मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

__________________________________________________________

 

चतुर्दश विधान सभा दशम् सत्र

 

 

फरवरी-अप्रैल, 2016 सत्र

 

गुरुवार, दिनांक 10 मार्च, 2016

 

(20 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1937 )

 

 

[खण्ड- 10 ] [अंक- 12]

 

__________________________________________________________

 

 

 

 

 

 

मध्यप्रदेश विधान सभा

 

गुरूवार, दिनांक 10 मार्च, 2016

 

(20 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1937 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 10.33 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

 

 

 

श्री रामनिवास रावत--अध्यक्ष महोदय, आपकी जाकेट आज सफेद है तो नरोत्तम जी पता नहीं कौन सा कलर पहनकर आये हैं.

डॉ.नरोत्तम मिश्र--मैं गौर साहब का अनुयायी हूं इसलिये पीला पहनकर के आया हूं.

श्री रामनिवास रावत--आपका आशीर्वाद प्राप्त डुपटा कहां है.

डॉ.नरोत्तम मिश्र--कल वह आपको चेतावनी तक था.

श्री बाबूलाल गौर--यह पीला दुपटा त्याग का दुपटा है.

तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर

 

प्रश्न संख्या 1

बलराम तालाब योजनांतर्गत निर्मित तालाब

1. ( *क्र. 510 ) श्री मुकेश नायक : क्या किसान कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्‍यप्रदेश में लघु सिंचाई और जल संरक्षण के लिये बलराम तालाब योजना कब से लागू है और वर्ष 2012 से दिसम्‍बर 2015 तक इस योजना के तहत राज्‍य में कुल कितने तालाब बनाये गये तथा कुल कितनी धनराशि खर्च की गई? (ख) क्‍या पन्‍ना जिले की पवई विधानसभा क्षेत्रांतर्गत बलराम तालाब योजना में घपले-घोटाले और भ्रष्‍टाचार की शिकायतें प्रशासन को विभिन्‍न स्‍तरों पर प्राप्‍त हुईं हैं और उनकी जाँच भी कराई गयी है और भौतिक सत्‍यापन के दौरान हजारों तालाब फर्जी तौर पर बनाये जाने तथा केवल कागजों पर तालाब बना कर शासन से अनुदान राशि लेने के मामले प्रकाश में आये हैं? यदि हाँ, तो ऐसे मामलों में दोषी व्‍यक्तियों और अधिकारियों के खिलाफ क्‍या कार्यवाही की गई?

किसान कल्याण मंत्री ( श्री गौरीशंकर बिसेन ) -

(ख) विभागीय स्तर पर कोई शिकायत प्राप्त होना नहीं होना पाया गया कार्यवाही का प्रश्न ही उपस्थित नहीं होता है।

परिशिष्ट - ''एक''

 

श्री मुकेश नायक--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि बलराम तालाब योजना में हितग्राहियों का चयन किस आधार पर किया जाता है, इसके मापदण्ड क्या हैं ? पवई तथा शाह विधान सभा क्षेत्र में बलराम तालाब योजना की क्या भोपाल से अधिकारियों को भेजकर जांच करा लेंगे? जांच कराएंगे तो उसका हिस्सा मुझे बनाएंगे क्या ?

श्री गौरीशंकर बिसेन--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह बलराम तालाब योजना पूर्ण रूप से राज्य सरकार के वित्त-पोषण पर आधारित है इसमें हमारे कृषि विभाग में आवेदन आते हैं इसमें जनपद पंचायत की जो वित्तीय समिति होती है उनकी अनुशंसा पर उनका चयन होता है. दूसरा साईज के संदर्भ में आप कहें तो वह भी बता देना चाहता हूं इसके जो मॉडल हैं वह चार तरह के हैं एक साईज है उसकी लंबाई मीटर में है 55, चौड़ाई 30 गहराई 3 मीटर ऐसे 23923 घनमीटर इसकी लागत उस समय लागत 1 लाख 60 हजार आंकी गई थी, दूसरा 63 मीटर, चौड़ाई 30 गहराई 2.5 इसका घनमीटर 3923 इसकी भी लागत 1 लाख 60 हजार है. तीसरा साईज थी 59 मीटर लंबाई 30 चौड़ाई गहराई 3 मीटर 4919 उसकी लागत 2 लाख रूपये.

श्री गौरीशंकर बिसेन - चौथा था, 7930 25 गहराई 4953, इसकी लागत 2 लाख, इसमें जो छूटे हैं, उसमें 80 हजार और एक लाख का इसमें अनुदान मिलता है, जैसा कि माननीय सदस्‍य जी ने कहा है कि जांच करा लेंगे वैसे तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो भूमि संरक्षण अधिकारी, सर्वेयर होते हैं, बलराम जलाशय की 100 प्रतिशत जांच करते हैं, कृषि विभाग के ए.डी.ओ. 100 प्रतिशत जांच करते हैं, सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी, कम से कम 20 प्रतिशत की जांच करते हैं और उप संचालक 5 प्रतिशत की जांच करते हैं, लेकिन जैसा कि माननीय सदस्‍य ने कहा है हो सकता है कि उनके पास कोई शिकायत आई हो, हमारे पास तो कोई शिकायत नहीं आई है, फिर भी हम भोपाल से अधिकारियों का दल बनाकर जांच करा लेंगे और माननीय सदस्‍य जहां पर भी जांच में जाना चाहेंगे, वहां पर उनको सम्मिलित भी कर लेंगे ।

लाइट ट्रैप उपकरणों की उपयोगिता

2. ( *क्र. 4559 ) श्री शैलेन्‍द्र पटेल : क्या किसान कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या कीट नियंत्रण के लिए शासन द्वारा लाइट ट्रैप उपकरण वितरित किए गए हैं? यदि हाँ, तो भोपाल संभाग में विगत एक वर्ष में कितने किसानों को उक्‍त उपकरण दिए गए? (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार लाइट ट्रैप उपकरणों की उपयोगिता क्‍या रही? उपकरणों से कीट नियंत्रण का प्रतिशत क्‍या रहा? क्‍या उपकरण के उपयोग से किसानों को कीट नाशक दवा का उपयोग नहीं किया गया? (ग) क्‍या लाइट ट्रैप उपकरण किसानों को अनुदान में दिया गया है? यदि हाँ, तो उपकरण की बाजार कीमत कितनी थी व शासन द्वारा प्रति उपकरण कितनी राशि वहन की गई? (घ) लाइट ट्रैप उपकरण के उपयोग का उपयुक्‍त समय क्‍या था? क्‍या उक्‍त समय में किसानों को उपकरण के उपयोग के लिए बिजली उपलब्‍ध रही?

किसान कल्याण मंत्री ( श्री गौरीशंकर बिसेन ) : (क) जी हाँ। भोपाल संभाग में विगत एक वर्ष में 8000 उपकरण दिये गये, जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) लाईट ट्रैप का उपयोग फसल पर हानिकारक कीटों के प्रकोप की पूर्व सूचना हेतु किया जाता है। इससे कीट नियंत्रण का प्रतिशत, कीट प्रकोप की अधिकता या कमी पर निर्भर करता है। तद्नुसार कीटों के नियंत्रण हेतु अंतिम विकल्प के रूप में कीट नाशक दवा का उपयोग किया जाता है। (ग) जी हाँ। योजना के अंतर्गत फसल प्रदर्शन में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली द्वारा विकसित एवं अनुशंसित लाईट ट्रैप को एक घटक के रूप में प्रावधानित कर रूपये 1800 प्रति लाईट ट्रैप के शत-प्रतिशत अनुदान पर फसल प्रदर्शन में कृषकों को उपलब्ध करवाया गया है। (घ) लाईट ट्रैप उपकरण के उपयोग का उपयुक्त समय फसल बुवाई के तृतीय सप्ताह से फसल कटाई पूर्व तक अनुशंसित है, तद्नुसार फसल प्रदर्शनों में लाईट ट्रैप का उपयोग शाम सात बजे से दस बजे तक उपयोग किया गया, उक्त समय बिजली की उपलब्धता रही है।

परिशिष्ट - ''दो''

श्री शैलेन्‍द्र पटेल- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके संरक्षण के साथ मैं अपना प्रश्‍न करना चाहता हूं, क्‍योंकि लाइट ट्रैप में करोड़ों रूपए के घोटाले का मामला है । माननीय मंत्री जी ने प्रश्‍न के उत्‍तर में कहा है कि लाइट ट्रैप का उपयोग कीटों को पहिचानने के लिए किया जाता है, क्‍या जिन किसानों को लाइट ट्रैप दिए गए हैं, उनको कीटों के पहिचानने की ट्रेनिंग दी गई थी कि ये कौन कौन से कीट हैं, क्‍योंकि इससे कीटों की रोक-थाम नहीं होती है, कीटों को पहचानने के लिए दिया जाता है, तो क्‍या ट्रेनिंग दी गई या सिर्फ लाइट ट्रैप दे दिए गए ।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा दूसरा प्रश्‍न है, जैसा कि उत्‍तर में बताया गया है कि इसका उपयोग का समय शाम को 7 से 10 बजे तक होता है, लेकिन क्‍या खेतों में 10 घण्‍टे बिजली मिलती है, शाम को 6 से 10 बजे तक तो बिजली मिलती ही नहीं है,जब बिजली नहीं मिलती है, तो इस लाइट ट्रैप की उपयोगिता पर सवाल उठता है, जब उपयोगिता का ही नहीं था, तो क्‍यों दे दिए गए ?

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा तीसरा प्रश्‍न यह है मुझे जानकारी दी गई है कि दो महीने के अंदर इस पर रोक-थाम लगा दी गई और कहा गया कि पहले की समिति ने गलत निर्णय लिया था,अब की समिति कह रही है कि उपयोगिता नहीं है, तो इसमें जांच होना चाहिए, उस दौरान जो घोटाला हुआ है, दूसरे विभाग से इसकी जांच की जाए, क्‍योंकि कुछ कंपनियों को फायदा देने के लिए किया गया है ।

अध्‍यक्ष महोदय- सीधा प्रश्‍न करें ।

श्री शैलेन्‍द्र पटेल- मेरा सीधा प्रश्‍न यह है कि जब उसकी उपयोगिता नहीं है, तो क्‍या यूज है, शाम को 7 से 10 लाईट मिलती नहीं है, क्‍या बिजली विभाग से परीमशन ली गई और दूसरा जिनको यह प्रदाय किया गया है,क्‍या उन किसानों को ट्रेनिंग दी गई कि आप कीट कैसे पहचानेंगे, , क्‍योंकि लाखों की संख्‍या में यह प्रदाय किए गए हैं ।

श्री गौरीशंकर बिसेन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय,नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर इन्‍टीग्रेटेड पेस्‍ट मैनेजमेंट जो हमारी संस्‍था है, यह राष्‍ट्रीय कृषि अनुसंधान के अधीनस्‍थ काम करती है और ऐसे कीट जो फसलों के लिए हानिकारक होते हैं, उनके ऊपर यह संस्‍था रिसर्च करती है, उस संस्‍था ने रिसर्च करके लाइट ट्रैप का अनुसंधान किया और उसको राज्‍य सरकारों को, भारत सरकार और भारत सरकार की हमारी इन संस्‍थाओं के द्वारा कहा गया कि जो प्रदर्शन होते हैं, इनमें आप इसका उपयोग करें, भारत सरकार के कहने के बाद ही हमने अपने वैज्ञानिकों का एक दल बनाया और वैज्ञानिकों का दल बनाने के बाद उनसे भी हमने राज्‍य स्‍तर पर उनकी जानकारी ली, उनकी अनुशंसाएं प्राप्‍त की, उसके बाद लाइट ट्रैप प्रदान किए गए हैं, लाइट ट्रैप हमने प्रदान नहीं किया है, यह जो लाइट ट्रैप है, यह एन.सी.आई.पी.एम. का खुद का डिजाइनिंग है और जो देश की अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण संस्‍थाएं हैं, उनको फ्रेंचायजी दिया है, लायसेंस दिया है और उन्‍होंने ही प्रदाय किया है, जहां पर आत्‍मा के प्रोजेक्‍ट हैं या खाद्य सुरक्षा मिशन के जो प्रोजेक्‍ट थे, उनमें हमने अपने डी.डी.ओ को कहा है कि आपकी आवश्‍यकता के अनुसार आप उसके लिए उनके आर्डर प्‍लेस करें, यह कहना असत्‍य है कि इसमें कोई भ्रष्‍टाचार हुआ है, मनगढ़त आरोप लगाने से कोई मतलब नहीं निकलेगा, हमारे सदस्‍य भी बड़े विद्वान सदस्‍य हैं,कृषक हैं,मैं उनके साथ बैठने को तैयार हूं, जब अखवार में थोड़ा सा छपा कि इस लाइट ट्रैम में शेष को अवसर क्‍यों नहीं दिया गया तो हमने इसके लिए भी वैज्ञानिकों को कहा कि आप परीक्षण कर लें और परीक्षण करने के उपरान्‍त वस्‍तु स्थिति से अवगत कराएं, सरकार कभी भी नहीं चाहती कि हमारे किसानों का अहित हो और पूरी जवाबदारी के साथ मैं कह सकता हूं कि बड़ा सोच - समझकर एन.सी.आई.पी.एम.की अनुशंसा के आधार पर 100 प्रतिशत अनुदान पर हमने लाइट ट्रैप का आवंटन किया है ।

श्री शैलेन्‍द्र पटेल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा सीधा सा प्रश्‍न था कि लाईट ट्रैप के यूज के लिये क्‍या उनको कीटों को पहचानने के लिए ट्रेनिंग दी गई ? और जिस समय इसकी उपयोगिता थी, उस समय क्‍या लाईट थी ? और क्‍या बिजली विभाग से उसकी परमीशन ली गई. मैं, आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से उसका उत्‍तर चाहता हूँ.

श्री गौरीशंकर बिसेन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जहां तक लाईट का प्रश्‍न है. मध्‍यप्रदेश में लाईट दो तरह से मिलती है- एक तो अनवरत 24 घण्‍टे, जो हमारे लाईटिंग फेस में है, दूसरी एग्रीकल्‍चर के जो कृषि पम्‍प हैं, उन पर 10 घण्‍टे बिजली मिलती है और 10 घण्‍टे के भी रोस्‍टर अलग-अलग हैं. किसी क्षेत्र में शाम को बिजली मिलती है, किसी क्षेत्र में 12 बजे बिजली मिलती है, किसी क्षेत्र में दोपहर को मिलती है. हम बिजली विभाग से अनुमति लेकर तो यह काम नहीं कर सकते हैं और फिर दूसरी बात, इसको भी हमने बतौर ट्रायल किया है, इसके अच्‍छे परिणाम आने के बाद ही इसको आगे बढ़ायेंगे. मैं एक बात और कहना चाहता हूँ कि हमारे पास किसी भी किसान की शिकायत नहीं है. अब देखिये, एक लाईट को प्‍लेन पेपर पर, हम अगर ऑयल लगा दें तो उस पर कीड़े आकर लगते हैं. उसी तरह से लाईट ट्रैप की डिजाइनिंग हुई है, यह मित्र कीटों को बचाने वाली और हानिकारक कीट उसमें अन्‍दर जाकर मृत होते हैं. इस तरह का बहुत ही इकोनॉमिकल मॉडल था. इसमें 4-5 मॉडल भारत सरकार ने हमारे आई.सी.आर. ने अनुसंधान किया. उस पर सबसे इकोनॉमिकल मॉडल 1,800/- रू., वह हमने लिया है. जिसको की मैन्‍युअल से ऑपरेट किया जाता है, नहीं तो इसके 4-5 मॉडल और भी हैं. हम चाहते तो महंगे मॉडल भी ले सकते थे. लेकिन चूँकि हमारी ग्रान्‍टेट योजना है और इसको हमने ट्रायल बेस पर शुरू किया. इसलिए इस इकोनॉमिक मॉडल को हमने एप्रूव किया. दूसरा, हमने पांच बड़े अधिकारियों का दल बनाकर, यह भी कहा कि पहले तो आपने रिकमेन्‍ड किया. लेकिन यह बात जब सामने आई है कि अन्‍य दूसरे मॉडलों को भी अवसर दिया जा सकता है, तो परीक्षण करके बतायें. उसकी रिपोर्ट हमारे पास नहीं आई है. लेकिन मैं, एक कृषक होने के नाते सरकारी पक्ष भी रखना चाहता हूँ और किसानों का पक्ष भी रखना चाहता हूँ. कई मर्तबा कीटों के प्रकोट से बहुत बड़ा नुकसान होता है, मुझे लगता है कि यह जो प्रयोग किया गया है. हमारे किसानों के हित में है.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें हित की बात नहीं है. किसानों को ट्रेनिंग नहीं दी गई है, उस समय लाईट नहीं थी तो उसकी उपयोगिता का सवाल उठता है कि वह क्‍या उपयोगी था और अनुपयोगी था ? उसकी अगर ट्रेनिंग दी जाती और लाईट सुनिश्चित करते तो निश्चित रूप से उपयोगी होता और उस ओर ध्‍यान नहीं दिया गया और किसी विशेष कम्‍पनियों को फायदा देने के लिए बगैर किसी तैयारी के, यह खरीदी की गई.

श्री गौरीशंकर बिसेन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह निराधार है. हमने नहीं खरीदा है.

श्री रामनिवास रावत - आप जांच करा लीजिये, खरीदी में अनियमितता हुई है.

श्री गौरीशंकर बिसेन - किसकी जांच करायेंगे. भारत सरकार का उपक्रम हैं, उसमें, उन्‍होंने ऑर्डर प्‍लेस किया है, हमने नहीं किया है. रहा सवाल ट्रेनिंग का, तो ट्रेनिंग का तो कुछ है ही नहीं. उसको तो सिर्फ लटकाना है कि जो मित्र कीट आएंगे वह बच जायेंगे और हानिकारक कीट होंगे, वे मर जायेंगे.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल - माननीय मंत्री जी, उससे मरेंगे नहीं, वह तो केवल मात्र पहचान के लिए है.

श्री गौरीशंकर बिसेन - कीट आकर जमा होते हैं, मरते भी हैं.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल - फिर उस क्षेत्र में दवाई क्‍यों उपयोग की गई है ?

अध्‍यक्ष महोदय - प्रश्‍न आ गया है.

जनश्री एवं आम आदमी बीमा योजना का क्रियान्‍वयन

प्रश्‍न 3. ( *क्र. 3672 ) श्रीमती पारूल साहू केशरी : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सागर जिले में जनपद पंचायतें जनश्री बीमा एवं आम आदमी बीमा के क्रियान्‍वयन की ओर से पूरी तरह उदासीन हैं? (ख) यदि नहीं, हैं तो बतावें कि वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 में किस-किस जनपद पंचायत के अंतर्गत कितने लोगों का जनश्री बीमा एवं आम आदमी बीमा कराया गया तथा कितने लोगों को उक्‍त बीमा योजनाओं का लाभ दिया गया है? (ग) यदि जनपद पंचायतों द्वारा लक्ष्‍य के अनुसार कार्यवाही नहीं की गयी है, तो क्‍या उत्‍तरदायी शासकीय सेवकों के विरूद्ध कोई कार्यवाही की जावेगी? (घ) यदि हाँ, तो कब तक और किसके विरूद्ध? संबंधित शासकीय सेवक का नाम पदनाम सहित बतावें?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जी नहीं। (ख) जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र 1 एवं 2 अनुसार(ग) उत्तरांश के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) कार्यवाही का प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''तीन''

श्रीमती पारूल साहू केशरी - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी ने जो जानकारी उपलब्‍ध कराई हैख्, उसके लिए उनका धन्‍यवाद करना चाहूँगी. और माननीय मंत्री जी को अवगत कराना चाहॅूंगी कि जब भी किसी भूमिहीन खेतिहर मजदूर परिवार के मुखिया की डेथ होती है तो उस परिवार पर विपदा टूट पड़ती है. इस स्थिति में ये जो आम आदमी बीमा योजना एवं जन श्री बीमा योजना हैं.

अध्‍यक्ष महोदय, यह पीडि़त परिवार के लिए वरदान का काम करती हैं. परन्‍तु अज्ञानतावश या कर्मचारियों की उदासीनता के चलते इन योजनाओं का लाभ सागर जिले में पिछले 2 वर्ष में शून्‍य की स्थिति में रहा है. मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहूँगी कि इन योजनाओं को गुड गवर्नेंस के क्षेत्र में एक उपलब्धि की तरह लोक सेवक गारन्‍टी अधिनियम के दायरे में लायें ताकि मध्‍यप्रदेश के लाखों परिवारों को इन योजनाओं का निश्चित लाभ, निर्धारित समय पर मिल सके और मध्‍यप्रदेश गुड गवर्नेंस के क्षेत्र में एक और उपलब्धि की ओर अग्रसर हो.

श्री गोपाल भार्गव -- अध्यक्ष महोदय, सन् 2008 में आम आदमी बीमा योजना और 2009 में जनश्री बीमा योजना, जो एलआईसी है, उसके माध्यम से देश में शुरु हुई थी. यह बात सही है, जैसा कि माननीय सदस्या ने पूछा है और मैंने जो आंकड़े देखे हैं, जितने लोग इस दायरे में हैं, जनश्री बीमा योजना और आम आदमी योजना के बहुत ही कम संख्या में ऐसे लोगों के लिये लाभ मिल सका है, जबकि बहुत बड़ी संख्या भरने वालों की राशि,सरकार की तरफ से जो राशि दी जाती है, उसकी काफी बड़ी संख्या है. मैं माननीय सदस्या जी को अवगत कराना चाहता हूं कि पिछले दिनों प्रधानमंत्री जी ने 3 बीमा योजनाएं इसी प्रकार की देश में प्रवर्तित की हैं, देश के लिये सौंपी हैं. विभाग का विचार यह है कि अब आम आदमी बीमा योजना, जनश्री बीमा योजना धीरे धीरे हम इसके लिये समाप्त करके और वह तीन बीमा योजनाएं, जो भारत सरकार ने अभी इस साल नई देश के लिये दी हैं. उन योजनाओं में हम इनको भी समाहित करेंगे और मुझे विश्वास है कि इन नई बीमा योजनाओं के माध्यम से बहुत ज्यादा लोग लाभान्वित होंगे. अभी इसमें जो लाभान्वित होने वाले लोगों का प्रतिशत है, वह 2 प्रतिशत से भी कम है, यह बात सही है और जितनी बड़ी राशि एलआईसी के लिये प्रीमियम के रुप में प्राप्त हुई है, उसका हम 5 प्रतिशत भी उसमें प्राप्त नहीं कर सके हैं. यह बात भी सही है, लेकिन अधिकारियों, कर्मचारियों की इसमें कोई कमी नहीं है. एलआईसी में प्रकरण के जो निर्णय हैं, प्रकरणों के निष्पादन में, उनके फैसले करने में, उसमें थोड़ा सा विलम्ब होता है और इस कारण से अब हम नई योजनाओं में इन योजनाओं को समाहित करने के बारे में विचार कर रहे हैं.

श्रीमती पारुल साहू केशरी -- अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से कहूंगी कि पिछले दो वर्षों में जिन हितग्राहियों को इसका लाभ नहीं मिल पाया है, इसके लिये क्या मंत्री जी प्रदेश स्तर पर इसकी समीक्षा के लिये समिति बनायेंगे और प्रदेश स्तर पर पीएस द्वारा इसकी समीक्षा करायेंगे. साथ ही साथ जो जिला लेविल पर कलेक्टरों द्वारा इसकी समीक्षा करायेंगे, ताकि जो पिछले दो वर्षों में  हितग्राहियों को लाभ नहीं मिल पाया है, उनको इसका लाभ मिले.

श्री गोपाल भार्गव -- अध्यक्ष महोदय, यह बात सही है कि जानकारी के अभाव में बहुत से लोग अपने क्लेम पेश नहीं करते और व्यवस्था की कमजोरी के कारण भी कभी कभी क्लेम नहीं बनाये जाते हैं और समय पर नहीं भेजे जाते हैं. मैं जिले के सभी अधिकारियों को, कलेक्टर्स को, जिला पंचायत के सीईओज को, जनपद पंचायत के सीईओज को आज ही पत्र लिख करके, उनसे कि जो पिछले दो वर्षों से लंबित मामले हैं, यदि वह कहीं विचाराधीन लंबित हैं, तो उनके लिये जल्दी से जल्दी वह संबंधित कम्पनी के पास भेजें और स्वयं सम्पर्क करके उन मामलों को निर्णित करवायें और जो हितग्राही हैं, जो प्रभावित लोग हैं, उनको उसका लाभ दिलवायें.

श्रीमती पारुल साहू केशरी -- मंत्री जी, बहुत बहुत धन्यवाद.

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से एक निवेदन करुंगा कि इस तरह के स्थाई आदेश जारी कर दें, कुछ परिवार ऐसे होते हैं, जो आवेदन ही नहीं कर पाते हैं. उन्हें जानकारी ही नहीं है. तो पंचायत सचिव और वहां के जो भी कर्मचारी हैं, पटवारी या पंचायत सचिव की, जिम्मेदारी फिक्स कर दें कि ऐसे परिवार का मुखिया अगर कोई उसमें मरता है, तो उस अवधि में उनसे फार्म भरवाकर के प्रस्तुत कर दें. इसमें बड़ी दिक्कत होती है.

अध्यक्ष महोदय -- प्रश्न संख्या 4. ठीक है, उनका सुझाव है, उनका उत्तर देने की जरुरत नहीं है.

श्री गोपाल भार्गव -- अध्यक्ष महोदय, जो पत्र भेजेंगे, उसमें उत्तरदायित्व भी निर्धारित कर देंगे.

मुख्‍यमंत्री सड़क योजना के तहत अमानक निर्माण कार्य

4. ( *क्र. 5544 ) श्री चम्पालाल देवड़ा : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) देवास जिले के बागली एवं कन्‍नौद विकासखण्‍ड में तृतीय चरण में जिन मार्गों का निर्माण कार्य हुआ है अथवा कार्य किया जा रहा है, इनमें निम्‍न स्‍तर का घटिया कार्य कराये जाने की शिकायतें विगत 3 वर्षों में कब-कब प्राप्‍त हुईं? (ख) प्रश्‍नांकित निर्माण कार्य किन-किन एजेन्सियों के माध्‍यम से किया जा रहा है? क्‍या विभागीय अधिकारियों ने शिकायतों की जाँच कराई है? यदि हाँ, तो जाँच के परिणाम बतायें? (ग) किन-किन अधिकारियों ने जाँच की है? अधिकारी का नाम, पद बतावें। क्‍या शिकायतकर्ता को जाँच प्रतिवेदन से अवगत कराया गया? यदि नहीं, तो क्‍यों? यदि हाँ, तो कब अवगत कराया गया? (घ) क्‍या दिनांक 12 जून, 2015 की जिला सतर्कता की बैठक में शेष कार्य अगस्‍त 2015 तक पूर्ण किये जाने के निर्देश दिये गये थे? यदि हाँ, तो प्रश्‍नांकित कार्य पूर्ण हो गये हैं? यदि नहीं, तो क्‍यों? कारण दें?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) उक्‍त विकासखण्‍डों में निम्‍न स्‍तर का घटिया कार्य किये जाने की शिकायत दिनांक 02.08.2014 एवं 20.06.2013 को की गई है। (ख) प्रश्‍नांकित निर्माण कार्य। (1) मेसर्स कराड़ा कंस्‍ट्रक्शन कंपनी इन्‍दौर। (2) मेसर्स सरमन इंडिया रोड मेकर्स प्रा.लि. भोपाल। (3) मेसर्स ज्‍योति कंस्‍ट्रक्शन कंपनी हरदा के माध्‍यम से किया जा रहा है। शिकायतों की जाँच कराई, जाँच में कार्य संतोषप्रद पाये गये। (ग) कार्यों की जाँच राज्‍य स्‍तरीय क्‍वालिटी मॉनिटर्स (1) श्री एस.डी. भाले (2) श्री एस.के.एस. रघुवंशी (3) श्री आर.के. खरे (4) श्री जे.एल. गाँधी से कराई गई। जाँच प्रतिवेदन से माननीय विधायक जी को दिनांक 09.02.2016 को अवगत कराया गया है। (घ) जी हाँ। सभी कार्य पूर्ण नहीं हुये हैं। कार्य अपूर्ण रहने का कारण मार्गों का वनक्षेत्र में होना, पूर्व ठेकेदार द्वारा कार्य अधूरा छोड़ने के कारण अनुबंध निरस्‍त किया जाना, निजि भूमि होना आदि है।

श्री चम्पालाल देवड़ा -- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न मध्यप्रदेश सरकार की उन महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक योजना मुख्यमंत्री सड़क योजना है, जिससे 500 की कम आबादी वाले गांवों को सड़क सुविधा उपलब्ध होती हैं और यह पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की एक बहुत महत्वपूर्ण योजना है. लेकिन मेरे विधान सभा क्षेत्र के विकास खण्ड बागली और कन्नोद में तृतीय चरण में जिन सड़कों का निर्माण हुआ था, उन सड़कों के संबंध में मैंने शिकायत लगातार की है और विधान ससभा में भी प्रश्न लगाये थे, लेकिन विभाग ने कहा कि सिर्फ दो बार ही शिकायत प्राप्त हुई. मेरा प्रश्न मंत्री जी से यह है कि जिन अधिकारियों ने मेरे विधान सभा क्षेत्र में शिकायत के बाद सड़कों की जांच की हैं, वह कौन कौन सी सड़कें ऐसी हैं, जिनकी जांच की गई और जांच में विभाग ने इस प्रश्न के जवाब में बताया है कि वह सड़कें ठीक पाई गईं.

