मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा त्रयोदश सत्र

 

 

फरवरी-मई, 2017 सत्र

 

गुरूवार, दिनांक 9 मार्च, 2017

 

(18 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1938 )

 

 

[खण्ड- 13 ] [अंक- 12 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

गुरूवार, दिनांक 9 मार्च, 2017

 

(18 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1938 )

विधान सभा पूर्वाह्न 11.02 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

प्रधानमंत्री फसल बीमा राशि का वितरण

[किसान कल्याण तथा कृषि विकास]

1. ( *क्र. 5397 ) श्री रमेश पटेल : क्या किसान कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बीमा किस तिथि से मान्‍य किया जाता है? प्रीमियम जमा करने की तिथि‍ या उसके कितने दिन बाद से बीमा मान्‍य किया जाता है? (ख) इसमें किसान को बीमा पॉलिसी वितरण/रसीद क्‍यों नहीं दी जाती है? कारण बतावें। (ग) खरीफ मौसम की प्राकृतिक आपदा से हुई क्षति के फलस्‍वरूप बड़वानी जिलान्‍तर्गत कितनी बीमा राशि कितने कृषकों को दी गई? शून्‍य से 100, 100-200, 200-300 रू. की बीमा राशि कितने कृषकों को दी गई? (घ) रबी फसल की जानकारी भी प्रश्‍नांश (ग) अनुसार देवें। प्रीमियम से कम बीमा राशि देने के लिए दोषी बीमा कंपनियों पर शासन कब तक कार्यवाही करेगा?

किसान कल्याण मंत्री ( श्री गौरीशंकर बिसेन ) : (क) प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनांतर्गत खरीफ मौसम में ऋणी एवं अऋणी कृषकों के बीमांकन एवं प्रीमियम काटने की अवधि 1 अप्रैल से 16 अगस्‍त तथा रबी में 15 सितंबर से 15 जनवरी है। प्रीमियम जमा करने की तिथि से ही बीमा मान्‍य किया जाता है। (ख) योजनांतर्गत अऋणी किसानों को रसीद बैंक द्वारा दी जाती है तथा ऋणी कृषकों के प्रीमियम कटौती की जानकारी बैंक पासबुक में होती है। योजनांतर्गत सभी बीमित कृषकों को पॉलिसी के रूप में फोलियो एवं रसीद देने का कार्य प्रक्रियाधीन है। (ग) खरीफ 2016 मौसम में बड़वानी जिले में प्राकृतिक आपदा से जो नुकसान हुआ है तथा जिला स्‍तर पर गठित सर्वे समिति द्वारा जिन प्रभावित बीमित क्षेत्र का सर्वे किया है उनके दावों की गणना बीमा कंपनी स्‍तर पर प्रक्रियाधीन है। (घ) रबी 2016-17 में बड़वानी जिले में प्राकृतिक आपदा से नुकसान की कोई सूचना बीमा कंपनी को प्राप्‍त नहीं हुई है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्री बाला बच्‍चन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मुख्‍यमंत्री जी और माननीय प्रधानमंत्री किसानों को क्‍या टोपी पहनाने में लगे हुए हैं? सीहोर जिले के शेरपुर में प्रधानमंत्री जी ने आकर घोषणा की है कि मुख्‍यमंत्री फसल योजना हम शुरू कर रहे हैं और उसके प्रावधानों को मैंने पढ़ा है कि अगर प्राकृतिक आपदाओं से फसलों का नुकसान होता है तो 25 प्रतिशत राशि तत्‍काल किसानों को देने का प्रावधान है. खरीफ फसल को करीब चार माह हो गया है, बड़वानी में प्राकृतिक आपदा से फसलों का नुकसान हुआ है. मैंने प्रश्‍न में पूछा है कि यह राशि अभी तक क्‍यों नहीं दी गई है, क्‍या इसकी प्रक्रिया हो गई है, चार महीने के बाद जवाब आता है कि अभी कंपनी अपने स्‍तर पर उसकी प्रक्रिया पूरी करने में लगी है. जबकि अभी तक 25 प्रतिशत राशि मिल जानी चाहिए थी. अभी तक प्रधानमंत्री फसल बीमा की राशि नहीं दी गई है. आज ही हमारे दूसरे साथी श्री जितू पटवारी के प्रश्‍न क्रमांक 5313 में यह लिखा गया है कि फसल बीमा योजना की राशि मध्‍यप्रदेश के केवल दतिया में ही दी गई है वह भी शून्‍य से हजार रूपए तक का क्‍लेम 1253 किसानों को एवं 1 हजार से 2 हजार की राशि केवल 3253 किसानों को दिया गया है.

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ये भाषण दे रहे हैं या प्रश्‍न कर रहे हैं. इस भाषण का जवाब कैसे दें, आप प्रश्‍न कर ले आप कल तक यह कह रहे थे कि किसान बीमा योजना का एक पैसा नहीं आया है और आज इन्‍होंने दतिया में पैसा आया यह स्‍वीकार कर लिया, इसका मतलब है कि राशि आनी शुरू हो गई है.

अध्‍यक्ष महोदय - आप सीधा प्रश्‍न कर लें.

श्री बाला बच्‍चन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बड़वानी जिले का मैंने प्रश्‍न पूछा है, मैं यह जानना चाहता हूं कि अभी तक वहां के किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा की 25 प्रतिशत राशि क्‍यों नहीं मिली, दूसरा जो 1 हजार और 2 हजार राशि तक ही फसल बीमा के लिए सीमित रखा गया है, क्‍या जल्‍दी और बढ़ी हुई राशि किसानों को दी जाएगी और ज्‍यादा राशि दी जाएगी? प्रीमियम की राशि तो अड़कर के किसानों से जमा करवाई गई है. मैं यह जानना चाहता हूं कि अभी तक बड़वानी जिले के किसानों को फसल बीमा की राशि क्‍यों नहीं मिली, क्‍या उनको बढ़कर राशि मिलेगी?

श्री गौरीशंकर बिसेन -- अध्यक्ष महोदय, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दावों के भुगतान के सूत्र हैं और उसके अनुसार ही इसमें भुगतान होता है. हमारे मित्र थोड़ा सा सब्र करें, सारा पैसा मिलेगा जो क्लेम होंगे, उसके लिये समिति बनी है. मैं तो एक बात कहना चाहता हूं कि इसमें थ्रेशोल्ड उपज- (माइनस) अनुमानित उपज उसके बटे (/) होंगे थ्रेशोल्ड उपज . उदाहरण के लिये थ्रेशोल्ड उपज 15 आई और अनुमानित 5 आई, तो (-) माइनस होने पर 10/3 हो गया और इसके आधार पर उसने यदि 1 लाख रुपये का ऋण लिया है, तो उसको 25 प्रतिशत, मतलब जो गणना का 25 प्रतिशत है, 16600 रुपये मिलता है, यह इसका सूत्र है. तो इसमें जब तक हमारा अंतिम क्रॉप कटिंग का एक्सपेरीमेंट नहीं आता,तब तक उसमें भुगतान नहीं होता. जहां तक आपके बड़वानी का विषय है, तो बड़वानी में प्रश्न सिर्फ खरीफ वर्ष 2015-16 का पूछा था, तो खरीफ वर्ष 2015-16 में राष्ट्रीय फसल बीमा योजना थी और इस राष्ट्रीय फसल बीमा योजना के तहत 7.84 करोड़ रुपया किसानों को दिया गया था, जो मैंने अपने उत्तर में भी दिया है.

श्री बाला बच्चन -- अध्यक्ष महोदय, मैं यह जानना चाहता हूं कि आपने जो दिया है राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना में 30 रुपये और 40 रुपये और 85 पैसे ऐसे चेक दिये हैं..

श्री गौरीशंकर बिसेन -- बच्चन जी, ऐसा नहीं है. आपने जो प्रश्न किया है वर्ष 2015-16 का, वह पैसा राष्ट्रीय फसल बीमा योजना का है, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना खरीफ 2016 से प्रारंभ हुई है.

श्री बाला बच्चन -- अध्यक्ष महोदय, आपने देखा है, मेरा जो प्रश्न है, उसमें खरीफ,2016 के बारे में ही मैंने पूछा है और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम से मैंने पूछा है. आप इसको घुमाने का प्रयास न करें. देखिये, किसानों से तो अड़कर राजस्व विभाग ने इसकी प्रीमियम राशि जमा करवाई है, उसके बाद अभी तक जो अंश राज्य सरकार का केंद्र सरकार को जमा होना चाहिये, वह अभी तक जमा नहीं हुआ है. मेरा यह आग्रह है कि किसानों को यह कब तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की राशि मिल जायेगी, जिससे कि किसानों को राहत मिल सके, किसान वैसे ही बहुत तंग एवं परेशान है.

श्री गौरीशंकर बिसेन -- अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य यदि उत्तर (ग) को गंभीरता से देखें और पढ़ें, तो मैंने साफ साफ कहा है कि खरीफ 2016 मौसम में जिले में प्राकृतिक आपदा से जो नुकसान हुआ है तथा जिला स्तर पर गठित सर्वे समिति द्वारा जिन प्रभावित बीमित क्षेत्र का सर्वे किया है, उनके दावों की गणना बीमा कम्पनी स्तर पर प्रक्रियाधीन है. अब इसमें थोड़ा सा समय लगता है. प्रक्रिया पूरी होते ही पैसा किसानों को दिया जायेगा, जिनका नुकसान हुआ है, वह मिल जायेगा.

श्री बाला बच्चन -- अध्यक्ष महोदय, एक तो मंत्री जी अभी खरीफ 2015-16 की बात कर रहे थे. आप देखें, इसमें क्लीयर लिखा है कि खरीफ,2016, इससे सरकार, विभाग और आपकी नीयत का पता चलता है.

अध्यक्ष महोदय -- आप प्रश्न करें और लोगों के भी प्रश्न हैं. 7 मिनट तो एक ही प्रश्न को हो गये हैं.

श्री गौरीशंकर बिसेन -- अध्यक्ष महोदय, आपने प्रश्न (क) में वर्ष 2015-16 का भी पूछा है, तो मैंने वर्ष 2015-16 (क) का उत्तर दिया है. आपने प्रश्नांश (क) में वर्ष 2015-16 में फसल बीमा के संदर्भ में साफ पूछा है, इसलिये मैंने वर्ष 2015-16 के बारे में आपको बताने का प्रयास किया है.

श्री बाला बच्चन -- अध्यक्ष महोदय, प्रश्नांश (क) में 2015-16 कहां है. इसमें वर्ष 2015-16 का कहीं उल्लेख नहीं है.

अध्यक्ष महोदय -- प्रश्न संख्या-2 श्री हरदीप सिंह डंग. इस प्रश्न में 10 मिनट हो गये हैं.

श्री बाला बच्चन -- अध्यक्ष महोदय, मैं यह जानना चाहता हूं कि जिस तरह से आपने तत्परता दतिया के किसानों के बारे में दिखाई, मध्यप्रदेश के बाकी और किसानों के बारे में क्यों नहीं दिखाई.

श्री गौरीशंकर बिसेन -- अध्यक्ष महोदय, देखिये इसमें दो वर्ष है. वर्ष 2015-16 तक सिर्फ राष्ट्रीय फसल बीमा योजना थी और 2016 के बाद प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना चालू हुई.

..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय -- प्रश्न संख्या 2. डंग साहब आप पूछिये. डंग जी के अलावा किसी का नहीं लिखा जायेगा.

श्री बाला बच्चन -- (xxx)

अध्यक्ष महोदय -- प्रश्न संख्या 3.

श्री हरदीप सिंह डंग -- अध्यक्ष महोदय, ये बोल रहे हैं, तो मैं कैसे बोलूं.

अध्यक्ष महोदय -- आप प्रश्न क्यों नहीं पूछ रहे हैं. मैंने बोल दिया कि आपके अलावा किसी का नहीं लिखा जायेगा. आप पूछिये.

श्री बाला बच्चन -- (xxx)

अध्यक्ष महोदय -- आप बैठिये. दूसरों के प्रश्न भी जरुरी हैं. आप उप नेता प्रतिपक्ष हैं, आपको अपने सदस्यों का संरक्षण करना चाहिये. प्रश्न संख्या -2 , श्री हरदीप सिंह डंग. डंग जी के अलावा किसी का नहीं लिखा जायेगा. पहले ही प्रश्न पर 10 मिनट हो गये हैं.

श्री बाला बच्चन -- (xxx)

 

 

मन्दसौर जिले को आवंटित राशि

[लोक निर्माण]

2. ( *क्र. 5610 ) श्री हरदीप सिंह डंग : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विभाग द्वारा मन्दसौर जिले में विगत 1 वर्ष में क्या-क्या विकास कार्य करवाए गए? (ख) विगत वर्ष 2016 के मूल बजट में एवं अनुपूरक बजट में मन्दसौर जिले को आवंटित राशि की जानकारी कार्य का नाम एवं राशि विधानसभा क्षेत्रवार बतावें। (ग) विगत एक वर्ष में प्रश्‍नकर्ता द्वारा माननीय मंत्री जी को दिये गये मांग पत्रों की जानकारी देवें। (घ) सुवासरा विधानसभा क्षेत्र में विकास हेतु वर्ष 2016-17 के मूल बजट एवं अनुपूरक बजट में कौन-कौन से कार्य जोड़े गए थे? नाम बतावें। यदि नहीं, जोड़े गए थे तो इसका कारण बतावें।

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-अ अनुसार है। (ख) बजट/अनुपूरक बजट में जिलेवार आवंटन प्रदाय नहीं किया जाता है। अत: मंदसौर जिले को आवंटित राशि का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता, शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-ब अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-स अनुसार है। (घ) श्‍यामगढ़ सुवासरा परासली मार्ग पर रेल्‍वे समपार क्र. 46-बी श्‍यामगढ़ यार्ड (नागदा कोटा सेक्‍शन कि.मी. 786) के बदले रेल्‍वे ओव्‍हर ब्रिज का निर्माण। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्री हरदीप सिंह डंग -- अध्यक्ष महोदय, मेरे द्वारा जो प्रश्न पूछा गया है, उसमें मैंने यह जानकारी चाही थी कि सुवासरा विधान विधान सभा में कौन कौन सी सड़कों को बजट में लिया गया है. तो मुझे जो उत्तर दिया गया है, उसमें दूसरे क्षेत्रों में तो कामों की लम्बी कतार है, लेकिन उसमें सुवासरा विधान सभा का कहीं भी नाम नहीं है. मै पूछना चाहता हूं कि ऐसा क्या कारण है. मैंने कई बार पत्र लिखे हैं. हमारी जो खस्‍ताहाल सड़कें हैं, सीतामऊ से खेड़ा मार्ग एक महत्‍वपूर्ण मार्ग है, सीतामऊ से बहुत से गांव जुड़ते हैं. एक किलोमीटर मार्ग के लिए कई बार पत्र लिखे गए हैं, ऐसी मांग की गई है और ऐसी एक-एक किलोमीटर की सड़कों के लिए भी पत्र लिखे गए हैं. क्‍या कारण है कि उन्‍हें बजट में शामिल नहीं किया गया है ?

राज्‍यमंत्री, सामान्‍य प्रशासन विभाग (श्री लाल सिंह आर्य) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जो प्रश्‍न किया है. इनकी विधानसभा में भी ऐसा नहीं है कि मध्‍यप्रदेश सरकार कोई काम नहीं करवा रही है. हमने आर.ओ.बी. के तहत 35 करोड़ रुपये का श्‍यामगढ़ में काम स्‍वीकृत किया है. जो इन्‍होंने पत्र दिया है, हम उन रोड़ों का परीक्षण करवा रहे हैं. जैसे ही हमारे वित्‍तीय संसाधन बोलेंगे, हम उनको देख लेंगे.

श्री हरदीप सिंह डंग - अध्‍यक्ष जी, मेरा कहना है कि जो पुलिया बनाई गई है, जिससे एन.टी.पी.सी. के बड़े-बड़े ट्राले निकल रहे हैं, उनकी सुविधा के लिए आपने जो पुलिया दी है, उसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद. मैं सड़कों की बात कर रहा हूँ. जो एक-एक, दो-दो किलोमीटर की सड़कें हैं, उनकी लम्‍बी सूची है जैसे बोलिया, खेड़ा, लसूडि़या, हरीपुरा से पीसला, आसपुरा, भड़केश्‍वर, गेरसासरी माता जी. ये मात्र एक-एक, दो-दो किलोमीटर के रोड़ें हैं. मैं चाहता हूँ कि उनकी जल्‍दी से स्‍वीकृति दी जाये. मैं कोई बड़े रोड़ की मांग नहीं कर रहा हूँ. माननीय मंत्री जी, आप सीतामऊ से खेड़ा तक एक किलोमीटर रोड़ की घोषणा कर दें और स्‍वीकृति दे दें. यह बहुत जरूरी है. आप केवल एक रोड़ दे दें.

श्री लाल सिंह आर्य - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्‍य जी की भावना का आदर करता हूँ और यह रोड़ स्‍वीकृत की जाती है.

 

 

 

लंबित कार्यों की स्‍वीकृति

[किसान कल्याण तथा कृषि विकास]

3. ( *क्र. 1981 ) श्रीमती उमादेवी लालचंद खटीक : क्या किसान कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला दमोह में कृषि मण्‍डी बोर्ड द्वारा वर्ष 2013-14, 2014-15, 2015-16 में कौन से कार्य, कितनी लागत से कराये गये? कार्य एजेंसी सहित जानकारी उपलब्‍ध करायें साथ ही यह बतायें कि कितने कार्य शासन स्‍तर पर स्‍वीकृति हेतु लंबित हैं? (ख) लंबित कार्य कब तक स्‍वीकृत हो जावेंगे?

किसान कल्याण मंत्री ( श्री गौरीशंकर बिसेन ) : (क) जिला दमोह में मंडी बोर्ड स्तर से वर्ष 2013-14, 2014-15 एवं 2015-16 में निर्माण कार्यों की जारी प्रशासकीय स्वीकृति के तहत कराये गये कार्यों की प्रश्नगत जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। दमोह जिले के अंतर्गत लगभग 65 सड़क निर्माण कार्यों के प्रस्‍ताव मंडी बोर्ड को प्राप्‍त हुये थे, जिन्‍हें मुख्‍य सचिव, म.प्र. शासन की नोटशीट क्रमांक 340 दिनांक 15.09.16 के निर्देश संदर्भ में मंडी बोर्ड द्वारा मंडी प्रांगण के बाहर भवन या सड़क के कार्य नहीं कराये जायेंगे, अपितु यह कार्य लो‍क निर्माण विभाग या म.प्र. ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के माध्‍यम से कराये जायेंगे, के अनुक्रम में मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी म.प्र. ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण को दिनांक 06.01.17 से आगामी कार्यवाही हेतु प्रेषित किया गया है। इस संबंध में मंडी बोर्ड स्तर पर उल्लेखित सड़क प्रस्तावों की स्वीकृति संबंधी अन्य कोई कार्यवाही लंबित नहीं है। (ख) उत्तरांश (क) के परिप्रेक्ष्य में समय-सीमा बताने का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।

श्रीमती उमादेवी लालचंद खटीक - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कृषि मण्‍डी बोर्ड द्वारा हमारे विधानसभा क्षेत्र की 10 सड़कें व जिले की 65 सड़कें स्‍वीकृत कराने हेतु विगत 6 वर्षों से प्रयासरत् हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - (विपक्ष के कुछ लोगों के खड़े होने पर) यह बात ठीक नहीं है. आप दूसरों के प्रश्‍न में इण्‍टरफेयर करते हैं, आपके प्रश्‍न में कोई करेगा तो आपको कैसा लगेगा ? आप लोग बैठ जाएं. क्‍या आप हर प्रश्‍न में ही खड़े होंगे ?

श्रीमती उमादेवी लालचंद खटीक - चूँकि हमारी सरकार ने उक्‍त कार्य मण्‍डी बोर्ड से न करवाकर सी.ई.ओ.,एम.पी.आर.डी.सी. को दिनांक 6/1/2017 को पत्र लिखकर कार्य कराने का लेख किया है. उक्‍त प्रस्‍तावित कार्य न कराने हेतु जिस प्रकार मुख्‍य सचिव, मध्‍यप्रदेश शासन ने पत्र जारी किया है. मुख्‍य सचिव, मध्‍यप्रदेश शासन एवं सी.ई.ओ., एम.पी.आर.डी.सी. को भी पत्र जारी करें कि प्रस्‍तावित कार्य जो मण्‍डी बोर्ड ने सौंपे हैं, वे शीघ्र करवाये जायें. अध्‍यक्ष महोदय, हमारी मण्‍डी में कर्मचारियों की कमी के कारण लगातार डाक न होना एवं अनियमितताएं होना आदि प्रचलन में हैं, इसकी जांच कराएं एवं कर्मचारियों की पदपूर्ति की जावे.

अध्‍यक्ष महोदय - पहले एक प्रश्‍न का उत्‍तर ले लें. वे दोनों अलग-अलग विषय हैं.

श्री गौरीशंकर बिसेन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने प्रश्‍न के उत्‍तर के बाद अपना समाधान स्‍वयं ही कर दिया है कि आर.आर.डी.ए. को प्रस्‍ताव भेजा जा चुका है और आर.आर.डी.ए. अपनी प्रक्रिया में है, जब उसके बारे में माननीय मुख्‍यमंत्री जी की बैठक होगी तब उसमें निर्णय होगा.

श्रीमती उमादेवी लालचंद खटीक - मेरा एक प्रश्‍न और है. अध्‍यक्ष महोदय, किसान 12,000 रुपये का बीज लेता है और बेचते समय 4-5,000 रुपये का हो जाता है.

अध्‍यक्ष महोदय - यह प्रश्‍न इससे उद्भूत नहीं होता.

श्रीमती उमादेवी लालचंद खटीक - अध्‍यक्ष महोदय, किसान की लागत के आधार पर उन्‍हें लाभकारी मूल्‍य मिले, महंगाई के आधार पर किसानों के अनाज के रेट बढ़ें एवं किसान के लिए एक आयोग बनना चाहिए.

अध्‍यक्ष महोदय - इससे उद्भूत नहीं होता.

श्रीमती उमादेवी लालचंद खटीक - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, किसान हमारे क्षेत्र में आंदोलित हो रहे हैं.

श्री लखन पटेल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस प्रश्‍न में जो 64 सड़कें मण्‍डी बोर्ड से स्‍वीकृत की गई थीं. मेरी विधानसभा क्षेत्र में करीब 14 सड़कें ऐसी थीं, जिनका टेण्‍डर हो चुका था, दो बार टेण्‍डर हुआ और वह स्‍वीकृत न होने के कारण निरस्‍त कर दिया गया था. मैं माननीय मंत्री जी से आपके माध्‍यम से अनुरोध करना चाहता हूँ कि आपके माध्‍यम से मैं माननीय मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूं कि उनकी स्‍वीकृति है तो वह उसकी घोषणा कर दें कि वह रोड़ बनाई जाएगी तो बड़ी कृपा होगी.

अध्‍यक्ष्‍ा महोदय-- इससे यह प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता है.

श्री लखन पटेल-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह उन्‍हीं 65 रोडों में से है इसे करवा दीजिए.

अध्‍यक्ष महोदय-- क्‍या आपको इसकी कुछ जानकारी है इससे प्रश्‍न उद्भूत ही नहीं हो रहा है.

