मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा द्वादश सत्र

 

 

दिसंबर, 2016 सत्र

 

गुरुवार, दिनांक 8 दिसंबर , 2016

 

(17 अग्रहायण, शक संवत्‌ 1938 )

 

 

[खण्ड- 12 ] [अंक- 4]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

गुरुवार, दिनांक 8 दिसंबर, 2016

 

(17 अग्रहायण, शक संवत्‌ 1938 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.02 बजे समवेत हुई.

 

{ अध्यक्ष महोदय (डॉ. सीतासरन शर्मा ) पीठासीन हुए.}

 

श्री जितू पटवारी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, एक बहुत महत्वपूर्ण बात थी ,मुख्यमंत्री जी ने और सारे मंत्रियों ने कल स्थगन पर जो चर्चा हुई थी उस पर कहा था..

अध्यक्ष महोदय-- यह बात प्रश्नकाल के बाद कर लेंगे, प्रश्न क्रमांक 1.

श्री जितू पटवारी-- उस पर कहा था कि कर्ज घटेगा,सस्ता होगा. सारे आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि सब महंगा हुआ है.

संसदीय कार्यमंत्री(डॉ. नरोत्तम मिश्र)माननीय अध्यक्ष महोदय, क्या यह गलत परंपरा नहीं है.

अध्यक्ष महोदय-- उनको मैंने अनुमति नहीं दी है.

डॉ. नरोत्तम मिश्र-- सवाल इतना सा नहीं है कि आपने उनको रोका है विपक्ष यह परंपरा ही गलत डाल रहा है, कौनसी बात कब कहना है यह उनको समझ ही नहीं आता.

अध्यक्ष महोदय-- धीरे-धीरे समझ में आएगी.

डॉ. नरोत्तम मिश्र-- कौनसी बात कब कैसे कही जाती है और यह सलीका हो तो हर बात सुनी जाती है.

अध्यक्ष महोदयक्या बात है.

वन मंत्री(डॉ. गौरीशंकर शेजवार)अध्यक्ष महोदय, प्रश्न यह है कि यह जानते हैं कि प्रश्नोत्तरकाल में व्यवधान नहीं करना चाहिए. इसके बाद व्यवधान करने की यह इनकी हठधर्मी है और एक बार नहीं, हर बार यह हो रहा है.

श्री सुदंरलाल तिवारी-- कौन व्यवधान कर रहा है. अध्यक्ष महोदय, यह कहने का अधिकार आपको है, शेजवार साहब बाधा क्यों पैदा कर रहे हैं.

श्री बहादुर सिंह चौहान--- हमारे नेताजी की बात पूरी सुनी आपने कल ?

डॉ. नरोत्तम मिश्र--- यह इनकी पुरानी आदत है जब आपके पिताजी अध्यक्ष थे तब इससे ज्यादा बाधा करते थे.

अध्यक्ष महोदय-- माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि प्रश्नकाल में कोई-सा भी विषय न उठाये.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार-- अध्यक्ष महोदय, अनुरोध से नहीं यह प्रताड़ना से सुधरेंगे.

अध्यक्ष महोदय-- मंत्री जी, मैं तो अनुरोध ही कर सकता हूं. ..(हंसी)..

श्री सुंदरलाल तिवारी--- (XXX)

डॉ. नरोत्तम मिश्र-- अध्यक्ष महोदय, यह घोर आपत्तिजनक है, चुनकर आया हुआ व्यक्ति है.आपकी कृपा से आया है क्या.

अध्यक्ष महोदय-- यह कार्यवाही से निकाल दें.

श्री सुदंरलाल तिवारी--- चुने हुए को भी बाहर निकालने का अधिकार अध्यक्ष महोदय के पास है, आपके पास नहीं है.

श्री कैलाश चावला-- अध्यक्ष महोदय, अगर निकालना है तो पहले इन्हीं को निकाला जाये.

अध्यक्ष महोदय---- जो सबसे अधिक व्यवधान डालते हैं उनको निकालने का नियम बना है.

श्री सुदंरलाल तिवारी--- अध्यक्ष महोदय, आपको निकालने का पूरा अधिकार है.

श्री बाबूलाल गौर-- अध्यक्ष महोदय, किसी को न निकाला जाये. (हंसी)..

 

 

 

 

तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर

 

 

भिण्‍ड जिले में स्‍वीकृत रेत खदानें

[खनिज साधन]

1. ( *क्र. 1671 ) चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) भिण्‍ड जिले के विकासखण्‍ड मेहगांव, रौन, लहार के अतंर्गत कुल कितनी स्‍वीकृत रेत खदाने हैं? विधानसभा क्षेत्रवार, नामवार, रकबावार जानकारी दी जावे (ख) उक्‍त खदानों में से वर्तमान में कौन-कौन सी खदानों से शासन की स्‍वीकृति से रेत उत्‍खनन का कार्य किया जा रहा है? क्‍या उक्‍त स्‍वीकृत संचालित खदानों का सीमांकन विधानसभा में लिये निर्णय के अनुसार क्षेत्रीय विधायक को साथ में लेकर किया गया है? यदि हाँ, तो किस-किस खदान पर नामवार, खदानवार जानकारी दी जावे (ग) क्‍या विकासखण्‍ड लहार अंतर्गत डुबका खदान जिसकी अनापत्ति पर्यावरण विभाग से जारी नहीं की गई है, से रेत का उत्‍खनन कर नदी की दूसरी और मेहगांव विकासखण्‍ड, मेहगांव बरेठी गांव से रेत का परिवहन किसकी अनुमति से और किन परिस्थितियों में किया जा रहा है? क्‍या प्रशासन उक्‍त नियम विरूद्ध रेत उत्‍खनन कार्य करने वाले ठेकेदार का ठेका निरस्‍त करेगा?

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट में दर्शित है। (ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट में दर्शित है। माननीय प्रश्‍नकर्ता द्वारा किस विधानसभा सत्र का प्रश्‍न में संदर्भ लिया गया है, स्‍पष्‍ट नहीं होने के कारण जानकारी दिया जाना संभव नहीं है। खदानों का सीमांकन कलेक्‍टर कार्यालय द्वारा किया जाता है। (ग) प्रश्‍नानुसार डुबका रेत खदान हेतु समस्‍त वैधानिक अनुमतियां प्राप्‍त हो गईं हैं। अत: नियमानुसार खदान का संचालन किया जा रहा है। शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''एक''

चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे जो जवाब मिला है उसमें शासन ने यह कहा है कि इस तरह का कोई प्रश्‍न उत्‍पन्‍न नहीं होता है जबकि पिछले जुलाई सत्र में माननीय प्रदीप अग्रवाल जी की ध्‍यानाकर्षण सूचना में माननीय मंत्री महोदय ने स्‍वयं कहा था कि जनप्रतिनिधि की उपस्थिति में सभी संबंधित खदानों का सीमांकन कराया जाएगा. मेरा आपसे अनुरोध है मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि क्‍या जो चिह्नित खदानें हैं और जो ऑक्‍शन्‍ड खदानें हैं उनका सीमांकन कराया जाएगा और जो अवैध रूप से खनन कर रहे हैं अन्‍यत्र जगह से उनको रोका जाएगा और अगर ऐसा कोई ठेकेदार जो ऑक्‍शन्‍ड खदान लिए हुए है और वह अगर अन्‍यत्र खदान से खुदाई कर रहा है तो क्‍या उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी.

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍लमाननीय अध्‍यक्ष महोदय, यदि स्‍वीकृत खदान के बाहर कोई रेत निकालने का काम करेगा तो सिर्फ कार्यवाही ही नहीं बहुत कड़ी कार्यवाही की जाएगी और जहां तक सीमांकन का सवाल है आमतौर पर जिला प्रशासन की ड्यूटी है कि कोई खदान ऑक्‍शन में स्‍वीकृत हुई है तो उसका सीमांकन कराकर उसको भूप्रवेश उपलब्‍ध कराए. जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में सीमांकन कराने की व्‍यवस्‍था नहीं है और आमतौर पर यह उचित भी नहीं होगा लेकिन स्‍पेसिफिक कहीं जनप्रतिनिधि की इच्‍छा है कि उस सीमांकन में पर्टिकुलर उस एरिया के सीमांकन में मझे रहना आवश्‍यक है तो जैसा मैंने पिछली बार किया था उस प्रकार से किया जा सकता है.

चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वैसे तो माननीय मंत्री जी ने ब‍हुत अच्‍छी बात कह दी है लेकिन थोड़ा सा और स्‍पष्‍ट हो जाता कि कोई भी प्रतिनिधि की उपस्थिति रहेगी तो हम आपके आभारी रहते.

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल माननीय अध्‍यक्ष महोदय, किसी भी प्रतिनिधि का रहना उचित नहीं है लेकिन माननीय सदस्‍य मुकेश जी के क्षत्र में यदि किसी खदान में उन्‍हें यह शंका है कि सीमांकन जो प्रशासन ने किया है वह सही नहीं हुआ है तो उस पर्टिकुलर क्षेत्र का सीमांकन मुकेश जी की उपस्थिति में या उनके प्रतिनिधि की उपस्थिति में हो जाएगा.

चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी बहुत बहुत धन्‍यवाद.

अध्‍यक्ष महोदयआप बैठ जाएं वैसे प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता है पर आप पूछ लीजिए.

श्री विजयपाल सिंहगलत जगह से जो रेत उठ रही है उसका सीमांकन करा लें तो ज्‍यादा उत्‍तम होगा और जो ठेकेदार गलत तरीके से रेत उठा रहा है तो उस पर कार्यवाही भी होना चाहिए.

अध्‍यक्ष महोदयमाननीय मंत्री जी प्रश्‍न दूसरे जिले का है प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता है पर माननीय विधायक जी ने जो कहा है उसको ध्‍यान में दे लें आपको कुछ कहना है तो कह भी दीजिए.

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍लमाननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो नई खनिज रेत नीति आपने बनाई है मुझे सदन को यह जानकारी देते हुए बड़ी प्रसन्‍नता है और आपको भी बड़ी खुशी होगी माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कि सेंड की रायल्‍टी से जो 130 करोड़ के आसपास शासन के खजाने में एतिहासिक रूप से आता रहा है नई जो खनिज रेत नीति हम लोगों ने बनाई है उससे ऑक्‍शन के रूट में हम लोग गए हैं उससे लगभग 1500 करोड़ रुपए से ज्‍यादा शासन के खजाने में रेत के माध्‍यम से आएगा. राजस्‍व के माध्‍यम से इसका मतलब कि लंबे समय से जो माननीय सदस्‍य इस बात को लेकर चिन्‍तित रहते थे कि रेत की मात्रा ज्‍यादा है लेकिन शासन के खजाने मे रायल्‍टी कम आती है तो उस कमी को भी दूर करने में नई रेत नीति के माध्‍यम से हम लोगों ने उस पर काफी सफलता प्राप्‍त की है और जहां तक आपके क्षेत्र के सीमांकन का सवाल है मैंने कहा ही है कि यदि किसी एक जिले में 50 खदाने हैं उसमे से किसी खदान में यदि अवैध उत्‍खनन की शंका होती है तो जो आप जो जानकारी मुझे देंगे उस पर सीमांकन की दुबारा व्‍यवस्‍था सुनिश्चित कर देंगे.

श्री बहादुर सिंह चौहानतिवारी जी माननीय अध्‍यक्ष जी ने मुझे समय दिया है. (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदयउन्‍हें अलाऊ किया है और अब इसके बाद किसी को अलाऊ नहीं करेंगे. (व्‍यवधान)

श्री सुन्दरलाल तिवारी--लैंड रेवेन्यू कोर्ट में क्या मंत्री जी को यह अधिकार है कि किसी विधायक को अनुमति दे दें कि वह सीमांकन में जाए, सीमांकन के तो नियम हैं.

अध्यक्ष महोदय--मनाही भी कहा है.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--मंत्री जी कह रहे हैं कि हम जनप्रतिनिधि को एलाउ कर देंगे.

अध्यक्ष महोदय--एलाउ कर देंगे. उन्होंने नापने के लिए थोड़ी बोला है. (व्यवधान)

श्री बहादुर सिंह चौहान--तिवारी जी इसमें गलत क्या हो रहा है (व्यवधान)

चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी--माननीय अध्यक्ष महोदय, कृपा करके थोड़ा सा स-कोप बोलिए. यह उस तरह के नहीं है जिस तरह के आप समझ रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय--तिवारी जी यह ठीक बात नहीं है. (व्यवधान) इसमें लेंड रेवेन्यू कोर्ट कहां से आ गया. (व्यवधान)

श्री सुन्दरलाल तिवारी--सीमांकन कौन करेगा (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--सीमांकन अधिकारी करेंगे. उसमें विधायक उपस्थित रहे तो कोई एतराज है क्या आपको (व्यवधान)

श्री सुन्दरलाल तिवारी--सीमांकन पटवारी, आरआई, तहसीलदार करेंगे और जो पार्टी इनवाल्व है..(व्यवधान)

श्री बहादुर सिंह चौहान--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा जनता से जुड़ा हुआ प्रश्न है (व्यवधान)

जल संसाधन मंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र)-- अध्यक्ष महोदय, कौन जाएगा कौन नहीं जाएगा क्या तिवारी जी तय करेंगे या मंत्री तय करेगा. (व्यवधान)

श्री सुन्दरलाल तिवारी--लेकिन आप भी तय नहीं करेंगे..(व्यवधान)

डॉ. नरोत्तम मिश्र--सरकार ही तय करेगी, कानून यहीं बनता है इसी विधान सभा में अधिकारी उस पर अमल करते हैं (व्यवधान)

श्री शैलेन्द्र जैन--विधायकों के अधिकार की बात करते हैं अब आप विधायकों के अधिकार के हनन की बात कर रहे हैं. आप क्या करना चाहते हैं (व्यवधान)

श्री बहादुर सिंह चौहान--तिवारी जी आप विधायक के खिलाफ बोल रहे हो (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--बैठ जाइए बाद में पढ़वा देंगे (व्यवधान) तिवारी जी बैठ जाइए.

श्री बहादुर सिंह चौहान--अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने जो उत्तर दिया है उसकी मैं प्रशंसा करता हूँ. देखने में यह आ रहा है कि जो ठेकेदार अपनी रायल्टी से ठेका लेता है सीमांकन सही नहीं होने पर जो अवैध उत्खनन करता है वह कहता है कि मेरी रेत यहां से आती है इस कारण मारपीट और हत्याएं हो जाती हैं. खनिज विभाग में सीमांकन अति महत्वपूर्ण है. इसमें जनप्रतिनिधि उपस्थित रहने से सीमांकन सही हो जाता है. रेत माफिया के कारण...

अध्यक्ष महोदय--वे तो सहमत हैं. आप अपनी बात कह दीजिए.

श्री बहादुर सिंह चौहान--अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न यह है कि मेरे विधान सभा क्षेत्र के संबंध में मैंने खनिज विभाग से संबंधित प्रश्न किया था.

वन मंत्री (डॉ. गौरीशंकर शेजवार)--तिवारी जी आप किसी ठेकेदार की तरफ से तो नहीं बोल रहे हैं न (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--माननीय मंत्री जी बहादुर सिंह जी का प्रश्न आ जाने दें. उनका प्रश्न आ जाए फिर आप जो कहना चाहें कह लें.

श्री बहादुर सिंह चौहान--मेरे विधान सभा क्षेत्र के संबंध में मैंने चार बार खनिज विभाग का प्रश्न लगाया था उसमें शासन द्वारा 30 करोड़ 29 लाख की रिकवरी कर दी. माननीय मंत्री जी के लगातार परस्यू करने से यह वसूली हुई. मेरा आग्रह यह है कि यह खनिज से जुड़ा हुआ मामला है तो केवियट लगाकर बाकी वसूली करवा लें.

अध्यक्ष महोदय--यह प्रश्न इससे उद्भूत नहीं होता है. माननीय मंत्री जी आप कुछ कह रहे थे.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार--अध्यक्ष महोदय, मैं यह बोल रहा था कि तिवारी जी बहुत रुचि लेकर इस विषय पर बात कर रहे थे.

अध्यक्ष महोदय--यह कोई बात नहीं है. तिवारी जी बैठ जाइए बिलकुल नहीं उठेंगे आप. बहादुर सिंह जी आप अपनी बात लिखकर मंत्री जी को दे दीजिए आपकी बात आ गई है पर उसका उत्तर नहीं आएगा. प्रश्न उद्भूत नहीं होता है.

श्री बहादुर सिंह चौहान--सरकार के खजाने में 30 करोड़ रुपए आए हैं. पहली बार इतनी बड़ी वसूली हुई है.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार--यदि कोई ठेकेदार आउट एरिया में खनन कर रहा है जैसे ही आउट एरिया वाली बात आई तो क्या आप ठेकेदार का पक्ष तो नहीं ले रहे हैं यहां पर ?

अध्यक्ष महोदय--तिवारी जी बैठ जाइए. अब कृपा करके तिवारी जी की बात पर कोई भी माननीय सदस्य और माननीय मंत्री कमेंट न करें. अभी पंचायत मंत्री जी ने भी अपनी बटन दबाई थी. वे फिर मानते नहीं हैं प्लीज.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री गोपाल भार्गव)--अध्यक्ष महोदय, तिवारी जी चाहते हैं कि.

श्री रामनिवास रावत--भार्गव जी भी तिवारी जी से कम नहीं पड़ते हैं.

अध्यक्ष महोदय--इस तरह से आप उनके लिए नहीं कह सकते हैं. बैठ जाएं.

श्री गोपाल भार्गव--रावत जी आप बैठ जाएं, मैं बंदूक लेकर बीहड़ में नहीं उतर रहा हूं. आप बंदूक लेकर बीहड़ में जाने की बात करते थे मैं नहीं जा रहा हूँ. मैं तिवारी जी से यह कहना चाहता हूँ कि अब यह तय करेंगे कि संसद में और विधान सभाओं में क्या होगा. अब यह भी पूछेंगे कि संसदीय कार्य मंत्री जी लाल, हरी, नीली पीली जैकेटें क्यों पहनकर आते हैं.

चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी--अध्यक्ष महोदय,(XXX)

अध्यक्ष महोदय--यह कार्यवाही से निकाल दें.

सड़क निर्माण में अनियमितता

[नगरीय विकास एवं आवास]

2. ( *क्र. 1651 ) श्री जालम सिंह पटेल : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) गोटेगांव नगरपालिका परिषद् में वर्ष 2014-15, 2015-16 एवं 2016-17 में विभिन्‍न वार्डों में सड़क नाली, पुलियों के कितने निर्माण हुए, विवरण स्‍वीकृत बजट सहित देवें (ख) उपरोक्‍त निर्माण में कितने निर्माण अंडर इस्‍टीमेट एवं कितने ओवर इस्‍टीमेट हुए? (ग) क्‍या ओवर इस्‍टीमेट निर्माणों की तकनीकी प्रशासनिक एवं वित्‍तीय अनुमतियां समय पर नियमानुसार ली गईं थी? यदि नहीं, तो दोषी कौन है? दोषियों पर क्‍या कार्यवाही कब तक की जाएगी? (घ) ओवर इस्‍टीमेट निर्माण करने हेतु क्‍या नियम हैं? नियमावली सहित जानकारी देवें (ड.) क्‍या प्रश्‍नकर्ता सदस्‍य द्वारा गोटेगांव की मॉडल रोड निर्माण में हुई अनियमितताओं की जानकारी कलेक्‍टर नरसिंहपुर को पत्र द्वारा दी गई थी? यदि हाँ, तो क्‍या कार्यवाही की गई?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) 12 कार्यों पर स्‍वीकृत प्राक्‍कलन राशि से कम एवं 8 कार्यों पर स्‍वीकृत प्राक्‍कलन राशि से अधिक व्‍यय हुआ है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) जी नहीं। प्राप्‍त जानकारी की जाँच किए जाने के आदेश दिए गए हैं। जाँच परिणामों के अनुसार आगे की कार्यवाही नियमानुसार की जावेगी। (घ) यदि किसी कार्य की लागत स्‍वीकृत अनुमानित लागत से अधिक आने की संभावना हो या अधिक आवे तो कार्य की पुनरीक्षित स्‍वीकृति सक्षम प्राधिकारी से लिए जाने का प्रावधान है। (ड.) जी हाँ। कार्यवाही कलेक्‍टर जिला नरसिंहपुर के पास प्रचलित है।

श्री जालम सिंह पटेल--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने अपने उत्तर के भाग (ख) और (ग) में लिखा है कि 12 कार्य ओव्हर इस्टीमेट हुए हैं. 2015-16 में जो निर्माण कार्य हुए उसमें किसी भी प्रकार की तकनीकी स्वीकृति नहीं ली गई. मैंने एक और शिकायत की है जो (घ) में है. गोटेगांव में मॉडल सड़क बन रही है उसकी शिकायत की है. उसकी जांच चल रही है. वर्तमान में जो उपयंत्री वहां है वह लगभग 9-10 साल से वहां पर पदस्थ है. वह 216 दिन अनुपस्थित रहा है उसके पश्चात् भी उसको 3 लाख रुपए का भुगतान हो गया है. उस पर एससी एसटी एक्ट का एक मामला चल रहा है. एक महिला उत्‍पीड़न का मामला चल रहा है. एक महीने से वह भी फरार है. मैं मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि मैंने लगभग चार बार शिकायत की है, एक शिकायत 18.3 में की है, 31.3 में एक शून्‍यकाल लगाया था, 7.5 में एक शिकायत की है, 29. 7 में एक शिकायत की है और नगरपालिका उपाध्‍यक्ष ने भी 30.12 में और 4.4 में एक शिकायत की है. मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि मैंने जो शिकायत की है तो उसको हटाकर या निलंबित करके जांच करायेंगे क्‍या ?

श्रीमती माया सिंह :- सम्‍माननीय अध्‍यक्ष जी, माननीय सदस्‍य ने जो सवाल पूछा है इस सवाल में वह जो उपयंत्री के बारे में पूछ रहे हैं, वह अलग है. यहां पर जो उन्‍होंने कहा है कि तकनीकी और प्रशासनिक वित्‍तीय अनियमितता के बारे में प्रश्‍न '''' के बारे में बता रहे हैं और दूसरा उन्‍होंने जांच के बारे में कहा है. जांच के बारे में जो कलेक्‍टर को कहा गया था तो वह जांच पूरी हो गयी है और उसमें कोई अनियमितता नहीं पायी गयी है. जब जांच की थी उस वक्‍त मॉडल रोड का निरीक्षण किया गया था तो उस वक्‍त निरीक्षण के समय में अध्‍यक्ष, उपाध्‍यक्ष और पार्षद उपस्थित थे. उनकी उपस्थिति में निविदा की शर्तों के अनुरूप उसमें गुणवत्‍ता पायी गयी है. दूसरी बात आपने उपयंत्री की बात कही है, वह आप हमें बता दीजिये, वह आपका एक अलग मसला है.

श्री जालम सिंह पटेल :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उपयंत्री वहां पर लगातार अनियमितता कर रहा है. मैंने 7.5.16 को कलेक्‍टर को जो पत्र लिखा है, उसी के '''' में जो उसका जवाब है, उसी में यह बिंदु है कि 216 दिन तक वह अनुपस्थित रहा है. मॉडल सड़क जो बन रही थी, उसमें जो वहां नाली बनना थी, उसमें 20 लाख रूपये की नाली बन चुकी थी, उसको तोड़ कर फिर से 35 लाख रूपये की नाली बना थी. मुख्‍यमंत्री जी ने जो मॉडल सड़क वहां के लिये दी थी उसमें आज तक डामर नहीं हुआ है, उसके लिये पैसा नहीं है. आपने जवाब दिया है कि 67 लाख रूपये का ओवर एस्‍टीमेट है, इसलिये सड़क नहीं बन रही है. वहां पर धूल उड़ रही है. मैंने इतने सारे बिंदु दिये है, आपको भी पत्र लिखा है, पूर्व मंत्री जी को पत्र लिखा है.लेकिन अभी तक जांच नहीं हुई है

अध्‍यक्ष महोदय :- इनके दो विषय हैं, एक तो ओवर एस्‍टीमेट है, दूसरा मॉडल सड़क की क्‍वालिटी ठीक नहीं है.

श्री जालम सिंह पटेल :- अध्‍यक्ष महोदय, वह 216 दिन अनुपस्थित रहा है तो उसका भुगतान कैसे होगा. मैंने कलेक्‍टर को पत्र दिया है, उसमें यह बिंदु है. आपने कहा है कि जांच हो गयी है, आप इसकी जांच करायें न ?

श्रीमती माया सिंह :- अध्‍यक्ष महोदय, जो मॉडल सड़क बनायी है, उसकी जांच हो चुकी है उसमें जांच के समय सारे लोग उपस्थित थे , कलेक्‍टर ने जांच करायी है उसमें सड़क की गुणवत्‍ता में कोई कमी नहीं पायी गयी है, रही बात नाली निर्माण की तो जो नाली का निर्माण कराया गया था वह क्षतिग्रस्‍त हो गयी थी और पानी की समुचित निकासी नहीं हो पा रही थी इसलिये मॉडल सड़क के साथ ही साथ पानी की समुचित निकासी के लिये इस नाली के निर्माण को उसमें सम्मिलित किया गया है.

