मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

                                                                       __________________________________________________________

 

                                                                     चतुर्दश विधान सभा                                                                              नवम् सत्र

 

 

दिसंबर, 2015 सत्र

 

गुरूवार, दिनाँक 10 दिसंबर, 2015

 

(19 अग्रहायण, शक संवत्‌ 1937)

 

 

                                                                  [खण्ड-  9 ]                                                                                                 [अंक- 4]

 

                                                                        __________________________________________________________

 

 

 

 

 

 

 

मध्यप्रदेश विधान सभा

 

गुरूवार, दिनाँक 10 दिसंबर, 2015

 

(19 अग्रहायण, शक संवत्‌ 1937)

 

विधान सभा पूर्वाह्न 10.33 बजे समवेत हुई.

 

{ अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

            गृह मंत्री (श्री बाबूलाल गौर)--  माननीय अध्यक्ष महोदय, विधान सभा बहुत अच्छी चल रही है. इसके लिए आपको बहुत बधाई.

          अध्यक्ष महोदय--  धन्यवाद आपको. प्रश्न क्रमांक 1 श्री राजकुमार मेव...

          श्री सुन्दरलाल तिवारी--  माननीय अध्यक्ष महोदय, पहले मेरा एक निवेदन है आप से...

          अध्यक्ष महोदय--  माननीय मंत्री जी, अब आप बताएँ कैसे चलाएँ? अभी प्रश्न शुरू ही हुआ है, आप कृपा करके उनको पूछ लेने दीजिए.

          श्री सुन्दरलाल तिवारी--  (कुछ पेपर दिखाते हुए) अध्यक्ष महोदय, यह प्रश्न मेरा था...

          अध्यक्ष महोदय--  आ रहा है ना आपका भी.

          श्री सुन्दरलाल तिवारी—(xxx)  ..(व्यवधान)..

          श्री राजकुमार मेव--  श्रीमान् अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न पूरा हो जाने दें.

          श्री सुन्दरलाल तिवारी—(xxx) 

          अध्यक्ष महोदय--  आप अपना जब मौका आए तब बोलिएगा. श्री राजकुमार मेव...

          श्री सुन्दरलाल तिवारी—(xxx) 

          अध्यक्ष महोदय--  आप कृपा करके प्रश्नकाल बाधित न करें.

          श्री सुन्दरलाल तिवारी—(xxx) 

          अध्यक्ष महोदय--  यह बात ठीक नहीं है.

          श्री निशंक कुमार जैन—(xxx)  ..(व्यवधान)..

          श्री सुन्दरलाल तिवारी—(xxx) 

          श्री निशंक कुमार जैन—(xxx)  ..(व्यवधान)..

          अध्यक्ष महोदय--  आप क्या प्रश्नकाल नहीं चलने देना चाहते है?..(व्यवधान)..तो आप चलने दीजिए आपको जो बोलना है वह  साढ़े ग्यारह बजे बोलिए...(व्यवधान)..(श्री निशंक कुमार जैन द्वारा कोई कागज दिखाने पर)..(व्यवधान)..आप अखबार नहीं हिला सकते...(व्यवधान)..बैठ जाइये जैन साहब अखबार रखिए नीचे...(व्यवधान)..अखबार पढ़ कर आ जाते हैं..(व्यवधान)..

          श्री निशंक कुमार जैन—(xxx)  ..(व्यवधान)..

          संसदीय कार्य मंत्री (डॉ नरोत्तम मिश्र)—(xxx) ..(व्यवधान)..

          अध्यक्ष महोदय--  बैठ जाइये...(व्यवधान)..कुछ नहीं लिखा जाएगा इनका...(व्यवधान)…

श्री बाबूलाल गौर---  यह बिना अनुमति के बोल रहे हैं यह अनुशासनहीनता है..(व्यवधान)…

          अध्यक्ष महोदय--- मैं श्री सुंदरलाल तिवारी से अनुरोध करता हूं कि वह अपने स्थान पर बैठ जाएं मुझे कोई भी कड़ी कार्यवाही करने के लिए बाध्य न करें, आप बैठ जाएं और आप नियम पढ़ लें कि जब नाम लेकर बोला जाता है तब क्या होता है.

          श्री सुंदरलाल तिवारी--  (XXX)

          अध्यक्ष महोदय--- यह आपका तरीका ठीक नहीं है. दूसरे सदस्यों के अधिकारों का आप हनन नहीं कर सकते हैं.

          श्री बाबूलाल गौर---  आप बिना अनुमति के नहीं बोल सकते हैं आपका जब नंबर आए तब बोले.

          श्री सुदंरलाल तिवारी—(XXX)

            डॉ. नरोत्तम मिश्र--- इनमें जवाब सुनने की हिम्मत नहीं है जब जवाब सुनने का समय आता है भाग जाते हैं दल बल सहित  और अभी जवाब सुन लें कि चवन्नी की कोई परचेजिंग सेंट्रल नहीं होती है. चवन्नी का भुगतान सेंट्रलाइज नहीं होता है.

          अध्यक्ष महोदय---  आप सभी बैठ जाइए.

          श्री बाबूलाल गौर---  अध्यक्ष महोदय, यह सारी कार्यवाही विलोपित कर दें.

          अध्यक्ष महोदय--- सब निकाल दिया है यह कार्यवाही नहीं लिखी जाएगी

 

 

 

 

 

 

 

तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर

 

मुख्‍यमंत्री युवा स्‍वरोजगार योजना का क्रियान्‍वयन

1. ( *क्र. 617 ) श्री राजकुमार मेव : क्या उद्योग मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि    (क) मुख्‍यमंत्री युवा स्‍वरोजगार योजना क्‍या है? योजनांतर्गत कौन-कौन सी गतिविधियों के माध्‍यम से स्‍वरोजगार हेतु ऋण उपलब्‍ध कराया जाता है? योजना में ऋण स्‍वीकृत किये जाने के क्‍या प्रावधान है? क्‍या ऋण स्‍वीकृत किये जाने हेतु बैंक द्वारा जमानत एवं सिक्‍यूरि‍टी स्‍वरूप किसी भी प्रकार की चल/अचल संपत्ति बैंक को उपलब्‍ध कराना अनिवार्य है? (ख) खरगोन जिले में मुख्‍यमंत्री युवा स्‍वरोजगार योजनांतर्गत वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 में कितने-कितने आवेदन प्राप्‍त हुए तथा कितनी प्रावधानित राशि के ऋण प्रकरण तैयार कर बैंक को भेजे गये हैं? (ग) प्रश्‍नांश (ख) के संदर्भ में बैंक शाखाओं द्वारा कितनी राशि के ऋण प्रकरण स्‍वीकृत किये गये एवं कितनी ऋण राशि आवेदक को उपलब्‍ध कराई गई एवं कितनी राशि और उपलब्‍ध कराई जाना शेष है? कितने प्रकरण बैंक शाखा द्वारा अस्‍वीकृत किये गये हैं? (घ) क्‍या खरगोन जिले में मुख्‍यमंत्री युवा स्‍वरोजगार योजनांतर्गत विभाग एवं बैंक शाखाओं द्वारा भौतिक एवं वित्‍तीय लक्ष्‍य की पूर्ति हेतु मात्र औपचारिकता की जा रही है? यदि हाँ, तो इस संबंध में शासन स्‍तर पर कोई कार्यवाही या कोई ठोस नीति तैयार की जा रही है?

उद्योग मंत्री ( श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया ) : (क) मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में युवाओं को उद्योग सेवा एवं व्यवसाय अंतर्गत बैंको के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराकर स्वरोजगार उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान है, जिसमें शासन द्वारा निर्धारित अर्हताओं के पात्र आवेदक को ऋण स्वीकृत किये जाते हैं। ऋण स्वीकृत किये जाने हेतु बैंक द्वारा योजनान्तर्गत किसी भी प्रकार की जमानत एवं सिक्यूरिटी चल/अचल सम्पत्ति बैंक को उपलब्ध कराने का प्रावधान नहीं है। (ख) एवं (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। बैंक शाखाओं द्वारा प्रकरण अस्वीकृत नहीं किये जाते। बैंक शाखाओं द्वारा लक्ष्यपूर्ति उपरांत शेष प्रकरण योजना की निरन्तरता में आगामी वित्तीय वर्ष हेतु विचार किया जाता है। (घ) खरगोन जिले में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का संचालन शासन द्वारा निर्धारित मापदण्डों के अनुसार किया जा रहा है। अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

 

          श्री राजकुमार मेव---  युवा स्वरोजगार योजना जो मुख्यमंत्री जी ने निकाली है उससे लाखों युवा लाभ ले रहे हैं उसके लिए मैं मुख्यमंत्री जी को बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहूंगा और माननीय मंत्री जी को भी बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन्होंने मेरे प्रश्न का बहुत सटीक और सही उत्तर दिया है. एक विषय उसमें उद्भूत होता है कि बैंक उसमें सहयोग नहीं कर रहे हैं. मैं प्रापर महेश्वर विधानसभा की बात कर रहा हूं कि वहाँ 30 आवेदन भारतीय स्टेट बैंक में लगाये गये उसमें एक भी प्रकरण बैंक द्वारा स्वीकृत नहीं किया गया. क्या इसमें बैंक मैनेजर पर दंड या कोई और कार्यवाही होगी.

          श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया---  माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय विधायक जी को बताना चाहती हूं कि ऐसी खबरें समय समय पर  मिलती हैं कि बैंक और बैंक मैनेजर छोटे-मोटे प्रकरणों में समय समय पर मदद नहीं करते इसीलिये माननीय मुख्यमंत्री जी ने एक  स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी गठित की है जो माननीय मुख्य सचिव के अंडर है. वह  कमेटी ऐसी चीजों को रीव्यू करती है . अब विधायक जी के आवेदन कैसे पहुंचे, जो आज बैंक उसको मंजूर नहीं कर रहे हैं तो मेरे पास दो-तीन विकल्प हैं, जो मैं उनको बताना चाहती हूं कि एक तो हम डीआईसीज को सेन्सिटाईज और करवाना चाह रहे हैं कि ऐसे ऐसे प्रकरण अगर आपके पास आएं तो आप लोग खुद जाओ बैंक के पास, बैंक मैनेजर के पास और पूछो कि क्यों नहीं आप लोग यह मंजूरी दे रहे हो. दूसरा विकल्प है कि आप लोग ऐसे जो भी आवेदन हैं, जिसमें आपको  दिक्कत आती है तो कृपया मेरे पास ले आएं, मेरी ओपन डोर पॉलिसी है, जिसमें आप कभी भी मुझे वह प्रकरण देने के लिए आ सकते हैं. तीसरा विकल्प है कि हम लोग यह स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी को भेज सकते हैं. चौथा विकल्प है कि जब जिला योजना समिति होती है तो मैं सभी जिलों में रिकवेस्ट कर रही हूं कि जब प्रभारी मंत्री आते हैं तो जिला योजना समिति में बैंकर्स को भी बुलाया जाये और विधायक उस समय वह प्रकरण सामने ले आए बैंकर्स के सामने कि यह यह हमारी समस्या है आपने इनको बैंक लोन नहीं दिये.  तो यह चार विकल्प हमारे पास हैं और हम हर बार कोशिश कर रहे हैं  डीआईसी को भी सेन्सिटाइज करवाने के लिए .

          श्री राजकुमार मेव--- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगा कि ऐसी कोई समिति का जिला स्तर पर गठन करेंगे कि जो पेंडिंग प्रकरण की सुनवाई कर सके.

          श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया--- कलेक्टर की अध्यक्षता में तो टास्क फोर्स है ही तो इसी लिए दूसरी कमेटी गठित करना शायद उचित न हो. मेरा सुझाव अभी भी है कि कलेक्टर टास्क फोर्स के साथ साथ कलेक्टर को रिकवेस्ट किया जाए कि विधायक जी भी उसमें इनक्लूड किये जायें, पर वह तो कलेक्टर के ऊपर है. वह जिला प्रशासन के ऊपर है,मेरे ऊपर नहीं है.

          श्री जितू पटवारी--- विधायकों को भी इसमें जोड़ लिया जाये.

          श्री सुदंर लाल तिवारी--  विधायकों को भी जोड़ लिया जाये.


 

            मुख्यमंत्री(श्री शिवराजसिंह चौहान)—माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक राजकुमार मेव जी ने बहुत महत्वपूर्ण सवाल उठाया है. मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना इसलिए बनायी गयी, लागू की गयी कि जो नौजवान अपने पैरों पर खड़े होकर  अपना काम धंधा और रोजगार करना चाहते हैं, उनको अधिक अवसर उपलब्ध करा सकें. इन योजनाओं में  सरकार ने यह भी तय किया कि जो उद्यमी हैं या और व्यापार करना चाहते हैं उनको कोई गारंटी नहीं देनी होगी लेकिन यह बात सही है कि समय-समय पर जैसा विधायक जी ने बताया, यह शिकायतें आती हैं कि लोन स्वीकृत नहीं होते, प्रकरण स्वीकृत नहीं होते. उसके दो कारण हैं, एक तो उनकी संख्या कई बार ज्यादा हो जाती है, टार्गेट कम होता है लेकिन इसके अलावा भी दिक्कतें जो उन्होंने बतायी हैं जैसा माननीय मंत्री जी ने कहा कि वे सामने आयी हैं और इसलिए  पिछली बार मैंने खुद बैंकर्स की जो राज्य स्तरीय कमेटी है उसकी बैठक ली थी वैसे सामान्यत: परम्परागत रुप से तो मुख्य सचिव उस बैठक को लेते हैं और हमने बैंकर्स से भी आग्रह किया कि वे इसमें सहयोग करें. जो हमारे सारे राष्ट्रीयकृत बैंक हैं वे सारे बैंक सम्मलित हैं तो उनसे चर्चा कर के भी और यह सुझाव बहुत अच्छा है कि  जिला स्तर पर भी इसकी मॉनीटरिंग लगातार होती रहे तो हम ऐसी पुख्ता व्यवस्था बनायेंगे कि जिससे लगातार मॉनीटरिंग जिला स्तर पर कलेक्टर करते ही हैं, होती रहे और हम ये कहेंगे कि ऐसी मॉनीटरिंग में किसी न किसी रुप में विधायक को भी सम्मलित किया जाए क्योंकि यह बहुत महत्वपूर्ण योजना है और जनप्रतिनिधि के मन में जितनी तड़प होती है, मैं नहीं मानता कि और किसी के मन में उतनी हो सकती है क्योंकि वास्ता तो हमारा ही  लोगों से पड़ता है, लोग हमारे पास आते हैं इसलिए  इस व्यवस्था को और बेहतर और पुख्ता बनाने की कोशिश करेंगे और मैं चाहता हूँ कि सबके सहयोग से मैं और मंत्री जी इसमें हम सब मिलजुलकर हमारे ऐसे नौजवानों को लाभांवित कर पायें जो अपने पैरों पर खड़े हों और मध्यप्रदेश की ग्रोथ रेट बढ़ाने में भी योगदान करें.

          श्री राजकुमार मेव—अध्यक्ष महोदय,आपका और मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद.

          श्री ओमप्रकाश सकलेचा—माननीय अध्यक्ष महोदय, बहुत संक्षेप में सुझाव देना चाहता हूँ कि जिला स्तरीय बैठक में हम जाते हैं और कलेक्टर कई बार विधायकों को बुलाते हैं और वहां पर जब इसकी चर्चा आती है तो उसमें तीन बिन्दु आते हैं, एक तो कुछ मैनेजर्स ऐसे पोस्टेड हैं जिनको अधिकार नहीं होते हैं दूसरा जितना भी बैंकों में डिपाजिट जाता है वह यहां भोपाल स्तर से तय होता है.अगर एक अधिकार कलेक्टर को या उस कमेटी को दे दें कि जो जो बैंकर्स में को-आपरेट नहीं करते हैं उनके वहां से सब डिपाजिट सरकारी विड्रा हो जाए तो आगे मैनेजर उसमें करेक्ट कर लेंगे क्योंकि यह राज्य स्तर से तय करते हैं जो को-आपरेट ही नहीं कर रहे हैं जो एक भी लोन नहीं दे रहे हैं, खुद चर्चा के बाद और बैठक में भी मना कर देते हैं कि हम देना नहीं चाहते हैं तो इस पर माननीय मुख्यमंत्री जी कृपया कुछ बोलना चाहें तो.

          सरवर देवला मार्ग निर्माण में विलंब

2. ( *क्र. 962 ) श्री सचिन यादव : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि  (क) दिनाँक 23 जुलाई, 2015 की प्रश्‍नोत्‍तरी के प्रश्‍न क्रमांक 103 के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न दिनाँक तक क्‍या कार्यवाही की गई है? (ख) सरवर देवला मार्ग वित्‍तीय व्‍यय समिति द्वारा क्‍या अनुमोदित किया जा चुका है? यदि हाँ, तो क्‍या वर्तमान बजट में शामिल किया गया है? यदि नहीं, तो क्‍यों? कारण दें। (ग) उक्‍त मार्ग के निर्माण कार्य में विलंब के क्‍या कारण हैं? प्रथम कार्यवाही दिनाँक से प्रश्‍न दिनाँक तक कार्यवाही पूर्ण नहीं किये जाने के स्‍पष्‍ट कारणों का उल्‍लेख करें। (घ) उक्‍त मार्ग में बार-बार त्रुटियां दर्शाये जाने के कारण विलंब हेतु कौन-कौन अधिकारी दोषी हैं, के खिलाफ क्‍या कार्यवाही की जायेगी? यदि हां, तो बतायें। यदि नहीं, तो क्‍यों? कारणों का उल्‍लेख करें।

लोक निर्माण मंत्री ( श्री सरताज सिंह ) : (क) वित्‍तीय समिति से अनुमोदन नहीं होने के कारण प्राक्‍कलन बिना स्‍वीकृति के वापस किये गये। (ख) जी नहीं। जी नहीं। वित्‍तीय सीमा उपलब्‍ध नहीं होने के कारण। (ग) वित्‍तीय स्‍वीकृति प्राप्‍त नहीं होने के कारण विलंब हो रहा है। कारणों का विवरण प्रश्‍नांश ‘’’’ के उत्‍तर में दर्शाया गया है। (घ) कोई भी विभागीय त्रुटि नहीं है। अत: कार्यवाही का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

          श्री सचिन यादव—माननीय अध्यक्ष जी, मैं आपका आर्शीवाद और संरक्षण चाहता हूँ क्योंकि यह प्रश्न  किसानों और सहकारिता विभाग के मार्ग से संबंधित है. मेरे विधानसभा क्षेत्र के मुख्य मार्ग से ग्राम सरवर देवला तक एक मार्ग निर्माण की मेरी मांग है और इस मांग को मैं विगत कई सत्रों से जब से मैं निर्वाचित हुआ हूँ, सदन में उठा रहा हूँ. यह मार्ग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस मार्ग पर एक सहकारी शुगर फेक्ट्री स्थित है, जब गन्ने का सीजन आता है तो हमारे उस क्षेत्र के जो गन्ना उत्पादक किसान हैं उनको भारी समस्या का सामना करना पड़ता है. मैंने विधानसभा के माध्यम से इस सड़क के निर्माण के लिए, इसकी प्रशासनिक स्वीकृति के लिए प्रश्न भी उठाया था और 11 दिसम्बर 2014 और 23 जुलाई 2015 को  इस मार्ग को लेकर विधानसभा में प्रश्न लगा था.अध्यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से अऩुरोध है कि चूंकि यह बहुत महत्वपूर्ण मार्ग है, क्या आज आप इस सदन में इस मार्ग को  बजट में सम्मलित करने की घोषणा करेंगे?

 

                                                                                                           


 

          राज्‍यमंत्री, संस्‍कृति, पर्यटन (श्री सुरेन्‍द्र पटवा) – माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी की मांग पर संबंधित कार्यपालन यंत्री द्वारा प्राक्‍कलन तैयार कर प्रेषित किया गया था. यह प्रस्‍ताव शासन स्‍तर पर वित्‍तीय व्‍यय समिति को प्रेषित किया गया और वित्‍तीय व्‍यय समिति से इसकी स्‍वीकृति नहीं हुई. इसका कारण है कि जो यहां पर रास्‍ता है वहां पर यातायात का घनत्‍व काफी कम है और प्राथमिकता से पहले के जो दूसरे हैं उनको प्राथमिकता दी जा रही है.

          श्री सचिन यादव – माननीय अध्‍यक्ष जी, चूँकि यहां पर एक शुगर फैक्‍ट्री स्‍थापित है और गन्‍ने की आवक बहुत ज्‍यादा होती है, मैं माननीय मंत्री जी की बात से सहमत हूँ कि पूरे बारह महीनों में इस मार्ग पर उतना ट्राफिक नहीं होता होगा लेकिन जब गन्‍ने का सीजन आता है तो गन्‍ने के सीजन में यह रोड बहुत महत्‍वपूर्ण हो जाती है इसलिए मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूँ कि जो गन्‍ना उत्‍पादक किसान हैं उनके हितों को ध्‍यान में रखते हुए इस मार्ग को स्‍वीकृत किया जाए. आज मेरे विधान सभा क्षेत्र से हमारे कई गन्‍ना उत्‍पादक किसान भी यहां पर मौजूद हैं और इस आशा और उम्‍मीद से इस सदन में आए हैं कि जो इस क्षेत्र की एक मांग बहुत लंबे अर्से से चली आ रही है उस मांग को ध्‍यान में रखते हुए माननीय मंत्री जी आज इस सदन में इसकी घोषणा करेंगे, उसको बजट में सम्‍मिलित करेंगे.

          श्री सुरेन्‍द्र पटवा – जैसा मैंने पहले कहा कि शासन की प्राथमिकता है कि पहले 10 हजार किलोमीटर स्‍टेट हाईवे, 20 हजार किलोमीटर की एमडीआर बनानी है, विभाग को उपलब्‍ध वित्‍तीय साधनों से अभी इस रोड की स्‍वीकृति संभव नहीं है, उसके बाद भी अगर विधायक जी चाहेंगे, वहां कहीं रिपेयरिंग की आवश्‍यकता है तो उसको तुरंत करा दिया जाएगा.

          श्री सचिन यादव – मैं अपनी बात को पुन: दोहराना चाहता हॅूं.

          अध्‍यक्ष महोदय – वे रिपेयरिंग करा देंगे.

          श्री सुरेन्‍द्र पटवा – वर्तमान में यह कार्ट ट्रेक है और यहां पर आवागमन उतना नहीं है जब गन्‍ने की फसल होती है उसके बाद जब कारखाने में आवश्‍यकता होती है तो चार महीने के लिए यातायात होता है.

          श्री सचिन यादव – अध्‍यक्ष जी, मैं आपका संरक्षण और आशीर्वाद चाहता हूँ.

          अध्‍यक्ष महोदय – आपकी बात आ गई और वे सहमत भी हैं कि उसको वे रिपेयर करा देंगे.

          श्री सचिन यादव – माननीय अध्‍यक्ष जी, रिपेयर होने से कुछ नहीं होगा. जब से मैं निर्वाचित हुआ हूँ, तब से मैं लगातार इस बात को उठा रहा हूँ. आज सरताज सिंह जी इस सदन में उपस्‍थित नहीं हैं मैंने उनसे भी निवेदन किया था, आला-अधिकारियों से भी विगत डेढ़ साल से बार-बार जाकर मिल रहा हूँ और इस रोड को स्‍वीकृत कराने के लिए प्रयासरत हूँ.

          अध्‍यक्ष महोदय – आपकी बात आ गई रिकार्ड में.

          श्री सचिन यादव – माननीय अध्‍यक्ष जी, यह रोड बहुत महत्‍वपूर्ण है इसलिए मैं आपके माध्‍यम से मंत्री से अनुरोध करना चाहता हूँ कि इस रोड की प्रशासनिक स्‍वीकृति आज मिल जाए.

          अध्‍यक्ष महोदय – उन्‍होंने स्‍पष्‍ट उत्‍तर दिया है अब उसमें कोई गुंजाइश नहीं है.

          डॉ. गोविन्‍द सिंह – माननीय अध्‍यक्ष जी, तमाम सड़कें बजट में सम्‍मिलित हैं, माननीय मुख्‍यमंत्री जी भी सदन में बैठे हुए हैं, जब यह सड़क महत्‍वपूर्ण है और वे किसानों के हितैषी हैं तो इस रोड की स्‍वीकृति दे दी जाए.

          अध्‍यक्ष महोदय – आप सभी की बात आ गई है, वे कंसीडर करने को तैयार हैं, मंत्री जी ने मना कहां किया.

          श्री सचिन यादव – माननीय अध्‍यक्ष जी, आज सदन में माननीय मुख्‍यमंत्री जी उपस्‍थित हैं, मैं माननीय अध्‍यक्ष जी के माध्‍यम से माननीय मुख्‍यमंत्री जी से भी अनुरोध करना चाहता हूँ. (व्‍यवधान...)

          अध्‍यक्ष महोदय – जबरदस्‍ती नहीं कर सकते, यह बात ठीक नहीं है. आपकी बात आ गई रिकार्ड में और शासन ने अपना उत्‍तर दे दिया है. इस तरह दबाव नहीं डाला जा सकता. (व्‍यवधान...)

          श्री सुरेन्‍द्र पटवा – माननीय अध्‍यक्ष जी, मैं आपकी अनुमति से कुछ कहना चाहता हूँ जैसा विधायक जी ने कहा है मैं सदन को यह अवगत कराना चाहता हूँ कि एक तरफ गोपालपुर मुख्‍य मार्ग पर है इसमें स्‍टेट हाईवे बना हुआ है और दूसरी तरफ सरवर देवला यह भी मुख्‍य मार्ग पर है. इन दोनों के बीच में लगभग 7 किलोमीटर के आसपास का रास्‍ता कच्‍चा है और केवल एक गांव उसमें आता है जिसकी संख्‍या 891 है करोड़िया, हो सकता है वह प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क में छूट गया होगा, अगर आप कहेंगे तो उसको जुड़वा दिया जाएगा.

          श्री सचिन यादव – माननीय अध्यक्ष महोदय उससे हमारी समस्या हल नहीं होगी.

          अध्यक्ष महोदय – मंत्री जी उसको जोड़ने के लिए तैयार हैं आप और क्या चाहते हैं...(व्यवधान).

          श्री सचिन यादव – अध्यक्ष महोदय क्षेत्र का बहुत बड़ा रकबा उस सड़क से आता है.

          अध्यक्ष महोदय – उन्होंने मना कहां किया है. आपकी बात भी आ गई है और उसका समाधान भी हो गया है अब और क्या चाहते हैं....(व्यवधान)..

          श्री सचिन यादव – अध्यक्ष महोदय वह प्रधानमंत्री सड़क में नहीं जुड़ सकता है...(व्यवधान)...

          अध्यक्ष महोदय – आपको बहुत समय दिया है यह अच्छी बात नहीं है. आप बैठ जायें. आपकी बात का निराकरण करने के लिए मंत्री जी तैयार हैं  और उसके बाद में आप क्या चाहते हैं..( श्री सचिन यादव जी के फिर से प्रश्न करने के लिए खड़ा होने पर)..  मंत्री जी तैयार हैं अब आप क्या चाहते हैं. नहीं. This is not proper.

          प्रश्न संख्या – 3 ( अनुपस्थित )

          प्रश्न संख्या – 4 ( अनुपस्थित )

         

वन भूमि पर काबिज आदिवासी किसानों को पट्टे का वितरण

5. ( *क्र. 788 ) इन्जी. प्रदीप लारिया : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि      (क) नरयावली विधानसभा क्षेत्र में ग्राम पंचायत बेरखेरी सुवंश के ग्राम खानपुर के आदिवासी किसान वन भूमि पर कितने वर्षों से काबिज होकर वन भूमि में कृषि कार्य कर रहे हैं? (ख) क्‍या प्रश्‍नांश (क) के आदिवासी किसानों को विभाग/राजस्‍व विभाग द्वारा पट्टे वितरण किये जाने का प्रावधान है? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो कारण बतावें। (ग) क्‍या विभाग द्वारा प्रश्‍नांश (क) क्षेत्र के लगभग 20 से अधिक काबिज किसानों को बेदखल करने की कार्यवाही की जा रही है? यदि हाँ, तो क्‍यों?

वन मंत्री ( डॉ. गौरीशंकर शेजवार ) : (क) प्रश्‍नांकित वन भूमि पर कोई कब्‍जा नहीं है। (ख) एवं (ग) वन भूमि पर पट्टे (गैर वानिकी उपयोग) वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत प्रस्‍ताव पर भारत शासन की अनुमति प्राप्‍त करने के उपरांत ही दिये जाने का विधिक प्रावधान है। उत्‍तरांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में शेष का प्रश्‍न उपस्थि‍त नहीं होता।

          इंजीनियर प्रदीप लारिया – माननीय अध्यक्ष महोदय यह प्रश्न आदिवासियों से जुड़ा हुआ है. प्रश्न क का जो जवाब विभाग के द्वारा आया है. उसमें लिखा है कि कोई काबिज नहीं है. लेकिन आज भी लगभग 84 आदिवासी किसान वहां पर काबिज हैं वहां पर खेती कर रहे हैं. उन्होंने वहां पर गेहूं और चने की फसल बोयी हुई है. यह आदिवासी किसान वहां पर 1996-97 से काबिज हैं. यह जो उत्तर आया है कि वहां पर कोई काबिज नहीं है यह उत्तर ठीक नहीं है. मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि जिस तरह से वन अधिकार के पट्टे पूरे प्रदेश में लगभग 2.5 लाख आदिवासियों को दिये गये हैं मैं इ सके लिए सरकार को बधाई देना चाहता हूं. मेरा इतना ही निवेदन है कि इन 84 आदिवासी किसानों को जिनमें से प्रत्येक के पास में एक से लेकर सवा एकड़ तक जमीन है. क्या इनको पट्टे दिये जायेंगे.

