मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

                   __________________________________________________________

 

चतुर्दश विधान सभा                                                                                                       त्रयोदश सत्र

 

 

फरवरी-मार्च, 2017 सत्र

 

सोमवार, दिनांक 6 मार्च, 2017

 

(15 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1938 )

 

 

[खण्ड-  13 ]                                                                                                                     [अंक- 9 ]

 

                   __________________________________________________________

 

 

 

 

 

 

 

मध्यप्रदेश विधान सभा

 

सोमवार, दिनांक 6 मार्च, 2017

 

(15 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1938 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.03 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

चालू/बंद नल-जल योजनाएं

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

        1. ( *क्र. 1761 ) श्री गोविन्‍द सिंह पटेल : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) नरसिंहपुर जिले की गाडरवारा विधान सभा क्षेत्र में कितनी नल-जल योजनाएं टंकी सहित एवं टंकी रहित स्‍थापित हैं, कितनी चालू एवं कितनी बंद हैं? (ख) जो बंद योजनाएं हैं उनके क्‍या कारण हैं? (ग) जो योजनाएं अभी तक चालू नहीं हुईं हैं एवं जो योजनाएं बंद हैं, उनका क्‍या कारण है?

        लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) 54 टंकी सहित एवं 37 टंकी रहित योजनाएं हैं, जिनमें से 56 योजनाएं चालू एवं 35 योजनाएं बंद हैं। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) ऐसी एक भी योजना नहीं है जो अभी तक चालू नहीं हुई है, जो योजनाएं बंद हैं, उनकी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है।

            श्री गोविन्‍द सिंह पटेल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में यह आया है कि 54 टंकी सहित एवं 37 टंकी रहित योजनाएं हैं, जिनमें से 56 योजनाएं चालू हैं एवं 35 योजनाएं बंद हैं. जो 56 योजनाएं चालू हैं, मैं उसके लिए मंत्री जी को धन्‍यवाद देता हूँ. लेकिन जो 35 योजनाएं बंद हैं, उनमें अधिकांश में कारण बताया है कि पाईप लाईन टूट-फूट होने के कारण बंद हैं. वे योजनाएं ऐसी हैं कि उनमें पाईप लाईन इतनी खराब डली थीं, वे योजनाएं चली ही नहीं हैं. जो मंत्री जी ने जवाब दिया है कि ऐसी कोई योजनाएं नहीं है, जो चालू नहीं हुई हैं तो जो 35 योजनाएं बंद हैं, उनमें से अधिकांश ऐसी हैं, जिनमें घटिया किस्‍म की पाईप लाईन डाली गई हैं, वे चालू नहीं हैं और पूरी पाईप लाईन टूट-फूट होना बताया है और कुछ योजनाएं ऐसी हैं, जिनमें अभी बिजली के कनेक्‍शन नहीं हुए हैं मतलब ट्रांसफार्मर नहीं लगे हुए हैं. ऐसी कम से कम 10 योजनाएं हैं. उदाहरण के तौर पर, ऊकासघाट, मेघमांकला और कान्‍धर गांव, इनमें मेरे पास जानकारी है कि ट्रांसफार्मर नहीं लगे हैं इसलिए बिजली कनेक्‍शन न होने के कारण वे योजनाएं बन्‍द हैं. जो योजनाएं टूट-फूट के कारण बन्‍द हैं, क्‍या उन योजनाओं को मंत्री जी चालू करवाएंगे ?       

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले-- निश्चित रूप से चालू कराएंगे और मैंने सभी विधायकों को और आपको भी पत्र भेजा है कि आपकी जो भी योजनाएं खराब पड़ी हैं उन सबको हम ठीक कराएंगे, चालू कराएंगे.

          श्री गोविन्‍द सिंह पटेल-- पाइप लाईन और बिजली के कारण जो भी योजनाएं बंद हैं आप उनको भी चालू करा दें और गर्मी में सभी पाइप लाइन चालू करा दें.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कोई भी ऐसी योजना हो जो पाइप की टूट-फूट की वजह से, बिजली की वजह से, या मोटर की वजह से खराब हो उन सबको हम सुधरवा देंगे.

          श्री गोविन्‍द सिंह पटेल-- धन्‍यवाद अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद मंत्री जी.

