मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा त्रयोदश सत्र

 

 

फरवरी-मार्च, 2017 सत्र

 

बुधवार, दिनांक 8 मार्च, 2017

 

(17 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1938 )

 

 

[खण्ड- 13 ] [अंक- 11 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

बुधवार, दिनांक 8 मार्च, 2017

 

(17 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1938 )

विधान सभा पूर्वाह्न 11.03 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

विशेष उल्‍लेख

दिनांक 7 मार्च 2017 को हुए ट्रेन में बम विस्‍फोट की घटना में शीघ्र आतंकवादियों के पकड़े जाने पर पुलिस विभाग को बधाई

संसदीय कार्यमंत्री (डॉ नरोत्‍तम मिश्र) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश पुलिस द्वारा इतने बड़े विस्‍फोट में बहुत जल्‍दी आतंकवादियों को ट्रेस किया गया है, इसके लिए मैं माननीय मुख्‍यमंत्री और हमारे गृह मंत्री माननीय भूपेन्‍द्र सिंह जी को बधाई देना चाहता हूं, एक ऐतिहासिक काम कल हमारी मध्‍यप्रदेश पुलिस ने किया है. मैं सदन की ओर से भी मध्‍यप्रदेश पुलिस को बधाई देना चाहता हूं, बहुत धन्‍यवाद.

गृह मंत्री (श्री भूपेन्‍द्र सिंह) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मुख्‍यमंत्री जी इस संबंध में सदन में वक्‍तव्‍य देंगे तो सारे तथ्‍य सामने आ जाएंगे.

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने ध्‍यान दिलाया है. मैंने इस घटना के संबंध में स्‍थगन प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत किया है.

अध्‍यक्ष महोदय - इस संबंध में जानकारी मंगाई गई है.

श्री रामनिवास रावत - अध्‍यक्ष महोदय, जब जानकारी मंगाई है तो मुख्‍यमंत्री जी वक्‍तव्‍य क्‍यों दे रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - मुख्‍यमंत्री तो वक्‍तव्‍य दे ही सकते हैं.

श्री रामनिवास रावत - अध्‍यक्ष महोदय, वक्‍तव्‍य दे ही सकते हैं तो आप जानकारी चर्चा में ले लें, कितनी बड़ी घटना है, पहले सिमी के विचाराधीन कैदियों का जेल ब्रेक होना, सामानांतर एक्‍सचेंज चलना, यह सब आतंकवादी घटना हो सकती है, इसकी ओर इंगित कर रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - क्‍या बिना जानकारी के चर्चा में लें ले, इसकी जानकारी मंगाई है?

डॉ नरोत्‍तम मिश्र - अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या ऐसा कहीं नियम में लिखा है कि अगर कोई स्‍थगन दे दें तो वक्‍तव्‍य नहीं दिया जाता, इसलिए तो आपकी सीट चेंज हो गई .

11:04 बजे तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

ग्रामीण विद्युतीकरण एवं एक बत्‍ती कनेक्‍शन कार्य की जाँच

[आदिम जाति कल्याण]

1. ( *क्र. 3143 ) कुमारी निर्मला भूरिया : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) झाबुआ जिले में वर्ष 2011-12, 2012-13 एवं 2013-14 में ग्रामीण विद्युतीकरण मद अंतर्गत किन-किन ग्रामों/मजरे/टोलों में विद्युतीकरण तथा एक बत्‍ती कनेक्‍शन कार्य कितनी-कितनी लागत के किये गये? कार्यवार विकासखण्‍डवार जानकारी देवें (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार स्‍वीकृत कार्य किन-किन ठेकेदारों द्वारा किया गया तथा वर्तमान में कार्य की क्‍या स्थिति है? उक्‍त कार्य का निरीक्षण किस-किस के द्वारा किया गया? (ग) क्‍या मजरे टोलों में विद्युतीकरण अथवा एक बत्‍ती कनेक्‍शन के कार्य में उपयोग की गई सामग्री की गुणवत्‍ता सही नहीं है और न ही शासन द्वारा निर्धारित मापदण्‍ड अनुसार सामग्री का उपयोग किया है? (घ) क्‍या शासन द्वारा उक्‍त कार्यों का निरीक्षण संभाग स्‍तर के किसी अधिकारी द्वारा करवाया गया है? यदि नहीं, तो क्‍यों और कब तक करवाया जावेगा?

आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) : (क) एवं (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) जी नहीं। (घ) कार्यों के संबंध में कोई शिकायत प्राप्‍त न होने से संभाग स्‍तर के किसी अधिकारी से जांच नहीं कराई गई. कार्य म.प्र.प.क्षे.वि.वि.क.लिमि. झाबुआ के तकनीकी अधिकारियों के पर्यवेक्षण में कराए गए हैं.

कुमारी निर्मला भूरिया - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से मेरा प्रश्‍न है कि झाबुआ जिले के ग्रामीण मंजरे टोले में जो विद्युतीकरण किया गया है, उस कार्य में जो भी सामग्री लगाई जाती है जैसे- पोल है, तार है तो मेरा मंत्री जी से यही निवेदन है कि मेरे प्रश्न में मैंने जिन जिन गांवों में पूछा था कि उनमें कार्य तो पूर्ण हो गया है, लेकिन जिन गांवों में खम्भे गिर गये हैं और तार वगैरह टूट गये हैं, क्या उनको आप ठीक करायेंगे. दूसरा, मेरा यह भी प्रश्न है कि इस अवधि में जो प्रश्न मैंने किया है, वर्ष 2011-12 से 2013-14 तक एक ही ठेकेदार को ये सारे काम दिये गये हैं. क्या विज्ञप्ति करके इन्हें काम दिया जाता है या किस तरह से काम दिया जाता है, यह मैं जानना चाहती हूं.

राज्यमंत्री, सामान्य प्रशासन (श्री लाल सिंह आर्य) -- अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्या ने पूछा है कि इनको जो ठेका मिला, तो टेंडर प्रक्रिया होती है, उसी के तहत ठेके मिलते हैं. दूसरा, आपने कहा है कि कुछ गांवों में खम्भे गिर गये हैं या विद्युत के पोल गिर गये हैं. मुझे आप अथेंटिक रुप से बता दें कि कौन से गांव में ये गिरे हैं, हम वहां उसको ठीक कराने का काम करेंगे.

कुमारी निर्मला भूरिया -- अध्यक्ष महोदय, जी हां, मैं जिन गांवों में ये पोल, खम्भे गिरे हैं और तार टूटे हुए हैं, उनकी लिस्ट मंत्री जी को दे दूंगी. कुछ तो हात्यादेहली और कुण्डाल है, इस तरह के गांव हैं. मेरा मंत्री जी से एक और प्रश्न है कि यह जो सामान हम पोल वगैरह लगाते हैं, तो उसकी अभी कोई लेबोरेट्री से जांच वगैरह होती है कि कैसे हम पता करेंगे कि वह गुणवत्ता वाले लग रहे हैं कि या नहीं लग रहे हैं.

श्री लाल सिंह आर्य -- अध्यक्ष महोदय, मैं यह झाबुआ में आपको बता दूं कि वर्ष 2011-12 में एकल बत्ती कनेक्शन 1104 हुए हैं और मजरे टोलों में 16. वर्ष 2012-13 में भी 4 और 181, वर्ष 2013-14 में 37 जगह, सभी काम पूर्ण हो गये हैं. इतनी बड़ी संख्या में हमने काम किया है. सरकार का निर्देश है कि मापदण्ड के हिसाब से और गुणवत्तायुक्त ही विद्युतीकरण का कार्य होगा. जहां तक प्रश्न यह आ रहा है कि किसी गांव का, मैं आपसे कह रहा हूं कि आप मुझे सुची दे दीजिये और उस सूची के हिसाब से ठेकेदार से वह कार्य हम करायेंगे, यदि समय सीमा के भीतर गड़बड़ हुई होगी तो.

कुमारी निर्मला भूरिया -- मंत्री जी, धन्यवाद.

भोपाल संभाग अंतर्गत विद्युतीकरण

[आदिम जाति कल्याण]

2. ( *क्र. 4419 ) श्री शैलेन्‍द्र पटेल : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शासन द्वारा आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति कल्‍याण योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युतीकरण कार्य कराए जाते हैं? यदि हाँ, तो किस योजना के तहत कौन-कौन से कार्य कराए जाते हैं। (ख) क्‍या शासन द्वारा प्रश्नांश (क) अनुसार योजना में किसी प्रकार का परिवर्तन किया है? यदि हाँ, तो परिवर्तित योजना का ब्‍यौरा दें। (ग) क्‍या शासन द्वारा प्रश्‍न दिनांक से 2 वर्ष पूर्व की अवधि में उक्‍त योजना के तहत कार्य कराए गए हैं? यदि हाँ, तो भोपाल संभाग में कराए गए कार्यों का ब्‍लॉकवार वर्षवार ब्‍यौरा दें। (घ) प्रश्नांश (ग) अनुसार विगत 2 वर्ष में व्‍यय की गई राशि का ब्‍यौरा दें?

आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) : (क) जी हाँ। अनुसूचित जनजाति बस्तियों में विद्युतीकरण, अनुसूचित जनजाति के कृषकों को सिंचाई सुविधा हेतु विद्युत लाइन का विस्तार (पंपों का ऊर्जीकरण) योजना नियम 2016 के तहत अविद्युतीकृत आदिवासी मजरे/टोलों में विद्युतीकरण एवं आदिवासी कृषकों के कुओं तक विद्युत लाइन विस्‍तार का कार्य किया जाता है। (ख) पूर्व में जारी निर्देश के स्‍थान पर जारी नवीन निर्देश की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (घ) प्रश्नांश अंतर्गत वर्णित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।

 

श्री शैलेन्‍द्र पटेल -- अध्यक्ष महोदय, मेरा जो प्रश्न था, वह आदिम जाति और अनुसूचित जाति के लोगों को योजना के अंतर्गत बिजली कनेक्शन का लाभ पहुंचाने का था. मैंने प्रश्न किया था कि अनुसूचित जनजाति बस्तियों में विद्युतीकरण एवं कृषकों के लिये सिंचाई सुविधाई हेतु विद्युत लाइन के विस्तार, पम्प के ऊर्जीकरण का क्या नियम है. सरकार ने जो जवाब दिया है, उन्होंने यह स्वीकार किया है कि वह नियम चेंज कर दिया गया है और आदिम जाति कल्याण विभाग का 23 दिसम्बर,2016 को राजपत्र में प्रकाशित हुआ है और अनुसूचित जाति का 6 दिसम्बर,2016 को राजपत्र में प्रकाशित हुआ है. मेरा प्रश्न यह था कि कितने लोगों का काम हुआ और जो उत्तर दिया है, उत्तर में दो वर्षों में अनुसूचित जाति में मेरे जिले के अंतर्गत निरंक काम हुआ है. एक भी काम नहीं हुआ है. गजट नोटिफिकेशन के पहले भी पैसा खर्च नहीं किया गया और गजट नोटिफिकेशन हुआ, नये नियम जारी हुए, उसके बाद में आज तारीख तक कोई काम नहीं हुआ. तो यह पैसा कहां गया, क्योंकि जब विधान सभा से हम लोगों ने बजट पारित किया, अनुसूचित जाति, जनजाति के लिये और कृषक दो सालों से दर-दर भटक रहे हैं और यह बात थी कि नया नियम आने वाला है. तो पिछले दो वर्षों में भी एक भी काम नहीं किया और गजट नोटिफिकेशन के बाद भी एक काम नहीं हुआ. मेरा मंत्री जी से यह प्रश्न है कि यह राशि कहां लेकर गये, कहां पर आपने खर्च की.

राज्यमंत्री, सामान्य प्रशासन (श्री लाल सिंह आर्य) -- अध्यक्ष महोदय, पहले तो आप यह बतायें कि एससी का पूछ रहे हैं कि एसटी का पूछ रहे हैं.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल -- मंत्री जी, एससी में मेरे जिले के अन्दर निरंक आया है. एसटी में मात्र 10 काम मेरे विधान सभा में और 35 काम पूरे जिले में हुए हैं. मंत्री जी, मैंने पूरा पढ़ लिया है, आप चिंता न करें, कृपया आप पढ़ें. मैं एससी का कह रहा हूं कि जीरो, निरंक आया है, आपके पास उत्तर है और मुझे सुबह उत्तर मिला है.

श्री लाल सिंह आर्य -- अध्यक्ष महोदय, पहली बात तो यह है कि विद्युतीकरण का काम चाहे एससी बस्तियां हों, चाहे एसटी बस्तियां हों, चाहे सामान्य बस्तियां हों, कोई भी हो, वहां काम राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत भी हो रहा था और अटल ज्योति योजना के तहत भी काम हो रहा था. हम जिलों को आवंटन देते हैं, लेकिन जिलों में इन योजनाओं से हटकर अगर किसी गांव में काम कराना है, तो वहां वह अधिकारी कहीं न कहीं स्थानीय स्तर पर निर्णय लेते हैं. लेकिन हमारी सरकार की मंशा उन क्षेत्रों में काम कराने की है.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जवाब अस्‍पष्‍ट है. मेरा सीधा सा सवाल यह था कि 2 वर्षों में एस.सी डिपार्टमेन्‍ट में मेरे जिले के अन्‍दर एक काम भी नहीं हुआ है. यह मुख्‍यमंत्री जी का गृह जिला है. उसके बाद भी एक काम भी अनुसूचित जाति की बस्‍ती में कृषि पम्‍पों का नहीं हुआ है. किसान दर-दर भटक रहे हैं और माननीय मंत्री जी जवाब दे रहे हैं कि हमने नये नियम बना दिये हैं. नये नियम के पहले भी 2 वर्षों में कोई काम नहीं हुआ और मेरा आरोप है कि यह पैसा कहां गया? यह माननीय मंत्री जी बतायें. आपकी मंशा ठीक है, हम मान रहे हैं. एक काम भी सीहोर जिले के अन्‍तर्गत 2 वर्षों में नहीं हुआ है. यह राशि कहां लेकर गए और कहां खर्च की ? यह बता दें.

श्री लाल सिंह आर्य - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमने अनुसूचित जाति की बस्तियों के लिए भोपाल में भी आवंटन दिया है और आपके जिले में भी दिया है.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके पास कॉपी है. उसमें परिशिष्‍ट '' में यह उत्‍तर आया है, उसमें क्‍लीयर लिखा है- निरंक. अध्‍यक्ष महोदय, आप पढ़ लीजिये. आपके पास परिशिष्‍ट '' में मैंने संभाग का पूछा था, जिसमें भोपाल, सीहोर, रायसेन, राजगढ़, विदिशा में ऊपर से लेकर नीचे तक निरंक लिखा है. एक रुपया भी खर्च नहीं किया है.

श्री लाल सिंह आर्य - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पिछले वर्ष एक निर्णय हुआ था कि अनुसूचित जाति की बस्तियों में जो काम कराना है, वह विद्युत विभाग के माध्‍यम से कराना है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍यों ने माननीय मुख्‍यमंत्री जी से कहा था, सदन में भी बात उठाई थी कि इन अनुसूचित जाति की जो बस्तियां हैं, उनमें विद्युतीकरण का जो काम होना है. उसके सर्वे का काम, उसकी स्‍वीकृति का काम अनुसूचित जाति विभाग से होना चाहिए. हमने यह निर्णय ले लिया है. माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने निर्देश दिया कि विद्युत विभाग नहीं करेगा, हम राशि देंगे, विद्युत विभाग काम करेगा, लेकिन उस सूची को स्‍वीकृत करने का काम अनुसूचित जाति-जनजाति कल्‍याण विभाग करेगा. इसलिए आप जो निरंक वाला विषय बता रहे हैं, वह राशि हमने वापस ले ली है. वह एक लेकुना था, अब उसको समाप्‍त कर दिया है. अब अनुसूचित जाति-जनजाति विभाग के माध्‍यम से ही विभिन्‍न जिलों में काम होगा.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न का जवाब नहीं मिला है. मैंने पूछा था कि 2 वर्ष पहले कितना काम हुआ था, जीरो काम हुआ. मैं आपका संरक्षण चाहता हूँ, यह बहुत महत्‍वपूर्ण विषय है. उसके बाद भी आज तक नहीं हुआ है और अभी तक एक रुपये की राशि जारी नहीं हुई है.

अध्‍यक्ष महोदय - आपने रिपीट किया है.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जवाब ही नहीं दे रहे हैं.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी का जवाब तो आना चाहिए कि वह राशि कहां गई ?

अध्‍यक्ष महोदय - उन्‍होंने बताया है कि राशि वापस कर ली है.

श्री अजय सिंह - दूसरी बात, सरकार अनुसूचित जाति-जनजाति के लिए बड़ी संवेदनशील है. यदि मुख्‍यमंत्री जी के क्षेत्र में ही इस तरह की लापरवाही हो रही है तो आप समझ सकते हैं कि प्रदेश में अनुसूचित जाति-जनजाति के क्षेत्रों में किस तरह से काम हो रहा होगा.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा जवाब दिलवा दीजिये. मंत्री जी ने जवाब नहीं दिया है कि वह राशि कहां लेकर गए हैं ?

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या पिछले 3 वर्षों की राशि लेप्‍स हो गई ?

श्री लाल सिंह आर्य - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अनुसूचित जाति-जनजाति के हितों का ध्‍यान मध्‍यप्रदेश की सरकार को है. हमने सन् 2016-17 में भोपाल, सीहोर, रायसेन, राजगढ़, विदिशा को 70 लाख रुपये कामों के लिए दिया है. राजगढ़ में 18 लाख रुपये, विदिशा में 305 लाख रुपये एवं वर्ष 2016-17 में 8.40 लाख रुपये दिया है. ऊर्जा विभाग के 62 करोड़ रुपये जो वापस आया है.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल - आपने फिर निरंक जानकारी क्‍यों दी है ?

श्री लाल सिंह आर्य - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप अनुसूचित जनजाति विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत परिशिष्टि '' देख लीजिये.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल - मैं अनुसूचित जाति का पूछ रहा हूँ, जनजाति का नहीं. मैं जो प्रश्‍न पूछ रहा हूँ, उसका उत्‍तर दें.

श्री लाल सिंह आर्य - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप पिछले वर्ष की राशि का बता रहे हैं. मैं वह आपको स्‍पष्‍ट कर चुका हूँ कि चूँकि शासन ने पहले यह निर्णय लिया था कि विद्युत विभाग ही गांव की सूची के सर्वे के अनुसार सूची तैयार करेगा. सम्‍मानीय सदस्‍यों की मांग पर, सरकार ने यह निर्णय बदल दिया है कि नहीं अनुसूचित जाति के विभाग को ही उस राशि का सर्वे करके, उस गांव में विद्युतीकरण या पम्‍प ऊर्जीकरण का जो भी है, उसको करना चाहिए. शासन ने नियम बदल दिया है. अनुसूचित जाति-जनजाति में अगर काम नहीं हुआ है, यह हमारे पास सूची है.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सूची की बात कर रहा हूँ. मंत्री जी, आपने जवाब दिया है कि निरंक है, काम नहीं किया है. आप पैसा कहां लेकर गए, यह तो बता दें ? आपने पैसा कहां खर्च दिया ?

श्री लाल सिंह आर्य - पैसा शासन के पास ही रहता है, वह निकाला नहीं जा सकता है.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल - मंत्री जी, जिस विभाग का था, आपने वहां खर्च नहीं किया.

श्री रामनिवास रावत-- वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 में जो राशि दी गई है क्‍या आप उसका काम कराएंगे?

श्री लाल सिंह आर्य-- जो नए नियम बने हैं उसके तहत हम काम कराएंगे.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल-- नए नियम बनने के बाद एक भी काम नहीं हुआ है.

श्‍योपुर जिला चिकित्‍सालय में रिक्‍त पदों की पूर्ति

[लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]

3. ( *क्र. 1032 ) श्री दुर्गालाल विजय : क्या लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या श्‍योपुर जिला चिकित्‍सालय के सिविल सर्जन/विभाग द्वारा आई.सी.यू. वेन्‍टीलेटर का क्रय आदेश क्रमांक 4020, दिनांक 27.07.2016 द्वारा जारी कर दिया है? क्‍या संबंधित एजेंसी ने वेन्‍टीलेटर प्रदाय कर दिया है? यदि हाँ, तो कब तक चिकित्‍सालय में आई.सी.यू. की स्‍थापना कर दी जावेगी? (ख) क्‍या चिकित्‍सालय में दो प्रथम श्रेणी सर्जीकल विशेषज्ञों सहित सभी रोगों के विशेषज्ञों के स्‍वीकृत 17 पदों में से वर्तमान में 14 पद रिक्‍त हैं, इन्‍हें भरने में विलंब के कारण गंभीर मरीजों के ऑपरेशन की सुविधा का अभाव है, नतीजतन जनवरी 2014 से वर्तमान तक 12104 गम्‍भीर मरीज भर्ती हुए, उसमें से 168 मरीजों को अन्‍यत्र रेफर किया केवल 24 रोड एक्‍सीडेंट एवं फ्रेक्‍चर वाले मरीजों के ऑपरेशन ही संभव हो सके तथा 11912 मरीजों को मजबूरी में ऑपरेशन हेतु स्‍वेच्‍छा से अन्‍यत्र जाना पड़ा? (ग) क्‍या उक्‍त स्थिति चिकित्‍सालय में सर्जीकल तथा अन्‍य विशेषज्ञ चिकित्‍सकों के रिक्‍त पदों सहित आई.सी.यू. के अभाव के कारण निर्मित हुई? (घ) क्‍या शासन जिले के गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार ऑपरेशन की सुविधा की उपलब्‍धता के मद्देनजर सर्जीकल विशेषज्ञों के दोनों रिक्‍त पदों को अविलंब भरेगा व आई.सी.यू. की स्‍थापना शीघ्र करवाएगा? यदि नहीं, तो क्‍यों?

लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) हाँ यह सही है, कि आई.सी.यू. वेन्टीलेटर के क्रय हेतु कार्यालीन आदेश क्रमांक 4020 श्योपुर दिनांक 29.07.2016 के द्वारा कोवेडियन हेल्थ केयर को क्रय आदेश जारी किया गया है। संबंधित फर्म के द्वारा अभी तक आई.सी.यू. वेन्टीलेटर प्रदाय नहीं किया इस हेतु कार्यालीन पत्र क्र./क्रय/2017/380 श्योपुर, दिनांक 24.01.2017 एवं पत्र क्र./क्रय/2017/735 श्योपुर, दिनांक 13.02.2017 के द्वारा भी संबंधित फर्म को वेन्टीलेटर प्रदाय हेतु पत्र भेजा गया है। आई.सी.यू वेन्टीलेटर प्राप्त होते ही शीघ्र आई.सी.यू. की स्थापना की जावेगी। (ख) जिला चिकित्सालय, श्योपुर में प्रथम श्रेणी 23 पद स्वीकृत हैं, जिसके विरूद्ध वर्तमान में 09 पद भरे हुये हैं एवं 14 पद रिक्त हैं। जो संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। रिक्त विशेषज्ञों की विधा में द्वितीय श्रेणी चिकित्सा अधिकारि‍यों के द्वारा अपनी सेवायें प्रदान की जा रही हैं। जी हाँ। यह सही है कि जनवरी 2014 से 30.11.2016 की स्थिति में गंभीर भर्ती मरीजों की संख्या 12107 एवं रेफर किये मरीजों की संख्या 168 एवं ऑपरेशन किये गये मरीजों की संख्या 24 थी, शेष 11936 गंभीर मरीजों को मजबूरी में ऑपरेशन हेतु अन्यत्र नहीं जाना पड़ा, अपितु इनका उपचार जिला चिकित्सालय, श्योपुर में पदस्थ विशेषज्ञ एवं चिकित्सकों के द्वारा ही किया गया है। लेकिन सभी बीमारि‍यों के अधिकांश मरीजों को अन्यत्र रेफर नहीं किया जाता है। कुछ बीमारि‍यों से संबंधित गंभीर मरीजों को जैसे हेडइन्जूरी, गंभीर हृदय रोग वाले मरीजों को सुपर स्पेशलिस्ट के अभाव में आगामी उपचार हेतु हायर सेन्टर के लिए रेफर किया जाता है। (ग) जिला चिकित्सालय, श्योपुर में विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पदों के विरूद्ध वर्तमान में कार्यरत उक्त विधा के द्वितीय श्रेणी चिकित्सकों के द्वारा मरीजों का उपचार किया जा रहा है। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (घ) प्रदेश में विशेषज्ञों की अत्यधिक कमी के कारण तथा विशेषज्ञ का पद शत-प्रतिशत पदोन्नति से भरने का प्रावधान होने के कारण, प्रथम श्रेणी विशेषज्ञ के रिक्त पद भरने में कठिनाई हो रही है। जिला चिकित्सालय, श्योपुर में एम.एस. सर्जरी योग्यता के एक द्वितीय श्रेणी चिकित्सक कार्यरत हैं। विभाग रिक्त पदों की पूर्ति हेतु निरंतर प्रयास कर रहा है, चिकित्सा अधिकारी के 1896 पदों हेतु मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग में साक्षात्कार की कार्यवाही प्रचलन में है। चयन सूची प्राप्त होने पर उपलब्धता अनुसार सर्जरी योग्यता के चिकित्सक की पदस्थापना संबंधी कार्यवाही की जावेगी। पद पूर्ति हेतु निश्चित समयावधि बताई जाना संभव नहीं हैं।

परिशिष्ट - ''एक''

श्री दुर्गालाल विजय-- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न श्‍योपुर जिला चिकित्‍सालय में आई.सी.यू. प्रारम्‍भ करने को लेकर है. श्‍योपुर जिला पिछड़ा हुआ जिला है और भौगोलिक दृष्टि से भी वह एक कोने में है. मैंने पिछले समय भी पूछा था कि आई.सी.यू. प्रारम्‍भ क्‍यों नहीं किया जा रहा है तो उन्‍होंने कहा कि वेन्‍टीलेटर खरीदने के बाद इसे प्रारंभ करेंगे. ऐसा बताया गया है कि वेन्‍टीलेटर खरीदने के लिए जुलाई 2016 में आदेश दे दिए गए हैं. आदेश देने के बाद भी अभी तक वेन्‍टीलेटर श्‍योपुर जिला चिकित्‍सालय में नहीं आया है. श्‍योपुर जिला चिकित्‍सालय में जो गम्‍भीर रूप से बीमार रोगी हैं और जिनको इन्‍टेंसिव केयर वार्ड में रखा जाना बहुत आवश्‍यक होता है. ऐसे रोगियों को मजबूरी के कारण बाहर जाना पड़ रहा है क्‍योंकि अभी तक वहां वेन्‍टीलेटर प्रदाय नहीं किया गया है. इसमें मेरा एक प्रश्‍न और है अभी मंत्री जी ने जवाब दिया है कि वेन्‍टीलेटर जिस कंपनी से खरीदना है वह कोवेडियम हेल्‍थ केयर के नाम से है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि यह कंपनी कहां की है. हमारे प्रदेश और देश में और भी जो नामी कंपनियां हैं जो समय पर प्रदाय कर देती हैं कम कीमत पर प्रदाय कर देती हैं. उन कंपनियों से वेन्‍टीलेटर क्‍यों नहीं खरीदा गया और किसने यह आर्डर दिया है कि यह कोवेडियम कंपनी से खरीदा जाए. यह कंपनी बार-बार पत्र लिखने के बाद भी सप्‍लाई नहीं कर रही है तो इसके लिए जिम्‍मेदार कौन है. मेरा माननीय मंत्री जी से यह भी कहना है कि यह जो नॉर्म्‍स के अंदर इस प्रकार की शर्तें निर्धारित कर दी जाती हैं जिसके कारण और कोई कंपनी उसमें भागीदार न बन सके और जिस कंपनी को देना है उसके हिसाब से नार्म्‍स तैयार कर लिए जाते हैं. मैं यह पूछना चाहता हूं कि जिस कंपनी को आर्डर दिया गया है जो वेन्‍टीलेटर सप्‍लाई करने में असमर्थ हैं उसका आर्डर कैंसिल किया जाना चाहिए. देश की ऐसी बहुत सारी कंपनियां हैं जो समय पर गुणवत्‍तापूर्ण तरीके से सप्‍लाई करती हैं उनको आर्डर दिया जाए.

