उपाध्‍यक्ष एवं शिक्षा समिति के अध्‍यक्ष से कई बार अभद्र व्‍यवहार किये जाने तथा जिला शिक्षा समिति में उपस्थित नहीं होने वाले ऐसे अधिकारी को प्रशासनिक पद भार में रखने का क्‍या औचित्‍य है? इन्‍हें कब तक हटा देंगे? इस संबंध में शिक्षा समिति में पारित निंदा प्रस्‍तावों एवं उपाध्‍यक्ष जिला पंचायत द्वारा लिखे गये पत्रों की प्रति एवं उस पर की गयी कार्यवाही की प्रति देवें?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) प्रश्‍नांकित अवधि में संबंधित को निलंबित नहीं किया गया है. बल्कि संबंधित को दिनांक 15.05.2016 को निलंबित किया गया. शेष जानकारी एकत्रित की जा रही है। (ख) जी नहीं, अपितु विभागीय जाँच संस्थित की गई थी, संचालनालय के आदेश दिनांक 07.07.2012 द्वारा विभागीय जाँच में आरोप प्रमाणित नहीं पाये जाने से प्रकरण समाप्त किया गया। शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। आदेश संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र 'एक' अनुसार है। (ग) प्रश्नांश (क) की अवधि 04.08.2005 से 15.05.2006 एवं 11.04.2010 से 28.04.2010 में मूल पद प्राचार्य, उमावि. था। प्राचार्य पद पर रहने के दौरान ही संचालनालय के आदेश क्रमांक 1076- 77 दिनांक 13.07.2012 द्वारा श्री बृजेश मिश्रा, कार्यालय संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण, रीवा संभाग का स्थानान्तरण प्राचार्य, शास.उमा.वि. पिण्डरा जिला सतना (जिले से बाहर) किया गया तथा इस आदेश का पालन श्री मिश्रा द्वारा किया गया। दिनांक 07.01.2015 से 05.03.2015 की अवधि में मूल पद उप संचालक था। जी नहीं। आदेश संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र 'दो' अनुसार है। (घ) म.प्र.शासन, स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश दिनांक 09.02. 2018 द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी जिला रीवा के पद पर श्री अंजनी कुमार त्रिपाठी, को पदस्थ किये जाने से उनके द्वारा कार्यभार ग्रहण दिनांक 15.2.2018 से श्री मिश्रा,को जिला शिक्षा अधिकारी जिला रीवा के सौपें गये अतिक्ति प्रभार से मुक्त किया गया है। शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''चार''

श्री शंकर लाल तिवारी- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न क्रमांक 1516 में रीवा के जिला शिक्षा अधिकारी के विषय में प्रश्‍न किया गया था. जिसमें मुझे उत्‍तर में बताया गया है कि उनको पूर्व में निलंबित भी किया जा चुका है और प्रश्‍न लगने के बाद 09.02.2018 के आस-पास उनको हटाकर श्री अंजनी कुमार त्रिपाठी जी को रीवा जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर पदस्‍थ किया गया है एवं शेष जानकारी एकत्रित की जा रही है. उनको हटा देने के बाद और पूर्व में उनका निलंबन भी हो चुका है इसलिए मैं समझता हूं कि यह पर्याप्‍त है. इसके लिए मैं मंत्री जी को धन्‍यवाद देता हूं.

मेन केनाल से दीवानचन्‍द का डेरा तक मार्ग निर्माण की स्‍वीकृति

[लोक निर्माण]

19. ( *क्र. 441 ) श्री दुर्गालाल विजय : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने दिनांक 25.06.2017 को श्‍योपुर जिले में प्रवास के दौरान मेन केनाल से ग्राम दीवानचन्‍द का डेरा तक वर्तमान तक आवागमन में आ रही कठिनाइयों के निवारण हेतु इस मार्ग का निर्माण कराने की मांग ग्रामीणों द्वारा की गई थी। ग्रामीणों की मांग को गंभीरता से लेते हुए इस मार्ग का निर्माण कराने की घोषणा माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने की थी। (ख) यदि हाँ, तो उक्‍त घोषणा के क्रियान्‍वयन हेतु क्‍या ई.ई. लो.नि.वि. श्‍योपुर ने उक्‍त मार्ग की डी.पी.आर. तैयार कर शासन को स्‍वीकृति हेतु भेज दी है व कब? यदि नहीं, तो कब तक भेजी जावेगी? इसकी लागत भी बतावें। (ग) क्‍या उक्‍त डी.पी.आर. भेजने में विलंब के कारण उक्‍त घोषणा के क्रियान्‍वयन में विलम्‍ब की स्थिति निर्मित हो रही है? (घ) यदि हाँ, तो क्‍या शासन उक्‍त घोषणा का प्राथमिकता से क्रियान्‍वयन कराने हेतु उक्‍त मार्ग की डी.पी.आर. शीघ्र मंगवाएगा तथा इसे वर्ष 2018-19 के बजट में शामिल करके शीघ्र स्‍वीकृति प्रदान करेगा? यदि नहीं, तो क्‍यों?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) जी हाँ। जी हाँ। (ख) जी नहीं, अपितु मुख्‍य अभियंता ग्‍वालियर द्वारा दिनांक 11.01.2018 को प्रमुख अभियंता कार्यालय को डी.पी.आर. प्रस्‍तुत। प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता। रू. 130.73 लाख। (ग) जी नहीं। (घ) विभाग की स्‍थायी वित्‍तीय समिति की 171 वीं बैठक के एजेण्‍डा में सम्मिलित। अनुपूरक बजट वर्ष 2018-19 में सम्मिलित होने के उपरांत स्‍वीकृति की कार्यवाही की जा सकेगी। प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता।

श्री निशंक कुमार जैन- दादा, इसमें भी केवल धन्‍यवाद ही दे दो. क्‍यों कुछ कह रहे हो ?

श्री शंकर लाल तिवारी- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस प्रश्‍न हेतु श्री दुर्गालाल जी द्वारा मुझे अधिकृत किया गया है. मेरा प्रश्‍न केवल इतना है कि जवाब में कहा गया है कि डी.पी.आर. विभाग की स्‍थायी वित्‍तीय समिति की 171 वीं बैठक में एजेण्‍डा में सम्मिलित की गई है. क्‍या समिति से तत्‍काल अनुमोदन करवाकर मंत्री जी द्वारा वर्ष 2018-19 के अनुपूरक बजट में उक्‍त मार्ग की डी.पी.आर. को निश्चित रूप से शामिल किया जायेगा ? इसके अतिरिक्‍त क्‍या मार्ग निर्माण के स्‍वीकृत आदेश जारी किए जावेगें ? माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह मुख्‍यमंत्री जी की स्‍वयं की घोषणा है और मंत्री जी भी वहां गए थे. उन्‍होंने भी इस आशय की घोषणा की थी. विधायक जी की ओर से मेरा निवेदन है कि इस पर ठोस आश्‍वासन दिया जाए कि वर्ष 2018-19 के अनुपूरक बजट में इसकी राशि स्‍वीकृत हो जायेगी और तत्‍काल काम शुरू हो जायेगा.

श्री रामपाल सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तिवारी जी ने स्‍वयं बता दिया है कि स्‍थायी वित्‍तीय समिति से यह प्रस्‍ताव पारित किया जा चुका है और इसे हम तुरंत स्‍वीकृत कर रहे हैं और अनुपूरक बजट में इसे शामिल करने की प्रक्रिया हो गई है.

श्री शंकर लाल तिवारी- अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी के आश्‍वासन से संतुष्‍ट हूं परंतु जब सब कुछ हो गया है, अनुपूरक बजट में भी आ गया है तो बस काम भी जल्‍दी शुरू हो जाए. मैं उम्‍मीद करता हूं कि इस मार्ग पर मंत्री जी शीघ्र काम लगवाने का प्रयास करेंगे.

कसरावद विधानसभा क्षेत्रांतर्गत सड़कों का निर्माण

[लोक निर्माण]

20. ( *क्र. 3045 ) श्री सचिन यादव : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) कसरावद विधानसभा क्षेत्रांतर्गत कसरावद मुख्‍य मार्ग औझरा से औझरा टाण्‍डा मार्ग, अदलपुरा बिटनेरा से सहेजला व्‍हाया बडिया मार्ग, मछलगांव से सहेजला मार्ग, बामखल आवरकच्‍छ से रामपुरा 3.20 कि.मी. मार्ग, कोडापुरा (लोहारी) से सोनखेड़ी 3.82 कि.मी. मार्ग, सिपटान मुख्‍य मार्ग से भुलगांव 1.50 कि.मी., भनगांव से कवडी 3.50 कि.मी. मार्ग, रसवा से डाबरी 6.50 कि.मी. मार्ग, टेमरनी से सिनगुन मार्ग एवं कसरावद खरगोन मार्ग (जायसवाल ढाबे) से नवलपुरा तक के उक्‍त मार्गों के निर्माण कार्य किये जाने हेतु वर्ष 2014-15 से प्रश्‍न दिनांक तक लोक निर्माण विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई? (ख) उक्‍त निर्माण कार्यों के प्रस्‍ताव किस-किस दिनांक को प्राप्‍त हुए तथा वर्तमान में उनकी अद्यतन स्थिति क्‍या है? उक्‍त मार्गों के निर्माण कार्य आज दिनांक तक नहीं किये जाने के क्‍या कारण हैं? (ग) प्रश्नांश (क) में दर्शित मार्गों की वस्‍तुस्थिति प्रश्‍नांकित दिनांक तक में क्‍या है? मार्गवार जानकारी दें। (घ) उक्‍त निर्माण कार्यों के संबंध में विगत 3 वर्षों में प्रश्‍नकर्ता के कितने पत्र विभाग को प्राप्‍त हुए तथा तत्‍संबंध में प्रश्‍नांकित दिनांक तक क्‍या कार्यवाही की गई? कार्यवाही की अद्यतन स्थिति से अवगत करावें (ड.) उक्‍त मार्गों के निर्माण कार्यों की कब तक स्‍वीकृति जारी कर निर्माण कार्य पूर्ण करा लिए जायेंगे?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) से (ड.) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है।

श्री सचिन यादव- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सीधा और सटीक प्रश्‍न मंत्री जी से करना चाहता हूं कि मैं जब से निर्वाचित हुआ हूं मैं अपने क्षेत्र की कुछ महत्‍वपूर्ण सड़कों की चर्चा विधान सभा में प्रश्‍नों के माध्‍यम से उठाने का प्रयास कर रहा हूं. मैं मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि वे कृपया इन महत्‍वपूर्ण सड़कों की स्‍वीकृत की घोषणा इस सदन में करें.

श्री रामपाल सिंह- अध्‍यक्ष महोदय, विधायक जी ने हमें 17 नई सड़कों के प्रस्‍ताव दिए हैं. एक सड़क अदलपुरा बिटनेरा से बडिया का कार्य वर्ष 2018-19 के मुख्‍य बजट में हमने शामिल कर लिया है. इसी तरह 3 करोड़ 14 लाख रूपये की 9 सड़कों के मजबूतीकरण का कार्य हमने आपके पत्र पर स्‍वीकृत किया है. माननीय विधायक के क्षेत्र में 10 करोड़ की लागत से 4 सड़कों के कार्य प्रगतिरत् हैं. विधायक जी द्वारा दिए गए पत्र में जो सुझाव दिए गए हैं हम उन्‍हें गंभीरता से लेकर उनका परीक्षण कर रहे हैं.

श्री सचिन यादव- धन्‍यवाद मंत्री जी. मेरे यहां मात्र 9 सौ मीटर-एक किलोमीटर की छोटी-छोटी सड़कें हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिस प्रकार आप अपने क्षेत्र की सड़कों को लेकर चिंतित हैं उसी प्रकार हम भी अपने क्षेत्र की सड़कों को लेकर चिंतित हैं. इसलिए मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि कृपया इन सड़कों को भी इस बजट में शामिल करें.

