मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

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चतुर्दश विधान सभा द्वादश सत्र

 

 

दिसम्बर,2016 सत्र

 

शुक्रवार, दिनांक 9 दिसम्बर,2016

 

(18 अग्रहायण, शक संवत्‌ 1938 )

 

 

[खण्ड- 12 ] [अंक- 5 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

शुक्रवार, दिनांक 9 दिसम्बर, 2016

 

(18 अग्रहायण, शक संवत्‌ 1938 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.02 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

 

वन मंत्री(डॉ.गौरीशंकर शेजवार) - अध्यक्ष महोदय,आजकल आपने एक बड़ी कृपा की है कि आते ही पहले सत्ता पक्ष की तरफ देखते हैं.

अध्यक्ष महोदय - विपक्ष की तरफ भी देखते हैं.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार - इसके पहले आपकी जो नीति थी वह दुर्जनम् प्रथमम् वन्दे थी.

अध्यक्ष महोदय - यह नहीं होता था. मैं पहले प्रतिपक्ष की तरफ ही देखता हूं.

प्रभारी नेता प्रतिपक्ष(डॉ.बाला बच्चन) - अध्यक्ष महोदय, आप सरकार से काम करवाईये. किधर देखते हैं इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है. सरकार अगर काम नहीं कर रही है जिम्मेदारी से भग रही है तो आप सरकार से काम करवाईये.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार - अध्यक्ष महोदय, मैंने दुर्जन शब्द का इस्तेमाल किया और सबसे पहले ये खड़े हुए. मेरी ऐसी कोई मंशा नहीं है भाई साहब.

श्री बाबूलाल गौर - अध्यक्ष महोदय, विपक्ष पर ध्यान देना जरूरी है. विपक्ष भी विधान सभा का एक बहुत बड़ा अंग है.

श्री मुकेश नायक - माननीय अध्यक्ष महोदय, डॉ.शेजवार जी दुर्जनों के बहुत समय तक नेता रहे हैं.

 

 

 

 

 

तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर

 

 

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दान राशि के उपयोग की जाँच

[लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]

1. ( *क्र. 1917 ) श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल : क्या लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या श्री लक्ष्‍मण आहूजा द्वारा कलेक्‍टर-कटनी को अक्‍टूबर 2015 में शासकीय जिला चिकित्‍सालय कटनी में रसोई घर निर्माण हेतु दान राशि दिये जाने हेतु पत्र दिया गया था एवं यह नि‍र्णय हुआ था कि निर्मित कक्ष का नाम इनकी स्‍वर्गवासी धर्मपत्‍नी के नाम रखा जावेगा? (ख) क्‍या विधानसभा अता. प्रश्‍न संख्‍या 55 (क्रमांक 1820), दिनांक 25-07-2016 के उत्‍तर में दी गयी दानराशि से रसोई घर रेन्‍यूवेशन के कार्य हेतु दिये जाने की जानकारी दी गई थी एवं यह भी स्‍वीकार किया गया था कि इस राशि से बाउंण्‍ड्रीवाल निर्माण एवं रसोई घर रेन्‍यूवेशन का कार्य किया गया है? यदि हाँ, तो बतायें कि किया गया कार्य दान-दाता की इच्‍छा के अनुरूप था एवं किस प्रकार? (ग) प्रश्नांश (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में बतायें कि दानदाता की मंशा के विपरीत दानराशि से बाउण्‍ड्रीवॉल निर्माण एवं रसोई घर रेन्‍यूवेशन की आवश्‍यकता किस प्रकार उचित थी? कार्य की मांग एवं नोटशीट किसके निर्देश/आदेश पर लिखी गई? (घ) प्रश्नांश (क) से (ग) के परिप्रेक्ष्‍य में विधानसभा प्रश्‍न का भ्रामक उत्‍तर देने एवं दानराशि का मनमर्जी से उपयोग करने के जिम्‍मेदारों के विरूद्ध कार्यवाही एवं निर्माण कार्य की गुणवत्‍ता की जाँच तथा दानदाता की मंशानुसार कार्य कराये जाने की कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों?

लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) जी हाँ। जी नहीं। दानदाता द्वारा उनकी स्वर्गीय पत्नी की स्मृति में रसोई घर के निर्माण हेतु रुपये 5.00 लाख का दान दिया गया था। (ख) जी हाँ। जिला चिकित्सालय कटनी में दान दाता द्वारा दी गई राशि रुपये 5.00 लाख एवं जनभागीदारी योजना मद की राशि से भोजनालय में बाउण्ड्रीवाल निर्माण एवं रसोई घर का उन्नयन कार्य कराया गया है। जी हाँ। दानदाता द्वारा अपने दान पत्र में यह उल्लेख नहीं किया गया है कि उनके द्वारा दी गई राशि से रसोई घर में अतिरिक्त कक्ष के निर्माण किये जाने हैं, अतः भोजनालय की बाउण्ड्रीवाल एवं किचिन में उन्नयन के कार्य कराये गये हैं। (ग) रसोई घर के चारों तरफ खुला हुआ क्षेत्र होने के कारण आवारा पशुओं का लगातार विचरण होता था। कई बार सुअर जैसे पशु भोजनालय में घुसने की चेष्ठा करते थे, जिसके कारण रसोई घर में बनने वाले भोजन को संक्रमित करने की लगातार शंका बनी रहती थी। जिसके कारण बाउण्ड्रीवाल का निर्माण अति आवश्यक था। प्रश्नांकित कार्य की नोटशीट सचिव, रोगी कल्याण समिति द्वारा अध्यक्ष कार्यकारिणी, रोगी कल्याण समिति/कलेक्टर, कटनी को अवलोकनार्थ एवं सहमति हेतु भेजी गई थी। (घ) विधानसभा प्रश्न का भ्रामक उत्तर नहीं दिया गया और न ही दान राशि का मनमर्जी से उपयोग किया गया है, उक्त कार्य की प्रशासकीय स्वीकृति जिला योजना समिति द्वारा प्रदान की गई है। कार्य की गुणवत्ता की जाँच, लोक निर्माण विभाग द्वारा की जा रही है।

श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र में स्थित जिला चिकित्सालय में मेरी उपस्थिति में एक दानदाता द्वारा पांच लाख रुपये की राशि इस शर्त पर दी गयी थी कि मेरी पत्नि की स्मृति में एक कक्ष बनाया जायेगा. यहां जवाब में यह स्वीकार किया गया कि स्वर्गीय पत्नि की स्मृति में रसोईगृह के निर्माण हेतु पांच लाख रुपये का दान दिया गया था लेकिन उक्त राशि को बाउंड्री वाल और रिनोवेशन के नाम पर अन्यत्र खर्च कर दिया गया और उस जवाब में यह भी कहा गया है कि चूंकि रसोईगृह खुला होने के कारण सुअर इत्यादि जानवर आते थे इसलिये खाने को बचाने के लिये ऐसा किया गया है. अस्पताल के चारों ओर बाउंड्री है. इस व्यवस्था पर ही प्रश्नचिह्न लग रहा है क्योंकि अस्पताल की ओर से यह जवाब आ रहा है कि वहां बाउंड्री बनाएंगे कि खाना सुअर न खा जाये मतलब पूरे अस्पताल में सुअर घूम रहे हैं. जिस तरह से जनभागीदारी के बावजूद राशि का दुरुपयोग किया गया और स्वीकार कर रहे हैं कि स्मृति में दान दिया गया तो दान रसोईगृह निर्माण के लिये दान दिया गया था. मैं चाहूंगा पूरे प्रकरण में मैं उपस्थित था. मैंने प्रेरित किया था. सामने वाले की भावनाएं आहत हुई हैं. मैं चाहता हूं कि पूरे प्रकरण की जांच करा ली जाये और राशि का सदुपयोग हो यह सुनिश्चित किया जाये. चूंकि मैं भी एक शिकायतकर्ता हूं इसलिये मेरा भी पक्ष जांच के दौरान सुना जाये.

श्री रुस्तम सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय विधायक जी की भावनाओं से सहमत हूं कि कोई भी अपनी स्वर्गीय पत्नि की स्मृति में दान देता है उसकी भावनाओं का सम्मान होना चाहिये. जैसा आपने कहा है कि उस राशि से बाउंड्री बनी,उन्नयन हो गया, लेकिन जो यह चाहते हैं उसके पूरे तथ्यों की जांच हो तो वह हम जांच करा ही लेंगे. साथ ही साथ वह व्यक्ति जिसने अपनी पत्नि की स्मृति में दान दिया. हम सुनिश्चित करेंगे कि जो उन्नयन होकर रसोईगृह बना है उस पर उनकी पत्नि के नाम की पट्टिका लगा दी जायेगी.

श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल - धन्यवाद.

 

झिरन्या में मुख्य कार्यपालन अधिकारी की पदस्‍थापना

[आदिम जाति कल्याण]

2. ( *क्र. 1383 ) श्रीमती झूमा सोलंकी : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या जनपद पंचायत अन्तर्गत पदस्थ मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा ग्रामीण विकास की समस्त योजनाओं का संचालन किया जाता है तथा उनकी कार्यालय में नियमित उपस्थिति‍ अनिवार्य है? (ख) क्या भीकनगाँव विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत जनपद पंचायत झिरन्या में विगत 02 वर्ष से मुख्य कार्यपालन अधिकारी अवकाश पर हैं तथा वहां पर जनपद पंचायत का संचालन प्रभारी अधिकारियों के माध्यम से कराया जा रहा है, जिसमें संबंधित अधिकारी उनके मूल कार्य करने के पश्चात् अतिरिक्त समय में जनपद पंचायत झिरन्या के कार्यों का सम्पादन कर रहा है, जिससे समस्त जनपद के प्रतिनिधि/सरपंचों के कार्य समयावधि में न होने तथा अधिकारी समय पर न मिलने से त्रस्त हैं? (ग) क्या झिरन्या जनपद में स्थाई मुख्य कार्यपालन अधिकारी को पदस्थ किया जावेगा? हाँ तो कब तक?

आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) : (क) जी हाँ। (ख) जी नहीं, दिनांक 14.09.2015 से दिनांक 05.10.2016 तक अवकाश पर। जी हाँ। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता।

 

श्रीमती झूमा सोलंकी--अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से कहना चाहती हूं कि जनपद पंचायत झिरन्या के सीईओ का दिनांक 5.10.2016 को अवकाश समाप्त हो गया ऐसा शासन से उत्तर आया है लेकिन उनको आज दिनांक प्रभार नहीं दिया गया. जिससे वर्तमान में अनुविभागीय अधिकारी(राजस्व) द्वारा सीईओ का कार्य किया जा रहा है. एसडीएम का कार्यालय भीकनगांव में स्थित है जो कि झिरन्या से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर है. एसडीएम द्वारा जनपद को पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा है. मैं चाहती हूं कि जनपद पंचायत झिरन्या में सीईओ की नियुक्ति हो.

श्री लालसिंह आर्य-- अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्या ने जो अपनी भावना व्यक्त की है, यह बात सही है कि हमने वहां एसडीएम को प्रभार दिया है, उसके पीछे एक नहीं कई कारण हैं. उन्होंने अवकाश लेने के लिए आवेदन किया था लेकिन उसके बाद 14.9.2016 से 5.10.2016 तक उनकी अवकाश की अवधि बढ़ायी गई थी लेकिन वे 13 महीने तक लगातार बिना कोई सूचना दिए अनुपस्थित रहे. इसके पहले उनको लापरवाही के कारण निलंबित किया गया था. जब किसी अधिकारी को नियुक्त किया जाता है तो इसका मतलब है कि वह जनकल्याण के काम करे, विकास के काम करे. लेकिन उनको लापरवाही के कारण निलंबित किया गया. बिना सूचना के वह 13 महीने अनुपस्थित रहे और इस कारण से उनको एक कारण बताओ नोटिस अभी 23.11.2016 को दिया गया. इसका भी उनकी ओर से उत्तर नहीं आया है. अध्यक्ष महोदय, कार्य रुके नहीं, लोगों के काम होते रहें इसलिए एसडीएम को चार्ज दिया गया. लेकिन अतिशीघ्र नए सीईओ की पदस्थी की जाएगी.

श्रीमती झूमा सोलंकी--अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री वहां जल्दी व्यवस्था हो. सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं वहां कोई नहीं चल रही है.

अध्यक्ष महोदय-- मंत्री जी ने अतिशीघ्र कहा है.

श्रीमती झूमा सोलंकी-- आप अतिशीघ्र करें और समय सीमा बता दें. वहां पर पिछले 2 साल से सीईओ नहीं है.

श्री लालसिंह आर्य-- उनकी भावना के अनुकूल जल्दी कर देंगे.

 

नियम विरूद्ध राशि स्‍वीकृति पर कार्यवाही

[विमुक्त, घुमक्कड़ एवं अर्द्धघुमक्कड़ जाति कल्याण]

3. ( *क्र. 126 ) श्री कुँवरजी कोठार : क्या राज्‍यमंत्री, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) शासन द्वारा विमुक्‍त, घुमक्‍कड़ एवं अर्द्धघुमक्कड़ जाति क्षेत्र के विकास हेतु कौन-कौन सी योजनाएं संचालित हैं? वर्ष 2014-15, 2015-16 एवं 2016-17 में प्रश्‍न दिनांक तक जिला राजगढ़ में किन-किन योजनाओं में कितना-कितना आवंटन प्राप्‍त हुआ? योजनावार वर्षवार आवंटन की जानकारी देवें (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार प्राप्‍त आवंटन का जिला स्‍तरीय समिति में कार्य स्‍वीकृति हेतु कब-कब समिति की बैठक आयोजित की गई? बैठक में जिला राजगढ़ के किन-किन कार्यों को प्रस्‍तावित किया जाकर जिला स्‍तर पर एवं शासन स्‍तर पर स्‍वीकृत किये गये? कार्य का नाम, राशि का विवरण, ग्राम पंचायतवार देवें (ग) जिला राजगढ़ अंतर्गत ऐसे कितने हितग्राही हैं, जिनको पूर्व में आवास योजना का लाभ मिल चुका था, किन्‍तु उन्‍हें सक्षम अधिकारियों द्वारा पुन: योजना का लाभ दिया गया है एवं ऐसी कितनी ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें पूर्व से ही अन्‍य योजनाओं का निर्माण कार्य हो चुका था, उसी स्‍थान पर पुन: निर्माण कार्य हेतु राशि स्‍वीकृत की गई? हितग्राहीवार, ग्रामवार, विकासखण्‍डवार कितनी-कितनी राशि स्‍वीकृत की गई? (घ) प्रश्नांश (ख) अनुसार विमुक्‍त, घुमक्‍कड़ एवं अर्द्धघुमक्कड़ जाति विकास के स्‍वीकृत कार्यों का सत्‍यापन किन-किन जिला स्‍तरीय अधिकारियों के द्वारा किया गया? कार्यवार सत्‍यापित करने वाले अधिकारी का नाम एवं दिनांक बताएं निर्धारित मापदण्‍ड के विपरीत वास्‍तविक हितग्राही को लाभ न देते हुये, नियम विरूद्ध कार्य करने वाले दोषी अधिकारियों के विरूद्ध विभाग कब तक कार्यवाही करेगा? यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं?

राज्‍यमंत्री, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण ( श्रीमती ललिता यादव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' एवं '''' अनुसार(ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार(ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार(घ) अनुविभागीय अधिकारी (राजस्‍व) नरसिंहगढ़ जिला राजगढ़ के जाँच प्रतिवेदन अनुसार निर्धारित मापदण्‍ड के विपरीत वास्‍‍तविक हितग्राही को लाभ पहुंचाने वाले अधिकारी/कर्मचारी के विरूद्ध कार्यवाही प्रचलन में है।

 

श्री कुंवरजी कोठार-- अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्रीजी से जानना चाहता हूं कि मेरे द्वारा प्रश्न में पूछा गया था कि प्रश्नांश में प्राप्त आवंटन का जिला स्तरीय समिति में कार्य स्वीकृति हेतु कब कब समिति की बैठक आयोजित कीगई? बैठक में जिला राजगढ़ के किन-किन कार्यों को प्रस्तावित किया जाकर जिला स्तर एवं शासन स्तर पर स्वीकृत किए गए? विभाग द्वारा कोई जानकारी नहीं दी गई. ऐसे ही प्रश्न के उत्तर में भी मात्र ग्राम हुलखेड़ी विकासखंड नरसिंहगढ़ में 6 हितग्राहियों को पूर्व में अन्य योजनाओं से लाभान्वित होने की जानकारी दी गई है. शेष ग्राम कडियासासी,करोंदी,शाहपुरा,जखरियाखेड़ी,मुगलखेड़ी,नेसढ़ी एवं सारंगपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत बनी, बुढनपुर के हितग्राहियों को अन्य योजनाओं से लाभान्वित होने की जानकारी नहीं दी गई. इसी प्रकार प्रश्न में भी स्वीकृत कार्यों की जानकारी का सत्यापन जिला स्तर के किन जिला अधिकारियों द्वारा कराया गया. अधिकारी का नाम एवं दिनांक की जानकारी चाही गई थी वह भी नहीं दी गई. इस तरह से मेरे प्रश्नांश एवं की अपूर्ण जानकारी दी गई. माननीय मंत्री जी क्या इसके लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देशित करेंगे कि जानकारी पूर्ण दें. मैं मंत्री जी यह भी जानना चाहता हूं कि प्रश्न के उत्तर में ग्राम हुलखेड़ी की जांच तो करा ली है लेकिन शेष रहे ग्राम कडियासासी,करोंदी,शाहपुरा,जखरियाखेड़ी,मुगलखेड़ी,नेसढ़ी एवं सारंगपुर विकासखंड के ग्राम बनी एवं बुढनपुर के अपात्र हितग्राहियों की जांच करा कर उन पर कार्रवाई की जाएगी और जो अधिकारी इसमें दोषी पाये जाते हैं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी?

श्रीमती ललिता यादव - अध्यक्ष महोदय, जिला स्तरीय समिति की बैठक दिनांक 19.9.14 को, दोबारा वर्ष 2015 में एवं दिनांक 9.6.16 को आयोजित की गई. माननीय सदस्य ने जो कहा है, जो होलखेड़ी ग्राम पंचायत है, उसमें 6 ऐसे लोग हैं, जिन्होंने आवास का पहले लाभ ले लिया था, उनको दोबारा लाभ दिया गया है. स्वीकृत कार्य का सत्यापन एडीओ, पंचायत समन्वयक एवं उपयंत्री द्वारा किया जाता है. माननीय सदस्य की जो भावना है और उन्होंने जो पंचायतों का नाम उल्लेखित किया है, उनकी जांच चाहते हैं. मैं माननीय सदस्य को आश्वस्त करती हूं, इन पंचायतों की जांच शीघ्र करा ली जाएगी. जिनके द्वारा अपात्र हितग्राहियों को लाभ दिया गया है, उनके खिलाफ कार्यवाही की जा रही है. इसमें दोषी सरपंच, सचिव, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, शाखा प्रभारी हैं. माननीय सदस्य को आश्वस्त करती हूं कि इनके खिलाफ कार्यवाही के लिए हमारे विभाग के द्वारा कलेक्टर को पत्र लिख दिया गया है और शीघ्र ही इनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी और आप जिन-जिन पंचायतों की जांच चाहते हैं उन पंचायतों की जांच मैं शीघ्र करा लूंगी.

श्री कुंवरजी कोठार - अध्यक्ष महोदय, जांच की समय-सीमा और निश्चित कर दें कि 15 दिन या 1 महीने के भीतर कार्यवाही कर दी जाएगी.

श्रीमती ललिता यादव - अध्यक्ष महोदय, 15 दिन में कार्यवाही हो जाएगी.

श्री कुंवरजी कोठार - धन्यवाद, माननीय मंत्री महोदया.

श्री गिरीश भण्डारी - अध्यक्ष महोदय, एक बात मैं कहना चाहता हूं कि जो होलखेड़ी मेरे विधान सभा क्षेत्र का गांव है, माननीय मंत्री महोदया ने जो जानकारी दी है कि 6 हितग्राही, वह 6 हितग्राही नहीं है, 106 हितग्राहियों को डबल आवास दिये गये.

अध्यक्ष महोदय - उसकी जांच करा ले रहे हैं.

श्री गिरीश भण्डारी - उसकी जांच हो चुकी है. जो 6 हितग्राही बता रही हैं, उस बात पर मैं कह रहा हूं कि होलखेड़ी गांव की जांच हो चुकी है. वहां 106 हितग्राहियों को डबल आवास दिये गये हैं. 106 आवास की गड़बड़ी है.

अध्यक्ष महोदय - आप उसे दिखवा लीजिए.

श्रीमती ललिता यादव - अध्यक्ष महोदय, एसडीएम के द्वारा जांच की गई. जांच प्रतिवेदन में 6 हितग्राही ऐसे हैं जिनको दोबारा लाभ दिया गया है.

श्री गिरीश भण्डारी - मंत्री महोदया, वह प्रतिवेदन मेरे पास में है, उसमें 106 हितग्राही ऐसे है जिनको डबल आवास दिये गये हैं.

श्रीमती ललिता यादव - अध्यक्ष महोदय, जो मैं बता रही हूं वह सही है. फिर आप पर्टिक्युलर कुछ पूछना चाहते हैं तो वह बता दीजिए, मैं फिर से जांच करा लूंगी.

शासकीय उत्कृष्ट विद्यालयों को आवंटित राशि

[स्कूल शिक्षा]

4. ( *क्र. 1931 ) श्री माधौ सिंह डावर : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अलीराजपुर जिले में कितने शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय संचालित हैं। (ख) वर्ष 2012-13 से वर्ष 2016-17 तक शासन द्वारा उक्त उत्कृष्ट विद्यालयों के संचालन हेतु कितनी राशि किस मद में आवंटित की गई है? वर्षवार बताएं। (ग) आवंटित राशि से क्या-क्या कार्य करवाये गये हैं? कार्यों की सूची प्रदान करें।

स्कूल शिक्षा मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) अलीराजपुर जिले में 01 जिला स्तरीय उत्कृष्ट विद्यालय एवं 05 विकासखण्ड स्तरीय उत्कृष्ट विद्यालय कुल 06 उत्कृष्ट विद्यालय संचालित हैं। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।

 

श्री माधौ सिंह डाबर - अध्यक्ष महोदय, मेरे द्वारा शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय में आवंटित धनराशि से संबंधित प्रश्न पूछा गया था और प्रश्नांश ग में यह भी पूछा गया था कि लघु निर्माण कार्य के लिए कितनी-कितनी राशि वर्ष 2012 से 2017 तक आवंटित की गई थी तो विभाग द्वारा जो जवाब आया है वहां मात्र लघु निर्माण कार्य किया गया है, ऐसा जवाब आया है. जबकि प्रश्नांश ग में उल्लेखित था कि कार्यवार सूची दी जाय, वह सूची न देते हुए अपूर्ण सूची दी गई है. माननीय मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं कि यह क्या-क्या कार्य करवाया है, उसकी जानकारी दे दें?

कुंवर विजय शाह - अध्यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय विधायक जी ने जानना चाहा है, वैसे तो यह आदिम जाति कल्याण विभाग के नियंत्रण में झाबुआ, अलीराजपुर जिला आता है. लेकिन उसके बावजूद भी सामूहिक जिम्मेदारी के कारण मैं उत्तर देने की कोशिश करता हूं. वैसे जितनी राशि शिक्षा विभाग ने जारी की थी, उसके लिस्ट तो आपको दी ही गई है. लेकिन आपने जो जानना चाहा है कि उस राशि से क्या-क्या काम हुए, उसकी जानकारी भी मुझे लगता है कि आपके खाने में दे दी गई होगी. परिशिष्ट बी यह अगर आपको नहीं मिला है..

श्री माधौ सिंह डाबर -अध्यक्ष महोदय, जानकारी तो मुझे मिली है लेकिन उसमें पूरी राशि का लिखा गया है कि लघु निर्माण कार्य करवाए गये और मेरे द्वारा पूछा गया था कि क्या-क्या कार्य किये गये हैं.

कुंवर विजय शाह - अध्यक्ष महोदय, डिटेल जानकारी दे देंगे, उसमें कुछ छिपाने वाली बात ही नहीं है.