बीना से देहरी सड़क मार्ग का निर्माण

[लोक निर्माण]

4. ( *क्र. 5260 ) श्री महेश राय : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या बीना से देहरी सड़क मार्ग स्‍वीकृत हो गया है? (ख) यदि हाँ, तो किस विभागीय मद से कार्य स्‍वीकृत हुआ है। वर्तमान स्थिति से अवगत करायें। (ग) यदि नहीं, है तो क्‍या शासन के द्वारा देहरी रोड की कार्य योजना प्रस्‍तावित है? (घ) प्रश्नांश (क) के अनुसार उक्‍त सड़क निर्माण कार्य के टेण्‍डर प्रक्रिया की समय-सीमा से अवगत करावें।

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) प्रश्‍नांकित मार्ग म.प्र. ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के अधीन है, प्राप्‍त उत्‍तर संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) प्रश्नांश (क) के उत्‍तर अनुसार। (ग) एवं (घ) प्रश्नांश (क) के उत्‍तर अनुसार।

परिशिष्ट - ''एक''

श्री महेश राय-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने प्रधानमंत्री सड़क योजना का प्रश्‍न ग्रामीण पंचायत विभाग में लगाया था परंतु मेरा प्रश्‍न पी.डब्‍ल्‍यू.डी. विभाग में पहुंच गया है. अब आप ही बताएं कि इसमें मैं क्‍या करूं?

अध्‍यक्ष महोदय-- अब पी.डब्‍ल्‍यू.डी. मंत्री से उत्‍तर ले लीजिए. सामूहिक जिम्‍मेदारी उनकी भी बनती है.

श्री महेश राय-- अध्‍यक्ष महोदय, उसका उत्‍तर ही नहीं मिल पाएगा. यह प्रधानमंत्री सड़क योजना का, ग्रामीण एवं पंचायत विभाग का प्रश्‍न है. आप ही बताएं अब मैं क्‍या करूं? डेढ़ साल बा‍की रह गया है. वह पी.डब्‍ल्‍यू.डी. का रोड नहीं है. ग्रामीण एवं पंचायत विभाग का रोड है. इसमें कौन जिम्‍मेदार होगा, यह आप तय करें.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बड़ा गम्‍भीर विषय है.

अध्‍यक्ष महोदय-- उन्‍होंने ग्रामीण विकास विभाग से प्रश्‍न पूछा था पी.डब्‍ल्‍यू.डी. में चला गया.

श्री अजय सिंह-- अध्‍यक्ष महोदय, आधे प्रश्‍नों के उत्‍तर सही नहीं आते हैं, कुछ प्रश्‍नों को रिजेक्‍ट कर दिया जाता है और कुछ प्रश्‍नों में पूछा किसी विभाग से जा रहा है और जा किसी और विभाग के पास रहा है. इस पर थोड़ा ध्‍यान दें.

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र)-- अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न सबके आते हैं और यदि कोई व्‍यवधान होगा तो उधर भिजवा देंगे, यह सामूहिक जिम्‍मेदारी है.

श्री महेश राय-- अध्‍यक्ष महोदय, मैं चाहता हूं कि ग्रामीण विकास मंत्री इसके विषय में कुछ आश्‍वासन दें.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप इसमें ग्रामीण विकास विभाग का परिशिष्‍ट ''एक'' देखें.

श्री महेश राय-- अध्‍यक्ष महोदय, उसमें पी.डब्‍ल्‍यू.डी. विभाग ने उत्‍तर दिया है कि वह प्रधानमंत्री सड़क योजना का रोड है. मुझे आज पहली बार तो प्रश्‍न पूछने का मौका मिला है लेकिन वह भी आधा अधूरा.

अध्‍यक्ष महोदय-- ग्रामीण विकास के महाप्रबंधक ने लिखा है कि यह 5260 की जानकारी तैयार कर आपकी ओर आवश्‍यक कार्यवाही हेतु प्रेषित की जा रही है. आप पी.डब्‍ल्‍यू डी. से उत्‍तर ले लीजिए.

श्री महेश राय-- अध्‍यक्ष महोदय, प्रेषि‍त तो हो जाएगा, परंतु मुझे बहुत उम्‍मीद थी कि आज कुछ निराकरण हो जाएगा. शहर से जुड़ा रोड है. 100 गांव के लोगों का आना-जाना है. कई बार उस रोड के कारण आंदोलन हो चुके हैं. लोग हमें घेर लेते हैं.(XXX). (हंसी)

अध्‍यक्ष महोदय-- आप उत्‍तर तो ले लीजिए.

राज्‍य मंत्री, सामान्‍य प्रशासन (श्री लाल सिंह आर्य)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बात सही है कि यह सड़क मध्‍यप्रदेश ग्रामीण विकास प्राधिकरण की ही है. यह बात भी सही है कि यह सड़क क्षतिग्रस्‍त है लेकिन हमारे अधिकारियों ने ग्रामीण विकास एवं पंचायत के अधिकारियों से बात की है. उसके प्राक्‍कलन की स्‍वीकृति प्रक्रियाधीन है और मैं एक पत्र और लिखूंगा ताकि माननीय सदस्‍य की भावना का आदर हो सके. टेंडर की प्रक्रिया उपरांत यह काम होगा लेकिन मैं उन अधिकारियों अपने यहां से एक पत्र चला जाए, यह निर्देश जारी करूंगा.

श्री बाबूलाल गौर-- अध्‍यक्ष महोदय, यह अव्‍यवस्‍था का मामला है. यह प्रश्‍न जिस विभाग को जाना चाहिए था, वह उस विभाग को क्‍यों नहीं गया, इस पर आप जरूर गौर करेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय-- इसे हम दिखवा लेंगे.

श्री महेश राय-- इस संबंध में मैंने जो भी प्रधानमंत्री सड़क योजना के वरिष्‍ठ अधिकारी थे उन सबको अवगत करा चुका था. सम्‍माननीय मंत्री जी से भी इस संबंध में कई बार मिला था, परंतु उस पर आज तक भी कोई अग्रिम कार्यवाही नहीं हुई है.

अध्‍यक्ष महोदय-- यह प्रश्‍न आपने लोक निर्माण विभाग से पूछा है आप प्रश्‍न क्रमांक 4 पर तो नजर डालें. उन्‍होंने पूछा ही लोक निर्माण विभाग से है. फिर भी ग्रामीण विकास विभाग ने लोक निर्माण विभाग के पास में जानकारी भेजी है. मैं यही कह रहा था कि आपको जानकारी मिल गई है अब आप बोलिए महेश राय जी.

श्री अजय सिंह-- अध्‍यक्ष महोदय,(XXX).

अध्‍यक्ष महोदय-- यह कार्यवाही से निकाल दीजिए जो माननीय सदस्‍य ने कहा वह भी और जो नेता प्रतिपक्ष जी ने कहा वह भी. विधायक जी पूछिए आप क्‍या पूछ रहे हैं.

श्री महेश राय-- अध्‍यक्ष महोदय, हमें यह आश्‍वासन मिल जाए कि‍ हम जनता के बीच में जाकर बता दें कि दो या तीन महीने में कुछ काम हो जाएगा.

श्री बाबूलाल गौर-- अध्‍यक्ष महोदय, जो विधायक की पीड़ा है उसे तो रहने दें आप.

श्री महेश राय-- अध्‍यक्ष महोदय, उस रोड के कारण बहुत पीड़ा है.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप बैठ जाइए अपना उत्‍तर ले लीजिए.

श्री लाल सिंह आर्य-- अध्‍यक्ष महोदय, मैं व्‍यक्तिगत भी उनसे बात कर लूंगा और माननीय विधायक जी का सम्‍मान बना रहे और काम हो जाए तो मैं व्‍यक्तिगत अधिकारियों से बात कर लूंगा.

डॉ. गोविन्द सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, आप पी.डब्ल्यू.डी. से बनवा दें क्या दिक्कत है. 56 ग्रामीण सड़कें हैं एक-एक किलोमीटर हैं पी.डब्ल्यू.डी. ने बनाईं हैं. जवाब देने के लिए मंत्री जी खड़े हैं. जब आप सामूहिक जिम्मेदारी बोलते हैं तो इसमें भी निविदा दो कि एक महीने में बनकर तैयार हो जाए.

प्रश्न संख्या-5 (अनुपस्थित)

 

रतलाम बांसवाड़ा मार्ग निर्माण में मापदंडों का उल्‍लंघन

[लोक निर्माण]

6. ( *क्र. 4003 ) श्रीमती संगीता चारेल : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या रतलाम बांसवाड़ा मार्ग पर ग्राम घामनोद बायपास मार्ग के निर्माण में शासन के मापदण्‍डों के अनुरूप कम से कम टर्न हो, इसके विरूद्ध जाकर अत्‍यधिक 90 डिग्री से अधिक के अनेक मोड़ निर्मित कर सड़क निर्माण किया गया? विभाग के अधिकारियों द्वारा किन नियमों के अनुसार अन्‍धे मोड़ की स्‍वीकृति दी गई? (ख) प्रश्नांश (क) के संबंध में दोषी अधिकारियों के विरूद्ध कोई कार्यवाही होगी? नहीं तो क्‍यों?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) जी नहीं। शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ख) प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

 

श्रीमती संगीता चारेल--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने जो जवाब दिया है उससे मैं संतुष्ट नहीं हूँ. रतलाम-बांसवाड़ा जो सड़क बनाई गई है वह मापदण्डों के अनुसार नहीं बनाई गई है. पिछली बारिश में वहां जो पुलिया बनी थी वह टूट चुकी है. उसके कारण वहां पर दो लोगों की मृत्यु हो चुकी है. पिपलौदा और बोदना सड़क पर दो चौराहे बने हुए हैं. चारों तरफ से सड़क चालू है, आए दिन वहां पर गंभीर दुर्घटनाएं होती रहती हैं. विभाग द्वारा वहां पर स्पीड ब्रेकर नहीं बनाए गए हैं, न वहां विद्युत सुविधा है, न ही यात्री प्रतीक्षालय बना है. कोई भी व्यवस्था नहीं है. माननीय मंत्री जी से निवेदन है इसका कुछ निराकरण करें.

राज्यमंत्री, सामान्य प्रशासन (श्री लाल सिंह आर्य)--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्या ने चिंता जाहिर की है. सड़क पर कोई भी टूट-फूट होती है तो विभाग द्वारा वह काम कराया जाता है और यदि गारंटी पीरियड का काम होता है तो जरुर होता है. जहां तक पुलिया टूटने का सदस्या ने प्रश्न किया है, यदि ऐसी कोई भी पुलिया टूटी होगी तो हम उसका सेफ्टी ऑडिट करा लेंगे और गारंटी पीरियड में कोई चीज है तो उसमें हम पुलिया का जो काम है उसे देख लेंगे, एक्सीडेंट का जहां तक मामला है, उस सड़क पर 80 किलोमीटर प्रतिघंटे की गति होना चाहिए परन्तु जब ज्यादा स्पीड होती है, ड्रायवर अनियंत्रित होता है तो कभी-कभी घटना होती है. माननीय सदस्य की जैसी चिंता है उसका हम एक बार परीक्षण करा लेंगे.

श्रीमती संगीता चारेल--माननीय मंत्री जी वहां पर स्पीड ब्रेकर जरुर बनवाएं. वह घाट सेक्शन है वहां काफी घाट है और आए दिन वहां दुर्घटनाएं होती हैं. लोग या तो खाई में गिर जाते हैं या जान से हाथ धो बैठते हैं.

श्री लाल सिंह आर्य--माननीय अध्यक्ष महोदय, ऐसा कोई स्थान है जहां लगेगा कि आवश्यक है तो हम उसका एक बार परीक्षण करा लेंगे. अधिकारियों को भेजकर उसको दिखवा लेंगे.

श्रीमती संगीता चारेल--माननीय अध्यक्ष महोदय, एक और निवेदन करना चाहती हूँ. सैलाना से रतलाम मात्र 20 किलोमीटर दूर है और बीच में टोल-टैक्स लिया जाता है तो मेरा निवेदन है कि यह 7-8 किलोमीटर की दूरी में टोल-टैक्स की छूट दी जाए. वहां से बच्चों की बसें आती हैं, व्यापारियों के वाहन आने जाने में असुविधा होती है. इसका निराकरण जरुर करें.

अध्यक्ष महोदय--यह प्रश्न इससे उद्भूत नहीं होता है.

 

नवनिर्मित बनियातारा स्‍टॉप डेम निर्माण की जाँच

[जल संसाधन]

7. ( *क्र. 3881 ) श्री रामप्यारे कुलस्ते : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मण्‍डला जिले के अंतर्गत बनियातारा सिंचाई डेम की स्‍वीकृति कब दी गई थी तथा कितनी राशि स्‍वीकृत की गई थी? उक्‍त कार्य का निर्माण किस एजेंसी को दिया गया था तथा कब तक कार्य पूर्ण करना था? (ख) क्‍या डेम निर्माण का कार्य पूर्ण होने के पहले ही स्‍लूस गेट एवं स्‍लूस एप्रोच टूट गये हैं, इसके क्‍या कारण हैं? (ग) डेम निर्माण में जो पिंचिग का कार्य किया गया है, वह पूर्णत: घटिया है, यह पहली बारिश में ही टूट गया है? (घ) क्‍या डेम निर्माण का कार्य पूर्ण होने के पूर्व डेम फट चुका है तथा बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं, इसके क्‍या कारण हैं? (ड.) क्‍या डेम निर्माण के पूर्व डेम की यह स्थिति निर्मित हुई है, उसमें संबंधित अधिकारि‍यों की जिम्‍मेदारी तय करते हुये कार्यवाही करेंगे?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति दिनांक 29.05.2013 को रू. 909.68 लाख की प्रदान की गई थी। श्री सुशील दत्त पाण्डे खरगोन। दिनांक 30.05.2016(ख) स्लूस के एप्रोच स्लेब में निर्माण के दौरान आंशिक टूट-फूट हुई थी। जिसे पुनः निर्माण कर सुधार करा लिया गया है। (ग) पिचिंग कार्य गुणवत्ता पूर्ण कराया गया है। बारिश में कोई क्षति नहीं होना प्रतिवेदित है। (घ) एवं (ड.) जी नहीं। बाँध पूर्णतः सुरक्षित एवं सुदृढ़ है। अतः अधिकारियों पर कार्यवाही करने की स्थिति नहीं है।

 

श्री रामप्यारे कुलस्ते--माननीय अध्यक्ष महोदय, बनियातारा डेम के निर्माण में जो घटिया काम हुआ है जिसके कारण पहली बारिश में ही बांध में दरारें आईं, स्लूस गेट टूट गया. मेरा माननीय मंत्री जी से स्पेसिफिक प्रश्न है कि यदि स्लूस गेट टूट गया है, डेम में दरारें आई हैं तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध वे कुछ जिम्मेदारी तय करेंगे क्या ?

डॉ. नरोत्तम मिश्र--माननीय अध्यक्ष महोदय, बांध की जिस समय शिकायत आई थी उस समय पूरी मरम्मत करा दी गई थी. बांध पूरी तरह से अच्छी स्थिति में है, भरा भी था, सिंचाई भी हुई थी. इसके बाद भी सम्मानित सदस्य ने प्रश्न लगाया है और कोई उन्हें शिकायत प्रतीत होती है तो हम भोपाल से अधिकारी को भेजकर जाँच करा देंगे और यदि कोई दोषी पाया जाएगा तो उसे दंडित भी करेंगे.

श्री रामप्यारे कुलस्ते--माननीय मंत्री जी कब तक जांच हो जाएगी ?

डॉ. नरोत्तम मिश्र--इसी हफ्ते भेज देंगे.

श्री रामप्यारे कुलस्ते--धन्यवाद.

 

जावरा शहर में फ्लाई ओवर ब्रिज का निर्माण

[लोक निर्माण]

8. ( *क्र. 5150 ) डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या जावरा शहर एवं आस-पास के क्षेत्रों में बढ़ती जनसंख्‍या एवं बढ़ते वाहनों की संख्‍या के कारण शहर के मध्‍य रेलवे फाटक पर 24 घंटे में कई बार फाटक बंद होने से शहर दो भागों में बंट कर रूक सा जाता है? व्‍यापारिक, शैक्षणिक, स्‍वास्‍थ्‍य एवं आपातकालीन सेवाएं ठप सी हो जाती हैं। (ख) यदि हाँ, तो क्‍या विगत वर्ष बजट में शासन/विभाग द्वारा उक्‍त स्‍थल पर सेतु विभाग द्वारा फ्लाई ओवर ब्रिज निर्माण किये जाने की बजट में स्‍वीकृति देकर टेंडर काल एवं वर्क आर्डर की प्रक्रिया भी पूर्ण कर ली गई है? (ग) यदि हाँ, तो क्‍या संबंधित एजेंसी ठेकेदार द्वारा फ्लाई ओवर ब्रिज निर्माण कार्य को प्रारंभ किये जाने हेतु अपना कैंप लगाकर औपचारिकताएं पूर्ण कर प्रारंभिक कार्यों की शुरूआत भी कर दी थी? (घ) यदि हाँ, तो अवगत कराएं कि शहर एवं क्षेत्र की अत्‍यंत गंभीर समस्‍या एवं मुख्‍य आवश्‍यकता की इस महती एवं महत्‍वपूर्ण कठिनाई के निराकरण को शीघ्र किये जाने हेतु निर्देशित किए जाने के बाद अब और कौन सी औपचारिकताएं शेष रही हैं? कब पूर्ण होंगी एवं कब तक निर्माण कार्य निरंतर रूप से प्रारंभ किया जा सकेगा?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) जी नहीं। जी नहीं। (ख) जी हाँ। (ग) जी हाँ। (घ) रेल्‍वे की आपत्ति, स्‍थानीय जनता का विरोध एवं निर्माण में आ रहे अतिक्रमण को हटाया जाना शेष है। बाधाओं के निराकरण उपरांत कार्य को निरंतर रूप से किया जा सकेगा, समय-सीमा बतायी जाना संभव नहीं है।

 

डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से सर्वप्रथम माननीय मुख्यमंत्री जी और शासन का बहुत-बहुत धन्यवाद ज्ञापित करना चाहता हूँ कि उन्होंने हमारे क्षेत्र की बहुत महत्वपूर्ण और गंभीर आवश्यकता की पूर्ति के लिए स्वीकृति प्रदान की और उसे बजट में सम्मिलित किया. माननीय अध्यक्ष महोदय, 26 फरवरी, 2016 को यह कार्य बजट में सम्मिलित किया गया. 23 मार्च 2016 को निविदाएं आमंत्रित की गईं. 18 अप्रैल 2016 को निविदाएँ स्वीकृत की गईं. लेकिन 1 वर्ष बीत जाने के बावजूद वहां पर कार्य प्रारंभ नहीं किया गया. दूसरी बात मैं यह कहना चाहता हूं कि मैं मंत्री जी के जवाब से संतुष्‍ट नहीं हूं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जवाब में कहा गया है कि वहां पर स्‍थानीय जनता का विरोध है. मैं बताना चाहता हूं कि वहां के लोगों में तो सेतु स्‍वीकृत होने से प्रसन्‍नता है, वहां पर माननीय मुख्‍यमंत्री जी एवं शासन को लोगों द्वारा धन्‍यवाद दिया गया और मिठाइयां बांटकर एक-दूसरे को बधाइयां दी गई कि एक अच्‍छा कार्य उनके क्षेत्र में स्‍वीकृत हुआ है, लेकिन जवाब में कहा गया कि वहां पर विरोध है, ज‍बकि वहां किसी प्रकार का विरोध नहीं है. मैं जानना चाहता हूं कि ऐसे कौन से कारण हैं, जिसकी वजह से निर्माण कार्य आज तक प्रारंभ नहीं किया गया है ?

राज्‍यमंत्री, सामान्‍य प्रशासन (श्री लाल सिंह आर्य)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य के उदबोधन से यह तो स्‍पष्‍ट है कि शासन की मंशा अच्‍छी है और इसी कारण कार्य को स्‍वीकृत भी किया गया. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे पास रेल्‍वे के अधिकारी, मण्‍डल इंजीनियर ट्रैक, रतलाम का 6.12.2016 का पत्र है. अपने पत्र के माध्‍यम से उन्‍होंने कहा है कि जब तक रेल्‍वे की ओर से सहमति नहीं दी जाती, तब तक काम प्रारंभ न किया जाए. इसी वजह से फ्लाई ओवर ब्रिज निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हो पाया है. जैसे ही हमें रेल्‍वे से सहमति प्राप्‍त हो जाती है, माननीय सदस्‍य निश्चिंत रहें, हम तत्‍काल निर्माण कार्य प्रारंभ करवा देंगे.

डॉ.राजेन्‍द्र पाण्‍डेय- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि कार्य स्‍वीकृति के पूर्व, बजट में सम्मिलित किए जाने के पूर्व, रेल्‍वे विभाग एवं लोक निर्माण विभाग के सेतु विभाग द्वारा संयुक्‍त रूप से एक से अधिक बार सर्वे किया गया था. ड्राइंग, डिजाईन और कार्य की समस्‍त आवश्‍यकताओं के संबंध में संयुक्‍त रूप से चर्चा की गई. चूंकि अंडर ब्रिज वहां नहीं बनाया जा सकता इसलिए इस प्रस्‍ताव को अस्‍वीकृत कर ओवर ब्रिज बनाने के प्रस्‍ताव को सहमति दी गई. रेल्‍वे विभाग एवं राज्‍य शासन में परस्‍पर सहमति होने के बाद, प्रस्‍ताव को बजट में सम्मिलित किया गया. ऐसी दशा में किसी तरह की आपत्ति शेष नहीं रहती है. इसके अतिरिक्‍त मैं कहना चाहता हूं कि यदि रेल्‍वे विभाग को किसी प्रकार की कोई आपत्ति है, तो रेल्‍वे की पटरी के ऊपर वाले हिस्‍से पर निर्माण के संबंध में भविष्‍य में, कार्य प्रारंभ होने के पश्‍चात् भी निर्णय लिया जा सकता है और शेष कार्य जो कि राज्‍य शासन को करना है, वह तो प्रारंभ किया ही जा सकता है. माननीय मंत्री जी बताने का कष्‍ट करें कि वे यह कार्य कब तक प्रारंभ करवायेंगे ?

श्री लाल सिंह आर्य- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, रेल्‍वे विभाग द्वारा अपने पत्र में कहा गया है कि उनकी सहमति के बिना किसी प्रकार का निर्माण कार्य प्रारंभ न किया जाये. सरकार की मंशा बिल्‍कुल साफ है. सरकार यह कार्य पूरा करना चाहती है. लेकिन यह रेल्‍वे ब्रिज का कार्य है.

डॉ.राजेन्‍द्र पाण्‍डेय- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ऐसा नहीं है. रेल्‍वे विभाग एवं राज्‍य शासन के सेतु विभाग ने एक से अधिक बार वहां का सर्वे किया, उसकी स्‍वीकृति प्रदान की एवं कार्य बजट में सम्मिलित हुआ. मैं इस बात से सहमत हूं कि रेल्‍वे विभाग द्वारा यदि कोई आपत्ति ली भी गई है तो रेल्‍वे का हिस्‍सा छोड़ दिया जाए, उसके बारे में जो निर्णय होना होगा वह भविष्‍य में हो जाएगा, लेकिन शेष कार्य तो सरकार को प्रारंभ करना चाहिए. यह एक बड़ा कार्य है. इसे पूर्ण होने में काफी समय लगेगा. ओवर ब्रिज न होने से बड़ी गंभीर समस्‍या वहां उत्‍पन्‍न हो जाती है. 24 घंटों में लगातार कई बार फाटक बंद होने के कारण पूरा शहर दो भागों में विभक्‍त हो जाता है. वहां की शैक्षणिक संस्‍थायें, स्‍वास्‍थ्‍य सेवायें, व्‍यापारी वर्ग और पूरा शहर इससे प्रभावित होता है. सरकार को ब्रिज का कार्य प्रारंभ करने में क्‍या दिक्‍कत है.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी ने सदन में रेल्‍वे के पत्र दिनांक 6.12.2016 का उल्‍लेख किया. ब्रिज की निविदा अप्रैल 2016 में स्‍वीकृत हुई है. 8 महीनों बाद मंत्री जी रेल्‍वे के पत्र को माध्‍यम बनाते हुए आर.ओ.बी. नहीं बना रहे हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय विधायक बहुत ही स्‍पष्‍ट रूप कह रहे हैं कि रेल्‍वे ने पहले परमीशन दी, टेंडर जारी होकर सब कुछ हो गया. अप्रैल 2016 में आपने निविदा स्‍वीकृत कर दी और दिसंबर 2016 तक कार्य प्रारंभ नहीं करने की जवाबदारी के एवज में मंत्री जी आज रेल्‍वे का पत्र दिखा रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय- अजय जी आप बैठ जाईये. मंत्री जी, आप इसका परीक्षण करवा लें और रेल्‍वे की अनुमति के लिए भी प्रयास करें.

