मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

                 __________________________________________________________

 

चतुर्दश विधान सभा                                                                                                त्रयोदश सत्र

 

 

फरवरी-मई, 2017 सत्र

 

मंगलवार, दिनांक 7 मार्च , 2017

 

( 16 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1938 )

 

 

[खण्ड-  13  ]                                                                                        [अंक- 10 ]

 

      __________________________________________________________

 

 

 

 

 

 

 

 

 

मध्यप्रदेश विधान सभा

मंगलवार, दिनांक 7 मार्च, 2017

( 16 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1938 )

विधान सभा पूर्वाह्न 11.01  बजे समवेत हुई.

{ अध्यक्ष महोदय (डॉ. सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

  मुख्य कार्यपालन अधिकारी की स्थाई पदस्थापना 

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

1. ( *क्र. 1423 ) श्री हरवंश राठौर : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या बंडा विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत जनपद पंचायत बंडा में विगत एक वर्ष से स्थाई मुख्य कार्यपालन अधिकारी की पदस्थापना न होने से प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा सप्ताह में एक दो दिवस का समय देकर कार्यों का संपादन किया जा रहा है, जिससे संबंधित प्रभारी अधिकारी द्वारा दो-दो जगहों का कार्य संपादन करने के पश्चात् जनपद पंचायत बंडा का कार्य संपादित किया जाता है, जिसके कारण समस्त जनपद पंचायत के प्रतिनिधि एवं सरपंचों के कार्य समयावधि में न होने एवं अधिकारी के न मिलने के कारण त्रस्त हैं? (ख) क्या जिला स्तर के अधिकारी को स्वयं के प्रभार के साथ-साथ दो-दो जनपदों का प्रभारी बनाया जा सकता है? प्रावधान बताया जाए। (ग) जनपद पंचायत बंडा में स्थाई मुख्य कार्यपालन अधिकारी की पदस्थापना कब तक की जावेगी?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जनपद पंचायत बंडा में मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी की पूर्णकालिक पदस्‍थापना दिनांक 15/12/2016 को की गई थी। मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत के दिनांक 09/01/2017 से निलंबित होने से जिला स्‍तर के अधिकारी को प्रभार सौंपा गया है। (ख) जी हाँ। जिला स्‍तर के अधिकारियों को स्‍वयं के प्रभार के साथ जनपद पंचायतों का प्रभारी बनाये जाने पर निषेध नहीं है। (ग) लोक सेवा आयोग से चयनित मुख्‍य कार्यपालन अधिकारियों के प्रशिक्षण उपरांत मार्च 2017 में पदस्‍थापना की जाना संभावित है।

            श्री हरवंश राठौर :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न था कि जनपद पंचायत बंडा में स्‍थायी मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी की स्‍थापना कब तक की जायेगी. मुझे उत्‍तर मिल गया है कि यहां पर स्‍थायी जनपद मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी की पदस्‍थापना हो चुकी है. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी को धन्‍यवाद करता हूं.

प्रस्तावित स्टेडियम का निर्माण

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

2. ( *क्र. 2411 ) श्री कुँवरजी कोठार : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                 (क) विधानसभा क्षेत्र सारंगपुर अंतर्गत ग्राम बख्यतायपुरा में निर्माणाधीन खेल परिसर के अंतर्गत       क्या-क्या कार्य होना है एवं निर्धारित समय-सीमा तक क्या-क्या कार्य हो चुका है? कार्य के प्राक्कलन से तुलनात्‍मक जानकारी उपलब्‍ध करावें (ख) खेल परिसर के निर्माण कार्य को प्रारम्भ करने एवं पूर्ण करने हेतु निर्धारित तिथि क्या है? क्या निर्धारित तिथि में कार्य पूर्ण हो गया है? यदि नहीं हुआ तो विलंब हेतु कौन जिम्मेदार है? विलंब के लिये ठेकेदार के विरुद्ध क्या कार्यावाही की गयी एवं कार्य कब तक पूर्ण हो जावेगा? (ग) निर्माणाधीन कार्य की गुणवत्ता की जाँच किस-किस अधिकारी द्वारा किस-किस दिनांक को की गयी है? अधिकारी का नाम एवं पद सहित जानकारी देवें बतावें की कार्य पूर्ण गुणवत्ता का किया गया है या नहीं? यदि नहीं, तो ठेकेदार के विरुद्ध क्या-क्या कार्यवाही की गयी?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) विधानसभा क्षेत्र सारंगपुर अंतर्गत ग्राम बख्यतायपुरा में निर्माणाधीन खेल परिसर के अंतर्गत पवेलियन, खेल मैदान, बाउन्‍ड्रीवॉल एवं गेट निर्माण का कार्य प्राक्‍कलन अनुसार निर्धारित समयावधि में कराया गया है। (ख) कार्य दिनांक 30/04/2016 को प्रारंभ किया गया। कार्य अनुबंधानुसार पूर्ण कराने की निर्धारित तिथि 29/04/2017 है, कार्य समय-सीमा में पूर्ण हो गया है। शेष प्रश्‍न उत्‍पन्‍न नहीं होता। (ग) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। शेष प्रश्‍न उत्‍पन्‍न नहीं होता।

परिशिष्ट - ''एक''

 

          श्री कुँवरजी कोठार :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न '''' में विभाग द्वारा जो जानकारी दी गयी है, वह अपूर्ण है. मैंने अपने प्रश्‍न में प्राक्‍कलन में दिये गये कार्य के विरूद्ध कराये गये कार्य की तुलनात्‍मक जानकारी चाही गयी थी, जिसमें विभाग द्वारा दिये गये उत्‍तर में खेल परिसर के अंतर्गत पवेलियन, खेल मैदान, बाऊंड्रीवाल एवं गेट का निर्माण कार्य प्राक्‍कलन अनुसार निर्धारित समयावधि में कराया गया है, यह जानकारी दी गयी है. जबकि मैंने प्रावधानित प्राक्‍कलन में प्रावधानित मात्रा और कराये गये कार्य की आर्थिक एवं भौतिक तुलनात्‍मक प्रपत्र चाहा है. माननीय मंत्री जी मुझे क्‍या तुलनात्‍मक जानकारी देंगे ?

            श्री गोपाल भार्गव :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा माननीय सदस्‍य ने जानना चाहा है, अधिकांश काम पूरा हो चुका है. 29.4.2017 तक सी.सी जारी हो जायेगी. कम्‍प्‍लीशन रिपोर्ट उसकी आ गयी है. समय-समय पर निरीक्षण भी हुआ है. काम गुणवत्‍ता का है चार बार एक्‍जीक्‍यूटिव इंजीनियर अहिरवार ने निरीक्षण किया है.90 प्रतिशत कार्य पूरा हो गया है.

          श्री कुँवरजी कोठार :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह जो हमारी सरकार ने खिलाडि़यों के उत्‍थान के लिये यह एक अच्‍छी योजना चलायी है, जिससे प्रत्‍येक ग्रामवासियों के लिये खेल मैदान उपलब्‍ध कराया गया है, लेकिन माननीय मंत्री जी कह रहे हैं कि कार्यपालन यंत्री से चार बार इसकी जांच करा ली गयी है और कार्य संतोषजनक पाया गया है, लेकिन मेरे द्वारा स्‍थल पर पाया गया है कि जो कार्य मैदान समतलीकरण के लिये कराया जाना था, उसको सेंड से भरना था और रिवर बांड मटेरियल का उपयोग किया जाना था, लेकिन भौतिक रूप से देखा कि उसमें जो डब्‍ल्‍यू.बी.एम सड़क बनाते हैं तो जो ओवर साईज के मेटल उपयोग करते हैं, वह शार्ट मेटल से, हार्ड पत्‍थर से मैदान का समतलीकरण किया गया है तो यह जो कार्यपालन यंत्री जी संतोषजनक गुणवत्‍ता बता रहे हैं तो क्‍या उसकी जांच मुख्‍य तकनीकी परीक्षक से करायेंगे ?

            श्री गोपाल भार्गव :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह ग्रामीण विकास विभाग की बहुत महत्‍वपूर्ण योजना थी, जिसमें हर विधानसभा क्षेत्र में एक ग्रामीण खेल परिषद बनाने का निर्णय हम लोगों ने किया था, जिसकी लागत 80 लाख रूपये थी. जहां-जहां भूमि उपलब्‍ध हो सकी वहां पर हमने काम शुरू कराया. कार्य पूर्ण भी हो चुके हैं और कार्य पूर्णता की ओर हैं. जहां तक ग्राउंड की लेबलिंग का सवाल है, तो यह तकनीकी विषय है. यह काम हमें खेल विभाग के सहयोग से और खेल विभाग के जो तकनीकी अधिकारी और विशेषज्ञ हैं उनके साथ में पूरा करना है. स्‍टेडियम के डिजाईन में जो कुछ कमी रहीं थीं, जैसे कल भी जब मैंने समीक्षा की थी तो मैंने देखा था कि  ग्राउंड में दो-तीन तरफ बैठने के लिये कोई दर्शक दीर्घा बनाने का प्रावधान नहीं था. इसलिए मैंने अपने अधिकारियों से भी कहा है कि उसको भी इसमें जोड़ लें और जो भी कमियां इसमें होंगी उनको भी हम सप्‍लीमेंट्री कुछ बजट उपलब्‍ध कराकर पूरा करायेंगे. माननीय सदस्‍य को अवगत कराना चाहता हूं कि  एक आईडियल खेल स्‍टेडियम ग्रामीण क्षेत्रों के लिये उपलब्‍ध कराया जायेगा.

          श्री कॅुंवरजी कोठार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न जो कार्य कराया गया है, उसकी गुणवत्‍ता से संबंधित है. क्‍या माननीय मंत्री महोदय उस काम की गुणवत्‍ता की जांच मुख्‍य तकनीकी परीक्षक से करायेंगे ?

          श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कार्यपालन यंत्री श्री एस.पी.अहिरवार हैं, इन्‍होंने दिनांक- 09/08/2016 , 27/09/2016, 05/02/2016 एवं 23/12/2016 को लगातार निरीक्षण किया है. कार्य की गुणवत्‍ता सही है और ऐसा बताया गया है कि ग्राउंड में ड्रेनेज ठीक करने के लिये दानेदार मिट्टी का उपयोग किया गया है, इसलिए शायद दानेदार मिट्टी के कारण यह लग रहा होगा कि ग्राउंड का फर्श ठीक नहीं है. हम उसको ठीक करा लेंगे, इसमें कोई बहुत बड़े तकनीकी विशेषज्ञ की आवश्‍यकता नहीं है.

          श्री कॅुंवरजी कोठार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दानेदार मिट्टी और पत्‍थर में बहुत अंतर है.

          अध्‍यक्ष महोदय - आपका पूरा प्रश्‍न आ गया है, अब कुछ नहीं आयेगा. प्रश्‍न क्रं.-03 श्री कुंवर सिंह टेकाम.

          श्री कॅुंवरजी कोठार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री यह गारंटी ले लें कि उससे कोई खिलाड़ी चोटिल नहीं होगा, यह जवाबदारी माननीय मुख्‍यमंत्री जी ले लें. मैंने खुद उस ग्राउंड को देखा है और मैं समझता है कि दानेदार मिट्टी और पत्‍थर में क्‍या अंतर होता है.

          अध्‍यक्ष महोदय - बस अब आप बैठ जाईये. मैंने आपको तीन प्रश्‍न करने की अनुमति दी है, साधारणतया दो प्रश्‍न करने की ही अनुमति दी जाती है. प्रश्‍नकाल में अब ज्‍यादा नहीं, आप बैठ जायें.

          श्री कॅुंवरजी कोठार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लेकिन काम गुणवत्‍ता का हुआ है नहीं है तो आप कैसे मान रहे हैं कि काम गुणवत्‍ता का हुआ है.

          अध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी आपसे कह रहे हैं कि यदि उसमें कुछ कमी रह गई हो तो उसको वह ठीक करा लेंगे.

          सीधी भर्ती के प्राध्‍यापकों की परि‍वी‍क्षा अवधि की समाप्ति 

[उच्च शिक्षा]

3. ( *क्र. 2071 ) श्री कुंवर सिंह टेकाम : क्या उच्च शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि            (क) क्‍या प्रदेश में संचालित शासकीय महाविद्यालयों के लिये विभिन्‍न विषयों में वर्ष 2010-11 में मध्‍यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा प्राध्‍यापकों की सीधी भर्ती की गई है? यदि की गई है तो विषयवार/वर्गवार प्राध्‍यापकों की सूची उपलब्‍ध करावें। (ख) क्‍या वर्ष 2010-11 में सीधी भर्ती के प्राध्‍यापकों को दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर नियुक्‍त किया गया है? यदि हाँ, तो उनकी परिवीक्षा अवधि समाप्‍त करने के नियम/निर्देश क्‍या हैं? (ग) प्रश्नांश (ख) के संदर्भ में क्‍या सीधी भर्ती के प्राध्‍यापकों की परिवीक्षा अवधि समाप्‍त कर दी गई है? यदि हाँ, तो परिवीक्षा अवधि समाप्‍त किये गये विषयवार प्राध्‍यापकों की सूची उपलब्‍ध करायें? (घ) प्रश्‍नांश (ग) के संदर्भ में यदि सीधी भर्ती के प्राध्‍यापकों की परिवीक्षा अवधि अभी तक समाप्‍त नहीं की गई है तो कारण सहित जानकारी देवें। उनकी परिवीक्षा अवधि कब तक समाप्‍त कर आदेश जारी कर दिये जायेंगे?

उच्च शिक्षा मंत्री ( श्री जयभान सिंह पवैया ) : (क) जी हाँ। वर्ष 2010-11 में 115 प्राध्यापकों की सीधी भर्ती की गई। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र  '' अनुसार है। (ख) जी हाँ। मध्यप्रदेश शैक्षणिक सेवा (महाविद्यालयीन शाखा) भर्ती नियम 1990 के बिन्दु 22 की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) जी नहीं। शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता। (घ) सीधी भर्ती से नियुक्त प्राध्यापकों की नियुक्ति के संबंध में प्राप्त शिकायतों की जाँच प्रचलित है। परिवीक्षा अवधि समाप्त करने के संबंध में प्राध्यापक संघ द्वारा याचिका क्रमांक डब्ल्यू.पी. 17095/2015 माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में दायर की गई है, जिसमें पारित आदेश दिनांक 01.12.2016 के तारतम्य में वैधानिक परीक्षण किया जा रहा है। न्यायालयीन प्रकरण के परिप्रेक्ष्य में समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।  

          श्री कुंवर सिंह टेकाम - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लोक सेवा आयोग के द्वारा सहायक प्राध्‍यापक से प्राध्‍यापकों के पद पर सीधी भर्ती के द्वारा वर्ष 2010-11 और 2011-12 में 235 नियुक्ति की गई थी जिसमें से 190 के करीब शासकीय महाविद्यालयों से चुने गये थे, उनकी परिवीक्षा अवधि दो साल की होती है. छ: वर्ष हो गये हैं, लेकिन अभी तक परिवीक्षा अवधि समाप्‍त नहीं की गई हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय,माननीय मंत्री जी ने अपने जवाब में भी दिया है कि माननीय उच्‍च न्‍यायालय में यह प्रकरण विचाराधीन था और उसका निर्णय 01 दिसंबर, 2016 को आया है और उसमें समय सीमा 90 दिन के अंदर शासन से उनकी परिवीक्षा अवधि समाप्‍त करने के लिये निर्देशित किया गया था, लेकिन अभी तक उनकी परिवीक्षा अवधि को समाप्‍त नहीं किया गया है. इस कारण उनको वेतन वृद्धि का लाभ नहीं मिल रहा है. माननीय मंत्री जी ने इसमें यह भी लिखा है कि बहुत लोगों की जांच चल रही है, तो मेरा आग्रह है कि क्‍या जिनकी जांच चल रही है उनको छोड़कर, जिन लोगों की जांच नहीं चल रही है, उनकी परिवीक्षा अवधि समाप्‍त करेंगे?

          श्री जयभान सिंह पवैया - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय उच्‍च न्‍यायालय में एनुअल ग्रेड-पे को लेकर याचिका दायर की है और उस प्रकरण का निराकरण अभी तक नहीं हुआ है. इसमें जांच जिनकी चल रही है और जिनकी जांच नहीं चल रही है, दोनों ही उसमें शामिल होते हैं. क्‍योंकि शासन ने  नौ हजार एनुअल ग्रेड पे किया है और उनकी कोर्ट में मांग दस हजार ग्रेड पे करने की है, तो यह प्रकरण जब तक निराकृत नहीं होगा, तब तक किस ग्रेड पे पर उनकी परिवीक्षा अवधि समाप्‍त करके उन्‍हें नियमित किया जाये, यह प्रश्‍न उठता है. इसलिए इस प्रकरण का निराकरण जैसे ही होगा, परिवीक्षा अवधि समाप्‍त करके जो पात्र होंगे उनको नियमित करेंगे और इस बीच का उनको ऐरियस भी दे दिया जायेगा.

          श्री कुंवर सिंह टेकाम - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्राध्‍यापकों की जो पे-ग्रेड होगी, उसमें तो उनको नियमित करना है, इसलिए उसमें नौ या दस हजार की बात आती ही नहीं है. इसलिए मेरा माननीय मंत्री महोदय से निवेदन था कि आप परीक्षण करा लें और उनको लगातार जो उनकी वेतन वृद्धि का लाभ नहीं मिल पा रहा है और इसका पढ़ाई पर भी कहीं न कहीं असर पड़ता है.  मेरा माननीय मंत्री महोदय से निवेदन है कि वह यथाशीघ्र कितने दिन में परीक्ष्‍ाण कराकर उनकी परिवीक्षा अवधि समाप्‍त करेंगे ?

श्री जयभान सिंह पवैया - अध्यक्ष महोदय, इसमें मैं माननीय सदस्य से अनुरोध करना चाहूंगा कि शासन के स्तर पर परीक्षण का विषय यह नहीं है क्योंकि विज्ञापन ही 9000 रुपए ग्रेड-पे का जारी हुआ था, जिसके विरुद्ध नियुक्तियां हुई हैं और वे चाहते हैं कि 10000 रुपए ग्रेड-पे हो तो यह बड़ी मूल समस्या है कि 10000 रुपए ग्रेड-पे पर शासन जिसने विज्ञापन ही 9000 रुपए ग्रेड-पे एन्युअल ग्रेड-पे का किया था, जब तक इसका निराकरण कोर्ट में नहीं हो जाएगा. लेकिन शासन की ओर से कोई विलंब नहीं होगा. न्यायपालिका की कार्यवाही में हम अपनी ओर से जितना जल्दी हो सकता है, उसकी कोशिश कर रहे हैं.

श्री कुंवर सिंह टेकाम - अध्यक्ष महोदय, केवल इतना था कि यदि 9000 रुपए ग्रेड-पे में उनकी सीधी भर्ती की गई है तो 9000 रुपए ग्रेड-पे पर क्या परिवीक्षा अवधि की समाप्ति की घोषणा करेंगे?

श्री जयभान सिंह पवैया - अध्यक्ष महोदय, जब दूसरा पक्ष 10000 रुपए ग्रेड-पे को लेकर कोर्ट में है और हाईकोर्ट जब तक निर्णय नहीं देता है तो शासन यह निर्णय कैसे ले पाएगा?

सीधी एवं सिंगरौली जिले में अधूरे निर्माण कार्य

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

4. ( *क्र. 4184 ) श्री कमलेश्‍वर पटेल : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग अन्‍तर्गत जनपद पंचायत सिहावल, सीधी जिले में निर्माण कार्य विगत दस वर्षों से स्‍वीकृत होकर अधूरे हैं? यदि हाँ, तो इसके लिये कौन-कौन जिम्‍मेदार है? (ख) ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग अन्‍तर्गत विगत पाँच वर्षों में जनपद पंचायत सिहावल में कितने कार्य स्‍वीकृत किये गये? कितने प्रारंभ, अपूर्ण, पूर्ण एवं अप्रारंभ हैं? जनपद सिहावल अन्‍तर्गत गेरूआ कुढेरी नाला रपटा एवं पुलिया कितने वर्षों से बंद है? क्‍यों बंद हैं? कार्य पूर्ण नहीं कराने में कौन दोषी है एवं क्‍या कार्यवाही की गई है? व्‍यौहारखांड रोड व लौआरबिछरी रोड ग्राम सोनवर्षा में सामुदायिक भवन इत्‍यादि कार्यों की जानकारी देवें (ग) जनपद पंचायत सिहावल जिला सीधी में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा अन्‍तर्गत मुख्‍यमंत्री ग्रामीण सड़क खेत सड़क के कितने कार्य स्‍वीकृत किये गए उनमें से कितने प्रारंभ, अप्रारंभ, पूर्ण, अपूर्ण हैं? अप्रारंभ एवं अपूर्ण का क्‍या कारण है? उक्‍त के संबंध में क्‍या कार्यवाही की गई है? (घ) क्‍या शासन स्‍तर से ग्रामीण यांत्रिकी सेवा में नये कार्यों की स्‍वीकृति पर प्रतिबंध लगाया गया है? यदि हाँ, तो क्‍यों? प्रतिबंधित कार्य जो अधूरे हैं, क्‍या उन्‍हें पूर्ण कराया जावेगा? कार्यों के लंबित भुगतान किये जायेगें? यदि हाँ, तो कब तक?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जी हाँ। निर्माणाधीन कार्यों की अपूर्णता के कारण निजी भूमि, भूमि विवाद होना, सामग्री-मजदूरी का अनुपात असंतुलन एवं निविदा में ठेकेदारों की अरूचि है।        (ख) प्रश्‍नाधीन अवधि में जनपद पंचायत सिहावल में 06 कार्य स्‍वीकृत हुए। 02 कार्यों की प्रशासकीय स्‍वीकृति निरस्‍त। 04 कार्य अपूर्ण हैं। प्रश्‍नांश की शेष जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के अंतर्गत जनपद पंचायत सिहावल में मुख्‍यमंत्री ग्राम सड़क योजना के 07 कार्यों में से 04 कार्य एम.पी.आर.आर.डी.ए. को अंतरित किये गये। 02 कार्य भूमि उपलब्‍ध नहीं होने से निरस्‍त हुये। 01 कार्य ठेकेदारों द्वारा निविदा में भाग न लेने के कारण विभागीय तौर पर किया जा रहा है। यह कार्य पूर्णता पर है। (घ) जी नहीं। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा में भुगतान संबंधी कोई कठिनाई नहीं है। शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''दो''

 

 

श्री कमलेश्वर पटेल - अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी के द्वारा जो जवाब आया है, वह आधा अधूरा है. आपके माध्यम से माननीय मंत्री महोदय से मेरा निवेदन सिर्फ इतना है कि सरकार कहीं भी राशि खर्च करती है. 10 सालों से आधे अधूरे कार्य पड़े हुए हैं और सरकार की आधी राशि भी लग गई और कार्य पूर्ण नहीं हुए. मेरा माननीय मंत्री महोदय से यह निवेदन है, एक तो जो जवाब आया है हम उसकी बात कर रहे हैं. वे कहीं ठेकेदारों की अरुचि बता रहे हैं. अगर जब कोई भी कार्य स्वीकृत होता है, उसकी निविदा होती है तो उस समय निविदा में सारी चीजों का उल्लेख होता है, उसकी नियम शर्तें रहती हैं. यह जो जवाब विभाग की तरफ से आया है तो मेरा पहला प्रश्न तो यह है कि जो अधूरे कार्य पड़े हुए हैं, क्या वे समय-सीमा में पूरे कर लिये जाएंगे? दूसरा प्रश्न यह है कि इसके लिए कौन-कौन लोग जिम्मेदार हैं, क्यों 10 साल से ये अधूरे कार्य पड़े हुए हैं, क्या उच्च स्तरीय अधिकारी भेजकर एक महीने के अंदर जो अधूरे कार्य हैं, उसको पूर्ण कराएंगे और क्षेत्रीय विधायक को भी उसमें साथ में रखेंगे?

श्री गोपाल भार्गव - अध्यक्ष महोदय, विभिन्न कारणों से हर जगह अलग-अलग कारण हैं, जिनके कारण से ये कार्य पिछले लंबे समय से अधूरे हैं. एक तो माननीय सदस्य ने जैसा जानना चाहा था कि 5 साल तक के ऐसे कौन-से  काम हैं. इसमें एक स्टेडियम 80 लाख रुपए का बनना था, वह कार्य भी अधूरा है. बारिश के पहले वह पूरा हो जाएगा. बहुत-से काम ऐसे हैं जो भूमि विवाद के कारण यथास्थिति में बंद कर दिये गये हैं और कामों को निरस्त भी कर दिया गया है. जैसे बेहरी हनुमना रोड से परसोना, यह वर्ष 2011-12 का रोड है. अमिलियाबीछी मार्ग से व्यौहार खांड मार्ग वर्ष 2011-12 का है, यह मार्च, 2017 तक पूरा हो जाएगा. मयापुर खुटेली रोड से बिछरी का मार्ग है, यह निजी भूमि होने से कार्य निरस्त कर दिया गया है. कुछ मार्ग आईएपी में शामिल थे तो यह मार्ग आरआरडीए को ट्रांसफर कर दिये गये हैं. लेकिन मैं माननीय सदस्य को बताना चाहता हूं कि जो योजनाएं बंद हो गई हैं, उन योजनाओं के लिए  किसी दूसरे योजना से राशि समायोजित करके उन कामों को हम शीघ्रातिशीघ्र पूर्ण करा लेंगे और माननीय सदस्य ने जैसा कहा है तो आपको  भी हम उसमें शामिल करेंगे.