शासकीय एवं अशासकीय शैक्षणिक संस्थाओं द्वारा डी.एड. कोर्स की अवैध वसूली

[स्कूल शिक्षा]

5. ( *क्र. 1968 ) श्री दिलीप सिंह परिहार : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म.प्र. शासन द्वारा शासकीय एवं अशासकीय शैक्षणिक संस्थाओं में डी.एड. कोर्स हेतु प्रतिवर्ष कितना शैक्षणिक शुल्क निर्धारित किया गया है? विगत एक वर्ष में निर्धारित शिक्षा शुल्क से अधिक धनराशि वसूल करने संबंधी किन-किन संस्थाओं की शिकायतें प्राप्त हुई हैं और क्या उनकी जाँच कराई गई है? यदि हाँ, तो तत्संबंधी ब्यौरा देवेंl (ख) क्‍या छात्रों द्वारा संस्थाओं की अवैध वसूली का विरोध करने पर उनको मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हुए जानबूझकर बिना कोई ठोस कारण के संस्था में उपस्थिति कम दर्शाकर उन्हें परीक्षा से वंचित किया गया है? सूची उपलब्ध कराई जावेl (ग) संस्थानों द्वारा अवैध वसूली किये जाने की शिकायत प्रमाणित होने की स्थिति में संबंधित संस्थानों की मान्यता समाप्त करने संबंधी शासन कार्यवाही करेगा? यदि हाँ, तो कब तक?

स्कूल शिक्षा मंत्री (कुंवर विजय शाह) :

 


 

श्री दिलीप सिंह परिहार- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि नीमच जिले में चल रहे डी.एड. कॉलेजों में लंबे समय से अनियमिततायें चल रही हैं. कॉलेजों में ज्‍यादा शुल्‍क वसूल कर छात्रों के ऊपर अनावश्‍यक भार डाला जाता है. गरीब बच्‍चे अंत तक जब इधर-उधर भटकते रहते हैं तो उनसे अवैध वसूली की जाती है. अवैध वसूली के पश्‍चात् उन्‍हें एडमिशन भी नहीं दिया जाता है और परीक्षा में नहीं बिठाकर प्रताडि़त किया जाता है. क्‍या माननीय मंत्री जी इस संबंध में कोई कार्यवाही करेंगे ?

कुंवर विजय शाह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इन कॉलेजों से संबंधी ज्‍यादा फीस वसूली की शिकायतें हमारे पास आई थीं. इसके संबंध में हमने न सिर्फ आवश्‍यक निर्देश दिए हैं बल्कि ज्‍यादा वसूल की गई राशि वापस भी कराई है. वर्तमान में मेरे पास खंडवा की लिस्‍ट उपलब्‍ध है, जहां 7500 रूपये ज्‍यादा लिए गए थे. यह 60 बच्‍चों की लिस्‍ट है. इनमें से कुछ से हमने संपर्क कर जानकारी ली है तो ज्ञात हुआ कि राशि उनके खातों में वापस की जा रही है. जिन्‍होंने ज्‍यादा राशि वसूल की है, उन पर सख्‍त कार्यवाही के निर्देश भी जारी किए गए हैं.

जिन इंस्‍टीट्यूटस ने नियमों का पालन नहीं किया है, अनियमिततायें की हैं. ऐसे 7 कॉलेजों की मान्‍यतायें निरस्‍त करने हेतु हमने शासन को लिखा है. चूंकि भारत सरकार इन कॉलेजों की मान्‍यतायें निरस्‍त करती है और हमारे लिखने के पश्‍चात् मध्‍यप्रदेश के ऐसे 6 कॉलेजों की मान्‍यता निरस्‍त कर दी गई है.

श्री दिलीप सिंह परिहार- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नीमच के रामचंद्र मंगल कॉलेज (आर.आर.एम. कॉलेज) और ज्ञानोदय कॉलेज की कई छात्राओं की मेरे पास लिखित में शिकायतें आई हैं. इस बाबत् मैंने बोर्ड ऑफिस को भी पत्र लिखा था. जिसमें श्रीमती मैना राठौर बहन को प्रताडि़त करना पाया गया लेकिन उसके बाद भी जिलाधीश महोदय से बात करने एवं पत्र लिखने के पश्‍चात् ही प्रकरण में कुछ कार्यवाही संभव हो पाई थी. मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि क्‍या मंत्री जी इस प्रकरण में वापस जांच करवायेंगे ?

कुंवर विजय शाह- माननीय अध्‍यक्ष जी, जिस बहन का नाम माननीय विधायक जी ने बताया है, मेरी जानकारी के अनुसार उपस्थिति कम दर्ज होने के कारण उन्‍हें परीक्षा में बैठने की पात्रता से वंचित किया गया है. 75 प्रतिशत उपस्थिति जरूरी होती है क्‍योंकि हम चाहते हैं कि मध्‍यप्रदेश के भविष्‍य को सुधारने के लिए, बच्‍चों को पढ़ाने के लिए ऐसे शिक्षक प्राप्‍त हों जो स्‍वयं पहले ठीक ढंग से पढ़ाई करें. यदि टीचर की स्‍वयं की उपस्थिति कम होगी तो वह बच्‍चों को क्‍या पढ़ा पायेंगे. हमारे द्वारा निर्देश जारी किए गए हैं कि डी.एड. एवं बी.एड. कॉलेजों में भविष्‍य में बायोमैट्रिक्‍स तरीके से उपस्थिति दर्ज की जायेगी ताकि हमारे भावी भविष्‍य अर्थात् हमारे बच्‍चों को पढ़ाने के लिए उचित शिक्षक मिल सकें. प्राय: देखने में यह आया है कि कई डी.एड. एवं बी.एड. करने वाले टीचरों की उपस्थिति कम होती है और फिर वे बच्‍चों के भविष्‍य के साथ खिलवाड़ करते हैं. विधायक जी, आपके प्रश्‍न के बाद मेरे द्वारा निर्देश दिए गए हैं कि भविष्‍य में सभी प्रायवेट एवं शासकीय डी.एड. एवं बी.एड. कॉलेजों में बायोमैट्रिक्‍स तरीके से वहां पढ़ने वालों की उपस्थिति ली जायेगी. जिस बहन का उल्‍लेख विधायक जी ने किया है, उस हेतु मैं भोपाल से एक टीम भिजवा रहा हूं जो कि प्रकरण की जांच करेगी कि क्‍या अतिरिक्‍त फीस की मांग की गई थी क्‍योंकि एक जांच में सामने आया है कि बहन से अतिरिक्‍त फीस की मांग की गई थी. परंतु दूसरी जांच जो कि आपके पत्र के आधार पर बोर्ड ऑफिस द्वारा की गई है और उसमें य‍ह निकल कर आया है कि इस संबंध में कुछ कन्‍फयूजन है. मैं एक उच्‍च स्‍तरीय टीम भिजवा रहा हूं. जो कि 15 दिनों के अंदर रिजल्‍ट देगी. यदि वह संस्‍था दोषी पाई गई तो उसकी मान्‍यता निरस्‍त करने हेतु हम भारत सरकार को पत्र लिखेंगे. इस प्रकार की कोई भी संस्‍था जो बच्‍चों के भविष्‍य के साथ खिलवाड़ करना चाहती है, मध्‍यप्रदेश में नहीं चल पायेगी.

श्री दिलीप सिंह परिहार- माननीय अध्‍यक्ष जी, मेरा एक और निवेदन है कि बहुत ही मुश्किल से नीमच में शासकीय डी.एड. कॉलेज खुला है. उसमें केवल 50 सीटें ही हैं. नीमच की सीमा से राजस्‍थान लगता है और वहां के छात्र भी यहां आते हैं. तो क्‍या आप कॉलेज की सीटों को बढ़ा देंगे. नीमच के रामचंद्र मंगल कॉलेज, ज्ञानोदय कॉलेज 1.25 लाख रूपये की फीस गरीब बच्‍चों से डी.एड. के लिए लेते हैं. शासकीय कॉलेज जिला स्‍तर पर है. माननीय मंत्री जी, आपसे निवेदन है कि आप शासकीय कॉलेज की सीट 50 से बढ़ाकर 100 कर दें.

कुंवर विजय शाह- माननीय अध्‍यक्ष जी, सीट बढ़ाने का काम मेरा नहीं है. जहां तक फीस की बात है जिसका उल्‍लेख माननीय विधायक जी ने किया है, तो मैं यह कहना चाहता हूं कि मध्‍यप्रदेश सरकार ने कॉलेजों के हिसाब से फीस तय की है. 30 हजार, 32 हजार एवं 35 हजार रूपये कॉलेजों के हिसाब से फीस तय है. यदि कोई कॉलेज इससे ज्‍यादा फीस लेता है तो वह गलत है.

श्री रामनिवास रावत- माननीय मंत्री जी, प्रायवेट कॉलेजों पर आपका कोई नियंत्रण नहीं है.

 

खण्‍डवा जिले में नर्सिंग होम/पैथालॉजी लेब में अनियमितता

[लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]

6. ( *क्र. 1232 ) श्री देवेन्द्र वर्मा : क्या लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) खंडवा जिले में कितने पंजीकृत निजी नर्सिंग होम, नि‍जी अस्‍पताल, पैथालॉजी लेब एवं सोनोग्राफी सेंटर हैं? उनकी संख्‍या, नाम एवं संचालकवार जानकारी दी जाए। (ख) क्‍या इनमें से कई नर्सिंग होम, अस्‍पताल, लेब में शासन की गाईडलाईन का खुलेआम उल्‍लंघन हो रहा है? प्रश्नांश (क) के क्रम में इनमें कार्यरत मेडिकल, पैरामेडिकल एवं नर्सिंग स्‍टाफ की नामवार जानकारी दी जाए (ग) उक्‍त सभी संस्‍थानों का विगत तीन वर्षों में किस-किस अधिकारी द्वारा कब-कब निरीक्षण एवं आकस्मिक जाँच की गई? कितने संस्‍थानों का संचालन नियम विरूद्ध होने पर क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई? (घ) क्‍या सभी संस्‍थानों में मानव स्‍वास्‍थ्‍य को देखते हुए अस्‍पताल के कचरे का निपटान नियमानुसार किया जा रहा है? पार्किंग सुविधा, विभिन्‍न पैथालॉजी जांचों की दरों की रेटलिस्‍ट दृश्‍यस्‍थान पर लगाई गई है? (ड.) यदि नहीं, तो क्‍या स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के अधिकारियों द्वारा नियम विरूद्ध संचालित ऐसे संस्‍थानों को सहयोग कर जनस्‍वास्‍थ्‍य से खिलवाड़ किया जा रहा है? यदि हाँ, तो क्‍या इनकी उच्‍चस्‍तरीय जाँच की जाएगी?

लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) खंडवा जिले में 2 निजी नर्सिंग होम, 14 निजी अस्पताल, 9 पैथालॉजी लेब एवं 15 सोनोग्राफी सेंटर पंजीकृत हैं। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) जी हाँ, 5 संस्थाओं सदगुरु नेत्र चिकित्सालय, श्री दादाजी हॉस्पिटल, आदर्श पैथालॉजी लेब, निदान पैथालॉजी लेब एवं संजीवनी डायग्नोस्टिक सेंटर बायोमेडिकल द्वारा वेस्ट मैनेजमेन्ट नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। 05 संस्थाओं का पंजीयन निरस्त किया गया, जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (घ) जी नहीं, 05 निजी संस्थाओं द्वारा बायोमेडिकल वेस्ट के निपटान हेतु मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल से ऑथोराईजेशन नहीं लिया गया था। जी हाँ। जी हाँ। (ड.) जी नहीं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

 

 

श्री देवेन्द्र वर्मा -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा जो प्रश्न है यह मेरे क्षेत्र से संबंधित ही नहीं पूरे प्रदेश से संबंधित है, पूरे मध्यप्रदेश की 7.5 करोड़ की जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ विषय है. मेरे प्रश्न में मैंने स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ विषय उठाया है. एक गरीब आदमी अस्पताल इलाज कराने के लिए जाता है तो एक ही बीमारी के अनेक अस्पतालों में अलग अलग प्रकार की दर है, मेरा एक प्रश्न यह है. दूसरा प्रश्न यह है कि जो मुझे जानकारी प्रतिवेदित की गई है उसमें 2013 में जांच टीम के द्वारा निरीक्षण किया गया है लेकिन विगत दो वर्ष से किसी प्रकार का निराक्षण नहीं किया गया है. मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहूंगा कि निरीक्षण के क्या नियम हैं, दर सूची बनाने के क्या नियम हैं, इसी प्रकार से देखने में आता है कि मरीज को वेनटीलेटर पर पहुंचा कर उसका बिल बढ़ाया जाता है तो इसके लिए क्या नियम हैं.मैं माननीय मंत्री जी से आपके माध्यम से जानना चाहता हूं ?

श्री रूस्तम सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय हमारे माननीय सदस्य ने जो चिंता व्यक्त की है लेकिन बहुत सारी चीजें वह कह गये हैं जिसका प्रश्न में कहीं पर उल्लेख नहीं है. प्रश्न को बहुत व्यापक कर दिया है, लेकिन जो स्पेसिफिक प्रश्न पूछा है उसमें मूल चीज यह है कि वहां पर जो प्राइवेट अस्पताल हैं उनका जो कचरा निकलता है, जो गंदगी निकलती है उसके विनिष्टिकरण की सुविधा ठीक से नहीं है. मुझे लगता है कि विधायक जी का फोकस मुख्यत: उसी बात की ओर है. उसमें जिन संस्थाओं ने ऐसी व्यवस्था नहीं की हुई थी तो उनके खिलाफ में कार्यवाही भी हुई है ऐसी 5 संस्थाओं का रजिस्ट्रेशन निरस्त भी किया गया है जहां तक निरीक्षण का सवाल है. इसकी पूरी डिटेल में सूची आपको उपलब्ध करायी गई कौन कौन डॉक्टर कब कब किस किस दिनांक को गया है यह सब दिया गया है और भी आप कोई स्पेसिफिक चीज बतायेंगे तो उसकी भी जांच हम करवा लेंगे लेकिन इतना जरूर है कि जो बायो कचरा होता है उसकी चिंता व्यक्त की है उस पर भी कार्यवाही करने के लिए संबंधित विभाग को बोला गया है और उसी के कारण इन 5 संस्थाओं का रजिस्ट्रेशन निरस्त किया गया है.

श्री देवेन्द्र वर्मा -- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न था कि एक ही बीमारी के अनेक अस्पतालों में अनेक तरह की दर हैं. जिस प्रकार से राज्य बीमारी सहायता में रेट तय हैं कि एक गरीब को एक बीमारी के लिए इतनी राशि दी जायेगी तो उसी प्रकार से अस्पताल की दर शासन तय करेगा क्या. मैं आपके माध्यम से यह बताना चाहूंगा कि मेरे प्रश्न करने के बाद में 5 संस्थाओं के लायसेंस निरस्त किये हैं. इन्होंने बताया है कि हमारे खण्डवा में चलने वाले दादाजी अस्पताल में प्रतिदिन हजारों मरीजों के नेत्रों का आपरेशन यह करते हैं तो इसका निरीक्षण 2013 में किया गया है और 2013 के बाद में दो वर्ष में हजारों लोगों के आपरेशन किये गये हैं, उन्होंने इस प्रकार की कमियां बताई हैं तो इन दो वर्षों में कमियों का निरीक्षण किया तो किन लोगों ने किया है और इसके पूर्व कार्यवाही क्यों नहीं की गई.

श्री रूस्तम सिंह -- अध्यक्ष महोदय, वैसे तो हमारे विधायक युवा हैं तीसरी बार चुनकर भी आये हैं लेकिन फिर भी मैं उनकी जानकारी के लिए बता दूं कि खण्डवा में एक भी चिकित्सालय में राज्य बीमारी सहायता के पैसे से इलाज नहीं होता है वहां पर कोई भी अस्पताल उसके लिए अधिकृत नहीं है. इसलिए वह तो उद्भूत नहीं होता है.

श्री देवेन्द्र वर्मा -- मैंने तो राज्य बीमारी सहायता का उदाहरण दिया है.

अध्यक्ष महोदय -- एक तो उनका यह प्रश्न है कि एक ही जांच के लिए, हालांकि इससे उद्भूत नहीं होता है, एक ही रेट रखने के लिए नियम बन सकते हैं. सोनोग्राफी के लिए हर अस्पताल वाले अलग अलग दर लेते हैं. दूसरा उनका कहना है कि निरीक्षण नियमित होना चाहिए.

श्री रूस्तम सिंह-- अध्यक्ष महोदय, निरीक्षण भी नियमित होते हैं और होंगे यह सदस्य जो रेट की बात कर रहे हैं. शासन प्राइवेट अस्पताल के लिए रेट तय नहीं करता है वह अपने अपने हिसाब से पैसे लेते हैं, जिसके पास में जितनी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं उसके हिसाब से रेट तय हैं. फिर भी मैं उनसे यह कहना चाहता हूं कि अगर उनके यहां पर किसी अस्पताल में बहुत ज्यादा रेट लिये जा रहे हैं तो उस पर कार्यवाही के लिए निर्देश देंगे.

श्री देवेन्द्र वर्मा -- मेरा यह कहना है कि जब रेट तय नहीं है तो राज्य बीमारी सहायता के रेट किस प्रकार से तय किये गये हैं. अगर वह रेट लेकर कोई गरीब आदमी किसी अस्पताल में जाते है तो 60 हजार के इलाज के 2 लाख रूपये लिये जाते हैं. अध्यक्ष महोदय मेरा कहना है कि निरीक्षण के भी नियम बता दें आप, तीन साल से अस्पतालों का निरीक्षण नहीं किया गया है. खुली लूट मची है,. डाकू बनकर खुले में जनता को लूट रहे हैं.

श्री रूस्तम सिंह -- अध्यक्ष महोदय निरीक्षण होते हैं और इसकी पूरी सूची माननीय विधायक जी को दी गई है यह देख तो लें. किस अस्पताल का किस डॉक्टर ने कब निरीक्षण किया है

श्री देवेन्द्र वर्मा -- अध्यक्ष महोदय 3 साल से निरीक्षण नहीं किया गया है, निरीक्षण के नियम बतायें और कितने समय में निरीक्षण करेंगे यह बतायें.

अध्यक्ष महोदय -- नियमित रूप से निरीक्षण करेंगे यह उन्होंने कह दिया है.

 

 

बैकलॉग के पदों की भर्ती

[स्कूल शिक्षा]

7. ( *क्र. 1579 ) श्री सुरेन्‍द्र सिंह बघेल : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या कारण है कि सहायक अध्‍यापक के बैकलॉग के रिक्‍त पदों की परीक्षा दिनांक 23.09.2016 को निरस्‍त की गई जबकि दिनांक 10.05.2016 को भारत सरकार के राजपत्र में नये नियमों का प्रकाशन हो गया था? इस निरस्‍त आदेश की छायाप्रति, आदेश जारी करने वाले अधिकारी का नाम, पदनाम सहित बतावें (ख) आरक्षित वर्ग के हितों के साथ खिलवाड़ करके परीक्षा निरस्‍त करने वाले अधिकारियों पर शासन कब तक कार्यवाही करेगा? धार जिले में वर्तमान में बैकलॉग पदों की कितनी संख्‍या है? जिलावार, पदवार बतावें। विगत 7 वर्षों में विशेष भर्ती अभियान के तहत कितने पद भरे गए? वर्षवार बतावें (ग) शेष पदों की पूर्ति हेतु शासन कब तक कार्यवाही करेगा?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) सहायक अध्यापक का पद सीधी भर्ती का पद नहीं है। सहायक अध्यापक के रिक्त पदों के भर्ती के लिए किसी भी प्रकार की परीक्षा आयोजित करने अथवा निरस्त करने के संबंध में कोई आदेश जारी नहीं किये गये हैं अतः शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ख) प्रश्नांश () के उत्तर के अनुसार। धार जिले में वर्तमान बैकलॉग पदों की जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) पद रिक्तता तथा पद पूर्ति की जाना एक सतत् प्रक्रिया है, निश्चित समयावधि बताया जाना संभव नहीं है।

परिशिष्ट - ''एक''

श्री बाला बच्‍चन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न में स्‍पष्‍ट यह पूछा गया था कि प्रदेश में बैकलॉग पदों की भर्ती की क्‍या स्‍थिति है जो कि 1 लाख से भी अधिक हैं और जिसमें आरक्षित वर्ग के पद भी हैं जो कि बैकलॉग से सीधी भर्ती के अंतर्गत भरे जाते हैं. इन पदों की भर्ती हेतु एक परीक्षा हुई थी जिसको निरस्‍त कर दिया गया है जिससे आरक्षित वर्ग के लोगों का नुकसान हुआ है, सरकार ऐसा क्‍यों कर रही है. अध्‍यक्ष महोदय, मेरे पास मूल प्रश्‍न की फोटोकॉपी है जिसमें पूरे प्रदेश के लिए पूछा गया है और जो उत्‍तर दिया गया है उसमें केवल धार के लिए सीमित कर दिया गया है. पूरे प्रदेश के सभी जिलों में विशेष भर्ती अभियान के अंतर्गत जो पदों की भर्ती की जानी थी वह सरकार ने अभी तक क्‍यों नहीं की और जहां तक मेरी जानकारी में है वर्ष 2009 से अभी तक प्रतिवर्ष 1 जुलाई को लगातार 1 वर्ष के लिए तारीख बढ़ा दी जाती है. मैं यह जानना चाहता हूँ कि सरकार की क्‍या मजबूरी है कि एक लाख से भी अधिक पद रिक्‍त हैं, इन पदों पर भर्ती की जानी चाहिए थी और इसके लिए परीक्षा भी आयोजित की गई थी, लेकिन अभी तक उनकी भर्ती क्‍यों नहीं की जा रही है और वह परीक्षा क्‍यों निरस्‍त की गई है. अध्‍यक्ष महोदय, सामान्‍य प्रशासन विभाग ने जितनी बार ऑर्डर निकाले हैं मेरे पास उन सब ऑर्डर्स की कापियां हैं, वैसे मैंने यह प्रश्‍न सामान्‍य प्रशासन विभाग से पूछा था लेकिन सामान्‍य प्रशासन विभाग ने इस प्रश्‍न को स्‍कूल शिक्षा विभाग को क्‍यों ट्रांसफर कर दिया ? अगर आप धार की भी बात करना चाहते हैं तो धार जिला भी आदिम जाति कल्‍याण विभाग के अंतर्गत आता है, माननीय मंत्री जी, आप खुद आरक्षित वर्ग से आते हैं, आपकी क्‍या मजबूरी है कि एक लाख से अधिक पद बैकलॉग भर्ती के खाली हैं और भरे क्‍यों नहीं जा रहे हैं, कृपया मुझे बताएं.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप सीधा प्रश्‍न करें.

श्री बाला बच्‍चन -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा सीधा प्रश्‍न यह है कि एक लाख से अधिक पदों की भर्ती बैकलॉग के अंतर्गत की जानी थी, उन पदों की भर्ती क्‍यों नहीं की जा रही है ?

कुंवर विजय शाह -- माननीय अध्‍यक्ष जी, एक तो संबंधित विधायक हैं नहीं. हमने संशोधित उत्‍तर दिया है.

श्री रामनिवास रावत -- सूचना दी है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय ने अनुमति दी है.

कुँवर विजय शाह -- यह उनका अधिकार है.

श्री बाला बच्‍चन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बात तो माननीय मंत्री जी को बोलनी ही नहीं चाहिए. हमने विधिवत तरीके से प्रश्‍न पूछा है.

कुँवर विजय शाह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विधायक जी ने अगर लिखकर दिया है तो वे पूछ सकते हैं, अधिकार है, इस बात से मैं इंकार नहीं करता.

अध्‍यक्ष महोदय -- कोई बात नहीं, बात आ गई है, उस पर बहस करने की कोई जरूरत नहीं है.

कुँवर विजय शाह -- माननीय अध्‍यक्ष जी, मेरा निवेदन यह है कि संबंधित विधायक को हमने संशोधित उत्‍तर दिया है या तो माननीय नेता प्रतिपक्ष के पास वह संशोधित उत्‍तर आया नहीं है जिसका प्रश्‍न उठाया गया है. सहायक अध्‍यापकों के बैकलॉग रिक्‍त पदों की परीक्षा 23.09.2016 को निरस्‍त की गई, भारत सरकार के राजपत्र में नए नियमों का प्रकाशन हो गया, ऐसी कोई भी परीक्षा न तो शुरू हुई और न ही निरस्‍त हुई. हमने कोई आदेश ही नहीं दिया. जो प्रश्‍न किया है वही इससे उद्भूत नहीं होता. जहां तक बैकलॉग पदों का सवाल है तो बैकलॉग पदों के बारे में आप अलग से जानकारी ले लें, मैं दे दूंगा.

श्री बाला बच्‍चन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न पूछने के पीछे मेरा आशय यही था कि ये बैकलॉग पदों की पूर्ति सरकार कब तक कर देगी क्‍योंकि पूरे मध्‍यप्रदेश का शिक्षा जगत इससे प्रभावित हो रहा है. हमारे बच्‍चे अच्‍छी शिक्षा से वंचित हो रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- आपका सीधा प्रश्‍न आ गया ना कि कब तक भर्ती करेंगे, उसमें भाषण देने की क्‍या जरूरत है. आप बैठ जाइये, माननीय मंत्री जी, उनका प्रश्‍न सीधा है कि बैकलॉग के पदों की भर्ती कब तक करेंगे ?