सागर विधानसभा क्षेत्रांतर्गत भवन एवं बाउण्‍ड्रीवॉल विहीन विद्यालय

[स्कूल शिक्षा]

21. ( *क्र. 370 ) श्री शैलेन्द्र जैन : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सागर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कुल कितने हायर सेकेण्‍डरी एवं हाई स्‍कूल संचालित हैं? इन विद्यालयों में से कितनों के स्‍वयं के भवन हैं एवं कितने भवन विहीन हैं, जिन विद्यालयों के स्‍वयं के भवन हैं, उनमें से कितने बाउण्‍ड्रीवॉल विहीन हैं? (ख) भवन विहीन हायर सेकेण्‍डरी एवं हाई स्‍कूल किन वैकल्पिक भवनों में संचालित हो रहे हैं? शासन सागर विधान सभा क्षेत्रांतर्गत भवन विहीन एवं बॉउण्‍ड्रीवॉल विहीन विद्यालयों को कब तक उक्‍त सुविधा उपलब्‍ध करा देगा? (ग) क्‍या अनुसूचित जाति बाहुल्‍य क्षेत्र में स्‍थापित हाई स्‍कूल काकागंज एवं हाई स्‍कूल बिट्ठलनगर में स्‍वयं के भवन एवं बाउण्‍ड्रीवॉल न होने के कारण विद्यार्थियों के मध्‍य सदैव ही असुरक्षा का वातावरण बन रहा है? यदि हाँ, तो शासन कब तक प्राथमिकता से इन विद्यालय में भवन एवं बाउण्‍ड्रीवॉल स्‍वीकृत करेगा ?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) सागर विधानसभा क्षेत्रांतर्गत कुल 13 (06 हाई स्कूल एवं 07 हायर सेकेण्डरी स्कूल) संचालित हैं। जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र ''एक'' अनुसार है। भवन विहीन तथा बाउण्ड्रीवॉल विहीन शालाओं की जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र ''दो'' अनुसार है। (ख) भवन विहीन हाई स्कूल शा. माध्यमिक शालाओं के भवनों में संचालित हो रही है। जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र ''तीन'' अनुसार है। भवन विहीन स्कूलों के लिए भवन एवं बाउण्ड्रीवॉल निर्माण बजट की उपलब्धता पर निर्भर करेगा। (ग) विद्यालय के प्राचार्य एवं स्टॉफ द्वारा विद्यार्थियों की सुरक्षा हेतु विशेष सजगता बरती जाती है। भवन निर्माण एवं बाउण्ड्रीवॉल निर्माण बजट उपलब्धता पर निर्भर करेगा।

परिशिष्ट - ''पाँच''

श्री शैलेन्‍द्र जैन:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय ने जो मेरे प्रश्‍न का जवाब दिया है, उसमें उन्‍होंने वहां हाई स्‍कूल के तीन भवन, भवन विहीन बतायें हैं.

अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी से आग्रह करना चाहता हूं कि लगभग इन विद्यालयों को संचालित होते हुए 20-20 वर्ष हो गये हैं और जहां पर यह भवन संचालित हैं, उनकी स्थिति अच्‍छी नहीं है. वहां पर कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है. मैं उनसे आग्रह करना चाहता हूं कि हमारे जो तीन स्‍कूल हैं, उसमें से कम से दो भवन बहुत ही आवश्‍यक हैं, माननीय मंत्री क्‍या आप उनको बनाने की घोषणा करेंगे ?

कुँवर विजय शाह:- माननीय अध्‍यक्ष जी, विधायक जी ने जिन भवनों को उल्‍लेख किया है, यह बात सच है कि बहुत दिनों से, क्‍योंकि पहले तो भवन जीरो बजट से खुलते थे. यह तो हम पहली बार, इस बार 900 करोड़ रूपये लेकर आये हैं और 200 करोड़ रूपये दे भी रहे हैं. शहरी क्षेत्र के जो हाई स्‍कूल हैं, हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल हैं और भी जो स्‍कूल हैं, उनकी हर निगम की शिक्षा उपकर की जो राशि होती है, वह स्‍कूलों में ही हमने खर्च करने के निर्देश जारी किये हैं. हर नगर-निगम में दो-तीन करोड़ रूपये साल की शिक्षा उपकर की राशि आती है और इसलिये हमने पहले भी निर्देश जारी किये हैं और आज फिर एक निर्देश जारी कर रहे हैं कि जिला शिक्षा अधिकारी से सलाह करने के उपरांत ही शिक्षा उपकर की राशि जो करोड़ों की होती है, वह स्‍कूल शिक्षा विभाग में ही खर्च की जायेगी. नगर निगम,कमिश्‍नर और कलेक्‍टर, सागर को हम आज ही निर्देश जारी कर देंगे कि वह विधायक जी के साथ बैठें और उनके क्षेत्र की जो दो-तीन करोड़ रूपये की उपकर राशि रखी हुई है, उससे क्‍या रिपेयरिंग हो सकती है, क्‍या नयी बिल्डिंग बन सकती है, वह मंजूर करवायेंगे और सभी नगर-निगमों को आज यह निर्देश जारी करवायेंगे कि हमारे शिक्षा अधिकारी के अनुमोदन उपरांत ही शिक्षा उपकर की राशि नगर-निगम क्षेत्र में शिक्षा के अलावा कहीं खर्च नहीं होगी और एक बिल्डिंग जहां आप बोलेंगे, जो महत्‍वपूर्ण होगी, उसको इस बजट में हम शामिल करेंगे.

श्री शैलेन्‍द्र जैन:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बहुत-बहुत धन्‍यवाद्. एक विषय और था कि आपने जो बताया कि विद्यालय के प्राचार्य और स्‍टॉफ के द्वारा विद्यार्थियों की सुरक्षा हेतु विशेष सजगता बरती जा रही है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बाऊँडी-विहीन विद्यालय हैं, नेशनल हाईवे से लगे हुए विद्यालय हैं,कुछ विद्यालय हमारी रिंग रोड से लगे हुए हैं, ऐसे भवन चिन्‍हृत कर लें, वह चार-पांच भवन हैं, उन भवनों की बाऊँडीवाल बनाना नितांत आवश्‍यक है. वहां पर आये दिन दुर्घटना होती है, वहां के कम से कम आज चार भवनों की बाऊँडीवाल की घोषणा कर देंगे तो बहुत बड़ी कृपा होगी.

कुँवर विजय शाह:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें बाऊँडीवाल का प्रश्‍न तो इसमें नहीं है. चूंकि जनहित और स्‍कूल का मामला है. सीमित संसाधनों में हम लोग बाऊँडीवाल के अलावा चेनिंग फेंसिंग भी कर रहे हैं. नगर पालिका निगम, सागर के साथ, कमिश्‍नर के साथ ,कलेक्‍टर के साथ और हमारे जिला शिक्षा अधिकारी के साथ माननीय विधायक की मीटिंग के उपरांत, जहां पर जरूरी होगा वहां पर चेनिंग फेंसिंग मंजूर करेंगे.

श्री शैलेन्‍द्र जैन:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बहुत-बहुत धन्‍यवाद्.

प्रश्‍न संख्‍या 22- अनुपस्थित.

प्रश्‍न संख्‍या 23- अनुपस्थित.

भावांतर योजना में न्‍यूनतम खरीदी भाव का निर्धारण

[किसान कल्याण तथा कृषि विकास]

24. ( *क्र. 2890 ) श्री दिनेश राय (मुनमुन) : क्या किसान कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सिवनी जिले के अंतर्गत भावांतर योजना में प्रश्‍न दिनांक तक कितने किसानों के पंजीकरण हुये? (ख) भावांतर योजना से प्रश्‍न दिनांक तक लाभांवित होने वाले किसानों की संख्‍या तथा उन्‍हें कुल प्राप्‍त अंतर राशि बतावें। (ग) भावांतर योजना के तहत कौन-कौन सी फसल है तथा उस फसल पर मिलने वाले भावांतर का सूत्र (फार्मूला) क्‍या है? (घ) खरीफ 2017 हेतु फसलों के मॉडल रेट की जानकारी देवें?

किसान कल्याण मंत्री ( श्री गौरीशंकर बिसेन ) : (क) सिवनी जिले के अंतर्गत खरीफ 2017 की भावांतर भुगतान योजना में 41880 किसानों के पंजीयन हुए हैं। (ख) भावांतर भुगतान योजना अंतर्गत 16 अक्‍टूबर, 2017 से 31 दिसम्‍बर, 2017 तक चयनित फसलों को मण्डी प्रांगण में विक्रय करने वाले सिवनी जिले के 18551 किसानों को दिनांक 20.02.2018 की स्थिति में भावांतर की राशि रूपए 45,97,54,732/- जिला कलेक्‍टर द्वारा उनके बैंक खाते में अंतरित की गई है। (ग) खरीफ 2017 की भावांतर भुगतान योजना अंतर्गत मक्‍का, मूंग, उड़द, सोयाबीन, मूंगफली, तुअर, तिल एवं रामतिल फसलें शामिल हैं। इन फसलों पर मिलने वाली भावांतर राशि की गणना का सूत्र (फॉर्मूला) इस प्रकार है, योजना अंतर्गंत निर्धारित शर्तों के अध्‍याधीन पंजीकृत किसान द्वारा बेची गयी फसल की विक्रय दर समर्थन मूल्‍य से कम, किन्‍तु राज्‍य शासन द्वारा घोषित मॉडल (होल-सेल) विक्रय दर से अधिक हुई तो समर्थन मूल्‍य तथा किसान द्वारा विक्रय दर के अंतर की राशि भावांतर के रूप में भुगतान योग्‍य होगी। पंजीकृत किसान द्वारा बेची गई फसल की विक्रय दर राज्‍य शासन द्वारा घोषित मॉडल (होल-सेल) विक्रय दर से कम हुई तो समर्थन मूल्‍य तथा मॉडल विक्रय दर के अंतर की राशि का लाभ भावांतर के रूप में देय होगा, परंतु किसी उत्‍पाद का मॉडल (होल-सेल) विक्रय दर (तीन राज्‍यों का औसत) यदि न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य से ऊपर रहे तो उक्‍त फसल उत्‍पाद के लिए भावांतर भुगतान योजना लागू नहीं मानी जावेगी। यदि किसान द्वारा विक्रय दर, न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य से अधिक या बराबर हुई तो भी योजना का लाभ देय नहीं होगा। (घ) खरीफ 2017 की भावांतर भुगतान योजना अंतर्गत प्रश्‍न दिनांक तक चार बार मॉडल रेट घोषित किये गये हैं, जिसकी जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है।

परिशिष्ट - ''छ:''

श्री दिनेश राय :-माननीय अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद् कि आपने मेरा प्रश्‍न ला दिया. मैं मंत्री जी से सीधा प्रश्‍न पूछूंगा कि भावांतर योजना में, सिवनी में आपने जो भावांतर योजना के मॉडल रेट तय किये हैं, उस अंतर की राशि को आपने सिवनी में वाकई में आपने दिया है या नहीं ? वहां पर क्‍या दर थी, कृपया यह बतायें. वहां पर मक्‍का 800-900 रूपये बिका है और आपने भावांतर में 235 रूपये दिये हैं. इसके बाकी अंतर की राशि कैसे मिलेगी ?

अध्‍यक्ष महोदय:- आप ठीक-ठाक प्रश्‍न पूछिये.

राज्‍य मंत्री, किसान कल्‍याण तथा कृषि विभाग (श्री बालकृष्‍ण पाटीदार):- मक्‍का जो बाजार में बिकती है, उस आधार पर भावांतर नहीं दिया जाता है, उसके मॉडल रेट तय होते हैं, उसके आधार पर भावांतर दिया जाता है और वह दिया गया है.

श्री दिनेश राय - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने मॉडल रेट का अन्‍तर पूछा है.

श्री कमलेश्‍वर पटेल - जो अन्‍तर की राशि है, वह सरकार के भाषण में मिल जायेगी.

अध्‍यक्ष महोदय - (श्री निशंक कुमार जैन द्वारा बिना माइक के लगातार बोलते रहने पर) आप समझदार सदस्‍य नहीं हैं. आप हर बात पर खड़े हो जाते हैं. नहीं, यह बात ठीक नहीं है, जिनका प्रश्‍न है उनको आप क्‍यों नहीं पूछने देते हैं ? उनको आपकी जरूरत नहीं है. निशंक जी, आप बैठ जाइये. हर प्रश्‍न पर खड़े हो जाते हो. (....व्‍यवधान....) यह ठीक बात नहीं है. निशंक कुमार जैन का कुछ नहीं लिखा जायेगा.

श्री निशंक कुमार जैन - (XXX)

श्री दिनेश राय - जैन साहब, बैठ जाओ. हम एम.कॉल एवं एलएलबी हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो अन्‍तर की राशि है, आपने मान लो, जो भी रेट तय किया है या आपका जो भी फॉर्मूला है, उस आधार पर मेरी विधानसभा में नहीं दिया गया है. क्‍या आप जांच कराएंगे ?

श्री बालकृष्‍ण पाटीदार - निश्चित रूप से. जो शासकीय मापदण्‍ड हैं, जिसके आधार पर, मॉडल रेट के आधार पर मक्‍के की भावांतर राशि, यदि नहीं दी गई है तो आप उसका तथ्‍यात्‍मक लिखकर देंगे तो जांच करवा लेंगे.