श्री जालम सिंह पटेल :- अध्‍यक्ष महोदय, नाली फाईनल हुई ही नहीं और फिर से तोड़कर बना दी. मैं मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि क्‍या नाली का निर्माण फाईनल हो गया था क्‍या ?

अध्‍यक्ष महोदय :- मंत्री जी, क्‍या आप फिर से इसकी जांच करा लेंगे ?

श्रीमती माया सिंह :- अध्‍यक्ष जी, मैं फिर से इसकी जांच करा लूंगी. इसके साथ ही साथ दूसरा जो अधिकारी के खिलाफ भी जांच की बात कर रहे हैं, मैं उसकी दोबारा जांच करवा लूंगी. वैसे इसकी जांच हो चुकी है.

अध्‍यक्ष महोदय :- विधायक जी, आप मंत्री जी को डिटेल्‍स दे दें, जो आपको एतराज है या उसमें जो अनियमिता हुई है, उसका विवरण दे दें, वह जांच करवा लेंगी.

श्री जालम सिंह पटेल :- धन्‍यवाद्.

शासकीय महाविद्यालयों को भवन की सुविधा

[उच्च शिक्षा]

3. ( *क्र. 20 ) श्री सुदर्शन गुप्‍ता (आर्य) : क्या उच्च शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या मध्यप्रदेश में कई शासकीय महाविद्यालय भवन के अभाव में किराये के भवन में संचालित होते हैं? यदि हाँ, तो जिलावार सूची उपलब्ध करावें? (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार किराये के भवन में संचालित शासकीय महाविद्यालयों के स्वयं के भवन के लिये शासन द्वारा क्या कार्यवाही की जा रही है? (ग) शासन द्वारा कब तक समस्त शासकीय महाविद्यालयों को स्वयं का भवन उपलब्ध कराने संबंधी कार्यवाही पूर्ण कर ली जावेगी?

उच्च शिक्षा मंत्री ( श्री जयभान सिंह पवैया ) : (क) प्रदेश के 11 शासकीय महाविद्यालय किराये के भवन में संचालित हैं। जानकारी संलग्न परिशिष्ट पर है। (ख) संलग्‍न परिशिष्ट के रिमार्क कालम में जानकारी अंकित है। भवन निर्माण हेतु भूमि उपलब्ध होने पर निर्माण कार्य का प्रस्‍ताव प्राप्त होने पर निर्णय हेतु स्थायी वित्तीय समिति के समक्ष प्रस्तुत किए जाते हैं। समिति के निर्णय अनुसार प्रशासकीय स्वीकृति जारी की जाती है। तदोपरांत निर्माण कार्य की प्रक्रिया निर्माण एजेंसी द्वारा की जाती है। उपलब्‍ध आवंटन के आधार पर भवनों का निर्माण किया जाता है। (ग) समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

परिशिष्ट - ''दो''

 

श्री सुदर्शन गुप्‍ता :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से बताना चाहता हूं यह पूरे प्रदेश के महाविद्यायलों के विद्यार्थियों के हित का मामला है. प्रायवेट स्‍थान पर महाविद्यालय लगने से पढ़ाई का माहौल नहीं बन पाता है. शिक्षा का स्‍तर नहीं बन पाता है. खेलकूद व सांस्‍कृतिक गतिविधियां नहीं हो पाती है. प्रदेश भर के केवल 20 महाविद्यालय हैं, जो प्रायवेट भवनों में चल रहे हैं. मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि वहां पर भूमि उपलब्‍ध नहीं है तो क्‍या सरकार वहां पर भूमि खरीदकर नये भवन बनायेंगी और कब तक ?

श्री जयभान सिंह पवैया :- मान्‍यवर अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने भवनविहीन महाविद्यालय के बारे में प्रश्‍न किया है. मैं यह बताना चाहूंगा कि 161 महाविद्यालयों के भवन निर्माण होने हैं. 45 महाविद्यालयों के भवन निर्माणाधीन प्रक्रिया में हैं. 50 के लिये विश्व बैंक से सहायता मिल गई है उसको इस वर्ष से शुरू कर रहे हैं. 66 महाविद्यालय जो बचेंगे उनको औसतन 15 महाविद्यालय प्रति वर्ष के मान से उनका निर्माण शासन की ओर से यथाशीघ्र पूरा कर दिया जाएगा.

श्री सुदर्शन गुप्ता--अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद मैं मंत्री जी के जवाब से संतुष्ट हूं.

श्री मुरलीधर पाटीदार--अध्यक्ष महोदय, मेरा आग्रह है कि प्रायवेट स्कूल तो एक-एक अथवा दो-दो बिल्डिंग में चल रहे हैं उनके लिये ग्राऊंड की व्यवस्था की जाए.

अध्यक्ष महोदय--आपकी बात आ गई है.

प्रश्न संख्या--4

4. ( *क्र. 1724 ) श्री सुरेन्‍द्रनाथ सिंह : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विभाग के कितने अधिकारियों को ए.सी.ई.ओ. जिला पंचायत बनाया है? उनको विभाग के कौन से आदेशों, निर्देशों से कार्य सौंपे हैं? (ख) किन जिला पंचायतों ने विभागीय निर्देशों का पालन कर ए.सी.ई.ओ. को कार्य दिये हैं और किनने नहीं दिये हैं? उनके नाम बतायें। (ग) विभागीय अधिकारी जैसे ए.सी.ई.ओ. जिला पंचायत, सी.ई.ओ. जनपद पंचायत, बी.डी.ओ. डी.ई.ओ., ए.डी.ई.ओ. को जल ग्रहण क्षेत्र मिशन एवं आजीविका परियोजना में क्‍या दायित्‍व सौंपे गये हैं? यदि दायित्‍व सौंपे गये हैं तो आदेश, निर्देश की प्रति उपलब्‍ध करायें? नहीं सौंपे गये हैं तो कब से विभागीय अधिकारियों से काम लिया जायेगा? (घ) विभाग में किस-किस विभाग के अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर कब से कार्यरत हैं? कितने अन्‍य विभाग से प्रतिनियुक्ति पर हैं? संविदा वाले कितने अधिकारी ए.सी.ई.ओ. के जि.पं. के पद से वेतन लेने वाले हैं?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) 32 अधिकारियों को अतिरिक्‍त मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है. विभाग के पत्र क्रमांक 2991, दिनांक 06.03.2013 एवं 7866, दिनांक 05.07.2013 द्वारा कार्य सौंपे गए हैं. जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है. (ख) समस्‍त जिला पंचायतों में उपरोक्‍त पत्रानुसार पालन किया जाकर अतिरिक्‍त मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी को कार्य दिए गए हैं. शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता. (ग) राजीव गांधी जल ग्रहण मिशन द्वारा उत्‍तरदायित्‍व सौंपे जाने संबंधी कोई आदेश पृथक से जारी नहीं किए गए हैं. मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी अपने स्‍तर से दायित्‍व संबंधी कार्यादेश जारी करते हैं. (घ) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है.

 

 

 

 

श्री सुरेन्द्र नाथ सिंह--अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न का जो जवाब दिया गया है वह गलत है, क्योंकि अनेक जिलों में निर्देशानुसार कार्य नहीं दिया गया है. यह जवाब आधा-अधूरा है कुछ जिलों में कार्य-विभाजन आदेश ही जारी नहीं किये गये हैं उसके अलावा अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को समस्त योजनाओं का प्रभारी अधिकारी बनाया है तो वित्तीय नस्तियां सीईओ सीधे संविदा पीओ तथा ए.पी.ओ द्वारा भेजी जाती है जिससे अनेक जिलों में वित्तीय अनियमितता संभावित है. स्थापना जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी अनेक जिलों में अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी को न देकर संविदाकर्मियों से कराया जा रहा है. शासन द्वारा दिया गया उत्तर जिलों द्वारा दिये गये उत्तरों के विपरीत है इसीलिये जिले द्वारा दिये गये उत्तरों में अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी के कार्य-विभाजन आदेश की छाया प्रति उपलब्ध करायी जाए. अनेक जिलों द्वारा वास्तविकता से हटकर गलत उत्तर दिये गये हैं इसीलिये एक माह में भोपाल स्तर से जांच करायी जाए.

अध्यक्ष महोदय--आप स्पेसिफिक कुछ पूछ लीजिये.

श्री सुरेन्द्र नाथ सिंह--अध्यक्ष महोदय, पंचायत विभाग में जो अधिकारी लोग हैं उनको प्रापर काम नहीं मिल रहा है, साथ-ही-साथ वहां पर प्रतिनियुक्ति पर इतने अधिकारी आ गये हैं कि वहां के लोग अपने आप को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं इनका निराकरण किया जाए.

श्री गोपाल भार्गव--अध्यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय सदस्य जी ने प्रश्न किया है उसमें विभाग के पत्र क्रमांक 2991 दिनांक 6.3.2013 को और 5.7.2013 को जो एडिशनल सीईओ इनके लिये अधिकार सौंपे गये थे और इसमें यह भी उल्लेख है कि जो जिला पंचायत का सीईओ होगा वह अपनी इच्छा-औचित्य एवं आवश्यकता के अनुसार एडिशनल सीईओ के लिये कार्य-विभाजन कर सकेगा यह परिपत्र है और जैसा कि माननीय सदस्य ने कहा है कि उसकी प्रति मुझे दे दें तो मैं उसकी प्रति भी उपलब्ध करवा दूंगा, क्योंकि मुख्य रूप से इनका काम प्रशासकीय शाखा एवं प्रशासनिक काम को देखना है. इसके अलावा भी समय समय पर जैसा कि उन्होंने कहा है कि हाऊसिंग के या आई.डब्ल्यू.एम.पी. के या दूसरे भी काम है उनको क्यों नहीं दिया जाते हैं. सेक्शन अलग अलग हैं जैसी उसकी उपयोगिता होती है उसके हिसाब से काम दिये जाते हैं.

श्री सुरेन्द्र नाथ सिंह--अध्यक्ष महोदय, इसमें जो अतिरिक्त अधिकारी हैं उनको काम दिया ही नहीं गया है वह फालतू बैठे रहते हैं उनके पास में कोई साधन जैसे गाड़ी व बैठने तक की व्यवस्था नहीं है और इसमें आजीविका संबंधी प्रश्न का उत्तर भी नहीं दिया गया है.

श्री गोपाल भार्गव--अध्यक्ष महोदय, यह एडिशनल सीईओ की पोस्ट है इसमें डिप्टी कमिश्नर रहते हैं. जो जनपद पंचायत के सीईओ थे जो प्रमोट हुए थे डिप्टी कमिश्नर थे और उनकी पोस्टिंग जिला पंचायतों में की गई थी. अभी हमारे पास में जनपदों में सीईओ के पद कम हैं इस कारण से हमने करीब 40 से ज्यादा जो हमारी जनपदे हैं वहीं पर डिप्टी कमिश्नरों की पोस्टिंग की है ताकि वह सीईओ का प्रभार भी देखें और कहीं कहीं पर वह जिले का भी काम देख रहे हैं. जहां तक माननीय सदस्य ने जो प्रश्न किया है आजीविका का काम अथवा दूसरा काम तो मैंने जैसा कहा कि जिला पंचायत सीईओ स्वविवेक के आधार पर आवश्यकता के अनुरूप जो कुछ भी समय समय पर काम होता है वह उनके लिये आवंटित कर देते हैं. मैं जैसा कि सदस्य जी की इच्छा है कि जिला पंचायत सीईओ ज्यादा से ज्यादा कामों का एडिशनल सीईओ के लिये आवंटन करें इस बारे में भी हम जो भी ज्यादा स्पष्ट होगा उसके लिये दिशा-निर्देश दे देंगे.

श्री सुरेन्द्र नाथ सिंह--अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद.

श्री निशंक कुमार जैन अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय जी से अनुरोध करना चाहूँगा कि कुछ शासन से ऐसे स्‍पष्‍ट निर्देश दे दें कि एडीशनल सी.ई.ओ., जिला पंचायत को कुछ न कुछ काम का आवंटन जरूर कर दें क्‍योंकि जब हम बात ए.सी.ई.ओ. से करते हैं तो वे कहते हैं कि उनके पास कुछ भी अधिकार नहीं हैं एवं काम सफर होता है. हम सी.ई.ओ. से बात करें तो वे अधिकतर समय या तो मीटिंग्‍स में रहते हैं या दौरों पर रहते हैं. कुछ काम बहुत ज्‍यादा प्रभावित हो रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय यह कोई प्रश्‍न नहीं है.

श्री कमलेश्‍वर पटेल माननीय अध्‍यक्ष महोदय, (XXX).

अध्‍यक्ष महोदय यह कार्यवाही से निकाल दें.

प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना प्रस्‍तावित सड़कों का निर्माण

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

5. ( *क्र. 888 ) श्रीमती रंजना बघेल (किराड़े) : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मनावर विधान सभा क्षेत्र में 91 मार्गों पर सड़क निर्माण के प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत किए गए थे, जिनकी स्‍वीकृति की जानकारी देवें। उक्‍त सड़कें कब तक स्‍वीकृत हो जावेंगी? (ख) विधानसभा क्षेत्र में प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना में मिसिंग रोड अधूरे पड़े हैं, क्‍या उन्‍हें पूर्ण किया जावेगा? यदि हाँ, तो कब तक निम्‍न रोड यथा- 1. साला से पडाला, 2. लुन्‍हेरा से बायखेड़ा, 3. अहेरवास कुटीर से रणदा, 4. उमरबन रोड से बडीया, 5. धौलीबावड़ी से मालविहार आदि को पूर्ण किया जावेगा। (ग) विधानसभा क्षेत्र मनावर के निम्‍नलिखित राजस्‍व ग्राम अभी भी सड़क मार्ग से नहीं जुडे है :- 1. बनेडिया, 2. उरदना, 3. सरिकपुरा, 4. गोपालपुरा, 5. पेरखड़, 6. पिपलटोका, 7. लिम्‍दापुरा, 8. जलखेड़ा, 9. दगडपुरा, 10. निलदा, 11. सावलाखेड़ी, 12. फरसपुरा, 13. निरगुडियापुरा, 14. बालीपुरखुर्द। उपरोक्‍त गांवों की पहुँच हेतु सड़क निर्माण की स्‍वीकृति प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना अथवा मुख्‍य मंत्री सड़क योजना में होगी। (घ) यदि हाँ, तो कब तक?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजनांतर्गत/मुख्‍यमंत्री ग्राम सड़क योजनांतर्गत वर्तमान में मिसिंग लिंक के अंतर्गत सड़क निर्माण करने का कोई प्रावधान नहीं होने से उक्त योजनांतर्गत स्वीकृत नहीं किया जा सकता है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (घ) उत्तरांश (ग) के प्रकाश में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।

श्रीमती रंजना बघेल माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी विधानसभा क्षेत्र की सड़कें, जो प्रधानमंत्री सड़क योजना में बनी हुई है, उसमें कुछ मिसिंग रोड़ें हैं, जो अभी तक नहीं बनी हैं. इसमें माननीय मंत्री जी का जवाब आया है कि उसमें एक ही तरफ से कनेक्टिविटी है और वह नहीं बन पायेगी, उसमें प्रावधान नहीं है, लेकिन मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहती हूँ कि अगर प्रधानमंत्री सड़क योजना में एक ही तरफ से कनेक्टिविटी होने के कारण, जो रोड़ बन चुकी है लेकिन जो रोड़ मिसिंग रोड़ हैं, जो विकासखण्‍ड को जोड़ती हैं, जो दूसरी तरफ से मुख्‍य-मुख्‍य पंचायत के ग्रामों को जोड़ती हैं तो क्‍या उन रोड़ों के लिए माननीय मंत्री जी डब्‍ल्‍यू.आर.डी. या मुख्‍यमंत्री सड़क योजना से उनको बनाने के लिए प्रावधान रखेंगे ?

श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी तो नियम यही है कि सिंगल कनेक्टिविटी होना चाहिए, वह चाहे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना हो या मुख्‍यमंत्री ग्राम सड़क योजना हो. हम सर्वे करवा लेंगे और जैसे ही हमारी वित्‍तीय स्थितियां अनुमति देंगी या फिर हम भारत सरकार के नियम बदलेंगे, नये-नये नियम बनते रहते हैं. हम उसके आधार पर विचार कर लेंगे.

श्रीमती रंजना बघेल माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहती हूँ कि जैसे एक तरह की कनेक्टिविटी तो है लेकिन वह विकासखण्‍ड से विकासखण्‍ड को जोड़ रही है. एक किलोमीटर की रोड़ से अगर वह डब्‍ल्‍यू.आर.डी. से या मुख्‍यमंत्री सड़क योजना से जोड़ी जाती है तो विकासखण्‍ड से विकासखण्‍ड जुड़ती है. प्रधानमंत्री सड़क योजना की जो प्‍लानिंग बनी है तो उसमें एक गांव तो जुड़ रहा है लेकिन आगे बहुत बड़ा पहाड़ी इलाका दूसरा विकासखण्‍ड आता है तो इस तरह की दो-तीन मिसिंग रोड़ें तो क्‍या आप प्रयास करेंगे कि शीघ्रता से उनको मुख्‍यमंत्री ग्राम सड़क योजना या डब्‍ल्‍यू.आर.डी. से कोई प्रावधान करके, उनको जोड़ा जाये.

श्री गोपाल भार्गव अध्‍यक्ष महोदय, मैं डब्‍ल्‍यू.आर.डी. के बारे में तो नहीं कह सकता हूँ लेकिन मैं इस पर विचार कर लूँगा तथा इस पर जो कुछ भी संभव हो सकेगा, मैं करने का प्रयास करूँगा.

श्रीमती रंजना बघेल माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक अंतिम प्रश्‍न है कि भैंसावद, मनावर, चीखलदा व्‍याहा, बनेडि़या मार्ग 9 किलोमीटर है. इसके लिए निविदा आमंत्रण की कार्यवाही प्रचलन में है. मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहूँगी कि यह प्रचलन में है तो कितने दिन में काम हो जायेगा ?

श्री गोपाल भार्गव अध्‍यक्ष महोदय, शीघ्र करवा लेंगे. बारिश के पहले काम पूरा हो जायेगा.

श्रीमती रंजना बघेल धन्‍यवाद.

डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह जो सड़कें ग्रामीण क्षेत्र की बनी हैं. चाहे वह प्रधानमंत्री सड़क योजना के माध्‍यम से, सुदूर ग्राम सड़क योजना के माध्‍यम से, मुख्‍यमंत्री सड़क योजना के माध्‍यम से, मुख्‍यमंत्री खेत सड़क योजना के माध्‍यम से बनी हैं किन्‍तु इन सबके बावजूद अनेक ऐसे मुख्‍य मार्ग हैं, जो किसी भी कार्य योजनाओं में नहीं आने के कारण ग्रामीण क्षेत्र का आवागमन अवरूद्ध रहता है और इतनी सड़कें बन जाने के बावजूद भी, जो एक सुगम यातायात होना चाहिए, वह नहीं हो पा रही है. क्‍या ऐसी लिंक सड़कों को बनाये जाने के लिए शासन विचार करेगा या इस पर कोई कार्यवाही करेगा ?

अध्‍यक्ष महोदय यह बहुत महत्‍वपूर्ण विषय है.

श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत भारत सरकार ने हमें स्‍वीकृति प्रदान की है और जो नई योजनाओं के नॉमर्स हैं. 500+ से ऊपर के जितने भी गांव हैं, सभी गांव हम प्रधानमंत्री सड़क योजना के अंतर्गत पक्‍की सड़क के साथ एवं पुल पुलियों के माध्‍यम से जोड़ रहे हैं, जो 500 की आबादी से कम वाले गांव है, उसके लिए हमने मुख्‍यमंत्री ग्राम सड़क योजना शुरू की थी. प्रत्‍येक राजस्‍व ग्राम मध्‍यप्रदेश के सभी 52 हजार गांव चाहे वे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत हो या मुख्‍यमंत्री ग्राम संडक योजना के अंतर्गत हो, अनिवार्य रूप से इस वर्ष के अंत तक पूरे के पूरे गांव मय पुल पुलियों के जोड़ दिए जाएंगे, सभी 52 हजार गांवों को जोड़ दिया जाएगा, एक भी गांव बाकी नहीं रहेगा. (मेजों की थपथपाहट)

श्री मुरलीधर पाटीदार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो एक जगह जोड़ा गया है, कम से कम 10 से 15 किलोमीटर का चक्‍कर लगाकर आना पड़ता है.

अध्‍यक्ष महोदय - मंत्री जी ने बहुत स्‍पष्‍ट उत्‍तर दिया है, इससे ज्‍यादा स्‍पष्‍ट उत्‍तर नहीं आ सकता.

श्री निशंक कुमार जैन - मेरा छोटा सा आग्रह है कि जो मजरे टोले हैं, उनने क्‍या बिगाड़ा, वहां भी तो इंसान रहते हैं. (व्‍यवधान)

श्री गोपाल भार्गव - सदस्‍य जी ने जो कहा है, उसका परीक्षण करवा लेंगे.

100 सीटर कन्‍या छात्रावास की स्‍वीकृति

[उच्च शिक्षा]

6. ( *क्र. 323 ) श्री नारायण सिंह पँवार : क्या उच्च शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रश्‍नकर्ता के अता. प्रश्न संख्‍या-85 (क्रमांक 2943), दिनांक 28 जुलाई 2016 के उत्‍तर की कंडिका (क) में बताया गया था कि नेताजी सुभाषचन्‍द्र बोस शासकीय स्नातकोत्‍तर महाविद्यालय ब्‍यावरा में 100 सीटर कन्‍या छात्रावास निर्माण हेतु राशि रूपये 234.28 लाख का प्रस्‍ताव स्‍थायी वित्‍त समिति के समक्ष प्रस्‍तुत कर दिया गया है, स्‍वीकृति हेतु कार्यवाही प्रक्रियाधीन है? यदि हाँ, तो क्‍या प्रश्‍न दिनांक तक स्‍थायी वित्‍त समिति द्वारा उक्‍त प्रस्‍ताव को स्‍वीकृति प्रदान कर दी गई है अथवा नहीं? (ख) क्‍या शासन विधानसभा क्षेत्र ब्‍यावरा सहित आसपास के क्षेत्र की कमजोर एवं सामान्‍य निर्धन वर्ग की छात्राओं को आवासीय सुविधा प्रदान करने की दृष्टि से उक्‍त प्रस्‍ताव को स्‍वीकृति प्रदान करेगा? यदि हाँ, तो कब तक?

उच्च शिक्षा मंत्री ( श्री जयभान सिंह पवैया ) : (क) जी हाँ। प्रस्‍ताव स्‍थायी वित्‍तीय समिति की बैठक में प्रस्‍तुत किया गया, किन्‍तु समिति द्वारा भवन विहीन महाविद्यालयों में भवनों के निर्माण को प्राथमि‍कता दी है। (ख) प्रश्‍नांश () के उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में समय-सीमा बतायी जाना संभव नहीं है। ब्‍यावरा नगर में पिछड़ा वर्ग तथा अल्‍पसंख्‍यक कल्‍याण विभाग द्वारा 50 सीटर कन्‍या छात्रावास संचालित किया जा रहा है, जिसमें महाविद्यालयीन छात्राओं को भी प्रवेश दिया जाकर लाभांवित किया जा रहा है।

श्री नारायण सिंह पवार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से माननीय उच्‍च शिक्षा मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि ब्‍यावरा शहर राजगढ़ जिले का 70 हजार आबादी का, सबसे बड़ा शहर है, यहां पर एक महाविद्यालय मात्र गुना और सिंरोज के बीच में पड़ता है, लगभग 100 किलोमीटर की दूरी तक भी कोई महाविद्यालय नहीं है, गुना व विदिशा जिले के छात्र भी उसी महाविद्यालय में पढ़ते हैं, जिससे अधिक समस्‍या होती है, लगभग 1000 छात्र वहां अध्‍ययनरत हैं. वहां के लिए पिछले साल से मैं एक कन्‍या छात्रावास की मांग कर रहा हूं. पिछले सत्र में भी मुझे आश्‍वासन दिया गया था कि प्रस्‍ताव स्‍थायी वित्‍त समिति को भेज दिया गया है, फिर भी माननीय मंत्री जी का जबाव आया कि प्रस्‍ताव स्‍थायी वित्‍त समिति को भेज दिया गया है, किन्‍तु साधनों के अभाव में अभी कह पाना संभव नहीं है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि ब्‍यावरा के लिए अनिवार्य रूप से 100 सीटर कन्‍या छात्रावास की व्‍यवस्‍था की जावें एवं उसकी घोषणा की जावें.