          पुलिसकर्मियों को कम्‍प्यूटर दक्षता प्रशिक्षण

[गृह]

2. ( *क्र. 4415 ) श्री शैलेन्‍द्र पटेल : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रदेश सरकार द्वारा पुलिसकर्मियों को कम्‍प्‍यूटर दक्षता प्रशिक्षण दिया जा रहा है? (ख) क्‍या पुलिसकर्मियों को कम्‍प्‍यूटर प्रशिक्षण के लिए किसी संस्‍था को नियत किया गया है? यदि हाँ, तो संस्‍था का ब्‍यौरा दें? यदि नहीं, तो किस माध्‍यम से प्रशिक्षण दिया जा रहा है? (ग) सीहोर जिले में अभी तक कितने पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है और कितने पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाना शेष है और कब तक प्रशिक्षित किया जाएगा? (घ) शासन द्वारा पुलिसकर्मियों के कम्‍प्‍यूटर प्रशिक्षण पर विगत दो वर्ष में कितनी राशि व्‍यय की जा चुकी है?

गृह मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : (क) जी हाँ। (ख) जी हाँ। भारत सरकार के मिशन मोड सी.सी.टी.एन.एस. प्रोजेक्ट के अंतर्गत मध्यप्रदेश के सभी 51 जिले एवं 03 रेल इकाइयों में पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण हेतु एच.सी.एल. (टी) कंपनी को नियत किया गया है। (ग) सीहोर जिले में 495 पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। शेष 278 पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया जाना है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। (घ) विगत दो वर्षों में पुलिसकर्मियों के कम्प्यूटर प्रशिक्षण पर भारत सरकार के मिशन मोड सी.सी.टी.एन.एस. प्रोजेक्ट के तहत् राशि रूपये 38,33,572/- (अड़तीस लाख तैतीस हजार पाँच सौ बहत्तर रूपये), राज्य अपराध अनुसंधान ब्यूरो के सामान्य बजट से राशि रूपये 1,33,813/- (एक लाख तैतीस हजार आठ सौ तेरह रूपये) का व्यय किया गया।

          श्री शैलेन्‍द्र पटेल-- अध्‍यक्ष जी, मैंने माननीय मंत्री जी से जो प्रश्‍न किया था वह यह था कि प्रदेश सरकार द्वारा पुलिसकर्मियों को कम्‍प्‍यूटर दक्षता प्रशिक्षण दिया जा रहा है. मेरा यह प्रश्‍न है कि आप दक्षता से क्‍या मायने रखते हैं, दक्षता का क्‍या मीनिंग है?

          श्री भूपेन्‍द्र सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कम्‍प्‍यूटर ट्रेनिंग के बारे में यह है कि पुलिस विभाग के अधिकारी और पुलिसकर्मी उसको समझें, कम्‍प्‍यूटर को चला सकें, उसकी ट्रेनिंग ले सकें यही दक्षता का प्रशिक्षण होता है और वह प्रशिक्षण चल रहा है.

          श्री शैलेन्‍द्र पटेल-- अध्‍यक्ष महोदय, कम्‍प्‍यूटर में 95 प्रतिशत जो लेंग्‍वेज होती है वह अंग्रेजी में है और हमारे विभाग के जो पुलिस कर्मचारी हैं खासकर जो सिपाही हैं बारहवीं से लेकर स्‍नातक तक उनकी क्‍वालिफिकेशन होती है. उनको अंग्रेजी का उतना अच्‍छे से ज्ञान नहीं होता है. उनमें से बहुत से सिपाही तो उम्रदराज भी हो गए हैं. होता यह है कि थानों में इंतजार किया जाता है कि कोई कम्‍प्‍यूटर जानने वाला सिपाही आएगा तब उसकी रिपोर्ट लिखी जाएगी. उन्‍हें ट्रेंड तो कर दिया है परंतु वह सिर्फ कम्‍प्‍यूटर चालू और बंद करना ही सीख पाए हैं क्‍योंकि कम्‍प्‍यूटर की लेंग्‍वेज हम जैसे लोगों को समझ में नहीं आती तो जिन लोगों ने कम्‍प्‍यूटर की पढ़ाई नहीं  की वे कैसे कर पाएंगे. ट्रेंड करना एक अलग विषय है. सिर्फ कम्‍प्‍यूटर चालू कर लेना, बंद कर लेना और एफ.आई.आर. लिख लेना अलग है. माननीय मंत्री जी एफ.आई.आर. लिखने के लिए भी थानों में इंतजार किया जाता है कि कोई सिपाही आएगा उसको एफ.आई.आर. लिखना आता है. बहुत से लोगों को तो वह भी नहीं आता है. मेरा दूसरा पूरक प्रश्‍न यह है कि जो आपने ट्रेनिंग दी है उसमें आप कह रहे हैं कि आपने उन्‍हें दक्ष कर दिया है लेकिन वह एफ.आई.आर. भी नहीं लिख पा रहे हैं . मैं यह पूछना चाहता हूं कि पी.एस.टी.एन. डाटा सर्च करने का क्‍या आश्रय है, क्‍योंकि यह भी कम्‍प्‍यूटर दक्षता से जुडा़ हुआ है. पी.एस.टी.एन. डाटा बड़ा महत्‍वपूर्ण होता है, उसे सर्च करने का क्‍या आश्रय है?