श्री गोपाल भार्गव -- माननीय अध्यक्ष महोदय, देवास जिले के बागली में पैकेज नंबर 217 खजुरिया-बीना से रमलखेडी, सेकेण्ड फेस की- बडियामांडु से मेरूखेडी, मेडिया गुराडिया से बरखेड़ालाड, धावड़िया से पांजरिया, धावड़िया से बावडीखेडा, चापला-बागलीरोड से लखवाड़ा, उदयनगर से कोटखेडी, एमडीआर से डोगली, एमडीआर से चतरपुर, महीगांव से सरालीबीड, पांडु तालाब उदय नगर से अंजनूर, प्रेमगढ़ से बावडीखेड़ा, रामपुरा से सुगलियापुरा, बिलवली से लालपिपल्या, बागली पुजापुरा से कोटला, बिलावली से लाली पिपल्या, धासड़ से किट्टी , खजुरिया से सुरलाय, एमडीआर से बेलाखाड़, एमडीआर से बोरखेडी, एमडीआर से कीटखेडी..

अध्यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी यह सूची माननीय सदस्य को उपलब्ध करा दें.

श्री गोपाल भार्गव-- अध्यक्ष महोदय, इन मार्गों का निरीक्षण हुआ है और इनकी जांच हुई है.

श्री चम्पालाल देवड़ा- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह सड़क लगातार 2-3 साल से अपूर्ण पडी है. इसमें भारी भ्रष्टाचार हुआ है. घटिया निर्माण हुआ है.

अध्यक्ष महोदय-- आप सीधा प्रश्न कर दें कि आप क्या चाहते हैं.

श्री चम्पालाल देवड़ा-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं यह चाहता हूं कि जिन अधिकारियों ने जांच की, असत्य जानकारी विधानसभा को दी है. सबसे पहले तो उन अधिकारियों को, जिनके मंत्री जी ने नाम बताये हैं 4 अधिकारी यहां से भेजे थे, उन चारों अधिकारियों के साथ में प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी को भेजकर के क्या इस मामले की जांच करायेंगे, मेरे समक्ष जांच करायेंगे, इसकी समय सीमा बतायेंगे.

श्री गोपाल भार्गव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, विभाग में इन सड़कों की जांच के लिये स्टेट क्वालिटी मानीटर (State Quality Monitors)होते हैं. इसमें 5 जगह, 5 स्टेट क्वालिटी मानीटर ने इनकी जांच की है कन्नौद में आर. के. खरे ने, बागली में जे. एल. गांधी ने, बागली में एस. डी. भाले ने, कन्नौद में एसकेएस रधुवंशी ने, बागली में आर. के. शर्मा ने, इन लोगों ने स्टेट क्वालिटी मानीटर्स के रूप में उसकी जांच की है. माननीय सदस्य बता दें वे कौन सी सड़क के बारे में जानना चाहते हैं हम यहां से वरिष्ठ अधिकारी चीफ इंजीनियर स्तर के अधिकारी को भेजकर के इसकी जांच करा लेंगे और गड़बड़ी पाई जायेगी तो कार्यवाही करेंगे. माननीय सदस्य चाहें तो साथ में चले जायें, वह भी बता देंगे.

श्री चम्पालाल देवड़ा- इसकी समय सीमा और बता दें.

अध्यक्ष महोदय-- जब आप नाम दे देंगे.

श्री गोपाल भार्गव- इस सत्र की समाप्ति के तुरंत बाद.

श्री चम्पालाल देवडा- धन्यवाद.

 

प्रश्न क्रमांक -5 श्री के.पी.सिंह (अनुपस्थित)

गोटेगांव में अनुविभागीय अधिकारी राजस्‍व की पदस्‍थापना

6. ( *क्र. 4368 ) डॉ. कैलाश जाटव : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) गोटेगांव में अनुविभागीय अधिकारी राजस्‍व (एस.डी.एम.) के पद की पूर्ण कालिक स्‍थापना है या नहीं? यदि नहीं, तो क्‍या शासन की कोई ऐसी मंशा है कि गोटेगांव में अनुविभागीय अधिकारी राजस्‍व (एस.डी.एम.) की पदस्‍थापना की जावेगी? (ख) यदि हाँ, तो कब तक? यदि स्‍थापना की जाती है, तो क्‍या अनुविभागीय अधिकारी हेतु पूर्ण कालिक स्टाफ की पर्याप्‍त उपलब्‍धता की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक?

राजस्व मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) गोटेगांव में अनुविभागीय अधिकारी राजस्‍व (एस.डी.एम.) का पद शासन द्वारा स्‍वीकृत है। पूर्ण कालिक अनुविभागीय अधिकारी पदस्‍थ है। (ख) उतरांश '''' के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। जी हाँ, समय-सीमा बताना संभव नहीं।

 

डॉ.कैलाश जाटव- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने मेरे सवाल के जवाब में जो उत्तर दिया है उससे मैं संतुष्ट नहीं हूं. इसमें (क) में मेरा प्रश्न यह था कि गोटेगांव में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (एसडीएम) के पद की पूर्णकालिक स्थापना है या नहीं . अगर नहीं है तो क्या शासन की कोई ऐसी मंशा है कि गोटेगांव में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व(एसडीएम) की पद स्थापना की जायेगी. मेरे इस प्रश्न का जवाब नहीं आया है.

अध्यक्ष महोदय-- आ तो गया है.

डॉ.कैलाश जाटव-- अध्यक्ष महोदय नहीं आया है. जो जवाब यहां पर आया है वह असत्य है.

अध्यक्ष महोदय-- आया है, लिखा है कि पूर्ण कालिक अनुविभागीय अधिकारी पदस्थ है.

डॉ.कैलाश जाटव -- अध्यक्ष महोदय, गोटेगांव में अभी भी अनुविभागीय अधिकारी राजस्व का नहीं है, एसडीएम जरूर बैठा हुआ है .मंत्री जी मैं आपसे अनुरोध करूंगा कि यह जवाब जिस अधिकारी के द्वारा दिया गया है यह असत्य जानकारी है.

अध्यक्ष महोदय-- मंत्री जी आप क्लीयर कर दें.

श्री रामपाल सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य कह रहे हैं कि वह मेरे जवाब से संतुष्ट नहीं है, मैं बताना चाहता हूं कि गोटेगांव में अनुविभागीय अधिकारी अभी विधिवत काम कर रहे हैं, गोटेगांव में काम चल रहा है. फिर भी माननीय सदस्य की जो चिंता है माननीय सदस्य की जो भावना है उसका सम्मान करते हुये हम स्थाई अनुविभागीय अधिकारी पदस्थ कर देंगे .

डॉ. कैलाश जाटव -- माननीय अध्यक्ष महोदय, इस संबंध में करीब ढाई वर्षों से पत्राचार कर रहा हूं मेरा अनुरोध है कि कब तक आदेश कर देंगे ताकि वहां की जनता को इसका लाभ मिल सके.

श्री रामपाल सिंह -- अध्यक्ष महोदय, जल्दी ही, शीघ्र आदेश कर देंगे.

पुरानी छाबनी ग्‍वालियर स्थित भूमि का नियम विरूद्ध आवंटन

7. ( *क्र. 2622 ) डॉ. गोविन्द सिंह : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्राम पुरानी छाबनी तहसील व जिला ग्‍वालियर के सर्वे क्रमांक 783, 784, 785, 786 की भूमि मिसिल बंदोबस्‍त संवत 1997 खसरा के खाना नं. 3 में मिल्कियत सरकार ग्‍वालियर गवर्नमेंट तथा खाना नं. 6 में कब्रिस्‍तान अंग्रेज कब्‍जे तहसील वशरह नं. 497 दर्ज है? (ख) इंडियन चर्च एक्‍ट 1997 की किस धारा व नियम के तहत चर्च ऑफ इंगलैण्‍ड की संपत्ति इंडिया में होने पर चर्च ऑफ इंडिया में समायोजित की गई थी? ग्राम छाबनी तहसील ग्‍व‍ालियर की मिसिल बंदोबस्‍त संवत 1997 में किस खसरे में सर्वे नं. 783, 784, 785 एवं 786 की भूमि चर्च ऑफ इंग्‍लैण्‍ड की थी? (ग) क्‍या उक्‍त भूमि ग्राम पंचायत की मांग पर नायब तहसीलदार रायरू (ग्‍वालियर) ने जनहित में दिनांक 17.08.2009 को शासकीय इंटर कॉलेज पुरानी छाबनी हेतु आरक्षित कर दी थी? (घ) यदि हाँ, तो तत्‍कालीन कलेक्‍टर ग्‍वालियर ने दस्‍तावेज का सत्‍यापन किए बिना चर्च को अनुचित लाभ पहुँचाकर इंडियन चर्च ट्रस्‍टीज चर्च ऑफ इंडिया सी.आई.पी.बी.सी. डायसीस ऑफ नागपुर सी.आई.पी.बी.सी. के नाम दर्ज आदेश निरस्‍त कर राजस्‍व खसरे में शासकीय दर्ज कराकर भूमि की हेराफेरी करने वाले दोषी अधिकारी एवं कर्मचारी के विरूद्ध जाँच कराकर कब तक कार्यवाही की जाएगी? यदि नहीं, तो क्‍यों?

 

राजस्व मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) :

डॉ.गोविंद सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने मेरे प्रश्न के (ख) में जवाब दिया है कि इंडियन चर्च एक्ट 1997 नाम का कोई अधिनियम नहीं है. मैं इसलिये यह बात जानना चाहता हूं कि इसके पूर्व जुलाई और दिसम्बर सत्र में प्रश्न लगा था उसमें विभाग द्वारा लिखा गया था कि चर्च एक्ट इतने-इतने के तहत जमीन आवंटित की गई है.पहले आपने यह दे दिया तो मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि पहले का उत्‍तर सही था कि आज का. अगर पहले गलत उत्‍तर दिया था, जिन अधिकारियों ने दिया उनके खिलाफ कार्यवाही करेंगे एक. एक ही बार में पूछ लेता हूं. दूसरा आपने लिख दिया न्‍यायालय प्रक्रिया के तहत है, चलो ठीक है न्‍यायालय का मामला है तो उसमें ज्‍यादा नहीं बोलते, लेकिन जो न्‍यायालय के बाहर है चूंकि उस भूमि को पूर्व में शासकीय इंटर कॉलेज छाबनी के लिये आवंटित की गई थी. अब भूमि जब पुन: शासकीय घोषित हो गई फिर लोग उस पर कब्‍जा करेंगे, फिर मनमानी तरीके से बंदरबाट करेंगे. तो क्‍या उस भूमि को पुन: आप जनहित में छात्रों के हित में पूर्व में करीब 10-11 वर्ष शासकीय इंटर कॉलेज की भूमि रही है, तो पुन: उसको शासकीय इंटर कॉलेज छाबनी बोर्ड के लिये निर्धारित निर्देशित करेंगे कि पुन: वह शासकीय इंटर कॉलेज को दे दी जाये ताकि वहां भवन बन सके.

श्री रामपाल सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इंडियन चर्च एक्‍ट 1997 का आपने पूछा था, वास्‍तव में सही यह है कि 1927 का है यह इंडियन चर्च एक्‍ट, तो आज का आप सही मान लेंगे, यह आज का सही है. दूसरा आपका धन्‍यवाद है कि आप सरकारी जमीन की चिंता कर रहे हैं और दिनांक 20.1.16 को हमने पूर्वानुसार राजस्‍व अभिलेख में जमीन को शासकीय दर्ज कर लिया है और इंटर कॉलेज या जहां भी जरूरत है, वह आवेदन करेंगे अध्‍यक्ष महोदय सरकारी जमीनों की कहीं इस तरह की मांग होती है तो हम निश्चित रूप से इंटर कॉलेज या कहीं भी, लेकिन मैं इस बात को जरूर कहूंगा मैं आपको विश्‍वास दिलाऊंगा कि जो जमीन है उसका सही उपयोग होगा, जो दुरूपयोग करेंगे उस पर हम लोग कार्यवाही करेंगे.

डॉ. गोविंद सिंह-- मेरी आपसे प्रार्थना है कि वह जमीन इंटर कॉलेज के लिये थी और 7-8 वर्ष इंद्राज रही तो स्‍कूल के बच्‍चों ने और क्षेत्र के लोगों ने जनहित में कुछ सहयोग भी किया और भवन बनबाना चाहते थे, तब तक उस पर कब्‍जा होकर उसको किसी दूसरे के नाम घोषित कर दी, अब पुन: आप इंटर कॉलेज को दे दो एक तो बीच बस्‍ती की जमीन है फिर किसी की निगाह होगी फिर सांठ-गांठ करके कब्‍जा कर लेंगे लोग अपने नाम करा लेंगे, कोर्ट कचहरी में जाकर एकतरफा अधिकारी मिल जाते हैं, इसलिये पुन: आप शासकीय घोषित कर दें इंटर कॉलेज के लिये तो आपकी बड़ी मेहरबानी होगी.

अध्‍यक्ष महोदय-- कॉलेज के लिये चाहते हैं वह जमीन.

श्री रामपाल सिंह-- अध्‍यक्ष महोदय इसका अच्‍छा सुझाव माननीय गोविंद सिंह जी ने दिया है, इस जगह को शासकीय दर्ज कर ली है, अगर और कहीं नहीं बना होगा तो कॉलेज की तरफ से वह एक आवेदन कर दें कलेक्‍टर ग्‍वालियर को, निश्चित रूप से आपके सुझाव पर गंभीरता से, बहुत ही गंभीरता से विचार किया जायेगा.

 

मुख्‍यमंत्री ग्राम सड़क योजना का क्रियान्‍वयन

8. ( *क्र. 3311 ) श्री विष्‍णु खत्री : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या मुख्‍यमंत्री ग्राम सड़क योजना में बैरसिया विधानसभा क्षेत्रांतर्गत कितने ग्राम जोड़े जाने की पात्रता रखते हैं? (ख) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित ग्रामों को जोड़े जाने के संबंध में विभाग की क्‍या कार्य योजना है एवं उल्‍लेखित ग्रामों को कब तक इस योजना के तहत जोड़ दिया जावेगा? (ग) सुदूर ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सुदूर बसे ग्रामों को प्राथमिकता के आधार पर जोड़ने की कोई योजना लंबित है अथवा नहीं? यदि नहीं, तो प्राथमिकता के आधार पर इन सुदूर बसे ग्रामों को कब तक जोड़ दिया जावेगा?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) मुख्‍यमंत्री ग्राम सड़क योजनांतर्गत बैरसिया विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान में 36 ग्राम जोड़े जाने की पात्रता रखते हैं। (ख) मुख्‍यमंत्री ग्राम सड़क योजनांतर्गत पात्र ग्रामों को जोड़े जाने की स्‍वीकृति प्रदान की गई है। निर्माण कार्यों की निविदा आमंत्रण की कार्यवाही प्रचलन में होने से उक्‍त ग्रामों को जोड़ने की निश्चित समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। (ग) जी नहीं। सुदूर ग्राम संपर्क सड़क योजनांतर्गत मनरेगा के अभिसरण से आंतरिक मार्ग, मजरे टोले एवं खेत समूह को जोड़ने की उपयोजना स्‍वीकृत की गई है। इस योजनांतर्गत कार्यों की स्‍वीकृति का निर्णय पंचायतीराज संस्‍थाओं द्वारा लिया जाता है, अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्री विष्‍णु खत्री-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न में मैंने माननीय मंत्री महोदय से यह जानना चाहा था कि बैरसिया विधानसभा के अंतर्गत ऐसे कितने ग्राम हैं जो मुख्‍यमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत जुड़ने की पात्रता रखते हैं, तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय विभाग ने बड़ी चतुराई से जो गत वर्ष स्‍वीकृत हुये थे मुख्‍यमंत्री ग्राम सड़क योजना में जो ग्राम जोड़े जाने हे‍तु उनकी जानकारी इसमें दे दी है और वह भी 38 की जगह 36 दी है, और माननीय मंत्री जी हमारे प्रभारी मंत्री भी हैं, लेकिन उनकी कृपा नहीं बरस रही है, बैरसिया विधानसभा क्षेत्र में.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप प्रश्‍न पूछ लें सीधे.

श्री विष्‍णु खत्री-- मेरा इसमें केवल इतना निवेदन है कि जो गांव जोड़ लिये गये हैं उनके स्‍थान पर जो गांव जोड़े जाने हैं वह मेरी मंशा थी कि उन गांवों को विभाग शामिल करेगा कहीं न कहीं और मैं माननीय मंत्री महोदय से उसमें आश्‍वासन चाह रहा था. इसमें भैंसखेड़ा से चोपड़ा, कलारा से उनीदा, दिल्‍लौद से रूसल्‍ली, ईंटखेड़ी से मस्‍तीपुरा, शाहपुर से परवलिया, पुरा छिंदवाड़ा से शेखपुरा, अगरिया से छापर, मुगालिया हाट से रातीबड़, डांगापुरा से ललोई और कड़ैयाचबर से ललोई और इसी प्रकार माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बरखेड़ा खुर्द से गांधीनगर....

अध्‍यक्ष महोदय-- लिस्‍ट में कितने हैं, आप यहां पढ़ने की बजाय उनको दे दीजिये. अब पूछ लीजिये इनका क्‍या करना है.

श्री विष्‍णु खत्री-- माननीय मंत्री जी क्‍या आश्‍वस्‍त करेंगे कि यह जो गांव जो पात्रता रखते हैं मुख्‍यमंत्री ग्राम सड़क योजनांतर्गत जुड़ने की, क्‍या माननीय मंत्री जी इस वित्‍तीय वर्ष के अंदर उनको इस योजना में शामिल करेंगे.

श्री गोपाल भार्गव--अध्यक्ष महोदय, हम लोगों ने मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना बनायी है वैसे तो जो प्रश्न माननीय विधायक जी ने पूछा वह राजमाता सिंधिया महाविद्यालय का, लेकिन मैं समझा कि कुछ त्रुटि है, मैंने उसमें विश्वविद्यालय की जानकारी दी क्योंकि महाविद्यालय विश्वविद्यालय में ही संलग्न है. मैं समझता हूं कि इसमें कहीं कोई भ्रम की स्थिति नहीं है. अनेक तरह के मदों को वित्त विभाग अकेले कृषि ही नहीं, सभी क्षेत्रों में देता है. मैं एक बात कहना चाहता हूं कि आयोजना सामान्य मांग संख्या 54, इसमें भी प्रावधान वर्ष 2013-14, 2014-15, एवं 2015-16 में किया गया है. आदिवासी उपयोजना मांग संख्या 54 में भी प्रावधानित किया गया है, अनुसूचित जाति उप योजना मांग संख्या 64 में भी प्रावधानित किया गया है. तीन मदों से पैसा सभी महाविद्यालयों को, विश्वविद्यालय को और अनेक संस्थाओं को दिया जाता है. लोक निर्माण विभाग तक के पुलों के निर्माण के लिए आदिवासी उपयोजना का पैसा दिया जाता है.

श्री संजय उइके - अध्यक्ष महोदय, मेरे पास में प्लॉनिंग कमीशन की दिनांक 18.6.2000 की गाईडलाईन है, जिसमें साफ निर्देश हैं कि गैर आदिवासी क्षेत्र में अनुसूचित जातियों के लिए जो योजनाएं हैं सीधे उनका लाभ देने के लिए व्यय की जा सकती है नहीं तो किसी भी विभाग को सांकेतिक आवंटन नहीं होगा. यह साफ निर्देश हैं. क्या इस निर्देश का उल्लंघन नहीं है?

श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन- मुझे लगता है आप यह दे दें, हम इसे फाईनेंस को भेज देंगे.

श्री संजय उइके - धन्यवाद.

फर्जी निर्वाचन में लिप्‍त कर्मियों की पदोन्‍नति/स्‍थानांतरण

12. ( *क्र. 5447 ) श्री मानवेन्द्र सिंह : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या वर्ष 2011-12 में हुए अंजनी प्रा.उ.स.भं.मर्या. चन्‍दला (छतरपुर) के फर्जी निर्वाचन की जाँच उपरांत पुष्टि हो चुकी है? यदि हाँ, तो संबंधित जाँच प्रतिवेदन में संलिप्‍त दोषी कर्मियों के नाम/पदनाम उल्लेखित करें? (ख) क्‍या उक्‍त कर्मियों के विरूद्ध विभागीय जाँच के आदेश जारी हैं? यदि हाँ, तो उक्‍त कर्मियों के नाम/पदनाम, विभागीय जाँच संस्‍थापित करने का आदेश क्र./दि., जाँच अधिकारी का नाम/पदनाम, कर्मियों की अधिवार्षिकी आयु की तिथि, प्रश्‍न दिनांक तक विभागीय जाँच पूर्ण/अपूर्ण, अपूर्ण होने के कारण सहित जानकारी स्‍पष्‍ट करें कि उक्‍त जाँच प्रतिवेदन के परिप्रेक्ष्‍य में विभागीय जाँच के अंतिम आदेश पारित न करने के लिए कौन दोषी है? दोषी अधिकारी का नाम/पदनाम लेख कर बताएं। (ग) क्‍या विभागीय जाँच लंबित रहते उक्‍त में से किसी कर्मी को पदोन्‍नति का लाभ दिया गया है? यदि हाँ, तो उक्‍त कर्मी का नाम/पदनाम लेख करें? (घ) क्‍या उक्‍त पदोन्‍नति आदेश में यह उल्‍लेख है कि पदोन्‍नत कर्मचारी के विरूद्ध विभागीय जाँच संस्‍थापित हो, तो पदोन्‍नति‍ आदेश स्‍थगित रखकर कार्यमुक्ति/कार्यग्रहण न कराया जाए? यदि हाँ, तो निर्देशों की अनदेखी कर उक्‍त कर्मी के पक्ष में कार्यमुक्ति आदेश जारी कर कार्य ग्रहण कराकर पदोन्‍नति लाभ व स्‍थानांतरण जैसे प्रतिकूल आदेश जारी किये गये हैं? उक्‍त प्रतिकूल आदेश जारी करने वाले दोषी अधिकारी के नाम/पदनाम का उल्‍लेख करें। (ड.) क्‍या शासन उक्‍त प्रतिकूल आदेशों को तत्‍काल प्रभाव से निरस्‍त कर उक्‍त अधिकारियों के विरूद्ध दण्‍डात्‍मक कार्यवाही करेगा?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जी हाँ, जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र एक अनुसार है। (ख) जाँच में दोषी पाये गये अधिकारियों/कर्मचारियों के विरूद्ध कार्यवाही की जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र दो अनुसार है। विभागीय जाँच प्रक्रियाधीन होने से कोई दोषी नहीं है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी नहीं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) उत्तरांश के परिप्रेक्ष्य में किसी भी अधिकारी/कर्मचारी को पदोन्नति का लाभ नहीं दिया गया, किन्तु प्रशासकीय आवश्यकता के आधार पर एक कर्मचारी का स्थानान्तरण किया गया है, जिसमें कोई अधिकारी दोषी नहीं होने से शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ड.) उत्तरांश के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न ही उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''पाँच''

श्री मानवेन्द्र सिंह - अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्नांश क के उत्तर में माननीय मंत्री जी ने स्वीकार किया है कि अंजनी प्राथमिक उपभोक्ता सहकारी भण्डार मर्यादित चन्दला के संचालक मंडल को फर्जी तरीके से निलंबित किया है. मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करना चाहता हूं कि क्या दोषी पाये गये जो अधिकारी-कर्मचारी के नाम परिशिष्ट में दिये हैं, इसकी रिपोर्ट शासन को दिनांक 13.4.2012 को प्राप्त हुई है. क्या उन दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही करेंगे?

श्री गोपाल भार्गव - अध्यक्ष महोदय, इसमें से वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक श्री तिवारी को निलंबित किया गया था, इसके अलावा कुछ अधिकारियों को चेतावनी जारी की गई थी, लेकिन जैसा माननीय सदस्य ने अवगत कराया है, जो रिपोर्ट आई है उस रिपोर्ट के आधार पर इसमें जो भी दोषी होंगे उनके विरुद्ध भी कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी.

श्री मानवेन्द्र सिंह - अध्यक्ष महोदय, क्योंकि यह रिपोर्ट से सिद्ध हो गया है तो मैं माननीय मंत्री जी से अनुरोध करूंगा कि इस संस्था को फिर से चालू कराने का आदेश प्रदान करेंगे?

श्री गोपाल भार्गव - अध्यक्ष महोदय, चूंकि यह अर्द्ध-न्यायिक प्रक्रिया होती है, इसलिए इसके हायर कोर्ट में जो भी होगा, उसमें हम निर्देशित करेंगे कि वस्तु स्थिति की जानकारी लेकर, उसका परीक्षण करके यथासंभव उसकी बहाली की कोशिश करेंगे.

श्री मानवेन्द्र सिंह - धन्यवाद, माननीय मंत्री जी.

दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही

13. ( *क्र. 5006 ) श्री आरिफ अकील : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या भोपाल जिला सहकारी बैंक द्वारा किसानों की ऋण गारंटी में रखी भूमि को ओने-पौने दामों पर रसूखदारों एवं बैंक के कथित अधिकारियों की मिलीभगत से वर्ष 2001 में नीलामी की गई थी? (ख) यदि हाँ, तो बैंक के कौन-कौन अधिकारी/कर्मचारियों द्वारा किन-किन रसूखदारों से मिलीभगत कर किन-किन किसानों की कितनी-कितनी कृषि भूमि कितनी-कितनी राशि में नीलाम की गई, वास्‍तविक कीमत सहित बतावें? (ग) प्रश्‍नांश (क)-(ख) के परिप्रेक्ष्‍य में क्‍या उक्‍त अनियमितता को लेकर माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय द्वारा दोषियों के विरूद्ध कानूनी कार्यवाही किए जाने एवं किसानों को उनकी भूमि वापिस दिलाए जाने का निर्णय दिया है? यदि हाँ, तो कब तक किसानों को भूमि वापिस कराकर दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही की जावेगी? यदि नहीं, तो क्‍यों कारण सहित बतावें?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जी नहीं। जिला सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक मर्या. भोपाल द्वारा 25 ऋणी सदस्यों की बंधक भूमि वर्ष 2001 में कलेक्टर दर से भिन्न दरों पर नीलाम की गई है, जिसमें बैंक के अधिकारियों की संलिप्तता प्रकाश में आई है। (ख) 25 ऋणी सदस्यों की 125.63 एकड़ भूमि राशि रुपये 16.86 लाख में नीलाम की गयी थी। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) बैंक द्वारा की गई भूमि नीलामी के विरूद्ध ऋणी कृषक श्री आजम खान एवं श्रीमती अकबरी बानों द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय में अपील की गई थी। माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा उक्तानुसार कृषकों द्वारा प्रस्तुत सिविल अपील क्रमांक 723/2016 एवं सिविल अपील क्रमांक 724/2016 में दिनांक 02/02/2016 को आदेश पारित करते हुए यह निर्देश दिये गये हैं कि अपीलार्थियों द्वारा 6 माह की अवधि के भीतर 6 प्रतिशत ब्याज दर से बैंक को मूलधन के भुगतान करने पर अपीलार्थियों को भूमि वापिस की जाये, बैंक द्वारा नीलामी से भूमि क्रय करने वाले व्यक्तियों को रू. 50,000/- की राशि 6 प्रतिशत की ब्याज दर से 2 माह की अवधि में वापस की जाए तथा लोकायुक्त कार्यालय द्वारा अपनी जाँच रिपोर्ट में दर्शित निष्कर्षों के आधार पर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की जाए। माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश के परिपालन में राशि जमा कराने एवं क्रेता को लौटाने की कार्यवाही प्रचलन में है। लोकायुक्त कार्यालय में प्रकरण पंजीकरण की प्रक्रिया में है। बैंक के दोषी अधिकारियों को पूर्व में ही दण्डित किया जा चुका है।

परिशिष्ट - ''छ:''

श्री आरिफ अकील - अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूं कि आप निष्पक्ष, सख्त और इंसाफ के लिए मशहूर हैं. लेकिन वर्ष 2001 से यह 160 किसान दर-दर, मारे-मारे फिर रहे हैं, इनकी जमीन वर्ष 2001 में बहुत वीवीआईपी, आईएएस, आईपीएस और बड़े बड़े लोगों ने खरीद ली. ये किसान आपके पास भी आए थे, तिवारी जी के माध्यम से इन्होंने आपसे भी अनुरोध किया. अन्नदाता की जमीन अगर नीलाम होती है तो जमीन का कुछ हिस्सा उसके खाने के लिए छोड़ देते हैं. लेकिन वरिष्ठ लोगों की इतनी मनमानी चल रही थी कि बैंक के लोगों के साथ सांठ-गांठ करके उनकी पूरी-पूरी की जमीन नीलाम कर दी. वह अन्नदाता जो दूसरों को अन्न देते थे, वे आज अन्न के लिए मोहताज हैं. मैं माननीय मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूं कि आप आज नरम क्यों पड़ रहे हैं? हमने आपसे सबके नाम पूछे, लेकिन आपने हमें कम नाम दिये. 140 लोगों की सूची तो मेरे पास में हैं, 20 की सूची मुझे नहीं मिल पाई. क्या बात है, किसकी पर्दादारी हो रही है, क्यों उन लोगों के नाम छिपाए जा रहे हैं, जो वरिष्ठ पदों पर विराजमान थे, जिन्होंने यह जमीन औने-पौने दामों पर खरीद ली? अध्यक्ष जी, जमीन किसी गांव की और डोंडी पिट रही है टी.टी. नगर में, वल्लभ भवन के पास! यहां पर नीलामी की कार्यवाही हो रही है. मैं आपसे यह अनुरोध करना चाहता हूं कि एक तो पहले उनकी सूची उपलब्ध कराएंगे और उसके हिसाब से क्या न्याय करेंगे? फिर अगला सवाल मैं आपसे पूछ लूंगा. वर्ष 2001 से जो ये लोग जमीन से वंचित हैं, दानों से वंचित हैं उनके लिए आप क्या व्यवस्था करेंगे?

