मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा दशम् सत्र

 

 

फरवरी-अप्रैल, 2016 सत्र

 

मंगलवार, दिनांक 08 मार्च, 2016

 

(18 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1937 )

 

 

[खण्ड- 10 ] [अंक- 10 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

मंगलवार, दिनांक 08 मार्च, 2016

 

(18 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1937 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 10.33 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

निधन का उल्‍लेख

1. श्री पी.ए. संगमा, पूर्व लोकसभा अध्‍यक्ष तथा

2. श्री पवन दीवान, पूर्व विधानसभा सदस्‍य

अध्‍यक्ष महोदय - मुझे सदन को सूचित करते हुए अत्‍यन्‍त दुख हो रहा है कि पूर्व लोकसभा अध्‍यक्ष, श्री पी. ए. संगमा का 04 मार्च तथा पूर्व विधानसभा सदस्‍य, श्री पवन दीवान का 02 मार्च, 2016 को निधन हो गया है.

श्री पी. ए. संगमा का जन्‍म 01 सितम्‍बर, 1947 को ग्राम चापाहाटी जिला वेस्‍ट गारो हिल्‍स (मेघालय) में हुआ था. श्री संगमा 1988 में मेघालय विधानसभा के सदस्‍य निर्वाचित हुए तथा 1988 से 1990 में मुख्‍यमंत्री और 1990-1991 में विपक्ष के नेता रहे. आप छठवीं, सातवीं, आठवीं, दसवीं, ग्‍यारहवीं, बारहवीं, तेरहवीं, चौदहवीं तथा वर्तमान सोलहवीं लोकसभा के सदस्‍य निर्वाचित हुए. आपने 1996 से 1998 तक लोकसभा के अध्‍यक्ष के रूप में कार्य किया. श्री संगमा केन्‍द्र सरकार में समय-समय पर विभिन्‍न विभागों के राज्‍यमंत्री और मंत्री भी रहे.

आपके निधन से देश ने एक वरिष्‍ठ राजनेता, संसदविद्, कुशल प्रशासक एवं कर्मठ समाजसेवी खो दिया है.

श्री पवन दीवान का जन्‍म 01 जनवरी, 1945 को किरवई जिला- रायपुर में हुआ था. श्री दीवान ने संस्‍कृत विद्यापीठ में प्राचार्य के पद पर कार्य किया. आप 1982-89 में मध्‍यप्रदेश कांग्रेस (आई) समिति के कार्यकारी सदस्‍य तथा मध्‍यप्रदेश रूरल हाउसिंग बोर्ड के अध्‍यक्ष रहे. श्री दीवान प्रदेश की छठवीं विधानसभा के सदस्‍य तथा जेल विभाग के मंत्री रहे. आप दसवीं तथा ग्‍यारहवीं लोकसभा के सदस्‍य निर्वाचित हुए. संत प्रवृत्ति के श्री दीवान प्रवचनकर्ता और कवि के रूप में विख्‍यात थे. आप लेखन और समाजसेवा के माध्‍यम से निरन्‍तर सक्रिय रहे.

आपके निधन से प्रदेश के सार्वजनिक जीवन की अपूरणीय क्षति हुई है.

गृह मंत्री (श्री बाबूलाल गौर) -- अध्यक्ष महोदय, जैसा कि आपने श्री पी.ए. संगमा, जिनका वेस्ट गारो हिल्स, मेघालय में जन्म हुआ था. उन्होंने हर पद पर सेवा की और वहां की जनता ने उनको निर्वाचित किया. वे विपक्ष के नेता रहे, मुख्यमंत्री रहे. 9 बार लोकसभा के सदस्य रहे. वे 1996 से 1998 तक 3 साल लगभग लोकसभा के अध्यक्ष रहे. उन्होंने केन्द्र के अनेक पदों को सुशोभित किया. मैं जब मेघालय गया था, मैं मुख्यमंत्री था, तो मुझे उनकी बेटी जो भारत सरकार में राज्यमंत्री बनी थी, उनके घर जाकर मेरी भेंट हुई. उस वेस्ट गारो हिल्स में भारतीयता के प्रति, भारत की निष्ठा के प्रति, इस मातृ भूमि के प्रति, जो देशभक्ति एवं राष्ट्र भक्ति संगमा जी के जीवन में , उनके परिवार में पाई गई, वह अतुलनीय है. आज राष्ट्र में देश भक्ति, अखंड भारत की बहुत आवश्यकता है. ऐसे परम देश भक्त, राजनेता, जन नायक के चरणों में मैं श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.

दूसरे महान पुरुष, श्री पवन दीवान एक संत प्रवृत्ति के थे. उनके साथ मध्यप्रदेश की विधान सभा में मुझे उनको करीब से देखने का मौका मिला. वे राजिम से चुनकर आते थे. वे बहुत फक्कड़ व्यक्ति थे. इतने फक्कड़ व्यक्ति थे कि वे अपनी जेब भी नहीं रखते थे. उनकी जेब भी कपड़ों में नहीं थी. वे केवल एक गेरुआ वस्त्र धारण करते थे. वे गीता के बहुत विद्वान थे. एक दिन मैं काम से उनके बंगले गया,तो उनको एक फाइल में दस्तखत करना था, जेल मंत्री थे. तो वे बोले कि आप अपना कलम दीजिये मुझे दस्तखत करना है. इतने त्यागी, तपस्वी, एक आदर्श जीवन के व्यक्ति थे. इन महान विभूतियों का जो निधन हुआ है ,उनके निधन से प्रदेश एवं देश के अन्दर अपूर्ण क्षति हुई है, उनको मैं अपनी ओर से और सदन की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.

उप नेता प्रतिपक्ष (श्री बाला बच्चन) -- अध्यक्ष महोदय, श्री पी.ए. संगमा जी का जन्म 1 सितम्बर,1947 को ग्राम चापाहाटी, जिला वेस्ट गारो हिल्स, मेघालय में हुआ था. वे 1988 से 1990 के बीच में मेघालय राज्य के मुख्यमंत्री रहे. उसके बाद केन्द्र सरकार के कई विभागों के वे कई बार मंत्री रहे. वे 12वीं लोकसभा के स्पीकर भी रहे हैं.  लोक सभा के स्पीकर रहते हुए वे संसद की कार्यवाही का संचालन इतने लोकतांत्रिक तरीके से संचालित करते थे, जिससे कि न केवल सत्ता पक्ष के राजनेता या सदस्य ही नहीं उनकी तारीफ करते थे, बल्कि मैं समझता हूं कि संसद के विपक्ष के जो सदस्य हुआ करते थे, वे भी उनकी तारीफ और प्रशंसा करते थे. वे अपने राजनैतिक जीवन में अपने जीवन को बहुत ऊंचाइयों तक ले गये. वे आज हमारे बीच में नहीं रहे हैं. मुझे यह भी याद है कि वे राष्ट्रीय आदिवासी विकास परिषद् के उपाध्यक्ष भी थे, जिसके अध्यक्ष मेरे ससुर जी हुआ करते थे. अभी भी मेरे ससुर जी तो राष्ट्रीय आदिवासी विकास परिषद् के अध्यक्ष हैं. तो समाज की जो बैठकें होती थीं, समाज का जो एजेंडा राष्ट्रीय स्तर का होता था, तो कई बार मेरी भी उनसे मुलाकात हुई है. मेरे ससुर जी भी कई बार उनके साथ जो सांसद रहे हैं, तो मैंने उनको बहुत अच्छे से सुना भी है, समझा भी है और जाना भी है. वे न केवल हमारे समाज के लिये ही नहीं, लेकिन मैं समझता हूं कि असम, मेघालय और उसके बाद पूरे देश के लिये जो चिंता करते थे और जिस तरह से जो संसद का संचालन करते थे, वह मैं समझता हूं कि अपने आप में एक अनूठी उनकी शैली थी. उस समय गठबंधन की सरकारें बनती थीं. सभी नेताओं से उनके मधुर और अच्छे संबंध हुआ करते थे.

माननीय अध्यक्ष जी, आज वे हमारे बीच में नहीं हैं, मैं समझता हूं कि उनके निधन से न केवल पूर्वी राज्यों से जो आवाज गूंजती वही न केवल हमसे छिन गई बल्कि बहुत बड़ा समाजसेवी, बहुत बड़ा नेता हमारे बीच में नहीं रहा है. मैं इस अवसर पर पी.ए.संगमा जी के निधन पर अपनी तरफ से कांग्रेस पार्टी के सभी लोगों की तरफ से श्रृद्धासुमन अर्पित करता, श्रृद्धांजलि अर्पित करता हूं. ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे तथा मैं शौक संतृप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं.

माननीय अध्यक्ष महोदय, आदरणीय पवन दीवान जी का जन्म 1 जनवरी, 1945 किरवई ग्राम, रायपुर, छत्तीसगढ़ में हुआ था .अविभाजित मध्यप्रदेश में कई वर्षों तक वे मध्यप्रदेश शासन में कई विभाग के मंत्री भी रहे हैं.2 बार वे संसद सदस्य रहे हैं, वे कांग्रेस(आई) पार्टी के कार्यकारी सदस्य भी रहे हैं, मध्यप्रदेश रूरल हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष भी रहे हैं, मैं आपकी जानकारी में लाना चाहता हूं कि बाद में उन्होंने आध्यात्मिकता के पथ पर चलकर जन सामान्य जीवन में आध्यात्मिकता का प्रकाश समाज में फेलाने की कोशिश की है. वे संस्कृत विद्यापीठ के प्राचार्य भी रहे हैं. उनकी सेवाये मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के अलावा देश को मिली है, उनकी प्रतिभा से सब भलीभांति परिचित हैं. वे संत की तरह जीवन जिये. हिन्दी और छत्तीसगढ़ी भाषा में कविताओं के अलावा रामायण-भागवत सुनाने की भी उनकी अनूठी शैली थी. आज वे हमारे बीच में नहीं रहे हैं. उनका योगदान हमारे लिये हमेशा हमेशा के लिये अविस्मरणीय रहेगा. मैं अपनी तरफ से कांग्रेस पार्टी के सभी लोगों की तरह से उन्हें श्रृद्धांजलि अर्पित करता हूं. तथा ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे और शौक संतृप्त परिवार के प्रति मैं संवेदना व्यक्त करता हूं. ऊं शांति.

 

 

उपाध्यक्ष महोदय(डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, स्वर्गीय पूर्णो-अगीतो संगमा जी (Purno Agitok Sangma) राष्ट्र के उन बिरले राजनेताओं में से एक थे जो ग्रामीण परिवेश में अत्यंत निर्धन परिवार से आते हुये देश की शीर्षस्थ राजनीति पर पहुंचे थे. संगमा साहब जब पढ़ते थे तो गरीबी के कारण उनको अपनी शिक्षा छोड़नी पड़ी और जीवन का निर्वाह करने हेतु वे जानवरों को लेकर के जंगल में जाते थे, उनको चराते थे, जिस तरह से चरवाहा होता है, ऐेसे परिवेश से संगमा जी आये. जब उनकी पढ़ाई छूटी तो वे एक ईसाई, पादरी और चर्च के संपर्क में आये, उन्होंने संगमी जी की मदद की फिर संगमा जी ने अपनी शिक्षा पूरी की, बीए किया, पीजी की शिक्षा प्राप्त की और शिलांग में बतौर प्रोफेसर उन्होंने पढ़ाना शुरू किया. उसके बाद उन्होंने अपने जीवन में कभी पीछे मुड़कर के नहीं देखा. निरंतर वे तरक्की करते गये, आगे बढ़ते गये, और केन्द्र सरकार में, भारत के मंत्री के रूप में, लोक सभा में सम्मानित अध्यक्ष के रूप में, और प्रदेश में भी मुख्यमंत्री और प्रतिपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने काम किया. बिरले ही राजनीति में ऐसे उदाहरण हमें देखने को मिलते हैं.

माननीय अध्यक्ष महोदय, आपको स्मरण होगा कि संगमा साहब मध्यप्रदेश भी आये थे. पिछले डेढ़ वर्ष पहले, जब विधान सभा ने माननीय विधायकों के लिये प्रबोधन का कार्यक्रम रखा था.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तो हमने उनसे प्रश्‍न किया कि संगमा जी आप इतना कुशल संचालन लोकसभा का कैसे करते थे, तो उन्‍होंने कहा कि हमारे तीन तरीके थे, या तो बहुत शोर-शराबा होता था, मैं चुपचाप बैठकर कुछ पुराने संस्‍करण याद करने लगता था और सदन को इसी तरह चलने देता था, जब तक कि लोग थक नहीं जाते थे, या कभी कभी झिड़की देनी पड़ती थी और कभी-कभी मैं मुस्‍कुरा देता था, ये सब सारी तस्‍बीर, सारा दृश्‍य हम लोगों ने टेलीविजन पर और बहुत से लोगों को अनुभव होगा, जिन्‍होंने उनकी लोकसभा संचालन के दरमियान वहां उपस्थिति दर्ज कराई होगी, देखी होगी. फिर मैंने उनसे पूछा की आपकी सफलता का राज क्‍या है, बोले कड़ी मेहनत तो है, लेकिन तीन-चार चीजें हैं जो जीवन में उतारिये. बड़ी विनम्रता के साथ उन्‍होंने कहा, एक तो हमेशा मुस्‍कुराते रहिये, दूसरा अध्‍ययन करिये, किताबे पढि़ये, तीसरा मित्रता करिये जितने ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों से हो सके, मित्रता करिये और चौथा पर्यटन करिये, घूमिये, देश में घूमिये, विदेश तो ठीक है, देश में जरूर घूमिये. ये चार चीजें उन्‍होंने बताईं थी, वह आज हमें याद आ रही हैं. 9वीं बार वह लोकसभा के सदस्‍य चुने गये थे, ऐसे प्रतिभाशाली व्‍यक्ति जो इंसानियत से भरे हुये थे, हमारे बीच नहीं हैं, उनके न रहने से जो एक कुशल प्रशासक, कर्मठ समाजसेवी हैं, हमने खोया है इस रिक्‍तता को पूरा नहीं किया जा सकता. मैं उन्‍हें श्रद्धांजलि देता हूं.

अध्‍यक्ष महोदय, माननीय पवन दीवान जी, एक लेखक, शिक्षाविद, राजनेता और संत यह सारे गुण उनमें समाये हुये थे और उनमें जो अल्‍हड़पन था, उनके व्‍यक्तिव में निष्‍च्‍छल भाव जो था वह झलकता था, दिखाई देता था और जब छत्‍तीसगढ़ी में वह भाषण देते थे और प्रवचन करते थे तो घंटों हजारों लोगों को मंत्रमुग्‍ध किये रहते थे, बांधे रहते थे, ऐसी प्रतिभा उनमें थी. यह संयोग था कि वह राजनीति में भी आये, विधायक बने, मंत्री बने और 2-2 बार लोकसभा का प्रति‍निधित्‍व किया. बहुत सारे लोग अध्‍यक्ष जी गेरूआ वस्‍त्र धारण करते हैं, लेकिन उस वस्‍त्र का महत्‍व उसकी महिमा समझना कठिन होता है, लेकिन बखूबी पवन दीवान जी ने उसको समझा और हम लोगों ने सबने अनुभव किया कि ऐसा नेता जो अब हमारे बीच नहीं रहा है उनके न रहने से न सिर्फ छत्‍तीसगढ़ मध्‍यप्रदेश बल्कि पूरे राष्‍ट्र को एक क्षति पहुंची है और सार्वजनिक जीवन में वह अपूरणीय है, मैं उनको विनम्र श्रृद्धांजलि देता हूं.

अध्‍यक्ष महोदय-- मैं सदन की ओर से शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं. अब सदन 2 मिनट मौन खड़े रहकर दिवंगतों के प्रति श्रृद्धांजलि अर्पित करेगा.

 

(सदन में 2 मिनट मौन खड़े रहकर दिवंगतों के प्रति श्रृद्धांजलि अर्पित की गई)

अध्‍यक्ष महोदय-- दिवंगतों के सम्‍मान में सदन की कार्यवाही 5 मिनट के लिये स्‍थगित.

 

 

 

 

 

 

(10.50 बजे से 5 मिनट के लिये अंतराल)

 

 

 

 

 

समय 10.58 बजे अध्यक्ष महोदय (डॉ सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.

 

ब धा ई

 

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस

 

संसदीय कार्यमंत्री (डॉ नरोत्तम मिश्र)--अध्यक्ष महोदय, आज अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस है. इस अवसर पर मैं अपनी ओर से, सदन की ओर से समस्त महिलाओं को बधाई देता हूं.

अध्यक्षजी, दिनांक 5 और 6 मार्च को लोकसभा अध्यक्षजी द्वारा एक पहल कर, नई दिल्ली में महिला सशक्तिकरण पर एक वृहत् सम्मेलन बुलाया था. आपकी ओर से भी हमारे प्रदेश की महिला बाल मंत्री और माननीय विधायक अर्चना चिटनीस जी गई थीं. शिक्षा और सामाजिक विकास के संबंध में सूत्रपात और आर्थिक विकास स्वशासन विषय पर एक संकल्प मेडम चिटनीस ने प्रस्तुत किया जो वहां स्वीकार भी हुआ. मैं उनको भी बधाई देता हूं. अध्यक्ष महोदय, यह वह देश है, जहां नारी की पूजा होती है. अपने कहा भी गया है यत्र नारी पूजयन्ते, रमन्ते तत्र देवता हमारे पैदा होने से लेकर अन्त तक मातृ शक्ति का बहुत महत्व है. इस अवसर पर मैं सदन की ओर से बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूं.

उप नेता प्रतिपक्ष(श्री बाला बच्चन)-- अध्यक्ष महोदय, महिला दिवस पर मैं भी प्रदेश और देश भर की महिलाओं को मेरी और मेरे दल की ओर से बधाई और शुभकामनाएं देता हूं. (XXX)

अध्यक्ष महोदय-- यह अभी उठाने वाला विषय नहीं है. किसी अन्य विषय में उठा लीजिए.

श्री बाला बच्चन--(XXX)

गृहमंत्री(श्री बाबूलाल गौर)--अध्यक्ष महोदय, यह आपत्तिजनक है.

डॉ नरोत्तम मिश्र-- अध्यक्षजी, अब ये नेता प्रतिपक्ष बन गये.

अध्यक्ष महोदय--कृपया इस विषय का राजनीतिकरण न करें.

श्री बाला बच्चन-- अध्यक्षजी, जैसा संसदीय कार्य मंत्रीजी ने अपनी बात कही तो मैंने भी महिलाओं को बधाई देते हुए कहना चाहता हूं कि (XXX)

अध्यक्ष महोदय-- उन्होंने जो महिला दिवस पर बधाई दी है,उसको छोड़कर बाकी विलोपित कर दें. विषय समाप्त.

डॉ नरोत्तम मिश्र--अध्यक्षजी, नेता प्रतिपक्ष कुछ बोलना चाहें तो बोलने के लिए अलग अलग समय भी होते हैं. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय - आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है, इस अवसर पर मैं अपनी ओर से, सदन की ओर से समस्त महिलाओं को बधाई देता हूं. जैसा अभी पूर्व में भी उल्लेखित किया गया कि हमारी लोकसभा अध्यक्ष जी ने एक दो दिवसीय कार्यशाला भी रखी थी, उसमें हमारे प्रदेश की विधान सभा की 17 माननीय महिला सदस्यों ने भाग लिया. मैं उन सभी हमारी सम्मानीया सदस्यों को भी बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं देता हूं.

श्री बाला बच्चन - अध्यक्ष महोदय, (XXX).

अध्यक्ष महोदय - कृपा करके आप बैठ जाएं.

संसदीय कार्यमंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र) - अध्यक्ष महोदय, यह क्या, कोई भी बात कभी भी?

अध्यक्ष महोदय - यह सब विलोपित कर दें, यह कोई विषय नहीं है.

श्री बाला बच्चन -(XXX)

डॉ. नरोत्तम मिश्र - अध्यक्ष महोदय, यह फिर वही उकसाने वाली बात कर दी. यह उकसाने वाली बात फिर कर दी गई अध्यक्ष महोदय.

श्री बाला बच्चन - (XXX). हम इसका विरोध करते हैं...

अध्यक्ष महोदय - यह कोई विषय नहीं है.

डॉ. नरोत्तम मिश्र - अध्यक्ष महोदय, इस पर हम घोर आपत्ति लेते हैं. यह घोर आपत्तिजनक है.

अध्यक्ष महोदय - आप प्रश्नकाल चलने दें. इसके बाद जो बोलना है वह बोलें.

डॉ. नरोत्तम मिश्र - अध्यक्ष महोदय, सदन नियम प्रक्रिया से चलेगा कि तानाशाही से चलेगा?

श्री बाला बच्चन - ..आरक्षण का विरोध करना संविधान का विरोध करने जैसा है. और बाबा साहेब की विचाराधारा का भी यह अपमान है.(व्यवधान)..

श्री जितू पटवारी - अध्यक्ष महोदय, यह 12वीं का पर्चा है.

 

डॉ. नरोत्तम मिश्र - आप आरएसएस का उल्लेख क्यों कर रहे हैं?

अध्यक्ष महोदय - आप कृपा करके प्रश्नकाल चलने दें.

डॉ. नरोत्तम मिश्र - अध्यक्ष महोदय, यह उकसाने वाली बात है.

श्री बाला बच्चन - ..मैं यह चाहूंगा कि इस पर सरकार चर्चा कराएं.

अध्यक्ष महोदय - माननीय प्रतिपक्ष के नेता जी, आप कृपा करके प्रश्नकाल के बाद जो विषय उठाना है वह उठा लें.

श्री बाला बच्चन - अध्यक्ष महोदय, यह इतना महत्वपूर्ण विषय है कि 12वीं के विद्यार्थियों से आप यह निबंध लिखवाकर उनमें लड़ाई के बीज अभी से क्यों डाल रहे हैं?

डॉ. नरोत्तम मिश्र - अध्यक्ष महोदय, हमारी बात भी आ जाए. मेरा निवेदन सिर्फ इतना-सा है कि जानबूझकर नेता प्रतिपक्ष उकसाने की बातें करते हैं और कौन-सी बात कब कैसे कही जाती है और यह सलीका हो तो हर बात सुनी जाती है. यह फ्लोर चर्चा के लिए है. एक जानबूझकर बार-बार आरएसएस का उल्लेख करना, यह इस बात का द्योतक है, आज प्रदेश में ओले पड़े हैं, उसकी बात नहीं उठाई..

श्री जितू पटवारी - (व्यवधान).. यह जातिगत आरक्षण को लेकर आपकी मंशा समझ में आई है.

डॉ. नरोत्तम मिश्र - .. आज किसान परेशान है उसकी बात नहीं उठाई है. आज हमारे यहां 10-10 किसान आहत हो गये हैं, ओले की बात नहीं कर रहे हैं..

श्री रामनिवास रावत - कर रहे हैं. (व्यवधान)..

डॉ. नरोत्तम मिश्र - .. ये किसानों की बात नहीं कर रहे हैं, यह सिर्फ राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए इस फ्लोर का उपयोग करते हैं अध्यक्ष महोदय. किसान की बात नहीं करेंगे, गरीब की बात नहीं करेंगे..

श्री रामनिवास रावत - बिल्कुल गरीबों की बात कर रहे हैं. इस तरह से बोलना उचित नहीं है. यह संसदीय मंत्री का कौन-सा तरीका है?

श्री जितू पटवारी - आखिर सरकार क्या चाहती है, सरकार की मंशा क्या है?

अध्यक्ष महोदय - आप कृपया बैठ जाएं.

डॉ. नरोत्तम मिश्र - .. मजदूर की बात नहीं करेंगे, यह क्या तरीका है अध्यक्ष महोदय? कौन-सी बात कब उठा रहे हैं, क्या यह गंभीर विषय है जो उन्होंने उठाया है? आप इसी विषय की चर्चा शून्यकाल में कर सकते थे कि नहीं कर सकते थे? आप खुद भी कह रहे हैं कि इसकी बात शून्यकाल में कर लें.

अध्यक्ष महोदय - आप कृपा करके प्रश्नकाल हो जाने दें. माननीय मंत्री जी कृपया बैठें.

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, लेकिन यह कहना कि ओले से पूरा प्रदेश परेशान है, उसके लिए ध्यानाकर्षण लगाया है आप चर्चा करा लो.

डॉ. नरोत्तम मिश्र - आपने यह बात नहीं उठाई, लेकिन राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए इस फ्लोर का उपयोग हम नहीं होने देंगे. (व्यवधान)..

श्री रामनिवास रावत - आप देख लीजिए, विधान सभा सचिवालय से पता कर लीजिए, आप क्या आरक्षण खत्म करोगे?

श्री मुकेश नायक - अध्यक्ष महोदय, मैंने स्थगन प्रस्ताव दिया है, आप चाहें तो प्रश्नकाल के बाद मुझे अनुमति दे दें.

अध्यक्ष महोदय - प्रश्नकाल के बाद उठाइए जो विषय उठाना है.

श्री जितू पटवारी - अध्यक्ष महोदय, उन्होंने जो स्थगन दिया है उस पर आप चर्चा कराने की अनुमति दें.

अध्यक्ष महोदय - अभी आप प्रश्नकाल तो हो जाने दें, इसके बाद बात करेंगे.

श्री लाखन सिंह यादव - अध्यक्ष महोदय, कल शाम को 5 बजे ग्वालियर जिले में तमाम सारे गांवों में भयानक ओलावृष्टि हुई है.

अध्यक्ष महोदय - कृपया करके यह आप शून्यकाल में उठा लें, शून्यकाल में आपको समय देंगे. माननीय मंत्री जी..

महिला एवं बाल विकास मंत्री (श्रीमती माया सिंह) - अध्यक्ष महोदय, मैं आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश की सभी बहनों को और यहां उपस्थित सभी हमारी सम्मानीय बहनों को दिल की गहराइयों से बधाई देना चाहती हूं और यहां सभी भाइयों को भी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की बधाई और खासतौर से आदरणीय बाला बच्चन जी को भी मैं कहना चाहती हूं कि मध्यप्रदेश वह प्रदेश है, जिसने कि महिलाओं के लिए, उनको आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में ऐसे कदम उठाए हैं, उन उठाए गये कदमों का ही नतीजा है, जिनकी वजह से आज महिलाएं अपनी पूरी क्षमता और अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार अपना लक्ष्य और दिशा तय करके आगे बढ़ रही हैं. मैं कहना चाहती हूं कि सरकार ने महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए कोई कौताही नहीं बरती है, लेकिन ऐसी योजनाएं भी बनी हैं, आपको इस मौके पर मैं एक आग्रह करना चाहती हूं कि महिलाओं को उन सभी के बारे में जानकारी देना, उनको बराबर के अवसर उपलब्ध हों, इसमें हम सबकी महत्वपूर्ण भूमिका है, इसलिए मैं आज इस मौके पर यह कहना चाहती हूं, मुझे लगा कि बच्चन जी हमें बधाई देंगे. मैं कहना चाहती हूं कि यह मध्यप्रदेश है, मध्यप्रदेश में हमें सारे मौके मिल रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय - ठीक है, बात समाप्त हो गई है, अब उनकी बात का उत्तर न दें.

श्रीमती माया सिंह - इसलिए आप सबको मेरी ओर से बहुत बहुत बधाई और अपेक्षा करती हूं कि हर क्षेत्र में महिलाओं को आप सबका सहयोग और आदर मिलेगा.

श्री मुकेश नायक --(XXX)...(व्यवधान)..