          श्री भूपेन्‍द्र सिंह-- अध्‍यक्ष महोदय, पहला तो जैसा माननीय सदस्‍य ने कहा है कि इसका प्रशिक्षण अंग्रेजी में होता है. तो यह सिर्फ अंग्रेजी में ही नहीं हिन्‍दी में भी होता है. जो सी.सी.टी.एन.एस. के माध्‍यम से होता है यह हिन्‍दी में ही होता है और दूसरा डाटा के बारे में आपने बताया है जो हमें इन्‍वेस्‍टीगेशन के लिए, बाकी जानकारी के लिए जिन डाटा की आवश्‍यकता होती है उस डाटा की कम्‍प्‍यूटर ट्रेनिंग से इसकी भिन्‍नता है. कम्‍प्‍यूटर ट्रेनिंग से इसका सीधा संबंध है.

          श्री शैलेन्‍द्र पटेल-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पी.एस.टी.एन. डाटा जो होता है वह मोबाइल से लोकेशन ट्रेस करने का होता है. मैं आपको उदाहरण के लिए कहना चाहता हूं कि शेहला मसूद हत्‍याकांड में भी जो बाहर से सी.बी.आई. टीम आई थी. उन्‍होंने भोपाल के 15 लाख मोबाइल यूजर में से लोगों को ट्रेस करके पर्दाफाश किया था. पी.एस.टी.एन. डाटा की दक्षता नहीं होने के कारण जो चोरी होती है, अपहरण होते हैं, बड़े अपराध होते है उन अपराधियों की लोकेशन नहीं मिल पाती है. हम सिर्फ एफ.आई.आर. तक ट्रेनिंग  देकर सीमित न रहें. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपसे आग्रह है कि सरकार इस प्रोग्राम में इतना पैसा खर्च कर रही है कम से कम हम उनको अच्‍छे से प्रशिक्षण दें ताकि जब मोबाइल गुमता है या किसी की लोकेशन ट्रेस करनी होती है तो जिला स्‍तर पर, सी.एस.पी. स्‍तर से नीचे के लोग नहीं कर पाते हैं. इस ओर सरकार क्‍या कदम उठाएगी या सिर्फ एफ.आई.आर. लिखने के अलावा बाकी जो काम है उसमें कैसे ट्रेंड करेगी, यह माननीय मंत्री जी ओर बता दें?

          श्री भूपेन्‍द्र सिंह - अध्‍यक्ष महोदय,  यह जो माननीय सदस्‍य पी.एस.टी.एन. डाटा के बारे में कह रहे हैं. यह डाटा सायबर सेल का कार्य है. यह कार्य थाने में नहीं होता है और इसके लिए हमारा जो मध्‍यप्रदेश का सायबर सेल है. वह काफी प्रभावी तरीके से काम कर रहा है और इसीलिए आपको भी जानकारी है कि इस पूरे सिस्‍टम के माध्‍यम से ही अभी बहुत बड़ी सफलता मध्‍यप्रदेश पुलिस को मिली है. एक पेरेलल एक्‍सचेंज चल रहा था जिसमें आतंकवादियों के कॉल ट्रांसफर किेए जाते थे यह पूरा एक राष्‍ट्रीय स्‍तर पर जो नेटवर्क चल रहा था उस नेटवर्क को ध्‍वस्‍त करने में मध्‍यप्रदेश पुलिस को सफलता मिली है.

अनुभाग सुसनेर को पूर्ण अनुभाग का दर्जा

[राजस्व]

3. ( *क्र. 2746 ) श्री मुरलीधर पाटीदार : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विगत 05 वर्षों में शासन द्वारा कौन-कौन से नवीन अनुभाग स्वीकृत किये गये हैं(ख) राजस्व अनुभाग के स्थायीकरण हेतु/पूर्ण अनुभाग बनाये जाने हेतु क्या मापदण्ड हैं एवं कौन-कौन से पद सृजित किये जाते हैं? (ग) अनुभाग सुसनेर कब से संचालित है? राजस्व अनुभाग सुसनेर में स्वीकृत एवं रिक्त पदों की जानकारी देवें? रिक्त पदों पर क्या व्यवस्था की गई है? (घ) क्‍या अनुभाग सुसनेर के स्थायीकरण हेतु/पूर्ण अनुभाग का दर्जा दिए जाने संबंधी कोई प्रस्ताव या मांग प्राप्त हुई थी? यदि हाँ, तो क्या कार्यवाही की गई? यदि नहीं, तो क्या स्वप्रेरणा से प्रशासनिक सुदृढ़ता व कार्यसुविधा को दृष्टिगत रखते हुए अनुभाग सुसनेर को पूर्ण अनुभाग का दर्जा दिया जावेगा? यदि हाँ, तो कब तक?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) :