अध्‍यक्ष महोदय--यह आपका दूसरा प्रश्‍न है. पहले एक का उत्‍तर आ जाने दीजिए.

श्री रुस्‍तम सिंह --अध्‍यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी ने जो बात कही है कि श्‍योपुर दूरस्‍थ जिला है यह बात सही है कि श्‍योपुर मध्‍यप्रदेश के अंतिम छोर पर है और इसी वजह से वहां पर आई.सी.यू. चालू हो जाए इसके लिए वेन्‍टीलेटर की व्‍यवस्‍था की गई थी. वेन्‍टीलेटर खरीदी के आदेश दिनांक 29.07.2016 को दिए गए थे जो अभी तक उपलब्‍ध नहीं हो पाए हैं. इसके लिए निर्देश भी दिए गए हैं. इसमें कोवेडियम कंपनी को आर्डर दिया गया है. यह नामी कंपनी कहलाती है और यह कंपनी पूरे देश में वेन्‍टीलेटर सप्‍लाई करती है. विधायक जी की चिन्‍ता भी सही है कि और भी कंपनियां होंगी. हम शीघ्रातिशीघ्र वेन्‍टीलेटर भी लगवाएंगे. जो बात उन्‍होंने कही है कि इसी कंपनी को क्‍यों दिया गया है. उन्‍होंने एक और शंका जाहिर की है कि वह नॉर्म्‍स और उनके जो पेरामीटर होते हैं वह ऐसे बनते हैं जिसकी वजह से किसी पर्टिकुलर कंपनी को आर्डर मिल जाता है. जैसे इनका आशय कोवेडियम कंपनी की तरफ है. इसको हम दिखवा लेंगे. नॉर्म्‍स प्राय: इस तरह के बनाए जाते हैं कि जनता के हित में हों, रेट्स ठीक आएं और अच्‍छी से अच्‍छी कंपनी उसमें हिस्‍सा ले सके लेकिन आपने जो जानकारी दी है इसको हम दिखवा लेंगे और हम यह बताना चाहते हैं कि यह पूरी तरह से पारदर्शी तरीके से हो इसको भी सुनिश्चित कर लेंगे.

श्री दुर्गालाल विजय--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं आया है. पहले तो यह बताया जाए कि यह किसने तय किया है कि इस कंपनी को ऑर्डर दिया जाए. सिविल सर्जन ने तो केवल सप्लाई ऑर्डर जारी किए हैं उन्हें जो आदेश दिए गए थे उसके अन्तर्गत जारी कर दिए लेकिन इसको तय किसने किया कि इस कंपनी को ऑर्डर दिया जाना है, एक तो इस बात को बताएं. जिन्होंने यह आदेश दे दिया है और अभी तक सप्लाई नहीं हुई है उनके ऊपर क्या कार्यवाही की जाएगी. उनके खिलाफ जांच करने के बाद कार्यवाही करने का मेरा निवेदन है और तीसरी बात यह है कि कब तक वेन्टीलेटर को वहां स्थापित कर देंगे ताकि वहां का आईसीयू वार्ड प्रारंभ हो जाए.

श्री रुस्तम सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक ने कहा है कि 7-8-9 महीने तक यह प्रदाय नहीं हो सका इसके लिए कौन दोषी है. इसकी तह तक हम जरुर जाएंगे. हम आपके माध्यम से उनको आश्वस्त करना चाहते हैं कि अगर इसमें कोई दोषी पाया जाएगा तो उस पर कार्यवाही भी करेंगे.

श्री दुर्गालाल विजय--अध्यक्ष महोदय, अभी इसमें एक प्रश्न और बकाया है.

श्री रामनिवास रावत--अध्यक्ष महोदय, यह मेरा भी जिला है मैं भी एक प्रश्न पूछना चाहता हूँ.

अध्यक्ष महोदय--आप दोनों इसी प्रश्न में पूरा समय लगा देंगे और इसी प्रश्न में बारह बज जाएंगे. बस अब आप यह पूछ लीजिए कि मशीन कब तक आ जाएगी. आप 4-5 प्रश्न पूछ चुके हैं.

श्री दुर्गालाल विजय--माननीय अध्यक्ष महोदय, इस प्रश्न का उत्तर तो आ गया है.

अध्यक्ष महोदय--तो बस अब आप बैठ जाइए.

श्री रामनिवास रावत--इस मशीन को ऑपरेट कौन करेगा.

श्री दुर्गालाल विजय--माननीय अध्यक्ष महोदय, एक तो माननीय मंत्री जी ने बताया नहीं है जो कि हमारी जानकारी में है कि कोई कार्पोरेशन उन्होंने इसके लिए निश्चित कर रखा है जिसका कोई काम नहीं है बस जबर्दस्ती खरीद करना और सप्लाई करना रहता है. क्या इस पर भी कोई नियंत्रण करेंगे. श्योपुर जिले में 17 पद विशेषज्ञों के हैं.

श्री रुस्तम सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने प्रश्न समझ लिया है. वेन्टीलेटर का जहां तक प्रश्न है वह आ भी जाएगा और दो महीने में इंस्टाल करके जो विधायक जी चाहते हैं वैसी कार्यवाही भी हो जाएगी. जहां तक कार्पोरेशन का सवाल है यह कार्पोरेशन मध्यप्रदेश में आने वाले समय में दवाइयों से लेकर इक्वीपमेंट आदि सभी की खरीद करेगा. केबिनेट से स्वीकृत होकर यह कार्पोरेशन बना है जो कि तमिलनाडु की तर्ज पर बना है. काफी साल पहले इस पर निर्णय हुआ था. इसके अलावा जो रिक्त पदों की बात है तो पूरे प्रदेश में विशेषज्ञों के पद रिक्त हैं करीब 1500-1600 पद रिक्त हैं. यह पद सुप्रीम कोर्ट से जैसे ही आरक्षण के संबंध में निर्णय आ जाता है उसके पश्चात हम इन पदों को भरने की कार्यवाही कर देंगे.

प्रश्न संख्या --4 (अनुपस्थित)

छात्रावासों के वार्डन/सहायक वार्डनों का स्‍थानांतरण

[स्कूल शिक्षा]

5. ( *क्र. 452 ) श्री सतीश मालवीय : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या जिला परियोजना समन्‍वयक उज्जैन द्वारा छात्रावासों के वार्डन और सहायक वार्डनों को हटाने के संबंध में कोई कार्यवाही विगत तीन वर्षों में की गई है? यदि हाँ, तो किन-किन छात्रावासों के वार्डन और सहायक वार्डनों को हटाया गया है? कारण स्पष्‍ट करें। (ख) छात्रावासों में शासन के नियमानुसार वार्डन को प्रतिनियुक्ति पर रखने पर कितने वर्ष तक का कार्यकाल अधिकतम होना चाहिये? क्या नियमों का पालन किया गया? यदि नहीं, तो क्यों? (ग) छात्रावासों में सहायक वार्डनों की अस्थाई नियुक्ति को किस समिति में अनुमोदन कराकर उनकी नियुक्ति आगे बढ़ाई गई है? समिति के अनुमोदन की जानकारी देवें, कब और किस-किस वर्ष अनुमोदन लेकर नियुक्ति अवधि बढ़ाई गई? यदि नहीं, तो इसके लिये कौन जिम्मेदार है? (घ) क्या छात्रावासों में नियुक्त अस्थायी सहायक वार्डनों के नियुक्ति आदेश पत्र जारी किये गए हैं तथा किस आधार पर उनकी नियुक्ति की गई?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) जी हाँ। के.जी.बी.वी नागदा, के.जी.बी.वी पानबिहार, के.जी.बी.वी. महिदपुर, बालिका छात्रावास चांपाखेडा, बालिका छात्रावास खाचरोद, बालिका छात्रावास महिदपुर, बालिका छात्रावास उज्‍जैन की वार्डनों को हटाया गया है। सहायक वार्डनों को हटाने के संबंध में विगत तीन वर्षों में जिले से कोई कार्यवाही नहीं हुई है। छात्रावासों के वार्डन का प्रशासनिक प्रक्रिया अनुसार प्रभार हटाया गया है। (ख) वार्डन को प्रतिनियुक्ति पर रखने का प्रावधान नहीं है, अपितु छात्रावास का प्रभार दिया जाता है। प्रभार हेतु वर्तमान में समय-सीमा निर्धारित नहीं है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) स‍हायक वार्डनों की नियुक्ति नियम एवं निर्देशों के अनुसार जिला जेण्‍डर कोर ग्रुप के अनुमोदन से बढ़ाई जाती है। सहायक वार्डनों की सेवा वृद्धि 4 जनवरी 2011 को की गई है। इस संबंध में जाँच कराई जा रही है। (घ) जी हाँ। सहायक वार्डनों की नियुक्ति राज्‍य शिक्षा केन्‍द्र द्वारा जारी निर्देश के अनुरूप निर्धारित मापदण्‍ड के आधार पर जिला जेण्‍डर कोर ग्रुप के अनुशंसा से कलेक्‍टर सहमि‍शन संचालक के अनुमोदन उपरांत की जाती है।

श्री सतीश मालवीय--माननीय अध्यक्ष महोदय, आपका संरक्षण चाहूंगा मेरा प्रश्न अनुसूचित जाति के बालक-बालिकाओं से संबंधित है. मैंने जो प्रश्न पूछा था उसके (क) भाग का जो जवाब आया है वह आधा-अधूरा आया है. सहायक वार्डनों को हटाने के संबंध में विगत तीन वर्षों में कोई कार्यवाही नहीं हुई है. मैं मानता हूं यह गलत उत्तर आया है. अभी तक कार्यवाही नहीं हुई है तो क्यों नहीं हुई है.

कुँवर विजय शाह--माननीय अध्यक्ष महोदय, या तो विधायक जी ने उत्तर पढ़ा नहीं है या फिर उन्हें कहीं कन्फ्यूजन है. मैं इसका क्या जवाब दूं ? उत्तर में स्पष्ट लिखा हुआ है कि जी हाँ. के.जी.बी.वी नागदा, के.जी.बी.वी. पानबिहार, के.जी.बी.वी. महिदपुर, बालिका छात्रावास चांपाखेड़ा, बालिका छात्रावास खाचरोद, बालिका छात्रावास महिदपुर, बालिका छात्रावास उज्जैन की वार्डनों को हटाया गया है. सहायक वार्डनों को हटाने के संबंध में विगत तीन वर्षों में जिले से कोई कार्यवाही नहीं हुई है.

 

श्री सतीश मालवीय- मैं यही कहना चाहता हूं कि सहायक वार्डनों को हटाने के संबंध में कोई कार्यवाही क्‍यों नहीं हुई है.

श्री अनिल फिरोजिया- ये गलत जानकारी दे रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय- जिनका प्रश्‍न है, पहले उन्‍हें पूछ लेने दीजिए.

श्री सतीश मालवीय- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि छात्रावासों के सहायक वार्डनों को क्‍यों नहीं हटाया गया है ? उन्‍हें नहीं हटाने का क्‍या कारण है ?

कुंवर विजय शाह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सहायक वार्डनों को तीन वर्षों में हटाने का कोई नियम नहीं है.

श्री सतीश मालवीय- यह नियम में है. अगर मंत्री जी चाहें तो मैं उन्‍हें शासन का पत्र उपलब्‍ध करवा दूंगा.

कुंवर विजय शाह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, समय-समय पर नियमों में परिवर्तन होते रहते हैं. यदि संबंधित के विरूद्ध कोई शिकायत है तो हम इसकी जांच करवा लेंगे, यदि कोई गड़बड़ी होगी तो हम संबंधित को हटा भी देंगे. लेकिन किसी के विरूद्ध कोई शिकायत नहीं है. केवल कोई आदेश जारी हुए हैं कि हटा सकते हैं तो इस आधार पर हटाना तो ठीक नहीं है. शिकायत हो तो हम जांच करवायें, गलती हो तो हम हटायें.

श्री अनिल फिरोजिया- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उनकी बहुत सी शिकायतें हैं. हमने स्‍वयं लिखित में शिकायत की है. पहले भी पूरे जिले के विधायकों ने शिकायत की है. मंत्री जी या तो उसे हटायें या उसकी जांच करवायें. ....(व्‍यवधान)....

श्री बहादुर सिंह चौहान- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप मंत्री जी को आदेश दें कि वे उज्‍जैन जिले के पांचों विधायकों को जांच में शामिल कर लें. मेरा महिदपुर क्षेत्र भी इससे जुड़ा हुआ है.

अध्‍यक्ष महोदय- मंत्री जी, जो शिकायतें हुई हैं, उसके संबंध में...........

कुंवर विजय शाह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं बड़ी विनम्रता के साथ माननीय विधायक जी को कहना चाहता हूं कि मेरे पास आज दिनांक तक कोई शिकायत नहीं आई है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दो-दो लोग एक साथ बोलेंगे तो मैं जवाब कैसे दे पाऊंगा. .....(व्‍यवधान)....

अध्‍यक्ष महोदय- जी हां, दो नहीं, तीन लोग एक साथ बोल रहे हैं. आप सभी पहले मंत्री जी का जवाब सुन लीजिए. अनिल जी आप बैठ जाईये.

श्री सतीश मालवीय- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी जांच करवाने का आश्‍वासन दे रहे हैं. मेरा मंत्री जी से अनुरोध है कि जिन अधीक्षकों एवं सहायक अधीक्षकों को तीन साल से अधिक समय हो गया है, क्‍या मंत्री जी उनका एक स्‍थान से दूसरे स्‍थान पर स्‍थानांतरण करेंगे ताकि वहां के छात्र-छात्राओं को जिस असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, वे उस असुविधा से बच सकें.

कुंवर विजय शाह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पहली बात की मेरे पास कोई शिकायत आई ही नहीं है. शिकायत आयेगी तो मैं कोई निर्णय लूंगा. दूसरी बात यह है कि राज्‍य शिक्षा केंद्र में नियम वर्ष 2014-15 के हैं. मैं मानता हूं कि देश-काल-परिस्थिति बदली है और समय के साथ-साथ कलेक्‍टर और जिला अधिकारियों के अधिकारों की हमें समीक्षा करनी पड़ेगी. भोजन, मेडिकल, स्‍थानांनतरण सभी मामलों की हम बहुत जल्‍दी समीक्षा करके, जिन नियमों में परिवर्तन करना होगा, उन्‍हें परिवर्तित करेंगे. सरकार बच्चियों की सुरक्षा और सम्‍मान के साथ कोई समझौता नहीं करेगी.

श्री सतीश मालवीय- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि यदि वे समीक्षा करेंगे तो फिर जांच किस बात की करेंगे ? यदि सब कुछ सही पाया गया है तो वह किस चीज़ की जांच करेंगे ?

अध्‍यक्ष महोदय- मंत्री जी शिकायत मिलने पर जांच करवायेंगे.

श्री अनिल फिरोजिया- यह बहुत ही गंभीर मामला है.

श्री बहादुर सिंह चौहान- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं शिकायत के बारे में बताना चाहता हूं, शिकायत मंत्री जी के पास नहीं पहुंची है. शिकायत यह है कि सभी वार्डनों को हटा दिया गया है. प्रतिनियुक्ति पर रखने का प्रावधान नहीं है. कितने समय तक उन्‍हें रखा जाएगा यह उत्‍तर में लिखा नहीं है. अपने चहेतों को वार्डन का चार्ज दे दिया गया है. अध्‍यक्ष महोदय, मेरा इस प्रकरण में आपसे केवल इतना आग्रह है कि मंत्री जी ने जांच का आश्‍वासन दे दिया है, यह हमारे जिले से जुड़ा हुआ मुद्दा है. हम नहीं कह रहे हैं कि वार्डन को हटाकर जांच की जाए क्‍योंकि कोई आरोप नहीं है. हम केवल यह कह रहे हैं कि जांच में उज्‍जैन जिले के समस्‍त विधायकों को सम्मिलित कर लिया जाए.

श्री सतीश मालवीय- इसमें बहुत भ्रष्‍टाचार हुआ है.

कुंवर विजय शाह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कलेक्‍टर मिशन का लीडर होता है. अगर माननीय विधायक कलेक्‍टर से संतुष्‍ट नहीं हैं तो मैं भोपाल से अधिकारी भेज कर जांच करवा लेता हूं.

श्री सतीश मालवीय- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं अपनी केवल एक और बात के लिए आपका संरक्षण चाहता हूं. यह अनुसूचित जाति के बच्‍चे-‍बच्चियों से जुड़ा हुआ मामला है. हम लोगों को अपने क्षेत्र में जवाब देना पड़ता है. हम अपनी बात सदन में नहीं रख पायेंगे तो कहां रखेंगे ? .....(व्‍यवधान )....

अध्‍यक्ष महोदय- आपकी बात आ गई है.

श्री सतीश मालवीय- मंत्री जी ने मेरे प्रश्‍न का जवाब दिया ही नहीं है. भोपाल स्‍तर के अधिकारी से प्रकरण की जांच करवायें. माननीय मंत्री जी भ्रष्‍ट अधिकारियों को बचाने में लगे हुए हैं. मंत्री जी भ्रष्‍ट अधिकारियों को क्‍यों बचाना चाहते हैं ? इसके पीछे क्‍या कारण है. ....(व्‍यवधान)....

अध्‍यक्ष महोदय- भोपाल से अधिकारी भेज कर मंत्री जी जांच करवा लेंगे. आपकी बात का समाधान हो गया है. आप शिकायत करिये, मंत्री जी उसकी जांच करवायेंगे. आप वही-वही बात कब तक पूछेंगे ?

श्री अनिल फिरोजिया- मंत्री जी जांच में विधायकों को शामिल क्‍यों नहीं करना चाहते हैं. अधिकारियों को क्यों बचाना चाहते हैं?

श्री सतीश मालवीय-- वह भी भ्रष्ट अधिकारी को क्यों बचाना चाहते हों, इसके पीछे क्या कारण है?

अध्यक्ष महोदय-- आप बैठ तो जाएँ.

श्री अनिल फिरोजिया-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी विधायकों को क्यों नहीं लेना चाहते?

श्री गोपाल भार्गव-- अध्यक्ष महोदय, जैसा माननीय मंत्री जी ने कहा है, तो जो भी विषय हो उसे आज ही लिख कर एक शिकायत दे दो, कार्यवाही हो जाएगी.

श्री सतीश मालवीय-- शिकायत तो दे चुके हैं.

कुँवर विजय शाह-- माननीय अध्यक्ष जी, उस अधिकारी को तो मैं जानता भी नहीं हूँ. लेकिन एक साल भी नहीं हुआ है, आप शिकायत दे दें मैं जाँच करा लूँगा.

अध्यक्ष महोदय-- आप भोपाल से वरिष्ठ अधिकारी को भेज कर जाँच करा लीजिए, ऐसा उनका अनुरोध है.

कुँवर विजय शाह-- आप जैसी चाहेंगे, अध्यक्ष जी, पहले शिकायत तो आवे. किस चीज की जाँच करा लूँ मैं? ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- अब कितनी बार वही वही बात करेंगे? अब मधु भगत जी का ही लिखा जाएगा.

डॉ.नरोत्तम मिश्र-- अध्यक्ष जी, सम्मानित सदस्य का कहना है कि भोपाल का अधिकारी जाकर जाँच कर ले.....

श्री सतीश मालवीय-- विधायकों की उपस्थिति में.

डॉ.नरोत्तम मिश्र-- जब आपकी भी शिकायत उसमें शामिल हो जाएगी, भोपाल से अधिकारी जाकर जाँच करेंगे ऐसा मंत्री जी ने बोल दिया है.

अमानक दवाइयों की खरीदी की जाँच

[लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]

6. ( *क्र. 4506 ) श्री मधु भगत : क्या लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अतारांकित प्रश्‍न (क्रमांक 3224) दिनांक 24.07.2015 के उत्‍तर में यह स्‍वीकार किया गया है कि वर्ष 2013-14 में अमानक दवाइयां खरीदी गईं? यदि हाँ, तो वर्ष 2013-14 से प्रश्‍न दिनांक तक ऐसे कितने प्रकरण विभाग की जानकारी में हैं, जिनमें कि अमानक दवाइयां क्रय में अनियमिततायें, भंडार क्रय नियमों का उल्‍लंघन, निविदा पद्धति का उल्‍लंघन किया हो? तिथिवार बतायें तथा यह बतायें कि संबंधित अधिकारी/कर्मचारी/एजेंसी या अन्‍य जिम्‍मेदारों पर कब-कब क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई? (ख) प्रश्‍न क्रमांक 3224, दिनांक 24.07.2015 के उत्‍तर अनुसार अमानक दवाइयों के दोषि‍यों पर पुलिस में एफ.आई.आर. की गई? यदि हाँ, तो बतायें कि संबंधित अधिकारी/कर्मचारी/एजेंसी या अन्‍य जिम्‍मेदारों पर कब-कब क्‍या कार्यवाही की गई? (ग) क्‍या अमानक दवाइयों के क्रय के अलावा ऑक्सीजन गैस सिलेण्‍डर, पट्टी गॉज बैंडेज कपास खरीदने में भी अनियमिततायें पाई गईं हैं? उक्‍त अवधि में यह बतायें कि प्रश्‍नांश (ग) में अंकित सामानों की खरीदी कब-कब किस-किस फर्म से कितनी-कितनी राशि की, की गयी? तिथिवार, वर्षवार, निविदावार, संस्‍थावार बिल एवं जमा रसीद की प्रति बतायें

लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) विभाग द्वारा अमानक दवाइयों की खरीदी नहीं की जाती है। क्रय करने के पश्चात् राज्य स्तरीय प्रयोगशाला में जाँच उपरांत कतिपय कारणों से दवाइयां अमानक पाई जाती हैं। वर्ष 2013-14 से प्रश्न दिनांक तक अमानक पाई गई दवाइयों की सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। दवाइयों के क्रय में अनियमितता अथवा भंडार क्रय नियमों का उल्लघंन नहीं किया जाता है। परीक्षण पश्चात् अमानक पाई जाने वाली दवाइयों के सप्लायर/फर्म पर निविदा शर्तों अनुसार कार्यवाही की जाती है। अधिकारियों/कर्मचारी/एजेंसी की सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) निविदा की शर्तों में दवा क्रय के उपरांत लेब टेस्टिंग में दवा अमानक पाए जाने पर दवा के बदलने/सप्लायर्स के विरूद्ध कार्यवाही का प्रावधान है, इन प्रकरणों में निविदा की शर्तों के अनुसार कार्यवाही की जा चुकी है, जिसकी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग)

श्री मधु भगत-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने आपके माध्यम से लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री से जानकारी चाही थी. जिसमें जो जानकारी मुझे मंत्री जी द्वारा दी गई है, उसमें जो प्रश्नांश ख है इसका मंत्री महोदय ने मुझे जो जवाब दिया है, वह बिल्कुल गलत दिया है. उत्तर में यह स्वीकार किया है कि दवा क्रय के उपरांत लेब टेस्टिंग में दवा अमानक पाए जाने पर दवा को बदलने एवं सप्लायर के विरुद्ध कार्यवाही करने का प्रावधान है. यदि यह सही है तो बताएँ कि आपने मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम मर्यादित के पत्र क्रमांक लघु उद्योग निगम/विपणन/ पीएस 4, 2011-12/1124/26 भोपाल दिनाँक 7.3.2013 द्वारा संचालक, स्वास्थ्य सेवाओं को यह सूचित कर दिया था कि पायरेथ्रम दवा एक्स्ट्रेक्ट दो प्रतिशत के परीक्षण में अमानक पाई गई. इसके बावजूद संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएँ के पत्र क्रमांक 8 मलेरिया.....