श्री दिनेश राय - मंत्री जी, मैंने प्रश्‍न लगाया है, उसके आधार पर जांच करा लें.

श्री बालकृष्‍ण पाटीदार - लेकिन ऐसा होता नहीं है कि मंडी के पास जो बिकता है, वह तो सब (........व्‍यवधान...)

अध्‍यक्ष महोदय - मंत्री जी, बैठ जाइये.

श्री दिनेश राय - व्‍यापारी 800-900 रुपये में खरीद रहे हैं, 1,435 रुपये का रेट है. ठीक है, धन्‍यवाद. अध्‍यक्ष जी, आपने एक मौका दे दिया.

अध्‍यक्ष महोदय - प्रश्‍नकाल समाप्‍त.

 

(प्रश्‍नकाल समाप्‍त)

 

12.01 बजे विशेषाधिकार भंग की सूचना

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया एवं अन्‍य माननीय सदस्‍यों द्वारा श्री जितू पटवारी, सदस्‍य

के विरुद्ध विशेषाधिकार भंग की सूचना

अध्‍यक्ष महोदय - मुझे श्री यशपाल सिंह सिसोदिया एवं अन्‍य माननीय सदस्‍यों की ओर से मध्‍यप्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियम 165 के अंतर्गत सदस्‍य श्री जितू पटवारी के विरुद्ध विशेषाधिकार भंग की सूचना प्राप्‍त हुई है.

श्री सिसोदिया एवं अन्‍य माननीय सदस्‍यों द्वारा प्रस्‍तावित विषय नियमानुकूल हैं.

अत: मैं नियमावली के नियम 167 (1) के अंतर्गत श्री सिसोदिया को विशेषाधिकार प्रश्‍न उठाने की अनुमति देता हूँ.

(....व्‍यवधान...)

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया (मंदसौर) - मैं बोलूंगा तो आपको मालूम पड़ जायेगा कि क्‍या हो गया है ?

अध्‍यक्ष महोदय - कृपया संक्षिप्‍त में बोलें.

(....व्‍यवधान...)

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया - मुझे पहले बोलने तो दें, तब स्‍वमोटो मालूम पड़ जायेगा कि क्‍या हुआ ? माननीय अध्‍यक्ष महोदय, निरन्‍तर देखा जा रहा है कि मध्‍यप्रदेश की सरकार के जनकल्‍याणकारी, लोक कल्‍याणकारी, हितग्राहीमूलक योजनाओं को जब प्रचार-प्रसार के माध्‍यम से इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स मीडिया या प्रिन्‍ट मीडिया इसको लेकर यदि, अध्‍यक्ष जी, अध्‍यक्ष जी, मैं विशेषाधिकार क्‍यों लाया ?

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसके पहले मैंने विशेषाधिकार भंग की सूचना दी है, आपकी नियमावली में पहले विशेषाधिकार भंग की चर्चा होनी चाहिए, उसके बाद कोई दूसरी विशेषाधिकार सूचना और नियमावली में स्‍थगन की चर्चा होना चाहिए और उसके बाद विशेषाधिकार भंग की सूचना लें.

अध्‍यक्ष महोदय - अभी स्‍थगन ग्राह्य नहीं किया है.

संसदीय कार्यमंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आसन्‍दी क्‍या लेगी ? क्‍या नहीं लेगी ? अब ये तय करेंगे.

(....व्‍यवधान...)

श्री रामनिवास रावत - मैंने स्‍थगन दिया हुआ है.

अध्‍यक्ष महोदय - मैंने अभी ग्राह्य नहीं किया है.

श्री रामनिवास रावत - मैंने भी दिया हुआ है.

राज्‍यमंत्री, सहकारिता (श्री विश्‍वास सारंग) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ये फिर विशेषाधिकार हनन कर रहे हैं. वे एक सदस्‍य को बोलने नहीं दे रहे हैं, जिसने विशेषाधिकार हनन की सूचना दी है.

(....व्‍यवधान...)

अध्‍यक्ष महोदय - रावत जी, यदि आपकी सूचना हम स्‍वीकार करते तब जरूर उसको पहले पढ़ते.

श्री विश्‍वास सारंग - रामनिवास जी, आप भी विशेषाधिकार हनन ही कर रहे हो.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया - मुझे सदस्‍यों को अपनी भावनाओं से अवगत कराना है.

अध्‍यक्ष महोदय - रावत जी, आपकी सूचना आई है, अभी उस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है इसलिए उसको नहीं पढ़ा है. पहले उसकी ही वरीयता थी, मैं मानता हूँ. किन्‍तु चूँकि उसका अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है इसलिए इस विशेषाधिकार को लिया.

श्री रामनिवास रावत - अध्‍यक्ष महोदय, महत्‍वपूर्ण विषय है ....(व्‍यवधान)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - रामनिवास जी, यह गलत परम्‍परा है.

अध्‍यक्ष महोदय - यशपाल जी 2 मिनट में बोलें.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया - अध्‍यक्ष महोदय, उस दिन माननीय डॉ. नरोत्‍तम मिश्र जी, संसदीय कार्यमंत्री ने जितू पटवारी दिए गए वक्‍तव्‍य को इस उम्‍मीद और इस अपेक्षा के साथ कि इस घटनाक्रम को विलोपित नहीं किया जाना चाहिए. मैं बार-बार सुन रहा था, नरोत्‍तम जी ने इसलिए कहा था कि सदन के एक सदस्‍य इस प्रकार से गैर जिम्‍मेदाराना वक्‍तव्‍य देते हैं. (XXX) की मंडली क्‍या अध्‍यक्ष जी, शासन की कार्ययोजनाओं को जन-जन तक पहुँचाने के लिए होर्डिंग, बोर्डिंग, इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया, प्रिन्‍ट मीडिया एवं प्रचार-प्रसार पर खर्च होना एक प्रश्‍न है.

श्री सोहनलाल बाल्‍मीक - (बैठे-बैठे) तो क्‍या साहूकारों की मंडली कहें.

(....व्‍यवधान...)

गृह मंत्री (श्री भूपेन्‍द्र सिंह) - माननीय अध्‍यक्ष जी, बार-बार व्‍यवधान करना, आपकी आसन्‍दी के निर्देशों के बावजूद भी यह हो रहा है.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - अध्‍यक्ष जी, यह आपत्तिजनक नहीं है. आपने यशपाल जी को अनुमति दी है. यह क्‍या है ? विषय तो आने दें. आप इनको भी अनुमति दें. यशपाल का विषय तो आने दें.

श्री विश्‍वास सारंग - अध्‍यक्ष जी, यह क्‍या है ?विषय तो आने दें.

(....व्‍यवधान...)

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह नियमों में है और मैंने नियम का उल्‍लेख करते हुए आपसे आग्रह किया है.

(....व्‍यवधान...)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - अध्‍यक्ष महोदय, आपने उन्‍हें अनुमति दी है. पहले उनका विषय तो आने दें.

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्‍वाइंट आफ आर्डर है.. ...(व्‍यवधान)....

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विशेषाधिकार भंग की सूचना को ग्राह्य करना या अग्राह्य करना आपका अधिकार है, लेकिन पहले विषय तो आ जाये. ...(व्‍यवधान)....

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने श्री यशपाल सिंह जी को बोलने की अनुमति दी है. श्री यशपाल सिंह जी के विषय को आने दीजिये और फिर आप इनको भी अनुमति दे दीजिये..(व्‍यवधान)....

श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बाहर प्रेस को दबाने की कोशिश हो रही और इधर सदन के अंदर सदस्‍य को न बोलने देने का काम हो रहा है. ...(व्‍यवधान)....

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने इसे प्रस्‍तुत करने का आसंदी से आदेश दिया है. ...(व्‍यवधान)....

अध्‍यक्ष महोदय - आप सभी बैठ जायें. पहले इनका विषय हो जाने दे. ...(व्‍यवधान)....

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह अकेला मेरा सवाल नहीं है. ...(व्‍यवधान)....

श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय सदस्‍य को नहीं बोलने दिया जा रहा है यह घोर आपत्तिजनक है. ...(व्‍यवधान)....

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दो दिन से वाट्सअप पर एवं अन्‍य चैनलों पर इस प्रकार के दिये गये वक्‍तव्‍यों की आलोचना हो रही है, अगर सदन में इस प्रकार की टीका टिप्‍पणी की जायेगी. ( शेम शेम की आवाज). माननीय अध्‍यक्ष महोदय यह अकेला मेरा सवाल नहीं है. सर्व श्री राजेन्‍द्र पांडे जी, रामेश्‍वर शर्मा जी, शंकरलाल तिवारी जी, जसवंत सिंह हाड़ा, प्रदीप लारिया जी और अन्‍य सारे दस सदस्‍यों ने मिलकर इस प्रकार के वक्‍तव्‍य की आलोचना करते हुए आपसे आग्रह किया है इसे विशेषाधिकार समिति को सौंपा जाये( शेम शेम की आवाज). ...(व्‍यवधान)....

अध्‍यक्ष महोदय - श्री रामनिवास रावत आप बोलें. ...(व्‍यवधान)....

श्री सुदंरलाल तिवारी - यह एक दल के दस लोगों द्वारा षड़यंत्र करके किया गया है. ...(व्‍यवधान)....

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह कोई तरीका नहीं है आपने श्री रावत जी को अनुमति दी है वह बोले समझ में आता हैं लेकिन यह कोई तरीका नहीं है. ...(व्‍यवधान)....

अध्‍यक्ष महोदय - श्री रामनिवास रावत जी आप बोलें. आप सभी बैठ जायें. ...(व्‍यवधान)....

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी आपसे विनम्रतापूर्वक प्रार्थना है कि जो चीज सदन की प्रापर्टी नहीं है और जो भी चर्चा हुई है उस चर्चा को आप विलोपित करा चुके हैं. इस संबंध में मैंने आपसे भी निवेदन किया था और आपने भी यह कहा था कि हम उसको विलोपित करा चुके हैं. इस प्रकार जो चर्चा सदन की कार्यवाही में नहीं है, जो विलोपित हो चुकी है, उस पर विशेषाधिकार भंग की सूचना कैसे आ सकती है? ...(व्‍यवधान)....

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह सदन को गुमराह करने की कोशिश हो रही है. यह विषयांतर करने की कोशिश हो रही है. ...(व्‍यवधान)....

श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारी भी यही आपत्ति है कि उस चर्चा को विलोपित करने के बावजूद, उसको ट्विटर पर और सोशल साइट्स पर चलवाया गया है, तमाम प्रचार साधनों से चलवाया गया है, यह घोर आपत्तिजनक है और यह अपराध है कि अध्‍यक्ष महोदय जिसको आपने सदन की कार्यवाही से निकाल दिया है उसे बाद में अनाधिकृत रूप से चलवाया गया है. ...(व्‍यवधान)....

श्री भूपेन्‍द्र सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लगातार ट्विटर पर जिस तरह से प्रेस का अपमान किया जा रहा है मध्‍यप्रदेश के इतिहास में इससे ज्‍यादा आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ है. ...(व्‍यवधान)....

श्री रामनिवास रावत - पहले मेरी बात तो हो जाने दीजिये,आप मुझे बोलने नहीं देंगे क्‍या . ...(व्‍यवधान)....

अध्‍यक्ष महोदय - श्री रावत जी कुछ कह रहे हैं. ...(व्‍यवधान)....

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे आपने बोलने का समय दिया है. ...(व्‍यवधान)....

श्री शंकरलाल तिवारी - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्‍वाइंट आफ आर्डर है. ...(व्‍यवधान)....

अध्‍यक्ष महोदय - अब कोई प्‍वाइंट ऑफ आर्डर नहीं है बैठ जायें. श्री रावत जी आप बोलें. ...(व्‍यवधान)....

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने व्‍यक्तिगत रूप से अनुरोध किया था और जो विषय कार्यवाही से विलोपित किया गया है उसके संबंध में मैंने यह भी कहा था कि ऐसा कहा नहीं गया है, यह चर्चा भी उस समय हुई थी. माननीय अध्‍यक्ष महोदय फिर भी जो विषय सदन की कार्यवाही से विलोपित किया जा चुका है क्‍या उस पर विशेषाधिकार भंग की सूचना लाई जा सकती है, नहीं लाई जा सकती है और अगर इस तरह की कोई बात कही भी गई है तो हम पूरी तरह से मीडिया का पूरा सम्‍मान करते हैं. मीडिया प्रजातंत्र का चौथा स्‍तंभ है अगर ऐसी कोई बात है तो हम खेद व्‍यक्‍त करते हैं, हम माफी चाहते हैं. ...व्‍यवधान

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - यह माफी का प्रश्‍न नहीं है अब सदस्‍यता समाप्ति की बात करेंगे. सदस्‍यता समाप्ति की बात होना चाहिए. ...व्‍यवधान

श्री गोपाल भार्गव - यह मीडिया के लिये लज्जित करने, लांछना, अपमानित करने वाली बात है. यह घोर आपत्तिजनक है. ...व्‍यवधान

 

श्री भूपेन्‍द्र सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह जानबूझकर कहा गया है. यह सदन के अंदर और सदन के बाहर जानबूझकर किया गया है.