            श्री मुरलीधर पाटीदार--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से आग्रह करना चाहता हूँ कि सुसनेर अनुभाग में 1978 से डिप्टी कलेक्टर को एसडीएम तो बना रखा है लेकिन उसका पद स्वीकृत ही नहीं है, न ही अनुभाग की बिल्डिंग स्वीकृत है न ही कोई स्टाफ स्वीकृत है इसके कारण वे तहसील के स्टाफ को अटैच कर लेते हैं जिससे तहसीलों की व्यवस्था भी चरमराती है. मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करना चाहता हूँ कि इसकी बिल्डिंग और स्टाफ वर्ष 1978 से स्वीकृत नहीं हुआ है तो कब तक स्वीकृत हो जाएगा ?

          श्री उमाशंकर गुप्ता--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं विधायक जी को धन्यवाद देता हूँ वास्तव में यह विसंगति है कि वर्ष यह अनुभाग 1978 में खुल गया और न ही पद स्वीकृत हुए न ही बिल्डिंग स्वीकृत हुई. विधायक जी के क्षेत्र में जल्दी कर देंगे लेकिन इस बहाने हम पूरे प्रदेश की जानकारी बुला रहे हैं जहां भी इस प्रकार के आफिस चल तो रहे हैं लेकिन विधिवत् उनके पद स्वीकृत नहीं हैं, भवन स्वीकृत नहीं हैं उन सबको हम टेक-अप करेंगे और पूरे प्रदेश में इसको ठीक करेंगे.

          अध्यक्ष महोदय--माननीय मंत्री जी इटारसी में भी ऐसा ही है, चार साल लगभग वहां भी हो गए हैं.

          श्री उमाशंकर गुप्ता--अध्यक्ष महोदय, मैं इसीलिए कह रहा हूँ कि पूरे प्रदेश में ही है, कई जगह है. पूरी जानकारी हम कलेक्टर से बुलवा रहे हैं और उन सबको करेंगे.

          श्री बाबूलाल गौर--माननीय अध्यक्ष महोदय, ऐसा क्यों हो रहा है, इतना विलंब क्यों हो रहा है.

          श्री मुरलीधर पाटीदार--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्यवाद कि उन्होंने इस प्रश्न को बहुत गंभीरता से लिया. मेरा आग्रह यह है कि जुलाई तक हमें तो स्टाफ मिल जाए  और बाकी प्रदेश में कार्यवाही चलती रहे.

          अध्यक्ष महोदय--यह तो मंत्री जी ने कह ही दिया है.

          श्री उमाशंकर गुप्ता--आपका तो मैंने कह ही दिया है कि आपका हम जल्दी कर ही देंगे जो ध्यान में आया है.

          श्री मुरलीधार पाटीदर--माननीय अध्यक्ष महोदय आपको एवं  माननीय मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्यवाद.

          श्री गोपाल परमार--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा इसी से संबंधित प्रश्न है कि जो अधिकारी आगर से सुसनेर व्यवस्था की दृष्टि से पहुंचा दिए गए, विगत छह महीनों से उन्होंने ज्वाइन नहीं किया. उनको निलंबित भी कर दिया गया तो क्या उनको बर्खास्त करने की कार्यवाही करेंगे  ?

          अध्यक्ष महोदय--यह प्रश्न इससे उद्भूत नहीं होता है.

          श्री गोपाल परमार--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह इसी की व्यवस्था से संबंधित है.

 

 

          लंबित सीमांकन प्रकरणों का निराकरण

[राजस्व]

4. ( *क्र. 629 ) श्री गिरीश गौतम : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रीवा जिले के मऊगंज, नईगढ़ी, मनगवां तहसीलों में सीमांकन के कितने आवेदन जनवरी, 2015 से प्रश्‍न दिनांक तक प्रस्‍तुत किये गये, तहसीलवार संख्‍या बताएं तथा कितने प्रकरणों का निराकरण किया गया? संख्‍या बताएं। (ख) लंबित सीमांकन प्रकरणों का निराकरण कब तक कर दिया जायेगा?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) रीवा जिले में तहसील मऊगंज नईगढ़ी, मनगवां में सीमाकंन आवेदनों की जानकारी निम्‍नानुसार है :-

 

तहसील का नाम

प्राप्‍त आवेदन

निराकृत आवेदन

मऊगंज

597

565

नईगढ़ी

130

103

मनगवां

296

275

 
 
