मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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 चतुर्दश विधान सभा                                                                        त्रयोदश सत्र

 

 

फरवरी-मई, 2017 सत्र

 

शुक्रवार, दिनांक 10 मार्च, 2017

 

( 19 फाल्‍गुनशक संवत्‌ 1938 )

 

 [खण्ड-  13  ]                                                                                         [अंक- 13 ]

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मध्यप्रदेश विधान सभा

शुक्रवारदिनांक 10 मार्च, 2017

( 19 फाल्‍गुनशक संवत्‌ 1938 )

विधान सभा पूर्वाह्न 11.02 बजे समवेत हुई.

{ अध्यक्ष महोदय (डॉ. सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर

 

            प्रश्न संख्या 1       (अनुपस्थित)

           आनंद विभाग अंतर्गत संपादित कार्य

[आनन्द]

2. ( *क्र. 5030 ) कुँवर सौरभ सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रदेश में माह अगस्‍त 2016 से आनंद विभाग का गठन किया गया है? (ख) यदि हाँ, तो आनंद विभाग के अंतर्गत कितना-कितना बजट किस जिले को आवंटित किया गया है? जिलेवार बताएं। क्‍या आनंद उत्‍सव, आनन्‍दम, आनन्‍द सभा हेतु पृथक-पृथक बजट आवंटित किया गया है?                      (ग) प्रश्नांश (ख) अनुसार कटनी जिले में प्रत्‍येक आनंद उत्‍सव के आयोजन हेतु पंचायत विभाग द्वारा राशि रूपये पन्‍द्रह हजार तक व्‍यय करने हेतु संचालनालय से जनपद पंचायतों को राशि उपलब्‍ध कराई गई है? यदि हाँ, तो कटनी जिले की कौन-कौन सी जनपद पंचायत को कितनी-कितनी राशि कब-कब उपलब्‍ध कराई गई है? (घ) क्‍या विभाग द्वारा कटनी जिले को निर्धारित 136 लक्ष्‍यानुसार कौन-कौन सी ग्राम पंचायत में कब-कब आनन्‍द उत्‍सव, आनन्‍दम, आनन्‍द सभा का आयोजन किया गया?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। दिनांक 6 अगस्‍त, 2016 को आनंद विभाग का गठन किया गया। (ख) आनंद विभाग द्वारा जिलेवार बजट आवंटित नहीं किया गया है। अत: प्रश्‍नांश लागू नहीं। जी नहीं। (ग) जी हाँ। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत पंचायत राज संचालनालय द्वारा कटनी जिले की 6 जनपद पंचायतों को पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 अनुसार राशि उपलब्‍ध कराई गई है। (घ) कटनी जिले में निर्धारित 136 पंचायत समूहों में केवल आनंद उत्‍सव का आयोजन किया गया। आनंद उत्‍सव के आयोजन की ग्राम पंचायतवार, दिनांकवार जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-2 अनुसार है।

            कुँवर सौरभ सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न आनन्द विभाग से संबंधित था  इसमें परिशिष्ट उपलब्ध हुए हैं. धन्यवाद. मेरा सीधा प्रश्न मंत्री जी से है क्या शिशु मृत्यु दर में मध्यप्रदेश पहले नंबर पर है, किसान आत्महत्या में देश में तीसरे स्थान पर है, बलात्कार में पहले स्थान पर है, कुपोषण के मामले में पहले नंबर है ? लगभग 230 विधायकों में से 196 विधायकों ने प्रश्न लगाये हैं. लगभग सात हजार की संख्या में प्रश्न लगे हैं. मतलब  क्षेत्र की समस्याएं बहुत हैं. क्या इन्हीं कारणों से इस विभाग की आवश्यकता प्रदेश को महसूस हो रही है? आनन्द विभाग का सृजन इसीलिये किया गया है कि इतनी अन्यान्य समस्याएं, हैं क्या इसीलिये यह विभाग बनाया गया है ?

            अध्यक्ष महोदय-- इनका प्रश्न वेग है, बिल्कुल क्लियर नहीं है पर मंत्री जी आप समझ सकें तो इसका उत्तर दीजिये.

          कुँवर सौरभ सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, वेग इसीलिये है कि विभाग देख नहीं सकते टटोलकर, छूकर महसूस कर रहे हैं कि कैसा विभाग होगा इसीलिये प्रश्न जरा वेग है ?

            राज्यमंत्री सामान्य प्रशासन (श्री लालसिंह आर्य)--माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रश्न भी साफ है इसका उत्तर भी साफ दिया गया है. आनन्द विभाग की तरफ से जो कार्यक्रम हुए हैं. आपने जो प्रश्न पूछा है उसके सारे उत्तर परिशिष्ट में दे दिये हैं. 14 जनवरी से 21 जनवरी के बीच में पूरे मध्यप्रदेश में यह कार्यक्रम हुए हैं इसका परिणाम भी उत्साहवर्द्धक आये हैं. पंचायत स्तर पर तीन-तीन चार-चार पंचायतों का समूह बनाकर यह कार्यक्रम किये हैं. पहली बार सांस्कृतिक कार्यक्रमों में खेलकूद गतिविधियों में यह कार्यक्रम पूरे मध्यप्रदेश में सम्पन्न हुए हैं. पंचायत विभाग के अंतर्गत जो कार्यक्रम हुए हैं उसकी राशि कहीं न कहीं 15 हजार रूपये एक पंचायत के हिसाब से रखी है, राशि व्यय की है.                                                     

            कुंवर सौरभ सिंह-- अध्यक्ष महोदय, मेरा वही प्रश्न था. यह कह रहे हैं कि 14 जनवरी से इनके कार्यक्रम चालू हुए हैं जबकि 18 से 20 जनवरी तक प्रतिभा पर्व था और उसके लिए अधिकतर स्कूलों के स्थलों का चयन हुआ. शिक्षकों और शिक्षा अधिकारियों ने इसमें भाग लिया. एक साथ एक जगह दो खर्च करने की क्या आवश्यकता थी?

            दूसरा, श्री बाला बच्चन जी के प्रश्न 3621 में बताया कि 2 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान था और 11 करोड़ रुपये पंचायत ने दिया. श्री मोती कश्यप जी के प्रश्न क्र 925 के भाग-ग में कहा गया कि जरुरतमंदों को मदद की जाएगी. श्रीमती चन्द्रा जी के प्रश्न क्र. 1074 में आपने कहा कि जन प्रतिनिधियों को इसमें इन्वाल्व किया जाएगा. अध्यक्ष महोदय मेरा कहना है कि इसका उद्देश्य कहीं भी जनता से नहीं है. किसान परेशान है, बोनस राशि कम कर रहे हैं. बहुत सी समस्याएं हैं. सिर्फ आनन्द विभाग को बनाकर बजट एलोकेट करके इवेन्ट मैनेजमेंट का काम किया जा रहा है जो जनता के द्वारा पसीने की कमाई पर दिए गए टैक्स से सरकार दुरुपयोग कर रही है.

          अध्यक्ष महोदय-- आपका प्रश्न क्या है?

            कुंवर सौरभ सिंह-- मेरा यह कहना है कि इस विभाग का औचित्य इस तरह से नहीं है. जो प्रतिभा पर्व है उसी दिन आप दुबारा दूसरा खेल कर रहे हैं. बिना कारण से लोगों का ध्यान भटकाने, विषयान्तर करने के लिए करना चाह रहे हैं.

          अध्यक्ष महोदय-- यह तो आपका ओपीनियन है.

          श्री लाल सिंह आर्य-- अध्यक्ष महोदय, यह जो आपत्ति है, जो आरोप है यह बिलकुल निराधार है. प्रतिभा पर्व की अगर तारीखें टकरा गई हैं तो वहां पंचायतों ने या समन्वय करने वाले व्यक्ति ने उन तारीखों से अलग हटकर कार्यक्रम तय किए. इसीलिए 14 से 21 के बीच में कार्यक्रम तय किए. उनकी तारीखें आप देख लीजिए पूरे परिपत्र में अलग-अलग हैं. माननीय मुख्यमंत्री जी का बहुत साफ मानना है कि मध्यप्रदेश में सामाजिक सरोकार के भी कार्यक्रम होने चाहिए. बहुत सारे ऐसे लोग हैं, जिनके पास बहुत सारे साधन ज्यादा हैं लेकिन क्या गरीब लोगों को उनके जीवन में भी कुछ अच्छा महसूस हो कि हमारे समाज में सक्षम लोग हमारे साथ खड़े हैं, यह आनन्द का अनुभव उनको होना चाहिए. अगर यह कार्यक्रम किया तो सरकार ने इसमें कौन सा पैसा लगाया?

          अध्यक्ष महोदय, अगर हमने किसी मंत्रालय को खोला है तो स्वाभाविक है उसको बजट देंगे. उसमें कर्मचारी भी होंगे, उसमें सुविधाएं भी लगेगीं. उसका कार्यालय भी होगा. उनको हम पैसा देंगे. अध्यक्ष जी, इसमें सिर्फ 2 करोड़ रुपये का बजट रखा है. केवल विभाग खोल कर सरकार वाहवाही लूट रही है, ऐसा नहीं है. आम आदमी को यह महसूस हो सके कि सरकार जो अच्छा कर रही है, उसका आनन्द महसूस कर सके. इसमें देश के बहुत बड़े बड़े लोग श्री पंजा और अनुपम मिश्र जैसे लोगों को इसमें रखा गया है. इसके पीछे मुख्यमंत्री जी का उद्देश्य साफ है कि  लोगों के जीवन में आनन्द महसूस हो और सरकार इस ओर और अच्छा करती चली जाए.

          श्री बाला बच्चन-- अध्यक्ष महोदय, मेरा भी प्रश्न था. यदि आप अनुमति दें तो मैं प्रश्न करना चाहता हूं.  अध्यक्ष महोदय, आनन्द विभाग का बजट 2 करोड़ रुपये था लेकिन अलग अलग विभागों ने  जैसे पंचायत विभाग ने 11.41 करोड़ रुपये खर्च किए.

          अध्यक्ष महोदय-- इसी प्रश्न से संबंधित हो तो प्रश्न करें.

          श्री बाला बच्चन-- इसी प्रश्न से संबंधित है.  मेरा प्रश्न क्र. 3621 है जिसका जिक्र सौरभ जी ने किया था. मैं यह पूछना चाह रहा हूं कि आनन्द विभाग का बजट मात्र 2 करोड़ रुपये था लेकिन पंचायत विभाग ने, जनपद पंचायतों के माध्यम से 11.41 करोड़ रुपये आनन्द से संबंधित कार्यक्रम कराए उसी पर खर्च किए हैं और अन्य विभाग भी खर्च कर रहे हैं. मैं माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि अभी तक इसका क्या रिजल्ट मिला है? कितने लोग आनन्दित हुए हैं? और लोगों द्वारा किस किस प्रकार का आनन्द महसूस किया गया वह जानना चाहता हूं.

          अध्यक्ष महोदय--यह कोई प्रश्न नहीं है.

          डॉ नरोत्तम मिश्र-- यह अपने आप में आनन्द है.(हंसी)

          श्री लाल सिंह आर्य--अध्यक्ष जी, जो अनुसूचित जाति,जनजाति बाहुल्य पंचायतें हैं जो गरीब गांव हैं जिनमें कभी कोई सांस्कृतिक गतिविधियां शासन के हिसाब से आयोजित नहीं होती थी. कभी उनको किसी प्रतियोगिता में पुरस्कार मिल जाता होगा. लेकिन उन्होंने महसूस किया कि कोई सरकार है जो हमको सम्मानित कर रही है और हमारे लिए कार्यक्रम आयोजित कर रही है. अध्यक्ष महोदय, 51 जिलों में लोगों ने इसको महसूस किया है. समाचार पत्रों की सुर्खियां बनी हैं और टेलीविज़न पर भी इसको दिखाया गया.

 

13वें वित्‍त आयोग से स्‍वीकृत राशि

[संस्कृति]

3. ( *क्र. 264 ) श्री जितेन्‍द्र गेहलोत : क्या राज्‍यमंत्री, संस्कृति महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) 13वें वित्‍त आयोग की अनुशंसाओं के तहत भारत शासन द्वारा वर्ष 2011 से अब तक     किन-किन कार्यों हेतु कितनी-कितनी राशि स्‍वीकृत हुई व कितनी प्राप्‍त्‍ा हुई? वर्षवार ब्‍यौरा दें। (ख) प्रश्नांश (क) के तहत स्‍वीकृत राशि से क्‍या-क्‍या कार्य करवाये गये? कितने एवं कौन-कौन से स्‍मारक अनुरक्षण पर कितनी-कितनी राशि व्‍यय की गई? (ग) केन्‍द्र सरकार द्वारा स्‍वीकृत कितनी राशि का उपयोग अब तक नहीं किया जा सका व किस कारण?

राज्‍यमंत्री, संस्कृति ( श्री सुरेन्द्र पटवा ) : (क) 13वें वित्‍त आयोग की अनुशंसाओं के अंतर्गत स्‍मारकों के अनुरक्षण एवं विकास कार्य, संग्रहालयों के उन्‍नयन एवं विविध कार्यों हेतु वर्ष 2011 से अब तक राशि रूपये 157.50 करोड़ भारत शासन द्वारा स्‍वीकृत की गई एवं प्राप्‍त हुई। स्‍वीकृत एवं प्राप्‍त राशि का ब्‍यौरा/जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार(ख) प्रश्नांश (क) के तहत स्‍वीकृत राशि से कराये गये कार्य तथ स्‍मारकों के अनुरक्षण एवं विकास कार्य, संग्रहालयों के उन्‍नयन एवं विविध कार्यों पर व्‍यय की गई राशि की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार(ग) 13वें वित्‍त आयोग की अनुशंसाओं के अंतर्गत केन्‍द्र सरकार द्वारा राशि रूपये 157.50 करोड़ की स्‍वीकृत की गई। इस राशि में से अब तक राशि रूपये 84.45 करोड़ व्‍यय की गई तथा शेष राश‍ि रूपये 73.05 करोड़ से अनुरक्षण कार्यों की कार्यवाही प्रचलन में है।

 

          श्री जितेन्द्र गेहलोत - माननीय अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मैं  माननीय मंत्री महोदय जी को और मध्यप्रदेश सरकार को  इस बात के लिये धन्यवाद देना चाहता हूं कि पुरातत्व विभाग के अंतर्गत महिदपुर में "चेन" किले को यूनेस्को द्वारा अवार्ड दिया गया,  लेकिन मैंने जो प्रश्न पूछा था कि वर्ष 2011-2015 तक केन्द्र सरकार से तेरहवें वित्त आयोग की राशि कब-कब आई ? मंत्री जी ने मुझे इसका पूरा जवाब दिया है लेकिन जो राशि 73 करोड़ रुपये शेष बची है उस राशि से  मेरे आलोट विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत  जो कई पुरातत्व विभाग की इमारतें हैं, पहाड़ हैं, मंदिर हैं, उसको क्या इसमें सम्मिलित किया जायेगा, जैसे किशनगढ़ बाधवा माता,अनादि कल्पेश्वर महादेव,क्षीपावरा महादेव मंदिर और  मनोनिया,यह धरोहरें जीर्णशीर्ण हो गई हैं  इस राशि से उनकी मरम्मत हो सकती है.

          श्री सुरेन्द्र पटवा - माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी ने जो अपनी मांग रखी है  तो तेरहवें वित्त आयोग में लगभग 157 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हुई थी जिसमें से 84 करोड़ रुपये के काम लगभग पूर्ण हो गये हैं और 73 करोड़ रुपये के काम पहले से प्रक्रिया में हैं, उनके टेंडर वगैरह बुला लिये गये हैं, लेकिन जैसा विधायक जी ने कहा, आलोट के कामों की उनकी जो लिस्ट है, उसका परीक्षण करा लिया जायेगा. इस राशि से वह काम नहीं हो सकते लेकिन उसके बाद भी पुरातत्व विभाग द्वारा उसकी परीक्षण कराकर  जहां आवश्यक्ता होगी उसके अनुसार काम करा लिया जायेगा.

          श्री जितेन्द्र गेहलोत - धन्यवाद अध्यक्ष जी.

जाति प्रमाण पत्रों का सत्यापन

[सामान्य प्रशासन]

4. ( *क्र. 4544 ) श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्नकर्ता सदस्य का विधानसभा प्रश्न क्रमांक 5235, दिनांक 11/03/2016 के प्रश्नांश () एवं (ड.) एवं प्रश्न क्रमांक 1400, दिनांक 06/12/2016 की एकत्रित जानकारी क्या है? (ख) कटनी जिले में अनुविभागवार कितने जाति प्रमाण दायरा पंजी में दर्ज हैं? कितने जाति प्रमाण-पत्र समग्र पोर्टल पर दिनांक 27/02/2016 के पश्‍चात् दर्ज कर प्रश्न दिनांक तक सत्यापित किये गये, कितने प्रमाण-पत्र किन कारणों से सत्यापित किया जाना शेष हैं? (ग) जाति प्रमाण-पत्र अभियान में कटनी तहसील के किन-किन विद्यालयों के आवेदन लोक सेवा केन्द्र से ऑनलाईन दर्ज किये गये? पात्र पाये गये आवेदनों का कब-कब डिस्पोजल किया गया? प्रमाण-पत्र कब-कब वितरित किये गये? विद्यालयवार बतायें। (घ) कटनी नगर के किन-किन विद्यालयों के आवेदन अभियान के तहत किन-किन कारणों से अब तक जमा नहीं हुये? क्या इन विद्यालयों को अभियान से पृथक रखा गया था? यदि हाँ, तो क्यों? यदि नहीं, तो आवेदन जमा न होने के कारण बतायें और क्या इस संबंध में अभिभावकों द्वारा समाधान पोर्टल पर शिकायत की गई है? यदि हाँ, तो प्रश्न दिनांक तक किया गया निराकरण क्या था? (ड.) प्रश्नांश () के इन विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के जाति प्रमाण-पत्र, अभियान के तहत बनवाये जाने की एवं प्रश्न में उपस्थित तथ्यों पर संज्ञान लेते हुये कार्यवाही की जायेगी? यदि हाँ, तो क्या एवं कब तक? यदि नहीं, तो क्यों?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) प्रश्‍न क्रमांक 5235 का प्रेषित उत्‍तर पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र ''एक'' अनुसार है तथा प्रश्‍न क्रमांक 1400 के संबंध में कलेक्‍टर, कटनी से प्राप्‍त जानकारी परीक्षणाधीन है। (ख) जानकारी निम्‍नानुसार है :-

अनुविभाग का नाम

पंजी में दर्ज

सत्‍यापित जाति प्रमाण-पत्र

सत्‍यापन हेतु शेष

कटनी, रीठी, बड़वारा

47676

466

47210

विजयराघवगढ़

4884

0

4884

ढीमरखेड़ा

10808

0

10808

बहोरीबंद

16927

1771

15156

(ग) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र ''दो'' अनुसार है। (घ) कटनी नगर के सभी विद्यालयों के जाति प्रमाण-पत्र हेतु आवेदन तहसील कार्यालय/राजस्‍व शिविरों में जमा किये गये हैं। जिन आवेदन पत्रों में आवश्‍यक दस्‍तावेजों की प्रतिपूर्ति नहीं की गई है। उन्‍हें वापस कर आवश्‍यक दस्‍तावेजों की पूर्ति कर पुन: जमा करने हेतु प्रे‍रित किया गया है। किसी भी विद्यालयों को अभियान से पृथक नहीं रखा गया है। केन्‍द्रीय विद्यालय आर्डीनेंस फैक्‍ट्री द्वारा छात्रों के आवेदन जमा नहीं किये गये। समाधान पोर्टल में शिकायत क्रमांक 10104323 दर्ज हुई थी जो सत्‍य पाई गई जिस पर प्राचार्य के असहयोग रवैये की जानकारी के संबंध में क्षेत्रीय संगठन अधिकारी, अजमेर को आवश्‍यक कार्यवाही हेतु पत्र प्रेषित किया गया है। (ड.) विद्यालयों में अध्‍ययनरत विद्यार्थियों के जाति प्रमाण-पत्र अभियान के तहत निरंतर सत्र दर सत्र लिये जा रहे हैं। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

 

          श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल - माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी को मैं धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने  विस्तृत एवं संतुष्टिकारक उत्तर दिया. मैं सिर्फ इतना चाहूंगा कि कई जगह बच्चों से स्कूल में प्रमाणपत्र बनाने का शुल्क लिया गया और  भी कई कारण हैं, तो  क्या इस लापरवाही की जांच कलेक्टर कटनी से कराएंगे, एवं उसमे मेरे द्वारा उठाये गये प्रश्नों को ध्यान में रखते हुए उनको जांच में शामिल करेंगे ? और दो या तीन महीने की निश्चित समय अवधि में, चाहें वार्डवार या पंचायतवार शिविर लगाकर जाति प्रमाणपत्र बनाने की कार्यवाही करेंगे ?

          श्री लाल सिंह आर्य - माननीय अध्यक्ष महोदय,  जैसी माननीय सदस्य की भावना है वह हजारों अनुसूचित जाति,जनजाति,घुमक्कड़,अर्द्धघुमक्कड़ बच्चों के संदर्भ में है. मैं उन्हें आश्वस्त करता हूं कि इसका हम परीक्षण करा लेंगे और जो भी शेष प्रमाणपत्र बनने के लिये रह गये हैं उसको एक अभियान के तौर पर लेकर हम पूरा करा लेंगे.

          श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल - माननीय अध्यक्ष महोदय,कलेक्टर के माध्यम से जांच होगी तो उसमें मेरे द्वारा जो उठाये गये बिन्दुओं को भी सुना जाये, ऐसे आदेश कृपया दे दें.

          श्री लालसिंह आर्य - जो आपने बोला मैंने उस पर अपनी सहमति दी है.

विभाग द्वारा पारित शासकीय संकल्‍प के अनुरूप कार्यवाही 

[महिला एवं बाल विकास]

5. ( *क्र. 2552 ) श्री बलवीर सिंह डण्‍डौतिया : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) वर्ष 2013 में विधानसभा द्वारा पारित शासकीय संकल्‍प के अनुसार महिला बाल विकास विभाग से संबंधित क्‍या-क्‍या सुविधाएं देने का निर्णय लिया गया है? संकल्‍प की प्रति उपलब्‍ध करावें। (ख) प्रश्नांश (क) के पालन में विधानसभा क्षेत्र-07 दिमनी जिला मुरैना में जनवरी 2014 से जनवरी 2016 तक संकल्‍प के निर्णय के अनुसार क्‍या-क्‍या कार्य किये गये, की विस्‍तार पूर्वक जानकारी दी जावे? संकल्‍प के अनुसार कार्य नहीं किये या नहीं हो सकने के क्‍या कारण हैं?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) म.प्र. से संबंधित जनसंकल्प की अ़द्यतन जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 अनुसार है। (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में विधानसभा क्षेत्र दिमनी में किये गए कार्य का विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अनुसार है। पारित संकल्प क्षेत्र विशेष हेतु निर्धारित नहीं है। अतः शेष का प्रश्न नहीं है। सतत् प्रक्रिया है।

 

          श्री बलबीर सिंह डण्डौतिया - माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी के जवाब से मैं पूर्णत: संतुष्ट हूं और यह चाहता हूं कि मेरे यहां आंगनवाड़ियों की कमी है तो वहां आंगनवाड़ियां देने  की कृपा करें.

          श्रीमती अर्चना चिटनिस -  माननीय अध्यक्ष महोदय, जहां-जहां आंगनवाड़ियां बहुत आवश्यक हैं, माननीय सदस्य मुझे बताएं, मैं उसको करने का प्रयास करूंगी.

          अध्यक्ष महोदय - जहां आप कहेंगे वहां बन जायेगी.

 

 

नर्मदा नदी से सामूहिक/माइक्रो सिंचाई परियोजनाओं की स्‍वीकृति 

[नर्मदा घाटी विकास]

6. ( *क्र. 1320 ) श्री राजकुमार मेव : क्या राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विभाग द्वारा किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराने हेतु नर्मदा नदी से सामूहिक सिंचाई एवं माइक्रो सिंचाई परियोजनाएं तैयार कर स्‍वीकृत करने की कार्यवाही की गई है? यदि हाँ, तो वर्ष 2016-17 में प्रदेश में कौन-कौन सी सिंचाई परियोजनाएं कितनी लागत की स्‍वीकृत की गई हैं? (ख) क्‍या खरगोन जिले में महेश्‍वर विधानसभा क्षेत्र की जनपद पंचायत महेश्‍वर एवं बड़वाह के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराने हेतु कोई नई परियोजना स्‍वीकृति हेतु प्रस्‍तावित है? यदि हाँ, तो कौन-कौन सी? (ग) क्‍या प्रश्नांश (क) एवं (ख) के संबंध में महेश्‍वर विधानसभा की जनपद पंचायत महेश्‍वर एवं बड़वाह के क्षेत्र बड़कीचौकी, कवाणा, घटयावैड़ी रामदढ़ बलसगांव आशाखो पेमपुरा करोंदियाखूर्द हाथीदग्‍गड़ जिरात रोस्‍याबारी बाकानेर कुसुम्‍भ्‍या भवनतलाई छोटाभेडल्‍या बड़ाभेडल्‍या हेलाबाबर आदि के किसानों की कृषि सिंचाई हेतु सुविधा उपलब्‍ध नहीं है? यदि हाँ, तो कार्ययोजना तैयार की गई है? यदि नहीं, तो कारण बतावें। (घ) प्रश्नांश (ग) के संदर्भ में ग्राम के किसानों एवं प्रश्‍नकर्ता द्वारा सिंचाई परियोजना स्‍वीकृति हेतु कब-कब प्रस्‍ताव दिये गये? उन पर विभाग द्वारा कब तक कार्य योजना तैयार कर परियोजना की स्‍वीकृति हेतु कार्यवाही की जावेगी?