अध्यक्ष महोदय-- आप पत्र मत पढ़िए. आप तो सीधा प्रश्न करिए. आप इस पत्र से क्या चाहते हैं?

श्री मधु भगत-- अध्यक्ष महोदय, अगर आपको जब बता दिया गया कि यह दवाई मार्च के महीने में अमानक है, उसके बाद भी 24 जुलाई को, इन्होंने 2012 को 50 लाख 70 हजार का भुगतान कर दिया. मेरा सवाल यह है कि जब दवाई अमानक पाई गई तो आपने भुगतान कैसे किया?

श्री रुस्तम सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य क के उत्तर से सहमत हैं इसलिए ख के बारे में जानकारी चाह रहे हैं, यह मान लिया जाए?

श्री मधु भगत-- अध्यक्ष महोदय, मैंने अभी वही प्रश्न किया है क्योंकि जानकारी मेरे पास अभी आई है.

श्री रुस्तम सिंह-- आपको क को नहीं पूछना है?

श्री मधु भगत-- अभी आप मेरे सवाल का जवाब दे दीजिए. पहले आप इसका जवाब दे दीजिए फिर क का भी पूछ लूँगा.

श्री रुस्तम सिंह-- आप आगे की पंक्ति से पीछे आएँगे, ठीक है, क्योंकि पहले से दूसरा संबंधित है इसलिए मैंने कहा है. अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्य को यह बताना चाहता हूँ कि निविदा की जो शर्तें होती हैं उसमें दवा आती है, उसमें लेब टेस्टिंग होती है और लेब टेस्टिंग में अगर वह अमानक पाई जाती है तो उसको निरस्त तो किया ही जाता है, उस कंपनी को ब्लेक लिस्टेड भी किया जाता है और भविष्य में उस कंपनी से दवाई भी नहीं खरीदी जाती है और आपने जो कहा है कि इसके बाद पेमेंट हो गया. अमानक पाए जाने के बाद पेमेंट हो गया, यह बात सही नहीं है. जब पता लग गया था और एक तरह की दवाई की यह पचास लाख की कीमत की बता रहे हैं, अगर इनका सत्य है तो मैं इसके पूरे ब्यौरों में तह में जाकर, इन्होंने जो कहा है उसी की जाँच कराऊँगा.

श्री मुकेश नायक-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे पास आपके विभाग के ये पेपर हैं कि भुगतान हो गया है. आप कहें तो मैं इन्हें सदन के पटल पर रख दूँ?

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, अभी पटल पर नहीं रखना है. मधु भगत जी को पूछने दीजिए.

श्री मुकेश नायक-- अध्यक्ष महोदय, इसके बाद मुझे एक प्रश्न पूछने की अनुमति दे दें.

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, अभी पहले उनसे बात कर लें, उसके बाद सोचेंगे.

श्री मधु भगत-- अध्यक्ष महोदय, यह मेरे पास लेब की पूरी रिपोर्ट है और उस लेब की रिपोर्ट के बाद...

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, पेमेंट हो गया उसके बारे में बताएँ.

श्री मधु भगत-- अध्यक्ष महोदय, पेमेंट की रिपोर्ट है. जिस लेब की रिपोर्ट में यह पाया गया कि वह दवाई अमानक है.

अध्यक्ष महोदय-- कौनसी तारीख की है और पेमेंट कौनसी तारीख का है?

श्री मधु भगत-- यह भी मैं आपको बता देता हूँ. इसकी जो तारीख है, मैंने अभी थोड़ी देर पहले पूरा बताया था, पत्र के माध्यम से...

अध्यक्ष महोदय-- पढ़ कर नहीं बताना. केवल तारीख बता दीजिए.

श्री मधु भगत -- मैं तारीख बता देता हॅूं. यह पाया गया है, दिनांक 07.03.2013 और उसके बाद 24 जुलाई, 2012 को 50 लाख 70 हजार रूपये का भुगतान किया गया है.

श्री रूस्‍तम सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप सोचते हैं कांग्रेस में जैसा होता था वैसा ही हम भी मान लें. ऐसा कैसे मान लें. मेरा आग्रह सुनें. विधायक महोदय थोड़ा कन्‍फ्यूज़ हो गए हैं, जो 50 लाख 70 हजार का बताया गया है, वह मलेरिया के छिड़काव की दवाईयों का पेमेन्‍ट है. जो माननीय विधायक बता रहे है, यह उसका पेमेन्‍ट नहीं है.

श्री मधु भगत -- हम उसी की बात कर रहे हैं अब आप सही जा रहे हैं. हम वहीं ले जाना चाह रहे थे मलेरिया छिड़काव में. .... (व्‍यवधान)......सिंगरौली, सीधी में 40-40 लोगों की मौत हुई थी इसमें तीन दिन तक मुख्‍यमंत्री जी उस जगह पर बैठकर राजनीति करते रहे और यही पेमेन्‍ट है जो आपको बताया जा रहा है 11-12 जुलाई की जो तारीख है आपने पेमेन्‍ट किया है जबकि फरवरी में आपके पास रिपोर्ट आ गई थी. सातवें महीने में पेमेन्‍ट करने का क्‍या औचित्‍य बनता है? जबकि फरवरी में उसे अमानक घोषित कर दिया. इसके पीछे कितना बड़ा भ्रष्‍टाचार है. क्‍योंकि यह छोटा-सा 50 लाख 70 हजार का पेमेन्‍ट है. इसमें कम से कम हम पूरे प्रदेश भर में लें तो कितना बड़ा भ्रष्‍टाचार उजागर होगा.

अध्‍यक्ष महोदय -- कृपया बैठ जाएं.

श्री रूस्‍तम सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम जो उत्‍तर दे रहे हैं और माननीय विधायक जो पूछ रहे हैं उसमें गेप है. हम जो कह रहे हैं कि 50 लाख का ऑर्डर है वह उससे हटकर दूसरी कंपनी का है. जिसका अमानक बोल रहे हैं उसका नहीं है. हमारे विभाग का ऐसा कहना है, माननीय विधायक जी अगर ऐसा बोल रहे हैं सबूत हैं तो आप दे दीजिए मैं पूरे प्रकरण की जॉंच करा लूंगा और इसमें जो दोषी होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी.

श्री मधु भगत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम बिल्‍कुल संतुष्‍ट नहीं हैं.

श्री रामनिवास रावत -- अमानक पायी गई दवाईयों का भुगतान किया है हॉं या नहीं?

श्री मधु भगत -- बस हम यही चाह रहे हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी मेरे सवाल का पूरा जवाब नहीं आया है. यह भ्रष्‍टाचार का मामला है. इसका पेमेन्‍ट कैसे हुआ ? .......(व्‍यवधान)...... पूरे के पूरे हमारे पास एविडेंस हैं.

श्री रामनिवास रावत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, छोटा-सा प्रश्‍न है. क्‍या अमानक पायी गई दवाइयों का भुगतान हुआ है या नहीं ?

श्री रूस्‍तम सिंह -- हमारा यह कहना है कि अमानक दवाईयों का भुगतान नहीं हुआ है और अगर यह कह रहे हैं तो सबूत दें, हम कार्रवाई करेंगे.....(व्‍यवधान)...

श्री मुकेश नायक -- यह डायरेक्‍टर का पत्र है.

अध्‍यक्ष महोदय -- अब उनका सीधा प्रश्‍न था और उसका सीधा उत्‍तर आ गया.

श्री मुकेश नायक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से जिस बारे में प्रश्‍न पूछा गया है उसी डायरेक्‍टर की चिट्टी है.

अध्‍यक्ष महोदय -- अब बैठ जाइए, अब श्री आरिफ अकील जी को पूछ लेने दीजिए.

अनाधिकृत लोगों को अधिग्रहित भूमि का मुआवज़ा

[पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण]

7. ( *क्र. 4439 ) श्री आरिफ अकील : क्या राज्‍यमंत्री, पिछड़ा वर्ग महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) प्रदेश के मण्‍डला जिला मण्‍डला के सक्षम प्राधिकारी भू-अर्जन राष्‍ट्रीय राजमार्ग 12-ए एवं अनुविभागीय अधिकारी राजस्‍व मण्‍डला द्वारा वक्‍फ सम्‍पत्ति खसरा 80 रकबा 0.110 हेक्‍टेयर, खसरा नम्‍बर 102/2 रकबा 0.020 हेक्‍टेयर भूमि अधिग्रहित करने के फलस्‍वरूप जिला प्रशासन द्वारा मुआवज़े की राशि वक्‍फ अंजुमन कमेटी तिदनी और जिला वक्‍फ कमेटी मण्‍डला को रूपये 56,84,661/- (छप्‍पन लाख चौरासी हजार छ: सौ इकसठ) भुगतान किया गया है? (ख) यदि हाँ, तो प्रश्नांश (क) में उल्‍ले‍खित अधिग्रहित भूमि के मुआवज़े की राशि किस स्‍वामित्‍वता के तहत अंजुम कमेटी तिदनी व जिला वक्‍फ कमेटी मण्‍डला को भुगतान की गयी तथा अंजुम कमेटी व जिला वक्‍फ कमेटी द्वारा बिना बोर्ड स्‍वीकृति के किस अधिकारिता के तहत राशि प्राप्‍त की? संबंधितों का यह कृत्‍य भ्रष्‍टाचार की श्रेणी में नहीं है? यदि है तो शासन द्वारा किन-किन के विरूद्ध क्‍या-क्‍या तथा कब तक कार्यवाही करेंगे? यदि नहीं, तो क्‍यों? (ग) क्‍या जिला वक्‍फ कमेटी मण्‍डला का कार्यकाल 16 मई, 2016 को समाप्‍त हो चुका था? यदि हाँ, तो क्‍या अधिनियम में किसी भी जिला व प्रबंध कमेटी के गठन का अधिकार मात्र बोर्ड को होता है? यदि हाँ, तो जिला वक्फ कमेटी मण्‍डला ने तिदनी अंजुमन कमेटी का गठन किस आधार पर किया? इस नियम विपरीत कार्यवाही में क्‍या मध्‍यप्रदेश वक्‍फ बोर्ड के वर्तमान अध्‍यक्ष की अप्रत्‍यक्ष रूप से सहभागिता है? यदि नहीं, तो लगभग 1 (एक) वर्ष व्‍यतीत हो जाने के पश्‍चात् भी मध्‍यप्रदेश वक्‍फ बोर्ड अध्‍यक्ष द्वारा प्रश्नांश (क) (ख) में जो राशि का लेनदेन हुआ उसके विरूद्ध कार्यवाही नहीं करने के क्या कारण हैं?

राज्‍यमंत्री, पिछड़ा वर्ग ( श्रीमती ललिता यादव ) : (क) कलेक्‍टर मण्‍डला से प्राप्‍त जानकारी अनुसार जिला प्रशासन द्वारा मुआवजे की राशि वक्‍फ अंजुमन कमेटी तिदनी और जिला वक्‍फ कमेटी मण्‍डला को रू. 51,83,541/- (इक्‍यावन लाख त्रियासी हजार पाँच सौ इकतालीस) का भुगतान किया गया। इसका विवरण निम्‍नानुसार है :- खसरा नं. 80 रकबा 0.020 हेक्‍टेयर जो अंजुमन कमेटी तिदनी के नाम पर भूमि स्‍वामी हक में दर्ज है, जिसमें से 0.110 हेक्‍टेयर भूमि अर्जित कर मुआवजा रूपये 665236/- स्‍वीकृत हुआ जिसका भुगतान अंजुमन कमेटी तिदनी की ओर से मो. आकिद एवं मो. आविद द्वारा प्राप्‍त किया गया है। इसी प्रकार खसरा नं. 102/2 रकबा 0.020 हेक्‍टेयर तिदनी मस्जिद कमेटी तिदनी के द्वारा मुतवल्‍ली सैय्यद वरकतुल्‍ला पिता सैय्यद अब्‍दुल्‍ला के नाम पर दर्ज है, जिसका 0.220 हेक्‍टेयर भूमि एवं उस पर निर्मित पक्‍का मकान का मुआवजा का भुगतान रूपये 4518305/- सचिव मस्जिद कमेटी श्री मंसूरी अहमद द्वारा प्राप्‍त किया गया है। (ख) प्रश्नांश (क) के संबंध में मध्‍यप्रदेश वक्‍फ बोर्ड एवं कलेक्‍टर मण्‍डला द्वारा जाँच की जा रही है। (ग) जी हाँ। प्रकरण का परीक्षण कराया जा रहा है।

श्री आरिफ अकील -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न का जवाब पूरी तरह से माननीया मंत्री जी नहीं दे पायी हैं. मैं आपके माध्‍यम से पूछना चाहता हॅूं कि वक्‍्फ अधिनियम धारा में स्‍पष्‍ट प्रावधान हैं कि वक्‍फ बोर्ड की अनुमति के बगैर, अध्‍यक्ष महोदय आप हमारी तरफ भी देख लीजिए (हंसी)...

अध्‍यक्ष महोदय -- मैं सुन लेता हॅूं. देखूं कहीं भी. बात आपकी सुनता हॅूं.

श्री आरिफ अकील -- अध्‍यक्ष महोदय, मुझे यह अच्‍छा नहीं लगेगा कि कहीं देखो. मुझे देखो, मुझे सुनो तो अच्‍छा लगेगा.

अध्‍यक्ष महोदय -- चलिए ठीक है.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास (श्री गोपाल भार्गव) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अच्‍छा है आप नहीं देखते हैं. (XXX)..(हंसी)..

अध्‍यक्ष महोदय -- वह स्‍मार्ट हैं. ऐसा नहीं है.

श्री आरिफ अकील -- ठीक है. अच्‍छा लग रहा है आपको. आपकी तो आदत में ही बना हुआ है. आपको जो अच्‍छा लगता है, अध्‍यक्ष जी भी कभी-कभी आपको नजरअंदाज कर देते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- चलिए, आप तो प्रश्‍न करें.

श्री आरिफ अकील -- आपका विशेष अधिकार है. जो चाहे गाओ, जो चाहे बजाओ. गाना बजाना दोनों आपका उचित रहेगा.

अध्‍यक्ष महोदय -- कृपया प्रश्‍न करें.

श्री गोपाल भार्गव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस सदन में कोई किसी को देखने के लिए बाध्‍य कर सकता है ? आप आसंदी से व्‍यवस्‍था दे दें.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय ने जो कद, काठी की बात कही है उसे विलोपित किया जाए. यह उचित नहीं है.

श्री आरिफ अकील -- हम उससे ज्‍यादा अच्‍छे शब्‍द बोल सकते हैं. आप उसको विलोपित मत करना.(XXX).

अध्‍यक्ष महोदय -- सारा विलोपित कर दें. आप सीधा प्रश्‍न करें.

श्री आरिफ अकील -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने आपसे पूछा कि माननीय मंत्री जी से मैं पूछना चाहता हॅूं कि क्‍या धारा 51 में प्रावधान हैं कि वक्‍फ भूमि का जो अधिग्रहण किया जाता है वह वक्‍फ अनुमति से किया जाता है. उसकी अनुमति के बगैर कोई वक्‍फ भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जा सकता. यह मंडला का ऑर्डर हुआ है 31.8.2015 को आदेश पारित किया है उसमें वक्फ बोर्ड को पक्षकार नहीं बनाया गया है और यह सीधा-सीधा 56 लाख रुपयों का गबन हुआ है. मैं आपके माध्यम से मंत्री महोदय से कहना चाहता हूं कि बहन जी, आज महिला दिवस है. आज बेईमानों को ऐसा सबक सिखाना, ऐसी कार्यवाही करना कि आइन्दा कोई बेईमानी ना करे और ऐसा लगे कि महिला दिवस पर महिला मंत्री ने ऐसी घोषणा की कि दूध-का-दूध और पानी-का-पानी अलग-अलग कर दिया.

अध्यक्ष महोदय-- आप साइकोलॉजिकल प्रेशर मत डालिये,तथ्यगत जवाब आने दीजिये.

श्री आरिफ अकील-- अध्यक्ष महोदय, आज तक हम आप पर प्रेशर नहीं डाल पाये तो किसी और पर हमारा प्रेशर क्या डलेगा.

श्रीमती ललिता यादव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर पूरे सदन को अपनी ओर से बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनायें देती हूं साथ ही विधायक जी को भी मैं बहुत-बहुत शुभकामनायें देना चाहती हूं. अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी ने जो कहा है कि कोई भी संपत्ति बिना वक्फ की अनुमति के ना क्रय की जा सकती है ना उसका भुगतान किया जा सकता है. यह बात बिल्कुल सही है कि वक्फ बोर्ड की अनुमति के बिना उसका भुगतान नहीं हो सकता यह गलत हुआ है. अध्यक्ष महोदय, इस गलती के लिए 14 तारीख को जो पत्र प्राप्त हुआ उसमें जाँच की गई है और कलेक्टर ने 20 फरवरी को इसके जांच के आदेश दे दिये हैं.

श्री आरिफ अकील-- माननीय अध्यक्ष महोदय, 56 लाख रुपये का गबन हुआ है. मंत्री महोदया कह रही हैं कि वक्फ बोर्ड की अनुमति के बगैर अधिग्रहण नहीं किया जा सकता है. जब सभी यह मान रहे हैं..

अध्यक्ष महोदय-- अधिग्रहण या भुगतान ?

श्री आरिफ अकील-- जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जा सकता है और भुगतान भी नहीं किया जा सकता है. दोनों काम नहीं हो सकते हैं लेकिन भुगतान हो गया है तो अब जाँच किस बात की हो रही है अब तो एफआईआर की आवश्यकता है. वक्फ बोर्ड ही जिम्मेदार हैं और जो वहाँ अंजुमन की कमेटी बनाई गई है जिनका 15.5.2016 को कार्यकाल भी समाप्त हो गया था और 1.6.2016 को उन्होंने एक सब-कमेटी बनाई, उस कमेटी ने इस 56 लाख रुपये का भुगतान ले लिया अगर ऐसे गबन होते रहेंगे, जाँच होती रहेगी और एफआईआर नहीं होगी तो कैसे वक्फ बोर्ड का निजाम चल पाएगा.अध्यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहते हुए कहना चाहता हूं कि जब बात क्लियर हो गई है कि 56 लाख रुपये का गबन हुआ है तो उनके खिलाफ एफआईआर क्यों नहीं हो रही है?

श्रीमती ललिता यादव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह बात सही है कि कमेटी का कार्यकाल मई 2016 को समाप्त हो गया था लेकिन जब तक नई कमेटी नहीं बनती तब तक पुरानी कमेटी कार्यरत् रहती है. माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं विधायक जी को बताना चाहती हूं कि वक्फ बोर्ड ने एफआईआर के आदेश दे दिये हैं और जो-जो दोषी होंगे उन पर कार्यवाही होगी, उन पर एफआईआर होगी और विधायक जी चाहेंगे तो मैं इसकी कॉपी विधायक जी को दे दूँगी.

श्री आरिफ अकील-- अध्यक्ष महोदय, मेरा एक आखिरी प्रश्न है. आप सुन तो लीजिये मुझे एक मिनट का टाइम दे दीजिये.

अध्यक्ष महोदय-- अब ऑर्डर हो ही गया है. जो आप चाहते थे वह आदेश हो गये हैं.

श्री आरिफ अकील-- अध्यक्ष महोदय, मैं कह रहा हूं कि वक्फ बोर्ड इसमें इन्वाल्व है और मंत्री महोदया कह रही हैं कि वक्फ बोर्ड ने एफआईआर के आदेश दे दिये हैं. मैं यह अनुरोध करना चाहता हूं कि जब वक्फ बोर्ड इसमें इन्वाल्व है तो वह एफआईआर कैसे कर रहा है. आप तो जो भी दोषी हों, चाहे वक्फ बोर्ड हो, चाहे सब-कमेटी हो, चाहे आपके विभाग के अधिकारी हों उनके खिलाफ जाँच के आदेश देना चाहिए.

श्री बाबूलाल गौर-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह तो गंभीर बात है कि अपराधी खुद जाकर एफआईआर करा रहा है. अपराधी एफआईआर कैसे कराएंगे. वक्फ बोर्ड ही अपराधी है.

श्री आरिफ अकील-- अध्यक्ष महोदय, न्याय करिये.

श्रीमती ललिता यादव-- अध्यक्ष महोदय, वक्फ बोर्ड अपराधी नहीं है. वहाँ जिला कमेटी ने एक कमेटी बनाई है.

श्री आरिफ अकील-- क्या जिला कमेटी को सब-कमेटी बनाने का अधिकार है?

श्रीमती ललिता यादव-- माननीय सदस्य, आप सही कह रहे हैं कि जिला कमेटी को कमेटी बनाने का अधिकार नहीं है. वहाँ गलत हुआ है और विवेचना के अनुसार कार्यवाही की जाएगी, जाँच में जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कार्यवाही होगी.

श्री बाबूलाल गौर-- अध्यक्ष महोदय, यह बहुत गंभीर मामला है. पूरा विभाग, पूरा वक्फ बोर्ड गलत काम कर रहा है और जो अपराधी हैं, उनके खिलाफ कार्यवाही होना चाहिए. अध्यक्ष महोदय, जिस वक्फ बोर्ड ने खुद ही यह कार्य किया है और वह अपराधी है, उसने एक कमेटी बना दी, वह भी अपराधी हैं इसलिए पूरा वक्फ बोर्ड अपराधी है उनके खिलाफ एफआईआर होना चाहिए. यह हमारा अनुरोध है.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय गौर साहब बिल्‍कुल सही बोल रहे हैं और आरिफ अकील जी की बात भी उसी में आ गई है. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदया से अनुरोध करना चाहता हूँ कि जब वक्‍फ़ बोर्ड ही शामिल है तो क्‍यों न आप सीधे विभाग से ही कार्यवाही करवाते ?

अध्‍यक्ष महोदय -- उत्‍तर में कहा लिखा है कि वक्‍फ़ बोर्ड शामिल है ?

श्रीमती ललिता यादव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विवेचना में जो-जो दोषी पाए जाएंगे उन पर कार्यवाही होगी और एफ.आई.आर. होगी.

सी.टी. एवं एम.आर.आई. जाँच हेतु आधुनिक मशीनों की स्‍थापना

[चिकित्सा शिक्षा]

8. ( *क्र. 4458 ) श्रीमती प्रतिभा सिंह : क्या राज्‍यमंत्री, चिकित्सा शिक्षा महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश के किन-किन मेडिकल कॉलेजों में सी.टी., एम.आर.आई. जाँच हेतु विभागीय आधुनिक मशीनें उपलब्‍ध हैं एवं किन-किन मेडिकल कॉलेजों में पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप के अंतर्गत मशीनें लगाई गयीं हैं? जबलपुर मेडिकल कॉलेज में संचालित P.P. पार्टनरशिप की मशीनों को विगत 5 वर्षों में जाँचों हेतु शासन द्वारा कितना भुगतान विभिन्‍न योजनाओं से किया गया? (ख) क्‍या शासन द्वारा प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में C.T. एवं MRI जाँच हेतु शासकीय आधुनिक तकनीक की मशीनें लगाई जावेंगी? ताकि प्रदेश के गरीब मरीजों को जाँच की सुविधा एवं पी.जी. (रेडियोलॉजी) छात्रों को प्रायोगिक ज्ञान मिल सकेगा? यदि हाँ, तो कब तक?

राज्‍यमंत्री, चिकित्सा शिक्षा ( एडवोकेट शरद जैन ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। जबलपुर मेडिकल कॉलेज में संचालित पी.पी.पी. पार्टनरशिप की मशीनों के संबंध में विगत 05 वर्षों में जाँच हेतु किये गये भुगतान की जानकारी निम्नानुसार है :-

अवधि

किया गया भुगतान

2012-13

1,36,80,492.00

2013-14

1,20,86,170.00

2014-15

72,95,192.00

2015-16

55,51,685.00

2016-17

1,48,95,625.00

(ख) उत्‍तरांश (क) के परिप्रेक्ष्य में जी हाँ। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

परिशिष्ट - ''दो''

श्रीमती प्रतिभा सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने प्रश्‍न (क) एवं (ख) के उत्‍तर में बताया है कि प्रदेश के 6 शासकीय मेडिकल कॉलेजों में शासकीय एम.आर.आई. मशीन नहीं है और 2 कॉलेजों में सी.टी. मशीन है. महोदय, केवल जबलपुर मेडिकल कॉलेज की मशीन को शासन ने पी.पी.पी. के तहत् 5 करोड़ 35 लाख रुपये का भुगतान बी.पी.एल. के मरीजों हेतु कर दिया, साथ में मशीन लगाने हेतु बिल्‍डिंग एवं बिजली बिल भी शासन देता है. शासन ने एक प्राइवेट मशीन से जाचो के लिए 5 करोड़ से अधिक का भुगतान कर दिया, इतनी राशि में तो नई टेक्‍नॉलॉजी की मशीन खरीदी जा सकती है. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से अनुरोध करना चाहती हूँ कि सभी शासकीय मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक टेक्‍नॉलॉजी की एम.आर.आई. एवं सी.टी. स्‍केन मशीन लगाई जाए ताकि प्रदेश के गरीबों को जाच का लाभ मिल सके, साथ ही रेडियोलॉजी के छात्र भी अच्‍छी पढ़ाई कर सकेंगे. अध्‍यक्ष महोदय, क्‍योंकि सरकार ने इस वर्ष चिकित्‍सा शिक्षा का बजट भी बढ़ा दिया है तो मैं माननीय मंत्री जी को इसके लिए धन्‍यवाद देती हूँ और निवेदन करती हूँ कि चूँकि आज महिला दिवस भी है तो इसके उपलक्ष्‍य में मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में सभी मेडिकल कॉलेजों को एम.आर.आई. मशीन और सी.टी. स्‍केन मशीन देने की घोषणा करें. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से आज यह उपलब्‍धि दिलवा दीजिएगा.

