मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा षोडश सत्र

 

 

फरवरी-मार्च, 2018 सत्र

 

बुधवार, दिनांक 07 मार्च, 2018

 

(16 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1939)

 

 

[खण्ड- 16 ] [अंक- 4 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

बुधवार, दिनांक 07 मार्च, 2018

 

(16 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1939)

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.02 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ. सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

 

शासकीय भूमियों का निजी भूमि में हस्‍तांतरण

[राजस्व]

1. ( *क्र. 757 ) श्री अजय सिंह : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र. शासन राजस्‍व विभाग मंत्रालय वल्‍लभ भवन के ज्ञाप क्रमांक एफ 16-36/20/2013/सात/शा. 2, भोपाल दिनांक 17.01.2014 के अनुसार भूमि स्‍वामी के हक में आवंटित भूमि के शासकीय पट्टेदारों द्वारा व्‍यक्तिगत परिस्थितियों के कारण भूमि विक्रय/अंतरण के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं, उसके अनुसार संहिता की धारा 165 (7) ख में प्रावधान है कि धारा 158 (3) के सभी भूमि स्‍वामी अपने धारणाधिकार की ऐसी कृषि भूमि को बिना कलेक्‍टर की आज्ञा से 10 वर्षों तक विक्रय नहीं कर सकते हैं? (ख) प्रश्नांश (क) हाँ तो कलेक्‍टर एवं जिला दण्‍डाधिकारी सतना के आदेश क्र./राजस्‍व/2017/87 सतना दिनांक 22.03.2016 के निर्देशों का पालन तहसील रघुराजनगर के ग्राम रामस्‍थान में एक हजार एकड़ से अधिक की शासकीय भूमि को खुर्द-बुर्द किये जाने के प्रकरणों में हुई शिकायतों पर कब-कब कार्यवाही की गयी? प्रकरणवार बतायें। (ग) क्‍या तहसीलदार, तहसील रघुराजनगर के पत्र क्रमांक 306/आ.क्र./तह.रघु/2017, दिनांक 31.08.2017 के जरिये क्‍या 04 शासकीय भूमियों के अवैध कब्‍जाधारियों को नोटिस जारी कर प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है? क्‍या हल्‍का पटवारी रामस्‍थान द्वारा प्रिज्‍म सीमेंट, अल्‍ट्राट्रेक, अमीरे कोल सहित उक्‍त ग्राम के 50 अवैध कब्‍जाधारियों के विरूद्ध तहसीलदार के हस्‍ताक्षरित नोटिसों को क्‍या प्रश्‍न तिथि तक तामील करवाया गया है? अगर तामील करवाया गया है तो क्‍या प्रश्‍न तिथि तक उन्‍हें तहसीलदार के कार्यालय में जमा करवाया गया है? ता‍मील हुये सभी नोटिसों की एक-एक प्रति दें। (घ) प्रश्‍नांश (ग) में उल्‍लेखित भूमियों को राज्‍य शासन कब तक निष्‍क्रांत संपत्तियों का अंतरण अवैधानिक मानते हुये शासकीय संपत्ति भू-अभिलेखों में दर्ज करेगा? अगर नहीं करेगा तो क्‍यों? कारण व नियम उपलब्‍ध करायें।

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जी हाँ। (ख) प्रश्नांश (क) में वर्णित भूमि-स्वामी हक में आवंटित भूमि/शासकीय पट्टेदार के क्रय विक्रय के संबंध में कोई शिकायत कार्यालय को प्राप्त नहीं है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी नहीं। पत्र क्रमांक 306, दिनांक 31.08.2017 के जरिये 04 व्यक्तियों को नोटिस जारी कर उनके स्वत्व के संबंध में जानकारी चाही गयी थी न कि शासकीय भूमि में अवैध कब्जाधारियों के संबंध में। इसके अलावा अन्य 16 व्यक्तियों को नोटिस तैयार कर तामिली हेतु कार्यवाही की जा रही है, जिसमें प्रिज्म सीमेन्ट, अल्ट्राटेक, अमीरे कोल सहित अन्य 13 व्यक्ति शामिल हैं। तामील हुई नोटिस की छायाप्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (घ) उत्‍तरांश () में वर्णित भूमियों निष्क्रांत भूमियां नहीं है। वर्ष 1958-59 की खतौनी अधिकार अभिलेख में शासकीय भूमियां थी, जिनका नियमानुसार बंटन/व्यवस्थापन किया गया है।

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा सौभाग्‍य है, इस सत्र के प्रश्‍नकाल के दिन मेरा पहला प्रश्‍न, वैसे तो मिलता ही नहीं कोई प्रश्‍न, लेकिन पता नहीं कैसे मेरा प्रश्‍न आ गया. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय ने पहला उत्‍तर दिया, फिर दूसरा उत्‍तर दिया, फिर तीसरा उत्‍तर दिया, संशोधन पर संशोधन है. मूल बात यह है कि माननीय मंत्री महोदय ने कहा कि ऐसी कोई शिकायत नहीं पाई गई. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यदि आपकी अनुमति हो तो मैं एक पत्र पढ़ दूं? कलेक्‍टर सतना दिनांक 22.03.2016 को आदेश करते हैं, क्रमांक/87/राजस्‍व/2016, सतना जिले में खासतौर से सतना नगरी क्षेत्र में हेराफेरी में पूर्व में ही दर्ज शासकीय भूमि को पिछले कुछ वर्षों के दौरान कतिपय निहित स्‍वार्थी भू-माफियाओं ने फर्जी पट्टों के माध्‍यम से कानून एवं नियमों तथा प्रक्रियाओं का उल्‍लंघन करते हुए, या अतिक्रमण कर बेनामी पट्टों के माध्‍यम से षड्यंत्रपूर्वक कतिपय निहित स्‍वार्थी तत्‍वों के नाम भू-अभिलेखों में इन्‍द्राज किए जाने की शिकायतें प्राप्‍त हुईं. आपने कहा कोई शिकायत प्राप्‍त नहीं हुई, कलेक्‍टर ने पत्र लिखा 2016, उक्‍त अवैध कार्य भू-अभिलेख राजस्‍व अधिकारी एवं कर्मचारीगण की मिलीभगत से किया गया. उक्त अवैध कार्य में सुनियोजित तरीके से दर्जनों ग्रामों की भूमि-नक्शों आदि का गुम होना बताया जा रहा है तथा अनेक स्थानों पर फर्जी नक्शे एवं भू-अधिकार अभिलेख को प्रचलित करा दिया गया है. उक्त अवैध कृत्य एवं कार्यवाही के कारण जहां शासकीय जमीन हड़पने का षणयंत्र हुआ वहीं दूसरी ओर जन सामान्य को भी अनेक कुचक्रों का सामना करना पड़ रहा है जिसके कारण राजस्व आदि से संबंधित गंभीर अपराध और समस्यायें पैदा हो रही हैं. साथ ही कानून और व्यवस्था की स्थिति भी पैदा हो रही है और जमीन से संबंधित अनेक हिंसक वाद-विवाद भी हो रहे हैं. अत: उक्त तथ्यों एवं परिस्थितियों के परिप्रेक्ष्य में वर्णित प्रकरणों की पूर्व बंदोबस्त एवं वर्ष 1958-59 में भूमि स्वामी पर शासकीय सिट के आधार पर कार्यवाही करते हुये उनकी जांच करने और शासकीय भूमि जो खुर्द-बुर्द हुई उन्हें उक्त षणयंत्रों से मुक्त कर पुन: शासकीय अभिलेख में दर्ज करने हेतु तथा अन्य अनुषांगिक कार्यवाही करने एवं दोषी लोगों के विरूद्ध एफ.आई.आर.दर्ज करने और आपराधिक मामला चलाने के संबंध में सतना जिले के समस्त अनुविभागो के संबंधित अनुविभागीय अधिकारियों की अध्यक्षता में एक विशेष जांच समिति गठित की जाती है जिसके सदस्य प्रत्येक तहसील के तहसीलदार, प्रभारी तहसीलदार होंगे तथा प्रभारी अधिकारी भू-अभिलेख इसके समन्वयक होंगे. उक्त जांच समिति अपना प्रतिवेदन तीन माह के अंदर आवश्यक रूप से मुझे प्रस्तुत करेगी. यह कलेक्टर का पत्र है.

अध्यक्ष महोदय, मंत्री महोदय का उत्तर है कि कोई जांच प्राप्त नहीं हुई है.मैं यह कलेक्टर का पत्र पढ़कर के बता रहा हूं जो कि वर्ष 2016 का है. अध्यक्ष महोदय, जब मैंने विधानसभा में प्रश्न पूछा उसके बाद के एक पत्र का उल्लेख और करना चाहता हूं. कार्यालय अभिभाषक एवं लोक अभियोजक, सतना का पत्र क्रमांक 38/शासकीय दिनांक 20.2.2018 का यह तीसरा स्मरण पत्र है. यह पत्र कलेक्टर औऱ पुलिस अधीक्षक दोनों को लिखा जाता है कि आवेदन पत्र वास्ते चालानी कार्यवाही किये जाने हेतु धारा 73(8) के तहत आरोपीगण रामानंद सिंह पटवारी, शिवभूषण सिंह ,पटवारी, रामशिरोमणी सिंह, पटवारी, तहसीलदार श्री खरे तथा मनोज श्रीवास्तव और बहुत सारे लोगों के नाम हैं इनके ऊपर अभी तक एफ.आई,आर. दर्ज क्यों नहीं की गई . यह पत्र अभियोजक ने कलेक्टर और एस.पी. दोनों को लिखा है . एक तरफ मंत्री जी कह रहे हैं कि कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है.

अध्यक्ष महोदय, एक हजार करोड़ का घपला है सिर्फ दो तहसीलों में दो गांव में किस तरह से 1958-59 की जमीन पट्टे की दी जानी थी, शासकीय जमीन थी, मंत्री जी ने कबूल किया है कि वह शासकीय जमीन थी, शासकीय जमीन के पट्टे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लोगों को दी उसका नामांतरण करने का अधिकार सिर्फ कलेक्टर का होता है. मंत्री जी बता दें कि ऐसे कितने प्रकरण हैं जहां पर कलेक्टर को नामांतरण के लिये प्रकरण पेश किया गया हो. दूसरा प्रश्न यह है कि जब कलेक्टर लिख रहे हैं, अभियोजक लिख रहे हैं उसके बाद भी एफ.आई.आर.दर्ज नहीं हो रही है. तीन चार निचले तबके के लोगों के ऊपर तो कार्यवाही कर दी.

अध्यक्ष महोदय, अनेक सत्रों में कई विधायकों ने, भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने भी इसी तरह के प्रकरण में ग्राम सुनोरा और ग्राम सांज के बारे मे प्रश्न पूछे हैं लेकिन सभी प्रश्नों के उत्तर इसी तरह से गोल मोल आते रहे हैं. मैं तथ्यों के साथ कह रहा हूं, कलेक्टर ने जो पत्र लिखा उसका उल्लेख कर रहा हूं उसके बाद भी इस प्रकरण में कोई कार्यवाही नहीं हो रही है. आखिर कौन ऐसा प्रभावशाली व्यक्ति है जिसके कारण से मंत्री जी कार्यवाही नहीं हो रही है.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो जवाब प्राप्‍त हुआ है और मैंने दिया है इसमें इस पत्र के बारे में मना नहीं किया कि कलेक्‍टर ने पत्र नहीं लिखा है, लेकिन ऐसी कोई शिकायत स्‍पेसिफिक कार्यालय को प्राप्‍त नहीं हुई है या जवाब मिला है, लेकिन मैं माननीय नेता प्रतिपक्ष जी की इस बात से सहमत हूं कि सारे प्रश्‍नों को मेरे भी अध्‍ययन करने के बाद लग रहा है कि कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर है और इसलिये नोटिस दिये हैं, फार्मेलिटी हुई है लेकिन कार्यवाही नहीं हुई है, मैं इसको स्‍वीकार करता हूं. और इसलिये संभागायुक्‍त की अध्‍यक्षता में पूरे जिले के ऐसे मामलों की हम जांच करायेंगे.

श्री अजय सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह फिर से एक तरह से मामला टालने की बात है, उन्‍होंने कबूल किया इसके लिये मैं माननीय मंत्री महोदय को धन्‍यवाद देता हूं, कल शायद ब्रीफिंग ली है, काफी अधिकारी बुलाये गये थे और ब्रीफिंग हुई होगी, उससे उनको भी पता चल गया कि इसमें कुछ न कुछ दाल में काला है. यदि सही में आप कार्यवाही करना चाहते हैं और इसकी तह तक जाना चाहते हैं तो विधान सभा की सर्वदलीय समिति बनाकर इसकी जांच करवा दें, वह बेहतर रहेगा. क्‍या जांच करवायेंगे ?

श्री उमाशंकर गुप्‍ता-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे लगता है इसकी जरूरत अभी नहीं है, हम संभागायुक्‍त की अध्‍यक्षता में एक दल गठित करके और सतना जिले के पूरे मामलों की जांच करायेंगे.

श्री अजय सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सिर्फ दो गांव का मामला है सुनोरा और रामस्‍थान, शहर से लगे हुये हैं. आरटीओ विभाग टीपी दे रहा है कि 16 टन निकलना चाहिये, उसमें 40 टन निकल रहा है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उन जमीनों में भयंकर माइनिंग हो रही है, वह शासकीय जमीन है. मेरा आरोप है कि हजार करोड़ रूपये का घोटाला है और आप बचाना चाहते हैं. यदि आप निष्‍पक्ष हैं, यदि सुशासन चाहते हैं, भ्रष्‍टाचार समाप्‍त करना चाहते हैं तो सदन में घोषणा कर दें कि पूरी सर्वद‍लीय समिति बनाकर, विधायकों की समिति बनाकर जांच करवा लें क्‍योंकि संभागायुक्‍त से जांच की आप कह रहे हैं, मुख्‍य सचिव ने तक रेवेन्‍यू की वहां पर हर संभाग में बैठक ले ली, क्‍या हुआ ? यह मामला वहां पर उजागर हुआ, कुछ नहीं हुआ. कलेक्‍टर एफआईआर दर्ज करने के लिये कह रहा है, कलेक्‍टर पत्र लिख रहा है कि 2016 में एफआईआर दर्ज होना चाहिये, तत्‍कालीन पटवारियों के नाम, तहसीलदारों के नाम तक लिख रहा है उसके बाद 2 साल हो गये कुछ नहीं हो रहा. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपसे अनुरोध है, माननीय मंत्री महोदय बहुत संवेदनशील हैं और इस तरह से भ्रष्‍टाचार को बचाना नहीं चाहते हैं तो कृपया करके इस तरह की कमेटी घोषित कर दें.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता-- माननीय सदस्‍य जो कह रहे हैं कि कलेक्‍टर ने कोई पत्र लिखा है, इस‍की जानकारी अभी मेरे पास नहीं है, लेकिन अगर लिखा है तो उस पर भी कार्यवाही होगी. मैंने स्‍वयं जब यह कहा है कि मैंने जब इस सारे मामले को समझा है और इसमें मुझे लगा है कि कहीं न कहीं इसमें गड़बड़ है, इसलिये संभागायुक्‍त की अध्‍यक्षता में हम जांच करायेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय-- वह पत्र तो बता रहे हैं न.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं उस पत्र को भी ले लूंगा और उस पर भी आगे कार्यवाही करेंगे.

श्री बाबूलाल गौर-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत गंभीर मामला है.

अध्‍यक्ष महोदय-- आपको टाइम देंगे, पहले प्रतिपक्ष के नेता जी पूछ लें.

श्री अजय सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तत्‍कालीन कलेक्‍टर संतोष मिश्र जी ने यह पत्र लिखा है, यह पूरी जानकारी किस तरह से ब्रीफिंग होती है इस पत्र का भी हवाला नहीं दिया गया और अभियोजक ने साफ कहा है कि फलाने-फलाने लोगों के ऊपर केस दर्ज हो, एफआईआर हो, माननीय मंत्री महोदय कह रहे हैं कि पूरे सतना जिले की जांच करा लो. मैं तो सीधे आरोप लगा रहा हूं कि दो पटवारी हल्‍का सुनोरा और रामस्‍थान आप उसकी जांच एक विधान सभा की समिति से करा लीजिये न, दूध का दूध और पानी का पानी पता चल जायेगा, यदि आप सही में मुख्‍यमंत्री महोदय की मंशा चाहते हैं कि भ्रष्‍टाचार मुक्‍त हो, स्‍वर्णिम मध्‍यप्रदेश बने, तो समिति से करा दीजिये.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, किसी जांच में कोई आपत्ति नहीं है आप दो तहसील का कह रहे हैं मैं पूरे जिले का कह रहा हूं.

श्री अजय सिंह-- मैं 2 तहसील नहीं कह रहा हूं, 2 पटवारी हल्‍के की बात कर रहा हूं, हजार करोड़ का मामला है.

श्री रामनिवास रावत-- 2 पटवारी हल्‍के, 2 गांव की बात कर रहे हैं.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता-- हां करा देंगे. हम कह रहे हैं न हम पूरी तहसील की करा देंगे. सतना जिले की करा देंगे, जांच में कोई आपत्ति नहीं हैं, लेकिन संभागायुक्‍त की अध्‍यक्षता में हम कमेटी बनायेंगे और वह जांच करेगी.

श्री अजय सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बड़ा गंभीर मामला है.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता-- यदि जांच में कोई विधायक जी शामिल होना चाहें हम शामिल कर देंगे कोई आपत्ति नहीं है.

श्री अजय सिंह-- विधायक शामिल होना चाहते हैं, इसमें शामिल होने की हमें कोई रूचि नहीं है. मैं तो कह रहा हूं शंकर लाल तिवारी वहां के विधायक हैं, आदरणीय उपाध्‍यक्ष महोदय स‍तना जिले के विधायक हैं, एक दो लोगों को और बना दीजिये एक बीजेपी के, एक कांग्रेस के, दो, तीन और विधायक बना दीजिये. एक बहुजन के विधायक हैं उनको बना दीजिये. इनकी समिति से दो पटवारी हल्कों की जांच आप जांच करा लीजिये इससे पता चल जायेगा कि वहां क्या है ?

श्री उमाशंकर गुप्ता--अध्यक्ष महोदय, मेरा कहना है कि संभागीय आयुक्त के ऊपर हम लोगों को भरोसा करना चाहिये उनसे हम जांच करा लेंगे. मुझे किसी भी समिति से जांच कराने में आपत्ति नहीं है.

श्री मुकेश नायक--अध्यक्ष महोदय, इनको संभागायुक्त पर भरोसा है, अपने विधायकों पर भरोसा नहीं है. प्रतिपक्ष के नेता माननीय विधायकों से जांच कराने के लिये कह रहे हैं और निष्पक्ष जांच चाहते हैं तो इन्हें इनकी भावनाओं का आदर करना चाहिये.

श्री बाबूलाल गौर--अध्यक्ष महोदय, यह बड़ा ही गंभीर प्रश्न है. शासकीय भूमि का है इसमें कलेक्टर पुलिस को एफ.आई.आर लिखने के लिये आदेशित कर रहा है तो क्या इसमें एफ.आई.आर. लिखी गई कि नहीं लिखी गई. इसमें कार्यवाही क्यों नहीं हुई है प्रश्न इस बात का है, न्याय का प्रश्न है.

अध्यक्ष महोदय--आप प्रश्न तो करें.

श्री बाबूलाल गौर--अध्यक्ष महोदय, मेरा यही तो प्रश्न है. कलेक्टर के द्वारा थाने के अंदर शिकायत की गई कि यह गलत काम हो रहा है. तो उनके खिलाफ कार्यवाही हुई कि नहीं हुई ?

श्री उमाशंकर गुप्ता--अध्यक्ष महोदय, वह पत्र मेरे पास में नहीं है. माननीय नेता प्रतिपक्ष ने कहा है तो मैं इसकी जानकारी प्राप्त करके दे दूंगा.

श्री अजय सिंह--अध्यक्ष महोदय, कलेक्टर ने एफ.आर.आर.दर्ज करने का कहा उसके बाद पुलिस अधीक्षक पत्र लिखता है कि फलाने फलाने लोगों के ऊपर जितने नाम मैंने पहले पढ़े हैं उनके ऊपर एफ.आई.आर दर्ज हो. एस.पी.ने, सीताराम यादव नगर पुलिस अधीक्षक थाना कुलगंवा के अपराध क्रमांक 168/2016 धारा 420, 467, 468 प्रकरण में विस्तृत जांच भेजने बाबत. मैं यही तो कह रहा हूं कि जब कलेक्टर लिख रहा है, एस.पी. एफ.आई.आर के लिये लिख रहा है 2016 में मैं और कुछ नहीं मांग रहा हूं. सर्वदलीय विधायकों की एक समिति बना दी जाए और इसकी जांच हो जाए. दो साल से क्या संभागायुक्त नहीं थे, क्या दूसरे कलेक्टर नहीं आ गये? लेकिन मामला वहीं का वहीं है. यह बहुत गंभीर मामला है. एक जिले के दो पटवारी हल्कों का मामला है. अब आप सोच लीजिये कि और जिलों में भी सरकारी जमीनों की किस तरह की हेरा-फेरी हो रही है उसके बारे में नहीं कह रहा हूं. मैं तो सिर्फ आपसे अनुरोध करता हूं कि यदि आप सही में निष्पक्ष हैं और भ्रष्टाचार समाप्त करना चाहते हैं, सरकारी जमीनों को बचाना चाहते हैं. अगर आपकी यह मंशा है तो एक सर्वदलीय समिति गठित कर लीजिये या चीफ सेकेट्री से कह दीजिये कि यह जांच कर लें.

श्री उमाशंकर गुप्ता--अध्यक्ष महोदय, मैं चीफ सेकेट्री से कह दूंगा कि इस प्रकरण की जांच कर लें.

परियोजनावार प्रबंधक के पद की पूर्ति

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

2. ( *क्र. 1518 ) श्री शंकर लाल तिवारी : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या पी.एच.ई. विभाग द्वारा जल निगम का गठन किया गया है? यदि हाँ, तो क्‍या जल निगम में परियोजनावार प्रबंधक के पद पर प्रचार-प्रसार हेतु नये सिरे से विज्ञापन जारी किये गये थे? (ख) यदि हाँ, तो कब-कब किस परियोजना के लिए कितने पद स्‍वीकृत थे? नियमावली क्‍या थी? क्‍या इसमें कोई संशोधन किया गया था? यदि किया गया था तो क्‍यों? स्‍पष्‍ट कारण बताएं। किसका चयन किया गया है, उसका पूर्ण विवरण साक्षात्‍कार के प्राप्‍त अंक सहित देंवे। (ग) क्‍या पी.एच.ई. विभाग से जिला सलाहकार (आई.ई.सी.) को जल निगम में प्रबंधक के पद पर प्रतिनियुक्ति पर लिया जा सकता था? यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं? यदि हाँ, तो जल निगम में प्रबंधक के पद पर विज्ञापन जारी करने की क्‍या आवश्‍यकता थी? (घ) क्‍या जल निगम द्वारा संविदा पर नियुक्त प्रबंधकों को भविष्‍य में स्‍थाई किया जाएगा? यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं? यदि हाँ, तो कब तक?

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) जी हाँ। जी नहीं, परियोजना क्रियान्वयन इकाई स्तर पर प्रबंधक (जनसहभागिता) के पद हेतु विज्ञापन जारी किये गए थे। (ख) प्रश्नांश (क) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) जी नहीं। संविदा कर्मी को प्रतिनियुक्ति पर लिए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता है। (घ) जी नहीं। संविदा कर्मी को स्थाई किए जाने का प्रावधान नहीं है। शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता है।

श्री शंकरलाल तिवारी--अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न का उत्तर साफ-सुथरा एवं सटीक आया है छपकर के मैं माननीय मंत्री जी से इतना ही पूछना चाहता हूं कि क्या भविष्य में इन कर्मचारियों के प्रति इनको रेग्यूलर कर स्थायी किये जाने का कोई प्रावधान बनाएंगी ?

सुश्री कुसुम सिंह महदेले--अध्यक्ष महोदय, अभी संविदा कर्मचारियों के लिये नियमित करने का कोई नियम नहीं है. भविष्य में सरकार यदि ऐसे कोई नियम बनाती है तो जरूर उन पर विचार करेंगे.

श्री शंकरलाल तिवारी--धन्यवाद अध्यक्ष महोदय.