कुँवर विजय शाह -- माननीय अध्‍यक्ष जी, नेता प्रतिपक्ष जी जो आंकड़ा दे रहे हैं पहले तो हम उससे सहमत नहीं हैं कि एक लाख पद खाली हैं. चतुर्थ श्रेणी के जितने पद मध्‍यप्रदेश के 51 जिलों में होंगे, उनकी भर्ती साल भर के अंदर कर दी जाएगी, कलेक्‍टर को हमने निर्देश जारी कर दिए हैं.

श्री बाला बच्‍चन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी सही आंकड़े बता दें. अगर मैं एक लाख से अधिक पदों की बात कर रहा हूँ तो मेरा यह आग्रह है और मेरा अधिकार भी है कि एक प्रश्‍न और मैं पूछ सकता हूँ कि आप सही आंकड़ों से अवगत कराएं.

अध्‍यक्ष महोदय -- यह उससे उद्भूत नहीं होता.

श्री बाला बच्‍चन -- इसलिए कि आप सरकार हो, आप बचना और भागना क्‍यों चाहते हो, जवाब क्‍यों नहीं देना चाहते हो और मंत्री जी खुद इस वर्ग से आते हैं. कब तक आप इन पदों की भर्ती कर लेंगे ?

कुँवर विजय शाह -- यथासंभव यथाशीघ्र.

अध्‍यक्ष महोदय -- उन्‍होंने बता दिया. प्रश्‍न क्र. 8, श्रीमती पारूल साहू केसरी.

 

 

वित्‍तीय अनियमितताओं पर कार्यवाही

[लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]

8. ( *क्र. 1216 ) श्रीमती पारूल साहू केशरी : क्या लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या जैसीनगर के बी.एम.ओ. के विरूद्ध वित्‍तीय अनियमितताओं की शिकायतें प्राप्‍त हुई हैं? (ख) यदि हाँ, तो क्‍या बी.एम.ओ. जैसीनगर के विरूद्ध शिकायतों की जाँच करायी जाकर उनके कार्यकाल अवधि के वित्‍तीय अभिलेखों का अंकेक्षण भी कराया गया है? जाँच प्रतिवेदन सहित अंकेक्षण की प्रति उपलब्‍ध करायी जावे (ग) यदि नहीं, तो क्‍या बी.एम.ओ. जैसीनगर को विभागीय स्‍तर पर संरक्षण के चलते वितीय अनियमितता करने की छूट दी गयी है, जिसकी पुष्टि प्रमुख समाचार पत्र दैनिक भास्‍कर सागर में 26 अक्‍टूबर, 2016 में प्रकाशित ''बी.एम.ओ. जैसीनगर द्वारा फिर से शासकीय राशि को हड़पने'' संबंधी समाचार से होती है? (घ) मध्‍यप्रदेश के स्‍वास्‍थ्‍य विभाग अंतर्गत ऐसे कितने बी.एम.ओ. को वित्‍तीय अनियमिततायें करने की विभागीय स्‍तर से छूट प्रदान की गयी है?

लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) जी हाँ। (ख) जैसीनगर ब्लॉक मेडिकल आफिसर डॉ. जे.एस. धाकड़ के विरूद्ध अनियमितता से संबंधित प्राप्त दो शिकायतों में से संचालनालय स्तर पर प्राप्त एक शिकायत की जाँच प्रचलन में है तथा दूसरी शिकायत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला सागर को प्राप्त होने पर प्रकरण की जाँच उनके द्वारा श्री राजेश राय जिला लेखाप्रबंधक सागर से पूर्ण कराते हुये जाँच प्रतिवेदन प्राप्त किया, जिसमें प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर डॉ. धाकड़ को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुये प्रतिवाद उत्तर चाहा गया जो प्राप्त होने पर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सागर द्वारा डॉ. धाकड़ के विरूद्ध आगामी कार्यवाही हेतु प्रकरण क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवायें, सागर को प्रेषित किया जो परीक्षणाधीन है। जी नहीं। जाँच प्रतिवेदन की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) जी नहीं, दिनांक 26 अक्टूबर 2016 के दैनिक समाचार पत्र में वित्तीय अनियमितता से संबंधित प्रकाशित समाचार पत्र का जाँच प्रतिवेदन प्रश्नांश () में उल्लेखित दूसरी शिकायत से संबंधित होकर क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवायें, सागर को प्राप्त होकर उनके अधीन परीक्षणाधीन है। परीक्षण उपरान्त संबंधित के विरूद्ध गुण-दोष के आधार पर नियमानुसार कार्यवाही शीघ्र की जावेगी। (घ) जी नहीं।

श्रीमती पारूल साहू केशरी --- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जी से निवेदन करना चाहती हॅूं कि पिछले 10 सालों में ब्‍लॉक मेडीकल ऑफीसर जैसीनगर के द्वारा वित्‍तीय अनियमितताऍं की जा रही हैं इसलिए मेरा निेवेदन है कि इनके पूरे कार्यकाल अवधि की जॉंच पूरी गंभीरतापूर्वक की जाए और जॉंच रिपोर्ट के आधार पर इनके ऊपर सख्‍त कार्यवाही की जाए.

श्री रूस्‍तम सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍या जी ने जो प्रश्‍न इस संबंध में उठाया है इनके खिलाफ कार्यवाही की गई है और इनको निलंबित भी किया गया है. इनके खिलाफ कार्यवाहियॉं प्रथमत: ठीक पाई गई थीं, सही पाई गई थीं, जॉंच में इनकी गलती पाई गई थी और उनकी फायनल जॉंच होने के बाद उनके खिलाफ और भी कार्यवाहियॉं की जायेगीं, इतना मैं आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍या जी को आश्‍वस्‍त करना चाहता हॅूं.

श्रीमती पारूल साहू केशरी --- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी द्वारा बीएमओ के विरूद्ध जो कार्यवाही की गई है उसके लिए मैं उनको बहुत-बहुत बधाई देना चाहॅूंगी और इस कार्यवाही से पूरे मध्‍यप्रदेश में स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं देने वाले जितने भी हमारे जिम्‍मेदार अधिकारी हैं उनके लिए एक बहुत बड़ा संदेश होगा कि अगर वे गड़बड़ी करेंगे तो हमारे माननीय मंत्री जी उनको नहीं छोड़ेगे नहीं. धन्‍यवाद.

अपूर्ण भवनों का निर्माण

[स्कूल शिक्षा]

9. ( *क्र. 708 ) श्री रामप्यारे कुलस्ते : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मंडला जिले के विकासखण्‍ड बीजाडांडी के ग्राम पिण्‍डरई में प्रा.शा. एवं मा.शा. भवन आंगनवाड़ी भवन, पंचायत भवन शाला के अतिरिक्‍त कक्ष निर्माण किन कारणों से पिछले 2008 से अपूर्ण हैं? (ख) निर्माण एजेंसी कौन थी? क्‍या उक्‍त भवनों की राशि प्राप्‍त हो गई है? अगर पूर्ण राशि प्राप्‍त हो गई है तो गड़बड़ी करने वाले के खिलाफ अभी तक क्‍या कार्यवाही की गई? (ग) क्‍या विभाग के पास उक्‍त अधूरे कार्यों को पूर्ण कराने की योजना है, ताकि लोगों को उसका लाभ प्राप्‍त हो सके?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) मण्‍डला जिले के विकासखण्‍ड बीजाडांडी के ग्राम पिण्‍डरई में 2008-09 में प्राथमिक शाला में 01 अतिरिक्‍त कक्ष तथा मा.शा. भवन हेतु 03 अतिरिक्‍त कक्ष स्‍वीकृत किये गए। पंचायत भवन, आंगनवाड़ी भवन तथा प्राथमिक शाला का अतिरिक्‍त कक्ष पूर्ण है। मा.शा. के 3 अतिरिक्‍त कक्ष निर्माण एजेन्‍सी ग्राम पंचायत द्वारा राशि का अनुचित आहरण कर कार्य छत स्‍तर उपरान्‍त अपूर्ण है। (ख) कार्य की निर्माण एजेन्‍सी ग्राम पंचायत है। जिला शिक्षा केन्‍द्र द्वारा सीधे निर्माण एजेन्‍सी के खातों में सम्‍पूर्ण स्‍वीकृत राशि हस्‍तान्‍तरित कर दी गई थी। निर्माण एजेन्‍सी के विरूद्ध प्रकरण क्र./अविअ/रि./01/12/463/31.03.12 अनु.विभा.अधि. राजस्‍व विभाग में लंबित है। (ग) विभाग को उक्‍त राशि की वसूली प्राप्‍त होने के पश्‍चात उक्‍त कार्य को पूर्ण किया जा सकेगा।

श्री रामप्‍यारे कुलस्‍ते -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न था. आंगनवाड़ी केन्‍द्र, प्राथमिक शाला भवन और ग्राम पंचायत का पंचायत भवन से संबंधित है. यह वर्ष 2008 से लंबित है निर्माण कार्य अधूरा है. उसमें मुझे जवाब में मिला है कि प्राथमिक शाला भवन का भवन पूर्ण हो चुका है, पंचायत भवन पूर्ण हो चुका है, माध्‍यमिक शाला भवन के कक्ष बाकी हैं. माननीय अध्‍यक्ष जी, मेरा यह प्रश्‍न है कि जो भवन पूर्ण कर लिये गए हैं उनका उपयोग कब तक प्रारम्‍भ हो जाएगा और दूसरा प्रश्‍न यह है कि जो तीन भवनों के अतिरिक्‍त कक्ष बाकी हैं उनको कब तक पूर्ण कर लिया जायेगा ? इसके साथ ही जो पूर्ण हो चुके भवन हैं उनमें उपयोग तो हो नहीं रहा है. यह इतना संवेदनशील विषय है, छोटे-छोटे बच्‍चे बाहर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं, आंगनवाड़ी भवन का भी उपयोग नहीं हो रहा है.

कुँवर विजय शाह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो भवन पूर्ण हो चुके हैं आने वाले शिक्षा सत्र से उसमें क्‍लास लगेगी, यह हम अनिवार्य रूप से आदेश जारी कर रहे हैं. इसके साथ -साथ जो दो-तीन भवन अधूरे हैं वह इसलिए अधूरे हैं कि कोई सरपंच चुनाव हार गया, कोई सचिव भाग गया, उस पर कार्यवाही चल रही है. कलेक्‍टर के यहां केस चल रहा है. लगभग ऐसे अतिरिक्‍त कक्ष हैं हमारे पास पूरे प्रदेश में 11 हजार 219 अतिरिक्‍त कक्ष जो सरपंच चुनाव हार गए या सचिव महोदय के केस चल रहे हैं जिसके कारण लाखों रूपया हमारा अटका पड़ा हुआ है, पैसे बढ़ रहे हैं, लागत बढ़ रही है और काम नहीं आ रहे हैं. भारत सरकार ने कहा है कि आप सरपंचों से कराइए. अब भारत सरकार को हम पत्र लिख रहे हैं कि ये अतिरिक्‍त भवन हैं छोटे-छोटे काम हैं सरपंच, सचिव भाग जाते हैं तो हमको स्‍कूल की जो कमेटी है उससे न कराने के लिए और सरपंच, सचिव से न कराने के लिए अनुमति प्रदान करें, ताकि हम ब्‍लॉक लेवल पर टेण्‍डर करके ये काम भी कर सकें ताकि समय-सीमा में और उस राशि में उस समय उस काम को पूरा कर सकें. भारत सरकार से अनुमति मिलते ही हम बाकी कामों की तैयारी कर लेंगे.

श्री रामप्‍यारे कुलस्‍ते -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी मेरा ऐसा अनुभव है कि सामान्‍यत: जो ग्राम पंचायत एजेंसी बनकर कुछ निर्माण कार्य, जिनका मैंने उल्‍लेख किया है, उनका निर्माण करती है. ग्राम पंचायतों की मॉनिटरिंग के लिए टेक्निल अधिकारी हमारे नियुक्‍त हैं. इंजीनियर, अस्टिटेंट इंजीनियर ये सब होते हैं. उसमें स्‍टेप बाई मूल्‍यांकन के आधार पर पैसा आहरित किया जाता है परन्‍तु सिर्फ सचिव और ग्राम पंचायत के सरपंच को जिम्‍मेदार ठहराते हैं. चूंकि मुझे लगता है कि इसमें अगर हम संबंधित ग्राम पंचायत के उपयंत्री की उपयुक्‍त कामों के लिए जिम्‍मेदारी तय करेंगे, तो मैं समझता हॅूं कि जो 11 हजार कामों का आप उल्‍लेख कर रहे हैं कि अधूरे हैं इस तरह की स्थितियॉं कम हो पायेंगी और इससे हम बच पायेंगे और पैसे का सदुपयोग हो पायेगा. भवन हमको समय-सीमा में मिल पायेंगे. हमारे काम समय में होने लगेंगे तो क्‍या आप ऐसा कराएंगे ?

कुंवर विजय शाह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, एजेंसियों को निर्देश जारी कर दिये गये हैं और उनकी जवाबदारी भी तय कर दी है यदि समयसीमा पर वह एजेंसी या मॉनिटरिंग करने वाला दोषी पाया जाता है तो उस पर भी कार्यवाही करेंगे. जो 3 बातें स्कूलें की बताई हैं, उसकी हम अलग से जांच करा लेंगे कि क्या उसमें इंजीनियर की लापरवाही है, अगर लापरवाही हुई है तो उस पर भी कार्यवाही करेंगे और वैसे तो मैंने माननीय सदस्य को 8-8 हायर सेकेंडरी स्कूल दिये हैं, आप मुझे धन्यवाद दीजिये.

श्री रामप्यारे कुलस्ते-- मंत्री जी आपको बहुत-बहुत धन्यवाद यदि आप समयसीमा बता देते तो बड़ी मेहरबानी होती.

अध्यक्ष महोदय-- अब नहीं, आपको 8 स्कूल भी मिल गये हैं.

 

राष्‍ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान अंतर्गत व्‍यय राशि

[स्कूल शिक्षा]

10. ( *क्र. 693 ) श्री गोपाल परमार : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) आगर जिले में वर्ष 2013-14 से प्रश्न दिनांक तक राष्‍ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत जिला कार्यालय को कितनी राशि‍ आवंटित की गई है? मदवार जानकारी दें। क्या शासन द्वारा उक्त राशि व्यय करने के नियम बनाये गए हैं? यदि हाँ, तो नियमों की प्रति उपलब्ध करावें? (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार क्‍या शासन द्वारा निर्धारित नियमों का पालन कर व्‍यय किया जा रहा है? यदि हाँ, तो प्राप्‍त मदवार राशि से कितनी राशि किस मद में व्‍यय की गई है? व्‍यय की मदवार जानकारी उपरोक्‍तानुसार पृथक पृथक देवें (ग) प्रश्नांश (क) अनुसार प्राप्त राशि एवं प्रश्नांश (ख) अनुसार व्यय राशि हेतु क्‍या क्रय समिति एवं सामग्री भौतिक सत्यापन समिति बनायी गयी है? यदि हाँ, तो जानकारी देवें? यदि नहीं, तो कारण बतावें? इसके लिए कौन अधिकारी जिम्मेदार है? शासन दोषी अधिकारी के विरुद्ध क्या कार्यवाही करेगा? (घ) प्रश्नांश (क) अनुसार क्‍या क्रय की गई कार्यालय की सामग्री का भौतिक सत्यापन कराया गया है? यदि हाँ, तो भौतिक सत्यापन की वर्ष 2013 से प्रश्न दिनांक तक की जानकारी देवें।

स्कूल शिक्षा मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) नवीन जिला आगर मालवा का गठन दि. 16.08.2013 को हुआ है। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान कार्यालय आगर में अक्टूबर 2015 से आरंभ किया गया है। अतः राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत वर्ष 2015-16 से आगर जिला कार्यालय को राशि प्रदाय की गई। मदवार प्रदाय राशि का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 1 अनुसार है। भारत शासन के निर्देशानुसार वित्तीय मेन्यूअल अनुसार राशि का व्यय किया जाता है। व्यय नियम पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 2 अनुसार है। (ख) जी हाँ। मदवार व्यय की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 1 अनुसार है। (ग) जी हाँ। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 3 एवं 4 अनुसार है। (घ) जी हाँ। सत्यापन रिपोर्ट की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 5 अनुसार है।

 

श्री गोपाल परमार--- माननीय अध्यक्ष महोदय, आगर जिले को हमारे मुख्यमंत्री जी की बड़ी कृपादृष्टि मिली हुई है और उन्होंने 16.8.2013 में आगर को जिला बनाया और उसके तहत सारे विकास कार्य चल रहे हैं और जिस प्रकार से हमारे युवा मुख्यमंत्री पूरे प्रदेश भर में सेवा कर रहे हैं, ऐसे ही स्कूल शिक्षा विभाग के हमारे युवा मंत्री आदरणीय विजय शाह जी यहाँ पर मौजूद हैं. अध्यक्ष महोदय, मैं यह कहना चाहता हूं कि जिस प्रकार से तीसरी बार सरकार बनी और आप लोग पूरी ताकत से जनता की सेवा कर रहे हैं और उसी सेवा का परिणाम मिल रहा है कि सरकार फिर से चौथी बार बनने की तैयारी में है. लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि जो अधिकारी आपको सहयोग नहीं करना चाहते, काम नहीं करना चाहते और वह हमेशा कोर्ट के स्टे ले आते हैं. हमारे यहाँ जिला शिक्षा अधिकारी ने ऐसा ही किया है और शाजापुर जिले से आगर जिले को जितने पद बंटवारे में मिलना चाहिए, नहीं मिले हैं. जैसे फर्नीचर का, कम्प्यूटर का बंटवारा नहीं हो पाया है.

अध्यक्ष महोदय-- यह प्रश्न में है ही नहीं.

श्री गोपाल परमार-- इसमें दो प्रश्न एक साथ हैं. चूंकि वहां जिला शिक्षा अधिकारी कुछ काम ही नहीं करना चाहते हैं. अलमारियों का बंटवारा नहीं हुआ, स्टॉफ का बंटवारा नहीं हुआ और जो पद शाजापुर जिले से आगर जिले को मिलना थे, वह भी नहीं मिले. मंत्री जी, आपको गुमराह किया गया है और आपको प्रश्न से संबंधित सारी जानकारी असत्य दी गई है. मैं आपको वास्तविकता बता रहा हूं क्योंकि मेरा स्वभाव ही अलग प्रकार का है कि मैं साफ-साफ बात करता हूं. प्रश्न के उत्तर में बताया गया कि जिला क्रीड़ा अधिकारी का 1 पद, मुख्य लिपिक का 1 पद, सहायक ग्रेड का 1 पद, सहायक ग्रेड के 2 पद, वाहन चालक का 1 पद हैं. लेकिन यह इन्होंने कागज पर ही दे दिये हैं तो क्या आपने कागज में स्वीकृति दी है. आप वास्तविकता की जांच कराकर उन पदों की वापस पदपूर्ति कराएंगे क्या. माननीय अध्यक्ष, उसके बाद शासन द्वारा कार्यालय के विकास के लिए जो राशि वर्ष 2013-14 और वर्ष 2014-15 में प्राप्त होना चाहिए थी. क्या वह राशि भी उन्होंने नहीं दी और खुद ने रख ली है, क्या इस बात की भी जांच कराएंगे.

अध्यक्ष महोदय-- इन दो प्रश्नों का उत्तर तो ले लीजिये.

कुंवर विजय शाह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मुख्यमंत्री जी की मंशानुसार जो नया जिला बना है और उसमें जहाँ तक कर्मचारियों का बंटवारा है, फर्नीचर का बंटवारा है वह बंटवारा हम पूरी ईमानदारी से कर रहे हैं. मैं माननीय सदस्य की मंशा समझ गया है हम जांच करा लेंगे कि बराबर बंटवारा हुआ है या नहीं और जो लिखा है वह वहाँ पहुंचा है या नहीं पहुंचा है. अगर वह नहीं पहुंचा होगा तो संबंधित अधिकारी पर सख्त कार्यवाही करेंगे.

श्री गोपाल परमार-- अध्यक्ष महोदय, मैं दूसरी बात बताना चाहता हूं कि वहाँ मध्याह्न भोजन की भी कोई व्यवस्था नहीं है और सारे स्कूलों में, संविदा शिक्षको ने जो संविलियन होना था उसमें उस अधिकारी ने कोई पद का सदुपयोग नहीं किया और 5-5 दिन तक हड़ताल करी, सारे कर्मचारी अधिकारी परेशान रहे. कलेक्टर ने चार-पांच बार जिला शिक्षा अधिकारी के लिए लिखकर दे दिया.

अध्यक्ष महोदय-- इससे यह प्रश्न उद्भूत नहीं होता है.

श्री गोपाल परमार-- अध्यक्ष महोदय, क्या उस जिला शिक्षा अधिकारी को हटाकर इन सब बातों की जांच करवा लेंगे यह बता दीजिये.

अध्यक्ष महोदय-- मंत्री जी,अब मुख्य प्रश्न यह है.

कुंवर विजय शाह विधायक जी की बातों से ऐसा लगता है कि वह उसकी कार्यप्रणाली से संतुष्‍ट नहीं है उनकी कार्यप्रणाली की जांच कर लेंगे.

श्री गोपाल परमार माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कार्यप्रणाली की बात नहीं है. उसको पद से हटाना पड़ेगा. मैं इस बात से सहमत नहीं हूं. मैंने पहले ही आपसे संरक्षण चाहा है. मैं विजय शाह जी से चाहता हूं कि आप जैसा युवा व्‍यक्ति यदि आपको क्षेत्र में कोई अधिकारी काम नहीं करता तो आप क्‍या करते बताइए? माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उसको हटाना पड़ेगा उसकी कार्यपद्धति से मैंने आपके डी.पी.आई. को बताया आपके सारे अधिकारियों को पता है.

अध्‍यक्ष महोदयउन्‍होंने जांच कराने का बोल दिया है.

श्री गोपाल परमार-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसके बाद भी अगर उसके खिलाफ कार्यवाही नहीं करते तो क्‍या मतलब रह जाएगा. हमारे विधायक बनने का क्‍या मतलब है माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप यह बताइए. आप अपने क्षेत्र की चिन्‍ता कर रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदयआप बैठ जाइए. वह जवाब दे रहे हैं.

कुंवर विजय शाह माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे बहुत सीनियर विधायक हैं. अगर वह कुछ बोल रहे हैं तो कुछ न कुछ बात होगी ही, उसको हटा दिया जाएगा.

श्री गोपाल परमारबहुत बहुत धन्‍यवाद.

 

उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों में मेडिकल स्‍टाफ की पूर्ति

[लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]

11. ( *क्र. 2031 ) श्री कमलेश्‍वर पटेल : क्या लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र मेडिकल स्‍टाफ की कमी की वजह से बंद रहते हैं? (ख) यदि हाँ, तो इसमें स्‍टाफ बढ़ाने के लिये कौन से कदम उठाये जा रहे हैं अथवा उठा लिये हैं?

लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) जी नहीं। (ख) प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

श्री कमलेश्‍वर पटेल-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा जो प्रश्‍न था मेडिकल स्‍टाफ की कमी उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों में माननीय मंत्री जी का जवाब आया है कि प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता. जब प्रश्‍न उपस्थित ही नहीं होता है तो हम क्‍या प्रश्‍न करें.

अध्‍यक्ष महोदय(क) में तो नहीं लिखा (ख) में लिखा है कि प्रश्‍न उपस्थित होता है.

श्री कमलेश्‍वर पटेल माननीय अध्‍यक्ष महोदय,अजब प्रश्‍न उपस्थित ही नहीं होता है, जब क्रियान्‍वयन ही नहीं करना है तो फिर क्‍या प्रश्‍न करें. पूरे मध्‍यप्रदेश में सभी अस्‍पतालों में स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों की कमी है और हमारे विधानसभा क्षेत्र में भी कई उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र बनकर तैयार हैं परंतु उनमें ताले लगे हुए हैं. भवन बने हुए लगभग दो साल से ज्‍यादा का समय हो गया है और जहां लोकार्पण भी हो गया है. हम खुद भी वहां गए थे. वहां भी ताला लगा रहता है. यह पूरे मध्‍यप्रदेश की समस्‍या है.

अध्‍यक्ष महोदयआपने कोई स्‍पेसिफिक प्रश्‍न नहीं पूछा है. कौन से स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र बंद रहते हैं. कौन- कौन से स्‍टाफ के लोग हैं. आपने जो प्रश्‍न पूछा है आप जरा उसको पढ़ लें. यह वेग प्रश्‍न है. इसमें स्‍पेसिफिक कुछ है ही नहीं.

श्री कमलेश्‍वर पटेलमैं आपको नाम बता देता हूं.