श्री अजय सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, डॉ. गोविन्‍द सिंह जी पूछ रहे हैं कि पुरुष दिवस कब आएगा ?

श्रीमती प्रतिभा सिंह -- अजय सिंह जी, यह संभव नहीं है क्‍योंकि बहुत पहले से पुरुष दिवस चलता रहा है, अभी महिला दिवस आना शुरू हुआ है.

डॉ. गोविन्‍द सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, पुरुषों के अधिकारों के लिए कभी पुरुष दिवस भी मनेगा या नहीं, कब आएगा पुरुष दिवस, हमारा आपसे निवेदन है कि इस विधान सभा में पुरुष दिवस के लिए भी कम से कम कोई दिन नियत कर दें ताकि हमको भी सम्‍मान मिल सके.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, कोई दिन नियत नहीं किया जाएगा.

श्रीमती ऊषा चौधरी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज महिला दिवस के दिन एक भी महिला के साथ अन्‍याय नहीं होगा, क्‍या सरकार इसकी गारंटी लेती है.

अध्‍यक्ष महोदय -- बैठ जाइये, प्रश्‍न का उत्‍तर आने दीजिए.

लोक स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्री (श्री रुस्‍तम सिंह) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो हमारी माननीय विधायिका जी ने बात कही है, दो मेडिकल कॉलेजेस में ऑलरेडी सी.टी. स्‍केन मशीनें हैं और उनका आग्रह यह है कि सभी मेडिकल कॉलेजेस में शासन के द्वारा ये मशीनें स्‍थापित कराई जाएं, जबकि पी.पी.पी. मोड पर हर कॉलेज में ये मशीनें हैं और वे चल रही हैं. उन्‍होंने यह भी सुझाव दिया कि इतना खर्चा सरकार कर ही रही है तो शासन के द्वारा ही क्‍यों न मशीनें खरीदी जाएं, यह सरकार के विचार में है और सरकार यह करना भी चाहती है. भोपाल हेतु पी.पी.पी. के तहत् एम.आर.आई. और सी.टी. स्‍केन मशीन हेतु टेंडर निकल गया है और जहा-जहाँ भी पी.पी.पी. के तहत् मशीनें लगाई गई हैं उनके रिजल्‍ट बेहतर हैं, उनका काम भी बेहतर है, इसलिए हम ऐसा कर रहे हैं. हम लोग तो हर जिला चिकित्‍सालय में सी.टी. स्‍केन की मशीनें पी.पी.पी. के तहत् ही लगाने का सोच रहे हैं क्‍योंकि वे दुरुस्‍त भी रखते हैं और चालू भी रखते हैं और भी बहुत सारी चीजें हैं जिन पर वे ध्‍यान देते हैं, आपने जो कहा उस पर विचार जरूर करेंगे लेकिन रिजल्‍ट्स में, सुविधा में प्राइवेट पार्टनरशिप के नतीजे ठीक आए हैं.

श्रीमती प्रतिभा सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लेकिन प्राइवेट पार्टनरशिप में इतना पैसा शासन का जाता है.

अध्‍यक्ष महोदय -- इसका उत्‍तर उन्‍होंने दे तो दिया.

श्रीमती प्रतिभा सिंह -- उत्‍तर दे तो दिया है लेकिन मेरा यह कहना है कि इसमें शासन को खुद मशीनें खरीदना चाहिए और हमारे सभी मेडिकल कॉलेजेस को मशीनें मिल जाएं.

अध्‍यक्ष महोदय -- आपकी बात का उत्‍तर उन्‍होंने दे दिया है, वही बात वे फिर बोलेंगे.

श्रीमती प्रतिभा सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह मेरा निवेदन था आज महिला दिवस है तो आज के दिन तो कम से कम वे घोषणा कर देते.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, यह कोई बात नहीं है.

श्रीमती प्रतिभा सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद.

वित्‍तीय अपराध के दोषी चिकित्‍सक के विरूद्ध कार्यवाही

[लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण]

9. ( *क्र. 4888 ) पं. रमेश दुबे : क्या लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नकर्ता के परि.अता. प्रश्‍न (क्र. 1331), दिनांक 26.02.2016 के उत्‍तर में यह बताया गया है कि डॉ. प्रमोद वाचक बी.एम.ओ. को वित्‍तीय अनियमितता का प्रथम दृष्‍टया दोषी पाया गया है? प्रक्रियात्‍मक अनियमिततायें एवं समुचित अभिलेखों का संधारण न करना पाया गया? (ख) प्रश्‍नकर्ता के प्रश्‍न क्र. 5618, दिनांक 14.03.2016 के उत्‍तर में बताया गया है कि डॉ. वाचक खण्‍ड चिकित्‍साधिकारी वित्‍तीय अनियमितता के दोषी हैं? प्रश्‍न क्र. 1586 दिनांक 26.07.2016 के उत्‍तर में डॉ. प्रमोद वाचक को वित्‍तीय अनियमितता का दोषी पाये जाने के फलस्‍वरूप उन्‍हें स्‍पष्‍टीकरण जारी किया जाना और प्रश्‍न क्र. 1804, दिनांक 09.12.2016 के उत्‍तर में राशि रूपये 258861.00 वसूली योग्‍य पायी जाने से वसूली जारी होना बताया गया है? (ग) प्रश्नांश (क) और (ख) के अनुसार जब डॉ. वाचक को वित्‍तीय अनियमितता का दोषी पाया गया है तो उनके विरूद्ध थाने में वित्‍तीय अपराध की प्राथमिकी दर्ज क्‍यों नहीं कराई गयी? उन्‍हें अभी तक निलंबित क्‍यों नहीं किया गया? क्‍या यह माना जाय कि स्‍वास्‍थ्‍य विभाग वित्‍तीय अपराधियों को प्रश्रय दे रहा है? (घ) क्‍या शासन वित्‍तीय अपराध के दोषी डॉ. प्रमोद वाचक, तत्‍कालीन बी.एम.ओ. के विरूद्ध थाने में प्राथमिक दर्ज कराने का आदेश देगा? यदि नहीं, तो क्‍यों?

लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) जी हाँ। जी हाँ। (ख) जी हाँ। जी हाँ। जी हाँ। (ग) प्रकरण में संबंधित चिकित्सक के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की प्रक्रिया नियमानुसार जारी है। गुण-दोष के आधार पर निर्णय लिया जावेगा। जी नहीं। (घ) अनुशासनात्मक कार्यवाही की प्रक्रिया पूर्ण होने पर गुण-दोष के आधार पर निर्णय लिया जावेगा।

 

पं. रमेश दुबे :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न के '''' और '''' में माननीय मंत्री जी ने इस बात को स्‍वीकार किया है कि प्रथम दृष्‍टयता वह दोषी पाये गये हैं और अभिलेखों का संधारण नहीं हुआ है और उसी के आधार पर उन्‍होंने उत्‍तर दिया है कि गुण दोष के आधार पर निर्णय लिया जायेगा. मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहूंगा कि गुण दोष का आधार क्‍या होगा और आप निर्णय क्‍या लेंगे, जिन्‍होंने वित्‍तीय अनियमितताएं की हैं ?

श्री रूस्‍तम सिंह :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय विधायक पिछले लगातार तीन चार बार सत्र हुए हैं, तब तब इन्‍होंने यह मुद्दा उठाया है, उनसे जो जांच हुई थी यह रोगी कल्‍याण समिति का पैसा था, जिसके आडिट में यह पाया गया कि पर्टिकुलर इनके बिल नहीं मिल पाये, उसी का उसे दोषी मानकर, उससे वसूली शुरू कर दी है और हर महीने वसूली हो रही है और उसके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी किये गये हैं, जो निकट भविष्‍य में पूरी होगी, जितनी गलती पायी जायेगी उससे उसको सजा भी दी जायेगी.

पं.‍रमेश दुबे:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी ने इस बात को स्‍वीकार किया है. लगभग आठ-नौ बार इस बात की शिकायत करने के बाद यह स्थिति बनी हैं. अभिलेखों का संधारण नहीं हुआ है, संयुक्‍त संचालक स्‍वास्‍थ्‍य, जबलपुर समिति जो इसकी जांच कर रही है; मेरा उनसे यह कहना है कि ढाई वर्ष हो गये हैं और ढाई वर्ष में उन्‍हें इतना अवसर दिया कि फर्जी बिल और बाऊचर लगाने का मौका दिया गया. इसलिये मैं चाहता हूं कि इसकी प्रदेश स्‍तरीय जांच करायी जाये. आर्थिक अनियमितताओं में जब दोषी पाये गये हैं तो क्‍या माननीय मंत्री जी उनके खिलाफ उनको निलंबित करके एफ.आई.आर करायेंगे ? अपने आप निर्णय हो जायेगा,मामला न्‍यायालय में चला जायेगा.

श्री रूस्‍तम सिंह :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपकी चिंता जाहिर है कि रोगी कल्‍याण समिति का पैसा था,उसके कुछ बिल और बाऊचर मेल नहीं खाये थे. उसको विभाग ने गंभीरता से लिया है. जितने बिल मेल नहीं खाये थे, उनसे उनकी वसूली शुरू कर दी है और अभी तक कुछ वसूली हो गयी है. बाकी वसूली भी होगी विभागीय जांच होगी और उसमें जो निर्णय आयेगा उस पर कार्यवाही होगी.

पं.रमेश दुबे :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उन्‍होंने अपने खुद के हस्‍ताक्षर से भी राशि का आहरण किया है. जबकि संयुक्‍त हस्‍ताक्षर से आहरण करना था, यह भी दोषी पाया गया है. उसमें ऐसी भारी अनियमितताएं हुई हैं. मैं चाहता हूं कि माननीय मंत्री जी उसकी विभागीय जांच कराकर उस पर कार्यवाही करवायें ?

अध्‍यक्ष महोदय :- उन्‍होंने जांच कराने का बोल दिया है.

प्रश्‍न कमांक 10- अनुपस्थित. (श्री आशीष गोविंद शर्मा)

मूल विषय के प्रोफेसर पद पर नियम विरूद्ध पदोन्‍नति

[आयुष]

11. ( *क्र. 4157 ) श्री केदारनाथ शुक्ल : क्या लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या आयुष विभाग के कुछ व्‍याख्‍याताओं एवं रीडरों को उनके मूल विषय से हटकर अन्‍य विषय में बिना सहमति पदोन्‍नतियां दी गई हैं? यदि हाँ, तो कब-कब किसे? महाविद्यालयवार, विषयवार सूची दें इसके लिए कौन दोषी हैं? दोषियों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की जावेगी? (ख) क्‍या इन लोगों को विषय विभाग में तत्‍समय रिक्‍त प्रोफेसर के पद के विरूद्ध पदोन्‍नति दी जाना (अन्‍यों की भांति) अपराधिक था? यदि नहीं, तो इन्‍हें भी मूल विषय में कब तक पदस्‍थ कर दिया जावेगा? यदि नहीं, तो क्‍यों?

लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) जी हाँ, पदोन्नति में सहमति का प्रावधान न होने से। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार। कोई नहीं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ख) जी नहीं। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

परिशिष्ट - ''चार''

श्री केदारनाथ शुक्‍ल :- अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि यदि द्रव्‍य गुण विज्ञान विषय का संबध विषय अगद तंत्र है.अगद तंत्र एवं विकृति तंत्र है तो अगद तंत्र एवं विकृति तंत्र का संबध विषय द्रव्‍य गुण विज्ञान विषय भी है,और बिना सहमति के द्रव्‍यगुण विज्ञान विषय के लेक्‍चरर को आपने अगद तंत्र में दे दिया, अब उसके बाद उसकी ओर से लगातार अपने मूल विषय की ओर जाने की बात की जा रही है.आप उसे मूल विषय में भेज नहीं रहे हो और उसकी ओर से लगातार रिप्रेजेंटेशन दिये गये हैं. जूनियर को लगातार प्रमोशन दिये गये हैं. कहीं नियम का पालन नहीं किया गया है, लेकिन उसके लिये बार-बार नियमों का हवाला दिया जाता है. मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करना चाहता हूं कि क्‍या आप सारे प्रकरण की जांच कराकर संबंधित को उसके विषय का प्रोफेसर बनायेंगे. क्‍योंकि उसकी एम.डी और पी.एच.डी भी द्रव्‍यगुण विज्ञान विषय में है. इसके बाद भी उसके द्वारा प्रमोशन मांगने पर नहीं मिल रहा है. जबकि उसके जूनियर्स को बिना समय सीमा का पालन किये रीडर्स बना दिया गया है. इस नाते मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि आप क्‍या उसे उसके मूल विषय प्रोफेसर बनायेंगे ?

श्री रूस्‍तम सिंह :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जो प्रश्‍न उठाया है उसमें वह यह बताना चाहते हैं कि आयुर्वेदिक कालेज में रीडर बनने के लिये पांच साल और प्रोफेसर बनने के लिये 10 साल का अनुभव उसी विभाग का जरूरी है, जिस विभाग में वह व्‍याख्‍याता है. यह जिस पर्टीकुलर प्रकरण की बात कर रहे हैं, उनके पास जिस समय उनको रीडर बनाया गया तब उनके पास पूरा अनुभव नहीं था और वह पद भरा हुआ था, पद एक ही था. नियमानुसार उन्‍होंने स्‍वीकृत किया, जो ग्रुप होता है कि इसमें भी प्रमोशन हो सकता है उसमें उनका प्रमोशन किया गया और उसकी सीनियरिटी के हिसाब से उनको फिर प्रोफेसर के पद पर प्रमोशन किया गया, वह पदोन्‍नतियां प्राप्‍त करते गये.

दूसरे प्रश्न में माननीय विधायक जी ने यह कहा है कि अन्य कई लोग ऐसे हैं जिनको 10 साल की सीनियरिटी उस विभाग की न होते हुए भी प्रमोशन दिये गये हैं. यह जानकारी ऐसी है कि इसकी जांच करायी जाना चाहिए. इसकी हम जांच करा लेंगे और आपके जरिये विधायक जी को उपलब्ध करा देंगे.

श्री केदारनाथ शुक्ल -- माननीय अध्यक्ष महोदय मैं बताना चाहता हूं कि 2 वर्ष और 2.6 वर्ष इस तरह करके, खुशीलाल शर्मा महाविद्यालय में ही 3 कनिष्ठों को प्रोफेसर के पद के विरूद्ध रीडर के पद पर नियुक्ति दी गई है, जबकि संबंधित प्राध्यापक के पास में 13.6 वर्ष का प्रोफेसर पद का अनुभव है. अगर वह विधि से संबंद्ध है तो वह दूसरे विषय से संबंद्ध भी तो है. अगर एक विषय के विरूद्ध में किसी को रीडर बना सकते हैं तो उस विषय के विरूद्ध में उसे प्रोफेसर भी तो बना सकते हैं. दूसरी बात मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि व्याख्याता से रीडर के लिए 5 वर्ष का अनुभव चाहिए था. डॉ आर के पत्ती, डॉ संजय श्रीवास्तव, डॉ चारू बंसल एवं डॉ विनोद शर्मा आदि को वरिष्ठता को शिथिल कर रीडर बना दिया गया है. इसी तरह से कई लोगों को सीधे प्रोफेसर पद के विरूद्ध रीडर के पद पर नियुक्ति दे दी गई है, उनसे जूनियर को . मेरा यह निवेदन है कि पीएचडी और एमडी भी उसी विषय में है, तो उसको क्यों नहीं बनाया जा सकता है अगर संबद्ध विषय में उसे रीडर बनाया जा सकता है , इस नाते मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि संबंधित पूरे प्रकरण की जांच करवाकर क्या न्याय करेंगे.

श्री रूस्तम सिंह -- अध्यक्ष महोदय मैंने पहले भी आपसे आग्रह किया है कि सीसीआई जो कि भारत सरकार का संस्थान है उससे हमने इसमें मार्गदर्शन भी मांगा था. उनका कहना है कि 10 वर्ष की स्पेसिफिक सीनियरिटी स्पेसिफिक विभाग की होगी तब ही वह उसमें प्रोफेसर बन पायेंगे. अन्य आयुर्वेदिक कालेज की जो बातें माननीय सदस्य ने बताई हैं, उन पूरे प्रकरणों की हम जांच करा लेंगे.

श्री केदारनाथ शुक्ल -- धन्यवाद्.

 

 

अनुसूचित जाति छात्रावास की स्‍वीकृति

[अनुसूचित जाति कल्याण]

12. ( *क्र. 796 ) श्री के.पी. सिंह : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में विगत तीन वर्षों में किस-किस विधानसभा क्षेत्र में कितने अनुसूचित जाति छात्रावास खोले गए हैं? विधानसभा क्षेत्रवार, ग्राम के नाम सहित जानकारी दें। (ख) क्‍या इन छात्रावासों को स्‍वीकृत करने में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया गया है? जहाँ अत्‍यधिक जरूरत थी, ऐसे क्षेत्रों की उपेक्षा की गई है? यदि हाँ, तो इसके क्‍या कारण हैं?

आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी नहीं। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

 

श्री के पी सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय मेरे प्रश्न में मैंने मंत्री जी से पूछा है कि छात्रावास खोलने में क्या पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया गया है. मंत्री जी ने कहा है कि जी नहीं. मंत्री जी मैं आपको उदाहरण देना चाहता हूं कि वर्ष 2013-14 में टीकमगढ़ में 20, सीहोर में 11, विदिशा में 10 छात्रावास खोले गये हैं. 2014-15 में भोपाल में 24, ग्वालियर में 14, इंदौर में 12 और 2015-16 में ग्वालियर में 19, मुरैना में 19 और छतरपुर में 10 और यहां पर जब शिवपुरी की बात आती है तो 2013-14 में कुल 3 जिसमें करेरा, पोहरी और शिवपुरी में एक एक छात्रावास खोला गया है. मेरी विधान सभा में जीरो. उसके बाद 2014-15 आता है तो शिवपुरी में दो और यह दोनों शिवपुरी विधान सभा में ही खोले गये हैं. बाकी किसी विधान सभा में कोई छात्रावास नहीं खोला गया है. इसी तरह से जब 2015-16 का आंकड़ा देखते हैं तो शिवपुरी में दो और दोनों ही शिवपुरी विधान सभा में दिये गये हैं. मंत्री जी यह जो पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया गया है. उसमें मेरा सीधा सीधा आपको यह कहना है कि बाकी लोगों के साथ में अन्याय हुआ है. विगत तीन वर्ष में एक भी छात्रावास मेरी विधान सभा में नहीं खोला गया है. क्या इस वर्ष में इस व्यवस्था को ठीक करेंगे या यह ही रवैया विभाग का रहेगा.

श्री लाल सिंह आर्य -- माननीय अध्यक्ष महोदय किसी भी विधान सभा के साथ में किसी प्रकार का अन्याय करने का सरकार का कोई मंतव्य नहीं है. जैसा कि माननीय सदस्य ने कहा है विभाग द्वारा एक साफ्टवेयर तैयार किया गया है उसमें छात्रावासों की जो संख्या होती है, और छात्रों की जो संख्या होती है वह जब हम साफ्टवेयर में डालते हैं तो वह हमें घटते क्रम में बताता है और उसके अनुसार ही छात्रावासों का निर्धारण होता है. जहां तक माननीय सदस्य ने कहा है मैं उसका परीक्षण करा लूंगा अगर नार्मस में आ रहा होगा तो वहां पर ..

श्री के पी सिंह -- आपके ही जवाब में यह दिया हुआ है. आपके ही जवाब में पूरे तीन वर्ष में एक भी छात्रावास मेरी विधान सभा में नहीं है. यह मैंने आपके ही जवाब से पढ़ा है मेरी जानकारी नहीं है यह.

श्री लाल सिंह आर्य -- पूरे मध्यप्रदेश में हैं.

श्री के पी सिंह -- मैं मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले की और मेरी विधान सभा क्षेत्र की बात कर रहा हूं.

श्री लाल सिंह आर्य-- मेरा कहना है कि वह मापदण्ड में नहीं आ रहा होगा.

श्री के पी सिंह -- एक विधान सभा में आप पांच छात्रावास खोल रहे हैं और एक विधान सभा में एक भी नहीं . शिवपुरी जिला मापदण्ड में आता होगा तब ही तो शिवपुरी जिले में खोले हैं.

श्री लाल सिंह आर्य -- जी.

श्री के पी सिंह -- एक विधान सभा में 5 छात्रावास और एक विधान सभा में एक भी छात्रावास नहीं.

श्री लाल सिंह आर्य-- मैं उसका परीक्षण करा लूंगा और नार्मस में आ रहा होगा तो

श्री के पी सिंह -- आपका ही जवाब है,इसमें परीक्षण की क्या जरूरत है. आपका ही जवाब है कि 3 साल में एक विधान सभा में 5 छात्रावास खोले हैं और एक विधान सभा में जीरो.

अध्यक्ष महोदय -- तो उसका ही तो परीक्षण करायेंगे कि क्यों ऐसा हुआ है.

श्री के पी सिंह -- अगर इनका जवाब सही है तो क्या यह इसका पालन करायेंगे या नहीं करायेंगे. जो पक्षपात किया गया है उसे ठीक ठाक करेंगे या नहीं.

श्री लाल सिंह आर्य -- माननीय अध्यक्ष महोदय मैं कह रहा हूं कि पक्षपातपूर्ण कार्यवाही हो ही नहीं सकती है. लेकिन आप कह रहे हैं तो हम उसका परीक्षण करा लेंगे, और फिर भी वहां पर आवश्यकता महसूस होगी तो करा लेंगे.

श्री के पी सिंह -- आवश्यकता किस नजरिये से महसूस होगी. अध्यक्ष महोदय सरकार का यह पक्षपातपूर्ण रवैया है और मैं सरकार के पक्षपातपूर्ण रवैये के विरोध में बहिर्गमन करता हूं.

 

 

 

 

समय 12.00 बजे. बहिर्गमन

सरकार के पक्षपातपूर्ण रवैये के विरोध में

( श्री के पी सिंह सदस्य द्वारा सरकार के पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण सदन से बहिर्गमन किया गया. )

अध्यक्ष महोदय -- प्रश्नकाल समाप्त.

 

( प्रश्नकाल समाप्त )

12.02 बजे बधाई

अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस

अध्‍यक्ष महोदय - आज अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस है. मैं इस अवसर पर अपनी और पूरे सदन की ओर से महिला सदस्‍यों एवं समस्‍त महिलाओं को बधाई देता हूं.

 

 

12.03 बजे अध्‍यक्षीय घोषणा

हीमोग्‍लोबिन जांच शिविर लगाये जाने विषयक.

 

अध्‍यक्ष महोदय - आज दिनांक - 08 मार्च, 2017 को अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर स्‍वास्‍थ्‍य विभाग द्वारा विधानसभा परिसर स्थित समिति कक्ष क्रमांक-2 में हीमोग्‍लोबिन जांच शिविर लगाया गया है. मेरा सभी माननीय सदस्‍यों से अनुरोध है कि वह पांच बजे तक अपनी सुविधा अनुसार हीमोग्‍लोबिन का परीक्षण कराने का कष्‍ट करें ,धन्‍यवाद.

 

मुख्‍यमंत्री( श्री शिवराज सिंह चौहान) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस है, इस अवसर पर हम अपनी बहिनों, बेटियों, माताओं और भांजियों को भी चूंकि मैं बेटियों और भांजियों को एक ही मानता हूं, दोनों में कोई अंतर नहीं है, इसलिए हम उनको हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम सबकी कोशिश तो यह हो कि केवल एक दिन महिलाओं के लिये क्‍यों रहे हर दिन मां बहन और बेटी का क्‍यों न हो. भारत की तो परम्‍परा है कि बेटियां गंगा, गीता, गायत्री है, बेटियां सीता, सत्‍या, सावित्री हैं, बेटियां दुर्गा, लक्ष्‍मी सरस्‍वती हैं. अर्धनारेश्‍वर की कल्‍पना भी भारत ने ही की है कि पुरूष और स्‍त्री के बिना यह सृष्टि चल नहीं सकती है. हम लोग उस दिशा में बहिनों के कल्‍याण के लिये भी लगातार काम करते रहे हैं. एक बार फिर सभी बहिनों को हार्दिक शुभकामनाएं.

श्री सुंदरलाल तिवारी - (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय - कोई निवेदन नहीं होगा. आप बैठ जाएं, कुछ एलाउ नहीं है. श्री सुंदरलाल तिवारी जो भी बोल रहे हैं वह कुछ भी नहीं लिखा जायेगा. माननीय मंत्री जी बोल रहे हैं, कृपया आप बैठ जायें.