श्री गोपाल भार्गव -- माननीय अध्यक्ष महोदय यह जो कृषि ग्रामीण विकास बैंक की भूमि की नीलामी का काम हुआ था. जैसा कि माननीय सदस्य को भी जानकारी है की मैंने ही इसमें 2004 में कार्यवाही शुरू करवायी थी, भोपाल जिले के किसान मेरे पास में आये थे. उन्होंने जब मुझे अवगत कराया कि उनकी जमीन बंधक है, लेकिन कुछ अधिकारियों कर्मचारियों ने जो कि एलडीबी के थे, उन्होंने उस जमीन का विक्रय कर दिया था, और विक्रय भी पारदर्शिता के साथ में नहीं किया गया है. उन्होंने जमीन का विक्रय औने पौने दाम पर कर दिया है. उ स समय की नोट शीट, दस्तावेज इस बात का गवाह हैं, अकील साहब भी बता सकते हैं कि मैंने ही 2004 में पहल की थी और उन तमाम लोगों के खिलाफ में प्रासीक्यूट करवाने का काम किया था. आज वह सारे के सारे अधिकारी जो कि इसके लिए उत्तरदायी हैं. ज्वाइंट रजिस्ट्रार, डीआर भी, एआर भी, आडिट आफिसर भी, इंस्पेक्टर भी इन सभी को निलंबित करने का काम मैंने किया है. जिन लोगों ने भूमि क्रय की है उन लोगों से भूमि वापस लेने का काम, न्यायालय के माध्यम से भी हुआ है. मैं अवगत कराना चाहता हूं कि न्यायालय ने जो आदेश दिया है कि यह भूमि जितने में नीलाम हुई थी तो क्रेता के लिए उतना पैसा देकर उसका कुछ ब्याज देकर वह भूमि भूमिधारी जो कि किसान है उ सको वापस कर दी जाय. लेकिन अभी तक बहुत से किसानों ने -- क्योंकि छोटी राशि में वह भूमि नीलाम हुई थी -- वह राशि भी अभी तक वापस नहीं की है इस कारण से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं हुआ है जिस दिन भी यह राशि जमा कर दी जायेगी कैंप लगाकर , हम यह भूमि उनको वापस दिलायेंगे. आपको चिंता करने की आवश्यकता नहीं है.

श्री आरिफ अकील -- अध्यक्ष महोदय सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला होता है वह रूलिंग बन जाती है. यह फैसला दो लोगों के नाम से होकर आया है. 160 लोगों के नाम पर उनकी जमीन स्थानांतरित करने की कार्यवाही आपने नहीं की है. उनका उस पर पजेशन और कब्जा नहीं है. सरकार तो जीरो प्रतिशत ब्याज पर किसानो को ऋण दे रही है किसानों की सरकार है. अब मैं नहीं कहता कि किसानों के कौन कौन लोग इसके मुखिया है कौन कौन लोग इसके लिए जिम्मेदार हैं. मैं आपसे यह कहना चाहता हूं कि जो आपकी मूल रकम है उसको भी आप लोन दिलवा दें. उनको फिर से लोन दिलवाकर वह अपना खाता क्लीयर कर लें और उनका जो ब्याज है वह आप माफ कर दें. आपकी बडी कृपा होगी मैं आपसे यह निवेदन कररहा हूं. ऐसा अगर आप करेंगे तो कितने दिन में करेंगे यह भी बतायें. 14 वर्ष में तो वनवास भी समाप्त हो गया था यह तो 2001 से अभी तक 15 वर्ष हो गये हैं.

श्री गोपाल भार्गव -- अध्यक्ष महोदय भोपाल जिले की जमीन है. 10 - 10 एकड़ जमीन है. कुल 50 हजार रूपये वापस करना है. 10 एकड़ जमीन बंधक है. वह भी नहीं लौटा रहे हैं तो यह तो सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग के खिलाफ होगा सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग है, यह सभी के लिए एक समान बाध्यकारी है. मैं कहना चाहता हूं कि आप यह राशि वापस करवा दें. एक बात जो मैं सदन में नहीं कहना चाहता था. अभी भी वह लोग खेती कर रहे हैं अधिकांश क्रेताओं का उस पर पजेशन नहीं है. मुख्य बात यह है कि उसमें से आधी सी जमीन किसानों ने दूसरे लोगों को बेच भी दी है.

श्री आरिफ अकील -- माननीय अध्यक्ष महोदय मेरा अनुरोध इतना सा है कि जैसा आपने कहा कि वह उस पर खेती कर रहे हों, आप उऩके नाम पर हस्तांतरण नहीं करा रहे हैं. छोटे छोटे किसानों को जो सुविधाएं मिलती हैं वह वे नहीं ले पा रहेहैं. आप लोग तो बहुत दयालू और कृपालू हैं किसानों के लिए तो पूरा बजट आपने बनाकर रखा है. इन 160 किसानों को छोटे छोटे पैसे का लोन दे दें लोन को अदा कर देंगे वह, एक बात जरूर कहना चाहता हूं कि मेहरबानी करके इसमें जो लोग भी खरीदने और बेचने में दोषी हैं उनके खिलाफ में आपने आज तक उनके नाम से एफआईआर नहीं हुई है. क्या उऩके नाम से एफआईआर करायेंगे और अगर वह किसान पैसा जमा कर देंगे तो कितने दिन में आप उनके नाम से जमीन स्थानांतरित कर देंगे, जैसा कि आपने अभी फरमाया है कि अगर वह पैसा जमा कर देंगे तो जमीन उनके नाम से स्थानांतरित कर देंगे, और आप जीरो प्रतिशत ब्याज पर ऋण दे रहे हैं तो क्या उन किसानों का प्रतिशत ब्याज माफ करेंगे क्या.

श्री गोपाल भार्गव -- अध्यक्ष महोदय चूंकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है सभी लोग सुप्रीम कोर्ट गये थे. जो लोग गये थे उस कारण से वह साइटेशन बन गई है. माननीय सदस्य से आग्रह करना चाहता हूं कि हम ब्याज न तो कम कर सकते हैं और न बढ़ा सकते हैं. न हम मूल कम कर सकते हैंऔर न ही बढ़ा सकते हैं. उच्च्तम न्यायालय का आदेश है उसके परिपालन में जब भी वह राशि जमा करेंगे. हम करा देंगे.

श्री आरिफ अकील -- अध्‍यक्ष महोदय, आखिरी सवाल,

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं आरिफ जी, आपके तीन प्रश्‍न हो गए. आपको बहुत समय दिया और भी प्रश्‍न हैं. आपसे अनुरोध है मेरा.

श्री आरिफ अकील -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं केवल इतना कहना चाहता हूँ कि ब्‍याज माफ करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मना तो नहीं किया. आप ब्‍याज माफ कर सकते हों तो कर दें बस यही आपसे अनुरोध करना चाहता हूँ.

श्री गोपाल भार्गव -- अध्‍यक्ष महोदय, ब्‍याज माफ करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने भले ही मना नहीं किया है, इसका परीक्षण करा लेंगे, एक साइटेशन बन जाएगी फिर और इसके बाद अन्‍य प्रकरणों का भी इसी आधार पर निपटारा करना होगा, लिटिगेशन फिर से पैदा हो जाएगा.

प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजनांतर्गत निर्मित मार्ग

14. ( *क्र. 3797 ) श्री मोती कश्यप : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विगत तीन वर्षों में जिला कटनी के वि.स.क्षे. बड़वारा के अंतर्गत वि.खं. बड़वारा, कटनी ढीमरखेड़ा के कितनी जनसंख्‍या के कौन-कौन से ग्राम प्र.मं.ग्रा.स.यो. के अंतर्गत पक्‍की सड़कों से जोड़े गये हैं? (ख) प्रश्‍नांश (क) में किन ग्रामों की किन सड़कों का निर्माण पूर्ण हो गया है? किनकी निविदा कब स्‍वीकृत हुईं, कब कार्य आदेश जारी हुये हैं, किन तिथियों में किस चरण के कितने कि.मी. के कार्य पूर्ण हुये हैं? कार्य रूकने के कारण क्‍या हैं और कौन से कार्य कब पूर्ण होंगे? (ग) क्‍या प्रश्‍नांश (क) के किन्‍हीं प्रचलित मार्गों के निर्माण की अवधि पूर्ण हो गई है और उनमें से किनका रिन्यूवल कार्य पूर्ण हो चुका है और किनके विषय में क्‍या कार्यवाही चल रही है? (घ) ज.पं. ढीमरखेड़ा के खमतरा से महगवां की कितनी कि.मी. की सड़क कब स्‍वीकृत हुई है और उसका निर्माण कब प्रारंभ किया गया है तथा किस स्‍तर तक कार्य पूर्ण हुआ है और कब तक पूर्ण कर दिया जावेगा?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है। (ख) जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र एवं अनुसार है। (ग) प्रश्नांश (क) में उल्लेखित सड़कें विगत तीन वर्षों में पूर्ण हुई हैं। अतः सभी सड़कें गारंटी अवधि में हैं। गारंटी अवधि समाप्त होने के पश्चात्‌ बी.टी. रिन्यूवल का कार्य कराया जाता है, अतः उक्त किसी भी सड़क पर न तो बी.टी. रिन्यूवल का कार्य प्रारंभ किया गया है और न ही रिन्यूवल कराने की कोई कार्यवाही चल रही है। (घ) जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के खमतरा से महगवां सड़क का निर्माण कार्य प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजनांतर्गत दिनांक 29.12.2011 को स्वीकृत कर माह मई, 2013 में प्रारंभ किया गया है। सड़क की विभिन्न लंबाईयों में जी.एस.बी./डब्ल्यू.एम.एम./बी.टी./सी.सी. स्तर तक का कार्य पूर्ण हुआ है। कार्य पूर्ण कराये जाने की निश्चित समय-सीमा बताना संभव नहीं है।

परिशिष्ट - ''सात''

श्री मोती कश्‍यप -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न का उत्‍तर तो आया है और उत्‍तर में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के संदर्भ में 8 गांवों के 8 मार्गों को पूर्ण बताया गया है और 16 मार्गों में से एक मार्ग का ठेका निरस्‍त हो गया है, दूसरे के निविदा की कार्यवाही चल रही है. 14 मार्ग हैं जिनको एक वर्ष में पूर्ण होना था, 3 वर्ष व्‍यतीत हो गए उसके बाद भी प्रगतिरत हैं यह बताया गया है.

अध्‍यक्ष महोदय -- सीधे प्रश्‍न कर दें.

श्री मोती कश्‍यप -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रश्‍न करते हुए थोड़ा सा आग्रह करूंगा.

अध्‍यक्ष महोदय -- आग्रह करते हुए प्रश्‍न कर दें परंतु जल्‍दी कर दें.

श्री मोती कश्‍यप -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से मेरा आग्रह केवल इतना है कि जो प्रगतिरत मार्ग हैं इन्‍हें 1 वर्ष के स्‍थान पर 3-3 वर्ष हो गए हैं तो इनकी समीक्षा वगैरह करते रहें ताकि शीघ्र पूरे हो सकें. एक मार्ग खमतरा से महगवां तक जिसका कि उत्‍तर '''' में दिया हुआ है इस मार्ग पर दिनांक 6.2.2016 को एक आदिवासी परिवार मोटरसाइकिल पर जा रहा था, उस मार्ग में जिस ढंग से गिट्टियां बिछी हैं वह तो ठेका निरस्‍त कर दिया गया है, वहां पर जो मुरम वगैरह बिछी है उससे स्‍लिप होकर वे गिरे तो एक महिला जिसका नाम रेखा बाई है और उसके 2 साल के बच्‍चे की मौत हो गई है, तो किसी विधि यदि उनको कोई सहायता मिल सके उस आदिवासी परिवार को तो उसकी चिंता हो जाए और दूसरी बात समीक्षा करते हुए उन मार्गों को प्रगति प्रदान करें ताकि उन 14 मार्गों का निर्माण पूरा हो सके.

श्री गोपाल भार्गव -- अध्‍यक्ष महोदय, खमतरा से महगवां मार्ग का निर्माण हम शीघ्रातिशीघ्र पूर्ण करवाने का भी काम कर लेंगे और माननीय विधायक महोदय को भी अवगत कराते रहेंगे. शेष मार्गों का काम भी पूर्णता की ओर है और जहां तक मृत्‍यु का सवाल है तो हम मुख्‍यमंत्री जी से निवेदन करेंगे कि वे अपनी अनुकंपा से अपने रिलीफ फंड से उसके लिए कुछ राशि प्रदान करें.

श्री मोती कश्‍यप -- अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद.

लीज़ पर दी गई भूमि की शर्तें

15. ( *क्र. 4039 ) श्री संजय शाह मकड़ाई : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) हरदा जिला टिमरनी नगर परिषद सीमा के नगर टिमरनी क्षेत्र में कितनी शासकीय भूमि है, शासकीय कुल भूमि का कितने-कितने भाग पर क्‍या-क्‍या उपयोग किया जा रहा है? क्षेत्रफल, खसरा नंबर सहित जानकारी उपलब्‍ध करायें। (ख) टिमरनी नगर परिषद सीमा के नगर टिमरनी क्षेत्र में शासन द्वारा राधा स्‍वामी सत्‍संग सभा दयाल बाग, आगरा को कितनी भूमि किन शर्तों पर किस प्रयोजन हेतु किस वर्ष में कितने वर्षों के लिए लीज़ पर दी गई है? (ग) प्रश्‍नांश (ख) के संदर्भ में क्‍या शासन द्वारा लीज़ में दिए गए राधा स्‍वामी सत्‍संग सभा दयाल बाग, आगरा की टिमरनी नगर परिषद सीमा में स्‍वयं की भूमि है? यदि हाँ, तो क्षेत्रफल, खसरा सहित जानकारी उपलब्‍ध करावें? (घ) प्रश्‍नांश (ख) (ग) के संदर्भ में क्‍या शासन जनहित एवं शासकीय प्रयोजन हेतु शासकीय भूमि की लीज़ निरस्‍त कर सकते हैं? यदि हाँ, तो नीति निर्देश की प्रति उपलब्‍ध करावें?

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न में मैं आपका संरक्षण चाहता हूँ, माननीय मंत्री जी का संरक्षण चाहता हूँ और सरकार से आशीर्वाद भी चाहता हूँ क्‍योंकि जो प्रश्‍न मैं करने जा रहा हूँ यह कोई साधारण प्रश्‍न नहीं है. बहुत पहुँच वाले लोगों के संबंध में मेरा प्रश्‍न है. दयाल बाग की राधा स्‍वामी सत्‍संग संस्‍था है जो शासकीय भूमि पर लीज उन्‍होंने टिमरनी में ले रखी है उसके विरुद्ध में यह प्रश्‍न था.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कहां-कहां पर किस-किस रकबे में उनको लीज दी है यह तो मुझे माननीय मंत्री जी ने जानकारी दी लेकिन मेरा मूल प्रश्‍न यह था कि जनहित में, नगर हित में क्‍या उनकी यह लीज समय से पूर्व निरस्‍त करेंगे क्‍योंकि उनके पास उनके स्‍कूल चलाने के लिए उसी रकबे से लगी हुई 17 एकड़ की भूमि है और आपने खुद अपने उत्‍तर में स्‍वीकारा है कि उनके पास स्‍वयं की भूमि 17 एकड़ वहां पर उपलब्‍ध है तो किसी भी संस्‍था को स्‍कूल चलाने के लिए इससे ज्‍यादा भूमि की आवश्‍यकता पड़ती हो, यह मुझे नहीं लगता. जनहित में यह किया जा सकता है क्‍योंकि हमारा नगर छोटा है.

अध्‍यक्ष महोदय -- आपका प्रश्‍न आ गया है और प्रश्‍न में ही सारी बातें क्‍लियर हैं.

श्री संजय शाह मकड़ाई -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहता हूँ, मेरा मूल प्रश्‍न यह था और आप उत्‍तर दिलवा दें कि क्‍या जनहित में यह सरकार निर्णय लेगी समय से पूर्व लीज समाप्‍त करने का क्‍योंकि वहां पर दूसरी शासकीय जमीन नहीं है इसलिए क्‍या इस जमीन को समय से पूर्व फ्रीहोल्‍ड करवाएंगे ?

अध्‍यक्ष महोदय -- उत्‍तर तो दिया है उन्‍होंने, माननीय मंत्री जी आपने इसमें उत्‍तर में ''जी नहीं'' दिया है पर आप उनको कुछ बता दें.

श्री रामपाल सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी को उत्तर हमने दे दिया है. लीज का समय भी 30 वर्ष के लिए है. 1993 में लीज दी है, 2023 तक का समय है और इसका प्रयोजन भी निश्चित है. राधा स्वामी सत्संग की जो समिति है, इसको शर्तों के आधार पर लीज दी है. अगर लीज की शर्तों का राधा स्वामी सत्संग, समिति अगर कोई गड़बड़ या अनियमितता कर रही है तो निश्चित रुप से गंभीरता से उस पर कार्यवाही करेंगे और अगर माननीय विधायक जी के ध्यान में और भी कोई तथ्य हों तो बता दें, बाकी और सब जानकारी आपको उपलब्ध करा दी लेकिन जो लीज पर जमीन दी है इसमें निश्चित रुप से जो माननीय सदस्य बिन्दु बतायेंगे उन पर कार्यवाही करेंगे.

श्री संजय शाह मकड़ाई-- माननीय अध्यक्ष जी, यह न्यायालय अनविभागीय अधिकारी महोदय हरदा के प्रकरण क्रमांक 712//20/1 वर्ष 89-90 आदेश दिनांक 25.1.90 के सम्पूर्ण प्रकरण आदेश की मूल प्रति हमें उपलब्ध करा दें क्योंकि इस प्रकरण के आधार पर उनको लीज दी गयी थी. इसकी मूल प्रति आज दिनांक तक किसी के पास भी नहीं है. हमने हरदा जिले में एसडीएम महोदय और कलेक्टर महोदय से भी लेना चाहा लेकिन इसकी सत्यप्रतिलिपि किस आधार पर दी गयी थी इसकी सत्यप्रतिलिपि हमें आज दिनांक तक प्राप्त नहीं हो पायी है. जैसा मैंने पूर्व में आपसे अनुरोध किया कि जनहित में एकमात्र हमारे पास खेल मैदान के लिए जमीन शासकीय वह है क्योंकि ऐसा न हो, वहां पर कोई ऐसा असंतुलन का वातावरण बनें, कोई अप्रिय घटना हो जाए क्योंकि आज टिमरनी एक बारूद के ढेर पर बैठा हुआ है, कभी भी कानून-व्यवस्था की स्थिति वहां पर बन सकती है. जनहित में शासन यह फैसला ले, उस संस्था के पास आलरेडी बहुत सारी जमीन है इसलिए इस जमीन को छोड़ दें, ऐसा मैं माननीय मंत्री महोदय से आश्वासन चाहता हूँ.

श्री रामपाल सिंह-- अध्यक्ष महोदय, जिस आदेश की कापी का माननीय विधायक जी उल्लेख कर रहे हैं उसको हम माननीय विधायक जी को उपलब्ध करा देंगे.

श्री संजय शाह मकड़ाई-- अध्यक्ष जी, समय सीमा बता दें,कब तक उपलब्ध करा देंगे

श्री रामपाल सिंह-- आज ही करा देंगे.

श्री संजय शाह मकड़ाई-- धन्यवाद अध्यक्ष महोदय.

प्रश्न संख्या 16 (अनुपस्थित)

प्रश्न संख्या 17 (अनुपस्थित)

प्रश्न संख्या 18 (अनुपस्थित)

सोयाबीन फसल की बीमा राशि का भुगतान

19. ( *क्र. 5036 ) श्री गिरीश भंडारी : क्या किसान कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या नरसिंहगढ़ तहसील के सभी पटवारी हल्‍कों के कृषकों को सन् 2014-15 की सोयाबीन फसल बीमा राशि का भुगतान कर दिया गया है? (ख) प्रश्‍न की कंडिका (क) की उपलब्‍ध जानकारी अनुसार जिन पटवारी हल्‍कों के कृषकों की बीमा राशि का भुगतान नहीं हुआ, उनको भुगतान कब तक किया जावेगा? अगर भुगतान नहीं किया जायेगा, तो कारण बतायें।

किसान कल्याण मंत्री ( श्री गौरीशंकर बिसेन ) : (क) राष्‍ट्रीय कृषि बीमा योजनांतर्गत खरीफ 2014 मौसम हेतु नरसिंहगढ़ तहसील के उन पात्र कृषकों को क्षतिपूर्ति राशि का पूर्ण भुगतान नोडल बैंको के माध्‍यम से किया गया, जिनकी अधिसूचित क्षेत्र की अधिसूचित फसल हेतु उपज में कमी पाई गई थी। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) उत्‍तरांश (क) अनुसार।

श्री गिरीश भंडारी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने जो मुझे जानकारी दी है, उसमें मेरा आखिरी का जो प्रश्न था कि अगर भुगतान नहीं किया जायेगा तो कारण बता दें. वह कारण मुझे इस परिशिष्ट में नहीं बताया गया है क्योंकि इसमें 14 पटवारी हल्के में बीमा की राशि का भुगतान नहीं किया गया है.कारण नहीं बताया कि क्यों नहीं किया गया.

श्री गौरीशंकर बिसेन-- माननीय अध्यक्ष महोदय, 3 साल के औसत फसल पर थ्रेशहोल्ड आता है. 14 पटवारी हल्का नम्बर में बीमा तो हुआ था लेकिन थ्रेशहोल्ड का जो उत्पादन है उसका और वास्तविक उत्पादन में, वास्तविक उत्पादन ज्यादा आया है इसलिए उनको बीमे के दावे नहीं मिल सकते हैं.

श्री गिरीश भंडारी-- माननीय मंत्री जी, जो आपने यह बात कही है वह असत्य है इसलिए कि वहां पर शासन ने मुआवजा भी दिया है और उनका जो परसेंटेज है, वह परसेंटेज बीमा की श्रेणी में आता है. पटवारी की जो रिपोर्ट, प्रशासन की जो रिपोर्ट, जो बीमा कम्पनी को गयी है उसमें वह परसेंटेज बीमा देने की पात्रता में आता है.

श्री गौरीशंकर बिसेन-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जो पात्रता में आता था उनको दिया गया. इस 14 पटवारी हल्का नम्बर वह है जहां पर थ्रेशहोल्ड से वास्तविक उत्पादन ज्यादा आया है और यह भी वास्तविक उत्पादन फसल कटाई के प्रयोग के बाद आता है और इसलिए उनके दावे नहीं दिये जा सकते. जब हम इतना पैसा दे रहे हैं तो इसको क्यों नहीं देते.

श्री गिरीश भंडारी-- माननीय मंत्री जी, मैं आपको रिकार्ड उपलब्ध करा सकता हूँ. अध्यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहता हूँ कि मैं इसका रिकार्ड उपलब्ध करा सकता हूँ कि वहां पर फसल कटाई के प्रयोग इस तरह के आये हैं कि उनको बीमा मिलना चाहिए था. जो दूसरी जगह फसल कटाई के प्रयोग आये हैं वही कटाई के प्रयोग वहां आये हैं लेकिन उनको बीमा नहीं मिला, मेरा यह प्रश्न है कि वह कटाई का प्रयोग जो दूसरी जगह जहां मिले हैं और उस कटाई के प्रयोग और इस कटाई के प्रयोग में कोई अन्तर नहीं है.

श्री गौरीशंकर बिसेन-- माननीय अध्यक्ष महोदय, राजस्व विभाग के द्वारा फसल कटाई के तजुर्बे जो किये जाते हैं उसके आधार पर मैं कह रहा हूँ इसलिए मैं अपने कथन पर प्रामाणिकता के साथ बात कर रहा हूँ इसमें कहीं कोई असत्यता नहीं है.

अध्यक्ष महोदय-- प्रश्न संख्या 20 , श्री ओमप्रकाश धुर्वे.

श्री गिरीश भंडारीमेरे प्रश्न का उत्तर नहीं आया है.

अध्यक्ष महोदय-- आपके प्रश्न का उत्तर आ गया है बिल्कुल साफ उत्तर आ गया है .

श्री गिरीश भंडारी-- कहाँ आया उत्तर मेरा यह कहना है कि जो फसल कटाई के प्रयोग..

अध्यक्ष महोदय-- आपका कहना वह है उनका कहना वह है उत्तर आ गया कि वह उस केटेगिरी में नहीं आते हैं.

श्री गिरीश भंडारी-- जहाँ दी है वहाँ और इसमें कोई फर्क नहीं है तो फिर क्यों नहीं दिया गया मेरा यह कहना है कि जहाँ दी है वहाँ से यहाँ में कोई फर्क नहीं है.

अध्यक्ष महोदय-- उनका कहना है कि वह प्रमाणिकता से बोल रहे हैं ऐसा बोला है उन्होंने. प्रश्न क्रमांक 21 श्री लाखन सिंह यादव प्रश्न करें.

श्री गिरीश भंडारी-- मैं उनको इस बारे में रिकार्ड उपलब्ध करा दूंगा, मैं रिकार्ड उपलब्ध करा दूंगा तो क्या आप कार्यवाही करेंगे...(व्यवधान)...

अध्यक्ष महोदय--- वह रिकार्ड उपलब्ध कराने का कह रहे हैं.

श्री गौरीशंकर बिसेन-- अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्य को बताना चाहता हूं कि जो राहत राशि है, वह नजरिया आधार पर दी जाती है और फसल कटाई के जो बीमे के दावे हैं जो फसल कटाई के परिणाम आते हैं उसके आधार पर देते हैं.

श्री गिरीश भंडारी-- मेरा यह कहना है कि क्या उसकी जांच कराएंगे अगर फसल कटाई के प्रयोग सही हैं तो.

श्री गौरीशंकर बिसेन--- कोई जांच नहीं कराएंगे क्योंकि आप अंतर को समझिये राहत की राशि नजरिया सर्वे पर होती है और फसल कटाई और फसल कटाई तजुर्बे के अनुसार राशि दी जाती है.....(व्यवधान).....

श्री गिरीश भंडारीमंत्री जी , आप गुमराह कर रहे हैं मैं फसल कटाई की बात कर रहा हूं, मैं बीमा कंपनी की बात कर रहा हूं मैं मुआवजे की बात नहीं कर रहा हूं.....(व्यवधान)....मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं आया है और जो फसल कटाई का प्रयोग जो बीमा कंपनी को गया हैं मैं उसकी बात कर रहा हूं...(व्यवधान)... मैं इस बात का प्रमाण दे रहा हूं.

श्री गौरीशंकर बिसेनइसमें जांच की कोई आवश्यकता ही नहीं है. यह सरकार किसानों की है ..(व्यवधान).. इनके जिले में 7 करोड़ रुपये हम दे रहे हैं. ...(व्यवधान)कहीं कोई सरकार कमी नहीं कर रही है.

श्री गिरीश भंडारी--- अध्यक्ष महोदय, मेरा कहना है कि जो फसल कटाई के प्रयोग बीमा कंपनी को गये हैं वह रिकार्ड देने के तैयार हूं.

श्री रामनिवास रावत-- आप फसल कटाई को तो ठीक करो.

श्री गौरीशंकर बिसेन--- फसल कटाई के परिणाम के आधार पर बीमे निर्धारित होते हैं और नजरिये आधार पर आरबीसी से भुगतान होते हैं...(व्यवधान)...

अध्यक्ष महोदयआप उत्तर तो सुन लीजिये वह कह रहे हैं. मंत्री जी कुछ कह रहे हैं वह आप सुन लीजिये.