अध्‍यक्ष महोदयआप अब स्‍पेसिफिक प्रश्‍न पूछ लीजिए हम आपको अनुमति दे रहे हैं.

श्री कमलेश्‍वर पटेलहमारे सिंहावल ब्‍लॉक में ब‍लेहा उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र, सिंहावल ब्‍लॉक में ही चमरउहा, पहाड़ी, हटवा, भिलवार, गैरूआ, कई जगह बनकर तैयार हैं पर स्‍वास्‍‍थ्‍य कर्मियों की कमी के वजह से उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र का संचालन नहीं हो रहा है. ऐसे कई अन्‍य उदाहरण भी हैं. कब तक चालू हो जाएगा, कब तक स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों की व्‍यवस्‍था हो जाएगी.

श्री रुस्‍तम सिंह माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इस बात के लिए माननीय विधायक जी को धन्‍यवाद देता हूं कि उन्‍हें अपने विधान सभा क्षेत्र की ज्‍यादा चिन्‍ता नहीं की पूरे प्रदेश की चिन्‍ता उन्‍होंने की अपनी विधानसभा को छोड़कर पूरे प्रदेश के लिए प्रश्‍न पूछा. यद्यपि वह शामिल है. मैं आपको बताना चाहता हूं कि आपके दो ब्‍लॉक आते हैं एक तो सिंहावल आता है और एक देवसर आता है यह जानकारियां आपने मांगी नहीं हैं लेकिन मैं जानता था कि आप यही जानना चाहेंगे इसलिए हमने यह जानकारियां निकलवा लीं. सिहावल में 39 उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र हैं उनमें से 32 भरे हुए हैं 7 खाली हैं इसी तरह से देवसर में 58 उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र हैं 51 भरे हुए हैं 7 खाली हैं. जो 7- 7 पद खाली हैं उनमें मैं आपको आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि हम उनको भी शीघ्र भर देंगे. हमारे यहां पूरे प्रदेश में 798 वेकेन्‍सीज़ हैं हैं इनकी हम पूर्ति करने जा रहे हैं. प्रक्रिया चालू हो गई है. जैसे ही होती है आपके साथ- साथ दोनों ब्‍लॉक के भी भर दिए जाएंगे आपको और कहीं भी कमी है तो आपको मेरे से व्‍यक्तिगत बात कर सकते हैं. इनसे, इनके पिताजी से, इनके परिवार से तो यह तो मेरे से बात कर ही सकते हैं कोई दिक्‍क्‍त नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदयइसीलिए तो उनने आपसे पूरे प्रदेश भर का पूछ लिया है.

श्री कमलेश्‍वर पटेलमाननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी का बहुत बहुत धन्‍यवाद, परंतु मेरा निवेदन सिर्फ इतना है कि कब तक भर दिए जाएंगे दूसरा माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने एक सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र के लिए 2013 में भूमि पूजन किया था

अध्‍यक्ष महोदयस्‍थान बताइए.

श्री कमलेश्‍वर पटेलतहसील मुख्‍यालय बहरी और इसी तरह देवसर जो ब्‍लॉक मुख्‍यालय है. वहां का सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र बंद करके दूसरी जगह प्राथमिक स्‍वास्‍य केन्‍द्र में तब्‍दील कर दिया है. यह दोनों कब तक हो जाएगा यह भी माननीय मंत्री जी के माध्‍यम से जानना चाहेंगे.

अध्‍यक्ष महोदयइससे उद्भूत कुछ नहीं होता है.

श्री रुस्तम सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, कहीं से कहीं तक यह उद्भूत नहीं होता है. मैंने कहा ही है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द की बाकी जो सुविधा है उस पर भी हम लोग निश्चित रुप से सहानुभूतिपूर्वक विचार भी करेंगे और जन स्वास्थ्य के लिए जो सुविधाएं और दी जा सकती हैं उस पर भी विचार करेंगे.

 

 

 

 

सिविल सर्जन के विरूद्ध प्राप्‍त शिकायत पर कार्यवाही

[लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]

12. ( *क्र. 1760 ) श्री मुकेश नायक : क्या लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) पन्‍ना जिले के जिला चिकित्‍सालय में पदस्‍थ स‍िविल सर्जन डॉ. राजेश श्रीवास्‍तव के खिलाफ जिला कलेक्‍टर, लोक स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जी को की गई शिकायतों के संबंध में अब तक की गई कार्यवाही की जानकारी देवें? (ख) डॉ. राजेश श्रीवास्‍तव वरिष्‍ठता सूची में काफी पीछे हैं, फिर भी वरिष्‍ठों की उपेक्षाकर उन्‍हें सिविल सर्जन किस कारण बनाया गया? (ग) डॉ. राजेश श्रीवास्‍तव द्वारा पन्‍ना जिला चिकित्‍सालय परिसर में डॉक्‍टरों और अन्‍य कर्मचारियों को आवास आवंटन के मामले में नियमों की उपेक्षा करने और अपात्रों को आवास आवंटन करने की शिकायत पर शासन ने क्‍या कार्यवाही की है?

लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) पन्ना जिले के जिला चिकित्सालय में सिविल सर्जन के पद पर पदस्थ डॉ. राजेश श्रीवास्तव के विरूद्ध कलेक्टर को प्राप्त दो शिकायतों का जाँच प्रतिवेदन, कलेक्टर पन्ना द्वारा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से प्राप्त की जो कलेक्टर पन्ना के अधीन परीक्षणाधीन है, के अतिरिक्त संचालनालय स्तर से डॉ. राजेश श्रीवास्तव, सिविल सर्जन पन्ना के विरूद्ध प्रशासनिक पद पर रहते हुये शासन को आर्थिक क्षति पहुँचाये जाने संबंधी शिकायत प्राप्त होने पर प्राप्त शिकायत जाँच हेतु क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवायें, सागर की ओर भेजते हुये जाँच प्रतिवेदन चाहा गया जो अप्राप्त है। (ख) प्रशासकीय पदों का दायित्व, अधिकारी की कार्य दक्षता एवं उनके व्यवहार कुशलता पर उन्हें सौंपा जाता है अतः यह कहना सही नहीं होगा कि डॉ. राजेश श्रीवास्तव वरिष्ठता सूची में काफी पीछे हैं, फिर भी वरिष्ठों की उपेक्षाकर उन्हें सिविल सर्जन बनाया गया। (ग) पन्ना जिला चिकित्सालय परिसर में डॉ. राजेश श्रीवास्तव द्वारा डॉक्‍टरों/अपात्रों को शासकीय आवास आवंटन के संबंध में डॉ. आलोक गुप्ता द्वारा शिकायत करने के पश्चात उनके द्वारा माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका क्रमांक डब्ल्यू.पी. 14204/2015 दायर की जिस पर माननीय न्यायालय द्वारा उक्त याचिका पर आदेश दिनांक 26.08.2015 पारित किया गया, जिस पर सागर कमिश्नर द्वारा डॉ. गुप्ता को समक्ष में उपस्थित होने के निर्देश देते हुये माननीय न्यायालय द्वारा पारित आदेश के संबंध में यह निर्णय दिया गया कि शासकीय आवास क्रमांक एफ से आई टाईप के निवास स्थानों के संबंध में किसी स्थान विशेष में कार्यभार ग्रहण करने की तारीख उसकी इस प्रकार के निवास स्थान के लिये अग्रता तारीख होगी, किंतु यह केवल तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पर ही लागू होगा, शिकायतकर्ता के स्वयं चिकित्सा अधिकारी के पद पर पदस्थ होने के साथ ही द्वितीय श्रेणी की परिधि में आने के परिणामस्वरूप उक्त प्रावधान उन पर लागू नहीं होता।

श्री मुकेश नायक--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न के उत्तर में स्वास्थ्य मंत्री जी ने यह कहा है कि किसी जूनियर डॉक्टर को उसकी दक्षता और व्यवहार कुशलता के आधार पर सीनियर चिकित्सक के ऊपर बैठाया जा सकता है. दूसरा प्रश्न जो मैंने पूछा था उसके उत्तर में माननीय मंत्री जी ने यह कहा है कि उनके विरुद्ध जो शिकायतें प्राप्त हुईं थीं वह शिकायतें कलेक्टर साहब को भेजी गईं व इनके संभागीय अधिकारी को भेजी गईं. दो प्रश्न मैं पूछना चाहता हूँ और प्रश्न पूछने के पहले एक बात और इनसे कहना चाहता हूँ कि देखिए बहुत अल्प समय हुआ है आपको मंत्री बने हुए और कभी कभी ऐसा होता है कि जैसे एक खराब पड़ोसी अगर मिल जाए तो उसके द्वारा फेंके गए कचरे को एक भले पड़ोसी को उठाना पड़ता है.

माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा माननीय मंत्री जी से यह प्रश्न है कि मंत्री जी यह बताने की कृपा करें कि उनसे कितने वरिष्ठ चिकित्सक उस हास्पिटल में मौजूद हैं, जिनकी अनदेखी करके इनको बड़े पद पर बैठाया गया. दूसरी बात एनएमडीसी ने अस्पताल के लिए 50 लाख रुपये स्वीकृत किए थे और उन्होंने उससे दोगुने पैसे खर्च कर दिए तो यह जो दोगुने पैसे खर्च कर दिए. इसका स्त्रोत क्या था ? यह शिकायत का एक हिस्सा है. किसकी सहमति से इन्होंने यह पैसे खर्च किए. इसका उत्तर आने के बाद एक प्रश्न और पूछूंगा.

श्री रुस्तम सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मुकेश जी तो बहुत विद्वान हैं. पहला प्रश्न जो इसमें उद्भूत नहीं होता है, मैं तो इतना ही कहना चाहता हूँ कि पड़ोसी इतने साफ-सुथरे हैं कि उस पर कुछ भी करने की जरुरत नहीं है लेकिन हम और बेहतर करें इसका प्रयास जरुर करेंगे. माननीय का एक प्रश्न और है कि थोड़ा सीनियरिटी में थोड़े कम डॉक्टर को सिविल सर्जन बना दिया. इसमें मैं विद्वान सदस्य को यह बताना चाहता हूँ कि ऐसे गवर्मेंट के रुल्स नहीं हैं कि एक्सीक्यूटिव एडमिनिस्ट्रेटिव जो पद होगा उस पर स्ट्रिक्टली सीनियरिटी से ही बैठेंगे और अगर ऐसा होता तो प्रदेश में बहुत गड़बड़ हो जाती क्योंकि जितने एडमिनिस्ट्रेटिव पद हैं एसपी के कलेक्टर के इनकी कभी सीनियरिटी से पदस्थापना नहीं हुआ करती है. अगर सीनियरिटी से पदस्थापना होती तो मैं इन्हीं की सरकार में जबलपुर का एसपी ही नहीं बन पाता.

अध्यक्ष महोदय--यह नियम उनको भी मालूम है. इस पर बहस नहीं होगी. मंत्री जी ने उत्तर दे दिया है. आपको एक प्रश्न और पूछना था वह पूछ लीजिए.

श्री मुकेश नायक--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह तर्क है किसी जिले में उसी संस्थान में अगर ऐसा कोई आईपीएस अधिकारी हो जो वरिष्ठ हो और उसी संस्थान में एक ऐसा आईपीएस अधिकारी हो जो उससे जूनियर हो क्या उसको उसके ऊपर बैठाया जा सकता है.

श्री कैलाश चावला--उसका रिकार्ड अच्छा नहीं होगा.

श्री मुकेश नायक--नहीं नहीं रिकार्ड अच्छा है.

श्री रुस्तम सिंह--अध्यक्ष महोदय, यह जानते हैं कि आईपीएस अधिकारी एसपी के रुप में जिले में एक ही होता है. डाक्टर्स तो दस होते हैं.

श्री मुकेश नायक--डीआईजी होता है, आईजी होता है, एसपी होता है. एक प्रश्न और बचा है.

वन मंत्री (डॉ. गौरीशंकर शेजवार)--माननीय अध्यक्ष महोदय, अभी आईपीएस पर जो चर्चा हुई है इसको विलोपित किया जाए क्योंकि डॉक्टरों से जुड़ा हुआ प्रश्न था और डॉक्टर की परिस्थितियां और आईएएस और आईपीएस की परिस्थितियां बहुत भिन्न हैं. डॉक्टरों की बेचारों की स्थिति यह होती है कि वे असिस्टेंट सर्जन अपाईंट होता है और रिटायर भी उसी पद पर होता है. अध्यक्ष महोदय, आप स्वयं इस पीड़ा को समझते हैं और आपके बैच के लोग इस बात को समझते हैं. यहां आईपीएस की यह स्थिति है कि जब तक सर्विस में रहे तब तक आईपीएस रहे और बाद में अब जबलपुर भी याद कर रहे हैं मंत्री बनने के बाद. अध्‍यक्ष महोदय :- इसमें विलोपित करने का क्‍या है.

प्रभारी नेता प्रतिपक्ष ( श्री बाला बच्‍चन) :- माननीय मंत्री जी सरकार तो आप चला रहे हो. यदि आपकी भी पीड़ा है तो आपने अभी तक इसमें परिवर्तन क्‍यों नहीं कराया.

श्री गोपाल भार्गव :- अध्‍यक्ष महोदय, जब डॉक्‍टर जब मंत्री बन जाये तो कभी रिटायर ही नहीं होते हैं.

श्री मुकेश नायक :- डॉक्‍टर साहब, खुद स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री रहे हैं.

डॉ गौरीशंकर शेजवार :- भार्गव जी ने मेरी प्रशंसा की है या बुराई कर रहे हैं. यह तय हो जाये, मेरे बगल में बैठते हैं और यह क्लियर बात नहीं करते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय :- नहीं, क्लियर ही है लगभग कि वह परेशान है .

श्री मुकेश नायक :- मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि जो शिकायत करता की शिकायत है, यह प्रश्‍न उसी का हिस्‍सा है, इसीलिये अप्रासंगिक नहीं है, यह उद्भूत होता है. पिछले वर्ष जुलाई में मेडिकल बोर्ड का गठन हुआ, जिसमें उनके प्रमाण पत्र बनाना थे, जिनकी आंखे खराब हैं. उस मेडिकल बोर्ड में डॉक्‍टर के बजाय एक क्‍लेरिकर स्‍टॉफ को उस मेडिकल बोर्ड में रख दिया गया है और उसने यह प्रमाणपत्र बना दिये कि किसको कितना दिख रहा है. उस पर कोई कार्यवाही करेंगे क्‍या ?

अध्‍यक्ष महोदय:- यह उद्भूत कैसे होगा इस प्रश्‍न में.

श्री रूस्‍तम सिंह :- अध्‍यक्ष महोदय, अधिक ज्ञान होना झंझट की बात है.

श्री मुकेश नायक :- अध्‍यक्ष महोदय, शिकायतकर्ता ने कलेक्‍टर से शिकायत की है.

श्री रूस्‍तम सिंह :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इतना अधिक ज्ञान मुकेश जी को है कि वह जिसका कहीं कोई सरोकार नहीं है

श्री मुकेश नायक :- नहीं, वह शिकायत का हिस्‍सा है, जो शिकायतकर्ता ने कलेक्‍टर को शिकायत की है.

 

 

जिला/राज्‍य बीमारी सहायता निधि अंतर्गत भुगतान

[लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]

13. ( *क्र. 305 ) श्रीमती सरस्‍वती सिंह : क्या लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या जिला/राज्‍य बीमारी सहायता निधि के अंतर्गत गरीबी रेखा के मरीजों को मान्‍यता प्राप्‍त अस्‍पतालों में ईलाज कराने पर सहायता राशि का भुगतान संबंधित अस्‍पताल को किया जाता है? (ख) यदि हाँ, तो सिंगरौली जिले में वर्ष 2015 एवं 2016 से प्रश्‍न दिनांक तक कितने ऐसे मरीजों को सहायता राशि भुगतान की गई है? अस्‍पतालवार विवरण देवें (ग) क्‍या सहायता राशि के प्रकरण प्राप्‍त होने से लेकर स्‍वीकृत करने तक की कोई समय-सीमा निर्धारित है? (घ) ऐसे कितने प्रकरण हैं, जिन्‍हें सहायता राशि अभी तक उपलब्‍ध नहीं कराई गई है?

लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) जी हाँ। (ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) आवेदन प्राप्त होने के 10 कार्य दिवस के अन्दर प्रकरण स्वीकृत करने की समय-सीमा निर्धारित है। (घ) निरंक।

परिशिष्ट - ''दो'

श्रीमती सरस्‍वती सिंह :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से मेरा सवाल था राज्‍य बीमारी सहायता निधि के बारे में, मेरे क्षेत्र में अभी भी बहुत सारे आवेदन पड़े हुए हैं, उनको सहायता नहीं दी गयी है. क्‍या माननीय मंत्री जी उनको सहायता दी जायेगी ?

श्री रूस्‍तम सिंह :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न काफी संवेदनशील है. मैं इतना विश्‍वास दिलाना चाहता हूं कि सरकार के पास पैसे की कोई कमी नहीं है, अगर कोई भी प्रकरण पेंडिंग होगा तो शीघ्रता से उसको मंजूर भी करवा देंगे और भविष्‍य में भी कोई प्रकरण पेंडिंग नहीं रहेगा. यह भी सुनिश्चित करा देंगे.

श्रीमती सरस्‍वती सिंह :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें जो समय सीमा दी गयी है कि 10 दिन के अंदर आवेदन स्‍वीकृत किया जाता है. परन्‍तु यह सत्‍य नहीं है. 10 दिन के अंदर कोई आवेदन स्‍वीकार नहीं किया जाता है. अध्‍यक्ष महोदय, आवेदन स्‍वीकृत होने में सालों लग जाते हैं. मैं निवेदन करना चाहती हूं कि यदि इस तरह से होगा तो जो सबसे ज्‍यादा जो बीमार लोग रहते हैं तो आपने जो नियम बनाया है उसका पालन किया जाये. कभी तो मरीज खत्‍म हो जाते हैं, तब सहायता मिलती है.

श्री रूस्‍तम सिंह :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यदि एक भी ऐसा प्रकरण है तो माननीय सदस्‍य बता देंगे तो जो दोषी होगा उस पर कड़ी कार्यवाही करेंगे. यह सुनिश्चित किया जायेगा.

स्‍कूल भवन निर्माण हेतु आरक्षित भूमि पर से अतिक्रमण को बेदखल किया जाना

[आदिम जाति कल्याण]

14. ( *क्र. 300 ) श्री कालुसिंह ठाकुर : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या धार जिले की उप तहसील नालछा के पटवारी हल्‍का नं. 168 (70) ग्राम बगडी की आबादी भूमि में स्थित शासकीय भूमि, खसरा नं. 624 रकबा 1.202 हेक्‍टेयर भूमि कलेक्‍टर, जिला धार द्वारा प्रकरण क्र. 121 बी, 90-91 में आदेश दिनांक 27.06.1991 एवं तहसील आदेश क्र. 195/री-3/91, दिनांक 06.08.1991 के माध्‍यम से सहायक आयुक्‍त आदिवासी विकास धार को कन्‍या उच्‍चतर माध्‍यमिक विद्यालय एवं विज्ञान कक्ष निर्माण हेतु हस्‍तांतरित की गई थी? (ख) कन्‍या उच्‍चतर माध्‍यमिक विद्यालय बगडी हेतु आरक्षित उक्‍त भूमि पर भूखण्‍डों का विक्रय किसके संरक्षण में किसके द्वारा किया गया है? क्‍या शासन दोषी व्‍यक्तियों के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही करेगा अथवा यदि अतिक्रमण हो रहा है तो क्‍या विभाग अतिक्रमण को बेदखल कर विद्यालय हेतु आवंटित भूमि को सुरक्षित करेगा? यदि हाँ, तो कब तक?

आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) : (क) जी हाँ। (ख) कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बगडी हेतु आरक्षित उक्त भूमि पर भूखण्डों का विक्रय नहीं किया गया है। ग्राम पंचायत हल्का पटवारी बगडी तहसील धार द्वारा दिनांक 25.11.2016 को मापन अनुसार शासकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय एवं शासकीय कन्या प्राथमिक विद्यालय, बगडी हेतु भूमि क्षेत्रफल 11522 वर्ग फिट (0.107 हेक्टेयर) पर स्कूल संचालित किया जा रहा है। शेष भवन पर अतिक्रमण है। चूँकि उक्त सर्वे नम्बर व रकबे की भूमि शासकीय अभिलेख में आबादी में दर्ज होने के कारण संबंधित ग्राम पंचायत को अतिक्रमण हटाने के अधिकार हैं। निश्चित समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

श्री कालुसिंह ठाकुर :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न बगडी माध्‍यमिक विद्यालय में अतिक्रमण के संबंध में है. इसमें जानकारी मिली है कि भवन पर अतिक्रमण तो है. पंचायत इस अतिक्रमण को हटायेगी. मैं माननीय मंत्री जी से अनुरोध करता हूं कि पंचायत के पास ऐसा कोई अमला नहीं होता है. भवन पर भी अतिक्रमण है और प्रांगण पर भी अतिक्रमण है. अब उसमें विभाग ने कहा है कि पंचायत अतिक्रमण हटाये. लेकिन पंचायत अतिक्रमण हटाने में सक्षम नहीं है, उसके पास अमला नहीं है.

श्री लाल सिंह आर्य :- अध्‍यक्ष महोदय, एक तो भवन पर अतिक्रमण नहीं है. कोई टंकण की त्रुटि हो गयी होगी. जमीन पर अतिक्रमण है, हमने उसको स्‍वीकार भी किया है. जहां तक हटाने की कार्यवाही है. उसके बारे में प्राचार्य ने, सरपंच ने भी लिखा है और अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही हो यह सरकार की भी मंशा है. इसलिये पुन: यहां से निर्देश जारी करेंगे कि अतिक्रमण जल्‍दी से जल्‍दी हटाया जाये.

श्री कालुसिंह ठाकुर :- अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी कह रहे हैं कि अतिक्रमण नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय :- मंत्री जी बोल रहे हैं कि अतिक्रमण है.

श्री कालुसिंह ठाकुर :- माननीय अध्‍यक्ष जी, अभी बता रहे हैं कि गल्‍ती से लिखा गया है. जबकि उसमें दुकान और चाय की गुमटी चल रही है.

श्री लाल सिंह आर्य :- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने भवन का कहा है, मैंने कहा है कि जमीन पर अतिक्रमण है.

श्री कालुसिंह ठाकुर :- मंत्री जी भवन पर लिखा है और वहां पर चाय की दुकान चल रही है.

अध्‍यक्ष महोदय :- मंत्री जी, आप भवन और जमीन का सब अतिक्रमण हटवा दीजिये. मंत्री जी जो भी अतिक्रमण हो चाहे वह भवन का हो या जमीन को हो, उसको हटाने का निर्देश आप दे दीजिये. आपने दिये भी हैं और मानीटरिंग कर लीजिये.

श्री लाल सिंह आर्य :- जी हां. पुन: निर्देश जारी कर देंगे.

श्री कालुसिंह ठाकुर :- बहुत-बहुत धन्‍यवाद्.

 

प्रश्न संख्या--15

जिला चिकित्‍सालय सागर के ट्रामा सेंटर को प्रारंभ किया जाना

[लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]

15. ( *क्र. 1489 ) श्री शैलेन्द्र जैन : क्या लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सागर जिला चिकित्‍सालय परिसर में नव निर्मित ट्रॉमा सेंटर प्रश्‍न दिनांक तक प्रारंभ नहीं हुआ है? यदि हाँ, तो किन कमियों के कारण ट्रामा सेंटर प्रारंभ नहीं हुआ है? (ख) क्‍या जिला चिकित्‍सालय सागर के सिविल सर्जन ने ट्रॉमा सेंटर प्रारंभ कराने हेतु वर्ष 2016 में कुछ आवश्‍यक कार्यों को कराने के लिए शासन को पत्र लिखा था? यदि हाँ, तो कौन-कौन से कार्य कराने के लिए पत्र में लेख किया गया था? उस पर शासन द्वारा प्रश्‍न दिनांक तक क्‍या कार्यवाही की गयी? (ग) शासन कब तक ट्रॉमा सेंटर को प्रारंभ करा देगा?

लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) जी हाँ। ट्रामा सेन्टर के निर्माण कार्य की कमियों के कारण। जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी हाँ। जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) यथासंभव शीघ्र।

परिशिष्ट - ''तीन''

 

श्री शैलेन्द्र जैन--अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी का ध्यानाकर्षित करना चाहता हूं कि सागर चिकित्सालय में जो ट्रामा सेन्टर बनना था उसकी स्वीकृति वर्ष 2011 में दी गई थी और 15 माह में यह काम कम्पलीट होना था, यह ट्रामा सेन्टर है, कोई बिल्डिंग का विषय नहीं है. दिसम्बर 2012 में जो कार्य पूरा हो जाना चाहिये था आज 2016 दिसम्बर होने जा रहा है, यह काम कब तक पूरा होगा? इसमें जो ठेकेदार दोषी हैं क्या उस ठेकेदार के खिलाफ कार्यवाही करके उसको ब्लेकलिस्टेड करने की कार्यवाही की जाएगी ?