श्री सुंदरलाल तिवारी - (XXX)

संसदीय कार्यमंत्री(डॉ. नरोत्‍तम) - बहुत ही गलत है, माननीय अध्‍यक्ष जी बार बार कह रहे हैं, उसके बाद भी आप बैठते नहीं है.

श्री सुंदरलाल तिवारी - (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय - श्री सुंदरलाल तिवारी जी आप मर्यादाओं का पालन करें, कुछ भी न सुना जायेगा, न ही लिखा जायेगा. श्री सुंदरलाल तिवारी जी कृपया आप बैठ जाएं. आधा मि‍निट भी नहीं कृपया बैठ जाएं, जी नहीं आपको कोई अवसर नहीं दिया जायेगा. आपका कुछ भी नहीं लिखा जायेगा. आप बैठ जाइये. यह उचित नहीं है, कृपया आप बैठ जाएं, कृपया वकील साहब आप बैठ जाएं. आदरणीय वकील साहब श्री सुंदरलाल तिवारी जी आप कृपा करके बैठ जाएं. आप लोकसभा के पुराने सदस्‍य रहे हैं कृपा करके बैठ जाएं.

श्री बाला बच्‍चन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पिछली विधानसभा में विधायकों को स्‍वास्‍थ्‍य परीक्षण करवाया गया था, उसकी रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है ?

अध्‍यक्ष महोदय - रिपोर्ट दे देंगे.

 

 

 

12.04 बजे विशेष उल्‍लेख

अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस पर महिला बाल विकास विभाग के कार्यक्रम विषयक.

 

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चि‍टनीस) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मुख्‍यमंत्री जी, माननीय नेता प्रतिपक्ष जी और उपाध्‍यक्ष जी और सभी माननीय सदस्‍यों को हमारी सारी बहिन विधायकों की ओर से एवं महिला बाल विकास की ओर से इस बात के लिये आग्रहपूर्वक निवेदन करना चाहती हूं कि ध्‍यानाकर्षण के बाद आडीटोरियम में ही महिला बाल विकास विभाग का एक छोटा सा सवा एक घंटे का कार्यक्रम है, उसमें माननीय मुख्‍यमंत्री जी भी उपस्थित रहेंगे. मैं आप सभी सदस्‍यों से पुन: पुन: आग्रह करती हूं कि उसमें आप सभी जरूर आयें. हमने बहुत ही स्‍नेह से आपके लिये बड़ा सादा सा और परंपरागत भोजन बनाया है. हम आपको खड़े-खड़े नहीं खाने देंगे महिला दिवस पर आप सभी को बैठाकर प्‍यार से परोसकर, हम भोजन करायेंगे. मैं फिर से आग्रह करती हूं आप सभी उस कार्यक्रम में आयें. माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने लालिमा अभियान चार दिसंबर को प्रारंभ किया था और लालिमा अभियान के अंतर्गत हमने स्वास्थ्य मंत्री जी से इस बात के लिए निवेदन किया, आग्रह किया कि लालिमा अभियान के अंतर्गत ही सभी माननीय विधायकों का हीमोग्लोबिन चेक हो जाय और फिर हम अगले 8 मार्च तक जैसा माननीय मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हर दिवस महिला दिवस, हम अगले 8 मार्च तक मध्यप्रदेश की हर बेटी का, बहन का हीमोग्लोबिन चेक करके उसमें अनिमिया न रहे इसके लिए हम स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर उसको आगे बढ़ाएंगे और आप भी हमारे साथ में मंचस्थ होंगे. श्री अजय सिंह जी, आप जरूर आइए और बीच में एक पोषण वाटिका है, उसका भी आप अवलोकन करें और महिला दिवस पर आपने हमें इतना स्पेस दिया, इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.

श्री सुन्दरलाल तिवारी - (XXX)

अध्यक्ष महोदय - पद क्रमांक 5 तक की कार्यवाही होने के बाद माननीय सदस्य आपके कार्यक्रम में जाएंगे. दिनांक 7.3.17 को शाजापुर जिले में.. तिवारी जी बैठ जायं, तिवारी जी बैठ जायं आप. (श्री सुन्दरलाल तिवारी, सदस्य के लगातार बोलते रहने पर) यह बात ठीक नहीं है. मैं खड़ा हूं ना, आपको कुछ मर्यादाओं का ज्ञान है कि नहीं है तो फिर बैठ जाय .

श्री सुन्दरलाल तिवारी - (XXX)

अध्यक्ष महोदय - आपका निवेदन अस्वीकार है.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) - अध्यक्ष महोदय, उनको महिलाओं के लिए बड़ी चिंता है और माननीय विधायक महोदय महिला दिवस पर ही कुछ बात कहना चाहते हैं. एक मिनट उनको समय दे दिया जाय.

अध्यक्ष महोदय - उनको पूरे प्रदेश भर की हर कार्य की चिंता है, इसीलिए समस्या है. एकाध चिंता होती तो उनको अनुमति दे देते, कृपया श्री तिवारी बैठ जायं.

श्री सुन्दरलाल तिवारी - (XXX)

अध्यक्ष महोदय - जी नहीं. माननीय प्रतिपक्ष के नेता जी ने जो कहा, मैंने उनको समझा दिया है. जी नहीं, आधा मिनट भी नहीं.

श्री सुन्दरलाल तिवारी - (XXX)

अध्यक्ष महोदय - आधा मिनट भी नहीं. तिवारी जी आप मुझे मजबूर न करें, प्लीज़.

श्री सुन्दरलाल तिवारी - (XXX)

अध्यक्ष महोदय - आप अपनी मर्यादा रखें और आप मर्यादा नहीं रखेंगे तो मुझे फिर मर्यादा का हनन करना पड़ेगा.

श्री सुन्दरलाल तिवारी - (XXX)

अध्यक्ष महोदय - जी नहीं. सिर्फ नेता प्रतिपक्ष बोल सकते हैं. (व्यवधान)..आप बैठ जाइए.

श्री सुन्दरलाल तिवारी - (XXX)

अध्यक्ष महोदय - बहस नहीं होगी. आप बैठ जाइए. सिर्फ नेता प्रतिपक्ष बोल सकते हैं.

श्री सुन्दरलाल तिवारी - (XXX)

अध्यक्ष महोदय - आप बैठ जाइए.

संसदीय कार्यमंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र) - नेता प्रतिपक्ष बोलें. आप कौन हैं? कौन रोक रहा है, उप नेता हैं, नेता हैं, कौन रोक रहा है? उन्होंने आपकी सिफारिश की तो किसी ने उनको रोका क्या? वे बोलें, आप कौन हैं?

श्री सुन्दरलाल तिवारी - (XXX)

अध्यक्ष महोदय - परन्तु अनुमति मेरी लगेगी. अनुमति आसंदी की होती है. आप बैठ जाइए.

श्री सुन्दरलाल तिवारी - (XXX)

अध्यक्ष महोदय - उनको उनकी मर्यादा की चिंता नहीं है. हमें ही करना पड़ेगी. आप बैठ जायं.

श्री सुन्दरलाल तिवारी - (XXX)

अध्यक्ष महोदय - कृपया बैठ जाइए. श्री सुन्दरलाल तिवारी, मैं आपको चेतावनी दे रहा हूं, आप बैठ जायं अपने स्थान पर.

श्री सुन्दरलाल तिवारी - (XXX)

अध्यक्ष महोदय - श्री सुन्दरलाल तिवारी, मैं दोबारा कह रहा हूं.

डॉ. नरोत्तम मिश्र - माननीय अध्यक्ष जी, प्लीज़, प्लीज़.

अध्यक्ष महोदय - आप कृपया बैठ जायं.

श्री गोपाल भार्गव - इतनी कर्कश आवाज है, महिलाओं के बारे में कुछ बोला जा सकता है?

अध्यक्ष महोदय - दिनांक 7.3.2017 को शाजापुर जिले में जबड़ी रेलवे स्टेशन के पास भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में आतंकियों द्वारा किये गये विस्फोट के संबंध में माननीय मुख्यमंत्री जी वक्तव्य देंगे.

मुख्यमंत्री (श्री शिवराज सिंह चौहान) - माननीय अध्यक्ष महोदय..

श्री रामनिवास रावत (विजयपुर) - अध्यक्ष महोदय, नियम प्रक्रिया में यह व्यवस्था है. मैंने इस घटना के संबंध में स्थगन दिया है, उसी घटना के संबंध में सरकार वक्तव्य दे रही है.

श्री भूपेन्द्र सिंह - अध्यक्ष महोदय, माननीय मुख्यमंत्री जी खड़े हैं. आप मर्यादा नहीं रखते हैं.. बाद में आप कह सकते हैं. (व्यवधान)..

श्री रामनिवास रावत - मैं मुख्यमंत्री जी को चैलेंज नहीं कर रहा हूं. मैं निवेदन कर रहा हूं. मैं प्रक्रिया के संबंध में निवेदन कर रहा हूं.

डॉ. नरोत्तम मिश्र - इस वक्तव्य के बाद भी आप निवेदन कर सकते हैं. आपको निवेदन ही तो करना है ना?

श्री रामनिवास रावत - यह वक्तव्य ही उसका जवाब होगा. मैंने इस संबंध में स्थगन दिया है, आप स्थगन पढ़ दें. माननीय मुख्यमंत्री उस पर वक्तव्य दे दें. सरकार का जवाब आ जाय.

अध्यक्ष महोदय - आप बैठ जाइए. आपकी बात का उत्तर सुन लें. स्थगन प्रस्ताव आपने कब दिया है?

श्री रामनिवास रावत - आज सुबह, आठ बजे से पहले.

अध्यक्ष महोदय - आप बैठ जायें. आठ बजे के पहले दिया. स्थगन प्रस्ताव पर जानकारी मंगाई जा रही है. एक मिनट सुन तो लीजिए. कृपा करके बहुत दिनों के बाद आए हैं तो थोड़ी एनर्जी ज्यादा है.

श्री रामनिवास रावत - ऐसी कोई बात नहीं है.

श्री आरिफ अकील - आप जानकारी मंगा रहे हैं और मुख्यमंत्री जी वक्तव्य दे रहे हैं. आपके पास जानकारी नहीं आई, मुख्यमंत्री जी के पास जानकारी आ गई है.

अध्यक्ष महोदय - मुख्यमंत्री जी को जानकारी है, इसलिए दे रहे हैं परन्तु विधान सभा को, हमारे सचिवालय को जानकारी नहीं है, इसलिए जानकारी मंगाई है. जानकारी आने के बाद उस पर निर्णय करेंगे. माननीय मुख्यमंत्री जी सदन के नेता हैं, वे वक्तव्य दे सकते हैं.

श्री रामनिवास रावत - वे वक्तव्य दे सकते हैं, उसमें हमें कोई आपत्ति नहीं है. माननीय मुख्यमंत्री जी वक्तव्य दे सकते हैं, वे सदन के नेता हैं. लेकिन जिस संबंध में स्थगन लगाया है, उसी के संबंध में वक्तव्य आ रहा है, वही जानकारी है.

अध्यक्ष महोदय--ऐसा कोई नियम नहीं है.

श्री रामनिवास रावत--जैसा आप कहें हमें तो वैसा स्वीकार है.

डॉ.नरोत्तम मिश्र--अस्वीकार की बात नहीं है आपने नियमों की बात कह रहे हैं तब मैंने कहा है.

शासकीय वक्तव्य

शाजापुर जिले के जबड़ी रेल्वे स्टेशन पर ट्रेन में आतंकवादियों द्वारा विस्फोट किये जाने विषयक.

मुख्यमंत्री (श्री शिवराज सिंह चौहान)--माननीय अध्यक्ष महोदय, एक सुनियोजित षड़यंत्र के तहत कल दिनांक 7.3.2017 को शाजापुर जिले के अंतर्गत भोपाल उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में जबड़ी रेल्वे स्टेशन के समीप आईएस, आईएस की आतंकी विचारधारा से प्रभावित आतंकवादियों के द्वारा एक विस्फोट किया गया. इस घटना के उपरांत त्वरित कार्यवाही करते हुए मध्यप्रदेश की पुलिस ए.टी.एस. और केन्द्रीय एजेंसियों से समन्वय करते हुए पांच घंटे में ही संदेहियों को पकड़ा जा सका. यह मध्यप्रदेश पुलिस की एक बहुत बड़ी सफलता है. समूचे पुलिस विभाग एटीएस,होशंगाबाद पुलिस एवं केन्द्रीय एजेंसियों को बहुत बहुत बधाई. इस घटना में ट्रेन के जनरल कोच में प्रातः 9.41 बजे विस्फोट हुआ. इस विस्फोट से 10 रेल यात्रियों को चोटें आयी हैं तथा रेल्वे की सम्पत्ति को भी नुकसान पहुंचा है. दो रेल यात्रियों को गंभीर रूप से चोटें आयी हैं तथा शेष सामान्य रूप से घायल हैं. इस घटना के संबंध में ट्रेन गार्ड फरियादी सुरेश कुमार स्वामी की रिपोर्ट पर थाना शासकीय रेल्वे पुलिस उज्जैन में अपराध क्रमांक 4717 धारा 3-4 विस्फोटक अधिनियम 1908 के तहत अज्ञात आरोपियों के विरूद्ध अपराध कायम कर विवेचना में लिया गया है. घटनास्थल की जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि विस्फोट एक सुनियोजित आतंकवादी घटना थी जिसको आईएस-आईएस की आतंकी विचारधार से जुड़े हुए आरोपियों के द्वारा आईईडी द्वारा यह कार्य किया गया था. घटना की सूचना प्राप्त होते ही पुलिस महानिदेशक मध्यप्रदेश के साथ अन्य प्रशासनिक व पुलिस के अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण घटनास्थल पर पहुंचे व घटनास्थल का निरीक्षण भी किया तथा समस्त पुलिस अधीक्षकों को नाकेबंदी के निर्देश दिये गये. साथ ही इस घटना के संबंध में केन्द्रीय एजेंसियों से समन्वय कर कार्यवाही प्रारंभ की गई जिसके फलस्वरूप यह सूचना प्राप्त हो सकी कि तीन संदेही बस से पिपरिया की ओर रवाना हुए हैं. इस सूचना पर गंभीरता से कार्यवाही करते हुए पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया गया व परिणामस्वरूप पिपरिया में तीन संदेहियों को वाहन चैकिंग के दौरान पकड़ा गया. संदेहियों से हुई पूछताछ में उपरोक्त घटना में उनकी सहभागिता स्पष्ट हुई है. संदेहियों से पूछताछ के दौरान प्राप्त जानकारी केन्द्रीय एजेंसियों से साझा की गई तथा वर्तमान में संदेहियों से अन्य सम्पर्क सूत्रों के संबंध में जानकारियों एकत्रित की जा रही हैं उक्त घटना में गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों के लिये 50 हजार रूपये एवं साधारण रूप से घायल व्यक्तियों के लिये 25 हजार रूपये की आर्थिक सहायता उनको दी जा रही है. पिछले कुछ माहों में आतंकवादियों ने मध्यप्रदेश में कुछ घटनाएं करने का प्रयास किया है जिनको मध्यप्रदेश पुलिस ने तत्परता से विफल किया है, यह उनकी सजगता का प्रमाण है. मेरी सरकार ऐसे तत्वों को पनपने नहीं देगी. मैं प्रदेश की जनता को पूर्ण विश्वास दिलाता हूं कि उनकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है. धन्यवाद.

शून्यकाल की सूचनाएं

निम्नलिखित माननीय सदस्यों की सूचनाएं सदन में पढ़ी हुई मानी जाएंगी.

1. श्री सतीश मालवीय

2. श्रीमती सरस्वती सिंह

3. श्री कालुसिंह ठाकुर

4. श्री के.के.श्रीवास्तव

5. सुश्री हिना लिखीराम कावरे

6. श्री दिलीप सिंह शेखावत

7. श्री गिरीश भंडारी

8. श्री प्रदीप अग्रवाल

9. श्री शैलेन्द जैन

10. श्री राजेन्द्र मेश्राम

 

 

 

पत्रों का पटल पर रखा जाना

मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम का वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखे वर्ष 2015-2016

(स्कूल शिक्षा मंत्री) कुंवर विजय शाह -- अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम विनिमय, 1974 के नियम 48 की अपेक्षानुसार मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम का वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखे वर्ष 2015-2016 पटल पर रखता हूं.

 

2 अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा(मध्यप्रदेश) का 48 वां प्रगति प्रतिवेदन वर्ष 2015-2016.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.16 बजे ध्यानाकर्षण.

 

(1) भिण्ड जिले के ग्राम हीरापुर निवासी की हत्या किए जाने संबंधी.

डॉ. गोविन्द सिंह (लहार) - माननीय अध्यक्ष महोदय,

गृह मंत्री (श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर) - माननीय अध्यक्ष महोदय,

डॉ गोविन्द सिंह-- अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी का जवाब आया. उसमें मुख्य जांच अधिकारी एसडीओपी अवनीश बंसल के बारे में कहा है. मैं बता देना चाहता हूं कि यह मामला रेत व्यापार से जुड़ा हुआ है. अपराधी हीरापुर निवासी राकेश इटावा, उत्तर प्रदेश से ट्राली से ईंट लाता था और अपनी रोजी-रोटी चलाता था. लहार से करीब 45 किलोमीटर दूर होटल(ढाबा) है वहां पर सभी रेत के ट्रक इकट्ठा होते हैं. जो मुख्य आरोपी है वह वहां पर प्रत्येक ट्रक से हजार-हजार रुपये गुंडा टैक्स वसूल करता था और एसडीओपी, लहार अवनीश बंसल से उसकी सांठगांठ थी. मेरे पास फोन आया कि राकेश को पकड़ कर, बिलाव के पास हाथ-पैर बांध कर दीपक यादव के कुंए पर पड़ा हुआ है. मैंने पुलिस को, एसडीओपी को सूचना दी कि वह वहां पड़ा हुआ है लेकिन गांवों में गुंडों के भय की वजह से नाम नहीं बताया और हीरापुरा गांव के सब लोग इकट्ठा होकर गए तो उन्होंने ट्राली जब्त कर ली. ट्राली कहां से जब्त हुई? किसके द्वारा हुई? अध्यक्ष महोदय, दूसरी बात कि यह एसडीओपी बंसल है, वह लहार से अपने ड्रायवर धर्मेन्द्र के नाम से करीब 15 ट्रक,डम्पर चला रहे हैं. उत्तर प्रदेश का कोई यादव है, उससे उसकी सांठगांठ है और किराये पर चलाता है. यहां से भर कर ले जाते हैं, फ्री आते हैं, यहां से वहां तक कोई पकड़ता नहीं है. जब उसकी सांठगांठ है. अपराधियों को संरक्षण है. वह वसूली करते थे और आगे भेजते थे.

अध्यक्ष महोदय-- कृपया प्रश्न करें.

डॉ गोविन्द सिंह-- अध्यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि जिस एसडीओपी बंसल जिसे मैंने भी फोन पर कहा कि आप ट्राली चलवा रहे हो तो वह बोला मैं नहीं चलवाता हूं. मैंने कहा आप एसडीओपी लहार हो. आपके ड्रायवर धर्मेन्द्र है. बाद में मैंने एसपी से कहा तो दो दिन पहले उसको अटैच किया. धर्मेन्द्र के मोबाइल नंबर ट्रेस किए जाएं कि उन अपराधियों से और क्या संबंध हैं? जो अपराधी उत्तर प्रदेश में घूम रहे हैं. जिन अपराधियों को एसडीओपी द्वारा संरक्षण दिया जा रहा था, उन्हीं के द्वारा एक सीडी में उसका बयान है जिसमें एसडीओपी ने कहा कि मैं नहीं, मेरा ड्रायवर चलवा रहा है और 10-12 डम्पर चोरी से चलवा रहा है.

अध्यक्ष महोदय--प्रश्न कर दें.

डॉ गोविन्द सिंह-- मैं यह कहना चाहता हूं कि जिस एसडीओपी द्वारा जो लहार में रह रहा है और धमकी दे रहा है और अपराधी थाने के आसपास घूम रहा है, उस एसडीओपी अवनीश बंसल जो इसमें इन्वाल्व है, उसने करोड़ों रुपये की रेत चोरी करवा दी उसके वहां रहते क्या आप उसकी निष्पक्ष जांच करवा सकेंगे? जो खुद उसमें इन्वाल्व है. इसके प्रमाण भी हमारे पास है. 20 लोगों के शपथ पत्र भी हैं जिनसे वह वसूली करता है. ट्रेक्टर चलवा रहा है. उन्होंने कहा कि हमारे ट्रक एसडीओपी ने किराये पर ले रखे हैं और अपराधी को बचा रहा है. मैं मंत्रीजी से जानना चाहता हूं कि अपराधियों को आप कितने दिनों में पकड़वा लेंगे? और जो ट्रेक्टर ट्राली जब्त हुई वह किस कारण से, किसने जब्त की और उसके बाद क्या बंसल, एसडीओपी से हटाकर, उससे बड़ा अधिकारी जो आपने सेल गठित किया है, उस सेल को जिम्मेदारी सौंपेगे? तभी निष्पक्ष जांच हो सकती है अन्यथा अपराधी नहीं पकड़े जा सकेंगे.

 

श्री भूपेन्द्र सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, निश्चित रूप से घटना गंभीर है और इसमें 4 आरोपी नामजद हुए हैं. जिसमें से 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और इसमें जो मुख्य आरोपी है जितेन्द्र सिंह उसकी गिरफ्तारी अभी नहीं हो सकी है, यह बात सही है. इसलिये माननीय विधायक जी ने जो चिंता व्यक्त की है उससे मैं पूरी तरह सहमत हूं. उन्होंने मुख्य रूप से 3 विषय यहां पर रखे हैं. एक विषय तो यह कि जो मुख्य आरोपी है जितेन्द्र सिंह, इसकी गिरफ्तारी हो जाये. इसके लिये हमने यह निर्णय किया है कि वहां के जो अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हैं उनके नेतृत्व में हम टीम बनाएंगे और उनके नेतृत्व में टीम बनाकर उसकी शीघ्र गिरफ्तारी हो जाये इसके लिये हम लोग प्रयास करेंगे. दूसरी बात जो मुख्य आरोपी है उसकी गिरफ्तारी के लिये अभी जो उस पर ईनाम है 10 हजार रुपये का, उसको बढ़ाकर हम 25 हजार रुपये कर रहे हैं और जो आपने एस.डी.ओ.पी के बारे में चिंता व्यक्त की है तो इस पूरे विषय की हम ए.डी.जी. स्तर से जांच करा लेंगे.

डॉ.गोविन्द सिंह - धन्यवाद. मैं आपको सब प्रमाण दे दूंगा कि एस.डी.ओ.पी ने क्या-क्या किया है.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे क्षेत्र का मामला है.

अध्यक्ष महोदय - उत्तर तो आ गया. चलिये एक प्रश्न पूछ लीजिये.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह - अध्यक्ष महोदय, यह बहुत बड़ी घटना है. एक जिंदा व्यक्ति को  हाथ-पांव बांधकर अंधा कुंए में फेंक दिया गया.

अध्यक्ष महोदय - वह सब आ गया. आप प्रश्न कर लें. सारी बात गोविन्द सिंह जी ने बता दी है.

श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह - अध्यक्ष महोदय, यह जितेन्द्र सिंह जो अपराधी है इसके एक नहीं अनेक अपराध हैं. इसकी गिरफ्तारी कब तक हो जायेगी ?

अध्यक्ष महोदय - उसका उत्तर आ गया. एक बार और बोल दीजिये मंत्री जी.

श्री भूपेन्द्र सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे माननीय सदस्य श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह जी ने जो विषय रखा है जैसा मैंने पूर्व में कहा है इसकी गिरफ्तारी शीघ्र हो,इसके लिये हम अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में टीम गठित कर रहे हैं और उसकी शीघ्र गिरफ्तारी करेंगे.

 

 

 

 

12.26 बजे स्वागत उल्लेख

मन्दसौर-जावरा क्षेत्र के सांसद श्री सुधीर गुप्ता जी का स्वागत-उल्लेख

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया - माननीय अध्यक्ष जी, मन्दसौर-जावरा क्षेत्र के सांसद श्री सुधीर गुप्ता जी अध्यक्षीय दीर्घा में मौजूद हैं. उनका स्वागत है.

अध्यक्ष महोदय - मन्दसौर-जावरा क्षेत्र के सांसद श्री सुधीर गुप्ता जी का सदन की ओर से स्वागत है.

12.27 बजे

(2) जबलपुर नगर निगम में शामिल केंट क्षेत्र की ग्राम पंचायतों को शासकीय योजनाओं

का लाभ न मिलना

श्री अशोक रोहाणी(जबलपुर केन्टोनमेंट) - माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

 

 

 

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री (श्रीमती माया सिंह) - अध्यक्ष महोदय,

 

श्री अशोक रोहाणी-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सबसे पहले तो उनको यह बताया जाता है कि आपका पोर्टल तहसील में है, तहसील वाले बोलते हैं कि नगर निगम में है, यह जो जानकारी दी जा रही है कि 4 ग्राम पंचायतों में गरीबी रेखा के कार्ड बने हैं, एक भी गरीबी रेखा का कार्ड उन 4 ग्राम पंचायतों में नहीं बना है. गंभीर रूप से बीमारी से ग्रसित अगर किसी व्‍यक्ति को आ‍वश्‍यक रूप से गरीबी रेखा का कार्ड बनवाना हो तो भी नहीं बनाया जा रहा है. मेरा माननीय मंत्री जी आपके माध्‍यम से आग्रह है कि यह 4 ग्राम पंचायतें हैं इनके जोन कार्यालय इन पंचायतों से कम से कम 10 किलोमीटर दूर हैं. मेरा माननीय मंत्री जी से आपके माध्‍यम से यह आग्रह है कि जो पंचायतें हैं उनके जो कार्यालय हैं उनमें अगर नगर निगम के अधिकारी बैठकर इन समस्‍याओं का हल करेंगे तो निश्चित रूप से हितग्राहियों को इसका लाभ मिलेगा साथ ही यह जानकारी दी जा रही है कि लाला लाजपतराय वार्ड और रानी अवंतिबाई बार्ड यह आलरेडी पहले से ही वार्ड थे, उसमें ग्राम पंचायतों को समाहित किया गया है, कभी भी इनको नया वार्ड नहीं माना गया है और इनको जो पंचायत की तरफ से 10-10 लाख रूपये की अतिरिक्‍त राशि मिलती है वह भी नहीं मिलती है. मेरा माननीय मंत्री जी से आपके माध्‍यम से आग्रह है कि इस समस्‍या का निराकरण करायें.