श्री लाल सिंह आर्य -- क्या इनका आर्थिक विकास हुआ है यह आप आरोप लगा रहे हैं. आप बिना प्रमाण के आरोप लगा रहे हैं यह क्या तरीका है. यह महिलाओं का अपमान है. आप यहां पर केवल माया सिंह जी का अपमान नहीं कर रहे हैं बल्कि पूरे महिला जगत का अपमान कर रहे हैं. यह क्या तरीका है. आप माया सिंह जी पर आरोप लगाकर पूरे महिला जगत को अपमानित कर रहे हैं.

श्री मुकेश नायक -- आप समय दे दें मैं आरोप सिद्ध कर दूंगा. मैं बिना जानकारी के आरोप नहीं लगाता हूं...(व्यवधान)..इस प्रदेश की गरीब महिला 50 हजार रूपये की सिल्क की साड़ी पहनती हैं क्या बताइये आप ....(व्यवधान)..

एक माननीय सदस्य -- अध्यक्ष महोदय यह व्यक्तिगत आरोप है मुकेश जी.. इसको कार्यवाही से निकाल दिया जाय.

अध्यक्ष महोदय -- आर्थिक और सामाजिक विकास की बात को विलोपित कर दें...(व्यवधान)..

श्री शंकरलाल तिवारी -- अध्यक्ष महोदय चाहे कुछ भी हो (XXX)..(व्यवधान)..

श्री लाल सिंह आर्य -- माननीय अध्यक्ष महोदय मेरा हक है इनको माफी मांगना चाहिए क्योंकि माया सिंह जी पर अप्रमाणिक ढंग से आरोप लगाये हैं..(व्यवधान).. आपने महिला जगत का अपमान किया है महिला दिवस के दिन. आपको अपने शब्द वापस लेना चाहिए..(व्यवधान)..

श्री मुकेश नायक --सही बात कहने वाले को माफी मांगना चाहिए..(व्यवधान).. महिला दिवस पर हम यह नहीं कहें कि महिलाओं पर अत्याचार हो रहा है,महिला दिवस पर हम यह नहीं कहें कि मध्यप्रदेश बलात्कार के मामले में पहले नंबर पर है, क्या बोलें हम आप बतायें....बड़ी बड़ी बातें करते हैं..(व्यवधान)..सही बात कहने वालों को रोकते हैं.

श्री लाल सिंह आर्य -- आपकी सरकार में क्या हुआ है..(व्यवधान).. हमारी सरकार में सशक्तिकरण हुआ है. लूट और अपमान तो आपकी सरकार के समय में हुआ है..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- कृपया माननीय सदस्य को अपना प्रश्न करने दें...(व्यवधान) नायक जी बैठ जायें...

श्री मुकेश नायक -- आप हमें समय देंगे तो महिलाओं के विकास और उनके सामाजिक स्तर और सभी विषय पर सदन में आपको बात चीत करना होगी...(व्यवधान)..

श्री रामेश्वर शर्मा -- अध्यक्ष महोदय आज सदन में हर विषय पर चर्चा होती हैं मैं पूछना चाहता हूं कि उस समय यह नेता कहां गये थे जब दिल्ली की सड़कों पर माननीय मनमोहन सिंह जी के नेतृत्व के समय पर बहनों के साथ में बलात्कार हुआ था तब आपने निंदा क्यों नहीं की..(व्यवधान)..

श्री मुकेश नायक -- हम यहां पर प्रदेश की बात कर रहे हैं आप दिल्ली की बात कर रहे हैं....

श्री रामेश्वर शर्मा -- क्यों नहीं करेंगे.

अध्यक्ष महोदय -- शर्मा जी एवं अन्य सभी सदस्य बैठ जायें सदस्य को अपना प्रश्न करने दें.

श्री मुकेश नायक -- आप बैठ जाइये इसी में भलाई है नहीं तो इस विषय पर बातचीत होगी तो असहज हो जायेगी पूरी सरकार...(व्यवधान)..

श्री लाल सिंह आर्य -- अध्यक्ष महोदय आज यहां पर सिद्ध हो गया है कि कांग्रेस महिला विरोधी हैं...(व्यवधान)--

अध्यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी कृपया बैठ जायें...(व्यवधान)..

 

 

 

 

तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर

(वर्ग 4 : लोक निर्माण, वाणिज्य, उद्योग एवं रोजगार, खेल एवं युवा कल्याण, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व, वन, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास, उच्च शिक्षा)


शा. पोलिटेक्निक पचौर के छात्रावास का सुदृढ़ीकरण

1. ( *क्र. 3503 ) श्री कुँवरजी कोठार : क्या तकनीकी शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला राजगढ़ के पोलिटेक्निक कॉलेज पचौर में छात्रावास किस दिनांक से संचालित है, छात्रावास की लागत एवं निर्माण कार्य पूर्ण होने की तिथि क्‍या थी? (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार छात्रावास पूर्ण होने के पश्‍चात प्रत्‍येक शैक्षणिक वर्ष में कॉलेज में कितने छात्र/छात्राओं के द्वारा प्रवेश लिया गया एवं उनके विरूद्ध कितने छात्र/छात्राओं को प्रत्‍येक वर्ष छात्रावास में प्रवेश दिया गया है? (ग) प्रश्‍नांश (ख) पोलिटेक्निक कॉलेज पचौर में अध्‍ययनरत छात्र/छात्राओं को छात्रावास में रहने हेतु संपूर्ण मूलभू‍त सुविधाएं उपलब्‍ध हैं? यदि नहीं, तो शासन द्वारा छात्रावास में रहने हेतु संपूर्ण मूलभूत सुविधाएं उपलब्‍ध कराने हेतु क्‍या प्रयास किया जावेगा, जिससे कि छात्र/छात्राओं की शै‍क्षणिक व्‍यवस्‍था सुचारू रूप से संचालित हो सके?

तकनीकी शिक्षा मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) राजगढ़ जिले के पोलिटेक्निक कॉलेज पचौर में छात्रावास भवन वर्ष 1997 से संचालित है। छात्रावास की लागत रू. 63.00 लाख है एवं निर्माण कार्य पूर्ण करने की तिथि 31 दिसम्बर, 1997 थी। (ख) जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र एवं अनुसार है(ग) जी हाँ। शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

परिशिष्ट - ''एक''

श्री कुंवरजी कोठार -- अध्यक्ष महोदय मेरे प्रश्न ग के उत्तर में पालिटेक्निक कालेज पचोर में अध्ययनरत छात्रों को छात्रावास में रहने हेतु संपूर्ण मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं. माननीय मंत्री जी ने उत्तर दिया है जी हां. उत्तर के परिशिष्ट एक अ में 2001 में पालिटेक्निक कालेज में प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या बतायी है 201, 254,2010 में 265, 2011 में 304, 2012 में 319, 2013 में 333, 2014 में 375 , 2015 में 303 और छात्रावासों में इन सालों में 2008 से लेकर 2014 तक छात्रावासों में प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या बताई है निरंक तो मैं यहां पर माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि जब मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं तो और आपने उत्तर दिया है कि जी हां. तो फिर यह कैसे होगा. कालेज के द्वार 19 लाख का प्राक्कलन भेजा है मरम्मत के काम के लिए तो क्या उसको स्वीकृत करेंगे. ताकि पालिटेक्निक कालेज में पढ़ने वाले छात्र छात्रावास की सुविधा का लाभ उठा सकें.

श्री उमाशंकर गुप्ता -- जी हां कर देंगे.

श्री कुंवरजी कोठार -- धन्यवाद्.

 

बी.ओ.टी. योजनांतर्गत मार्ग निर्माण

2. ( *क्र. 4171 ) श्री अजय सिंह : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रीवा संभाग में बी.ओ.टी. योजना के अंतर्गत वर्ष 2013-14, 2014-15 एवं 2015-16 में राज्‍य सरकार द्वारा कितने सड़क मार्ग बी.ओ.टी. योजना के माध्‍यम से बनवाये गये और इन मार्गों की कितने कि.मी. की दूरी है, इन मार्गों के क्रम बतायें कि कहाँ से कहाँ तक मार्ग बनाये गये हैं। (ख) इन बनाये हुए मार्गों में राज्‍य शासन के द्वारा संबंधित बी.ओ.टी. कंपनी (ठेका कंपनी) को कुल सड़क लागत के कितने प्रतिशत राज्‍य सरकार द्वारा राशि दी गई। क्‍या यह राशि ठेका कंपनी द्वारा राज्‍य सरकार को वापस की गई या उन्‍हीं सड़कों पर खर्च कर दी गई? (ग) प्रस्‍तावित बी.ओ.टी. परियोजना में वर्तमान में कितने प्रतिशत राशि ठेका कंपनी को राज्‍य सरकार देगी और यह राशि क्‍या ठेका कंपनी वापस करेगी अथवा रोड पर ही खर्च कर दी जायेगी। प्रस्‍तावित मार्गों के नाम एवं दूरी बतावें।

लोक निर्माण मंत्री ( श्री सरताज सिंह ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) बी.ओ.टी. के अंतर्गत निर्मित सड़कों पर राज्‍य शासन द्वारा दी गई ग्रान्‍ट की जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। उपयुक्‍त राशि राज्‍य सरकार को वापस करने का कोई प्रावधान नहीं है। (ग) बी.ओ.टी. के अंतर्गत निर्माणाधीन सड़कों पर राज्‍य शासन द्वारा ग्रांट सड़क निर्माण के पश्‍चात दी जावेगी। उपयुक्‍त राशि राज्‍य सरकार को वापस करने का कोई प्रावधान नहीं है। नाम व दूरी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।

परिशिष्ट - ''दो''

श्री अजय सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय मेरे प्रश्न के उत्तर में मंत्री जी ने रीवा संभाग में राष्ट्रीय राजमार्ग के अंतर्गत निर्माणाधीन बीओटी पद्धति के द्वारा 2745 करोड़ की रोड़ अपूर्ण बताई गई हैं.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह पूछना चाहता हूँ कि इतनी महत्‍वपूर्ण सड़कें हैं, शायद रीवा संभाग में ही ग्रहण लगा हो कि वहीं की सड़कें नहीं बन रही हैं. सीधी से सिंगरौली एक बहुत ही महत्‍वपूर्ण सड़क है, क्‍या कारण है माननीय अध्‍यक्ष महोदय कि बीओटी के अंतर्गत होने के बाद भी निमार्णाधीन ही है, यह माननीय मंत्री जी बताएं. इसी तरह सतना से बेला सड़क का काम शुरू होता है फिर बंद हो जाता है तो मैं पूछना चाहता हूँ कि आपके माध्‍यम से कि इन ठेकेदारों के ऊपर मंत्री जी का कोई नियंत्रण है या नहीं, यह भी वे बताने की कृपा करें.

श्री सरताज सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ये पांचों सड़कें काफी समय से लंबित हैं, ठेकेदार के साथ विवाद थे, निर्माण का मामला लगभग बंद हो चुका था, मैं माननीय गडकरी जी इस बात के लिए धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि उनके आने के बाद उन्‍होंने इस मामले को ठीक किया. ठेकेदारों को बुलाकर उनकी बात सुनी और एक रास्‍ता निकाला और आज फिर से इन सड़कों का कार्य शुरू हो चुका है.

श्री अजय सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय ने जरूर विशेष पहल की होगी लेकिन मैं माननीय मंत्री महोदय को यह बताना चाहता हूँ कि उदाहरण के लिए सिर्फ सतना-बेला मार्ग, आपने काम शुरू किया, महीने भर काम चला उसके बाद फिर बंद हो गया तो क्‍या अब फिर से गडकरी जी को बुलाएंगे. 13 साल पहले सीधी से सिंगरौली जाने में 3 घंटे लगते थे आप लोग बहुत वर्ष 2003 का बहुत उदाहरण देते हैं मैं बताना चाहता हूँ कि 13 साल पहले 3 घंटे लगते थे और आज सीधी से सिंगरौली जाने में 6 घंटे लगते हैं. अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय ने जो कहा कि गडकरी ने विशेष पहल की, ठेकेदार को बुलाया लेकिन उसके बाद भी कार्य क्‍यों चालू नहीं हो पा रहा है.

श्री सरताज सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ये पांचों सड़कें मॉर्थ (MORTH) के अंतर्गत आती हैं, केन्‍द्रीय सरकार के अंतर्गत आती हैं, उन्‍हीं के फंडिंग से बन रही हैं और आरडीसी केवल इसकी एक एजेंसी है, इसलिए माननीय गडकरी जी तो हर बार आएंगे ही जहां भी विवाद आएगा क्‍योंकि सड़क उनकी है, उन्‍होंने विवाद सुलझाया है और सभी सड़कों में काम आगे बढ़ रहा है. सतना-बेला सड़क का काम थोड़ा पीछे है लेकिन बाकी सड़कों के काम काफी आगे बढ़ गए हैं. हमारा पूरा प्रयास है कि इस सड़क का काम भी पूरा हो जाए.

श्री अजय सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री महोदय से अंत में यह पूछना चाहता हूँ कि काम कमजोर इसलिए हो रहा है, देरी इसलिए हो रही है कि कोई ठेकेदार नहीं है. हर रोड में पेटी कान्‍ट्रेक्‍टर से काम कराते हैं क्‍या बांड बीओटी योजना के अंतर्गत पेटी कान्‍ट्रेक्‍टर निर्माण एजेंसी बन सकते हैं.

श्री सरताज सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, काम को सब्‍लेट करने का प्रावधान है और बहुत से ठेकेदारों से इससे पहले भी काम को सब्‍लेट करके बनवाया है. लेकिन काम में जो भी कमी होगी या गलती होगी, उसका जिम्‍मेदार वह ठेकेदार ही रहेगा और इसमें पर डे पेनाल्‍टी लगाने का प्रावधान है जो इन पर लग रही है. हमारा पूरा प्रयास है कि इस काम को जल्‍दी से जल्‍दी किया जाए और यह प्रयास का परिणाम ही है कि सब काम शुरू हो चुके हैं.

श्री अजय सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, आज की तारीख में सतना-बेला मार्ग का काम चालू है या नहीं, मंत्री जी केवल यह बता दें.

अध्‍यक्ष महोदय -- अब आपके तीन प्रश्‍न हो गए.

श्री गिरीश गौतम -- अध्‍यक्ष महोदय, मनगवां से चारघाट सड़क का काम बंद है, मैं निवेदन करना चाहता हूँ.

अध्‍यक्ष महोदय -- कृपया बैठ जाएं, बाद में बात करेंगे.

अभ्‍यारण्य क्षेत्र के ग्रामों में मूलभूत सुविधाएं

3. ( *क्र. 5032 ) श्री गिरीश भंडारी : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नरसिंहगढ़ के चिड़ीखौ अभ्‍यारण्य में कौन-कौन से ग्राम आते हैं? ग्रामों के नाम सहित जानकारी देवें? (ख) क्‍या अभ्‍यारण्य क्षेत्र के ग्रामों में सड़क, बिजली, शाला भवन, नलकूप खनन, हैण्‍डपंप जैसी मूलभूत सुविधाएं हेतु क्‍या-क्‍या प्रावधान/मापदण्‍ड/शर्तें हैं? शासन के निर्देशों की प्रति दें। (ग) प्रश्‍न की कंडिका (क) की उपलब्‍ध जानकारी अनुसार इन सभी ग्रामों में मूलभूत सुविधाएं प्राप्‍त हैं या वन विभाग इन ग्रामों तक जाने वाली सड़कें बनाने में रोक लगा रहा है?

वन मंत्री ( डॉ. गौरीशंकर शेजवार ) : (क) नरसिंहगढ़ (चिड़ि‍खौ) अभ्‍यारण्य के अंतर्गत 2 ग्राम, वनग्राम देवगढ़ एवं राजस्व ग्राम चैनपुराखुर्द स्थित हैं। (ख) अभ्‍यारण्य क्षेत्र के ग्रामों में सड़क, बिजली, शाला भवन, हैण्डपम्प, नलकूप खनन जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भारत शासन, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय का पत्र दिनांक 26 अक्टूबर, 2007 एवं मध्यप्रदेश शासन, वन विभाग का पत्र दिनांक 25 मई, 2009 संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र 1 एवं 2 अनुसार है। (ग) उत्तरांश में उल्लेखित ग्रामों में हैण्डपम्प, कुआं, नलकूप, बिजली, शाला भवन एवं सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं। प्रश्नाधीन ग्रामों तक जाने वाली सड़क बनाने हेतु कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुए हैं एवं न ही लंबित हैं। अतः वन विभाग द्वारा इन ग्रामों तक जाने वाली सड़क बनाने में रोक लगाने का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।

परिशिष्ट - ''तीन''

श्री गिरीश भंडारी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में माननीय वन मंत्री जी ने जो जानकारी दी है वह जानकारी सही नहीं है. मेरा प्रश्‍न था कि चिड़ीखौ अभ्‍यारण्‍य के पास कौन-कौन से गांव हैं तो एक ही गांव का नाम बताया गया है जबकि इस फारेस्‍ट क्षेत्र के पास में ग्राम हनापुरा, रसीदखेड़ी, चारपुरा, रेसई, भाटपुरा, भोपालपुरा, छाबड़, बरखेड़ी, गढ़ी ये गांव भी आते हैं और मेरा सीधा सा प्रश्‍न यह है कि इन गांवों में जाने के लिए मुख्‍यमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत सड़कें स्‍वीकृत हुई हैं लेकिन फारेस्‍ट की रोक के कारण वहां सड़कें बनाना विभाग के द्वारा संभव नहीं हो पा रहा है तो क्‍या फारेस्‍ट उन सड़कों को बनाने की मंजूरी देगा.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार-- माननीय अध्यक्ष महोदय,देवगढ़ और चैनपुराखुर्द दो गांव इस सेंचुरी में आते हैं. तीसरा एक टोला है जिसको गांव की मान्यता नहीं है. यह तिन्दौनिया का वार्ड नम्बर 17 है. बाकी के ग्राम आपने अभ्यारण्य का जो क्षेत्र है उसमें नहीं आते हैं.

श्री गिरीश भण्डारी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूँ कि वन्य जो आपका अभ्यारण्य क्षेत्र है इसके पास लगे हुए गांव हैं और उस वन क्षेत्र में से जाकर ही उन गांवों में पहुंचा जाता है और उन गांवों की रोडें मुख्यमंत्री सड़क योजना के अंतर्गत स्वीकृत हुई हैं लेकिन वन विभाग का यह कहना है कि हमारे वन में निकलकर जा रही हैं इसलिए हम इन सड़कों को नहीं बनाने देंगे. मैं वन मंत्री जी से जानना चाहता हूँ कि क्या उन सड़कों को बनाने की अनुमति देंगे?

डॉ. गौरीशंकर शेजवार-- माननीय अध्यक्ष महोदय, अभ्यारण्य में, नेशनल पार्क में और वन भूमि में रोड अथवा कोई भी निर्माण के लिए एक अनुमति लगती है और उसकी एक प्रक्रिया है. प्रक्रिया में एक हेक्टेयर से नीचे अनुमति देने का अधिकार वनमण्डलाधिकारी को है और नक्सली क्षेत्रों में 5 हेक्टेयर से नीचे के भी अधिकार वनमण्डलाधिकारी को हैं और इसके ऊपर के जो भी अधिकार है वह प्रदेश शासन केन्द्र सरकार को रिकमंड करता है और केन्द्र सरकार से उसकी अनुमति आती है तब उसकी अनुमति मिलती है और इसमें जो जमीन है उसका हस्तांतरण होता है और जमीन हस्तांतरण के लिए कुछ नियम और प्रक्रिया है. यदि जो भी हमें कार्य करना है तो उस नियम प्रक्रिया का पालन करना पड़ेगा और उसके अंतर्गत गुजरना पड़ेगा. यह वन संरक्षण अधिनियम इसके लिए लागू होता है.

श्री गिरीश भंडारी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह वन्य अभ्यारण्य जब बना, यह गांव उसके पहले से स्थित हैं क्या इन गांवों को सड़कों की सुविधा उपलब्ध होगी या नहीं?

अध्यक्ष महोदय--वे चाहते हैं कि उसकी अनुमति मिल जाए जिस भी प्रक्रिया से मिले.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार-- नियम प्रक्रिया से एप्लाई करेंगे तो उसमें कहीं कोई अकारण बाधा पैदा नहीं करते और नियम में जो आता है उसके अंतर्गत अनुमति मिलेगी.

अध्यक्ष महोदय-- वन विभाग के लिए एप्लाई करवा दें तो अनुमति हो जाएगी.

श्री गिरीश भंडारी-- ठीक है,धन्यवाद.

 

संचालक तकनीकी शिक्षा के पद पर नियमित पदस्‍थापना

4. ( *क्र. 4244 ) श्री तरूण भनोत : क्या तकनीकी शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) संचालक, तकनीकी शिक्षा म.प्र. की शैक्षणिक योग्‍यता, अनुभव सेवा शर्तें, नियुक्ति का तरीका क्‍या है? क्‍या विगत दस वर्षों से प्रदेश में नियमित संचालक तकनीकी शिक्षा म.प्र. नहीं है? विगत दस वर्षों में प्रभारी संचालक तकनीकी शिक्षा म.प्र. कौन-कौन रहे, उनका नाम कार्यकाल व वे किस सेवा संवर्ग से थे? क्‍या विगत दस वर्षों में प्रभारी संचालक को नियमानुसार संचालक का प्रभार दिया जा सकता है? यदि नहीं, तो किन परिस्थितियों में यह निर्णय लिया गया? (ख) विगत दस वर्षों में नियमित संचालक तकनीकी शिक्षा म.प्र. की नियुक्ति हेतु क्‍या-क्‍या प्रयास किये गये? (ग) क्‍या प्रभारी संचालक, तकनीकी शिक्षा म.प्र. को प्रभार से मुक्‍त कर आई.ए.एस. कैडर के अधिकारी की पदस्‍थापना नियम विरूद्ध तरीके से की गई थी? यदि हाँ, तो यह निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया है? कब तक नियमित संचालक की नियुक्ति की जावेगी? (घ) क्‍या विगत दस वर्षों में संचालनालय तकनीकी शिक्षा म.प्र. में पदस्‍थ अधिकारी यथा अतिरिक्‍त संचालकों तथा संयुक्‍त संचालकों की पदस्‍थापना नियमानुसार वरिष्‍ठता के आधार पर की गई? यदि नहीं, तो किन परिस्थितियों में यह निर्णय लिया गया? अब कितनी समयावधि में नियमानुसार अतिरिक्‍त संचालकों तथा संयुक्‍त संचालकों की नियुक्तियां की जावेंगी?

तकनीकी शिक्षा मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) मध्यप्रदेश शैक्षणिक सेवा (तकनीकी शाखा) भर्ती नियम 1967 के अनुसार संचालक तकनीकी शिक्षा का पद 100 प्रतिशत शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय के प्राचार्य के संवर्ग से स्थानांतरण द्वारा भरे जाने के प्रावधान हैं। विगत दस वर्षों मे प्रभारी संचालक तकनीकी शिक्षा मध्यप्रदेश के नाम, कार्यकाल एवं सेवा संवर्ग का विवरण संलग्न परिशिष्‍ट अनुसार है। जी हाँ। शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ख) केडर में नियमित प्राचार्य उपलब्‍ध नहीं होने के कारण नियमित संचालक की नियुक्ति नहीं की गई है। (ग) संचालक, तकनीकी शिक्षा के पद पर आई.ए.एस. कैडर अधिकारी की पदस्‍थापना कैडर में नियमित प्राचार्य उपलब्‍ध न होने के कारण की गई थी। प्रकरण माननीय न्‍यायालय में विचाराधीन है। (घ) संचालनालयीन अधिकारियों का पृथक संवर्ग नहीं है। वर्तमान पदस्‍थापना कार्य आवश्‍यकता के आधार पर की गई है।

परिशिष्ट - ''चार''

श्री तरुण भनोत-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से सीधा प्वाइंटेड प्रश्न यह पूछना चाहता हूँ, क्योंकि उत्तर बहुत गोलमोल, घुमाकर दिया गया है. पिछले 10 वर्षों से मध्यप्रदेश टेक्नीकल एज्युकेशन बोर्ड के डायरेक्टर के रुप में क्या एआईसीटीएस के नियमों का पालन करते हुए डायरेक्टर का पद दिया गया है? दूसरा प्रश्न मैं यह पूछना चाहता हूँ कि यह पद टेक्नोक्रेट्स के लिए है या ब्यूरोक्रेट के लिए? इन दोनों प्रश्नों का जवाब मंत्री जी दे दें, फिर मैं तीसरा अंतिम प्रश्न पूछूंगा.

श्री उमाशंकर गुप्ता-- माननीय अध्यक्ष महोदय, डायरेक्टर टेक्नीकल एज्युकेशन का पद इन्जीनियरिंग कालेज के प्राचार्य के पद से भरा जाता है.इन्जीनियरिंग कालेज में इन दिनों कोई रेग्युलर प्राचार्य हमारे पास नहीं है और इसलिए इन पदों पर पॉलीटेक्निक के प्राचार्यों की नियुक्ति विगत वर्षों से हो रही है. मैं माननीय सदस्य को आपके माध्यम से भी बताना चाहता हूँ कि वैसे इन्जीनियरिंग कालेज के प्राचार्य और पॉलीटेक्निक के प्राचार्य की योग्यता एक जैसी ही हैं लेकिन फिर भी जो अभी अवेलेबिल हैं लेकिन इन्जीनियरिंग कालेज के प्राचार्य के पद जल्दी भर जाएँ, इसके लिए हम कोशिश कर रहे हैं. दूसरा जो इन्होंने पूछा है यह पद टेक्नोक्रेट्स के लिए है लेकिन जैसा प्रश्न आया था कि इन्जीनियरिंग कालेज के प्राचार्य हमारे पास नहीं हैं इसलिए बीच में एक आईएएस की नियुक्ति हुई थी लेकिन वह मामला कोर्ट में है और इसलिए किसी आईएएस की नियुक्ति नहीं हुई है. अभी टेक्नोक्रेट्स ही संचालक के पद पर हैं.

श्री तरुण भनोत--- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी को बताना चाहता हूं कि ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्नीकल एजुकेशन का डायरेक्टिव है कि इस पद पर सिर्फ वह व्यक्ति रह सकता है जो इंजीनियरिंग कॉलेज में पांच साल तक जो प्रोफेसर रहे हों और टेक्नीकल सब्जैक्ट से आते हो. आपने जो नियुक्ति की है वह केमिस्ट्री, फिजिक्स और जूलॉजी विषय वालों की, की है. जबकि उसमें साफ निर्देशित है कि मेकेनिकल , सिविल या किसी टेक्नीकल ब्रांच का ही व्यक्ति उसका चेयरमैन बन सकता है . माननीय अध्यक्ष महोदय, नियमों का उल्लंघन किया गया है, इसके अलावा क्या दस वर्षों का समय कम होता है.

अध्यक्ष महोदयकृपया सीधा प्रश्न कर दें.

श्री तरुण भनोत-- अध्यक्ष महोदय, मेरा सीधा प्रश्न यह है कि क्या दस वर्षों का समय कम होता है . दस वर्षों से आपको किसी भी इंजीनियरिंग कॉलेज में एक भी ऐसी योग्यता रखने वाला प्रोफेसर नहीं मिला और अगर नहीं मिला तो मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि (XXX) शिक्षा का स्तर क्या है टेक्नीकल एजुकेशन का मध्यप्रदेश में ?

अध्यक्ष महोदय-- यह मुहावरों में कुछ नहीं पूछा जाएगा.सीधे प्रश्न कीजिये.

श्री तरुण भनोत-- दस वर्षों से आपको एक भी व्यक्ति नहीं मिला जिसको कि आप डायरेक्टर बना सकते हैं. मेरा सीधा प्रश्न है कि क्या आपको दस वर्षों में एक भी व्यक्ति किसी इंजीनियरिंग कालेज में नहीं मिला जिसको आप टेक्नीकल एजुकेशन के डायरेक्टर पद पर बिठा सकते हैं.