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) जी हाँ। जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) बलवाडा उद्वहन सिंचाई योजना स्‍वीकृत है। (ग) जी हाँ। ओंकारेश्‍वर जलाशय के वर्तमान में जल के अधिकतम स्‍तर से ओंकारेश्‍वर परियोजना की नहरों से इन ग्रामों में सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराने हेतु नहर में अतिरिक्‍त जल उपलब्‍ध नहीं है। नर्मदा नदी से जल उद्वहन कर इस क्षेत्र में सिंचाई करना वित्‍तीय दृष्टि से साध्‍य नहीं है। (घ) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।

परिशिष्ट - ''दो

 

          श्री राजकुमार मेव - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से मुख्यमंत्री जी को और मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि  उन्होंने बलवाड़ा माईक्रो सिंचाई परियोजना महेश्वर क्षेत्र में मंजूर की है, लेकिन इतना कहना चाहूंगा कि कुछ अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति के ग्राम  वहां छूट रहे हैं, उन गांवों को भी इसमें जोड़ने का प्रयास किया जाये और उन गांवों को  भी सिंचित किया जाये.

          श्री लालसिंह आर्य - अध्यक्ष महोदय, निमाड़ का क्षेत्र ड्राई था. माननीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में नर्मदा घाटी विकास विभाग ने एक-एक इंच जमीन पर सिंचाई करने का पहले ही उद्देश्य रखा है और इसीलिये बहुत सी योजनाएं हमने स्वीकृत की हैं. आपने कुछ गांव प्रश्न में बताए हैं, साध्यता के तहत् वह आ रहे हैं या नहीं इसको हमको देखना पड़ेगा क्योंकि  वहां बहुत सारा इलाका पठारी है और कभी-कभी ऐसा होता है कि हमने जो नहरें बनाईं हैं उसकी क्षमता जितनी है उससे अतिरिक्त पानी देने में कहीं न कहीं दिक्कत आती है लेकिन फिर भी हम जल संसाधन विभाग से बातचीत कर लेंगे. कोई ऐसा रास्ता निकलता होगा  तो मुझे लगता है उसमें कोई दिक्कत नहीं है हम उसको दिखवा लेंगे.

          श्री राजकुमार मेव - मंत्री जी उसका परीक्षण हो जाये. धन्यवाद मंत्री जी,धन्यवाद अध्यक्ष जी.

 

 

 

 

 

 

पेट्रोल, डीजल एवं रसोई गैस पर वेट टैक्‍स

[वाणिज्यिक कर]

7. ( *क्र. 4147 ) श्री जयवर्द्धन सिंह : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या देश के अन्‍य राज्‍यों की तुलना में मध्‍यप्रदेश में पेट्रोल, डीजल एवं रसोई गैस पर सबसे अधिक वेट टैक्‍स लगाया जाता है? यदि हाँ, तो पेट्रोल, डीजल एवं रसोई गैस पर किन-किन दरों पर टैक्‍स लगाया जाता है? (ख) देश की सार्वजनिक क्षेत्र की किन-किन पेट्रोलियम कंपनियों से मध्‍यप्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थ बुलाये जाते हैं? उन पेट्रोलियम कंपनियों से प्रदेश सरकार को पेट्रोल तथा डीजल कितने रूपये प्रति लीटर में प्राप्‍त हो रहा है तथा वे उपभोक्‍ताओं को कितने रूपये में बेच रहे हैं?

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) अन्‍य राज्‍यों में लागू वेट की दरें विभाग द्वारा संधारित नहीं की जाती हैं। प्रदेश में पेट्रोल, डीजल एवं रसोई गैस पर अधिरोपित टैक्‍स की जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियां मेसर्स इंडियन ऑयल कार्पोरेशन लिमिटेड, मेसर्स हिन्‍दुस्‍तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड एवं मेसर्स भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड हैं। पेट्रोल एवं डीजल प्रतिलीटर कितने रूपये में प्राप्‍त किया जाता है तथा उपभोक्‍ताओं को कितने रूपये प्रतिलीटर विक्रय किया जाता है, यह जानकारी विभाग द्वारा संधारित नहीं की जाती है।

परिशिष्ट - ''तीन''   

 

          श्री जयवर्द्धन सिंह--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने मेरे प्रश्‍न में माननीय मंत्री जी से यह पूछा था कि क्‍या बाकी राज्‍यों की तुलना में पेट्रोल और डीजल पर वैट दर जो मध्‍यप्रदेश में लगती है क्‍या वह सबसे अधिक है. मुझे इस बात का आश्‍चर्य है कि उत्‍तर में यह दिया गया है कि यह जानकारी संधारित नहीं की जाती है. जबकि वाणिज्‍यक कर विभाग के पास और विधान सभा के पास अन्‍य ऐसे साधन है जिसके द्वारा यह जानकारी आसानी से मिल सकती है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, फिर भी मैंने कल शाम को लगभग आधे घंटे में पूरी जानकारी एकत्रित कर ली है और उसके द्वारा यह बात स्‍पष्‍ट होती है कि जो उत्‍तर में दी गई वैट दर हैं. पैट्रोल पर 31 प्रतिशत मूल्‍य आधारित और उसके साथ प्रति लीटर पर 4 रूपये अतिरिक्‍त दर लगती है. इसी तरह डीजल पर 27 प्रतिशत मूल्‍य आधारित और उसके ऊपर डेढ़ रूपये प्रति लीटर लगता है. इसके द्वारा मध्‍यप्रदेश का पेट्रोल प्राइज करीब 78 रूपये प्रति लीटर और डीजल का 66 रूपये प्रति लीटर है, जो पूरे देश में सबसे अधिक है. जबकि माननीय मुख्‍यमंत्री जी बात करते हैं कि सरकार किसानों के हित में काम कर रही है, गरीबों के हित में काम कर रही है फिर भी सबसे अधिक रेट मध्‍यप्रदेश का है. आप इसकी तुलना राजस्‍थान के साथ कीजिये जहां पर 5 रूपये का अंतर है. छत्‍तीसगढ़ में 72 रूपये प्रति लीटर पेट्रोल बिकता है, 6 रूपये का अंतर है. उसी प्रकार गुजरात में डीजल मिलता है 60 रूपये में और मध्‍यप्रदेश में मिलता है 66 रूपये में. मेरा माननीय मंत्री जी से यही प्रश्‍न है कि क्‍या आप इसके रेट कम करने का विचार करेंगे ? चुनाव भी आने वाले हैं और वैसे भी जनता परेशान है.

          श्री जयंत मलैया--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमको भी बहुत तकलीफ होती है जब रेट बढ़ाते हैं, परंतु हरेक प्रदेश की अपनी अलग स्थिति होती है. हमारा राज्‍य एक ऐसा राज्‍य है जहां रेवेन्‍यू कलेक्‍शन के बहुत अधिक संसाधन नहीं हैं और जो दूसरी मेन्‍यूफेक्‍चरिंग स्‍टेट्स हैं, दिल्‍ली है, हरियाणा है, महाराष्‍ट्र है, आंध्रप्रदेश है यहां पर और भी जगह से स्रोत होते हैं जहां से वह अपनी राजस्‍व की आय इकट्ठा करते हैं इसलिये हमारे पास साधन कम होने से न चाहते हुये भी हमें यह रेट रखना पड़ रहे हैं.

          श्री जयवर्द्धन सिंह--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें मेरे 2 और पाइंट्स हैं. माननीय मंत्री ने रेवेन्‍यू लॉस के बारे में जो बात कही है, इसमें आप से यह निवेदन है कि ऐसी स्‍टडी की जाये कि आसपास के जो राज्‍य हैं, हम बात करें गुजरात के बारे में, हम बात करें महाराष्‍ट्र के बारे में, हम बात करें उत्‍तर प्रदेश के बारे में, राजस्‍थान के बारे में, जो रेवेन्‍यू लॉस उन ट्रक्‍स के द्वारा होता है जो ट्रक वाले मध्‍यप्रदेश में डीजल नहीं भरवाते हैं, सीमा के उस पार जो भी पम्‍प मिल जाता है वहां भरवाते हैं तो मेरे अनुसार इसमें हजारों करोड़ रूपये का घाटा प्रदेश को ही होता है, इसके बारे में स्‍टडी की जाये.

          श्री जयंत मलैया--  अध्‍यक्ष महोदय, हमने इसका विश्‍लेषण कराया है और डीजल की खपत जैसे जनवरी 2016 तक, वर्ष 2015-2016 के 10 माह में 3379313 किलो लीटर हुई थी जो इस वर्ष जनवरी 2017 तक 3433448 किलो लीटर हुई जो कि 1.60 प्रतिशत की वृद्धि है. अगर इसी को हम रूपयों में लें तो डीजल से गतवर्ष जनवरी तक जहां हमें 3932.3 करोड़ रूपये का राजस्‍व प्राप्‍त हुआ, इस वर्ष जनवरी 2017 तक हमें 4884.94 करोड़ का राजस्‍व प्राप्‍त हुआ जो कि पिछली बार से 21.68 प्रतिशत अधिक है. इसी प्रकार आप अगर पेट्रोल में देखेंगे तो इसमें भी हमारी खपत लगभग 30 प्रतिशत बढ़ी है. ऐसा नहीं है कि पड़ोस के राज्‍य में दाम कम होने से हमारा नुकसान हो रहा है बल्कि बढो़त्‍तरी ही हो रही है.          

          श्री जयवर्द्धन सिंह --माननीय अध्यक्ष महोदय, इस संबंध में भी मेरे पास में एक सुझाव है कि नवम्बर, 2014 में जो एक्साइज ड्यूटी पेट्रोल पर केन्द्र के द्वारा लगती थी वह 9 रूपये प्रति लीटर थी और डीजल पर 3 रूपये प्रति लीटर थी. पिछले तीन सालों में जो वृद्धि हुई है वह इस प्रकार है पेट्रोल पर 21 रूपये प्रति लीटर और डीजल पर 17 रूपये प्रति लीटर. जबकि उस समय क्रूड का प्राईज लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल था. मैंने आज ही चेक किया है. आज की स्थिति में क्रूड का प्राईज लगभग 50 डॉलर प्रति बैरल है. जो क्रूड आयल प्रति लीटर आता है वह लगभग 20 से 25 रूपये प्रति लीटर आता है उत्पाद में जो एन्ट्री टैक्स लगता है रिफायनरी प्रोसेसिंग मार्जिन होता है, लेंडिंग कास्ट होता है, ओएमसी मार्जिन और ट्रांसपोटेशन फेट कास्ट होता है उसके बाद भी मुश्किल से रिफायनिंग पेट्रोय या डीजल का कास्ट होता है वह लगभग 30 रूपये होता है .मेरा कहने का मतलब यह है कि जब 30 रूपये में डीजल या पेट्रोल का कास्ट आ रहा है तो फिर 70 रूपये मे मध्यप्रदेश में आप क्यों बेच रहे हैं, थोड़ा बहुत तो सरकार को इसकी कीमत कम करनी चाहिये. महाराष्ट्र, गुजरात से 2 अथवा 3 रूपये कम हो जाये.इसके बारे में मंत्री जी जानकारी दे दें.

          अध्यक्ष महोदय- यह आपका सुझाव है, इसमें प्रश्न कहा हैं.

          श्री जयंत मलैया--माननीय अध्यक्ष महोदय, बहुत सी बातें माननीय सदस्य ने बताई हैं, इसमें अकेले यह नहीं और भी वेरीएशन हैं, क्रूड की इम्पोर्ट करने की, उसके ऊपर एक्साईज लगने की, इसके अलावा डॉलर का रेट रूपये का क्या होता है इसके ऊपर भी फर्क पड़ता है. इसके बाद डिस्टेंस के ऊपर भी फर्क पड़ता है. यह बहुत सारी वेरीएशंस है. आप देखेंगे कि एक ही शहर के अंदर एक जगह अलग दाम होता है दूसरी जगह दूसरी कंपनी का अलग दाम होता है. वेरीएशन रहता है जहां तक पेट्रोल और डीजल पर रेट कम करने की बात है फिलहाल इस बात का हमारा कोई ईरादा नहीं है .

          (कांग्रेस पार्टी के कई सदस्यों द्वारा प्रश्न पूछने की अनुमति मांगने पर )

          अध्यक्ष महोदय- अब क्या रह गया है. जयवर्द्धन जी को 3 प्रश्न एलाऊ कर दिये.

          श्री मुकेश नायक --एक प्रश्न पूछना है अगर आप अनुमति दें तो.

          श्री जयवर्द्धन सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, फिर भी माननीय वित्त मंत्री जी इसमें केन्द्र सरकार से यह निवेदन कर सकते हैं कि उनकी एक्साइज ड्यूटी कम हो जाये.यह प्रयास तो कर ही सकते हैं.

          श्री मुकेश नायक -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि पूरे भारतवर्ष में मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा रेट पेट्रोल और डीजल के हैं और जो क्रूड आईल की प्राईज है उसके मुताबिक मध्यप्रदेश में पेट्रोल डीजल क्यों नहीं मिल रहा है.

          अध्यक्ष महोदय- अब बहुत चर्चा हो गई. अब नहीं. अन्य लोगों के भी प्रश्न हैं, उन्हें आने दीजिये.

          श्री रामनिवास रावत- यह सरकार देश की जनता पर टैक्स लगा कर उनको लूट रही है. अध्यक्ष महोदय, आप भी चाहते हैं कि पेट्रोल डीजल सस्ता हो जाये.

          डॉ.गोविन्द सिंह-- अध्यक्ष महोदय, मैं वित्त मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश में पेट्रोल और डीजल के रेट कम करने का आपका कोई ईरादा है क्या ? आप इसका जवाब दें. कुछ तो कम करें क्योंकि सबसे ज्यादा पेट्रोल और डीजल का उपयोग किसान करता है और किसानों की यह सरकार हितैषी है तो फिर किसानों को आत्महत्या करने के लिये क्यों मजबूर कर रहे हैं. आप थोड़ा तो कम करें.

          श्री बाला बच्चन --माननीय अध्यक्ष महोदय, इस प्रश्न का प्रापर जवाब दिलवाईये. जवाब प्रापर नहीं आया है.

          अध्यक्ष महोदय- जवाब आ गया है.

          श्री बाला बच्चन- नहीं आया है . मंत्री जी बतायें कि क्या मध्यप्रदेश में पेट्रोल या डीजल की कीमतें कम होंगी.

          श्री जयंत मलैया - जी नहीं.

 

 

 

 

बहिर्गमन

श्री बाला बच्चन, सदस्य के नेतृत्व में इंडियन नेश्नल कांग्रेस पार्टी के सदस्यों द्वारा सदन से बहिर्गमन

 

          श्री बाला बच्चन(राजपुर) -- जी नहीं तो हम आपके जवाब से संतुष्ट नहीं है और हम सदन से बहिर्गमन करते हैं.

(श्री बाला बच्चन, सदस्य के नेतृत्व में इंडियन नेश्नल कांग्रेस के सदस्यों द्वारा शासन के उत्तर से असंतुष्ट होकर सदन से बहिर्गमन किया गया.)

 

 

 

अन्‍य राज्‍यों को विद्युत का प्रदाय

[ऊर्जा]

8. ( *क्र. 4608 ) श्री गिरीश भंडारी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र. पॉवर सरप्‍लस राज्‍य बन गया है और दूसरे राज्‍यों को बिजली बेच रहा है? यदि हाँ, तो वर्ष 2013 से वर्ष 2016 तक वर्षवार कितने राज्‍यों को कितनी मात्रा में बिजली बेची गयी? (ख) प्रदेश में कृषि पंप हेतु किसानों को कितने घंटे बिजली दी जा रही है? (ग) प्रश्नांश (क) व (ख) की जानकारी अनुसार अगर प्रदेश दूसरे राज्‍यों को बिजली बेच रहा है तो प्रदेश के किसानों को कृषि कार्य हेतु 24 घंटे बिजली क्‍यों नहीं दी जा रही है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ। विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) अटल ज्‍योति अभियान के अंतर्गत प्रदेश में कृषि कार्य हेतु प्रतिदिन 10 घंटे वि़द्युत प्रदाय किया जा रहा है। (ग) भूतल स्‍तर एवं विभिन्‍न फसलों के लिए पानी की आवश्‍यकता अनुसार कृषि कार्यों हेतु प्रतिदिन 10 घंटे विद्युत प्रदाय पर्याप्‍त है। वर्तमान में भूजल एवं सतही जल का संरक्षण भी एक महत्‍वपूर्ण उद्देश्‍य है।

परिशिष्ट - ''चार''

          श्री गिरीश भंडारी -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा जो प्रश्न था वह इस बात को लेकर के था कि कृषि क्षेत्र में कितनी बिजली, किस किस समय और कितने घण्टे दी जाती है. प्रश्न के उत्तर में मुझे बताया है कि 10 घण्टे कृषि पंप के लिये बिजली दी जाती है लेकिन उसका समय नहीं बताया कि किस समय में वह 10 घण्टे बिजली किस समय प्रदाय की जाती है. इसके साथ मेरा एक और प्रश्‍न है कि फाल्‍ट की वजह से, तार टूटने की वजह से, मेन्‍टेनेंस की वजह से जिस दिन 10 घंटे बिजली नहीं दी जाती है, क्‍या उसकी पूर्ति दूसरे दिन करने का कोई प्रावधान है.

          श्री पारस चन्‍द्र जैन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वर्तमान में कृषि क्षेत्र को दो समूह में क्रमश: 6 घंटे व 4 घंटे विद्युत देने का प्रावधान है.

          श्री गिरीश भंडारी - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक और प्रश्‍न था, उसमें माननीय मंत्री जी ने ध्‍यान नहीं दिया, प्रतिदिन 10 घंटे कृषि क्षेत्र में बिजली दी जाती है, मेरा प्रश्‍न है कि जिस दिन फाल्‍ट की वजह से, तार टूटने की वजह से, मेन्‍टेनेंस की वजह से जिस दिन 10 घंटे बिजली नहीं दी जाती है, क्‍या उसकी पूर्ति दूसरे दिन की जाती है या कटौती की गई बिजली को दूसरे दिन देने का कोई प्रावधान है.

          श्री पारस चन्‍द्र जैन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कांग्रेस के समय में तो इतनी भी बिजली नहीं मिलती थी.

          श्री गिरीश भंडारी -  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह कोई प्रश्‍न का उत्‍तर नहीं है कि कांग्रेस के समय बिजली इतनी भी नहीं मिलती थी. मेरा स्‍पष्‍ट प्रश्‍न है कि 10 घंटे बिजली देने की बात की गई तो क्‍या बिजली 10 घंटे दी जाती है? (व्‍यवधान...)

          राज्‍यमंत्री, सहकारिता (श्री विश्‍वास सारंग) - माननीय सदस्‍य आप डांट कैसे रहे हो, थोड़ा मर्यादा का ध्‍यान तो रखें.

          श्री बाला बच्‍चन - मंत्री जी, सही जवाब नहीं मिलेगा तो डांट तो सुनने को मिलेगी.

          श्री पारस चन्‍द्र जैन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कोई कड़वी बात कह दो तो सभी लोग एक साथ बोलने लग जाते हैं, कबूलते भी नहीं है. बिजली सप्‍लाई में यदि कोई व्‍यवधान होता है तो अलग से बिजली की पूर्ति करने के लिए कोई प्रावधान नहीं है.

          श्री गिरीश भंडारी - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, फिर शासन की जो घोषणा है कि 10 घंटे प्रतिदिन बिजली दी जाती है, तो क्‍या शासन अपनी घोषणा से मुकर रहा है.

          श्री पारस चन्‍द्र जैन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे मुख्‍यमंत्री जी ने जो घोषणा की है, (श्री जितू पटवारी के खड़े होने पर) बैठे तो सही, आप चाहे जब खड़े हो जाते हैं, मेरे ख्‍याल से यह कल्‍पना परूलेकर जी की सीट तो नहीं है, कृपया यह सीट बदल दो अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपसे हाथ जोड़कर निवेदन है. (हंसी...)मुख्‍यमंत्री जी ने जो घोषणा की है उसके तहत 10 घंटे प्रतिदिन बिजली दी जा रही है, यदि कोई फाल्‍ट हो जाता है तो उसको हाथों-हाथ सुधारने की भी योजना है.

          श्री गिरीश भंडारी - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न का उत्‍तर नहीं आया है. मैंने कहा है कि प्रतिदिन 10 घंटे कृषि क्षेत्र में बिजली दी जाती है, जिस दिन फाल्‍ट की वजह से, तार टूटने की वजह से, मेन्‍टेनेंस की वजह से जिस दिन 10 घंटे बिजली नहीं दी जाती है, क्‍या उसकी पूर्ति दूसरे दिन की जाती है या कटौती की गई बिजली को दूसरे दिन देने का कोई प्रावधान है.

          अध्‍यक्ष महोदय - उसका जवाब तो आ गया, मंत्री जी ने बोल तो दिया, मंत्री जी एक बार और कह दो.

          श्री पारस चन्‍द्र जैन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम प्रतिदिन 10 घंटे बिजली दे रहे हैं, जिस दिन किसी गड़बड़ी के कारण बिजली नहीं दी जाती है तो उसकी पूर्ति  दूसरे दिन बिजली देने का कोई प्रावधान नहीं है.

          श्री गिरीश भंडारी - मंत्री जी, दूसरे दिन बिजली नहीं देंगे, किसी भी दिन काट दो बिजली, कोई बिजली देने का प्रावधान नहीं है, मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री इस बारे में क्‍यों असत्‍य घोषणा करते हैं.

          श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कई क्षेत्रों में किसानों को 10 घंटे बिजली नहीं दी जा रही है, जब सरकार की घोषणा है तो माननीय मंत्री जी निर्देश तो जारी कर दें कि प्रदेश के किसानों को 10 घंटे बिजली देना सुनिश्चित करें. 

          ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण आहार वितरण की व्यवस्था

[महिला एवं बाल विकास]

        9. ( *क्र. 5642 ) श्री दीवानसिंह विट्ठल पटेल : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण आहार वितरण की क्या व्यवस्था है? नियमों की प्रति उपलब्ध करावें (ख) विधानसभा क्षेत्र पानसेमल में क्‍या आंगनवाड़ी केन्द्रों पर पोषण आहार प्रदाय कर रहे समूहों के विरुद्ध लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही हैं? यदि हाँ, तो वित्तीय वर्ष       2016-17 में प्राप्त कुल शिकायतें और उन पर की गई कार्यवाही का विवरण देवें? (ग) क्या विभाग के द्वारा आंगनवाड़ी केन्द्रों पर पोषण आहार वितरण व्यवस्था के सुधार हेतु कोई कार्ययोजना है? यदि हाँ, तो उसका क्रियान्वयन कब प्रारम्भ हो जावेगा?

        महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) ग्रामीण क्षेत्रों में विभाग के निर्देशानुसार वर्तमान में 03 वर्ष से 06 वर्ष तक के बच्चों को पूरक पोषण आहार की व्यवस्था सांझा चूल्हा कार्यक्रम तहत् मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम अंतर्गत कार्यरत स्व सहायता समूहों के माध्यम से तथा 06 माह से 03 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती धात्री माताओं एवं किशोरी बालिकाओं को टेकहोम राशन के रूप में पूरक पोषण आहार की व्यवस्था एम.पी. एग्रो के माध्यम से संचालित की जाती है। विभाग के निर्देश की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी नहीं। पानसेमल विधानसभा क्षेत्र अन्तर्गत आंगनवाड़ी केन्द्रों पर सांझा चूल्हा कार्यक्रम अन्‍तर्गत नाश्ता एवं भोजन का प्रदाय करने वाले स्व सहायता समूह के विरूद्ध कोई भी शिकायत वर्ष 2016-17 में प्राप्त नहीं हुई है। (ग) राज्य शासन द्वारा भारत सरकार महिला बाल विकास एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप पूरक पोषण आहार वितरण व्यवस्था के विस्तृत निर्देश जारी किए जा चुके हैं। निर्देशों के अनुसार ही वर्तमान में प्रदेश की आंगनवाड़ी केन्द्रों में पूरक पोषण आहार का वितरण किया जा रहा है। विभाग द्वारा इसकी सतत् मॉनिटरिंग की जा रही है। वर्तमान में स्व सहायता समूहों के देयकों के भुगतान की प्रक्रिया का सरलीकरण किया गया है। परियोजना स्तर एवं आंगनवाड़ी केन्द्र स्तर पर पृथक-पृथक टेकहोम राशन प्राप्ति एवं वितरण व्यवस्था का पंचनामा तैयार किया जा रहा है।

          श्री दीवानसिंह विट्ठल पटेल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदया से यह जानना चाहता हूं कि मेरा आंगनवाड़ी केन्‍द्रों में पोषण आहार वितरण और सांझा चूल्‍हा के संबंध में प्रश्‍न है, मेरे पास पोषण आहरण वितरण के संबंध में सभी विवरण आ गये हैं . लेकिन मैं यह जानना चाहता हूं कि जिस तरह से आंगनवाड़ी केन्‍द्र संचालित हो रहे हैं और विवरण के आधार पर सात दिन का पोषण आहार गर्भवती माताओं बहनो और बच्‍चों को जो पोषण आहर नाश्‍ते और भोजन के रूप में मिल रहा है , मैं भी अपने क्षेत्र में दौरे के दौरान देखता हूं कि जो पोषण आहार भोजन और नाश्‍ते के रूप में मिलना चाहिए और वह प्रतिदिन के मीनू के आधार पर नहीं मिल रहा है. इस तरह की शिकायत ग्रामीण जनता की ओर से भी मिली है. साथ ही मुझे आंगनवाड़ी केंद्र  से भी यह जानकारियां  मिली है.  मैंने इसकी शिकायत   जिले के जिलाधिकारी से भी की, मंत्री जी से भी  की और साथ में  इस तरह की जो शिकायत आई है,  वह मैंने मंत्री जी को भी दी है.  मैं मंत्री जी से यह जानना  चाहूंगा कि  ऐसे  16 बिन्दुओं की जो शिकायत  है और साथ ही  जो पर्यवेक्षिका है, श्रीमती चंद्रकाता जैन   एवं  श्री आर्य,  परियोजना अधिकारी,  क्या इनके खिलाफ कोई ठोस कार्यवाही   उनको हटाकर की जायेगी.