श्रीमती माया सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष जी, सम्‍मानीय विधायक जी ने जो बात रखी है कि दूरी ज्‍यादा है और वहां पर नगर निगम के अधिकारी बैठें, उसकी व्‍यवस्‍था हम आयुक्‍त महोदय से बात करके कर देंगे, लेकिन वहां पर नगर उदय अभियान के तहत भी शिविर लगे हैं और डोर टू डोर भी घर-घर जाकर उनको योजनाओं की विस्‍तृत जानकारी दी गई है और उसी के अनुसार जो मैंने इसमें पढ़कर सुनाया है उतने व्‍यक्तियों को अलग-अलग योजनाओं के माध्‍यम से इसमें लाभ मिला है.

श्री अशोक रोहाणी-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी का, माननीय मंत्री जी का आभार व्‍य‍क्‍त करता हूं कि केन्‍टोनमेंट बोर्ड को इन जन सुविधाओं का आपके आदेश के बाद लाभ मिलने लगा है और साथ ही जो चुंगी क्षतिपूर्ति उनने जो दी है, उसके लिये भी मैं आभार व्‍यक्‍त करता हूं, साथ ही यह आग्रह करता हूं कि यह चुंगी क्षतिपूर्ति का विधायक अनुशंसा से मद खर्च किया जाये तो बहुत अच्‍छा होगा.

इंजी. प्रदीप लारिया (नरयावली)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र में भी केन्‍टोनमेंट बोर्ड है. राज्‍य शासन की कई योजनायें यहां पर लागू नहीं होती हैं, एक बार माननीय मंत्री जी इसका परीक्षण करवा लेंगे और सारी की सारी जो राज्‍य शासन की योजनायें हैं वह केंट बोर्ड क्षेत्र में लागू हो जायें. दो बहुत ही महत्‍वपूर्ण योजनायें हैं, एक तो स्‍वच्‍छता मिशन के अंतर्गत जो शौचालय निर्माण हो रहे हैं वह केन्‍टोनमेंट बोर्ड में नहीं हो पा रहे हैं और दूसरा प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्‍यम से जो आवास बनना चाहिये वह भी नहीं बन पा रहे हैं. इसका सर्वे दिनांक 06.06.2016 को हो गया है जिसमें 800 ऐसे हितग्राही पाये गये हैं जिनका शौचालय का निर्माण हो और लगभग 475 आवास निर्माण का भी सर्वे हो गया है. क्‍या यह सुनिश्चित करेंगे कि यह निर्माण कार्य पूर्ण हो जायें.

 

श्री दिलीप सिंह परिहार(नीमच) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, नीमच में भी कैन्टोनमेंट का क्षेत्र है, बंगला बगीचा वहां के निवासियों को मूलभूत सुविधायें नहीं मिल रही हैं. मेरा आपके माध्यम से मंत्री जी से अनुरोध है कि वहां के निवासियों को मूलभूत सुविधायें मिल जायें, बिजली, पानी, सफाई और सरकार की योजनाओं का लाभ बंगला-बगीचा निवासियों को भी मिल जाये तो बहुत अच्छा होगा.यही निवेदन है.

अध्यक्ष महोदय- कैन्टोनमेंट में यह समस्यायें हैं. आप वैसा आश्वस्त कर दें.

श्रीमती माया सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं कहना चाहती हूं कि मुख्यमंत्री जी ने स्वयं इस बात की चिंता की और कैन्टोनमेंट बोर्ड की जितनी भी नगरपालिकायें, नगरपरिषदें हैं उनके विकास कार्यों के लिये पैसा दिया है, पहली बार इस तरह के कदम सरकार के द्वारा उठाये गये हैं और वहां के जो वार्ड नगर निगम में शामिल हुये हैं, हम पूरी कोशिश करेंगे वैसे वहां पर नगर निगम के माध्यम से सुविधायें दी जा रही हैं लेकिन अगर वहां कोई पात्र व्यक्ति छूटता है तो वह हमें बता दें, हम वहां के आयुक्त और महापौर से बोलेंगे कि कोई पात्र व्यक्ति छूटना नहीं चाहिये सुविधा को उसका लाभ मिले. प्रदीप लारिया जी ने जो शौचालय और आवास की बात कही है उसको दिखवा लेंगे, वहां पर वह होगा तो जरूर उस काम को करवायेंगे.

श्री दिलीप सिंह परिहार-- मंत्री जी नीमच में जरूर आप करवा दें.

श्री अशोक रोहाणी -- माननीय अध्यक्ष महोदय, जो पैसा पहली बार मिला है उसके लिये मैंने पहले ही आभार व्यक्त कर दिया है. मेरा आग्रह यह है कि विधायक अनुशंसा से अगर वह खर्च हो तो ज्यादा अच्छा होगा.

श्री दिलीप सिंह परिहार-- शासन ऐसे निर्देश देकर के व्यवस्था कर दे तो बेहतर होगा.

श्रीमती माया सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, विधायक जी जो कह रहे हैं मैं उनसे कहना चाहती हूं कि उस क्षेत्र में काम करवाने के लिये अनुशंसा या उनका पत्र आयेगा तो वह हम संबंधित को रेफर कर देंगे क्योंकि यह काम एमआईसी से मंजूर होते हैं उनकी भी राय है उस राय को जरूर उसमें शामिल करेंगे.

इंजी.प्रदीप लारिया-- अध्यक्ष महोदय, कैन्टोनमेंट बोर्ड होता है वह तय करता है उसको एक पत्र चला जाये, कि जो भी क्षतिपूर्ति की राशि है विधायक जिस काम की अनुशंसा करता है उसको प्राथमिकता देंगे ऐसा पत्र यदि विभाग से चला जायेगा तो हो जायेगा.

श्रीमती माया सिंह -- अध्यक्ष महोदय, नियमानुसार क्या कदम उठाये जा सकते हैं, माननीय सदस्य की जो भावना है उस भावना को ध्यान में रखते हुये देखेंगे कि क्या नियम के अनुसार कदम उठाये जा सकते हैं.

श्री अशोक रोहाणी- मंत्री जी को बहुत बहुत धन्यवाद.

 

 

 

 

12.36 बजे प्रतिवेदनों की प्रस्तुति

याचिका समिति का चवालीसवां एवं पैंतालीसवां प्रतिवेदन

 

श्री शंकरलाल तिवारी(सभापति) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं याचिका समिति का चवालीसवां एवं पैंतालीसवां प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूं.

प्रत्यायुक्त विधानसभा समिति का अष्टम(कार्यान्वयन) प्रतिवेदन

श्री जयसिंह मरावी(सभापति)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं प्रत्यायुक्त विधान समिति का अष्टम् (कार्यान्वयन) प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूं.

12.37 बजे याचिकाओं की प्रस्तुति

 

अध्यक्ष महोदय -- आज की कार्यसूची में सम्मिलित सभी याचिकायें प्रस्तुत की हुई मानी जायेंगी.

सदन की कार्यवाही अपराह्न 3.00 बजे तक के लिये स्थगित.

 

 

 

(12.39 बजे से 3.00 बजे तक अंतराल)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

03:03 बजे विधान सभा पुन: समवेत हुई

{उपाध्‍यक्ष महोदय (डॉ.राजेन्‍द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुए}

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ नरोत्‍तम मिश्र) - माननीय उपाध्‍यक्ष जी, अभी माननीय गोविन्‍द सिंह जी कह रहे थे कि कभी पुरुष दिवस होगा कि नहीं होगा. मैं गोविन्‍द सिंह जी के घर पर बहुत जाता रहता हूं. अभी पिछले महीनों गया था खाना खाने के लिए, इनके घर में ऐसी स्थिति है कि वहां पर कभी पुरुष दिवस आ ही नहीं सकता. (हंसी...)

डॉ गोविन्‍द सिंह (लहार) - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह बात सच है कि संविधान में सभी को बराबर का अधिकार है, हमारी शुभकामना है कि महिलाएं आगे आएं, सक्षम बने और बनी भी हैं, जैसी जैसी शिक्षा बढ़ रही है, लेकिन इस मुल्‍क में पुरुषों की सुनने वाला कोई है कि नहीं , तमाम अत्‍याचार, अन्‍याय हो रहे हैं, कानून का दुरूपयोग कर रहे हैं, निर्दोष लोग जेलों में सड़ रहे हैं. ऐसे कायदे-कानून बने हैं जो पुरुषों के ऊपर कुठाराघात करने वाले हैं.

उपाध्‍यक्ष महोदय - यह तो महिलाओं से ही पूछिए.

डॉ नरोत्‍तम मिश्र - यहां अपनी पारिवारिक स्थिति का बयां न करें.(हंसी..)

डॉ गोविन्‍द सिंह - उपाध्‍यक्ष महोदय, पुरुषों के न्‍याय के लिए भी जरा कोई सोचे.

उपाध्‍यक्ष महोदय - डॉ साहब का दर्द छलक रहा है.

पशुपालन मंत्री (सुश्री कुसुम महदेले)- अध्‍यक्ष महोदय, महिलाओं की अभी नहीं सुन रहे हैं तो फिर कब सुनेंगे. आज तो महिला दिवस है. पुरुष दिवस तो रोज होता है, महिला दिवस तो साल में एक ही दिन होना है.

श्री बाला बच्‍चन - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक दिन महिला दिवस को छोड़कर, सारे दिन पुरुष दिवस ही होते हैं.

 

03:04 बजे अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

विभागीय प्रतिवेदन उपलब्‍ध कराने विषयक

डॉ गोविन्‍द सिंह - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हमारी व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न यह है कि सदन में स्थिति बिगड़ती चली जा रही है. हम सुबह 10:30-11:00 बजे से आ जाते हैं और शाम 7 से 8 बजे तक यहां उपस्थित रहते हैं, क्‍योंकि बीच में लंच नहीं होता. हमेशा परम्‍परा रही है कि प्रशासकीय प्रतिवेदन एक दिन पहले मिल जाते हैं ताकि हम उसका अध्‍ययन कर सके. आज सुबह यहां श्रम विभाग का प्रशासकीय प्रतिवेदन मिला, लेकिन अन्‍य विभागों के प्रशासकीय प्रतिवेदन अभी तक नहीं मिले हैं, राजस्‍व विभाग का अभी तक नहीं मिला, स्‍वास्‍थ्‍य विभाग का प्रतिवेदन अभी अभी मिला है, इससे सरकार को सचेत होना चाहिए, या तो सरकार का कंट्रोल नहीं है, पूरी तरह से संसदीय विभाग अक्षम है जो विधान सभा की गरिमा को गिराने का काम कर रहा है.

उपाध्यक्ष महोदय -- मंत्री गण इस बात का ध्यान रखें.

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र)-- उपाध्यक्ष महोदय, यह संसदीय विभाग बीच में कहां से आ गया. संसदीय विभाग थोड़ी प्रतिवेदन देता है. हर विभाग अपना अलग अलग प्रतिवेदन देता है. डॉक्टर साहब को तो जबरदस्ती मुझे घेरना है. मेरा कहना है कि राजस्व विभाग को छोड़कर के लगभग सभी विभागों के प्रतिवेदन आ गये हैं. आपने निर्देश दिया है, हम उसका अक्षरशः पालन करेंगे.

डॉ. गोविन्द सिंह -- उपाध्यक्ष महोदय, एक दिन पूर्व तो आना चाहिये.

उपाध्यक्ष महोदय -- कम से कम एक दिन पूर्व तो आ ही जाना चाहिये.

श्री बाला बच्चन -- उपाध्यक्ष महोदय, अभी हमको 15 मिनट पहले स्वास्थ्य विभाग का प्रशासकीय प्रतिवेदन मिला है. मैं डॉक्टर साहब की बात से सहमत हूं, मंत्री जी इस बात को दिखवायें, क्योंकि विभाग की मांगों पर 23 तारीख तक चर्चा है.

उपाध्यक्ष महोदय -- यह व्यवस्था में दे रहा हूं कि इसका पूर्ण ध्यान रखा जाये, जितने शासकीय प्रतिवेदन हैं, कम से कम एक दिन पहले माननीय सदस्यों के पास अवश्य आ जाया करें.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

3.06 बजे वर्ष 2017-18 की अनुदानों की मांगों पर मतदान (क्रमशः)

मांग संख्या - 18 श्रम

मांग संख्या - 39 खाद्य, नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण

 

उपस्थित सदस्यों के कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत हुए. अब मांगों और कटौती प्रस्तावों पर एक साथ चर्चा होगी.

3.09 बजे अध्यक्षीय व्यवस्था (क्रमशः)

मांगों पर चर्चा के समय कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत करने वाले माननीय सदस्यों की सदन में उपस्थिति सुनिश्चित करने विषयक

 

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र) -- उपाध्यक्ष महोदय, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है कि यह कटौती प्रस्ताव मूल रुप से विपक्ष के लिये ही होता है और विपक्ष जिस तरह का रवैया अपना रहा है, मैंने कल भी ध्यानाकर्षित किया था, व्यवस्था का प्रश्न आपके सामने ही उठाया था कि जो व्यक्ति बजट पर चर्चा स्टार्ट करे, वह जब मंत्री जी जवाब दें, तब सदन में उपस्थित रहें. आपने व्यवस्था भी दी थी, इसके लिये मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं. अब आप देखिये कि 90 प्रतिशत कटौती प्रस्ताव देने वाले माननीय सदस्य, जिनके नाम आपने पढ़े, वे नहीं हैं. मैं यह नहीं कहता कि कटौती प्रस्ताव न दें, जो माननीय सदस्य कटौती प्रस्ताव देते हैं,मेरी इच्छा यह है कि इस बहाने उपस्थित तो रहें, जो वास्तव में क्षेत्र की मांग करते हैं. इसका मतलब तो यह है कि अपने बाबू या क्लर्क से लिखवाकर भेज देते होंगे और ध्यान नहीं देते हैं. उप नेता जी एवं गोविन्द सिंह जी, मैं आपसे प्रार्थना करता हूं, नेता प्रतिपक्ष जी तो आपके रहते नहीं हैं, आप कृपा करें. उपाध्यक्ष महोदय, मेरा आपसे निवेदन है कि इस संबंध में आप कुछ व्यवस्था दें.

उपाध्यक्ष महोदय -- मैं आपके सुझाव से पूर्णतः सहमत हूं और पूर्व में भी व्यवस्था दे चुका हूं. कम से कम कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत करने वाले माननीय सदस्य तो रहें, लेकिन कम से कम वह सदस्य जो शुरु में बोलते हैं या बाद में भी बोलते हैं. जो बोलने वाले सदस्‍य हैं, उनको सुनना चाहिए. बहुत सारे इश्‍यूस में माननीय मंत्री जी अपने भाषण के दौरान जवाब भी देते हैं तो उचित तो यही रहेगा. ऐसी व्‍यवस्‍था करें.

श्री बाला बच्‍चन (राजपुर) - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हम बिल्‍कुल सुनिश्चित करेंगे. आपकी बात और माननीय संसदीय कार्यमंत्री की बात से हम सहमत हैं,. ठीक है, हमारे विधायकगण रहेंगे और ओपनर तो विशेषकर रहेंगे ही.

हमारा निवेदन है कि आज एक साथ पांच डिमाण्‍ड्स पर चर्चा है तो पांचों के मंत्री, जैसे धीरे-धीरे आते जाएंगे. जैसे ही यह चर्चा शुरू होगी, हमने जो नाम दिए हैं, हमारे बोलने वाले सभी सदस्‍यगण रहेंगे बाकी हमारी तरफ से भी उन लोगों को हिदायत दे दी जायेगी कि आप लोगों को हाऊस में स्ट्रिक्‍टली रहना ही है.

 

3.11 बजे वर्ष 2017-2018 की अनुदान की मांगों पर मतदान (क्रमश:)

सुश्री हिना लिखीराम कावरे (लांजी) - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मांग संख्‍या 18 एवं 39 पर बोलने के लिए खड़ी हुई हूँ.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आज अन्‍तर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस है, लेकिन आज भी महिलाओं को कम मजदूरी दी जाती है. यह कानून की किसी भी किताब में या संविधान में कहीं नहीं लिखा है कि महिलाओं और पुरुषों को अलग-अलग मजदूरी दी जायेगी. मैं आपको उदाहरण देकर बताना चाहती हूँ. मेरी विधानसभा क्षेत्र के अन्‍तर्गत नहरों में लाइनिंग का काम चल रहा था. मैंने गाड़ी रोकी और वहां जो मजदूर काम कर रहे थे, मैंने उनसे बात की और पूछा कि आपको कितनी मजदूरी मिल रही है ? महिलाओं ने बताया कि हमें 100 रुपये मिल रहे हैं. जब मैंने पुरुषों से बात की तो उन्‍होंने बताया कि उनको 130 रुपये मिल रहे हैं.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैंने वहीं से एस.डी.ओ. को फोन किया और पूछा कि आपके डिपार्टमेन्‍ट में सी.एस.आर. में रेट तय होते हैं. मजदूरी के क्‍या रेट हैं ? क्‍योंकि यहां जो लेबर काम कर रहे हैं, उनमें महिलाओं को 100 रुपये और पुरुषों को 130 रुपये मिल रहे हैं. एस.डी.ओ. ने मुझे जवाब दिया कि मैडम, वह काम तो ठेकेदार करवा रहे हैं. ठेकेदार जो चाहे वह मजदूरी लेबरों को दे सकते हैं. शासकीय कार्यों में जब भी ठेके होते हैं तो उसमें स्‍पष्‍ट निर्देश होता है कि मजदूरी का भुगतान शासन के नियमों के अनुसार है. जब एस.डी.ओ. का मुझे यह जवाब मिला तो मैंने पूरी जानकारी ली कि आखिर वास्‍तव में मजदूरी क्‍या है. मैं आपको बता देती हूँ कि पिछले 2 वर्षों से एरिगेशन में मजदूरी के रेट तय नहीं हो रहे हैं. लेकिन जब मैंने जानकारी ली कि अभी क्‍या रेट चल रहे हैं ? तब मुझे पता चला कि कमिश्‍नरी के रेट से इनको भुगतान करना है और जिसमें अकुशल श्रमिक को 267 रुपये, अर्द्धकुशल श्रमिक को 300 रुपये, कुशल श्रमिक को 353 रुपये एवं जो कुशल से भी अच्‍छे हैं, उनको 403 रुपये देना है. यह मजदूरी के रेट शासन ने निर्धारित कर रखे हैं.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक एस.डी.ओ., यदि एम.एल.ए. को यह जवाब देता है तब आप इस बात की कल्‍पना कर सकते हैं कि जो जन-प्रतिनिधि गांवों में रहते हैं जैसे पंच, सरपंच, जनपद के सदस्‍य, जिला पंचायत के सदस्‍य, वे जब अधिकारियों से बात करते होंगे तो उनकी क्‍या स्थिति होती होगी ? इस बात की कल्‍पना आप और हम यहां बैठकर निश्चित रूप से कर सकते हैं. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से यह कहना चाहती हूँ कि इसके लिए सरकार को ही कड़े कदम उठाने पड़ेंगे क्‍योंकि हम मजदूरी की शिकायत कर भी दें तो श्रम न्‍यायालय में जब केस चलता है तो ठेकेदार, मजदूरों को 10-20,000 रुपये देकर उनके बयान बदलवा देते हैं और इस तरह श्रम न्‍यायालय बेअसर रहता है. यह बहुत गंभीर मामला है एवं श्रमिकों के कल्‍याण के लिये श्रमिक कल्‍याण निधि में करोड़ों रुपये जमा होते हैं लेकिन यदि रुपये शासन के खजाने में रहें और यदि रुपये श्रमिकों के उपयोग के लिये खर्च न हों तो इन रुपयों का क्‍या मतलब है ?

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहती हूँ कि श्रमिकों के श्रमिक कार्ड बनने चाहिए. आज वर्तमान में, उस तरह श्रमिकों के कार्ड नहीं बन रहे हैं. जब तक उनके कार्ड नहीं बनेंगे तो श्रमिकों को मिलने वाले लाभ से, वे निश्चित रूप से वंचित रह जायेंगे और मैं तो इस सदन में बैठे हुए सभी जन-प्रतिनिधियों से कहना चाहती हूँ कि श्रमिक कार्ड के लिए हमें एक अभियान चलाना पड़ेगा. कई बार हम सोच लेते हैं कि श्रम अधिकारी कार्ड बनवा लेंगे, श्रम निरीक्षक कार्ड बनवा लेंगे. अधिकारियों को श्रमिकों से कोई लेना-देना नहीं है, वे तो यह देखते हैं कि बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां कहां पर हैं ? उनके दिमाग में बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां रहती हैं न कि श्रमिकों के श्रमिक कार्ड. इसके लिए तो हम जन-प्रतिनिधियों को ही आगे बढ़कर इसको एक अभियान के तहत श्रमिक कार्ड बनवाना पड़ेगा. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं एक और बात कहना चाहती हूं कि जो कामकाजी महिलाएं हैं उन कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्‍टल की सुविधा विशेष रूप से होना चाहिए और इसका पालन भी कड़ाई से होना चाहिए. साथ ही साथ उनके हॉस्‍टल परिसर की सुरक्षा के भी पुख्‍ता इंतजाम होने चाहिए. अब मैं पी.डी.एस. की बात करना चाहती हूं. शासन ने 25 श्रेणियां पी.डी.एस. के माध्‍यम से केरोसिन देने के लिए बनाई हैं. पहली श्रेणी में अंत्‍योदय श्रेणी, दूसरी श्रेणी में बी.पी.एल. श्रेणी और तीसरी श्रेणी में अन्‍य 23 श्रेणियों को रखा गया है. इन श्रेणियों के अलावा भी जो लोग प्रदेश में हैं उनको भी केरोसिन की जरूरत पड़ती है. ऐसी स्थिति में वह केरोसिन कहां से लाएंगे क्‍योंकि आज वर्तमान में खुले बाजार में केरोसिन बेचने की व्‍यवस्‍था शासन ने नहीं की है. कहीं पर भी मार्केट में केरोसिन नहीं मिल रहा है और इसकी व्‍यवस्‍था शासन को करना चाहिए. यदि आप ऐसा नहीं करेंगे तो इन श्रेणियों को छोड़कर जिन परिवारों को मिट्टी के तेल की जरूरत है वह मिट्टी का तेल कहां से लाएंगे या तो वह इन्‍हीं परिवारों से ज्‍यादा रेट पर केरोसिन खरीदेंगे जिनको केरोसिन मिल रहा है. या फिर सेल्‍स मेन से मिट्टी का तेल ज्‍यादा रेट पर खरीदेंगे और यदि बात इन सबसे ज्‍यादा आगे बढ़ गई तो पी.डी.एस. तक जो केरोसिन जाता है वहां जाने के पहले ही उसका बंटाढार हो जाएगा. क्‍योंकि जिन्‍हें जरूरत है वह तो निश्चित रूप से ज्‍यादा रेट देकर खरीदेंगे. इसीलिए मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से कहना चाहती हूं कि मिट्टी के तेल को आपको खुले बाजार में बेचने की व्‍यवस्‍था करनी चाहिए. मैं एक और बात कहना चाहती हूं कि केश सब्सिडी सरकार लागू करने वाली है. आप बताइए कि जब तक आप केश सब्सिडी लागू करने की योजना बना रहे हैं बहुत अच्‍छी बात है लेकिन जब तक खुले बाजार से आप मिट्टी का तेल नहीं खरीदेंगे तो आप उनकी सब्सिडी कैसे जमा करवाएंगे. वह लोग मिट्टी का तेल कहां से खरीदेंगे. आप यदि पी.डी.एस. में नहीं देंगे तो वह खुले मार्केट से खरीदेंगे और उसके बाद ही तो सब्सिडी उनके खाते में आएगी तो यह व्‍यवस्‍था तो आपको निश्चित रूप से करवानी होगी. मैं उज्‍ज्‍वला योजना के बारे में भी कहना चाहती हूं. उज्‍ज्‍वला योजना में जितनी भी बी.पी.एल. परिवारों की महिलाएं हैं सरकार उनको गैस कनेक्‍शन देने का काम कर रही है. यह बहुत अ‍च्‍छी बात है लेकिन शहरी क्षेत्र में जो बी.पी.एल. की महिलाएं हैं जिनको गैस कनेक्‍शन आपने दिया है. उन लोगों को आपने पिछले एक वर्ष से केरोसिन देना बंद कर दिया है और जब शहर के लोग केरोसिन की बात करते हैं तो आप उनको कहते हैं कि आपको तो हमने गैस कनेक्‍शन दे दिया है अब आपको केरोसिन की जरूरत कहां है. जब वह कहते है कि केरोसिन हमको खाना बनाने के लिए नहीं चाहिए लेकिन यदि लाईट चली जाए तो दिया जलाने के लिए हमको केरोसिन की जरूरत पड़ती है तो आपका जवाब आता है कि हमने 24 घंटे बिजली दे दी है. यह तो आपने शहरों में कर दिया है लेकिन मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी से निवेदन करना चाहती हूं कि जैसे आपने शहरों में मिट्टी का तेल देना बंद कर दिया है वैसे यदि आपके दिमाग में यह है कि जिन-जिन को आपने गैस कनेक्‍शन दिए हैं आप गांव में उनको मिट्टी का तेल देना बंद कर देंगे. गांव में तो अभी आप उज्‍ज्‍वला योजना के कनेक्‍शन बांट रहे हैं उनको गैस कनेक्‍शन ही दिए जा रहे हैं लेकिन मैं आपके माध्‍यम से सरकार से कहना चाहती हूं कि यदि उनके दिमाग में यह बात है कि आप उनको मिट्टी का तेल देना बंद करने वाले हैं तो मैं आपको बता दूं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय कि गलती से भी आप यह कदम नहीं उठाना क्‍योंकि मैं तो कांग्रेस की विधायक हूं और मुझे यह बात नहीं कहना चाहिए. उसके बावजूद भी मैं लोगों की भलाई के लिए य‍ह बात कह रही हूं कि यदि आपने यह कदम उठा लिया तो यह बात आप भी जानते हैं कि यदि आपने गलती से भी गांव में केरोसिन देना बंद कर दिया तो 2018 और 2019 के पहले ही आपका गैस का भांडा फूट जाएगा और आप उसके लिए अभी से तैयार हो जाइए. इसलिए य‍ह बात यदि आपके दिमाग में हो तो भी मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहती हूं कि सरकार इस बात पर पुनर्विचार जरूर करें कि गलती से भी यह कदम कभी न उठाए. अगस्‍त 2016 से पात्र परिवारों को पात्रता पर्ची नहीं मिल रही है. मैंने जब पता किया कि ऐसा क्‍या कारण है जिसके कारण पात्रता पर्ची नहीं मिल रही है तो मुझे पता चला कि भोपाल से ही सिस्टम बंद कर दिया गया है और जब मैंने अंदरुनी बात पता की कि आखिर क्या कारण है तो मुझे पता चला कि फूड सिक्योरिटी बिल में एक गांव में 75 प्रतिशत लोगों को लाभान्वित करने का प्रावधान है लेकिन पात्रता पर्ची इतनी बढ़ गई हैं कि 75 प्रतिशत पीछे छूट गया. मैं निवेदन करना चाहती हूँ कि यह जो 75 प्रतिशत की पात्रता कर दी है इनके लिए राज्य शासन अपने बजट में से व्यवस्था करे और यह पात्रता पर्ची के द्वारा जितने लोग खाद्यान्न के लिए आते हैं उनको खाद्यान्न की पूरी सुविधा आप उपलब्ध करवाइये.