वनमंत्री (डॉ. गौरीशंकर शेजवार)-- अध्यक्ष महोदय, यह (XXX) कार्यवाही से निकलवा दें.

अध्यक्ष महोदय---- इसको कार्यवाही से निकाल दें.

श्री तरुण भनोत-- मैंने तो एक उदाहरण दिया है कि (XXX). इसलिए व्यापम जैसे घोटाले मध्यप्रदेश में हो रहे हैं.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार-- अध्यक्ष महोदय, अजय सिंह जी ने बैठे बैठे एक कमेंट किया (XXX), मुझे इस पर आपत्ति है.

अध्यक्ष महोदय--- इसको कार्यवाही से निकाल दें.

श्री अजय सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, शेजवार जी, किस तरह से कौनसी बात को घुमाया जाये यह जानते हैं. मैंने तो कुछ और बोला (XXX), आप खुद ही पता लगा लो क्या हो.

श्री तरुण भनोत-- अध्यक्ष महोदय, यह बहुत महत्वपूर्ण बात है कि सरकार दस साल में एक भी ऐसे व्यक्ति को ढूंढ नहीं पाई जिसको टेक्नीकल एजुकेशन का डायरेक्टर बनाया जा सके.

अध्यक्ष महोदय--- आपका प्रश्न आ गया है.

श्री तरुण भनोत--- माननीय मंत्री जी ने अभी जवाब नहीं दिया है.

अध्यक्ष महोदय-- मंत्री जी ने जवाब दे दिया है. आपका प्रश्न आ गया है.

श्री तरुण भनोत--- दस वर्ष लग गये हैं कितने साल और लगेंगे आपको ढूंढने में.

अध्यक्ष महोदय--- मुकेश जी आप प्रश्न कर लें, मंत्री जी आप इकट्ठा जवाब दे दें.

श्री मुकेश नायक--- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं कि स्थाई डायरेक्टर की कमी के कारण ..

श्री गोपाल भार्गव--- अध्यक्ष महोदय, मैं पूछना चाहता हूं कि ऐसे प्राणी जो मूक हैं, बोल नहीं सकते, इनकी भाषा समझ में नहीं आ सकती उनका सदन में उल्लेख करना, चर्चा करना , उनका अपमान है.

अध्यक्ष महोदय--- उसको हमने कार्यवाही से निकाल दिया है. नायक जी , अपना प्रश्न करें.

श्री तरुण भनोत--- भार्गव जी जब घोड़ी पर बैठकर बारात में जा रहे थे तब मूक जानवर पर नहीं बैठे थे क्या.

अध्यक्ष महोदय-- आपके प्रश्न का उत्तर आने दें.

श्री मुकेश नायक--- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि प्राचार्य और डायरेक्टर का पद अस्थाई होने के कारण पूर्णकालिक व्यक्ति वहाँ पदस्थ नहीं होने के कारण जो पूरे के पूरे टेक्नीकल एजुकेशन के एकेडेमिक कैलेंडर , स्पोर्ट्स कैंलेंडर, कल्चरल कैलेंडर का कोई फॉलोअप नहीं है. कब परीक्षा होगी, पता नहीं है. सारी परीक्षायें न्यायालय करा रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय-- आप गुस्से में मत पूछिये.

श्री सत्यपाल सिंह सिकरवार-- माननीय अध्यक्ष महोदय, और लोगों के भी प्रश्न लगे हैं पूरे प्रश्न यही पूछ लेंगे क्या .

श्री मुकेश नायक-- मैं पूछना चाहता हूं कि क्या आपका परीक्षा कराने का कोई वार्षिक कैलेंडर है . आपने शैक्षिणिक संस्थानों का कोई कैलेंडर बनाया है.

अध्यक्ष महोदय-- मंत्री जी, आप तरुण जी का उत्तर दे दीजिये कि कब तक ऐसा टेक्नीकल आदमी मिल जाएगा.

श्री उमाशंकर गुप्ता--- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं इस पर नहीं जाऊँगा कि (XXX), कैसे क्लास टू की नियुक्तियाँ हुई हैं , उस पर मैं नहीं जाऊँगा. 50 साल के इतिहास में देश और प्रदेश में क्या हुआ उस पर मैं नहीं जाऊँगा, कैसे घोड़े-गधे रहे मैं यह नहीं कहूंगा , यह सदन की गरिमा की अनुरूप नहीं होगा. लेकिन माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने कहा है कि भर्ती नियम में डायरेक्टर के पद पर इंजीनियरिंग कालेज के प्राचार्य के पद से व्यक्ति जाता है पिछले दस साल से इंजीनियरिंग में कोई डायरेक्ट हमारे पास कॉलेज का प्राचार्य नहीं है बीच में जो सेवा भर्ती नियम बदले और सारे इंजीनियरिंग कालेज और पोलिटेक्नीक कालजेस की सोसायटी बन गई और वह पद सीधी भर्ती का हो गया इसलिए प्रमोशन भी नहीं कर सकते जो कहा कि दस साल में कोई नहीं ढूंढ पाये लेकिन जैसा मैंने कहा कि हम लगातार इसके पीछे पड़े हैं और मैं आपको बताना चाहता हूं कि आज ही मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सेवा भर्ती नियम के सुधार की मीटिंग है और मुझे लगता है कि फैसला हो जाएगा और मैं यह भी आश्वस्त करता हूं कि नायकजी, सब टाइमटेबल कैलेंडर साल भर का हम प्रकाशित करते हैं, आप सुन लीजिये आपको असत्य कहने की आदत है.

अध्यक्ष महोदय--- प्रश्न समाप्त हो गया है. आपका जवाब आ गया है.

श्री उमाशंकर गुप्ता--- आपको सुनने की आदत नहीं है आपको अपना जमाना याद है.

..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- आपका जवाब आ गया. ...(व्यवधान)..प्रश्न क्रमांक 5 श्री संदीप जायसवाल...(व्यवधान)..

श्री उमाशंकर गुप्ता-- सुन लीजिए. आपकी असत्य बोलने की आदत है.

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, अब प्रश्न समाप्त हो गया. आपका जवाब आ गया...(व्यवधान)..

श्री उमाशंकर गुप्ता-- सुनने की ताकत नहीं है. आपका अपना जमाना याद है...(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- प्रश्न क्रमांक 5 श्री संदीप जायसवाल..(व्यवधान)...मुकेश नायक जी, अब आप बैठ जाएँ.

श्री तरूण भनोत-- अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न का जवाब नहीं आया.

अध्यक्ष महोदय-- आपके प्रश्न का जवाब आ गया...(व्यवधान)..

श्री तरूण भनोत-- अध्यक्ष महोदय, एक मिनट चाहता हूँ.

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, आपके 3-4 प्रश्न हो गए. श्री संदीप जायसवाल.

श्री तरूण भनोत-- एक का भी सही जवाब नहीं दिया. यह सरकार 10 साल में एक डायरेक्टर नहीं ढूँढ पाई...(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- आप कृपया सहयोग करें.

श्री तरूण भनोत-- अध्यक्ष जी, (xxx)

अध्यक्ष महोदय-- यह कुछ नहीं आएगा रिकार्ड में. केवल संदीप जायसवाल जी का और मंत्री जी का आएगा. आपका पूरा उत्तर आ गया. आपको आपके सदस्यों ने ही व्यवधान पैदा किया.

श्री तरूण भनोत-- (xxx)..(व्यवधान)..

 

कटनी नदी पर पुल निर्माण

5. ( *क्र. 5232 ) श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रश्‍नकर्ता सदस्‍य द्वारा कटनी नदी में नये पुल निर्माण हेतु दिनांक 09.07.2014 को सदन में प्रस्‍तुत ध्‍यानाकर्षण सूचना के परिप्रेक्ष्‍य में उक्‍त कार्य प्रश्‍न दिनांक तक कितने प्रतिशत पूर्ण हो चुका है? कार्यावधि कितनी बढ़ाई गई? क्‍या 60 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने की सत्‍यता का परीक्षण प्रश्‍नकर्ता सदस्‍य सहित स्‍थल निरीक्षण कर किया जायेगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों? (ख) कार्य में विलंब के क्‍या-क्‍या कारण हैं? वर्तमान में स्‍थल पर क्‍या कार्य संचालित हैं, कार्य कब तक पूर्ण किया जायेगा? क्‍या पुल निर्माण कार्य की लागत में बढ़ोत्‍तरी होने की संभावना है? यदि हाँ, तो इन कारणों के जिम्‍मेदारों पर क्‍या कार्यवाही की जायेगी?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री सरताज सिंह ) : (क) पुल का 60 प्रतिशत कार्य पूर्ण। दिनांक 30.12.2015 तक कार्यावधि बढ़ाई गई। जी हाँ। माननीय विधायक जी द्वारा निर्धारित तिथि अनुसार। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ख) भू-अर्जन प्रकरण में विलंब होना, अतिरिक्‍त कार्य एवं संविदाकार द्वारा समानुपातिक प्रगति नहीं देने के कारण। सुपर स्‍ट्रक्‍चर की ड्रांइग प्रूफ चैकिंग हेतु आई.आई.टी. दिल्‍ली में लंबित होने के कारण कार्य बंद है। जून-2017 तक पूर्ण होना संभावित है। वर्तमान में लागत वृद्धि की संभावना प्रतीत नहीं होती है। इसके लिए कोई अधिकारी जिम्‍मेदार नहीं है, संविदाकार द्वारा कार्य धीमी गति से करने के कारण अनुबंधानुसार कार्यवाही की जा रही है।

श्री संदीप श्रीप्रसाद जायसवाल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री महोदय से जानकारी लेना चाहूँगा कि इस प्रश्न पर पूर्व में मैंने ध्यानाकर्षण लगाया था. उसमें भी यह जानकारी आई थी और मैं मंत्री महोदय से यह जानकारी चाहूँगा कि पुल पर जो भी व्यवधान आ रहे हैं..(व्यवधान)..जून 2017 तक जो..(व्यवधान)..कार्य बताया जा रहा है. यह कब तक पूर्ण होने की संभावना है?...(व्यवधान)...

अध्यक्ष महोदय-- आप कृपया सहयोग करें. मंत्री जी, कृपया संदीप जायसवाल जी के प्रश्न का उत्तर दें. माननीय मंत्री जी, आपको सुनाई पड़ा?..(व्यवधान)..

श्री संदीप श्रीप्रसाद जायसवाल-- माननीय मंत्री महोदय, पिछले उत्तर से इस उत्तर के बीच की डेढ़ साल की अवधि में कोई भी कार्य नहीं हुआ है. जनता में असंतोष है. महत्वपूर्ण कार्य है. मैं मंत्री महोदय से जानना चाहूँगा कि कितनी जल्दी यह कार्य पूर्ण होगा और इस काम को लेकर जो तकनीकी समस्या है उसको कैसे हल किया जाएगा?

श्री सरताज सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, पुल के निर्माण में जो विलंब हुआ है. उसके पीछे एक तो भू-अर्जन में समय लगा और दूसरा इसकी जो डिजाइन थी, डिजाइन की प्रूफ चेकिंग आई आई टी, दिल्ली से लंबित होने के कारण, जब तक वहाँ से ड्राइंग का एप्रुव्हल नहीं आएगा तब तक यह पुल का काम चालू नहीं हो पाएगा. उसमें इस कारण से विलंब हुआ है और प्रयास किया जा रहा है कि उसको जल्दी किया जाए. जो काम बिना ड्राइंग के संभव था, वह उसमें किया गया है और लगभग 60 प्रतिशत कार्य हुआ भी है.

श्री संदीप श्रीप्रसाद जायसवाल-- अध्यक्ष महोदय, एक ध्यानाकर्षण सूचना पर 9.7.2014 को भी मुझे जानकारी दी गई थी कि 60 परसेंट काम हुआ है. आज भी 60 परसेंट काम हुआ है. हमारा उद्देश्य पुल को जल्दी बनवाना है. विभाग में हो रही देरी को देखते हुए मैं चाहूँगा कि माननीय मंत्री महोदय इस विषय पर विशेष ध्यान देते हुए एक कोई वरिष्ठ अधिकारी को यह जवाबदारी दे जो उसकी मंथली रिपोर्ट लेते हुए उसको जल्द से जल्द ड्राइंग, डिजाइन इत्यादि का पूरा इंतजाम कराकर उस कार्य को जल्दी करवा सकें.

श्री सरताज सिंह-- अध्यक्ष महोदय, विभाग की तरफ से पूरा प्रयास किया जा रहा है चूँकि मामला दिल्ली में लंबित है इसलिए थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा.

श्री घनश्याम पिरोनियॉ-- माननीय अध्यक्ष महोदय....

अध्यक्ष महोदय-- भाण्डेर से क्या लेना देना. वह कटनी का प्रश्न है.

श्री घनश्याम पिरोनियॉ-- इसमें भी माननीय मंत्री महोदय बोल देंगे क्योंकि माननीय मुख्यमंत्री जी की घोषणा है...

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, आपका प्रश्न नहीं है.वह विषय ही यहाँ नहीं है. नहीं पूछ सकते.

श्री घनश्याम पिरोनियॉ-- पुल से संबंधित ही है.

अध्यक्ष महोदय-- दूसरे पुल से संबंधित नहीं पूछ सकते. वह प्रश्न उद्भूत नहीं होता. प्रदेश भर के पुल का थोड़े ही बता पाएँगे. अब उनका नहीं लिखा जाएगा. श्री मोती कश्यप अपना प्रश्न करें.

श्री घनश्याम पिरोनियॉ-- (xxx)

 

 

रानी दुर्गावती विश्‍वविद्यालय में अतिथि अध्‍यापकों की नियुक्ति

6. ( *क्र. 239 ) श्री मोती कश्यप : क्या तकनीकी शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रानी दुर्गावती विश्‍वविद्यालय में कौन-कौन से विभाग व पाठ्यक्रम संचालित हैं और उनमें किन स्‍तर के कौन से पद सृजित हैं तथा कब से कौन से पद किन कारणों से रिक्‍त हैं? (ख) प्रश्‍नांश (क) में किन विभाग व पाठ्यक्रमों में किन-किन अतिथि अध्‍यापकों की नियुक्ति की गई है और वे कब से अध्‍यापन कार्य कर रहे हैं? (ग) वर्ष 2013 से किन विषय विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में किनके शोध कार्य पूर्ण हुये हैं और चल रहे हैं? (घ) विश्‍वविद्यालय द्वारा विभाग से पदपूर्ति का अनुमोदन प्राप्‍त कर लेने के उपरान्‍त भी किन कारणों से नियुक्तियां नहीं की हैं?

तकनीकी शिक्षा मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''', '''' एवं '''' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (घ) विश्वविद्यालय द्वारा रिक्त पदों की पूर्ति हेतु दिनांक 20.01.2014 एवं 03.03.2014 को विज्ञापन जारी किये गये थे, परन्तु माननीय उच्च न्यायालय में दायर याचिका क्रमांक 7532/2014 में स्थगन का निराकरण दिनांक 30.10.2014 एवं याचिका क्रमांक 7326/15 में निर्णय दिनांक 27.08.2015 के परिपालन में विज्ञापित पदों में से अनारक्षित के 23 एवं बैकलॉग के 55 पद भरे जाने थे। विधि विभाग के रिक्त पदों की पूर्ति हेतु दिनांक 12.12.2014 को साक्षात्कार आयोजित किया गया था, जिसमें कोई भी उम्मीदवार योग्य नहीं पाया गया है। इसी बीच समन्वय समिति की 90वीं बैठक दिनांक 26.06.2015 में अध्यादेश क्रमांक 04 में हुए परिवर्तन जो कार्य परिषद बैठक दिनांक 19.02.2016 में अंगीकृत किया गया, के पालन में अधिसूचना जारी कर पुन: विज्ञापन निकालने की कार्यवाही की जा रही है।

श्री मोती कश्यप-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का प्रश्न उठाया और..(व्यवधान).. वर्ष 2014 को जो विज्ञप्ति निकाली गई है और उसमें आरक्षण के बेकलॉग के पदों का अनुसूचित जाति और जनजाति के जो पद आमंत्रित किए गए थे. वर्ष 2007, 2010, 2011 में आमंत्रित किए गए थे. उन पर नियुक्तियाँ नहीं कीं. राजनीति चलती रही और अपने-अपने लोगों को भरने के लिए 2014 में....

अध्यक्ष महोदय-- सीधा प्रश्न करें. समय हो गया है. भाषण नहीं.

श्री मोती कश्यप-- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न यह है कि बेकलॉग के पदों की पूर्ति के लिए 6.11.2007, 26.4.2010 और 14.10.2011 को विज्ञापित पदों में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर के अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए जो पद विज्ञापित किए गए थे. उनमें 2014 में जो परिवर्तन कर दिया गया, तो क्या इसको पुराने जो 2011 के जो विज्ञापित पद हैं, उनको मान्यता प्रदान की जाएगी?

श्री उमाशंकर गुप्ता-- माननीय अध्यक्ष महोदय, इस मामले में लोग माननीय न्यायालय में गये थे न्यायालय ने बैकलाग और जनरल के लिये जो 55 व 23 पद हेतु हमें निर्देश दिए हैं उसकी भर्ती का विज्ञापन हमने जारी कर दिया है.

अध्यक्ष महोदय--प्रश्नकाल समाप्त.

 

( प्रश्नकाल समाप्त )

शून्यकाल में उल्लेख

श्री बाला बच्चन--माननीय अध्यक्ष महोदय, जातिगत आरक्षण के विषय पर आपको चर्चा करवानी चाहिए हमारे साथियों ने इस पर स्थगन प्रस्ताव दिया है आपको उसको चर्चा के लिए लेना चाहिए. (व्यवधान)

श्री मुकेश नायक--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा स्थगन प्रस्ताव है. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--शून्यकाल की सूचनाएं पढ़ लेने दें यह 10 सूचनाएं हैं 5-7 मिनट लगेंगे इसके बाद मैं आपकी बात सुनूंगा.(व्यवधान)

श्री बाला बच्चन--माननीय अध्यक्ष महोदय, आप आश्वस्त करें.(व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--अब आप लोग एक को तो बोलने दो (व्यवधान)

श्री बाला बच्चन--आप 12 वीं कक्षा में विद्यार्थियों से ऐसा निबंध लिखवाते हैं उनकी परीक्षा में यह प्रश्न डालते हैं कि जातिगत आरक्षण देश के लिए घातक है (व्यवधान)

श्री मुकेश नायक-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा स्थगन प्रस्ताव है. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--यह बैठें तो पहले (व्यवधान)

डॉ. गोविन्द सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, रेत माफियाओं द्वारा मुरैना में एक वनकर्मी नरेन्द्र शर्मा की ट्रेक्टर से कुचलकर कर हत्या कर दी है इस पर मैंने ध्यानाकर्षण लगाया है उस पर चर्चा करायें भारी पैमाने पर अवैध उत्खनन चल रहा है..(व्यवधान)

श्री बाला बच्चन--आप ऐसे एजेंडे को लागू करना चाहते हैं क्या (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--कृपा करके शून्यकाल की सूचनाएं हो जाने दें (व्यवधान)

श्री बाला बच्चन--हमारे विधायक साथियों ने स्थगन दिया है जातिगत आरक्षण देश के लिए घातक है आपको हमारे इस स्थगन को लेना चाहिए और इस पर चर्चा कराना चाहिए (व्यवधान)

श्री मुकेश नायक-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा स्थगन प्रस्ताव है अगर आप अनुमति देंगे तो शून्यकाल के बाद उस पर मैं अपनी बात कह दूंगा.. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--सुन लें, अभी नहीं कहेंगे, प्रतिपक्ष के नेता जी ने जो कहा है उसका उत्तर तो जान लें..

श्री मुकेश नायक--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने स्थगन प्रस्ताव दिया है. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--उसी का तो उत्तर दे रहे हैं बैठ जाइये. यह शून्यकाल की सूचनाओं के बाद.  आपको अनुमति देंगे बैठ जाइये (व्यवधान)

श्री रामनिवास रावत--शून्यकाल इसके बाद आएगा पहले स्थगन आएगा (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--बाद में अनुमति देंगे.

डॉ. नरोत्तम मिश्र--अध्यक्ष महोदय, मेरा यह निवेदन है कि...

अध्यक्ष महोदय--मंत्रीजी एक मिनट, इन्होंने जो कहा है उसके बाद आप बोल लीजिएगा. अभी दे रहे हैं न अनुमति. नेता प्रतिपक्ष ने कुछ विषय उठाया है, माननीय नेता प्रतिपक्ष एवं सदस्यगण जिस स्थगन प्रस्ताव की चर्चा कर रहे हैं वह 10 बजकर 40 मिनट पर दिया गया है जो प्रक्रियाधीन है.

श्री रामनिवास रावत--अध्यक्ष महोदय, मैंने पहले दिया है 9 या 9.30 बजे के लगभग दिया है. मैंने दिया है.

अध्यक्ष महोदय--आज अभी प्रक्रियाधीन है मना नहीं किया है..(व्यवधान) आपने ठीक बोला 10.40 की जगह आपका स्थगन 9 बजे आया होगा किन्तु चर्चा अभी विचाराधीन है इसलिये (व्यवधान)

श्री रामनिवास रावत--बोल चुके हैं कि स्थगन है (व्यवधान) क्या आप आरक्षण को समाप्त करना चाहते हो (व्यवधान) क्या आप शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन करना चाहते हो (व्यवधान)

डॉ. नरोत्तम मिश्र--अध्यक्ष महोदय, जिसके बारे में शिक्षा मंत्री बोल चुके हैं (व्यधान)

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र)--अध्यक्ष जी यह कितने गंभीर हैं इसी से अंदाजा लगता है कि स्थगन की सूचनाएं 8 बजे के पहले दी जाती हैं यह पूरा स्टाफ यहां पर रहता है, लेकिन हमारा दूसरा कहना है..(व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--वैसे भी प्रक्रियाधीन है उस पर विचार कर लेंगे मना कहां कर रहे हैं (व्यवधान)

श्री रामनिवास रावत--किस तरह से संविधान की मूल भावनाओं को छेड़ने का प्रयास किया जा रहा है इस तरह से वैचारिक..(व्यवधान) पूरी आरक्षण प्रणाली पर प्रश्न चिह्न लगा दिया है (व्यवधान)

अध्यश्र महोदय--प्रश्न चिह्न नहीं आपने खुद स्वीकार किया है कि 9.00 बजे दिया है आपने सिर्फ 8.30 बजे तक के स्वीकार किये जाते हैं आज की सूची में..अभी प्रक्रियाधीन है मना नहीं किया है. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--आपने कहा कि 10 बजकर 40 मिनट पर दिया है इसलिए मैंने कह दिया कि 9 बजे दिया है मैंने असत्य तो नहीं बोला..(व्यवधान)

अध्‍यक्ष महादेय :- यह विषय अभी विचाराधीन है. (व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत :- हम बोल तो चुके हैं कि स्‍थगन प्रस्‍ताव है. क्‍या आप आरक्षण को समाप्‍त करना चाहते हैं. (व्‍यवधान)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह आप लोग मुद्दा बनाना चाहते हैं. आपको ओले कि चिन्‍ता नहीं है. किसान की चिन्‍ता नहीं है, गांव की चिन्‍ता नहीं है. किसान की चिन्‍ता नहीं है. आपने एक भी विषय नहीं उठाया. (व्‍यवधान) आप जानबुझकर राजनैतिक रोटियां सेकना चाहते हैं. (व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत :- आप शिक्षा का भगवाकरण नहीं कर पाएगें.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र :- हम हर विषय पर चर्चा करने को तैयार हैं.

श्री रामनिवास रावत:- आप इस प्रदेश में आरक्षण समाप्‍त नहीं कर पाओगे. (व्‍यवधान)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, चर्चा कराने को कौन मना कर रहा है. (व्‍यवधान) जिस विषय पर हमारे शिक्षा मंत्री बोल चुके हैं. (व्‍यवधान) यह कहां पर त्रृटि हुई है, हमने पाठ्य पुस्‍तक निगम से बुलवाया है. (व्‍यवधान) हमने शिक्षा मंडल बोर्ड से कह दिया है. हम उसको चेक करवा रहे हैं, यह भी कह दिया है.(व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय:- कृपया आप सभी लोग बैठ जाईये.(व्‍यवधान)

डॉ नरोत्‍तम मिश्र :- यह जातिगत विद्वेश फैलाने की कोशिश करते हैं. (व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत :- आप जातिगत विद्वेश फैलाने की कोशिश करते हैं. (व्‍यवधान)

डॉ नरोत्‍तम मिश्र :- यह इस हाऊस के फ्लोर पर राजनीतिक रोटियां सेकने की कोशिश करते हैं. इनको किसान की चिन्‍ता नहीं है. (व्‍यवधान) इस व्‍यक्ति भी नहीं बोला कि ओले पर स्‍थगन प्रस्‍ताव लो (व्‍यवधान) एक व्‍यक्ति नहीं बोला कि 10 किसान मर गये हैं, उस पर स्‍थगन लो. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इनको किसान की चिन्‍ता नहीं है. (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय:- आप लोग कृपा करने सदन चलने दीजिये. मेरा दोनों तरफ के सदस्‍य से अनुरोध है कि आप कृपया बैठ जाईये. सभी विषयों पर बातचीत करेंगे. कृपा करके बैठ जायें. (व्‍यवधान)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र :- अध्‍यक्ष महोदय कांग्रेस के लोक किसान विरोधी हैं. 10-10 किसान मर गये पर एक भी व्‍यक्ति ने नहीं कि स्‍थगन प्रस्‍ताव ले लो. (व्‍यवधान)

श्री सुन्‍दर लाल तिवारी :- हमने स्‍थगन दिया है. (व्‍यवधान)

डॉ नरोत्‍तम मिश्र :- एक भी व्‍यक्ति ने नहीं बोला. किसानों के नाम पर कागजी घोड़े दौड़ा कर औपचारिकता पूरी कर रहे हैं. (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय :- सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिये स्‍थगित.

 

 

( सदन की कार्यवाही 11.36 बजे 10 मिनट के लिये स्‍थगित)

 

 

11.48 बजे विधान सभा की कार्यवाही पुन: समवेत हुई.

{अध्यक्ष महोदय डॉ.सीतासरन शर्मा पीठासीन हुए}

 

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने स्थगन दिया हुआ है.

डॉ.नरोत्तम मिश्र - अध्यक्ष महोदय, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है.

एक माननीय सदस्य - माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने मुझसे बोला था कि शून्यकाल में मुझे अपनी बात कहने की अनुमति देंगे.

अध्यक्ष महोदय - शून्यकाल होने नहीं देने दे रहे हैं. यदि शून्यकाल होगा तो आपको मैं अनुमति दूंगा.शून्यकाल की सूचनाएं. श्री सुदर्शन गुप्ता.

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, मैं स्थगन के विषय में कहना चाहता हूं कि 5 मार्च से बारहवीं की परीक्षाएं...

डॉ.नरोत्तम मिश्र - अध्यक्ष महोदय, वह स्थगन पढ़ रहे हैं. मेरा प्वाइंट आफ आर्डर उस स्थगन के बारे में ही है.

अध्यक्ष महोदय - वह स्थगन नहीं पढ़ रहे. वह स्थगन के विषय में अपना कुछ विषय बोल रहे हैं.

श्री रामनिवास रावत - मैं पढ़ नहीं रहा. मैं घटना बता रहा हूं.

अध्यक्ष महोदय - घटना मत बताईये. आप क्या चाहते हैं वह बताईये.