                   श्रीमती अर्चना चिटनिस --  अध्यक्ष महोदय, मैं  आपके माध्यम से इस विषय में दो बातें   माननीय सदस्य और सदन को  कहना चाहती हूं कि पर्टिक्यूलरली  आप अपने विधान सभा क्षेत्र  और जिले के बारे में  जो बात कर रहे हैं, आपकी उपस्थिति में उच्च अधिकारी से  जांच कराकर  एक हफ्ते के अंदर  दोषी पाये गये  अधिकारी/ कर्मचारियों के  खिलाफ कार्यवाही करुंगी.  दूसरी  बात में जो कहना  चाह रही हूं कि  यह जो सांझा चूल्हा की व्यवस्था पर  माननीय सदस्य बात  कहना चाह रहे हैं, वह ग्रामीण विकास विभाग  सांझा चूल्हा  का संचालन करता है, स्कूल  शिक्षा और  महिला  एवं बाल  विकास विभाग  को अपनी सर्विसेस देता है. वित्त मंत्री जी हमारे बीच में उपस्थित हैं, मेरी वित्त मंत्री जी से चर्चा हुई है, उनकी उपस्थिति में  तीनों विभागों की  एक बैठक करके  इस व्यवस्था को   सुदृढ़  और  सुव्यवस्थित करने के लिये  अतिशीघ्र  हम  सब मिलकर  प्रयास करेंगे.

                   श्री दीवान  विट्ठल सिंह पटेल -- मंत्री जी, बहुत बहुत धन्यवाद.

                   विभागीय परीक्षाओं के मापदण्‍ड

[सामान्य प्रशासन]

10. ( *क्र. 5566 ) श्री आर.डी. प्रजापति : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                 (क) क्‍या सामान्‍य प्रशासन विभाग द्वारा आयोजित विभागीय परीक्षाओं में अन्‍य विभागों के लिपिक वर्गीय कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं? (ख) म.प्र. शासन की अधिसूचना क्रमांक 2377/ ए-3-दिनांक 17/3/1977 के अनुसार क्‍या अन्‍य विभागों के शासकीय/अर्द्धशासकीय/निगम मण्‍डल/शासन के बोर्ड जैसे मण्‍डी बोर्ड आदि के कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं। (ग) प्रश्नांश (ख) अनुसार यदि हाँ, तो छतरपुर जिले में अन्‍य विभागों के लिपिक वर्गीय कर्मचारियों के आवेदन आमंत्रित क्‍यों नहीं किये जाते? कलेक्‍ट्रेट छतरपुर में विगत वर्ष में उक्‍त विभागीय परीक्षा कब हुई? आवेदन पत्र बुलाये गये तो तिथिवार विगत एक वर्ष की जानकारी देवें। (घ) उक्‍त परीक्षाओं के क्‍या नियम हैं और कब से संचालित नहीं हो रही हैं, अगले सत्र की परीक्षा तिथि व आवेदन करने की तिथि की भी जानकारी देवें।

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) एवं (ख) जी नहीं। (ग) एवं (घ) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) के उत्‍तर के प्रकाश में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

                   श्री आर.डी.प्रजापति --  अध्यक्ष महोदय,   मंत्री जी ने  जो  जवाब दिया है, उससे मैं  पूर्ण रुप  से संतुष्ट हूं.  हमारे मंत्री जी ऊर्जावान  हैं, लेकिन मैं इससे संबंधित एक प्रश्न करना चाहता हूं कि  जो  विधायकों और सांसदों  के पत्रों का जवाब  मुख्यमंत्री जी, मंत्री  गण और यहां के सीएस  एवं पीएस  सब जवाब दे देते हैं, लेकिन  जिले में विशेषकर मेरे जिले में  पत्रों का जवाब  नहीं दिया जाता है.   सामान्य प्रशासन से अभी एक निर्देश 27 फरवरी,2017 को गया है. इसके पहले 2004, 2007,2009 में दो आदेश,2011,2012,2014,2015 एवं 2016  में इतने निर्देश गये हैं और बार बार कहा जाता है कि  हम निलम्बित कर देंगे.  मैं मंत्री जी से एक ही निवेदन करना चाहता हूं कि  अगर मेरे पत्रों का जवाब  नहीं दिया है, तो क्या मंत्री जी उनको निलंबित करेंगे, चाहे भले क्यों न कलेक्टर हो.

                   राज्यमंत्री, सामान्य प्रशासन (श्री लाल सिंह आर्य) --   अध्यक्ष महोदय, प्रश्न कुछ और है और पूरक प्रश्न और कुछ किया जा रहा है.

                   अध्यक्ष महोदय -- आपका यह प्रश्न इससे उद्भूत नहीं होता.

                   श्री आर.डी.प्रजापति --  अध्यक्ष महोदय,    यह प्रश्न सामान्य प्रशासन विभाग का है. मेरा  निवेदन है कि  सामान्य प्रशासन विभाग के  ऊर्जावान मंत्री जी  हैं.  हम यह कह रहे हैं कि  जब आप बार-बार निर्देश दे रहे हैं,  11 बार निर्देश दिया गया है,लेकिन हमारे पत्रों  को टोकनी में डाल दिया जाता है.  एक भी पत्र का जवाब नहीं दिया जाता है.  यह हम लोगों की बहुत प्रतिष्ठा का सवाल है कि यहां से  निर्देश दिये जाते हैं, लेकिन वहां हम लोगों की बात सुनी नहीं जाती है और न ही उत्तर दिया जाता है. 

                   अध्यक्ष महोदय --  यह विषय दूसरा है. 

                   श्री आर.डी.प्रजापति --  अध्यक्ष महोदय,     मेरा व्यक्तिगत निवेदन है कि इस पर मेरे यहां  जरुर कार्यवाही करवायें.

                   अध्यक्ष महोदय -- इस प्रश्न से यह उद्भूत नहीं होता है.

                   श्री बाला बच्चन -- अध्यक्ष महोदय,  सत्ता  पक्ष के विधायकों की यह स्थिति है.  मंत्री जी, विधायकों का सम्मान  करवाइये.  11 बार पत्र लिखा है  और आप देख लीजिये आपके सत्ता पक्ष  के विधायक कह रहे हैं. विधायक जी,  आपका पूर्ण संतुष्टि का  परसेंटेज खत्म हो गया. आपने बोला कि सौ प्रतिशत संतुष्ट हूं. 11 साल से  आपके पत्रों का कलेक्टर जवाब नहीं दे रहे हैं.  मंत्री जी, आप क्या कर रहे हैं और आपकी सरकार क्या कर रही है.

                   श्री आर.डी.प्रजापति --  अध्यक्ष महोदय,    11 साल नहीं, 11  लेटर  सामान्य प्रशासन विभाग से जा चुके हैं. ऐसा नहीं है.

                   अध्यक्ष महोदय -- 11 पत्र बोले हैं, 11 साल नहीं.

                   श्री बाला बच्चन --  अध्यक्ष महोदय, विधायकों की गरिमा का  ध्यान दिलवाइये.

                   श्री आर.डी.प्रजापति --  अध्यक्ष महोदय,   मेरा एक निवेदन है कि  यह जरुर विशेषकर  छतरपुर कलेक्टर  को कह दिया जाये.

                  

                   अशोक नगर जिले में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण

[सामान्य प्रशासन]

11. ( *क्र. 4830 ) श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) 06 दिसम्‍बर 2016 के परि.अता. प्रश्‍न संख्‍या 4 (क्र. 30) एवं प्रश्‍न संख्‍या 5 (क्र. 31) तथा दिनांक 01 अप्रैल 2016 के प्रश्‍न संख्‍या 2 (क्र. 6602) के संदर्भ में बतायें कि इस संबंध में 06 दिसम्‍बर 2016 के बाद आज तक जो कार्यवाही प्रचलन में थी, उसमें क्‍या प्रगति हुई? (ख) पत्रों व शिकायतों का विवरण देते हुये प्रश्‍नवार व पत्रवार शिकायतों की कार्यवाही में जो कार्यवाही प्रचलन में है? उसमें क्‍या कार्यवाही हुई?

               

                श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा --  अध्यक्ष महोदय,  मैं पिछले 3 सालों  से  4 सत्रों  से यह प्रश्न कर रहा हूं ,आप  देख लीजिये, प्रश्न संख्या  और  तारीख दे रखी है  और हमेशा  यह उत्तर आ रहा हूं कि  कार्यवाही प्रचलन में है.  भू-माफिया से जरा सी भी  जमीन  वापस नहीं ली गई है.  इसमें जो पिपरई का उल्लेख है,  पिपरई,हथईखेड़ा, भोसले का बाड़ा  की करोड़ों रुपये  की भूमियां  कब्जे में है और राजस्व मंडल उन पर   स्टे दे देता है.  मेरा मंत्री जी से स्पेसीफिक प्रश्न है कि  यह राजस्व मंडल जो है,  ये जब आपके यहां आलरेडी  थ्री  टियर सिस्टम  है, तहसीलदार नायब तहसीलदार की अपील एसडीओ को, एसडीओ की कलेक्टर को और  कलेक्टर की रेवेन्यू  कमिश्नर को. तो यह तहसीलदार और  नायब  तहसीलदार  के फैसले सीधे राजस्‍व मण्‍डल में क्‍यों जाते हैं ? वहां मैनेज हो जाता है, वहां पैसे दे देते हैं, वहां से स्‍टे प्राप्‍त कर लेते हैं और शासकीय भूमि के विरुद्ध निर्णय प्राप्‍त कर लेते हैं. अगर नहीं है तो क्‍या आप यह प्रावधान करेंगे कि लोग सीधे राजस्‍व मण्‍डल न जा सकें. पहले एस.डी.ओ. को जाएं, कलेक्‍टर को जाएं, रेवेन्‍यू कमिश्‍नर को जाएं. क्‍या आप यह प्रावधान करेंगे ?

          राज्‍यमंत्री, सामान्‍य प्रशासन (श्री लाल सिंह आर्य) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पहले तहसीलदार के न्‍यायालय में निर्णय हुआ है, उसके बाद एस.डी.एम. कार्यालय के न्‍यायालय में निर्णय हुआ है और उसके बाद राजस्‍व मण्‍डल में गया है, लेकिन मैं माननीय सदस्‍य को बताना चाहता हूँ कि आपने गजराम सिंह पुत्र आलोक सिंह के नामान्‍तरण का प्रकरण बताया. यह राजस्‍व मण्‍डल के अध्‍यक्ष महोदय द्वारा पुनरावलोकन में दर्ज कर कार्यवाही अपने संज्ञान में ले ली गई है और इसलिए उसमें और क्‍या सही चीज है ? वह उसके बाद क्‍लीयर हो जायेगा.

          श्री महेन्‍द्र सिंह कालूखेड़ा - क्‍या आप सीधे राजस्‍व मण्‍डल में जाने से रोकेंगे ? कलेक्‍टर और रेवेन्‍यू कमिश्‍नर भी तो ऊपर हैं.   

          श्री लाल सिंह आर्य - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, शासन का नियम है कि राजस्‍व मण्‍डल में निगरानी प्रकरण सीधे किया जा सकता है.

          श्री महेन्‍द्र सिंह कालूखेड़ा - अध्‍यक्ष महोदय, मैं परिवर्तन करने के लिए कह रहा हूँ, इससे भ्रष्‍टाचार बढ़ रहा है. मेरा दूसरा प्रश्‍न है कि आप परिशिष्‍ट '' देखें. परिशिष्‍ट '' जिसमें भूमि सर्वे 552/2 का लेख है, यह भोंसले के बाड़े की करोड़ों रुपयों की भूमि है और जब अशोक नगर जिला, गुना जिले में था तब कलेक्‍टर अशोक नगर में पुलिस की मदद से इस भूमि का कब्‍जा खाली करवा लिया गया था लेकिन जब अशोक नगर नया जिला बना तो वापस उसी आदमी ने कब्‍जा कर लिया और अभी तक वह कब्‍जा खारिज नहीं हुआ है, इसमें कहीं न कहीं अधिकारियों ने मिलकर कब्‍जा करवाया है. यह करोड़ों रुपयों की भूमि है, इस पर भू-माफिया का कब्‍जा है तो क्‍या आप इसको जल्‍दी खाली करवाएंगे ? यह प्रकरण 10 वर्ष से चल रहा है. इसकी समय-सीमा बताएं.

          श्री लाल सिंह आर्य - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह प्रकरण चूँकि मैंने अभी कहा है कि राजस्‍व मण्‍डल के अध्‍यक्ष ने इसमें मामला दर्ज कर, अपने संज्ञान में ले लिया है. जो निर्णय आ जाएगा, हम उस पर कार्यवाही करेंगे.

          श्री महेन्‍द्र सिंह कालूखेड़ा - अध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक प्रश्‍न और है. अभी मैंने भू-माफिया के बारे में किया था, खनन माफिया के बारे में किया था क्‍योंकि इस भूमि पर पलकटोरी में जो खनन हुआ, उसने अवैध खनन किया. जब उन लोगों के वाहन जप्‍त करके ले जा रहे थे तो पुलिस और प्रशासन पर अटैक करके इसी भू-माफिया ने इसी प्रांगण पर यह रखा था. मेरा राशन माफिया के बारे में प्रश्‍न है. आप परिशिष्‍ट का आखिरी, प्रश्‍न संख्‍या 31 में राशन की दुकानों के बारे में है. यह इसलिए गम्‍भीर है.   

          अध्‍यक्ष महोदय - यह प्रश्‍न संख्‍या 11 से कहां उद्भूत हो रहा है.

          श्री महेन्‍द्र सिंह कालूखेड़ा - आप परिशिष्‍ट में देखें. इसमें परिशिष्‍ट में पीछे दे रखा है. श्री राजकुमार सिंह यादव, बीजेपी के एमएलए थे. उन्‍होंने राशन माफियाओं के खिलाफ सन् 2010 में आवाज उठाई थी, उसके बाद 8 वर्ष हो गए हैं, उसी आवाज को 8 वर्ष बाद मैं उठा रहा हूँ और वहां प्रमुख सचिव, खाद्य गये थे. वहां पर कलेक्‍टर का ट्रांसफर पनिशमेंट के कारण हुआ था. वहां पर सुकृत सिंह और चन्‍देल की रिपोर्ट आई लेकिन एक जगदीश कुशवाह नामक आदमी ने 2010 में स्‍टे ले लिया था. आप उसको 8 वर्ष से खाली नहीं करवा पा रहे हैं. वह माफिया है, राशन माफिया का किंग पिन है और उसका प्रभारी मंत्री ने बमौरी में हुआ ट्रांसफर निरस्‍त कर दिया था तो आप ऐसे भू-माफियाओं एवं राशन माफियाओं को संरक्षण दे रहे हैं. परिशिष्‍ट 2 देखिये. इस संबंध में आप कब कार्यवाही करेंगे क्‍योंकि पूरे प्रदेश में मुगावली जिले में करोड़ों का भ्रष्‍टाचार, ब्‍लैक मार्केट में हुआ है. यह आरोप मैंने नहीं बल्कि बीजेपी के एमएलए ने लगाया था. 2010 में ध्‍यानाकर्षण भी लाये थे लेकिन 8 वर्ष तक आप एक भी आदमी को राशन व्‍यवस्‍था से खण्डित नहीं कर पा रहे हैं. वहां अभी भी राशन माफिया काम कर रहा है.

          श्री लाल सिंह आर्य - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप जिन दुकानों के बारे में कह रहे हैं. इन 10 दुकानों के प्रबंधक वगैरह हैं, उनके पास अर्थदण्‍ड और प्रतिभूति राशि राजसात कर ली गई है. राशन दुकानों का प्रकरण को हाई कोर्ट से भी स्‍टे मिला है.

          प्रश्‍न क्रमांक 12 - (अनुपस्थित)

          महिदपुर वि.स. क्षेत्र में प्रदायित अस्‍थायी कनेक्‍शन

[ऊर्जा]

        13. ( *क्र. 5389 ) श्री बहादुर सिंह चौहान : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2016-17 में महिदपुर वि.स. क्षेत्र में कुल कितने अस्‍थायी कनेक्‍शन प्रदान किये गये हैं? वितरण केन्‍द्रवार, ग्रामवार, कृषक संख्‍या सहित बतावें (ख) नवीन ट्रांसफार्मर लगाकर इन्‍हें कब तक स्‍थायी कर दिया जायेगा? (ग) महिदपुर वि.स. क्षेत्र में कितने मजरे टोले अविद्युतीकृत हैं? (घ) इन्‍हें कब तक विद्युतीकृत कर दिया जावेगा?

        ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) महिदपुर विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2016-17 में कुल 3990 अस्‍थायी कृषि पम्‍प कनेक्‍शन प्रदान किये गये हैं, जिसकी वितरण केन्‍द्रवार एवं ग्रामवार संख्‍या की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) महिदपुर विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2016-17 में प्रदाय किये गये कुल 3990 अस्‍थायी कृषि पम्‍प कनेक्‍शनों में से जिन कृषकों द्वारा मुख्‍यमंत्री स्‍थायी कृषि पम्‍प कनेक्‍शन योजना में स्‍थायी कृषि पम्‍प कनेक्‍शन हेतु आवेदन प्रस्‍तुत कर योजना के प्रावधानों के अनुसार राशि जमा करने सहित औपचारिकताएं पूर्ण की जाएंगी, उनके अस्‍थायी पम्‍प कनेक्‍शन तकनीकी रूप से साध्‍य पाये जाने पर स्‍थायी कनेक्‍शन में परिवर्तित किये जाने की कार्यवाही की जा सकेगी। अत: वर्तमान में निश्चित समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। (ग) महिदपुर विधानसभा क्षेत्र में चिन्हित 70 मजरे/टोले अविद्युतीकृत हैं। (घ) महिदपुर विधानसभा क्षेत्र में चिन्हित 70 अविद्युतीकृत मजरों/टोलों में से 22 मजरों/टोलों के विद्युतीकरण का कार्य 12वीं पंचवर्षीय योजना में स्‍वीकृत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में सम्मिलित है। उक्‍त कार्य माह दिसम्‍बर-2017 तक पूर्ण किया जाना संभावित है। शेष 48 मजरों/टोलों के विद्युतीकरण का कार्य दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना के अंतर्गत स्‍वीकृत है, जिसे टर्न-की ठेकेदार एजेंसी से किये गये अनुबंध के अनुसार नवम्‍बर, 2018 तक पूर्ण किया जाना है।

          श्री बहादुर सिंह चौहान - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने प्रश्‍न किया कि मेरे विधानसभा क्षेत्र में, इस वित्‍तीय वर्ष 2016-17 में कितने अस्‍थायी कनेक्‍शन दिए गए हैं ? इस प्रश्‍न के उत्‍तर में आया है कि 3990 कनेक्‍शन अस्‍थायी दिए गए हैं, यह बहुत बड़ी संख्‍या है. यह भी कहा गया है कि इन कनेक्‍शनों को मुख्‍यमंत्री स्‍थायी कृषि पम्‍प कनेक्‍शन योजना के तहत जो साध्‍य होगा उसे स्‍थायी कनेक्‍शन में बदल दिया जाएगा. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से सीधा प्रश्‍न करना चाहता हूं कि यह जो 3990 अस्‍थायी कनेक्‍शन हैं क्‍या आपके विभाग से इसका परीक्षण करवाकर इसी वित्‍तीय वर्ष में अस्‍थायी कनेक्‍शन को स्‍थायी कनेक्‍शन में बदल देंगे? इसमें मैं कहना चाहता हूं कि जो मुख्‍यमंत्री स्‍थायी कृषि पम्‍प कनेक्‍शन योजना है. उसमें 6 महीने के अंदर आवेदन आने के बाद और स्‍वी‍कृति के बाद 6 महीने में उसको स्‍थायी करना अनिवार्य है. वैसे भी यह साध्‍य इसलिए है कि खंभे से अस्‍थायी कनेक्‍शन देने का जो नियम है वह 150 फिट का है. वैसे तो यह साध्‍य है लेकिन फिर भी मैं आपसे आग्रह कर रहा हूं कि इनका परीक्षण करके जो 3990 कनेक्‍शन हैं इनको इसी वित्‍तीय वर्ष में स्‍थायी कनेक्‍शन में कर दिया जाएगा.

          श्री पारस चन्‍द्र जैन-- अध्‍यक्ष महोदय, जहां आवंटित राशि प्रथम चरण में ऐसे कार्य जिनकी लागत दो लाख रुपए से ऊपर होती है वह रह गए हैं. उनको हम शामिल कर लेते हैं, लेकिन जैसा माननीय सदस्‍य कह रहे हैं तो हम इनका परीक्षण करा लेंगे और होगा तो उस काम को हम करवा देंगे.

          श्री बहादुर सिंह चौहान-- अध्‍यक्ष महोदय, अभी पहले प्रश्‍न का उत्‍तर आया है. मेरा दूसरा प्रश्‍न यह है कि मेरे विधान सभा  क्षेत्र में कितने मजरे/टोले हैं जहां पर आज तक बिजली नहीं पहुंची है, विद्युतीकरण नहीं हुआ है. मंत्री जी के विभाग ने स्‍वीकार किया है कि 70 ऐसे मजरे/टोले हैं जहां पर आज तक विद्युतीकरण नहीं किया गया है. इसका उत्‍तर दिया है कि 22 ऐसे मजरे/टोले हैं जिनको राजीव गांधी विद्यु‍तीकरण योजना के अंतर्गत ले लिया गया है और उसी वित्‍तीय वर्ष में 22 मजरे/टोलों को बिजली दे दी जाए. मैं उससे संतुष्‍ट हूं लेकिन 48 ऐसे मजरे/टोले बताएं हैं कि उसको दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना के अंतर्गत लिया गया है और टर्न-की ठेकेदार ऐजेंसी है. उसको वर्ष 2018 तक पूर्ण कर लिया जाएगा. मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहता हूं कि एक मजरे टोले में लगभग 10 से 25 परिवार रहते हैं. मैं चाहता हूं कि यह भी इसी वित्‍तीय वर्ष में दिसम्‍बर 2017 तक पूर्ण कर दें.

          श्री पारस चन्‍द्र जैन-- अध्‍यक्ष महोदय, जून 2017 तक इन्‍हें भी पूर्ण कर दिया जाएगा.

          श्री अमर सिंह यादव-- अध्‍यक्ष महोदय, किसानों के लिए जो स्‍थायी कनेक्‍शन का मामला उठा है

          अध्‍यक्ष महोदय-- यह प्रश्‍न इससे उद्भूत नहीं होता है.

          श्री अमर सिंह यादव- अध्‍यक्ष महोदय, राजगढ़ में भी एक करोड़ 35 लाख रुपए स्‍थाई कनेक्‍शन में जमा किये गये हैं. अस्‍थाई कनेक्‍शन की जो रसीद कटी है, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि राजगढ़ में बड़ी राशि स्‍थायी कनेक्‍शन के रूप में जमा की है तो क्‍या उन्‍हें स्‍थायी कनेक्‍शन की प्राथमिकता दी जाएगी.

          अध्‍यक्ष महोदय-- इससे उद्भूत नहीं होता है.

          श्री अमर सिंह यादव- अध्‍यक्ष महोदय, यह किसानों का मामला है. 1 करोड़ 35 लाख रुपए जमा हुआ है. सालभर से लोग रसीद लेकर घूम रहे हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय--यह अलग जिले का है.

          श्री अमर सिंह यादव- अध्‍यक्ष महोदय 1 करोड़ 35 लाख रुपए का कोई हिसाब नहीं मिल रहा है. अध्‍यक्ष महोदय-- इससे प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता है. इस जिले का होता तो भी कोई बात थी पर यह दूसरे जिले का है.