उपाध्यक्ष महोदय, मैं मिलिंग सिस्टम की बात करना चाह रही हूँ. बालाघाट जिले में सबसे ज्यादा धान होता है. बहुत सारी ऐसी फसलें होती हैं जिनका सीधे-सीधे उपार्जन किया जाता है लेकिन धान एक ऐसी फसल है जिसके उपार्जन के बाद उसकी मिलिंग करना पड़ती है. गेहूं, चना, सोयाबीन इनका उपार्जन सीधे-सीधे हो जाता है उपार्जन के बाद इनमें मिलिंग की जरुरत नहीं पड़ती है क्योंकि गेहूँ का आटा बनाकर नहीं बांटते हैं. धान एक ऐसी फसल है जिसकी मिलिंग बहुत जरुरी होती है. मध्यप्रदेश में बालाघाट और सिवनी जिले में सबसे ज्यादा धान होता है. मैं शासन को दोषी नहीं मानती लेकिन उसकी कमियों को बताना चाहती हूँ कि मध्यप्रदेश में सिस्टम है कि जब सोसायटियां धान खरीदती हैं उसके बाद उस धान को गोदाम में रखा जाता है सोसायटी से यह धान गोदाम में जाता है उसके बाद यह धान मिलर्स को मिलिंग के लिए देते हैं. मिलिंग के बाद यह धान वापस गोदाम में आता है फिर गोदाम से पीडीएस के केन्द्रों में जाता है जहाँ से लोगों को खाद्यान्न वितरित किया जाता है.

उपाध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश के बगल में छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र राज्य हैं. छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा फसल धान की होती है वहां यह सिस्टम है कि सोसायटियों से सीधे मिलर्स को धान दे दिया जाता है और मिलर्स से सीधे पीडीएस की दुकानों में धान चला जाता है. उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से कहना चाहती हूँ कि इस पूरे सिस्टम में करोड़ों रुपए ट्रासंपोर्ट में खर्च होता है. यदि इस बात पर आप विचार करेंगे तो इस व्यय को सीधे-सीधे बचाया जा सकता है. अभी दो दिन पहले श्री दिनेश राय मुनमुन जी ने भी जिक्र किया था कि हमारे यहां पीडीएस में कालाबाजारी होती है. मैं आपको बताना चाहती हूँ कि यह कैसे होती है. मध्यप्रदेश में उत्तर प्रदेश और बिहार का चावल आता है. सोसायटियों से जब मिलर्स को धान दिया जाता है तो वे मिलर्स उस धान को रख लेते हैं उसकी मिलिंग किए बिना उत्तर प्रदेश और बिहार का जो धान है उसको मिलर्स पीडीएस केन्द्रों पर भिजवा देते हैं. अब आप कल्पना कीजिए कि पता नहीं वह कब का चावल है. यह जमीनी सच्चाई है ऐसा होता है. हमारे यहां के लोग जो पीडीएस की दुकानों से अनाज खरीदकर खाते हैं यह वही धान खरीदकर खाते हैं. सरकार के पास यह सिस्टम है कि वह पता कर सकती है कि यह चावल कितना पुराना है.

उपाध्यक्ष महोदय--हिना जी अब आप समाप्त करें 13 मिनट आप बोल चुकी हैं.

कुंवर विक्रम सिंह--उपाध्यक्ष महोदय, आज महिला दिवस के अवसर पर बोल लेने दें.

उपाध्यक्ष महोदय--आपके पास आज की कार्य-सूची होगी उसमें देखिए इस विभाग पर 1.30 घंटे का समय निर्धारित है. सत्तापक्ष से 10 सदस्य बोलने वाले हैं प्रतिपक्ष में कांग्रेस से 5, बहुजन समाज पार्टी से 3 और आदरणीय दिनेश राय मुनमुन जी भी बोलने वाले हैं. अब आप समाप्त करिए.

सुश्री हिना लिखिराम कावरे-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, धन्यवाद.

श्री दुर्गालाल विजय (श्‍योपुर)- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मांग संख्‍या 18 और 39 का समर्थन करता हूं. आज महिला दिवस है. आज का दिन हमने अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया है. मध्‍यप्रदेश की सरकार ने और माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने महिलाओं के सशक्‍तिकरण की दृष्टि से बहुत से कार्य किए हैं. विभिन्‍न विभागों की मांगों की चर्चा में सदन में उनका उल्‍लेख आयेगा. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं बताना चाहता हूं कि मध्‍यप्रदेश के खाद्य आपूर्ति विभाग ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्‍त करने की दृष्टि से सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानें महिलाओं के माध्‍यम से संचालित करने और दुकानों में विक्रेता भी महिला ही हो ऐसा प्रबंध मध्‍यप्रदेश की सरकार ने किया है. इसका कारण हम सभी ठीक तरह से समझ सकते हैं और प्रदेश की जनता भी इस बात को जानती है कि विभिन्‍न क्ष्‍ोत्रों में महिलाओं को सशक्‍त करने का काम माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने किया ही है परंतु आर्थिक रूप से महिलाओं को समृद्ध एवं सशक्‍त करने का काम भी सरकार ने किया है. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आप और हम, सभी यह बात जानते हैं कि खाद्य से संबंधित तमाम बातों को लेकर महिलाएं जितनी संवेदनशील होती हैं, इस मसले पर पुरूष उतने संवेदनशील नहीं हो पाते हैं. इसी वजह से खाद्य वितरण की व्‍यवस्‍था को महिलाओं के हाथों में दिए जाने का निर्णय सरकार ने किया है. इसके अतिरिक्‍त सरकार द्वारा यह भी निर्णय लिया गया है कि अब तक जो राशन कार्ड थे उनमें परिवार के मुखिया के तौर पर पुरूष का नाम होता था, लेकिन अब जो राशन कार्ड बनेंगे उनमें पुरूष के स्‍थान पर राशन कार्डों में मुखिया के रूप में महिला का नाम दर्ज किया जाएगा. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसके साथ ही साथ यह भी तय किया गया है कि यदि किसी परिवार में 18 वर्ष तक की कोई महिला नहीं है तो पुरूष का नाम मुखिया के तौर पर राशन कार्ड में रहेगा लेकिन बाद में जब परिवार की महिला 18 वर्ष की हो जाएगी तो पुरूष का नाम मुखिया से हटाकर, उसके स्‍थान पर परिवार की जिस महिला ने 18 वर्ष की आयु पूर्ण की है, उसका नाम रखा जाएगा.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, खाद्य सुरक्षा के अंतर्गत यह भी तय किया गया है कि जो कामकाजी महिलाएं हैं, उन्‍हें प्राथमिकता की श्रेणी में रखने का काम मध्‍यप्रदेश सरकार ने किया है. परिवार की श्रेणी में सम्मिलित किया है और ऐसी महिलाओं को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत पात्रतानुसार रियायती दर पर शक्‍कर, नमक और अन्‍य खाद्यान्‍न उपलब्‍ध कराने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है. माननीय उपाध्‍यक्ष्‍ा महोदय, सुरक्षा की दृष्टि से भी बहुत से फैसले सरकार द्वारा लिए गए हैं, जिसके तहत महिलाओं को खाद्यान्‍न एवं आर्थिक रूप से सम्‍पन्‍न कर पूरी तरह समृद्ध बनाया जा सके. सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सही ढंग से जारी रखने का काम करती है और खाद्य विभाग के माध्‍यम से इस कार्य को संचालित करने का कार्य किया जाता है. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं बताना चाहता हूं कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों पर मिलने वाली सभी आवश्‍यक वस्‍तुओं को सही तरीके से जनता के बीच पहुंचाने का काम खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के माध्‍यम से सरकार द्वारा किया जा रहा है. अभी सदन में उल्‍लेख किया गया कि केरोसिन बंद कर दिया गया है. जिसके कारण लोगों को कठिनाई हो रही है. लेकिन हम सभी जानते हैं कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम तो इस सरकार के पहले ही लागू हो गया था. जिस सरकार द्वारा यह अधिनियम लागू किया गया, उस सरकार के लोग भी यदि यह कहें कि इसे बंद कर दिया गया है. क्योंकि उसमें जो प्रावधान किया गया था, उस प्रावधान के अन्दर बीपीएल को छोड़ करके बाकी लोगों को केरोसिन न देने का निर्णय हुआ. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं यह भी निवेदन करना चाहता हूँ कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में तो सरकार ठीक से काम कर ही रही है, खाद्य विभाग के माध्यम से इसमें गेहूँ और धान उपार्जन का काम भी संचालित किया जाता है और मुझे यह कहते हुए बड़ी प्रसन्नता है कि पिछले वर्षों में खाद्य विभाग के माध्यम से जो उपार्जन का कार्य किया गया था, उस उपार्जन के कार्य के अन्तर्गत गेहूँ का उपार्जन बहुत बंफर स्तर पर हुआ और मध्यप्रदेश का उसमें नाम था और उसमें किसानों को कहीं किसी भी प्रकार की कठिनाई उत्पन्न न हो, इस प्रकार का प्रबंध किया गया था, धान में भी यह प्रबंध हुआ था. उपाध्यक्ष महोदय, मैं इस बात को स्वीकार करने में कोई संकोच नहीं करता कि ट्रांसपोर्टर के कारण से थोड़ी बहुत कठिनाइयों का सामना किसानों को और वहाँ की व्यवस्था को करना पड़ता है क्योंकि यह समितियों के माध्यम से विभाग इस काम को संपादित कराता है और उसके कारण उसमें कहीं न कहीं किसी भी प्रकार की थोड़ी बहुत कठिनाई तो उत्पन्न होती है, लेकिन गेहूँ का जितना विपुल उत्पादन था, देश में दूसरा नंबर, हमारे प्रदेश का था. ऐसी स्थिति में जिस तेजी के साथ में उपार्जन का कार्य ठीक से संपन्न हो पाया उसको करने में हमारी सरकार ने और खाद्य विभाग ने बहुत बेहतर तरीके से कार्य किया.

माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश में श्रम विभाग के माध्यम से बहुत सारे ऐसे काम करने का प्रयत्न किया जाता है, जिससे हमारे श्रमिकों को ठीक से लाभ प्राप्त हो सके, औद्योगिक क्षेत्र में कार्य करने वाले नियोजकों को भी ठीक वातावरण में कार्य करने का अवसर मिले, इस दृष्टि से हमारे प्रदेश में श्रम विभाग और श्रम आयुक्त संगठन के माध्यम से उद्योगों में शांति स्थापित करने और औद्योगिक तनाव को समाप्त करने की दृष्टि से बहुत सारे कार्य ठीक तरीके से संपन्न करने का काम किया है और इसके कारण मैं यह कह सकता हूँ कि जो समय आ रहा है और जिस प्रकार का समय आगे आने वाला है उसमें विभिन्न सारे नियोजकों को अब यह धीरे धीरे संतुष्टि होने लगी है कि हमारे मध्यप्रदेश के अन्दर उद्योग लगाने के कारण से उनको कहीं न कहीं किसी न किसी प्रकार का लाभ प्राप्त होगा, उद्योग ठीक तरीके से चल पाएगा.

उपाध्यक्ष महोदय-- (श्री के.पी.सिंह माननीय सदस्य द्वारा अपने आसन पर बैठे बैठे पेपर पढ़ने पर) आदरणीय के. पी. सिंह जी, अखबार न पढ़ें.

श्री दुर्गालाल विजय-- उपाध्यक्ष महोदय, औद्योगिक क्षेत्र में जो तनाव उत्पन्न होता था, जो असंतोष उत्पन्न होता था उसको श्रम विभाग...

डॉ. नरोत्तम मिश्र-- माननीय उपाध्यक्ष जी, के पी सिंह जी हमारे छात्र नेता रहते थे, बड़े लीडर थे. कॉलेज टाइम से मैंने देखा है ऐसे ही काम करते थे.

उपाध्यक्ष महोदय-- आप इनकी टीम में थे क्या?

डॉ.नरोत्तम मिश्र-- हाँ थे.

उपाध्यक्ष महोदय-- आपने उनको शुरू से सही सलाह दी नहीं.

डॉ.नरोत्तम मिश्र-- उपाध्यक्ष जी, कभी किसी की नहीं मानी.

श्री दुर्गालाल विजय-- उपाध्यक्ष महोदय, 735 व्यक्तिगत विवादों को श्रम न्यायालय को संदर्भ करने की कार्यवाही विभाग ने की है और इसमें लगभग 1196 अवार्डों में विभाग के द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई जिससे यह काम ठीक तरीके से आगे बढ़ा और इसके अलावा जो श्रम न्यायालय ने विशेष कार्य किया है, 2016-17 में 25 प्रकरणों में लगभग एक करोड़ छः लाख रुपये की राशि का जो अवार्ड दिया था, उसकी वसूली कराने का काम सरकार ने किया है.

उपाध्यक्ष महोदय, वर्तमान समय में लोगों में कार्य करने की क्षमता बहुत वर्षों तक रहती है. पिछले समय में जब कार्य करने की क्षमता कम हुआ करती थी तो किसी भी उद्योग में काम करने के लिए श्रमिकों की आयु 58 वर्ष निर्धारित की गई थी, लेकिन प्रदेश की सरकार ने और श्रम विभाग ने इस आयु को बढ़ाकर 60 वर्ष कर दिया है. इसके कारण से ऐसे अनेक परिवार जो उद्योगों में कार्य कर रहे थे, जिनके मुखिया उसमें काम करते थे वे लोग बहुत प्रसन्‍नता महसूस कर रहे हैं कि उन्‍हें दो वर्षों तक और रोजगार करने का अवसर मिलेगा. यह काम श्रम विभाग ने और मध्‍यप्रदेश की सरकार ने किया है. दूसरा माननीय अध्‍यक्ष महोदय एक और काम सरकार की ओर से हुआ है उसमें बड़ी पहल की गई है कि महिला मजदूर रात्रि के समय काम करने के लिए जाने में बहुत कठिनाई महसूस करती थीं. महिला सुरक्षा की दृष्टि से सरकार ने जो प्रबंध किए हैं और उनको रात्रिकालीन सेवा में कार्य करने के लिए स्‍वीकृति और अनुमति प्रदान की है इसके कारण से अब महिलाएं भी रात्रिकाल में सुरक्षा की व्‍यवस्‍था ठीक होने के कारण से कार्य करने में सक्षम हो पायी हैं. बहुत सारे उद्योगों में अब रात्रिकालीन समय में भी महिलाएं कार्य करने के लिए आगे आ रही हैं.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अंतर्गत बहुत सारे लाभ श्रमिकों को देने का कार्य सरकार ने किया है और हमारे मध्‍यप्रदेश में पिछले वर्ष 25 लाख श्रमिकों को 709 करोड़ रूपये का लाभ देने का काम सरकार ने किया है और इसी प्रकार विभिन्‍न कल्‍याणकारी योजनाओं के अंतर्गत भी 11 लाख लोगों को 320 करोड़ रूपये का लाभ विभिन्‍न कल्‍याणकारी योजनाओं में देने का काम मध्‍यप्रदेश की सरकार ने किया है. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, न्‍यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 के अंतर्गत 66 अधिसूचित नियोजनों में न्‍यूनतम वेतन दरों का पुनरीक्षण किया गया है. यह बहुत महत्‍वपूर्ण है कि अकुशल श्रमिकों के लिए 267 रूपये, अर्द्ध कुशल श्रमिकों के लिए 300 रूपये, कुशल श्रमिकों के लिए 353 और उच्‍च कुशल श्रमिकों के लिए 403 रूपये का वेतन निर्धारण मध्‍यप्रदेश की सरकार द्वारा किया है और स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा की दृष्टि से भी सरकार ने बहुत सारे काम किए हैं.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं एक लाइन में अपने क्षेत्र की बात थोड़ी-सी कहना चाहता हॅूं कि हमारे श्‍योपुर क्षेत्र में गेहूं का विपुल उत्‍पादन होता है और गेहूं का विपुल उत्‍पादन, यह कह सकता हॅूं कि मध्‍यप्रदेश में श्‍योपुर तीसरे नंबर पर है. उपार्जन के समय लोगों को ठीक से सुविधा प्राप्‍त हो सके, इसके कारण पहले जो व्‍यवस्‍था की गई थी उस व्‍यवस्‍था में तो पूरा एक साथ तुल जाया करता था, चला जाया करता था. लेकिन अब पृथक-पृथक सोसायटियों के केन्‍द्रों पर जाने के लिए वहां पर लोगों को काम करना पडे़गा. आपके माध्‍यम से मेरा निवेदन यह है कि आपने सोसायटियों पर व्‍यवस्‍था कर दी है केन्‍द्र पृथक-पृथक कर दिए हैं लेकिन वहां पर धर्मकांटे लगाकर और जो इलेक्‍ट्रॉनिक तौल कांटा है वह प्रत्‍येक केन्‍द्रों पर लगाया जाए. आपने मुझे बोलने का समय दिया, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- धन्‍यवाद.

कुंवर सौरभ सिंह (बहोरीबंद) -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मांग संख्‍या 18 और 39 के विरोध में खड़ा हुआ हूँ. 7 नवम्‍बर 1917 को रसियन समाज क्रांति का उदय हुआ था और 7 नवम्‍बर 2017 को इसे 100 वर्ष पूरे होंगे. उनकी शुरूआत थी. हम मेहनतकश जब जग वालों से अपना हिस्‍सा मांगेगे, एक खेत नहीं, एक देश नहीं, हम सारी दुनियां मांगेगे. यह जो श्रम विभाग है हमारे यहां के जो मजदूर हैं यह उनकी लगातार उपेक्षा करता जा रहा है और ऐसा लगता है कि कुछ दिनों बाद अभी जातिगत समीकरण चलते हैं कुछ दिनों बाद वर्ग संघर्ष पैदा हो जाएगा.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरे कटनी क्षेत्र में एक एसीसी सीमेंट फैक्‍ट्री है जहां लेबर का अनुबंध होना था, जो विगत कई वर्षों से नहीं हुआ और लगातार वे लेबर कोर्ट के चक्‍कर काट रहे हैं. आज दिनांक तक मैनेजमेंट से उनकी बात नहीं हो पायी. प्राइवेट ठेकेदार तो ठीक है, जहॉं तक सरकारी कामों की बात होती है नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, जो एक सरकारी विभाग है वहां के जो ठेकेदार हैं वे भी मजदूरों का 70-80 लाख प्रोविडेंट फण्‍ड का पैसा जो मजदूरों से काट कर रखा जाता है वह भी कई सालों से जमा नहीं होता है. बार-बार प्रश्‍न लगाने पर श्रम विभाग उनके प्रोविडेंट फण्‍ड का पैसा उनके खातों में जमा करवाता है.

माननीय उपाध्यक्ष महोदय, इस ठेकेदार की मनमर्जी के चलते वहाँ के किसानों की जमीनों पर वहाँ मजदूरों के पेमेंट लगातार बहुत लोगों से बकाया है और अभी तक उसका भुगतान नहीं हो पा रहा है. हमारे क्षेत्र में संन्निर्माण कार्ड का पंजीयन ढंग से नहीं हो पा रहा है इससे छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिल रही है. राशि संबंधित जनपद श्रम विभाग में पड़ी रहती है और जब पंजीयन नहीं हो रहा है तो मजदूरों को उसका लाभ नहीं मिलता और पूरी की पूरी राशि मूल विभाग को वापस लौटा दी जाती है और जो ब्याज के साथ राशि वापस आना चाहिए संबंधित विभाग उस ब्याज का दोहन कर रहे हैं और मजदूरों की राशि जो यहाँ सरकार बजट में पास करके भेजती है वह उन तक नहीं पहुँच पा रही है. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मांग संख्या 39 जो खाद्य विभाग की है, हमारे यहाँ एक तेलदूत योजना चलती है जिसमें डिपो से कटनी की जो दूरी दिखाई गई है वह उससे ज्यादा दिखाई गई है. दिखने में तो ज्यादा असर नहीं आता है. कटनी में लगभग प्रति गरीबी रेखा कार्ड पर मिलने वाले औसत तेल पर 27 पैसे का वहन ज्यादा आता है, अति गरीब वालों को और इसी तरह सागर में लगभग 46 पैसे का अधिक आता है.कुल मिलाकर सारे जिलों में जो इस तरह की योजना चल रही है उनका उद्देश्य मजदूरों को लाभ देना है, कार्डधारियों को लाभ देना है लेकिन उनको लाभ ना मिलकर के वह लाभ डिपो में ट्रांसपोर्ट करने वालों को लगातार दिया जा रहा है. हमारे जिले में लगातार, कार्डों से अधिक आवंटन, जब मैं जिला पंचायत में उपाध्यक्ष था तब भी यह प्रश्न और जाँच चलती रही अभी तक इसका हल निकल नहीं पाया है. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, शौचालय के नहीं बनने के अभाव में स्वच्छता के कारण यहाँ पर हमारे जिले में अघोषित आदेश के तहत जिन गरीबों के घर में शौचालय नहीं बने हैं, उनको गल्ला नहीं मिलेगा. ऐसा बोलकर उनका गल्ला रोक दिया गया है. वह गल्ला कहाँ जा रहा है? यह लगभग सभी जिलों की स्थिति है. पंचायत सचिव वैसे ही हेराफेरी करके नाम कटवा देते हैं अब और गल्ला वहाँ स्टोर हो रहा है और गरीबों तक नहीं पहुँच पा रहा है. सरकार ने वितरण का रजिस्टर बनाना बंद कर दिया है और मशीन से वितरण डाटा आपके पास सिर्फ एक माह का रहता है. एक माह के बाद का डाटा आपके पास उपलब्ध नहीं होता है. अगर कोई गड़बड़ी होती है तो आप उसको किस तरह बंद करेंगे,किस तरह पकड़ेंगे. रही बात सर्वर की तो कई जिलों के विभाग सर्वर से अपना डेटा माँग रहे हैं कि हमारे यहाँ कितना वितरण हुआ, जो आज तक प्राप्त नहीं हो पाया है. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मास्टर कार्ड खत्म हो रहे हैं, मदर कार्ड खत्म हो रहे हैं और संन्निर्माण कार्ड रीन्यू तो हो ही नहीं रहे हैं. लगभग सभी स्थिति में तेल की काला बाजारी हो रही है. मैं यह कहना चाहता हूं कि चाहे खाद्य विभाग हो, चाहे श्रम विभाग हो, इनके द्वारा जो बजट का एलोकेशन किया गया है, जो इनकी माँग संख्या है, इसके आधार पर यह काम नहीं पा रहे हैं. इनका पूरा का पूरा जोर कागजी खाना पूर्ति में है. जबसे इन्होंने इसको डिजीटिलाईज किया है तबसे आंकड़ों का खेल हो गया है. हकीकत में जनता के पास चाहे तेल हो, चाहे श्रम कार्ड की बात हो, वह नहीं पहुँच रहा है जो उनके पास पहुँचना चाहिए. मेरा आपसे निवेदन है मैं श्रम और खाद्य विभाग की माँग संख्या का विरोध करता हूं और मैं चाहूँगा कि मंत्री जी इस विषय पर ध्यान दें.

