मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा दशम् सत्र

 

 

फरवरी-अप्रैल, 2016 सत्र

 

शुक्रवार, दिनांक 11 मार्च, 2016

 

(21 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1937 )

 

 

[खण्ड- 10 ] [अंक- 13 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

शुक्रवार, दिनांक 11 फरवरी, 2016

 

(21 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1937 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 10.33 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

(संसदीय कार्य मंत्री )डॉ नरोत्‍तम मिश्र:- अध्‍यक्ष महोदय, आरिफ भाई अग्रिम पंक्ति में अकेले हैं, मुझे आशंका है कि बाकी सबको काटकर ऊपर आने के चक्‍कर में हैं.

श्री तरूण भनोत :- मंत्री जी आपक सामने वाली कुर्सी भी खाली है.

डॉ नरोत्‍तम मिश्र :- मलैया जी बैठे है वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं, लेकिन वहां पर तो कोई भी नहीं है.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया :- आरिफ भाई मंद मंद मुस्‍करा रहे हैं, मुस्‍कराहट का क्‍या जवाब माने.

डॉ नरोत्‍तम मिश्र :- मलैया जी बैठे हैं. हमारे वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं. यह क्‍या है कि शुरू से ही बाला बच्‍चन, मुकेश नायक जी और महेन्‍द्र सिंह कालूखेड़ा जी उनसे शुरू से ही इस कोशिश में हैं.

श्री आरिफ अकील :- यह मुख्‍यमंत्री की दौड़ में हैं, उनको हटाकर मुख्‍यमंत्री बनना चाहते हैं. डॉ नरोत्‍तम मिश्र :-मैं तो मुक्‍त कंठ से कह रहा हूं कि पूरे मनसावाचा कर्मणा शिवराज सिंह जी के साथ हूं. यह कहें अब कि मैं मुकेश नायक जी के साथ हूं मनसावाचा कर्मणा से.

श्री आरिफ अकील :- मैं क्‍यों कहूं. जबरन कहलवा रहे हो.

डॉ नरोत्‍तम मिश्र :- आरिफ भाई मैंने बोला न,कि मैं तो मनसावाचा कर्मणा से शिवराज जी के साथ हूं.

श्री आरिफ अकील :-आप बोलो कि आप मुकेश नायक जी के साथ हो. आपकी उनसे सेटिंग है क्‍या कि आप मुझसे कहलवा रहे हो.

डॉ नरोत्‍तम मिश्र :- चलो अच्‍छा कालूखेड़ा जी के साथ हो यह बोल दो. बाला बच्‍चन जी के साथ हो, यह तो बोल दो.

श्री आरिफ अकील :- क्‍यों बोल दो. आप आ जाओ आपके लिये बोल देता हूं.

डॉ नरोत्‍तम मिश्र :- मैं तो सी एम के पीछे खड़ा हूं, उनके साथ रहूंगा, चाहे वह पक्ष में रहे चाहे विपक्ष में रहें. आप किसके साथ हो.

श्री आरिफ अकील :- आपके साथ हूं.

 

तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

 

प्रश्‍न संख्‍या- 1 :- श्री आर.डी.प्रजापति :- अनुपस्थित.

 

अनुबंधानुसार राशि का भुगतान

2. ( *क्र. 3670 ) श्रीमती पारूल साहू केशरी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सागर जिला अंतर्गत एस्‍सेल विद्युत वितरण कपंनी को शासन को करोड़ों रूपया देना बकाया है? प्रश्‍न दिनांक तक एस्‍सेल विद्युत वितरण कंपनी को कुल कितनी राशि सरकार को विभिन्‍न मदों में अनुबंध अनुसार देना बाकी है? (ख) क्‍या एस्‍सेल विद्युत वितरण कंपनी सागर द्वारा शासन को लगातार नियमित भुगतान नहीं किया जा रहा है और इससे अनुबंध की किन-किन शर्तों का लगातार उल्‍लंघन हो रहा है? (ग) प्रश्‍नांश (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में अगर लगातार अनुबंध की शर्तों का उल्‍लंघन करने पर शासन द्वारा अनुबंध निरस्‍त किया जाता है अथवा कंपनी कार्य छोड़ देती है, तो उपभोक्‍ताओं की सुरक्षा निधि की जवाबदेही किसकी होगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) मेसर्स एस्‍सेल विद्युत वितरण (सागर) प्रा.लि. (वितरण फ्रेंचायजी) को म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड द्वारा जारी की गई मंथली इनवाईस (एम.आई.) तथा पूरक इनवाइस (एस.आई.) के मद में दिनांक 22.02.2016 की स्थिति में राशि रू. 23,00,56,789/- का भुगतान करना बाकी है। भुगतान हेतु अनुबंध में निहित शर्तों की कंडिका 10.2 के तहत् लंबित बकाया राशि पर पेनाल्‍टी अधिरोपित की जा रही है। इसके अतिरिक्‍त मेसर्स एस्‍सेल विद्युत वितरण (सागर) प्रा.लि. द्वारा पुन‍रीक्षित पेमेंट सिक्‍योरिटी रू. 17.28 करोड़ जमा करना भी बाकी है। (ख) जी हाँ, मेसर्स एस्‍सेल विद्युत वितरण (सागर) प्रा.लि. द्वारा म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड को किश्‍तों में कुल देय राशि से कम का भुगतान किया जा रहा है। इससे अनुबंध की कंडिका 10.1, 23.2, 23.4 एवं 35.1 में निहित प्रावधानों का उल्‍लंघन हो रहा है। (ग) उपभोक्‍ताओं की सुरक्षा निधि की जवाबदेही म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड की रहेगी.

श्रीमती पारूल साहू केशरी :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगी कि सागर की जनता एस्‍सेल पावर कंपनी से त्रस्‍त है, सागर के लाखों लोग और जनप्रतिनिधि सभी इसका विरोध कर चुके हैं. माननीय मंत्री जी जनभावनाओं का सम्‍मान करते हुए आपसे निवेदन है कि एस्‍सेल पावर कंपनी का कांट्रेक्‍ट निरस्‍त करने की घोषणा करें.

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय कंपनी को नोटिस जारी हो गये हैं और जो भी वैधानिक कार्यवाही है वह कि जा रही है.

श्रीमती पारुल साहू केशरी - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से कहूंगी क्योंकि इन्होंने नोटिस जारी कर दिया है इसके लिये बहुत-बहुत धन्यवाद.यह बात ध्यान में लाना चाहूंगी कि कंपनी द्वारा एग्रीमेंट की किसी भी शर्त का पालन नहीं किया गया है और जो जानकारी मुझे प्रश्न में मिली है 40 करोड़ रुपये सरकार को लेना बाकी है सरकार के पास कोई एसएल पावर कंपनी की पेमेंट सिक्युरिटी भी नहीं है लोगों का कितना पैसा एसएल पावर कंपनी के पास जमा है जो वह सरकार को नहीं दे रही है इसकी भी जानकारी नहीं है ऐसी स्थिति में इसका कांट्रेक्ट निरस्त कर सरकार की पावर कंपनी को तत्काल पावर डिस्ट्रीब्यूशन मेंटेनेंस और कलेक्शन का काम दिया जाये.

श्री शैलेन्द्र जैन - - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं कि मेरे ध्यानाकर्षण के उत्तर में माननीय मंत्री महोदय के द्वारा एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया था उस कमेटी की रिपोर्ट संभवत: आ चुकी होगी उस रिपोर्ट को विधान सभा के पटल पर रखने की कृपा करेंगे ?

श्री राजेन्द्र शुक्ल - इसमें कोई आपत्ति नहीं है.

प्रश्न क्र.3 श्री नथन शाह कवरेती (अनुपस्थित)

सड़क के मध्‍य लगे विद्युत पोलों की शिफ्टिंग

4. ( *क्र. 5464 ) श्री संजय पाठक : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या नगर निगम कटनी में सड़कों पर विद्युत पोलों के कारण यातायात बाधित हो रहा है तथा पीरपाबा से चाका रोड के निर्माण के समय सड़क के बीच में आये विद्युत पोलों को सड़क के कि‍नारे प्रतिस्‍थापित किया गया है? (ख) यदि प्रश्‍नांश (क) हाँ तो बस स्‍टैण्‍ड से चाका एवं शहर के अंदर सड़कों पर विद्युत पोल जो आज भी लगे हैं, उन्‍हें कब तक हटाकर सड़क किनारे किया जायेगा? (ग) क्‍या बस स्‍टैण्‍ड के आगे स्‍कूल बस दुर्घटनाग्रस्‍त होने के बावजूद भी विद्युत पोलों को नहीं हटाया गया, जिसमें घटना के समय कई बच्‍चे घायल हुये थे? (घ) जब सड़क का निर्माण कार्य पूर्णता की ओर है, इसके बाद भी विद्युत पोल न हटाये जाने का कारण स्‍पष्‍ट करें तथा कब तक हटाये जायेंगे?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ, जी हाँ। (ख) जी हाँ, बस स्‍टैण्‍ड से नाका तक के पोल हटाने की कार्यवाही प्रचलित है, मिशन चौक से बस स्‍टैण्‍ड तक विद्युत पोल हटा दिये गये हैं। शहर के अंदर अन्य मार्गों के पोल हटाने की कार्यवाही प्रचलित है। समय-सीमा बताना संभव नहीं है। (ग) बस दुर्घटना का कारण विद्युत पोल नहीं थे। उत्‍तरांश '''' अनुसार कार्यवाही प्रचलित है। (घ) कार्यवाही प्रचलित है। विद्युत खम्‍बों को सड़क योजना का कार्य किये जाने के पूर्व हटाया जाना सुनिश्चित किया जावेगा। समय-सीमा बताना संभव नहीं है।

श्री संजय पाठक - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने प्रश्न लगाया कि विद्युत पोलों के कारण माडल रोड कटनी पर विगत छह-सात महिने में लगभग दस एक्सीडेंट हो चुके हैं और कई लोगों की मौत भी हो चुकी है उनको कब तक हटाया जायेगा.प्रश्न के उत्तर में आया है कि मिशन चौक से बसस्टैंड के बीच में हटा दिये गये हैं और उत्तर माननीय मुख्यमंत्री जी के हवाले से दिलाया गया है. मैं आपके माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री जी को अवगत कराना चाहूंगा कि यह जो उत्तर है पूर्णत: असत्य पर आधारित है. कल रात तक खम्बे चार जगह अभी तक अलग नहीं हुए हैं. आजाद चौक पर,चाण्डक चौराहे पर,कैलवारा मोड़ पर,

अध्यक्ष महोदय - विभाग उनके पास है इसीलिये उत्तर पर उनका नाम लिखा है.

श्री संजय पाठक - विभाग उनके पास है तो अधिकारियों में इतना भी भय नहीं है कि मुख्यमंत्री जी के माध्यम से माननीय मंत्री जी जवाब देंगे इन्होंने उत्तर दिया है कि हटा दिये गये हैं जबकि नहीं हटाये गये हैं.

राज्यमंत्री,सामान्य प्रशासन(श्री लालसिंह आर्य) - माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रश्न में हमने बहुत स्पष्ट किया है कि पोल हटाने की कार्यवाही प्रचलन में है. कटनी नगर में  427 पोल हैं. यह रोड चार पार्ट में स्वीकृत हुई है. फर्स्ट पार्ट और फोर्थ पार्ट की बाद में स्वीकृति हुई और बाद में उसके पोलों को बढ़ाने की कार्यवाही हुई इसीलिये 427 पोल हटना थे उसमें से 61 पोलों को अभी तक हटा भी दिया गया है. 366 पोलों के हटाने की कार्यवाही जारी है.

श्री संजय पाठक - माननीय अध्यक्ष महोदय, आपके प्रश्न के जवाब में है कि मिशन चौक से बसस्टैंड तक विद्युत पोल हटा दिये गये हैं. मैं कह रहा हूं कल रात तक नहीं हटाये गये हैं.

अध्यक्ष महोदय - घ में यह भी उत्तर दिया है कि प्रचलित है.

श्री संजय पाठक - प्रचलित है के बाद आगे लिखा है कि बाकी को हटाने की कार्यवाही प्रचलित है. मैं मंत्री जी को अवगत कराना चाहूंगा कि इन पोलों के कारण कई एक्सीडेंड हो चुके हैं कई लोग मर चुके हैं और कमिश्नर नगर निगम को स्थानीय विधायक संदीप जायसवाल जी ने भी कई बार बोला नगर निगम महापौर है. नगर निगम महापौर ने बोला नगर निगम की परिषद ने भी बोला कि इनको यथाशीघ्र अलग किया जाये लेकिन विगत डेढ़ वर्ष से नगर निगम कटनी का पूरा काम ठप्प पड़ा हुआ है विकास कार्य वहां इसलिये नहीं हो पा रहे हैं क्योंकि कमिश्नर अपनी अड़ी में रहे हैं और नगर निगम महापौर की सुन रहे हैं न परिषद की सुन रहे हैं लगातार उनके विरुद्ध शिकायत पर शिकायत दर्ज कराई जा रही हैं कई अनियमितताएं हुई हैं मेरा सीधा प्रश्न यह है कि सारे प्रतिनिधियों के बोले जाने के बाद भी अभी तक नहीं हटाया गया है और मुख्यमंत्री जी के विभाग के माध्यम से असत्य जानकारी विधान सभा में दी है तो खम्बे कब तक हटाएंगे और ऐसे कमिश्नर के विरुद्ध क्या कार्यवाही करेंगे ?

श्री लालसिंह आर्य--माननीय अध्यक्ष महोदय, उनके खिलाफ गंभीर शिकायतें, अनियमितताएं हैं तो उसकी जानकारी आप दे दें तो मैं उसकी जांच करवा दूंगा. अगर गंभीर शिकायतों में वह दोषी पाये जायेंगे तो उनको हटाने की कार्यवाही भी करेंगे.

श्री संजय पाठक--अध्यक्ष महोदय, पोल हटाने की समय सीमा बता दें.

श्री लालसिंह आर्य--अतिशीघ्र हटा देंगे.

श्री संजय पाठक--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा आग्रह है कि दिसम्बर में यह आश्वासन मिला था कि एक माह के अंदर कार्यवाही कर दी जाएगी यह जवाब माननीय नरोत्तम मिश्र जी ने दिया था गरीबी रेखा के जो कार्ड हैं उनका शिविर लगाने की मुख्यमंत्री जी की घोषणा थी उस पर कार्यवाही कर दी जाएगी. आज 4 महीने हो गये हैं वहां पर कोई भी शिविर नहीं लगाया गया है.

अध्यक्ष महोदय--यह प्रश्न उद्भूत नहीं होता है.

प्रश्न संख्या 5

रीवा जिलांतर्गत फीडर सेपरेशन का कार्य

5. ( *क्र. 4498 ) पं. रमाकान्‍त तिवारी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या त्‍योंथर एवं जवा तहसील जिला रीवा में फीडर सेपरेशन का कार्य प्रारंभ हुआ और आज दिनांक तक अधूरा है? (ख) यदि हाँ, तो यह बतायें कि त्‍योंथर एवं जवा तहसील जिला रीवा के कितने फीडरों के लिये फीडर सेपरेशन कार्य प्रारंभ हुआ था, कितने फीडरों में सेपरेशन का कार्य पूर्ण हुआ है, शेष कार्य क्‍यों बंद हैं? (ग) उपरोक्‍त अधूरे कार्य कब तक पूरा करायेंगे? (घ) कार्य पूरा न होने में दोषी कौन हैं? दोषियों के खिलाफ क्‍या कार्यवाही की जायेगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हाँ। (ख) रीवा जिले के अंतर्गत त्‍यौंथर एवं जवा तहसीलों में 11 के.व्‍ही. के 33 फीडरों के विभक्तिकरण का कार्य प्रारंभ हुआ था, जिसमें से 10 फीडरों का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। उक्‍त कार्य टर्न-की आधार पर कराए जाने हेतु अवार्ड पूर्व में मेसर्स. जी.ई.टी. पॉवर लिमिटेड, चेन्‍नई को दिया गया था, किन्‍तु कार्य की प्रगति संतोषप्रद नहीं पाये जाने पर उक्‍त अवार्ड निरस्‍त कर पुन: निविदा जारी कर शेष 23 फीडरों के कार्य हेतु कार्यादेश मेसर्स विंध्‍या टेलीलिन्‍कस लिमिटेडनई दिल्‍ली को दिनांक 05.05.2015 को जारी किया गया है। उक्‍त शेष 23 फीडरों का कार्य वर्तमान में प्रगति पर है। (ग) ठेकेदार एजेंसी से किये गये अनुबंध की शर्तों के अनुसार उक्‍त शेष कार्य दिसम्‍बर 2016 तक कार्य पूर्ण होना है। (घ) प्रश्‍नाधीन कार्य पूर्ण नहीं करने के लिये दोषी ठेकेदार एजेंसी मेसर्स जी.ई.टी. पॉवर लिमिटेड, चेन्‍नई का अवार्ड निरस्‍त कर दिया गया है तथा ठेके की शर्तों के अनुसार लायबिलिटी निर्धारित कर वसूली की कार्यवाही की जा रही है। 

श्री रमाकांत तिवारी--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि वहां पर कोई फीडर बनाने वाला कार्यकर्ता ही नहीं गया कम्पनी तो गयी ही नहीं वहां पर कोई बताने वाला आदमी भी नहीं गया क्या मंत्री जी कौन कौन से फीडर दुरूस्त हो गये हैं, कौन से 23 फीडर प्रगति पर हैं बताने की कृपा करेंगे.

श्री राजेन्द्र शुक्ल--माननीय अध्यक्ष महोदय, जो फीडर पूरे हो गये हैं उनका नाम है सतपुड़ा, बड़ागांव, खरादी, मजीगमा, चाटघाट, सुहागी, कुठीला, गढ़ एवं डबोरा जो प्रगति पर हैं उनकी 23 फीडरों की सूची मैं आपको उपलब्ध करवा दूंगा.

श्री रमाकांत तिवारी--माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी जो विभाग ने लिखकर के दे दिया है वही आपने बता दिया है मैं कहना चाहता हूं कि कान की सुनी बात असत्य होती है, आंख की देखी सत्य होती है तो क्या आप कृपा करके स्वयं देख करके बता सकेंगे.

श्री राजेन्द्र शुक्ल--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं यह कार्य स्वयं तिवारी जी के साथ देखूंगा बल्कि इन फीडरों का लोकार्पण भी करने जाऊंगा.

श्री रमाकांत तिवारी--धन्यवाद आपको.

 

 

 

 

 

 

 

प्रश्न संख्या--‑6

घट्टिया तहसील में खदानों की नीलामी

6. ( *क्र. 3015 ) श्री सतीश मालवीय : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) उज्‍जैन जिले की घट्टिया विधानसभा क्षेत्र में कितनी चिन्हित खदानें हैं, इनमें से 01 अप्रैल 2013 से प्रश्‍न दिनांक तक कितनी खदानों (रेत, मुरम, गिट्टी, पत्‍थर आदि) की नीलामी की गई एवं कितना राजस्‍व प्राप्‍त किया गया? कितनी खदानों का सीमांकन किया गया? खदानों के नाम तथा किन व्‍यक्तियों द्वारा खदान ली गई? उनके नाम सहित सूची उपलब्‍ध करावें। (ख) क्‍या नीलाम की गई खदानों में से उत्‍खनन का कार्य नीलामी के निर्धारित रकबे व सर्वे नंबर से अधिक दूसरे सर्वे नंबर एवं रकबे में अवैध उत्‍खनन किया जा रहा है। इस संबंध में विभाग द्वारा कहाँ किस अधिकारी द्वारा निरीक्षण किया गया? निर्धारित रकबे से अधिक रकबे के उत्‍खनन के कितने प्रकरण बनाये गये और कितनी राशि वसूली की गई? शासन इस पर क्‍या कार्यवाही करेगा? (ग) क्‍या घट्टिया विधान सभा क्षेत्र में भारी मात्रा में रेती, मुरम, हार्ड मुरम एवं गिट्टी का भारी मात्रा में अवैध उत्‍खनन एवं अवैध भंडारण किया जा रहा है? विगत 01 जनवरी 2015 से 01 जनवरी 2016 तक अवैध उत्‍खनन एवं अवैध भंडारण के कितने प्रकरण बनाये गये? किस-किस व्‍यक्ति या संस्‍था पर कार्यवाही की गई? कितनी राशि की वसूली की गई? अवैध उत्‍खनन एवं अवैध भंडारण के संबंध में विभाग द्वारा अवैध उत्‍खनन रोकने की आगामी क्‍या कार्ययोजना है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) प्रश्‍नाधीन जिले की घट्टिया विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कुल 43 नीलाम खदानें चिन्हित हैं। प्रश्‍नांकित अवधि में कोई खदान नीलाम नहीं की गई है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ख) प्रश्‍नांश '' में दिये उत्‍तर अनुसार चूंकि खदानें नीलाम नहीं की गई हैं, अत: शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता। (ग) जी नहीं। खनिज के अवैध उत्‍खनन एवं अवैध भंडारण के प्रकरण प्रकाश में आने पर नियमानुसार कार्यवाही की जाती है। प्रश्‍नाधीन अवधि में दर्ज किये गये अवैध उत्‍खनन तथा अवैध भंडारण के प्रकरणों की प्रश्‍नानुसार जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट में दर्शित है। दर्शित जानकारी अनुसार यह समस्‍त प्रकरण निराकरण हेतु प्रचलित हैं। अत: वर्तमान में राशि वसूल किये जाने का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। जिले में पदस्‍थ अमले द्वारा जिले में सतत् निगरानी की जाती है। प्रश्‍नानुसार प्रकरण प्रकाश में आने पर कार्यवाही की जाती है।

परिशिष्ट - ''एक''

 

श्री सतीश मालवीय--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं पूछना चाहता हूं कि मैंने प्रश्न किया था जो मेरा प्रश्न क्रमांक 3 है घटिया विधान सभा में अवैध उत्खनन हो रहा है मुझे इसका जवाब मिला है कि इस प्रकार की कोई भी उत्खनन जैसी शिकायत प्राप्त नहीं हुई है एवं जिले में पदस्थ अमले द्वारा जिले में सतत निगरानी की जाती है मेरा अनुरोध है कि हमारे यहां पर अवैध उत्खन्न की बहत ज्यादा शिकायतें हैं उसमें सुधार किया जाए. दूसरा ऋितिका में अवैध उत्खन्न होता है तो आने वाले समय में नीलामी प्रक्रिया के द्वारा वहां पर इस प्रकार की व्यवस्था की जाए कि वहां नीलामी हो जाए एवं काम शुरू हो, ऐसी आशा है.

श्री राजेन्द्र शुक्ल--माननीय अध्यक्ष महोदय, गौण खनिज एक फैली हुई सम्पदा है इसमें अवैध उत्खनन एवं परिवहन की संभावनाएं बनी रहती हैं इसलिये घटिया विधान सभा में मेरे जवाब में यह नहीं है कहीं पर अवैध उत्खनन एवं परिवहन शिकायतें नहीं हैं, अथवा नहीं हो रही है, बल्कि विभाग ने 345 प्रकरण बनाये हैं परिवहन के इसमें से 61 लाख 86 हजार रूपये की वसूली की जा चुकी है. अवैध उत्खनन के 6 प्रकरण भी बनाये गये हैं और किसी प्रकार से अवैध भंडारण के भी प्रकरण बनाये गये हैं जो कि एसडीएम कोर्ट में चल रहे हैं. इसलिये जवाब में कहा गया कि विभाग सतत निगरानी रखता है और जहां कहीं भी शिकायतें आती हैं तत्काल उस पर कार्यवाही भी करता है.

श्री सतीश मालवीय - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से, सिर्फ इतना ही कहना चाहूँगा कि जिस प्रकार रेती का, मैंने एक बार जिक्र किया है कि इस प्रकार की व्‍यवस्‍था अगर बन जाये तो जहां-जहां पर भी, हमारे यहां 3-4 नदियां हैं, जहां पर रेती का बहुत ज्‍यादा अवैध उत्‍खनन होता है, वहां पर नीलामी प्रक्रिया हो जाये तो उसके बाद अगर इस प्रकार के नीलामी होने के बाद, वहां पर कोई बिजनेस करना चाहे तो बेहतर होगा. मैं आपके माध्‍यम से, माननीय मंत्री जी से पूछना चाहूँगा.

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत ही अच्‍छा है. माननीय सतीश जी ने बात उठाई है. 43 खदानों में से, 13 खदानों की नीलामी अतिशीघ्र होने वाली है और सारी खदानों की नीलामी कर देंगे. उसके बाद सिया से जैसे ही परमीशन मिलती है, सारी खदानों में वैध उत्‍खनन शुरू हो जायेगा तो अवैध की संभावना समाप्‍त हो जायेगी.

श्री सतीश मालवीय - माननीय मंत्री जी, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

 

 

अधिकारियों के विरूद्ध आर्थिक अपराध के दर्ज प्रकरण

प्रश्‍न 7. ( *क्र. 4425 ) श्री गिरीश गौतम : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या अनुसंधान एजेंसी आर्थिक अपराध प्रकोष्‍ठ द्वारा बाणसागर परियोजना में हुए भ्रष्‍टाचार के लिये बाणसागर एवं गंगा कछार के अधिकारियों के विरूद्ध भा.द.वि. एवं भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत अपराध कायम किया गया है? अपराध क्रमांक धारा एवं सभी आरोपित अधिकारियों का नाम, पद सहित विवरण देवें। (ख) क्‍या ई.ओ.डब्‍ल्‍यू. द्वारा बाणसागर परियोजना के अधिकारियों, जिनके विरूद्ध (प्रकरण पंजीबद्ध हैं) अभियोजन चलाने के लिये अभियोजन स्‍वीकृति‍ हेतु कई प्रस्‍ताव भेजे गये? यदि हाँ, तो कब-कब अभियोजन स्‍वीकृति हेतु प्रस्‍ताव प्राप्‍त हुए तथा किनके विरूद्ध अभियोजन स्‍वीकृति‍ दी गयी? विवरण नाम, पद सहित बताएं और जिनके विरूद्ध प्रस्‍ताव दिये जाने के बाद अभियोजन की स्‍वीकृति‍ नहीं दी गयी है? अभियोजन स्‍वीकृति‍ नहीं दिये जाने का कारण बताएं। (ग) ई.ओ.डब्‍ल्‍यू. द्वारा वांछित अभियोजन स्‍वीकृति‍ कब तक प्रदान कर दी जायेगी?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-अ अनुसार है। (ख) जी हाँ। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-'' एवं '' अनुसार है। अभियोजन स्‍वीकृति के लंबित प्रकरण परीक्षण में हैं। (ग) समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

श्री गिरीश गौतम - मानीय अध्‍यक्ष महोदय, बाण सागर परियोजना हमारे रीवा संभाग के लिए जीवनदायिनी योजना है. बाण सागर का पानी किसानों के खेत में पहुँचता है तो निश्चित तौर पर बहुत सारे फायदे, हमारे मुख्‍यमंत्री जी के संकल्‍प को पूरा करने में मदद मिलती है. इसी बाण सागर परियोजना में अधिकारियों ने हजारों का नहीं, लाखों का नहीं, करोड़ों का भ्रष्‍टाचार किया है. जिसमें से एक मामला कायम हुआ है. अपराध क्रमांक- 21/8, धारा 406, 409, 420, 467, 468, 472, 201, 120 बी, 203, 204, 217, 218 भा.द.वि. एवं 13 (1) सी, 13 (2) डी, करेप्‍शन एक्‍ट में ये मामले कायम हैं. हमने प्रश्‍न इसमें यह किया था कि कितने अधिकारियों के खिलाफ यह मामला कायम हुआ है ? जो सूची उपलब्‍ध कराई गई परिशिष्‍ट '' पर, उसमें 30 अधिकारियों का 1 से 30 तक का नाम, पद सहित दिया है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दूसरा प्रश्‍न मेरा यह था कि चूँकि सबके खिलाफ अभियोजन शुरू नहीं हुआ. मैंने यह पूछा था कि कितने लोगों के अभियोजन के लिए वहां से चिट्ठी आई है. उस चिट्ठी के आधार पर अभियोजन स्‍वीकृति की, आपने क्‍या कार्यवाही की है ? उत्‍तर में बताया गया है कि अभियोजन स्‍वीकृति के लम्बित प्रकरण परीक्षण में हैं. मैं मंत्री जी, आपके माध्‍यम से दो प्रश्‍न करना चाहता हूँ कि क्‍या मध्‍यप्रदेश शासन, सामान्‍य प्रशासन विभाग क्र.एफ-156/96/1110, भोपाल दि. 21 अप्रैल, 1997 का यह एक आदेश है. जिस आदेश पर यह लिखा हुआ है कि अभियोजन स्‍वीकृति का आदेश करने के पूर्व विधि एवं विधायी कार्य विभाग संबंधी शासकीय सेवक के प्रशासकीय विभाग का मत प्राप्‍त करेगा. अभियोजन स्‍वीकृति जारी में विलम्‍ब को देखते हुए इस विभाग के परिपत्र का हवाला देते हुए यह व्‍यवस्‍था की गई थी कि लोकायुक्‍त संगठन द्वारा शासकीय सेवकों के विरूद्ध प्रस्‍तुत प्रकरणों में अभियोजन स्‍वीकृति सीधे विधि एवं विधायी कार्य विभाग द्वारा दी जावे. इसमें क्रमांक 3 में अभियोजन स्‍वीकृति के प्रकरणों में प्रशासकीय विभाग द्वारा अपना अभिमत देने के लिए एक माह की समयावधि निर्धारित की जाती है. यदि इस अवधि में, उनको अभिमत प्राप्‍त नहीं होता है तो विधि विभाग बिना उनके अभिमत के ही अभियोजन स्‍वीकृति जारी कर देगा. मेरा पहला प्रश्‍न तो यही है कि क्‍या यह परिपत्र माननीय मंत्री जी के पास है ? क्‍या इस आदेश में कोई संशोधन हुआ है ? यदि संशोधन हुआ है तो वह हमको उपलब्‍ध करवायें. मैं दूसरे प्रश्‍न के लिए फिर निवेदन करूँगा.