अध्‍यक्षमहोदय - सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिये स्‍थगित.

(अपराह्न 12.09 बजे विधानसभा की कार्यवाही 15 मि‍नट के लिये स्‍थगित)

12.30 बजे                 विधान सभा पुनः समवेत हुई.

{अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए}

अध्‍यक्ष महोदय पहले यशपाल सिंह जी ने प्रस्‍ताव दिया था, उनकी बात आने दीजिए.

वन मत्री (डॉ. गौरीशंकर शेजवार) अध्‍यक्ष महोदय, मुझे आपने समय दिया था.

श्री यशपाल सिह सिसोदिया माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे विशेषाधिकार पर आप व्‍यवस्‍था देते हुए उसको ग्राह्य करने की कृपा करें.

अध्‍यक्ष महोदय देंगे व्‍यवस्‍था. तिवारी जी बैठ जाइए.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार माननीय अध्‍यक्ष महोदय,आपने जो विशेषाधिकारी भंग का मामला यहां पढ़ा है. उसमें मैं कुछ कहना चाहता हूं, जितू पटवारी जी, माननीय सदस्‍य का जो प्रश्‍न है, लिखित प्रश्‍न है और चर्चा है, इसमें इन्‍होंने दो बार सदन की अवमानना की है. सबसे पहले तो आपने जो लिखित प्रश्‍न दिया है यह अपने आपमें आपके विधायक के पद का निजी उपयोग करते हुए और मीडिया को दबाने की आपने कोशिश की है और पत्रकारों के खिलाफ आपने व्‍यक्तिगत प्रश्‍न उठाए हैं ऐसा आज तक सदन में नहीं हुआ.

श्री रामनिवास रावत यह कौन सा प्रश्‍न है, यह विशेषाधिकार से संबंधित ही नहीं है.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार मैं अपनी बात कर रहा हूं, कोई असंसदीय नहीं बोल रहा हूं, सदन का कहीं विशेषाधिकार भंग नहीं कर रहा हूं. आप व्‍यवधान नहीं कर सकते. आप जितू पटवारी और कांग्रेस के कृत्‍यों पर पर्दा नहीं डाल सकते. आप गलती पर फंस गए हैं.

श्री रामनिवास रावत सदन में जो विशेषाधिकार प्रस्‍तुत किया है उस विषय से यह संबंधित ही नहीं है. यह जबरदस्‍ती की बातें कर रहे हैं, यह बात विषय से संबंधित ही नहीं है.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी अध्‍यक्ष महोदय, मेरा पांइट और आर्डर है कि अध्‍यक्ष के विशेषाधिकार का हनन सरकार के पक्ष के द्वारा हो रहा है. अध्‍यक्ष महोदय, यह विशेषाधिकार आपका है. आपके विशेषाधिकार का हनन हो रहा है.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने पत्रकारों के खिलाफ प्रश्‍न पूछे हैं, लेपटाप कितने दिये हैं. पत्रकारों के नाम इन्‍होंने पूछे हैं, कभी मीडिया के बारे में या किसी के बारे में व्‍यक्तिगत प्रश्‍न सदन में पूछे नहीं जाते हैं. (...व्‍यवधान)

श्री भूपेन्‍द्र सिंह अध्‍यक्ष महोदय, डाक्‍टर साहब फैक्‍ट रख रहे हैं. विपक्ष सुनना क्‍यों नहीं चाहता है. (...व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत अध्‍यक्ष जी ने समय दिया है बोलने दीजिए, यह क्‍या तरीका है. (...व्‍यवधान)

डॉ नरोत्‍तम मिश्र अध्‍यक्ष जी, डाक्‍टर साहब जो पढ़ रहे हैं यह हाउस की प्रापर्टी हैं. यह हाउस की सम्‍पत्ति है, डाक्‍टर साहब जो जवाब आया है वह पढ़ रहे हैं, उसको पढ़ने नहीं दिया जा रहा है.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह एक तरफ कांग्रेस पार्टी मीडिया को (XXX) कहती हैं और एक तरफ जब फैक्‍ट आया है उसको पढ़ने नहीं दिया जा रहा है. (...व्‍यवधान)

डॉ नरोत्‍तम मिश्र अध्‍यक्ष जी, जो जवाब आया है उसे नहीं पढ़ने दिया जा रहा है. (...व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत आप विशेषाधिकार से संबधित बोल रहे हो क्‍या. (...व्‍यवधान)

श्री भूपेन्‍द्र सिंह माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मी‍डिया के लिए सदस्‍य द्वारा जो बोला गया है वह विधायक के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी के राष्‍ट्रीय सचिव भी हैं और यह सीधा आरोप कांग्रेस पार्टी के ऊपर है. (...व्‍यवधान)

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी माननीय अध्‍यक्ष महोदय का विशेषाधिकार है उस पर कोई टीका-टिप्‍पणी कोई पक्ष नहीं कर सकता. यह अध्‍यक्ष के विशेषाधिकार का हनन है. (...व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय एक मिनट तिवारी जी को बोलने दीजिए, उनका पाइंट आफ आर्डर है. (...व्‍यवधान)

डॉ. गौरीशंकर शेजवार अध्‍यक्ष महोदय, मेरी बात पूरी नहीं हुई. मैं निवेदन कर रहा था कि दो प्रश्‍नों में जितू पटवारी जी ने मीडिया को दबाने की कोशिश की है और अपने पक्ष में और अपने कृत्‍यों पर काले कारनामे जो इनके हैं, उनको छिपाने की कोशिश की है. (...व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय जिस प्रश्‍न के संबंध में बात उठी है उसकी चर्चा करें.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कोई भी मीडिया को दबाने की बात नहीं हुई. शेजवार जी संबंधित बाते करें. प्रश्‍न के उत्‍तर में जो सही चीज है उसकी जानकारी चाह रहे थे, इसमें किसी को दबाने की बात नहीं हो रही थी.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार पहला प्रश्‍न यह है इन्‍होंने लेपटाप के बारे में पूछा है, पत्रकारों के नाम पूछे हैं, उनके पते पूछे हैं. यह बात दबा रहे हैं (XXX) उजागर कर रहे हैं. (...व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय काले कारनामे को निकाल दे.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार -- अध्यक्ष महोदय, पत्रकार कांग्रेस पार्टी के जितू पटवारी के (XXX) को उजागर कर रहे हैं, इसलिये यह विधानसभा का दुरूपयोग करके मीडिया को दबाना चाहते हैं.

...(व्यवधान)...

डॉ. नरोत्तम मिश्र- कांग्रेस की मानसिकता इस तरह की है.

अध्यक्ष महोदय- (श्री रामनिवास रावत, सदस्य द्वारा बैठे बैठे यह कहने पर) रावत जी, उसको मैंने कार्यवाही से निकाल दिया है.

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष जी, क्या डॉक्टर साहब विशेषाधिकार भंग से संबंधित विषय पर बोल रहे हैं.

...(व्यवधान)...

डॉ. नरोत्तम मिश्र-- काहे के लिये निकाला अध्यक्ष जी, आप तो कुछ मत निकालो, एक एक चीज पर चर्चा कराओ. अध्यक्ष जी इसको निकालने की जरूरत ही नहीं है. गंभीर विषय है लोकतंत्र के चौथे खम्भे पर हमला हुआ है.

...(व्यवधान)...

अध्यक्ष महोदय-- सभी से अनुरोध है कि संयमित भाषा का उपयोग करें.

श्री भूपेन्द्र सिंह-- मीडिया को कुचलने का काम किया जा रहा है.

डॉ.नरोत्तम मिश्र-- अध्यक्ष जी, गंभीर विषय है यह कोई साधारण विषय नहीं है.

अध्यक्ष महोदय- कृपया सभी लोग बैठ जायें.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार-- अध्यक्ष महोदय,चौथे स्तंभ को दबाने का पूरा पूरा प्रयास है और इसके लिये इनको माफ नहीं किया जा सकता है.

...(व्यवधान)...

अध्यक्ष महोदय-- हर्ष यादव जी, बैठें, जयवर्द्धन सिंह बैठें, सचिन जी बैठें, कृपया सभी बैठें, आऱिफ भाई भी बैठें. डॉक्टर साहब अपनी बात कंपलीट करें.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार-- अध्यक्ष महोदय, मैं निवेदन यह कर रहा था कि विधानसभा की कार्यवाही का निजी रूप में उपयोग करके लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को दबाने का यह प्रयास है. अपने काले कारनामों पर पर्दा डालने का यह प्रयास है और कोई भी सदस्य विधानसभा का निजी उपयोग नहीं कर सकता और जो निजी उपयोग करेगा तो सदन की अवमानना है और सदन का विशेषाधिकार भंग है.

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, डॉक्टर साहब को बैठाये, यह विशेषाधिकार भंग की सूचना से संबंधित बात नहीं है. कुछ भी बोले जा रहे हैं.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार--अध्यक्ष महोदय, कांग्रेस पार्टी के हित में विधानसभा कार्यवाही का दुरूपयोग किया है..

...(व्यवधान)...

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, डॉक्टर साहब विषय पर बोलें, विशेषाधिकार भंग की जो सूचना दी है उस पर बोलें, यह विषय से हटकर के बात कर रहे हैं. जबरदस्ती बोले जा रहे हैं.

श्री सचिन यादव-- मीडिया सब जानती है. आपके काले चिट्ठे जल्दी ही जनता के सामने आने वाले हैं,आपका काला चिट्ठा बहुत जल्दी खुलने वाला है.

श्री सुंदरलाल तिवारी -- अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया है.

अध्यक्ष महोदय--शैजवार साहब की बात पूरी हो गई ? आपकी बात पूरी हो गई तो श्री तिवारी जी..

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, आपने विशेषाधिकार भंग की सूचना से संबंधित विषय पर बोलने की अनुमति प्रदान की है.

डॉ.नरोत्तम मिश्र - और पाईंट आफ आर्डर पर हरेक को बोलने की अनुमति है ? अध्यक्ष जी, मेरा पाईंट आफ आर्डर है.

श्री रामनिवास रावत- कुछ भी बोले जाओ.

डॉ.नरोत्तम मिश्र-- अध्यक्ष जी, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है.

श्री सुंदरलाल तिवारी-- अध्यक्ष महोदय, पहले मेरे पाईंट आफ आर्डर को सुना जाये, आपने मुझे अनुमति दी है.

अध्यक्ष महोदय- मंत्री जी, मैंने पहले तिवारी जी को अनुमति दी है.

डॉ.नरोत्तम मिश्र- ठीक है अध्यक्ष जी आप पहले उनको सुने फिर मुझे बुलवायें.

श्री शंकरलाल तिवारी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, विशेषाधिकार की सूचना में मेरे भी हस्ताक्षर हैं.

श्री सुंदरलाल तिवारी -- अध्यक्ष महोदय, (श्री शंकरलाल तिवारी ती तरफ इंगत करते हुये) यह तिवारी जी कहां से खड़े हो गये, अध्यक्ष महोदय, आप इन्हें बैठायें.आपने मुझे बोलने की अनुमति दी है.

अध्यक्ष महोदय -- (हंसी) हम बैठाल रहे हैं.तिवारी जी आप तो अपनी बात बोलें.

श्री सुंदरलाल तिवारी-- अरे, शंकरलाल जी बैठो, अध्यक्ष जी ने हमको बोला है. अध्यक्ष महोदय ने हमें बोलेने की अनुमति दी है.हम हैं असली तिवारी..(हंसी)

डॉ.गौरीशंकर शेजवार-- अध्यक्ष महोदय, रावत जी ने मेरे ऊपर आक्षेप लगाया है.

अध्यक्ष महोदय- रिकार्ड देख लेंगे.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार -- अध्यक्ष महोदय, मेरा यह कहना है कि विधानसभा की कार्यवाही की निजी हितों के लिये उपयोग करना और ऐसे प्रश्न पूछना जिसमें विधानसभा का कार्यालय और लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मीडिया इसको यदि दबाया जाये तो यह निजी हितों के लिये काम किया गया है, सदन की अवमानना है सदन का विशेषाधिकार भंग किया है.