जहांगीराबाद थाने में दर्ज अपराध पर कार्यवाही

[गृह]

3. ( *क्र. 1618 ) एडवोकेट सत्‍यप्रकाश सखवार : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अपराध क्रमांक 889/2013 में थाना जहांगीराबाद, भोपाल द्वारा जिला एवं सत्र न्‍यायालय भोपाल में चालान किस दिनांक को प्रस्‍तुत किया गया? प्रस्‍तुत चालान में किस-किस आरोपी द्वारा नियमित जमानत प्राप्‍त की गयी है? प्रत्‍येक का तिथिवार विवरण दें। (ख) उक्‍त अपराध के संबंध में उच्‍च न्‍यायालय में प्रस्‍तुत एम.सी.आर.सी. 3267/2014 में स्‍थगन किस दिनांक को जारी किया गया है? स्‍थगन में किसे आदेशित किया गया है? चालान प्रस्‍तुत होने के पश्‍चात् एफ.आई.आर. पर स्‍थगन किस तरह प्रभावशील होगा? (ग) जिला अभियोजन अधिकारी किस विभाग के अधीन है? उसके द्वारा उक्‍त प्रकरण में जिला न्‍यायालय के समक्ष एफ.आई.आर. पर दिये गये स्‍थगन को किस आधार पर न्‍यायालयीन कार्यवाही के लिये स्‍थगन के रूप में समर्थित किया जा रहा है? (घ) जिन विधिक कार्यवाहियों में कार्यवाही अंतिम हो जाती है, तो ऐसे प्रकरणों में कार्यवाही अंतिम होने के पश्‍चात् जारी/प्राप्‍त न्‍यायालयीन स्‍थगन की प्रभावशीलता के‍ नियमों की प्रति उपलब्‍ध करावें।

गृह मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : (क) थाना जहांगीराबाद, जिला भोपाल के अपराध क्रमांक 889/13 में चालान दिनांक 10.04.2014 को माननीय न्यायालय में पेश किया गया है। जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर द्वारा एम.सी.आर.सी. क्र. 3267/2014 में दिनांक 11.04.2014 को स्थगन जारी किया गया है। माननीय उच्च न्यायालय ने यह स्थगन आगामी समस्त कार्यवाहियों हेतु जारी किया गया है, जो सभी पक्षकारों के लिये प्रभावशील है। माननीय न्यायालय से संबंधित होने से टिप्पणी करना न्यायसंगत नहीं होगा।

(ग) जिला अभियोजन अधिकारी, गृह विभाग के अधीन है। प्रश्नांश विवेचना/न्यायालयीन प्रक्रिया से संबंधित होने से उत्तर दिया जाना न्यायसंगत नहीं होगा। (घ) न्यायालयीन प्रक्रिया से संबंधित होने से उत्तर दिया जाना न्यायसंगत नहीं होगा।

परिशिष्ट - ''एक''

एडवोकेट सत्यप्रकाश सखवार - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न जहांगीराबाद थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 889/2013 से संबंधित है. दिनांक 10 अप्रैल,2014 को चालान पेश होने के एक दिन बाद दिनांक 11 अप्रैल,,2014 को एम.सी.आर.सी. से 3267/2014 में एफ.आई.आर. पर मिले स्टे को लोक अभियोजन संचालनालय द्वारा चालान पर स्टे क्यों नहीं माना जा रहा है ? इस संबंध में विधि वेत्ताओं का मार्गदर्शन क्यों नहीं लिया गया ? दूसरी बात जिन लोगों ने जिला एवं सत्र न्यायालय से नियमित जमानत नहीं ली है उनको फरार घोषित करने के संबंध में लोक अभियोजन संचालनालय द्वारा कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही है ?

श्री भूपेन्द्र सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, इसमें माननीय न्यायालय की ओर से रोक है इस कारण से विभाग कोई कार्यवाही अभी नहीं कर पा रहा है. न्यायालय का जैसा निर्णय आयेगा उस आधार पर हम आगे कार्यवाही करेंगे.

एडवोकेट सत्यप्रकाश सखवार - माननीय अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद.

आदिवासी की भूमि का नामांतरण

[राजस्व]

4. ( *क्र. 1545 ) श्री कल सिंह भाबर : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (‍क) क्‍या आदिवासी वर्ग के नाम की कृषि भूमि सामान्‍य वर्ग के नाम पर की जा सकती है? यदि नहीं, तो झाबुआ जिले के ग्राम मेघनगर तहसील मेघनगर सर्वे नम्‍बर 332 क्षेत्रफल 1.35 हेक्‍टेयर कृषि भूमि, जो वर्ष 2010-11 तक आदिवासी वर्ग के व्‍यक्ति के नाम पर थी, वह वर्ष 2011-12 में अचानक सामान्‍य वर्ग के व्‍यक्ति के नाम पर कैसे की गई? (ख) क्‍या ऐसे मामलों की जाँच कर आदिवासी वर्ग की भूमि गैर आदिवासी के नाम पर करने वाले अधिकारी/कर्मचारी के विरूद्ध कोई कार्यवाही की जावेगी।

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) म.प्र. भू-राजस्‍व संहिता 1959 की धारा 165 (6) के उपबंधों के अध्‍यधीन अधिसूचित क्षेत्रों में अ.ज.जा. की भूमि का गैर अ.ज.जा को अंतरण प्रतिबंधित है। ग्राम मेघनगर स्थित सर्वे नं. 332 रकबा 1.35 हेक्‍टर कृषि भूमि राजस्‍व रि‍कॉर्ड में वर्ष 2010-11 में अनुसूचित जनजाति के सदस्‍य श्री सोमला पिता कुवरा जाति पटलिया के नाम दर्ज थी। वर्ष 2011-12 में यह भूमि राजस्‍व रिकार्ड खसरा के कालम नं. 12 कैफियत में अनुविभागीय अधिकारी राजस्‍व थांदला के प्रकरण क्रमांक 2/अ-23/2007-08 आदेश दिनांक 09.04.2009 द्वारा नामांतरण होकर गैर अनुसूचित जनजाति की सदस्‍य सुगरा बेवा अब्‍दुलरहीम के नाम दर्ज होना पाई गई है। (ख) जी हाँ तहसीलदार मेघनगर के न्‍यायालय में प्रकरण क्रमांक 0007/अ-6 (अ)/2017-18 पंजीबद्ध कर जाँच प्रारंभ की गई है। जाँच उपरांत अग्रिम कार्यवाही की जावेगी।

श्री कल सिंह भाबर - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र में आदिवासी जमीन पर गैर आदिवासी ने कब्जा किया है और उसका नामांतरण भी करवाया है. ऐसी जो नगर के आसपास आदिवासियों की जमीनें रहती हैं उस पर हमेशा गैर आदिवासी कब्जा करके उस पर अपना व्यवसाय करते हैं. मेरे प्रकरण में जो काम करने वाला है उससे जबरन नामांतरण करवा लिया और बड़े अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके नामांतरण करवाया है. छोटे कर्मचारियों को दण्ड देकर कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं. मैं मंत्री जी से आग्रह करना चाहूंगा कि क्या वह बड़े अधिकारियों पर कार्यवाही करेंगे ?

श्री उमाशंकर गुप्ता - माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जो मामला उठाया है वह बिल्कुल ठीक है इसकी जब हमने जांच की तो पटवारी ने कैफियत में लिखकर कि एस.डी.ओ. के आदेश से नामांतरण किया जा रहा है किया था. जांच में जब एस.डी.ओ. के यहां देखा गया तो प्रकरण कोई पंजीबद्ध नहीं पाया गया. इसलिये पटवारी को हमने निलंबित किया है और एफ.आई.आर. के भी हमने निर्देश दिये हैं. हम पूरी जांच करवाएंगे.

श्री कल सिंह भाबर - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे यहां इसी प्रकार के करीब 100 के आसपास प्रकरणों में आदिवासियों की जमीनों पर सामान्य लोग कब्जा किये हुए हैं. मैं चाहूंगा कि सारे प्रकरणों की जांच करवाकर उन सभी को कब्जा वापस दिलाया जाएगा ?

श्री उमाशंकर गुप्ता - माननीय अध्यक्ष महोदय, जो भी ऐसे मामले हमें दिये जायेंगे, हम सबकी जांच कराएंगे.

श्री कल सिंह भाबर - माननीय अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद.

किसानों की फसल का मुआवजा भुगतान

[राजस्व]

5. ( *क्र. 708 ) श्री दीवान सिंह विट्ठल पटेल : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या दिनांक 07.09.2017 एवं 10.10.2017 को विकासखण्‍ड पानसेमल जिला बड़वानी में तेज बारिश एवं आंधी तूफान से किसानों की खड़ी फसल खराब हुई है? (ख) यदि हाँ, तो क्या विभाग के द्वारा प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया गया है? सर्वे में कितने किसानों की फसल खराब होने की जानकारी प्राप्त हुई? प्रभावित किसानों की सूची उपलब्ध करायें। (ग) क्या प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित किसानों को शासकीय नियमानुसार मुआवजा प्रदान किया गया है? यदि हाँ, तो ऐसे किसानों की सूची उपलब्ध करावें? यदि नहीं, तो कब तक किसानों को मुआवजा प्रदान किया जावेगा?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जी हाँ। आंशिक क्षति हुई है। (ख) जी हाँ। राजस्‍व एवं कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा विकासखण्‍ड पानसेमल के ग्राम जाहूर, भड़गोन, बबुलताड़, मोरतलाई, कानसुल, निसरपुर में सर्वे किया गया। सर्वे अनुसार कुल 210 किसानों की फसल को आंशिक क्षति हुई है। आंशिक प्रभावित किसानों की सूची पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। सर्वे अनुसार फसल क्षति का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) राजस्‍व पुस्‍तक परिपत्र खण्‍ड छ: क्रमांक 4 (आर.बी.सी. 6-4) के नियमानुसार फसल क्षति 25 प्रतिशत से कम होने से आर्थिक सहायता राशि दिये जाने के प्रावधान नहीं हैं। शेष प्रश्‍नांश उदभूत नहीं।

 

श्री दीवान सिंह विट्ठल पटेल - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से कहना चाहूंगा. मेरा किसानों से संबंधित मामला है और उनसे मैं आग्रह करना चाहूंगा कि दिनांक 7.9.2017 एवं दिनांक 10.10.2017 को मेरे विधान सभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों में अतिवृष्टि और आंधी,तूफान से फसलों का नुकसान हुआ, जैसे मक्का,गन्ना,ज्वार,बाजरा की फसलों का, उसमें आपने बताया कि आंशिक क्षति हुई है और कुल ऐसे 210 किसान हैं जिनकी फसलों की क्षति हुई है. फसलों के नुकसान का जो आकलन हुआ है वह क्या उन किसानों की उपस्थिति में या कोई जनप्रतिनिधि की उपस्थिति में सही आकलन हुआ ? और मैंने खुद भी उस क्षेत्र के किसानों के मध्य जाकर देखा और उसका जो आकलन है वह अलग है तो उन किसानों को जो वास्तविक मुआवजा मिलना चाहि,ये वह उनको मिले और जिन अधिकारियों,कर्मचारियों ने जिन्होंने यह जांच की उन्होंने क्या वास्तविक जांच की है ?

श्री उमाशंकर गुप्ता - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने जवाब में बताया है कि आंशिक क्षति हुई है और मुआवजे के अंतर्गत नहीं आता है. जब सर्वे के लिये जाते हैं उस समय रेवेन्यू का पंचायत का,वहां का कोई जनप्रतिनिधि शामिल होता है और उनकी उपस्थिति के पंचनामे मेरे पास हैं, जिनके सामने यह आकलन हुआ.

श्री दीवान सिंह विट्ठल पटेल - माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा आपने बताया कि अधिकारी,कर्मचारी गये थे और मैं खुद वहां गया हूं. उसमें मैंने वहां के कलेक्टर, तहसीलदार, एसडीएम से भी कहा था कि मेरी उपस्थिति में भी कार्यवाही हो. अधिकांश किसानों को जानकारी का अभाव होता है वहां पर क्या आंकलन हुआ और किस तरह का आंकलन हुआ और कैसा पंचनामा हुआ? इस तरह की बात कहीं से कहीं तक स्पष्ट नहीं है. मैं आग्रह करना चाहूंगा कि पुनः उसकी अपने स्तर से जांच कर ली जाएगी या जिन कर्मचारियों ने सही जांच नहीं की है, क्या उनके खिलाफ कोई जांच होगी?

श्री उमाशंकर गुप्ता - अध्यक्ष महोदय, अब तो कोई जांच उसकी हो सकती नहीं है और चार-चार, पांच-पांच लोगों ने देखा है. राजस्व विभाग, पंचायत विभाग, कृषि विभाग, इन 3 विभागों के प्रतिनिधि रहे हैं. राजस्व पटेल, कृषक इन सबकी उपस्थिति में पंचनामें बने हैं.

 

व्ही.आई.पी. सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मी के साथ अभद्र व्‍यवहार

[गृह]

6. ( *क्र. 559 ) श्री कालुसिंह ठाकुर : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि व्ही. आई.पी. की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मी का कार्य शासकीय कार्य की श्रेणी में आता है या नहीं? यदि हाँ, तो फिर प्रश्नकर्ता के अंगरक्षक के साथ दिनांक 08.01.2016 को मांगलिया टोल प्लाजा कर्मचारियों द्वारा की गई मारपीट की घटना होने पर पुलिस थाना क्षिप्रा में धारा 341, 323, 294, 506, 34 भा.द.वि. के तहत् दर्ज अपराध क्र. 09/16 में प्रश्नकर्ता द्वारा नियमानुसार धारा 353 बढ़ाने के संबंध में पूछे गये प्रश्न क्रमांक 1186, दिनांक 20.07.2016 के उत्तर में किस नियम के तहत उक्त अपराध शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करने वाला नहीं बताया जाकर धारा 353 एवं 332 भा.द.वि. की श्रेणी में नहीं होना बताया गया है? नियम की प्रति उपलब्ध करावें।

गृह मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : जी हाँ। प्रकरण में अनुसंधान के दौरान यह पाया गया था कि घटना दिनांक को धरमपुरी धार के माननीय विधायक श्री कालुसिंह अपनी प्रायवेट कार से क्षिप्रा होते हुए धरमपुरी जा रहे थे। वाहन पर विधायक पास नहीं था और न ही वाहन पर विधायक लिखा था। गनमेन आरक्षक श्री मोतीलाल, सुरक्षा वाहिनी, भोपाल सादे कपड़ों में था। इस कारण टोल कर्मचारियों का विवाद हुआ था। वर्तमान में थाना क्षिप्रा के अप.क्र. 09/16 का प्रकरण न्यायालय में धारा 294, 332, 353, 341 एवं 506 भाग-2 के अंतर्गत विचारण में है।

श्री कालुसिंह ठाकुर - अध्यक्ष महोदय, मेरे जवाब में माननीय मंत्री जी ने जो जानकारी दी है, उससे संतुष्ट तो हूं परन्तु मैं यह भी निवेदन करना चाहता हूं कि एक विधायक होते हुए जब टोल पर विवाद होते हैं. 11 बजे से 5 बजे तक मैं थाने में बैठा रहा हूं, जब तक एफआईआर नहीं की गई. अन्य धाराओं में एफआईआर की गई. मेरे गनमैन के साथ अभद्र व्यवहार एवं मारपीट की गई. न्यायालय में उसका आवेदन किया, न्यायालय ने शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करने की धारा के आदेश दिये तब धारा लगाई. जबकि पुलिस को वहां रहकर मौजूद दस्तावेज बताए कि विधायक की सिक्युरिटी में गनमैन था, उसको उन्होंने दौड़ा-दौड़ा कर मारा. टोल नाके से पता नहीं क्या मेरी राशि में ही कुछ न कुछ गड़बड़ है, माननीय मंत्री जी मेरे प्रश्न का जवाब दें? मैं अब बस आ रहा हूं, मैंने गाड़ी से भोपाल आना बंद कर दिया है क्योंकि यह मेरे साथ में दूसरी बार ऐसी घटना हो गई है. दो बार घटना हो गई इसकी वजह से मैं बस से आ रहा हूं. मुझसे यह सहन होता नहीं है, उन्होंने मेरे गनमैन को मारा है. अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे अनुरोध कर रहा हूं कम से कम ऐसे दोषी लोगों पर कार्यवाही करें, जबकि वहां पर विधायक 5 घंटे बैठा रहा.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) - अध्यक्ष महोदय, यह एक भाजपा के विधायक हैं. भारतीय जनता पार्टी का विधायक कितना असुरक्षित महसूस कर रहा है कि गाड़ी से न आकर बस से आ रहा है?

श्री रामनिवास रावत - गृह मंत्री जी, सुरक्षा तो प्रदान करें.

श्री निशंक कुमार जैन - अध्यक्ष महोदय, भारतीय जनता पार्टी के विधायकों की यह हालत है कि बसों में जा रहे हैं. यह सुरक्षा व्यवस्था की क्या स्थिति है?

अध्यक्ष महोदय - आप बैठ जाएं.

श्री यादवेन्द्र सिंह - (XXX)

अध्यक्ष महोदय - इसे कार्यवाही से निकाल दें.

श्री यादवेन्द्र सिंह - (XXX)

डॉ. नरोत्तम मिश्र - अध्यक्ष महोदय, यह बाद का भी विलोपित करा दें.

अध्यक्ष महोदय - यह भी विलोपित कर दें. माननीय मंत्री जी..

श्री भूपेन्द्र सिंह - अध्यक्ष महोदय, इसमें सारी कार्यवाही हो गई है और कार्यवाही से विधायक जी संतुष्ट भी हैं. मैं उनसे निवदेन करूंगा कि आप तो अपनी गाड़ी से आए जाएं. हम आपकी पर्याप्त सुरक्षा करेंगे.

श्री यादवेन्द्र सिंह - मंत्री जी आप बार-बार कहते हैं.

अध्यक्ष महोदय - आप बैठ जाएं.

श्री कालुसिंह ठाकुर - माननीय मंत्री जी आपका सम्मान करता हूं. आपकी बात से संतुष्ट तो हूं. लेकिन एक विधायक को 4 घंटे अधिकारियों ने बैठाया, उस पर कार्यवाही होना चाहिए.

श्री यादवेन्द्र सिंह - हमने यही कहा कि आज आपके विधायकों के साथ यह हो रहा है और मदद करने वाली यही बात आप बार-बार कहते हैं.

श्री कालुसिंह ठाकुर - अगर पुलिस वहीं पर मौके पर कार्यवाही कर देती तो मैं संतुष्ट होता, लेकिन ऐसे अधिकारी पर कुछ कार्यवाही होना चाहिए.

श्री यादवेन्द्र सिंह - यह दोबारा, तिबारा केस हो रहा है. आप आज निर्णय कर दें.

अध्यक्ष महोदय - आप बैठ जाएं.

श्री भूपेन्द्र सिंह - अध्यक्ष महोदय, सभी हमारे माननीय विधायकों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर सरकार की ओर से, हमारे विभाग की ओर से सभी माननीय विधायकों को सुरक्षा गार्ड उपलब्ध कराए गए हैं. अगर कभी अतिरिक्त भी कोई..

श्री शंकर लाल तिवारी - सभी को नहीं, मैंने आज तक सुरक्षा गार्ड लिया ही नहीं. आपके आशीर्वाद से मैं सुरक्षित हूं. मुझे गनमैन की जरूरत ही नहीं है.

श्री अजय सिंह - (XXX)..(हंसी)..

श्री शंकर लाल तिवारी - (XXX)

अध्यक्ष महोदय - इसे विलोपित कर दें.

(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय - आप सब बैठ जाएं. माननीय मंत्री जी. श्री भूपेन्‍द्र सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आग्रह है और विभाग की तरफ से फिर से इस बात के आदेश जारी कर रहे हैं कि जो हमारे सुरक्षागार्ड हैं, सुरक्षागार्ड्स का पहचानपत्र हो, वह यूनिफार्म में हों, तो सामने वाले को पहचानने में सुविधा होती है. उस समय जो घटना हुई वह इस कारण हुई कि सुरक्षागार्ड के पास न कोई पहचान पत्र था, न कोई इस तरह से पहचानने की स्थिति थी कि टोलकर्मी उसको पहचान पाते. इसलिये मेरा सभी माननीय विधायकों से आग्रह है कि कृपया इस बात को देखें कि आपको शासन ने जो सुरक्षागार्ड उपलब्‍ध कराये हैं कम से कम उनके गले में पहचान पत्र हो, तो लोग पहचान सकें कि यह सुरक्षागार्ड है और इससे कई बार घटनायें नहीं हो पाती हैं. यह निर्देश भी हम जारी कर रहे हैं और सभी माननीय सदस्‍यों से आग्रह भी है.

श्री कालुसिंह ठाकुर -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी के जवाब से संतुष्‍ट नहीं हूं क्‍योंकि मेरे सुरक्षागार्ड के पास पहचान पत्र था एवं वह ड्रेस में भी था. उसके बाद भी मैं थाने में 5 घण्‍टे बैठा. यहां गलत जानकारी दी गई है, उससे मैं सहमत नहीं हूं.

श्री शंकरलाल तिवारी -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि यहां अपराधी शब्‍द का इस्‍तेमाल हुआ है वह उचित नहीं है.

श्री कालुसिंह ठाकुर -- अध्‍यक्ष महोदय, मुझे जवाब दिलाया जाये. मैंने बताया कि मेरे सुरक्षागार्ड के पास उसका पहचानपत्र था, वह ड्रेस में भी था और मैंने थाने में जाकर पास बताया उसके बाद भी मुझे थाने में 5 घण्‍टे बैठाया गया. यह गलत तरीका है.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप क्‍या चाहते हैं ? आप बैठ जायें.

श्री कालुसिंह ठाकुर -- यहां बिल्‍कुल गलत जानकारी दी गई है. मैंने स्‍वयं जाकर अपना पास बताया और गनमैन का पास भी बताया फिर भी मुझे थाने में बैठाया और यह गलत आरोप भी लगा दिया कि तीन फायर किये थे. थाने में गन भी चेक की गई. क्‍या यह भी पता नहीं कि वह गन शासकीय है. जिस भी अधिकारी ने गलत किया है उसके खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिये.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, इसमें माननीय विधायक जी जैसा चाहते थे वैसी कार्यवाही हो गई है.

श्री कालुसिंह ठाकुर -- कार्यवाही कोर्ट ने की है आपने नहीं की. हमने कोर्ट से वह कार्यवाही करवायी. आपने क्‍या किया ? हमको 5 घण्‍टे थाने में बैठाया ? यह गलत है इस पर कार्यवाही होना चाहिये. अन्‍यथा मैं गाड़ी से नहीं आऊंगा बस से आऊंगा.

अध्‍यक्ष महोदय -- प्रतिपक्ष के नेता जी खड़े हैं. आप कृपया एक मिनट बैठ जाये फिर आपकी बात भी सुन लेंगे.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय गृहमंत्री जी ने कार्यवाही की या नहीं की, लेकिन विधायक महोदय की पीड़ा को आप समझें. यह केवल एक विधायक की पीड़ा नहीं है बहुत सारे विधायकों की है.

श्री शंकरलाल तिवारी -- अध्‍यक्ष महोदय, श्री राहुल सिंह जी यह शब्‍द वापस लें कि मैं अपराधी हूं. मैंने गनमैन नहीं लिया इसके लिये इनको मुझे धन्‍यवाद देना चाहिये. मैंने तो 14 साल से सरकार का पैसा बचाया है. आपने मुझे अपराधी कह दिया.

अध्‍यक्ष महोदय -- इस शब्‍द को विलोपित कर दिया गया है. आपको कोई अपराधी नहीं मानता है.

श्री अजय सिंह -- मैंने क्‍या आपको नाम से अपराधी कहा था ? हमने कहा जो अपराध करता है. अब उसमें आपको इतनी चींटी लग गई तो मैं क्‍या करूं ?

श्री शंकरलाल तिवारी -- आप इशारों से हमला करते हैं.

श्री अजय सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, अभी विधायक महोदय ने जो पीड़ा प्रकट की यह बहुत सारे विधायकों की पीड़ा है. यादवेन्‍द्र सिंह जी भी बात कर रहे थे कि सुरेन्‍द्र सिंह जी चित्रकूट के पूर्व विधायक के साथ भी ऐसी घटना हुई थी. कोई ऐसा नियम बना दें. माननीय गृहमंत्री जी ने कहा कि पास होना चाहिये, यूनिफार्म में होना चाहिये. वह बता रहे हैं कि पास था, यूनिफार्म में भी था, विधायक स्‍वयं थे, उन्‍होंने अपना पास भी दिखाया, तो और कौन सा प्रमाण हम लोग दे दें जिससे हम बच जायें ? यह बात आप हमको बता दीजिये. इस बात का आप निराकरण करा दें. चाहे गृहमंत्री जी से वाद-विवाद करके, लेकिन विधायकों की सुरक्षा करायें.