 
 




 

 

(ख) जिन आवेदित भूमियों पर फसल नहीं लगी है, उनके सीमांकन की तिथि नियत है एवं फसल लगे खेतों का सीमांकन फसल कटने के बाद किया जायेगा।

          श्री गिरीश गौतम--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न के उत्तर में माननीय मंत्री जी ने जो निराकरण बताया है 565, 103, 275 तहसीलवार मऊगंज, नईगढ़ी और मनगवां का और बकाया 32, 28 और 21 हैं. सबसे पहले मैं यह निवेदन करना चाहूंगा कि हम सब जानते हैं कि कई बीमारियां दूसरे कारण से जनित होती हैं. जैसे कैंसर हुआ तो कहते हैं उसका कारण धूम्रपान है, तंबाकू है. कई बार जल-जनित बीमारियां पैदा होती हैं कई बार खाद्य प्रदूषण से होती हैं. उसी तरह से जो भी आपराधिक मामले होते हैं मैं 100 प्रतिशत की बात नहीं करता परन्तु जितने आपराधिक मामले होते हैं ज्यादातर राजस्व के कर्मचारियों के उल्टा-सीधा इंद्राज करने के कारण होते हैं. अधिकांशत: इसी बात के लिए होते हैं कि उनका डिमार्केशन ठीक से नहीं हुआ है. पटवारी क्या करता है क्या दर्ज करता है यह तो भगवान ही जानता है. मेरा आज ही एक तारांकित प्रश्न लगा था वह दुर्भाग्य से 46 (2) में परिवर्तित हो गया है, वह 11 नंबर पर है. मेरा उसमें यह प्रश्न था कि कुछ आदिवासी भाइयों को भू-अधिकार अभिलेख देना है. उसमें जवाब यह आया है कि उसमें नाला दर्ज है. जबकि उनके मकान 40-40, 50-50 साल से बने हैं लेकिन पटवारी साहब ने नाला दर्ज कर दिया है तो राजस्व में नियम यह है कि जहां नाला दर्ज होगा, शमशान दर्ज होगा या कब्रिस्तान दर्ज होगा उसको पट्टा नहीं दिया जाएगा.

          अध्यक्ष महोदय, मैं यह निवेदन कर रहा हूँ कि यह राजस्व कर्मचारियों और पटवारियों के कारण हो रहा है. जो शेष हैं इनको दिखवाने की आवश्यकता है. केवल इसी एक प्रश्न का जवाब माननीय मंत्री जी दे दें. यह जो डिमार्केशन पेडिंग हैं 32, 28 व 21 यह वर्ष 2015 के हैं या 2016 के हैं. मैंने वर्ष 2015 के पूछे थे. इसके बाद अनुमति मिल जाएगी तो एक प्रश्न और पूछ लूंगा.

          श्री उमाशंकर गुप्ता--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह जो शेष हैं उनकी सूची मेरे पास है. यह कब के हैं और कब इनका सीमांकन कर दिया जाएगा. इसका भी हमने टारगेट तय कर लिया है यह मैं सदस्य को उपलब्ध करा दूंगा.

          श्री गिरीश गौतम--माननीय अध्यक्ष महोदय, वैसे भी नियम है कि डिमार्केशन को छह महीने के भीतर करना है. इसीलिए मैंने प्रश्न पूछा था. माननीय मंत्री जी मुझे सूची दे देंगे उसके लिए उन्हें बहुत-बहुत धन्यवाद. परन्तु इसमें जल्दी से जल्दी निराकरण हो जाए क्योंकि जैसा मैंने निवेदन किया कि अधिकांश आपराधिक मामले लगभग 90 प्रतिशत इसी बात को लेकर होते हैं. उसमें सीमा चिह्न की गड़बड़ी रहती है जिसके कारण विवाद होता है वह कहता है हमारा इधर है दूसरा कहता हमारा उधर है. इसका जितनी जल्दी हो सके निराकरण करवा दें.

          श्री उमाशंकर गुप्ता--माननीय अध्यक्ष महोदय, 25 मार्च तक जहां फसल नहीं है वे सारे सीमांकन हम कर देंगे और जहां फसल अभी खड़ी है वहां फसल कटने के बाद कर देंगे.

          श्री गिरीश गौतम--बहुत-बहुत धन्यवाद मंत्री जी.