          ट्रांसफार्मर बदलने की प्रक्रिया

[ऊर्जा]

14. ( *क्र. 4634 ) श्री गोविन्‍द सिंह पटेल : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विभाग द्वारा जले हुये ट्रांसफार्मर के बदलने की क्‍या प्रक्रिया है तथा इस हेतु निर्धारित राशि क्‍या है? क्‍या अपेक्षित राशि जमा न करने पर ट्रांसफार्मर नहीं बदले जाते हैं? निर्धारित शुल्‍क जमा करने के कितने दिनों में ट्रांसफार्मर बदले जाने के नियम हैं? (ख) यदि अपेक्षित राशि से कम राशि जमा है और ट्रांसफार्मर नहीं बदला जा रहा है तो ऐसी स्थिति में किसानों को बिजली उपलब्‍ध कराने की शासन की क्‍या कोई योजना है? यदि हाँ, तो जानकारी उपलब्‍ध करायें।

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जले/खराब ट्रांसफार्मर बदलने हेतु उपभोक्‍ताओं द्वारा शिकायत प्राप्‍त होने पर/अन्‍य किसी स्‍त्रोत से जानकारी प्राप्‍त होने पर क्षेत्रीय लाईनमेन जाकर ट्रांसफार्मर की जाँच करता है एवं ट्रांसफार्मर जलने/खराब होने संबंधी जानकारी वितरण केन्‍द्र प्रभारी/फीडर प्रभारी को उपलब्‍ध करवाता है। संबंधित वितरण केन्‍द्र प्रभारी/फीडर प्रभारी को जानकारी प्राप्‍त होने के पश्‍चात् एस.एम.एस. आदि के माध्‍यम से उच्‍चाधिकारी को जानकारी प्रेषित की जाती है तथा ट्रांसफार्मर बदलने हेतु प्राक्‍कलन बनाकर आवश्‍यक स्‍वीकृति हेतु उच्‍चाधिकारी को प्रेषित किया जाता है। जले/खराब ट्रांसफार्मर बदलने हेतु प्रत्‍येक संचालन/संधारण संभाग में इम्‍प्रेस्‍ट ट्रांसफार्मर उपलब्‍ध कराये गये हैं। सूचना प्राप्‍त होते ही सहायक अभियंता/मेन्‍टेनेन्‍स प्रभारी ट्रांसफार्मर को उपलब्‍धता के अनुसार नियमानुसार निर्धारित समय-सीमा के अन्‍दर ट्रांसफार्मर बदलवाता है। म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा खराब/जले हुये वितरण ट्रांसफार्मरों को बदलने हेतु निम्‍नानुसार समयावधि निर्धारित है :- (i) संभागीय मुख्‍यालयों में 12 घंटे के अन्‍दर। (ii) संभागीय मुख्‍यालयों को छोड़कर शहरी क्षेत्र में 24 घंटे के अन्‍दर। (iii) ग्रामीण क्षेत्रों में सूखे मौसम में 72 घंटों के अन्‍दर तथा मानसून के मौसम में जुलाई से सितम्‍बर तक 7 दिवस के अन्‍दर। फेल/खराब वितरण ट्रांसफार्मरों से संबद्ध उपभोक्‍ताओं पर बकाया राशि होने की स्थिति में जले एवं खराब वितरण ट्रांसफार्मरों से जुड़े 75 प्रतिशत उपभोक्‍ताओं द्वारा भुगतान करने पर अथवा कुल बकाया राशि का 40 प्रतिशत जमा होने के उपरांत इन जले एवं खराब ट्रांसफार्मरों को उक्‍तानुसार निर्धारित समय-सीमा में बदला जाता है। फेल/खराब वितरण ट्रांसफार्मर, जिन पर बकाया राशि नहीं है, उनको बदलने हेतु कोई राशि जमा नहीं कराई जाती है। (ख) वर्तमान में निर्धारित नियमानुसार उपभोक्‍ताओं द्वारा उत्‍तरांश (क) में दर्शाए अनुसार बकाया राशि जमा करने पर जले/खराब ट्रांसफार्मर को बदल कर विद्युत प्रदाय सुचारू किये जाने का प्रावधान है।

          श्री गोविन्‍द सिंह पटेल-- अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न के जवाब में जो जले हुए ट्रांसफार्मर बदलने का जवाब माननीय मंत्री जी ने दिया कि 75 प्रतिशत उपभोक्‍ता या 40 प्रतिशत राशि जमा होने पर जले ट्रांसफार्मर बदले जाते हैं. मेरा मंत्री जी से सिर्फ यह कहना है कि यदि इससे कम प्रतिशत जमा होती है तो जिन किसानों ने पैसा जमा किया है और जो किसान लापरवाह हैं जो पैसा जमा नहीं करते हैं, उनकी सजा पैसा जमा करने वाले किसानों को मिलती है तो क्‍या उन किसानों के लिए कोई ऐसी व्‍यवस्‍था करेंगे कि उनकी बिजली चले. यह कोई व्‍यावहारिक बात नहीं है कि इतने प्रतिशत किसान या इतने प्रतिशत जमा होने पर ट्रांसफार्मर बदले जाएंगे. मेरा मंत्री जी से कहना है कि जिन किसानों के पैसे जमा हैं जो उनकी फसलें बबार्द होती हैं, लागत लगती है. उनकी बिजली की कहीं न कहीं से व्‍यवस्‍था की जाए. मेरे कहने का मतलब यह है कि राशि बकाया रहती है तो उसके पहले वसूली का कोई प्रयास नहीं होता है. जो जमा नहीं कर रहे हैं उनके कनेक्शन काटे जाएं लेकिन जिनके पैसे जमा हैं मंत्री जी उन्हें बिजली देने का वादा करेंगे क्या ?

            श्री पारस चन्द्र जैन--माननीय अध्यक्ष महोदय, इसमें हमने कुछ संशोधन किये हैं. मैंने विधायकों एवं सांसदों को पत्र भी लिखा था. पहले 50 प्रतिशत पर बदलते थे अब 40 प्रतिशत पर बदलना चालू कर दिया. कोई व्यक्ति गांव छोड़कर चला जाए उसे हमने डीपी में एडजस्ट कर दिया है. यह बात निश्चित है जो लोग बिजली का बिल भर देते हैं उनका क्या दोष है, उसके लिए हम कोई न कोई बात करेंगे. परीक्षण कराएंगे कि क्या हो सकता है.

          श्री गोविन्द सिंह पटेल--अध्यक्ष महोदय, मेरा मंत्री महोदय से आपके माध्यम से यही कहना है कि जो किसान पैसा जमा करते हैं उनका क्या दोष है ? जो बिल जमा नहीं करते हैं उनसे वसूली करें. जो किसान बिल जमा कर रहे हैं उन्हें बिजली मिलना चाहिए उनके लिए व्यवस्था करके उन्हें बिजली उपलब्ध कराएं.

          अध्यक्ष महोदय--समाधान हो गया है.

          डॉ. कैलाश जाटव--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह हमारे जिले का मामला है. इसमें कई जगह पर तार नहीं जोड़े गए हैं जिसके कारण मीटर के बिल बढ़ते हैं

          श्री गोविन्द सिंह पटेल--जिनके बिल बकाया हैं आप उनसे वसूली करें लेकिन जिनके बिल जमा हैं उन्हें बिजली मिलना चाहिए.

          अध्यक्ष महोदय--मंत्री जी कह रहे हैं कि उसका रास्ता निकालेंगे. उन्होंने इस विषय का समाधान कर दिया है.

          प्रश्न संख्या-15 (अनुपस्थित)

 

 

 

 

 

          सागर जिलांतर्गत विक्रय पत्र का पंजीयन/रजिस्‍ट्रेशन

[वाणिज्यिक कर]

16. ( *क्र. 4665 ) श्री हर्ष यादव : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सागर नगर में रजिस्‍ट्रार सागर के माह दिसम्‍बर 2016 में कितने विक्रय पत्र पंजीयन किये? खरीददार व विक्रेता के नाम, रकबा, पटवारी हल्‍का, विक्रय मूल्‍य, शासन को स्‍टाम्‍प आदि से आय सहित बताएं? (ख) जनवरी 2017 में 01 जनवरी से 15 जनवरी 2017 तक कुल कितने विक्रय पत्र रजिस्‍टर्ड किये गये? (ग) प्रश्नांश (ख) में उल्‍लेखित समय में सागर के सुभाग्‍योदय डेव्‍हलपर्स नामक क्रेता ने कुल कितनी जमीन, किस कीमत की, किस पटवारी हल्‍का व किस खसरा नंबर की क्रय की है? क्‍या जिला प्रशासन ने जमीन का विक्रय नहीं करने संबंधी आपत्ति की थी? विक्रय नहीं करने संबंधी आपत्ति संबंधी शासन के पत्र का विवरण देवें। (घ) पट्टे/लीज़ की जमीन का विक्रय क्‍यों पंजीकृत किया गया? विक्रय के पूर्व जमीन के असल मालिक की जाँच/जानकारी क्‍यों नहीं की गई? क्‍या सागर की बेशकीमती, बहुउपयोगी, जमीन भूमाफिया को देने हेतु जमीन के असल मालिक की पड़ताल ना कर अवैध विक्रय किया गया? क्‍या इसकी जाँच कराई जाकर दोषी शासकीय सेवकों पर कार्यवाही की जावेगी।

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) उप पंजीयक कार्यालय सागर में दिसम्‍बर, 2016 में नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत 101 विक्रय पत्र पंजीबद्ध किये गये। खरीददार व विक्रेता के नाम रकबा पटवारी हल्‍का, विक्रय मूल्‍य, शासन को स्‍टाम्‍प आदि से आय की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-1 अनुसार है। (ख) जनवरी 2017 में 01 जनवरी से 15 जनवरी तक कुल 137 विक्रय पत्र पंजीबद्ध किये गये। (ग) सुभाग्‍योदय डेव्‍हलपर्स नामक क्रेता द्वारा की गई जमीन, कीमत, पटवारी हल्‍का नं. एवं खसरा नं. की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-2 अनुसार है। कलेक्‍टर (नजूल), जिला सागर द्वारा राजस्‍व मण्‍डल मध्‍यप्रदेश ग्‍वालियर के निगरानी प्रकरण क्रमांक-R-1794-I/16 में पारित आदेश दिनांक 06/06/2016 के विरूद्ध अपील प्रस्‍तुत करने की अनुमति हेतु प्रमुख सचिव, विधि और विधायी कार्य विभाग, मध्‍यप्रदेश भोपाल को लिखे पत्र की प्रतिलिपि पत्र पृ. क्रमांक 4805/री.नजूल/16 सागर, दिनांक 16/06/2016 द्वारा जिला पंजीयक सागर को सूचनार्थ इस निर्देश के साथ प्राप्‍त हुआ कि उक्‍त भूमियों के दस्‍तावेजों का पंजीयन आगामी आदेश तक न किये जावें। शासन से उक्‍त भूमि के विक्रय न किये जाने के संबंध में कोई आदेश प्राप्‍त नहीं हुआ। (घ) भूमि विक्रय संबंधी कलेक्‍टर (नजूल), जिला सागर द्वारा नजूल प्रकरण 21अ/20 (4) वर्ष 2014-15 में पारित आदेश दिनांक 25/05/2016 के विरूद्ध माननीय राजस्‍व मण्‍डल ग्‍वालियर द्वारा निगरानी प्रकरण क्रमांक 1794-1/10 में पारित आदेश दिनांक 06/06/2016 तथा पुनर्विलोकन आवेदन प्रकरण क्रमांक 2269/2016 में पारित आदेश दिनांक 23/09/2016 के अनुसार तथा माननीय उच्‍च न्‍यायालय जबलपुर द्वारा डब्‍ल्‍यू.पी.नं. 10493 में पारित आदेश दिनांक 01/12/2016 के आदेश के विरूद्ध किसी सक्षम न्‍यायालय के स्‍टे न होने की स्थिति में उप पंजीयक द्वारा पंजीयन अधिनियम के अंतर्गत प्रस्‍तुत विक्रय पत्र का पंजीयन नियमानुसार पंजीबद्ध किया गया। अत: कार्यवाही का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

          श्री हर्ष यादव--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहता हूँ बहुत गंभीर मामला है, बहुत विचारणीय मामला है. माननीय मंत्री जी ने जो जवाब दिया है उससे मैं पूरी तरह असंतुष्ट हूँ. चूंकि यह जनहित का मामला है, सागर का एक बहुत बड़ा मामला है. नजूल की भूमि की रजिस्ट्री हो जाना, वह भी कम मूल्य पर जबकि मध्यप्रदेश सरकार के वर्तमान में जो कलेक्टर वहां पदस्थ हैं उन्होंने मूल्यांकन कराया था वह 350 करोड़ रुपए की भूमि है. उसमें रजिस्ट्री शुल्क बहुत कम लिया गया है. मंत्री जी का जवाब बहुत भ्रामक है. पिछली बार मैंने चर्चा की थी कि एम.के. सिंह के द्वारा जो स्वीकृति दी गई उनको उसका अधिकार नहीं था कलेक्टर के आदेश के खिलाफ कमिश्नर को सुनने का अधिकार है, कमिश्नर के बाद मध्यप्रदेश सरकार को सुनने का अधिकार है. उनको आदेश का पालन करने का अधिकार ही नहीं था उसके संदर्भ में रजिस्ट्रार द्वारा जो रजिस्ट्री की गई है वह शून्य घोषित की जाए. उसका कारण भी है क्योंकि दिनांक 6.6.2016 के आदेश के विरुद्ध कलेक्टर ने दिनांक 16.6.2016 को प्रमुख सचिव, विधि विधायी विभाग को पत्र लिखा है उसकी प्रति पंजीयक को भी भेजी गई है कि इसकी कोई रजिस्ट्री न की जाए. उसके बाद रजिस्ट्री की गई है, यह बहुत गंभीर मामला है. करोड़ों रुपयों के भ्रष्टाचार का मामला है, रसूखदार लोगों से जुड़ा हुआ मामला है, राजनीतिक दलों से जुड़ा हुआ मामला है. मेरा प्रश्न यह है कि क्या यह रजिस्ट्री शून्य की जाएगी ? जिस पंजीयक ने रजिस्ट्री की है क्या उसके खिलाफ दण्डात्मक कार्यवाही की जाएगी ? क्या लोकायुक्त के द्वारा जाँच कराई जाएगी ?

          श्री जयंत मलैया--जी नहीं.

          श्री हर्ष यादव--माननीय अध्यक्ष महोदय,(XXX).

          अध्यक्ष महोदय--इस तरह आप आरोप नहीं लगा सकते हैं.

          संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र)--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह आपत्तिजनक है इसको विलोपित कराएं.

          अध्यक्ष महोदय--इसको कार्यवाही से निकाल दें.

          श्री जयंत मलैया--अध्यक्ष महोदय, इस तरीके से बात करना मैं समझता हूँ ठीक नहीं है, अगर आपको लगता है कि कोई है तो उसका नाम लेकर आप बात करिए.

          श्री हर्ष यादव--नाम भी लेंगे.

          श्री जयंत मलैया--अभी लो.

          श्री हर्ष यादव--माननीय अध्यक्ष महोदय, पहले तो मेरी मांग है कि यह रजिस्ट्री शून्य घोषित की जाए, रजिस्ट्रार के खिलाफ कार्यवाही होना चाहिए. मैं पटल पर कुछ कागज प्रस्तुत करने के लिए भी तैयार हूं. यह बहुत गंभीर मामला है. यदि मंत्री जी उत्तेजित हो रहे हैं तो इस मामले में कहीं-न-कहीं इनकी पीड़ा है.

          अध्यक्ष महोदय--आप भाषण दे रहे हैं प्रश्न नहीं कर रहे हैं. इस तरह से आरोप नहीं लगा सकते हैं.

          श्री हर्ष यादव--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं संतुष्ट नहीं हूँ.

          डॉ. गोविन्द सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूँ कि जो पंजीयन हुआ है उसकी कलेक्टर के द्वारा गाइड लाइन क्या थी. क्या गाइड लाइन से काफी कम मूल्य पर रजिस्ट्री हुई है. वहां की क्या गाइड लाइन थी वह बता दें. कलेक्टर ने विधि विभाग के निर्देश का उल्लेख करते हुए आदेश दिए थे कि इसका पंजीयन न किया जाय तो कलेक्टर के आदेश के बाद भी पंजीयन करने का कारण भी बताएं.

          वित्‍त मंत्री (श्री जयंत मलैया)-  अध्‍यक्ष महोदय, मैं उन सभी सदस्‍यों का स्‍वागत करता हूं जो इस संबंध में बात करना चाहते हैं, परंतु वे एक-एक करके बात करें. जहां तक दस्‍तावेजों के कम बाजार मूल्‍य पर प्रस्‍तुत किए जाने का विषय है, तो यह सही नहीं है. मैं बताना चाहता हूं कि उप पंजीयक के समक्ष प्रस्‍तुत दस्‍तावेज 35 करोड़ 29 लाख 19 हजार रूपये के हैं जबकि कम्‍प्‍यूटर सर्वर द्वारा गाइड लाईन से की गई गणना के अनुसार संपत्ति का बाजार मूल्‍य 33 करोड़ 43 लाख 56 हजार रूपये होता है. चूंकि संपत्ति के बाजार मूल्‍य से प्रतिफल की राशि अधिक थी, अत: प्रतिफल की राशि 35 करोड़ 29 लाख 19 हजार रूपये पर स्‍टाम्‍प शुल्‍क 3 करोड़ एक तथा पंजीयन शुल्‍क 28 लाख 23 हजार 852 रूपये वसूल कर दस्‍तावेज पंजीबद्ध किए गए.

          श्री हर्ष यादव-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि नजूल की जमीन की, एकड़ के हिसाब से रजिस्‍ट्री नहीं होती है. नजूल की जमीन का रेट स्‍कवेयर फीट के हिसाब से तय किया जाता है.

          डॉ. गोविंद सिंह-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें बहुत बड़ा घोटाला हुआ है.....(व्‍यवधान)....

          अध्‍यक्ष महोदय-  हर्ष जी, आपके प्रश्‍न का उत्‍तर आ गया है. बाकी सभी लोग बैठ जायें. कोई खड़ा नहीं होगा. हर्ष यादव जी, आप सिर्फ एक प्‍वाइंटेड प्रश्‍न पूछिये. भाषण मत दीजिएगा. 

          श्री हर्ष यादव-  अध्‍यक्ष महोदय, मैं बताना चाहता हूं कि नजूल की जमीन का मूल्‍यांकन स्‍कवेयर फीट के हिसाब से होता है जबकि सरकार ने उस जमीन का मूल्‍यांकन एकड़ के हिसाब से किया है. इससे सरकार को राजस्‍व की हानि हुई है. जब नजूल की जमीन का रेट स्‍कवेयर फीट के हिसाब से तय होता है और इस हिसाब से कलेक्‍टर ने जो मूल्‍यांकन कराया है, वह साढ़े तीन सौ करोड़ का है. फिर जमीन 35 करोड़ में कैसे बिक गई ?

            श्री जयंत मलैया-  अध्‍यक्ष महोदय, मैं बताना चाहता हूं कि जिस भूमि का पंजीयन हुआ है, जिसके बारे में माननीय सदस्‍य बता रहे हैं कि वह नजूल की भूमि है, यह असल में विक्रेता द्वारा दिनांक 9.1.2016 को प्रस्‍तुत विक्रय पत्र में विक्रेता अब्‍दुल कादिर एवं अन्‍य 20 द्वारा विक्रय पत्र में भू-स्‍वामी हक, जिसका भू-अधिकार पुस्तिका खाता नंबर 803, क्रमांक एल.एफ. 2 लाख 27 हजार 734 तथा पटवारी हलका नंबर 66 ग्राम करेला, पटवारी हलका नंबर 67 ग्राम बावनखेड़ी, भू-अधिकार पत्र पुस्तिका 44 हजार 639 था. खसरा वर्ष 2016-17 जिसमें भूमि स्‍वामी हक की भूमि 11.20 हेक्‍टेयर दर्ज है, विक्रय पत्र के साथ प्रस्‍तुत थे. 

          अध्‍यक्ष महोदय-  इस संबंध में अब किसी का कुछ नहीं लिखा जाएगा. ....(व्‍यवधान)....

          श्री बाला बच्‍चन- (XXX)

          श्री हर्ष यादव-  (XXX)

 

11.53 बजे                                       बहिर्गमन

       श्री बाला बच्‍चन के नेतृत्‍व में इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यों का सदन से बहिर्गमन

          श्री बाला बच्‍चन-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम शासन के जवाब से असंतुष्‍ट होकर सदन से बहिर्गमन करते हैं.

(श्री बाला बच्‍चन के नेतृत्‍व में इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यों द्वारा शासन के उत्‍तर से असंतुष्‍ट होकर नारे लगाते हुए सदन से बहिर्गमन किया गया)  

..........................................................................................................

(XXX)-  आदेशानुसार रिकॉर्ड नहीं किया गया.

 

11.54 बजे                     तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर (क्रमश:)

नार्मल डेवलपमेंट योजना का क्रियान्‍वयन

[ऊर्जा]

17. ( *क्र. 5606 ) श्री मुकेश पण्‍ड्या : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म.प्र.प.क्षे.वि.वि.कं.लि. इन्‍दौर के अन्‍तर्गत नार्मल डेवलपमेंट योजना (एन.डी. योजना) में किस प्रकार के कार्य किये जाते हैं? (ख) उज्‍जैन जिले में वर्ष 2015-16, 2016-17 में जनवरी, 2017 अंत तक नार्मल डेवलपमेंट योजना में कितने प्राक्‍कलन स्‍वीकृत किये गये हैं, उनमें से कितने कार्य पूर्ण किये जा चुके हैं? संख्‍या बतावें कार्य पूर्ण नहीं होने के प्रमुख कारण क्‍या हैं? (ग) क्या संबंधित अधिकारी के द्वारा कार्य में लापरवाही करने के कारण इस योजना का लाभ पात्र व्यक्तियों को नहीं मिल पाया और ऐसे अधिकारी के खिलाफ क्या कार्यवाही की जायेगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) म.प्र. पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड इन्‍दौर के अन्‍तर्गत नार्मल डेवलपमेंट योजना में घरेलू श्रेणी के आवेदकों/उपभोक्‍ताओं (उन आवेदकों/उपभोक्‍ताओं को छोड़कर जो बहु मंजिला काम्‍प्‍लेक्‍स अथवा आवासीय कॉलोनियों में अवस्थित है) एवं गैर-घरेलू अथवा औद्योगिक श्रेणी के आवेदकों/उपभोक्‍ता के नवीन कनेक्‍शनों अथवा भार वृद्धि के प्रकरणों में सर्वे के अनुसारतकनीकी साध्‍यता होने पर 11 के.व्‍ही. लाईननवीन वितरण ट्रांसफार्मर स्‍थापित करने तथा आवश्‍यक होने पर वितरण ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि जैसे कार्य किये जाते हैं तथा इनकी लागत वितरण कंपनी द्वारा वहन की जाती है। निम्‍नदाब लाईन की आवश्‍यकता होने पर उपभोक्‍ता द्वारा निम्‍नदाब लाईन की लागत वहन की जाती है। (ख) उज्‍जैन जिले में वर्ष 2015-16 में नार्मल डेवलपमेंट योजना में 74 प्राक्‍कलन स्‍वीकृत किये गये व सभी कार्य पूर्ण हो गये हैं। वर्ष 2016-17 में जनवरी-2017 अंत तक नार्मल डेवलपमेंट योजना में 88 प्राक्‍कलन स्‍वीकृत किये गये हैंजिनमें से 84 कार्य पूर्ण किये जा चुके हैं तथा शेष 4 कार्य वर्तमान में प्रगति पर हैं। नार्मल डेवलपमेंट योजना में कार्य वितरण कंपनी द्वारा विभागीय तौर पर सम्‍पादित कराये जाते हैं तथा कतिपय अवसरों पर उपयोग होने वाली विद्युत सामग्री एवं अन्‍य संसाधनों की तात्‍कालिक अनुपलब्‍धता के कारण कार्य पूर्णता में समय लगता है। प्रश्‍नाधीन शेष 4 कार्यों हेतु कार्यादेश जनवरी 2017 में ही निर्माण संभाग उज्‍जैन को जारी किये गये हैं। (ग) प्रश्‍नाधीन योजना में पात्र सभी व्‍यक्तियों को योजना का लाभ दिया जा रहा है। अत: किसी के विरूद्ध कार्यवाही करने का प्रश्‍न नहीं उठता।

          श्री मुकेश पण्‍ड्या-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में नार्मल डेवलपमेंट योजना के अंतर्गत उज्‍जैन जिले में वर्ष 2015-16 और 2016-17 में कुल 88 एवं 74 प्राक्‍कलन के संबंध में जानकारी दी गई है. मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि इसमें से कुल कितने लोगों के आवेदन इस सुविधा को प्राप्‍त करने के लिए आपके पास आये थे. इसके साथ ही मैं यह भी जानना चाहता हूं कि नार्मल डेवलपमेंट योजना मध्‍यप्रदेश में कब से लागू की गई है ? यह सुविधा किन-किन लोगों को दी जा रही है.

          श्री पारस चन्‍द्र जैन-  अध्‍यक्ष महोदय, मैंने माननीय सदस्‍य को उनके प्रश्‍न के उत्‍तर में ही बता दिया है कि 74 स्‍वीकृत प्राक्‍कलनों में से सभी के कार्य पूर्ण हो गए हैं और 88 स्‍वीकृत प्राक्‍कलनों में से 84 प्राक्‍कलनों के कार्य पूर्ण कर चुके हैं. शेष के कार्य भी हम अतिशीघ्र पूर्ण कर लेंगे.

