मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा दशम् सत्र

 

 

फरवरी-अप्रैल, 2016 सत्र

 

बुधवार, दिनांक 9 मार्च, 2016

 

(19 फाल्गुन, शक संवत्‌ 1937 )

 

 

[खण्ड- 10 ] [अंक- 11]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

बुधवार, दिनांक 9 मार्च, 2016

 

(19 फाल्गुन, शक संवत्‌ 1937 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 10. 33 बजे समवेत हुई.

 

{ अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर

 

संसदीय कार्यमंत्री(डॉ. नरोत्तम मिश्र)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, आरिफ अकील जी 5 दिन से परेशान हैं. गौर साहब उनकी शंका का समाधान नहीं कर रहे हैं. मैं चाहता हूँ कि गौर साहब आरिफ अकील जी की शंका का समाधान करें.

श्री आरिफ अकील- अध्यक्ष महोदय, गौर साहब 5 दिन से गले में मफलर डाल के आ रहे हैं. यह माफलर का राज क्या है, यह कहां से भेंट आयी है, किसने भेंट किया. हमें बताओं, हमें भी तो जानकारी दो, हम लोग भी तो चेले हैं आखिर आपके.

डॉ. नरोत्तम मिश्र-- ये गुरु हैं! (हंसी)

श्री आरिफ अकील-- हाँ ये गुरु. हमारे तो हैं मगर तुम नहीं मानोगे.

गृह मंत्री(श्री बाबूलाल गौर)-- अध्यक्ष महोदय, कोई विशेष बात नहीं है. एक संत हैं, उज्जैन में मैं भूमिपूजन में गया था तो संत जी ने यह गले में डाल दिया कि इसे डाले रहो तो 100 साल तक विधायक बने रहोगे (हंसी)

श्री रामनिवास रावत-- आप सही सही बताओ, मुख्यमंत्री बनने के लिए डाला है.

श्री बाबूलाल गौर-- नहीं, विधायक बनने के लिए. मैं मुख्यमंत्री बनने के लिए ज्यादा इच्छुक नहीं हूँ, विधायक रहूंगा, वह ज्यादा अच्छा रहता है.

श्री आरिफ अकील-- मतलब मान लिया कि अगली बार मुख्यमंत्री का चांस नहीं है, इधर ही आआोगे.

श्री रामनिवास रावत-- आत्मा की बात कह दी.

डॉ. नरोत्तम मिश्र-- इसका तो सोचना ही नहीं, 100 साल इधर ही रहने वाले हैं.

श्री बाबूलाल गौर-- 100 साल में 13 साल ही बचे हैं तो 13 साल तक तो रहूंगा ही

 

 

अनुसूचित जाति बस्‍ती विकास योजनांतर्गत निर्माण कार्य

1. ( *क्र. 838 ) श्री नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) भिण्‍ड जिले के अंतर्गत जिला संयोजक आदिम जाति कल्‍याण विभाग भिण्‍ड के द्वारा अनुसूचित जाति बस्‍ती विकास योजनांतर्गत जनवरी, 13 से 31 जनवरी, 2016 तक किन ग्राम पंचायतों को किनकी अनुशंसा से निर्माण कार्य के लिए राशि जारी की गई है? (ख) क्‍या ग्राम पंचायतों में 50 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जाति निवासरत ग्रामों में बस्‍ती विकास के लिए राशि जारी की जावेगी? यदि हाँ, तो प्रश्‍नांश (क) में जारी की गई राशि के ग्रामों में कितने प्रतिशत जनसंख्‍या निवासरत है? कितने अनुसूचित जाति के लोगों को लाभ हुआ है? (ग) क्‍या प्रश्‍नांश (क) के अंतर्गत राशि जारी करने में नियमों के विपरीत विभाग द्वारा कार्य करके अनुसूचित जाति के लोगों के विकास कार्य संबंधित अधिकारियों द्वारा किये जा रहे हैं? यदि हाँ, तो प्रश्‍नांश दिनांक तक क्‍या कार्यवाही की गई? (घ) प्रश्‍नांश (क) अंतर्गत प्रश्‍नकर्ता द्वारा अनुमोदित ग्राम पंचायतों में किन ग्राम पंचायतों को कब कितनी राशि किस निर्माण के लिए जारी की गई? क्‍या भिण्‍ड विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत बस्‍ती विकास और अनुसूचित जाति बस्‍ती विद्युतीकरण के लिए राशि जारी नहीं की गई? यदि हाँ, तो क्‍यों कौन से प्रकरण विचाराधीन हैं? कब तक राशि जारी हो जायेगी?

आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है। (ख) 40 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जाति की आबादी में या 20 अनुसूचित जाति के परिवार निवासरत होने पर बस्‍ती विकास योजना में कार्य कराने का प्रावधान है। शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है। (ग) नियमों के विपरीत विभाग द्वारा कार्य करने का प्रकरण संज्ञान में नहीं है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) प्रस्‍तावित ग्रामों की सूची व उनमें आबादी के प्रतिशत की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है। कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। विद्युतीकरण के कोई प्रस्‍ताव प्राप्‍त नहीं हुए हैं। परीक्षणाधीन कार्य पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है।

 

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न आदिम जाति कल्याण विभाग से संबंधित था कि भिण्ड जिले के अंतर्गत जिला संयोजक आदिम जाति कल्याण विभाग भिण्ड के द्वारा अनुसूचित जाति बस्ती विकास योजना के अंतर्गत 13 जनवरी से 31 जनवरी 2016 तक किन ग्राम पंचायतों को किनकी अनुशंसा से निर्माण कार्य के लिए राशि जारी की गयी. माननीय मंत्री महोदय ने जो जवाब दिया है कि 4 करोड़ की राशि बांटी गयी है. इसमें बहुत बड़े पैमाने पर घपला हुआ है. भिण्ड जिले में 4 विधायक हैं, एक भी विधायक की अनुशंसा पर दो साल में दो लाख की राशि नहीं बांटी गयी.इसमें परिशिष्ट में जो बताया गया है उसमें पूर्व विधायक, पूर्व मंत्री, लेकिन एक भी विधायक के नाम से एक भी विधायक के नाम से अनुशंसा पर 2 लाख की राशि नहीं बांटी गई है यह बहुत बड़ा घोटाला हुआ है , 4 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है वहाँ कोई अधिकारी है नहीं.

अध्यक्ष महोदय-- आप प्रश्न कर दें.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाहअध्यक्ष महोदय, जो घोटाला हुआ है पहले उन अधिकारियों को सस्पेंड किया जाये जो तीस-तीस साल से वहीं के निजी जमे हुए हैं, इसका क्राइटेरिया क्या है.

श्री ज्ञान सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से माननीय सदस्य को अवगत कराना चाहूंगा कि वर्ष 2013-14 और 2014-15 में जिला कलेक्टर भिंड के द्वारा बस्ती विकास योजना के मद से जो राशि अनुशंसा करने का जिनको अधिकार है, अधिकांशतः माननीय विधायकों की जो सूची मेरी पास है यदि माननीय सदस्य संतुष्ट नहीं हैं उनको ऐसा लगता है.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह--- अध्यक्ष महोदय, सूची माननीय मंत्री जी ने जारी की है इसमें एक भी वर्तमान विधायक का नाम बतायें यह. चाहे भिंड हो, मेहगांव हो, अटेर हो और फिर हमारी विधानसभा में एक रुपये भी नहीं दिया गया यह बहुत बड़ा घोटाला , इसका क्राइटेरिया क्या है, अब जीरो परसेंट जहाँ अनुसूचित जाति के लोग हैं वहाँ आप राशि दे रहे हैं और जहाँ 50 परसेंट अनुसूचित जाति के लोग हैं, हरिजन बस्ती है वहाँ नहीं दे रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय-- उत्तर ले लें.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह-- माननीय, जब उत्तर ही गलत आएगा तो प्रश्न क्या करेंगे. मेरा निवेदन है कि यह जानकारी इन्होंने ही दी है विभाग की जानकारी है. इसमें पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक, पूर्व अध्यक्ष , वर्तमान जिलाध्यक्ष का भी नाम नहीं है. जानकारी तो इनकी आई है.

अध्यक्ष महोदय--- आप चाहते क्या हैं.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह--- मैंने पहले भी प्रश्न किया था तब भी यही जवाब दिया था. हम चाहते हैं कि वहाँ जो दोनों अधिकारी हैं, लोकल के हैं. इनको सस्पेंड किया जाये. माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से पूछना चाहते हैं कि अनुसूचित जाति बस्ती के लिए माननीय मुख्यमंत्री जी की जो योजनायें हैं वह बस्ती में खर्च क्यों नहीं की जा रही है. हमारी विधानसभा में आज तक एक रुपया भी खर्च क्यों नहीं किया गया .

श्री ज्ञान सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी के क्षेत्र में 14 कार्य स्वीकृत हुए हैं.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह--- यह उन अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी पढ़ रहे हैं, जिन्होंने घपला किया है . हमारी विधानसभा है क्या वह हमसे ज्यादा जानते हैं, मंत्री जी गलत जवाब दे रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय-- जवाब तो आने दें आप.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह--- उल्टे सीधे जवाब का मतलब क्या है.

अध्यक्ष महोदय--- आप जवाब आने तो दे उसके बाद आप पूछ लेना.

श्री ज्ञान सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य के विधानसभा क्षेत्र में काम हुए हैं और जहाँ तक गलत तरीके से राशि स्वीकृत हुई है जहाँ पर  आबादी नहीं है उस रेश्यों के बाहर जाकर के जो काम स्वीकृत हुए हैं मैं माननीय सदस्य को आश्वस्त करना चाहूंगा जिन कर्मचारियों की वह बात कर रहे हैं कि 25-30 साल से वहाँ पर हैं ,मैं आज ही घोषणा करता हूं कि उन अधिकारियों को निलंबित करने की.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह--- बहुत बहुत धन्यवाद मंत्री जी.

डॉ. गोविंद सिंह--- माननीय अध्यक्ष महोदय, पूर्व में यह नियम था कि जिला समिति की कमेटी थी , उसमें विधायक भी थे और स्वयं मीटिंग बुलाकर तब निर्णय लिया जाता था क्या मंत्री जी पुरानी समय के अनुसार नीतिगत ऐसी कमेटी निर्धारित करेंगे जिसमें विधायक भी सम्मिलित हो और विधायकों की अनुशंसा के आधार पर निर्णय हो. उसमें जरूरी नहीं है कि विधायकों की ही सारी बात मान लो उसमें कमेटी निर्णय लेगी ऐसा आप निर्देश जारी करेंगे और इसमें घपला हुआ है , इस विषय में मैंने भी कई चिट्ठी लिखी है, एक रुपया भी नहीं मिला.

अध्यक्ष महोदय--- आगे से भविष्य में, जो कमेटी पहले हुआ करती थी उसके निर्णय अनुसार जारी करेंगे और माननीय विधायकों को भी उस कमेटी में लेंगे क्या.

श्री ज्ञान सिंह--- माननीय अध्यक्ष महोदय जी, यह बहुत सामयिक सुझाव है और अवश्य इसमें व्यवस्था में परिवर्तन करने की हमारे विभाग की एक सोच है . मैं आश्वस्त करना चाहूंगा कि हमारे सम्मानीय विधायकों को जो वर्तमान में व्यवस्था या प्रावधान हैं, उसमें जो कठिनाई आती है उसमें सुधार किया जायेगा.

अध्यक्ष महोदय-- (माननीय सदस्य श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह जी के खड़े होने पर) माननीय सदस्य, आपकी सारी बात मान ली. अब आगे से आप से राय भी करेंगे.

श्री रामनिवास रावत-- अब तो धन्यवाद भी दे दिया.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह-- अध्यक्ष महोदय, मैं यह कहना चाहता हूँ कि अधिकारियों की नासमझी के कारण इसमें 2 वर्ष में 2 करोड़ 28 लाख राशि लैप्स हुई है. यह गंभीर मुद्दा है. अनुसूचित जाति की बस्ती में काम नहीं हो पा रहा है.

श्री हर्ष यादव-- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी के द्वारा यह नहीं कहा गया है कि कमेटी में विधायकों को रखा जाएगा. मंत्री जी आश्वस्त करें.

डॉ गोविन्द सिंह-- अध्यक्ष महोदय, हमको आश्वस्त करो, रखोगे. आप विधायकों को रखोगे कि नहीं रखोगे?

अध्यक्ष महोदय-- माननीय विधायक कमेटी में रहेंगे कि नहीं?

श्री ज्ञान सिंह-- रखेंगे.

अध्यक्ष महोदय-- रहेंगे.

डॉ गोविन्द सिंह-- धन्यवाद.

अध्यक्ष महोदय-- आप लोग कमेटी में रहेंगे. बैठ जाइये. श्री रामनिवास रावत पूछें.

श्री आरिफ अकील-- अध्यक्ष जी, इतना और कहलवा दो कि किनकी सिफारिशों पर ये पैसे देते हैं और किस तरीके से देते हैं? वह तरीका हम लोगों को मालूम हो जाए तो हम भी इनसे ले लें.

श्री बाबूलाल गौर-- अध्यक्ष महोदय, यह रहस्य की बातें हैं.

श्री आरिफ अकील-- टेबल के नीचे वाली बातें तो नहीं है ये.

विधान सभा क्षेत्र केवलारी अंतर्गत शालाओं का उन्‍नयन

2. ( *क्र. 4049 ) श्री रजनीश सिंह : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सिवनी जिले के विधान सभा क्षेत्र केवलारी अंतर्गत कितने कौन-कौन से माध्‍यमिक स्‍कूलों एवं हाइस्‍कूलों का विगत 05 वर्षों में उन्‍नयन किया गया है? (ख) केवलारी विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत स्‍कूलों के उन्‍नयन हेतु किन-किन ग्राम पंचायतों से प्रस्‍ताव आये एवं किन-किन जनप्रतिनिधियों ने उन्‍नयन हेतु विभाग को पत्र लिखा? प्रस्‍ताव एवं पत्र दिनांक का विवरण देवें? (ग) विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत किन-किन माध्‍यमिक/हाईस्‍कूल का उन्‍नयन इस सत्र में होना है? (घ) क्‍या ग्राम अलौनी खापा, अहरवाड़ा सादक सिवनी माध्‍यमिक शाला का उन्‍नयन होना है? यदि हाँ, तो कब तक?


स्कूल शिक्षा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र-एक अनुसार(ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र-दो अनुसार(ग) उन्‍नयन की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। सीमित वित्‍तीय संसाधनों के दृष्टिगत अंतिम निर्णय उपरांत ही शालाओं के नाम ज्ञात हो सकेंगे। समय-सीमा बताना संभव नहीं है। (घ) अहरवाड़ा पूर्व से ही हाईस्‍कूल है। मा.शा. अलौनीखापा एवं मा.शा. सादक सिवनी निर्धारित मापदण्‍ड की पूर्ति नहीं करते हैं। उन्‍नयन की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। सीमित वित्‍तीय संसाधनों की वजह से सभी पात्र शालाओं का उन्‍नयन संभव नहीं हो पाता है। समय-सीमा बताना संभव नहीं है।

परिशिष्ट ''एक''

श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने यह प्रश्न पूछने के लिए मुझे अधिकृत किया है. माननीय सदस्य द्वारा केवलारी विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत माध्यमिक स्कूलों से हाई स्कूल और हाई स्कूल से इंटर कॉलेज का उन्नयन करने के संबंध में प्रश्न पूछा था. अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य एवं माननीय सदस्य के पिताजी स्वर्गीय श्री हरवंश सिंह जी ने भी, जो पूर्व विधान सभा उपाध्यक्ष रहे थे. अपनी विधान सभा के ग्राम अलौनी खापा में माध्यमिक शाला से हाई स्कूल में उन्नयन करने के लिए उल्लेख किया है, अनुशंसा की है और माननीय सदस्य भी यही चाहते हैं कि अलौनी खापा एक ऐसा गाँव है, जिसकी आबादी काफी है और जहाँ से हाई स्कूल की दूरी भी 10 किलोमीटर से अधिक है. अगर सीधे एयर डिस्टेंस में नापेंगे तो एक गाँव जरूर ऐसा पड़ता है कि जिसकी दूरी 3 किलोमीटर है. लेकिन वहाँ वेनगंगा नदी है. नदी पर न पुल है, न रपटा है और नदी पर सामान्यतः निकल नहीं पाते. जिस गाँव के हाई स्कूल का विभाग जिक्र करता है कि वहाँ से 3 किलोमीटर दूरी है उस गाँव में, अलौनी खापा से उस गाँव तक पहुँचने के लिए 16 किलोमीटर की यात्रा तय करनी पड़ती है तो इस चीज को ध्यान में रखते हुए माननीय मंत्री जी से भी अनुरोध करूँगा और माननीय हमारे पूर्व विधान सभा उपाध्यक्ष, जिनका भी प्रस्ताव था, उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए, अलौनी खापा में माध्यमिक स्कूल से हाई स्कूल में उन्नयन करने के आदेश प्रसारित करने की कृपा करेंगे?

राज्य मंत्री, स्कूल शिक्षा (श्री दीपक जोशी)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसी माननीय सदस्य की भावना है, हम परीक्षण करवा लेंगे और यदि कुछ विशेष परिस्थितियाँ बनती हैं तो इस हाई स्कूल को मंजूरी के लिए प्रस्तावित करेंगे.

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, इसमें यह कह दें कि अगर नदी बीच में है और रास्ता नहीं है तो हम स्वीकृत कर देंगे.

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, आपके कहने से कैसे कहेंगे.

श्री रामनिवास रावत-- विशेष परिस्थितियाँ यही हैं, मैं ही बता रहा हूँ.

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, उनको भी परीक्षण करवा लेने दीजिए.

श्री रामनिवास रावत-- विशेष परिस्थिति वाला जिक्र कर लें. माननीय मंत्री जी, अगर वहाँ 3 किलोमीटर जाने का सुगम रास्ता नहीं है 10 किलोमीटर से अधिक है तो आप हाई स्कूल में उन्नयन कर देंगे. यह कह दें.

अध्यक्ष महोदय-- ऐसे कैसे कह देंगे.

श्री दीपक जोशी-- अध्यक्ष महोदय, विशेष परिस्थितियों में पहले भी निर्णय लिए गए हैं इसलिए हम परीक्षण करवा लेते हैं. विशेष परिस्थितियाँ निर्मित होंगी उसके बाद हम आपके आश्वासन, चूँकि माननीय पूर्व उपाध्यक्ष जी से जुड़ा हुआ है इसलिए उस सम्मान को दृष्टिगत रखते हुए हम पूर्व तरीके से आपको आश्वस्त करते हैं कि हम करेंगे.

श्री रामनिवास रावत-- इससे कब तक अवगत करा देंगे?

अध्यक्ष महोदय-- अतिशीघ्र.

श्री दीपक जोशी-- अध्यक्ष महोदय, हमारी नई प्रक्रिया अभी प्रचलित है अगर उसमें जुड़ जाएगा तो ठीक नहीं तो अगले वर्ष में हम ले लेंगे.

श्री रामनिवास रावत-- धन्यवाद.

शाला भवन तक पहुंच मार्ग का निर्माण

3. ( *क्र. 5234 ) श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राष्‍ट्रीय माध्‍यमिक शिक्षा मिशन के तहत विद्यालय भवनों तक पहुंच मार्ग निर्माण के क्‍या निर्देश हैं? पुरवार कन्‍या हाई स्‍कूल, इंदिरा गांधी वार्ड कटनी के पहुंच मार्ग निर्माण हेतु वर्ष 2013-14 से किन-किन जनप्रतिनिधियों ने नगर पालिक निगम, कटनी को कब-कब पत्र लिखे? पत्रों पर क्‍या कार्यवाही की गई। क्‍या की गई कार्यवाही से संबंधितों को अवगत कराया गया? यदि हाँ, तो कब-कब? यदि नहीं, तो क्‍यों? (ख) प्रश्‍नांश (क) में कलेक्‍टर कटनी के पत्र क्रमांक आर.एम.एस.ए./शिक्षा/ 2013-14/6595, दिनांक 23.12.2013 द्वारा आयुक्‍त नगर पालिक निगम, कटनी को दिये गये निर्देश के पालन में क्‍या कार्यवाही की गई एवं क्‍या की गई कार्यवाही से कलेक्‍टर महोदय को अवगत कराया गया? साथ ही बतायें कि अब तक मार्ग निर्माण न होने के क्‍या कारण हैं? (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) में बतायें कि जनप्रतिनिधियों के पत्रों और शासन तथा वरिष्‍ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना कर विद्यालय के मार्ग का निर्माण नहीं करने का कौन-कौन जिम्‍मेदार हैं? क्‍या इन पर कार्यवाही की जायेगी? यदि हाँ, तो क्‍या और कब तक, यदि नहीं, तो क्‍यों? साथ ही यह भी बतायें कि विद्यालय मार्ग का निर्माण किस प्रकार एवं कब तक किया जायेगा?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत विद्यालय भवनों तक पहुँच मार्ग का कोई प्रावधान नहीं है। अतः राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान से जिला कलेक्टर को जिला स्तर पर संचालित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कार्यवाही हेतु पत्र क्र./भवन/आर.एम.एस.ए./भोपाल/ 2013-14/2019 दिनांक 22.4.2013 से लेख किया गया था। पुरवार कन्या हाईस्कूल, इंदिरा गाँधी वार्ड, कटनी के पहुँच मार्ग निर्माण हेतु वर्ष 2013-14 से जनप्रतिनिधियों द्वारा लिखे गये पत्र एवं उन पर की गई कार्यवाही का विवरण संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। संलग्‍न परिशिष्ट में उल्लेखित जानकारी के प्रकाश में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ख) कार्यालय कलेक्टर, जिला कटनी का पत्र क्र./आर.एम.एस.ए./शिक्षण/2013-14 /6505 कटनी, दिनांक 23.12.2013 द्वारा प्रश्‍नाधीन मार्ग को बी.आर.जी.एफ. योजनांतर्गत निर्माण कराये जाने हेतु पत्र लिखा गया है, लेकिन प्रस्तावित पहुँच मार्ग अवैध कॉलोनी क्षेत्र के अंतर्गत है। मध्यप्रदेश नगरपालिका नियम अधिनियम 1956 के अंतर्गत बनाये गये मध्यप्रदेश नगरपालिका (कॉलोनाईजर का रजिस्ट्रीकरण निबंधन तथा शर्तें) नियम 1998 में वर्णित प्रावधानों के अनुसार अवैध कॉलोनी क्षेत्र में निर्माण कार्य नहीं कराये जा सकते हैं, इसलिये प्रस्तावित पहुँच मार्ग का निर्माण कार्य नहीं कराया गया है। (ग) प्रश्‍नांश के उत्तर के प्रकाश में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''दो''

श्री संदीप श्रीप्रसाद जायसवाल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, कटनी में शिव नगर क्षेत्र में एक पुरवार कन्या हाई स्कूल निर्मित हुआ था. पिछले 5 से अधिक वर्षों से वहाँ पर पहुँच मार्ग निर्मित न होने से बच्चों को अत्यधिक कठिनाई हो रही है. नगर निगम द्वारा उसे अवैध कॉलोनी का क्षेत्र बताकर सड़क निर्माण नहीं किया जा रहा है. मैं माननीय मंत्री जी से अनुरोध करना चाहूँगा कि वहाँ पर सड़क मार्ग का निर्माण कराया जाए और अगर अवैध कॉलोनी का क्षेत्र है तो अवैध कॉलोनी पहले से घोषित थी स्कूल बाद में बना है और शासकीय भूमि पर बना है ऐसी विषम परिस्थिति में माननीय मंत्री महोदय से अनुरोध है कि वहां सड़क मार्ग का निर्माण कराया जाए.

अध्यक्ष महोदय--शिक्षा विभाग कैसे करेगा ?

राज्यमंत्री, स्कूल शिक्षा (श्री दीपक जोशी)--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह सही है कि कॉलोनी वर्ष 2007 में निर्मित हुई और विद्यालय का निर्माण वर्ष 2009 में शुरु हुआ लेकिन वर्तमान में जो रास्ता है चल तो रहा है परन्तु कॉलोनी के लोगों द्वारा बाधा उत्पन्न करने के कारण कभी कभी यह अवरुद्ध हो जाता है इसलिए नगर निगम कमिश्रर और कलेक्टर को पत्र लिख दिया है कि इन बाधाओं को दूर करके रास्ते की सुगम रुप से चलने के लिए व्यवस्था करें और साथ ही आगे के लिए निर्माण कार्य के लिए बाधाएं दूर करने का प्रयास करें.

श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल--माननीय अध्यक्ष महोदय, नगर निगम फिर कहेगा कि अवैध कॉलोनी का क्षेत्र है अब प्रश्न यह है कि अगर अवैध कॉलोनी पहले से थी तो शासन के किन जवाबदार अधिकारियों ने शासकीय भूमि पर ऐसी जगह पर 70 लाख रुपये से अधिक राशि व्यय करके स्कूल बना दिया कि वहां पर बच्चे पहुंच ही नहीं पा रहे हैं. सैंकड़ों की संख्या में बच्चे पढ़ रहे हैं. शासन के आदेश भी है पूर्व में कि स्कूल पहुंच मार्गों का निर्माण किया जाए अगर ऐसा एक आदेश यहां से विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर और नगर निगम के आयुक्त को हो जाएगा तो निश्चित रुप से वहां पर व्यवस्था हो जाएगी.

श्री दीपक जोशी--माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसी माननीय सदस्य की भावना है हमने कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त दोनों को पत्र लिख दिया है और पूरी कोशिश है कि बाधाओं को दूर करते हुए वहां मार्ग निर्माण हो सके.

 

हरदा जिलांतर्गत नलकूप खनन

4. ( *क्र. 4443 ) डॉ. रामकिशोर दोगने : क्या पशुपालन मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग, हरदा द्वारा हरदा जिले में विगत 3 वर्षों में कुल कितने नलकूप खनन कार्य कराये गये हैं? विधान सभा क्षेत्रवार बताएं? (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार किये गये खनन कार्यों में से कितने कार्य शासकीय मशीन द्वारा एवं कितने खनन प्राइवेट मशीन से ठेकेदार द्वारा कराये गये हैं? (ग) प्रश्‍नांश (क) अ‍नुसार किये गये खनन कार्यों का भौतिक सत्‍यापन किस अधिकारी द्वारा कराया गया है? (घ) प्रश्‍नांश (क) अनुसार किये गये खनन कार्य की वर्तमान स्थिति क्‍या है? कितने खनन चालू हालत में हैं व कितने खनन बंद हैं, उसका क्‍या कारण है?

