मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा षोडश सत्र

 

 

फरवरी-मार्च, 2018 सत्र

 

गुरूवार, दिनांक 08 मार्च, 2018

 

(17 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1939 )

 

 

[खण्ड- 16 ] [अंक- 5 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

गुरूवारदिनांक 08 मार्च, 2018

 

(17 फाल्‍गुनशक संवत्‌ 1939 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.03 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

शपथ

उप चुनाव में, निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 27- कोलारस से निर्वाचित सदस्‍य, श्री महेन्‍द्र रामसिंह यादव 'खतोरा' तथा निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 34-मुंगावली से निर्वाचित सदस्‍य,

श्री बृजेन्‍द्र सिंह यादव द्वारा शपथ ग्रहण

 

अध्‍यक्ष महोदय -- उप चुनाव में, निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 27-कोलारस से निर्वाचित सदस्‍य, श्री महेन्‍द्र रामसिंह यादव 'खतोरा' तथा निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 34-मुंगावली से निर्वाचित सदस्‍य, श्री बृजेन्‍द्र सिंह यादव शपथ लेंगे. सदस्‍यों की नामावली में हस्‍ताक्षर करेंगे और सभा में अपना स्‍थान ग्रहण करेंगे -

 

(1) श्री महेन्‍द्र रामसिंह यादव 'खतोरा' (कोलारस) - ( शपथ )

(2) श्री बृजेन्‍द्र सिंह यादव (मुंगावली) - ( शपथ )

 

 

 

 

 

 

 

 

 

तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर

 

रसोईयों के मानदेय में वृद्धि

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

1. ( *क्र. 654 ) श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या शासनादेश के तहत् ग्रामीण क्षेत्रों में शासकीय शालाओं में कार्यरत स्व-सहायता समूहों में रसोईयों को भोजन बनाने, भोजन स्थल की सफाई, बच्चों के हाथ धुलाना, छात्रों को भोजन परोसना, बर्तन साफ करना इत्यादि कार्य रसोईयों द्वारा किया जाता है? इस संबंध में शासनादेश क्‍या हैं? (ख) क्या प्रश्नांश (क) में रसोईयों द्वारा किये जाने वाले कार्यों हेतु मासिक मानदेय मात्र एक हजार रूपये दिया जाता है, जबकि इन रसोईयों को सम्पूर्ण शाला समय में उपस्थित रहना होता है, रसोईयों के मानदेय एवं इनकी समयावधि के संबंध में शासनादेश उपलब्ध करायें। (ग) इस मंहगाई के दौर में मात्र एक हजार रूपये मानदेय दिये जाने से परिवार के पालन पोषण में आ रही समस्याओं को दृष्टिगत रखते हुए क्या इन रसोईयों को शासन द्वारा मानेदय वृद्धि किये जाने के संबंध में आदेश प्रदान किया जायेगा? यदि हाँ, तो कब तक, यदि नहीं, तो क्यों?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जी हाँ। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) जी हाँ। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) जी नहीं। प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

 

श्री संदीप श्रीप्रसाद जायसवाल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री महोदय, माननीय मुख्यमंत्री महोदय और प्रदेश सरकार का धन्यवाद करना चाहूंगा, जो मेरे प्रश्न की मूल मंशा थी उसको स्वीकार किया गया और पूर्व में इस मध्यप्रदेश शासन द्वारा केंद्र शासन को रसोईयों के मानदेय में वृद्धि करने का पत्र लिखा जा चुका था.मैं ध्यानाकृष्ट करना चाहूंगा कि पत्र दो हैं दोनों में अलग-अलग मानदेय राशि की माँग की गई है एक पत्र में 3 हजार की मांग की गई है, एक में 4 हजार रुपये की माँग की गई है और शासन द्वारा यह भी स्वीकार किया गया है कि दिन भर रसोईयों को वहाँ काम करना पड़ता और काम के घंटे इतने ज्यादा होते हैं कि उन्हें कोई और अतिरिक्त कार्य करने का समय नहीं बचता है और आज के जमाने में 1 हजार रुपये में उन रसोईयों का जीवन हम नहीं मान सकते हैं कि चल सकता है. इसीलिये मैं चाहूंगा कि राज्य शासन की ओर से 4 हजार रुपये उनका मानदेय किये जाने के संबंध में केंद्र शासन को गंभीरतापूर्वक पत्र लिखकर एकरूपता के साथ उसका निराकरण किया जावे.

श्री गोपाल भार्गव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय सदस्य ने स्वयं स्वीकार किया है कि राज्य सरकार ने भारत सरकार को इस संबंध में तीन बार पत्र लिखे हैं. यह बात सही है कि हम रसोईयों के लिए जो मानदेय देते हैं वह 1 हजार रुपया है और राज्य सरकार ने स्वतः इस बात को पहल करते हुए भारत सरकार को लिखा है. अध्यक्ष महोदय, जो 3 हजार और 4 हजार रुपये की राशि के अंतर की बात यह बता रहे हैं चूंकि महंगाई बढ़ी है इसी कारण हमने पुनरीक्षित पत्र 4 हजार रुपये करने के लिए लिखा था. मुझे विश्वास है कि भारत सरकार जल्दी-से-जल्दी इस पर विचार करेगी और माननीय सदस्य की जो भावना है उसका सम्मान होगा.

श्री संदीप श्रीप्रसाद जायसवाल-- माननीय अध्यक्ष महोदय,एक पत्र और नये सिरे से मंत्री जी की ओर से चला जाये तो मुझे लगता है कि ठीक होगा क्योंकि मुझे लगता है कि बहुत कठिन विषय है एक हजार रुपये में दिन भर काम और जवाबदारी का काम.

श्री गोपाल भार्गव-- अध्यक्ष महोदय, आज ही पत्र भेज देंगे.

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, पत्रों से इनकी कोई सुनने वाला नहीं है यह खुद चले जायें तो अच्छा रहेगा.

श्री गोपाल भार्गव--- पूर्व में मैं स्वयं गया था और सत्र की समाप्ति की बाद मैं फिर से चला जाऊँगा.

भवन निर्माण की अनुमति की वैधता अवधि

[नगरीय विकास एवं आवास]

2. ( *क्र. 556 ) श्री कालुसिंह ठाकुर : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) विभाग द्वारा भवन निर्माण या नर्सिंग होम निर्माण के लिये जारी की गई अनुमति कितने वर्षों तक वैध रहती है? समयावधि बतावें। (ख) यदि कोई फर्म या व्यक्ति भवन निर्माण एवं नर्सिंग होम निर्माण आदि की दो भाग (ब्लॉक) की अनुमति लेता है एवं उसमें से भवन का केवल एक ही भाग बनाता है तो क्या 8-10 वर्षों के बाद बचे हुए भाग की वापस अनुमति लेना अनिवार्य है? (ग) क्‍या पूर्व अनुमति प्राप्त बचे हुए भाग (ब्लॉक) के निर्माण की अनुमति नगर पालिका से वापस लेना अनिवार्य है? इस संबंध में शासन के क्या दिशा निर्देश हैं?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) म.प्र. भूमि विकास नियम, 2012 के नियम 23 (i) के प्रावधान अनुसार प्रदाय की गई भवन अनुज्ञा 03 वर्ष तक विद्यमान होती है, जिसे नियम 23 (ii) के अनुसार एक-एक वर्ष की दो लगातार अवधियों के लिये पुनर्विद्यमान कराया जा सकता है। (ख) जी हाँ। (ग) जी हाँ। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है।

परिशिष्ट - ''एक''

 

श्री कालुसिंह ठाकुर-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न था कि भवन निर्माण हेतु नगर पालिका से, जो भी प्राईवेट या कॉलोनी के निर्माण होते हैं उसमें संबंधितों द्वारा अनुमति नहीं ली जाती हैं. थोड़ी-बहुत आधे-अधूरे भवन की अनुमति ले लेते हैं बाकी बाद पूरा बना लेते हैं और इस कारण अलग-अलग पूरे खेतों में, अपने-अपने खेतों में कॉलोनी या भवन बन जाते हैं इसके बाद में वहाँ नाली, रोड, बिजली आदि की व्यवस्था हेतु बहुत परेशानी होती है इस कारण जनता का आक्रोश जन प्रतिनिधि को झेलना पड़ता है.

श्रीमती माया सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, विधायक जी ने जो सवाल पूछे हैं उसके जवाब दे दिए गए हैं. अभी शायद वे कह रहे हैं कि जो कॉलोनियां बनती हैं उनकी शायद इजाजत नहीं लेते हैं लेकिन इसमें इन्होंने भवन और नर्सिंग-होम के संबंध में सवाल पूछा है. इसमें इन्होंने यह भी कहा है कि इसकी अनुमति 3 साल के लिए विद्यमान रहती है और उसके बाद एक-एक वर्ष के लिए इसे पुनर्विद्यमान किया जा सकता है. लेकिन यदि कोई व्यक्ति भवन या नर्सिंग-होम का एकमुश्त पूरा निर्माण करती है उसके पूरे भाग की अनुमति लेता है और बनाता सिर्फ एक ब्लाक है दूसरा ब्लाक वह नहीं बनाता है और 8-10 साल बाद दूसरा ब्लाक बनाना चाहेगा तो उसे नियम के तहत इसकी अनुमति लेना अनिवार्य है. यह सारी बातें इसमें लिखी गई हैं. आपकी बात इस प्रश्न से संबंधित नहीं है.

श्री कालूसिंह ठाकुर--अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री महोदया के जवाब से संतुष्ट हूँ. मेरा अनुरोध है कि आसपास जो भी किसान होते हैं वे प्लाट बेच देते हैं वहां पर होटल आदि बना लेते हैं उससे पूरे क्षेत्र में आवागमन , बिजली और पानी की परेशानी होती है. बाद में थोड़ी बहुत अनुमति ले लेते हैं और कहते हैं कि इसकी अनुमति है. इससे व्यवस्था में थोड़ी दिक्कत होती है.

श्रीमती माया सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय विधायक जी से आग्रह करना चाहती हूँ यदि वे इस तरह की कोई शिकायत है तो मुझे लिखकर दे दें मैं उसकी जांच करा लूंगी.

श्री कालूसिंह ठाकुर--अध्यक्ष महोदय, ठीक है मैं पूरी जानकारी लिखकर दे दूंगा. धन्यवाद.

श्री निशंक कुमार जैन--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा मंत्री जी से इस संबंध में एक पिन पाइंट क्योश्चन है. आपके माध्यम से मैं अनुरोध करना चाहता हूँ कि जैसा माननीय सदस्य ने कहा कि जो अवैध कॉलोनियां हैं उससे हम सब परेशान हो रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय--यह इससे संबंधित प्रश्न नहीं है.

श्री निशंक कुमार जैन--अध्यक्ष महोदय, इससे उद्भूत नहीं होता है यह बात सही है परन्तु अवैध कॉलोनियों की वजह से हम सबको कोपभाजन बनना पड़ता है.

अध्यक्ष महोदय--निशंक जी यह प्रश्न नहीं है.

श्री निशंक कुमार जैन--अध्यक्ष महोदय, इससे उद्भूत नहीं होता है यह बात सही है.

अध्यक्ष महोदय-- इससे उद्भूत नहीं होता है तो नहीं पूछने देंगे. बैठिए.

पोस्‍ट मैट्रिक छात्रवृत्ति स्‍वीकृति के अधिकार

[उच्च शिक्षा]

3. ( *क्र. 1619 ) एडवोकेट सत्‍यप्रकाश सखवार : क्या उच्च शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) आदिवासी, अनुसूचित जाति तथा पिछड़ा वर्ग की पोस्‍ट मैट्रिक छात्रवृत्ति स्‍वीकृत करने के महाविद्यालय के प्राचार्यों को क्‍या वित्‍तीय अधिकार प्रदत्‍त हैं? अधिकार प्रत्‍यायोजन की प्रति उपलब्‍ध करावें। वित्‍तीय अधिकार पुस्तिका में प्राइवेट कॉलेजों के लिये पोस्‍ट मैट्रिक छात्रवृत्ति स्‍वीकृति के अधिकार किसे प्रदत्‍त हैं? (ख) क्‍या अधिकारों के प्रत्‍यायोजन में शासकीय महाविद्यालय के प्राचार्य को अशासकीय महाविद्यालयों के विद्यार्थियों की पोस्‍ट मैट्रिक छात्रवृत्ति/आवास भत्‍ता स्‍वीकृत करने के भी अधिकार हैं? यदि नहीं, तो वे किस आधार पर नोडल प्राचार्य के रूप में अशासकीय महाविद्यालयों के लिये पोस्‍ट मैट्रिक छात्रवृत्ति स्‍वीकृत कर रहे हैं? (ग) क्‍या उच्‍च शिक्षा विभाग के प्रचार्यों को आदिम जाति कल्‍याण विभाग या जिला कलेक्‍टर, इस प्रकार से नोडल प्राचार्य के रूप में वित्‍त विभाग की स्‍वीकृति के बिना अशासकीय महाविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिये पोस्‍ट मैट्रिक छात्रवृत्ति/आवास भत्‍ता स्‍वीकृत करने हेतु अधिकृत कर सकते हैं? (घ) उज्‍जैन, इंदौर, भोपाल तथा रीवा जिले के किस-किस शासकीय महाविद्यालय के प्राचार्य को नोडल प्राचार्य होने के कारण लोकायुक्‍त के द्वारा छात्रवृत्ति स्‍वीकृति में अनियमितता के लिये अपराधी बनाया है? प्रत्‍येक का विवरण दें।

उच्च शिक्षा मंत्री ( श्री जयभान सिंह पवैया ) : (क) आदिवासी, अनुसूचित जाति तथा पिछड़ा वर्ग की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति स्वीकृत करने का अधिकार प्राचार्य शासकीय महाविद्यालय को तथा भुगतान करने का अधिकार जिला कलेक्टर को प्रदत्त है। प्राइवेट कॉलेजों के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति स्वीकृत एवं भुगतान के अधिकार जिला कलेक्टर को प्रदत्त हैं। वित्तीय शक्ति पुस्तिका की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "अ" अनुसार है। (ख) पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति नियम/वित्तीय शक्ति पुस्तिका भाग-दो की कंडिका-6 (बी) अनुसार अशासकीय महाविद्यालय के विद्यार्थियों की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के मंजूरी के अधिकार जिला कलेक्टर को हैं। नवीनीकरण की मंजूरी तथा पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति देयकों पर प्रतिहस्ताक्षर के अधिकार जिला स्तरीय अधिकारी एवं शैक्षणिक संस्था के प्रमुख को है। तत्‍संबंधी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "ब" अनुसार है। आवास भत्ता योजना नियम, 2016 की कंडिका 06 (01) के तहत् आवास भत्ता स्वीकृति के अधिकार शासकीय संस्थाओं के प्राचार्य एवं अशासकीय संस्थाओं हेतु संबद्ध शासकीय संस्था के नोडल प्राचार्य को अधिकार प्रत्यायोजित किये गये हैं। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "ब" अनुसार है। (ग) 1. पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति की स्वीकृति के अधिकार के संबंध में प्रश्नांश (क) में दिये गये उत्तर अनुसार 2. आवास सहायता योजना 2016 को (डी.पी.आर. के रूप में) वित्त विभाग द्वारा स्वीकृति प्राप्त है। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "अ" अनुसार है। (घ) उज्जैन, इन्दौर, भोपाल तथा रीवा जिले के किसी भी प्राचार्य को लोकायुक्त संगठन द्वारा छात्रवृत्ति स्वीकृति में अनियमितता के लिए अपराधी नहीं बनाया गया है। जानकारी निरंक है।

एडवोकेट सत्यप्रकाश सखवार-- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न पोस्ट मेट्रिक छात्रवृत्ति की स्वीकृति के संबंध में है. जो जानकारी दी गई है वह गलत दी गई है. आदिवासी और अनुसूचित जाति पोस्ट मेट्रिक छात्रवृत्ति स्वीकृति के अधिकार आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला संयोजक सहायक संयोजक, और सहायक आयुक्त को हैं. दिए गए उत्तर पर आदिम जाति कल्याण विभाग के द्वारा जारी नियमों के परिप्रेक्ष्य में जांच कराई जाए. आदिम जाति कल्याण विभाग के अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए प्राचार्यों को छात्रवृत्ति की स्वीकृति के अधिकार दिए हैं जो नियम विरुद्ध हैं. दूसरी बात इंदौर लोकायुक्त द्वारा छात्रवृत्ति स्वीकृति में अनियमितता को लेकर आदिवासी विकास विभाग के अधिकारियों के खिलाफ 34 प्रकरण दर्ज हैं. यह प्रकरण प्राचार्य पर दर्ज होना चाहिए थे. क्या माननीय मंत्री जी इसकी जांच कराएंगे और दोषियों को दंड देंगे.

श्री जयभान सिंह पवैया--माननीय अध्यक्ष महोदय, वैसे उत्तर में बहुत स्पष्ट लिखा गया है. पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति स्वीकृति के अधिकार शासकीय महाविद्यालय में वहां के प्राचार्य को हैं और निजी महाविद्यालय में कलेक्टर को अधिकार दिए गए हैं. आवास भत्ते के लिए शासकीय महाविद्यालय में प्राचार्य को और शासकीय महाविद्यालय के जो नोडल प्राचार्य होता है उनको निजी महाविद्यालयों के अधिकार दिए गए हैं. मध्यप्रदेश की वित्तीय शक्ति पुस्तिका में अधिकार देने के जो प्रावधान हैं उसी के अनुसार यह अधिकार दिए गए हैं. प्रथम वर्ष की स्वीकृति के उपरांत 50 प्रतिशत अंक लाने वाले विद्यार्थियों के लिए आगामी वर्ष के नवीनीकरण का कार्य शासकीय महाविद्यालय में प्राचार्य के द्वारा होता है और निजी महाविद्यालय में आदिम जाति कल्याण विभाग के अधिकारियों के द्वारा किया जाता है. वर्ष 2015 में कलेक्टर, इंदौर के जांच प्रतिवेदन के आधार पर वर्ष 2011 से 3 वर्ष की छात्रवृत्ति का ऑडिट और त्रुटिकर्ता संस्थाओं पर विभागीय कार्यवाही प्रचलित है. बड़वानी जिले की सेंधवा और निवाली की संस्थाओं की कक्षा 8 से 12 वीं की छात्रवृत्ति वितरण की जांच की गई थी वह पूर्ण होकर उसमें अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रचलित है. एडवोकेट सत्‍यप्रकाश सखवार-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्राईवेट कॉलेजों की स्‍वीकृति प्राईवेट कॉलेजों को न होकर जिला कलेक्‍टर या आदिम जाति कल्‍याण को होना चाहिए थी. प्राईवेट प्राचार्यों को देकर, प्राईवेट स्‍कूलों को देकर इसमें बहुत सारी अनियमितताएं हुई हैं. क्‍या माननीय मंत्री जी इसकी जांच कराएंगे?

श्री जयभान सिंह पवैया-- निजी महाविद्यालयों को किसी प्रकार के अधिकार नहीं दिए गए हैं. छात्रवृत्ति स्‍वीकृ‍ति का अधिकार कलेक्‍टर को है और आवास भत्‍ते का नोडल सरकारी प्राचार्य को है.

एडवोकेट सत्‍यप्रकाश सखवार-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह 34 प्रकरण इंदौर में दर्ज हुए हैं. यह प्रकरण प्राचार्यों पर दर्ज होने चाहिए थे यह आदिम जाति कल्‍याण विकास विभाग के अधिकारियों के खिलाफ हुए हैं. जिन्‍होंने यह अनियमितता की है उनके खिलाफ दर्ज होना चाहिए थे.

श्री जयभान सिंह पवैया-- अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह निवेदन करूंगा कि प्राईवेट कॉलेज के नवीनीकरण का अधिकार आदिम जाति कल्‍याण विभाग के अधिकारियों को है और जिनको अधिकार है कार्यवाही उन्‍हीं के खिलाफ प्रचलित होती है.

मुआवजे का नियमानुसार निर्धारण

[नगरीय विकास एवं आवास]

4. ( *क्र. 484 ) श्री सुन्‍दरलाल तिवारी : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या विधान सभा प्रश्‍न क्रमांक 2569, दिनांक 29.07.2017 के उत्‍तर के संदर्भ में नगर पंचायत क्षेत्र की निर्धारित दर रूपये 9.30 प्रति वर्ग मी. मान से किसानों की जमीनों का मुआवजा देने का आदेश जारी करावेंगे? यदि हाँ, तो कब तक? (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में क्‍या किसानों को मुआवजें की राशि में बढ़ोत्‍तरी के साथ क्‍या ब्‍याज का भी भुगतान करने के आदेश जारी करेंगे, जिससे किसानों की क्षति पूर्ति हो सके? (ग) प्रश्नांश (क) पर अंकित बिन्‍दु अनुसार कार्यवाही कर नवीन दरों से मुआवजे के भुगतान के आदेश जारी करने के साथ क्‍या नियम विरूद्ध मुआवजे के आदेश जारी कर किसानों को आर्थिक क्षति पहुँचाने के जिम्‍मेवारों पर क्‍या कार्यवाही करेंगे? अगर नहीं तो क्‍यों?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) नगर परिषद गुढ़ में राष्ट्रीय राज्य मार्ग 75 रीवा सीधी सड़क निर्माण में सड़क निर्माण हेतु किसानों की अधिग्रहीत की गई भूमि का मुआवजा अनुविभागीय अधिकारी अनुभाग गुढ़ जिला-रीवा द्वारा कलेक्‍टर गाईड लाईन वर्ष 2015-16 में दिये गये निर्देशों के तहत् न्यूनतम मूल्य के आधार पर तैयार किया गया। किसानों द्वारा मुआवजे संबंधी प्रकरण माननीय न्यायालय आयुक्त (राजस्व) रीवा संभाग रीवा में विचाराधीन है। (ख) एवं (ग) उत्तरांश (क) के परिप्रेक्ष्य में न्यायालयीन प्रकरण के निर्णय के उपरांत नियमानुसार कार्यवाही की जावेगी।

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी द्वारा जो जवाब दिया गया है उस जवाब का संबंध इस प्रश्‍न से नहीं है. जवाब दिया गया है कि मुआवजे संबंधी प्रकरण माननीय न्‍यायालय आयुक्‍त राजस्‍व रीवा संभाग, रीवा में विचाराधीन है. अत: न्‍यायालयीन प्रकरण के निर्णय के उपरांत‍ नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी. पूरे न्‍यायालय का नाम लेकर पूरे प्रश्‍न पर विराम लगा दिया गया है. मैं माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि‍ यह भू-अर्जन एवं पुनर्वास और पुनर्व्‍यवस्‍थापन में उचित प्रतिक्रमण पारदर्शिता का अधिकार इसमें एस.डी.ओ. और राजस्‍व आयुक्‍त न्‍यायालय की भूमिका कहां और कैसे आ जाती है? अगर यह बता दें तो तब हम आगे प्रश्‍न पूछें. क्‍योंकि मुझे मालूम है एस.डी.ओ. भू-अर्जन अधिकारी होता है. एस.डी.ओ. रेवेन्‍यू कमिश्‍नर वर्ड है लेकिन वह न्‍यायालय के रूप में नहीं आर्बीट्रेटर के रूप में कमिश्‍नर का है. न्‍यायालय में तो यह मामला कहीं है ही नहीं. अधिकारियों ने जबर्दस्‍ती यह जवाब दे दिया है कि यह मामला न्‍यायालय में है. माननीय मंत्री जी पहले इसको स्‍पष्‍ट कर दें. तब मैं अपना सवाल पूछ सकूंगा कि यह क्‍या जवाब दे दिया है.