डॉ.राजेन्‍द्र पाण्‍डेय- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आग्रह है कि कार्य प्रारंभ करने का आदेश दिया जाए. राज्‍य शासन को कार्य प्रारंभ करने का आदेश देने में क्‍या दिक्‍कत है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे क्षेत्र में डी.आर.एम. कार्यालय उस स्‍थान से मात्र 30 किलोमीटर की दूरी पर है. मंत्री जी कार्य प्रारंभ करवाने का आदेश जारी करें.

अध्‍यक्ष महोदय- मंत्री जी से आप उत्‍तर ले लीजिए.

श्री लाल सिंह आर्य- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पूरे कार्य की डिजाईनिंग रेल्‍वे के द्वारा ही की गई है. रेल्‍वे विभाग की अनुमति कार्य प्रारंभ करने हेतु अनिवार्य रूप से चाहिए. हम लगातार उनसे पत्राचार कर रहे हैं. सरकार की मंशा साफ है. हम इस फ्लाई ओवर ब्रिज को बनाना चाहते हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसे ही हमें रेल्‍वे से अनुमति प्राप्‍त होगी हम कार्य प्रारंभ करवा देंगे. डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय-- नहीं, माननीय अध्यक्ष महोदय, लेकिन राज्य शासन....

अध्यक्ष महोदय-- प्रश्न क्रमांक 9...

डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय-- अध्यक्ष महोदय, आप से एक मिनट और चाहूँगा.

अध्यक्ष महोदय-- वह तो स्टेगनेशन हो गया.

डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय-- अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह है कि जो राज्य शासन का हिस्सा है, उसका तो कार्य प्रारंभ करें, उसको प्रारंभ करने में क्या कठिनाई है? वह कार्य तो प्रारंभ किया जा सकता है. प्रदेश में अन्य स्थान पर भी ऐसा हुआ है, प्रदेश में ऐसा किया गया है, तो वैसा किया जा सकता है. जब कार्य स्वीकृत हुए एक वर्ष हो गया और आप कार्य प्रारंभ नहीं कर रहे, परीक्षण करने की बात कर रहे हैं. मैं सरकार से सहमत नहीं हूँ. आप कार्य कब प्रारंभ करेंगे, उस समयावधि से अवगत करा दें?

अध्यक्ष महोदय-- श्री सूबेदार सिंह रजौधा आप अपना प्रश्न करें.

श्री लाल सिंह आर्य-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यदि रेल्वे विभाग की अनुमति नहीं मिली तो कार्य तो पूरा ही बेकार हो जाएगा.

डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय-- यह तो कोई जवाब नहीं होता. इसका मतलब है कि समस्या वहीं खड़ी रहे. शासन कुछ करना नहीं चाहता. यह कोई बात होती है क्या?

श्री लाल सिंह आर्य-- माननीय पाण्डेय जी, हम पुनः उनसे पत्राचार करेंगे.

अध्यक्ष महोदय-- वे रेल्वे से पत्राचार करेंगे.

डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय-- नहीं, मुझे समयावधि बताई जाए.

अध्यक्ष महोदय-- जबर्दस्ती थोड़ी ही कर सकते हैं.

डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय-- मैं हाथ जोड़कर निवेदन करता हूँ कि मुझे समयावधि बताई जाए. वह कितनी समयावधि में करेंगे?

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, अब कोई प्रश्न नहीं. अब श्री सूबेदार सिंह रजौधा जी का प्रश्न. डॉ पाण्डेय साहब, आपको बहुत समय दिया. आप गंभीर सदस्य हैं, बहुत समय दिया.

डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय-- अध्यक्ष महोदय, अत्यन्त जरूरी है.

अध्यक्ष महोदय-- मालूम है इसलिए सरकार ने स्वीकृत किया. उसमें कुछ अड़चन मंत्री जी बता रहे हैं.

डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय-- अध्यक्ष महोदय, समयावधि बता दी जाए.

अध्यक्ष महोदय-- कृपया बैठ जाएँ. दूसरों के भी प्रश्न हैं. सूबेदार जी, आप तो प्रश्न पूछिए.

डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय-- अध्यक्ष महोदय, समयावधि बताने में क्या जा रहा है? समयावधि तो बताई जा सकती है कि कितनी समयावधि में कार्य प्रारंभ होगा.

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, वह नहीं बता रहे हैं. बैठ जाएँ, अब जिद करने से कोई मतलब नहीं है.

डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय-- मैं माननीय मुख्यमंत्री जी से निवेदन कर चुका.

अध्यक्ष महोदय-- अब श्री रजौधा का लिखा जाएगा. डॉक्टर साहब का नहीं लिखा जाएगा. रजौधा जी, आप तो पूछिए. वही मंत्री उत्तर देंगे. आपके पश्न का उत्तर आएगा आप तो पूछिए.

डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय-- (xxx)

श्री सूबेदार सिंह रजौधा-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे सामने धर्म संकट है. वे बोल रहे हैं. वे मेरी समिति के चेयरमेन हैं...(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- सुनाई पड़ रहा है.

डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय-- (xxx)

श्री सूबेदार सिंह रजौधा-- अब मैं किसकी बात मानूँ? किसकी नहीं मानूँ?

श्री लाल सिंह आर्य-- अध्यक्ष महोदय, सहमति 15 दिन के अन्दर मिल जाएगी, काम प्रारंभ हो जाएगा. महीने भर के अन्दर मिल जाएगी, काम प्रारंभ हो जाएगा. दो महीने में मिल जाएगी, काम प्रारंभ हो जाएगा. जब तक अनुमति नहीं मिलेगी ..(व्यवधान)..

डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय-- (xxx)

अध्यक्ष महोदय-- डॉक्टर साहब, आप गंभीर सदस्य हैं. इस तरह से जिद नहीं कर सकते.

डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय-- (xxx)

अध्यक्ष महोदय-- श्री रजौधा अपना प्रश्न करें. डॉक्टर साहब का नहीं लिखा जाएगा. रजौधा जी, आप प्रश्न पूछिए आपके प्रश्न का उत्तर आएगा.

डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय-- (xxx)

अनुबंध के पश्‍चात् निविदा दरों में परिवर्तन

[लोक निर्माण]

9. ( *क्र. 2975 ) श्री सूबेदार सिंह रजौधा : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) लोक निर्माण विभाग में निविदा में प्राप्‍त दर को अनुबंध करने के पश्‍चात दरें परिवर्तित करने का अधिकार किस सक्षम अधिकारी को प्राप्‍त है? सक्षम अधिकारी का पद नाम बतावें? यदि नहीं, तो स्‍पष्‍ट करें कि सक्षम अधिकारी के अलावा ऐसा करना वि‍त्‍तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है या नहीं? (ख) क्‍या लोक निर्माण विभाग (वि.यां) संभाग ग्‍वालियर में अनुबंध क्रं. 15/2016-17 में कार्यादेश क्र. 3697/3698, दिनांक 27-06-2016 में अनुबंधित दर से हटकर अन्‍य दर पर कार्यों का भुगतान किया गया है? यदि हाँ, तो यह नियम संगत है? नियम की प्रति उपलब्‍ध करावें (ग) प्रश्‍नांश (ख) में वर्णित कृत्‍यों में अनियमितता करने वाले अधिकारी के विरूद्ध जाँच कराई जाकर दण्‍डात्‍मक कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो कारण बतावें?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) किसी को नहीं है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ख) जी नहीं। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) उत्तरांश (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्री सूबेदार सिंह रजौधा-- माननीय अध्यक्ष महोदय, सबसे पहले मैं यह कहना चाहता हूँ कि कल मैं स्वास्थ्य विभाग की अनुदान मांगों पर बोल रहा था, तो आपने मुझे दो मिनट दिए. मैंने कहा पाँच मिनट बोलूँगा, मैंने यह ठीक नहीं किया उसके लिए क्षमा चाहता हूँ.

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, नहीं, कोई बात नहीं.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा-- लेकिन आज के प्रश्न में आप मेरा पूरा सहयोग करेंगे और मंत्री जी से निर्णय कराएँगे. माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने जो प्रश्न लगाया है वह इंजीनियर तो हैं ही लेकिन इंजीनियर के साथ-साथ बहुत बड़ा कारीगर है. उनके खिलाफ सांसद ने शिकायत की है, दो विधायकों ने शिकायत की है. मेयर साहब ने शिकायत की है और पार्टी के जिलाध्यक्ष ने शिकायत की है, लेकिन उनकी आज तक कोई जाँच नहीं हुई और उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई. उनके खिलाफ मेरा प्रश्न है. अध्यक्ष महोदय, लोक निर्माण विभाग के एग्जीकेटिव इंजीनियर हैं, मैंने एक प्रश्न पूछा है कि लोक निर्माण विभाग में निविदा में प्राप्त दर को अनुबंध करने के पश्चात् दरें परिवर्तित करने का अधिकार किस सक्षम अधिकारी को प्राप्त है? तो माननीय मंत्री जी ने मेरा जवाब तो दे दिया कि किसी को नहीं, लेकिन फिर मैंने पूछा है एक पेज का, उसमें जी नहीं, जी हाँ, है. अध्यक्ष महोदय, जो कार्यादेश हुए हैं उनको परिवर्तन करके बिना किसी बड़े अधिकारी के, बिना किसी छोटे अधिकारी के, निविदाओं से अधिक भुगतान किया है, उनके बारे में मेरे पास पूरी जानकारी है और जो दो विधायक, सांसद और मेयर साहब ने शिकायत की है, वह कॉपी भी मेरे पास है. मेरा पूरा प्रश्न कर लूँ?

अध्यक्ष महोदय-- अभी आप इसका उत्तर ले लें.

राज्य मंत्री, सामान्य प्रशासन (श्री लाल सिंह आर्य)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जिस ईई के बारे में आप बात कर रहे हैं, वहाँ पर जोनल होते हैं. बंगलों का कुछ जोनल होता है, कुछ मजिस्ट्रेट वगैरह रहते हैं, वहाँ का जोनल रहता है. उन जगहों पर काम करने के लिए साल भर का कोई न कोई टेण्‍डर होता है. छोटे-छोटे काम होते हैं. 20 हजार का, 50 हजार का, 1 लाख का. एक बार ऑनलाईन टेण्‍डर प्रक्रिया हो गई, किसी ठेकेदार को मिल गई तो फिर उसको कहीं न कहीं कोई नया कार्य करना है तो उसकी सहमति लेनी पड़ती है. उसने सहमति ली है, लेकिन फिर भी माननीय सदस्‍य की भावना को ध्‍यान में रखते हुए हमने मुख्‍य अभियंता, ग्‍वालियर को जॉंच के निर्देश दिए हैं. अगर कोई दोषी होगा तो कार्यवाही की जाएगी.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय...

अध्‍यक्ष महोदय -- आपको अवसर देंगे, आप पूरा उत्‍तर तो ले लें.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर मैंने सुन लिया जो उन्‍होंने दिया है. एक तो माननीय मंत्री जी, लोक निर्माण विभाग को उस समय जो बताया होगा, उतना बता रहे हैं लेकिन मैं कह रहा हॅूं कि कार्यपालन यंत्री (वि./या.) संभाग, ग्‍वालियर द्वारा मनमाने तरीके से नियमों की अनदेखी कर अनियमित कार्य कराए जा रहे हैं. कार्यादेश क्रमांक 3697/3698, 5555/8831, 2105/5951, 6232/7069, 7392/7727 इतने कार्यादेशों की निविदा के बाद में उन्‍होंने ठेकेदार के साथ समझौता करके ज्‍यादा भुगतान किया है जबकि कोई अधिकार नहीं है. पीडब्‍ल्‍यूडी में कम से कम मैंने एक आंगनवाड़ी बन रही थी तो मैंने इंजीनियर को कहा कि ठेकेदार को उसका पेमेन्‍ट कर दो तो उसने कहा कि पुताई ठीक नहीं हुई है, पीएस खा जाएगा. लेकिन इस अधिकारी के आगे कोई पीएस, मंत्री नहीं लग रहा है. मैं चाहता हॅूं कि इसको हटाने के बाद ही जॉंच की जाए.

श्री लाल सिंह आर्य -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने बहुत स्‍पष्‍ट कहा है. शासन की यह प्रक्रिया है कि हम किसी को नोटिस देते हैं, उसका जवाब मांगते हैं. मैंने कहा है कि हमने जॉंच मुख्‍य अभियंता, ग्‍वालियर को दी है और उसमें कोई दोषी पाए जाएंगे तो केवल हटाने की कार्यवाही क्‍या होती है और कोई बड़ी कार्यवाही होगी, तो हम वह भी करेंगे. लेकिन अभी जॉंच तो हो जाए और हम एक महीने के अंदर उसकी पूरी जॉंच करा लेंगे.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- कार्यवाही करेंगे तो उसमें एफआईआर होगी. वह तो पीएस साहब ने मेरा प्रश्‍न लगने के बाद उसके जॉंच के आदेश कर दिए हैं लेकिन आज सदन में ऐसे अधिकारी के खिलाफ, जिसने कई कार्यादेशों से अधिक भुगतान किया है आप उसको हटाकर जॉंच नहीं करवाना चाहते. ऐसी क्‍या बात है ? माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे प्रार्थना कर रहा हॅूं मैंने आपसे कहा था कि आप मुझे जवाब दिलवा दीजिए.

अध्‍यक्ष महोदय -- मंत्री जी ने जवाब तो दे दिया है.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सस्‍पेंड नहीं चाह रहा हूँ, मैं कोई कार्यवाही नहीं चाह रहा हॅू. मैं तो स्‍पष्‍ट जॉंच चाह रहा हॅूं और हटाकर जॉंच कराने में क्‍या दिक्‍कत है ? जो कार्यादेश चेंज कर सकता है उसके आगे क्‍या जॉंच हो पाएगी ?

अध्‍यक्ष महोदय -- एक महीने का उन्‍होंने टाइम लिया है. एक महीने में जॉंच करने की समय-सीमा दी है.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय..

अध्‍यक्ष महोदय -- अब हर सदस्‍य इसी तरह अडे़ंगे, तो कैसे काम चलेगा. यह श्री डंग जी ने शुरू किया है कि हमारे काम में अभी हॉं ही करो.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं अड़ नहीं रहा हॅूं. मैं निवेदन कर रहा हॅूं. उसको हटाकर जॉंच हो जाए, भले ही बाद में उसको पदस्‍थ कर दीजिए........(व्‍यवधान).......आप मुझे दंड दे दीजिए, यदि मैं गलत कह रहा हॅूं. भले ही उसको 15 दिन के लिए हटा दीजिए.....(व्‍यवधान).......

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विपक्ष के इतने सदस्‍यों की भावनाओं का आदर करते हुए मैं आपके माध्‍यम से अनुरोध करूंगा कि इतने सारे सत्‍ता के विधायक खडे़ हैं एक छोटी-सी बात करके उसको हटाकर जॉंच करने में क्‍या दिक्‍कत है?

श्री रामनिवास रावत -- यह छोटी-सी बात नहीं है बहुत गंभीर बात है. जब विधायक जी आरोप लगा रहे हैं कि अनुबंध से अधिक भुगतान किया है और आपके पास उसकी कॉपी है. आपकी जानकारी में है फिर जॉंच किस बात की कराएंगे ?

श्री अजय सिंह -- उसको हटाकर जॉंच कराने में क्‍या दिक्‍कत है ?

श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- माननीय अध्‍यक्ष्‍ा महोदय, दो विधायकों ने लिखा है और मेयर ने लिखा है. भ्रष्‍टाचार करने वालों को क्‍यों संरक्ष्‍ाण दे रहे हैं ?

श्री अजय सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सामूहिक दायित्‍व है आपका. ठीक है अनेक इस तरह की बातें आती हैं लेकिन कोई कार्यवाही नहीं होती है.

अध्‍यक्ष महोदय -- इस बात पर उत्‍तर आएगा, आपका.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपका संरक्षण चाहता हॅूं.

अध्यक्ष महोदय-- आप लोग बैठ जाएं.

डॉ गोविंद सिंह-- भ्रष्टाचारियों को बढ़ावा देते हैं.ऐसे अधिकारियों से पैसा वसूल करते हो पार्टी के लिए..(व्यवधान).. तो उसको क्यों नहीं हटा रहे हैं.जब आप पाक साफ हैं आपने कोई वसूली नहीं की आपने कोई पैसा नहीं लिया है तो तत्काल हटाइए ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों को. यह पूरी सरकार भ्रष्टाचार में गले-गले तक डूबी हुई है...(व्यवधान)..भ्रष्टाचारियों को बढ़ावा दे रही है.

अध्यक्ष महोदय-- यदि पीछे सदस्य खड़े हों तो मर्यादा के खिलाफ है कि आप सामने खड़े होकर बात करें.श्री सुखेन्द्र सिंह अपना प्रश्न करें.

श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्यक्ष महोदय, कितनी गंभीर बात है.भ्रष्टाचार करने वालों को इस तरह से संरक्षण मिलेगा तो हाउस का क्या अर्थ होगा इसलिए हाउस में प्रश्न लगाने के बाद भी ऐसे लोग डरते नहीं है.

डॉ गोविंद सिंह-- पूरी हाउस की गरिमा खत्म हो गई है, विधायिका की गरिमा खत्म,सदन की गरिमा खत्म. मंत्री लोग मनमानी पर ऊतारु हैं. आप भ्रष्टाचारियों को क्यों बढ़ावा दे रहे हैं. जब प्रमाण सामने आ चुके हैं तो क्या दिक्कत आ रही है...(व्यवधान)..तत्काल सस्पेंड करना चाहिए.अध्यक्ष महोदय, आपसे संरक्षण चाहिए.

अध्यक्ष महोदय-- बैठ जाएं आप लोग. आपके ही सदस्य का प्रश्न है. एक-एक ही प्रश्न में इतना समय नहीं लगाएंगे.

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, भ्रष्टाचार प्रथम दृष्टया उजागर हुआ है.

अध्यक्ष महोदय-- परिणाम आ रहे हैं. जाँच करा रहे हैं एक महीने की समय-सीमा में. अब आप लोग बैठिये. ...(व्यवधान)..

डॉ गोविंद सिंह-- अगर आप संरक्षण नहीं देंगे तो कौन देगा संरक्षण. विधायक अपनी फरियाद लेकर आखिर कहाँ जाएं? सदन में सुनवाई नहीं. कहीं पर सुनाई सुनवाई नहीं.. ...(व्यवधान).. मंत्रियों को संरक्षण नहीं मिलना चाहिए.

अध्यक्ष महोदय-- आप लोग बैठ जाएं.

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, बहुत गंभीर बात है. यह स्पष्ट है कि उसको संरक्षण मिला है. इस तरह से हाउस का डर समाप्त होता जा रहा है.

अध्यक्ष महोदय-- आप लोग बैठ जाएं कृपया.. ...(व्यवधान).. ऐसे हाथ करने से कुछ नहीं होगा. जो आप कहेंगे वही मानेंगे क्या.

डॉ गोविंद सिंह-- अध्यक्ष महोदय, आखिर यह विधानसभा है किसलिए.

अध्यक्ष महोदय-- आप बैठ तो जाएं, जबर्दस्ती करेंगे क्या ...(व्यवधान).. प्रश्न आपका नहीं है, उनका है. आप बैठ जाएं. श्री सुखेन्द्र सिंह अपना प्रश्न करें.

श्री सुंदरलाल तिवारी-- अध्यक्ष महोदय, प्रश्न हाउस का है, हाउस में आ गया तो सबका हो गया है. ...(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- लेकिन बोलने का अधिकार अनुमति के बाद है.

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, विनम्रतापूर्वक निवेदन है कि आप अनुमति प्रदान करें और भ्रष्टाचार को संरक्षण नहीं मिले. इस हाउस में तो कम से कम भ्रष्टाचार को संरक्षण ना मिले.

अध्यक्ष महोदय-- कोई संरक्षण नहीं दे रहे हैं.श्री सुखेन्द्र सिंह प्रश्न करें.

डॉ गोविंद सिंह-- विधानसभा के सदस्यों के ये हाल है तो आम जनता का इस प्रदेश में क्या होगा.

श्री रामनिवास रावत-- उसको संरक्षण ही है. जिस अधिकारी का, जिस व्यक्ति का प्रथम दृष्टया भ्रष्टाचार सिद्ध होता है उसको क्यों संरक्षण दिया जा रहा है.

अध्यक्ष महोदय-- कोई संरक्षण नहीं दे रहे हैं , इसको कार्यवाही से निकालिये. ...(व्यवधान).. हर प्रश्न पर उठना जरूरी है क्या.

श्री बाबूलाल गौर-- अध्यक्ष महोदय, सुन लें. मेरा कहना है कि जब माननीय सदस्य ने जो प्रश्न किया, मेरा आपसे अनुरोध है कि उनका व्यक्तिगत प्रश्न नहीं है यह सदन की प्रापर्टी हो गई है और कोई भी सदस्य उसमें अपने विचार प्रकट कर सकता है.

अध्यक्ष महोदय-- आप बहुत वरिष्ठ सदस्य हैं. प्रश्नकर्ता सदस्य के अलावा यदि कोई दूसरा सदस्य प्रश्न करता है तो उसको आसंदी की अनुमति की आवश्यकता होती है, यह आप भी जानते हैं.

श्री सुंदरलाल तिवारी-- अध्यक्ष महोदय, सदन परिणाम चाहता है.

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, आपकी अनुमति से ही प्रश्न करेंगे हम आपकी अनुमति चाहते हैं.

अध्यक्ष महोदय-- श्री सुखेन्द्र सिंह जी, आप अपना प्रश्न पूछिये नहीं तो मैं आगे का प्रश्न सरस्वती सिंह जी का ले लूंगा.

एन.एच. 7 मऊगंज में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क द्वारा निर्मित मार्ग

[लोक निर्माण]

10. ( *क्र. 3486 ) श्री सुखेन्‍द्र सिंह : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या एन.एच. 7 मऊगंज एम.डी.आर. सड़क से मऊगंज घोघम पहुंच मार्ग हनुमना-बहरी सीधी जिला मार्ग को जोड़ने वाले मार्ग की कुल लंबाई 28.30 किलोमीटर है, जिसमें 10 किलो मीटर प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क द्वारा निर्मित मार्ग है? (ख) प्रश्नांश (क) के प्रकाश में क्‍या इस मार्ग में पड़ने वाले गांवों की जनसंख्‍या लगभग 25817 है, जो मार्ग पूर्णत: ध्‍वस्‍त है? (ग) प्रश्नांश (क) (ख) के प्रकाश में यदि हाँ, तो इस मार्ग को एम.डी.आर. घोषित किये जाने हेतु एवं मार्ग की केटेगिरी 'बी' का प्रस्‍ताव शासन को भेजा गया है? जिसमें लिखा है कि पुनर्निर्माण कराना आवागम की दृष्टि से नितांत आवश्‍यक है? (घ) प्रश्‍नांश (ग) के प्रकाश में यदि हाँ, तो इसे स्‍वीकृत कर बजट में राशि आवंटन की जावेगी? यदि नहीं, तो क्‍यों? इसे स्‍वीकृत करने की समय-सीमा बतावें?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) जी हाँ। (ख) जी हाँ, जी नहीं, आंशिक रूप से ध्‍वस्‍त है जो मोटरेबल है। (ग) जी नहीं अपितु विभागीय स्‍तर पर परीक्षणाधीन है। (घ) उत्‍तरांश (ग) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होते।

 

श्री सुखेन्द्र सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे विधानसभा क्षेत्र में मऊगंज से घोघम पहुंच मार्ग जिसकी लंबाई 28 किलोमीटर है. उस रोड के बारे में मैंने प्रश्न किया है. मेरा कहना यह है कि वह रोड पूरी तरह से ध्वस्त है और विभाग ने जो रीवा और मऊगंज से जानकारी भेजी है, उसमें भी यह आया है कि रोड पूरी तरह से ध्वस्त है लेकिन जो जवाब आया है उसमें यह कहा गया है कि आंशिक रूप से ध्वस्त है. जबकि यह रोड इतनी महत्वपूर्ण है, यह लगभग 25817 की आबादी का क्षेत्र है और इस रोड के बगल से एक बंधा भी है जिसके कारण बरसात में आवागमन अवरूद्ध हो जाता है. मेरा प्रश्न है कि इस रोड को मंजूरी प्रदान की जाये. डीपीआर घोषित की जाये और इसको बजट प्रदान किया जाये यह बहुत ही आवश्यक है मेरा यह आपसे अनुरोध है.