पशुपालन मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) से (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है।

डॉ. रामकिशोर दोगने--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे द्वारा मंत्रीजी से नलकूप खनन के संबंध में तीन साल की जानकारी मांगी गई थी वह जानकारी अधूरी आई है ढाई साल की जानकारी आई है इसके साथ ही नलकूप खनन के जो पाइंट पूछे गये थे कि किस-किस पाइंट पर खनन किया गया जिससे कि हम भी सत्यापन कर सकें क्योंकि अधिकारी बिल बना रहे हैं लोगों के खेतों में या घरों में बोरिंग कर रहे हैं और सार्वजनिक जगह पर बोरिंग नहीं कर रहे हैं इसलिये पाइंट पूछे गए थे पाइंट स्पष्ट नहीं बताये गए हैं उसमें सिर्फ गांव के नाम बताए गए हैं यह जानकारी मुझे चाहिए.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले--माननीय अध्यक्ष महोदय, सारी जानकारी परिशिष्ट में लगी है यदि आप अनुमति दें तो मैं पढ़कर सुना दूं.

अध्यक्ष महोदय-- पढ़कर मत सुनाइये उन्होंने पढ़ लिया होगा. माननीय सदस्य आपको कुछ स्पेसिफिक प्रश्न पूछना है तो पूछ लीजिए.

डॉ. रामकिशोर दोगने--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्रीजी ने जो जानकारी दी है वह मेरे पास भी है इसमें लिखा है पवरदीमाल, बख्तापुर, कानपुरा, चौखड़ी, नीमसराय, कुसिया इनमें पाइंट नहीं बताये गये हैं. क्या गांव में एक नलकूप से काम चल रहा होगा.

अध्यक्ष महोदय--आप सीधा प्रश्न कर दें कि आप क्या चाहते हैं.

डॉ. रामकिशोर दोगने-- मुझे पाइंट स्पष्ट बताये जाएं कि किस-किस गांव में कहां-कहां बोरिंग हुई है मुझे जानकारी ढाई साल की दी गई है मैंने तीन साल की जानकारी मांगी है.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले--माननीय अध्यक्ष महोदय, पाईप की जानकारी,गांव की जानकारी और खनन की जानकारी सब कुछ परिशिष्ट में है.

अध्यक्ष महोदय-- हां है परिशिष्ट में.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले--माननीय अध्यक्ष महोदय, विधायक जी कहें तो मैं प्रश्नकाल के बाद उपलब्ध करा दूंगी सब कुछ है मेरे पास.

डॉ. रामकिशोर दोगने--मंत्री महोदया, मेरे पास आप का ही लिखित जवाब है मेरा सीधा-सीधा प्रश्न है मुझे पाइंटवार जानकारी चाहिए और तीन साल की जानकारी चाहिए.

अध्यक्ष महोदय--मंत्री महोदया आपको प्रश्नकाल के बाद जानकारी दे देंगी.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं तो अभी बता रही हूं. कॉलम क्रमांक 7 में पढ़ लें माननीय सदस्य से मेरा निवेदन है कृपा करके सुन लें विनम्र निवेदन है.

अध्यक्ष महोदय--आप तो एक सीधा प्रश्न पूछ लें कि आप क्या चाहते हैं.

डॉ. रामकिशोर दोगने--मेरे पास पूरी लिस्ट है मुझे पाइंटवार जानकारी चाहिये कि गांव में किस पाइंट पर बोरिंग हुआ है और छह महीने की जानकारी कम है वह जानकारी चाहिए.

अध्यक्ष महोदय--माननीय मंत्रीजी वह जानकारी आपको दे देंगी.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं तो अभी जानकारी दे रही हूँ. मैं आपके माध्यम से निवेदन करना चाहती हूँ कि कॉलम क्रमांक-7 में जानकारी दी गई है आप कृपा करके पढ़ लें जो भी कमी है और जहां भी आप खनन कराना चाहते हैं वह स्थान बतायें मैं करवा दूंगी. पानी हमें देना है और पानी देने के लिए हम बाध्य हैं.

शाला भवन के गुणवत्‍ताहीन कार्य की जाँच

5. ( *क्र. 5376 ) पं. रमेश दुबे : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) छिंदवाड़ा जिले में आदिम जाति कल्‍याण विभाग के द्वारा शासकीय उच्‍चतर माध्‍यमिक शाला बडोसा विकासखण्ड बिछुआ जिला छिंदवाड़ा का निर्माण कार्य कब प्रारंभ हुआ? लागत राशि क्‍या थी, ठेकेदार कौन थे और किस तकनीकी अधिकारी के पर्येवेक्षण में इस भवन का निर्माण कार्य कब पूर्ण हुआ? (ख) क्‍या उक्‍त भवन का निर्माण कार्य गुणवत्‍ताहीन होने से लोकार्पण के दिन वर्षा होने के कारण छत टपकने लगी, जिसके गवाह तत्‍कालीन शिक्षक व शिक्षणरत बच्‍चे थे, जिसकी शिकायत तत्‍समय व उसके पश्‍चात की गयी थी? (ग) क्‍या शासन उक्‍त गुणवत्‍ताहीन भवन की जाँच प्रश्‍नकर्ता की उपस्थिति में कराकर दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही तथा उक्‍त भवन की मरम्‍मत कराये जाने का आदेश देगा? यदि नहीं, तो क्‍यों? ‍

आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) : (क) छिन्दवाड़ा जिले में आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला बडोसा विकासखण्ड बिछुआ जिला छिन्दवाड़ा का निर्माण कार्य वर्ष 2005-06 से प्रारम्भ हुआ, भवन की लागत राशि 26.53 लाख थी। ठेकेदार श्री चन्द्रभूषण यादव निवासी ग्राम चंदनगांव जिला छिन्दवाड़ा एवं श्री एम.के. विश्वकर्मा तथा श्री जी.पी. सोनी उपयंत्री लोक निर्माण विभाग छिन्दवाड़ा एवं प्रभारी सहायक यंत्री, आदिवासी विकास छिन्दवाड़ा के तकनीकी पर्यवेक्षण में वर्ष 2008-09 में पूर्ण हुआ। (ख) जी नहीं। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बडोसा विकासखण्ड बिछुआ की छत लोकार्पण के समय भवन में किसी प्रकार से छत टपकने की शिकायत तत्समय प्राप्त नहीं हुई थी। लोकार्पण के पश्चात भवन में गुणवत्ताहीन कार्य होने की शिकायत की गई थी। (ग) जी हाँ। उक्त भवन में गुणवत्ताहीन कार्य के लिये तत्कालीन तकनीकी अमले के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही किये जाने की कार्यवाही की जा रही है एवं भवन में हुई तकनीकी त्रुटि के कारण आवश्यक मरम्मत एवं सुधार का कार्य कराये जाने की कार्यवाही की जा रही है।

पं. रमेश दुबे--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न के भाग (ख) के उत्तर में माननीय मंत्रीजी ने बताया है कि लोकार्पण के समय भवन की छत टपकने की शिकायत प्राप्त नहीं हुई थी. मेरे द्वारा 19.8.2008 को इस भवन को लोकार्पित करते वक्त बरसात हो रही थी और लोकार्पण के पश्चात् जब मैं लोकार्पण के पश्‍चात जब मैंने भवन के अन्‍दर प्रवेश किया तो तभी अध्‍यक्ष महोदय, पानी छत से टपक रहा था. लोकार्पण के समय संबंधित विभाग के अधिकारी मेरे साथ थे, मैंने उसकी शिकायत की थी और उत्‍तर में आया है कि मेरे को उस प्रकार की कोई शि‍कायत प्राप्‍त नहीं हुई है. पिछले सत्र में 10.12.2015 को भी मेरे द्वारा इस संबंध में प्रश्‍न लगाया गया था. आज भी प्रश्‍न लगाया गया है. मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि पिछले सत्र में आपने आश्‍वासन दिया था कि मेरी उपस्थिति में अधिकारियों को पहुंचाकर आप जांच करायेंगे. लेकिन 2015 के सत्र में मेरे प्रश्‍न के जवाब के बाद भी अभी तक किसी भी अधिकारी की उपस्थिति में कोई जांच नहीं करायी है. आपने स्‍वयं इस बात को स्‍वीकार किया है कि भवन गुणवत्‍ताहीन निर्माण हुआ है. जिन के कारण इस गुणवत्‍ताहीन भवन का निर्माण कराया गया है. क्‍या उनके खिलाफ आप कार्यवाही करेंगे. साथ ही आप उस भवन के मरम्‍मत की समय सीमा बताईये कि कब तक आप इस भवन की मरम्‍मत करायेंगे.

श्री ज्ञान सिंह :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने अतिमहत्‍वपूर्ण के माध्‍यम से शिक्षा क्षेत्र से जुड़ा हुआ प्रश्‍न है, मैं आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍य को बताना चाहूंगा कि अभी अनुशासनहीनता की कार्यवाही प्रचलन में है. मैं यह कहना चाहता हूं कि संबंधित उपयंत्री के ऊपर कार्यवाही तो होगी ही, उनसे राशि की वसूली भी कि जायेगी और बरसात के पहले स्‍कूल की व्‍यवस्‍था दुरूस्‍त करा दी जायेगी.

अध्‍यक्ष महोदय :- ठीक है.

अनुत्पादक पशुओं के हितार्थ गौशालाओं का निर्माण

6. ( *क्र. 520 ) श्रीमती ऊषा चौधरी : क्या पशुपालन मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या म.प्र. शासन पशुपालन विभाग द्वारा गौ एवं पशु हत्‍या पर कानून बनाकर हत्‍या करने वालों के विरूद्ध कठोर कार्यवाही का प्रावधान किया गया है? (ख) यदि हाँ, तो शासन से ऐरा प्रथा समाप्‍त करने के बावजूद पशु मालिकों द्वारा अपने वृद्ध मवेशियों को खुला छोड़ देने के कारण वे किसानों की खेती को नुकसान पहुँचा रहे हैं? क्‍या ऐसे पशु मालिकों के विरूद्ध कार्यवाही का प्रावधान किया गया है? यदि नहीं, तो क्‍यों कारण सहित बताएं? (ग) क्‍या आवारा पशुओं के कारण आए दिन सड़क दुर्घटनाओं में लोगों की जाने जा रही हैं? यदि हाँ, तो क्‍या पशुपालन विभाग द्वारा पूरे प्रदेश के अंदर ग्राम पंचायत मुख्‍यालय में गौशाला बनवाकर आवारा पशुओं के ठहरने एवं खाने आदि की व्‍यवस्‍था हेतु ग्राम पंचायतों में बजट उपलब्‍ध कराया जावेगा?

पशुपालन मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) जी हाँ। प्रदेश में गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम (संशोधित) 2010 प्रभावशील है। (ख) जी नहीं। पशु पालकों द्वारा स्वयं के पालित पशु, जिनमें अधिकांश गौवंश है, अनुत्पादक हो जाने पर पशुओं को घर पर बांधा नहीं जाता है, बल्कि घर से छोड़ दिया जाता है और यही गौवंश आवारा रूप में विचरण करते हैं। जी हाँ। (ग) आवारा पशुओं के कारण सड़क दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। गौवंश के संरक्षण हेतु समाजसेवी संस्थाओं के माध्यम से संचालित पंजीकृत, क्रियाशील गौशालाओं को गौवंश के भरण पोषण हेतु आर्थिक सहायता म.प्र. गौपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड के द्वारा जिला गौपालन एवं पशुधन संवर्धन समितियों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है। गौशालाओं की देखभाल एवं भरण पोषण की व्यवस्था गौशाला समिति द्वारा की जाती है।

श्रीम‍ती ऊषा चौधरी:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से प्रश्‍न के '''' में पूछा था और '''' के संबंध में मंत्री जी ने जो जवाब दिया है उससे मैं संतुष्‍ट नहीं हूं. मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि गौशाला कहां पर चल रहे हैं और कौन चला रहा है इसका जवाब स्‍पष्‍ट नहीं आया है और वह किन किन संस्‍थाओं द्वारा चलाया जा रहा है.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले :- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने प्रश्‍न के '''' भाग में पूछा है कि मध्‍यप्रदेश शासन पशुपालन विभाग द्वारा गौ एवं पशु हत्‍या कानून बनाने बनाकर हत्‍या करने वाले के विरूद्ध ...

अध्‍यक्ष महोदय:- माननीय सदस्‍य ने प्रश्‍न के '''' भाग के बारे में पूछा है. वह '''' का उत्‍तर मांग रही हैं.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले:- '''' के बारे में पूछ रही हैं. ख में भी आप जो पूछ रही हैं, वह नहीं है. यदि हां तो शासन ऐसी प्रथा समाप्‍त कर मालिकों के विरूद्ध प्रथा समाप्‍त कर मालिकों को यानि वृद्ध पशुओं के बारे में पूछ रही हैं.

श्री जीतू पटवारी :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी क - कमल का, ख- खरगोश का और ग- गमले का उन्‍होंने ग का उत्‍तर मांगा है.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले :- अच्‍छा अब आप मुझे ककहरा पढ़ायेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय :- वह गौशालों की जानकारी चाह रही हैं. आपका प्रश्‍न यही है न.

श्रीमती कुसुम सिंह महदेले :- आवारा पशुधन हेतु विभाग की वर्तमान में ऐसी कोई योजना नहीं है कि वह गौशाला बनवाये, आप गौशाला बनाना चाहते हैं तो गौशाला बनवायें, हम मदद करेंगे. प्रायवेट संस्‍थाएं गौशाला बनवाती है. सरकार गौशाला नहीं बनवाती है.

श्रीमती ऊषा चौधरी :- अध्‍यक्ष महोदय, लेकिन माननीय मंत्री जी ने प्रश्‍न के '''' भाग में जवाब दिया है कि आवारा पशुओं के कारण आये दिन सड़क दुर्घटनाओं में लोगों के आने जाने में पशुपालन विभाग द्वारा प्रदेश के अन्‍दर ग्राम पंचायत मुख्‍यालय में गौशाला बनवाकर आवारा पशुओं को ठहरने की एवं खाने आदि की व्‍यवस्‍था हेतु ग्राम पंयायतों में बजट आदि के लिये बजट उपलब्‍ध कराया जायेगा, मैंने यह पूछा था और उन्‍होंने जवाब दिया है कि आवारा पशुओं के कारण सड़क दुर्घटना की आशंका बनी रहती है, गौशाला में संरक्षण हेतु समाज सेवा संस्‍थाओं के माध्‍यम से संचालित की जाती है.

अध्‍यक्ष महोदय :- यह तो आ गया है, यह इसमें लिखा हुआ है.

श्रीमती ऊषा चौधरी :- मेरा कहना यही है कि कहां पर चल रही है.

अध्‍यक्ष महोदय :- नहीं चल रही है, ऐसा उन्‍होंने लिखा भी नहीं है. उन्‍होंने लिखा है कि यदि कोई चलाता है, तो वह मदद करेंगे. अगर अब आपको इसमें कुछ पूछना है तो पूछ लें.

श्रीमती ऊषा चौधरी :-अध्‍यक्ष महोदय, कोई मदद नहीं हो रही है. मैं आपको बताना चाहती हूं कि मैंने खुद पांच लाख रूपये विधायक निधि से वर्ष 2013-14 में रोण ग्राम पंचायत में दिया था, उसमें से ढाई लाख रूपये मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी ने जानबूझकर लेप्‍स कर दिया इससे ग्रामीणों में इतनी ज्‍यादा समस्‍या किसानों को हो रही है कि सड़क दुर्घटनाएं तो हो ही रही है और किसानो की पूरी खेती आवारा पशु चर जाते हैं. इसकी आप क्‍या व्‍यवस्‍था करेंगे.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले:- अध्‍यक्ष महोदय, आवारा पशु हमारे और आप के होते हैं और हम और आप अपनी जिम्‍मेदारी नहीं निभायेंगे तो आवारा पशु तो ऐसे ही घुमेंगे. यह सरकार की जिम्‍मेवारी थोड़े ही है कि आवारा पशुओं की देखभाल करे. आवारा पशु आप अपने घर में बांधे, वह आपके पशु हैं वह आप अपने घर पर बांधे. यहां पर सारे सदस्‍य बैठे हैं, उन सबसे मैं निवेदन करना चाहती हूं कि आप अपने अपने पशु अपने घर पर बांधे.

(..व्यवधान..)

श्री सुखेन्द्र सिंह - आपका मंत्री जी यह जवाब ठीक नहीं है.

श्रीमती ऊषा चौधरी - मैं पूछना चाहती हूं कि सरकार की जिम्मेदारी नहीं है.

सुश्री कुसुमसिंह महदेले - सरकार की आवारा पशु बांधने की कोई नीति नहीं है और न हम बांधेंगे. सब लोग अपने-अपने आवारा पशु बांधें और सारे सदस्यगण जनता को इस बात के लिये प्रेरित करें कि वे अपने-अपने आवारा पशु घर में बांधें.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा एक विनम्र निवेदन है कि (XXX) श्री सुन्दरलाल तिवारी - (XXX) अध्यक्ष महोदय.

अध्यक्ष महोदय - यह कार्यवाही से निकाल दीजिये.

श्रीमती ऊषा चौधरी - माननीय मंत्री महोदया से मैं पूछना चाहती हूं कि क्या इस पर कोई कानून व्यवस्था बनाने का काम करेंगे कि जिनके पशु हैं वे अपने पशु को घर में रखें और पालन पोषण करें या तो आप इस व्यवस्था को खत्म कर दें. गौहत्या का जो कानून है.

सुश्री कुसुमसिंह महदेले - माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य से मैं निवेदन करना चाहती हूं कि वे सदन में संकल्प लायें हम उस पर विचार करेंगे.

प्रश्न क्र.7 अनुपस्थित.

 

 

महिदपुर वि.स. क्षेत्रांतर्गत गौशालाओं का विकास

8. ( *क्र. 5525 ) श्री बहादुर सिंह चौहान : क्या पशुपालन मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) महिदपुर वि.स. क्षेत्र में कितनी गौशालाएं हैं? इनके पास कितना भूमि रकबा है? शासकीय एवं निजी पृ‍थक-पृथक बतावें? (ख) विगत 5 वर्षों में इन्‍हें कितना अनुदान दिया गया वर्षवार, गौशाला के नाम सहित बतावें। अकाउंट नंबर भी बतावें? (ग) गौशाला विकास के लिए जो सुविधाएं एवं अनुदान दिए जाते हैं, उनकी सूची प्रक्रिया सहित देवें?

पशुपालन मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) महिदपुर विधान सभा मे कुल 2 पंजीकृत गौशालाएं हैं। गोपाल गौशाला कटन, महिदपुर के पास 5.76 हेक्टेयर गौशाला समिति की निजी भूमि है तथा श्री कृष्ण गौशाला रावतखेडी के पास 7 हेक्टेयर शासकीय भूमि है, जिसमें 18 आरा विवादित हैं। (ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार(ग) म.प्र. गौपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड द्वारा पंजीकृत क्रियाशील गौशालाओं को जिला गौपालन एवं पशुधन संवर्धन समितियों के माध्यम से गौवंश के भरण पोषण हेतु आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। गौशालाओं में उपलब्ध गौवंश के भरण पोषण की व्यवस्था एवं देखरेख गौशाला समिति द्वारा की जाती है। म.प्र. गौपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड से प्राप्त राशि को गौशाला में उपस्थित पशु संख्या के अनुपात में जिला गौसंवर्धन समिति की बैठक में अनुमोदन उपरांत चेक के माध्यम से प्रदाय किया जाता है। पशु चिकित्सा विभाग की नज़दीकी संस्था द्वारा पशुओं का टीकाकरण एवं स्वास्थ परीक्षण कार्य किया जाता है। निर्देश की प्रति संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है।

परिशिष्ट - ''तीन''

श्री जसवन्त सिंह हाड़ा - (XXX) .

श्री बहादुर सिंह चौहान - क्या आप सिखाओगे बोलने के लिये. आपसे सीनियर हैं हम. तीन बार चुनाव लड़ लिये हाड़ा जी. आप तो कभी बोलते नहीं. प्रश्न लगाते नहीं. हाऊस की कार्यवाही में भाग भी नहीं लेते.

अध्यक्ष महोदय - उनका उत्तर मत दीजिये. हाड़ा जी की बात कार्यवाही से निकाल दीजिये.

श्री बहादुर सिंह चौहान - अध्यक्ष महोदय, मेरा गौशाला से जुड़ा हुआ प्रश्न है. दो गौशालाएं हैं. गोपाल गौशाला और श्रीकृष्ण गौशाला. मैंने पूछा था कि यहां कितनी-कितनी भूमि है. यह महत्वपूर्ण प्रश्न है क्योंकि गोपाल गौशाला निजी भूंमि पर है कमेटी बनी हुई है और श्रीकृष्ण गौशाला शासकीय भूमि पर है. श्रीकृष्ण गौशाला में 7 हेक्टेयर जमीन है परन्तु उत्तर में यह भी आया कि 18 आरा विवादित है उसमें से. मैं दोनों गौशालाओं के लिये क्योंकि निजी भी ट्रस्ट की है निजी व्यक्ति की नहीं है उस पर प्रभावशाली लोगों ने कब्जा कर लिया. आप परिशिष्ट पढ़ेंगे तो अनुदान की संख्या धीरे-धीरे कम होती गई है यानि गायों की संख्या कम हो गई है उस भूमि पर व्यक्तिगत अतिक्रमण कर लिये निर्माण कर लिये खेती कर रहे हैं. इन दोनों गौशालाओं का अतिक्रमण मंत्री जी हटवाएंगी.

सुश्री कुसुमसिंह महदेले - अध्यक्ष महोदय, निश्चित रूप से हम वहां के जिले के कलेक्टर को लिखेंगे और आग्रह करेंगे कि उस अतिक्रमण को वे हटाएं और गौशाला की भूमि गौशाला को दी जाये.

श्री बहादुर सिंह चौहान - अध्यक्ष महोदय, एक प्रश्न और पूछना चाहता हूं कि माननीय मंत्री जी इस कार्यवाही को कितने समय में करवा देंगी.

सुश्री कुसुमसिंह महदेले - अध्यक्ष महोदय, आज इसी वक्त तत्काल यहां से जाने के बाद कलेक्टर को पत्र लिखूंगी.

श्री बहादुर सिंह चौहान - धन्यवाद. मंत्री जी.

पशुओं के उपचार हेतु दवाईयों का क्रय

9. ( *क्र. 3894 ) श्री दिनेश राय : क्या पशुपालन मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) सिवनी जिले में उपसंचालक पशु चिकित्‍सा द्वारा पशुओं के उपचार हेतु दवाइयों का क्रय वर्ष 2011-12 से प्रश्‍न दिनांक तक में कितनी-कितनी किस एजेंसी के द्वारा किया गया तथा इस मद में उक्‍त वर्षों में कितना-कितना बजट प्राप्‍त हुआ? वर्षवार जानकारी दें। (ख) सिवनी जिले के अंतर्गत पशु चिकित्‍सक द्वारा प्रश्‍नांक (क) में वर्णित वर्षों के दौरान कहाँ-कहाँ पर भ्रमण कार्यक्रम किये गये हैं और उनके द्वारा कितने व्‍यय के बिल प्रस्‍तुत किये गये? (ग) प्रश्‍नांश (क) में दर्शित वर्षों में क्रय दवाइयों को स्‍टॉक रजिस्‍टर में दर्ज कर कितनों को कितनी-कितनी दवाइयां वितरित की गई तथा कितना व्‍यय किया गया? (घ) सिवनी विधानसभा क्षेत्र में किस-किस ग्राम में कहाँ-कहाँ कैम्‍प आयोजित कर पशुओं का इलाज किया गया? यदि नहीं, तो क्‍यों?

पशुपालन मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार(ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार(ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार(घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

श्री शैलेन्द्र पटेल - अध्यक्ष महोदय, मुझे माननीय सदस्य ने यह प्रश्न करने के लिये अधिकृत किया है और  इस प्रश्न के माध्यम से पशुपालन विभाग का सिवनी जिले का उत्तर प्राप्त हुआ है. इस पशुपालन विभाग को हमारे गांव में ढोर डिपार्टमेंट भी कहते हैं और उसी डिपार्टमेंट का यह प्रश्न है. इस प्रश्न का जो जवाब दिया गया है मेरी भी आंखें खुल गईं जब उसका इतना मोटा उत्तर आया कि 47 लाख 90 हजार रुपये की दवाईयां अकेले सिवनी जिले में वेटनरी डिपार्टमेंट ने पशुपालन के लिये दी हैं. दवाईयां मिलीं तथा इनके सत्यापन की क्या प्रक्रिया अपनाई गई, क्योंकि दवाईयां खरीदी गई उसकी जानकारी है क्या वाकई पशु-पालकों को यह दवाई मिली ?

सुश्री कुसुम सिंह महदेले--माननीय अध्यक्ष महोदय, परिशिष्ट में सारी जानकारियां दी हैं और इतना मोटा जवाब देने का मतलब ही यह है कि जो माननीय सदस्य ने प्रश्न किया है हमने उसके बिन्दुवार जवाब दिये हैं. आप कहें तो मैं इसको पटल पर रख दूं या उसको पढ़कर के सुना दूं.

अध्यक्ष महोदय--आप स्पेसिफिक प्रश्न पूछ लें कि दवाईयां नहीं पहुंची हैं तो क्यों नहीं पहुंची ?

श्री शैलेन्द्र पटेल--माननीय अध्यक्ष महोदय, सिवनी जिले में दवाईयां नहीं है इसके अलावा प्रदेश के कहीं पर यह दवाईयां उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं, इस बात से पूरे सदस्य सहमत होंगे. दूसरा मुझे जो जवाब दिया गया है (ख) का कितने भ्रमण कार्यक्रम डॉक्टरों द्वारा किये हैं तो किसी डॉक्टर ने पांच से लेकर 20 भ्रमण किये हैं और प्रश्न यह भी आया है कि कुल उन 19 डॉक्टरों में से 11 डॉक्टरों ने तो यात्रा भत्ता भी नहीं लगाया है, क्या वे इतने सक्षम हो गये हैं कि उनको यात्रा भत्ते की जरूरत नहीं है या उन्होंने यहां पर फर्जी आंकड़े पेश कर दिये कि हम इतने गांवों में गये हैं.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले--माननीय अध्यक्ष महोदय, डॉक्टरों ने यात्रा भत्ता नहीं लगाया था यह कोई प्रश्न है ?

श्री शैलेन्द्र पटेल--माननीय अध्यक्ष महोदय, क्या यह संभव है कि कोई काम पर जाए और वह यात्रा भत्ता न लें, क्या उसे पैसे की जरूरत नहीं है इसका मतलब यह है कि क्या मंत्री महोदय उनके सत्यापन की जांच करवाएंगे ?

सुश्री कुसुम सिंह महदेले--माननीय अध्यक्ष महोदय, निश्चित रूप से इसकी जांच करवाऊंगी तथा उसका सत्यापन भी करवाऊंगी.