राज्‍यमंत्री, सामान्‍य प्रशासन विभाग (श्री लाल सिंह आर्य) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सदस्‍य ने जो प्रश्‍न पूछा है. मैं उनको बताना चाहता हूँ कि शासन ने यह आदेश जारी किया है कि किसी भी प्रकरण चाहे ई.ओ.डब्‍ल्‍यू का हो, इसमें यदि अपराध पंजीबद्ध होता है तो उसके 45 दिवस के भीतर संबंधित विभाग को अभियोजन की स्‍वीकृति के लिए भेजा जायेगा. उसको कम किया गया है, पहले यह ज्‍यादा था. उसके बाद एक महीना, यदि कोई विशेष बहुत गम्‍भीर प्रकरण है तो उसमें एक महीना और समय दिया जाता है. जहां तक, आप इस प्रश्‍न की बात कर रहे हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 2 लोगों के अभियोजन की स्‍वीकृति दी है, 8 का हमने रीवा स्‍पेशल कोर्ट में चालान भी प्रस्‍तुत कर दिया है.

श्री गिरीश गौतम - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने जो प्रश्‍न किया है. उसका उत्‍तर नहीं आया है. मैंने इस परिपत्र को पढ़ते हुए यह कहा कि यह परिपत्र है क्‍या ? क्‍या इसका कोई संशोधन हुआ है ? यदि संशोधन हुआ है तो यह बतायें. सीधा बतायें.

अध्यक्ष महोदय -- आप दूसरा प्रश्न भी कर दें उसी के साथ.

श्री गिरीश गौतम -- अध्यक्ष महोदय, नहीं तो वह फिर गोल मोल जवाब आ जायेगा. मैं यह चाहता हूं कि यह परिपत्र एक बार स्वीकार करें, यह इन्हीं का आदेश है. सामान्य प्रशासन विभाग का आदेश है. इसमें और लिखा है, जहां विवादित बता रहे हैं, उसी में लिखा है कि क्या करेंगे. समयावधि निर्धारित की गई है..

अध्यक्ष महोदय -- वह तो आपने पढ़ दिया.

श्री गिरीश गौतम -- नहीं,इसी में आगे हैं कि यदि मतभेद हैं, मतभेद होने की स्थिति में प्रकरण प्रशासकीय विभाग द्वारा मंत्री परिषद् की उप समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा. इसी में लिखा हुआ है. ..

अध्यक्ष महोदय -- आ गया, अब इसका उत्तर ले लें.

श्री लाल सिंह आर्य -- अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जो कहा है, वह परिपत्र मेरे पास भी है. स्वाभाविक है...

अध्यक्ष महोदय -- बस इतना ही प्रश्न था. अब दूसरा प्रश्न पूछिये.

श्री गिरीश गौतम -- अध्यक्ष महोदय, इसी के संदर्भ में फिर मेरा दूसरा प्रश्न है कि प्रकोष्ठ द्वारा प्रेषित प्रस्ताव का दिनांक, जिन जिन लोगों के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति, अभिमत तो तब देंगे, जब विधि विधायी विभाग भेजेगा. अभिमत के लिये विधि विधायी विभाग ने भेजा, मेरा प्रश्न यह होगा, तो कब भेजा उन्होंने, वहां से आया प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन विधि विधायी विभाग मंत्रालय, भोपाल को ब्यूरो का पत्र क्रमांक, आप ही के उसमें है. ये भेजा गया 6.1.14 को, दूसरा पत्र है 3.4.14 को, तीसरा पत्र है 13.4.14 को और चौथा पत्र है 28.4.14 को. ये चार पत्र आये. तो 2014 से लेकर के जब यह भेजा दिया गया पत्र तो अब कृपा करके यह बताने का प्रयास करें कि विधि विधायी विभाग ने कब अभिमत के लिये भेजा. विभाग को कब अभिमत के लिये भेजा. यह तारीख और बता दें.

अध्यक्ष महोदय -- दूसरा और पूछ लीजिये. अब इसके बाद पूरक प्रश्न की हम अनुमति नहीं देंगे. इसलिये साथ ही इससे संलग्न और प्रश्न पूछ लीजिये.

श्री गिरीश गौतम -- अध्यक्ष महोदय, जी हां. अभिमत के लिये कब भेजा और अभिमत क्यों नहीं मिला. अभिमत उनका आया नहीं, तो फिर इसका पालन क्यों नहीं किया जा रहा है. तो कृपा करके इसमें करोड़ों रुपयों का भ्रष्टाचार है. किसानों के साथ अन्याय हुआ. जिस बाण सागर के पानी को हम 10 साल पहले पहुंचा सकते थे, यह भ्रष्टाचार के कारण हम पानी नहीं पहुंचा पायें. उनके अभियोजन की स्वीकृति देने में क्या दिक्कत आ रही है और वे रिटायर भी हो रहे हैं. कई लोग रिटायर हो गये, इस दुनिया से चले जायेंगे, हम उनके खिलाफ क्या कार्यवाही करेंगे.

श्री लाल सिंह आर्य -- अध्यक्ष महोदय, यह कहना उचित नहीं है कि मध्यप्रदेश सरकार उनको बचा रही है. बचाने का सवाल ही नहीं है.

श्री गिरीश गौतम -- मैंने बचाने के लिये नहीं कहा. मैंने तो यह कहा है कि मुख्यमंत्री जी के संकल्प के अनुसार कह रहा हूं. बचाने का मैंने बिलकुल नहीं कहा.

अध्यक्ष महोदय -- ऐसा उन्होंने नहीं कहा. उन्होंने कहा कि देर हो रही है.

श्री लाल सिंह आर्य -- अध्यक्ष महोदय, यदि सरकार की मंशा उस प्रकरण के प्रकाश में आने के बाद कार्यवाही करने की नहीं होती, तो ईओडब्ल्यू को हम लोग ये नहीं देते. जहां तक आपने कहा है कि विधि विभाग को कब दिया गया था. तो 4.1.16 को विधि विभाग द्वारा जल संसाधन विभाग को अभियोजन की स्वीकृति के लिये उनसे जो मांगा जाता है विभाग से, वह हमने भेजा है.

श्री गिरीश गौतम -- यह दूसरा पत्र है. 2014 वाले का मैंने पूछा,यह तो फिर दोबारा हमारा कुश्चन लग गया तो 4.1.16 को फिर भेज दिया. उसका स्पष्टीकरण नहीं हुआ तो कम से कम इतना आश्वासन दे दें कि हम जल्दी से अभियोजन की स्वीकृति देंगे और चालान करा देंगे. अध्यक्ष महोदय, यह तो आश्वासन दिलवा दीजिये. चालान पेश करेंगे. बाकी का हो ही गया, एक प्रकरण में बाकी का हुआ है.

श्री लाल सिंह आर्य -- अध्यक्ष महोदय, अभियोजन की स्वीकृति अब प्रशासकीय विभाग देता है. जल संसाधन विभाग से जितनी जल्दी आ जायेगा, हम जल्दी भेज देंगे.

नीलामी रहित रेत खदानों की विधिवत नीलामी

8. ( *क्र. 4333 ) श्री जयवर्द्धन सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या गुना जिले में शासन द्वारा ग्राम पंचायतों को नि:शुल्‍क रेत उपलब्‍ध कराने के लिये कोई व्‍यवस्‍था की गई है? यदि हाँ, तो कृपया नियमों की प्रति उपलब्‍ध करावें? (ख) वित्‍तीय वर्ष 2015-16 में गुना जिले की कितनी ग्राम पंचायतों को नि:शुल्‍क रेत उपलब्‍ध कराई गई है? (ग) शासन द्वारा नीलामी रहित रेत खदानों की विधिवत नीलामी कब तक की जायेगी? क्‍या इसके लिये कोई प्रक्रिया प्रारंभ की गई है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) मध्‍यप्रदेश गौण खनिज नियम 1996 के नियम 3 (3) में एवं प्रारूप-अठारह की कंडिका का 02 के परन्‍तुक में प्रश्‍नानुसार प्रावधान सभी ग्राम पंचायतों हेतु किये गये हैं। उक्‍त नियमों की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट पर दर्शित है। (ख) वित्‍तीय वर्ष 2015-2016 में गुना जिले की किसी भी ग्राम पंचायत को नि:शुल्‍क रेत उपलब्‍ध नहीं करायी गई है। (ग) नीलामी हेतु चिन्हित खदानों की नीलामी सतत् रूप से की जा रही है। इसकी प्रक्रिया पूर्व से प्रारंभ एवं वर्तमान में निरंतर है।

श्री गिरीश भण्डारी -- अध्यक्ष महोदय, मेरा खनिज मंत्री जी से यह प्रश्न है कि क्या पंचायतों को सरकारी काम करने के लिये लीज लेने की आवश्यकता है या नहीं. यह मेरा पहला प्रश्न है.

श्री राजेन्द्र शुक्ल -- अध्यक्ष महोदय, नियम में यह प्रावधान किया गया है कि ग्राम पंचायतों को शासकीय कार्यों के लिये जो गौण खनिज की आवश्यकता होगी, वह निकट कीजो भी घोषित खदान होगी, वहां से उसको निशुल्क बिना किसी रायल्टी के वह गौण खनिज प्राप्त हो जायेगा.

श्री गिरीश भण्डारी -- अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि इसके लिये परमीशन की आवश्यकता है या नहीं.

श्री राजेन्द्र शुक्ल -- अध्यक्ष महोदय, परमीशन की आवश्यकता रहेगी, क्योंकि उनको आवेदन नायब तहसीलदार के यहां देना पड़ेगा और वह यह निश्चित करेंगे कि वास्तव में उस शासकीय कार्य के लिये कितनी मात्रा की आवश्यकता है. और एक बार वह क्वांटिटी तय हो जाने के बाद उनको जो रायल्टी पिट पास होता है, वह प्रदाय किया जायेगा. उसके बाद ही वह परिवहन कर पायेंगे.

श्री गिरीश भण्डारी -- अध्यक्ष महोदय, मेरा इसी से एक प्रश्न उद्भूत होता है कि इसी पार्वती नदी पर जो खदानें हैं, उन पर अवैध उत्खनन हो रहा है. अवैध उत्खनन के साथ साथ उन पर जो स्टाप डेम बने हुए हैं, उन अवैध उत्खनन कर्ताओं ने उन स्टाप डेमों का पानी भी तोड़ दिया.

अध्यक्ष महोदय-- इससे यह प्रश्न उद्भुत नहीं हो रहा है.

श्री गिरीश भण्डारी--अध्यक्ष महोदय, प्रश्न तो उद्भुत हो रहा है, क्योंकि पार्वती नदी का ही प्रश्न है. अध्यक्ष महोदय, पार्वती नदी से पंचायतों को निशुल्क रेत का मामला है उसी पर मैं अपनी बात कह रहा हूं. अध्यक्ष जी मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी पूछना चाहता हूं कि उस पार्वती नदी पर जो स्टाप डेम बने हुये हैं जिनसे 100 गांव के लोग पानी लेते हैं अवैध उत्खननकर्ताओं ने रेत का उत्खनन करने के लिये, उस पानी को भी तोड़ दिया है.कार्यवाही तो तब हुई है जब यह प्रश्न जिले में पहुंचा है. मंत्री जी ने क्या कार्यवाही की उनके खिलाफ क्या आपने जेबीसी जब्त की, क्या उनके टेक्टर जब्त किये,क्या उन लोगों के खिलाफ कार्यवाही की है कृपया बताने की कृपा करें.

श्री राजेन्द्र शुक्ल -- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह प्रश्न उद्भुद तो नहीं होता है लेकिन यदि माननीय सदस्य ने सदन में कोई बात उठाई है तो आप हमें लिखित में देंगे तो यदि किसी ने नियमों का उल्लंघन किया है तो कार्यवाही करेंगे.

श्री गिरीश भण्डारी-- अध्यक्ष महोदय अंतिम प्रश्न कि अगर वह खदाने हैं तो क्या माननीय मंत्री जी उन खदानों की नीलामी की कार्यवाही करेंगे.

अध्यक्ष महोदय- वो प्रश्न ही नहीं है.

श्री गिरीश भण्डारी -- जब वह अवैध उत्खनन कर रहे हैं तो फिर क्या वह खदानें नीलाम हो जायेंगी ?

श्री राजेन्द्र शुक्ल - गुना जिले का यह प्रश्न है. गुना जिले में कुल मिलाकर के 25 खदानें है. उनकी नीलामी की गई थी. 7 खदानों की नीलामी सफल हो गई. 18 खदानों की जो नीलामी सफल नहीं हो पाई है उसको हम दुबारा आक्शन कर रहे हैं.

 

 

 

नवीन सिंचाई पंप कनेक्‍शनों का प्रदाय

9. ( *क्र. 4813 ) श्री रामसिंह यादव : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शिवपुरी जिले के बदरवास वितरण केंद्र के अंतर्गत सिंचाई पंपों के नवीन विद्युत कनेक्‍शनों हेतु अगस्‍त 2014 से दिसंबर 2015 तक राशि जमा करायी गयी है? यदि हाँ, तो किन-किन की कहाँ-कहाँ की कितनी-कितनी राशि कब-कब जमा करायी गई है? (ख) क्‍या जिन व्‍यक्तियों ने नवीन सिंचाई पंप कनेक्‍शनों हेतु राशि जमा करायी है? उनके द्वारा आवेदन प्रस्‍तुत किए गए हैं? यदि हाँ, तो कितने लोगों के द्वारा आवेदन प्रस्‍तुत किए गए? इनके प्राक्कलन कब किनके द्वारा स्‍वीकृत किए गए? यदि प्राक्कलन स्‍वीकृत नहीं हुए, तो राशि किस आधार पर जमा करायी गई? (ग) क्‍या जिन व्‍यक्तियों से नवीन सिंचाई पंप कनेक्‍शन हेतु राशि हजारों में वसूली गई और उन्‍हें रसीद केवल 506 रूपयें की दी गई, जिसकी शिकायतें प्राप्‍त हुईं थीं? यदि हाँ, तो कौन-कौन सी शिकायतें प्राप्‍त हुईं थीं? जिन आवेदकों से रसीद कम की देकर राशि अधिक ली गई है, तो उस पर क्‍या कार्यवाही हुई? क्‍या जिन व्‍यक्तियों ने नवीन सिंचाई पंप कनेक्‍शन हेतु राशि जमा कराई है, उनमें से कितनों को कनेक्‍शन प्रदान कर दिए गए हैं? कितने शेष हैं क्‍यों?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हाँ, शिवपुरी जिले के बदरवास वितरण केन्‍द्र के अंतर्गत सिंचाई पंपों के नवीन स्‍थाई विद्युत पंप कनेक्‍शनों हेतु अगस्‍त 2014 से दिसम्‍बर 2015 तक 499 कृषकों द्वारा राशि जमा कराई गई है, जिसकी प्रश्‍नाधीन चाही गई आवेदकवार, ग्रामवार जमा कराई गई राशि एवं राशि जमा कराने की दिनांक सहित जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र एवं अनुसार है। (ख) जी हाँ, सभी 499 कृषकों द्वारा नवीन सिंचाई पम्‍प कनेक्‍शन के लिए आवेदन प्रस्‍तुत किये गये हैं। 171 नवीन सिंचाई पंप कनेक्‍शनों के प्राक्‍कलन उप महाप्रबंधक/कार्यपालन यंत्री द्वारा स्‍वीकृत किये गये हैं, जिनकी स्‍वीकृति की दिनांक की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र अनुसार है। 328 कृषकों के प्रकरणों में लाईन विस्‍तार कार्य आवश्‍यक नहीं होने के कारण प्राक्‍कलन स्‍वीकृत नहीं किये जाकर उनकी राशि प्रबंधक/सहायक यंत्री द्वारा भार अनुमोदन स्‍वीकृति के आधार पर जमा कराई गई है, जिसकी कार्योत्‍तर स्‍वीकृति उपमहाप्रबंधक (संचालन/संधारण) शिवपुरी द्वारा प्रदान की गई है। भार अनुमोदन वाले उक्‍त प्रकरणों का विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र अनुसार है। (ग) जी नहीं, ऐसी कोई शिकायत प्राप्‍त नहीं हुई है। उक्‍त परिप्रेक्ष्‍य में कोई कार्यवाही किये जाने का प्रश्‍न नहीं उठता। जिन आवेदकों ने नवीन सिंचाई पंप कनेक्‍शन हेतु राशि जमा कराईं हैं, उन सभी आवेदकों को कनेक्‍शन प्रदान कर दिये गए हैं।

श्री रामसिंह यादव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि शिवपुरी जिले के बदरवास वितरण केन्द्र पर तत्कालीन कनिष्ठ यंत्री द्वारा अगस्त 2014-15 में नवीन स्थाई सिंचाई पंप कनेक्शन हेतु जिन किसानों ने ज्यादा पैसा देकर के रूपये 506 की रसीद प्राप्त की है. क्या संबंधित किसानों के बयान लेकर के मंत्री महोदय उन किसानों से ज्यादा ली गई राशि वापस करायेंगे. अध्यक्ष जी, वहां किसानों के साथ इतना अन्याय और भ्रष्टाचार हुआ है कि प्रत्येक कनेक्शन पर 8 से 10 हजार रूपये की वसूली की गई है. इसकी जांच करायेंगे और संबंधित किसानों से ज्यादा ली गई राशि वापस करवायेंगे.

श्री राजेन्द्र शुक्ल --माननीय अध्यक्ष महोदय, शिकायत पर कार्यवाही शुरू हो चुकी है. शिकायत मिलते ही जो तत्कालीन जूनियर इंजीनियर था उसको निलंबित भी कर दिया गया है. जैसे ही जांच के निष्कर्ष सामने आयेंगे उस पर माननीय सदस्य की मंशानुसार कार्यवाही हो जायेगी.

श्री रामसिंह यादव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी को जानकारी देना चाहूंगा कि जब किसानों ने मुझे फोन किये कि रूपये 506 की रसीद दी जा रही है और रूपये 8 से 10 हजार वसूल किये जा रहे हैं. तो मैंने महाप्रबंधक को पत्र लिखा तब इस कनिष्ठ यंत्री को निलंबित किया . मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि जिन किसानों से रूपये 506 की स्थाई पंप कनेक्शन हेतु राशि की मांग की गई है क्या इस राशि को प्राप्त करने हेतु कोई डिमाण्ड नोट जारी किया गया था, यदि डिमाण्ड नोट जारी नहीं किया गया था तो बगैर डिमाण्ड नोट के तत्कालीन कनिष्ठ यंत्री द्वारा रसीद कैसे काटी गई.

श्री राजेन्द्र शुक्ल -- इसी शिकायत के आधार पर उनको निलंबित किया गया है.

श्री रामसिंह यादव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, अंतिम प्रश्न मैं यह करना चाहता हूं.

अध्यक्ष महोदय-- अब नहीं, कार्यवाही भी हो गई उसकी जांच भी चल रही है. अब क्या बचा है.

लघु सिंचाई परियोजनाओं की स्‍वीकृति

10. ( *क्र. 5021 ) श्री नारायण सिंह पँवार : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या राजगढ़ जिले के विधानसभा क्षेत्र ब्‍यावरा के अंतर्गत पातलापानी तालाब, भगोरा तालाब, खेजड़ामहाराजा तालाब, जामी तालाब, भोजपुरिया बैराज, सुन्‍दरपुरा तालाब, बांसखों तालाब, मोरीखों तालाब, लुहारी तालाब, सोनकच्‍छ तालाब एवं कुण्‍डीखेड़ा तालाब लघु सिंचाई योजनाएं विभाग की सर्वेक्षित योजनाएं हैं? यदि हाँ, तो क्‍या उक्‍त सभी सर्वेक्षित योजनाएं साध्‍य होकर कम लागत में अत्‍यधिक क्षेत्र सिंचित करने वाली योजनाएं हैं? (ख) क्‍या शासन विधानसभा क्षेत्र ब्‍यावरा की महत्‍वपूर्ण लघु सिंचाई परियोजनाओं की स्‍वीकृ‍ति प्रदान करेगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) मोरिखो परियोजना को छोड़कर प्रश्‍नाधीन सभी परियोजनाएं सर्वेक्षित हैं। जी नहीं। प्रश्‍नाधीन सर्वेक्षित सभी परियोजनाओं का डूब क्षेत्र सैंच्‍य क्षेत्र की तुलना में अत्‍याधिक होने से परियोजनाएं तकनीकी आधार पर साध्‍य नहीं हैं। (ख) प्रश्‍नाधीन विधान सभा क्षेत्र में भोजपुलिया बैराज का साध्‍यता आदेश दिनांक 07.01.2016 को जारी किया गया है। डी.पी.आर. अंतिम नहीं होने से परियोजना की स्‍वीकृति अथवा निर्माण के संबंध में निर्णय लेने की स्थिति नहीं आई है। शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होते हैं।

श्री नारायण सिंह पंवार --माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं जल संसाधन मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि मेरे प्रश्न के उत्तर में उन्होंने एक योजना भोजपुरिया बैराज को छोड़कर के सभी को असाध्य बताया है. अनुरोध है कि बहुत लंबे समय पूर्व इसका सर्वे हुआ था. मैं मंत्री जी से आग्रह करूंगा कि फिर से इसका जमीनी सर्वे किया जाये. दूसरा प्रश्न यह है कि भोजपुरिया बैराज को साध्यता प्रदान की है उसके डीपीआर की स्वीकृति प्रदान की जाये. मंत्री जी पहले जो निर्देश दिये गये थे सुन्दरपुरा, सोनकक्ष यह ऐसी योजनायें हैं जिनका कार्यपालन यंत्री के द्वारा सर्वे किया जा चुका है, और साध्यता के लिये यह योग्य पाई गई हैं . मंत्री जी से निवेदन है कि इन योजनाओं को भी साध्यता की सूची में जोड़ते हुये साध्यता आदेश जारी करने का कष्ट करें..

अध्यक्ष महोदय-- आप सीधा प्रश्न पूछ लें.

श्री नारायण सिंह पंवार --अध्यक्ष महोदय, क्या माननीय मंत्री जी भोजपुरिया बैराज को जल्दी स्वीकृति प्रदान करेंगे.

श्री जयंत मलैया-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह भोजपुरिया बैराज जो है इसकी साध्‍यता के आदेश जनवरी 2016 में हो गये हैं और सर्वेक्षण डीपीआर बनाने के लिये 3 माह का समय लगता है. डीपीआर बनने के बाद ही स्‍वीकृति के संबंध में निर्णय लिया जा सकेगा.

श्री नारायण सिंह पंवार-- माननीय अध्‍यक्ष जी मेरा एक और प्रश्‍न है इसमें पूर्व में भी मेरे यहां ग्राम पातला पानी और जामी दो तालाब साध्‍यता की सूची में थे और उनकी स्‍वीकृति लगभग अंतिम दौर में थी किंतु वे भी अभी लंबित है. एक और सेमला पार्क बैराज की भी स्‍वीकृति साध्‍यता सूची में प्रदान कर दी गई थी किंतु वह भी डीपीआर के इंतजार में है. क्‍या सेमला पार्क बैराज को लेकर माननीय मंत्री जी अतिशीघ्र निर्देश प्रदान करेंगे.

श्री जयंत मलैया-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने जितनी भी लघु सिंचाई परियोजनाओं के बारे में उल्‍लेख किया है उन सबके बारे में यह सब असाध्‍य पाये गये हैं इनका या तो डूब क्षेत्र ज्‍यादा है या इनकी प्रति हेक्‍टेयर सिंचाई की लागत ज्‍यादा आ रही है इसलिये इनको नहीं कराया जा रहा है, एक जो साध्‍य पाया गया है उसकी कार्यवाही चल रही है.

 

अध्‍यक्ष महोदय-- प्रश्‍न क्रमांक 11, श्रीमती शकुन्‍तला खटीक

प्रश्‍न क्रमांक 11, श्रीमती शकुन्‍तला खटीक (अनुपस्थित)

जनप्रतिनिधियों से प्राप्‍त पत्रों पर कार्यवाही

12. ( *क्र. 1769 ) श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र. शासन सामान्‍य प्रशासन विभाग द्वारा जारी पत्र दिनांक 06 अगस्‍त 2012 एवं 27 नवम्‍बर 2015 के द्वारा माननीय सांसदों एवं विधायकों द्वारा लिखित पत्रों की पावती एवं पत्रों पर की गई कार्यवाही नियत समयावधि में देने, इन पत्रों के आवक-जावक की पंजी पृथक से संधारित करने एवं कार्यालय प्रमुखों द्वारा जनप्रतिनिधियों से प्राप्‍त पत्रों की मासिक समीक्षा के निर्देश दिये गये हैं? (ख) प्रश्‍नांश (क) के तहत प्रश्‍नकर्ता सदस्‍य द्वारा कटनी जिले के शासकीय जिला स्‍तरीय, ब्‍लॉक स्‍तरीय, तहसील स्‍तरीय एवं अन्‍य शासकीय कार्यालयों एवं विभागों को जनवरी 2014 से प्रश्‍न दिनांक तक कब-कब पत्र लिखे गये तथा पत्रों पर संचालित एवं की गई कार्यवाही से कब-कब अवगत कराया गया? (ग) प्रश्‍नांश (ख) के तहत शासकीय अधिकारियों/कार्यालयों को लिखित पत्रों पर संबंधितों द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई, कितने पत्रों पर किन-किन कारणों से कार्यवाही लंबित है, निराकृत पत्रों का क्‍या-क्‍या निराकरण किया गया? (घ) प्रश्‍नांश (क) से (घ) के परिप्रेक्ष्‍य में शासनादेश का उल्‍लंघन कर, सदस्‍य म.प्र. विधान सभा के द्वारा जनहित में लिखित पत्रों पर नियमानुसार कार्यवाही ना करने की कार्यशैली की सक्षम प्राधिकारी से जाँच करवाये जाने के आदेश कर समुचित कार्यवाही की जायेगी? यदि हाँ, तो कब तक, यदि नहीं, तो क्‍यों?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। (ख) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (ग) उत्‍तरांश '''' के प्रकाश में जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (घ) उत्‍तरांश '''' से '''' के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्री संदीप जायसवाल-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे द्वारा माननीय मंत्री महोदय से जो प्रश्‍न पूछा गया था, उसमें की गई कार्यवाही से कब-कब अवगत कराया गया और किन-किन कारणों से कार्यवाही लंबित है और क्‍या निराकरण किया गया, इसका जवाब मुझे प्राप्‍त नहीं हुआ है.