          श्री कमलेश्वर पटेल - अध्यक्ष महोदय, मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क, खेत सड़क के कितने कार्य स्वीकृत किये गये, कितने अधूरे हैं? बहुत सारे कार्य स्वीकृत कर दिये गये, उनमें थोड़ा बहुत काम भी हो गया. खासकर मुख्यमंत्री जी के नाम पर अगर कोई सड़क योजना शुरू हुई तो वह तो पूरी होनी चाहिए. कहीं न कहीं योजनाएं तो आप बहुत सारी बनाते हैं, उनका क्रियान्वयन नहीं होता है. आपसे मेरा निवेदन है और इसी तरह से यह कोई सिहावल विधान सभा क्षेत्र की बात नहीं कर रहे हैं. पूरे मध्यप्रदेश में सीधी सिंगरौली जिले में, हमारे क्षेत्र में देवसर ब्लाक भी आता है. वहां भी यही हालत है. आपके माध्यम से मेरा निवेदन है कि सभी जगह समीक्षा कराकर और इस तरह से जहां शासन की राशि लग चुकी है, वह शासन की राशि का दुरुपयोग नहीं हो. माननीय मंत्री जी ने आश्वासन दिया है. मुझे विश्वास है कि कहीं न कहीं दूसरी योजना में समायोजन करके अधूरे कार्य पूर्ण कराएंगे और जो भी लापरवाह लोग है, जैसे एक बिछरी रोड का इसमें उल्लेख है. उसका जो सर्वे हुआ तो किसी रोड की स्वीकृति तभी होती है, निविदा तभी होती है, तो कैसा उन्होंने सर्वे किया था, किस आधार पर उसकी राशि मंजूर हुई तो पहले उसका निरीक्षण करना चाहिए था? अब भूमि का विवाद आड़े आ गया तो कितनी बार अधिकारियों ने उसके लिए बैठक की, कितनी बार हम लोगों को शामिल किया? कहीं कोई प्रयास नहीं किया गया. मेरा निवेदन है कि माननीय मंत्री जी इसके लिए आश्वस्त करेंगे?

          श्री गोपाल भार्गव--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य भी जानते हैं यह नियम है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत जो सड़कें बनती हैं और मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से सड़कें बनती हैं इनमें जो सड़कें बनती हैं उसमें चाहे कृषि भूमि हो या अन्य भूमि हो उसमें किसी भी प्रकार का मुआवजा देने का प्रावधान नहीं है. यह लोगों की सुविधा के लिये है और लोगों की इच्छा के अनुसार ग्रामीण लोगों की सुविधा के लिये बनती हैं. अब इसमें सड़क मंजूर हुई उसके बाद किसी व्यक्ति ने आपत्ति लगा दी कि मुझे अपनी जमीन पर सड़क नहीं बनाना है तो यह व्यवधान आ जाते हैं, लेकिन मैं चाहूंगा कि माननीय सदस्य एवं सभी लोग बैठकर उसका समाधान निकाल लें और यदि समझौता होता है सड़क बनाने की सहमति होती है उसमें सड़क स्वीकृत है पैसे का भी प्रावधान है तो मैं समझता हू कि सड़क बनने में कोई दिक्कत नहीं है यदि समन्वय के साथ में बैठक करके उसका समाधान कर लिया जाएगा. दूसरी बात पूरक प्रश्न पांच में सड़कवार उल्लेखित जानकारी है उसको आप देख लें.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह)--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री सड़क में मुआवजा देने का कोई प्रावधान नहीं है. मेरे ख्याल से प्रधानमंत्री सड़क में यह प्रावधान नहीं है, यह सही है, लेकिन जो नीतिगत पहले से ही सड़क रहती है उसी में प्रधानमंत्री सड़क बनायी जाती है उसमें कोई विवाद नहीं होता है. मुख्यमंत्री सड़क योजना के तहत जरूर कहीं न कहीं जमीनी विवाद होते हैं. आप इसमें नीतिगत निर्णय ले लें. यदि चार-पांच साल से ऐसे विवाद हैं उसके लिये विभाग के अंदर उच्च स्तरीय कमेटी बनाकर के यह सुनिश्चित कर लें कि कम से कम यह काम इस वर्ष में पूरे हो जाएं. नहीं तो आधे-अधूरे काम इनके तथा मेरे क्षेत्र में और सम्पूर्ण क्षेत्रों में इसी तरह से पड़े हैं. इसमें उत्तर देना बड़ा ही आसान है. जमीनी विवाद 3 सड़कों के आपके क्षेत्र में भी हैं.

          श्री गोपाल भार्गव--अध्यक्ष महोदय, जिला स्तर पर ऐसी समिति बनायी जा सकती है जो इन सारे विषयों के लिये विचार करके सभी पक्षों को बिठाकर के समन्वय कर लें तो इसके लिये निर्देश जारी कर देंगे.

 

 

 

 

घोड़ाडोंगरी ब्‍लॉक में भूमि का नवीनीकरण 

[वन]

5. ( *क्र. 3742 ) श्री मंगल सिंग धुर्वे : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या बैतूल जिले के वर्तमान घोड़ाडोंगरी ब्‍लॉक के अन्‍तर्गत वन विभाग ने अधिक अन्‍न उपजाओं योजना के अन्‍तर्गत 1965-66 में जिन जमीनों को राजस्‍व विभाग को अन्‍तरित किया है, उन जमीनों का राजपत्र में प्रश्‍नांकित दिनांक तक भी नवीनीकरण वन विभाग ने नहीं किया? (ख) यदि हाँ, तो घोड़ाडोंगरी ब्‍लॉक के किस ग्राम की कितनी भूमि संरक्षित वन सर्वे में शामिल कर वनखण्‍डों में अधिसूचित की गई? कितनी भूमि किन कारणों से वनखण्‍डों के बाहर छोड़ी गई? इसमें कितनी भूमि किस आदेश क्रमांक, दिनांक से अन्‍तरित की गई? कितनी भूमि किस दिनांक को राजपत्र में निर्वनीकृत की गई? (ग) वनखण्‍डों के बाहर छोड़ी गई किस ग्राम की कितनी भूमि का किन-किन कारणों से प्रश्‍नांकित दिनांक तक भी निर्वनीकरण नहीं किया गया? इन भूमियों को निर्वनीकृत किए जाने के प्रस्‍ताव वनमंडल एवं वनवृत से किस दिनांक को प्रेषित किए? यदि प्रस्‍ताव प्रेषित नहीं किए हों तो उसका कारण बताएं? (घ) भारत सरकार एवं सर्वोच्‍च अदालत से निर्वनीकरण की अनुमति प्राप्‍त की जाकर वन भूमि का निर्वनीकरण किए जाने पर किस दिनांक को किसने रोक लगाई है? यदि नहीं, लगाई तो अनुमति के प्रस्‍ताव प्रेषित क्‍यों नहीं किए? कब तक प्रस्‍ताव प्रेषित कर दिए जावेंगे?

वन मंत्री ( डॉ. गौरीशंकर शेजवार ) : (क) एवं (ख) जी हाँ। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है।                  (ग) परिशिष्‍ट के कॉलम-7 में दर्शित संरक्षित वनभूमियों के निर्वनीकरण की कार्यवाही माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय की याचिका क्रमांक 337/1995 में पारित आदेश दिनांक 13.11.2000 द्वारा निर्वनीकरण पर अस्‍थाई रूप से रोक लगाये जाने के कारण लंबित है। (घ) भारत सरकार एवं माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय से अनुमति लेकर निर्वनीकरण पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। प्रकरण विशेष में आवश्‍यक होने पर माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय की अनुमति हेतु प्रकरण भारत सरकार को प्रेषित किया जाता है। वनखण्‍डों के बाहर छोड़ी गई वनभूमियों के निर्वनीकरण की समय-सीमा बतायी जाना संभव नहीं है।

परिशिष्ट - ''तीन''

         

          श्री मंगलसिंह ध्रुवे--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि सर्वोच्च अदालत की सिविल याचिका क्रमांक 33795 में 13 नवम्बर 2000 को वनग्रामों की वन भूमि संबंधी रोक लगायी है जिसमें न्यायालय की अनुमति प्राप्त किये जाने की भी शर्त है. वन विभाग ने 1966 से 2000 आज तक में अंतरित भूमि के डी-नोटिफाईड की अनुमति का प्रस्ताव माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत क्यों नहीं किया ?

            डॉ.गौरीशंकर शेजवार--माननीय अध्यक्ष महोदय, जब भी हम किसी वनभूमि को अन्य प्रयोजन के लिये उपयोग करने के लिये अनुमति लेना चाहते हैं तो केन्द्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हमें पालन करना पड़ता है. यह बैतूल जिले का प्रकरण है इसमें यदि हम निर्वनीकरण के लिये प्रस्ताव भेजते हैं तो उसमें आवश्यकता इस बात की है कि जमीन की वर्तमान कीमत है जिसके नाम यह जमीन हस्तांतरित कर रहे हैं उसकी तरफ से उसको पैसा भरना पड़ेगा. दूसरा वैकल्पिक वृक्षारोपण के लिये भी हमें पैसा चाहिये. बैतूल के प्रकरण में जो पहले जमीन दी गई थी वह राजस्व विभाग के पास में है. वर्तमान कीमत और वृक्षारोपण की व्यवस्था नहीं होने के कारण हम प्रस्ताव को नहीं भेज पायेंगे.

            श्री हेमंत खण्डेलवाल-- अध्यक्ष महोदय, यह जनहित का मुद्दा है.28 जुलाई को नियम 52-क की चर्चा हुई थी उसमें मंत्री जी ने बड़े स्पष्ट निर्देश दिए थे कि इस संबंध में वन विभाग दिशा-निर्देश जारी कर देगा. अध्यक्ष महोदय, मैंने सुप्रीम कोर्ट के, राज्य सरकार के, आपके विभाग के और भारत सरकार के 27 पत्र आपको दिए हैं. जिसमें कहीं पर भी इस जमीन को,छोटे-बड़े झाड़ के जंगल को नारंगी भूमि नहीं माना गया. मेरा मंत्री जी से अनुरोध है कि इस बारे में स्पष्ट निर्देश जारी करें और सुप्रीम कोर्ट का जो आदेश है उसका अवलोकन करें. उसमें कहीं भी नहीं कहा कि डी-नोटिफाई के लिए आप आवेदन नहीं कर सकते. अगर किसी भूमि में जंगल है ही नहीं तो डी-नोटिफाईड किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट में पिछले 16 साल से हमने कोई अपील ही दायर नहीं की. इस संबंध में हमें  पूरे प्रदेश के लिए सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की जरुरत है. 

          डॉ गौरीशंकर शेजवार--अध्यक्ष महोदय, प्रश्न तो स्पष्ट हुआ ही नहीं?

            अध्यक्ष महोदय-- उनका प्रश्न यह है कि सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर्स में जो जमीन बिलकुल खाली पड़ी है, उसको डी-नोटिफाई किया जा सकता है.

          डॉ गौरीशंकर शेजवार--अध्यक्ष जी, वन संरक्षण अधिनियम में किसी दूसरे उपयोग के लिए जब हम जमीन को हस्तांतरित करते हैं तो उसके अपने नियम हैं उन्हीं नियमों के अनुसार हम हस्तांतरित कर सकते हैं. उसमें नेट प्रेजेन्ट वेल्यू और वैकल्पिक वृक्षारोपण अनिवार्य है. बैतूल के प्रकरण में वास्तव में यह हुआ है कि सबसे पहले नजरिया आंकलन जिसको ब्लेंक नोटिफिकेशन कहते हैं, के आधार पर एक जमीन का नोटिफिकेशन हुआ कि यह भूमि वन विभाग की है. इसके बाद सर्वे डिमार्केशन स्कीम में उसका सर्वे हुआ और फिर धारा 4(1) के अधिसूचित वन खंडों में शामिल किया गया. जमीन दूसरी तो हस्तांतरित हो गई लेकिन उसका डी- नोटिफिकेशन नहीं हुआ. इसके बाद 1980 में वन संरक्षण अधिनियम आ गया. वन संरक्षण अधिनियम में डी-नोटिफिकेशन के लिए कुछ चीजों की अनिवार्यता है. आज की तारीख में उन अनिवार्यताओं को पूरी नहीं कर पा रहे हैं और किन्हीं कारणों से वह डी-नोटिफिकेशन वन भूमि से अलग हो नहीं पाया. नियमानुसार तो वह भूमि जंगल की है लेकिन कई स्थानों पर कब्जा राजस्व विभाग का है.

          अध्यक्ष महोदय-- बैतूल जिले के माननीय सदस्यों के साथ बैठकर चर्चा करके,निराकरण कर दें.

          श्री हेमंत खंडेलवाल-- अध्यक्ष जी....

          अध्यक्ष महोदय-- हेमंत जी मैंने वही कहा है कि आप माननीय सदस्यों के साथ बैठ कर इसका निराकरण कर दें.

          डॉ गौरीशंकर शेजवार--अध्यक्ष जी, हम बार बार बैठ सकते हैं लेकिन सदस्यों के साथ बैठ कर निराकरण नहीं हो पाएगा. वन संरक्षण अधिनियम से निराकरण होगा. वन संरक्षण अधिनियम और सुप्रीम कोर्ट ये दोनों हमें पालन करने के लिए बाध्य करते हैं. यहां यह परेशानी है.

          अध्यक्ष महोदय-- जैसा कि वह कह रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट..

          डॉ गौरीशंकर शेजवार-- उनसे हम तैयार हैं, हम बैतूल भी जा सकते हैं.

          अध्यक्ष महोदय-- आप उनको कंवीन्स कर दें.

          डॉ गौरीशंकर शेजवार-- हम बार बार बैठ सकते हैं लेकिन यह भी हमें मालूम है कि परिणाम में निराकरण नहीं हो पाएगा तो ऐसे आश्वासन का कोई औचित्य नहीं है.

          अध्यक्ष महोदय-- एक बार आप तैयारी से बैठें.

          श्री हेमंत खण्डेलवाल-- आप बैठक का आश्वासन दे दीजिए.

          अध्यक्ष महोदय-- आप बैठक का आश्वासन दे दीजिए.

          डॉ गौरीशंकर शेजवार-- आप बैठक का विषय बदल दीजिए फिर रोज बैठक करिए. (हंसी) लेकिन यदि यह विषय रहेगा तो निराकरण उसका होना नहीं है.

          अध्यक्ष महोदय-- माननीय सदस्य इस विषय पर माननीय मंत्री जी से समय लेकर बैतूल जिले के सभी सदस्य बैठ जाएं.

          श्री हेमंत खण्डेलवाल-- ठीक है.

 

 

11.24 बजे                                  स्वागत उल्लेख

 

 लोक सभा बीपीएसटी के अधीन प्रशिक्षणरत् 28 देशों के विधायी अधिकारियों का सदन में स्वागत.

-------------

           

          अध्यक्ष महोदय-- आज सदन की विशिष्ट दीर्घा में लोक सभा बीपीएसटी के अधीन प्रशिक्षणरत् 28 देशों के विधायी अधिकारी उपस्थित हैं, सदन की ओर से उनका स्वागत है. We welcome you in our assembly.

 

 

तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर (क्रमश:)

 

प्रधानमंत्री आवास योजना का क्रियान्वयन 

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

6. ( *क्र. 3680 ) श्री मुरलीधर पाटीदार : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                         (क) प्रधानमंत्री आवास योजना के ग्रामीण क्षेत्रों में क्रियान्वयन के क्या दिशा-निर्देश हैं एवं आवास स्वीकृति हेतु पात्रता के क्या पैमाने हैं एवं इस हेतु क्या प्रक्रिया अपनाई जा रही है? सन् 2022 तक सबको आवास उपलब्ध कराने हेतु मध्यप्रदेश में योजनान्तर्गत इस वर्ष कितना आवंटन प्राप्त हुआ है? जिलेवार विवरण देवें (ख) आगर जिला अंतर्गत इस वर्ष कितना आवंटन/लक्ष्य प्रधानमंत्री आवास योजनान्तर्गत प्राप्त हुआ है? प्राप्त आवंटन/लक्ष्य/मध्यप्रदेश को प्राप्त आवंटन/लक्ष्य का कितना प्रतिशत है? (ग) प्रश्नांश (क) में उल्लेखित पात्रता/पैमाने अनुसार प्रश्‍नकर्ता के विधानसभा क्षेत्र सुसनेर अंतर्गत कितने लोग आवास योजना अंतर्गत पात्र हैं? ग्रामवार सूची उपलब्ध करावें इनमें से कितने लोगों को आवास स्वीकृत किये जाकर प्रथम किस्त जारी की जा चुकी है एवं शेष हितग्राहियों को कब तक आवास स्वीकृत होंगे? (घ) क्या आवास हेतु पात्र व्यक्तियों/परिवारों के परीक्षण हेतु अधिकारी/कर्मचारी के दल द्वारा निरीक्षण किया था? यदि हाँ, तो क्‍या निरीक्षण दल ने प्रश्नांश (क) में उल्लेखित प्रावधान अनुसार जाँच की है? यदि नहीं, तो क्‍या जाँच में विसंगतियों का स्वतः संज्ञान लिया जाकर पात्र व्यक्तियों को आवास उपलब्ध कराने हेतु प्रभावी कार्यवाही की जावेगी व जिम्मेदारों पर कार्यवाही की जावेगी?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) एवं (ख) प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत् हितग्राहियों का चयन सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना-2011 (SECC-2011) में सूचीबद्ध परिवारों की परस्पर वंचितता की तीव्रता के आधार पर करने के दिशा-निर्देश हैं। सर्वोच्च प्राथमिकता आवासहीन परिवारों को, दूसरी प्राथमिकता शून्य कक्ष कच्चा परिवारों को एवं तीसरी प्राथमिकता एक कक्ष कच्चा श्रेणी आवास परिवारों को वंचितता की तीव्रता के क्रम से देने की है। SECC-2011 के अनुसार मध्यप्रदेश में 23,023 आवासहीन 53,562 शून्य कक्ष कच्चा आवास एवं 29,22,647 एक कक्ष कच्चा आवास वाले परिवार हैं। भारत सरकार ने वर्ष 2019 तक के लिए मध्यप्रदेश के लिए 11.78 लाख आवास निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें से वर्ष 2016-17 के लिए 4.48 लाख व वर्ष 2017-18 के लिए 4.96 लाख आवास का लक्ष्य निर्धारित है। इसके विरूद्ध प्रदेश में विभिन्न ग्रामों के लिए 9.44 लाख लक्ष्य देते हुए हितग्राहियों के भौतिक सत्यापन पश्चात् पात्र पाये जाने वाले परिवारों को स्वीकृति के निर्देश दिये गये हैं। (ग) सुसनेर विधानसभा क्षेत्र के ग्रामों में लक्षित हितग्राही संख्या 3509 है, जिनमें से 1024 हितग्राहियों को प्रथम किश्त की राशि जारी की गई है। शेष हितग्राहियों की पात्रता का भौतिक सत्यापन एवं भारत सरकार की वेबसाईट पर स्वीकृति की प्रकिया पूरी होने पर स्वीकृति संभव है। स्वीकृत प्रकरणों की ग्रामवार सूची पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (घ) SECC-2011 में सूचीबद्ध परिवारों की पात्रता का भौतिक सत्यापन कराये जाने के उपरांत अपात्रों को चिन्हित कर पात्रता क्रम में अगले परिवार का चयन करने की प्रकिया अपनाई गई है। SECC-2011 में सूचीबद्ध परिवारों में नाम जोड़ना अथवा संशोधन करना राज्य शासन के क्षेत्राधिकार में नहीं है।

          श्री मुरलीधर पाटीदार -  माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं सबसे पहले तो प्रधानमंत्री आवास योजना के लिये देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को धन्यवाद देना चाहता हूं कि सबके लिये आवास की सुध उन्होंने ली और क्राईटीरिया बनाया जिसमें सबको आवास सुनिश्चित हो सके और जिस तरह से हमारे प्रदेश  में मुख्यमंत्री जी और पंचायत मंत्री जी ने इसको अंजाम दिया उसके लिये मैं उनको बधाई देता हूं. मैं मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं कि यह जो सूची है यह किसी के पास उपलब्ध नहीं है. 2022 तक किन-किन को आवास की पात्रता है उसकी सूची अगर नोटिस बोर्ड पर चस्पा हो जाये,पंचायतों में बोर्ड पर पेंट हो जाये ताकि जो लोग कुछ लोगों को भ्रमित करते हैं तो वे लोग भ्रमित होने से बचेंगे.

          श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्यक्ष महोदय,  माननीय सदस्य का बहुत अच्छा सुझाव है और हम लोगों ने यह तय किया है निर्देश भी जारी हो गये हैं कि अगले तीन वर्षों में 2017-18,2018-19,2019-20, जितने भी आवास आवंटित होना है जो लाभान्वित हितग्राही हैं उनकी सूची पूरी पारदर्शिता के साथ पंचायतों की दीवाल पर टांग दें,सार्वजनिक कर दें. सरपंचों,पंचों सबके लिये उपलब्ध करा दें ताकि किसी भी प्रकार की कोई गड़बड़ी उसमें न हो, यह माननीय सदस्य का सुझाव बहुत अच्छा है. इसके लिये हमने निर्देश भी जारी कर दिये हैं और हमारा प्रयास है जो प्रधानमंत्री जी की मंशा है और हम सबकी मंशा है उसी के अनुसार हम यह काम करेंगे और जो लक्ष्य है उस लक्ष्य की हम समय से पहले ही पूर्ति कर देंगे और मुझे कहते हुए खुशी है कि हम देश में फिलहाल सबसे आगे हैं. हमारे आवास बनना भी शुरू हो गये हैं. पहली किश्त भी हमारी जारी हो चुकी है इस कारण हमें  डेढ़ लाख अतिरिक्त आवास भी मिले हैं और आगे भी हमें और भी ज्यादा आवास प्राप्त होंगे और कोई भी आवासहीन व्यक्ति मध्यप्रदेश में नहीं रहेगा.

          श्री मुरलीधर पाटीदार - अध्यक्ष महोदय, मेरा दूसर प्रश्न मंत्री जी से यह है कि कई जगह इनके पास मकान बनाने की जमीन नहीं है तो उनको ग्राम आबादी में भी पट्टा देना चाहिये और मेरे विधान सभा क्षेत्र में 19 पंचायतें शाजापुर जिले की पड़ती हैं. आपने सुसनेर जनपद पंचायत की 742 की लिस्ट दी,नलखेड़ा जनपद की 386 की और मोहन बड़ौदिया जनपद की 19 पंचायतों के नाम इसमें नहीं है तो क्या वहां एक भी प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत नहीं किया है या अधिकारी ने जानबूझकर उसको माना ही नहीं है. क्या मोहन बड़ौदिया इसके अंतर्गत नहीं आता है, मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं.

          श्री गोपाल भार्गव -  अध्यक्ष महोदय, भारत सरकार ने  2011 में एस.ई.सी.सी. की सूची प्रकाशित की थी.सामाजिक आर्थिक जनगणना की सूची के आधार पर ही आवासहीनों की सूची बनाई गई जिसे 2016 में जारी किया गया. मैं माननीय सदस्य को अवगत कराना चाहता हूं कि ऐसा कई गांवों में हुआ है जहां इस समय शून्य या एक या दो आवास हैं और कई ग्राम ऐसे हैं जहां 100 हैं लेकिन मैं उनसे कहना चाहता हूं कि एक भी व्यक्ति आवासहीन है वह या जिसका एक कच्चा कमरा है वह, इसकी पात्रता में जो भी व्यक्ति आएंगे वह एक भी व्यक्ति मध्यप्रदेश में नहीं रहेगा यह प्रधानमंत्री जी का भी कहना है और जो निर्देश हैं उसके अनुसार हम करेंगे. कई जगह ऐसा हुआ है कि जो पहली सूची आई है पहली सूची में नाम नहीं है लेकिन अगले वर्ष की सूची में नाम है. माननीय सदस्य को उनके विधान सभा क्षेत्र की 3 वर्ष की उपलब्ध करा दूंगा शायद वे इससे संतुष्ट हो जायेंगे कि एक भी व्यक्ति,एक भी गांव ऐसा नहीं रहेगा जहां पात्र व्यक्ति आवास से वंचित हो.

          श्री मुरलीधर पाटीदार - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा उत्तर नहीं आया. मेरा प्रश्न यह है कि आप अंदाज लगा लें 19 पंचायतें हैं उस बड़ौदिया जनपद में.

          अध्यक्ष महोदय - आप सूची तो देख लीजीये.

          श्री मुरलीधर पाटीदार - सूची मिली ही नहीं अध्यक्ष महोदय.

          अध्यक्ष महोदय - वे उपलब्ध कराएंगे उसके बाद आप संतुष्ट न हों तो उनसे बात करें.

          श्री मुरलीधर पाटीदार - अध्यक्ष महोदय, आज क्यों नहीं मैंने प्रश्न पूछा है. प्रश्न यह है कि मोहन बड़ौदिया जनपद पंचायत के तीन विधायक हैं मैं, अरुण जी और हाड़ा साहब, उस जनपद के बारे में कोई सुनने को तैयार नहीं है. अधिकारियों ने जानबूझकर लापरवाही की है और उनको दण्ड मिलना चाहिये. 19 पंचायतों में क्या एक भी आवास नहीं है ?

          श्री गोपाल भार्गव-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, शायद सदस्‍य इस विषय को समझ नहीं पा रहे, मेरे स्‍वयं के विधान सभा क्षेत्र में जब मैंने इस वर्ष की सूची देखी तो कहीं पर 50 आवास थे और कहीं पर एक आवास भी नहीं था. मैंने अपने अधिकारियों से चर्चा की, भारत सरकार से भी चर्चा की और अगले 3 वर्षों के अंदर मैंने देखा कि वह सारे गांव जो इस साल की सूची में नहीं थे, जहां एक भी आवास नहीं था, वहां पर अगले साल की सूची जब हमने देखी तो उसमें सौ-सौ, डेढ़-डेढ़ सौ आवास हैं, इस कारण से माननीय सदस्‍य को अवगत कराना चाहता हूं कि आप यह आशंका बिलकुल छोड़ दें. मैं फिर कहना चाहता हूं कि अभी यह वर्ष 2011 का सर्वे है जिसके आधार पर यह आवंटन हो रहा है, वर्ष 2011 से वर्ष 2016-2017 के बीच तक यदि किसी व्‍यक्ति ने योजना का लाभ अन्‍य किसी योजना में ले लिया होगा जिसमें इंदिरा आवास योजना है, मुख्‍यमंत्री आवास मिशन है, होम स्‍टेट है, अंत्‍योदय आवास है, इसके अंतर्गत ले लिया होगा तो उसको लाभ नहीं मिलेगा. दूसरी बात यह है कि यदि वह व्‍यक्ति वहां से चला गया होगा, वहां रहता नहीं होगा, तब भी उसको लाभ नहीं मिलेगा और तीसरी बात यदि उसने अपना पक्‍का मकान बना लिया होगा तो फिर उस व्‍यक्ति को उसमें से पृथक कर दिया जायेगा. इसके अलावा एक भी व्‍यक्ति राज्‍य में ऐसा नहीं रहेगा जो आवासहीन हो और उसके लिये आवास नहीं मिले. इसकी मैं सदन में घोषणा करता हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय--  (श्री मुरलीधर पाटीदार के खड़े होने पर) नहीं अब नहीं, आप बैठ जायें बहुत लंबा प्रश्‍न हो गया आपका. अब कोई अलाऊ नहीं है, कुछ नहीं लिखेंगे. श्री कश्‍यप जी को पूछने दें. एक मिनट कश्‍यप जी विपक्ष के नेता जी खड़े हैं.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह)--  माननीय मंत्री महोदय ने कहा कि आपके क्षेत्र की अगले 3 साल की सूची मैं दे दूंगा. मेरा आपके माध्‍यम से अनुरोध है, सभी विधान सभा क्षेत्रों को वह सूची उपलब्‍ध हो जाये, अगले 3 साल के लिये कौन-कौन से पात्र हैं, विभाग की जो भी सूची बनी हो वह सूची, हर विधायक को ब्‍लॉकवार उनके क्षेत्र की मिल जाये.