          डॉ गौरीशंकर शेजवार – माननीय अध्यक्ष महोदय हमारी जानकारी के हिसाब से कोई वन भूमि पर काबिज नहीं है वन भूमि पर जो काबिज हैं उसमें आदिवासियों के लिए 2006 से पहले का कब्जा होना चाहिए और अन्य जो लोग हैं उनको वनाधिकार देने के लिए कम से कम 75 वर्ष का कब्जा होना चाहिए. एक प्रकरण इसमें ऐसा आया है कि 2014 में एक वन रक्षक ने गलत रिपोर्ट दे दी थी तो ग्राम स्तरीय वन समिति के बाद में उपखण्ड स्तरीय वन समिति ने भी इसकी बिना जानकारी के अनुशंसा कर दी थी और जब जिला स्तरीय  समिति कलेक्टर, डीएफओ और डीओ ट्रायबल वेल्फेयर जिसमें सदस्य रहते हैं इन्होंने इस स्थल का निरीक्षण किया और दिखवाया तब पता चला कि वहां पर किसी का कब्जा नहीं है तो वन अधिकार में पट्टे के लिए कब्जा आवश्यक है .

          इंजीनियर प्रदीप लारिया – माननीय अध्यक्ष महोदय मैं लगभग 15 दिन पहले खानपुर में गया था. वहां पर वे आदिवासी किसान अभी भी खेती कर रहे हैं. उनको 2005 में शासन ने नोटिस भी जारी किये थे. मेरा आपसे मंत्री जी से यह आग्रह है कि यह बात सत्य है कि आदिवासी किसान आज भी खेती कर रहे हैं. उसका आप चाहें तो तत्काल का परीक्षण करा लें. जो मैं तथ्य दे रहा हूं या जो हमारे आदिवासी किसान भाई तथ्य दे रहे हैं उसका परीक्षण कराकर क्या उनको पट्टे दिये जायेंगे.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार—अध्यक्ष महोदय, जहां तक परीक्षण का सवाल है तो यह जो उत्तर आये हैं यह तत्काल परीक्षण के बाद ही आते हैं. लेकिन हम फिर से भी परीक्षण करवा सकते हैं और वन भूमि पर यदि नियमानुसार 2006 के पट्टे हैं और वे आदिवासी हैं तो हमको वनाधिकार पत्र देने में कहीं कोई आपत्ति नहीं है. रहा सवाल परीक्षण का तो वनभूमि पर कब्जा होना चाहिए और उसमें मैने जो नियम बताया वह सब होना चाहिए. हम परीक्षण करवा लेंगे.

इन्जी.प्रदीप लारिया—अध्यक्ष महोदय,चाहे तो मंत्री जी मेरे साथ चले चलें .

अध्यक्ष महोदय—अब आपकी समस्या का समाधान तो हो गया न?

इन्जी.प्रदीप लारिया—अध्यक्ष महोदय, मेरा सिर्फ इतना निवेदन है कि मंत्री जी मेरी मौजूदगी में परीक्षण करवायेंगे क्या?

डॉ.गौरीशंकर शेजवार—अध्यक्ष महोदय, विधायक जी की उपस्थिति में परीक्षण करवा लेंगे.

इन्जी.प्रदीप लारिया—बहुत बहुत धन्यवाद अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी को भी धन्यवाद.

प्रश्न संख्या(6)       (अनुपस्थित )

प्रश्न संख्या(7)

                                          विद्यार्थियों को स्‍मार्ट फोन का वितरण

7. ( *क्र. 486 ) श्री निशंक कुमार जैन : क्या तकनीकी शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र. शासन, उच्‍च शिक्षा विभाग, मंत्रालय, वल्‍लभ भवन, भोपाल के पत्र क्रमांक     एफ-23-4/2014/38-2, भोपाल दिनाँक 08.09.2014 के द्वारा उच्‍च शिक्षा विभाग द्वारा संचालित महाविद्यालयों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को स्‍मार्ट फोन प्रदान करने की स्‍वीकृति जारी की गई? (ख) यदि हाँ, तो विदिशा जिले के अतंर्गत संचालित शासकीय महाविद्यालयों में अध्‍ययनरत चयनित छात्रों की सूची दें, जिन्‍हें पात्रता है। (ग) क्‍या शासन की योजना का क्रियान्‍वयन एक वर्ष बाद भी नहीं हुआ, जिस कारण छात्रों को अभी तक स्‍मार्ट फोन उपलब्‍ध नहीं कराये गये, इसके लिये शासन की योजना का क्रियान्‍वयन यथासमय नहीं करने के लिये कौन दोषी हैं? (घ) विद्यार्थियों को कब तक स्‍मार्ट फोन उपलब्‍ध करा दिये जावेंगे?

तकनीकी शिक्षा मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जी हाँ। (ख) चूँकि सत्र 2015-16 का शैक्षणिक सत्र अभी जारी है, अतः सत्र के मध्य में उपस्थिति 75 प्रतिशत या अधिक उपस्थिति के आधार पर संख्या का निर्धारण संभव नहीं है। (ग) प्रक्रिया सतत् चल रही है। ऐसी दशा में किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। (घ) समय-सीमा बताना संभव नहीं है।

श्री निशंक कुमार जैन—अध्यक्ष महोदय, माननीय मुख्यमंत्री जी ने शासकीय महाविद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए एक योजना प्रारंभ की थी. मुख्यमंत्री जी का उद्देश्य बड़ा पवित्र था कि अधिकतम संख्या में छात्र और छात्राएं कॉलेज में पहुंचें. जिन छात्र और छात्राओं की उपस्थिति 75 प्रतिशत से अधिक होगी उनको मोबाईल दिये जाएँगे. मगर 2014 से विदिशा जिले में ,गंजबासौदा में दो शासकीय महाविद्यालय हैं ,दोनो में किसी भी छात्र को मोबाईल नहीं दिया गया. गंजबासौदा के साथ साथ विदिशा जिले के भी किसी महाविद्यालय में किसी छात्र को कोई मोबाईल नहीं दिया गया.

अध्यक्ष महोदय—आपका प्रश्न क्या है?

श्री निशंक कुमार जैन—पूरे मध्यप्रदेश में कहीं भी मोबाईल नहीं दिया गया है. इसलिए मेरा आपके माध्यम से मंत्री जी से निवेदन है कि मोबाईल कब तक वितरित कर दिये जाएँगे? समय सीमा बताने की कृपा करें.

राज्यमंत्री,उच्च शिक्षा ( श्री दीपक जोशी )- अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश में उच्च शिक्षा के अच्छे अवसर और ई-लर्निंग की व्यवस्था के लिए माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर प्रत्येक छात्र को स्मार्ट फोन देने का शासन ने निर्णय लिया था. चूंकि यह तकनीकी मामला है ,इस कारण जो हमने टेण्डर बुलवाये थे उन टेण्डरों में कुछ विसंगतियां पायी जाने के कारण हम उस समय वो फोन उपलब्ध नहीं करा पाये. लेकिन अब हमारी प्रक्रिया बहुत शीघ्र चल रही है. और इसी सत्र में हम अच्छे स्मार्ट फोन प्रत्येक छात्र को,जो 75 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज करायेंगे उनको शीघ्र उपलब्ध करा देंगे.

श्री निशंक कुमार जैन- अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से अनुरोध करना चाहूंगा कि जिन छात्रों का पिछला सत्र निकल गया है क्या उनको भी आप मोबाईल उपलब्ध करवा देंगे?

श्री दीपक  जोशी‑ उनको भी उपलब्ध करायेंगे.

श्री निशंक कुमार जैन – बहुत बहुत धन्यवाद अध्यक्ष महोदय, अध्यक्ष महोदय, मेरे ही विधान सभा का इसमें एक पूरक प्रश्न है.

अध्यक्ष महोदय—अब हो गया, आपने धन्यवाद भी दे दिया.

श्री निशंक कुमार जैन—मेरे ही विधानसभा क्षेत्र का पूरक प्रश्न है. क्या मंत्री जी गंजबासौदा के शासकीय सुमित्रा कन्या महाविद्यालय जोकि स्वर्गीय राष्ट्रपति डॉ.शंकर दयाल शर्माजी की माताजी के नाम पर है ,तीन साल से वहां पर बिजली नहीं है....

अध्यक्ष महोदय—ये उद्भूत नहीं होता है. यह डिसअलाऊ करता हूं. ये नहीं लिखा जायेगा. दूसरों को  पूछने दें, प्रश्न क्रमांक (8)

श्री निशंक कुमार जैन –x x x )

अध्यक्ष महोदय—आप कृपया बैठ जाये. और किसी अवसर पर यह बात बोलें. आपके प्रश्न के उत्तर आ गये आप  दूसरों को पूछने दें. यह भाषण का समय नहीं है. कुछ नहीं लिखा जाएगा. कुछ भी रिकार्ड मे नहीं आएगा. कोई फायदा नहीं  है. आप इस तरह से नहीं कर सकते. आप कृपया बैठ जाईये. यह बात ठीक नहीं है, आप कभी भी कुछ भी नहीं बोल सकते. आप समझदार आदमी है कि नहीं ?  कभी भी कुछ भी आप बोलेंगे ? आप बैठ जाईए. श्री दिनेश राय अपना प्रश्न करें. 

अध्यक्ष महोदय—कृपया बैठ जाईये. आप समझदार आदमी हैं.

          श्री निशंक कुमार जैन—XX

            अध्यक्ष महोदय—बैठ जाईये. आप समझदारी का परिचय दीजिए.

          डॉ गौरीशंकर शेजवार—अध्यक्ष महोदय, आपने काम बहुत आसान कर दिया. वास्तव यदि आपकी तरफ से प्रमाण पत्र मिल जाये और प्रमाण पत्र भी गलत लोगों को मिले तो सदन में सदस्य बहुत आपत्ति उठा रहे हैं. (हंसी)

 

 

 

 

 

 

 सिवनी से छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर मार्ग में बनाए गए टोल नाके

8. ( *क्र. 160 ) श्री दिनेश राय : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि    (क) सिवनी से छिंदवाड़ा, सिवनी से नरसिंहपुर व्‍हाया लखनादौन मार्ग में कितने-कितने किलोमीटर पर टोल नाके बनाए गए हैं और वे किस दिनाँक से किस अनुसार टोल वसूल कर रहे हैं?        (ख) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित प्रत्‍येक टोल नाके पर प्रति‍ किलोमीटर किस दर से टोल वसूलना प्रारंभ किया गया तथा उसमें प्रतिवर्ष किस अनुसार, कितनी वृद्धि की गई तथा प्रारंभिक वर्ष से 2015 तक वे किस गाड़ी पर कितना टोल वसूल कर रहे हैं? (ग) अनुबंध में किस अनुसार टोल की वृद्धि पर क्‍या सुविधाएं देने का जिक्र है और क्‍या वे सुविधाएं दी जा रही हैं? (घ) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित प्रत्‍येक टोल पर प्रतिवर्ष अनुसार औसत प्रतिदिन कितनी टोल राशि संग्रहित की गई? (ड.) क्‍या प्रश्‍नांश (क) मार्ग में स्थित टोल में निर्धारित दर से अधिक राशि वसूल करने की शिकायतें प्राप्‍त हुई हैं? यदि हाँ, तो संबंधित दोषियों के विरूद्ध क्‍या-क्‍या कार्यवाही हुई?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री सरताज सिंह ) : (क) से (ड.) तारांकित प्रश्न क्रमांक 160 का संबंध भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, मंत्रालय, भारत सरकार के उपक्रम (एन.एच.ए.आई.) से संबंधित है। इस संबंध में (एन.एच.ए.आई.) से प्राप्त जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है।

 

          श्री दिनेश राय—अध्यक्ष महोदय, मैंने आपके माध्यम से माननीय मंत्रीजी से जानकारी चाही थी. उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण मंत्रालय द्वारा जानकारी मुझे उपलब्ध करायी है. मैंने पूछा था कि जहां जहां आपके टोल हैं वहां पर क्या सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं और किस दर पर टोल ले रहे हैं. दूसरा, जो टोल लगाये गये हैं वह हमारे सिवनी जिले में तीनों तरफ लगा दिये गये हैं. कोई भी व्यक्ति निकलेगा तो उसको टोल टेक्स देना पड़ेगा. चौथी रोड़ और बन जायेगी तो चारों तरफ से आने वाले लोगों को टोल टेक्स लगेगा. अध्यक्षजी, इसमें जो अलोनिया का  टोल प्लाजा है वह टोटल अवैधानिक रुप से लगाया गया है क्योंकि लखनादौन से

सिवनी रोड़ बनती तब उसमें आप टोल प्लाजा लगाते, क्योंकि 15 किलोमीटर का रकबा छूटा हुआ है. उसको इन्होंने नागपुर रोड़ लेकर उस टोल को लगाकर जबरजस्ती अवैधानिक वसूली राष्ट्रीय राजमार्ग द्वारा की जा रही है. इसी तरह फुलारा-छिंदवाड़ा का 50 किलोमीटर का मार्ग.

          अध्यक्ष महोदय—आप प्रश्न करें.

            श्री दिनेश राय—सिर्फ सिवनी के 10 किलोमीटर मार्ग के पीछे हमारे शहर के लोगों को टोल टैक्स देना पड़ रहा है. आने-जाने वाले किसानों से भी अवैधानिक रुप से पूरी राशि ली जाती है. मंत्रीजी इसमें कोई कार्रवाई करेंगे? जानकारी मिली कि सिर्फ 5 लोगों पर अपराध है. अभी कुछ दिन पहले फुलारा में बस जला दी गई.

अध्यक्ष महोदय—आप सीधा प्रश्न कर दें.

          श्री दिनेश राय—अध्यक्षजी, मैं माननीय मंत्रीजी से चाहूंगा कि वहां पर जो सुविधाएं नहीं दी जा रही है, उसके संबंध में संबंधित टोल प्लाजा वालों पर कार्रवाई करेंगे और बिना नियम के जो टोल प्लाजा लगाये हैं उन पर कार्रवाई होगी क्या?

          राज्यमंत्री, संस्कृति (श्री सुरेन्द्र पटवा)—अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायकजी द्वारा चाही गई जानकारी उपलब्ध करा दी गई है. वैसे तो यह विषय राज्य सरकार का नहीं है, फिर भी NAHI से प्राप्त कर प्रदान कर दी गई है. मैं विधायकजी की जानकारी में लाना चाहूंगा कि टोल प्लाजा के संबंध में 5 शिकायतें प्राप्त हुई थीं जिसमें एक शिकायत सही पायी गई थी. उपरोक्त एक शिकायत पर कार्रवाई कर, टोल प्लाजा एजेन्सी कंपनी पर साढ़े पांच लाख रुपये की पेनाल्टी लगाकर, वसूल की गई.

          श्री दिनेश राय—अध्यक्ष महोदय, पुलिस का संरक्षण है. वहां पर टोल के संबंध में रोज शिकायतें आ रही है. ड्रेस कोड में कोई कर्मचारी वहां पर नहीं रहता है. एक बेरियर पर एक कर्मचारी होना चाहिए. वहां पर 8-8,10-10 कर्मचारी डण्डा लिये खड़े रहते हैं. बिना ड्रेस के वसूल कर रहे हैं तो उन पर कोई कार्रवाई होगी. वहां पर कोई सुविधा नहीं है. फुलारा में जो टोल प्लाजा है, वहां पैसेन्जर के लिए न बाथरुम है और न ही पीने के पानी की व्यवस्था है. उसके बाद भी अवैध वसूली किये जा रहे हैं और किसानों को टोल से छूट मिलेगी?

          श्री सुरेन्द्र पटवा—अध्यक्ष महोदय, जैसे मैंने पहले विधायकजी को बताया कि NAHI से संबंधित यह प्रश्न है. टोल पर सुविधाएं देने का दायित्व भी NAHI का है. संबंधित एनएएचआई से जानकारी मंगाकर आपको दे दी जायेगी.

          श्री दिनेश राय—अध्यक्षजी, ठीक है यह एनएएचआई का है लेकिन लगा तो प्रदेश में है. हमारे जिले में लगा है. पुलिस हमारी है. अगर गलत कार्रवाई कर रहे हैं तो मंत्रीजी से इतना ही निवेदन है कि उसमें आप कार्रवाई करायेंगे क्या?

            श्री सुरेन्द्र पटवा—आप संज्ञान में लाये हैं. परीक्षण कराकर उस पर  कार्रवाई करा दी जायेगी.

          श्री दिनेश राय—धन्यवाद.

          श्री मुरलीधर पाटीदार—अध्यक्षजी, टोल नाके से संबंधित मेरा भी एक प्रश्न है. नलखेड़ा नगर की सीमा के अंदर एक टोल नाका है.

          अध्यक्ष महोदय—यह इस प्रश्न से उद्भूत नहीं होता. आप लिखकर मंत्रीजी को दे दीजिए.

          प्रश्न क्रमांक—9  (अनुपस्थित)

   प्राचार्य को अतिरिक्‍त संचालक उच्‍च शिक्षा के प्रभार से हटाया जाना

10. ( *क्र. 824 ) श्रीमती शीला त्‍यागी : क्या तकनीकी शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या तत्‍कालीन प्राचार्य शासकीय आदर्श विज्ञान महाविद्यालय रीवा को अतिरिक्‍त संचालक उच्‍च शिक्षा के पद पर वर्तमान में पदस्‍थ किया गया है? (ख) यदि हाँ, तो क्‍या तत्‍कालीन प्राचार्य आदर्श विज्ञान महाविद्यालय रीवा के विरूद्ध राज्‍य आर्थिक अपराध अन्‍वेषण ब्‍यूरों रीवा थाना सिविल लाईन में धारा 420, 188, 180 की एफ.आई.आर. दर्ज कराई गई थी? (ग) क्‍या उक्‍त तत्‍कालीन प्राचार्य की पदस्‍थापना अतिरिक्‍त संचालक उच्‍च शिक्षा रीवा के पद पर की गई है, जिसकी शिकायत उसी कार्यालय में विचाराधीन है? (घ) यदि प्रश्‍नांश (क), (ख) एवं (ग) हां तो ऐसे भ्रष्‍टाचार के आरोपों से घिरे अधिकारी को अतिरिक्‍त संचालक जैसे महत्‍वपूर्ण पद पर पदस्‍थापित करने का औचित्‍य क्‍या है? उसे कब तक हटा दिया जाएगा ताकि निष्‍पक्ष एवं प्रभावी जाँच हो सके?

तकनीकी शिक्षा मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) एवं (ख) जी हाँ। (ग) जी हाँ। किन्तु शिकायत का जाँच प्रतिवेदन तत्कालीन अतिरिक्त संचालक रीवा से प्राप्त हो चुका है, जिस पर कार्यवाही परीक्षण प्रक्रियाधीन है। (घ) शिकायत के प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के परीक्षणोपरान्त नियमानुसार कार्यवाही/निर्णय लिया जावेगा।

  

          श्रीमती शीला त्यागी—अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से निवेदन करना चाहती हूं. मैंने जो प्रश्न पूछा था उसके उत्तर में माननीय मंत्रीजी ने दो प्रश्नों का जवाब तो सही दिया कि डॉक्टर ऊषा अवस्थी जो तत्कालीन प्राचार्य और संयुक्त संचालक, साइंस कॉलेज, रीवा में पदस्थ हैं. उनके ऊपर कई भ्रष्टाचार के मामले दर्ज हैं. EoW  में मामला दर्ज है. जब वह गुढ़ कॉलेज में थीं तब 50 लाख का उनके ऊपर आर्थिक अपराध का मामला दर्ज है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से पूछना चाहती हूं कि आज तक उनको हटाकर दूसरे जिले में क्‍यों पदस्‍थ नहीं किया गया.

          राज्‍य मंत्री, स्‍कूल एवं उच्‍च शिक्षा (श्री दीपक जोशी)--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍नाधीन जिस एफआईआर का जिक्र प्रश्‍न में माननीय सदस्‍या द्वारा किया गया उस एफआईआर की जांच पुलिस द्वारा की गई और पुलिस द्वारा खात्‍मे की रिपोर्ट प्रस्‍तावित की गई है, इस कारण से उस प्रश्‍न पर विभाग अभी संज्ञान नहीं ले रहा है, लेकिन बाकी उनके खिलाफ जो आरोप लगे थे उनका प्रतिवेदन प्राप्‍त हो गया है, प्रतिवेदन का परीक्षण उपरांत कार्यवाही की जायेगी.

          श्रीमती शीला त्‍यागी—माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके संज्ञान में यह बताना चाहती हूं कि उनके ऊपर आर्थिक अपराध का मामला तो दर्ज ही है और 2010 में 20 फरवरी को इसी सदन को माननीय केदार शुक्‍ला जी विधायक जी ने प्रश्‍न किया था और इस सदन को जानकारी दी थी कि बहुत भ्रष्‍ट हैं, हमेशा भ्रष्‍टाचार में लिप्‍त रहती हैं और राज्‍य शासन की इच्‍छा और दृष्टि के अनुसार वह कार्य नहीं करती हैं अपने गृह जिले में और उनके अंडर में 62 कालेज हैं, ऐसे भ्रष्‍ट अधिकारी को क्‍या उनके गृह जिले में पदस्‍थ किया जाना चाहिये था और वर्ष 2010 से लेकर अभी तक इनकी जांच प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, मैं यह बताना चाहती हूं कि क्‍या रीवा जिले में और प्रदेश के अन्‍य किसी जिले में कोई बेदाग छवि का प्राचार्य नहीं है कि उनको गृह जिले में, इतनी भ्रष्‍ट अधिकारी जिनको वहां पर पदस्‍थ किया गया है ।

            अध्‍यक्ष महोदय--  बैठ जाइये आपका प्रश्‍न आ गया. माननीय मंत्री जी.

            श्री उमाशंकर गुप्‍ता--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इनके खिलाफ लगातार एक ही व्‍यक्ति वर्षों से सब जगह शिकायत कर रहा है, कई जांचें हो चुकी हैं, पुलिस में भी जांच हुई और उसमें खात्‍मा की कार्यवाही चल रही है, विभागीय जांच भी कराई है.

            श्रीमती शीला त्‍यागी--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वर्ष 2010 से जांच चल रही है अभी तक पूरी नहीं हुई. वह खुद ही अपराधी हैं और खुद ही जांच कर रही हैं.

            अध्‍यक्ष महोदय--  उत्‍तर तो आने दीजिये. मंत्री जी उत्‍तर दे रहे हैं न.

            श्री उमाशंकर गुप्‍ता--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक ही व्‍यक्ति लगातार एक तरह की शिकायत अलग-अलग जगह करता है और प्रशासन की जो व्‍यवस्‍था रहती है उसमें सब जांचें करना पड़ती हैं, किसी भ्रष्‍ट को कोई संरक्षण नहीं दिया जा रहा और न ही दिया जायेगा. .....(व्‍यवधान)

            श्रीमती शीला त्‍यागी--  माननीय अध्‍यक्ष जी, डॉ. उषा अवस्‍थी प्राचार्य हैं तत्‍कालीन और संयुक्‍त संचालक भी हैं.

            श्री उमाशंकर गुप्‍ता--  अकारण किसी को परेशान भी नहीं किया जा सकता.

            अध्‍यक्ष महोदय--  प्रश्‍न क्र. 11 श्री महेन्‍द्र सिंह सिसौदिया. (अनुपस्थित)       

            श्रीमती शीला त्‍यागी--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहती हूं, जितने भी अपराध उनके उपर दर्ज हैं उसकी मेरे पास फाइल               है. (xxx)     

               अध्‍यक्ष महोदय--  प्रश्‍न क्र. 12 श्री गिरीश गौतम.

            अध्‍यक्ष महोदय--  इस तरह का आरोप नहीं लगा सकतीं आप. यह कार्यवाही में नहीं आयेगा. आप बैठ जाइये.

            श्रीमती शीला त्‍यागी--  (xxx)

            अध्‍यक्ष महोदय--  यह कार्यवाही में नहीं आयेगा. बैठ जाइये आप. आपकी बात रिकार्ड में आ गई है, जबरदस्‍ती नहीं कर सकते. बैठ जाइये आप.

            श्रीमती शीला त्‍यागी--  अगर आपके माध्‍यम से न्‍याय नहीं मिलेगा और राज्‍य में ऐसे भ्रष्‍ट अधिकारी बने रहेंगे रीवा जिले में...

            अध्‍यक्ष महोदय--  आप दूसरों को पूछने दें. आप बैठ जाइये.

            श्रीमती शीला त्‍यागी—माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको साक्ष्‍य दे रही हूं न, क्‍योंकि जांच हो गई है, अग्रिम जमानत पर वह रिहा हैं.

            अध्‍यक्ष महोदय--  आपकी बात आ गई, मंत्री जी ने स्‍पष्‍ट उत्‍तर दे दिया.

            श्रीमती शीला त्‍यागी--  तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी का क्‍या विशेष इंट्रेस्‍ट है कि 2010 से लेकर अभी तक उनकी जांच प्रक्रिया नहीं हो रही है, अग्रिम जमानत पर हैं वह. क्‍यों ऐसा कर रहे हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय--  श्री गिरीश गौतम अपना प्रश्‍न करें.

          श्रीमती शीला त्‍यागी--  एक व्‍यक्ति के द्वारा यह शिकायत नहीं की गई है, कई लोगों ने शिकायत की है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय मैं इनके जवाब से संतुष्‍ट नहीं हूं. मंत्री जी असत्‍य बोल रहे हैं.

          श्री बाला बच्‍चन--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विधायक महोदया का जवाब दिलवाना चाहिये आपको, यह सरकार की हठधर्मी है, यह गलत बात है.

श्री बाला बच्चन – माननीय अध्यक्ष महोदय, आपको सरकार से इस पर उत्तर दिलवाना चाहिये.

          श्रीमती शीला त्यागी—मंत्री जी बिल्कुल असत्य कथन कर रहे हैं. उनकी शिकायत एक व्यक्ति के द्वारा नहीं हुई है .

          अध्यक्ष महोदय—कृपया बैठ जाये.

          श्रीमती शीला त्यागी—अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी के उत्तर से संतुष्ट नहीं हूं. एक व्यक्ति के द्वारा शिकायत नहीं की गई बल्कि 10 लोगों के द्वारा इसकी शिकायत की गई है.

          श्री बाला बच्चन- अध्यक्ष महोदय, विधायक महोदय का उत्तर सरकार से आपको दिलवाना चाहिये, यह सरकार की हठधर्मिता है. गलत बात है.

          अध्यक्ष महोदय—उनकी बात आ गई. इतना स्पष्ट उत्तर आ गया. जबरदस्ती कर सकते हैं क्या ? इस तरह से जबरदस्ती नहीं कर सकते हैं .

          श्रीमती शीला त्यागी – अध्यक्ष महोदय, यह जबरदस्ती नहीं है.

          श्री बाला बच्चन – विधायिका के प्रश्न का उत्तर नहीं आया है.

          श्री आरिफ अकील – (XXX)

          श्रीमती शीला त्यागी—वह फर्जी विदेशी यात्रा भी करती हैं, फर्जी बिल पुटअप करके पैसा लेती हैं.

          अध्यक्ष महोदय—कृपया बैठ जायें.

 

 

बहिर्गमन

श्रीमती शीला त्यागी, सदस्य द्वारा शासन के उत्तर से असंतुष्ट होकर बहिर्गमन

 

श्रीमती शीला त्यागी – अध्यक्ष महोदय 62 कॉलेजों की वो प्रभारी हैं. अध्यक्ष महोदय यदि आपके माध्यम से भी हमें यहां पर न्याय नहीं मिलेगा तो हम सदन का बहिर्गमन करते हैं, मेरी मांग है कि उनको तत्काल दूसरे जिले में पदस्थ किया जाये.

 

(श्रीमती शीला त्यागी, सदस्य द्वारा शासन के उत्तर से असंतुष्ट होकर के सदन से बहिर्गमन किया गया )

 

          श्री बाला बच्चन – अध्यक्ष महोदय, यह ठीक नहीं है, शासन की तरफ से उत्तर नहीं आ रहा है.

          अध्यक्ष महोदय-चलिये आप ही पाईंटेड प्रश्न उनकी तरफ से पूछ लीजिये. उनके प्रश्न का इतना स्पष्ट उत्तर मंत्री जी ने दिया है अब उसके बाद क्या रह जाता है. इसके बाद भी यदि कोई तथ्य उनके पास हों तो वह उपलब्ध करा दें उन्हें.