श्री गिरीश भंडारी --- अध्यक्ष महोदय, मेरा यह निवेदन है कि मंत्री जी मुआवजे की बात कर रहे हैं मैं मुआवजे की बात नहीं कर रहा हूं मैं तो यह कह रहा हूं कि जो फसल कटाई के प्रयोग जो बीमा कंपनी को गये हैं, जिन पटवारी हल्को को नहीं मिला है अगर उनका समान होगा , तो क्या मंत्री जी उन पटवारी हल्को को भी बीमा का लाभ देंगे मेरा यह पूछना है.

श्री गौरीशंकर बिसेन--- अध्यक्ष महोदय, मैं जिस बात को कह रहा हूं उसको माननीय सदस्य समझने का प्रयास करें राजस्व विभाग के द्वारा यह फसल कटाई के तजुर्बे किये जाते हैं और वह एसएलआर की वेबसाईट पर अपलोड होते हैं, उसी के आधार के देते हैं.

अध्यक्ष महोदय-- वह यह कह रहे हैं कि जितना रिपोर्ट में बीमा दिया गया है उतनी रिपोर्ट उनकी भी है. ऐसा इनका कहना है तो क्या आप वह रिपोर्ट देख लेंगे, आप रिपोर्ट उपलब्ध करा दीजिये.

श्री गिरीश भंडारी--- मैं रिपोर्ट उपलब्ध करा दूंगा तो क्या आप उनको बीमा मिलेगा.

अध्यक्ष महोदय-- आप सिर्फ रिपोर्ट उपलब्ध करा दीजिये उसके बाद की मत पूछिये. श्री लाखन सिंह यादव अपना प्रश्न करें.

श्री गिरीश भंडारी-- उसके बाद क्या उनको बीमा नहीं मिलेगा क्या. यदि मैं रिपोर्ट उपलब्ध करा दूंगा तो उनको बीमा मिलना चाहिए ना उनको.

श्री रामनिवास रावत-- उसके बाद की बात क्यों नहीं पूछे.

अध्यक्ष महोदय-- वह परीक्षण कराएंगे आप पहले रिपोर्ट तो उपलब्ध करायें....(व्यवधान)...

श्री रामनिवास रावत-- यह प्रदेश के किसानों से जुड़ा हुआ बहुत गंभीर मामला है.

श्री अजय सिंहवह रिपोर्ट उपलब्ध करा देंगे तो परीक्षण के बाद राशि देंगे या नहीं यह बता दें....(व्यवधान)...

श्री गिरीश भंडारी-- मैं रिपोर्ट उपलब्ध करा दूंगा तो क्या उनको बीमा मिलेगा.

श्री हरदीप सिंह डंग--- अध्यक्ष महोदय, इसका उत्तर दिलवायें.

अध्यक्ष महोदय-- वह रिपोर्ट तो उपलब्ध करायें उस रिपोर्ट का मंत्री जी परीक्षण करा लें जो माननीय सदस्य देंगे.

श्री गिरीश भंडारी-- यदि वह रिपोर्ट सही पाई जाएगी तो क्या उनको बीमा मिलेगा यह मुझे आश्वस्त करा दें.

श्री गौरीशंकर बिसेन--- अध्यक्ष महोदय, यह 2014 का विषय है हम 2015 की ओर बढ़ चुके हैं....(व्यवधान)..

श्री गिरीश भंडारी-- 2014 का है तो इसका मतलब बीमा नहीं मिलेगा. यदि 2014 में कोई गल्ती हो गई तो अब बीमा नहीं मिलेगा उसका खामियाजा किसान क्यों भुगतेगा.

अध्यक्ष महोदयश्री लाखन सिंह यादव अपना प्रश्न करें.

श्री रामनिवास रावत-- आपके प्रशासकीय रिपोर्ट के आधार पर...

श्री गौरीशंकर बिसेनयदि रिपोर्ट देने में राजस्व विभाग ने गलती की है तो(व्यवधान)...हमारे राजस्व मंत्री बैठे हैं, वह पटवारी के ऊपर कार्यवाही करेंगे और अधिकारियों पर कार्यवाही करेंगे.

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, उन्होंने तो रिपोर्ट दी है उनके ऊपर आप कार्यवाही क्यों करेंगे.

श्री गिरीश भंडारी-- क्या किसानों को बीमा मिलेगा...(व्यवधान)...जिन किसानों का गलती से नुकसान हुआ है उनको क्या बीमा मिलेगा.

श्री अजय सिंह--- इसमें किसानों की गलती नहीं है. यदि 2014-15 का मामला है तो राशि दिलाएंगे या नहीं. कृपा करके मंत्री महोदय से जानकारी दिलाने का कष्ट करें.

श्री रामनिवास रावतमंत्री जी, आपके प्रशासनिक रिकार्ड के आधार पर , क्राप कटिंग के आधार पर बीमा दिलाएंगे या नहीं.

श्री गिरीश भंडारी-- मैं तो बस यह आश्वासन चाहता हूं कि बीमा दिलाएंगे या नहीं. मेरा सीधा सा प्रश्न है यदि मैं रिकार्ड उपलब्ध कराऊँगा तो मंत्री जी उनका बीमा दिलाएंगे...(व्यवधान)...

11.30 बजे बहिर्गमन

इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यों द्वारा शासन के उत्तर से असंतुष्ट होकर सदन से बहिर्गमन

 

श्री अजय सिंह --- हम शासन के उत्तर से असंतुष्ट है , बहिर्गमन करते हैं.

श्री गिरीश भंडारी-- मंत्री जी , सरासर सदन को गुमराह कर रहे हैं. रिकार्ड होने के बाद उनको बीमा देना नहीं चाह रहे हैं. हम बहिर्गमन करते हैं.

(श्री अजय सिंह,सदस्य के नेतृत्व में इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यों द्वारा ता. प्र. सं. 19 ( क्र. 5036) के उत्तर से असंतुष्ट होकर सदन से बहिर्गमन किया गया. )

प्रश्न संख्या 20 (अनुपस्थित)

अध्यक्ष महोदय-- प्रश्नकाल समाप्त.

 

(प्रश्नकाल समाप्त)

 

 

 

अध्यक्ष महोदय-- शून्यकाल की सूचनाएँ....

शून्यकाल में उल्लेख.

श्री जितू पटवारी(राऊ)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपकी अनुमति से कहना चाहता हूँ. यह मध्यप्रदेश में एक बहुत चिन्ता का विषय है. मैं विरोध स्वरूप बात नहीं कह रहा हूँ. कल की एक घटना है तेन्दूखेड़ा ग्राम खिरकिया की, एक दलित बच्चे को जिस तरीके से स्कूल के हैंडपंप में पानी नहीं पीने दिया गया. इससे निंदनीय और कोई काम नहीं हो सकता है. मैं यह शिक्षा मंत्री और आदिम जाति कल्याण मंत्री जी के संज्ञान में लाना चाहता हूँ...(व्यवधान)..जिस तरीके से खिरकिया गाँव में एक 8 वर्ष के बच्चे को तीसरी क्लास के बच्चे को दलित था इसलिए पानी नहीं पीने दिया गया.

अध्यक्ष महोदय-- आपकी बात आ गई.

श्री जितू पटवारी-- वह एक पास की बावड़ी में पानी पीने को उतरा और डूबने से उसकी मौत हो गई. (शेम शेम की आवाज) मैं समझता हूँ कि इस तरीके से मध्यप्रदेश के दलितों और अनुसूचित जनजाति के लोगों पर अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं और भेदभाव किए जाने का जितना इस सरकार में निंदनीय कृत्य होने लगा है, अधिकारियों द्वारा, कर्मचारियों द्वारा, तंत्र द्वारा...

अध्यक्ष महोदय-- आपकी बात आ गई. आप बैठ जाएँ. श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह अपनी बात कहें.

श्री जितू पटवारी-- उसकी निंदा करते हैं. अध्यक्ष जी, मेरा आप से अनुरोध है इस पूरी घटना की क्या सरकार जाँच करवाएगी?..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, यह प्रश्नकाल नहीं है.

श्री जितू पटवारी-- आगे ऐसी घटना न हो इसका कोई....

अध्यक्ष महोदय-- अब आप बैठ जाएँ. आपको टाइम दिया...(व्यवधान)..नहीं, जबर्दस्ती नहीं कर सकते...(व्यवधान)..शून्यकाल में सिर्फ अपनी बात कह सकते हैं.

श्री जितू पटवारी-- अध्यक्ष जी, दलितों के खिलाफ अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं...(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- ठहर जाइये. अभी आप बैठ जाएँ. टाइम दे रहे हैं. उनकी तो सुन लें. आप ही लोगों का नुकसान हो रहा है...(व्यवधान)..आपकी बात आ गई. श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह अपनी बात कहें...(व्यवधान)..

श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्यक्ष महोदय....(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- उनको बोल लेने दें. उनका विषय आ गया. अब वे दूसरे को बोलने ही नहीं दे रहे. आप उनको तो बिठाओ...(व्यवधान)..नरेन्द्र सिंह कुशवाह जी को टाइम दिया है उसके बाद आप बोल लेना. (माननीय सदस्य श्री हरदीप सिंह डंग द्वारा नवदुनिया अखबार दिखाने पर) अखबार अन्दर रखिए. .(व्यवधान)..

श्री हरदीप सिंह डंग-- (xxx).. ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- अखबार अन्दर रखिए. अखबारों को मत दिखाइये. बैठ जाएँ.श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह बोलें. कुछ नहीं आएगा रिकार्ड में. सिर्फ नरेन्द्र सिंह कुशवाह का आएगा..(व्यवधान)..

श्री हरदीप सिंह डंग-- (xxx) .(व्यवधान)..

श्री कमलेश्वर पटेल-- (xxx) .(व्यवधान)..

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह(भिण्ड)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह शिक्षा से संबंधित बहुत गंभीर विषय है...(व्यवधान)..अध्यक्ष महोदय, इनको शांत करिए.

अध्यक्ष महोदय-- आप बोलिए. आपका तो रिकार्ड में आ रहा है. आप अपनी बात बोलिए. सब शांत हो गए...(व्यवधान)..

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह-- सारा भ्रष्टाचार तुमने किया है. भ्रष्टाचार की जगत जननी हों तुम कुछ भी बोलने लगोगे.

अध्यक्ष महोदय-- आप अपनी बात बोलिए.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह-- कुछ भी बोलोगे तुम.

अध्यक्ष महोदय-- माननीय नरेन्द्र सिंह कुशवाह जी, आप कृपा करके अपनी बात बोलिए.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह-- अध्यक्ष महोदय, 16 हजार छात्रों के साथ भिण्ड जिले में खिलवाड़ की गई. जो माध्यमिक शिक्षा मंडल की परीक्षा हो रही है. उसमें 16 हजार छात्र परीक्षा नहीं दे पा रहे हैं क्योंकि शिक्षा मंडल के नियम हैं कि शासकीय विद्यालय का सेंटर प्रायवेट स्कूल में कर दिया गया और प्रायवेट स्कूल का सेंटर शासकीय स्कूल में किया गया है. 50-50 किलोमीटर की दूरी पर जो सेंटर बनाए गए हैं....

अध्यक्ष महोदय-- ठीक है. आपकी बात आ गई.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह-- क्या वहाँ छात्र-छात्राएँ जा सकते हैं? इसलिए हमारे ध्यानाकर्षण पर चर्चा कराई जाए.

अध्यक्ष महोदय-- आपकी बात आ गई. उसको देख लेंगे.

श्री रामनिवास रावत(विजयपुर)-- संसदीय मंत्री जी, सत्तापक्ष के लोगों की क्या हालत हो गई. शून्यकाल विपक्ष के लिए होता है. माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूँ जो 12 वीं की परीक्षा के पेपर वाला मुद्दा था, स्थगन दिया था...

अध्यक्ष महोदय-- अभी उस पर वक्तव्य आ रहा है.

श्री रामनिवास रावत-- उस पर दूसरी स्थिति उत्पन्न हो गई है. जो पूरे पेपर में से, प्रश्न पत्र में से वह प्रश्न निलंबित किया है, 10 नंबर का...

अध्यक्ष महोदय-- अभी माननीय मंत्री जी उस पर वक्तव्य दे रहे हैं. आप कृपया दो मिनट बैठ जाएँ.

 

 

11.35 बजे नियम 267-क के अधीन विषय

अध्यक्ष महोदय--निम्नलिखित माननीय सदस्यों की सूचनाएं सदन में पढ़ी हुई मानी जाएंगी--

1. श्री यशपाल सिंह सिसोदिया

2. श्री सुदर्शन गुप्ता

3. श्री आर.डी. प्रजापति

4. श्री रमाकांत तिवारी

5. श्री अरुण भीमावद

6. श्री रामनिवास रावत

7. श्री संजय पाठक

8. पं. रमेश दुबे

9. श्री कमलेश्वर पटेल

10. श्री बहादुर सिंह चौहान

 

 

 

 

 

 

 

11.36 बजे मंत्री का वक्तव्य

म.प्र.माध्यमिक शिक्षा मण्डल की बारहवीं की परीक्षा में दिए गए निबंध के संबंध में

अध्यक्ष महोदय--अब, माननीय संसदीय कार्य मंत्रीजी स्कूल शिक्षा के प्रश्न पत्र के संबंध में अपना वक्तव्य देंगे.

संसदीय कार्यमंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र)--माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

रामनिवास रावत--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्रीजी जो वक्तव्य पढ़ रहे हैं यह पटल पर रखा गया है उससे भिन्न पढ़ रहे हैं. माननीय अध्यक्ष महोदय, पहली आपत्ति तो मेरी यही है कि..

वन मंत्री (डॉ.गौरीशंकर शेजवार)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, पाइंट ऑफ ऑर्डर.

श्री रामनिवास रावत--डॉक्टर साहब यह शून्यकाल है इसमें पाइंट ऑफ ऑर्डर नहीं होता है, स्थगन में पाइंट ऑफ ऑर्डर नहीं होता है.

अध्यक्ष महोदय--पढ़ लेने दीजिये उनको.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार--माननीय अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियम पुनरीक्षित 15 वां संस्करण, यह किताब मध्यप्रदेश विधान सभा द्वारा हम सब सदस्यों को उपलब्ध कराई गई है इसके पेज क्रमांक 114 के 263 क्रम को मैं पढ़ना चाहता हूँ "लोक महत्व के किसी विषय पर अध्यक्ष की सम्मति से मंत्री द्वारा वक्तव्य दिया जा सकेगा" माननीय मंत्रीजी द्वारा वक्तव्य लोक महत्व के विषय पर दिया गया है. आगे इसमें लिखा है "किन्तु जिस समय वक्तव्य दिया जाए उस समय कोई प्रश्न नहीं पूछा जाए." अध्यक्ष महोदय 263 को मैंने और भी आगे 115 पेज पर पढ़ा इसमें कहीं उल्लेख नहीं है कि कोई भी सदस्य इस पर भाषण देगा या विपक्ष के नेता भाषण देंगे या उस पर कोई प्रक्रिया बतायेंगे. अध्यक्ष महोदय, मेरा विनम्र अनुरोध है कि मंत्री के वक्तव्य के बाद विषय यहीं पर समाप्त हो जाना चाहिए और इस विषय पर न तो किसी के द्वारा प्रश्न पूछा जाएगा और न किसी का वक्तव्य आएगा. यह नियम का हवाला दिया है .

अध्‍यक्ष महोदय, मेरी विनम्र प्रार्थना है कि यह सदन जो है आपके द्वारा और सदन के द्वारा नियम समिति द्वारा बनाये गये नियमों के अनुसार चलना चाहिये. इसलिये यह विषय अब समाप्‍त हो गया है, अब किसी का कोई भाषण नहीं होना चाहिये. मैंने जो भी बात बोली है वह पढ़कर और नियम बताकर कोड की है. मेरी विन्रम प्रार्थना है कि अब इसके बाद को कोई वक्‍तव्‍य या प्रश्‍न इस पर नहीं आयेगा.

अध्‍यक्ष महोदय :- उन्‍होंने जो बात उठायी है, उसका उत्‍तर सुन लें.

श्री मुकेश नायक :- अध्‍यक्ष महोदय, मैं क्लियर करना चाहता हूं कि शून्‍यकाल और स्‍थगन प्रस्‍ताव पर उन्‍होंने जो पाईंट आफ आर्डर कोड किया है उसकी कोई प्रासंगिकता नहीं है. हम लोग भी मंत्रिमण्‍डल के सदस्‍य रहे हैं. सरकार के किसी भी मंत्री को चलती हुई विधान सभा में अपना वक्‍तव्‍य रखने का अधिकार है लेकिन अध्‍यक्ष महोदय यह शून्‍यकाल है और यह स्‍थगन प्रस्‍ताव हमने पहले से इस सदन दिया है.इसलिये यह जो पाईंट ऑडर मंत्री जी ने उठाया है, इस समय इसकी कोई प्रासंगिकता नहीं है. अगर अनुदान मांगों पर चर्चा हो रही होती या प्रश्‍नकाल के बाद या कोई दूसरी जाब होता या किसी अधिनियम पर चर्चा हो रही होती तो उस समय मध्‍यप्रदेश में किसी सरकार के मंत्री ने वक्‍तव्‍य दिया होता तो उस समय इसकी प्रासंगिकता है, उस समय प्रश्‍न नहीं पूछा जा सकता लेकिन यह शून्‍यकाल है यह स्‍थगन प्रस्‍ताव का समय है. इसलिये जो मंत्री जी ने औचित्‍य का प्रश्‍न उठाया है, उसका कोई अर्थ नहीं है.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब जब हाउस डिस आर्डर होगा तब तब पाईंट ऑफ आर्डर होगा. अव्‍यवस्‍था होती तो व्‍यवस्‍था प्रश्‍न पैदा होगा.

अध्‍यक्ष महोदय :- माननीय मंत्री जी ने जो विषय उठाया और माननीय मुकेश नायक जी ने भी उस पर अपनी बात की.

डॉ गौरीशंकर शेजवार :- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने तो नियम बताया है और इन्‍होंने तो अंदाजिया बात की है, दोनों की तुलना तो हो नहीं सकती.

अध्‍यक्ष महोदय :- आप लोगों की बात आ गयी है, उस पर बहस करने की आवश्‍यकता नहीं है.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता :- माननीय शेजवार जी ने जो बताया है कि माननीय मंत्री जी का कोई वक्‍तव्‍य आया है, यह शून्‍यकाल का क्‍या विषय रह गया है, जो माननीय मुकेश नायक जी कर रहे हैं. किसी मंत्री को वक्‍तव्‍य देने का अधिकार है और जब वक्‍तव्‍य आया है तो उसके लिये जो नियम है वह माननीय शेजवार जी ने बताया है और उस समय माननीय शेजवार जी उस वक्‍तव्‍य के बारे में जब प्रश्‍न उठ रहे हैं और नियम बता रहे हैं तो औचित्‍यहीन कैसे हो गया है.

श्री मुकेश नायक :- हमारे प्रश्‍न पूछने का और चर्चा करने का अधिकार है. यह मैं कहना चाहता हूं. मैं वक्‍तव्‍य पर टिप्‍पणी नहीं कर रहा हूं.

अध्‍यक्ष महोदय :- आप लोग बहस नहीं करें. माननीय मंत्री जी बात और माननीय वरिष्‍ठ सदस्‍य मुकेश नायक जी की बात मैंने सुनी, पर माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी के वक्‍तव्‍य के बाद मैंने श्री रामनिवास रावत जी को उनकी बात रखने की अनुमति दी है परन्‍तु उनसे अनुरोध है कि वह अपनी बात रखें, यह कोई प्रश्‍नकाल नहीं है और प्रश्‍न होता भी नहीं है. वह अपनी बात रखें और उस पर कोई प्रश्‍न उत्‍तर नहीं होंगे.

श्री रामनिवास रावत :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बात तो रख सकतें या नहीं रख सकते.

अध्‍यक्ष महोदय:- आप अपनी बात रखें आपको अनुमति पर संक्षेप में अपनी बात रखें.

डॉ गौरीशंकर शेजवार :- आप कृपा पर बोल रहे हों. कहीं कोई नियम पर नहीं बोल रहे हो.

श्री रामनिवास रावत:- नियम है, आप स्‍थगन प्रस्‍ताव आप देख लो.

डॉ गौरीशंकर शेजवार :- अगर कोई नियम है तो पढ़कर बताओ. स्‍थगन प्रस्‍ताव पर चर्चा नहीं है.

श्री रामनिवास रावत:- सदन को आप नहीं चलाते.सदन को आसंदी चलाती है.

अध्‍यक्ष महोदय :- उनको दो मिनट का समय दिया है, आप उनको बोलने दें.

डॉ गौरीशंकर शेजवार:- अध्‍यक्ष महोदय, आपकी कृपा पर बोल रहे हैं. यह लिखा जाए कि आपकी कृपा पर बोल रहे हैं, यह लिखा जाये. आपको अधिकार नहीं है.

श्री रामनिवास रावत:-आसंदी की कृपा पर ही सदन चलता है.

डॉ गौरीशंकर शेजवार :- आपका अधिकार नहीं है, आप स्‍पीकर की कृपा पर बोल रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय:- मेरा अनुरोध है कि सभी सदस्‍य यहां अधिकार से आते हैं और अधिकार से ही बोलते हैं. मैं तो सिर्फ संचालन करता हूं, इसलिये उनका अधिकार है सदन में बोलने का. इसलिये उनका अधिकार है सदन में बोलने का, उसकी अनुमति मैंने दी है.

श्री जितू पटवारी :- डॉ साहब आप वन मंत्री जरूर हैं, इसलिये आप जंगल के कानून कायदे यहां पर नहीं लगवाओ.

डॉ गौरीशंकर शेजवार:- मैंने तो नियम पढ़कर बताये और यह जंगल के कानून बता रहे हैं. अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍हें प्रताडि़त किया जाये. मैंने एक शब्‍द भी विधान सभा के नियम से अलग कोई बात नहीं की आप नये नये सदस्‍य हो आप कुछ सीखो. हालांकि जंगल मेरा है,मैं जंगल के कानून बता सकता था. मुझे प्रायरिटी है लेकिन मैंने विधान सभा के कानून बताये हैं और मैं फिर एक बार कहूंगा कि यह तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय का बड़प्‍पन है कि इनको महत्‍व दे रहे हैं लेकिन ये आज कृपा पात्र हैं. कृपा पात्र .

श्री मुकेश नायक - नये सदस्यों से माननीय मंत्री जी ने कुछ सीखने के लिये कहा है मैं नये सदस्यों से कहना चाहता हूं कि इनका आचरण न सीखें नहीं तो व्यवधान पुरुष के रूप में उनकी भी छवि विधान सभा में बन जायेगी.

अध्यक्ष महोदय - श्री रामनिवास रावत जी कृपया संक्षेप में अपनी बात कहें.

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री नरोत्तम मिश्रा जी ने वक्तव्य टेबल किया वह दूसरा था यह दूसरा पढ़ा है.

डॉ.नरोत्तम मिश्र - माननीय अध्यक्ष जी, एक्चुअल में इन्होंने अंतिम समय में एक नयी बात अंकों से संबंधित रेज की थी मैंने उसको सम्मिलित किया है वह भी आ गया है आपके पास पहुंच रहा है.

श्री रामनिवास रावत - पेपर सेटर और माडरेटर को आपने निलंबित किया है लेकिन इसके लिये और भी लोग जिम्मेवार हैं. आपका विधियोचित प्रमुख कौन होता है जो इस पेपर को सलेक्ट करता है इस पेपर को वह भी देखता है आपका सचिव भी रहता है. केवल इतनी बड़ी घठना घटित हो जाने के बाद निश्चित रूप से व्यवस्था है कि इस तरह के विषय नहीं आयें यह नियमों में है जो राज्य में या जनहित में न हो जनता के विपरीत हो और इसके लिये पूरी व्यवस्था की गई है उसके बाद भी सेटर जो प्रायवेट स्कूल की व्याख्याता है और माडरेटर एक वरिष्ठ अध्यापक है. क्या वरिष्ठ  अध्यापक को माडरेशन का कार्य करने के लिये अधिकृत कर रहे हैं क्या इसके लिये कोई योग्यता नहीं है. यह ऐसे महत्वपूर्ण विषय हैं इसके साथ-साथ एक अकादमिक व्यवस्था और होती है इनकी विधियोचित विभाग जो पूरे प्रश्न को यह देखता हैकि यह विधियोचित है कि नहीं विधि के अनुकूल है कि नहीं यह देखने वाला कौन था. यह आपने स्पष्ट नहीं किया. यह कार्यवाही नहीं की और इसकी सूचना सचिव तक को दी जाती है इसके लिये सहायक संचालक होता है और वह कंट्रोलर को सूचना देता है.कंट्रोलर सचिव को सूचना देता है कि पेपर ठीक सेट हो गये तब कहीं जाकर आपका पेपर सलेक्ट होता है. ऐसे कई विषय हैं कई ऐसी बातें हैं जो इस तरह से आईं कि जातिगत आधार पर आरक्षण देश के लिये घातक. इसी तरह से एक विषय और आया था कि दूरदर्शन भी युवा पीढ़ी के लिये घातक, फिर कहोगे कि इंटरनेट भी युवा पीढ़ी के लिये घातक. कई ऐसी बातें हैं जो चर्चा में आयेंगी यदि आप समय पर चर्चा की अनुमति देंगे. दूसरी जो बात मैंने सदन में नहीं बाहर उठाई थी कि जो छात्रों का प्राप्तांक वह 490 रह जायेगा. आपने कहा कि समानुपातिक पद्धति से हम नंबर देंगे. इसमें मैं सहमत हूं लेकिन इसमें विसंगति यह है कि हो सकता है कि किसी लड़के के मात्र 45 अंक आ रहे हों और यही निबंध का प्रश्न इस ढंग का किया हो कि वह 8 या 9 नंबर प्राप्त कर सकता हो तो उसके साथ यह अन्याय भी होगा समानुपातिक पद्धति से नंबर देने का मैं नहीं समझता कि यह न्याय है ठीक है आपने समानुपातिक पद्धति से निर्णय किया है. मैं चाहता हूं कि सरकार इसके बोनस अंक दे दे. दस के दस नंबर सभी छात्रों को दे दे तो वह उचित रहेगा और सरकार इस पर विचार करे.

श्री मुकेश नायक - माननीय अध्यक्ष महोदय, माध्यमिक शिक्षा मण्डल में सेट सिस्टम लागू हुआ है.एक ही परीक्षा के एक ही विषय के अनेक प्रश्न पत्र माध्यमिक शिक्षा मण्डल में विद्यार्थियों को दिये जाते हैं. इसको सेट सिस्टम कहते हैं. कोई प्रश्नपत्र आउट हो जाये या कोई गलत प्रश्न पूछ लिया जाये तो विद्यार्थियों को दूसरा प्रश्नपत्र दे दिया जाता है तो सेट सिस्टम का उपयोग क्यों नहीं किया गया और यह पहली परीक्षा होगी मध्यप्रदेश में जिसमें बच्चों को बिना लिखे प्रतिशत बढ़ जायेगा.

अध्यक्ष महोदय - यह प्रश्नकाल नहीं है. यह निकाल दीजिये.रावत जी आप अपनी बात एक मिनट में पूरी कर लीजिये.

श्री रामनिवास रावत - इसमें कई बातें ऐसी रह जाती हैं जैसे कि इस प्रश्नपत्र की जानकारी किस-किस को रहती है सभी के विरुद्ध कार्यवाही होनी चाहिये. मेरा यह मानना है कि माडरेटर जो वरिष्ठ अध्यापक है उससे माडरेशन कराया है वह उसके लिये एलिजेबल ही नहीं था ऐसी कई चीजें हैं जिससे यह स्थिति उत्पन्न हुई. हम चाहते हैं कि इस स्थिति पर इस स्थगन को ग्राह्य करेंगे तो पूरी बात आयेगी. उसमें मूल भावना भी दिखती है. यह विषय चर्चा में आये जिससे भविष्य में इस तरह की गल्तियां न हों.

अध्यक्ष महोदय--चूंकि माननीय मंत्री जी का वक्तव्य आ गया है एवं एडिशनल चीफ सेकरेट्री को जांच के लिये निर्देशित कर दिया गया है. अब आगे किसी भी चर्चा की आवश्यकता नहीं है.

श्री रामनिवास रावत (xxx)

श्री बाला बच्चन (XXX)

अध्यक्ष महोदय--माननीय मंत्री उमाशंकर गुप्ता जी के अलावा किसी का नहीं लिखा जाएगा. सदन आगे बढ़ चुका है अब कुछ नहीं लिखा जाएगा.

 

XXX : आदेशानुसार रिकार्ड नहीं किया गया.

 

 

(श्री बाला बच्चन, उप नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगण द्वारा शासन के वक्तव्य से असंतुष्ट होकर सदन से बहिर्गमन किया गया.)

 

 

 

 

 

 

पत्रों का पटल पर रखा जाना.

महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय का वार्षिक प्रतिवेदन

 

उच्च शिक्षा मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्ता) अध्यक्ष महोदय, मैं महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय अधिनियम, 1995 (क्रमांक 37 सन् 1995) की धारा 28 की उपधारा (3)की अपेक्षानुसार महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय का वार्षिक प्रतिवेदन पटल पर रखता हूं.