प्रश्न संख्या 10

व्‍याख्‍याताओं की मूल विभाग में वापसी

10. ( *क्र. 4364 ) डॉ. कैलाश जाटव : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) आदिवासी विकास विभाग के कितने व्‍याख्‍याता जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्‍थान में पदस्‍थ हैं ओर क्‍यों? (ख) प्रश्‍नांश (क) के अनुसार क्‍या इन व्‍याख्‍याताओं की आदिवासी विकास विभाग में आवश्‍यकता नहीं है? इनको मूल विभाग में वापिस बुलाने हेतु क्या प्रयोजन किये गये? (ग) इस विभाग के कितने व्‍याख्‍याता वर्षों से डाइट्स में बिना अनापत्ति प्रमाणपत्र के प्रतिनियुक्ति/पद विरूद्ध कार्यरत हैं, जिसके कारण शिक्षा विभाग के व्‍याख्‍याता/वरिष्‍ठ व्‍याख्‍याताओं का डाइट संस्‍थाओं में पदांकन/पदोन्नति नहीं हो पा रही है? (घ) प्रश्‍नांश (ग) अंतर्गत व्‍याख्‍याताओं को कब तक मूल विभाग में वापिस भेजा जावेगा?

आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) : (क) आदिवासी विकास विभाग के 10 व्‍याख्‍याता जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्‍थानों में पदस्‍थ हैं। पदस्‍थ व्‍याख्‍याताओं के द्वारा आदिम जाति कल्‍याण विभाग के शिक्षकों को भी प्रशिक्षित किया जाता है। (ख) जी हाँ। रिक्‍त पदों पर विभाग में पदस्‍थ समान सामर्थ्‍य एवं समान वेतनमान में न्‍यूनतम अर्हताधारी कार्यरत शिक्षकों की निर्धारित चयन प्रक्रिया द्वारा अवसर दिये जाने संबंधी विभागीय सहमति प्रदान की गई है। डाईट प्रशिक्षण में विभाग के शिक्षक भी प्रशिक्षण प्राप्‍त करते हैं। (ग) विभाग के 10 व्‍याख्‍याता बिना अना‍पत्त्‍िा प्रमाण पत्र के डाईट में कार्यरत हैं। पदोन्‍नति पर शिक्षा विभाग से पदस्‍थापना होने पर कार्यरत व्‍याख्‍याताओं को मूल विभाग में वापस किया जा सकता है। (घ) उत्‍तरांश '' के प्रकाश में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

 

डॉ.कैलाश जाटव--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे सवाल के जवाब में माननीय मंत्री जी ने (क) में कहा है कि व्याख्यता जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में पदस्थ हैं, वहां पर कितने लोग पदस्थ हैं ?

श्री ज्ञानसिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, 10 व्याख्याता अभी पदस्थ हैं 33 व्याख्याता वापस विभाग में आ रहे हैं.

डॉ.कैलाश जाटव--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से मेरा निवेदन है कि आपके विभाग को इनकी आवश्यकता नहीं है यह व्याख्याता दूसरे विभाग में पदस्थ किये गये हैं.

श्री ज्ञानसिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय,आवश्यकता अवश्य है 10 व्याख्याता वहां पर पदस्थ हैं दूसरी व्याख्याताओं की सेवाएं आज ही वापस की जाती है.

प्रश्न संख्या -11

अतिथि शिक्षकों का नियमितीकरण

11. ( *क्र. 3728 ) श्री राजेन्द्र फूलचं‍द वर्मा : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या मध्‍यप्रदेश में अतिथि शिक्षक, नियमित शिक्षक के समान ही कार्य कर रहे हैं। यदि कर रहे हैं, तो क्‍या इन्‍हें समान काम का समान वेतन दिया जा रहा है? (ख) क्‍या अतिथि शिक्षकों को आगामी संविदा नियुक्‍ति में किसी प्रकार का लाभ दिया जावेगा? (ग) यदि दिया जावेगा तो क्‍या लाभ दिया जावेगा। क्‍या सभी अतिथि शिक्षकों को संविदा शिक्षक बनाने की शासन द्वारा कोई कार्यवाही की जा रही हैं? यदि नहीं, तो क्‍या भविष्‍य में की जाएगी?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी नहीं। अत: शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ख) जी हाँ। (ग) संविदा शाला शिक्षक नियोजन की प्रक्रिया हेतु शैक्षणिक योग्‍यता एवं शिक्षण प्रशिक्षण धारित अतिथि शिक्षकों को पात्रता परीक्षा उत्‍तीर्ण करने पर प्रावीण्‍य सूची में कार्य दिवसों के अनुभव के आधार पर बोनस अंक देने का प्रावधान किया गया है। जी नहीं शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

श्री राजेन्द्र वर्मा--माननीय अध्यक्ष महोदय, आज का प्रश्न महत्वपूर्ण है, क्योंकि मध्यप्रदेश के 30 से 35 हजार अतिथि प्रश्नों का प्रश्न हैं. मैं माननीय मंत्री जी को वह हमारे जिले के गौरव हैं मैं उनको जानता हूं कि अतिथि शिक्षकों से माला भी नहीं पहनते हैं. आप जानते हैं कि प्रदेश में शिक्षा को लेकर के बात चल रही है. यह अतिथि शिक्षक 2500-3500 तथा 4500 रूपये वेतन पाने के उपरांत जो शिक्षा देनी चाहिये वह नहीं दे पा रहे हैं जिसमें इस प्रकार के नारे लगते हों कि भारत की बर्बादी तक आजादी जारी रहेगी इंशा अल्लाह यह शिक्षा नहीं देना है.

श्री राजेन्‍द्र वर्मा- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा माननीय मंत्री जी से स्‍पेस्फिक प्रश्‍न है, जिस प्रकार इन्‍होंने गुरूजी को अतिरिक्‍त दिया है, उसी प्रकार क्‍या अतिथि शिक्षकों के लिए कोई योजना बना रहे हैं और दूसरा क्‍या अतिथि शिक्ष्‍ाकों को अतिरिक्‍त कुछ देंगे, मेरे दो प्रश्‍न हैं, उसके बाद मैं अलग से प्रश्‍न करूंगा।

श्री दीपक जोशी- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, संविदा शाला शिक्षक नियोजन प्रक्रिया हेतु शैक्षणिक योग्‍यता एवं शैक्षणिक प्रशिक्षण धारी अतिथि शिक्षकों को पात्रता परीक्षा उत्‍तीर्ण करने पर, प्रावीण्‍य सूची में कार्य दिवसों में, अनुभव के आधार पर बोनस अंक प्रदान किए जाने का प्रावधान किया गया है । यदि वह 200 दिवस से 399 दिवस पर कार्य करते हैं तो 5 अंक, 400 से 599 दिवस कार्य करते हैं तो 10 अंक और 600 से अधिक दिन कार्य करते हैं तो 15 अंक बोनस के रूप में दिए जाने का प्रावधान शासन द्वारा किया गया है ।

श्री राजेन्‍द्र वर्मा- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो शिक्षक होते हैं,इनका प्रमाणीकरण नहीं होता है, इनका रजिस्‍टर भी अलग से होता है, मेरा माननीय मंत्री से स्‍पेस्फिक अनुरोध है कि क्‍या इनको नियमितीकरण करने के लिए सरकार की कार्यवाही प्रचलित है, दूसरा इसकी पालसी के बारे में पूछा था क्‍या इनके संबंध में कोई पॉलसी बनाएंगे ।

श्री दीपक जोशी- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसे आर.टी. के नियम हैं, उन नियमों का पालन करना आवश्‍यक है, अभी उत्‍तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा मित्र के लिए जो निर्णय लिया, उसको उत्‍तर प्रदेश हाईकोर्ट ने पलट दिया, उत्‍तर प्रदेश हाईकोर्ट ने भी यही कहा कि आर.टी.के नियमों का पालन करते हुए ही आप आगामी कार्यवाही कर सकते हैं, उसी परिप्रेक्ष्‍य में हम भी चूंकि इन्‍होंने रिकार्ड रखने के लिए कहा है, हम रिकार्ड संधारण के लिए कोई व्‍यवस्‍था कर सकते हैं तो हम करने का प्रयास करेंगे ।

श्री सुंदर लाल तिवारी- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसी विषय में मैंने ध्‍यानाकर्षण दिया है ।

अध्‍यक्ष महोदय- नहीं किसी को अनुमति नहीं है । आपका मूल प्रश्‍न है आपको पूछना हो तो पूछ सकते हैं ।

श्री राजेन्‍द्र वर्मा- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या इनका अध्‍यापक वर्ग में संविलियन किया जाएगा । दूसरा यह जो शिक्षक हैं, इनका प्रमाणीकरण भी नहीं होता है और अप्रैल मई के बाद बंद कर दिया जाता है तो क्‍या आगे इनको निरन्‍तर करेंगे ।

श्री दीपक जोशी- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह प्रश्‍न नहीं उठता क्‍योंकि परीक्षा उत्‍तीर्ण करना आवश्‍यक है, उसके बाद ही कार्यवाही हो सकती है ।

श्री ओमप्रकाश सखलेचा- माननीय अध्‍यक्ष जी, स्‍पेशल परीक्षा करके अतिथि शिक्षकों का पहले किया था ।

अध्‍यक्ष महोदय- आपको अनुमति नहीं दी गई है और भी अन्‍य सदस्‍यों ने हाथ उठाएं हैं, उनका अधिकार पहले बनेगा ।

राष्‍ट्रीय उद्यानिकी मिशन अंतर्गत ट्रैक्टर का प्रदाय

12. ( *क्र. 4471 ) श्री लखन पटेल : क्या पशुपालन मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या राष्‍ट्रीय उद्यानिकी मिशन के अंतर्गत 20 HP से अधिक एवं 20 HP से कम ट्रैक्टर दिए जाने का प्रावधान है? यदि हाँ, तो इसके लिए क्‍या मापदण्‍ड निर्धारित हैं? (ख) विगत 03 वर्षों में इस योजना के अंतर्गत पथरिया विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत कितने कृषकों को 20 HP तथा इससे अधिक के ट्रैक्टर प्रदान किए गए? (ग) शासन द्वारा विधानसभावार अथवा क्षेत्रवार कोई लक्ष्‍य निर्धारित किया गया? विगत 03 वर्षों की लक्ष्‍य पूर्ति का ब्‍यौरा दिया जावे?

पशुपालन मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) 20 अश्वशक्ति से अधिक के ट्रैक्टर पर वर्ष 2013-14 तक अनुदान का प्रावधान था। वर्तमान में 20 अश्वशक्ति तक के ट्रैक्टर पर अनुदान का प्रावधान है। कृषक उद्यानिकी फसलों का उत्पादन करता हो। (ख) जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र-अ अनुसार है। (ग) जी नहीं। लक्ष्य जिलेवार निर्धारित किये जाते हैं। विगत 03 वर्षों की लक्ष्य पूर्ति की जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र-ब अनुसार है।

परिशिष्ट - ''चार''

श्री लखन पटेल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी के जवाब से संतुष्‍ट हूं,परन्‍तु मैं एक जानकारी चाहता हूँ पिछले वर्षों में जो लक्ष्‍य पूरा नहीं हुआ उसका क्‍या कारण था, क्‍या इसकी जानकारी उपलब्‍ध करा देंगे ।

सुश्री कुसुम सिंह महदेले- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जानकारी हमने परिशिष्‍ट में... कृपया एक बार फिर से प्रश्‍न करें ।

श्री लखन पटेल - पिछले वर्षों में जो लक्ष्‍य पूरा नहीं हुआ है मैंने तीन वर्ष का मांगा था कि तीन वर्ष में कितना लक्ष्‍य था, उसकी क्‍या पूति हुई है आपने दो वर्षों का दिया है और लक्ष्‍य पूरा नहीं हुआ है इसकी जानकारी चाहता हूँ कि क्‍या कारण था कि लक्ष्‍य पूरा नहीं हो पाया क्‍या इसकी जानकारी उपलब्‍ध करा देंगे ।

सुश्री कुसुम सिंह महदेले- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जितने आवेदन आए हमने उस पर कार्यवाही की अब आवेदन ही नहीं आए तो क्‍या कार्यवाही करें ।

एरिया एजूकेशन ऑफिसर के पद का सृजन

13. ( *क्र. 3046 ) श्री इन्‍दर सिंह परमार : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र. में राज्‍य शिक्षा सेवा गठन के पश्‍चात् कक्षा 1 से 8 तक के विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्‍ता एवं निरीक्षण के लिए एरिया एजूकेशन ऑफिसर के पद सृजित किये जा रहे हैं? यदि हाँ, तो क्‍या इन पदों की पूर्ति विभाग परीक्षा आयोजित करके करेगा? (ख) क्‍या म.प्र. में शिक्षा विभाग द्वारा एरिया एजूकेशन ऑफिसर के पद की पूर्ति के लिए अध्‍यापक संवर्ग को भी पात्र माना गया है? यदि हाँ, तो विभाग में उपलब्‍ध प्रधानाध्‍यापक की पदोन्‍नति का मार्ग छोड़कर एरिया एजूकेशन ऑफिसर के पद की पूर्ति के लिए परीक्षा का आयोजन करने का क्‍या औचित्‍य है? (ग) क्‍या शासन द्वारा माध्‍यमिक विद्यालय के प्रधानाध्‍यापकों को वरिष्‍ठता के आधार पर विकासखण्‍ड शिक्षा अधिकारी बनाने के पश्‍चात् शेष रहे प्रधानाध्‍यापकों को एरिया एजूकेशन ऑफिसर बनाने पर विचार किया जायेगा? (घ) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित एरिया एजूकेशन ऑफिसर के पदों की पूर्ति के लिए परीक्षा आयोजित करके पदस्‍थ करने पर शासन का कितना व्‍यय होगा?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) शासन द्वारा एरिया एजूकेशन ऑफिसर के कुल 3286 पद सृजित किये गये हैं। ए.र्इ.ओ. की पद पूर्ति हेतु परीक्षा आयोजित हो चुकी है। वर्तमान में ए.ई.ओ. की भर्ती से संबंधित न्‍यायालयीन प्रकरण प्रचलित है, न्‍यायालय निर्णय के अनुक्रम में कार्यवाही की जावेगी। (ख) अध्‍यापक संवर्ग में मात्र अध्‍यापक को पात्रता है। ए.ई.ओ. का पद सीधी भर्ती का है एवं प्रधानाध्‍यापक माध्‍यमिक शाला को भी चयन परीक्षा में शामिल होने की पात्रता है। अत: शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) प्रश्‍नांश '''' के उत्‍तर के प्रकाश में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) उक्‍त पद की चयन परीक्षा हेतु शासन द्वारा व्‍यय नहीं किया गया है।

श्री इन्‍दर सिंह परमार- अध्‍यक्ष महोदय,मेरा एरिया एजूकेशन ऑफिसर से संबंधित प्रश्‍न था, पर इसमें न्‍यायालय का उल्‍लेख किया गया है । मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि आपने पद सृजन भी कर दिया, परीक्षा भी आयोजित कर ली, इनकी नियुक्ति कितने वर्ष के लिए की जाएगी, दूसरा यदि नियुक्ति की कोई निश्चित समय अवधि दो साल पांच साल है तो इसके बाद इनको कहां पर भेजा जाएगा, मूल विषय था कि प्रधान अध्‍यापक को प्रमोशन के द्वारा, इन पदों पर पदोन्‍नति करना चाहिए, लेकिन इनका अलग से पद सृजन करने के लिए परीक्षा आयोजित करना यह मुझे समझ में नहीं आ रहा है, यह जानकारी चाहिए ।

श्री दीपक जोशी- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,विभाग में पूर्व से ए.डी.आई. के पद होते थे, जिन पर हम हेड मास्‍टर और शिक्षक को नियुक्‍त करते थे बाद में जब अध्‍यापक संवर्ग भी इनके समकक्ष आ गए, चूंकि एरिया एजूकेशन का पद अभी हमने सृजित किया है और इसी परिप्रेक्ष्‍य में किया है, ए.डी.आई. के पद के समकक्ष ,इसलिए हमने सोचा कि क्‍यों न इसमें अध्‍यापक को भी जोड़ लिया जाए । इसलिये अध्‍यापकों को भी जोड़ा गया. लेकिन मामला कोर्ट में जाने के कारण लगातार इसमें विलम्‍ब हुआ और वर्तमान में माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय में प्रकरण प्रचलित है. जब तक माननीय न्‍यायालय से फैसला नहीं होगा तब तक प्रकरण विचाराधीन रहेगा.

श्री इन्‍दर सिंह परमार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रधानाध्‍यापक का जो पद है, सेकेण्‍ड क्‍लास गजेस्‍टेड ऑफिसर का पद है. अध्‍यापक और उसमें अन्‍तर है, उनको समक्ष नहीं हैं.

श्री दीपक जोशी - चूँकि शिक्षक और अध्‍यापकों की पदोन्‍नति के रास्‍ते आगे बन्‍द हो जाते हैं इसलिए उनके लिए, ये पद पहले से ही रहित हैं. इसलिए अभी भी हमने रखने का विचार किया है.

 

शिक्षकों के अनियमित निलंबन की जाँच

प्रश्‍न 14. ( *क्र. 5468 ) श्री संजय पाठक : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या कटनी जिले में सर्वशिक्षा अभियान के तहत प्राथमिक एवं माध्‍यमिक शालाओं में वर्ष 2015 में शौचालय निर्माण कराये गये? यदि हाँ, तो कितने और कहाँ-कहाँ जानकारी देवें? (ख) क्‍या उक्‍त के दौरान जून 2015 में अनेक शिक्षकों/जनशिक्षकों/अध्‍यापक/सहायक अध्‍यापक/सहायक शिक्षकों को शौचालय निर्माण न करने के कारण निलंबित किया गया? यदि हाँ, तो क्‍या शौचालय निर्माण का दायित्‍व शाला प्रबंधन समिति का है या उक्‍त शिक्षकों का? उक्‍त निलंबन किसके द्वारा प्रस्‍तावित किया गया? क्‍या संबंधित निलंबित कर्मचारी को पहले कोई कारण बताओ सूचना पत्र देकर पक्ष रखने का अवसर दिया गया, इसमें आरक्षित श्रेणी के शिक्षकों को भी दण्डित किया गया है? (ग) प्रश्‍नांश (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में संबंधित का निलंबन किस जाँच के आधार पर निरस्‍त किया गया? यदि संबंधित अधिकारी जाँच में निर्दोष पाये गये तो निलंबन प्रस्‍तावित करने वाले अधिकारी पर क्‍या कार्यवाही होगी? यदि जाँच नहीं हुई तो क्‍या उक्‍त निलंबन छिपाने के लिये किया गया?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ। स्वच्छ भारत स्वच्छ विद्यालय 2015-16 के अंतर्गत प्राथमिक/माध्यमिक शाला परिसरों में 315 बालक शौचालय, 189 बालिका शौचालय, इस प्रकार कुल 504 शौचालयों का निर्माण किया गया। शालावार स्वीकृत एवं निर्मित शौचालयों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जून 2015 में शिक्षक/जन शिक्षक/ अध्यापक/सहायक अध्यापक/सहायक शिक्षकों को स्वच्छ भारत स्वच्छ विद्यालय अभियान के अंतर्गत शालाओं में शौचालय निर्माण कार्य प्रारंभ न करने के कारण निलंबित किया गया। शौचालय निर्माण का दायित्व शाला प्रबंधन समिति का है एवं इस समिति में शाला के प्राधानाध्यापक/प्रभारी अध्यापक पदेन सचिव होते हैं तथा शासन के आदेशों का पालन समय-सीमा में किये जाने हेतु उनका मुख्य दायित्व होता है। जन शिक्षक का मॉनिटरिंग का दायित्व होता है। शिक्षकों का निलंबन विकासखण्ड स्त्रोत समन्वयक द्वारा प्रस्तावित किया गया था। संबंधित निलंबित कर्मचारियों को पहले कोई कारण बताओ सूचना पत्र नहीं दिया गया, इसमें आरक्षित श्रेणी के शिक्षकों को भी दंडित किया गया है। (ग) उत्तरांश '''' के परिप्रेक्ष्य में संबंधितों का निलंबन विकासखण्ड स्त्रोत समन्वयक के प्रतिवेदन के आधार पर निरस्त किया गया। प्रकरण की जाँच करवाई जा रही है एवं प्रतिवेदन प्राप्त होने पर आगामी कार्यवाही की जाएगी।

श्री संजय पाठक - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने अपने प्रश्‍न में पूछा था कि कटनी जिले में शौचालय निर्माण में विलम्‍ब के कारण बगैर कारण बताओ नोटिस जारी किये 14 शिक्षकों को निलंबित किया गया है. क्‍या उनके ऊपर शौचालय निर्माण की जवाबदारी थी ? और अगर निलंबित भी किया गया है तो उनको कोई कारण बताओ नोटिस जारी हुआ था या उनको किस प्रतिवेदन के आधार पर निलंबित किया गया था ? मैं माननीय मंत्री जी से इसका जवाब चाहता हूँ.

राज्‍यमंत्री, स्‍कूल शिक्षा (श्री दीपक जोशी) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा अगस्‍त, 2014 को 'स्‍वच्‍छ भारत अभियान' के आगाज की घोषणा की गई थी. तत्‍संबंध में, विभाग ने त्‍वरित करते हुए जून, 2015 तक हमारे सभी विद्यालयों को शौचालय शुरू करने का फैसला लिया था. जब कलेक्‍टर ने समीक्षा की तो समीक्षा के दौरान 4 दिन की रिपोर्ट आई कि प्रश्‍नांकित विद्यालयों में शौचालय की कार्यवाही आरम्‍भ नहीं की गई. कलेक्‍टर द्वारा 8 दिन की समीक्षा बैठक में वी.आर.सी. को निर्देशित किया गया कि इनके विरुद्ध कार्यवाही की जाये और वी.आर.सी. ने तत्‍संबंधी कार्यवाही की थी.

श्री संजय पाठक - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यहां पर यह जानकारी देना चाहूँगा कि जिन 14 शिक्षकों को बगैर कारण बताओ नोटिस के ही निलंबित कर दिया गया है, इनमें से किसी के भी ऊपर शौचालय निर्माण की जिम्‍मेदार एवं जवाबदारी नहीं थी. शौचालय निर्माण की जिम्‍मेदारी/जवाबदारी, जो होती है वह प्रचार की होती है या प्रभारी प्रचार की होती है या प्रभारी अ‍ध्‍यापक, जो भी हो, उसकी होती है. ये न कहीं पर प्रभारी प्रचार थे, न प्रभारी अध्‍यापक हैं. ये वहां पर केवल शिक्षक थे और इनको बलि का बकरा इसलिए बना दिया गया है कि जो प्रभारी प्रचार लोग थे, वे डायरेक्‍ट डी.पी.सी. से कनेक्‍टेड लोग हैं. कलेक्‍टर ने बोला कि जिनने विलम्‍ब किया, उन्‍हें निलंबित करो.

अध्‍यक्ष महोदय - आप सीधे प्रश्‍न करें. सब री-इन्‍सटेट हो गए हैं न सब.

श्री संजय पाठक - ठीक है. लेकिन जिनकी जवाबदारी/जिम्‍मेदारी नहीं थी. मेरा सीधा प्रश्‍न यह है कि बगैर गलती के जिन शिक्षकों को निलंबित किया गया है, ऐसे निलंबित करने वाले अधिकारी डी.पी.सी. के विरुद्ध आप क्‍या कार्यवाही करेंगे ? कितनी समय-सीमा में करेंगे ? इतना बता दीजिये.

श्री दीपक जोशी - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, निलंबित सहायक शिक्षक, तत्‍समय प्रभारी प्रधान अध्‍यापक थे एवं शाला प्रबन्‍धन समिति के पदेन सचिव थे, इस कारण से उनको निलंबित किया गया था. फिर भी माननीय सदस्‍य को संशय है तो उसकी हम जांच करा लेंगे और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्यवाही करेंगे.

श्री संजय पाठक - अध्‍यक्ष महोदय, सिर्फ समय-सीमा चाहता हूँ और यह चाहता हूँ कि कितने दिन के अन्‍दर करवा लेंगे और उसमें चूँकि पारदर्शिता चाहता हूँ. तो उस कमेटी में क्‍या मेरी उपस्थिति में जांच होगी ? समय-सीमा बताएं और यह भी बता दें कि जांच में डी.पी.सी. दोषी पाया जाता है तो उस पर तत्‍काल कार्यवाही होगी कि नहीं होगी.

श्री दीपक जोशी - अध्‍यक्ष महोदय, माननीय विधायक महोदय की जैसी भावना है. हम माननीय विधायक जी को भी कागज उपलब्‍ध करा देंगे और जांच के इस दायरे में, अगर वे स्‍वयं को सम्मिलित करना चाहते हैं तो उनको पत्र परीक्षण करने के लिए उपलब्‍ध करा देंगे.

श्री संजय पाठक - समय-सीमा बता दें. 15 दिन में.

श्री दीपक जोशी - चूँकि समय-सीमा बतलाना उचित नहीं रहेगा, शीघ्र करवा लेंगे.

 

 

 

 

 

 

प्रश्‍नकर्ता के पत्रों पर कार्यवाही

प्रश्‍न 15. ( *क्र. 2118 ) कुँवर सौरभ सिंह : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नकर्ता द्वारा माह मई, 2015 से प्रश्‍न दिनांक तक सचिव माध्‍यमिक शिक्षा मण्‍डल, भोपाल को लिखे गये पत्रों पर क्‍या कार्यवाही की गई? पत्र के माध्‍यम से चाहे गए अभिलेख उपलब्ध करावें। (ख) अभी तक उपलब्‍ध न कराने के लिए कौन उत्‍तरदायी हैं एवं उनके विरूद्ध क्‍या कार्यवाही करेंगे?

 

 

 

 

 

स्‍कूल शिक्षा मंत्री (श्री पारस चन्‍द्र जैन) -

कुँवर सौरभ सिंह - अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न एक संविदा के विषय में था, उत्‍तर आया उसके लिए धन्‍यवाद, संशोधन भी करवाया, उसके लिए पुन: धन्‍यवाद. मेरा सीधा प्रश्‍न यह है कि सेवा वृद्धि हो रही है कि नहीं हो रही है और दूसरा, वेतन 2016 तक मिल रहा है कि नहीं मिल रहा है.

श्री दीपक जोशी - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍नांकित कर्मचारी का वेतन हमने 2016 तक देने का निर्णय ले लिया है और आगामी सेवावृद्धि भी उनकी 30 सितम्‍बर, 2016 तक कर दी गई है.

कुँवर सौरभ सिंह - माननीय मंत्री जी, धन्‍यवाद.