          श्री मुकेश पण्‍ड्या-  मैं जानना चाहता हूं कि कुल कितने आवेदन आपके पास प्राप्‍त हुए थे ?

          श्री पारस चन्‍द्र जैन-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सदस्‍य को जानकारी दे दूंगा कि कुल कितने आवेदन प्राप्‍त हुए थे.

          श्री मुकेश पण्‍ड्या-  इसके साथ ही मैं यह भी जानना चाहता हूं कि मध्‍यप्रदेश में यह योजना कब से प्रभावित है ?

           श्री पारस चन्‍द्र जैन-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस प्रकार की योजना है लेकिन इसे कहीं भी लेकर इसके काम किए जाते हैं.

          श्री मुकेश पण्‍ड्या-  मध्‍यप्रदेश में यह योजना कब से प्रभावित है, मैं यह जानना चाहता हूं.

          प्रश्‍न क्रमांक 18-  (अनुपस्थित)

          प्रश्‍न क्रमांक 19- (अनुपस्थित)

अध्‍यापक संवर्ग की स्‍थानान्‍तरण्‍ा नीति

[सामान्य प्रशासन]

20. ( *क्र. 5457 ) श्री अमर सिंह यादव : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्‍यप्रदेश्‍ा में शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के स्‍थानान्‍तरण के शासन के क्‍या नियम हैं? निर्देश की प्रति उपलब्‍ध करावें (ख) क्‍या शासन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को एक ही स्‍थान पर 3 वर्ष से अधिक अवधि हो जाने पर स्‍थानान्‍तरण के निर्देश हैं? यदि हाँ, तो प्रति उपलब्‍ध करावें? (ग) क्‍या वर्ष 2016 में शासन ने स्‍कूल शिक्षा विभाग एवं पुलिस विभाग को छोड़कर जिले में अथवा जिले के बाहर स्‍थानान्‍तरण किये जाने के निर्देश दिये थे? यदि हाँ, तो उक्‍त विभाग को स्‍थानान्‍तरण से छूट दिये जाने का क्‍या कारण रहा है? (घ) क्‍या शासन स्‍कूल शिक्षा विभाग के अध्‍यापक संवर्ग के अध्‍यापकों के स्‍थानान्‍तरण्‍ा भी अन्‍य शिक्षकों की भांति करने की नीति बना रहा है? यदि हाँ, तो कब तक और यदि नहीं, तो अध्‍यापक संवर्ग के अन्‍य शिक्षकों की भांति स्‍थानान्‍तरण नीति नहीं बनाये जाने का क्‍या कारण है, जबकि अध्‍यापक संवर्ग को भी अन्‍य शिक्षकों के समान छठवां वेतनमान दिया गया है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) राज्‍य एवं जिला स्‍तर पर अधिकारियों/कर्मचारियों के स्‍थानांतरण के लिए स्‍थानांतरण नीति निर्धारित है। जिसकी प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' एवं '' अनुसार है। (ख) स्‍थानांतरण नीति की कंडिका 8.7 के प्रावधान अनुसार। प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र  '' अनुसार है। (ग) जी हाँ। प्रशासकीय व्‍यवस्‍था को दृष्टिगत रखते हुये उक्‍त विभागों के लिये पृथक नीति निर्धारित करने का प्रावधान है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) अध्‍यापक संवर्ग में स्‍थानांतरण का कोई प्रावधान नहीं है, अपितु अन्‍तर्निकाय ऑनलाईन संविलियन का प्रावधान है। अध्‍यापक संवर्ग स्‍थानीय निकाय के अन्‍तर्गत पंचायत/नगरीय निकाय के कर्मचारी हैं। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

            श्री अमर सिंह यादव--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने आपके माध्यम से शिक्षा विभाग से,  शिक्षा मंत्री महोदय से,  निवेदन किया था कि...

          अध्यक्ष महोदय--  आपका प्रश्न जो है मुख्यमंत्री जी से है, उसका उत्तर लाल सिंह आर्य जी देंगे.

          श्री अमर सिंह यादव--  जी हाँ, अध्यक्ष महोदय, मुख्यमंत्री महोदय से ही है. मगर मंत्री जी जवाब दे रहे हैं इसलिए मैं उनका कह रहा हूँ. अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री महोदय और माननीय मुख्यमंत्री महोदय को, वर्तमान में महिलाओं और अध्यापकों को जो  छठा वेतनमान दिया है, उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद देता हूँ और स्थानांतरण एवं संविलयन की जो नीति बनाई है, उसके लिए भी धन्यवाद देता हूँ. माननीय मंत्री महोदय, माननीय मुख्यमंत्री महोदय, प्रदेश में स्कूल शिक्षकों की बहुत कमी है, विशेष कर शहरी क्षेत्र में....

          अध्यक्ष महोदय--  यादव जी, कृपया प्रश्न करें.

          श्री अमर सिंह यादव--  अतिशेष शिक्षकों की जो नीति है, जो लंबे समय से एक ही स्थान पर रहते हैं और दूरदराज के स्कूल खाली रहते हैं उसके कारण बड़ी परेशानी है और ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षकों की कमी है और मेरे राजगढ़ विधान सभा क्षेत्र में दुर्गपुरा, डाबली कला, बादरी, खाताखेड़ी और परसपुरा ऐसे हैं जहाँ एक भी शिक्षक नहीं है. मैं माननीय मंत्री महोदय और माननीय मुख्यमंत्री जी से निवेदन करूँगा कि जो अध्यापक और  प्रशासनिक स्थानांतरण की जो नीति बनाई है, उनके लिए भी  जो नीति संविलियन की बनाई गई है, वैसी अध्यापकों और प्रशासनिक स्थानांतरण नीति बनाएँगे?

          अध्यक्ष महोदय--  उनका कहना यह है कि जो नीति सामान्य है, क्या वह शिक्षा विभाग में भी लागू करेंगे? जो सामान्य स्थानांतरण की है,  आपका यही प्रश्न है ना?

          श्री अमर सिंह यादव--  जी हाँ, यही है. अध्यक्ष महोदय,  शिक्षक लंबे समय से शहरी क्षेत्र में जमे हैं.

          राज्य मंत्री, सामान्य प्रशासन (श्री लाल सिंह आर्य)--  माननीय अध्यक्ष महोदय, शासन ने विकलांग और महिलाओं के लिए पहले ही स्थानांतरण के लिए प्रक्रिया रखी है. अध्यक्ष महोदय, सामान्य प्रशासन विभाग स्थानांतरण की नीति बनाता है, लेकिन इसका निर्णय शिक्षा विभाग को ही कहीं न कहीं लेना पड़ता है, लेकिन मुझे ऐसी जानकारी है कि शिक्षा विभाग ने भी स्थानांतरण की नीति अब भविष्य के लिए बना ली है.

          अध्यक्ष महोदय--  शिक्षा विभाग में नीति बन गई है.

          श्री अमर सिंह यादव--  अध्यक्ष महोदय, नहीं, नहीं, अध्यापकों और प्रशासनिक स्थानांतरण नीति की बात कर रहा हूँ. शिक्षक लंबे समय से जमे हुए हैं. अतिशेष शिक्षकों का स्थानांतरण हो जाएगा तो उससे दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षक....

          श्री मुरलीधर पाटीदार--  अध्यक्ष महोदय, मैं भी पूछना चाहता हूँ...

          अध्यक्ष महोदय--  पाटीदार जी, शिक्षा विभाग का मत पूछना.

          श्री मुरलीधर पाटीदार--  नहीं, यही प्रश्न है. माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा आग्रह सिर्फ यह है कि एक निकाय से दूसरे निकाय में स्थानांतरण के बजाय संविलयन की नीति बनाई. अध्यक्ष महोदय, निकाय के भीतर ही उनका स्थानांतरण होना चाहिए.

          अध्यक्ष महोदय--  यह विषय उनका नहीं है.

          श्री मुरलीधर पाटीदार--  अध्यक्ष महोदय, यही है.  उदाहरण के लिए कोई व्यक्ति मान लो आष्टा में सर्विस कर रहा है, सीहोर जिला पंचायत से पोस्टिंग हुई, वह बुधनी जाना चाहता है, तो उसके लिए 21 साल से कोई नीति ही नहीं है. यह उनका प्रश्न है और यही मेरा भी प्रश्न है.

          श्री लाल सिंह आर्य--  अध्यक्ष महोदय, नगरीय निकाय में भर्ती प्रक्रिया और उसके नियम अलग हैं, पंचायत विभाग में उसकी भर्ती प्रक्रिया, नियम अलग हैं, वे विभाग अगर बनाना चाहते हों तो स्वतंत्र हैं.

 

 

रीवा जिले में कुपोषण की रोकथाम

[महिला एवं बाल विकास]

21. ( *क्र. 3488 ) श्री सुखेन्‍द्र सिंह : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) रीवा जिले में बच्‍चों के कुपोषण की रोकथाम हेतु सुपोषण अभियान, अटल बाल पालक मिशन, ब्‍लॉक वार, स्‍नेह सरोकार, कुपोषित बच्‍चों को गोद लेने की परम्‍परा आदि का अभियान चलाया जा रहा है? यदि हाँ, तो अक्‍टूबर 2016 की सर्वे रिपोर्ट में 36 हजार बच्‍चे कुपोषण की चपेट में पाये गये, जिनकी संख्‍या 2017 में बढ़कर लगभग 37 हजार हो गयी है? (ख) प्रश्नांश (क) के प्रकाश में इसकी रोकथाम हेतु क्‍या जिले में 15 परियोजनाएं 3300 से ज्‍यादा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, पोषण पुनर्वास केन्‍द्र में न्‍यूट्रीशन स्‍टॉक, नर्स और डॉक्‍टर पदस्‍थ हैं? परियोजना अधिकारी मौजूद हैं एवं कुपोषित बच्‍चों को दिया जाने वाला पोषण आहार का मीनू और भर्ती के लिये एन.आर.सी. तय है? (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) के प्रकाश में क्‍या प्रश्‍न दिनांक तक 1 वर्ष में 15 से ज्‍यादा बच्‍चों की मौत हो चुकी है एवं 33 हजार बच्‍चे मध्‍यम कुपोषण की श्रेणी में एवं लगभग 4 हजार बच्‍चे अति कुपोषण की श्रेणी में हैं? यदि हाँ, तो पोषण पुनर्वास केन्‍द्र के आंकड़े बताते हैं कि 1 वर्ष में महज 2800 बच्‍चे ही केन्‍द्र में पहुंच सके हैं? (घ) प्रश्नांश (क) (ख) (ग) के प्रकाश में सरकार 1 कुपोषित बच्‍चे पर करीब 2 हजार रूपये खर्च करती है, जिसमें एन.आर.सी. में पोषण आहर, इलाज और भोजन का खर्चा जुड़ा है, जब कि माँ को भी प्रतिदिन भोजन एवं सौ रूपये दिये जाते हैं? यदि हाँ, तो उपरोक्‍त के बावजूद हर माह कुपोषण का आंकड़ा घटने की जगह बढ़ता जा रहा है, इन सब के लिये किसे जिम्‍मेदार माना गया है? अब तक कितनों के वि‍रूद्ध कितनी कार्यवाही की गई? क्‍या शासन द्वारा राशि उपलब्‍ध नहीं कराई जा रही है? की जावेगी तो कब तक?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) जी हाँ। माह-अक्टूबर 2016 एवं जनवरी 2017 में कुपोषित बच्चों की संख्या निम्नानुसार है :- 

 

वर्ष

कुपोषित बच्चों की संख्या

अक्टूबर 2016

36840

जनवरी 2017

36314


(
ख) जी हाँ, रीवा जिले में 09 पोषण पुनर्वास केन्द्र संचालित हैं, जिसमें न्यूट्रीशन स्टॉक, नर्स एवं डॉक्टर पदस्थ हैं। चिन्हित गंभीर कुपोषित बच्चों को संचालित केन्द्रों में भर्ती किया जाता है व निर्धारित मानक अनुसार पोषण आहार दिया जाता है। (ग) पोषण पुनर्वास केन्द्रों में कुपोषण से मृत्यु की संख्या निरंक है। माह जनवरी 2017 में मध्यम कम वजन के 32746 तथा अतिकम वजन के 3568 बच्चे कुपोषण की श्रेणी में हैं। अतिकम वजन के सभी बच्चे पोषण पुनर्वास केन्द्र में भर्ती हेतु पात्र नहीं होते हैं। पोषण पुनर्वास केन्द्र के मापदण्डों अनुसार अतिकम वजन के बच्चों का परीक्षण किया जाकर, उन्हें पात्र पाये जाने पर पोषण पुनर्वास केन्द्र में भर्ती कराया जाता है। भर्ती कराने हेतु बच्चों के अभिभावकों की सहमति भी आवश्यक होती है। वित्तीय वर्ष 2016-17 में माह जनवरी तक 1865 बच्चे इन पोषण पुनर्वास केन्द्रों में भर्ती किए गए हैं। (घ) पोषण पुनर्वास केन्द्र में भर्ती के दौरान राशि रूपये 2580/- प्रति बच्चे के मान से व्यय की जाती है, जिसमें भर्ती बच्चे की माता को राशि रू. 120/- प्रतिदिन मजदूरी क्षतिपूर्ति भत्ते के रूप में दी जाती है। शासन के द्वारा कुपोषण प्रबंधन पर निरंतर कार्य किया जा रहा है, कुपोषण में कमी की स्थिति प्रश्‍नांश () के उत्तर में परिलक्षित है। कुपोषण हेतु कई कारक जिम्मेदार होते हैं यथा दैनिक भोजन में पर्याप्त पोषण तत्वों का अभाव, स्वास्थ्य सुविधाओं की अनुपलब्धता/पहुंच, आर्थिक संरचना, संसाधन की कमी, अनुचित आहार-व्यवहार, बीमारियां, परिवार में सदस्यों की संख्या, रोजगार की कमी, सामाजिक कुरीतियां, शिक्षा का अभाव आदि। गंभीर कुपोषित बच्चों की रोग निरोधक क्षमता कम होने से अन्य बीमारियों का उन पर तुलनात्मक रूप से ज्यादा प्रभाव पड़ता है। जन सामान्य द्वारा पोषण विविधता का उपयोग न करना, स्वच्छता एवं व्यवहार परिवर्तन में कम रूचि जैसे अन्य कारक भी कुपोषण की समस्या बने रहने के प्रमुख कारण हैं, जिसके लिए किसी एक व्यक्ति को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। अतः कार्यवाही का प्रश्‍न ही नहीं उठता है।

          श्री सुखेन्द्र सिंह--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने प्रश्नांश ग में पूछा था कि प्रश्न दिनाँक तक 1 वर्ष में 15 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है. माननीय मंत्री जी ने उत्तर दिया है कि पोषण पुनर्वास केन्द्रों में कुपोषण से मृत्यु संख्या निरंक है, यह गलत जानकारी दी गई है. जब आपके पोषण पुनर्वास केन्द्र में बच्चे भर्ती ही नहीं होंगे तो मृत्यु संख्या निरंक रहेगी. मैंने पूछा था कि आप सब कुछ खर्च कर रहे हैं फिर भी कुपोषण बढ़ रहा है. 1 वर्ष में 15 बच्चों की मौत हो चुकी है. यह मैं नहीं कह रहा हूँ, यह स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट भी कह रही है. कुपोषण बाल मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है.

          अध्यक्ष महोदय--  सुखेन्द्र सिंह जी, कृपया सीधा प्रश्न करें.

          श्री सुखेन्द्र सिंह--  अध्यक्ष महोदय, मेरा कहना यह है कि मध्यप्रदेश कुपोषण में नंबर वन है और हमारा रीवा जिला तो पूरे प्रदेश में नंबर वन होता जा रहा है, तो इसके लिए सरकार चिन्तित है कि नहीं चिन्तित है?

            श्रीमती अर्चना चिटनिस--  माननीय अध्यक्ष महोदय, सरकार न केवल चिंतित है बल्कि सरकार बहुत कंसंर्नड है और बहुत सघन मॉनिटरिंग के साथ अपनी सर्विसेस को लगातार हम बेहतर बना रहे हैं.

          श्री सुखेन्द्र सिंह--  अध्यक्ष महोदय, इसके बावजूद यह दशा है कि रीवा जिला कुपोषण के घेरे में आ गया.

          श्रीमती अर्चना चिटनिस--  अध्यक्ष महोदय, कई सारी जानकारियाँ, जो प्रश्न में आपने दीं, मैंने अपने उत्तर में बताया है कि माननीय सदस्य को जो जानकारियाँ प्राप्त हैं. उसमें बहुत जगह सत्‍यता नहीं है बहुत जगह सत्‍यता है भी, पर आपकी जो चिन्‍ता है कुपोषण के प्रति, मैं आपकी उस चिन्‍ता का, आपके कंसर्न का सम्‍मान करती हॅूं और आपके अपने पर्टिक्‍यूलर जिले के लिए कुछ विशेष सुझाव होंगे या कुछ विशेष इनपुट देंगे तो मैं उसको लागू करूंगी.

          अध्‍यक्ष महोदय :- प्रश्‍नकाल समाप्‍त.

 

 

 

( प्रश्‍नकाल समाप्‍त )

 

 

 

 

 

 

 

 

12.01 बजे                    नियम 267-क के अधीन विषय

 

 

 

 

12.02 बजे                           शून्‍यकाल में उल्‍लेख

 

(1)     श्री कमलेश्‍वर पटेल (सिहावल) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे विधानसभा क्षेत्र अन्‍तर्गत अमिलिया, डीसी अन्‍तर्गत 5-6 गांवों से ज्‍यादा की लाईट बंद कर दी गई है. हमारी शून्‍यकाल की सूचना इस प्रकार है कि दसवीं, बारहवीं बोर्ड की परीक्षाएं चल रही हैं. कई अनुसूचित जाति, जनजाति बस्तियों की लाइटें बंद कर दी गई हैं. जैसे ग्राम अमिलिया, गेरूआ, मुरदाडी.

          अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, इतने लंबे नहीं पढ़ने देंगे. आपने सूचना दे दी है, हो गया. ब्‍लॉक का नाम बता देते, तो ठीक था. आप तो गांव बताने लगे.

          श्री कमलेश्‍वर पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सिहावल विधानसभा क्षेत्र अन्‍तर्गत अमिलिया, डीसी की कई ग्रामों की लाइटें बंद कर दी गई हैं.

 

(2)     डॉ. गोविन्‍द सिंह (लहार) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पूरे मध्‍यप्रदेश में कक्षा नौवीं, ग्‍यारहवीं, की परीक्षाएं, जो शासकीय स्‍कूलों में स्‍थानीय स्‍तर पर होती हैं परन्‍तु पेपर कुछ वर्षों से  माध्‍यमिक शिक्षा मंडल से भेजे जाते हैं. वे पेपर यहां से जाकर अमरपाटन, सतना में लीक हो गए और पूरे मध्‍यप्रदेश के करीब लाखों विद्यार्थियों की परीक्षाएं दोबारा कराने का निर्णय हुआ है. इससे तमाम विद्यार्थियों को और पालकों को आर्थिक और मानसिक क्षति हुई है और परेशानी हुई है. हमारा आपसे अनुरोध है कि परीक्षा लीक होने में जो गड़बड़ी हुई है उसकी आप चर्चा कराएं.

 

 

(3)     श्री प्रताप सिंह (जबेरा) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, संपूर्ण मध्‍यप्रदेश में नौवी, दसवीं, ग्‍यारहवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं उसमें मेरे क्षेत्र में भी जबेरा ब्‍लॉक में कई गांवों की लाइटें काट दी गई हैं तो मैं चाहूंगा कि इन परीक्षाओं के वक्‍त ध्‍यान दिया जाए.

 

(4)     श्री दिनेश राय (सिवनी) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे सिवनी विधानसभा में कोटवारों द्वारा असंतोष जाहिर किया गया है और वे लोग हड़ताल में बैठ गए हैं उनकी तनख्‍वाह बढ़ाने की बात पूर्व में इस सरकार ने कही थी, उसको पूर्ण करा दें.

 

(5)     श्री सुखेन्‍द सिंह (मऊगंज) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधानसभा क्षेत्र हनुमना नगर पंचायत के अंतर्गत वार्ड क्रमांक 6 में बस स्‍टेण्‍ड के लिए प्रस्‍ताव किया गया है जिसमें वहां के स्‍थानीय निवासी काफी विरोध में हैं. दूसरी जगह जहां पूर्व में आरटीओ था उस जमीन पर चाहते हैं कि बस स्‍टेण्‍ड बने, जो जनहित में है. 80 परसेंट जनता चाहती है. अत: उस पर ध्‍यान केन्द्रित करना चाहता हॅूं.

         

12.03 बजे                      पत्रों का पटल पर रखा जाना

अटल बिहारी वाजपेयी हिन्‍दी विश्‍वविद्यालय, भोपाल का चतुर्थ वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2015-2016

 

          उच्‍च शिक्षा मंत्री (श्री जयभान सिंह पवैया) -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं, अटल बिहारी वाजपेयी हिन्‍दी विश्‍वविद्यालय अधिनियम, 2011 (क्रमांक 34 सन् 2011) की धारा 44 की उपधारा (2) की अपेक्षानुसार अटल बिहारी वाजपेयी हिन्‍दी विश्‍वविद्यालय, भोपाल का चतुर्थ वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2015-2016 पटल पर रखता हॅूं.

 

 

 

 

 

 

 

 

12.04 बजे                                         ध्‍यान आकर्षण

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

                               

1. गुना जिले के जंजाली मकसूदनगढ़ सड़क की जर्जर हालत से उत्पन्न स्थिति

 

        श्री जयवर्द्घन सिंह(राघौगढ़)-- अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

          लोक निर्माण मंत्री(श्री रामपाल सिंह)--  अध्यक्ष महोदय,

 

          श्री जयवर्द्धन सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने इस बात का उल्‍लेख किया है कि बारिश के पहले इस सड़क का पुनर्निर्माण तो नहीं हो पाएगा, लेकिन मरम्‍मत करवा दी जाएगी. मेरा निवेदन है कि मरम्‍मत के लिए भी जो व्‍यवस्‍था वर्तमान में लोक निर्माण विभाग की है, उसके तहत् सरकार की ओर से सिर्फ लगभग 20 श्रमिक वहा उपस्‍थित हैं. रोड की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि उनके माध्‍यम से उस सड़क की मरम्‍मत भी नहीं हो पाएगी तो मेरा मंत्री जी से यही निवेदन है कि या तो मरम्‍मत हेतु एक टेंडर हो जाए क्‍योंकि कम से कम 50 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये में ही अच्‍छी तरह से मरम्‍मत हो पाएगी और साथ ही जैसा कि माननीय मंत्री जी ने कहा है कि एम.पी.आर.डी.सी. के माध्‍यम से इसकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट भी आ चुकी है और उसके बाद जो ए.डी.बी. का फण्‍ड होगा उसके माध्‍यम से इसका पुनर्निर्माण हो जाएगा, लेकिन बारिश के पहले अगर टेंडर के माध्‍यम से इसकी मरम्‍मत हो जाए तो इससे काफी काम हल हो जाएगा.

          श्री रामपाल सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, निश्‍चित रूप से हम पूरा प्रयास कर रहे हैं कि बरसात के पहले वहा पर यातायात सुचारु रूप से चले, माननीय सदस्‍य जिस तरह बरसात के पहले यातायात के आवागमन के लिए चिंता कर रहे हैं तो हम उसकी मरम्‍मत करा देंगे. इसको हमने राज्‍यमार्ग भी घोषित किया है और योजना में भी हम ले रहे हैं और सड़क की चिंता हम लोग कर रहे हैं. जल्‍दी ही आने वाले समय में अच्‍छी सड़क वहा बनाई जाएगी.

          श्री जयवर्द्धन सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या मरम्‍मत टेंडर के माध्‍यम से होना संभावित है ?

          श्री रामपाल सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ये निर्णय हमारे ऊपर माननीय सदस्‍य छोड़ दें तो अति कृपा होगी कि हमें कैसे कराना है, लेकिन उसकी मरम्‍मत हम कराएंगे, टेंडर से भी करा सकते हैं.

          श्री जयवर्द्धन सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद.

 

 

(2)    उज्‍जैन जिले के घट्टिया क्षेत्र में पेयजल संकट से उत्‍पन्‍न स्‍थिति

          श्री सतीश मालवीय (घट्टिया) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 

 

 

 

          लोक  स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी मंत्री (सुश्री कुसुम सिंह महदेले) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

          श्री सतीश मालवीय -- माननीय मंत्री जी आप तो स्वयं महिला हैं और महिला वर्ग की पीड़ा को भली भांति जानती हैं. मैंने जिस समस्या की तरफ आज आपका ध्यान आकर्षित किया है उस समस्या का सामना महिलाओं को ही करना होता है, जो पुरूष प्रधान समाज है, वह इन समस्याओं से दो दो हाथ कभी नहीं करता है. मेरे विधान सभा क्षेत्र घट्टिया के बारे में जो जवाब आया है, उसमें कहीं न कहीं विभाग के द्वारा यह स्वीकार किया गया है कि भू जल स्तर गिरा है.  जवाब में आया है कि मार्च अप्रैल के बाद में विभाग इस प्रकार की व्यवस्था करेगा कि जहां पर भू जल स्तर गिरा है वहां पर पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जायेगी. मेरा आपसे अनुरोध है कि मेरी विधान सभा क्षेत्र घट्टिया में जनवरी फरवरी से ही भू जल स्तर गिर जाता है और पानी के लिए त्राहि माम जैसी अव्यवस्था बनती है. मैं आपसे कहना चाहता हूं कि क्या मंत्री महोदया आश्वस्त करेंगी कि मेरे विधान सभा क्षेत्र में निजी तथा शासकीय स्त्रोत से खनन होने वाले ट्यूब वेल में 500 से 600 फीट पर भी पानी नहीं निकल रहा है तो क्या आपका विभाग 1000 से लेकर 1200 फीट की गहराई तक ट्यूब वेल का खनन करने के आदेश - निर्देश जारी करेगा या वहां पर आपका विभाग खनन करेगा .