 

 

 

 

 

 

ध्यानाकर्षण

 

 

समय--11.52 बजे (1) सीहोर जिले के इछावर क्षेत्र में कृषकों से थ्रेशर कनेक्शन की राशि जबरिया वसूल किया जाना

 

श्री शैलेन्द्र पटेल (इछावर)--माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

 

ऊर्जामंत्री (श्री राजेन्द्र शुक्ल)--माननीय अध्यक्ष महोदय,

श्री शैलेन्द्र पटेल--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी के जवाब से संतुष्ट नहीं हूं, लेकिन इतना जरूर हुआ है कि जब हमारा ध्यानाकर्षण हमारा लगा तो किसानों को पूरी सुविधाएं मिलने लगीं. मेरा प्रश्न चोरी प्रकरण का नहीं था मेरा सिर्फ यह प्रश्न था कि उनको यह अलाऊ नहीं हो रहा है और जो बिजली विभाग के कर्मचारी हैं उनके द्वारा किसानों के खलिहानों में जाकर के जबरदस्ती उनकी रसीदें काट दी गई हैं. यहां इसका कहीं पर भी उल्लेख नहीं किया गया, जब यह सीजन आया तो किसानों की कितनी रसीदें काटी गईं हैं चोरी के प्रकरणों का तो मैंने सवाल ही नहीं उठाया है कि चोरी के प्रकरण बने हैं मेरा प्रश्न था कि उनकी जबरदस्ती रसीदें काटी गईं उसकी उल्लेख इसमें नहीं किया गया है.

श्री शैलेन्‍द्र पटैल- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस प्रश्‍न के माध्‍यम से, सरकार के द्वारा किसानों को वह सुविधाएं प्राप्‍त कराने की मंशा है । इस समय सिंचाई के लिए पानी तो होता नहीं है और अधिकतर किसानों के पास परमानेंट कनेक्‍शन हैं और उन परमानेंट कनेक्‍शन धारियों को, क्‍योंकि सिंचाई नहीं करते हैं तो उसी कनेक्‍शन पर थ्रेसर चलाने की अनुमति होती है यदि वास्‍तव में हम किसानों का हित चाहते हैं तो इसके लिए एक विधिवत् आदेश जाए और ऐसे किसानों को थ्रेसिंग स़ीजन में बिना किसी रोक- टोक के और बिना किसी परमीशन से, यह परमीशन दी जाए, ताकि वह फसल निकाल सके, जो बड़े किसान हैं, वह हार्वेस्‍टर से या हिडम्‍बा मशीन से फसल निकाल लेते हैं, लेकिन जो छोटे और मध्‍यम किसान हैं, लघु किसान हैं, वही इस थ्रेसर का उपयोग करते हैं, जो दो-दो-,चार - चार एकड़ के किसान हैं, उनके हित में यह आदेश निकाला जाए, ताकि उन्‍हें आवेदन न करना पड़े और परमीशन प्राप्‍त न करना पड़े और वह अपनी फसल निकाल सकें ।

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कोई प्रश्‍न नहीं किया है, सुझाव दिए हैं ।

अध्‍यक्ष महोदय- वह आगे से निर्देश चाहते हैं कि भविष्‍य में भी कोई तकलीफ न आए, यही बात है ।

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, स्‍पष्‍ट निर्देश हैं,150 फीट तक कनेक्‍शन धारियों को उसी पंप से थ्रेसिंग करने की अनुमति है, बशर्ते वह वितरण केन्‍द्र में जाकर विधिवत् आवेदन दे दें, कार्यपालन यंत्री उनकी अनुमति जारी कर देंगे कहीं कोई दिक्‍कत नहीं है, यदि किसी को समस्‍या आई होगी तो उन्‍होंने वितरण केन्‍द्र में प्रक्रिया का पालन नहीं किया होगा ।

श्री शैलेन्‍द्र पटेल- माननीय मंत्री जी मैं आपका ध्‍यानाकर्षित कराना चाहता हूं कि जो बिजली विभाग के कर्मचारी हैं, उन्‍होंने वहां जाकर वसूली की है, खैर जो हो गया, अब मैं आगे के लिए चाहता हूं कि यह जो परमीशन का प्‍वाइंट है, उसे इरेज कर दिया जाए, क्‍योंकि आगे आने वाले समय में हम सारे कृषकों को परमानेंट कनेक्‍शन धारी बना रहे हैं, अस्‍थाई नहीं रखेंगे और जब स्‍थाई कनेक्‍शन धारी बना रहे हैं तो उनको स़ीजन में थ्रेसर चलाने की अनुमति दी जाए, क्‍योंकि जब फसल कट जाती है तो सिंचाई की आवश्‍यकता नहीं होती है, उसको ध्‍यान में रखकर परमीशन दी जाए, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से सदन के माध्‍यम से, माननीय मंत्री जी से चाहता हूं, ताकि उनको आवेदन न करना पड़े और बार - बार की लूट खसोट खत्‍म हो जाए ।

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ठीक है ।

श्री सुशील कुमारी तिवारी(पनागर)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

 

श्री लाल सिंह आर्य (राज्‍यमंत्री, नगरीय प्रशासन) -

श्री सुशील कुमार तिवारी - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बरेला में भीषण जल संकट है. यह सभी विभागीय अधिकारियों को पता है. आपसे बता देना चाहते हैं कि पूर्व के ध्‍यानाकर्षण के जवाब में एक पैरा सुनाना चाहते हैं. नगर में वैकल्पिक जल प्रदाय व्‍यवस्‍था हुई थी, ए.डी.बी. प्रोजेक्‍ट के अन्‍तर्गत जल प्रदाय का डी.पी.आर. बनाने का कार्य प्रारम्‍भ किया गया था. पूर्व में हमें जो लिखित उत्‍तर दिया गया था कि डी.पी.आर., ए.डी.बी. के योजना के तहत दिया गया और आज प्रोजेक्‍ट उदय के तहत दिया गया. उसमें कौन-सी बात सत्‍य है ? यह बताने की कृपा करें. इसके साथ, हम आपको बता दें कि जो गौर नदी से जल की सप्‍लाई की जा रही है,

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उसमें माननीय मंत्री जी के पास भी विभाग ने एक फोटोग्राफ भेजा है और वही फोटोग्राफ्स मेरे पास है. मैं उसका उल्‍लेख करना चाहूँगा कि जो जल सप्‍लाई हो रही है, डैम के माध्‍यम से हो रही है. माननीय मंत्री जी के पास जो फोटोग्राफ हैं, उसमें गोबर और गन्‍दगी को डिलीट किया गया है और ओरिजनल मेरे सामने है. उसी व्‍यवस्‍था के तहत यह हमारे पास आया है. दूसरी बात गन्‍दगी के विषय में बताना चाहता हूँ कि माननीय उच्‍च न्‍यायालय ने यह निर्णय दिया था, उसकी छाया-प्रति भी मेरे पत्र के साथ संलग्‍न है कि गोबर, मल-मूत्र और गन्‍दगी उस नदी में मिल रही है, जिससे बरेलावासियों को पानी की सप्‍लाई हो रही है. दैनिक अखबारों में एवं आपको बता देना चाहते हैं कि इस साक्ष्‍य को हम पटल पर रखना चाहते हैं कि कबूतर को निकालते हुए नगरपालिका के अधिकारी सामने दिख रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - आप सीधे प्रश्‍न करें, चुनौती न दें.

श्री सुशील कुमार तिवारी - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारी समस्‍या का हल हो जाये, ऐसा प्रश्‍न आप ही बता दीजिये. वहां पर एक ही विकल्प है, एक तो सबसे पहले फ्लोराइड जल के माध्यम से जो आपूर्ति की जा रही है, उसको बंद करने के निर्देश दिये जायें, उसके साथ साथ ट्रीटमेंट प्लांट में एक भी ग्राम क्लोरिन नहीं मिलाई जाती है. एक भी फिटकरी नहीं मिलाई जाती है. डायरेक्ट पानी सप्लाई किया जा रहा है, जिससे पक्षी और पक्षियों के टूटे हुए बाल ग्लासों में आ रहे हैं, लोग पूजा के लिये उसका उपयोग भी नहीं कर पा रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय -- अब आप बैठ जायें. काफी लम्बा भाषण हो गया. मंत्री जी.

श्री लाल सिंह आर्य -- अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्य को अवगत कराना चाहता हूं कि एडीबी और प्रोजेक्ट उदय यह अलग अलग नहीं है, एक ही है. पूरे मध्यप्रदेश के जिन नगरों में, मुख्यमंत्री जी का यह संकल्प है कि 378 जो हमारी नगर पालिका, नगर पंचायत एवं नगर निगम हैं, उनमें एडीबी के तहत और अमृत योजना के तहत पेय जल की सप्लाई के लिये व्यवस्था है. 128 जो नगर पालिका, नगर पंचायतें हैं, उसमें हम एडीबी योजना के तहत ले रहे हैं. उसी योजना के तहत डीपीआर गौर नदी से बन गया है. अब माननीय सदस्य का यह कहना है कि उसको क्या नर्मदा से जोड़ेंगे. ऐसा उनका मानना है. जहां तक फिटकरी मिलाने का सवाल है, मध्यप्रदेश की एक भी नगरपालिका, नगर पंचायत ऐसी नहीं है, जिसमें हम यह काम नहीं करते, क्योंकि हमारे लिये आम जनता का जीवन सुरक्षित रहे, यह आवश्यक है. फ्लोराइड युक्त ट्यूबवैल की जहां तक आप बात कर रहे हैं, वार्ड क्रमांक 2,6,8,10 एवं 14 में स्थित है. वार्ड क्रमांक 6,8,10,14 में ट्यूबवेल से 2015 में ही हमने बंद कर दिया, जहां से फ्लोराइड युक्त पानी आता था. जहां तक एडीबी, जो स्वीकृति अपनी देती है, उनके कुछ मापदंड होते हैं. उन मापदंडों में हमने गौर नदी से जोड़ने के लिये भेजा है. लेकिन फिर भी माननीय सदस्य की भावना का मैं सम्मान करता हूं, क्योंकि उनका भी टारगेट आम जनता है. इसलिये मैं उन्हें आश्वस्त करना चाहता हूं कि दोनों हम डीपीआर बनवायेंगे, गौर नदी से भी और नर्मदा जी से भी. और दोनों में उनके मापदण्ड में जो होगा, उसे स्वीकृति वह देंगे, यह उनके हाथ में है. लेकिन हम दोनों डीपीआर बनवाकर देंगे.

श्री सुशील कुमार तिवारी -- अध्यक्ष महोदय, मैं यह बताना चाहता हूं कि गौर नदी का प्रभाव लगभग समाप्त हो चुका है. आखिर में ऐसी कौन सी बात है कि इसके लिये विभाग इस विषय की चिंता नहीं कर रहा है.

अध्यक्ष महोदय -- दोनों की डीपीआर बनवा रहे हैं ना. जो उसमें फिजिबल होगी, उसको लेंगे. और कुछ पूछना है, तो पूछ लीजिये.

श्री सुशील कुमार तिवारी -- अध्यक्ष महोदय, मेरा मतलब यह है कि प्रारंभिक तौर पर केवल जाकर उसको देख बस लें, तो उसकी डीपीआर बनाने की आवश्यकता नहीं रहेगी. 10 माह पूर्व डीपीआर बन रहा था और आज भी डीपीआर बन रहा है. हम तो मंत्री जी से उम्मीद करना चाहेंगे कि यह घोषणा करें कि कब तक हमें नर्मदा जल प्रदाय किया जायेगा. कृपया समय सीमा बतावें.

श्री लाल सिंह आर्य -- अध्यक्ष महोदय, समय सीमा तो अभी बताना संभव नहीं है, क्योंकि यह उदय चरण में जो हमारी नल जल योजनाएं जा रही है स्वीकृति के लिये और एडीबी को स्वीकृत करना है. लेकिन हम आपको आश्वस्त कर रहे हैं कि हम दो महीने के भीतर आपके नर्मदा नदी से भी और गौर नदी का, चूंकि हमारा डीपीआर लगभग अंतिम चरण में है, दोनों को हम प्रस्तावित कर देंगे.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.09 बजे प्रतिवेदन की प्रस्तुति/स्वीकृति

गैर सरकारी सदस्यों के विधेयकों तथा संकल्पों संबंधी समिति का ग्यारवां प्रतिवेदन.


 

12.10 बजे याचिकाओं की प्रस्तुति

 

अध्यक्ष महोदय--आज की कार्यसूची में उल्लेखित माननीय सदस्यों की याचिकायें प्रस्तुत की हुई मानी जायेंगी.

 

12.11 बजे वक्तव्य

प्रदेश में विद्युत के विक्रय तथा खपत पर लगने वाले विद्युत शुल्क की वर्तमान में लागू दरों को युक्तिसंगत करने संबंधी ऊर्जा मंत्री का वक्तव्य

 

ऊर्जा मंत्री (श्री राजेन्द्र शुक्ल ) -- माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

 

श्री बाला बच्चन(प्रभारी-नेता प्रतिपक्ष)- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने वक्तव्य तो दे दिया है लेकिन मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करना चाहता हूं कि विद्युत से संबंधित बहुत सी अनियमिततायें पूरे मध्यप्रदेश में और किसान सबसे ज्यादा इससे प्रभावित हो रहे हैं. अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मंत्री जी से आग्रह है कि विद्युत के जो बड़े बड़े बिल दिये जा रहे हैं, उसमें धांधली चल रही है, मनमानी की जा रही है, कृपा करके मंत्री जी इसको आप दिखवायें. अल्पवर्षा से, सूखे की स्थिति ,अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से पहले ही परेशान हैं. मुझे याद है पिछले सत्र में इस बात को यहां पर कहा गया था कि बैंकों के कर्जा को, समितियों के कर्ज को माफ किया जायेगा या फिर बिजली के बिलों की वसूली स्थगित की जायेगी और ऋणो की वसूली स्थगित की जायेगी,लेकिन ऐसा तो कुछ हुआ नहीं, और बिजली के बिल इतने भारी आ रहे हैं कि वह किसानों की आर्थिक स्थिति को ही खराब कर देते हैं, उनके बजट को बिगाड़ देते हैं. मंत्री जी आप अपने स्तर से निचले स्तर के जो अधिकारी हैं लाईनमेन से जो मनमानी विभाग के अधिकारी करवाते हैं वहां पर ध्यान देने की आवश्यकता है जिससे अनियमितता, गड़बड़ी, धांधली न हो. बिजली के बिल न भरने के कारण किसानों को मुंह छिपाकर के रहना पड़ता है. कम से कम यह जो बिजली के बिल वसूलने पर आपने कसावट कर रखी है उस पर आप ध्यान दें. किसानों को, गरीबों को राहत दिलवायें, उनको कुछ छूट दें जिससे कि आये दिन किसानों के द्वारा जो आत्महत्यायें की जा रही हैं उस पर रोक लग सके, उनको बिजली के बिलों से राहत मिल सके. मंत्री जी इस पर आपको ध्यान देना पडेगा. मैं समझता हूं कि सदन के सभी सदस्यों की भी इसमे सहमति है. बड़ा मामला है तो आप किसी भी तरह से किसानों को बिजली के बिलों में छुट देकर के उनको राहत दिलाये तो किसान चेन की सांस ले सकेंगे. अध्यक्ष महोदय, आपने समय दिया उसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद.

 

 

 

12.14 बजे वर्ष 2016-17 की अनुदान की मांगों पर मतदान(क्रमश:)

(1) मांग संख्या-24 लोक निर्माण कार्य-सड़कें और पुल

मांग संख्या-67 लोक निर्माण कार्य-भवन

 

 

उपस्थित सदस्यों के कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत हुये. अब मांगों और कटौती प्रस्तावों पर एक साथ चर्चा होगी.

डॉ.गोविंद सिंह(लहार) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय लोक निर्माण मंत्री द्वारा प्रस्तुत मांगों में से कुछ मांगों का विरोध तथा कुछ मांगों का समर्थन के लिये अपनी बात करने के लिये खड़ा हुआ हूं. माननीय अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश में लोक निर्माण विभाग का काम मंत्री जी ने सुधारने का प्रयास किया है. परंतु मैं कहना चाहता हूं कि इतना बिगड़ा हुआ विभाग इनको मिला है कि इस विभाग में जितना बजट खर्च के लिये मंजूर किया जाता है उससे आधे से ज्यादा बजट तो भ्रष्टाचार के गर्त में जा रहा है.हालांकि हमें 4-6 महीनों में सड़कों की गुणवत्ता में सुधार दिखा है. उसका भी कारण यह है कि विभाग के प्रमुख सचिव ईमानदार और कर्मठ अधिकारी है, वह स्वयं जाकर के कार्यों को देखते हैं इस कारण से ठेकेदारों की मनमानी पर अंकुश लगा है .

श्री वेलसिंह भूरिया-- कांग्रेस के राज में पता नहीं चलता था कि रोड में गढ्ढा है या गढ्ढे में रोड है. अभी तो पेट के अंदर का पानी तक नहीं हिलता है डॉ.गोविंद सिंह जी.

डॉ. गोविंद सिंह -- अध्यक्ष महोदय, इनको कौन सी बीमारी है बताओ. (हंसी) मैं डॉक्टर हूं उसका इलाज कर दूंगा.

अध्यक्ष महोदय-- वेलसिंह जी आप बैठ जायें.

डॉ.गोविंद सिंह --क्या आपकी कुर्सी में कीलें लगी हैं जब आते हैं खड़े हो जाते हैं.

इंजी.प्रदीप लारिया-- अध्यक्ष महोदय, दिग्विजय सिंह जी के कार्यकाल में 10 हजार सड़कें थीं आज 1 लाख बन गई हैं.

डॉ.गोविंद सिंह-- अरे बैठ जायें भाई.

श्री अजय सिंह -- अध्यक्ष महोदय, प्रदीप भाई कह रहे हैं कि 1 लाख सड़कें प्रदेश में बन गई हैं. कृपा करके जरा विंध्य क्षेत्र का भी दौरा कर लें, पूरे रीवा संभाग की एक भी सड़क चमचमाती हुई दिखाई दे जाये तो बताईयेगा.

डॉ.गोविंद सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं लोक निर्माण विभाग पर अपनी बात कह रहा था. लोक निर्माण विभाग में विभागीय मंत्री प्रमुख होता है. किंतु देखने में आ रहा है कि मंत्री के अधिकारों का धीरे धीरे हनन किया जा रहा है, धीरे धीरे सब उनके अधिकार उनसे अलग करने का काम सरकार के द्वारा किया जा रहा है. मंत्री जी की ईमानदारी की छवि होने के कारण विभाग में जितना भ्रष्टाचार होता है आधे से ज्यादा पैसा किसी के पास पहुंचना चाहिये वह नहीं पहुंच पा रहा है इसलिये इनके अधिकारों का हनन किया जा रहा है. अध्यक्ष महोदय, भवन/सड़क विंग में एक प्रमुख अभियंता तथा 9 मुख्य अभियंता हैं वहीं दूसरी तरफ मध्यप्रदेश रोड डेवलेपमेंट कारपोरेशन है इसमें 3 मुख्य अभियंता है और करोड़ों का बजट इसको जाता है वर्तमान में एमपीआरडीसी अंतर्गत लगभग 40-50 करोड़ के काम चल रहे हैं, एनओटी द्वारा, बीओटी द्वारा एडीबी से कर्जा लेकर के एमपीआरडीसी को काम की जिम्मेदारी सौंप दी गई है.

अब इसके बाद एक और बना दिया है पीआईयू, परियोजना संचालक इसमें भी 25 लाख से अधिक जो भवन हैं वह पीआईयू बनायेगी. लोक निर्माण विभाग का काम पूरा विभाग को तहस-नहस करने का काम कर दिया कई विभागों में बांटकर, बंदरबाट का काम चालू हो गया है.

12.20 बजे {उपाध्‍यक्ष महोदय (डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुये.}

 

रोड डेवलपमेंट कारपोरेशन एनओटी और बीओटी से काम कर रहे हैं, उनको सारे स्‍टेट हाइवे दे दिया, नेशनल हाइवे दे दिये, पूरा काम उनको दे दिया और अब मध्‍यप्रदेश की जो छोटी-छोटी गांव की सड़कें हैं, एमडीआर भी देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, कई दे भी दिये हैं, तो लोक निर्माण विभाग के पास बचेगा क्‍या. हमारा तो यह कहना है कि पूरा एमपी रोड डेवलपमेंट कारपोरशन को दे दें ताकि पूरा किसी का कंट्रोल नहीं रहे और लोग रोड डेवलपमेंट कारपोरेशन के जो काम चल रहे है, उसमें 70-80 प्रतिशत भ्रष्‍टाचार हो रहा है. मैं कहना चाहता हूं कोई सुनवाई नहीं, मुख्‍यमंत्री इसके अध्‍यक्ष हैं, अब मुख्‍यमंत्री को इतनी फुर्सत कहां है प्रदेश से चलाने की और मुख्‍यमंत्री जी अध्‍यक्ष बन बैठे. अब वहां के जो अधिकारी कर्मचारी हैं वह मनमानी कर रहे हैं. विभाग के मंत्री की इतनी क्षमता नहीं हैं, ताकत नहीं है कि वहां जाकर रोड को देख सकें, प्रमुख सचिव देख सकें, देखकर भी आते हैं तो कुछ कर नहीं पाते हैं.

माननीय मंत्री जी ने आश्‍वासन दिया था विधानसभा में कि मैं जाऊंगा 8 अगस्‍त को, गये. लहार में एक एमपी स्‍टेट हाइवे 45 देखी, आपने देखी क्‍या कर लिया आपने, आपने कुछ किया, मौके पर देखकर आये थे, सड़क बिलकुल निम्‍न गुणवत्‍ता की थी. उपाध्‍यक्ष जी लेकिन मंत्री की कुछ हिम्‍मत नहीं हुई कि उसमें कुछ देख सकें. इसी प्रकार आपने स्‍टेट हाइवे नंबर 2, भिंड, मुरैना, गोपालपुर मार्ग, उसको भी देखा, मैंने कहा हमारे विधानसभा में आसपास पेड़ लगाये गये, 1726 पेड़ लगे हैं, मौके पर मंत्री जी को बोला आप देखिये कितने पेड़ लगे हैं, गांव वालों ने बताया कि लगे ही नहीं हैं और पेड़ों का भुगतान हो गया, हमने फिर प्रश्‍न किया किस दुकान से हुआ तो जवाब मिला इस-इस दुकान से यह बिल आ गये, वह दुकानें मध्‍यप्रदेश में ढूंढी कहीं हैं ही नहीं हैं, फर्जी बिल लगा दिये, उसकी शिकायतें की, विधानसभा की कमेटी से कीं, अनेक शिकायतों के बाद कोई कार्यवाही नहीं हुई और वह बीओटी के माध्‍यम से है, भिंड से मिहोना तक सड़क कई जगह उखड़ी है, कोई सुनने वाला नहीं है, चाहे जितनी शिकायतें करो.

श्री वेलसिंह भूरिया (सरदारपुर)-- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पेड़ के मंत्री डॉ. शेजवार जी हैं, माननीय सरताज सिंह थोड़ी हैं क्‍या.

डॉ. गोविंद सिंह-- उपाध्‍यक्ष जी इसको बाहर तो निकालों .. (हंसी)... तुम्‍हारे मुंह में कुछ बीमारी हो गई क्‍या. .. (हंसी)...

उपाध्‍यक्ष महोदय-- डॉ. साहब आप जारी रखें अपना भाषण.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार-- गोविंद सिंह जी को उससे बड़ी बीमारी लग रही है, क्‍योंकि भाषा तो लगभग मिलती है, उनकी तो अच्‍छी है पर इनकी क्‍या भाषा है. अरे भई जरा विधानसभा के कुछ, आप तो इतने वरिष्‍ठ आदमी है जरा धीरे से कह देते इसी बात को और उधर मुखातिब होने की बजाय आसंदी से थोड़ी सी आपत्ति कर देते तो आपकी बात में बहुत वजन होता.

डॉ. गोविंद सिंह-- वह वेल हैं न.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार-- मैं यह कह रहा था आपने उधर को कहकर जिस भाषा में बोला अपना ही वजन कम किया है, उनका कुछ कम नहीं हुआ और इधर को आप बोलते तो आपका वजन बढ़ता.

डॉ. गोविंद सिंह-- शर्म लिहाज नहीं आ रही तो भी .. (हंसी)

उपाध्‍यक्ष महोदय-- डॉ. साहब आप जारी रखें.

डॉ. गोविंद सिंह-- आदत में है उनके, जब बोलेंगे चाहे जब खड़े हो जाते हैं, कम से कम अब सीखो, शुरूवात है, एबीसीडी वाले हो. उपाध्‍यक्ष महोदय, स्‍टेट हाइवे हमारे क्षेत्र में एमपी रोड डेवलपमेंट कारपोरेशन के द्वारा बन रहा है, करीब 6 वर्ष हो चुके हैं, उसका 29 जून 2013 को काम समाप्‍त होना था, आज 2016 हो गई, उस सड़क के बारे में उपाध्‍यक्ष महोदय जैसे ही बनी उसी समय से इतनी निम्‍न स्‍तर की है कि आज रोड पर जो ट्रॉफिक चलता है और 2-2 फीट के गड्डे उसमें पहाड़ जैसे निकल आते हैं, उसमें मिट्टी डाली गई, गिट्टी का उपयोग नहीं हुआ, पुलियां बनीं, निम्‍न स्‍तर की हैं और मैं बता दूं हम 127 शिकायतें कर चुके हैं, मुख्‍यमंत्री को चीफ सेकेट्री को, प्रमुख सचिव को, विभाग के जितने भी अधिकारी हैं सबको. 5-6 वर्षों में 127 शिकायतें 17 विधानसभा प्रश्‍न, 8 बार ध्‍यानाकर्षण, 2 बार शून्‍यकाल और 1 बार मय शपथ पत्र के लोकायुक्‍त में, पूरे प्रमाण के साथ दिया, अगर मेरी बात गलत होती तो लोकायुक्‍त को अधिकार है मेरे ऊपर मुकदमा चलाती. लेकिन मध्‍यप्रदेश का लोकायुक्‍त मध्‍यप्रदेश के भ्रष्‍टाचारियों को बचाने के लिये है, संरक्षण देने के लिये है, बेईमानों के खिलाफ कार्यवाही करने के लिये नहीं है लोकायुक्‍त और लगातार उनका कार्यकाल इसलिये बढ़ाया जा रहा है कि सबको संरक्षण दें, खाओ, लूटो, तुम भी खाओ, हम भी खायें, मिल बांटकर खाओ, खा-खा खैया मची हुई है. ... (हंसी)... यह हालत है.

उपाध्‍यक्ष जी इसके बाद भी माननीय मंत्री जी ने देखा आज तक कार्यवाही नहीं हुई. अभी पटवा जी ने जब उनके पास चार्ज था 10 मार्च को विधानसभा के ध्‍यानाकर्षण का जवाब दिया कि 31 मार्च तक काम पूरा हो जायेगा, पुलिया, बिजली के खंबे, नाली, नाला और पेवर ब्‍लॉक लग जायेंगे, अभी तक कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है 31 मार्च आने वाला है, शुरूआत ही नहीं हुई. विधानसभा के ध्‍यानाकर्षण में माननीय नागेन्‍द्र सिंह जी ने जवाब दिया था कि 87 करोड़ की इसकी लागत है, इसके बाद अभी 89 करोड़ 26 लाख के करीब भुगतान हो चुका है और अभी हमने देखा जो विभागीय पुस्‍तक छपी हुई है उसमें लिखा है 137 करोड़ से अधिक उसकी लागत अब आ गई है. आखिर इतना ताकतवर कौन सा ठेकेदार है. गंगोत्री कंस्‍ट्रक्‍शन कंपनी किसकी है, मध्‍यप्रदेश के एक प्रभावशाली मंत्री हैं, उनका रिश्‍तेदार है. इसलिये विभाग कोई कार्यवाही नहीं कर पा रहा. जहां मुख्‍यमंत्री तक शिकायत पहुंची मंत्री जी पहुंच जाते हैं कि साहब बहुत बढि़या चल रहा है और हर सवाल पर असत्‍य जवाब आ रहे हैं.

मैं माननीय मंत्री जी आपसे कहना चाहता हूं या तो आप उस सड़क को सुधरवा दीजिये. (श्री अजय सिंह जी ने बैठे-बैठे कहा कौन से मंत्री जी) मंत्री जी अभी हैं नहीं हैं नाम बतायेंगे, हमें क्‍या है, नाम भी बतायेंगे.

उपाध्‍यक्ष महोदय-- नाम न लें.

डॉ. गोविंद सिंह-- उनको पता होगा, हमसे सिफारिश भी की थी एक बार कि रिश्‍तेदार हैं यार, मान जाओ, तो एक बार हम मान गये थे. .... (हंसी)..

श्री प्रदीप लारिया-- रिश्‍तेदारी निभाई आपने.

डॉ. गोविंद सिंह-- मनुष्‍य सामाजिक प्राणी है, तो एक बार तो आपकी भी मानना पड़ती है.