श्री सचिन यादव-- अध्यक्ष महोदय, डॉक्टर साहब बार बार सदन को गुमराह कर रहे हैं. आपके निर्देशों की बार बार अवहेलना कर रहे हैं. बार बार सदन को गुमराह कर रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय-- तिवारी जी.....

श्री शंकरलाल तिवारी-- अध्यक्ष महोदय,जी मेरा निवेदन है. मेरे विशेषाधिकार की सूचना पर दस्तखत हैं. आपने तिवारी करके बुलाया तब मैं खड़ा हुआ हूं.

अध्यक्ष महोदय- अरे सुंदरलाल तिवारी जी ने पाईंट आफ आर्डर उठाया था उनको मैंने अनुमति दी है भाई. तिवारी जी बोलिये...

श्री शंकरलाल तिवारी-- अरे तिवारी तो मैं भी हूं. और बोल रहा हूं.(हंसी)

अध्यक्ष महोदय-- (श्री सुंदरलाल तिवारी जी की तरफ ईशारा करते हुये) ये वाले तिवारी जी को अनुमति दी है.

श्री सुंदरलाल तिवारी-- असली तिवारी बोलेगा.. आप बैठ जाईये.

श्री शंकरलाल तिवारी -- अध्यक्ष जी, आपने कहा कि तिवारी जी तो मैं खड़ा हो गया. मेरे विशेषाधिकर सूचना में हस्ताक्षर भी हैं.

अध्यक्ष महोदय- अच्छा चलिये श्री सुंदरलाल तिवारी जी अपनी बात कहें शंकरलाल तिवारी जी बैठ जायें.

श्री सुंदरलाल तिवारी -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं बड़ी विनम्रतापूर्वक निवेदन कर रहा हूं कि हमारे मित्र श्री यशपाल सिंह सिसोदिया जी या सत्ता पक्ष के लोगों ने क्या माननीय अध्यक्ष महोदय के खिलाफ सदन में विशेषाधिकार प्रस्तुत किया है ?

...(व्यवधान)...

(सत्ता पक्ष के कई सदस्य एक साथ खड़े होकर के अपनी बात कहने पर )

अध्यक्ष महोदय- कृपया बैठ जायें.

श्री सुंदरलाल तिवारी-- अध्यक्ष महोदय, मुझे अपनी बात कहने दें..........(व्‍यवधान).... माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इनको बिठाईये ....(व्‍यवधान).... एक मिनट मुझे बात करने दीजिये. ....(व्‍यवधान).... बैठो, मेरी बात कहने दो. ....(व्‍यवधान)....

राजस्‍व मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्‍ता)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हर कुछ कहने दें. ....(व्‍यवधान)....

श्री सुंदरलाल तिवारी-- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा कहना है इस सदन को नियंत्रित करने का, सुचारू रूप से चलाने का और व्‍यवस्थित यह सदन चले, यह अधिकार माननीय अध्‍यक्ष महोदय के पास सुरक्षित है ....(व्‍यवधान).... यदि कोई भी सदस्‍य ....(व्‍यवधान).... सुन लो, हम बात कर रहे हैं ....(व्‍यवधान).... माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस पक्ष ने या उस पक्ष ने ....(व्‍यवधान)....

वन मंत्री (डॉ. गौरीशंकर शेजवार) -- चोरों की मंडली, सही कहा है या गलत कहा है. ....(व्‍यवधान).... चोरों की मंडली, मंत्रियों को, पत्रकारों को ....(व्‍यवधान).... चोरों की मंडली ....(व्‍यवधान)....

श्री सुंदरलाल तिवारी-- नियम देखो. ....(व्‍यवधान).... (डॉ. गौरीशंकर शेजवार की ओर गुस्‍से के साथ, जोरों से इशारा करते हुये) बैठो.., बैठो.., बैठो........(व्‍यवधान)....

अध्‍यक्ष महोदय-- तिवारी जी, आपका यह क्‍या तरीका है. ....(व्‍यवधान)....

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र)-- अध्‍यक्ष जी, मैं निंदा करता हूं, यह झगड़े की स्थिति निर्मित हो रही है ....(व्‍यवधान).... यहां झगड़े की स्थिति निर्मित हो जायेगी, मैं आपको बता रहा हूं. ....(व्‍यवधान).... यह बदतमीजी की हद है. ....(व्‍यवधान)....

अध्‍यक्ष महोदय-- सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिये स्‍थगित.

 

 

 

 

 

 

(अपराह्न 12.42 बजे सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिये स्‍थगित की गई)

 

 


1.01 बजे विधान सभा पुनः समवेत हुई

(अध्यक्ष महोदय {डॉ.सीतासरन शर्मा} पीठासीन हुए.)

गृहमंत्री (श्री भूपेन्द्र सिंह)--अध्यक्ष महोदय, तिवारी जी ने अपनी बात कह दी है. हमारा रह गया है.(व्यवधान)

डॉ.नरोत्तम मिश्र--अध्यक्ष महोदय,मेरा रह गया है. (व्यवधान)

श्री सुन्दरलाल तिवारी--अध्यक्ष महोदय, जैसा मैने निवेदन किया---.(व्यवधान)

श्री विश्वास सारंग‑--अध्यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि तिवारी जी का डॉ.शेजवार जी के प्रति क्या व्यवहार था. (व्यवधान)

श्री विश्वास सारंग--अध्यक्ष महोदय, इन्होंने बात रख दी है. (व्यवधान)

श्री सुंदरलाल तिवारी--मुझे बोलने नहीं दिया जा रहा है.

अध्यक्ष महोदय--आप बोलते क्यों नहीं हैं. मैंने आपको बोलने की चार बार अनुमति दी है.

श्री भूपेन्द्र सिंह--पूरे मीडिया के लिये असंसदीय शब्दों का सदन में उपयोग किया गया है. यह कदाचरण की श्रेणी में आता है. (व्यवधान)

श्री सुंदरलाल तिवारी--अध्यक्ष महोदय, मुझे बोलने नहीं दिया गया. मेरा व्यवस्था का प्रश्न है. मुझे यह लोग बोलने ही नहीं दे रहे हैं. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--मैंने आते ही आपको बुलाया था, आप सामने बहस में उलझ जाते हैं.

श्री सुंदरलाल तिवारी--अध्यक्ष महोदय, यह लोग बोलने देंगे, तब तो बोलेंगे. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--आपको बोलने के लिये क्या निमंत्रण दें. आप अपनी बात बोलिये.

श्री सुंदरलाल तिवारी--अध्यक्ष महोदय, मेरा यह कहना है, कि जैसा मैंने कहा था कि सदन को संचालित करने का अधिकार माननीय अध्यक्ष महोदय का है. अगर हमने कोई गलत शब्द बोले हैं या गलत शब्दों का हमने उपयोग किया है. हमने पार्लियामेन्ट्री लेंग्वेज का यूज किया है.(व्यवधान)

श्री सत्यपाल सिंह सिकरवार--अध्यक्ष महोदय, तिवारी जी को अपनी गलती के लिये माननीय मंत्री जी से माफी मांगनी पड़ेगी. (व्यवधान)

श्री सुंदरलाल तिवारी--अध्यक्ष महोदय, गलत शब्दों का उपयोग किया है, तो उन शब्दों को तुरंत विलोपित करने का अध्यक्ष महोदय को अधिकार है.

श्री सत्यपाल सिंह सिकरवार--यह बार बार सदन की अवमानना करते हैं इसलिये इनको मंत्री जी से माफी मांगनी पड़ेगी (व्यवधान)

श्री अनिल फिरोजिया--अध्यक्ष महोदय, इनको माफी मांगनी चाहिये.

श्री सुंदरलाल तिवारी--अध्यक्ष महोदय, विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन संबंधी नियम 164 में '' इन नियमों के उपबंधों के अधीन रहते हुए कोई भी सदस्य, अध्यक्ष की सम्मति से, किसी सदस्य के, या सभा के या उसकी किसी समिति के विशेषाधिकार के उल्लंघन से संबंधित प्रश्न उठा सकेगा." इन्होंने नियम 164 के तहत नोटिस दिया है. इन्होंने किसी सदस्य के विशेषाधिकार की बात ही नहीं कही है. (व्यवधान)

श्री अनिल फिरोजिया--अध्यक्ष महोदय, यह बात बोली ही नहीं है.

डॉ.नरोत्तम मिश्र--अध्यक्ष महोदय, मैं भी एक बात कहना चाहता हूं.

अध्यक्ष महोदय--आपकी बात सदन में आ गई है. इनके व्यवस्था के प्रश्न पर मंत्री जी आपको कुछ कहना है क्या ?

संसदीय कार्य मंत्री(डॉ.नरोत्तम मिश्र) - अध्यक्ष महोदय, मेरी प्रार्थना सिर्फ इतनी सी है कि माननीय तिवारी जी ने प्रश्न रखा. यह विषय अकेले एक से जुड़ा हुआ नहीं है. आप यह देखें कि जब भाई जितू पटवारी जी ने अपना प्रश्न पूछा था तो पहली बार आसन्दी की ओर मुखातिब हुए. आसन्दी से प्रश्न पूछा. ऐसा आज तक नहीं हुआ जैसा हुआ. मैं आपको आखिरी तक ले जाऊंगा क्योंकि यह घटना जिसकी अभी चर्चा हो रही है यह सिर्फ प्रश्नकाल की हो रही है. मेरे साथ में,यहां पर लंच के बाद में जितू पटवारी जी हाऊस के अंदर आये और हाऊस के अंदर आने के बाद, माने अपने कृत्य का जितना ज्यादा अहंकार होगा और कितना ज्यादा गुरूर होगा.यहां आकर पर बोले कि संसदीय कार्य मंत्री माफी मांगेगा मैं माफी नहीं मांगूंगा मीडिया से. यह हाऊस के अन्दर रिकार्ड में है.माननीय अध्यक्ष महोदय, आप रिकार्ड निकलवाकर देख लें. एक लम्बे समय से सदन की गरिमा को गिराने का काम किया जा रहा है. सिर्फ छपने के लिये कभी साईकल यात्रा,कभी कमण्डल लेकर आना,कभी एप्रिन पहनकर आना,लगातार है माननीय अध्यक्ष महोदय,कभी अन्न के ऊपर चलना, पैरों से प्याज को कुचलना,कभी आलू को कुचलना,कभी गेहूं को कुचलना, यह एक प्रक्रिया बन गई है. इस सदन में हमें ताकत अध्यक्ष महोदय, आपसे मिलती है. हमें सारी शक्तियां आपसे मिलती हैं, अगर हम इस हाऊस को कमजोर करेंगे, आसन्दी को कमजोर करेंगे तो माननीय अध्यक्ष महोदय, हम लोग न्याय के लिये जाएंगे कहां, और हमारी ताकत कहां रहेगी. यशपाल भाई, ने जो बात उठाई है माननीय अध्यक्ष महोदय, उस पर आपकी व्यवस्था आना लाजमी है, अगर आपकी व्यवस्था नहीं आयेगी तो यह हठधर्मिता, यह अहंकार,यह प्रवृत्ति,यह अवमानना की आदत लगातार बढ़ती जायेगी और हम कमजोर होते चले जायेंगे.

अध्यक्ष महोदय - श्री रामनिवास रावत और श्री सुन्दरलाल तिवारी जी की बात मैंने सुन ली है. मैंने नियमों के अन्तर्गत ही उनको लिया है. रावत जी जो आपने कहा था कि जब वह विलोपित हो गये तो कैसे ले सकते हैं. सारे नियम और व्याख्याएं मैंने पढ़ी हैं और उसके बाद ही यह निर्णय किया है कि इसको यहां उठाने की अनुमति दी जाय और जो आप कह रहे हैं तो विधिवत् नियम-165 में उन्होंने बात उठायी.नियम-164 भी उसी से संबंधित है.