श्री लाल सिंह आर्य-- माननीय अध्यक्ष महोदय, थोड़ा एक बार और प्रश्न कर देंगे प्लीज.

अध्यक्ष महोदय-- उनका प्रश्न आ गया है आप उनका उत्तर दे दीजिये.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे एक सेकेंड की अनुमति दे दीजिये. अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी उसको हटाकर जाँच करेंगे क्या?

अध्यक्ष महोदय-- वह आपको पूछने नहीं देंगे. मुझे मालूम है सुखेन्द्र सिंह जी, आप फिर से प्रश्न पूछिये.

श्री सोहनलाल बाल्मीक-- (XXX).

अध्यक्ष महोदय-- यह कार्यवाही से निकालिये यह ठीक बात नहीं है.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से आश्‍वासन चाह रहा था, वे हा कर दें चाहें ना कर दें, मैं बैठ जाऊँगा.

अध्‍यक्ष महोदय -- श्री सुखेन्‍द्र सिंह, आप प्रश्‍न फिर से पूछिए.

श्री सुखेन्‍द्र सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने यह प्रश्‍न लगाया था कि मेरे विधान सभा क्षेत्र की मऊगंज और घोघम सड़क, जो कि 28.30 किलोमीटर की है, पूरी तरह से ध्‍वस्‍त हो गई है लेकिन इसमें विभाग की तरफ से यह जवाब आया है कि यह सड़क पूरी तरह से ध्‍वस्‍त नहीं है, आंशिक रूप से ध्‍वस्‍त है. यह जानकारी बिल्‍कुल गलत है, यह बहुत महत्‍वपूर्ण सड़क है, यह बाध के पास से होकर निकलती है जिससे कि बरसात के दिनों में आवागमन पूरी तरह से अवरुद्ध हो जाता है. यह सड़क इतनी खराब हो गई है कि कई एक्‍सीडेंट भी हो चुके हैं तो मेरा आपके माध्‍यम से मंत्री जी से अनुरोध है कि इस सड़क को एम.डी.आर. जिला मार्ग घोषित किया जाए और बजट प्रदान किया जाए.

राज्‍यमंत्री, सामान्‍य प्रशासन (श्री लालसिंह आर्य) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम उसका परीक्षण करा लेंगे और अगर वह सड़क आवश्‍यक होगी, प्राथमिकता में आती होगी तो हम करा देंगे.

श्री सुखेन्‍द्र सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वह सड़क आवश्‍यक है, इसको एम.डी.आर. घोषित करने के लिए शासन का पत्र भी गया है. मेरा आपके माध्‍यम से अनुरोध है कि यह बहुत ही जरूरी रोड है और हम इसको कम से कम एम.डी.आर. घोषित करने के लिए कह रहे हैं बाकी जब आपका बजट एलाऊ करे, आज कल, तब दीजिएगा, कोई दिक्‍कत नहीं है.

श्री लालसिंह आर्य -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ठीक है.

श्री सुखेन्‍द्र सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद.

आयातित दलहन पर मण्‍डी शुल्‍क की वसूली

[किसान कल्याण तथा कृषि विकास]

11. ( *क्र. 5036 ) श्रीमती सरस्‍वती सिंह : क्या किसान कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विभाग द्वारा वर्ष 2013 से प्रश्‍न दिनांक तक कब-कब प्रदेश के बाहर से आयातित दलहन पर मण्‍डी शुल्‍क एवं निराश्रित शुल्‍क देय था? अवधिवार विवरण दें। (ख) प्रश्नांश (क) की अवधि में अन्‍तर्राज्‍यीय जाँच चौकी 'खवासा' से कटनी मण्‍डी में कितना-कितना दलहन किस फर्म में किस-किस दिनांक को आया? फर्मवार विवरण दें। (ग) प्रश्‍नांश (ख) में दर्शाये गए विवरण अनुसार क्‍या कटनी मण्‍डी की फर्मों द्वारा मण्‍डी शुल्‍क एवं निराश्रित शुल्‍क उसी दर से जमा किया, जिस दर पर बिल जारी है? यदि नहीं, तो मण्‍डी शुल्‍क एवं नि:शुल्‍क की चोरी का आकलन कब कराया जावेगा। (घ) प्रश्नांश (क), (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में जाँच कराकर दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही कब तक करेंगे?

किसान कल्याण मंत्री ( श्री गौरीशंकर बिसेन ) : (क) वर्ष 2013 से प्रश्‍न दिनांक तक प्रदेश के बाहर से आयातित दलहन पर मंडी शुल्‍क निम्‍नानुसार अवधि में देय था, दिनांक 20-07-2013 से 22-08-2013 तक, दिनांक 23-08-2015 से 06-01-2016 तक, दिनांक 07-01-2017 से वर्तमान तक तथा प्रदेश के बाहर से आया‍तित दलहन पर निराश्रित शुल्‍क समाज कल्‍याण विभाग मध्‍यप्रदेश शासन भोपाल की अधिसूचना दिनांक 27-01-2000 अनुसार प्रश्‍नांश में उल्‍लेखित अवधि में देय है। (ख) परीक्षण प्रक्रियाधीन है। (ग) प्रश्‍नांश के सन्‍दर्भ में जाँच पूर्व से प्रचलित है, जिसमें इस विषय को भी सम्मिलित किया गया है। (घ) दोषिता निर्धारण हेतु परीक्षण प्रचलित है। समय-सीमा बताई जाना संभव नहीं है।

श्रीमती सरस्‍वती सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय जी, मेरे प्रश्‍नांश (ख) में मैंने पूछा था कि प्रश्‍नांश (क) की अवधि में अन्‍तर्राज्‍यीय जाच चौकी 'खवासा' से कटनी मण्‍डी में कितना-कितना दलहन किस फर्म में किस-किस दिनाक को आया ? फर्मवार विवरण दें. इसका माननीय मंत्री जी द्वारा उत्‍तर दिया गया है कि परीक्षण प्रक्रियाधीन है. यह सही जवाब नहीं है, क्‍या माननीय मंत्री जी डेट बताएंगे कि किस-किस दिनाक को कितना-कितना दलहन किस-किस फर्म में दिया गया ?

श्री गौरीशंकर बिसेन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दलहन की या कुछ दालों की जब कमी होती है तो राज्‍य सरकार द्वारा समय-समय पर मंडी शुल्‍क में छूट दी जाती है, उस पीरिएड में हमारे 220 फर्म ऐसे हैं, इनकी संख्‍या कुछ बढ़ भी सकती है, जिन्‍होंने वर्ष 2013 से वर्ष 2017 तक की छूट की समयावधि में उनका का जो निराश्रित शुल्‍क 20 पैसा प्रति सैकड़ा जमा होता है उसको उन्‍होंने पटाया नहीं. चूँकि इसमें पूरे प्रदेश में निराश्रित शुल्‍क में लगभग 100 करोड़ रुपया आता है और यहा पर निश्‍चित रूप से 10-15 करोड़ रुपये जब पूरे वर्ष की छूट होगी तो मिलेगा, इसमें व्‍यापारियों का कहना है कि हमें मंडी शुल्‍क में छूट थी इसलिए हमने निराश्रित शुल्‍क नहीं जमा किया, तो हमने एक जा-समिति बनाई है, इसमें हमारे उप संचालक, जो राज्‍य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं, वे इसकी जाच कर रहे हैं और लगभग 220 एकाउंट्स की जाच करनी पड़ेगी इसलिए इसमें समय लगेगा तो 90 दिन के अंदर जाच कर लेंगे, चूँकि मंडी शुल्‍क और निराश्रित शुल्‍क दोनों हमारी आय का साधन है, अत: इसमें किसी को भी छोड़ा नहीं जाएगा.

श्रीमती सरस्‍वती सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं शुल्‍क के बारे में बात नहीं कर रही हूँ, जो इसका जवाब आया है मैं उससे संतुष्‍ट हूँ. मैं तो यह पूछ रही हूँ कि कटनी मंडी में कितना-कितना दलहन किस-किस तारीख को आया था ?

श्री गौरीशंकर बिसेन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍या का प्रश्‍न मंडी शुल्‍क में छूट की समयावधि में निराश्रित शुल्‍क नहीं आने का है, इस संदर्भ में हमने कहा है कि हम जाच कर रहे हैं, जाच चूँकि लंबी है, फर्मों में जाकर जाच करनी पड़ेगी तो समय लगेगा.

अध्‍यक्ष महोदय -- मंत्री जी, प्रश्‍नांश (ख) में इनका प्रश्‍न यह भी है कि कितना-कितना दलहन किस फर्म से किस-किस दिनाक को आया, आपने इसका उत्‍तर दिया है कि परीक्षण प्रक्रियाधीन है.

श्री गौरीशंकर बिसेन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह प्रक्रियाधीन है क्‍योंकि यह बहुत लंबा विषय है और इसका पूरा परीक्षण जब हो जाएगा तो माननीय सदस्‍या को पूरी सूची उपलब्‍ध करा दी जाएगी.

अध्‍यक्ष महोदय -- कितने दिन में करा देंगे ?

श्रीमती सरस्‍वती सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, परीक्षण वाली बात ही नहीं है, कितना-कितना दलहन आया, यह बता दें.

श्री गौरीशंकर बिसेन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, चूँकि छूट का जो पीरिएड था, उस समय का हमारे पास में सीधा रिकॉर्ड नहीं आया, इस कारण से इसमें विसंगति आई है, हम पूरा जाच दल बना रहे हैं, इसकी 90 दिन के अंदर हम जाच करा लेंगे, उनके साथ हम और भी वरिष्‍ट अधिकारियों को भेज रहे हैं, इसकी पूरी जाच हम 90 दिन में करके सूची उपलब्‍ध करा देंगे.

अध्‍यक्ष महोदय -- क्‍या माननीय सदस्‍य को उपलब्‍ध करवा देंगे.

श्री गौरीशंकर बिसेन -- जी अध्‍यक्ष महोदय.

श्रीमती सरस्‍वती सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍नांश (ग) में उत्‍तर आया है कि जाच पूर्व से प्रचलित है यानि जाच कराई जा रही है, मैं पूछना चाहती हूँ कि इस जाच में कौन-कौन सम्‍मिलित हैं और अभी तक जाच क्‍यों नहीं कराई गई ? माननीय सौरभ भैया का प्रश्‍न है, भैया जी ने मुझे प्रश्‍न लगाने के लिए बोला था तो मैं बोल रही हूँ.

श्री गौरीशंकर बिसेन :- माननीय सदस्‍य को मैं धन्‍यवाद देना चाहता हूं. अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जो प्रश्‍न किया है, वह हमारे मंडी बोर्ड के लिये सकारात्‍मक प्रश्‍न है, कहीं कोई विषय नहीं है. हमारे आय से संबंधित है, इसमें मैंने अभी कहा है कि 220 कटनी की फर्मों का तो हमने अभी आडिट चालू किया है. अभी सिर्फ आडिट चालू किया है, उसकी रिपोर्ट आयी है, चूंकि 1317 पेड़ों का आडिट है, यह लंबा आडिट है. इसमें हमको समय लगेगा, लेकिन हमारा प्रयास है कि हम 90 दिन में इसका आडिट पूरा करायेंगे.

श्रीमती सरस्‍वती सिंह :- अध्‍यक्ष जी, मेरा एक प्रश्‍न और है.

अध्‍यक्ष महोदय :- अब आप बैठ जाइये, आपके प्रश्‍न का उत्‍तर आ गया है.

 

 

लेबड़ नयागांव फोर लेन के अपूर्ण कार्य को पूर्ण किया जाना

[लोक निर्माण]

12. ( *क्र. 4561 ) श्री यशपालसिंह सिसौदिया : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) लेबड़-नयागांव फोर-लेन पर ट्रकों को खड़े करने के लिए अनुबंध के अनुसार कितने ले-बाय कहाँ-कहाँ रखे जाना प्रस्तावित थे? क्या सभी स्थलों पर ले-बाय बनाये गये हैं, इन ले-बाय में क्या-क्या सुविधाएं कन्सेश्नर को दी जाना अनुबंध के अनुसार प्रस्तावित थी? क्या समस्त प्रस्तावित सुविधाएं वर्तमान में दी जा रही हैं? (ख) प्रश्नांश (क) संदर्भित सभी सेंटर पर पानी, छत, शौचालय, विद्युत कनेक्शन उपलब्ध हैं, इसकी जांच कब-कब, किस-किस MPRDC के या अन्य अधिकारी ने की? अधिकारी के नाम सहित जानकारी देते हुए बतायें कि इस संबंध में कितनी शिकायत किस-किस व्यक्ति/संस्था की विभाग को प्राप्त हुईं, उस पर क्या कार्यवाही की गई? (ग) क्या विधानसभा की सरकारी उपक्रम समिति द्वारा इस मार्ग का निरीक्षण कर उक्त सर्विस सेंटर की कमियों को ठीक कर सुविधा चालू करने के निर्देश अधिकारियों को वर्ष 2016 में दिए? क्या उन पर प्रश्न दिनांक तक अमल हुआ? यदि नहीं, तो क्यों नहीं? () क्या फोरलेन कन्सेश्नर द्वारा उन सम्पूर्ण फोर-लेन पर लगे पौधों का भौतिक सत्यापन (गिनती) करवायी गयी थी? यदि हाँ, तो लेबड़-जावरा तथा जावरा-नयागांव के बीच कितने पौधे लगाए गये, कितने और लगना शेष हैं? क्या इन समस्त पौधों पर मार्किंग या नम्बर प्लेट लगाई गयी है? यदि नहीं, तो क्यों?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) लेबड़-नयागांव फोरलेन मार्ग को दो भागों में विभाजित होकर प्रथम भाग लेबड़-जावरा फोरलेन मार्ग लम्बाई 125 कि.मी. पर अनुबंधानुसार दांयी/बांयी ओर कुल 10 स्थानों मकनी, नागदा, मुलथान, धराड़, अरनियाफंटा पर एवं द्वितीय भाग जावरा-नयागांव फोरलेन मार्ग लम्बाई 127 कि.मी. पर दांयी/बांयी ओर कुल 8 स्थानों परवलिया, मन्दसौर बायपास, चल्दू, मनासा जंक्शन एवं मलखेड़ा जंक्शन पर ट्रक ले-बाय बनाये जाना प्रस्तावित होकर बनाये गये हैं। जी हाँ। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '1' अनुसार है। जी हाँ, अधिकांशतः। (ख) जी हाँ, अधिकांशतः। उक्त मार्ग का निरीक्षण समय-समय पर एम.पी.आर.डी.सी. एवं अन्य अधिकारियों द्वारा लगातार किया गया, जिनमें श्री नरेन्द्र कुमार मुख्य अभियंता, श्री बी.पी. बौरासी महाप्रबंधक, श्री राकेश जैन संभागीय प्रबंधक, श्री मनोज कुमार गुप्ता सहायक महाप्रबंधक इत्यादि द्वारा दिनांक 15.05.2014, दिनांक 14.06.2016, दिनांक 15.11.2016, दिनांक 16.11.2016 आदि दिनांकों में निरीक्षण किया गया। ट्रक ले-बाय पर सुविधाओं की कमियों के संबंध में निगम को कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। अतः शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी हाँ। निवेशकर्ता को निर्देश जारी किये गये एवं पालन सुनिश्चित करने हेतु कार्यवाही प्रगति पर है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) जी हाँ। पौधरोपण की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। जी नहीं। अनुबंध में मार्किंग या नम्बर प्लेट लगाने का प्रावधान न होने के कारण।

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लेबड़ से लेकर नयागांव तक का लगभग 260 किलोमीटर लंबा 9 वर्ष पहले निर्मित फोर लेन सड़क मार्ग, जिस पर आये दिन दुर्घटना हो रही है. अध्‍यक्ष महोदय, 28 फरवरी को रतलाम एडीशन, नई दुनिया में पूरा एक पेज में इसका मौत का फोरलेन करार दिया है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आसंदी से तत्‍कालीन अध्‍यक्ष ईश्‍वर रोहाणी जी ने मुझे संयोजक बनाया था और 9 विधायकों के क्षेत्राधिकार से निकलने वाले इस सड़क मार्ग पर कमी और खामियों को लेकर के माननीय नागेन्‍द्र सिंह जी नागौद, पूर्व लोक निर्माण मंत्री ने इसका निरीक्षण और अवलोकन किया था. तब की कमियां अभी भी जमीनी हकीकत में नहीं उतरी है. अध्‍यक्ष महोदय, 15.11.16 और 16.11.16 को सरकारी उपक्रम समिति का सभापति होने के कारण इस मार्ग का निरीक्षण और अवलोकन करने गया था और उस समय जो समस्‍याएं सामने आयी थी, उसको हमने पुन: रेखांकित किया था. ट्रक ले-बाय, धराड़, मुलथान, परवलिया आदि पर, ट्रक वाहन चालकों को वाहनों को सफाई करना, ड्रायवर फ्रेश हो जायें, नहा धो लें, उनकी व्‍यवस्‍था करना. अध्‍यक्ष महोदय, लेकिन जो ले-बाय बने हैं, वहां पर न तो पानी की व्‍यवस्‍था है न ट्यूबवेल की व्‍यवस्‍था है न टायलेट की व्‍यवस्‍था है और यहां तक की छतें उड़ी हुई हैं. अध्‍यक्ष महोदय, निवेशकर्ता को MPRDC किसी भी स्थिति में सहमत नहीं कर पा रही है, उन बुनियादी सुविधाओं को लेकर, जहां उन टोल बूथों पर प्रतिदिन एक-एक टोल बूथ पर 30-30 लाख रूपये की राशि निवेशकर्ता को प्राप्‍त हो रही है.

अध्‍यक्ष महोदय, मैं अब सीधे प्रश्‍न पर आता हूं कि क्‍या निवेशकर्ता को MPRDC द्वारा निर्देश जारी करने के बाद भी पालन सुनिश्चित क्‍यों नहीं हो पा रहा है. क्‍या MPRDC निश्चित समय-सीमा में उन कमियों और खामियों को, जो विधान सभा के द्वारा आसंदी से दी गयी व्‍यवस्‍था के अंतर्गत सरकारी उपक्रम समिति के अध्‍ययन दौरे के साथ संपूर्ण की गयी थी, उन खामियों को कब दूर करवा लिया जायेगा ?

श्री लाल सिंह आर्य :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह 2007 से 2030 तक की अवधि का है. उसमें ठेकेदार को अनुबंध के तहत काम करना होता है. माननीय सदस्‍य जो बता रहे हैं, यदि आप एथेंटिक रूप से बता देंगे कि यह काम हैं. अध्‍यक्ष महोदय, वहां पर 18 ले-बाय बने हुए हैं. उसमें टेंडरिंग के अनुबंध के तहत ठेकेदार ने वहां पर काम किया है. लेकिन यदि वहां पर कोई काम रहा होगा, ऐसा कोई होगा तो मैं सदस्‍य को संतुष्‍ट करना चाहता हूं कि उसको हम दिखवा लेंगे और वह काम समय-सीमा में पूरा हो उसके निर्देश दे देंगे.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया :- अध्‍यक्ष महोदय, MPRDC के अधिकारी अपने जवाब में कहते हैं कि हमें कोई शिकायत कमी और खामियों को लेकर प्राप्‍त नहीं हुई है, विशेषकर ट्रक ले-बाय को लेकर. यदि आप उत्‍तर को देखेंगे कि उसमें 15.11.16 और 16.11.16 को तो सरकारी उपक्रम समिति ने तो स्‍वयं ने दौरा किया है और ट्रक ले-बाय में क‍मी को रेखांकित किया है. हमारे साथ तीन -तीन वरिष्‍ठ अधिकारी हमारे साथ दौरे में मौजूद थे और उन्‍होंने अभी तक वह टिप्‍पणी सरकारी उपक्रम समिति को भेजने की कोशिश नहीं करी है तो विभाग के पास कैसे आयेगी. जबकि MPRDC को प्रतिवेदन देना चाहिये था.

माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा दूसरा प्रश्न है कि 8 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अभी भी रतलाम जिले का वह पोरशन जहां पर वन विभाग को जीवित पौधों का सत्यापन कर लेना चाहिए था, अभी तक कितने पौधे रोपे जाना था उसकी जानकारी तो आयी है, लेकिन रतलाम का एक प्रापर बेल्ट छूट रहा है, वन विभाग के अधिकारी रतलाम में विराजित हैं, उन्होंने इस बात की कोशिश ही नहीं की है कि वहां पर कितने पौधे रोपे गये हैं, कितने पौधे जीवित हैं, कितने पौधे अजीवित हैं. मैं यहां पर फिर कह रहा हूं कि 7 - 8 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद में 27-1-16 और 24-7-16 को लेबड़ से जावरा और जावरा से नयागांव में जो आकलन किया गया है, वह असत्य आकलन है मैं समझता हूं कि वह नजरिया आकलन है. इसलिए कि रतलाम जिले में अभी भी वन विभाग ने जीवित पौधों का सत्यापन किया ही नहीं है, जबकि निवेशकर्ता के साथ में एक पेड़ काटने पर 10 पेड़ लगाने का अनुबंध था. मैं पूछना चाहता हूं कि वन विभाग कब तक इसका भौतिक सत्यापन कर लेगा, विशेषकर रतलाम की बेल्ट का.

श्री लाल सिंह आर्य-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य जो स्थान बता रहे हैं उसका एक माह के अंदर सत्यापन करा लेंगे.

श्री ओमप्रकाश सखलेचा -- माननीय अध्यक्ष महोदय, इसमें मेरे क्षेत्र का भी मामला है, वन विभाग के डीएफओ ने यह लिखकर दिया हुआ है कि एक भी पेड़ नहीं लगाया गया है, यह समिति को लिखकर दिया गया है. बाद में जब लोक निर्माण विभाग के मंत्री और एमपीआरडीसी के सीएमडी खुद सभी विधायकों के साथ में विजिट कर चुके हैं, उस मिनिट्स में लिखा हुआ है तो यह पूरी असत्य जानकारी देने पर क्या किसी अधिकारी पर कार्यवाही करेंगे और क्या उनको स्पष्ट लाइन पर खड़ा करेंगे.

डॉ राजेन्द्र पाण्डेय -- माननीय अध्यक्ष महोदय, वहां पर पूरा फोर लेन जानलेवा बना हुआ है. इस समिति के निरीक्षण के बाद में वहां पर दुर्घटना हुई एक बस पलटी खाकर के गिर गई, वहां पर विभाग सड़क सुधारने को तैयार नहीं है, बार बार निरीक्षण किये जा रहे हैं तो कब तक वह सड़क सुधार ली जायेगी.

अध्यक्ष महोदय -- ठीक है, आप दोनों की बात शासन की जानकारी में आ गई.