श्रीमती माया सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं विधायक जी से कहना चाहती हूं कि यह प्रश्‍न मेरे विभाग से संबंधित नहीं है, राजस्‍व और पी.डब्‍ल्‍यू.डी. से संबंधित है. इससे संबंधित आपका कोई और सवाल या समस्‍या है तो आप संबंधित विभाग को लिखकर दे दें वह आपको जवाब देंगे. आपने जो सवाल यहां पूछा है उसका जवाब इसमें लिखित मैं है.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने प्रश्‍न विधान सभा के सामने रखा है. माननीय मंत्री महोदया का कहना है यह प्रश्‍न मेरे विभाग से संबंधित है ही नहीं तो इस प्रश्‍न का जवाब कौन देगा ? जिससे संबंधित हो वह जवाब दे दे.

अध्‍यक्ष महोदय-- आपने सवाल नगरीय विकास विभाग से पूछा था.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस प्रश्‍न का संबंध कई विभागों से है. सवाल इस बात का है कि यह कहा गया है कि यह मामला न्‍यायालय में लंबित है इसीलिए इसका जवाब नहीं दिया जा सकता है. हमारा सवाल इस बात का है कि यह कहां किस न्‍यायालय में लंबित है ?

वन मंत्री (डॉ. गौरीशंकर शेजवार) -- किन विभागों से संबंधित है तो हम अलग-अलग विभागों से पूछ सकते हैं. प्रश्‍न बनाते समय इतने सीनियर सदस्‍य को यह ध्‍यान रखना चाहिए कि कौन से विभाग से कैसे प्रश्‍न पूछे.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी-- माननीय मंत्री जी आप सीनियर हैं आप ही जवाब दे दीजिए.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आदरणीय तिवारी जी का जो प्रश्‍न है उसके बारे में माननीय मंत्री महोदया जी ने कहा कि प्रश्‍न हमारे विभाग से संबंधित नहीं है. मैं यह जानना चाहता हूं कि यदि प्रश्‍न इनके विभाग से संबंधित नहीं था तो फिर इन्‍होंने अपने विभाग से जवाब क्‍यों भेजा ? यदि इनके विभाग से प्रश्‍न संबंधित नहीं था तो उसी समय विधान सभा सचिवालय को प्रश्‍न लौटा देतीं और यदि उन्‍होंने प्रश्‍न ले लिया है तो मंत्रिपरिषद की सामूहिक जवाबदारी के तहत मंत्री होने के नाते उन्‍हें पूरा जवाब देना चाहिए.

श्री रामनिवास रावत- मंत्री महोदया के बगल में राजस्‍व मंत्री भी बैठे हैं.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार- नेता प्रतिपक्ष जी मैं आपसे सहमत हूं. लेकिन आप तिवारी जी को भी नसीहत दें कि इन्‍हें मालूम था कि तीन विभागों का जवाब एक विभाग से नहीं मिल सकता. (...व्‍यवधान...)

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने बिल्‍कुल सही प्रश्‍न लगाया है. प्रश्‍नों की स्‍क्रूटनी विधान सभा सचिवालय में होती है. अगर विधान सभा सचिवालय से कोई आपत्ति उठाई गई होती तो मैं सुधार करता परंतु विधान सभा सचिवालय से कोई आपत्ति नहीं उठाई गई इसलिए मेरे द्वारा उसमें किसी सुधार का प्रश्‍न ही नहीं उठता है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप कृपया मेरे प्रश्‍न का जवाब दिलवायें.

अध्‍यक्ष महोदय- आपने जो प्रश्‍न पूछा था, वह नगरीय विकास विभाग से पूछा था. जमीन नगर पंचायत क्षेत्र की निर्धारित दर की थी. आपका प्रश्‍न वहीं से था और नगर पंचायत की दर के संबंध में आपने पूछा था.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न मुआवजे के संबंध में है. जमीनें नगर पंचायत में हैं और इसे Rural Area मानकर किसानों को मुआवजा दिया गया है. मेरा यह कहना है कि जब वह नगर पंचायत है तो वह क्षेत्र Urban Area है और जो दर कलेक्‍टर द्वारा मुआवजे हेतु निर्धारित की गई है या जो बिक्री का रेट तय किया गया है, किसानों को उसके अनुसार मुआवजा मिलना चाहिए.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसके अतिरिक्‍त मैं यह भी कहना चाहता हूं कि जो नया एक्‍ट 2013 में यू.पी.ए. सरकार द्वारा केंद्र में बनाया गया है उसके अनुसार किसानों को मुआवजा मिलना चाहिए और यदि इस एक्‍ट का पालन नहीं किया गया है तो दोषी अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ 6 माह से लेकर 3 वर्ष तक की सजा का प्रावधान इस एक्‍ट में है. यह बहुत ही गंभीर मुद्दा है. यह प्रदेश के गरीब किसानों का मामला है. इस तरह सरकार अपना पल्‍लू झाड़कर नहीं जा सकती है कि यह मेरे विभाग से संबंधित नहीं है. यहां सदन में इतनी बड़ी केबिनेट बैठी है और कोई भी मेरे प्रश्‍न का जवाब दे पाने की स्थिति में नहीं है. किसान रो रहा है,वह कहां जाए ?

अध्‍यक्ष महोदय- राजस्‍व मंत्री जी.

श्री गोपाल भार्गव- तिवारी जी, आपने अपने प्रश्‍न में प्रश्‍न क्रमांक 2569 का संदर्भ दिया है. आपने जुलाई 2017 में अपना प्रश्‍न किस विभाग से किया था ?

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी- मुझे उस प्रश्‍न का जवाब ही प्राप्‍त नहीं हुआ.

श्री अजय सिंह- पहले आप लोग तय कर लें कि कौन जवाब देगा. तीन-तीन मंत्री खड़े हैं.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी- तीन-तीन मंत्री है. जवाब कौन देगा, पहले ये बतायें?

अध्‍यक्ष महोदय- आपने नगरीय विकास एवं आवास मंत्री जी से प्रश्‍न पूछा है, वही उत्‍तर दे रही हैं.

श्रीमती माया सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नेशनल हाइवे एक्‍ट के अंतर्गत भारत सरकार के माध्‍यम से भू-अर्जन की कार्यवाही की गई है और विधान सभा सचिवालय को पत्र लिखा गया था. नया एक्‍ट नेशनल हाइवे पर लागू नहीं है.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ये लोग कितनी गलत जानकारी दे रहे हैं. मैं नेशनल हाइवे एक्‍ट से संबंधित जानकारी भी साथ लाया हूं. नेशनल हाइवे ने यह स्‍वीकार किया है. पूरा पत्र पढ़ना तो मुश्किल है लेकिन मैं इससे संबंधित हिस्‍सा सदन में पढ़कर सुना रहा हूं.

''It is, therefore, seen from the legal opinion accepted by the Ministry that wherever award of compensation under section 3G of NH Act, 1956 was declared by CALA on or before 31.12.2014 but compensation in respect of majority of the land area notified in the relevant 3A notification was not deposited in the accounts of the beneficiaries on or before 31.12.2014. Then all the beneficiaries shall be entitled to compensation in accordance with the provisions of RFCTLARR Act, 2013.''

ये नेशनल हाइवे अथॉरिटी का आदेश है जो सभी राज्‍यों को दिया गया है.

श्रीमती माया सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आदरणीय विधायक जी ने सदन में इतना पढ़कर सुनाया है लेकिन वे भी जानते हैं कि उन्‍होंने जो सवाल पूछा है और इसका जवाब हालांकि दूसरे विभाग ने देना है.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी -- फिर वही बात आ गई.

श्रीमती माया सिंह -- मैं आपकी जानकारी के लिए बता रही हूँ.आप एक मिनट मुझे सुनेंगे ?

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे ज्ञान नहीं बढ़ाना है.

अध्‍यक्ष महोदय -- तिवारी जी, आप एक मिनट बैठ तो जाएं.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी -- अध्‍यक्ष महोदय, मुझे जवाब चाहिए.

अध्‍यक्ष महोदय -- जवाब दे रहे हैं, आप बैठें तो.

श्रीमती माया सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, पहली बात तो मैं सोच रही थी कि आज अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर इनकी तरफ से हमें बधाई मिलेगी.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी -- अध्‍यक्ष महोदय, जवाब पूरा आ जाए, हम हृदय से बधाई देंगे.

श्रीमती माया सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं अपनी तरफ से हमारे प्रदेश की आधी आबादी को अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस की बधाई देती हूँ और साथ ही साथ आपके सवाल का जवाब भी देती हूँ.

अध्‍यक्ष महोदय -- हम सबकी ओर से भी बधाई.

श्रीमती माया सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने जो सवाल पूछा है, मैं यह कहना चाहती हूँ कि उसमें 107 खातेदारों की भूमि अर्जित की गई और उसमें 96 खातेदारों ने 4.59 करोड़ रुपये का आहरण कर लिया. इसके बाद 82 अपील में गए, उनका केस चल रहा है, जो आप कह रहे थे कि न्‍यायालय का बार-बार क्‍यों हम जिक्र कर रहे हैं. मैं यह कहना चाहती हूँ कि 11 खातेदारों के द्वारा जो 53.46 लाख रुपये की धनराशि आहरण नहीं की गई, उसका कारण है कि उनके आपसी विवाद हैं और टाइटल के जो विवाद हैं, इसकी वजह से नहीं की गई है, यह आप जान लें.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी -- अध्‍यक्ष महोदय, यह मेरे प्रश्‍न का उत्‍तर नहीं है. हमने विधान सभा में अगर प्रश्‍न लगाया है, उसका उत्‍तर आया है जिसे मैंने पढ़कर सुनाया है. इन्‍होंने कह दिया कि न्‍यायालय में मामला पेंडिंग है. जब इस प्रोविजन में कोई न्‍यायालय नहीं है तो न्‍यायालय में पेंडिंग होने का कोई प्रश्‍न ही नहीं उठता.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, कमिश्‍नर के यहां अपील होती है.

राजस्‍व मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्‍ता) -- अध्‍यक्ष महोदय, टाइटल के निर्धारण के मामले का तो राजस्‍व न्‍यायालय में निपटारा होता है.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी -- अध्‍यक्ष महोदय, टाइटल का झगड़ा ही नहीं है, कम्‍पेन्‍सेशन का झगड़ा है.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता -- अध्‍यक्ष महोदय, स्‍वामित्‍व का विवाद है. अभी मंत्री महोदया ने कहा कि 11 लोगों के स्‍वामित्‍व का विवाद है.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी -- अध्‍यक्ष महोदय, सरकार के द्वारा प्रश्‍न का विधिवत् जवाब देने की तैयारी नहीं की गई है. इसलिए इसका जवाब कोई मंत्री दे नहीं पा रहे हैं. इसलिए इसके जवाब को टालामटोला जा रहा है. अदालत के ऊपर डाल दिया.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, अब बिल्‍कुल स्‍पष्‍ट हो गया. श्री कुँवरजी कोठार अपना प्रश्‍न करें.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी -- अध्‍यक्ष महोदय, मुझे जवाब दिलवाएं.

अध्‍यक्ष महोदय -- प्रश्‍न क्रमांक 5, श्री कुँवरजी कोठार.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी -- अध्‍यक्ष महोदय, प्रजातांत्रिक व्‍यवस्‍था है. सदन में हम आपसे आग्रह कर रहे हैं. तानाशाही रवैया न अपनाया जाए. क्‍या आप मंत्री जी के जवाब से संतुष्‍ट हैं ?

अध्‍यक्ष महोदय -- इसकी और प्रक्रियाएं हैं. एक ही प्रश्‍न पर मैंने बहुत समय दिया.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी -- अध्‍यक्ष महोदय, सवाल समय का नहीं है, सवाल जवाब का है.

अध्‍यक्ष महोदय -- तिवारी जी, बैठ जाएं. यदि आप इससे संतुष्‍ट नहीं हैं तो इसकी और प्रक्रियाएं हैं. (श्री सुन्‍दरलाल तिवारी के खडे़ होने पर) पहले आप सुन लें, आप एकदम खड़े हो जाते हैं, इसलिए मुश्‍किल होती है. इसकी और प्रक्रियाएं हैं. अन्‍य माननीय सदस्‍यों के भी प्रश्‍न हैं. एक ही प्रश्‍न पर मैंने बहुत समय दिया और एक ही प्‍वॉइंट पर डेडलॉक हो रहा है, इसलिए आपको यदि इससे अंसतुष्‍टि है तो आप अन्‍य प्रक्रियाएं अपनाएं. श्री कुँवरजी कोठार अपना प्रश्‍न करें.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी -- अध्‍यक्ष महोदय, सवाल मेरे संतोष होने का नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय -- डिस्‍एलाउड. श्री तिवारी का कुछ नहीं लिखा जाएगा.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी -- (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय -- आप मेरे से नहीं पूछ सकते.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी -- (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय -- आसंदी से कुछ नहीं पूछ सकते. आप बैठ जाइये.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी -- (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय -- श्री कुँवरजी कोठार अपना प्रश्‍न करें.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मामला गंभीर है. शायद एक ही जगह की बात हो, लेकिन भू-अधिग्रहण में कौन से रेट से मुआवजा दिया जाता है, उसका भी विषय शायद तिवारी जी कहना चाहते थे. मैं आपसे अनुरोध करता हूँ, इस विषय पर आधे घंटे की चर्चा किसी दिन करा लें.

अध्‍यक्ष महोदय -- वे विधिवत् दें. मैं यही तो उनसे कह रहा था, तो वे सुनने को तैयार नहीं थे.

श्री अजय सिंह -- तिवारी जी, आप आधे घंटे की चर्चा का लिखकर दे दें.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी -- वह हम दे देंगे. (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय -- अब दूसरे माननीय सदस्‍यों को प्रश्‍न पूछने दीजिए. इनका कुछ नहीं लिखा जाएगा.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी -- (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय -- आप आसंदी से कुछ नहीं पूछ सकते. आप बैठ जाएं.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी -- (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय -- आप बैठ जाएं. श्री कुँवरजी कोठार प्रश्‍न करें.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी -- (XXX)

नगर परिषद पचोर द्वारा संपादित कार्य

[नगरीय विकास एवं आवास]

5. ( *क्र. 1510 ) श्री कुँवरजी कोठार : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) वित्तीय वर्ष 2014-15 से प्रश्न दिनांक तक नगर परिषद पचोर द्वारा निविदा आमंत्रित कर कौन-कौन से निर्माण कराये गये हैं? वर्षवार कार्य का नाम, एजेन्सी का नाम, राशि एवं कार्य की अद्यतन स्थिति की जानकारी से अवगत करावें। (ख) प्रश्नांश (क) के अंतर्गत कराये गये निर्माण कार्य का सत्यापन किन-किन तकनीकी अधिकारियों/कर्मचारीयों के द्वारा कराया गया है?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) वित्‍तीय वर्ष 2014-15 से प्रश्‍न दिनांक तक नगर परिषद पचोर द्वारा निविदा आमंत्रित कर कराये गये कार्यों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार कराये गये निर्माण कार्य का सत्‍यापन निकाय में पदस्‍थ उपयंत्रियों द्वारा किया गया है, नाम एवं दिनांक की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है।

श्री कुँवरजी कोठार -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में माननीय मंत्री जी द्वारा परिशिष्‍ट में जो जानकारी दी गई है, उसके सरल क्रमांक 19 में प्राक्‍कलित राशि टेंडर राशि 9 लाख 73 हजार के अगेन्‍स्‍ड 10 लाख 7 हजार का काम कराया. सरल क्रमांक 22 में 12.39 लाख रुपये के विरुद्ध 13.94 लाख रुपये का कार्य, सरल क्रमांक 26 में 8.29 लाख रुपये के विरुद्ध 13.71 लाख रुपये एवं सरल क्रमांक 29 में 12.49 लाख रुपये के विरुद्ध 14.29 लाख रुपये का कार्य कराया गया है.

अध्‍यक्ष महोदय - आप क्‍या पूछना चाहते हैं ?

श्री कुँवरजी कोठार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह आधार बता रहा हूँ कि जो श्री सी.एल.चौरे, उपयंत्री हैं, जिन्‍होंने ये 7-8 काम कराये हैं, उनमें 10 प्रतिशत से लेकर 63 प्रतिशत तक अप्रत्‍याशित वृद्धि करके इनका भुगतान करवाया है और सरल क्रमांक 21 में 9.28 लाख रुपये की निविदा बुलाई गई, उसका मात्र 3.29 लाख रुपये का काम कराया है क्‍योंकि इस ठेकेदार से उसकी कुछ सांठ-गांठ नहीं हुई तो इसको सस्‍ते में निपटा दिया. जिससे उनकी सांठ-गांठ है, उसको आगे बढ़ाते हुए अधिकारी से काम कराये गये.

अध्‍यक्ष महोदय - आपने पढ़ लिया है, आप प्रश्‍न कीजिये.

श्री कुँवरजी कोठार - अध्‍यक्ष महोदय, इनको दिनांक 28 मार्च, 2017 में 10,000 रुपये की राशि रिश्‍वत लेते हुए लोकायुक्‍त द्वारा पकड़ा गया था. उस उपयंत्री को विभाग द्वारा आज दिनांक तक न तो निलंबन किया गया है और न ही उसको उस पद से वहां से हटाया गया है. मैं आपके माध्‍यम से, माननीय माननीय मंत्री महोदया से पूछना चाहता हूँ कि इस उपयंत्री का आप कब तक निलंबन करेंगी और यदि निलंबन करेंगी तो कब तक ?

श्रीमती माया सिंह - माननीय अध्‍यक्ष जी, माननीय विधायक जी ने जो प्रश्‍न पूछा है, उसका जवाब इसमें दिया गया है. अभी तो ई-नगरपालिका के माध्‍यम से नगरीय निकायों की जो निधि विकास कार्यों पर खर्च की जाती है, उसकी एन्‍ट्री होने लगी है और अब हम इन सब कामों की मॉनिटरिंग कर सकते हैं. पहले ये सारी व्‍यवस्‍थाएं नहीं थीं, ये सन् 14 एवं 15 के हैं, जो सवाल इन्‍होंने पूछे हैं. लेकिन मैं यह कहना चाहती हूँ कि पहले निकाय की निधियों से किये गये कार्यों की मॉनिटरिंग नहीं होती थी, अब यह सारी मॉनिटरिंग ई-नगरपालिका के माध्‍यम से होने लगी है. आपने जो उपयंत्री के बारे में सवाल पूछा है कि उसके खिलाफ लोकायुक्‍त प्रकरण है तो उसे तत्‍काल निलंबित किया जाता है.

श्री कुँवरजी कोठार - माननीय मंत्री महोदया जी आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद. मेरा एक प्रश्‍न और है. वर्ष 2014-2015 से प्रश्‍न दिनांक तक 35 कार्य स्‍वीकृत हैं और जिनकी लागत 9,51,88,594 रुपये है, उनमें से मात्र 16 कार्य पूर्ण हैं, जिसकी लागत 1,71,41,000 है तो शेष अपूर्ण एवं अप्रारंभ कार्यों को विभाग जांच कराकर कब तक शुरू करवायेगा और उन कार्यों को कब तक प्रारंभ करवाकर, क्षेत्रवासियों को सुविधाओं का लाभ देगा.

श्रीमती माया सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम जांच करवा लेंगे.

श्री कुँवरजी कोठार - धन्‍यवाद.

जबेरा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत संचालित मनरेगा योजनाएं

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

6. ( *क्र. 1405 ) श्री प्रताप सिंह : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दमोह जिले के जबेरा विधानसभा क्षेत्र में वित्‍तीय वर्ष 2014-15 से प्रश्‍न दिनांक तक मनरेगा योजनांतर्गत कौन-कौन से विकास कार्य प्रारंभ होकर अपूर्ण हैं? विकासखण्‍डवार संख्‍या बतावें। (ख) कार्यों की पूर्णता के लिए कब-कब कितनी-कितनी राशि का आवंटन शासन से जिले को प्राप्त हुआ है? वर्षवार बतलावें। (ग) क्या वर्ष 2017-18 में पिछले 6 माह की अवधि के दौरान मनरेगा योजना के अन्तर्गत प्रारम्भ विकास कार्यों (सामग्री एवं मजदूरी) हेतु राशि का भुगतान न किये जाने से निर्माण कार्य अवरूद्ध हैं? यदि नहीं, तो प्रारम्भ कार्यों की पूर्णता हेतु कितना आवंटन उल्लेखित अवधि के दौरान जिले को उपलब्ध कराया गया है?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) वांछित जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) महात्‍मा गांधी नरेगा अंतर्गत कार्यवार राशि आवंटन का प्रावधान नहीं होने से प्रश्‍नांकित अवधि में उत्‍तरांश (क) के कार्यों हेतु जिले को कोई आवंटन नहीं किया गया है। (ग) जी नहीं, वित्‍तीय वर्ष 2017-18 में 23 जनवरी से भारत सरकार से आवंटन प्राप्‍त नहीं होने के कारण सामग्री मद में भुगतान लंबित है। इसी प्रकार मजदूरी मद में दिनांक 23.02.2018 से आवंटन उपलब्‍ध नहीं है। उत्‍तरांश (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

परिशिष्ट - ''दो''

श्री प्रताप सिंह - अध्‍यक्ष महोदय, मैंने जो प्रश्‍न पूछा था तो उसमें माननीय मंत्री जी का जो उत्‍तर आया है, मैं उससे संतुष्‍ट हूँ लेकिन '' का जो उत्‍तर आया है, मैं उससे असंतुष्‍ट हूँ. इसमें बताया गया है कि जो मनरेगा की मजदूरी लंबित है, वह भारत सरकार से दिनांक 23 जनवरी के बाद कोई भी फण्‍ड नहीं आने के कारण लंबित है, लेकिन सामग्री मद में भुगतान लंबित है. इसी प्रकार मजदूरी मद में दिनांक 23/02/2018 से आवंटन उपलब्‍ध नहीं है. लेकिन मैं कहना चाहूँगा कि मेरी जानकारी के अनुसार पूरे प्रदेश में 3 लाख मजदूरों की मजदूरी एफटीओ के माध्‍यम से, जो पोस्‍ट ऑफिस के माध्‍यम से दी जाती है, वह लंबित है. इसी प्रकार हमारे दमोह जिले में 1,000 एफटीओ की 24,000 मजदूरों की मजदूरी अभी भी बकाया है. हमारे विधानसभा क्षेत्र में जो हमने जानकारी मांगी थी, उसमें भी सबसे ज्‍यादा 9,800 मजदूरों की मजदूरी बकाया है. जबकि माननीय मंत्री जी ने बताया है कि दिनांक-23.02.2018 से आवंटन उपलब्‍ध नहीं है. लेकिन मैं जो आंकड़े बता रहा हूं यह दिनांक- 23.02.2018 के पहले के आंकड़े हैं, जिसमें इन लोगों की इतनी मजदूरी बकाया है. मैं माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि इनकी मजदूरी कब भुगतान होगी ?