श्री घनश्‍याम पिरोनिया-- डॉ. साहब वह रोड का मेरा और आपका अच्‍छा संबंध है.

डॉ. गोविंद सिंह-- आपका भी है और आपके पहले पूर्व विधायक अरविंद भदौरिया थे उनका भी था हमारे साथ इसी गंगोत्री कंस्‍ट्रक्‍शन कंपनी के सामने और उन्‍होंने विधानसभा में यह कहा था सबके सामने कि ठेकेदार आयेगा तो हम काट देंगे. विधानसभा के चुनाव में आपको खर्चा देंगे आप तो गोविंद सिंह को मना लें और आप भी सेट हो जाइये, मंत्री जी ने नागेन्‍द्र सिंह जी ने कहा था जांच करायेगे, अभी तक जांच नहीं हुई. इसके बाद मैं कहना चाहता हूं, अभी माननीय मंत्री जी का कल पत्र मिला है मुझे.

श्री घनश्‍याम पिरोनिया-- मुझे भी पत्र मिला है.

डॉ. गोविंद सिंह-- आप भी इस पर बोलना जरा, अगर हमें और आपको जनता के सामने जवाब देना है तो जरा दमदारी से लड़ो इसके खिलाफ. इसके बाद उपाध्‍यक्ष महोदय कहना चाहता हूं माननीय मंत्री जी का कल हमें एक पत्र मिला कि प्रमुख सचिव जी जाकर जांच करेंगे, 4 अप्रैल लिखा है शायद 6 अप्रैल...

उपाध्‍यक्ष महोदय-- डॉक्‍टर साहब कितना समय लेंगे.

डॉ. गोविंद सिंह-- बस जल्‍दी-जल्‍दी बोल देता हूं, हमें जाना भी है. ...(व्‍यवधान) अभी मैं इसलिये कहना चाहता हूं क्‍योंकि हमें पत्र मिला है और हमें उम्‍मीद है क्‍योंकि हमने देखा है जो प्रमुख सचिव आज हैं अग्रवाल साहब वह पहले मंडी बोर्ड में थे और मंडी बोर्ड से उन्‍होंने कुछ सड़के बनवाई थीं हमारे क्षेत्र में, आज 14 वर्ष होने को हैं सड़क जहां बच गई है, रोड डेवलपमेंट कार्पोरेशन ने नहीं बनाई वहां अभी भी एक गड्डा नहीं हुआ 14 वर्ष के बाद भी, जो आदमी की सच्‍चाई है उसकी तारीख करना चाहिये और चोरों की भ्रष्‍टाचारियों की खिलाफत करना चाहिये यह हमारे सिद्धांत में हैं, कोई कहता है तारीख करते हो, सच्‍चाई की तारीफ करूंगा, गलत काम होगा तो आलोचना करूंगा. इसलिये मैं कहना चाहता हूं कि हमें उम्‍मीद है कि हमें न्‍याय मिलेगा.

हमारे नेताजी ने भी बताया कि अब बिलकुल सही हो जायेगा. हमने चिट्टी दिखायी थी आपको, आपने कहा कि अब काम हो जायेगा. लेकिन हमें इसलिए विश्वास नहीं है कि न्याय की कार्रवाई करने का अधिकार कहीं और है. वह कार्रवाई होगी कि नहीं होगी लेकिन मैं बताना चाहता हूं मंत्रीजी कि आपको 5-10 साल और जनता की सेवा करना है. 10 साल और चुनाव लड़ेंगे. 10 साल और मंत्री रहेंगे. मैं और सड़कों के बारे में बता देना चाहता हूं. उपाध्यक्षजी, स्टाफ की कमी है.

श्री सूबेदार सिंह--उपाध्यक्ष महोदय,डॉक्टर साहब बहुत वरिष्ठ सदस्य हैं.उन्होंने यह माना कि 10 साल भारतीय जनता पार्टी की सरकार रहेगी.

इंजी.प्रदीप लारिया--उन्होंने स्वीकार कर लिया है.

डॉ गोविन्द सिंह--हमारी शुभकामना है कि पचासों साल तक रहें.(हंसी)

इंजी.प्रदीप लारिया--और आप वहीं रहें.

डॉ गोविन्द सिंह-- लेकिन कुछ करके दिखायें. अन्यथा साल भर में हट जायें. उपाध्यक्ष जी, लहार में दो सब डिवीजन हैं लेकिन सब डिवीजन में सब इंजीनियर नहीं रहते हैं. जितने सब इंजीनियर के पद हैं, उसमें से 30 प्रतिशत ही पदस्थ हैं.

डॉ गौरीशंकर शेजवार--उपाध्यक्ष महोदय, डॉक्टर साहब जब सरकार की बुराई कर रहे थे तो अजय सिंह जी बहुत प्रसन्न थे और जैसे ही इन्होंने असली बात की कि आप 10 साल और मंत्री रहेंगे तो अजय सिंह जी का चेहरा एकदम नाराज सा हो गया. देखो तो आप ! गुस्से में आ गये. ऐसा होना नहीं चाहिए. सत्य बात सुनने का कम से कम धेर्य होना चाहिए. ( श्री अजय सिंह जी खड़े होने पर) पहले आप मुस्कुराईये. गोविन्द सिंह जी ने बहुत अच्छी बात कही है. आप प्रसन्न होईये. देखिये, आपके लिए हम अधिकतम हम मांग सकते हैं तो वहां तक मांग सकते हैं. लेकिन यहां कि आप कभी कल्पना मत करना. गोविन्द सिंह जी जो कह रहे हैं. वह ही सही है.(हंसी)

श्री अजय सिंह--उपाध्यक्ष महोदय, आज सुबह ही माननीय शेजवार जी को व्यवधान पुरुष की पदवी मिल चुकी है.(हंसी) अच्छी-खासी चर्चा चल रही है, जबरजस्ती बीच में बोल देते हैं.(हंसी) मैं चिन्तन कर रहा था और मेरे ऊपर आरोप लगा रहे हैं.

उपाध्यक्ष महोदय--आपको छेड़ रहे थे.

डॉ गोविन्द सिंह--उपाध्यक्षजी, माननीय सरताज सिंह जी भ्रष्टाचारियों से गले गले तक परेशान हो चुके हैं. उन्होंने हमसे चर्चा में स्वीकार किया हम उधर आयेंगे.(हंसी)

उपाध्यक्ष महोदय--समाप्त करिये.

डॉ गोविन्द सिंह--उपाध्यक्ष महोदय, माननीय आरिफ अकील साहब के क्षेत्र भोपाल-उत्तर में लोक निर्माण विभाग की सड़क पर अभी तक कार्य नहीं हुआ है. उसका डामरीकरण उखड़ चुका है. उसमें गड्डे हैं. उसको ठीक करायें.

उपाध्यक्ष महोदय, मेरे क्षेत्र में रतनपुर-आलमपुर मार्ग करीब 12 साल से उखड़ा पड़ा है. उसमें डामरीकरण नहीं है. अभी 2-3 किलोमीटर हुआ है वह भी निम्न स्तर का हुआ था, 4 महीने पहले पूरा खराब हो गया. हमारे क्षेत्र में जाखोली सड़क पर 20 करोड़ रुपये की लागत से पुल बन चुका है. उत्तरप्रदेश के कानपुर को जोड़ने वाली सड़क है. उस सड़क पर 5 साल से मुआवजा नहीं मिला इसलिए बीच में करीब 200 मीटर सड़क नहीं बन पाने के कारण उस सड़क की लागत बढ़कर 20-25 करोड़ रुपये हो गई जिसका कोई उपयोग नहीं हो रहा है. हमारा मंत्रीजी से अनुरोध है कि तत्काल इसका मुआवजा स्वीकृत करायें और उसके आगे बढ़ायें.

उपाध्यक्ष महोदय, मैं यह भी कहना चाहता हूं कि हमारे क्षेत्र में भवानी माता की सड़क है. वहां प्रतिवर्ष नवदुर्गा पर मेला लगता है. उत्तरप्रदेश और राजस्थान आदि राज्यों से लाखों लोग आते हैं. वह सड़क आज से 4-5 साल पहले बनी थी. वह बनते ही उखड़ गई थी. उसकी भी शिकायतें करते रहे लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं है. हमारा आपसे अनुरोध है कि अभी सरकार ने पत्र भी निकाला था कि जितनी भी खराब सड़कें हैं उनमें डामरीकरण कराया जायेगा और गड्डे भराये जायेंगे. लेकिन लहार क्षेत्र की सड़कों पर कार्रवाई नहीं हुई.

उपाध्यक्ष महोदय, नारददेव मंदिर, जहां शिवजी ने तपस्या की थी की अजनार-मगरोल सड़क बनी थी, वह भी पूरी तरह से उखड़ चुकी है. वहां पर शिवरात्रि पर विशाल मेला लगता है. दतिया आदि चारों ओर से लोग आते हैं. उस सड़क की भी मरम्मत करायें.उपाध्यक्षजी, सड़कें ज्यादा डेमेज हो रही है. उसके लिए खनिज विभाग से भी पैसा मांगना चाहिए क्योंकि कुछ सड़कें खनिज के अंतर्गत भी आती हैं.

उपाध्यक्षजी, हमारे विभाग में स्टाफ नहीं है. एक सब डिवीजन में दो क्लर्क हैं. ताला लगा रहता है. स्टाफ की पूर्ति करें.

एक माननीय सदस्य--डॉक्टर साहब लहार से बाहर निकल ही नहीं पा रहे हैं.

उपाध्यक्ष महोदय--ड़ॉक्टर साहब एक रोड़ पर बहुत यात्रा करते रहे हैं ना.

डॉ गोविन्द सिंह-- उसमें 6 साल हो गये. लोकायुक्त आदि को 127 शिकायतें. ध्यान आकर्षण आदि सब कार्रवाई की.

उपाध्यक्ष महोदय-- वह भी एक रिकार्ड है. गिनीज वाले मानेंगे नहीं. आप लिम्का में दर्ज करायें.

डॉ गोविन्द सिंह--उपाध्यक्षजी, हमारा निवेदन है कि आप हमारी एक सड़क नौदा से पचोघरा मार्ग जो उत्तरप्रदेश को जोड़ती है केवल 3 किलोमीटर है, इस साल नहीं तो अगले साल के बजट या अनुपूरक में शामिल करने की घोषणा करें. धन्यवाद.

श्री दिलीप सिंह परिहार(नीमच)--उपाध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 24 और 67 के समर्थन में अपनी बात कहने के लिए खड़ा हुआ हूं.

उपाध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश का जो चहुंमुखी विकास हो रहा है. उस विकास में सड़कों का बहुत बड़ा योगदान है. उन सड़कों के अच्छे होने के कारण मध्यप्रदेश का सर्वांगीण विकास हो रहा है. उस विकास के कारण ही देश हृदयस्थल मध्यप्रदेश उसमें उद्योगपति यहां आकर अपना उद्योग स्थापित कर रहे हैं. हम देखते हैं कि हमारे शरीर में यदि रक्त है और धमनियों में रक्त बह रहा है. उसी प्रकार से सड़कों के जाल के कारण प्रदेश का चहुंमुखी विकास हो रहा है.

उपाध्यक्ष महोदय, सड़कों के मामले में जैसा डॉ गोविन्द सिंह जी बता रहे थे, बहुत सुधार हुआ है. जब मैं 2003 में आया था उस समय सड़कों की बुरी हालत थी. मुझे नीमच से आने में 14 से 18 घंटे लगते थे. आज मैं एक दिन वीरभूमि चित्तौड़ जो शक्ति और भक्ति भूमि है, मैं साढ़े छः घंटे में चित्तौड़ से भोपाल विधानसभा में आ गया. राजस्थान से या उत्तरप्रदेश या महाराष्ट्र शिर्डी के दर्शन करके आने वाला हो हम देखते हैं कि लगातार सड़कें बन रही है. प्रदेश के शासन ने सड़कों के सुदृढ़ीकरण में बहुत बड़ा योगदान दिया है. माननीय मंत्रीजी लगातार गुणवत्ता युक्त सड़कें बनाने का काम कर रहे हैं. राज्य में अधिकांश स्टेट हाई-वे जो कहीं न कहीं कार्य पूर्णता की ओर है. राज्य में लगभग 19 हजार किलोमीटर जिला मार्ग भी उन्नयन किये गये हैं. पहले जब हम जिला मार्गों पर जाते थे तो जिला मार्गों पर सिंगल सड़कें होती थी. आज सड़कों को फोर लेन से जोड़ा जा रहा है. टू लेन से तहसीलों को जोड़ा जा रहा है. यहीं नहीं गांवों में भी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से जोड़ने का काम किया जा रहा है. वहीं मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से छोटे-छोटे गांव में भी सड़कों का जाल बिछा है.

उपाध्यक्ष महोदय, माननीय लोक निर्माण मंत्री श्री सरताज सिंह जी इच्छा शक्ति के धनी हैं. इनके प्रमुख सचिव भी इच्छा शक्ति के धनी है. मैं एक बार नीमच जिले की सड़क के लिए उनसे मिलने गया तो उन्होंने कहा कि नीमच जिले में यदि कहीं कोई कमी है तो उसको पूरा करेंगे. मुझे याद है कि जब हमारे नीमच में जावरा से नयागांव का फोर लेन निकाला गया तो हमारे क्षेत्र में एकदम वृद्धि हुई. क्योंकि फोर लेन के निकलने के कारण हमारे लोग जो राजस्थान व्यापार करने जाते थे, वह बढ़िया सुविधा से जाते थे. पहले सड़कों में बड़े बड़े गड्डे होते थे. यह नहीं पता चलता था कि गड्डे में सड़क है या सड़क में गड्डा. एक बार जब मैं मंदसौर परीक्षा देने गया तो हमारी बस गड्डे में फंस गई. पत्थर और मुरम डालकर हमने उस गड्डों को भरकर बस को आगे बढ़ाया था. आज शानदार सड़कें बनी हुई है. उन सड़कों के कारण प्रदेश का चहुंमुखी विकास हो रहा है.

उपाध्यक्ष महोदय, 19 हजार किलोमीटर मुख्य मार्ग हैं. राष्ट्रीय राजमार्ग में भी 5 हजार किलोमीटर बढ़ा दिया गया है. इसके कारण से स्टेट हाई-वे और मुख्य जिला मार्गों की लंबाई भी कहीं न कहीं बढ़ रही है. हम देख रहे हैं कि गुणवत्ता युक्त सड़कों का जाल बिछाना उसमें प्रदेश के माननीय मंत्रीजी का बहुत बड़ा योगदान है. प्रधानमंत्री सड़क योजना के माध्यम से भी 63 हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण हुआ है. मैं माननीय खुमानसिंह जी शिवाजी जो हमारे यहां से पूर्व विधायक थे, वे एक सड़क बोरदा की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में लेकर आये थे तो हम बहुत प्रसन्न हुए थे. लेकिन आज मेरे नीमच विधानसभा में और अन्य सारी विधानसभा क्षेत्रों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से गुणवत्ता पूर्ण सड़कें बनी हैं. उसके माध्यम से लोग हमसे बार बार यह कहते हैं कि आप हमारे यहां प्रधानमंत्री सड़क से गांव को जुडवा दें. कहीं न कहीं प्रधानमंत्री सड़क योजना के माध्यम से भी मध्यप्रदेश में 63 हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण हुआ है. इस योजना में 2016-17 में 5 किलोमीटर निर्माण का लक्ष्य रखा गया है. इस योजना में वर्ष 2016-17 में 5 कि.मी. के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है. जो मुख्यमंत्री योजना की सड़कें बन रही हैं, जो छोटे-छोटे गांव में हम देखते हैं तो मुख्यमंत्री सड़क योजना की माध्यम से गांव-गांव को जोड़ा जा रहा है. 2000 कि.मी. से अधिक सड़कें इस वर्ष बजट में माननीय मंत्री जी ने ली हैं.

श्री अजय सिंह - यह किस विभाग पर चर्चा हो रही है? यह मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री सड़क, यह किस विभाग पर चर्चा हो रही है?

उपाध्यक्ष महोदय - आप लोक निर्माण विभाग पर आ जाएं.

श्री दिलीप सिंह परिहार - हम तो सड़क से जोड़ने की बात कर रहे हैं क्योंकि इसमें भी फंड रखकर डामरीकरण किया है. तेज गति से मध्यप्रदेश में सड़कें बनी हैं. उपाध्यक्ष महोदय, विभाग ने ऑन लाईन जोड़ने का भी काम किया है. आज लोक निर्माण विभाग में ई-टेंडरिंग के माध्यम से जो पारदर्शिता हुई है, उसकी वजह से भी सरकार के प्रति लोगों की आस्था बढ़ी है. कार्य में ई-प्रबंधन हो, उसकी समीक्षा हो, वह भी माननीय मंत्री जी के नेतृत्व में लगातार बढ़ रहा है. पुल हों, भवनों की बात हो. हम देखते हैं, अभी राजेन्द्र पाण्डेय जी बैठे हैं, जावरा में एक ओवर ब्रिज माननीय मंत्री जी ने स्वीकृत किया है. मैं उसके लिए भी धन्यवाद देता हूं. आज जहां जहां भी ओवर ब्रिज हैं, सेतु निगम के पुल हैं, या पुलियाएं हैं, भवन हैं, उनका रख-रखाव भी मंत्री जी के माध्यम से लगातार हो रहा है. उसमें पारदर्शिता भी है. ई-टेंडरिंग, ई-पेमेंट, ई-मैनेजमेंट के आधार पर भी सरकार की गुणवत्ता बढ़ी है और इससे सरकार के प्रति भी लोगों की आस्था बढ़ी है. माननीय मंत्री जी ने सड़कों को लेकर सख्त कार्यवाही की है. यदि कहीं गड़बड़ी नजर आई है तो माननीय मंत्री जी ने सख्त कार्यवाही की है. माननीय मंत्री श्री सरताज सिंह जी जब नीमच में प्रवास पर आए थे, उन्होंने कलेक्टर को निर्देश दिये, लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये और कुछ जो सड़कें मैंने बताई थी तो वे अधिकारी, ठेकेदार मेरे पास भागकर आए कि हम सुधार देंगे. यह उनकी प्रामाणिकता का प्रमाण है कि वे सड़कें एकदम बढ़िया हो गई हैं.

उपाध्यक्ष महोदय, मेरे क्षेत्र में भी बहुत सारे काम हैं, उनक कामों को लेकर भी मैंने माननीय मंत्री जी से लगातार संपर्क किया है. अनुसूचित जाति विकास निगम में लगभग 2008 कार्य सौंपे गये थे, आज लगभग 376 करोड़ रुपए के हैं. उन छात्रावासों का कार्य प्रगति पर है और कुछ पूर्ण हो चुके हैं. पीआईयू के माध्यम से जो हमारे यहां अम्बेडकर भवन बने हैं, उनमें भी काम की गुणवत्ता है. अम्बेडकर भवनों की भी मांग हर विधान सभा में हो रही है. उन अम्बेडकर भवनों, स्मारकों को वर्ष 2016-17 में पूर्ण कर लिया जाएगा. रोड, ओवर ब्रिज, अंडर ब्रिज और अन्य योजनाओं के निर्माण कार्य भी पीआईयू के माध्यम से कराए जा रहे हैं. देश में कौशल विकास की दृष्टि से भी युवाओं के लिए महत्वाकांक्षी परियोजनाएं हैं. केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा परियोजना के माध्यम से जो कौशल विकास के काम हैं उन पर भी ध्यान दिया जा रहा है. वे कौन-से कौशल हैं, स्कूलों में इसके बारे में समझाया जाएगा, केन्द्र सरकार द्वारा 50 करोड़ युवाओं को वर्ष 2022 तक कौशल विकास में दक्ष बनाया जाएगा. मध्यप्रदेश में 50000 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, 25000 महिलाओं के लिए कौशल रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है. कौशल विकास में पीआईयू के माध्यम से 665 करोड़ रुपए की लागत से 163 भवन निर्माणधीन हैं. लगभग 60 कार्य मध्यप्रदेश में पूर्ण हो चुके हैं. जो आईटीआई भवन, छात्रावास हैं वे कौशल विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, उन्हें पीआईयू के माध्यम से पूर्ण किया जा रहा है.

हमारे देश के प्रधानमंत्री जी ने तकनीकी शिक्षा के माध्यम से युवाओं को जोड़ने का काम किया है. तकनीकी शिक्षा के माध्यम से आईटीआई, बालिका छात्रावास का निर्माण भी मध्यप्रदेश में तीव्र गति से हो रहा है. स्कूल विभाग में 101 मॉडल स्कूल भवन निर्माणाधीन हैं. जो पीआईयू के अंडर में हैं. मेरे नीमच जिले में भी एक मॉडल स्कूल बना है, वह सर्वसुविधायुक्त एवं गुणवत्ता से बना है. मैं इसके लिए माननीय मंत्री जी को बधाई देता हूं और शुभकामनाएं देता हूं.

उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी आज पूरे प्रदेश में लगातार विकास कर रहे हैं, उस विकास को कहीं भी नकारा नहीं जा सकता है. मेरी विधान सभा के लिए भी मैंने कुछ मांग की है. मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के माध्यम से नीमच मनासा का 64 करोड़ 55 लाख रुपए का सीमेंट-कांक्रीट रोड दिया है. मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि इस प्रकार सड़क हमारे नीमच में मिलने वाली है. कभी आप पधारें. माता भादवा का वहां पर स्थान है. उस भादवा माता के स्थान पर यदि किसी को लकवा मार जाता है तो वहां पर दर्शन के लिे जाते हैं. जब नवरात्रि आती है तो वहां पर हजारों, लाखों की संख्या में नवरात्रि में माता भादवा के स्थान पर पहुंचते हैं. वहां पर लोग नंगे पैर जाते रहे हैं, उनको पहले कंकर लगते थे. मैं और ओम जी, जब विधायक बने थे तो हम भी पैदल गये थे. हमने भी मानता ली थी, इस वजह से हम वर्ष 2004 में विधायक बने थे. वहां लोगों की मनोकामना पूर्ण होती है. जो लोग कंधे पर बैठकर आते हैं, मां की कृपा से वहां से पैदल जाते हैं. उस रोड को बनाने का काम माननीय श्री सरताज सिंह जी ने किया है. मैं उन्हें बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं. एक ऐसी गुणवत्ता की सड़क, सीमेंट-कांक्रीट वाली सड़क, जिसमें बड़े-बड़े सरिए लगकर मनासा से नीमच तक वह बन रही है. मैं आपसे निवेदन करूंगा कि उसमें कुछ पैसा बचा है तो मैसिव पर्क्युशन से बस स्टेण्ड तक करने की कृपा करें. यह मेरे क्षेत्र की मांग है. एक हिंगोरिया से नीमच छोटी सादड़ी मार्ग, जो जैसनपुरा होते हुए बायपास जाता है, जो 9 कि.मी. लगभग है, जो 17 करोड़ 55 लाख रुपए का है, उसको भी प्रोजेक्ट में लेना का काम करें. झीरनग्वाल तालाब जो केवल 3 कि.मी. की है. माननीय शिवाजी ने भी उसका प्रस्ताव दिया था, उसको भी जोड़ने की कृपा करें. हरनियाबुराना और झीरन, यह एक छोटा सा टुकड़ा है. आपने मेरे यहां पर बहुत कुछ दिया है. अभी आपने भवरासा की सड़क दी है. हमारे यहां धंदेरिया की सड़क दी है, जावी की सड़क दी है. इसके लिए तो मैं धन्यवाद ही देता हूं. परन्तु यह जो छोटी सी सड़क है. इन सड़कों को भी आप लेने का काम करें. नीमच से नसीराबाद, जो हमारा जिला स्थान है, जहां से माननीय श्री सुन्दरलाल पटवा जी मुख्यमंत्री रहे हैं, माननीय श्री वीरेन्द्र कुमार सखलेचा जी रहे हैं, डॉ. पाण्डेय हमारे क्षेत्र में रहे हैं तो यह जिला स्थान होने की वजह से नीमच में जाने वाली जिले की सड़क बहुत ही दयनीय स्थिति में है तो उसे आप फोर लेन करने की कृपा करें. जो नीमच जिला है, उसको उत्कृष्ट नगर में लिया गया है, उसमें भी आपका अच्छा योगदान रहेगा.

उपाध्यक्ष महोदय, बोरखेड़ी में आपने एक सेतु विकास निगम का अच्छा पुल दिया है. उसका निर्माण कार्य हो गया है. मैं आपसे निवेदन करूंगा कि आप आकर उसका उद्गाटन करें. एक स्पेक्ट्रा पेट्रोल पंप और ग्वारटोली के यहां एक सेतु विकास निगम की पुलिया का आवेदन दिया है, उसको भी स्वीकृत करने की कृपा करें. साथ ही निवेदन है कि भड़कसनावदा पर एक लम्बे समय से सेतु विकास निगम की पुलिया बनी हुई है, यदि उसमें कोई शासकीय बाधा नहीं हो तो जिलाधीश महोदय, हम लोग मिलकर उसको सहयोग करेंगे और वह काम यदि आप पूरा कर देंगे क्योंकि वहां भड़कसनावदा में आदिवासी लोग निवास करते हैं, वहां ठेकेदार इस काम को छोड़कर चला गया है. इसका आप परीक्षण कराकर इस काम को भी पूरा करने की कृपा करेंगे. नीमच में माननीय आडवाणी जी, मुख्यमंत्री जी सभी लोग आते हैं. वहां पर एक सर्किट हाऊस की कमी है या तो वहां पर आप डाक बंगले का उन्नयन करें, या नीमच जिले में सर्किट हाऊस देने का भी काम करें. लोक निर्माण विभाग के द्वारा जो सड़कों के निर्माण कार्य किये जा रहे हैं उनमें बहुत गुणवत्ता है. पीआईयू के माध्यम से नीमच में एक ट्रामा सेंटर का काम भी लगातार बढ़ रहा है. इस अवसर पर अधिक कुछ बोलने की आवश्यकता नहीं है. माननीय मंत्री जी आप प्रदेश में पद बनाने का काम कर रहे हैं, मैं अक्सर कहता हूं कि -

'कोई चलता पद चिह्नों पर,

कोई पद चिह्न बनाता है,

हे वही सूरमा इस जग में,

जो अपनी राह बनाता है.'

माननीय श्री सरताज सिंह जी, वही सूरमा हैं जो अपनी राह प्रशस्त करके इस विभाग को उन्नति के शिखर पर पहुंचा रहे हैं. उपाध्यक्ष महोदय, आपने बोलने का अवसर दिया है, इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद. माननीय मंत्री जी हमारी मांगों पर गौर करेंगे और निश्चित ही करेंगे क्योंकि - 'सवा लाख से एक लड़ाऊं तो गुरू गोविन्द सिंह कहलाऊं.'उस पथ पर चलने वाले माननीय मंत्री जी हैं और जहां सरदार है, वहां सरकार है. पुनः उपाध्यक्ष महोदय आपको बहुत-बहुत धन्यवाद. भारत माता की जाय.

श्री प्रताप सिंह ( जबेरा ) -- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र की ही कुछ सड़कों की ओर ध्यानाकर्षित करवाना चाहता हूं. हमारे यहां पर नौहटा से जुझार घाट रोड करीब 60 वर्ष से लंबित पड़ा हैं उसमें टायरिंग नहीं हुई है. मैं चाहूंगा कि करीब 20 किलोमीटर की सड़क है उ सका उन्नयन एवं डामरीकरण का काम कराया जाय. इसी प्रकार से तारादेही मार्ग से महाराजपुर जो कि नरसिंहपुर जिले को भी जोड़ता है. इस सड़क का भी उन्नयन कराया जाय. तेजगढ़पुरा रोड के करीब 6 किलोमीटर रिन्यूइंग करवाया जाय, इ सी प्रकार से कंसा रिचकूड़ी रोड़ जिसका 4 किलोमीटर का रोड़ शेष बचा है उ सको भी इस वित्तीय बजट में ले लें. जबेरा से करनपुरा मार्ग के करीब एक किलोमीटर जो सिद्ध क्षेत्र जोगनकुंड है उसको भी इस बजट में ले लें. साथ ही सेतू निगम से भी हमारे यहां के कुछ पुलों के प्रस्ताव भेजे गये हैं लेकिन वह आज तक मंजूर नहीं हुए हैं. मैं तेजगढ़ की गुरइया नदी पर नवीन पुल रोजाघाट पर पुल निर्माण, खर्रा घाट की ब्यावरा नदी पर पुल निर्माण, घुनगी नाले पर पुल निर्माण, महादेव घाट पर पुल निर्माण के लिए मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करूंगा. यदि इसी वित्तीय वर्ष में ले लेंगे तो पचासों गांव इस रोड से जुड़ जायेंगे और जो 4 माह का आवागमन बंद रहता है वह भी सुचारू रूप से होगा. उपाध्यक्ष महोदय आपने बोलने का समय दिया धन्यवाद्.