श्री रूस्तम सिंह--अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को इस बात के लिये धन्यवाद देना चाहता हूं कि इन्होंने स्वयं रूचि लेकर सागर के डिस्ट्रिक्ट हॉस्पीटल में बहुत काम कराये हैं. मैंने स्वयं विधायक जी के साथ इसको देखा और मुझे यह लगा कि कोई भी चुने हुए प्रतिनिधि हैं वह समाज सेवा में काम करते हैं या रूचि लेते हैं तो कितना बेहतर काम शासन के सहयोग से हो सकता है, इसके साथ-साथ इन्होंने ट्रामा सेन्टर के निर्माण में बहुत रूचि ली है उसको व्यक्तिगत देखा इसीलिये इनको पूरी जानकारी है. वहां पर 99 प्रतिशत कमियों को ठीक कर दिया गया है. मुश्किल से छोटी-छोटी चीजें बची हैं, वह भी बहुत ही जल्दी ठीक हो जाएंगी, रहा सवाल ठेकेदार का तो उसको ब्लैकलिस्टेड किया जाए उसकी प्रक्रिया अलग है, इसको माननीय विधायक जी भी जानते हैं, यह हेल्थ विभाग का विषय नहीं है, लेकिन उसके लिये जरूर लिखेंगे कि इसके ऊपर ध्यान रखा जाए कि यह आदमी काम कैसा करता है. रहा सवाल ट्रामा सेन्टर के पूरी तरह से सही होकर चालू करने का तो बहुत जल्दी वह चालू कर दिया जाएगा, क्योंकि स्वयं माननीय विधायक जी बहुत रूचि लेते हैं, जब वह सागर रहते हैं हर 15 वें दिन जाकर के देखते हैं कि ट्रामा सेन्टर कितना बन गया है, जब वह इतनी रूचि लेते हैं तो मैं यह कहता हूं कि जब इसका पूर्ण निर्माण होगा तो उसका काफी श्रेय माननीय शैलेन्द्र जैन जी को जाएगा.

श्री शैलेन्द्र जैन--अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी का धन्यवाद. आप भी सागर आये हैं मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि ट्रामा सेन्टर में भवन के अलावा जो इक्यूपमेंट वगैरह हैं उनको चालू करना है वह इक्यूपमेंट हम लोगों को कब तक मिल जाएंगे और भवन तैयार होने के बाद ट्रामा सेन्टर शुरू नहीं हो पाएगा उसमें जो फेक्लटीज की आवश्यकता है और उसमें सबसे बड़ी आवश्यकता है वहां न्यूरोसर्जन की यह सारी व्यवस्थाएं आप कितने दिनों में पूरी करा देंगे?

श्री रूस्तम सिंह--अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य भी जानते हैं कि डिस्ट्रिक्ट हॉस्पीटल में न्यूरोसर्जन नहीं हुआ करते हैं.

श्री शैलेन्द्र जैन--अध्यक्ष महोदय, ट्रामा सेन्टर के लिये बोल रहे हैं ?

श्री रूस्तम सिंह--अध्यक्ष महोदय, ट्रामा सेन्टर में भी न्यूरोसर्जन, न्यूरोफिजीशियन अभी तो नहीं हैं, लेकिन ट्रामा सेन्टर जो मोटे तौर पर उसमें जो कार्यवाहियां हो सकती हैं अथवा जो इलाज हो सकता है उसके इक्यूपमेंट उसके डॉक्टर्स की पूर्ण व्यवस्था कर दी जाएगी.

 

 

 

स्कूल भवनों का निर्माण

[स्कूल शिक्षा]

16. ( *क्र. 1944 ) श्री पुष्‍पेन्‍द्र नाथ पाठक : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्राथमिक शाला से माध्यमिक शाला एवं माध्यमिक शाला से हाई स्कूल तथा हाई स्कूल से हायर सेकेण्‍ड्री में उन्नयित शालाओं में नवीन भवन के निर्माण हेतु क्या प्रक्रिया है? विधानसभा क्षेत्र बिजावर में उपरोक्त उन्नयन की गई शालाओं में कब तक भवन निर्माण किया जा सकेगा? (ख) विधानसभा क्षेत्र बिजावर में शासकीय उ.मा.वि. सटई, मातगुवा, गुलगंज में क्या छात्र संख्या के मान से विद्यालय में पर्याप्त कक्ष हैं? यदि नहीं, तो क्या इन विद्यालयों में नवीन कक्ष निर्माण या नवीन भवन निर्माण की आवश्यकता है? यदि हाँ, तो नवीन कक्ष या भवन निर्माण किया जायेगा? यदि हाँ, तो कब तक?

 

स्कूल शिक्षा मंत्री (कुंवर विजय शाह)-

 

 

 

श्री पुष्पेन्द्र नाथ पाठक--अध्यक्ष महोदय, हमारे माननीय शिक्षा मंत्री जी से यह आग्रह है कि उन्होंने जो जवाब दिया है उसमें आया है कि सटई में 1429 विद्यार्थियों के बीच में 6 कमरे हैं, गुलगंज में 721 बच्चों के बीच में 5 कक्ष हैं, मातगुवा में 791 में 11 कक्ष हैं. मेरा निवेदन यह है कि माननीय मंत्री जी यह जवाब दे दें कि इनके लिये जो अतिरिक्त कक्ष अथवा भवन की आवश्यकता है उसमें बजट का प्रावधान अभी तक नहीं हुआ है तो इसके लिये क्या बजट का प्रावधान अगले बजट सत्र में करायेंगे क्या ?

कुंवर विजय शाह--अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य को खुश होना चाहिये आपके निवेदन पर हमने 6-6 हाईस्कूल की बिल्डिंग्स आपको दी है.

श्री पुष्पेन्द्र नाथ पाठक--अध्यक्ष महोदय, 6 हाईस्कूल तथा 6 हायर सेकेन्ड्री स्कूल दिये हैं इसके लिये आपका बहुत बहुत धन्यवाद और अभी लिस्ट में हैं 10 स्कूल और चाहिये.

कुंवर विजय शाह--अध्यक्ष महोदय, अभी इन्होंने 2 हाईस्कूल या एक हायर सेकेन्ड्री स्कूल और दो अतिरिक्त कक्ष मांगे हैं उसमें भी एक हायर सेकेन्ड्री स्कूल के लिये 1 करोड़ 55 लाख रूपये हम आने वाले सत्र में जारी करवा देंगे और अतिरिक्त कक्ष के लिये भी राशि जारी करवा देंगे.

श्री पुष्पेन्द्र नाथ पाठक--अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी को इसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद.

रेडक्रास सोसायटी (मुरैना) के कर्मचारियों की सेवा में पुन: बहाली

[लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]

17. ( *क्र. 2035 ) श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार : क्या लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या जिला चिकित्‍सालय मुरैना की रेडक्रास सोसायटी द्वारा लंबे समय से पदस्‍थ नर्सिंग, इलेक्‍ट्रीशियन एवं सफाई कर्मचारियों को दिनांक 01.09.2014 से हटा दिया गया है? यदि हाँ, तो क्‍यों? (ख) क्‍या उक्‍त आदेश के खिलाफ माननीय उच्‍च न्‍यायालय, खण्‍डपीठ ग्‍वालियर में याचिका क्र. 5592/2014 पर स्‍थगन आदेश पारित किया है तथा एक अन्‍य याचिका क्र. डब्‍लू.पी. 7737/2014 में स्‍थगन आदेश पारित किया गया था, परंतु अस्‍पताल प्रशासन द्वारा नवम्‍बर 2016 तक किसी कर्मचारी को ट्रेनिंग नहीं कराई गई है? क्‍या कारण रहे? तथ्‍यों सहित पूर्ण जानकारी दी जावे। (ग) क्‍या उक्‍त प्रकरण में स्‍थगन आदेश के बावजूद कार्यरत कर्मचारियों को ना तो सेवा कार्य पर रखा है, ना ही उन्‍हें अभी तक वेतन भुगतान किया गया है? उन्‍हें कब तक कार्य पर रख वेतन भुगतान किया जावेगा?

लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) जी हाँ। कर्मचारियों के प्रशिक्षित नहीं होने के कारण रेडक्रास सोसायटी मुरैना की दिनांक 01.09.2014 की बैठक में लिये गये निर्णय अनुसार कर्मचारियों को हटाया गया है। (ख) जी हाँ। माननीय उच्च न्यायालय खण्डपीठ ग्वालियर द्वारा न्यायालयीन प्रकरणों क्रमशः 5592/14 एवं 7737/2014 में दायर याचिका में स्थगन आदेश आगामी सुनवाई तक दिया गया। स्टाफ को ट्रेनिंग कराये जाने हेतु दिये गये आदेश के तारतम्य में संबंधित नर्सिंग स्टाफ की निर्धारित योग्यता न होने के कारण कर्मचारियों को प्रशिक्षण नहीं कराया गया। उक्त संबंध में माननीय उच्च न्यायालय को अवगत कराया गया है। प्रकरण वर्तमान में न्यायालय के अधीन विचाराधीन है। (ग) उत्तरांश (क) में उल्लेखित अनुसार सिविल सर्जन मुरैना के आदेश दिनांक 09.12.2014 के पालन में कर्मचारियों द्वारा कार्य पर उपस्थिति नहीं दिये जाने के कारण वेतन भुगतान नहीं किया गया है।

श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार अध्‍यक्ष महोदय, जिला चिकित्‍सालय मुरैना की रेडक्रास सोसायटी द्वारा लम्‍बे समय से पदस्‍थ नर्सिंग स्‍टाफ, इलेक्‍ट्रीशियन एवं सफाई कर्मचारियों को दिनांक 01.09.2014 से हटा दिया गया है. यदि हां, तो क्‍यों? क्‍या उक्‍त आदेश के खिलाफ माननीय उच्‍च न्‍यायालय, खण्‍डपीठ ग्‍वालियर में यह स्‍थगन आदेश पारित हुआ. मुझे जो जवाब मिला है उसमें माननीय मंत्री जी ने कहा है कि जी हां, कर्मचारियों के प्रशिक्षित नहीं होने के कारण रेडक्रास सोसायटी मुरैना की दिनांक 01.09.2014 की बैठक में उन कर्मचारियों को हटा दिया गया है.

अध्‍यक्ष महोदय आप संक्षेप में करें. समय हो गया है.

श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार अध्‍यक्ष महोदय, मेरा इसी से एक मिलता-जुलता प्रश्‍न था कि दिनांक 11 दिसम्‍बर, 2015 को मैंने पूछा था कि क्‍या लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्‍या वर्ष 1998-99 मुरैना जिला चिकित्‍सालय परिसर में रेडक्रास सोसायटी की राशि से रेडक्रास वार्ड का निर्माण कराया गया था ? जिसमें नर्सिंग स्‍टाफ, इलेक्‍ट्रीशियन तथा सफाई कर्मचारी अस्‍पताल प्रबंधन की ओर से नियुक्‍त किये गये थे. जिन्‍हें वेतन दिया जाता था, उन्‍हें अकारण क्‍यों हटाया गया ? मुझे जो उस समय जवाब मिला था, उसमें माननीय मंत्री महोदय ने बताया था कि उसमें माननीय मंत्री महोदय ने कहा था कि यही सही है.

अध्‍यक्ष महोदय आप सीधा प्रश्‍न करें.

श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार मुझे जो 2015 में जवाब मिला था उसमें कहा गया है कि नसिंग स्‍टाफ, इलेक्‍ट्रीशियन एवं सफाई कर्मचारी को रेडक्रास सोसायटी द्वारा नहीं हटाया गया है.

अध्‍यक्ष महोदय आप अभी क्‍या चाहते हैं, वह बताइये.

श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार लेकिन आज जो जवाब मिला है, उसमें कहा गया है कि उन कर्मचारियों को सन् 2014 में ही हटा दिया गया था. उन कर्मचारियों को रखा जाये.

श्री रुस्‍तम सिंह अध्‍यक्ष महोदय, हमारी विधानसभा में हॉस्पिटल है, मुझे स्‍वयं उसकी चिंता है लेकिन नियम में नहीं बनता है. रेडक्रास सोसायटी गवर्नमेंट की सोसायटी नहीं होती है, वह जिला चिकित्‍सालय के हिस्‍से में चलाते थे, वह बाद में बन्‍द हो गई. उसको बन्‍द हुए 2 वर्ष हो गए हैं. लोग हाईकोर्ट भी गए थे. हाईकोर्ट के डायरेक्‍शन थे कि अगर ये प्रशिक्षित हैं तो इनकी ट्रेनिंग करवा दी जाये. अगर ये एलिजिबल हैं तो इनका प्रशिक्ष्‍ाण करवा दिया जाये, वे एलिजिबल नहीं थे इसलिए उनका प्रशिक्षण नहीं हो पाया. लेकिन संवेदनशीलता को ध्‍यान में, फिर भी अगर कुछ हो सकता है तो जरूर करने का प्रयास करेंगे.

 

 

 

 

(प्रश्‍नकाल समाप्‍त)

 

 

 

 

(सर्वश्री बाला बच्‍चन, रामनिवास रावत, सुन्‍दरलाल तिवारी, जितू पटवारी एवं कुँवर विक्रम सिंह के एक साथ खड़े होकर बोलने पर)

अध्‍यक्ष महोदय आप शून्‍यकाल की सूचनाएं हो जाने दें. सिर्फ एक मिनट लगेगा. (व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत अध्‍यक्ष महोदय, सभी हो गया है. आज विधानसभा भी समाप्‍त हो जायेगी.

अध्‍यक्ष महोदय आप किस विषय पर बोल रहे हैं ?

श्री रामनिवास रावत मैंने स्‍थगन दिया हुआ है कुपोषण जैसे मुद्दे पर 139 पर चर्चा आपने कार्यमंत्रणा समिति में ग्राह्य की और आपने कहा था कि चर्चा कराएंगे.

अध्‍यक्ष महोदय आप रोज वही विषय उठाते हैं. मैंने कल आपसे कहा कि आप बात करने के लिए कक्ष में आ जाइये.

श्री रामनिवास रावत हम रोज-रोज कक्ष में आएं.

अध्‍यक्ष महोदय नहीं, मैंने आपसे कल ही कहा था. लेकिन आप जान-बूझकर नहीं आए.

श्री रामनिवास रावत (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय आप यह आरोप मत लगाइये. आप बिल्‍कुल आरोप नहीं लगा सकते. आसन्‍दी पर आरोप रिकार्ड नहीं होंगे. (व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत मेरे प्रश्‍न के जवाब में आज ही आया है.

अध्‍यक्ष महोदय मैंने आपको आश्‍वस्‍त किया था कि आप आइये. उसको नियम में लेंगे. आप बात करने नहीं आए. (व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय मुझे क्‍या मालूम कि आपको इंट्रेस्‍ट है कि नहीं. यह रिकार्ड नहीं किया जायेगा.

श्री रामनिवास रावत अध्‍यक्ष महोदय, इंट्रेस्‍ट क्‍यों नहीं है ? तो यहां हम क्‍यों आते हैं ?

अध्‍यक्ष महोदय आप यहां बोलते हैं और बात नहीं करते हैं. (व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत मैंने स्‍थगन भी दिया है, ध्‍यानाकर्षण भी दिया है एवं 139 पर चर्चा के लिए भी दिया है. यह इतना संवेदनशील मुद्दा है कि 123 जिलों में 10,000 बच्‍चे मर चुके हैं एवं 80 बच्‍चों की रोज मृत्‍यु हो रही है. आपने मेरे ऊपर आरोप लगाया है कि मैं चर्चा नहीं करवाना चाहता हूँ.

अध्‍यक्ष महोदय आप मुझ पर आरोप लगा रहे हैं. आप 3 दिन से आरोप लगा रहे हैं.

श्री रामनिवास रावत (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय यह नहीं लिखा जायेगा.

प्रभारी नेता प्रतिपक्ष (श्री बाला बच्‍चन) अध्‍यक्ष महोदय, कार्यमंत्रणा में सत्र का एजेन्‍डा तय होता है एवं बिजनेस तय होता है.

संसदीय कार्यमंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र) अध्‍यक्ष महोदय, मेरा व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न है एवं एक प्‍वाईंट ऑफ आर्डर है.

श्री बाला बच्‍चन माननीय मंत्री जी पहले हमारी बात सुन लें. हम लोग दोनों खड़े थे. (व्‍यवधान)

स्‍कूल शिक्षा मंत्री (कुंवर विजय शाह) आपकी बात क्‍या सुन लो ? आप नियम से ही नहीं उठा रहे हैं. आप नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं. (व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत आप नियम सिखाओगे. आप जानते हैं कि नियम क्‍या होते हैं? (व्‍यवधान)

कुंवर विजय शाह आप क्‍या बात कर रहे हो ? आप गलत बातें कर रहे हैं ? (व्‍यवधान)..ये आसंदी का सम्‍मान नहीं कर रहे हैं, परम्‍परा का पालन नहीं कर रहे हैं, आपको इस संबंध में माफी मांगनी चाहिए.

श्री रामनिवास रावत - आसंदी का सम्‍मान करना आपका काम है. (xxx) प्रभारी नेता प्रतिपक्ष(श्री बाला बच्‍चन) - कार्यमंत्रणा में ये तय हुआ है, जिसमें सत्र का ये बिन्‍दु तय होता है, जिसमें 193 की चर्चा कुपोषित बच्‍चों से संबंधित विषय पर चर्चा होगी ये तय हुआ था. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कार्यमंत्रणा की बैठक में जो तय हुआ था उसी विषय पर तो हम चर्चा करना चाहते हैं.

संसदीय कार्यमंत्री (डा. नरोत्‍तम मिश्र) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न है, लगातार जो व्‍यवधान होता है, यहां पर इसी तरह से जो स्‍थगन आपने लिया वह स्‍थगन उठाया और स्‍थगन की चर्चा आने के पहले भी इन्‍होंने चर्चा में मुख्‍यमंत्री जी का जबाव नहीं सुना और चले गए. कल बजट पर चर्चा हुई, चर्चा रामनिवास रावत जी ने शुरू की थी, वित्‍त मंत्री जी ने जब चर्चा का जबाव दिया तो रावत जी चले गए. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, चर्चा इस तरह से उठाना, व्‍यवधान करना और चर्चा में भाग न लेना. कल आपने देखा कालूखेड़ा जी कह रहे थे, मैं था और आप भी साक्षी है, इसको भले ही आप अगले सत्र में ले लेना, जिस विषय को रामनिवास रावत जी उठा रहे हैं, उसी विषय को इनके वरिष्‍ठ सदस्‍य ने कहा कि आप इसको अगले सत्र में ले लेना, आपने भी आसंदी से इनसे भी कहा कि इस विषय पर आप आकर चर्चा कर लें, इसके बावजूद भी व्‍यवधान हो रहा है. मैं चाहता हूं कि आप इस पर कोई व्‍यवस्‍था दे कि जो लोग जिस विषय को उठाते हैं, उस विषय पर कम से कम चर्चा पूरी होने तक तो रहे, रहते नहीं है कोई भी विषय उठा देते हैं.

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा भी व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न है.

अध्‍यक्ष महोदय - आप बैठ जाए, कृपया करके अनर्गल आरोप न लगाए. जो बात संसदीय कार्यमंत्री जी ने कहीं, वह सारे सदन ने सुनी, लेकिन मैं कोई आक्षेप नहीं लगाना चाहता, क्‍योंकि यहां बैठकर के आरोप लगाना, आसंदी की मर्यादा के खिलाफ हैं. इसलिए मैंने कुछ नहीं कहा, कल जब आदरणीय वरिष्‍ठ सदस्‍य ने कहा था, तब आपने यह नहीं कहा कि नहीं अध्‍यक्ष महोदय, अगले सत्र में नहीं अभी चर्चा कर लीजिए, तब आप मौन हो गए, उसके बाद भी मैंने आपने कहा था कि आप आइए, बात कर लेते हैं, तब आप नहीं आए, मैंने आपको नियम भी बताया था कि इस नियम के अंतर्गत लेने को तैयार है, तब आप नहीं आए और यहां पर आकर आरोप लगाते हों, यह उचित नहीं है. यह रिकार्ड में नहीं आएगा.

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारी न तो कतई आरोप लगाने की मंशा है न ही आरोप लगाते हैं. पिछली विधानसभा में भी आसंदी से आपने कहा था कि सिंहस्‍थ पर चर्चा कर लेंगे. (xxx)

अध्‍यक्ष महोदय - आपकी उपस्थिति में आपके ही सदस्‍य ने कहा था, तब आप चुप रह गए थे, तब क्‍यों नहीं कहा कि नहीं ये चर्चा इसी सत्र में, आज ही लेंगे, तब आप शांत हो गये. ये विषय यहीं समाप्‍त होता है.

श्री रामनिवास रावत - पिछली विधानसभा का रिकार्ड देख लीजिए. (xxx) माननीय अध्‍यक्ष महोदय प्रदेश में 80 बच्‍चे रोज कुपोषण से मर रहे हैं, मेरे आज के ही प्रश्‍न के जबाव में कुपोषण जैसे महत्‍वपूर्ण मुद्दे पर सरकार गंभीर नहीं है, (xxx) सरकार चर्चा कराने के लिए तैयार नहीं है, यह बड़ा पीड़ादायक है, कष्‍टदायक है.

अध्‍यक्ष महोदय - यह रिकार्ड में नहीं आएगा.

 

12:08 बजे नियम 276-क के अधीन विषय

 

12:09 बजे बहिर्गमन

प्रभारी नेता प्रतिपक्ष, श्री बाला बच्‍चन के नेतृत्‍व में कुपोषण के संबंध में नियम 139 के अधीन चर्चा नहीं कराए जाने के विरोध में इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यों द्वारा सदन से बहिर्गमन

श्री बाला बच्‍चन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इतना बड़ा ज्‍वलंत मुद्दा है, 80 कुपोषित बच्‍चों की मौत हो रही है और विधानसभा इस पर चर्चा नहीं कराना चाहा रही है. आज ही श्री रामनिवास रावत जी के प्रश्‍न के जबाव में आया है कि 80 बच्‍चों की हर दिन मौत हो रही है, जिसमें हमारे आदिवासी क्षेत्रों के काफी बच्‍चों की मौत हो रही है. (xxx) और मैं समझता हूं कि सरकार गंभीर नहीं है और इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रही है, इस कारण हम सदन से बहिर्गमन करते हैं. प्रभारी नेता प्रतिपक्ष, श्री बाला बच्‍चन के नेतृत्‍व में कुपोषण के संबंध में नियम 139 के अधीन चर्चा नहीं कराए जाने के विरोध में इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यों द्वारा सदन से बहिर्गमन किया गया.

 

 

 

 

 

 

 

शून्‍यकाल में उल्‍लेख(क्रमश:)

विदिशा जिले में हुई साम्‍प्रदायिक घटना की ज्‍यूडिशियल इन्‍क्‍वायरी कराने का उल्‍लेख

श्री आरिफ अकील (भोपाल उत्‍तर)- अध्‍यक्ष महोदय जी, आपने मेरा नाम पुकारा है. मेरी शून्‍यकाल की सूचना यह है कि विदिशा जिले में पिछले दिनों जो साम्‍प्रदायिक घटना हुई, उसमें जिस तरह से तांडव मचाया गया, उसकी ज्‍यूडिशियल इन्‍क्‍वायरी कराने के लिए मैंने आपको ध्‍यानाकर्षण दिया है. मैंने माननीय गृहमंत्री और मुख्‍यमंत्री को भी पत्र लिखा है. कृपया करके आप उनके जख्‍मों पर मरहम तो नहीं लगा सके, लेकिन ज्‍यूडिशियल इन्‍क्‍वायरी करके जिनका नुकसान हुआ है, उनको मुआवजा दिलाने की कृपा करेंगे, ऐसा अनुरोध है और आपने जिस तरह से सहयोग दिया है, गृहमंत्री जी मुझे उम्‍मीद है कि ज्‍यूडिशियल इन्‍क्‍वायरी के लिए आप आगे बात करेंगे.

(संसदीय कार्य मंत्री, डॉ. नरोत्तम मिश्र द्वारा बैठे बैठे श्री आरिफ अकील जी को कहने पर कि आप बाहर जाओ, नहीं तो पार्टी से अलग हो जाओगे)

श्री आरिफ अकील -- हमारी पार्टी हम खुद हैं.

..(हंसी)..

राजस्व मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्ता) -- अध्यक्ष महोदय, पूरी कांग्रेस का ही यह रोग है. हर व्यक्ति अपने आप में पार्टी है.