श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय सदस्‍य जानते हैं कि यह मांग आधारित योजना है. इस योजना में जिस-जिस प्रकार की मांग ग्राम पंचायतों के द्वारा की जाती है, उसके आधार पर काम स्‍वीकृत होते हैं और वह काम करवाते हैं. यह बात सही है कि अभी लगभग 15 दिन से जबेरा और तेंदुखेड़ा विकासखंड में कुछ मजदूरों को मजदूरी नहीं मिली है, क्‍योंकि अभी भारत सरकार का बजट प्रस्‍तुत हुआ है, जैसे ही बजट पारित हो जायेगा और किश्‍त मिल जायेगी तो हम जल्‍दी से जल्‍दी मजदूरी का भुगतान कर देंगे इसमें एक दिन का भी विलंब नहीं होगा. इस प्रकार चूंकि यह राशि हमें भारत सरकार से ही प्राप्‍त होती है, इस कारण से मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ है. बाकी संपूर्ण राज्‍य में किसी भी प्रकार की मजदूरी का बहुत लंबे से कोई भी भुगतान प्रतीक्षित नहीं है.

श्री प्रताप सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा सिर्फ यही कहना है कि आपके अधिकारियों ने जो आपके लिये यहां उत्‍तर उपलब्‍ध करवाया है, उसमें दिनांक-23.02.2018 के बाद कोई भी मजदूरी लंबित नहीं हैं, जबकि हमारे यहां दिनांक- 23.02.2018 के पहले से 10 हजार लोगों की मजदूरी अभी भी लंबित है. मैं इसके बारे में माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं.

श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसका बकायदा एफ.टी.ओ. भी होता है और इसमें रोजाना का जो काम होता है उसकी फीडिंग और एम.आई.एस. भी होता है, जिसकी जानकारी राज्‍य और भारत सरकार तक जाती है. हमारे रिकार्ड के अनुसार मजदूरी नहीं मिली हो ऐसा दर्शित नहीं है, फिर भी हम इस संबंध में देख लेंगे और यदि जैसा आप बता रहा हैं कि दस हजार लोगों को मजदूरी नहीं मिली है, तो हम इस संबंध में जानकारी प्राप्‍त करके शीघ्र भुगतान करवा देंगे.

श्री प्रताप सिंह - धन्‍यवाद.

रेत का अवैध भण्‍डारण/निकासी

[खनिज साधन]

7. ( *क्र. 947 ) श्री गिरीश गौतम : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रीवा जिले के थाना लौर तहसील मऊगंज अंतर्गत रेत भण्‍डारण का लायसेंस कितने लोगों को दिया गया है? उनके नाम, पता सहित बतावें कि कितनी क्षमता के भण्‍डारण का लायसेंस किस तारीख को दिया गया है? (ख) यदि रेत भण्‍डारण का लायसेंस दिया गया है, तो लायसेंस की शर्तों का पालन किया जा रहा है या नहीं, इसकी जाँच कब-कब, किस-किस अधिकारी ने की है? (ग) क्‍या देवतालाब रेत के स्‍टाक को उत्‍तर प्रदेश के निवासी के लिए भी लायसेंस/परमिट दिया गया? यदि हाँ, तो कब-कब? उ.प्र. के लिए रेत का परिवहन कितने ट्रकों से किया गया? उसकी सूची विवरण के साथ देवें। यदि रेत निकासी का लायसेंस/परमिट नहीं दिया गया, तो प्रतिदिन सैकड़ों की तादाद में ट्रकों से रेत परिवहन किया जाकर शासन के राजस्‍व का नुकसान पहुँचाए जाने के लिए कौन-कौन अधिकारी जिम्‍मेवार हैं एवं उनके विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की जायेगी और रेत की अवैध निकासी को रोके जाने के लिए क्‍या कार्यवाही की जायेगी?

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) प्रश्‍नानुसार जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) जी हाँ। शर्तों का पालन किया जा रहा है। भण्‍डारण स्‍थलों की जाँच समय-समय पर खनि निरीक्षक द्वारा की जाती है। (ग) जी नहीं। अत: शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता। प्रश्‍नाधीन क्षेत्र की जाँच के दौरान यह पाया गया कि रेत का परिवहन समीपस्‍थ जिलों में स्‍वीकृत रेत खदानों/व्‍यापारिक अनुज्ञप्तियों के अभिवहन पार-पत्रों के माध्‍यम से किया जाता है। प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में खनिजों के अवैध भण्‍डारण तथा अवैध परिवहन के प्रकरण प्रकाश में आने पर इन्‍हें पंजीबद्ध कर राशि रूपये 2,93,500/- का अर्थदण्‍ड वसूल किया गया है। अत: शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता। खनिजों के अवैध परिवहन की जाँच किया जाना सतत् प्रक्रिया है, जिसके अधीन प्रकरण प्रकाश में आने पर नियमानुसार कार्यवाही की जाती है।

परिशिष्ट - ''तीन''

श्री गिरीश गौतम - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न यह था कि रेत के बारे में सरकार ने काफी चिंता की है कि लोगों को रेत मिले क्‍योंकि रेत के रेट महंगे होने से घर बनाना मुश्किल हो गया है. मेरा अपने विधानसभा क्षेत्र से मतलब था और इसके संबंध में मैंने प्रश्‍न '''' में यह पूछा था कि किन-किन अधिकारियों ने जांच की तो उसका जवाब आया है कि निरीक्षक द्वारा समय-समय पर जांच की जाती है. जबकि मैंने पूछा था कि किस-किस अधिकारी ने कौन-कौन सी तारीख में जांच की है, लेकिन इसके संबंध में जवाब नहीं आया है. विभाग के अधिकारियों ने हमारे मंत्री जी को गलत तथ्‍यों के आधार पर जवाब दिलवाया है. दूसरा इसी में अतंर्विरोध का उत्‍तर है जिसमें यह जवाब आया है कि रेत परिवहन समीपस्‍थ जिलों में स्‍वीकृत रेत खदानों/व्‍यापारिक अनुज्ञप्तियों के अभिवहन पार-पत्रों के माध्‍यम से किया जाता है. यदि परमिट से आया है तो फिर इसी के जवाब में लिखा हुआ है कि प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में खनिजों के अवैध भण्‍डारण तथा अवैध परिवहन के प्रकरण प्रकाश में आने पर इन्‍हें पंजीबद्ध कर राशि रूपये 293500/- रूपये की वसूली की गई है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अब इसके संबंध में कबीरदास की सूक्ति है जिसमें उन्‍होंने कहा है कि - ''तुम कहते कागज की लेखी और मैं कहता आंखन की देखी'' तो मैं कैसे संतुष्‍ट हो जाउं ''तेरा मेरा मनवा कैसे एक होय रे'' सवाल यह है कि मैं जब उस क्षेत्र से निकलता हूं तो सैकड़ों की तादाद में ट्रक जेसीबी से लदकर निकलते हुये देखता हूं. एक तो यह जवाब आ जाये कि यह परिवहन के भण्‍डारण का जुर्माना है या ट्रकों से परिवहन का है. इस प्रकार की भी जानकारी मिल जाये कि 293500/- का जो जुर्माना किया गया और इसमें 10-12 ट्रक पकड़े गये और 12 ट्रकों का जुर्माना, परिवहन का ज ासासयाय

का भी जुर्माना है या किस प्रकार का जुर्माना है?

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा दूसरा आग्रह यह है कि लोगों को सस्‍ती रेत मिले उसका तरीका यह है कि जिले के भीतर ज्‍यादा रेत उपलब्‍धता हो. उत्‍तरप्रदेश में पूरी तरह से प्रतिबंध होने के कारण सैकड़ों की तादाद प्रतिदिन ट्रक लादकर निकल जाते हैं, इसके कारण से हमको रेत 40 हजार रूपये,45 हजार रूपये, 50 हजार रूपये प्रति डम्पर मिल रहा है. क्‍या माननीय मंत्री जी इसमें ऐसी व्‍यवस्‍था करेंगे कि हमारे क्षेत्र से ही सड़क उत्‍तरप्रदेश को जाती है इसलिए वहां पर कोई चैकिंग का प्रावधान करेंगे, जिससे यह अवैध रूप से रेत का परिवहन न हो? क्‍योंकि मैं यह कहना चाहता हूं कि जिन ट्रकों को पकड़ा है वह सब अवैध थे. यदि वह अवैध नहीं तो जुर्माना ही क्‍यों होता. मतलब अवैध तरीके से रेत की निकासी हो रही है. क्‍या माननीय मंत्री जी उनकी जांच कराकर उस पर कार्यवाही करेंगे ? जिससे सरकार को भी फायदा और लोगों को सस्‍ते रेट पर रेत मिले.

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एम.पी. एवं यू.पी. की सीमा में जहां तक चेकिंग का सवाल है तो इन्‍टर स्‍टेट चेकिंग बेरियर्स लगे हुए हैं, जहां पर सारे टैक्‍सेस एवं रायल्‍टी जमा करके कोई ट्रक जब दस्‍तावेज दिखाता है, उसके बाद ही उसकी निकासी संभव हो पाती है. दूसरा माननीय सदस्‍य ने जो पूछा है, 2 लाख 93 हजार का जो अर्थदंड वसूल किया गया है इसमें 56 हजार रूपए तो अवैध भंडारण का है, हालांकि दो महीने पहले भंडारण का आवेदन लगाया गया है, लेकिन कुछ एनओसी नहीं मिलने के कारण भंडारण का लायसेंस नहीं मिल सका था और वहां पर रेत कुछ पाई गई थी, जिस पर पेनाल्‍टी लगाई गई है और 56 हजार रूपए अवैध भंडारण के कारण उस रेत पर बाजार के रेट से 10 गुणा जुर्माना लगाया गया है. शहडोल और सीधी से जो रेत आती है और रीवा होते हुए यू.पी. जाती है चूंकि दूसरे राज्‍यों में रेत भेजने में कहीं कोई प्रतिबंध नहीं है और हमारे यहां पर सरप्‍लस रेत रहती है और उस आधार पर यदि सरकार के खजाने में कोई ज्‍यादा राशि जमा करके रेत निकालता है तो यूपी ले जा सकता है, तो उस ट्रांसपोर्टेशन के दौरान जो चेकिंग होती है उस चेकिंग में यदि बिना पास के कोई ट्रक पकड़ा जाता है तो उस पर पेनाल्‍टी लगती है और वह पेनाल्‍टी लगभग 2 लाख 93 हजार रूपए लगाई गई है.

श्री गिरीश गौतम माननीय अध्‍यक्ष जी, भारत सरकार का इसी संबंध में एक आदेश भी है, उस आदेश में यह है कि आपके बिना परमिट के यदि कोई ट्रक अवैध परिवहन करते हुए पाया जाता है तो उसके खिलाफ पुलिस में चोरी का भी मामला कायम होता है, क्‍योंकि इसमें रेवेन्‍यु, माइनिंग और पुलिस विभाग शामिल होते हैं, तो क्‍या जिन ट्रकों को पकड़ा गया उनके खिलाफ उस आदेश के परिप्रेक्ष्‍य में 379 का चोरी का मुकदमा भी कायम किया जाएगा.

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्‍य को उससे भी आगे बढ़कर यह सूचना देना चाहता हूं कि मुख्‍यमंत्री जी के निर्देश में हम लोगों ने राजसात करने का नियम बना दिया है. यदि कोई गाड़ी अवैध रेत लेकर कहीं पकड़ी जाती है तो सिर्फ रेत जप्‍त नहीं होगी, बल्कि पूरी की पूरी गाड़ी राजसात हो जाएगी, यह बहुत ही कड़ा नियम है. चूंकि यह मामला बहुत पुराना है उसके बाद नये नियम आने के बाद अभी कोई गाड़ी बिना पिटपास के अभी पकड़ी नहीं गई है, लेकिन अभी तक पूरे मध्‍यप्रदेश में आप देखेंगे तो बड़ी संख्‍या में गाडि़यां और ट्रेक्‍टर और जेसीबी राजसात की गई है.

श्री गिरीश गौतम अध्‍यक्ष जी, एक निर्देश आप कर दें मेरे क्षेत्र से ही गाड़ी जाती है वहां उत्‍तरप्रदेश बार्डर पर चैक नहीं करवाइए, हमारे नईगढ़ी थाने के पास से जो सड़क इलाहबाद जाती है एक बार बिना बताए आप वहां पर चैकिंग करवा दीजिए 4-6 दिन के लिए बहुत सारे ट्रक मिल जाएंगे, माननीय अध्‍यक्ष जी इतना आदेश हो जाए.

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल अध्‍यक्ष महोदय, ठीक है जैसी माननीय सदस्‍य की इच्‍छा है उस प्रकार से कार्य हो जाएगा.

श्री गिरीश गौतम अध्‍यक्ष जी, धन्‍यवाद.

प्रधानमंत्री आवास योजना का क्रियान्‍वयन

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

8. ( *क्र. 2427 ) श्री हरदीप सिंह डंग : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत् ग्रामों में आवास किश्त देने के क्या नियम हैं एवं कितने कार्य के लिए कितनी राशि जारी की जाती है? (ख) सुवासरा विधानसभा क्षेत्र में ग्राम पंचायतों के अन्तर्गत ऐसे कितने व्यक्ति हैं, जिन्हें प्रथम किश्त का कार्य पूर्ण होने के बाद दूसरी किश्‍त एवं दूसरी किश्त का कार्य पूर्ण होने के बाद तीसरी किश्त प्राप्त नहीं हुई है? व्यक्ति के नाम, ग्राम एवं पंचायत के नाम सहित जानकारी देवें। (ग) ऐसे कितने व्यक्ति हैं, जिन्हें माह दिसम्बर 2017 में प्रथम किश्त जारी की गई थी, उसके बाद द्वितीय किश्त जारी नहीं की गई तथा द्वितीय के बाद तृतीय किश्त प्रश्न दिनांक तक जारी नहीं की गई? (घ) जिन व्यक्तियों द्वारा ठण्ड के मौसम में मकान तोड़कर आवास निर्माण करवाया जा रहा है, उन व्यक्तियों को ठण्ड से बचाने हेतु शासन द्वारा क्या-क्या‍ सुविधाएं प्रदान की गईं?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अन्तर्गत आवास निर्माण हेतु हितग्राही को वर्तमान में 4 किश्‍तों में राशि प्रदाय की जाती है। आवास स्वीकृति उपरांत प्रथम किश्‍त रू. 40,000/- कुर्सी स्तर तक का कार्य पूर्ण होने पर, द्वितीय किश्‍त रू. 40,000/- छत स्तर तक कार्य पूर्ण होने पर, तृतीय किश्‍त रू. 25,000/- तथा आवास निर्माण का कार्य पूर्ण होने के पश्चात् रू. 15,000/- की राशि एफ.टी.ओ. के माध्यम से हितग्राही के खाते में हस्तांतरित की जाती है। किश्‍त का भुगतान आवास निर्माण की निर्धारित प्रगति का जियोटैंग फोटो आवास सॉफ्ट पर अपलोड होने के उपरांत ही देय होती है। (ख) निरंक। निर्धारित कार्य पूर्ण करने पर जियोटैंग करते हुए सभी को समय से राशि जारी की गई। (ग) माह दिसम्बर 2017 में किसी भी हितग्राही को प्रथम किश्‍त जारी नहीं की गई है। (घ) हितग्राही द्वारा स्वमेव अस्थाई व्यवस्था की गई है।

श्री हरदीप सिंह डंग माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे द्वारा प्रधानमंत्री आवास के मामले में 3 प्रश्‍न आज लगाए गए थे और तीनों के जो उत्‍तर आए हैं, उसमें आठवें नंबर आज तारांकित में है और दो अतारांकित में है 145 और 153 पर. मेरा प्रश्‍न है कि हितग्राही को जो किश्‍तें दी जाती है 40-49 हजार, 25 हजार और 15 हजार के बारे में जो जानकारी दी गई है जहां तक ग्रामीण क्षेत्र में जो अधिकारी द्वारा बताया गया है कि 70 और 80 प्रतिशत तक जो लक्ष्‍य दिया गया है जैसे 100 आवास है तो उसमें से जब तक 70 लोग मकान नहीं बना लेते जब तक दूसरी किश्‍त जारी नहीं की जाएगी और जो प्रथम किश्‍त लेकर जिन्‍होंने मकान बना लिया और ठंड में तीन तीन महीने बाहर बैठे रहे क्‍योंकि उन्‍हें दूसरी किश्‍त इसलिए नहीं दी गई कि जब 70 प्रतिशत मकान बनेंगे तब ही दूसरी किश्‍त जारी की जाएगी, तो यह जो जानकारी मुझे दी गई है, इसके बारे में स्‍पष्‍ट जानकारी मेरे पास नहीं आई है.

श्री गोपाल भार्गव माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जैसा कहा है यह सत्‍य नहीं है. सदस्‍य स्‍वयं कह रहे हैं कि पहली एवं दूसरी किश्‍त 40 हजार रूपए, तृतीय किश्‍त 25 हजार और अंतिम किश्‍त 15 हजार रूपए है. अध्‍यक्ष महोदय, हमारे मध्‍यप्रदेश में जैसी पारदर्शी व्‍यवस्‍था है वैसी व्‍यवस्‍था शायद देश में कहीं नहीं है, सुचारू रूप से पूरा काम और हमारा लक्ष्‍य पूरा हो जाए, राज्‍य में हम लोगों ने ऐसी व्‍यवस्‍था प्रचलित की है. प्लिंथ मतलब नींव के लिए हम 40 हजार रूपए देते हैं, जैसे ही प्लिंथ तैयार हो जाती है उसके बाद हम 40 हजार रूपए की दूसरी किश्‍त देते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय सदस्‍य का प्रश्‍न यह नहीं है, सदस्‍य का कहना यह है कि प्रथम किश्‍त दे दी लेकिन अगली किश्‍त इस आधार पर रोकी जा रही है कि दूसरे लोग मकान नहीं बना रहे हैं तो आपको भी अगली किश्‍त नहीं दी जाएगी, सदस्‍य का यह प्रश्‍न है.

श्री गोपाल भार्गव-- मतलब दूसरे लोग नहीं बना रहे हैं !!

अध्यक्ष महोदय- 70 प्रतिशत तक जब लोग बना लेंगे तो ही दूसरी किश्त जारी होगी, ऐसा सदस्य का कहना है.

श्री हरदीप सिंह डंग --कोई व्यक्ति लक्ष्य के 70 या 80 प्रतिशत तक प्रधानमंत्री आवास का काम चालू नहीं कर देते तब तक दूसरी किश्त नहीं दी जायेगी.

अध्यक्ष महोदय- मंत्री जी, यह सदस्य का प्रश्न है . क्या ऐसा कोई नियम है कि सबको ही एक साथ बनाना पड़ेगा.

श्री गोपाल भार्गव-- अध्यक्ष महोदय, ऐसा कोई नियम नहीं है. आप तो बनाते जायें और हम क्रमश: उसकी किश्त देते जायेंगे.इंडीविजुवली.

अध्यक्ष महोदय- मंत्री जी का कहना है कि इंडीविजुवली. ऐसा कोई ग्रुप नहीं है. अब आप पूछें.

श्री हरदीप सिंह डंग --अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि नगरीय क्षेत्र में नगर पंचायत में तो आदेश दे दिया गया है कि जब तक लक्ष्य का 70 प्रतिशत तक व्यक्ति काम नहीं कर लेंगे तब तक द्वितीय किश्त नहीं दी जायेगी. यही ग्रामीण क्षेत्र में हो रहा है वहां के सीईओ और अन्य अधिकारियों का कहना है कि जब तक सब नहीं बना लेते हैं 70 प्रतिशत तब तक हम दूसरी और तीसरी किश्त नहीं देंगे, ऐसा क्षेत्र में हो रहा है.

श्री गोपाल भार्गव-- अध्यक्ष जी, ऐसा बिल्कुल भी सही नहीं है. 6 लाख आवास बन गये है. मध्यप्रदेश में हम हिन्दुस्तान में अव्वल नंबर पर हैं. यदि ऐसा होता तो हमारा एचीवमेंट कैसे संभव होता. आप लिखकर के दे दें हो सकता है कि कहीं कोई कन्फ्यूजन हो. यदि आपके क्षेत्र में ऐसा हो रहा है, आपकी विधानसभा क्षेत्र के आजू बाजू में ऐसा हो रहा है , पूरे जिले की हम जानकारी ले लेंगे और विधिवत जितना स्पष्टीकरण हो सकता है वह भी निकाल लेंगे इसके बाद भी यदि कोई अधिकारी शासन की बात को नहीं मान्य करेगा तो हम कार्यवाही करेंगे.

अध्यक्ष महोदय-- ठीक है.

श्री रामनिवास रावत- अध्यक्ष महोदय, जिलों में ऐसा हो रहा है. लक्ष्य को पाने के लिये अधिकारी मौखिक रूप से निर्देश देकर के रोक लगा देते हैं तो ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिये. जिस व्यक्ति ने काम कर लिया उसको किश्त जारी करें.यह दर्द है.

श्री गोपाल भार्गव-- रावत जी ऐसा ही है. जैसा आप कह रहे है ऐसा ही है.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह)-- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी बहुत अच्छी तरह से विभाग को चला रहे है लेकिन विधायक जी की जानकारी भी सत्य है. हमारे क्षेत्र में भी ऐसा हो रहा है. उपाध्यक्ष महोदय के क्षेत्र में भी दूसरी किश्त मुश्किल से जारी कर रहे हैं. मकान आधे अधूरे पड़े हैं, अंदर से कुछ नहीं है, बाहर बोर्ड लगा दिया कि प्रधान मंत्री आवास. इसकी भी आप जिला स्तर पर जांच करा लें.