श्री भूपेन्द्र सिंह -- अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायकों की सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह से गंभीर है और इसलिये माननीय विधायकों की सुरक्षा के लिये सुरक्षा गार्ड शासन की तरफ से उपलब्ध कराये गये हैं, परन्तु उसके बाद भी अगर कोई इस तरह की घटना होती है, तो उसमें जो तात्कालिक कार्यवाही शासन, विभाग की ओर से होना चाहिये, वह हम लोगों ने तात्कालिक कार्यवाही इसमें की है या और भी जो प्रकरण होंगे, उसमें करेंगे. विधायकों की सुरक्षा को लेकर, जैसा मैंने पहले भी निवेदन किया है कि हमें यह देखना पड़ेगा कि हमारे जो सुरक्षा गार्ड हैं, जो हमें पीएसओ मिले हुए हैं, वह पीएसओ कम से कम उनकी पहिचान स्पष्ट रुप से दिखे, यह हम सबको इस बात के लिये सजग होना चाहिये. अध्यक्ष महोदय, यह जो घटनाएं होती हैं, यह कई बार इसी कारण से हो जाती हैं कि सुरक्षा गार्ड की पहिचान न हो पाने के कारण इस तरह की घटनाएं होती हैं और इसलिये सभी माननीय विधायकों से आग्रह है कि इसको सभी लोग सुनिश्चत करेंगे. नेता प्रतिपक्ष जी को हम विश्वास दिलाते हैं कि कहीं पर भी अगर कोई भी विषय आपकी तरफ से ऐसा आता है, कहीं पर भी कोई ऐसा आपको लगता है, तो आप बतायें, हम अतिरिक्त सुरक्षा भी कहीं करना होगी, तो हम अतिरिक्त सुरक्षा भी करेंगे, परंतु विधायकों की सुरक्षा में सरकार की तरफ से कोई कमी हम नहीं रखेंगे.

11.36 बजे अध्यक्षीय व्यवस्था

टोल नाकों पर पदस्थ कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन सुनिश्चित किया जाना.

अध्यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी, टोल नाकों पर जो कर्मचारी रखे जाते हैं, वह आपराधिक प्रवृत्ति के होते हैं और इसलिये यह झगड़े होते हैं. इसलिये कृपया यह सुनिश्चित करें कि उनका पुलिस वेरिफिकेशन हो और उनकी एंट्री निकट के पुलिस थाने में हो, ताकि भविष्य में यह घटनायें न घटें. .(मेजों की थपथपाहट)

श्री भूपेन्द्र सिंह -- जी, माननीय अध्यक्ष महोदय.

11.37 बजे तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर (क्रमशः)

श्री कालुसिंह ठाकुर -- अध्यक्ष महोदय, मुझे 5 घण्टे तक वहां पर थाने में बिठाया गया.

अध्यक्ष महोदय -- आप जो कार्यवाही चाहते हैं, वह बता दीजिये , वह भी करवा देंगे.

श्री कालुसिंह ठाकुर -- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी एक ही बात कह दें कि जिस अधिकारी ने अनियमितता की है, उस पर कार्यवाही होना चाहिये. मैं केस भी वापस ले लूंगा, पर मुझे पूरी रात थाने में बिठाया गया, इसके लिये तो उस पर कार्यवाही होनी चाहिये.

श्री भूपेन्द्र सिंह -- अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय विधायक जी से अलग से बैठकर चर्चा कर लूंगा.

अध्यक्ष महोदय -- आप क्या चाहते हैं, वह बात कर लीजियेगा.

श्री भूपेन्द्र सिंह -- अध्यक्ष महोदय, मैं अलग से उनसे चर्चा कर लूंगा.

श्री कालुसिंह ठाकुर -- अध्यक्ष महोदय, ठीक है, धन्यवाद.

प्रश्न संख्या - 7 (अनुपस्थित)

भवन निर्माण हेतु भूमि आवंटन

[राजस्व]

8. ( *क्र. 1514 ) श्री पुष्‍पेन्‍द्र नाथ पाठक : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा क्षेत्र बिजावर अंतर्गत कितने ऐसे प्रकरण हैं, जिनमें शासन द्वारा भवन निर्माण स्वीकृत कर दिया है, परंतु विभाग द्वारा भूमि उपलब्ध नहीं कराई गई है? ऐसे प्रकरणों की सूची उपलब्ध करावें। (ख) प्रश्नांश (क) के अनुक्रम में उक्त भवनों के निर्माण की स्वीकृति कब प्राप्त हुई? विभाग अथवा एजेंसी द्वारा भूमि आवंटन हेतु कब-कब पत्राचार किया गया? उपरोक्त पत्राचार पर क्या कार्यवाही की गई? भवन निर्माण हेतु भूमि आवंटन कब तक कर दी जायेगी?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) एवं (ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है।

परिशिष्ट - ''दो''

श्री पुष्पेन्द्र नाथ पाठक -- अध्यक्ष महोदय, मैंने आपके माध्यम से मंत्री जी से प्रश्न में यह जानना चाहा था कि मेरे विधान सभा क्षेत्र में ऐसे कितने प्रकरण हैं, जिनमें भूमि आवंटन का विषय लंबित है. कुल मिलाकर जवाब में 4 जगह के आवंटन के संबंध में जानकारी आई है, जिसमें से 2 स्वास्थ्य, 1 ग्रामीण विकास और 1 सहकारिता का है और जवाब में जो जानकारी कालम 8 में आई है, उसमें आखिरी में लिखा है कि औपचारिक आवंटन की प्रक्रिया जारी है. तो मैं निवेदन यह कर रहा हूं कि यह आवंटन की प्रक्रिया जारी कितने दिन तक रहना है, क्या एकाध हफ्ते में इसका समाधान हो जायेगा. दूसरा, प्रश्न बहुत ज्यादा विषयों को लेकर था. एक हमारे यहां बजरंगगढ़ मिडिल स्कूल की बिल्डिंग बनना है, वह लम्बे समय से लंबित है, उसका जिक्र नहीं है. एक गोपालपुरा गांव है, वहां प्रधानमंत्री सड़क योजना से सड़क बनना है, एक बार पैसा वापस जा चुका है, खींचतान कर दोबारा लाये हैं, उसका कोई जिक्र नहीं है. तो मैं मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि प्रश्न हम कुछ भी पूछते हैं, आपका विभाग उसका सुविधानुसार अर्थ निकालता है, उससे ज्यादा सुविधानुसार जवाब देता है. तो इसका समाधान कैसे होगा कि हमें जिन भवनों की आवश्यकता है, जिन रोड्स की आवश्यकता है, उनकी भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी करके 10 दिन में यह विकास के काम की गति बढ़ सकती है या भूमि आवंटित हो सकती है.

श्री उमाशंकर गुप्ता -- अध्यक्ष महोदय, चारों आवंटन हो गये हैं, आदेश की कॉपी मैं आज दे दूंगा.

श्री पुष्पेन्द्र नाथ पाठक -- अध्यक्ष महोदय, मैंने आगे जो पूछा है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क की एक सड़क है और एक मिडिल स्कूल की बिल्डिंग है और दो हायर सेकेण्ड्री स्कूल की और एक हायस्कूल की बिल्डिंग, यह लंबित हैं, इनके लिये अभी तक जमीन नहीं मिल पाई है. मंत्री जी,यह काम कब तक करा देंगे.

श्री उमाशंकर गुप्ता -- अध्यक्ष महोदय, नहीं, लंबित प्रकरण की जानकारी जिले से जो मेरे पास आई है, उसमें यह सूची में नहीं है. यह अगर है, आप देंगे, तो मैं उसकी जानकारी लूंगा.

श्री पुष्पेन्द्र नाथ पाठक -- जी, मैं कलेक्टर महोदय को दे चुका हूं.

श्री उमाशंकर गुप्ता -- दिये होंगे, लेकिन आवंटन के लिये संबंधित विभाग ने दिया है कि नहीं दिया है, अगर संबंधित विभाग ने आवंटन के लिये कलेक्टर को दे दिया है, तो आजकल तो मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर यह सरकारी विभागों का आवंटन का पावर हमने कलेक्टर को ही दे दिया है. तो यहां तक भी मामले नहीं आते, ताकि जल्दी हो जाये और विलम्ब नहीं हो. तो अगर कोई मामला होगा, तो कलेक्टर स्तर पर निपटायेंगे, हमें जानकारी देंगे, तो हम भी कलेक्टर से करायेंगे.

श्री पुष्‍पेन्‍द्र नाथ पाठक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इससे संबंधित एक और विषय भूमि आवंटन का है जो इसमें नहीं आया है. हम चाहते थे कि यह विषय इसमें आए लेकिन नहीं आया. हम बता देते हैं कि पटवारी यह गड़बड़ करते हैं कि जो जमीनें उनकी मर्जी की होती हैं वह देते हैं और कई जमीनें जो उपयोगी हैं, उनका मन नहीं होता है तो वे नहीं देते हैं, कब्‍जा बना रहने देते हैं. इससे असुविधा हो रही है और इस बात के लिए मैंने लिखित में जानकारी दे दी है, माननीय मंत्री जी, कृपया उसका समाधान करवा दें.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता -- अध्‍यक्ष महोदय, जो इनको शिकायत है, वह मुझे भी दे दें, मैं उसका निराकरण कराऊंगा.

श्री पुष्‍पेन्‍द्र नाथ पाठक -- अध्‍यक्ष महोदय, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

कुंडालिया परियोजना अंतर्गत डूब क्षेत्र की भूमि

[राजस्व]

9. ( *क्र. 1445 ) श्री मुरलीधर पाटीदार : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) कुंडालिया बाँध परियोजना अंतर्गत सुसनेर विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत डूब क्षेत्र में कौन-कौन से ग्रामों की भूमि है? ग्रामवार सर्वे नम्बर वार जानकारी उपलब्ध करावें उक्तानुसार भूमि में कौन-कौन सी सिंचित है एवं कौन सी असिंचित? (ख) प्रश्नांश (क) में उल्लेखित जमीन के डूब क्षेत्र में आने से पूर्व असिंचित होने एवं बाद में सिंचित करने या इसके विपरीत अर्थात् सिंचित से असिंचित करने संबंधी कोई शिकायत प्राप्त हुई है या कोई प्रकरण संज्ञान में आए हैं? यदि हाँ, तो क्या कार्यवाही की गई? (ग) क्‍या प्रश्नकर्ता द्वारा पत्र क्रमांक 958, दिनांक 09.11.2017 से प्रश्नांश (क) एवं (ख) के संबंध में अनुविभागीय अधिकारी सुसनेर से जानकारी चाही गयी थी एवं कार्यवाही हेतु लेख किया था? पत्र के संदर्भ में क्या कार्यवाही की गई? पूर्ण विवरण देवें। (घ) क्‍या प्रश्नांश (ख) एवं (ग) के संदर्भ में जवाबदारी सुनिश्चित की जाकर ठोस कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो क्या व कब तक? क्या दोषियों पर उचित कार्यवाही की जावेगी?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) कुंडालिया बांध परियोजना अंतर्गत सुसनेर विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत डूब क्षेत्र में कोठडी, पिपल्या सोगनरा, रोजडी ढाबला सोनगरा, पटना भीलखेडी, भण्डावद, गडिया, गोयल, महेन्दी, बिसनी, दात्या, कचनारिया, टिकोन, सामरी, लटूरीउमठ, लाडोन, कनाली, पनाली, पनाला, गुंजारिया, गोकुलपूर, धनोरा, मोल्याखेडी, गोठडा, बेरछाखेडी ग्रामों की भूमि है। ग्रामवार सर्वे नंबरवार सूची पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। सिंचित व असिंचित अभिनिर्धारित करने के संबंध में प्रकरणों में भूमि अर्जन अधिनियम 2013 की धारा 19 के प्रकाशन की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है, धारा 20 की प्रक्रिया में सुनिश्चित होगा कि कौन-सी भूमि सिंचित अथवा असिंचित है, ग्राम कोठडी, मोल्याखेडी, गोठडा (सहायक बांध) एवं गोठडा की कुछ भूमियों को आपसी सहमति से क्रय नीति से लिया गया है, सर्वे की सूची पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र "ख" अनुसार है। (ख) जी नहीं। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी हाँ। चाही गई जानकारी के संबंध में चूंकि भू-अर्जन प्रकरणों में धारा 19 के प्रकाशन की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है तथा धारा 20 की प्रक्रिया में विनिश्‍चय होगा, अत: तदनुसार जानकारी उपलब्‍ध होगी। (घ) प्रश्नांश (क) से (ग) के उत्‍तर के प्रकाश में प्रश्‍न उत्‍पन्‍न नहीं होता।

श्री मुरलीधर पाटीदार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न बहुत सरल और सीधा था कि कुंडालिया बांध के जो गांव प्रभावित हैं, वहां कौन सी जमीन सिंचित है ? कितना रकबा है और कौन सी जमीन असिंचित है ? इसका जवाब तो आ नहीं रहा है. इसके लिए मैंने नवंबर महीने में पत्र भी लिखा. ये धारा 19 और 20 की जानकारी दे रहे हैं, मेरा आग्रह है कि हम सबके पास जो जमीनें हैं उसका रिकार्ड तो है कि वह सिंचित है या असिंचित है. मैं तो केवल जानकारी मांग रहा हूँ कि वर्तमान स्‍थिति में उस जमीन का क्‍या स्‍टेटस है ? मैं यह जानकारी माननीय मंत्री जी से चाहता हूँ.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अधिग्रहण के बाद इसका निर्धारण मुआवजे के लिए फिर से होता है.

श्री मुरलीधर पाटीदार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आग्रह है कि मैं यह जानकारी नहीं मांग रहा हूँ कि अधिग्रहण के बाद क्‍या होगा, मैं तो वर्तमान में किसान बो रहा है या नहीं बो रहा है, वह जमीन सिंचित है या असिंचित है या पड़त है, मैं इसकी जानकारी मांग रहा हूँ. उसके लिए मैंने पत्र भी लिखा, अधिकारियों से बातचीत भी की, लेकिन वे जानकारी देना नहीं चाहते हैं, वे क्‍यों जानकारी नहीं देना चाहते, यह पूरा सदन समझता है.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे पास पूरी सूची है.

श्री मुरलीधर पाटीदार -- अध्‍यक्ष महोदय, मुझे सिंचित और असिंचित की जानकारी चाहिए.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप बैठ जाएं, उत्‍तर ले लें.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जानकारी मेरे पास है लेकिन माननीय सदस्‍य का प्रश्‍न सिंचित, असिंचित का मुआवजा देने के लिए है तो मुआवजा देने के पहले एक बार फिर से वेरिफिकेशन होता है. काफी ग्रामों का हो गया है, कुछ ग्रामों का रह गया है, वह इस महीने के अंदर हो जाएगा और उसकी जानकारी माननीय सदस्‍य को भी दे दी जाएगी. संबंधित एसडीओ ने माननीय विधायक जी को यह अवगत भी कराया है और पत्र भी लिखा है कि यह प्रक्रिया में है और प्रक्रिया पूरी होते ही जानकारी दे दी जाएगी.

श्री मुरलीधर पाटीदार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे पास अभी तक कोई पत्र नहीं आया है. मेरा आग्रह केवल जमीन का स्‍टेटस बताने का है.

अध्‍यक्ष महोदय -- इनका प्रश्‍न सिर्फ यह है कि आपके रिकार्ड में कौन सी जमीन असिंचित बताई गई है, कौन सी सिंचित बताई गई है, यह पटवारी के रिकार्ड में होता है. मुआवजा जब तय होगा तब होगा, तो माननीय सदस्‍य यही जानना चाहते हैं कि कौन सी जमीन सिंचित है और कौन सी जमीन असिंचित है ?

श्री उमाशंकर गुप्‍ता -- अध्‍यक्ष महोदय, हम तीन दिन में जानकारी उपलब्‍ध करवा देंगे.

श्री मुरलीधर पाटीदार -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्‍यवाद. एक और मेरा प्रश्‍न इसमें यह है कि कुआं एक होता है और चार भाइयों में जमीन बंट गई है. अब ये कह रहे हैं कि जिसकी जमीन में कुआं है उसका मुआवजा सिंचित का देंगे और बाकी को असिंचित घोषित कर रहे हैं. अब आप यह बताएं कि जब कुआं एक ही है तो बंटवारे में एक ही जगह कुआं आएगा, चार जगह तो हो नहीं सकता, कुएं के चार टुकड़े तो हो नहीं सकते. कुआं तो एक ही जगह रहेगा. अत: इसका निर्धारण करना चाहिए.

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी, आप इसका कुछ समाधान कर दें.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता -- अध्‍यक्ष महोदय, जिसके हिस्‍से में कुआं होगा..(हंसी)

श्री मुरलीधर पाटीदार -- अध्‍यक्ष महोदय, बाकी का क्‍या होगा ?

श्री मुकेश नायक -- अध्‍यक्ष महोदय, एक खसरे के अंदर दो चीजें कैसे हो सकती हैं ?

श्री लखन पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत सी जगहों पर हुआ है कि एक खसरा नंबर में जिसमें कुआं बना हुआ है, उसी को सिंचित मान रहे हैं, बाकी को सिंचित नहीं मान रहे हैं. जबकि उस कुएं से मान लें कि 10 एकड़ जमीन में सिंचाई होती है और मान लें कि खसरा नंबर आधे एकड़ का है तो सिर्फ उस आधे एकड़ को सिंचित मान रहे हैं बाकी की साढ़े 9 एकड़ जमीन को सिंचित नहीं मान रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- वैसे यह विषय महत्‍वपूर्ण है, इस पर विचार करना चाहिए.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता -- इसको दिखवा लेते हैं.

श्री लखन पटेल -- इससे बहुत से किसानों को लाभ हो जाएगा.

श्री मुरलीधर पाटीदार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद. माननीय मंत्री जी को भी धन्‍यवाद, आप बहुत वरिष्‍ठ मंत्री है, थोड़ा लगे कि विधान सभा में आप बोल रहे हैं.

नाप तौल निरीक्षकों की नियुक्ति में अनियमितता

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

10. ( *क्र. 2156 ) श्री मुकेश नायक : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2012 के पश्‍चात् व्‍यापम द्वारा प्रदाय की गई सूची के आधार पर क्‍या नाप तौल निरीक्षकों की नियुक्ति की गई थी? यदि हाँ, तो व्‍यापम द्वारा प्रदाय की गई सूची की प्रति बतायें। (ख) उक्‍त सूची में से शैक्षणिक योग्‍यता प्रमाण पत्रों के सत्‍यापन हेतु कौन-कौन से उम्‍मीदवारों को बुलाया गया था, चयन सूची/प्रतीक्षा सूची के मेरिट क्रम में उनके नाम तिथि सहित बतायें और उनमें से कौन-कौन उपस्थित हुये थे? (ग) उपरोक्‍त सूची में से दस्‍तावेजों के सत्‍यापन उपरांत कौन-कौन से उम्‍मीदवार पात्र पाये गये थे, उनके नाम, पते बतायें तथा किस-किस के नियुक्ति आदेश जारी किये गये थे? (घ) सत्‍यापन के पश्‍चात् पात्र पाये गये कौन-कौन से उम्‍मीदवारों के नियुक्ति‍ आदेश जारी नहीं किये गये? उनका नाम तथा कारण बतायें। (ड.) नियुक्ति आदेश जिन-जिन के जारी हुए थे, उनमें से किस-किस ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया? उनके नाम पते सहित बतायें। (च) क्‍या नियुक्ति आदेश रजिस्‍टर्ड डाक से नहीं भेजे गये थे और न ही उन्‍हें विभागीय पोर्टल/वेबसाईट पर अपलोड कर प्रचारित किया गया? यदि हाँ, तो ऐसा क्‍यों? यदि नहीं, तो सभी के रजिस्‍ट्री क्रमांक, दिनांक बतायें।

खाद्य मंत्री ( श्री ओम प्रकाश धुर्वे ) : (क) जी हाँ। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट '' अनुसार है। (ग) पात्र उम्‍मीदवारों को नियुक्ति आदेश जारी किये गये थे, जिसकी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (घ) सत्‍यापन के पश्चात् ऐसे उम्‍मीदवार जिनके नियुक्ति आदेश जारी नहीं किये गये, उनकी सूची पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ड.) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (च) सभी पात्र उम्‍मीदवारों को नियुक्ति आदेश स्‍पीड पोस्‍ट के माध्‍यम से भेजे गये थे। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। आदेश विभागीय पोर्टल/वेबसाईट पर अपलोड नहीं किये गये।

श्री मुकेश नायक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न विश्‍वविख्‍यात व्‍यापमं घोटाले से संबंधित है.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप भूमिका न बांधें, सीधे प्रश्‍न करें.

श्री मुकेश नायक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं माननीय मंत्री महोदय से यह जानना चाहता हूँ कि मूलत: कितने पदों की भर्ती के लिए विज्ञापन हुए थे ? कितने पदों पर भर्ती की गई ? किस-किस तारीख को पदों की भर्ती की गई ?

श्री ओम प्रकाश धुर्वे -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 27 पदों के लिए विज्ञप्‍ति हुई और 27 पद भरे गए. जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट में उपलब्‍ध है.

श्री मुकेश नायक -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरे पास पूरी जानकारी है. मंत्री महोदय, अब आप सुनें, जो मैं बोल रहा हूँ.

श्री ओम प्रकाश धुर्वे -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं सुन रहा हूँ.

श्री मुकेश नायक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 27 पदों के लिए नहीं, बल्कि 33 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया है. विभाग ने पहले 27 पदों के लिए अनुमति ली, उसके बाद 6 अतिरिक्‍त पदों के लिए व्‍यापम से अनुमति ली गई.

सभापति महोदय -- पहले आप उनकी बात सुन लें, उसके बाद आप अपनी बात कहें.

श्री मुकेश नायक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी का उत्‍तर तो आ गया.

अध्‍यक्ष्‍ा महोदय -- मंत्री जी खडे़ ही थे और आप बीच में बोल पडे़. ठीक है आप बोलिए.

श्री ओम प्रकाश धुर्वे -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ठीक है. माननीय नायक जी बहुत वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं. मैं निवेदन करना चाहता हॅूं कि आपने जो पूछा, वह मैंने बताया. व्‍यापम के द्वारा 27 पद ही भरती किए गए हैं. विभाग ने 6 पद बाद में भरा है. मेरा जवाब बिल्‍कुल सही है, सटीक है. यह आप मानेंगे या नहीं मानेंगे. मैं कहां गलत बोल रहा हॅूं.

श्री मुकेश नायक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह उदाहरण है कि सरकार किस तरह से जवाब देती है. मुझे जो परिशिष्‍ट दिया गया है, मैं उसे पढ़कर सुना देता हॅूं. इसमें पहले 27 पदों के लिए विज्ञप्ति जारी हुई, इसके बाद व्‍यापम ने 6 पदों के लिए अतिरिक्‍त अनुमति मांगी. मेरे पास विभाग के सचिव का पत्र है, मैं इसे पढ़कर सुना देता हॅूं. यह पत्र आपने हमारे प्रश्‍न के उत्‍तर में दिया है. यह पत्र विभाग के अपर सचिव ने दिनांक 06.07.2013 को जारी किया है और इसमें यह कहा गया है कि पहले 27 पदों के लिए हमने अनुमति मांगी, विज्ञापन जारी किए फिर 6 अतिरिक्‍त पदों के लिए हमने व्‍यापम से अनुमति मांगी. इस तरह से 33 पदों के लिए हमने विज्ञापन जारी किया और माननीय मंत्री महोदय सदन को यह कह रहे हैं कि केवल 33 पदों पर ही नियुक्तियां हुई हैं.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने विधानसभा में जो उत्‍तर दिया है उसमें कहा है कि 52 पदों के लिए नियुक्तियां की हैं. पूरी सूची मुझे दी गई है और 52 पदों के लिए जो नियुक्तियां की गई हैं मैं उसकी तारीख बता देता हॅूं.

श्री ओम प्रकाश धुर्वे -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ठीक कह रहे हैं लेकिन कुछ नियम, कानून-कायदे भी होते हैं.

श्री मुकेश नायक -- आपने पहले 33 कहा, फिर 52 कहा.

श्री ओम प्रकाश धुर्वे -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 5 प्रतिशत से ऊपर है तो व्‍यापम द्वारा सीधी भर्ती से पद भरे जाते हैं. उससे नीचे है तो विभाग द्वारा अपने स्‍तर से पद भरने की प्रक्रिया है और जो 6 पद बता रहे हैं जो प्रतीक्षा सूची के लिए वहां निवेदन किया गया है कि आप प्रतीक्षा सूची भेजिए ताकि हम 6 पद भर सकें. उसको पूरा व्‍यापम से भरने के लिए नहीं था. इस प्रकार से 27 पद व्‍यापम से और 6 पद हैं जो विभाग द्वारा 5 प्रतिशत भरे जाते हैं उसकी अनुमति के लिए भेजा गया है. इस प्रकार 33 पद होते हैं.

श्री मुकेश नायक -- ठीक है. माननीय मंत्री जी मैं विनम्रतापूर्वक आपसे यह पूछ रहा हॅूं कि किस-किस तारीख को आपने यह सूची जारी की ? यह एक स्‍पेसीफिक प्रश्‍न है.

किसान कल्‍याण तथा कृषि विकास, मंत्री (डॉ.गौरीशंकर शेजवार) -- माननीय नायक जी, सामने वाले को अहसास भी तो होना चाहिए. आप कभी आइने के सामने बोल कर देखें कि विनम्रता है उसमें या नहीं है. (हंसी..)