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, बारहवीं की बोर्ड रीक्षा जो 5 तारीख को हुई उस संबंध में मैंने स्थगन दिया हुआ है. मैं चाहता हूं उस स्थगन पर सरकार का जवाब आ जाये. आप चर्चा करा लें.

अध्यक्ष महोदय - वह लिखा हुआ आ गया है मेरे पास.

डॉ.नरोत्तम मिश्रा--माननीय अध्यक्ष जी हमारी नियम प्रक्रिया कार्य संचालन समिति की पुस्तक है और इसमें स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि स्थगन प्रस्ताव की सूचना उस दिन जिस दिन प्रस्ताव करने का विचार हो बैठक के आरंभ होने के कम से कम दो घंटे पूर्व प्रमुख सचिव, सचिव अथवा प्राधिकृत अधिकारी को तीन प्रतियों में अध्यक्ष महोदय की सहमति लेकर के अभी सम्मानित सदस्य 9.00 बजे का कह रहे थे, जब उनका स्थगन 9.40 बजे प्राप्त हुआ है. वह किसी भी विषय पर नियम प्रक्रिया के तहत चर्चा में आया है अध्यक्ष महोदय आपको सर्वाधिकार है उसमें चर्चा कर सकते हैं, लेकिन इस तरह से तो कुछ भी नहीं हो सकता है.

श्री रामनिवास रावत--अध्यक्ष महोदय, विषय की गंभीरता को देखते हुए मैंने चर्चा के लिये निवेदन किया है.

अध्यक्ष महोदय--आपका निवेदन आ गया है.

श्री रामनिवास रावत--मैं मानता हूं कि 8.00 बजे के पूर्व दिया जाना चाहिये विषय की गंभीरता को देखते हुए इसमें शासन का उत्तर आ जाए और इस पर चर्चा करा ली जाए या उसको कल चर्चा के लिये रख दीजिये.

श्री मुकेश नायक--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं पूरा संकलन करके आपको दे दूंगा कि ऐसी परम्परा रही है अध्यक्ष महोदय ने पूर्व में संरक्षण दिया है, ऐसे गंभीर विषयों पर चर्चा करायी है मेरी विनम्र विनती है आपसे.

अध्यक्ष महोदय--मैंने चर्चा के लिये किसी भी बात के लिये मना नहीं किया है.

श्री रामनिवास रावत--यह तात्कालिक विषय है आज हम क्षेत्र से आ रहे थे इसलिये विलंब हो गया नहीं तो यह भी विलंब नहीं होता.

श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा--अध्यक्ष महोदय, 8 बजकर 20 मिनट पर मैंने प्रदेश में ओलावृष्टि तथा जबरदस्त बारिश हुई है उसके कारण फसलों का नुकसान हुआ उस बारे में स्थगन प्रस्ताव दिया है मेरा निवेदन है कि इस पर विचार किया जाना चाहिये.

अध्यक्ष महोदय--ठीक है उस पर विचार कर लेंगे. माननीय रावत जी ने जो मुद्दा उठाया है जिसका समर्थन माननीय मुकेश नायक जी ने किया है आपने जो स्थगन प्रस्ताव दिया है विधान सभा में 9.40 बजे यहां पर रिसीव हुआ है अभी संसदीय कार्यमंत्री जी ने नियम पढ़कर के सुनाया है. आप भी यह जानते हैं दोनों मंत्री पद पर रह चुके हैं कि शासन को जानकारी बुलाने के लिये समय चाहिये और इसीलिये दो घंटे का नियम इसलिये नहीं बनाया है कि इसमें कोई तथ्य एवं तर्क है. इसमें तर्क यही है कि जानकारी वह मंगवा लें. चूंकि अभी उसको जानकारी के लिये भेजा गया है उसमें भी बिना जानकारी के उत्तर मांगना मैं नहीं समझता कि उचित होगा. अतः आपसे अनुरोध है कि शासन से जानकारी आने दें .

डॉ.गौरीशंकर शेजवार--आप तो ऐसा कह रहे हैं कि 5.00 बजे ले लें.

श्री रामनिवास रावत--किसने कहा कि 5.00 बजे ले लें.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार--आप कुछ भी मत कहिये यदि आप ऐसे कमेन्ट करेंगे, यह उचित नहीं है. मुकेश नायक जी ने भी कहा पूर्व में परम्पराएं रही हैं आज तक कभी भी ऐसी परम्परा नहीं रही आज तक स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार करने अथवा चर्चा कराने के लिये कभी भी नियमों की अवहेलना नहीं की गई और जैसा कि आपने स्वयं ने निर्देशित किया कि 2 घंटे का समय इसलिये दिया जाता है कि सरकार को अधिकृत जानकारी मंगाने के लिये पर्याप्त समय मिल जाए. यदि आप समय पर देते कार्यवाही प्रारंभ होने के 2 घंटे पूर्व देते और स्थगन प्रस्ताव आपका आता और 100 प्रतिशत आपका क्लेम था शासन 11.30 बजे तक हर हाल में आपका उत्तर विधान सभा को पहुंचा देती. दूसरी बात इन्होंने कहा कि 5.00 बजे ले लीजिये, तो क्या नियम कानून कभी भी हो जाएंगे ? आप सीनियर सदस्य हैं.

श्री मुकेश नायक--आप कार्यवाही निकालकर देख लें 5.00 बजे का हमने कहा ही नहीं है.

अध्यक्ष महोदय--यह बहस का विषय नहीं है. माननीय मंत्री जी आपकी बात आ गई है.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार--मेरा इसमें कहना है कि हम खुद इतने गंभीर नहीं है कि समय पर प्रस्ताव को भेज सकें और सदन में आप बड़ी गंभीरता की बात कर रहे हैं. आप खुद इतने गंभीर नहीं हैं कि समय पर आप स्थगन प्रस्ताव को दे पाते.

श्री मुकेश नायक--आप आरक्षण के पक्ष में हैं या विपक्ष में यह बता दें.

श्री रामनिवास रावत--माननीय मंत्री जी ने कहा कि समय पर आपने स्थगन नहीं दिया हम लोग 2 घंटे पूर्व नहीं दे पाये, इसका यह मतलब नहीं है कि उसका उत्तर जानने का अथवा चर्चा करने का स्तर समाप्त हो गया है. आज नहीं तो कल ले लीजिये.

श्री मुकेश नायक--आप कल ले लीजिये.

अध्यक्ष महोदय--अभी माननीय सदस्यों ने आग्रह किया है कि इस विषय को कल लें लें शासन से जानकारी आ जाने दें उसके बाद ही निर्णय करेंगे.

श्री रामनिवास रावत--जानकारी आप कल तक बुलवा लें अध्यक्ष महोदय,

अध्‍यक्ष महोदय- कृपा करके सचिवालय हमको चलाने दें, आप नहीं चलाएं ।

श्री रामनिवास रावत- शेजवार साहब कह रहे हैं, हम तैयार हैं, सरकार जवाब देगी ।

...... (व्‍यवधान).....

अध्‍यक्ष महोदय - आप सभी बैठ जाएं, विषय खत्‍म हो गया है, शून्‍य काल की सूचना......

पंचायत मंत्री(श्री गोपाल भार्गव) - अध्‍यक्ष महोदय, सदन की यह मान्‍य परंपरा रही है कि जब बजट सत्र चलता है तब बजट की मांगों पर चर्चा होती है और ऐसी कोई बात स्‍थगन के रूप में बीच में सामान्‍यत: नहीं ली जाती है । प्रदेश की कानून व्‍यवस्‍था भंग हो रही हों......(व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत- जी, हां, भंग हो रही हैं, आप संविधान की मूल भावना से छेड़-छाड़ कर रहे हैं । (व्‍यवधान)

डॉं गौरीशंकर शेजवार- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सदन की परंपरा रही है कि जब बजट पर पर चर्चा चल रही हो तब स्‍थगन प्रस्‍ताव नहीं लिए जाते हैं ।

श्री मुकेश नायक - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप कल का समय दे दें ।

डॉं गौरीशंकर शेजवार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूँ कि आरक्षण के प्रति, आप खुद आरक्षण पसंद नहीं करते और यदि आरक्षण पसंद करते तो साढ़े आठ बजे के पहले स्‍थगन देते, आपको इस विषय पर बात करने का कोई अधिकार नही है ।

(व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत- आप खुद आरक्षण विरोधी हो ।

श्री मुकेश नायक - आप मध्‍यप्रदेश में आरक्षण के खिलाफ बोल रहे हो, आप उस वर्ग से आते हो, यह शर्म की बात है कि आप उनके हितों के खिलाफ विधानसभा में बोल रहे हो और व्‍यवधान डाल रहे हो, उस स्‍थगन प्रस्‍ताव पर चर्चा नहीं करा रहे हो । (व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत- जिस तरह से अनुसूचित जाति, जनजाति के अधिकारों के विरूद्व बोल रहे हैं .......(व्‍यवधान)

डॉं गौरीशंकर शेजवार- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे ऊपर आरोप लगाए जा रहे हैं ।

अध्‍यक्ष महोदय- कृपया आप सभी बैठ जाएं । (व्‍यवधान)

श्री मुकेश नायक- आप उस वर्ग से आते हो, फायदा लेते हो और उसके खिलाफ बोल रहे हो । (व्‍यवधान)

डॉं गौरीशंकर शेजवार- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे ऊपर आरोप लगाए गए हैं, मुझे बोलना पड़ेगा ।

अध्‍यक्ष महोदय- श्री मुकेश नायक और डॉं साहब से मेरा अनुरोध है कि आप बैठ जाएं । माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी आप कृपया बैठाएं ।

श्री लाखन सिंह यादव- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आरक्षण का लाभ लेकर यहां बैठे हुए हैं और आरक्षण के विरोध में बोल रहे हैं ।

डॉं गौरीशंकर शेजवार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुकेश नायक ने मेरे ऊपर आरोप लगाए हैं, मुकेश नायक सबसे बड़ा आरक्षण विरोधी है,अनुसूचित जाति का सबसे बड़ा विरोधी है, उसे आगे नहीं बढ़ने दिया और आज आप चाहते हो कि आरक्षण खत्‍म हो । भारतीय जनता पार्टी आरक्षण को कभी समाप्‍त नहीं करना चाहती है । (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय- माननीय मंत्री जी से मेरा अनुरोध है कि बैठ जाएं ।

डॉं गौरीशंकर शेजवार- आरक्षण रहेगा और तुम्‍हारे मंसूबे पूरे नहीं रहेंगे ।

अध्‍यक्ष महोदय- आपकी बात आ गई है, माननीय वनमंत्री जी से मेरा अनुरोध है,कृपया अपना स्‍थान ग्रहण करें,कृपया आप बैठ जाएं ।

श्री मुकेश नायक- ये आरक्षण का विरोध कर रहे हैं, समाज के नाम पर कुसिर्यों पर बैठे हुए हो और उनके हितों पर बात नहीं करने दे रहे हो, धन, प्रतिष्‍ठा, राजनीति हासिल कर ली और उनके बारे में बोलने नहीं देते हो । ...(व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय - आप लोग बैठ जाइये, वे भी बैठ जायेंगे. आरिफ जी बैठ जाइये.(बहुत से माननीय सदस्‍य एक साथ खड़े होकर बोलने लगे)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - यह प्‍वाइंट ऑफ ऑर्डर है, यह व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न है. (व्‍यवधान)

श्री गोपाल भार्गव - अध्‍यक्ष महोदय, जिन लोगों ने शिवभानु सिंह सोलंकी को मुख्‍यमंत्री नहीं बनने दिया. शिवभानु सिंह सोलंकी आदिवासी थे, जनजाति के थे, उन लोगों को आपने मुख्‍यमंत्री नहीं बनने दिया. अब क्‍या आरक्षण (व्‍यवधान)

श्री मुकेश नायक - अब पता लगा कि शेजवार इसलिए मुख्‍यमंत्री नहीं बन पाये कि ये आरक्षण विरोधी हैं.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - अध्‍यक्ष महोदय, मेरा व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न है.

अध्‍यक्ष महोदय - मैंने प्‍वाइंट ऑफ ऑर्डर एलाउ किया. जरा, प्‍वाइंट ऑफ ऑर्डर सुन लें. (व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत - वैसे तो शून्‍यकाल है. शून्‍यकाल में प्‍वाइंट ऑफ ऑर्डर नहीं होता.

अध्‍यक्ष महोदय - शून्‍यकाल में कोई प्‍वाइंट ऑफ ऑर्डर नहीं होता. ठीक बात है. (व्‍यवधान)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - नहीं, प्रश्‍नकाल के अलावा कभी भी होता है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप इसमें देख लें. मेरी बात एक सेकेण्‍ड के लिये सुन लें कि भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह से आरक्षण की पक्षधर है.

अध्‍यक्ष महोदय - यह विषय बहस का नहीं है. आरक्षण पर कोई बहस नहीं हो रही है. मैंने किसी को एलाउ नहीं किया है. (व्‍यवधान)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - यह विषयान्‍तर करने की कोशिश की जा रही है, इसमें लिखा है. परीक्षा का प्रश्‍न-पत्र पूरी तरह से गोपनीय होता है. आपने मेरे शून्‍यकाल में व्‍यवस्‍था दे दी है. इस व्‍यवस्‍था में आप इनसे चर्चा करेंगे, सरकार 2 घण्‍टे में जवाब आपको देगी. विषय समाप्‍त हो जाता है.

अध्‍यक्ष महोदय - आप लोग बैठ जाइये. अभी एलाउ करता हूँ. डॉक्‍टर साहब अभी अति हो रही है. माननीय वन मंत्री जी आप बैठ जाइये. (व्‍यवधान)

डॉ. गौरीशंकर शेजवार (श्री मुकेश नायक की ओर इशारा करते हुए)- ये बाला बच्‍चन की खिलाफत करके नेता प्रतिपक्ष बनना चाहते हैं. आज विधानसभा में आरक्षण का विरोध कर रहे हैं. (व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत - डॉक्‍टर साहब चर्चा करवा लीजिये. (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्रीगण बैठ जाइये.

श्रीमती शीला त्‍यागी - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह भारतीय संविधान की परम्‍पराओं के विरूद्ध है, कोई भी जनहित के मुद्दे आते हैं तो चर्चा में शामिल किया जाना चाहिए. दोषी व्‍यक्तियों को सस्‍पेंड किया जाना चाहिए.

अध्‍यक्ष महोदय - आप बैठ जाइये. भार्गव जी बैठ जाइये. कृपा कर बिना अनुमति के नहीं बोलें. माननीय महोदय, कम से कम सुनने की आदत डालिये. उन्‍हीं को बोला है. उसमें भी एतराज है तो बैठ जाता हूँ. मेरा संसदीय कार्य मंत्री जी से भी अनुरोध है कि व्‍यस्‍था आने दें और सभी उनके सदस्‍यों को भी समझायें और प्रतिपक्ष के नेताजी से, माननीय इस विषय पर कृपा कर बैठ जाएं. मैंने अनुमति नहीं दी है. मैंने श्री अजय सिंह जी को अनुमति दी है.

श्री अजय सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो स्‍थगन, हम लोगों ने प्रस्‍तुत किया है. श्री मुकेश नायक, श्री रामनिवास रावत, श्री जितु पटवारी और मैंने, बहुत संवेदनशील विषय है. इसमें आपने कहा कि चर्चा तब लेंगे, जब जानकारी आ जायेगी.

अध्‍यक्ष महोदय - मैंने चर्चा कर लेंगे का नहीं कहा, निर्णय कर लेंगे. थोड़ा संशोधन कर लीजिये.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार - अब सिर्फ अजय सिंह जी को बोलने दें. ये तो अनुसूचित जाति के नहीं हैं. केवल तुम अनुसूचित जाति के लोगों को दबाने की बात कर रहे हो.

श्री मुकेश नायक - डॉक्‍टर साहब, आप अनुसूचित जाति के विरोधी हो. आप आरक्षण के नाम पर मंत्री बन गये हैं. अगर आरक्षण नहीं होता सरपंच नहीं बन पाते.

श्री ऊषा चौधरी - आप तो अनुसूचित जाति के हो. आप तो संविधान के अन्‍दर की बात करें.

अध्‍यक्ष महोदय - श्री अजय सिंह जी बोलें.

श्री रामेश्वर शर्मा -- अध्यक्ष महोदय, पूरी कांग्रेंस पार्टी इस बात से डर रही है कि देश के प्रधानमंत्री, नरेन्द्र मोदी जी ..

अध्यक्ष महोदय -- नहीं, सिर्फ अजय सिंह जी का लिखा जायेगा.

श्री रामेश्वर शर्मा -- .. और प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह कहा है कि जब तक भारतीय जनता पार्टी सरकार में है, कोई (XXX) आरक्षण खत्म नहीं कर सकता. इसलिये ये भय ग्रस्त हैं.

..(व्यवधान)..

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- शर्मा जी, क्या आप (XXX) असहमत हैं.

अध्यक्ष महोदय -- तिवारी जी, बैठ जाइये.

श्री सुन्दरलाल तिवारी -- शर्मा जी, आप (XXX) असहमत हो कि नहीं, बताइये.

अध्यक्ष महोदय -- यह विलोपित कर दीजिये. आप नाम नहीं ले सकते.

श्री रामेश्वर शर्मा -- तिवारी जी, संविधान की बात संविधान के अनुसार रखें और अगर आपको और फोरम पर चर्चा करनी है, तो हम उस फोरम पर भी चर्चा करने के लिये तैयार हो जायेंगे.

श्री अजय सिंह -- अध्यक्ष महोदय, यह आपस में क्या चर्चा हो रही है.

श्री रामेश्वर शर्मा -- अजय सिंह जी, (श्री सुन्दरलाल तिवारी की ओर इशारा करते हुए) आप उनको समझाइये ना.

श्री अजय सिंह -- आप थोड़ा बैठिये.

अध्यक्ष महोदय -- सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिये स्थगित.

(विधान सभा की कार्यवाही 12.06 बजे से 10 मिनट के लिये स्थगित हुई.)

 

12.18 बजे विधानसभा की कार्यवाही पुन: समवेत हुई.

 

[अध्यक्ष महोदय(डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए]

 

अध्यक्ष महोदय -- मेरा माननीय वरिष्ठ सदस्य अजय सिंह जी से अनुरोध है कि चूंकि अब वह विषय समाप्त हो गया है इसलिये कोई वाद विवाद उस विषय पर न करें. जैसा कि मैंने पहले ही कहा है कि विषय की जानकारी आ जाये उसके बाद में निर्णय करेंगे. (श्री अजय सिंह द्वारा हाथ उठाये जाने पर) ठीक है, अजय सिंह जी को सुन लेंते हैं, लेकिन कोई इस पर प्रतिक्रिया नहीं देगा.

श्री अजय सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं सिर्फ आपसे यह गुजारिश कर रहा था कि आपने जो निर्णय दिया है कि जानकारी आने पर विचार कर लेंगे. सदन की भावना है यह बहुत ही संवेदनशील मामला है, संविधान के ऊपर आक्षेप आ रहे हैं, इसलिये जानकारी आने पर इस विषय को आप चर्चा में ले लें. इतनी ही आपसे गुजारिश है.

(श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा के खडे होने पर)

अध्यक्ष महोदय-- अब नहीं, प्लीज.

श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा -- अध्यक्ष महोदय, मैं इस मामले को नहीं ले रहा हूं. ओला पीडि़त वाला मामला है.आप उसको लेंगे ? मैंने 8.20 पर स्थगन दिया है.

अध्यक्ष महोदय--(हंसते हुये) सबमें हां अभी करवा लेंगे आप. आप उस विषय को आने दें, आने के लिये मैने कहा है कि आप अपनी बात कह लेना, यह मैं कह रहा हूं.

श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा- आप मौका देंगे सर.

अध्यक्ष महोदय-- हां मौका देंगे.

 

12.19 बजे नियम 267-क के अधीन विषय

(1) इंदौर जिले में लाड़ली लक्ष्मी योजना के लाभ संबंधी प्रमाण पत्रों का

वितरण न होना.

श्री सुदर्शन गुप्ता(इन्दौर-1) माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी शून्यकाल की सूचना का विषय इस प्रकार है :-

मध्यप्रदेश शासन की महत्वाकांक्षी लाड़ली लक्ष्मी योजना सरकारी कार्यालयों में विभागीय लापरवाही के कारण दम तोड़ती नजर आ रही है. 1 अप्रैल 2007 से शुरू की गई, लाड़ली लक्ष्मी योजना में मौजूदा दिनांक तक अकेले इन्दौर में 10 हजार से ज्यादा प्रमाण-पत्रों का वितरण नहीं हो पाया है. जिससे नागरिकों में भारी रोष व्याप्त है.

लाड़ली लक्ष्मी योजना में इन्दौर में मौजूद सभी विकासखण्डों में 3 माह पूर्व आवेदन करने के बाद भी विभागीय पैंडेंसी 10 हजार पार कर चुकी है, हालांकि विभागीय अधिकारियों ने इसे रूटिन कार्य बताते हुये संतोष जाहिर किया है, वहीं योजना का लाभ न मिल पाने से हितग्राहियों में निराशा का भाव झलकने लगा है. लाड़ली लक्ष्मी योजना को अब ई-लाड़ली करते हुये पूरी प्रक्रिया आनलाईन कर दी है. अब आवेदक आवश्यक दस्तावेजों के साथ सीधे या आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से परियोजना कार्यालय, लोक सेवा केन्द्र या किसी भी इन्टरनेट कैफे से आवेदन कर पंजीयन कर सकता है. असल परेशानी आवेदन करने के बाद शुरू होती है. आवेदन स्वीकृति के लिये सभी दस्तावेजों का परीक्षण परियोजना कार्यालय से किया जा रहा है. अब यहां हालात यह है कि इन्दौर विकासखण्डों में डाटा तो तैयार है, लेकिन उसके प्रिंट होने और दस्तावेज प्रमाणीकरण की प्रक्रिया धीमी होने से यह प्रमाण पत्र अटक रहे हैं. प्रदेश शासन व जिला प्रशासन को इस ओर ध्यान देते हुये लाड़ली लक्ष्मी योजना के प्रमाण पत्र शीघ्र हितग्राही को उपलब्ध करना अति आवश्यक है.

 

 

(2) प्रदेश की बांझ महिलाओं के टेस्‍ट ट्यूब बेवी की व्‍यवस्‍था की जावे

 

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया (मंदसौर)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी शून्‍यकाल की सूचना का विषय इस प्रकार है-

बांझपन से ग्रसित शिकार महिलाएं सामाजिक प्राताड़ना, उलाहनों व मानसिक वेदनाओं से ग्रसित रहती हैं, ऐसी महिलाओं का दाम्‍पत्‍य जीवन सुखमय भी नहीं रह पाता है. कई महिलाओं का दाम्‍पत्‍य जीवन बीच में टूट जाता है उन्‍हें संतान हीनता के कारण दम्‍पत्‍य अधिकारों से पृथक तथा तलाक जैसी प्रक्रिया पर भी मजबूर होना पड़ता है, शासन ऐसी महिलाओं के स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की नई व्‍यवस्‍था जोड़कर टेस्‍टट्यूब बेबी अथवा संपूर्ण उपचार बांझपन से मुक्‍त होने की व्‍यवस्‍था कर महिलओं को सामाजिक न्‍याय प्रदान करें. शासन बांझपन से ग्रसित महिलाओं के सम्‍पूर्ण उपचार की व्‍यवस्‍था सुनिश्चित करे.

 

(3) छतरपुर जिले के चंदला क्षेत्र में सूखा राहत राशि में वितरण में अनियमितता.

 

श्री आर.डी. प्रजा‍पति (चंदला)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी शून्‍यकाल की सूचना का विषय इस प्रकार है-

छतरपुर जिले की चंदला विधान सभा क्षेत्रांतर्गत पानी न बरसने के कारण रवी और खरीब की फसल की बोनी नहीं हो पाई जिससे सूखा राहत (मुआवजा) की राशि के वितरण तहसील गौरिहार, चंदला, लवकुशनगर में पदस्‍थ तहसीलदार व पटवारियों द्वारा कोई मापदंड निर्धारित न करते हुये जिस किसान से जिस तरह की रिश्‍वत प्राप्‍त हुई उसी को आधार मानते हुये मनमानी से सूखा राहत राशि का वितरण किया गया और मजबूरन धरना प्रदर्शन हो रहे हैं. धरना प्रदर्शन के चलते कुछ पटवारियों को निलंबित भी किया गया है जिससे किसानों में भारी आक्रोश व्‍याप्‍त है.

अध्‍यक्ष महोदय-- श्री रमाकांत तिवारी, (अनुपस्थित).

 

 

 

(4) सागर जिले के ग्रामों में विद्युत कनेक्‍शन काटे जाना.

 

इंजी. प्रदीप लारिया (नरयावली)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी शून्‍यकाल की सूचना का विषय इस प्रकार है-

नरयावली विधानसभा क्षेत्र जिला सागर के अधिकांश गांवों में ऊर्जा विभाग/बिजली विभाग द्वारा गांवों के विद्युत कनेक्‍शन विच्‍छेद किये जा रहे हैं. विच्‍छेद करने का कारण गांवों के उपभोक्‍ताओं द्वारा बिल का भुगतान न करना है. वर्तमान में ग्रामीणजन प्राकृतिक प्रकोप के कारण फसल का उत्‍पादन न होना एवं मुआवजा राशि न मिलने के कारण परेशान हैं, फसल आने पर विद्युत बिल का भुगतान करने तैयार हैं. वर्तमान में हाईस्‍कूल एवं हायर सेकेण्‍ड्री परीक्षा समीप है. विभाग द्वारा विद्युत कनेक्‍शन या ट्रांसफार्मर उठा ले जाने के कारण छात्र-छात्राओं एवं नल जल योजनायें प्रभावित होंगी. छात्र छात्राओं के भविष्‍य को देखते हुये विद्युत विच्‍छेद नहीं किया जावे. ऐसा करने से ग्रामीणों में रोष व्‍याप्‍त है.

 

(5) श्‍योपुर जिला मुख्‍यालय में 220 के.व्‍ही का उपकेन्‍द्र स्‍थापित किया जावे.

श्री दुर्गालाल विजय (श्‍योपुर)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी शून्‍यकाल की सूचना का विषय इस प्रकार है-

 

 

 

 

 

(6) जावरा शहर में बहने वाली पीलिया खाल को प्रदुषण मुक्त किये जाने.

 

श्री राजेन्द्र पाण्डेय(जावरा)--अध्यक्ष महोदय, जावरा शहर मध्य स्थित बहकर जाने वाली पीलिया खाल शहर के एक बड़े गंदे नाले के रुप में परिवर्तित होकर पर्यावरण को प्रदुषित कर,गंभीर बीमारियां फैलाने का कारण बन चुकी है. चूंकि नाले के दोनों ओर घनी आबादी एवं आवासीय क्षेत्र होकर आमजन प्रदूषित जल पीने एवं प्रदूषित पर्यावरण के कारण गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो रहा है. तत्कालीन वर्षों में इसके कारण लगभग 116 बच्चे पोलियोग्रस्त होकर विकलांग हुए, यह प्रमाणित भी हुआ है. अतएव पीलिया खाल को प्रदूषण मुक्त किये जाने की कार्ययोजना की पहल शीघ्र की जावे, ताकि आमजन की स्वच्छता एवं स्वास्थ्य की पूर्ति की जा सके.

अध्यक्ष महोदय--श्री अरुण भीमावद (अनुपस्थित)

(7) शालेय शिक्षा विभाग द्वारा 'वह अमर छलांग ' योजना बंद किये जाने.