टेकनपुर हर्सी केनाल रोड का लोक निर्माण विभाग में हस्तांतरण

[जल संसाधन]

13. ( *क्र. 4486 ) श्री लाखन सिंह यादव : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (‍क) भितरवार विधान सभा क्षेत्र में जल संसाधान विभाग द्वारा 01 अप्रैल, 2015 से प्रश्‍न दिनांक तक कितनी-कितनी वित्‍तीय स्‍वीकृति प्राप्‍त हुई है? उनमें क्‍या-क्‍या निर्माण कार्य किस-किस स्‍थान पर कराये गये हैं तथा कराये जा रहे हैं? किस ठेकेदार/एजेंसी तथा किस-किस यंत्री के सुपरवि‍ज़न में निर्माण कार्य कराये गये हैं? उन निर्माण कार्यों की वर्तमान में भौतिक तथा वित्‍तीय स्थिति क्‍या है? निर्माण कार्यों को कब तक पूरा किया जाना था, विलम्‍ब होने का क्‍या कारण है? इसके लिये कौन ठेकेदार/एजेन्‍सी या यंत्री दोषी हैं? सभी निर्माण कार्यों की अलग-अलग जानकारी स्‍पष्‍ट करें तथा अधूरे निर्माण कार्यों को कब तक पूरा कर लिया जावेगा? (ख) जल संसाधन विभाग में भितरवार विधान सभा क्षेत्र में कौन-कौन कर्मचारी/अधिकारी पदस्‍थ हैं? उनका नाम, पद, पदस्‍थापना, दिनांक, मुख्‍यालय स्‍पष्‍ट करें। (ग) टेकनपुर-हर्सी, केनाल रोड जो पूरी तरह जर्जर हालत में है, क्‍या जल संसाधन विभाग इस रोड का निर्माण करा रहा है? यदि हाँ, तो प्रश्‍न दिनांक तक क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई है या लोक निर्माण विभाग को हस्‍तांतरण किया जा रहा है तो प्रश्‍न दिनांक तक हस्‍तांतरण की क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई है। अब कब तक पूरी कार्यवाही कर लोक निर्माण विभाग को हस्‍तांतरण कर दिया जावेगा? एक निश्चित समय-सीमा स्‍पष्‍ट करें।

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''अ-1'' एवं ''अ-2'' अनुसार है। सभी कार्य समयावधि में पूर्ण किए गए हैं, अथवा प्रगतिरत हैं। अतः विलम्ब होने अथवा किसी के दोषी होने की स्थिति नहीं है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''ब-1'', ''ब-2'', ''ब-3'' एवं ''ब-4'' अनुसार है। (ग) टेकनपुर-हर्सी केनाल रोड पर भारी वाहनों का आवागमन होने से यह क्षतिग्रस्त हुई है। इस मार्ग को लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरण करने हेतु प्रमुख सचिव, म.प्र. शासन, लोक निर्माण विभाग से दिनांक 12.02.2016 को अनुरोध किया गया था। उक्त के परिप्रेक्ष्‍य में लोक निर्माण विभाग द्वारा मार्ग के निर्माण हेतु जल संसाधन विभाग से रू. 95 करोड़ की मांग की गई है। सड़क निर्माण हेतु धनराशि का प्रावधान परियोजना प्रस्‍ताव में नहीं रखा जाता है। लोक-निर्माण विभाग को इस तथ्‍य से अवगत करा दिया गया है। इस विषय में प्राथमिकता पर आगामी कार्यवाही की जाएगी। समय-सीमा बताना संभव नहीं है।

 

श्री लाखन सिंह यादव -- माननीय अध्यक्ष महोदय,मेरे प्रश्न ग में जिस हर्सी टेकनपुर सड़क की चर्चा होने जा रही है, यह वह केनाल रोड है जहां से मंत्री जी को पहली बार यहां की जनता ने चुनकर विधान सभा में भेजा था. यह हर्सी केनाल रोड 65 किलोमीटर लंबा है. इससे 68 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होती है. मंत्री जी ने मेरे प्रश्न के उत्तर में लिखा है कि इस रोड को लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित करने के लिए प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश शासन को 12-2-2016 को पत्र लिखा है. अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से यह निवेदन करना चाहता हूं कि आपने लोक निर्माण विभाग को यह पत्र क्यों लिखा है. आप उनसे इस रोड को क्यों बनवाना चाहते हैं. जबकि पूर्व में आपके विभाग के द्वारा ही इस पर डामरीकरण का काम हुआ था तो मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि आप इस रोड की घोषणा करें कि आप अपने विभाग से ही इस रोड को तत्काल बनवायें.

डॉ नरोत्तम मिश्र -- माननीय अध्यक्ष महोदय, एक बार चुनकर नहीं भेजा है उस क्षेत्र की जनता ने मुझे अनेक बार चुनकर भेजा है. जिस समय यह सड़क बनी थी उस समय सड़क विश्व बैंक के माध्यम से बनायी गई थी, जल संसाधन विभाग के द्वार सड़कों का निर्माण नहीं किया जाता है. यह रोड़ उस समय स्पेशली बनी थी, निश्चित रूप से उस रोड की हालत काफी खराब है. लोकनिर्माण विभाग बनाये या जल संसाधन विभाग बनाये. अगला जो अनुपूरक बजट आयेगा उसमें हम इस सड़क को ले आयेंगे.

श्री लाखन सिंह यादव -- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी से निवेदन है कि जल संसाधन विभाग से ही बन जाय तो क्या दिक्कत है लोक निर्माण विभाग ने तो 95 करोड़ रूपये का स्टीमेट दिया है.

डॉ नरोत्तम मिश्र -- आप सड़क से मतलब रखें विभाग से नहीं.

श्री लाखन सिंह यादव -- लोक निर्माण विभाग वाले इस सड़क को नहीं बना रहे हैं. 95 करोड़ रूपये की मांग उनके द्वारा की गई है.

डॉ नरोत्तम मिश्र -- 95 करोड़ रूपये लगें या 100 करोड़ लगे हम इसे अगले बजट में लायेंगे.

श्री लाखन सिंह यादव -- बहुत बहुत धन्यवाद्.

अध्यक्ष महोदय -- प्रश्नकाल समाप्त.

( प्रश्नकाल समाप्त )

श्री विश्‍वास सारंग- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, श्री लाल सिंह आर्य जी को बधाई कि इनका विभाग नहीं था, उसके बाद भी उन्‍होंने जवाब बहुत ही अच्‍छे दिये हैं.

 

 

 

 

 

12.02बजे नियम 267-क के अधीन विषय

अध्‍यक्ष महोदय - निम्‍नलिखित सदस्‍यों की सूचनाएं सदन में पढ़ी हुई मानी जाएंगी:-

1. श्री दिनेश

2. पं. रमेश दुबे

3. श्री प्रहलाद भारती

4. श्री सुरेन्‍द्र सिंह बघेल

5. श्री घनश्‍याम पिरौनियां

6. श्री महेन्‍द्र सिंह

7. श्री नारायण सिंह पंवार

8. डॉ. योगेन्‍द्र निर्मल

9. श्री सुशील कुमार तिवारी

10. श्री बाला बच्‍चन

 

 

 

 

 

12.03बजे शून्‍यकाल में उल्‍लेख

(1) शासकीय योजनाओं और सामाजिक परिस्थितियों में विधवा शब्‍द का प्रयोग बंद करने विषयक.

 

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनीस) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आज आपके माध्‍यम से माननीय सामाजिक न्‍याय मंत्री जी और समस्‍त विधायक बंधुओं और बहिनों को यह जानकारी भी देना चाहती हूं और माननीय मुख्‍यमंत्री जी का आभार भी मानना चाहता हूं कि कल आपकी उपस्थिति में मैंने अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस के कार्यक्रम के अवसर पर मुख्‍यमंत्री जी से निवेदन किया था कि जैसे हमने नि:शक्‍तजनों के लिये दिव्‍यांग शब्‍द का प्रयोग शुरू किया, वैसे ही शासकीय योजनाओं में और सामाजिक परिस्थितियों में भी विधवा शब्‍द का प्रयोग बंद हो और हम उसके स्‍थान पर कोई अच्‍छा, सकारात्‍मक शब्‍द प्रयोग करें, जिससे बहिनों में अकेले होने की कुंठा हमेशा नहीं बनी रहे.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुख्‍यमंत्री जी ने कल शाम को ही इस बात का निर्णय लिया और यह घोषणा कर दी कि मध्‍यप्रदेश में शासन द्वारा अब विधवा शब्‍द का प्रयोग नहीं किया जायेगा, उसके स्‍थान पर कल्‍याणी शब्‍द का प्रयोग होगा. (मेजों की थपथपाहट) मैं सारी बहिनों और महिलाओं की तरफ से मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री का बहुत-बहुत धन्‍यवाद आभार मानती हूं.

2. मध्‍यप्रदेश में आतंकी संगठनों की बढ़ती हुई गतिविधियों के बारे में सदन में चर्चा करायी जाना.

 

श्री के.पी.सिंह (पिछोर) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि देखने में आया है कि आपके कार्यकाल में आप एक बार आगे बढ़ने के बाद आप पीछे नहीं हटते हैं, यह हम आपका स्‍वभाव समझ गये हैं. मैंने प्रदेश में आतंकी संगठन की बढ़ती हुई गतिविधियों के बारे में एक स्‍थगन लगाया था, उसमें आपने कल चर्चा के दौरान सदन में कहा था कि हम इसको चर्चा में ले लेंगे लेकिन आज पूरा हफ्ता गुजर गया है किसी भी रूप में इसको नहीं लिया गया है. मुझे कल शाम को आपकी एक सूचना मिली है, जिसमें आपने लिखा है कि नियम 53 के अधीन माननीय अध्‍यक्ष महोदय ने आपको उपरोक्‍त स्‍थगन प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करने की सम्‍मति प्रदान नहीं की है. इस तरह हम यह तो समझ गयें है कि स्‍थगन आप नहीं लेंगे.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपसे अनुरोध है कि जिस तरह की घटनाएं अभी हो रहीं हैं. जैसे अभी एक ट्रेन दुर्घटना हो गई है और जिस तरह की गतिविधियां आई.एस.आई. की बार-बार पकड़ी जा रही हैं तो मेरा आपसे अनुरोध है कि स्‍थगन आप नहीं लेना चाहते हैं तो ध्‍यानाकर्षण के रूप में चर्चा करा लें, लेकिन आप चर्चा तो जरूर करा लें. आपने यहां सदन में सहमति व्‍यक्‍त कर दी पूरा हफ्ता गुजर गया लेकिन अभी तक चर्चा नहीं हुई है.

अध्‍यक्ष महोदय - किसी न किसी रूप में चर्चा करा लेंगे.

श्री के.पी.सिंह - कब चर्चा करा लेंगे, इसका समय तो तय कर दें ?

अध्‍यक्ष महोदय - समय बाद में तय करेंगे.

श्री के.पी.सिंह - सोमवार को बात हुई थी, अब तो पूरा हफ्ता गुजर गया है,

अध्‍यक्ष महोदय - अभी सदन दो हफ्ता का और रह गया है. हम उसको देख लेंगे और उसको किसी न किसी दिन चर्चा में जरूर ले लेंगे.

श्री के.पी.सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिस समय मामला लगाया गया था, उस समय यह पैसेंजर ट्रेन दुर्घटना नहीं हुई थी. हो सकता है कि अगर उस समय चर्चा करा लेते तो शायद यह घटना नहीं घट पाती. क्‍या आप एकाध घटना और घट जायेगी, तब उसे चर्चा में लेंगे ?

अध्‍यक्ष महोदय - (हंसी)आप कक्ष में आ जायें, इस संबंध में बात कर लेंगे.

श्री के.पी.सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके इलाके से लोग पकड़े गये हैं. आपको चिंता होना चाहिए. (हंसी)

अध्‍यक्ष महोदय -(हंसी) वह लोग वहां के नहीं है, वह कानपुर के हैं.

श्री रामनिवास रावत - (हंसी) माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लेकिन वह लोग वहां पर सुरक्षित तो महसूस कर रहे हैं. पूरे प्रदेश में आई.एस.आई. की गतिविधि बढ़ रही हैं.

संसदीय कार्यमंत्री (डॉ.नरोत्‍तम मिश्र) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिस रूप में सम्‍मानित सदस्‍यगण चाहें, उस रूप में चर्चा करा लें, हम भी चाहते हैं कि जैसा नेता प्रतिपक्ष जी ने बताया है, उस विषय पर चर्चा हो,

श्री के.पी.सिंह - आपने तो पहले भी सहमति दी थी.

डॉ.नरोत्‍तम मिश्र - मैं तो अभी भी सहमति दे रहा हूं. लेकिन चर्चा तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय ही करायेंगे, मैं थोड़ी ही चर्चा कराउंगा. यही तो मैं भी कह रहा हूं कि जिस रूप में चाहें चर्चा करा लें, सरकार तैयार है. नेता प्रतिपक्ष जी ही बता दें, उस रूप में चर्चा करा लेंगे.

श्री रामनिवास रावत - आप समय बता दें ?

श्री के.पी.सिंह - कब चर्चा करायेंगे यह तो बता दें ?

नेता प्रतिपक्ष( श्री अजय सिंह ) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिस रूप से भी आप लेना चाहे, इसकी चर्चा करायें. यह एक गंभीर विषय है और यदि स्‍थगन लेना चाहे तो स्‍थगन ले सकते हैं. आपने स्‍थगन अस्‍वीकृत कर दिया है लेकिन हम स्‍थगन फिर से लगा देते हैं और फिर से उसे स्‍वीकृत कर दीजिये

श्री रामनिवास रावत - स्‍थगन दिया हुआ है.

अध्‍यक्ष महोदय - उन्‍होंने वह स्‍थगन दूसरे विषय पर दिया है.

डॉ. गोविंद सिंह (लहार) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि वह किसी भी रूप में तैयार है तो हमारी आपसे विनम्र प्रार्थना है कि स्‍थगन के रूप में इस पर चर्चा करा लें, तो इस विषय पर विस्‍तार से चर्चा हो जाएगी.

अध्‍यक्ष महोदय - मैंने भी यही कहा है कि हम किसी न किसी रूप में उस विषय को चर्चा में ले लेंगे. माननीय नेता जी सिर्फ समय की बात है तो उस संबंध में कक्ष में बता कर लेंगे और उसकी सूचना आपको दे देंगे. यह काम हम जल्‍दी कर लेंगे.

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ऐसा तो नहीं होगा कि आपने कह तो दिया है लेकिन पूरा सत्र निकल जाए और इस विषय पर चर्चा ही न हो ?

अध्‍यक्ष महोदय - सत्र नहीं निकलेगा अभी बहुत दिन बाकी हैं.

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बहुत दिन तो हैं लेकिन क्‍या आप चर्चा करायेंगे ? क्‍योंकि ऐसा ही सिंहस्‍थ के मामले में हुआ था, आसंदी से निर्देश आये थे कि हम चर्चा करायेंगे, लेकिन चर्चा नहीं कराई.

अध्यक्ष महोदय - आप कुछ कह रहे हैं?

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) - अध्यक्ष महोदय...

डॉ. नरोत्तम मिश्र - जब नेता प्रतिपक्ष खड़े हो तो बैठ जाया करें.

श्री आरिफ अकील - आप क्यों खड़े हो रहे हैं?

श्री अजय सिंह - आप चिंता न करें. मैं बैठ जाता हूं वे बोलेंगे.

श्री आरिफ अकील - जब नेता प्रतिपक्ष खड़े होते हैं तो आप खड़े हो सकते हो?

डॉ. नरोत्तम मिश्र - आप जरूर खड़े होना कहीं भी.

श्री आरिफ अकील - हमें आपको देखकर खड़ा होना पड़ता है.

डॉ. नरोत्तम मिश्र - आप बैठे रहते हो तो खड़े से ही लगते हो.

श्री आरिफ अकील - जब आप खड़े होते हो तो दिल चाहता है कि हम भी आपसे खड़े होकर बात करें.

श्री के.पी. सिंह - अध्यक्ष महोदय, मेरा आपसे इतना अनुरोध है कि चूंकि आपने सदन में कहा है.

अध्यक्ष महोदय - मैं आपको अभी कक्ष में जानकारी देता हूं, यहां तारीख बताना उचित नहीं है.

श्री के.पी. सिंह - धन्यवाद, अध्यक्ष महोदय.

श्री आरिफ अकील - यह कक्ष वाली पॉलिसी पुरानी है. इसको संशोधित करके यहीं चर्चा कर लिया करें.

अध्यक्ष महोदय - यह चर्चा यहां नहीं होती.

श्री आरिफ अकील - हां, ना, यहीं कर लिया करें.

अध्यक्ष महोदय - हां तो कर दिया है, परन्तु समय नहीं बताया है वह कक्ष में बताएंगे.

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, बहुत गंभीर घटना है. प्रदेश में आतंकी गतिविधियां बढ़ रही हैं.

अध्यक्ष महोदय - हम सहमत है. हम कहां मना कर रहे हैं, यह गंभीर नहीं है?

श्री रामनिवास रावत - आप सहमत हैं तो इसे स्थगन के रूप में ही ग्राह्य कर लें. यह आप और बता दें?

अध्यक्ष महोदय - अभी चर्चा कर लेते हैं.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.08 बजे पत्रों का पटल पर रखा जाना

 

(1) मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का वार्षिक लेखा परीक्षण प्रतिवेदन

वर्ष 2015-2016

 

पर्यावरण मंत्री (श्री अंतर सिंह आर्य) - अध्यक्ष महोदय, मैं, जल (प्रदूषण

 

 

(2) महर्षि पाणिनी संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2015-2016

 

उच्च शिक्षा मंत्री (श्री जयभान सिंह पवैया) - अध्यक्ष महोदय, मैं, महर्षि

 

 

 

 

12.09 बजे ध्यान आकर्षण

 

(1) दमोह जिले में शिशु मृत्यु दर में वृद्धि होने से उत्पन्न स्थिति

 

श्री प्रताप सिंह (जबेरा) - अध्यक्ष महोदय, मेरी ध्यान आकर्षण की सूचना का विषय इस प्रकार है -

 

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री (श्री रुस्तम सिंह)- अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जो वक्तव्य दिया है, उसमें

 

इसलिए माननीय अध्यक्ष महोदय, यह कहना कि मृत्यु दर बढ़ रही है, यह कहना सही नहीं है. उपरोक्त तालिकाओं में अंकित जानकारी से स्पष्ट है कि जिले एवं विकासखण्ड तेंदूखेड़ा में शिशु बाल मृत्यु एवं गर्भपात की संख्या लगातार गिरावट की ओर जा रही है.

श्री प्रताप सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, अप्रैल से दिसम्बर तक की स्थिति संबंधी पिछले एक साल रिकार्ड बता रहा हूं. हमारे दमोह जिले में शिशुओं की जो मौत हुई है पूरे संभाग में सागर 177, दमोह में 325 एवं टीकमगढ़ में 130, छतरपुर में 89, पन्ना में 241 इसमें भी हमारे दमोह जिले के विकासखण्ड तेन्दूखेड़ा की जिन ग्रामों की आप चर्चा कर रहे हैं वहां 1 जनवरी से 31 दिसम्बर के बीच में बेलधारा में बाल मृत्यु की एक, मृत जन्म हुए बच्चों की दो, शिशु मृत्यु 2 कुल मिलाकर 5 बच्चों की मृत्यु हुई है. इसी प्रकार से बेलधारा में 21.2.17 को मृत जन्म हुए 4, शिशु मृत्यु दर 1, बाल मृत्यु इसमें नगण्य है. पडरई में मृत जन्म हुए 2, शिशु मृत्यु 1, बाल मृत्यु 2, इसी प्रकार बगदरी में 1 जनवरी, से 31 दिसम्बर 2016 तक मृत जन्म 1, शिशु मृत्यु दर 5, बाल मृत्यु नगण्य है. कुल मिलाकर 23 बच्चों की मौतें हमारे तेन्दूखेड़ा विकासखण्ड की चार पंचायतों में हुई हैं. जो आपके आंकड़े कह रहे हैं उस आधार पर यह ठीक नहीं है. इसमें समय रहते इन ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने 26 जनवरी को ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर वहां के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में इसकी सूचना दी कि हमारे जिले की पंचायतों में ऐसा क्यों हो रहा है, लेकिन उस पर भी शासन ने कोई कार्यवाही नहीं की. मेरा निवेदन है कि तेन्दूखेड़ा के नजदीक झलोन पीएचएसी में न तो वहां पर महिला डॉक्टर नहीं हैं वहां पर एएनएम नहीं है झलोन सबसे बड़ा केन्द्र है तो मृत्यु दर घटेगी नहीं बढ़ेगी ही. मैं शासन से जानना चाहता हूं कि वहां महिला डॉक्टर की पूर्ति की जाए वहां पर पानी का भी परीक्षण करवाया जाए कि पंचायतों में क्यों मृत्यु दर बढ़ रही है.

श्री रूस्तम सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य का सुझाव उत्तम है कि वहां पर पानी की जांच करा ली जाए कि आखिरकार वजह क्या है? पानी की जांच करा ली जाएगी जहां तक महिला डॉक्टर की पदस्थापना का सवाल है. अभी हाल में हमारे 700 डॉक्टर पीएससी से सिलेक्ट होकर के उपलब्ध हो गये हैं हम शीघ्रताशीघ्र महिला डॉक्टर की पूर्ति कर देंगे. वहां पेरामेडिकल एएनएम उसकी भी 1800 पदों की भर्ती की प्रक्रिया है. व्यापम से निकट भविष्य में होने वाली है जो आपने चाहा है उसकी पूर्ति करवा देंगे.

श्री प्रताप सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह मामला 2015 से लंबित है

इसमें समय सीमा बता दें. यदि महिला डॉक्टर की वहां पूर्ति हो जाएगी शायद यह जो घटनाएं घट रही हैं उसमें कमी होगी.

श्री रूस्तम सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, पीएससी से सिलेक्ट डॉक्टर्स की लिस्ट आ गई है डॉक्टरों का वेरीफिकेशन होता है, वह जरूरी है उसमें जितना समय लगे वैसे ही डॉक्टर की पदस्थापना हो जाएगी, वहां इसकी पूर्ति कर देंगे.

श्री यादवेन्द्र सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे दो ब्लाक हैं नागौद एवं उचहेरा ब्लाक में भी डॉक्टर नहीं है.

अध्यक्ष महोदय--ध्यानाकर्षण चल रहा है आप, ऐसे खड़े नहीं हो सकते हैं. ध्यानाकर्षण में यह विषय नहीं आते न ही उनके पास में जानकारी रहती है.

श्री यादवेन्द्र सिंह--दोनों का इकट्ठा मान लें.

अध्यक्ष महोदय--नहीं, बिल्कुल नहीं.

(2) नीमच जिले के मनासा क्षेत्र में कृषकों पर विद्युत अधिनियम के अंतर्गत प्रकरण कायम किए जाने से उत्पन्न स्थिति.