श्री के के श्रीवास्तव ( टीकमगढ़ ) -- उपाध्यक्ष महोदय मैं मांग संख्या 24 और 67 का समर्थन करता हूं. सड़क बिजली पानी शिक्षा स्कूल स्वास्थ्य यह ऐसी मूलभूत सुविधाएं है जिनकी उपलब्धता कराना किसी भी कल्याणकारी सरकार की पहली जिम्मेदारी होती है. मैं दावे के साथ में कहता हूं कि भाजपा की शिवराज सिंह जी सरकार ने इन सुविधाओं का न केवल विस्तार किया है, बल्कि पिछले 50 - 60 सालों के रिकार्ड को भी ध्वस्त किया है.

उपाध्यक्ष महोदय अभी सदन में डॉ गोविन्द सिंह जी वरिष्ठ सदस्य हैं वह स्वीकार कर रहे थे कि विभाग में ईमानदार अधिकारी हैं. यह परिणाम हैं मध्यप्रदेश की सरकार की नीयत के कारण, यह कारण है कि मध्यप्रदेश के सभी विभाग में इस त रह के अधिकारी काम कर रहे हैं. उसका परिणाम है कि हम आज मध्यप्रदेश को अच्छी सड़कों के रूप में दे पाये हैं. 10 वर्षों में एक लाख किलोमीटर सड़कों का निर्माण कर पाये हैं 19000 किलोमीटर जिला मार्ग हैं उनका भी सुदृढीकरण कराया जा रहा है. एक ऐतिहासिक निर्णय प्रदेश की सरकार ने और केन्द्र की सरकार ने किया है कि जहां पर सड़क और रेल्वे की क्रासिंग है वहां पर रोड ओव्हर ब्रिज और अण्डर ब्रिज का निर्माण भी कराया जा रहा है. वृहद पुल पुलियों के कार्य निर्माणाधीन हैं.

शासन ने पारदर्शिता लाने के लिए ई पेमेण्ट ई रजिस्ट्रेशन का भी काम आन लाइन किया गया है. गुणवत्ता नियंत्रण कैसे ठीक रहे इस दृष्टि से 13 मण्डल स्तरीय प्रयोगशालाएं मध्यप्रदेश में प्रारम्भ की गई है उनकी यहां पर स्थापना की गई है. समस्त मार्गों का उन्नयन किया जा रहा है. राज मार्गों को राष्ट्रीय राजमार्ग में और मुख्य जिला मार्गों को राज मार्ग में ग्रामीण मार्ग को मुख्य जिला मार्ग में परिवर्तित करने की कार्यवाही की जा रही है.

उपाध्यक्ष महोदय मैं कुछ बातें सुझाव के रूप में भी मंत्री जी को आपके माध्यम से कहना चाहता हूं. एमडीआर और एमपीआरडीसी में जो सड़कों के पैकेज सिस्टम के माध्यम से हम टेण्डर कर रहे हैं. उसमें प्रदेश के जो ठेकेदार हैं वह इसमें सम्मिलित नहीं हो पारहे हैं बाहर के बहुत से ठेकेदार इसमें सम्मिलित होकर काम करने के लिए आ गई हैं जैसे गुजरात, राजस्थान हरियाणा आदि जगह से. हमारे मध्यप्रदेश के ठेकेदारों को काम मिल सके इसलिए सड़कों के पैकेज सिस्टम से नहीं बल्कि सड़कवाइड जैसे अलग अलग सड़कें है तो उनका बड़ा पैकेज बना देंगे तो उसमें दिक्कत होगी तो इसको ठीक करने की आवश्यकता है.

उपाध्यक्ष महोदय मैं अपने क्षेत्र की कुछ बात माननीय मंत्री जी सेकरना चाहता हूं. हमारे यहां पर टीकमगढ़ में यातायात की बहुत दिक्कत है पूरा ट्रेफिक कण्ट्रोल नहीं हो पा रहा है. शहर में निकलने में दिक्कत होती है एक बायपास मार्ग वैकल्पिक रूप में मात्र 4 - 5 किलोमीटर का है दो टुकड़ों में डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी बस स्टेण्ड से गोंगावीर मंदिर तक का 3 किलोमीटर का एक मार्ग यह है. एक टैगोर हाल से महेन्द्र सागर तालाब होकर के नेता जी सुभाष प्रतिमा तक का डेढ किलोमीटर का यह है. यह सब इसी बजट में किया जाना बहुत आवश्यक है. आये दिन झगड़े की स्थितियां निर्मित हो रहीहै शहर में टैक्सी बड़े वाहन भारी वाहन सब पूरे शहर से ही निकलते हैं. इसलिए बहुत ही अत्यंत ही आवश्यकता है. मैं चाहूंगा किइनको इसी बजट में शामिल कर लिया जाय. पहाड़ीखुर्द से बडौदा घाट तक की एक सड़क है बहुत ही आवश्यक है जो ग्रामीण क्षेत्र से मंडी तक जाने के लिए हमारे लोगों को 14 - 15 किलोमीटर घूमकर जाना होता है. अगर यह सड़क बन जायेगी तो वह केवल 4 किलोमीटर में मंडी तक पहुंच जायेंगे. बड़ा गांव धसान से बुडेरा हेतु एक नवीन मार्ग बनाने की आवश्यकता है चूंकि पुराना मार्ग जो कि अभी है बानसुजारा बांध बन जाने के कारण उसके डूब क्षेत्र में आ गया है इसलिए उसको भी बनाने की जरूरत है. एक हीरा नगर तिबेला से काड़ी व्हाया दुनातरसे होकर मवई टोल बेरियर तक एक सड़क तक उन्नयन करने की भी महती आवश्यकता है. तहसील बड़गांव कीअभी घोषणा हो गई है लेकिन वह अभी अस्तित्व में नहीं आयी है मुझे ऐसा भरोसा है कि शायद एक हफ्ते 10 दिन के अंदर वह तहसील भी काम करना प्रारम्भ कर देगी. इसलिए उस तहसील बड़ागांव में एक रेस्ट हाऊस की भी आवश्यकता है. एक माडूमर से अस्तोन तक के लिए जो रोड़ जाती है वह यूपी तक उसकी सीमा लगती है उधर यूपी ने अपना रोड़ बना दियाहै. लेकिन उसके पहले हमारा रोड वहां तक नहीं बना है इसलिए उसको बनाना भी आवश्यक है तो गुणाभदौरा की सीमा तक अस्तोन होकर माडूमर रोड़ को भी विकसित कर दिया जाय. मैं इतनी ही बात कहकर अपनी बात को समाप्त करता हूं पूर्ण अनुशासित होकर अपना स्थान ग्रहण करता हूं धन्यवाद्.

श्री फुन्देलाल सिंह मार्को ( पुष्पराजगढ़ ) -- उपाध्यक्ष महोदय मैंने मंत्री जी से 11-10-2015 के पत्र के माध्यम से भी अपने पुष्पराजगढ़ विधान सभा के कुछ मुख्य मार्गों के संबंध में जिनके डीपीआर तैयार हो गये हैं वह अभी विभाग के पास में लंबित हैं उन मार्गों के बारे में ही मैं निवेदन करना चाहूंगा कि कृपया इस वित्तीयवर्ष में जोड़कर उनका निर्माण कार्य प्रारम्भ करेंगे तो बड़ी कृपा होगी. नोनघटी से दमेहड़ी मार्ग, बम्हनी से केशवानी , बीजापुरी से नगमला , अमगवां से भेजरी, अहिरगवा से केलमनिया, देवरा से मौहारी, अतरिया से करनपठार, कपिलधारा पहुंच मार्ग,कोयलारी से खजुरवार, कोहका से गर्जनबीजा, बेलडोगरी से जटंगा, औरगिरारी से थमरदर इनके डीपीआर तैयार कर विभाग को भेजे जा चुके हैं. इसी तरह से पुष्पराजगढ़ विधान सभा के मुख्य जिला मार्गों के नवीन प्रस्ताव इस प्रकार से हैं- जिनमें निर्माण काम कराया जाना आवश्यक है. पोंडी से करगरा, पटना करपा, करई केलमनिया मार्ग, राजेन्द्रग्राम करौंदी बिजौरी मार्ग, दमेहड़ी से लीलाटोला मेंढाखार मार्ग, सल्हरों पहुंच मार्ग, कौरेला से पोंडी बेकंटनगर मार्ग, अमगवां से पोंडी मार्ग, राजेन्द्र ग्राम से जैतहरी मार्ग, सोनियामार से नौगवां पहुंच मार्ग, बैकट नगर से खैरी पहुंच मार्ग कराया जाना अति आवश्यक है.

उपाध्यक्ष महोदय जोअपूर्ण कार्य वाले मार्ग हैं जो कि अधूरे पडे हुए हैं लेकिन अभी तक उनमें कोई काम नहीं हुआ है उनके बारे में कहना चाहता हूं कि माननीय मंत्री जी अपने स्तर से कार्यवाही कराने की कृपा करें. खाटी से बेलगवा मार्ग स्वीकृत वर्ष 16-2-2010, राजेन्द्र ग्राम से घोघरी मार्ग वर्ष 2012, अमगवा से पोड़ी मार्ग स्वीकृत वर्ष 2011 यह आज तक अपूर्ण हैं कृपया इनको पूर्ण कराने की कृपा करें. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत लंबित कार्य हैं. कोडार सरफा अमोदामार्ग, पडमनिया से गिजरी मार्ग जो कि 2009-10 से अपूर्ण हैं. लोक निर्माण विभाग में जो भी निर्माण कार्य अपूर्ण हैं उऩके संबंध में निवेदन करना चाहूंगा दमेहड़ी में हाई स्कूल के भवन का अपूर्ण कार्य पूर्ण करावें, अमगवां में हाई स्कूल एवं गिरारी में उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का अपूर्ण कार्य है इनको पूर्ण कराया जाय. इसी तरह से पुल पुलियों की बात है संचरा छट्टन टोला से दमहडी मार्ग में रपटा कम स्टाप डेम का निर्माण, भिमकुण्डी से भिमकुंडीखुर्द मार्ग पर नर्मदा नदी पर रपटा कम स्टाप डेम का निर्माण कार्य, सोनिया मार्ग से नवगवा मार्ग पर जोहिला नदी पर रपटा कम स्टाप डेम का निर्माण कार्य, बेहनाडाबर से निगौरा मार्ग पर तिपान नदी पर रपटा कम स्टाप डेम का निर्माण कार्य, ढोढीपानी मार्ग पर कोयलारी नाला में रपटा कम स्टाप डेम का निर्माण कार्य, रनई कापा मार्ग पर रपटा कम स्टाप डेम का निर्माण कार्य, ग्राम वेंकट नगर में लोक निर्माण विभाग का विश्राम गृह बनाया जाय.

उपाध्यक्ष महोदय एक हमारा 11-10-2015 को माननीय मंत्री लोक निर्माण से निवेदन किया था कि राजेन्द्र ग्राम से घोघरी मार्ग की स्वीकृति प्रदान की गई थी वह हमारी विधान सभा का मुख्यमार्ग है 2013 में तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री ने उसका भूमि पूजन भी किया है लेकिन 2016 में भी यह काम पूरा नहीं हो रहा है मेरा निवेदन है कि यह काम तत्काल पूर्ण कराया जाय. उपाध्यक्ष महोदय आपने बोलने के लिए समय दिया धन्यवाद्.


 

श्री गोविंद सिंह पटेल (गाडरवारा) -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं लोक निर्माण कार्य-सड़कें और पुल, लोक निर्माण कार्य-भवन, मांग संख्‍या 24 और 67 का समर्थन करता हूँ. मध्‍यप्रदेश में वर्ष 2003 से वर्ष 2016 में सड़कों के मामले में बहुत परिवर्तन आया है, वैसे हर क्षेत्र में सरकार ने काम किया है लेकिन सड़कों के मामले में एक बहुत बड़ी क्रांति प्रदेश में आई है. इसके लिए मैं प्रदेश के मुख्‍यमंत्री माननीय शिवराज सिंह चौहान जी को और लोक निर्माण मंत्री श्री सरताज सिंह जी को बधाई देना चाहता हूँ. माननीय सरताज सिंह जी हमारे क्षेत्र से 5 साल सांसद भी रहे हैं. वे एक कर्तव्‍यनिष्‍ठ और एक ईमानदार जनप्रतिनिधि माने जाते हैं और इस विभाग में भी वे अच्‍छा कार्य कर रहे हैं. सड़कों की गुणवत्‍ता इस समय जो आ रही है वह बहुत अच्‍छी गुणवत्‍ता आ रही है और ई-टेंडरिंग आदि की व्‍यवस्‍था से भी एक क्रांति आई है.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वर्ष 2003 में मात्र 4-5 हजार किलोमीटर सड़कें थीं आज 1 लाख किलोमीटर से भी ज्‍यादा सड़कें हमारे प्रदेश में बन गई हैं. एक समय था जब मध्‍यप्रदेश में सड़कों की स्‍थिति यह थी कि सड़क है या गड्ढा है लेकिन आज ऐसी स्‍थिति नहीं है. गाडरवारा यहां से 200 किलोमीटर दूर है और पहले हमें भोपाल आने में 6 घंटे लगते थे लेकिन अब 3 घंटे में हम लोग आ जाते हैं. सड़कें भी कई हैं जहां से आना है वहां से आ जाओ, होशंगाबाद से आ जाओ, सीधे रायसेन से आ जाओ, कहीं से भी आ जाओ माने कई जगह सड़कों का निर्माण बहुत अच्‍छे ढंग से मध्‍यप्रदेश की सरकार ने किया है. सरकार का जिलों के लिए फोर लेन सड़कों का एक संकल्‍प है और तहसील के लिए 2 लेन सड़कों के निर्माण का संकल्‍प है तो सड़कों और पुलों के मामले में बड़ी क्रांति आई है. बंटवारा भी विभाग द्वारा कर दिया गया है कि 20 लाख से नीचे की बिल्‍डिंग पीडब्‍ल्‍यूडी बनाएगी और 20 लाख से ऊपर की बिल्‍डिंग पीआईओ बनाएगी. कुछ सड़कों का निर्माण रोड डेव्‍हलपमेंट कार्पोरेशन द्वारा भी किया जा रहा है तो एक अच्‍छी क्रांति सड़कों के मामले में आई है. मेरे क्षेत्र में एक आईटीआई का भवन 4 करोड़ रुपये का पीआईओ के द्वारा बनाया गया है और 2-3 भवन छात्रावासों के भी पीआईओ के द्वारा बनाए गए हैं तो यह विभाग अच्‍छी बिल्‍डिंग्‍स बना रहा है.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरे क्षेत्र की कुछ मांगें मैं यहां रखना चाहता हूँ. काम तो बहुत हुआ है लेकिन विकास एक निरंतर प्रक्रिया है और विकास का कभी अंत नहीं होता क्‍योंकि जब विकास होता है तभी लोग विकास की मांग करते हैं. उस जमाने में जब विकास नहीं होता था तो लोग सोचते थे कि सड़क की मांग ही मत करो क्‍योंकि सड़क बनती ही नहीं है तो मांग क्‍यों करो. आज सड़कें बन रही है इसलिए लोगों के मन में आता है कि मांग करो क्‍योंकि हमारी सरकार सड़कें बना रही है.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पिछले समय जब मैं पहली बार विधायक बना तो लोक निर्माण मंत्री माननीय नागेन्‍द्र सिंह जी थे, उन्‍होंने मेरे क्षेत्र में बहुत सड़कें बनवाईं. माननीय सरताज सिंह जी ने भी सड़कें बनवाने का कार्य किया है लेकिन मैं और चाहता हूँ कि कुछ सड़कें बन जाएं क्‍योंकि ''घर के परसैया अंधेरी रात''. वे हमारे क्षेत्र के सांसद भी रहे हैं इसलिए मेरा उन पर ज्‍यादा अधिकार बनता है कि हमारी सड़कें वे बनवाएं. एक बेलखेड़ी से मोहपा सड़क है जिसकी लंबाई 7 किलोमीटर है, एक अमाड़ा से बगलई सड़क है जिसकी लंबाई 12 किलोमीटर है, एक चांदनखेड़ा से प्रेमपुर सड़क है जिसकी लंबाई 7 किलोमीटर है, एक पीपरपानी से टेकापार सड़क है जिसकी लंबाई 5 किलोमीटर है, एक गाडरवारा पिपरिया मार्ग से सहावन सड़क है जिसकी लंबाई 4 किलोमीटर है और झांझनखेड़ा से पचामा सड़क है जिसकी लंबाई 8 किलोमीटर है. इसके अलावा हमारे यहां कल्‍याणपुर-रायुपर के बीच में एक पुल बन गया है जो कि बहुत अच्‍छा बना है इसकी घोषणा माननीय मुख्‍यमंत्री ने वर्ष 2007 में की थी, यह पुल तो बन गया है लेकिन उसमें दोनों तरफ एप्रोच सड़क, कल्‍याण की तरफ 4 किलोमीटर और रायपुर की तरफ 3 किलोमीटर सड़क नहीं बनी है इसलिए वह पुल फिलहाल औचित्‍यहीन है यदि ये दोनों सड़कें बना दी जाएं तो पुल का औचित्‍य सिद्ध हो सकेगा.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हमारे यहां चींचली में एनटीपीसी का एक पॉवर प्रोजेक्‍ट लग रहा है 1600 मेगावाट का इसलिए वह एक औद्योगिक क्षेत्र बन रहा है और चींचली नगर पंचायत है साथ ही ब्‍लॉक हेडर्क्‍वाटर भी है और वहां अभी 20 किलोमीटर सड़क एनटीपीसी के सहयोग से बन रही है जिसे पीडब्‍ल्‍यूडी बना रहा है तो मैं चाहता हूँ कि चींचली में एक रेस्‍ट-हाऊस बन जाए क्‍योंकि वहां ज्‍यादा लोगों का आना-जाना है. इसलिए चींचली में रेस्‍ट-हाऊस की मैं मांग करता हूँ. इसके अलावा जबलपुर-इटारसी के बीच में गाडरवारा में जो रेलवे क्रासिंग है वहां से एनटीपीसी के हजार, दो हजार वाहन रोज निकलते हैं तो मेरी मांग है कि वहां यदि ओव्‍हरब्रिज बन जाए तो लोगों को वहां पर घंटों इंतजार नहीं करना पड़ेगा और ट्रैफिक जाम की स्‍थिति भी निर्मित नहीं होगी.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक बारहावड़ा सूखाखेरी का रोड जो आरडीसी से स्‍वीकृत हो गया है यह 25 किलोमीटर का है सालेचोका तिगड्डा से सालेचोका बारहे और सूखाखेरी, उसका जल्‍दी निर्माण कराया जाए क्‍योंकि पुरानी सड़क पीडब्‍ल्‍यूडी की है लेकिन अब आरडीसी में जाने के कारण उसमें पीडब्‍ल्‍यूडी विभाग ने मरम्‍मत करना बंद कर दिया है. यदि वह सड़क जल्‍दी आरडीसी से बन जाए तो लोगों को दिक्‍कत नहीं होगी. इसके अलावा हमारे यहां पर एक पुल की आवश्‍यकता है जो साईंखेड़ा और बनखेड़ी को जोड़ सके, मोआर और मरधा के बीच दूधी नदी पर यदि वह पुल बन जाए तो होशंगाबाद नरसिंहपुर जिले का एक ज्‍वॉइंट वहां से हो जाएगा. दूसरी बात यह है कि हमारे यहां उदयपुरा और साईंखेड़ा के बीच नर्मदा नदी पर पुल बन गया है और अच्‍छी सड़क बन गई है वहां से वाहनों का बहुत आवागमन होता है क्‍योंकि सीधी एप्रोच वहां से हो गई है तो साईंखेड़ा में एक रेस्‍ट-हाऊस बन जाए, यह मैं मंत्री जी से निवेदन करता हूँ. आप मेरी इन मांगों पर ध्‍यान देते हुए इन कार्यों को करवाएं. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का समय दिया इसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

श्री अजय सिंह (चुरहट) -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मांग संख्‍या 24 और 67 का विरोध करता हूँ और माननीय मंत्री महोदय को आपके माध्‍यम से कुछ सुझाव देना चाहता हूँ. अभी माननीय पटेल जी कह रहे थे कि पहले सड़कों का पता ही नहीं था कि सड़क है या क्‍या है लेकिन रीवा संभाग की यदि मैं बात करूँ, जहां से मैं आता हूँ और उपाध्‍यक्ष महोदय आप भी आते हैं तो आज भी सड़कों की स्‍थिति बहुत खराब है. हमारी औद्योगिक क्षेत्र राजधानी सतना है. सतना से रीवा जाने के लिए आपके क्षेत्र होकर लोग रीवा जाते हैं. रीवा से यदि बनारस या इलाहाबाद कोई जाना चाहे तो 13 साल हो गए अभी भी स्‍थिति खराब है.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता -- अजय भैया, कोई ग्रह दिखवाओ, पता नहीं वह सड़क क्‍यों नहीं बन रही है जबकि प्रदेश की बाकी सड़कें बन रही हैं.

श्री अजय सिंह -- माननीय शिवराज सिंह चौहान जी की रीवा पर कृपा नहीं हो रही है यह ग्रह खराब है. तन डोले, मन डोले लेकिन शिव नहीं बोले, रीवा संभाग की हालत यह है. आप एनटीपीसी की एक फैक्‍टरी की बात कर रहे थे जबकि एनटीपीसी के 4-4 प्‍लांट सिंगरौली में हैं, यह हिंदुस्‍तान की ऊर्जा की राजधानी मानी जाती है लेकिन सीधी से सिंगरौली, जहां 13 साल पहले हम 3 घंटे में जाया करते थे आज 6 घंटे लगते हैं.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पूरे रीवा संभाग की सड़कों की हालत खराब है. चाहे बमीठा की सड़क देख लीजिए, बमीठा से सतना, सतना से रीवा, बेला ये यूपी बॉर्डर, मऊगंज बॉर्डर, ये कोई सी सड़क आज तक नहीं बन पाई है. माननीय मंत्री महोदय की गोविंद सिंह जी बहुत तारीफ कर रहे थे, प्रमुख सचिव की भी तारीख कर रहे थे, मैं आपके माध्‍यम से इन दोनों महानुभावों से आग्रह करना चाहता हूँ कि ग्रह जैसा कि उमाशंकर गुप्‍ता जी ने कहा है कुछ हम लोगों का भी ग्रह, आपका भी ग्रह कुछ ठीक हो कि हम लोगों के संभाग में कुछ सड़कें जल्‍दी से जल्‍दी बन जाएं. धन्‍यवाद.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- उमाशंकर जी के ग्रह तो अच्‍छे हैं, इनके भोपाल में चमचमाती रोडें हैं.

श्री मुकेश नायक -- ये तो भाग्‍य के भरोसे चल रहे हैं दो कौड़ी का काम नहीं करते हैं.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, काम मैं दो कौड़ी के नहीं करता, मैं काम के काम करता हूँ, मैं अच्‍छे काम करता हूँ.

डॉ. गोविंद सिंह -- लेकिन हायर एजुकेशन को तो भट्टा बैठाल दिया.

श्रीमती शीला त्यागी(मनगवां)-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं लोक निर्माण मंत्री जी का ध्यान आकर्षित कराना चाहती हूँ कि आपके विभाग में जो सड़कें, पुल, भवन निर्माण के जो कार्य चल रहे हैं उन कार्यों में गति जरुर आयी है लेकिन वह कार्य जितने भी हैं गुणवत्ताविहीन हैं और उनका रख-रखाव भी सही नहीं है. जितने राष्ट्रीय राजमार्ग के कार्य हैं वह भी धीमी गति से चल रहे हैं उदाहरण के लिए रीवा नेशनल हाई वे नम्बर 7 और 27..

1.11 बजे अध्यक्षीय घोषणा

माननीय सदस्यों के लिए भोजन विषयक

उपाध्यक्ष महोदय-- शीला जी एक मिनट. माननीय सदस्यों के लिए भोजन की व्यवस्था सदन की लॉबी में की गयी है. माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि सुविधानुसार भोजन ग्रहण करने का कष्ट करें.

वर्ष 2016-2017 की अनुदानों की मांगों पर मतदान (क्रमश:)

श्रीमती शीला त्यागी-- माननीय उपाध्यक्ष जी, जैसा कि मैं कह रही थी कि माननीय लोक निर्माण मंत्री जी के कार्यकाल में कामों में गति तो आयी है लेकिन गुणवत्ताविहीन हैं चाहे वह भवन हो, चाहे पुल हों. चाहे सड़कें हों, सडकों का तो यह हाल है कि बनने से पहले ही उखड़ जाती हैं.साथ ही साथ जो लोक प्रबंधन अधिनियम, सर्विस अधिनियम है उसके तहत् भी आपके विभाग में पर्याप्त भ्रष्टाचार है उसकी शिकायत भी गयी. जीएडी ने दो कर्मचारियों को शोकाज नोटिस दिया, रिवर्ट कर दिया गया और फिर जीएडी ने जब उनको सही साबित किया तो उनको पदोन्नति देना चाहिए थी लेकिन पदोन्नति नहीं दी गयी. इसलिए आपसे गुजारिश है कि आप इधर ध्यान दें. साथ ही साथ मैं यह भी बताना चाहती हूँ कि लोक निर्माण विभाग के द्वारा जो एसटी, एससी मद होता है 6442, उसके अंतर्गत जितनी एसटी, एससी की जो बस्तियां होती हैं, नाली निर्माण के लिए, सड़क के लिए और मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिये विभाग ने बहुत अच्छा खास बजट दिया लेकिन सबसे ज्यादा अगर कहीं भ्रष्टाचार है पीडब्लयूडी के क्षेत्र में, इस आदिम जाति, अनुसूचित जाति जो एक शाखा है उसके तहत् जो कार्य किये जाते हैं वह सिर्फ पन्नों में हैं इसकी भी आप उच्च स्तरीय जांच करवा के भ्रष्टाचार से मुक्त करें. माननीय मंत्री जी से यह भी गुजारिश करती हूँ कि मनगवां विधानसभा को आपने 11 सड़कें दीं उसके लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद देती हूँ लेकिन कुछ ऐसी सड़कें हैं जो बनने से पहले उखड़ रही हैं.आपने देवास से फूलबाला मार्ग स्टार्ट किया था अभी,आप गये थे, मैं भी आपके साथ वहां थीं उससे हमारे क्षेत्र के कम से कम 150 गांवों को आपने गति प्रदान कर दी उनको सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक रुप से सुदृढ़ बनाया उसके लिए भी मैं आपको धन्यवाद देती हूँ लेकिन काम भी बहुत धीमी गति से चल रहा है. साथ ही साथ मेरे मनगवां विधानसभा की जो सड़कें हैं जैसे बेलवापाईकान से कठेरी होते हुए जो सलईया तक जाती है बहुत जर्जर है, उस पर चलना मुश्किल हो रहा है. मैंने आपसे पत्राचार भी किया था लेकिन अभी उसमें ध्यान नहीं दिया गया है. मैं चाहती हूँ कि उसे आप जल्दी से जल्दी बजट में जोड़ेगे. साथ ही साथ पड़वा से जो पहुंच मार्ग है उसमें एक नाला है जो बरसात के समय में डूब जाता है और कम से कम 60-70 गांवों का आवागमन रुक जाता है. कोई बीमार हो जाए, महिला जो डिलेवारी वाली रहती हैं उनको बहुत परेशानी होती है इसलिए िस पुल को भी ऊंचा किया जाये या नया पुल बनाया जाए. साथ ही साथ कन्हीला, धवैय्या, मड़ीकटेरी, आलमगंज के बीच भी जो रपटा बना है वह भी बरसात में डूब जाता है, कम से कम 60-70 साल पुराना है उसको भी पुल बनाया जाए. देवास से गंगेउ रोड भी बहुत जर्जर है , बनवाने का कष्ट करें. ग्राम पंचायत हकरिया में आंगनवाड़ी भवन नहीं है, गंगेउ जनपद में विश्रामगृह बनाने के लिए मैंने पत्राचार किया था, वहां विश्रामगृह बनवाया जाए और एक सबसे बड़ी मांग, आपने मनगवां मुख्यालय पर एक अनुविभागीय कार्यालय तो खोल दिया लेकिन अपने कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था नहीं की और नगर पंचायत के भवन पर उसके कर्मचारी कब्जा किये हुए हैं, आप अतिशीघ्र अपने अधिकारियों और कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था करें.उपाध्यक्ष महोदय, आपने मुझे अपनी बात रखने का मौका दिया, उसके लिए धन्यवाद.

श्री रामेश्वर शर्मा(हुजूर)-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मेरा यह आग्रह है कि जिस तरह सड़कों के बारे में कह रहे हैं. अभी माननीय सरताजसिंह जी ने और माननीय पी.एस.अग्रवाल साहब ने तारीफ करुंगा मैं कि अभी जितनी भी सड़कों की स्वीकृति दी है, कम से कम 5 साल और अधिक से अधिक 40 साल तक वह सड़कें चलेंगी.ऐसा मध्यप्रदेश के पीडब्ल्यूडी के इतिहास में पहली बार हो रहा है और इस बात के लिए पूरी सरकार बधाई की पात्र है. हमारे मंत्री बधाई के पात्र हैं, हमारे पी.एस. भी बधाई के पात्र हैं.