          श्री गोपाल भार्गव--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जहां तक नेता प्रतिपक्ष जी का सवाल है, 3 वर्षों की सूची जनपदों में ही उपलब्‍ध हैं और उनके पास में ही उसका डेटा है. सारे जनपदों को पहले भी निर्देश जारी किये जा चुके हैं और अभी भी हम कर देंगे कि वह माननीय सदस्‍यों को 3 वर्षों की सूची उपलब्‍ध करा दें. पूरी पारदर्शिता के साथ में वह सूची जनपदों में उपलब्‍ध रहे और जिन-जिन पंचायतों और जिन-जिन ग्रामों के लिये आवंटन हुआ है उन ग्रामों के लिये भी उपलब्‍ध करवा दें, हितग्राहियों के नाम उपलब्‍ध करवा दें, संख्‍या उपलब्‍ध करवा दें, यदि उसका मकान बन गया होगा तो उसके लिये पृथक कर दिया जायेगा, इस कारण से अगली जो ग्रामसभा होगी उसमें यह प्रक्रिया पूरी कर ली जायेगी.

 

विशेष औद्योगिक क्षेत्रों की स्थिति

[वाणिज्य, उद्योग एवं रोजगार]

7. ( *क्र. 4361 ) श्री चेतन्‍य कुमार काश्‍यप : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रतलाम में बांगरोद के 33.500 हेक्‍टेयर तथा करमदी के 18.150 हेक्‍टेयर क्षेत्र में निर्माणाधीन विशेष औद्योगिक क्षेत्रों की क्‍या स्थिति है? इसके उद्योग कब से प्रारंभ होंगे? (ख) करमदी में बन रहे नमकीन कलस्‍टर में अब तक कितना काम हो चुका है? यह कब तक पूरा होगा? (ग) इसमें अब तक कितने प्‍लॉट आवंटित किये जा चुके हैं?

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) रतलाम जिले के औद्योगिक क्षेत्र बांगरोद एम.एस.एम.ई. विभाग के अधीन जिला व्‍यापार एवं उद्योग केन्‍द्र रतलाम के आधिपत्‍य में है। विभाग के अंतर्गत रतलाम जिले के औद्योगिक क्षेत्र करमदी में 18.15 हेक्‍टेयर भूमि पर दिनांक 22.12.2015 को अधोसरंचना विकास कार्य प्रारंभ किये गये हैं। औद्योगिक क्षेत्र करमदी में दिसंबर 2018 तक उद्योग प्रारंभ होने की संभावना है। (ख) करमदी में बन रहे नमकीन क्‍लस्‍टर में अभी तक निम्‍न निर्माण कार्य पूर्ण किये गये हैं :- 3.0 कि.मी. सीमेंट कांक्रीट रोड, 2.5 कि.मी. स्‍ट्रॉम वाटर ड्रेन, जल प्रदाय हेतु 2.20 कि.मी. पाईप लाईन का कार्य, 2.72 कि.मी. सीवर लाईन, बॉटम डोम स्‍तर तक पानी की टंकी का कार्य, अपर डोम स्‍तर तक भूमि का सम्‍पवैल निर्माण कार्य। दिनांक 31.12.2017 तक कार्य पूर्ण होना संभावित हैं। (ग) नमकीन क्‍लस्‍टर करमदी जिला रतलाम में अभी तक 05 प्‍लाट आवंटित किये गये हैं।

          श्री चेतन्‍य कुमार काश्‍यप--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा उद्योग मंत्री जी से प्रश्‍न था कि रतलाम के बांगरोद में साढ़े 33 हेक्‍टेयर भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र बनाने का प्रस्‍ताव था परंतु अभी तक वह भूमि उद्योग विभाग के कब्‍जे में है, ऐसा मुझे जवाब दिया है, परंतु उसकी क्‍या स्थिति है, क्‍योंकि उस भूमि पर जाने का मार्ग बांगरोद ग्राम के अंदर से जाता है, कोई भी उद्योगपति अगर वहां आता है तो उसे जाने का मार्ग भी नजर नहीं आता है. अत: कोई भी उद्योगपति वहां उद्योग लगाने में रूचि नहीं दिखाता है. इसके बारे में मैं जवाब चाहूंगा कि उसके आगे की क्‍या कार्य योजना है. दूसरा करमदी के अंदर नमकीन कलस्‍टर जिसका शिलान्‍यास माननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा किया गया मुझे जवाब में बताया गया कि उसकी सड़कें तथा अधोसंरचना का कार्य प्रगति पर है और वर्ष 2018 के अंदर वहां पर उद्योग प्रारंभ होंगे और उसके निर्माण कार्य की जो पूर्णता है वह वर्ष 2017 बताई गई है, जबकि अभी तक वहां पर पावर स्‍टेशन की कोई व्‍यवस्‍था नहीं है. जब वहां पर पॉवर स्टेशन बनेगा तभी उद्योग लग सकते हैं इसका बड़ी स्पष्टता से उत्तर में उल्लेख नहीं है और जब तक पॉवर स्टेशन नहीं लगेगा तब तक उद्योग लग नहीं सकता है.रतलाम में नमकीन का व्यवसाय है, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जाने के लिये हमने जीआई की व्यवस्था भी की है परंतु डेढ़ वर्ष तक कोई इंतजार करेगा तो वहां का नमकीन का व्यवसाय प्रभावित होगा.

          श्री राजेन्द्र शुक्ल -- माननीय अध्यक्ष महोदय, जहां तक करमदी औद्योगिक क्षेत्र का सवाल है वह सीधा मेरे विभाग के अंतर्गत आता है, जैसा जवाब में है कि दिसम्बर, 2017 तक इस काम को पूरा कर लेंगे. पॉवर स्टेशन के काम में भी 4-6 माह से अधिक का समय लगता नहीं है इसलिये दिसम्बर 2017 तक माननीय सदस्य की इच्छा के अनुसार इस काम को पूरा करने का काम होगा. जहां तक बांगरोद का सवाल है यह सीधे मेरे विभाग के अंतर्गत नहीं आता है, एम.एल.एम.ई. विभाग जब से बन गया है यह जिला उद्योग केन्द्र के अंतर्गत आता है क्योंकि यह इन्ड्रस्ट्रीइल एरिया है जिसका फिजिबिल्टी स्टडी और सर्वे के काम के लिये राशि की मांग की गई है. अपने संचालनालय से उन्होंने मांग की है. अभी वह स्वीकृत नहीं हुआ है और माननीय सदस्य जैसा कह रहे हैं कि वहां पर पोटेन्शियल उतना ज्यादा नहीं है इसीलिये शायद वहां के लिये राशि स्वीकृत नहीं हो पाई है.

          श्री चेतन्य कुमार काश्यप-- माननीय अध्यक्ष महोदय, बांगरोद के बारे में बड़ा स्पष्ट जवाब है कि वह एम.एस.एम.ई. विभाग के पास आरक्षित है, उन्हें भूमि प्राप्त हो चुकी है. अत: मंत्री जी के विभाग का सीधा कार्य है और पोटेन्शिलिटी के बारे में तो अभी मैंने बताया ही नहीं है. पोटेन्शिलिटी वहां पर काफी है , काफी उद्योगपति आकर के गये हैं परंतु वह गांव के अंदर से रास्ता है जिसके कारण वहां से न कोई ट्रक अंदर जा सकता है न जाने का कोई एप्रोच है . जब तक उद्योग विभाग ऐसी संरचना नहीं करेगा तब तक वहां पर उद्योगपति रूचि क्यों बतायेगा. मेरा मंत्री जी से आग्रह है कि इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करें.

          श्री राजेन्द्र शुक्ल -- माननीय अध्यक्ष महोदय, एम.एस.एम.ई. विभाग के मंत्री श्री संजय पाठक जी से मैं चर्चा कर लूंगा . एम.एस.एम.ई. विभाग उनके अंतर्गत आता है. उनसे बात करके जैसा माननीय सदस्य  कह रहे हैं कि वहां पर पोटेन्शियल अच्छा है, तेजी से जो प्लाट विकसित होंगे वह तेजी से बिकेंगे तो निश्चित रूप से इसमें आगे बढ़ने के लिये संबंधित विभाग के मंत्री जी से मैं बात कर लूंगा.

          श्री चेतन्य कुमार काश्यप-- मंत्री जी, बहुत बहुत धन्यवाद.

          नेता प्रतिपक्ष(श्री अजय सिंह) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा तो भारतीय जनता पार्टी के कोषाध्यक्ष महोदय से अनुरोध है कि वह अगली इन्वेस्टर्स समिट का इंतजार करें, उसके बाद ही कुछ होगा.

 

 

मनरेगा के तहत् स्वीकृत कार्यों में मजदूरी का भुगतान

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

8. ( *क्र. 3690 ) श्री रामनिवास रावत : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि  (क) माह जनवरी, 2017 की स्थिति में श्योपुर जिले में मनरेगा के तहत् स्वीकृत कार्यों में कितने कार्य अपूर्ण एवं अप्रारम्भ हैं? अपूर्ण रहने के क्या कारण हैं इन कार्यों में कितनी राशि का भुगतान क्रय की गई सामग्री एवं कितना मजदूरी का किया जाना शेष है? अपूर्ण कार्यों को पूर्ण कराने एवं मजदूरों को शेष राशि का भुगतान कब तक करा दिया जावेगा। जनपदवार जानकारी देवें (ख) वर्ष 2016-17 में मनरेगा के तहत् कौन-कौन से कार्य, कितनी राशि के कब स्वीकृत कर किसे एजेंसी बनाया गया है? इन पर प्रश्‍न दिनांक तक कितना व्‍यय किया गया, कौन-कौन से कार्य स्‍वीकृत करने पर किस कारण से रोक लगी हुई है? (ग) क्या मनरेगा अधिनियम की अनुसूची II पैरा 29 के प्रावधानों के अनुरूप मजदूरी भुगतान में 15 दिनों से अधिक देरी से किये गए सभी भुगतानों के लिए क्षतिपूर्ति तुरंत प्रदान करने के आदेश हैं? यदि हाँ, तो उक्त आदेशों के क्रम में श्‍योपुर जिले में कुल कितनी क्षतिपूर्ति राशि दी जाना थी?

 

        पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) माह जनवरी 2017 की स्थिति में श्‍योपुर जिले में महात्‍मा गांधी नरेगा के तहत् स्‍वीकृत कार्यों में से 3419 कार्य अपूर्ण हैं। जिनकी जनपद वार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। योजना मांग आधारित होने से कार्यों का पूर्ण होना जॉबकार्डधारी श्रमिकों द्वारा रोजगार की मांग पर निर्भर है। इन कार्यों में सामग्री व मजदूरी का भुगतान शेष नहीं है। (ख) वर्ष 2016-17 में महात्‍मा गांधी नरेगा के तहत् खेल मैदान, शांतिधाम, आंगनवाड़ी, सुदूर सड़क एवं तालाब आदि 384 कार्य रू. 2114.56 लाख के स्‍वीकृत किए गए। क्रियान्‍वयन ऐजेन्‍सी संबंधित ग्राम पंचायत है। प्रश्‍न दिनांक तक राशि रू. 755.21 लाख व्‍यय किए गए। महात्‍मा गांधी नरेगा के तहत् मजदूरी मूलक कार्य जिनसे स्‍थाई परिसम्‍पत्‍तियों का निर्माण होता है, को छोड़कर शेष पर रोक है। (ग) जी हाँ। श्‍योपुर जिले में कोई क्षतिपूर्ति राशि अधिरोपित नहीं है।

          डॉ.गोविन्द सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय पंचायत मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि मंत्री जी ने अपने जवाब में बताया है कि अभी 3419 कार्य अपूर्ण है. मंत्री जी बतायें कि पूर्ण कितने हुये थे और पूर्ण की संख्या क्या है. अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने उत्तर में बताया है कि महात्मा गांधी नरेगा के तहत मजदूरी मूलक कार्य जिनसे स्थाई परिसम्पत्तियों का निर्माण होता है वही किये हैं. रोजगार गारंटी योजना अधिनियम के तहत क्या अन्य कार्यों जैसे बंधान, मेढ़ बंधान, जमीन का समतलीकरण करना, सड़कें बनाना क्या इन कार्यों पर रोक लगी है. यदि है तो आपने  रोक किन कारणों से लगाई है.

          श्री गोपाल भार्गव -- अध्यक्ष महोदय, एक प्रश्न मैं भी पूछना चाहता हूं कि इस पूरे सत्र में रामनिवास जी क्यों नहीं आ रहे हैं ?

          अध्यक्ष महोदय- रामनिवास जी का पत्र भी आ गया था. उनके बच्चे की शादी है. पारिवारिक कार्यक्रम में व्यस्थ होने के कारण वे सदन में नहीं आ रहे हैं.

          श्री गोपाल भार्गव -- या अन्य कोई कारण है तो डॉ.साहब बता दें और फिर प्रश्नों के लिये डॉ.साहब को ही क्यों नियुक्त किया है.(हंसी)

          श्री अजय सिंह -- क्योंकि आप नाच देख रहे थे, आपको जानकारी पूरी नहीं है कि उनके यहां पर बच्चे की शादी है.

          श्री बाला बच्चन -- आप मंत्री पूरे प्रदेश के हैं या रेहली विधानसभा के ही मंत्री हैं.बड़ा ध्यान रखते हैं आप कि कौन विधायक नहीं आया .

          श्री गोपाल भार्गव -- मैं प्रदेश का राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंत्री हूं.

          श्री बाला बच्चन- आपने 95% ग्रांटफंड रेहली में लगा दिया है.

          वन मंत्री (डॉ.गौरीशंकर शेजवार) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रतिपक्ष के नेता और अन्य सदस्य अकारण सदन का समय बर्बाद कर रहे हैं. अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न आने वाला है. (हंसी)

          कुं.विक्रम सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, व्यवधान पुरूष आज बोल रहे हैं कि व्यवधान हो रहा है . (हंसी)

          श्री गोपाल भार्गव -- माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा माननीय सदस्य ने प्रश्न किया है कि 3419 कार्य अपूर्ण हैं पूर्ण कितने है. मैं जानकारी में लाना चाहता हूं कि इसमें से 3400 में कार्य पूर्ण कर लिये गये है .इसमें 1197 कार्य सामुदायिक नेचर के हैं और 2204 कार्य हितग्राहीमूलक कार्य हैं इस तरह से 3400 कार्य पूर्ण कर लिये गये हैं. और जो सामुदायिक कार्य अपूर्ण  है, ये भी लगभग 50 प्रतिशत से ज्‍यादा पूर्णता की ओर है और इस वर्ष शीघ्रता से पूर्ण कर लिए जाएंगे. दूसरा प्रश्‍न जो आपने किया है कि क्‍या मनरेगा के अंतर्गत जो कार्य चल रहे हैं, उनको बंद कर दिया गया है. काम कोई भी बंद नहीं किया गया है सिर्फ पशु शेड का दुरूपयोग हो रहा था, पशु थे नहीं और पशु शेड का दुरूपयोग हो रहा था, पशु शेड की स्‍वीकृतियां हो रही थी और उसका उपयोग कई तरह से रहने के लिए हो रहा था, जब इस तरह की शिकायत आई तो इस कारण सिर्फ पशु शेड का कार्य बंद किया गया है, बाकी सड़कों का काम, ग्रेवल रोड का काम, मेढ़ बंधान का काम सभी तरह के काम चालू हैं, इसमें कोई रोक नहीं है.

          डॉ गोविन्‍द सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि अभी मजदूरों के माध्‍यम जो सड़कों बगैरह के कार्य हुए हैं, अभी तक दो-दो तीन-तीन महीने से राशि नहीं आई है जनपद पंचायत के सीईओ का कहना था कि शासन से पैसा नहीं आ रहा है, इसलिए हम पेमेंट नहीं करेंगे. 6-6 महीनों का भुगतान नहीं हुआ है और कई लोगों का साल-साल भर का भी भुगतान नहीं हुआ है.  मैं जानना चाहता हूं कि भिण्‍ड जिले में जनपद पंचायत में पुराने कार्य का मजदूरों का शेष भुगतान कब तक भेज देंगे. दूसरा, कई जगह ऐसा बताया गया है कि सड़कों के काम और मिट्टी के काम पर भी रोक लगाई गई है. इस प्रकार की सड़कें, मेढ़बंधान, स‍मतलीकरण के कार्य के लिए क्‍या आप शासन स्‍तर से निर्देश जारी करेंगे और क्‍या जिन मजदूरों को समय पर भुगतान नहीं हुआ उनको मनरेगा अधिनियम की अनुसूची II पैरा 29 के प्रावधानों के तहत अलग से इन्‍सेंटिव देने संबंधी भुगतान कराएंगे.

          श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा सभी जानते हैं कि पूरे देश में डिजिटलाइेजेशन एवं कैशलैस व्‍यवस्‍था का काम आगे बढ़ रहा है. हमारे पास में पर्याप्‍त बैंक और पोस्‍ट आफिसों की इतनी शाखाएं नहीं हैं कि मजदूरों का भुगतान हम समय पर कर सकें. हालांकि माननीय सदस्‍य को अवगत कराना चाहता हूं कि वर्तमान में मनरेगा के अंतर्गत हमारे पास राशि की कोई कमी नहीं है, राशि पर्याप्‍त है. भिण्‍ड एवं श्‍योपुर जिले में जिन जिन मजदूरों की राशि शेष होगी उसका हम परीक्षण करवा लेते हैं. वैसे भिण्‍ड जिले में रोजगार गारंटी का काम ज्‍यादा होता नहीं है (हंसी..) सबसे कम लेबर भिण्‍ड जिले में हैं,  वहां जितने कर्मचारी है उतने तो लेबर भी नहीं है, वहां तो कंधों पर बंदूक टांगी और घूमना लोगों का शौक है.

         

          वित्‍तीय अनियमितता के दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही 

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

9. ( *क्र. 4602 ) पं. रमेश दुबे : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्‍यप्रदेश में मनरेगा स्‍कीम के तहत् वित्‍तीय अपराध करने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों/सरपंचों के विरूद्ध कार्यवाही हेतु किन नियमों में क्‍या प्रावधान हैं? नियम एवं आदेश-निर्देश की प्रति संलग्‍न करें (ख) क्‍या ग्राम पंचायत जमुनिया विकासखण्‍ड चौरई जिला-छिन्‍दवाड़ा में मोक्षधाम निर्माण, फर्जी जॉब कार्ड के आधार पर मजदूरी में अनियमितता तथा नियम विरूद्ध पशु शेड निर्माण में हितग्राहियों का चयन, बिना तकनीकि स्‍वीकृति के भुगतान, स्‍वीकृत राशि से अधिक भुगतान के लिए पूर्व सरंपच, सचिव एवं इंजीनियर्स को वित्‍तीय अपराध का दोषी पाया गया है? यदि हाँ, तो दोषियों के नाम, पता एवं पदनाम सहित जानकारी दें? (ग) अभी तक दोषियों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज नहीं कराने के क्‍या कारण हैं? इसके लिए कौन जिम्‍मेदार है? क्‍या यह माना जाय कि जनपद पंचायत और जिला पंचायत के मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी दोषियों को प्रश्रय दे रहे हैं? यदि नहीं, तो कब तक दोषियों के विरूद्ध थाने में समस्‍त सुसंगत दस्‍तावेजों सहित प्राथमिकी दर्ज करा दी जावेगी? (घ) क्‍या शासन, पृथक-पृथक समय पर तीन बार जाँच में ग्राम पंचायत जमुनिया के पूर्व सरपंच, सचिव व इंजीनियर्स को वित्‍तीय अपराध का दोषी पाये जाने पर भी उनके विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज नहीं करने, वित्‍तीय अपराधियों को प्रश्रय देने वाले अधिकारियों को भी वित्‍तीय अपराध के दोषियों के साथ सह आरोपी बनाते हुए उनके विरूद्ध थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश देगा?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) मध्‍यप्रदेश में महात्‍मा गांधी नरेगा योजना के तहत् वित्‍तीय अपराध करने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों/सरपंचों के विरूद्ध कार्यवाही हेतु पृथक से कोई विशेष प्रावधान नहीं है। अत: शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता है। वित्‍तीय अपराध एवं अनियमितता की गंभीरता को देखते हुए भारतीय दण्‍ड संहिता, भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम (1988), पंचायतराज एवं ग्राम स्‍वराज अधिनियम 1993, मध्‍यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 एवं संबंधित अधिकारी/कर्मचारी की संविदाकर्मी की सेवा-शर्तों के तहत् यथोचित कार्यवाही करने की व्‍यवस्‍था है। (ख) जी हां जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है(ग) परिशिष्‍ट अनुसार कार्यवाही की गई है. शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता (घ) परिशिष्‍ट अनुसार कार्यवाही की गई है. शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता.

परिशिष्ट - ''चार''

          पंडित रमेश दुबे - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने पांचवी बार प्रश्‍न लगाया, जिसमें जवाब प्राप्‍त हुआ, मोक्षधाम निर्माण, गुणवत्‍ताहीन कार्य, अपात्र पशु शेड की राशि प्रदाय कराया जाना, फर्जी जॉबकार्ड, मजदूरी का भुगतान कराया जाना, एक बिल को दोबारा भुगतान किया जाना. इस प्रकार से फर्जी तरीके से पंचायत में घोटाले हुए, मेरे द्वारा पिछले समय में भी इस प्रकार के प्रश्‍न लगाए गए. मेरे द्वारा लगाया गया प्रश्‍न क्रमांक 1805, दिनांक 14.12.2015 के उत्‍तर में जो आज उत्‍तर दिया गया है, यही उत्‍तर दिया गया था कि पशु शेड निर्माण में पात्रता की शर्तों एवं प्राथमिकता की प्रक्रिया का पालन किया गया है. दूसरी बार जब मैंने प्रश्‍न किया, प्रश्‍न क्रमांक 7768, दिनांक 31.03.2016 में जबाव मिला कि नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है. तीसरी बार प्रश्‍न लगाया प्रश्‍न क्रमांक 572, दिनांक 22.02.2016 में उत्‍तर मिला कि अधिकारी इसकी जांच कर रहे हैं. जब पांचवीं बार यह प्रश्‍न चर्चा में आया कि फर्जी मस्‍टर रोल के माध्‍यम से आहरण करने की राशि और वसूली करने की प्रक्रिया बताई गई है. माननीय अध्‍यक्ष्‍ा महोदय, मैं जानना चाहता हूं कि पांचवी बार प्रश्‍न लगाने के पश्‍चात हमारे जिला के सीईओ और मनरेगा के प्रभारी द्वारा लगातार फर्जी मस्‍टर रोल के द्वारा आहरण करना और  इस प्रकार से उनको संरक्षण प्रदान करने का  काम जिला पंचायत के सीईओ के माध्यम से  और मनरेगा के प्रभारी के माध्यम से  किया जा रहा है.  लाखों रुपये का गबन  आपकी  2 या 3 पंचायतों  में हुआ  है. यह बात जांच के माध्यम से निकलकर आ रही है.  मैं मंत्री जी से इस बात का आग्रह करुंगा कि  जिस प्रकार का भ्रष्टाचार, बल्कि  जिस लेखाधिकारी को  पृथक किया गया है और  उसके बैंक के  खाते में लाखों रुपये जमा बताया गया है. मैं ऐसा चाहता हूं कि  हमारे जो जिले के अधिकारी,  जिस प्रकार का संरक्षण  और प्रश्रय देने का काम कर रहे हैं, जिला पंचायत के सीईओ  और मनरेगा के  प्रभारी,  श्री प्रदीप  उपासे, क्या इनको  हटाकर  इसकी प्रदेश स्तरीय जांच कराई जायेगी.

                   श्री गोपाल भार्गव -- अध्यक्ष महोदय, माननीय  सदस्य ने जैसा प्रश्न किया है,  यह बात सही है कि गड़बड़ी  हुई है  और गुणवत्ताहीन काम हुए हैं.  मूल्यांकन में भी गड़बड़ी हुई है.  इन सब बातों को सिद्ध पाया गया है और  इस कारण से  हमने जो भी संबंधित व्यक्ति हैं,  उनके विरुद्ध कार्यवाही कर दी है.  माननीय सदस्य की यदि और भी अधिक  कार्यवाही की   कोई अपेक्षा है, तो वे इसके लिये भी बता दें.  मैं अपने  यहां भोपाल से  वरिष्ठ अधिकारी को भेज करके  माननीय सदस्य की उपस्थिति में और जांच करा लूंगा.