श्री मुकेश नायक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री महोदय से यह जानना चाहता हॅूं कि जो 52 पदों की नियुक्तियां की गई हैं क्‍या वह सूची वेबसाइट पर अपलोड की थी या इन्‍होंने किसी रजिस्‍टर्ड डाक के माध्‍यम से, जो लोग चयनित हुए हैं उन्‍हें सूचना दी गई ? 52 पदों में से किस-किस तारीख को कितने-कितने पदों पर आपने कितने लोगों को नियुक्तियां दीं ? यह आप बता दें.

श्री ओम प्रकाश धुर्वे -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सही पूछा जाए तो आप जो प्रश्‍न पूछना चाहते हैं वह आप नहीं पूछ पा रहे हैं (हंसी..) मैं बताने वाला भी नहीं हॅूं जब तक आप नहीं बताएंगे. (हंसी..) उसका उत्‍तर मैं बता रहा हॅूं जो 52 पद हैं जो परिशिष्‍ट में है. उसे आप देख लीजिएगा. हमने उसका उत्‍तर दे दिया है और किस-किस तारीख को 52 लोगों की नियुक्तियां हुई हैं और कब उन लोगों को बुलाया गया है, उसमें सारी बातों का उल्‍लेख है. पांचवे महीने में है, सातवें महीने में है, दसवें महीने में है, ग्‍यारहवें में है और अंत में सबका उल्‍लेख है.

श्री मुकेश नायक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय ने क्‍या किया कि जिन पदों पर नियुक्तियां कीं, दिनांक 17.05.2013 को...

श्री ओम प्रकाश धुर्वे -- माननीय मुकेश नायक जी, आप ढूंढ लीजिए. (हंसी..)

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसका मतलब इनको मालूम है कि घोटाला हुआ है.

अध्‍यक्ष महोदय -- वे तैयारी से आए हैं. (हंसी..)

श्री अजय सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप जानते हैं कि कुछ न कुछ दाल में काला है.

अध्‍यक्ष महोदय -- सामने श्री मुकेश नायक जी हैं इसीलिए वे तैयारी से आए हैं.

श्री मुकेश नायक-- मंत्री जी हमेशा तैयारी से आते हैं. मैं यह कह रहा हूँ कि दिनाँक 17.5.2013 को आपने 10 लोगों के नियुक्ति पत्र जारी किये, 17.5.2013 को उसी दिन,अलग से फिर से 5 नामों की सूची जारी की दिनाँक 9.7.2013 को आपने फिर से 17 लोगों के नियुक्ति पत्र जारी किये. एक ही पद है, एक ही विज्ञापन है, दिनाँक 4.10.2013 को आपने 12 नियुक्तियाँ फिर से जारी कर दी,दिनाँक 16.12.2013 को फिर से 3 आदेश निकाले और उसी दिन दूसरी बार 5 आदेश फिर से निकाले इस प्रकार एक ही दिन में दो भागों में 8 आदेश निकाले. अध्यक्ष महोदय, यह मामला ऐसा है कि (XXX).

अध्यक्ष महोदय-- यह कार्यवाही से निकाल दीजिये.

श्री बाबूलाल गौर-- अध्यक्ष महोदय, यह आपत्तिजनक है...(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- उसको कार्यवाही से निकाल दिया है.

श्री मुकेश नायक-- इसमें क्या असंसदीय है?

श्री सुंदर लाल तिवारी-- आदेश अलग-अलग क्यों निकला, इसकी जाँच होनी चाहिए.

श्री शंकर लाल तिवारी-- पर इस तरह की बात और सिर्फ फर्जी बयानबाजी प्रश्न में नहीं होनी चाहिए आप किसी चौराहे पर कांग्रेस पार्टी का भाषण नहीं दे रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय-- मुकेश नायक जी आप अपना प्वाइंटेड प्रश्न करिये.

श्री मुकेश नायक-- अध्यक्ष महोदय, मैं यह जानना चाहता हूं कि एक ही विज्ञापन था, एक ही पद है तो अलग-अलग आदेश क्यों निकाले. एक दिन में दो-दो आदेश क्यों निकाले, वेबसाईट पर अपलोड क्यों नहीं किया, रजिस्टर्ड डाक से क्यों नहीं भेजे?

अध्यक्ष महोदय-- रजिस्टर्ड डाक से भेजे हैं उत्तर में लिखा है आप पढ़ तो लीजिये.

श्री मुकेश नायक-- स्पीड पोस्ट से भेजे हैं.

श्री ओम प्रकाश धुर्वे-- माननीय अध्यक्ष महोदय, तत्समय हमारा पोर्टल सिस्टम डेवलप नहीं था इस कारण से स्पीड पोस्ट से हमने आदेश भेजे हैं और निश्चित रूप से आपने जो कहा है कि 17.5.2013 को पहले 10 लोगों को आदेश भेजे फिर 5 को आदेश भेजे दोनों मिलाकर के 15 हो गये और इसी प्रकार से 5 और 3 आदेश फिर निकाले यह कुल 8 थे. दिनाँक 16.12.2013 को यह 5 बार भेजे गये. कई लोगों को,अभ्यर्थियों को बुलाया गया, कुछ लोग समय पर नहीं आए, कुछ ने ज्वाइन नहीं किया इस कारण से यह अलग-अलग समय आपको दिख रहे हैं.

श्री सुंदर लाल तिवारी-- अध्यक्ष महोदय, इसमे भ्रष्टाचार की बू आ रही है एक ही दिन में कभी 3 ऑर्डर, कभी 5 ऑर्डर , कभी 7 ऑर्डर. क्या यह सदन को बताएंगे नहीं.मंत्री जी को बताना चाहिए उनकी जवाबदेही है.

अध्यक्ष महोदय-- आप बैठ जाइए . इसमें बहुत समय हो गया है. प्रश्न क्रमांक 11 श्री रजनीश सिंह अपना प्रश्न करें.

श्री निशंक जैन-- अध्यक्ष महोदय, इसमें व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है..(व्यवधान)...

श्री सुंदर लाल तिवारी-- यह ठीक कह रहे हैं. इसमें इस बात का अहसास हो रहा है कि (XXX).

अध्यक्ष महोदय-- यह कार्यवाही से निकाल दें...(व्यवधान)...

श्री ओम प्रकाश धुर्वे-- अध्यक्ष महोदय, आपको जो यह अंतर दिख रहा है उसका कारण है कि अलग-अलग केटेगिरी के हिसाब से एक ही दिन आदेश निकाले गये थे.जो 3 आदेश हैं उसमें अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग के अलग-अलग आदेश जारी किये गये हैं.

श्री मुकेश नायक-- अध्यक्ष महोदय, मैं यह प्रश्न पूछना चाहता हूं कि....

अध्यक्ष महोदय-- आप कई प्रश्न पूछ चुके हैं.

श्री ओम प्रकाश धुर्वे-- अध्यक्ष महोदय, मैं इसमें निवेदन करना चाहता हूं कि मैं इसकी जाँच करा लूँगा.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, इसमें मेरी जिज्ञासा है हम लोग बैठे-बैठे सुन रहे थे मुकेश नायक जी के प्रश्न में कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि 27 पद हैं या 33 पद हैं और 52 की भर्ती कैसे हो गई? माननीय मंत्री महोदय ने कहा कि 5 प्रतिशत विभाग के ऊपर रहता है और उससे वेटिंग ले ली जाती है तो 27 पद से डबल पद कैसे हो गये? यह थोड़ा हमको क्लियर कर दीजिये.

श्री ओम प्रकाश धुर्वे-- माननीय अध्यक्ष महोदय, हमने लोगों को नियुक्ति आदेश भेजे. कुछ लोगों ने ज्वाइन नहीं किया तो वेटिंग से नहीं लेना पड़ेगा क्या?

श्री यादवेन्द्र सिंह-- हम लोग भी शिक्षाकर्मी भर्ती करते थे..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- आप बैठ जाए, रजनीश जी आप पूछिये. इस पर बहुत चर्चा हो गई.

श्री मुकेश नायक--अध्यक्ष महोदय, जिनके नाम ही नहीं हैं उनकी भर्ती कर ली...(व्यवधान)...

श्री अजय सिंह-- हमारा यह आरोप है कि जिनका नाम वेटिंग लिस्ट में भी नहीं था उनको भी इन्होंने नियुक्ति दी है..(व्यवधान)...

अध्यक्ष महोदय--मैंने रजनीश जी को अलाउ किया था पर आप लोग खड़े हो जाते हैं. रजनीश सिंह जी आप प्रश्न करें. इस प्रश्न पर बहुत चर्चा हो गई है.

श्री यादवेन्द्र सिंह--हम लोग भी शिक्षाकर्मी भर्ती किया करते थे.

श्री मुकेश नायक--जिनका नाम ही नहीं हैं उनको भर्ती कर लिया. (व्यवधान)

श्री ओमप्रकाश धुर्वे--भर्ती के लिए बुलाया गया कुछ लोग नहीं आए. (व्यवधान)

श्री अजय सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा आरोप है जिसका नाम वेटिंग लिस्ट में भी नहीं था उसको भी इन्होंने नियुक्ति दी है.

श्री ओमप्रकाश धुर्वे--नहीं बिलकुल नहीं हुई है. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--. रजनीश सिंह जी अपना प्रश्न करिए. आप लोगों का यह तरीका सही नहीं है, आप लोग बार-बार खड़े होते हैं. कृपया बैठिए. नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया है और मंत्री जी ने नकार दिया है.

श्री ओमप्रकाश धुर्वे--आप बहुत जवाबदार व्यक्ति हैं, गलत बात यहां पर कर रहे हैं.

श्री विश्वास सारंग--यह तो प्रश्न ही उद्भूत नहीं होता है. न्यूज बनाने के लिए कर रहे हैं.

श्री ओमप्रकाश धुर्वे--अध्यक्ष महोदय, यह बिना जानकारी के प्रश्न कर रहे हैं.

 

11.56 बजे बहिर्गमन

प्रश्न संख्या 10 (क्रमांक 2156) पर शासन के उत्तर से असंतुष्ट होकर बहिर्गमन

श्री अजय सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी व्यापम जैसे घोटाले पर बिलकुल सही उत्तर नहीं दे रहे हैं इसलिए हम सदन से बहिर्गमन करते हैं.

(शासन के उत्तर से असंतुष्ट होकर श्री अजय सिंह, नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में इण्डियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यों द्वारा बहिर्गमन किया गया)

श्री बाबूलाल गौर--अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने बिलकुल सही और निष्पक्ष उत्तर दिया है.

 

11.57 बजे तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर (क्रमश:)

 

सोयाबीन/धान की फसलों की क्षतिपूर्ति

[राजस्व]

11. ( *क्र. 813 ) श्री रजनीश सिंह : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सिवनी जिले में सूखे से प्रभावित नष्‍ट हुई सोयाबीन की फसलों एवं धान की फसलों के लिये क्षति का आंकलन किया गया है? (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार यदि हाँ, तो उक्‍त क्षति पर शासन द्वारा कितना-कितना मुआवजा दिया गया, विकासखण्‍डवार बताएं (ग) यदि सर्वे कर आंकलन नहीं किया गया तो क्‍यों? स्‍पष्‍ट करें। मुआवजे की राशि कब तक वितरित की जायेगी?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जी नहीं, सूखा मैन्‍युअल 2016 के अनुसार जिला सिवनी में वैज्ञानिक मापदण्‍डों की पूर्ति नहीं होने से जिला सिवनी को सूखाग्रस्‍त घोषित नहीं किया गया हैं। अत: प्रश्‍न उदभूत नहीं होता। (ख) एवं (ग) उत्‍तरांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उदभूत नहीं होता।

श्री रजनीश सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न था कि सिवनी जिले के केवलारी विधान सभा क्षेत्र में और सिवनी जिले में सोयाबीन और धान की फसल बर्बाद हो गई थी. सूखे की स्थिति निर्मित हो गई थी. माननीय मंत्री जी का जो उत्तर आया है उससे मैं संतुष्ट नहीं हूँ. मुझे ऐसा लगता है कि माननीय मंत्री जी को गलत जानकारी दी गई है. जो उत्तर आया है मेन्युअल 2016 के अनुसार जिला सिवनी में वैज्ञानिक मापदण्डों की पूर्ति नहीं होने से सिवनी जिले को सूखा घोषित नहीं किया गया है. माह सितम्बर में जिले के अधिकारियों द्वारा जो वर्षा का रिकार्ड आंका गया उसके अनुसार 378.8 सेमी कम बरसात हुई है. विगत वर्ष 1057.2 सेमी बरसात हुई थी. प्रदेश के कृषि मंत्री, जिले के प्रभारी मंत्री गौरीशंकर बिसेन जी आए. 5 व 6 सितम्बर को सासंद फग्गन सिंह कुलस्ते जी आए मैंने स्वयं उनके साथ गांव-गांव और खेत-खेत का दौरा किया. हम सब लोगों ने माना की सूखे की स्थिति है. सोयाबीन और धान की फसल नष्ट हो गई है. हमने मुख्यमंत्री जी से आग्रह किया. 15 सितम्बर को मुख्यमंत्री जी वैज्ञानिकों को लेकर पलारी आए. 4 वैज्ञानिकों ने यह कहा कि आपके क्षेत्र में अल्प वर्षा हुई है. आप लोग गेहूं मत बोना. चना, मसूर, तेवड़ा, अलसी यह कम बरसात वाली फसल की बोवाई करना. इसके बाद भी सूखा घोषित नहीं किया गया. सोयाबीन के फसल बीमा की राशि भी नहीं मिली न ही धान की मिली. हमारी मांग और हमारा प्रश्न था कि मुआवजा क्यों नहीं दिया गया.

श्री उमाशंकर गुप्ता--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने जवाब में कहा है कि सूखा घोषित करने के जो मापदण्ड हैं उसके हिसाब से माइनस 24 प्रतिशत अगर वर्षा होती है तो सूखा घोषित किया जाता है. सिवनी का आंकड़ा माइनस 18 प्रतिशत आया है इसलिए सूखा घोषित नहीं किया गया है. लेकिन इसके कारण फसल बीमा नहीं मिलेगा, इसके कारण फसल का मुआवजा नहीं मिलेगा. इसका सूखे से कोई लेना देना नहीं होता है. सूखा घोषित करने के केन्द्र सरकार के मापदण्ड हैं उसका निर्धारण प्रदेश सरकार नहीं करती है. एजेंसियां निर्धारण करती हैं उसके हिसाब से सिवनी उसमें नहीं आया है. जो जिले और तहसील आई हैं उनको घोषित किया गया है.

श्री रजनीश सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे पास विकासखण्डवार जानकारी है कि कहां पर कितने सेंटीमीटर बरसात हुई है. मुख्यमंत्री जी ने स्वयं स्वीकार किया है कि मैं वैज्ञानिकों को इसलिए साथ लेकर आया हूँ कि आपके जिले में केवलारी में सूखा की स्थिति है.

अध्यक्ष महोदय--यह बात आप कह चुके हैं.

श्री रजनीश सिंह--अब जब वैज्ञानिक भी कह रहे हैं कि सूखा है तो फिर अलग से कौन से आंकड़े आयेंगे. माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे पास आंकड़े हैं जो इसको फुलफिल कर रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय--मंत्री जी आप माननीय सदस्य के आंकड़ें देख लें और अपने आंकड़ों से मिलान कर लें.

श्री उमाशंकर गुप्ता--जी. मैं उनके आंकड़े देख लूंगा और उसमें कोई विसंगति होगी तो दिखवा लूंगा.

श्री रजनीश सिंह--अध्यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्यम से निवेदन है कि लगातार किसान भूख हड़ताल पर बैठा है.

अध्यक्ष महोदय--भाषण मत दीजिए. आप मंत्री जी के पास जाकर आंकड़ें दीजिए वे मिलान करेंगे.

श्री रजनीश सिंह--क्या माननीय मंत्री जी फिर से जांच करवा लेंगे. क्या फसल बीमा का पैसा दिलवाएंगे.

श्री उमाशंकर गुप्ता--फसल बीमा का तो इससे कोई लेना देना नहीं है. यह माननीय सदस्य को जानकारी होगी. क्षतिपूर्ति, सूखे का इससे कोई लेना देना नहीं है.

श्री रजनीश सिंह--अध्यक्ष महोदय, जब सूखा रहेगा तो फसल बीमा तो मिलेगा ही मिलेगा. फसल बीमा भी नहीं मिल रहा है. मेरा अनुरोध है कि माननीय मंत्री जी फिर से इसकी जांच करवा लें.

अध्यक्ष महोदय--माननीय मंत्री जी कह रहे हैं कि वे आपके आंकड़े देखकर बताएंगे.

श्री रजनीश सिंह--मेरे पास आंकड़े हैं मंत्री जी आप आदेश करें.

श्री उमाशंकर गुप्ता--आप मुझे आंकड़े दे दीजिए यदि आंकड़ों में कोई विसंगति है तो हम जांच करा लेंगे.


 

यात्री बसों को स्‍थाई/अस्‍थाई परमिट का प्रदाय

[परिवहन]

12. ( *क्र. 1850 ) श्री जतन उईके : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या छिंदवाड़ा जिले में परिवहन विभाग द्वारा जिलों में यात्री बसों का स्‍थाई एवं प्रतिमाह अस्‍थाई परमिट दिया जाता है? (ख) क्‍या सभी यात्री बसों को अस्‍थाई परमिट प्रतिमाह दिया जा रहा है? यदि हाँ, तो किन-किन यात्री बसों को प्रतिमाह दिया जा रहा है? (ग) क्‍या छिंदवाड़ा जिले में बिना परमिट की अवैध रूप से यात्री बसें भी चलाई जा रही हैं? यदि हाँ, तो कितनी बसें चल रही हैं? प्रश्नांश (ख) अवधि में निरीक्षण के दौरान बिना परमिट अथवा वैधता समाप्‍त होने के बाद भी चलती पाई गई यात्री बसों पर क्‍या कार्यवाही किस अधिकारी के द्वारा की गई? यदि कोई अर्थदण्‍ड वसूला गया तो कितनी राशि वसूली गई, वसूली राशि का क्‍या उपयोग किया गया? (घ) क्‍या विभाग द्वारा बस मालिकों को जो परमिट जारी किये जाते हैं, उसमें वाहन की क्‍या कंडीशन है, क्‍या यह भी दर्शाई जाती है कि विभाग द्वारा कितने वर्ष पुराने वाहन को यात्री बसों के संचालन हेतु परमिट दिया जाता है?

गृह मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : (क) जिला परिवहन अधिकारी छिंदवाड़ा द्वारा अस्थायी परमिट जारी किये जाते हैं तथा स्थायी परमिट क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार जबलपुर द्वारा स्वीकृति के पश्चात् आर.टी.ओ. जबलपुर द्वारा जारी किये जाते हैं। (ख) जिन बस संचालकों द्वारा अस्थाई अनुज्ञापत्र मार्ग पर प्राप्ति हेतु विहित फीस एवं टैक्स निर्धारित प्रपत्रों को संलग्न कर प्राधिकार के समक्ष आवेदित किये जाते हैं, उन्हें गुण-दोष के आधार पर नियमानुसार अनुज्ञापत्र स्वीकृत कर जारी किये जाते हैं। अस्थाई अनुज्ञापत्रों की सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) जी नहीं। परिवहन एवं पुलिस विभाग द्वारा समय-समय पर निरंतर विशेष अभियान चलाकर अवैध रूप से बिना परमिट चल रही वाहनों की चैकिंग की जाती है। अवैध रूप से चल रही वाहनों से राशि रूपये 15000/- की शास्ति अधिरोपित की गई है। अधिरोपित राशि शासकीय कोष में जमा कराई गई। (घ) जी हाँ। मध्यप्रदेश शासन के राजपत्र दिनांक 24.11.2010 के अनुसार 15 वर्ष तक की आयु तक के यात्री वाहनों को स्टेज कैरिज के स्थाई/अस्थाई परमिट दिये जाते है। परिपत्र की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है।

श्री जतन उईके-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा जिला परिवहन कार्यालय छिंदवाड़ा की जानकारी से संबंधित प्रश्‍न था इसमें मैं मुतमईन नहीं हूं. मैं माननीय मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं कि हमारे जिले में संतोष कौल नामक अधिकारी है वह कितने जिलों के प्रभारी हैं ? कृपया करके बताएं.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य का जो प्रश्‍न है उसमें परमिटों के बारे में जानकारी मांगी गई है परमिटों की जानकारी इसमें दी गई है.

श्री जतन उईके-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, परमिट अस्‍थाई और स्‍थाई के संबंधित थी और जांच की थी, वसूली की थी. वह अधिकारी मात्र 15 दिन में या सप्‍ताह में केवल एक दिन बैठता है वह क्‍या जांच कर पाएगा ? क्‍या परमिटों की वसूली कर पाएगा ?

अध्‍यक्ष महोदय-- प्रश्‍नकाल समाप्‍त.

 

 

(प्रश्‍नकाल समाप्‍त)

 

 

श्री रामनिवास रावत-- प्रश्‍न कम कर दें. 25 की जगह 12 ही कर दें तो ज्‍यादा अच्‍छा है.

अध्‍यक्ष महोदय-- मुकेश नायक जी और आदरणीय प्रतिपक्ष के नेता जी के प्रश्‍न के बाद 12 प्रश्‍न आ गए हैं आपको तो धन्‍यवाद देना चाहिए.

श्री रामनिवास रावत-- सरकार संतुष्‍ट करे, सरकार सही समय पर सही जवाब दे सदस्‍य संतुष्‍ट हों तो प्रश्‍नकाल आगे चले.

 

12.01 बजे नियम 267 (क) के अधीन विषय

 

(1) सुमावली ग्राम के बारादरी मंदिर से गुढ़ा चम्‍बल नहर तक सड़क मार्ग निर्माण किया जाना

श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार (सुमावली) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

(2) उज्‍जैन संभाग में गरीब परिवारों को पट्टे न दिया जाना

 

डॉ. मोहन यादव (उज्‍जैन दक्षिण)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

(3) इंजी. प्रदीप लारिया- (अनुपस्थित)

 

 

 

 

(4) प्रदेश के हजारों स्‍कूल शिक्षक विहीन होना

 

श्री सुखेन्‍द्र सिंह (मऊगंज) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

(5) श्री दिनेश राय मुनमुन- (अनुपस्थित)

 

(6) उज्‍जैन संभाग के शासकीय चिकित्‍सालयों की भोजनशालाओं को आई.एस.ओ. तथा नेशनल क्‍वालिटी इंश्‍योरेंस संस्‍थाओं से रजिस्‍टर्ड किया जाना

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया (मंदसौर) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

 

(7) शासकीय कन्‍या उच्‍चतर माध्‍यमिक विद्यालय में वाणिज्‍य एवं कृषि विज्ञान की कक्षाएं प्रारंभ किया जाना

 

श्री रामनिवास रावत (विजयपुर)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

(8) कुशाभाऊ ठाकरे जिला अस्‍पताल में सोनोग्राफी की सुविधा न होने से मरीजों को परेशानी होना

 

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी (गुढ़)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

(9) भोपाल के शिवाजी नगर के मुख्‍य मार्ग पर 5 एवं 6 नंबर के बीच बने पार्क की दुर्दशा होना

 

डॉ. रामकिशोर दोगने (हरदा)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

(10) प्रदेश में कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को कार्यानुसार मानदेय प्राप्‍त न होना

 

श्री शैलेन्‍द्र जैन (सागर)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

12.09 बजे

शून्‍यकाल में मौखिक उल्‍लेख

 

(1) विजया राजे सिंधिया कॉलेज में प्रोफेसरों की नियुक्ति किया जाना

 

श्री घनश्‍याम पिरौनियॉ (भाण्‍डेर)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी विधान सभा भाण्‍डेर के ''विजया राजे सिंधिया कॉलेज'' में लंबे समय से प्रोफेसरों की कमी है. इस संबंध में मैंने निवेदन भी किया है. कुछ समय पूर्व जब मैं कॉलेज गया था तो वहां से सारे छात्रों ने इसके लिए मुझसे निवेदन किया था इसलिए मैं पुन: शून्‍यकाल के माध्‍यम से आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि वहां पर यदि शीघ्र प्रोफेसरों की नियुक्ति की जायेगी तो कॉलेज में अध्‍ययन-अध्‍यापन का कार्य सुचारू रूप से हो सकेगा. धन्‍यवाद.

2. भीषण ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान पर सहायता राशि उपलब्‍ध कराया जाना.

श्री रजनीश हरवंश सिंह(केवलारी):- अध्‍यक्ष महोदय, मेरी शून्‍यकाल की सूचना इस प्रकार है कि विगत 13 तारीख को मेरे विधान सभा क्षेत्र केवलारी और सिवनी जिले में लगभग 278 ग्रामों में भीषण ओलावृष्टि हुई है और किसान 26 तारीख से आज दिनांक तक भूख हड़ताल पर बैठे हैं. अभी तक शासन के किसी भी वरिष्‍ठ अधिकारी ने कोई सुध नहीं ली है. मेरा आपके माध्‍यम से अनुरोध है कि तत्‍काल सहायता राशि उपलब्‍ध करायी जाये और उनकी व्‍यवस्‍था करायी जाये.