श्री गोपाल भार्गव- माननीय नेता प्रतिपक्ष जैसा कह रहे हैं, आज वह बता दें कि कहां कहां पर ऐसा हो रहा है हम आज ही अधिकारी को भेजकर के जांच करा लेगे.

अध्यक्ष महोदय- हरदीप सिंह जी के यहां की आप जांच करा लें और यदि पेमेंट नहीं हो रहे हैं तो पेमेंट करायें.

श्री गोपाल भार्गव-- प्रश्न ही पैदा नहीं होता है.

अध्यक्ष महोदय- डंग जी आप आज ही मंत्री जी को लिखित मे जानकारी दीजिये.

श्री हरदीप सिंह डंग --अध्यक्ष महोदय, आज भी शौचालय और मनरेगा की राशि हमारे यहां नहीं पहुंची है.

श्री गोपाल भार्गव-- नहीं, शौचालय और मनरेगा कि विषय अलग है. जहां तक यह प्रश्न है कि 70 प्रतिशत ..

श्री अजय सिंह -- उपाध्यक्ष महोदय ने अमरपाटन विधानसभा क्षेत्र के ग्राम गौरा के मामले में फोटो सहित प्रकरण आपको दिया कि नहीं दिया.

श्री गोपाल भार्गव -- दी होगी तो मैं दिखवा लूंगा.

अध्यक्ष महोदय- मंत्री जी बैठ जायें, प्रश्न हो गया.

श्री हरदीप सिंह डंग --अभी मेरा प्रश्न बाकी है साहब.

अध्यक्ष महोदय- आपके प्रश्न का निराकरण हो गया है.

श्री हरदीप सिंह डंग -- बाकी है . अभी तक शौचालय के और मनरेगा की मजदूरी की राशि उन पंचायतों में नहीं पहुंचे हैं जिसके कारण परेशानी है. प्रधान मंत्री आवास पर 1 लाख 50 हजार रूपये लिखे जा रहे हैं जबकि 1 लाख 47 हजार रूपये उनको दिये जा रहे हैं.

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- अध्यक्ष महोदय प्रधान मंत्री आवास योजना के अंतर्गत बने मकानों में प्रधान मंत्री और मुख्यमंत्री का नाम किन नियमों के तहत लिखवाया जा रहा है. बतायें.

अध्यक्ष महोदय- आपस में बहस नहीं. प्रश्न का उत्तर आने दें.

श्री सुन्दरलाल तिवारी- मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री जी का जबरिया गरीबों के मकानों पर नाम लिखा जा रहा है. किस नियम के तहत.

अध्यक्ष महोदय- मंत्री जी श्री डंग जी के प्रश्न का उत्तर दें. तिवारी जी आप बैठ जायें.

श्री सुन्दरलाल तिवारी- नाम क्यों लिखे जा रहे हैं. यह बतायें.

अध्यक्ष महोदय-तिवारी जी आप बैठ जायें. दूसरे के प्रश्न पर डिस्टर्ब कर रहे हैं आपको किसी ने डिस्टर्ब किया था क्या . तिवारी जी का कुछ नहीं लिखा जायेगा.

श्री गोपाल भार्गव- अध्यक्ष महोदय, आसंदी से जो व्यवस्था हुई है. उसके हिसाब से मैं प्रश्न का उत्तर दे रहा हूं.

श्री हरदीप सिंह डंग --अध्यक्ष महोदय 15 ऐसे बड़े बड़े गांव हैं जिसमें एक भी प्रधान मंत्री आवास नहीं आया है.

अध्यक्ष महोदय- यह प्रश्न नहीं है.

श्री हरदीप सिंह डंग --मंत्री जी, एक और प्रश्न है कि जो अंग्रेजी में सूची जारी की गई है उसको हिन्दी मे जारी करे.

अध्यक्ष महोदय- मैंने कहा कि यह प्रश्न उद्भुद नहीं हो रहा है.

श्री गोपाल भार्गव-- अध्यक्ष महोदय, मैं डंग जी के एक एक प्रश्न का उत्तर दे रहा हूं.

अध्यक्ष महोदय- अब नहीं, प्रश्न क्रमांक 9

श्री हरदीप सिंह डंग -- मेरे प्रश्न का उत्तर तो दिलायें.

अध्यक्ष महोदय- नहीं, आपका प्रश्न उद्भुद नहीं हो रहा है.

श्री हरदीप सिंह डंग -- मेरे प्रश्न का उत्तर तो दिला दें.

अध्‍यक्ष महोदय-- अब कोई उत्‍तर नहीं आयेगा. अब आगे बढ़ गये. ...(व्‍यवधान)..

श्री हरदीप सिंह डंग-- अध्‍यक्ष जी, कम से कम मेरा उत्‍तर तो दिलायें. ...(व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय-- आ गया उत्‍तर. उससे उद्भूत नहीं हो रहा. ...(व्‍यवधान)...

श्री हरदीप सिंह डंग-- मैंने सिर्फ एक ही प्रश्‍न किया है. ...(व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय-- उससे उद्भूत नहीं हो रहा है. प्रश्‍न क्रमांक 9 पूछिये आप. ...व्‍यवधान... कहां लिखा है प्रश्‍न में.

श्री हरदीप सिंह डंग-- लिखा है इसमें ...व्‍यवधान... मंत्री जी उत्‍तर दे रहे हैं. उत्‍तर तो दिला दें कम से कम. ...व्‍यवधान...

अध्‍यक्ष महोदय-- अब सिर्फ गोविंद सिंह जी का लिखा जायेगा.

श्री हरदीप सिंह डंग-- (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय-- डंग जी का कुछ नहीं लिखा जायेगा.

श्री हरदीप सिंह डंग-- (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय-- मैं अनुमति नहीं दे रहा हूं. श्री गोविंद सिंह पटेल. ...व्‍यवधान...

 

 

 

विभागांतर्गत संचालित योजनाओं का क्रियान्‍वयन

[सामाजिक न्याय एवं निःशक्तजन कल्याण]

9. ( *क्र. 2163 ) श्री गोविन्‍द सिंह पटेल : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विभाग द्वारा जनता के कल्‍याण के लिए कौन-कौन सी योजनाएं संचालित की जा रही हैं? योजनाओं के नाम सहित विवरण दें। (ख) विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की चयन प्रक्रिया एवं पात्रता क्‍या होती है तथा आवेदन करने की प्रक्रिया क्‍या होती है? (ग) चयन प्रक्रिया में कौन-कौन अधिकारी, कर्मचारी सदस्‍य होते हैं? पदवार/कार्यानुसार स्‍पष्‍ट विवरण देवें। (घ) नरसिंहपुर जिले में विभिन्‍न प्रकार की पेंशनों में किस-किस प्रकार के हितग्राहियों को पेंशन दी जाती है?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) विभाग द्वारा 21 योजनाएं संचालित हैं। योजनाओं का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''एक'' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''एक'' अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''दो'' अनुसार है। (घ) पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''एक'' अनुसार जिले में पात्रता मापदण्ड के अनुसार हितग्राही को पेंशन दी जाती है।

श्री गोविंद सिंह पटेल-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सामाजिक न्‍याय विभाग द्वारा बहुत सी योजनायें चल रही हैं और जनहितैषी हैं, उनके लिये मैं पंचायत मंत्री जी को धन्‍यवाद देता हूं. एक राष्‍ट्रीय परिवार सहायता योजना है इसमें पात्रता है कि ऐसे गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाला 18 से 60 वर्ष का व्‍यक्ति जो परिवार का मुख्‍य कमाऊ सदस्‍य है उसकी मौत के बाद 20 हजार रूपये आश्रित को दिये जाते हैं, लेकिन इसमें कमाऊ गरीब परिवार में महिला और पुरूष दोनों होते हैं, लेकिन इसमें सिर्फ पुरूष की मृत्‍यु होने पर परिवार सहायता की राशि दी जाती है. मैं मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं कि गरीब परिवार में महिला भी कमाऊ सदस्‍य होती हैं तो महिला की मृत्‍यु के बाद क्‍या परिवार सहायता की राशि दी जायेगी.

श्री गोपाल भार्गव-- अध्‍यक्ष महोदय, यदि रिकार्ड में यह होगा कि वह महिला परिवार का पालन पोषण करती थी और उसकी मृत्‍यु हो गई, उस कारण से परिवार असहाय हो गया है तो राशि दी जायेगी.

श्री गोविंद सिंह पटेल-- मंत्री महोदय, मैं चाहता हूं कि आदेश हो जाये, अधिकांश सभी परिवारों में महिला भी कमाऊ सदस्‍य होती है. उसकी मृत्‍यु पर भी परिवार सहायता की राशि मिलना चाहिये.

श्री गोपाल भार्गव-- अध्‍यक्ष महोदय, इसका बहुत व्‍यापक है, मैंने तो यह तक व्‍यवस्‍था कर दी है कि उस परिवार में यदि कोई लड़के हैं, कभी-कभी यह होता है कि पिता का नाम जुड़ा होता है और परिवार का वही मुखिया माना जाता है, जबकि पिता की आयु होती है 58 साल, 60 साल, 65 साल यह होती है, उसके लड़के होते हैं 40 साल के, लड़के की शादी भी हो गई होती है, 35 साल के होते हैं, 30 साल के होते हैं तो बेटे जो शादीशुदा है यदि उनकी मृत्‍यु होती है तो उनके लिये भी हमने 20 हजार रूपये की सहायता के निर्देश जारी कर दिये हैं और वह दिये भी जा रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय-- उसकी कापी दे देंगे उनको, वह कह रहे हैं.

श्री रामनिवास रावत-- निर्देशों की कापी सभी विधायकों को दिलवा दें.

श्री गोविंद सिंह पटेल-- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा दूसरा प्रश्‍न है एक मुख्‍यमंत्री निकाह योजना के अंतर्गत हम जो राशि देते हैं वह सम्‍मेलन में जो विवाह होते हैं उनमें देते हैं. हमारे प्रदेश में और पूरे देश में वैदिक पद्धति से विवाह होते हैं तो अलग-अलग समय अलग-अलग लोगों के विवाह होते हैं और सम्‍मेलन के बाद ही वह राशि मिलती है. सम्‍मेलन में कभी-कभी कोई परिवार नहीं जाना चाहता क्‍योंकि उसको एक वैदिक पद्धति के द्वारा पंडित लोग कहते हैं कि आपकी शादी नहीं बन रही है इसलिये कई लोग वंचित रह जाते हैं. मेरा कहना है कि जो पात्रता रखते हैं, जो गरीब परिवार हैं, बीपीएल कार्डधारी हैं, वैसे उसमें बंधन नहीं है. गरीब परिवार के लोगों की घर से भी शादी होती है तो भी मुख्‍यमंत्री विवाह सहायता की राशि मिलना चाहिये. मंत्री महोदय, क्‍या ऐसा आदेश पारित करेंगे ?

श्री गोपाल भार्गव-- हमारी यह जो कन्‍यादान योजना है यह सिर्फ कन्‍यादान के लिये नहीं, शादी के लिये बल्कि उसको शादी शब्‍द देकर हम उसका अवमूल्‍यन करेंगे. यह सामाजिक समरसता के क्षेत्र में सबसे बड़ा यज्ञ है और इस कारण से हम लोग समूहों में, सभी समाजों के, सभी जातियों के लोग एकत्रित होकर इसे कन्‍यादान समारोह के लिये आयोजित करते हैं, इसका नामकरण कुछ भी करें, मुख्‍यमंत्री कन्‍यादान या कुछ भी. अध्‍यक्ष महोदय, इस कारण से व्‍यक्तिगत रूप से यदि हम इसको देंगे तो वह भाव नहीं रहेगा जो सामूहिक रूप से शादियों का होता है और इससे सामाजिक समरसता का भाव खत्‍म होता है इस कारण से इस योजना के लिये इसी तरह से जैसा अभी प्रचलन में है इसी तरह से चलाया जाये.

श्री शंकरलाल तिवारी-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक बात मैं इसमें कहना चाहता हूं, मजदूरों को मजदूरी के कार्ड में यदि घर में शादी करो तो 25 हजार रूपये मिलता है, अगर इस ढंग का करें जिसा विधायक जी ने चाहा है तो यह उचित होगा.

श्री गोपाल भार्गव-- अध्‍यक्ष महोदय, वह श्रम विभाग की योजना है, वह अलग है.

श्री गोविंद सिंह पटेल-- वह मजदूर सुरक्षा के तहत मिलता है, अगर इसके तहत भी मिलने लगे तो कोई वंचित न रहे. मेरा तीसरा प्रश्न यह कि आपके सामाजिक न्याय विभाग द्वारा बहुत सी योजनाएं चलाई जा रही हैं उसके लिये धन्यवाद. आपका पंचायत सचिव होता है, रोजगार सहायक होता है, सरपंच होता है. हम जनप्रतिनिधि जब गांव में पहुंचते हैं तो पता चलता है कि कई लोग जो पेंशन के पात्र हैं वे वंचित होते हैं. उनकी ड्यूटी नहीं बनती है कि इतनी योजनाएं चल रही हैं अगर कोई भी व्यक्ति जानकारी के अभाव में यदि आवेदन नहीं कर पाता है तो आपका पंचायत सचिव अथवा रोजगार सहायक जो पात्र लोग हैं उनको उन योजनाओं का लाभ दिलाएं. गांव में जनप्रतिनिधि अथवा अधिकारी पहुंचते हैं तो कोई पात्र व्यक्ति वहां पर खड़ा न हो उनके लिये आप आदेशित करें. उनको योजना का लाभ अपनी तरफ से भी दिलाएं.

श्री गोपाल भार्गव--अध्यक्ष महोदय, हमारी सरकार ने तय किया है कि जहां पर सूखा है. सूखाग्रस्त किसानों के लिये उनको उनके घर पर ही 25 हजार रूपये की राशि दी जाएगी. यह पिछले वर्ष भी था, इस वर्ष में यही नियम हमने लागू करके रखा है. दूसरी बात जैसा माननीय सदस्य ने कहा कि कुछ लोग अभी भी वंचित हैं, जो नहीं जा पाते हैं अथवा दफ्तरों में एप्रोच नहीं कर पाते हैं उनके घरों पर हमारे ग्राम पंचायत के सचिव, रोजगार सहायक, या अन्य कर्मचारी हैं वे उनको चिन्हित करके उनको पेंशन की पात्रता होती है अथवा जो पात्र हैं उनको पेंशन दी जानी चाहिये. इसके लिये हम लगातार अंत्योदय मेले भी लगाते हैं उस पर अभियान भी चलाते हैं. उसमें विभिन्न कार्यक्रम लोक सेवा गारंटी जो हमारी योजना है इसके अंतर्गत भी काम होते हैं. इसके बावजूद भी अगर कोई शेष हों तो देख लेंगे. इस मामले में एक बात और कहना चाहता हूं कि यह हम सभी की जिम्मेवारी है कि हम लोग ग्रामों,बस्तियों में भ्रमण करते हैं तो उसमें हम लोग भी पात्र लोगों को चिन्हित कर उनको यथास्थान पहुंचायें तथा उनका मार्गदर्शन करें तो यह समस्या शून्य पर आ जायेगी.

प्रश्न संख्या 10 (अनुपस्थित)

 

 

 

 

नगरीय निकायों में भूमि का आवंटन

[नगरीय विकास एवं आवास]

11. ( *क्र. 1444 ) श्री मुरलीधर पाटीदार : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) नगरीय निकायों द्वारा दुकान निर्माण हेतु निर्माण से पूर्व नजूल अधिकारी से अनापत्ति लेकर एवं निर्धारित प्रब्याजी एवं भू-भाटक शासन मद में जमा करे बिना ही निर्माण कार्य करने संबंधी विगत 03 वर्षों में आगर एवं शाजापुर जिला अंतर्गत कितनी शिकायतें प्राप्त हुई हैं एवं क्या कार्यवाही की गई? शिकायतवार पूर्ण विवरण देवें। (ख) प्रश्नकर्ता के प्रश्न क्रमांक 3608, दिनांक 26 जुलाई, 2016 के उत्तरांश (ख) में नगर परिषद् नलखेड़ा द्वारा अपने पक्ष में भूमि आवंटन कराए बिना ही निर्माण कार्य कराया जाना बताया गया हैं एवं उत्तरांश (घ) अनुसार परीक्षण उपरांत शीघ्र कार्यवाही किया जाना बताया था? इसके उपरांत क्या कार्यवाही की गई? पूर्ण विवरण देवें। (ग) उज्जैन संभाग अंतर्गत विगत 03 वर्षों में प्रश्नांश (ख) में उल्लेखित अनुसार क्‍या कोई प्रकरण संज्ञान में आए हैं? यदि हाँ, तो क्या कार्यवाही की गई? (घ) विधानसभा क्षेत्र सुसनेर अंतर्गत विगत 03 वर्षों में नजूल अधिकारी की अनापत्ति के आधार पर कौन-कौन सी भूमि का आवंटन किया गया है? सर्वे नम्बर वार पूर्ण जानकारी देवें। क्‍या इसके विपरीत भूमि आवंटन के कोई तथ्य संज्ञान में आए हैं? यदि हाँ, तो क्या कार्यवाही की गई? यदि नहीं, तो क्या इसकी समीक्षा की जाकर उचित कार्यवाही की जावेगी?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) नगरीय निकायों द्वारा दुकान निर्माण से पूर्व नजूल अधिकारी से अनापत्ति प्रमाण पत्र एवं निर्धारित प्रब्याजी एवं भू-भाटक शासन मद में जमा किये बिना निर्माण कार्य करने संबंधी विगत् 03 वर्षों में आगर एवं शाजापुर जिला अन्तर्गत कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, परन्तु विधानसभा अता. प्रश्न क्रमांक 3608, जुलाई 2016 के परिप्रेक्ष्य में नगर परिषद् नलखेड़ा में निर्मित दुकानों के संबंध में कार्यालय कलेक्टर जिला आगर में जाँच संबंधी कार्यवाही प्रचलन में है। (ख) कार्यालय कलेक्टर जिला आगर में नगर परिषद् नलखेड़ा में निर्मित दुकानों के संबंध में जाँच संबंधी कार्यवाही प्रचलन में है। (ग) नगर परिषद् नलखेड़ा जिला आगर के अतिरिक्त उज्जैन संभाग अन्तर्गत कोई प्रकरण संज्ञान में नहीं आया है। (घ) विधानसभा क्षेत्र सुसनेर अन्तर्गत विगत् 03 वर्षों में नजूल अधिकारी की अनापत्ति के आधार पर किसी भूमि का आवंटन नहीं किया गया है, शेषांश की जानकारी निरंक है।

 

श्री मुरलीधर पाटीदार--अध्यक्ष महोदय, मेरा मंत्री जी से आग्रह यह है कि जो नरखेड़ा में 2 सालों से दुकानों की जांच चल रही है वह एकाध महीने में पूरी हो जाएगी उसमें जो दोषी होंगे उनके खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज होगी ? जांचकर्ता भी ढुलमुल नीति अपना रहे हैं उनके खिलाफ भी कार्यवाही होनी चाहिये ?

श्रीमती माया सिंह--अध्यक्ष महोदय, जांच को एक महीने के अंदर पूरा करवा लेंगे. उसमें जो दोषी होगा उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी.

श्री मुरलीधर पाटीदार--अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी एक और आग्रह है कि सारे शहर में अतिक्रमण हो रहा है उसको भी हटवाया जाये वहां की सड़कें व्यवस्थित की जाएं. वहां पर जब भी जायें वहां पर वाहन ही नहीं निकल पाता है.

श्रीमती माया सिंह--अध्यक्ष महोदय, यह सवाल इससे संबंधित नहीं है. लेकिन यह जो समस्य माननीय सदस्य जी ने उठायी है, यह समस्या कई शहरों में है, उसके निराकरण के लिये एक पूरी योजना तैयार करेंगे.

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत स्‍वीकृत सड़कें

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

12. ( *क्र. 1789 ) श्री वेलसिंह भूरिया : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सरदारपुर विधान सभा क्षेत्र में कितनी प्रधानमंत्री सड़कें स्‍वीकृत हैं, इनमें से कितनी पूर्ण एवं कितनी अपूर्ण हैं? (ख) 250 की आबादी तक के ग्रामों एवं मजरे टोलों को प्रधानमंत्री सड़क से कब तक जोड़ा जायेगा? (ग) क्‍या प्रश्‍नकर्ता द्वारा इन सड़कों की गुणवत्‍ता ठीक न होने एवं रिनीवल कोट की घटिया गुणवत्‍ता की जाँच की मांग की गई थी? (घ) यदि हाँ, तो क्‍या विभाग इनकी गुणवत्‍ता की जाँच क्षेत्रीय विधायक के समक्ष करवायेगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) कुल 86 सड़कें स्वीकृत हैं, इनमें से 78 सड़कें पूर्ण हैं, 03 मार्ग प्रगतिरत एवं 05 मार्ग स्वीकृत होकर निविदा प्रक्रिया में हैं। (ख) प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत 250 से कम आबादी के ग्रामों एवं मजरे टोलों को जोड़ने का प्रावधान नहीं है. (ग) जी नहीं। (घ) उत्तरांश (ग) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्री वेलसिंह भूरिया--अध्यक्ष महोदय, मेरा माननीय मंत्री जी से प्रश्न है कि हमारे धार जिले के सरदारपुर विधान सभा में प्रधानमंत्री सड़क कितनी स्वीकृत हैं, कितनी पूर्ण हैं. पंचायत एवं ग्रामीण विकास की सड़कें कितनी पूर्ण हैं और कितनी अपूर्ण हैं और कितनी सड़कें स्वीकृत हुई थीं? पहले तो प्रधानमंत्री सड़क के बारे में बता दें कि कितनी स्वीकृत हैं उसमें कितनी पूर्ण हैं और कितनी अपूर्ण हैं ?

श्री गोपाल भार्गव--अध्यक्ष महोदय, यह क्षेत्र अथवा जिले का पूछ रहे हैं.

श्री वेलसिंह भूरिया--अध्यक्ष महोदय, मैं सिर्फ सरदारपुर विधान सभा क्षेत्र का पूछ रहा हूं.

श्री गोपाल भार्गव--अध्यक्ष महोदय, विधान सभा क्षेत्र सरदारपुर में 384 किलोमीटर की लम्बाई के कुल 86 मार्ग जिनकी लागत 122 करोड़ 93 लाख रूपये है. स्वीकृत की गई हैं जिनकी लम्बाई 331 किलोमीटर है. 78 मार्ग लागत 79.85 करोड़ रूपये से पूर्ण हो गये हैं. 8.10 किलोमीटर के शेष तीन मार्ग रूपये 3 करोड़ 73 लाख लागत के मार्ग प्रगतिरत हैं जिनकी कुल लम्बाई 44.65 किलोमीटर है. शेष 5 मार्ग जिनकी लागत 33.65 के हैं, वह निविदा प्रक्रिया में हैं.