राजनगर विधानसभा क्षेत्र में कार्यों की स्‍वीकृति

16. ( *क्र. 1630 ) कुँवर विक्रम सिंह : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 में अनुसूचित जाति, जनजाति की बस्तियों में निर्माण हेतु शासन द्वारा कितने प्रस्‍तावों को स्‍वीकृति दी गई? उनकी कितनी संख्‍या है तथा कितनी राशि व्‍यय हुई? (ख) छतरपुर जिले के कितने प्रस्‍ताव आयुक्‍त आदिवासी विकास हेतु भेजे गये? क्‍या उनकी स्‍वीकृतियां की गई? यदि हाँ, तो कब, नहीं तो क्‍यों? (ग) राजनगर विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत क्‍या आदिवासी बस्तियों में नाली निर्माण/रोड निर्माण/भवन निर्माण के प्रस्‍ताव विभाग में प्राप्‍त हुए? यदि हाँ, तो स्‍वीकृति ‍में क्‍या समस्‍या उत्‍पन्‍न हुई? शासन प्रावधानों की गाइड लाईन की प्रति उपलब्‍ध करावें।

आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) : (ख) छतरपुर जिले के 03 प्रस्‍ताव, आयुक्‍त, आदिवासी विकास को भेजे गये। जी नहीं। अनुसूचित जनजाति बस्‍ती विकास योजना मद अंतर्गत प्रावधानित राशि की 80 प्रतिशत राशि जिलों को अनुसूचित जनजाति की जनसंख्‍या के मान से आवंटित किये जाने के कारण जिले से प्राप्‍त प्रस्‍ताव जिले को प्राप्‍त आवंटन अंतर्गत नियमानुसार स्‍वीकृति हेतु मूलत: जिले को भेजे गये। (ग) जिला स्‍तर पर प्राप्‍त हुए हैं। 01 कार्य की स्‍वीकृति प्रदान की गयी है। शेष के प्राक्‍कलन एवं तकनीकी स्‍वीकृति अपेक्षित होने से स्‍वीकृति की कार्यवाही नहीं हो सकी है। शासन प्रावधानों की गाईड लाईन की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है।

कुँवर विक्रम सिंह -- अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं कि प्रश्नांश () के उत्तर के अनुसार जो जिले से प्रस्ताव भेजे गये हैं, क्या उन्हें इस वर्ष के आवंटन में स्वीकृति प्रदान की जायेगी.

श्री ज्ञान सिंह -- अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्य को आश्वस्त करना चाहूंगा कि स्वीकृतियां मिल जायेंगी.

कुँवर विक्रम सिंह -- अध्यक्ष महोदय, प्रश्नांश () के संबंध में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत, राजनगर ने फरवरी,2016 को प्राक्कलन सहित प्रस्ताव जनसंख्या प्रमाणित कर संयोजक, आदिम जाति कल्याण विभाग, छतरपुर को भेजे हैं, उनकी स्वीकृति की जायेगी कि नहीं.

श्री ज्ञान सिंह -- अध्यक्ष महोदय, उत्तर में तो स्पष्ट है, लेकिन मैं माननीय सदस्य के ध्यान में लाना चाहूंगा कि आदिवासी बस्ती विकास मद से 25 लाख 57 हजार, अनुसूचित जाति बस्ती विकास मद से 1 करोड़ 66 लाख स्वीकृत हुए हैं, जो आपके विधानसभा क्षेत्र में भी हैं और जिनका आप जिक्र कर रहे हैं, माननीय सदस्य की भावनाओं का आदर करते हुए हैं, जो प्रस्ताव आये हैं, उनकी स्वीकृति दी जायेगी.

कुँवर विक्रम सिंह -- मंत्री जी, धन्यवाद.

अल्‍पसंख्‍यक शैक्षणिक संस्थाओं को जारी प्रमाण पत्र

17. ( *क्र. 4997 ) श्री आरिफ अकील : क्या श्रम मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या राज्‍य शासन द्वारा माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय के निर्देशानुसार संस्‍थाओं को अल्‍पसंख्‍यक दर्जा प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं? यदि हाँ, तो किन मूलभूत नियम एवं आधारों पर प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं और भोपाल संभाग में वर्ष 2014 से प्रश्‍न दिनांक तक में कितने अल्‍पसंख्‍यक दर्जा प्रमाण पत्र जारी किए गए, कितने प्रकरण/प्रस्‍ताव वर्तमान में लंबित हैं? (ख) क्‍या अल्‍पसंख्‍यक दर्जा प्राप्‍त शैक्षणिक संस्‍थाओं में अल्‍पसंख्‍यक समुदाय के बच्‍चों को अन्‍य समुदायों से अधिक प्रतिशत में प्रवेश दिये जा रहे हैं? यदि नहीं, तो वर्ष 2012 से प्रश्‍न दिनांक की स्थिति में भोपाल जिला अंतर्गत वर्षवार अल्‍पसंख्‍यक समुदाय व अन्‍य समुदायों के छात्रों की संख्‍या बतावें? (ग) प्रश्‍नांश (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में राज्‍य शासन एवं नेशनल कमिशन फॉर मायनोरिटी एज्‍यूकेशन इंस्‍टीट्यूशन भारत सरकार के दिशा निर्देशानुसार यथोचित संख्‍या में अल्‍पसंख्‍यक समुदाय के बच्‍चों को जिन संस्‍थाओं/स्‍कूलों में प्रवेश नहीं दिया, उनकी मान्‍यता समाप्‍त कर वैधानिक कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों कारण सहित बतावें?

श्रम मंत्री ( श्री अंतरसिंह आर्य ) : (क) जी हाँ। अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थाओं को मान्यता एवं अल्पसंख्यक प्रमाण-पत्र देने के लिए मार्गदर्शी सिद्धांत एवं प्रक्रिया 2007 यथा संशोधित 2015 के आधार पर आवेदक संस्थाओं के आवेदनों का निराकरण किया जाता है, नियम की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। भोपाल संभाग में वर्ष 2014 से आज दिनांक तक 10 अल्‍पसंख्यक शैक्षणिक संस्थाओं को प्रमाण-पत्र जारी किये गये। 07 आवेदन प्रक्रियाधीन हैं। (ख) जी नहीं। अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थाओं को मान्यता एवं अल्पसंख्यक प्रमाण-पत्र देने के लिये मार्गदर्शी सिद्धान्त् एवं प्रक्रिया 2007 संशोधित 2015 में अल्प‍संख्यक दर्जा प्राप्त शैक्षणिक संस्था में अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को अन्य समुदायों से अधिक प्रतिशत में प्रवेश दिये जाने का कोई बंधन नहीं है, उक्‍त मार्गदर्शी सिद्धांत की कण्डिका 19.12 में अल्पसंख्यक समुदायों के आवेदकों को प्रवेश में प्राथमिकता देने का प्रावधान है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) प्रश्नांश भाग के उत्तर के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

श्री आरिफ अकील -- अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि जिन संस्थाओं को मान्यता दी गयी है, क्या वह केन्द्र सरकार के निर्देशानुसार हैं और जिन पर भ्रष्टाचार का मामला चल रहा था, उन संस्थाओं को मान्यता दी गई है, तो उनकी क्या मान्यता समाप्त करेंगे. एक बात इसी में और है कि जिनको अनुदान दिया गया है, उन संस्थाओं में अल्पसंख्यक समुदाय के जितने छात्रों को होना चाहिये था, क्या उनमें उतने छात्र हैं और अगर नियमानुसार नहीं हैं, तो क्या उनका अनुदान समाप्त करके उनके विरुद्ध कार्यवाही करेंगे.

श्री अंतर सिंह आर्य -- अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी का प्रश्न अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थाओं को मान्यता से संबंधित है. अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थाओं को मान्यता एवं अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्था का मान्यता प्रमाण पत्र प्रदाय किये जाने हेतु राज्य शासन द्वारा मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार तथा राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्था आयोग अधिनियम,2004 सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देश से ..

श्री आरिफ अकील -- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न आपने सुना है. मैंने सीधा पूछा है कि केन्द्र सरकार के जो निर्देश हैं, उसके अनुसार मान्यता दी है.

अध्यक्ष महोदय -- आप उनकी सुन लें.

श्री आरिफ अकील -- अध्यक्ष महोदय, लम्बा हो जायेगा, फिर आप बाद में मुझे प्रश्न पूछने नहीं देंगे.

अध्यक्ष महोदय -- नहीं पूछने देंगे. सुन लें उनकी. वह निर्देशानुसार ही बता रहे हैं, पर वह उसकी डिटेल दे रहे हैं.

श्री अंतर सिंह आर्य -- अध्यक्ष महोदय, मैं आपको थोड़ा बता रहा हूं. मान्यता अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र देने के लिये मागर्दर्शी सिद्धांत प्रक्रिया 2007 संशोधित 2015 प्रभावशील है. मैं विधायक जी को बताना चाहूंगा कि यदि कोई इस प्रकार से अनियमितता हुई है, तो आप लिखित में दे दें, जरुर उसकी हम जांच करेंगे.

श्री आरिफ अकील -- अध्यक्ष महोदय, हमने पूछा कुछ, मंत्री जी ने जवाब कुछ दिया है. हम आपके माध्यम से पूछना चाहते हैं कि जिन संस्थाओं को अनुदान दिया गया है, उस समिति में ऐसे भ्रष्ट प्रवृत्ति के लोग थे, जिनके विरुद्ध ईओडब्ल्यू और आपके विभाग में कार्यवाही चल रही है. उनको उस समिति में रख करके उनको अनुदान दिलवाया गया और पिछड़ा वर्ग अल्पसंख्यक के आयुक्त जब अवकाश पर थे, तो अपर आयुक्त के माध्यम से इस काम को कराया गया, ताकि इसमें और लम्बा चौड़ा भ्रष्टाचार हो सके. क्या इसकी जांच करायेंगे कि उनके अवकाश होने के समय में, अवकाश पर जाने के बाद ही उसमें उनको नजर अंदाज करके क्यों ऐसे अपर आयुक्त ने इस काम को किया, क्या इसकी जांच करायेंगे. दो सवाल के बारे में बता दें, फिर मैं तीसरा अंतिम सवाल और पूछूंगा.

श्री अंतरसिंह आर्य--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय विधायक जी को आश्वस्त करता हूं कि इसकी हम जांच करा लेंगे.

श्री आरिफ अकील-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जॉच करायेंगे ? मामला नॉलेज में है. EOW में कैस चल रहा है. 15-20 प्रेम पत्र तो मेरे भी मंत्री जी के पास में होंगे उनके भ्रष्टाचार के मामले के जो मैंने उनको दिये हैं. अदालतों में कैस चल रहा है लेकिन पता नहीं आप उनसे क्यों मोहब्बत करते हो कि उनके खिलाफ कार्यवाही भी करने को आप तैयार नहीं होते हो.(XXX)

श्री अंतरसिंह आर्य--ऐसी कोई मोहब्बत नहीं है.गलत किया होगा तो उसकी हम जॉंच करवायेंगे.

श्री आरिफ अकील-- विभाग में जांच चल रही है. मामूली पैसों में जमीनें बेच दी, उनके खिलाफ जांच चल रही है (XXX).

अध्यक्ष महोदय-- उसको कार्यवाही से निकाल दीजिये.

श्री आरिफ अकील-- सर इसमें क्या असंसदीय हो गया.

गृह मंत्री(श्री बाबूलाल गौर) -- अध्यक्ष महोदय, आप बताईये. आरिफ भाई प्रेम पत्र और भ्रष्टाचार का क्या संबंध है और मोहब्बत.

श्री आरिफ अकील -- गौर साहब..जो प्रेम से भ्रष्टाचार करता है.

श्री अंतरसिंह आर्य-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जो जांच की मांग की है उसकी हम जांच करवा लेंगे.

श्री आरिफ अकील-- अंतिम सवाल. अनुदान प्राप्त संस्थाओं में अल्पसंख्यक समुदाय के कम बच्चों के आने की शिकायत के आधार पर आयोग के द्वारा किन किन संस्थाओं को नोटिस जारी किये गये हैं, क्या उसको भी जांच में शामिल करेंगे.

श्री अंतरसिंह आर्य -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जो जांच मांगी है उसकी भी हम जांच करा लेंगे.

श्री आरिफ अकील-- धन्यवाद.

 

 

जिला खरगोन अंतर्गत निर्माण/मरम्‍मत कार्य

18. ( *क्र. 3163 ) श्री सचिन यादव : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला खरगोन में शिक्षा विभाग द्वारा वित्‍तीय वर्ष 2013-14 से प्रश्‍न दिनांक तक छात्रावासों, आश्रमों, प्राथमिक, माध्‍यमिक, हाईस्‍कूल, हायर सेकेण्‍ड्री स्‍कूलों के मरम्‍मत कार्य, फर्शीकरण, बाउण्‍ड्रीवाल, अतिरिक्‍त कक्ष, मूत्रालय, शौचालय तथा अन्‍य कार्यों के लिये कितनी राशि प्राप्‍त हुई? (ख) उक्‍त राशि में से कौन-कौन से निर्माण कार्य कहाँ-कहाँ कराए गए? क्‍या उक्‍त कार्यों का प्राक्‍कलन सत्‍यापन एवं कार्य की आवश्‍यकतानुसार ही कार्य स्‍वीकृत किए गए और कार्य की पूर्णता के आधार पर ही मापांक कराया गया? (ग) क्‍या प्रश्‍नांश (क) में दर्शित कार्यों की भुगतान प्रक्रिया पूर्ण कर दी गई है? यदि हाँ, तो किस प्रकार की गई है? उक्‍त निर्माण कार्यों के संबंध में क्‍या कोई शिकायत प्राप्‍त हुई है? यदि हाँ, तो प्रश्‍न दिनांक तक किस प्रकार की कार्यवाही की गई? शिकायतवार जानकारी दें। (घ) प्रश्‍नांश (क) अनुसार कसरावद विधानसभा क्षेत्रांतर्गत कितनी-कितनी राशि के कितने-कितने कार्य कहाँ-कहाँ कराये गये एवं प्रश्‍न दिनांक तक कौन-कौन से कार्य शेष हैं? शेष के क्‍या कारण हैं और इन कार्यों को कब तक पूर्ण कर दिया जायेगा? प्रश्‍नांश (ख) एवं (ग) अनुसार भी कोई कार्यवाही की गई है, तो उसकी अद्यतन स्थिति की जानकारी से अवगत करावें?

राज्य मंत्री, स्कूल शिक्षा (श्री दीपक जोशी):-

 

 

श्री सचिन यादव-- माननीय अध्यक्ष महोदय,मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि मेरे विधानसभा में ऐसे कई विद्यालय हैं जहां पर वाउन्ड्रीवाल नहीं है, ऐसे कई विद्यालय हैं जहां पर भवनों की आवश्यकता है और बाकी सारी चीजों की भी आवश्यकता है. क्या माननीय मंत्री जी उन सारी चीजों को एक बार परीक्षण करवा करके क्या आने वाले समय में उन कार्यों को पूर्ण करने का आश्वासन देंगे ?

श्री दीपक जोशी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य को हमने सारी जानकारी उपलब्ध करा दी है लेकिन फिर भी उनका एक स्पेसिफिक पत्र रेगांव हाईस्कूल के लिये आया था हमने इस साल की योजना में उसको सम्मलित करने का पूरा पूरा प्रयास किया है और हम माननीय सदस्य को आश्वस्त करते हैं कि हाई स्कूल रेगांव के लिये भवन उपलब्ध करायेंगे.

श्री सचिन यादव- इसके लिये मंत्री जी को बहुत बहुत धन्यवाद. मंत्री जी एक निवेदन यह भी करना चाहता हूं कि हम जब क्षेत्र में दौरा करते हैं तो स्कूल में वाउन्ड्रीवाल के निर्माण की बात लगातार सामने आती है. मंत्री जी इस मांग को भी पूरा करने का आश्वासन सदन में देने का कष्ट करें.

श्री दीपक जोशी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, बजट की उपलब्धता के आधार पर हम वाउन्ड्रीवाल का निर्माण कराते हैं. यदि संभव हुआ तो वाउन्ड्रीवाल का निर्माण कर देंगे.

श्री सचिन यादव-- बहुत बहुत धन्यवाद.

पेयजल संकट के निदान हेतु तैयार कार्ययोजना

19. ( *क्र. 3962 ) श्री सुन्‍दरलाल तिवारी : क्या पशुपालन मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या म.प्र. सरकार द्वारा रीवा जिले को पूर्ण रूप से सूखाग्रस्‍त घोषित किया गया है? (ख) यदि हाँ, तो शासन द्वारा इस स्थिति से निपटने के लिए क्‍या कार्ययोजना तैयार की है, का पूर्ण विवरण देते हुये बतावें कि नये हैण्‍डपम्‍प खनन, हैण्‍डपंपों हेतु राइजर पाइपों की खरीदी, बंद नल जल योजनाओं के संचालन सहित अन्‍य कार्यों हेतु कितनी राशि व्‍यय करने की कार्ययोजना सरकार की है? (ग) प्रश्‍नांश (ख) के संदर्भ में सरकार द्वारा पेयजल संकट से निपटने के लिये कार्य योजना तैयार की है, तो उसका क्रियान्‍वयन कब तक किया जाकर मौके पर दिखाई देने लगेगा? अगर कार्य योजना तैयार नहीं की गयी है, तो कब तक तैयार कर कार्यरूप में परि‍णीत किया जावेगा? अगर नहीं, तो क्‍यों?

पशुपालन मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) जी हाँ। (ख) जानकारी संलग्न परिशिष्ट के अनुसार है। (ग) पेयजल संकट निवारण हेतु बनाई गई आकस्मिक कार्य योजना में दर्शाये गये कार्य आवश्यकतानुसार करवाये जा रहे हैं। शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''पाँच''

श्री बाबूलाल गौर-- सुंदरलाल जी तिवारी प्रश्न पूछ रहे हैं बड़ा आश्चर्य हो रहा है. यह तो प्रश्नों के अंदर गड़बड़ी ज्यादा पैदा करते हैं. (हंसी)

अध्यक्ष महोदय-- अब उनको पूछ लेने दें.

श्री घनश्याम पिरौनिया --अध्यक्ष महोदय, यह तो बिना कहे खड़े हो जाते थे.

अध्यक्ष महोदय-- माननीय तिवारी जी आप तो अपना प्रश्न करें.

श्री सुंदरलाल तिवारी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, रीवा जिला मध्यप्रदेश सरकार के द्वारा सूखाग्रस्त जिला घोषित किया गया है. वहां पर पेयजल की स्थिति बहुत दयनीय है. वैसे भी पूरे मध्यप्रदेश की पेयजल की स्थिति बहुत खराब .यह तथ्य पत्रक संदर्भ सेवा द्वारा संकलित यह विधानसभा के द्वारा तैयार किया गया है. जिसमें हमारी मध्यप्रदेश की स्थिति यह है कि केन्द्र सरकार 30%की उम्मीद करती है कि शुद्ध पेयजल दिया जाये. इसमें गुजरात 55 % पर है, महाराष्ट्र 50% पर है...

अध्यक्ष महोदय-- आप प्रश्न करें.

श्री सुंदरलाल तिवारी-- प्रश्न में ही आ रहे हैं.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले-- यह तो भाषण दे रहे हैं.

श्री सुंदरलाल तिवारी-- मैं भाषण नहीं कर रहा हूं.

अध्यक्ष महोदय-- यह प्रश्न में कहां है ?

श्री सुंदरलाल तिवारी-- जब हालत खराब है तो जो राशि आप दे रही हैं उस राशि से क्या होगा यह मेरा कहना है.

अध्‍यक्ष महोदय-- माननीय सदस्‍य प्रश्‍न इसलिये पूछते हैं कि उनका निराकरण हो, इससे कोई निराकरण नहीं होगा, आप तो अपना सीधा प्रश्‍न पूछें.

श्री सुंदरलाल तिवारी-- मेरा कहना यह है कि जो योजना इन्‍होंने बनाई है, जो राशि दर्शाई है, वह ऊंट के मुंह में जीरा है, इसलिये यह स्थिति मैं स्‍पष्‍ट कर रहा हूं.

अध्‍यक्ष महोदय-- स्‍पष्‍ट मत करिये. आप तो सीधे पूछिये न.

श्री सुंदरलाल तिवारी-- तो मेरा कहना यह है हमारी स्थिति यह है कि गुजरात 55 प्रतिशत, महाराष्‍ट्र 50 और मध्‍यप्रदेश 9.9 प्रतिशत पर है.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले (पशुपालन मंत्री)-- अध्‍यक्ष महोदय यह हो क्‍या रहा है.

अध्‍यक्ष महोदय-- आपका प्रश्‍न क्‍या है.

श्री सुंदरलाल तिवारी-- हमारा प्रश्‍न यह है कि जब पहले से हालत खराब है और जो स्थिति इन्‍होंने बताई है...

अध्‍यक्ष महोदय-- आप प्रश्‍न करें और भी सदस्‍यों के प्रश्‍न हैं, भाषण नहीं. आप तो यह बतायें कि इसके निराकरण के लिये आप क्‍या चाहते हैं.

श्री सुंदरलाल तिवारी-- निराकरण के लिये जो जानकारी दी गई है वह जानकारी पूर्णत: अपर्याप्‍त है और रीवा जिले का जलसंकट उससे दूर होने वाला नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय-- तो आप जानकारी लो न, उनसे पूछो न.

श्री सुंदरलाल तिवारी-- मेरा यह कहना है कि आपने यह लिखा है कि बंद नल योजनाओं का संचालन, मेरा पूरा दावा है, अध्‍यक्ष महोदय कि 90 प्रतिशत नल जल योजनायें रीवा जिले की बंद हैं और मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि मेरा विधानसभा क्षेत्र गुड़ है. आप इन योजनाओं को कब तक शुरू कर देंगे, यह मेरा आपसे निवेदन है, घोर जल संकट वहां पर है.

अध्‍यक्ष महोदय-- बैठ जाइये, उत्‍तर तो आने दीजिये.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो पुरानी नल जल योजनायें हैं वह ग्रामीण विकास के अंतर्गत हैं, ग्रामीण पंचायत विभाग हमको आदेश देगा और बजट उपलब्‍ध करायेगा तो हक तत्‍काल सुधरवा देंगे.

श्री सुंदरलाल तिवारी-- अध्‍यक्ष महोदय, माननीया मंत्री जी के जवाब से यह स्‍पष्‍ट हो गया है कि इनके पास वित्‍तीय संकट है, अब सवाल मेरा यह है कि रीवा जिले के रहवासियों को जल कैसे मिलेगा क्‍या यह सरकार की चिंता का विषय नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय-- नहीं आप प्रश्‍न तो पूछिये.

श्री सुंदरलाल तिवारी-- प्रश्‍न तो मेरा यही है.

अध्‍यक्ष महोदय-- जल कैसे मिलेगा, पूछ रहे हैं.

श्री सुंदरलाल तिवारी-- आपका कहना यह है कि जब हमको पंचायत बजट देगी, आप यह कहिये कि हमारे पास बजट ही नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप उत्‍तर तो लें. .... (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय-- विभागीय मंत्री.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ग्रामीण विकास विभाग हमें पैसा दे रहा है और हम उन नल जल योजनाओं को सुधारेंगे.

श्री सुंदरलाल तिवारी-- अध्‍यक्ष महोदय मेरा यह निवेदन है कि यह नल जल योजनायें कब तक शुरू हो जायेंगी, इतना ही मेरा निवेदन है.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले-- अभी मार्च का म‍हीना है, अभी गर्मी शुरू नहीं हुई, गर्मी शुरू होने के पहले हम सुधरवा देंगे.

श्री रामनिवास रावत-- यह चिंता प्रदेश के लगभग सभी सदस्‍यों की है, जैसा कि कहा दोनों पंचायत मंत्री भी बैठे हैं और पीएचई मंत्री भी बैठे हैं, आप आपस में इसका संधारण दोनों अपने हाथ में ले लें तो ज्‍यादा अच्‍छा है, नहीं तो ऐसे तो प्रश्‍न होते रहेंगे.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले-- हममें आपसी सहमति है, आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है. हम सारी नल जल योजनायें सुधरवा देंगे.

श्री रामनिवास रावत-- माननीय मंत्री जी 90 प्रतिशत मेरे यहां भी खराब है.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री गोपाल भार्गव)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 100 करोड़ रूपये पंचायत विभाग की तरफ से पीएचई में ट्रांसफर कर दिये गये हैं, बिजली के बिल के 50 करोड़ रूपये उसके तीनों कंपनी में जमा करा दिये गये और हमने जो 14वे वित्‍त आयोग की राशि की उसमें हमने प्राथमिकता से उनके लिये निर्देशित किया, हर ग्राम पंचायत में 5-6 लाख रूपये भेजे हैं, अब मैं समझता नहीं हूं कि कोई समस्‍या है.

श्री रामनिवास रावत-- संधारण कौन के पास है.

अध्‍यक्ष महोदय-- रावत जी उनका प्रश्‍न आने दें.

 

शालाओं में शिक्षकों का युक्तियुक्‍तकरण

20. ( *क्र. 40 ) श्री वेलसिंह भूरिया : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधान सभा क्षेत्र सरदारपुर जिला धार के विभिन्‍न शालाओं में प्राचार्य, संविदा वर्ग 1, 2 एवं 3 तथा अध्‍यापकों के कितने पद कब से रिक्‍त हैं? (ख) उक्‍त पदों को भरने के लिए क्‍या कार्यवाही की जा रही है तथा कब तक रिक्‍त पदों की पूर्ति कर दी जायेगी? (ग) क्‍या शासन यह सुनिश्चित करेगा कि युक्तियुक्‍तकरण के अनुसार शिक्षकों को शालाओं में पदस्‍थ किया जाये, जिससे छात्रों के अध्‍ययन के कार्य में व्‍यवधान न हो?

आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) प्राचार्यों के रिक्‍त पदों की पूर्ति पदोन्‍नति द्वारा किये जाने की कार्यवाही प्रचलन में है। संविदा वर्ग 1, 2 एवं 3 के पदों की पूर्ति प्रोफेशनल एक्‍जामिनेशन बोर्ड द्वारा आयोजित परीक्षा के माध्‍यम से की जावेगी। समय-सीमा बताना संभव नहीं है। (ग) जी हाँ। 15 शैक्षणिक संस्‍थाओं में 30 मई, 2015 में युक्तियुक्‍तकरण किया जाकर पदपूर्ति की कार्यवाही की गई है।

श्री वेलसिंह भूरिया-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह तिवारी जी और रावत जी हमेशा मुझे डिस्‍टर्व करते हैं, मेरा प्रश्‍न यह है कि माननीय मंत्री जी से मैं यह पूछना चाहता हूं कि जो रिक्‍त पद पड़े हैं प्राचार्य के उनको कब तक भर दिये जायेंगे.