          श्री बाला बच्चन—माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने सुना है . आपको उत्तर दिलवाना चाहिये.

          अध्यक्ष महोदय—उत्तर ही तो दिया है और क्या दिया है.

          श्री बाला बच्चन – नहीं, माननीय विधायिका जी जो जानना चाहती हैं..

          अध्यक्ष महोदय—उत्तर दिया है शायद आपने ध्यान से सुना नहीं. पर इसके अलावा कोई अतिरिक्त तथ्य हों तो वह आप उपलब्ध करा दें. आपकी पार्टी के सदस्य का अगला प्रश्न हैं उनको प्रश्न करने दें.

          श्री आरिफ अकील –(XXX)

          अध्यक्ष महोदय—बैठ जाईये.

          श्री मुकेश नायक – अध्यक्ष महोदय, विधायिका जी ने स्पष्ट कहा है कि संबंधित व्यक्ति अग्रिम जमानत पर है.

          अध्यक्ष महोदय—हमने आपको एलाऊ नहीं किया है.

          श्री मुकेश नायक—(XXX)

          अध्यक्ष महोदय—बैठ जाईये.

गुना जिले में प्‍लान्‍टेशन/तार फेंसिंग

11. ( *क्र. 529 ) श्री महेन्‍द्र सिंह सिसौदिया : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) गुना जिले में विगत तीन वर्षों में विधान सभा क्षेत्र बमोरी के लिये कितना लक्ष्‍य दिया गया तथा उसके विरूद्ध कितना आवंटन किस-किस कार्य हेतु प्राप्‍त हुआ? (ख) विधान सभा क्षेत्र बमोरी के कितने ग्रामों में तार फेंसिंग कर कितने पौधारोपण का कार्य किया गया? ग्राम पंचायत, ग्रामवार, क्षेत्रफल तथा उस पर हुये व्‍यय सहित जानकारी देवें तथा किये गये पौधारोपण की वर्तमान स्थिति क्‍या है? कितने पौधे जीवित हैं तथा कितने नष्‍ट हो गये? (ग) गुना जिले में कौन-कौन से ग्राम वन क्षेत्र के अतंर्गत नहीं हैं, जो ग्राम वन रहित हैं, क्‍या वहां पर समितियां गठित हैं? उन समितियों के माध्‍यम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानें आवंटित हैं? विधानसभावार क्षेत्र एवं ग्राम पंचायत के ग्राम सहित जानकारी उपलब्‍ध करावें। (घ) क्‍या विधान सभा क्षेत्र बमोरी का ग्राम इमझरा वन क्षेत्र के अतंर्गत आता है? यदि हाँ, तो वहां वनसमिति कब से पंजीकृत है? किसके द्वारा की गई तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकान कैसे आवंटित की गई? गुना जिले में ऐसी कितनी वन सार्वजनिक वितरण प्रणाली है जहां वन क्षेत्र ग्राम न होकर संचालित है, सूची देवें। प्रश्‍नांश (क) की अनियमितता के लिये कौन जिम्‍मेदार है क्‍या इस पर कार्यवाही की जावेगी।

वन मंत्री ( डॉ. गौरीशंकर शेजवार ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 अनुसार है।  (ख) प्रश्‍नांकित विधान सभा क्षेत्र में किसी भी ग्राम में तार फेंसिंग कर पौधा रोपण का कार्य नहीं किया गया है। प्रश्‍नांकित विधान सभा क्षेत्र के अन्‍तर्गत वन क्षेत्र में तार फेन्सिंग कर किये गये पौधा रोपण की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-2 अनुसार है। (ग) एवं (घ) प्रश्‍नांकित जिले में वनक्षेत्र की सीमा से 5 किलो मीटर की परिधि में स्थित ग्रामों में संयुक्‍त वन प्रबंध समितियां गठित हैं, शेष वन रहित ग्रामों के समूह में जहां तेंदू पत्‍ता तथा लघु वनोपज का संग्रहण होता है वहां प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियां कार्यरत हैं। ग्राम इमझरा वन सीमा से 5 किलो मीटर की परिधि में नहीं होने के कारण संयुक्‍त वन प्रबंध समिति गठित नहीं है। इस ग्राम में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकान भी आवंटित नहीं है। शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-3 अनुसार है। उत्‍तरांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में कोई अनियमितता नहीं हुई है, अत: शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

 

          श्री महेन्द्र सिंह सिसौदिया – माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न माननीय वन मंत्री जी से है और मेरे प्रश्न के उत्तर में जो (ख) और (घ) का उत्तर दिया है उससे मैं संतुष्ट नहीं हूं. मैंने अपने प्रश्न के उत्तर में पूछा था कि लाखों रूपये का प्लान्टेशन जो मेरी विधानसभा में हुआ है उसमें कितने प्लान्ट जीवित हैं. उनका मोर्टेलिटी रेशो(मृत्यु-दर) क्या है जो आंकडे आपके विभाग ने दिये हैं वह पूर्णत: असत्य हैं. मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि इसका भौतिक सत्यापन करायें क्योंकि लाखों रूपये का भ्रष्टाचार इस पौधारोपण के कार्यक्रम में हुआ है.

          डॉ.गौरीशंकर शैजवार—भौतिक सत्यापन करवा लेंगे.

          श्री महेन्द्र सिंह सिसौदिया –माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने भौतिक सत्यापन की मांग को स्वीकार किया. मैंने (घ) में पूछा था कि लघु उपज वन समिति के माध्यम से ग्राम इमझरा में एक व्यक्ति को उपकृत करने के लिये बिना वन के वहां वन समिति के माध्यम से उचित मूल्य की दुकान संचालित की जा रही है. मंत्री जी ने उत्तर दिया है कि वहां पर कोई उचित मूल्य की दुकान संचालित नहीं की जा रही है. यह recorded proof है . कलेक्टर को मालूम है, फ्रूड डिपार्टमेंट को मालूम है कि वहां पर दुकान संचालित की जा रही है और वन समिति के माध्यम से संचालित की जा रही है. मैं आपसे निवेदन करूंगा कि इसका भी भौतिक सत्यापन करवाकर के कलेक्टर से इसकी जांच रिपोर्ट ली जाये.

          डॉ.गौरीशंकर शेजवार – माननीय अध्यक्ष महोदय, वन समिति और लघु वनोपज सहकारी समिति दोनों में अंतर है. वन समिति, ग्राम वन समिति, वन सुरक्षा समिति और ईको समिति यह तीनों संयुक्त वन प्रबंधन के अंतर्गत आते हैं . संयुक्त वन प्रबंधन के अंतर्गत जो समितियां आती हैं, तो उचित मूल्य की जो दुकानें हैं इनको आवंटित करने में इन समितियों को प्राथमिकता रहती है और लघु वनोपज सहकारी समिति वहां पर कार्यरत है और यह आवंटन का अधिकारा पूर्ण रूप से कलेक्टर और एसडीएम को है . संयुक्त वन प्रबंधन की समितियों को दुकानें आवंटित नहीं हैं. यह हमने उत्तर दिया है.

          श्री महेन्द्र सिंह सिसौदिया –अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी को यह बताना चाहता हूं कि वन समिति का रजिस्ट्रेशन उन्हीं जगहों पर होता है जहां पर वन समितियां संचालित होती हैं या वन होते हैं यह इमझरा गांव एक ऐसा गांव है जहां एक पेड़ भी नहीं है, जो गुना शहर के नजदीक का गांव है जहां एक पेड़ नहीं है, वन नहीं है वहां वन समिति रजिस्टर्ड कैसे की गई.                                       

डॉ. गौरीशंकर शेजवार – अध्यक्ष महोदय, मैंने कहा कि  वन समिति जो संयुक्त वन प्रबंधन  के अंतर्गत आती है.  उनका रजिस्ट्रेशन और उनमें चुनाव होता है.  ग्रामसभा से  अधयक्ष और पदाधिकारी  चुने जाते हैं और  इमझरा में  संयुक्त वन  प्रबंधन के अंतर्गत  आने वाली समिति नहीं है.  यह जो  लघु वनोपज  सहकारी समिति  है, यह इन  तीनों समितियों से अलग विषय है.  यह तेंदूपत्ता  से जुड़ी हुई और तेंदूपत्ता  संग्रहण के लिये   समिति बनाई गई है.

                   श्री महेन्द्र सिंह सिसौदिया – अध्यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहूंगा.  मेरी छोटी सी मांग है कि  मंत्री जी निष्पक्षता के साथ  इसकी जांच करा लें कि क्या कंट्रोल की  दुकान वन समिति  संचालित कर रही है या नहीं कर रही है.

                   डॉ. गौरीशंकर शेजवार – अध्यक्ष महोदय, वन समिति संचालित नहीं कर रही है.  जो संयुक्त  वन प्रबंधन  के अंतर्गत तीन  समितियां होती हैं,  ग्राम वन समिति, जिसके बारे में बहुत स्पष्ट आपने पूछा है और दूसरी वन सुरक्षा  समिति और ईको समिति.  यह तीन समितियां संयुक्त वन प्रबंधन  के अंतर्गत आती हैं और  लघु वनोपज सहकारी  समिति, यह तेदंपूरत्ता की  और फेडरेशन  की समिति है.  दोनों में अंतर है.  अब दुकान आवंटन में  जो प्राथमिकता दी जाती है, वह  संयुक्त  वन प्रबंधन के अंतर्गत  आने वाली  समितियों को दी जाती है. यह  लघु वनोपज  सहकारी समिति को यदि दुकान आवंटित की है,  तो यह कलेक्टर और एसडीएम  ने की है.  वन विभाग   और तेंदूपत्ता समिति  दोनों में अंतर है.  तो आप काहे की जांच चाहते हैं.  आप जिस प्रकारी की  भी जांच  कहें, हम  करवा लेंगे,  हमें कहीं कोई आपत्ति नहीं है.

श्री महेन्द्र सिंह सिसौदिया – अध्यक्ष महोदय, वन समिति  के माध्यम से चाहे वह लघु ..

 

                   अध्यक्ष महोदय –   महेन्द्र सिंह जी, मंत्री जी तैयार हैं आप जैसी जांच  चाहते हैं,उसके लिये.

                   श्री महेन्द्र सिंह सिसौदिया – अध्यक्ष महोदय, बहुत बहुत धन्यवाद.

                   डॉ. गौरीशंकर शेजवार –  देखिये, आप जो प्रश्न कर रहे हैं, मैं यह  नहीं कह रहा हूं कि आप खुद कनफ्यूज हैं.  मैं कह रहा हूं कि आप तो लिखित में  हमें दे दें कि आप क्या जांच चाहते हैं.

                   श्री महेन्द्र सिंह सिसौदिया – मंत्री जी,  मैं कनफ्यूज नहीं हूं.  मैं पूरी तैयारी से आया हूं.  आपका विभाग आपको कनफ्यूज किये हुए है.

                   श्री कमलेश्वर पटेल – अध्यक्ष महोदय, मुझे एक प्रश्न करने दें.  यह मेरे विधान सभा क्षेत्र  वन विभाग से संबंधित भी प्रश्न है.   बड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न है.

                   अध्यक्ष महोदय – कोई प्रश्न नहीं. मैंने प्रश्नकर्ता  माननीय सदस्य को चार प्रश्न   एलाऊ किये हैं.  अब दूसरों को पूछने दीजिये.  जिनके प्रश्न हैं, उनको ही अनुमति है. प्रश्नकर्ता  माननीय सदस्य के  प्रश्न में जांच की बात कर दी, उसमें अब क्या  रह गया है, फिर भी आप पूछना चाहते हैं. प्रश्न संख्या- 12 श्री गिरीश गौतम.

                   श्री कमलेश्वर पटेल --  (xxx)

                   अध्यक्ष महोदय – इनका कुछ  नहीं लिखा जायेगा.       

         

निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना के कार्य में विलंब

12. ( *क्र. 782 ) श्री गिरीश गौतम : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विधायक निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना अन्‍तर्गत वित्‍तीय वर्ष 2015-16 में देवतालाब, नईगढ़ी मोड़ पर विकास खण्‍ड मऊंगज में सुलभ काम्‍पलेक्‍स निर्माण हेतु राशि 7,42,000.00 रूपये स्‍वीकृत की गयी, जिसे कार्यालय कलेक्‍टर (संभागीय योजना एवं सांख्‍यि‍की रीवा म.प्र.) द्वारा कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग भ/सं.क्रमांक 1 रीवा को क्रियान्‍वयन एजेन्‍सी निर्धारित करते हुए प्रशासकीय/वित्‍तीय स्‍वीकृति‍ आदेश जारी किया गया? (ख) यदि हाँ, तो विभाग को उक्‍त वित्‍तीय स्‍वीकृति‍ आदेश कब प्राप्‍त हुआ और क्‍या कार्यादेश जारी कर कार्य प्रारंभ कराया गया? यदि नहीं, तो कार्य प्रारंभ करने में देरी क्‍यों? (ग) कार्य कब तक पूर्ण किया जायेगा?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री सरताज सिंह ) : (क) जी हाँ। जी हाँ। (ख) दिनाँक 01.07.2015, कार्यादेश दिनाँक 08.09.2015 को जारी किया गया संविदाकार के द्वारा कार्य प्रारंभ नहीं किया गया है। कार्य प्रारंभ नहीं करने के कारण ठेकेदार को अनुबंध की धारा-27 के अंतर्गत कार्यवाही किये जाने का नोटिस दिनाँक 19.11.2015 को जारी किया गया है। (ग) फरवरी 2016 तक पूर्ण होने की संभावना है।

 

                   श्री गिरीश गौतम – अध्यक्ष महोदय, यह निर्वाचन क्षेत्र विकास निधि  के पैसे का सवाल है.  दिक्कत अपने सामने यह होती है कि  पैसा देने के बाद भी विधायक निधि का काम नहीं होता है.  मैंने जो प्रश्न लगाया, विधान सभा का प्रश्न लगाने  के बाद  आप जरा देखे कि  इन्होंने कार्यादेश किया  दिनांक 8.9.15 को,  जब उसने काम शुरु नहीं किया और  जब मेरा विधान सभा प्रश्न लग गया,  तब इन्होंने उसको धारा  27  का नोटिस जारी किया.  अभी भी काम शुरु नहीं हुआ है.  ऐसा करके इसमें  कुछ नहीं हुआ कि हमने काम शुरु कर दिया है. तो मेरा सिर्फ आग्रह यह है कि  एक तो इसमें दो कारण से गड़बड़ी हो रही है.  विधायक निधि के जो पैसे जाते हैं,  पहले नियम यह था कि  यदि दो लाख रुपये  तक गया है, तो  उसमें वह  टेंडर प्रक्रिया में नहीं जायेगा.  तो किसी न किसी  को दे दिया जायेगा, सीधे काम हो जायेगा.  आजकल चूंकि टेंडर प्रक्रिया कर दी गई है और टेंडर प्रक्रिया होने के बाद  उसमें  कब कहां   कोई ठेकेदार आता है या नहीं  आता है, यह तमाम सारी समस्याएं आती हैं.  दूसरी समस्या उसमें यह आती है कि  हमने तो  पैसा  सीमित दिया, एस्टीमेंट  के आधार पर हमने पैसा दे दिया 2 लाख रुपये.  अब   जो टेंडर भरने वाला है,  अब उसने यदि अबो  में भर दिया, 5, 15 और 20 प्रतिशत अबो कर दिया, तो उसका पैसा  कौन देगा,यह भी  समस्या उसमें आती है.  या लो भर दिया  उसने.  तो हमारा पैसा बच गया, उस पैसे का क्या होगा.  इसमें मेरा आग्रह सिर्फ इतना है कि  एक तो यह काम तत्काल शुरु करायें. दूसरा, इसमें  ऐसा कुछ करके  संशोधन करें कि  विधायक निधि  का पैसा जा रहा है या  सांसद निधि का पैसा जा रहा है,  उस पैसे की कोई सरल प्रक्रिया  निकले.  उनका काम जल्दी से जल्दी हो जाय, क्योंकि तीन-तीन, चार-चार साल तक  यह काम पड़ा रहता है.  तो क्या मंत्री जी  इस तरह का कोई विचार करेंगे.

                   राज्यमंत्री, संस्कृति (श्री सुरेन्द्र पटवा) – अधध्यक्ष महोदय,  जैसा कि विधायक जी ने बताया. संबंधित ठेकेदार को धारा 27  के तहत  नोटिस जारी किया गया है  और लगभग   माह फरवरी,2016 तक इस काम को  पूरा करा लिया जायेगा और इसमें देरी हुई थी, इसलिये नोटिस  भी दिया है. उन्‍होंने जो दूसरा प्रश्‍न किया है कि इसकी सरल प्रक्रिया करा दी जाये. मैं समझता हूँ कि इसका एक बार परीक्षण कराकर, जो भी इसमें बेहतर तरीका होगा, वह करवा लिया जायेगा. 

श्री गिरीश गौतम – माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उसका उत्‍तर नहीं आया है कि काम शुरू हुआ है कि नहीं शुरू हुआ. काम शुरू किया कि नहीं किया. ऐसा करें कि इसका भी जवाब आ जाये.

अध्‍यक्ष महोदय -  उसका उत्‍तर तो आ जाने दें.

श्री सुरेन्‍द्र पटवा – माननीय विधायक जी, काम शुरू हो गया है और फरवरी, 2016 में कम्‍पलीट हो जायेगा.

13. ( *क्र. 869 ) पं. रमेश दुबे : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि    (क) क्‍या शासकीय उच्‍चतर माध्‍यमिक विद्यालय बड़ोसा, विकास खण्‍ड बिछुआ तथा तहसील कार्यालय पांढुर्णा परिसर स्थित एक आवा‍सीय भवन लोक निर्माण विभाग के द्वारा निर्माण कराया गया था? यदि हाँ, तो किस मद की कितनी राशि से कब किस एजेंसी से और इस भवन को कितने वर्ष तक कार्यालय व आवास हेतु उपयुक्‍त माना गया? (ख) क्‍या शासकीय उच्‍चतर माध्‍यमिक विद्यालय बड़ोसा, विकास खण्‍ड बिछुआ की छत लोकार्पण के समय से ही टपक रही है और वर्षाकाल में बरामदें और कमरों में पानी भरने की शिकायत है? इसी प्रकार तहसील कार्यालय पांढुर्णा परिसर स्थित‍ एक आवासीय भवन निर्माण के 5-6 वर्षों में ही जर्जर होकर वर्तमान में गिरने की स्थिति‍ में है? (ग) उक्‍त दोनों भवनों के गुणवत्‍तायुक्‍त निर्माण की जिम्‍मेदारी किसकी थी? क्‍या शासन इन भवनों के गुणवत्‍ताहीन निर्माण की प्रश्‍नकर्ता द्वारा नियुक्‍त प्रतिनिधि की उपस्थिति में जाँच करवाकर जिम्‍मेदार इंजीनियर्स के विरूद्ध सख्‍त कार्यवाही करने का आदेश देगा? यदि नहीं, तो क्‍यों?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री सरताज सिंह ) : (क) जी नहीं। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बड़ोसा, विकास खण्ड बिछुआ का निर्माण आदिवासी विकास विभाग द्वारा कराया गया है तथा तहसील कार्यालय पांर्ढुणा परिसर स्थित एक नग जी टाईप आवासीय भवन का निर्माण लोक निर्माण विभाग द्वारा गृह भाड़ा निर्माण योजना के (जमा मद) के अंतर्गत रु. 2,31,354/- की लागत से    श्री गणेश लाल साहू ठेकेदार छिन्दवाड़ा से वर्ष 1997-98 में कराया गया था। (ख) जी नहीं, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास छिन्दवाड़ा से प्राप्त जानकारी के अनुसार भवन के लोकार्पण के समय से ही छत में सीपेज की शिकायत नहीं थी तथा तहसील कार्यालय परिसर पांर्ढुणा में भवन निर्माण पश्चात संबंधित विभाग को सौपा गया था। हस्तांतरण उपरान्त उक्त आवास में अधिकारी/कर्मचारी आवासरत् रहे हैं। काली मिट्टी का क्षेत्र होने एवं वाल लोडवियरिंग स्ट्रक्चर होने के कारण दीवाल में क्रेक्स विकसित हुये हैं एवं फर्श में सेटलमेन्ट हुआ हैं। काफी समय से रिक्त होने के कारण आवास गृह में टूट फूट भी हुई हैं। (ग) शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बड़ोसा तहसील बिछुआ के गुणवत्तायुक्त निर्माण की जिम्मेदारी आदिवासी विभाग के तत्कालीन पर्यवेक्षक कर्मचारी/अधिकारियों एवं तहसील कार्यालय पांढुर्णा परिसर स्थित आवासीय भवन के गुणवत्तायुक्त निर्माण की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग संभाग छिंदवाड़ा के तत्कालीन पर्यवेक्षण कर्मचारी/अधिकारियों की थी। लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्मित आवास गृह का निर्माण वर्ष 1997-98 में करवाया गया था। अत: अब इस कार्य की जाँच करना औचित्‍य पूर्ण नहीं होगा। उत्‍तरांश ‘’ में वर्णित कारणों से भवन में हुयी क्षति हेतु मरम्‍मत की कार्यवाही की जायेगी।

पं. रमेश दुबे – माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे ‘’ के उत्‍तर में जो उत्‍तर आया है कि दि. 19/08/2008 को मेरे भवन के लोकार्पण के समय, उसकी छत सीपेज नहीं हो रही थी. यह जो उत्‍तर है, वह असत्‍य उत्‍तर दिया गया है. मैं माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूँ कि जो उत्‍तर निकलकर आया है, क्‍या मेरी उपस्थिति में वरिष्‍ठ अधिकारियों से जांच कराई जायेगी. दूसरा, यदि यह सही पाया जाता है तो क्‍या ऐसे अधिकारी, जिन्‍होंने जानकारी दी है, उनके खिलाफ कार्यवाही की जावेगी.

अध्‍यक्ष महोदय – माननीय मंत्री जी.

श्री सुरेन्‍द्र पटवा – माननीय विधायक जी से पूछना चाहूँगा कि यह लोक निर्माण वाला भवन बता रहे हैं या आदिवासी विभाग वाला.

पं. रमेश दुबे – जी, आदिवासी विभाग वाला, जो भवन है.

श्री सुरेन्‍द्र पटवा – आदिवासी विभाग द्वारा उपलब्‍ध कराई गई जानकारी से आपको अवगत करा दिया गया है और अगर उसमें आप जैसा कह रहे हैं तो संबंधित विभाग को निर्देश देकर, आप स्‍वयं उसको जाकर परीक्षण करा लें, यहां से अधिकारी भेज दिये जायेंगे.

पं. रमेश दुबे – यदि जांच में सही पाया जाता है कि जानकारी जिन्‍होंने गलत दी है तो क्‍या उनके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी.

अध्‍यक्ष महोदय – यह काल्‍पनिक प्रश्‍न है.

श्री सुरेन्‍द्र पटवा – एक महीने के अन्‍दर कार्यवाही कर दी जायेगी.

पं. रमेश दुबे – दूसरा प्रश्‍न, माननीय अध्‍यक्ष महोदय. मेरी छत अभी भी जो टपक रही है तो मैं चाहता हूँ कि उसकी मरम्‍मत क‍ब तक कर दी जावेगी. उसकी समय-सीमा बता दें.

अध्‍यक्ष महोदय – पहले जांच तो होने दीजिये.

पं. रमेश दुबे – माननीय अध्‍यक्ष जी, लेकिन छत तो टपक रही है. इस बात का आश्‍वासन तो मिल जाये कि यदि छत टपक रही है तो उसकी मरम्‍मत तो होगी न?

अध्‍यक्ष महोदय –  यह भी आ गया है न उसमें.

 

 

14. ( *क्र. 756 ) श्री विष्‍णु खत्री : क्या उद्योग मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) बैरसिया विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत विभाग द्वारा स्‍वीकृत बांदीखेडी औद्योगिक क्षेत्र में अधोसंरचना विकास के क्‍या कार्य हो गये हैं, वर्तमान प्रगति की क्‍या स्थिति है? (ख) प्रश्‍नांश (क) के अनुसार अधोसंरचना विकास कार्य आरंभ नहीं हुये हैं, तो क्‍या कारण हैं?

उद्योग मंत्री ( श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया ) : (क) एवं (ख) बैरसिया विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत बांदीखेडी औद्योगिक क्षेत्र के संबंध में माननीय उच्‍च न्‍यायालय में विकास कार्य से संबंधित याचिका लंबित होने के कारण विकास कार्य प्रारंभ नहीं हो सके।

श्री विष्‍णु खत्री – माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बैरसिया विधानसभा क्षेत्र में बांदीखेड़ी में लगभग 6 वर्ष पूर्व डी.आई.सी. ने औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने हेतु भूखण्‍ड आवंटित किये थे. लेकिन विगत 6 वर्ष में वहां पर किसी प्रकार का कोई विकास कार्य वहां पर नहीं हुआ. इसके संबंध में मेरे द्वारा दो बार विधानसभा में प्रश्‍न पूछे गये और उसमें मुझे यह बताया गया कि प्रक्रिया चल रही है. आज चूँकि यह प्रश्‍न चर्चा में आया है तो इसमें विभाग ने उत्‍तर दिया है कि माननीय उच्‍च न्‍यायालय में विकास कार्य से संबंधित याचिका लम्बित होने के कारण, विकास कार्य प्रारम्‍भ नहीं किये जा रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय – कृपया प्रश्‍न करें.

श्री विष्‍णु खत्री –माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा इसमें निवेदन यह है कि जो आवंटित लोग इसलिए उच्‍च न्‍यायालय गए, चूँकि विभाग विकास कार्य नहीं करा रहा था और मैं इसमें माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूँ कि विकास कार्य क्‍यों नहीं कराये गये ? क्‍योंकि बैरसिया विधानसभा में कृषि कार्य के अलावा कोई रोजगार के साधन नहीं हैं.

अध्‍यक्ष महोदय – बैठ जाइये, आप उत्‍तर ले लें. माननीय मंत्री जी.

श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया – माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से, मैं माननीय विधायक जी को बताना चाहती हूँ कि आज यह हाई कोर्ट में केस चल रहा है. इसलिए केस सब ज्‍यूडिस है. इस पर मेरा टिप्‍पणी करना उचित नहीं होगा.

   

 

 

 

 

 

 

         

          100 सीटर कन्‍या छात्रावास की स्‍वीकृति

15. ( *क्र. 112 ) श्री नारायण सिंह पँवार : क्या तकनीकी शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रश्‍नकर्ता के विधान सभा प्रश्‍न क्रमांक 2052, दिनाँक 28 जुलाई, 2015 के उत्‍तर की कंडिका (क) में बताया गया था कि प्राचार्य नेताजी सुभाषचन्‍द्र बोस शासकीय स्‍नातकोत्‍तर महाविद्यालय ब्‍यावरा द्वारा 100 सीटर कन्‍या छात्रावास की स्‍वीकृति के संबंध में आवश्‍यक कार्यवाही हेतु अपर संचालक (वित्‍त) कार्यालय आयुक्‍त, उच्‍च शिक्षा, म.प्र., भोपाल को प्रेषित प्रस्‍ताव में राज्‍य योजना आयोग की चेक लिस्‍ट अनुसार लोक निर्माण विभाग (पीआईयू) से तकनीकी स्‍वीकृति, ब्‍लूप्रिंट नक्‍शा, चाहे गये, जो अप्राप्‍त हैं? तो क्‍या विभाग द्वारा प्रश्‍न दिनाँक तक तकनीकी स्‍वीकृति, ब्‍लूप्रिंट नक्‍शा प्राप्‍त कर 100 सीटर कन्‍या छात्रावास की स्‍वीकृति के संबंध में कोई कार्यवाही की गई? यदि हाँ, तो क्‍या? यदि नहीं, तो क्‍यों? (ख) उपरोक्‍तानुसार क्‍या शासन छात्राओं के हित को ध्‍यान में रखते हुऐ शासकीय महाविद्यालय, ब्‍यावरा में 100 सीटर कन्‍या छात्रावास निर्माण की स्‍वीकृति प्रदान करेगा? यदि हाँ, तो कब तक?