श्री जयभान सिंह पवैया - मान्‍यवर अध्‍यक्ष महोदय, मैंने सदस्‍य के आग्रह पर उनका प्रस्‍ताव स्‍थायी वित्‍त समिति को भेजा है, लेकिन स्‍थायी वित्‍त समिति ने शासन के नियमानुसार ये तय किया है कि भवन विहीन महाविद्यालय को प्राथमिकता देनी है, शासकीय मद से जिसका निर्माण होना है. ब्‍यावरा में अल्‍पसंख्‍यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्‍याण की ओर से 50 सीटर छात्रावास है, उसमें भी कुछ महाविद्यालय की छात्राएं लाभ लेती हैं, लेकिन मान्‍यवर सदस्‍य की भावनाओं का सम्‍मान करते हुए. हम यह तय कर रहे हैं कि यूजीसी इस तरह के कन्‍या छात्रावासों के लिए अनुदान देती है, हम ब्‍यावरा में कन्‍या छात्रावास के लिए शासन की ओर प्रस्‍ताव यथाशीघ्र भेजेंगे और यूजीसी से कन्‍या छात्रावास के लिए हमें स्‍वीकृति मिलेगी, हम आगामी सत्र में उनकी इस मांग पर अवश्‍य विचार करेंगे.

श्री नारायण सिंह पंवार -- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी का जो उत्तर आया है, यह सही है कि 50 सीटर कन्या छात्रावास आदिम जाति कल्याण विभाग का ब्यावरा में संचालित है. लेकिन ब्यावरा की छात्राओं की परिस्थितियों को देखते हुए पोस्ट मेट्रिक छात्रावास और महाविद्यालय छात्राओं की संख्या अत्यंत अधिक है. दो हजार के आस-पास बैठती है. इसलिये उसमें फिर आदिम जाति की छात्राओं की संख्या इतनी अधिक है कि कालेज की छात्राएं उसमें आ नहीं सकतीं. मेरा फिर अनुरोध यही रहेगा कि शासन दोनों तरफ से विचार करे. मंत्री जी ने जो कहा है कि यूजीसी से मिल सकता है और शासन के स्थाई फंड से भी प्रयास चलता रहेगा, तो मुझे लगता है कि इस मांग की पूर्ति संभव होगी. यह बहुत अनिवार्य है, इसलिये मेरी मंत्री जी से पुनः प्रार्थना आपके माध्यम से है.

श्री जयभान सिंह पवैया-- अध्यक्ष महोदय, मैंने पूर्व में ही निवेदन किया कि हम आगामी सत्र में यूजीसी के सहयोग से अवश्य विचार करेंगे और शासन भी विचार करेगा, आपकी मांग का सम्मान करते हुए.

श्री नारायण सिंह पंवार -- मंत्री जी, बहुत बहुत धन्यवाद.

श्री सोहन लाल बाल्मीक -- अध्यक्ष महोदय, मेरा इसी से जुड़ा हुआ मामला है. मेरे विधान सभा क्षेत्र परासिया में शासकीय महाविद्यालय है, वहां यूजीसी के द्वारा कन्याओं के लिये छात्रावास स्वीकृत किया गया है. चूंकि उस छात्रावास निर्माण में बहुत समय लग गया, लगभग 3-4 साल लग गये. पहले उसकी कास्ट जो 74 लाख रुपये यूजीसी से स्वीकृत हुई थी, आज उसकी लगभग डेढ़ करोड़ रुपये कास्ट हो गई है. मेरा प्रश्न यह है कि जो कॉस्ट बढ़ी है, अब यूजीसी ने पैसा दे दिया, अब यूजीसी पैसा देगा नहीं. क्या बाकी निर्माण कार्य के लिये सरकार उसमें पैसा देगी.

अध्यक्ष महोदय -- यह प्रश्न से उद्भूत नहीं होता.

श्री सोहन लाल बाल्मीक -- अध्यक्ष महोदय, यह छात्रावास का मामला है,वहां कन्या छात्रावास बन रहा है.

अध्यक्ष महोदय -- उनका कहना यह है कि जो पैसा स्वीकृत था, उससे वह पूरा बन नहीं पायेगा, उसका प्राक्कलन बढ़ गया है. तो आप कुछ उसका उत्तर दे सकें, तो दे दें.

श्री जयभान सिंह पवैया -- अध्यक्ष महोदय, मैं प्रश्न ठीक से समझ नहीं पाया.

श्री सोहन लाल बाल्मीक -- अध्यक्ष महोदय, मैं प्रश्न रिपीट कर देता हूं.

अध्यक्ष महोदय -- नहीं, उनका कहना यह है कि 74 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे, अब प्राक्कलन डेढ़ करोड़ रुपये का हो गया है. बचा हुआ पैसा क्या शासन देगा, यह उनका प्रश्न है, क्योंकि यूजीसी से पैसा आया है. यही प्रश्न है न आपका.

श्री सोहन लाल बाल्मीक -- जी हां. यूजीसी से पैसा आया है, उसका निर्माण कार्य चालू हो गया है. लेकिन निर्माण कार्य अधूरा है, चूंकि उसकी लागत ज्यादा बढ़ गयी है, पैसा कम पड़ रहा है और यूजीसी बढ़ा हुआ पैसा नहीं दे रही है.

अध्यक्ष महोदय -- इस प्रश्न से उद्भूत नहीं होता है, पर आप यदि ठीक समझें तो उत्तर दे देंगे. लेकिन उनका प्रश्न ठीक है.

श्री जयभान सिंह पवैया --- अध्यक्ष महोदय, चूंकि प्रश्न ब्यावरा से संबंधित था, उससे यह उद्भूत तो नहीं होता है, लेकिन आप मुझे यह जानकारी दे देंगे, तो मैं उसका परीक्षण कराकर आपको व्यक्तिगत रुप से दे दूंगा.

अध्यक्ष महोदय -- आप लिखकर दे दीजिये.

श्री सोहन लाल बाल्मीक -- जी हां.

पी.एच.डी. परीक्षा में अनियमितता

[उच्च शिक्षा]

7. ( *क्र. 144 ) श्री पन्‍नालाल शाक्‍य : क्या उच्च शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) परि. अतारांकित प्रश्‍न संख्‍या 41 (क्र. 6799), दिनांक 29.03.2016 के उत्‍तरांश (क), (ख), (ग) एवं (घ) प्रबंध विषय में अंग्रेजी माध्‍यम का पर्चा वितरित किया व उत्‍तर में उक्‍त विषय का अध्‍ययन व अध्‍यापन अंग्रेजी माध्‍यम में होना बतायाजबकि वास्‍तविकता में ग्‍वालियर-चंबल संभाग के अधिकांश महाविद्यालय में मात्र हिन्‍दी माध्‍यम से प्रबंध विषय का अध्‍ययन-अध्‍यापन कराया जाता है व कुछ में दोनों भाषाओं में? (ख) क्‍या उक्‍त (क) में वर्णित कार्य हिन्‍दी माध्‍यम के ग्रामीण अंचल व पृष्‍ठभूमि के तथा दलित वर्ग के शोधार्थियों के खिलाफ सुनियोजित षडयंत्र था? यदि नहीं, तो उक्‍त विषय में मात्र सामान्‍य वर्ग के ही छात्र क्‍यों उत्‍तीर्ण हुए? (ग) क्‍या प्रश्नांश (क) में सदन को गुमराह करने वाले अधिकारी/कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही करेंगे तथा उक्‍त विषय की परीक्षा को पुन: आयोजित कराने की घोषणा करेंगे?

उच्च शिक्षा मंत्री ( श्री जयभान सिंह पवैया ) : (क) जी हाँ। जी नहीं। प्रबंध विषय के अध्‍यापन का कार्य अध्‍यादेश-24 के सेक्‍शन 37 (ii) एवं 39 (i) परीक्षा के बिन्‍दु 5 अनुसार अंग्रेजी में ही होता है। (ख) जी नहीं। क्‍योंकि परीक्षा में कुल 317 परीक्षार्थी सम्मिलित हुए थे। परीक्षा में सामान्‍य श्रेणी के 251 छात्र बैठे थे, जिसमें से मात्र 07 छात्र ही उत्‍तीर्ण हुए। अनु. जाति/जनजाति श्रेणी के 27 तथा अन्‍य पिछड़ा वर्ग श्रेणी के 39 छात्र बैठे थे, जिसमें कोई भी छात्र उत्‍तीर्ण नहीं हुआ है। (ग) जी नहीं। प्रश्‍नांश (क), (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्री पन्नालाल शाक्य -- अध्यक्ष महोदय, आप मुझे क्षमा करेंगे, मैं आज तैयारी से नहीं आया हूं.

अध्यक्ष महोदय -- ठीक है.

सिंहस्थ 2016 में विभाग द्वारा खर्च की गई राशि

[नगरीय विकास एवं आवास]

8. ( *क्र. 1779 ) श्री जितू पटवारी : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) सिंहस्‍थ 2016 के मद में किस-किस विभाग द्वारा कितनी-कितनी राशि खर्च की गई और कुल कितनी राशि खर्च हुई? (ख) सिंहस्‍थ 2016 में प्रशिक्षण के मद में किस-किस विभाग द्वारा कितनी राशि खर्च की गई प्रशिक्षण के मद में खर्च का विस्‍तृत ब्‍यौरा उपलब्‍ध करावें? (ग) सिंहस्‍थ 2016 में गठित समिति की अनुशंसा पर किस-किस विभाग द्वारा कितनी-कितनी राशि किस-किस मद में कार्य में खर्च की गई, उक्‍त समिति के गठन संबंधी विवरण उपलब्‍ध करावे तथा बतावे कि उक्‍त समिति को खर्च संबंधी निर्देश देने के वित्‍तीय अधिकार किस नियम से प्राप्‍त हुये? नियम की प्रति देवें (घ) सिंहस्‍थ 2016 के दौरान वैचारिक कुंभ किसके आदेश से आयोजित किया गया उस आदेश की प्रति देवें तथा बतावें कि वैचारिक कुंभ पर किस-किस मद में किस-किस विभाग द्वारा कितनी-कितनी राशि खर्च की गई? उक्‍त खर्च की स्‍वीकृति किसके द्वारा किस अधिकार से दी गई?

 

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) :

श्री जितू पटवारी -- अध्यक्ष महोदय, मैंने एक ही प्रश्न तीन बार किया और तीनों बार अलग अलग उत्तर आया. मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूं कि मेरा प्रश्न था कि सिंहस्थ 2016 के मद में किस किस विभाग द्वारा कितनी कितनी राशि खर्च की गई और कुल कितनी राशि खर्च हुई. आपने जो उत्तर दिया है, मैंने यही प्रश्न क्र. 803, दिनांक 19.7.16 को किया था, उस राशि में और आज जो उत्तर दिया है, एक तो उसमें अंतर है. क्योंकि एक ही प्रश्न है और आप ही के विभाग ने, मध्यप्रदेश शासन ने यही उत्तर केंद्र सरकार, संसद में भी दिया, उसमें भी अंतर है. 3 अलग अलग उत्तर, तीनों में अलग अलग राशि का व्यय, आवंटन और व्यय तीनों में अंतर आया है. दूसरा इसी के अंतर्गत, चूंकि मैंने सारे खर्चे अलग अलग आपसे मांगे थे, तो नर्मदा विकास घाटी में जो संसद में आपने इसका खर्चा बताया है, वह 432 करोड़ है और मुझे जो आज उत्तर मिला है, वह 12.90 करोड़ है. ऐसे ही मध्यप्रदेश सड़क विकास में मुझे उत्तर दिया है, वह जीरो जीरो है और जो संसद को दिया है, वह 131 करोड़ है. ऐसे ही वन विभाग में मुझे जो उत्तर दिया है, उसमें 7 लाख और जो संसद में आप ही ने प्रतिलिपि भेजी है, वह 3.93 करोड़, यह अंतर क्यों है स्पष्ट करें.

श्री सतीश मालवीय -- अध्यक्ष महोदय, भाषण हो रहा है, कृपया प्रश्न करवा दें. बाकी के प्रश्न भी महत्वपूर्ण हैं.

अध्यक्ष महोदय- वह विवरण दे रहे हैं. चलिये आप प्रश्न पूछ लें.

श्री जितू पटवारी --अध्यक्ष महोदय पूछ लिया न कि यह अंतर क्यों है शासन स्पष्ट करे.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री(श्री गोपाल भार्गव) -- अध्यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय सदस्य स्वयं कह रहे हैं कि तीसरी बार प्रश्न पूछा है तो एक ही प्रश्न को तीन बार विधानसभा में पूछने के लिये एलाऊ करना चाहिये या नहीं करना चाहिये.

श्री जितू पटवारी-- अध्यक्ष महोदय, ऐसा है कि मैंने पूछा एक बार, एक बार संसद में किसी सांसद ने पूछा फिर एक बार रामनिवास रावत ने पूछा तीन लोगों ने पूछा इतने वरिष्ठ सदस्य हैं मंत्री जी. इतनी भी जानकारी नहीं है तो मैं ज्यादा बोल नहीं पाऊंगा.

अध्यक्ष महोदय- जो प्रश्न पहले आ जाते हैं उनको दुबारा लिया नहीं जाता यह बात सही है.

श्री गोपाल भार्गव -- मैं आसंदी से यही व्यवस्था चाहता था.

अध्यक्ष महोदय- किंतु प्रश्नों की भाषा में या उनके विवरण में कुछ फर्क होगा इसलिये उसको स्वीकार किया गया.

श्री उमंग सिंघार- अध्यक्ष महोदय, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है.

अध्यक्ष महोदय- प्रश्नकाल में यह नहीं उठता.

श्री उमंग सिंघार- अध्यक्ष महोदय, चलिये इन्हीं के प्रश्न पर बात कर लें. परसों भी प्रश्न था उस प्रश्न में भी असत्य जानकारी दी गई. माननीय जितू पटवारी जी को भी असत्य जानकारी दी जा रही है, विधायकों को शासन की तरफ से बार बार असत्य जानकारी दी जा रही है. इस पर आपकी तरफ से कोई व्यवस्था आनी चाहिये.

अध्यक्ष महोदय--व्यवस्था स्थाई है कि सही जानकारी देना चाहिये.

श्री उमंग सिंघार- इसके बाद भी तो असत्य जानकारी लगातार दी जा रही है.विधायक को एक बार में अगर सही जानकारी मिल जाये तो वह दुबारा प्रश्न ही नहीं लगायेगा. आपसे अनुरोध है कि सरकार को आप इसके लिये निर्देशित करें कि सही जानकारी समय पर विधानसभा में दी जाये.

अध्यक्ष महोदय- गलत जानकारी की भी व्यवस्था है. प्रश्न एवं संदर्भ समिति इसके लिये विधानसभा के सदस्यों की समिति बनी हुई है.

श्री गोपाल भार्गव-- अध्यक्ष महोदय, यदि किसी प्रश्न का उत्तर सही नहीं आया है तो प्रश्न एवं संदर्भ समिति है और अन्य सदन की समितियां हैं, उसमें जाकर के चर्चा कर सकते हैं. यहीं पर दुबारा उत्तर देना, कैसे संभव है.

अध्यक्ष महोदय- आपकी बात ठीक है.

श्री उमंग सिंघार- क्या एक सदस्य एक ही प्रश्न के पीछे भागता रहे. समिति में और विधानसभा में. शासन सही उत्तर क्यों नहीं देता ?

श्री गोपाल भार्गव- फिर हाउस की समितियों को भंग कर दो. अगर शासन की समझ में आ रहा है कि सही जवाब है और आपकी समझ में आ रहा है कि गलत जवाब है तो उसके लिये विधानसभा में समितियों के माध्यम से व्यवस्था है.नहीं तो विधानसभा की समितियां भंग कर दी जायें, यह फोरम किसलिये बने हैं ? संसद और विधानसभा की समितियां इसीलिये बनी हुई हैं.

अध्यक्ष महोदय- मूल प्रश्नकर्ता को तो प्रश्न पूछने दें.

श्री जितू पटवारी-- अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह है कि आंकड़ों में अंतर क्यों है ? इसका उत्तर मंत्री जी दे दें ?

श्री कैलाश चावला-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं इसमें निवेदन करना चाहता हूं कि जब सदस्य प्रश्न पूछते हैं और विभाग की तरफ से उत्तर आता है कि जानकारी एकत्रित की जा रही है और जानकारी आखिरी तक मिलती नहीं तो सदस्य वास्तव में क्या करे.

अध्यक्ष महोदय- आप वरिष्ठ सदस्य हैं पहले मूल प्रश्नकर्ता के प्रश्न का उत्तर आ जाने दें.

श्रीमती माया सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, सम्माननीय विधायक जी ने कहा है कि नर्मदा घाटी विकास विभाग का खर्च 432 करोड़ और ज्यादा है. मैं कह रही हूं कि यह राशि उनके विभागीय बजट से खर्च की गई है. सिंहस्थ 2016 से खर्च हुई राशि नहीं है. सिंहस्थ के मद से खर्च का विवरण वह आपके प्रश्न के उत्तर में दे दिया गया है. इसके साथ साथ दूसरी बात माननीय सदस्य ने जो कही है उनके प्रश्न की सारी जानकारी परिशिष्ट के रूप में उत्तर मे दे दी गई है. आपके सारे प्रश्न व्यय संबंधी हैं उसकी भी जानकारी दे दी गई है. यहां पर इस तरह के आरोप लगाने का कोई औचित्य नहीं है. सारी जानकारी परिशिष्ट में है.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार-- अध्यक्ष महोदय, हमारे माननीय सदस्य ने विधानसभा के...

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, अब क्या प्रश्नकाल बाधित नहीं हो रहा है.

अध्यक्ष महोदय-- मैंने उनको अनुमति दी है.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार- अध्यक्ष महोदय, सदस्य ने विधानसभा के उत्तर में और प्रश्न करते समय संसद के आंकड़े बताये हैं. तो यह आंकड़े कोड करने के लिये क्या माननीय सदस्य ने आपसे अनुमति ली है ?

अध्यक्ष महोदय- अनुमति नहीं ली गई परंतु वे कर सकते हैं. पटल पर नहीं रखा है उनके पास कुछ आंकड़े हैं उन्होंने कोड कर दिये हैं.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार -- आखिर सरकार को जवाब देने के लिये तैयारी करनी पडेगी और आप एकदम से कोई भी आंकड़े यहां पर प्रस्तुत कर दें तो सरकार एक मिनट में कहां से जवाब लायेगी.

श्री रामनिवास रावत-- उनके आंकडे नहीं है . यह मध्यप्रदेश सरकार के आंकड़े हैं.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार -- अध्यक्ष महोदय, मैं प्रेक्टिकल बात कह रहा हूं कि यदि इनको संसद के उत्तर को कोड करना था तो पहले आपसे अनुमति लेते ताकि सरकार उसकी पहले से तैयारी करती.

श्री सुन्दरलाल तिवारी- उत्तर नहीं आंकड़े कोड कर रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय--मूल प्रश्नकर्ता प्रश्न करिये.

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, जी आप शेजवार साहब को थोड़ा समझा दो.(हंसी)

श्री जितू पटवारी-- मैं फिर से अपना प्रश्‍न दोहरा देता हूं माननीय मंत्री जी, आपसे मैंने जो प्रश्‍न किया था वह यह था, आपने कहा कि वह उनके विभाग से खर्च किये हैं, नर्मदा घाटी विकास विभाग ने खर्च किये है, आपने यह उत्‍तर दिया है. मेरा प्रश्‍न था जो मैंने विभाग से पूछा था सिंहस्‍थ 2016 के मद में किस-किस विभाग द्वारा कितनी-कितनी राशि खर्च की गई और कुल कितनी राशि खर्च हुई. आपने मुझे नर्मदा विकास घाटी का उत्‍तर दिया है कि इतना हमने खर्च किया. विभाग ने किया वह, संसद में जो दिया और इससे पहले भी 2-3 बार विवरण अलग-अलग सदस्‍यों के आये, वह भी आये हैं. मेरा अनुरोध यह है कि यह सच बात है कि नर्मदा घाटी विकास का आपने मुझे जो बजट दिया है वह 12.90 और वहां पर जो हुआ है वह 432 करोड़, 400 करोड़ का घपला है, मुझे ऐसा लगता है. इसका आप उत्‍तर देने की कृपा करें, यह अंतर क्‍यों है.

श्रीमती माया सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष जी, यह जो बजट की राशि है, यह 2011 से 2016 तक की सारी जानकारी इसमें दी गई है जो आप अलग-अलग बात पूछ रहे हैं. आवंटन की आवश्‍यकतानुसार विभागों को आवंटन किया जाता है. जैसे-जैसे कार्य शुरू होता है तो 2011 से 2016 तक के काम चले हैं यह, खर्च अद्यतन दिये गये हैं और आपने जो कहा है, मैं फिर कह रही हूं कि सिंहस्‍थ के अलावा, जो राशि खर्च की है, वह अलग-अलग विभागों ने की है. नर्मदा से क्षिप्रा नदी का खर्चा उनके विभाग ने किया है. 13 घाटों पर व्‍यय हुआ है, वह अलग हुआ है. एमपीआरडीसी की सड़कें बनी हैं वह विभाग ने बनाई हैं, वन विभाग ने अपना खर्चा अलग किया है और उसकी सारी विस्‍तृत जानकारी आपको परिशिष्‍टों में उपलब्‍ध कराई गई है. अब आप एक साथ सारे विभागों की कहेंगे तो मैं यह कहना चाहूंगी अध्‍यक्ष जी कि इतने सारे विभागों के काम इसमें समाहित हैं तो जो जानकारी आपने मांगी थी वह जानकारी विस्‍तृत परिशिष्‍ट में दी गई है. इसके अलावा भी इनकी कोई क्‍वेरीज हों, या इन्‍हें लगता है, और बड़ी ईमानदारी के साथ इतना अच्‍छा कार्य सिंहस्‍थ में हुआ है जिसकी तारीफ हमारे प्रदेश और देश नहीं दुनिया में हो रही है ..(मेजों की थपथपाहट).... और आप यह कह रहे हैं तो मैं एक मीटिंग अपने अधिकारियों के साथ करा देंगे, आप आ जायें, क्‍योंकि आज इस वक्‍त सारे विभागों के बारे में जो यह सवाल उठा रहे हैं उनका जवाब अभी देना मुश्किल है, लेकिन इन्‍होंने जो व्‍यय का सवाल पूछा था उसकी सारी जानकारी इसमें उपलब्‍ध कराई गई है.

श्री जितू पटवारी-- पहले दो बातें हैं आपने पूरी बात फिर से यह कही, पूरे सवाल का उत्‍तर मैं यह समझ पाया कि हमने जो समयबद्ध आपको उत्‍तर दिया है उसमें इतना खर्च हुआ और उसके बाद जो बढ़ता गया वह बढ़ता गया, यह आपने बताने की कोशिश की. संसद में जो उत्‍तर मध्‍यप्रदेश शासन ने दिया था यह आज के उत्‍तर से पहले दिया था.

अध्‍यक्ष महोदय-- एक मिनट.

श्री जितू पटवारी-- मेरा अनुरोध है अध्‍यक्ष जी, मैं समझना चाहता हूं, हमारा है मध्‍यप्रदेश, मैं आरोप प्रत्‍यारोप पर नहीं जा रहा. मेरा यह कहना है कि आंकड़ों में जो अंतर है, इसका मतलब है कि कहीं न कहीं गड़बड़ है तो क्‍या एक संसदीय भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के सदस्‍यों की कोई समिति बनाकर इसकी जांच करायेंगी और अधिकारियों को बैठाकर कोई ऐसी समिति बनाकर इसकी जांच कराने की कृपा करेंगे क्‍या ?

अध्‍यक्ष महोदय-- माननीय जितू पटवारी जी, जो आप संसद के आंकड़े पढ़ रहे हैं, क्‍या आपने माननीय मंत्री जी को उपलब्‍ध कराये हैं.

श्री जितू पटवारी-- अभी करा देता हूं.

अध्‍यक्ष महोदय-- अभी आप करायेंगे तो उसका उत्‍तर कैसे देंगी ? उसे आपको या तो पहले उपलब्‍ध कराना था और अनुमति मांगना था कि सदन के पटल पर यह रख रहे हैं, चूंकि अभी के अभी आपने यह आंकड़े पढ़े हैं इसलिये उसकी सच्‍चाई के बारे में भी उनको पता नहीं है और इसीलिये अब इस विषय पर आगे कोई चर्चा नहीं की जा सकती, क्‍योंकि वह आंकड़े आपके पास हैं, उनके पास नहीं हैं. ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनिवास रावत-- आंकड़े राज्‍य सरकार ने भेजे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय-- ठीक है, परंतु उनको नहीं मालूम न. ये आंकड़े यहां उपलब्‍ध करा देते पटल पर ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनिवास रावत-- सरकार एक बार आंकड़े भेजने के बाद इस जिम्‍मेदारी से नहीं बच सकती कि हमें मालूम ही नहीं है और आंकड़े चले गये.

श्री मुकेश नायक-- अध्‍यक्ष महोदय, सम्‍मानीय सदस्‍य यह कह रहे हैं कि लोकसभा में पूछा गया प्रश्‍न और विधान सभा में पूछा गया प्रश्‍न यह अलग-अलग नहीं हैं, अगर यह अलग-अलग नहीं हैं तो इसके उत्‍तर अलग-अलग क्‍यों आ रहे हैं, यह पूछ रहे हैं माननीय सदस्‍य.

अध्‍यक्ष महोदय-- तो आप वह उपलब्‍ध तो कराईये.

श्री जितू पटवारी-- एक मिनट लगेगा, सरकार का ही उत्‍तर है, सरकार के उन्‍हीं अधिकारियों ने जो उत्‍तर संसद में भेजा है और उन्‍हीं अधिकारियों ने आपको और हमको उपलब्‍ध कराया है, इसमें अंतर क्‍यों है ? यह कौन सी बात हो गई. ....( व्‍यवधान)... अध्‍यक्ष जी मेरा स्‍पष्‍ट मानना है कि यह सब भाषा करप्‍शन की ओर लेकर जाती है. ... (व्‍यवधान)...