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्यक्ष महोदय,मेरा प्वाइंट आफ आर्डर है. गोपाल भार्गव जी पहले बोल लें.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री(श्री गोपाल भार्गव) - माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्यों ने जो विशेषाधिकार भंग की सूचना दी.इसमें स्पष्ट रूप से उल्लेखित है -

" कोई भी कार्य या लोग जिससे सदन की कार्यवाही या उसके कृत्यों में बाधा पहुंचती है या अड़चन आती है या सदन के सदस्य या अधिकारी को अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में बाधा पहुंचती है,अड़चन आती है अथवा जिसका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष ऐसा परिणाम उत्पन्न होता है जिसे अवमानना समझा जा सकता है, चाहे ऐसे अपराध के लिये कोई पूर्व दृष्टांत न हो " पार्लियामेंट्री प्रेक्टिस का 15 वां संशोधन देख लें. अध्यक्ष महोदय, हमारे विधान सभा की प्रेस रिपोर्टिंग की शानदार परंपरा रही है. चाहे वह इलेक्ट्रानिक मीडिया हो,प्रिंट मीडिया हो,अन्य कोई सोशल मीडिया हो. अध्यक्ष महोदय, यही कहना चाहता हूं कि माननीय सदस्य ने जिस उद्देश्य से यह कहा हो लेकिन इससे हमारी विधान सभा की रिपोर्टिंग भी,सदन के अन्दर  की रिपोर्टिंग और सदन के बाहर की रिपोर्टिंग,राज्य स्तर की और राष्ट्रीय स्तर की, इससे प्रभावित हुई. लोक तंत्र की रक्षा करने के लिये और लोकतंत्र को सुगठित करने के लिये हमारी विधायिका,हमारी न्यायपालिका,कार्यपालिका, उसके साथ में हमारा प्रेस भी है चौथा स्तम्भ. इसको यदि इस तरह से प्रभावित करने की कोशिश की जायेगी कि आप विज्ञापन दे रहे हैं. सारी की सारी बातें पूछकर,यह प्रत्यक्ष रूप से कुछ दिख रहा है और इसके पीछे जो भावना छिपी हुई है यह सिर्फ इस बात को प्रतिध्वनित करती है कि यह विज्ञापन क्यों दिये गये ? अब राज्य की उन्नति के लिये,तरक्की के लिये,विकास के लिये हमने जो काम किये विकास के लिये,जो हम योजनाएं चला रहे हैं उनको लोगों तक पहुंचाने के लिये विज्ञापनों की आवश्यकता होती है. हर राज्य में ऐसा होता है.

श्री सुन्दरलाल तिवारी - अध्यक्ष महोदय, हम लोगों को बोलने नहीं दिया जाता. एक मिनट अपनी बात नहीं कहने दी और यह भाषण शुरू किये हुए हैं.हम तो अपनी बात भी नहीं कह पाये.

श्री गोपाल भार्गव - तिवारी जी, मेरी बात हो जाये.

श्री सुन्दरलाल तिवारी - अध्यक्ष महोदय, हमें भी अवसर दिया जाये अपनी बात कहने का.

अध्यक्ष महोदय - आपका प्वाइंट आफ आर्डर था उसमें संक्षेप रहता है,वे विषय पर बोल रहे हैं. दोनों में फर्क है कि नहीं है.

श्री गोपाल भार्गव - अध्यक्ष महोदय, इस तरह से प्रश्न पूछना,ठीक है,प्रश्न पूछने का, जब मैं बीस साल यहां  अपोजीशन में बैठा, मेरा अधिकार था. मैं भी पूछता था. आज मैं सरकार में हूं. मैं उत्तर देता हूं. उत्तर देने का मेरा जो कुछ भी कर्तव्य है, मैं उसका निर्वहन करता हूं. इस प्रकार के प्रश्न पहले कभी नहीं पूछे गये. जिस प्रकार से लांछित करने की कोशिश हुई यह राज्य के, मध्यप्रदेश के, विधायी इतिहास में अभूतपूर्व घटना है और इस कारण से मैं यह कहना चाहता हूं कि माननीय सदस्य ने जो कृत्य किया है, इसकी चर्चा मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि दिल्ली में भी हुई है, हमारे पास में सारे अखबारों की कतरन हैं. इंग्लिश के सारे अखबार हैं, हिन्दी के भी अखबार हैं. एक ऐसा विषय जिसके लिए आपने विधान सभा की कार्यवाही से विलोपित कर दिया था, उस विषय के लिए ट्विटर के माध्यम से, सोशल साइट के माध्यम से और अन्य मीडिया के माध्यम से..

संसदीय कार्यमंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र) - वह विलोपित नहीं हुआ है गोपाल जी, हमारे पास में रिकॉर्ड है. हमारे पास रिकॉर्ड है अध्यक्ष जी.

श्री गोपाल भार्गव - फिर तो प्रामाणिक है अध्यक्ष महोदय.

डॉ. नरोत्तम मिश्र - अध्यक्ष महोदय, मैं गोपाल जी की हां में हां मिलाकर अब तो सदस्यता समाप्ति की बात करूंगा.

श्री सुन्दरलाल तिवारी - विलोपित नहीं हुआ?

डॉ. नरोत्तम मिश्र - हां, नहीं हुआ.

श्री सुन्दरलाल तिवारी - इसका मतलब अध्यक्ष महोदय के अनुमति से वह रिकॉर्ड पर है? (व्यवधान).. अध्यक्ष महोदय की अनुमति है उसमें कि वह रिकॉर्ड पर रहे?(व्यवधान)..

डॉ. नरोत्तम मिश्र -वह विलोपित हुआ ही नहीं है. हमारे पास में रिकॉर्ड है. इसका हमारे पास में रिकॉर्ड है. (व्यवधान).. मैंने मीडिया के सामने रखा है वह रिकॉर्ड.

(व्यवधान)..

श्री सुन्दरलाल तिवारी - विलोपित करने का, विलोपित नहीं करने का अधिकार आपके पास है. (व्यवधान)..

गृह मंत्री (श्री भूपेन्द्र सिंह) -अध्यक्ष महोदय, रिकॉर्ड के आधार पर प्रिविलेज लाए हैं.

डॉ. नरोत्तम मिश्र - अध्यक्ष महोदय, रिकॉर्ड के आधार पर यह प्रिविलेज आया है. यह प्रिविलेज रिकॉर्ड के आधार पर आया है. (व्यवधान)..यह स्वीकार होता है कि अस्वीकार, यह अभी पता चल जाएगा.

श्री सुन्दरलाल तिवारी - कुछ नहीं पता चलेगा, क्या पता चलेगा?

डॉ. नरोत्तम मिश्र - यह रिकॉर्ड पर है कि नहीं, यह पता चलेगा. (व्यवधान)..मीडिया को ले जाकर रिकॉर्ड दिखाया.

(व्यवधान)..

श्री यादवेन्द्र सिंह - सरकार घबड़ा गई जितू पटवारी से, भार्गव जी.

डॉ. नरोत्तम मिश्र - किसी से नहीं घबड़ाए. इस गलतफहमी में मत रहिए.

(व्यवधान)..

श्री यादवेन्द्र सिंह - कहां गुम हो गये थे लाल सिंह और आप दोनों.

(व्यवधान)..

डॉ. नरोत्तम मिश्र - पिछले 27 साल से यही सोच रहे हो आप. 27 साल से ही बैठे हैं.

(व्यवधान)..

श्री यादवेन्द्र सिंह - आप इतने महीने कहां रुके रहे? अध्यक्ष महोदय, (XXX). इस सदन से, मंत्रिमंडल से नहीं हटाए गए.

(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय - इसे विलोपित करें.

डॉ. नरोत्तम मिश्र - आप बीच में गेप ले लेकर आते हो.

श्री यादवेन्द्र सिंह -जितू पटवारी राष्ट्रीय नेता बन रहा है. आप पर भारी पड़ेगा. और क्या करेंगे आप? (व्यवधान).. निकलवा दोगे उससे क्या होता है? सदस्यता से हट जाएगा तो क्या फर्क पड़ता है जितू, सरकार उससे नीचे हो गई है. प्रदेश का नेता बन जाएगा सोच लो आप.

श्री गोपाल भार्गव - यादवेन्द्र जी, आप नौनिहाल हो, आप अभी राजनीति के, सदन के नौनिहाल हो. अभी आप पल्ला में से बाहर नहीं निकले और जितू भाई को भी सलाह देता हूं इतने कम अनुभव के आधार पर, इतनी कम वरिष्ठता के आधार पर बहुत हाई जंप लेने की कोशिश नहीं करें, इसमें यही घटनाएं होती हैं. ये घटनाएं इस कारण से होती हैं. ये सारी की सारी बातें आपको इसलिए करना पड़ती हैं क्योंकि आप कम समय में बहुत ज्यादा कुछ हासिल करना चाहते हैं. राजनीति में कोई शॉर्ट-कट नहीं होता है. अध्यक्ष महोदय, मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि प्रश्न पूछने के अधिकार का परोक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस प्रकार से दुष्प्रयास करना सारे सदस्यों के विशेषाधिकार भंग का हनन है. सदन के विशेषाधिकार भंग का हनन है और अध्यक्ष महोदय, आपकी आसंदी का अपमान भी है, इस कारण से इसे स्वीकार करके अध्यक्ष महोदय, विशेषाधिकार समिति के सामने इसको भेजना चाहिए.

गृह मंत्री (श्री भूपेन्द्र सिंह) - अध्यक्ष महोदय, जो प्रिविलेज मोशन का विषय है इसमें रिकॉर्ड के आधार पर ही यह प्रिविलेज मोशन सदस्यों के द्वारा यहां पर लाया गया है. रिकॉर्ड में यह स्पष्ट है, जिसमें माननीय विधायक श्री जितू पटवारी जी ने कहा है कि चोरों की मंडली है, चोरों को विज्ञापन देते हैं. पूरे मीडिया तंत्र के लिए असंसदीय और अपमानजनक है. (शेम-शेम की आवाज)..अध्यक्ष महोदय, चूंकि मीडिया, सदन के सदस्य नहीं होते हैं, वे अपनी बात सदन में कह नहीं सकते हैं, इसलिए अगर कोई सदन का सदस्य नहीं है, जिसके बारे में कहा जा रहा है तो निश्चित रूप से यह कदाचरण की श्रेणी में आता है और इसलिए भी प्रिविलेज मोशन स्वीकार करने का आग्रह आपसे इस आधार पर करेंगे. अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे यह भी कहना चाहूंगा कि इससे पूरा देश का पत्रकार जगत आहत हुआ है, अकेले मध्यप्रदेश का नहीं, पूरे देश का पत्रकार जगत, पूरे देश में ऑर्टिकल छप रहे हैं, पूरे देश के सारे समाचार-पत्रों में यह खबरें छप रही हैं कि मध्यप्रदेश की विधान सभा में कांग्रेस पार्टी के एक राष्ट्रीय सचिव जो माननीय विधायक हैं. उनके द्वारा इस तरह से मीडिया पर आरोप लगाया गया है इसी तरह से यह विषय केवल यहां तक नहीं था सदन के बाहर जाकर भी इस बात को कहा गया कि जो हमने सदन के अंदर कहा है वह सही कहा है. इस तरह से बाहर जाकर भी अपमान किया गया. बात वहां तक समाप्‍त नहीं हुई, उस दिन से लेकर आज तक लगातार ट्विटर पर पत्रकारों के विरुद्ध असम्‍मान जनक टिप्पिणयां जारी हैं. इससे बड़ा अपमान पत्रकार जगत का क्‍या हो सकता है ? इसलिये अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे विनम्र प्रार्थना करूंगा कि यह हमारे संसदीय लोकतंत्र के लिये इससे ज्‍यादा अपमानजनक क्षण नहीं हो सकते और उस दिन का प्रश्‍नकाल हमारे लोकतंत्र के लिये माननीय विधायक जी ने काला दिवस बना दिया है. लोकतंत्र के लिये काले दिन के रूप में स्‍थापित कर दिया है. कभी भी सदन में इस तरह से बात नहीं हुई. हमने पूरे तथ्‍यों के साथ प्रिविलेज मोशन आपके समक्ष प्रस्‍तुत किया है, आपसे आग्रह है कि आप इसको स्‍वीकार करें और इसमें जल्‍दी निर्णय होकर न्‍याय मिले.

अध्‍यक्ष महोदय -- मेरा ख्‍याल है कि इस विषय पर बहुत चर्चा हो चुकी है. अब कोई कारण नहीं है कि इस पर और अधिक बात की जाय.

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्‍वाइंट ऑफ आर्डर है. ..(व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय -- प्‍वाइंट ऑफ आर्डर तिवारी जी ने उठाया था उसका उत्‍तर दे दिया. आपको विषय पर कुछ बोलना हो तो बोलिए.