                   पं. रमेश दुबे -- अध्यक्ष महोदय, यह प्रश्न पांचवीं बार सदन में चर्चा में आया, तब जाकर इस प्रकार की कार्यवाही  की स्थिति निकलकर  आई है और   जिले के अधिकारी  इस प्रकार के भ्रष्टाचार को  प्रश्रय दे रहे हैं,  जिसमें मैं इस बात  का उल्लेख करुंगा कि  जिला पंचायत के हमारे  सीईओ  एवं  मनरेगा के प्रभारी, श्री  उपासे और यह लाखों रुपये का भ्रष्टाचार सिद्ध हो चुका है,  नितीश महावरे, जिसको सेवा से  पृथक किया गया है, जिसके बैंक के खाते में  यह राशि जमा निकली है और फर्जी मस्टर रोल  के माध्यम से आहरण किया गया है.  मैं मंत्री जी से इतना आग्रह करना चाहता हूं कि  इस प्रकार का करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार  छिंदवाड़ा जिले में हुआ है.  जब तक जिला पंचायत के सीईओ  और मनरेगा के प्रभारी, श्री उपासे, उनको  हम जिले से बाहर नहीं करेंगे,  तब तक सही जांच निकलकर नहीं आ पायेगी, यह स्थिति निकलकर आ रही है.  मैं चाहता हूं कि हमें इनको हटाना चाहिये और इसकी  भोपाल  के  अधिकारियों के द्वारा उच्च स्तरीय  जांच कराना चाहिये, ऐसा मैं आग्रह करना चाहता हूं.

                   श्री गोपाल भार्गव -- अध्यक्ष महोदय,   अपात्र व्यक्तियों को  फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर  लाभ देने तथा फर्जी  मस्टर रोल बनाकर  धनराशि आहरित  करने के लिये  पुलिस थाने में  एफआईआर दर्ज करा दी गई है.  यहां से अधिकारी भेज देंगे, जो भी दोषी होंगे, चाहे वे किसी भी  स्तर के अधिकारी हों, चाहे जिला  स्तर के अधिकारी  हों, चाहे जनपद स्तर के  हों, 7 दिन के अंदर हम  पूरी जांच कराकर  और  कार्यवाही   सुनिश्चित कर देंगे.

                   पं. रमेश दुबे -- अध्यक्ष महोदय, जिला स्तर के जो  अधिकारी हैं, सीईओ, जिला पंचायत   और मनरेगा प्रभारी, श्री उपासे,  इनके माध्यम से  यदि जांच करायेंगे, तो स्पष्ट स्थिति निकलकर नहीं आयेगी.  ये उनको बचाने का काम कर रहे हैं और इसमें लाखों- करोड़ों का भ्रष्टाचार हुआ है.   पांचवीं बार विधान सभा के उत्तर में यह बात सिद्ध हो चुकी है.  चार बार मेरे  विधान सभा के प्रश्न में  इनको निर्दोष करने का काम  उन्होंने किया है.

                   अध्यक्ष महोदय --  नहीं, अब प्रदेश  स्तर से भेज रहे हैं.  मंत्री जी, आप उनका समाधान करा दें.

                   पं. रमेश दुबे -- अध्यक्ष महोदय,   नहीं, लेकिन जब तक   जिला पंचायत  के सीईओ और  मनरेगा  के प्रभारी को  हटायेंगे नहीं, तब तक  यह सम्भव नहीं हो पायेगा.  सदन  में  प्रश्न के उत्तर में  इस बात का जवाब दिया गया है.  उनको आप हटाकर जांच करायें और यदि गलत सिद्ध हो जाये,तो मैं विधान सभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के लिये तैयार हूं,  लेकिन  आपको ऐसे भ्रष्ट लोगों को हटाना चाहिये.

..(व्यवधान)..

                   श्री गोपाल भार्गव -- अध्यक्ष महोदय, इस्तीफा  देने की  कोई आवश्यकता नहीं है.  बड़ी मुश्किल से लोग जीतकर आ पाते हैं.  बड़ी मुश्किल से टिकट मिलते हैं. रमेश जी,  इस्तीफा देने की कोई  जरुरत नहीं है, आपकी इच्छा के अनुसार सारे काम होंगे,  आप चिंता नहीं करें.

..(व्यवधान)..

                   अध्यक्ष महोदय -- कृपया बैठ जायें. उत्तर आने दीजिये.  उत्तर तो  आ जाने दें.

                   श्री आरिफ अकील --  मंत्री जी,  जब वे कह रहे हैं, तो उनको वहां से हटाइये.

                   अध्यक्ष महोदय -- आरिफ अकील साहब,  मंत्री जी की पूरी बात सुन लें, वे क्या कह रहे हैं.

                   श्री गोपाल भार्गव -- अध्यक्ष महोदय, वहां का जो मनरेगा का अधिकारी है, उसको हम तत्काल हटा देंगे और चूंकि जिला पंचायत के सीईओ  का क्षेत्राधिकार  मेरा नहीं है, इसके बारे  में भी हम  मुख्यमंत्री जी से चर्चा कर लेंगे.

                   अध्यक्ष महोदय --  प्रश्न संख्या 10.  ..(व्यवधान).. अभी जांच हो जाने दीजिये.  जांच प्रदेश स्तर के अधिकारी से होगी.

                   पं. रमेश दुबे -- अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी को बहुत बहुत धन्यवाद देता हूं.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) - अध्‍यक्ष महोदय, (XXX)

          अध्‍यक्ष महोदय -  प्रश्‍न क्रमांक 10 श्रीमती प्रमिला सिंह.

          श्री अजय सिंह - अध्‍यक्ष महोदय, उन्‍होंने इतनी गम्‍भीर बात की है. माननीय मंत्री महोदय जो बहुत सक्षम है,(XXX).

          अध्‍यक्ष महोदय - यह कार्यवाही से निकाल दें. जो पहले बोला था, वह भी कार्यवाही से निकाल दें.

          श्री गोपाल भार्गव - (XXX).

          श्री अजय सिंह - (XXX). इसको गम्‍भीरता से लें.

          श्री शंकरलाल तिवारी - वह विधायक, जिसने प्रश्‍न लगाया है, वह धन्‍यवाद दे चुका है.

          श्री अजय सिंह - पण्डित जी, 'अपना तो विराजी'.

          श्री शंकरलाल तिवारी - (XXX).

          श्री अजय सिंह - पाय लागी गुरुदेव, विराजी.

          श्री शंकरलाल तिवारी - प्रश्‍न भाजपा विधायक का, (XXX).....

          अध्‍यक्ष महोदय - यह भी कार्यवाही से निकाल दें और जो लिखा है, वह भी कार्यवाही से निकाल दें.

          श्री अजय सिंह - अध्‍यक्ष महोदय, माननीय विधायक महोदय यह सदन सम्‍पूर्ण पार्टियों का है.

          अध्‍यक्ष महोदय - प्रश्‍न क्रमांक 11 श्री प्रताप सिंह.

          श्री अजय सिंह - एक सत्‍ता पक्ष के विधायक ने अपनी पीड़ा बताई, क्‍या हम उस पर नहीं उठ सकते हैं ?

          श्री शंकरलाल तिवारी - वे विधायक जी धन्‍यवाद दे चुके हैं.

          श्री अजय सिंह - धन्‍यवाद से बात नहीं होती है.

          श्री शंकरलाल तिवारी - प्रश्‍नकाल का समय खराब हो रहा है.

          श्री अजय सिंह - पण्डित जी, धन्‍यवाद से काम नहीं होता है.

          अध्‍यक्ष महोदय - मेरा अनुरोध है कि नेताजी, अब आप इस विषय को समाप्‍त करें और आगे बढ़ने दें.

          श्री अजय सिंह - आप समाप्‍त करिये, आगे बढि़ये. लेकिन जो बात उन्‍होंने कही, यह सिर्फ उनके क्षेत्र की बात नहीं है. बहुत सारे क्षेत्रों में इसी तरह है. माननीय मंत्री महोदय ने कहा कि हम सी.एम. से चर्चा करेंगे, लेकिन जब उन्‍होंने पहले कह दिया है कि उसे हटाने के बाद ही कुछ होगा तो हटवा दो.

          अध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी, अब यह विषय समाप्‍त हो गया है.

          श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय राहुल जी नेता प्रतिपक्ष जब इस विभाग के मंत्री थे. यह विभाग आपके पास भी था और आपके जनपदों के सी.ई.ओ. आप शिक्षकों को बनाए थे, बाबूओं को बनाए थे, ओवरसियरों को बनाये थे. हमने व्‍यवस्‍था सुधारी है. आपके समय में पूरी व्‍यवस्‍था भंग हो गई थी.

          श्री अजय सिंह - आपने तो व्‍यवस्‍था बिगाड़ी है.

          श्री प्रताप सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न क्रमांक 10 है. 

          अध्‍यक्ष महोदय - आप बैठ जाएं. वह प्रश्‍न गया.

          श्री प्रताप सिंह - मेरी विधानसभा का क्षेत्र का मामला था.

          अध्‍यक्ष महोदय - आपने नहीं पूछा.

          श्री प्रताप सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने हाथ उठाया था.

          अध्‍यक्ष महोदय - क्‍या उन्‍होंने आपको अधिकृत किया है ?

          श्री प्रताप सिंह - नहीं, अधिकृत नहीं किया है.

          अध्‍यक्ष महोदय - वह प्रश्‍न गया.

          प्रश्‍न क्रमांक 10 - (अनुपस्थित)

          प्रश्‍न क्रमांक 11 - (अनुपस्थित)

 

 

 

 

मिनी इंडोर स्टेडियम का निर्माण

[खेल और युवा कल्याण]

        12. ( *क्र. 2778 ) श्रीमती योगिता नवलसिंग बोरकर : क्या खेल और युवा कल्याण मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) नगर परिसर पंधाना में प्रस्तावित मिनी इंडोर स्टेडियम निर्माण की क्या स्थिति है? (ख) कौन से कारणों से मिनी इंडोर स्टेडियम नहीं बन रहा है?

        खेल और युवा कल्याण मंत्री ( श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया ) : (क) नगर परिसर पंधाना में प्रस्तावित इण्डोर खेल परिसर निर्माण की योजना को भारत सरकार के पत्र क्र. 30-01/एम.वाई.ए.एस./आर.जी.के.ए./2015/6419/6428, दिनांक 05.11.2015 द्वारा योजना की पुनः समीक्षा के कारण स्थगित रखे जाने की जानकारी दी गई है। भारत सरकार का पत्र संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार।

परिशिष्ट - ''पाँच''

          श्रीमती योगिता नवलसिंग बोरकर - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहूँगी और सर्वप्रथम तो मैं उन्‍हें बहुत-बहुत धन्‍यवाद ज्ञापित करती हूँ कि उन्‍होंने मेरे नगर परिसर पंधाना विधानसभा में इंडोर स्‍टेडियम स्‍वीकृत किया. किन्‍तु 2-3 वर्ष हो गए अभी तक इसकी कोई प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है. मेरे प्रश्‍न में जो उत्‍तर आया है, मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहूँगी कि अविलम्‍ब उसका निर्माण हो और क्‍या भारत सरकार इसके लिए कोई प्रयास करेगी ?

          श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह राजीव गांधी खेल अभियान अब बंद हो गई है. इसके बाद अब 'भारत खेलो अभियान' चल रही हैं तो इसमें जो इंडोर हाल का इन लोगों ने जो निर्णय लिया था, वह अब पूरा का पूरा स्‍थगित हो गया है. भारत सरकार की जो योजनाएं अब नहीं चल रही हैं, उसमें हम अब कैसे दखल दें ?

          श्रीमती योगिता नवलसिंग बोरकर - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह स्‍टेडियम स्‍वीकृत है किन्‍तु यह योजना की समीक्षा के लिए, भारत सरकार को लिखा गया है और माननीय मंत्री जी से यह निवेदन करूँगी कि राज्‍य सरकार इसमें कुछ मदद करे ताकि खेल परिसर तैयार हो और खिलाडि़यों को इसका लाभ मिले.

          श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया - अध्‍यक्ष महोदय, मैं भारत सरकार को लिखूँगी कि इसके ऊपर और थोड़ी सी और क्‍लेरिटी या स्‍पष्‍टीकरण मिल जाये तो हम देखने के लिए तैयार हैं.

          श्रीमती योगिता नवलसिंग बोरकर - धन्‍यवाद, माननीय मंत्री जी.

 

 

जनपद पंचायत पवई एवं शाहनगर के अंतर्गत स्‍वीकृत निर्माण कार्य

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

        13. ( *क्र. 3861 ) श्री मुकेश नायक : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जनपद पंचायत पवई एवं शाहनगर के अंतर्गत वर्ष 2014 से दिसम्‍बर 2016 तक ऐसे कितने स्‍वीकृत निर्माण कार्य हैं, जो समय-सीमा में पूर्ण नहीं हुये हैं। (ख) स्‍वीकृत निर्माण कार्य समयावधि में पूर्ण नहीं होने पर उत्‍तरदायी अधिकारियों के विरूद्ध विभाग द्वारा अभी तक क्‍या कार्यवाही की गई है। (ग) अपूर्ण कार्यों से संबंधित अधिकारियों पर क्‍या कार्यवाही की गई है। (घ) अपूर्ण निर्माण कार्यों को कब तक पूर्ण किया जाएगा।

 

        पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) :

          श्री मुकेश नायक - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अगर मैं अभी इसी क्षण यह सिद्ध कर दूँ कि विभाग ने गलत जानकारी दी है तो क्‍या माननीय मंत्री जी संबंधित अधिकारियों पर कार्यवाही करेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय - यह काल्‍पनिक प्रश्‍न है. आप व्‍यवस्थित प्रश्‍न पूछिये. (हंसी)

          श्री मुकेश नायक - अध्‍यक्ष महोदय, यह काल्‍पनिक प्रश्‍न नहीं है. मैं मंत्री जी से विनम्रतापूर्वक यह ......

          अध्‍यक्ष महोदय - प्रश्‍नों में यदि नहीं होता है.

          श्री मुकेश नायक-- अध्‍यक्ष महोदय, मैं पूरा क्‍लब करके एक प्रश्‍न को दो भागों में पूछना चाहता हूं. मूल प्रश्‍न में मैंने मंत्री महोदय से जो जानकारी मांगी थी वह वर्ष 2012 से दिसम्‍बर 2016 तक की जानकारी मांगी थी. लेकिन इन्‍होंने प्रश्‍न को बदल दिया. इन्‍होंने वर्ष 2012 की जगह वर्ष 2014 से दिसम्‍बर 2016 तक की जानकारी दी जो अपने आप में भ्रामक है. दूसरी बात यह है कि विधान सभा में किस तरह से जवाब दिए जाते हैं इसकी चिन्‍ता सम्‍माननीय सदस्‍यों ने समय समय पर सदन में की है कि किस तरह से भ्रामक जवाब विधान सभा में दिए जाते हैं. विधान सभा लोकतंत्र का सबसे शक्तिशाली फोरम है. ऐसे जवाबों से उसकी गरिमा कितनी कम होती है.

          अध्‍यक्ष महोदय-- आप भाषण न दें कृपया सीधे अपना प्रश्‍न करें.

          श्री मुकेश नायक-- अध्‍यक्ष महोदय, परिशिष्‍ट '''' देखें. पंचायत में निर्माण कार्यों की जांच को लेकर जानकारी मांगी गई थी. परंतु क्‍या जानकारी दी गई है वह मैं आपको पढ़कर सुनाता हूं

          अध्‍यक्ष महोदय-- आपके प्रश्‍न में कहां है?

          श्री मुकेश नायक --- अध्‍यक्ष महोदय, पूरे निर्माण कार्यों की जानकारी दी है और उसके उत्‍तर में जो जानकारी आई है मैं आपको पढ़कर सुनाता हूं. परिशिष्‍ट में कार्यालयीन पत्र क्रमांक 2839 जिला पंचायत एस.बी.एम./201 पृष्‍ठ 46 दिनांक 10.05.2016 के माध्‍यम से जनपद पंचायत शाह नगर को जांच हेतु पत्र प्रेषित किया गया. मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत शाह नगर द्वारा जांच के आधार पर पत्र क्रमांक  1278 / 4.06.2017 के माध्‍यम से अनुविभागीय अधिकारी शाह नगर को सरपंच सचिव के विरुद्ध वसूली की कार्यवाही के लिए पत्र प्रेषित किया गया. मंत्री जी अभी 2017 कहां आया है. 04.06.2017 को जिला पंचायत ने पत्र कहां से लिख दिया?

          अध्‍यक्ष महोदय-- इसमें परिशिष्‍ट कहां है?

          श्री मुकेश नायक-- अध्‍यक्ष महोदय, परिशिष्‍ट इस समय मेरे पास मौजूद है. माननीय मंत्री जी दूसरा उत्‍तर आपने दिया है. 2431 अपूर्ण कार्य हैं. इसमें मैंने जो मूल प्रश्‍न पूछा है. 2012 से 2016 तक कितने अपूर्ण कार्य हैं? वह आप मुझे बताने की कृपा करें और आप यदि तैयारी से नहीं आए हैं तो उसकी जानकारी मुझे पत्र द्वारा प्रेषित कर  दें.

          श्री गोपाल भार्गव--  अध्‍यक्ष महोदय, आप मेरी संवेदनशीलता तो देखें. आपको जो पहले उत्‍तर दिया गया था उसकी जब मैंने ब्रीफिंग की तो मैं भी इस उत्‍तर से संतुष्‍ट नहीं था. आपको भी शायद जानकारी प्राप्‍त हुई होगी जब मुझे जिले से जानकारी मिली तो मैंने उन्‍हें कहा कि आप पूरी जानकारी लाएं, अद्यतन लाएं और उसके बाद में मैंने फिर से संशोधित उत्‍तर बुलवाया. यह प्रश्‍नों में संशोधन पढ़ने का प्रारूप है. यह मैंने माननीय सदस्‍य को लिए पूरा विस्‍तृत रूप से उपलब्‍ध कराया है. यह बात सही है कि कुछ कार्य अपूर्ण हैं. इसमें अूपर्णता के कारण भी बताए गए हैं लेकिन माननीय सदस्‍य जो जानना चाहते हैं कि कार्य पूर्ण हो तो मैं यही कहना चाहता हूं कि आपको हम शीघ्रातिशीघ्र जानकारी देंगे कि किन कारणों से काम अपूर्ण है और हम जल्‍दी से जल्‍दी उन कार्यों को पूर्ण करा लेंगे.

          श्री मुकेश नायक-- अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक और प्रश्‍न पूछना चाहता हूं. अतिरिक्‍त स्‍कूल भवन में कक्ष निर्माण के लिए जो राशि आवंटित की गई थी. वर्ष  2007, 2008, 2009, 2010 में जो राशि स्‍वीकृत की गई वहां के अतिरिक्‍त भवन के निर्माण आज तक नहीं हुए हैं . जिन सरपंचों को, ग्राम पंचायतों को वह राशि दी गई उनका कार्यकाल खत्‍म हो गया है तो यह राशि कहां गई यह आज तक पता नहीं है. क्‍या माननीय मंत्री जी इसकी जांच कराएंगे?

          श्री गोपाल भार्गव-- अध्‍यक्ष महोदय, प्रदेश में जो सर्व शिक्षा अभियान चला था.  उसके अंतर्गत एक कक्ष या दो कक्ष बनाने की राशि शिक्षा विभाग के द्वारा पंचायत विभाग को दी गई थी.  निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत देती है. जिस कार्यकाल में राशि दी गई थी उस कार्यकाल के सरपंचों का पीरियड खत्‍म हो चुका है और जो माननीय सदस्‍य कह रहे हैं यह बात सही है कि सिर्फ पन्‍ना जिला ही नहीं बल्कि हमारे अधिकारियों ने समीक्षा की है तो हमने देखा है कि राज्‍य के कई जि‍लों में उस राशि का उपयोग नहीं किया गया और जो निर्माण कार्य होना थे वह कार्य निर्मित नहीं हुए. इस कारण से हमने कलेक्‍टर को, जिला पंचायत के सी.ई.ओ. को निर्देशित किया है कि उन तमाम सचिवों के विरुद्ध कार्यवाही की जाए. जिन्होंने राशि का प्रभक्षण किया है या राशि का उपयोग नहीं किया है हम जल्दी से जल्दी उनके विरुद्ध सिविल जेल की कार्यवाही भी करेंगे, उनकी जायदाद की कुर्की की कार्यवाही भी करेंगे और अन्य प्रकार की जो भी विधिक आवश्यकताएं होंगी, प्रावधान होंगे उनके अन्तर्गत कार्यवाही करेंगे. यह सिर्फ पन्ना जिले में नहीं बल्कि पूरे राज्य में होगा.

          श्री मुकेश नायक--जिन्होंने 2017 को पत्र लिखा है उनको समझाइश देंगे कि भविष्य में इस तरह की जानकारियां विधान सभा को न दें.

 

 

(प्रश्नकाल समाप्त)

 

 

 

 

 

12.01 बजे                                  स्वागत उल्लेख

 

श्री रघुनंदन शर्मा, पूर्व सांसद एवं लोकसभा बीपीएसटी के सलाहकार का सदन में स्वागत

 

          अध्यक्ष महोदय--आज सदन की दीर्घा में पूर्व सांसद एवं लोकसभा बीपीएसटी के सलाहकार श्री रघुनंदन शर्मा उपस्थित हैं. सदन की ओर से उनका स्वागत है.

 

 

 

 

 

 

 

12.02 बजे                                नियम 267-क के अधीन विषय

 

 

 

          अध्यक्ष महोदय--निम्नलिखित सदस्यों की सूचनाएं सदन में पढ़ी हुई मानी जाएंगी--

1.       श्री मधु भगत

2.       श्री केदारनाथ शुक्ल

3.       श्री मेहरबान सिंह रावत

4.       श्री भारत सिंह कुशवाह

5.       श्रीमती शीला त्यागी

6.       श्री घनश्याम पिरौनिया

7.       श्री के.के. श्रीवास्तव

8.       श्री फुन्देलाल सिंह मार्को

9.       श्री बहादुर सिंह चौहान

10.     श्री अशोक रोहाणी

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.02 बजे                             शून्यकाल में उल्लेख

         

         

          (1) श्री हर्ष यादव (देवरी)--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी शून्यकाल की सूचना इस प्रकार है. मेरी विधान सभा क्षेत्र के सिलारी गांव के घायल व्यक्तियों के परिजनों द्वारा अपने हक की लड़ाई के लिए धरना प्रदर्शन किया गया था. उनके ऊपर पुलिस के द्वारा कार्यवाही की जा रही है, केस बनाए जा रहे हैं. उनके परिजन तो वैसे ही घायल हैं उनके ऊपर पुलिस केस न बनाए जाएं.

 

          (2) श्री रामपाल सिंह (ब्यौहारी)--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी शून्यकाल की सूचना इस प्रकार है. शहडोल जिले की जयसिंहनगर तहसील अन्तर्गत सन्नौसी ग्राम के विजौरा नाले में जल संसाधन विभाग द्वारा बांध निर्माण का कार्य प्रारंभ है किन्तु स्थानीय ग्राम सभा सहित डूब प्रभावित किसानों को भारी आपत्ति है उन्होंने आन्दोलन कर वरिष्ठ अधिकारियों के सामने अपनी मांग रखी है. यह भी आरोप है कि बांध बलौड़ी में प्रस्तावित था किन्तु प्रस्तावित जगह को छोड़कर सन्नौसी में बनाया जा रहा है जिससे किसानों में भारी रोष एवं आक्रोश व्याप्त है.

 

          (3) श्री यशपाल सिंह सिसौदिया (मंदसौर)--माननीय अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश के सात विश्वविद्यालय के अधिकारी और कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं.

          अध्यक्ष महोदय--माननीय मंत्री जी और माननीय सदस्य कृपया अपने-अपने स्थान पर बैठें (कुछ माननीय मंत्रियों एवं सदस्यों द्वारा अधिकारी दीर्घा में उपस्थित अधिकारियों से बात करने पर)

          श्री यशपाल सिंह सिसौदिया--माननीय अध्यक्ष महोदय, 5 लाख छात्र-छात्राओं पर इसका असर पड़ रहा है. परीक्षा नजदीक है सारा काम प्रभावित हो रहा है. माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी सदन मैं बैठे हुए हैं उनसे आपके माध्यम से निवेदन करना चाहता हूँ कि  7 विश्वविद्यालय अचानक हड़ताल पर हैं, यह चरणबद्ध है इसमें समन्वय की कहीं-न-कहीं कमी है. कुलपतियों, प्रबंधक और सरकार की तरफ से यदि समन्वय बैठक हो जाती है तो शीघ्र निराकरण हो सकता है. उनकी मांगें न्यायोचित हैं.

 

          (4) श्री दिनेश राय (सिवनी)--माननीय अध्यक्ष महोदय, सिवनी जिले में भीमगढ़ नहर में आठ साल का एक बच्चा कल दोपहर से डूब गया है किन्तु अभी तक उसकी लाश नहीं ढूंढी जा सकी है इससे उसका परिवार काफी दुखी है और पूरा क्षेत्र बड़ा रोषित है.

 

          (5) श्री गिरीश भण्डारी (नरसिंहगढ़)--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी शून्यकाल की सूचना इस प्रकार है. एक ओर जहां शासन द्वारा प्रदेश में बेहतर कानून व्यवस्था का दावा किया जा रहा है. राजगढ़ जिले के नगर कुरावर निवासी श्री रामेश्वर नायक द्वारा चिटफण्ड कंपनी बीएनपी-11, इंडिया एवं जीएफ गोल्ड रियल स्टेट कंपनियों का संचालन बतौर मुखिया किया जा रहा है. उक्त आरोपी पर 420, 406, 120 (बी) के तहत मुकदमा कायम हो चुका है लेकिन यह आरोपी खुलेआम कुरावर में घूम रहा है. पुलिस के द्वारा उस पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है जिसके कारण जनता में रोष व्याप्त है. कृपया कार्यवाही करने का कष्ट करें.

 

          (6) श्री बाबूलाल गौर (गोविन्‍दपुरा)-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, गोविन्‍दपुरा क्षेत्र के अंतर्गत भारत सरकार का बीएचईएल का कारखाना है. वहां नगर निगम द्वारा किए जाने वाले विकास कार्यों हेतु बीएचईएल द्वारा अनुमति नहीं दी जाती है. इसलिए वहां सड़क निर्माण, नालियों का निर्माण या चौराहों का निर्माण, जैसे कार्य नहीं हो पा रहे हैं. हमने भारत सरकार को बीएचईएल के कारखाने हेतु वह जमीन लीज़ पर दी है. उस जमीन का बीएचईएल को पट्टा नहीं दिया गया है, लेकिन फिर भी मेरे क्षेत्र में निर्माण कार्यों की अनुमति नहीं मिलती है. मैं मध्‍यप्रदेश सरकार से यह अनुरोध करता हूं कि वह बीएचईएल को गोविन्‍दपुरा क्षेत्र में निर्माण कार्य करने के निर्देश जारी करे.