श्री सुंदरलाल तिवारी-- अध्‍यक्ष महोदय, आधे घंटे की चर्चा करा लें. ...(व्‍यवधान)...

(..व्यवधान..)

श्री बाला बच्चन - माननीय अध्यक्ष महोदय,सिंहस्थ में अरबों रुपये का घोटाला हुआ है. सरकार के अलग-अलग उत्तर देने से भ्रम की स्थिति है. मैं आपको बताना चाहता हूं कि हमारे बहुत सारे विधायक साथियों ने बहुत सारे प्रश्न लगाये थे और लगभग एक ही ईश्यू और एक ही मुद्दे पर सरकार अलग-अलग उत्तर दे रही है आप कम से कम सिंहस्थ घोटाले पर आधे घंटे की चर्चा करवा दें तो दूध का दूध और पानी हो जायेगा. मेरे पास भी बहुत सारे आंकड़े हैं.

(..व्यवधान..)

अध्यक्ष महोदय - प्रश्न क्रमांक 9 श्री शैलेन्द्र पटेल.

ग्राम उदय से भारत उदय अभियान का संचालन

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

9. ( *क्र. 1834 ) श्री सुरेन्‍द्र सिंह बघेल : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) 14 अप्रैल से 31 मई 2016 तक सरकार द्वारा ग्राम उदय से भारत उदय अभियान चलाया गया था? उसमें किन-किन विभागों के कितने-कितने आवेदन ग्राम स्‍तर से लगाकर जिले स्‍तर के हितग्राही मूलक योजनाओं के प्राप्‍त हुए? धार जिले के संबंध में उपरोक्‍त जानकारी विधानसभा क्षेत्रवार, विकासखण्‍डवार उपलब्‍ध करावें.(ख) प्राप्‍त आवेदनों में से कितने आवदेन पात्र पाये गए एवं कितने आवेदन अपात्र पाये गए? विभागवार एवं ग्राम पंचायतवार जानकारी देवें (ग) क्‍या पात्र लोगों को लाभान्वित कर दिया गया है एवं उनको सूचित किया गया है? धार जिले के संबंध में जानकारी जनपद पंचायतवार, पंचायतवार उपलब्‍ध करावें लाभान्‍वितों को प्रदाय राशि की जानकारी भी उपलब्‍ध करावें (घ) अपात्र लोगों की किस कारण से अपात्र किया, उनको जानकारी दी गयी या नहीं? धार जिले के संबंध में जनपद पंचायतवार, पंचायतवार जानकारी देवें

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : -

(क) जी हां. कुल 44724 आवेदन प्राप्त हुए,जानकारी परिशिष्ट-"" पर पुस्तकालय में रखे अनुसार.

(ख) कुल प्राप्त 44724 आवेदनों में से 20515 पात्र तथा 24209 अपात्र पाये गये. जानकारी परिशिष्ट-"" पर पुस्तकालय रखे अनुसार.

(ग) जी हां. वांछित जानकारी परिशिष्ट-"" पर पुस्तकालय में रखे अनुसार.

(घ) जी हां. वांछित जानकारी परिशिष्ट-"" पर पुस्तकालय में रखे अनुसार.

 

(..व्यवधान..)

( श्री शैलेन्द्र पटेल,सदस्य द्वारा व्यवधान के कारण प्रश्न न पूछा जा सका.)

श्री बहादुर सिंह चौहान - मैं कहना चाहता हूं कि विधान सभा में लोक सभा की बात करने का अधिकार ही नहीं है. आप सदन को गुमराह कर रहे हो. आप असत्य बयानबाजी कर रहे हो. सिंहस्थ के अंदर 2770.93 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं.(..व्यवधान..) यह कुछ भी कहेंगे. यह सिंहस्थ को लेकर सदन में कुछ भी कहेंगे.

श्री जितू पटवारी - अध्यक्ष जी, यह गलत बात है.हमें चार प्रश्न पूछने का अधिकार है.

अध्यक्ष महोदय - आप नियम तो पढ़िये. दो प्रश्न का अधिकार है.

(..व्यवधान..)

श्री बाला बच्चन - यह बड़ा घोटाला है.(..व्यवधान..) अध्यक्ष महोदय, इस पर आपको आधे घंटे की चर्चा करवाना चाहिये या जितू पटवारी जी के प्रश्न का उत्तर दिलवाएं.

अध्यक्ष महोदय - बैठ जाईये सभी लोग. मंत्री जी कुछ कहना चाह रही हूं.

श्रीमती माया सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, विधायक जी ने जो जानकारी मांगी उस जानकारी की सारी विस्तृत रिपोर्ट इसमें दी गई है लेकिन आवंटन और खर्चे की जो आप पूर्व की बात कर रहे हैं, संसद की बात उठा रहे हैं, मैं कहना चाहती हूं कि जानकारी अद्यतन दी गयी है और यह जानकारी पूर्व की तिथि में दी गयी जानकारी से स्वाभाविक ही अलग होगी. पूरा डिटेल दिया हुआ है. आरोप लगाने का कोई औचित्य नहीं है.

श्री जितू पटवारी - अध्यक्ष जी,उन्होंने कहा कि पहले और अब के आंकड़ों में स्वाभाविक अंतर होगा. मुझे यह बता दें कि पहले जो जवाब दिया गया उसमें आंकड़े ज्यादा हैं और आज जो उत्तर दिया उसमें अलग है यह कैसे संभव है. पहले खर्चा आपने ज्यादा कर दिया अब कम कर दिया. किये हुए खर्चे को आप कम कैसे कर सकते हैं ? पहले जहां आपने 4 करोड़ खर्च किया उसको अब 2 करोड़ कर दिया, यह कैसे संभव है ?

(..व्यवधान..)

श्री बहादुर सिंह चौहान - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आग्रह करना चाहता हूं कि भूतभावन महाकाल की नगरी में सिंहस्थ महापर्व 12 साल में एक बार आता है और 2770.93 करोड़ का जो उत्तर विधान सभा में दिया गया वह सही उत्तर है. मैं कहना चाहता हूं कि खान नदी का 90 करोड़ का कार्य जो सिंचाई विभाग कर रहा है उसमें अभी 30 करोड़ का पैसा देना बाकी है और कार्य चल रहा है तो उत्तर अभी अलग है और आगे भी उत्तर अलग-अलग आयेंगे. अभी बहुत सारे उसमें खर्चे हैं. आप गलत बोल रहे हो. उत्तर अलग-अलग आते हैं.

अध्यक्ष महोदय - आपकी बात आ गयी.

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्यक्ष महोदय, सिंहस्थ का आयोजन हुआ. सिंहस्थ में भारी व्यय हुआ है और खरीदी और व्यय के संबंध में कई प्रश्न उठाये गये. पिछले विधान सभा सत्र में भी हमने स्थगन लगाया था. आपने आश्वासन दिया था कि हम इस पर किसी न किसी रूप में चर्चा कराएंगे. इस बार भी कई सदस्यों ने स्थगन लगाये हैं इस पर भी चर्चा कराने की बात कही है. मेरी एक मांग है कि माननीय मंत्री महोदया सिंहस्थ में हुए भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिये किसी सक्षम समिति से इसकी जांच कराएंगी ?

(व्यवधान)

 

श्री रामनिवास रावत--अध्यक्ष महोदय, मेरी एक मांग है मैं मंत्री जी से निवेदन करुंगा कि भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए सदन के सदस्यों की समिति बनाकर सारे आय-व्यय और खरीदी की जांच करा लें. (व्यवधान)

श्री जितू पटवारी-- सदन के विधायकों की कोई समिति बनाकर जो आंकड़ों में हेरफेर है इसकी जांच करवायेंगे क्या? (व्यवधान)

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष जी, सदन के सदस्यों की समिति बनाकर सिंहस्थ में हुए भ्रष्टाचार या सिंहस्थ में हुए आय-व्यय की जानकारी, खरीद-फरोख्त की जांच करा लें. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय-- मुकेश जी आप कहिए.

श्री जितू पटवारी-- जांच कराईये और दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय-- मुकेश नायक जी और कह लेने दीजिए. नायक जी जल्दी कहिए फिर समय समाप्त हो रहा है. (व्यवधान)

श्री मुकेश नायक-- अध्यक्ष महोदय, अभी खान नदी की चर्चा सदन में की गई.

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, यह विषय नहीं है. माननीय मंत्रीजी बोलें.

श्री मुकेश नायक-- यह प्रश्न से उद्भूत होता है.

अध्यक्ष महोदय-- आप बैठ जाईये. यह बात उन सदस्य ने उठायी थी. (व्यवधान)

श्री मुकेश नायक-- यह अप्रासंगिक प्रश्न नहीं है. यह उद्भूत होता है. खान नदी की चर्चा की गई.

अध्यक्ष महोदय-- खान नदी का विषय बहादुर सिंह चौहान जी ने उठाया और रावत जी ने आपत्ति ली कि वह इस बात उठाने वाले कौन होते हैं. अब आप उसी पर प्रश्न करने लगे.

श्री जितू पटवारी--मुकेश भैया, मंत्री जी जवाब दे रही हैं.

श्री मुकेश नायक-- सिंहस्थ के मेले की मेरे पास पूरी जानकारी है. आप सदन में चर्चा करा देंगे. (व्यवधान)

श्री जितू पटवारी--अध्यक्ष जी, मेरे प्रश्न का जवाब दिलवा दें. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय-- श्री बाला बच्चन...

श्री बाला बच्चन-- अध्यक्ष महोदय, सिंहस्थ में अरबों रुपये का घोटाला हुआ है और उसको उजागर करने के लिए जितू पटवारी जी ने प्रश्न लगाया है. अध्यक्ष महोदय, आप उसका उत्तर दिलवायें. मैंने भी आपको 60 पेज की एक रिपोर्ट अभी दो दिन पहले ही सबमीट की है. सिंहस्थ में अलग अलग कामों में और जो खरीदी गई उनमें भ्रष्टाचार हुआ है. करीब डेढ़ हजार करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार हुआ है. 60 बिंदुओं की मैंने आपको रिपोर्ट सौंपी है. इसमें हम जांच चाहते हैं. (व्यवधान) जितू पटवारी जी के प्रश्न पर आपको विधायकों के साथ कोई जांच समिति बैठाना चाहिए.

अध्यक्ष महोदय-- प्रश्न क्रमांक 10 श्री विष्णु खत्री ....

स्‍पेशल कनेक्टिविटी के तहत सड़क निर्माण

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

10. ( *क्र. 1897 ) श्री विष्‍णु खत्री : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्राम उदय से भारत उदय कार्यक्रम के दौरान बैरसिया से ग्राम बरखेड़ा मौजी तक स्‍पेशल कनेक्टिविटी योजनांतर्गत मार्ग को जोड़ने हेतु प्रश्‍नकर्ता द्वारा प्रभारी मंत्री जिला भोपाल को दिये गये पत्र पर विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की गयी है? (ख) प्रश्नांश (क) के तारतम्‍य में यदि अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गयी है, तो इस पर कब तक कार्यवाही करेंगे?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) राज्य में स्पेशल कनेक्टिविटी में सड़क निर्माण योजना संचालित नहीं है। (ख) शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

श्री विष्णु खत्री--अध्यक्ष महोदय, बैरसिया विधान सभा के बरखेड़ा मौजी गांव मुख्यालय से ढ़ाई किलोमीटर की दूरी पर है. माननीय मंत्री जी का ध्यान इस ओर आकर्षित कराना चाहता हूं. वह गांव सड़क मार्ग से नहीं जुड़ा होने के कारण ग्रामीणों और छात्र-छात्राओं को बैरसिया आने-जाने में दिक्कत होती है. मैं मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि उक्त मार्ग सुदूर संपर्क ग्राम तथा मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना में लेने की कृपा करेंगे?

अध्यक्ष महोदय-- पंचायत मंत्री जी से बोलें कि वे श्री विष्णु खत्री जी के प्रश्न का उत्तर दे दें. (व्यवधान)

गृह एवं परिवहन मंत्री(श्री भूपेन्द्र सिंह)-- अध्यक्ष जी, विपक्ष यह बात पिछले 8 महीने से कह रहा है कि सिंहस्थ में भ्रष्टाचार हुआ है. आज सदन में चर्चा हो रही है. विपक्ष के पास एक भी प्रमाण इस बात का नहीं है कि सिंहस्थ में भ्रष्टाचार हुआ है. एक भी प्रमाण नहीं है. अगर प्रमाण हैं तो पटल पर रखें. (व्यवधान) विपक्ष बिना तथ्यों के आरोप लगा रहा है कि भ्रष्टाचार हुआ है.

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- ईओडब्ल्यू से जांच करा लें. (व्यवधान)

श्री भूपेन्द्र सिंह-- अध्यक्ष जी, मेरा कहना है कि अगर विपक्ष के पास एक भी प्रमाण हो. इतना सफल सिंहस्थ हुआ है और आप आरोप लगाने का काम कर रहे हैं. अगर एक प्रमाण हो तो आप पटल पर रखिये. (व्यवधान) आपके साथी ने कहा कि सरकार ने इतना अच्छा काम किया है. आप भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय-- मंत्री जी, श्री विष्णु खत्री जी के प्रश्न का उत्तर दे दें.

श्री गोपाल भार्गव-- अध्यक्ष महोदय, बहुत जल्दी उस सड़क की स्वीकृति हो जायेगी.

श्री रामनिवास रावत-- ईओडब्ल्यू में प्रकरण किन पर दर्ज हुआ है. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय-- खत्री जी, आपने मंत्री जी का उत्तर सुन लिया ? (व्यवधान) आपकी सड़क स्वीकृत कर रहे हैं.

श्री भूपेन्द्र सिंह-- विपक्ष 8 महीने से यही बात कह रहा है. यदि एक प्रमाण हो तो आप पटल पर रख दो.. भ्रष्टाचार का अगर एक प्रमाण हो तो आप पटल पर रख दो. (व्यवधान)

श्री जितू पटवारी--अध्यक्ष जी, मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं आया. यह क्या तरीका है?

अध्यक्ष महोदय--आप लोग उत्तर कहां लेना चाहते हैं. सब तो एक साथ खड़े हो जाते हैं.

श्री भूपेन्द्र सिंह--अध्यक्ष जी, यदि विपक्ष के पास एक प्रमाण हो तो पटल पर क्यों नहीं रखते. अगर आपके पास भ्रष्टाचार का प्रमाण है तो आप प्रमाण पटल पर रखिये ना. पिछले 8 महीने में एक प्रमाण नहीं रख पाये. (व्यवधान)

श्री बाला बच्चन--अध्यक्ष महोदय, हमारे पास प्रमाण है इसलिए हमने आपको 60 पेज की रिपोर्ट सौंपी है. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय-- खत्री जी, आपके प्रश्न का उत्तर दे दिया है. आप रिकार्ड में देख लीजिए.

 

(व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय - (व्यवधान).. सब तो खड़े हो जाते हैं.

श्री भूपेन्द्र सिंह - एक प्रमाण नहीं हैं.

अध्यक्ष महोदय - (व्यवधान)..आप इस तरह से प्रश्न रोक नहीं सकते हैं, दूसरों का भी अधिकार है.

12.01 बजे गर्भगृह में प्रवेश एवं वापसी

इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्य श्री जितू पटवारी द्वारा गर्भगृह में प्रवेश एवं कुछ समय पश्चात् श्री मुकेश नायक एवं श्री जितू पटवारी द्वारा पुनः गर्भगृह में प्रवेश एवं वापसी

(इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्य श्री जितू पटवारी अपनी बात कहते हुए गर्भगृह में आसंदी के समक्ष आए और थोड़ी देर के बाद वापस चले गए एवं कुछ समय पश्चात् श्री मुकेश नायक एवं श्री जितू पटवारी शासन के जवाब से असंतुष्ट होकर पुनः गर्भगृह में आए एवं अपनी बात कहकर कुछ देर पश्चात् अपने स्थान पर वापस गए.)

तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर (क्रमशः)

नरसिंहपुर जिले में शौचालय निर्माण

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

11. ( *क्र. 1530 ) श्री गोविन्‍द सिंह पटेल : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नरसिंहपुर जिले में प्रश्‍न दिनांक तक कितनी पंचायतों में बाह्य शौच मुक्‍त करने के लिए कितने शौचालय का निर्माण हो चुका है त‍था कितनों का निर्माण शेष है, वह कब तक पूर्ण हो जाएगा? (ख) नरसिहंपुर जिले में प्रश्‍न दिनांक तक कितनी पचायतें बाह्य शौच से मुक्‍त हो चुकी हैं तथा कितनी पंचायतें अभी बाह्य शौच मुक्‍त होना बाकी हैं? अलग-अलग पंचायतों के नाम सहित जानकारी दें (ग) गाडरवारा विधान सभा क्षेत्र में वर्ष 2008-09 से अभी तक कितने शौचालयों का निर्माण हो चुका है? किस ग्राम में कितने-कितने शौचालयों का निर्माण किया गया है? ग्रामवार/संख्‍यावार स्‍पष्‍ट जानकारी दें (घ) क्‍या 23 जुलाई, 2016 के बाद सीधे हितग्राही के खाते में राशि दी जाएगी? क्‍या इस स्थिति में शौचालय निर्माण में पंचायतों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है? यदि हाँ, तो क्‍या ऐसी स्थिति में पूर्व की तरह व्‍यवस्‍था पर शासन विचार करेगा?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) नरसिंहपुर जिले में प्रश्‍न दिनांक तक 446 ग्राम पंचायतों को बाह्य शौच मुक्‍त करने के लिए 80697 शौचालयों का निर्माण हो चुका है एवं वास्‍तविक सर्वे अनुसार 17757 शौचालयों का निर्माण शेष है, जिन्‍हें 2 अक्‍टूबर 2019 के पूर्व पूर्ण कराये जाने का लक्ष्‍य है। (ख) नरसिहंपुर जिले में प्रश्‍न दिनांक तक 227 ग्राम पंचायतें बाह्य शौच से मुक्‍त हो चुकी हैं तथा 219 ग्राम पंचायतें बाह्य शौच मुक्‍त होना बाकी हैं। शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है(ग) गाडरवारा विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2008-09 से अभी तक 31464 शौचालयों का निर्माण हो चुका है। शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है(घ) स्‍वच्‍छ भारत मिशन अंतर्गत दिनांक 01-07-2016 से शौचालय निर्माण की प्रोत्‍साहन राशि सीधे हितग्राही के खाते में दी जा रही है। वर्तमान में शौचालय निर्माण स्‍वयं हितग्राही द्वारा किया जा रहा है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

 

श्री गोविन्द सिंह पटेल - अध्यक्ष महोदय, मैं यह पूछना चाहता हूं कि हितग्राहियों के खाते में जो राशि दी जाती है, क्या पंचायतों को पूर्व व्यवस्था के तहत दी जाएगी?

अध्यक्ष महोदय - प्रश्नकाल समाप्त.

(प्रश्नकाल समाप्त)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.02 बजे शून्यकाल में उल्लेख

कुपोषण एवं सिंहस्थ के संबंध में चर्चा कराए जाने की मांग किया जाना

प्रभारी नेता प्रतिपक्ष (श्री बाला बच्चन) - यह मुद्दा समाप्त नहीं हुआ है, हमारे पास में प्रमाण हैं, सिंहस्थ में जो घोटाले हुए हैं, जो भ्रष्टाचार हुआ है, उसके बड़े प्रमाण है, इसलिए इस पर अध्यक्ष महोदय, आपको कम से कम आधे घंटे की चर्चा विधान सभा में कराना चाहिए.

श्री रामनिवास रावत (विजयपुर) - अध्यक्ष महोदय, कुपोषण के संबंध मैंने स्थगन दिया था, नियम 139 की चर्चा दी थी और आपने स्वीकार भी किया था कि नियम 139 में चर्चा कराएंगे, लेकिन उस पर चर्चा नहीं करा रहे हैं. अभी सिंहस्थ का प्रश्न का उठाया गया. सिंहस्थ की बात पिछले विधान सभा सत्र में भी उठाई गई थी, आपने कहा था कि मैं चर्चा कराऊंगा. इस पर हमारे स्थगन प्रस्ताव लगे हैं. अध्यक्ष महोदय, हम सदस्यों की बात या सदस्य जो चर्चा कराना चाहते हैं प्रदेश की समस्याओं के बारे में क्या उस पर चर्चा नहीं कराएंगे?

अध्यक्ष महोदय - अभी प्रश्न पर क्या चर्चा हुई? वह सिंहस्थ की चर्चा थी या और कुछ थी?

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, जवाब आना चाहिए था.

अध्यक्ष महोदय - जवाब आ रहा था, आप तो सब खड़े हो जाते हैं.

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, व्यवधान पैदा कर देते हैं, मंत्री जी कह रहे हैं कि भ्रष्टाचार का प्रकरण बता दो. मंत्री जी, ईओडब्ल्यू में बिजली विभाग ने सिंहस्थ में जो ट्रांसफार्मर लगाये थे, वह प्रकरण दर्ज है. वह क्या भ्रष्टाचार के नहीं हैं तो किस बात के हैं?

श्री विश्वास सारंग - अध्यक्ष महोदय, जब चर्चा होती है, तब तो बहिर्गमन कर देते हैं. कल भाग गये. ये सुन नहीं सकते.

श्री रामनिवास रावत - वह प्रकरण भ्रष्टाचार के ही हैं, आप ही देख लो. आपके ही जवाब में भ्रष्टाचार के प्रकरण दर्ज हैं. आप जांच करा लो. अध्यक्ष महोदय, कुपोषण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर मैं चाहता हूं कि आप स्थगन लें और चर्चा कराएं, मेरा व्यक्तिगत रूप से निवेदन है.

श्री बाला बच्चन - अध्यक्ष महोदय, आदरणीय श्री रामनिवास रावत जी ने जिस तरह से बोला है, मेरा भी आग्रह है और माननीय मंत्री जी ने भी बोला है, जो सिंहस्थ के प्रभारी मंत्री रहे हैं. हमारे पास में बहुत सारे सबूत हैं कि सिंहस्थ में अरबों रुपयों का घोटाला हुआ है और उसकी आधे घंटे की चर्चा विधान सभा ने स्वीकार करना चाहिए और यहां पर उसकी चर्चा होनी चाहिए. (व्यवधान)..

एक माननीय सदस्य - जिस दिन आप लोग अपनी जवाबदारी के प्रति गंभीर हो जाओगे, आपको जवाब मिल जाएगा.

श्री वैलसिंह भूरिया - अध्यक्ष महोदय, कांग्रेस के जो सदस्य हैं वे किसी बात को सुनने के लिए तैयार नहीं हैं. (व्यवधान)..

12.04 बजे नियम 267-क के अधीन विषय

अध्यक्ष महोदय - आप बैठ जाएं. शून्यकाल की सूचनाएं. नियम 267-क के अधीन लंबित सूचनाओं में से 15 सूचनाएं नियम 267 क (2) को शिथिल कर आज सदन में लिये जाने की अनुज्ञा मैंने प्रदान की है. मैं समझता हूं कि सदन इससे सहमत है.

(सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई.)

अब मैं सूचना देने वाले सदस्यों के नाम पुकारूंगा.

 

अध्यक्ष महोदय - शून्यकाल की सूचनाएं, श्री सुखेन्द्र सिंह बना..

(1) रीवा की हनुमना नगर पंचायत में कार्यालय क्षेत्र में एक भी हैंडपंप न होना

(श्री सुखेन्द्र सिंह बना, सदस्य द्वारा अपनी शून्यकाल की सूचना नहीं पढ़ी गई.)

श्री बाला बच्चन - अध्यक्ष महोदय, चर्चा होनी चाहिए, हमारा यह आग्रह है.

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, व्यवस्था नहीं आई.

अध्यक्ष महोदय - व्यवस्था बाद में देंगे.

श्री रामनिवास रावत - बाद में नहीं, कल तो सत्र निपट ही जाएगा. इसी तरह से अगर सदन चलाना है तो आप बुला लिया करें और एक ही दिन में पारित करा लिया करें.

अध्यक्ष महोदय - आप कक्ष में आ जाएं, वहां बात कर लें.

श्री रामनिवास रावत -यह कोई तरीका नहीं है.

अध्यक्ष महोदय - यह भी कोई तरीका नहीं है, जो आप कह रहे हैं.

श्री रामनिवास रावत -कल इसकी भी चर्चा ग्राह्य की, वह भी आपने नहीं होने दी. स्थगन भी दिया है, सिंहस्थ के बारे में आपने ही कहा था कि मैं चर्चा कराऊंगा.

अध्यक्ष महोदय - उस पर चर्चा कराएंगे. आप कक्ष में आ जाएं. अभी समय है.

श्री रामनिवास रावत -कब कराएंगे? आज सदन का सत्र समाप्त हो जाएगा.

अध्यक्ष महोदय - आज नहीं समाप्त हो रहा है.

श्री रामनिवास रावत - अगर हम इंट्रप्ट करेंगे तो आज ही सत्र समाप्त करने के लिए तैयार हो.