तकनीकी शिक्षा मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जी हाँ। प्राचार्य, नेताजी सुभाष चंद्र बोस शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, ब्यावरा के पत्र क्रमांक 1064, दिनाँक 19.10.2015 द्वारा 100 सीटर कन्या छात्रावास निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया, जो कार्यालय में दिनाँक 30.10.2015 को प्राप्त हुआ है। प्रकरण को आगामी स्थायी वित्तीय समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा। (ख) प्रकरण में नियमानुसार कार्यवाही की जावेगी। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं।

          श्री नारायण सिंह पॅवार -        माननीय अध्‍यक्ष जी, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूँ, माननीय मंत्री महोदय यहॉं विराजमान हैं, इस विषय के ऊपर मेरी उनसे अनेक बार चर्चा हुई है । मेरा प्रश्‍न यह है कि ब्‍यावरा विधानसभा क्षेत्र में, नेताजी सुभाष चन्‍द्र बोस स्‍नातकोत्‍तर महाविद्यालय, एक मात्र कॉलेज है,  जिसके आस-पास गुना जिले का मंसूरगढ़, बीनागंज भी आते हैं । मेरा आग्रह यह है कि महाविद्यालय में स्‍वतंत्र कन्‍या छात्रावास की अत्‍यन्‍त आवश्‍यकता है, इसके लिए मैंने बार-बार अनुरोध किया है । माननीय मंत्री जी ने उत्‍तर तो दिया है कि सर्वे कराकर,स्‍थाई वित्‍त समिति के समक्ष प्रकरण रखा गया है । छात्रावास की अत्‍यन्‍त आवश्‍यकता है, क्‍योंकि लगभग 800 से 900 छात्राएं वहां अध्‍ययन करती हैं ।

अध्‍यक्ष महोदय -         आप भाषण मत दीजिए, प्रश्‍न पूछ लीजिए ।

          श्री नारायण सिंह पॅवार -        मैं मंत्री महोदय से आश्‍वासन चाहता हूँ कि क्‍या  इसी वित्‍तीय वर्ष में छात्रावास की स्‍वीकृति प्रदान करेंगे ।

          राज्‍यमंत्री,उच्‍च शिक्षा (श्री दीपक जोशी)-        माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारी स्‍थाई वित्‍त समिति की बैठक शीघ्र प्रस्‍तावित है, उस बैठक में हम इसको प्राथमिकता से करने का प्रयास करेंगे ।

          श्री नारायण सिंह पॅवार -        माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ग्रामीण क्षेत्र का महाविद्यालय है । मेरा आग्रह यह है कि प्रयास नहीं करेंगे, इसको कर दिया जाए । 

वनों की सुरक्षा पर व्‍यय

16. ( *क्र. 661 ) कुँवर विक्रम सिंह : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में वनों की सुरक्षा/वाहनों पर वर्ष 2013-14 से प्रश्‍न दिनाँक तक कितना व्‍यय किया गया? (ख) वनों से प्राप्‍त आय छतरपुर जिले को वर्ष 2013-14 से प्रश्‍न दिनाँक तक कितनी हुई तथा व्‍यय कितना किया गया? (ग) तार फेंसिंग, नवीन वृक्षों के रोपण में लापरवाही तथा वृक्षों की अवैध कटाई के कितने प्रकरण प्रकाश में आये? (घ) बुंदेलखण्‍ड पैकेज से प्राप्‍त कुल कितनी राशि छतरपुर जिले को प्राप्‍त हुई है? जो व्‍यय हुआ उसका विवरण दें।

वन मंत्री ( डॉ. गौरीशंकर शेजवार ) : (क) प्रदेश में प्रश्‍नांकित अवधि में वनों की सुरक्षा पर रूपये 52,780.04 लाख एवं वाहनों पर रूपये 4349.24 लाख व्‍यय हुआ। (ख) छतरपुर जिले को प्रश्‍नांकित अवधि में वनों से राशि रूपये 1,064.42 लाख की आय हुई एवं राशि रूपये 6,917.11 लाख व्‍यय की गई। (ग) छतरपुर जिले में वर्ष 2013-14 से प्रश्‍न दिनाँक तक तार फेंसिंग तथा नवीन वृक्षों के रोपण में लापरवाही से संबंधित कोई प्रकरण प्रकाश में नहीं आया, जिले में वृक्षों की अवैध कटाई के कुल 9,168 प्रकरण प्रकाश में आये हैं। (घ) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है।

परिशिष्ट - ''दो'

कुंवर विक्रम सिंह -माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से सवाल करना चाहता हूँ कि प्रश्‍नांक ग में तार फेंसिंग तथा नवीन वृक्षों के रोपण में,जहां जहां तार फेंसिंग हुई है और वृक्षा रोपण किया गया है, वहां पर वृक्ष आज मौजूद नहीं हैं, इसमें सरकार का भारी व्‍यय हुआ है, खास तौर से बुदेलखंड पैकेज का बहुत पैसा गया है ।  मैं माननीय मंत्री जी से चाहूँगा कि उसकी जांच कराई जाए और विधायकों को विधायक के क्षेत्र में उस जांच कमेटी में रखा जाए ।

          डॉ गौरीशंकर शेजवार- आपने प्रश्‍न के साथ शिकायत की है, जांच करवा लेंगे और उस समय स्‍थल निरीक्षण के लिए जो लोग जाएंगे यदि आप उपलब्‍ध रहेंगे या आपके समय के हिसाब से आपको जरूर वहां सूचित करेंगे ।

          कुंवर विक्रम सिंह -      माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं पूछना चाहता हूँ कि इसमें बुंदेलखण्‍ड पैकेज का पैसा बचा हुआ है, उसमें मैं चाहता हूँ कि माननीय मंत्री जी घोषणा करें कि दतला पहाड़ और लमानिया पहाड़ में तार फेंसिंग करवा दी जाएगी

डॉ गौरीशंकर शेजवार- पहले स्‍थल का निरीक्षण करवा लेंगे और स्‍थल निरीक्षण में यदि संभावना है कि वृक्षा रोपण वहां सफल होगा तो उस पर जरूर विचार करेंगे ।

कुंवर विक्रम सिंह -      माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वहां पर हजारों वृक्ष सागौन के लगे हुए हैं । मैं तार फेंसिंग की मांग कर रहा हूँ, वह लगभग 25 साल पहले से लगे हुए हैं, तार फेंसिंग होना अतिआवश्‍यक है,क्‍योंकि दुर्लभ प्रजाति के जानवर भी वहां पर रहते हैं । माननीय अध्‍यक्ष महोदय,सबसे बड़ी दिक्‍कत यह है कि मेरे विधानसभा क्षेत्र में  क्‍या माननीय मंत्री जी क्षेत्र में रजुआ नील गाय  हटाओं योजना चलांऍगे ।

अध्‍यक्ष महोदय -         स्‍थल निरीक्षण की बोल रहे हैं । स्‍थल निरीक्षण करा लेंगे । आपको,इनका प्रश्‍न समझ में आया ।

डॉ गौरीशंकर शेजवार- प्रश्‍न तो बहुत अच्‍छा है लेकिन विषय से जुड़ा नहीं है, प्रश्‍न  उद्भूत नहीं होता ।

          भोपाल संभाग की सिक यूनिटों की पुनर्स्‍थापना

17. ( *क्र. 142 ) श्री शैलेन्‍द्र पटेल : क्या उद्योग मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि     (क) भोपाल में कितनी औद्योगिक इकाई सिक यूनिट की श्रेणी में हैं? नाम एवं पते का ब्‍यौरा देवें। (ख) प्रश्‍नांश (क) की कितनी देनदारियां हैं? (ग) क्‍या सरकार की इन सिक यूनिट की पुनर्स्‍थापना की योजना है? यदि हाँ, तो विस्‍तृत जानकारी देवें? क्‍या इन सिक यूनिटों में नई तकनीक के सहयोग से बेहतरी लाई जा सकती है?

उद्योग मंत्री ( श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया ) : (क) उद्योग संवर्धन नीति, 2014 के अंतर्गत बीमार लघु श्रेणी के उद्योगों के लिए पुनर्जीवन योजना, 2014 के तहत भोपाल में सिक यूनिट की श्रेणी में औद्योगिक इकाई की संख्‍या निरंक है। इसी तरह वृहद एवं मध्‍यम श्रेणी की औद्योगिक इकाइयों को बीमार (सिक) घोषित किए जाने के लिए भारत सरकार वित्‍त मंत्रालय के अधीन औद्योगिक और वित्‍तीय पुनर्निर्माण बोर्ड (बी.आई.एफ.आर.) गठित है। अद्यतन जानकारी के अनुसार भोपाल स्थित किसी वृहद एवं मध्‍यम श्रेणी की इकाई बीमार होने के लिए बोर्ड में पंजीबद्ध नहीं है। (ख) उत्‍तरांश (क) के संबंध में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) उद्योग संवर्धन नीति, 2014 के अंतर्गत बीमार लघु श्रेणी उद्योगों के लिए पुनर्जीवन योजना का प्रावधान है। योजना की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-एक अनुसार है। इसी तरह वृहद एवं मध्‍यम श्रेणी के उद्योगों को बी.आई.एफ;आर. द्वारा बीमार घोषित होने पर एवं उद्योग विशेष की पुनर्वास योजना स्‍वीकृत किए जाने पर राज्‍य शासन से अपेक्षित सुविधाओं को दिए जाने के लिए उद्योग संवर्धन नीति, 2014 में पॉलिसी पैकेज तथा विशेष पैकेज निर्धारित है। पॉलिसी पैकेज एवं विशेष पैकेज की प्रतियां क्रमश: पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-दो एवं तीन अनुसार है। नवीन तकनीक पर आधारित पुनर्वास योजना उद्योग विशेष पर निर्भर है।

          श्री शैलेन्‍द्र पटेल -       माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रदेश में सबसे बड़ी समस्‍या बेरोजगारी की है ।

अध्‍यक्ष महोदय -         आप भाषण मत दीजिए सीधा प्रश्‍न पूछिए ।

श्री शैलेन्‍द्र पटैल -       माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न था कि भोपाल संभाग में कितनी सिक इन्‍डस्‍ट्री है, जो मुझे उत्‍तर मिला उसमें बताया गया कि भोपाल संभाग में एक भी सिक इन्‍डस्‍ट्री नहीं है, लेकिन जो मेरे संज्ञान में है, लगभग 5 इन्‍डस्‍ट्री मेरे जिले में बंद हैं, जिनके नाम इस तरह है, स्‍ने डाईकॉम लिमिटेड, जो थूना कला में है, वह बंद पड़ी हुई है, भोपाल -चोगा लिमिटेड, सीहोर में, वह बंद पड़ी हुई है । जग मानस साल्‍वेट प्‍लांट सीहोर में, जो सोयाबीन का तेल बनाती है, वह बंद पड़ी हुई है । वरूण एग्रो प्रोटीन लिमिटेड भाउखेड़ी, वह भी बंद पड़ी हुई है  और तो और तिलहन संघ का जो सोया प्‍लांट पचामा में है, वह भी बंद पड़ा हुआ है  मुख्‍यमंत्री जी के गृह जिले का मामला है । पांच वर्षों से वह इंडस्‍ट्री बंद हैं । उनके लिए कौन -सा पैकेज है, आपकी क्‍या व्‍यवस्‍था है  जो इन्‍डस्‍ट्री चालू हों और लोगों को बेरोजगारी से निजात मिले ।

श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया- माननीय अध्‍यक्ष जी, आपके माध्‍यम से मैं माननीय विधायक जी को बताना चाहती हूँ कि हमारे विभाग में  एक सिक यूनिट स्‍कीम है,जिसमें अगर यूनिट अप्‍लाई करती है तो उसको तरह तरह की सुविधाएं मिलती है, अपनी यूनिट को चलाने के लिए जैसे कमर्शियल टैक्‍स, वाणिज्‍यक कर विभाग से जो असेस्‍ट टैक्‍स है, 36 मासिक किश्‍तों में आप दे सकते हो  ऊर्जा विभाग की न्‍यूनतम डिमाण्‍ड जो रहती है, उसमें अधिकतम 1 लाख की छूट मिलती है । ऐसे करते हुए हमारे पास 4-5 ऐसी चीजें है, अगर हम उद्योग को पुनर्जीवित करवाना चाहते हैं, तो आपको पहले हमारी सिक यूनिट स्‍कीम में रजिस्‍टर्ड करवाना है, तब ही यह चीजें किकिंग हो जाएंगी ।

हम यह देख रहे हैं कि लघु-उद्योग हमारी रीढ़ की हड्डी है और अगर हम लघु उद्योगों को प्रोत्साहित नहीं करेंगे तो इसमें हमें इनको प्रोत्साहित इस तरह से करना है कि हम विभाग द्वारा एक वर्कशाप कर रहे हैं जो दिसम्बर के अंतिम सप्ताह में हम सारे लघु उद्योगों जो कनेक्टेड हैं एसोसिएशन से, उनके वर्कशाप करते हुए उसमें चार विभागों को साथ में रखते हुए—पॉवर विभाग, पोल्यूशन कंट्रोल विभाग, लेबर विभाग एवं कमर्शियल टेक्सेज विभाग इन चारों विभागों को हम सूचित करना चाह रहे हैं कि हम आपके साथ बैठकर उन सारे लघु एसोसिएशन को बिठाकर और बैंकर्स को भी बिठाकर हम उनके साथ वार्तालाप करना चाहेंगे कि हम कैसे आपको आगे बढ़ायें, कैसे आपको प्रोत्साहित करें ?

            अध्यक्ष महोदय—प्रश्नकाल समाप्त.

                                                (प्रश्नकाल समाप्त)

 

 

 

 

 

          श्री सुंदरलाल तिवारी—दवाई खरीदी में बहुत घपला है इसमें 43 लोगों की आंखे चली गई हैं. इसमें डॉक्टर सही हैं, सरकार सही है.

          अध्यक्ष महोदय—आप शून्यकाल की सूचनाएं तो होने दें.

समय—11.32                      नियम 267 (क) के अधीन विषय

 

          अध्यक्ष महोदय—श्री आरिफ अकील अपनी शून्यकाल की सूचना पढ़ें.—

          1.श्री आरिफ अकील—अध्यक्ष महोदय, यह शून्यकाल की सूचना मैंने परसों पढ़ दी थी तो आप इसको दोबारा पढ़ी हुई मान लें तथा इसका जवाब श्री तोमर साहब जी से दिलवा दीजियेगा.

          अध्यक्ष महोदय—ठीक है.

          2.  श्री जितेन्द्र गेहलोत—(अनुपस्थित)

          3.   श्री दिलीप सिंह शेखावत—(अनुपस्थित)

         4.   छतरपुर जिले में छात्रवृत्ति वितरण में अनियमितता.

   श्री मानवेन्द्र सिंह,(महाराजपुर)--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी शून्यकाल की सूचना इस प्रकार है—

                                                                                               

 

          5.       श्री दिनेश कुमार अहिरवार       (अनुपस्थित)

 

 

 

 

 

 

  6.       खण्डवा जिले के पुनासा क्षेत्र में घटिया नलजल योजना का कार्य किया जाना.

          श्री लोकेन्द्र सिंह तोमर(मांधाता)—माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी शून्यकाल की सूचना का विषय इस प्रकार है—

         

 

                                                                                                         

7. रीवा जिले के गौरी में संचालित नलजल योजनाओं से पेयजल की आपूर्ति न होना.

श्री सुखेन्द्र सिंह(मऊगंज) -  माननीय अध्यक्ष महोदय, रीवा जिले के  विधान सभा क्षेत्र मउगंज अंतर्गत ग्राम पंचायत गौरी में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा नलजल योजना संचालित है. यह योजना विभागीय रिकार्ड में तो संचालित है परन्तु कई वर्षों से  विद्युत कनेक्शन नहीं हैं. ट्रांसफार्मर से पंप हाऊस तक विद्युत सप्लाई के दो फेज तार कटे होने के कारण नलजल योजना पूरी तरह से बंद पड़ी हुई है. पूरे क्षेत्र भयंकर सूखे की चपेट में है. लोग पीने के पानी के लिये दर-दर भटक रहे हैं. कोई सुनने वाला नहीं है. मेरे द्वारा संबंधित विभाग के अधिकारियों को दूरभाष एवं पत्र द्वारा अवगत कराया जाता है परंतु कार्यवाही नगण्य है. सरकार की इस जनविरोधी नीति से पूरे क्षेत्र में आमजन व्यापक रोष में है. असंतोष व्याप्त है. स्थिति  विस्फोटक और नियंत्रण से बाहर है. कभी भी कोई अप्रिय स्थित घट सकती है.

          अध्यक्ष महोदय – श्री भारत सिंह कुशवाह.... (अनुपस्थित)

श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा...( अनुपस्थित)

श्री नीटू सत्यपाल सिंह सिकरवार...  (अनुपस्थित)

          अध्यक्ष महोदय – श्री बाला बच्चन जी...

          श्री बाला बच्चन – माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी शून्यकाल की सूचना का विषय इस प्रकार है - 

          अध्यक्ष महोदय – नहीं यह इस तरह से नहीं लिया जा सकता. आप प्रतिपक्ष के नेता का काम कर रहे हैं. आप इस तरह से मत करिये प्लीज. यह नहीं चलेगा. यह कुछ भी रिकार्ड में नहीं आयेगा.

श्री बाला बच्चन-( XXX )

अध्यक्ष महोदय – यह अलाऊ नहीं है. गोविन्द सिंह जी.

          संसदीय कार्य मंत्री(डॉ.नरोत्तम मिश्र) – अध्यक्ष महोदय, विलोपित भी तो करें उसे.

          अध्यक्ष महोदय -  डिसअलाऊ कर दिया उसको. यह नहीं लिखा जायेगा. डॉ. गोविन्द सिंह. वह रिकार्ड में नहीं आयेगा बाला बच्चन जी.

          श्री बाला बच्चन ( XXX )

          अध्यक्ष महोदय – आप किसी नियम के अंतर्गत दे दें. आप दल के लीडर हैं. आप समझिये इस बात को. आप दल के नेता हैं. यह कुछ रिकार्ड में नहीं आ रहा है. कोई फायदा नहीं है. न कोई सुन रहा है. आप ही पढ़ रहे हैं आप ही सुन रहे हैं.

          डॉ.गोविन्द सिंह – अध्यक्ष महोदय, आपके आदेश से हम लोगों को गाड़ियों का पास मिला है और अट्ठाईस वर्षों में पहली बार यह स्थिति निर्मित हो रही है कि जब हम आते हैं तो 15-15 मिनट लाईन लगती है गाड़ियों की चेकिंग में.

           अध्यक्ष महोदय – यह विषय यहां का नहीं है. आप कक्ष में आकर बात कर लीजिये.

          डॉ.गोविन्द सिंह –(XXX).

          अध्यक्ष महोदय – आप इतने वरिष्ठ विधायक हैं.

          डॉ.गोविन्द सिंह – आपसे निवेदन है अध्यक्ष जी कि यह हम लोगों का अपमान है. मंत्री तत्काल चले आएं. हम लोगों के लिये प्रतिबंध. एक-एक गाड़ी चेक होती है.

          अध्यक्ष महोदय – आप इस बारे में कक्ष में बात कर लें इस बारे में निराकरण कर देंगे.

          डॉ.गोविन्द सिंह – आपसे निर्देश चाहते हैं.

          अध्यक्ष महोदय – निराकरण कर देंगे मना कहां कर रहे हैं.

खाद्य,नागरिक आपूर्ति मंत्री(कुं.विजय शाह) – माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जो मामला उठाया है हर मंत्री की गाड़ी भी चेक हो रही है. मेहरबानी करके सुरक्षा में सहयोग करिये.

          डॉ.गोविन्द सिंह – चेक क्यों हो रही हैं.(XXX).

          अध्यक्ष महोदय – यह कार्यवाही से निकाल दीजिये.

          डॉ.गोविन्द सिंह – जब हम विधायक हैं. पास हमें दे रहे हैं. हम एम.एल.ए. हैं. आज तक अट्ठाईस साल से नहीं हुआ. पहली बार यह परंपरा  चालू हो रही है.

          अध्यक्ष महोदय – आप बैठ जायें. कृपया कक्ष में बात कर लें.

          डॉ.गोविन्द सिंह – आपके मार्शल जानते हैं. सब लोग जानते हैं.

          पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री(श्री गोपाल भार्गव) – एक बात में सुधार कर लें मंत्रियों की गाड़ियों की भी चेकिंग हो रही है.

          डॉ.गोविन्द सिंह – क्यों हो रही है. यह अपमान है.

          अध्यक्ष महोदय – यह चर्चा का विषय नहीं है. इसको रिकार्ड में नहीं लेंगे.

          लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री (सुश्री कुसुम सिंह महदेले) – माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्रियों की गाड़ियों की भी  चेकिंग हो रही है और होना जरूरी है.इसीलिये कि हिन्दुस्तान में आतंकवादी घुस आये हैं.

          डॉ.गोविन्द सिंह -        ( XXX )

            अध्यक्ष महोदय – आप  कक्ष में आकर बात करिये.

          डॉ.गोविन्द सिंह -        ( XXX )

          अध्यक्ष महोदय – श्री आरिफ अकील..

          श्री आरिफ अकील :- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से गृह मंत्री जी ने निवेदन है कि धार में मौन जुलूस निकाला जा रहा है, धार के काजी साहब पर आपराधिक केस पंजीबद्ध कर लिया गया है. मैं आपके माध्‍यम से गौर साहब से कहना चाहता हूं कि काजियों पर केस बनाना उचित नहीं है.

          गृह मंत्री (बाबूलाल गौर):- माननीय अध्‍यक्ष  महोदय, इसका परीक्षण कर लेंगे. अगर उनके खिलाफ भाषण में कोई बातचीत हुई होगी तो दोनों पर से केस वापस ले लेंगे.

          श्री निशंक जैन :- (x x x)

            अध्‍यक्ष महोदय :- निशंक जैन जी आप बैठ जाईये. आप लोग सदन में अखबार लेकर घूम रहे हैं यह उचित नहीं है. श्री निशंक जैन जी जो बोल रहे हैं, वह कुछ नहीं लिखा जायेगा.

 

 

 

 

 

पत्रों का पटल पर रखा जाना

मध्‍यप्रदेश राज्‍य अल्‍पसंख्‍यक आयोग के वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2011- 2012

 

ध्‍यानाकर्षण

 

 

(सदन द्वारा सहमति दी गयी)

ध्‍यानाकर्षण सूचना

 

बुरहानपुर जिले में ग्रामीण सड़कों के समीप ओ.एफ.सी. लाईन डालने में नियमों का पालन नहीं करना

 

श्रीम‍ती अर्चना चिटनीस:- अध्‍यक्ष महोदय, मेरी ध्‍यानाकर्षण का विषय इस प्रकार है:-

 

 

 

पंचायत एवं ग्रामीण विकास,मंत्री(श्री गोपाल भार्गव):- अध्‍यक्ष महोदय,

          श्रीमती अर्चना चिटनीस—माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं जिस बात को कह रही हूँ मंत्रीजी स्वयं उसको स्वीकार कर रहे हैं लेकिन जिन नियमों का और तकनीकी निर्देशों का परिपालन किया जाना चाहिये उसका लगातार उल्लंघन हो रहा है. रोड कनेक्टिविटी पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी जी की एक महत्वाकांक्षी योजना थी मैं मानती हूँ उतनी ही महत्वाकांक्षी योजना डिजीटल कनेक्टिविटी की है जिससे ग्रामीण क्षेत्र आगे बढ़ने में अग्रसर होगा परन्तु जो हमारी ग्रामीण सड़कें हैं उसकी चौड़ाई 7.5 मीटर होती है, शोल्डर्स के बाद में ड्रेन होता है. मैं आपको बहुत दुखी होकर कहना चाहती हूं कि शोल्डर्स को Through and through पूरा खोद दिया गया है.  इसमें नियम विरुद्ध जो काम किया गया है उन पर कार्यवाही होना चाहिये वह दोबारा से बनना चाहिये और नियमानुसार बनना चाहिये. माननीय मंत्रीजी कह रहे थे कि स्टेट लेवल पर मार्च में एक बैठक ली गई दरअसल यह पूरा स्टेट का विषय है स्टेट लेवल पर समन्वय भी हो परन्तु जिला स्तर पर भी जो जीएम हैं और BSNL के अधिकारी हैं उनका समन्वय होकर जहां-जहां ज्यादा समस्या है वहां निरीक्षण होना चाहिये और इस प्रकार का काम करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्यवाही होना बहुत आवश्यक है. जब आप ड्रेन के पहले ही शोल्डर्स को खोद देंगे तो आगे चलकर यह कभी दोबारा पूरे नहीं होंगे. यदि आप खोदते ही चले गये तो एक विकास की योजना दूसरी विकास की योजना को बाधित करेगी और इससे ग्रामीण क्षेत्र के आवागमन में सख्त अवरोध आ रहा है और आगे भी आयेगा. मार्च की आपकी बैठक के बाद में आपके ही विभाग को 14.11 को FIR  करना पड़ी थी अगर विभाग को FIR  करने की स्थिति बन गई है इसका मतलब है कि जो परिस्थिति है वह कितनी गंभीर है. माननीय मंत्रीजी किसी सीनियर आफीसर्स का दल वहां भेजकर इसका  बहुत सूक्ष्मता से परीक्षण करायें और इस स्थिति में सुधार लाने का कष्ट करें.

 

श्री गोपाल भार्गव--  माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा मैंने अपने उत्तर में माननीय सदस्य को बताया है कि आर आर डी ए के द्वारा बी एस एन एल के मुख्य महाप्रबंधक से एग्रीमेंट किया गया है, चर्चा की गई और इसके बारे में दोनों पक्षों में समझौता हुआ है कि जो भी हमारी सड़कें डेमेज होंगी उसके लिए वे मरम्मत करवाएँगे और यदि नहीं करवाएँगे तो उनके ऊपर वैधानिक कार्यवाही भी की जाएगी, पुलिस कार्यवाही भी की जाएगी और उसी तारतम्य में 24.11.15 को ये पुलिस थाने में कार्यवाही हेतु पत्र भी लिखा गया है. माननीय सदस्य को अवगत कराना चाहता हूँ कि मध्यप्रदेश में ऐसी कोई भी सड़क, सिर्फ बुरहानपुर जिले में ही नहीं, प्रदेश में कोई भी सड़क,  जो ऑप्टिकल फायबर केबल है,  उसके द्वारा यदि क्षतिग्रस्त की जाएगी, तो जैसा कि हमने पुलिस थाने में भी लिखा, जिला पंचायत के सी ई ओ को भी हमने निर्देशित किया है, उनके सभी जिलों में पत्र लिखे हैं और इसके अलावा जो बी एस एन एल के महाप्रबंधक हैं उनके साथ भी बात हुई है, उनके साथ भी एग्रीमेंट हुआ है तो आश्वस्त करना चाहता हूँ कि जहाँ भी सड़क डेमेज होगी उसकी मरम्मत का काम संबंधित ठेकेदार के द्वारा और रीजेंसी के द्वारा करवाया जाएगा, इस मामले में शासन पूरी तरह से सचेत है.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

भिण्ड जिले के मिहोना-लहार-दबोह-भाण्डेर, चिरगाँव मार्ग निर्माण में अनियमितता होना.

         

 

                     


 

          डॉ. गोविंद सिंह—माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने तो कह दिया कि जनता में कोई रोष व्याप्त नहीं है , उस सड़क का दो –तीन बार तो टाइम पीरियड बढ़ चुका है पौने तीन साल और ज्यादा हो गये हैं . हाईकोर्ट में लोग गये हैं, लोकायुक्त में इसकी शिकायत हुई हैं और चौथी या पांचवी बार ध्यानाकर्षण लगा है और बारह –पन्द्रह प्रश्न लग गयें हैं और आप कह रहे हैं कि रोष व्याप्त नहीं है तो क्या हर्ष व्याप्त है, मिठाई बंट रही ,आप भी खा आए हैं क्या. आपने जब अध्ययन किया है तो थोड़ा ठीक जवाब तो दो. मैं भी मंत्री रहा हूं, मैंने कभी गलत बात नहीं कही, सच्चाई और जनता के हित में बात कही है. मैं केवल यह कहना चाहता हूं कि सड़क बन जाए , काम अच्छा हो.

 मैं आपसे कहना चाहता हूं कि आप विभाग के प्रमुख सचिव और एमडी को तत्काल वहाँ भेज दें और जहाँ जहाँ सड़क खराब है, स्थिति बिगड़ी हुई है उसको आप समय सीमा में ठीक करा दें, वह भी आप  बता दें कि कितने दिन में पूरी कर देंगे. दूसरा लहार बस्ती करीब ढाई किलोमीटर है, वहाँ पर 50 हजार की आबादी है , वहाँ सड़क पूरी उखड़ी है ,उसमें बिजली का काम अधूरा है, खंबे टूटे हुए हैं, नाला नहीं बना है. पेबर ब्लाक नहीं लगे हैं और नगर के बीच में रेस्ट हाउस के सामने पुल खोद दिया गया है उससे आवागमन में दिक्कत आ रही है, रोज जाम लग रहा है. यह काम वैसे तो 15 दिन में हो सकता है. लेकिन दो माह के अंदर लहार बस्ती के जो काम मैंने आपको बतायें हैं वह करा दें तथा तूरा सड़क कितनी समय सीमा में पूरा करा देंगे वह बता दें क्योंकि पौने तीन वर्ष एक्स्ट्रा हो चुका है . आपके पास जो लिखकर आ गया आपने बता दिया, उस पर मुझे विश्वास नहीं है.  लेकिन जो दोनों वरिष्ठ अधिकारी हैं, उन पर मुझे विश्वास है ,दोनों की ईमानदारी की छाप है, इन दोनों में से किसी को भी आप भेज दें और वह स्वयं देख लें यदि सच्चाई है तो सड़क सुधरवा दें . हम तो काम चाहते हैं, हम चाहते हैं कि लोगों को जो पौने तीन से आवागमन में परेशानी आ रही है वह दूर हो जाए.