 

3. शासकीय महाविद्यालय की जनभागीदारी समिति के अध्‍यक्ष को हटाया जाना.

श्री सोहनलाल बाल्‍मीक(परासिया):- अध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र में एक शासकीय महाविद्यालय है और उस शासकीय महाविद्यालय की जनभागीदारी समिति का अध्‍यक्ष बनाया गया है, उस पर धारा-110 और गुण्‍डा एक्‍ट की कार्यवाही चल रही है. ऐसी शासकीय संस्‍था में ऐसे लोगों को बैठाना कहीं न कहीं गलत काम हुआ है, यह उचित नहीं है. मेरा आपसे आग्रह है कि मेरी शून्‍यकाल की सूचना पर जांच कर ऐसे व्‍यक्ति को हटाना चाहिये.

 

 

 

 

 

12.11 बजे अध्‍यादेशों का पटल पर रखा जाना

 

(क)मध्‍यप्रदेश हाई स्‍पीड डीजल उपकर अध्‍यादेश, 2018 (क्रमांक 1 सन् 2018),

(ख) मध्‍यप्रदेश मोटर स्पिरिट उपकर अध्‍यादेश, 2018 (क्रमांक 2 सन् 2018); तथा

(ग) मध्‍यप्रदेश नगरपालिक विधि (संशोधन) अध्‍यादेश, 2018 (क्रमांक 3 सन् 2018).

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.12 बजे पत्रों का पटल पर रखा जाना

 

1. मध्‍यप्रदेश वित्‍त निगम का 62 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2016-17

 

 

 

2.

 

 

 

(क)

(i)

अवधेश प्रताप सिंह विश्‍वविद्यालय, रीवा (म.प्र.) का 49 वां प्रगति प्रतिवेदन वर्ष 2016-2017 तथा

 

(ii)

महाराजा छत्रसाल बुन्‍देलखण्‍ड विश्‍वविद्यालय, छतरपुर (मध्‍यप्रदेश) का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2016-2017,

(ख)

मध्‍यप्रदेश भोज (मुक्‍त) विश्‍वविद्यालय अधिनियम, 1991 की धारा 29 की उपधारा (2) की अपेक्षानुसार मध्यप्रदेश भोज (मुक्‍त) विश्‍वविद्यालय, भोपाल का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2016-2017; तथा

(ग)

चित्रकूट ग्रामोदय विश्‍वविद्यालय अधिनियम, 1991 (क्रमांक 9 सन् 1991) की धारा 36 की उपधारा (5) की अपेक्षानुसार महात्‍मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्‍वविद्यालय, चित्रकूट, जिला सतना (म.प्र.) का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2016-2017,

 

 

 

 

3. मध्‍यप्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड, भोपाल का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2013-2014

 

12.13 बजे

नवम्बर-दिसम्बर, 2017 सत्र निर्धारित अवधि के पूर्व स्‍थगित हो जाने के फलस्‍वरूप शेष दिनांकों की प्रश्‍नोत्‍तरी तथा इसी सत्र के प्रश्नों के अपूर्ण उत्‍तरों के पूर्ण उत्‍तरों का संकलन पटल पर रखा जाना.

 

12.14 बजे

नियम 267 - क के अधीन नवम्बर-दिसम्बर, 2017 सत्र में पढ़ी गई सूचनाओं तथा

उनके उत्‍तरों का संकलन पटल पर रखा जाना.

 

12.14 बजे राज्‍यपाल की अनुमति प्राप्‍त विधेयकों की सूचना.

12.15 बजे

 

अब, इसके संबंध में डॉ. नरोत्‍तम मिश्र, संसदीय कार्य मंत्री, प्रस्‍ताव करेंगे.

संसदीय कार्यमंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूँ कि अभी अध्‍यक्ष महोदय जी ने जिन कार्यों पर चर्चा के लिए समय निर्धारित करने के संबंध में कार्य मंत्रणा समिति के प्रतिवेदन की सिफारिशें पढ़कर सुनाई हैं. उन्‍हें सदन स्‍वीकृति देता है.

 

12.16 बजे [उपाध्‍यक्ष महोदय (डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुए.]

 

उपाध्‍यक्ष महोदय - प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ.

प्रश्‍न यह है कि जिन कार्यों पर चर्चा के लिए समय निर्धारण करने के संबंध में कार्य मंत्रणा समिति की जो सिफारिशें पढ़कर सुनाई गईं, उन्‍हें सदन स्‍वीकृति देता है.

 

प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ.

 

 

12.17 बजे ध्‍यानाकर्षण

 

(1) प्रदेश में गेहूँ की खरीदी शीघ्र प्रारंभ न किया जाना.

 

श्री शैलेन्‍द्र पटेल (इछावर) [श्री बहादुर सिंह चौहान] उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरी ध्‍यान आकर्षण की सूचना का विषय इस प्रकार है:-

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण मंत्री (श्री ओम प्रकाश धुर्वे) उपाध्‍यक्ष महोदय,

 

उपाध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी आपने जवाब में 1800 से 1840/- रूपये मॉडल रेट का उल्‍लेख किया है, जबकि अभी अपने जवाब में 1900/-रूपये पढ़ा है. माननीय सदस्‍य श्री शैलेन्‍द्र पटेल आप बोलें.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि उन्‍होंने बहुत सारी जानकारियां दे दी हैं. मेरा उद्देश्‍य इतनी सारी जानकारियां लेने का नहीं था. मेरी बहुत सरल सी बात है और मैं इस ध्‍यानाकर्षण के माध्‍यम से सीधा सरकार का ध्‍यानाकर्षित करना चाहता था कि हमारे क्षेत्र में खासकर मालवा, इंदौर में गेहूँ की कटाई लगभग खत्‍म हो चुकी है क्‍योंकि आजकल हार्वेस्‍टर से जल्‍दी काम हो जाता है. मंत्री जी यदि कृषि मंत्री होते तो शायद ज्‍यादा बेहतर तरीके से समझ सकते थे कि इस वर्ष मावठा नहीं गिरा है और फसलों से आपकी अपेक्षा थी कि बाद में फसल आयेगी लेकिन फसल उससे बहुत पहले ही आ चुकी है. मैं अभी होली और रंगपंचमी की छुट्टियों में अपने क्षेत्र में था और सारे विधायकगण भी अपने-अपने क्षेत्र में गये थे, फसलें कटकर तैयार हो चुकी है और एक ओर आप कह रहे हैं कि फसलें मंडियों में भी जा रही है, यह आपने स्‍वीकार किया है. मैं आपको इस बात के लिये भी धन्‍यवाद दे रहा हूं कि फसलें 1800 से 1840/- रूपये के रेट में जा रही है और कहीं न कहीं उस रेट में भी जा रही होंगी जैसा अपने उत्‍तर दिया है, तब भी 150 से 200 रूपये का घाटा किसानों को हो रहा है. अगर यह समर्थन मूल्‍य की खरीदी पहले हो जाती तो शायद किसानों को यह घाटा नहीं होता.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से एक बात पूछना चाहता हूं कि अगर हम समर्थन मूल्‍य का निर्णय लेते हैं कि इस मूल्‍य पर खरीदा जाये तो क्‍यों वह उस समर्थन मूल्‍य पर मंडी पर नहीं खरीदा जाता है ? अगर उसी समर्थन मूल्‍य पर मंडी में खरीद लेते तो यह व्‍यवस्‍था नहीं आती. भावांतर योजना में भी यही हुआ है कि भावांतर में समर्थन मूल्‍य कुछ ओर था, मंडी का मूल्‍य कुछ ओर था लेकिन जब किसान वह सोयाबीन मंडी में लेकर गया तो वह सोयाबीन जिसका समर्थन मूल्‍य 3050 रूपये था, वह 2400-2500 रूपये तक गया और वह राशि सरकार को देनी पड़ी.

उपाध्‍यक्ष महोदय - कृपया आपका जो प्रश्‍न हो वह आप पूछ लें.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं उसी के परिप्रेक्ष्‍य में कह रहा हूं कि अगर मंडी में समर्थन मूल्‍य पर ही गेहूँ की खरीदी हो जाये तो कोई दिक्‍कत वाली बात नहीं होती है. शासन जो मूल्‍य निर्धारित करती है, उस समर्थन मूल्‍य पर मंडियों में कोई भी खरीदी नहीं होती है. हमारी सरकार ने आज तक इस पर कोई मैकेनिज्‍म नहीं बनाया है, जिससे जो समर्थन मूल्‍य की राशि घोषित हुई है उस पर खरीदी करवाई जा सके.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से नम्र निवेदन है कि 20 मार्च तक बहुत देरी हो जायेगी. आज हम मंडी के आंकड़ें निकालेंगे तो बहुत सा गेहूँ मंडी में बिक रहा है और उसके कारण किसानों को घाटा जा रहा है. किसानों को जो राशि मिलना चाहिए वह नहीं मिलती है. शासन ने मंशा जाहिर की है कि 2000/- रूपये क्विंटल में गेहूँ खरीदा जायेगा लेकिन उनकी मंशा कुछ ओर है और वह राशि उन्‍हें मिल नहीं पा रही है. इसलिए यहां पर यह प्रश्‍न उत्‍पन्‍न होता है कि शायद उनकी मंशा में ही कहीं खोट होगा, अगर खोट नहीं है तो वह पहले से ही फसल खरीदना चालू कर दें तो सरकार जो राशि देना चाहती है वह किसानों तक पहुंच जायेगी. अगर 15 मार्च, 20 मार्च और 25 मार्च से फसल खरीदेंगे तो किसानों का बहुत सा गेहूँ मंडी में चला जायेगा और वह घाटा किसान को होगा. क्‍या वह घाटा सरकार भावांतर में पूरा करेगी? या तो वह समर्थन मूल्‍य में खरीद ले और जो घाटा होगा वह कैसे पूरा होगा ? मेरा आपके माध्‍यम से मंत्री जी से निवेदन है कि वह इस स्थिति को वह स्‍पष्‍ट करें.

उपाध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी, आपने जवाब इतना लंबा जवाब दे दिया है और इतनी सारी जानकारियां दे दी हैं कि उससे बहुत सारे प्रश्‍न उत्‍पन्‍न हो गये हैं. माननीय सदस्‍य को सिर्फ यह जानकारी चाहिए थी कि क्‍या 07 मार्च से आप खरीदी चालू करेंगे या जो अन्‍य तिथियां 15, 20 एवं 27 मार्च हैं, से शुरू करेंगे ?

श्री ओम प्रकाश धुर्वे माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक सप्‍ताह ही तो बचा है. आज 7 तारीख है 15 मार्च, कोई ज्‍यादा दिन नहीं हैं. माननीय सदस्‍य की चिन्‍ता ठीक है. मैं तो इससे उद्भूत होते हुए कोई और नया प्रश्‍न खड़ा न हो जाए, इसलिए आपको संतुष्‍ट करने के लिए ढेर सारी जानकारियां दे दी थी.

उपाध्‍यक्ष महोदय उससे बहुत सारे प्रश्‍न उत्‍पन्‍न हो जाते हैं.

श्री ओम प्रकाश धुर्वे हां ठीक है, हो सकते हैं. यह तो जलवायु के ऊपर निर्भर करता है, जितनी नमी रहेगी, सिंचाई जहां होगी वहां फसल लेट होगी.

उपाध्‍यक्ष महोदय मंत्री जी क्‍या आप जो तारीख है उससे दो-चार दिन पहले कर सकते हैं?

श्री ओम प्रकाश धुर्वे एक सप्‍ताह तो अब बच गया हैं, हमें तैयारी भी करनी पड़ती है. माननीय सदस्‍य ने कहा कि आप जो उत्‍तर दे रहे हैं उसमें 6000-7000 क्विंटल आवक प्रतिदिन आप बता रहे हैं वह भी सही है, लेकिन हम लोगों की भी एक मजबूरी, हम लोग जो सरकार का जो मापदंड है, जो मानक है, एफएक्‍यू है, उसके अनुसार ही हम लोग खरीदी कर पाते हैं. अभी गेहूं की फसल जहां ज्‍यादा पानी नहीं है या सूखे क्षेत्र हैं, पथरीली भूमि है वहां कटाई हो गई है, थ्रेसिंग भी हो गई है या चल रही है, लेकिन उसमें नमी ज्‍यादा है और ऐसे सूखे वाले क्षेत्र जहां हैं, आप मुस्‍कुरा रहे हैं हो सकता है वहां पहले बुआई हो गई होगी, या पानी की उपलब्‍धता कम होगी माननीय श्री शैलेन्‍द्र पटेल से कहना चाहता हूं, लेकिन एफएक्‍यू जो हमारा मापदंड है उसके अनुसार नहीं आ पाता, इसलिए यह सब विसंगतियां हो रही हैं. मैं निवेदन करना चाहता हूं कि एक सप्‍ताह है, एक सप्‍ताह और इंतजार कर ले, जब तक गेहूं और सूख जाएगा.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, किसानों को परेशानी न हो. मैं खुद किसान हूं और स्थिति को भलीभांति जानता हूं. मैं यह नहीं कहता हूं कि शासन से कहां गलती हुई है, लेकिन वह यह अंदाजा नहीं लगा पाए कि इस बार मावठा नहीं गिरने के कारण और जो मौसम रहा उसके कारण फसलें बहुत जल्‍दी आ गईं.पिछले बार 15 मार्च को हुई कोई दिक्‍कत नहीं थी, फसलें आईं थीं लेकिन इस वर्ष उसके पहले फसल आ गई. दूसरी बात यह है कि जब हार्वेस्‍टर से गेहूं कटता है तो उसमें गीला गेहूं कट ही नहीं पाता, गेहूं में कोई नमी भी नहीं है. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से सरकार से बहुत निवेदन है, ठीक है आप 20 मार्च और 25 मार्च वालों को तो 15 मार्च कर दीजिए. ठीक है इंदौर, उज्‍जैन में आप 15 मार्च से खरीद रहे हैं. मालवा और हमारे होशंगाबाद संभाग में और जो दूसरी जगह है, उनकी भी पहले कर दीजिए. मैं भोपाल संभाग से आता हूं, मेरे क्षेत्र का लगभग 90 प्रतिशत गेहूं कट चुका हैं. मैं मंत्री जी को यही ध्‍यानाकर्षित करना चाहता हूं. पूरे जिले में लगभग बुधनी, नसरूल्‍लागंज को छोड़ दें वहां पर नहर वगैरह है.

उपाध्‍यक्ष महोदय माननीय सदस्‍य, मंत्री जी समझ गए हैं.

श्री ओम प्रकाश धुर्वे माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हम लोग तो जबलपुर से आते हैं. मेरे प्रभार का सतना जिला भी है, तो यहां से आप ट्रेन से निकल जाइएगा कहीं आपको गेहूं की कटाई चालू नहीं दिखेगी इतनी दूरी में, हो सकता है इधर हो, मैं इधर बहुत दिनों से नहीं गया हूं, लेकिन माननीय सदस्‍य जो बता रहे हैं उसका मैं परीक्षण करवा लूंगा.

उपाध्‍यक्ष महोदय माननीय मंत्री जी, मध्‍यप्रदेश के अलग अलग अंचलों में फसल कहीं पहले आती है, कहीं बाद में आती है, अभी विन्‍ध्‍य क्षेत्र में तो फसल हरी है.

श्री ओम प्रकाश धुर्वे उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं उसका परीक्षण करवा लूंगा, अगर ऐसा है तो जल्‍दी चालू करवा देंगे.

उपाध्‍यक्ष महोदय कुछ दिन पहले इसको करवा लीजिए.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल मंत्री जी, आप ऐसा करते हैं तो अभी से मैं आपको धन्‍यवाद देता हूं, सभी किसानों की तरफ से जिनको कि आज राशि का नुकसान हो रहा है. आप समय से 15 मार्च से करवा देंगे तो मैं बहुत बहुत आभारी रहूंगा.

श्री बहादुर सिंह चौहान (महिदपुर) माननीय उपाध्‍यक्ष जी, शासन द्वारा समर्थन मूल्‍य पर गेहूं खरीदी के लिए 15 मार्च 2018 में खरीदी के केन्‍द्र प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि इस वर्ष गेहूं की फसल वर्तमान में कट चुकी है और फरवरी के अंतिम दिनों में कटाई व थ्रेसिंग का कार्य लगभग पूरा हो जाएगा. किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए 15 दिनों इंतजार करना पड़ेगा. दूसरी तरफ किसानों को तुरंत पैसों की आवश्‍यकता होने के कारण वे अपने उपज मंडी में कम दामों पर बेचने के लिए विवश हैं. किसानों द्वारा समर्थन मूल्‍य पर खरीदी 7 मार्च से किए जाने की मांग की गई है समय पर समर्थन मूल्‍य पर गेहूं की खरीदी की व्‍यवस्‍था नहीं होने से किसानों में रोष व्‍याप्‍त है.

श्री ओम प्रकाश धुर्वे मैंने बता दिया न जिस क्षेत्र की जानकारी नहीं है, हम उधर का परीक्षण करवा लेंगे.

श्री बहादुर सिंह चौहान माननीय उपाध्‍यक्ष जी, आपने कहा है कि विन्‍ध्‍य में फसल अलग समय में आती है, चंबल में अलग समय में आती है, निमाड़ में अलग समय में आती है.

उपाध्‍यक्ष महोदय इस साल मावठा नहीं गिरा, इसलिए फसल पहले आ गई.

श्री बहादुर सिंह चौहान -- उपाध्यक्ष महोदय, मैं कृषि उपज मंडी के आंकड़े लाया हूं. उज्जैन जिले में 7 मंडियां हैं. 1 लाख 70 हजार 400 क्विंटल गेहूं 26 फरवरी, 2018 तक उज्जैन संभाग में बिक चुका है और यह गेहूं 1600 से 1700 के रेट में बिका है. उपाध्यक्ष महोदय, अन्य अंचलों में नवम्बर में सोयाबीन होती है और उज्जैन संभाग में अक्टूबर में प्रारंभ हो जाती है.इसका कारण यह है कि हमारे यहां पर कुंओ और ट्यूव वेल से सिंचाई होती है. गत वर्ष यह खरीदी जब हमने आग्रह किया तो 15 मार्च हुई थी क्योंकि गत वर्ष मावठा गिरा था. एक किसान होने के नाते मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूं कि 1600 से1700 में जो गेहूं 26 फरवरी, 2018 तक बिक चुके हैं, इनके उपार्जन केन्द्र तैयार है और मुख्यमंत्री जी द्वारा यह कहा गया कि किसानों के गेहूं 2,000 रूपये क्विंटल में खरीदेंगे इस पर मेरा प्रश्न है कि जो 1 लाख 70 हजार 400 क्विंटल गेहूं जो 1600 से 1700 में बिक चुका है, इसका एवरेज 3500 रूपये क्विंटल का घाटा हमारे यहां के किसान को हो रहा है. 100 क्विंटल में किसान को 35 हजार का नुकसान हो रहा है, अंतिम तारीख बीत गई है, क्या आज से ही उज्जैन संभाग में जितने उपार्जन केन्द्र हैं उनकी खरीदी के निर्देश मंत्री जी देंगे ?

श्री ओमप्रकाश धुर्वे-- उपाध्यक्ष महोदय, मंडियों में गेहूं के जो आंकड़े सदस्य ने बताये हैं इसमें नये और पुराने दोनों किस्म के गेहूं आते हैं.साल भर आदमी थोड़ी थोड़ी बिक्री करता है. मैंने पहले भी कहा है कि मैं इसका परीक्षण करा लूंगा अगर ऐसी स्थिति है तो वहां जल्दी प्रारंभ करेंगे.

उपाध्यक्ष महोदय- मंत्री जी, एक सुझाव यह है कि जो आपने तारीखें दी हैं क्षेत्र विशेष को लेकर के पांच दिन उसको और बढ़ा दें.

श्री बहादुर सिंह चौहान- ऐसा कर दें तो बहुत कृपा होगी.

श्री ओमप्रकाश धुर्वे-- उपाध्यक्ष महोदय, अलग अलग क्षेत्र में अलग अलग फसल बोने का समय है, इसी के हिसाब से अलग अलग संभाग में अलग अलग तारीखें दी हैं. उज्जैन-इंदौर तरफ 15 मार्च से ही खरीदी प्रारंभ कर देते हैं.

उपाध्यक्ष महोदय- आप परीक्षण करा लें.

श्री ओमप्रकाश धुर्वे- मैंने कह दिया है, परीक्षण करा लूंगा.

श्री बहादुर सिंह चौहान- उपाध्यक्ष महोदय, मंत्री जी जो कह रहे हैं कि पुराने गेहूं भी बिक्री के लिये आ रहे हैं यह उत्तर न्याय संगत नहीं है. 99 प्रतिशत नई फसल है. हम किसान हैं, मालवा के लोग हैं, मंत्री जी, माननीय उपाध्यक्ष जी के सुझाव के अनुसार परीक्षण करके कम से कम पांच दिन आगे बढ़ा दें ताकि किसान को फायदा हो सके.

उपाध्यक्ष महोदय- मंत्री जी परीक्षण के लिये कह रहे हैं, बहुत सारी चीजें देखना पड़ती है, व्यवस्थायें देखना पड़ती हैं.

श्री सोहनलाल बाल्मीक(परासिया) -- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं छिंदवाड़ा जिले के बारे में जानकारी चाहता हूं. 28 फरवरी,2018 तक सोसायटी में पंजीकरण करने का अवसर किसानों को मिला था चूंकि सोसायटी में कर्मचारियों की हड़ताल के कारण पंजीयन नहीं हो पा रहा है, क्या किसानों के हित में पंजीयन करने की वैकल्पिक व्यवस्था सरकार करेगी ?

श्री ओमप्रकाश धुर्वे-- उपाध्यक्ष महोदय, पिछले वर्ष जिन जिन ने पंजीयन किया था उन सबको ले रहे हैं, दुबारा पंजीयन की उन्हें आवश्यकता नहीं है. इस साल जो तारीखें निर्धारित की हैं उसमें सारे पंजीयन मेरे ख्याल से हो गये होंगे.

श्री सोहनलाल बाल्मीक --मंत्री जी, चूंकि मेरे क्षेत्र में सोसायटी के कर्मचारी हड़ताल में है, वहां पंजीयन नहीं हो पा रहा है.

श्री ओमप्रकाश धुर्वे-- मैं वही कह रहा हूं कि पिछले साल जिनका पंजीयन था उनको अब पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं है. कोई बच गया था, उसके लिये पर्याप्त समय दिया गया है.

श्री सोहनलाल बाल्‍मीक-- माननीय उपाध्‍यक्ष जी, मैं यह कह रहा था कि आपने बोला कि जो पिछले किसान जिनका पंजीयन था, फिर से उन्‍हीं को मौका मिल जायेगा, रिव्‍यू हो जायेगा, मगर सोसायटी में ऐसे निर्देश जारी नहीं हुये हैं, कर्मचारी हड़ताल पर हैं, आज भी सोसायटी में किसान पंजीयन कराने के लिये लाइन लगाकर खड़े हुये हैं लेकिन पंजीयन नहीं हो पा रहा, तो एक बार निर्देश जारी कर दें.

उपाध्‍यक्ष महोदय-- उनको पंजीयन करने की आवश्‍यकता नहीं है.

मुख्‍यमंत्री (श्री शिवराज सिंह चौहान)-- एक-एक किसान का पंजीयन होगा, आवश्‍यकता पड़ेगी तो तिथि भी बढ़ा दी जायेगी लेकिन जो पात्र किसान है वह कोई भी पंजीयन से वंचित नहीं रहेगा एक बार रिव्‍यू करके वैसी व्‍यवस्‍था बना लेंगे, बिल्‍कुल होगा, कोई वंचित नहीं रहेगा.

श्री सोहनलाल बाल्‍मीक-- जी धन्‍यवाद. यही निर्देश जारी कर दें ताकि किसानों को राहत मिल जाये.

 

 

 

 

 

2. उज्‍जैन-जावरा बी.ओ.टी. सड़क मार्ग के किनारे नाली का निर्माण न किये जाने से

उत्‍पन्‍न स्थिति

 

श्री दिलीप सिंह शेखावत (नागदा-खाचरोद)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी ध्‍यानाकर्षण सूचना का विषय इस प्रकार है-

लोक निर्माण, विधि और विधायी कार्य मंत्री (श्री रामपाल सिंह)-- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय,

श्री दिलीप सिंह शेखावत-- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी को यह बताना चाहूंगा कि यह जो बी.ओ.टी सड़क है यह बहुत ही महत्‍वपूर्ण सड़क है. राजस्‍थान, गुजरात के सारे या‍त्री और विशेषकर उज्‍जैन हमारा एक प्रसिद्ध धार्मिक और तीर्थ स्‍थल है वहां पर काफी लोग आते हैं. जैसा माननीय मंत्री जी ने बताया कि जो गुड़गांव की कंपनी है उसके हिसाब से उन्‍होंने यह सारा बनाया है. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहूंगा कि वास्‍तव में जो अनुबंध हुआ है उस अनुबंध की शर्तों को लागू करवाने का काम वास्‍तव में किसका है एक प्रश्‍न मेरा यह है. दूसरा मैं यह पूछना चाहूंगा कि माननीय मंत्री जी ने यह बताया है कि 935 मीटर की लंबाई जल निकासी हेतु निवेशक द्वारा बनाई गई है. जब डी.पी.आर.बनी थी उस वक्त टोटल नाली कितनी बननी थी और अभी तक उनसे कितनी राशि जो उन्होंने नाली नहीं बनायी है, वह वसूल कर ली गई, मंत्री जी बतायेंगे तो ठीक होगा.