श्री बाला बच्चन - कुपोषण और सिंहस्थ दोनों महत्वपूर्ण मुद्दे हैं इन पर हम चर्चा चाहते हैं, अध्यक्ष महोदय, आपको व्यवस्था देना चाहिए.

अध्यक्ष महोदय - यह कोई पाईंट ऑफ आर्डर नहीं है जो उसकी व्यवस्था दें.

श्री बाला बच्चन - अध्यक्ष महोदय, आपका संरक्षण चाहिए, इस पर हम चर्चा चाहते हैं. कुपोषण में भी लगातार जो बच्चों की मौतें हुई हैं, लगातार मौतें हो रही हैं और सिंहस्थ में बड़ा भ्रष्टाचार है.

श्री वैलसिंह भूरिया - अध्यक्ष महोदय, सरकार जो जवाब देती है, विपक्ष के सदस्य उसको सुनना ही नहीं चाहते हैं तो किस बात का स्थगन? सुनने की ताकत नहीं है. सुनना चाहते नहीं हैं, भग जाते हैं तो किस बात का स्थगन?

श्री जितू पटवारी - अध्यक्ष महोदय, मेरा अनुरोध है कि क्या मेरे अधिकारों से आप मुझे वंचित रखना चाहते हैं?

अध्यक्ष महोदय - आपके प्रश्न में 25 मिनट चर्चा हुई है. दूसरे सदस्यों के प्रश्नों का क्या होगा?

श्री जितू पटवारी - अध्यक्ष महोदय, 25 मिनट हुई या 40 मिनट चर्चा हुई, लेकिन रिजल्ट क्या निकला? मैंने कहा कि आंकड़े अलग-अलग हैं, सरकार इस बारे में क्या समिति बनाकर जांच करवाएगी क्या?

अध्यक्ष महोदय - एक ही प्रश्न पर क्या पूरा एक घंटा दे दें? उसके बाद भी रिजल्ट न निकले तो क्या दिन भर दे दें? उसके अन्य तरीके हैं.

श्री जितू पटवारी - अध्यक्ष महोदय, इसमें मेरा क्या कसूर है?

अध्यक्ष महोदय - आप कृपा करके नियम पढ़िए. दूसरे सदस्‍यों का क्‍या कसूर है, जिनके प्रश्‍न आपने आने ही नहीं दिए हैं.

श्री जितू पटवारी- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें मेरा क्‍या कसूर है ? मंत्री और सरकार की मंशा ही ठीक नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय- आप बैठ जाईये. शून्‍यकाल की सूचनाएं पढ़ने दीजिए.

श्री जितू पटवारी- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब तक मेरे सवाल का उत्‍तर नहीं मिलेगा, तब तक सदन में कुछ नहीं होगा, यह कांग्रेस पार्टी की मांग है. सिंहस्‍थ के (XXX) को छोड़ेंगे नहीं. सिंहस्‍थ के मुद्दे का दूध का दूध और पानी का पानी होगा.(XXX).

(व्‍यवधान........)

अध्‍यक्ष महोदय- श्री सुदर्शन गुप्‍ता शून्‍यकाल की सूचना पढ़े.

श्री रामनिवास रावत- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आप से विनम्र निवेदन है. हमें आसंदी से संरक्षण की आवश्‍यकता है.

अध्‍यक्ष महोदय- आपको संरक्षण दिया जाएगा.

श्री रामनिवास रावत- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कब संरक्षण दिया जायेगा. हमारे द्वारा कार्यमंत्रणा में दे दिया गया, स्‍थगन आ गया, आसंदी से आपने व्‍यवस्‍था दी है. पिछले सत्र में भी हमने ये मुद्दा रखा था. कुपोषण से बच्‍चे मर रहे हैं. हमारा प्रदेश अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर कुपोषण के मामले में कलंक है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप सरकार में है. आप चर्चा नहीं कराना चाहते हैं, आप चर्चा से बच रहे हैं.

(व्‍यवधान...........)

 

(2) इंदौर के 50 सहित प्रदेशभर के 500 से ज्‍यादा शूटर को एयरगन लाइसेंस की अनिवार्यता को समाप्‍त करने संबंधी

श्री सुदर्शन गुप्‍ता (इंदौर-1)-

अध्‍यक्ष महोदय- आप कक्ष में चर्चा कर लें.

श्री रामनिवास रावत- चर्चा हमारा अधिकार है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कक्ष में क्‍या चर्चा कर लें. कार्यमंत्रणा में नहीं हुई, 139 में नहीं हुई, कक्ष में क्‍या चर्चा होगी. आपने पिछले सत्र में भी कहा था, सिंहस्‍थ पर चर्चा करायेंगे.

(व्‍यवधान........)

श्री बाबूलाल गौर (गोविंदपुरा)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने भी शून्‍यकाल की 2 सूचनाएं दी थी. वे अभी तक आई नहीं हैं. मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि इस हेतु आप मुझे स्‍वीकृति प्रदान करें.

अध्‍यक्ष महोदय- लिखित सूचनाएं पहले पढ़ ली जायें फिर आपको अनुमति दी जायेगी.

श्री बाबूलाल गौर- धन्‍यवाद.

अध्‍यक्ष महोदय- श्रीमती ऊषा चौधरी, कृपया अपनी शून्‍यकाल की सूचना पढ़े.

(3) सतना के ग्राम पंचायत रामपुर चौरासी में खेलकूद मैदान निर्माण संबंधी

श्रीमती ऊषा चौधरी (रैगांव)-

श्री बाला बच्‍चन- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम ये दोनों चर्चाएं चाह रहे हैं. कुपोषण से लगातार बच्‍चों की मौतें हो रही हैं. सिंहस्‍थ में अरबों रूपये का घोटाला हुआ है.

श्री रामनिवास रावत- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपसे निवेदन है, आप व्‍यवस्‍था दे दें.

अध्यक्ष महोदय -- रावत जी ने और अन्य सदस्यों ने जो बात कही है आज अनुपूरक पर भी चर्चा है, अनुपूरक पर आप सभी वरिष्ठ सदस्य हैं, यह जानते हैं कि सभी विषयों पर चर्चा हो सकती है.....( व्यवधान )..

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय फिर अनुपूरक ही ले आयें बाकी किसी चीज की जरूरत ही नहीं है. .....( व्यवधान )..

अध्यक्ष महोदय -- जरा धीरज भी तो रखें आप.

श्री रामनिवास रावत -- आप जो चुपचाप कहते हैं उसे आसंदी से कह दें. .....( व्यवधान )..

अध्यक्ष महोदय -- उस पर भी चर्चा कर सकते हैं इसके बाद में भी यदि माननीय सदस्यों को असुविधा या किसी प्रश्न के संबंध में आपत्ति है तो नियमों में अन्य प्रावधान भी हैं कृपया उनका भी उपयोग करें, उन पर विचार करके तद्नुसार निर्णय किया जायेगा. .....( व्यवधान )..

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय हमने नियमों के अंतर्गत 139 की चर्चा के लिए सूचना दी है, कुपोषण के मामले में और कार्य मंत्रणा समिति ने उसको एक्सेप्ट किया है,आपको समय आवंटित करना था, सरकार कुपोषण पर चर्चा कराने से बचना चाहती है.

अध्यक्ष महोदय -- कोई नहीं बचना चाहता है. .....( व्यवधान )..

श्री रामनिवास रावत -- तो आप कह दें कि चर्चा करायेंगे,

अध्यक्ष महोदय -- नहीं यहां पर नहीं कहेंगे. .....( व्यवधान )..

श्री रामनिवास रावत -- आपने चुपचाप बुलाकर तो कह दिया है वह बात आसंदी से कह दें, अध्यक्ष महोदय सरकार भागना चाहती है. .....( व्यवधान )..

अध्यक्ष महोदय -- यहां पर कुछ नहीं कहेंगे.

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय कुपोषण जैसा महत्वपूर्ण मुद्दे के कारण हमारा पूरा मध्यप्रदेश अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कलंकित हो रहा है. .....( व्यवधान )..

अध्यक्ष महोदय -- फिर आप बिना चर्चा के ही सब कुछ कह लो.

श्री बाला बच्चन-- अध्यक्ष महोदय हमारा कहना है कि अगर प्रश्नों का जवाब ही नहीं आयेगा तो क्या होगा. दूसरा यह है कि रावत जी जो कह रहे हैं यह तो कार्यमंत्रणा की बैठक में भी तय हो चुका है.. .....( व्यवधान )..

अध्यक्ष महोदय -- ठीक है, लेकिन कृपा करके अभी काम तो होने दें..(व्यवधान)..

श्री रामनिवास रावत -- क्या चर्चा होने दें, आपने पिछली बार कहा था लेकिन आपने मना कर दिया है...(व्यवधान)..

श्री बाला बच्चन -- सिंहस्थ का इतना महत्वपूर्ण मुद्दा, आपको इस सिंहस्थ के मुद्दे पर आधे घंटे की चर्चा देना थी..(व्यवधान)..

श्री रामनिवास रावत -- सिंहस्थ पर चर्चा कराने के लिए आपने पिछली बार कहा था कि चर्चा कराऊंगा लेकिन नहीं हुई है..(व्यवधान)... और सदन समाप्त हो गया.

अध्यक्ष महोदय -- हर सत्र में उस पर चर्चा हो रही है...(व्यवधान).. फिर भी आप लोगों को संतोष नहीं हो रहा है...(व्यवधान)..

(4) श्री मानवेन्द्र सिंह -- ( अनुपस्थित )

(5) देवास जिले के नेमावर में नर्मदा तट पर पक्का शमशान घाट व शेड निर्माण संबंधी.

श्री आशीष गोविन्द शर्मा( खातेगांव) -- अध्यक्ष महोदय,

 

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय सिंहस्थ पर भी स्थगन दिया हुआ है उसके बारे में हमारा निवेदन है कि उसको स्वीकार करें...(व्यवधान).. अगर आपका संरक्षण नहीं मिलेगा तो कैसे काम चलेगा.

समय 12.14 बजे. गर्भगृह में प्रवेश एवं वापसी

इण्डियन नेशनल कांग्रेस के सदस्य श्री जितू पटवारी द्वारा गर्भगृह में प्रवेश एवं वापसी

श्री जितू पटवारी -- माननीय अध्यक्ष महोदय आप सिंहस्थ पर चर्चा करायें.

( इण्डियन नेशनल कांग्रेस के सदस्य श्री जितू पटवारी सिंहस्थ पर चर्चा कराने की मांग को लेकर गर्भगृह में आये एवं कुछ समय पश्चात् अपने आसन पर वापस चले गये ) .....( व्यवधान )..

अध्यक्ष महोदय -- यहां पर कुछ बात नहीं होगी. ( श्री जितू पटवारी सदस्य द्वारा सिंहस्थ पर चर्चा कराने की बात कहने पर ). .....( व्यवधान )..

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय सिंहस्थ पर भी स्थगन दिया हुआ है उसके बारे में हमारा निवेदन है कि उसको स्वीकार करें...(व्यवधान).. अगर आपका संरक्षण नहीं मिलेगा तो कैसे काम चलेगा.

(6)नरसिंहपुर में रेत का अवैध उत्खनन

श्री जालमसिंह पटेल ( नरसिंहपुर ) --

श्री बाला बच्चन -- माननीय अध्यक्ष महोदय यह हमारे जो दो मुद्दे हैं इन पर आप बिल्कुल विचार नहीं कर रहे हैं और चर्चा नहीं कराना चाहते हैं. हम तो यह ही चाहते हैं कि आप चर्चा करायें. .....( व्यवधान )..

 

अध्यक्ष महोदय -- आपसे कहा गया है कि आपसे चर्चा करेंगे. .....( व्यवधान )..

श्री बाला बच्चन -- आपके शब्द पर तुरंत ध्यान दिया है हम तो यह चाहते हैं कि दोनों पर आप चर्चा करायें. .....( व्यवधान )..

अध्यक्ष महोदय -- माननीय नेता जी आपसे कहा है कि आपसे चर्चा कर लेंगे.

श्री बाला बच्चन --कुपोषण से लगातार बच्चों की मौत हो रही है, सिंहस्थ में अरबों रूपये का घोटाला हो गया है. .....( व्यवधान )..

अध्यक्ष महोदय -- मैंने ना मना किया है ना ही हां कहा है.

श्री बाला बच्चन (XXX)..(व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय -- यह सब कार्यवाही से निकाल दीजिए...(व्यवधान)..

डॉ नरोत्तम मिश्र -- आप चर्चा के लिए कहते हैं कि ध्यानाकर्षण लें, स्थगन लें और उसके बाद में आप सदन से भाग जायें....(व्यवधान)..

श्री गोपाल भार्गव -- अध्यक्ष महोदय कितनी दयनीय स्थिति है प्रतिपक्ष की प्रश्नकर्ता विधायक जी एक एक सीट पर जा रहेहैं, कृपया करके बहिर्गमन के लिए तैयार हो जायें..(व्यवधान).. मैं देख रहा हूं आप एक एक सीट पर जा रहे हैं...(व्यवधान)..

श्री बाला बच्चन -- आज यहां पर हमारे 56 एमएलए हैं,दयनीय स्थिति विपक्ष की संसद में थी 1984 में केवल दो सांसद जीतकर आये थे, हम तो आज भी मजबूत स्थिति में हैं संसद में आज भी हमारे 45 सांसद हैं और यहां पर हम आज 56 एमएलए हैं..(व्यवधान)..

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- बच्‍चन जी, तब भी वहां पर नेता प्रतिपक्ष था और आज वहां नेता प्रतिपक्ष नहीं है. (...व्‍यवधान...)

श्री बाला बच्‍चन -- दयनीय स्‍थिति संसद में 1984 में आप लोगों की थी, हम तो आज भी मजबूत हैं लेकिन हमारे मुद्दों को सुना क्‍यों नहीं जा रहा है. हम जो मुद्दे उठाकर दे रहे हैं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से हम चर्चा चाहते हैं. (...व्‍यवधान...)

अध्‍यक्ष महोदय -- श्रीमती चंदा सुरेन्‍द्र सिंह गौर अपनी शून्‍यकाल की सूचना पढ़ें. श्री सतीश मालवीय अपनी शून्‍यकाल की सूचना पढ़ें. (...व्‍यवधान...)

श्री बाला बच्‍चन -- सिंहस्‍थ में अरबों रुपये के घोटाले की रिपोर्ट हमने आपको दे दी है. आप उसी पर चर्चा करवा लें. (...व्‍यवधान...)

श्री गोपाल भार्गव -- मैं 1984-85 में किसी सीट पर हाथ जोड़ने नहीं गया.

(7) कटनी के बहोरीबंद विकासखण्‍ड अंतर्गत माध्‍यमिक स्‍कूलों के हाईस्‍कूल में उन्‍नयन संबंधी

 

कुँवर सौरभ सिंह -- (अनुपस्‍थित)

 

(8) उज्‍जैन जिले के घटिया विधानसभा क्षेत्र में स्‍थापित पवन ऊर्जा संयंत्र से उत्‍पन्‍न समस्‍या

 

श्री सतीश मालवीय (घटिया) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी शून्‍यकाल की सूचना इस प्रकार है :-

उज्‍जैन जिले के घटिया विधानसभा क्षेत्र में स्‍थापित पवन ऊर्जा संयंत्र की स्‍थापना के बाद किसानों एवं आमजन की जानमाल का खतरा उत्‍पन्‍न हो गया है. पवन चक्‍की के निर्माताओं ने स्‍कूल ग्राम आबादी तथा सार्वजनिक सड़क मार्गों के नजदीक इन संयंत्रों को स्‍थापित कर दिया है जिससे आमजन में भय व्‍याप्‍त है. दुर्घटनाओं की संभावनाओं के चलते नागरिकगण असुरक्षा का भाव महसूस कर रहे हैं. चरवाहे जंगल में पशुओं को लेकर चराने के लिए जा रहे हैं. खुली एवं असुरक्षित डीपियां, झूलते हुए कम ऊँचाई वाले तारों के कारण अनेकों दुर्घटनाएं भी हो रही हैं. कंपनी निर्माताओं ने अपने टॉवर स्‍थापित कर दिए, अब किसानों को अपने खेतों तक जाने के लिए रास्‍ते अवरुद्ध कर दिए हैं. धनबल एवं बाहुबल के कारण प्रशासन किसानों एवं आमजनों की शिकायतों का निराकरण करने में असमर्थता व्‍यक्‍त कर रहे हैं. (...व्‍यवधान...)

श्री रामनिवास रावत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपसे विनम्र प्रार्थना है कि सिंहस्‍थ और कुपोषण पर किसी न किसी तरीके से चर्चा कराएं. (...व्‍यवधान...)

अध्‍यक्ष महोदय -- बाद में बात कर लेंगे. आपकी बात स्‍वीकार है किंतु कक्ष में बात करेंगे. निर्णय कक्ष में करेंगे. (...व्‍यवधान...) श्रीमती चंदा सुरेन्‍द्रसिंह गौर अपनी शून्‍यकाल की सूचना पढ़ें.

 

(9) खरगापुर विधान सभा क्षेत्र के नगर बल्‍देवगढ़ में बायपास मार्ग निर्माण न हो पाना.

 

श्रीमती चंदा सुरेन्‍द्रसिंह गौर (खरगापुर) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी शून्‍यकाल की सूचना इस प्रकार है :-

खरगापुर विधान सभा-47 के नगर बल्‍देवगढ़ से टीकमगढ़-छतरपुर मुख्‍य मार्ग निकला हुआ है. उक्‍त मार्ग के दोनों तरफ बस्‍ती है, दुकानें, अस्‍पताल हैं, शासकीय हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल एवं हाई स्‍कूल एवं अशासकीय स्‍कूल संचालित हैं. भारी-भरकम वाहनों, ट्रकों, बसों का संचालन इसी मार्ग से होता है तथा रविवार के दिन हाट-बाजार भी लगता है जिस कारण उक्‍त सड़क से आने-जाने वाले वाहनों की भरमार रहती है. ग्रामीणों, क्षेत्र वासियों एवं नगर वासियों तथा छात्र-छात्राओं को आने-जाने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है तथा उक्‍त रोड पर हमेशा जाम की स्‍थिति बनी रहती है. मरीजों को भी कठिनाई उठानी पड़ती है. इसलिए बल्‍देवगढ़ में बाईपास सड़क निर्माण किये जाने हेतु शासन को पत्रों के माध्‍यम से अवगत भी कराया गया है परंतु आज तक बाईपास सड़क निर्माण नहीं हो पाया है. आम जनता की परेशानियों को ध्‍यान में नहीं रखा जा रहा है जिसके कारण क्षेत्र की तथा नगर की आम जनता में रोष व आक्रोश व्‍याप्‍त है तथा घटनाओं की आशंका बनी रहती है.

(...व्‍यवधान...)

अध्‍यक्ष महोदय -- क्‍या सब निर्णय यहीं करा लेंगे. नेताजी, कक्ष में बात कर लेंगे.

(...व्‍यवधान...)

श्री मुकेश नायक -- अध्‍यक्ष जी, यह माइक चालू नहीं होता है, मैंने सचिव महोदय को भी कहा है. (...व्‍यवधान...)

श्री कमलेश्‍वर पटेल -- अध्‍यक्ष जी, व्‍यवस्‍था दीजिए. (...व्‍यवधान...)

अध्‍यक्ष महोदय -- यहां बात नहीं करेंगे, श्री रामपाल सिंह... (...व्‍यवधान...)

 

12.18 बजे गर्भगृह में प्रवेश

इण्‍डियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍य सर्वश्री बाला बच्‍चन,

रामनिवास रावत, हरदीप सिंह डंग, मुकेश नायक, ओमकार सिंह मरकाम, सचिन यादव,

जितू पटवारी, मधु भगत आदि द्वारा सिंहस्‍थ के घोटाले की जांच कराने की

बात कहते हुए गर्भगृह में प्रवेश

(इण्‍डियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍य सर्वश्री बाला बच्‍चन, रामनिवास रावत, हरदीप सिंह डंग, मुकेश नायक, ओमकार सिंह मरकाम, सचिन यादव, जितू पटवारी, मधु भगत आदि सिंहस्‍थ के घोटाले की जांच कराने की बात कहते हुए गर्भगृह में आए एवं ''सिंहस्‍थ की जांच कराओ '' के नारे लगाने लगे.)

... (...व्‍यवधान...)...

 

अध्‍यक्ष महोदय -- सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्‍थगित.

(12.18 बजे सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्‍थगित की गई.)

 

 

12.35 बजे विधान सभा पुन: समवेत हुई.

 

{ अध्‍यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए}

 

 

अध्‍यक्ष महोदय -- शून्‍यकाल की जो सूचनाएं हैं इनको हो जाने दें, उसके बाद में बात कर लेंगे. श्री सुखेन्‍द्र सिंह बन्‍ना, श्री मानवेन्‍द्रसिंह, कुंवर सौरभ सिंह, श्री रामपाल सिंह, श्री मुकेश नायक, श्री वीरसिंह पवार, श्री संजीव छोटेलाल उइके, श्री उमंग सिंघार, श्री सचिन यादव, सदस्‍यों की शून्‍यकाल की सूचनाएं पढ़ी हुई मानी जाएंगी. ( ...व्‍यवधान.....)

श्री महेन्‍द्र सिंह कालूखेड़ा (मुंगावली) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपसे अनुरोध है कि एक तो आपने बहुत छोटा-सा सत्र बनाया. दूसरा नियम 139 में हमने महिला बाल विकास और अन्‍य मामले दिए थे उसके बजाए आपने एक छोटा-सा मामला ले लिया, एक जिले का जो कि शून्‍यकाल में आना था. ध्‍यानाकर्षण के भी लायक नहीं था. अब आपसे अनुरोध है कि हमारे अधिकारों का संरक्षण आपके हाथ में है और हम लोग महिला बाल विकास और सिंहस्‍थ के मामले में चर्चा चाहते हैं और आपसे अनुरोध है कि आप इस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का कष्‍ट करें क्‍योंकि आपने पिछले विधानसभा सत्र में यह कहा था, रिकार्ड में भी है कि अगली बार आप सिंहस्‍थ पर चर्चा करवाएंगे तो हम एक कदम पीछे हटते हैं ये भी एक कदम पीछे हटें. हम महिला बाल विकास का अगले सत्र में ले लेंगे. कम से कम सिंहस्‍थ के मामले में आप हमें किसी भी तरह से चर्चा का मौका दें.

श्री रामनिवास रावत (विजयपुर) -- अध्‍यक्ष महोदय, स्‍थगन लगे हुए हैं.

श्री महेन्‍द्र सिंह कालूखेड़ा -- अध्‍यक्ष महोदय, ध्‍यानाकर्षण भी है. कोई-सा भी स्‍वीकार कर लें.

अध्‍यक्ष महोदय -- कक्ष में इस पर बात कर लेंगे.

श्री रामनिवास रावत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कक्ष में ही क्‍यों ? आपने पिछली बार पिछले सत्र में आसंदी से कहा था कि सिंहस्‍थ पर चर्चा कराएंगे, हम अगले सत्र में करा लेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय -- इन विषयों में यहां बात नहीं होती.

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, क्‍यों नहीं होती बात. हम आसंदी से संरक्षण चाहेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, सब बातों का उत्‍तर यहां नहीं दिया जाता.

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, हमारे भी तो कुछ अधिकार हैं.

श्री महेन्‍द्र सिंह कालूखेड़ा -- विधान सभा के पटल पर आपका आश्‍वासन है.

श्री आरिफ अकील -- अध्‍यक्ष महोदय, आप यह भी नहीं कर सकते, आप यह भी नहीं कर सकते, आप सक्षम हो.

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, आपकी जो अंतरात्‍मा कहती है आप वह नहीं कर पाते.

श्री आरिफ अकील -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप शक्तिशाली हैं, आप सब कर सकते हैं.

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, आप जो चाहते हो, वह नहीं कर पाते. मुझे बड़ा कष्‍ट होता है.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप कृपया बैठ जाएं. श्री दिनेश राय मुनमुन.

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, आप अपनी अंतरात्‍मा से जो चाहते हैं वहीं कर दीजिए.

अध्‍यक्ष महोदय -- चलिए बैठ जाइए, हो गई बात.

श्री रामनिवास रावत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप नहीं चाहते कि चर्चा हो.

अध्‍यक्ष महोदय -- कृपया आप बैठ जाइए.

श्री रामनिवास रावत -- चर्चा के लिए हमारा निवेदन है. यह भी अच्‍छा मैसेज नहीं जाता कि आसंदी से एक बार निर्देश दे दिया हो, कि हम अगले सत्र में सिंहस्‍थ पर चर्चा कराएंगे फिर आप उस चर्चा से मुकर जाएं. यह अच्‍छी बात नहीं है. यह आसंदी के सम्‍मान के लिए यह अच्‍छी बात नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय -- चर्चा करने के लिए भी चर्चा करना पडे़गा. चर्चा करने के लिए तैयार हैं. चर्चा कर लेंगे.

 

12.36 बजे गर्भगृह में प्रवेश

इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यगण द्वारा गर्भगृह में प्रवेश

(इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍य सिंहस्‍थ पर चर्चा कराए जाने की मॉंग करते हुए गर्भगृह में आए एवं नारेबाजी करने लगे.)