श्रीमती अर्चना चिटनिस(नेपानगर)--शालेय शिक्षा विभाग द्वारा वह अमर छलांग नामक कार्यक्रम चलाकर छात्रों को खेल तथा स्वास्थ्य के साथ साथ देश के ऐतिहासिक प्रसंगों के माध्यम से देश भक्ति की भावना से परिचित कराने का कार्य कराया जा रहा था परंतु उक्त बहुउद्देशीय योजना को बंद करने से शालेय स्तर से ही विद्यार्थियों में देश प्रेम की भावना तथा इतिहास से जुड़ाव खत्म हो रहा है जिससे उनमें सार्वजनिक जीवन में अवांछित लोगों को नायक मानने की प्रवृत्ति पनप रही है जो बहुत चिंता का विषय है. ऐसी स्थिति में सम्पूर्ण समाज में उक्त योजना को निरंतर चलायमान ना रखने से बहुत चिंता तथा रोष व्याप्त है.

अध्यक्ष महोदय-- श्रीमती सरस्वती सिंह(अनुपस्थित)

श्री सत्यपाल सिंह सिकरवार(सुमावली)--अध्यक्ष महोदय, मेरे ग्वालियर और चम्बल संभाग में इस प्रकार ओलावृष्टि हुई है, जिसकी कल्पना भी हम लोग नहीं कर सकते. सुबह जब हम सदन में आये और आपसे से भी मैंने भेंट की. मुझे लगा कि अगर सदन में सबसे पहले किसी विषय पर चर्चा होगी तो प्रदेश के जो ओला पीड़ित किसान हैं, दुखी किसान हैं, उनकी चर्चा होगी. लेकिन हमारे विपक्ष भाईयों ने..

अध्यक्ष महोदय--आप किसी पर आरोप न लगायें. आप किसानों की बात कहें.

श्री सत्यपाल सिंह सिकरवार--अध्यक्ष महोदय, मेरे सुमावली विधानसभा में, जौरा,मुरैना,अटेर,मेहगांव,सबलगढ़ और मुझे जहां तक मालूम है कि प्रदेश के बहुत सारे हिस्सों में ओलावृष्टि हुई है जिसके कारण किसानों की फसल पूरी तरह बरबाद हुई है. सुबह मेरे पास लोगों के फोन आये कि भाई साहब ! इस कदर फसल बरबाद हुई है कि एक भी दाना नहीं बचा.

अध्यक्ष महोदय--ठीक है. आपकी बात रिकार्ड में आ गई.

श्री सत्यपाल सिंह सिकरवार--अध्यक्ष महोदय, मैं सदन में अपने मित्रों से यह कहना चाहता हूं कि पहले किस विषय पर चर्चा होना चाहिए. आज किसान दुखी है. जिसके आंसू अभी तक हम लोग नहीं पोंछ पाये, उनकी चर्चा होना चाहिए. जितू भाई ने एक कागज का पन्ने पर हंगामा खड़ा कर दिया.

अध्यक्ष महोदय--अब कुछ रिकार्ड में नहीं आयेगा.बैठ जाईये.

श्री गिरीश भण्डारी ( नरसिंहगढ़ )- अध्यक्ष महोदय, मेरे राजगढ़ जिले के नगर सारंगपुर में एक नाबालिग छात्र अभिषेक टेलर को पुलिस द्वारा बिना कोई कार्यवाही के, बिना किसी आरोप के..(व्यवधान).. वह छात्र 4 दिन से गायब है, उसकी परीक्षा चल रही है. अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे समय दिया है, वह छात्र 4 दिन से गायब है और पुलिस ने अकारण धारा 151 की कार्यवाही उस पर की है. अध्यक्ष महोदय, राजगढ़ जिले के नगर सारंगपुर के एक नाबालिग छात्र अभिषेक टेलर जो कि कक्षा 9वीं का छात्र है और जिसकी परीक्षा चल रही है, उसको एक वाट्स-अप के मैसेज के आधार पर वहां के क्षेत्रीय विधायक ने पुलिस पर दबाव बनाकर उस छात्र को जेल में बंद करवा दिया. वह छात्र जमानत होने के बाद आज तक लापता है.

अध्यक्ष महोदय - नहीं, इस तरह से आरोप नहीं, यह विलोपित कर दें. अब आप बैठ जाइए.

श्री गिरीश भण्डारी - अध्यक्ष महोदय, वह छात्र 4 दिन से लापता है, उसकी 9 मार्च को परीक्षा है.

अध्यक्ष महोदय - जो आपने आरोप लगाया है, वह विलोपित कर दिया है, बाकी बात आ गई.

श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा (मुंगावली) - अध्यक्ष महोदय, मैंने 8 बजकर 20 मिनट पर स्थगन प्रस्ताव दिया है, न केवल मुंगावली, अशोकनगर में, वरन् प्रदेश के अधिकांश जिलों में भिण्ड, मुरैना से लेकर, विन्ध्यप्रदेश से लेकर, पचमढ़ी और चारों ओर जबर्दस्त ओला वृष्टि और अतिवृष्टि हुई है, उसके कारण किसानों का बहुत नुकसान हुआ है. पहले ही किसानों को बीमा की राशि और मुआवजे की राशि नहीं मिली है और यह कहर टूट पड़ा है. मुझे नहीं लगता कि यह सरकार के जो कर्मचारी हैं, वे हर जगह जा नहीं रहे हैं. मैं मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि वह पटवारियों और कर्मचारियों को हर जगह भेजें और सही आकलन करके उनको मुआवजा देने का इंतजाम करें.

श्री घनश्याम पिरोनियां (भाण्डेर) - अध्यक्ष महोदय, भाण्डेर विधान सभा क्षेत्र के गौदन, रमपुरा, कुतौली, काशीपुरा, कमलापुरी, उड़ीना, भलका, इरौनी, आदि सहित अनेक ग्रामों में अतिवृष्टि और ओलावृष्टि हुई है. फसलें बर्बाद हुई हैं. इससे पूर्व भी 3 वर्षों से हमारा विधान सभा क्षेत्र से जूझ रहा है. मेरा निवेदन है कि राजस्व अमले को भेजकर उसकी एक बार जांच हो जाए और किसानों को उसका मुआवजा मिल जाए, यही निवेदन में करता हूं.

इंजी. प्रदीप लारिया (नरयावली) - अध्यक्ष महोदय, 5 तारीख को शनिवार को रात के लगभग 9 और 10 बजे के बीच में नरयावली विधान सभा क्षेत्र के लगभग 10 गांवों में जिसका मैं उल्लेख करना चाहता हूं कि ध्वाब, मैहर, लोहारी, सेवारासेवारी, कानौनी, मढ़ियागोंट सेवासासेवारी, पिपरियाखंगार, लगभग 10 गांवों में बड़े-बड़े ओले गिरे हैं. अध्यक्ष महोदय, रविवार को मुझे जैसे ही सूचना मिली, मैं गांव में गया तो गांव के लोगों ने बताया कि कम से कम 50 ग्राम से लेकर 100 ग्राम के ओले, जो शनिवार को गिरे थे, वह रविवार को दोपहर में भी वह ओले पिघले नहीं थे. किसानों की फसल बर्बाद हो गई है. अध्यक्ष महोदय, मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि उसका सर्वे हो जाय और उनको उसका जल्दी से मुआवजा मिल जाय.

श्री संदीप जायसवाल - मेरे क्षेत्र में भी यही स्थिति है. (व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय - सब जगह यही बात है. आपका क्या विषय है?

डॉ. कैलाश जाटव (गोटेगांव) - अध्यक्ष महोदय, गोटेगांव विधान सभा में 6, 7 और 8 तारीख को लगातार तीन दिन से ओलावृष्टि हुई है, पूरे क्षेत्र में किसानों का नुकसान हुआ है. मेरा निवेदन है कि जांच दल गठित करके वहां की जांच कराई जाय और किसानों को मुआवजा दिलवाया जाय. नरसिंहपुर जिले में 3 दिन ओलावृष्टि हो रही है. कल गोटेगांव में इतनी अधिक ओलावृष्टि हुई है कि पूरी फसल नष्ट हो गई है.

डॉ. नरोत्तम मिश्र - अध्यक्ष महोदय, सभी जगह की मांग है, सभी जगह के सर्वे के भी आदेश दे दिये हैं, सभी जगह के आंकलन के आदेश भी दे दिये हैं, कर्मचारी- अधिकारी भी भेज दिये हैं. एक ही विषय आ रहा है, अध्यक्ष महोदय.

डॉ गोविन्द सिंह (लहार ) -- अध्यक्ष महोदय मुरैना जिले में रेत माफिया द्वारा ट्राली पकड़कर एक वनकर्मी नरेन्द्र शर्मा की हत्या कर दी है. ..(व्यवधान) पूराअवैध उत्खनन हो रहा है.

श्री सुन्दरलाल तिवारी ( गुढ़ )-- अध्यक्ष म होदय रीवा जिले में भी अतिवृष्टि और ओलावृष्टि की वजह से फसलों का नुकसान हो गया है, पूरा रीवा जिला प्रभावित हुआ है, साथ ही हमारा विधान सभा गुढ़ हुआ है बरिया, बासी, इमरती, देवरा, थमरा, पड़ोखर बमहगना इन गावों में अरहर गेहूं की फसलें खराब हो गई हैं. सर्वे करवाकर इन किसानों को मुआवजा दिलाने का कष्ट करें.

अध्यक्ष महोदय -- सभी माननीय सदस्यों ने यह ओले के संबंध में अपनी अपनी बात रखी है और यहां पर चर्चा रखने की भी बात कहीहै माननीय राजस्व मंत्री जी इस विषय पर कुछ कह रहे हैं.

राजस्व मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) -- अध्यक्ष महोदय माननीय सदस्यों ने जो चिंता व्यक्त की है पूरे प्रदेश में वहां के कलेक्टरों को निर्देश दिये जा चुके हैं, जैसे ही खबर मिली की ओले गिरे हैं मैंने भी कलेक्टरों से चर्चा की है, और राजस्व, कृषि और पंचायत तीनों विभागों के अधिकारी सर्वे के लिए निकल पड़े हैं, शासन की तरफ से जैसा कि पूर्व मंत्री श्री महेन्द्र सिंह जी कह रहे थेतो पुरानी राशि भी बंट गई है, किसानों को किसी तरह की कोई कठिनाई न हो इसके निर्देश दिये गये हैं पारदर्शिता से सर्वे करें, और तुरंत किसानों को सहायता दी जायेगी. हमारे माननीय सदस्य उसमें कोई चर्चा रखना चाहते हैं तो उसके लिए भी हम तैयार हैं पिछली बार भी विपक्ष की तरफ से मामला नहीं आया था तो मैंने स्वयं पहल करके विधान सभा में चर्चा करवाई थी. हम तैयार हैं मध्यप्रदेश की सरकार किसानों की सरकार है.

अध्यक्ष महोदय -- अब कोई नहीं बोलेगा श्री बाला बच्चन जी को एलाऊ किया है.(व्यवधान)...( श्री ओमकार सिंह मरकाम जी के द्वारा अपनी बात बोलने का कहने पर, ) नहीं, अब वह विषय मंत्री जी के बोलने के बाद में समाप्त हो गया है. अब मैंने केवल बाला बच्चन जी को एलाऊ किया है. मंत्री जी चर्चा कराने के लिए भी तैयार हैं. (..व्यवधान)......... कृपया सभी सदस्य बैठ जायें. दिनेश राय जी ओमकार सिंह जी सभी माननीय सदस्य बैठ जायें.मैंने केवल श्री बाला बच्चन जी को एलाऊ किया है.

श्री बाला बच्चन -- माननीय अध्यक्ष महोदय मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से और सरकार से आग्रह करना चाहता हूं कि जिस तरह से अभी राजस्व मंत्री जी ने अपने ब्यान में कहा है कि राजस्व, कृषि और पंचायत विभाग के कर्मचारी खेतों तक पहुंचे हैं. बड़वानी जिले की मेरी राजपुर विधान सभा की जानकारी लेकर आया हूं. माननीय मंत्री जी सरकारी तंत्र खेतों तक नहीं पहुंचा है. बड़वानी जिला, बैतूल, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, मण्डला और सिवनी के लिए सरकारी तंत्र खेतों तक पहुंचना आवश्यक है. सर्वे करायें और मुआवजा राशि जल्दी दिलवायें.

अध्यक्ष महोदय -- आपकी बात पर, सभी माननीय सदस्यों की बात की चिंताओं को लेकर माननीय राजस्व मंत्री जी ने एक वक्तव्य दिया है. उस पर आपने अपनी प्रतिक्रिया भी दे दी. अब यहां पर कोई बहस नहीं हो रही है. आपसे अनुरोध है कि कृपया सहयोग करें...

( माननीय श्री ओमकार सिंह मरकाम जी बिना माइक के लगातार बोलते रहने पर )

श्री ओमकार सिंह मरकाम -- ( X X X )

अध्यक्ष महोदय -- नहीं लिखा जायेगा. अब हम आगे बढ़ गये हैं. हमेशा समय देते हैं आपको. इस तरह से जिद नहीं करेंगे हमेशा समय देते हैं. ओमकार सिंह जी का कुछ भी रिकार्ड में नहीं आयेगा.

 

 

समय 12.39 बजे.

पत्रों का पटल पर रखा जाना.

अटल बिहारी बाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय का द्वितीय वार्षिक प्रतिवेदन 2013-14 तथा

महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय चित्रकूट का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2013-14 एवं 2014-15.

 

उच्च शिक्षा मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) -- अध्यक्ष महोदय मैं (क) अटल बिहारी बाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2011 ( क्रमांक 34 सन् 2011 ) की धारा 44 की उपधारा (2) की अपेक्षानुसार अटर बिहारी बाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय का द्वितीय वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2013-14 तथा

(ख) - चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय अधिनियम, 1991 (क्रमांक 9 सन् 1991 ) की धारा 36 की उपधारा (5) की अपेक्षानुसार महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय चित्रकूट जिला सदना का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2013-14 एवं 2014-15 पटल पर रखता हूं.

 

श्री ओमकार सिंह मरकाम -- (xxx)

अध्‍यक्ष महोदय -- अब आगे बढ़ गए हैं, कृपा करके सहयोग करें, हमेशा आपको समय देते हैं.

श्री ओमकार सिंह मरकाम -- (xxx)

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, इस तरह से जिद नहीं करेंगे आप, प्‍लीज. ध्‍यानाकर्षण की सूचना. श्री कैलाश चावला.

श्री ओमकार सिंह मरकाम -- (xxx)

अध्‍यक्ष महोदय -- ओमकार सिंह मरकाम जी का कुछ रिकार्ड में नहीं आएगा.

श्री बाला बच्‍चन -- अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट का समय दे दीजिए माननीय विधायक जी को.

श्री ओमकार सिंह मरकाम -- (xxx)

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, दे दिया समय, अब पीछे नहीं जाएंगे. सभी सदस्‍यों को वही बोलना है.

श्री बाला बच्‍चन -- अध्‍यक्ष महोदय, वे ऐसे क्षेत्र से चुनकर आते हैं, उनको एक मिनट का समय दे दीजिए.

अध्‍यक्ष महोदय -- उनकी बात आ गई रिकार्ड में, अब पीछे नहीं जाएंगे, इस तरह से परंपराएं ठीक नहीं होंगी.

श्री ओमकार सिंह मरकाम -- (xxx)

अध्‍यक्ष महोदय -- जी नहीं, आप कृपया शांति रखें, दूसरों को बोलने दें. बिल्‍कुल नहीं, कुछ रिकार्ड में नहीं आएगा.

 

 

 

12.41 बजे ध्‍यान आकर्षण

(1) नीमच जिले के मनासा क्षेत्र में बिजली के बिल के नाम पर लोगों को परेशान

किया जाना

श्री कैलाश चावला-- अध्‍यक्ष महोदय, मेरी ध्‍यानाकर्षण की सूचना का विषय इस प्रकार है -

 

12.42 बजे गर्भगृह में प्रवेश एवं बहिर्गमन

श्री ओमकार सिंह मरकाम, सदस्‍य द्वारा गर्भगृह में प्रवेश एवं बहिर्गमन

श्री ओमकार सिंह मरकाम -- (xxx)

(श्री ओमकार सिंह मरकाम, सदस्‍य अपनी बात कहते हुए अपने आसन से उठकर गर्भगृह में आए तथा कुछ ही क्षण पश्‍चात् सर्वश्री बाला बच्‍चन एवं रामनिवास रावत, सदस्‍यों द्वारा गर्भगृह में आकर उन्‍हें अपने आसन पर जाने की समझाइश दी गई किंतु श्री ओमकार सिंह मरकाम, सदस्‍य द्वारा उनकी बात को न सुने जाने के विरोध में सदन से बहिर्गमन किया गया.)

 

ऊर्जा मंत्री (श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 


 

 

 

 

श्री कैलाश चावला-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी का जवाब मैंने सुना. मूल बात छोड़कर सब बातें जवाब में हैं. मैंने न तो यह पूछा कि नीमच जिले में क्या हुआ, आपने नीमच जिले का उल्लेख कर दिया. मैंने केवल मनासा विधानसभा क्षेत्र की जानकारी आपसे पूछी थी. मैंने आपसे यह भी नहीं पूछा था कि इसके प्रावधान अपील के क्या क्या हैं. आपने अनावश्यक रुप से एक पैरा और उसमें जोड़ दिया. मूल बात यह है कि जो प्रकरण बनाया गया, वह जो नोटिस मिला है, उसमें लिखा है कि विद्युत चोरी की गयी जबकि आपके जवाब में यह नहीं आ रहा है कि विद्युत चोरी की गयी. नोटिस जिस आधार पर जारी किया गया, उसमें विद्युत चोरी की बात आपने उल्लेखित की है और इसमें आप कह रहे हैं कि ऐसी व्यवस्था की गयी थी. मेरा सीधा सीधा मंत्री जी से प्रश्न है कि जिस समय निरीक्षण किया गया, क्या सिंचाई फीडर से इण्डस्ट्री चल रही थी? सिंचाई फीडर क्या उस समय चालू था जिसको आरोप लगाया जा रहा है कि सिंचाई फीडर से हम इण्डस्ट्री चला रहे थे तो क्या यह उपभोक्ता वैसा कर सकता था अगर सिंचाई फीडर बंद था तो, इसकी जानकारी मंत्री जी दें।

श्री राजेन्द्र शुक्ल--- माननीय अध्यक्ष महोदय, जवाब तो नीमच जिले के मनासा विधानसभा से जुड़ा हुआ ही दिया गया है. जहाँ तक चावला जी का कहना है कि सिंचाई के फीडर में जब 10 घन्टे के अलावा घन्टे होते हैं, उस समय क्या कृषि वाले, एग्रीकल्चर वाले में वह कृषि की बिजली जा नहीं सकती थी. इसमें जो मामला सामने आया है , वह कृषि फीडर के एलटी लाइन को , इंडस्ट्रियल लाइन के एलटी लाइन तक पहुंचाना और इंडस्ट्रियल के एलटी लाइन से कृषि तक पहुंचाने का मामला है. यह एक तरह से इनफ्लो और आउटफ्लो दोनों का अरेजमेंट उसमें प्राइमाफेसी दिखाई देता है. मैं सीधे-सीधे आपकी बात को नहीं काट रहा हूं लेकिन जो रिपोर्ट आई है उसके आधार पर बिजली जब चाहे एग्रीकल्चर फीडर से इंडस्ट्रियल में पहुंचाई जा सकती थी क्योंकि दो-तीन सौ मीटर का ही अंतर है. इस प्रकार का यह अरेजमेंट है,एक नीम का पेड़ है ,जिसमें एलटी लाइन लाकर वहाँ पर पहुंचाई गई और इंडस्ट्रियल से भी एलटी लाइन वहाँ पहुंचाई गई और आवश्यकतानुसार उसको जोड़ने की व्यवस्था के आधार पर वह बिजली इधर से उधर फ्लो हो सकती थी. तो इसलिए जब बात पकड़ में यहाँ पर आई कि जब मीटर में एमआरआई मीटर रीडिंग इंस्ट्रूमेंट के माध्यम से मीटर में आजकल एक सिम का प्रावधान कर दिया जाता है, उसमें यह निकाला जा सकता है कि पर्टीकुलर टाइम पर ....

श्री कैलाश चावला-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं सीधा कहना चाहता हूं कि जो विद्युत चोरी का आरोप लगाया गया, जब पंचनामा बनाया गया मेरे पास उसी डीसी का एक पत्र का जिसमें लिखा गया है कि इस समय बिजली का सप्लाई बंद था, सिंचाई का. तो जब पंचनामा बना तब सिंचाई का बिजली सप्लाई बंद था तो फिर चोरी करने का सवाल कहाँ उठता है, मैं सीधा यह सवाल पूछ रहा हूं. क्या व्यवस्था थी क्या व्यवस्था नहीं था यह सवाल नहीं है. मेरी पास बंदूक थी पर मैंने मारी हो तब ना. इससे क्या मतलब है. आपके अधिकारी ने जिस समय निरीक्षण किया क्या सिंचाई की लाइट से उसने इंडस्ट्री चलती हुई पाई यह सीधा जवाब दे दीजिये आप.

श्री राजेन्द्र शुक्ल--- अध्यक्ष महोदय, सिंचाई की बिजली से इंडस्ट्री चलाने की आवश्यकता इसलिए नहीं है क्योंकि इंडस्ट्रियल फीडर में तो आलरेडी 24 घंटे बिजली देने की व्यवस्था है . आवश्यकता हो सकती है कि इंडस्ट्री की बिजली से हम सिंचाई का उपयोग करें यदि 10 घन्टे हमको अपर्याप्त लगते हैं. लेकिन इसमें कुल मिलाकर जो इंडस्ट्रियल मीटर है वह पूरा रीडिंग इसलिए नहीं ले पा रहा था क्योंकि उसमें वोल्टेज , तीन फेज में से एक फेज में वोल्टेज जीरो बता रहा था जब एमआरआई इंस्ट्रूमेंट ने जो भी आंकड़े सामने रखे हैं. फिर भी माननीय चावला साहब बहुत ही वरिष्ठ सदस्य हैं और बहुत ही हाई लेवल का टेक्नीकल मामला है इसलिए आपके पास भी जो प्रमाण हैं, विभाग ने जो प्रमाण दिये हैं, उस पर हम लोग अलग से बैठकर उसमें आपके तर्कों का समावेश करते हुए समाधान कर लेंगे. यदि किसी ने कुछ गलत किया है तो गलत करना तो स्वीकार नहीं किया जा सकता है.

श्री कैलाश चावला--- यदि गलत किया तो गलत स्वीकार करना ही पड़ेगा आपको कि गलत किया है, क्यों नहीं किया जा सकता है, हम इसीलिये तो प्रकरण आपके पास लाये हैं.

श्री राजेन्द्र शुक्ल-- मेरा आशय यह है कि यदि किसी ने गलत किया है तो उसको स्वीकार नहीं किया जाएगा उसके परिणाम स्वरूप उसको दंड दिया जाएगा.

अध्यक्ष महोदय-- वह उपभोक्ता की कह रहे हैं और आप सरकार की कह रहे हैं गलत करने का उनका अलग अलग मत है. वह कह रहे हैं कि उपभोक्ता ने गलत किया है और आप कह रहे हैं कि सरकार ने गलत किया है दोनों ही स्वीकार हैं , दोनों में गलती स्वीकार है.

श्री कैलाश चावला--- अध्यक्ष महोदय, मैं सरकार को गलत नहीं कह रहा हूं. मैं यह कह रहा हूं कि जब सिंचाई का फीडर बंद था केवल संभावना के आधार पर कोई प्रकरण नहीं बनाया जा सकता है.

अध्यक्ष महोदय-- मंत्री जी कह रहे हैं कि आपके साथ चलकर उसकी पूरी जांच करा लेंगे.

श्री कैलाश चावला--- अध्यक्ष महोदय,मेरा सवाल पूरा नहीं हुआ हूं मैं यह भी निवेदन करना चाहता हूं कि जो चेंज ओवर की बात कही गई है , क्या उस चेंज ओवर स्विच को जप्त किया गया यदि जप्त किया गया हो तो मैं इस बात के लिए तैयार हूं कि उसकी जांच हो. जो इंस्ट्रूमेंट था क्या उसको जप्त किया . जो आप लाइन बता रहे हैं कि केबल डाली गई थी क्या आपने उसको जप्त किया, जब एमआरआई आपने की तो उपभोक्ता वहाँ उपस्थित था, क्या आपने पंचनामे के साथ एमआरआई की कापी उसको दी , आपने उसको कुछ नहीं दिया और आपने एक बिल जारी कर दिया, यह कैसे संभव है? क्या मनमानी चलेगी?

अध्यक्ष महोदय-- अब उसका उत्तर ले लें.

श्री कैलाश चावला-- अध्यक्ष महोदय, कोई प्रक्रिया है. माननीय अध्यक्ष महोदय, सिंचाई का फीडर बंद था इस कारण वह चोरी नहीं हो सकती थी. अगर वहाँ कोई ऐसा इंस्ट्रुमेंट लगा था, तो उसको जप्त किया जाना चाहिए था. जो केबल आप बता रहे हैं, डायरेक्ट डली हुई थी, उसको जप्त किया जाना चाहिए था. जो एम आर आई की गई है, उसकी कॉपी दी जानी चाहिए थी. उसके दस्तख्त नहीं हैं. मेरा ऐसा आरोप है कि उपभोक्ता की एम आर आई हुई ही नहीं है.

अध्यक्ष महोदय-- आपका प्रश्न आ गया.

श्री कैलाश चावला-- बताएँ कब एम आर आई हुई और एम आर आई क्यों नहीं दी गई?

 

12.56 बजे अध्यक्षीय घोषणा.

माननीय सदस्यों के लिए भोजन विषयक.

अध्यक्ष महोदय-- आज भोजन अवकाश नहीं होगा. माननीय सदस्यों के लिए भोजन की व्यवस्था सदन की लॉबी में की गई है. माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि सुविधा अऩुसार भोजन ग्रहण करने का कष्ट करें.

 

12.57 बजे ध्यानाकर्षण(क्रमशः)

श्री राजेन्द्र शुक्ल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने अपने जवाब में बताया है कि रामदयाल, जो उपभोक्ता के प्रतिनिधि थे, जब पंचनामा बनाया गया तो उनके दस्तख्त बाकायदा उसमें लिए गए हैं और उसके बाद भी, मैंने शुरू में भी कहा था, फिर से मैं कह रहा हूँ कि चूँकि यह बहुत ही हाई लेवल का टेक्नीकल मामला है और इसके लिए, चूँकि आपके पास ऐसे प्रमाण हैं, जिसको कि हम सीधे एक सिरे से खारिज नहीं करना चाहते हैं इसलिए संबंधित विभागों के साथ बैठकर, क्योंकि सतर्कता टीम ने कुछ काम किया है, उसको हम कैसे पूरी तरीके से, आपकी बात को काट कर कह दें कि उन्होंने सही किया है. इसलिए बैठकर इसको देख लेंगे कि यदि कहीं कुछ गलती या चूक हुई है तो उस पर आवश्यक निर्णय करेंगे.

 

 

 

श्योपुर जिले में कृषकों को भूमि चकबंदी का लाभ न मिलने से उत्पन्न स्थिति.