          श्री सुरेन्द्र पटवा--- माननीय महोदय, यह सही है कि विलंब हुआ है और विलंब के लिए पहले कार्यवाही भी की गई है. जैसा कि माननीय विधायक जी ने कहा संबंधित विभाग से ,यहाँ से अधिकारी भेजकर इसकी जांच करा ली जाएगी और मार्च 2016 तक पूरा काम करवा लिया जाएगा.

          अध्यक्ष महोदय--- बस, अब आप धन्यवाद दे दीजियेगा.

          डॉ. गोविंद सिंह---  आपने कहा कि एमपीआरडीसी के अधिकारी जा रहे हैं. हमने तो केवल दो वरिष्ठ अधिकारियों का कहा है.

          अध्यक्ष महोदय--  आपका विषय आ गया है.

          श्री सुरेन्द्र पटवा--- अधिकारी जो भी जाएंगे वह परीक्षण कराकर बता देंगे.

          डॉ. गोविंद सिंह---  एमडी जा सकते हैं, पीएस जा सकते हैं, पीएस तो बहुत दौरा करते हैं.

          अध्यक्ष महोदय--- आपका प्रश्न हो गया है.

          श्री सुरेन्द्र पटवा--  मुझे लगता है कि 83 परसेंट काम पूरा हो गया है और मार्च तक पूरा काम करा लिया जाएगा.

          डॉ. गोविंद सिंह--  मैं पूछा रहा हूं वर्तमान में क्वालिटी मेंटेन करने के लिए आप किसको भेजेंगे.

          अध्यक्ष महोदय---  भेज रहे हैं, उन्होंने बता दिया है.

            श्री सुरेन्द्र पटवा- क्वालिटी कंट्रोल का काम भी परीक्षण करके जैसा आप चाहेंगे वैसा हो जाएगा.

          डॉ.गोविन्द सिंह—अध्यक्ष जी, दो सड़क हैं. मंत्री जी ने दूसरी सड़क का तो बताया ही नहीं?

            श्री सुरेन्द्र पटवा--  दोनों सड़क के लिए एम.डी को भेजकर परीक्षण करा लिया जाएगा और 31 मार्च 2016 तक इस काम को पूरा करा लिया जायेगा.

          डॉ. गोविन्द सिंह—अध्यक्ष महोदय, लहार नगर के अन्दर जो पेबर ब्लाक्स है, नाला है, पुलिया है, जो अधूरी पड़ी हैं, बस्ती के अन्दर है और बिजली खम्भे,इनका काम कितने दिन में करा देंगे?

          श्री सुरेन्द्र पटवा—अध्यक्ष महोदय, मैंने जो समय-सीमा बतायी है,31 मार्च 2016 तक हो जाएगा.

(3) नरसिंहपुर जिले में सिंचाई हेतु हरेरी नगर क्षतिग्रस्त होने से उत्पन्न स्थिति

श्री जालमसिंह पटेल(नरसिंहपुर)—अध्यक्ष महोदय,

संसदीय कार्य मंत्री(डॉ. नरोत्तम मिश्र)—माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

                                                                                               


 

           

 

 

श्री जालम सिंह पटेल – माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने जो जवाब दिया मैं उससे संतुष्‍ट हूँ और जवाब भी सही आया है. यह नहर माननीय मुख्‍यमंत्री जी के कारण आगे बढ़ रही है. वर्ष 2008-09 में मेम्‍बर्स ने इसे अस्‍वीकृत कर दिया था लेकिन मुख्‍यमंत्री जी ने स्‍वीकृत कराया है. मैं माननीय मंत्री से एक निवेदन यह करना चाहता हूँ कि एक हिस्‍से का तो टेंडर हो गया लेकिन दूसरे हिस्‍से का भी टेंडर हो जाए और आगे लाइनिंग हो जाए तो कृपा होगी.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र – माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दूसरे हिस्‍से का भी टेंडर लगाया है, कई बार लगाने के बाद भी अभी निविदाकार आ नहीं रहे हैं. ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे ही एक्‍वाडक्‍ट हमारा चालू हो जाएगा तो आगे की परिस्‍थितियों को देखते हुए उसमें टेंडर आ जाएगा और जो एक्‍वाडक्‍ट का काम है उसे हम अगले महीने जनवरी में प्रारंभ कर देंगे.

(4) शिवपुरी जिले के पिछोर एवं खनियाधाना तहसील को सूखाग्रस्‍त घोषित न किए जाने से उत्‍पन्‍न स्‍थिति 

श्री के.पी. सिंह (पिछोर) – अध्‍यक्ष महोदय,


 

          राजस्व मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) – माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

 

श्री के पी सिंह – माननीय अध्यक्ष महोदय आपने एक ही प्रश्न करने के लिए कहा है तो मैं अपने सभी प्रश्न एक साथ कर लेता हूं. मैं मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि वर्षा मापने का इनका तरीका क्या है हालांकि मैं जानता हूं. वह तरीका क्या है उसके बारे में मंत्री जी बता दें. क्योंकि मेरी समझ में यह नहीं आ रहा है मैं पूरी बरसात के समय में मेरे विधान सभा क्षेत्र में रहा हूं कहीं बाहर नहीं गया हूं. अध्यक्ष महोदय विधायकों को सरकार ने समीक्षा बैठक करने का अधिकार दे रखा है तो मैंने अगस्त में समीक्षा बैठक की थी तो उस समीक्षा बैठक के दौरान उपस्थित अधिकारियों ने कहा कि न तो कोई नाला ओवरफ्लो हुआ, न किसी नदी में बाढ़ आयी, न ही कोई तालाब भरा है, समीक्षा बैठक के दौरान उपस्थित स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि 75 प्रतिशत बरसात पूरी हो गई है. मैंने उनको कहा कि यह कौन सी बरसात है कि कोई नाला नहीं बहा, किसी नदी में पानी नहीं आया है, कोई तालाब नहीं भरा है लेकिन आप कह रहे हैं कि 75 प्रतिशत बरसात पूरी हो गई है, तो मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि बरसात मापने का तरीका क्या है.

श्री रामपाल सिंह – माननीय अध्यक्ष महोदय  माननय सदस्य पूर्व में मंत्री भी रह चुके हैं. आपके जमाने के ही यह बरसात मापने के यंत्र लगे हुए हैं अगर कहीं पर गड़बड़ है तो हम उनको बदलवा लेंगे क्योंकि उनसे ही पूरे प्रदेश में बरसात के आंकड़े आते हैं. उसी से हम यह आंकड़े प्राप्त करते हैं मैंने जानकारी माननीय सदस्य को दे दी है.

श्री के.पी.सिंह – अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी कह रहे हैं कि आपके ही जमाने के लगे हैं और हो सकता है कि खराब हो गये हों. जब आप खुद ही शंका व्यक्त कर रहे हैं कि वर्षा मापक यंत्र खराब हो सकते हैं . अध्यक्ष महोदय, यह वर्षा मापक यंत्र सिर्फ तहसील मुख्यालय पर लगे  हैं.  अगर तहसील मुख्यालय के क्षेत्र में बारिश हो जाती है तो यह मान लिया जाता है कि बारिश पूरे क्षेत्र में हो गई. अध्यक्ष महोदय, यह मंत्री जी की जानकारी में होगा कि इस वर्ष खण्ड खण्ड बारिश हुई है. मैंने जो अगस्त में मुख्यमंत्री जी को पहला पत्र लिखा था उसमें लिखा भी था कि इस समय खण्ड खण्ड बारिश हो रही है.  इससे मात्र तहसील स्तर के आधार पर आप पूरे तहसील का आंकलन नहीं कर सकते. और उसी वजह से मैने यह शंका प्रकट की थी कि खण्ड खण्ड बारिश का जो समय है  इसमें आप पूरे तहसील का गांव गांव सर्वे करायें. कोई सर्वे कार्य नहीं  हुआ.  , तब जब मंत्री जी खुद ही शंका व्यक्त कर रहे हैं कि  वर्षा मापक यंत्र सही हैं या नहीं यह हम नहीं कह सकते. तो फिर इनको सर्वे कराना चाहिए था कि नहीं.

          अध्यक्ष महोदय—वो नहीं कर रहै हैं , उन्होने कहां है कि यदि आपको शंका है तो बदल देंगे.

          श्री के.पी.सिंह—मुझे तो शंका है ही तभी तो मैने चिट्ठी लिखी थी.  पूरे प्रदेश में वर्षा मापक यंत्र की यही हालत है.

अध्यक्ष महोदय—आप सीधा प्रश्न कर लें.

श्री के.पी.सिंह- - अध्य़क्ष महोदय, मेरा कहना है कि यदि केवल तहसील मुख्यालय पर बारिश हो जाती है तो क्या पूरे तहसील में बारिश हो सकती है? मैने इसलिए सर्वे का निवेदन किया था लेकिन सर्वे नहीं कराया गया. फिर बाद में पता लगा कि गिरधर राव करके एक आय.एफ.एस. अधिकारी पूरे हमारे  पिछोर क्षेत्र का दौरा करने गये थे.  वे जब दौरा करके लौट कर आए तो मैने उनसे पूछा कि राव साहब आपने क्या स्थिति पायी ? तो वे बोलो कि मैं तो अपनी रिपोर्ट में यह लिख रहा हूं कि 100 प्रतिशत सूखे के हालात हैं और पूरी तरह से फसल बरबाद हो चुकी है. तो मैं  माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि जिन अधिकारी का मैं नाम ले रहा हूं ,क्या वे सर्वे करने गये थे और क्या उन्होंने राज्य सरकार को कोई रिपोर्ट सौंपी है? आपकी जानकारी मैं है या नहीं.

श्री रामपाल सिंह--- अध्यक्ष महोदय, वर्षा मापक यंत्र के विषय में सदस्य ने जो बताया है ,इस बात से हम भी सहमत थे. शासन ने भी उनके सुझाव पर गंभीरता से विचार किया है और तय किया है कि अगर तहसील के 10 गांव में भी वर्षा नहीं हो रही है ,कम वर्षा है तो उसको भी हम सूखा घोषित करेंगे, उस पर हम लोग विचार कर रहे हैं. दूसरा, जो अधिकारी वहां गए थे उनकी रिपोर्ट अभी ध्यान में नहीं है,उस रिपोर्ट को बुला लेंगे. और जिले से हमारे  पास जो आंकड़े आए हैं ,जो मापदण्ड बना है उसी आधार पर हमने किया है.  लेकिन मैं माननीय सदस्य को जरूर यह आश्वासन देना चाहूंगा कि आपके जिले को 67 करोड़ 97 लाख 80 हजार रूपये दिये गये हैं ,यह सूखा घोषित करने पर नहीं लेकिन मध्यप्रदेश सरकार ने जहां भी किसानों को क्षति हुई है उनको हम सीधे राशि दे रहे हैं. इसमें सूखा का कोई बन्धन नहीं है. और अभी तक 13 करोड़ 95 लाख 64  हजार की राशि आपके जिले में किसानों को बट भी गई है और आपने जिन बातों को ध्यान में लाया है उन पर हम गंभीरता से विचार करेंगे.

श्री के.पी.सिंह—अध्यक्ष महोदय, मेरी बात थोड़ी सुन लें. मुआवजा दिलायें न दिलायें यह मंत्री जी का और सरकार का अपना एक अधिकार है. मैं यह जानना चाहता हूं कि जो अधिकारी आपने भेजे थे उसकी रिपोर्ट तक नहीं मिली. यह बड़ी विचित्र बात है.

अध्यक्ष महोदय—उन्होंने कह दिया कि जानकारी ले लेंगे.

श्री के.पी.सिंह—अध्यक्ष महोदय, यह एक महीने पुरानी बात है,आज की नहीं है. मेरा कहना है कि क्या आई.एफ.एस. अधिकारी की जो रिपोर्ट है आप उसको बुला कर के ,अगर उनकी रिपोर्ट सकारात्मक पायी जाती है तो क्या दोनो तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित करेंगे.?

श्री रामपाल सिंह—अध्यक्ष महोदय, निश्चित रूप से.

 

 

 

 

 

 

समय- 12.14 बजे        प्रतिवेदन की प्रस्तुति

 

 

 

 

 

 

 

 

समय 12.21 बजे               याचिकाओं की प्रस्तुति.

 

श्री सत्यपाल सिंह सिकरवार (अनुपस्थित)

 

विदिशा जिले में वामनाखेड़ी से बगरौदा सिंरोज कुवई मार्ग को 03 किलोमीटर तक सड़क से जोड़े जाने

         

          श्री वीर सिंह पवार(कुरवाई)—अध्यक्ष महोदय, मैं, विदिशा जिले में वामनाखेड़ी से बगरौदा सिंरोज कुवई मार्ग को 03 किलोमीटर तक सड़क से जोड़े जाने के संबंध में याचिका प्रस्तुत करता हूं.

          श्री हरवंश सिंह राठौर (अनुपस्थित) श्री हर्ष सिंह (अनुपस्थित)

 रीवा जिले की जड़कुड़ पहुंच मार्ग का निर्माण किये जाने

श्री सुखेन्द्र सिंह(मऊगंज)—अध्यक्ष महोदय, मैं, रीवा जिले की जड़कुड़ पहुंच मार्ग का निर्माण किये जाने के संबंध में याचिका प्रस्तुत करता हूं.

छतरपुर जिले की ग्राम बनजारी के शासकीय माध्यमिक शाला को हाई स्कूल में उन्नयन किये जाने

श्री आर डी प्रजापति(चन्दला)—अध्यक्ष महोदय, मैं, छतरपुर जिले की ग्राम बनजारी के शासकीय माध्यमिक शाला को हाई स्कूल में उन्नयन किये जाने के संबंध में याचिका प्रस्तुत करता हूं.

वक्तव्य

दिनांक 23 जुलाई,2015 को पूछे गये तारांकित प्रश्न संख्या 3(क्रमांक 719) एवं तारांकित प्रश्न संख्या 5(क्रमांक 361) के उत्तर के संबंध में राज्यमंत्री, पर्यटन का वक्तव्य.

 

राज्यमंत्री,संस्कृति(श्री सुरेन्द्र पटवा)—अध्यक्ष महोदय, दिनांक 23.07.2015 की प्रश्नोत्तर सूची में पृष्ठ 2 में मुद्रित तारांकित प्रश्न संख्या 3 (क्रमांक 719) में, मैं निम्नानुसार संशोधन करना चाहता हूं.       

 

राज्यमंत्री,संस्कृति(श्री सुरेन्द्र पटवा)—अध्यक्ष महोदय, दिनांक 23.07.2015 की प्रश्नोत्तर सूची में पृष्ठ 3 में मुद्रित तारांकित प्रश्न संख्या 5 (क्रमांक 361) में, मैं निम्नानुसार संशोधन करना चाहता हूं.

          अध्यक्ष महोदय—वर्ष 2015-16 के...

          डॉ गोविंद सिंह—अध्यक्षजी, हमारा अनुरोध है कि अब समय कम है. इस विषय को भोजन अवकाश के बाद ले लें. मेहरबानी होगी.

          अध्यक्ष महोदय—माननीय मंत्रीजी, लंच के बाद ले लें?

            वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया)—ठीक है.

          अध्यक्ष महोदय—विधानसभा की कार्यवाही अपराह्न 2.30 बजे तक के लिए स्थगित.

 

                               (अपराह्न 12.26 बजे से  2.30 बजे तक अन्तराल)

 

(2.36 बजे माननीय अध्‍यक्ष श्री सीतासरन शर्मा पीठासीन हुये)

वर्ष 2015-16 के तृतीय अनुपूरक अनुमान की मांगों पर मतदान

          अध्‍यक्ष महोदय--  अब अनुपूरक अनुमान की मांगों पर चर्चा होगी, सदन की परम्‍परा के अनुसार सभी मांगे एक साथ प्रस्‍तुत की जाती हैं और उनपर एक साथ चर्चा होती है.

          अत: मैं, वित्‍त मंत्री से कहूंगा कि वह सभी मांगे एक साथ प्रस्‍तुत कर दें. मैं, समझता हूं कि सदन इससे सहमत है.

          वित्‍त मंत्री (श्री जयंत मलैया)--  अध्‍यक्ष महोदय मैं, राज्‍यपाल की सिफारिश के अनुसार प्रस्‍ताव करता हूं कि-

          “दिनांक 31 मार्च, 2016 को समाप्‍त होने वाले वित्‍तीय वर्ष में अनुदान संख्‍या 1,3,5,6,10,13,14,15,16,17,18,22,23,24,25,26,27,28,29,31,34, 37,38,39,41,42,44,45,47,48,50,52,53,55,57,60,61,64,66,67,68,71, 73,74 तथा 75 के लिये राज्‍य की संचित निधि में से प्रस्‍तावित व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को कुल मिलाकर पांच हजार पांच सौ पच्‍चीस करोड़, एक लाख, छ: हजार, आठ सौ रूपये की अनुपूरक राशि दी जाये.”

          अध्‍यक्ष महोदय--  प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ. श्री मुकेश नायक.

          श्री मुकेश नायक (पवई)--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय वित्‍त मंत्री जी ने अनुपूरक बजट एक साल में तीसरी बार, अभी पूरा नहीं हुआ एक वर्ष और उसको तीसरी बार सदन के पटल पर अनुपूरक बजट रखा है, अभी मूल बजट आना बाकी है, यानी एक वर्ष में 4 बार वित्‍त मंत्री जी इस सदन में बजट रखेंगे. मुझे नहीं लगता जो मेरी जानकारी है, उसके अनुसार माननीय जयंत मलैया जी वित्‍त मंत्री जी पूरे भारत वर्ष में अनुपूरक बजट पेश करने में नंबर 1 पर आ गये हैं और अनुपूरक बजट के मामले में इनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्‍ड रिकार्ड में शामिल किया जाना चाहिये. चूंकि भारत वर्ष की किसी भी विधानसभा में किसी भी वित्‍त मंत्री ने इतने अनुपूरक बजट प्रस्‍तुत नहीं किये, जितने वर्तमान माननीय वित्‍त मंत्री जी ने अनुपूरक बजट पेश किये हैं. इससे पता लगता है कि मध्‍यप्रदेश की सरकार उसके वित्‍तीय अनुमान, इंटीशिपेशन और उसका आर्थिक कुप्रबंध किस दिशा में जा रहा है, यह स्‍पष्‍ट इशारा इस ओर होता है. यह कहा जा सकता है कि मध्‍य प्रदेश में किसानों की समस्‍यायें आ गईं, गैर आयोजना व्‍यय अचानक आ गये, नॉन प्‍लान बजट अचानक आ गये और ऐसी आकस्मिक जरूरतें आ गईं जिसके कारण राज्‍य की सरकार को अपना अनुपूरक बजट मध्‍यप्रदेश की विधानसभा में और प्रदेश की जनता के सम्‍मुख रखना पड़ा. लेकिन एक दिन का भी अगर विधानसभा सत्र बुलाया जाता है उसमें भी सरकार का अनुपूरक बजट आता है. ऐसा कोई विधान सभा सत्र उठाकर देख लों जिसमें इस सरकार ने अनुपूरक बजट न रखा हो. मध्‍य प्रदेश वास्‍तव में आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है. 23 हजार करोड़ का कर्जा उस समय था, जब मध्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री माननीय दिग्विजय सिंह जी थे. यह कहा जा सकता है कि टोटल योजना का आकार जितना बड़ा है, उसके अनुपात में जो कर्ज का परसेंटेज का रेश्‍यो है वह ज्‍यादा हो सकता है, यह कहा जा सकता है, चतुराई के आंकड़े देने के लिये, लेकिन वास्‍तविकता यह है कि 1 लाख 10 हजार करोड़ का जो कर्ज है मध्‍यप्रदेश की जनता के उपर यह ज्‍यादा है, और मेरा अनुमान है कि यह मार्च-मार्च तक लगभग-लगभग 1 लाख 30 हजार करोड़ के आस-पास यह कर्जा चला जायेगा. मार्च तक लगभग 1 लाख 30 हजार करोड़ के आसपास यह कर्जा चला जायेगा, मेरा ऐसा आंकलन है, अनुमान है. कहने का मतलब मेरा यह है कि कब तक आप उधार के वैभव पर जीते रहेंगे, कब तक उधार लेकर के कहते रहेंगे कि हम प्रदेश की बुनियादी सुविधाओं के लिये अपने भौतिक लक्ष्यों के लिये, इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिये इतनी विपुल धनराशि का नियोजन कर रहे हैं. यह कहने से काम नहीं चलेगा. माननीय वित्त मंत्री जी वास्तविक स्थिति यह है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने भी जिन देनदारियों के लिये अपने आदेश दिये हैं, निर्देश दिये हैं वो देनदारियां भी राज्य शासन पूरी नहीं कर पा रहा है. आज इतनी खस्ता हालत राज्य शासन की है. आपके स्टेब्लिशमेंट के खर्चे आपके, तनख्वाह-वेतन और भत्तों के खर्चे, आपको कर्ज लेकर के पूरा करना पड़ रहे हैं. यह वास्तविक स्थिति है मध्यप्रदेश की इस सरकार की. हितग्राही मूलक योजनाओं के बारे में कहना चाहूंगा कि पहले तो आप कहते थे कि हमारी केन्द्र में सरकार नहीं है, हमें अनुदान नहीं मिल रहा है. अब आज आप क्या कहेंगे. माननीय मुख्यमंत्री जी धरने पर बैठ जाते थे, कहते थे कि हमारे साथ में पक्षपात हो रहा है.फेडरल स्ट्रेक्चर को क्षति पहुंच रही है, संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, भेदभाव हो रहा है और यहां पर चूंकि कांग्रेस की सरकार नहीं है इसलिये पूरा अनुदान नहीं दिया जा रहा है लेकिन अध्यक्ष महोदय अब वित्त मंत्री जी बतायें अब क्या हो रहा है मैं इनको वास्तविक स्थिति बताता हूं.माननीय अध्यक्ष महोदय, केन्द्र सरकार के द्वारा जो राज्य शासन को अनुदान मिलता है इसमें से 12886 करोड़ रूपये लेप्स हो गये हैं. वर्ष 2014-15 में 30063 करोड़ रूपये की रकम राज्य शासन को मिलना थी  और इसमें से 17120 करोड़ रूपये मिले हैं और 12886 करोड़ रूपये लेप्स हो गये हैं. Accelerated Irrigation Benefits Prograamme  में 1650 करोड़ रूपये मिलना थे सिंचाई के लिये उसमें से केवल 200 करोड़ रूपये मिले और 1450 करोड़ नहीं मिले. Backward Regions Grant Fund Programme तो लगभग इन्होंने बंद ही कर दी है . इसमें 1107 करोड़ रूपये मिलने थे जिसमें से केवल राज्य शासन को 221 करोड़ रूपये मिले हैं और 886 करोड़ रूपये नहीं मिल पाये. मीड-डे मील योजना. जब कोई भी सरकार अपनी प्राथमिकतायें तय नहीं कर पाती है उसकी आर्थिक स्थिति लड़खड़ाती है तो पता लगता है कि उस सरकार का Vision क्या है, उसका दृष्टिकोण क्या है. आप मीड-डे मील के पैसे मध्यप्रदेश में काट रहे हैं.  social structure के पैसे जो सेवा का क्षेत्र है उसके पैसे आप काट रहे हैं तो आपकी प्राथमिकतायें कहां जा रही हैं . मध्यप्रदेश में मीड-डे मील के लिये 1471 करोड़ रूपये मिलना थे इसमें से केवल 796 करोड़ रूपये मिले हैं 675 करोड़ रूपये की मीड-डे मील की योजनाओं में कटौती की है. यह जो बच्चे स्कूलों में  पढ़ने जाते हैं हमने उनको प्रोत्साहन के लिये यह योजना बनाई है, कुपोषण रोकने के लिये हमने यह योजना बनाई है, स्कूलों में ड्राप रेट रोकने के लिये यह योजना बनाई है, और इस तरह की सामाजिक विकास की और सेवा के क्षेत्र में कटौती करने से इस सरकार का दिवालियापन और इस सरकार की प्राथमिकताओं का अंदाजा सहज रूप में लग जाता है . आप  प्रधान मंत्री ग्रॅाम सड़क योजना  के अंतर्गत 1125 करोड़ रूपये मिलना थे लेकिन 708 करोड़ रूपये मिले और 414 करोड़ रूपये नहीं मिले. अगर  कहीं मैं गलत बोलूं तो मेरा विनम्र निवेदन है कि आप मुझे करेक्ट करते जाईये . मनरेगा कितनी महत्वकांक्षी योजना थी ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर तलाशने की, रोजगार के अवसर देने की इसमें 4000 करोड़ रूपये मिलना थे केवल 2452 करोड़ रूपये मिले और 1543 करोड़ रूपये मनरेगा योजना में सरकार को नहीं मिले हैं . सरकार के मंत्री कहते हैं, माननीय वित्त मंत्री जी कहते हैं कि पैसे की कोई कमी नहीं है, विकास योजनायें जारी रहेंगी, धनराशि की कोई कमी नहीं है लेकिन आज वर्तमान में यह हालत है कि मीड-डे मील के पैसों में कटौती करना पड़ रही है सामाजिक विकास के क्षेत्र के अवसरों में कटौती करना पड़ रही है और सबसे दुर्भाग्यजनक बात तो यह है कि पिछली बार भी मैंने विधानसभा में कहा था सामाजिक सुरक्षा पेंशन 8-8 महीने से नहीं मिली है, विधवा पेंशन, विकलांग पेंशन, 8-8 महीने से नहीं मिली है, मध्यान्ह भोजन में कटौती की जा रही है . मनरेगा की मजदूरी हमारे ग्रामीण क्षेत्र के मजदूरों को नहीं मिल रही है. सबसे ज्यादा दुर्भाग्यजनक तो यह है कि केन्द्र शासन के द्वारा पोषित जो हमारे शौचालयों की स्कीम है, मुख्यमंत्री कुटीर योजना की जो स्कीम है, इंदिरा आवास की जो स्कीम है इनकी एक एक किश्तें मिली है, आधी आधी झोपड़ियां गरीबों की बनी है. यह हालत है  मधयप्रदेश  में ग्रामीण विकास योजनाओं की.  जो मनरेगा की मजदूरी के तहत  ग्रामीण क्षेत्रों में  मजदूरी के पैसे तो नहीं मिले,मटेरियल के भी पैसे हमारे  मजदूरों  के  खाते में नहीं पहुंचे, जिसके कारण  ग्रामीण विकास की छोटी छोटी  रोजगारोन्मुखी योजनायें  बहुत बुरी तरह से प्रभावित हो रही हैं.  मैं बुंदेलखण्ड पैकेज की बात करना चाहूंगा.  हमने बुंदेलखण्ड पैकेज में सिंचाई  योजनाओं में हो रही धांधली की बात  उठाई थी, चूंकि यह अनुपूरक बजट है और इसलिये मैं
इसमें विस्तार से  नहीं जाऊंगा.  जब मूल बजट आयेगा,  तो मैं बजट के ऊपर बहुत विस्तार पूर्वक अगले सत्र  में  चर्चा करने वाला हूं.  लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि  सिंचाई मंत्री जी ने  विनम्रतापूर्वक  जो बुंदेलखण्ड में सिंचाई योजनाओं में जो घपले,करप्शन हुए थे,  उसकी जांच  कराने की बात  विधान सभा में कही थी.  जब वे अपना उत्तर दें,  तो यह जरुर बतायें कि  वह जांच  कितनी  प्रगति पर है, कहां तक वह पहुंची  और उसकी जांच  कौन कर रहा है, उसकी क्या स्थिति है.  मंत्री जी जानते हैं, मैंने इनको कहा था  और इन्होंने विनम्रतापूर्वक  अपने अधिकारी भी वहां भेजे थे कि बुंदेलखण्ड पैकेज में  बांध बन गये.  नहरें बन गयीं.  लेकिन आज तक नहरों में पानी नहीं  छोड़ा, 3-3 साल से सिंचाई  परियोजनाओं  में पानी भरा हुआ है,  लेकिन किसान उसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं.  जब मैं वहां मौके पर गया, गांव के लोगों से मिला,  निचले स्तर पर अधिकारियों से मैंने बात की  कि बहुत बैचेनी और घुटन है  ग्रामीण क्षेत्र की जनता में,  क्योंकि जिस उद्देश्य से  इतनी बड़ी राशि का नियोजन  किया गया था, उसका लाभ ग्रामीण क्षेत्र की जनता  को  नहीं मिल पा रहा है.  जब मैंने पूछा, लोगों और अधिकारियों ने  बताया कि ये बांध इतनी जल्दबाजी में बनाये गये, इस तरह से बनाये गये, इतना भ्रष्टाचार इनमें हुआ है कि   पानी तो भरा है,  लेकिन अगर नहरों में पानी छोड़ दिया तो  जल का असामान्य वितरण हो जायेगा  और यह पानी अपनी सीमायें  तोड़ता हुआ  कहीं गांव में घुस जायेगा, कहीं किसी ऐसी जगह पर घुस जायेगा, जिससे पूरी ग्रामीण जनता का  निस्तार अवरुद्ध हो  जायेगा, रुक जायेगा, यह हालत है.  3-3 साल से बांध बने हुए हैं.  मंत्री जी, उसमें क्यों नहीं पानी छोड़ा जा रहा है,  आप विधान सभा को बतायें और इतनी बड़ी धनराशि  का दुरुपयोग जब हुआ है,  तो इसके लिये कौन जिम्मेदार है.  यह भी जरा हमारे तमाम माननीय सदस्य  सदन में बैठे हैं,  उनको बतायें.  तीसरी बात मैं कहना चाहता हूं.  आपने जल्दबाजी में हमारी  किसानों की भूमि का अधिग्रहण कर लिया.  उनकी जमीनें छीन लीं.  3-3,4-4 साल हो गये,  किसान रोते फिर रहे हैं, पन्ना जिले में. लेकिन उनकी जमीन  के मुआवजे  शासन ने नहीं दिये.  क्यों नहीं दिये.  आपका कानून बना हुआ है.  भू अधिग्रहण का कानून है.  उसके रेट्स फिक्स हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में  बाजार मूल्य हर जगह  की जमीनों का और शहरी क्षेत्र  की जमीनों का  फिक्स है.  जब आपने उनकी जमीन का अधिग्रहण कर लिया, किसान रोते, चिल्लाते रहे.  कई किसान तो ऐसे हैं, जो बिलकुल  भूमिहीन हो गये.  2-2,3-3 एकड़ भर उनकी जमीन थी,  वह भी डूब में चली गई. लेकिन उनके मुआवजे आज तक नहीं बांटे,  3-3,4-4  साल हो गये.  क्यों नहीं बांटे मुआवजे,  जरा हम सब लोगों को यह बताने की  कृपा करें.  यह किसानों के साथ इस तरह का अन्याय  क्यों हो रहा है.  हमने मंत्री जी से कहा था कि  डेढ़ सौ, दो सौ ट्रक रेत और गिट्टी की ढुलाई  के पैसे दे दिये और नम्बर लगे हैं स्कूटर और मोटर साइकिलों के. हमने इनको नम्बर भी  विधान सभा में बोले थे कि साहब डेढ़ सौ ट्रक, दो सौ ट्रक  ईंट ,गिट्टी और   रेत  कोई मोटर साइकिल,  स्कूटर  ढो सकते हैं क्या. उसके नम्बर पड़े हुए हैं.  उसके बिल लगे हुए हैं.  पैसे आहरित कर लिये गये. पैसे निकाल लिये गये.  मैंने विधान सभा में  वह नम्बर दिये थे.  जब जांच हुई तो पता चला कि  वह छतरपुर , पन्ना और टीकमगढ़   के  स्कूटर  और मोटर साइकिल के नम्बर  हैं.  अभी तक कार्यवाही नहीं हुई.  जांच की घोषणा कर देते हैं.  मुझे एक बात समझ में नहीं आती कि  कांग्रेस और  भाजपा की सरकार में  एक बड़ा बुनियादी अंतर देखने को मिलता है.  वह बुनियादी अंतर यह है कि 
(XXX).  कांग्रेस के लोग कभी ऐसा  नहीं करते थे.  केंद्र की सरकार में  किसी भी मंत्री ने अगर गड़बड़ी की है, तो उसको अपना पद  छोड़ना पड़ा है.  कोर्ट ने अगर उनके  विरुद्ध टिप्पणी की है,  तो उनको हटना पड़ा है.  लेकिन  इस सरकार में  ऐसा नहीं होता है.  (XXX).  यह बहुत दुर्भाग्यजनक है और यह संसदीय गरिमा के   विरुद्ध है.  प्रदेश की जनता ने  जिस आशा और विश्वास के  साथ  तीसरी दफे आपकी सरकार बनाई थी,  आपने उसके साथ न्याय नहीं किया और उसका परिणाम क्या देखा. मुझे बहुत खुशी है कि झाबुआ चुनाव में 7 सीटों पर कांग्रेस जीती. मैं अपने सम्‍माननीय विधायकों को धन्‍यवाद देता हूँ. उन्‍होंने इतनी गरिमा रखी कि एक भी बार हुँकार नहीं भरी. एक भी बार अहंकार का प्रदर्शन नहीं किया. एक भी बार आपसे नहीं कहा कि हम जीत गए. आप तो विधानसभा का चुनाव जीत गए, लोकसभा का चुनाव जीत गए, नगर-निगम एवं नगरपालिकाओं के चुनाव जीत गए, मण्डियों के चुनाव पर कब्‍जा कर लिया, सहकारी बैंकों पर कब्‍जा करके, उनको पूरा ध्‍वस्‍त कर दिया, पूरा खत्‍म कर दिया. इतना क्रूर बहुमत मध्‍यप्रदेश की जनता ने आपको दिया. लेकिन आपने जो अपमानजनक व्‍यवहार मध्‍यप्रदेश की जनता से किया है, उसके परिणाम आने लगे हैं. झाबुआ का चुनाव आपने देखा, तिनका उड़ता है तो दिशा बताता है. अब भी संभल जाइये. लोग कहने लगे हैं कि मध्‍यप्रदेश की राजनीति में तीसरी बार के बाद आप अवसर देने लायक नहीं बचे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय – कृप्‍या समाप्‍त करें.