श्री रामपाल सिंह--उपाध्यक्ष महोदय, पहले प्रस्ताव के अनुसार तो इसकी 30.9 किलोमीटर लंबाई का प्रावधान इसमें किया गया था. निर्माण के द्वारा पाया गया कि 935 मीटर नाली का निर्माण किया गया है. तीसरा प्रश्न माननीय सदस्य जी ने पूछा है कि 9 करोड़ के लगभग राशि की वापसी के लिये पत्र संबंधित को दिया गया है.

श्री दिलीप सिंह शेखावत--उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि ऐसा क्या कारण है कि 2013 में विभाग को यह कार्य हैंडओव्हर कर दिया गया है. 2013 से 2018 तक अधिकारियों द्वारा जो 9 करोड़ रूपये की राशि ठेकेदार से वापस लेना थी वह राशि वापस नहीं ली गई, तो क्यों नहीं ली गई ? इसमें अधिकारियों की चूक है तो क्या उनके ऊपर कार्यवाही करेंगे.

श्री रामपाल सिंह--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मूल प्रश्न माननीय सदस्य जी का है नाली निर्माण का, जहां पर पानी भर रहा है वहां का आप प्रस्ताव दे दें. वहां मैं अधिकारियों को भेजकर दिखवा लूंगा अगर वहां पानी भरता है तो नाली का निर्माण कर देंगे. दूसरा विषय जो आपने उठाया है इसमें पूरी प्रक्रिया का पालन हुआ है, लेकिन फिर भी माननीय सदस्य जी को कहीं पर किसी तरह की बात आपके ध्यान में है तो इसकी जांच कराने में हमें कोई आपत्ति नहीं होगी.

उपाध्यक्ष महोदय--माननीय मंत्री जी इन्होंने जो पूछा है कि 9 करोड़ रूपये जो वापस आने हैं अभी तक वापस क्यों नहीं आये ? इसमें कौन दोषी हैं, उन पर क्या कार्यवाही करेंगे और अनुबंध लागू करने वाली एजेंसी कौन सी है, अनुबंध कौन लागू करता है, यह दो महत्वपूर्ण प्रश्न हैं ?

श्री रामपाल सिंह--उपाध्यक्ष महोदय, उत्तर में सारी जानकारी दे दी गई है उसमें कम्पनी का नाम भी दिया हुआ है.

उपाध्यक्ष महोदय--अनुबंध कौन कराएगा ? बनाने वाले का आपने नाम दिया है क्या? उसको लागू कौन करेगा ?

श्री रामपाल सिंह-- उपाध्यक्ष महोदय, बनाने वाले का नाम दे दिया है.

उपाध्यक्ष महोदय--अनुबंध लागू कौन करेगा ?

श्री रामपाल सिंह--उपाध्यक्ष महोदय, अनुबंध विभाग ने लागू किया है, जो एजेंसी है उन्होंने शर्तों का पालन किया है और अनुबंध के हिसाब से उनको नाली का निर्माण करना था. 30 किलोमीटर में करना था 935 मीटर में किया है. बाकी उपयुक्त नहीं समझा है इसलिये उसका निर्माण कार्य कम कर दिया है.

12.42 बजे {अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए}

श्री दिलीप सिंह शेखावत--अध्यक्ष महोदय, मैं विनम्रता से पूछना चाहता हूं कि 30 किलोमीटर की डी.पी.आर बनी थी उसमें मात्र 935 मीटर नाली बनी है. यह गंभीर मामला है. क्या संबंधित अधिकारियों पर इसकी जांच करेंगे ? वर्तमान में आप कह रहे हैं कि पानी कहीं नहीं भर रहा है. घिनोदा जो मेरा गांव है उसमें लगातार चार वर्षों से विभाग को इस बारे में पत्र भी दे रहा हूं कि पानी घुस रहा है. इसमें कई प्रकरण राजस्व के मुआवजे के भी बने हैं. मेरे समक्ष एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी यहां से भेजकर जांच कराएंगे ? मेरा प्रश्न एक और है कि वर्तमान में जो संधारण होना चाहिये व शर्तों का पालन भी नहीं हो रहा है क्या ? आप मेरे समक्ष अधिकारियों को भेजकर दोनों मामलों की जांच कराएंगे ?

श्री रामपाल सिंह--अध्यक्ष महोदय, मेरा माननीय सदस्य जी से निवेदन है कि जानकारी इसकी आपको दे दी है. अगर आपके ध्यान में जो ज्यादा जरूरी है वहां स्थान बता दें, वहां पर नाली का निर्माण करवा देंगे. दूसरा अनुबंध के हिसाब से पूरा काम वहां पर हुआ है. अगर वहां पर उसका उल्लंघन हुआ है तो निश्चित रूप से हमारी एम.पी.आर.टी.सी की पूरी जवाबदारी है. हमें इसकी वरिष्ठ अधिकारियों से जांच कराने में दिक्कत नहीं है इसमें माननीय सदस्य जी को विश्वास भी दिलाते हैं कि अगर ऐसी कोई बात है, अगर कोई कमी अथवा शर्तों का उल्लंघन हुआ है उसकी वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा जांच करा लेंगे.

श्री दिलीप सिंह शेखावत - ये जो संधारण वाली है उसकी मेरे समक्ष जांच कराएंगे.यह बहुत गंभीर विषय है और 100 कि.मी. की रोड है और वह इतनी खराब है और टोल पूरा वसूला जा रहा है. मैं अधिकारियों को बताऊंगा कि कहां-कहां गड़बड़ है.

अध्यक्ष महोदय - जब जांच करने जाएं तो विधायक जी को सूचना दे दें.

डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय - अध्यक्ष महोदय, नीमच जिला,मंदसौर जिला इसी पर निर्भर करता है.गांव भी आते हैं.

अध्यक्ष महोदय - उन्होंने काम करवाने का कह दिया है.

श्री दिलीप सिंह शेखावत - अध्यक्ष महोदय,मेरा आखिरी प्रश्न, अनुबंध की कापी मुझे उपलब्ध कराई जायेंगी ?

श्री रामपाल सिंह - अनुबंध की कापी उपलब्ध करा दी जायेगी और जहां तक नाली की बात है, विधायक जी की महत्वपूर्ण सड़क है वहां का अधिकारी परीक्षण करेंगे. जहां जरूरत होगी, नाली बनेगी. मैंने विस्तार से बता दिया है आपकी भावना से लोग काम करेंगे.

श्री दिलीप सिंह शेखावत - अध्यक्ष महोदय, घिनौदा, जहां पर लगातार 5 साल से दिक्कत है उसका तो आप परीक्षण कराकर नाली बनवा दें.

अध्यक्ष महोदय - आप बैठें. अनन्त काल तक नहीं चलेगा.

 

 

12.46 बजे सभापति तालिका की घोषणा

अध्यक्ष महोदय - मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 9 के उपनियम(1) के अधीन,मैं,निम्नलिखित सदस्यों को सभापति तालिका के लिये नाम-निर्दिष्ट करता हूं :-

1. श्री कैलाश चावला

2. डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय

3. श्रीमती नीना विक्रम वर्मा

4. श्री ओमप्रकाश वीरेन्द्र कुमार सखलेचा

5. श्री रामनिवास रावत

6. श्री के.पी. सिंह

 

याचिकाओं की प्रस्तुति

अध्यक्ष महोदय - आज की कार्यसूची में सम्मिलित सभी याचिकाएं प्रस्तुत की गईं मानी जाएंगी.

 

 

12.47 बजे

राज्यपाल के अभिभाषण पर श्री रामेश्वर शर्मा,सदस्य द्वारा दिनांक 26 फरवरी,2018 को प्रस्तुत कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव पर चर्चा

अध्यक्ष महोदय - राज्यपाल के अभिभाषण पर प्रस्तुत कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव एवं संशोधनों पर चर्चा. अब श्री रामेश्वर शर्मा,सदस्य कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव के संबंध में अपना भाषण प्रारम्भ करेंगे.

श्री रामेश्वर शर्मा(हुजूर) - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं महामहिम राज्यपाल जी के द्वारा इस विधान सभा में जो अभिभाषण दिया उस पर कृतज्ञता व्यक्त करने के लिये यहां पर खड़ा हूं. आप और हम यह जानते हैं कि मध्यप्रदेश की जो प्रगति हुई है और आज मध्यप्रदेश जिस स्थान पर खड़ा है. हम उन सरकारों का भी उल्लेख कर सकते हैं जो पहले रही हैं और वर्तमान सरकारों का भी उल्लेख कर सकते हैं. विगत चौदह सालों की यात्रा हम देखें तो इन चौदह सालों में मध्यप्रदेश ने प्रगति के जो नये आयाम छुए हैं. चौदह सालों में मध्यप्रदेश जिस स्थान पर पहुंचा है आज वह संपूर्ण देश के अंदर बधाई का पात्र है. मध्यप्रदेश आज बीमारू राज्य से ऊपर उठकर अपने पैरों के ऊपर विकसित राज्य के रूप में खड़ा है. इस विकसित राज्य को ऊंचे स्थान पर पहुंचाने में किसी का नेतृत्व काम आया है, किसी ने हमारे मध्यप्रदेश को उन्नत बनाया है तो उसमें हमारे मुख्यमंत्री जी शिवराज सिंह चौहान जी का महत्वपूर्ण योगदान है. माननीय अध्यक्ष महोदय आप और हम जानते हैं कि 2003 के पहले की जो स्थितियां थीं. यह राज्य बीमारू था. इस राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति चौपट हो गई थी. इस राज्य में कानून-व्यवस्था इतनी खराब थी कि उस समय तत्कालीन मंत्री की हत्या तक इस राज्य में हुई. आप और हम जानते हैं कि ग्वालियर-चंबल संभाग के बीहड़ों में डाकुओं का आतंक था. मध्यप्रदेश इस दुर्गति के दौर से कांग्रेस के नेतृत्व में गुजरा. कांग्रेस के नेतृत्व में " अंधेर नगरी चौपट राजा टके सेर भाजी टके सेर खाजा " जैसे उदाहरण उस समय प्रस्तुत किये जाते थे.

नेता प्रतिपक्ष(श्री अजय सिंह) - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं सम्माननीय विधायक जी से पूछना चाहता हूं कि आप 2005,2006,2007,2008,2009,2010 कब का भाषण दे रहे हैं. चौदह साल आपकी सरकार हो गई. आप अपनी बात तो करो.

श्री रामनिवास रावत - बोलते जाओ आप तो. बोलते जाओ.

श्री रामेश्वर शर्मा - नेता प्रतिपक्ष जी ने सही कहा कि कब की बात,मैंने शुरुआत में कहा कि मध्यप्रदेश की स्थिति में जिन-जिन का योगदान है हम उसका भी उल्लेख करेंगे लेकिन मध्यप्रदेश इन चौदह सालों में प्रगति के रास्ते पर आया उसका भी उल्लेख करेंगे. हम मध्यप्रदेश में यह सवाल भी पूछेंगे क्योंकि वर्तमान और भूतकाल दोनों सामने रखे जाते हैं. अगर उस समय तत्कालीन मंत्री की हत्या होती है तो समझ आता है कि कानून-व्यवस्था क्या थी.

श्री के.पी.सिंह - "भूत" से पीछा कब छूटेगा आपका. "'भूत" से कभी पीछा छूटेगा,नहीं छूटेगा.

श्री रामेश्वर शर्मा - अगले चुनाव में आप सबसे पीछा छूट जायेगा तो "भूत" से पीछा छूट जायेगा.

श्री के.पी. सिंह- हमसे छोड़ो "भूत" से कब छूटेगा यह बता दो.

श्री अजय सिंह - रामेश्वर शर्मा जी, हमने कोलारस में देख लिया.

श्री रामनिवास रावत - कोलारस से अभी आये हो. तीन महीने रामेश्वर जी आप कोलारस पड़े रहे. तीन महीने से कोलारस थे भोपाल नहीं देखा.

श्री के.पी. सिंह - "भूत" का पीछा नहीं छूट पाया.

श्री रामेश्वर शर्मा - अध्यक्ष जी, कोलारस में जो कुछ भी स्थिति है. मैं यही तो कहना चाहता हूं कि कांग्रेस की जो स्थिति है. वह धुंधकारी की तरह है. बारिश में जो माचिस गीली हो जाती है, उसको रगड़-रगड़कर जब कभी वह जल जाती है तो कांग्रेस चीखने और चिल्लाने लगती है. 4 उपचुनाव जीतने से कांग्रेस यह नहीं समझ सकती कि प्रदेश जीत गई. प्रदेश आज भी शिवराज जी के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है और आगे बढ़ता रहेगा. मध्यप्रदेश आज उन्नति के पथ पर है. आप विचार करिए, कोलारस के पिछले चुनाव का आपके पास क्या रिकॉर्ड है? जो सीट आप 48000 वोट से जीते थे, उसमें आप 8000 वोट पर आ गये. जो सीट कभी आप 35000 वोट से जीतते थे, उसमें आज 3000 वोट पर आ गये. यह बात मैं जानता हूं. अजय भैया, मैं आपकी भावना जानता हूं. मैं आपकी भावना भी जानता हूं श्री के.पी. सिंह जी कि आप यह चाहते हैं कि कोलारस और शिवपुरी में भारतीय जनता पार्टी का झंड़ा गड़े और (XXX), यह आपकी भावना है.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) - अध्यक्ष महोदय, यह आपत्तिजनक है.

अध्यक्ष महोदय - इसे विलोपित कर दीजिए.

श्री के.पी. सिंह - मतलब जो आप बखान कर रहे हैं, उसमें हमारा योगदान है?

श्री रामेश्वर शर्मा - के.पी. सिंह जी, मैं तो बोल ही रहा हूं.

श्री के.पी. सिंह -मतलब आपका कुछ योगदान नहीं है? आप सीधी बात कहें.

श्री रामेश्वर शर्मा - आप इसी तरह से सहयोग करते रहिए.

श्री के.पी. सिंह - आप कहें तो कि हमारा योगदान है, आपका कुछ योगदान नहीं है.

श्री रामेश्वर शर्मा - अब क्या कह दें?

श्री के.पी. सिंह - आप कहें, क्यों नहीं कह रहे हैं?

अध्यक्ष महोदय - आप अपनी बात करें, यह प्रश्नोत्तर काल नहीं है.

श्री रामनिवास रावत - यह और बता दें कि कितना-कितना रुपया खर्च करके आए?

श्री रामेश्वर शर्मा -अध्यक्ष महोदय, मैं आपको यह भी बता देना चाहता हूं कि आज जो प्रदेश की स्थिति है. आप देखिए कि डेढ़ दशक के शासनकाल में आज मध्यप्रदेश की विकास दर 18 से 20 प्रतिशत प्रतिवर्ष के आधार पर बढ़ी हैं. मध्यप्रदेश 2 लाख करोड़ रुपए के बजट को पार कर चुका है. आज बेहतर वित्तीय प्रबंधनों का नतीजा है कि लगातार मध्यप्रदेश की विकास की दर देश के औसत विकास की दर से अधिक है. गरीबों की उन्नति में भागीदार है. राज्य में समावेशी विकास की नीतियों को ध्यान में रखते हुए शासन ने गरीबों के लिए रोटी, कपड़ा, मकान, पढ़ाई-लिखाई, दवाई की व्यवस्था और रोजगार के इंतजाम किये हैं. ऐसी महत्वाकांक्षी योजनाओं को लेकर माननीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में आज हम चल रहे हैं. आप और हम यह भी जानते हैं कि मध्यप्रदेश कृषि प्रधान प्रदेश है. मध्यप्रदेश में अगर किसानों के लिए कोई बात है, अभी हमारे तमाम कांग्रेस के विधायक, भाजपा के विधायक यह बात उठा रहे थे कि जहां पर सिंचाई है, वहां पर अभी फसल कटने में 10-15 दिन की देरी है. जहां पर सूखा क्षेत्र है, वहां पर फसलें कट गई हैं. आप यह विचार करिए. माननीय मुख्यमंत्री जी अनेक बार वह बात कह चुके हैं. मैं भी यह बात करता हूं. आप भी यह जानते हैं कि विगत 60 साल के आपके शासनकाल में और पुराने राजा, नवाब, इनके शासनकाल में केवल 7 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित थी. मध्यप्रदेश के नागरिको को, किसानों को और इस सदन के सदस्य होने के नाते मुझे, आज हम सबको फक्र है. आज हम माननीय श्री शिवराज सिंह चौहान जी के नेतृत्व में 40 लाख हेक्टेयर से ज्यादा सिंचाई का रकबा सिंचित करने जा रहे हैं. (मेजों की थपथपाहट)..केवल इतना ही नहीं, वर्ष 2025 तक इसकी जो योजना है वह 80 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचाई करने की योजना है. मैं आप सबको यह भी बता देना चाहता हूं कि हमारे कर्मचारी भाइयों की स्थिति क्या थी? हमारे पुलिस विभाग की स्थिति क्या थी. आप देखिए गुरुजियों की स्थिति क्या थी? आज श्री शिवराज सिंह चौहान जी के नेतृत्व में जहां पर हम लंबी-लंबी सड़कें बना रहे हैं. खेत तक सड़क पहुंचाने का काम कर रहे हैं, जहां पर गरीब के लिए पक्का मकान देने के लिए श्री नरेन्द्र मोदी जी का हमको आशीर्वाद मिल रहा है. जहां गरीब का चूल्हा कभी बेशरम की लकड़ी से जला करता था, उसकी रोटी काली पड़ जाती थी. सदन के माध्यम से मैं धन्यवाद देता हूं श्री नरेन्द्र मोदी जी को कि उन्होंनें गरीब की इस परेशानी को समझा, उस बहन की आंखों के आंसू को समझा और उन्होंने गरीब को पक्के मकान देने के साथ गैस का चूल्हा देने का जो काम किया है, उसके लिए वे बधाई के पात्र हैं.

अध्यक्ष महोदय, आप विचार करिए, मैं आपसे एक प्रार्थना करना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश में हमने बहुत से मुख्यमंत्री देखे. आदरणीय श्री अर्जुन सिंह जी को भी हमने देखा, आदरणीय श्री मोतीलाल वोरा जी को देखा, आदरणीय श्री दिग्विजय सिंह जी को देखा, लेकिन इनके मुख्यमंत्रित्व काल का एक भी उदाहरण ऐसा नहीं है कि किसी भी बेटी को लाड़ली लक्ष्मी बनाया गया हो, एक भी उदाहरण नहीं है कि किसी भी गरीब की बेटी का विवाह कराया हो. मैं फक्र के साथ कह सकता हूं और श्री शिवराज जी को मैं धन्यवाद भी दे सकता हूं कि अगर 27 लाख बेटियों को लाड़ली लक्ष्मी बनाया तो वह माननीय श्री शिवराज सिंह चौहान जी ने बनाया.( मेजों की थपथपाहट) 5 लाख से अधिक बेटियों का विवाह कराया. वह गरीब की बेटियां थीं, हिन्‍दू की बेटियां थीं, मुसलमान की बेटियां थी, सिख की बेटियां थीं, लेकिन शिवराज सिंह चौहान जी ने कहा कि बेटी कोई भी हो, पर मामा शिवराज सिंह चौहान इन बेटियों के हाथ पीले करायेगा. यह जिम्‍मेदारी माननीय शिवराज सिंह जी ने बखूबी निभायी. मैं एक बात और भी बता देना चाहता हूं कि माननीय प्रधानमंत्री जी, माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने दिव्‍यांगों को, जो चलने में असहाय महसूस करते थे, जिनको आंखों की परेशानी थी, जिनको पैर की परेशानी थी, ऐसे लोगों के लिये भी पर्याप्‍त सुख-सुविधायें उपलब्‍ध कराकर, उनका मेडिकल परीक्षण कराकर उनको विशेष प्रकार के यंत्र उपलब्‍ध कराये. यह भी बहुत बड़ा काम मध्‍यप्रदेश सरकार और केन्‍द्र सरकार के सहयोग से हुआ है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप और हम यह जानते हैं. आप तो स्‍वयं डॉक्‍टर रहे हैं. आप विचार करिये कि हमीदिया अस्‍पताल की हालत वर्ष 2003 में क्‍या थी ? इसके पहले आपके यहां के अस्‍पतालों की हालत क्‍या थी ? आज मैं यह कह सकता हूं कि माननीय मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी की सहज, सरल और गरीब को लाभ देने वाली मेडिकल सुविधाओं के आधार पर हर गरीब को दवा उपलब्‍ध हो, उसका सस्‍ता इलाज हो, उसकी पूर्ण जांच यहां पर हो, आज सरकारी अस्‍पतालों में मरीजों की लंबी-लंबी कतारें खड़ी हो गई हैं. उनके अंदर यह भरोसा पैदा हो गया है कि हम सरकारी अस्‍पताल में जायेंगे तो हमारा नि:शुल्‍क इलाज होगा, हमको दवायें फ्री मिलेंगी, वहां पर हमारा मेडिकल चेकअप होगा, हम वहां पर जल्‍दी स्‍वस्‍थ होंगे. आप उस समय गिनें तो केवल 2-3-4 मेडिकल कॉलेज हुआ करते थे और आज मैं मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी को इस बजट भाषण के माध्‍यम से धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि आज उनके नेतृत्‍व में पूरे प्रदेश में 7 नये मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं.

श्री सुखेन्‍द्र सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, वहां पर डॉक्‍टर एक भी नहीं है.

श्री रामेश्‍वर शर्मा -- आपने पहले डॉक्‍टर नहीं बनने दिये. तुरंत तो डॉक्‍टर नहीं हो जायेंगे, यह 7 नये मेडिकल कॉलेज खुल रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप उनकी बात का उत्‍तर न दें अपनी बात करें. आप वाद-विवाद नहीं करें.

श्री रामेश्‍वर शर्मा -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह नहीं समझ सकता कि विपरीत परिस्थितियां होने के बाद भी देश में कांग्रेस के इतना चिल्‍ला-चोट करने के बाद भी त्रिपुरा जैसे राज्‍य में जहां भारतीय जनता पार्टी का नाम लेने पर वहां के कार्यकर्ताओं को मौत के घाट उतार दिया जाता था, वहां पर शाखा लगाने वाले लोगों को मार दिया जाता था, अगर त्रिपुरा की धरती ने केसरिया स्‍वीकार किया है, तो आप इससे अहसास करो कि यह लहर कहां तक जायेगी ? यह ध्‍वनि कहां तक जायेगी ? अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको एक बात और बता देना चाहता हूं. माननीय मुख्‍यमंत्री, माननीय प्रधानमंत्री जी के कारण हमारे यहां गर्भवती महिलाओं, माताओं-बहनों के लिये विशेष प्रावधान किये गये हैं. माननीय मुख्‍यमंत्री जी के द्वारा उनको 4000 रुपये की विशेष राशि, केन्‍द्र सरकार के द्वारा, माननीय प्रधानमंत्री जी के द्वारा 6000 रुपये विशेष राशि उपलब्‍ध कराकर क्‍योंकि वह इस बात को जानते हैं कि गरीबी के कारण किसी गर्भवती महिला के पेट में जो शिशु पल रहा है वह कहीं कमजोर न हो, कहीं कुपोषण का शिकार न हो इसलिये उसको भी इस तरह की सहायता उपलब्‍ध कराई गई है.

अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह भी बता देना चाहता हूं कि मध्‍यप्रदेश में विकास की जो योजनायें हैं उन योजनाओं पर आप विचार करिये. आज मध्‍यप्रदेश विकास की तरफ चल रहा है. आज मध्‍यप्रदेश के 20-21 शहर सफाई के मामले में नंबर एक पर खड़े हैं. मध्‍यप्रदेश में आज भोपाल और इंदौर ये दोनों शहर मेट्रो की तरफ आगे बढ़ रहे हैं. मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं कि हम दिल्‍ली और मुम्‍बई की तरह प्रगति कर रहे हैं. यह दोनों हमारे विशेष शहर थे. राजधानी होने के कारण भोपाल और उद्योग नगरी इंदौर होने के कारण इनमें जो सुविधा उपलब्‍ध करायी जा रही हैं, इनको मेट्रो से जोड़ा जा रहा है वह अपने आपमें अभूतपूर्व है. मैं आपसे यह भी प्रार्थना करना चाहता हूं कि मैं भी ग्रामीण क्षेत्र से आता हूं और अनेक विधायकगण ग्रामीण क्षेत्र से आते हैं. पहले एक-एक हैण्‍डपम्‍प के लिये तरसते थे, हैण्‍डपम्‍प नहीं मिलता था. मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि मुख्‍यमंत्री पेयजल योजना के अंतर्गत, पीएचई विभाग की अनेक योजनाओं के अंतर्गत आज हमारे विधानसभा क्षेत्र में और भी अन्य सदस्यों के विधान सभा क्षेत्रों में घर-घर नल जल योजना केवल चार इमली की बहन के यहां ही नहीं होना चाहिये कि उसके घर में टोंटी खोलेंगे, तो पानी होगा, बल्कि गांव में बैठी हुई बहन के घर में भी नल लगेगा और जब वह नल खोलेंगे, तो उसको पानी प्राप्त होगा. ऐसी सुविधायें सरकार वहां पर पहुंचा रही है. गरीबों के प्रगति के लिये सरकार लगातार अपने अपने कामों पर लगी है. मध्यप्रदेश के 150 शहरों को हम शीघ्र और तीव्र गति के विकास कार्य में और तेजी से उन्नति की तरफ आगे बढ़ा रहे हैं. मैं आप सबसे प्रार्थना करना चाहता हूं कि आज आप देखिये, हम कभी कभी मध्यप्रदेश की पुलिस पर कमेंट्स कर देते हैं. कभी कभी तो लोग सेना के बारे में कमेंट्स कर देते हैं. और तो और अच्छे अच्छे बुद्धिजीवी, जिनको राष्ट्रीय पार्टी का नेता होने का सौभाग्य प्राप्त है, वह भी देशद्रोही नारों का समर्थन कर देते हैं, लेकिन इन देशद्रोहियों से लड़ता है, तो सीमा पर खड़ा हुआ हमारा सैनिक और अंदर कोई लड़ता है, तो हमारा पुलिस का नौजवान. इन पुलिस के नौजवानों के लिये मध्यप्रदेश में विशेष रुप से योजना तैयार की गई है. प्रदेश में पुलिस रक्षित केंद्र बनाये जा रहे हैं. लगातार इनके आवास की व्यवस्था सुचारु रुप से की जा रही है. इनके छुट्टी और मेडिकल परीक्षण के लिये भी विशेष योजनाएं मध्यप्रदेश सरकार ने तैयार की है. अपराधियों पर नियंत्रण करने के लिये 100 डॉयल को और सुचारु रुप से बढ़ाया जा रहा है. पूरे प्रदेश में 100 डॉयल की हजारों गाड़ियां गली और मोहल्लों में घूम रही हैं. जहां पर अपराधियों पर अंकुश लगया जा रहा है और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जा रही है. आज मुझे बताने में बड़ा हर्ष हो रहा है कि जिला मुख्यालय पर चिह्नित 61 शहरों में निगरानी करने के लिये यातायात प्रबंधन को ठीक करने के लिये सी.सी.टी.व्ही. कैमरे भी लगवाये जा रहे हैं, उज्जैन, भोपाल, इन्दौर , जबलपुर, ग्वालियर जैसे बड़े शहर, खण्डवा, कटनी, सागर जैसे संवेदनशील नगरों के कार्य पूर्ण हो चुके हैं. दूसरे चरण में शेष 50 शहरों में सी.सी. टी.व्ही. सिस्टम को स्थापित किया जायेगा. मैं आपसे यह भी प्रार्थना करना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश सरकार यहीं नहीं रुकेगी, मध्यप्रदेश सरकार उस हर गरीब के पास, जिसके पास रहने का मकान नहीं है या जिसके पास रहने के लिये जमीन का कोई टुकड़ा नहीं है. यह पहली सरकार है, आजादी का सपना और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के अंत्योदय अभियान की अगर सार्थक भूमिका अदा की है, तो माननीय शिवराज सिंह चौहान जी ने अदा की है. मैं शिवराज सिंह चौहान जी को हृदय से धन्यवाद देता हूं कि आज आप इस बारे में विचार करें कि मध्यप्रदेश के अन्दर इतने काम किये हैं. गरीब के लिये, मजदूर के लिये 10 लाख पक्के आवास बनाकर दिये जा रहे हैं, जिनके पास रहने के लिये जमीन का टुकड़ा नहीं है, उनको जमीन का मालिक बनाया जा रहा है. इतने काम मुख्यमंत्री जी के द्वारा लगातार किये जा रहे हैं. मैं आप सबसे यह प्रार्थना करना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश के विकास में योजना बनाकर मुख्यमंत्री जी ने और वित्त मंत्री जी ने जो बजट हमारे सामने प्रस्तुत किया है, वह अपने आप में अनुकरणीय है. अध्यक्ष महोदय, आप और हम विचार करते हैं कि पहले सड़कों की क्या हालत थी. कोई सड़कें ही नहीं थीं. सड़क थी कि गड्ढा था, गड्ढा था कि सड़क थी, दोनों एक बराबर थे. लेकिन आज हम यह कह सकते हैं कि मध्यप्रदेश में हर जिला मुख्यालय, हर तहसील मुख्यालय, हर ब्लॉक मुख्यालय, हर पंचायत मुख्यालय तक अगर पक्की सड़क है, तो वह माननीय शिवराज सिंह जी के नेतृत्व में गांव तक को जोड़ने के लिये सड़क के प्रावधान किये गये हैं. मैं आपसे यह भी प्रार्थना करना चाहता हूं कि विकास की इस नीति के तहत मध्यप्रदेश में सबका कल्याण हो रहा है. ..

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) -- अध्यक्ष महोदय,मुझे कुछ ध्यान आ रहा है कि कुछ महीने पूर्व एक विधायक जी भोपाल के ही हैं, खड़े होकर कोई रोड बनवा रहे थे. 14 साल बाद शायद वहां पर कोई रोड बन रही थी. अब पता नहीं वह कौन से विधायक जी थे. आपको शायद जानकारी होगी.

श्री रामेश्वर शर्मा -- अध्यक्ष महोदय, नेता प्रतिपक्ष जी ने इतना तो ध्यान रखा कि कोई विधायक खड़े होकर सड़क बनवा रहे थे. अगर ये सड़कें पहले के विधायक खड़े होकर बनवाते रहते, तो यह दुर्दशा सड़कों की नहीं होती. आपकी सड़क तो मैंने वैसे ही बनवा दी.

श्री अजय सिंह -- डागा जी से पूछो.

श्री रामेश्वर शर्मा --डागा जी से क्या पूछो. वह तो आपकी सड़क तो मैंने बनवा दी ना.

श्री अजय सिंह -- नहीं, मेरी सड़क आपने नहीं बनवाई.

श्री रामेश्वर शर्मा -- अच्छा, रामपाल सिंह जी ने बनवाई. चलो ठीक है साहब, किसी ने तो सड़क बनवाई. नेता प्रतिपक्ष जी,आज मैं आपको यह भी बता देना चाहता हूं कि आप जिस सड़क की बात कर रहे हैं, वह सड़क अभी फोल लेन है, लेकिन आने वाले एक साल बाद वह सड़क भी सिक्स लेन के रुप में होगी. और केवल इतना ही नहीं कि अकेले कोलार क्षेत्र के लोगों को उसका लाभ मिलेगा, होशंगाबाद, इटारसी, हरदा और बैतुल जाने वाले लोगों को भी उस सड़क का लाभ मिलेगा. आज आप देखिए कि सड़कों का जाल फैल रहा है. आपके यहां की सड़कें भी देख लीजिए कि किस तरह की सड़कें थीं. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की सड़कें देख लीजिए. पहले हम पंचायतों में जाते थे तो पंचायत भवन नहीं थे. गांवों में अगर कोई आयोजन होते थे, किसी की बेटी का विवाह हो या किसी गरीब के यहां मौत हो जाए तो उसकी रसोई करने के लिए कोई स्‍थान नहीं हुआ करते थे. मैं पंचायत विभाग को इस बात के लिए धन्‍यवाद दूंगा कि आज वहां पर एक-एक विधान सभा क्षेत्र में एक-एक नहीं, दो-दो नहीं, तीन-तीन नहीं, चार-चार नहीं, कई जगह तो दस-दस, बीस-बीस मंगल भवन बनकर तैयार हैं. यह अपने आप में एक उपलब्‍धि है. हमने ग्रामीण मॉडल को आगे बढ़ाया है. हमने इसे महात्‍मा गांधी जी की तर्ज पर आगे बढ़ाया. जब ग्राम में विकास होगा, जब ग्राम सुरक्षित होगा, जब ग्राम के लोग संस्‍कारित होंगे, तब देश का विकास होगा. आप विचार करिए, क्‍या कभी श्रमोदय विद्यालय खुले हैं. मेरे पास मंत्री जी बैठे हुए हैं, एक गांव में श्रमोदय विद्यालय खुल रहा है. वहां पर बच्‍चे की भर्ती पहली क्‍लास में होगी और आखरी तक उसकी पढ़ाई वहां पर होगी. सीधे वहीं पर वह इंटरव्‍यू देगा. कैम्‍पस सिलेक्‍शन तक की व्‍यवस्‍था वहां पर गरीब बेटा-बेटियों के लिए की गई है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या कभी अनुसूचित जाति के बेटा-बेटी विदेश में पढ़ने के लिए गए, क्‍या कभी इसकी व्‍यवस्‍था की गई ? आज मध्‍यप्रदेश की सरकार ने अनुसूचित जाति के 1400 बेटा-बेटियों को विदेश में पढ़ने के लिए भेजने की व्‍यवस्‍था की है. यह अपने आपमें एक सराहनीय कार्य है. आप विचार करिए, आप अनुसूचित जाति के नाम पर नारा देते हैं. आप अंबेडकर जी की बात करते हैं लेकिन अंबेडकर जी के लिए आपने क्‍या किया, कौन सा अंबेडकर भवन बनाकर तैयार हुआ, अंबेडकर जी की क्‍या पूजा हुई. क्‍या रविदास जी को आपने माना, क्‍या संत वाल्‍मी जी की पूजा की, लेकिन आज मैं यह कह सकता हूँ कि मुख्‍यमंत्री जी की इस कल्‍पना ने गरीब की उस झोपड़ी तक जाकर कहा कि झोपड़ी तो पक्‍की बनेगी ही, पर तेरे आराध्‍य देव के मंदिर का भी निर्माण होगा. यह संकल्‍प अगर किसी ने लिया है तो यह माननीय शिवराज सिंह चौहान जी ने लिया है.

अध्‍यक्ष महोदय, आज किसी भी क्षेत्र में हम चले जाएं, सभी क्षेत्रों में मध्‍यप्रदेश का विकास निरंतर हो रहा है. मध्‍यप्रदेश चौतरफा विकास कर रहा है. आप विचार करें कि क्‍या कभी ऐसा हुआ है कि 2017 में किसान का गेहूँ खरीदा गया हो और गेहूँ खरीदने के बाद भी लगा कि किसान परेशान न हों, मैं मुख्‍यमंत्री जी को धन्‍यवाद देता हूँ कि उस पर भी 200 रुपये प्रति बोरे के हिसाब से उन्‍हें बोनस दिया गया है, एक बार ताली बजाकर माननीय मुख्‍यमंत्री जी का हृदय से धन्‍यवाद दिया जाए. (मेजों की थपथपाहट). यह है किसानों की चिंता, क्‍या किसानों की कभी ऐसी चिंता की गई, क्‍या किसानों को कभी इतना उपकृत किया गया. आप कहते हैं कि भावांतर योजना का क्‍या लाभ है, मैं इस सदन में बैठे हुए सभी माननीय सदस्‍यों से पूछना चाहता हूँ जो अपने आपको किसान कहते हैं, यदि वे किसान हैं, अगर उन्‍होंने फसल बोई है, फसल काटी है, फसल बेची है तो इस सदन को आप बताएं कि आपको भी भावांतर योजना का लाभ मिला है. उससे आप वंचित नहीं हैं. लेकिन कहा जाता है कि क्‍या है भावांतर योजना. मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी को हृदय से धन्‍यवाद देता हूँ कि आज भावांतर योजना में मध्‍यप्रदेश में जो सफलता अर्जित की गई है, इस भावांतर योजना का अध्‍ययन देश के अन्‍य प्रदेश भी कर रहे हैं. किसानों की प्रगति के लिए एक नया रास्‍ता हमारे माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने ढूंढा है कि हम फसल के समानांतर क्‍या रेट किसान को दे सकते हैं, कैसे किसानों को अपने पैरों पर खड़े कर सकते हैं. किसानों को सिंचाई के साधन, किसानों को सड़कों की व्‍यवस्‍था, किसानों को डेयरी लगाने की व्‍यवस्‍था, किसानों को समय पर बीज उपलब्‍ध कराने की व्‍यवस्‍था, किसानों की फसल खरीदने की व्‍यवस्‍था इस सरकार ने की है और तो और पहले मंडियों में दो-दो, तीन-तीन दिन तक किसानों की लाइन लगी रहती थी, लेकिन आज कहा जाए तो किसान के द्वार के सामने सोसाइटियों ने कैम्‍प लगा दिए हैं और वहां पर वे गेहूँ खरीद रहे हैं. एक क्‍विंटल नहीं, दो क्‍विंटल नहीं, आपके समय तो जरा सा माल हुआ करता था, आज भगवान की कृपा है कि लाखों मेट्रिक टन अनाज मध्‍यप्रदेश की सरकार किसानों से खरीद रही है और भण्‍डार गृह भरे पड़े हैं. आप तो कृषि प्रधान देश का तमगा लेकर आगे बढ़ना चाहते थे, लेकिन पिछली सरकार में, मनमोहन सिंह जी के नेतृत्‍व वाली सरकार में न जाने कौन से देश से लाल गेहूँ आया, इधर आदमी ने रोटी खाई, उधर लोटा लेकर निकल गया. बीमार पड़ गया. आज हम यह तो कह सकते हैं कि मध्‍यप्रदेश के अंदर गेहूँ के इतने भण्‍डारण हैं कि हम प्रदेश के लाखों-करोड़ों गरीबों को तो उपलब्‍ध कराएंगे ही, लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो देश के अन्‍य प्रदेशों को भी मध्‍यप्रदेश गेहूँ देने में सक्षम है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अगर किसानों की मेहनत, परिश्रम, कृषि नीतियों का आगाज अच्‍छे नये अनुकरणीय ढंग से नहीं हुआ होता, तो 5-5 कृषि कर्मण अवॉर्ड इस प्रदेश को नहीं मिलते. अगर 5-5 कृषि कर्मण अवॉर्ड इस प्रदेश को मिले हैं तो वह माननीय मुख्‍यमंत्री जी की सफल कृषि नीति के कारण मिले हैं, सफल योजनाओं के कारण मिले हैं. आप बताइएं. आप भी बडे़ किसान हैं कभी इससे पहले आपको फसल बीमा योजना का लाभ मिला है. क्‍या किसी को मिला है. लेकिन आज हम फख्र के साथ कह सकते हैं कि कम से कम लाखों किसानों को अरबों रूपए का फसल बीमा योजना का लाभ मिला है और अगर यह मिला है तो यह माननीय श्री नरेन्‍द्र मोदी जी की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का सफल व्‍यवस्‍थापन करने पर माननीय मुख्‍यमंत्री जी की सफल कृषि नीतियों के कारण मिला है. आज सिंचाई के साधन गांव-गांव तक बढ़ाए जा रहे हैं. जहां-जहां सूखा था, वहां पानी की नहरें पहुंचाने का काम किया जा रहा है. उस समय जो डेम बंद थे, उसके लिए नवीन डेम तैयार किए जा रहे हैं. 40 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र और बढे़गा तब मध्‍यप्रदेश का कृषि का जो बजट आएगा, मध्‍यप्रदेश के सदन में बैठे हुए जो लोग होंगे, वे लोग प्रफुल्लित होंगे और वे यह कह रहे होंगे कि वास्‍तव में अगर कृषि प्रधान प्रदेश है तो वह मेरा मध्‍यप्रदेश है और यहां का किसान अगर सफलता के साथ खड़ा है तो वह माननीय श्री शिवराज सिंह चौहान जी की नीतियों के कारण, सफलता के साथ खड़ा है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पुलिस ने कानून व्‍यवस्‍था को और सुचारू रूप से चलाने का जो काम किया है वह भी बहुत अनुकरणीय है. मैं माननीय गृह मंत्री जी को भी हृदय से धन्‍यवाद देता हॅूं कि उन्‍होंने नवीन थानों की स्‍थापना की है और भी थाने क्षेत्र में बढ़ाने हैं. जहां थानों की आवश्‍यकता है, जहां नवीन पापुलेशन बढ़ रही है, जहां दूरदराज प्रांतों के लोग भी आ रहे हैं, विभिन्‍न भाषाएं बोलने वाले लोग भी आकर जहां निवास कर रहे हैं ऐसी जगह नये थाने खोलने की और आवश्‍यकता है, पुलिस को और सुविधाएं देने की आवश्‍यकता है. माननीय गृह मंत्री जी ने अपनी योजनाओं में इस बात को भी सम्मिलित किया है और आज चारों तरफ सुरक्षा का वातावरण है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज जो मध्‍यप्रदेश की नीतियां सफल बनकर सामने आयीं हैं, मैं इस बात के लिए आज आप सब को धन्‍यवाद देता हॅूं कि जो हमारी योजनाएं हैं, मध्यप्रदेश सरकार ने जो योजनाएं बनाकर प्रस्‍तुत की हैं, जो हमारे सामने बजट प्रस्‍तुत किया है, माननीय राज्‍यपाल महोदय ने जिस पर अपना भाषण दिया है, मैं माननीय राज्‍यपाल महोदय के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए यह निवेदन करना चाहता हॅूं कि मध्‍यप्रदेश की उन्‍नति में, मध्‍यप्रदेश की प्रगति में हम सब को सहभागी होना चाहिए. चाहे एक नवंबर का स्‍थापना दिवस हो. एक नवंबर का स्‍थापना दिवस, भारतीय जनता पार्टी का स्‍थापना दिवस नहीं होता है बल्कि मध्‍यप्रदेश की साढे़ सात करोड़ जनता का स्‍थापना दिवस होता है. उसका बहिष्‍कार करके, उससे दूर रहकर प्रदेश में अच्‍छा संदेश नहीं जाएगा. जहां प्रदेश का तिरंगा झंडा फहराया जाए, जहां पर राष्‍ट्रगान हो वहां हमारे और आपके बीच मतभेद या कुछ भी हो, वह सब त्‍याग कर हम राष्‍ट्र के ध्‍वज को सलामी देने के लिए, हम अपने प्रदेश की ताकत को मजबूत करने लिए, प्रदेश के किसानों के हित में लड़ाई लड़ने के लिए, प्रदेश की साढे़ सात करोड़ जनता के हितों के सम्‍मान के लिए, यहां के बेटा और बेटियों की सुरक्षा के लिए, उनको सुचारू रूप से काम और रोजगार देने के लिए संपूर्ण सदस्‍य एक साथ होकर अगर उन्‍नत मध्‍यप्रदेश की कल्‍पना करेंगे तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वह दिन दूर नहीं जब हम हिन्‍दुस्‍तान के प्रदेशों में नंबर वन प्रदेश तो होंगे लेकिन दुनियां के देशों के अंदर भी मध्‍यप्रदेश सीना तानकर खड़ा होकर अपनी योजनाओं पर चर्चा कर सकता है. मध्‍यप्रदेश अपनी उपस्थिति का एहसास करा सकता है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे समय दिया, उसके लिए मैं हृदय से आपको धन्‍यवाद देता हॅूं और माननीय मुख्‍यमंत्री जी को, माननीय मंत्रीगणों को भी हृदय से धन्‍यवाद देता हॅूं और सभी माननीय सदस्‍यों को भी, जो उन्‍होंने मुझे जो थोड़ा बहुत सुना है उसके लिए मैं उन्‍हें हृदय से धन्‍यवाद करता हॅूं. मैं माननीय नेता प्रतिपक्ष जी को भी हृदय से धन्‍यवाद देता हॅूं. (मेजों की थपथपाहट).

अध्‍यक्ष महोदय -- राज्‍यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्‍ताव में मेरे पास माननीय सदस्‍यों के संशोधनों की 1840 सूचनाएं प्राप्‍त हुई हैं. उनमें से जो संशोधन नियमानुसार नहीं थे, उन्‍हें अग्राह्य किया गया है.

संशोधन बहुत विस्‍तृत स्‍वरूप के हैं, इसलिए पूरे संशोधनों को न पढ़कर केवल उनके प्रस्‍तावकों के नाम और संशोधन क्रमांक ही पढॅूंगा. जो माननीय सदस्‍य सदन में उपस्थित होंगे उनके संशोधन प्रस्‍तुत हुए माने जायेंगे.

सदस्‍य का नाम संशोधन क्रमांक

डॉ. गोविन्‍द सिंह 1

श्री आरिफ अकील 2

श्री सचिन यादव 3

डॉ. रामकिशोर दोगने 4

श्रीमती ऊषा चौधरी 6

श्री सुखेन्‍द्र सिंह 9

श्री नीलेश अवस्‍थी 10

श्री रामनिवास रावत 11

श्री रामपाल सिंह (ब्‍यौहारी) 12

श्रीमती चंदा सुरेन्‍द्र सिंह गौर 15

श्री शैलेन्‍द्र पटेल 18

राज्‍यपाल के अभिभाषण पर श्री रामेश्‍वर शर्मा, सदस्‍य द्वारा प्रस्‍तुत प्रस्‍ताव और संशोधनों पर एक साथ चर्चा होगी.

डॉ. गोविंद सिंह(लहार) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, अभी माननीय सदस्य रामेश्वर शर्माजी द्वारा राज्यपाल महोदय को कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए वक्तव्य दिया जा रहा था उसमें ऐसा लग रहा था कि रामेश्वर शर्माजी सदन में राज्यपाल के अभिभाषण पर ना बोलकर आम सभा में अपना भाषण दे रहे हैं और उन्होंने अपने भाषण में 4 बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की योजनाओं का उल्लेख किया है और (XXX).

अध्यक्ष महोदय-- इसको कार्यवाही से निकाल दें.

डॉ. गोविंद सिंह-- अध्यक्ष महोदय, मैं यह कहना चाहता हूं कि कई बातें ऐसी आई जो कि बजट भाषण में थीं उनका भी आपने यहाँ उल्लेख कर दिया और ज्यादातर जो बातें वह बोलते रहे उसमें राज्यपाल के अभिभाषण में जो बिंदु थे, जो किताब में लिखे थे उनको हूबहू दोहरा दिया. हम चाहते थे कि शासन की दिशा और दशा बताने वाला जो राज्यपाल का अभिभाषण होता है उस पर आप विस्तार से बात करते. मैं कहना चाहता हूं कि यह आपका चौदहवीं विधान सभा का माननीय राज्यपाल महोदय का पांचवा अभिभाषण है. इस अभिभाषण में 9 बार प्रधान मंत्री योजनाओं का उल्लेख किया गया है. मैं कहना चाहता हूं कि यह भाषण मध्यप्रदेश के राज्यपाल का अभिभाषण था ना कि राष्ट्रपति महोदय का. इस अभिभाषण में 9 बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का उल्लेख हुआ है. यह भाषण तो राष्ट्रपति जी के वहाँ लोकसभा में होना चाहिए था. आपको तो मध्यप्रदेश का उल्लेख करना था. लगातार भारत सरकार का उल्लेख इस अभिभाषण में हुआ है ऐसा लग रहा है कि यह भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत माननीय राष्ट्रपति महोदय का अभिभाषण है और उनका एजेंडा है. मैं इसके बाद भी कहना चाहता हूं पेज क्रमांक 52 और बिंदु क्रमांक 139 पर आपने लिखा है कि "प्रदेश कई क्षेत्रों में सबसे तेजी से आगे बढ़ता प्रदेश है."

श्री वेल सिंह भूरिया-- (XXX)

डॉ. गोविंद सिंह-- (XXX), जो ट्रेनिंग मिली है.

अध्यक्ष महोदय-- इसको निकाल दें.

श्री रामेश्वर शर्मा-- ग्वालियर के बेल्ट में माहौल ठीक नहीं है आप अजय भैया को छोड़कर कहीं और जा रहे हैं.