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, विषय पर ही बोलूंगा. प्रजातंत्र में जनता सरकार बनाती है. आपकी सरकार है हमें कोई आपत्ति नहीं है. आप अपने कार्यों का विज्ञापन देते हैं हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इस विधानसभा के किसी भी सम्‍मानित सदस्‍य को जानकारी प्राप्‍त करने का, प्रश्‍न लगाने का अधिकार है, अगर किसी सदस्‍य ने जानकारी प्राप्‍त करने के लिये प्रश्‍न लगाया है तो इसमें कोई विशेषाधिकार भंग जैसी सूचना नहीं है. इस घटना के संबंध में उस दिन भी यह बात आई थी. आप सारे तथ्‍यों को विलोपित कर चुके थे और विलोपित की गई कार्यवाही पर कोई विशेषाधिकार भंग की सूचना नहीं लगाई जाती. अध्‍यक्ष महोदय, मैं कॉल एण्‍ड शकधर पुस्‍तक की तरफ आपका ध्‍यान दिलाना चाहूंगा. मामले जो सभा का विशेषाधिकार ..(व्‍यवधान)..

श्री शंकरलाल तिवारी -- अध्‍यक्ष महोदय, यह किसी किताब में नहीं लिखा है कि मीडिया को (XXX) कहो.

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, हम मीडिया का सम्‍मान आपसे ज्‍यादा करते हैं. मीडिया चौथा स्‍तम्‍भ है उसका पूरा सम्‍मान है. इस मीडिया ने ही देश को आजादी दिलाने में सहयोग प्रदान किया है.

श्री शंकरलाल तिवारी -- आप सम्‍मान करते हैं लेकिन वह नहीं करते हैं, वह लगातार अपमान कर रहे हैं. ...(व्‍यवधान)..

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, कॉल शकधर की पुस्‍तक के पृष्‍ठ क्रमांक 335 में ..(व्‍यवधान)..

श्री रामेश्‍वर शर्मा -- अध्‍यक्ष महोदय, उस समय हमने कहा था कि आपने मीडिया के बारे में जो शब्‍द कहे हैं आप माफी मांगिए. आज जितनी सफाई से आप पेश कर रहे हैं उस दिन अगर आप मीडिया से माफी मांग लेते तो यह होता कि आपने लोकतंत्र की रक्षा की. आज दिनांक तक आपने माफी नहीं मांगी है.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- अध्‍यक्ष महोदय, आज दिनांक तक माफी नहीं मांगी, यह कांग्रेस की हठधर्मिता है. यह पूरी की पूरी कांग्रेस की मानसिकता है. लगातार अपमान हो रहा है. ..(व्‍यवधान)..

श्री उमाशंकर गुप्‍ता -- अध्‍यक्ष महोदय, पूरी पार्टी लगातार सदन का अपमान कर रही है. ..(व्‍यवधान).. लगातार मीडिया का अपमान कर रहे हैं. ..(व्‍यवधान)..

श्री भूपेन्द्र सिंह-- अध्यक्ष महोदय, अभी भी लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से मीडिया का अपमान किया जा रहा है. आप कृपया आसंदी से व्यवस्था दें. हमारे प्रदेश की मीडिया को क्या इस तरह से बदनाम किया जायेगा. क्या मध्यप्रदेश की मीडिया के बारे में .. .(व्यवधान).. लगातार यह चल रहा है.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष महोदय, यह हठधर्मिता है.

अध्यक्ष महोदय -- रावत जी की बात होने दें.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष महोदय, चार बार रावत जी बोल चुके हैं. आपने उनको चार बार समय दिया है.

..(व्यवधान)..

श्री भूपेन्द्र सिंह -- अध्यक्ष महोदय, लगातार मीडिया का अपमान हो रहा है.

..(व्यवधान)..

श्री अजय सिंह -- अध्यक्ष महोदय, क्या ये सदन चला रहे हैं. ..(व्यवधान).. आप ऐसे बोलेंगे.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष महोदय, ऐसे ही बोलेंगे.

श्री अजय सिंह -- बिलकुल नहीं बोलेंगे.

..(व्यवधान)..

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- ऐसे ही बोलेंगे. ..(व्यवधान).. ऐसे ही बोलेंगे.

..(व्यवधान)..

श्री भूपेन्द्र सिंह -- .. अध्यक्ष महोदय, यह लगातार अभी भी आज भी अपमान हो रहा है. कृपया आप व्यवस्था दीजिये.

..(व्यवधान)..

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष महोदय, आप व्यवस्था दीजिये. ..(व्यवधान).. यह कोई बात हुई क्या.

..(व्यवधान)..

श्री भूपेन्द्र सिंह -- अध्यक्ष महोदय, आप व्यवस्था दीजिये.

..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय -- रावत जी को बोलने के लिये कहा है. आप दो मिनट में अपनी बात समाप्त करें.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष महोदय, यह गलत बात है. ..(व्यवधान).. यह तो गलत कर रहे हैं माननीय अध्यक्ष महोदय. आप चार बार अवसर दे चुके हैं.

श्री अजय सिंह -- नरोत्तम जी, आपके मन की बात नहीं हो रही है, तो गलत हो गया.

 

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष महोदय, उनको चार बार अवसर दे दिया.

श्री अजय सिंह -- इनकी मन की बात नहीं हो रही है, तो गलत हो गया.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- काहे की मन की बात नहीं हो गई.

..(व्यवधान)..

श्री अजय सिंह -- ..यदि आपको सुनना भी नहीं है.....(व्यवधान)..

श्री विश्वास सारंग -- अध्यक्ष महोदय, वे चार-चार बार बोल रहे हैं. हमें एक बार बोलने का मौका नहीं मिल रहा है.

..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय -- मैं सिर्फ रामनिवास रावत जी को अनुमति दे रहा हूं, उसके बाद में विश्वास जी दो मिनट बोलेंगे और बस इस तरफ से कोई चर्चा नहीं होगी.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष महोदय, अब कोई नहीं बोलेगा. आप व्यवस्था देने की कृपा तो करें.

अध्यक्ष महोदय -- रामनिवास रावत जी, बोलें. ..(व्यवधान).. रामनिवास रावत जी को मैंने बुला लिया है, उनको बोलने दीजिये.

श्री अजय सिंह -- अध्यक्ष महोदय, ये कैसे तय कर सकते हैं कि कोई नहीं बोलेगा.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- ये अध्यक्ष जी तय करेंगे कि कोई नहीं बोलेगा. अपने दल का मैं तय करुंगा कि कोई नहीं बोलेगा. उन्होंने विश्वास जी का नाम लिया था, उसके बारे में मैं तय करुंगा. मैं संसदीय कार्य मंत्री हूं. ..(व्यवधान)..

श्री अजय सिंह -- आप सुन तो लें.

..(व्यवधान)..

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष महोदय, आपने उनको चार बार समय दे दिया.

..(व्यवधान)..

श्री सुन्दरलाल तिवारी -- मंत्री जी, बैठिये, सदन चलने दीजिये.

..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय -- गृह जी, मेरा अनुरोध है कि रामनिवास रावत जी के सुनने के बाद मैं अपना निर्णय दूंगा. श्री रामनिवास रावत.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष महोदय, आप बार-बार समय दे देते हैं. हम आप पर आपत्ति नहीं कर रहे हैं. अध्यक्ष महोदय, विषयान्तर होता है कई बार. आपने चार बार समय दिया है. इन्होंने एक बार भी माफी या खेद व्यक्त नहीं किया है. ..

श्री रामनिवास रावत -- किया है, मैंने किया है.

..(व्यवधान)..

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष महोदय, यह मीडिया आपकी ओर मुखातिब है. पूरे देश का मीडिया आपकी ओर मुखातिब है. ..(व्यवधान).. आपने उनको चार बार समय दिया है.

..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय -- मेरा दोनों तरफ के सदस्यों से अनुरोध है कि एक मिनट मेरी बात सुन लें. माननीय आरिफ भाई बैठ जायें. रावत जी, सब कृपया बेठ जायें. एक मिनट सुन लें. गृह मंत्री जी एवं राजस्व मंत्री जी, एक मिनट सुन लें.

श्री शंकरलाल तिवारी -- अध्यक्ष महोदय, आप व्यवस्था दीजिये.

अध्यक्ष महोदय -- हां मैं दे रहा हूं. आप सुन तो लें. तिवारी जी, बैठ जायें. नरेन्द्र सिंह जी, के.के.श्रीवास्तव जी, रामेश्वर जी बैठ जायें.

श्री के.के.श्रीवास्तव -- अध्यक्ष महोदय, इसमें कोई बोलने की जरुरत नहीं है. आप तो पत्रकारों का सम्मान बचा रहे, इतना न्याय कर दीजिये.

अध्यक्ष महोदय -- सारे सदस्यों की बात सुन ली, माननीय मंत्रियों की बात सुन ली. श्री रामनिवास रावत 3 मिनट बोलेंगे, इसके बाद किसी को कहीं से एलाऊ नहीं किया जायेगा.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष महोदय, आप उनको चार बार बोलवा चुके हैं. आपने उनको चार बार अवसर दिया है.

अध्यक्ष महोदय -- उनका पाइंट ऑफ आर्डर था...

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- ..अध्यक्ष महोदय, उनको चार बार अवसर हो गया. वे चार बार बोल चुके हैं.

अध्यक्ष महोदय -- .. .उनको बोलने नहीं दिया गया. वे विषय पर नहीं बोलें. रावत जी, अब आप बोलिये.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष महोदय, वे चार बार बोल चुकें हैं. वे विषय पर नहीं बोले हैं, तो उनकी गलती है. आप उनको चार बार अवसर दे चुके हैं. उधर विश्वास हमारा समय मांग रहा है, एक घंटे से समय मांग रहा है.

अध्‍यक्ष महोदय, विश्‍वास सारंग जी को भी समय दीजिए..(व्‍यवधान)..

श्री विश्‍वास सारंग -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे भी बोलने का मौका दीजिए.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- अध्‍यक्ष जी, हमारा मंत्री समय मांग रहा है.

अध्‍यक्ष महोदय -- कृपया उन्‍हें बोल लेने दीजिए. ..(व्‍यवधान)..

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- अध्‍यक्ष जी, हम थोड़ी रोक सकते हैं, आपका अधिकार है.. ..(व्‍यवधान)..हमारा कहना है कि वे चार बार बोल चुके हैं. ..(व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय -- ठीक है, एक बार उन्‍हें बोलने दीजिए. इस बार आखिरी बार है. ..(व्‍यवधान)..

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- अध्‍यक्ष महोदय, एक शब्‍द खेद का नहीं आया है ..(व्‍यवधान)..

श्री विश्‍वास सारंग -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे भी तो आपने बोला था, ..(व्‍यवधान).. इसके बाद भी मुझे..(व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय -- उनको तो बोलने दें. ..(व्‍यवधान)..

श्री लालसिंह आर्य -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं भी बहुत देर से हाथ उठा रहा हूँ. ..(व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष माहेदय -- कृपया सब बैठ जाएं. पहले उनको तो बोलने दें, फिर निर्णय करूंगा मैं. ..(व्‍यवधान)..

श्री रामनिवास रावत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसी कि बात की गई थी, कौल-शकधर की पुस्‍तक के पृष्‍ठ क्रमांक 290 - मामले जो सभा का विशेषाधिकार भंग या अवमानना नहीं कहे जा सकते, इसके दूसरे पैरे में लिखा है कि, '' यदि कोई सदस्‍य या मंत्री सभा में कोई ऐसा वक्‍तव्‍य देता है जो किसी अन्‍य सदस्‍य के विचार में असत्‍य, अपूर्ण या गलत है तो वह विशेषाधिकार भंग नहीं है. यदि कोई गलत वक्‍तव्‍य दिया जाता है तो उस मामले का निपटारा करने के दूसरे उपाय हैं.''

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसी तरह से पृष्‍ठ क्रमांक 299 - सदस्‍यों के विरुद्ध शिकायतें - इसमें लिखा हुआ है कि, '' जब किसी सदस्‍य द्वारा कथित विशेषाधिकार भंग या सभा की अवमानना की शिकायत की जाती है तो शिकायत के संबंध में सभा की कार्यवाही एक जैसी नहीं होती. वह इस बात पर निर्भर करती है कि शिकायत किसी सदस्‍य के विरुद्ध है या किसी अजनबी के विरुद्ध. दोनों मामलों के संबंध में मुख्‍य अंतर यह है कि यदि शिकायत किसी सदस्‍य के विरुद्ध हो, तो शिष्‍टाचार के नाते उसे इस मामले के उठाये जाने की सूचना पहले से दे दी जाती है. इसके अतिरिक्‍त, जब कोई सदस्‍य किसी अन्‍य सदस्‍य के विरुद्ध विशेषाधिकार प्रश्‍न उठाना चाहता है, तो जैसा कि पहले कहा जा चुका है, अध्‍यक्ष उसे सभा में वह मामला उठाने की अनुमति देने से पहले जिस सदस्‍य के विरुद्ध शिकायत की गई हो, उसे इस मामले से संबंधित तथ्‍य जो उसके पास हों अध्‍यक्ष या सभा के समक्ष रखने का अवसर देता है. जब सभा के कथित विशेषाधिकार भंग या उसकी अवमानना की शिकायत किसी सदस्‍य द्वारा सभा से बाहर दिए गए और समाचार पत्र में प्रकाशित हुए कथित वक्‍तव्‍य पर आधारित हो, '' इस तरह से इसमें विशेषाधिकार नहीं बनता है. ..(व्‍यवधान)..