राज्‍य मंत्री सामान्‍य प्रशासन विभाग (श्री लालसिंह आर्य)-- माननीय अध्‍यक्ष्‍ज्ञ महोदय, उत्‍तर में सभी परिशिष्‍ट संलग्‍न हैं, माननीय सदस्‍य देख लें, सभी संलग्‍न हैं, कब-कब कार्यवाही की गई है, आपके टोटल 211 पत्र प्राप्‍त हुये हैं, उसमें से 161 का निराकरण हो गया है, 50 पर कार्यवाही प्रचलित है माननीय सदस्‍यगण.

श्री संदीप जायसवाल-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कब-कब अवगत करया गया, इसमें सिर्फ यह लिख दिया गया है कि अवगत कराया गया. मैं सामान्‍य प्रशासन विभाग का जो आदेश है जिसे स्‍वीकार किया गया है, मैं चाहूंगा कि कार्यालय प्रमुखों द्वारा जनप्रतिनिधियों से प्राप्‍त पत्रों की मासिक समीक्षा एवं आवक जावक की पृथक से पंजी संधारित करने का जो सामान्‍य प्रशासन विभाग का आदेश है, उसका क्रियान्‍वयन नहीं हो रहा है, उस संबंध में माननीय मंत्री महोदय जिले के कलेक्‍टर को आदेश देंगे, क्‍या.

श्री लालसिंह आर्य-- जी अध्‍यक्ष महोदय, आज ही हम संबंधित कलेक्‍टर को आदेश जारी कर देंगे.

 

सूखाग्रस्‍त तहसीलों में बिजली बिलों की वसूली पर रोक

13. ( *क्र. 5039 ) श्री गिरीश भंडारी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या माननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा प्रदेश में घोषित सूखाग्रस्‍त तहसीलों के ग्रामों में जहां फसलों में 50% से ज्‍यादा नुकसान हुआ, वहां बकाया बिजली बिलों की राशि वसूल नहीं करने की घोषणा की थी? (ख) प्रश्‍न की कंडिका (क) की उपलब्‍ध जानकारी अनुसार न‍रसिंहगढ़ विधान सभा क्षेत्र में ऐसे कितने ग्राम हैं, जहां फसलों में 50% ज्‍यादा नुकसान हुआ है? ग्रामवार जानकारी देवें। (ग) प्रश्‍न की कंडिका (ख) की उपलब्‍ध जानकारी अनुसार क्‍या इन ग्रामों में मा. मुख्‍यमंत्री जी की घोषणा अनुसार बकाया बिजली बिलों की वसूली नहीं की गई या ऊर्जा विभाग द्वारा मुख्‍यमंत्री जी की घोषणा को दर किनार करते हुए ग्रामों से ट्रांसफार्मर उतारे गये, किसानों के तार काट दिये गये? यदि हाँ, तो संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों पर क्‍या कार्यवाही की जावेगी? कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हाँ। (ख) कलेक्‍टर एवं तहसीलदार कार्यालय से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार नरसिंहगढ़ विधानसभा क्षेत्रांतर्गत आने वाले नरसिंहगढ़ एवं पचौर तहसील के क्रमश: 200 एवं 64, इस प्रकार कुल 264 ग्रामों में 50 प्रतिशत से ज्‍यादा फसल का नुकसान हुआ है। उक्‍त ग्रामों की तहसीलवार सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (ग) उत्‍तरांश '' के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍नाधीन सूखाग्रस्‍त ग्रामों में माननीय मुख्‍यमंत्रीजी की घोषणा अनुसार जारी राज्‍य शासन के आदेश दिनांक 22.12.2015 के परिपालन में ऐसे किसान जिनकी 50 प्रतिशत से अधिक फसल के क्षतिग्रस्‍त होने की सूची कलेक्‍टर द्वारा दी गई है, उनके 31 मार्च 2016 तक कृषि पंप के विद्युत बिल की बकाया राशि की वसूली की कार्यवाही स्‍थगित रखी गई है। अत: किसी के विरूद्ध कार्यवाही किये जाने का प्रश्‍न नहीं उठता।

श्री गिरीश भंडारी-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक सीधा सा प्रश्‍न है कि जो जबाव दिया है, वह ठीक है लेकिन क्‍या कृषि पम्‍पों के अलावा क्‍या ग्रामीण क्षेत्र के घरेलू कनेक्‍शनों को भी इस घोषणा में लिया जायेगा जो मुख्‍यमंत्री जी ने घोषणा की थी कि 50 प्रतिशत से अधिक फसल नुकसान होने वाले ग्रामों की बिजली वसूली के बिल स्‍थगित किये जायेंगे तो क्‍या उसमें कृषि पम्‍पों के अलावा घरेलू कनेक्‍शनों को भी माफ करने की घोषणा है.

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी हाल ही में मुख्‍यमंत्री जी ने एक समाधान योजना जनता को दी है जिसमें जो गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले घरेलू उपभोक्‍ता हैं और शहरों में जो नोटीफाइड झुग्‍गी झोपडि़यां होती हैं उसमें रहने वाले जो गरीब हैं उनका 100 प्रतिशत सरचार्ज माफ होगा और 50 प्रतिशत मूल बिल का भी माफ हो जायेगा और इनके अलावा जो आम उपभोक्‍ता हैं उनका 100 प्रतिशत सरचार्ज भी माफ हो जायेगा, यह गरीब कल्‍याण वर्ष के रूप में मनाने का फैसला माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने लिया है, इसके तहत घरेलू उपभोक्‍ताओं को यह बहुत बड़ी राहत की गई है, इसके शिविर लगने शुरू हो गये हैं और बड़ी संख्‍या में लोग आकर अपने प्रकरणों को निपटा रहे हैं, मई तक यह लागू रहेगी.

श्री गिरीश भंडारी-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा सीधा सा प्रश्‍न था कि जो मुख्‍यमंत्री जी ने 31 मार्च 2016 तक जिन गांवों में 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ है, उन गांवों में बिजली वसूली स्‍थगित करने का आदेश दिया था, यह घोषणा विधानसभा में की थी. मेरा सीधा सा प्रश्‍न है कि कृषि पम्‍पों के अलावा क्‍या जो घरेलू कनेक्‍शन हैं जिससे घर की लाइट जलाई जाती है.

अध्‍यक्ष महोदय-- आ गया प्रश्‍न.

श्री गिरीश भंडारी-- कहां आया है प्रश्‍न.

अध्‍यक्ष महोदय-- तो उत्‍तर तो ले लें.

श्री गिरीश भंडारी-- हां-हां उत्‍तर दे दें.

अध्‍यक्ष महोदय-- उन्‍होंने उसका विस्‍तार कर दिया, आप सीधा बता दीजिये.

श्री गिरीश भंडारी-- यह योजना 31 मार्च 2016 के बाद की है, मेरा माननीय मंत्री जी से यह निवेदन है कि जो आपने योजना बनाई है, मैं तो 31 मार्च 2016 तक क्‍या घरेलू कनेक्‍शनों की वसूली स्‍थगित करने की क्‍या कार्यवाही की जायेगी.

श्री राजेन्द्र शुक्ल--अध्यक्ष महोदय, सूखे के कारण जहां 50 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान हुआ है, उसमें सिर्फ कृषि पंपों पर राहत देने के लिए थी न कि घरेलू उपभोक्ताओं को.

श्री गिरीश भंडारी--अध्यक्ष महोदय,जब किसान खेती पर निर्भर है तो उसमें देना चाहिए. यह तो फिर मुख्यमंत्रीजी की आधी अधूरी घोषणा है.

अध्यक्ष महोदय-- भाषण नहीं. बैठ जाईये. प्रश्न का उत्तर आ गया है. इस विषय को किसी और समय में लीजिए.बैठ जाईये.

नर्मदा-सीप लिंक परियोजना का क्रियान्‍वयन

14. ( *क्र. 4567 ) श्री शैलेन्‍द्र पटेल : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सीहोर जिले में नर्मदा नदी और सीप नदी की लिंक परियोजना का कार्य किया जा रहा है? यदि हाँ, तो कार्य करने वाली कंपनी परियोजना लागत और परियोजना की वर्तमान स्थिति का ब्‍यौरा देवें? (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार क्‍या परियोजना के तहत भूमिगत नहर का निर्माण किया जा रहा है? यदि हाँ, तो कितनी लंबाई (दूरी) की नहर बनाई जा रही है और कार्य की स्थिति क्‍या है? (ग) परियोजना के तहत भूमिगत नहर निर्माण के लिए विस्‍फोटक का उपयोग किया जा रहा है? यदि हाँ, तो भूमिगत नहर निर्माण क्षेत्र व उसके आसपास निवासरत ग्रामीणों की सुरक्षा के क्‍या इंतजाम किए गए हैं?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) से (ग) जी नहीं। अत: शेष प्रश्‍न उत्‍पन्‍न नहीं होते हैं।

 

श्री शैलेन्द्र पटेल--अध्यक्ष महोदय, मेरे सवाल पूछने में थोड़ी सी त्रुटि हो गई. मैं उस त्रुटि को स्वीकार करता हूं. वास्तव में मैं नर्मदा-सीप लिंक परियोजना के संबंध में प्रश्न नहीं करना चाहता था मैं कोलार-सीप लिंक के बारे में प्रश्न करना चाहता था. अगर आप आज्ञा दें और मंत्रीजी उसका उत्तर देना मुनासिब समझे तो जवाब दे दें और अगर अभी नहीं दे सकते हैं तो बाद में मुझे लिखित में दे दें.

जल संसाधन मंत्री(श्री जयंत मलैया)--अध्यक्ष महोदय, सदस्य जो कुछ भी प्रश्न पूछना चाहें पूछ लें.

श्री शैलेन्द्र पटेल--अध्यक्षजी, मैं नर्मदा-सीप लिंक के स्थान पर कोलार-सीप लिंक के बारे में जानना चाहता था. अगर आप मुनासिब समझें तो उसका जवाब दे दीजिए.

श्री जयंत मलैया--आप प्रश्न पूछिये.

श्री शैलेन्द्र पटेल--अध्यक्षजी, मेरा सीधा सा प्रश्न यह था कि कोलार और सीप लिंक परियोजना का काम चालू है उसमें अभी तक कितनी लंबाई का काम पूरा हो गया. कितनी नहर बन गई और विस्फोट का जो काम चल रहा है, उससे सुरक्षा के विभाग ने क्या क्या उपाय किये हैं?

श्री जयंत मलैया--अध्यक्ष महोदय, सीप-कोलार लिंक परियोजना में सुरंग बनायी जा रही है और इस सुरंग की पूरी लंबाई 5.69 किमी है जिसमें से 4.7 किमी तक टनल बन गई है और शेष निर्माण कार्य प्रगति पर है.

श्री शैलेन्द्र पटेल--अध्यक्ष महोदय, सिर्फ छोटी सी बात है. समय का ख्याल रखते हुए मैंने माननीय मंत्रीजी से अनुरोध किया था कि बीच में इछावर के 8-9 गांव पड़ते हैं. अंडर ग्राऊंड टनल होने के कारण उनको फायदा नहीं हो पा रहा है. क्या उन किसानों के लिए भी विचार करेंगे जिनके खेतों के बीच से पानी जा रहा है?

श्री जयंत मलैया--अध्यक्ष महोदय, यह जो सीप नदी पर जल व्यपवर्तन की योजना बहाव के द्वारा कोलार जलाशय में ले जाने की व्यवस्था है. सभी जानते हैं कि कोलार से भोपाल के लिए भी पानी आता है. कोलार में पानी बहुत कम रहता है तो यहां सीप से 35 एमसीएम पानी कोलार में डाला जायेगा. यह जो योजना है, कोलार को भरने के लिए है, सिंचाई के लिए नहीं है.

श्री शैलेन्द्र पटेल--अध्यक्ष महोदय, बिलकुल छोटी सी बात करना चाहता हूं...

अध्यक्ष महोदय--मंत्रीजी ने उदारता से आपके प्रश्न का उत्तर दिया जबकि प्रश्न उद्भूत नहीं था और आपने भी उदारता से ही पूछा कि मंत्रीजी मुनासिब समझें तो जवाब दें. आप विषय समाप्त करें.

श्री शैलेन्द्र पटेल--अध्यक्षजी, मैं स्वीकार करता हूं और धन्यवाद देता हूं. अध्यक्ष महोदय मैं इतनी बात जानना चाहता हूं....

अध्यक्ष महोदय-- आप बोल दीजिए, जानिये मत.

श्री शैलेन्द्र पटेल--अध्यक्षजी, वहां का पानी जा रहा है. वहां बड़ा तालाब हो चाहे कोलार हो...

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया--अध्यक्षजी, शायद विधानसभा के इतिहास में पहली बार यह आया होगा कि इस प्रकार से प्रश्न उद्भूत ही नहीं हो रहा था प्रश्न ही गलत हो गया था उसके बाद भी प्रश्न का उत्तर आया !

अध्यक्ष महोदय-- मंत्रीजी ने उत्तर दिया लेकिन सदस्य ने भी उतनी ही सदाशयता से कहा कि 'आप देना चाहें तो' ऐसा भी नहीं होता. माननीय मंत्रीजी और सदस्य की उदारता के लिए धन्यवाद.

श्री शैलेन्द्र पटेल--अध्यक्ष महोदय, मैं इतना सा चाहता हूं कि उस क्षेत्र के लिए भी विचार कर लें और थोड़ा पानी मिल जायेगा तो वहां के किसान भी खेती के लिए सक्षम हो जायेंगे.

अध्यक्ष महोदय--अब नहीं.

प्रश्न क्रमांक--15 (अनुपस्थित)

प्रश्न क्रमांक--16 (अनुपस्थित)

अवैध उत्‍खननकर्ताओं के विरूद्ध दर्ज प्रकरणों पर कार्यवाही

17. ( *क्र. 4096 ) श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या मुरैना तहसील के ग्राम पड़ावली की भूमि सर्वे क्रमांक 1104, 1103, 1123, 1105 से माफिया लगातार अवैध उत्‍खनन कर रहे हैं? खनिज विभाग द्वारा लंबे समय से अनदेखी कर माफियाओं को प्रोत्‍साहित किया जा रहा है, शासन द्वारा अभी तक क्‍या कार्यवाही की गई? वर्ष 2014, 2015 की जानकारी दी जावे। (ख) क्‍या अरूण शर्मा द्वारा सर्वे नं. 1105 जो तालाब का किनारा है तथा सर्वे नं. 1123 जिसका किसी को ठेका नहीं होने की शिकायत की गई थी, लेकिन शिकायत के बावजूद भी संबंधितों के खिलाफ कार्यवाही नहीं करना विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत प्रदर्शित करता है? क्‍या शासन द्वारा ग्राम पड़ावली के किस-किस सर्वे के नंबर पर पत्‍थर निकालने की लीज़ दी गई है? सर्वे नंबर सहित पूर्ण जानकारी दी जावें।

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी नहीं। प्रश्‍नाधीन क्षेत्र पर वर्ष 2014 एवं वर्ष 2015 में अवैध उत्‍खनन के 04 प्रकरण दर्ज कर सक्षम न्‍यायालय में निराकरण हेतु प्रेषित किये गये हैं। प्रकरण का विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' में दर्शित है। (ख) जी हाँ। संबंधित शिकायत की जाँच खनिज विभाग एवं राजस्‍व विभाग द्वारा संयुक्‍त रूप से की गई है एवं अवैध उत्‍खननकर्ताओं के विरूद्ध प्रकरण दर्ज किये गये हैं, जिसका विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' में दर्शाया गया है। प्रश्‍नांश की शेष जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' में दर्शित है।

 

श्री सत्यपाल सिंह सिकरवार--अध्यक्ष महोदय, मैंने जो प्रश्न किया था उसके प्रश्नांश '' में मंत्रीजी ने उत्तर में कहा है कि कोई अवैध उत्खनन वहां पर जारी नहीं है. दूसरी बात यह स्वीकार भी किया है कि 4 प्रकरण अवैध उत्खनन के 2014-15 में बनाये गये. जो मैंने प्रश्न किया था उसमें मंत्रीजी ने स्वीकार किया है कि अरुण शर्मा जी ने वहां अवैध उत्खनन की शिकायत की है और राजस्व विभाग और खनिज विभाग का जो संयुक्त अमला था वह वहां पहुंचा और अवैध उत्खनन करने वालों के खिलाफ प्रकरण भी दर्ज किये गये. मेरा आपके माध्यम से मंत्रीजी से यही कहना है कि आज भी वहां पर अवैध उत्खनन जारी है और जिस जगह पर अवैध उत्खनन जारी है वह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा संरक्षित स्मारक है. ऐसे स्मारकों के पास अगर अवैध उत्खनन होता है. लोग बारुद लगाकर अवैध उत्खनन करते हैं तो राष्ट्रीय महत्व के जो स्मारक हैं, उनको नुकसान होगा. मैं मंत्रीजी से यह प्रश्न करना चाहता हूं कि क्या इनके खिलाफ कार्रवाई होगी या संयुक्त दल बनाकर इस स्थल का फिर जांच/परीक्षण करा लिया जायेगा?

श्री राजेन्द्र शुक्ल - अध्यक्ष महोदय, राष्ट्रीय महत्व के जो स्मारक हैं, उनको बचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसलिए हम यहां भोपाल मुख्यालय से किसी अधिकारी को भेजेंगे और संयुक्त दल बनाकर उसकी जांच भी कर लेंगे.

श्री सत्यपाल सिंह सिकरवार - बहुत-बहुत धन्यवाद.

प्रश्न संख्या 18 - (अनुपस्थित)

 

पेयजल संकट के निदान हेतु व्‍यय राशि

19. ( *क्र. 4746 ) श्री अनिल जैन : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा क्षेत्र निवाड़ी के अंतर्गत आने वाली नगर परिषद निवाड़ी, ओरछा एवं तरीचरकलां अंतर्गत पेयजल संकट दूर करने के लिए विभिन्‍न योजनाओं के तहत मदवार क्‍या-क्‍या कार्य किये जा रहे हैं तथा वित्‍तीय वर्ष में अब तक कितनी-कितनी राशि खर्च की जा चुकी है? योजनावार जानकारी दी जावे। (ख) क्‍या विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत नगर परिषदों में पेयजल की गई लाईनें टूटी पड़ी हैं, जिसकी वजह से प्रदूषित पानी का वितरण किया जा रहा है? यदि हाँ, तो वार्डवार इन लाईनों को कब तक सुधार दिया जायेगा? (ग) पेयजल परिवहन के लिये नगर परिषदों के द्वारा क्‍या-क्‍या इंतजाम किये गये हैं?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) जी नहीं। परन्‍तु समय-समय पर छोटी-मोटी टूट-फूट होती रहती है, जिसका नियमित संधारण कराया जाता रहता है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थि नहीं होता है। (ग) वर्तमान परिवेश में पेयजल परिवहन की आवश्‍यकता के दृष्टिगत की गई व्‍यवस्‍था का विवरण जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।

परिशिष्ट - ''तीन''

श्री अनिल जैन - अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्नांश (ग) में पेयजल परिवहन के लिए नगर परिषद के द्वारा क्या क्या इंतजाम किये गये हैं? टैंकर स्वीकृति प्रचलन में है, ऐसा मुझे जवाब प्राप्त हुआ है. मैं इस उत्तर से संतुष्ट नहीं हूं. अध्यक्ष महोदय, जो पेयजल टैंकर के लिए जो प्रचलन शब्द दिया गया, मैं जानना चाहता हूं कि प्रचलन शब्द का मतलब क्या होता है कि क्या कार्यवाही के रूप में मैं इसे देखूं, या महीनों तक इस शब्द से काम चल जाएगा, मैं माननीय मंत्री जी से इस बात का उत्तर चाहता हूं?

राज्यमंत्री, नगरीय विकास एवं पर्यावरण (श्री लाल सिंह आर्य) - अध्यक्ष महोदय, कोई भी कार्य हो पहले प्रचलन में ही आता है, इसके बाद ही कार्यवाही होती है. आपने जो दोनों-तीनों नगर पंचायतों का पूछा है, वहां पर परिवहन की आवश्यकता होगी तो उस पर भी कार्यवाही करेंगे.

श्री अनिल जैन - अध्यक्ष महोदय, मैं केवल निवाड़ी नगर पंचायत की बात जानना चाहता हूं. परिवहन के लिए दिनांक 29.12.15 को 8 इंची के 12 बोर की फाइलें नगर पंचायत के अधिकारियों द्वारा अध्यक्ष जी के पास भेजी गईं. लेकिन उनको बिना अनुमोदन के ही वापस कर दिया गया. दिनांक 25.1.16 को टैंकरों के परिवहन की भी फाइलें वहां के स्थानीय अध्यक्ष को भेजी गईं. लेकिन वे फाइलें भी लौटा दी गईं. यह पेयजल से जुड़ा मुद्दा है. यदि इन फाइलों पर महीने भर तक अनुमोदन नहीं होगा तो जनता को पानी देने के लिए हमारे पास और अन्य क्या व्यवस्था होगी? माननीय मंत्री जी इसका जवाब दे दें.

श्री लाल सिंह आर्य - अध्यक्ष महोदय, निवाड़ी में यदि किसी प्रकार का पेयजल संकट है वहां परिवहन की आवश्यकता होगी, हम परिवहन कराएंगे, जहां तक आपने अन्य फाइलों के बारे में बातचीत की है, यदि फाइलों में आम जनहित के मुद्दों को दरकिनार करने की कोशिश हो रही होगी तो हम नोटिस जारी करेंगे और शीघ्र कार्यवाही कराएंगे.

 

श्री अनिल जैन - धन्यवाद मंत्री जी.

प्रश्न संख्या 20 - (अनुपस्थित)

 

स्‍वच्‍छ भारत मिशन अंतर्गत शौचालय निर्माण

21. ( *क्र. 4336 ) श्री प्रहलाद भारती : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) स्‍वच्‍छ भारत मिशन के तहत नगरीय निकायों से घर-घर शौचालय निर्माण हेतु शासन ने कुल कितनी धनराशि इस वित्‍तीय वर्ष में स्‍वीकृत की है? ग्‍वालियर-चंबल संभाग की सभी निकायों की पृथक-पृथक जानकारी उपलब्‍ध करावें। (ख) ग्‍वालियर चंबल संभाग के कितने नगरीय निकायों में इस स्‍वीकृत राशि का उपयोग किया जा चुका है? निकायवार विवरण दें। (ग) क्‍या शौचालय निर्माण हेतु जारी निविदाओं में ठेकेदार रूचि नहीं ले रहे हैं? ग्‍वालियर-चंबल संभाग के कितने निकायों में इस कार्य की निविदायें एक से अधिक बार आमंत्रित की गयी हैं? ब्‍यौरा दें। (घ) क्‍या एक तरफ शौचालय निर्माण के लिये ठेकेदार रूचि नहीं ले रहे हैं, वहीं जिन निकायों में निविदाएं आ चुकी हैं, उन्‍हें नगरीय प्रशासन संचालनालय भोपाल, प्रशासकीय स्‍वीकृति नहीं दे रहा है? (ड.) ग्‍वालियर चंबल संभाग के ऐसे सभी निकायों की जानकारी उपलब्‍ध करावें, जिनकी निविदाएं नगरीय प्रशासन संचालनालय भोपाल में स्‍वीकृति के लिये लंबित हैं? निकायवार जानकारी उपलब्‍ध करावें। ये निविदायें कब भोपाल मुख्‍यालय में प्राप्‍त हुयी और जो लंबित हैं? उन्‍हें क्‍यों स्‍वीकृति से रोका गया है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) राशि रू. 162.75 करोड़। शेषांश की जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) एवं (ग) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (घ) जी नहीं। (ड.) निविदा आमंत्रित एवं निविदा स्‍वीकृत करने का अधिकार निकाय को होने से शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

परिशिष्ट - ''चार''

 

श्री प्रहलाद भारती - अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि प्रशासकीय स्वीकृति का अधिकार भले ही स्थानीय निकायों को होता हो, लेकिन वित्तीय स्वीकृति या अनुमोदन के लिए फाइल नगरीय प्रशासन संचालनालय भोपाल से ही की जाती है. मैं आपके माध्यम से पूछना चाहता हूं कि ग्वालियर चंबल संभाग में ऐसे कौन-कौन से निकायों की निविदाएं नगरीय प्रशासन भोपाल में स्वीकृति के लिए लंबित हैं?

राज्यमंत्री, नगरीय विकास एवं पर्यावरण (श्री लाल सिंह आर्य) - अध्यक्ष महोदय, नगर परिषद सेवढ़ा जिला दतिया, नगर परिषद राघौगढ़, विजयपुर जिला गुना, नगर परिषद साढ़ोरा जिला अशोकनगर, नगर परिषद विजयपुर जिला श्योपुर, इन 4 की स्वीकृति शेष है, शेष सबकी स्वीकृति दे दी गई है.

श्री प्रहलाद भारती - अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि बेराड़ की स्वीकृति भी लंबित है, बेराड़ मेरी विधान सभा की नगर परिषद है और शिवपुरी नगरपालिका की क्या स्थिति बनी, कहां से निविदा स्वीकृत हुई, कब प्रशासकीय स्वीकृति हुई, उसके बाद आपके यहां संचालनालय में क्या वह आई, वहां पर आपने क्या कार्यवाही की, क्या आपने मना कर दिया कि ज्यादा एसओआर से 10 परसेंट से अधिक दर थीं, इसलिए आपने उसको वापस कर दिया? क्या ऐसी स्थिति है? बेराड़ नगर परिषद की और शिवपुरी नगरपालिका की स्थिति स्पष्ट कर दें?

श्री लाल सिंह आर्य - अध्यक्ष महोदय, शौचालय निर्माण के संबंध में जो भी निविदाएं आमंत्रित की जा रही हैं, उसमें शासन का निर्देश है कि 10 परसेंट से ज्यादा ऊपर आएगी उसको हम स्वीकृति नहीं दे सकते. 10 परसेंट के अंदर जो आएगी उसको हम स्वीकृति देंगे. ये 4 शिवपुरी, कोलारस, बदरवास, करेरा, इनकी 10 परसेंट से ज्यादा आई है, इसके कारण से उसको स्वीकृति नहीं मिली है. जहां तक बेराड़ का मामला है, प्रकरण अपूर्ण होने के कारण निकाय को पुनः कार्यवाही के लिए पत्र भेजा गया है.

श्री प्रहलाद भारती -- अध्यक्ष महोदय नगर परिषद ने उसकी पूर्ति करके संचालनालय में भेज दिया है. मेरा एक प्रश्न और है माननीय मंत्री जी कि माननीय प्रधानमंत्री जी की यह महत्वपूर्ण योजना है, शौचालय निर्माण स्वच्छ भारत मिशन , उसमें 162.75 करोड़ रूपये की स्वीकृति हुई थी और पूरा वित्तीय वर्ष समाप्ति की ओर है. मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि क्या प्रगति हुई है साल भर में 162.75 करोड़ में से कितनी राशि विभाग व्यय कर पाया है, कितना काम हो पाया है , प्रगति कैसी रही है, क्या वह इस काम से संतुष्ट हैं. 51 निकाय की जो सूची दी है उसमें से स्वयं मंत्री जी देख लें कि उसकी क्या प्रगति रही है.

श्री दुर्गालाल विजय -- अध्यक्ष महोदय प्रहलाद भारती जी ने जो कहा है वह ही मेरा प्रश्न है कि नगरीय निकाय में और ग्रामीण अंचल में समग्र स्वच्छता अभियान के अंतर्गत शौचालय निर्माण का काम जो प्राथमिकता के आधार पर किया जाना है . चंबल और ग्वालियर संभाग में एक में भी काम नहीं हुआ है. मैं यहां पर श्योपुर के बारे में कहना चाहता हूं कि इसमें पूरा ग्वालियर चंबल संभाग है.

श्री लाल सिंह आर्य -- अध्यक्ष महोदय मैं दोनों का जवाब देता हूं. भीतरवार और नरवर में दो निकाय में हमारा काम पूरा हो चुका है. 27 में कार्य प्रगतिरत है अध्यक्ष महोदय आप चाहेंगे तो हम माननीय सदस्य को पूरी सूची उपलब्ध करा देंगे. हमने डबरा में 4 बार निविदाएँ आमंत्रित की हैं, पिछोर में 1 बार की है, आंतरी में 6 बार की है, बिलौआ में 2 बार की है और दतिया में 4 बार की है. नार्म्स के ऊपर रेट आयेंगे तो हम शासन के आदेशों के विरूद्ध नहीं जा सकते हैं. इसलिए जहां पर भी नगर पंचायत में या नगरपालिका में जहां भी जरूरत होगी दुबारा निविदा आमंत्रित करना होगी वहां पर निविदा आमंत्रित करेंगे.