श्री ज्ञान सिंह (आदिम जाति कलयाण मंत्री)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय जी, विभाग में पदों की कमियां उनकी पूर्ति के लिये विभाग की ओर से प्रयास जारी हैं, माननीय न्‍यायालय में हमारे प्रदेश के अभ्‍यार्थी अपील किये थे, इस कारण से देरी हुई है, वह अपील उनकी वापसी हो गई है, अध्‍यक्ष महोदय जी मैं आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍य को आश्‍वस्‍त करना चाहूंगा कि जुलाई सत्र के पहले जो पदों की कमी है वह पूर्ति हो जायेगी.

अध्‍यक्ष महोदय-- प्रश्‍नकाल समाप्‍त.

श्री वेलसिंह भूरिया-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय ....

अध्‍यक्ष महोदय-- वेलसिंह जी प्रश्‍न काल समाप्‍त हो गया, आपको अनुमति दूसरे सदस्‍यों को बिठाकर दी है, आप भी सहयोग करिये, यह बात ठीक नहीं है.

 

प्रश्‍नकाल समाप्‍त.

शून्यकाल में उल्लेख

 

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, हमने कल स्थगन दिया था कि बारहवीं की परीक्षा में 5 तारीख को सामान्य हिन्दी के पेपर में जातिगत आधार पर आरक्षण देश के लिए घातक विषय पर निबंध लिखने का प्रश्न आया था. स्थगन प्रस्ताव दिये 24 घंटे हो गये हैं. शासन का उत्तर आ जाना चाहिए. मेरा निवेदन है कि इस पर चर्चा करा लें.

संसदीय कार्यमंत्री(डॉ नरोत्तम मिश्र)--अध्यक्षजी, मैं जवाब दे रहा हूं.

अध्यक्ष महोदय-- ( श्री रामनिवास रावत सदस्य के कहे जाने पर)आपने जो कहा अब उनकी भी सुन लें.

डॉ नरोत्तम मिश्र--अध्यक्ष महोदय, प्रश्न पत्र की सेटर थी वंदना व्यास, उन पर कार्रवाई कर दी है. श्री संतोष स्वर्णकार, मॉडरेटर थे, उनको निलंबित कर दिया गया. उस प्रश्न को शून्य कर दिया गया. इस तरह की जितनी कार्रवाई हो सकती थी, सारी की सारी कार्रवाई कर दी गई.

श्री रामनिवास रावत--अध्यक्ष महोदय, यह स्थगन क्यों ग्राह्य किया जाना चाहिए. कई ऐसे विषय हैं. यदि ग्राह्य नहीं किये गये या ग्राह्यता पर चर्चा नहीं की गई तो छूट जायेंगे. मेरा निवेदन है कि ग्राह्यता पर ही चर्चा करा लें.

उच्च शिक्षा मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्ता)--अध्यक्ष महोदय, आप और हम सब यह जानते हैं कि प्रश्न पत्र बहुत गोपनीय होते हैं. प्रश्न पत्र जो बनाता है और जो मॉडरेटर है, उसके अलावा तीसरे को पता नहीं होता है. उसके बाद भी विषय आया है, उसमें जबरन का इश्यू बनाया जा रहा है. इसमें चर्चा का सवाल ही नहीं है.(व्यवधान)

श्री रामनिवास रावत--यह आपकी सोच और मानसिकता को प्रदर्शित करता है. आपको चर्चा कराने में क्या दिक्कत है.(व्यवधान)

श्री उमाशंकर गुप्ता-- आप सुनिये तो. दोनों के खिलाफ कार्रवाई कर दी गई है. शासन की कोई मंशा नहीं है. प्रश्न पत्र आपके समय देख कर बनाये जाते होंगे. (व्यवधान)

डॉ नरोत्तम मिश्र-- वे विषय की गंभीरता बता रहे हैं. विवाद वाली कोई बात ही नहीं है.

श्री उमाशंकर गुप्ता-- जिसने प्रश्न पत्र गलत बनाया उसके खिलाफ कार्रवाई कर दी गई.

श्री सत्यप्रकाश सखवार--अध्यक्ष महोदय, यह कोई कार्रवाई नहीं है. ऐसे व्यक्ति को बर्खास्त करना चाहिए.

श्री उमाशंकर गुप्ता--आप सुनिये तो. आप क्यों नहीं सुनना चाहते.

श्री रामनिवास रावत--अध्यक्ष महोदय, माननीय संसदीय कार्यमंत्रीजी ने जो उत्तर दिया, उसमें एक बहुत बड़ा प्रश्न उद्भूत हो गया है कि आपने उस निबंध लेखन को निरस्त कर दिया. उनके अंक भी नहीं जुडेंगे.

अध्यक्ष महोदय-- इस पर बहस नहीं हो रही है.

श्री रामनिवास रावत--अध्यक्षजी, बहस इसलिए है कि बेचारे उन बच्चों को जो किसी भी वर्ग के हों, उन्होंने लिखा, उनका क्या दोष. उनको कौन से अंक जोडोगे.

श्री उमाशंकर गुप्ता--जब उस प्रश्न को ही हटा दिया गया. न वेल्यूएशन में होगा, न टोटल नंबर में होगा, न जांच में होगा तो क्या अंतर पड़ेगा वकील साहब.

डॉ नरोत्तम मिश्र-- उस प्रश्न को शून्य घोषित किया है.

श्री रामनिवास रावत-- पूरा प्रश्न शून्य घोषित किया है?

श्री उमाशंकर गुप्ता-- हां शून्य घोषित किया है.

श्री रामनिवास रावत-- क्या 90 नंबर को टोटल माना जायेगा?

श्री उमाशंकर गुप्ता-- हां हां.

श्री रामनिवास रावत-- 100 नंबर का प्रश्न पत्र नहीं जंचेगा. 100/ प्राप्तांक नहीं होंगे?

श्री उमाशंकर गुप्ता-- आपको जरा देर से समझ में आती है.

श्री रामनिवास रावत-- मैं तो बहुत समझता हूं. आप लोग आरक्षण को समाप्त नहीं कर सकते.(व्यवधान)आप अनुसूचित जाति,जनजाति के वर्गों को दबा नहीं सकते.(व्यवधान)

डॉ नरोत्तम मिश्र-- अध्यक्ष महोदय, टोटल 90 नंबर का ही प्रश्न पत्र है.(व्यवधान) जैसा आपने कहा वैसा ही है. टोटल 90 नंबर का ही है.

श्री रामेश्वर शर्मा--अध्यक्ष जी, आरक्षण कभी खत्म नहीं होगा. यह प्रदेश के मुखिया की घोषणा है. प्रधानमंत्रीजी की घोषणा है. आरक्षण तो कांग्रेस खत्म कराना चाहती है.(व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--आप लोग बैठ जायें.

श्री सुन्दरलाल तिवारी - अध्यक्ष महोदय, एक छोटा-सा हमारा सवाल है.

अध्यक्ष महोदय - (कई माननीय सदस्यों के एक साथ खड़े होकर बोलने पर) आप लोग बैठ जाएं.

श्री रामेश्वर शर्मा - अध्यक्ष महोदय, हम कांग्रेस के मनसूबों को कभी पूरा नहीं होने देंगे, आरक्षण कभी खत्म नहीं होगा, नहीं होगा, यह हमारी घोषणा है, हमारे मुख्यमंत्री की घोषणा है. हमारे प्रधानमंत्री की घोषणा है.(व्यवधान)..

श्री रामनिवास रावत - मोहन भागवत को अपना संविधान मानते हो. आपको संविधान में भरोसा नहीं है.

संसदीय कार्यमंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र) - (व्यवधान)..राहुल गांधी केन्द्र में बैठे हैं, उसके देश द्रोह के मामले से आप सहमत हैं या नहीं हैं? (व्यवधान)..जो देश द्रोह का केस लगा है, उससे कांग्रेस सहमत है या नहीं है? (व्यवधान)..जो देश द्रोह का केस लगा है उससे कांग्रेस नाराज है, आहत है.

श्री रामनिवास रावत - ..तभी तो यह बात आई है. हमें आपसे नहीं लेना राष्ट्रभक्ति का पाठ, आपके सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है. तुम लोगों ने क्या क्या कहा है, तुम किनके वंशज हो. सबको मालूम है.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -(व्यवधान).. देश द्रोहियों से आप सहमत हो या नहीं हो?

अध्यक्ष महोदय - आप लोग कृपया बैठ जाएं. रावत जी, कृपया बैठ जाइए. आप लोग भी कृपया बैठ जाइए.

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, यह क्या सत्ता पक्ष का व्यवहार है?

श्री लाखन सिंह यादव - यह इस तरह का कौन-सा व्यवहार है?

अध्यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी, आप बैठ जाइए.

श्री रामनिवास रावत - आप पूरी शैक्षणिक व्यवस्था में परिवर्तन करना चाहते हो.(व्यवधान). आप शिक्षा का भगवाकरण करना चाहते हो.

श्री सुन्दरलाल तिवारी - (व्यवधान)..(XXX)... (यह कहते हुए माननीय सदस्य, श्री सुन्दरलाल तिवारी अपने आसन से हटकर गर्भ गृह की ओर आकर बोलने लगे.)

अध्यक्ष महोदय - आप लोग भी कृपया बैठ जाइए. तिवारी जी आप भी बैठ जाइए. तिवारी जी को तो बैठा दीजिए, हम सबको बैठाल देंगे. यह नहीं चलेगा, यह कार्यवाही से निकाल दीजिए.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -राहुल गांधी के देश द्रोह के मामले से आप सहमत हैं या नहीं हैं? अफजल गुरु के मामले पर आप सहमत हैं कि नहीं हैं?

श्री रामनिवास रावत - किसी के व्यक्तिगत विचारों पर कोई बात नहीं होती. मोहन भागवत के बयान से तुम सहमत हो. आज वह (व्यवधान)..बाहर आ गया, रोहित की हत्या करवा रहे हो (व्यवधान)..

डॉ. नरोत्तम मिश्र - (व्यवधान)..कांग्रेस जरा इस बात को बताए, देश द्रोह के मामले से आप सहमत है कि नहीं हैं? (व्यवधान)..ये देश द्रोहियों से आप सहमत हैं कि नहीं हैं? देश द्रोहियों से आप सहमत है या नहीं हैं? (व्यवधान)..

श्री रामनिवास रावत - जो व्यक्ति यहां का सदस्य नहीं है. जो व्यक्ति यहां पर जवाब नहीं दे सकता, उनके बारे में आप यहां पर बोल रहे हो. (व्यवधान).. आपके प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है.

डॉ. नरोत्तम मिश्र - आंतकवादियों के समर्थकों, आंतकवाद का आप लोग समर्थन करते हो (व्यवधान)...मोहन भागवत.. (व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय - मेरा माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया शून्यकाल हो जाने दें.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -...राष्ट्रभक्त के ऊपर उंगली उठाते हो. देश द्रोहियों राष्ट्र भक्तों के ऊपर ऊंगली उठाते हो.

अध्यक्ष महोदय - शून्यकाल और ध्यानाकर्षण हो जाने दें.

(व्यवधान)..

डॉ. नरोत्तम मिश्र - देश द्रोह करने वाले राष्ट्र भक्तों पर ऊंगली उठाएंगे?

अध्यक्ष महोदय - मंत्री जी, बैठ जाएं. तिवारी जी आप अपनी जगह पर बैठें. तिवारी जी अखबार रख लें पास में.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -(व्यवधान)..राष्ट्र भक्त है, राष्ट्र भक्त. आप राष्ट्र द्रोही लोगों की पार्टी से हो. आपके उपाध्यक्ष पर देश द्रोह का मुकदमा चल रहा है.

अध्यक्ष महोदय - तिवारी जी अखबार पास में रख लें.

डॉ. नरोत्तम मिश्र - मोहन भागवत देश भक्त हैं, आप लोग देश द्रोही लोगों की पार्टी से हो.

अध्यक्ष महोदय - कृपा करके सब अपने अपने स्थान पर बैठ जाएं. मंत्री जी, माननीय सदस्यगण बैठ जाएं. आप लोग भी कृपया बैठ जाएं. कृपया शून्यकाल होने दें. तिवारी जी आप बैठें तो, जितू पटवारी जी कृपया बैठें. लाखन सिंह जी कृपया बैठें.

डॉ. नरोत्तम मिश्र - देशद्रोहियों, राष्ट्र भक्त के ऊपर ऊंगली उठाते हैं. देश द्रोही पार्टी के लोग जिनके उपाध्यक्ष पर देश द्रोह का केस चल रहा है. देश द्रोह का मामला चल रहा है, ये अफजल गुरु का समर्थन करते हैं.

श्री रामनिवास रावत - देश द्रोही तुम हो, तुमसे सर्टिफिकेट, प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है. (व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय - सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित.

 

(11.38 बजे सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित की गई.)

 

समय 11.52 बजे.

{ अध्यक्ष महोदय ( डॉ. सीतासरन शर्मा ) पीठासीन हुए }

 

अध्यक्ष महोदय -- आप सभी लोग बैठ जायें. श्री रावत जी बोलें. आपकी बात आ गई है और आपकी भी आ गई है और आप सभी मेरी बात सुन लें...( श्री सुन्दरलाल तिवारी जी के बोलने के लिए खड़े होने पर ) तिवारी जी सदन चलने देना है या नहीं. रावत जी को कहा है वह बोलेंगे. सदस्यों से अनुरोध है कि कोई नहीं बोलेगा और आप संक्षेप में अपनी बात रखेंगे.

श्री रामनिवास रावत --अध्यक्ष महोदय सरकार का जवाब आ गया है. हम चाहते हैं कि यह बहुत महत्वपूर्ण विषय है, बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है. जिस तरह से संविधान के अनुच्छेद 330 से लेकर 342 तक कुछ विशेष जातियों के लिए विशेष आरक्षण की सुविधा प्रदान की गई है. उस संविधान के भाग को लेकर के उस प्रश्न पत्र में निबंध का लेख किया गया है कि जातिगत आधार पर आरक्षण देश के लिए घातक है यह संविधान की मूल भावना के विरोध में है. जिस तरह से सत्तापक्ष राष्ट्रवाद और राष्ट्रद्रोह अफजल गुरू.

अध्यक्ष महोदय -- नहीं यह भाषण का विषय नहीं है.

श्री रामनिवास रावत -- अफजल को फांसी किसने दी है यह बता दें..(व्यवधान) अजहर मसूद को कौन छोड़कर आया...(व्यवधान)..( सत्तापक्ष और प्रतिपक्ष के अनेक माननीय सदस्य लगातार जोर जोर से बोलते रहे)

डॉ नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष महोदय यह ओले पाले पर चर्चा नहीं करेंगे हमारे मुख्यमंत्री जी उस पर चर्चा कराना चाहते हैं..(व्यवधान)..

श्री रामनिवास रावत -- हम भी उस पर चर्चा करना चाहते हैं उसके लिए भी स्थगन के रूप में दिया है..(व्यवधान)..

डॉ नरोत्तम मिश्र -- एक भी नेता किसानों के बीच में नहीं पहुंचा है...(व्यवधान).. किसानों के मुद्दे पर चर्चा नहीं कराना चाहते हैं..(व्यवधान)..एक भी व्यक्ति ने किसान की बात नहीं उठाई है.

 

नियम 267-क के अधीन विषय.

अध्यक्ष महोदय -- निम्नलिखित सदस्यों की शून्यकाल की सूचनाएं पढ़ी हुई मानी जायेंगी.

1. श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा

2. श्री संजय पाठक

3. श्री दिलीप सिंह परिहार

4. श्री रामकिशोर दोगने

5. श्री संजय शर्मा

6. श्री संजय उइके

7. श्री हितेन्द्र सिंह सोलंकी

8. श्री कालूसिंह ठाकुर

9. श्री भारत सिंह कुशवाह

10. श्री रामनिवास रावत

डॉ नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष महोदय इनके एक भी सदस्य ने नहीं कहा कि ओले पर ध्यानाकर्षण ले लें, इनके एक भी सदस्य ने नहीं कहा कि ओले पर स्थगन प्रस्ताव ले लें..(व्यवधान).. अध्यक्ष महोदय इनकी बात का जवाब दे दिया है. आपने कहा कि सरकार का जवाब आना चाहिए तो सरकार ने जवाब दे दिया है....(व्यवधान).. ओले पाले पर कोई चर्चा नहीं करना चाहते हैं . ओले पर किसान परेशान है, गांवों में ओले गिर गये हैं एक भी सदस्य ने नहीं कहा कि ओले पर स्थगन ले लें...(व्यवधान).. एक भी सदस्य ने नहीं कहा कि ओले पर ध्यानाकर्षण ले लें लेकिन राजनीतिक रोटियां नहीं सेंकने देंगे...(व्यवधान).. अध्यक्ष महोदय आपने कहा कि जवाब दें तो हमने जवाब दिया या नहीं,

 

 

 

गर्भगृह में प्रवेश एवं वापसी

 

( श्री रामनिवास रावत जी एवं श्री सुंदरलाल तिवारी जी अपनी बात कहते हुए वेल में आये एवं अध्यक्ष महोदय की समझाइश पर वापस अपने आसन पर गये)

डॉ नरोत्तम मिश्र -- मैंने एक एक बात का जवाब दिया है और यह भी गुजारिश की कि जिनकी गलती है यह गंभीर बात है, हमने इसको गंभीर माना है हमने कहा है कि जिसकी गलती है वह दण्डित कर दिये गये हैं बच्चों को कोई दिक्कत नहीं हो तो वह भी जवाब दिया है इनको प्रश्न पत्र 90 अंक का ही है उस प्रश्न को शून्य घोषित कर दिया है..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महदोय -- मेरा सभी सदस्यों के अनुरोध है कि बैठ जायें. कक्ष में बात कर लेंगे, बात हो गई है, पत्रों का पटल पर रखा जाना, श्री जयंत मलैया. (व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय ... (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय -- आपने जो बात कही है उसका माननीय संसदीय कार्यमंत्री जी ने जो उत्‍तर दिया है, इस सब पर विचार करने के लिए कक्ष में चर्चा कर लेंगे. आपसे अनुरोध है कि इस बारे में कक्ष में बात कर लें.

(व्‍यवधान)

श्री जितु पटवारी -- अध्‍यक्ष जी, यह तो गलत बात है, ये दोनों विचार कल भी हुए थे.

अध्‍यक्ष महोदय -- कक्ष में कोई विचार नहीं हुआ. आज मैंने बोला है कल मैंने बोला भी नहीं था. कृपा करके आप अपनी बात तो मेरी जबान पर न डालें. श्री जयंत मलैया.

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, अग्राह्य तो नहीं किया ?

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं किया. (व्‍यवधान)

श्री गोपाल भार्गव -- अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट. (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय -- अब आगे बढ़ गए माननीय मंत्री जी.

श्री रामनिवास रावत -- गोपाल जी, शून्‍यकाल में फिर व्‍यवस्‍था. (व्‍यवधान)

श्री गोपाल भार्गव -- अध्‍यक्ष महोदय, जब शासन की तरफ से उत्‍तर आ गया तो मेरा कहना यह है कि .. (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय -- अभी मैंने न हां की है न ही ना की है, इसलिए उस पर कोई बात करने का अर्थ नहीं है.

श्री गोपाल भार्गव -- अब शासन का उत्‍तर आ गया तो इसके बाद... (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय -- उत्‍तर आ गया तो विचार कर रहे हैं.

श्री गोपाल भार्गव -- अध्‍यक्ष महोदय, यह नई व्‍यवस्‍था शुरू हो जाएगी.

श्री रामनिवास रावत -- आप आसंदी पर दबाव बनाएंगे. (व्‍यवधान)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- कोई दबाव नहीं बना रहे हैं. (व्‍यवधान)

श्री गोपाल भार्गव -- जब शासन का उत्‍तर आ गया है तो अब आप क्‍या चर्चा करवाएंगे इस पर, नई परंपरा शुरू करवाना चाहते हैं. ऐसा नहीं चलेगा. (व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत -- हमेशा यही परंपरा रही है, स्‍थगन से उठाकर देख लो. आप आसंदी पर दबाव बना रहे हैं. (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय -- अभी चर्चा के लिए हां नहीं की है, कक्ष की बात हुई है, सदन की तो कोई बात हुई नहीं है. (व्‍यवधान)

श्री सुंदरलाल तिवारी -- अध्‍यक्ष महोदय के अधिकारों को भी आप छीनना चाहते हैं. श्री गोपाल भार्गव -- मैं किसी के अधिकार नहीं छीनना चाहता. (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय -- तिवारी जी, आप बैठ जाइये. (व्‍यवधान)

श्री सुंदरलाल तिवारी -- अध्‍यक्ष महोदय ने अपना निर्णय सुना दिया.

अध्‍यक्ष महोदय -- आपको ज्‍यादा मालूम हैं अध्‍यक्ष के अधिकार, आप बैठ जाइये. आपको बहुत ज्ञान है उसका. (व्‍यवधान)

श्री गोपाल भार्गव -- विषय खत्‍म हो गया है, शासन की तरफ से उत्‍तर आ गया है.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप सब लोग बैठ जाएं. (व्‍यवधान)

श्री सुंदरलाल तिवारी --(XXX). (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय -- तिवारी जी की बात निकाल दीजिए कार्यवाही से. माननीय मंत्रिगणों से अनुरोध है कि बैठ जाएं, उन्‍हें चिल्‍लाने दें. श्री सुंदरलाल तिवारी जो बोलेंगे वह कुछ भी लिखा नहीं जाएगा.

श्री सुंदरलाल तिवारी -- (xxx)

अध्‍यक्ष महोदय -- सभी लोग बैठ जाइये, माननीय वित्‍त मंत्री जी कृपया पढ़ें.

श्री बहादुर सिंह चौहान -- मेरी शून्‍यकाल की सूचना महत्‍वपूर्ण थी.

अध्‍यक्ष महोदय -- बैठ जाइये, कल दे देना.

 

 

 

11.58 बजे पत्रों का पटल पर रखा जाना

 

अवधेश प्रताप सिंह विश्‍वविद्यालय, रीवा का 43वां, 44वां एवं 45वां प्रगति प्रतिवेदन

वर्ष 2010-2011, 2011-2012 तथा 2012-2013

 

 

11.59 बजे ध्‍यान आकर्षण

(1) स्‍वकराधान योजना के तहत पंचायतों को राशि न मिलना

श्रीमती अर्चना चिटनिस (बुरहानपुर) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री(श्री गोपाल भार्गव)---अध्यक्ष महोदय,

 

 

श्रीमती अर्चना चिटनिस-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जो माननीय मंत्री जी कह रहे हैं वह वही कह रहे हैं जो मैंने अपनी ध्यानाकर्षण सूचना में आपके सामने विषय प्रस्तुत किया है. 2010-11 में जो इनका स्वकराधान का सर्क्यूलर था उसके अंतर्गत राशि सम्पूर्ण प्रदेश में उपलब्ध करायी गयी. 2011-12 और 2012-13 में भी राशि उपलब्ध करायी गयी. 2013-14 और 2014-15 में राशि उपलब्ध नहीं करायी गयी. 2015-16 का विषय ही नहीं है और यह योजना बहुत अच्छी योजना माननीय मंत्री जी ने स्वयं बनायी थी और एक प्रकार से जो ग्राम स्वराज हासिल करना हमारी आजादी का मुख्य मकसद था, हम अपने गांव को स्वावलम्बी बनाये, हम अपने गांव को स्वाभिमानी बनाये, हम अपने नागरिकों में अपनी खुद को जिम्मेदारी के प्रति उनको कांशीयस् करें, उनको अवेयर करें. इस योजना के अंतर्गत मैंने अपने विधानसभा क्षेत्र में बहुत मेहनत की और मेरे सभी जनप्रतिनिधियों ने, महिलाओं ने, पुरुषों ने सब ने मिलकर इस प्रकार के रजिस्टर का असिसमेंट प्रत्येक पंचायत का किया, व्यक्तिवार किया और कर आरोपण कर, कर का एकत्रीकरण भी किया. जो योजना का सर्क्यूलर पंचायत राज संचालनालय से निकला था, उस योजना के सर्क्यूलर के निकलने के बाद उसमें जो 5 लाख की राशि एकत्रित करेगा, उसे क्या दिया जाएगा, 1 लाख की राशि एकत्रित करेगा उसे क्या दिया जाएगा, से लेकर 10 हजार तक का कर अगर इकट्ठा हुआ तो इतना इतना पैसा स्वकराधान में मिलेगा. माननीय मंत्री जी द्वारा या विभाग द्वारा इसके निरस्तीकरण का आगे कोई ऐसा दूसरा सर्क्यूलर जारी नहीं हुआ और लोग शासन के भरोसे, विभाग के भरोसे कि हम अपना टैक्स इकट्ठा करेंगे तो हमारे गांव का विकास होगा, इस भरोसे से गरीब लोग खराब मौसम, खराब फसलों में भी अपना टैक्स कलेक्शन करते रहे. अध्यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से आग्रहपूर्वक निवेदन है कि स्वकराधान की योजना उसके प्रावधानों के अनुसार चालू रखें और यहां उपस्थित सभी हमारे जितने विधायकबंधु और बहने हैं. वह भी गांव-गांव जाकर , पंचायत-पंचायत जाकर के उस पंचायत को जो पढ़ाई भी कराये, सफाई भी कराये, निर्माण कार्य भी करे, आंगनवाड़ी भी देखे,सामाजिक न्याय भी देखे क्या हमारी जनता ने एक परिवार ने एक दिन में एक रुपया रोज पंचायत को नहीं देना चाहिए. पंचायतें भी रिस्पॉन्सिबल हों और सरकार अपने प्रॉमिस पर कायम रहे.