 

श्री कैलाश चावला (मनासा )-- माननीय अध्यक्ष महोदय,

ऊर्जा मंत्री, (श्री पारस चन्द्र जैन )-- माननीय अध्यक्ष महोदय,

श्री कैलाश चावला - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे ध्यानाकर्षण का जो विषय है वह यह है कि पिछली गर्मी में पेयजल की वास्तव में कमी थी और उसी समय सिंहस्थ भी चल रहा था और पी.एच.ई. विभाग के सभी अधिकारी भी सिंहस्थ में लगे हुए थे. जिला योजना समिति की जब बैठक सम्पन्न हुई उसमें सहमति बनी थी कि पंचायत अगर पेयजल की व्यवस्था करती है और किसी कृषक के कुंए से टैंकर भरकर लाती है तो उसके खिलाफ कोई प्रकरण नहीं बनाया जायेगा. अध्यक्ष महोदय, जो काम सरकार को करना चाहिये था वह ग्राम पंचायतों ने किया और जिन किसानों के पास पानी उपलब्ध था उन्होंने पानी देने की सहमति प्रदान की. इस प्रकरण में माननीय मंत्री जी ने जो जवाब दिया है उसमें यह कहा है कि चोरी का प्रकरण कायम किया गया है. चोरी में किसी आदमी का नुकसान होता है और कोई व्यक्तिगत लाभ के  लिये चोरी करता है तो हम उसको चोरी कहते हैं परंतु जनहित के लिये अगर कुंए से पानी लेकर जनता को पिलाया गया और इसको हम चोरी मानेंगे तो यह उचित होगा. विवेक का उपयोग नियमों का पालन करने में अवश्य किया जाना चाहिये. इस प्रकरण में जिस अधिकारी ने केस बनाये हैं उसने विवेक का उपयोग नहीं किया. मंत्री जी के जवाब में कहीं भी यह नहीं आया है कि जिन कुंओं से पानी लिया गया उनके पास वैध कनेक्शन नहीं थे. यह बात तो मैंने ध्यानाकर्षण सूचना में स्वीकार की है कि कृषकों के कुंओं से वैध कनेक्शन से पानी लेकर जनता को पानी पिलाया गया. जनता के हित में निर्णय लिया गया और ऐसे केस बनाये गये तो कल किसी गांव में आग लग गई और किसी के कुंए से पानी भरकर आग बुझाने का प्रयत्न किया गया तो क्या ऐसे केस बनाये जायेंगे ? मानवीय आधार पर जनहित में जो काम सरकार को करना चाहिये वह काम सरकार न करे और पंचायत करे और उसको दण्डित किया जाये. उनको तो शाबाशी देनी थी कि सरकार पानी की व्यवस्था नहीं कर पा रही है और पंचायत ने पानी की व्यवस्था की उसको शाबाशी देने के बजाय लाखों रुपये के बिल थमा दिये. 5-10 हजार रुपये के बिल होते तो और बात थी 5-5 लाख रुपये 3-3 लाख रुपये के पंचायतों को बिल दे दिये और इतना ही नहीं जिन कृषकों ने अपने कुंए का पानी दिया उनको भी बिल बनाकर दे दिये गये. उन पर भी जुर्माना कर रहे हैं, दण्डित कर रहे हैं और पंचायतों को भी दण्डित कर रहे हैं. मेरा माननीय मंत्री जी से यह प्रश्न है कि क्या ग्रीष्मकाल में संकट के समय में किसी कुंए से पानी पंचायत लेती है तो इस काम को आप जनहित में मानते हैं कि नहीं ?

श्री पारसचन्द्र जैन - माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जो बात कही है वास्तव में जहां से पानी लिया गया उनके पास कनेक्शन नहीं थे एक भी कनेक्शन वैध नहीं था. इसके बाद भी मानवता की जहां तक बात है मेरा कहना है कि ग्राम पंचायत को विद्युत वितरण कंपनी द्वारा दिनांक 28.2.2017 को सूचित किया था कि वे अपने बिल के विरुद्ध अपील कर सकते थे. इसका प्रावधान भी है. यदि वे अपील करते तो हम उसमें जो भी संशोधन हो सकता कर सकते थे.

श्री कैलाश चावला - माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी जो बात कह रहे हैं वह तथ्यों से परे हैं. मेरे पास 2 बिल हैं बाकी के मैं कलेक्ट नहीं कर पाया. बंशीलाल,नाथूलाल जी पटेल यह कंजाड़ा का बिल है. इस कनेक्शन से पंचायत ने पानी लेकर लोगों को पिलाया इसका वैध स्थाई कनेक्शन है. 34 हजार का नोटिस इनको भी दिया गया है और पंचायत को भी लगभग 5 लाख रुपये के 4-5 नोटिस दिये गये. मेरा कहना है कि मंत्री जी किसी अधिकारी से जांच करा लें कि वहां वैध कनेक्शन से पानी लिया गया कि नहीं. अगर वैध कनेक्शन से पानी लिया गया है तो आप कोई समाधान खोज लें और अगर वैध कनेक्शन से नहीं डायरेक्ट लिया गया है तो उन पर जुर्माना करें मुझे कोई ऐतराज नहीं है लेकिन कृषक का वैध कनेक्शन है और केवल पीने का पानी लिया है इस आधार पर उनको दण्डित न किया जाये. मेरा यह अनुरोध है इसका आप कोई समाधान खोजें और इसकी जांच कराएं.

श्री पारसचन्द्र जैन - माननीय अध्यक्ष महोदय, जो बात माननीय सदस्य कह रहे हैं. यदि वैध कनेक्शन से पानी लिया होगा तो हम पूरे प्रकरण की जांच भी करा देंगे और पूरी सहूलियत देंगे लेकिन यदि वह अवैध कनेक्शन है तो उनको अपील में जाना था.

श्री कैलाश चावला - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने पूर्व में भी कहा है कि जिला योजना समिति में ए.सी. को प्रभारी मंत्री जी ने निर्देश दिये. हम बार-बार कहते हैं कि जिला सरकार होती है. अब जिला सरकार ग्रीष्म काल में कहती है कि पीने के पानी की छूट पंचायत दे सकती है और उस बात को मान्य न करके केस बनाये जायें, तो मेरा यह मानना है कि यह पंचायतों के साथ अन्याय होगा. वह एक संस्था है, उसके पास इतना पैसा नहीं है कि वह पैसा जमा करा सके. इसकी पूरी जांच करा लें. किस पंचायत ने किस कनेक्शन से पानी लिया, अगर स्थाई कनेक्शन उसके पास हो तो उसका बिल माफ करके प्रकरण वापस ले लिया जाये और अगर अवैध कनेक्शन है, डायरेक्ट है, तो मुझे उसके बारे में कुछ नहीं कहना है.

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्यक्ष महोदय, सिंहस्थ के यात्रियों को पानी पिलाया है.  इस बात पर भी विचार कर लें.

 

श्री पारस चन्‍द्र जैन-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 12 प्रकरण बने थे उसमें से चार किसानों ने पैसे भी भर दिये. जो सदस्‍य की मंशा है हम उसकी जांच भी करा लेंगे और यदि वैध है तो हमको कोई दिक्‍कत नहीं, लेकिन यदि अवैध है जिसके लिये गर्मी के मौसम में पानी सबको मिलना चाहिये इसलिये सरकार भी चिंति‍त है. इसके लिये हम यह भी कह रहे हैं कि गर्मी प्रारंभ होने वाली है, पेयजल समस्‍या पूरे प्रदेश में रहती है. ऐसे क्षेत्र जहां पर समस्‍या है वहां पर वितरण कंपनी द्वारा शिविर लगाकर ग्राम पंचायत को अस्‍थाई कनेक्‍शन हम दो दिन में दे देंगे.

अध्‍यक्ष महोदय-- अभी समस्‍या आगे की नहीं है, अभी समस्‍या पीछे वाली है. आप उसका निराकरण कर दीजिये.

श्री पारस चन्‍द्र जैन-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमने कह दिया कि यदि वैध है तो ह‍म उसमें कंसीडर कर लेंगे.

श्री कैलाश चावला-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी ने जो अभी जवाब दिया एक आखिरी बात मैं कहना चाहता हूं कि ग्रीष्‍मकाल में जब गांव में पीने के पानी की समस्‍या आती है तो किसी कुए से एक टेंकर भरता है, किसी कुए से दों टेंकर भरते हैं, किसी से तीन टेंकर भरते हैं. अब यह मंत्री जी कह रहे हैं कि दो दिन में उनको अस्‍थाई कनेक्‍शन दे देंगे, तो क्‍या ग्राम पंचायत 5 कुओं पर कनेक्‍शन लेकर पानी की सप्‍लाई करेगी. यह व्‍यावहारिक नहीं है, पंचायत एक कनेक्‍शन तो ले सकती है, पर 4 कुओं पर 4 कनेक्‍शन लेकर पंचायत कैसे बिल भर सकती है, इसके बारे में मंत्री जी को विचार करना चाहिये.

अध्‍यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी, माननीय सदस्‍य कैलाश चावला जी ने जो कहा है वह बिल्‍कुल मानवीय आधार है और हर चीज कानून से नहीं चलती और यदि लेट भी हो गये हैं तो condonation of delay होकर अपील भी हो सकती है. मेरा आपसे अनुरोध है कि जो वैध कनेक्‍शन हैं जिसका आपने अभी कहा है उनको तो आप समाप्‍त कर दें बाकी केसेस में अपील के लिये उनको समय दें.

श्री पारस चन्‍द्र जैन-- मैंने अपील का बोला है.

श्री कैलाश चावला-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक आखिरी बात सुभाषित करना चाहता हूं- ''आपात काले, मर्यादा नास्‍ति'' जब आपातकाल होता है तो कोई नियम कानून नहीं चलता है. इसलिये मेरा निवेदन है कि इसमें सहानुभूतिपूर्वक विचार करें, जांच करा लें और फिर इसका निराकरण करें.

अध्‍यक्ष महोदय-- नहीं ठीक बात है उनकी, कल को कोई पानी नहीं देगा पीने के लिये.

श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सिंहस्‍थ के यात्रियों को पानी पिलाया है, उन्‍होंने कोई अपराध नहीं किया है.

अध्‍यक्ष महोदय-- मैं खुद भी आपकी बात से सहमत हूं.

श्री पारस चन्‍द्र जैन-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जो बात कही है और आपने भी आसंदी से जो कहा है उसके आदेश का हम पालन करेंगे.

 

 

12.33 बजे प्रतिवेदन की प्रस्‍तुति तथा स्‍वीकृति

गैर सरकारी सदस्‍यों के विधेयकों तथा संकल्‍पों संबंधी समिति का अठारहवां प्रतिवेदन

 

 

 

12.34 बजे याचिकाओं की प्रस्‍तुति

 

अध्‍यक्ष महोदय-- आज की कार्यसूची में सम्मिलित सभी याचिकायें प्रस्‍तुत की हुई मानी जायेंगी.

अध्‍यक्षीय घोषणा

भोजनावकाश न होने विषयक

अध्‍यक्ष महोदय-- आज भोजनावकाश नहीं होगा, भोजन की व्‍यवस्‍था दोपहर 1.00 बजे से सदन की लॉबी में की गई है. माननीय सदस्‍यों से अनुरोध है कि सुविधानुसार भोजन ग्रहण करने का कष्‍ट करें.

श्री के.पी. सिंह (पिछोर)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सिर्फ एक मिनट लूंगा, कल मैं नहीं था. माननीय मंत्री जी हमारे जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं इसलिये उनके ध्‍यान में एक बात लाना चाहता हूं. माननीय अनूप मिश्रा जी अब सदन के सदस्‍य नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप कल लाना नहीं तो यह चर्चा शुरू हो जायेगी, फिर सभी बोलेंगे.

श्री के.पी सिंह-- सिर्फ एक लाइन में खत्‍म कर दूंगा.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप बीच में व्‍यवधान करके बोल देना पर अभी शुरू करने दीजिये आप.

श्री के.पी सिंह-- बीच में मुझे अच्‍छा नहीं लगता.

श्री बाला बच्‍चन-- क्‍या बात है माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तरीका भी बता दिया.

 

12.30 बजे वर्ष 2017-2018 की अनुदानों की मांगों पर मतदान (क्रमश:).

 

(1)

मांग संख्या 19

 

लोक स्वास्थ् एवं परिवार कल्याण.

 

 

 

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री (श्री रूस्तम सिंह) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, कल स्वास्थ्य विभाग की अनुदान मांगों पर सदन के हमारे 42 माननीय सदस्यों ने चर्चा में भाग लिया और मैं समझता हूं कि काफी तादाद में सदस्यों ने स्वास्थ्य विभाग की चर्चा में रूचि दिखाई और रात के 8.00 बजे तक चर्चा हुई. स्वास्थ्य विभाग की चर्चा में इनका भाग लेना यह दर्शाता है कि हमारे सदस्य, लोगों के स्वास्थ्य के प्रति चिंतित है. अध्यक्ष महोदय, यह मान्यता है कि पहला सुख निरोगी काया, अंग्रेजी में कहते हैं Health is Wealth. अंग्रेजी Health को Wealth मानते है और हमारी संस्कृति Health को सुख मानती है. स्वास्थ्य को सुख मानती है.

माननीय अध्यक्ष महोदय, अनादिकाल से लेकर चाहे भगवान राम का समयकाल हो, चाहे सम्राट अशोक का समयकाल हो, चाहे गुप्तकाल का समय हो, जो भी उस समय के राजा और महाराजा रहे उन्होंने स्वास्थ्य को लेकर के चिंता की और उस समय जो व्यवस्थायें थीं, चरक जी का नाम, धनवंतरी जी का नाम आज भी लोग सम्मान के साथ में लेते हैं तो अपने अपने समय में सबने स्वास्थ्य के प्रति काम किया है . आज के समय में मैं, इतना ही कहना चाहता हूं कि यह जो वर्ष चल रहा है इसको हम पंडित दीनदयाल जी के नाम से शताब्दी वर्ष के रूप में मना रहे हैं. पंडित दीनदयाल जी का जो मूल मंत्र था "अंतिम छोर के अंतिम व्यक्ति को सुविधायें दी जायें" और अंतिम छोर के अंतिम व्यक्ति को, जो पहला सुख निरोगी काया है तो निरोगी काया देने के लिये उनको स्वस्थ्य रखने के लिये मध्यप्रदेश की सरकार, माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, मेरा स्वास्थ्य विभाग और हमारी सरकार दृढ़-संकल्पित है.

माननीय अध्यक्ष महोदय, कल जितनी बातें हुई हैं, उसके बारे में मै कहना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश में माननीय मुख्यमंत्री जी ने आनंद विभाग का गठन किया. आनंदित व्यक्ति के लिये सबसे पहले जरूरी है उसका स्वस्थ्य रहना. अगर व्यक्ति स्वस्थ है तभी वह आनंद का अनुभव कर पायेगा. उसके अच्छे स्वास्थ्य के लिये जरूरी है धन की आवश्यकता. मैं तुलना नहीं करना चाहता लेकिन अगर बताया नहीं जायेगा तो ज्ञात कैसे होगा इसलिये मैं यह कहना चाहता हूं कि स्वास्थ्य विभाग के लिये साढे़ प्रदेश की सात करोड़ जनता के स्वास्थ्य की चिंता करते हुये कभी 2003 में स्वास्थ्य विभाग का बजट कुल 664 करोड़ रूपये हुआ करता था और अब यह बजट 5670 करोड़ रूपये का है.

श्री बाला बच्चन -- माननीय मंत्री जी, असत्य आंकड़े बता रहे हैं. मैं स्वयं उस समय स्वास्थ्य मंत्री था .

श्री रूस्तम सिंह -- माननीय हमने देख लिया है तभी हम बता रहे हैं. आप जब मंत्री थे, रिकार्ड आपके पास में होता था लेकिन आज वह रिकार्ड मेरे पास है.

डॉ. गोविन्द सिंह -- मंत्री जी, तब आपकी आयु क्या थी और आज आपकी आयु क्या हो गई ? क्या आपकी आयु घटी ? आपकी आयु बढ़ी कि नहीं तो इसी तरह से बजट की बात है वह भी बढ़ेगा उसमें नया क्या है. बार बार कहते हैं बजट बढ़ गया-बजट बढ़ गया.(हंसी)

राजस्व मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्ता) -- अध्यक्ष महोदय, डॉ. गोविन्द सिंह जी ऐसे सदस्य हैं जिनकी हर सत्र में ऊंचाई कम दिखती है. (हंसी)

श्री रूस्तम सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय. डॉ.साहब ने मेरे बारे में बोला है तो मुझे बोलना ही पड़ेगा. मैं आदरणीय डॉ.साहब और बाला बच्चन जी जो तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री भी थे उनसे यह कहना चाहता हूं कि स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर कुल सिविल अस्पताल 54 हुआ करते थे..

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री गोपाल भार्गव) --बाला बच्चन जी के पास में शायद चिकित्सा शिक्षा विभाग था, स्वास्थ्य विभाग नहीं था. स्वास्थ्य मंत्री सुभाष कुमार सोजतिया जी थे.

श्री बाला बच्चन -- अध्यक्ष महोदय, मैं लोक स्वास्थ्य एवं परिवार विभाग का मंत्री था, सोजतिया जी के बाद लास्ट के विस्तार में मैं स्वास्थ्य मंत्री बना था.

श्री उमाशंकर गुप्ता-- उस समय चिकित्सा शिक्षा विभाग अलग नहीं था.

श्री बाला बच्चन -- मेडीकल एज्यूकेशन विभाग अलग था. मेरे पास में हेल्थ था इसलिये मेरी जानकारी में सारे फिगर अभी भी हैं. इसीलिये मैं कह रहा हूं कि आंकड़े असत्य हैं. मंत्री जी पता नहीं कहां से आंकड़े निकालकर के ले आये. आपको असत्य आंकडे दिये हैं . मुझे अभी भी मालूम है कि कितना बजट मेरे समय में था.

श्री उमाशंकर गुप्ता- बाला बच्चन जी क्या है कि उस समय का जो घालमेल था वही तो मंत्री जी निकाल रहे हैं.

श्री बाला बच्चन- नहीं. कोई घाल मेल नहीं था. मेरा कहना है कि मंत्री जी को भ्रमित किया जा रहा है.

श्री रूस्तम सिंह -- हम कोई भ्रमित नहीं है हम आपको लिखित में भेज देंगे.तथ्यों के साथ भेज देंगे.

संसदीय कार्य मंत्री(डॉ.नरोत्तम मिश्र) -- अध्यक्ष जी एक गाना है "याद न जाये बीते दिनों की - जा के न आये वो दिन" (हंसी)

श्री बाला बच्चन -- अध्यक्ष महोदय, याद चली जायेगी तो फिर हम सरकार को कैसे घेर पायेंगे.(हंसी) मंत्री जी के द्वारा असत्य आंकड़े देकर के बात की जा रही है.

श्री रूस्तम सिंह-- अध्यक्ष महोदय, बाला बच्चन जी स्वयं स्वास्थ्य मंत्री थे अपनी विधानसभा की दो मांगे वह पूरी नहीं कर पाये. जो आप सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मांग रहे हैं इसको कर लेते, जो आप पीएचसी मांग रहे हैं इसको कर लेते.वह दोनों काम हम कर रहे हैं.

श्री बाला बच्चन-- प्लीज, आप कर दीजिये उसके लिये हम धन्यवाद करेंगे. अध्यक्ष महोदय, 15 साल पहले की बात थी इसलिये नहीं कर पाये थे.15 साल हो गये हैं इसलिये नये की मांग है. मैं चाहूंगा कि आप कर दीजिये.

श्री रूस्तम सिंह -- अध्यक्ष महोदय, इनकी सरकार में विभाग के पास में बजट ही नहीं था तो यह कर कहां से लेते. कहां से करते (हंसी) इसके लिये बजट तो होना चाहिये.अध्यक्ष महोदय, इनकी दोनों मांगे उप स्वास्थ्य केन्द्र को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र हम बना रहे हैं, मै आपकी खुशी के लिये यह कर रहा हूं. बाला बच्चन जी अब तो मेजें थपथपा दें.(हंसी)

श्री बाला बच्चन-- माननीय मंत्री जी आप घोषणा कर दें तो मैं आपका धन्यवाद मेरी तरफ से और मेरे क्षेत्र की जनता की तरफ से भी करूंगा.

श्री रूस्तम सिंह -- यह घोषणा ही तो है भाई. जब मैं कह रहा हूं कि हम बना रहे हैं तो घोषणा ही तो है.

श्री बाला बच्चन -- धन्यवाद लेकिन उनके नाम तो ले लीजिये मडवारा और अंजड़.

श्री रूस्तम सिंह - चलो मड़वारा और अंजड़ दोनों. मड़वारा को हम प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बना रहे हैं यह साध्यता में नहीं आ रहा है लेकिन चूंकि वह वनवासी भाईयों का इलाका है इसलिये बना रहे हैं.

श्री बाला बच्चन-- माननीय मंत्री जी,आपको बहुत बहुत धन्यवाद. आपने हमारी बात को हमारे क्षेत्र की जनता की भावनाओं का ध्यान रखा और मड़वारा सब सेन्टर था उसको आपने पीएचसी करने का और अंजड़ जो पीएचसी थी उसको सब सीएचसी करने की जो घोषणा की है उसके लिये मैं आपको धन्यवाद देता हूं.

डॉ.नरोत्तम मिश्र--लेकिन आपकी सरकार में राजा साहब ने आपका ध्यान नहीं रखा.

श्री के.पी.सिंह(पिछौर) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय स्वास्थ्य मंत्री जी हमारे जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं इसलिये मैं याद दिलाना चाहता हूं. नरोत्तम मिश्र जी तो हमारे अनूप मिश्रा जी के प्रति पता नहीं कैसा भाव रखते थे.मुझे समझ में नहीं आया.

डॉ.नरोत्तम मिश्र -- जैसा आप सिंधिया जी के प्रति रखते हैं (हंसी)

श्री के.पी.सिंह -- दोनों ही यहां नहीं हैं.(हंसी)

डॉ.नरोत्तम मिश्र-- लेकिन दोनों इस दुनियां में हैं (हंसी)

श्री के.पी.सिंह -- अध्यक्ष महोदय, अनूप मिश्रा जी माननीय मंत्री जी के क्षेत्र के सांसद भी हैं इसलिये मैं आपसे बात कहना चाहता हूं. हमारे क्षेत्र में दौरे पर जब अनूप मिश्रा जी स्वास्थ्य मंत्री के रूप में गये थे, मेरे साथ एक बैठक भी हुई थी. भोती कस्बा हमारे यहां पड़ता है. भारतीय जनता पार्टी का एक कार्यक्रम था उसमें उन्होंने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि यहां पर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र स्थापित हो जायेगा और मैं इसको स्वीकृत कर दूंगा. उसके बाद नरोत्तम मिश्र जी स्वास्थ्य मंत्री बन गये, मैंने सदन में एक दिन यह बात रखी कि पूर्व स्वास्थ्य मंत्री जी हमारे यहां एक घोषणा करके आये हैं और चूंकि सरकार की जवाबदारी संयुक्त होती है तो आपको भोती में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र को स्वीकृत करना चाहिये, नहीं तो उनकी विश्वसनीयता समाप्त होगी तो नरोत्तम मिश्र जी ने तो उसकी परवाह की नहीं, जैसा इनका भाव था वैसे इन्होंने किया लेकिन माननीय स्वास्थ्य मंत्री जी आपका भाव उनके प्रति ऐसा नहीं है, आपके वह सांसद भी हैं उनकी विश्वसनीयता जनता में बनी रहे, सरकार की बनी रहे इसलिये मेरा आपसे अनुरोध है कि भोती की घोषणा पूरी करायें. हालांकि मुख्यमंत्री की घोषणायें भी यहां पूरी नहीं होती हैं. आपके जिले के प्रभार का मामला है इसलिये कह रहा हूं कि भोती में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की मांग बहुत पुरानी है कृपा करके क्या इसी बजट में उसको शामिल कर लेंगे ?

डॉ.नरोत्तम मिश्र-- अध्यक्ष जी, आप ऐसे एक एक विपक्ष के सदस्य की घोषणा करवायेंगे तो हमारे सत्ता पक्ष के सदस्यों की भी मांगे हैं. हमारे सदस्यों का भी ख्याल रखा जाये.

अध्यक्ष महोदय- घोषणा नहीं कर रहे हैं. उन्होने अपनी बात रख दी है. यह कोई प्रश्नकाल नहीं है.

श्री के.पी.सिंह -- नरोत्तम जी,आपको दिक्कत थी आपने नहीं की कम से कम वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री जी को तो करने दो.

श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उस समय अनूप जी ने घोषणा की थी, यदि वे मना करते तो कहते कि बताओ इतनी छोटी सी बात नहीं मानी, जबरन बगैर प्रावधान के घोषणा करवाते हैं तो फल ऐसा ही होगा.

श्री के.पी. सिंह - मैंने घोषणा नहीं करवाई, वह आपकी पार्टी की ही मीटिंग थी.

श्री रूस्‍तम सिंह - जो श्री के.पी. सिंह ने बोला है उसका आकलन करा लेंगे, केटेगरी में आया तो विचार करेंगे.