 

          (7) श्री सुखेन्‍द्र सिंह (मऊगंज)-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, रीवा जिले के हनुमना ब्‍लॉक अंतर्गत स्थित ग्राम पंचायत हटवा निर्भयनाथ में खाद्यान्‍न वितरण व्‍यवस्‍था में लगातार कालाबाजारी की जा रही है. खाद्यान्‍न ग्राम पंचायत हटवा में न रखकर दूसरी पंचायत में रखकर वितरण व्‍यवस्‍था की जा रही है. जिससे लगातार हितग्राहियों को दिक्‍कतें उठानी पड़ रही हैं. इससे लोगों में काफी आक्रोश है. मैं आपके माध्‍यम से सरकार से अनुरोध करना चाहता हूं कि खाद्यान्‍न हटवा निर्भयनाथ में ही रखने की व्‍यवस्‍था की जाए जिससे कि वहां के हितग्राहियों को समुचित लाभ मिल सके.

 

12.07 बजे                           पत्रों का पटल पर रखा जाना

(1) मध्‍यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड, जबलपुर का चतुर्दश वार्षिक प्रतिवेदन वित्‍तीय वर्ष 2015-2016

 

          संसदीय कार्य मंत्री (डॉ.नरोत्‍तम मिश्र)-  अध्‍यक्ष महोदय, मैं, कंपनी अधिनियम, 2013 (क्रमांक 18 सन् 2013) की धारा 395 की उपधारा (1) (ख) की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड, जबलपुर का चतुर्दश  वार्षिक प्रतिवेदन वित्‍तीय वर्ष 2015-2016 पटल पर रखता हूं.

(2) (क) महर्षि महेश योगी वैदिक विश्‍वविद्यालय, करौंदी, जिला-कटनी (म.प्र.) का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2015-2016

(ख) जीवाजी विश्‍वविद्यालय, ग्‍वालियर (म.प्र.) का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2015-2016

 

 

 

 

 

 

 

 

12.08 बजे                                ध्‍यानाकर्षण

(1) जौरा तहसील के ग्राम रकेरा में भूदान की जमीन पर कब्‍जा किया जाना

श्री सूबेदार सिंह रजौधा (जौरा)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

          राजस्‍व मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्‍ता)-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

          श्री सूबेदार सिंह रजौधा-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी द्वारा सदन में दिया गया उत्‍तर पूरी तरह से मेरे पक्ष में है, लेकिन मंत्री जी द्वारा दिया गया जवाब सौ प्रतिशत असत्‍य है.

            माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं एक तो आपको धन्यवाद देता हूँ कि आपने मेरे ध्यानाकर्षण को ग्राह्य कर लिया, लेकिन आप से एक प्रार्थना यह करता हूँ कि बीच में मुझसे यह नहीं कहेंगे कि कृपया भाषण मत दो, अपनी बात कहो.

          अध्यक्ष महोदय--  भाषण नहीं देंगे, अपनी बात संक्षेप में स्पष्ट करिए.

          श्री सूबेदार सिंह रजौधा--  अध्यक्ष महोदय, अगर मैं भूमिका नहीं बनाऊँगा तो न सदन समझेगा न आप समझ पाओगे.

          अध्यक्ष महोदय--  आप संक्षेप में एक मिनट में समझाइये.

          श्री सूबेदार सिंह रजौधा--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं ऐसे क्षेत्र की बात कर रहा हूँ, जो गाँव बसे हैं, वे जंगल में हैं. वहाँ जमीन नहीं है, सिंचाई के लिए कोई साधन नहीं है, तालाब नहीं हैं, पशु हैं और थोड़ी बहुत जमीन है. 240 बीघा जमीन राजस्व विभाग ने पट्टे पर इन किसानों को दी. उसके बाद में माननीय मंत्री जी के जवाब में आया है कि किसान खेती कर रहे हैं, उसमें कोई व्यवधान नहीं है. मैं मंत्री जी को यह जानकारी देना चाहता हूँ कि कम से कम दर्जनों मुकदमे, वन विभाग ने, उन किसानों के ऊपर लगाए हैं. तारीख कर-कर के आदमी परेशान हो रहा है और खेत में जाने का तो नाम ही नहीं है. खेत में जाते ही मुकदमा दर्ज, ऐसे 10-12 मुकदमे, कम से कम 25 किसानों पर लगाए हैं. मैं मंत्री जी से यह प्रार्थना करता हूँ कि या तो आपकी राजस्व विभाग में चलती नहीं है, वन विभाग हावी है. वन विभाग,  शेर तो एक तरफ से खाता है, लेकिन चारों तरफ मुँह है. अध्यक्ष महोदय, मेरे मुरैना जिले में जो फॉरेस्ट विभाग का जंगल है....

          अध्यक्ष महोदय--  अब आप इसी विषय पर रहिए और अपनी समीक्षा भी मत करिए.

          श्री सूबेदार सिंह रजौधा--  इसी विषय पर हूँ. अध्यक्ष महोदय, कब्जा तो वन विभाग ने ही किया है. वन विभाग उन खेतों में किसानों को जाने नहीं देता.

          अध्यक्ष महोदय--  अब आप बैठ जाएँ. आप मंत्री जी से उत्तर तो ले लें.

          श्री सूबेदार सिंह रजौधा--  मंत्री जी से मैं उत्तर ले लेता हूँ, लेकिन उनको समझा देता हूँ.

          अध्यक्ष महोदय--  वे समझ गए हैं, बहुत समझदार हैं.

          श्री सूबेदार सिंह रजौधा--  नहीं समझे. माननीय अध्यक्ष महोदय, बिल्कुल नहीं समझे हैं. उन्होंने तो जवाब दिया है कि खेती कर रहे हैं.

          अध्यक्ष महोदय--  आप उत्तर तो ले लें. आपकी बात इस पूरे सदन को समझ आ गई.

          श्री सूबेदार सिंह रजौधा--  अध्यक्ष महोदय, मैं पूरी बात तो कह दूँ.

          अध्यक्ष महोदय--  आपकी बात पूरी हो गई.

          श्री सूबेदार सिंह रजौधा--  अध्यक्ष महोदय, मैं यह कह रहा हूँ कि किसानों के नाम भू-अधिकार पुस्तिका है, उनका स्वामित्व है, गेल इंडिया कंपनी ने, उसने लाइन डाली. अगर वह जमीन उन पट्टेधारियों की नहीं होती, राजस्व विभाग की नहीं होती तो लोग वहाँ वन विभाग से एनओसी प्राप्त करते.

          अध्यक्ष महोदय--  आप सुन तो लें. अब आप बैठ जाएँ. यह बात ठीक नहीं है.

          श्री सूबेदार सिंह रजौधा--  अध्यक्ष महोदय, उनको मुआवजा मिला है. उन्होंने कर्ज लिया है. इसके बावजूद वन विभाग उसमें जाने नहीं देता.

          अध्यक्ष महोदय--  आप बैठ तो जाएँ.

          श्री उमाशंकर गुप्ता--  माननीय अध्यक्ष महोदय, जो माननीय सदस्य कह रहे हैं, वही मैं स्वीकार कर रहा हूँ कि उस भूमि पर उनका कब्जा है, हमारे रिकार्ड में वे भू-स्वामी हैं, यह ठीक है कि वन विभाग उस पर अपनी जमीन बता रहा है, लेकिन अभी रेवेन्यू के रिकार्ड में वही पट्टेधारी हैं, मेरे पास सारी नकल है. अगर कोई वन विभाग का अधिकारी किसी को परेशान कर रहा है या कहीं वन विभाग ने सो-मोटो कुछ मुकदमे दर्ज कर लिए हैं, ऐसे किसान कलेक्टर को अगर लिख कर देंगे, तो यह उनको अधिकार नहीं है, लेकिन इसके बाद भी यह झंझट खत्म होना चाहिए इसलिए केवल जौरा के लिए ही नहीं है, माननीय अध्यक्ष महोदय, हमने जो भू-सुधार आयोग बनाया है, जिसके अध्यक्ष माननीय दाणी जी हैं, उनको प्रायर्टी पर, मुख्यमंत्री जी ने कहा है कि भू-दान यज्ञ से संबंधित जो मामले हैं, उसके बारे में वे अध्ययन करके रिपोर्ट दें. अध्यक्ष महोदय, उसका प्रारंभिक प्रतिवेदन इस महीने उन्होंने प्रस्तुत भी कर दिया है, उसका भी हम अध्ययन कर रहे हैं. अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से मैं माननीय सदस्य को आश्वस्त करता हूँ कि अब यह काम दाणी जी के भू-सुधार आयोग को देंगे कि जौरा की यह जो समस्या है, उसका निपटारा वे कर दें और अगर वन विभाग जबरन कोई मुकदमे दर्ज कर रहा है, तो कलेक्टर उस पर संज्ञान लेगा.

          श्री सूबेदार सिंह रजौधा--  अध्यक्ष महोदय, वन विभाग तो इसमें इन्वॉल्व नहीं है,  मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूँ कि जो माननीय मंत्री जी ने कहा है कि किसान खेती कर रहा है, वह उसका स्वामी है और उसको कोई बेदखल नहीं कर सकता. अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से आश्वासन चाहता हूँ कि आप वन विभाग को निर्देशित करें कि जो असत्य दर्जनों मुकदमे लगाए हैं, उनको वन विभाग, उनसे वापस ले और आगे उनको खेती करने से न रोके. यह मैं आपके माध्यम से पूरा आश्वासन चाहता हूँ.

          श्री उमाशंकर गुप्ता--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने कहा है कि ऐसी सूची माननीय विधायक या वे सदस्य जिनके खिलाफ,  किसानों के खिलाफ, कोई मुकदमे बने हैं.कलेक्‍टर को उपलब्‍ध कराएंगे, हम कलेक्‍टर को निर्देशित करेंगे कि अभी जब तक भूमि स्‍वामी हुए हैं तो जब तक इस प्रकार का कोई फैसला नहीं होता है तब तक वन विभाग ऐसी कार्यवाही नहीं करेगा.

          अध्‍यक्ष महोदय -- आप सूची उपलब्‍ध करा दीजिए.

          श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सूची उपलब्‍ध करा दूंगा. अध्‍यक्ष महोदय -- कलेक्‍टर को और माननीय मंत्री जी को सूची उपलब्‍ध करा दीजिए.

          श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्‍यवाद देता हॅूं लेकिन एक बात आपने शंका की कही है कि इसलिए आपने कहा कि जब तक, अरे जब हम स्‍वामी हैं भू-स्‍वामित्‍व है तो जब तक काहे का. जॉंच काहे की. जब आपने स्‍वीकार कर लिया है आप उसको वापिस ले लें.

          अध्‍यक्ष महोदय -- आपने जो एक लेक्‍यूना रखा, वह उन्‍होंने पकड़ लिया है.

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी फॉरेस्‍ट के बैतूल वाले मामले में आपने वन मंत्री जी को सुना है. कई मजबूरियॉं रहती हैं इसलिए फैसला कराना पडे़गा. लेकिन चूंकि वे काबिज हैं भू-दान की जमीन है तो हम ऐसा मानते हैं कि वह निजी भूमि ही रही होगी, फॉरेस्‍ट की नहीं. अगर कहीं विसंगति है तो उसको दूर करेंगे लेकिन कोई न कोई वैधानिक स्‍वरूप तो देना पडे़गा और इसलिए हम भू-सुधार आयोग को निवेदन कर रहे हैं कि प्रॉयोरिटी पर बहुत जल्‍दी इस मामले का निपटारा करे.

          श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- माननीय मंत्री जी, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे संज्ञान में आया है कि इसी तरह का प्रश्‍न इसी जगह का वर्ष 2008 और 2013 के बीच में भी आया था. तब भी इसी तरह का आश्‍वासन हुआ था. क्‍या बात सही है ? वर्ष 2008 और 2013 के बीच में भी वहीं के विधायक ने यहीं का प्रकरण सदन में उठाया था. क्‍या उस समय भी आश्‍वासन इसी तरह दिया गया था ?

          अध्‍यक्ष महोदय -- मंत्री जी, उस प्रकरण को दिखवा लेंगे, यदि ऐसी कोई बात है तो.

          श्री बाला बच्‍चन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने मजबूरी की बात बोली तो मजबूरियों से निजात पाने के लिए तो सरकारें होती हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय -- श्री कमलेश्‍वर पटेल.

          श्री बाला बच्‍चन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मजबूरी से उपाय पाने के लिए ही तो सरकार है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- आप उनको पढ़ लेने दीजिए, वह भी कठिन आदमी हैं बहुत.

 

 

 

 

(2)    सीधी जिले के अमिलिया स्थित जागृति विद्यालय के छात्र परीक्षा देने से वंचित होना

 

 

          श्री कमलेश्‍वर पटेल (सिहावल) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

         

 

 

 

 

 

 

          स्‍कूल शिक्षा मंत्री (कुंवर विजय शाह) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

         

 

         

          श्री कमलेश्वर पटेल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, क्या यह सच नहीं है कि पूरे मध्यप्रदेश में मिल बाँचों कार्यक्रम चलाया गया, इस कार्यक्रम में कहीं भी..

          अध्यक्ष महोदय-- स्पेसीफिक प्रश्न पूछिये.

          श्री कमलेश्वर पटेल-- अध्यक्ष महोदय, यह प्रश्न से ही जुड़ा हुआ है. एक तरफ सरकार बड़े-बड़े दावे करती है. क्या यह दिखाई नहीं दिया कि अगर जिला शिक्षा अधिकारी के यहाँ आवेदन किया था या जो भी विसंतियाँ थीं, अगर बच्चे अध्ययनरत् थे पिछले साल यदि वहाँ पर दसवीं की मान्यता प्राप्त थी और बच्चों ने एक्जाम भी दिया और इस साल अगर नहीं हुआ तो क्या उनको निर्देशित नहीं कर सकते थे? क्योंकि बच्चों के भविष्य का सवाल है, 47 बच्चे परीक्षा से वंचित रह गये.

          अध्यक्ष महोदय-- इसलिए इस ध्यानाकर्षण को लिया है  और आप इधर उधर की बात करेंगे तो बच्चों के भविष्य के बारे में बात नहीं हो पाएगी आप सीधा-सीधा उन बच्चों के बारे में क्या चाहते हैं वह बात मंत्री जी से करिये.

          श्री कमलेश्वर पटेल-- एक तो हम यह चाहते हैं कि उन बच्चों का साल खराब नहीं हो और इसके लिए जो भी दोषी लोग हैं, उनके ऊपर कठोर कार्यवाही होना चाहिए,चाहे वह शिक्षा विभाग के सरकारी अधिकारी कर्मचारी हो या संस्था के संचालक हों, उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही होना चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटना ना हो. क्योंकि यह पूरे मध्यप्रदेश के ऊपर धब्बा है. (XXX).

          कुं. विजय शाह--  माननीय अध्यक्ष महोदय, जिस तरह के आरोप माननीय सदस्य सरकार और अधिकारियों के ऊपर लगा रहे हैं, यह नियम संगत नहीं है. नियम संगत यह था कि समय-सीमा पर उस सीधी जिले में रहने वाले माननीय अजय सिंह जी, अब मैं नहीं जानता कौन से अजय सिंह जी हैं. लेकिन उस सीधी जिले में रहने वाले इस स्कूल के संचालक अजय सिंह जी, ने अपनी जवाबदारी की निर्वहन ठीक ढंग से नहीं किया है.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, घोर आपत्ति है. आप अच्छी तरह से जानते हैं कि कौनसे अजय सिंह होंगे.वह स्कूल संचालक है. मंत्री जी मेरी तरफ देख कर क्यों कह रहे हैं.

          अध्यक्ष महोदय-- आपकी बात सही है. मंत्री जी, स्कूल संचालक बोलिये.

          श्री कमलेश्वर पटेल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं बता रहा हूं कि वह अजय सिंह कौन हैं, वह अजय सिंह वह हैं,(XXX), जिन्होंने 47 बच्चों का भविष्य खराब किया है.

          कुं. विजय शाह--  अध्यक्ष जी,मैंने किसी अजय सिंह का नाम लिया, जो संचालक है, वह किस पार्टी से हैं.(XXX), मैंने यह नहीं कहा है.

          श्री कमलेश्वर पटेल-- घोर आपत्ति है यहाँ नेता प्रतिपक्ष की बात नहीं हो रही है. अमलिया की बात हो रही है.

          अध्यक्ष महोदय-- यह कार्यवाही से निकाल दें.

          श्री अजय सिंह-- यहाँ नेता प्रतिपक्ष कहाँ से आ गया. वह अजय सिंह दूसरा है,अजयप्रताप सिंह दूसरा है और अजय सिंह नेता प्रतिपक्ष तीसरा है.

          श्री कमलेश्वर पटेल-- (XXX).

          कुं. विजय शाह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, नेता प्रतिपक्ष को अगर आहत हुआ है तो मैं माफी चाहूँगा लेकिन वह जो संचालक था उसने लापरवाहीपूर्ण काम किया है और जिस तरीके के आरोप हमारे अधिकारी और सरकार पर लग रहे हैं. ये बिल्‍कुल असत्‍य है. उसकी जवाबदारी थी कि समय-सीमा पर वह ऑनलाईन आवेदन करता, उसने नहीं किया, बच्‍चों के भविष्‍य के साथ खिलवाड़ करने वाले वे संचालक, चाहे वे अजय सिंह जी हों या कोई सिंह जी हों, उन पर आज ही एफ.आई.आर. दर्ज की जाएगी और उन्‍हें जेल भेजा जाएगा.

          श्री कमलेश्‍वर पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष जी, बच्‍चों के बारे में नहीं बताया कि उनका साल खराब न हो, सरकार को कोई अल्‍टरनेट व्‍यवस्‍था करनी चाहिए, सप्‍लीमेंट्री इक्‍जाम के जरिए या जैसे भी हो.

          अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी, बच्‍चों के लिए क्‍या करेंगे ?

          कुँवर विजय शाह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह शिवराज सिंह जी की सरकार बहुत संवेदनशील है. अध्‍यक्ष जी, जैसी कि आपकी भी हमेशा भावना रहती है, बच्‍चों के भविष्‍य के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाएगा, शिक्षा मंत्री होने के नाते यह मेरा नैतिक दायित्‍व है कि उन बच्‍चों के भविष्‍य के साथ हम खिलवाड़ नहीं होने देंगे, उन्‍हें ''रुक जाना नहीं'' योजना के अंतर्गत ओपन स्‍कूल की परीक्षा में बैठाएंगे और 25 जून को वह परीक्षा होगी, वे विद्यार्थी नियमित कहलाएंगे, लेकिन इस तरह के लापरवाहीपूर्वक कार्य करने वाले और भी जो संचालक होंगे, उन पर कठोर कार्यवाही की जाएगी.

          श्री कमलेश्‍वर पटेल -- अध्‍यक्ष जी, जो हमारे पास सूची है और मंत्री जी के नाम लेटर भी है, हम मंत्री जी को दे देते हैं, आपके माध्‍यम से हम यही चाहेंगे कि बच्‍चों का भविष्‍य खराब न हो, मुझे उम्‍मीद है कि उनका भविष्‍य खराब नहीं होगा. माननीय मंत्री जी, सिर्फ ताल ठोंकने से काम नहीं चलेगा, सरकार ताल बहुत ठोंकती है, क्‍यों बच्‍चे सरकारी स्‍कूल छोड़कर प्राइवेट स्‍कूलों में जा रहे हैं ? ...(व्‍यवधान) ...

          अध्‍यक्ष महोदय -- आप अगर विषय परिवर्तन कर देंगे तो मुख्‍य विषय रह जाएगा.

            कुँवर विजय शाह -- माननीय अध्‍यक्ष जी, रीवा और सीधी जिले में कितने स्‍कूल हैं ...(व्‍यवधान) ... तिवारी जी के परिवार के आठ-आठ, दस-दस स्‍कूल हैं. घरों में काम करने वाले नौकरों को मास्‍टर बना दिया.

          श्री कमलेश्‍वर पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम आपके माध्‍यम से बच्‍चों का भविष्‍य सुरक्षित चाहते हैं. अब मंत्री जी कार्यवाही करें.

          अध्‍यक्ष महोदय -- उन्‍होंने बोल तो दिया.

          कुँवर विजय शाह -- माननीय सदस्‍य जी, दूसरे पर उंगली उठाने से पहले आप स्‍वयं देखें कि 4 उंगली आपकी ओर उठ रही है.

          श्री दिलीप सिंह परिहार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी का बहुत बढ़िया उत्‍तर आया है.

 

 

12.27 बजे                              प्रतिवेदन की प्रस्‍तुति

याचिका समिति का अभ्‍यावेदनों से संबंधित सप्‍तम् प्रतिवेदन

 

          श्री शंकरलाल तिवारी (सभापति) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं याचिका समिति का अभ्‍यावेदनों से संबंधित सप्‍तम् प्रतिवेदन प्रस्‍तुत करता हूँ.

 

12.27 बजे                              याचिकाओं की प्रस्‍तुति

 

        अध्‍यक्ष महोदय -- आज की कार्यसूची में सम्‍मिलित सभी याचिकाए प्रस्‍तुत की हुई मानी जाएंगी.

अध्‍यक्षीय घोषणा

(1)  माननीय सदस्‍यों के लिए भोजन विषयक

          अध्‍यक्ष महोदय -- आज भोजनावकाश नहीं होगा. भोजन की व्‍यवस्‍था दोपहर 1.30 बजे से सदन की लॉबी में की गई है, माननीय सदस्‍यों से अनुरोध है कि सुविधानुसार भोजन ग्रहण करने का कष्‍ट करें.

                   (2)  लाला हरदौल के चरित्र पर आधारित नाटक ''लाला हरदौल'' का मंचन

          अध्‍यक्ष महोदय -- आज दिनाक 7 मार्च, 2017 को सायं 7.00 बजे से विधान सभा भवन के मानसरोवर सभागार में बुंदेलखण्‍ड के लोक जीवन में रचे बसे लाला हरदौल के चरित्र पर आधारित नाटक ''लाला हरदौल'' का मंचन होगा एवं उसके पश्‍चात् परिसर में भोज आयोजित है, माननीय सदस्‍यों से अनुरोध है कि दोनों कार्यक्रमों में पधारने का कष्‍ट करें.

 

12.28 बजे               वर्ष 2017-2018 की अनुदानों की मांगों पर मतदान

 

                   (1)     मांग संख्‍या - 1 सामान्‍य प्रशासन

                   (2)     मांग संख्‍या - 2 सामान्‍य प्रशासन विभाग से संबंधित अन्‍य व्‍यय

                   (3)     मांग संख्‍या - 65         विमानन

 

          राज्‍यमंत्री, सामान्‍य प्रशासन (श्री लालसिंह आर्य)  -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, राज्‍यपाल महोदय की सिफारिश के अनुसार प्रस्‍ताव करता हूँ कि 31 मार्च, 2018 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में राज्‍य की संचित निधि में से प्रस्‍तावित व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को -

 

          मांग संख्‍या - 1                    सामान्‍य प्रशासन विभाग के लिए चार सौ दस करोड़,                                                     अड़सठ लाख, इक्‍कीस हजार रुपये,

 

          मांग संख्‍या - 2                    सामान्‍य प्रशासन विभाग से संबंधित अन्‍य व्‍यय के लिए                                        एक सौ इक्‍तीस करोड़, बत्‍तीस लाख, सात हजार रुपये,

 

          मांग संख्‍या - 65                  विमानन के लिए चौंतीस करोड़, अस्‍सी लाख, इक्‍यासी                                         हजार रुपये,

                                                तक की राशि दी जाये.

 

          अध्‍यक्ष महोदय -- प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ.

         

          अध्‍यक्ष महोदय -- उपस्‍थित सदस्‍यों के कटौती प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुए, अब मांगों और कटौती प्रस्‍तावों पर एक साथ चर्चा होगी.

            श्री ओमकार सिंह मरकाम(डिण्‍डोरी):- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मांग संख्‍या-1 और 2 का में विरोध करता हूं और कटौती प्रस्‍तावों का मैं समर्थन करता हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय, सामान्‍य प्रशासन विभाग एक महत्‍वपूर्ण विभाग है और मुख्‍यमंत्री जी सामान्‍य प्रशासन का डंडा समय-समय पर 56 विभागों में चलाते रहते हैं और यह जो सामान्‍य प्रशासन विभाग का बजट पेश हुआ है, इसके आंकड़े ही गलत हैं. अध्‍यक्ष महोदय, यह जो वर्ष 2017-18 के लिये छयालीस लाख, बीस हजार, दौ सौ छियासठ हजार रूपये की मांग इन्‍होंने की है और इसमें पीछे जो योजनावार सूची लगी है, सब स्‍कीम प्रावधानों का विवरण, इसमें उनसठ लाख, चौंतीस हजार, सात सौ तेईस रूपये है, तो जिस तरह से सरकार की लापरवाही आंकड़े में है, यह सामान्‍य प्रशासन विभाग के लिये जो बजट की मांग की है, उसमें ही लफड़ा है.यह आंकड़े ही सही नहीं हैं तो इनका बजट ही गलत है. क्‍योंकि आंकड़े तो कम से कम स्‍पष्‍ट होना चाहिये. यह स्‍पष्‍ट रूप से जो है, उसमें हम चाहते हैं कि मंत्री जी गंभीरता से इन आंकड़ों को देखकर के बजट के प्रावधानों को देखें और समझें. क्‍योंकि आप जो बजट के रूप में धनराशि ले रहे हैं, यह जनता के परिश्रम का पैसा है. परिश्रम की धनराशि का जो पैसा आपके पास है, उसके आप कम से कम आंकड़े तो सही लायें और साथ में आपका जो सामान्‍य प्रशासन विभाग है उसमें आप जो राज्‍य आनन्‍द संस्‍थान, की स्‍थापना कर रहे हैं, यह आनन्‍द शब्‍द आप लोगों के लिये तो है, आप सरकार में हो,आप आनंद लेते रहते हो. जनता को कोई आनन्‍द नहीं है, आपने आनन्‍द संस्‍थान के लिये चार करोड़, पचहत्‍तर लाख रूपये का प्रावीजन किया है. आप चार करोड़ पचहत्‍तर लाख रूपये में प्रदेश की साढ़े सात करोड़ जनता को आनंद देना चाहते हैं. इसका मतलब है एक व्‍यक्ति को पचास पैसे में आप आनंद देना चाहते हैं. आप पचास पैसे में प्रदेश की जनता को आनंद नहीं दे पायेंगे.पचास पैसे में तो एक माचिस भी नहीं मिल रही है, जिससे आप लोगों की जिंदगी में आग लगाने के लिये समस्‍या पैदा करते हैं, परन्‍तु आपने आनंद के लिये इतना पैसे भी नहीं लिया है.इसमें आपका जो आनंद संस्‍थान है. आनंद संस्‍थान में आपको पर्याप्‍त बजट रखना चाहिये ताकि प्रदेश की जो साढ़े सात करोड़ जनता है, उन तक आपका आनंद एक रूपये में पहुंचने के लिये संस्‍थान में होना चाहिये.