डॉ. गौरीशंकर शेजवार -- अपमान और अपशब्‍दों के लिए इसमें कहीं भी एग्‍जेम्‍प्‍शन नहीं है. ..(व्‍यवधान)..

श्री उमाशंकर गुप्‍ता -- ये कौन सी नई बात पढ़ी गई ? ..(व्‍यवधान)..

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र (XXX) शब्‍द आता है क्‍या ? ..(व्‍यवधान)..

श्री शंकरलाल तिवारी -- अध्‍यक्ष महोदय, इस किताब में कहीं यह नहीं लिखा कि (XXX) शब्‍द बोला जाए. (XXX) शब्‍द कहीं नहीं लिखा है. ..(व्‍यवधान)..ये भ्रम पैदा कर रहे हैं. ..(व्‍यवधान)..

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न का उत्‍तर दें कि (XXX) शब्‍द आता है क्‍या, हां या ना ? ..(व्‍यवधान).. ..(व्‍यवधान)..

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, इनके पास जो विधान सभा की कार्यवाही की नकल है, क्‍या यह प्रमाणित नकल है, जिस नकल को वे बार-बार उठा रहे हैं?

..(व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय -- कृपया सभी बैठ जाएं. सभी सदस्‍यों के विचार सुनने के पश्‍चात् मैं उक्‍त सूचना को जांच, अनुसंधान और प्रतिवेदन के लिए विशेषाधिकार समिति को सौंपता हूँ. (सत्‍ता पक्ष द्वारा मेजों की थपथपाहट) ..(व्‍यवधान)..

श्री रामनिवास रावत -- मेरा उत्‍तर नहीं आया है. ..(व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय -- मैंने जो अभी कार्यवाही की है, उत्‍तर उसमें सम्‍मिलित है. ..(व्‍यवधान)..

श्री रामनिवास रावत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने जो प्रश्‍न उठाया है, उसका निराकरण ? ..(व्‍यवधान).. (कौल एवं शकधर पुस्‍तक दिखाते हुए) क्‍या आप इसे भी अवॉइड करेंगे ? ..(व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय -- मैंने आपकी बात सुनने के बाद ही यह निर्णय किया है. ..(व्‍यवधान)..

श्री रामनिवास रावत -- क्‍या आप इसे भी अवॉइड करेंगे ? ..(व्‍यवधान)..

श्री अजय सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय.. ..(व्‍यवधान)..

श्री गोपाल भार्गव -- ये कौल और शकधर का उल्‍लेख अब प्रिविलेज कमेटी के सामने करना. ..(व्‍यवधान)..

श्री उमाशंकर गुप्‍ता -- आप मीडिया को (XXX) कहते रहेंगे. ..(व्‍यवधान)..

1.30 बजे नियम 267 (क) के अधीन विषय

अध्‍यक्ष महोदय -- आज की कार्यसूची में उल्‍लिखित सभी सदस्‍यों की शून्‍यकाल की सभी सूचनाएं पढ़ी हुई मानी जाएंगी. अब मैं उनके नाम पढ़ रहा हूँ :-

1. इंजी प्रदीप लारिया

2. डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय

3. श्री सुखेन्‍द्र सिंह

4. पं. रमेश दुबे

5. श्री कमलेश्‍वर पटेल

6. श्री सूबेदार सिंह रजौधा

7. श्री इन्‍दर सिंह परमार

8. श्री गोवर्धन उपाध्‍याय

9. श्रीमती झूमा सोलंकी

10. श्री निलांशु चतुर्वेदी

श्री अजय सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, गुजरात विधान सभा में पत्रकारों के ऊपर .. ..(व्‍यवधान)..

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आसंदी के निर्णय के ऊपर उंगली उठाई जा रही है. ..(व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय -- सदन की कार्यवाही अपराह्न 3.00 बजे तक के लिए स्‍थगित.

 

(1.31 बजे से 3.00 बजे तक अंतराल)

3.07 बजे विधान सभा पुन: समवेत हुई

{ अध्‍यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए}

 

 

पत्रों का पटल पर रखा जाना

 

 

(1) मध्‍यप्रदेश जल निगम मर्यादित, भोपाल का चतुर्थ वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2015-16

 

लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी, मंत्री (सुश्री कुसुम सिंह महदेले) -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं कंपनी अधिनियम, 2013 (क्रमांक 18 सन् 2013) की धारा 395 की उपधारा (1) (ख) की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश जल निगम मर्यादित, भोपाल का चतुर्थ वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2015-16 पटल पर रखती हॅूं.

 

 

 

(2) मध्‍यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का वार्षिक लेखा परीक्षण

प्रतिवेदन वर्ष 2016-17

 

पर्यावरण मंत्री (श्री अंतर सिंह आर्य) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 40 की उपधारा (7) एवं वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 36 की उपधारा (7) की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का वार्षिक लेखा परीक्षण प्रतिवेदन वर्ष 2016-17 पटल पर रखता हॅूं.

 

 

 

 

 

 

 

 

(3) अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्‍वविद्यालय का पंचम् वार्षिक प्रतिवेदन

वर्ष 2016-17

 

उच्‍च शिक्षा, मंत्री (श्री जयभान सिंह पवैया) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं अटल बिहारी वाजपेयी हिन्‍दी विश्‍वविद्यालय अधिनियम, 2011 (क्रमांक 34 सन् 2011) की धारा 44 की उपधारा (2) की अपेक्षानुसार अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्‍वविद्यालय का पंचम् वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2016-17 पटल पर रखता हॅूं.

 

 

 

 

 

 

 

 

(4) एन.एच.डी.सी. लिमिटेड की 17 वीं वार्षिक रिपोर्ट वर्ष 2016-17

 

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ.नरोत्‍तम मिश्र) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं कंपनी अधिनियम, 2013 (क्रमांक 18 सन् 2013) की धारा 395 की उपधारा (1) (ख) की अपेक्षानुसार एन.एच.डी.सी. लिमिटेड की 17 वीं वार्षिक रिपोर्ट वर्ष 2016-17 पटल पर रखता हॅूं.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

3.09 बजे कार्यमंत्रणा समिति का प्रतिवेदन

 

 

 

 


 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

3.14 बजे ध्यान आकर्षण

1. राज्य शासन द्वारा परिवार की परिभाषा बदले जाने से राज्य बीमारी सहायता का लाभ पात्र व्यक्तियों को न मिलना

श्री सुन्दर लाल तिवारी (गुढ़),(श्री आरिफ अकील)--- माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

 


 

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री (श्री रुस्तम सिंह)-- माननीय अध्यक्ष महोदय,

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, शासन के द्वारा पूरे प्रदेश में गरीबों को चिह्नित करके उनके नाम गरीबी रेखा में लिखे गए हैं. राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने गरीबी रेखा की एक अपनी अलग परिभाषा बना दी, मतलब, इस प्रदेश में गरीबों की दो परिभाषा हो गई. एक जनरल परिभाषा, जो शासन, गरीबों के गरीबी के राशन कार्ड में नाम रखता है. उससे भिन्न एक परिभाषा स्वास्थ्य विभाग ने बना ली और एक आदेश जारी कर दिया और उस आदेश में यह उल्लेख है, आपने यह स्वीकार किया है कि हमने आदेश जारी किया है. इसमें सबसे बड़ा जो चिन्ता का विषय है, आश्रित बच्चे, अविवाहित एवं जिनकी आयु 25 वर्ष से कम हो, यह जो आश्रित जो 25 वर्ष से ज्यादा हो गए, मतलब 25 वर्ष से कम वालों को तो ये देंगे. लेकिन गरीबी रेखा में, जिनका राशन कार्ड में नाम है, लेकिन उम्र उनकी 25 वर्ष से ऊपर हो गई है तो उनके परिवारों को यह स्वास्थ्य सेवा का जो लाभ देते हैं, जो राशि उपलब्ध कराते हैं, वह उनको इन्होंने बन्द कर दिया है तो मेरा यह कहना है कि सर्वे तो बहुत पहले वर्ष 2011 में हो गया था. उसके बाद दोबारा अभी कोई सर्वे नहीं हुआ है. सर्वे में उस परिवार की सूची में उस आदमी का नाम है तो जब तक अब नया सर्वे नहीं होता है और यदि उम्र का आपने बंधन लगा दिया है उससे कुछ लोगों को आपने अलग कर दिया है तो गरीबी रेखा में रहते हुए भी उनको गरीबी का लाभ नहीं मिल रहा है. यह स्थिति प्रदेश के अन्दर है.

अध्यक्ष महोदय, मेरा यह निवेदन है कि क्या एक गरीब और दूसरे गरीब के बीच में भेद किया जा सकता है. मेरा प्रश्न यह है कि जिन गरीब लोगों को आपने इसमें छोड़ दिया है और गरीबी रेखा में उनका नाम है. राशन कार्ड में उनका नाम है. जो स्वास्थ्य सेवाएं सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाती हैं क्या उन्हें भी उपलब्ध कराएंगे ?  किसी गरीब को इन सुविधाओं से वंचित नहीं करेंगे क्या ऐसी व्यवस्था आप करेंगे ?

श्री रुस्तम सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, वैसे तो माननीय विधायक बहुत विद्वान हैं लेकिन उन्होंने मेरा जवाब नहीं सुना. जबाव सुनते और उस पर ध्यान देते तो यह नहीं कहते कि स्वास्थ्य विभाग ने अलग से परिभाषा बना दी है. स्वास्थ्य विभाग परिवार की परिभाषा नहीं बनाता है. गरीबी रेखा के अन्तर्गत जो भी हैं उनकी परिभाषा पूरे प्रदेश के हर विभाग के लिए एक ही होती है और वह परिभाषा सामाजिक न्याय विभाग नियत करता है. हमारे विभाग ने जो आदेश जारी किया है वह है परिपत्र क्रमांक एफ 1007/1739/15/26-2 भोपाल दिनांक 25.7.2015 के संदर्भ में जो सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग, मध्यप्रदेश शासन से जारी हुआ है उसकी डिक्टो कॉपी हमने इस विभाग में की है. अब माननीय सदस्य नहीं समझ पा रहे हैं तो माननीय अध्यक्ष महोदय आप समझा दीजिए.

अध्यक्ष महोदय--माननीय सदस्य समझदार हैं.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--माननीय अध्यक्ष महोदय, जो मैं पढ़ रहा हूँ क्या यह इनके विभाग का आदेश नहीं है. विभागीय सम संख्यक आदेश के अनुक्रमांक में राज्य बीमारी सहायता योजना के अन्तर्गत सेवा की प्रदायगी हेतु परिवार की परिभाषा निम्न अनुसार परिभाषित की जाती है. इसमें आश्रित बच्चे, अविवाहित जिनकी आयु 25 वर्ष से कम हो उनको छोड़ दिया गया है. यह जानकारी बिंदु क्रमांक 4 पर है. मेरा इसमें यह कहना है कि 25 वर्ष से कम आयु वालों को लाभ देंगे लेकिन 25 वर्ष से ऊपर के जो गरीबी रेखा के कार्ड में नाम हैं उनको लाभ नहीं देंगे. मैं ऐसे सैंकड़ों मामले बता सकता हूँ जो सीएमएचओ कार्यालय से यह कहकर लौटा दिये गये कि यह गरीबी रेखा की परिभाषा में नहीं आते हैं, इनकी उम्र 25 वर्ष से ज्यादा हो गई है इसलिए इनको स्वास्थ्य के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध नहीं कराई जाएगी मेरा यह सवाल है.

श्री रुस्तम सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने फिर से वही बात रिपीट कर दी है.

अध्यक्ष महोदय--माननीय सदस्य का सीधा प्रश्न यह है कि ...

श्री रुस्तम सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य का सीधा प्रश्न है और मेरा उत्तर उससे भी ज्यादा सीधा और साफ है. स्वास्थ्य विभाग परिवार की परिभाषा तय नहीं करता है.

अध्यक्ष महोदय--वह तो उन्होंने मान लिया है.

श्री रुस्तम सिंह--दूसरी बात मैं माननीय सदस्य को बताना चाहता हूँ कि जो बीपीएल में हैं, राज्य बीमारी सहायता में यह भी स