श्री मुकेश नायक - इस लापरवाही, घपलेबाजी, अनियमितता और अराजकता के कारण मध्‍यप्रदेश की जनता के बीच में इस तरह का परसेपशन बनने लगा है.

अध्‍यक्ष महोदय – कृप्‍या समाप्‍त करें.

श्री मुकेश नायक – माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बस थोड़ा और समय दीजिये.

अध्‍यक्ष महोदय – एक मिनिट में समाप्‍त करें. आपको 15 मिनिट्स हो गए हैं.

श्री मुकेश नायक – दूसरी चीज, बुन्‍देलखण्‍ड पैकेज़ में पी.एच.ई. के तहत नल-जल योजनाएँ बनीं थीं. मन्‍त्री तो विधानसभा में आते ही नहीं हैं. पी.एच.ई. मंत्री भी नहीं आईं.(XXX). कोई नहीं आता, किसी को जनता की कोई परवाह नहीं है, लोकतंत्र एवं विधानसभा की कोई परवाह नहीं है, कोई चिन्‍ता नहीं है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नल-जल योजनाओं के लिये बुन्‍देलखण्‍ड पैकेज मैं पैसा मिला था. 1200 नल-जल योजनाएं बनीं, ट्यूबवेल कर दिये गये, गड्डे हो गए. समर्सिबल पम्‍प उसमें डाल दिये गये, बिजली के कनेक्‍शन उसमें हो गए, गांव भर में पाईप लाईन बिछा दीं, लेकिन 1200 में से 997 नल-जल योजनाओं के बटन चालू नहीं किये. योजनाओं को चालू नहीं किया. 1200 में से 997 योजनाएं बन्‍द पड़ी हैं.

अध्‍यक्ष महोदय – नायक जी, कृप्‍या समाप्‍त करें.

श्री मुकेश नायक – इस तरह की लापरवाही, घपलेबाजी सरकार के द्वारा की जा रही है और इतनी अनन्‍त कथा है. इसलिए समाप्‍त करना ही पड़ेगा. जब मूल बजट आयेगा तो उसमें विस्‍तारपूर्वक, मैं सारे बजट पर चर्चा करूँगा लेकिन मैं इतना जरूर कहना चाहता हूँ कि माननीय वित्‍त मंत्री जी, आप कुप्रबन्‍ध तथा अराजकता के बिल्‍कुल मूर्तिमंत्र रूप हैं, वित्‍त विभाग आपसे संभलता नहीं है, आपको वित्‍त की कोई जानकारी नहीं है. इसलिए कृपा करके अपने आसपास थोड़े अच्‍छे लोग रखिये ताकि मध्‍यप्रदेश की जनता की प्राथमिकता ठीक हो सकें और बजट ठीक बन सके एवं आर्थिक नियोजन अच्‍छा हो सके. धन्‍यवाद.

अध्‍यक्ष महोदय – श्री ओम प्रकाश सखलेचा.

श्री ओम प्रकाश सखलेचा (जावद) – माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं अनुपूरक बजट के समर्थन में अपनी बात रखना चाहता हूँ. इस वर्ष जब पूरा प्रदेश सूखा एवं पानी की समस्‍या के कारण फसल से इतना पीडि़त है. उस समय, इस सरकार ने अपनी अति जागरूकता का परिचय देते हुए, भले एक दिन का विशेष सत्र बुलाकर भी अपने फण्‍ड में से इसका विशेष प्रावधान करके, प्रदेश के किसान को तुरन्‍त सहयोग करने की हिम्‍मत दिखाई. अभी एक छोटी-सी चर्चा, मैं सुन रहा था. मेरे पूर्व वक्‍ता सम्‍माननीय ने कहा कि बहुत ज्‍यादा लोन ले लिया है. जितना मध्‍यप्रदेश की सरकार पर आज की तारीख में कुल लोन है, उस लोन को केवल दो विभाग में किसानों को पिछले 10 वर्षों में चाहे सूखा, ओलावृष्टि, अन्‍य तरह की राहत चाहे बिजली की राहत. इस केवल राहत-राहत किसानों का अंक ले लें तो वह टोटल लोन से ज्‍यादा निकलेगी. यह हमारे पूरे मध्‍यप्रदेश की सरकार का सोच का तरीका है. लोन मध्‍यप्रदेश की सरकार ने, जो भी लिया. वह पूरा लोन कहीं न कहीं अन्‍नदाता या जो 70 प्रतिशत लोन किसानी पर आधारित है, उनके भले के लिए और उनको सस्‍टेन करने के लिए और उसी का परिणाम आज आया है कि पूरे भारत में सबसे ज्‍यादा कृषि उत्‍पादन में हमने तरक्‍की की है. क्‍या हमारे दूसरे मित्र लोग यह नहीं चाहते हैं तो वह बहुत स्‍पष्‍ट शब्‍दों में कह दें कि लोन लेने की कोई जरूरत नहीं है. किसानों को सहयोग करने की जरूरत नहीं है, ओलावृष्टि में पैसा बांटने की जरूरत नहीं है, क्‍या आप यह बात कहना चाहते हैं ? अगर मैं विकास के पैसे की बात करूं, तो मुझे यह बताते हुए बड़ा हर्ष होता है कि 4 बड़े आइटम में सबसे प्रमुख राशि  इस बजट में दी गई है ।  पंचायती राज विभाग के विभिन्‍न हिस्‍सों में सबसे ज्‍यादा फायनेंस       1 हजार 843 करोड़ रूपया इस बजट में एलोकेट किया जो कि 16 प्रतिशत है, अर्बन सेक्‍टर में 409 करोड,पब्लिक वर्क्‍स में आय, अब उसमें सड़क पुलिया बनाना,  इसमें जो काम किया, इसमें विरोध किस विषय का है ।  यह  बात करना, सिर्फ यह कह देना कि यह नहीं है, या यह सही है ,विषय यह होना चाहिए ।  जहां तक मैं थोड़ा-बहुत  समझ पाया हूँ कि क्‍या हमारी सरकार ने जो  पैसा उधार लिया, वह खर्चे में तो नहीं उड़ाया, वह एक्‍सपेन्‍डीचर का कितने प्रतिशत था, वह हमारा विकास के इन्‍फ्रास्‍ट्रेक्‍चर में, उसका कितना प्रतिशत लगा और देश के  सामान्‍य,निचले वर्ग, आखिरी छोर के व्‍यक्ति तक उसका कितना हिस्‍सा पहुंचा । जैसा मैं अभी देख रहा था, किसान कल्‍याण के लिए मैं लेता हूँ तो ट्रेक्‍टर एवं अन्‍य विभिन्‍न उपकरणों में जो आर्थिक अनुदान के लिए 33 करोड़ रूपए से ज्‍यादा विशेष प्रावधान किया, आज अगर किसान ट्रेक्‍टर लेता है, पिछड़ा और एस.सी.एस.टी. का है तो 35 प्रतिशत तक या एक लाख रूपए तक का उसको अनुदान मिल रहा है और अगर वह सामान्‍य वर्ग  है तो उसमें 25 प्रतिशत का अनुदान उसको  मिल रहा है, तो क्‍या यह उसके खिलाफ है । अगर  हमने किसानों के लिए बात की तो इसमें  क्‍या गलती है । राष्‍ट्रीय फसल बीमा योजना की डेफरिसेयल पूर्ति के लिए अगर 50 करोड़ का प्रावधान किया, तो उसमें क्‍या यह नहीं करना चाहिए, फसल बीमा नहीं होना चाहिए, सहकारिता में अल्‍प ऋण के लिए प्रावधान किया क्‍योंकि मध्‍यम वर्ग के लोन में उसको परिवर्तित किया,अगर 58 करोड़ 41 लाख रूपया खर्च हुआ तो क्‍या वह जरूरी नहीं था, क्‍या उसकी हमें पूर्ति नहीं करनी चाहिए, क्‍या उस लोन को डिफर नहीं करना चाहिए । क्‍या हमें किसानों के लिए अब नए तरीके की खेती के लिए उनको उत्‍साहित नहीं करना चाहिए, क्‍या उसके लिए हमें प्रावधान नहीं करना चाहिए, इन सब विषयों पर थोड़ा गंभीरता से विचार करना होगा ।   मुख्‍यमंत्री कन्‍यादान योजना में 45 करोड़ का अतिरक्ति प्रावधान किया, सामुहिक विवाह के लिए 25 करोड़ रूपए का अतिरिक्‍त प्रावधान किया । क्‍या आप सामूहिक विवाह के खिलाफ हैं, क्‍या आप इस नीति के समर्थन में नहीं हैं । हमें सोचना पड़ेगा हमें यह बात करनी चाहिए कि क्‍या यह जनहितेषी योजना लॉंग टर्म के लिए सामान्‍य वर्ग के लिए जरूरी हैं या नहीं है । सिर्फ यह कह देना कि इसमें गलती है उसमें यह हुआ या यह चूक हो गई । उसका तथ्‍य हैं, इतना बड़ा बजट है तो गलतियां होंगी, अगर गलतियां होंगी  तो उस पर जांच होगी, उस पर दोषियों के विरूद्व कार्यवाही मांगे । जितना चिन्हित बात होगी उतना हम कहीं न कहीं किसी विषय पर पहुंचेगे । कन्‍या अभिभावकों की जिनकी दो कन्‍याएं हैं, उनके परिवारों के लिए  2 करोड़ रूपए का अतिरिक्‍त प्रावधान किया है । इंदिरा विधवा, गांधी विधवा पेंशन के लिए उनके लिए आदिवासी क्षेत्र में 2.71 करोड़ का अतिरिक्‍त प्रावधान किया, क्‍या उसमें चूक है । कहीं न कहीं जो नीतियां बनी हैं, उसमें निचले और सामान्‍य वर्ग के ऊपर खर्चें पर, आप लोगों को किसी को भी आपत्ति है तो स्‍पष्‍ट कहें, उसे घुमा फिराकर हर बात को भ्रष्‍टाचार का नाम देकर, ऐसा वातावरण बनाना कि कुछ नहीं हो रहा है । अगर कुछ नहीं हो रहा था तो क्‍या मध्‍यप्रदेश में आज से दस साल पहले बिजली नाम की चीज नहीं होती थी । आज गांवों में 24 घंटे बिजली मिल रही है. किसान का आज खेती में डीजल के जनरेटर का पैसा खर्च नहीं हो रहा है. आज जिस-जिस विषय पर मैंने बोला उन विषयों को मैं अपने नजरिये से देख रहा हूं. सिंहस्थ मेले के लिये बात करूं तो पहली बार किसी मुख्यमंत्री जी ने सोचा कि उन्हें अपनी संस्कृति, पुराने संस्कारों और क्यों हमारे शास्त्रों ने सिंहस्थ का प्रावधान किया ? उस पर गोष्ठियों का प्रावधान किया इसके पहले कभी इन पहलुओं पर चर्चा नहीं होती थी? आज पूरी दुनिया के सभी अलग अलग धर्मगुरू आयेंगे वह अलग अलग विषयों पर, पुरानी हमारी परम्परा क्या थी, प्रकृति के नियम क्या थे, प्रकृति के नियम क्या अंधा दौड़ सिर्फ वेस्टर्न की तरफ भागने से क्या उसके परिणाम हुए, उसके बारे में बात करेंगे ? पहली बार इन सब बातों की चर्चाएं शुरू हुईं. मैं अगर बीओटी मार्ग के लिये थोड़ा सा प्रावधान और किया है इन्होंने, विकास के लिये 69.22 करोड़ का, क्या उसमें सूखे, चिकित्सा महाविद्यालय के लिये ढाई करोड़ रूपये का प्रावधान किया, उसकी स्वीकृति में भी तकलीफ आ रही थी, उसकी पूर्ति नहीं हो रही थी. राष्ट्रीय राज-मार्गों के लिये 100 करोड़ रूपये का प्रावधान किया. स्कूल शिक्षा विभाग में अध्यापक संवर्ग के जो अतिरिक्त पेमेन्ट है, उसके लिये 378 करोड़ की पेमेन्ट का प्रावधान किया. लोक शिक्षण में माध्यमिक शिक्षा के लिये 267 करोड़ रूपये का प्रावधान किया है. यह सब चीजें कहीं न कहीं जन-हितैषी एवं समाज के आखिरी छोर के व्यक्ति के लिये प्रावधान किया है. हमने कोई ऐसा प्रावधान ऐसा नहीं किया किसी बड़े एक्सपेंडीचर के लिये कहीं ऐसी कोई चीज के लिये जो किसी के आराम के लिये, किसी बड़ी इंडस्ट्रीज के लिये प्रावधान कर रहे हैं, या उसको अनुदान दे रहे हैं. हमने जहां तक मैं समझता हूं कि पूरे बजट का आखिरी तबके के विकास के लिये प्रावधान किया है. आखिरी तबके के लिये कैसे ज्यादा से ज्यादा इस सूखे के समय राहत पहुंचाई जाए एवं ग्रामीण के लिये, ग्रामीण विकास के लिये, गांव की सड़क के लिये, इन सबके लिये जो प्रावधान किये हैं, इसके लिये मैं माननीय वित्तमंत्री जी जिन्होंने माननीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में अनुपूरक बजट बनाया है, उसके लिये मैं उनको बधाई देता हूं तथा मैं अपनी तरफ से समर्थन करते हुए अपनी वाणी को विराम देता हूं.

          डॉ.गोविन्द सिंह(लहार)—माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय वित्तमंत्री जी के द्वारा अनुपूरक बजट की एक-दो बिन्दुओं को छोड़कर बाकी अनुपूरक बजट का विरोध करता हूं. विरोध इसलिये कर रहा हूं कि जब से मध्यप्रदेश की सरकार बनी है तब से लगातार आप प्रदेश को कर्ज में डिबो रहे हैं. आज रिजर्व बैंक की रिपोर्ट है उन्होंने आपको निर्देशित किया है कि तथा चेतावनी दी है कि आप 1 लाख 61 हजार का कर्ज ले चुके हैं. कम से कम आप बाजार से कर्ज वेतन बांटने के लिये 4 हजार करोड़ तथा 6 हजार करोड़ पिछले पांच-छः महीने से ले रहे हैं, आखिर आप लोग कितना कर्जा लेंगे ? क्या आप पूरे मध्यप्रदेश को कर्जे में डिबोने का इरादा है क्या और फिर अगर कर्ज ले रहे हैं तो विकास दिखना चाहिये ? विकास हो, तथा विकास के नाम पर आज भ्रष्टाचार के कारण आज मध्यप्रदेश की जनता का विकास तो डूब रहा है और आपके पार्टी के लोग, सत्ता में बैठे हुए लोग दलाल लोग मस्त हो रहे हैं. कोरड़ो रूपयों से माला-माल हो रहे हैं, जिनके पास में टूटी सायकिलें नहीं थीं आज उनके पास में एक-एक-डेढ़-डेढ़ करोड़ रूपये की ऑडी में घूम रहे हैं. मैं आपसे कहना चाहता हूं कि आपने कई ग्लोबल मीट्स कीं, आपने इन्दौर में मीट्स कीं उसके ऑन-लाईन प्रस्ताव मांगे 22 हजार के करीबन प्रस्ताव आये थे उनमें से केवल 98 प्रस्तावों पर आपने एमओयू किया है, कुछ एमओयू कर रहे हैं, कुछ की अभी शुरूआत नहीं हुई है? विदेशी दौरों पर पिछले बारह वर्षों में ग्लोबल मीट्स के चक्कर में आपने करीब सौ करोड़ रुपये से अधिक फूंक दिये. अकेले मुख्यमंत्री जी ने इसी वर्ष सात करोड़ सत्तासी लाख रुपये विदेशी यात्राओं में निवेश लाने के लिये खर्च कर दिये लेकिन मैं आपसे पूछना  चाहता हूं कि कितना निवेश आया ? हम आपसे इतना कहना चाहते हैं कि जितनी भी आपने विदेशी निवेश के बारे में घोषणाएं कीं और उसमें करोड़ों रुपये फूंक डाले. आप निवेश पर श्वेतपत्र और मध्यप्रदेश  की आर्थिक स्थिति पर श्वेतपत्र जारी करें. यह हमारा आपसे अनुरोध है. आप करोड़ों रुपये ब्याज में दे रहे हैं इसी अनूपूरक बजट में करीब 345 करोड़  रुपये ऋण और ब्याज के लिये प्रावधान किया है. इसके पहले आपने लगातार दो अनुपूरक और मुख्य बजट में आप कर्जा चुकाने और ब्याज में करोड़ों रुपये दे रहे हो. हमारा आपसे कहना है जो पैसा आप ले रहे हो तो बेफिजूली खर्च आप बंद करो. मंत्रियों के खर्चे  पिछले तीन-चार वर्षों में आप देखिये. हमारे विधान सभा प्रश्न में भी यह है कि एक-एक मंत्री ने 60-60 लाख साज-सज्जा पर खर्च कर दिये. गाड़ियां खरीद रहे हैं. एम्बेसेडर गाड़ी थी अब आप 25-25 लाख की टाटा सफारी खरीद रहे हो. ज्यादा शौक है तो घर से मेहनत करके हल-बख्खर चलाओ कमाओ  और फिर गाड़ी खरीदो हवाई जहाज खरीदो सब खरीदो. सरकारी जनता के धन पर क्यों ऐश आराम कर रहे हो. आप मुंबई में एडवर्ड विला खरीदने के लिये, शानो-शौकत दिखाने के लिये आपने  ढाई करोड़ रुपये का बजट रख दिया. किदवई नगर में दो फ्लैट खरीद रहे हो इसकी क्या जरूरत है. मध्यप्रदेश भवन भी आप तोड़ रहे हो दोबारा बनाने का विचार कर रहे हो. आखिर उधार लेकर घी क्यों पी रहे हो. बंद करो. आपकी आर्थिक स्थिति खराब है तो गांव में कहावत है जितना बड़ा चद्दर हो उतना पैर पसारो.

अध्यक्ष महोदय – कृपया समाप्त करें.

          डॉ.गोविन्द सिंह – अध्यक्ष महोदय, अभी शुरुआत नहीं हुई समाप्त कर दो.

          अध्यक्ष महोदय -  चार मिनट हो गये.

          डॉ.गोविन्द सिंह – फिर काहे के लिये आप सदन चलवा रहे हो.

          अध्यक्ष महोदय  – अट्ठाईस मिनट हैं आपके दल के.

          डॉ.गोविन्द सिंह – केवल चार मिनट हो गये.

          अध्यक्ष महोदय -   अभी चार मिनट बोल चुके हो. पांच-पांच मिनट से ज्यादा कैसे समय देंगे.

          डॉ.गोविन्द सिंह – बोलेंगे नहीं तो जो मेन मुद्दे हैं तो इनको चेतावनी तो दे दें. मध्यप्रदेश का हित आप चाहते हैं कि नहीं. सभी चाहते हैं तो कम से कम समय तो मिलें. अब जल्दी जल्दी हम अपनी बात कहेंगे.

          अध्यक्ष महोदय -  17 नाम आ गये आपके दल से. कुल 26 मिनट हैं.

          डॉ.गोविन्द सिंह – कुछ लोग चले गये हैं.

          अध्यक्ष महोदय -  बैठे हैं उन्हीं के नाम आये हैं.

          श्री जितू पटवारी – माननीय अध्यक्ष महोदय, समय बढ़ा दें. रात तक बैठेंगे. मेहनत करेंगे मध्यप्रदेश के विकास के लिये.

          डॉ.गोविन्द सिंह – अब ज्यादा नहीं मेन मुद्दों पर बात कर लें.

          श्री के.के.श्रीवास्तव -  25 लाख की कौन सी गाड़ी आ रही है. असत्य का बखान कररहे हैं. 8 एकड़ की जमीन का मालिक होने के बाद आज क्या हैसियत है खुद अपनी देखें.

          श्री लाखन सिंह यादव -  माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी से अनुरोध है कि इनको समझाएं इनको कोई तकलीफ है.

          डॉ.गोविन्द सिंह –  दो-तीन बातें अपने क्षेत्र की कर लें. सबसे ज्यादा बजट 16.6 प्रतिशत आपने ग्रामीण विकास के लिये, सड़क और अरबन डेव्लहपमेंट के लिये 3 प्रतिशत बजट इस बार के अनुपूरक में रखा है. माननीय वित्त मंत्री जी आप जरा जांच करा लें. पिछले वर्ष जो ई कक्ष बनवाए हैं करीब 2100 करोड़ रुपये की लागत से. उनमें से कितने ई कक्ष चल रहे हैं. कई जगह बिजली नहीं है और साढ़े छह लाख रुपये के बनवाए हैं जबकि वह वास्तव में एक-सवा लाख रुपये के बनकर तैयार हुए हैं. चुनाव के पहले तेरहवें वित्त आयोग का जो पैसा मिला था उसमें 100 करोड़ के आसपास राशि का दुरुपयोग हुआ है. उसकी भी आप जांच करा लें. आपने सड़कों के लिये बहुत पैसा रखा है. दतिया पर बड़ी मेहरबानी है आपकी. दतिया और लहार में कितना फर्क है. सभी काम दतिया में. आखिर इनसे क्या डर है. दतिया में मेडिकल कालेज,दतिया में वेटेनरी कालेज, दतिया में हवाई अड्डा, दतिया में फोर लेन,  दतिया में अस्‍पताल, दतिया में एक कलेक्‍ट्रट बना हुआ है उसके बाद भी आप दूसरा बना रहे हैं. दिगमा में आदिवासी मद से सड़क बना रहे हैं ,वहां क्‍या काम है, यहां मैं सबके सामने नहीं बता पाऊंगा. वहां से 3-4 किलोमीटर में हमारा क्षेत्र लगा हुआ है. आपका वहां क्‍या लगाव है, पहले वाले वित्‍त मंत्री को तो बड़ा मोटा चश्‍मा लगा हुआ था, वह चश्‍में में नहीं देख पाते होंगे. आपको लहार भी नक्‍शे में नहीं दिख रहा है. अगर नहीं दिख रहा है तो हम आपको नक्‍शा लाकर दिखा देंगे.  मैं आपसे सिर्फ यह कहना चाहता हूं कि वहां पर भी एक-दो सड़क का प्रावधान बजट में करवा देते. आप तो सहृय और खुशमिजाज हो फिर हमारे क्षेत्र से क्‍या नाराजगी है या सिर्फ दतिया पर ही सारी मेहरबानी चल रही है. इसके बाद आखरी बात कहना चाहता हूं कि अध्‍यापकों का आंदोलन चल रहा है और आपने 1990 में वादा किया था कि हम उनको पूर्णकालिक शिक्षक बनायेंगे, शिक्षा कर्मियों को पूर्णकालिक शिक्षा कर्मी बनायेंगे, पंचायत सचिवों को पूर्णकालिक बनायेंगे जिनकी मध्‍यप्रदेश में करीब 200 के आसपास संख्‍या है. उनके लिये कोई कहने वाला नहीं है, उन पर भी आप मेहरबानी करें. इसमें तो नहीं लेकिन आगामी बजट में इसका प्रावधान करने का कष्‍ट करें. लेकिन आखिर में एक बात कह रहा हूं कि लोकायुक्‍त के लिये गाड़ी का पैसा नहीं दें. लोकायुक्‍त तो भ्रष्‍टाचार का अड्डा बन गया है. आज तक लोकायुक्‍त ने जो प्रायमरी केस सिद्ध होते हैं उसके बाद भी क्लिनचिट मिल गयी. इसके साथ ही मैं अपनी बात समाप्‍त करता हूं, धन्‍यवाद.      