 

रीवा ‍जिले में संचालित गोदाम

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

5. ( *क्र. 4308 ) श्रीमती शीला त्‍यागी : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रीवा जिले में कितने पी.डी.एस. केन्‍द्र एवं गोदाम संचालित हैं। जिले के सभी केन्‍द्रों की सूची तथा केन्‍दों में पदस्‍थ अधिकारियों/कर्मचारियों की सूची विधानसभावार/अनुभागवार उपलब्‍ध करायें। (ख) प्रश्‍नांश () के संदर्भ में उक्‍त सभी केन्‍द्रों के लिए वर्ष 2015 से प्रश्‍न‍ दिनांक तक कितनी सामग्री (गेहूँ, चावल, शक्‍कर एवं केरोसीन) का आवंटन प्रदान किया गया है? केन्‍द्रवार, माहवार सामग्रियों की सूची देवें। (ग) प्रश्‍नांश (ख) के संदर्भ में क्‍या प्रबंध संचालक भोपाल, क्षेत्रीय प्रबंधक सतना म.प्र. स्‍टेट सिविल सप्‍लाईज कार्पोरेशन लि. को द्वार प्रदाय योजनांतर्गत परिवहनकर्ता मे. सुरेश कुमार मिश्र एवं अन्‍य परिवहनकर्ता के विरूद्ध शिकायत प्राप्‍त हुई है? यदि हाँ, तो शिकायत में क्‍या कार्यवाही की गई है? कृत कार्यवाही की प्रति देवें। (घ) प्रश्‍नांश () के संदर्भ में रीवा के गोदामों में पी.डी.एस. आवंटन के लिए खाद्यान्न सामग्री न होने की स्थिति में सीधे सतना वेयर हाउस से ट्रक क्र. एम.पी. 17 - एच.एच. 1460 द्वारा परिवहन किया गया है? यदि हाँ, तो क्‍या पावती ऑनलाईन जारी हुई है? यदि नहीं, तो क्‍यों, सामग्री की पावती कहाँ से है? सामग्री नहीं पहुंचने के लिए कौन जिम्‍मेदार है? उसके विरूद्ध कौन-सी दण्‍डात्‍मक कार्यवाही की गई है?  

 

 

 

          श्री ओम प्रकाश धुर्वे-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

          श्रीमती शीला त्‍यागी-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण के संबंध में था. मैं कहना चाहती हूं कि जैसा कि सरकार की मंशा है कि खाद्य विभाग के माध्‍यम से प्रदेश में सभी को भोजन मिले, कुपोषण दूर हो, लेकिन खाद्य विभाग में ही सबसे ज्‍यादा अनियमितता एवं भ्रष्‍टाचार व्‍याप्‍त है. समय-समय पर सदन में भी माननीय विधायकों द्वारा खाद्य विभाग से संबंधित प्रश्‍न उठाये जाते हैं. रीवा जिले में खाद्य विभाग में सबसे ज्‍यादा भ्रष्‍टाचार है. फुड कंट्रोलर, फुड की कालाबाजारी करते हैं. गरीबों का खाद्यान सोसायटी के दुकानों में नहीं पहुंच पाता है. मैं सरकार को इस बात से अवगत करवाना चाहती हूं कि खाद्य विभाग में व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार को समाप्‍त करने के लिए यदि कोई विशेष पहल नहीं की गई तो सरकार की जो मंशा है कि गरीबों का भला हो, उनका विकास हो, उनको खाद्यान मिले, कुपोषण से किसी की मौत न हो, वह पूरी नहीं हो पाएगी. माननीय मंत्री जी ने मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में स्‍वीकार किया है कि खाद्य विभाग में पड़े पैमाने पर अनियमितता है एवं इसके अतिरिक्‍त मेरे प्रश्‍न के सभी अंशों को मंत्री जी द्वारा स्‍वीकार किया गया है. इसके लिए मैं उन्‍हें धन्‍यवाद देती हूं. आपके माध्‍यम से मैं माननीय मंत्री जी निवेदन करना चाहती हूं कि खाद्यान की कालाबाजारी में लिप्‍त एवं विशेषकर फुड कंट्रोलर विभाग के प्रशासनिक अमले द्वारा, ब्‍लैक लिस्‍टेड लोगों की सूची पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है और न ही खाद्यान पकड़ा गया है. मैं जानना चाहती हूं कि कार्यवाही क्‍यों नहीं की गई है? सरकार की मंशा के अनुसार विभाग के अधिकारी-कर्मचारी कार्य क्‍यों नहीं कर रहे हैं. भ्रष्‍टाचार कैसे दूर होगा ?