श्री गोपाल भार्गव--- माननीय अध्यक्ष महोदय , अर्चना जी बहुत जागरूक विधायक हैं. 1993 में मध्यप्रदेश ग्राम स्वराज अधिनियम के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया था त्रिस्तरीय पंचायतीराज संस्थाओं के लिए कि वह स्वकराधान करें. जब हमारा 73 वाँ संविधान संशोधन संसद में मंजूर हुआ था उस समय यही भावना थी कि पंचायतें स्वतंत्र हों, स्वायत्तशासी हों, अपने कर्तव्यों के सहित अधिकारों का निर्वहन करें और अधिकारों के साथ कर्तव्यों का भी निर्वहन करें. यही मूल भावना गांधी जी के ग्राम स्वराज की थी, यही मूल भावना दीनदयाल जी की थी, यही मूल भावना आज हमारी भी है और इस कारण से पिछले वर्षों में लगातार हमने जो स्वकराधान किया है उन पंचायतों के लिए, राशि प्रावधानित करके तीसरे वित्त आयोग की जो अनुशंसा थी उसके आधार पर हमने राशि आवंटित की है. प्रत्येक वर्ष के हिसाब से जैसे भवन कर, प्रकाश कर, सफाई कर, व्यवसाय कर, वैकल्पिक कर,जल कर, मनोरंजन कर यह अधिरोपित करते हैं और एक अच्छी भावना है कि अधिरोपित करके उसके एवज में सरकार उनको प्रोत्साहित करें ताकि नागरिकों में जिम्मेदारी की भावना पैदा हो और वह कुछ राशि पब्लिक इंटरेस्ट में, गांव के हित में भी, समाज हित में भी खर्च करें इसी उद्देश्य के साथ में यह योजना शुरु की गई थी . अध्यक्ष महोदय, 2010-11 में जिन ग्राम पंचायतों द्वारा स्वकराधान किया गया था और वसूल किया गया ऐसी 2100 ग्राम पंचायतों में 33 करोड़ 70 लाख रुपये की राशि वितरित की गई थी. 2011-12 में इसी तरह 591 ग्राम पंचायतों में 63 करोड़ 99 लाख रुपये की स्वकराधान की राशि प्रोत्साहन रूप में वितरित की गई थी क्योंकि हमें उस वर्ष अधिक राशि शासन के द्वारा वित्त आयोग की सिफारिश के अनुसार उपलब्ध कराई गई थी. वर्ष 2012-13 में 700 ग्राम पंचायतों को 42 करोड़ 25 लाख रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई थी, जिन्होंने स्वकराधान किया था और उस क्राइटेरिया में आए थे, नानसो नियम के अंतर्गत . वर्ष 2013-14 में 13 वें वित्त आयोग के अंतर्गत स्वकराधान की राशि भारत शासन से प्राप्त न होने से राज्य मद में कुल उपलब्ध रुपया 10 करोड़ एवं वर्ष 2014-15 राज्य मद की राशि 10 करोड़ रुपया, कुल 20 करोड़ रुपये की राशि के विरुद्ध ग्राम पंचायतों द्वारा वसूल की गई राशि का 150 प्रतिशत स्वकराधान प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत देने हेतु प्रस्तावित है. माननीय सदस्य की 13 ग्राम पंचायतो के लिए पिछले वर्ष में हमने 295 लाख रुपये की राशि उपलब्ध करवाई है. इस वर्ष भी जो आपकी 6 ग्राम पंचायतें इस क्राइटेरिया में आ रही हैं और राज्य के एक ही विधानसभा क्षेत्र या एक ही ब्लाक की नहीं जो भी राज्य की जनपदें हैं, जहाँ जहाँ हैं, हमारे पास में रिपोर्ट आ गई है और वहाँ का ऑडिट हो गया है, उन सभी ग्राम पंचायतों के लिये जिन्होंने स्वकराधान किया है हम मध्यप्रदेश में जो 10 करोड़ रुपये की राशि हमें उपलब्ध है, हम अनुपातिक आधार पर, हम सभी पंचायतों के लिए राशि शीघ्र अतिशीघ्र दो-तीन दिन में उपलब्ध करा देंगे.

श्रीमती अर्चना चिटनिस-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहती हूं जो उत्तर माननीय मंत्री जी ने दिया है , अभी जो उन्होंने कहकर भी बताया , वह यह परिलक्षित करता है कि यह योजना कितनी प्रभावी है . 700 ग्राम पंचायतें भी अगर कराधान करके, कर वसूल करके यह पैसा ले रही हैं इसका मतलब है कि यह डाउन द लाइन परकोलेट हो रहा है. लोग उसका असर अपने ऊपर ले रहे हैं.माननीय वित्तमंत्री जी भी यहाँ उपस्थित हैं, माननीय ग्रामीण विकास मंत्री जी भी यहाँ उपस्थित हैं, ऐसा कहना उचित नहीं होगा कि 10 करोड़ हमारे पास हैं तो हम उसको इक्वली बांट देंगे. जो आपने कहा कि आपने जो उस योजना के अंतर्गत प्रावधान बनाये थे उस प्रावधान के लिए अगर 50 करोड़ रुपया खर्च होकर लोगों में ग्रामीण क्षेत्र में टैक्स को देने की प्रवृत्ति पनपती है तो वह नेशन बिल्डिंग है, वह महत्वपूर्ण है. लोगों को जिम्मेदारी के प्रति सरकार प्रोत्साहन दे रही है.

अध्यक्ष महोदय--- आप अपना प्रश्न कर दें.

श्रीमती अर्चना चिटनिस-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से मेरा आग्रह है कि मेरे क्षेत्र में मात्र 6 पंचायतें इस वर्ष की नहीं हैं, उससे अधिक पंचायतें हैं पर ये जो लिखित जवाब दे रहे हैं, उसमें कह रहे हैं कि 50 प्रतिशत कर वसूली की गई, ऑडिट करवाया गया, वहीं हम देंगे. जबकि योजना का जो प्रावधान है वह 10,000 रुपये तक की भी अगर कर वसूली की गई है तो भी योजना में प्रावधान है. आपने इतनी अच्छी योजना बनाई, कितनी सकारात्मक आपकी सोच है, वह लगातार चलती रही. वह योजना यथावत प्रावधानों के अनुरूप चलती रहे और माननीय वित्त मंत्री जी भी ग्रामीण विकास मंत्री जी की इस योजना में अपना सहयोग दें, आशीर्वाद दें.

अध्यक्ष महोदय-- मंत्री जी आप बोल दीजिए, माननीय सदस्य की जो भावना है.

श्री गोपाल भार्गव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, योजना के नियमों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है. जैसा मैंने कहा वित्त आयोग के माध्यम से, उनकी सिफारिश से, जो भी राशि हमें उपलब्ध होती है. हम उसी हिसाब से इसे बाँटते हैं. जहाँ तक 50 प्रतिशत का चूँकि नियम है, मैं माननीय सदस्य को अवगत कराना चाहता हूँ कि इस नियम के अंतर्गत आपकी 6 पंचायतें आती हैं. बाकी 10 पंचायतें इस नियम के अंतर्गत नहीं आ रही हैं. चूँकि इसमें यह बाध्यता है कि 1993 में...

श्रीमती अर्चना चिटनिस-- अध्यक्ष महोदय, मैं आधा मिनट और लूँगी.

अध्यक्ष महोदय-- पूरा उत्तर आ जाय.

श्री गोपाल भार्गव-- मैं माननीय सदस्य की ग्राम पंचायतों के लिए, माननीय सदस्य ने जिन ग्राम पंचायतों के बारे में उल्लेख किया है उनके लिए भी और राज्य में जो ऐसी ग्राम पंचायतें हैं, जहाँ करारोपण हुआ है, उन सबका 2 दिन में परीक्षण कराकर उनके खातों में राशि हम जमा करा देंगे.

श्रीमती अर्चना चिटनिस-- अध्यक्ष महोदय, 50 प्रतिशत का नियम तो है ही वह पहला बिन्दु है. उसका अगला बिन्दु है 1 लाख से 5 लाख तक कर वसूली, उसका जो तीसरा बिन्दु है वह 50 हजार रुपये तक की कर वसूली पर, उसका जो चौथा बिन्दु है, यह मेरा लिखा हुआ नहीं है, यह माननीय मंत्री जी के विभाग द्वारा है और...

अध्यक्ष महोदय-- वे तो एग्री हैं. वे मान रहे हैं कि वह सर्क्यूलर है.

श्रीमती अर्चना चिटनिस-- क्रायटेरिया के अनुसार 10 हजार रुपये तक की स्वकराधान वसूली पर ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहन राशि दी जाएगी. यह समस्त कलेक्टर्स को....

अध्यक्ष महोदय-- वे उस पर एग्री हैं. वे परीक्षण भी कराने को तैयार हैं.

श्रीमती अर्चना चिटनिस-- वे 50 प्रतिशत की बात कर रहे हैं. वे योजना के समस्त नियमों की बात नहीं कर रहे.

अध्यक्ष महोदय-- उन्होंने कहा कि योजना चालू है.

श्रीमती अर्चना चिटनिस-- योजना के प्रावधानों के अंतर्गत केवल पहले बिन्दु के अनुसार नहीं, समस्त बिन्दुओं के अनुसार.

श्री रामनिवास रावत(विजयपुर)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, वैसे काफी बातें आ गईं. काफी महत्वपूर्ण योजना है कि स्वशासी संस्थाओं को स्ववित्तीय पोषण की तरफ किस तरह से उन्हें अग्रेषित किया जाए, किस तरह से उनमें एक जागृति पैदा की जाए. जिससे वे स्व वित्त की भी व्यवस्था कर सकें, स्वकराधान लगाकर, माननीय मंत्री जी, आपने केवल 13 वें वित्त का जिक्र किया है. जैसा कि माननीय हमारी सदस्य महोदया ने कहा बहुत अच्छी योजना है हम चाहते हैं कि आप, कहीं से भी राशि की व्यवस्था हो, चाहे तो वित्त आयोग से व्यवस्था हो, चाहे पंचायत विभाग व्यवस्था करे, मांग लो ना, हाथ कर रहे हों, मांग लो, वित्त मंत्री जी से, सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है.

अध्यक्ष महोदय-- आप तो सीधा प्रश्न कर लीजिए और भी सदस्यों के नाम हैं.

श्री रामनिवास रावत-- इस तरह की व्यवस्था क्या माननीय मंत्री जी करेंगे, जिससे प्रदेश की सभी पंचायतें स्वकराधान वसूल करने के लिए उत्साहित हों?

वन मंत्री (डॉ गौरीशंकर शेजवार)-- अध्यक्ष महोदय, मैं यह निवेदन कर रहा था कि आपने कहा कि कहीं से भी पैसे लाओ पैसे निकालो, जंगल में चले जाओ यह कैसी भाषा बोल रहे हैं? कहीं से भी कैसे लाएँगे पैसा?

श्री रामनिवास रावत-- विभाग की अन्य स्कीमों से, वित्त विभाग से....

डॉ गौरीशंकर शेजवार-- आप ऐसा तो मत बोलिए. मलैया जी ने यह बात कही कि कहीं से भी मतलब कहाँ से, तो पीछे से आवाज आई कि बन्दूक उठा लो, जंगल में चले जाओ, ऐसा नहीं होता.

श्री रामनिवास रावत-- केन्द्र से ले आओ.

डॉ गौरीशंकर शेजवार-- वह वित्त मंत्री हैं. खर्च के लिए पैसे की व्यवस्था करना पड़ती है और जो नियम कानून हैं उनका पालन करना पड़ता है. ऐसे प्रश्न नहीं आना चाहिए कि कहीं से भी व्यवस्था करो.

श्री रामनिवास रावत-- आपको वित्त की जानकारी है? आप तो जंगली आदमी हों. जंगल के मालिक हों.

श्री गोपाल भार्गव-- अध्यक्ष महोदय, यह राज्य के द्वारा प्रवर्तित और राज्य के द्वारा ही तैयार की गई योजना है. भारत सरकार के द्वारा जो हमें 14 वें, 13 वें, वित्त आयोग की राशि मिलती है, यह तो उस ग्राम की जनसंख्या के आधार पर समानुपातिक रूप से सभी राज्य की लगभग 23 हजार पंचायतों में वितरित की जाती है. इस कारण से हम स्वकराधान के हेड में इसका उपयोग नहीं कर सकते हैं. लेकिन हम प्रयास यह करेंगे कि इस वर्ष से या अगले वर्ष से, स्वकराधान जो पंचायतें करती हैं, उस मद में और अधिक राशि का प्रावधान किया जाए. फिलहाल जो हमारे पास में राशि उपलब्ध है, सभी ग्राम पंचायतों में जहाँ स्वकराधान हुआ होगा, ऑडिट हो गया होगा, सी ए की रिपोर्ट आ गई होगी, सभी के लिए हम राशि दो दिन के अन्दर भिजवाने का कार्य करेंगे.

श्री रामनिवास रावत--माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्रीजी से निवेदन है कि प्रचार-प्रसार, सभी सदस्यों को इसके सर्कुलर की कॉपी और गांवों में उत्साहित व प्रोत्साहित करने की व्यवस्था बनाने के लिए कुछ करें.

श्री गोपाल भार्गव--माननीय अध्यक्ष महोदय, अच्छा सुझाव है जब प्रचार प्रसार होगा तो इससे निश्चित रुप से ग्राम पंचायतों का स्वावलंबन भी बढ़ेगा, विकास के लिए ज्यादा राशि उपलब्ध हो सकेगी और मेरी स्वयं यह मान्यता है कि गांव स्वत: के साधनों से जितने ज्यादा आत्मनिर्भर होंगे उतना ही ज्यादा वास्तविक विकास होगा और ग्राम स्वराज्य की जो वास्तविक कल्पना है आत्मनिर्भरता की वह निश्चित रुप से साकार होगी.

डॉ. गोविन्द सिंह(लहार)--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्रीजी ने जवाब दिया है कि पात्रतानुसार सभी जिलों में राशि वितरण की गई और कोई गड़बड़ी नहीं हुई है. मैं माननीय मंत्रीजी से जानना चाहता हूँ कि क्या अगर कहीं गड़बड़ी हुई है तो आप जांच करायेंगे. भिण्ड जिले में कई पंचायतें ऐसी हैं जिनमें कराधान लगा ही नहीं है यहां से विभाग के दो अधिकारी गए उन्होंने पंचायत से पैसा इकट्ठा किया वहीं रसीद काटी और आकर पैसे का दुरुपयोग कर लिया और वहां कोई विकास का काम नहीं हुआ. वर्ष 2010-11, 2011-12, 2012-13 में आपके उत्तर के विपरीत भिण्ड जिले में जो कार्य हुआ है उसकी जांच करायेंगे क्या ? वे लोग हमारे पास आए भी थे कि हमें माफ कर दो हमारे पीछे क्यों पड़े हो. मैंने उनसे कहा कि पैसा क्यों खा गये सबको दो. क्या आप भिण्ड जिले में जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही करेंगे.

श्री गोपाल भार्गव--अध्यक्ष महोदय, भिण्ड जिले की पंचायतों ने स्व-कराधान किया है जब मैंने इस रिकार्ड को देखा तो मुझे स्वयं आश्चर्य हुआ कि भिण्ड जिले के लोग स्व-कराधान करें इससे बड़े आश्चर्य की कोई बात नहीं हो सकती है.

श्री रामनिवास रावत--अध्यक्ष महोदय, जांच अलग विषय है लेकिन यह आपत्तिजनक है भिण्ड जिले के लोगों को आप क्या कहना चाहते हो.

डॉ.गोविन्द सिंह--मंत्रीजी सही कह रहे हैं (हंसी) स्व-कराधान हुआ नहीं है फर्जी हुआ है. (हंसी).

डॉ. नरोत्तम मिश्र--यह गोविन्द सिंह जी हैं.

श्री रामनिवास रावत--अध्यक्ष महोदय, यह बात हम मानते हैं कि नहीं हुआ है लेकिन जिस तरह से मंत्रीजी कह रहे हैं उस पर आपत्ति है.

डॉ. नरोत्तम मिश्र--तरीका कोई भी हो कह एक ही बात रहे हैं.

श्री गोपाल भार्गव--अध्यक्ष महोदय, भिण्ड जिले की दो ग्राम पंचायतों को 12 लाख रुपया दिया है और सीए की ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर दिया है लेकिन माननीय सदस्य जैसा कह रहे हैं यह बात सही है कि हमारे यहां परम्परा नहीं है और इस कारण से आप इसका ऑडिट करवा लें और इसकी जांच करवा लें. हम निश्चित रुप से इसकी जांच करवा लेंगे.

(2) श्योपुर जिले में भू-जल स्तर नीचे गिरने से उत्पन्न स्थिति

श्री रामनिवास रावत (विजयपुर)--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी ध्यानाकर्षण सूचना का विषय इस प्रकार है --

वित्‍त मंत्री, (श्री जयंत मलैया):- अध्‍यक्ष महोदय,

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि मेरी ध्‍यानाकर्षण सूचना से ही स्‍पष्‍ट है कि मेरे विधान सभा क्षेत्र में तीन तहसील हैं, विजयपुर, कराहल और वीरपुर आपने 37 छोटे ग्राम है. अध्‍यक्ष महोदय, आप तो जानते हैं कि किसी भी विधान सभा में कितने ग्राम होते हैं, 37 ग्राम एक पार्ट है, आपने सिंचाई का हवाला दिया है. उसमें मुझे आपत्ति नहीं है, मैं स्‍वीकार कर रहा हूं कि वीरपुर तहसील के कुछ ग्रामों में सिंचाई होती है. मेरी दूसरी तहसील विजयपुर है, विजयपुर और कराहल तहसील में ट्यूबवेलों से सिंचाई है और वहां पर वाटर लेवल है लेकिन वह बहुत नीचे 300-350 फीट नीचे जाकर है. विजयपुर तहसील एक ऐसी तहसील है, इसका जो भूगर्भ स्‍टेटा है, वह इस तरह का स्‍टेटा है कि 180 और 200 फीट तक पानी है उसके बाद वह पानी समाप्‍त हो जायेगा. 1200 फीट तक दो तीन बोर मैं ही करा चुका हुं, उसके बाद काला स्‍लेट आ जाता है और वह खत्‍म नहीं होता है. वहां पर भूगर्भ जल पूरी तरह से समाप्‍त हो चुका है. इसके लिये आपने सर्वे भी कराया है. मैं आज निश्चित रूप से इसको स्‍वीकार करता हूं कि सहरिया आदिवारी परिवार कूनोपालपर अभ्‍यारण्‍य के कारण विस्‍थापित हुए और विस्‍थापन के बाद से वहां की पेयजल की स्थिति इतनी खराब है कि अगर आप आज चलकर के पूरा परीक्षण करा लेंगे तो वहां के 70 प्रतिशत सहरिया परिवार विस्‍थापित हो चुके हैं. वह वहां से चले गये हैं उनका पलायन हुआ है. आप पलायन के लिये मना करेंगे तो मैं पलायन का आरोप लगाऊंगा. इससे अच्‍छा यह है कि हाथ कंगन को आरसी क्‍या, अच्‍छा तो यह है कि आप भेज दो मैं साथ जाऊंगा और आप पलायन की स्थिति का परीक्षण करा लें तो स्‍पष्‍ट हो जायेगा. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दूसरी बात यह है कि मैंने निवेदन किया था कि हमारी कुछ योजनाएं इनको आप स्‍वीकार कर लें.

अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न यह है कि आपने सहरिया परिवारों के दूसरे अनिवार्य विस्‍थापन पर यूपीए सरकार के तत्‍कालीन केन्द्रीय समाज कल्याण मंत्री द्वारा आपत्ति लेते हुए परियोजना को निरस्त करने का राज्य शासन से अनुरोध किया. मैं मानता हूं लेकिन यह कौन सी परियोजना के संबंध में निरस्त की बात है. जब यह परियोजना जिसका जिक्र मैं कर रहा हूं वह तो स्वीकृत ही नहीं हुई तो निरस्त की बात कहां से आ गई. तीसरा मेरा निवेदन है मैं आपकी बात से पूरी तरह से सहमत हूं. मेरे ही विधान सभा क्षेत्र जागदा जागीर में 4 हजार हेक्टेयर जमीन कलेक्टर ने अभी भू-माफियाओं से मुक्त कराई है. कलेक्टर भी तैयार है कलेक्टर से भी मेरी चर्चा हो चुकी है उसका कहना है मैं भूमि देने के लिये तैयार हूं. आप ग्राम सभा भी करा चुके हो. 80 प्रतिशत लोगों से आप  सहमति भी ले चुके हो मैं समझता हूं यहां पर न उन्हें खेती करा पा रहे खेती की जमीन जरूर दे दी है लेकिन खेती हो नहीं रही है आज चले चलिये उन गांवों में से एक गांव में भी गेहूं, सरसों की फसल नहीं खड़ी है. एक तो यह बता दें कि कौन सी परियोजना को निरस्त करने का केन्द्र शासन ने अनुरोध किया था. पैरा 3 की प्रथम लाईन है कि सहरिया परिवारों के दूसरे अनिवार्य विस्थापन पर यूपीए सरकार की तत्कालीन केन्द्रीय समाज कल्याण मंत्री द्वारा आपत्ति लेते हुए परियोजना को निरस्त करने का राज्य शासन से अनुरोध किया. यह कौन सी परियोजना है मेरी तो स्वीकृत नहीं हुई और मेरा यह निवेदन है भूमि कलेक्टर उपलब्ध कराने को तैयार है. पूरी भूमि वन विभाग को जरूरत पड़ेग वन विभाग को उपलब्ध कराएंगे और सहरिया परिवारों को विस्थापित करने की जरूरत पड़ेगी हम उपलब्ध कराएंगे. माननीय मंत्री जी से सहृदयतापूर्वक निवेदन है वहां भूजल स्तर समाप्त हो गया है. आप भूगर्भ शास्त्रियों से परीक्षण करा लें.

श्री जयंत मलैया - अध्यक्ष महोदय, 2012 में जब चिट्टीखेड़ा परियोजना का सर्वेक्षण चलरहा था तब वहां पर सहरिया आदिवासियों ने केन्द्र सरकार के समाज कल्याण मंत्री जी के पास संभवत: एप्रोच किया होगा किसी के माध्यम से कि हम लोग पहले भी एक बार विस्थापित किये गये हैं अब दूसरी बार हमको विस्थापित किया जा रहा है तो उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया था कि इस चिट्टीखेड़ा परियोजना को निरस्त करें.

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्यक्ष महोदय, वह जमीन न उपजाऊ है जिस पर सहरिया बसे हुए हैं. उससे अच्छी जमीन मैं मेरे विधान सभा क्षेत्र में दे सकते हैं उपजाऊ जमीन दे सकते हैं.

अध्यक्ष महोदय - पुनर्विचार करेंगे क्या मंत्री जी वे यह पूछ रहे हैं.

श्री रामनिवास रावत - मैं यह निवेदन करूंगा कि आप जियोलोजिकल सर्वे आफ इंडिया से यह सर्वे करा लें कि वहां भूगर्भ जल है कि नहीं. जल पूरी तरह से समाप्त हो चुका है दूसरा एक कमेटी बनाकर भेज दें कलेक्टर को बुलाकर चर्चा करा लें वह जमीन और विस्थापन के लिये तैयार हैं तो.

श्री जयंत मलैया - मैं यहां निवेदन करना चाहता हूं कि किन कारणों से मुझे यह परियोजना बनाना संभव प्रतीत नहीं होता. पहला कारण यह है कि प्रत्येक सहरिया परिवार को भूअर्जन एवं पुनर्वास  अधिनियम 2013 के प्रावधानों के तहत भूमि के बदले भूमि देना पड़ेगी और इतनी बड़ी कृषि भूमि एक जगह उपलब्ध नहीं हो पायेगी और सहरिया आदिवासी लोगों की बिना सहमति के उनको वहां से नहीं हटा सकते हैं उनकी सहमति भी आवश्यकता है इसके साथ-साथ शहरिया परिवारों के विस्थापन होने से पुनर्वास योजना की स्वीकृति केन्द्रीय समाज कल्याण मंत्रालय से लेना पर्यावरण स्वीकृति के लिये आवश्यक है इसके साथ-साथ केन्द्रीय वन मंत्रालय वन भूमि के उपयोग की अनुमति समाज कल्याण मंत्रालय से पुनर्वास योजना की स्वीकृति के बगैर नहीं करेगा. चौथा कारण यह है कि परियोजना में डूब क्षेत्र से प्रभावित आबादी वर्ष 2012 में 4560 थी. इतनी अधिक आबादी के विस्थापन के लिये 8500 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई परियोजना की अनुमति केन्द्रीय समाज कल्याण मंत्रालय एवं पर्यावरण मंत्रालय से मिलना बहुत मुश्किल का कार्य है और अंतिम बात यह है कि पुनर्वास लागत लगभग 200 करोड़ से अधिक आयेगी और इस अनुमान के हिसाब से यह योजना लागत प्रति हेक्टेयर सिंचाई के लिये बहुत अधिक हो जायेगी इसलिये यह योजना साध्य नहीं होगी. एक गांव में गेहूं व सरसों की फसल खड़ी हो. तो मैं दोबारा चेट्टी खेड़ा बांध बनाने के लिये नहीं कहूंगा. एक हैक्टेयर शहरिया आदिवासियों की जमीन पर फसल नहीं है तथा पानी नहीं है, आप उसका परिक्षण करवा लें. यह लोग विस्थापन्न होने के लिये अपनी व्यवस्था बनाएंगे. मेरे विधान सभा क्षेत्र में जमीन देने की बात कर रहा हूं. वह भी उपजाऊ एवं खेती योग्य जमीन पर खेती हो सके वहां पर भी खेती नहीं हो रही है. शहरिया जाति के लोगों को विस्थापित करने की जरूरत न पड़े माननीय मंत्री जी से सहृदयतापूर्वक कहना चाहता हूं.

श्री जयंत मलेया--अध्यक्ष महोदय, हम इसका परीक्षण करवा देंगे.