          श्री शैलेन्‍द्र जैन (सागर):-माननीय अध्‍यक्ष महोदय,मैं अनुपूरक बजट के समर्थन में बात करने के लिये खड़ा हुआ हूं. जैसा की सर्वविदित है कि यह वर्ष हमारे किसान भाईयों के लिये, हमारे अन्‍नदाता के लिये बड़ा ही कठनाई का वर्ष रहा है. इसके पूर्व के भी दो तीन वर्ष भी किसान भाईयों के लिये बड़े कठिनाई के दौर से गुजर रहे थे. इस वर्ष भी हमें सूखे की मार से गुजरना पड़ रहा है. एक बहुत बड़ी राशि मध्‍यप्रदेश शासन के खजाने से किसान भाईयों के लिये खर्च करनी पड़ी. इस सबके बावजूद भी विकास का पहिया मध्‍यम नहीं होने पाया है. बल्कि तेज गति से चल रहा है. हमारे माननीय मुकेश जी कह रहे थे कि प्रथम राज्‍य है जहां पर इतने अनुपूरक लाये जा रहे हैं. मध्‍यप्रदेश प्रथम राज्‍य है भी जहां पर किसान भाईयों के लिये इतनी बड़ी राहत राशि मध्‍यप्रदेश में दी जा रही है, उतनी राशि देश के इतिहास में आज तक किसी राज्‍य में नहीं दी गयी है. गिनिज बुक में निश्‍चित रूप से दी जाने चाहिये. जितना बजट इनके कार्यकाल में होता था उतनी राशि का तो हमारी अनुपूरक बजट हो रहा है.

          अध्‍यक्ष महोदय, लगभग 525 करोड़ रूपये की राशि के लिये यह अनुपूरक राशि के लिये बजट आया है. इसके लिये माननीय मुख्‍यमंत्री जी और वित्‍तमंत्री जी को साधुवाद इन लाईनों के  साथ देना चाहता हूं कि वह कुशल वित्‍तीय प्रबंधन के साथ वह काम कर रहे हैं- कहते हैं कि वह पथ भी क्‍या जिस पथ पर शूल न हों, नाविक की धैर्यकुशलता क्‍या, जब तक धारा प्रतिकूल न हो- इन प्रतिकूल परिस्थियों में भी जिस प्रतिकूल परिस्थियों के बाद भी आपने काम किया है, वह काबिले तारीफ क्‍या.

          अध्‍यक्ष जी मैं शहरी क्षेत्र का रहने वाला हूं , वहीं का प्रतिनिधित्‍व कर रहा हूं. माननीयवित्‍त मंत्री जी ने नगरीय क्षेत्र में विशेष रूप से ‘हाऊसिंग फार आल’ जो हमारे गरीब और जो हमारे मजदूर हैं, उनके आवास के लिये जिस तरह की राशि का यहां पर प्रावधान किया है, उसके लिये बहुत बधाई और धन्‍यवाद देना चाहता हूं. अध्‍यक्ष महोदय, इस समय मध्‍यप्रदेश के सागर में हाऊसिंग के क्षेत्र में काम हो रहा है, वह काबिले तारीफ है. हम पूरे मध्‍यप्रदेश में एक नंबर पर हैं. हम राजीव हाऊसिंग योजना में एक नंबर पर हैं और Housing for all में हमें लगभग 95 करोड़ रुपये की योजना पहली किस्त में स्वीकृत हुई है. मैं माननीय वित्त मंत्री महोदय का धन्यवाद करना चाहता हूँ. सड़कें किसी भी राज्य की किसी भी देश की लाइफ-लाइन होती हैं और इनके लिये तमाम कठिन परिस्थितियों के बावजूद भी लगभग 200 करोड़ रुपये BOT के अन्तर्गत 100 करोड़ रुपये राष्ट्रीय राजमार्गों में उन्होंने खर्च किये हैं. हमारी एक बहुत पुरानी मांग है, BOT  NOT में सिलवानी सलामतपुर वाली सड़क बनाई गई थी वह सड़क बीच में जाकर खत्म हो गई उसके आगे सड़क ही नहीं है अब उस सड़क पर कोई आवागमन नहीं हो रहा है जितना भी पैसा उसमें खर्च हुआ है उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है. मैं निवेदन करना चाहता हूँ कि तिली-पथरिया-मोतीनगर वाली सड़क जो लगभग 12 किलोमीटर की है उसका 36 करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार होकर शासन के अन्तर्गत विचाराधीन है इस दिशा में वह काम करेंगे तो अच्छा होगा.

          अध्यक्ष महोदय, चिकित्सा के क्षेत्र में नये मेडिकल कॉलेज खोलने के लिये सरकार ने प्रतितबद्धता दिखाई है. अनुपूरक बजट में शहडोल व खंडवा के लिये राशि दी है मैं उनको इसके लिये धन्यवाद देना चाहता हूँ लेकिन सागर के मेडिकल कॉलेज के बारे में ध्यान आकर्षित कराना चाहता हूँ कि सागर का मेडिकल कॉलेज मान्यता के अभाव में कठिनाई के दौर से गुजर रहा है उसमें कुछ आवश्यकतायें हैं खासतौर से रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट में सीटी स्केन की आवश्यकता है वह इन-हाउस होना चाहिये कैम्पस के अंदर होना चाहिये. इस संबंध में माननीय मंत्रीजी सहयोग करेंगे तो बहुत अच्छा होगा.

          अध्यक्ष महोदय, Atomic Energy Regulatory Board है वहां पर हमारा रजिस्ट्रेशन पेंडिंग पड़ा हुआ है उस दिशा में शासन स्तर पर कार्यवाही होगी तो बहुत अच्छा होगा.

          अध्यक्ष महोदय, वकीलों की सुविधाओं के  लिये लगभग ढाई करोड़ रुपये का प्रावधान माननीय वित्त मंत्रीजी ने किया है. मैं वित्तमंत्री महोदय का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ कि मुख्यमंत्रीजी की घोषणा थी कि विधि वेत्ताओं के लिये एक अलग से पूर्ण हॉल बनाया जाना है जिसकी लागत करीब 1 करोड़ रुपये है उसकी भी स्वीकृति अगर वे दे देंगे तो सागर के लिये बहुत अच्छा होगा.

          अध्यक्ष महोदय, वन विभाग, चूंकि सारे देश में वन संपदा सबसे ज्यादा हमारे पास है इसलिये हमारी जिम्मेदारी भी ज्यादा है माननीय वित्त मंत्रीजी ने इस दिशा में काफी कुछ राशि वन विभाग को इस अनुपूरक बजट में भी दी है. सागर का जो नौरादेही अभ्यारण्य है वह देश का सबसे बड़ा अभ्यारण्य है देश के सबसे पड़े अभ्यारण्य के लिये आपने हजारों करोड़ रुपये री-लोकेशन के लिये खर्च कर दिये हैं. 400 स्क्वायर किलोमीटर का हमारे पास क्षेत्र है जिसको वाइल्ड लाइफ रिजर्व सेंटर ने चीताओं के विस्थापन के लिये सबसे उपयुक्त माना है इस दिशा में  शासन स्तर पर कार्यवाही हो जायेगी तो बहुत अच्छा हो जायेगा.

          अध्यक्ष महोदय, जेल विभाग की बात कहकर मैं अपनी बात समाप्त करूंगा सागर में केन्द्रीय जेल के बारे में कहना चाहता हूँ.

          अध्यक्ष महोदय—अब आप अपनी बात समाप्त करें.

          श्री शैलेन्द्र जैन—एक शेर कहकर मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ. इन तमाम कठिनाइयों के बावजूद भी बहुत कुशलता के साथ उन्होंने काम किया है चुनौती बहुत हैं लेकिन हम उन चुनौतियों का सामना करेंगे.

          मंजिल मिल ही जायेगी मुश्किल ही सही

        गुमराह तो वो हैं जो घर से निकले ही नहीं.

 

          आपने मुझे अपनी बात रखने का अवसर दिया उसके लिये बहुत-बहुत धन्यवाद.

श्री सुन्दरलाल तिवारी(गुढ़)--  माननीय अध्यक्ष महोदय, सप्लीमेंट्री बजट में जो देखने को मिला है और माननीय वित्त मंत्री जी यहाँ हैं, ऐसा लगता है कि आप बिल्कुल बॉर्डर में खड़े हैं, बस पलटने ही वाले हैं अब. फायनेंस कमीशन जो लोन लेने के लिए अंतिम सीमा जो आपको देता है. वहाँ पर आप खड़े हैं मेरा ख्याल घंटी आ भी गई होगी, केन्द्र सरकार के द्वारा अलार्मिंग हुई होगी कि अब इससे ज्यादा आप लोन मत लीजिए. रिजर्व बैंक की भी और फायनेंस कमीशन की भी अलार्मिंग हुई होगी. हिन्दुस्तान में एकाध ही कोई राज्य ऐसा होगा जो ऐसी स्थिति में खड़े होंगे जहाँ हमारा मध्यप्रदेश खड़ा है. जो फायनेंस कमीशन की जो सीमा है, वह लगभग जी एस डी पी की तीन परसेंट होती है. वह हम तीन पर पहुँच गए थे 2014-15 में, 2015-16 में वह है 2.99 परसेंट,  अब इससे ज्यादा आप लोन लेने की स्थिति में नहीं हैं. अब इससे अधिक आप कर्ज में इस प्रदेश को डुबा नहीं सकते, अंतिम में पहुँचा दिया इसलिए वित्त मंत्री जी आप समझदार हैं और मेरा कोई ज्यादा वास्ता तो नहीं लेकिन लगता है कि कुछ जानते हैं, योग्य हैं आप, तो मेरा यह कहना है कि इस स्थिति में अगर हमारी मध्यप्रदेश की सरकार सुधार करे तो इस प्रदेश का ज्यादा बेहतर कल्याण हो सकेगा और ज्यादा बेहतर विकास हो सकेगा. आज तो हम रोटी में घी लगाकर खा लिए और कल सूखी रोटी भी नहीं मिलेगी, यह स्थिति आने वाली है, इस राज्य की. आगे मेरा कहना यह है कि कितना पैसा खर्च हो चुका है, जो आपने मेन बजट प्रस्तुत किया....

          इंजी. प्रदीप लारिया--  एक रुपया किलो गेहूँ, एक रुपया किलो चाँवल, एक रुपया किलो नमक मध्यप्रदेश की साढ़े पाँच करोड़ जनता को दे रहे हैं. आप चिन्ता न करो...(व्यवधान)..

          एक माननीय सदस्य--  अध्यक्ष महोदय, इनसे कह दो हमारे मुख्यमंत्री जी को तीन-तीन कृषि अवार्ड मिले..(व्यवधान)..

          श्री सुन्दरलाल तिवारी--  अध्यक्ष महोदय, इसका जवाब हम कल देंगे आप जरूर रहिएगा ध्यानाकर्षण के समय. मैंने एक ध्यानाकर्षण दिया है संभवतः वह कल स्वीकार हो जाएगा कि वह एक रुपया वाला गेहूँ कहाँ जाता है. कल हमारी आपकी 12 बजे के लगभग भेंट होगी और अध्यक्ष महोदय, वह जरूर मंजूर करिएगा, हमारा निवेदन है.

          अध्यक्ष महोदय--  आप तो विषय पर बोलिए.

          श्री सुन्दरलाल तिवारी--  आप हमारे खिलाफ इनडिसीप्लीन की एक्शन लेने की कई बार बात करते हैं.

          अध्यक्ष महोदय--  आप विषय पर आ जाएँ.

          श्री सुन्दरलाल तिवारी--  विषय पर ही आ रहे हैं. अध्यक्ष महोदय,(XXX)

          अध्यक्ष महोदय--  यह कार्यवाही से निकाल दीजिए. ऐसा कोई नहीं कहता.

          श्री सुन्दरलाल तिवारी--  मेरा यह कहना है कि मैं गलत कब बोलता हूँ?..(व्यवधान)..हाँ भटक रहे हैं अब आ जाते हैं लाइन में उसको बाद में बोलेंगे, तो अध्यक्ष महोदय, मेरा यह कहना है, यह पैसा जो मेन बजट के समय आपने एस्टीमेटेड किया और विभिन्न विभागों को आपने भेजा, वह पैसा कितना खर्च हुआ, कितना नहीं खर्च हुआ, यह सदन को अभी तक नहीं बताया गया. न इसमें हमें कोई जानकारी  है, आपने पैसा मांगा इसकी जानकारी दी है. लेकिन किन विभागों द्वारा कितना पैसा खर्च कर दिया गया, इसकी जानकारी नहीं है और जो सप्लीमेंट्री बजट यह दिसंबर के अंत में आया है तो इसका सीधा अर्थ है कि जनवरी, फरवरी और मार्च ये अंतिम महीने लूट के आ गए हैं अब जल्दी-जल्दी चैक काटो, मार्च आ गया, मार्च आ गया. हर विभागों में वित्तमंत्री जी यही होता है. अगर यही सप्लीमेंट्री थोड़ा और पहले आप ले आते तो ज्यादा अच्छा था. उसके ज्यादा अच्छे परिणाम राज्य में आते.

          अध्यक्ष महोदय--  कृपया समाप्त करें.

          श्री सुंदरलाल तिवारी--  तो यह जो आपका एस्टीमेशन है , सरकार का एस्टीमेशन कह लें या माननीय मंत्री जी का एस्टीमेशन कह लें यह गलत समय में आता है और  यहाँ हमारी सरकार फेल है. आपको और पहले अंदाज कर लेना चाहिए था कि इन-इन विभागों में हमको इतना पैसा चाहिए जिससे खर्च करने के लिए भी पर्याप्त समय आपको मिल जाता .

          अध्यक्ष महोदय—कृपया समाप्त करें आपको पांच मिनिट से ज्यादा हो गये हैं.

          श्री सुंदरलाल तिवारी--- अब एक सवाल और खड़ा होता है यह सरकार कैसी चल रही है इसका एक दृश्य हम आपको बता रहे हैं. आज माननीय मंत्री जी एक जवाब दे रहे थे ,हमारे माननीय सदस्य सचिव यादव जी एक रोड के लिए बोल रहे थे और जद्दोजहद के बीच आप यह नहीं कह सके कि आपकी वह रोड बन जाएगी.

          अध्यक्ष महोदय--  कृपया समाप्त करें.

          श्री सुंदरलाल तिवारी--  अभी बहुत मामले हैं, मैं दो मिनिट और लूंगा .अध्यक्ष महोदय, मैं अंतिम बात कहना चाहता हूं कि हम इस पक्ष से शिकायत करते हैं या उस पक्ष के भी मेरे मित्र इस तरह के प्रश्न लगाते हैं कि भई हमारी रोड खराब है, मंत्री जी जवाब दे देते हैं कि रोड अच्छी बनी है . यह एक व्यवस्था में सुधार किया जाये. इस तरह की शिकायतों में मंत्री जी वहाँ से सी.डी. मंगवाये. सी.डी आए उसमें देखे कि रोड खराब है या नहीं.

          अध्यक्ष महोदय--  ठीक है अब समाप्त करें. दिलीप सिंह शेखावत अपना भाषण शुरु करें.

          श्री सुंदरलाल तिवारी---  अध्यक्ष महोदय, मेरा एक निवेदन है कि इसी में समय जाया होता है कि वह कहते हैं कि रोड अच्छी है, मैं कहता हूं कि रोड खराब है. वह कहते हैं कि पेड़ लगे हैं , हम कहते हैं कि पेड़ नहीं लगे हैं तो मेरा कहना है कि इसमें थोड़ा सा सुधार हो इससे यह जो पैसा जा रहा है ,इस पैसे का खर्च उसके अनुसार हो.

          अध्यक्ष महोदय--  तिवारी जी , आपकी बात आ गई है. आप दूसरों को बोलने देंगे या नहीं.

          श्री सुंदरलाल तिवारी--- बोलने देंगे लेकिन हमारा भी अधिकार है. मेरा कहना है कि यह सप्लीमेंट्री बजट लूटपाट के लिए आया है इसलिए इसको हम लोग स्वीकार नहीं करते हैं.

          श्री दिलीप सिंह शेखावत(नागदा-खाचरौद)--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं अनुपूरक बजट के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं . मैं आपसे निवेदन करुंगा कि तिवारी जी की कुर्सी जरूर चेक करवाये क्योंकि हम जैसे जो नये विधायक हैं बोलने के लिए खड़े हुए हैं लेकिन वह शायद संतुष्ट  ही नहीं हो पा रहे हैं कि वह बैठेंगे तो नीचे से स्प्रिंग चुभेगी या पता नहीं क्या हो जाएगा.

          श्री सुंदरलाल तिवारी--- अभी आपको मालूम नहीं है मुख्यमंत्री जी ने सब जांच हमारी करवा ली है .

          श्री दिलीप सिंह शेखावत--  वह तो मुझे पता नहीं है कि क्या क्या जांच सरकार ने करा ली है. लेकिन मैं इतना जानता हूं कि यदि आप 11-12 वर्ष पूर्व आप देखेंगे तो पता लगेगा कि बिजली की क्या हालत थी,सड़कों की क्या हालत थी, सिंचाई का रकबा क्या था. तब आपको समझ में आएगा कि यह कर्ज कैसे बढ़ा है . अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे यह भी निवेदन करना चाहूंगा कि  जब 2004 में 23 हजार करोड़ का कर्जा था , उसके पहले जब माननीय दिग्विजय सिंह जी ने सत्ता संभाली थी उस वक्त कर्जा कितना था और फिर कर्जा कैसे बढ़ा. मैं यह मानता हूं कि कर्जा जरूर बढ़ा है लेकिन विकास भी हुआ है आज  9 लाख से बढ़कर 26 लाख तक सिंचाई का रकबा बढ़ा है और कृषि के क्षेत्र में हमें पुरस्कार मिला है. प्रसन्नता और अधिक तब होती है जब कांग्रेस की सरकार केन्द्र में होते हुए भी मध्यप्रदेश को पुरस्कार मिलता है. आज अगर गांवों में 23 घन्टे बिजली मिल रही है.(कांग्रेस पक्ष के कई माननीय सदस्यों के खड़े होने पर)..(व्यवधान)... अरे, मिल रही है, तुम्हारे क्षेत्र में नहीं मिल रही होगी. लेकिन मेरे क्षेत्र में आकर देख लेना मेरे क्षेत्र में 24 घंटे बिजली मिल रही है.

          श्री सचिव यादव--- नहीं मिल रही है रोज ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं....(व्यवधान)....

          अध्यक्ष महोदय--- जब आपका समय आए तब आप बोलिये.

            श्री लाखन सिंह यादव—ट्रांसफार्मर बदले नहीं जा रहे हैं, ये कह रहे हैं कि 24 घंटे बिजली मिल रही है,यह  असत्य जानकारी है. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय—जब आपका समय आये तब आप बोलिये,बीच में व्यवधान क्यों कर रहे हैं.

श्री दिलीप सिंह शेखावत—मैं कांग्रेस के मित्रों से बहुत विनम्रता से निवेदन करुंगा और इस सदन के अन्दर चुनौती भी देता हूँ कि अगर आपके क्षेत्र में 24 घंटे बिजली नहीं आ रही है तो मुझे ले चलना. उदाहरण के तौर पर एकाध गांव में हो सकती है लेकिन 24 घंटे बिजली मिलती है,यह सदन के अन्दर प्रसन्नता के साथ में कह रहा हूँ. आपके जमाने में बिजली नहीं मिलती थी तो छात्र आत्महत्याएँ करते थे, आपके जमाने में किसान आत्महत्या करता था और इसलिए करता था कि उसको बिजली नहीं मिलती थी.(व्यवधान) आजादी के 67 साल के अऩ्दर मध्यप्रदेश देश के अन्दर पहला प्रांत है जहां 8500 करोड़ रुपये का मुआवजा मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री मान्यवर शिवराजसिंह चौहान किसानों के आंसू पौंछने के लिए  दे रहा है इसलिए मैं माननीय जयंत मलैया जी को धन्यवाद देना चाहूंगा...(व्यवधान)

श्री के.के.श्रीवास्तव—(xxx) (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय—श्री शेखावत कृपया अपनी बात जारी रखें. (व्यवधान)  बैठ जाएं कृपया. कोई धमकी नहीं दे रहा है, बैठें कृपया.

श्री जितू पटवारी—अध्यक्ष जी,मेरा नाम लेकर के उन्होंने कहा.

अध्यक्ष महोदय-- यह कार्यवाही में नहीं आयेगा जो नाम लेकर उन्होंने कहा.

श्री लाखनसिंह यादव—माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा आपसे विनम्रतापूर्वक अनुरोध है कि (XXX). चाह क्या रहे हैं.

          अध्यक्ष महोदय- श्री शेखावत अपनी बात जारी रखें.

 

          श्री जितू पटवारी—अध्यक्ष जी, मेरा नाम लिया,मुझे बोलना चाहिए.

          अध्यक्ष महोदय—वह विलोपित हो गया.यह वाद-विवाद नहीं है,अब उऩ्होंने नाम ले लिया फिर आप बोलेंगे.यह बात ठीक है कि नाम नहीं लेना चाहिए किन्तु विलोपित कर दिया है. वाद विवाद यहां नहीं होगा, नहीं तो कोई चर्चा नहीं हो पायेगी. श्री शेखावत अपनी बात जारी रखें.

          श्री जितू पटवारी- अध्यक्ष जी, मुझे बोलने की अनुमति दें, नहीं तो मेरे साथ अन्याय होगा.

          अध्यक्ष महोदय—फिर आपकी बात का कब वे उत्तर देंगे फिर उनको भी आधा मिनट देना पड़ेगा. कृपया सहयोग करें. वह कार्यवाही से निकाल दिया है.

          श्री बाला बच्चन—अध्यक्ष महोदय, जितू पटवारी जी का नाम लिया गया है इसलिए उऩ्होंने एक मिनट में सुन लें आप.इसके बाद उनको टाइम दे दीजिए.

          अध्यक्ष महोदय—पहले इनको बोल लेने दीजिए.

          श्री दिलीप सिंह शेखावत--  माननीय अध्यक्ष महोदय, 20-20 बड़ी योजनाएँ अगर स्वीकृत होकर पूर्ण हुई हैं, यह हमारे लिए गर्व की बात है. 1600 योजनाएँ अगर पूर्ण हुई हैं तो यह हमारी दूरदृष्टा का परिचय है कि बगैर जल के कुछ नहीं होता है और इसलिए हमने जहां किसानों और मजदूरों को संवारा है. खेल के क्षेत्र में जहां मध्यप्रदेश का नाम  नहीं आता था लेकिन आज अगर हाकी के क्षेत्र में हमारे नौजवान कहीं पर जाते हैं और मध्यप्रदेश का नाम होता है तो यह हमारे लिए गर्व की बात है और अगर पंच परमेश्वर जैसी योजना बनाकर के अगर गांव की गंदगी के साम्राज्य को अगर किसी ने समाप्त किया है तो भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने और मध्यप्रदेश के शिवराज सिंह जी ने किया है और इसलिए कहने के लिए बहुत कुछ है. इन 11-12 वर्षों में मध्यप्रदेश की तस्वीर और तकदीर दोनों बदली है भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने. कमियां हो सकती हैं, हम कमियों को पूरा करेंगे, इस जनता ने भारतीय जनता पार्टी को यह सौभाग्य दिया है और एक बार नहीं, तीन तीन बार दिया है और सिंहस्थ भी करने का अगर सौभाग्य किसी को मिला है तो हमेशा भारतीय जनता पार्टी को मिला है और इसलिए  मैं बहुत बहुत धन्यवाद देते हुए वित्त मंत्री जी को और माननीय मुख्यमंत्री जी को कहना चाहता हूँ लेकिन एक निवेदन मैं वित्त मंत्री जी से बहुत विनम्रता के साथ में जरुर करना चाहूंगा, क्योकि नागदा एक प्रसिद्ध औद्योगिक क्षेत्र है और . ग्रेसिम उद्योग चंबल में पानी की कमी के कारण लगभग 50 दिन बंद होता है और 50 करोड़ का शासन को नुकसान होता है. बागेड़ी नदी पर जो 5 डैम मैंने प्रस्‍तावित किए हैं अगर उन्‍हें आप बनवाएंगे तो निश्‍चित रूप से वह इंडस्‍ट्री भी चलेगी और किसानों की सिंचाई का रकबा भी बढ़ेगा. माननीय वित्‍त मंत्री जी, मैं आपसे एक निवेदन और भी करना चाहूंगा कि जो मूल बजट है उसके अंदर तीन-चार जो मुख्‍य सड़कें हैं बड़े गांव वाली, जो बेलोला से सीधे नामली बेरछा होते हुए बनवाड़ा जाती है उन्‍हें भी शामिल करें और एक निवेदन और आपसे करूंगा कि खाचरोद हमारी बहुत पुरानी तहसील है, लगभग 200 ट्रक मटरफली के वहां से जाते हैं. अगर फूड प्रोसेसिंग प्‍लांट भविष्‍य में वहां लगे तो निश्‍चित रूप से किसानों को फायदा होगा. मैं आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद देते हुए अपनी वाणी को विराम दूंगा. जय हिंद.

          अध्‍यक्ष महोदय – एक मिनट में समाप्‍त करें, विवादास्‍पद बात नहीं बोलेंगे, कोई वाद-विवाद नहीं होगा.

          श्री जितू पटवारी (राऊ) – अध्‍यक्ष महोदय, सबसे पहले तो सम्‍माननीय सदस्‍य बार-बार ऐसा कर रहे हैं. पिछले 2 सालों में जब से सत्र चालू हुआ तब से यह बात सामने आ रही है कि जिस तरीके से उनका व्‍यवहार होता है मुझ पर व्‍यक्‍तिगत रूप से बात करते हैं. माननीय सदस्‍य हर बार मेरा नाम लेते हैं. उन्‍होंने दो बार मेरा नाम लिया और अलग-अलग तरीके से उन्‍होंने कहा कि बाहर आओ, उनको मेरे व्‍यवहार में कोई बुराई दिखती होगी या कोई बात ऐसी मैंने उनको कही होगी कि जिससे उनका व्‍यवहार बनता है. अव्‍वल तो मैंने उन्‍हें आज तक दुर्भावना से कोई बात नहीं कही फिर भी उनके मन में ऐसी शंका हो कि मैंने कुछ कहा हो, उनको देखकर मैं हंसता हूँ, मुस्‍कुराता हूँ, प्रसन्‍न होता हूँ तो मेरा ख्‍याल है यह बुरा नहीं है और रही बात इसकी कि वे बार-बार खड़े होते हैं हम सब परिवार के ही लोग हैं. मैं आपसे यह भी नहीं कहता हूँ कि बाहर देख लूंगा, ऐसा कर दूंगा, मैं यह भी नहीं कहता हूँ मैं बहुत सज्‍जन हूँ आप मुझे मार सकते हो. (हंसी)

          अध्‍यक्ष महोदय – ठीक है, आपकी बात आ गई है.

          श्री जितू पटवारी – मेरी और भी बाते हैं बाकी चीजें मनोज पटेल से आप पूरी जानकारी लेंगे तो मेरी पूरी विनम्रता और सज्‍जनता का पता चलेगा.

          अध्‍यक्ष महोदय – सभी माननीय सदस्‍यों से अनुरोध है कि कृपया निजी नाम लेकर कोई आक्षेप न लगाएं. आप बैठ जाएं आपकी बात हो गई है.

          श्री जितू पटवारी – अध्‍यक्ष जी, उन्‍होंने मेरा नाम लिया है, मैं आपसे अनुमति लेकर ही बोलता हूँ.

          अध्‍यक्ष महोदय – भाषण नहीं चलेगा, आपकी बात आ गई. श्री सुखेन्‍द्र सिंह  अपनी बात कहें.

          श्री के.के. श्रीवास्‍तव (टीकमगढ़) – माननीय अध्‍यक्ष जी, जब मैं बोलने के लिए खड़ा होता हूँ यह हाथ उठा कर के बैठने का इशारा करते हैं तो मैं इनको कहता हूँ, यही केवल दिक्‍कत है. (हंसी) अब पता नहीं ये किस बात की मुझसे खुन्‍नस लिए बैठे हैं, जितू भाई, मैं ऐसा बिल्‍कुल नहीं हूँ जैसा आप मुझे सोचते हो.

 

 

 

          अध्‍यक्ष महोदय – मेरा सभी माननीय सदस्‍यों से अनुरोध है कि सिर्फ अपने क्षेत्र की यदि कोई समस्‍या हो तो बता दें, पहले पूरा भाषण सब पढ़ देते हैं उसके बाद आखरी में जब मैं कहता हूँ कि समाप्‍त करें तो क्षेत्र की बात बताते हैं तो कृपा करके तथ्‍य की बात रख दें यदि कोई महत्‍वपूर्ण बात हो तो और जल्‍दी-जल्‍दी समाप्‍त करें.