          दूसरा, आपने यहां पर जो दुर्घटना में मृतकों के परिवार के लिये सहायता राशि रखी है, वह मात्र तीन करोड़ रूपये ही रखी है. यह आपने जो बजट रखा है, वह बहुत ही कम है.

12.33 बजे        {सभापति महोदय (श्री कैलाश चावला) पीठासीन हुए.}

            माननीय सभापति महोदय, आपको धन्‍यवाद कि आपकी कृपा से हम इसमें और अपनी बात रखेंगे. आपने यहां पर गोदाम का निर्माण- सामान्‍य प्रशासन विभाग कौन सा गोदाम बनाने लगा? आपने इसमें गोदाम के निर्माण के लिये एक रूपये का प्रावधान भी नहीं किया है और इसमें गोदाम के किराये के लिये 7 करोड़ रूपये का प्रावधान किया है. इसका मतलब है कि सामान्‍य प्रशासन विभाग गोदाम का किराया देने में बहुत बड़ी गड़बड़ी करके 7 करोड़ रूपये किराया देने वाले हैं. आप 7 करोड़ रूपये का किराया दे रहे हैं, तो आप गोदाम बनाने के लिये 1 रूपये भी क्‍यों नहीं रख रहे हैं. आपको गोदाम बनाना चाहिये. आप कब तक किराया देते रहेंगे. सभापति महोदय, यह जो 7 करोड़ रूपये किराया दे रहे हैं. मैं आपको चुनौती देना चाहता हूं कि आपने जो भवन किराये पर लिया है, उसके निर्माण की आप लागत देखेंगे तो वह पांच या चार करोड़ रूपये की लागत नहीं होगी. जिसमें आप सात करोड़ रूपये किराया दे रहे हो. आप यह सीधे-सीधे हमारे प्रदेश के गरीब जनता के साथ बहुत बड़ा धोखा कर रहे हो. आपको मेरा इसमें सुझाव है कि गोदाम के किराया प्रतिपूर्ति के लिये आप सात करोड़ रूपये की राशि दे रहे हो, इसमें आप गोदाम निर्माण के लिये भी राशि देने के लिये प्रावधान करें ताकि गोदाम निर्माण होने के बाद सामान्‍य प्रशासन विभाग को गोदाम की आवश्‍यकता होगी उसकी पूर्ति की जा सके.

          माननीय सभापति महोदय, मैं यह कहना चाहता हूं कि आज यहां पर इनका सामान्‍य प्रशासन विभाग सोया हुआ है. सामान्‍य प्रशासन कहीं पर भी व्‍यवस्‍था कर पाने में पूरी तरह से अक्षम है. माननीय सभापति महोदय, आप देख रहे हैं पूरे मध्‍यप्रदेश के अंदर डिप्‍टी कलेक्‍टरों की यह पदस्‍थापना आप नहीं कर पा रहे हैं, जिसके कारण इनका जो सत्‍कार विभाग जिसमें एस.डी.एम. अधिकतर सत्‍कार की जिम्‍मेदारी संभालते हैं. यह जो इनके विभाग है उसमें कहीं पर भी यह डिप्‍टी कलेक्‍टर और संयुक्‍त कलेक्‍टरों की पदस्‍थापना नहीं कर पा रहे हैं.

          माननीय सभापति महोदय, प्रदेश के अंदर सामान्‍य प्रशासन के अमले के माध्‍यम से रेवन्‍यू का जो सबसे बड़ा वर्क इनको करना चाहिए, उसमें ये पूरी तरह से असफल है. उसके लिये यह उसमें कोई बहुत बड़ा उपाय नहीं कर पा रहे हैं. आज इनका सामान्‍य प्रशासन विभाग पूरी तरह से सोया हुआ है. प्रदेश में अंधेर मचा हुआ है. विभाग अपने-अपने आदेश ऐसे कर रहे हैं, जैसे उनकी कोई स्‍वतंत्र इकाई, संस्‍था हो. ट्राइबल डिपार्टमेंट की इकाईयों में, ब्‍लॉकों में सी.ई.ओ. की पदस्‍थापना, ट्राइबल्‍स के सी.ई.ओ. की पदस्‍थापना कमिश्‍नर करते थे. मैं आपको बता दूं कि अभी कल ही हमारे डिंडोरी में हमने देखा कि  सी.ई.ओ. की ग्रामीण विकास ने ही पदस्‍थापना कर दी. अब वहां दो सी.ई.ओ. हैं. अब दोनों सी.ई.ओ. में से कौन काम करेगा, वहां  कोई स्थिति स्‍पष्‍ट नहीं है.   इनका जो सामान्‍य प्रशासन विभाग है, उसमें कोई काम नहीं कर रहा है.

          माननीय सभापति महोदय, सामान्‍य प्रशासन विभाग की जो जिम्‍मेदारी है उस जिम्‍मेदारी से सामान्‍य प्रशासन विभाग आज प्रदेश के अंदर जो रोस्‍टरों का, प‍दन्‍नो‍तियों का, जो आरक्षण के अनुसार आपको पदोन्‍नोतियों डी.पी.सी. से करना चाहिए थी, उसमें आप पूरी तरह से असफल रहे हैं. आप उसमें 53 विभागों में मात्र 20 विभागों का डी.पी.सी. करके 6 सालों में आपने उसमें कोई डी.पी.सी. नहीं कर पाये हैं. इनका जो सामान्‍य प्रशासन विभाग है इस समय पूरी तरह से आदिवासी और दलित विरोधी है. सामान्‍य प्रशासन विभाग वहां पर निरंतर हमारे लोगों की, दलित लोगों की पूरी तरह से सीआर बिगाड़कर और उनको उच्‍च पदों पर जाने से रोकता है. उसका एक उदाहरण है कि शशि कर्णावत को सामान्‍य प्रशासन विभाग ने जानबूझकर के कनिष्‍ठ करके उसको वहां पद पर जाने से रोक रहे हैं. इसी प्रकार से जो आदिवासी वर्ग के जो अधिकारी हैं, वह 33 विभाग में पदोन्‍नतियों के लिये देख रहे हैं.

          माननीय सभापति महोदय, मैं आपको बताना चाहता हूं कि सामान्‍य प्रशासन विभाग की यह पूरी असफलता है. मेरे डिंडोरी जिले में जो एक्‍जीक्‍यूटिव इंजीनियर था, उसको 4-6 बार तक एक्‍सटेंशन देकर डब्‍ल्‍यू.आर.डी. में चीफ इंजीनियर बनाकर इसलिए रखा गया था ताकि रिजर्व केटेगिरी का कोई काबिल व्‍यक्ति वहां पर नहीं पहुंच पाये. सामान्‍य प्रशासन विभाग इस तरह पूरी तरह से हमारे एस.टी.,एस.सी. के जो अधिकारी हैं, उन अधिकारियों को उनके हक तक नहीं जाने देता है, उनकी पूरी सी.आर. बिगाड़कर रख देते हैं.

          माननीय सभापति महोदय, मैं यह कहना चाहता हूं कि सबका साथ सबके विकास की इनके नेता बात करते हैं और मध्‍यप्रदेश में ही यह उसका पालन नहीं करते हैं. मध्‍यप्रदेश में आप भेद-भाव करते हैं, आप निरंतरता के साथ देखें. मध्‍यप्रदेश के अंदर हमारे गरीब छात्र पढ़ाई करते हैं. अभी आप श्‍यामला हिल्‍स मुख्‍यमंत्री के सामने का जो छात्रावास है, वहां जाकर के देख लीजिये, वहां एक टाईम भोजन मिलता है. पांच सौ रूपये उनको भोजन के लिये दिया जाता है. क्‍या आज के वर्तमान समय में पांच सौ रूपये में एक छात्र को तीस दिन का भोजन दिया जा सकता है ? अगर आप देखेंगे तो वहां मिलेगा कि चूं‍कि वह बच्‍चे हमारे आदिवासी वर्ग के हैं, दलित समाज से हैं, क्‍या इसलिए उनकी व्‍यवस्‍थाओं पर ध्‍यान नहीं दिया जायेगा ? ऐसी स्थिति में हमारा सामान्‍य प्रशासन विभाग अपने बजट में जिस तरह से यहां पर केंद्रीय जो भवन है, इनके साज सज्‍जा के लिये जो पैसा ले रहा है. आज मैं आपको बताना चाहता हूं कि विशिष्‍ट गणमान्‍य व्‍यक्तियों के भ्रमण के लिये दस करोड़ पैसा जा रहा है. आज भी मध्‍यप्रदेश में अगर अंतिम व्‍यक्ति तक सरकार के पहुंचने के उद्देश्‍य को आप लोग मानते हैं. तो अंतिम व्यक्ति तक जो लाभ पहुंचाने की योजना है, उसको वहां तक पहुंचाने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग को काम करने की आवश्यकता है.

          सभापति महोदय - अब आप समाप्त कीजिए.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम - सभापति महोदय, आपसे इस विषय में एक और अनुरोध करना चाहता हूं. चूंकि सामान्य प्रशासन विभाग को बहुत महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के साथ काम करने की जरूरत है. जो पीएससी है, जिसमें अनुसूचित जाति, जनजाति के परीक्षार्थी हैं, उनसे अत्यधिक फीस वसूली जा रही है. साथ ही जो जन शिकायत निवारण विभाग है, कंप्यूटरीकृत प्रणाली के लिए 25 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है. प्रदेश में आप 25 लाख रुपए में क्या कर लेंगे? क्या 25 लाख रुपए में आप हर आदमी तक पहुंच जाएंगे. इस समय डिजिटल इंडिया के कॉंसेप्ट के साथ में आगे बढ़ने के लिए आपके नेता कहते हैं और आप प्रदेश में पैसा नहीं दे रहे हैं. 25 लाख रुपए में आप कौन-सा काम कर देंगे? इसमें कितने कंप्यूटर आ जाएंगे? जन शिकायत निवारण में जो सामान्य प्रशासन विभाग है, यह गरीबों के साथ खुला मजाक कर रहा है. यह जो जन शिकायत निवारण विभाग है,  पूरी तरह से निःशुल्क इसमें ऑन-लाइन में कार्यवाही होना चाहिए. जन शिकायत निवारण में मात्र 25 लाख रुपए रखकर यह बहुत बड़ा आपने प्रदेश के लोगों के साथ में अन्याय किया है. सामान्य प्रशासन विभाग के और सारे विषय है, परन्तु सभापति महोदय जी, आप वहां पर बैठे हैं तो हम आपके आदेश के पालन के लिए तैयार हैं. परन्तु इतना जरूर कहेंगे कि माननीय मंत्री जी, आपसे भी मेरा अनुरोध है. आप चूंकि वहां पर मंत्री हैं. हमारी आपसे बहुत उम्मीद है. आप हमारे निवेदन को जरूर स्वीकार करेंगे कि यह सामान्य प्रशासन विभाग मध्यप्रदेश में आदिवासी, दलितों के साथ जिस तरह से भेदभाव कर रहा है और अगर आज आप न्याय करना चाहेंगे. अगर सरकार वाकई में दलित की हितैषी है तो सुश्री शशिकर्णावत की पदस्थापना करके यहां से इस सदन से घोषणा होना चाहिए और जो दलितों के साथ, आदिवासियों के साथ, उनको सही जगह में पहुंचने से जो रोक रहे हैं, समय पर उनकी सीआर को देखा जाय, यह हम सब माननीय मंत्री जी से उम्मीद करते हैं. अगर समाज में हमारे हितैषी हैं तो जरूर आप इसमें कोशिश करेंगे. सभापति महोदय जी, आपने बोलने का जो समय दिया, उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.

          श्री यशपाल सिंह सिसौदिया (मंदसौर) - सभापति महोदय, सामान्य प्रशासन विभाग से संबंधित मांग संख्या 1, 2 एवं 65 का समर्थन करता हूं और कटौती प्रस्तावों का विरोध करता हूं. सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से भी किसी ऐसे बच्चे का जिसकी उम्र मात्र 7-8 वर्ष की हो और भोपाल में 24 मई, 2014 को हाईटेंशन लाइन से उसके दोनों हाथ चले जाएं, उस नन्हें से बच्चे की जिंदगी को कैसे संवारा जाय, उसको कैसे आगे बढ़ाया जाय. सुनने में लगता है कि यह विषय सामान्य प्रशासन विभाग से संबंधित नहीं है, लेकिन रतलाम के उस बालक की उम्र जब 7 वर्ष थी, आज वह 10 वर्ष की हो गई है. अब्दुल कादिर इंदौरी पिता श्री हुसैन इंदौरी रतलाम, उसके दोनों हाथ जब हाईटेंशन लाइन से चले जाते हैं. आज मैं यह बताते हुए अत्यंत प्रसन्नता और गर्व महसूस कर रहा हूं, उस बालक को 27 मार्च से 31 मार्च, 2017 को जयपुर में संपन्न होने वाली  नेशनल पैरा ऑलम्पिक प्रतियोगिता में, जिस बालक के दोनों हाथ नहीं हैं, उसको भाग लेने का अवसर मिल रहा है, उसका कारण माननीय मुख्यमंत्री जी की स्वेच्छा अनुदान से 13 लाख लाख रुपए की राशि उस बालक को यदि मिलती है तो उस बालक का जीवन सुधर जाता है. सभापति महोदय, अक्सर भारतीय जनता पार्टी के प्रशिक्षण वर्गों में और विधायक दल की बैठकों में माननीय मुख्यमंत्री जी एक घटना से अवगत कराते हैं. उनके भोपाल स्थित बंगले पर एक व्यक्ति आता है वह स्वागत करने के लिये आतुर होता है उस समय मुख्यमंत्री जी केबिनेट की बैठक में जाने के लिये तैयार होते हैं. स्टॉफ के लोग कहते हैं कि एक व्यक्ति जिद कर रहा है आपसे मिलना है. मुख्यमंत्री जी तमाम व्यस्तताओं के बावजूद उस व्यक्ति से मिलने के लिये जाते हैं. वह व्यक्ति अपने दोनों हाथों से माननीय मुख्यमंत्री जी के गले में पुष्प माला पहनाता है. मुख्यमंत्री जी कहते हैं कि तुम इसीलिये इतनी जिद कर रहे थे यह तो कभी भी कर सकते थे. उस व्यक्ति ने जो शब्द कहे यह दोनों हाथ जो आपके गले तक माला पहना रहा हूं, यह आपकी कृपा है मुख्यमंत्री स्वैच्छानुदान से जब मेरे दोनों हाथ लग गये तो सामान्य प्रशासन विभाग के मुखिया उनकी संवेदनशीलता ने इस अनुदान में 2002-03 में पांच करोड़ रूपये की राशि मुख्यमंत्री जी स्वैच्छानुदान मद में प्रारंभ की थी. आज वर्ष 2016-17 में यह बढ़ करके 17 करोड़ के आसपास हो गई है इनसे लोगों को जिन्दगी मिली है, जिन्दगी जीने का अवसर मिला हैं. माननीय सभापति जी यह बानगी दी है. एक समय था तत्कालीन सरकार के समय 14 एवं 26 फरवरी 2000 में 28 हजार दैनिक वेतन भोगियों की सेवाएं एक साथ समाप्त कर दीं जरा आप उन दिनों को याद करें. इसीलिये निकाल दिया था कि वेतन बांटने की व्यवस्था नहीं थी. सरकार में ओव्हर ड्राफ्ट हुआ करती थी. माननीय मुख्यमंत्री तथा माननीय लालसिंह जी यहां पर विराजित हैं उन्हें बताते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता है कि 21 जनवरी 2004 से उन हटाये गये दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नयी जिन्दगी मिली उनके मन में नयी किरण की रोशनी जागृत हुई है आज वह व उनके परिवारस सारे के सारे सरकार को धन्यवाद ज्ञापित कर रहे हैं. जिन दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की सेवाएं 10 अप्रैल 2006 को 10 वर्ष पूर्ण हो चुकी थी उनको प्रक्रिया के अनुसार  नियमित करने के निर्देश शासन की ओर से दिये गये हैं. 2007 से 2016 की अवधि में 58 हजार में से 10 हजार दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित भी किया जा चुका है, यह सामान्य प्रशासन विभाग की कार्य प्रणाली है. एक ऐतिहासिक निर्णय 7 अक्टूबर 2016 द्वारा दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों के स्थान पर स्थायी कर्मी श्रेणी दिये जाने के निर्देश विभाग के द्वारा जारी किये गये. वेतनमान, वेतनवृद्धि, महंगाई भत्ता, अद्धिवार्षिकी आयु पूर्ण होने पर अकुशल के रूप में रूपये 1 लाख 25 हजार, अर्ध्दकुशल के रूप में 1 लाख 50 हजार रूपये एवं कुशल के लिये 1 लाख 75 हजार रूपये दिये जाने का निर्णय सामान्य प्रशासन विभाग के द्वारा दिया गया है. इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के लगभग 28 हजार दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी लाभांवित हुए हैं. बजट में प्रावधान किया गया है कि सब दूर से चर्चा थी कि भारत सरकार के द्वारा मध्यप्रदेश की सरकार भी कर्मचारियों को सातवें वेतनमान का लाभ देगा. विभाग ने 1 जनवरी, 2016 से सातवां वेतनमान लागू करने का एक साहसिक निर्णय किया है. केन्द्र के समक्ष 6 माह में एक बार महंगाई भत्ता दिया जाता है उसी के अनुरूप महंगाई भत्ता भी दिया गया है. कर्मचारी संघों की मांगों के संबंध में समय समय पर समन्वय-सौजन्यता, परस्पर संवाद यह काम सामान्य प्रशासन विभाग के द्वारा मैत्री का भाव अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बीच में शासन एवं प्रशासन दोनों के साथ एवं जनप्रतिनिधि का संवाद के माध्यम से यह बड़ा काम हुआ है. वह जमाना गया जब सरकारें हुआ करती थीं तब नौकर और राजा का कहीं न कहीं भाव परिलक्षित होता था आज एक गाड़ी के दो पहिये के समान यह गाड़ी एवं विकास का रथ, यह हितग्राहीमूलक योजानाओं का रथ निरंतर चल रहा है. सभापति महोदय, पूर्व की सरकार में जब अनुकंपा नियुक्ति के लिए जाते थे तो उस समय परिवार के सदस्यों को कह दिया जाता था कि 2 लाख रुपये ले लो और चले जाओ. यानी पैसे लो और चले जाओ. इससे ज्यादा कोई बड़ा काम नहीं होता था.

          सभापति महोदय, स्थानांतर की सुविधा अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े उन लोगों के परिवारों को जिनको सरकार ने अनुकंपा नियुक्ति देने का प्रावधान किया था उनके लिए 31 अगस्त 2016 से स्थानांतर की सुविधा  मिलना प्रारंभ हुई है.

          सभापति महोदय, अनुकंपा नियुक्ति एवं समयमान वेतनमान दिए जाने से लगभग 60 हजार कर्मचारी लाभान्वित हुए हैं.

          सभापति महोदय,अनेक उल्लेखनीय उपलब्धियां सामान्य प्रशासन विभाग के खाते में जाती हैं. दिल्ली में मध्यप्रदेश भवन में विधायकों को सुविधाएं देने का काम शुरु हुआ है. 5 दिन निःशुल्क ठहरने की पात्रता दी गई है. मुंबई में वार्सी नवी में  लगभग 3879 वर्ग मीटर के भूखंड पर मप्र शासन द्वारा एक अतिथि गृह का निर्माण किया जा रहा है जिसका नाम मध्यालोक रखा गया है.

          सभापति महोदय, लोकायुक्त संगठन को ताकत देने के लिए अनेक उल्लेखनीय, अनुकरणीय काम हुए हैं, उनको स्वतंत्रता दी गई. उनको अधिकार दिए गए हैं. 1 जनवरी 2016 से 31 दिसम्बर 2016 तक संगठन में कुल 5008 शिकायतें प्राप्त हुई थीं उनमें से 906 शिकायतें जांच हेतु पंजीबद्ध की गई. संगठन ने उक्त अवधि में  3848 शिकायतों को नस्तीबद्ध करते हुए 254 शिकायतों पर आवश्यक कार्रवाई  की गई है.

          सभापति महोदय, सामान्य प्रशासन विभाग के सहयोग से विशेष न्यायालयों की स्थापना की गई. आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो अंतर्गत आर्थिक अपराध प्रकोष्ठों को मजबूती प्रदान की गई. उनको संसाधनों से सुसज्जित किया गया है. सामान्य प्रशासन विभाग में अनेक उल्लेखनीय काम किए गए हैं.

          सभापति महोदय, प्रशासन अकादमी में 10 वर्षों में 3201 प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन करके 57069 शासकीय सेवकों को प्रशिक्षित किए जाने का अनुकरणीय काम किया गया है.

          सभापति महोदय, केस स्टडी को लेकर नवाचार किया गया है. नगरीय केन्द्रीय सेवाओं के आधार पर अनेक नवीन संरचना की गई है. गुणवत्ता के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय मापदंडों के अनुरुप कार्य करने हेतु प्रशासन अकादमी में 23 अप्रैल 2015 से 3 वर्षों के लिए ISO प्रमाण पत्र प्राप्त करने में सफलता प्राप्त की है.

          सभापति महोदय, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा पारितोषिक के रुप में विभिन्न संस्थाओं को पुरस्कृत करने का काम प्रारंभ किया गया है. उसमें सैनिक, असैनिक अनेक प्रकार के सामाजिक कार्यों को बढ़ावा देने के लिए शौर्य पुरस्कार है जिसमें अशोक चक्र श्रंखला. राज्य स्तरीय वीरता कार्य पुरस्कार. राज्य स्तरीय महाराणा प्रताप शौर्य पुरस्कार. संत-महापुरुषों के नाम पर पुरस्कार. इंदिरा गांधी साम्प्रदायिक सौहार्दता पुरस्कार, भैया श्री मिश्रीलाल गंगवाल सद्भावना पुरस्कार, मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार. इस प्रकार से अनेक पुरस्कारों की घोषणा करके प्रदेश में अनेक सुव्यवस्थित व्यवस्था देने का काम किया है.

          सभापति महोदय, स्वंतत्रता संग्राम सेनानियों के परिवारों को जो मानदेय, सम्मान निधि प्राप्त होती थी वह तत्कालीन सरकारों के समय ऊंट के मुंह में जीरा के समान थी. यह कहते हुए अत्यंत प्रसन्नता है कि उन आजादी के दीवानों को स्मरण करते हुए, उनके परिवार को आर्थिक रुप से सक्षम और सम्मान देते हुए सामान्य प्रशासन विभाग ने स्वतंत्रता संग्राम  सेनानियों के परिवार को जो सम्मान निधि दी है वह 25 हजार रुपये करने का ऐतिहासिक काम किया है.

          सभापति महोदय, मृत सैनिकों के परिवार के सदस्यों को शासकीय सेवा में प्राथमिकता देना. सेनानियों के पुत्र-पुत्रियों के कृषि विश्वविद्यालय में प्रवेश देना. प्रदेश के सेनानियों को शासकीय चिकित्सालयों में निशुल्क चिकित्सा व्यवस्था करना. सेनानियों के पुत्र-पुत्रियों को मेडिकल कॉलेज में स्थान आरक्षण की सुविधा देना. ऐसे अनेक उल्लेखनीय काम किए गए हैं. शायद इसी कारण से आज हिंदुस्तान में सबसे बड़ा, सबसे पहला कोई शौर्य स्मारक स्थापित हुआ है तो वह राजधानी भोपाल में हुआ है जिसका लोकार्पण, उद्घाटन, अनावरण माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया है. वह ऐतिहासिक क्षण था. सभापति महोदय, श्री लाल सिंह जी आर्य सदन में विराजमान हैं, मैं उनको धन्यवाद देना चाहता हूं कि लोक सेवा गारंटी अधिनियम के माध्यम से एक ऐतिहासिक काम हुआ है. इतनी बड़ी संख्या में जो आपने स्थाई रूप से जाति प्रमाणपत्र देने का काम किया है उसके चौंकाने वाले आँकड़े आए हैं. लोगों को बार-बार भटकना पड़ता था,बार-बार परेशान होना पड़ता था. 1 करोड़ 24 लाख 65 हजार 390 आवेदकों के प्रकरणों का निराकरण करके मध्यप्रदेश में हिन्दुस्तान ने जाति प्रमाणपत्र का स्थाईकरण करने का एक रिकार्ड बनाकर अभूतपूर्व काम किया है उसके लिये मैं मंत्री जी आपको और आपके विभाग को और मुख्यमंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं यह काम वास्तव में ऐतिहासिक और  अनुकरणीय है. प्रशासनिक सुधार को लेकर मंथन,2014 की अनुशंसाओं को मूर्त रूप देने के कारण प्रदेश में चहुमुखी विकास हुआ है जिसके कारण हितग्राही मूलक योजनाएं भोपाल से चलकर चौपाल तक पहुंची हैं. सुराज मिशन,अधिकारियों द्वारा मासिक डायरी का संधारण,जनसुनवाई,परख,सुशासन जैसे अनेक उल्लेखनीय काम हुए हैं. मंत्रालय में वाई-फाई कनेक्टिविटी जोड़ने का काम हुआ है. " आओ बनाएं अपना मध्यप्रदेश " मध्यप्रदेश का अपना कोई गान नहीं था लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से,मुख्यमंत्री जी की मंशा के अनुरूप, अपना मध्यप्रदेश,स्वर्णिम मध्यप्रदेश,मध्यप्रदेश विकास की दौड़ में किस प्रकार आगे बढ़े इसको लेकर सम्मेलनों का आयोजन आओ बनाए अपना मध्यप्रदेश के गान के साथ प्रारंभ हुआ उससे न केवल सरकार के प्रति जनता का भाव जुड़ा है बल्कि आमजन में सूचना का अधिकार अधिनियम,2000 के क्रियान्वयन में भी मदद मिली है. सामान्य प्रशासन विभाग के साथ-साथ विमानन विभाग की बात करें तो मध्यप्रदेश के 51 जिलों में से 30 जिलों में विमानन विभाग के द्वारा हवाईपट्टी उपलब्ध करा दी गई हैं. इन्दौर,भोपाल,ग्वालियर,छतरपुर,खजुराहो तथा जबलपुर में राष्ट्रीय स्तर के विमान तल सुसज्जित होकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. दमोह में डायमण्ड सीमेंट के द्वारा,शहडोल में ओरियेंट पेपर मिल के द्वारा,नागदा में ग्रेसी मिल के द्वारा निजी रूप से हवाईपट्टियां निर्मित की गई हैं  यह भी एक उल्लेखनीय उपलब्धि है. मुझे कहते हुए प्रसन्नता है कि सागर एवं गुना में उड़ान प्रशिक्षण को लेकर 2 हवाईपट्टियों का निर्माण निजी संस्थाओं द्वारा किया जा रहा है और जिस क्षेत्र मन्दसौर का मैं प्रतिनिधित्व करता हूं सभापति जी, आप भी वहीं के निवासी हैं मन्दसौर में मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी हवाईपट्टी 2 किलोमीटर की बनकर तैयार हुई है जिसका मुख्यमंत्री जी ने अनौपचारिक रूप से 17 जनवरी 2017 को लोकार्पण किया है उस हवाईपट्टी से पर्यटन के क्षेत्र में क्योंकि मन्दसौर भगवान पशुपतिनाथ की नगरी है और औद्योगिक क्षेत्र में भी उसका लाभ मिलेगा.