श्री वेल सिंह भूरिया - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि शासन के नियमानुसार 250 की आबादी तक राजस्व ग्राम एवं मजरे,टोलों में कब तक प्रधानमंत्री सड़क बना दी जायेगी और पंचायत ग्रामीण विकास विभाग से भी कब तक सड़क बना दी जायेगी ? दोनों विभाग आपके पास है.

श्री गोपाल भार्गव - अध्यक्ष महोदय,ट्रायवल इलाकों तक हम यह कर चुके हैं. जो जनजाति के गांव हैं उनमें हम यह कनेक्टिविटी कर चुके हैं.

अध्यक्ष महोदय - प्रश्नकाल समाप्त

श्री वेल सिंह भूरिया - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा अधूरा प्रश्न रह गया है.

अध्यक्ष महोदय - आपका प्रश्न आ गया.

श्री वेल सिंह भूरिया - गलत बात है माननीय अध्यक्ष महोदय,मेरा निवेदन है कि प्रश्न मुश्किल से लगता है. सुन्दरलाल तिवारी या कोई और होता तो आप 20 मिनट दे देते हैं. मेरे लिये एक मिनट नहीं है. मैं यह जानना चाहूंगा कि मेरी सरदारपुर तहसील में 800 मजरे,टोले हैं. 216 गांव हैं. 216 गांव में से आज भी 50 ग्रामों में कनेक्टिविटी नहीं है. रोडों से जुड़ा नहीं है. तो शेष गांवों को कब तक प्रधानमंत्री सड़क और मुख्यमंत्री सड़क योजना से जोड़ा जायेगा.

अध्यक्ष महोदय - बैठ जाएं. समय हो गया. समय के बाद भी आपको समय दिया. प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद भी आपको समय दिया. अब आप मत लड़िये और बैठ जाईये कृपा करके.

(प्रश्नकाल समाप्त)

 

 

12.02 बजे विशेष उल्लेख

(1) अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर जबलपुर की लड़की द्वारा एशिया कप में गोल्ड मैडल जीतने पर बधाई

खेल एवं युवक कल्याण मंत्री(श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया) - माननीय अध्यक्ष महोदय, आज महिला दिवस के अवसर पर खुशखबरी हमारे विभाग की यह है कि मुस्कान किरार जो जबलपुर की लड़की है और हमारे मध्यप्रदेश आर्चरी एकेडमी की लड़की है. 16 साल की उम्र में सबजूनियर होकर सीनियर में जाकर एशिया कप में जाकर इंडीवीजुअल गोल्ड मैडल लेकर आयी है. एशिया कप विश्व मंच में बहुत बड़ा काम्पटीशन रहता है. मैं इस सदन के माध्यम से पूरे मध्यप्रदेश को बधाई देना चाहता हूं कि वाकई में हम खेल एवं युवक कल्याण विभाग के माध्यम से हमारी बच्चियों को हम एक ऐसे विश्व स्तर के मंच पर लेकर आए हैं. गोल्ड मैडल जीतकर बच्ची आई है. आप सबको बहुत-बहुत बधाई.

बधाई

(2)अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं को बधाई

अध्यक्ष महोदय - आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है. हमारी संस्कृति में महिलाएं हमेशा सम्मानित रही हैं और समाज में उनका महत्वपूर्ण स्थान और भूमिका है. वे अपने गुणों के आधार पर इस धरा पर उत्तरोत्तर इतिहास रचती आयी हैं. मुझे विश्वास है कि वे भविष्य में सफलता के नए प्रतिमान स्थापित करेंगी. महिला दिवस के अवसर पर मैं अपनी और पूरे सदन की ओर से हमारी समस्त महिलाओं,बहनों को बधाई और शुभकामना देता हूं और बेटी मुस्कान को भी सदन की ओर से बधाई देता हूं और माननीय मंत्री जी को भी साधुवाद जिनके नेतृत्व में यह हो रहा है.

श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्यक्ष महोदय, अगले साल तो निजाम बदल जायेगा. नहीं तो महिला दिवस पर महिला सदस्य प्रश्न करें और महिला मंत्री उत्तर दें तो ज्यादा अच्छी परम्परा हो जाये.

 

 

 

 

 

 

 

12.03 बजे नियम 267-क के अधीन विषय

1. प्रदेश की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को उन्नत वेतनमान दिये जाने

 

श्री बहादुर सिंह चौहान(महिदपुर) माननीय अध्यक्ष महोदय,मेरी शून्यकाल की सूचना इस प्रकार है :-

2.श्योपुर विधान सभा क्षेत्र के ग्राम कूण्ड,कनापुर,कठौदी सहित 35 ग्रामों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध करायी जाने

श्री दुर्गालाल विजय(श्योपुर) - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी शून्यकाल की सूचना की सूचना इस प्रकार है :-

 


 

इंजीनियर प्रदीप लारिया (नरयावली) - (अनुपस्थित)

 

 

( 3) सिवनी शहर के नेताजी सुभाष चन्द्र बोस कन्या महाविद्यालय में उर्दू विषय के शिक्षकों के पद सृजित करना

 

श्री दिनेश राय (सिवनी) - माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

श्री प्रदीप अग्रवाल (सेंवढ़ा) - (अनुपस्थित)

 

श्री आशीष गोविन्द शर्मा (खातेगांव) - (अनुपस्थित)

 

 

 

(4) रेत के खनन के चलते वन्य प्राणी घड़ियालों की वंश वृद्धि समाप्त होना

 

 

डॉ. गोविन्द सिंह (लहार) - माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

(5) पोहरी विधान सभा क्षेत्र में अल्पवर्षा के कारण पेयजल समस्या होना

 

श्री प्रहलाद भारती (पोहरी) - माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

(6) छतरपुर तहसील के नौगांव, महाराजपुर, गौरिहार लवकुश नगर में ओलावृष्टि से नष्‍ट हुई फसलों का मुआवजा मिलना

श्री मानवेन्‍द्र सिंह (महाराजपुर) -- अध्‍यक्ष महोदय,

(7) कटनी जिले के बहोरीबंद अंतर्गत संचालित हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल भवन विहीन होना

कुंवर सौरभ सिंह (बहोरीबंद) -- अध्‍यक्ष महोदय,

12.11 बजे शून्‍यकाल में मौखिक उल्‍लेख

(1) भाण्‍डेर नगर परिषद के जल आवर्द्धन के कार्यों में भ्रष्‍टाचार होना

श्री घनश्‍याम पिरौनिया (भाण्‍डेर) -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि मेरी विधानसभा भाण्‍डेर में नगर परिषद को शासन के द्वारा 14 करोड़ रुपये आवंटित किये थे. पार्षदों एवं स्‍थानीय नागरिकों ने शिकायत की है कि वहां जल आवर्द्धन के जो काम चल रहे हैं, टंकी बन रही है उसमें भारी भ्रष्‍टाचार हो रहा है. निवेदन है कि माननीय मंत्री महोदय इस पर विचार करें और कार्यवाही करें.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप लिखकर दे दीजिये.

(2) ग्‍वालियर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के ग्रामों में खदानें बंद होने से मजदूरों का बेरोजगार होना

श्री भारत सिंह कुशवाह (ग्‍वालियर ग्रामीण) -- अध्‍यक्ष महोदय, ग्‍वालियर ग्रामीण विधान सभा क्षेत्र में ग्राम महेश्‍वरा, महेन्‍द्रपुर, परसी में पत्‍थर की खदान बंद किये जाने के कारण मजदूरों को गंभीर आर्थिक हानि हुई है और मजदूर बेरोजगार हो गये हैं. उनका भरण-पोषण बहुत मुश्किल हो गया है. खदान शीघ्र प्रारंभ नहीं करने के कारण मजदूरों में असंतोष व्‍याप्‍त है. उक्‍त खदान को शीघ्र प्रारंभ किये जाने की आवश्‍यकता है.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप बैठ जाइये. आप लिखकर दे दीजिये.

 

 

 

 

12.13 बजे पत्रों का पटल पर रखा जाना

 

 

(1) मध्‍यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग की अधिसूचना क्रमांक 1629/.प्र.वि.नि.आ. /2017, दिनांक 15 नवम्‍बर, 2017

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

(2)- (क) अधिसूचना क्रमांक एफ 44-23-15-बीस-2, दिनांक 03 जून, 2017

(ख) अधिसूचना क्रमांक एफ 44-23-2015-बीस-2, दिनांक 24 अगस्‍त, 2017

(3) मध्‍यप्रदेश स्‍टेट टेक्‍सटाइल कार्पोरेशन लिमिटेड, भोपाल (म.प्र.) का 40 वां वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखा (वर्षान्‍त 31 मार्च, 2011)

 

 

 

 

 

 

12.14 बजे ध्‍यानाकर्षण

 

(1) श्योपुर जिले के विजयपुर क्षेत्र में जल स्तर वृद्धि हेतु बांध निर्माण की स्वीकृति न दिया जाना

श्री राम निवास रावत (विजयपुर) -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरी ध्‍यानाकर्षण की सूचना इस प्रकार है-

 

 

12.15 बजे {उपाध्यक्ष महोदय (डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुए.}

जल संसाधन मंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र) -- उपाध्यक्ष महोदय,

श्री रामनिवास रावत -- उपाध्यक्ष महोदय, मैं समझता हूं कि पहले कोई दूसरा वक्तव्य प्रस्तुत किया गया था. अभी कोई दूसरा वक्तव्य पढ़ रहे हैं. ये अलग अलग हैं.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- उपाध्यक्ष महोदय, मैं जो पढ़ूंगा, वही सही माना जायेगा.

उपाध्यक्ष महोदय -- जी हां. मंत्री जी, आप पढ़ें.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- उपाध्यक्ष महोदय,

 

रामनिवास रावत जी, क्‍या पहले वाले जवाब में मेरे दस्‍तखत हैं ? जो पढ़ा है उसी जवाब पर दस्‍तखत हैं.

श्रीमती ऊषा चौधरी (रैगांव) -- माननीय मंत्री महोदय जी, जिस तरह आपने कहा कि प्रदेश के हर कोने में संकट नहीं है. मेरे सतना जिले में लोग प्‍यासे मर रहे हैं, किसानों की बात ही छोड़ दीजिए. बाणसागर का पानी नहीं छोड़ा जा रहा है. वर्ष 2017-18 में बरगी बांध की घोषणा भी आपके द्वारा की गई थी लेकिन वह भी पूरी नहीं हुई है.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- आप राज्‍यपाल जी के अभिभाषण पर बोलने वाली हैं, उस समय अपनी बात कह लीजिएगा. मंत्री जी, अपने वक्‍तव्‍य में एक सुधार कर लीजिए. इसके प्रथम पैरा के अंत में लिखा है कि ''रबी में तथा 2.35 हेक्‍टेयर में खरीफ में सिंचाई की गई है.'' इसमें 'लाख' शब्‍द जोड़ लीजिए. यह दस्‍तखत के साथ मेरे पास है.

श्री रामनिवास रावत -- जो पढ़ा है वही इन्‍होंने प्रस्‍तुत किया है.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- आप जब-जब आंख बंद करके इनकी मानेंगे तो ऐसे ही गलत साबित होंगे.

श्री रामनिवास रावत -- असल में मेरे पास दो विभागों से उत्‍तर आया है, पेयजल संकट का भी हवाला देने के कारण लोकस्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग से भी उत्‍तर आ गया है.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- रामनिवास जी, आपने एक दर्जन बांध का ध्‍यानाकर्षण किया है..(हंसी)..

श्री रामनिवास रावत -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जल संसाधन विभाग के मंत्री महोदय डॉ. नरोत्‍तम मिश्र जी काफी सक्षम मंत्री हैं. ये ताकतवर भी हैं और जो चाहते हैं वह कर लेते हैं. आपके विभाग के एसीएस और अन्‍य अधिकारी भी बहुत ताकतवर हैं.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैंने अपना ध्‍यानाकर्षण श्‍योपुर जिले के विजयपुर क्षेत्र से शुरू किया है. मैं श्‍योपुर क्षेत्र से बाहर नहीं गया. माननीय मंत्री जी ने ध्‍यानाकर्षण के उत्‍तर में पूरे प्रदेश में सिंचाई की सुविधाओं का विस्‍तार, सिंचाई सुविधाओं की क्षमता के बारे में बताया है.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- रामनिवास जी, क्‍या आप इसे गलती मानते हैं ?

श्री रामनिवास रावत -- नहीं नहीं, मैं इसे गलती नहीं मान रहा हूँ. मैं आपको धन्‍यवाद दे रहा हूँ कि आपने सिंचाई क्षमताओं का विस्‍तार किया. जितना विस्‍तार किया उतनी आप सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- मंत्री जी, तुम डाल-डाल तो हम पात-पात.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- उपाध्‍यक्ष जी, हमारा इनका काफी लंबा साथ है.

श्री रामनिवास रावत -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं पूरे प्रदेश की बात नहीं करना चाहूँगा, फिर भी आप देख लें कि आपकी सिंचाई क्षमता 42 लाख हेक्‍टेयर है और आप 27 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र में सिंचाई कर पा रहे हैं. 15 लाख हेक्‍टेयर का पानी कहां जा रहा है, क्षमताओं का विस्‍तार तो चाहे जितना हो जाए, लेकिन सिंचाई एरिया भी उतना ही होना चाहिए.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- मूल उत्‍तर में ले लिया है.

श्री रामनिवास रावत -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा ध्‍यानाकर्षण केवल मेरे क्षेत्र से संबंधित है. मैं माननीय मंत्री जी से अनुरोध करूंगा, चाहे तो आप किसी को भेजकर दिखवा लें, मेरे क्षेत्र में यह स्‍थिति उत्‍पन्‍न हो गई है कि 30-30 किलोमीटर तक पेयजल के लिए पानी नहीं है. हजार-हजार फुट तक बोर करवा चुके हैं, पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा है. नदियां सब सूख गई हैं, सिंचित क्षेत्र सूख गए हैं. रबी की बोवनी पूरे विधान सभा क्षेत्र में किसी किसी के यहां मुश्‍किल से 5 या 10 प्रतिशत हुई होगी, अन्‍यथा पूरी तरह से सूखा पड़ा हुआ है. नगर में भी पेयजल के लिए 55 बोर थे, 50 बोर लगभग सूख गए हैं, अभी 2-3 बोर नदी में कराए हैं, उनमें पानी मिला है. मेरा निवेदन केवल सिंचाई क्षमताओं के विस्‍तार से है. एक बारधा बांध भी था, वह बना, टूट गया, आपने उसकी राशि भी स्‍वीकृत कर दी, उसे ठेकेदार छोड़कर भाग गया, कृपया इसको भी दिखवा लें. अपने अधिकारियों को निर्देशित कर दें कि इसको बनवाने की व्‍यवस्‍था करें. ठेकेदार भाग गया है तो विभागीय स्‍तर पर व्‍यवस्‍था करें. चेटीखेड़ा बांध के लिए पिछली विधान सभा में अनुदान मांगों के दौरान 21 मार्च, 2017 को आपने घोषणा की थी कि, ''चेटीखेड़ा बांध की 9950 हेक्‍टेयर की परियोजना 330 करोड़ रुपये की स्‍वीकृति की घोषणा करता हूँ.'' उपाध्‍यक्ष जी, घोषणा हुए एक साल हो गया लेकिन अभी तक इसकी प्रशासकीय स्‍वीकृति जारी नहीं हुई है. इस बार भीषण जलसंकट उत्‍पन्‍न हो गया है, अभी भी मेरे क्षेत्र में 25 दिनों से धरना चल रहा है और 5-6 दिनों से लोग भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं. हम चाहते भी हैं कि क्षेत्र का विकास हो, क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्‍तार हो और मंत्री जी ने पिछले वर्ष के बजट भाषण में सहृदयता से इसे स्‍वीकार भी किया था, लेकिन अभी तक प्रशासकीय स्‍वीकृति जारी नहीं हुई है. माननीय मंत्री जी ने यह भी उल्‍लेख किया है कि परियोजना के लिए बजट में भी प्रावधान किए गए हैं. माननीय मंत्री जी से मेरा सीधा-सीधा एक प्रश्‍न है कि इस परियोजना की प्रशासकीय स्‍वीकृति कब तक जारी कर दी जाएगी और बजट में प्रावधान किए गए हैं तो आपकी बजट पुस्‍तक के कौन-से पृष्‍ठ पर कितनी राशि का प्रावधान चेटीखेड़ा बांध बनाने के किया गया है ? आपने जो प्रमुख सहरिया जनजाति के द्वितीय विस्‍थापन की बात कही है केवल दो गांवों के कुछ परिवार आते हैं उन्‍होंने भी अपनी लिखित सहमति ग्राम सभा के प्रस्‍ताव के माध्‍यम से अन्‍य जगह विस्‍थापन होने के लिए प्रदान कर दी है तो इसमें कोई आपत्ति नहीं है और स्‍थानीय स्‍तर पर स्‍थानीय प्रशासन ने उनके लिए जमीन भी देख ली है विस्‍थापन के लिए जमीन भी देख ली है और अब जमीन के बदले जमीन देने की भी कार्यवाही सरकार कराएगी.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- अब आप अपना उत्‍तर ले लीजिए.

श्री रामनिवास रावत -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से यह निवेदन करना चाहता हॅूं कि इन सारी चीजों का, इन सारी परेशानियों का हल निकालते हुए चेटीखेड़ा बांध की परियोजना की प्रशासकीय स्‍वीकृति जारी करने की घोषणा करें.

डॉ.नरोत्‍तम मिश्र -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय रावत जी ने कुल 17 प्रश्‍न किए हैं. मैं पहले प्रश्‍न से शुरू करता हॅूं और 17 प्रश्‍नों का जवाब देना चाहता हॅूं.

श्री रामनिवास रावत -- अभी एक ही प्रश्‍न है. अभी एक-दो हैं. ठीक है, 17 प्रश्‍नों के ही जवाब दे दीजिए.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- क्‍योंकि रिकॉर्ड में तो 17 प्रश्‍न ही आ गए होंगे. माननीय रावत जी ने कहा कि 42 लाख का रकबा था और कुल 32 लाख की है. सिंचाई का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी, जो आवश्‍यक हैं उन्‍हीं का ही जवाब दे दीजिए.

श्री रामनिवास रावत -- माननीय मंत्री जी, मुझे केवल मेरी विधानसभा क्षेत्र का ही उत्‍तर दे दीजिए. बाकी का नहीं.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- आपकी विद्वता पर कोई शक नहीं है और दोनों अति विद्वान लोग आमने-सामने हैं.(हंसी..)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- माननीय उपाध्‍यक्ष जी, मैं सिर्फ इतनी ही प्रार्थना कर रहा हॅूं कि दरअसल यह जो चेटीखेड़ा बांध है यह सच है कि मैंने पिछले बजट सत्र के दौरान ऐसा कहा था. उसके बाद में उसकी स्‍वीकृति भी हुई, बाकी चीजें हमने कीं क्‍योंकि वह पुनर्स्‍थापन का था. एक बार कूनो के कारण से हमारे जनजाति भाई सहरिया लोग वहां विस्‍थापित हुए थे उन्‍हें दूसरी जगह विस्‍थापित करना था और पर्यावरण की तकनीकी स्‍वीकृति केन्‍द्र सरकार पर लंबित थी. हमने बजट में प्रावधान किया है यह भी सच है लेकिन श्री रावत जी ने एक और प्रश्‍न किया कि वह कौन-से पृष्‍ठ पर है क्‍या है. आज बताने की स्थिति में नहीं हॅूं जितना आज बताने की स्थिति में था, उतना लिखित में आपको जवाब दे दिया है. चूंकि विभाग का बजट आने वाला ही है. पुस्‍तक आपके पास भी आएगी. प्रतिवेदन आप स्‍वयं भी देख लेंगे. आप काफी पढे़-लिखे व्‍यक्ति हैं.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, श्री रावत जी से मेरी प्रार्थना है चूंकि केन्‍द्र की अनुमतियां आनी हैं अगर हमने आज जो यह चाहते हैं जारी करने का, मैं आज भी घोषणा कर सकता हॅूं लेकिन उससे उसमें व्‍यवधान आ जाएगा. सरकार ईमानदारी से उसका निर्माण चाहती है. इसीलिए यह उसमें लिखा कि बजट में प्रावधानित हो गई है. थोड़ा-सा समय दें, हो सकता है कि हम इसी मास में उसे पूरी कर लें. जो केन्‍द्र की अनुमतियां हैं, हो सकता है वह अगले मास तक हो जाएं. अगर दें तो ठीक है अन्‍यथा मैं आज भी कह सकता हॅूं कि हम एक हफ्ते में जारी कर सकते हैं. लेकिन फिर अगर न बन पाए तो अगले सत्र में इन्‍हें वादा करना पडे़गा कि ये प्रश्‍न नहीं लगाएंगे. मैं वैसे ही नहीं कह रहा हॅूं. श्री रावत जी, मैं एक सवाल का जवाब और दूंगा. माननीय रावत जी बहुत जागरूक विधायक हैं लंबे समय से इनका और हमारा साथ है. उस समय ऐसे ही जैसे आज डॉ. नरोत्‍तम मिश्र, जल संसाधन, मंत्री को इन्‍होंने घेरा, उस समय जब ये मंत्री थे उस समय के जल संसाधन मंत्री को घेर लेते तो वहां पर एकाध तो बन जाती. इन्‍होंने एक भी नहीं बनवाई.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- श्री रावत जी, उस शर्त से आप तैयार हैं. माननीय मंत्री जी ने जो शर्त लगायी है कि घोषणा कर देंगे लेकिन अगर अनुमति नहीं आयी.

श्री रामनिवास रावत -- नहीं, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय. माननीय मंत्री जी ने अभी जो उत्‍तर दिया था उसमें मेरे ख्‍याल से या तो मैं सुन नहीं पाया या रिकॉर्ड में निकलवाकर देख लें. मंत्री जी ने यह कहा था कि इस मार्च तक या अगले मार्च तक.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- इस मार्च में या अप्रैल तक ऐसा कहा है मैंने यही दो महीने कहा है. ज्‍यादा लंबा समय नहीं खीचा. एक माह या दो माह के अंदर हमारी वे अनुमतियां कंपलीट हो जाएंगी.

श्री रामनिवास रावत -- आपने अगला मार्च बोल दिया था. आप रिकॉर्ड उठाकर देख लीजिए.

डॉ.नरोत्‍तम मिश्र -- देख लीजिए. मैंने अगला मार्च नहीं कहा.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- श्री रामनिवास जी, माननीय मंत्री जी ने अगले मार्च नहीं कहा. इसी मार्च में या एक-दो महीने.