श्री दुर्गालाल विजय(श्योपुर)-- माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

राजस्व मंत्री (श्री रामपाल सिंह)-- माननीय अध्यक्ष महोदय,


1.00 बजे {उपाध्यक्ष महोदय (डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुए}

 

श्री दुर्गालाल विजय-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्रीजी ने उत्तर में यह बताया है कि चकबंदी का राजस्व अभिलेख में तो इंद्राज कर दिया गया है लेकिन मौके पर कब्जा नहीं दिया गया है जब मौके पर कब्जा दिया ही नहीं गया है तो चकबंदी की पुष्टि होने का कोई प्रश्न नहीं है इस कारण मैं माननीय मंत्रीजी से दो सवाल करना चाहता हूँ. एक तो उन्होंने कहा कि इसकी पुष्टि हो गई है और एक बात यह कही है कि उनका कब्जा मौके पर नहीं दिया गया है. मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 209 जिसमें चकबंदी के प्रावधान हैं उसमें धारा 209 की उपधारा (4) (5) में यह व्यवस्था है कि जब चकबंदी की स्कीम पूरी हो जाए यदि स्कीम से प्रभावित समस्त भूमि स्वामी उस स्कीम के अधीन उन्हें आवंटित किए गए खातों का का कब्जा लेने के लिए सहमत हो जायें तो चकबंदी अधिकारी उनको स्कीम में वर्णित की जाने वाली तारीख को ऐसा कब्जा लेने के लिए अनुज्ञात कर सकेगा.

माननीय उपाध्यक्ष महोदय, धारा 210 में प्रावधान किया है कि कब्जा देने के बाद स्कीम की पुष्टि की जाएगी तो मैं यह प्रश्न करना चाहता हूं कि जब कब्जा दिया ही नहीं गया स्कीम की पुष्टि हुई नहीं है, चकबंदी हुई नहीं है तो कागज में जो इंद्राज हुए हैं उनको समाप्त करने का क्या मंत्रीजी आदेश देंगे.

श्री रामेश्वर शर्मा--उपाध्यक्ष महोदय, मेरा इसी विषय से संबंधित प्रश्न है यदि आप अनुमति दे दें तो पूछ लेता हूं अन्यथा आप बाद में मौका नहीं देंगे. मंत्रीजी अनुमति दे देंगे मुझे.

उपाध्यक्ष महोदय--मंत्रीजी जवाब दे रहे हैं उनको जवाब दे देने दीजिये. मंत्रीजी जवाब देने के लिए खड़े हो गये हैं यह गलत परम्परा हो जायेगी फिर आप पूछ लीजिएगा मैं एलाउ कर दूंगा.

श्री रामपाल सिंह--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य सही तर्क रख रहे हैं और कहीं न कहीं कठिनाई है. जब चकबंदी हुई थी उस समय 90 गांवों में हुई थी 6 गांव रह गये थे वहां के किसान परेशान हैं पहले भी माननीय सदस्य ने इस बात को बड़ी वजनदारी से रखा है. उन्होंने धारा और उपधारा का जो उल्लेख किया है वह सही है लेकिन पहले जब चकबंदी हुई थी. 1960 में गावों से सहमति ली जाती थी सहमति के आधार पर चकबंदी की थी 90 गांवों में व्यवस्था है लेकिन 6 गांवों में कठिनाई है उस कठिनाई को दूर करने के लिए शासन का भी कर्तव्य बनता है कि किसान भाई परेशान न हों विधायक जी ने जो बता रखी है उसके संबंध में हम निर्देश कर रहे हैं पीएलआरसी की धारा 108 (2) में अधिकार अभिलेख बनाकर किसानों को व्यवस्थित कर दिया जाएगा और जो कठिनाई उनको आ रही है उसको दूर कर दिया जाएगा.

श्री दुर्गालाल विजय--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं मंत्रीजी का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ यह जो बात अभी माननीय मंत्रीजी ने कही है यही बात दिनांक 27.3.2006 को भी मेरे प्रश्न के उत्तर में कही गई थी और आश्वासन भी दिया था और आज कहा जा रहा है कि उसके अनुसार अधिकार अभिलेख में परिवर्तन कर दिया जाए.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से स्‍पष्‍ट उत्‍तर चाहता हूं कि आप यह निर्देशित करें कि जहां पर किसान पहले भूमि स्‍वामी था, वही पुन: अधिकार अभिलेखों के अन्‍दर इंद्राज किये जायेंगे तभी तो इस समस्‍या का समाधान होगा. तभी तो इस समस्‍या का समाधान होगा नहीं तो आज 10 साल के बाद मुझे बताया गया कि चकबंदी निरस्‍त नहीं की जा सकती है. हमने जब पूरा रिकार्ड पेश किया कि चकबंदी हुई ही नहीं है और उसकी पुष्टि ही नहीं हुई तो फिर उसको निरस्‍त करने का सवाल ही नहीं है. लेकिन अब शासन की ओर से बताया गया कि रिकार्ड ही नहीं मिल रहा है, हो सकता है कि 1960 से अभी तक का रिकार्ड न मिले लेकिन यह बात तो शासन के सामने स्‍पष्‍ट है कि 1960 के समय जिन भूमि स्‍वामियों का नाम दर्ज था, वह उसी स्‍थान पर काबिज हैं तो उसी के अनुसार उनका नाम इंद्राज कर दिया जाए. समस्‍या का समाधान हो जाए. बहुत सारे किसान परेशान है. आपने यह तो कहा कि खाद बीज लेने में कोई कठिनाई नहीं है. लेकिन कोई भूमि स्‍वामी अपनी जमीन का विक्रय करना चाहे, उससे वह 60 वर्ष से वंचित है. उसकी दूसरी और तीसरी पीढ़ी इंद्राज हुई है. लेकिन अब वह बेच ही नहीं सकता है, क्‍योंकि जिस जमीन पर कब्‍जा है उसमें मालिकाना हक नहीं है.

उपाध्‍यक्ष महोदय:- आपकी बात सही है, लेकिन माननीय मंत्री ने आश्‍वासन दिया है कि शीघ्र ही इसको करवा देंगे. यदि माननीय मंत्री जी कोई समय सीमा बता सकें तो बता देंगे.

श्री रामपाल सिंह :- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पहले भी माननीय विधायक जी ने यह बात रखी थी लेकिन राजस्‍व विभाग का जो अमला था, बहुत बड़ा सर्वे का काम करता था, उसे 2002 में बंद कर दिया और अब वह अमला नहीं है. लेकिन अब हम आऊट सोर्स करके उनकी समस्‍या का निराकरण कर देंगे और एक साल के अन्‍दर इनके 6 गांव बचे हैं वहां के रिकार्ड व्‍यवस्थित करवा कर किसानों का जो अधिकार है वह उनको दिलवायेंगे. उनके अभिलेखों को व्‍यवस्थित करवाकर वास्‍तव में जो वहां काबिज किसान हैं उनके जो अधिकार हैं, वह उनको दिलवायेंगे.

उपाध्‍यक्ष महोदय:- आपकी समस्‍या का समाधान हो गया है. उसमें समय सीमा भी आ गयी है. 10 वर्ष से जो चीज नहीं हुई है, उसको माननीय मंत्री जी ने 1 वर्ष में करवाने की बात की है.

श्री दुर्गालाल विजय :- मैं माननीय मंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूं. मैं केवल इतना चाहता हूं कि जो वहां पर काबिज हैं. उनको वहीं पर काबिज किया जाए.

श्री रामेश्‍वर शर्मा:- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसी के संदर्भ में मेरा एक प्रश्‍न है कि बंदोबस्‍त और चकबंदी लगभग एक ही बात है. हमारे क्षेत्र में भी कई ऐसे गांव हैं जहां पर बंदोबस्‍त का कार्य हुआ है. मौके पर जिसकी जमीन है वह वहीं पर काबिज है, पर रिकार्डों में थोड़ा सा सुधार करने की आवश्‍यकता है. उसकी जमीन कर कर दी गयी है. उसके कारण पारिवारिक और पड़ोसियों से भी विवाद बहुत बढे़ हैं, जैसे कि एक साल का समय उनको दिया है और कलेक्‍टर के कोर्ट में यह प्रकरण सब विचाराधीन हैं. जब कलेक्‍टर से इस संबंध में चर्चा की जाती है तो कलेक्‍टर बताते हैं कि पुराना प्रकरण है, मैं इसमें क्‍यों फसुं, जमीनों के रेट हैं, जांच में मैं क्‍यों फंसु.

उपाध्‍यक्ष महोदय, यह प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता है, आपकी बात आ गयी है.

श्री रामपाल सिंह :- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अभी माननीय शर्मा जी की भोपाल की जो समस्‍या है वह अलग से लिखकर दे देंगे. उस पर तुरन्‍त कार्यवाही करेंगे और किसानों को न्‍याय दिलवायेंगे. मध्‍यप्रदेश में किसानों की सरकार है और किसानों की सेवा के लिये हम लोग काम कर रहे हैं.वह निश्चित रूप से रखें, उस पर हम लोग कार्यवाही करेंगे. शर्मा जी तो भोपाल में ही रहते हैं,वह कभी जिले की टीम के साथ बैठ भी सकते हैं और भी कोई समस्‍या हो वह बताते रहें.

उपाध्‍यक्ष्‍ा महोदय:- शर्मा जी आपकी समस्‍या का समाधान हो गया है.

श्री रामेश्‍वर शर्मा :- मैं माननीय मंत्री जी को बहुत बहुत धन्‍यवाद् देता हूं.

 

 

 

 

 

याचिकाओं की प्रस्‍तुति

उपाध्‍यक्ष महोदय:- आज की कार्यसूची में सम्मिलित सभी याचिकाएं प्रस्‍तुत हुई मानी जाएंगी.

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समय

(1.10बजे)

वर्ष 2016-17 की अनुदानों की मांगों पर मतदान(क्रमश:)

 

मांग संख्या -17 सहकारिता

मांग संख्या - 30 ग्रामीण विकास

मांग संख्या - 34 सामाजिक न्याय

मांग संख्या - 59 ग्रामीण विकास विभाग से संबंधित विदेशों से

सहायता प्राप्त परियोजनाएं

मांग संख्या - 62 पंचायत

मांग संख्या - 74 त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं को वित्तीय सहायता

उपाध्यक्ष महोदय - मांग संख्या 17,30,34,59,62,74 पर चर्चा हेतु 3 घंटे का समय निर्धारित है. तद्नुसार दलीय व्यवस्था निम्नानुसार आवंटित है:-

भारतीय जनता पार्टी - 2 घंटे 9 मिनट

इंडियन नेशनल कांग्रेस - 42 मिनट

बहुजन समाज पार्टी - 6 मिनट

निर्दलीय - 3 मिनट

माननीय सदस्यगण समय-सीमा का ध्यान रखकर कृपया सहयोग करें.

 

 

 

 

 

 

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री(श्री गोपाल भार्गव) - उपाध्यक्ष महोदय, मैं,राज्यपाल महोदय की सिफारिश के अनुसार प्रस्ताव करता हूं कि 31 मार्च,2017 को समाप्त होने वाले वर्ष में राज्य की संचित निधि में से प्रस्तावित व्यय के निमित्त राज्यपाल महोदय को --

 

 

 

 

 

 

 

 

उपाध्यक्ष महोदय - प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ.

अब मांगों और कटौती प्रस्तावों पर एक साथ चर्चा होगी.

डॉ.गोविन्द सिंह(लहार) - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश में जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार आई है तब से सहकारी आंदोलनों का प्रजातांत्रिक स्वरूप पूरी तरह से  तहसनहस भारतीय जनता पार्टी के द्वारा कर दिया गया है. पिछले 12-13 वर्षों में अनेक संस्थाएं जो सहकारिता के क्षेत्र में किसानों को आम जनता में हाऊसिंग में हर क्षेत्र में काम करती थीं और गरीबों को न्याय दिलाने का काम करती थीं उन संस्थाओं का प्रजातांत्रिक स्वरूप नष्ट करके भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को, कार्यकर्ताओं को उन संस्थाओं में काबिज करके उनको पूरी तरह से चरने के लिये चारागाह के रूप में छोड़ दिया गया और अनेक संस्थाएं पूरी तरह से बंद हो रही हैं और कई संस्थाएं ऐसी हैं जिनमें करीब 12-13 वर्षों से चुनाव नहीं हुए और चुनाव हुए भी हैं तो केवल नाममात्र के लिये. मेरे पास एक पत्र है. भारतीय जनता पार्टी कार्यालय से मैं नाम नहीं पढूंगा. लिखा गया है कि क वर्ग में यह संचालक रहेंगे. इनको अधिकृत किया जाता है और इनके ही संचालक नोमिनेट करें. यह दतिया जिले का पत्र मेरे पास है. उनको क,ख,ग,वर्ग में करके यहां से अधिकृत हुआ है. बाकी किसी को नोमिनेशन फार्म नहीं भरने दिया. भारतीय जनता पार्टी के भी कई लोग चुनाव लड़ना चाहते थे उनको भी अवसर नहीं दिया गया. यह पत्र माननीय मंत्री जी कहेंगे तो मैं उन तक पहुंचा दूंगा. वे देख लें. नीचे पार्टी के अध्यक्ष के हस्ताक्षर हैं और एक नहीं समूचे जिलों में केन्द्रीय सहकारी बैंक के चुनाव नहीं हुए हैं. आज कई संस्थाएं ऐसी हैं जिनमें जो संविधान है और सहकारी अधिनियमों की धज्जियां उड़ा दी गई हैं क्योंकि प्रजातंत्र में  इनका विश्वास नहीं है.इन्होंने बीज संघ के चुनाव2005 से,उद्योग संघ के 2005 से,आवास संघ के 2004 से, दुग्ध महासंघ के  2004 से, बैंक एसोसियेशन के 2004 से,सहकारी संघ के 2004 से, सहकारी संघ के 2004 से, कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के 11 वर्ष से, शक्कर कारखाने के करीब 12-13 वर्षों से, अनेक ऐसी संस्थाएं हैं जिनके चुनाव नहीं कराये गये. मध्यप्रदेश राज्य सहकारी संघ है जिसके अधीन सभी संस्थाएं कार्य करती हैं. उनके संरक्षण,ट्रेनिंग सेंटर, यह संघ करता है. मध्यप्रदेश राज्य सहकारी संघ पूरी तरह से आज बंद होने की स्थिति में है. कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक वर्षों से मध्यप्रदेश में काम कररही थी. लगातार इनकी कार्यपद्धति के चलते अनेक प्रकार के ऐसे निर्णय लिये हैं जिससे पूरा सहकारी क्षेत्र नष्ट हो रहा है. सरकार ने निर्णय ले लिया है उन बैंकों को बंद कर दिया जायेगा और प्रशासक को हटाकर डेपुटेशन पर डाल रहे हैं लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि आप उनको बंद कर रहे हैं तो उनके कर्मचारियों का क्या होगा और केन्द्रीय सहकारी बैंक और जिला केन्द्रीय सहकारी बैंकों के प्रदेश में करीब साढ़े चार हजार-पांच हजार के करीब पद खाली पड़े हैं. सहकारी सोसायटियों को एक-एक सचिव चला रहा है. आपका प्रजातंत्र में क्यों विश्वास नहीं है. आपने नोमिनेट कर दिये. आपकी पार्टी के मठाधीश बैठे हुए हैं. उनसे भी आप अधिकार छीनकर कोर्ट के माध्यम से लूटखसोट यहां से करना चाहते हैं. सभी अधिकारों को केन्द्रीकृत करके उनको प्रजातांत्रिक स्वरूप से नौकरी देने का काम बंद कर रहे हैं. अगर वहां से लोगों को रोजगार मिलेगा तो जिले के लोगों को मिलेगा. आप बाहर के लोगों को लाकर वहां बैठाना चाहते हो. करीब 1100 कर्मचारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के हैं उनमें अधिकांश चतुर्थ श्रेणी के हैं. करीब 350-400 चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी हैं और आपकी जब 5 हजार जगह खाली हैं तो हमारा आपसे अनुरोध है कि जब आपने निर्णय लियआ कि उन कर्मचारियों को सहकारी बैंक में विलीनीकरण करें. जिस प्रकार तिलहन संघ का विलीनीकरण हुआ था उस समय भी वहां के कर्मचारियों को सभी सहकारी संस्थाओं में भेजा गया था. आज कई जिले ऐसे हैं जहां 12-13 महिने से वेतन नहीं मिला. लोग जगह-जगह भटक रहे हैं. आपने आवास संघ में कोई खटोल जी बैठा रखे हैं वे तमाम ठेके ले रहे हैं. ऐसी स्थिति में उनकी निगाह आवास संघ के गरीबों को मकान देने की नहीं है. वह देख रहे हैं कि हमें विधायकों के आवास मिलें वहां करोड़ों रुपयों के काम हों. ऐसी संस्थाएं लें जिसमें उनको कमीशन 15 परसेंट मिले. इस प्रकार के लोगों को बैठाने का काम बंदकरो और जिस उद्देश्य के लिये संस्था का गठन हुआ उस पर काम करो.

डॉ.नरोत्तम मिश्र - आधा दर्जन विभाग हैं उन पर.अकेला सहकारिता नहीं है.

डॉ.गोविन्द सिंह - यही तो केन्द्रीयकृत कर रहे हैं. जो बैठा रखे हैं आपने वह खुद ही कब्जा करके बैठ जायेंगे. जिसका समाजवाद एवं प्रजातंत्र में पूरा विश्वास था, लेकिन आपकी ट्रेनिंग लेकर के आपने इनको भी खराब कर दिया है. इस प्रकार आपने अंतर्राष्ट्रीय सहकारी सम्मेलन बुलाया इसमें केवल अपनी पार्टी के लोगों को बुलाया क्या कांग्रेस के लोग सहकारी आंदोलन में भाग नहीं लेते, हमारी राजनीति सहकारी आंदोलन से हुई है और आप लोगों ने हर कहीं से चन्दा लिया है, किसको दे दिया है सहकार भारती, यह सहकार भारती कौन है ? यह कहां से पैदाइश है अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन हिन्दुस्तान एवं अफ्रीकी देशों में बुलाया उसमें भी करोड़ो रूपये खा गये उसमें 7 करोड़ रूपये का टेन्ट लगा था उसका बिल भी पेमेन्ट हुआ है इसमें भी करोड़ों रूपये हर संस्था से चन्दा लेकर तथा भारत सरकार एवं मध्यप्रदेश सरकार ने दिये हैं उसमें उन पैसों का दुरूपयोग भी हुआ है. आज ऋण वितरण में भी घोटाला हुआ था तत्कालीन सहकारिता मंत्री जी ने उसमें श्वेत पत्र जारी किया था राज्यपाल महोदय जी के यहां से रिपोर्ट कही थी उसमें करीब ऋण राहत में 85 करोड़, 52 लाख रूपये तथा ऋण माफी में 84 करोड़ 63 लाख रूपये की गड़बड़ी स्वीकार की थी करीबन 21-22 कर्मचारियों को दोषी ठहराया गया था मध्यप्रदेश की करीबन 12-13 सौ सहकारी समितियां थीं उनमें आज तक वसूली नहीं हुई जिन्होंने कहा था कि हम कार्यवाही करेंगे एफ.आई.आर दर्ज करेंगे कहीं कुछ नहीं कर रहे हैं लूट खाएं सब बंद हो गई. आज प्रदेश की करीबन 11 केन्द्रीय सहकारी बैंकों के रिजर्व बैंक उनके लायसेन्स रद्द करने वाली है. भारत सरकार ने वेद्य नाथन समिति की कमेटी के समय जब माननीय मनमोहन सिंह जी प्रधानमंत्री थी उसमें 16 सौ करोड़ रूपये दिये थे. आज आपने इसमें कुछ शर्ते लगाई हैं उसका भी आपने पालन नहीं किया है. करीबन साढ़े छः सौ करोड़ रूपये आपने लेप्स कर दिये हैं. मैं आपसे कहना चाहता हूं कि आज सहकारिता आंदोलन को प्रजातांत्रिक स्वरूप दें और वहां की समस्या देखें आप बार बार सहकारिता मंत्री बन जाते हैं आपकी उसमें क्या रूचि है, (XXX) उसमें आप कुछ नहीं करते हैं.

डॉ.नरोत्तम मिश्र(XXX) शब्द को विलोपित करवा दें.

उपाध्यक्ष महोदय--इसको विलोपित करें.

श्री गोपाल भार्गव--हमारा क्षेत्राधिकार है क्या हमारी पार्टी तय करती है हमारा हाईकमान जो भी तय करेगा वही होगा.

डॉ.गोविन्द सिंह--आप इसमें प्रजातांत्रिक स्वरूप पैदा कर दें जिससे ग्रामीण एवं कृषि के लोगों का उद्धार हो जाएगा. अब मैं पंचायत के बारे में कहना चाहता हूं उसमें भी यही हालत है. मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि भारत सरकार ने परफारमेन्स गारंटी को पैसा दिया था करीबन 425 करोड़ रूपये दिये थे जो पैसा जनपद पंचायत एवं जिला पंचायत एवं पंचायतों को सीधा जाना था वह जाना था आदिवासी आबादी के लिहाज से उसका भी जनसंख्या के अनुपात में वितरण होता है, परन्तु माननीय मंत्री जी के द्वारा किन्हीं के दबाव में या हम नहीं कह सकते हैं कि किस के दबाव में हुआ है. तमाम नोटशीट हमारे पास में हैं आपने उसमें लघु उद्योग निगम को ठेका दिया था. लघु उद्योग निगम ने आपकी 2 संस्थाएं जो गुजरात की हैं उनको पैसा 344 करोड़ 29 लाख रूपये का ठेका दे दिया किसके लिये पंचायत भवन इत्यादि बनाने के लिये उसमें भी आधे भवन बने नहीं लघु उद्योग निगम का एमडी पैसा वापस नहीं कर रहा है वहां के एमडी राजन जी ने कई पत्र लिखे, कई जिला पंचायत के सीईओ ने पत्र लिखे कि हमारा पैसा वापस कर दो जो उन्होंने ठेके के टेन्डर दिये थे वह भी आधे से ज्यादा पैसा वापस नहीं कर रहे हैं और न ही पंचायत भवन बन रहे हैं. आपने सेटेक इन्वायर इंजीनियरिंग यह गुजरात की दो कम्पनियां हैं, यह कोई एनजीओ चला रहा है, यह किसका आदमी है, यह माननीय नरेन्द्र मोदी जी से पूछ लेंगे. इसी प्रकार से संटेक्स इंडस्ट्रीज दूसरी कम्पनी को दी है ई कक्ष जो ग्राम पंचायतें भवन 15 लाख रूपये में बना रही हैं वह पंचायतों का ठेका लघु उद्योग निगम के माध्यम से उस कम्पनी को 16 लाख, 14 हजार रूपये में दिया है.

श्री गोपाल भार्गव--यह तीन साल पहले खत्म हो चुका है अब पंचायतों को ही 15 लाख रूपये का अधिकार दे दिये गये हैं, अब वही बना रही हैं.

डॉ.गोविन्द सिंह--वह तो नहीं बना रही हैं.

श्री गोपाल भार्गव--इसमें सरकार को पैसा नहीं लेना है उसको लोटकर के लेना है.

डॉ.नरोत्तम मिश्र--उसके बाद 2 बजट आ चुके हैं, जिस पर यह चर्चा हो चुकी है, लेकिन अभी तक अधूरे पड़े हैं.

डॉ.गोविन्द सिंह--उपाध्यक्ष महोदय, आपने ई कक्ष में 6 लाख रूपये दिलवाए थे, हालांकि यह पंचायतें 3 लाख रूपये में बना रही हैं. आपने कम्प्यूटर खरीदी में आपके नॉलाज में है तथा आपने उसकी जांच भी करवायी है, लेकिन कम्प्यूटर एवं टीवी सब यंत्र मिलाकर के जो कम्प्यूटर से संबंधित है वह करीबन 55-60 हजार के आते थे आपके यहां पर करीबन 1 करोड़ 13 लाख 8 सौ रूपये के करीबन पेमेन्ट हुआ है इसमें कई गांव हैं जहां की पंचायतों में विद्युत ही नहीं है. लाईटे के लिये पंचायतों के पास में पैसे ही नहीं हैं, आपके ई कक्ष ठीक ढंग से चल ही नहीं रहे हैं. कई जगहों पर कम्प्यूटर एवं टीवी लगी थीं वह भी गांवों के लोगों ने उसकी चोरी कर ली. आपने इसमें करोड़ों रूपये खर्च किये हैं आप दूसरी जगहों पर जहां पर इन्फ्रास्ट्रक्चर, बिजली है वहां पर खर्च करते, लेकिन अधिकारियों को छूट मिल गई खाओ कमीशन एवं लूटो तुम भी खाओ एवं हम भी खाएं तुम भी चोर एवं हम भी चोर.

उपाध्यक्ष महोदय, इसके अलावा और आश्चर्य की बात और सुनिये आपका पास में परफार्मेन्स स्टॉफ का जो पैसा आया है वह पैसा रहली में 22 करोड़ रूपये ले लिया है और जो आपके चहेते आपके साथ घूमने वाले थे किसी को 2 करोड़ तो किसी को 5 करोड़ रूपये स्कूल पंचायतों में दे दिये हैं आखिरकार कांग्रेस के एवं विपक्ष के विधायक हैं जनता ने उनको भी चुना है, उनके प्रति आपकी कोई दया नहीं है, ताकि उस क्षेत्र के निवासी आपका गुणगान करें. इसके अलावा चुनाव के पहले यह फाईल सूचना के अधिकार के अंतर्गत लाये हैं इसमें चुनाव से पहले लिखा गया है कि उसमें एक पत्र तथा नोटशीट चली है माननीय विधायक जी हम उसमें किसी का भी नाम नहीं ले रहे हैं, उसमें बहुत से तो यहीं पर बैठे हैं. 425 करोड़ रूपये में से 225 करोड़ रूपये ऐसे चुनाव के पहले भारतीय जनता पार्टी के 200 एवं 225 लोगों को जिसमें सांसद तथा मंत्री जी भी हैं आप चाहे हैं बहुत लोगों के नाम तो हम पढ़ सकते हैं.

उपाध्यक्ष महोदय--नाम नहीं पढ़े.

डॉ.गोविन्द सिंह--नोटशीट में नाम हैं.

श्री गोपाल भार्गव--विकास में क्यों अड़ंगेबाजी होना चाहिये.

डॉ.गोविन्द सिंह--यह चुनाव के समय पैसा दिया है, आपने वहां पर देखे कि तालाब खुदे कि नहीं खुदे, निर्माण कार्य हुए कि नहीं हुए.

श्री गोपाल भार्गव--पैसा लेप्स हो जाए उससे सरकार तथा विभाग की कितनी बदनामी होती है इसमें माननीय सदस्यों के कहने पर जिनको जो आवश्यकता थी उनके लिये पैसे खर्च कर दिये.

डॉ.गोविन्द सिंह--उपाध्यक्ष महोदय, इसमें प्रमाणित दस्तावेज हैं. आपत्ति इस बात पर है कि एक पार्टी के लोगों को चुनाव के पहले पैसे दिये हैं इसमें हमारा सीधा आरोप है. उस पैसे को चुनाव में लड़ने के लिये भारतीय जनता पार्टी के नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को दिया गया है.