 

श्री दिनेश राय (सिवनी) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ऑनलाइन प्रश्‍न लगाने की व्‍यवस्‍था हुई है. ऑनलाइन प्रश्‍न लगा रहे हैं. ( व्‍यवधान ........) इसमें जो क्‍वेश्‍चन लगाएं हैं पूरे मध्‍यप्रदेश के विधायको और सांसदों ने कितने रूपयों में (व्‍यवधान.....) उनकी जानकारी मंत्री जी नहीं दे रहे हैं और क्‍वेश्‍चन को बदल दिया है और सिवनी जिले के विधायकों की जो सूची दी है उसमें मेरा भी नाम है. मध्‍यप्रदेश के विधायक, सांसदों ने (व्‍यवधान......) उसमें कहीं न कहीं मंत्री जी भी गोलमाल कर रहे हैं. सांसदों, विधायकों को बचा रहे हैं. भारी भ्रष्‍टाचार हुआ है. (व्‍यवधान......)

नेता प्रतिपक्ष (श्री बाला बच्‍चन) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारी सब विधायको की मांग है कि सिंहस्‍थ पर चर्चा की जाए.

 

12.37 बजे पत्रों का पटल पर रखा जाना

1. माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्‍वविद्यालय, भोपाल का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2015-2016

 

वित्‍त मंत्री (श्री जयंत मलैया) -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं, संविधान के अनुच्‍छेद 151 के खण्‍ड (2) की अपेक्षानुसार भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक के वित्‍त लेखे खण्‍ड-I एवं खण्‍ड-II वर्ष 2015-2016 तथा विनियोग लेखे वर्ष 2015-2016 पटल पर रखता हॅूं.

 

2. माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्‍वविद्यालय, भोपाल का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2015-2016

 

जनसम्‍पर्क मंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र) -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्‍वविद्यालय, अधिनियम, 1990 (क्रमांक 15 सन् 1990) की धारा 36 की उपधारा (4) की अपेक्षानुसार माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्‍वविद्यालय, भोपाल का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2015-2016 पटल पर रखता हूँ.

....व्यवधान...

(इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यों द्वारा गर्भगृह से नारे लगाये जाते रहे)

श्री बाला बच्चन--- माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारी सभी विधायकों की मांग है कि सिंहस्थ पर चर्चा कराई जाये...(व्यवधान)....

3. म.प्र. राज्य महिला आयोग, भोपाल का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2013-2014

एवं 2014-15

 

महिला एवं बाल विकास मंत्री(श्रीमती अर्चना चिटनिस)-- अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग अधिनियम, 1995(क्रमांक 20 सन् 1996) की धारा 17 की उपधारा(3) की अपेक्षानुसार म.प्र. राज्य महिला आयोग, भोपाल का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2013-2014 एवं 2014-15 पटल पर रखती हूं.

श्री बाला बच्चन-- माननीय अध्यक्ष महोदय, सिंहस्थ पर चर्चा हो यह हमारी मांग है...(व्यवधान)... लोकतंत्र का गला घोंटने का काम आप न करें.हम यह चाहते हैं कि चर्चा हो.

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, आप हमको संरक्षण नहीं दे रहे हैं...(व्यवधान)..

श्री दिनेश राय-- अध्यक्ष महोदय, कांग्रेस और भाजपा की मिली हुई यह सरकार है.

 

 

4. मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम मर्यादित का ग्यारहवाँ वार्षिक लेखा एवं प्रतिवेदन वर्ष 2014-15

 

लोक निर्माण मंत्री(श्री रामपाल सिंह)-- अध्यक्ष महोदय, मैं, कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 395 की उपधारा(1) (ख) की अपेक्षानुसार मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम मर्यादित का ग्यारहवाँ वार्षिक लेखा एवं प्रतिवेदन वर्ष 2014-15 पटल पर रखता हूं.

श्री बाला बच्चन-- अध्यक्ष महोदय, सिंहस्थ में करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ है. इसमें जांच कमेटी बनना चाहिए और जांच होनी चाहिए....(व्यवधान)...

 

 

5. एन.एच.डी.सी. लिमिटेड की 16 वीं वार्षिक रिपोर्ट वित्तीय वर्ष 2015-16

 

राज्यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास(श्री लालसिंह आर्य)-- अध्यक्ष महोदय, मैं, कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 395 की उपधारा(1) (ख) की अपेक्षानुसार एन.एच.डी.सी. लिमिटेड की 16 वीं वार्षिक रिपोर्ट वित्तीय वर्ष 2015-16 पटल पर रखता हूं...(व्यवधान)..

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.42 बजे ध्यानाकर्षण

 

(सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई)

श्री बाला बच्चनमाननीय अध्यक्ष महोदय, यह सिंहस्थ की रिपोर्ट(प्रदर्शन करते हुए) है जिसको हमने आपको सौंपा है.100 पेज की यह रिपोर्ट है. लगभग 60 बिंदु इसमें है,इसमें जो करप्शन,भ्रष्टाचार सिंहस्थ में हुआ है उसकी यह पूरी रिपोर्ट मेरे हाथ में है और हम यह चाहते हैं ...(व्यवधान)..बड़ी मात्रा में सरकार के द्वारा जो भ्रष्टाचार हुआ है उसका खुलासा होना चाहिए उस पर चर्चा होना चाहिए...(व्यवधान)... जो घोटाल हुआ है उस पर चर्चा होना चाहिए.

अध्यक्ष महोदय-- मेरा यह अनुरोध है कि आज 4 ध्यानाकर्षण लिये हैं, कम से कम ध्यानाकर्षण हो जाने दें. माननीय सदस्यों के आग्रह पर 4 ध्यानाकर्षण लिये हैं ताकि माननीय सदस्यों के विषय चर्चा में आ जाये, कृपा करके इसको हो जाने दें.बाकी जो विषय है उसके बारे में चर्चा कर लेंगे.

श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपसे विनम्रतापूर्वक अनुरोध है कि सदस्यों के अधिकारों का संरक्षण करिये.

अध्यक्ष महोदय-- कृपया आप सभी अपने स्थान पर बैठ जायें. श्री सुखेन्द्र सिंह बन्ना अपने ध्यानाकर्षण की सूचना पढ़ें...(व्यवधान)..नेता जी, आपके ही सदस्य हैं उनको सूचना पढ़ लेने दें, वह भी जनता के अधिकार की बात है.

श्री बाला बच्चन-- माननीय अध्यक्ष महोदय, सिंहस्थ में घोटाल और भ्रष्टाचार हुआ है, उस पर विधानसभा में चर्चा होना चाहिए जिससे कि दूध-का-दूध और पानी-का-पानी का हो सके.

1.रीवा जिले के मऊगंज नवीन तहसील कार्यालय में मूलभूत सुविधाओं का अभाव होना

श्री सुखेन्द्र सिंह (मऊगंज)-- माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

श्री लालसिंह आर्यमाननीय अध्यक्ष महोदय, इनकी असत्य रिपोर्ट है, जाने कहाँ से मनगढ़न्त बातें करके मध्यप्रदेश जनता को भ्रमित करने का काम कर रहे हैं.

श्री बाला बच्चन-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह बहुत गलत है. यह लोकतंत्र का पूरा गला घोंट दिया गया है. माननीय अध्यक्ष महोदय, आप हमारी एक बात मानने को तैयार नहीं हैं . हम आपके माध्यम से चर्चा मांग रहे हैं . आप चर्चा नहीं करा रहे हैं. यह देखिये हमारे पास सिंहस्थ में जो घोटाला हुआ है उसकी पूरी रिपोर्ट है...(व्यवधान)...

 

 

 

 

 

 

राजस्‍व, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्‍ता)अध्‍यक्ष महोदय,

(व्‍यवधान)...

श्री बाला बच्‍चनहम आपसे आग्रह कर रहे हैं कि सिंहस्‍थ में बड़ा घोटाला हुआ है उसकी जांच हो. (व्‍यवधान)... माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम आपसे आग्रह कर रहे हैं आप हमारे आग्रह को मान नहीं रहे हैं. (व्‍यवधान)... सिंहस्‍थ में बड़ा घोटाला हुआ है. आप हमारी मांग को स्‍वीकार करें. आप हमारी मांग पर चर्चा नहीं करने दे रहे हैं. (व्‍यवधान)...इस पर जांच होना चाहिए जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो सके. (व्‍यवधान)... सिहंस्‍थ पर चर्चा करो. (व्‍यवधान)...

श्री सुखेन्‍द्र सिंहमाननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो माननीय मंत्री जी के द्वारा जवाब आया है कि जनता में असंतोष नहीं है वह बिलकुल असत्‍य है. आज भी असंतोष है. जबरन पुलिस के बल पर जो आमरण अनशन तुड़वाया गया, मेरा आपसे अनुरोध है कि जनता, अधिवक्‍ता और वहां के आक्रोश को देखते हुए तहसील को वापस लाया जाए और मेरा विनम्र निवेदन है कि उसकी न्‍यायिक जांच कराई जाए. मंत्री जी ने जो उत्‍तर दिया है मैं इस बात से सहमत नहीं हूं. (व्‍यवधान)...

डॉ. नरोत्‍तम मिश्रमाननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम सभी मंत्रियों की राय ऐसी है. (व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय-- ध्‍यानाकर्षण पढ़ रहे हैं और उनके उत्‍तर आ रहे हैं. (व्‍यवधान)...

श्री उमाशंकर गुप्ता--माननीय अध्यक्ष महोदय, दिनांक 13.10.2016 से लगातार तहसील कार्यालय वहां चल रहा है. अनशन भी समाप्त हो गया है. अधिवक्ताओं की मांग थी रोड की और मूलभूत सुविधाओं की, वह भी पूरी की जा रही है. वह विकसित क्षेत्र है, आबादी भी वहां पर है. आईटीआई चल रहा है 300 छात्र उसमें पढ़ रहे हैं. इसलिए परिवर्तन की कोई जरुरत नहीं है. दिनांक 13.10..2016 से नये भवन में तहसील कार्यालय ठीक ढंग से काम कर रहा है.

अध्यक्ष महोदय--आप माननीय सदस्य से मिलकर ठीक ढंग से उनकी समस्या का समाधान कर दें.

श्री उमाशंकर गुप्ता--माननीय सदस्य जो कठिनाई बताएंगे उसको हम दूर कर देंगे.

श्री सुखेन्द्र सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, तहसील वापस कराई जाए. जब सारी सुविधाएं हो जाएंगी तब हो जाएंगी. बिना जनता को, बिना हमको और बिना अधिवक्ताओं को विश्वास में लिए कैसे तहसील चली गई. मेरा आपसे अनुरोध है कि तहसील वापस कराई जाए. मैंने मंत्री जी से बात की है लेकिन वे मानने के लिए तैयार नहीं हैं. जनता में आक्रोश है. मेरा अनुरोध है कि क्या वहां अधिवक्ता फांसी पर झूल जाएं उसके बाद तहसील वापस होगी. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--माननीय मंत्री जी कुछ कह दें.

श्री उमाशंकर गुप्ता--माननीय अध्यक्ष महोदय, पुरानी तहसील जर्जर हो गई थी. यह काम वर्ष 2014 से चल रहा है. वहां नए तहसील भवन और अन्य भवन बने हैं. ऐसी कोई स्थिति नहीं है. (व्यवधान)

श्री सुखेन्द्र सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, क्या तहसील को छात्रों के लिए वहां ले जाया गया है. (व्यवधान) मेरा अनुरोध है कि इसमें न्याय दिलाइए जनता को (व्यवधान) वहां अधिवक्ता फांसी पर झूल जाएंगे क्या तब तहसील वापस की जाएगी, वहां पर 26 एकड़ जमीन उपलब्ध है. मैं पूछना चाहता हूं कि क्या वहां पर तहसील वापस लाई जाएगी ?..(व्यवधान)

श्री सुन्दरलाल तिवारी--अध्यक्ष महोदय, (XXX) (व्यवधान)

श्री बाला बच्चन--आप चर्चा को हाउस में स्वीकार कर लें. (व्यवधान)

श्री सुन्दरलाल तिवारी(XXX).. (व्यवधान)

 

 

(2) नागदा-खाचरौद क्षेत्र के अनेक ग्रामों में केमिकल युक्त पेयजल का प्रदाय होना

श्री दिलीप सिंह शेखावत (नागदा-खाचरौद)--माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री (सुश्री कुसुम सिंह महदेले)--माननीय अध्यक्ष महोदय,

(व्यवधान)

श्री बाला बच्चन--हमारे पास सिंहस्थ की 100 पेज की रिपोर्ट है आप समय दीजिए, चर्चा हो जाने दीजिए. सारी चीजें साफ हो जाएंगी (व्यवधान) आप इस रिपोर्ट पर विचार नहीं कर रहे हैं. लोकतंत्र की हत्या यहां हो रही है, हमारी आवाज दबा दी है जीरो कर दी है.सिंहस्थ पर चर्चा हो, जांच कमेटी बने. दूध का दूध और पानी का पानी हो. केवल विपक्ष इतना चाहता है. इस पर चर्चा होनी चाहिए यह हमारा आपसे आग्रह है. आप हमारी बात को अनदेखा कर रहे हैं. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--आपकी बात सुनेंगे ना, तैयार हैं चर्चा कराने के लिए. (व्यवधान)

श्री दिलीप सिंह शेखावत--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी को यह बताना चाहूंगा पहले तो आपने जो योजना मंजूर की है उसके लिए धन्यवाद दूंगा. यह जानकारी असत्य है कि वहां पर पीने योग्य पानी है. 22 गांवों में आपके विभाग द्वारा परमारखेड़ी में पानी पीने योग्य नहीं होने के कारण, खुद ने सील किया है, और 22 गांवों में लोग 5-5 किलोमीटर से पानी भरकर ला रहे हैं. आपने एक चीज और कही है कि ग्रेसिम उद्योग से सहमति नहीं मिली है. मैंने आपको पत्र दिया है मेरा बहुत विनम्रता से आपसे निवेदन है कि सरकार की पानी पिलाने की जिम्मेदारी है. इसलिये अगर डेम बनाने की आवश्यकता है तो आप डेम बनाएं. हम कब तक उद्योगों के रहमो-करम पर पानी पीने के लिए उनसे भीख मांगते रहेंगे. अगर 14 गांवों को पानी दे रहे हैं तो एक निवेदन और है कि यदि आप 70 लीटर पानी की व्यवस्था करते हैं तो उसको थोड़ा बहुत कम ज्यादा कर दें, लेकिन इस योजना के टेंडर करके इस योजना को प्रारंभ करा दें, क्योंकि यह काफी गंभीर समस्या है.यदि इस योजना को पानी कम या ज्यादा करके सदन में घोषणा करें तो मैं आपका बहुत-बहुत आभारी रहूंगा.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले--माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय सदस्य का आग्रह है विभाग ने 14 ग्रामों के लिए उपलब्ध पानी को समानुपातिक रुप से 22 गांवों में बांटने की योजना बनाई है और इस पानी को हम 22 गांव में बांट देंगे.

श्री दिलीप सिंह शेखावत-- क्या योजना चालू कर देंगे ?

सुश्री कुसुम सिंह महदेले--माननीय अध्यक्ष महोदय, चालू कर देंगे.

श्री दिलीप सिंह शेखावत--बहुत बहुत धन्यवाद.

 

 

(3) श्‍योपुर जिले के सहरिया आदिवासी क्षेत्र में विद्यु‍तीकरण कार्य न किये जाना.

 

श्री रामनिवास रावत, सदस्‍य द्वारा ध्‍यानाकर्षण की सूचना नहीं पढ़ी गयी.

 

(4) प्रदेश में डीबीटी योजना से कृषकों को लाभ न मिलना

 

सर्वश्री अनिल फिरोजिया(तराना) (सुखेन्‍द्र सिंह ''बन्‍ना'') :-माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी ध्‍यानाकर्षण की सूचना का विषय इस प्रकार है:-

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

राज्‍य मंत्री, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्‍करण (सूर्य प्रकाया मीणा):- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

श्री अनिल फिरोजिया :- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री का ध्‍यानाकर्ष्‍ंण कराना चाहता हूं कि जब से मध्‍यप्रदेश में डीबीटी लागू की है. तब से आप यह बता दें कि कहां-कहां पर पौधे लगें है. गरीब किसानों को यदि पौधे खरीदने हैं तो गरीब किसान को पौधे खरीदने के लिये नागपुर या दूसरे प्रांत में जाना पड़ेगा. अनुसूचित या अनुसूचित जनजाति वर्ग के जो किसान हैं जिनकी दो-दो या तीन-तीन बीघा की जमीन है वह कहां से व्‍यवस्‍था करेंगे. अभी इन्‍होंने धनिया और आलू खरीदने के लिये दो कम्‍पनियों को आर्डर दिये हैं. अध्‍यक्ष जी,मैं आपके माध्‍यम से पूछना चाहता हूं कि यह भ्रष्‍टाचार नहीं है. जब डीबीटी लागू है तो इन्‍होंने आर्डर कैसे दे दिये. एक इंदौर की कंपनी है और अन्‍य कंपनी को आर्डर दिया है तो क्‍या माननीय मंत्री जी यह आश्‍वासन देंगे कि जिन अधिकारियों ने आर्डर दिये हैं. क्‍या मंत्री जी जांच करा कर उन अधिकारियों पर कार्यवाही करेंगे ?

श्री सूर्य प्रकाश मीणा :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यदि कोई ऐसा विषय है कि सीधी खरीदी किसी संस्‍था को दी गयी है, डीबीटी नियमों के विपरीत, तो किस स्‍तर पर खरीदी के

आदेश जारी हुए हैं इसकी जानकारी एकत्रित कर जांच करवा लेंगे.

श्री अनिल फिरोजिया :- माननीय मंत्री जी, आपके डायरेक्‍टर ने आदेश दिये हैं, उसकी कापी मेरे पास है. क्‍या आप डायरेक्‍टर के विरूद्व जांच करके कार्यवाही करेंगे ?

श्री सूर्य प्रकाश मीणा :- आपके पास जो पेपर है वह मुझे दे दें. किस स्‍तर पर खरीदी हुई है, उसको देखकर फिर हम जांच करवा लेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय :- मेरा माननीय सदस्‍यों से अनुरोध है कि नियम प्रक्रिया के तहत ही बातचीत हो सकती है और निर्णय हो सकते हैं. आपसे अनुरोध है कि आप अपने स्‍थान पर वापस जायें.

श्री बाला बच्‍चन :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम नियम प्रक्रिया के अंतर्गत ही चर्चा चाहते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय :- परन्‍तु आप सब निर्णय यहीं कराना चाहते हैं, यह उचित नहीं है.

श्री बाला बच्‍चन :- हम तो नियम प्रक्रियाओं के अंतर्गत ही हैं.

 

1.00 बजे अध्‍यक्षीय घोषणा

 

काले धन की व्‍यवस्‍था को समाप्‍त करने के लिये कैशलेस लेनदेन का बढ़ावा देने संबंधी प्रशिक्षण

अध्‍यक्ष महोदय:- शासन द्वारा संचालित कल्‍याणकारी योजनाओं के प्रशिक्षण कार्यक्रम की श्रंखला के अंतर्गत माननीय सदस्‍यों के समक्ष '' काले धन की व्‍यवस्‍था को समाप्‍त करने के लिये कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देने संबंधी प्रशिक्षण '' का प्रस्‍तुतिकरण कार्यक्रम आज गुरूवार, दिनांक 8 दिसम्‍बर, 2016 को अपराह्न 2.00 बजे विधान सभा भवन स्थित ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया है.

प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा संस्‍थागत वित्‍त, मध्‍यप्रदेश शासन द्वारा तैयार की गई है, जिसकी अवधि 30 मिनट रहेगी.

माननीय सदस्‍यों से अनुरोध है कि उक्‍त कार्यक्रम में पधारने का कष्‍ट करें.

अध्‍यक्ष महोदय :- सदन की कार्यवाही अपराह्न 3.00 बजे तक के लिये स्‍थगित.

 

(1.00 बजे से 3.00 बजे तक अन्‍तराल )

 

 

 

समय--03.07 बजे

 

3.07 बजे {अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.

प्रतिवेदनों की प्रस्तुति

 

(1) गैर सरकारी सदस्यों के विधेयकों तथा संकल्पों संबंधी समिति का सोलहवां प्रतिवेदन

 

प्रतिवेदनों की प्रस्तुति.

(2) सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति का एक सौ दो वां से एक सौ बाईस वां प्रतिवेदन

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया(सभापति)--अध्यक्ष महोदय, मैं सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति का एक सौ दो वां से एक सौ बाईस वां प्रतिवेदन सदन में प्रस्तुत करता हूं.

अध्यक्ष महोदय, यह कहते हुए अत्यंत प्रसन्नता है कि जो विश्वास एवं जिम्मेदारी आपने हमारी इस समिति को दी है. समिति के पास 2001 से प्रतिवेदन लंबित थे जिनके लिये लगातार बैठकें हम लोगों ने कीं. मैं धन्यवाद देना चाहता हूं समिति के 10 माननीय सदस्यों जो हर बैठकों में आये हैं और उन्होंने बहुत ही तलीनता के साथ काम किया है. विधान सभा के प्रमुख सचिव एवं सचिवालय के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी साथी हैं उन्होंने भी रात-दिन परिश्रम करके प्रतिवेदनों को पटल पर पहुंचाने का काम किया है.

अध्यक्ष महोदय--सभापति जी आपको तथा आपके सदस्यों एवं सचिवालय के अधिकारी/कर्मचारियों को मेरी ओर से बधाई आप इसी प्रकार से काम निरंतर बना रहे.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया-- अध्यक्ष महोदय बहुत बहुत धन्यवाद.

(3) प्रश्न एवं संदर्भ समिति का पन्द्रहवां, सोलहवां, सत्रहवां एवं अठारहवां प्रतिवेदन

श्री अंचल सोनकर (सभापति)--अध्यक्ष महोदय, मैं, प्रश्न एवं संदर्भ समिति का पन्द्रहवा, सोलहवां, सत्रहवां एवं अठारहवां प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूं.

3.10 बजे याचिकाओं की प्रस्‍तुति

अध्‍यक्ष महोदय आज की कार्यसूची में उल्‍लेखित सभी याचिकाएं पढ़ी हुई मानी जाएंगी.

3.10 बजे शासकीय विधि विषयक कार्य

(1) मध्‍यप्रदेश आयुर्वेदिक, यूनानी तथा प्राकृतिक चिकित्‍सा व्‍यवसायी (संशोधन) विधेयक, 2016 (क्र. 27 सन् 2016) का पुर:स्‍थापन

लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण तथा आयुष मंत्री (श्री रूस्‍तम सिंह) अध्‍यक्ष महोदय, मैं मध्‍यप्रदेश आयुर्वेदिक, यूनानी तथा प्राकृतिक चिकित्‍सा व्‍यवसायी (संशोधन) विधेयक, 2016 के पुर:स्‍थापन की अनुमति चाहता हूँ.

अध्‍यक्ष महोदय प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश आयुर्वेदिक, यूनानी तथा प्राकृतिक चिकित्‍सा व्‍यवसायी (संशोधन) विधेयक, 2016 के पुर:स्‍थापन की अनुमति दी जाये.

अनुमति प्रदान की गई

श्री रूस्‍तम सिंह अध्‍यक्ष महोदय, मैं मध्‍यप्रदेश आयुर्वेदिक, यूनानी तथा प्राकृतिक चिकित्‍सा व्‍यवसायी (संशोधन) विधेयक, 2016 का पुर:स्‍थापन करता हूँ.

 

(2) मध्‍यप्रदेश आयुर्वेदिक, आयुर्विज्ञान परिषद् (संशोधन) विधेयक, 2016 (क्र. 28 सन् 2016) का पुर:स्‍थापन

राज्‍यमंत्री चिकित्‍सा शिक्षा (श्री शरद जैन) अध्‍यक्ष महोदय, मैं मध्‍यप्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद् (संशोधन) विधेयक, 2016 के पुर:स्‍थापन की अनुमति चाहता हूँ.

अध्‍यक्ष महोदय प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद् (संशोधन) विधेयक, 2016 के पुर:स्‍थापन की अनुमति दी जाये.

अनुमति प्रदान की गई

श्री शरद जैन अध्‍यक्ष महोदय, मैं मध्‍यप्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद् (संशोधन) विधेयक, 2016 का पुर:स्‍थापन करता हूँ.

 

(3) मध्‍यप्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय (स्‍थापना एवं संचालन) तृतीय संशोधन विधेयक, 2016 (क्र. 29 सन् 2016) का पुर:स्‍थापन

उच्‍च शिक्षा मंत्री (श्री जयभान सिंह पवैया) अध्‍यक्ष महोदय, मैं मध्‍यप्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय (स्‍थापना एवं संचालन) तृतीय संशोधन विधेयक, 2016 के पुर:स्‍थापन की अनुमति चाहता हूँ.

अध्‍यक्ष महोदय प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय (स्‍थापना एवं संचालन) तृतीय संशोधन विधेयक, 2016 के पुर:स्‍थापन की अनुमति दी जाये.

अनुमति प्रदान की गई

श्री जयभान सिंह पवैया अध्‍यक्ष महोदय, मैं मध्‍यप्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय (स्‍थापना एवं संचालन) तृतीय संशोधन विधेयक, 2016 का पुर:स्‍थापन करता हूँ.