प्रश्न संख्या -- 22 श्री यादवेन्द्र सिंह ( अनुपस्थित )

प्रश्न संख्या -- 23 श्री चन्दरसिंह सिसौदिया ( अनुपस्थित )

प्रश्न संख्या 24 श्रीमती अनीता नायक ( अनुपस्थित )

 

 

डूब प्रभावित मार्ग का डामरीकरण

25. ( *क्र. 1326 ) श्रीमती झूमा सोलंकी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) भीकनगांव विधान सभा क्षेत्रांतर्गत अपरवेदा डेम अन्‍तर्गत डूब मार्ग भीकनगांव से झिरन्‍या का वैकल्पिक मार्ग खोई से लार्इखेड़ी मार्ग का चयन किया जाकर नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा मार्ग निर्माण की स्‍वीकृति प्रदाय की गई है? (ख) क्‍या इस मार्ग निर्माण कार्य में डामर डालने हेतु प्रावधान नहीं है? क्‍या कारण है? जब नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा डेम बनाकर किसी डामर मार्ग जो दो जनपदों को जोड़ने वाला मार्ग हो उसे डुबाया जाता है तो उसके बदले उनके द्वारा डामर मार्ग बनाने की स्‍वीकृति क्‍यों नहीं ली गई? (ग) क्‍या नर्मदा घाटी विकास विभाग क्षेत्रवासियों की आवश्‍यकता एवं मांग को देखते हुए खोई से लाईखेड़ी मार्ग पर डामर डालने हेतु पुन: शासन से स्‍वीकृति प्राप्‍त करने हेतु कार्यवाही प्रस्‍तावित करेंगे?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी नहीं। अपरवेदा डेम से डूब प्रभावित भीकनगाँव-झिरन्‍या मार्ग के आंशिक भाग हेतु वैकल्पिक डामरीकृत मार्ग के रूप में शिवना से आभापुरी परिवर्तित मार्ग लंबाई 8.10 कि.मी. वर्ष 2009 में निर्मित किया गया है। खोई-लाईखेड़ी मार्ग पूर्व में कच्‍चा मार्ग था जिस पर क्षेत्रवासियों की मांग पर अतिरिक्‍त सुविधा के रूप में डब्‍ल्‍यू.बी.एम. मार्ग का निर्माण कार्य किया गया है। (ख) उत्‍तरांश के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी नहीं। नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा अतिरिक्‍त रूप से निर्मित खोई-लाईखेड़ी मार्ग को मूल विभाग, लोक निर्माण विभाग को सौंपे जाने की कार्यवाही प्रक्रिया में है। 

 

श्रीमती झूमा सोलंकी -- अध्यक्ष महोदय मैं मंत्री जी से पूछना चाहती हूं कि मेरे प्रश्न का जवाब जो आया है कि अपरवेदा डेम की डूब में जो रोड डामरीकृत रोड था वह आ गया है और उसके वैकल्पिक रोड के रूप में विभाग के द्वारा खोई से लाईखेड़ी रोड़ बनाया गया उसकी हालत बहुत खराब है. वह आज भी जर्जर स्थिति में है. यह दूसरे ब्लाक को जोड़ने वाला रोड है. इसके अभाव में आवागमन के जो साधन हैं. बसें और आमजन इस पर चलते हैं तो बहुत तकलीफ होती है. मैं चाहती हूं कि इस रोड का डामरीकरण हो.

श्री लाल सिंह आर्य -- माननीय अध्यक्ष महोदय जैसा कि माननीय सदस्या ने कहा है कि जो रोड डूब में आयी थी उसके विकल्प के लिए एक रोड डूब क्षेत्र से बाहर विभाग से बनायी गई थी, उसमें एक पार्ट दो तरफ से प्रधानमंत्री सड़क योजना के माध्यम से डामर की सड़क बनी है, एक छोटा पार्ट हमारा डब्ल्यू बी एम का बना हुआ है. चूंकि इस पर आडिट की आपत्ति आयी है इसलिए उस पर डामर का काम नहींकर पा रहे हैं.

श्रीमती झूमा सोलंकी -- माननीय अध्यक्ष महोदय इसमें माननीय मंत्री जी की ओर से जवाब पूरा नहीं है. जो आभापुरी मार्ग है उसके बारे में भी मैंने दिसम्बर 2014 में आपसे पूछा था तब भी आपने आश्वासन दिया था कि 4 माह के भीतर बना दिया जायेगा या तो आप सिवना से आभापुरी वाली सड़क को पूरा करा दें.

श्री लालसिंह आर्य -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह सड़क तो बनी हुई है, 8.10 किलोमीटर है.

श्रीमती झूमा सोलंकी -- अध्‍यक्ष महोदय, बनी हुई है लेकिन गड्ढों में रोड है और वहां रोड कहीं नहीं दिखाई देती है.

श्री लालसिंह आर्य -- अध्‍यक्ष महोदय, यदि उसमें रिपेयरिंग की कोई आवश्‍यकता होगी तो हम करवा देंगे.

श्रीमती झूमा सोलंकी -- अध्‍यक्ष महादय, उस रोड का डामरीकरण करवाना आवश्‍यक है. यह कोई लंबा-चौड़ा रोड नहीं है, माननीय मंत्री जी कृपया आश्‍वासन तो दे दें कि कार्य करवा देंगे.

अध्‍यक्ष महोदय -- वे कैसे आश्‍वासन दे दें. उनका बहुत स्‍पष्‍ट उत्‍तर पहले ही आ गया है.

श्रीमती झूमा सोलंकी -- अध्‍यक्ष महोदय, जिला योजना समिति की जब बैठक हुई थी तो उसमें प्रभारी मंत्री जी भी आए थे और उन्‍होंने आपत्‍ति भी ली थी कि कितना खराब रोड है.

श्री लालसिंह आर्य -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विधायक महोदया जैसा कह रही हैं कि सिवना से आभापुरी मार्ग क्षतिग्रस्‍त हो गया है, मैं आपको पूर्ण आश्‍वस्‍त करता हूँ कि मैं उसका परीक्षण करा लूंगा और अतिशीघ्र उसके रिपेयरिंग का कार्य और जहां रोड बनाने का काम होगा मैं करवा दूंगा.

तारांकित प्रश्‍नों का द्वितीय चक्र

अध्‍यक्ष महोदय -- अब प्रश्‍नों का द्वितीय चक्र होगा, पूर्व में अनुपस्‍थित रहे माननीय सदस्‍यों के नाम क्रमश: पुकारे जाएंगे, यदि वे उपस्‍थित होंगे तो अनुपूरक प्रश्‍न पूछे जा सकेंगे.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं कुछ कहना चाहता था, आपने मुझे समय भी दिया है, मैं यह कह रहा था कि प्रश्‍नों का द्वितीय चक्र प्रारंभ हो रहा है, आपको बधाई !!! और गौर साहब ने आपको स्‍मार्ट स्‍पीकर कहा है, अध्‍यक्ष महोदय, तो क्‍या इस विधान सभा को हम स्‍मार्ट विधान सभा मानें.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- अध्‍यक्ष जी, मानने वाली बात नहीं है यह विधान सभा स्‍मार्ट ही है. यह एशिया की सर्वश्रेष्‍ठ विधान सभा है. यहां के उदाहरण और नजीरें पूरे हिंदुस्‍तान में ही नहीं और जगह भी दिए जाते हैं.

श्री बाला बच्‍चन -- अध्‍यक्ष महोदय, जब स्‍मार्ट तरीके से मंत्रिगण, शासन और विभाग जवाब देंगे तब तो इस पर विचार किया जाएगा.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- आप तो श्री सुंदरलाल तिवारी को स्‍मार्ट कर दो बस.

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय प्रतिपक्ष के नेता जी, प्रश्‍नकर्ता सदस्‍य आ गए हैं उनको प्रश्‍न पूछ लेने दीजिए.

श्री लालसिंह आर्य -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, स्‍मार्ट विधान सभा में हमारे स्‍मार्ट अध्‍यक्ष के नेतृत्‍व में 25 प्रश्‍न पूरे किए गए हैं, बधाई हो माननीय अध्‍यक्ष महोदय.

अध्‍यक्ष महोदय -- धन्‍यवाद.

प्रश्‍न संख्‍या . 1 - (अनुपस्‍थित)

जमुनिया में जलाशय की स्‍वीकृति

3. ( *क्र. 5483 ) श्री नथनशाह कवरेती : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या छिंदवाड़ा जिले के विधानसभा क्षेत्र जुन्‍नारदेव अंतर्गत घोघरीढाना ग्राम पंचायत जमुनिया में जलाशय की स्‍वीकृति प्रदान की गई है? यदि हाँ, तो स्‍वीकृति के लिए किस-किस विभाग की अनुमति प्राप्‍त की जाती है? क्‍या किसी विभाग की अनु‍मति शेष है? यदि हाँ, तो किस विभाग की और क्‍यों? (ख) क्‍या शासन प्रश्‍नांश (क) के प्रकाश में समस्‍त कार्यवाही पूर्ण कर जलाशय को दी गई स्‍वीकृति उपरांत कार्य पूर्ण करेगा? यदि हाँ, तो वर्ष एवं कार्य करने की समय-सीमा बतावें? (ग) उक्‍त जलाशय के निर्माण में बाधा डालने के लिए कौन-कौन अधिकारी/कर्मचारी दोषी हैं? उनके खिलाफ क्‍या कार्यवाही की जायेगी?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जी हाँ। परियोजना से वनभूमि प्रभावित होने की दशा में भारत-सरकार से वन भूमि की अनुमति प्राप्‍त करना आवश्‍यक होता है। वन विभाग की अनुमति भारत-सरकार से प्राप्‍त नहीं हुई है। (ख) जी नहीं। परियोजना की लागत निर्धारित वित्‍तीय मापदण्‍ड से बहुत अधिक होने के कारण परियोजना असाध्‍य हो गई है। शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होते हैं। (ग) उक्‍त '''' एवं '''' उत्‍तर के प्रकाश में किसी अधिकारी के दोषी होने की स्थिति नहीं है। शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होता है।

श्री नथनशाह कवरेती -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा जुन्‍नारदेव विधान सभा का प्रश्‍न है. जुन्‍नारदेव विधान सभा में बिलावर पंचायत के घोघरीढाना में जल संसाधन विभाग के द्वारा जो बांध बनाया गया है, इसको करीब 5-6 वर्ष हो गए हैं और उसमें लीकेज़ है और वहां पर अभी तक नहर का काम भी चालू नहीं हुआ है तो मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूँ कि कौन से ठेकदार हैं जिन्‍होंने अभी तक नहर का काम चालू नहीं किया है और डेम में भी लीकेज है.

श्री जयंत मलैया -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जिसका उल्‍लेख किया है वह मुझे लिखकर दे दें, मैं करा दूंगा.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप लिखकर दे दीजिए.

श्री नथनशाह कवरेती -- अध्‍यक्ष महोदय, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

प्रश्‍न संख्‍या. 11 - (अनुपस्‍थित)

प्रश्‍न संख्‍या. 15 - (अनुपस्‍थित)

प्रश्‍न संख्‍या. 16 - (अनुपस्‍थित)

प्रश्‍न संख्‍या. 18 - (अनुपस्‍थित)

प्रश्‍न संख्‍या. 20 - (अनुपस्‍थित)

प्रश्‍न संख्‍या. 22 - (अनुपस्‍थित)

प्रश्‍न संख्‍या. 23 - (अनुपस्‍थित)

प्रश्‍न संख्‍या. 24 - (अनुपस्‍थित)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- अध्‍यक्ष जी, विपक्ष के अधिकांश साथी प्रश्‍न पूछने के बाद अनुपस्‍थित रहते हैं, आपने अभी इतने सारे नाम पढ़े और सभी वरिष्‍ठ सदस्‍य है, ऐसा भी नहीं है कि श्री अजय सिंह जी, डॉ. गोविन्‍द सिंह जी कनिष्‍ठ सदस्‍य हैं. आपकी कोई व्‍यवस्‍था आनी चाहिए इस पर.

अध्‍यक्ष महोदय -- कोई व्‍यवस्‍था नहीं है. आज की प्रश्‍नोत्‍तर-सूची में सम्‍मिलित सभी 25 तारांकित प्रश्‍नों का दूसरा चक्र भी निर्धारित समय से पूरा होने से अब मैं कार्यसूची में निहित अन्‍य विषय लेता हूँ.

 

 

 

 

 

 

(प्रश्‍नकाल समाप्‍त)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

11.25 बजे नियम 267-क के अधीन विषय

श्री सुन्दरलाल तिवारी(गुढ़)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, हमने विशेषाधिकार हनन का एक नोटिस दिया है.

अध्यक्ष महोदय-- आपने दिया है. उसके बारे में यहां मत पूछिये.

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- अध्यक्ष महोदय, हम यह चाहते हैं कि मैं आपका ध्यान उस विषय पर आकर्षित करूं.

अध्यक्ष महोदय-- अभी उस पर विचार तो करने दें आप. आपने कल ही तो दिया है.

उप नेता प्रतिपक्ष(श्री बाला बच्चन)--माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे भी बोलना है,उसके बाद आपको समय देंगे.

वन मंत्री(डॉ. गौरीशंकर शेजवार)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं यह जानना चाहता हूँ कि कोई भी विशेषाधिकार की सूचना विधानसभा में किसी सदस्य ने दी तो विधानसभा में माननीय अध्यक्ष जी ने उस पर क्या कार्यवाही की, सदन में उसकी चर्चा यहां नहीं हुई, इसके पहले ही क्या हम अखबारों में वक्तव्य दे सकते हैं क्या और क्या यह उचित है. क्या यह विधानसभा के सदन की अवमानना नहीं है. सुन्दरलाल जी तिवारी ने इस विषय को अखबारों में छपवाया है और अखबारों में मैंने पढ़ा और अखबार पढ़ के मुझे यह जानकारी मिली लेकिन सदन में इसकी चर्चा नहीं हुई. माननीय विधानसभा अध्यक्ष ने इस पर कहीं कोई संज्ञान नहीं लिया और इसके पहले अखबारों में छपवाना क्या यह सदन की अवमानना नहीं हैं क्या, अध्यक्ष महोदय, यह मैं आपसे जानना चाहता हूँ.

अध्यक्ष महोदय-- उन्होंने सूचना दी है. उस पर कोई चर्चा नहीं है. मैंने श्री कोठार जी को बुलाया है. आप उनको बोलने दें.

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने यह बात कही है.

अध्यक्ष महोदय-- आपसे जवाब मांगा क्या उऩ्होंने? मुझसे पूछा है. आप बैठ जाइये.

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- मेरे ऊपर लांछन लगाया गया है.

अध्यक्ष महोदय-- तिवारी जी जो बोल रहे हैं,बिलकुल अलाऊ नहीं करेंगे. उऩ्होंने मुझसे पूछा. आप अनुमति तो लीजिए. (व्यवधान) तिवारी जी बहुत व्यवधान कर रहे हैं,यह उचित नहीं है बिलकुल.

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- अध्यक्ष महोदयमंत्री जी ने यहां वक्तव्य दिया है,बोला है

अध्यक्ष महोदय-- तिवारी जी,अब आप मुझे मजबूर मत करिये. आप दूसरे सदस्यों को बोलने दीजिए

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने बोला है. क्या आपने मंत्री जी को अनुमति दी थी.

अध्यक्ष महोदय-- आपको अनुमति नहीं दे रहे हैं. उनको अनुमति दी थी. आप बैठ जाइये कृपया.

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- अध्यक्ष महोदय, मेरे खिलाफ मंत्री जी ने आरोप लगाया है इसलिए हम अपनी बात कहना चाहते हैं.

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, मैंने पूछा ही नहीं आपसे आरोप का उत्तर. आप बैठ जाइये. मैं श्री सुन्दरलाल तिवारी जी को निर्देशित करता हूँ कि वह अपना स्थान ग्रहण करें.आप यदि नहीं मानेंगे तो मुझे कड़ी कार्यवाही करना पड़ेगी. श्री सुन्दरलाल तिवारी आप बैठेंगे या नहीं.

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- हम बैठेंगे लेकिन मंत्री जी ने हम पर आरोप लगाया है(व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय‑-- आप बैठ जाइये पहले. पहले आप बैठिये. कोई नहीं बोलेगा.

श्री कुंवरजी कोठार(सारंगपुर)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, दिनांक 8.3.16 को शून्यकाल में सारंगपुर में लड़का गायब होने का असत्य आरोप मेरे विपक्षी पार्टी के साथी नरसिंहगढ़ विधायक द्वारा लगाया गया था जो कि असत्य एवं निराधार आरोप है और कल लड़का बरामद हुआ है. वह उन्हीं की पार्टी के द्वारा उनके कार्यकर्ताओं के द्वारा उसको गायब किया गया था. ऐसे असत्य आरोप इस पवित्र सदन में लगाने वाले के खिलाफ भी कार्यवाही होना चाहिए मेरा आपके माध्यम से गृहमंत्री जी से निवेदन है कि इस कांड में जो भी पदाधिकारी लिप्त है ..(व्यवधान)... कांग्रेस पार्टी के जो भी कार्यकर्ता पदाधिकारी लिप्त हैं उनके विरुद्ध जांच करायें उन पर कार्यवाही होना चाहिए....(व्यवधान)...इसकी सदन में निंदा होना चाहिए.

श्री गिरीश भंडारी-- यह गलत आरोप लगा रहे हैं..(व्यवधान)... यह समाचार पत्रों में छपा है कि विधायक के दबाव में...(व्यवधान)... कार्यवाही की गई, वह छात्र परीक्षा नहीं दे पाया यह मैं आरोप लगा रहा हूं और अभी भी उस आरोप पर कायम है, उस छात्र ने 2 मार्च को अपनी परीक्षा नहीं दी, मैं इस बात के लिए आरोप लगा रहा है और विधायक के दबाव में उस लड़के के खिलाफ 151 की कार्यवाही की गई. यह असत्य आरोप लगा रहे हैं. एक विधायक पर यह लोग इस तरह से आरोप लगा रहे हैं.यह पेपरों में समाचार छपा हुआ है.

श्री जितू पटवारी-- यह बहुत निंदनीय अपराध है .

श्री के.के. श्रीवास्तव-- यह पूरे सदन को गुमराह कर रहे हैं...(व्यवधान)...मिथ्या भाषण किया है.

श्री गिरीश भंडारी-- मैं सही आरोप लगा रहा हूं और आज भी उस पर कायम हूं.

अध्यक्ष महोदय-- (सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के कई माननीय सदस्यों के खड़े होकर एक साथ बोलने पर) आप सभी लोग बैठ जाएं कृपया , बात आ गई है रिकार्ड में.

श्री गिरीश भंडारी-- मैं आरोप पर कायम हूं उस लड़के के खिलाफ 151 की कार्यवाही की विधायक द्वारा दबाव बनाया गया, वह लड़का परीक्षा नहीं दे पाया. और वह चार दिन में मिला है...(व्यवधान)....मैं इस आरोप पर कायम हूं.

श्री कुंवरजी कोठारइसकी जांच कराई जाए.

अध्यक्ष महोदय--- आप सभी लोग बैठ जाइए.

श्री जितू पटवारी--- अध्यक्ष महोदय, जिस तरह से मैं रोज एक घटना सुनाता हूं, बताता हूं. ...(व्यवधान)...

अध्यक्ष महोदय-- आपकी बात कल आ गई है ,रोज नहीं बोलने देंगे, क्या आप रोज बोलेंगे . श्री बाला बच्चन अपनी बात कहें.

डॉ. नरोत्तम मिश्र--- यह लगातार सनसनी फैलाने के लिए , पेपर में छपवाने के लिए इस तरह से बात करते हैं कि महिला जेल में गर्भवती हो गई पूरी असत्य जानकारी दे रहे हैं. इनकी हर बात असत्य निकल जाती है. ...(व्यवधान)...

श्री जितू पटवारीएक व्यक्ति को, मजदूर पर मुरम डाल दी फिर रोलर चला दिया और सड़क बना दी क्या यह छोटी मोटी घटना है.

अध्यक्ष महोदय-- कृपया आप बैठ जाए , आ गया समाचार अखबार में.

उपनेता प्रतिपक्ष(श्री बाला बच्चन)माननीय अध्यक्ष महोदय, आज पूरे प्रदेश में पांच लाख से अधिक कर्मचारी हड़ताल पर हैं, पंचायत के सचिव हैं, रोजगार सहायक हैं, संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी हैं और मैं आपको बताना चाहता हूं कि कसरावद में कल ही एक रोजगार सहायक ने आत्महत्या की है और लगभग एक लाख रोजगार सहायकों को पद से हटा दिया गया है और 1 हजार से ज्यादा इस्तीफा देने की तैयारी में है. पिछली बार अतिथि शिक्षकों ने यहाँ पर आंदोलन किया था उन पर लाठीचार्ज सरकार ने कराया है. हम यह चाहते हैं कि पांच लाख कर्मचारी प्रदेश के हड़ताल पर हैं , पूरा शासकीय काम ठप्प पड़ा है, सरकार को इस पर विचार करना चाहिए और आपके द्वारा सरकार से जवाब आना चाहिए और उनकी मांगों को सुना जाये और फिर सुचारू रूप से प्रदेश काम कर सके इस ओर हमारा सरकार से आग्रह है कि जिन मुद्दों को लेकर वह हड़ताल कर रहे हैं, उनको सुने, उनका निराकरण कराये और उसके बाद सुचारू रुप से प्रदेश काम करें ऐसा आग्रह है. ...(व्यवधान)....संसदीय कार्यमंत्री जी बैठे हैं, मंत्रीगण भी बैठे है आप उनको निर्देश दें ..इस पर सरकार का वक्तव्य आना चाहिए. जवाब आना चाहिए. ...(व्यवधान)...

अध्यक्ष महोदय--- आपकी बात आ गई है.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

11.34 बजे पत्रों का पटल पर रखा जाना

मध्यप्रदेश पुलिस हाऊसिंग कार्पोरेशन, लिमिटेड, भोपाल का तैंतीसवां वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखा वर्ष 2013-2014

 

गृहमंत्री(श्री बाबूलाल गौर)-- अध्यक्ष महोदय, मैं, कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 619-क की उपधारा (3) (ख) की अपेक्षानुसार मध्यप्रदेश पुलिस हाऊसिंग कार्पोरेशन, लिमिटेड, भोपाल का तैंतीसवां वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखा वर्ष 2013-2014 पटल पर रखता हूं. ..(व्यवधान)....

 

 

 

 

11.35 बजे बहिर्गमन

सरकार के कर्मचारी विरोधी रवैये के विरोध में सदन से बहिर्गमन

 

 

 

श्री जितू पटवारी-- अध्यक्ष महोदय, कोई भी नहीं बचा है, इस सरकार से कर्मचारी इतना निराश और उदास है. यह कर्मचारी विरोधी सरकार है...(व्यवधान)... कर्मचारी आप लोगों को माफ नहीं करेगा.कर्मचारी , शिक्षक, बेरोजगार, युवा सब आपके विरोध में है. ..(व्यवधान)...

डॉ. नरोत्तम मिश्र--- सब विरोध में हैं , तब 28 हजार से हार रहे हो.

श्री बाला बच्चन-- कर्मचारी विरोध कर रहे हैं..(व्यवधान)... हम इसके विरोध में बहिर्गमन करते हैं.

 

 

 

(श्री बाला बच्चन,उपनेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यों द्वारा कर्मचारी विरोधी सरकार की बात कहते हुए सदन से बहिर्गमन किया गया)


 

श्री निशंक कुमार जैन-- माननीय अध्यक्ष महोदय, इसी सदन में...

अध्यक्ष महोदय-- भाषण नहीं दें आप सिर्फ सूचना पढें.

श्री निशंक कुमार जैन-- बिल्कुल. भाषण नहीं...

अध्यक्ष महोदय-- ध्यानाकर्षण में यह एलाऊ नहीं है. यह जो लिखा है वह पढ़ें.

श्री निशंक कुमार जैन-- अध्यक्ष महोदय, पढ़ तो रहा हूँ पढ़ने के पहले थोड़ा मामला जमा तो लूँ.

अध्यक्ष महोदय-- इसके बाद में जब मंत्री जी का उत्तर आ जाएगा...

 

 

(1) विदिशा जिले के मजराटोलों को राजस्व ग्राम घोषित न किया जाना.

श्री निशंक कुमार जैन(बासौदा)-- माननीय अध्यक्ष महोदय,

राजस्व मंत्री(श्री रामपाल सिंह)-- माननीय अध्यक्ष महोदय,

अध्यक्ष महोदय-- भाषण नहीं देंगे, सिर्फ सीधा प्रश्न पूछेंगे.

श्री निशंक कुमार जैन-- अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से आपकी विधान सभा क्षेत्र के एक गाँव की ओर माननीय मंत्री जी का ध्यानाकर्षित करना चाहता हूँ. मैं अभी वहाँ रिश्तेदारी में गया था. तवा नगर जिसके नाम पर इतना बड़ा डेम है वह आपकी विधान सभा क्षेत्र में आता है और....

अध्यक्ष महोदय-- अभी नहीं है, पहले था.

श्री निशंक कुमार जैन-- मजरा टोला है. उसी को राजस्व ग्राम घोषित नहीं किया गया.

अध्यक्ष महोदय-- अभी विधान सभा में नहीं है, पर पहले था.

श्री निशंक कुमार जैन-- पुरानी विधान सभा में था. अध्यक्ष महोदय, जो माननीय मंत्री जी ने कहा....

श्री जसवन्त सिंह हाड़ा-- अध्यक्ष महोदय, पूरी असत्य बात करते हैं. आप स्वयं बोल रहे हैं कि पहले था और अब नहीं है. ये हर जानकारी असत्य देते हैं. ये इनका काम ही है.

अध्यक्ष महोदय-- निशंक जी, आप पूछ लें.

श्री निशंक कुमार जैन--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्रीजी को जो रिपोर्ट दी गई है या तो वह असत्य है या जो विभिन्न पंचायतों द्वारा मुझे रिपोर्ट दी गई है वह भी शासकीय ऐजेंसी है. शासन का नियम है कि जिस मजरे टोले की आबादी 200 है और वह मूल गांव से 2 किलोमीटर दूर होगा तो उस मजरा टोला को राजस्व ग्राम घोषित किया जाएगा. बासौदा विधान सभा क्षेत्र में ग्यारसपुर में कुल 20 मजरा टोला हैं जिनमें से 13 मजरा टोला शासन के नियमों की पात्रता में आते हैं 200 से अधिक आबादी है 2 किलोमीटर से ज्यादा है इसी तरह से त्योंदा तहसील में 7 मजरा टोला राजस्व ग्राम बनने की श्रेणी में हैं.

अध्यक्ष महोदय, दुर्भाग्य इस बात का है कि बासौदा तहसीलदार ने खुद मुझसे कहा कि बासौदा तहसील में एक भी मजरा टोला नहीं है जबकि 7 मजरे टोले हैं उनमें से 4 मजरे टोले ग्राम बनने की स्थिति में हैं. मंत्रीजी से अनुरोध करना चाहूंगा कि जो शासकीय रिकार्ड मेरे पास है जो कि पंचायत सचिवों द्वारा दिया गया है उसको आधार मानकर यदि इन मजरा टोलों को राजस्व ग्राम घोषित करने का कष्ट करेंगे तो शासन की जो मूलभूत योजना है चाहे सड़क की हो, चाहे अटल ज्योति की हो, चाहे पीएचई की हो उनका लाभ मिल जायेगा. मैं चाहूंगा कि माननीय मंत्रीजी इस मामले में घोषणा कर दें.