श्री मानवेन्द्र सिंह (महाराजपुर)-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं माँग संख्या 18 और 39 के पक्ष में बात रखने के लिए खड़ा हुआ हूँ. श्रम विभाग में शासन की ओर से एक श्रमायुक्त संगठन के माध्यम से यह जो बड़े-बड़े उद्योगपति हैं और वहाँ पर जो यह श्रम की जो समस्यायें आती हैं और उनके विवादों का निराकरण शासन की तरफ से काफी हद तक किया गया है. मैं माननीय मंत्री जी को बधाई देना चाहूँगा क्योंकि बड़े उद्योगपतियों की जो श्रमिकों की जो समस्यायें होती हैं वह आसानी से नहीं निपटती हैं. दूसरा माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने जो 58 वर्ष उम्र थी, उसको 60 वर्ष करके श्रमिकों को दो वर्ष का और काम करने का मौका दिया है उसके लिए मैं उनको बधाई देना चाहूँगा और महिलाओं के लिए जो रात्रि पाली होती थी उसमें उनको आने-जाने में और काम करने में जो असुविधा होती थी, उनकी सुरक्षा की व्यवस्था मंत्री जी और विभाग द्वार की गई है उससे महिलाओं के रात्रि में काम करने की संख्या भी काफी हद तक बढ़ी है. जहाँ तक श्रमिकों की जो मजदूरी है उसमें भी अकुशल श्रमिकों की 267 रुपये की गई है. अर्ध कुशल की 300 रुपये और कुशल श्रमिक की 353 रुपये और उच्च कुशल श्रमिकों की उनकी 403 रुपये प्रतिदिन की राशि उनके लिए उपलब्ध की जाती है . माननीय उपाध्यक्ष महोदय, जो आसपास के राज्य हैं उनसे यह राशि काफी अधिक है.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मांग संख्‍या-39, जो कि खाद्य, नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्‍ता संरक्षण से संबंधित है, इसके बारे में मैं कहना चाहता हूँ कि सब जगह जो प्‍वॉइंट ऑफ सेल बनाए गए हैं इससे जो बोगस कॉर्ड्स थे और राशन वितरण में जो समस्‍याए आती थीं उन पर काफी हद तक अंकुश लगा है. प्‍वॉइंट ऑफ सेल से व्‍यवस्‍था काफी सुधरी है, उपाध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मंत्री जी से मैं एक निवेदन और करना चाहूँगा कि केवल बी.पी.एल. कार्डधारक को ही खाद्यान्‍न मिलता है, इस योजना को थोड़ा विस्‍तृत कर ओ.बी.सी. और अन्‍य लोग जिनके पास बी.पी.एल. कार्ड नहीं हैं लेकिन वे गरीब हैं, उनको भी इसमें सम्‍मिलित किया जाए क्‍योंकि उनमें बड़ा असंतोष है. आपके माध्‍यम से मैं माननीय मंत्री जी से अनुरोध करूंगा कि इनको भी यह सुविधा उपलब्‍ध कराने की शासन की ओर से प्रयास किया जाए. आपने मुझे समय दिया, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- बहुत-बहुत धन्‍यवाद आपको भी मानवेन्‍द्र सिंह जी कि आपने काफी कम समय लिया.

श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को (पुष्‍पराजगढ़) -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मांग संख्‍या 18 और 39 के विरोध में और कटौती प्रस्‍ताव के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ. आज अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस है तो मैं सभी माताओं, बहनों और बेटियों को अपनी ओर से ढेर सारी शुभकामनाए और बधाई देते हुए अपनी बात जिला अनूपपुर और अपने क्षेत्र से मैं प्रारंभ करना चाहूँगा.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश स्‍टेट सिविल सप्‍लाई कार्पोरेशन लिमिटेड, क्षेत्रीय कार्यालय, सतना का पत्र क्रमांक - परिवहन/द्वारप्रदाय/16-17/1685 दिनाक 22.02.2017 एवं मध्‍यप्रदेश स्‍टेट सिविल सप्‍लाई कार्पोरेशन लिमिटेड, मुख्‍यालय भोपाल का पत्र क्रमांक - द्वारप्रदाय/परिवहन/2016-17/953, भोपाल दिनाक 16.02.2017, पुष्‍पराजगढ़ के सेक्‍टर राजेन्‍द्रग्राम में परिवहनकर्ता मैसर्स सुनील कुमार कुकरेती से संबंधित ये पत्र हैं. और दूसरा एम.पी. स्‍टेट सिविल सप्‍लाई कार्पोरेशन लिमिटेड, जिला कार्यालय, अनूपपुर का पत्र क्रमांक एन.ए.एन./क्‍लैम/2016-17, अनूपपुर, दिनाक 02.03.2017, इस पत्र के माध्‍यम से अनूपपुर जिले में 21814.84 क्‍विंटल चावल गोदाम में कम पाया गया जिसकी राशि लगभग रुपये 5 करोड़ 88 लाख 97 हजार होती है. इन पत्रों पर बाद में विस्‍तार से चर्चा करने की अनुमति मैं चाहूंगा.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश स्‍टेट सिविल सप्‍लाई कार्पोरेशन लिमिटेड, शहडोल का पत्र क्रमांक - परिवहन/अनुबंध/2016-17/392, शहडोल, दिनाक 22.10.2016, स्‍टेट सिविल सप्‍लाई कार्पोरेशन लिमिटेड, शहडोल का पत्र क्रमांक - परिवहन/2016-17/347, शहडोल, दिनाक 21.10.2016 एवं मध्‍यप्रदेश स्‍टेट सिविल सप्‍लाई कार्पोरेशन लिमिटेड, शहडोल का पत्र क्रमांक- 16-17/ 348, शहडोल, दिनांक 19.10.2016. मध्‍यप्रदेश स्‍टेट सिविल सप्‍लाई कार्पोरेशन लिमिटेड, शहडोल- परिवहन/ 2016-17/ 329/ शहडोल, दिनांक 17.10.2016 और स्‍टेट सिविल सप्‍लाई कार्पोरेशन, शहडोल का पत्र दिनांक 14.10.2016.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह पेट का सवाल है इसलिये मैं आपसे थोड़ा समय और चाहूंगा,क्‍योंकि यह नागरिक आपूर्ति विभाग से सं‍बंधित है. तीसरा पत्र है, परिवहनकर्ता श्री पंकज चतुर्वेदी का और मध्‍यप्रदेश स्‍टेट सिविल कार्पोरेशन लिमिटेड, जिला कार्यालय, अनुपपूर का पत्र क्रमांक-उपार्जन/2016-17-Q,अनूपपुर,दिनांक 23.2.2017 और मध्‍यप्रदेश स्‍टेल सिविल सप्‍लाई कार्पोरेशन लिमि., जिला अनूपपुर, मध्‍यप्रदेश का पत्र क्रमांक- उपार्जन/2016-17- 626, अनूपपुर, दिनांक 2.3.2017.

उपाध्‍यक्ष महोदय :- फुंदेलाल जी, मैं यह कह रहा हूं कि आपको बोलते हुए करीब 6 मिनट हो गये हैं. अब आप 2 मिनट में अपनी बात समाप्‍त करें. आप पत्र बहुत सारे कोड कर रहे हैं, अब आप विषय वस्‍तु पर आइये.

श्री फुंदेलाल सिंह मार्को- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैंने जिन पत्रों का उल्‍लेख किया है, उनमे सारे बिंदु विभाग के द्वारा सही पाये गये हैं. मैं माननीय मंत्री जी से मात्र कार्यवाही की अपेक्षा चाहूंगा. इसमें मेसर्स सुनील कुमार कुकरेती, परिवहनकर्ता के द्वारा जानबूझकर परिवहन में विलंब खाद्यान्‍न की अफरातफरी, मिलावट या अन्‍य कपटपूर्ण आचरण करने तथा उसके विरूद्ध जिला प्रबंधक व क्षेत्रीय प्रबंधक की अनुशंसा पर अन्‍य कार्यवाहियों के अलावा उसे अनिवार्यत: कार्पोरेशन की काली सूची में दर्ज कर भविष्‍य में कार्पोरेशन की समस्‍त परिवहन निविदाओं में किसी भी प्रकार से भाग न लेने के लिये दस वर्ष के लिये काली सूची में शामिल किया जाये.

मैं मंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगा कि जो मेसर्स सुनील कुमार कुकरेती हैं उनके विरूद्ध क्‍या आप कार्यवाही करेंगे या उसको काली सूची में डालेंगे या भविष्‍य में 10 वर्ष के लिये वह किसी भी नागरिक आपूर्ति विभाग के कार्य में भाग न लेने के लिये आप प्रतिबंधित करेंगे या नहीं ? जब आप बोलें तो अपने उत्‍तर में इसको जरूर शामिल करें. मेरे पुष्‍पराजगढ़ विधान सभा में लगभग 22 हजार क्विंटल चावल और विभाग की मिली भगत के कारण और इस सप्लाईकर्ता, सुनील कुमार कुकरेती के कारण 21 हजार क्विंटल चावल पुष्पराजगढ़ में दिसम्बर, जनवरी, फरवरी में नहीं मिला है. इस कारण से शासन की महत्वपूर्ण योजना के माध्यम से गांव गांव तक खाद्यान्न नहीं पहुंचाया गया है. हमारे पूरे जिले का 21 हजार क्विंटल चावल को विभाग के द्वारा अफरा तफरी करके गोल माल कर दिया गया, यहां पर हमने सभी पत्रों का उल्लेख किया है. इसलिए मैं चाहता हूं कि माननीय मंत्री जी इसमें कार्यवाही करें. हमारे यहां पर जो पीडीएस के गोदाम हैं, सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानें हैं, लेकिन मंत्री जी के विभाग में अभी करोड़ों रूपया संचित कर रखा गया है. मंत्री जी मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि क्या आप उस पैसे को रखे रहेंगे. वहां पर लोग धूप में गल्ला लेने के लिए खड़े रहते हैं. आप वहां पर शेड का निर्माण नहीं करवा रहे हैं, आप वहां पर छांव की कोई व्यवस्था नहीं कर रहे हैं, आप अपने पैसे को रखे रहें. मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि आप वहां पर तत्काल शेड का निर्माण करें, वहां पर पानी की व्यवस्था करें इसके लिए आपके पास में पर्याप्त राशि है उसे आप खर्च करने का कष्ट करें. उपाध्यक्ष महोदय आपने बोलने के लिए समय दिया धन्यवाद.

श्री मुकेश नायक -- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मुझे इसके बाद में जेल विभाग की मांगों पर बोलने के लिए 2 मिनट का समय प्रदान कर देंगे.

श्री सुदर्शन गुप्ता ( इंदौर-1) -- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 18 और 39 का समर्थन करता हूं तथा कटौती प्रस्तावों का विरोध करता हूं. मध्यप्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली का क्रियान्वयन सुचारू रूप से हो रहा है और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियमन के अंतर्गत पात्र परिवारों हेतु भारत सरकार द्वारा 2 रूपये किलो गेहूं और 3 रूपये किलो चावल दिये जाने का प्रावधान है, किंतु मध्यप्रदेश की सरकार और माननीय शिवराज सिंह जी की सरकार यहां पर गरीबों को 1 रूपये किलो में गेहूं, चावल और नमक दे रही है. इससे फरवरी 2017 में लाभांवित परिवारों की संख्या 1 करोड़ 15 लाख 47 हजार से बढ़कर 5 करोड़ 36 लाख 55 हजार हो गयी है. इस वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार के द्वारा विभागग के लिए इस बजट में 509 करोड़ का प्रावधान किया गया है जो कि प्रशंसनीय है इसके लिए मैं माननीय मुख्यमंत्री जी, माननीय मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं.

माननीय उपाध्यक्ष महोदय, प्रदेश की 22396 उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से शक्कर, नमक और कैरोसीन दिया जा रहा है, जिसमें 4300 शहरी क्षेत्र में तथा 18096 ग्रामीण क्षेत्र में उचित मूल्य की दुकानें हैं. सिंहस्थ में भी हमारे मुख्यमंत्री जी द्वारा और हमारी सरकार के द्वारा और जो हमारे साधु संत थे और उनके जो अनुयायी थे उनको भी सस्ती दर पर जैसे 10 रूपये किलो आटा, 10 रूपये किलो चावल और 20 रूपये किलो शक्कर का भी वितरण किया गया और पूरे देश भर से आये हुए साधु संत और उनके अनुयायी इस बात से प्रसन्नचित थे कि यहां की सरकार ने बहुत अच्छी व्यवस्था की है.

माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से अपने क्षेत्र की समस्याओं को रखना चाहता हूं, और माननीय मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा. पूरे प्रदेश में और इंदौर जिले में विशेषकर पैट्रोल और डीजल पंपों पर उपभोक्ताओं के साथ में पंप वाले खुले आम लूट करते हैं, पैट्रोल पंपों पर मिलावटी पैट्रोल और डीजल का वितरण किया जाता है, इस पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए. साथ ही पंपों के माध्यम से उपभोक्ताओं को जो पैट्रोल डीजल मिलता हैं वह कम मात्रा में और मिलावटी मिलता है इनकी समय समय पर चैकिंग होना चाहिए, इनके यहां पर रेड पड़ना चाहिए और इनका निरीक्षण होना चाहिए. वहां पर अगर हमारे उपभोक्ता शिकायत करते हैं तो पंप मालिक और पंप के कर्मचारी उपभोक्ताओं के साथ में अभद्र व्यवहार करते हैं, मारपीट करते हैं. इस तरह की घटनाएं जिन पंपों पर होती हैं उन पंपों के लायसेंस निरस्त करके उन पंपों को बंद कर देना चाहिए.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी से अनुरोध करूंगा कि इसका शक्ति के साथ पालन किया जाए. इसी प्रकार एल.पी.जी. के जो सिलेंडर आते हैं, उसमें निर्धारित मात्रा में कई बार हाकर्स गड़बड़ी करते हैं. वह एल.पी.जी. के सिलेंडर वहां गोडाउन से तो लेकर आ जाते हैं, किंतु बीच रास्‍ते में गैस सिलेंडर में से दो-दो, चार-चार किलो अपने दूसरे सिलेंडरों में खाली करके उसकी पैकिंग वापस उसमें फिट कर देते हैं. उसके बाद उन सिलेंडरों को घरों में सप्‍लाई कर देते हैं, इसके कारण उपभोक्‍ताओं को जो सिलेंडर 15 किलों का मिलना चाहिए, वह पूरी मात्रा में नहीं मिलता है. उपभोक्‍ताओं को केवल दस बारह किलो का ही सिलेंडर मिलता है, उस पर भी विशेष ध्‍यान दिये जाने की जरूरत है और नाप तौल विभाग को सक्रिय करने की जरूरत है. विशेषकर जो हाकर्स हैं, इनका आकस्मिक निरीक्षण किया जाना चाहिए.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसी तरह नागरिक सुरक्षा के अंतर्गत प्रदेश में दो पहिया वाहन चालकों को बिना हेलमेट लगाये पेट्रोल प्रदान नहीं किया जा रहा है. मेरी इस पर आपत्ति है. आपत्ति का यह कारण है कि शहरी क्षेत्रों में इतना ज्‍यादा भारी आवागमन और ट्रेफिक रहता है कि वहां आदमी चलता नहीं है, वह दो पहिया वाहन लेकर रेंगता है. हर चौराहे -चौराहे पर लाल लाईट, पीली लाईट में उसको रूकना पड़ता है. इस प्रकार वह जब दस की स्‍पीड से चल नहीं पाता है तो वहां हेलमेट का कोई उपयोग ही नहीं रह जाता है, इसलिए इस पर भी पुनर्विचार करना चाहिए. हां जहां पर रिंग रोड है या बायपास है तो वहां पर हेलमेट लागू करें, मगर शहरी क्षेत्रों में जहां पर इतना ट्रेफिक, इतने वाहन है कि आदमी चल ही नहीं पा रहा है और उसके ऊपर अगर हेलमेट नहीं लगाकर आओगे तो पेट्रोल नहीं देंगे. इस तरह इस प्रकार के कई जगहों पर विवाद होते हैं. मेरा इस संबंध में आपसे यह निवेदन है कि हमको इस पर विचार करना चाहिए.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसी के साथ मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि इंदौर में जो कंट्रोल की दुकानों में सामग्री का वितरण ऑनलाईन के माध्‍यम से हो रहा है, उसमें सर्वर बार-बार खराब होने से नागरिकों को असुविधा का सामना करना पड़ता है. अगर सर्वर खराब हो जाता है तो इसमें संबंधित आदमी की आईडी या आधारकार्ड को देखकर सामग्री दी जानी चाहिए. बेचारे गरीब दो-दो, चार-चार, पांच-पांच किलोमीटर दूर तक जाते हैं और जब सर्वर खराब होता है तो निराश होकर लौटकर पूरा दिन खराब करके घंटो में वापस अपने घर आते हैं. वह अपनी मजदूरी छोड़कर कंट्रोल की दुकान पर जाते हैं और इस तरह से सर्वर खराब होने पर उनका पूरा दिन तो खराब होता ही है, साथ ही उनकी मजदूरी भी मारी जाती है.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसी तरह मैं माननीय मंत्री जी से आपके माध्‍यम से निवेदन करूंगा कि इंदौर में जो कंट्रोल की जो दुकानों में सामग्री का वितरण होता है वह उसी वार्ड में होना चाहिए जहां वह आदमी रहता है. आदमी रहता तो कहीं ओर है और पांच किलोमीटर और दस किलोमीटर दूर जाकर वह कंट्रोल की दुकान पर लाईन लगकर सामान लेने जाता है. इससे उसे बहुत कठिनाई होती है. अत: जो नागरिक जिस क्षेत्र का होता है उसी वार्ड में उसके सामग्री वितरण की कंट्रोल की दुकान होनी चाहिए. ऐसा नहीं होने पर एक वार्ड से दूसरे वार्ड में जाने में आदमी को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इंदौर में कंट्रोल की दुकानों के कम होने से नागरिकों को दूर दूर जाना पड़ता है और गरीब मजदूर को बहुत ज्‍यादा परेशानी उठानी पड़ती है. इसी तरह बीच में यह प्रावधान हुआ था कि महिला उपभोक्‍ता भण्‍डार केंद्र बनाने पड़े थे, उसका गठन किया गया था किंतु उनको अभी तक दुकानें एलॉट नहीं की गई हैं. मेरा निेवेदन है कि महिला उपभोक्‍ता भंडार का गठन तो किया गया है किंतु उन्‍हें अभी तक संचालन हेतु दुकानें नहीं दी गई है. महिला उपभोक्‍ता भण्‍डारों को हम लोग दुकान देंगे तो निश्चित ही वह बहुत अच्‍छी तरीके से चलेंगी और संचालित होंगी. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आज वैसे ही महिला दिवस है, आज अगर माननीय मंत्री जी घोषणा कर देंगे तो ज्‍यादा बेहतर होगा.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसी तरह बी.पी.एल. कार्डधारियों की संख्‍या कुछ जगहों पर बढ़ाई जानी आवश्‍यक है. उसका कारण यह है कि जो विधवा है, विकलांग हैं या गंभीर रूप से बीमार व्‍यक्ति हैं और उनका किसी कारण वश अगर बी.पी.एल. का कार्ड नहीं बना है. अगर उनका हम लोग बी.पी.एल.का कार्ड बना देते हैं तो निश्चित ही एक बहुत बड़ा उपकार का काम होगा क्‍योंकि उस बी.पी.एल. कार्ड के कारण वह गंभीर बीमारियों का ईलाज वहां के जिला कलेक्‍टर के माध्‍यम से करा सकते हैं. इस संबंध में मेरा माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि इस तरफ वह ध्‍यान देंगे. आपने बोलने के लिये समय दिया उसके लिये बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

श्रीमती ऊषा चौधरी (रैगांव) - उपाध्यक्ष महोदय, सबसे पहले तो मैं आज महिला दिवस के अवसर पर इस देश की सबसे महान महिला प्रथम शिक्षिका को याद करना चाहती हूं. माता सावित्री बाई फुले, वर्ष 1832 में जो प्रथम महिला शिक्षिका होकर उनके पति महात्मा ज्योतिराव फुले ने महिलाओं को बड़े संघर्षों से पढ़ाने का काम किया. उनका नाम कहीं पर नहीं लिया जाता है. देश में संविधान निर्माता बाबा साहब अम्बेडकर जी ने संविधान के अंदर धारा 14 लिखकर महिलाओं का बराबरी का अधिकार दिया, उनको भी मैं नमन करती हूं. उन्हीं की बदौलत आज इस सदन में महिलाओं को बोलने का अधिकार मिला है, नहीं तो हम महिलाओं को कोई बोरी देना भी पसंद नहीं करता था. जिस तरह से देश में व्यवस्था थी कि स्त्री शुद्रो ना धीयताम, तमाम कई तरह की चौपाइयां लिखी गई थीं. इस सबको खत्म करने के लिए मान्यवर डॉ. भीमराव अम्बेडकर का बहुत बड़ा योगदान है.

उपाध्यक्ष महोदय, दूसरी बात यह है, मैं मांग संख्या 18 एवं 39 पर बोलने के लिए खड़ी हुई हैं. श्रम विभाग की बात कहना चाहती हूं कि आज हमारे मध्यप्रदेश में जिस तरह से हम देखते हैं कि होटलों में छोटे-छोटे बच्चे मजदूरी करने के लिए मजबूर हैं और उन पर कोई कार्यवाही नहीं होती है, उनको मजदूरी भी ठीक से नहीं दी जाती है, वे होटलों में कप-प्लेट धोते हैं, झूठन धोते हैं और बचा-खुचा खाना उनको दिया जाता है. 100-50 रुपए उनको पकड़ा दिये जाते हैं, उनकी मजदूरी भी तय नहीं है. जिस तरह से कुशल, अकुशल मजदूरों की मजदूरी तय की गई है. जैसे मेरे सतना जिले में आदिम जाति कल्याण विभाग में रसोइए पद में कुछ मजदूरों को रखा गया था, उनको वहां पर काम करते हुए दो साल हो गये हैं, उनकी मजदूरी बढ़ाई नहीं गई है. माननीय मंत्री महोदय इस बात को जानते हैं. कलेक्टर सतना, एसडीओ, डीओ, आदिम जाति कल्याण विभाग ने नयी भर्ती की है, नियुक्ति की है. हालांकि मैंने सदन में भी यह बोला, माननीय मंत्री जी को भी पत्र लिखकर दिया था कि उनकी नियुक्ति अभी नहीं हो रही है. उन मजदूरों की मजदूरी भी बढ़ाई जाय. उनकी मजदूरी 150 रुपए से बढ़ाकर 300 रुपए की जाय. उनको भी कुशल मजदूर में लेकर परमानेंट किया जाय, उनको इसमें प्राथमिकता दी जाय.

उपाध्यक्ष महोदय, जिस तरह से महिलाओं की मजदूरी की बात आई है. हमारे सतना जिले में मनरेगा का काम बंद है. महिलाओं को कोई रोजगार नहीं मिल रहा है. महिलाएं जिले को छोड़कर पलायन करके कोई गुजरात, कोई उड़िसा, कोई मुम्बई जाकर वहां अपने बच्चों को लेकर फुटपाथ पर रहकर मजदूरी करने पर मजबूर हैं क्योंकि शासन के सारे काम जो हैं वह जेसीबी मशीन द्वारा करा लिये जाते हैं.

दूसरी बात है कि फैक्ट्रियों में महिलाओं को महत्व नहीं दिया जाता है. फैक्ट्रियों में पुरुषों को रखा जाता है, उसमें भी जिले के मजदूरों को महत्व नहीं दिया जाता है, बाहर से लोगों को लाया जाता है. सतना जिले में कई ऐसे गांव हैं, जिनकी जमीन फैक्ट्रियों ने ले ली हैं, लेकिन वहां के लोगों को मजदूरी में भी नहीं रखा गया और जहां रखा गया है वहां 2-2, 4-4 हजार रुपए केवल उनको मजदूरी दी जाती है. बहुत से ऐसे स्थान हैं चाहे मनरेगा की बात हो या अन्य स्थानों पर जो भी ठेकेदार मजदूरी कराते हैं वह साल-साल भर उनकी मजदूरी नहीं देते हैं. एक मामला मेरे पास आया है. नगर निगम का मामला था, कोई ठेकेदार सतना की नल जल योजना के तहत नाली खुदवाने के लिए छिंदवाड़ा से मजदूरों को लेकर गया था और वे मजदूर वहां पर एक महीने से डले हुए थे, उनकी मजदूरी भी नहीं दी गई और वह ठेकेदार वहां से गायब हो गया. इस पर शासन द्वारा एक कानून बनाया जाय कि जो ठेकेदार ठेका लेता है तो मजदूरों की मजदूरी उसमें सुनिश्चित की जाय कि उनको मजदूरी मिल सके.

उपाध्यक्ष महोदय, खाद्य, नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण विभाग के बारे में बोलना चाहती हूं कि सतना जिले में जिस तरह से खाद्य पदार्थों की कालाबाजारी हो रही है. एक महीना गरीबों को राशन नहीं दिया जाता है और जिस महीने का राशन उनको दिया जाना चाह