 

 

 

12:36 बजे याचिकाओं की प्रस्‍तुति

अध्‍यक्ष महोदय- आज की कार्यसूची में उल्‍लेखित माननीय सदस्‍यों की याचिकाएं प्रस्‍तुत की गई मानी जाएंगी ।

12:37 बजे वर्ष 2016-2017 की अनुदानों की मांगों पर मतदान(क्रमश:)


 

 

 

 

अध्‍यक्ष महोदय- पूर्व परंपरा अनुसार वित्‍त विभाग से संबंधित मांग संख्‍या 6 पर चर्चा नहीं की जाती है,परंपरा का पालन करना पड़ेगा ।

श्री सुन्‍दर लाल तिवारी- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो बजट प्रस्‍तुत किया गया है और उसमें जो अनुदान की मांगे आई हैं, उस सबंध में माननीय अध्‍यक्ष महोदय मैं आपका विशेष तौर से ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा मुझे नहीं मालूम था कि वित्‍त मंत्री जी नेता, समाज सेवी के साथ-साथ जादूगर भी हैं, आपने बजट प्रस्‍तुत करके 6.5 करोड़ मध्‍यप्रदेश की जनता को दिगभ्रमित किया है और इसके साथ- साथ मध्‍यप्रदेश विधान सभा को भी दिगभ्रमित किया है, यह सारी चीजें स्‍पष्‍ट हैं ।

12:41 बजे उपाध्‍यक्ष महोदय(डॉं. राजेन्‍द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुए ।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय जो अनुमानित बजट प्रस्‍तुत किया गया है, वह काल्‍पनिक बजट है और बजट फॉरमूलेशन का जो मैथड था, वह पुरानी ट्रेडीशन, कन्‍वेन्‍शन सब को तोड़ते हुए माननीय वित्‍त मंत्री जी ने इसको बनाया है, मेरा यह कहना है कि पुरानी रीति -नीति सबको माननीय वित्‍त मंत्री जी ने बलाय - ताक रख दिया है और एफ.आर.बी.एम. एक्‍ट में जो आपने यहां संशोधन कराया है, उसके माध्‍यम से आपने समूचे सदन को भ्रमित किया है, आपने केन्‍द्र सरकार के मार्गदर्शन को न मानकर 14वें पे - कमीशन की राय को आपने स्‍वीकार किया, वह राय जिसको आज तक भारत सरकार ने स्‍वीकार नहीं किया है और वह भारत सरकार के समक्ष अभी लंबित है, वह स्‍वीकार नहीं की गई है, लेकिन मध्‍यप्रदेश एफ.आर.बी.एम. एक्‍ट 2015 में जो आपने संशोधन किया है, वह विधि विरूद्व है और उसमें जो उद्देश्‍य आपने बताएं हैं, उसमें कारण आपने बताएं हैं, वह असत्‍य हैं,झूठे हैं और वह संशोधन अपने आप में गलत हैं ।

उपाध्‍यक्ष महोदय- झूठा शब्‍द निकाल दिया जाए, असत्‍य रहेगा ।

श्री सुन्‍दर लाल तिवारी माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय,इस बजट में घोर वित्‍तीय अनुशासन हीनता भी प्रदर्शित हो रही है, इसमें छलावा भी है, कपटपूर्ण बजट का निर्माण किया गया है ,सही तथ्‍यों को छिपाया गया है । मैं माननीय वित्‍त मंत्री जी से इन तमाम चीजों के बारे में चाहूंगा कि विधान सभा के समक्ष यह स्‍पष्‍ट करें ।

डॉं. गौरीशंकर शेजवार- माननीय उपाध्‍यक्ष्‍ा महोदय, गालियां दी जा रही हैं ।

श्री सुन्‍दर लाल तिवारी - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, गालियां नहीं दी जा रही हैं, मुझे प्रमाणित करने दीजिए और मेरा ख्‍याल है कि वित्‍त मंत्री जी भी इस बात को समझ गए हैं ।

डॉ. गौरीशंकर शेजवार- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, प्रमाणिकरण के लिए गालियां आवश्‍यक नहीं हैं, बिना गालियों के भी भाषण हो सकते हैं, आप किसी तथ्‍य को प्रमाणित करना चाहते हैं तो गालियों का इस्‍तेमाल न करें तो ज्‍यादा अच्‍छें से प्रमाणित कर पाएंगे ।

उपाध्‍यक्ष महोदय- डॉं. साहब वह कड़े शब्‍दों का इस्‍तेमाल कर रहे हैं, गालियां नहीं दे रहे हैं, यदि गालियां होंगी तो मैं विलोपित कर दूंगा ।

श्री सुन्‍दर लाल तिवारी- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, बजट के पैरा 9 में आपने लिखा है वित्‍त आयोग की अनुशंसा अनुसार मध्‍यप्रदेश राज्‍य कोषीय उत्‍तरदायित्‍व एवं बजट कोषीय प्रबंधन अधिनियम 2015 द्वारा राजकोषीय घाटे की उच्‍चतम सीमा को जी.एस.डी.पी. के 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.5 प्रतिशत किया गया है ।

उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि 14वें वित्‍त आयोग के द्वारा केन्‍द्र को सिफारिश की गई है कि जिन राज्‍यों की वित्‍तीय स्थिति नियंत्रण में है, उनको राजकोषीय घाटे का 3.5 प्रतिशत सीमा बढ़ाने की अनुमति दी जाए, यह अभी लंबित है और राज्‍य शासन ने इसको माना, केन्‍द्र सरकार ने अभी इसको नहीं माना है ।लेकिन इसके बावजूद भी हमारे मंत्री जी ने आज जो संशोधन पेश किया है और उस संशोधन के बारे में, हम सदन और आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहेंगे. मध्‍यप्रदेश राजकोषीय एवं बजट प्रबन्‍धन संशोधन विधेयक 2015 उद्देश्‍य और कारणों में कथन, भारत के 14 वें वित्‍तीय आयोग की अनुशंसाओं के अनुसरण में भारत सरकार ने राज्‍य सरकारों की उधार लेने की अधिकतम सीमा आरोपित की है. इस अनुशंसा को राज्‍य के राजकोषीय उत्‍तरदायित्‍व तथा बजट प्रबन्‍धन अधिनियम में समाविष्‍ट की जाना है. अतएव यह विनिश्‍चय किया जाता है कि भारत सरकार द्वारा निर्धारित उधार लेने की सीमाओं को समाविष्‍ट करते हुए मध्‍यप्रदेश राजकोषीय उत्‍तरदायित्‍व एवं बजट प्रबन्‍धन अधिनियम 2005 की धारा 9 को य‍था उचित रूप से संशोधित किया जाये.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा यह वित्‍त मंत्री जी से निवेदन होगा कि वह सदन को यह बतायें कि भारत सरकार ने 14 वें वित्‍त आयोग की सिफारिश को कब मान लिया और गाईड लाईन्‍स में उसे स्‍वीकार करके मध्‍यप्रदेश सरकार को लिखकर भेजा है और वह कोई आपके पास आदेश है तो सदन को बतायें, नहीं तो यह एक्‍ट एमेन्‍डमेन्‍ट किया गया है. इस एक्‍ट में झूठी बातें करके, आपने यह एमेन्‍डमेन्‍ट किया है. भारत सरकार ने वित्‍त आयोग की सिफारिश को आज तक स्‍वीकार नहीं किया गया है. इसलिए मैं कह रहा हूँ कि वित्‍त मंत्री जी ने समूचे सदन को दिग्‍भ्रमित कर दिया है और इसलिए ये साहस नहीं कर सके कि ये लिखें. इन्‍होंने अपने बजट भाषण में यह बात कही है कि हमने अनुमति मांगी. आपने यह बात कही है लेकिन अभी आपने जब अनुमति मांगी है तो आपको अनुमति नहीं मिली, तब यह एमेन्‍डमेन्‍ट कैसे आ गया ? यह एमेन्‍डमेन्‍ट से आपने सदन को क्‍यों दिग्‍भ्रमित किया ? अगर किसी के दिल और दिमाग में, यह बात नहीं भी आई या सदन में इस बात पर चर्चा नहीं उठी तो यह क्‍या आपकी जिम्‍मेदारी नहीं है. सबसे बड़ी जिम्‍मेदारी आपकी है और यह आपके एक्‍ट में लिखा है. आपकी इन्‍टीग्रिटी डाउटफुल बजट पेश करते समय नहीं होनी चाहिए. यह एक्‍ट में आपने प्रोविजन कर रखा है. इसके बारे में भी, हम आपका ध्‍यान आकर्षित करेंगे. यह आपकी इन्‍टीग्रिटी, जो मैंने बात कही है, वह हमने क्‍यों कहा है. मध्‍यप्रदेश राजकोषीय उत्‍तरदायित्‍व एवं बजट प्रबन्‍धन अधिनियम 2005 की धारा 4 पर हम आते हैं, धारा 4 की उपधारा 'सी' पर आते हैं. रिस्‍पोर्न्रस्बिलिटी इन द मैनेजमेन्‍ट ऑफ पब्लिक फाइनेन्‍स इनक्‍लुडिंग इन्‍टीग्रिटी इन बजट फॉर्मुलेशन, आपकी इन्‍टीग्रिटी डाउटफुल है कि नहीं है. यह सदन को कृपया बताने का कष्‍ट करें. यहां पर पूरे प्रदेश को आपने भ्रमित किया है और अपने ही बनाये हुए कानून का आपने उल्‍लंघन किया है. यह मेरा आपसे निवेदन है कि इस तरह के कानून बनाकर, और विशेषकर वित्‍तीय मामले में कम से कम सदन को धोखा देने की परम्‍परा तो नहीं शुरू होनी चाहिए, नहीं चलनी चाहिए और जिसने इसको फॉर्मुलेट किया है. जिस किसी ने बनाया है, उस अधिकारी के खिलाफ भी कार्यवाही होनी चाहिए. जिन उद्देश्‍यों एवं कारणों को यहां बनाकर, सदन के सामने प्रस्‍तुत किया.

उपाध्‍यक्ष महोदय, अब मेरा निवेदन यह है कि अगर वित्‍त आयोग की सिफारिश को केन्‍द्र सरकार ने स्‍वीकार नहीं किया तब आपके बजट की क्‍या स्थिति होगी ? यह जो जादूगरी के आंकड़े आपने यहां दिये हैं, तब इसकी स्थिति क्‍या आयेगी? आपने वित्‍तीय घाटे का 3.5 ले लिया, अभी तक जो है केन्‍द्र सरकार की 3 प्रतिशत की अनुमति है और 3.5 को मानकर, आपने यह पूरा बजट बनाया है और अभी यह स्थिति स्‍पष्‍ट नहीं है. अब आप यह कह सकते हो कि यह हमारा स्‍टीमेट है. स्‍टीमेट आपके रूपये में हो सकते हैं लेकिन कानून बनाने में स्‍टीमेट नहीं चलेगा, कानून बनाने के कुछ नॉर्मस हैं, उन नॉर्मस को आपको फॉलो करना चाहिए था, जिसको आपने नहीं किया है और मध्‍यप्रदेश में यह नहीं किया गया है. यह इसलिए, मैं आपको आरोपित कर रहा हूँ कि आपने मध्‍यप्रदेश की 6.5 करोड़ जनता को दिग्‍भ्रमित कर रखा है. क्षमा कीजिये 7.5 करोड़ है.

श्री शंकर लाल तिवारी - मैं जान रहा हूँ कि बी.जे.पी. के सदस्‍यों को आप प्रदेश की जनता नहीं मानते हैं.

श्री सुन्‍दर लाल तिवारी - उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा यह एक प्रश्‍न विधानसभा के सामने आकर खड़ा हो गया है कि अगर केन्‍द्र सरकार ने फायनेन्‍स डिपार्टमेन्‍ट की सिफारिश को नहीं माना तब इस बजट की क्‍या स्थिति होगी ? और यह बजट माननीय मंत्री जी ने यहां प्रस्‍तुत किया है, इसके आधार पर डिमांड्स ऑफ ग्रान्‍ट्स, जो विभिन्‍न विभागों के तैयार किये हैं, उस बजट का क्‍या होगा ? राज्‍य की वास्‍तविक वित्‍तीय स्थिति क्‍या होगी ? यह प्रदेश की जनता को कैसे मालूम पड़ पायेगा, इसको बताने का बीच में कष्‍ट करेंगे और क्‍या यह बजट में भी एमेन्‍डमेन्‍ट करेंगे ? क्‍योंकि एप्रोप्रिएशन बिल के बाद तो यह एक्‍ट बन जायेगा और आपकी वित्‍तीय स्थिति उल्‍टी हो जायेगी तो मध्‍यप्रदेश सरकार के पास क्‍या जवाब रहेगा ?

उपाध्‍यक्ष महोदय - सुन्‍दर लाल जी, आप क्‍या केवल वित्‍त विभाग पर ही बोलेंगे. आपको 12 मिनिट्स हो गए हैं. जल संसाधन विभाग भी है.

श्री सुन्‍दर लाल तिवारी - उपाध्‍यक्ष महोदय, थोड़ा समय ज्‍यादा लगा होगा क्‍योंकि मैं शरीर के बारे में बात कर रहा हूँ. जब शरीर ही डेड है तो अंग को कहां से जिन्‍दा रखेंगे तो अंग की क्‍या बात की जाये. यह हालत मध्‍यप्रदेश की है. मैं विशेष तौर पर, पूरे सदन का ध्‍यान आकर्षण करना चाहता हूँ और आपका भी ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूँ. कानून बनाते वक्‍त, कानून में झूठी बातें न प्रदर्शित की जायें, न उसमें उनके ऑब्‍जेक्‍ट्स, विज़न, गलत बातें की जायें. झूठी बातें कर, कानून का निर्माण न किया जाये.

वित्‍त मंत्री (श्री जयन्‍त मलैया) - उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं क्षमा चाहता हूँ, बीच में बोलने के लिए. यह तो परम्‍परा कभी भी नहीं रही है कि सामान्‍य चर्चा के बाद, जब विभागीय चर्चा आये तो उसमें वित्‍त के ऊपर चर्चा की जाये. चूँकि श्री तिवारी जी ने मामला उठाया है. उसके बारे में, मैं यहां स्‍पष्‍टीकरण देना चाहता हूँ कि यह बात सही है कि हम एफ.आर.बी.एम. एक्‍ट से बँधे हैं, जिसका 3 प्रतिशत है. अब फोरटिन्‍थ पे कमीशन आया तब हमने चर्चा की. हमारे अलावा और भी कई प्रदेशों में चर्चा की कि जिनका फायनेन्‍स में अच्‍छा परफॉरमेन्‍स है, उनके लिये इसको बढ़ाकर 3 की जगह 3.5 प्रतिशत कर दिया. उनने उसकी 3 श्रेणी बनाईं. उन्‍होंने कहा कि पहली श्रेणी कि उनका स्‍टेट का ब्‍याज 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए, हमारा 8.11 प्रतिशत ब्‍याज की दर थी, दूसरा, जो आपका जी.एस.डी.पी. है, उसका 25 प्रतिशत से अधिक कर्ज नहीं होना चाहिए, वह भी हम पूरा करते हैं. इसके बाद तीसरी कंडीशन यह थी कि राजस्‍व आधिक्‍य होना चाहिए. हम लगातार, जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार आई है, हम लगातार राजस्‍व आधिक्‍य में रहे हैं और निवेदन यह है कि परम्‍पराओं को तोड़ा न जाये और जहां तक फोरटिन्‍थ पे कमीशन की सिफारिशों को अमूमन केन्‍द्र सरकार मानता है और इसी के लिये, उसके आधार के ऊपर, हमने केन्‍द्र सरकार को दी है और हमारी जो मौखिक चर्चा हुई है, उसके हिसाब से हमें 3.5 प्रतिशत की अनुमति मिल जायेगी.

 

श्री सुन्दरलाल तिवारी--उपाध्यक्ष महोदय, वही बात तो मैं कह रहा था.

श्री जयन्त मलैया-- मैंने जो उत्तर दिया वह पर्याप्त है.

उपाध्यक्ष महोदय-- आप वही चीज कह रहे थे जो मंत्रीजी ने कही.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--उपाध्यक्षजी, मंत्रीजी ने बिलकुल सही बोला. मंत्रीजी ने यहां पर जो बात कही है वह बिलकुल सत्य है. चौदहवें वित्त आयोग के अनुसार ही आपने फिस्कल रिस्पांसबिलिटी एक्ट में संशोधन भी किया. और वित्त आयोग ने सिफारिश भी की. मेरा इसमें सिर्फ इतनी आपत्ति है कि अगर केन्द्र सरकार चौदहवें वित्त आयोग की सिफारिश को नहीं मानेगा तब आपके बजट की क्या स्थिति होगी? आपने बोला है इसलिए मैं चाहता हूं कि आप यह भी बता दें कि जो बजट आपने पेश किया उसकी क्या स्थिति होगी अगर केन्द्र सरकार नहीं माने.

अध्यक्ष महोदय, मेरा कहना है कि केन्द्र सरकार के बिना माने आपने कानून में संशोधन किया और बजट पेश किया तो यह पूरा बजट गलत है.

उपाध्यक्ष महोदय-- तिवारीजी, आपकी आपत्ति अभी काल्पनिक है.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--उपाध्यक्ष महोदय, काल्पनिक नहीं है. मेरा यह निवेदन है कि जब केन्द्र सरकार ने सिफारिश नहीं की तो आपका कहना है कि हमने मौखिक, केवल बातचीत करके स्वीकार कर लिया, और हमने मान लिया. मेरा कहना है कि हिंदुस्तान के किसी भी राज्य में इस तरह बजट में प्रावधान नहीं किया जो आपने किया है. यह राज्य पहला है जो कानून से, कायदे से, कन्वेंशन्स से, ट्रेडिशन से हटकर,,,

उपाध्यक्ष महोदय--तिवारी जी, मेरी बात सुन लीजिए. यह बात आप संज्ञान में ले आये हैं और सामान्यतः वित्त पर चर्चा भी नहीं होती. आप जो प्रश्न कर रहे हैं या शंका जाहिर कर रहे हैं, वास्तव में काल्पनिक ही है. अगर कोई समस्या आती है तो सरकार उसका निदान करेगी. अब आप दूसरे विषय पर आ जायें.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--उपाध्यक्ष महोदय, मैं मंत्रीजी से इतना ही जानना चाहता हूं.

उपाध्यक्ष महोदय-- यह उत्तरदायित्व सरकार का है.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--उपाध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन सुन लें. मेरा कहना है कि अगर वित्त आयोग की सिफारिश को केन्द्र सरकार ने नहीं माना तो क्या माननीय मंत्रीजी यह कहेंगे कि यह पूरा बजट गलत हो गया है और यह बिलकुल आधारहीन है. इसकी कोई नींव नहीं है. पूरा बजट गलत है. यही बता दें.

उपाध्यक्ष महोदय-- If लगा हुआ है ना. यदि...

श्री जयन्त मलैया--उपाध्यक्ष महोदय, विधानसभा का इतनी कीमती समय क्यों खराब किया जा रहा है. मुझे समझ में नहीं आ रहा है. आपको इतनी समझ होना चाहिए कि यहां पर बजट के लिए जो डिमांड्स पर चर्चा हो रही है, यह चर्चा इसके लिए नियत हुई है, इनकम के ऊपर तो नहीं हुई है ना. (व्यवधान)

श्री सुन्दरलाल तिवारी--उपाध्यक्ष महोदय, अब हमारा कहना है. मैंने वित्त मंत्रीजी से पहले ही निवेदन किया कि अगर शरीर की चर्चा नहीं होगी तो अंगों की चर्चा हो नहीं सकती.

उपाध्यक्ष महोदय-- You have made your point अब आप आगे बढ़िये.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--उपाध्यक्ष महोदय, मेरा यही कहना है कि इस तरह से इस बात का जवाब मंत्रीजी नहीं दे पाये हैं कि केन्द्र सरकार ने जिन सिफारिशों को स्वीकार नहीं किया, उसके आधार पर आपने जो यह बजट बनाया है, तो क्या यह Method of Formulation of budget की बात सही है.

उपाध्यक्ष महोदय-- तिवारी जी, आपको 16-17 मिनट बोलते हुए हो गये हैं.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--उपाध्यक्षजी, जो बजट का निर्माण हुआ है और सदन में पेश किया है यह पूर्णतः गलत है, असत्य है. इस बात को मंत्रीजी ने भी सदन में स्वीकार कर लिया कि केवल बातचीत के आधार पर आपने कानून बना दिया. केन्द्र सरकार द्वारा कोई आदेश, कोई गाईड लाईन नहीं दी गई.

उपाध्यक्ष महोदय--तिवारी जी, मेरी बात भी सुन लीजिए. कांग्रेस पक्ष के लिए कुल समय जो आवंटित है वह 42 मिनट है.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--उपाध्यक्षजी, मैं आपके अधिकारों पर कोई टीका-टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं. कभी कभी कुछ सवालात ऐसे खड़े हो जाते हैं, जिनमें थोड़ा समय ज्यादा लेना आवश्यक होता है. यह पूरे राज्य का सवाल है. यह वित्तीय मामला है. मंत्रीजी यह स्वीकार कर रहे हैं.

उपाध्यक्ष महोदय-- मैं, यह पूछना चाहता हूं कि अगर आप ज्यादा समय लेंगे तो दूसरे माननीय सदस्य हैं विपक्ष के वह नहीं बोलेंगे? 15 लोगों ने बोलने के लिए नाम दिये हैं. कुल आवंटित समय 42 मिनट है. आप करीब 18 मिनट ले चुके हैं.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--बस 2 मिनट में समाप्त करता हूं. मेरा वित्तमंत्रीजी से निवेदन है कि यह जो विधायक निधि है.

 

 

अध्यक्षीय घोषणा

माननीय सदस्यों के भोजन की व्यवस्था विषयक.

उपाध्यक्ष महोदय--माननीय सदस्यों के लिए भोजन की व्यवस्था सदन की लॉबी में की गई है. माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि सुविधानुसार भोजन ग्रहण करने का कष्ट करें.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--उपाध्यक्षजी, माननीय वित्तमंत्रीजी से हमारा निवेदन है कि जैसे MP LED की निधि होती है, वह PD अकाऊंट की वजह से अगले साल के लिए ट्रांसफर हो जाती है. वह व्यवस्था आप मध्यप्रदेश में भी लागू कर दें. मान लीजिए कोई विधायक अस्वस्थता के कारण या किसी अन्य कारण से अपना पैसा खर्च नहीं कर सके तो अगर उस पैसे आप PD अकाऊंट में रख लेंगे तो अगले वर्ष ऑटोमेटिक जो हमारी विधायक निधि आयेगी उसमें जुड़ जायेगी. इस तरह की व्यवस्था करें. लोकसभा में केन्द्र सरकार ने ऐसी व्यवस्था कर रखी है. एक्स एमपी की वजह से थोड़ा सा मुझे अनुभव है, यदि मैं गलत न हूं तो हम लोगों को जो वहां पर MP LED मिलता था अगर वह इस साल शेष रह गया तो वह अगले साल के लिए ट्रांसफर हो जाता था तो उसमें भी थोड़ा सा सुधार कर लें.

उपाध्यक्ष महोदय, बस अंतिम बात कह रहा हूं. इस बजट में जो आपने दिया और डिमांड्स ऑफ ग्रांट्स जो आपने किया उसमें गरीब की किसी प्रकार सुध नहीं ली गई. वृद्धा पेंशन, निराश्रित पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन आदि सामाजिक सुरक्षा की योजना है, इस पर हमारी मध्यप्रदेश सरकार ने एक रुपया भी बढ़ाकर उन गरीबों को नहीं दिया. अभी समय है, सदन है, अभी इस पर बहस चल रही है, अभी सुधार करने की गुंजाईश है.

उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्रीजी से कहना चाहता हूं कि पूंजीपतियों का खूब ख्याल किया गया है. पैसे वालों का ख्याल किया गया. लेकिन गरीबों का कोई ख्याल नहीं किया गया. एक रुपया नहीं बढ़ाया. अंतिम बात....

उपाध्यक्ष महोदय--आपकी बात इतनी लंबी हो जाती है.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--लंबी नहीं है, हमारी बात इतनी छोटी है. यह जो राजकोषीय घाटे का प्रतिशत GSGP से आपने 2014-15 में 2.9 प्रतिशत खर्च किया. आपका लक्ष्य 2.29 तक ही पहुंचा है. इसके बाद आपकी ग्रोथ 3.5 जो आपके पास है और 3 में आप पहुंचे नहीं और 3.5 का आप बजट प्रस्तुत कर रहे हैं. आपने यह अनुमानित किया है कि इस वर्ष आप 3.94 पर पहुंचेंगे. मेरा कहना है कि इसको ध्यान में रखा जाये. पूरे प्रदेश को कम से कम आर्थिक मामले में भ्रमित नहीं किया जाये. आप एक विद्वान फायनेंस मिनिस्टर हैं. आपका लंबा राजनैतिक अनुभव है. लेकिन आज मुझे मालूम पड़ा कि आप एक बहुत बड़े जादूगर भी हैं. बजट बता रहा है. आपको इस जादूगरी के लिए धन्यवाद लेकिन इससे राज्य के लोगों का नुकसान हुआ है. धन्यवाद.

श्री बहादुरसिंह चौहान(महिदपुर)--उपाध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 7,23,31,45,57,60 और 61 के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं.

उपाध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश सरकार के जितने विभाग हैं उसमें जल संसाधन विभाग अति महत्वपूर्ण विभाग है. यह विभाग सीधा सीधा किसानों से, कृषि और उर्जा से जुड़ा विभाग है. अब चूंकि इसमें उर्जा और कृषि विभाग नहीं है लेकिन इस विभाग का संबंध इन दोनों विभागों से अति महत्वपूर्ण है.