 

(4) मध्‍यप्रदेश उपकर (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2016 (क्र. 31 सन् 2016)

का पुर:स्‍थापन

वित्‍त मंत्री (श्री जयंत मलैया) अध्‍यक्ष महोदय, मैं मध्‍यप्रदेश उपकर (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2016 के पुर:स्‍थापन की अनुमति चाहता हूँ.

अध्‍यक्ष महोदय प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश उपकर (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2016 के पुर:स्‍थापन की अनुमति दी जाये.

अनुमति प्रदान की गई

श्री जयंत मलैया अध्‍यक्ष महोदय, मैं मध्‍यप्रदेश उपकर (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2016 का पुर:स्‍थापन करता हूँ.

 

(5) मध्‍यप्रदेश मोटरयान कराधान (संशोधन) विधेयक, 2016 (क्र. 32 सन् 2016)

का पुर:स्‍थापन

परिवहन मंत्री (श्री भूपेन्‍द्र सिंह) अध्‍यक्ष महोदय, मैं मध्‍यप्रदेश मोटरयान कराधान (संशोधन) विधेयक, 2016 के पुर:स्‍थापन की अनुमति चाहता हूँ.

अध्‍यक्ष महोदय प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश मोटरयान कराधान (संशोधन) विधेयक, 2016 के पुर:स्‍थापन की अनुमति दी जाये.

अनुमति प्रदान की गई

श्री भूपेन्‍द्र सिंह अध्‍यक्ष महोदय, मैं मध्‍यप्रदेश मोटरयान कराधान (संशोधन) विधेयक, 2016 का पुर:स्‍थापन करता हूँ.

 

3.14 बजे वर्ष 2016-2017 के द्वितीय अनुपूरक अनुमान की मांगों पर मतदान

अध्‍यक्ष महोदय अब, अनुपूरक अनुमान की मांगों पर चर्चा होगी, सदन की परम्‍परा के अनुसार सभी मांगें एक साथ प्रस्‍तुत की जाती हैं और उन पर एक साथ चर्चा होती है. अत: वित्‍त मंत्री जी सभी मांगें एक साथ प्रस्‍तुत कर दें. मैं समझता हूँ कि सदन इससे सहमत है.

(सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई)

वित्‍त मंत्री (श्री जयंत मलैया) अध्‍यक्ष महोदय, मैं राज्‍यपाल की सिफारिश के अनुसार प्रस्‍ताव करता हूँ कि

दिनांक 31 मार्च, 2017 को समाप्‍त होने वाले वित्‍तीय वर्ष में अनुदान संख्‍या 1, 2, 3, 4, 6, 8, 10, 11, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 18, 21, 22, 23, 24, 26, 29, 30, 31, 32, 34, 35, 36, 37, 39, 40, 41, 42, 43, 44, 45, 46, 47, 48, 50, 52, 54, 55, 56, 64, 65, 70, 72, 73, 74 तथा 75 के लिए राज्‍य की संचित निधि में से प्रस्‍तावित व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को कुल मिलाकर नौ हजार तीन सौ सैंतालीस करोड़, छियालीस लाख, अड़तीस हजार, सतासी रूपये की अनुपूरक राशि दी जाये.

अध्‍यक्ष महोदय प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ.

श्री रामनिवास रावत - माननीय मंत्री जी द्वारा प्रस्‍तुत अनुपूरक बजट रूपए नौ हजार तीन सौ सैंतालीस करोड, छियालीस लाख, अड़तीस हजार सतासी, का मैं विरोध करता हूं. विरोध के कई कारण हैं, अनुपूरक बजट की आवश्‍यकता होती है, प्रदेश की जनता के विकास के लिए, लेकिन इसमें अनुपूरक बजट क्‍यों चाहते हैं, इसका कारण नहीं दर्शाया गया. आपने प्रथम बजट प्रस्‍तुत किया 2016-2017 का एक लाख अटठावन हजार सात सौ तेरह करोड़ का, प्रथम सप्‍लीमेंट्री लाए चौदह हजार तीन सौ सड़सठ करोड़ का, द्वितीय सप्‍लीमेंट्री भी लाए नौ हजार 431 करोड़ का. अब आपने फिर द्वितीय सप्‍लीमेंट्र प्रस्‍तुत किया है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं जानना चाहता हूं कि आज प्रदेश की राजस्‍व इन्‍कम की स्थिति क्‍या है और आपके जीडीपी से राजस्‍व के घाटे की स्थिति क्‍या है, उसका प्रतिशत क्‍या है. जब उस समय बजट प्रस्‍तुत करने और ऋण लेने की बात आई थी, तब तिवारी जी ने भी यह बात उठाई थी कि आपकी जो सीलिंग थी, तीन प्रतिशत थी, सीलिंग बढ़ाने की प्रत्‍याशा में केन्‍द्र सरकार से 3.5 फीसदी तक के घाटे का ऋण लिया और आज आप उस घाटे की जीडीपी से तुलना करें तो उस घाटे की क्‍या स्थिति है, इसको स्‍पष्‍ट करने की जरूरत है. यह आपने अनुपूरक बजट की मांग तो की है, लेकिन आप इसको कहां से लाएंगे, कहां से राशि की व्‍यवस्‍था करेंगे, कितना कर्ज लेंगे, कितना आपके पास उपलब्‍ध है, ये जरूर स्‍पष्‍ट करने का प्रयास करेंगे तो महती कृपा होगी. नहीं तो पूरे प्रदेश की आर्थिक स्थिति बिगड़ जाएगी, जिस तरह से प्रदेश का किसान बेहाल और परेशान है, वह बेहाली और परेशानी लगातार बढ़ती जाएगी.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं वर्ष 2003 से इनकी सरकार को लगातार देख रहा हूं, मैं भी वर्ष 2003 से लगातार विधायक हूं. कभी कभी बड़ा संकोच होता है यह कहने में, यह बड़ा दुर्भाग्‍य है, मैं समझता हूं सभी लोग इनको पत्र लिखते होंगे, मैं भी पत्र लिखता हूं, प्रस्‍ताव भी बनवाता हूं. प्रस्‍ताव सरकार तक भी आते हैं, लेकिन मेरे बजट में, कुछ एकाध मंत्री को छोड़ दे, जो सहृदयता पूर्वक हमको राशि देते हैं, एकाध को छोड़कर.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री गोपाल भार्गव)- रावत जी आप नाम भी बता दें, कौन है.

श्री रामनिवास रावत - अब आप खुद ही समझ जाए कि एकाध कौन है, आपने तो कभी दिया नहीं है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज तक कभी न ही मुख्‍य बजट और न ही अनुपूरकों में मेरी विधानसभा के तालाब या सड़क का नाम आज तक नहीं आ पाया है.

राजस्‍व मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्‍ता)- रावत जी आप कसम खाकर कहो कि आपकी विधानसभा क्षेत्र में कोई भी काम नहीं हुआ.

श्री रामनिवास रावत - प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत, मुख्‍यमंत्री सड़क योजना के तहत जो नार्म्‍स के अनुसार सड़क गई है वह तो है, लेकिन लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत इस बजट में जो मद आते हैं, या सिंचाई विभाग के अंतर्गत इस बजट में जो मद आते है, वह आज तक कभी नहीं आए. रेग्‍यूलर जो बजट आता है वही आता है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी को यह भी कहना चाहूंगा कि जो आप अनुपूरक बजट प्रस्‍तुत करते हो. यह आपके भारत नियंत्रक महालेखा परीक्षक का प्रतिवेदन है. इन्होंने कहा है कि मूल अनुपूरक अनुदानों के अंतर्गत बढ़ते हुए प्रावधान पूरी तरह से फेल, वित्तीय प्रबंधन में सरकार फेल. यह आपके अनुपूरक बजट बेकार साबित हुए. यह केग की रिपोर्ट में दिया हुआ है. तो यह हमें संतुष्ट करने की कोशिश करें कि आप अनुपूरक लाये क्यों, कैसे ला रहे हैं. वित्तीय प्रबंध में सरकार फेल. यह आपका केग कह रहा है कि 2014-15 के दौरान कुल बजट प्रावधान 1,48500 करोड़ के विरुद्ध 1,13,052 करोड़ रुपये व्यय हुए, परिणाम स्वरुप 35453 करोड़ रुपये की समग्र बचतें हुईं और जो 19541 करोड़ मूल प्रावधान का 15.12 प्रतिशत के सम्पूर्ण अनुपूरक प्रावधान अनावश्यक सिद्ध हुए. 37 प्रकरणों में प्रत्येक मद में 100 करोड़ से अधिक की कुल 28334 करोड़ की बचतें हुईं. यह केग की रिपोर्ट में है. अध्यक्ष महोदय, इन चीजों को स्पष्ट करें कि जब अनुपूरक अनुमान, अनुपूरक बजट, अनुपूरक प्रावधान, अनुपूरक राशि आप ले रहे हैं, ये अनावश्यक सिद्ध हो रहे हैं. जब आप खर्च करने की स्थिति में नहीं हैं, तो आप इसको क्यों ले रहे हैं. दूसरा हमारा सवाल है कि जो राशि आप ले रहे हैं, उस राशि का सदुपयोग तो करें. आप केग की रिपोर्ट में ही देखें. पेंशन भुगतान में विलम्ब. 2015 के दौरान 14 चयनित जिलों में से 6 जिलों में समग्र सामाजिक सुरक्षा पेंशन, जो कि इस समाज के अंतिम पंक्ति की पेंशन से संबंधित है, सामाजिक सहायता कार्यक्रम 1 लाख 49 हजार हितग्राहियों को 7 करोड़ 74 लाख की राशि का भुगतान नियत तिथि से 16 माह विलम्ब से हुआ. इसी तरह से 16 लाख 16 हजार व्यक्ति इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना हेतु पात्र थे, लेकिन वे योजना का लाभ प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं. ऐसी कई स्थितियां हैं. एससी,एसटी के छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिल पाना, आवंटित जिला स्तर पर निधि का अवरुद्ध रहना. एसी,एसटी के छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति 2015 के अंत में नमूना जांच किये गये 15 जिलों के सहायक आयुक्त, आदिम जाति कल्याण जिला संयोजक, आदिम जाति कल्याण के बैंक खातों में 71 करोड़ 93 लाख अव्ययित शेष थे, जो कि शासन को वापस नहीं किये गये. छात्रवृत्ति नहीं मिल रही है, छात्रवृत्ति घोटाला भी सबके सामने है. कितना बड़ा छात्रवृत्ति घोटाला हुआ है. तो इस राशि का उपयोग किस तरह से हो और जो सहरिया,बैगा,भारिया जातियां, जिनके लिये केंद्र से विशेष राशि आती है, उनकी राशि का भी उपयोग नहीं किया गया. आज आप तमाम राशि ले रहे हैं, पोषण आहार के लिये, कुपोषण मिटाने के लिये. महिला बाल विकास के लिये भी आपने राशि की मांग की है. कुपोषण मिटाने के लिये भी आप राशि ले रहे हैं. लगभग आपका 1700 करोड़ रुपये का बजट है और सुप्रीम कोर्ट ने 2004 में निर्देश दिये थे कि पोषण आहार का वितरण, ठेकेदारी प्रथा समाप्त करके सेल्फ हेल्प ग्रुप्स से कराया जाये. 2004 से लेकर अब तक इनकम टैक्स के भी छापे पड़े, कुपोषण के मामले में आपने पूरे प्रदेश को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बदनाम कर दिया, लेकिन आप उन ठेकेदारों की ठेकेदारी प्रथा समाप्त नहीं कर पाये, क्या कारण है. आज प्रदेश में प्रति दिन औसत जीरो से लेकर 5 वर्ष तक और 6 से लेकर 12 वर्ष तक 61 बच्चे प्रतिदिन काल के गाल में समाहित हो रहे हैं. यह प्रदेश के लिये, हम सब लोगों के लिये केवल सरकार के लिये नहीं, हम भी इस प्रदेश के जिम्मेदार नागरिक हैं. हम सब के लिये बड़े शर्म की बात है और इस पर बिना किसी संकोच के चिंतन करने की आवश्यकता है. आप हम से अनुपूरक बजट मांग रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग की स्थिति जो अभी अभी नरोत्तम जी ने छोड़ा है, पता नहीं किधर चले गये. प्रथम श्रेणी विशेषज्ञों के 3266 पद स्वीकृत हैं और भरे कितने हैं 1222, खाली 2044 हैं. जहां आधे से अधिक 70 प्रतिशत पद डाक्टर्स के रिक्त होंगे, तो उस प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के बारे में मैं समझता हूं कि कहने की ज्यादा आवश्यकता नहीं है कि स्वास्थ्य सेवाओं का क्या हाल होगा. इसी तरह से चिकित्सा अधिकारियों की 4800 स्वीकृत पद, कार्यरत् 2934 और 1926 पद आज भी रिक्त हैं. कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ऐसे हैं, जो चिकित्सक विहीन हैं, केवल कम्पाउंडर चला रहे हैं. और कम्पाउन्डर भी समय़ पर बैठे या न बैठें कोई जरूरी नहीं है. मंत्री जी, आप किसानों के लिये बजट लेते हैं अच्छी बात है. अभी आपकी सरकार ने 4 दिसम्बर 2016 को मुख्यमंत्री जी के कार्यकाल के 11 वर्ष पूर्ण होने पर कार्यक्रम किया, उनके 11 वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण हुये, हम भी इसकी बधाई देते हैं लेकिन इसका आशय यह तो नहीं था कि कृषक भ्रमण के नाम की राशि से आप भारतीय जनता पार्टी का आयोजन करें. यदि आयोजन करना था तो भारतीय जनता पार्टी को करना था. क्या एक दिन में आपने कितने कृषकों को प्रशिक्षण दिया ? लेकिन करोड़ों रूपये उस कृषक प्रशिक्षण के नाम पर आपने व्यय किये,लेकिन प्रशिक्षण जैसी कोई चीज कहीं पर देखी नहीं गई.

माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रदेश में रोज चार किसान आत्महत्या कर रहा है. प्रदेश के सभी वर्गों के लगभग 25 व्यक्ति रोज आत्महत्यायें कर रहे हैं इससे बड़ी दुर्भाग्य की बात मैं समझता हूं कि दूसरी कोई हो नहीं सकती है. औसत रोज 2 छात्र भी आत्महत्या कर रहे हैं. माननीय अध्यक्ष महोदय, आपका भी काफी लंबा राजनैतिक जीवन है और हमारा भी काफी लंबी राजनैतिक जीवन है. कभी यह बात सरकार की तरफ से नहीं आई है कि किसान ने कर्ज के बोझ से दबकर के आत्महत्या की हो, लेकिन कल ही एक प्रश्न के उत्तर में सरकार ने इस बात को स्वीकार किया है कि सागर संभाग के टीकमगढ़ और छतरपुर जिले में कर्ज से किसान ने आत्महत्या की है, कर्ज के बोझ से दबकर के किसान आत्महत्या की है, कल की ही प्रश्नोत्तर सूची की मैं बात बता रहा हूं. इससे बड़ी कोई दुर्भाग्य की बात नहीं हो सकती है. ढोल पीटते हैं कि हम किसानों को जीरो परसेंट पर ब्याज दे रहे हैं ,यदि आपने जीरो परसेंट पर ब्याज दिया तो कर्ज के बोझ से दबकर के किसान कैसे आत्महत्यायें कर रहे हैं. यह सोचनीय विषय है. मंत्री जी इसको आप दिखवायें कि कहीं बीच में कोई घालमेल तो नहीं हो रहा है , सहकारी बैंकों में बड़े बड़े घोटाले तो नहीं हो रहे हैं. सुन्दरलाल तिवारी जी आपको बतायेंगे रीवा के को-आपरेटिव बैंक में कितना बड़ा घोटाला हुआ. आज भी किसान की स्थिति जस की तस है, रोज 4 किसान प्रदेश में आत्महत्यायें कर रहे हैं.

माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रदेश में कानून व्यवस्था को बनाये रखने की दृष्टि से आपने 100 नंबर के वाहन किराये पर लिये, जितना आप उन वाहनों का किराया दे रहे हैं उस किराये से तो 2 साल में आप पूरे वाहन खरीद सकते थे, इस सरकार ने किस कंपनी को यह ठेका दिया, मैं ज्यादा नहीं कहूंगा कि किसकी यह कंपनी है और किसको लाभ देना चाहते हो, किस तरह से लाभ देना चाहते हैं यह तो आप ही जाने. आपने वाहन कानून और व्यवस्था को चुस्त दुरस्त बनाने के लिये ही दिये हैं. लेकिन आज हम देखें बड़ी छोटी छोटी चीजे हैं, मानव तस्करी. मानव तस्करी में प्रतिदिन 67 महिलायें इस प्रदेश में गायब हो रही हैं. और आप महिलाओं के सशक्तिकरण की बात करते हैं, महिलाओं की सुरक्षा की बात करते हैं. जहां पर एक तरफ लेंगिग अनुपात में भारी कमी आ रही है वहीं महिलाओं की सुरक्षा के प्रति हम चिंतित नहीं हैं. 67 महिलायें प्रतिदिन गायब हो रही हैं. टोटल 75 लोग मानव तस्करी के प्रभाव से बच नहीं पा रहे हैं. आपकी सरकार को प्रदेश में 11 वर्ष कार्य करते हुये हो गये हैं लेकिन महिलाओं का जो सम्मान होना चाहिये वह नहीं हो रहा है और महिलाओं के अपराध में जरूर लगातार वृद्धि होती जा रही है. प्रतिदिन 13 महिलाओॆ के साथ में प्रदेश में बलात्कार हो रहे हैं, लेकिन आपकी सरकार इन अपराध को रोक नहीं पा रही है. प्रति तीन दिन में दो सामूहिक बलात्कार हो रहे हैं.

माननीय अध्यक्ष महोदय, कर्मचारी भी इस प्रदेश में सुरक्षित नहीं है. क्योंकि आपकी जो संस्कृति है वह (XXX). इस तरह से प्रतिदिन औसत 7 कर्मचारियों के साथ में मारपीट हो रही है. आप यह नहीं कहेंगे यह आंकड़े कहां से दिये, यह सरकार के आंकडे हैं, मेरे प्रश्न के जवाब में सरकार ने आंकडे दिये हैं 1 जनवरी 2015 से 30 जून 2016 तक की स्थिति में कुल 544 दिन होते हैं 3007 घटनायें हो गई. 7 कर्मचारी औसत प्रतिदिन (XXX) इससे बड़ी दुर्भाग्य की बात कोई दूसरी हो नहीं सकती.

राज्य मंत्री, सामान्य प्रशासन(श्री लाल सिंह आर्य) -- यह आंकड़ा आप कहां से ला रहे हैं.

श्री रामनिवास रावत- यह आंकड़ा आपका ही है.

श्री लाल सिंह आर्य-- आर.एस.एस. पीटने का काम नहीं करती है.जनसेवा का काम करती है .राष्ट्र सेवा का काम करती है.

श्री कमलेश्वर पटेल -- मंत्री जी आपको याद दिला दें अभी बालाघाट में क्या हुआ है.

श्री लाल सिंह आर्य-- अध्यक्ष महोदय, इसको कार्यवाही से निकाला जाना चाहिये.

श्री के.के. श्रीवास्तव- अध्यक्ष महोदय, यह बार बार आर.एस.एस. का नाम न लें.

श्री रामनिवास रावत- एक एडिशनल एस.पी. को, एक टी.आई. को बिना कारण के सस्पेंड कर दिया और प्रकरण भी कायम करा दिया 307 का.

श्री कमलेश्वर पटेल -- आई.जी., डी.आई.जी. सबका स्थानांतरण कर दिया.

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- गांधी जी को मार डाला, गांधी जी की हत्या कर दी और यहां बोल रहे हैं..

श्री लाल सिंह आर्य-- लंबे समय तक सरकार तो आपकी रही है गिरफ्तार कर लेते न. पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर मनमोहन सिंह तक आपकी सरकार रही है गिरफ्तार करके दिखा दो न अगर मारा है तो.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--सजा दिलवाई है, गोड़से को सजा हुई है.

श्री यशपाल सिंह सिसोजिया-- अध्यक्ष जी, गांधी जी के हत्यारों कहा गया है.

श्री सुन्दरलाल तिवारी(XXX)

अध्यक्ष महोदय-- यह कार्यवाही से निकाल दें.

नर्मदा घाटी विकास मंत्री (श्री लाल सिंह आर्य)-- (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय-- तिवारी जी जो कह रहे हैं वह निकाल दें.

श्री सुंदरलाल तिवारी-- (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय-- यहां चर्चा का विषय नहीं है.

श्री सुंदरलाल तिवारी-- (XXX).

अध्‍यक्ष महोदय-- इसको निकालिये, उचित नहीं है यह.

श्री रामनिवास रावत-- कितनी गंभीर बातें कर रहे हैं, सुनना चाहिये.

श्री लाल सिंह आर्य(XXX), इसका मतलब है.

वन मंत्री (डॉ. गौरीशंकर शेजवार)-- मैं तिवारी जी की तारीफ करना चाहता हूं कि पहले तो बहुत अकड़ रहे थे इन सबसे, फिर आखिरी में आरएसएस वालों के सामने हाथ जोड़े इन्‍होंने.

श्री सुंदरलाल तिवारी-- हम सबके जोड़ रहे हैं, लेकिन जब आप अपने आरएसएस में उतर आओगे तब नहीं जोड़ेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप तो बैठ जाओ.

श्री कमलेश्‍वर पटेल-- वह आसंदी का सम्‍मान कर रहे हैं, आसंदी सबकी है.

श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं चर्चा कर रहा था कि प्रतिदिन 7 कर्मचारियों को औसतन पीटा जा रहा है और मैं बता ही चुका किसके द्वारा पीटा जा रहा है, आप दिखवा लें, कौन-कौन रिपोर्टर हैं. इसी तरह से योजनाओं के बारे में कुछ नहीं कहना, आपकी योजनायें अच्‍छी हैं लेकिन योजनाओं की धरातल पर क्रियान्‍वयन की क्‍या स्थिति है यह किसी से छिपा नहीं है. प्रदेश में पिछले वर्ष सूखा पड़ा, लेकिन रोजगार के काम पूरे प्रदेश में कहीं नहीं चल रहे. एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक भ्रष्‍टाचार के मामले में महाराष्‍ट्र के बाद देश के दूसरे नंबर पर मध्‍यप्रदेश आ गया और इसी तरह से ट्रांसपेरेंसी ऑफ इंटरनेशनल इंडिया की ओर से किये जा रहे सर्वे में भी मध्‍यप्रदेश का नंबर भ्रष्‍टाचार के मामले में दूसरे नंबर पर है, भ्रष्‍टाचार के मामले में आपने सारे रिकार्ड तोड़ दिये. व्‍यावसायिक परीक्षा मंडल घोटाला किसी से छिपा नहीं है, आपने प्रोफेशनल एग्‍जॉमिनेशन बोर्ड बनाया, अभी पुलिस सब इंस्‍पेक्‍टर की परीक्षायें कराई, कराने के बाद लोगों के रिजल्‍ट भी निकाल दिये, स्‍टूडेंट को इंटरव्‍यू के लिये कॉल भी कर दिया. उसके बाद पता नहीं 100 स्‍टूडेंट के लिये न जाने कितने स्‍टूडेंट्स को पुन: रिव्‍यू करके रिवाइज रिजल्‍ट निकाल दिया कि आपका वह इंटरव्‍यू का काल लेटर भूल से चला गया. अब दोबारा आपको फेल किया जाता है, आपकी जगह किसी दूसरे को लिया जाता है. इस तरह के लड़के मुझे मिले, मुझे दोनों तरह के इंटरव्‍यू कॉल लेटर भी दिखाये उन्‍होंने, वह इंटीमेशन जिसमें सिलेक्‍ट करके इंटरव्‍यू के लिये बुलाया गया, और वह भी इंटीमेशन जिसमें उसे अयोग्‍य घोषित किया गया, इस तरह से हो रहा है माननीय अध्‍यक्ष महोदय. पीडीएस में किस तरह से गेहूं में मिट्टी निकली यह किसी से छिपा नहीं है, और आज भी सड़े, घुने गेहूं बांटे जा रहे हैं.

सिंहस्‍थ की बात आई थी, सिंहस्‍थ आयोजन कराया, अच्‍छा आयोजन हुआ, हमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सिंहस्‍थ के नाम पर जिस तरह से व्‍यय किया गया है, जिस तरह से खर्च किया गया है, उसमें हमें आपत्ति है, पैसा लुटाया गया और उसमें भारी बड़ा भ्रष्‍टाचार सिंहस्‍थ के नाम पर हुआ. सिंहस्‍थ के नाम पर सफाई के लिये, सफाई के नाम पर, ट्रेनिंग के नाम पर न जाने किस-किस नाम पर पैसे खर्च किये गये, क्‍या-क्‍या खरीदी गई, यह किसी से छिपा नहीं है, इसकी चर्चा के लिये हम आपसे निवेदन कर रहे थे. आपने पिछले सत्र में आसंदी से भी आश्‍वासन दिया था, रिकार्ड उठाकर दिखवा लें. मैं तो इसलिये ध्‍यान दिलवा रहा हूं कि कम से कम आसंदी से जो आश्‍वस्‍त करें उसका तो पूरा करायें, इनके दवाब में ज्‍यादा न आयें माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अन्‍यथा लगे तो मैं माफी मांगता हूं.