श्री सुन्दरलाल तिवारी -- अध्यक्ष महोदय, जहां तक कुपोषण का सवाल है, हमारे संविधान के अनुच्छेद में उन बच्चों को स्पेशल प्रोटेक्शन दिया गया है. इस सदन में संविधान का सम्मान नहीं हो रहा है. कम से कम संविधान का तो सम्मान हो.

अध्यक्ष महोदय -- आप पहले संविधान पढ़कर आइये.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री गोपाल भार्गव) -- अध्यक्ष महोदय, एक कांग्रेस के सदस्य कह गये कि मैं खुद ही पार्टी हूं. लगता है कि पूरी कांग्रेस पार्टी एक मानव संग्रहालय हो गयी है. (XXX).

श्री बाबूलाल गौर -- अध्यक्ष महोदय, मानव संग्रहालय कहना अपमान है. ये मानव संग्रहालय नहीं हैं.

 

 

 

 

12.11 बजे पत्रों का पटल पर रखा जाना

(1) दि प्रोविडेंट इन्वेस्टमेंट कंपनी लिमिटेड का 87वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2013-2014.

 

 

 

(2) मध्यप्रदेश जल निगम मर्यादित का द्वितीय वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2013-2014 एवं तृतीय वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2014-2015.

 

 

 

 

 

12.12 बजे ध्यान आकर्षण

 

(1) सीधी एवं सिंगरौली जिले में गरीबी रेखा के हितग्राहियों के नाम काटे जाना.

 

श्री कमलेश्वर पटेल (सिहावल) -- अध्यक्ष महोदय, हमें जवाब तो मिला ही नहीं है.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री गोपाल भार्गव) -- अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य कह रहे हैं कि जवाब नहीं मिला है. इनके पिताजी बहुत वरिष्ठ विधायक रहे हैं. वे उनसे ही पूछ लें. वैसे स्थगन और ध्यान आकर्षण की सूचनाओं का जवाब नहीं दिया जाता है.

श्री कमलेश्वर पटेल -- अध्यक्ष महोदय, पहले मिला है, जवाब आता है.

श्री गोपाल भार्गव -- नहीं आता है.

अध्यक्ष महोदय -- यहीं दे देते हैं आपकी सुविधा के लिये. वैसे कायदा वही है कि मंत्री जी जो उत्तर देते हैं, उस पर से से ही प्रश्न पूछना पड़ता है.

श्री वैलसिंह भूरिया -- कमलेश्वर जी, पढ़कर नहीं आये, पढ़कर आया करो. बिना पढ़े लिखे काम नहीं चलेगा.

श्री कमलेश्वर पटेल --आप कितने विद्वान हैं, हमको मालूम है. आप अपना स्थान ग्रहण करें.

अध्यक्ष महोदय -- कमलेश्वर जी, आप अपनी ध्यान आकर्षण की सूचना पढ़ें.

श्री कमलेश्वर पटेल -- अध्यक्ष महोदय, मेरी ध्यान आकर्षण सूचना का विषय इस प्रकार है -

 


 

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री गोपाल भार्गव) --माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

12.16 बजे

अध्यक्षीय घोषणा

सदन की दीर्घा में उपस्थित श्री महेश आर्य,सदस्य उत्तरप्रदेश विधान परिषद का स्वागत उल्लेख.

अध्यक्ष महोदय--आज सदन की दीर्घा में श्री महेश आर्य, उत्तरप्रदेश विधान परिषद के सदस्य उपस्थित हैं. सदन की ओर से उनका स्वागत है.

12.17 बजे

ध्यानाकर्षण (क्रमश:)

श्री कमलेश्वर पटेल -- माननीय अध्यक्ष महोदय, पिछले विधानसभा सत्र में भी हमने यह विषय उठाया था, मंत्री जी ने वही जानकारी दे दी है. पिछले सत्र में भी गरीबी की रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के नाम काटने पर चर्चा हुई थी. अध्यक्ष महोदय, पूरी तरह से पात्र हितग्राहियों के नाम काटे गये हैं. ऐसे लोगों के नाम कटे हैं जो कि विकलांग हैं, विधवा हैं, निराश्रित हैं , ऐसे लोगों की वृद्धावस्था पेंशन बंद हो गई, खाद्यान मिलना बंद हो गया. मैं मंत्री जी से यह चाहता हूं कि इस मामले में आप क्या कोई कमेटी वहां भेजकर के इस पूरे मामले की जांच करायेंगे ? दूसरा प्रश्न मेरा है कि ग्रामोदय से भारत उदय अभियान के तहत पंचायतवार कुल कितने आवेदन प्राप्त हुये और कितने का निराकरण किया गया ?

श्री गोपाल भार्गव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जो ध्यानाकर्षण सूचना है इसमें दो जिलों के बारे में संपूर्ण जानकारी मांगी है जो कि हमने समेकित रूप से माननीय सदस्य को उपलब्ध कराई है. अध्यक्ष महोदय, 3 ग्राम सभा की बैठकें हुई थीं. इन ग्रामसभा की बैठकों के दौरान जो भी आवेदन आये कि इनका नाम काट दिया जाये, या इनका नाम जोड़ा जाये. उन्हीं ग्रामसभाओं की बैठक के आधार पर यह नाम का जोड़ना और काटना हुआ है. इसके बाद में अपील अथारिटी का प्रावधान है, दूसरी अपील करने का प्रावधान है. मैं मानकर के चलता हूं कि पहले वहां पर आवेदन करना चाहिये और यदि वहां पर न्याय नहीं मिले तब फिर शासन से संपर्क करें तो शासन इस पर कुछ विचार करेगा. मैं माननीय सदस्य से यह जानना चाहता हूं कि तहसीलदार ने क्या उनका आवेदन खारिज कर दिया है या एसडीएम ने खारिज कर दिया या कलेक्टर ने खारिज कर दिया है . अब भोपाल से सीधे अधिकारी भेजकर के हजारों नाम की स्कूटनी नहीं की जा सकती है, पहले यहां पर यह जानकारी आ जाये कि क्या उन्होंने सारे के सारे खारिज कर दिये और खारिज किये तो कोई वैध आधार है क्या ? यदि वैध आधार है तो उसको मानना पड़ेगा जो कट-आफ-मार्क्स भारत सरकार ने तय किये हैं, उसके आधार पर यदि गरीबी की रेखा की सूची में नाम जुड़ता अथवा कटता है तो उसके लिये मान्य करना पड़ेगा.

 

श्री कमलेश्वर पटेल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, सरकार ने तहसीलों में एसडीएम कार्यालय में सब जगह तो रेट फिक्स करके रखा है विकलांग व्यक्ति, निराश्रित व्यक्ति, वृद्ध व्यक्ति कहां से अपील करेगा और कहां से एसडीएम कार्यालय के वो चक्कर लगायेगा. अगर अन्याय हुआ है तो क्या शासन पंचायतवार शिविर लगाकर के यह व्यवस्था नहीं कर सकता है ? जितने आवेदन मिले थे उन आवेदनों का अभी तक निराकरण ही नहीं हुआ है. मेरा मंत्री जी से प्रश्न है कि जो आवेदन पत्र प्राप्त हुये थे उनकी संख्या कितनी थी, कितनों का निराकरण किया गया, कितने पात्र पाये गये, कितने अपात्र पाये गये. क्या मंत्री जी सीधी और सिंगरौली जिले की पंचायतवार जानकारी यहां पर नहीं दे सकते हैं ?

अध्यक्ष महोदय- ध्यानाकर्षण में जानकारी कैसे देंगे.

श्री गोपाल भार्गव-- अध्यक्ष महोदय, मेरे उत्तर में ही सारी जानकारी आ गई है.

श्री कमलेश्वर पटेल -- माननीय अध्यक्ष महोदय, ग्रामोदय से भारत उदय अभियान के तहत जो आवेदन लिये गये थे अभी तक किसी भी आवेदन का निराकरण नहीं हुआ है. एक दूसरा अभियान तो इनका शुरू होने वाला है. मुझे लगता है कि सिर्फ जनता को दिग्भ्रमित करने के लिये आवेदन जमा करा रहे हैं. आवेदन जमा करने में भी गरीब जनता का पैसा खर्च होता है.

अध्यक्ष महोदय- भाषण का अवसर ध्यानाकर्षण में नहीं रहता है. न ही इतने विस्तार से बताया जा सकता है. मंत्री जी आपके पास में कुछ जानकारी हो तो वह आप दे दें.

श्री गोपाल भार्गव- अध्यक्ष महोदय, मैंने कहा है कि 3 ग्रामसभाएं 9वें महीने में हुई थीं. उन ग्रामसभा की बैठकों में पूरे गांव के लोग एकत्रित होते हैं और वह कहते हैं कि यह पात्र है और यह पात्र नहीं है. उस आधार पर निर्णय होते हैं. इसके बाद में यह व्यवस्था है कि तहसील इसके लिये आप आवेदन कर सकते हैं. तहसील में आप आवेदन कर सकते हैं, तहसीलदार से यदि आप असंतुष्‍ट हों तो आप एसडीएम के यहां कर सकते हैं, एसडीएम से आप संतुष्‍ट नहीं हों तो कलेक्‍टर या एडिश्‍नल कलेक्‍टर के यहां कर सकते हैं.

एक माननीय सदस्‍य-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय.

अध्‍यक्ष महोदय-- ध्‍यानाकर्षण में यह परंपरा नहीं है कि जो सदस्‍य का नाम हो उसके अलावा पूछने दिया जाये. अनुमति इसलिये नहीं है क्‍योंकि इसमें परंपरा नहीं है.

श्री गोपाल भार्गव-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इसलिये भी माननीय सदस्‍य को अवगत कराना चाहता हूं, इन्‍होंने तो वैसे प्रश्‍न किया है सीधी और सिंगरौली का, लेकिन मैं बताना चाहता हूं ग्रामोदय से भारत उदय अभियान के अंतर्गत जो वृद्धावस्‍था पेंशन है उसके 84 हजार 49 हितग्राही अतिरिक्‍त, उनके मंजूर किये गये जो वृद्धावस्‍था पेंशन के थे, विधवा पेंशन के 38 हजार 172, निशक्‍त पेंशन के 10 हजार 258 और सामाजिक सुरक्षा पेंशन के 36 हजार 726. ऐसा नहीं है सरकार ने उदार भाव से नाम जोड़ने का काम किया है और इसलिये मैं कह रहा हूं कि यदि कोई खामी रह गई है, या कहीं कोई त्रुटि है, कोई सुन नहीं रहा है तो उसके लिये आप हमें अवगत करायें, हम फिर से उसे दिखवा लेंगे.

श्री अनिल फिरोजिया-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट.

अध्‍यक्ष महोदय-- नहीं, ध्‍यानाकर्षण में अनुमति नहीं दी जाती. ... (व्‍यवधान).... बैठ जायें, कमलेश्‍वर जी बैठ जायें आपको बहुत समय दे दिया. श्री जितू पटवारी जी कृपया अपनी ध्‍यानाकर्षण की सूचना पढ़ें. ... (व्‍यवधान).... कोई एलाऊ नहीं है. ... (व्‍यवधान).... कोई प्रश्‍न एलाऊ नहीं होगा. किसी अन्‍य माननीय सदस्‍य का एलाऊ नहीं होगा. काल अटेंशन में यह परंपरा नहीं है. श्री कमलेश्वर पटेल से अनुरोध है कि वह बैठ जायें, आप दूसरों के में व्‍यवधान नहीं डाल सकते. श्री जितू पटवारी जी अपनी ध्‍यानाकर्षण पढ़ें, उमंग सिंगार जी बैठ जाइये, आप उनकी मदद नहीं करें, वह खुद ही सक्षम हैं ... (व्‍यवधान).... नातीराजा जी बैठ जाइये, श्री जितू पटवारी जी आप पढि़ये, नहीं तो मैं आगे बढ़ूंगा. ... (व्‍यवधान)....

 

 

12.23 बजे बहिर्गमन

इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍य श्री कमलेश्‍वर पटेल, द्वारा सदन से बहिर्गमन

श्री कमलेश्वर पटेल (सिहावल)-- अध्‍यक्ष महोदय, मैं उत्‍तर से संतुष्‍ट नहीं हूं इसलिये बहिर्गमन करता हूं.

(इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍य श्री कमलेश्‍वर पटेल, द्वारा शासन के उत्‍तर से असंतुष्‍ट होकर बहिर्गमन किया गया.)

 

12.24 बजे ध्‍यानाकर्षण (क्रमश:)

(2) मध्‍यप्रदेश पश्चिम विद्युत वितरण कंपनी द्वारा दर वृद्धि हेतु प्रस्‍ताव किया जाना.

श्री जितू पटवारी (राऊ)-- अध्‍यक्ष महोदय, मेरी ध्‍यानाकर्षण की सूचना का विषय इस प्रकार है--

 

 

 

 

 

 

 

 

 

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारसचन्द्र जैन ) - माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

श्री जितू पटवारी-- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने जो उत्तर दिया उससे तीन बातें पता चलीं. आपके पूरे उत्तर का सार निकाले तो आपने कहा कि हमारे पास सरप्लस बिजली है. यह बात मुख्यमंत्री जी भी कई बार कह चुके हैं. दूसरी तरफ आप यह भी कह रहे हैं कि उपभोक्ताओं में रोष नहीं है. हर जगह पर्याप्त बिजली मिल रही है. तीसरा, आंकड़े आपके विभाग के,आपकी सरकार के हैं. 2013-14 में 21276 मिलियन यूनिट बिजली खरीदी गई. मैं गलत नहीं होऊं तो जरा आंकड़े चेक करते रहना पहलवान साहब ! अध्यक्ष जी, 2013-14 में 13799 मिलियन यूनिट बिजली बेची गई जबकि 7478 मिलियन यूनिट बिजली का लॉस यानी चोरी होना बताया गया. मतलब 54 प्रतिशत उसमें मैं 0.1 प्रतिशत जोड़ रहा हूं इतना लॉस बताया. यह आप ही के आंकड़े हैं. या तो आप सच बोल रहे हैं, या आंकड़े सच बोल रहे हैं. दूसरा, इसी से मिलता-जुलता प्रश्न है कि सरकारी उपक्रम की बिजली उत्पादन की कुल क्षमता 12929 मिलियन यूनिट है तो वह 921 मिनियन यूनिट ही उत्पादन आज की तारीख में कर पा रही है. आपने जो आंकड़े दिए उसके आधार पर मैं बात कर रहा हूं जोकि क्षमता का 7 प्रतिशत है. जितनी क्षमता है उसका सिर्फ 7 प्रतिशत बाकी आप खरीदे रहे हैं. प्रदेश सरकार ने अनुबंधित इकाईयों से 41 प्रतिशत से और ओपन मार्केट से 59 प्रतिशत बिजली खरीदी है. आप अधिकारियों को यह बात बताएं क्योंकि वह आपको उत्तर देंगे. वह भी पीक टाइम की बिजली जो सबसे महंगी होती है. अब आप खरीदने और बेचने का अन्तर सुन लें.

अध्यक्ष महोदय--आपका प्रश्न क्या है?

श्री जितू पटवारी--अध्यक्ष जी, प्रश्न यही है कि जिस तरीके से इतना घाटा बढ़ता है. पहले इन्होंने कहा कि हमारी विद्युत कंपनियों को कोई लॉस नहीं है. फिर उन्होंने कहा कि जो लॉस है वह कंपनियां ही उठाएंगी. यह उत्तर में है. उत्तर से प्रश्न उद्भूत होता है. ये आंकड़े भी इन्हीं के हैं. एक तरफ उत्तर में बता रहे हैं वह हरा-हरा है और आंकड़े बता रहे हैं, वह सब सूखा-सूखा है. इस अन्तर को समझना पड़ेगा. मेरा अनुरोध है. आप सिर्फ एक स्पेसिफिक प्रश्न का उत्तर दें कि आप जो बिजली खरीदते हो और अनुबंधित इकाईयां हैं.

कुंवर विजय शाह-- अध्यक्ष जी, हरा-हरा, नीला-नीला, काला-काला काहे का कलर होता है. (हंसी)

श्री जितू पटवारी-- मंत्री जी, यह आपने कलर नहीं कराया था उससे पहले का है. पहले देखा तो सफेद थे, अब कलर करा लिया तो काला हो गया यह है. मेरा अनुरोध यह है कि मंत्री जी यह बताने की कोशिश करें कि हमारी सरकार और बिजली कंपनी से जो अनुबंधित इकाईयां हैं, उन्हीं इकाईयों से बिजली खरीदने के बजाय बाहर से क्यों खरीदते हैं. और महंगी खरीदते हैं और सस्ती बेचते हैं. इससे मध्यप्रदेश का, कंपनियों को घाटा होता है. फिर जब हम विनियामक आयोग में जाते हैं तो अंततोगत्वा उसका भार उपभोक्ता पर पड़ता है. क्या उसके लिए सरकार ने कोई प्रोग्राम बनाया है या इसमें कोई लेन-देन का खेल है, भ्रष्टाचार की कहीं बू आती है. कहीं से आपके विभाग को पता चला कि आपके अधिकारियों ने या सिस्टम ने कहीं कोई गड़बड़ की? इसमें आपने कोई जांच की. कोई चोरी में पाया गया? किसी पर करप्शन का चार्ज लगा? कृपया उत्तर दें.

श्री पारस जैन-- अध्यक्ष महोदय, मैंने पूर्व में अपने उत्तर में बताया है कि विद्युत विनियामक आयोग 1994 के तहत विनियामक आयोग को न्यायालय शक्तियां प्राप्त हैं. जब उनके पास कोई आपत्तियां जाती हैं तो उसके लिए बराबर केम्प लगाकर उनकी सुनवाई करते हैं. अभी तो यह न्यायालय के पास है. अभी इसमें कुछ हुआ ही नहीं है. इसके पहले यह सब सोचने लग गए. इनके जमाने में आप देखें 14 साल पहले एक आदेश निकला था कि आप एक लट्टू जलाइये. आज मप्र में कोई गरीब व्यक्ति भी ऐसा नहीं है जिसने दीपावली पर एक सीरिज़ (लाईट) नहीं लगायी हो. इतनी अच्छी व्यवस्था के बाद आज उत्पादन भी हो रहा है...एक मिनट दे दें. मैंने आपकी बात सुनी, आप मेरी बात सुनो. अपन दोनों एक सरीखे हैं, चिन्ता मत करो. आप कभी कभी बहुत तेज आवाज में सदन में बोलते हो. मैं आपसे हाथ जोड़ कर निवेदन करता हूं कि आप सदन में थोड़ा धीरे बोला करो. मैं भी बहुत जोर जोर से बोलता था. मेरा आपरेशन हो गया इसलिए मैं नहीं चाहता कि आपका हो. (हंसी)

मैं सुझाव इसलिए दे रहा हूं कि आप छोटे भाई हो. मैंने कहा कि धारा 95 में न्यायालय की शक्तियां उसमें है. यदि किसी को आपत्ति होती है और वह वहां जाता है तो उसकी सुनवाई होती है. इन्होंने जो एक बात कही है कि जो वर्तमान स्थिति में जितनी बिजली का उत्पादन हम कर रहे हैं, वह एक्सेस है और बराबर देने की अवस्था में हैं. आपको इसके लिए धन्यवाद देना चाहिए. आप जो नियामक आयोग की बात कह रहे हैं तो नियामक आयोग एक न्यायालय है, उसकी प्रक्रिया है, उस प्रक्रिया में पूरा हिसाब-किताब उनके सामने होता है. जो सरप्लस बिजली की बात आपने की है, जो भी सस्ती यूनिट हैं, उससे ही उत्पादन किया जाता है और पूरा हिसाब आयोग के समक्ष ही रखा जाता है.

श्री जितू पटवारी - अध्यक्ष महोदय, दो बातें बहुत अच्छी बोली. एक तो मैं ध्यान रखूंगा, जोर से नहीं बोलूंगा क्योंकि हॉर्ट की सुरक्षा करना भी मेरा दायित्व है. दूसरा अनुरोध यह है कि दो बातें आपने उत्तर में कहीं. अध्यक्ष महोदय, आपने भी सुना होगा. इन्होंने कहा कि हमारे पास में सरप्लस में बिजली है. फिर इन्होंने कहा कि हम जहां सस्ती बिजली होती है, उन्हीं से खरीदते हैं. फिर कहा कि हमारी इकाइयां इतना उत्पादन करती हैं जो सरप्लस है. आप अगर रिकॉर्डिंग निकालेंगे तो क्या बोले, कुछ समझ में नहीं आया? यह पॉलिटिकल भाषा गोलमोल बता दी. लेकिन उत्तर नहीं आया. आप यह बताएं कि मार्केट में आज के रेट में वर्ष 2013-14 में जो असेसमेंट के पार्ट में एक आंकलन किया गया था कि जो आपकी इकाइयां कोयला खरीदती हैं, वह 1800 रुपए प्रति टन होता है. जबकि आपकी पूरी बिजली कंपनियों ने पूरे समय 6500 रुपए प्रति टन कोयला खरीदा है, यह अडानी जी की कंपनी से खरीदा है. यदि यह जो 1800 रुपए प्रति टन कोयला खरीद सकते तो सस्ती बिजली हम उपभोक्ता को दे सकते थे और बिजली सस्ती हो जाती तो यह 6500 रुपए प्रति टन क्यों खरीदा गया यह बता दें?

श्री पारस चन्द्र जैन - अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्य को यह बताना चाहता हूं कि आज से 15 साल पहले जो एग्रीमेंट हुए होंगे, उससे तो हम बाध्य हैं. जबकि वास्तव में उस समय तो बिजली मिलती ही नहीं थी. अब बिजली मिल रही है और यदि एग्रीमेंट किये हैं तो उनसे तो बिजली लेना होगी. आपके कार्यकाल में तो बिजली मिलती ही नहीं थी. आपने तो कोई उत्पादन बढ़ाया नहीं. हमारी सरकार आने के बाद हमने उत्पादन भी बढ़ाया और पर्याप्त मात्रा में हम बिजली दे रहे हैं.

श्री जितू पटवारी - अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे फिर संरक्षण चाहता हूं कि आदरणीय मंत्री जी ने जितनी बातें कहीं. यह कहा कि आप नहीं करते थे तो हम हार गये, अब आप जीते हैं तो मैं आपसे पूछ रहा हूं. मंत्री जी, आप आखिर यह बता दें कि आपने यह कहा कि इसलिए हम मंहगी खरीदते हैं. आपने मान लिया कि हम महंगी बिजली खरीदते हैं और इसलिए खरीदते हैं कि हमने अनुबंध कर रखा है तो खरीदेंगे. चूंकि खरीद रहे हैं तो बेच रहे हैं. आप बिजली महंगी खरीदते हैं और उपभोक्ता पर उसका भार डालते हैं. फिर कहते हैं कि हमारा बहुत अच्छा प्रबंधन है. यह आपके जवाब से बात उत्पन्न हुई है, जितनी बातचीत की है, यह उससे ही निकली है. आप यह बताएं कि मध्यप्रदेश में जो किसान है, उसको इस बार 4 महीने का अस्थाई कनेक्शन अनिवार्य रूप से लेना पड़ा. उसकी नीति आपने बनाई कि 5 हार्स पावर का कन्केशन 9500 रुपए और उससे बड़ा 8 हार्स पावर का 13000 रुपए और उससे बड़ा 10 हार्स पावर का 15000 रुपए में, जब सस्ती बिजली थी तो किसान को बिजली महंगी क्यों की, इसका आप उत्तर दें?

अध्यक्ष महोदय - यह ध्यानाकर्षण का विषय नहीं है. श्री पुष्पेन्द्र नाथ पाठक..

श्री पारस चन्द्र जैन - अध्यक्ष महोदय, इससे उद्भूत ही नहीं होता है.

श्री जितू पटवारी - अध्यक्ष महोदय,एक मिनट. मेरा यह अनुरोध है कि पूरे प्रश्न का मूल यह है कि आप महंगी बिजली खरीदते हैं, सस्ती बिजली बाहर बेचते हैं और जो यहां का उपभोक्ता है, उसको महंगी बिजली देते हैं तो यह अव्यवस्था, कुप्रबंध, इस तरह का भ्रष्टाचार, इस तरह की आपकी नीयत और फिर भी कहते हैं हम अच्छे हैं? यह कैसे हो सकता है? इसमें किसान आत्महत्या नहीं करेगा तो कौन करेगा? (व्यवधान)..

श्री कमलेश्वर पटेल - अध्यक्ष महोदय, पूरे प्रदेश में हाहाकार मचा हुआ है. बिजली के कुप्रबंधन से किसान परेशान है . बहुत सारे ट्रांसफार्मर जले हैं, ट्रांसफार्मर बदले नहीं जा रहे हैं.