डॉ. गोविन्द सिंह-- 40 हजार करोड पहले खा गये, वे कहां गये? 12 बरस से

श्री रामेश्वर शर्मा-- यह आप हिसाब जानों, अभी तारीफ कर रहे थे. जब हमारे पी.एस. आनेस्ट हैं तो खा कैसे सकते हैं. आज भी कितने अधिकारियों पर जांच हो रही है, पहले इतने अधिकारियों पर कभी जांच हुई है? आज भी उन अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की गयी है, आज भी उनको सस्पेंड किया गया है. (व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय-- आपके दल की तरफ से आपका नाम नहीं आया है.अगर आपको बोलना है तो पर्ची भिजवा दें.

श्री रामेश्वर शर्मा-- उपाध्यक्ष महोदय, मैं तो अनुमति ले के बोल रहा था.आपने अनुमति दे दी है. (व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय-- इन्टरवेन्शन 5-10 सेकण्ड का होता है, आप तो भाषण दे रहे हो,आप बैठ जाओ. डॉ. मोहन यादव

श्रीमती शीला त्यागी-- माननीय उपाध्यक्ष जी, ठैरा से लेकर गंगेउ तक की जो रोड बनी है, बन भी रही है और उखड़ती जा रही है. माननीय शर्मा जी, आप अपनी सरकार की तारीफ करें, गुणगान करें, यह सच है लेकिन हम अपने रीवा जिले की बात कह रहे हैं हमारे यहां की जो सड़कें बनी हैं गुणवत्ताविहीन हैं इसकी जांच माननीय मंत्री जी करवा लें.

उपाध्यक्ष महोदय-- शीला जी, आप बैठ जाएं. आप आसंदी का हमेशा सम्मान करती हैं.

इंजी.प्रदीप लारिया-- बहन जी के यहां 11 सड़कें स्वीकृत हुई हैं, इनको तो सरकार की तारीफ करना चाहिए.

श्रीमती शीला त्यागी-- इसलिए मैं कहना चाहती हूँ शर्मा जी, आपकी सरकार है, लेकिन हमारे मनगवां विधानसभा की जो सड़कें बनी हैं सब गुणवत्ताविहीन हैं, बनते बनते उखड़ रही हैं. मैं मंत्री जी से चाहती हूँ कि उनकी गुणवत्ता की जांच करवा ली जाए.

उपाध्यक्ष महोदय-- यह गलत बात है. आप बैठ जाएं, आप अपनी बात कह चुकी हैं,सारी समस्याएँ, सब कुछ आ चुका है.

श्री रामेश्वर शर्मा-- लेकिन दीदी अब जो सड़के बनेंगी वे 5 साल के लिए बनेंगी.अगर विधायक 5 साल के लिए चुना जाता है, सांसद 5 साल के लिए, सरपंच 5 साल के लिए तो सड़कें भी 5 साल के लिए बनेंगी, यह पहली बार हो रहा है.

श्रीमती शीला त्यागी-- 5 साल की तो बात ही अलग है, हमारे यहां तो एक साल के अन्दर ही उखड़ गयीं.

श्री रामेश्वर शर्मा-- यह पहली बार हो रहा है या तो श्रीमान अटलविहारी वाजपेयी जी के किया था या श्रीमान शिवराज सिंह चौहान ने वह पालिसी लागू की.

उपाध्यक्ष महोदय-- शर्मा जी, आप जाकर भोजन कर आयें(हंसी) आप भोजन के लिए नहीं गये.शीला जी आज आपको क्या हो गया.

श्रीमती शीला त्यागी-- उपाध्यक्ष महोदय, धन्यवाद.

डॉ. मोहन यादव(उज्जैन-दक्षिण)-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से लोक निर्माण विभाग, उनके मंत्री माननीय सरताजसिंह जी, पीएस, ईएनसी खासतौर से मैं धन्यवाद इस नाते से देना चाहता हूँ, सिंहस्थ 2016 विक्रम संवत् 2073 के परिप्रेक्ष्य में माननीय यशस्वी मुख्यमंत्री ने जो बात कही थी यद्यपि समय सीमा कम होने के बावजूद भी मैं अपनी बात थोड़ी सी आपसे गुंजाइश चाहूंगा कि वाकई में एक 5 लाख की छोटी सी आबादी वाला शहर जिसमें 100 गुना ज्यादा दर्शनार्थी श्रृद्धालु आने वाले हैं, 5 से 6 करोड़ जब लोग आने वाले हों ऐसे शहर में एक चुनौती के रुप में विभाग सामने आता है और आज आप जाकर के देख सकते हैं किउज्जैन में मुझे लगता है कि उज्जैन न केवल मध्यप्रदेश बल्कि देश नहीं, दुनिया में भी कोई ऐसा शहर नहीं होगा जो डेढ़ साल से कम समय में 14 पुल अपने उस शहर में बनवा ले. 230 करोड़ के काम और खासतौर से 14 ब्रिज और 14 ही ब्रिज बनकर के तैयार है, उनका आधे से ज्यादा का लोकार्पण मुख्यमंत्री जी इस महीने कर चुके हैं और 15 से 20 तारीख के बीच में उनको दुबारा हम बुलाने वाले हैं. लगभग सिंहस्थ ज्ञात इतिहास में 300 साल में एकमात्र ऐसा सिंहस्थ भरने वाला है जहां पूरा शहर एक नयी दिशा में सिंहस्थ बाईपास के माध्यम से लगने वाला है जहां पर लगभग 5 हजार हेक्टेयर भूमि अब नये बाईपास का लाभ लेकर के आने वाले 20 सिंहस्थ तक की पूरी व्यवस्था हमारे लोक निर्माण विभाग के माध्यम से कर दी गयी है. इतना ही नहीं जो जो आवश्यक निर्माण के लिए बिल्डिंगों की आवश्यकता थी वह सारी की सारी गुणवत्तापूर्ण बिल्डिंग, मुख्य मार्ग, रेलवे ओवरब्रिज क्योंकि सेन्ट्रल गवर्नमेंट ने अपना पार्ट भी स्टेट गवर्नमेंट को दे दिया कि रेलवे का वह ब्रिज भी आपको ही बनाना है और मुझे इस बात की खुशी है कि हमारे चारों रेलवे ओवरब्रिज उसी स्थिति में आ गये जब अपना पूरा ट्रेफिक निकलकर सरलता से आ जा सकेगा. मैं और दो तीन कारणों से लोक निर्माण विभाग को धन्यवाद देना चाहूंगा कि जितना समय मिला था , उतने कम समय में भी, जो कांग्रेस के कार्यकाल में एक हमारा गिरौता से खेमासा तक की सड़क का एक ब्रिज गंभीर नदी पर बना हुआ पड़ा था उस बीस साल पुराने ब्रिज को भी वर्तमान में 13 करोड़ की लागत से स्वयं सरताज सिंह जी ने अपने कर कमलों से उसका भूमिपूजन करवाकर वह कार्य भी रिकार्ड समय में पूरा करने की स्थिति में बढ़ रहे हैं. मैं उम्मीद करता हूं कि जिस प्रकार से गुणवत्तापूर्ण कार्य हुए हैं,यहाँ तक कि मंत्रीजी ने यह चैलेंज दिया है कि थर्ड पार्टी जांच भी करा ले. क्योंकि आमतौर पर सिंहस्थ में जो पुराने समय के अनुभव थे कि बाद में बहुत सारी शिकायतें आती हैं उन शिकायतों की पूर्व तैयारी करते हुए गुणवत्तापूर्ण काम करने का प्रयास किया गया है , वाकई वह सराहने योग्य हैं. हम उम्मीद करते हैं कि जिस प्रकार से काम हुए हैं, उन सारे कामों के साथ अब हमको लगता है कि हमारे लिए जो मास्टर प्लान 2006 में हमने बनाया था उस मास्टर प्लान के 90 परसेंट से ज्यादा काम पूरे हो गये हैं. हमको लगता है कि उज्जैन के विकास के लिए मास्टर प्लान को रिवाईज करना पड़ेगा क्योंकि उज्जैन का यह जो सिंहस्थ का क्रम है उसमें आमतौर पर पांच छह साल पहले से कार्य होते हैं तो जो हमारा 2028 का सिंहस्थ आने वाला रहेगा अब उस दिशा में हमको सोचने की आवश्यकता है. मैं उम्मीद करता हूं कि जो काम हमारे हुए हैं उन कामों के साथ जो दो तीन चीजें छूटी हैं,उसकी तरफ भी ध्यानाकर्षित कराना चाहूंगा खासकर के हमारे उज्जैन में वीवीआईपी मूवमेंट में नाइट लैंडिंग की हमारी साधिकार समिति से भी मंजूरी थी लेकिन बड़े दुर्भाग्य के साथ कहना पड़ रहा है कि वह हमारा काम अभी हो नहीं पाया है. मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि कुछ भी करके अगर समय मिले तो नाइट लैंडिंग की सुविधा दिला दें क्योंकि अक्सर भस्म आरती में सुबह चार बजे जिनको पहुंचना रहता है वह लेट नाइट भी पहुंच सकेंगे. इसके साथ साथ एमपीआरडीसी की तरफ से जो सर्विस रोड बनाया जा रहा है उस सर्विस रोड की प्लानिंग में थोड़ी गड़बड़ हुई है, कुछ भूमि ली है कुछ छूट गई है तो सर्विस रोड पूरा नहीं बन पा रही है. उपाध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से निवेदन करना चाहूंगा कि जो इन्दौर उज्जैन सर्विस रोड बन रहा है उस पर भी ध्यान देने का कष्ट करें ताकि वह ठीक से बन जाए. शहरों में हमने पूरा ध्यान दिया है पर कुछ गांवों का भी हमारा विधानसभा क्षेत्र है, ग्राम झिरोलिया-फतेहाबाद के पास का हमारा स्थान है, अब तो हमारी फतेहाबाद रेल लाइन भी भारत सरकार ने मंजूर कर दी है और यह सिंहस्थ के लिए अत्यन्त आवश्यक है, हर सिंहस्थ में काम आएगी, इस सड़क को बनाना अत्यन्त आवश्यक है .इसी प्रकार से लालपुर से धतरावदा विक्रमनगर रेल्वे स्टेशन को जोड़ने वाले मार्ग की भी आवश्यकता है इसको भी बनाने का कष्ट करें. ग्राम करोंदिया से निमनवासा यह हमारा पुराना प्राचीन मार्ग था, इसको बनाने की आवश्यकता है. हमारे रेस्ट हाउस में 12 कमरे बने हुए हैं, मंत्री जी व अधिकारियों को भी याद होगा, यह भले सिंहस्थ के बाद हो, लेकिन यह अत्यंत आवश्यक है क्योंकि बाहर से आने वाले लोगों को रुकने की अत्यंत आवश्यकता पड़ती है तो इसमें 6 कमरे और बन जाए. एक ज्यूडीशियरी की दृष्टि से उज्जैन में अलग से ज्यूडीशियरी का रेस्ट हाउस बनाने की आवश्यकता है क्योंकि आमतौर पर ज्यूडीशियरी के पूरे देश के लोग आते हैं, सुप्रीम कोर्ट के जज या हाईकोर्ट के जज आते हैं, तब हमारा रेस्ट हाउस , सर्किट हाउस हमारे हाथ से चला जाता है तो ऐसे में इनके रुकने की अलग से व्यवस्था अलग हो जाएगी तो बाबा महाकाल सहित जो देवदर्शन के लिए लोग आते हैं उनको सबको सुविधा होगी. मैं आपके माध्यम से एक बार फिर उज्जैन के मामले में धन्यवाद देना चाहूंगा जो विभाग ने काम किया, विभाग के अधिकारियों ने काम किया, मंत्री जी ने मानिटरिंग की , इवन हमारे वरिष्ठतम अधिकारियों ने भी छोटे छोटे कामों की मानिटरिंग की है , वह वाकई में सराहनीय है. धन्यवाद.

श्री सचिव यादव (अनुपस्थित)

श्री हरदीप सिंह डंग(सुवासरा)माननीय उपाध्यक्ष महोदय, जो बजट पर चर्चा की जा रही है उसमें मेरे क्षेत्र की जो महत्वपूर्ण मांगें हैं , जो सुवासरा विधानसभा में मांग मेरे द्वारा की गई थी शायद उसको बजट में सम्मिलित नहीं की गई है. यहाँ पर माननीय मंत्री जी बैठे हैं, मेरा उनसे निवेदन है कि क्षेत्र में अगर यह सड़कें मंजूर होती हैं तो क्षेत्र के लिए विकास के रूप में एक अच्छी सौगात मिलेगी . वहाँ पर एक एक किलोमीटर की चार-पांच सड़कें हैं, उनको एफएफसी में भी सम्मिलित कर सकते हैं और दो तीन रोड जो बजट में शामिल करनी हैं उनके भी नाम मैं बताऊँगा. एक दूधिया रोड जो चौमेला से सीतामऊ मार्ग पर है , एक बाकली है जो कियामपुर रोड पर है, एक शक्करखेड़ी है, जो कियामपुर रोड पर है, एक लसूड़िया है, यह चार रोड हैं, मेन रोड से जुड़े हुए हैं,यह एक एक किलोमीटर के रोड हैं,इनको एफएफसीज में भी सम्मिलित किया जाता है तो यह रोड को मंजूरी मिलेगी तो जनता को सुविधायें मिलेंगी. एक शेरगढ़ जो तीन किलोमीटर दूर पड़ता है, उसको बजट में शामिल करें, एक माकड़ीमाता से खेड़ा अजयपुर बनी मार्ग है यह कम से कम 15गांवों को जोड़ता है इसको भी बजट में शामिल किया जाएगा तो यहाँ की जनता को इसका फायदा मिलेगा. एक महत्वपूर्ण बात है, मुख्यमंत्री जी की घोषणा है कि चंबल नदी पर जो पुल बनना है, गरोठ और भानपुरा की दूरी मंदसौर से जो 120 से 150 किलोमीटर पड़ती है अगर पुल का निर्माण सुवासरा विधानसभा में दोई छोर पर एक तो आवरी और एक आवरा के बीच में चंबल नदी पर होता है तो 60-60 किलोमीटर का फायदा होगा और वहाँ पर व्यवसाय भी बढ़ेगा और जनता को सुविधा मिलेगी. एक पुलिया जो देवपुरा नागर और डोकरखेड़ी में रुड़ीजा पंचायत में आने जाने का रास्ता है, हास्पिटल की ,स्कूल की सुविधा रुड़ीजा में है वहाँ पर रोड का निर्माण तो हो गया है पर पुलिया निर्माण नहीं हुई है और बरसात के समय पर किसी महिला के डिलेवरी का टाइम हो तो वहाँ पर घटनायें भी घट चुकी हैं.उसके बारे में कहा जाता है इसको सेतु निगम में दे दिया गया है, कोई कहता है कि लोक निर्माण में दे दिया गया है पर आज तक देवपुरा नागर और रुड़ीजा के बीच में उस पुलिया का निर्माण नहीं हुआ है इसको अगर आप शामिल करेंगे तो जनता को सुविधा मिलेगी. सीतामऊ में एक रेस्ट हाउस की बहुत जरूरत है, उसको भी इस बजट में शामिल करें. मेरा एक निवेदन है कि जो राजस्व ग्राम घोषित किये गये हैं उनमें न तो प्रधानमंत्री में, न मुख्यमंत्री सड़क में, न पीडब्ल्यूडी सड़क में कहीं पर भी रोड नहीं बन पा रहे हैं, यह ग्राम भी मेन सड़क से एक किलोमीटर या आधा किलोमीटर दूर हैं, उनको भी इस बजट में शामिल किया जाये तो मेहरबानी होगी.एक और निवेदन है कि जो विभाग द्वारा रोड बनाये गये हैं, जो बिल्डिंग्स बन चुकी हैं उसको विभाग द्वारा क्योंकि मैं कांग्रेस का विधायक हूं, जब उन निर्माण कार्यों के ओपनिंग की बात होती है, दूसरी विधानसभा में विधायक ओपनिंग करते हैं पर मेरी विधानसभा में जब ओपनिंग की बात आती है तो विभाग द्वारा दूसरी एजेंसी बना दी जाती है तो जो दूसरी विधानसभाओं में विधायक ओपनिंग कर रहे हैं, कम से कम जो नवीन बिल्डिंग बने वह विधायक की उपस्थिति में प्रोटोकाल का उपयोग करते हुए उसमें विधायक को सम्मिलित किया जाये, इस विषय में अभी एक मैंने प्रश्न भी लगाया था उसमें पीडब्ल्यूडी ने साफ मना करा है कि हमने नहीं बुलाया है, यह जानकारी आप देख सकते हैं. एक बसई कशनारा जो रोड अभी बना है , उसके आगे कशनारा से डिगांव तक अगर रोड बनेगा तो बहुत मेहरबानी होगी धन्यवाद.

श्री आर.डी.प्रजापति(चन्दला)-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मेरा क्षेत्र तीनों तरफ से उत्तरप्रदेश से घिरा हुआ क्षेत्र है और छतरपुर से करीब डेढ़ सौ किलोमीटर दूर है इसलिए पूरा का पूरा काम उत्तरप्रदेश से होता है. मेरे यहाँ कुछ रोड और पुलियायें छूट गई हैं जिसके कारण आवागमन पूरी तरह से ठप्प रहता है मैं उनका उल्लेख करना चाहता हूं , मैं केवल अपने क्षेत्र पर ही बोलना चाहता हूं मैं मांग संख्या 24 औऱ 67 के पक्ष में बोल रहा हूं. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, यह रोड हैंकरहरी से दिदवारा 3 किलोमीटर. मुडेरी से अधियारीबारी 3 किलोमीटर. चन्दला से गौहानीबाईबंशिया 20 किलोमीटर यह बहुत जर्जर मार्ग है. पहरा से हनुमानजी के मंदिर के पास उत्तरप्रदेश सीमा तक ढाई किलोमीटर,चंकि उत्तरप्रदेश से सभी रोड बन गये हैं हमारे मध्यप्रदेश के रोड बनना शेष है, इस कारण आवागमन नहीं हो पाता है. बदौराकला से बसराही उत्तरप्रदेश सीमा तक, प्रकाशबम्हौरी से खजुरिहापहरा उत्तरप्रदेश सीमा तक 3 किलोमीटर रोड, प्रकाशबम्हौरी से सरगईयनपुरवा उत्तरप्रदेश सीमा तक 5 किलोमीटर , मुड़हरा से रतौली बार्डर उत्तरप्रदेश सीमा पर डेढ़ किलोमीटर, मनवारा से पहरा 3 किलोमीटर यह सब उत्तर प्रदेश सीमा तक हैं. पलटा से बदौरकला 4 किलोमीटर, मनवारा से मटौध बार्डर 3 किलोमीटर , ठकुर्रा से राजापुर 2 किलोमीटर , नाद से पड़रिया 1 किलोमीटर , पचवरा से महुईकला 2.5 किलोमीटर , खड़ेहा से ओदी 3 किलोमीटर, बसन्तपुर तिराहा से बसन्तपुर तक डेढ़ किलोमीटर, जनकपुर से गुढ़ा खुर्द तक साढ़े तीन किलोमीटर, पंचमपुर से गुमानघाट ढाई किलोमीटर, घटरा से बरहा 3 किलोमीटर..

उपाध्यक्ष महोदय-- अब आप समाप्त करें.

श्री आर डी प्रजापति-- माननीय उपाध्यक्ष जी, अपनी बात ही तो रख रहा हूँ.

उपाध्यक्ष महोदय-- आपकी सूची बहुत लंबी लग रही है. आप माननीय मंत्री जी को दे देना.

श्री आर डी प्रजापति-- बिलहरी से पंचमनगर, 3 किलोमीटर, छठीबम्हौरी से बनजारी मेन रोड तक 6 किलोमीटर, नांद मस्जिद घाट से किशनपुर तक 4 किलोमीटर, किशनपुर से पवईथर व्हाया आलमदेवी 6 किलोमीटर और मेन रोड चन्दला से रजौरा तक. इसी तरह से कुछ पुलिया हैं, अंजनी नाला में पुलिया निर्माण है, चन्दवारा से बदौराकला के बीच में पलटा से बदौराकला के बीच में एक पुलिया का निर्माण है. बदौरा से जोगा में पुलिया का निर्माण और नांद मस्जिद घाट से किशनपुर पर कुशियार नदी में पुलिया का निर्माण, नांद से कीरतपुर कुशियार नदी में पुल निर्माण, जरेहटा से रानीबाग में पुल निर्माण और नेहरा से नेहरी केन नदी पर पुल निर्माण, ये मेरे यहाँ बहुत जरूरी हैं. चूँकि मेरा सबसे दुरस्थ क्षेत्र है.

उपाध्यक्ष महोदय-- मैं आपके क्षेत्र में गया हूँ. ग्राम ठकुरदा में आपके यहाँ गया हूँ.

श्री आर डी प्रजापति-- उत्तर प्रदेश से लगा हुआ है इसलिए ये पुल बनाए जाएँ जिससे आवागमन की समस्या का समाधान हो जाए. दूसरा, मेरा मंत्री से एक और निवेदन है....

उपाध्यक्ष महोदय-- आप तो बहुत सारे निवेदन कर चुके दूसरा कैसे आ गया.

श्री आर डी प्रजापति-- आधा मिनट. मेरे यहाँ छतरपुर में पूरे....

उपाध्यक्ष महोदय-- यह गलत बात है. अब समाप्त करिए. श्री सूबेदार सिंह रजौधा, आप बोलिए. आप भी शताब्दी से जा रहे हैं. दो मिनट बोलें.

श्री आर डी प्रजापति-- उपाध्यक्ष महोदय, मेरे यहाँ छतरपुर में पूरे अधिकारी रहते हैं. मंत्री जी से निवेदन भी किया. वे केवल क्षेत्र में रहें यह जरूर कर दीजिए, यह मेरा निवेदन है, नहीं तो इस तरह से तो मेरे क्षेत्र का विकास नहीं हो सकता है. माननीय उपाध्यक्ष जी, आपने बोलने का मौका दिया इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा(जौरा)-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय....

उपाध्यक्ष महोदय-- आप शताब्दी से पक्का जा रहे हैं?

श्री सूबेदार सिंह रजौधा-- जी हाँ.

उपाध्यक्ष महोदय-- नहीं तो शताब्दी का नाम लेकर लोग लाइन तोड़ देते हैं.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा-- आदरणीय, मैं शताब्दी से जा रहा हूँ. उपाध्यक्ष महोदय, सबसे पहले मैं डॉक्टर गोविन्द सिंह जी को मैं धन्यवाद देता हूँ. उनमें वजन जरूर कम है लेकिन चंबल संभाग में उनकी बात में वजनदारी है यह पूरा चंबल संभाग लोहा मानता है. आज उन्होंने माननीय मंत्री जी की प्रशंसा की और यह भी कहा कि 10 साल तक आप मंत्री रहेंगे, तो इसका मतलब 10 साल तक हमारी सरकार रहेगी और पी एस साहब की उन्होंने प्रशंसा की इसके लिए मैं उनको बहुत बहुत धन्यवाद देता हूँ. उपाध्यक्ष महोदय, वास्तव में मंत्री जी की ईमानदारी, कुशलता, मैं मुरैना जिले में एक रोड के लिए गया था मुरैना जिले की दूसरी जिला रोड ए बी सी केनाल पर है. सबलगढ़ से...

श्री वेलसिंह भूरिया-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय डॉक्टर गोविन्द सिंह जी काँग्रेस से परेशान हो गए. निश्चित ही बहुत जल्दी भाजपा में आने वाले हैं.

उपाध्यक्ष महोदय-- अब आप बैठ जाइये. आप भविष्य वक्ता भी हो गए हैं क्या?

श्री सूबेदार सिंह रजौधा-- उपाध्यक्ष महोदय, मुरैना जिले की एक नई जिला रोड बनाई जा रही है सबलगढ़ से मुरैना ए बी रोड तक उसमें कम से कम 180-90 गाँव उससे जुड़े हुए हैं. मैं केवल उसकी मरम्मत के लिए माननीय मंत्री जी के पास गया था कि मंत्री जी, इस रोड से 150-200 गाँव लाभान्वित होते हैं. इस रोड में बहुत गड्डे हैं. लेकिन माननीय मंत्री जी की उदारता देखिए, उन्होंने कहा कि गड्डे क्यों भरवा रहे हों, इसको नई रोड बनाओ उसके लिए 1 से 5 करोड़ रुपये की स्वीकृति जारी की. इसके लिए मैं माननीय मंत्री जी का बहुत बहुत धन्यवाद करता हूँ, बहुत बहुत आभार व्यक्त करता हूँ. (मेजों की थपथपाहट) आदरणीय सामने बैठे हमारे मित्र 2003 से पहले की जब हम बात करते हैं कि सड़कों में गड्डे थे कि गड्डों में सड़क थी. उनको पता है कि मुरैना से श्योपुर जाने के लिए 3 घंटे एम एस रोड पर लगते थे और उसी रोड से आज डेढ़ घंटे में मुरैना से सबलगढ़ तक जाया जा सकता है. उस पर दो पुलों का एक सिकरोदा पर एक नैपुरी पर पुलों का निर्माण हो रहा है और 156 करोड़ की लागत से वह रोड बन रही है. इसके लिए मैं मंत्री जी का और माननीय मुख्यमंत्री जी का बहुत बहुत धन्यवाद करता हूँ. वास्तव में जिस कुशलता से, जिस ईमानदारी से, पी डब्ल्यू डी में काम चल रहा है हमारे सभी विधायक साथियों ने....

उपाध्यक्ष महोदय-- सूबेदार सिंह जी, अब आप एक मिनट में समाप्त करें.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा-- आदरणीय, हमारे सभी विधायक साथियों ने कहा कि मंत्री जी और माननीय पी एस साहब ईमानदारी से पी डब्ल्यू डी का काम कर रहे हैं. ऐसा लग रहा था कि पी डब्ल्यू डी पूरी खतम होने पर है. आज पी डब्ल्यू डी में बजट की कोई कमी नहीं है. 105 करोड़ रुपये का रोड मेरा ए बी सी केनाल पर बन रहा है. 146 करोड़ का रोड मुरैना एम एस रोड पर बन रहा है और साढ़े छः करोड़ का रोड 1980 में माननीय जबर सिंह जी.....

उपाध्यक्ष महोदय-- यह रोड मंजूर कराने का जो मंत्र है हमें भी बता दीजिए, कैसे कराते हैं.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा-- आदरणीय, जहाँ आवश्यकता है वहाँ सरकार देख रही है. हमारे मुख्यमंत्री जी ने अभी मेरे जौरा विधान सभा क्षेत्र में 5 रोड बनाने की घोषणा की है. चिन्हौनी से खेड़ाकला तक, सिंगरौली से माधवगढ़ तक और निधान से स्यारू तक, चोंडेरा से किरावली तक और रामलालपुरा से पचोखरा तक, 5 रोड की घोषणा की है. वह तो मैं समझ सकता हूँ कि हमारे मंत्री जी उनको तो बनाएँगे ही. लेकिन मेरा थोड़ा सा आग्रह है मेरी दो रोड हैं एक दबोखरी गाँव है उसका अस्पताल झुंडपुरा में पड़ता है. लेकिन जाने के लिए रास्ता नहीं है. उसमें 20 किलोमीटर रोड से सबलगढ़ जाना पड़ता है इसलिए 3 किलोमीटर की रोड बन जाएगी तो गाँव वालों को अस्पताल और बाजार जाने में बहुत सुविधा होगी. दूसरी एक छोटी सी रोड जौरा से मही के लिए एक रोड गई है वह हमारे नगर में होकर गई है. 800 मीटर होगी या 1 किलोमीटर. लेकिन उसको नगर पालिका बना नहीं सकती क्योंकि वे कहते हैं कि पी डब्ल्यू डी की रोड है. वह पूरी बाजार में हमारी सुन्दरता को खराब कर रही है तो मैं माननीय मंत्री जी से भी यही प्रार्थना करता हूँ कि उस रोड को भी जोड़ने का काम करें.

उपाध्यक्ष महोदय-- अब आपका पूरा हो गया. समाप्त करें.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा-- उपाध्यक्ष जी, आपने मुझे समय से पहले जो बोलने के लिए खूब टाइम दिया उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद. बहुत बहुत आभार.

उपाध्यक्ष महोदय-- अब आपकी ट्रेन भी जाने वाली होगी उसका भी ध्यान रखें.

एडव्होकेट सत्यप्रकाश सखवार(अम्बाह)-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र अम्बाह में काफी लंबे समय से वह उसैत घाट का जो पुल है चंबल नदी में जो उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश को जोड़ने वाला है, काफी महत्वपूर्ण है. करीब 20 साल से ज्यादा समय से इसकी मांग चली आ रही है और यह पुल बनने से मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के लिए यातायात का साधन महत्वपूर्ण तरीके से इधर से आने जाने के लिए सुविधा हो जाएगी तो मेरी यह मांग है और मेरी विधान सभा में तमाम सड़कें हैं जो नहीं बनी हैं. मैंने पिछले समय में भी मांग रखी थी, तो मैं चाहूँगा कि अम्बाह से चिरपुरा मात्र 2 किलोमीटर की सड़क है जो शहरी क्षेत्र में ही है. मॉफलपुरा से बगियापुरा तक, कुम्