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले -- अध्यक्ष महोदय, अभी तो हमारे विभाग ने घट्टिया विधान सभा के लिए जो व्यवस्था की है वह मैं यहां पर बताना चाहती हूं. इस वर्ष आपके क्षेत्र  में हम 50 सिंगल फेस की मोटर लगायेंगे, जिले में 160 हैण्ड पंप करेंगे और ट्यूब वेल करेंगे, और घट्टिया में 40 ट्यूब वेल और करेंगे.

          श्री सतीश मालवीय -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे संरक्षण चाहूंगा. मैं माननीय मंत्री जी से भी अनुरोध करना चाहूंगा कि मेरा निवास भी घट्टिया गांव में है. मैं जिस जगह पर रहता हूं वहां पर भी पानी के लिए त्राहि माम, त्राहि माम मचा हुआ है. वहां की जनसंख्या 6500 बताई गई है लेकिन वहां की जनसंख्या 10 से 11 हजार के आसपास है और वहां पर बहुत ज्यादा स्थिति खराब है. मैं अनुरोध करना चाहता हूं कि कम से कम यहां पर यह आश्वासन तो दे दें कि घट्टिया जैसे जो बड़े बड़े गांव हैं जैसे ताजपुर, घट्टिया, बिछडोद, पानबिहार, बेड़ावन और उन्हेल है ऐसे 10 से 15 हजार की आबादी वाले क्षेत्र हैं, जहां पर पानी के लिए महिलाओं को वास्तव में दूरस्थ अंचल तक पानी नहीं मिलता है 5 से 7 किलोमीटर दूर तक से पानी खोजकर लाना पड़ता है. यहां तक कि टेंकरों को 10 से 20 किलोमीटर दूर से किराये पर लाना पड़ता है. मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री महोदया से निवेदन करना चाहता हूं कि यहां पर यह आश्वासन तो दे दें कि जो बड़े बड़े गांव हैं जिन गांवों का मैंने जिक्र किया है वहां पर 1000 से 1200 फीट तक के ट्यूब वेल खनन के आदेश जारी करेंगे. ताकि इन जगहों पर पानी की व्यवस्था सुचारू रूप से शुरू हो जाय. मैं यहां पर इतना ही आश्वासन चाहता हूं.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले -- माननीय अध्यक्ष महोदय, यहां पर बहुत गहराई तक पानी है तो जिस मशीन की आप मांग कर रहे हैं उसको भेज देंगे.

          श्री सतीश मालवीय-- अध्यक्ष महोदय, मैं इसके लिए माननीय मंत्री महोदया को धन्यवाद देना चाहता हूं. साथ ही मेरा यह भी अनुरोध है कि हमारा घट्टिया बहुत बड़ा गांव है, दुर्भाग्य से नाम तो घट्टिया है लेकिन आप सबके आशीर्वाद से बहुत ही उन्नति कर रहा है, वहां पर पानी की एक ही टंकी है.

          कुंवर विजय शाह -- अध्यक्ष महोदय, इस घट्टिया नाम को बदला जाना चाहिए, मध्यप्रदेश में कोई भी घटिया नहीं है, विधायक जी आप प्रस्ताव दें, हम सब सदस्य पूरा सदन सहमत है. मध्यप्रदेश में सब कुछ बढ़िया है फिर घट्टिया क्यों रहे. मेरा निवेदन है कि आप इस सदन के माध्यम से प्रस्ताव दें और पूरा सदन उसे पास करेगा.

          श्री  कमलेश्वर पटेल -- महिलाएं 5 से 7 किलोमीटर दूर से पानी लेकर आ रही हैं आपका कितना बढ़िया मध्यप्रदेश है...(व्यवधान)..

          श्री सतीश मालवीय -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय शिवराज सिंह चौहान जी के नेतृत्व में बहुत ही अच्छा विकास हो रहा है.....(व्यवधान)..

           कुँवर विजय शाह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप भी इस बात से सहमत होंगे कि क्‍या किसी गांव को घटिया कहा जा सकता है ? (व्‍यवधान).....

          अध्‍यक्ष महोदय - हां आप सही कह रहे हैं , घटिया नहीं कहा जा सकता है.

          कुँवर विजय शाह - (व्‍यवधान).....माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसलिए निवेदन है कि इस गांव के नाम को बढि़या कर दिया जाए. (व्‍यवधान).....

           श्री सतीश मालवीय - (व्‍यवधान).....माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से एक दो लाख लीटर की टंकी की मांग कर रहा हूं कि आपका आदेश हो जायेगा तो आपकी मेरे ऊपर कृपा हो जायेगी. (व्‍यवधान).....

          श्री कमलेश्‍वर पटेल -  नलजल योजनाएं बंद है. (व्‍यवधान).....

          अध्‍यक्ष महोदय - कृपया सभी बैठ जायें, कोई नहीं बोलेगा. श्री मोहन यादव जी आप भी बैठ जाएं, इनका उत्‍तर तो आने दे पहले (व्‍यवधान).....

          डॉ.मोहन यादव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह इनकी बात कर लें फिर मैं बोलूंगा. (व्‍यवधान)...

          अध्‍यक्ष महोदय -श्री सतीश मालवीय यह आपका आखिरी प्रश्‍न है. (व्‍यवधान)....

          डॉ.मोहन यादव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह एक विषय जो आया है मैं उसके बारे में स्‍पष्‍ट करना चाहूंगा कि इन्‍होंने जो घट्टिया शब्‍द कहा है, उसमें ट के नीचे ट है. वह संस्‍कृत का शब्‍द है, उसका वह अर्थ नहीं है जो हम लोग निकाल रहे हैं. यह हमारा अपभ्रंश है, जो हम उसकी गलत अर्थ में व्‍याख्‍या कर रहे हैं.

          श्री कमलेश्‍वर पटेल -  यह शिक्षा मंत्री जी की समझ से परे है. (हंसी)

          डॉ.मोहन यादव -यह संस्‍कृत का शब्‍द है इसको समझने की आवश्‍यकता है. (व्‍यवधान)..

          श्री सतीश मालवीय - माननीय अध्‍यक्ष जी, मेरा जवाब आ जाए. (व्‍यवधान)..

          अध्‍यक्ष महोदय -अब उस विषय पर बहुत देर चर्चा हो गई, उनकी डिमांड है कि उनको एक पानी की टंकी चाहिए. माननीय मंत्री जी आप बोलें. (व्‍यवधान).. 

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी के बिना मांगे ही मैंने इतना अधिक दे दिया है, लेकिन विधायक जी संतुष्‍ट ही नहीं हो रहे है.

          श्री सतीश मालवीय - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं तो संतुष्‍ट हू.  मैं तो सिर्फ आपसे टंकी का अनुरोध कर रहा हूं कि आपकी कृपा हो जाए. ग्राम घट्टिया में एक दो लाख लीटर की टंकी की आवश्‍यकता है. (हंसी)

          कुँवर विजय शाह - (व्‍यवधान)..  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, फिर घटिया कहा इन्‍होंने. (हंसी...)

          श्री कलेश्‍वर पटेल -  माननीय अध्‍यक्ष महोदय सालभर से नलजल योजनाएं बंद है. (व्‍यवधान)..

          अध्‍यक्ष महोदय - आप बैठ जाएं. इस विषय पर बहुत चर्चा हो गई है. (व्‍यवधान)..

          कुँवर विजय शाह -  जिज्‍जी आप यह बोलो कि घटिया में सब बढि़या कर देंगे. (व्‍यवधान)..

          अध्‍यक्ष महोदय -यह विषय इतना महत्‍वपूर्ण नहीं है कि इस पर इतनी देर बहस की जाए. (व्‍यवधान)..

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, घट्टिया  ग्राम में सब कुछ बढि़या कर देंगे और आवश्‍यकतानुसार गहरे नलकूप खनन कर देंगे.

          श्री सतीश मालवीय - माननीय अध्‍यक्ष जी एक बार आप आसंदी से टंकी का आदेश करवा देंगे तो आपकी कृपा हो जाएगी (व्‍यवधान)..

          अध्‍यक्ष महोदय - आसंदी से आदेश नहीं होगा. आपको कृपा मंत्री जी की चाहिए (हंसी)

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले - टंकी की आवश्‍यकता होगी तो टंकी भी बनवा देंगे.

          श्री सतीश मालवीय - माननीय अध्‍यक्ष जी, टंकी की आवश्‍यकता है. बहुत बहुत धन्‍यवाद. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक छोटा सा प्रश्‍न और है.

          अध्‍यक्ष महोदय - अब कोई प्रश्‍न नहीं होगा, ध्‍यानाकर्षण में एक प्रश्‍न पूछा जाता है. आप तीन प्रश्‍न पूछ चुके हैं.

          श्री सतीश मालवीय - माननीय अध्‍यक्ष जी एक छोटा सा प्रश्‍न.

          अध्‍यक्ष महोदय - अब बिल्‍कुल नहीं यह अनंतकाल तक नहीं चलेगा. श्री जितू पटवारी जी आप बोलें.

          श्री सतीश मालवीय - माननीय अध्‍यक्ष महोदय मैं आपको और मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्‍यवाद देना चाहता हूं और कुंवर शाह जी को भी धन्‍यवाद देना चाहता हूं.

          कॅुंवर विजय शाह - गांव का नाम बढि़या वाला कराओ, माननीय अध्‍यक्ष महोदय जी भी इससे सहमत होंगे...(हंसी)

          श्री सतीश मालवीय - आप चाहेंगे तो हो जायेगा.

          (3) इंदौर एवं रतलाम जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिले आवासों को तोड़े                                       जाने से उत्‍पन्‍न स्थिति. 

          श्री जितू पटवारी -                               

                                 

         

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री (श्रीमती माया सिंह) - अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

          श्री जितू पटवारी--माननीय अध्यक्ष महोदय, बड़े विस्तार से माननीय मंत्री जी ने उत्तर दिया है. ईश्वर नगर रतलाम की बस्ती ऐसी मध्यप्रदेश में ऐसी जितनी भी योजनाएं शासन की आयी है जो पुराने पट्टे दिये हैं उसमें पट्टों की जो जमीन निर्धारित थी उसको कम करके जमीन दी जा रही है. उतने ही पट्टे पर सुधार के लिये जो आपने ऋण की व्यवस्था की है, हो सकती है. मेरा प्रश्न फिर से एक बार क्या पट्टे की जमीन कर-कर के योजनाओं के लाभ दिये जा रहे हैं या उतनी ही जमीन पर लाभ दिया जा रहा है.

          श्रीमती माया सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, रतलाम के ईश्वर नगर में हितग्राहियों को पूर्व में काबिज जमीन पर 30 वर्ग मीटर के पक्के आवास निर्माण के लिये हम उनको मदद कर रहे हैं उनको राशि भी दी जा रही है. उतने ही पट्टे पर निर्माण एलोकेशन है.

          श्री जितू पटवारी--माननीय अध्यक्ष महोदय, इन्दौर नगर निगम में ऐसी कितनी बस्तियां चिन्हित की हैं जिसको विस्थापित करना है या उनको इस योजना का लाभ दिलाना है. आपके पास इसकी संख्या उपलब्ध है तो बता पाएंगी क्या? मेरा प्रश्न यह है कि इन्दौर नगर निगम में ऐसी कितनी बस्तियां हैं और ऐसी बस्तियों में योजना का लाभ दिलाने से पहले क्या बस्ती को विश्वास में लिया जाता है या जोर जबरदस्ती से यह काम किया जाता है, स्पष्ट करें.

          अध्यक्ष महोदय--आपने प्रश्न यह नहीं पूछा था. आपने पूछा था कि कितनी बस्तियां ऐसी हैं जिनको विस्थापित किया जा रहा है.

          श्री जितू पटवारी--अध्यक्ष महोदय, उन विस्थापित बस्तियों से क्या सहमति ली है.

            श्रीमती माया सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, इन्दौर में इस समय चिन्हांकन का काम चल रहा है.

          श्री जितू पटवारी--अध्यक्ष महोदय, सवाल फिर से यह है कि ऐसी बस्तियों में जिसमें प्रधानमंत्री जी की इस महत्वाकांक्षी योजना को लागू करने के लिये शासन की मंशा है, क्या उनकी सहमति ली जाना अनिवार्य है. उनसे सहमति ली जा रही है कि नहीं ?
           
श्रीमती माया सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, वहां पर बसे हुए लोग हैं उनसे बातचीत करने के बाद ही दो तरह से हम मकान को बना रहे हैं. एक बस्ती को विश्वास में लेकर ही काम किया जाता है. वहां सहमति के आधार पर निर्माण कर रहे हैं. उनको विश्वास में लेने के बाद ही यह निर्माण कार्य वहां पर किये जा रहे हैं. अगर आपकी जानकारी में ऐसी पर्टीक्यूलर बात है आप बताएंगे तो मैं जवाब दूंगी.

          श्री जितू पटवारी--अध्यक्ष महोदय, सवाल तो अब....

          अध्यक्ष महोदय--आप तीन प्रश्न पूछ चुके हैं, जबकि इसमें एक ही प्रश्न पूछा जाता है. तीन प्रश्न पूछने के बाद कह रहे हैं कि सवाल अब चालू होते हैं.

          श्रीमती माया सिंह--अध्यक्ष महोदय, जितू जी से मुझे अपेक्षा थी कि इतना बड़ा काम हाऊस फॉर ऑल के तहत पहली बार मध्यप्रदेश के अंदर गरीब लोगों को जिनके अपने स्वयं के मकान नहीं हैं वह टपरों में तथा झुग्गी बस्तियों में रह रहे हैं उनको मकान उपलब्ध कराये जा रहे हैं तो मुझे लगा कि आप इससे खुश होंगे. मैं सभी से आग्रह कर रही हूं कि अपने अपने विधान सभा क्षेत्र में ऐसे परिवार व ऐसे हितग्राहियों को चिन्हित करें और उसका लाभ दिलाये. अभी नगर उदय अभियान के तहत लगभग 3 लाख ऐसे आवासहीन व्यक्तियों को अधिकार पत्र दिये गये हैं. यू.पी.ए. की सरकार के समय 10 वर्षों में सिर्फ 40 हजार आवासों के निर्माण की स्वीकृति मिली थी और लोग बहुत खुश हैं, क्योंकि दो तरह से मकान बनाये जा रहे हैं एक जिनके नहीं हैं उनको पूरे मकान बनाकर के दे रहे हैं जहां पर जो बसे हुए हैं जिन्होंने अपनी राशि लगाकर ऐसे मकान बना रहे हैं उन्होंने इतने अच्छे एवं सुन्दर मकान बनाये हैं आप उन स्थानों पर जाकर के देखेंगे तो आप बड़े खुश होंगे.

            श्री जितू पटवारी--  अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे संरक्षण चाहता हूं. मेरे जो प्रश्न आना थे वह आये नहीं है. मंत्री जी ने अपनी योजना का क्रियान्वयन कैसे करेंगे, वह बताया है. अध्यक्षजी, इंदौर में इस योजना..

          अध्यक्ष महोदय-- यह डिस्कशन का विषय नहीं है.

          श्री जितू पटवारी-- अध्यक्ष जी, यह क्या बात हुई.

          अध्यक्ष महोदय-- आप ध्यानाकर्षण के नियम पढ़ लें.

          श्री जितू पटवारी-- अध्यक्ष जी, ये क्या तरीका है, फिर ध्यानाकर्षण क्यों लिया?

          अध्यक्ष महोदय-- तरीका नियमानुसार है. आप 6 प्रश्न पूछते हैं. इसमें एक प्रश्न की अनुमति होती है. आपको 3 प्रश्नों की अनुमति दी है. (व्यवधान) उसके बाद भी तरीका बताऊं आपको.

          श्री जितू पटवारी--अध्यक्ष जी, आप मेरे लिए नहीं, गरीब आदमी के लिए कृपा करें.

          श्री यशपाल सिंह सिसौदिया--अध्यक्ष महोदय, यह क्या तरीका है.(व्यवधान)

          श्री मुकेश सिंह चतुर्वेदी-- आसंदी के खिलाफ कुछ भी बोलेंगे. (व्यवधान)

          श्री जितू पटवारी-- अध्यक्ष जी, जो शासन की योजना का लाभ लेना चाहता है. (व्यवधान) यह एक व्यक्ति का या कांग्रेस पार्टी का सवाल नहीं है.

          डॉ मोहन यादव-- अध्यक्ष जी, जिस प्रकार से इन्होंने बोला है वह आपत्ति जनक है...(व्यवधान) जिस प्रकार का व्यवहार जितू जी ने किया है उसके लिए इनको माफी मांगना चाहिए.

          श्री शंकर लाल तिवारी-- अध्यक्ष महोदय, इनका व्यवहार सदन में उचित नहीं है. कागज फैंक देंगे और कहेंगे कि ध्यानाकर्षण क्यों लिया था. यह अमर्यादित है. इस प्रकार का व्यवहार नहीं होने दीजिए. (व्यवधान)

          श्री जितू पटवारी-- मैं सम्मानित सदस्यों से अनुरोध करता हूं.

          एक माननीय सदस्य--सबसे पहले जितू जी माफी मांगे.

          श्री जितू पटवारी-- काहे की माफी मांगूं?

            एक माननीय सदस्य--आपने जिस प्रकार से आसंदी के साथ व्यवहार किया उसके लिए. (व्यवधान) यह बर्दाश्त नहीं है.

          श्री बहादुर सिंह चौहान-- प्रधान मंत्री आवास योजना में जितू भाई आपकी विधान सभा में कितने आवास बनवाये, बतायें. (व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदय-- कृपया बैठ जायें. 

          श्री आरिफ अकील-- वह प्रधानमंत्री उजाड़ा योजना है.(व्यवधान) बसा कर उजाड़ रहे हो. (व्यवधान)

          डॉ मोहन यादव-- अध्यक्ष महोदय, मेरी विधानसभा में माननीय माया सिंह जी के नेतृत्व में 23 हजार मकान बन रहे हैं. उसमें से लगभग 2 हजार मकान बन कर तैयार हो गए. यह इतनी अच्छी योजना है जिसका हमको लाभ लेना चाहिए लेकिन जितू जी इस प्रकार की बात कर रहे हैं वह जो व्यवहार कर रहे हैं वह अत्यंत निन्दनीय है.(व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदय-- इस पर कोई बहस नहीं हो रही है. बैठ जाइये.

          श्री शंकर लाल तिवारी-- इस प्रकार की चुहलबाजी करते हैं और विधान सभा की गरिमा खराब करते हैं.

          श्री जितू पटवारी-- अध्यक्ष महोदय, यादव जी मैं मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं  लूं?

          अध्यक्ष महोदय-- कोई सीधे बात नहीं करेगा. आप बैठ जाइये. आपका उत्तर दे रहे हैं उसके बात कोई प्रश्न नहीं होगा.

          श्री जितू पटवारी-- मेरा प्रश्न ही कहां हुआ?

          अध्यक्ष महोदय-- आपने प्रश्न कर लिया है. माननीय मंत्री उत्तर दे रही हैं

          श्री जितू पटवारी-- मैं प्रश्न पूरा कर लूं?

          अध्यक्ष महोदय-- नहीं होगा. आपको उत्तर लेना है या नहीं अन्यथा मैं अगला प्रश्न पुकार रहा हूं. आपके 4 प्रश्न हो गए हैं.

          श्री जितू पटवारी--अध्यक्ष महोदय, आप इतने निष्पक्ष हैं. (व्यवधान)

          श्री बहादुर सिंह चौहान--अध्यक्ष जी, नियम प्रक्रिया  से विधान सभा चलेगी. क्या यह कांग्रेस का मंच है?

            श्रीमती माया सिंह--अध्यक्ष जी, इंदौर में अभी पीएमएवाय घरों का निर्माण प्रारंभ हुआ है. साथ ही साथ पूर्व में निर्मित मकानों का कब्जा पुरानी योजना के अंतर्गत ही दिया जा रहा है. आपने जो सवाल पूछा कि लोगों को बताया नहीं गया तो मेरा कहना है कि सबको विश्वास में लिया गया है और पूर्व से ही रजिस्ट्रीकरण कर, बैंकों से लोन का फार्म हितग्राहियों द्वारा ही भरा जाता है. वे खुशी-खुशी भर रहे हैं. उन्हें नए, सुन्दर पक्के मकान दिए जाएंगे.

          अध्यक्ष महोदय-- यह सवाल-जवाब नहीं है. सवाल और जवाब है. आप ध्यानाकर्षण के नियम पढ़ें.

 

               (4) मक्सी थानान्तर्गत अपराधों में वृद्धि होने से उत्पन्न स्थिति

 

        श्री राजेन्द्र फूलचंद वर्मा(सोनकच्छ) - माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

            गृह मंत्री (श्री भूपेन्द्र सिंह) - माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

          श्री राजेन्द्र फूलचन्द वर्मा - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी के जवाब से संतुष्ट नहीं हूं. यह जो थाना है यह महिला विरोधी,अनुसूचित जाति विरोधी थाना है. इसमें दिनांक 3.3.2017 को लक्ष्मी लोधी नाम की महिला जो पिछड़े वर्ग की है उसके साथ शाम को छेड़छाड़ होती है और  कुछ लोगों द्वारा उसके घर में घुसकर उसके साथ जबर्दस्ती करने की कोशिश होती है. वह दिनांक 3.3.2017 की शाम को रिपोर्ट करती है लेकिन अगले ही दिन दिनांक 4.3.2017 की सुबह 8 बजे अपराधी फिर उसके घर पर पहुंचते हैं और उसके साथ मारपीट करके जबर्दस्ती करने की कोशिश करते हैं. उसके बाद जब वह महिला थाने जाती है तो वहां के टी.आई. उदय सिंह अवाला और एस.आई. भीम सिंह  पटेल उसके साथ मारपीट करते हैं कि जो वह करना चाहता था  तुमने उसको करने क्यों नहीं दिया. इस घटना की जानकारी उस महिला ने एस.पी. को दी है. मेरे पास सारे रिकार्ड हैं. आप कहेंगे तो मैं वह पेपर्स को पटल पर भी रख दूंगा. वह महिला घर छोड़कर पिछले एक महीने से अपनी बहन के यहां रह रही है. उसका पूरा घर खाली पड़ा हुआ है. मेरा मंत्री जी से कहना है कि हमारी सरकार महिला संरक्षण वाली सरकार है और इसके अलावा मैं एक और घटना का उल्लेख करना चाहता हूं कि  एक अनुसूचित जाति के  व्यक्ति कैलाश मालवीय के भाई के खिलाफ 22.2.2017 को एफ.आई.आर. होती है, 23.2.2017 को टी.आई. उदय सिंह अवाला और एस.आई. भीम सिंह पटेल उसके घर में जाते हैं और अनुसूचित जाति की महिलाओं के बाल पकड़कर खींचते हैं, उनकी रात को 12 बजे जाकर रजाई हटाते हैं. कोई महिला पुलिस कर्मी उनके साथ नहीं थी. इसीलिये मेरा कहना है कि यह टी.आई. और एस.आई. महिला विरोधी एवं अनुसूचित जाति विरोधी हैं. मेरा आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से अनुरोध है कि क्या इनको सस्पेंड कराकर दोनों प्रकरणों की जांच कराएंगे और जो महिला अपना गांव छोड़कर रह रही है उसको सुरक्षा प्रदान करेंगे ?

            श्री भूपेन्द्र सिंह -  माननीय अध्यक्ष महोदय, वहां पर पदस्थ टी.आई. उदय सिंह अवाला और सब इंस्पेक्टर भीम सिंह पटेल, इन दोनों को निलंबित करके आई.जी. से जांच करा लेंगे.

 

         

 

 

 

12.45 बजे                                 याचिकाओं की प्रस्तुति

अध्यक्ष महोदय - आज की कार्यसूची में सम्मिलित याचिकाएं प्रस्तुत की हुई मानी जायेंगी

 

 

12.45 बजे           उपाध्यक्ष महोदय(डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुए.

 

 

 

 

12.45 बजे                                   वक्‍तव्‍य

कक्षा 9वीं एवं 11वीं का पेपर लीक होने के कारण परीक्षा निरस्‍त करने के संबंध में

स्‍कूल शिक्षा मंत्री का वक्‍तव्‍य.

स्‍कूल शिक्षा मंत्री (कुंवर विजय शाह)--  उपाध्‍यक्ष महोदय,

         

          श्री रामनिवास रावत--  आज 10वीं का पेपर भी आउट हो गया.