श्री रामपाल सिंह‑‑माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रश्न भी उन्होंने कर लिया उत्तर भी उन्होंने दे दिया. पूरा विवरण उन्होंने रख दिया है. लेकिन मेरा निवेदन यह है कि आंकड़ें आपने सरपंचों, पंचायत सचिवों से एकत्रित किए यह अच्छी बात है. मध्यप्रदेश सरकार ने पहल की है गांव हम बना रहे हैं विदिशा में भी हमने काफी गांवों को राजस्व ग्राम घोषित किया है. माननीय विधायक जी के क्षेत्र में भी गांव हैं उन्होंने 30 गांवों का जिक्र किया है. जनगणना 2011 के मान से परीक्षण कर लेंगे. जिस तरह से गंज बासौदा की आपको चिन्ता है उससे चार गुना चिंता हमें है वहां से माननीय मुख्यमंत्रीजी सांसद रहे हैं मैं भी रहा हूं. मेहनत करके देख लेंगे कि वे ग्राम मापदंड में आते हैं क्या. मापदंडों को समझने की बात है कहीं दो किलोमीटर है कहीं जनसंख्या कम है और कहीं पर जमीन कम है. भू-राजस्व संहिता के ऐसे 2-3 मापदंड बने हुए हैं यह सब मापदंड इकट्ठे होना भी एक संयोग होता है संयोग बनाने की कोशिश करेंगे और माननीय विधायक जी की जो चिंता है उस चिंता में मैं भी शामिल हूं उसको पूरा करने की हम कोशिश करेंगे.

श्री निशंक कुमार जैन--माननीय मंत्रीजी ने कहा है वे हमारे सांसद रहे हैं, माननीय मुख्यमंत्रीजी चार बार सांसद रहे हैं. माननीय मंत्रीजी ने जो कहा उसको उनके लिये धन्यवाद भी दूंगा कि आपने कम से कम स्वीकार तो किया. 34 मजरे टोलों में से 23 मजरे टोले इस श्रेणी में आ रहे हैं कि उनको राजस्व ग्राम बनाया जा सकता है मैं 34 का नहीं बोल रहा हूँ. जो दो किलोमीटर का नियम है और 200 की जनसंख्या है मैं उसी की बात कर रहा हूं. मंत्रीजी आप कहें तो पूरे गांव को इकट्ठा कर लें और जैसे क्लास में हाजिरी लगाते हैं ऐसे पूरी जनसंख्या को खड़ा कर लें आप अपनी गाड़ी का माइलोमीटर चालू कर लो.

अध्यक्ष महोदय--आपकी बात आ गई है अब आप समाप्त करें. मंत्रीजी ने आश्वस्त भी कर दिया है.

श्री रामपाल सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह उसी गांव में इस तरह से जायें और उस तरफ से आ जायें ऐसा न करें सीधे रोड से जाना पड़ेगा. परीक्षण करा लेंगे. (हंसी)

 

 

 

 

 

 

 

11.43 बजे

दमोह जिले के ग्राम सूखा में स्थित ट्यूबवेल से जहरीली गैस के

ब्लास्ट से महिला की मौत होना.

श्री लखन पटेल (पथरिया)-- माननीय अध्यक्ष महोदय,

श्री बाबूलाल गौर(गृह मंत्री) :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

श्री लखन पटेल:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूं कि आसपास के जो गांव है वहां पर यही स्थिति है कि ट्यूबवेल में पानी के साथ साथ गैस निकलती है और कई बार पानी में भी आग लग जाती है. वहां पर 10-12 गांव इस प्रकार के हैं जो मैंने अपने ध्‍यानाकर्षण में उल्‍लेखित किये हैं. मैं आपके माध्‍यम से अनुरोध करना चाहता हूं कि क्‍या वहां पर जियोलाजिकल उच्‍चस्‍तरीय टीम बनाकर जांच करा देंगे. अध्‍यक्ष महोदय, मेरा दूसरा प्रश्‍न यह है कि दोनों मृतकों को क्‍या मुआवजे की घोषणा करेंगे.

श्री बाबूलाल गौर :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय विधायक ने कहा है कि हम टीम बनाकर जांच करा लेंगे. जहां तक सहायता राशि का है. वह इस प्रकरण के अन्‍दर आता नहीं है, क्‍योंकि उन्‍होंने बीड़ी जलायी और पूरा कमरा बंद था, वहां पर रोशनदान भी नहीं था. उसके कारण वहां पर जो ज्‍वलनशील पदार्थ है उसमें आग लग गयी. फिर भी इसमें मुआवजा नहीं दे रहे हैं. फिर भी मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी के स्‍वेछानिधि से 25 25 हजार रूपये दोनों मृतक परिवार को और जो घायल हुए हैं उनको 10 हजार रूपये दिया जायेगा.

श्री लखन पटेल :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अनुसूचित जाति का परिवार है, यदि मुआवजा थोड़ा और बढ़ा देंगे तो ज्‍यादा अच्‍छा रहेगा.

अध्‍यक्ष महोदय :- माननीय मंत्री जी ने बोल दिया है कि और मुआवजे की घोषणा कर दी है और जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया की टीम भी जायेगी.

श्री लखन पटेल :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुआवजा राशि थोड़ी और बढ़ा देंगे तो कृपा होगी.

अध्‍यक्ष महोदय :- नहीं अब नहीं आपकी बात आ गयी है.

 

 

याचिकाओं की प्रस्‍तुति

अध्‍यक्ष महोदय:- आज की कार्यसूची में सम्मिलित सभी याचिकाएं प्रस्‍तुत की हुई मानी जायेंगी.

अध्‍यक्ष महोदय :- आपका कोई विषय नहीं है. श्री सुन्‍दर लाल तिवारी जो भी बोल रहे हैं वह कुछ भी नहीं लिखा जायेगा.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी :(x x x)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

मंत्री का वक्तव्य

तारांकित प्रश्न संख्या 1(क्रमांक 2268) के उत्तर के परिशिष्ट में संशोधन संबंधी वक्तव्य

अध्यक्ष महोदय - अब माननीय श्री जयंत मलैया,जल संसाधन मंत्री दिनांक 15सितम्बर,2015 को पूछे गये तारांकित प्रश्न संख्या 1(क्रमांक2268) के उत्तर के परिशिष्ट में संशोधन करने के संबंध में वक्तव्य देंगे.

श्री जयंत मलैया,जल संसाधन मंत्री - माननीय अध्यक्ष महोदय, दिनांक 15.12.2015 की प्रश्नोत्तर सूची के पृष्ठ क्रमांक 01 में मुद्रित तारांकित प्रश्न संख्या 01(क्रमांक2268) में, निम्नानुसार संशोधन करना चाहता हूं:-

प्रश्नोत्तर सूची में मुद्रित उत्तर के भाग "" एवं "" में संलग्न परिशिष्ट-1 के संशोधित परिशिष्ट में विगत 03 वर्षों में रबी सिंचाई के कालम नं.2 में 2012-13,कालम 03 में 2012-13

के स्थान पर निम्नानुसार संशोधित उत्तर(परिशिष्ट) पढ़ा जावे:-

कालम 02 में 2013-14

कालम 03 में 2014-15

श्री सुन्दरलाल तिवारी - (XXX)

अध्यक्ष महोदय - मैं आपकी बात का उत्तर दे रहा हूं. माननीय मंत्री जी ने जो कुछ कहा उसका संज्ञान उन्होंने आसन्दी को संबोधित करके कहा था उसका संज्ञान नहीं लिया है इसीलिये उत्तर देने की कोई आवश्यकता नहीं है. अब आप बैठ जाएं.

श्री सुन्दरलाल तिवारी - (XXX)

अध्यक्ष महोदय - आपकी बात का उत्तर दे दिया मैंने. अब बात समाप्त हो गई. कृपा करके सहयोग करें.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

वर्ष 2016-17 की अनुदानों की मांगों पर मतदान (क्रमश:)

 

(1) मांग संख्या - 44 उच्च शिक्षा

मांग संख्या - 47 तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास

मांग संख्या - 70 तकनीकी शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग से संबंधित विदेशों से

सहायता प्राप्त परियोजनाएं.

उच्च शिक्षा मंत्री(श्री उमाशंकर गुप्ता) - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं,राज्पाल महोदय की सिफारिश के अनुसार प्रस्ताव करता हूं कि 31 मार्च,2017 को समाप्त होने वाले वर्ष में राज्य की संचित निधि में से प्रस्तावित व्यय के निमित्त राज्यपाल महोदय को--

अनुदान संख्या - 44 उच्च शिक्षा के लिए दो हजार तीन सौ तीस करोड़,

इन्क्यानवे लाख,बानवे हजार रुपये,

अनुदान संख्या - 47 तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास के लिए छ: सौ

इकसठ करोड़,इक्कीस लाख,नब्बे हजार रुपये, तथा

अनुदान संख्या - 70 तकनीकी शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग से संबंधित

विदेशों से सहायता प्राप्त परियोजनाएं के लिए चार

करोड़,इक्यासी लाख,पचपन हजार रुपये

तक की राशि दी जाय.

अध्यक्ष महोदय - प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ.

 

 

 

 

 

उपस्थित सदस्यों के कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत हुए. अब मांगों एवं कटौती प्रस्तावों पर एक साथ चर्चा होगी. श्री मुकेश नायक, श्री जितू पटवारी( अनुपस्थित) सुश्री हिना कावरे..

डॉ.नरोत्तम मिश्र,संसदीय कार्य मंत्री - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी नेता प्रतिपक्ष जी से गुजारिश है मैंने प्रश्नकाल में भी उनसे गुजारिश की थी अभी उच्च शिक्षा की मांगों पर चर्चा शुरू हो रही है अपने सम्मानित सदस्यों से कहिये कि वे उपस्थित तो रहा करें. इतनी महत्वपूर्ण चर्चाएं चल रही हैं.

अध्यक्ष महोदय - जितू पटवारी जी आ गये हैं. (जितू पटवारी जी से) आप इनके बाद में बोल लें. बैठ जाईये जितू जी.

श्री बाला बच्चन - अध्यक्ष महोदय, यह उम्मीद थी कि इतने सारे ध्यानाकर्षण सूची में थे तो कम से कम चार पर चर्चा होगी यह सोचा था. इस हिसाब से उनके आने का है. मुकेश नायक जी आ रहे हैं.

वन मंत्री(डॉ.गौरीशंकर शेजवार) - अध्यक्ष महोदय, नरोत्तम जी ने बहुत अच्छी बात कही (XXX).

अध्यक्ष महोदय - यह विलोपित कर दें.

श्री बाला बच्चन - अध्यक्ष महोदय, कोई नहीं सुन रहा इसकी जगह आप यह बोलिये कि सरकार नहीं सुन रही है. बाकी हमारे साथी तो सब सुन रहे हैं और  सरकार को सुना रहे हैं.

डॉ.नरोत्तम मिश्र - आप लोगों ने जितनी बातें कहीं. एक-एक अक्षरश: हम यहां से मानते हैं.

श्री बाला बच्चन - अध्यक्ष महोदय,सरकार सुने और रिप्लाई करे.

अध्यक्ष महोदय - माननीय सदस्यगणों से मेरा अनुरोध है कि हिना कांवरे जी अच्छी सदस्या हैं और वे बोलने खड़ी हो गई हैं उनको बोलने दें अच्छा बोलती हैं और अच्छे सुझाव देती हैं. व्यवधान होगा तो वे बोल नहीं पाएंगी.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार - अध्यक्ष महोदय, आप बैठेंगे तो मैं बोल पाऊंगा

अध्यक्ष महोदय - मेरा अनुरोध है कि उनको बोल लेने दें.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार - मैं यही बात कहना चाहता था कि जिस तरीके से विपक्ष को जो भूमिका निभाना चाहिये उसमें विपक्ष पूरी तरीके से फेल है और उसका एक मात्र कारण यही है तो यह कार्यवाहक की व्यवस्था है. ये नाम लिखकर देते हैं और वे लगातार अनुपस्थित रहते हैं और वे गैरहाजिर हो जाते हैं तो यह स्थिति बिगड़ रही है.वास्तव में मैं यह कहूं कि सदन की गरिमा इससे कम हुई है.

डॉ.नरोत्तम मिश्र - दरअसल नेता प्रतिपक्ष बच्चन जी का भाषण इतना प्रभावी हो गया कि आगे की बेंच किस तरह से घबरा कर खाली हो गई. मैं सुबह से कह रहा हूं.

श्री बाला बच्चन - अध्यक्ष महोदय, मैं इसी को कोड करके बोलता हूं मेरा अभिभाषण पर जो भाषण था माननीय शेजवार जी, आपकी सरकार आपके मंत्री जी, आपके मुख्यमंत्री जी, उसी बात का जवाब दे दो हमने उस दिन सारी एथ्रेंटिक चीजें बताईं माननीय अध्यक्ष जी ने एप्रीसियेट किया. मीडिया में बोला कि सरकार को आईना दिखा दिया लेकिन मुख्यमंत्री जी ने पब्लिक भाषण दे दिया ऐसा लग रहा था कि भारतीय जनता पार्टी की सभा को संबोधित कर रहे थे.

अध्यक्ष महोदय - यह प्रश्नकाल नहीं है. हिना कांवरे जी.

(..व्यवधान..)

सुश्री हिना कांवरे(लांजी) - माननीय अध्यक्ष महोदय, आम आदमी जब सरकार के रेवेन्यू की बात सोचता है तो यह कल्पना से परे है कि एजुकेशन राज्य में रेवेन्यू का  बहुत बड़ा सोर्स है क्योंकि आमजन को लगता है शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल ऐसे विभाग हैं जहां शासन को केवल खर्च करना पड़ता है अभी जब बजट को समझने के लिये एक दिन का वर्कशाप लगाया गया था उसमें सभी को यह जानकर बहुत आश्चर्य हुआ कि नान टैक्स रेवेन्यू सोर्सेस में माईनिंग के बाद एजुकेशन प्रदेश की आय का सबसे बड़ा सोर्स है. फारेस्ट तथा इलेक्ट्रिसिटी का नंबर एजुकेशन के बाद आता है. एजुकेशन से शासन को 2015-16 में 3191 करोड़ राजस्व प्राप्त हुआ. मैं समझती हूं कि एजुकेशन शब्द को यदि हायर एजुकेशन कर दिया जाये क्योंकि स्कूल एजुकेशन से आय का स्त्रोत समझ में नहीं आता. हमेशा से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में जब भी चर्चा होती है तो शिक्षा की गुणवत्ता हमेशा अहम् सवाल होता है. गुणवत्ता के मायने में टीचर्स तथा उच्च शिक्षा की दृष्टि से मूलभूत सुविधाएं हैं. हम बहस में पड़े या चाहे जो भी बात कर लें या अच्छी-अच्छी सलाह दे दें. मूल रूप से सबसे बड़ी दिक्कत वित्त की है. मैं बोलूं या न बोलूं सारे लोग समझते हैं कि राज्य द्वारा पोषित प्रदेशके विश्वविद्यालय तथा महाविद्यालयों में प्राचार्य प्राध्यापकों टेक्निकल स्टाफ क्लेरिकलस्टाफ तथा फोर्थ क्लास के स्टाफ की बहुतायत में पद खाली है. सामान्य तौर पर यह होना चाहिये कि यदि किसी महाविद्यालय में 12 सहायक प्राध्यापकों के पद हैं वहां यदि एक-दो पद खाली पड़े हैं तो अतिथि विद्वानों से एक-दो पदों को भरकर तब तक काम चला लिया जाये तब तक दो पदों पर नियुक्ति न हो जाये. जब तक दो पदों पर नियुक्तियां न हों जाएं. आज तो इमरजेन्सी में अतिथि विद्यालयों का उपयोग करने की बजाय पूरा उच्च शिक्षा विभाग अतिथि विद्वानों के भरोसे पर चल रहा है. अतिथि विद्वान शिक्षित तो हैं, लेकिन शिक्षित व्यक्ति को सरकार 200 रूपये प्रति पीरियड तथा 1 दिन में अधिकतम 600 रूपये मानदेह दे तो भी छुट्टियां काटकर यदि 24 दिन भी कॉलेज लगता हो दिन का अधिकतम मानदेय मिलता हो तब भी उनका 14 हजार 4 सौ रूपये ही बनते हैं. आप इतने कम पेमेन्ट पर एक शिक्षित व्यक्ति से उच्च शिक्षा की कैसी गुणवत्ता की अपेक्षा कर सकते हैं, जब कि उसका दिमाग पढ़ाने से ज्यादा अपने रोजमर्रा की परेशानियों में उलझा रहता हो. मेरा शासन से निवेदन है कि अतिथि विद्वानों को कम से कम 25 हजार रूपये मानदेय दें. राज्य शासन द्वारा पोषित विश्वविद्यालयों पर यूजीसी के नये पद विकसित करने तथा रिक्त पदों की भर्ती का भारी दबाव रहता है. विश्वविद्यालयों द्वारा बार-बार शासन को पत्र लिखकर के नियुक्तियों के लिये निवेदन किया जाता है, किन्तु राज्य शासन द्वारा वित्त की कमी की वजह से यह अनुमति पेंडिंग कर दी जाती है. यही वजह है कि राज्य शासन द्वारा पोषित नामी-ग्रामी विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता गिरती जा रही है. विश्वविद्यालयों को खुद फण्ड जनरेट करने के लिये कहा जाता है उनके पास में फण्ड को जनरेट करने के लिये क्या सोर्सेज हैं, क्या विश्वविद्यालय नगर-पालिका है, या नगर निगम है. राज्य शासन को विश्वविद्यालयों को ज्यादा आर्थिक मदद देकर गुणवत्ता में सुधार करने की जरूरत है. 3 हजार 191 करोड़ रूपये का रेवेन्यू देने वाला विभाग को ज्यादा बजट देकर उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया जाना चाहिये स्टूडेन्ट में नेतृत्व क्षमता उभारने के लिये छात्र संघ के चुनाव सीधे होने चाहिये उसका प्रावधान हमको करना चाहिये, किन्तु मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहती हूं कि चुनाव पैनलों के बीच होना चाहिये इसे एनएसयूआई या एबीबीपी का नाम देकर राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिये अंत में मेरे विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत किरनापुर शासकीय कॉलेज जर्जर हालत में है, यह मिडिल स्कूल में जल रहा है उनको बिल्डिंग की नितांत आवश्यकता है. विज्ञान संकाय होने के बावजूद लेब की व्यवस्था नहीं है मैं मंत्री जी से निवेदन करना चाहती हूं कि इसे इसी बजट में राशि उपलब्ध करायें लॉजी तथा किरनापुर महाविद्यालय में खाली पड़े पदों की नियमित स्टॉफ की भर्ती करने का निवेदन करती हूं. आपने बोलने का अवसर दिया आपका धन्यवाद.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया (मंदसौर)--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 44,47 एवं 70 का समर्थन करता हूं. उच्च शिक्षा विभाग के अनुदानों की मांगों में यदि नवाचार स्पष्ट झलकता हो, गुणवत्तायुक्त शिक्षा हो, हितग्राहीमूलक छात्र-छात्राओं की मदद का उल्लेख हो, महाविद्यालयों की अधोसंरचना का विकास हो, नये नये मानदण्डों के आधार पर महाविद्यालयों की स्थापनी की परिकल्पना हो, और आगे बढ़ चढ़ के भारत वर्ष में यदि अकेले इस मध्यप्रदेश राज्य को यह गौरव प्राप्त हो कि पंडित अटल बिहारी बाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय की न केवल स्थापना बल्कि उसका प्रारंभ होना इस बात को परिलक्षित करता है कि प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री सम्मानित शिवराज सिंह चौहान की दृढ़इच्छा शक्ति और इस विभाग के वरिष्ठ मंत्री आदरणीय उमाशंकर गुप्ता जी का जो ध्येय एवं लक्ष्य है मैं समझता हूं कि आने वाले वर्षों में जिस प्रकार से अब तक महाविद्यालयों में विशेषकर के शासकीय स्नातकोत्तर, शासकीय स्नातक में जो आमूल-चूल परिवर्तन हुआ है वह आने वाले वर्षों में और अधिक अपनी सुदृढ़ता लिये हुए दिखेगा. उच्च शिक्षा के क्षेत्र में माननीय मुख्यमंत्री जी ने जो नवाचार किये हैं इसके लिये माननीय उमाशंकर गुप्ता जी को बधाई देना चाहता हूं कि जिनके कुशल नेतृत्व में विभाग की महत्वपूर्ण योजनाएं जिनका उल्लेख किया जाना अति आवश्यक होगा. विश्व बैंक परियोजना, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान, रूसा विवेकानन्द केरियर मार्गदर्शन योजना, व्यक्तित्व विकास प्रकोष्ट वर्च्यूअल कक्षाओं का संचालन, महाविद्यालय में व्हाई-फाई, नेक मूल्यांकन यह सारी चीजें आईने की तरह साफ हैं. विवेकानन्द केरियर प्रशिक्षण मार्गदर्शन आयोजना में 60 महाविद्यालयों में केरियर मेलों का सफल आयोजन किया गया है, उसके परिणाम देखने को मिल रहे हैं. गत वर्ष 64 हजार 426 छात्र-छात्राओं की सहभागिता इसमें दर्ज की गई है तो इसी बजट में 2015-16 में 100 लाख रूपये का प्रावधान किया गया है मैं इसके लिये माननीय मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं. महाविद्यालयों में भी हितग्राहीमूलक योजनाएं लागू हों वह भी हितग्राही के समान सरकार की योजनाओं से सरोकार रखते हुए उसका लाभ प्राप्त करें इस दिशा में मील का पत्थर कुछ योजनाएं उच्च महाविद्यालयों में प्राप्त की गई हैं. गांवों की बेटी, प्रतिभा किरण, विक्रमादित्य निशुल्क शिक्षा योजना छात्राओं के लिये आवागमन की सुविधा योजना प्रारंभ की है उसमें सफलता भी मिली है, छात्र-छात्राओं ने इस योजना को स्वीकार भी किया है. निजी छात्रावास गारंटी योजना विद्यार्थियों को बेहतर छात्रावास की सुविधा इस योजना के अंतर्गत प्रारंभ की गई है. निजी छात्रावास योजनाओं में छात्रों को उस बात की गारंटी मिलना प्रारंभ किये जाने का प्रयास किया गया है. गांव की बेटी योजना में पहले 5 रूपये बचत में हुआ करते थे उसको बढ़ाकर के 10 रूपये कर दिये गये हैं इसके लिये भी मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं. विक्रमादित्य योजना में आय-सीमा 54 हजार से बढ़ाकर 1 लाख 20 हजार रूपये किया जाना स्वागत योग्य है. बजट में प्रावधान किया गया है जबलपुर जैसा संस्कारधानी की नगरी कहा जाता है वहां पर पृथक से नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी खोलने की कार्यवाही की जा रही है मैं समझता हूं कि आजादी के 67 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद यदि इस बार पुनः मध्यप्रदेश को कोई दूसरा अवसर जबलपुर को मिल रहा है नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के लिये तो यह उपलब्धिपूर्ण बात होगी. यह जो पूरा 12 वर्ष का एक दशक निकला है, यह परिवर्तन की बयार को लेकर के सामने आया है. गत एक दशक में माननीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में देश भर में महाविद्यालय की तस्वीर उभरकर के सामने आयी है. अभिभावकों का विश्वास महाविद्यालयों के प्रति जागृत हुआ है. अब उच्च शिक्षा की किरण छोटे-छोटे एवं मंझौले तथा बड़े नगरों तक और अधिक तेजी के साथ बढ़ती जा रही है. दूर सुदूर अंचलों में गांवों तक पहुंची है. माननीय मुख्यमंत्री जी ने अत्यंत पिछड़े ग्रामीण अंचलों में अब तक 36 शासकीय महाविद्यालय खोले हैं. कभी कल्पना नहीं की जा सकती कि 15 हजार की जनसंख्या वाले नगर पंचायत जो कि अब नगर परिषद् कहला रही है उन छोटे कस्बों में वहां पर शासकीय महाविद्यालयों की स्थापना करना मैं समझता हूं कि प्रसन्नता की बात है. मेरे मंदसौर जिले के पिपिल्या मंडी, मल्हार, सीतामऊ, श्यामगढ़ का उल्लेख करना चाहता हूं ऐसे कई छोटे नगर परिषदें एवं पंचायतें हैं उनमें शासकीय महाविद्यालयों का विशेष लाभ इन दिनों मिला है. न केवल विद्यालय प्रारंभ हुए हैं उनमें कला एवं सामाजिक विषयों के साथ साथ विज्ञान एवं वाणिज्य की कक्षाएं भी प्रारंभ हुई हैं. मंत्री का ध्यानाकर्षित करना चाहूंगा कि मेरे विधान सभा क्षेत्र में दलोदा एक ऐसा कस्बा है जहां पर 72 आसपास के गांवों के 10 से अधिक 12 हजार छात्र-छात्राएं 12 वीं कक्षा में पढ़ने के लिये जाती हैं हालांकि यह ग्राम पंचायत है, लेकिन 12 हजार छात्र-छात्राएं 12 वीं कक्षा में पढ़ रहे हैं मंदसौर से उसकी दूरी करीबन 18 किलोमीटर की है मैं चाहता हूं कि वहां पर एक महाविद्यालय आने वाले बजट में आप यदि स्वीकृत करेंगे तो उस क्षेत्र पर बड़ी कृपा होगी दलोदा डिजर्व करता हैं तथा दलौदा हमारा तहसील मुख्यालय है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, छात्र-छात्राओं की प्रवेश संख्‍या में सकल नामांकन अनुपात जी.ई.आर. के मध्‍यप्रदेश समकक्ष पहुँचा है. यह गौरव करने का विषय है. उच्‍च शिक्षा में छात्र-छात्राओं की प्रवेश की संख्‍या में रूचि तुलनात्‍मक आशातीत वृद्धि हुई है और उसके साथ-साथ अनुसूचित जाति-जनजाति और पिछड़े वर्गों की छात्राओं में भी विशेष प्रवेश की अभिवृद्धि हुई है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज प्रदेश का सकल नामांकन उत्‍पाद जी.ई.आर. के बराबर पहुँच गया है. मन्‍दसौर शासकीय स्‍नातकोत्‍तर महाविद्यालय जनभागीदारी की बड़ी रूचि है और मैं माननीय मंत्री जी को इस बात के लिये धन्‍यवाद देना चाहता हूँ. पिछले 2, 3 हफ्ते पहले, जब माननीय मुख्‍यमंत्री जी की अध्‍यक्षता में महाविद्यालयों की समीक्षा बैठक हो रही थी तब आपने आगे चलकर मन्‍दसौर को शासकीय स्‍नातकोत्‍तर महाविद्यालय की छात्र संख्‍या लगभग 8 से 10 हजार छात्र-छात्राएं मन्‍दसौर पी.जी. कॉलेज में पढ़ती हैं और उस महाविद्यालय में अधोसंरचना विकास का जनभागीदारी के माध्‍यम से, जो विकास हुआ है, मैं समझता हूँ कि उज्‍जैन संभाग में उस महाविद्यालय की सबसे अग्रणी स्थिति है, जब आपने समीक्षा बैठक में, जिसकी आपने भूरी-भूरी प्रशंसा की है तो मेरा दायित्‍व बनता है कि मैं आपका भी आभार व्‍यक्‍त करूँ और माननीय मुख्‍यमंत्री जी का भी आभार व्‍यक्‍त करूँ और माननीय मंत्री जी से अपेक्षा करूँगा कि मन्‍दसौर का जो पी.जी.महाविद्यालय है, उसे शासकीय स्‍नातकोत्‍तर महाविद्यालय को एम.बी.ए. एवं एम.सी.ए. की दरकार है. उसके लिए मैं माननीय मंत्री जी से अनुरोध करूँगा कि आज आप इस बात की घोषणा करें. हम आपसे एवं सरकार से कोई बजट नहीं मांगेंगे. हम सेल्‍फ एसेस योजना के अन्‍तर्गत, हमारी जो निजी पूँजी निवेश है, महाविद्यालय के पास जो जनभागीदारी का पैसा है, फैकल्‍टीज़ हमारे पास हैं, डिपोजिट हमारे पास है. सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि एम.बी.ए. एवं एम.सी.ए के लिए शासन यदि अनुमति देना चाहे तो दे, इसमें कोई आपत्ति नहीं है. अगर आप अनुमति देंगे तो आने वाले सत्र से मन्‍दसौर स्‍नातकोत्‍तर महाविद्यालय में एम.बी.ए. एवं एम.सी.ए. की कक्षाएं प्रारम्‍भ कर देंगे.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने महाविद्यालयों को खोलने को लेकर मापदण्‍डों में आनुपातिक सुधार किया है, उसके लिए मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी का आभार व्‍यक्‍त करना चाहता हूँ, यह निर्णय स्‍वागत योग्‍य है. इसलिए कि सरकार ने नई सोच, नई विचारधारा पर कार्य करना शुरू कर दिया है. शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालय एवं 12 वीं के कक्षा के विद्यालयों की जियो ट्रेनिंग करते हुए, जो डिजीटल डाटा तैयार किया जा रहा है, इससे संस्‍थाओं की आपसी दूरियां एवं कैचमेन्‍ट एरिया क्षेत्राधिकार को मिलाते हुए विद्यार्थियों की संख्‍या ज्ञात करने के साथ-साथ नवीन महाविद्यालय की स्‍थापना का रास्‍ता साफ होगा. 12 वीं के न्‍यूनतम 500 छात्र की उपलब्‍ध छात्र संख्‍या का निर्धारण, मंत्री जी स्‍वागत योग्‍य है. स्‍नातक संख्‍या के लिये 12 वीं के उसी संकाय के 200 छात्र तथा स्‍नातकोत्‍तर में उसी संख्‍या के 100 छात्रों की उपलब्‍धता होनी चाहिए. ऐसे जो आप नए मापदण्‍ड तय कर रहे हैं, उस मापदण्‍ड में दलौदा मेरा विधानसभा क्षेत्र निश्चित रूप से अपना स्‍थान प्राप्‍त कर लेगा.