          सभापति महोदय,आनन्द विभाग की कल्पना 2016-17 में उन बिन्दुओं के माध्यम से तय की गई जिसकी चिंता चाहे सत्ता पक्ष हो या प्रतिपक्ष हो या मीडिया हो सबने उसकी चिंता की थी कि आदमी तनाव में परेशान होता है तनाव में मर जाता है तो आनन्द का अनुभव लोगों को हो और वह सीधे-सीधे शासन,प्रशासन के साथ जुड़े और उसी के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतियोगिताओं का आयोजन करना, नेकी की दीवाल बनाकर लोगों को भावनाओं से जोड़ने का काम पूरे प्रदेश स्तर पर किया गया है.  आनन्द की अनुभूति के  लिये एक्शन प्लान एवं गतिविधि निर्धारण करने का काम इस विभाग ने किया है. मैं सामान्य प्रशासन विभाग को इसके लिये बधाई देता हूं और बजट में इसके लिये 2 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है मैं समझता हूं कि यह कम है क्योंकि 7 करोड़ 50 लाख मध्यप्रदेश की जनता है और लोगों को आनन्द भाव से जोड़ने को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी मुख्यालय तक जोड़ने के लिये यह 2 करोड़ की राशि कम है. इसको और अधिक आगे बढ़ाने की आवश्यकता है.  आनन्द विभाग का गठन समाज में जीवन जीने की कला से संबंधित है. जीवन जीने की कला के निर्माण के उद्देश्य से इसका निर्माण किया गया है. आज प्रतिपक्ष को लगता होगा कि कैसे विभाग का गठन कर दिया इसके क्या परिणाम आएंगे लेकिन जो लोग तनाव में रहते हैं तो आनन्द उत्सव में 14 जनवरी 2017 से 21 जनवरी 2017 के बीच इतने कम समय में पंचायतों के समूह बनाकर जो खेल-कूद  प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया,सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया गया यह पहली बार हुआ और जिन ग्राम पंचायतों में जहां स्थानीय कलाकार हैं, स्थानीय खिलाड़ी हैं उनको अवसर मिले उसको लेकर फोटोग्राफी प्रतियोगिता,वीडियोग्राफी प्रतियोगिता,अल्पविराम, आनंद सभा, इस प्रकार के जो आयोजन हुए हैं तो सामान्य प्रशासन विभाग ने अपने दायित्व का निर्वाह किया है वह पूरे मध्यप्रदेश  की 7 करोड़ 50 लाख जनता के लिये किया है उसके लिये मैं उसकी प्रशंसा करता हूं और मुख्यमंत्री जी और लाल सिंह आर्य जी की प्रशंसा करता हूं और सामान्य प्रशासन विभाग की अनुदान मांगों का समर्थन करते हुए उसकी भूरि-भूरि प्रशंसा करता हूं. आपने बोलने का अवसर दिया बहुत-बहुत धन्यवाद.

          श्री कमलेश्‍वर पटेल (सिहावल)-- माननीय सभापति महोदय, अनुदान मांगों की संख्‍या क्रमांक 1, 2 और 65 पर बोलने के लिये मैं खड़ा हुआ हूं. अभी सिसौदिया जी बहुत प्रशंसा कर रहे थे. अब आंनद मंत्रालय से शुरू करें कि कहां से शुरू करें. माननीय सभापति महोदय, सरकार बातें तो बहुत बड़ी-बड़ी करती है और खासकर जो सामान्‍य प्रशासन विभाग है, हम समझते हैं कि जो हमारे माननीय मुख्‍यमंत्री जी, माननीय मंत्रीगण, सभी कार्पोरेशन के अध्‍यक्ष हैं, जितने आयोग हैं आपका लोक सेवा प्रबंधन से लेकर चाहे आपका लोकायुक्‍त संगठन हो, ईओडब्‍ल्‍यू हो,‍ जितने भी विभाग हैं या जो प्रमुख संस्‍थायें हैं उनकी जड़ें सामान्‍य प्रशासन विभाग से जाती हैं. अगर हम मंत्रालय से शुरू करें तो सामान्‍य प्रशासन विभाग पूरी तरह से असामान्‍य कार्य कर रहा है. बड़े-बड़े दावे तो किये गये थे, पूरा वल्‍लभ भवन पेपरलैस हो जायेगा, ऐसा पिछले बजट में उल्‍लेख भी किया गया था, पर आज तक हुआ नहीं. हां पेपरलैस बनाने पर करोड़ों रूपये जरूर खर्च हो गये. सुप्रीम कोर्ट में प्रमोशन में आरक्षण मामले की सुनवाई के कारण कई पदों पर सक्षम अधिकारियों के रहते पोस्टिंग नहीं हो पा रही है, जबकि कई विभाग नियमों को ताक पर रखकर अपने चहेतों, अधिकारियों का प्रमोशन कर रहे हैं. सामान्‍य प्रशासन विभाग के सर्कुलर का जमीनी स्‍तर पर कितना पालन हो रहा है इसे देखने की फुर्सत नहीं है. कई विभागों में गोपनीय प्रतिवेदन का फार्मेट ठीक नहीं है, प्र‍त्‍येक पद के निर्धारित कर्तव्‍यों और कार्यकलापों के आधार पर गोपनीय प्रतिवेदन भरवाना चाहिये ताकि संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों की कार्यक्षमता का आंकलन सही परिप्रेक्ष्‍य में हो, पर हर पद के लिये एक ही सीआर फार्म भरवाया जाता है, इस पर विचार करना चाहिये.

          माननीय सभापति महोदय, सार्वजनिक कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों को, क्षेत्रीय विधायक, सांसद को बार-बार हम लोगों के पास सर्कुलर आ जाता है पर इसका क्रियान्‍वयन नहीं हो रहा है तो कहां से हम मान लें कि सामान्‍य प्रशासन विभाग सामान्‍य है. हम तो यही कहेंगे कि यह असामान्‍य हो गया है. माननीय सभापति महोदय, हमारे विधान सभा क्षेत्र में ही कई आयोजन हो जाते हैं और क्षेत्रीय विधायकों को पता नहीं चलता है, विधायकों को बुलाने की आवश्‍यकता नहीं समझते. हमने विधान सभा में भी प्रश्‍न लगाया था. हमारे पास प्रमुख सचिव महोदय का सर्कुलर आ गया कि हमने यह परिपत्र जारी किया है, उसकी कापी हमारे पास आ गई. माननीय सभापति महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से यह निवेदन है कि इसको क्रियान्‍वयन कराने की जिम्‍मेदारी किसकी है. जनप्रतिनिधियों को सिर्फ सर्कुलर भेज दें, विभाग के अधिकारियों को भेज दें, अगर उसका सही ढंग से क्रियान्‍वयन नहीं हो रहा है तो इसकी जिम्‍मेदारी हम समझते हैं कि यह सामान्‍य प्रशासन विभाग की है. हमारे यहां कई कार्यक्रम अभी आयोजित हुये, दो-तीन कार्यक्रमों का हम उदाहरण दे सकते हैं. प्रधानमंत्री सड़कों का लोकार्पण हो गया, भूमिपूजन कर दिया गया और क्षेत्रीय विधायक को, सांसद को नहीं बुलाया गया. कहीं जिला पंचायत अध्‍यक्ष लोकार्पण कर रहे हैं तो कहीं सरपंच कर रहे हैं. ऐसे ही अभी एक रेस्‍ट हाउस बहरी में बना था उसका लोकार्पण हो गया, हमको सूचना तक नहीं दी गई, जबकि‍ हम क्षेत्र में थे. ऐसे ही हमारे क्षेत्र में एक मॉडल स्‍कूल का देवसर में निर्माण हुआ था उसका भी लोकार्पण जिला पंचायत अध्‍यक्ष द्वारा कर दिया गया.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक (परासिया)-- सभापति महोदय, यह बात सही है, जो सदस्‍य अपनी भावना रख रहे हैं, हम लोगों के साथ भी यही स्थिति बन रही है. इसमें सामान्‍य प्रशासन विभाग को ध्‍यान देने की आवश्‍यकता है.

          श्री कमलेश्‍वर पटेल--  माननीय सभापति महोदय, हम समझते हैं पूरे प्रदेश में कानून व्‍यवस्‍था से लेकर सारे विभागों की व्‍यवस्‍था बनाने की जिम्‍मेदारी सामान्‍य प्रशासन विभाग की है. अगर लाइन आर्डर ठीक नहीं है, अनुविभागीय अधिकारी से लेकर अगर आप निचले स्‍तर से बात करें, डिप्‍टी कलेक्‍टर जो अनुविभागीय अधिकारी रहते हैं, जिले में जो कलेक्टर, अपर कलेक्टर होते हैं अगर इनकी मानसिकता ठीक है, इनके क्रियाकलाप ठीक है तब कानून व्यवस्था से लेकर के सारे विभाग की जो क्रियान्वयन एजेंसी हैं वह बहुत अच्छे से काम करती हैं. जिलों में खण्डस्तरीय जो अधिकारी हैं वह राजस्व का पूरा काम देखते हैं वहां पर बिना लेन देन के कोई काम नहीं होता, जिला पंचायतों में आप चले जाईये. जनता का प्रतिनिधि बोलता रहे लेकिन करेंगे वही जब दक्षिणा पहुंच जायेगी. बिना लेन देन के कोई काम नहीं होता. यह हालत पूरे प्रदेश में है. मुख्यमंत्री बहुत अच्छे हो सकते हैं. मंत्री जी बहुत अच्छे हो सकते हैं परंतु व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी सरकार की है.

          श्री लाल सिंह आर्य-- माननीय सभापति महोदय, कमलेश्वर जी अच्छा बोल रहे हैं लेकिन प्रदेश के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर टिप्पणी करना एक कर्मचारी विरोधी कदम है इसलिये सभी को चिह्नांकित न करें.

          सभापति महोदय- मंत्री जी जब आप विभाग की मांगों पर जवाब दें उस समय बोल लेना.

          श्री कमलेश्वर पटेल--सभापति महोदय, बहुत अच्छे अधिकारी और कर्मचारी भी हैं. हमारे जिले में कलेक्टर अच्छा काम कर रहे थे उनको हटा दिया. अभी जिस कलेक्टर की पदस्थापना मेरे जिले में की गई है उनकी पदस्थापना कई वर्षों तक कार्पोरेशन में रही है इसलिये उनको ज्यादा जानकारी जिले की नहीं है. जो अच्छे अधिकारी या कर्मचारी हैं उसका उदाहरण भी आप देख लीजिये. हाल की घटना है बालाघाट में किसी के खिलाफ में कार्यवाही कर दी तो वहां से आईजी, एसपी सबका स्थानांतरण कर दिया. सबको हटा दिया. ऐसा नहीं होना चाहिये अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी अच्छा कार्य कर रहा है चाहे वह मंत्रालय का हो या जिले का हो उनको सरकार को प्रशस्ति पत्र देना चाहिये. परंतु दु:ख के साथ में कहना पड़ता है कि प्रशस्ति पत्र ऐसे लोगों को मिलता है जो सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार में संलिप्त हैं. जो उल्टे काम करते हैं और इसी से हमको समझ में आता है कि हम कितने आनंद में हैं. आनंद मंत्रालय में आनंद हो सकता है, खेल कूद कराने के लिये सरकार ने प्रावधान भी कर दिया, आनंद उत्सव भी सभी गांव में मनाया गया परंतु अगर आप देखें कि यदि गरीबों को समय पर खाद्यान नहीं मिल रहा है, उनका निराश्रित पेंशन में नाम नहीं है, गरीबी रेखा में नाम नहीं है तो किस बात का आनंद, बिजली के बिल के कारण लोग परेशान है किस बात का आनंद. हर विभाग में यदि  प्रबंध संचालक से लेकर के ऊपर के स्तर पर जो आईएएस-डिप्टी कलेक्टर हैं इन्हीं की सबसे ज्यादा जिम्मेदारी है. यह भी सुनने को मिलता है कि कलेक्टर कई बार जिले में पदस्थापना करने के लिये भी लेन देन करते हैं. हमारे जिले में आज  अपर कलेक्टर नहीं है, कई डिप्टी कलेक्टर के पद रिक्त हैं, और ऐसे ही हालात पूरे प्रदेश में है इसलिये सभापति महोदय मेरा आपके माध्यम से सामान्य प्रशासन मंत्री जी से निवेदन है कि जो भी डिप्टी कलेक्टर के रिक्त पद हैं, तहसीलदार के पद रिक्त हैं, आरआई के पद रिक्त हैं, शिक्षक हैं, डाक्टर्स हैं यही सब जिले में सारी प्रक्रिया का निर्वहन यह लोग सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से ही करते हैं. जिन संस्थाओं में आज पद रिक्त हैं मंत्री जी उनकी पूर्ति होना चाहिये क्योंकि जब तक अधिकारी और कर्मचारी पदस्थ नहीं होंगे तो योजनाओं का क्रियान्वयन कराने में भी बहुत दिक्कत आती है.

          माननीय सभापति महोदय, लोक सेवा गारण्टी प्रदेश में लूट सेवा गारण्टी में बदल गई है. हमने सारी योजनाओं को लोक सेवा गारण्टी योजना से जोड़ दिया है. परंतु काम वही होता है, लोक सेवा गारण्टी में भले ही आप आवेदन लगा दें, इसकी समय सीमा भी निर्धारित है परंतु जब तक  वहां पर जाकर के चढौती नहीं चढ़ायेंगे तब तक फाईल नहीं हिलती तब तक न्याय नहीं मिलता.

          श्री सुरेन्द्र पटवा, राज्यमंत्री संस्कृति -- माननीय सभापति महोदय, माननीय सदस्य द्वारा लूट सेवा बोला गया है. इसको विलोपित करना चाहिये.

          श्री कमलेश्वर पटेल-- मंत्री जी, ऐसा है. आपको इसकी चिंता करनी चाहिये. मुझे मालूम है कि लोक सेवा नाम है परंतु यह लोक सेवा लूट सेवा की तरह हो गया है. आपने लोक सेवा गारण्टी बनाई बहुत अच्छी है, हम भी इसका स्वागत करते हैं परंतु उसका सही ढंग से पालन तो हो. मुख्यमंत्री आनलाइन में कितने लोगों ने आवेदन देकर के रखा है, उसकी क्या स्थिति है. लाखो की संख्या में आवेदन पेंडिंग है. वहां पर एक कम्प्यूटर आपरेटर बैठा दिया है वह अटेण्ड करता है, रिप्लाई देते रहते हैं लेकिन कोई क्रियान्वयन नहीं होता है. यही स्थिति है. कई जगह तो लोक सेवा गारण्टी का भवन नहीं है, यदि भवन है तो वहां पर कर्मचारी नहीं है. इसलिये मेरा आपके माध्यम से निवेदन है कि जो संस्थायें आपने बनाई हैं उनका सही ढंग से क्रियान्वयन हो.

          माननीय सभापति महोदय, हमारे जो अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी हैं आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, इनकी संपत्ति का विवरण भी आना चाहिये. बातें तो कई होती हैं मंत्रियों-विधायकों की संपत्ति की विवरण आना चाहिये. हम लोग तो दे देते हैं किंतु इन आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, अधिकारियों की संपत्ति का विवरण सरकार के पास में होना चाहिये इसमें हमें अभाव नजर आता है. बहुत सारे अधिकारी और कर्मचारी प्रदेश में ऐसे भी हैं जो कि बहुत निष्ठा भाव से आम जनता को, जनतिनिधियों को, जो जिसकी जिम्मेदारी है, बहुत अच्छे तरीके से उसका निर्वहन करते हैं. जो व्‍यवस्‍थाएं हैं, जो प्रावधान है, उसका सही ढंग से क्रियान्‍वयन नहीं होता है. अच्‍छे काम करने वाले हैं, उनको सम्‍मान देने की बजाए उन्‍हें एक किनारे कर देते हैं. कई बार हमने यह भी देखा है कि माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय भी बहुत बढि़या चालाकी से जो मंत्री उनके गुडविल में नहीं हैं वहां ऐसे अधिकारी बैठा देते हैं जिससे उनकी न चले. यह सारी चीजें हम समझते हैं कहीं न कहीं प्रदेश की जनता इसको सफर कर रही है. आम जनता को न्‍याय मिलने में कठिनाई हो रही है. मेरा निवेदन है कि मध्‍यप्रदेश का सबसे महत्‍वपूर्ण विभाग समान्‍य प्रशासन विभाग है, जिसके माध्‍यम से सभी विभाग संचालित होते हैं. मुझे पूरी उम्‍मीद है कि अच्‍छी व्‍यवस्‍था बनाएंगे, जो कमियां हैं, उनको दुरूस्‍त करेंगे और जो मैंने बोला है, उसको गलत तरीके से नहीं लेंगे, उसको अच्‍छे तरीके से लेंगे. सभापति महोदय मेरा आपके माध्‍यम से यही निवेदन है. खासकर के जहां तक प्रोटोकॉल की बात की है, तो हम जनता के चुने हुए प्रतिनिधि होते हैं, हम समझते हैं. हमारा पांच साल और सरकारी अधिकारी के कर्मचारियों का पूरा सर्विसकाल बराबर होता है, इसका विशेष ध्‍यान रखें, हम लोग जनता की सेवा के लिए 24 घंटे लगे रहते हैं, रात में भी फोन आ जाता है, सुबह से लेकर रात तक हम लोग कार्य में लगे रहते हैं और जो कानूनी व्‍यवस्‍था है, जो संवैधानिक व्‍यवस्‍था है, इसकी खिल्‍ली नहीं उड़ना चाहिए. सभापति महोदय, मेरा माननीय मंत्री से विशेष आग्रह है कि वे ऐसी व्‍यवस्‍था बनाएंगे. बजट में आपने बहुत सारी व्‍यवस्‍थाएं की हैं, उसका सही ढंग से क्रियान्‍वयन होना चाहिए और आनंद मंत्रालय सिर्फ आनंद मंत्रालय तक ही सीमित न रहे, वह हम सारे लोग सत्‍ता पक्ष और विपक्ष सभी इसको महसूस करें, बहुत बहुत धन्‍यवाद.

          सभापति महोदय - मंत्री जी यह सुनिश्चित करें कि प्रोटोकॉल का पालन होना चाहिए, आप इसके लिए  पुन: सर्कुलर निकाले.

          राज्‍य मंत्री, सामान्‍य प्रशासन विभाग (श्री लाल सिंह आर्य) - सभापति जी हां.

          श्री पुष्‍पेन्‍द्र नाथ पाठक (विजावर) - माननीय सभापति महोदय, मैं सामान्‍य प्रशासन विभाग, सामान्‍य प्रशासन से संबंधित विभाग एवं विमानन विभाग की मांग संख्‍या 1, 2 एवं मांग संख्‍या 65 के समर्थन में अपनी बात आपके समक्ष प्रस्‍तुत करना चाहता हूं. शासन की कार्यप्रणाली में उत्‍तरोत्‍तर प्रभावी और जनहितकारी व्‍यवस्‍था बने, सुशासन की ओर हमारी शासन व्‍यवस्‍था चले इस‍के लिए सामान्‍य प्रशासन विभाग कार्यरत रहता है. भारतीय इतिहास के स्‍त्रोत चाहे वे ज्ञात हों, अल्‍पज्ञात हों, लिखित हों, अलिखित हों या श्रुति आधारित हों. इतिहास में अवध नरेश रघुकुल तिलक दशरथ नंदन राजाराम का उल्‍लेख मिलता है. सुशासन के प्रतिमान के रूप में रामराज्‍य की व्‍याख्‍या की जाती है, जब भी किसी उल्‍लेखनीय घटना का जिक्र होता है, जब भी कोई जनता के हित की बात होती है तो उसकी रामराज्‍य से तुलना की जाती है. किसी भी शासन व्‍यवस्‍था में रामराज्‍य की तरफ बढ़ना, एक तरह से प्रतिमान होता है और उस मानदंड को प्राप्‍त करने की कोशिश प्रत्‍येक राज्‍य शासन व्‍यवस्‍था को करना चाहिए. मध्‍यप्रदेश की शासन व्‍यवस्‍था इस दिशा में कार्यरत रहती है, इसके लिए मैं शासन के इन विभागों की मांग के समर्थन में अपने कुछ विचार व्‍यक्‍त करना चाहता हूं. वर्तमान में संवैधानिक व्‍यवस्‍था के आधार पर शासन प्रशासन का कार्यभार चलाना सामान्‍य प्रशासन विभाग की जिम्‍मेदारी है. इसके लिए जो उल्‍लेखनीय काम हुए हैं, उनमें आरसीवीपी नरोन्‍हा प्रशासन अकादमी के नवीन प्रशिक्षण के द्वारा प्रशासकीय अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने की निरंतर प्रक्रिया का चलना, मुझे एक उल्‍लेखनीय घटना क्रम लगता है, इसके लिए मैं विभाग की मांगों का समर्थन करता हूं. राज्‍य शासन की सेवाओं में महिलाओं की भागीदार बढ़ाने के प्रयास हुए हैं. कल चूंकि अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस है इसलिए इसका मैं विशेष रूप से आज उल्‍लेख करना चाहता हूं. राज्‍य शासन ने अपनी सेवा में 33 प्रतिशत का आरक्षण महिलाओं को देने के लिए अपने कदम आगे बढ़ाए हैं. इसमें वन विभाग को छोड़कर अन्‍य विभागों में जो 33 प्रतिशत का आरक्षण होगा, इससे महिलाओं की उपस्थिति प्रशासन में बढ़ेगी.यह अपने आप में उल्लेखनीय  उपलब्धि मध्यप्रदेश के प्रशासनिक  अमले के लिये मानी जायेगी.  स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत का  आरक्षण देकर  मुख्यमंत्री,  श्री शिवराज सिंह चौहान जी ने  जो प्रदेश में क्रांतिकारी  कदम उठाया है,  उसका यह नतीजा है कि  अपने यहां  सामाजिक परिवेश में  महिलाओं की जो कुल  सीमा होती थी,  वह उनके चूल्हे-चौके से  बढ़कर  आंगन में आकर खत्म हो जाती थी,  उनकी सीमाओं को विस्तार दिया है.  उनको इतना बड़ा खुला आकाश दिया है, जिससे  सोचने समझने में  और प्रशासन के कामों में  हिस्सेदारी बढ़ाने में महिलाओं की  भागीदारी बढ़ी है.  उसका लाभ निश्चित रुप से  हमारे सामाजिक उत्थान की दिशा में  बढ़ा है,  इसके लिये मैं सामाजिक  उन्नति के लिये  किये गये प्रयास  के  लिये सामान्य प्रशासन विभाग  की प्रशंसा करता हूं. लोक सेवा गारंटी के अंतर्गत  अनेक महत्वपूर्ण काम हुए हैं.  सबसे बड़ा  विशेष अभियान जो हुआ है,  प्रमाण पत्रों को लेकर हुआ है.  जहां तक कि मुझे अपने स्कूल के दिनों  की याद है,  जब भी हमें किसी सर्टिफिकेट  की जरुरत रहती थी, तो  अपने सर्टिफिकेट्स को एप्रूव्ह कराने के लिये गजेटेड ऑफिसर की  खोज में  हमको भागना पड़ता था,  तमाम तरह के  और कागजों को  प्राप्त करने के लिये  तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, लेकिन मुझे इस उपलब्धि को बताते हुए हर्ष  हो रहा है कि  जाति प्रमाण पत्र  के लिये 1.25 करोड़  से ज्यादा आवेदन  प्राप्त  होने  के विरुद्ध  1.13  करोड़ का  विभाग ने निराकरण किया है. यह उपलब्धि महत्वपूर्ण है. स्थाई  निवास प्रमाण पत्रों  की बात करें, तो 70,945  आवेदन पत्रों के विरुद्ध 64097   आवेदनों का समाधान हुआ है, यह उल्लेखनीय उपलब्धि मैं विभाग की कह सकता हूं.  आय प्रमाण पत्र के मामले में भी  1,07501  आवेदनों के विरुद्ध 1,04293  आवेदनों का निराकरण हुआ है.  यह एक प्रशासनिक क्षमता की उपलब्धि  के लिये मैं इसको  उल्लेखित कर सकता हूं.  सामान्य प्रशासन विभाग ने  मंथन,2014 के माध्यम से  7 समूह में चर्चा  करके 27  और 28 सितम्बर,2014  को एक उल्लेखनीय  ऐसा काम किया था,  जिससे  प्रशासनिक  जमावट के लिये  निश्चित ही  मुझे इसमें  अच्छा प्रयास हुआ   प्रतीत होता है.  विकासखण्ड स्तर  पर लोक कल्याण शिविरों का  आयोजन हुआ, जो लगातार जारी है.  स्वराज मिशन के माध्यम से  इस तरह के आयोजन से  जनता को बहुत लाभ हुआ है और मध्यप्रदेश की जनता  अपने अपने कामों को लेकर, अपनी परेशानियों को लेकर  जो निराकरण  इसमें प्राप्त करती है,  इससे उन्हें जो संतोष प्राप्त होता है,   मुझे लगता है कि मध्यप्रदेश की सरकार   इसके लिये बहुत ही ज्यादा जनता की ओर से  जनता की  कृतज्ञता को प्राप्त  करने की हकदार है. प्रत्येक मंगवार को  जन सुनवाई होती है.  जन सुनवाई में लगातार जो  उसके प्रति लोगों का विश्वास बढ़ा है,आस्था  बढ़ी है,  चाहे वह जिला स्तर के कार्यालय हों  अथवा विकास खण्ड स्तर के कार्यालय हों,  उनमें जनता की उमड़ती हुई भीड़ से  ही यह अंदाज  लगता है कि  इस व्यवस्था के प्रति  जनता के मन में एक विश्वास  है  और जनता को  उसमें अपने  समाधानकारक  नतीजे प्राप्त होते हैं.