इंजी. प्रदीप लारिया- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा विधानसभा क्षेत्र भी मध्‍यप्रदेश में है, गोविन्‍द सिंह जी को बताना चाहता हूँ यदि विधानसभा क्षेत्र के लिए पैसा दिया गया है तो कोई पाप नहीं किया गया है ।

डॉं. गोविन्‍द सिंह- उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय कैलाश विजयवर्गीय जी को, 24.8.13 को 1 करोड़ 59 लाख मिला है,विजयपाल सिंह को 74 लाख,अजय विश्‍नोई जी को 1 करोड़ 30 लाख और अब हम विधायकों के नाम नहीं ले रहे हैं, लेकिन सीधी वाले सांसद जी को 53 लाख मिला है ।

श्री घनश्‍याम पिरोनिया- डॉं साहब मेरा नाम नहीं होगा ।

डॉ. गोविन्‍द सिंह - आप विधायक नहीं थे तो आपको कहां से हो जाएगा । इसके अलावा भोपाल शहर जो ग्रामीण क्षेत्र के लिए पैसा आया था, वह पैसा सी.सी.रोड एवं डामरीकरण के लिए 52 लाख 90 हजार रूपया आपने भोपाल में भी दिया, आपने देखा नहीं, आपकी नोटशीट आती है और लिखते हैं, माननीय अमुक- अमुक के प्रस्‍ताव अनुसार, अब नाम लेंगे तो कई लोगों को मिर्चियां लगेगीं, अभी सामने बैठे हैं, से प्राप्‍त पत्र के आधार पर दिनांक 3.9.2014 को प्रस्‍तुत प्रस्‍ताव अनुसार विकास कार्यों के लिए राशि स्‍वीकृत करें, निर्देशानुसार समुचित कार्यवाही हेतु संलग्‍न है, के.डी.कुकरेती, विशेष कर्त्‍तव्‍यस्‍थ अधिकारी,कार्यालय माननीय मंत्री, सामाजिक न्‍याय और पंचायत एवं ग्रामीण विकास, मतलब एक - एक विधायक को, एक - एक और डेढ़- डेढ़, दो-दो करोड़ रूपए, माननीय वरिष्‍ठ सांसद हैं, राज्‍यसभा के हैं, जिनको पांच - पांच करोड़ रूपए भारत सरकार देती है, उनको भी दिया, इस राशि का भारी पैमाने पर भारतीय जनता पार्टी के लोगों ने जो गांव के विकास के लिए पैसा जाना चाहिए था, जो गांव की तरक्‍की के लिए, गांव की सी.सी., नाली, खरंजा,स्‍कूल उनके लिए थी ।

श्री कैलाश जाटव- डॉं साहब वह पैसा विकास के लिए दिया है ।

डॉं. गोविन्‍द सिंह - क्‍या उस पैसे का आपने ठेका लेकर रखा है,हम लोगों ने नहीं लिया है और चुनाव के पहले हुआ है, अगस्‍त सितम्‍बर अक्‍टूबर इन महीनों में आचार संहिता जारी होने के पहले करीब 200 करोड़ का....... (व्‍यवधान)

श्री कैलाश जाटव- हां विकास का ठेका लेकर रखा है, आचार संहिता के पहले का है।

इंजी प्रदीप लारिया- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 2 बजट निकल चुके हैं, हमारी सरकार ने दिया है ।

उपाध्‍यक्ष महोदय- लारिया जी, बैठ जाएं ।

डॉं. गोविन्‍द सिंह- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूँ और निवेदन भी है अगर आप इसमें ईमानदारी से जांच करवाएंगे दिल पर हाथ रखकर तो कम से कम 50 प्रतिशत विधायक मिलेंगे जिन्‍होंने उस राशि का दुरूपयोग किया, फर्जी बिल बनवाकर चुनाव में पैसा लगवाया और कांग्रेस पार्टी को हराने के लिए सरकारी धन का, जो भारत सरकार ने दिया उसका दुरूपयोग किया है, मैं आपको चुनौती देता हूँ.........

श्री कैलाश जाटव- माननीय उपाध्‍यक्ष जी, यह क्‍या बोल रहे हैं कोई प्रमाण तो होना चाहिए, ऐसे आरोप लगाने के लिए कम से कम प्रमाण तो दें ।

इंजी प्रदीप लारिया - जितनी राशि दी गई है, उसकी जांच करवा लो । (व्‍यवधान)

डॉं. गोविन्‍द सिंह- प्रमाणित दस्‍तावेज हैं, सूचना के अधिकार में पंचायत विभाग से दस्‍तावेज निकाले हैं,इसलिए आपसे हमारा अनुरोध है कि इस प्रकार का भ्रष्‍टाचार हुआ है, माननीय मंत्री जी अगर आप पर कोई दाग नहीं है,निष्‍कलंक हैं जैसे ईमानदारी से बहादुरी से यहां दहाड़ते हैं, जिन्‍होंने पैसे का दुरूपयोग चुनाव में लगाकर नहीं किए,एक- एक, डेढ़ - डेढ़ करोड़ रूपए लेकर आधे से ज्‍यादा, कुछ ने कह दिया सफाई की है, अगर आप ईमानदारी से जांच कराएंगे तो हम आपका स्‍वागत करेंगे, अभिनंदन भी करेंगे और आपको धन्‍यवाद भी देंगे, अभी तक नहीं दिया, लेकिन अब धन्‍यवाद भी देंगे ।

श्री गोपाल भार्गव - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय,विधायकों के खाते में पैसे नहीं जाते हैं,यह राशि तो ग्राम पंचायतें खर्च करती हैं, सवाल ही पैदा नहीं होता, कोई विधायक निधि थोड़ी है ।

उपाध्‍यक्ष महोदय- गोविन्‍द सिंह जी समझ रहे हैं ।

डॉं. नरोत्‍तम मिश्र- उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने अभी कांग्रेस पार्टी का 42 मिनट का समय पढ़ा था,32 मिनट इनको हो गए हैं ।

डॉं. गोविन्‍द सिंह- आधा समय तो आप डिस्‍टर्ब कर रहे हैं ।

उपाध्‍यक्ष महोदय- आपने तो भाषण समाप्‍त कर दिया था ।

डॉं. गोविन्‍द सिंह- हमारी बात खत्‍म है, हम केवल इतना कहना चाहते हैं, अगर आपको विश्‍वास नहीं है तो हम अभी पढ़वा देते हैं आप अपने,विभाग के और सरकार के कारनामे पढ़ लेना ।

श्री गोपाल भार्गव डॉं. साहब 20 साल मैं भी विपक्ष में रहा हूँ, 20 साल में 20 रूपए भी मेरे लिए नहीं दिए गए थे और आपके यहां सड़कें,सामुदायिक भवन से लेकर पी.एम.जी.एस.वाय,सी.एम.जी.एस.वाय. सारी चीजें हैं, आपके यहां करोड़ों रूपए का काम हुआ है, कांग्रेस के विधायकों का एक एक का नाम पढ़कर बता दूंगा ।

डॉं. गोविन्‍द सिंह- जो दुर्गति कांग्रेस की हुई है, क्‍या आप अपनी चाहते हो । और चाहते हो तो फिर तैयार हो जाओ ....(हंसी).....

श्री गोपाल भार्गव मैं यह कह रहा हूं कि 20 साल मैं भी विपक्ष में रहा हूं रिकार्ड उठाकर देख लेना, यदि मेरे विधानसभा क्षेत्र में 20 रूपए का भी काम हुआ हो ।

डॉं. गोविन्‍द सिंह- ठीक है, हमने गलती की हमने सजा भोग ली,जनता ने सजा दे दी अब आप क्‍यों तैयार हो रहे हो ।

उपाध्‍यक्ष महोदय- नहीं, नहीं यह प्रश्‍नकाल नहीं है आप बैठ जाइए,श्री यशपाल सिंह जी आप अपनी बात शुरू करें ।

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया(मंदसौर)- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मांग संख्‍या 17,सहकारिता,मांग संख्‍या 30,ग्रामीण विकास,मांग संख्‍या 34 सामाजिक न्‍याय, मांग संख्‍या 59 ग्रामीण विकास,मांग संख्‍या 62 पंचायत तथा मांग संख्‍या 74 त्रि-स्‍तरीय पंचायत राज, की मांगों के पक्ष,समर्थन में, मैं अपनी दो बातें रखना चाहता हूँ, आपने समय दिया उसके लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद ।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं सामाजिक न्‍याय से अपना वक्‍तव्‍य प्रारम्‍भ करूंगा, सरकारें तो पहले भी कई दलों की रही हैं, विशेषकर कांग्रेस की,पूरे मध्‍यप्रदेश में सामाजिक सरोकार रखने वाली वे तमाम हितग्राही मूलक योजनाएं आज सार्वजनिक स्‍थानों पर उन आयोजना के साथ जहां पर गरीब और दुखी व्‍यक्तियों को न्‍याय मिलता है, स्‍पर्श अभियान होते हैं, कन्‍यादान विवाह योजनाएं उसमें दिखती हैं, मुख्‍यमंत्री निकाह योजना उसमें दिखती है । माननीय उपाध्‍यक्षमहोदय, एक समय था जब उस व्‍यक्ति का जिसका शरीर अंग-भंग कट जाता था, उसको लूला बोला जाता था, उसको अंधा बोला जाता था, लंगड़ा बोला जाता था,लेकिन धीरे- धीरे परिवर्तन हुआ, शब्‍द आया विकलांग, फिर शब्‍द आया नि:शक्‍त और अभी माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी ने पूरे देशवासियों को यह संदेश देते हुए नि:शक्‍तजनों को दिव्‍यांग के नाम से संबोधित किए जाने का जो अनुकरणीय उदाहरण दिया है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वे विकलांग वे नि:शक्‍तजन अब दिव्‍यांग की श्रेणी में आ गए हैं

1:38 बजे सभापति महोदय (डॉं. गोविन्‍द सिंह) पीठासीन हुए ।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूं, बधाई देना चाहता हूं कि जिन्‍होंने विकलांग और नि:शक्‍तजन की इस परिभाषा को तब्‍दील किया और सिर्फ शरीर के अंग- भंग होने वाले उन्‍हीं व्‍यक्तियों को ही विकलांग या दिव्‍यांग नि:शक्‍त नहीं माना, आगे चलकर के जो मंद बुद्वि के बच्‍चे हैं, शरीर से दिखने के लिए वह ठीक हो सकते हैं, हृष्‍ट पुष्‍ट लगते हैं, लेकिन मानसिक रूप से मंद बुद्वि के होने के कारण से उनको भी इस अभियान में जोड़ने का अनुकरणीय कार्य किया है ।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं पुन: माननीय मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं, जिन्‍होंने पिछले 2 वर्ष पहले विकास खण्‍ड और अस्‍पताल परिसरों में स्‍पर्श अभियान लागू करके विकलांगों को, दिव्‍यांगों को, नि:शक्‍तजनों को एक टेंट के नीचे आमंत्रण देकर उनको चिन्‍हांकित करने का काम किया है, मध्‍यप्रदेश में हजारों की संख्‍या निकली जो अछूते थे,जो मुख्‍य धारा से जुड़ नहीं पा रहे थे ।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी को एक बात के लिए और धन्‍यवाद देना चाहता हूं, सरकार की यह योजना है कि कन्‍यादान विवाह योजना हो, निकाह योजना हो,माननीय मंत्री जी ने स्‍वयं आगे बढ़ करके एक उदाहरण प्रस्‍तुत किया हैअपने बेटे अभिषेक और बिटिया की शादी, विवाह समारोह कन्‍यादान योजना में सार्वजनिक रूप से उस टेंट के नीचे कराई और एक उदाहरण प्रस्‍तुत किया। यह सरकार का काम है, यह वह सरकार नहीं है जो कथनी और करनी में अंतर करे । माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 2 दिवस पहले बैतूल जिले में दिव्‍यांगों का सामूहिक विवाह जिसमें माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने भी हिस्‍सा लिया था और आदरणीय खण्‍डेलवाल जी भी यहां विराजित हैं, मैं टी.व्ही पर देख रहा था,सांसद महोदया भी उस कार्यक्रम में विराजी थीं, 91 जोड़ों का विवाह हुआ और वे 91 जोड़े सरकार के झण्‍डे तले, बैनर तले टेंट के नीचे बैठे थे ।

माननीय सभापति महोदय, उसमें जन-भागीदारी हुई, अब बड़ी खुशी और प्रसन्‍नता की बात है कि सामाजिक सरोकार रखने वाले स्‍वयं सेवी संगठन भी, इसमें अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए अनेक अनुकरणीय कार्य हुए हैं. पूरे देश भर में स्‍वच्‍छता अभियान चल रहे हैं. गरीब की बस्‍ती में शौचालय बन जाये, इसकी चिन्‍ता माननीय प्रधानमंत्री जी ने की है. मैं एक बार पुन: माननीय मंत्री जी एवं माननीय मुख्‍यमंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूँ. मुझे स्‍मरण है कि मैं पिछली विधानसभा में भी सदन का सदस्‍य था. घर-घर में, गांव-गांव में मर्यादा अभियान चलाने का था, हम ग्रामीण क्षेत्र में भी प्रतिनिधित्‍व करते हैं. हम जब दौरे पर जाते हैं तो एक परिदृश्‍य देखने को मिलता था, दिल पर बड़ा अजीब सा लगता था कि महिलायें सार्वजनिक शौच करती हैं और हमारी गाडि़यां जब निकलती हैं तो उनको शौच करने के समय छुपना पड़ता था. उनको सुरक्षा दी गई और शौचालय की जो शुरूआत हुई है. वह मर्यादा अभियान के माध्‍यम से, मध्‍यप्रदेश के यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री जी ने पहल की थी और एक अभियान के रूप में लिया था. पूरे प्रदेश भर में जो संख्‍या निकलकर आई थी, उससे सार्वजनिक स्‍थानों पर शौच करने वाले उन महिला और पुरूषों की संख्‍या में निरन्‍तर गिरावट आई. आज भारत सरकार और मध्‍यप्रदेश की सरकार ने भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्‍सा लिया.

माननीय सभापति महोदय, मैं इसके साथ-साथ मंत्री जी को सुझाव भी देना चाहता हूँ कि आपका विभाग इसमें कितनी मदद कर पायेगा या शिक्षा विभाग इसमें जुड़ेगा या स्‍वास्‍थ्‍य विभाग उसमें जुड़ेगा. लेकिन पांचवीं से लेकर आठवीं तक, जो छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं, जिस प्रकार से आपने बहुविकलांगों जो जोड़ा है, जिस प्रकार से आपने नि:शक्‍तजन और विकलांगता की परिभाषा को स्‍पर्श अभियान के माध्‍यम से बदलने की कोशिश की है. वह जो पांचवीं से आठवीं पढ़ने वाले छात्र स्‍कूलों में पढ़ रहे हैं और पढ़ाई के दौरान, उनकी आंखें अचानक कमजोर हो जाती हैं, उनके नेत्र-परीक्षण किस प्रकार से होगा ? आदरणीय नरोत्‍तम मिश्रा जी, वे स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के मंत्री हैं. ये कौन विभाग तय करेगा ? मैं चाहूँगा कि उन बच्‍चों की सरकारी स्‍कूलों में नेत्रों का परीक्षण हो जाये ताकि उनका समय पर चश्‍मा लग जाये ताकि 5 - 7 साल के बाद ऐसी स्थिति बन रही है कि वे देख नहीं पा रहे हैं, अन्‍धत्‍व की ओर जा रहे हैं. मैंने आदरणीय श्री गोपाल भार्गव मंत्री जी से आग्रह भी किया है. माननीय सभापति महोदय, कल की ही बात है. मैं मन्‍दसौर में था तो रोटरी इन्‍टरनेशनल के द्वारा 17 लोगों के कृत्रिम हाथ लगाने के काम हुए और अमेरिका ने प्रति हितग्राही को 60 - 60,000/- रू. की राशि से राहत प्रदान की है. मैं भी था, मन्‍दसौर कलेक्‍टर भी उस कार्यक्रम में थे. उनके कृत्रिम हाथ लगे हैं, छोटा-मोटा कार्य वे करना प्रारंभ कर दें. टी. चोइथराम, इन्‍दौर में उनका उपचार हुआ और कृत्रिम हाथ लगने का कार्य, उनका प्रारम्‍भ हो गया. मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करूँगा कि शासन के स्‍तर पर भी बड़े आयोजनों के साथ, चूँकि थ्रेसर चलाते समय किसान का हाथ कट जाता है, कुँए में जब ब्‍लास्टिंग का काम आता है तो हाथ उड़ जाता है, दुर्घटनाओं में हाथ कट जाता है, खेतिहर मजदूर का खेत में काम करते-करते दतारे से हाथ कट जाता है तो ऐसे में रोटरी इन्‍टरनेशनल ने कुछ काम करके दिया है तो आप उसको किस प्रकार से बढ़ायेंगे ? मुझे सरकार पर पूरा भरोसा एवं विश्‍वास है कि माननीय मुख्‍यमंत्री जी की संवेदनाओं के ऊपर और माननीय श्री गोपाल भार्गव जी, यह जो उदाहरण मन्‍दसौर में सामने आया है, इसको आप किस प्रकार से आगे बढ़ाकर काम करायेंगे.

माननीय सभापति महोदय, मैं एक और निवेदन करना चाहता हूँ कि इस विभाग से संबंधित बातें थी. मैं सुझाव भी साथ रख रहा हूँ. कलेक्‍टरों को प्रत्‍येक जिले में निराश्रित राशि जो ब्‍याज की होती है, इस पर 2 लाख रूपये का उस समय [at a time] खर्च करने का अधिकार होता है, मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करूँगा कि 2 लाख रूपये की राशि कम होती है, आयुक्‍त की 10 लाख की होती है एवं कलेक्‍टर की 2 लाख रूपये की होती है. मैं इस अनुदान मांग के माध्‍यम से आग्रह करूँगा कि कलेक्‍टरों की राशि 2 लाख रूपये से बढ़ाकर 5 लाख रूपये की जाये ताकि स्‍थानीय स्‍तर पर उस निराश्रित हितग्राही को तत्‍काल प्रभाव से लाभ मिल जाये.

माननीय सभापति महोदय, अब मैं पंचायत विभाग पर आता हूँ. यदि लोकसभा और विधानसभा में विधायक निधि बढ़ाने की बात चलती है तो बढ़ती भी है. पंचायत प्रतिनिधि, फिर चाहे वह पंच हो, सरपंच हो या जनपद प्रतिनिधि हो या जिला पंचायत प्रतिनिधि हो, जनपद अध्‍यक्ष हो, जनपद उपाध्‍यक्ष हो, जिला पंचायत का अध्‍यक्ष एवं उपाध्‍यक्ष हो. इन सबका भी मानदेय बढ़ाने का कार्य, सम्‍मान देने का एक बड़ा काम, यदि 50 वर्षों के बाद कभी हुआ है, तो अभी वर्तमान सरकार के नेतृत्‍व में हुआ है. अब अनुकूलता के साथ उनको बैठकों में जाने पर पारिश्रमिक मिलता है, पैसा भी मिलता है और मानदेय भी मिलता है. साथ ही, माननीय सभापति महोदय, अभी-अभी सरकार ने जिला पंचायत के अध्‍यक्ष को 2 करोड़ रूपये की राशि, जिस प्रकार से विधायक को निधि नहीं मिलती है, सांसद को निधि मिलती है. उसी प्रकार से जिला पंचायत के अध्‍यक्ष और जनपद पंचायत के अध्‍यक्ष को 1-1 करोड़ रूपये की राशि देने का प्रावधान किया है. यह परिवर्तन की बयार है. अभी 2-3 विभाग और भी है.

सभापति महोदय - आप जल्‍दी कीजिये. बहुत वक्‍ता हैं.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया - माननीय सभापति महोदय, बड़ा गम्‍भीर विषय है, संवेदनाओं से जुड़ा हुआ है. सामाजिक न्‍याय, ग्रामीण यांत्रिकीय विभाग है. मैं, माननीय मंत्री जी से आग्रह करूँगा कि छत्‍तीसगढ़ में इसी सत्र में एक विधेयक की तैयारी चल रही है और छत्‍तीसगढ़ राज्‍य इस बात को लेकर राजस्‍थान की तर्ज पर तैयारी कर रहा है कि पंचायत के चुनाव में पंच और सरपंचों की शैक्षणिक व्‍यवस्‍थाओं को सुनिश्चित किया जाये. उसके घरों में टॉयलेट एवं शौचालय है कि नहीं, उसकी तैयारी की जा रही है. पंच को 5वीं की कक्षा तक पास होना चाहिए और सरपंच को 8वीं तक की परीक्षा पास होना चाहिए और जनपद एवं जिला पंचायत के प्रतिनिधि को 10 वीं पास होना चाहिए. यह व्‍यवस्‍था राजस्‍थान में लागू है. छत्‍तीसगढ़ इसकी तैयारी कर रहा है.

माननीय सभापति महोदय, साथ में यदि जिला पंचायत के सदस्‍य का चुनाव और जनपद पंचायत के सदस्‍य का चुनाव राजनीतिक आधार पर भी हो जाये तो कोई एतराज नहीं है ताकि यह जो व्‍यर्थ का लम्‍बा चुनाव होता है. इस लम्‍बे चुनाव को समेटने की आवश्‍यकता प्रतिपादित होती है. विधायक और सांसद से भी बड़ा चुनाव होता है, 1-1 महीने तक, और उसके कारण से खर्च बढ़ते हैं, अपव्‍यय और दुरूपयोग बढ़ता है, उसको कहीं न कहीं नियंत्रित किये जाने की आवश्‍यकता है. ग्रामीण यांत्रिकीय विभाग, ग्रामीण विकास विभाग के ऊपर, मैं बोलना चाहूँगा. आवास योजना में विशेषकर, मुख्‍यमंत्री आवास योजना में आमूल-चूल परिवर्तन हुआ है. इसी बजट में प्रावधान किया गया है, 6,07,476 हितग्राही लाभान्वित हुए हैं और लगभग 4 लाख से अधिक आवास मध्‍यप्रदेश में बन चुके हैं और बजट 2016-17 में 1,50,000 आवास का लक्ष्‍य सरकार ने निर्धारित किया है.

माननीय सभापति महोदय, पंच-परमेश्‍वर योजना कन्‍वर्जन के माध्‍यम से विधायक निधि को सम्मिलित करते हुए, गांव-गांव में अधोसंरचना का जो विकास हुआ है. बड़ा परिवर्तन हुआ है.

सभापति महोदय - समाप्‍त करें.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया - केवल 5 मिनिट दीजिये. मनरेगा के अन्‍तर्गत खेत-खलिहान सड़क योजना को बढ़ावा मिला है. खेल मैदान अभी आप इधर विराजित थे, कन्‍वर्जन के माध्‍यम से कोई दुरूपयोग हुआ है. सभापति महोदय, माननीय मंत्री जी ने विधायकों का सम्‍मान बढ़ाया है, 80 - 80,00,000 रूपये हमको परफोरमेन्‍स गारन्‍टी योजना के अन्‍तर्गत खेल मैदान के लिए प्राप्‍त हुए हैं. सहकारिता के क्षेत्र के बारे में, मेरा कहना है कि जीरो प्रतिशत पर कर्जा आकर टिक गया है.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - सभापति महोदय, भारतीय जनता पार्टी को आवंटित हुआ था 3 घण्‍टे और कुछ मिनिट.

सभापति महोदय - इसमें आपके 17 लोग हैं.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - हमारी पूरी बात सुन लीजिये. कांग्रेस को 42 मिनिट हुआ था, कांग्रेस से जो सम्‍मानित सदस्‍य बोले, वे 34 मिनिट बोले. भारतीय जनता पार्टी के 17 मिनिट बोले.

सभापति महोदय - सिसोदिया जी, आप 19 मिनिट बोल चुके हैं. कृपया आप समाप्‍त करें.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया - मुझे 10 मिनिट और बोलने दें. भण्‍डारण की क्षमता को लेकर, सहकारिता को टैक्‍स में 1 रूपये वर्गफीट में जमीनें दी गई हैं ताकि किसानों का माल वहां जमा हो सके. 4 माह का अग्रिम खाद्यान्‍न का भण्‍डार किसान पहले से कर ले, यह सहकारिता में नई व्‍यवस्‍था हुई है.

माननीय सभापति महोदय, सहकारिता के क्षेत्र में कोर बैंकिंग का बड़ा काम हुआ है. 38 जिला सहकारी केन्‍द्रीय बैंक एवं अपैक्‍स बैंक पूरी तरह से, कोर बैंकिंग व्‍यवस्‍था के साथ जुड़ चुका है, प्रारंभ हो चुका है. पोर्टल ई व्‍यवस्‍था को-आपरेटिव में प्रारंभ हुई है. 21,50,000 कृषक इसमें पंजीकृत हुए हैं. एक नया उदाहरण, 1,00,000 रूपये का कर्जा लो, 90,000 रूपये लौटाओ, बिना ब्‍याज के 10,000 की फिर मदद सरकार की तरफ से दी जा रही है. किसान क्रेडिट कार्ड की कल्‍पना श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने देखी थी. उसको बढ़ाने का काम तथा सहकारिता से जोड़ने का काम सरकार ने किया है. आपने मेरे समय में कटौती कर दी. लेकिन मैं चाहता हूँ कि थोड़ा और बोलूँ. आपने इतना समय दिया उसके लिए मैं आपका आभारी हूँ.

श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा (मुंगावली) -- सभापति महोदय, मैं मांग संख्या 17,30,34,59,62 एवं 74 का विरोध करता हूं और कटौती प्रस्तावों का समर्थन करता हूं. मंत्री जी के पास सामाजिक न्याय विभाग भी है. मैं सबसे पहले तो यह अनुरोध करुंगा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला वर्ष भी है. आपके सहकारी बैंकों में स्टाफ की बहुत कमी है. इसके कारण अराजकता फैली हुई है. सहकारिता और पंचायत विभाग में जितनी भी आप भर्तियां करें, उसमें विक्लांगों, विधवा और परित्यक्त महिलाओं के लिये विशेष आप प्रावधान करने का कष्ट करें कि उनके रिक्यूरमेंट में इतना प्रतिशत होना ही चाहिये. मैं तो यह कहूंगा, चूंकि सामाजिक न्याय विभाग आपके पास हैं, तो अन्य मंत्रियों से भी आप अनुरोध करें कि विक्लांग, परित्यक्त एवं विधवा महिलाओं को अधिक से अधिक नौकरी मिले. प्रदेश के सहकारी बैंकों की हालत बहुत खराब है. आप यह खुद स्वीकार कर चुके हैं. प्रदेश की सहकारी बैंकों के लिये नाबार्ड ने इस साल 4700 करोड़ रुपये की साख सीमा निर्धारित की है. पुनर्वित्त पात्रता के लिये जो 50-50 प्रतिशत था, अब उन्होंने कम कर. 40/60 कर दिया है. अब आप यह बताइये कि जीरो परसेंट पर किसान को कैसे ऋण देंगे. वैसे भी किसान खैरात में नहीं चाहता है. किसान फ्री में बिजली नहीं चाहता है. किसान जीरो प्रतिशत पर ऋण नहीं चाहता है. आप तो दो-तीन प्रतिशत जो कम से कम हो आपको वह ब्याज लेना चाहिये, ताकि वह साहूकारों के चंगुल में न फंसे. आप तो नीति में परिवर्तन करें, क्योंकि आपकी इस नीति के कारण पैक्स की हालत बहुत खराब हो गई है. जो प्राथमिक सहकारी समितियां हैं, उनको आप कम्पनसेट भी नहीं कर पा रहे हैं और उनकी बहुत बुरी हालत है. इसको आपको ठीक करना चाहिये. मेरे पूर्व वक्ता गोविन्द सिंह जी ने आप पर आरोप लगाया था कि आपने सहकारिता का सरकारीकरण कर दिया है, पार्टीकरण कर दिया है. पहले जब आप विरोध में थे, तब आप कांग्रेस पर यही आरोप लगाते थे. लेकिन आप आये, तो आपने भी वही काम किया. तो फिर क्या फर्क पड़ा. मेरा आपसे अनुरोध है कि उज्जैन दुग्ध संघ के चुनाव अभी हुए हैं. उसमें नियम है कि कोई भी समिति एक वर्ष में 270 दिन में 20 हजार लीटर दूध दे, यह जरुरी है और समिति में जो प्रतिनिधि निर्वाचित होना चाहता है, वह एक साल में 700 लीटर दूध 180 दिन तक दे. लेकिन मैंने विधान में प्रश्न भी किया है, आप इसकी जांच करवा लें कि जिन लोगों ने 700 लीटर दूध और 180 दिन में नहीं दिया है, ऐसे लोगों को आपने समितियों में प्रतिनिधि ही नहीं, संचालक बना दिया है. संचालक बनने का मौका दिया है और नकली दुग्ध उत्पादकों के हाथ में, संचालक अगर चले गये, तो नकली दुग्ध उत्पादक संचालक बन गये. तो जो अमूल पैटर्न है, डॉ. कुरियन ने जो सपना देखा था, वह पूरा नहीं हो सकता है. हमारे यहां पर, चूंकि मेरा लगाव है, अखिल भारतीय पर मैं अध्यक्ष रहा था. तो मैंने चुनाव तो लड़ा है. मुझे 50 में चुनाव लड़ना पड़ा. बहादुर सिंह जी ने 8 में ही चुनाव लड़वा दिया. 8 में ही एक को, किसी सोसायटी को इस लायक ही नहीं रहने दिया, उनके क्षेत्र में बिलकुल नकली हुआ है, उन्हीं से पूछ लीजियेगा आप.