डॉ. गोविंद सिंह-- हम कहीं भी जाये उससे क्या लेना-देना है. हम रोजाना आते-जाते हैं. इधर भी जाते हैं उधर भी जाते हैं. जहाँ मर्जी होगी वहाँ जाएंगे. स्वतंत्र भारत में हम लोग रह रहे हैं. माननीय अध्यक्ष महोदय, पेज क्रमांक 52 में आपने उल्लेख किया है कि प्रदेश आज सबसे आगे हैं. मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि आप किस-किस बात में आगे हो? मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा घोटाले हुए हैं आप घोटालों में आप नंबर एक पर हो, यह आप आगे बढ़ते हुए प्रदेश में जा रहे हो? एनसीआरबी की रिपोर्ट में महिला और बच्चियों के अत्याचारों में आपने प्रथम स्थान प्राप्त किया है. आपकी सरकार ने इतना कर्जा ले डाला है कि अब भारत सरकार ने भी आपको प्रतिबंधित किया है कि आप 15 हजार करोड़ से ज्यादा कर्जा नहीं ले सकते हैं. जब 2003 में दिग्विजय सिंह जी की सरकार गई थी उस समय मध्यप्रदेश में 20 हजार 147 करोड़ रुपयों का कर्जा था और आज आप मध्यप्रदेश में पौने 2 लाख करोड़ रुपयों से भी ज्यादा कर्जा ले चुके हो, पूरा प्रदेश कर्ज के गर्त में डुबो चुके हो. इसके अलावा भ्रष्टाचार में भी आप आगे हैं. किसानों की आत्महत्या के मामले में आप प्रथम स्थान प्राप्त करने की ओर बढ़ रहे हैं, बेरोजगार नौजवानों की आत्महत्याओं में आप महाराष्ट्र के बाद दूसरे नंबर पर हैं.

माननीय अध्यक्ष महोदय,आप क्या इन बातों पर भी रोक लगाएंगे, इन बातों का भी आपको महामहिम राज्यपाल महोदय के अभिभाषण में उल्लेख करना था. रामेश्वर जी ने बड़े जोर-शोर से लाड़ली लक्ष्मी योजना का जिक्र किया. लाड़ली लक्ष्मी योजना में आपकी सरकार ने बच्चियों को धोखा देकर ठगा है और आज आप गाँवों में जाएं तो पता चल जाएगा कि वह बच्चियाँ क्या कह रही हैं? वह कह रही हैं कि हमें इस मामा से बचाइए, जिसने हमसे वादा करके वादाखिलाफी की है. अध्यक्ष महोदय, मैं आपके सामने उदाहरण रख रहा हूं कि मध्यप्रदेश में लाड़ली लक्ष्मी योजना में यह तय किया था और यह घोषणा की थी कि जब बच्ची 21 साल की हो जाएगी तो उसको सरकार 1 लाख 18 हजार रुपये देगी.बच्ची के कक्षा-6 में प्रवेश में समय 2 हजार, कक्षा-9 में प्रवेश के समय 4 हजार, कक्षा 11 के प्रवेश के समय 6 हजार और 12 वीं कक्षा में प्रवेश के समय 6 हजार रुपए. कुल मिलाकर 1.18 लाख रुपए आप शादी के समय देंगे. मैं आपसे यह पूछना चाहता हूँ कि जब आपने यह घोषणा की, 27 लाख बच्चियों का आपने उल्लेख किया. रामेश्वर जी यह जान लें कि सरकार ने उन्हें देकर छीनने का काम किया है. सरकार ने जो नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट पोस्ट आफिस के द्वारा दिए थे. मध्यप्रदेश सरकार ने वह सभी बच्चियों के पालकों से वापस ले लिए हैं. इसका पैसा जो कि 3 हजार करोड़ से अधिक है इसे आपने वेतन-भत्ते पर और हवाई यात्रा में उड़ाने का काम किया है.

अध्यक्ष महोदय, यदि आप अनुमति दें तो मेरे पास इसके प्रमाण हैं मैं प्रस्तुत कर सकता हूँ. लाड़ली लक्ष्मी योजना, महिला एवं बाल विकास विभाग, मध्यप्रदेश शासन. इसमें लिखा है "मैं वचन देता हूँ कि", वचन कौन दे रहा है प्रत्येक जिले का परियोजना एवं एकीकृत बाल विकास अधिकारी. एनएससी का पैसा आपने निकाल लिया है, सर्टिफिकेट वापिस ले लिए हैं. अब आपने लिखित में एक प्रमाण-पत्र दे दिया है वह भी जिला परियोजना अधिकारी के द्वारा, उसमें कई शर्तें जो पहले नहीं थीं वह आपने जोड़ दी हैं. उसमें आपने जोड़ दिया है कि लड़की जब 12 वीं पास करेगी तब ही मिलेगा पहले इसका उल्लेख कहीं नहीं था. हाई स्कूल से कम पर अलग से सहायता देने का कहा गया था. अब आपने बच्चियों के साथ धोखाधड़ी करके लिख दिया है कि 18 वर्ष पूर्व विवाह न करने और 21 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर 1 लाख रुपए का वचन देता है. वचन कौन देता है परियोजना अधिकारी देता है. जो पैसा था वह आपने वापिस ले लिया और परियोजना अधिकारी जिसने वचन दिया है वह उस समय रिटायर हो जाएगा उस समय खजाना खाली होगा. उस समय जो सरकार में होगा, उस समय न आपके पास बजट होगा, न प्रावधान होगा. आप यह नकली प्रमाण-पत्र देकर बच्चियों और उनके पालकों को धोखा नहीं दे रहे हैं. अगर ऐसा नहीं है तो माननीय मंत्री जी और माननीय मुख्यमंत्री जी जब भी बोलें इसे स्पष्ट करें कि आपने बच्चियों के साथ धोखा क्यों किया है. एनएससी वापिस लेकर केवल एक प्रमाण-पत्र दे दिया है कि 21 साल के बाद ले लेना. उसमें तमाम शर्तें जोड़ दीं जिससे कि वे ले ही न पाएं. आप देंगे कहां से ? "घर में नहीं है दाने अम्मा चली भुनाने". खजाना खाली होगा तो आप कहां से दे देंगे. 21 साल बाद परियोजना अधिकारी को ढूंढने जाएंगे. कौन मुकदमा लगाएगा.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह)--माननीय अध्यक्ष महोदय, राज्यपाल महोदय के अभिभाषण पर चर्चा चल रही है. रामेश्वर शर्मा जी के बाद कांग्रेस के प्रथम वक्ता बोल रहे हैं. सरकार में कितनी जवाबदेही है आप उधर देख लें (अधिकारी दीर्घा की तरफ इशारा करते हुए) एक भी प्रमुख सचिव नहीं है. विधान सभा की कार्यवाही का स्तर कितना गिर रहा है. मंत्रिमंडल के सदस्य कुछ व्यवस्था कर दें. संसदीय मंत्री तो सदन में उपस्थित रहते ही नहीं हैं.

श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्यक्ष महोदय, कोई व्यवस्था दे दें. (बैठे-बैठे कहा गया)

अध्यक्ष महोदय--माननीय मंत्रीगण बैठे हैं. वरिष्ठम् मंत्री बैठे हैं.

श्री आरिफ अकील--अध्यक्ष महोदय, अधिकारी भी तो होना चाहिए.

अध्यक्ष महोदय--डॉ. गोविन्द सिंह जी अपना भाषण जारी रखें.

डॉ. गोविन्द सिंह-- अध्यक्ष महोदय, इसी प्रकार पिछले साल 12 फरवरी, 2017 को माननीय राज्यपाल महोदय के चतुर्थ अभिभाषण में बिंदु क्रमांक 116 पर सामाजिक सुरक्षा पेंशन 150 रुपए से बढ़ाकर 300 रुपए प्रतिमाह देने का उल्लेख था. पिछले वर्ष जब माननीय वित्त मंत्री जी ने भी बजट भाषण दिया उसमें बिंदु क्रमांक 176 पर स्पष्ट उल्लेख किया है कि जो महिलाएं विधवा हैं और अगर शासकीय सेवा में नहीं हैं, सेवारत नहीं हैं और पेंशन नहीं ले रहीं उन विधवा महिलाओं को चाहे वह किसी भी जाति की हों, चाहे उनके लिए गरीबी रेखा का उल्‍लेख हो या न हो हम सबको पेंशन देंगे और 1501 करोड़ रुपए का प्रावधान भी किया था परंतु मैं पूछना चाहता हूं कि उसी बात का उल्‍लेख इस बार दोबारा किया गया. एक वर्ष में जो 1501 करोड़ रुपए का बजट आपने रखा था वह बजट आपने कहां व्‍यय किया, कहां ले गए. वह आदेश इसी पवित्र सदन में किया गया था. माननीय राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण का आपने अपमान किया और उसका उल्‍लंघन करती हुई वही बातें आपने दोबारा लिखने का काम किया है. मैं आपसे कहना चाहता हूं कि जो आप सदन में वायदा करते हैं, जनता को आश्‍वासन देते हैं उसको पूरा करना चाहिए. नर्मदा संरक्षण, नर्मदा हमारी जीवनदायिनी नदी है उसके संरक्षण के लिए सरकार बहुत ज्‍यादा चिंतित है, संकल्पित है. लगातार करोड़ों रुपए नमामि देवी नर्मदा यात्रा के नाम पर खर्च कर दिया है. मैं कहना चाहता हूं कि नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए आपने अभिभाषण में पृष्‍ठ संख्‍या 2 पर बिंदु क्रमाक 4 में नर्मदा नदी के संरक्षण की बातें लिखी हैं. नर्मदा नदी को जनआंदोलन बनाएंगे. जनआंदोलन बनाने के लिए जगह-जगह विज्ञापन, टी.वी. पर विज्ञापन, स्‍वच्‍छता अभियान का जो पैसा था उसको निकालकर आपने स्‍वच्‍छता के नाम पर नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए रखा था कि 6 करोड़ पेड़ पौधे लगाएंगे. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं चार दिन अलग- अलग समय पर यात्रा कर चुका हूं. अध्‍यक्ष महोदय, आपके होशंगाबाद जिले से ही यात्रा में गया था जहां हम गए वहां पर मैंने देखा नर्मदा नदी को पूरा खोखला किया गया है. रात में जब मैं वापस आया तो पूरी रात भर ट्रक 10-10 बड़े-बड़े हाइवा ओवरलोड भरे हुए लगातार 8-8, 10-10 किलोमीटर पर हर जगह मिले. इन वाहनों से आने जाने में भी दिक्‍कत होती है. इस प्रकार नर्मदा नदी का पूरा दोहन करके, पूरा शोषण करके अपनी गरीबी दूर राजनेताओं और अन्‍य अधिकारी कर्मचारी जो लोग हैं हम नहीं कहते कि किस दल के हैं लेकिन सभी हो सकते हैं. अपनी जुगाड़-तुगाड़ लगाकर ठेके लेते हों, काम करते हों उन लोगों ने खोखला कर दिया. जब मैं दोबारा नर्मदा यात्रा में गया वह माननीय दिग्‍विजय सिंह जी की नर्मदा यात्रा थी. आपकी यात्रा उड़न खटोला से थी. साढ़े तीन हजार किलो मीटर की यात्रा 144 दिन में पूरी कर दी. कुछ लोगों को पैदल चलाया बाकी उड़न खटोला में उड़कर पूरी साढ़े तीन हजार किलोमीटर की यात्रा पूरी कर ली. आपकी यात्रा 144 दिन में पूरी हो गई और माननीय दिग्‍विजय सिंह जी की यात्रा को 6 महीने हो रहे हैं.

लोक निर्माण मंत्री (श्री रामपाल सिंह) -- आपने नर्मदा जी में स्‍नान नहीं किया.

डॉ. गोविन्‍द सिंह-- आप कहां देख रहे थे. कमल पटेल जी ने हम लोगों का स्‍वागत किया था आप उनसे पूछ लीजिए उन्‍हें पता है हमने स्‍नान किया था कि नहीं किया. आप तो थे नहीं. देवास जिले में फतेहपुर गांव है. फतेहपुर के पास मंदिर बना हुआ है. काफी ऊंचाई पर मंदिर है. नीचे कुछ नहीं है. जमीन के किनारे नर्मदा नदी आ रही है. इधर से एक दूसरी छोटी सी नदी है उसका मिलन हो रहा है. क्‍योंकि नर्मदा यात्रा पवित्र यात्रा है उसको क्रॉस नहीं कर सकते इसीलिए बगल की जो नदी है उससे निकलना था वहां के जनपद अध्‍यक्ष यादव जी हैं उन्‍होंने करीब करीब 60 नाव लगा दीं. बड़ी-बड़ी नाव थीं. उसमें पन‍डु‍ब्‍बी मशीन लगी हुई थी. मैंने कहा यह करीब 100 से 150 नाव कहां से आईं तो वह बोले यह नर्मदा नदी के अंदर जो मोटर लगी है वह पानी के अंदर से रेत खींचती है और अभी हमारी यात्रा की वजह से यह खाली करके खड़ी कर दी हैं और उनके द्वारा पुल बनाकर हम लोग निकले हैं और वहां पर 186 नाव फतेहपुर गांव के पास जहां पर नर्मदा नदी का मिलन होता है छोटी नदी जाती है वहां पर मिलती हैं. मैं पूछना चाहता हूं कि जब 186 मशीन एक स्‍थान पर लेक‍र रेत निकालती हैं और नर्मदा नदी के पेट से चीरकर मोटर के द्वारा पानी की पनडुब्‍बी रेत निकालती हैं वह आपने नहीं देखा है. क्‍या यही नर्मदा यात्रा है ? 6 करोड़ पेड़ लगाए. मैं कहना चाहता हूं आप चलो.

अध्‍यक्ष महोदय-- माननीय सदस्‍य का वक्‍तव्‍य जारी रहेगा. सदन की कार्यवाही अपराह्न 3.00 बजे तक के लिए स्‍थगित.

 

 

 

 

 

 

(1.31 बजे से 3.00 बजे तक अंतराल)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

03.13 बजे

{उपाध्‍यक्ष महोदय (डॉ.राजेन्‍द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुए}

डॉ.गोविन्‍द सिंह (लहार)- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, नर्मदा यात्रा के बारे में चर्चा चल रही थी. मैं कहना चाहता हूं कि यात्रा में करीब 4-5 दिन हमारे साथ आप भी थे.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र- आप कब से नर्मदा यात्रा कर रहे हैं ?

श्री के.पी.सिंह- गोविंद सिंह जी, चार बार नर्मदा यात्रा कर चुके हैं.

डॉ.गोविन्‍द सिंह- यात्रा में हमारे साथ उपाध्‍यक्ष जी भी थे. हम दोनों पैदल ही चले लेकिन कहीं भी हमें 6 करोड़ नए लगे हुए पेड़ नहीं दिखाई दिए.

श्री के.पी.सिंह- डॉ.साहब ने सभी जगहों पर पैदल चल-चलकर देखा है कि पेड़ कहां-कहां लगे हुए हैं ?

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र- डॉ.साहब, माननीय दिग्विजय सिंह जी जैसी नर्मदा परिक्रमा यात्रा कब कर रहे हैं ? मैं उसके बारे में पूछ रहा हूं.

श्री के.पी.सिंह- ऐेसी परिक्रमा यात्रा आप ही करेंगे.

डॉ.गोविन्‍द सिंह- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अलग-अलग दिनों में मैं करीब 58 किलोमीटर पैदल चला हूं. कहीं भी एक नया पेड़ नजर नहीं आया. आपने लाखों-करोड़ों रूपये खर्च करके 6 करोड़ पेड़ लगाये हैं और कहीं कोई पेड़ नहीं दिख रहा है तो इसकी जांच करवानी चाहिए कि बीच में कौन ले गया, कौन खा गया ? यह हमारा सुझाव है कि यदि भ्रष्‍टाचार हुआ है तो उस पर रोक लगानी चाहिए.

उपाध्‍यक्ष महोदय, इसके अतिरिक्‍त मैं यह भी कहना चाहता हूं कि ''नेमावर'' में नर्मदा नदी की नाभि है. वहां नर्मदा का पानी अथाह है.

श्री के.पी.सिंह- डॉ.साहब ने पूरा नर्मदा पुराण पढ़ा है और उसके बाद नर्मदा यात्रा पर गए थे.

डॉ.गोविन्‍द सिंह- मैंने कुछ नहीं पढ़ा है. (हँसी)

डॉ.नरोत्‍तम मिश्र:- आप डॉक्‍टर साहब को ही पढ़ लो तो ही तर जाओगे.

उपाध्‍यक्ष महोदय:- वैसे चम्‍बल के लोग सच बोला करते हैं.

डॉ.नरोत्‍तम मिश्र:- तो क्‍या के.पी. सिंह जी चम्‍बल के नहीं हैं ? ये तो असत्‍य ही बोल रहे हैं, डॉक्‍टर साहब ने ही बोल दिया है.

श्री के.पी.सिंह :- हम लोग सिंध वाले हैं.

डॉ. गोविन्‍द सिंह:- हम तो सिंध बचाने में लगे हैं.इसलिये मैं कह रहा हूं कि आप इसको भी देखें. वहां पर हमेशा नर्मदा नदी में 20-25 फीट नीचे पानी रहता था, वहां पर आज रेत निकल आयी है और ऐसा लग रहा है कि वहां पर नर्मदा नदी मई-जून के महीने में सूख जायेगी, इसलिये यदि सरकार ने नर्मदा नदी के संरक्षण की बात की है और वाहवाही लूटने में लाखों- करोड़ों रूपये खर्च किये हैं. वोटरों को रिझाने में और माननीय नरेन्‍द्र मोदी जी को बुलाकर, करोड़ों रूपये जो स्‍वच्‍छता अभियान का था, एक-एक महिला और पुरूष को सभा में शामिल कराने के लिये पांच-पांच सौ रूपये देकर, स्‍वच्‍छता अभियान के पैसों से देकर जो भ्रष्‍टाचार किया है, यह सब आपने पाप किया है. आपको प्रदेश की जनता और नर्मदा नदी आपको नहीं बख्‍शेगी.

उपाध्‍यक्ष महोदय, इसके साथ ही मैं आपसे यह भी कहना चाहता हूं कि रोजगार देने का वायदा आपके घोषणा पत्र में भी था और वर्ष 2017-18 की जो आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट आयी है, उसके पेज नंबर-258 में भी रोजगार देने का वायदा किया था. मैं कहना चाहता हूं कि मध्‍यप्रदेश में पिछले 2016 तक की स्थिति में 11 लाख, 22 हजार बेरोजगार नौजवानों ने रोजगार के लिये पंजीयन कराया था, उनमें से केवल 2 वर्ष में 2018 तक 422 लोगों को रोजगार मिला. प्रदेश में बेरोजगारी बढ़ रही है और शासकीय अधिकारियों/कर्मचारियों की संख्‍या भी लगातार घट रही है. आज तमाम पद खाली पड़े हैं. आज मध्‍यप्रदेश में 2.33 प्रतिशत कर्मचारियों की संख्‍या है, उसमें कमी आयी है. बिना रोजगार के नौजवान बेरोजगार रहेगा तो वह कहां जायेगा, क्‍या करेगा. आप प्रतिवर्ष रोजगार के लिये विज्ञापन निकालते हों, पटवारियों की भर्ती के लिये विज्ञापन निकालते हों और फीस भी ले लेते हों. इसमें हमारा सरकार से कहना है कि बेरोजगारों से फीस नहीं लेना चाहिये क्‍योंकि जो पढ़े-लिखे लड़के हैं, वह बेरोजगार हैं, वह कहां से पैसे लायेंगे, इसलिये जो कांग्रेस की सरकार में नीति थी कि वह सादे पेपर में आवेदन दें बिना फीस के, उसी को आवेदन मान लिया जाता था. उस पर सरकार विचार करे, चिंतन करे.

मैं आपसे कहना चाहता हूं कि पशुधन के बारे में सरकार ने कहा है कि प्रदेश में दूध उत्‍पादन बढ़ा है, लेकिन मैं पूछना चाहता हूं कि दूध का उत्‍पादन बढ़ेगा कैसे ? माननीय राज्‍यपाल महोदया के अभिभाषण के पेज-8 के बिन्‍दु क्रमांक 21 में आपका ध्‍यान आकर्षित कर रहा हूं कि पशुपालन के संरक्षण के संबंध में आपने बड़े-बड़े दावे किये हैं, जिसको हमने देखा. 27 फरवरी, 2018 को जो आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्‍तुत किया है, उसमें पेज क्रमांक -23 पर लिखा है कि सरकार की पोल खुल रही है. आपने 2007 में मध्‍यप्रदेश में पशुओं की संख्‍या, जो पशुधन है, वह 4 करोड़, 7 लाख था, जो 2012 में घटकर 3.66 करोड़ पशु ही रह गये हैं. आखिर यह बीच के पशु कहां गये ? इससे स्थिति स्‍पष्‍ट होती है कि 2012 में मध्‍यप्रदेश में जहां 40 हजार मीट्रिक टन मांस का व्‍यापार मध्‍यप्रदेश सरकार करती थी, वह 2012 में बढ़कर 79 हजार मीट्रिक टन हो गया, मतलब डबल हो गया.परंतु दूध उत्‍पादन की मात्रा केवल 25-30 प्रतिशत ही बढ़ी है. परंतु मांस का व्‍यापार 100 प्रतिशत बढ़ गया. यह पशुधन लगातार जा कहां रहा है ? इसीलिये पशुधन का लगातार दुरूपयोग हो रहा है या कमी आ रही है या पशुधन कट-कट कर बाहर भेजने का काम हो रहा है और मध्‍यप्रदेश के पशुधन में कटौती आ रही है.

उपाध्‍यक्ष महोदय, राज्‍यपाल महोदय का जब प्रथम भाषण हुआ था, उसमें भ्रष्‍टाचार के विरुद्ध लिखा था. बिन्‍दु क्रमांक 6 पर उल्‍लेख किया था कि भ्रष्‍टाचार जीरो टॉलरेंस पर रहेगा यह सरकार की नीति है. इस नीति का सरकार कठोरता से पालन करेगी परन्‍तु मैं कहना चाहता हूँ कि अगर सरकार की यह नीति थी तो करीब 15 वर्षों से माननीय एन.के.जैन, न्‍यायाधीश ने इन्‍दौर में जो गरीबों को, महिलाओं को, निराश्रितों को पेंशन मिली थी. उस पेंशन का घोटाला बड़े भारी पैमाने पर हुआ था, करोड़ों रुपये का हुआ था एवं रिपोर्ट में भी माननीय न्‍यायाधीश ने अपनी इस बात में भ्रष्‍टाचार का उल्‍लेख किया है. लेकिन लगातार 15 वर्षों के बाद मंत्रिमण्‍डल की समिति बनी, समिति ने क्‍या कार्यवाही की, वह आज तक पटल पर नहीं रखी गई है और अपराधी कौन है ? उसको सामने लाने में क्‍या दिक्‍कत है ? आज तक उसको सामने लाने पर आपने कोई विचार नहीं किया और न ही लाये. यह आपके भ्रष्‍टाचार की जीरो टॉलरेंस की नीति, इच्‍छा एवं नीयत बताती है.

उपाध्‍यक्ष महोदय, अब पोषण आहार आता है. पोषण आहार लगातार पिछले 5-7 वर्षों से इसी सदन में, डेट तो मुझे याद नहीं है, माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने घोषणा की थी कि स्‍व-सहायता समूहों को नहीं देंगे क्‍योंकि उसमें भ्रष्‍टाचार है परन्‍तु उसके दो वर्षों के बाद उसमें छापा पड़ा. जो लोग लगातार व्‍यापार कर रहे हैं, पोषण आहार के नाम पर 1,200 - 1,300 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष लूट कर खा रहे हैं. भ्रष्‍टाचार कर रहे हैं, उनके यहां छापे में सोने की ईंटें पकड़ी गईं लेकिन उनके खिलाफ क्‍या कार्यवाही हुई ? और लगातार वही नीति जारी रही. माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने समीक्षा बैठक जो विभाग की की थी, दिनांक 14/09/2016 को ली थी, उसमें कहा था कि पोषण आहार की नीति पर, भ्रष्‍टाचार पर या जो भी सच्‍चाई सामने रखेंगे, उस पर श्‍वेत पत्र जारी करेंगे और मंत्रिमण्‍डल की समिति भी गठित की थी परन्‍तु मैं शिवराज सिंह जी, माननीय मुख्‍यमंत्री जी से पूछना चाहता हूँ कि आपकी समिति का क्‍या हुआ ? आखिर अधिकारियों के दबाव में सरकार क्‍यों काम कर रही है ? अगर सरकार दबाव में काम कर रही है तो इसका प्रमाण है कि कहीं न कहीं सरकार में बैठे लोग भी अधिकारियों के साथ भ्रष्‍टाचार में लिप्‍त हैं.

उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं कुपोषण की जहां तक बात कर रहा हूँ, अक्‍टूबर, 2017 से जनवरी, 2018 तक केवल 123 दिन में मध्‍यप्रदेश में 11,000 से अधिक कुपोषित बच्‍चों की मृत्‍यु हो गई है एवं प्रतिदिन 90 बच्‍चों की मृत्‍यु हुई है. मध्‍यप्रदेश में डेढ़ लाख से 10 लाख तक बच्‍चे अभी भी कुपोषण के शिकार हैं, इनमें से डेढ़ लाख बच्‍चों की हालत बड़ी नाजुक है एवं अभी माननीय नेता प्रतिपक्ष जी नí