          श्री बाला बच्‍चन (राजपुर)--  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसकी पुनरावृत्ति न हो. इसका छात्रों पर बहुत फर्क पड़ता है.

          उपाध्‍यक्ष महोदय--  यह वक्‍तव्‍य है बाला जी, इसमें चर्चा नहीं होती है.

          श्री बाला बच्‍चन--  उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं अपनी प्रतिक्रिया दे रहा हूं. माननीय मंत्री जी आप और आपका विभाग देखता क्‍या है. बच्‍चे तैयारी करते हैं और उस टाइमिंग के मुताबित अपनी परीक्षा को नहीं दे पाते हैं इससे उनके टेलेंट पर बहुत फर्क पड़ता है. बार-बार इसका रिपीटेशन हो रहा है. कम से कम भविष्‍य में इस तरह का रिपीटेशन न हो, इसको आप प्राथमिकता दें. इस बात को देखें कि परीक्षा निरस्‍त करने से बहुत बड़ा फर्क पड़ता है. जब हम लोग पढ़ाई करते थे, और कहीं अगर ऐसी कोई बात हो जाती थी, या पेपर लीक हो जाता था, बड़ी दिक्‍कतें होती हैं. फिर से वापस उसकी तैयारी करना पड़ती थी. इसकी पुनरावृत्ति भविष्‍य में न हो इस बात को आप सुनिश्चित करें.

 

12.49 बजे        5. वर्ष 2017-2018 की अनुदानों की मांगों पर मतदन .. (क्रमश:).

 

          (1)     मांग संख्‍या-27           स्‍कूल शिक्षा (प्रारंभिक शिक्षा)

                   मांग संख्‍या-40           स्‍कूल शिक्षा विभाग से संबंधित अन्‍य व्‍यय

                                                          (प्रारंभिक शिक्षा को छोड़कर)

 

 

          उपस्थित सदस्यों के कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत हुए.

          अब मांगों और कटौती प्रस्तावों पर एक साथ चर्चा होगी.

 

 

 

 

12.52 बजे

                                                 अध्यक्षीय घोषणा

भोजनावकाश न होने विषयक

 

          उपाध्यक्ष महोदय- आज भोजनावकाश नहीं होगा. भोजन की व्यवस्था दोपहर 1.00 बजे से सदन की लॉबी में की गई है. माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि सुविधानुसार भोजन ग्रहण करने का कष्ट करें.

12.53 बजे

वर्ष 2017-2018 की अनुदानों की मांगों पर मतदान (क्रमश:).

 

 

          श्री के.पी.सिंह(पिछौर) -- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मांग संख्या 27 और 40 के विरोध में तथा कटौती प्रस्ताव के समर्थन में अपनी बात करने के लिये खड़ा हुआ हूं. उपाध्यक्ष महोदय, भारतीय जनता पार्टी की सरकार के 13 साल का जो कार्यकाल है उस पर कहना चाहता हूं कि..

          कुं.विजय शाह - मुझे तो अभी 8 माह ही हुये हैं.

          श्री के.पी.सिंह -- अध्यक्ष महोदय, 9 माह पूरे हो गये कि नहीं. (कुं.विजय शाह द्वारा बैठे बैठे नहीं कहने पर )फिर यह कैसे जवाब देंगे. (हंसी)

          उपाध्यक्ष महोदय, वर्तमान में शिक्षा की जो स्थिति है उसकी एक तुलनात्मक रिपोर्ट है जिसमें आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र से मध्यप्रदेश की तुलना की गई है. मध्यप्रदेश में कुल स्कूल हैं 1 लाख 50 हजार 762, महाराष्ट्र में स्कूल हैं 1 लाख 7 हजार और आंध्र प्रदेश में 62 हजार स्कूल हैं. मध्यप्रदेश के शिक्षा विभाग में शिक्षकों के मामले में जो स्थिति है वह भी बताना चाहता हूं. मध्यप्रदेश में शिक्षक हैं 9736, 1 लाख 50 हजार 762 स्कूल पर और महाराष्ट्र में 1 लाख 7 हजार पर 5338 उसी तरह से जब 62 हजार स्कूल आंध्रप्रदेश में हैं तो उस प्रदेश में शिक्षक 7371. इसी तरह से बिना बिजली और बिना शिक्षक के जो स्कूल हैं उसकी भी रिपोर्ट में तुलना की गई है. उस रिपोर्ट को देखने के बाद मध्यप्रदेश में स्कूलों की स्थिति बहुत शर्मनाक है, चूंकि मंत्री जी कह रहे हैं कि उन्हें अभी 8 माह ही हुये हैं तो आपकी कोई जवाबदारी बनती नहीं है, ऐसा नहीं होना चाहिये.

          उपाध्यक्ष महोदय, मैं यह उदाहरण इसलिये प्रस्तुत कर रहा हूं कि बार बार हमारी सरकार के द्वारा समय समय पर स्कूल शिक्षा की बेहतर शिक्षा के बारे में बड़ी बड़ी बातें की जाती हैं. लेकिन जो रिपोर्ट सामने आ रही हैं वह उससे बिल्कुल भिन्न है. मंत्री जी आपने स्कूल चलो अभियान बड़े जोर शोर से चलाया. पिछले माह ही प्रवेश उत्सव चलाया शायद हर स्कूल में एक माह तक वह उत्सव चला . यह अभियान आपको क्यों चलाना पड़ रहे हैं. मेरे मत में यह अभियान सरकार को इसलिये चलाना पड़ रहे हैं क्योंकि आपके स्कूलों में  छात्रों की संख्या निरंतर घट रही है. 2013 के पहले की चर्चा करना यहां उचित नहीं है क्योंकि शायद पिछले कार्यकाल की बात हम नहीं कर सकते हैं इसलिये मैं 2013-14 से ही इस विभाग की तुलना कर रहा हूं.

          उपाध्यक्ष महोदय, 2013-14 में नामांकन की स्थिति थी. 41,361 बालिकायें और 38,915 बालक. 2014-15 में नामांकन की स्थिति बालक थे 34074 मतलब 4 हजार से ज्यादा के नामांकन घट गये. उसी तरह से बालिकाओं की तुलना आई उसमें 41,361 से 36,000 पर आप आ गये. वर्ष 2015-16 में 33 हजार और बालिकाएं हो गई 35 हजार. माननीय मंत्री जी कुल मिलाकर मेरा मतलब यह है कि यह नामांकन संख्‍या क्‍यों घट रही है और आप इस पर ध्‍यान भी नहीं दे रहे हैं, उसका कारण यह है कि आपके विद्यालय के जो स्‍थल हैं, उनकी व्‍यवस्‍था नहीं है. भोपाल की हालत यह है यहां कि जितने प्रायमरी स्‍कूल है, उसमें 50 प्रतिशित से ऊपर ऐसे स्‍कूल हैं, जहां टायलेट और पानी की व्‍यवस्‍था भी नहीं है. प्रदेश में तो यह संख्‍या 80 प्रतिशत के आसपास है. आप स्‍वच्‍छ भारत अभियान के तहत शौचालय की बात करते हैं, मोदी जी के नारे को दोहराते हैं, लेकिन प्रदेश में 80 प्रतिशत प्रायमरी स्‍कूल में शौचालय ठीक से व्‍यवस्थित नहीं है, नाम के लिए कागजों में बन गए हो तो अलग बात है, स्‍कूलों में पानी नहीं है और शिक्षक भी नहीं है. आपके मापदंड के अनुसार एक स्‍कूल में कम से कम दो शिक्षक होना चाहिए लेकिन हजारों स्‍कूलों की संख्‍या ऐसी हैं जहां दो शिक्षक की संख्‍या नहीं है. कहीं कहीं तो ऐसी हालत है कि अतिथि शिक्षक ही स्‍कूलों के ताले खोलते हैं, कई स्‍कूलों में अतिथि शिक्षक हेडमास्‍टर हो गए हैं, यह बड़ी बिडम्‍बना है. आप 36 हजार शिक्षकों की भर्ती की बात कर रहे हैं, जबकि आपके मापदंड के अनुसार देखा जाए तो लगभग 1 से 2 लाख शिक्षकों की जरूरत है. आपकी सरकार का चौथा साल प्रारंभ हो रहा है और आप सिर्फ 20 या 30 प्रतिशत शिक्षक भर्ती करने की स्थिति में आए हैं. आज भी कह रहे हैं कि कोई गारंटी नहीं है कि अगले साल तक यह हो जाए, कहने से क्‍या होता है हकीकत तो हमको दिख रही है. जब हम गांव में दौरे पर जाते हैं तो पता चलता है कि मास्‍टर साहब विकासखंड मुख्‍यालय गए हैं और स्‍कूलों में अतिथि शिक्षक के अलावा कोई दूसरा नहीं होता. बात भी करें तो किससे करें, यह बड़ी विडम्‍बना है.  चाहे मध्‍यान्‍ह भोजन हो, चाहे स्‍कूल प्रबंधन की समितियां हो, चाहे अन्‍य व्‍यवस्‍था हो, पूरी की पूरी व्‍यवस्‍था चौपट हो रही है. अधिकतर माता पिता कोशिश कर रहे हैं कि आपके स्‍कूलों के बजाए उनके बच्‍चों को प्रायवेट स्‍कूलों में दाखिला दें. सिर्फ गरीबों के बच्‍चे जिनके पास स्‍कूल की फीस देने के लिए पैसे नहीं है वे ही बच्‍चे आपके स्‍कूल में जा रहे हैं. मैं विश्‍वास के साथ कह सकता हूं कि अगर सरकार ने इस पर ध्‍यान नहीं दिया तो सिर्फ गरीब के बच्‍चे ही आपके स्‍कूल में जाएंगे, जैसे शहरों की स्थिति हो गई है, शहर में गरीब बच्‍चा ही आपके स्‍कूल में पढ़ने जाता है, कोई भी परिवार जिसके पास थोड़ी सी भी राशि की व्‍यवस्‍था है वे बच्‍चे प्रायवेट स्‍कूल में ही जाते हैं, यही आपके स्‍कूल के  धरातल का आंकलन है. आपने अभी एक नई व्‍यवस्‍था की है, उसके लिए सरकार का धन्‍यवाद, हम भी उसका स्‍वागत करते हैं कि प्रायवेट स्‍कूल को गरीबों के 25 प्रतिशत छात्र लेने पड़ेंगे, लेकिन इतने भी बच्‍चे प्रायवेट स्‍कूल में नहीं जाते हैं. अब एक नया रास्‍ता निकाल लिया है कि आईआरडी सूची में तहसीलदार को अधिकार दिया है जो कभी भी बढ़ा सकता है, तो लोगों ने नया रास्‍ता बना लिया कि आईआरडी सूची में नाम जुड़वा लो और स्‍कूल में प्रवेश ले लो, लेकिन वास्‍तव में जो आईआरडी सूची के पात्र हैं उसको जानकारी नहीं है तो इस व्‍यवस्‍था का और भी दुरूपयोग हो रहा है. मेरा मंत्री जी से अनुरोध है कि इस बारे में थोड़ा समय सीमा बता दें कि किस समय आईआरडी में वह परिवार था, उसको दाखिला दिया जाएगा, जो तत्‍काल आईआरडी में जुड़ता है, उनको कम से कम प्रवेश न दिया जाए.

                   श्री के.पी. सिंह -- मैं आरटीआई की बात नहीं कर रहा हूं.  मैं  तो यह कह रहा हूं कि  जुगाड़ से  आईआरडी के लोग  एडमीशन ले लेते हैं,  उन पर तो कुछ अंकुश लगाओ.लगाना न लगाना आपकी मर्जी है, मैंने तो आपके ध्यान में बात बता दी,क्योंकि हम लोगों के पास यह प्रकरण आते हैं.  इसी तरह से  स्वच्छ निर्माण की बात  मोदी जी कर रहे हैं.  हमारे प्रधानमंत्री जी का  एक बहुत बड़ा अभियान है, उसमें हम सबको शामिल होना है, आपको भी शामिल होना है.  लेकिन स्वच्छ विद्यालय परिसर  बनें,  इसके लिये  वहां सफाई  की आवश्यकता होती है. जब हम प्राध्यापकों से बात करते हैं, तो वह कहते हैं कि  हमारे पास जो सफाई कर्मी हैं, उनको देने के लिये  पैसा ही नहीं है. मंत्री जी,  अब सफाई कर्मी के लिये  जब आप पैसा ही नहीं दे सकते,  तो सफाई कौन करेगा और कई स्कूलों में तो    मैंने देखा है कि  जो वहां के प्रधानाध्यापक हैं, वह बच्चों से कहते हैं कि  तुम सफाई करो.  छोटे छोटे बच्चे   सफाई करें, क्या  हमको  यह अच्छा लगता है.  इसलिये  इस संबंध में राज्य शासन कोई व्यवस्था करे.  एक सफाईकर्मी की जो नियुक्ति होती है, उसके लिये आप थोड़े बहुत अनुदान की  व्यवस्था करिये.  आपके पास सर्व शिक्षा अभियान का  बहुत सारा पैसा होता है, उसमें से ही कहीं व्यवस्था कर दीजिये.  नहीं तो फिर यह स्वच्छ भारत अभियान  का  क्या होगा. जब स्कूल ही  साफ नहीं हैं,  तो बाकी गांव की हालत क्या होगी.  आपके यहां से अभी अभी एक फरमान जारी   हुआ है कि  शिक्षा गारंटी स्कूल,  जिनमें 20 या 25 से बच्चे कम हैं,  वह सारे स्कूल हम बंद कर देंगे. भवन बना हुआ है, छोटे छोटे मजरों में यह  हमारा  प्रदेश विभक्त हो रहा है.  लोग अपनी सुविधा की दृष्टि  से  अपने अपने खेतों पर जाकर बस रहे हैं.  गांव  में भीड़ बढ़ रही है, घनी आबादी  हो रही है,  इसलिये लोग खुली  हवा के लिये अपने खेतों में  जाकर बस रहे हैं.  अब आप मजरे-टोलों के स्कूल बंद करेंगे,  तो वह बच्चे कहा आयेंगे, वही बच्चे   2 किलोमीटर  दूर गांव  में आकर  फिर पढ़ने आयेंगे. क्या प्रायमरी, पहली क्लास  का बच्चा दो किलोमीटर दूर  गांव में पढ़ने आ सकता है.  तो इस बारे में आप पुनः विचार करिये. आपके डीपीआई के लोग  आंकलन कर आये हैं और कही कहीं तो ऐसा है कि  मेरी विधान सभा में  50 स्कूल  ऐसे हैं, तो  पूरे मध्यप्रदेश  के विधान सभा क्षेत्रों में आंकलन करेंगे,  तो हो सकता है कि यह हजारों की संख्या में पहुंच जायेगे.  हजारों की  संख्या में स्कूल  बंद  करने का औचित्य क्या है. अगर  20 बच्चे भी पढ़ रहे हैं, तो  आपको परेशानी क्या है.   उपाध्यक्ष महोदय, यह जो शिक्षा गारंटी  के  स्कूल बंद हो रहे हैं,  यह आपकी विधान सभा में भी होंगे. अभी  बंद नहीं हुए हैं,  इसलिये  आपको हो सकता है कि  जानकारी न हो,  लेकिन यह स्कूल बंद न करें.  आगे पीछे बच्चों की संख्या कम थोड़ी हो रही है. हमारी जनसंख्या में लगातार वृद्धि हो रही है,यह बहुत गलत निर्णय है, जिसने भी यह निर्णय लिया है,  यह निर्णय आपकी जानकारी में है  कि  नहीं  मुझे नहीं पता, लेकिन  प्रदेश से  एक निर्देश यह गया है कि  जिन स्कूलों में बच्चों की संख्या  20 है,  उन स्कूलों को  बंद कर दिया जायेगा.  उन भवनों का क्या होगा. उन मजरे-टोले के निवासियों का क्या होगा.

                   श्री सूबेदार सिंह रजौधा --  उपाध्यक्ष महोदय,  के.पी. सिंह जी एक तरफ तो यह कह रहे हैं कि  मैं कटौती प्रस्ताव का समर्थन करता हूं  और स्कूल भी चाहते हैं, तो  यह स्कूल कैसे खुलेंगे.  कटौती प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं, तो पैसा कहां से आयेगा.

                   श्री के.पी. सिंह -- हमने कुछ नहीं कहा है.

                   उपाध्यक्ष महोदय -- आप बैठ जाइये. आपका नम्बर आयेगा, तब बोलियेगा.  आप अपना भाषण जारी रखिये.

                   डॉ. गोविन्द सिंह --  रजौधा जी, पहले आपको  पता है कि कटौती प्रस्ताव क्या होता है,  उसका क्या मतलब है. आप बताओ जरा.  आप कुछ समझते हैं कि चाहे जो कुछ  बोलने लगते हैं.

                   श्री सूबेदार सिंह रजौधा --   आप वरिष्ठ हैं,  मैं आपका जवाब नहीं दे सकता.

                       उपाध्‍यक्ष महोदय - भिण्‍ड, मुरैना का एक प्रबोधन कार्यक्रम होना चाहिए.

          वन मंत्री (डॉ. गौरीशंकर शेजवार) - देखिये, गोविन्‍द सिंह जी, आप आरोप नहीं लगा सकते हैं. वे सत्‍ता पक्ष के विधायक हैं और पहली बार जीतकर आए हैं. उन्‍हें कटौती प्रस्‍तावों से क्‍या लेना-देना है ?

          श्री बलवीर सिंह डण्‍डौतिया - मुरैना में सबसे ज्‍यादा विरोध गोविन्‍द सिंह जी का किया था. 

          डॉ. गौरीशंकर शेजवार - आप तो अपनी तरफ से लोगों से पूछो जो कटौती प्रस्‍ताव रखते हैं. हमारे दल का विधायक कटौती प्रस्‍ताव क्‍यों रखेगा ? हम क्‍यों जानें, हमें जानने की क्‍या जरूरत है. हम सत्‍ता में हैं और सत्‍ता में रहेंगे. हम बरसों तक सत्‍ता में रहेंगे. कटौती प्रस्‍तावों को हम कभी नहीं समझेंगे.

          श्री के.पी.सिंह - शेजवार जी, आप तो समझते हो, आप तो रहे हो.

          उपाध्‍यक्ष महोदय - बरसों तक रहेंगे या परसों तक रहेंगे. (हंसी)

          श्री कमलेश्‍वर पटेल - उपाध्‍यक्ष जी, परसों तक रहेंगे.(हंसी)

          स्‍कूल शिक्षा मंत्री (कुँवर विजय शाह) - उपाध्‍यक्ष जी, परसों तो हिन्‍दुस्‍तान के बहुत जगह पर और आ जाएंगे.

          श्री सुखेन्‍द्र सिंह - इसीलिए तो परसों तक फाईनल हो जाएगा.

          उपाध्‍यक्ष महोदय - आप जारी रखें (हंसी)

          श्री के.पी.सिंह - एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई है. जिसमें दर्शाया गया है कि 3 साल में करीब 3 लाख बच्‍चे स्‍कूल छोड़ गए हैं.

          कुँवर विजय शाह - यह कहां की रिपोर्ट है ?

          श्री के.पी.सिंह - संस्‍था जिसने लिखा है Annual State of Education Report (SER) यह शायद भारत सरकार की संस्‍था है. इसकी रिपोर्ट में 3 लाख बच्‍चे आपके  स्‍कूल में पढ़ रहे थे, वे स्‍कूल छोड़कर चले गए हैं.

          उपाध्‍यक्ष महोदय - मंत्री जी, जब आप भाषण दें तो उसमें सब बता दीजिएगा.

          श्री के.पी.सिंह - रिपोर्ट भी एथेन्टिक है, मैं ऐसे ही नहीं कह रहा हूँ. अब आपने एक और नई व्‍यवस्‍था की है. उत्‍कृष्‍ट विद्यालय आपके हर विकासखण्‍ड मुख्‍यालय में खुल गए हैं. अब इसने एक नई परेशानी को जन्‍म दिया है कि उत्‍कृष्‍ट विद्यालयों में उन्‍हीं बच्‍चों को प्रवेश मिलेगा, जो मैरिट पर हैं. अब उसके बाद बचे हुए बच्‍चे कहां चले गए ? दूसरा, हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल विकासखण्‍ड मुख्‍यालय पर नहीं है, अब क्‍या वे गांव में लौटकर जाएं, 5-5 किलोमीटर दूर गांव हैं. जब आपने उत्‍कृष्‍ट विद्यालय की स्‍थापना की थी.

          उपाध्‍यक्ष महोदय -आप 3 मिनट में समाप्‍त करें.

          श्री के.पी.सिंह - अभी मुझे 1 मिनट नहीं हुआ है.

          उपाध्‍यक्ष महोदय - श्री के.पी.सिंह जी, आपको बोलते हुए 16 मिनट हो गए हैं. आप 3 मिनट में समाप्‍त करें.

          श्री के.पी.सिंह - उत्‍कृष्‍ट विद्यालय जहां एक है, वहां कम से कम 10+2 का और कर दें, जिससे वहां लोकल बच्‍चे पढ़ सकें. उधर आप फेल होने वाले बच्‍चों के लिए एक नई योजना चला रहे हो कि जो फेल होंगे, उनको हम दोबारा आगे बढ़ाएंगे, इधर आप स्‍कूल की व्‍यवस्‍था ही नहीं कर रहे हो तो हर विकासखण्‍ड मुख्‍यालय पर एक-एक स्‍कूल और हो जाए, जिससे बचे हुए बच्‍चे वहां एडमीशन ले सकें.

          कुँवर विजय शाह - बिल्‍कुल खोल देंगे.

          श्री के.पी.सिंह - अपने वक्‍तव्‍य में घोषणा कीजिये. दो-दो तो हो जाएं. मॉडल स्‍कूल भारत सरकार ने खोले हैं. अब मॉडल स्‍कूल की हालत यह है कि उनका पैसा आया है, बिल्डिंग बन गई है, बिल्डिंग बनने के बाद अगर बाउन्‍ड्री नहीं है तो आप आज बाउन्‍ड्री नहीं बनवा पा रहे हैं, लाईट नहीं है तो आप लाईट नहीं लगवा पा रहे हैं. मेरे विधानसभा क्षेत्र के खनियाधाना में हमारी स्‍कूल बिल्डिंग खड़ी है और पिछले एक वर्ष से ज्‍यादा हो गया.

          डॉ. गौरीशंकर शेजवार - विधायक निधि से दे दो.

          श्री के.पी.सिंह - तो फिर आप क्‍या करेंगे ? क्‍या राज्‍य सरकार विद्युत व्‍यवस्‍था, पानी और बाउन्‍ड्री की व्‍यवस्‍था नहीं कर सकती है. जो आप नहीं करेंगे, वह तो हम करेंगे ही.

          कुँवर विजय शाह - उपाध्‍यक्ष जी, मुझे लगता है कि कक्‍का जी ने पूरा नहीं पढ़ा है.

          श्री के.पी.सिंह - पढ़ लिया है. जो व्‍यवस्‍था धरातल में नहीं हैं, हम उसको कैसे मान लें ?

          डॉ. गौरीशंकर शेजवार - हमें एक बात श्री के.पी.सिंह जी की बहुत अच्‍छी लगी कि आप जब स्‍कूल छोड़ने वाले बच्‍चों की रिपोर्ट बता रहे थे. आखिरी में यह कहा कि मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि यह अथेन्टिक है.

          श्री के.पी.सिंह - मैंने बोला अथेन्टिक है.

          डॉ. गौरीशंकर शेजवार - नहीं, आप कार्यवाही उठाकर देख लें.

          श्री के.पी.सिंह - उठाकर देख लें और पढ़ो.

          डॉ. गौरीशंकर शेजवार - जब उस रिपोर्ट पर मंत्री जी ने शंका व्‍यक्‍त की तो आपने यह कहा कि मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि यह अथेन्टिक है. मुझे यह बात बहुत अच्‍छी लगी.

          श्री के.पी.सिंह - मैंने उस एजेन्‍सी का नाम तक बताया है.

          श्री सुखेन्‍द्र सिंह - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह छोटे-छोटे बच्‍चों के स्‍कूल के भविष्‍य का सवाल है. माननीय वरिष्‍ठ मंत्री जी, आप इस तरह से मजाक न करें.

          श्री के.पी.सिंह - आपके स्‍कूलों में खेल मैदान नहीं हैं. आप पूरे मध्‍यप्रदेश में एक निर्देश जारी करिये कि जहां स्‍कूल हैं. वहां आसपास जो भी जमीन है, उसमें एक खेल का मैदान तो उपलब्‍ध करवा दें. मनरेगा से पैसा मिल रहा है, उसमें आपको पैसा नहीं लगाना है. एक निर्देश जारी करें.

          चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपके स्‍कूल की बजाय अगर हमारे स्‍कूल कहने लग जाएं, तो अच्‍छा है. 

          उपाध्‍यक्ष महोदय - उनका भाषण समाप्‍त नहीं होगा.  

           चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी-- उपाध्‍यक्ष महोदय, के.पी.सिंह जी आपके स्‍कूल की बजाए हमारे स्‍कूल कहने लगें तो.

          उपाध्‍यक्ष महोदय-- उनका भाषण समाप्‍त नहीं होगा. आप बैठ जाइए.

          चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी-- मेरा कहना इतना ही है कि वह हमारे स्‍कूल कहने लगे. 