श्री बहादुर सिंह चौहान -- वह निर्विरोध निर्वाचित हो गया, मैं क्या करुं.

श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा -- वह आपने ही करवाया उनको. चुनाव लड़ना ही नहीं पड़ा. मुझे 50 में चुनाव लड़ना पड़ा, उनको 8 में भी नहीं और 8 में भी निर्विरोध निर्वाचित हुआ. इन्होंने किसी को खड़ा ही नहीं होने दिया. तो आप मेहरबानी करके यह देखिये कि यह सहकारिता में प्रजातंत्र समाप्त न हो. अब मैं सहकारी समितियों पर आता हूं. राजकुमार सिंह जी यादव, बीजेपी के विधायक, चन्देरी के. उन्होंने 2010 में एक ध्यान आकर्षण लगाया था कि सहकारी समितियों के माध्यम से करोड़ों का भ्रष्टाचार हो रहा है. सारा ब्लैक में जा रहा है. तब पारस जैन जी खाद्य मंत्री थे, तब उन्होंने एक जांच करवाई,तो संचालक खाद्य ने रिपोर्ट दी. उस पर आपका एक कर्मचारी हाईकोर्ट चला गया 2010 में. आज 2015 हो गया, आप स्टे भी वेकेट नहीं करवा पाये. 5 साल हो गया. यह 2015 की आप रिपोर्ट पढ़ लें. आपकी सहकारी समितियों में क्या क्या हो रहा है. यह रिपोर्ट मिस्टर चंदेल की है, खाद्य के उप सचिव. इन्होंने क्लीयरकट गबन लिखा है. इंदिरा महिला बहुद्देशीय सहकारी संस्था पीपरई, गरेठी, सेवा सहकारी संस्था रामनगर, जमाखेड़ीसे संचालित की जा रही है. आकेत की संस्था पीपरई से चालू की जा रही है. एक ही संस्था है रामनगर और डुगरासिरा, मोहली, सिंहपुर, चलदा, गरेठी सब जगह सहकारी समितियां हैं, उनको राशन की दुकान मिलना चाहिये,लेकिन उसकी बजाय एक ही रामनगर सोसायटी को आपने दे दी है. मेहरबानी करके आप यह चंदेल जी की रिपोर्ट पढ़िये. यह बहुत लम्बी रिपोर्ट है. इसमें आपने किसी को दंडिता नहीं किया है. 2010 वाली रिपोर्ट के बारे में आपने कहा था, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की. कम से कम छोटे छोटे कर्मचारी सहकारिता विभाग, सहकारी समितियों के हैं, उन सहकारी समितियों को आप भंग करिये. अपनी बीबी को उसने सहकारी समिति का संचालक बना दिया, खुद राशन की दुकान 10-10,15-15,20-20 चला रहा है. मुझे बड़ा अफसोस है कि मैं दो ढाई साल से इसके लिये आवाज उठा रहा हूं और मैं आपका आभारी हूं कि आपने मेरी शिकायत को आवश्यक कार्यवाही के लिये भेजा भी है. लेकिन सवाल यह है कि सहकारिता विभाग के उप पंजीयक और जिला सहकारी बैंक, वह गुना में है और पत्र सब अशोक नगर जाते हैं. जबकि वह गुना कलेक्टर के अधीन हैं. इस पर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है. मेरा आपसे अनुरोध है कि आप इन सब लोगों को राशन सिस्टम से अलग करिये और इन लोगों को दंडित करिये. अब तो आप कुछ मशीन वगैरह ला रहे हैं और कुछ ठीक काम कर रहे हैं, ताकि यह बेईमानी न हो सके. लेकिन मैं चाहता हूं कि इन पापियों को, ये डाकू माधव सिंह और मोहर सिंह से भी खतरनाक लोग हैं. क्योंकि वे तो बड़े लोगों को लूटते थे. ये लोग तो बिलकुल गरीब, बीपीएल, एससी,एसटी के लोगों को लूटते हैं. जो राशन गरीबों के लिये है, उसको खा जाते हैं और छोटे छोटे कर्मचारियों ने इसमें करोड़ों रुपये कमा लिये हैं.

सभापति महोदय, मैं पंचायत विभाग के बारे में निवेदन करना चाहूंगा. पंचायत में, मुझे खुशी है कि पंचायत के कर्मचारियों को भी राजस्व मंत्री जी कह रहे थे कि इनवाल्व किया. यह जो ओलावृष्टि हुई है, उसमें आप पंचायत कर्मचारियों को कहें कि पटवारी मनमानी करता है, तो आपके कर्मचारी भी होंगे, तो थोड़ा बैलेंस होगा, ऐसा मैं सोचता हूं. ताकि अच्छा आंकलन हो और जिन लोगों को वास्तव में नुकसान हुआ है, उनको फायदा आपके विभाग के कर्मचारियों के मार्फत से मिले. हमारे यहां पर एक झागर पंचायत में लाखन सिंह यादव सरपंच हैं, उन्होंने एक सचिव की शिकायत की है, उसका निलंबन भी हुआ, उस पर पुलिस रिपोर्ट भी हो गई, लेकिन वह स्थगन ले आया है अतिरिक्त आयुक्त, ग्वालियर से. तो ऐसे बेईमान लोगों पर अगर आप इस तरह से कार्यवाही नहीं करेंगे, वह आपसे बिलकुल डरते ही नहीं हैं. मुख्यमंत्री आवास योजना में भी आपके कई सचिव पैसा मांगते हैं. मेरा अनुरोध है कि जितनी सरकारी योजनायें हैं, इसमें जिन पंचायत सचिवों के विरुद्ध आपको रिपोर्ट मिले, मेहरबानी करके उसको लोकायुक्त से रंगे हाथों गिरफ्तार करवाइये, क्योंकि जनता इतनी जागृत नहीं है कि वह यह काम करवा सके. पंचायत के सचिव इतने होशियार हैं, मेरे यहां एक टीला पंचायत है. वहां का सचिव जब आदिवासी अनपढ़ महिला सरपंच थी, तब वह वहां सचिव था, जैसे ही वहां निर्वाचित बाबूलाल यादव समझदार वकील सरपंच बन गये, तो उसने अपना ट्रांसफर अन्यत्र आदिवासी एरिया में करवा लिया. जहां पर वह पैसा खा सके. तो इस ओर आप ध्यान दें. जैसे सार्वजनिक शौचालय हैं, मनरेगा के थ्रू बनते हैं, पशु शेड हैं, इसमें जबरदस्त भ्रष्टाचार हुआ है. कपिल धारा में बहुत भ्रष्टाचार हुआ है. ऐसा नहीं है कि मैंने शिकायतें नहीं की हैं. जहां जहां लोग मुझे बोलते हैं, मैं उनकी शिकायत बाकायदा करता हूं. लेकिन कोई कार्यवाही नहीं होती है. एक और अनुरोध है कि आज कल सरकारी एसडीओ और तहसीलदार इसी मुहिम में लगे हैं कि कौन से सरपंच को रेत लाते हुए पकड़ा जाये. आप विकास कार्यों की अनुमति देते हैं, तो कम से कम यह प्रावधान करिये कि पंचायत के सरपंच रेत और मिट्टी, मुरम ला सकें, इसका आप प्रावधान करिये, नहीं तो उनका शोषण होता है और उसके कारण उनकी कॉस्ट ऑफ कंस्ट्रक्शन भी बढ़ती है. तो इस पर आप विशेष रुप से विचार करने का कष्ट करें. मेरे यहां पर एक नगेसिरी पंचायत थी. उस पंचायत के संबंध में विधान सभा में एक प्रश्न किया था, आपने खुद उत्तर दिया था कि वहां सरपंच के पुत्र, पत्नी दो सचिव हैं, वह सब लोग मनरेगा के मजदूर थे, लेकिन एक एसडीओ, श्री सिसोदिया थे, उन्होंने उन सब को दोष मुक्त कर दिया. अल्टीमेटली लोगों को अदालत जाना पड़ा और अदालत में पूर्व सरपंच, सरपंच पति, देवर सब के खिलाफ 420,467 और 468 के मुकदमें अदालत ने दर्ज किये हैं. मेरा आपसे अनुरोध है कि ये डिप्टी कलेक्टर जो दो साल में रिटायर होने वाले आते हैं . इनको आप नियुक्त कर देते हो तो यह पैसा इकट्ठा करने का ही काम करते हैं, रिटायर होने वाले हैं ऐसे सरपंचों को और सचिवों को जिन्होंने मनरेगा में करोड़ो रूपया कमाया है ऐसे गरीब लोग जो बेचारे अपने काम के लिये रेत ला रहे हैं, अगर व्यापार के लिये ला रहे हों तो आप जरूर पकड़िये, विभाग के कर्मचारी ऐसे लोगों को पकड़ पकड़ कर पैसा इकट्ठा कर रहे हैं. मेरा आपसे अनुरोध है कि जैसा डॉ. गोविंद सिंह जी ने बताया कि आपने बंदरबांट बहुत जबरदस्त की है, मेहरबानी करके आपके प्रभार के जिले में भी ऐसी बंदरबाट कर दीजिये, हम लोगों को भी 2-4 करोड़ रूपये विकास कार्यों के लिये दे दीजिये. हम देखेंगे कि वास्तव में विकास के कार्य हो गड़बड़ न हो, धन्यवाद, जय हिन्द.

श्री रामेश्वर शर्मा(हुजूर) -- सभापति महोदय, मैं मांग संख्या 17, 30, 34, 59, 62 और 74 का समर्थन करता हूं. मध्यप्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान पंचायत विभाग का है क्योंकि मध्यप्रदेश की प्रजातांत्रिक व्यवस्था में और बहुतायत क्षेत्र में पंचायत का सर्वाधिक विस्तार है. इस दिशा में मुख्यमंत्री जी ने, पंचायत मंत्री जी ने हमारी सभी पंचायतों को सर्व सुविधा युक्त बनाने का जो लक्ष्य पंच परमेश्वर योजना के माध्यम से लिया है, वह सराहनीय है. आज हम कह सकते हैं कि किसी नगर निगम की अच्छी सड़क अगर दिख रही है तो उसके मुकाबले एक ग्राम पंचायत में भी सड़क बनाने की जबावदारी पंच परमेश्वर योजना के माध्यम से दिखी है इसके लिये मंत्री जी को बधाई.

माननीय सभापति महोदय, पंचायतों के विकास को चहुमुंखी विकास के योगदान का बनाया है यह अपने आप में बहुत बड़ा उदाहरण है. हम आज यह कह सकते हैं कि पंचायती क्षेत्र में एक और विस्तार की आवश्यकता है, हालांकि मंत्री जी इस बात से सहमत हैं मुख्यमंत्री जी भी इस बात से सहमत हैं क्योंकि हमारे यहां ग्राम पंचायत के कार्यालय बन रहे हैं, हम चाहते हैं कि जहां पर ग्राम पंचायत के कार्यालय बनें वहां पर कम से कम 2-3 एकड़ भूमि आरक्षित की जाये, जहां पर ग्राम पंचायत का कार्यालय हो, वहीं आंगनवाड़ी हो, सरकार के जितने भी व्यवस्थित कार्यालय हैं वह सब एक साथ लगें जिससे कभी भविष्य में पंचायती राज योजना से, या ग्रामीण सचिवालय हमें संचालित करना पड़े तो हमें उनके कार्यालयों को दूर दूर ढूंढना न पड़े, बल्कि एक स्थान पर ही हों. अगर हो सके तो वहां पर एक मंगल भवन भी बनाने की व्यवस्था की जाये. मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत जो गरीब बेटियों के लिये शादी में नि:शुल्क दिया जाये जिससे उनका वहां पर विवाह हो सके. और सामाजिक न्याय की जो चुनौतियां आ रही हैं, वह चुनौतियां आज मंहगाई, दहेज प्रताडना के कारण, दहेज की मांग के कारण हैं लेकिन एक सामान्य परिवार का पिता अपनी लड़की की शादी करना चाहता है तो टेंट का खर्चा भी वह पिता नहीं उठा सकता है, इसलिये मैं चाहूंगा कि इस तरह का विस्तार हम ग्राम पंचायत में करेंगे तो बहुत अच्छा होगा.

सभापति महोदय, माननीय मुख्यमंत्री जी ने एक घोषणा की थी उस पर अमल हुआ, मैं इसके लिये सरकार को बधाई देना चाहता हूं. मुख्यमंत्री जी ने कहा था कि अब दूर दराज गांव की बेटी भी 1-1 किलोमीटर से सिर पर पानी ढोकर नहीं लायेगी उसके घर में भी नल लगाया जायेगा. इस पर भी काम हुआ, सैकड़ों पंचायतों में 40 लाख से लेकर के 1 करोड़ तक की नल जल योजनायें वहां पर स्वीकृत हुई लेकिन आज जिस तरह से सूखे ने अपने पैर पसारे हैं, जगह जगह जल स्त्रोत, ट्यूव वैल हमारे सूख गये हैं, 700-800 फीट तक हमारे ट्यूव वैल में पानी नहीं है. मैं मंत्री जी से प्रार्थना करूंगा मैंने मुख्यमंत्री जी से भी व्यक्तिगत रूप से आग्रह किया है, पीएचई मंत्री जी से मैंने आग्रह किया है हमारे हर गांव में लगभग पांच से छे: एकड तक के तालाब हैं, यह तालाब या तो जीर्णशीर्ष अवस्था में हैं या थोड़े बहुत अतिक्रमण के शिकार हैं, या इनको तालाब कहना लोग भूल गये हैं, पर सरकारी रिकार्ड में आज भी यह तालाब हैं, अगर मंत्री महोदय चाहें तो मनरेगा की राशि से अगर और भी राशि की जरूरत पड़े तो विधायक निधि, सांसद निधि या अन्य कोई निधि का उपयोग करते हुये इन तालाबों का जीर्णोद्धार कर देंगे तो आने वाले दिनों में जो पीने के पानी की समस्या की चुनौती है शायद हम उसका मुकाबला कर सकें और हमारे जल स्त्रोत वहां पर पानी देने लगें.

इसलिये मैं चाहता हूं कि इसमें भी मनरेगा से कनवर्शन की योजना लागू होगी तो अच्छा होगा और जो मंशा मुख्यमंत्री जी की है उसके माध्यम से हम नल जल योजना को घर घर तक पहुंचाने में कामयाब होंगे.

माननीय सभापति महोदय, आज हम और आप देख रहे हैं कि लोकतंत्र की सबसे पहली सीढी पंच है, पंच से सरपंच है, सरपंच से जनपद का सदस्य है, जनपद से जिला पंचायत का सदस्य है, और जिला पंचायत के सदस्य के बाद विधायक और सांसद का निर्वाचन है. अगर यह प्रक्रिया चुनाव की है तो मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि क्या पंच और सरपंच का चुनाव जो कि 100-200 वोटरों के बीच में होता है, सरपंच का चुनाव अगर 1000 वोटरों पर होता है, एक ही गांव का सरपंच होता है अधिकतर 2 या 3 गांव होते हैं जिसकी दूरी लगभग 2 से ढाई किलोमीटर अधिकतम होती है तो क्या हम सरपंचों का चुनाव फार्म भरने से 3 दिन के अंदर सरपंच का चुनाव करा सकते हैं ? अगर हम यह चुनाव करेंगे तो धन का अपव्यय रूकेगा, वहां पर होने वाली गड़बड़ियों पर भी आसानी से प्रतिबंध लगाया जा सकता है. 3 दिन के अंदर पंच और सरपंच का निर्वाचन होना चाहिये. इसी प्रकार से मेरी प्रार्थना है कि जनपद के सदस्य का और जिला पंचायत के सदस्य के चुनाव में भी 20 से 30 दिन दिये जाते हैं. जिस तरह से धन का अपव्यय होता है, हम और आप जिस निर्वाचन की प्रक्रिया से आते हैं और हमारे चुनाव में पर्यवेक्षक का ध्यान रहता है लेकिन इस प्रक्रिया में जिस तरह की शिथिलता है, लाखों रूपये चुनाव में खर्च होते हैं ,जब वे निर्वाचित होकर के आते हैं तो जीतने के बाद उनका ध्यान अन्यत्र रहता है तो मेरी प्रार्थना है कि पूरा सदन इस पर विचार करे, विपक्ष भी मेरे सुझाव पर सहमत होकर के विचार करे कि सरपंच-पंच का चुनाव 3 दिन के अंदर और जिला पंचायत सदस्य और जनपद पंचायत सदस्य का निर्वाचन 7 दिन के भीतर हो जाना चाहिये जिससे समय, और पैसे का अपव्यय रोका जा सके तथा दूसरी अन्य प्रकार की हाईजेक करने की जो प्रवृत्ति जो विकसित हो रही हैं, चाहे वह नशे की प्रवृत्ति हो, उससे बचा जा सकता है और लोकतंत्र की पवित्र पाठशाला से जब यह निर्वाचित होकर आयेंगे तो आने वाले पंच, सरपंच ही नहीं आन वाले भविष्य के अनेक जन नेताओं के नाते काम का उदाहरण प्रस्तुत कर सकें.

सभापति महोदय-- शर्मा जी कृपया समाप्त करें.

श्री रामेश्वर शर्मा -- सभापति महोदय, मैं एक ओर प्रार्थना करता हूं कि इस निर्वाचन प्रक्रिया को और भी सरल बनाया जाये. हालांकि मैं भी पूरी तरह से कन्फ्रम नहीं हूं. क्या हम यह कर सकते हैं कि जब जिला पंचायत के सदस्य का चुनाव हो तो विधायक उसमें एक मतदाता की हैसियत से रखा जाये, जब विधायक उसका सदस्य होगा तो मैं समझता हूं कि पारस्परिक संबंध ठीक होंगे , विधायिका वहां पर ठीक से काम करेगी और वहां पर होने वाली जो अनियमिततायें होती हैं, अनकन्ट्रोल की जो स्थिति होती है शायद हम उस स्थिति पर एक सामान्य प्रक्रिया के तहत कार्य कर सकते हैं. इस तरह की प्रक्रिया अगर लागू की जा सकती है तो बहुत अच्छा इस पर कार्य होगा.

सभापति महोदय, आज हम यह महसूस करते हैं कि जो सरपंच जीता, जो जनपद का सदस्य जीता जो जिला पंचायत का सदस्य जीता उसे मालूम है कि अगली बार मुझे इस वार्ड से चुनाव नहीं लड़ना , क्योंकि चुनाव में आरक्षण का जो रोटेशन है वह केवल 5 साल का है, और 5 साल का डर न होकर उसमें स्वच्छन्दता पैदा करता है. उसे किसी प्रकार से जनता का भय भी नहीं रहता है. मैं चाहता हूं कि आप और सदन इस पर विचार करे कि क्या इस आरक्षण की प्रक्रिया को इस रोटेशन को क्या हम 10 साल में कन्वर्ड कर सकते हैं ? अगर हम इसको 10 साल में कन्वर्ड करेंगे तो वहां पर निर्वाचित प्रतिनिधि चाहे वह सरपंच हो, जनपद हो या जिला पंचायत हो वह अपना व्यवहार ठीक रखेगा और लोकतंत्र पर भरोसा रखेगा और उसे भी लगेगा कि अगला चुनाव मुझे यहीं से लड़ना है तो काम की प्रक्रिया और सुचारू रूप से संचालन में सहायक भूमिका अदा करेगा.

सभापति महोदय पंचायत मंत्री के पास में सामाजिक न्याय विभाग भी है. सामाजिक न्याय के लिये काफी काम आदरणीय गोपाल भार्गव जी ने किये हैं. विकलांगों के लिये सायकिल, उनको पेंशन की व्यवस्था की गई है. लेकिन मैं चाहता हूं कि जो रैन बसेरा हैं, माननीय पंचायत ने मेरी जिला पंचायत में घोषणा भी की है. कोलार में एक रैन बसेरा देने की घोषणा की थी जो अस्पताल में बनेगा, बैरागढ़ में एक रैन बसेरा देने की घोषणा की थी तथा 11मील पर रैन बसेरा देने की घोषणा की थी, इस तरह के जो रैन बसेरा है. हम चाहते हैं कि यह ऐसी जगहों पर बनें जिसका सामाजिक रूप से खासकर के जो बस स्टेन्ड या अस्पतालों में आने जाने वाले नागरिक हैं, यह इन रैन बसेरा का लाभ ले सकें क्योंकि अस्पताल के पास में अगर रैन बसेरा बनते हैं तो बाहर से और दूर दराज से जो आने वाले लोग हैं उनको अस्पताल में जगह नहीं होती वो रैन बसेरा का उपयोग कर सकते हैं, शहरी क्षेत्र में और जगहों पर बना देते हैं पर इस तरह से अगर यह काम करेंगे तो मुझे लगता है कि बहुत ज्यादा अच्छा होगा.

सभापति महोदय--कृपया समाप्त करें. 10 मिनिट से ज्यादा हो गये हैं.रामनिवास जी रावत....

श्री रामेश्वर शर्मा-सभापति जी रावत जी तो वरिष्ठ सदस्य हैं वे तो बोलते ही रहते हैं. आपका और रावत जी का आशीर्वाद मेरे ऊपर है.

सभापति महोदय-कृपया आधा मिनिट में समाप्त करें.

श्री रामेश्वर शर्मा-- अरे राजनीति में आधा मिनिट में क्या होता है, आप भी जानते हैं. (हंसी).....

मैं माननीय मंत्री महोदय से प्रार्थना करना चाहूंगा कि जो नल जल योजना है, इस नल जल योजना में भी हमारी पीएचई मंत्री भी यहां बैठी हुई हैं मैं उनसे भी बात करूंगा कि जब गांव में नल जल योजना लगे तो हम पाइप लगाकर, टंकी बनाकर और खटका दबाकर उसको छोड़कर नहीं आयें, बल्कि नल जल योजना में घर-घर कनेक्‍शन दिये जायें और 3 महीने तक वह ठेकेदार उस योजना का संचालन करे ऐसा प्रावधान डले, यह पंचायत विभाग में आता है तो पंचायत विभाग करे और यदि पीएचई पानी में आता है तो माननीय मंत्री महोदय इसके लिये करें. नहीं तो क्‍या होता है कि तकनीकी रूप से इतनी बड़ी योजना लगाकर चले आते हैं बाद में वह योजना सुचारू रूप से नहीं चलती, हमारे पैसे का मिसयूज होता है और साथ में जनता को उसका लाभ नहीं मिलता, तो हम यह चाहते हैं कि इस तरह की योजनायें वहां पर की जायें. मैं माननीय मंत्री महोदय से प्रार्थना करूंगा कि मेरी जो 53 पंचायतें हैं जिसमें अभी हमने प्रत्‍येक पंचायत में पानी का एक टेंकर उपलब्‍ध कराया है.

सभापति महोदय-- रामेश्‍वर जी, श्री रावत जी बोलेंगे अब.

श्री रामेश्‍वर शर्मा-- तो धन्‍यवाद तो दे दूं माननीय मंत्री महोदय का.

सभापति महोदय-- दे दो.

श्री रामेश्‍वर शर्मा-- मैं आपके माध्‍यम से और पूरे सदन के माध्‍यम से ....

सभापति महोदय-- संख्‍या बहुत लंबी है.

श्री रामेश्‍वर शर्मा-- चलेगा, आपने तो टाइम शायद 8-9 बजे तक का कर दिया. रात्रि का खाना भी शायद यहीं है, ऐसी सूचना है. मैं माननीय मंत्री महोदय का बहुत हृदय से धन्‍यवाद देता हूं और मैंने जो निर्वाचन प्रक्रिया पर कुछ बोला है, अगर इस पर कुछ विचार किया जा सकता है तो मैं समझता हूं कि लोकतंत्र के हित में होगा और लोकतंत्र का संरक्षण भी होगा, इस निमित्‍त माननीय मंत्री महोदय से प्रार्थना है.

श्री रामनिवास रावत (विजयपुर)-- माननीय सभापति महोदय मैं माननीय मंत्री जी द्वारा प्रस्‍तुत मांग संख्‍या 17, 30, 34, 59 , 62, 74 द्वारा प्रस्‍तुत मांगों का विरोध करते हुये कटौती प्रस्‍तावों का समर्थन करता हूं. माननीय सभापति महोदय, माननीय मंत्री जी का बहुत भारी भरकम, बड़ा विभाग है, यह बात अलग है कि वह संतुष्‍ट नहीं है, मैं समझता हूं कि प्रदेश की 70 प्रतिशत ग्रामीण आबादी से आप ही संबंधित हो, सीधे, यदि उनके विकास में कोई सहयोग प्रदान करता है तो वह भी आप हो, और अगर बाधक भी बनता है तो वह भी आप ही हो, लेकिन मैं माननीय मंत्री जी के सबसे पहले सहकारिता विभाग पर दो शब्‍द कहना चाहूंगा कि सहकारिता विभाग जैसी कि संविधान की हमारी मूल अवधारणा थी, कल्‍याणकारी राज्‍य की स्‍थापना, इसको लेकर के लोगों के कल्‍याण के लिये बनाया गया, लेकिन जिस तरह से सहकारिता विभाग हमारी राजनैतिक, माननीय मंत्री जी आपकी राजनैतिक अपेक्षाओं और आकांक्षाओं की भेंट चढ़ रहा है, जिस तरह से राजनैतिक शोषण का अड्डा बना हुआ है, बड़ा दुर्भाग्‍यपूर्ण है, जहां कांग्रेस की यूपीए सरकार ने 72 हजार करोड़ रूपये की ऋण माफी की, उसका कितना बड़ा भ्रष्‍टाचार इस प्रदेश में देखने को मिला और मिला भी लेकिन आपने कोई बहुत बड़ी कार्यवाही किसी मसले पर नहीं की. सभापति महोदय, सहकारिता के आप भी पुरोधा रहे हैं, रीवा जिले की डबोरासेंक में बैंक घोटाला, हरदा की सहकारी बैंक में घोटाला, ग्‍वालियर की चिनार में सहकारी संस्‍था में कृषक ऋण माफी घोटाला और शिवपुरी में मृत व्‍यक्तियों को लोन देकर और उनकी ऋण माफी भी कर दी, जांच भी हो गई, उसकी रिपोर्ट भी है, लेकिन आप कार्यवाही नहीं कर रहे और जो व्‍यक्ति इसमें इनवाल्‍व है उसी को आपने बैंक मेनेजर बना रखा है, बड़े दुर्भाग्‍य की बात है. इसके साथ-साथ आपने जैì