अध्‍यक्ष महोदय - कृपया 5 मिनट में समाप्‍त करें.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कन्‍या महाविद्यालय के संकायों का युक्तियु‍क्‍तकरण करना, एक नया प्रयोग आपके नेतृत्‍व में, माननीय मुख्‍यमंत्री जी की संकल्‍पना के आधार पर प्रारम्‍भ हुआ. अभी भी प्रदेश के 10 जिले कन्‍या महाविद्यालय के रूप में स्‍थापित नहीं हैं. शासन ने इसकी चिन्‍ता की और शासन ने जब इन 10 जिलों की चिन्‍ता की है तो 12 वीं के छात्रों की संकायवार निर्धारण करते हुए, कन्‍या महाविद्यालय खोलने का, जो प्रस्‍ताव विचाराधीन है. ऐसे कन्‍या महाविद्यालयों को खोलने का जो विचार हुआ है, उससे रास्‍ता साफ होगा और मंजिल तक पहुँचा जायेगा. 41 कन्‍या संचालित महाविद्यालय 3 संकायों- कला, वाणिज्‍य एवं विज्ञान द्वारा संचालित किये जाने का प्रस्‍ताव परीक्षण में है, मैं समझता हूँ कि यह भी स्‍वागत योग्‍य है. अतिथि विद्वानों की बात बहिन सुश्री हिना कावरे ने रखी है. मैं समझता हूँ कि लगभग 30, 35 वर्षों से महाविद्यालयों में जो अतिथि विद्वान हैं, वे अपनी सेवायें दे रहे हैं. माननीय मंत्री जी श्री उमाशंकर गुप्‍ता एवं माननीय मुख्‍यमंत्री जी भी निरन्‍तर चिन्‍ता कर रहे हैं. अतिथि विद्वानों का मानदेय कभी 100-150 रूपये हुआ करता था, उसे बढ़ाकर 200 रूपये किया गया है. लेकिन मैं मानता हूँ कि जिस प्रकार से, माननीय मंत्री जी ने इसका अध्‍ययन किया है और पिछली बार भी यह बात सदन में आई थी कि कहीं यह चर्चा में है कि छत्‍तीसगढ़ और गुजरात के समकक्ष अतिथि विद्वानों का पाई फिक्‍सेशन तय कर दिया जाये. उनको पीरियड के हिसाब से बुलाकर उनका नुकसान होता है. क्‍योंकि कभी विद्यालय में अवकाश आ जाते हैं, कभी स्‍ट्राईक हो जाती है, वार्षिक सम्‍मेलन के अवसर पर 3 दिन की छुट्टी हो जाती है तो ऐसे में अतिथि विद्वान नियमित अपनी सेवाएं देने के लिए आते हैं, उनको निराश होकर घर वापिस लौटना पड़ता है. मैं समझता हूँ कि अगर उनका मासिक निर्धारण होगा तो वे सरकार के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करेंगे. मैंने यह मामला, जब मैं 13 वीं विधानसभा का सदस्‍य था तो मैंने सदन में रखा था.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, व्‍यक्तित्‍व विकास प्रकोष्‍ठ का गठन करना. यह अपने आप में एक अनूठा प्रयोग है, नवाचार है. 339 शासकीय महाविद्यालय, 9 अशासकीय महाविद्यालय एवं 36 शासकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय में व्‍यक्तित्‍व विकास प्रकोष्‍ठ का गठन किया गया है. उसके लिए मैं आभार एवं धन्‍यवाद प्रकट करना चाहता हूँ एवं इसका लाभ ढाई लाख छात्र-छात्राओं ने लिया है. प्रकोष्‍ठ के माध्‍यम से काम हुआ है. यह प्रकोष्‍ठ, दीपावली के पर्व पर शहीदों के नाम पर प्रत्‍येक घर में दीप प्रज्‍ज्‍वलन करने जाने के लिए अपने आपको अग्रेषित कर पाया है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, स्‍वच्‍छता अभियान में भी पुलिस विभाग के रक्षक बन्‍धु योजना में सहृदयता दर्ज करा रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - कृपया समाप्‍त करें.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी 2-3 बातें और रह गई हैं. स्‍मार्ट फोन के माध्‍यम से नवाचार के साथ जुड़ा है, आधुनिक युग है, तकनीकी युग है और विद्यार्थियों को स्‍मार्ट फोन देने के लिए, इस बजट में 3030 लाख का प्रावधान किया गया है. मैं उसके लिए माननीय मंत्री जी एवं मुख्‍यमंत्री जी को बधाई देना चाहता हूँ. ऐसा नहीं है कि रिक्‍त पदों की भर्ती के बारे में सरकार ने चिन्‍ता नहीं की है. सहायक प्राध्‍यापकों के 2,333 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया प्रारंभ है, यह लोक सेवा आयोग द्वारा दि. 19 फरवरी, 2016 को इसका विज्ञापन प्रकाशित कर दिया गया है. पूरी प्रक्रिया प्रक्रिया के अन्‍तर्गत है एवं तृतीय श्रेणी के भी 262 पदों पर प्रक्रिया जारी है. इसी सदन के सदस्‍य पूर्व मंत्री इन्‍दौर के विधायक स्‍वर्गीय श्री लक्ष्‍मण सिंह जी गौड़ के नाम से उनकी जीवटता एवं जिन्‍दादिली को लेकर शिक्षा के प्रति, उनकी जो अभिरूचि थी, उसमें आमूलचूल परिवर्तन करने को लेकर, उनका जो दिव्‍य सपना था, उसको चिर-स्‍थायी बनाने के लिए सरकार ने स्‍वर्गीय श्री लक्ष्‍मण सिंह गौड़ पुरस्‍कार योजना को प्रारंभ किया है. वास्‍तव में, यह निर्णय स्‍वागत योग्‍य निर्णय है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्राचार्य, शिक्षक और विद्यार्थी, इन तीनों की त्रिवेणी को समेटते हुए, जब पुरस्‍कारों की बात चलाई गई है तो स्‍व. गौड़ साहब की स्‍मृति में. इन पुरस्‍कारों की संख्‍या भी बढ़ी है. पुरस्‍कारों की संख्‍या 30 से बढ़ाकर 248 कर दी गई है, जिसमें 8 प्राचार्य, 40 शिक्षक तथा 200 विद्यार्थी इस पुरस्‍कार से लाभान्वित हुए हैं एवं बजट में 1.25 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है. कुल मिलाकर यह जो अनुदान मांग आई है. मैं समझता हूँ कि यह समग्र चिन्‍तन, सोच एवं विचार है. एक बार पुन: बड़े सम्‍मान के साथ माननीय मुख्‍यमंत्री जी, माननीय मंत्री श्री उमाशंकर जी गुप्‍ता का बहुत-बहुत धन्‍यवाद एवं आभार व्‍यक्‍त करता हूँ.

श्री मुकेश नायक (पवई) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज इस सदन में, उच्‍च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा की अनुदान मांगों पर चर्चा हो रही है. मैं इस कटौती प्रस्‍ताव के विरोध में, अपनी बात कहने के लिए खड़ा हुआ हूँ. मैं आपके माध्‍यम से, सरकार से, उच्‍च शिक्षा मंत्री जी यह पूछना चाहता हूँ कि दि. 23.06.2015 को आयोजित बैठक का यह आपके मध्‍यप्रदेश शासन का परिपत्र है, जो सारे मध्‍यप्रदेश में आपने लोगों के बीच में भेजा है. इसमें लिखा है कि निजी विश्‍वविद्यालय में भी समस्‍त विशेषकर प्रोफेशनल कोर्सेस में प्रवेश की अंतिम तिथि माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय के आदेशानुसार15 अगस्‍त रखी जावे. प्रदेश के समस्‍त शासकीय एवं निजी विश्‍वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया 15 अगस्‍त के पूर्व निश्चित कर ली जाये. क्‍या आप इससे सहमत हैं ? यह आपका परिपत्र है. दूसरा, पारदर्शिता की दृष्टि से प्रवेश की अंतिम तिथि के साथ के ही समस्‍त निजी विश्‍वविद्यालय संचालनालय तकनीकी शिक्षा एवं अन्य विश्वविद्यालयों द्वारा प्रवेषित छात्रों की सूचियां, उनको वेब साइट पर, डोमेन पर उपलब्ध कराना सुनिश्चित कराया जाये. इसका अर्थ यह है कि शासकीय और अशासकीय दोनों विश्वविद्यालयों के लिये गाइड लाइन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राज्य शासन ने मध्यप्रदेश में लागू की है कि प्रवेश की अंतिम तिथि 15 अगस्त होगी और जो छात्र इसका रजिस्ट्रेशन करायेंगे, इसमें एडमिशन लेंगे, उनकी सूची ऑन लाइन वेब साइट के ऊपर, पोर्टल के ऊपर डाली जायेगी. मै मंत्री जी से यह विनम्रता कहना चाहता हूं कि जब आप अपना उत्तर दें, मुझे बड़े दुख के साथ सदन में यह कहना पड़ रहा है कि पक्ष और विपक्ष के सम्मानित सदस्य अनुदान मांगों पर जो सुझाव देते हैं, आपत्तियां दर्ज कराते हैं, कमियों की ओर इशारा करते हैं, जब मंत्री अपना उत्तर देते हैं, तो वह उत्तर बेहद औपचारिक होता है, उसमें कोई कंटेंट नहीं होता है और माननीय सदस्यों की आशंकाओं, जिज्ञासाओं और सुझावों पर कोई भी उत्तर देना उचित नहीं समझते हैं. इसलिये मैं मंत्री जी से विनम्रतापूर्वक यह कहना चाहता हूं कि सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश का, राज्य शासन की इस गाइड का प्रायवेट विश्वविद्यालयों ने कितना पालन किया, अपने उत्तर में यह बतायें. अब मैं इसकी कहानी बताना चाहता हूं कि यह होता क्यों है. अध्यक्ष महोदय, इसी में राज्य शासन ने यह लिखा है कि तीसरी जो गाइड लाइन लिखी है- निजी विश्वविद्यालय में आरजीपीवी व अन्य विश्वविद्यालों से अध्ययनरत् छात्र किसी भी कोर्स के मध्य में स्थानांतरित किये जा रहे हैं, इस प्रक्रिया में भी पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से प्रवेश के पूर्व संबंधित विश्वविद्यालय का अनापत्ति प्रमाण पत्र, स्कूल लेविल सर्टीफिकेट, टीसी और इसकी एनओसी देना पड़ेगी. मैं सही कह रहा हूं ना कि यह आपने लिखा है. मैं आपसे यह पूछना चाहता हूं कि निजी विश्वविद्यालयों ने इस गाइड लाइन का पालन क्यों नहीं किया. साल भर ये एडमिशन क्यों कर रहे हैं. जब चाहे एडमिशन कर लो, जब चाहे परीक्षा करा दें. ऐसा क्यों हो रहा है. ऐसा इसलिये हो रहा है कि भोपाल के एक ग्रुप ने एक ही सोसायटी पर चार निजी विश्वविद्यालय खोल लिये. खोले लिये कि नहीं खोल लिये. नाम पढ़कर सुनाऊं, सोसायटी का नाम पढ़कर सुनाऊं. आपके कार्यकाल में और इस विश्वविद्यालय को 100-100 सीटें, 400 सीटें इस विश्वविद्यालय को बीएड, डीएड और एमएड की सेंक्शन हुई थीं. यह सत्य है. इसका उत्तर चाहूंगा आपके जवाब में. अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्री जी पर आरोप लगाता हूं कि इन 400 सीटों के बदले प्रायवेट विश्वविद्यालयों ने 5 हजार विद्यार्थियों को बीएड, एमएड और डीएड की परीक्षा में बिठाल दिया और एक-एक विद्यार्थी से 3 लाख रुपये वसूल किये हैं. मेरे पास एक नम्बर है. अध्यक्ष महोदय, मैं आपके कक्ष में आकर वह नंबर आपको दे दूंगा, क्योंकि सदन में बोलने की मर्यादा है. मैं अपने पत्र के माध्यम से पक्ष और विपक्ष के तमाम विधायकों को वह नंबर दे दूंगा. एक कंसल्टेंसी का नंबर है, उस नंबर पर आप फोन करिये और पूरी सौदेबाजी करिये. आरकेडीएफ विश्वविद्यालय 2-2 साल पहले की परीक्षाएं सम्पन्न करा रहा है. आपको पता है 15 दिन पहले होटल के एक कमरे में 100 विद्यार्थी परीक्षा देते हुए पकड़े गये. पूरे अखबारों में आया. आरकेडीएफ यूनिवर्सिटी ने गलत एफडी लगाई अपना विश्वविद्यालय और कालेज खोलने के लिये. सीबीआई उसकी जांच कर रही है, उसके ऊपर इतना गंभीर आरोप था. उसके बावजूद भी मंत्री जी ने आपसी (XXX) के द्वारा उसकी चार यूनिवर्सिटी खोलवा दीं. मध्यप्रदेश के अन्दर चार विश्वविद्यालय की स्थापना करा दी. आप मध्यप्रदेश में करना क्या चाहते हैं. किस तरह की संस्कृति को आप निर्मित करना चाहते हैं. किस तरह के शिक्षा परिसर बनाना चाहते हैं. किस तरह का एकेडमिक एडमॉसफिअर बनाना चाहते हैं. क्या डिसीप्लेन लाना चाहते हैं मध्यप्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में. और बताऊं. आरकेडीएफ विश्वविद्यालय ने फर्स्टीअर में जो बच्चे फेल हो गये, मंत्री जी, अध्यक्ष जी के माध्यम से मैं आप पर आरोप लगाता है, यह बहुत गंभीर आरोप है. जो बच्चे फेल हो गये विश्वविद्यालय में, फर्स्ट इयर में इंजीनियरिंग कालेजेस में, उनको प्रायवेट विश्वविद्यालयों ने अपने इंजीनियरिंग कालेज में एडमिशन दे दिया. आपको मालूम है कि आपने ही गाइड लाइन्स बनाई हैं. गवर्नमेंट ऑफ इंडयिा ने, तकनीकी शिक्षा ने गाइड लाइन्स बनाई हैं कि जो बच्चे फर्स्ट इयर में फेल हो जाते हैं, उनको एडमिशन नहीं मिलेगा. बिना एनओसी लिये, बिना माइग्रेशन सर्टीफिकेट लिये, बिना टीसी लिये 5 हजार बच्चों के एडमिशन प्रायवेट यूनिवर्सिटी ने ऐसे बच्चों के कर दिये, जो फेल हो चुके थे. आपको (XXX) आनी चाहिये, आप इस तरह से मध्यप्रदेश के शिक्षा परिसर को चलाना चाहते हैं.

अध्यक्ष महोदय -- यह कार्यवाही से निकाल दीजिये.

श्री मुकेश नायक -- किस आधार पर, पांच हजार बच्चों का आपने एडमिशन करा दिया और एक बच्चे से 5 से 10 लाख रुपये वसूले गये. क्या हो रहा है प्रायवेट यूनिवर्सिटी में, मैं बताऊं. अनिल का एडमिशन हुआ और अखिल को डिग्रियां दी जा रही हैं. जिनका एडमिशन हुआ जिस नाम से, उनको डिग्रियां नहीं दी जा रही हैं. दूसरे व्यक्तियों को डिग्रियां दी जा रही हैं.

राज्यमंत्री, संसदीय कार्य (श्री शरद जैन) -- अध्यक्ष महोदय, जिस प्रकार की भाषा प्रयोग की जा रही है और जिस प्रकार से व्यक्त की जा रही है कि लोगों को शर्म आना चाहिये. लोगों को ऐसा करना चाहिये.

श्री मुकेश नायक -- कोई गलत भाषा प्रयोग नहीं की जा रही है.

अध्यक्ष महोदय (XXX) शब्द निकाल दीजिये. बाकी मंत्री जी उत्तर दे देंगे, आप चिंता न करें.

श्री मुकेश नायक -- अध्यक्ष महोदय, मैं विनम्रतापूर्वक इस सदन के सदस्यों से हाथ जोड़कर यह प्रार्थना करना चाहता हूं कि यह पूरे मध्यप्रदेश के बच्चों के भविष्य का प्रश्न है और विपक्ष अगर कोई आलोचना करता है, सरकार को जागृत करने का काम करता है, तो इसके पीछे किसी को बदनाम करने की हमारी मंशा नहीं होती.

श्री के.के.श्रीवास्तव -- अध्यक्ष महोदय, शब्दों की मर्यादा होनी चाहिये. ये पता नहीं कैसे प्रवचनकर्ता रहे. मुझे तो कहीं से शक होता है.

अध्यक्ष महोदय -- कृपया बैठ जायें, उनको बोलने दें.

श्री मुकेश नायक -- अध्यक्ष महोदय, इनका क्षेत्र मेरे क्षेत्र से लगा हुआ है. और मैं तो नहीं समझता कि इनका कोई उत्तर देने की आवश्यकता है. क्योंकि मैं इन्हें बहुत अच्छे से जानता हूं. अभी जेल से छूटे हैं, थोड़े दिन हुए हैं. मैं बोलना नहीं चाहता था, अच्छा नहीं लगता, आपकी बदनामी होगी.

श्री के.के.श्रीवास्तव -- उतना ही मैं आपको जानता हूं. छात्र राजनीति के समय से ही जानता हूं.

श्री मुकेश नायक -- मुझसे बड़ा छात्र राजनेता मध्यप्रदेश की राजनीति में हुआ ही नहीं. महानुभाव आप पता कर लीजिये. मुझसे बड़ा छात्र नेता, मुझसे बड़ा युवा नेता, एक एक लाख युवक मेरे साथ जेल जाते थे. आप हो कहां. शिक्षा और शिक्षित व्यक्ति के द्वारा अपने सामाजिक सरोकार, अपना सामाजिक बोद्ध, अपने उद्देश्य और भारत की संस्कृति, सभ्यता और परंपराओं में अपना योगदान, एक महत्वपूर्ण विषय माने जाते हैं. मैं बड़े दुख के साथ कहता हूं कि जिस शिक्षा के बारे में हमारी परंपरा ने कहा कि जो विमुक्त करे, वह शिक्षा है. भगवान कृष्ण जी ने कहा कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिये, जो बुद्धि से हृदय का ठीक ठीक तालमेल बिठा दे. और आगे कहा कि बुद्धि अगर हृदय की बात माने तो बहुत अनूठी है, बुद्धि अगर मालिक बन जाये तो बहुत घातक है. ये बुद्धि को मालिक बनाने का काम कर रहे हैं. जिस तरह से अनुशासनहीनता शिक्षा में हो रही है , भ्रष्टाचार हो रहा है, आप अपने उत्तर में बताने की कृपा करेंगे कि ये चार विश्वविद्यालय एक ही सोसायटी ने कैसे मध्यप्रदेश में खोल लिये. आप मुझसे कहेंगे कि मध्यप्रदेश विनियामक आयोग ने खोले हैं. यह आयोग किसका है और इस आयोग की सिफारिशें क्या राज्य शासन के पास नहीं आती हैं. उसकी स्क्रुटनी के बाद राज्य शासन की यह जिम्मेदारी नहीं बनती है क्या कि जिस पर सीबीई के मुकदमें विचाराधीन हैं, जो घपले और घोटाले की गंभीर प्रक्रिया से गुजर रहा है. उसको इतने बड़े बड़े शिक्षा के परिसर आपने दे दिये. एक विवेकानन्द विश्वविद्यालय है सागर में. मैंने फेसबुक के ऊपर देखा कि वह अफ्रीका में डिग्रियां दे रहे हैं बच्चों को. मुझे एक चीज बताइये किसी भी विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत जिस विश्वविद्यालय का गठन होता है उस विश्वविद्यालय का कार्य क्षेत्र निश्चित होता है. उस विश्वविद्यालय का केम्पस कल्चर निश्चित होता है और मध्यप्रदेश के नियम, केन्द्र सरकार के नियम और विश्वविद्यालय अधिनियम जो आपने बनाया है, उसके समन्वित रुप में शिक्षक, केम्पस, उसके मापदंड सरकार के द्वारा और भिन्न भिन्न समितियों के द्वारा निर्धारित होते हैं. आप बताइये कि क्या कोई विश्वविद्यालय विदेशों में अपने सेंटर बना सकता है. आपने इसकी अनुमति दी है. स्टडी सेंटर दूसरे राज्यों में बना सकता है. यह कोई डिसटेंस एजुकेशन है. यह कोई ओपन यूनिवर्सिटी है. अगर इग्नू होता, तो मैं मान लेता कि इनको इस अधिनियम में यह अधिकार दिया है कि वह दूसरे राज्यों में अपने स्टडी सेंटर बनायें. दूसरे राज्यों में शिक्षा के केम्पस को आर्गेनाइज करे, शिक्षा का प्रचार प्रसार करे और ऐसे बच्चों को लें...

अध्यक्ष महोदय--कृपया 5 मिनट में अपनी बात समाप्त करें.

श्री मुकेश नायक-- जी. अध्यक्षजी, दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से ऐसे बच्चों को लें जो किन्हीं कारणों से ड्राप रेट में आ गये हैं, किन्हीं कारणों से पढ़-लिख नहीं पाये. इसके लिए ओपन स्कूल, ओपन यूनिवर्सिटी बनी है. अध्यक्ष महोदय, अब मैं आपको एक किस्सा बताता हूं. महानुभाव,भोपाल में आई सेक्ट यूनिवर्सिटी है ? इग्नू ने एक फरमान जारी किया कि मध्यप्रदेश के हजारों शिक्षकों को B Ed-D Ed कराया जाये. इग्नू को यह जिम्मेदारी दी गई कि वह परीक्षाओं का संपादन करें, उन्हें परीक्षाओं में बैठाये लेकिन इग्नू के अधिकारियों ने, विश्वविद्यालय के लोगों ने आई सेक्ट विश्वविद्यालय के लोगों के साथ एक तालमेल बैठाया. माननीय मंत्रीजी ने मध्यस्थता का काम किया. पता है 250 करोड़ रुपये लेकर 20 हजार बच्चों को परीक्षा में बैठा दिया. आपको यह बात मालूम है? अगर नहीं मालूम है तो आप कर क्या रहे हो. अध्यक्ष महोदय, बच्चे एक साल की परीक्षा दे चुके हैं. लेकिन तीन साल से सेकंड ईयर का एग्जाम नहीं हो पाया क्योंकि सीबीआई ने छापा मारा इसको गंभीर अपराध माना और इसकी जांच चल रही है.

अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश के शिक्षकों से एक प्रायवेट यूनिवर्सिटी ने ढा़ई सौ करोड़ रुपये वसूल किये. यह परीक्षा इग्नू को संपादित करना थी. लेकिन इस परीक्षा के संपादन का तालमेल आपने इग्नू और आईसेक्ट यूनिवर्सिटी के बीच में बैठा दिया और ढ़ाई सौ करोड़ रुपये की फीस और पैसे मध्यप्रदेश के शिक्षकों से आपने वसूल कर लिये. अब वो 3 साल से भटक रहे हैं कि हम सेकंड ईयर की परीक्षा कहां दें. अब आप बताईये कि वह सेकंड ईयर की परीक्षा कब दे और कहां दें. आपने मध्यप्रदेश के सारे विश्वविद्यालयों को उनके बच्चों के रजिस्ट्रेशन को ऑन लाईन किया है. पोर्टल पर डाला है लेकिन निजी विश्वविद्यालयों को इससे वंचित क्यों रखा? सुप्रीम कोर्ट का आदेश है, राज्य शासन का फरमान है लेकिन निजी विश्वविद्यालय के बच्चों का एडमिशन कब हुआ. कितने बच्चे परीक्षा में बैठे. कब कब परीक्षा में बैठे. किन किन होटलों में परीक्षाएं हो रही हैं. किन किन पेड़ों के नीचे, किन किन घरों में परीक्षाएं हो रही हैं. इसका लेखा-जोखा आपको पोर्टल पर डालना चाहिए. क्यों नहीं डाला आपने?

अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश में 32 हजार रुपये ओबीसी के बच्चों की स्कालरशिप थी. स्कालरशिप के मामले में आपकी ही पार्टी के विधायक माननीय गिरीश गौतम जी ने कितना गंभीर आरोप लगाये थे. उन्होंने कहा था कि इसमें करोड़ों अरबों रुपये का घपला है. आपने इंजीनियरिंग कॉलेजों के ओबीसी के बच्चों के लिए 32 हजार रुपये स्कालरशिप रखी थी उसको आपने 23 हजार रुपये कर दिया. बिहार में यही 70 हजार है, पंजाब में 90 हजार रुपये है. बिहार ने एक पॉलिसी डिसीज़न लिया कि जिन राज्यों में ओबीसी,अनुसूचित जाति और जनजाति के बच्चों के लिए जो स्कालरशिप होगी, हम अपने राज्य में वही स्कालरशिप देंगे. परिणाम यह हुआ कि जो बच्चे बिहार,उत्तरप्रदेश या अन्य राज्यों से हमारे यहां पढ़ने आते थे,उनने आना बंद कर दिया. क्योंकि बिहार में ज्यादा फीस है. वो लेपटॉप भी देते हैं, दूसरे साधन भी देते हैं. पंजाब में 90 हजार रुपये पिछड़े वर्ग के बच्चों की फीस है.

श्री जसवंत सिंह हाडा--अध्यक्षजी, ये जो बिहार, उत्तरप्रदेश या पंजाब का उदाहरण दे रहे हैं. ये इनके समय का दें ना जब ये उच्च शिक्षा मंत्री थे. अपना उदाहरण दीजिए कि आपने क्या किया था तब हम करके दिखायें. हमने आपके समय से कम किया क्या? (व्यवधान)

श्री जितू पटवारी-- आप स्वयंसेवक रहे हैं. 15 साल में विधायक बन गये हैं.

श्री सचिन यादव--ये एक्सक्यूज़ देना बंद कर दीजिए. आपकी सरकार को भी 12 साल हो गये.

श्री जसवंत सिंह हाडा--आपने क्या किया. कुछ नहीं किया.

श्री जितू पटवारी-- मध्यप्रदेश का काला मुंह आपने किया है.

श्री जसवंत सिंह हाडा--मुझे केवल मुकेश जी से पूछ लेने दो अभी आपको कुछ पता नहीं है.

श्री मुकेश नायक--बता दूंगा. अध्यक्ष महोदय...

अध्यक्ष महोदय--समय कम है.

श्री मुकेश नायक--अध्यक्ष महोदय, पूरे सरकारी विश्वविद्यालयों में प्रवेश में आरक्षण के नियम लागू होते हैं या नहीं? भर्ती में आरक्षण के नियम लागू होते हैं या नहीं? निजी विश्वविद्यालयों में बच्चों के प्रवेश में आरक्षण के नियम क्यों लागू नहीं होते? अब आप कहेंगे कि हमने उनको आत्मनिर्भरता दी. विश्वविद्यालयों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर दिया. उनकी ऑटोनामी को हम प्रभावित नहीं करना चाहते. यह कहकर आप बच नहीं सकते हैं. भारतवर्ष में जितनी भी प्रायवेट यूनिवर्सिटीज़ हैं, सब एक्ट आप उठाकर देख लीजिए. मैंने स्वयं ने वैदिक विश्वविद्यालय का एक्ट बनाया और पूरे भारत के लोग आज उस एक्ट की नकल करते हैं. महानुभाव ! ऑटोनामी ऐसे नहीं होती कि आप नियम-प्रक्रिया का पालन न करें. जब चाहो परीक्षा कराओ. जब चाहे एडमिशन दो.खुद फीस निर्धारित कर लो. (XXX)

अध्यक्ष महोदय-- इस तरह से आरोप नहीं लगा सकते. कार्यवाही से विलोपित करें.(व्यवधान) बिना सूचना के आरोप नहीं लगा सकते.