डॉ.नरोत्‍तम मिश्र -- उपाध्‍यक्ष जी भी तो सुन रहे हैं. श्री रावत जी, थोड़ा-बहुत तो यहां ध्‍यान रखा करो. हमेशा वहीं ध्‍यान रखते हो..(हंसी...)

श्री रामनिवास रावत -- ध्‍यान तो रहता है.

डॉ. नरोत्तम मिश्र-- उपाध्यक्ष महोदय, वह एक कहावत है कि " सर हो सजदे में मगर दिल में हो दुनिया का ख्याल" तो फिर इबादत हो ही नहीं सकती है.(हंसी)

उपाध्यक्ष महोदय-- अभी तो इनको सिंचाई का ही ख्याल है.

श्री रामनिवास रावत-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, अभी तो केवल सिंचाई का ख्याल है. परियोजना में बजट प्रावधान के लिए माननीय मंत्री जी कह ही दिया है.

उपाध्यक्ष महोदय-- चेटीखेड़ा का तो आपका हो ही गया है.

श्री रामनिवास रावत--  लिख कर दिया है.

डॉ. नरोत्तम मिश्र-- मैंने कहा नहीं है, मैंने इनको लिखकर दिया है.

श्री रामनिवास रावत-- लिखकर दिया है तो हो ही जाएगा लेकिन अभी जो बजट पुस्तक प्रस्तुत की थी मैंने वह भी पढ़ी है उसमें इसका जिक्र नहीं है इसलिए मैं कह रहा हूँ.

डॉ. नरोत्तम मिश्र-- उपाध्यक्ष महोदय, मैं एक बार फिर दोहरता हूँ कि मेरे विभाग का बजट आने वाला है उसमें हो जाएगा थोड़ा-सा तो धैर्य रखें.

श्री रामनिवास रावत-- इसके लिए धन्यवाद है और धैर्य भी है.दूसरा मेरा प्रश्न था आपने लिखा है कि साध्य परियोजनायें मिलने पर स्वीकृतियाँ दी जा रही हैं. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं अपने क्षेत्र की सिंचाई का रकबा बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा हूँ और बात कर रहा हूँ मैं ईड़न नदी पर लोढ़ी के बांध के लिए भी लगातार प्रयास कर रहा हूँ इसमें उसका हवाला दिया गया है, उत्तर में नहीं आया है.आपके मध्यप्रदेश शासन के जल संसाधन विभाग का, वल्लभ भवन का मेरे पास एक पत्र है जो कि 5 अक्टूबर 2007 का है. यह मेरे नाम से आया है कि रामनिवास रावत, विधायक, ग्राम गांवड़ी में ईड़न नदी पर बाँध बनाने बाबत्. उपरोक्त संदर्भित पत्र के परिप्रेक्ष्य में विषयांकित प्रकरण से संबंधित वस्तु स्थिति यह है कि दिनाँक 6.8.2007 को मैदानी अधिकारियों द्वारा बाँध निर्माण हेतु किये गये स्थल निरीक्षण के दौरान बाँध हेतु स्थल साध्य पाया गया. उक्त योजना हेतु उनके द्वारा सर्वेक्षण का प्रस्ताव तैयार किया जाना है.इसके बाद ईएनसी का भी पत्र है कि यह योजनायें साध्य पाई गईं और इसके लिए भी मैं लगातार प्रयासरत् हूँ. पिछली बार 28 दिसंबर को इसको लेकर के लोगों ने आंदोलन किया था और मुख्यमंत्री जी से आकर मिले थे और उन्होंने आश्वासन दिया था तो क्या इस योजना को भी जो कि साध्य पाई गई है इसकी स्वीकृति प्रदान करने की भी कृपा करेंगे? इसकी घोषणा कर दें इसमें तो कोई आपत्ति नहीं है.

डॉ. नरोत्तम मिश्र-- उपाध्यक्ष महोदय, साध्यता जारी कर दी गई है अभी रामनिवास जी मुझसे साध्यता की अनुमति ले लें लेकिन.. ठीक है ना ? संतुष्ट ?

श्री रामनिवास रावत-- क्या कह रहे हैं?

उपाध्यक्ष महोदय--  इसमें कुछ किन्तु परन्तु भी हैं.

डॉ. नरोत्तम मिश्र-- उपाध्यक्ष महोदय, नहीं-नहीं, वह दूसरी चीज है वह पॉलिटिकल है.

श्री रामनिवास रावत-- क्या चीज, क्या है?

डॉ. नरोत्तम मिश्र-- उपाध्यक्ष महोदय, इसका जवाब आपका दे दिया कि साध्यता जारी कर दी गई है.

श्री रामनिवास रावत-- स्वीकृति की बात है.

डॉ. नरोत्तम मिश्र-- स्वीकृति की ही तो कह रहा हूँ. स्वीकृति जारी कर दी गई है आपको कागज भी दे देता हूँ.

श्री रामनिवास रावत--साध्यता की स्वीकृति या प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी गई है?

डॉ. नरोत्तम मिश्र-- उपाध्यक्ष महोदय, साध्यता की स्वीकृति का कह रहा हूँ. आपने जो पत्र पढ़ा है उसमें साध्य शब्द पढ़ा है.आपने जो पढ़ा है मैं उसका जवाब दे रहा हूँ.इन्होंने जो साध्य शब्द पढ़ा है वह साध्यता जारी कर दी गई है यह जवाब मैंने उसका दिया है. वह वकील हैं. शब्दों के जादूगर हैं.

उपाध्यक्ष महोदय-- वह भी बहुत चतुर हैं.

श्री रामनिवास रावत-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, साध्यता का तो 2007 में ही मध्यप्रदेश शासन का मेरे पास पत्र आ गया. यह मेरे पास पत्र है.

उपाध्यक्ष महोदय--  आपने साध्यता पूछी थी तो उन्होंने साध्यता का बताया.

डॉ. नरोत्तम मिश्र-- उपाध्यक्ष महोदय, इन्होंने पूछी नहीं थी. इन्होंने कहा कि साध्य पाई गई है उस पत्र में यही लिखा है.

श्री रामनिवास रावत--आपने लिखा है कि साध्य परियोजनायें मिलने पर स्वीकृतियाँ दी जा रही हैं क्या आप इसकी प्रशासकीय स्वीकृति या इसको बनाने की स्वीकृति जारी करेंगे?

डॉ. नरोत्तम मिश्र-- उपाध्यक्ष महोदय,डीपीआर तो सर्वे के बाद ही जारी होगी ना, वह जारी हो जाएगी.

श्री रामनिवास रावत--डीपीआर बनाने के निर्देश जारी कर देंगे इसे स्वीकृत करवाएंगे?

डॉ. नरोत्तम मिश्र-- उपाध्यक्ष महोदय,करवाएंगे.

श्री रामनिवास रावत-- बहुत-बहुत धन्यवाद.

पंचायत मंत्री(श्री गोपाल भार्गव)-- रावत जी, दो प्रकार की साध्यतायें होती हैं एक तो यह टेक्नीकल है दूसरी है राजनीतिक साध्यता, उसमें हमारे नरोत्तम जी माहिर हैं.

श्री रामनिवास रावत-- उपाध्यक्ष महोदय , मैं केवल प्रशासकीय स्वीकृति की बात कर रहा हूं.

उपाध्यक्ष महोदय-- आपकी दो योजनाओं की स्वीकृतियाँ हो गई हैं.

डॉ. नरोत्तम मिश्र-- उपाध्यक्ष महोदय, फिर भी नहीं बैठ रहे हैं.

श्री रामनिवास रावत-- मेरा आखिरी निवेदन है.

श्री दुर्गालाल विजय-- उपाध्यक्ष महोदय, इस पर मैंने भी दिया है.

उपाध्यक्ष महोदय-- हम आपको भी एक प्रश्न पूछने का अवसर देंगे.

श्री रामनिवास रावत--उपाध्यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र में कुछ लोग 25-30 दिन से धरने पर बैठे हैं और 25 तारीख से भूख हड़ताल पर हैं. मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि वे प्रशासन के अधिकारियों को भेजकर उन लोगों का आन्दोलन समाप्त करवा दें. सर्वदलीय आन्दोलन है, इन्हें मैंने नहीं बैठाया है, स्वप्रेरित है, महिलाएं भी बैठी हैं. सिर्फ पानी की पीड़ा के कारण बैठे हैं. आप अपने प्रशासनिक अधिकारियों को भेजकर धरना समाप्त करवा दें.

श्री गोपाल भार्गव--आप यहां आ जाओ आपको आन्दोलन की जरुरत ही नहीं पड़ेगी (हंसी)

कुंवर विजय शाह--नरोत्तम जी जो बोलते हैं वह होता है आपको लिमिट के बाहर दे दिया है.

श्री रामनिवास रावत--मंत्री जी आप क्यों बैठ गए.

डॉ. नरोत्तम मिश्रा--उपाध्यक्ष महोदय, मुझसे सीनियर दो मंत्री खड़े थे इसलिए बैठ गया था. यह परम्परा हमारे यहां है. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, उन लोगों से आज सुबह चर्चा हो गई है. अभी मुझे लोक निर्माण मंत्री जी ने बताया है, जैसा माननीय रामनिवास जी ने कहा है वह भी निपट जाएगा. परन्तु एक बार मैं और दोहराउंगा कि इतना जागरुक उन्हें उस वक्त भी रहना था.

श्री दुर्गालाल विजय(श्योपुर)--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, 35 गांवों में सिंचाई की व्यवस्था करने की दृष्टि से चंबल नहर से पानी देने की जो प्राथमिक रुप से सहमति दी है उसकी डीपीआर भी बन गई है. इन 35 गांवों में से 12 गांव छोड़ दिए गए हैं. मेरा माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि उन 12 गांवों के लिए सिंचाई की क्या व्यवस्था करेंगे ? दूसरी बात मुजरी बांध की जो डीपीआर तैयार कराई गई है वह डीपीआर अभी यहां प्रस्तुत हुई है या नहीं हुई है यदि नहीं हुई है तो कब तक हो जाएगी और होगी तो उसे कब तक स्वीकृति दे देंगे ?

डॉ. नरोत्तम मिश्रा--उपाध्यक्ष महोदय, पहली बात का तो ध्यानाकर्षण के उत्तर में उल्लेख है माननीय विधायक जी को इसकी एक प्रति भिजवा देता हूँ और दूसरे प्रश्न का भी उल्लेख है. विधायक जी ने बहुत गंभीर व्यवस्था की तरफ ध्यान आकर्षित किया है. अतिशीघ्र इस पर कार्यवाही कर देंगे.

 

(2) मंदसौर एवं समीप के जिलों में मादक पदार्थों की तस्करी होना

 

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया (मंदसौर)--माननीय उपाध्यक्ष महोदय,

गृह मंत्री (श्री भूपेन्द्र सिंह)--उपाध्यक्ष महोदय,

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया (मंदसौर)-- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय ने अपने विभागीय प्रतिउत्‍तर में यह स्‍वीकार किया है कि नित नए प्रयोग तस्‍करों द्वारा किए जा रहे हैं. लगभग तीन दशक पूर्व की बात बता रहा हूं एक तस्‍‍कर शनिवार के दिन मंदसौर, रतलाम के रेलवे स्‍टेशन से मुंबई, शनिदेव की अफीम की मूर्ति बनाकर उस पर प्‍लास्टिक का लेप लगाकर बाल्‍टी में लेकर उसकी तस्‍करी करता है, ऐसा मामला प्रकाश में आया था. मंदसौर, रतलाम, नीमच जिले के तस्‍कर इसमें गरीब लोगों का भी इस्‍तेमाल करते हैं. मंदसौर के बस स्‍टेण्‍ड से रेलवे स्‍टेशन की तरफ एक अंधी महिला जो कि भिखारी थी उसको भी अफीम की थैली देकर स्‍टेशन तक भेजने का मामला प्रकाश में आया था. लगभग दो दशक पूर्व मंदसौर के तत्‍कालीन पुलिस अधीक्षक, पन्‍नालाल ने सार्वजनिक रूप से पत्रकार वार्ता में इस बात को स्‍वीकार करते हुए कहा था जब मैं पत्रकारिता करता था तब मंदसौर जिले का हर चौथा व्‍यक्ति कहीं न कहीं किसी न किसी रूप में तस्‍‍करों से जुड़ा हुआ है या तस्‍करों के साथ उसका उठना-बैठना होता है. उस समय मंदसौर पत्रकार वार्ता में यह रिकार्ड में आया था. नित नए प्रयोग किये जा रहे हैं. अभी एम्‍बूलेंस राजस्‍थान से चलकर आती है, खरीदना बताई जाती है, पीली बत्‍ती होती है, एम्‍बूलेंस लिखा जाता है. सहानुभूति के आधार पर, मानव अधिकार के नाम पर हम टोल नाकों पर उनको रोक नहीं सकते हैं. आप और हम सब जब चलते हैं तो हमको लगता है कि कोई बीमार होगा हम तत्‍काल उसको साईड भी दे देते हैं. यह हमारा मानव स्‍वभाव है लेकिन हमारे मंदसौर, रतलाम, नीमच जिले में जो मादक द्रव्‍य पदार्थों की तस्‍करी हो रही है उसमें कुकरमुत्‍तों की तरह एम्‍बूलेंस रोज बढ़ती जा रही हैं. अगर जिला चिकित्‍सालय मंदसौर के अंदर दो एम्‍बूलेंस ऑलरेडी है तो उसकी बाउन्‍ड्री के बाहर 15 एम्‍बूलेंसों की क्‍या आवश्‍यकता है? यदि मंदसौर में चार प्रमुख बडे़ अस्‍पताल हैं जो कि निजी अस्‍पताल हैं उनकी खुद की एम्‍बूलेंस है तो टेक्‍सी स्‍टेण्‍ड पर टेम्‍पो-ट्रेक्‍स, बोलेरो, मारुति-वेन इन सबको वहां पर एम्‍बूलेंस के रूप में कैसे परमिट किया जाता है? इस पर कहीं न कहीं नियंत्रण लगना चाहिए. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय ने जो 29 मार्च की घटना बताई है 26.03.2015 को स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की मीटिंग में मैंने विधायक होने के नाते इस बारे में आगाह किया था कि मंदसौर-‍नीमच जिले में एम्‍बुलेंस को थोड़ी अधिक सतर्कता के साथ देखा जाए. 29.03.2015 को इस मीटिंग के चार दिन बाद नीमच के पास केसरपुरा में, जिस घटना की जानकारी मंत्री जी ने सदन में अभी दी है. एम्‍बुलेंस क्रमांक एमपी-44-एनऐ-0681 की टक्‍कर कंटेनर से हो गई और गाड़ी में आग लग गई. उस गाड़ी में डोडाचुरा था.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जवाब में यह नहीं आया कि उस गाड़ी में मरीज नहीं था. उस गाड़ी में तीन व्‍यक्ति थे- दिनेश पुत्र मदनलाल निवासी मंदसौर उम्र 33 वर्ष, ईश्‍वर निवासी मंदसौर उम्र 35 वर्ष और प्रशांत निवासी मंदसौर उम्र 32 वर्ष. ये तीनों उस एम्‍बुलेंस में बैठकर राजस्‍थान की ओर जा रहे थे और उस एम्‍बुलेंस में वे जलकर स्‍वाहा हो गए. वे तीनों तस्‍कर आग की भेंट चढ़ गए और इस संबंध में प्रकरण भी दर्ज हुआ, यह बात सही है.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 13.01.2018 को राजस्‍थान की जिस गाड़ी का उल्‍लेख मंत्री जी द्वारा किया गया है. गाड़ी क्रमांक आरजे-03-पी-1856 में 1 क्विंटल 53 किलो डोडाचुरा लेकर जाया जा रहा था जिसमें आरोपी उदयलाल और देवीलाल को संदेह के दृष्टिकोण से पुलिस द्वारा पकड़ा गया है और तो और इस एम्‍बुलेंस के आगे वाहन क्रमांक आरजे-27-यूबी-4198 पायलेटिंग कर रहा था. ये तो अच्‍छा रहा कि पुलिस ने शंका की दृष्टि से इस वाहन को रोका और उसमें से 1 क्विंटल 53 किलो डोडाचुरा जब्‍त किया गया.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से निवेदन करूंगा कि हमारा मंदसौर-रतलाम-नीमच जिला मादक द्रव्‍य पदार्थों के मामले में कुख्‍यात है. एम्‍बुलेंस के माध्‍यम से डोडाचुरा और अफीम का जो परिवहन हो रहा है इसके लिए मंत्री महोदय क्‍या इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि आखिर इन तीनों जिलों में कितने अस्‍पताल हैं और कितनी एम्‍बुलेंस की आवश्‍यकता है ? क्‍या लोग रोज अपने मरीजों को लेकर गुजरात और राजस्‍थान जाते हैं ? इसके बारे में एक नीति बननी चाहिए और इस पर नियंत्रण होना चाहिए. दूसरी बात यह है कि इन वाहनों का रजिस्‍ट्रेशन और इन वाहनों को चलाने वाले ड्रायवरों का वेरीफिकेशन कैसे होगा, यह विभाग तय करे और इसके अतिरिक्‍त मेरा मंत्री जी से यह भी आग्रह है कि स्‍वास्‍थ्‍य विभाग, परिवहन विभाग, पुलिस और पुलिस का नार्कोटिक्‍स विंग ये सभी मिलकर एक संयुक्‍त टीम बनायें और एक नीति बनायें जिससे पिछले दो सालों में एम्‍बुलेंस के माध्‍यम से तस्‍करी की जो घटनायें हुई हैं, इन्‍हें रोकने के लिए एक कारगर और ठोस प्रावधान हो सके.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, विधायक जी की मादक द्रव्‍य पदार्थों की तस्‍करी को लेकर जो चिंता है, मैं उससे सहमत हूं. यह बात सही है कि वहां पर अलग-अलग तरह से तस्‍करी करने का प्रयास लोग करते हैं. इसमें एम्‍बुलेंस के माध्‍यम से तस्‍करी होना भी पाया गया है और पुलिस ने कुछ एम्‍बुलेंस पकड़ी भी हैं. यह बात भी सही है कि मंदसौर-रतलाम-नीमच में एम्‍बुलेंस की तादाद् पिछले कुछ समय में अचानक से बढ़ी है और इससे यह शंका निश्चित रूप से होती है कि एम्‍बुलेंस का उपयोग तस्‍करी में लोग कर रहे होंगे, इसलिए हमने यह निश्चित किया है कि जितनी भी एम्‍बुलेंस इन तीनों जिलों में है, उन सभी का हम वेरीफिकेशन करवायेंगे और हम जांच करवायेंगे कि एम्‍बुलेंस का वास्‍तविक उपयोग क्‍या हो रहा है, कितनी एम्‍बुलेंस की आवश्‍यकता है, कहां पर ये एम्‍बुलेंस अटैच हैं ?

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसके अतिरिक्‍त हमारे बॉर्डर के जिलों से एम्‍बुलेंस सामान्‍यत: उदयपुर, राजस्‍थान जाती हैं. वहां अस्‍पताल होने के कारण मंदसौर-रतलाम-नीमच के लोग उनका उपयोग करते हैं. इसलिए बॉर्डर के थानों पर भी हम औचक निरीक्षण करवायेंगे जिससे कि इस तरह की एम्‍बुलेंस के माध्‍यम से हो रही तस्‍करी या अन्‍य माध्‍यमों से हो रही तस्‍करी, न होने पाये. इसे भी हम सुनिश्चित करेंगे. इसके अलावा अभी एम्‍बुलेंस के उपयोग, परमिट, फिटनेस का कोई बहुत स्‍पष्‍ट नियम नहीं या कोई स्‍पष्‍ट प्रावधान नहीं है. कोई भी एम्‍बुलेंस का परमिट ले लेता है और वह फिर क्‍या उपयोग कर रहा है, क्‍या उपयोग नहीं कर रहा है, इसका हम लोगों के पास कोई सिस्‍टम नहीं है. उपाध्‍यक्ष महोदय, इसलिये हम लोग एक ज्‍वाईंट कमेटी बना रहे हैं, जिसमें होम विभाग भी होगा, स्‍वास्‍थ्‍य विभाग भी होगा और ट्रांसपोर्ट विभाग भी होगा और हम यह तय करेंगे कि एम्‍बुलेंस के संबंध में कोई एक ऐसी नीति बने कि यह जो एम्‍बुलेंस का अपराध में दुरूपयोग हो रहा है, यह दुरूपयोग न हो पाये, इसलिये इस समिति के रिपोर्ट के आधार पर जो ट्रांसपोर्ट विभाग में हम लोगों को जो नियम लागू करना है वह हम वहां करेंगे, जो हेल्‍थ विभाग से मदद चाहिये वह उनसे लेंगे और जो होम विभाग से इसमें करना है, वह हम करेंगे. इस प्रकार से तीनों विभागों की एक ज्‍वाईंट टीम की मीटिंग करके, इसमें जल्‍द ही एक नीति बनायेंगे. जिससे की इस तरह का दुरूपयोग न हो पाये.

उपाध्‍यक्ष महोदय:- आंकलन कर लिया जाये कि कितनी संख्‍या में एम्‍बुलेंस की जरूरत है.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह:- जी. तात्‍कालिक रूप से हम इस बात की जांच करायेंगे, जो हमारे डीआईजी, नारकोटिक्‍स हैं वह और हमारे जो स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के अधिकारी हैं उनको भी हम लिखेंगे और हमारे गृह विभाग के अधिकारी हैं, हम लोग इसकी ज्‍वाईंट रूप से जांच करेंगे कि वहां पर ऐसी कितनी एम्‍बुलेंस की आवश्‍यकता है, वहां पर कितनी एम्‍बुलेंस रजिस्‍टर्ड हैं, उनका वास्‍तव में कितना उपयोग हो रहा है और किस तरह से उपयोग हो रहा है, यह सारी जांच भी हम लोग करेंगे.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया:- उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी को आपके माध्‍यम से धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि इस गंभीर विषय पर माननीय गृह मंत्री जी ने बहुत गंभीरता दिखायी और अगली नीति और रणनीति बनेगी उस पर प्रकाश डाला.

उपाध्‍यक्ष महोदय, नयी तकनीक और नये-नये संसाधन के साथ जीपीएस सिस्‍टम से भी इसको जोड़ने का अगर आप प्रयत्‍न करेंगे और यदि जीपीएस सिस्‍टम इसमें हो जाता है तो काफी कुछ कारगर मदद हो सकेगी, ऐसी मेरी एक बार पुन: निवेदन के साथ प्रार्थना है,बहुत-बहुत धन्‍यवाद्.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह:- उपाध्‍यक्ष महोदय, काफी अच्‍छा सुझाव है, हम इनको जीपीएस से भी जोड़ देंगे.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया:- बहुत-बहुत धन्‍यवाद्.

डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय(जावरा):- माननीय उपाध्‍यक्ष मंदसौर,रतलाम और नीमच जिला चूंकि संसदीय क्षेत्र है. वह मादक पदार्थों में काफी चर्चित भी रहा है और इससे इंदौर और उज्‍जैन संभाग भी काफी प्रभावित रहा है. एक बड़े पैमाने पर विगत वर्षों में एक हथियार कांड हुआ था और झिरन्‍या में नागदा के पास में एके-47 से लेकर से अनेक अवैध हथियार पकड़े गये थे.

उपाध्‍यक्ष महोदय:- परन्‍तु यह इस विषय से रिलेटेड नहीं है.

डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय:- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह इस विषय से रिलेटेड है. मैं थोड़ी सी बात कहना चाहता हूं, मैं विस्‍तार में नहीं जाऊंगा. मेरा निवेदन यह है कि वह अफीम, हिरोइन और स्‍मेक के बदले नकदी और हथियार प्राप्‍त करके, ऐसा करके उस समय घटनाक्रम घटित हुआ था. हथियार कांड की पुनरावृत्ति आप देख लें.

उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा दूसरा निवेदन है कि यह जो पूरा क्षेत्र है वह गुजरात और राजस्‍थान से लगा हुआ क्षेत्र है. वहां से भी अपराधियों का भी आवागमन होता है, लेकिन लगातार जो टोल नाके आते हैं, वहां पर जितने सीसीटीव्‍ही कैमरे लगे होना चाहिये, उतने नहीं लगे हैं.

उपाध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी ने अन्‍य विभागों की जो कमेटी बनाने की बात कही है मैं उसका स्‍वागत करता हूं. इसमें फूड विभाग को भी जोड़ा जाना चाहिये. अगर आप ध्‍यान देंगे और रतलाम से प्रारंभ करेंगे और नयागांव से चितौड़गढ़ तक पहुंच जायेंगे तो सड़क के दोनों और अनगिनत हजारों की संख्‍या में अवैध ढाबे संचालित किये जाते हैं, जहां देर रात्रि को इस तरह के वाहन रूकते हैं और उन ढाबों के पीछे गड्डे खोदकर के, जगह बनाकर के अफीम भी रखी जाती है, डोडाचुरा भी रखा जाता है, वहां पर कई हत्‍याएं भी हुई हैं.

इसमें मेरा प्रश्‍न यह है कि दुखद बात यह होती है कि जब अपराधी पकड़े जाते हैं और जब अपराधियों का नाम सामने आता है, उनके गांव में, उनकी गली में और उनके निवास तक यदि पहुंचा जाता है तो वह आदमी फटेहाल पाया जाता है, गरीब-मजदूर पाया जाता है. बड़े तस्‍करों तक पहुंचने की कोशिश नहीं की जाती है, उस लिंक तक पहुंचा जाना अत्‍यंत आवश्‍यक है. 20 करोड़ रूपये त‍क की अफीम पकड़ी गयी, 20 करोड़ रूपये की स्‍मेक पकड़ी गयी.

श्री वेलसिंह भूरिया - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, दारू में भी ऐसा ही किया जाये.

डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय - उपाध्‍यक्ष महोदय, वह जो अपराधी है, वह गरीब है, जिसकी झोपड़ी तक नहीं है, जिसके पास कोई वाहन तक नहीं है. उसके पास आखिरकार 20 करोड़ रुपये की अफीम कहां से आई ? कुछ नाम तो चिन्ह्ति हैं, कुछ नाम तो चर्चित हैं, बहुचर्चित नाम हैं. जो विभिन्‍न राजनीतिक दलों में नेतागिरी भी कर रहे हैं. ऐसे अधिकारियों का एवं राजनेताओं का गठजोड़ है लेकिन उन ढाबों पर एवं उनमें रात में जो गतिविधियां होती हैं, उसमें खाद्य विभाग को भी जोड़ा जाये. गुजरात पुलिस, राजस्‍थान पुलिस और मध्‍यप्रदेश पुलिस ऐसी एक संयुक्‍त टीम बनाई जाये. सोराबउद्दीन का जो घटनाक्रम हुआ था.

उपाध्‍यक्ष महोदय - आपका यह सुझाव है. आपने प्रश्‍न नहीं पूछा है.

डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय - उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा मानना है कि तीनों राज्‍यों की एक संयुक्‍त कमेटी बने.

उपाध्‍यक्ष महोदय - राजेन्‍द्र जी, अपराधी पुलिस से एक कदम तो आगे रहता ही है पर कानून के हाथ लम्‍बे होते हैं, वह पल में पकड़ा जाता है. आप यही कहना चाहते हैं कि आप बड़े-बड़े लोगों को पकड़ें.

डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय - उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं सदन, शासन और सबकी मर्यादा के अंतर्गत रहकर यह कहना चाहता हूँ कि कई बार तो नारकोटिक्‍स विभाग के वाहन भी इसमें उपयोग होते हैं, पुलिस विभाग के वाहन का भी इसमें उपयोग किया जाता है. एम्‍बुलेंस की जो बात आई है, वह सब आपके सामने है, इसमें सूक्ष्‍मता में जाने की आवश्‍यकता है.

उपाध्‍यक्ष महोदय - यह आपका सुझाव है. तिवारी जी, आपके यहां तो डोडाचुरा होता ही नहीं है, न ही अफीम होती है. भूमिका बहुत बांधी जा चुकी है, यशपाल जी एवं राजेन्‍द्र जी ने भी बांधी है. परिहार जी, आप प्रश्‍न पूछ लें.

श्री दिलीप सिंह परिहार (नीमच) - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं नीमच का विधायक हूँ. अभी जिस दिन होली थी, उस दिन नीमच के बाहर एक ढाबे पर, जिसके यहां 2 किलो दाल नहीं बनती और वे इतने बड़े-बड़े ढाबे हैं, वहां पर अभी डोडाचूरा पकड़ा गया. डोडाचुरा पकड़ने के बाद अधिकारी वहां पर गए तो उन्‍होंने उस ढाबे का नाम ही दूसरे के नाम पर नामान्‍तरण कर दिया. उसने चार दिन में इसलिए ढाबा नामान्‍तरण कर दिया कि वह उन तक न पहुँच पाये तो मेरा माननीय मंत्री महोदय जी से निवेदन है कि उसके जो पीछे हैं, जिसका मूल ढाबा है, उन लोगों की जांच की जायेगी और लगातार नीमच में भी पहले इस प्रकार के प्रकरण हुए हैं और जो यह किसान आन्‍दोलन हुआ है, इसके पीछे भी बहुत बड़े तस्‍कर और माफिया लोग रहे हैं, यह हमेशा वातावरण बिगाड़ने के लिए तथा लॉ एण्‍ड ऑर्डर को खराब करने के लिए भी इस प्रकार की घटनाएं करते हैं. नीमच से नयागांव तक जो ढाबे हैं, उनको भी चैक किया जाये, उनके मालिकों को भी चिन्ह्ति किया जाना चाहिए. मेरा यही निवेदन है और जिनके खिलाफ डोडाचुरा की कार्यवाही हुई, उनके नीचे तक पहुँचनी चाहिए. वैसे एस.पी. साहब ने वहां कार्यवाही की है मगर मूल आदमी को पकड़ना चाहिए.

उपाध्‍यक्ष महोदय - आपका सुझाव था. प्रश्‍न तो कोई पूछ ही नहीं रहा है. मुझे ऐसा लगता है कि सब इस विषय के विशेषज्ञ हैं. ओम प्रकाश जी बोलिए.

श्री ओमप्रकाश सखलेचा (जावद) - उपाध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न यह है कि जितने भी काण्‍ड हो रहे हैं, उनकी गहराई में न जाकर, क्‍या ऐसा कोई निर्देश करेंगे कि जो बड़े मूल व्‍यापारी हैं, जो चिन्ह्ति हैं, जिनके नाम जग जाहिर हैं, कई बार अखबारों में पब्लिश हो चुके हैं, उन तक पहुँचने का पुलिस प्रयास करेगी और यदि प्रयास करेगी तो वह कैसे करेगी ? दूसरा प्रश्‍न यह है कि जैसा राजेन्‍द्र जी ने कहा कि छोटे आदमियों को पकड़कर पुलिस वहीं पर चौथ वसूली कर छोड़ देती है और किसी का भी नाम देकर, उन्‍हें जेल में डाल देते हैं. यह प्रक्रिया कब बन्‍द होगी ? एक और प्रश्‍न है.

उपाध्‍यक्ष महोदय - मूल ध्‍यानाकर्षण आपका नहीं है.

श्री ओमप्रकाश सखलेचा - उपाध्‍यक्ष महोदय, एक आखिरी विषय यह है कि इन सबके बाद जो प्रकरण वहां दर्ज होते हैं, उन प्रकरणों पर जो चिन्ह्ति वहां ऑफिसर्स कई वर्षों से इन तीन जिलों में कार्यरत् हैं, चाहे वे सिपाही से लेकर टी.आई. और एडीशनल एस.पी. तक हैं तो क्‍या उनको रोटशन में वहां से हटाने का तुरन्‍त निर्देश देंगे ? बिना उनके समन्‍वय अथवा बिना उनकी सहमति के यह नहीं हो सकता है.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह - माननीय उपाध्‍यक्ष जी, माननीय सदस्‍यों ने जो अपनी चिंता व्‍यक्‍त की है, उस संबंध में मैं कहना चाहता हूं कि पूर्व में भी पुलिस के द्वारा काफी लोगों पर कार्यवाही हुई है और काफी बड़े-बड़े तस्‍कर जिनके बड़े नाम हैं, उनको भी पुलिस ने गिरफतार किया है. राजस्‍थान से भी पुलिस बड़े-बड़े लोगों को गिरफतार करके लाई है, इस प्रकार पुलिस की जानकारी में जो भी लोग हैं, उन पर कार्यवाही लगातार पुलिस के द्वारा हो रही है, परंतु उसके बाद भी यदि माननीय सदस्‍यों के ध्‍यान में कोई ऐसे नाम हैं, जो लगता है कि इस काम में सलंग्‍न हैं और उन पर कार्यवाही नहीं हो रही है, यदि वह नाम मुझे दे देंगे, तो मैं तत्‍काल कार्यवाही करवा दूंगा.

(मेजों की थपथपाहट)

उपाध्‍यक्ष महोदय - (एक साथ कई सदस्‍यों के खड़े होने पर) आप सभी बैठ जायें. आप लोगों के प्रश्‍नों का समाधान हो गया है. आप लोग यही कह रहे थे कि छोटे लोग पकड़े जाते हैं और बड़े लोग रह जाते हैं. आप लोग मंत्री जी को नाम दे दीजिये, वह कार्यवाही कर देंगे. (व्‍यवधान)

श्री ओमप्रकाश सखलेचा - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने प्‍वाइंटेड प्रश्‍न का बोला है. तीन प्‍वाइंटेड प्रश्‍न आये हैं, लेकिन सिर्फ एक के बारे में ही उत्‍तर आया है, दो के बारे में उत्‍तर नहीं आया है.

उपाध्‍यक्ष महोदय - (एक साथ कई सदस्‍यों के खड़े होने पर) डॉ राजेन्‍द्र पाण्‍डेय जी आप बैठ जाएं. श्री कैलाश चावला जी खड़े हैं, आप सभी बैठ जायें. (व्‍यवधान)

डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, तस्‍करी के कारण कई युवाओं की मृत्‍यु हुई है. कई सैकड़ों युवा मृत्‍यु को प्राप्‍त हो चुके हैं और लगातार मर रहे हैं. स्‍मैक, हीरोइन, डोडा-चूरा के अवैध सेवन के कारण लगातार मृत्‍यु हो रही है. यह बहुत ही दु:खद स्थिति है. मानवीय आधार पर भी यह संवेदनशील मामला है.

उपाध्‍यक्ष महोदय - डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय जी आप बैठ जायें. मैं आपसे सहमत हूं. आप बैठ जायें. (व्‍यवधान)

श्री दिलीप सिंह परिहार - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जो मूल व्‍यक्ति हैं. वह बड़े-बड़े होते हैं उन्‍हें नहीं पकड़ा जाता है. (व्‍यवधान)

उपाध्‍यक्ष महोदय - (एक साथ कई सदस्‍यों के खड़े होने पर) श्री कैलाश चावला जी वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं, उन्‍हें भी प्रश्‍न पूछने दें. आप सभी लोग बैठ जायें. (व्‍यवधान)...

श्री ओमप्रकाश सखलेचा - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पिछले पांच साल से लगातार दंगे हो रहे हैं, उसके पीछे मूल कारण कारण भी यही है. क्‍या मंत्री जी इस साल दंगा न हो उसके लिये भी कोई व्‍यवस्‍था करेंगे ? क्‍योंकि पिछले पांच साल में नीचम, मंदसौर और रतलाम जिलों में जितने भी दंगे हुए हैं, उन सभी के पीछे मूल रोग यही है.

उपाध्‍यक्ष महोदय - श्री ओमप्रकाश सखलेचा जी, आप लिखित में सुझाव दे दीजिये. आप बैठ जाएं. श्री कैलाश चावला जी आप बोलें.

श्री कैलाश चावला (मनासा) - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मंदसौर, नीमच एवं रतलाम जिले पर इस तस्‍करी के बारे में बहुत गंभीर चर्चा हो रही है. मैं इस पर आग्रह करना चाहूंगा कि हमने विभिन्‍न विभागों की समितियां बनाने की सहमति की है, परंतु इसका मूल कारण क्‍या है, उस पर हम नहीं गये हैं. मूल कारण यह है कि डोडा-चूरा की डिस्‍पोजल नीति अभी तक बनी नहीं है, इस पर गृह मंत्री जी और वाणिज्यिक कर मंत्री जी दोनों मिलकर कोई समाधान निकालें कि इसका डिस्‍पोजल कैसे हो. यह डोडा-चूरा पहले शासन के द्वारा परमिट देकर खरीदवाया जाता था और ठेकेदार खरीदते थे और परमिट के आधार पर उसका एक्‍सपोर्ट होता था, किंतु अभी पिछले दो सालों से इसके बारे में कोई स्‍पष्‍ट नीति नहीं है. अगर इस तस्‍करी को रोकना है तो शासन को डोडा-चूरा किसानों से क्रय करके स्‍वयं नष्‍ट करना होगा. तब जाकर तस्‍करी रूकेगी. मैं माननीय मंत्री जी से यह आग्रह करते हुए पूछना चाहूंगा कि वाणिज्यिक कर मंत्री जी और आप बैठकर कोई ऐसी नीति‍ बनायेंगे कि किसानों का नुकसान भी न हो और यह तस्‍करी भी रूक जाये? क्‍या आप इस बारे में कोई कमेटी बनाकर उसके सुझाव लेकर कोई कार्यवाही करेंगे?

श्री भूपेन्‍द्र सिंह - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इस संबंध में हम लोग माननीय वाणिज्यिक कर मंत्री जी के साथ बैठक कर लेंगे. हम लोग बैठक के बाद जो भी शासन के स्‍तर पर कर सकते हैं और जो हम लोगों के अधिकार क्षेत्र में होगा, वह हम करेंगे, क्‍योंकि इसमें काफी कुछ नीति भारत सरकार भी तय करती है.

श्री कैलाश चावला - मंत्री जी अगर आप विचार करें तो आप इन क्षेत्रों के विधायकों को भी बैठक में बुला लें और उनके सुझाव भी ले सकते हैं.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह - माननीय सदस्‍य, हम एक ज्‍वाइंट बैठक कर लेंगे और उसमें आप सभी को भी बुला लेंगे और उसके बाद आप लोगों के जो सुझाव होंगे, उन सुझावों के आधार पर जो भी शासन कर सकता है, वह हम जरूर करेंगे.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इस संबंध में जरूरी यह है कि मार्च अप्रैल के बाद अफीम आने वाला है, उसके बाद फिर नया डोडा-चूरा आने वाला है, इसलिए यह कार्य जितनी जल्‍दी हो जाये, उतना अच्‍छा है.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह - हम अभी इसी सत्र में मीटिंग बुला लेंगे.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया - धन्‍यवाद.

 

 

 

 

 

 

01:05 बजे प्रतिवेदनों की प्रस्तुति एवं स्वीकृति.

(1) गैर सरकारी सदस्‍यों के विधेयकों तथा संकल्‍पों संबंधी समिति का बाइसवां प्रतिवेदन.

 

 

 

2. नियम समिति का तृतीय प्रतिवेदन.

 

 

3. याचिका समिति का याचिकाओं से संबंधित बावनवां, तिरेपनवां एवं चौवनवां प्रतिवेदन.

 

4. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा पिछड़े वर्ग के कल्‍याण संबंधी समिति का चतुर्थ प्रतिवेदन

 

 

 

01:06 बजे याचिकाओं की प्रस्तुति.

उपाध्‍यक्ष महोदय आज की कार्यसूची में सम्मिलित सभी याचिकाएं प्रस्‍तुत की हुई मानी जाएगी.

 

01:07 बजे राज्‍यपाल के अभिभाषण पर श्री रामेश्‍वर शर्मा, सदस्‍य द्वारा दिनांक 26 फरवरी, 2018 को प्रस्‍तुत प्रस्‍ताव पर चर्चा .......(क्रमश:)

 

उपाध्‍यक्ष महोदय - अब राज्‍यपाल के अभिभाषण पर चर्चा पुन: प्रारंभ होगी

श्री वेल सिंह भूरिया (सरदारपुर) माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश में विगत 14 साल से हमारी भारतीय जनता पार्टी की सरकार निरंतर समाज और जनता के हित में काम कर रही है. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हमारी सरकार सबका साथ सबका विकास की अवधारणा से कार्य कर रही है. हमारी सरकार की निगाहों से कोई भी वर्ग, तबका छूटा नहीं है, जाति, धर्म, वर्ग से परे सरकार की योजनाओं का लाभ सभी के लिए सुनिश्चित किया गया है. वर्ष 2017 को पंडित दीनदयाल जनशताब्‍दी वर्ष के रूप में गरीब कल्‍याण को समर्पित किया गया है. हमारी सरकार ने जिस प्रकार से गरीबी के क्षेत्र में, आदिवासी भाइयों के हित में, किसानों के हित में, सर्वधर्म सम्‍भाव के साथ में हर समाज को जोड़ने का काम किया है. इस देश में, इस प्रदेश में जाति धर्म से ऊपर उठकर हमारी सरकार दिनों दिन प्रदेश के विकास में निरन्‍तर कार्य कर रही है. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, देश को आजाद हुए 70 साल हो गये. लगभग 50 साल तक इस प्रदेश में कांग्रेस ने काम किया किया और 50 साल के कार्यकाल को हमारे प्रदेश के प्रदेश के मुख्‍यमंत्री माननीय शिवराज सिंह चौहान जी के कार्यकाल को यदि तौला जाए तो यह दीन, दुखी, गरीबों का, आदिवासी भाईयों का मसीहा माननीय मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी का पलड़ा भारी होगा और यह 50 साल के कांग्रेस के मुख्‍यमंत्रियों का पलड़ा हवा में उड़ेगा. उपाध्यक्ष महोदय, जिस प्रकार से हमारे वित्त मंत्री आदरणीय मलैया जी ने बजट प्रस्तुत किया है, उसके लिये वे धन्यवाद के पात्र हैं.

श्री शंकर लाल तिवारी--भूरिया जी ने कहा कि कांग्रेस के मुख्यमंत्री का पलड़ा उड़ जायेगा, वह उड़ चुका है . मेरे भाई अपना वाला वजनदार बनाये रखें.

श्रीमती शकुंलता खटीक -- इसी साल आपके मुख्यमंत्री का पलड़ा भी उड़ने वाला है. ध्यान रखे.

श्री वेल सिंह भूरिया-- उपाध्यक्ष महोदय, 2018-19 में भी कांग्रेस का प्रदेश से सफाया हो जायेगा. कांग्रेस ने बहुत कोशिश की गरीबों को रूलाने की मगर जिम्मेदारी ली हिन्दुस्तान के प्रधान मंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी ने और मध्यप्रदेश के लाड़ले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गरीबों को हंसाने की.आज मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक ऐसी योजना बनाई सुदूर ग्रामीण आदिवासी क्षेत्र में, धार, झाबुवा, अलीराजपुर, शहडोल, मंडला,अनूपपूर, बालाघाट आदिवासी जिलों के लिये 100 की आबादी तक, 50 की आबादी तक 24 घंटे बिजली देने का काम हमारी सरकार ने किया है.

श्रीमती उषा चौधरी-- आपने प्रश्न लगाया था कि सरदारपुर विधानसभा क्षेत्र मे एक भी सड़क नहीं बनी है.

श्री वेल सिंह भूरिया -- उपाध्यक्ष महोदय, वित्त मंत्री जी ने जो 2 लाख हजार करोड़ का बजट पेश किया है, कांग्रेस को मलाई खाने को नहीं मिल रही है इसलिये कांग्रेस खिसियानी बिल्ली की तरह व्यवहार कर रही है.

श्रीमती उषा चौधरी -- काम तो कुछ हो नहीं रहा है मलाई तो आप लोग खा रहे हैं. विषय पर बोलें.

श्री वेल सिंह भूरिया -- उपाध्यक्ष महोदय, इस प्रदेश के अंदर अमन-चैन-शांति, कानून व्यवस्था बहुत अच्छी चल रही है. (XXX)

डॉ. गोविंद सिंह - उपाध्यक्ष महोदय, कांग्रेस के विधायक के ऊपर आरोप लगाये हैं, इसको विलोपित किया जाये.

उपाध्यक्ष महोदय --विलोपित

श्री वेल सिंह भूरिया -- किसान आंदोलन में भी कांग्रेस के नेताओं का हाथ था.हमारी सरकार बहुत अच्छा काम कर रही है. मैं राज्यपाल महोदय को, मुख्यमंत्री महोदय को, वित्त मंत्री जी को बहुत बहुत धन्यवाद और बधाई देना चाहता हूं.आज नर्मदा का पानी अलीराजपुर में जा रहा है, मेरे धार जिले के बदनावर में जा रहा है. इस योजना को मुख्यमंत्री द्वारा बनाया गया था, मां नर्मदा का पानी थांदला में जा रहा है, सरदारपुर में आ रहा है. कुक्षी में आ रहा है.

श्री सुरेन्द्र सिंह हनी बघेल -- मां नर्मदा का पानी, गुजरात और राजस्थान में चला गया है. सरदारपुर, धार और कुक्षी को मां नर्मदा का पानी नहीं मिलेगा. आपको पानी के लिये आंदोलन करना पड़ेगा.