                   सभापति महोदय, परख के माध्यम से प्रत्येक माह के तीसरे  गुरुवार को  आम लोगों की मूलभूत आवश्यकताओं के लिये मुख्यमंत्री  स्वयं और  मुख्य सचिव स्वयं बैठकर वीडियो कांफ्रेंसिंग  के माध्यम से  चर्चा करते हैं, इसके भी नतीजे अच्छे आये हैं.  यह भी प्रदेश  की जनता के लिये  एक सुखदायी कदम साबित हुआ है.  स्व-अभिप्रमाणित, जो भी प्रमाण पत्र होते हैं, उनको जारी करने में जो सरलीकरण  हुआ है, उसका लाभ छात्रों को मिला है,  विशेष करके छात्र,छात्राओं  को प्रवेश के समय ही  स्कूलों के द्वारा जाति  प्रमाण  पत्र दिये जाने की जो व्यवस्था बनाई गई है, यह बहुत उल्लेखनीय है, क्योंकि  जब विद्यार्थी जीवन में  तो  बच्चों को  समझ में नहीं आता है कि उनके लिये प्रमाण पत्रों  की क्या आवश्यकता है, लेकिन कालान्तर में जब वे  परीक्षाएं उत्तीर्ण करके    प्रतियोगिता की दुनिया में आगे बढ़ते हैं, तो  उनको उन प्रमाण पत्रों की  आवश्यकता रहती है, तब उन्हें ध्यान   में आता है कि उनके साथ  कितनी सरलता के व्यवहार से यह सर्टिफिकेट प्राप्त हो गये हैं.  एक और उल्लेखनीय  बात है. कृषि कर्मण  अवार्ड की  तो चर्चा  हमने बहुत सुनी है, लेकिन  सामान्य प्रशासन विभाग में भी  केन्द्र सरकार से पुरस्कार मिले हैं.  भारत सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन  मंत्रालय के  कार्मिक एवं प्रशिक्षण  विभाग के द्वारा  2015 में  दो पुरस्कार  मध्यप्रदेश की प्रशिक्षण अकादमी  को मिले हैं,  मैं इसके लिये  इस विभाग  का अभिनन्दन करना चाहता हूं. प्रशिक्षण में नवाचार के राष्ट्रीय  उत्कृष्टता  पुरस्कार,  प्रदेश के दूरस्थ अंचलों में  गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिये विद्या परियोजना का शुभारंभ हुआ है, इसके लिए मिला है. मैं इसके लिए विभाग के मंत्री एवं मुख्‍यमंत्री जी का अभिनन्‍दन करता हूँ.

          माननीय सभापति जी, दिल्‍ली स्थित मध्‍यप्रदेश भवन और मध्‍यांचल भवन की व्‍यवस्‍थाएं प्रभावी रूप से ठीक हुई हैं. इस सदन के सभी माननीय सदस्‍यों का वहां जाना होता है और पूरे सदस्‍यों को इसके लिए विभाग को धन्‍यवाद और आभार व्‍यक्‍त करना चाहिए. एक और उल्‍लेखनीय उपलब्धि भी मध्‍यांचल भवन के लिए है कि सितम्‍बर, 2015 में प्रधानमंत्री और केन्‍द्रीय मंत्रिमण्‍डल के कई सदस्‍यों के द्वारा वहां 5 दिवसीय बैठक हुई थी, जो अपने आप में उल्‍लेखनीय है, उसमें सम्मिलित होने वाले हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी और मंत्रियों ने इसकी व्‍यवस्‍था की सराहना भी की है.

          सभापति महोदय, एक विशेष बात अनेकानेक प्रकार के पुरस्‍कार प्रदान कर सामाजिक सरोकार की दिशा में सामान्‍य प्रशासन विभाग ने जो महत्‍वपूर्ण काम किए हैं. मैं उनका भी यहां उल्‍लेख करना चाहता हूँ. जो अशोक चक्र श्रृंखला पुरस्‍कार होते हैं, भारत सरकार से पुरस्‍कृत जो मध्‍यप्रदेश के निवासी होते हैं, उनको मध्‍यप्रदेश की सरकार भी अपने विभाग के माध्‍यम से पुरस्‍कृत करती है और उन्‍हें इसके लिये भूमि के लिए कुछ कम्‍पनसेशन देती है. इस प्रकार के पुरस्‍कारों से मध्‍यप्रदेश के निवासियों की हौंसला-अफजाही होती है, इसके लिये मैं विभाग के प्रति आभार व्‍यक्‍त करता हूँ. राज्‍य स्‍तरीय वीरता पुरस्‍कार, जिसमें 25, 15 और 10 हजार रूपये की व्‍यवस्‍था है, राज्‍य स्‍तरीय महाराणा प्रताप शौर्य पुरस्‍कार, इसके अलावा सन्‍तों, महापुरुषों के नाम पर भी पुरस्‍कार देने की व्‍यवस्‍था विभाग ने की है, जिसमें कबीरदास जी महाराज, शंकाराचार्य जी, गुरुनानक जी, गौतम बुद्ध जी और रहीम के नाम पर जो पुरस्‍कार हैं, यह भी अपने आप में सामाजिक सरोकार की दृष्टि से किया गया महत्‍वपूर्ण काम है, इसके लिए मैं विभाग की सराहना करता हूँ और उनके द्वारा की गई मांगों का समर्थन करता हूँ. साम्‍प्रदायिक उपद्रवों की रोकथाम और सौहार्द्र वृद्धि के लिये भी पुरस्‍कारों की घोषणा हुई, उसके लिये भी मैं विभाग की मांगों के समर्थन में अनुशंसा करना चाहता हूँ.

          सभापति महोदय, मांग संख्‍या 65 में विमानन विभाग की कई बातें इसमें आई हैं. सामान्‍यत: विभाग ने यह निर्धारित किया है कि लगभग सभी जिला मुख्‍यालयों पर हवाई पट्टियों का निर्माण हो. वास्‍तव में, आज इसकी जरूरत भी है क्‍योंकि धीरे-धीरे हवाई परिवहन बढ़ा है. कुछ यह जानकारी मिली है कि झाबुआ, पन्‍ना, पचमढ़ी एवं खरगौन की अनुपयोगी हवाई पट्टियों की जो स्थिति है, उनको उपयोगी बनाया जायेगा तो यह हमारे लिये एक उपलब्धि की बात होगी और जितने जिले अभी वंचित हैं, वहां पर भी यदि हवाई पट्टी बनेगी तो एक अच्‍छा कार्य हो सकता है. हमारे गृह नगर नौगांव में हवाई पट्टी सातवें दशक से कार्यरत् रही है. मैं माननीय मंत्री जी का ध्‍यान इस ओर आकर्षित करना चाहूँगा कि इस हवाई पट्टी में, मैंने अपने बचपन में वहां हवाई जहाज उतरते देखें हैं, लेकिन अब वह भारतीय रक्षा मंत्रालय के आधिपत्‍य में आ गई है. यदि मध्‍यप्रदेश सरकार, केन्‍द्र सरकार से चर्चा करके इसका उन्‍नयन करायेगी तो अच्‍छा होगा. यह छतरपुर जिला मुख्‍यालय से 20 किलोमीटर की दूरी पर है और हम इसको भी संचालित करेंगे तो हमारे लिये एक उपलब्धि का काम होगा. खजुराहो, विश्‍व स्‍तर का पर्यटन स्‍थल है. जो कि मेरे छतरपुर जिले में स्थित है, जिसके लिये मैं स्‍वयं को गौरवान्वित महसूस करता हूँ, लेकिन वहां अभी केवल दिल्‍ली से कनेक्टिविटी है. यदि विमानन विभाग केन्‍द्र के उड्डयन मंत्रालय से सम्‍पर्क करके अपनी ओर से यह प्रयास करे कि कोलकाता, मुम्‍बई, चेन्‍नई, इन्‍दौर एवं बैंगलोर आदि स्‍थानों से भी जोड़कर खजुराहो को कुछ महत्‍वपूर्ण स्‍थान देंगे. मेरा ख्‍याल है कि पर्यटन मंत्री जी और श्री लाल सिंह आर्य जी, दोनों इस बात का समन्‍वयन करेंगे तो हमें निश्चित रूप से लाभ होगा. यह पर्यटन की दृष्टि से बहुत महत्‍वपूर्ण मांग है.    

          सभापति महोदय, मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि विमानन, विभाग सामान्‍य प्रशासन विभाग और सामान्‍य प्रशासन से संबंधित अन्‍य विभागों के संबंध में, जो मांगें आई हैं, उनका भरपूर समर्थन करता हूँ और कटौती प्रस्‍तावों के माध्‍यम से जो माननीय सदस्‍यों ने अनावश्‍यक फिजूल बातें की हैं, उनको मैं निरस्‍त करते हुए, यह चाहूँगा कि सारी मांगों को माना जाये. आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          डॉ. गोविन्‍द सिंह (लहार) - माननीय सभापति महोदय, मैं मांग संख्‍या 1, 2 एवं 65 का विरोध करता हूँ और कटौती प्रस्‍तावों का समर्थन करता हूँ. सामान्‍य प्रशासन विभाग का नियंत्रण समूचे विभागों पर रहता है और मध्‍यप्रदेश सरकार की नीति, रीति, कानून-कायदे जितने भी बनते हैं, वे सामान्‍य प्रशासन के माध्‍यम से और  मंत्रिमण्‍डल के माध्‍यम से बनाये जाते हैं. अभी मैं कहना चाहता हूं कि आजादी के समय जब राज्‍यों का, रजवाड़ों का विलय हुआ उनके विलय का मध्‍यप्रदेश गवाह है. ग्‍वालियर, छत्‍तीसगढ़, होल्‍कर स्‍टेट यह सब मिलाकर उस समय तय हुआ था कि कौन-कौन से विभागों में, कौन-कौन से स्‍थानों में कौन-कौन सी सुविधाएं दी जाएंगी. उसके तहत मध्‍यप्रदेश में हाईकोर्ट जबलपुर को मिला, पब्लिक सर्विस कमीशन इन्‍दौर को मिला और राजस्‍व मंडल, परिवहन और एक्‍साइज इन तीनों विभागों को तय किया गया कि य‍ह विभाग ग्‍वालियर में रहेंगे. परंतु मध्‍यप्रदेश की सरकार द्वारा राजस्‍व मंडल को उजाड़ने का काम प्रारंभ कर दिया गया है. इसके बारे में मैं कहना चाहता हूं कि यदि राजस्‍व मंडल में एक, दो अधिकारी गड़बड़ कर रहे हैं, भ्रष्‍टाचार कर रहे हैं तो उसमें सुधार की आवश्‍यकता है. लेकिन जो आजादी के समय एग्रीमेंट हुआ था प्रदेश की राजधानी भोपाल को बनाने का तो भोपाल राज्‍य को राजधानी मिली. यदि राजस्‍व मंडल की आपको जरूरत है तो आप ज्‍यूडीशियल के जजों को बैठा सकते हैं ताकि हमें न्‍याय मिले सके. लेकिन एक दो लोग यदि भ्रष्‍टाचार फैलाएं उसके कारण आप आयोग गठित करके राजस्‍व मंडल राजस्‍व विभाग के तहत समाप्‍त कर दें जो आपका षड्यंत्र है, वह उचित नहीं है. ग्‍वालियर संभाग के लिए यह मांग बहुत जरूरी है. यह हो सकता है कि सीधे एस.डी.एम. के द्वारा जो फैसले लिखे जाते हैं, कलेक्‍टर के द्वारा थ्रू प्रॉपर चैनल पहुंचे, सीधे न पहुंचे उस पर संशोधन किया जा सकता है. लेकिन उसको उजाड़ने का काम ग्‍वालियर के संभाग के आठ जिलों के लिए कष्‍टदायक होगा. इसके साथ मैं कहना चाहता हूं कि अभी अनुकम्‍पा नियुक्ति के बारे में सिसौदिया जी ने लंबे चौड़े भाषण दिए. कांग्रेस की दस साल की सरकार रही, मैं भी उसमें मंत्री था. उसमें साफ प्रावधान था कि अगर कोई टाइपिस्‍ट नहीं है तो उसे तीन वर्ष की छूट दी जाती थी ताकि वह टायपिंग सीख लें क्‍योंकि उस समय कम्‍प्‍यूटर ज्‍यादा चलता नहीं था यदि तीन वर्ष तक टायपिंग नहीं सीखी होगी तो उनकी सेवा समाप्‍त कर सकते थे. इस डर के कारण सब लोग सीख लिया करते थे. इसी प्रकार आपने अध्‍यापक वर्ग के लिए कर दिया अध्‍यापक में अगर डी-एड है तो अध्‍यापक अनुकम्‍पा नियुक्ति के लिए हर जिलों में तमाम प्रकरण पडे़ हैं. लेकिन उसमें आपने डी-एड आवश्‍यक कर दिया है परंतु अब उसे पता तो रहता नहीं है कि हमारे पिताजी मरने वाले हैं तो हम बी.एड., डी-एड कर लें. यह सारे नियम अनुकम्‍पा नियुक्ति में बाधक हैं और अनुकम्‍पा नियुक्ति के प्रकरण के कारण जिले में जगह खाली है. इसे जिले में ही कलेक्‍टर स्‍तर पर, विभागीय स्‍तर पर सॉल्‍व होना चाहिए. वहीं उसका निदान होना चाहिए. महीनों तक चक्‍कर लगाओ, वहां से कमिश्‍नर, कमिश्‍नर से भोपाल चक्‍कर लगाना पड़ता है. यहां क्‍यों इस परम्‍परा को आपने चालू रखा है. इसे जिला स्‍तर पर या भोपाल स्‍तर पर समाप्‍त करें. अगर पद खाली नहीं हैं तब यहां प्रदेश स्‍तर पर भेजे जाएं. इसी प्रकार आपने अभी एक और काम किया विवेकाधीन. विवेकाधीन मंत्रियों ने स्‍वयं बढ़ा ली. मनमाने तरीके से स्‍वेच्‍छानुदान मंत्रियों ने अपना बढ़ाकर लाखों रुपए कर लिया है और उसमें विधायक रहने के बाद दोनों-दोनों सुविधाएं प्राप्‍त कर रहे हैं. विधायकों की भी स्‍वेच्‍छा वृद्धि ले रहें हैं, मंत्रियों की भी ले रहे हैं. और अपने वेतन भत्‍ते बढ़ा रहे हैं. मंत्री इसका आंनद ले रहे हैं आनंद विभाग इसीलिए गठित किया गया है कि आंनद प्राप्‍त करें मैं आपसे कहना चाहता हूं कि जिस प्रकार कर्मचारियों के लिए वेतन आयोग बनता है उसी प्रकार मंत्री विधायकों के लिए भी बनना चाहिए मनमाने तरीके से अपने स्‍वयं फैसला करने वाले लोग नहीं हों वेतन भत्‍ते बढ़ें तो आयोग के द्वारा बढ़ें.

          वन मंत्री (डॉ. गौरीशंकर शेजवार)--माननीय सभापति महोदय, क्या उपाध्यक्ष जी पर आपको विश्वास नहीं है.

          डॉ. गोविन्द सिंह--हमारा तो आप पर भी विश्वास नहीं है.

          डॉ. गौरीशंकर शेजवार--उपाध्यक्ष जी उस समिति के अध्यक्ष थे और उस समय आपको इस बात को विरोध करना था.

          डॉ. गोविन्द सिंह--आप चुपचाप गटर-पटर कर लो.

          डॉ. गौरीशंकर शेजवार--अच्छा आप बढ़ा हुआ वेतन मत लीजिए. आप यह घोषणा कर दीजिए आपको पसंद नहीं है तो आप घोषणा कर दें.

          डॉ. गोविन्द सिंह--मैंने मंत्रियों के लिए कहा है जिनके वेतन आपने मनमान बढ़ाए हैं, विधायकों का वेतन तो विधान सभा में आया है.

          चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी--माननीय सभापति महोदय, थोड़ा सा गटर-पटर का विश्लेषण कराएं.

          डॉ. गोविन्द सिंह--इसी प्रकार मैं कहना चाहता हूँ कि लोक सेवा आयोग में सदस्य कौन हैं इसकी भी समीक्षा योग्यता के आधार पर होना चाहिए. लोक सेवा आयोग के द्वारा डीएसपी, डिप्टी कलेक्टर और द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों की भर्ती की जाती है जो आगे जाकर प्रदेश को सम्हालते हैं. आपने वहां किन लोगों को बैठा दिया है अयोग्य लोगों को लोक सेवा आयोग का मेंबर बना रहे हैं जो कि आपकी विचारधारा के बारे में प्रश्न पूछते हैं. ऐसे लोगों को वहां भेजने का काम कर रहे हैं यह षडयंत्र आपका बंद होना चाहिए. अभी सिसौदिया जी चर्चा कर रहे थे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की पेंशन बढ़ा दी है. अब स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बचे कहां है. भिण्ड जिले में तो एक भी नहीं बचा है. पूरे मध्यप्रदेश से भी निकालेंगे तो 10-50 निकलेंगे. देश को आजाद हुए 72-73 साल हो गए हैं उसके बाद अब कितनी उम्र के होंगे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जो भी एक दो बचे होंगे (XXX)...

          श्री सतीश मालवीय--सभापति महोदय, यह फर्जी वाला काम तो आपके समय ही चलता था.

          चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी--माननीय सभापति महोदय, यह आपत्तिजनक बात है, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को आप फर्जी बता रहे हैं तो यह घोर आपत्तिजनक है(व्यवधान)

          श्री सतीश मालवीय-- यह आपत्तिजनक बात है, यह इनके जमाने की याद कर रहे हैं इनके समय में चलता था इनकी आदतें अभी गई नहीं हैं (व्यवधान)

          श्री के.के. श्रीवास्तव--माननीय सभापति महोदय, यह स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का अपमान कर रहे हैं (व्यवधान)

          डॉ. गोविन्द सिंह-- (XXX).

          श्री सतीश मालवीय--अरे आप अपने जमाने की थोड़ी बहुत बातें तो भूलो, कुछ तो भी बोले जाआगे (व्यवधान)

          चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी--डॉक्टर साहब बात मिर्च की नहीं है (व्यवधान)

          वित्त मंत्री (श्री जयंत मलैया)--सभापति महोदय, इस बात को कार्यवाही से निकाला जाए (व्यवधान)

          श्री के.के. श्रीवास्तव--कभी गटर-पटर, कभी मिर्चें कभी कुछ भी बोल रहे हैं यह स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का अपमान कर रहे हैं(व्यवधान)

          डॉ. गोविन्द सिंह--आपके कारनामों को उजागर कर रहे हैं (व्यवधान)

          डॉ. गौरीशंकर शेजवार--स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को फर्जी कहना यह अपमानजनक है.

          श्री सतीश मालवीय--आप स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का और मीसा बंदियों का अपमान कर रहे हो, इनको माफी मांगना चाहिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का अपमान कर रहे हैं (व्यवधान)

          सभापति महोदय--आप सभी लोग बैठ जाइए.इसे कार्यवाही से निकाला जाए.

          डॉ. गोविन्द सिंह--आपने पहले किया कि मीसा बंदियों को छह महीने में आधी पेंशन देंगे, आप बढ़ाते चले गए मीसा बंदियों को आज आपने 25 हजार रुपए कर दिया है जबकि पहले प्रावधान था कि...

          श्री सतीश मालवीय--गोविन्द सिंह जी आपका पेट क्यों दुख रहा है.

          श्री शंकरलाल तिवारी--गोविन्द सिंह जी आप तो सोशलिस्ट रहे हो आप तो इस तरह मत रो गाओ.

          डॉ. गोविन्द सिंह--पहले सुन तो लो कि क्यों कह रहे हैं.

          श्री शंकरलाल तिवारी--क्या सुन लें. पूरे देश को काला कर दिया था और 20-20 महीने लोग जेल में रहे. लोगों के जीवन खत्म हो गए और आप फालतू की बातें कर रहे हो.

          श्री कमलेश्वर पटेल--सभापति महोदय, मीसा बंदियों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को एक समान नहीं रखा जा सकता है. स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का दर्जा मीसा बंदी नहीं ले सकते हैं (व्यवधान)

          डॉ. गोविन्द सिंह--इसमें आप चार सौ बीसी कर रहे हो नकली लोगों को देने का काम कर रहे हो जो मीसा में गये नहीं जो कभी जयप्रकाश के आन्दोलन में रहे नहीं अब आपने उसमें प्रावधान कर दिया कि जो जेल में रहे में रहे हैं उनको प्रमाणित कर दें उनको भी हम देंगे. इसके नाम पर आप फर्जी नियुक्तियां कर रहे हैं.

          चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी--माननीय सभापति महोदय, कृपया सदस्य को बतायें कि अब लोकतंत्र सेनानी हैं न कि मीसा बंदी. नामकरण लोकतंत्र सेनानी है.

          डॉ. गोविन्द सिंह--यह जो संशोधन किया है उसका मैं विरोध करता हूँ.

          श्री कमलेश्वर पटेल--स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और मीसा बंदियों को एक बराबर नहीं रख सकते हैं सरकार ने इसी तरह का प्रावधान किया है इसकी भी हम निंदा करते हैं. स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देश को आजाद कराने वाले लोग हैं मीसा बंदी वह नहीं हैं मीसा बंदियों की उनसे तुलना नहीं की जा सकती है. सरकार की मानसिकता ठीक नहीं है.

          श्री के.के. श्रीवास्तव--उन्होंने आपातकाल से आजादी दी वे भी स्वतंत्रता सेनानी हैं. कांग्रेस ने काला अध्याय लिखा था. काले अध्याय के खिलाफ आजादी थी.

          श्री शंकरलाल तिवारी--स्वतंत्रता तो इमरजेंसी लगाकर चुरा ली गई थी. उन्हें लोकतंत्र सेनानी कहो.

          सभापति महोदय--तिवारी जी कृपा करके आप बैठिए.

          डॉ. गोविन्द सिंह--सभापति महोदय, लोकायुक्त में अध्यक्ष का पद खाली है इसी प्रकार सूचना अधिकारी के 10 में से 7 पद खाली हैं. पहले नेता प्रतिपक्ष न होने से यह पद नहीं भरे जा सकते थे अब नेता प्रतिपक्ष पदासीन हो गए हैं.

          श्री भंवर सिंह शेखावत-  माननीय सभापति महोदय, मेरा एक छोटा सा निवेदन है. अभी सदन में कुछ सदस्‍यों ने बहुत ही आपत्तिजनक टिप्‍पणियां की हैं. जिन स्‍वतंत्रता संग्राम सेनानियों की चर्चा हो रही है, आपातकाल में क्‍या हुआ था, इसकी जानकारी पूरे देश को है. किन लोगों को जेलों में बंद किया गया था, देश में पूरे संविधान को बलाय ताक रखकर, न वकील, न अपील, न दलील की स्‍थिति कर दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट के भी पावर छीन लिए गए थे. ....(व्‍यवधान)....

          श्री गोपाल परमार-  उस समय इंदिरा जी की हिटलरशाही देश में चल रही थी.

          सभापति महोदय-  गोविन्‍द सिंह जी, आप अपनी बात जारी रखिये.

          डॉ.गोविन्‍द सिंह-  मैं यह कहना चाहता हूं कि आपके लोग तो आंदोलनकारी थे, त्‍यागी पुरूष थे, महान लोग थे तो आपके लोग पेंशन क्‍यों ले रहे हैं. क्‍या आप लोग पेंशन के लिए जेल में गए थे ? मैं कहता हूं कि खाली पदों को तत्‍काल भरा जाए. आपकी सरकार के सुशासन में माननीय मुख्‍यमंत्री जी की जो घोषणायें हैं, उन घोषणाओं का पालन नहीं होता है. अखबारों में यह छपा है कि मुख्‍यमंत्री जी ने स्‍वयं बैठक में कहा था कि ''जब मेरी ही घोषणाओं का यह हाल है तो अन्‍य का क्‍या होता होगा''. माननीय मुख्‍यमंत्री जी और मंत्री अगर कोई घोषणा करते हैं तो सामान्‍य प्रशासन विभाग की यह ड्यूटी है कि वह कलेक्‍टर को इसे भेजे और वह इसका पालन करवाये. आप देखिये आपका सामान्‍य प्रशासन विभाग कैसे कार्य कर रहा है, जो घोषणायें मुख्‍यमंत्री ने नहीं की, जिसके बारे में उन्‍होंने कुछ बोला ही नहीं है, उस बारे में भी अफसर लिखकर दे देते हैं. आपके जो अफसर गलत जानकारी देते हैं, उन पर आपको नियंत्रण रखना चाहिए, लगाम लगानी चाहिए. आज तमाम पद खाली पड़े हैं. आपने पूरा प्रशासनिक तंत्र ही बर्बाद कर दिया है. जहां कहीं चले जाओ अस्‍पतालों में डॉक्‍टर नहीं, स्‍कूलों में मास्‍टर नहीं