श्री मुकेश नायक--आप विधानसभा की कार्यवाही से निकाल दीजिए. लेकिन जो सब जानते हैं उसको आप कैसे झुठला सकते हैं. अध्यक्ष महोदय, अंतिम बात कहना चाहता हूं. मैंने जो आरोप लगाये हैं, अगर मेरे एक भी आरोप गलत हों तो मैं मंत्रीजी से यह प्रार्थना करना चाहता हूं कि यदि वो पाक साफ हैं, दूध के धुले हैं, स्वच्छ हैं, वह किसी चीज में शामिल नहीं हैं तो सदन में अभी खड़े होकर इन दो विषयों को लेकर सीबीआई जांच की घोषणा करो. आपको पता लग जायेगा. और अगर आरोप असत्य निकले, विधानसभा की समिति बनाकर जांच करा लें. अगर मेरे आरोप असत्य निकले तो मैं विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दूंगा. मैं यही कहना चाहता हूं.

अध्यक्ष महोदय-- (श्री उमाशंकर गुप्ता, उच्च शिक्षा मंत्री के खड़े होने पर) आप उत्तर के समय बोलिये. आप बैठ जाईये. मंत्रीजी कुछ बोल रहे हैं.

उच्च शिक्षा मंत्री(श्री उमाशंकर गुप्ता)--अध्यक्ष महोदय,(XXX)

श्री मुकेश नायक--(XXX)

अध्यक्ष महोदय--यह कार्यवाही से निकाल दीजिए. श्री रामेश्वर शर्मा...

श्री रामेश्वर शर्मा(हूजूर) अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 44,47 और 70 के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं.

अध्यक्ष महोदय, हम और आप जानते हैं कि उच्च शिक्षा के गुणात्मक विकास के लिए जो मध्यप्रदेश सरकार कदम उठा रही है, वह केवल एक जाति, एक वर्ग के लिए नहीं है, बल्कि संपूर्ण मध्यप्रदेश के नागरिकों के हित में है. हम और आप यह भी जानते हैं कि पहले जो मेला शब्द था वह शब्द या तो कोई धार्मिक आयोजन को मेला कहते थे, या कोई मेला या ठेला जो हाट बाजारों के बड़े आयोजनों को मेला कहते थे. लेकिन यह प्रदेश के इतिहास में पहला उदाहरण है कि शिक्षा के आधार पर जिस केम्पस से बच्चे पढ़कर तैयार हो रहा हैं वहां पर भी रोजगार मेले मध्यप्रदेश की सरकार, मुख्यमंत्रीजी और उच्च शिक्षा मंत्री श्री गुप्ता जी और दीपक जोशीजी ने आयोजित कराये. उससे हजारों विद्यार्थियों को लाभ मिला और सीधे नौकरी मिली.

अध्यक्ष महोदय, मैं यह भी बता देना चाहता हूं कि शिक्षा के क्षेत्र में जितने भी विस्तार हो रहे हैं. उन विस्तारों में पहले भी मतभिन्नता रही है. मैं माननीय मुकेश नायक जी को बधाई देना चाहता हूं कि उन्होंने एक बहुत अच्छा नाम उठाया आरकेडीएफ. यह आरकेडीएफ है कौन? यह कौन महापुरुष है? इसका जनक कौन है? यह आरकेडीएफ में आर क्या राजस्थान का है. के क्या कर्नाटक का है. आर के धवन नाम के कोई महापुरुष थे यह उनका नाम है. यह उस कांग्रेस के नेता की संस्था है जो कांग्रेस के नेता यहां मध्यप्रदेश में मिनिस्ट्री बांटने का काम करते थे. हो सकता है आपका उनका भी तत्कालीन समय में गठजोड़ रहा हो. 1995 में दिग्विजय सिंह जी के समय इस बात का विवाद भी रहा. दिग्विजय सिंह जी ने इस बात पर मतभिन्नता भी व्यक्त की कि निजी विश्वविद्यालयों को हम अनुमति देकर एक नई परम्परा की शुरुआत न करें और तब एक निजी विश्वविद्यालय को अनुमति दी गई. इसके बाद आरकेडीएफ को लगातार कॉलेजों की अनुमति दी गई. वह अनुमति किसने दी? कैसे अनुमति मिली? इसकी भी एक जांच होना चाहिए. आखिर वह आरकेडीएफ महापुरुष कौन हैं?...........

 

12.40 बजे {उपाध्यक्ष महोदय(डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह)पीठासीन हुए}

 

 

..............वह भारत की पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के निज सचिव हुआ करते थे. उनके नाम पर यह कालेज है. और अगर वो नहीं है तो यह भी क्लीयर किया जाना चाहिये कि यह आरकेडीएफ है क्या. यह बताया जाये. मैं इतनी प्रार्थना करना चाहता हूं कि शिक्षा के क्षेत्र में हम कोई विवाद नहीं चाहते हैं. आज हम गर्व के साथ में इस मध्यप्रदेश के लोकतंत्र के मंदिर में यह कह सकते हैं कि हमारे जितने भी निजी विश्वविद्यालय हैं , जो अपराध दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में हुआ वह मध्यप्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय में नहीं हुआ इसके लिये सरकार बधाई की पात्र है. अगर हमने पैदा किया है तो भारत का नागरिक पैदा किया है, अगर हमने उसकी गुणवत्ता का विकास किया है तो हमने भारत के अग्रसर भारत के नागरिक के रूप में किया है, भारत के राजनेता के रूप में किया और अगर आपको यह दंभ है कि आप मध्यप्रदेश के सबसे युवा नेता रहे हैं तो मैं बधाई देता हूं लेकिन आप उन नेताओं को समझाओ जो पंडित जवाहर लाल नेहरू आजादी के लिये जेल के सींखचे में रहे, जिन्होंने देश की आजादी के लिये पूरी जिंदगी दांव पर लगा दी उनके नाम पर जेएनयू में अगर कोई तिरंगा फाडने की बात करे, कोई राष्ट्रद्रोह की बात करे इससे ज्यादा गद्दारी और देशद्रोह कोई हो नहीं सकता. और आप सपोर्ट करें, मैं आपका बहुत सम्मान करता हूं. आप युवा नेता हैं, आपने परिवर्तन किया है, आपने तो अपनी सरकारों को भी चेलेंज किया है, इसलिये आप युवाओं के प्रेरणास्त्रोत हैं . आप उसको भी चेलेंज करो जो तिरंगा फाड़ने की बात करे, आप उसको भी चेलेंज करो जो देश के टुकड़े करने की बात करे, आप उसको भी चेलेंज करो जो अफजल गुरू की बरसी मनाने का धंधा करे उसको भी चेलेंज करो, जिसको सुप्रीम कोर्ट फांसी दे,.

श्री मुकेश नायक-- पीडीपी ने तो खुद अफजल गुरू की फांसी का विरोध किया था. इसका उत्तर भी दे दो. जरा सोच समझकर के बोलें भैया. आपने पीडीपी के साथ सरकार नहीं बनाई कश्मीर में. पीडीपी के मुफ्ती मोहम्मद ने क्या पत्र लिखा था, पढ़ के बतायें.

श्री जितू पटवारी-- आप तो कम से कम ऐसी बात मत करो. आप तो आतंकवादियों को घर तक छोड़कर के आने वाले हो. संसद उड़ाने वालों को घर छोड़कर के आने वाले हो. कुछ तो भी बात करते हो.

उपाध्यक्ष महोदय-- कृपया बैठ जायें.

श्री सचिन यादव--कंधार तक छोड़कर के आये थे.

उपध्यक्ष महोदय- रामेश्वर जी को बोलने दें.

श्री रामेश्वर शर्मा-- उपाध्यक्ष महोदय, अगर मैंने कोई ऐसा शब्द बोला हो जिससे किसी को आपत्ति हो.यह भारत 1947 में आजाद हुआ, भगत सिंह, रामप्रसाद विस्मिल, खुदीराम बोस, अशफाकउल्ला खान, महात्मा गांधी, मंगल पांडे, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, तमाम लोगों ने कुर्बानी दी है अगर उनकी कुर्बानी कुछ लोग भूलना चाहते हैं तो ऐसे भुलक्कड़ लोगों से मैं कुछ कह तो नहीं सकता अगर उन्हें मेरी बात कुछ बुरी लगी हो तो उन शब्दों को मैं वापस कर लूं.

उपाध्यक्ष महोदय-- रामेश्वर जी मेरा सुझाव था कि आप मांगों पर भी बोल लें.

श्री जसवंत सिंह हाड़ा- उपाध्यक्ष महोदय, रामेश्वर जी के साथ अन्याय हो जायेगा, उन्होंने बहुत तैयारी की है, मुकेश भाई तो मांग पर आये नहीं.

श्री रामेश्वर शर्मा-- उपाध्यक्ष महोदय, मैं केवल एक प्रार्थना करना चाहता हूं.मैं मुकेश जी के मामले में बिल्कुल नहीं पड़ना चाहते वह वरिष्ठ राजनेता हैं, और दिग्विजय सिंह जी की और उनकी आंतरिक कलह को मैं यहां उजागर भी नहीं करना चाहता क्योंकि इसमें बहुत सी चीजें निकलेंगी मैं उसमें क्यों पडूं. मैं जितना सम्मान मुकेश भाई आपका करता हूं उतनी ही दिग्विजय सिंह जी का करता हूं और आप दोनों ही मध्यप्रदेश में सम्मानित हो. बाकी तो सब..

उपाध्यक्ष महोदय-- रामेश्वर जी उनके मुद्दों में आप अपना समय क्यों जाया कर रहे हैं. मांगों पर आयें.

श्री बाला बच्चन- उपाध्यक्ष महोदय, मांगों पर बोंले दिग्विजय सिंह जी का नाम क्यों ले रहे हैं, वे सदन के सदस्य हैं क्या.

श्री रामेश्वर शर्मा -- क्या वो आपके नेता नहीं है.

उपाध्यक्ष महोदय-- बाला जी कोई आपत्तिजनक बात तो नहीं कर रहे हैं लेकिन मांगों पर उनको आना चाहिये.

श्री बाला बच्चन -- दिग्विजय सिंह जी हमारी पार्टी के बहुत बड़े नेता हैं.

श्री रामेश्वर शर्मा- आप कमलनाथ जी के गुट के हो इसलिये दिग्विजय सिंह जी को स्वीकार नहीं करते, जितू पटवारी जी दिग्विजय सिंह गुट के हैं वो नहीं बोले, आप कमलनाथ गुट के हो तो आपको बुरा लग गया.

श्री बाला बच्चन -- आपको मांगों पर बोलना नहीं है. यहां वहां की बात कर रहे हैं. हमारे नेता कमलनाथ भी हैं, दिग्विजय सिंह जी भी हैं, राहुल गांधी जी भी हैं. सब हमारे नेता हैं , आप कहें तो आज इसी पर चर्चा कर लेते हैं.

श्री रामेश्वर शर्मा-- उपाध्यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि माननीय उच्च शिक्षा मंत्री महोदय लगातार शिक्षा के क्षेत्र में सुधार कर रहे हैं गुणात्मक विकास कर रहे हैं. आज मध्यप्रदेश में लाखों छात्र इससे लाभान्वित हो रहे हैं. हमारा प्रदेश निरंतर नाम कमा रहा है. उपाध्यक्ष महोदय, जैसा आपका निर्देश हुआ है मैं केवल 2-3 सुझाव देना चाहता हूं. अगर मंत्री जी को उचित लगे तो सभी महाविद्यालयों में, सभी कालेजों में एनसीसी को अनिवार्य किया जाये, अगर एनसीसी सभी महाविद्यालयों में अनिवार्य होती है , राष्ट्रीय चेतना की बात होती है, सेना के जवान उनको अगर प्रशिक्षित करते हैं , नैतिकता का पाठ होता है तो एक नई प्रथा वहां पर शुरू होगी. मेरी प्रार्थना है कि राष्ट्रीय सेवा योजना जो चालू है, कालेज में इसका पालन होता है मगर साल में 4 दिन 5 दिन का एक आयोजन होता है इसको भी त्रेमासिक किया जाना चाहिये. कम से कम तीन माह में एक राष्ट्रीय सेवा योजना के तहत एक गांव अनिवार्य रूप से दिया जाये और साल भर में उस गांव में एक ही प्रकल्प चलाया जाये या वो स्वच्छता का चलायें, पर्यावरण का चलाये, साक्षरता का चलायें, नोजवानों में प्रेरणा देने का काम करें पर तीन महीने में इसको केंप के रूप में लिया जाये और प्रत्येक शासकीय कालेज प्रायवेट कालेज में अनिवार्य रूप से अगर यह कराया जायेगा तो नैतिकता का पाठ भी होगा और बच्चों में गांव का भी बोध होगा.

उपाध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से एक और प्रार्थना करना चाहता हूं कि हम और आप रोजगारोन्मुखी शिक्षा की बात करते हैं . अभी भाई रामनिवास रावत साहब नहीं है उन्होंने कहा था कि शिक्षा का शुरू से ही ऐसा विकास हो हम जब कालेजों में एडमीशन लेते हैं तो विद्यार्थी लिखता है मैं किसान का बेटा हूं, कोई लिखता है कि मैं उद्योगपति का बेटा हूं, कोई कहता है कि मैं मास्टर का बेटा हूं जब इस तरह की श्रेणी हमारे पास में आती है, तो इस तरह की श्रेणी को हम चिह्नित करके क्या कालेजों में कौशल विकास केन्द्र के नाम पर या विवेकानंद जो विकास केन्द्र चल रहे हैं, ऐसे लोगों को जैसे कृषि के विद्यार्थी हैं, वो किसान के बेटे हैं कृषि पर पढ़ाई नहीं कर रहे हैं, लेकिन किसान के बेटों को उन्नत खेती के बारे में अगर हम बतायें और प्रोत्साहित करें तो उन्हें नया धंधा ढूंढने की जरूरत नहीं पडेगी. बल्कि पारंपरिक जो धंधा है उसमें ही वह आगे योगदान दे सकेंगे और अपना विकास कर सकते हैं, उस दिशा में वो आगे कर सकते हैं.

उपाध्यक्ष महोदय-- कृपया समाप्त करें.

श्री रामेश्वर शर्मा- उपाध्यक्ष महोदय, 2 मिनट में अपनी बात को समाप्त करूंगा.

श्री रामेश्वर शर्मा -- उपाध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से यह भी प्रार्थना करना चाहता हूं कि हमारे इन कालेजों में राष्ट्रीय सेमीनार होते हैं लेकिन उनको और ज्यादा करने की आवश्यकता है. और ज्यादा विचार विमर्श करने की आवश्यकता है, भारत की यह जवानी ही यही भारत का भाग्य विधाता है यही भारत का नेतृत्व करने वाली है और नेतृत्व करने वाली पीढ़ी किसी दल की नहीं है बल्कि वह हिन्दुस्तान की पीढ़ी है, हिन्दुस्तान की पीढ़ी को जो प्रेरणा दे सके जिनका भी नाम प्रेरणा दे सके, अगर वह नाम इंदिरा गांधी का है तो उस पर विचार किया जाये, अगर वह नाम विवेकानंद जी का है तो उस पर विचार किया जाये, अगर वह नाम डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का हो तो उस पर विचार किया जाये, अगर वह नाम पंडित नेहरू का है तो उस पर चर्चा हो, अगर वह नाम श्रीमान अटल बिहारी वाजपेयी का है तो उस पर चर्चा हो, अगर वह नाम दीनदयाल जी का है तो उस पर चर्चा हो लेकिन विकास किया जाये. एक और प्रार्थना करना चाहता हूं कि यह हम नहीं कह सकते हैं कि धीरे धीरे लोग हमारे महापुरूषों के चित्र भूल रहे हैं लेकिन कहीं न कहीं ऐसा लग रहा है कि महापुरूषों के चित्र लोगों के ध्यान से हट रहे हैं. अगर मंत्री जी चाहें तो प्रत्येक कक्ष में किसी भी एक महापुरूष का चित्र लगा देना चाहिये चित्र के नीचे उनका बोधवाक्य भी लिखा जाना चाहिये. जिससे वहां पर राष्ट्रीय महापुरूषों का चिंतन मनन और उनके चित्रों के बारे में व्यापक प्रचार प्रसार कर सकें. उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से यह भी कहना चाहता हूं कि मंत्री जी ने जो कहा था.

उपाध्यक्ष महोदय-- कृपया समाप्त करें.

श्री जसवंत सिंह हाडा- माननीय उपाध्यक्ष महोदय,शर्मा जी बहुत तैयारी करके आये हैं, उनको समय देना पडेगा, बहुत लिखकर के लाये हैं, दो दिन से जग रहे हैं, महाविद्यालय के मामले में इतनी तैयारी की है क्योंकि उनको मालूम था कि मुकेश जी के सामने उनको बोलना पड़ेगा, उपाध्यक्ष जी थोड़ी कृपा करें.

श्री मुकेश नायक-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप श्री रामेश्‍वर शर्मा जी को 5 मिनट का समय और दे दें, कम से कम ये अनुदान मांगों पर भी बोल लें.

श्री रामेश्‍वर शर्मा-- मेरे को अपनी मांग कर लेने दो, मुझे अपने यहां कालेज खुलवाने की मांग कर लेने दो.

अध्‍यक्ष महोदय-- एक मिनट में समाप्‍त करें.

श्री रामेश्‍वर शर्मा-- मैं एक प्रार्थना करना चाहता हूं. मेरा क्षेत्र फंदा है, और मेरे से लगा हुआ क्षेत्र भाई शैलेन्‍द्र पटेल का है और मेरा लालघाटी से लेकर, दीपक जी भी जानते हैं, मंत्री जी भी जानते हैं इस पूरे क्षेत्र में शासकीय महाविद्यालय नहीं है. अगर फंदा और बैरागढ़ के बीच में कोई शासकीय महाविद्यालय निकट भविष्‍य में, जहां भी फंस जाये वह आप बता देना, जहां भी निकट भविष्‍य में अगर कोई योजना हो और माननीय मंत्री महोदय जी का सर्वे या उच्‍च शिक्षा का सर्वे होता है गुणवत्‍ता के हिसाब से वह अगर आ जाये और वहां खुल जाये तो हमारे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को काफी लाभ होगा, शैलेन्‍द्र पटेल जी के भी कुछ गांव उसमें सम्मिलित हो जायेंगे. अगर वहां खुल जाये तो माननीय मंत्री महोदय ...

उपाध्‍यक्ष महोदय-- अब आप समाप्‍त करें.

श्री जितू पटवारी (राऊ)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज जिस विभाग पर चर्चा हो रही है उसकी अनुदान मांगों पर बात करने के लिये मैं खड़ा हुआ हूं. मैं इन सारी बातों को लेकर मध्‍यप्रदेश में, पूरे विश्‍व में, पूरे देश में शिक्षा विभाग और उच्‍च शिक्षा विभाग के कारण मध्‍यप्रदेश को नीचा देखना पड़ा, ये किसी से छिपा हुआ नहीं और मंत्री जी मैं उपाध्‍यक्ष जी के माध्‍यम से आपको भी बताना चाहूंगा कि मैं जो भी बात करूंगा ईमानदारी से क्रिटीसाइज नहीं करूंगा क्‍योंकि यह छात्रों के भविष्‍य का मामला है, मध्‍यप्रदेश के अच्‍छे संस्‍कारों के साथ इसका मुंह फिर से उजला कैसे हो, इसकी साख कैसे जमे विश्‍व में वापस मध्‍यप्रदेश के विश्‍वविद्यालयों पर कैसे इसके छात्रों पर देश के लोग भरोसा करें, इसके लिये कुछ सुझाव देना चाहूंगा. बहुत सी बातें सब कहेंगे, क्रिटीसाइज भी हो सकता है, आपकी बुराइयां भी हो सकती हैं, कमियां भी बता सकते हैं और मैं कोई दावा और किसी प्रकार से यह भी नहीं कहूंगा कि बाहर आप आरोप लगा लिये, अंदर लगाऊं, कोई आरोप भी नहीं लगा रहा हूं. मेरा तो अनुरोध इतना है कि आज जो शिक्षा हम दे रहे हैं मध्‍यप्रदेश में इंजीनियर छात्रों की या अन्‍य विषयों पर क्‍या बच्‍चे डिप्रेशन के दौर से नहीं गुजर रहे हैं. क्‍या वह छात्र इस स्थिति में नहीं है कि हमेशा तनाव में रहते हैं, क्‍या बच्‍चे इस स्थिति में नहीं है कि आत्‍महत्‍या हर साल 500 से ज्‍यादा इंजीनियरिंग के छात्र करते हैं. यह विचार हम सबको मिलकर करना पड़ेगा और इसमें पक्ष और विपक्ष नहीं हो सकता, यह सदन हो सकता है और हम सब यहां चुनकर आये हैं अगर हम लोग इस पर विचार नहीं करेंगे, इस पर बात नहीं करेंगे या जिस तरीके से इन विषयों पर जिस पर मध्‍यप्रदेश का भविष्‍य और देश की युवापीढ़ी का बन रहा है, उसमें एक दूसरे को आरोप प्रत्‍यारोप लगाकर अगर कोई विवाद और विरोध करेंगे तो मैं समझता हूं कि यह सार्थकता नहीं रहेगी. मैं आपसे इस अवसर पर यह भी कहना चाहता हूं कि जो निजी, व्‍यापम की बात भी अब नहीं करूंगा, व्‍यापम को लेकर जो हो सकता था सब कर लिया और उसको लेकर पूरे विश्‍व में मुंह काला हुआ उसको कैसे धो सकते हैं यह आपसे अनुरोध करूंगा. इसमें आप आगे रहकर थोड़ा अच्‍छा कुछ निर्णय लेगें तो आपकी मेहरबानी भी होगी. एक आपसे अनुरोध और है मंत्री जी कि यह जो व्‍यवसायिक परीक्षा मंडल का नाम बदला गया, हमारे सदन की एक गरिमा है, इसका एक महत्‍व है, क्‍या आपने सदन से अनुमति ली थी कि व्‍यवसायिक परीक्षा मंडल का नाम बदलकर प्रोफेशनल एग्‍जामिनेशन बार्ड करें, यह भी मैं समझता हूं लेना चाहिये, सदन की गरिमा बनें, पक्ष और विपक्ष के विधायकों को पता चले, इस पर अध्‍ययन हो और वह समझें कि क्‍या हुआ है, हम कई लोग उस शिक्षा से पढ़े हुये हो सकते हैं और कई नहीं भी हो सकते हैं, पर इन बातों को समझकर मैं अपनी मूल बात पर आना चाहता हूं कि क्‍या निजी विश्‍वविद्यालय व्‍यापम से बड़ा घोटाला करने की तैयारी में नहीं हैं. क्‍या एक तरफ व्‍यापम में जो मुंह काला हुआ है, क्‍या 2 साल बाद फिर यह सदन इस पर चर्चा करे. ...(व्‍यवधान)....

श्री लोकेन्‍द्र सिंह तोमर-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय .....(व्‍यवधान)

श्री जितू पटवारी-- यह हुआ है भैया निकलवा भी दोगे तो काला ही हुआ है और यह कांग्रेस बीजेपी का नहीं हुआ है, मध्‍यप्रदेश का हुआ है. मैं फिर से दोहराता हूं मेरी बात जब मैंने राज्‍यपाल के अभिभाषण के दौरान यह बात कही थी कि व्‍यापम से बड़ा घोटाला तकिया कलाम देश में बन गया है तो व्‍यापम से मुंह काला नहीं तो सफेद हुआ है, यह बात कहते हुये तो उन लोगों को सोचना चाहिये जो इस पर आपत्ति लेते हैं. मेरा अनुरोध है उपाध्‍यक्ष महोदय कि मैं सुझाव देना चाहता हूं.

उपाध्‍यक्ष महोदय-- तोमर साहब यह तो ट्रकों के पीछे भी लिखा रहता है कि बुरी नजर बाले तेरा मुंह काला तो कहां तक निकालेंगे उसको.

डॉ. कैलाश जाटव-- जितू भाई मेरा एक निवेदन है कि जिस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने पूरे प्रदेश में माहौल बनाया उसके बाद में एक भी चुनाव नहीं जीत पाये आप, मुंह काले की वजह से इतनी कम संख्‍या बची है सदन में आपकी.

श्री जितू पटवारी-- ये चुनाव जीतना और हारना और यह कौन सी सरकार है और कौन विपक्ष में है यह विषय नहीं है. विषय यह है कि कैसे हम इस बुराई के पाठ से बचें और मैं उसी पर बात कर रहा हूं, मंत्री जी जो निजी विश्‍वविद्यालय हैं, घोर अनियमिततायें कर रहे हैं और सरकार उनको श्रेय दे रही है, उनका बचाव कर रही है, उनका पक्ष ले रही है, अभी रामेश्‍वर शर्मा जी ने कहा कि आर.के.डी.एफ क्‍या है, किसका है कौन है अपने पूर्वजों से पूछो, भैया सरकार किसकी है उसको कार्यवाही करनी चाहिये कि नहीं, जितू पटवारी क्‍यों न हो अगर वह गलत है तो उसको जेल की सलाखों के पीछे डालना चाहिये कि नहीं डालना चाहिये. यह व्‍यवहार, यह धर्म आप नहीं निभा पाते हो, उसका दोषी विपक्ष है, मुकेश नायक है, जितू पटवारी है, कतई नहीं. मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूं कि इन विश्‍वविद्यालयों की परीक्षा की कोई अंतिम तिथि नहीं होती है और एडमीशन की भी कोई अंतिम तिथि नहीं होती है, आप जो नार्म्‍स देते हो उस पर कोई अंकुश सरकार का नहीं होता है, मंत्री जी इस पर विचार करें और उन पर इस तरह से शिकंजा कसें कि इन अनियमितताओं से बचें वह. मैं एक बार और आपसे अनुरोध करना चाहता हूं कि जो यूजीसी के और एसआईटीसी के मापदंड के अनुसार फेकल्‍टीज जो रखना चाहिये उसके नार्म्‍स को एक भी विश्‍वविद्यालय पूर्ण नहीं करता. आप अगर आकस्मिक जाते हो, आपका तंत्र जात है तो सब खेल होता है, आप भी समझते हो और मैं भी समझता हूं, उसको कैसे रोक सकते हैं तंत्र के रूप में, कैसे पारदर्शिता आये इस पर विचार करने की आवश्‍यकता है मंत्री जी. मध्‍यप्रदेश शासन ने इस संबंध में पूर्व छात्र...

अध्‍यक्षीय घोषणा

माननीय सदस्‍यों के भोजन विषयक

 

उपाध्‍यक्ष महोदय-- जितू जी एक मिनट. माननीय सदस्‍यों के लिये भोजन की व्‍यवस्‍था सदन की लॉबी में की गई है. माननीय सदस्‍यों से अनुरोध है कि वह अपनी सुविधा अनुसार भोजन ग्रहण करने का कष्‍ट करें.

श्री जितू पटवारी-- फिर भी मध्‍यप्रदेश शासन ने एक पत्र लिखकर इनको निर्देश दिये थे कि 15 अगस्‍त के बाद कोई निजी विश्‍वविद्यालय एडमीशन नहीं देंगे, सब कागजों का खेल होता है, कहीं भी ऑनलाइन व्‍यवस्‍था नहीं है तो मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आपका जो निर्देशित पत्र है उसको भी यह निजी वि‍श्‍वविद्यालय नहीं मानते हैं तो मैं आपसे ज्‍यादा कुछ न कहते हुये इतना जरूर कहना चाहता हूं कि इतनी बातें इतनी गैर कानूनी तरीके से यह लोग अपनी बातें करते हैं, अपना काम करते हैं और फिर भी हम उनका बचाव करते हैं और यह दावा करते हैं कि आप उस पर बाहर आरोप लगा दो तो फिर मैं बताऊंगा कि कौन सच है और कौन असत्‍य, यह बात सत्‍य नहीं है मंत्री जी. ... (व्‍यवधान)...