श्री जितू पटवारी - अध्यक्ष महोदय, ट्रांसफार्मर नहीं हैं.

श्री उमंग सिंघार - बिजली महंगी खरीदी जा रही है और किसानों पर उसका बोझ आ रहा है.

अध्‍यक्ष महोदय -- रामनिवास रावत जी को अलाऊ किया है. उनका भी नाम था इसमें.

श्री रामनिवास रावत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि जितू पटवारी जी ने पूछा, माननीय मंत्री जी ने अपने जवाब में दिया है, एक तो मैं उनसे यह प्रश्‍न पूछना चाहूंगा कि आप कह रहे हैं कि रबी की फसल के लिए आप 10 हजार मेगावाट प्रतिदिन बिजली दे रहे हैं. माननीय मंत्री जी, यह भी बता दें कि आज की तारीख में मांग कितनी है, मांग के विरुद्ध आप कितनी दे रहे हैं ?

अध्‍यक्ष महोदय -- ध्‍यानाकर्षण में यह विषय कहां हैं ?

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, है, ध्‍यानाकर्षण के उत्‍तर में यह बात आई है कि इस रबी के मौसम में लगभग 10 हजार मेगावाट से अधिक की विद्युत आपूर्ति प्रदेश में की जा रही है, सेकंड पेज के लास्‍ट पैरे के चौथी लाइन में यह बात आई है.

अध्‍यक्ष महोदय -- ठीक है.

श्री रामनिवास रावत -- माननीय मंत्री जी, आप कितनी कंपनियों से बिजली खरीद रहे हैं और किस-किस रेट पर खरीद रहे हैं, कृपया यह भी बता दें ?

एक माननीय सदस्‍य -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी एक अन्‍य माननीय सदस्‍य ने पूछा था तो आपने मना कर दिया था.

अध्‍यक्ष महोदय -- इनका नाम था उसमें. कार्यसूची में नहीं आ पाया लेकिन इसमें इनका नाम था.

श्री कमलेश्‍वर पटेल -- अध्‍यक्ष जी, हमने भी ध्‍यानाकर्षण लगाया था.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, अब सबके थोड़ी लेंगे.

श्री रामनिवास रावत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक तो कितनी मेगावाट की मांग है और दूसरा किन-किन कंपनियों से किस-किस रेट पर बिजली खरीद रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- जानकारी हो तो मंत्री जी बता दें.

श्री पारस चन्‍द्र जैन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जानकारी लेकर मैं माननीय सदस्‍य को दे दूंगा. (....व्‍यवधान ...)

श्री जितू पटवारी -- अध्‍यक्ष जी, यह बात ठीक नहीं है, ध्‍यानाकर्षण में भी जानकारी लेंगे, तो फिर आपकी क्‍या तैयारी है ? (XXX). (....व्‍यवधान ...)

अध्‍यक्ष महोदय -- ध्‍यानाकर्षण में यह कहां है. (....व्‍यवधान ...)

श्री रामनिवास रावत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, टैरिफ बढ़ाकर किसानों को आत्‍महत्‍या करने के लिए मजबूर कर रहे हैं. (....व्‍यवधान ...)

श्री जितू पटवारी -- अध्‍यक्ष महोदय, बिजली भ्रष्‍टाचार की भेंट चढ़ रही है. (....व्‍यवधान ...)

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय सदस्‍य, ध्‍यानाकर्षण तो पढ़ लें.

श्री जितू पटवारी (XXX), महंगी बिजली खरीदना... (....व्‍यवधान ...) किसान को कुछ नहीं देना ... (....व्‍यवधान ...)

अध्‍यक्ष महोदय -- ध्‍यानाकर्षण में यह नहीं है. (....व्‍यवधान ...) श्री पुष्‍पेन्‍द्र नाथ पाठक, अपना ध्‍यानाकर्षण पढ़ें.

श्री जितू पटवारी -- कुप्रबंध का सबसे बड़ा उदाहरण बिजली विभाग है. (....व्‍यवधान ...)

श्री उमंग सिंघार -- महंगी बिजली खरीदी जा रही है.. (....व्‍यवधान ...) किसानों को बिजली .. (....व्‍यवधान ...)

 

12.42 बजे बहिर्गमन

 

इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यगण सर्वश्री जितू पटवारी, सचिन यादव, सुखेन्‍द्र सिंह, मधु भगत, उमंग सिंघार द्वारा सदन से बहिर्गमन

(इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यगण सर्वश्री जितू पटवारी, सचिन यादव, सुखेन्‍द्र सिंह, मधु भगत, उमंग सिंघार द्वारा शासन के उत्‍तर से असंतुष्‍ट होकर व नारेबाजी करते हुए सदन से बहिर्गमन किया गया.)

 

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र) -- जितू भाई, आपके ग्रुप ने वॉकआऊट किया है. नेता प्रतिपक्ष जी, यह कैसा बहिर्गमन है, कुछ समझ नहीं आ रहा है, कैसे चला रहे हो आप. एक ग्रुप ने कर दिया, एक आ गया, एक बाहर है.

श्री रामनिवास रावत -- ग्रुप ने नहीं किया, सदस्‍य की पीड़ा थी.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- ठीक है, मैं तो यही पूछ रहा हूँ कि ये पीड़ा व्‍यक्‍त करने का नया तरीका इजाद किया है क्‍या आपने.

श्री रामनिवास रावत -- आप ही करते रहते थे, आप ही से सीखा है. आप भूल गए. आपको 11 साल हो गए.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- हम तो जानकारी ले रहे हैं. हम तो एकदम मुट्ठी की तरह कसे हैं. आप दोनों तय करो, आप दोनों के नेता कौन-कौन हैं. कमलनाथ जी हैं या ज्‍योतिरादित्‍य जी हैं.

श्री गोपाल भार्गव -- मैं पहले ही कह चुका हूँ, कांग्रेस पार्टी इस पृथ्‍वी का सबसे बड़ा संग्रहालय है.

श्री रामनिवास रावत -- आपको बताने की जरूरत नहीं है, सभी हमारे नेता हैं और सभी सम्‍माननीय हैं.

श्री जितू पटवारी -- बिजली की बात करो.

अध्‍यक्ष महोदय -- पाठक जी, अपना ध्‍यानाकर्षण पढ़ें.

 

12.44 बजे ध्‍यानाकर्षण (क्रमश:)

(3) छतरपुर जिले के नौगांव में निर्माणाधीन छात्रावास का कार्य पूर्ण न होने से उत्‍पन्‍न स्‍थिति

 

श्री पुष्‍पेन्‍द्रनाथ पाठक (बिजावर) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी ध्‍यानाकर्षण की सूचना का विषय इस प्रकार है :-

 

 

 

 

 

 

 

स्‍कूल शिक्षा विभाग मंत्री (कुँवर विजय शाह) -- अध्‍यक्ष महोदय,

 

 

श्री पुष्‍पेन्‍द्र नाथ पाठक (बिजावर) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से मेरा प्रश्‍न यह है कि डाइट में पूरे जिले के दूर-दूर से लगभग डेढ़ सौ किलोमीटर दूर से छात्रों का आना होता है और छात्रावास के अभाव में उन्‍हें बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है और कई लोग अप-डाउन करते हैं. यदि इसको शीघ्रता से पूर्ण कर लिया जायेगा तो शासन का भी लाभ होगा और विद्यार्थियों को भी लाभ होगा.

 

 

कॅुंवर विजय शाह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वैसे तो इसे बनते-बनते 19 साल हो गए और 19 साल में 40 परसेंट से ऊपर राशि बढ़ गई. हम पीडब्‍ल्‍यूडी और अन्‍य एजेंसी को सख्‍त निर्देश दे रहे हैं कि अगर ये 40 परसेंट राशि बढ़ गई और 19 साल में भवन नहीं बना तो क्‍यों नहीं आपकी तनख्‍वाह में से काट लिया जाए. हम सख्‍त कार्यवाही कर रहे हैं और भविष्‍य में शिक्षा विभाग का कोई भी भवन समय-सीमा में नहीं बनेगा तो हम नई सीमा शर्तें लागू करेंगे, ताकि शासन का पैसा व्‍यर्थ न जाये और समय-सीमा में भवन बनकर तैयार हो जाए, इसके लिए कठोर कार्यवाही करेंगे.

श्री पुष्‍पेन्‍द्र नाथ पाठक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने यह बड़ा साहसिक कदम उठाया है और इसके लिए मैं माननीय मंत्री जी का बहुत-बहुत आभार व्‍यक्‍त करता हॅूं. बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

 

(4) खरगौन जिले में सिकल सेल नामक बीमारी का प्रकोप होना

 

श्रीमती झूमा सोलंकी (भीकनगांव) -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरी ध्‍यानाकर्षण की सूचना का विषय इस प्रकार है -

 

 

 

 

 

 

 

 

लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण विभाग मंत्री (श्री रूस्‍तम सिंह) -- अध्‍यक्ष महोदय,

 

श्रीमती झूमा सोलंकी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, बड़वानी जिले में यह सुविधा हो चुकी है तो खरगौन जिले में यह बेहद जरूरी है.

अध्यक्ष महोदय-- उन्होंने स्वीकार कर लिया है.

श्रीमती झूमा सोलंकी-- पर कब तक करेंगे उसकी समयसीमा भी मुझे बता दें क्योंकि यह बहुत आवश्यक है, स्वास्थ्य से संबंधित है और आदिवासी बाहुल्य जिला है और इस बीमारी की जिस तरह से सरकार ने पहले सुविधा दी है, ब्लड की, दवाईयों की पर उसकी जांच भी बेहद जरूरी है. जांच के अभाव में ही कई मरीजों की मृत्यु हुई है.

श्री रुस्तम सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, अतिशीघ्र यह व्यवस्था की जाएगी और इसी में नहीं 22 आदिवासी बाहुल्य जिलों में इस तरह की बीमारियाँ होती हैं उन 22 जिलों में भी यह सुविधायें शीघ्र अति शीघ्र उपलब्ध करा दी जाएंगी.

 

सुश्री हिना लिखीराम कांवरे-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा बहुत महत्वपूर्ण ध्यानकर्षण है पांचवे नंबर पर है. आपसे मेरा करबद्ध निवेदन है कि इसको स्वीकार कर लीजिये. मुख्यमंत्री जी भी सदन में उपस्थित है, मेरा आपसे निवेदन है.

 

अध्यक्ष महोदय-- नियम रिलेक्स करके 4 ध्यानाकर्षण लिये हैं. नहीं ले पाएंगे.

 

12.51 बजे प्रतिवेदनों की प्रस्तुति

1. शासकीय आश्वासनों संबंधी समिति का बीसवां, इक्कीसवां, बाईसवां, एवं तेईसवां प्रतिवेदन

 

डॉ. राजेन्द्र पांडे(सभापति) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं शासकीय आश्वासनों संबंधी समिति का बीसवां, इक्कीसवाँ, बाईसवां एवं तेईसवां प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूं.

माननीय अध्यक्ष महोदय, इस अवसर मैं समिति के माननीय सदस्य श्री अजय सोनकर जी का, सूबेदार सिंह रजौधा जी का, रामेश्वर शर्मा जी का, के के. श्रीवास्तव जी का, दुर्गालाल विजय जी का, यादवेन्द्र सिंह जी का, मनोज अग्रवाल जी का , सोहनलाल बाल्मीक जी का, कुंवर हजारी लाल दांगी जी का, डा. योगेन्द्र निर्मल जी का अत्यंत आभारी हूं कि वह समिति में निरंतर रहे, उनकी सक्रियता रही. साथ ही समिति के समस्त अधिकारी और कर्मचारियों ने देर रात तक बैठकर इन आश्वासनों के क्रियान्वयन में काफी सहयोग दिया उनके प्रति भी आभार व्यक्त करता हूं.

 

 

 

 

2. कृषि विकास समिति का प्रथम एवं द्वितीय प्रतिवेदन

 

 

श्री केदारनाथ शुक्ल (सभापति) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं, कृषि विकास समिति का प्रथम एवं द्वितीय प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूं.

माननीय अध्यक्ष महोदय, यह समिति पहली बार अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत कर रही है समिति ने पांच संभागों का दौरा किया है और दौरा करने के बाद प्रदेश में कृषि के विकास के लिए बड़े उपयोगी सुझाव दिये हैं. मैं सदन से आग्रह करूंगा कि इस प्रतिवेदन को जरूर पढ़ें. धन्यवाद.

 

 

12.52 बजे याचिकाओं की प्रस्तुति

अध्यक्ष महोदय-- आज की कार्यसूची में सम्मिलित सभी याचिकायें पढ़ी हुई मानी जाएंगी.

 

 

12.53 बजे प्रतिवेदन प्रस्तुत करने की अवधि में वृद्धि का प्रस्ताव

 

विशेषाधिकार समिति को संदर्भित विशेषाधिकार भंग की सूचना पर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने की अवधि में आगामी सत्र के अंतिम दिवस तक की वृद्धि की जाना

 

 

 

 

 

12.55 बजे वक्‍तव्‍य

नर्मदा नदी को प्रदूषण मुक्‍त करने के संबंध में श्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्‍यमंत्री का वक्‍तव्‍य

 

 

अध्‍यक्ष महोदयअब माननीय मुख्‍यमंत्री जी नर्मदा नदी को प्रदूषण मुक्‍त करने के उद्देश्‍य से की जा रही सेवा यात्रा के संबंध में वक्‍तव्‍य देंगे.

मुख्‍यमंत्री (श्री शिवराज सिंह चौहान)माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नर्मदा जी मध्‍यप्रदेश की जीवन रेखा हैं, मध्‍यप्रदेश की समृद्धि का आधार है. मध्‍यप्रदेश को पानी, मध्‍यप्रदेश को बिजली मां नर्मदा जी की कृपा से मिलती है और मध्‍यप्रदेश के करोड़ों करोड़ लोग नर्मदा जी को नदी नहीं मां मानते हैं और मां मानकर नर्मदा जी की पूजा करते हैं. नर्मदा जी हमें जल के रूप में जीवन भी देती हैं.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नर्मदा जी ऐसी नदी हैं जो किसी ग्‍लेशियर से नहीं निकलती हैं बल्कि सतपुड़ा और विन्‍ध्‍याचल दोनों में जो घोर घने वन हैं, शाल के बड़े वृक्ष और बाकी पेड़ जो नर्मदा जी के जल को अवशोषित करते हैं और बाद में बूंद बूंद करके उस पानी को छोड़ते हैं वही पानी धीरे धीरे अलग-अलग नदियों के रूप में नर्मदा जी की धार बन जाता है. पिछले वर्षों में जंगल तेजी से कटे और पिछले वर्ष जब मैं डिण्‍डोरी गया था तो मैंने देखा की नर्मदा जी के उद्गम स्‍थल से नर्मदा जी की धार लगभग विलुप्‍त सी हो गई थी. तब तमाम विचार विमर्श के बाद नर्मदा जी की धारा अविरल बहती रहे, नर्मदा जी प्रदूषण मुक्‍त हों इसके लिए लगा कि एक अभियान चले. कई लोगों ने छोटे- छोटे अभियान चलाए. अलग अलग समाजसे‍वियों ने, नर्मदा भक्‍तों ने सफाई अभियान से लेकर बाकी कार्यक्रम चलाए हैं. लेकिन मुझे लगा कि एक ऐसा अभियान जिसमें सारी जनता जुड़े, समाज के सभी वर्ग जुडे़ं, सभी जनप्रतिनिधि जुडें, अलग-अलग स्‍वयंसेवी संगठन, धार्मिक संगठन, सामाजिक संगठन सब जुडे़ं और सब मिलकर एक अभियान चलाएं जिससे नर्मदा जी प्रदूषण मुक्‍त हों क्‍योंकि हम यह भी जानते हैं कि अलग-अलग शहरों के गंदे नाले, सीवेज का पानी नर्मदा जी में प्रवाहित होता है. य‍द्यपि आज भी तुलनात्‍मक दृष्टि से देखें तो नर्मदा जी का जल कम प्रदूषित है लेकिन धीरे-धीरे प्रदूषण बढ़ रहा है और इसलिए जरुरत इस बात की थी कि एक ऐसा अभियान चले जिससे मां नर्मदा जी की धारा अविरल रहे और जितने वैज्ञानिक विशेषज्ञ हैं उनसे जब सलाह की तो एक ही चीज आई कि नर्मदा के दोनों तटों पर व्‍यापक पैमान पर वृक्षारोपण की जरुरत है. दोनों तटों पर या तो फॉरेस्‍ट की जमीन, कोई शासकीय जमीन है या फिर निजी किसानों की जमीन है. शासकीय जमीन पर वृक्षारोपण करना आसान है, लेकिन किसानों से भी यह आग्रह किया जाए कि दोनों तटों पर एक-एक किलोमीटर केवल फलदार वृक्षों की खेती हो. हमने बैठक की और फलदार वृक्षों की खेती किसान कब करेंगे तब जब उनकी आजीविका सुरक्षित रहेगी और इसीलिए यह फैसला किया कि जो किसान एक किलोमीटर की पट्टी पर फलदार वृक्ष लगाएंगे उनको तीन साल तक 20 ह‍जार रुपय प्रति हेक्‍टेयर की दर से राहत की राशि दी जाएगी ताकि आजीविका चल सके और उसके साथ साथ दोनों फलों की कतार के बीच में वह जब तक फलदार वृक्ष बड़े नहीं हो सकते वह अपनी खेती भी जारी रख सकते हैं. उससे भी उनको अतिरिक्‍त आजीविका प्राप्‍त हो जाएगी और तीन साल बाद चौथे साल जब फलदार वृक्ष फल देने लगेंगे तो निश्चित तौर पर उनकी आमदनी और बेहतर हो जाएगी. किस जमीन पर कौन से फल लगाना चाहिए यह वहां के अलग- अलग एग्रो क्‍लाएमेटिक ज़ोन को देखकर, वहां की मिट्टी को देखकर, वहां की अवश्‍यकताओं को देखकर, किसानों से चर्चा करके उन्‍हें प्रोत्‍साहित करने का काम करेंगे लेकिन यह काम कोई कानून बनाकर नहीं होगा. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जनजागरण करके किसान स्‍वत: प्रेरित होते हैं और संकल्‍प करते हैं कि हम अपने खेत में फलदार वृक्षों की खेती करेंगे तो एक बड़ा काम होगा. नर्मदा जी दो हजार किलोमीटर से ज्‍यादा मध्‍यप्रदेश की सीमा में बहती है. दोनों तटों पर व्‍यापक वृक्षारोपण हो जाएगा उसके साथ जितने गांव नर्मदा जी के तट पर हैं वैसे तो शौच से मुक्‍त प्रदेश के सभी गांवों को करना है. लेकिन प्राथमिकता के आधार पर हर घर में शौचालय बन जाए ताकि बाहर खुले में न जाना पड़े. तीसरी चीज कई नगर ऐसे हैं जिनके सीवेज का पानी नर्मदा जी में जा रहा है वहां अगर ट्रीटमेंट प्लांट लग जाए और शुद्ध जल (ट्रीटेड वाटर) हम भेजें तो नर्मदा जी पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त हो सकेंगी. चौथी चीज यह जन-जागरण भी किया जाए कि नर्मदा जी में कई बार पूजन के नाम पर जैसी सामग्री प्रवाहित करते हैं वह भी प्रदूषण को बढ़ाती है जिसमें प्लास्टिक के दोने होते हैं अन्य चीजें होती हैं. जन-जागरण के माध्यम से यह कोशिश की जाए कि पूजन के कुण्ड बना दिए जाएं, वहां पूजन सामग्री आ जाए. नर्मदा जी की ही पूजा करना है तो नर्मदा जी के जल से पवित्र और कुछ नहीं हो सकता है. नर्मदा जल या दूध से पूजा हो सकती है. अनावश्यक रुप से जो चीजें जल को प्रदूषित करती हैं उनसे बचा जा सकेगा और पूजन कुण्ड में पूजन सामग्री जो आएगी उससे जैविक खाद भी बन सकता है. किसानों को यह भी प्रेरित करने का प्रयास किया जाए कि वे दोनों तटों पर फलदार वृक्षों की खेती करें और यह कानून बनाकर नहीं जबरदस्ती नहीं प्रेरणा से प्रेरित करने का प्रयास करें, ताकि केमिकल, फर्टिलाइजर जो धीरे-धीरे नर्मदा जी के जल में जाकर मिलता है और पानी को प्रदूषित करता है उससे भी बचा जाए. माननीय अध्यक्ष महोदय, यह काम केवल पत्रक जारी करके नहीं किया जा सकता है. दो चीजें इसमें और जोड़ी जा सकती हैं. एक नर्मदा जी के तट पर अंतिम संस्कार के संबंध में, क्योंकि लोगों की मान्यता है कि नर्मदा जी के तट पर अंतिम संस्कार होगा तो यह धार्मिक मान्यता है आस्था है कि वह उनके लिए श्रेष्ठ होगा, मोक्ष मिलेगा. जहां अंतिम संस्कार होता है, अंतिम विदाई होती है शांति धाम की स्थापना भी चिह्नित स्थानों पर हो सकती है. कई तटों पर ऐसे घाट हैं जहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं, माताएं-बहनें भी स्नान करती हैं वहां कपड़े बदलने का स्थान जिसको अंग्रेजी में चेंजिंग रुम कहते हैं वह सुरक्षित बन जाए तो मैं समझता हूँ कि और भी सुविधा होगी. इन सब उद्देश्यों को लेकर हम लोगों ने विचार किया तो यह लगा कि केवल पत्रक जारी करने से, कार्यक्रम घोषित करने से यह काम नहीं होगा. इसके लिए एक व्यापक जन-जागरण अभियान समाज के सब वर्गों को लेकर, सब साथियों को लेकर, सब जन-प्रतिनिधियों को लेकर अगर चलाया जाए तो समाज को काफी प्रेरित कर पाएंगे और एक पवित्र नदी जिनको हम माँ मानते हैं उनके संरक्षण का, वैसे तो वह हम सब का संरक्षण करती हैं. उनका कर्ज उतारने का वक्त है उनका उपकार मध्यप्रदेश पर है. एक व्यापक जन-जागरण अभियान चल सकता है और जनता स्वत: जुड़कर इस अभियान को अपने हाथ में ले सकती है. सरकार इस अभियान के पीछे रहेगी, हम समाज को आगे करने का प्रयास करेंगे. इसी उद्देश्य से 11 दिसंबर को अमरकंटक जो कि नर्मदा जी का उद्गम स्थल है वहां से "नर्मदा सेवा यात्रा" इस नाम से एक यात्रा प्रारंभ हो रही है. यह 11 दिसंबर 2016 से प्रारंभ होकर 11 मई 2017 तक चलेगी. निर्जन स्थान अगर होंगे तो यात्रा वाहन से होगी लेकिन जहां सघन गांव हैं वहां यह यात्रा पदयात्रा होगी. अधिकांश हिस्सा पदयात्रा का होगा. कुछ हिस्सा ऐसा होगा जहां 15-20 किलोमीटर केवल जंगल है तो वहां पैदल चलने का औचित्य नहीं है इसलिए वहां यात्रा वाहन से होगी. गांव में जब यह यात्रा जाएगी तो इस यात्रा का स्वागत करने, अगवानी करने गांव के लोग बाहर आएंगे और एक यात्रा का ध्वज रहेगा वह अपने हाथ में लेंगे. गांव में कार्यक्रम होगा जिसमें किसानों के द्वारा यह संकल्प किया जाएगा, प्रेरित करेंगे. कितने करते हैं कितने नहीं करते हैं यह अलग विषय है लेकिन प्रेरित करने का प्रयास करेंगे कि वे फलदार वृक्ष लगाएं. जो तैयार होंगे उनसे संकल्प-पत्र भरवाए जाएंगे. अगले साल वृक्ष लगाने के लिए 40 प्रतिशत सबसिडी सरकार देगी. उसके साथ-साथ गांव में कितने घर ऐसे हैं जहां शौचालय नहीं हैं उनकी सूची बनाकर तत्काल ही उनको स्वीकृत कर देंगे ताकि तट के सभी गांवों में शौचालय बन जाए. अरबन डेवलपमेंट, रुरल डेवलपमेंट विभाग के साथ साथ शहरी विकास विभाग ने यह योजना बनाई है कि नर्मदा जी के तटों पर जो शहर हैं उनके सीवेज का पानी नर्मदा जी में न जाए. शुद्ध करके, ट्रीट करके उस पानी को भेजें. जन-जागरण में इन सब कामों को करते हुए यह यात्रा आगे बढ़ेगी और हर गांव में एक नर्मदा सेवा समिति बनेगी जो इन कामों का फॉलो-अप करेगी. समाज को आगे रखकर एक बड़ा अभियान जन-जागरण का सरकार ने तय किया है. मुझे विश्वास है कि इस पूरे अभियान को धार्मिक संगठन, सामाजिक संगठन, स्वयं सेवी संगठन, आम जनता, जन-प्रतिनिधि. मैं सभी जन-प्रतिनिधियों से अपील करना चाहता हूँ जो नर्मदा के तट पर रहते हैं उनसे भी और जो पूरे प्रदेश में कहीं भी रहते हैं क्योंकि नर्मदा जी की कृपा तो हम सबको किसी न किसी रुप में मिलती है चाहे वह बिजली के रुप में, पानी के रुप में या अन्य रुप में हो. सारे जन-प्रतिनिधि जो इस सदन के सदस्य हैं वे भाग लें, सांसद भी भाग लें और जो स्थानीय निकायों के जन-प्रतिनिधि हैं वे भी भाग लें. सब समाज, सब संगठन, सभी दल मिलकर इस अभियान को चलाएं ऐसी कल्पना है.

अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से सदन से, सदन के माध्यम से जनता से भी अपील करना चाहता हूँ कि यह एक पवित्र नदी के संरक्षण का अपने आप में एक अनूठा अभियान है . इसमें सब समाज का सहयोग मिले, सब जनप्रतिनिधियों का सहयोग मिले, यही मैं अपील भी करता हूं और मुझे लगा कि विधान सभा का सत्र चल रहा है इसलिये इतने बड़े अभियान की जानकारी विधान सभा में भी मैं आपकी अनुमति से दूं. इसलिये यह विषय रखा है. मुझे पूरा विश्‍वास है आप सभी के सहयोग से एक व्‍यवस्थित अभियान नर्मदा जी को प्रदूषण मुक्‍त करने का दोनों किनारे पर वृक्षारोपण करने का यह चलेगा और मुझे पूरा विश्‍वास है हम लोग वांछित उद्देश्‍यों को पूरा करने का सफल हो पायेगा. सभी का सहयोग मिलेगा ऐसा मेरा विश्‍वास है. बहुत-बहुत धन्‍यवाद्.

श्री तरूण भनोत(जबलपुर-पश्‍चिम):- माननीय मुख्‍यमंत्री जी बहुत-बहुत धन्‍यवाद कि आपने इस अभियान की शुरूआत की और इसकी जानकारी सदन में दी. हम तो खुले हृदय से इस अभियान की समर्थन भी करते हैं, किन्‍तु कुछ बहुत छोटी-छोटी सी चीजें हैं जो मैं कहना चाहूंगा. चूंकि मुख्‍यमंत्री जी भी यहां पर बैठें है. माननीय निश्चित तौर पर किसान मदद करेंगे और आम आदमी भी चाहता है कि जो भावनात्‍मक रूप से मां नर्मदा से जुड़े हुए हैं. हम सब मिलकर साफ सफाई के लिये काम करें. परन्‍तु कुछ चीजें ऐसी हैं कि हम सब चाहें तो खुद पहल करके भी कर सकते हैं. मैं चाहता हूं कि एक प्रस्‍ताव इस विधान सभा से पारित करें कि मां नर्मदा तटों से जो रेत निकासी होती है उसको पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाना चाहिये. उसमें किसी प्रकार की जो माईनिंग की एक्‍टीविटी है, वह नर्मदा के तटों पर नहीं होनी चाहिये. अगर इस बारे में विधान सभा गौर करेगी तो जब हम 11 तारीख को इस अभियान की शुरूआत करने जा रहे हैं तो पहले ही इसकी बहुत अच्‍छी शुरूआत होगी. मैं माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपसे एक निवेदन और करना चाहता हूं कि

अध्‍यक्ष महोदय :- वैसे इस पर चर्चा होती नहीं है, नेता प्रतिपक्ष वक्‍तव्‍य पर अपना भाषण देते हैं. चूंकि आप नर्मदा तट के हैं इसलिये आपको अनुमति दी है.

श्री तरूण भनोत :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने यह बात इसलिये छेड़ी है कि मां नर्मदा पर बसे हुए सबसे महत्‍वपूर्ण तट जबलपुर क्षेत्र में आते हैं और शहरी क्षेत्र में मां नर्मदा कहीं से जाती है तो वह मेरे विधान सभा क्षेत्र से बहती है. मैं तो मुख्‍यमंत्री महोदय, से यह निवेदन करना चाहता हूं कि आज आप सदन में उपस्थित हैं तो यह घोषणा जरूर करें कि मां नर्मदा के ऊपर जितना भी रेत का उत्‍खनन हो रहा है. यह तुरंत तत्‍काल प्रभाव से बंद किया जाना चाहिये.

प्रभारी नेता प्रतिपक्ष (श्री बाला बच्‍चन):- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि आदरणीय मुख्‍यमंत्री जी का वक्‍तव्‍य अभी मां नमामि देवी नर्मदा जी से संबंधित जो नर्मदा सेवा योजना जो 11 दिसम्‍बर से निकाल रहे हैं, उसको हमने सुना. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें मेरा कहना है कि मेरी अपनी विधान सभा क्षेत्र से भी और मैं समझता हूं कि यहां बहुत सारे विधायकगण हैं जिनके विधान सभा क्षेत्र से और उनके जिलों से भी मां नर्मदा गुजरती है. आप यात्रा तो कर रहे हैं, यात्रा के वक्‍तव्‍य में आपने वह सारी चीजें दी हैं जिसको अभी हमने पढ़ा , उसके मकसद और उद्देश्‍य को भी पढ़ा है, लेकिन इसके पीछे यह कहना है कि यह यात्रा केवल राजनीतिक यात्रा तक न सीमित रह जाये.

अध्‍यक्ष महोदय, मेरा यह आग्रह है कि मेरे विधान सभा क्षेत्र से भी लम्‍बी मां नर्मदा जी गुजरती है, मेरी जानकारी में है कि मां नर्मदा जहां से निकलती है और जहां जाकर मिलती है उसकी कुल लंबाई लगभग 1213 किलोमीटर है और वह मध्‍यप्रदेश में हजार किलोमीटर की दूरी तय करती है. हमारे यहां पर मुख्‍यमंत्री जी जो दिक्‍कतें आ रही हैं, वह मैं आपको बताना चाहता हूं. चूंकि आप यात्रा लेकर निकलेंगे तो इस बात का ध्‍यान रखा जाये, क्‍योंकि हम लोगों को आशंका है कि यह यात्रा एक राजनैतिक यात्रा बनकर न रह जाये. मैं यह कहना चाहता हूं कि ऐसे ही आपने एक राम पथ, जहां-जहां से रामजी मध्‍यप्रदेश से निकले हैं, वह रामपथ के बारे में भी आपने बोला था लेकिन वह मालूम नहीं कहां है, वह तो बात करने के बाद समाप्‍त ही हो गयी है. आपने जैसे रामपथ की बात कही थी, वैसे ही मैं समझता हूं कि यह जो नमामि देवी नर्मदा सेवा यात्रा जो है, कहीं यह भी लुप्‍त न हो जाये. यह भी खत्‍म न हो जाये. दूसरा, जिन इलाकों से आप निकलेंगे वहां बहुत समस्‍याएं और दिक्‍कतें हैं. लोगों की जमीनें नर्मदा जी के ऊपर सरदार सरोवर बांध जो गुजरात में बन रहा है उससे मध्‍यप्रदेश के लोग जो प्रभावित हुए हैं, जो विस्‍तापित हुए हैं. उनको न तो गुजरात में जमीन मिली है और न ही आज तक वे लोग ठीक ढंग से विस्‍थापित हो पाये हैं. माननीय मुख्‍यमंत्री जी, यह बातें वहां पर आयेंगी और जो पुनर्वास स्‍थल हैं, उन पुनर्वास स्‍थलों में न तो बिजली, सड़क, पानी ,स्‍कूल और न ही अस्‍पताल बन पाये हैं. उनकी अभी तक सुध नहीं ली है और अगर अभी सुध ले ली जाती है और इसके बाद उनके काम हो जाते हैं और ठीक ढंग से वह विस्‍थापित हो जाते हैं तो मैं समझता हूं कि ज्‍यादा अच्‍छा होगा. माननीय मुख्‍यमंत्री जी, नर्मदा जी के जिन-जिन इलाकों से और जिन-जिन विधान सभा क्षेत्रों से निकलेंगे अगर इसका ध्‍यान रखा जायेगा तो ज्‍यादा अच्‍छा होगा.

राज्‍य मंत्री,नर्मदा घाटी विकास (श्री लाल सिंह आर्य) :- नेता प्रतिपक्ष महोदय आपको जानकारी नहीं है, वह सभी लोग विस्‍थापित हो गये हैं. गुजरात में भी और हमारी मध्‍यप्रदेश सरकार ने भी सभी कर विस्‍थापित कर दिया है.

श्री बाला बच्चन--अध्यक्ष महोदय, माननीय मुख्यमंत्रीजी ने वक्तव्य दिया है इसमें मैं तरूण भाई की बात से सहमत हूं कि अवैध रेत का बहुत ज्यादा उत्खनन हो रहा है जो कि नर्मदा जी से हो रहा है तो माननीय मुख्यमंत्री जी हमारी पार्टी के समस्त विधायकों की तरफ से आज ही आप इस बात की घोषणा करें कि रेत का अवैध रूप से उत्खनन हो रहा है आज ही वहां से रेत निकालना बंद करें तो मैं समझता हूं कि यात्रा की सार्थकता होगी और आपके वक्तव्य की भी सार्थकता होगी.

श्री उमंग सिंघार--अध्यक्ष महोदय, वहां से अवैध रेत का उत्खनन बंद करायें अगर आपकी सच्ची यात्रा है और दिल से है तो फिर आपके हम साथ हैं माननीय मुख्यमंत्री जी.

श्री बाला बच्चन--अध्यक्ष महोदय, एक महत्वपूर्ण बात रह गई है जिन शर्तों पर सरदार सरोवर बांध नर्मदा जी का बन रहा है यह नर्मदा का पानी गुजरात के लोगों को देंगे.

अध्यक्ष महोदय--इस पर अलग से फिर से चर्चा करवा देंगे.

श्री बाला बच्चन--अध्यक्ष महोदय, यह जो नर्मदा का पानी गुजरात के लोगों को देंगे और बिजली मध्यप्रदेश के लोगों को देंगे उनको बिजली कम दर पर अथवा मुफ्त में देना चाहिये और पर्याप्त मात्रा में देना चाहिये और जो उसमें प्रभावित लोग हैं उनको वहां पर अलग से बसाने की प्रक्रिया भी की जाये. उनको जो बिजली अथवा रोजगार मिलना चाहिये, वह नहीं मिल रहा है, इस बात का भी माननीय मुख्यमंत्री जी ध्यान रखें.

डॉ.नरोत्तम मिश्र--अध्यक्ष महोदय, आप यात्रा के समर्थन में हैं अथवा विरोध में हैं ?

श्री रामनिवास रावत--अध्यक्ष महोदय, माननीय मुख्यमंत्री जी आप मुझे इस बारे में एक मिनट के लिये बोलने के लिये समय दिलवाएंगे.

अध्यक्ष महोदय--जी बोलिये.

श्री रामनिवास रावत--अध्यक्ष महोदय, वैसे तो माननीय मुख्यमंत्री जी का स्नेह है वह उदार भी है, इसमें आपकी भी कृपा है. निश्चित रूप से नदियों को संरक्षित करने की आवश्यकता है और हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी ने मां नर्मदा जो मध्यप्रदेश की जीवन-दायिनी नदी है, उसको संरक्षित करने की बात तथा उसे सुरक्षित करने की बात और जनजागरण के माध्यम से प्रदूषण से मुक्त करने की बात माननीय मुख्यमंत्री जी ने की और निश्चित रूप से नदियों का पानी अवरल रूप से बनता रहे, इसकी चिन्ता हम सबको होना चाहिये और माननीय मुख्यमंत्री जी ने जो वक्तव्य दिया है उनकी जो सोच है उसके लिये हम हृदय से धन्यवाद देते हैं, लेकिन यह बात राजनैतिक बनकर न रह जाए. हम चाहते हैं तथा माननीय मुख्यमंत्री जी आप भी चाहते हैं और हम लोगों का प्रस्ताव है कि मां नर्मदा जी के हृदयस्थल से अवैध रेत का उत्खनन को पूर्णरूपेण समाप्त कर दिया जाये मां नर्मदा जी को बचाने के लिये, तब आपकी हम तारीफ करेंगे.

श्री शैलेन्द्र जैन--अध्यक्ष महोदय, इतने अच्छे अभियान पर राजनीतिकरण नहीं होना चाहिये.

मुख्यमंत्री (श्री शिवराज सिंह चौहान)--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा यह निवेदन है कि कुछ मुद्दे कम से कम ऐसे होने चाहिये जिसमें सदन में चाहे सत्तापक्ष हो, अथवा प्रतिपक्ष हो वह एकमत होकर के निकलें और नर्मदा जी का विषय जो मैंने रखा बहुत ही शुद्ध एवं पवित्र हृदय से रखा. अगर सबके सहयोग लेने की इच्छा एवं अपेक्षा, आवश्यकता न होती तो मुझे किसी ने वक्तव्य देने के लिये नहीं कहा था यह खुद ही मेरे मन में आया कि सदन में इतने माननीय सदस्य बैठे हैं वह इस अभियान से जुड़ें. ऐसे विषयों पर भी हम टोका-टोकी करेंगे और उसको हम राजनीति से जोड़ने का विषय करेंगे तो हर विषय राजनीति में चला जाएगा. कम से कम कुछ विषयों पर तो हम हृदय की शुद्धता के साथ हम विचार करें मैं आप सबको आमंत्रित करता हूं कि आप लोग अमरकंटक आईये. अगर वहां पर नहीं आ सकते हैं तो यात्रा में कहीं न कहीं जरूर आईये हम सब मिलकर इस अभियान को चलायें. कई बार कुछ अभियान ऐसे होते हैं जो सचमुच में नया इतिहास रचने में सफल हो सकते हैं और इसीलिये इसी शुद्ध एवं पवित्र भाव से इस विषय को हम राजनीति से ऊपर रखें. हम सब लोग इसको मिलकर के चलायें. जहां संभव हो सकता है सब जगहों पर सब लोग नहीं जा सकते हैं, जहां पर संभव हो सकता है, वहां पर आप लोग भाग लें और वह सारे उपाय करें जिससे नर्मदा जी की धारा अविरल बहती रहे तथा नर्मदा जी प्रदूषण से मुक्त हो.उसमें हम सबका सहयोग मिलेगा तो मुझे लगता है कि एक बड़ा काम इस सदन के माननीय सदस्‍यों द्वारा, हम सबके द्वारा मिलकर होगा. मेरे मित्रों ने कुछ विषय उठाये हैं तो मैं आपको आश्‍वस्‍त करता हूँ कि राजनीति का कोई सवाल नहीं है. नहीं तो, मैं यहां विषय को लेकर नहीं आता. हम झण्‍डा लेकर चल देते, हमें कौन रोकने आता ? कोई बात नहीं है. इसमें कोई भी अभियान चला सकता है. हमें सबको जोड़ने की इच्‍छा है, इसलिए यह कहा और दूसरी बात कोई भी अवैध उत्‍खनन नर्मदा जी से न हो, इसकी पूरी व्‍यवस्‍था करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे (सत्‍तापक्ष के सदस्‍यों द्वारा मेजों की थपथपाहट).

अध्‍यक्ष महोदय, मैं फिर दृढ़ता के साथ कह रहा हूँ और अब मैं पूरी ताकत से कह रहा हूँ कि यह विषय राजनीति करने का नहीं है. अवैध उत्‍खनन किसी भी हालत में नहीं होगा बाकी चीजों पर बैठकर विचार होगा. एक विषय यहां पर रखा और सब का सब एवं पूरा ही रोक दो तो यह नहीं चलेगा, अवैध बिल्‍कुल नहीं होगा. अगर कहीं एन.जी.टी. कहता है तो दूसरी आवश्‍यकता कहीं न कहीं लोगों को रेत की भी होती है. अगर वैध कहीं से आ सकता है तो आप वैध के रास्‍ते बन्‍द मत कीजिये. ऐसी चीज, जिससे नर्मदा जी को नुकसान न हो, उसके रास्‍ते बन्‍द नहीं कीजिये. नहीं तो यह होगा कि राजनीति में मामला उलझकर रह जायेगा और इसलिए नर्मदा जी के संरक्षण के लिए जो आवश्‍यक उपाय होंगे, वे सब किये जायेंगे. उसमें अगर विशेषज्ञ सब मिलकर यह फैसला करेंगे कि कोई उत्‍खनन न हो, तो यह फैसला भी कर दिया जायेगा लेकिन विशेषज्ञों के साथ, पर्यावरणविदों के साथ बैठकर, जानकारों के साथ बैठकर, जब फैसला होगा तब करेंगे. हमने आंख बंद कर एक वक्‍तव्‍य दे दिया तो सबको फंसा लो और मिलकर अभी कह दो तो यह कोई विचार करने की सभा है या खड़े होकर कह दो कि अभी कह दो, अभी कह दो.

अध्‍यक्ष महोदय, मैं आज आपसे चाहता हूँ कि जब प्रतिपक्ष ने रोका-टोकी की है तो वह बताएं कि वे इस यात्रा के साथ है कि नहीं, वे समर्थन कर रहे हैं कि नहीं कर रहे हैं. मैं अपील करता हूँ कि हम सब मिलकर चलें. बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

प्रभारी नेता प्रतिपक्ष (श्री बाला बच्‍चन) अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने बोला, उसमें हम भी हमारी बात रखना चाह रहे हैं. हम यात्रा के साथ में हैं एवं ताली बजाकर वक्‍तव्‍य का एवं यात्रा का स्‍वागत कर रहे हैं. आपने जो मुद्दे की बात की है, हमने भी मुद्दे डाले हैं. आपके और हमारे मुद्दे मिलकर, आखिर उसका मकसद तो एक ही है कि नर्मदा जी संरक्षित रहें और उसके बाद नर्मदा जी की धारा निरन्‍तर बहती रहे. लेकिन हमारे पास जो मुख्‍य मुद्दे थे, वे मुद्दे हमने आपको डाले हैं तो आप मुख्‍यमंत्री के नाते उस पर विचार करें और माननीय मुख्‍यमंत्री जी आप उस पर व्‍यवस्‍था दें.

 

 

1.17 बजे शासकीय विधि विषयक कार्य

(1) मध्‍यप्रदेश मोटरयान कराधान (संशोधन) विधेयक, 2016 (क्र. 32 सन् 2016)

परिवहन मंत्री (श्री भूपेन्‍द्र सिंह) अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करताहूँ कि मध्‍यप्रदेश मोटरयान कराधान (संशोधन) विधेयक, 2016 पर विचार किया जाये.

अध्‍यक्ष महोदय प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ कि मध्‍यप्रदेश मोटरयान कराधान (संशोधन) विधेयक, 2016 पर विचार किया जाये.

 

 

1.18 बजे औचित्‍य का प्रश्‍न एवं अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

विधेयक की प्रतियां दो दिन पूर्व सदस्‍यों को उपलब्‍ध कराने विषयक्

अध्‍यक्ष महोदय आप इस विधेयक के संबंध में कोई प्‍वाईंट ऑफ आर्डर देना हो तो दीजिये.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी अध्‍यक्ष महोदय, यह विधानसभा प्रक्रिया तथा कार्य संचालन की किताब है.

अध्‍यक्ष महोदय वह विषय निकल गया है.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी अध्‍यक्ष महोदय, यह माननीय मुख्‍यमंत्री जी वाले विषय पर नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय आप बताइये, कौन से विषय पर है ?

पंचायत मंत्री (श्री गोपाल भार्गव) - एक बार तो बोलो, नर्मदे हर.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - नर्मदे हर. हमारे उस विषय पर नहीं है. माननीय मंत्री जी ने अभी जो संशोधन प्रस्‍तुत किया है. उस विषय पर हमारा प्‍वाईंट ऑफ आर्डर है.

अध्‍यक्ष महोदय आप बैठ जाइये. आप बोलें. श्री तिवारी जी का प्‍वाईंट ऑफ आर्डर सुन लें.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी अध्‍यक्ष महोदय, आपने हमारे प्‍वाईंट ऑफ आर्डर को मुख्‍यमंत्री जी से ले जाकर जोड़ दिया. आप मध्‍यप्रदेश विधानसभा प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियम 65 को देख लें. मेरा कहना है कि यह विधेयक कल सदन में प्रस्‍तुत किया गया है. इसमें विधायकों को अपनी बात कहने एवं इस पर चर्चा करने के लिए, कम से कम 2 दिन का समय मिलना चाहिए.

अध्‍यक्ष महोदय मैंने इसको शिथिल किया है.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी अध्‍यक्ष महोदय, मेरी पूरी बात सुन ली जाये.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - अध्‍यक्ष महोदय, कल भी मैंने कहा था, आप आसंदी में उपस्थित नहीं थे, उपाध्‍यक्ष महोदय थे. इस सदन में कानून में अमेंडमेंट कानून बनाने की बात आती है जो इतनी लापरवाही तरीके से प्रस्‍तुत की जाती है कि विधायक उसमें भाग नहीं ले पाते. चार- चार अमेंडमेंट आपने कल प्रस्‍तुत कर दिया, चारों अमेंडमेंट में आज ही आप चर्चा कराना चाहते हैं, उसको पास करवाना चाहते हैं. हर विधायक के पास न तो लायब्रेरी है न तो पुस्‍तक है. रात 12 बजे आप ये देते हों, हम क्‍या चर्चा करेंगे और हम सरकार का क्‍या सहयोग कर सकते हैं, इसमें जब इसमें नियम है, नियम 65 में स्‍पष्‍ट लिखा है, परन्‍तु ऐसा कोई प्रस्‍ताव उस समय तक नहीं किया जाएगा, जब तक कि विधेयक को प्रतिलिपियां सदस्‍यों के उपयोग के लिए उपलब्‍ध न कर दी गई हों. दो दिन पहले हमको अमेंडमेंट की कापी देना चाहिए.

अध्‍यक्ष महोदय - आपका उत्‍तर सुन लें अब. विधेयकों की सूचना 7 तारीख को दे दी गई थी और कल पुर:स्‍थापित किया गया.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - अध्‍यक्ष महोदय, कापी कल मिली है, कल भी नहीं मिली, लेकिन हम कल मान लेते हैं, क्‍योंकि कल पुर:स्‍थापित किया गया.

पंचायत मंत्री (श्री गोपाल भार्गव) - इसी सदन के सौ उदाहरण होंगे कि जब नियम शिथिल करके उसी दिन चर्चा हुई.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - आपको अधिकार नहीं है मंत्री जी इसमें, अध्‍यक्ष महोदय को अधिकार है.

अध्‍यक्ष महोदय - पाइंट आफ आर्डर पर वे भी बोल सकते हैं, यदि मैं अनुमति दूं तो.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - बोलने का अधिकार है बोलिए. ये राजनैतिक विषय नहीं, हर विधायक का अधिकार है.

श्री गोपाल भार्गव - अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य जो कह रहे हैं कि विधानसभा की कार्य और प्रक्रिया नियमावली में यह प्रावधान है. मैं इस बात को मानता हूं. औचित्‍य के हिसाब से, आवश्‍यकता के हिसाब से हमेशा सदन में आसंदी की अनुमति और सदन के बहुमत से यह होता है कि जब भी विधेयक यहां पर प्रस्‍तुत होता है, उसी दिन भी चर्चा हुई है, ऐसे उदाहरण भी है, इसलिए इसका कोई औचित्‍य नहीं है.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - अध्‍यक्ष महोदय, मैं फिर से निवेदन करना चाहूंगा और नियम 65 को मैं फिर से पढूंगा, परन्‍तु ऐसा कोई प्रस्‍ताव उस समय तक नहीं किया जाएगा, जब तक कि विधेयक को प्रतिलिपियां सदस्‍यों के उपयोग के लिए उपलब्‍ध न कर दी गई हों, पहली बात तो यह है कि क्‍या दो दिन पहले ये प्रतिलिपियां उपलब्‍ध करवाई गई है.

अध्‍यक्ष महोदय - 7 तारीख को उपलब्‍ध करा दी गई थी.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - अध्‍यक्ष महोदय, नहीं उपलब्‍ध कराई गई. एक विधायक के नाते हम ये अपेक्षा आपसे करते हैं और इस विधानमंडल में हम बैठे है, जहां कानून बनता है और इतनी मजाक के साथ अगर कानून बनेंगे तो क्‍या होगा. मेरा यह आरोप है.

अध्‍यक्ष महोदय - ऐसे पचासों पूर्व के उदाहरण है, जिसमें कि नियमों को शिथिल करके किया गया है.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - इसमें क्‍या इमरजेंसी है, क्‍या दो दिन का समय नहीं देंगे. हम सरकार की चर्चा में भाग लेना चाहते है, कुछ सहयोग करना चाहते है, सरकार का सह