          श्री ओम प्रकाश धुर्वे-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍या की चिंता निश्चित रूप से गंभीर प्रवृत्ति की है. इस हेतु मैं उन्‍हें धन्‍यवाद देना चाहता हूं. घटना 8.12.2016 की एक शिकायत की है. पहली घटना 6.5.2016 फिर 5.10.2016, 28.2.2015 इस प्रकार से शिकायतें होती रही हैं, लेकिन कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों के द्वारा इन शिकायतों पर कोताही बरती गई है. हमारे संज्ञान में आते ही हम कार्यवाही कर रहे हैं. रीवा संभाग के क्षेत्रीय प्रबंधक श्री नेमा एवं जिला प्रबंधक रीवा, नागरिक आपूर्ति निगम को निलंबित किया जाता है. (मेजों की थपथपाहट) शेष अधिकारियों-कर्मचारियों में श्री अतीत श्रीवास्‍तव, वरिष्‍ठ सहायक सतना, बालेन्‍दु सिंह, कनिष्‍ठ सहायक, जे.पी. तिवारी, जिला प्रबंधक सतना, बी.पी.तिवारी, शाखा प्रबंधक वेयरहाऊस, एस.के.श्रीवास्‍तव की इसमें संलिप्‍तता है, इन सभी को नोटिस दिया गया है. दिसंबर में हमें इस प्रकरण के संबंध में जानकारी प्राप्‍त हुई थी. जांच एवं कार्यवाही करने में जिन-जिन अधिकारी-कर्मचारियों ने कोताही बरती है, जो हमारे भोपाल मुख्‍यालय में हैं, उन्‍हें भी हम नोटिस देंगे और कार्यवाही करेंगे.

          श्रीमती शीला त्‍यागी-  माननीय मंत्री जी आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक छोटा सा प्रश्‍न और है. मैं मंत्री जी से जानना चाहती हूं कि क्‍या सभी ब्‍लैक लिस्‍टेड परिवहनकर्ताओं की संपत्ति को भी ब्‍लैक लिस्‍टेड किया जाएगा और क्‍या जो खाद्यान आज तक नहीं मिला है, उसके लिए इन परिवहनकर्ताओं की चल-अचल सं‍पत्ति से वसूली की जाएगी क्‍योंकि ये परिवहनकर्ता आज ब्‍लैक लिस्‍टेड हो जायेंगे और परिवहन का काम अन्‍य लोगों को मिल जाएगा. क्‍या इन ब्‍लैक लिस्‍टेड परिवहनकर्ताओं पर एफ.आई.आर. दर्ज की जाएगी ?

          श्री ओम प्रकाश धुर्वे-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ब्‍लैक लिस्‍टेड परिवहनकर्ता अगले 10 सालों के लिए परिवहन में भाग नहीं ले पायेंगे.

          श्रीमती शीला त्‍यागी-  धन्‍यवाद मंत्री जी.

शासकीय जमीन से अतिक्रमण हटाया जाना

[राजस्व]

6. ( *क्र. 2278 ) श्री सुखेन्‍द्र सिंह : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या रीवा जिले की तहसील हुजूर हल्‍का पटवारी टीकर, ग्राम टीकर की भूमि नं. 1673 रकबा 0.991 हे. जिसमें कि म.प्र. शासन (रास्‍ता) दर्ज रिकॉर्ड है, के अंश रकबा 0.222 हे. में ग्राम के ही निवासी छोटेलाल सिंह आ. तेजभान सिंह द्वारा फसल बोकर अवैधानिक रूप से अतिक्रमण किया गया है? (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में क्‍या इस शासकीय जमीन से अवैधानिक अतिक्रमण को हटाया जाकर अतिक्रमणकारी के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी? यदि हाँ, तो कब तक एवं यदि नहीं, तो कारण स्‍पष्‍ट बतावें। (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) के संदर्भ में क्‍या बार-बार अतिक्रमण करने के आरोपी के विरूद्ध कार्यवाही कर आम रास्‍ता बहाल किया जावेगा? यदि हाँ, तो कब तक एवं यदि नहीं, तो क्‍यों?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जी हाँ। (ख) जी हाँ, अतिक्रमण हटाने हेतु म.प्र. भू-राजस्‍व संहिता की धारा 248 के प्रावधानानुसार न्‍यायालयीन प्रक्रियानुरूप कार्यवाही प्रचलित है। (ग) जी हाँ। अतिक्रमण हटाना न्‍यायालयीन प्रक्रिया है, अत: निश्चित समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

          श्री बाला बच्‍चन-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न राजस्‍व विभाग से संबंधित है. जिस तरह से मंत्री जी एवं उनके विभाग ने जवाब दिया है तो मुझे ऐसा लगता है कि यह राजस्‍व विभाग की आदत में आ गया है. बहुत ही छोटा सा मामला है शासकीय जमीन पर रास्‍ते का अतिक्रमण एक ही व्‍यक्ति द्वारा बार-बार किया जा रहा है. मैंने पूछा है कि कब तक यह अतिक्रमण हटा दिया जायेगा. सरकार ने यह माना भी है कि अतिक्रमण किया गया है. अतिक्रमण कब तक हटा दिया जायेगा तो इसके संबंध में उत्‍तर दिया गया है कि कोर्ट में विचाराधीन है. प्रक्रिया जारी है. माननीय मंत्री जी, हमेशा, जब भी आपका प्रश्नों के उत्तर देने का जो दिन होता है, तो जवाब आता है कि जानकारी इकट्ठी की जा रही है. आज भी 66 प्रश्नों के जवाब इकट्ठे किया जाना बताया जा रहा है.