उच्‍च शिक्षा मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्‍ता)-- मैं स्‍वागत करूंगा, आपमें दम है और सत्‍यता है तो बाहर लगाइये. ... (व्‍यवधान)...

श्री मुकेश नायक-- अरे आप क्‍या बात करते हो, मैं अभी लगाउंगा सदन के बाहर जाकर अभी, मुझे आप जानते नहीं हो. आपके घर के सामने पत्रकारवार्ता बुलाकर आरोप लगाऊंगा.

उपाध्‍यक्ष महोदय-- मंत्री जी य‍ह उचित नहीं है, इस तरह. आरोप उनको लगाना है तो लिखित दें आपको नोटिस दें. यह जरूरी थोड़ी है कि सदन के बाहर ही लगाया जाये.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता-- हाउस में बिना नोटिस दिये लगाये गये. यह नियम है. यह कोई नोटिस आया नहीं.

उपाध्‍यक्ष महोदय-- हां नोटिस देना चाहिये नियमानुसार. पर यह कहा जाये कि बाहर लगाओ यहां मत लगाओ, ऐसा नहीं.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता-- उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं हाउस की बातों को बाहर कोर्ट में नहीं ले जा सकता.

उपाध्‍यक्ष महोदय-- जी हां, लेकिन यहां की गरिमा भी कम नहीं होनी चाहिये.

श्री मुकेश नायक-- इस तरह से धमकी देना थोड़ी उचित है, आप मंत्री हैं, आप सुधरने की वजाय धमकी दे रहे हैं.

उपाध्‍यक्ष महोदय-- मुकेश जी आप बैठ जायें हमने संज्ञान में ले ली उस बात को.

श्री जितू पटवारी-- मंत्री जी यह व्‍यवहार आपका थोड़ा गुण्‍डे जैसा दिखता है. .. (हंसी)

श्री उमाशंकर गुप्‍ता-- कल के घोड़े से नहीं उतरे.

श्री जितू पटवारी-- अरे मैं घोड़ा इतना दौड़ाता हूं वह तो मंत्री जी थीं मैंने उनका सम्‍मान किया, मंत्री जी आप भी बड़े हो. मेरा अनुरोध यह है कि जब केमरे लगते हैं सरकारी विश्‍वविद्यालयों में या महाविद्यालयों में कैमरे में परीक्षा होती है, निजी विश्‍वविद्यालयों में क्‍यों नहीं होती, क्‍या कारण है, क्‍या सभी कक्षाओं में केमरे लगे हैं. इस पर भी हमें ध्‍यान देना चाहिये और एक तरफ तो आप करते हो उच्‍च शिक्ष का बखान कि हमने यह किया, हमने यह किया, अभी रामेश्‍वर जी ने भी बखान किया, जो भी बोलेंगे वह सब तारीफ भी करेंगे. मेरा अनुरोध है यह शिक्षा की बात है, इसकी कमियां गिनाने की आदत डालो, मेरे यहां कॉलेज खुल जाये तो मेरा नाम हो जायेगा, मैं चुनाव जीत जाऊंगा. यह चुनाव जीतने और हरने से बहुत ऊपर है देश और प्रदेश के भविष्‍य को हम कैसे सुधारें, हमारे बच्‍चों के भविष्‍य को, उस पर विचार करने की आवश्‍यकता है साथियों.

मैं मंत्री जी से अनुरोध करता हूं कि आपने उच्च शिक्षा का जितना बजट घटाया है और शिक्षा का स्तर सुधारा यह क्या गणित है और यह क्या विज्ञान है, यह मैं नहीं समझ पाया. आपने हर जगह उच्च शिक्षा का बजट कम किया है इसको बढ़ाने की कोशिश करें. इसमें अच्छी से अच्छी पारदर्शिता के साथ फिर से उस विज़न को मध्यप्रदेश का जिससे सम्मान बढ़े, ऐसा कोई कार्य हो और इसमें विपक्ष को भी साथ में लें. विपक्ष का काम गिनाने का, बुराई करने का, परन्तु हम लोग बुराई सदन में करते हैं. लेकिन बाहर जब मध्यप्रदेश की बात आएगी तो हम सीना ठोककर कहेंगे कि हमारी सरकार है और जो गलती हुई उसको सुधार रही है. इसी आशा और विश्वास के साथ कि मेरे सुझावों को आप मानेंगे. उपाध्यक्ष महोदय, आपने जो बोलने का अवसर दिया उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद.

श्री दुर्गालाल विजय (श्योपुर) - उपाध्यक्ष महोदय, मैं उच्च शिक्षा तकनीकी शिक्षा की मांगों के समर्थन में अपनी बात कहने के लिए उपस्थित हूं. उपाध्यक्ष महोदय, बहुत परिचर्चा अभी हुई, लेकिन यह बात बहुत स्पष्ट है कि पिछले समय के रिकॉर्ड के आधार पर वर्तमान में जो कार्य किये गये हैं, विभाग के द्वारा, माननीय मंत्री जी के द्वारा, प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री जी के द्वारा, उससे यह बात निकलकर तो सामने आ रही है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हमारे यहां के विद्यार्थी बहुत अधिक आगे जाने की स्थिति में आए हैं.

श्री जितू पटवारी - उपाध्यक्ष महोदय, मेरा यह कहना है कि बुराई भी गिनाओ, तारीफ ही मत करो, यह मध्यप्रदेश के भविष्य का सवाल है.

श्री दुर्गालाल विजय - उपाध्यक्ष महोदय, पता नहीं मध्यप्रदेश के कैसे भविष्य के बारे में विचार करने वाले लोग हैं? आज अगर मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों का चाहे वह तकनीकी क्षेत्र में हो, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हो, न केवल मध्यप्रदेश राज्य में, न केवल भारत वर्ष में बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों ने अपने आपका उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए शिक्षा के मामले में और बड़े ऊंचाइयों पर पहुंचे हैं, बड़ा स्थान प्राप्त किया है. मुझे यह कहते हुए गौरव है. अभी 10-12 वर्षों के आंकड़ों को देखें और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चाहे वह चिकित्सा के क्षेत्र में हो, आईटी के क्षेत्र में हो, कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में हो, हमारे मध्यप्रदेश राज्य के युवाओं ने यहां से शिक्षा ग्रहण करने के बाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने आपको बहुत ऊंचाइयों पर ले जाने का कार्य किया है. उपाध्यक्ष महोदय, इस परिस्थिति को निर्मित करने में मध्यप्रदेश की सरकार ने हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी ने और हमारे उच्च शिक्षा मंत्री जी ने नीतियों में बड़ा अमूल-चूल परिवर्तन किया है. नीतियों में परिवर्तन के कारण से जो कार्य धीरे-धीरे करके आगे बढ़ाए, उनक कार्यों के कारण से निश्चित रूप से हमारे यहां के युवाओं को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक बेहतर संसाधन उपलब्ध हो सकें और उनको ठीक तरीके से अपने आपको आगे बढ़ाने के अवसर प्राप्त हुए हैं. तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में नीचे के स्तर पर ग्रामीण अंचल में रहने वाले विद्यार्थियों को ठीक से अवसर प्राप्त नहीं हो पाते थे. आज की परिस्थिति में मध्यप्रदेश की सरकार ने और हमारे तकनीकी शिक्षा विभाग ने, प्रदेश के मंत्री जी ने, मुख्यमंत्री जी ने बहुत प्रयत्न करके हर जिले के अंदर दो कौशल विकास केन्द्र खोलने के लिए जो कार्य किया है, उसके कारण ग्रामीण अंचल से आने वाले विद्यार्थियों को और ठीक तरीके से अपने आपको शिक्षित करने के लिए, प्रशिक्षित करने के लिए एक अच्छा मौका प्राप्त हुआ है.

उपाध्यक्ष महोदय, प्रत्येक विकास खण्ड स्तर पर आईटीआई की स्थापना करने का कार्य भी विभाग के द्वारा किया है. यह आईटीआई प्रशिक्षण केन्द्र प्रारंभ होने के कारण से जो लोग इलेक्ट्रिशियन में, मोबाईल में अथवा अन्य छोटी-छोटी तकनीकों में कार्य करने के उत्सुक हैं. इसके लिए जो प्रशिक्षण प्राप्त करना चाहते हैं, जिन्हें बहुत लम्बे समय तक कोई अवसर इस मध्यप्रदेश में प्राप्त नहीं हो पाया था, उस अवसर को उपलब्ध कराने की दृष्टि से यह विकास खण्ड स्तर पर जो आईटीआई प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना की गई है, उसके कारण से और कौशल विकास केन्द्रों के कारण से ग्रामीण अंचल में जो बहुत अधिक पढ़ाई नहीं कर सकते हैं. तकनीकी शिक्षा में, इंजीनियरिंग या ऊंचे स्तर पर नहीं जा सकते हैं उन लोगों को इस कार्य के माध्यम बहुत बेहतर अवसर प्राप्त हुए हैं. हम अगर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भी बात करें और पूरे देश के जो आंकड़े सामने आते हैं उनको देखकर विचार करें तो तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में, इनफॉर्मेशन टेक्नालॉजी में मध्यप्रदेश के युवाओं, विद्यार्थियों ने यहां से शिक्षा ग्रहण करके विभिन्न महाविद्यालयों में और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अच्छे महकमों में पहुंचे हैं. इसके अलावा उच्च शिक्षा की दृष्टि से भी बहुत सारे महत्वपूर्ण परिवर्तन करने का काम विभाग ने किया है. मैं समझता हूं कि जो कार्य अच्छे और बेहतर तरीके से किये जा रहे हैं शिक्षा में गुणवत्ता लाने की दृष्टि से विद्यार्थियों को आधुनिकतम शिक्षा प्रदान करवाने की दृष्टि से, प्राचार्यों, शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की दृष्टि से अथवा उनको बेहतर तरीके से किस प्रकार से शिक्षा प्राप्त हो सकती है. इसके लिए अच्छी ई-लाईब्रेरी स्थापित करने की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण कार्य इस मध्यप्रदेश की सरकार के द्वारा और विभाग के द्वारा किये गये हैं. इसके कारण से हमारे विद्यार्थियों को अच्छे अवसर प्राप्त हो रहे हैं और ठीक तरीके से आगे बढ़ने के भी मौके मिल रहे हैं.

उपाध्यक्ष महोदय, नीचे के स्तर तक शिक्षा, उच्च शिक्षा बेहतर तरीके से प्राप्त हो सके. इसके लिए नये 26 महाविद्यालयों की स्थापना पिछले समय की गई थी. नीचे के स्तर पर भी लोग उच्च शिक्षा ग्रहण कर सकें. इसका प्रयत्न विभाग के द्वारा और प्रदेश के माननीय उच्च शिक्षा मंत्री जी के द्वारा किया जा रहा है. ग्रामीण अंचल के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त हो सके, तकनीकी शिक्षा प्राप्त हो सके, इसके लिए क्या किया जाना चाहिए, किस बेहतर तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है, उसका ठीक तरीके से विचार करके हमारी सरकार ने बहुत महत्वपूर्ण कार्य किया है.

उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके सामने निवेदन करना चाहता हूं कि आज जो महाविद्यालय हैं उन महाविद्यालयों को उनकी शिक्षा की गुणवत्ता के आधार पर, उनके भवन और वहां पर जो परिसर है, उसके आधार पर National Assessment and Accreditation Council (NAAC) के द्वारा इंस्पेक्शन करने के पश्चात् एबीसी ग्रेड प्रदान किये जाते हैं. मुझे यह कहते हुए हर्ष है कि वर्तमान में 45 शासकीय महाविद्यालय NAAC से मूल्यांकित हुए हैं, उसमें 13 महाविद्यालयों को '' ग्रेड और 26 महाविद्यालयों को 'बी' ग्रेड का स्थान प्राप्त हुआ है. 6 महाविद्यालयों को 'सी' ग्रेड प्राप्त है. इसमें जिन्होंने '' ग्रेड प्राप्त किया है, उनको 15 लाख रुपए, जिन्होंने 'बी' ग्रेड प्राप्त किया है उनको 10 लाख रुपए और जिन्होंने 'सी' ग्रेड प्राप्त किया है, उनको 5 लाख रुपए की राशि प्रदान की जा रही है. हमारे महाविद्यालयों में जो प्राचार्य और अधिकारी हैं, जो शिक्षा की स्थिति में परिवर्तन आया है, वे ठीक से प्रशिक्षित हो सकें. इसके लिए भी हमारे उच्च शिक्षा विभाग ने और तकनीकी शिक्षा विभाग ने ठीक तरीके से प्रयत्न किये हैं. वर्ष 2015-16 में आरसीबीपी नरोना प्रशासन अकादमी भोपाल के माध्यम से प्राचार्यों, सचिवों और सहायक प्राध्यापक और अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण आयोजित करवाए गये थे. इस प्रशिक्षण के माध्यम से वे आधुनिक शिक्षा प्रणाली को समझकर नीच के स्तर पर विद्यार्थियों को ठीक तरह से अध्ययन करा सकें, यह एक अच्छा प्रयत्न है. क्योंकि आज पूरा देश ही नहीं, पूरे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जो आधुनिकतम शिक्षा आई है, उसका ठीक तरीके से प्रशिक्षण प्राप्त होने की आवश्यकता रहती है तो उसे कराने का प्रयत्न विभाग के द्वारा किया गया है.

माननीय उपाध्यक्ष महोदय मैं अपने क्षेत्र की दो बातें मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं. अभी सरकार ने 41 स्थानों पर कन्या महाविद्यालयों की स्थापना की है. अभी 11 जिले बाकी हैं जहां पर कन्या महाविद्यालय नहीं हैं. उनमें श्योपुर जिला भी हैं जहां पर कन्या महाविद्यालय की बहुत वर्षों से आवश्यकता महसूस की जा रही है. इसके संबंध में विभाग ने जो प्रस्ताव आमंत्रित किये थे वह प्रस्ताव महाविद्यालय स्तर से भेजे गये गये हैं. मैं मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि श्योपुर में कन्या महाविद्यालय शुरू करने की अतिशीघ्र कृपा करेंगे. मेरा तो आग्रह यह है कि इसी बजट में शामिल करा लें तो श्योपुर की कन्याओं को जो महाविद्यालय न होने के कारण घर में बैठी हैं उनको पढ़ने के लिए एक अच्छा स्थान प्राप्त हो जायेगा.

उपाध्यक्ष महोदय भौगोलिक दृष्टि से श्योपुर एक कोने पर होने के कारण से उच्च शिक्षा और तकनीकि दृष्टि से बच्चों को जयपुर, ग्वालियर, इंदौर और भोपाल जाना पड़ता है. मैं यहां पर मंत्रीजी से यह निवेदन करना चाहता हूं कि जिस प्रकार से आपने झाबुआ और शहडोल में इंजीनियरिंग महाविद्यालय स्थापित करके प्रारम्भ किया है जो कि दूरअंचल के क्षेत्र हैं. श्योपुर भी उसी तरह से वनवासी क्षेत्र है और वहां पर भी इस प्रकार की शिक्षा ग्रहण करने के लिए बच्चे बाहर नहीं जा पाते हैं, इसलिए श्योपुर में भी एक इंजीनियरिंग महाविद्यालय की बहुत आवश्यकता है. इसके लिए मैं श्योपुर की जनता की ओर से निवेदन करता हूं कि इसको शीघ्र वहां पर स्थापित करायें.

उपाध्यक्ष महोदय श्योपुर की एक बडौदा तहसील है. अच्छी तहसील है वहां पर कृषि उत्पादन बहुत ज्यादा होता है. लेकिन वहां पर विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए कोई स्थान नहीं है. केवल वहां पर हायर सेकेण्ड्री स्कूल है तो वहां पर एक कालेज की स्थापना के लिए बहुत लंबे समय से मांग चल रही है. मैंने भी उसके बारे में निवेदन पत्र माननीय मुख्यमंत्री जी और मंत्री जी को दिये हैं. इस अवसर पर मेरा निवेदन है कि बडौदा में एक शासकीय महाविद्यालय की स्थापना का निर्णय लेकर सरकार उसे शीघ्र प्रारम्भ कराये. उपाध्यक्ष महोदय सरकार ने अच्छे तरीके से काम किये हैं मुख्यमंत्री जी ने मंत्री जी ने पुन: मैं उनको धन्यवाद देना चाहता हूं आपको भी कि आपने मुझे बोलने के लिए समय दिया.

श्री शैलेन्द्र पटेल ( इछावर ) -- माननीय उपाध्यक्ष महोदय मैं यहां पर मांग संख्या 44 और 47 के विरोध में और कटौती प्रस्ताव के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं. मैंने कुछ कटौती प्रस्ताव दिये हैं उन्हीं के समर्थन में अपनी बात रखना चाहता हूं. अभी पूर्व वक्ताओं के द्वारा निजी विश्वविद्यालय की कमियों खामियों अनियमितताओं के बारे में बहुत सारी बातें कही गई हैं. मैं उनको रिपीट नहीं करना चाहता हूं. आरोप बहुत गंभीर हैं जांच की आवश्यकता है और सदन को भी उसको जानने का अधिकार है. ऐसा मंत्री जी बतायें कि वास्तव में उनकी क्या स्थितियां हैं.

उपाध्यक्ष महोदय मैं कोई उच्च शिक्षा का मैं विशेषज्ञ तो नहीं हूं लेकिन जो मोटी मोटी बातें समझ में आती हैं. मैं आपके माध्यम से सदन में रखना चाहता हूं. जहां तक मैं समझता हूं कि उच्च शिक्षा का महत्व केवल नौकरी पाने तक सीमित नहीं है. लेकिन यह तो ज्ञान के मंदिर हैं, जहां पर ज्ञान पाया जाता है और अपना खुद का मानवता का विकास किया जाता है. ये युवा एवं परिपक्व भारत के अध्ययन के वह स्थान हैं जहां पर मध्यप्रदेश ही नहीं देश के युवा अध्ययन करते हैं और अपने परिपक्व युवाकाल को और आगे तक ले जाने का प्रयास करते हैं. विचार क्रांति नये जोश और आगे बढ़ने की तमन्ना और जीवन की ऊंचाइयों तक पहुंचने का प्रयास कालेज और विश्वविद्यालय में होता है. उसे और आगे बढ़ाने की आवश्यकता है. जहां तक मैं समझता हूं कि उच्च शिक्षा में आज भी मध्यप्रदेश में जो रेशो है कि उच्च शिक्षा पाने के बाद में कितने लोगों की नौकरी लगी है. उस ओर विचार करने की बहुत ज्यादा आवश्यकता है. क्योंकि आज भी कहीं न कहीं गरीब वर्ग के लोग या मध्यम वर्ग के लोग जब उच्च शिक्षा के लिए जाते हैं तो उनके मां बाप यह उम्मीद करते हैं कि हमारा बेटा पढ़ लिखकर कोई न कोई नौकरी पायेगा, कोई न कोई रोजगार पायेगा, किसी सर्विस सेक्टर में जायेगा उसका रेशो के केलकुलेशन करने की आवश्यकता है कि वास्तव में कितने लोगों को रोजगार मिला है यदि रोजगार नहीं मिल रहाहै तो उसके लिए बेहतर काम कैसे कर सकते हैं. उसके लिए हमें यहां पर ही नहीं स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा रोजगार विभाग उद्योग विभाग के समन्वय की आवश्यकता है. किस विषय की मांग है किस प्रोफेश्नल की जरूरत है, और उनकी एकार्डेन्स में मिलाकर स्कूल शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक उसकी जगह प्राथमिकता से पूरी करना चाहिए वह विषय वहां से आना चाहिए. खासकर हम देखते सुनते हैं कि विदेशों में कालेज के समय में ही पार्ट टाइम जॉब बहुत से बच्चे करते हैं और उन पार्ट टाइम जॉब के प्रति हमारी कालेज एजुकेशन के दौरान और यूनिवर्सिटी की शिक्षा के दौरान उच्च शिक्षा विभाग क्या हेल्प कर सकता है. इसके बारे में आज मनन करने की जरूरत है, क्योंकि बहुत से बच्चे या युवा जब कालेज जाते हैं. उसी समय में वह पढ़ाई के साथ में वह अपने खुद के भविष्य के निर्धारण के लिए कोई काम करते हैं तो निश्चित रूप से वह प्रदेश के और उनके खुद के आर्थिक विकास में वह नींव और वह बीज उसी समय से उनके अंदर डल जायेगा.

उपाध्यक्ष महोदय एक और बात मुझे देखने में आयी है कि उच्च शिक्षा में 12वीं में जो विषय होते हैं उसी के आधार पर प्रवेश मिलता है लेकिन देखने में यह आता है कि बहुत सी नौकरियों में उन विषय की संबद्धता न होने के कारण वह विषय कम हो जाते हैं. जैसा कि स्कूल शिक्षा की नौकरी होती हैं उसमें कामर्स की संबद्धता समाप्त हो गई है, उसका परिणाम यह निकला की 11वीं और 12वीं में कामर्स विषय लेने वाले बच्चों की संख्या कम हो गई है. उसके कारण कामर्स फेकल्टी में जो बीकाम की है उसमें छात्रों की संख्या घट गई है. इस ओर भी ध्यान देने की आवश्यकता है कि जो विषय हैं उनके हिसाब से भी नौकरी हों ताकि सारे विषयों का अध्ययन हो सके, सभी विषयों में वह प्रवेश लेकर आगे बड़ सकें.

उपाध्यक्ष महोदय मेरे क्षेत्र की एक मांग बहुत दिनों से लंबित है. मैंने उसके बारे में प्रश्न भी लगाये थे. इछावर में 1985 से कालेज है. लेकिन वहां पर मात्र बीए और बीकाम का कालेज है.18 एकड़ का वह कैम्पस है उसमें बीएससी, बीएससी कम्पयूटर, बीए कम्पयूटर यह कोई भी संकाय नहीं है. मैं लगातार इस बारे में मांग कर रहा हूं. मै आदरणीय मंत्री जी से आपके माध्यम से इस क्षेत्र की मांग को पूरा करने की बात कहता हूं. दूसरा इछावर विधान सभा क्षेत्र में दो तहसीलें आती हैं एक तो इछावर और दूसरी सीहोर तो सीहोर जिला हेड क्वार्टर है, वह जिला हेड क्वार्टर होने के नाते पीजी कालेज सीहोर में है. उसके पास में ही लगा बिल्किसगंज जो कि एक बड़ा कस्बा है वहां पर 5 - 6 तो बड़े प्रायवेट स्कूल हैं, सरकारी स्कूल भी वहां पर हैं और आदिवासी अनुसूचित जाति के जो लोग हैं वह वहां पर पास में रहते हैं वहां पर भी एक कालेज की आवश्यकता है. चूंकि वह तहसील तो नहीं है लेकिन तहसील सीहोर होने के कारण वहां पर कालेज नहीं है तो वहां पर कालेज की आवश्यकता है उस मांग को भी पूरा किया जाय .

उपाध्यक्ष महोदय मेरा एक सुझाव है कि कालेजों के पास में बहुत जमीन है तो उस जमीन का हम कैसे बेहतर उपयोग युवाओं और छात्रों के लिए कर सकते हैं. वहां पर कौन से कंवेंसनल सेण्टर खोल सकते हैं, कैसे दूसरी गतिविधियों में उस जगह का हम कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं, उसके बारे में विभाग को प्लानिंग करने की आवश्यकता है. अन्य जो मूलभूत आवश्यकताएं हैं कालेज की चाहे स्टाफ की हो या फर्नीचर की हो, उसमें भारी कमी देखी गई है.यूजीसी के नार्म्स के कारण कई बार कालेज को जो अनुदान मिलता है उसमें कटौती की बात आती है उस ओर भी ध्यान देने की आवश्यकता है.

उपाध्यक्ष महोदय मध्यप्रदेश में केवल इंदौर ही एजुकेशनल हब के रूप में उभरा है. बाकी के दूसरे बड़े शहर भी एजूकेशनल हब के रूप में उभरें इस ओर भी ध्यान देने की आवश्यकता है. बाहर के देशों से लोग यहां पर आकर पढ़े ताकि प्रदेश की आर्थिक उन्नति भी हो और एक शिक्षा का माहौल प्रदेश के अंदर बने उस ओर गहन चिंतन और मनन की आवश्यकता है. उसके लिए एक्सपर्ट लोगों को भी बुलाकर बात करके कैसे हम हमारी यूनिवर्सिटी को आगे ले जायें इस बारे में भी ध्यान देने की आवश्यकता है. कालेजों में चुनाव हों उसका मैं समर्थन करता हूं. अतिथि विद्वानों की मांग जायज है उनकी मांग पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है. तकनीकि शिक्षा में जो पिरामिड होना चाहिए, नीचे आईटीआई, पालिटेक्निक कालेज, इंजीनियरिंग कालेज उसके बाद में आईआईटी वह पिरामिड अभी पूरे तरीके से नहीं है, इस पिरामिड को सही तरीके से बनायें, उसमें वोकेशनल को भी जोड़ लें और जरूरत के मान से वह रोजगार दें पायें, इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है. चाहे बीफार्मा या एमफार्मा इनमें भी इसी तरह की आवश्यकता है. मैं यहां पर इछावर के लिए सरकारी आईटीआई की भी मांग करता हूं उपाध्यक्ष महोदय आपने बोलने के लिए समय दिया इसके लिए मैं आपको बहुत बहुत धन्यवाद देता हूं.

डॉ. कैलाश जाटव (गोटेगांव) -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मांगों के समर्थन में बोलने के लिए यहां पर खड़ा हूँ. माननीय मंत्री जी से मेरा शिक्षा विभाग को लेकर केवल दो-चार बातों पर निवेदन है, अगर वह स्‍वीकार होगा तो हमारे नौजवानों का उज्‍ज्‍वल भविष्‍य बनेगा. जैसी कि आप सबको जानकारी है कि आज जो बच्‍चा पढ़ाई करता है उसकी आधी उम्र शिक्षा ग्रहण करने में ही निकल जाती है लेकिन जिस तरह की शिक्षा हम आज बच्‍चों को दे रहे हैं और पिछले 10 सालों में हमारे माननीय मुख्‍यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी ने हमारे बच्‍चों को दिया है उसका मैं समर्थन करता हूँ.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आज देखने में यह आ रहा है कि उच्‍च शिक्षा ग्रहण करने के बाद भी हम रोजगार के साधन उपलब्‍ध नहीं करा पा रहे हैं, इस पर हमें मजबूती से ध्‍यान देना पड़ेगा. हमारे शिक्षा विभाग में कई विषय ऐसे भी हैं जो औचित्‍यहीन हैं, बच्‍चों पर जबरदस्‍ती किताबों का बोझ डाला जाता है, 400-500 पेज की किताबें बन जाती हैं लेकिन उसमें कुछ विषय ऐसे हैं जिनका भविष्‍य में भी कोई काम नहीं है और वर्तमान में भी कोई काम नहीं है. अगर ऐसे विषयों को हम हटाएंगे तो हमारे बच्‍चों को न केवल कम राशि में पुस्‍तकें मिलेंगी बल्‍कि शिक्षा ग्रहण करने में भी आसानी होगी.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा माननीय मंत्री महोदय से एक और निवेदन है कि वर्तमान समय में आपने भी देखा होगा कि प्रदेश में प्राइवेट कोचिंग क्‍लासेज की संख्‍या किस तरह से बढ़ रही है. इन कोचिंग क्‍लासेस में न तो किसी प्रकार के आरक्षण की व्‍यवस्‍था है और न ही बच्‍चों की फीस में कोई कटौती की जाती है. अगर कोई गरीब परिवार का बच्‍चा है तो उससे भी उतनी ही राशि वसूली जाती है जितनी कि अन्‍य बच्‍चों से तो मेरा माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि ऐसे कोचिंग क्‍लासेस, जिनमें कि बच्‍चे अपने भविष्‍य को बनाने के लिए जाते हैं और गरीब परिवार के रहते हैं, उनकी कोचिंग क्‍लास की फीस के ऊपर कंट्रोल किया जाए ताकि गरीब परिवार के बच्‍चों को जिन्‍हें हम शासकीय रूप से आर्थिक मदद नहीं दे पाते हैं लेकिन वह पढ़ाई में आगे जाने के लि