 

 

 

          श्री सुखेन्‍द्र सिंह (मऊगंज) – माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं क्षेत्र की ही बात करूंगा. इस अनुपूरक बजट पर मुझे बोलने का अवसर मिला इसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद. अभी सत्‍ता पक्ष और विपक्ष के सभी सीनियर लीडर बोल रहे थे, बहुत सारी बातें हुईं. अभी हमारे तिवारी जी ने कहा, सचिन यादव जी ने एक रोड की बात कही उस समय मुख्‍यमंत्री जी भी स्‍वयं यहां पर बैठे हुए थे लेकिन उसको स्‍वीकार नहीं किया. हम एक और छोटी बात बताना चाहते हैं कि मुख्‍यमंत्री स्‍वेच्‍छा अनुदान राशि जो हर विधायक को मिलनी चाहिए क्‍योंकि हर क्षेत्र में कोई न कोई घटना घटती रहती है लेकिन बड़े दुर्भाग्‍य के साथ यह कहना पड़ रहा है कि जहां भारतीय जनता पार्टी के विधायक होते हैं सिर्फ वहीं काम हो रहा है, हम लोग भी पेपर में पढ़ते हैं. हम लोग भी विधायक हैं एक भी केस आज तक हम लोगों के क्षेत्रों में नहीं हुआ. इस पर यह भी बात उठती होगी कि हम लोगों ने इस बात की लिखा-पढ़ी की कि नहीं, आवेदन-पत्र आदि दिए कि नहीं, लेकिन दावे के साथ कहता हूँ कि कई आवेदन भिजवाए गए लेकिन दस हजार रुपये भी मुख्‍यमंत्री स्‍वेच्‍छा अनुदान राशि नहीं मिली तो आप रोड की जो लड़ाई लड़ रहे हो यह सब झूठी है जब एक स्‍वेच्‍छा अनुदान नहीं मिल सकती यह बात आज इस सदन के माध्‍यम से मैं आपको बताना चाहता हूँ.

 

 

और वहां के डॉक्टर कहते हैं कि यहां पर इनकी मृत्यु नहीं हुई थी, हमने सतना रिफर कर दिया था. मेरा प्रश्न भी लगा हुआ था, उसमें जवाब आया है . एक तरफ तो डॉक्टर जीतेन्द्र सिंह जी कह रहे हैं कि यहां इसकी मृत्यु नहीं हुई,हमने सतना रिफर कर दिया था. दूसरी तरफ ये जवाब दे रहे हैं कि हमने पोस्टमार्टम के लिए कहा था लेकिन इन्होंने पोस्टमार्टम नहीं कराया. यह स्वास्थ्य विभाग की स्थिति है. अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मैं अनुरोध करना चाहती हूं  कि 1956 से पृथक मध्यप्रदेश राज्य होने के बाद से हमारे यहां कोई भी महाविद्यालय या ,स्वास्थ्य विभाग के विश्व विद्यालय नहीं हैं. हमारे मध्यप्रदेश के अनुसूचित जाति,जनजाति, पिछड़ा वर्ग के बच्चे दूसरे राज्यों में पढ़ने जाते हैं, पी.जी. करने जाते हैं. मध्यप्रदेश के किसी कोने में, किसी भी जिले में कोई भी महाविद्यालय नहीं है. चाहे वह किडनी स्पेशलिस्ट का हो, चाहे हार्ट का हो.

          अध्यक्ष महोदय—कृपया समाप्त करें.

          श्रीमती ऊषा चौधरी—अध्यक्ष महोदय, पूरे सदन में आप टीका-टिप्पणी सुनते रहे ,हम यथार्थ की बात कर रहे हैं, समाज के हित की बात कर रहे हैं तो आप समय नहीं दे रहे हैं. अध्यक्ष महोदय, दूसरी बात यह है कि इन  बच्चों को दूसरे राज्यों में पढ़ने के लिए जाना पड़ता है. क्योंकि यहां पर उनके  पढ़ने की व्यवस्था नहीं हो पाती है और आर्थिक आभाव के कारण वे काम्पीटीशन में  नहीं आ पाते हैं. तीसरी बात यह है कि, एस.सी.,एस.टी. और पिछड़े वर्ग के  बच्चे हैं, माननीय प्रधान मंत्री जी ने भी इस बात को कहा है कि जो लिखित परीक्षा होती है ,प्रथम और द्वितीय परीक्षा होती है ,फिर जो उनकी मौखिक परीक्षा होती है इन मौखिक परीक्षाओं में काफी अनियमितता होती है और एस.सी. एस.टी. और पिछड़े वर्ग के बच्चे मौखिक परीक्षा तक नहीं पहुंच पाते हैं. इनको किसी न किसी तरीके से फेल कर दिया जाता है.  यह परीक्षा 250 से 300 नंबर तक की होती है. ये  बच्चे काम्पीटीशन में लिखित में तो पास हो जाते हैं लेकिन मौखिक परीक्षा तक नहीं जा पाते, इस परीक्षा को समाप्त किया जाना चाहिए. 

 माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे सतना जिले में ,मेरे रैगांव विधान सभा में 27 नलजल योजनाएं स्वीकृत हैं. लेकिन उनमें से एक भी नलजल योजना आज तक संचालित नहीं हो पायी है. अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से कहना चाहती हूं कि एक साल के अंदर केवल मेरे रैगांव विधानसभा क्षेत्र में  3 नलकूप खुदे हैं. अब इन तीन नलकूप से  एक लाख साठ हजार की जनसंख्या कैसे पानी पी सकती  है? हम यह अनुरोध करना चाहते हैं कि हम मंत्री जी से एक भी हैण्डपम्प या नलकूप नहीं चाहते हैं उसके बदले आप हमारी विधायक निधि बढ़ा दें तो  हम पूरे क्षेत्र में नलकूप देकर पूरे क्षेत्र की जनता को पीने के पानी की व्यवस्था कर देंगे.  अध्यक्ष महोदय, एक बात और कहना चाहते हैं, आदिम जाति कल्याण विभाग जो है यह एस.सी. एस.टी.और पिछड़े वर्ग का है इसके लिए आप बजट पास करते हैं लेकिन पता नहीं तमाम बजट कहां चला जाता है. हमारे यहां चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को 6  माह हो गये हैं और उनको वेतन नहीं मिला है. इस विभाग को भी थोड़ा ठीक किया जाय.  आपने मुझे बोलने का मौका दिया इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद.

डॉ.मोहन यादव( उज्जैन दक्षिण )—अध्यक्ष महोदय, मैं अनुपूरक बजट के समर्थन में अपनी बात प्रारंभ करता हूं.  सर्व प्रथम तो माननीय मुख्यमंत्री जी और वित्त मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं. लगातार जबसे हम चुन  कर आए हैं ,मुझे लगता है कि कोई भी अनुपूरक बजट ऐसा नहीं रहा जिसमें उज्जैन सिंहस्थ के लिए पैसा नहीं रखा हो. इस बजट के माध्यम से भी लगभग 300 करोड़ रूपये का उसमें प्रावधान किया गया है. सच मानिये उज्जैन के लिए जो यह राशि रखी जा रही है , मैं अपनी सभी मित्रों को उज्जैन के लिए आमंत्रित करना चाहता हूं , तीन महीने बाद जब उज्जैन की आबादी से 100 गुना ज्यादा लगभग 6 करोड़ से ज्यादा की संख्या में जब श्रद्धालु वहां आएँगे और वो स्नान करेंगे तो हम सबको भी गौरव और गर्व होगा कि वाकई में यह वहीं मध्यप्रदेश का एक नगर है ,जिसके लिए वर्तमान में जो राशि दी जारी है उसकी व्यवस्था की जा रही है.अध्यक्ष महोदय, सच में अद्भूत काम हुआ है. लगभग 14 पुल दो साल से भी कम समय में बनकर तैयार होने की स्थिति में है. एक बायपास जो पूरे शहर को पार कराते हुए पूरे मेले में इतनी बड़ी आबादी में सहजता से, सुगमता पूर्वक आवागमन की व्यवस्था बनायेगा. पवित्र क्षिप्रा नदी जो खान के कारण से आजादी के समय से खराब हो गई थी, उस पूरी क्षिप्रा नदी के लिए खान डायवर्सन योजना जो लगभग 80 करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार होने की स्थिति में है. अतिशीघ्र उसका लाभ मिलेगा. जिसके कारण क्षिप्रा नदी के 8 किलोमीटर चौड़े पाट में जहां चाहें, स्नान कर सकते हैं.

          अध्यक्ष महोदय, हमारे अपने शहर के मूलभूत सुविधा के जो काम हैं. शहर के अंदर के सारे मार्ग जो ज्यादा जरुरी है. उन मार्गों का चौड़ीकरण, फोर लेन और आवश्यकता पड़ी तो नवीनीकरण, उन्नयन किया जा रहा है. प्रत्येक गली-मोहल्ले,चौराहे का सौंदर्यीकरण कराया जा रहा है. इतना ही नहीं 450 बिस्तरों का एक नवीन अस्पताल भी बनकर तैयार हो गया है. जो लंबे समय तक उज्जैन की चिकित्सा सुविधा  के लिए उपलब्ध रहेगा.

          अध्यक्ष महोदय, उज्जैन की जितनी शिक्षण संस्थाएं हैं, उनकी जो मूलभूत आवश्यकताएं हैं, सिंहस्थ के मद्देनजर उनमें भी यात्री ठहराये जायेंगे. उसमें भी प्रत्येक क्षेत्र में काम किया है. भगवान कृष्ण, आदिशक्ति दुर्गा और महाकालेश्वर तीनों के कारण उज्जैन का मान-सम्मान दुनिया भर में है. कृष्णायन, दुर्गायन और शिवायन के माध्यम से संस्कृति मंत्रालय ने तीनों पीठ की स्थापना करवायी है.

          अध्यक्ष महोदय, उज्जैन में महाराजा विक्रमादित्य का नाम था लेकिन विक्रमादित्य का सिंहासन और उनके नवरत्नों की प्रतिमाएं और चौंसठ पुतलियों की जानकारी नहीं थी. अब भविष्य में आप उज्जैन जायेंगे तो महाकालेश्वर के ठीक पीछे, जैसे राजा भोज की प्रतिमा भोपाल में हमको आते-जाते बड़ा तालाब पर दिखाई देती है, उसी तरह की लगभग 2 हजार साल बाद विक्रमादित्य की जानकारी आप अपनी आंखों से देख सकेंगे.

          अध्यक्ष महोदय, इस बजट के माध्यम से जो उदारता दिखाई जा रही है. उसकी मैं सराहना करता हूं. मैं सौभाग्यशाली हूं कि सिंहस्थ के माध्यम से जो पैसा लग रहा है, उसका बड़ा हिस्सा मेरी अपनी विधानसभा क्षेत्र में लग रहा है. मेरी विधानसभा क्षेत्र में लगभग 32 पंचायतें हैं. हमारे पास जो खर्च हो रहा है वह सिंहस्थ के अलावा भी हो रहा है. मैं माननीय गोपाल भार्गव जी को धन्यवाद देना चाहूंगा. उन्होंने स्मार्ट विलेज़ की एक नई कल्पना की है. उसके माध्यम से न केवल शहर में, बल्कि आसपास की पंचायत के प्रत्येक गांव की पूरी सड़कों को सीमेंट-कांक्रीट से बनाना, आने जाने का मार्ग सुविधाजनक बनाना और जिन जन सुविधाओं की आवश्यकता होती है, उनको भी जोड़ा है.

          अध्यक्ष महोदय, मैं, प्रत्येक विभाग के मंत्रियों को धन्यवाद देना चाहूंगा. कोई ऐसा विभाग नहीं है जिसने सिंहस्थ को सामने रखकर अपनी योजना न बनायी हो. जिस प्रकार की योजना बनी है. अब उज्जैन ही नहीं, सिंहस्थ के कार्यक्रम को बढ़ाते हुए, पिछले साल से ही कार्यक्रम प्रारंभ हुए हैं. चाहे इंदौर हो,भोपाल हो और आने वाले समय में जबलपुर में भी अलग अलग विषयों पर अलग अलग विद्वानों को जोड़ते हुए सिंहस्थ से संबंधित वैचारिक कार्यक्रम करा कर जो गरिमा प्रदान की है, वह वास्तव में काबिले तारीफ है. मैं इसके लिए माननीय मुख्यमंत्रीजी और संस्कृति मंत्रीजी को बधाई देता हूं और उनकी सराहना करता हूं.

          अध्यक्ष महोदय, कन्वेंशन सेन्टर की बात करें. सप्त सागर के विकास की बात करें. शहर में जो आने वाले हमारे अतिथि हैं, उनके साथ साथ, हमको मालूम है कि शहर में जो लोग आ रहे हैं, वह काहे के लिए आ रहे हैं. अब लगभग ढ़ाई हजार लोग एक साथ भस्मारती के दर्शन कर सकते हैं. चौरासी महादेव मंदिर सहित 119 मंदिरों के उन्नयन का काम कर रहे हैं. अध्यक्ष महोदय, जिस प्रकार से कार्य किये गये हैं, यह  सिंहस्थ हम या आप रहेंगे तब तक नहीं बल्कि युगो-युगो तक रहने वाला है.

          अध्यक्ष महोदय, मैं, आपका भी धन्यवाद ज्ञापित करता हूं. सिंहस्थ क्या होता है. कुम्भ का क्या महत्व है.

          अध्यक्ष महोदय—बाद में बताईयेगा.

          डॉ मोहन यादव—हमने जो कार्यक्रम रखा है, उसके माध्यम से दिखाना चाहूंगा. आप सब एक बार देखें. आप उज्जैन बार बार आयें यह निमंत्रण देते हुए माननीय मुख्यमंत्रीजी को, आपको इस बजट के माध्यम से धन्यवाद देता हूं. धन्यवाद.

श्री दिनेश राय (सिवनी)--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से माननीय वित्‍त मंत्री जी द्वारा अनुपूरक बजट की जो मांगें रखी हैं, उसका मैं समर्थन करता हूं. साथ ही मैं सिवनी विधानसभा की कुछ समस्‍यायें हैं, जिन पर आपके माध्‍यम से मंत्री जी का ध्‍यान आकर्षित कराना चाहता हूं. माननीय मंत्री जी सिवनी जिला प्रापर सिवनी विधानसभा को अति संवेदनशील घोषित किया गया है. लेकिन वह कागजों में दिखता है. छिंदवाड़ा और बालाघाट में बटालियन की व्‍यवस्‍था की गई, सिवनी में नहीं की गई. जब कोई घटना घटती है या उपद्रव होते हैं तो उपद्रवी क्‍या पूछते हैं, पुलिस कब तक आयेगी, तो वहां अधिकारी बोलते हैं दो घंटा लगेगा, दो घंटे इतमिनान से वहां पर कदर किया जाता है. मेरा निवेदन है कि आप हमारे लिये विशेष बल की व्‍यवस्‍था वहां जरूर करायें, वहां 2-3 जगह शहर में पुलिस चौकी बनना है, डेढ़ लाख आबादी है, डूंडा सिवनी है, भैरोगंज है और दल सागर के पास है. मेरा आग्रह है कि विशेष बल की व्‍यवस्‍था वहां पर कराने की कृपा करें.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लघु बांध की कुछ योजनायें हैं, मैंने मंत्री जी के सामने पूर्व में भी रखा था, उनकी स्‍वीकृति प्रदान करें. साथ में सिवनी शहर में उद्योग कार्यालय से जिला पंचायत बीजाबाड़ा, लूघड़वाड़ा से जिला पंचायत बीजाबाड़ा और वेनगंगा कालोनी के गेट से जिला पंचायत के बीच की पीडब्‍ल्‍यूडी की रोड हैं, बहुत क्षतिग्रस्‍त हो गईं हैं, इसमें भी राशि प्रदान करने की कृपा करें. शहर में जब बारिस होती है तो पूरा पानी रोड में आ जाता है तो वहां सीवर लाइन का प्रस्‍ताव पहुंचाया गया है, उसमें भी राशि मिले, ऐसा मेरा आपसे आग्रह है. हमारे विधानसभा में साढ़े 300 गांव भी आते हैं उसमें स्‍कूल हैं, आंगनबाड़ी केन्‍द्र हैं, सोसायटी हैं, लगभग-लगभग 10 प्रतिशत क्षेत्रों में ही बाउंड्रीवाल है. उन बच्‍चों के स्‍कूलों के लिये, आंगनबाडि़यों के लिये मैं निवेदन करता हूं कि बाउंड्रीवाल की व्‍यवस्‍था माननीय मंत्री जी इसमें जोड़ें. हमारे यहां पी.पी.पी. मोड के मेडीकल कालेज की स्‍वीकृति पूर्व में दी गई थी, किंतु उसके लिये जमीन भी उपलब्‍ध हो गई है, टेण्‍डर भी डल गये हैं, पता नहीं क्‍यों जिंदल हास्पिटल ग्रुप के द्वारा लगभग वह हो गया है, उसकी हमें स्‍वीकृति मिल जाये, यह पिछली केबिनेट में आया लेकिन सिवनी जिले का नाम नहीं आया. सिवनी मेडीकल हास्पिटल में सीटी स्‍केन मशीन आवश्‍यक है. कृषि महाविद्यालय खोलने के लिये भी मेरा माननीय मंत्री जी से आग्रह है. नल-जल योजना की बात मैं करता हूं, उस दिन भी की, स्रोतों की कमी है. आप जब तक भीमगढ़ बांध से नल जल योजना सामूहिक नहीं करेंगे तब तक उन क्षेत्रों में पानी नहीं आयेगा, वहां 206 गांव हैं. अत: मेरा आग्रह है उस नल जल योजना को आप इस बजट में रखें और स्‍वीकृति प्रदान करें. लघु उद्योग कुछ नहीं हैं, उसके लिये भी मैं आपसे निवेदन करूंगा. मुआवजे की जो बात आ रही है...

          अध्‍यक्ष महोदय--  कृपया समाप्‍त करें.

          श्री दिनेश राय—मेरा  6‍ मिनट था.

          अध्‍यक्ष महोदय--  आपके दो मिनट हैं केवल, लेकिन आप विषय से बाहर नहीं जा रहे हैं इसलिये ठीक है, लेकिन फिर भी जल्‍दी-जल्‍दी कर दें.

          श्री दिनेश राय--  आप सबको 40-50 प्रतिशत बढ़ा रहे थे तो मैंने सोचा 6 मिनट हो जायेगा मेरा. माननीय अध्‍यक्ष महोदय थोड़ा समय दें, अगर कहेंगे तो मैं पूरा कागज दे दूंगा.

          अध्‍यक्ष महोदय--  एक मिनट में कर दें.

          श्री दिनेश राय--  कोशिश कर रहा हूं. मुआवजा के लिये मैं निवेदन करता हूं. हमारे यहां मुगवानीकला हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल और जैतपुर में भी हाईस्‍कूल के लिये निवेदन है. मेरी विधानसभा में अभी तक दो सालों से किसी भी स्‍कूल का उन्‍नयन नहीं हुआ, जिनमें 12 हैं उनमें कहें तो समय न लेते हुये मैं लिस्‍ट दे दूंगा और आंगनबाड़ी केन्‍द्र प्राय: पंचायत स्‍तर पर हैं, ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं हैं. प्रधानमंत्री सड़क की बात करता हूं, आपने राशि दी है, मैं मानता हूं, लेकिन ऐसे ठेकेदारों ने काम ले लिया है, दो साल से उनके ठेके निरस्‍त करते हैं, पता नहीं भोपाल में कौन बैठे हैं, उनको पुन: ठेका दे देते हैं. दो-दो साल से ठेकेदारों ने कोई काम नहीं किया है. एक ठेकेदार ने 16 रोड ले लिये हैं, ग्‍वालियर का कोई ठेकेदार है, पता नहीं किसकी मेहरबानी है. लेकिन वह शहर में और ग्रामीण क्षेत्र में काम बिलकुल नहीं कर रहा है. इसके लिये मेरा आग्रह है कि उन्‍हें समय से पूर्ण करा लें.

छिंदवाड़ा से जब हमारे शहर सिवनी में ग्रामीण क्षेत्र से लोग आते हैं तो छिंदवाड़ा के बॉर्डर की रोडें अच्‍छी हैं, लेकिन सिवनी में आने के बाद वह रोडें खत्‍म हो जाती हैं. मेरा आग्रह है कि मेरे जिले के अंदर की जो भी रोडें अपूर्ण हैं, उनको पूर्ण करें और माननीय अध्‍यक्ष महोदय आपने समय दिया इसके लिये धन्‍यवाद और माननीय मंत्री जी ध्‍यान देंगे, उसके लिये भी धन्‍यवाद.

          अध्‍यक्ष महोदय--  श्री जयवर्द्धन सिंह.  

          श्री जयवर्द्धन सिंह (राघौगढ़)--    माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस बार जो अनुपूरक बजट में अधिकतर आवंटन हुआ है उसमें पंचायती राज और नगरीय प्रशासन के लिये राशि अधिकतर मिली है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विशेषकर ग्रामीण विकास में पिछले डेढ़ साल में जो भी निर्माण कार्य प्रधानमंत्री सड़क योजना का और मुख्‍यमंत्री सड़क योजना का जो भी होता था, वह बिलकुल बंद पड़ा है. पिछले डेढ़ साल में कोई भी राशि इसके लिये आवंटित नहीं की गई है. पिछले साल यह खबर आई थी कि बीआरजीएस योजना पूरी तरह से बंद हो रही है, उसके बाद में यह खबर मिली कि अब शायद 14वें वित्त आयोग से ग्रामीण कार्यों के लिये राशि का आवंटन किया जायेगा मगर अभी तक ऐसी कोई राशि प्रदेश सरकार को आवंटित नहीं हुई है. हमें इस बात का इंतजार है कि जो भी राशि 14वें वित्त आयोग के अंतर्गत आयेगी उसका उपयोग कैसे होगा क्योंकि पुरानी स्कीम अंतर्गत चल रहे बहुत से निर्माण कार्य और सड़कों,पुल पुलियों का कार्य अभी अधूरा पड़ा हुआ है. कब तक वह राशि आयेगी और कब तक काम पूरा होगा   वित्त मंत्री जी बताने का कष्ट करेंगे.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय वित्त मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि मैंने पूरे बजट को देखा है और जो राशि स्वास्थ्य विभाग के लिये आई है टोटल ग्रास स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट है उससे 1प्रतिशत से भी कम राशि आवंटित हुई है. जबकि  अंतरराष्ट्रीय  स्टेण्डर्ड हैं उसमें इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि स्वास्थ्य चिकित्सा से संबंधित जो राशि आनी चाहिये वह कम से कम 5 प्रतिशत होना चाहिये. कम आवंटन के कारण ही पूरे प्रदेश में फर्जी दवायें- एक्सपायरी डेट की दवायें मिल रही हैं जिसके कारण बडवानी की घटना जैसे हालत प्रदेश में देखने को मिल रहे हैं (विपक्ष की तरफ से शैम शैम की आवाजे).

माननीय अध्यक्ष महोदय, पिछले दिनों विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र आयोजित किया गया था , उसमें सूखे की स्थिति से निपटने के लिये चिंता की गई थी, किसानों को राहत पहुंचाने हेतु बजट राशि ली गई थी. सूखाग्रस्त क्षेत्र जहां जहां पर भी सोयाबीन की फसल नष्ट हुई थी उस पर माननीय मुख्यमंत्री जी ने बहुत अधिक राशि का आवंटन पीड़ितों को मुआवजे के लिये किया है. किंतु अभी तक जो भी सूची सूखा पीडितों की कलेक्टर्स के द्वारा भोपाल में भेजी गई है मुआवजे के लिये, उस पर अभी कोई निर्णय नहीं किया गया है, किसानों को मुआवजा अभी तक नहीं मिला है. मुआवजे के लिये पटवारी द्वारा सर्वे करना आवश्यक है लेकिन यहां पर पटवारियों द्वारा कोई सर्वे नहीं किया गया है तो मेरी चिंता यह है कि सूखा पीड़ितों को सरकार के द्वारा जो मुआवजा दिया जाना है वह किस आधार पर दिया जायेगा. प्रति गांव में मुआवजा राशि का आवंटन कैसे होगा. वित्त मंत्री जी उसके बारे में भी अपने जबाव में बतायें.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, जो इस प्रदेश का भविष्य है, जो इस प्रदेश की सम्पत्ति है, वो है इस प्रदेश का युवा, इस प्रदेश का मानव संसाधन. उसकी हालत आज क्या है. पटवारी हड़ताल पर थे, शिक्षाकर्मी परेशान हैं, अध्यापक वर्ग वेतनवृद्धि की निरंतर सरकार से मांग कर रहे हैं. पिछले कुछ वर्षों में सरकार के द्वारा प्राध्यापकों के पदों को भरा नहीं जा रहा है,  सभी अतिथि प्राध्यापक के रूप में काम कर रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग की स्थिति भी ऐसी ही है . स्वास्थ्य विभाग में भी लेब टेक्नीशन के पद पीएचसी सेन्टरों के खाली पड़े हैं , वहां पर भी लेब टेक्नीशियन  की नियुक्ति होनी चाहिये , एक तरफ हजारों की संख्या में पद रिक्त हैं वहीं दूसरी और लाखों की संख्या में प्रदेश के शिक्षित बेरोजगार लड़के घूम रहे हैं. कई शिक्षित बेरोजगार ऐसे हैं जिन्होंने लेब टेक्निशियन का कोर्स किया हुआ है मगर परेशानी यह है कि जो प्लेसमेंट होती है वह भोपाल से होती है जबकि इसकी प्लेसमेंट जिला स्तर पर होना चाहिये. तो सरकार को इस प्रकार की व्यवस्था करना चाहिये. 

          माननीय अध्यक्ष महोदय, इस वर्ष किसानों को जो भी नुकसान सोयाबीन की फसल में हुआ है उसके लिये शासन सूखा पीड़ितों के लिये आने वाले समय में क्या वैकल्पिक व्यवस्था कर रहा है  उसको बताना चाहिये. मुख्यमंत्री कृषि महोत्सव प्रदेश में मनता है उसमें माननीय मुख्यमंत्री जी के ट्रक हर गांव में जाते हैं और प्रचार-प्रसार  करते हैं मगर किसानों को प्रशिक्षण देने और भविष्य में खेती की तरक्की के लिये किसानों को क्या क्या करना चाहिये, यह बात किसानों को नहीं बताई जाती है तो सरकार को किसानों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी करना चाहिये.

माननीय अध्यक्ष महोदय मेरा आपके माध्यम से माननीय वित्त मंत्री जी से यह भी अनुरोध है कि शासन आने वाले समय में डेयरी पर ज्यादा ध्यान दे. महाराष्ट्र में डेयरी के माध्यम से किसानों को बहुत लाभ मिला है . आज स्थिति ऐसी है कि गुना जिला जिसमें कि मेरी विधानसभा भी आती है उसमें एकमात्र सांची डेयरी का चीलिंग प्लान्ट है वह भी बंद पड़ा हुआ है. यदि प्रदेश की सरकार को किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारना है, उनकी दशा को सुधारना है , उनको आर्थिक लाभ देना है तो सरकार को डेयरी उद्योग पर ध्यान देना चाहिये. मैं माननीय वित्त मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूं कि किसानों के भविष्य को देखते हुये अगले वर्ष के बजट में शासन कम से कम हर सब डिवीजन में एक चीलिंग प्लान्ट खोलने का काम करें इससे किसानों को बहुत लाभ होगा.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे विधानसभा क्षेत्र में शकर कारखाना भी है. सभी सदस्यों को जानकारी है कि शकर के रेट इस वर्ष न्यूनतम भाव पर आ गये हैं, तो मध्यप्रदेश की सरकार को इसके लिये सबसीडी की व्यवस्था करना चाहिये ताकि शुगर फेक्टी आगे भी चालू रहने की स्थिति में रह सकें. अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे अपनी बात रखने का यहां पर अवसर प्रदान किया उसके लिये मैं आपका बहुत बहुत आभारी हूं, बहुत बहुत धन्यवाद.

श्रीमती ममता मीना (चाचौड़ा) – अध्यक्ष महोदय,  मैं तृतीय अनुपूरक  मांगों के समर्थन में  बोलने के लिये खड़ी हुई हूं.  मैं सबसे पहले  मुख्यमंत्री जी  और वित्त मंत्री जी को  बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहती हूं कि  आपने सभी विभागों के लिये जो बजट का प्रावधान रखा है, वह हर विभाग के माध्यम से   अंतिम छोर और अंतिम पंक्ति   पर खड़े व्यक्ति तक  विकास पहुंचेगा.  जहां तक बात विद्युत की करें,  जैसे कि कुछ सदस्यों की ओर से यह  बात आई है कि  बिजली 24 घण्टे नहीं मिल रही है, जबकि  यह बात उनके समझ में नहीं आ पा रही है कि  24 घण्टे बिजली  कहां मिल रही है.  क्योंकि  खेती के लिये 24 घण्टे  बिजली  देने की  मुख्यमंत्री जी  ने  घोषणा नहीं की है.  अपने घरों के लिये  मुख्यमंत्री जी ने 24 घण्टे  बिजली मिले, उसके लिये  प्रावधान रखा है.  खेती के लिये  10 घण्टे बिजली मिले,  इसके लिये प्रावधान रखा है.  मुख्यमंत्री जी ने अभी विशेष सत्र बुलाकर  और उस विशेष सत्र के पहले ही मुख्यमंत्री जी ने  एक आदेश निकाल दिया  कि हमारे किसानों  की फसलें बर्बाद हो गईं, ओलावृष्टि के कारण से या सूखा के कारण से,  इसलिये तत्काल उन्होंने  कि भाई 50  प्रतिशत एवं 25 प्रतिशत भी राशि जमा नहीं कराना, मात्र  10 प्रतिशत में  हमारे किसा&