          उपाध्‍यक्ष महोदय-- क्‍या आप नहीं बोलने वाले हैं. जब आपका नाम आएगा आप तब ही बोल लीजिएगा.

          श्री के.पी.सिंह-- प्रतिनियुक्ति पर बहुत सारे शिक्षक हैं 10-10 15-15 साल हो गए हैं. 15-15 साल से दूसरे विभागों में यह शिक्षक काम कर रहे हैं और आपके स्‍कूलों में शिक्षक नहीं हैं. क्‍या आप इन्‍हें वापस करेंगे? अभी श्री आरिफ भाई बता रहे थे कि भोपाल के ही एक नसरत मेहंदी शिक्षक हैं. वह 15 साल से किसी दूसरे विभाग में काम कर रही हैं. वह यू.एस. घूमकर आई हैं. श्री आरिफ जी ने जो मुझे बताया है मैं वह जानकारी दे रहा हूं. आरिफ जी के माध्‍यम से आप इसे पता कर लें कि वास्‍तव में यह सही है या गलत है. ऐसे बहुत सारे उदाहरण हो सकते हैं. उन शिक्षकों को वापस करिए जिससे कम से कम स्‍कूलों में पढ़ाई लिखाई हो सके. कस्‍तूरबा गांधी कन्‍या छात्रावास का जिक्र मैं इसीलिए कर रहा हूं कि हमारे यहां एक घटना हुई. इसी छात्रावास में अधी‍क्षक के पद पर रहने के लिए भारतीय जनता पार्टी के लोगों में गोलीबारी हो गई. मैंने जब दोनों को बुलाया और पूछा कि क्‍यों लड़ रहे हो? आपको नहीं लड़ना चाहिए. आप एक ही पार्टी में हो तो कहने लगे यह 10 साल रह लिए अब हमारी नियुक्ति हुई तो हमको हटाने के पीछे पड़े हुए हैं. कस्‍तूरबा गांधी कन्‍या छात्रावास इस तरह से लाभ के धंधे के रूप में परिवर्तित न हो. कृपा करके इस पर भी थोड़ा ध्‍यान दें कि वही लोग यहां रहें जो इसके लिए पात्र हैं. मंत्री जी कम से कम इस व्‍यवस्‍था को ठीक कराएंगे. उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरे एक प्रश्‍न का उत्‍तर गलता आया है. माननीय मंत्री जी, आप बहुत जागरुक हैं. आप मेरी समस्‍या पढ़ते भी होंगे. चूंकि वह चर्चा में नहीं आया इसीलिए मैं इसकी चर्चा कर रहा हूं.  मैने पूछा था कि विधानसभावार हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल वर्ष 2013-14, 2014-15 और 2015-16 में कितने खोले गए? चूंकि मेरे विधानसभा क्षेत्र में तीन सालों में एक भी स्‍कूल नहीं खोला गया है. इसीलिए मैंने यह सवाल लगाया था कि आखिरकार क्‍या कारण है कि पूरे मध्‍यप्रदेश में स्‍कूल खुल रहे हैं तो मेरे विधान सभा क्षेत्र में क्‍यों नहीं खुल रहे हैं. उसमें एक जानकारी दे दी कि मेरे विधान सभा क्षेत्र पिछोर के विकासखण्‍ड में शासकीय उच्‍चतर माध्‍यमिक विद्यालय बामोर, डामोर में खोला गया है. आज दिनांक तक यह हाई स्‍कूल है यह इंटर स्‍कूल नहीं है. चूंकि यह चर्चा में नहीं आया है. इसलिए आपने पढ़ा ही नहीं होगा. कम से कम मेहरबानी करके विभाग के जो लोग हैं उनको यह तो समझा दीजिए कि गलत जानकारी न दें. स्‍कूल नहीं खोला गया है और लिख दिया गया है कि वर्ष 2013-14 में स्‍कूल खोला गया. मैं थोड़ा सा अपने शिवपुरी जिले से तुलना करना चाहूंगा. आपने हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल खोले, वर्ष 2013-14 में सतना में 18, विदिशा में 14, सागर में 13. वर्ष 2014-15 में हमारे यहां शिवपुरी में 1, पोहरी में 1, कोलारस में 2, करेरा में 1. वर्ष 2014-15 में सिर्फ 1 और वर्ष 2015-16 में निल. मंत्री जी यह पक्षपातपूर्ण रवैया यहां क्‍यों हो रहा है. मेरे विधान सभा क्षेत्र में तो 3 साल में एक भी स्‍कूल नहीं खुला है. यहां भी बच्‍चे पढ़ते लिखते हैं, हम लोग भी चुनकर आते हैं. आपके सदस्‍य ज्‍यादा हैं तो आपका अधिकार ज्‍यादा है, लेकिन क्‍या हम 1 स्‍कूल भी एक साल में नहीं खुलवा सकते हैं. आप 9 महीने के मंत्री हैं आप इसको थोड़ा ठीक से दिखवा लीजिए. आपका हक ज्‍यादा है. आप अपने यहां ज्‍यादा करिए. हमारी विधानसभाओं में भी आपकी पार्टी के वोटर हैं. उनको भी वोट मिलता है. वहां भी आपके समर्थक रहते हैं. आपने समय दिया बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          कुंवर विजय शाह-- उपाध्‍यक्ष महोदय, यह 1990 से विधायक हैं, ऐसे ही बोल देते तो हम स्‍कूल खोल देते.

          के.पी. सिंह-- जहां-जहां नहीं खुले हों वहां खोल दीजिए.

            श्री मुरलीधर पाटीदार (सुसनेर)-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 27 और 40 का समर्थन करता हूँ. एक कहावत बहुत प्रसिद्ध है यदि हम समाज या प्रदेश को 1-2 साल के लिए आगे ले जाना चाहते हैं तो अच्छी खेती को बढ़ावा देना चाहिए. यदि हम चाहते हैं कि हमारा देश, प्रदेश कुछ दशक तक तरक्की के रास्ते पर जाए तो बाग-बगीचों को लगाने पर बढ़ावा देना चाहिए. यदि हम चाहते हैं हमारा देश, प्रदेश जन्म-जन्मान्तर, पीढ़ी-दर-पीढ़ी तरक्की के रास्ते पर जाए तो उसके लिए शिक्षा को बढ़ावा देना चाहिए. माननीय मुख्यमंत्री जी इसी ओर आगे बढ़ रहे हैं इसलिए उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में हर तरह की सुविधाएं दी हैं. सभी का बखान यहां पर नहीं किया जा सकता है लेकिन कुछ उदाहरण यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ. इस वर्ष के बजट में एनसीआरटी के सिलेबस को बजट में लागू किया गया है. आईआईटी या राष्ट्रीय स्तर की जो प्रतियोगी परीक्षाएं होती थीं उनमें मध्यप्रदेश का आंकड़ा देखें तो बहुत कम मात्रा में यहां के बच्चे चयनित हुए हैं. लेकिन एनसीआरटी का सिलेबस लागू होने के बाद सभी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में मध्यप्रदेश भी आने वाले समय में अग्रणी होगा. अभी तक अन्य प्रदेश के आईएएस, आईपीएस यहां आते रहे हैं उनका प्रतिशत अब कम हो जाएगा. यह बहुत ही महत्वपूर्ण निर्णय मध्यप्रदेश सरकार, माननीय मुख्यमंत्री जी, और जाबांज शिक्षा मंत्री जी का है. जब कोई शिक्षक अवकाश पर जाते हैं या कोई बहन प्रसूति अवकाश या दीर्घकालीन अवकाश लेती है तो उसके बदले में अतिथि शिक्षक रखने का प्रावधान है जिनका वेतन बढ़ाने का प्रावधान करने का प्रस्ताव माननीय मंत्री जी ने अपने विभाग की ओर से भेजा है. जिसमें वर्ग एक के लिए 9000 रुपए, वर्ग दो के लिए 7000 रुपए और वर्ग तीन के लिए 5000 रुपए करने का प्रस्ताव है. मैं इसके लिए माननीय मुख्यमंत्री जी और शिक्षा मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूँ. अध्यापक संवर्ग जो अभी सबसे ज्यादा संख्या में हैं और बहुत महत्वूपर्ण भी हैं विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र की शिक्षा के लिए जिनको वर्ष 1995 में 500 रुपए, 700 रुपए और 1000 रुपए मिलते थे. इसमें माननीय मुख्यमंत्री जी के आने के बाद लगातार बढ़ोतरी की गई. इस वर्ष छठवां वेतनमान दिया गया जिसमें प्रदेश सरकार ने लगभग 2200 करोड़ रुपए की अपने बजट से व्यवस्था की है. यह बहुत महत्वपूर्ण निर्णय है. शिक्षक अपने आपको अब तक असहज महसूस करता था अब वह नहीं करता है. गुरुजियों को संविदा शिक्षक बनाया गया. संविदा शिक्षकों को अध्यापक संवर्ग में शामिल किया गया. यह शिक्षा की गुणवत्ता के लिए अति महत्वपूर्ण निर्णय माननीय मुख्यमंत्री जी का है. अभी तक पुरुषों के संविलियन की नीति नहीं थी इस बार महिला विकलांग के साथ-साथ पुरुषों के संविलियन की नीति भी विभाग ने बना दी है. सबसे बड़ी बात यह है कि यह संविलियन ऑन-लाइन होंगे. इसका फायदा यह है कि अब किसी भी अध्यापक को किसी नेता के दरबार में या किसी ऑफिस में जाने की आवश्यकता नहीं होगी. वह घर बैठे ऑन-लाइन एप्लाई करेगा. वह जहाँ जाना चाहता है वहाँ का आदेश उसे ऑन-लाइन ही मिल जाएगा. यह अति महत्वपूर्ण निर्णय माननीय मुख्यमंत्री जी का है. के.पी. सिंह जी कह रहे थे कि 15 प्रतिशत शिक्षक भरने की ही तैयारी कर रहे हैं तो ऐसा नहीं है, विभाग ने 31645 संविदा शिक्षकों की भर्ती करने का निर्णय ले लिया है प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड को इसका प्रस्ताव भी भेज दिया गया है. अभी तक स्कूलों में व्यायाम शिक्षक नहीं मिलते थे. व्यायाम शिक्षक, प्रयोगशाला शिक्षक और संगीत के शिक्षकों की भी इसमें व्यवस्था की गई है. अभी के.पी. सिंह जी ने कहा और आगे अन्य माननीय सदस्य भी यह कहेंगे कि प्रायवेट स्कूल ज्यादा फीस वसूल करते हैं. हम जानते हैं कि अधिकतर जो बड़े-बड़े प्रायवेट स्कूल खुले हैं वह हमारे ही साथियों के हैं, दूसरों के नहीं हैं. वे मनमानी फीस न वसूलें इसलिए फीस नियंत्रण कमेटी का गठन भी विभाग करने जा रहा है.             माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मुख्‍यमंत्री जी ने इस वर्ष नए 520 हाई स्‍कूल और 240 हायर सेकण्‍डरी स्‍कूल खोलने का प्रावधान इस बजट में किया है. मेरे पूर्व वक्‍ता ने यह बात उठाई थी कि जहां उत्‍कृष्‍ट विद्यालय हैं, वहां के छात्र कहां जायेंगे. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं बताना चाहता हूं कि विभाग यह निर्णय ले चुका है कि जहां-जहां उत्‍कृष्‍ट विद्यालय हैं वहां इस वर्ष नए हाई स्‍कूल खोले जायेंगे. यह निर्णय बहुत ही महत्‍वपूर्ण एवं सराहनीय है. इसके लिए मैं माननीय मुख्‍यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्‍यवाद देना चाहता हूं.

          माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इस वर्ष विभाग द्वारा नियमों में संशोधन कर हायर सेकण्‍डरी स्‍कूलों के बीच की दूरी को 12 किलोमीटर से घटाकर 8 किलोमीटर कर दिया गया है. अब राज्‍य में एक हायर सेकण्‍डरी स्‍कूल से दूसरे स्‍कूल की दूरी 8 किलोमीटर से ज्‍यादा नहीं होगी. इसके अतिरिक्‍त हाईस्‍कूलों के बीच की दूरी 5 किलोमीटर से ज्‍यादा नहीं होगी. इस वजह से हमारे राज्‍य की कन्‍याओं, जिनका माननीय मुख्‍यमंत्री जी बहुत लाड करते हैं, ध्‍यान रखते हैं, अब वे बालिकायें 8 किलोमीटर की दूरी अपने गांव से तय करके स्‍कूल जा सकेंगी. अब बालिकायें अपनी शिक्षा पूरी कर सकेंगी. पूर्व में स्‍कूलों की दूरी गांवों से अधिक होने के कारण अधिकांश बालिकायें स्‍कूलों से ड्रॉप आउट हो जाती थीं. यह भी बहुत ही महत्‍वपूर्ण निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है.

          माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अब शासकीय छात्रावासों में भी सोलर पैनल गीज़र लगाये जायेंगे. पैसे वालों के बच्‍चे गर्म पानी से नहाते हैं, लेकिन अब जो छात्रावास खुल रहे हैं उनमें सोलर पैनल और गीज़र लगाये जायेंगे. यह बहुत ही सराहनीय व्‍यवस्‍था है. पूर्व में कन्‍या छात्रावासों में केवल एक ही चौकीदार के रहने का प्रावधान था. लेकिन इस वर्ष से 3-3 चौकीदारों की व्‍यवस्‍था कन्‍या छात्रावासों में करने का प्रावधान बजट में किया गया है. यह अति महत्‍वपूर्ण है. अब कन्‍या छात्रावासों में कार्यरत चौकीदारों को भी 8-8 घंटे की ड्यूटी होने से राहत मिलेगी और छात्राओं की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो पाएगी.

          माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि सरकार की सबसे महत्‍वपूर्ण योजना में से एक, छात्रों को साईकिल प्रदान करने की योजना है. हम सभी साईकिल बांटने गए थे. मैं स्‍वयं 39 स्‍कूलों में साईकिल बांटने गया था. वहां मेरी बच्‍चों से मुलाकात हुई. छठवीं, नौवीं और ग्‍यारहवीं कक्षा के छात्रों को साईकिल बांटने की योजना से, अब किसी भी गरीब परिवार का बच्‍चा या बच्‍ची शिक्षा से वंचित नहीं रह पाएगा.

          माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, बहुत ही अच्‍छा लगता है जब हम गांव में जाकर देखते हैं कि एक जैसी साईकिलों पर छात्र-छात्राएं स्‍कूल जाते हैं. यह सब देखकर हमारे मन को बहुत ही सुकून मिलता है. यह हमारे माननीय मुख्‍यमंत्री जी की अनुकरणीय पहल है. इस वर्ष से तो मजरे-टोलों में जहां दो किलोमीटर की दूरी है, वहां भी साईकिल वितरण करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है. इसके लिए हम उनका आभार व्‍यक्‍त करते हैं और साधुवाद देते हैं. इसके अलावा अभी तक गणवेश प्रदान करने के लिए सीधे बच्‍चों के पालकों के खातों में पैसा डाल दिया जाता था, लेकिन इस वर्ष बजट में यह प्रावधान किया गया है कि बच्‍चों को उनके स्‍कूल की यूनिफॉर्म सिलवा कर दी जायेगी. इस हेतु बजट में लगभग 3 अरब का प्रावधान किया गया है. यह हमारे माननीय मुख्‍यमंत्री जी का बहुत ही सराहनीय कदम है. मेरे पूर्व, हमारे साथी के.पी.सिंह जी ने कहा कि स्‍कूलों में लाईट ही नहीं है. मैं बताना चाहता हूं कि इस वर्ष माननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा निर्णय लिया गया है कि 1 लाख 10 हजार 364 विद्यालयों में, जहां वर्तमान में लाईट की व्‍यवस्‍था नहीं है, इस वर्ष के बजट में प्रावधान कर दिया गया है. अब हर स्‍कूल में लाईट चमकेगी. वास्‍तव में मैं कह सकता हूं कि इसके बारे में पहले कभी किसी ने चिंता नहीं पाली.

          श्री दिनेश राय-  (बैठे-बैठे)  बिजली का बिल कौन भरेगा ?

          श्री मुरलीधर पाटीदार-  बिल भरने की व्‍यवस्‍था भी हो जाएगी. शादी करेंगे तो बाकी की व्‍यवस्‍थायें तो करनी ही पड़ेंगी. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 12 वीं में 85 % लाने के लिए विद्या‍र्थी बहुत ही कड़ी मेहनत और परिश्रम करते हैं. माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने ऐसे बच्‍चों को लैपटॉप देने की योजना चलाई है. इस वर्ष भी यह योजना जारी रहेगी. एस.सी., एस.टी. के बच्‍चे थोड़े पिछड़े क्षेत्रों से आते हैं इसलिए ऐसे बच्‍चों के 75 % अंक आने पर लैपटॉप देने का प्रावधान है. इस वर्ष लगभग 17 हजार 896 बच्‍चों को इस योजना का लाभ मिला है. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आप अंदाजा लगा लीजिए कि सरकारी स्‍कूलों में 85 % से अधिक अंक लाने वाले बच्‍चों की संख्‍या 17 हजार से अधिक है. इससे सरकारी स्‍कूलों की गुणवत्‍ता भी सभी के सामने स्‍वयं सिद्ध हो जाती है और सरकारी स्‍कूलों पर बेवजह जो आरोप लगाये जाते हैं, वे अपने आप ही दूर हो जाते हैं.  

          उपाध्यक्ष महोदय--  मुरलीधर जी, और कितना समय लेंगे?

            श्री मुरलीधर पाटीदार--  उपाध्यक्ष महोदय, मैं तो ओपनर हूँ ना.

          उपाध्यक्ष महोदय--  ओपनर भी तो आउट होता है.

          श्री मुरलीधर पाटीदार--  मैं बहुत जल्दी खत्म कर दूँगा. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, स्कूलों की मान्यताओं में पहले माध्यमिक शिक्षा मण्डल और वल्लभ भवन के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब इसको इतना सरल कर दिया है कि अब यहाँ पर किसी को आने की आवश्यकता नहीं है.

          उपाध्यक्ष महोदय, इस साल से खेलकूद का कैलेण्डर भी बनाया गया है और उसी के कारण से, आप तो जानते ही हैं, 2013 में जहाँ हमारा मध्यप्रदेश राष्ट्रीय खेलकूद प्रतियोगिता में  सातवें क्रम पर था, 2017 में यह चौथे क्रम पर आ गया है, इससे हमारी खेलकूद के साथ जो अन्य गतिविधियाँ हैं,  उसको बढ़ावा देने के लिए, हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी और हमारे शिक्षा मंत्री जी का विशेष ध्यान है.

          श्री लाल सिंह आर्य-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, ओपनर बल्लेबाज जो होता है वह लास्ट तक आउट नहीं होता है, तब तक चलते रहता है.

          श्री मुरलीधर पाटीदार--  नहीं, आउट हो जाऊँगा.

          उपाध्यक्ष महोदय--  ये सुनील गावस्कर बनना चाहते हैं. आर्य साहब,  60 ओव्हर में 37 रन बनाकर नॉट आउट.

          श्री बाला बच्चन--  माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने जितना मेटर दिया होगा, वह सब डिलिव्हर्ड करेंगे.

          श्री मुरलीधर पाटीदार--  माननीय बाला भाई, मैंने आज तक मंत्री जी से संपर्क ही नहीं किया है...

          श्री बाला बच्चन--  बहुत बढ़िया.

          श्री लखन पटेल--  माननीय उपाध्यक्ष महोदय, ये शिक्षक रहे हैं और अध्यापक वर्ग के नेता रहे हैं.

          कुँवर विजय शाह--  माननीय उपाध्यक्ष जी, जो हमारे माननीय सदस्य बोल रहे हैं वे शिक्षक संघ के अध्यक्ष रहे हैं और शिक्षा से संबंधित सारे मामलों की विस्तृत जानकारी है. बाला बच्चन जी, मुझे सलाह की आवश्यकता ..(व्यवधान)..

          श्री बाला बच्चन--  तभी मुझे लग रहा है कि मंत्री जी से ज्यादा जानकारी उनके पास कैसे है. विभाग से बड़ी जानकारी और बहुत अच्छी जानकारी वे प्रस्तुत कर रहे हैं.

          कुँवर विजय शाह--  शिक्षक संघ के प्रदेश के अध्यक्ष रहे हैं.

          डॉ.गोविन्द सिंह--  उपाध्यक्ष महोदय, जिन अध्यापक और सहायक अध्यापकों के कंधे पर बैठ कर यहाँ तक आए हैं ये उनकी पैरवी नहीं कर रहे हैं, उनके लिए इन्होंने कुछ नहीं कहा, उनको (XXX) देकर, आँदोलन करके यहाँ तक चले आए. उनके दम पर यहाँ बैठे हैं. ..(व्यवधान)..

          उपाध्यक्ष महोदय--  यह शब्द निकाल दें. ..(व्यवधान)..मैंने कार्यवाही से निकाल दिया है. ..(व्यवधान)..

          श्री के.के.श्रीवास्तव--  माननीय उपाध्यक्ष महोदय, उनके साथ धोखा उन्होंने किया है जो तीन सौ रुपये में शिक्षाकर्मी की भर्ती करते थे ..(व्यवधान)..

          उपाध्यक्ष महोदय--  सुखेन्द्र सिंह जी, बैठ जाएँ. ..(व्यवधान)..

          श्री मुरलीधर पाटीदार--  उपाध्यक्ष महोदय, माननीय गोविन्द सिंह जी को कष्ट इस बात का है कि इनके समय में अध्यापक को पाँच सौ रुपये मिलते थे.

          डॉ.गोविन्द सिंह--  आपके आँदोलन में आपने बुलाया था तो मैं गया था. ..(व्यवधान).. इन्होंने जब आँदोलन किया था तो मेरे को बुलाया था, मैं इसलिए गया इन्होंने कहा था मैं पूरा वेतन दिलवाऊँगा. ..(व्यवधान)..

          श्री मुरलीधर पाटीदार--  माननीय गोविन्द सिंह जी, मैंने आपको नहीं टोका.

          उपाध्यक्ष महोदय--  डॉक्टर साहब, अनावश्यक टोकें नहीं.

          डॉ.गोविन्द सिंह--  शिक्षकों के बराबर वेतन ..(व्यवधान)..

          उपाध्यक्ष महोदय--  गोविन्द सिंह जी, बैठ जाएँ. ..(व्यवधान)..

          श्री मुरलीधर पाटीदार--  उपाध्यक्ष महोदय, गोविन्द सिंह जी के बारे में मैं आपको एक कहानी सुना देता हूँ.

          डॉ.गोविन्द सिंह--  उनकी पीठ में छुरा मार करके यहाँ आए हैं. ..(व्यवधान)..

          कुँवर विजय शाह--  उपाध्यक्ष महोदय, मुरलीधर जी की समस्या यह है कि वे काँग्रेस के जमाने में पाँच सौ हजार रुपये में मास्टर बने थे, तो तकलीफ तो होगी ना.

          श्री मुरलीधर पाटीदार--  उपाध्यक्ष महोदय, चूँकि गोविन्द सिंह जी ने बीच में व्यवधान किया है तो मैं कहना चाहता हूँ कि इनके जमाने में मास्टर को पाँच सौ, सात सौ, रुपये मिलते थे वह ज्यादा दुःख की बात नहीं थी, उससे ज्यादा दुःख की बात यह थी कि वह स्कूलों में कम जाते थे इनके घर पर ये ज्यादा चक्कर लगवाते थे. (शेम शेम की आवाज)  मुझे इनके बारे में असलियत मालूम है और नियुक्ति पत्र जनपद, जिला पंचायत नहीं देती थी, ये घर पर बुलाते थे और एग्रीमेंट लिखवाते थे. इतना अत्याचार इन्होंने किया है और आज वे इनकी सुनते नहीं हैं. आज वे इनको वोट नहीं देते हैं और गोविन्द सिंह जी, अगली बार मैं आपके खिलाफ प्रचार करने आऊँगा. ..(व्यवधान)..

          डॉ.गोविन्द सिंह--  तुम्हें चुनौती है. ..(व्यवधान)..

          उपाध्यक्ष महोदय--  मुरलीधर जी, ऐसा लग रहा है कि आप सदन से दशहरा मैदान पहुँच गए हैं. अब आपका भाषण वहाँ शुरू हो गया है. अब आप समाप्त करिए.

          श्री मुरलीधर पाटीदार--  उपाध्यक्ष महोदय, जो बच्चे 12 वीं की परीक्षा में 85 प्रतिशत से ज्यादा लाते हैं, वह गरीब परिवार के बच्चे हैं वे अपनी फीस भी नहीं भर पाते हैं आज उनकी फीस की व्यवस्था माननीय प्रदेश के मुखिया ने की है और यही गरीब परिवार के बच्चे इस देश और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे. इसके अलावा भी है, अगर अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में...

          श्री लाल सिंह आर्य--  माननीय गोविन्द सिंह जी, आपने कहा चुनाव नहीं लड़ेंगे?

          डॉ.गोविन्द सिंह--  चुनौती दी है.          

            उपाध्यक्ष महोदय--  माननीय मंत्रीगण ज्यादा व्यवधान कर रहे हैं क्या बात है?

          श्री बाला बच्चन--  चुनाव नहीं लड़ेंगे तो फिर सदन का क्या होगा?

          श्री सूबेद