श्री सोहन लाल बाल्‍मीक - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक लाइन, मैं घोषणा के संबंध में ही कुछ कहना चाह रहा हूं.

अध्‍यक्ष महोदय - मंत्री जी के सिवाए कुछ नहीं लिखा जाएगा.

श्री रूस्‍तम सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश की सरकार और हमारे मुखिया अति संवेदनशील है स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर और जो अंतिम व्‍यक्ति के इलाज की बात हम कह रहे थे, उसके स्‍वास्‍थ्‍य की चिन्‍ता की हम बात कह रहे थे. यह भाव तब तक आ नहीं सकता, जब तक मन में माननीय नरोत्‍तम जी बोलते हैं, एक चौपाई.

श्री शंकर लाल तिवारी - परहित सरिस धरम नहीं भाई, परपीड़ा सम नहीं अधमाई.

श्री रूस्‍तम सिंह - अध्‍यक्ष महोदय, जिसके दिल में यह भाव नहीं आएगा कि दूसरे का दर्द मेरा दर्द है, दूसरा बीमार है, दुखी है वह मेरी चिन्‍ता है, यह माननीय मंख्‍यमंत्री जी की चिन्‍ता है, इसी भाव से मध्‍यप्रदेश का स्‍वास्‍थ्‍य विभाग काम करता है. कल अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस था, उसको लेकर चर्चा भी हुई, कार्यक्रम भी हुए, हकीकत में महिलाओं के स्‍वास्‍थ्‍य की चिन्‍ता की गई है, जो अक्‍सर बोलते हैं मोर्टेलिटी रेट अधिक है, लेकिन हमको जो कुछ मिला, उसको ठीक करने में 13 साल हो गए, पूरी मशक्‍कत लगा दी, इतना खराब मिला कि ठीक करते करते, सूखा पेड़ मिला, समय लगता है उसको ठीक करने में. मैं आपसे आग्रह करना चाहता हूं, ये विपक्ष के सदस्‍य बाते करते हैं, महिलाओं का संस्‍थागत प्रसव 22 प्रतिशत, 2003 में थे.

डॉ. गोविन्‍द सिंह - माननीय अध्‍यक्ष जी, उस समय बिगाड़ने में आप सीनियर आईपीएस अधिकारी थे, आपने भी बिगाड़ने का काम किया है, जितना भी बिगाड़ किया है सरकार के पदों में बैठकर आपने किया है.

श्री शंकर लाल तिवारी - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, गोविन्‍द सिंह जी जबरन बोल रहे हैं, इनके समय में सरकारी अस्‍पतालें बूचड़खाना बन गई थी, दवाई के पर्चे मिलते थे.

अध्‍यक्ष महोदय - मंत्री जी बैठे नहीं है, उन्‍हें बोलने दें, वाद विवाद नहीं चल रहा है इसमें बहुत समय लगेगा. बैठ जाए तिवारी जी.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - माननीय अध्‍यक्ष जी जब से अजय सिंह जी नेता प्रतिपक्ष बने है न तब से गोविन्‍द सिंह जी इतने ओवरलोडड है कि इन्‍हें यही नहीं पता कि स्‍वास्‍थ्‍य विभाग में आईपीएस नहीं आता. (हंसी..)

डॉ. गौरीशंकर शेजवार- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी विनम्र प्रार्थना है कि सदन का शुरू का समय हम तो टोकाटाकी और व्‍यवधान में बर्बाद कर देते हैं, फिर आखिरी में कार्यवाही पूरी करने के लिए समय बढ़ाना पढ़ता है. मेरा कहना है कि पहले से ही हम एहतियात बरतें कि समय पर सभी चीजें हो जाएं ताकि रात में 8-9 बजे तक नहीं बैठना पड़े.

अध्‍यक्ष महोदय - अब कोई सदस्‍य नहीं बोलेगा, सिर्फ स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जी बोलेंगे, हम आपसे सहमत है.

श्री रूस्‍तम सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आग्रह करता हूं कि कोई पुलिस अधीक्षक सरकार को महिलाओं की सुविधा नहीं देने देता, सरकार को एक जिले का एसपी महिलाओं की सुविधा नहीं देने देता, यह शोध का विषय है, जैसे गोविन्‍द सिंह जी ने बोला है (..हंसी..) मैं अपने विषय पर आता हूं, जो बातें मैंने कहीं है कि आखिरकार यह सरकार कैसे चिन्‍ता कर रही है, कुल मिलाकर जो बैड हुआ करते थे, 19700, आज मध्‍यप्रदेश में स्‍वास्‍थ्‍य विभाग जो अस्‍पताल संचालित करता है, उसमें 28743 बैड हो गए है,5 करोड़ 13 लाख बाह्य रोगी अस्‍पताल में जाते हैं, भर्ती होने वाले 42 लाख 76 है. मैंने बताया था कि संस्‍थागत प्रसव 86 प्रतिशत हो रहे है, महिलाओं को लाने की व्‍यवस्‍था, डिलीवरी के बाद वापस करने की व्‍यवस्‍था, जिन महिलाओं की प्रेगनेंसी हुई है उनको 1400 रूपए देने की व्‍यवस्‍था, जो प्रेरित करके उनको लाती है उनके लिए 600 रूपए की व्‍यवस्‍था की गई है.

श्रीमती नीना विक्रम वर्मा - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक बात कहना चाहती हूं कि कल महिला दिवस था और मुख्‍यमंत्री जी ने विधवा शब्‍द हटाकर के कल्‍याणी शब्‍द का उपयोग किया था, उसी सिलसिले में निवेदन करना चाहती हूं कि जो महिलाएं नि:संतान है, जिनके बच्‍चे नहीं होते उनके लिए गरीबी रेखा का होना अनिवार्य है, गरीबी रेखा की पात्रता खत्‍म कर उनके इलाज की सुविधा के लिए भी माननीय मंत्री जी आज घोषणा कर दें उन महिलाओं के लिए अच्‍छा होगा.

श्री रूस्‍तम सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो प्रश्‍न उठाया गया है, किलकारी के नाम से माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने यह बीड़ा उठाया, हमको निर्देश दिए कि मध्‍यप्रदेश में जितनी भी महिलाएं नि:संतान है, किसी कारणवश जिनको संतान नहीं हो पाई, उनके लिए इलाज की पूर्ण व्‍यवस्‍था करें एवं ऐसी कई महिलाएं हैं जिन्‍हें शादी के कई साल बाद शासन द्वारा इलाज कराने से उनके बच्‍चे हुए हैं, उनके घरों में बच्‍चों की किलकारी गूंजी है.

श्रीमती नीना विक्रम वर्मा - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नि:संतान महिलाओं के ऊपर बीपीएल का प्रतिबंध है, वह हटना चाहिए.

अध्‍यक्ष महोदय - इस तरह से तो मंत्री जी का उत्‍तर ही नहीं हो पाएगा, आप भी उत्‍तर मत दीजिए, आप भी एक साथ उत्‍तर दीजिए.

श्री रूस्‍तम सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो माननीय सदस्‍या ने बोला है उसकी चिन्‍ता है. मैं यह बताना चाहा रहा हूं कि नि:शुल्‍क सुविधा वाली बात, नि:शुल्‍क दवाई देने वाली बात जो पहले नहीं थी, नि:शुल्‍क जांचें की बात, ब्‍लड जांच की बात, यह सब अभी हुई है, उसका विस्‍तृत आंकड़ा मैं देना चाहा रहा था.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - इसमें पुरूषों को भी शामिल करें, जिनको बच्‍चे नहीं हो रहे हैं.

श्री कैलाश चावला - मंत्री जी, उसमें तिवारी जी को शामिल कर लो.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - हम बिल्‍कुल शामिल होने को तैयार है, लेकिन रोइएगा नहीं.

श्री रूस्‍तम सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश में स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं की बात हम कर रहे थे. पहले कैंसर की बात आई थी तो मैं कह रहा हूं कि मध्‍यप्रदेश ही एक ऐसा प्रदेश है जहां के पूरे 51 जिलों में कीमोथेरेपी सभी को मुफ्त दी जा रही है, उसमें बीपीएल का होना जरूरी नहीं है. मैं उज्‍जैन जिले में अस्‍तपाल का विजिट करने गया था, वहां पर कीमोथेरेपी के सेशन चल रहे थे, मैंने उन लोगों से बात की, वे कह रहे थे कि जो कीमोथेरेपी आपकी सरकार हमें मुफ्त दे रही है, इसके लिए हमें इन्‍दौर, भोपाल या कैन्‍सर अस्‍पताल जाना पड़ता तो बहुत परेशानी होती थी, वह मुफ्त में मिल रही है, उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री जी का आभार माना.

श्री सोहनलाल बाल्‍मीक - अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी ने पूरे प्रदेश के 51 जिलों का नाम लिया है, क्‍या छिन्‍दवाड़ा जिले के अस्‍पताल में कीमोथेरेपी हो रही है.

अध्‍यक्ष महोदय - यह प्रश्‍न काल नहीं है.

श्री सोहनलाल बाल्‍मीक - अध्‍यक्ष महोदय, यह असत्‍य बात क्‍यों बोली जा रही है. (xxx)

अध्‍यक्ष महोदय - कुछ नहीं लिखा जाएगा.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - अध्‍यक्ष महोदय, जो इस तरह के आरोप लगा रहे हैं, वह गलत है, छिन्‍दवाड़ा जिले में कीमीथेरेपी हो रही है.

डॉ. गोविन्‍द सिंह - आपने कल प्रतिवेदन दिया है, उसमें भिण्‍ड जिले में कीमीथेरेपी नहीं हो रही है, भिण्‍ड जिले का नाम दर्ज नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय - डॉ. साहब यहां कोई क्षेत्रवार चर्चा नहीं हो रही है.

श्री सोहन लाल बाल्‍मीक - मेरे क्षेत्र में सौ बिस्‍तर के अस्‍पताल के लिए मुख्‍यमंत्री जी की घोषणा थी, वह भी बता दें. (xxx)

अध्‍यक्ष महोदय - कुछ नहीं लिखा जाएगा.

श्री रूस्‍तम सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ये बीच बीच में खड़े होकर बातें करते हैं, ये कुछ तो सोचे कि इन्‍होंने क्‍या किया है, बाते कर रहे हैं कि मेरे यहां नहीं हुआ. क्‍यों नहीं हुआ, आपकी सरकार 40 साल क्‍यों नहीं की, यह कोई बात होती है.

डॉ. गोविन्‍द सिंह - एसपी से आई जी बनाया था.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - माननीय अध्‍यक्ष जी, एसपी से आईजी प्रक्रिया के तहत बनते हैं, गोविन्‍द सिंह जी नहीं थे तो अभी बन नहीं रहे क्‍या.

अध्यक्ष महोदय -- मेरा मंत्रिगण से अनुरोध है कि वे किसी का उत्तर नहीं दें और स्वास्थ्य मंत्री जी से अनुरोध है कि अपना भाषण दें, किसी का उत्तर देने की कोई जरुरत नहीं है. उनको बोलने दीजिये.

श्री उमाशंकर गुप्ता -- अध्यक्ष महोदय, उस समय सीधे एसपी से आईजी बनाते थे, अब एसपी से डीआईजी बनते हैं.

श्री रुस्तम सिंह -- अध्यक्ष महोदय, मैं जननी एक्सप्रेस की बात बताना चाह रहा था. यह पूरे प्रदेश में चल रही है. महिलाओं को लाने की व्यवस्था हम लोग कर रहे हैं. इसी के साथ जो डायलिसिस की बात है, उसमें मैं व्यक्तिगत रुप से हास्पीटल्स में गया हूं, मैंने बात-चीत की है और उन्होंने इसकी काफी प्रशंसा की है और यह हमारे लिये बहुत वरदान सिद्ध हुई है. हमारे यहां जो इतनी योजनायें चल रही हैं,यह जो मातृ मृत्यु दर की बात थी, जो पहले मातृ मृत्यु दर जितनी थी, आंकड़ों में 379 हुआ करती थी, वह 221 हुई है. इससे हम लोग संतुष्ट नहीं हैं. हमको आंकड़ा जो है, अभी और बेहतर करना है.पहले के मुकाबले संतुष्ट हैं, लेकिन हमारा लक्ष्य इसको जीरो पर पहुंचाने का है. हमारा लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर से बेहतर करने का है. अध्यक्ष महोदय, इसी तरह से बाल मृत्यु दर की चर्चाएं आती हैं. हम लोग पेरामीटर्स में नीचे आये हैं. हिन्दुस्तान में नीचे लाने वालों में अग्रणी प्रदेश में से हम लोग हैं. लेकिन इसको भी हमको और बेहतर करना है. जो मलेरिया या उससे जनित दूसरी जो बीमारियां होती हैं, उसके लिये भी प्रभावी कार्यवाही की गई है. मंडला को सनफ्लावर के जरिये गोद लिया गया है, जो जीरो मलेरिया पहुचांने का वह काम शुरु कर रहे हैं. 5 साल के लिये उसको गोद लिया हुआ है. 13 लाख 70 हजार मेडिकेटेड मच्छरदानियां हमको प्राप्त हुई हैं. वह हम वितरण करा रहे हैं. मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी काम हुए हैं, चाहे वह संजीवनी वाली बात हो, चाहे सरदार वल्लभ भाई मुफ्त दवाई वितरण वाली बात हो, यह कुछ मर्चुरी (पीएम) हाउस की बात बताई गई है. हम पूरे मध्यप्रदेश के हर जिला अस्पताल में उसको अपग्रेड कर रहे हैं और जिन हास्पीटल्स में नहीं है, वहां मर्चुरी (पीएम) रुम, पीएम हाउस बनाने की व्यवस्था मध्यप्रदेश सरकार करने जा रही है. इसी तरह से सभी माननीय सदस्य गण रुचि रख रहे होंगे कि कल जो उन्होंने मांग की है, उसमें क्या हुआ है. उसका मैं उल्लेख करना चाहता हूं

श्री रामनिवास रावत -- पीएम हाउस में किस-किसको रखेंगे.

श्री रुस्तम सिंह -- अध्यक्ष महोदय, जो उसके काबिल हो जायेंगे. ..(हंसी)

श्री उमाशंकर गुप्ता -- अभी आपको नहीं रखेंगे.

श्री रुस्तम सिंह -- अध्यक्ष महोदय, आप लोगों ने ही बहुत मांग की थी. मैं इस मौके पर यह जरुर कहना चाहता हूं कि मुझे यह विभाग मिला एक मजबूत और कामयाब स्वास्थ्य मंत्री जी के हाथों से, जो डॉ. नरोत्तम जी यहां बैठे हुए हैं. पिछले वर्ष मैंने इसी सदन में इसी विभाग की अनुदान मांगों पर ओपनिंग की थी और मंत्री जी ने कहा था कि आप ओपनिंग कर दीजिये. मैंने कहा कि मैं मांगूंगा, आप देंगे. बोले देंगे. आपने यह भी नहीं पूछा कि मैं क्या मागूंगा. अध्यक्ष महोदय, मैंने मुरैना हास्पीटल को जो 300 बेड का था, उसको 600 बेड करने की मांग की. मंत्री जी ने 600 बेड का दे दिया.

श्री कैलाश चावला -- मंत्री जी, हम कुछ मांगेंगे तो आप दे देंगे.

श्री रुस्तम सिंह -- अध्यक्ष महोदय, बाला बच्चन जी ने ओपनिंग की थी, उन्होंने जो मांगा, वह दे दिया. माननीय नरोत्तम जी ने जो परम्परा डाली है, मैं तो उसका पालन कर रहा हूं कि चर्चा प्रारम्भ करने वाला जो मांगे, वह दे दो और हमने उसका पालन किया है. अध्यक्ष महोदय, यह मुरैना हास्पीटल 300 बेड का था, वह 600 बेड का हो गया है. ..

श्री गोपाल भार्गव -- अध्यक्ष महोदय, यह समस्या आ गयी है कि हम लोग मांगें तो कहां मांगें और किससे मांगें.

श्री रुस्तम सिंह -- अध्यक्ष महोदय, भार्गव जी हमसे कह चुके हैं और आपकी वाणी का पूरा पालन होगा.

श्री बाला बच्चन -- आप तो अब विपक्ष से मांगो. आप मांगों, हम देंगे.

श्री शंकरलाल तिवारी -- मंत्री जी, मैंने भी सतना में 200 बिस्तर बढ़ाने की विनती की है.

श्री गोपाल भार्गव -- अध्यक्ष महोदय, हमारे मंत्री जी बड़े दयावान हैं. देने वाले तूने सब कुछ ही दे दिया,किसको क्या मिला है,यह मुकदर की बात है.

श्री रुस्तम सिंह -- अध्यक्ष महोदय, मुरैना के बामोर में हमने मांगा, पिछली बार मंत्री मंत्री जी ने सिविल हास्पीटल दिया. वह अब हो गया है. इसी तरह से भर्रा के बारे में श्री सूबेदार सिंह, विधायक जी की मांग थी, तो भर्रा को भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र किया गया है. मुरैना में नूराबाद को बीमोक किया गया है. इसी तरह से मुरैना के परीछा को पीएचसी किया गया है. करेधाम जो पटिया वाले बाबा हैं, वहां पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बहुत समय से मांग थी, वहां पर भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र किया गया है. शिवपुरी में 300 बेड का हास्पीटल था, हमारी मंत्री जी, यशोधरा जी उसकी मांग करती रहीं, यह 400 बेड किया गया है. यह के.पी. सिंह जी के लिये भी है. के.पी. सिंह जी सुन लीजिये. आपका शिवपुरी जिला चिकित्सालय 300 बेड से 400 बेड किया गया है.

श्री के.पी.सिंह -- मंत्री जी, इसके लिये धन्यवाद, लेकिन हास्पीटल की बाकी व्यवस्थाएं ठीक करा दें.

श्री रुस्तम सिंह -- अध्यक्ष महोदय, इसी तरह से श्योपुर में माननीय दुर्गालाल विजय जी ने 100 बेड से 200 बेडेड हास्पीटल करने की मांग की थी, वह 200 बेडेड किया गया है. श्री रामनिवास रावत जी का जो विधान सभा क्षेत्र है, उसमें रघुनाथपुर की इनकी मांग थी, रघुनाथपुर को भी पीएचसी किया गया है.

श्री रामनिवास रावत -- मंत्री जी, बहुत बहुत धन्यवाद.

श्री रुस्तम सिंह -- अध्यक्ष महोदय, इसी तरह से श्योपुर में मानपुर उप स्वास्थ्य केंद्र को दुर्गालाल विजय जी ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के लिये मांगा था, वह किया गया है.

श्री कैलाश चावला -- मंत्री जी, ग्वालियर संभाग के बाहर भी आयेंगे क्या.

..(व्यवधान)..

श्री रुस्तम सिंह -- अध्यक्ष महोदय, अभी मेरा मांग वाला काम समाप्त नहीं हुआ है. अभी आप पूरा तो सुन लीजिये.

श्री बहादुर सिंह चौहान -- मंत्री जी, आप पूरे मध्यप्रदेश के मंत्री हैं, आप थोड़ी कृपा मालवा में भी करें. हमने कल मांग रखी है.

श्री रुस्तम सिंह -- अध्यक्ष महोदय, मेरा यह कहना है कि पूरा तो होने दीजिये. ग्वालियर में हस्तिनापुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र था,उसको सीएचसी किया गया है. मुरार जो डिस्ट्रिक्ट हास्पीटल है, उसमें माननीय जयभान सिंह पवैया जी की भी मांग थी और माया सिंह जी, जो मंत्री हैं, उनकी भी मांग थी, बड़ी जगह थी. उसको बढ़ाकर 300 बेड किया गया है. ग्वालियर के डी.डी. नगर में भी माया सिंह जी के आग्रह पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और ग्वालियर में हजीरा, जो सिविल अस्पताल है, 49 बेड का था, उसको माननीय जयभान सिंह पवैया जी बहुत दिनों से मांग कर रहे थे और वहां जरुरत भी थी, उसको 100 बेड किया गया है. ग्वालियर के उप स्वास्थ्य केंद्र, बेहट,जो माननीय मुख्यमंत्री जी की घोषणा थी और हमारे माननीय सदस्य, भारत सिंह कुशवाह जी भी चाहते थे, उसका उन्नयन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में किया गया है. दतिया में जो बढ़ोनी है, वह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र था, उसको सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र किया गया है .दतिया में ही बढ़ोनीकला, इसका भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नयन किया गया है.

श्री बाला बच्चन -- अध्यक्ष महोदय, उपाध्यक्ष महोदय की भी पिछली बार तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री जी ने घोषणा की थी, उसका कहीं उल्लेख नहीं हो रहा है.

श्री रुस्तम सिंह -- अध्यक्ष महोदय, क्या हमारा पूरा भाषण पूरा हो गया, क्या हम बैठ गये. थोड़ा धैर्य तो रखिये. भिण्ड के मालनपुर उप स्वास्थ्य केंद्र को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र किया गया है. इसी तरह से दंदरौआ धार्मिक स्थल है, वहां पर लोगों का आना होता है. चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी जी का आग्रह था, वह प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र किया गया है. भिण्‍ड में गोरमी जो प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र है, उसका उन्‍नयन किया गया है, अशोक नगर में प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र पिपरई का उन्‍नयन किया गया है, यह आदरणीय श्री कालूखेड़ा जी चाहते थे, इन्‍दौर में 100 बिस्‍तर का जिला अस्‍पताल है, उसको 300 बिस्‍तर का किया गया है. मैंने तीन गुना किया है.

अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍दौर में ही शहरी क्षेत्र में मांगीलाल चूरिया को 30 बिस्‍तरीय सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र किया गया है, गौरी नगर शहरी क्षेत्र को भी प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र किया गया है, खण्‍डवा में पुनासा को सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र किया गया है, खरगौन में बोराबा को प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र में उन्‍नयन किया गया है, यह सचिन यादव जी की मांग थी.

श्री लाल सिंह आर्य - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पूरे विपक्ष को खड़े होकर आज स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री एवं मध्‍यप्रदेश सरकार को बधाई और धन्‍यवाद देना चाहिए क्‍योंकि वे सभी को कुछ न कुछ दे रहे हैं.

डॉ. गोविन्‍द सिंह - आप धन्‍यवाद दीजिये. आपने हमारे लिए क्‍या किया है ? आपने लहार के लिए क्‍या किया ?

श्री आरिफ अकील - राजधानी भोपाल के लिए भी कोई घोषणा होनी थी. सबको शामिल कर रहे हो.

श्री गोपाल भार्गव (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय - यह विलोपित कर दें.

श्री आरिफ अकील - गिन-गिनकर देते हैं.

डॉ. गोविन्‍द सिंह - अब कौन से नम्‍बर का चश्‍मा ले आएं. जिससे आपको लहार दिख जाये. आपको पूरे मध्‍यप्रदेश के नक्‍शे में लहार ही नहीं दिखा.

अध्‍यक्ष्‍ा महोदय - कृपया माननीय मंत्री जी को बोलने दें. माननीय मंत्रीगण से अनुरोध है कि वे व्‍यवधान न करें.

श्री रुस्‍तम सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, खरगौन में उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र मगरखेड़ी को बी.एस.ई. बनाया गया है. धार में कोद को प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र बनाया गया है, बड़वानी में प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र अंजड़ का उन्‍नयन कर सी.एस.ई. बनाया गया है, इसी तरह भोपाल में बैरसिया में जो 30 बिस्‍तरीय अस्‍पताल था, उसको सिविल अस्‍पताल बनाकर 50 बिस्‍तर का हॉस्पिटल बनाया गया है. भोपाल में जे.पी.हॉस्पिटल जो 300 बेड का है, उसको 400 बेड का किया गया है, रायसेन में मण्‍डीदीप जो 30 बिस्‍तरीय अस्‍पताल था, उसको सिविल अस्‍पताल कर 50 बिस्‍तर का किया गया है, सीहोर में 30 बिस्‍तरीय नसरूल्‍लागंज को सिविल अस्‍पताल बनाकर 50 बिस्‍तरीय किया गया है. सीहोर में ही आबिदाबाद को प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र किया गया है, विदिशा में कागपुर को प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र किया गया है. होशंगाबाद में इटारसी अस्‍पताल को 160 बेड से 200 बिस्‍तर का किया गया है, यह माननीय अध्‍यक्ष महोदय की विधानसभा का अस्‍पताल है.