श्री वेल सिंह भूरिया -- उपाध्यक्ष महोदय, 5 हजार करोड़ से अधिक का विकास कार्य शिवराज सिंह जी ने सरदारपुर तहसील में किया है, इसके लिये वित्त मंत्री जी को और संसदीय कार्य मंत्री जी को बहुत बहुत धन्यवाद.पहले गरीबों को पीने के लिये पानी नसीब नहीं होता था इसके लिये हमारी सरकार ने नल जल समूह योजना स्वीकृत की. 24 घंटे बिजली गांव में अनवरत रूप से मिल रही है.पानी मिल रहा है..

श्री सुरेन्द्र सिंह हनी बघेल- उपाध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश के लोगों को न सिंचाई के लिये पानी मिल रहा है न पीने के लिये मिल रहा है.

श्री वेल सिंह भूरिया -- हनी भाई बैठ जायें. 6 माह के लिये क्यों विरोध कर रहे हैं, 6 माह के बाद आपको भाजपा में आना पड़ेगा. कांग्रेस के बारे में दो लाईन कहना चाहता हूं :

(XXX)

उपाध्यक्ष महोदय- इसको विलोपित करें. मीठी मीठी बातें करें.

श्री वेलसिंह भूरिया -- माननीय उपाध्‍यक्ष जी, चाय में शक्‍कर नहीं, तो पीने का क्‍या मजा और सदन में यदि तिवारी जी जैसे और हमारे नाम भूल गया हमारे वरिष्‍ठ सदस्‍य, यदि विरोध नहीं करें, तो विधान सभा में क्‍या मजा.

श्री सुरेन्‍द्र सिंह हनी बघेल-- उपाध्‍यक्ष महोदय, यहां क्‍या कवि सम्‍मेलन हो रहा है. ..(व्‍यवधान)..

श्री वेलसिंह भूरिया-- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, बोलने ही नहीं दे रहे ..(व्‍यवधान).. यह एक आदिवासी विधायक का विरोध कर रहे हैं, सदन के अंदर बोलने नहीं दे रहे हैं.

उपाध्‍यक्ष महोदय-- वैसे आप भी लोगों को बहुत डिस्‍टर्ब करते हो. ...(हंसी)...

श्री रामनिवास रावत-- वेल सिंह जी, जैसा नाम है हूबहू वैसे ही गुण भरे हुये हैं.

श्री वेलसिंह भूरिया-- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जिस प्रकार से हमारे ऊर्जावान प्रधानमंत्री, माननीय नरेन्‍द्र मोदी जी ने देश और समाज के निर्माण में कार्य किया है, उससे हमें केन्‍द्र सरकार का भरपूर सहयोग मिल रहा है. हमें विश्‍वास है कि सरकार सभी क्षेत्रों में प्रदेश को देश का अग्रणी राज्‍य बनाने में सफल होगी. हिन्‍दुस्‍तान के प्रधानमंत्री माननीय नरेन्‍द्र मोदी जी ने सबसे ज्‍यादा, लाखों की तादाद में प्रधानमंत्री आवास दिये. देश आजाद हुये 70 साल हो गये, 70 साल में 50 साल तक कांग्रेस का राज था. मैं पूछना चाहता हूं कि पहले इंदिरा आवास योजना आती थी उसमें 20 हजार की राशि आती थी, 25 हजार की राशि आती थी, कच्‍ची, पक्‍की के नाम से 12 हजार, 15 हजार रूपये मिलते थे, वह 20 हजार रूपये सरपंच की भेंट चढ़ जाया करता था, 20 हजार में से 2 हजार सरपंच ले लिया करता था, 1 हजार रूपये पंचायत का सचिव ले लिया करता था. ..(व्‍यवधान)...

उपाध्‍यक्ष महोदय-- सुरेन्‍द्र सिंह जी बैठ जाइये, आपका नंबर आयेगा तब बोल लीजियेगा. ..(व्‍यवधान)... बघेल साहब जो बोल रहे हैं, यह नहीं लिखा जायेगा.

श्री सुरेन्‍द्र सिंह हनी बघेल-- (XXX)

श्री वेलसिंह भूरिया-- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कांग्रेस के राज में सरपंच, मंत्री, विधायक, सांसद के चक्‍कर लगाते थे, आज हमारी भारतीय जनता पार्टी की सरकार में ऐसा नहीं होता है, पंच परमेश्‍वर योजना के अंतर्गत हमारी भारतीय जनता पार्टी की सरकार में पंचायतों को ही निधि दे दी. जनसंख्‍या के आधार पर हमारी भारतीय जनता पार्टी की सरकार गांव के विकास के लिये रूपया दे रही है, क्षेत्र के विकास के लिये, गली-गली, मोहल्‍ले-मोहल्‍ले में नाली निर्माण के लिये, सीमेंट कांक्रीट रोड के लिये दे रही है, हनी भैया बोल रहे हैं, मैं मानता हूं, लेकिन इस बात को स्‍वीकार करो.

श्री सुरेन्‍द्र सिंह हनी बघेल-- (XXX)

श्री वेलसिंह भूरिया-- आपके पापा एक रूपया नहीं देते थे, लेकिन हमारी भारतीय जनता पार्टी की सरकार में, हिन्‍दुस्‍तान के प्रधानमंत्री, नरेन्‍द्र मोदी जी की सरकार में ऐसा नहीं होता. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सबका साथ, सबका विकास के साथ में हमारी सरकार चल रही है. मध्‍यप्रदेश के लाडले मुख्‍यमंत्री जी ने गरीबों का ध्‍यान रखा, दीन, दुखी एवं दरिद्रों का ध्‍यान रखा, गरीब की थाली में भोजन देने का काम किया. आज एक गरीब, आदिवासी विदेश पढ़ने के लिये जा रहा है. यह 50 साल पहले भी हो सकता था. मैं इस सदन में सीना ठोककर कहना चाहता हूं कि मध्‍यप्रदेश के लाडले मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह जी के कार्यकाल में जितने डिप्‍टी कलेक्‍टर बने, जितने डीएसपी बने और जितनी आदिवासी भाईयों की नौकरी लगी, किसी की सरकार में नहीं लगी.

माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गरीब आदिवासी महिला वर्ग पर ध्यान दिया है. उन्होंने दीन-दुखी-दरिद्र का ध्यान दिया. देश के अंदर सबसे ज्यादा मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास दिये तो हिन्दुस्तान के प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी ने दिये. कांग्रेस बात करती है, कांग्रेस को मलाई खाते नहीं आ रही है, उनको मलाई मिल ही नहीं रही है. मलाई इसलिये नहीं मिल रही है कि माननीय शिवराज तथा माननीय जयंत मलैया जी ने एक कानून बनाया. एक बार 1990 में राजीव गांधी जी ने संसद के अंदर बोला था कि मैं केन्द्र से 100 रूपये भेजता हूं विकास के लिये तो 15 पैसे पहुंचते हैं. उस समय मैं सातवीं क्लास में पढ़ता था. मैंने उस समय राजीव गांधी जी को एक चिट्ठी लिखी थी. प्रदेश में आपकी सरकार, जिले में आपकी सरकार, तहसील में आपकी सरकार है तो 100 रूपये में से 15 पैसे मौके पर पहुंचते हैं तो बाकी पैसे कहां जाते हैं. कहीं न कहीं आपके विधायक, सांसद और आपकी सरकार और आपके मंत्री की भेंट चढ़ जाते थे मेरे पास उसका जवाब भी आया था कि उसमें हम सुधार भी करेंगे, ऐसा राजीव गांधी जी ने बोला था. माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा केन्द्र से जो पैसे भेजे जाते हैं वह पूरे के पूरे जमीन पर लगते हैं. हम उसकी मॉनिटरिंग करते हैं.

उपाध्यक्ष महोदय--आपको 13 मिनट हो गये हैं आप बैठ जाएं. अब अनुमति नहीं है.

श्री वैलसिंह भूरिया--एक मिनट और दे दीजिये.

उपाध्यक्ष महोदय--वैल सिंह द्वारा अब जो बोला जाएगा उसको नहीं लिखा जाएगा. आपको 14 मिनट हो गये लगातार बोल रहे हैं. बैठ जाएं.

श्री वैलसिंह भूरिया-- (XXX)

श्रीमती शीला त्यागी (मनगवां)--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं चौदहवीं विधान सभा के पांचवें महामहिम राज्यपाल महोदय के अभिभाषण के संबंध में कहना चाहती हूं कि यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है, विधान सभा की प्रक्रिया है कि जब कभी भी बजट भाषण होगा तो राज्यपाल महोदया जी ने जिस तरह से अभिभाषण दिया है इससे यह प्रतीत होता है कि सरकार का यशगान महोदया जी से करवाया गया है. यह सरकारी की आंकड़ेबाजी है और जादूगरी है. धरातल में इसका कोई लेना-देना नहीं है. चुनावी वर्ष है सरकार के 14 वर्ष पूरे हो चुके हैं. मैं यही कहना चाहती हूं कि अभिभाषण का जो पत्रक है इसमें भी यही लिखा हुआ है कि सरकार गरीब कल्याण वर्ष मना रही है, लेकिन गरीबों का कितना कल्याण हो रहा है, यह योजनाओं के क्रियान्वयन से पता चलता है. गरीबों का उनकी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है. पात्र लोग अभी भी योजनाओं से वंचित हैं और अपात्र लोग बड़ी होशियारी से सरकार की योजनाओं का

लाभ उठा रहे हैं और मलाई छान रहे हैं. अभी भी गरीबों के नाम गरीबी की रेखा में नहीं जुड़े हैं. आज भी गरीब लाल-पीले कार्ड लेकर हाथों में सरकारी दफ्तरों में चक्कर काट रहे हैं. एक तरफ सरकार यही नारा लगा रही है कि सबका साथ, सबका विकास, लेकिन यह नारा धरातल पर नहीं है. सरकार की मंशा है कि गरीब का कल्याण हो उनको योजनाओं का लाभ मिले, लेकिन अमीरों और गरीबों की खाई मध्यप्रदेश में इन 14 वर्षों में और बढ़ गई है. राज्यपाल महोदया के द्वारा सरकार का जो यशगान कराया गया है उसमें बेरोजगारी का कहीं भी कोई उल्लेख नहीं है. 14 वर्षों में आज भी बेरोजगार गली-गली घूम रहे हैं उनको आरक्षण का भी कोई लाभ नहीं मिला है. जितने भी सरकारी अधिकारी-कर्मचारी हैं उनकी पदोन्नति में आरक्षण का लाभ उनको नहीं मिल पा रहा है. नई भर्ती हो नहीं रही है. पूरी प्री प्लानिंग के तहत एस.टी. एस.सी.ओ.बी.सी. की जो भर्तियां थीं उनको खत्म करने का प्लान किया है. यहां तक मैं यह भी बता दूं कि सरकार ने जो भी एस.टी.ए. सी.ओ.बी.सी. के नाम से जो कल्याण विभाग बना रखे हैं उन कल्याण विभागों में आज भी कागजों में ही उनका कल्याण हो रहा है. जो अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के छात्रावास हैं, हॉस्टल्स हैं वहां पर फर्नीचर नहीं है, बिजली नहीं है. मेरी विधान सभा में गंगेव जैसे मुख्यालय में एक अनुसूचित जाति का छात्रावास है वहां पर बिजली ढाई सालों से कटी हुई है. मैंने सौर ऊर्जा प्लांट के नाम से वहां पर  7 लाख रुपये की लागत से सौर ऊर्जा का प्लांट दिया था वहां उससे लाईट जल रही है. न अतिरिक्त कक्ष हैं. आप सरकार के जो मंत्रीगण है सरकार उन होस्टलों में जाकर देखे तो वहां इतनी गंदगी का अंबार है और यह सरकार कह रही है कि हम गरीबों का कल्याण कर रहे हैं. सबका साथ ले रहे हैं सबका विकास कर रहे हैं लेकिन ऐसा नहीं है बड़े-बड़े पूंजीपति देश को चूना लगाकर उनको इस देश से भगा दिया जाता है और गरीब किसान,मजदूरों को बैंक के द्वारा उनकी कुर्की की जाती है यह सरकार की मंशा सही नहीं है. गरीबों का साथ इस तरह से नहीं दिया जाता.सरकार चाहती तो गरीबों के कल्याण के लिये जो ईमानदार आफीसर है उनको लाईन अटैच नहीं करती. ईमानदार आफीसरों को फील्ड में उनकी नियुक्ति देती और जब जाकर सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन होता. नर्मदा बचाओ अभियान के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर दिये गये. 4 करोड़ रुपये जो हेलीकाप्टर पर खर्च किये गये,सरकार चाहती है कि समाज में समरसता स्थापित हो तो एस.सी.,एस.टी. बस्तियों में जाकर उनकी नाली,उनके पेयजल,उनके स्वास्थ्य के लिये शौचालय के लिये अगर यही पैसा खर्च किया जाता तो हो सकता था कि सामाजिक समरसता आती. यह जो गरीबी और अमीरी की खाई है इसको भी पाटने में दिक्कत नहीं होती. मैं बताना चाहती हूं लाड़ली लक्ष्मी योजना,यह सरकार बहुत ढिंढोरा पीट रही है कि लाड़ली लक्ष्मी योजना के माध्यम से मध्यप्रदेश की बच्चियों को हम बहुत बड़ा लाभ दे रहे हैं बहुत बड़ा खजाना दे रहे हैं लेकिन उपाध्यक्ष महोदय, बच्चियां कह रही हैं कि मामा के इस झूठे जाल से हमें निकालिये. हमें पैसा नहीं चाहिये लेकिन इस तरह से हमें भ्रम जाल में नहीं फंसना है. बच्चियां कह रही हैं कि यह असत्य बोलने वाले मामा जी से हमें बचाईये. नकली परियोजना अधिकारी के माध्यम से नकली शपथपत्र दिये जा रहे हैं. जब वह परियोजना अधिकारी रिटायर हो जायेगा तो वह झूठा पत्रक लिये वे लाड़ली लक्ष्मी कहां घूमेंगी. दर-दर भटकेंगी. किस बैंक में जायेंगी. साथ ही साथ मैं यह कहना चाहती हूं सरकार ने एकात्म यात्रा निकाली. धर्म के नाम पर कब तक भोले-भाले लोगों को आप लूटते रहेंगे. उनको भ्रम में डालते रहेंगे. मैं किसी धर्म के खिलाफ नहीं हूं. मैं खुद हिन्दू धर्म को मानती हूं. सभी धर्मों को मानती हूं. मानव धर्म सबसे बड़ा धर्म होता है,अगर मानव का असली कल्याण सरकार करना चाहती है तो ऐसी झूठी एकात्म यात्राओं को निकालकर लोगों को दिग्भ्रमित करने का काम नहीं करती. सरकार गरीबों की बस्तियों में जाकर देखे आज गर्मी का समय है आज गरीब लोग सुबह से शाम तक 4 से 5 कि.मी. तक पानी के लिये भटकते रहते हैं. मजदूरी करने के लिये टाईम नहीं मिलता. जल ही जीवन है. जल नहीं रहेगा तो इंसान मर जायेगा,अगर गांव का कोई संभ्रांत और बड़ा आदमी उनको अपने बोर से पानी नहीं दे तो गांव के गांव प्यासे मर जायेंगे. एकात्म यात्रा की जगह एक-एक गांव में एक-एक नल,जल योजना दी जाती, जो 20-20 लाख रुपये दिये गये हैं उसके लिये, उन योजनाओं को अभी तक चालू नहीं किया गया है. अभी भी 20-20 लाख रुपये का दुरुपयोग हो रहा है और साथ ही साथ जो यह प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जो भ्रष्टाचार मेरे मनगंवा में तो है ही पूरे मध्यप्रदेश में इस प्रधानमंत्री आवास योजना का आलम है. सचिव,पटवारी और वहां के दलाल टाईप के लोग आज भी 20-20 हजार रुपये लेकर प्रधानमंत्री आवास योजना को ये लोग पलीता लगा रहे हैं चूना लगा रहे हैं. हमारी बहन कु.मायावती जी जब उत्तर प्रदेश में 4 बार सरकार बनाईं थीं तो उन्होंने साढ़े तीन लाख रुपये नहीं दिये. लड़ाई का काम नहीं किया. उन्होंने अलग से सरकारी जमीनों पर कालोनियां बनाकर दीं. कालोनी ही बनाकर नहीं दी स्वास्थ्य,बिजली,पानी की सारी समस्याओं को दूर करके उन कालोनियों में उन्होंने एक अच्छा सा संदेश दिया और आज उत्तर प्रदेश में जाकर देख लें इन कालोनियों में कितना अच्छा संचालन हो रहा है. इसी तरह मध्यप्रदेश की सरकार को करना चाहिये था. लड़ाने का काम नहीं करना चाहिये था. भ्रष्टाचार का काम नहीं करना चाहिये था.

 

 

 

 

 

 

1.29 बजे अध्यक्षीय व्यवस्था

सदन के समय में वृद्धि विषयक

उपाध्यक्ष महोदय - माननीय सदस्य का वक्तव्य पूर्ण होने तक सदन के समय में वृद्धि की जाय. मैं समझता हूं सदन इससे सहमत है.

सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई.

राज्यपाल के अभिभाषण पर श्री रामेश्वर शर्मा,सदस्य द्वारा दिनांक 26 फरवरी,2018 को प्रस्तुत कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव पर चर्चा (क्रमश:)

श्रीमती शीला त्यागी - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, बिजली विभाग में जितना भ्रष्टाचार है शायद ही  किसी और विभाग में हो. बिजली विभाग के जितने भी अधिकारी,कर्मचारी हैं गरीब किसानों को फर्जी बिल देकर उनको तंग करते हैं और ट्रांसफार्मर बदलने की प्रक्रिया तेज नहीं करते जितना कि फर्जी बिल न देने पर लोगों को परेशान किया जाता है. मेरा भी 4 साल का कार्यकाल बीत गया और 14 वर्षों से भाजपा की सरकार मध्यप्रदेश में है. मैं यही कहना चाहती हूं कि जनता इस बार आपको सबक सिखाकर रहेगी. जिस प्रकार से अभी आपने उपचुनाव में देख लिया है और आप कह रहे हैं कि एससी, एसटी, ओबीसी की जितनी बस्तियां हैं उन बस्तियों को हम आत्मनिर्भर बनाएंगे. आप कैसे आत्मनिर्भर बनाएंगे, जब उनको रोटी, कपड़ा और मकान की मूलभूत जो आवश्यकताएं हैं उनको अभी तक आपने पूरा नहीं किया है?

श्री सूबेदार सिंह रजौधा - उपाध्यक्ष महोदय, आज महिला दिवस है. हमारी बहन जी को अच्छी बात करना चाहिए, किसको ठिकाने लगाना है? आपका पूरा सदन सम्मान कर रहा है, आप सम्मान की बात करिए.

श्रीमती शीला त्यागी - माननीय सदस्य महोदय, आप हमसे बहुत सीनियर हैं, पितातुल्य हैं. मैं जितनी बात कर रही हूं. आपने अभी विधान सभा में प्रश्न लगाया था कि हमारी विधान सभा में पेयजल की समस्या है..

श्री गोपाल परमार - उपाध्यक्ष महोदय, बीएसपी ने अपने आपको कांग्रेस के यहां गिरवी रख दिया है.

श्री कुंवर विक्रम सिंह - एकदम सत्य बात बोली है.

श्रीमती शीला त्यागी -.. जब आपकी विधान सभा में समस्याएं नहीं हैं तो आपने सरकार के खिलाफ विधान सभा में प्रश्न क्यों लगाया? आप सरकार के विधायक हैं.

उपाध्यक्ष महोदय - आप उनकी बात का जवाब न दें. आप अपनी बात खत्म करें.

श्रीमती शीला त्यागी - उपाध्यक्ष महोदय, मैं अब ज्यादा कुछ न कहते हुए आपने मुझे बोलने का जो इतना समय दिया, उसके लिए मैं धन्यवाद देती हूं. मैं इतना ही कहना चाहती हूं कि सरकार को चाहिए कि सारे विभागों में जो लंबित प्रकरण पड़े हुए हैं.

श्री गोपाल परमार - और तो और समाजवादी पार्टी के वहां पर गिरवी हो गये.

उपाध्यक्ष महोदय - अब आप अपनी बात कहकर समाप्त करिए.

श्रीमती शीला त्यागी - उपाध्यक्ष महोदय, एक आखिरी बात कहना चाहती हूं कि नर्मदा किनारे की जो शराब की दुकानें थीं, सरकार ने तो वह बंद कर दीं. लेकिन जो गांव-गांव में पैकारियां चल रही हैं, क्या सरकार उनको बंद करना चाहेगी? उनको बंद कर देना चाहिए, नहीं तो जो बेरोजगार युवक हैं, वे नशे में धुत होकर, जो इस देश की नींव हैं, वे नशे से बर्बाद हो रहे हैं और हमारा प्रदेश ही नहीं, देश भी नशे की गर्त में समा रहा है. मैं यह कहना चाहती हूं कि नर्मदा के किनारे जैसी और भी पैकारियां बंद कर दी जाएं, जिससे हमारे नौजवान युवा नशे की गर्त में न जाकर समाज की तरक्की, खुशहाली के लिए और समाज के विकास के लिए अपनी हिस्सेदारी भी निभाएं. उपाध्यक्ष महोदय, जो आपने मुझे बोलने का समय दिया, बहुत-बहुत धन्यवाद.

उपाध्यक्ष महोदय- सदन की कार्यवाही अपराह्न 3.00 बजे तक के लिए स्थगित.

 

 

 

 

 

 

(1.33 बजे से 3.00 बजे तक अन्तराल)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

3.10 बजे { उपाध्‍यक्ष महोदय (डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुए }

श्री के.पी. सिंह (पिछोर) -- उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय राज्‍यपाल जी के अभिभाषण पर अपनी बात रखने के लिये खड़ा हुआ हूं. मैं अपनी बात की शुरुआत करता हूं. महिलाओं की उपस्थिति कम है. आज महिला दिवस है इस मौके पर महिला सशक्तिकरण के लिये मेरी बहुत सारी शुभकामनायें कि इनका भविष्‍य उज्‍जवल हो और हमारे पुरुष प्रधान समाज में विधानसभा में बहुमत रखकर जो विधानसभा चला रहे हैं, भविष्‍य में इनकी उपस्थिति यहां पर और भी ज्‍यादा हो.

उपाध्‍यक्ष महोदय, राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण में बिन्‍दु क्रमांक 5 में नर्मदा सेवा यात्रा का जिक्र है. उसके सबसे नीचे लिखा गया है नशामुक्‍त समाज का निर्माण. अब नशामुक्‍त समाज के निर्माण की बात हम राज्‍यपाल जी के अभिभाषण में करते