उपाध्यक्ष महोदय, वर्ष 2003-04 में इस प्रदेश का सिंचाई का रकबा साढ़े सात लाख हेक्टर था. इन 10-11 वर्षों में माननीय शिवराज सिंह जी की सरकार ने, हमारे लोकप्रिय जल संसाधन मंत्री, मलैया जी के प्रयास से आज मध्यप्रदेश का सिंचाई का रकबा 36 लाख हेक्टेयर हो गया. लगभग चार गुना से भी अधिक हुआ है. अब इससे रिलेवेंट यह भी बात है कि ऊर्जा विभाग ने भी इसमें महत्वपूर्ण कार्य किया है. 3 हजार मेगावाट से उनकी बिजली 16116 मेगावाट हुई है. कई जगह नहरों से पानी गया है, तो कई जगह बिजली विभाग ने लिफ्ट करके पानी दिया है. जैसे मुझे एक उदाहरण याद आ रहा है कि भूत भावन महाकाल की नगरी उज्जैनी में 12 वर्षों में सिंहस्थ महापर्व आता है और 22 अप्रैल से सिंहस्थ प्रारंभ हो रहा है. मां क्षिप्रा में पानी की कमी है. इस कारण 432 करोड़ की योजना ओंकारेश्वर जलाशय से उद्वहन कर बिजली के द्वारा 5 क्यूसिक पानी प्रवाहित किया जा रहा है. इस पानी को एकत्रित किया गया है. कहीं डेम में, जहां से मां नर्मदा का पानी डला है, डेम बनाकर उसको एकत्रित किया गया है. जब भी डेम के गेट खोलेंगे, तो क्षिप्रा प्रवाहीमान हो जायेगी. पूर्व सरकार के समय जब योजना को बनाने का वक्त आया था, तो तत्कालीन सरकार के मुखिया जी ने कह दिया था कि यह असंभव है. माननीय मुख्यमंत्री, श्री शिवराज सिंह चौहान ने इसको संभव किया है. मध्यप्रदेश के जल संसाधन विभाग ने 563 लघु योजनाएं 5372 करोड़ की लागत से दिसम्बर,2015 में पूर्ण कर ली हैं, जिससे लाखों हेक्टेयर भूमि की सिंचाई हो रही है. यहां तक ही नहीं, नर्मदा जो है हमारी मध्यप्रदेश की एक महत्वपूर्ण नदी है और उससे मध्यप्रदेश का विकास 80 प्रतिशत संभव है. यह अमरकंटक से निकल कर गुजरात की खम्भात की खाड़ी में जाकर अरब सागर में समाहित हो जाती है. कुल 1312 किलोमीटर में यह नदी बहती है, उसमें से 1077 किलोमीटर मात्र मध्यप्रदेश में बहती है. 162 किलोमीटर जो बहती है, वह सिर्फ गुजरात में बहती है और 39 किलोमीटर महाराष्ट्र में बहती है. तो नर्मदा 1077 किलोमीटर हमारे मध्यप्रदेश में बहती हुई जाती है. हमें 18.25 एमएएफ पानी नर्मदा जी का आवंटित हुआ है. उसका दोहन हम अभी तक नहीं कर पाये. लेकिन भाजपा एवं शिवराज सिंह जी की सरकार ने यह तय किया है कि 18.25 एमएएफ पानी मध्यप्रदेश को जिसका आवंटन हुआ, मध्यप्रदेश को उपयोग करना है. वर्ष 2024 तक इसका पूरा उपयोग कर लिया जायेगा. उस समय मध्यप्रदेश की स्थिति सिंचाई की क्या होगी, मध्यप्रदेश का बहुत कम ही रकबा बचेगा, जो सिंचाई के लिये बच जायेगा. मैं मन की बात कहना चाहता हूं कि पानी है, बिजली है और काश्त करने योग्य जब भूमि नहीं होगी, तो इन योजनाओं का महत्व क्या रहेगा. मैं इस ओर आपका ध्यान आकर्षित इसलिये करना चाहता हूं कि धीरे धीरे मध्यप्रदेश में काश्त करने योग्य भूमि का रकबा कम होता जा रहा है और यह अति चिंता का विषय है, यह बड़ा गंभीर विषय है. बड़ी बड़ी मल्टियां तो पहाड़ी पर भी बनाई जा सकती हैं. लेकिन पत्थरीली जमीन पर कभी कृषि नहीं की जा सकती है. आज मध्यप्रदेश की जनसंख्या 7.50 करोड़ है. आने वाले समय में जनसंख्या का विस्फोट हो रहा है. जिस अनुपात में जनसंख्या बढ़ रही है और जिस अनुपात में कृषि की काश्त योग्य भूमि कम होती जा रही है, यह हमारे सब के लिये चिंता का विषय है. इस पर गंभीरता से शासन को कोई न कोई निर्णय अवश्य करना चाहिये. बड़े बड़े शहरों में 20-25 किलोमीटर तक काश्त करने योग्य जो भूमि है, उसमें मल्टियां बनाई जा रही हैं. लेकिन बाद में जब जमीन कम हो जायेगी, आज हम उत्तर प्रदेश को देख लें. जनसंख्या बहुत अधिक है और क्षेत्रफल वहां का कम है. हम सौभाग्यशाली हैं कि जनसंख्या के अनुपात में हमारे मध्यप्रदेश का क्षेत्रफल बहुत बड़ा है. मां नर्मदा का 98795 वर्ग किलोमीटर कछार क्षेत्र है. इतना बड़ा क्षेत्र, जिसका जितना दोहन किया जाये, उतना कम है. मैं मंत्री जी से निवेदन करुंगा, चूंकि जल संसाधन मंत्री जी वित्त मंत्री भी है. जल संसाधन में और अधिक राशि का प्रावधान करना चाहिये. जब अधिक राशि का प्रावधान होगा, तो प्रदेश में सिंचाई का रकबा निश्चित रुप से बढ़ेगा. मुझे कहने में अत्यन्त प्रसन्नता हो रही है कि यह 432 करोड़ की नर्मदा क्षिप्रा सिंहस्थ लिंक परियोजना तो संचालित हो रही है, लेकिन मां नर्मदा से एक और महत्वपूर्ण योजना हमारे शिवराज सिंह जी और जल संसाधन मंत्री जी ने नर्मदा मालवा गंभीर लिंक योजना, जिसमें 2187 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति दी जा चुकी है. इस योजना के बनने से मालवा में एक कहावत थी कि मालव माटी गहन गंभीर. पग पग रोटी डग डग नीर. अब नीर के दर्शन नहीं होते. पानी वहां पर 300-400 फीट नीचे चला गया है और जब यह 2187 करोड़ की योजना बनकर हमारे मालवा में आयेगी, तो इन्दौर और उज्जैन जिले में 50 हजार हेक्टेयर इस योजना से सिंचाई का रकबा बढ़ेगा, जिससे मालवा के किसान लाभान्वित होंगे. आगे जाकर पार्वती और बड़ी काली सिंध को भी जोड़ने की योजना सरकार की है. मैं आग्रह करना चाहता हूं कि जल संसाधन विभाग आने वाले 10 वर्षों में सिंचाई का रकबा 36 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 60 लाख हेक्टेयर करने जा रहा है. जब मध्यप्रदेश का रकबा 60 लाख हेक्टेयर सिंचाई का हो जायेगा, तो जो लगातार चार बार कृषि कर्मण अवार्ड मध्यप्रदेश की सरकार को मिल रहा है, 60 लाख हेक्टेयर का रकबा जब सिंचाई का हो जायेगा, तो भूत भावन महाकाल बाबा की कृपा से हमेशा कृषि कर्मण पुरस्कार मध्यप्रदेश सरकार को ही मिलता रहेगा. ..

श्री सुखेन्द्र सिंह -- कागजों में है.

श्री बहादुर सिंह चौहान -- क्या बात है, अब बढ़ेगा तो फिर अनाज पैदा होगा कि नहीं होगा. जब 36 लाख से हम 60 लाख हेक्टेयर तक पहुंच जायेंगे और नर्मदा का पूरा आवंटित पानी का उपयोग कर लेंगे, तो क्या पैदावार नहीं बढ़ेगी. यह कागजों में है. यह 36 लाख हेक्टेयर जो सिंचाई हो रही है, यह भी कागजों में है. वित्त विभाग की मांगों पर चर्चा नहीं करनी थी, हमारे वरिष्ठ विधायक, श्री सुन्दरलाल तिवारी जी ने चर्चा कर ली.

श्री सुखेन्द्र सिंह -- अभी वित्त विभाग भी उसका जवाब नहीं दे पाया.

श्री बहादुर सिंह चौहान -- वित्त विभाग पर हमको बोलना ही नहीं है और मैंने उसकी स्टडी नहीं की है. मुझे जानकारी भी नहीं है. मुझे उस पर बोलना नहीं था, इसलिये मैंने उसको पढ़ा भी नहीं.

उपाध्यक्ष महोदय -- आप उनका जवाब नहीं दे, आप चर्चा जारी रखें.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया -- सुखेन्द्र जी, काल्पनिक बात पर वित्त मंत्री जी जवाब नहीं देते हैं. क्योंकि कल्पना की सीट पर बैठने वाला व्यक्ति काल्पनिक बात करेगा.

श्री सुन्दर लाल तिवारी -- यह आप गलत बोल रहे हैं. मैंने कानून के आधार पर बोला है. अगर वित्त मंत्री जी बोल दें कि मैंने कानून से हटकर बात की है, तो मैं अपनी सारी बहस को वापस लेता हूं. यह मैं सदन में बोल रहा हूं . ऐसा आप मत बोलिये.

श्री बहादुर सिंह चौहान -- उपाध्यक्ष महोदय, जिस सदन के अन्दर आज तक वित्त विभाग की मांगों पर बोलने की परम्परा नहीं रही, उस पर कांग्रेस पार्टी के लोग बोल रहे हैं. इसमें और भी विषय हैं, उन पर बोला जा सकता है. उन पर विचार रखे जा सकते हैं. यह इस सदन की परम्परा नहीं रही है. जो परम्परा नहीं है, उस पर हमारे कांग्रेस के माननीय सदस्य सदन में अपनी बता कह रहे हैं. मुझे उस पर चर्चा करने की आवश्यकता नहीं है. मैं अपनी बात कहना चाहता हूं.

उपाध्यक्ष महोदय -- बहादुर सिंह जी, आप विषय पर आ जाइये. आप आपस में चर्चा कर रहे हैं.

डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय--उपाध्यक्ष महोदय, बहादुर सिंह जी किसान आदमी हैं, वह खेती किसानी पर पर ज्यादा बोलेंगे, वित्त पर कहां से बोलेंगे.

श्री बहादुर सिंह चौहान--अरे हम तो गेहूं चने पैदा करने वाले हैं, हम व्यापारी नहीं है.

उपाध्यक्ष महोदय--बहादुर सिंह जी, आप विषय पर आ जायें. 2 मिनिट में समाप्त करें.

श्री सुखेन्द्र सिंह -- बहादुर सिंह जी एक बार आप घिरे थे (हंसी)

श्री बहादुर सिंह चौहान- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं नहीं घिरा हूं, जिन्होंने मुझे घेरने की कोशिश की थी उनको भी मैंने घेर दिया. फारेन्सिक लेब चन्डीगढ़ से जांच करवाकर मंगा ली, उस जांच को बाकी नहीं रखा. मैं कभी भी नहीं घिरता हूं. मेरे घिरने का तो सवाल ही नहीं उठता है.

उपाध्यक्ष महोदय, मेरे विधानसभा क्षेत्र में अरण्या डेम है यह 1982-83 में बना था एक योजना है जिसका नाम याद नहीं आ रहा है. उस योजना में आधुनिक रूप से नहरों को सीमेंट से बनाते हैं, अनुरोध है कि उस योजना के तहत, क्योंकि उज्जैन जिले का सबसे बड़ा डेम है जिससे 4000 से 5000 हेक्टेयर में अरण्या डेम से सिंचाई होती है. बहुत पुराना डेम है आरआर योजना के तहत यदि इस डेम का आधुनिकीकरण किया जायेगा तो उस डेम से सिंचाई का रकवा लगभग 7000 हेक्टेयर तक हो जायेगा. किसानों को और लाभ होगा. मैं सौभाग्यशाली हूं कि मां क्षिप्रा उज्जैन से बहती हुई, मेरे विधानसभा क्षेत्र में लगभग 55 किलोमीटर में बहती है. हरबाखेडी डेम मैंने प्रस्तावित किया था यह 60 से 70 लाख की लागत से बनने वाला है. सबसे अधिक पानी जहां पर रूकता है डेम वहीं बनाना चाहिये. कम पैसा खर्च करके अधिक पानी एकत्रित करना मात्र बैराज और स्टाप डेम से ही संभव है. जहां जहां पर उच्च स्तरीय बैराज मध्यप्रदेश की नदियों में बनाये जा सकें वहां पर जल संसाधन विभाग को बैराज बनाना चाहिये. हरबाखेडी बैराज की साध्यता हो गई है और वह बनने की तैयारी में है. मेरे विधानसभा क्षेत्र में छोटी कालीसिंध नदी बहती है वह भी 50 किलोमीटर बहती है. उस पर डेम बनाने की बात आई तो 22 फिट ऊंचाई पर उसकी साध्यता नहीं आ रही थी, मेरे द्वारा विभाग से चर्चा के बाद जब उसकी ऊंचाई बढ़ा दी गई तो उसका साध्यता आ गई है. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं जल संसाधन मंत्री जी से उम्मीद करता हूं कि जब वे विभाग की मांग का उत्तर दें तो मेरे क्षेत्र की मांगों पर निश्चित रूप से उनका आशीर्वाद मिलेगा. आपने बोलने का समय दिया, बहुत बहुत धन्यवाद.

श्री ओमकार सिंह मरकाम(डिण्डोरी) -- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 6, 7, 23, 31, 45, 57, 60 और 61 के विरोध में और कटौती प्रस्ताव के समर्थन में बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं. उपाध्यक्ष महोदय, प्रदेश की जनता के परिश्रम से दिन रात भूखे रहकर उनके परिश्रम और श्रम से, किसानों के परिश्रम से प्रदेश की आर्थिक व्यवस्था बजट के रूप में वित्त मंत्री जी ने जो बजट के रूप में प्रस्तुत तो की है. परंतु मंत्री जी, आपने अपने बजट में गरीबों के प्रति एक प्रतिशत भी चिंता जाहिर नहीं की है. वर्तमान समय में प्रदेश के गरीबों को न वृद्धा पेंशन, न मजदूरी, न विकलांग पेशन नहीं मिल रही है, गरीब इंतजार करते रहते हैं कि हमारा पैसा हमें मिले तो हम जरूरतों की रोजमर्रा की आवश्यकता की चीजें लें परंतु मंत्री जी ने बजट में कोई ध्यान गरीबों का नहीं रखा है, क्योस्क बैंक से 2,000 लोगों को एक दिन में पेमेन्ट देने की व्यवस्था कर रहे हैं और कहते हैं कि हमारे अच्छे दिन आ गये हैं. आपके अच्छे दिन हो सकते हैं, आपसे जुड़े हुये लोगों के, आपकी पार्टी के अच्छे दिन हो सकते हैं, परंतु गरीब लोग आज भी भूखे सोने को मजबूर हैं. वास्तविक स्थिति अगर आपको देखना हो तो किसी गांव का दौरा कर लें आपको प्रदेश की वास्तविक स्थिति का पता चल जायेगा. मंत्री जी, प्रदेश के अंदर अतिथि विद्वान अपना पारिश्रमिक बढ़ाने की मांग को लेकर के आंदोलन कर रहे है, जिले में जायें तो पता चलता है कि स्वास्थ्य विभाग के लोग अपनी मांगों को लेकर के आंदोलन कर रहे है, रोजगार सहायक आंदोलन कर रहे हैं, सचिव आंदोलन कर रहे है, कलम बंद किये हुये हैं और वित्त मंत्री जी गरीब विरोधी बजट प्रस्तुत करके कह रहे हैं कि अच्छे दिन आ गये हैं. आपके काम करने वाले कर्मचारी तो सब आंदोलन कर रहे हैं, कोई काम हो नहीं रहा है इस पर आपने कोई ध्यान नहीं दिया है. इसके बाद आप कहते हैं कि हम बहुत बेहतर बजट प्रस्तुत कर रहे हैं.

माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं वित्त मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि वह लोग जो अपना काम छोड़कर के आंदोलन में हैं, वह गरीब जो रोटी के लिये आपकी तरफ मजदूरी भुगतान के लिये टकटकी लगाये बैठा है, वह वृद्ध जो अपने अंतिम समय में चाह रहा है कि जो वृद्धावस्था पेंशन उसको मिलती है वह मिल जाये, उस पर आपने बजट में कोई नया प्रावधान नहीं किया है फिर भी कहते हैं कि बजट गरीबों के हित में बनाया है. मंत्री जी ने जो बजट यहां पर प्रस्तुत किया है देखने में वह बड़े लोगों के हित का बजट है, पूंजीपति लोगों के हित का वर्ग है, गरीब आज भी मजदूरी भुगतान के लिये तरस रहा है. यह कोई आरोप-प्रत्यारोप की बात नहीं है. हकीकत बयान कर रहा हूं, जिनको मजदूरी नहीं मिल रही है उनसे पूछो, वो भुगतान के लिये कितना तरस रहा है उस पर वित्त मंत्री जी को ध्यान देने की आवश्यकता है.

उपाध्यक्ष महोदय, जल संसाधन विभाग के बारे में कहना चाहूंगा कि मैं स्वयं सिंचाई करता हूं, कृषि करता हूं, चना गेहूं अरहर की फसल हम स्वयं पैदा करते हैं, रोपा लगाई - मताई का काम करते हैं. सच्चाई में देखेंगे तो यह विभाग पूरी तरह से काल्पनिक रिकार्ड तैयार करता है. रोजगार गारन्टी के माध्यम से जो मेढ़ बंधान के कारण से कृषि का उत्पादन बढ़ा है उसके उत्पादन को यह अपना उत्पादन बताते हैं. इसके द्वारा निर्मित सिंचाई रकवे को यदि देखा जाये तो जल संसाधन विभाग के जितने भी डेम बने हुये हैं मंत्री जी उनका आप वास्तविक वेल्यूवेशन करा लीजिये , जो आपका डीपीआर है जो आपका सीएसआर रेट है जितनी क्यूबिक मीटर क्वांटिटी पर वहां पर जो आईटम लगता है अगर हिम्मत है तो सदन के विधायकों की एक समिति बनाकर के आप जांच करा लें , आपको पता लग जायेगा कि जल संसाधन विभाग 3 करोड़ के डेम को 43 करोड़ में बनाता है और उसमें जो गरीब जनता को मजदूरों को मिलने वाला पैसा है उसका भी भुगतान 120 रूपये मिलती है, 110 रूपये मजदूरी मिलती है. मैंने कई बार आपसे निवेदन किया है कि कम से कम गरीबों की मजदूरी तो बढ़ा दी जाये लेकिन उस पर भी विभाग कोई ध्यान नही दे रहा है. सिंचाई का रकवा जो आपका विभाग बता रहा है , विभाग के जो पुराने डेम बने हैं उनके बारे में बखान करते रहते हैं, आपने जो डेम बनाये हैं, जो लघु डेम बनाये हैं, आपने जो स्टाप डेम कन्वरजेन्स के बनाये हैं उसके बारे में मैं कहना चाहता हूं क्योंकि मैं उस विद्वान को भी जानता हूं जो मेरे यहां डिण्डोरी में कार्यपालन यंत्री के पद पर थे, जो आज आपके विभाग के ईएनसी के पद पर हैं, उनकी सोच और उनके विचार को भी मैं जानता हूं. अगर डिण्डोरी जैसी जगह में उनके 3-3 स्टापडेम कम डायवर्सन फेल हो रहे हैं तो मैं कहना चाहता हूं कि मंत्री जी आपको मूल्यांकन करके देखने की आवश्यकता है.

उपाध्यक्ष महोदय, जल संसाधन विभाग के माध्यम से मंत्री जी एक नया फरमान जारी किये कि जिला सेक्टर का कोई भी काम जल संसाधन विभाग नहीं करेगा. अब आपने फरमान जारी कर दिया उसके लिये धन्यवाद, उसमें हमें दिक्कत नहीं है पर आप विभागीय बजट में नहरों के सुदृढीकरण के लिये, पानी को बांध में पहुंचाने के लिये एक पैसे का प्रावधान बजट में नहीं है. तो किस तरफ आप विभाग को ले जा रहे हैं, पैसा भी नहीं दे रहे हैं और प्रतिबंध भी लगा रखे हैं. रोजगार गारन्टी योजना के माध्यम से डिण्डोरी जिले में हमने 400-500 मीटर दूरी पर नहरों का सुदृढीकरके पानी को पहुंचाने का प्रयास किया है , मंत्री जी को और विभागीय अधिकारियों को यह बात अच्छी नहीं लगी, उन्होंने लाईन खींच दिया कि आप काम नहीं कर सकते हैं. उपाध्यक्ष महोदय, हमने अनुरोध किया कि आप नहीं कर पा रहे हैं तो राशि की व्यवस्था कर दें, भोपाल से भी पैसा नहीं दे रहे हैं. पूरी तरह से जल संसाधन विभाग जो आंकड़े प्रस्तुत कर रहा है यह आंकडे काल्पनिक है , जमीनी हकीकत से इन आंकडों का कोई लेना देना नहीं है. रोजगार गारंटी के मेढ बंधान से जो किसान अनाज पैदा करता है, उसको अपना रिकार्ड बताते हैं. सिंचाई के मामले में विभाग जितना खर्चा किया है उसके एवज में सिंचाई का रकवा नहीं बढ़ा है. आज लघु सिंचाई और मध्यम सिंचाई की बात की जा रही है . मैं कहना चाहता हूं हमारे विधानसभा क्षेत्र में बेलगांव में जाकर के मैंने देखा है कि वहां पर साढ़े 4 लाख क्यूबिक मीटर कुल मिट्टी लगी है, 51 रूपये प्रति क्यूबिक मीटर की दर से, पर भुगतान ठेकेदार को कर दिया 23 करोड़ का जबकि वास्तव में उसका भुगतान 5 करोड़ होना चाहिये. इसके बाद भी विभाग सुनने को तैयार नहीं है. मैंने जब जाकर के देखा और मैंने कहा तो कहते हैं कि हार्डराख ज्यादा लग गई, मैंने कहा कि एमएएस में दर्ज कहां है, तो उस पर मंत्री जी ध्यान नहीं दे रहे हैं. और कह रहे हैं कि मेरा बहुत बेहतर काम हो गया.

श्री ओमकार सिंह मरकाम (जारी)-- माननीय मंत्री जी ध्‍यान नहीं दे रहे हैं और कह रहे हैं काम हो गया.

उपाध्‍यक्ष महोदय-- ओमकार जी एक मिनट में समाप्‍त करें.

श्री ओमकार सिंह मरकाम-- जी माननीय उपाध्‍यक्ष जी एक मिनट, हमारे वित्‍तमंत्री जी भी हैं, मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूं कि वर्तमान समय में गरीबों को सही समय में मजदूरी नहीं मिल रही है, इस प्रक्रिया में आप समीक्षा करा लीजिये और जो आपके विश्‍वसनीय हों उनसे जानकारी लीजिये और गरीबों तक मजदूरी भुगतान करने के लिये कोई आपका कार्यक्रम हो ताकि समय पर उनको मिले और जो आंदोलन कर रहे हैं, शिक्षाकर्मी, स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी और जो हमारे अतिथि विद्वान और रोजगार सचिव यह सब लोग किस तरह से काम में लग जायें माननीय मंत्री जी अगर आपके प्राइमरी स्‍टेज में काम करने वाले लोग निरंतर यह मांग करते रहेंगे तो आप कैसे व्‍यवस्‍था को ग्राउंड तक पहुंचायें, इसके लिये माननीय मंत्री जी को सोचना चाहिये और मैं आपसे पुन: निवेदन करना चा‍हता हूं यह जो बजट बड़े अमीरों का पेश हुआ है, उसमें गरीबों के हित का भी ध्‍यान रखा जाये और माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय जी आपने बोलने का समय दिया आपको मैं बहुत-बहुत धन्‍यवाद देता हूं.

उपाध्‍यक्ष महोदय-- धन्‍यवाद ओमकार सिंह जी.

डॉ. गोविंद सिंह (लहार)-- माननीय उपाध्‍यक्ष जी.

उपाध्‍यक्ष महोदय-- मैंने गोविंद सिंह पटेल बोला.

डॉ. गोविंद सिंह-- नहीं आज बोलना नहीं है.

श्री नरोत्‍तम मिश्र-- नहीं आपको बोलना पड़ेगा, आपका नाम है.

डॉ. गोविंद सिंह-- नहीं हमारा नाम नहीं है, हमने उपाध्‍यक्ष जी से समय मांग लिया. मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूं सांसद निधि, विधायक निधि इनमें हमने देखा है जो टेंकर देते हैं, सामान देते हैं उन पर अपनी पार्टी का नि‍शान लगाते हैं और उसके बाद नाम लिखते हैं, यह सांसदों की, विधायकों की निजी सम्‍पत्‍ती नहीं है इसलिये इस पर रोक लगाई जाये और ....

श्री वेलसिंह भूरिया-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, डॉ. गोविंद सिंह जी गलत बोल रहे हैं, आपकी पार्टी के लोग भी लगा रहे हैं कोई हमारी पार्टी के लोग नहीं लगा रहे.

डॉ. गोविंद सिंह-- बैठ जाइये आप, खड़े हो जाते हो बीच में.

श्री वेलसिंह भूरिया-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह गलत है, मेरी आपत्ति है, डॉ. गोविंद सिंह जी कुछ भी बोल जाते हैं यहां पर ऐसा थोड़ी चलेगा.

श्री दिलीप सिंह परिहार-- आप सीनियर विधायक हो, डाटोगे नहीं, आग्रह कर सकते हो हमारे विधायक जी से.

डॉ. गोविंद सिंह-- हमारा अनुरोध है माननीय मंत्री जी आप नोट कर लें और इस पर रोक लगा दें, यह हमारा सुझाव है इस पर अमल करें.

श्री वेलसिंह भूरिया-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कांग्रेस के लोगों ने परंपरा डाली है सबसे पहले टेंकर के उपर नाम लिखने की सांसदों और विधायकों ने.

उपाध्‍यक्ष महोदय-- वेलसिंह जी आप बैठ जाइये. जब मौका आयेगा तब बोल लीजिये. गोविंद सिंह जी उनका उत्‍तर न दें आप बात करें.

डॉ. गोविंद सिंह-- दूसरा, जमीन के जो रेट हैं बहुत बड़ गये, पंजीयन बेहड़ी जमीन, सिंचाई वाली सिंचित जमीन और दूसरा पड़त इनके अलग-अलग रेट हैं, कहीं जगह बेहड़ी जमीन जो खेती की कीमत है 20-20 फीट ऊंचे बीहड़ हैं, 20 हजार, 15 हजार रूपये प्रति बीघा और आप उस पर सिंचाई के हिसाब से लेते हैं, एक गांव में दो-दो प्रकार की जमीन होती है तो इसमें भी जहां आपकी सिंचित जमीन है उसकी दर अलग कर दें और बेहड़ी जमीन और पड़त जमीन और जो ऊसर जमीन है उसका रेट अलग करें, मतलब वास्‍तविकता के आधार पर जो बाजारी मूल्‍य है उसके मूल्‍य पर कर दें. इसके साथ एक बात अंतिम माननीय मुख्‍यमंत्री दिग्विजय सिंह जी ने और शिवराज सिंह जी ने घोषणा की थी करधन तालाब है बहुत बड़ा कि हम इसका जीर्णोद्धार करायेंगे, उनकी घोषणा पर अमल आज 10-12 साल हो गये, नहीं हो रहा, कृपया अमल करा दें.

श्री गोविंद सिंह पटेल (गाडरवारा)-- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मांग संख्‍या 7, 23, 31, 45, 57, 60 और 61 के समर्थन में अपनी बात रखना चाहता हूं. पहले मैं जल संसाधन विभाग के बारे में बात करना चाहता हूं. जल संसाधन विभाग की जो आज भूमिका है उसके द्वारा सिंचाई का रकबा 7 लाख हेक्‍टेयर से बढ़कर और 36 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र हुआ है उसमें सिंचाई विभाग की बहुत बड़ी भूमिका है, क्‍योंकि सिंचाई विभाग ने अभी तक 142 मध्‍यम परियोजनाओं के विरूद्घ 116 का कार्य पूर्ण करके 3.88 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र में इसकी सिंचाई की क्षमता बढ़ाई. मध्‍यम परियोजना भी लघु परियोजना 220 लघु परियोजना के विरूद्ध 200 बाण्‍ड पूर्ण करके ऐसे 22 जिलों में 241 लघु परियोजनाओं का कार्य प्रगति पर है, ऐसा काम जल संसाधन विभाग ने किया है और सिंचाई का रकवा जो बढ़ा है उसमें जल संसाधन विभाग की भूमिका बहुत अधिक है. मेरे क्षेत्र में जल संसाधन विभाग द्वारा पहले एक नलकूप विभाग जिसको ट्यूबबेल कंस्‍ट्रक्‍शन ग्राउंड वाटर सर्वे एक विभाग था जिसमें लगभग दो ढाई सौ नलकूप चलते थे, लेकिन आज उन नलकूपों की उपयोगिता समय के हिसाब से कम हो गई है और विभाग खत्‍म कर दिया गया है. तो वह विभाग हस्‍तांतरण करके राजगढ़ पहुंचा दिया गया है पूरा अमला तो वह जो विचारे छोटे-छोटे कर्मचारी, आपरेटर, चौकीदार वगैरह बहुत ज्‍यादा परेशान हो रहे हैं तो मेरा कहना है कि आज केन्‍द्र सरकार भी हमारी चाह रही है, प्रदेश सरकार भी चाह रही है कि पुराने जो जलस्रोत हैं उनको रीचार्ज