अध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी, धन्‍यवाद.

श्री रुस्‍तम सिंह - अध्‍यक्ष महोदय, इसी तरह से जिला चिकित्‍सालय होशंगाबाद के मेटरनिटी वार्ड में बेड बढ़ाते हुए, उसमें 100 बेड और बढ़ाये गये हैं. सागर में मकरोनिया बुजुर्ग जो प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र है, उसको 30 बिस्‍तरीय सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र किया गया है, यह माननीय विधायक प्रदीप इंजीनियर की मांग थी.

अध्‍यक्ष महोदय - बहुत बहुत धन्‍यवाद.

श्री महेश राय - माननीय मंत्री जी, सागर एवं बीना का बता दें.

अध्‍यक्ष महोदय - आप धीरज रखें. पूरा हो जाने दें.

श्री रुस्‍तम सिंह - अध्‍यक्ष महोदय, पॉलीक्‍लीनिक चमेली चौक, जो सागर में है, यह शैलेन्‍द्र जैन जी की मांग पर उन्‍नयन किया गया है. टीकमगढ़ में उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र मवई, जिला टीकमगढ़ प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र किया गया है. पन्‍ना के उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र सुनवानी को भी प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र किया गया है. उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र पिपरई जिला रीवा को प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र किया गया है, यह विधायक सुखेन्‍द्र सिंह की मांग थी.

श्री आरिफ अकील - मैंने विधानसभा में कभी ऐसा नहीं देखा कि कागज लेकर पूरा पढ़कर बताया जा रहा है.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - ये घोषणाएं हैं.

श्री गोपाल भार्गव - घोषणाएं मिल रही हैं तो आपको तो खुश होना चाहिए.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - आपने कभी इतना घोषणाएं नहीं की हैं. आप लोग कुछ करते ही नहीं थे, आप लोग जो करते थे, वह जीरो बजट पर करते थे.

श्री गोपाल भार्गव - जिसने कुछ किया ही नहीं है. आप कोरी कॉपी रख आए, आपने परीक्षा ही नहीं दी तो आप क्‍या बांचोगे ?

श्री आरिफ अकील - नरोत्‍तम जी, क्‍या आपने ऐसे ही पढ़ा था ?

श्री शंकरलाल तिवारी - ऐसे ही बातें करते रहते हैं.

श्री गोपाल भार्गव - आप 10 वर्ष में एक अस्‍पताल तो खोल नहीं पाए. अब एक साल में आप 100 अस्‍पताल देखें. अपग्रेडेशन हो रहा है, नए अस्‍पताल खुल रहे हैं. साक्षात् धन्‍वन्‍तरि जी मध्‍यप्रदेश में उतर आए हैं.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - आप जानते ही नहीं हैं कि धन्‍वन्‍तरि क्‍या हैं ? यह आपको बता रहे हैं.

श्री रुस्‍तम सिंह - अध्‍यक्ष महोदय, रीवा में श्री सुखेन्‍द्र सिंह जी के क्षेत्र मऊगंज को सिविल अस्‍पताल बनाते हुए 30 बिस्‍तर से 50 बिस्‍तर किया गया है.

श्री सुखेन्‍द्र सिंह - आपको बहुत धन्‍यवाद.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया - मंत्री जी, श्री सुखेन्‍द्र सिंह जी धन्‍यवाद दे रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - कृपया व्‍यवधान न करें.

श्री रुस्‍तम सिंह - हमारे मंत्री श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल जी के आग्रह पर अजगरा भटाला को उन्‍नयन कर प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र किया गया है, रीवा में श्री गिरीश गौतम जी के उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र मानिकवार, यह माननीय मुख्‍यमंत्री जी की घोषणा थी, उसका उन्‍नयन रायपुर कलचुरियन विकासखण्‍ड में किया गया है.

श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को - अध्‍यक्ष महोदय, अनूपपुर जिले की भी सूची पढ़ दी जाये क्‍योंकि वह ट्रायबल क्षेत्र है.

अध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी, आप तो जारी रखिये. सब अपनी-अपनी बातें कहेंगे.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अनूपपुर की विवेचना जारी है.

श्री रुस्‍तम सिंह - अध्‍यक्ष महोदय, इटमा बड़ा इटमा, जिला सतना को प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र किया गया है, सतना में करथाह यह नारायण त्रिपाठी जी का क्षेत्र है, उसको उन्‍नयन कर प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र किया गया है, सतना में जरयारी को प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र में उन्‍नयन किया गया है, सतना प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र माधवगढ़ का उन्‍नयन किया गया है.

श्री शंकरलाल तिवारी - माननीय मंत्री जी को हृदय से धन्‍यवाद देना चाहता हूँ.

श्री रुस्‍तम सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र बहरी, जिला सीधी को भी श्री कमलेश्‍वर पटेल जी के आग्रह पर प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र किया गया है, सीधी में कबरजी को भी प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र में उन्‍नयन किया गया है, अनूपपुर में उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र खड़ा जिला अनुपपूर को प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र में उन्‍नयन किया गया है, देवास में प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र सतवास, जिला देवास को सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र बनाया गया है, देवास का उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र अजनास को प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र, देवास के ही हरण गांव के उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र का उन्‍नयन किया गया है. सागर में सी.एच.सी. गढ़ाकोटा को सिविल हॉस्पिटल बनाकर उसका उन्‍नयन किया गया है, इसी तरह से सी.एच.सी. रहली को भी उन्‍नयन किया गया है.

श्री गोपाल भार्गव - अध्‍यक्ष महोदय, ऐसा तो कभी नहीं हुआ है. इतना शानदार, प्रशंसनीय एवं उल्‍लेखनीय है. नरोत्‍तम जी आप पीछे रह गए.

श्री बाला बच्‍चन - अध्‍यक्ष महोदय, यह आपको ही सीख लेने की बात है. आप भी मंत्री हैं, आप ऐसा करें.

श्री गोपाल भार्गव - हम लोगों में प्रशंसा का अभाव नहीं रहता. आप लोगों में प्रशंसा का क्‍या भाव रहता है ? यह मैं नहीं कह सकता.

श्री रुस्‍तम सिंह - अध्‍यक्ष महोदय, शाजापुर में उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र पोचानेर को भी इन्‍दर सिंह परमार विधायक जी के आग्रह पर प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र किया गया है

श्री इन्‍दर सिंह परमार - बहुत बहुत धन्‍यवाद.

श्री रुस्‍तम सिंह - उज्‍जैन में सिविल अस्‍पताल नागदा, जिला उज्‍जैन का उन्‍नयन करके नये भवन के निर्माण की कार्यवाही स्‍वीकृत की गई है.

डॉ. मोहन यादव - बहुत बहुत धन्‍यवाद.

श्री रुस्‍तम सिंह - रतलाम में जावरा को 50 बिस्‍तर का नवीन मेटरनिटी भवन देने का निर्णय लिया गया है.

डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय - बहुत बहुत धन्‍यवाद.

श्री रुस्‍तम सिंह - बालाघाट का जिला चिकित्‍सालय 300 बेड का है, उसके लिए माननीय गौरीशंकर बिसेन जी ने विजिट भी कराई थी, उनकी और सुश्री हिना कावरे जी यहां बैठी हैं, इनकी भी मांग थी. उस हॉस्पिटल को 500 बेड किये जाने का निर्णय लिया गया है.

सुश्री हिना लिखीराम कावरे - धन्‍यवाद.

श्रीमती ऊषा चौधरी - मैं तीन सालों से बजट मांग रही हूँ. आपने आज तक रैगांव को एक रुपया भी नहीं दिया है.

श्री रुस्‍तम सिंह - अध्‍यक्ष महोदय, यह पन्‍ना के संबंध में मांग है, उसका आकलन हो गया है, माननीय मंत्री जी की भी मांग है, हम उसको कर रहे हैं. जहां तक शीला त्‍यागी जी का है उन्‍होंने दो मांग की हैं, हम आकलन कर रहे हैं और एक उसमें से करेंगे. इतना कहते हुए मैं अपनी भाषण को विराम दूंगा. धन्‍यवाद.

अध्‍यक्ष महोदय : मैं पहले कटौती प्रस्‍तावों पर मत लूंगा.

प्रश्‍न यह है कि मांग संख्‍या- 19 पर प्रस्‍तुत कटौती प्रस्‍ताव स्‍वीकृत किए जाएं.

कटौती प्रस्‍ताव अस्‍वीकृत हुए.

 

अब मैं मांगों पर मत लूंगा.

प्रश्‍न यह है कि 31 मार्च 2018 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में राज्‍य की संचित निधि में से प्रस्‍तावित व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को-

अनुदान संख्‍या- 19 लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण के लिए पांच

हजार छह सौ बहत्‍तर करोड़, साठ लाख,

पचास हजार रुपए

तक की राशि दी जाय.

मांगों का प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ

 

(2) मांग संख्‍या -8 भू-राजस्‍व तथा जिला प्रशासन

मांग संख्‍या - 9 राजस्‍व विभाग से संबंधित व्‍यय

मांग संख्‍या - 46 विज्ञान और टेक्‍नालाजी

मांग संख्‍या - 58 प्राकृतिक आपदाओं एवं सूखा ग्रस्‍त क्षेत्रों में राहत पर व्‍यय.

 

 

 

 

 

 

 

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी (गुढ़) -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा पाइंट ऑफ ऑर्डर है.

अध्‍यक्ष महोदय-- अब इसमें क्‍या पाइंट ऑफ आर्डर है.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी-- अध्‍यक्ष महोदय, यह जो मांग संख्‍या 8 भू-राजस्‍व तथा जिला प्रशासन इसमें जो अनुदानों की मांग को लेकर जो लेखा जोखा सदन के अंदर प्रस्‍तुत किया गया है. संभवत: माननीय मंत्री जी ने ध्‍यान नहीं दिया है.

अध्‍यक्ष महोदय-- यह पाइंट ऑफ आर्डर नहीं है.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी-- अध्‍यक्ष महोदय, देखें तो इसमें बहस कैसे होगी. मुझे कहने तो दें.

अध्‍यक्ष महोदय-- यह पाइंट ऑॅफ आर्डर नहीं है.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी-- यह दस्‍तावेज ही जो सदन में पेश किया गया है पूर्णरूपेण गलत है.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप इसे अपनी चर्चा के समय बोलिए.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी-- हम निवेदन कर रहे हैं. इसमें हम लोग क्‍या बात करेंगे.

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र) --पूर्णरूपेण गलत कैसे कह सकते हैं.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी-- यही तो मैं निवेदन कर रहा हूं. एक मिनट हमारी बात को सुने तो.

अध्‍यक्ष महोदय-- नहीं सुनेंगे.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- अभी सवाल आया नहीं है कह दिया कि जवाब नहीं मिलेगा.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा यह निवेदन है कि जो भी दस्‍तावेज लेखा जोखा प्रस्‍तुत किया गया है उसके बारे में एक मिनट मुझे अपनी बात कह लेने दें.

अध्‍यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी के बाद में अपनी बात कहिए.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी--- अध्‍यक्ष महोदय, यह पूर्णरूपेण गलत है और आप भी ध्‍यान नहीं दे रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय-- आपको चर्चा के लिए समय मिल रहा है उसमें बात करिए आप.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी-- अध्‍यक्ष महोदय हम आपसे संरक्षण चाहते हैं कि आप इस तरह के गलत दस्‍तावेज सदन के अंदर न रखें.

अध्‍यक्ष महोदय-- आपको चर्चा में समय मिलेगा आप उसमें अपनी बात रखिए.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी-- इसमें जो गलत आंकड़े हैं उसमें बहस क्‍या होगी उसमें बात क्‍या होगी उसमें हम क्‍या कहेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप पॉइंट आउट करके बताइए.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी-- अध्‍यक्ष महोदय, वही तो मेरा कहना है कि मैं पॉइंट ऑफ ऑर्डर बता रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय-- पाइंट आफ आर्डर का विषय नहीं है, आप पढ़े-लिखे हो आप कैसी बातें करते हो.

डॉ. गोविन्‍द सिंह (लहार)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने विभाग में मांगों का प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत किया है. विभाग वैसे ही चौपट है तो हम कटौती के लिए क्‍या जोर दें. सबसे पहले तो आपसे यह अनुरोध है कि राजस्‍व विभाग में पूरा अराजकता का माहौल बन चुका है. आज अभी तक आपके निर्देश के बावजूद भी नियम है, हमेशा परम्‍परा रही है कि जब जिस विषय पर विभाग में बहस होती है उसके एक दिन पहले प्रतिवेदन मिलना चाहिए, लेकिन लगातार तीन दिन से आपत्ति करने के बाद हमें अभी दस मिनट पहले उपलब्‍ध हो पाया है. मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि भविष्‍य में चेतावनी दें या फिर इस विभाग के ऊपर मंत्री पर कोई जुर्माना करें.

अध्‍यक्ष महोदय-- जुर्माना नहीं, पर माननीय मंत्रियों से मेरा अनुरोध है कि वह जो प्रतिवेदन है वह समय पर प्रस्‍तुत करें.

डॉ. गोविन्‍द सिंह-- वैसे भी जहां जहां यह मंत्री रहे हैं उस विभाग का तो इन्‍होंने बंटाढार करके ही छोड़ा है.

श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसके साथ-साथ एक निवेदन और है कई कई विभागों ने जो पिछले वर्ष के पिछले वर्ष प्रस्‍तुत हो गए उनको भी प्रस्‍तुत कर दिया है.

1.17 बजे { उपाध्‍यक्ष महोदय (डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुए }

डॉ. गोविन्‍द सिंह-- यह नई बात हो गई, यह नई परम्‍परा है.

श्री रामनिवास रावत-- उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍व विभाग ने पिछले वर्ष का भी प्रस्‍तुत किया है आज इस वर्ष का प्रस्‍तुत किया है. दोनों के.पी.सिंह जी के पास रखे हुए हैं.

डॉ. गोविन्‍द सिंह -- उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍व विभाग में पूरी तरह अराजकता फैल चुकी है. लगातार आप देखें इस विधानसभा की गरिमा समाप्‍त करने का काम राजस्‍व विभाग कर रहा है. प्रजातंत्र का इस विभाग से विश्‍वास उठ चुका है. यहां के मंत्री से लेकर अधिकारी कर्मचारी तक आंनद विभाग में परमानंद प्राप्‍त कर रहे हैं. जितने विधानसभा के सवाल आते हैं अधिकांश में केवल यही विभाग सबसे ज्‍यादा अराजकता वाला है. जिसमें यह आता है कि जानकारी एकत्रित की जा रही है और जानकारी आती है तो असत्‍य आती है. घोषणाओं पर पूर्ति नहीं होती. आश्‍वासन अगर दिए जाते हैं तो 14-14 वर्ष तक इस विभाग के आश्‍वासन को पूरा नहीं किया जा रहा है. जब से आप विराजमान हुए हैं पहले जितने विभाग थे उनकी हालत देख लो अब इसमें यह और आ गए सत्‍यानाश करने के लिए. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जब-जब सरकार बनी भारतीय जनता पार्टी की आप उठा के देखें जमीनों पर कब्‍जा करने का काम, जमीनें हड़पने का काम इस विभाग ने पूरे पैमाने पर पूरे प्रदेश में किया है.

उपाध्‍यक्ष महोदय, कहावत है मोहम्‍मद गजनवी हिन्‍दुस्‍तान को लूटने आया था. उसने भी रहम किया था वह कुछ सोना तो छोड़ गया था. यह तो उनके ग्रांड फादर हैं. जमीनों को लूटने के मामले में. खूब घोटाले मनोज कुमार कमेटी आपकी सरकार ने माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय खूब घोटाले जांच के लिए माननीय मुख्‍यमंत्री की घोषणा के अनुसार एक सदस्‍यीय श्री मनोज कुमार कमेटी का गठन हुआ था. उस कमेटी ने धार, कटनी, होशंगाबाद, अशोकनगर, भोपाल, ग्‍वालियर, जबलपुर, हरदा जिलों के जांच प्रतिवेदन दिए हैं. पहले भी पटवा जी थे तब जमीनें बंटी, दिल खोलकर जमीनों को लूटा गया. जो शहर के आसपास की जमीनें थीं वे लूटी गईं. जगतपति कमेटी बनी थी उसकी रिपोर्ट आ गई जब तक कमेटी की रिपोर्ट आई तब तक हमारी सरकार चली गई, नहीं तो हम उनका इन्तजाम कर देते, दोबारा वे गड़बड़ नहीं कर पाते. लेकिन दुर्भाग्य था जनता ने हमको हटा दिया तो उसका लाभ इनको मिल गया. ग्वालियर स्टेट के समय डबरा में साढ़े आठ हजार एकड़ जमीन शुगर मिल के लिए उसके सीएमडी जो कि दिल्ली का रहने वाला था वह शुगर मिल का मालिक था उसने जमीन ली फिर शुगर मिल बंद कर दी उसकी लीज़ समाप्त हो गई. उस जमीन को हड़पने का काम सत्ता में बैठे हुए लोगों के द्वारा किया जा रहा है. यह नियम है कि अगर कोई उद्योग खोला जाता है तो उद्योग खोलने के लिए आपने जो लैंड बैंक बनाई है पहले उद्योग विभाग पैसा जमा करेगा परन्तु उस भूमि का 4 फरवरी 2010 को ग्वालियर, उच्च न्यायालय ने आदेश कर दिया कि यह शासकीय जमीन है. अभी तक उसका कब्जा न लेकर इन्वेस्टर्स मीट में सरकारी भूमि को बिना किसी की अनुमति के एमओयू साइन कर लिया. यह साढ़े आठ हजार एकड़ भूमि ग्वालियर और दतिया जिले की 18 गांव की भूमि है. अरबों रुपए की जमीन हड़पने की साजिश अधिकारी और सत्ता में बैठे हुए लोग कर रहे हैं. क्या कारण है जब नियम है तो नियमों की धज्जियां क्यों उड़ाई जा रही है. अगर जमीन लेना ही है तो ओपन-ऑक्शन कराइए अन्यथा पहले आप उद्योग विभाग में यह जमीन वापस करें जब उद्योग विभाग जमीन दे तब आप किसी उद्योग के साथ एमओयू कर सकते हैं अन्यथा आपको एमओयू करने का अधिकार नहीं है. नियम विरुद्ध आपने एमओयू किया है. इसी प्रकार सागर में किया है.

डॉ. मोहन यादव--(XXX)

डॉ. गोविन्द सिंह--(XXX)

उपाध्यक्ष महोदय--दोनों माननीय सदस्यों का यह संवाद रिकार्ड में नहीं आयेगा.

डॉ.गोविन्द सिंह--उपाध्यक्ष महोदय, सागर में 27 एकड़ जमीन, 5 हजार रुपए स्कवायर फिट की जमीन जो बीच शहर की थी उस जमीन को हड़पने के लिए भी कई भू-माफियाओं द्वारा यहां से अवैध पंजीयन करा दिया है. इसका विधान सभा में प्रश्न भी आ चुका है. इस जमीन की कीमत करीब साढ़े छ सौ करोड़ रुपए थी पैंतीस करोड़ रुपए की राजस्व की जमीन बताकर उसकी रजिस्ट्री कर दी गई. अब यह मामला राजस्व न्यायालय में, हाई कोर्ट में लटका दिया अब यह लटका रहेगा. बाद में जब मामला शांत हो जाएगा तो सत्ता में बैठे लोग और भू-माफिया इसको हड़पने का काम करेंगे. इसी प्रकार इंदौर में इसी महीने श्रीराम गृह निर्माण सहकारी संस्था को 7 हेक्टेयर से अधिक जमीन दी गई है. सोसायटी में जो सदस्य आवासहीन हैं उनको मकान बनाकर दिया जाएगा परन्तु यहां पर बैठे हुए उच्च अधिकारी जो सत्ता की शीर्ष पर बैठे हुए हैं. सत्ता के मठाधीशों के अगल-बगल में रहते हैं उन्हें उस जमीन पर बिना किसी मंजूरी बिना संस्था के प्रस्ताव के सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने मिलकर यह जमीन अधिकारियों में बांट दी है. न इसकी परमीशन है, न टीएनसीपी से परमीशन ली है, न नगर निगम से, बस बँटवारा कर लिया है. यह हालत है. इसी प्रकार ग्वालियर में भी यह मामला है मैंने कई प्रश्न लगाए परन्तु अभी तक जवाब नहीं मिला. सूचना के अधिकार में लगाया अभी तक जवाब नहीं मिला है. मैं आपसे जानना चाहता हूँ कि जब कांग्रेस की सरकार थी. उस समय अनुसूचित जाति, जनजाति के भूमिहीनों को पट्टा देने का काम किया था. उसमें यह नियम था कि जब तक 10 वर्ष नहीं होगा कोई जमीन बेच नहीं सकता है. बेचेगा तो कलेक्टर की परमीशन लगेगी, कारण बताना पड़ेगा और उसका पैसा भी कलेक्टर के कोषालय में जमा होगा. लड़की की शादी के लिए, बीमारी के लिए बेच सकता है अन्यथा वह भूमि नहीं बेची जा सकती है. भूमि बेचेगा तो दूसरी जगह उसे भूमि मिलेगी. यह कितना बड़ा घोटाला हुआ है. 27 अप्रैल, 2015 को शासन ने एक अध्यादेश छह माह के लिए जारी किया और फिर इसको छह महीने के लिए बढ़ा दिया. जबकि बीच में विधान सभा सत्र चला था. जब आपत्ति आई तो इन्होंने 2 दिसंबर 2015 को यहां विधेयक संशोधन के लिए रखा. पांच धाराओं में संशोधन कर दिया. इन अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों की मुम्बई के भू-माफियों ने जमीन खरीद ली, महानगरों, शहरों के आसपास जो ग्रामीण क्षेत्र थे उनकी जमीनें खरीदकर करोड़ों रुपयों की हाउसिंग कॉलोनियां बन रही हैं. सोसायटियां बनाकर जमीनें बेचने का काम कर रहे हैं. जब अध्यादेश आया तो मैंने संशोधन लगाया, रामनिवास रावत जी ने लगाया तो मुख्यमंत्री जी ने घोषणा की कि हम उसको वापस लेते हैं. मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूँ कि उस दौरान जब आपने दो अध्यादेश जारी किए थे उस समय जो अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों की जमीनें बिक गईं उन जमीनों का क्या होगा. क्या वह जमीन आप वापस कराएंगे, उनको दोबारा दिलवाएंगे, भूमि का मालिक बनाएंगे जो भूमि न होने के कारण भूखों मरने के लिए चले गए हैं. 1-1, 2-2 लाख रुपए बीघा जमीन लेकर 60-60, 70-70 लाख रुपए बीघा के हिसाब से सोसायटी बनाकर जमीन बेचने का काम कर रहे हैं.

उपाध्यक्ष महोदय, मैं नहीं कह रहा हूं आप समीक्षा करिए कि क्या कारण है कि आपके विभाग के एक मंत्री के रिश्तेदार लगातार पद पर बैठे हैं. क्यों कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं, आज तक आपका प्रतिवेदन क्यों नहीं आ पा रहा है. जहां घपले-घोटाले होते हैं वहां इनकी पदस्थापना कर देते हैं. वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन में करोड़ों रुपयों के गेहूं में मिट्टी मिला दी गई, उन्हें वहां बैठा दिया गया. शहडोल उप चुनाव हुए उसमें पटवारियों की मीटिंग ली कि भारतीय जनता पार्टी को जिताओ. अब आपने यहां बैठा दिया कि जमीनों का घोटाला करो. वह व