अध्‍यक्ष महोदय-- आपके दबाव में ज्‍यादा रहते हैं.

श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हर विभाग में भ्रष्‍टाचार है. डीमेट घोटाला, डीमेट घोटाला भी अपने आप में एक बहुत बड़ा घोटाला था, लेकिन अब इनकी किस्‍मत है, जब तक बच रहे हैं, तब तक बच रहे हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जेल में व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार, जेलें भी भ्रष्‍टाचार से अछूती नहीं रहीं, आप और हम सब जानते हैं कि अभी जो जेल ब्रेक हुआ है इससे पहले के जेल अधीक्षक और डीआईजी गांधी के साथ क्‍या स्थिति हुई, सोमकुंवर क्‍या था, उस पर कितने भ्रष्‍टाचार के आरोप लगे, किसने इसकी जांच की और जेलों में सुधार के लिये चतुर्वेदी जी ने एक स‍मीक्षा करके सरकार को रिपोर्ट भी भेजी कि जेलों में सुधार किया जाये नहीं तो कभी भी जेल ब्रेक हो सकती हैं और बहुत बड़ा खतरा जेलों का बना हुआ है, लेकिन आपने कोई कार्यवाही नहीं करते हुये बल्कि जेलों के प्रहरी अधिकारियों के बंगलों पर, मंत्रियों के बंगलों पर लगे रहे. और इतना बड़ा जेल ब्रेक का काण्ड हो गया और इतना बड़ा काण्ड होने के बाद आप उसको कोई भी नाम देते हो कुछ भी करते हो लेकिन अपनी जिम्मेदारी को कभी स्वीकार नहीं करते. आज भी जेलों की खराब स्थिति है. यह सब हुआ तो भ्रष्टाचार के कारण हुआ. पोषण आहार जो तीन कंपनियां ठेके पर चला रही हैं. इन्कम टैक्स का छापा पड़ने के बाद भी आज भी मेरे किसी दोस्त के प्रश्न के जवाब में मैंने पढ़ा, सुप्रीम कोर्ट आर्डर कर चुका. केन्द्र सरकार पांच बार पत्र लिख चुकी. केन्द्र सरकार प्रस्ताव दे चुकी कि आप ऐफिडेविड प्रस्तुत करें कि आप सेल्फ हेल्प ग्रुप से बटवाएंगे और माननीय मुख्यमंत्री जी भी घोषणा कर चुके कि हम पोषण आहार में ठेकेदारी की व्यवस्था बंद करेंगे लेकिन अभी तक वह पोषण आहार ठेकेदारी व्यवस्था के माध्यम से ही बांटा जा रहा है. मुख्यमंत्री जी भी बौने पड़ गये हैं ठेकेदारी व्यवस्था के सामने. माननीय अध्यक्ष महोदय, सहकारी बैंकों का घोटाला किसी से छिपा नहीं है. माननीय मंत्री जी मैं आपसे विनम्रतापूर्वक निवेदन करूंगा कि आप प्रति माह रेवेन्यू इन्कम की स्थिति और बता दें. नवम्बर माह की रेवेन्यू में कितनी बढ़त और कितनी गिरावट आई वह और बता दें तो ज्यादा अच्छा होगा. सरकारें भिन्न-भिन्न आयोजन पूरे प्रदेश में करती हैं उससे हमें कोई आपत्ति नहीं. तीन संस्थाएं हैं जो पूरे प्रदेश में हर कार्यक्रम का आयोजन करती हैं. वैचारिक कुम्भ का भी आयोजन इन्हीं संस्थाओं ने किया है और इन्हीं संस्थाओं को चाहे वह प्रदेश के महू में आयोजन हो तब भी यही संस्था काम करेगी और इन्हीं को भुगतान किया जायेगा. इस तरह से करोड़ों की हेराफेरी कार्यक्रम करने के नाम पर यह करते हैं. हम चाहते हैं कि कई ऐसे विषय हैं, कुपोषण जैसा विषय कि इस पर आप अलग से चर्चा कराएं. यह विधान सभा प्रश्न का जवाब है.(कागज दिखाते हुए) जवाब में जानकारी दी गयी है. जवाब में प्रोपराईटर के भी नाम दिये गये हैं कि कौन-कौन प्रोपराईटर हैं. अभी बात आ रही थी विचार महाकुम्भ की, इस पर 19 करोड़ 53 लाख 54 हजार 204 रुपये व्यय किये गये. यह किस-किस ने व्यय किया ? विजन फोर्स,भोपाल, भोपाल ग्लास एण्ड टेस्ट स्टोर ने यह व्यय किया. महू में आयोजन हो तब भी यही संस्था,भोपाल में आयोजन हो तब भी यही संस्था,इन्वेस्टर मीट हो तब भी यही संस्था. मैं मंत्री जी से यही निवेदन करूंगा कि आप अनूपूरक बजट लें लेकिन अनुपूरक बजट का उपयोग इस संकल्प के साथ करायें कि हमारे प्रदेश में कुपोषण से कोई बच्चा मौत के गाल में न जाये. अनुपूरक बजट का उपयोग इस ढंग से करायें कि पूरे प्रदेश में हमारा कोई किसान आत्महत्या न करे. प्रदेश की कानून-व्यवस्था की स्थिति ठीक रहे, किसी महिला का अपहरण न हो,किसी महिला का बलात्कार न हो और आंकड़े प्रस्तुत करें कि आपका जो जीडीपी का घाटा है उस घाटे की सीमा के अंतर्गत ही आप ऋण ले रहे हैं और जो सीलिंग थी उसकी आपको अनुमति मिल पाई है या नहीं. इन सारे तथ्यों के साथ आप अपना उत्तर दें तो बड़ी कृपा होगी इसीलिये माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं इस अनुपूरक अनुमान का विरोध करता हूं और इसलिये विरोध करता हूं कि आप समानुपातिक रूप से सबकी तरफ एक निगाह से नहीं देखते. यदि हम बजट को देखेंगे तो सामान्यत: विभागों में खर्च के अलावा कुछ ही जिलों में कार्यों के मद इसमें लिये गये हैं. आप ऐसे भी देख लें कि तेरह साल से जो विधायक हैं उनके भी काम कभी बजट में देखने को मिल जायें तो मैं आभार मानूंगा. धन्यवाद.

श्री दिनेश राय मुनमुन (सिवनी)-- अध्यक्ष महोदय, द्वितीय अनुपूरक बजट के 1 से लेकर 75 अनुदानों का मैं समर्थन करता हूं.

अध्यक्ष महोदय, मैं, अपने क्षेत्र की छोटी-मोटी समस्याओं के लिए मैं माननीय वित्त मंत्री जी से चाहूंगा कि उस पर ध्यान दें. हमारे यहां ट्रामा सेन्टर खुले एक साल हो गया है किन्तु अभी डॉक्टर और स्टाफ की नियुक्ति नहीं हुई है. हमारे यहां अधिकांश स्कूलों में अतिथि शिक्षक पढ़ा रहे हैं उनकी भी भर्ती कराएं. वर्तमान में अतिथि शिक्षक अपनी मांगों को लेकर, वेतन को लेकर हड़ताल पर बैठे हैं. उनकी मांग पूर्ण करें. उनको कहीं न कहीं पूर्ण रोजगार प्रदान करें.

अध्यक्ष महोदय, माननीय वित्त मंत्री जी हमारे यहां कि माझाघोरा बांध की जो नहर है उसमें पूर्व में काफी राशि दी है किन्तु अभी भी हमारे क्षेत्र के काफी लोग असंतुष्ट हैं. पूर्व में जो स्वीकृत कार्य थे वह किन कारणों से नहीं हो पा रहे हैं चाहे वह गोपाल गंज क्षेत्र हो, चाहे बखारी का बचा हुआ क्षेत्र हो चाहे परासिया से लगे हुए 30-40 गांव हैं उसके लिए राशि प्रदान करेंगे तो बड़ी कृपा होगी.

अध्यक्ष महोदय, सिवनी जिले में राज्य बीमारी सहायता में तीन माह से राशि नहीं आयी है. उसको भी पहुंचाने की व्यवस्था करें. 27 मरीज बहुत गंभीर अवस्था में थे, उसमें से 3 मरीज अब हमारे बीच में नहीं रहे. कहीं न कहीं कोई समस्या है उसको दूर करने की कृपा करें. मैं, आपसे आग्रह करता हूं कि युवाओं के लिए रोजगार के साधन हों.

अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से एक और आग्रह है कि हमारे जिले की नमिता चन्देल जो वॉटर स्पोर्ट्स की खिलाड़ी है. इसको मध्यप्रदेश सरकार और केन्द्र सरकार ने भी सम्मानित किया वह बच्ची विदेश में जाकर ट्रेनिंग लेना चाहती है. लगभग 35 लाख रुपये का उसमें खर्च है. मैं चाहता हूं कि मप्र सरकार उसकी ट्रेनिंग में खर्च करे. ऐसी प्रार्थना है. मैं माननीय अध्यक्ष जी और माननीय वित्त मंत्री जी को धन्यवाद दूंगा कि मेरे जिले की तरफ ध्यान दें. धन्यवाद.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया(मंदसौर)-- अध्यक्ष महोदय, माननीय वित्त मंत्री जी द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2016-17 के द्वितीय अनुपूरक अनुमान का मैं समर्थन करता हूं.

अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में आम बजट और अनुपूरक बजटों में जन कल्याण कारी योजनाएं, किसानों की सुविधाएं, पुलिस अधिकारियों, जवानों और सैनिकों का सम्मेलन, श्रम कल्याण जैसी अनेक बातें हैं. वे बातें जो सम-सामयिक होती हैं और तात्कालिक परिस्थितियों के अंतर्गत जब वह चर्चाओं में आती, मांग में आती और जब पंचायत, महा पंचायत के सम्मेलन होते हैं, उसके माध्यम से आती है. तब यह प्रासंगिक हो जाता है कि इनको कहीं न कहीं बजट में मूर्त रुप दिया जाए.

अध्यक्ष महोदय, हिंदुस्तान के अकेले मध्यप्रदेश में और मध्यप्रदेश में केवल भोपाल में शौर्य स्मारक का निर्माण किया जावे और देश के प्रधानमंत्री आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी उसका लोकार्पण करने आवे तो इसी अनुपूरक बजट में सैनिकों का सम्मेलन के लिए राशि का प्रावधान रखना भी उसी से उद्भूत हो जाता है. यह निरन्तरता है. पंचायतों के अच्छे काम, पंचायतों को स्वच्छता अभियान से जोड़ने को लेकर घर-घर में शौचालय हो, उसके लिए यदि वातावरण का निर्माण होता है तो मैं समझता हूं अनुपूरक बजट में पंचायतों को पुरस्कृत करने, ग्रामीण विकास में निर्मल भारत अभियान को लेकर जो मांगें रखी गई हैं, यह उसका समर्थन हो जाता है.

अध्यक्ष महोदय, विदेशों में जाकर माननीय मुख्यमंत्री महोदय और माननीय उद्योग मंत्री महोदय और तत्कालीन उद्योग मंत्री महोदया मध्यप्रदेश में निवेश करने के लिए वातावरण बनाने का मन बनाते हैं तो सरकार की जिम्मेदारी, जवाबदेही हो जाती है कि अनुपूरक बजट में युवा उद्यमों को कहीं न कहीं स्थान मिले और उसका समाविष्ट भी इस अनुपूरक बजट में किया जाता है.

अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश कृषि प्रधान प्रदेश है. इसमें जो खेती-किसानी करने वाले किसान हैं वे अपने कुंओं के लिए, ट्यूब वेल के लिए विद्युत कनेक्शन लेते हैं.और उनको दोनों फसलों में अस्थाई कनेक्शन लेना पड़ते थे. जब यह बात सामने आई कि क्यों न इन सबको स्थाई कर दिया जाय, अस्थाई का मामला ही समाप्त कर दिया जाय. माननीय मुख्यमंत्री जी ने इस बात को अपनी दृढ़-संकल्पना में लिया और कहा कि अब हम स्थाई कनेक्शन ही देंगे. अस्थाई का झंझट समाप्त कर दिया जाएगा. स्थाई कनेक्शन को देकर राष्ट्रीय कृषि में मध्यप्रदेश का स्थान और अधिक बढ़े क्योंकि कृषि कर्मण पुरस्कार बार-बार मध्यप्रदेश को मिल रहे हैं. ऐसे में अनुपूरक बजट में स्थाई कनेक्शन की सदन से मांग की जावे तो मैं समझता हूं कि ऐसे हजारों सैकड़ों किसान हैं, जो अस्थाई कनेक्शन का आर्थिक भार, आर्थिक मार झेल रहे थे, यदि यह अनुपूरक बजट में समाविष्ट हो जाएगा तो उनको निश्चित रूप से इस बात की आश्वस्ति होगी कि अब वे स्थाई कनेक्शनधारी हो गये हैं.

अध्यक्ष महोदय, तकनीकी का युग है और तकनीकी शिक्षा और कौशलता को लेकर भी इस अनुपूरक बजट में कहीं न कहीं माननीय मुख्यमंत्री जी की दृढ़-संकल्पना परिलक्षित हुई है. मैं माननीय वित्तमंत्री जी का आभार व्यक्त करना चाहता हूं कि तकनीकी के क्षेत्र में और तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास को लेकर आपने इस अनुपूरक बजट में एक विशेष स्थान दिया है, जिसको मैंने पढ़ा भी है. अध्यक्ष महोदय, नित्य नये नवाचार हमारे सामने आते हैं. विभिन्न विभागों की मांगें हमारे सामने आती हैं, उनको केबिनेट में पास कराकर फिर बजट का इंतजार किया जाता है, फिर अनुपूरक बजट जैसी बात आती है तो अनुपूरक बजट में इस सारी चीजों का समावेशन हो जाता है.

अभी मैं बहुत ध्यान से श्री रामनिवास रावत जी को सुन रहा था. एक नहीं, दो नहीं, तीन-तीन बार उन्होंने तारीफ भी की. सरकार के अच्छे कामों को उन्होंने प्रोत्साहित भी किया, धन्यवाद भी दिया, लेकिन मुझे यह समझ में नहीं आ रहा है कि एक तरफ प्रतिपक्ष के द्वारा तारीफ, प्रशंसा भी हो जाती है और दूसरी तरफ आलोचना भी हो जाती है. अभी इसमें बीच का रास्ता कैसे निकले? अभी भी प्रतिपक्ष किसी न किसी दुविधा में है. तारीफ भी करना और आलोचना भी करना? या तो तारीफ-तारीफ होना चाहिए या आलोचना-आलोचना होना चाहिए. लेकिन तारीफ के बीच में आलोचना और आलोचना के बीच में तारीफ, यह कुछ समझ से परे है?

श्री बाला बच्चन - जब आप विपक्ष में बैठेंगे, आपका पाला विपक्ष से पड़ा नहीं है. जब आप विपक्ष में बैठेंगे, तब आप सब समझ जाएंगे.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया - अब तो पाला पड़ना नहीं है क्योंकि पाला तो प्रतिपक्ष में रहने का आपका पड़ गया है. हमें तो सरकार चलाने का दायित्व मिल गया है. बाला तो बाला ही है, पाला तो पाला है और डॉ. मनमोहन सिंह जी मानते नहीं थे कि पाला कोई प्राकृतिक आपदा होती है क्या? प्राकृतिक आपदा में पाला होता क्या है यह पहले कभी डॉ. मनमोहन सिंह जी ने बताया ही नहीं था. ओला, पाला वे जानते ही नहीं थे.

अध्यक्ष महोदय, योजना की तारीफ भी माननीय रावत जी ने की है. जब योजना अच्छी होती है तो उसके लिए बजट तो चाहिए होता है क्योंकि सम सामयिक परिस्थितियों का सामना करते हुए जब कोई बात आती है और उस बात को रखने के लिए जब बजट की आवश्यकता होती है तो बजट आता है. जितना बजट बढ़ेगा, मैं समझता हूं कि उतनी आवश्यकता हो रही है, उतनी योजनाएं जमीनी हकीकत में बदल रही हैं. अब योजनाएं जब भोपाल से चलती हैं तो चौपाल तक जाती है. पहले योजनाएं बनती थीं, मात्र हजारों करोडों के बजट में भी इतने जनकल्याणकारी, इतने लोककल्याणकारी, इतने हितग्राही मूलक काम नहीं होते थे. यह दूर की कोढ़ी थी. जब कोई हितग्राही सम्मेलन हो जाये, कोई गरीब सम्मेलन हो जाय, इस प्रकार के जो आयोजन हो रहे हैं, यह माननीय मुख्यमंत्री जी की दूरदर्शिता है, उसके आधार पर वह जानते हैं कि गरीब क्या है, किसान क्या है, बालक-बालिकाएं क्या हैं. समस्त प्रकार की समस्याएं जो बार-बार सामने आती हैं, दौरों के दौरान सामने आती हैं उनको कहीं न कहीं स्थान देने के लिए यह सब बातें आती हैं. किसानी के क्षेत्र में सरकार ने अनुकरणीय काम किये हैं. जो आत्महत्या के संबंध में श्री रावत जी ने बातें कहीं, वे घटनाएं निश्चित रूप से सबके लिए तकलीफदेह होती हैं कि कोई आत्महत्या करे. लेकिन आत्महत्या का कोई एक कारण सिर्फ यही नहीं होता है कि वह किसान कर्ज में दबा था, कुछ और भी उसके कारण हो सकते हैं. लेकिन मैं उन कारणों की गहराई में नहीं जाना चाहता हूं. परन्तु प्रतिपक्ष का काम है, उसको किस प्रकार से प्रस्तुत करे, किस प्रकार से परोसे, लेकिन यह बात सही है कि जितनी राहत, जितनी मदद श्री शिवराज सिंह चौहान जी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश के किसानों को मिली, अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं को लेकर मिली, वे तारीफे-काबिल है. माननीय मुख्यमंत्री जी ने अपनी सोच को उड़ान की तरह भरा है और शायद इसी कारण से मध्यप्रदेश में निरंतर विकास हो रहा है.

अध्यक्ष महोदय - कृपया समाप्त करें.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया - अध्यक्ष महोदय, अभी शुरुआत ही हुई है. श्री रामनिवास रावत जी को 35 मिनट का समय दिया गया. मैं सत्ताधारी पक्ष की ओर से ओपनर हूं, अभी 10 मिनट भी नहीं हुए हैं.

श्री रामनिवास रावत- आपको करना क्‍या है, केवल तारीफ ही तो करनी है. आप मंत्री नहीं है. फिर भी तारीफ कर रहे हैं. हमें दर्द है कि अच्‍छे लोगों को मंत्री नहीं बना रहे हैं. हमारी सद्भावनायें और शुभकामनायें दोनों ही आपके साथ हैं.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया- बहुत-बहुत धन्‍यवाद. तारीफ तो आपने भी की है. तीन बार तारीफ की है, रिकॉर्ड में है. आपने तारीफ भी की और आलोचना भी की है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, किसान कल्‍याण एवं कृषि क्षेत्र में राष्‍ट्रीय कृषि बीमा योजना के अंतर्गत इस अनुपूरक बजट में 845.89 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है. इस हेतु मैं वित्‍त मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं. यह वही बात उद्भूत हुई है, जब सीहोर के पास शेरपुर में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी पधारे थे और उन्‍होंने राष्‍ट्रीय कृषि बीमा योजना के अंतर्गत फसल बीमा योजना को लेने की घोषणा की थी, तत्समय के बाद आज इसकी आवश्‍यकता हुई है. इसमें निरंतरता बनी हुई है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कृषि के उपकरणों एवं यंत्रों हेतु इस बजट में 10 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है. स्‍वाईल हेल्‍थ मैनेजमेंट योजना के लिए भी माननीय मुख्‍यमंत्री एवं वित्‍त मंत्री जी ने इस बजट में 36 करोड़ रूपये का प्रावधान किया है. मैं इसका स्‍वागत एवं अभिनंदन करता हूं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आदिवासी क्षेत्र उपयोजना के अंतर्गत वित्‍तीय वर्ष में 35.45 लाख का प्रावधान इस अनुपूरक बजट में किया गया है. जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्‍वविद्यालय, जबलपुर को अनुदान दिए जाने के लिए 34.80 करोड़ रूपये का प्रावधान स्‍वागत योग्‍य है. इसी प्रकार राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्‍वविद्यालय को अनुदान के रूप में 5 करोड़ रूपये की स्‍वीकृति इस द्वितीय अनुपूरक बजट में दी गई है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नेशनल ऑइल सीड एवं पाम ऑईल मिशन योजना के अंतर्गत बनी व्‍यापक नीति में केंद्र के 60 प्रतिशत अंशदान के साथ राज्‍य सरकार का 40 प्रतिशत अंशदान अपेक्षित है. राज्‍य सरकार के अंशदान हेतु अनुपूरक बजट में 3 करोड़ रूपये के प्रावधान को समाविष्‍ट किया गया है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, किसानों से जुड़ा हुआ एक और मुद्दा है. हम कहते हैं कि खेती को लाभ का धंधा बनाया जाए. सिर्फ खेती करके ही किसान लाभ की स्थिति में नहीं आयेगा. इस हेतु मत्‍स्‍यपालन, मुर्गीपालन और अन्‍य ऐसे कारोबार हैं, जो किसान अपनी खेती-बाड़ी के साथ कर सकता है. इसके लिए किसान को आत्‍मनिर्भर बनाने हेतु पशुपालन, दुग्‍ध के व्‍यवसाय, मत्‍स्‍यपालन जैसे व्‍यवसायों हेतु बजट में 2 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पशुपालन विभाग के अंतर्गत पशु प्रजनन प्रशिक्षण हेतु भी 4 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक समय था जब इसबगोल जैसी फसल को फसल ही नहीं माना जाता था. मैं जिस जिले का प्रतिनिधित्‍व करता हूं वहां इसबगोल की खेती होती है. इसबगोल को राजस्‍व पुस्तिका आर.बी.सी. की धारा 6 (4) के तहत खेती ही नहीं मानते थे. यदि इसकी फसल ओला, पाला या पानी गिरने से क्षतिग्रस्‍त हो जाती थी, तो सरकार इसकी ओर ध्‍यान ही नहीं देती थी. जबकि इसबगोल उद्यानिकी के तहत एक फसल है. इस फसल को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा फसल बीमा योजना के अंतर्गत उद्यानिकी विभाग को 14 करोड़ रूपये का आवंटन इस द्वितीय अनुपूरक बजट में किया गया है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पंचायतों में अच्‍छे काम करने वाली पंचायतों को राष्‍ट्रीय ग्राम स्‍वराज त्रिस्‍तरीय पुरस्‍कार योजना के अंतर्गत 18.59 करोड़ रूपये का प्रावधान इस बजट में इसलिए किया गया है ताकि प्रतिस्‍पर्धा बढ़े. जब प्रतिस्‍पर्धा बढ़ेगी तो एक पंचायत दूसरी पंचायत के श्रेष्‍ठ कामों को देखकर पुरस्‍कार प्राप्‍त करने हेतु आगे बढ़कर लोकहित में काम करेंगी. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पंचायत विभाग के अंतर्गत स्‍थानीय निकायों को मूलभूत सुविधाओं हेतु एकमुश्‍त अनुदान हेतु 100 करोड़ रूपये का प्रावधान इस अनुपूरक बजट में किया गया है. इसके अतिरिक्‍त समग्र स्‍वच्‍छता अभियान, जो कि माननीय प्रधानमंत्री जी का एक सपना है. इसे समूचे देशवासियों ने स्‍वीकार किया है. देशवासियों ने इसे स्‍वीकार किया है तो इस योजनांतर्गत 60 फीसदी केंद्रांश है और यदि भारत सरकार की ओर से 40 प्रतिशत के राज्‍यांश की अपेक्षा की जाती है तो मध्‍यप्रदेश की सरकार का यह दायित्‍व बन जाता है कि इस अनुपूरक बजट में योजना को मूर्त रूप देने के लिए, इस योजना की निरंतरता को बनाये रखने के लिए 400 करोड़ रूपये का प्रावधान इस बजट में किया गया है. जो कि प्रशंसनीय है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इंदिरा आवास योजना को निरंतरता प्रदान करते हुए भारत सरकार ने जहां 60 प्रतिशत अंशदान दिया है वहीं 40 प्रतिशत अंशदान राज्‍य सरकार की ओर से सुनिश्चित होना था. इस हेतु वित्‍तीय वर्ष में 375 करोड़ रूपये का प्रावधान इस अनुपूरक बजट में चाहा गया है. मैं समझता हूं कि यह स्‍वागत योग्‍य कदम है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना एक मील का पत्‍थर साबित हुई है. श्री अटलबिहारी वाजपेयी जी ने यह सपना देखा था. आज सुदूर गांव में, 250, 500 से नीचे की आबादी वाले गांवों में जो सड़कें बनी हैं उन सड़कों की निरंतरता अभी भी बनी हुई है, उनके नवीनीकरण एवं सुदृढ़ीकरण को लेकर के, उनके उन्नयन के लिए द्वितीय अनुपूरक में 125 करोड़ रूपये