          अध्यक्ष महोदय--  आपके इस प्रश्न में कहाँ है?

          श्री बाला बच्चन--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं यह पूछना चाह रहा हूँ,  ऐसे अगर आप जवाब नहीं देंगे और विभाग की आदत में अगर यह बनाए रखोगे तो पैंडेंसी फिर बढ़ती रहेगी और वह फिर आँकड़े ऐसे दिखाती रहेगी तो अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूँ कि एक ही व्यक्ति द्वारा बार-बार अतिक्रमण किया जाता है. यह अतिक्रमण कब तक हटा दिया जाएगा? आप इसकी समय सीमा बताएँ.

          श्री उमाशंकर गुप्ता--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने यह सोचा कि बाला बच्चन जी की पूरी डाँट सुन ली जाए. वह अतिक्रमण हटा दिया गया है.

          श्री तरूण भनोत--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे भी राजस्व से संबंधित आज दो प्रश्न हैं दोनों के उत्तर में यह लिखा गया है कि," जानकारी एकत्रित की जा रही है".

          श्री बाला बच्चन--  अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी का धन्यवाद करता हूँ. 

          अध्यक्ष महोदय--  माननीय मंत्री जी, इसको आप जरूर दिखवाएँ कि राजस्व के प्रश्नों में हर बार "जानकारी एकत्रित की जा रही है", आता है. तारांकित के तो आ जाते हैं..(व्यवधान)..तारांकित के तो सभी आ गए. आप इसको थोड़ा सुनिश्चित करें कि यह प्रिंट भी ऐसा न हो, समय के पहले आ जाएँ ताकि अलग से पेपर न लगाना पड़े.

          श्री उमाशंकर गुप्ता--  जी अध्यक्ष महोदय.

          श्री बाला बच्चन--  और आप यह डाँट सुनने का भी नेचर में न लाएँ, यह भी परमेनेंट नेचर में नहीं आ जाए कि डाँट सुनने के बाद एक्शन ली जाएगी. माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपका भी धन्यवाद करता हूँ.

          अध्यक्ष महोदय--  उन्होंने एक्शन पहले ले ली, फिर डाँट बाद में सुनी.

          श्री उमाशंकर गुप्ता--  अध्यक्ष महोदय, एक्शन लेने के बाद मैंने कहा कि एक्शन तो हो ही गया है. लेकिन बाला बच्चन जी जो कहना चाहते हैं वह पूरा सुना जाए.

          अध्यक्ष महोदय--  एक्शन पहले ले ली.

          श्री बाला बच्चन--  धन्यवाद.

चितरंगी विकासखण्‍ड में आई.टी.आई. की स्‍थापना

[तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास]

7. ( *क्र. 148 ) श्रीमती सरस्‍वती सिंह : क्या राज्‍यमंत्री, तकनीकी शिक्षा महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विभाग की नीति यह है कि ऐसे विकासखण्‍ड जिनमें कोई भी शासकीय/अशासकीय आई.टी.आई. महाविद्यालय संस्‍थान नहीं हैं, वहां आई.टी.आई. महाविद्यालय स्‍थापित किये जायें? (ख) यदि हाँ, तो प्रदेश में ऐसे कितने विकासखण्‍ड हैं और कितने विकासखण्‍ड में आई.टी.आई. महाविद्यालय संचालित कराए गए हैं? (ग) क्‍या सिंगरौली जिले के विकासखण्‍ड चितरंगी आदिवासी बाहुल्‍य क्षेत्र में आई.टी.आई. महाविद्यालय खुलवाए जाने हेतु आवेदन प्राप्‍त हुए हैं? यदि हाँ, तो शासन स्‍तर से महाविद्यालय खोले जाने हेतु क्‍या-क्‍या विभागीय प्रयास हुए हैं एवं कब तक प्रारंभ करा दिए जाएंगे?

राज्‍यमंत्री, तकनीकी शिक्षा ( श्री दीपक जोशी ) : (क) जी हाँ। (ख) कुल 313 विकासखण्‍डों में से 249 विकासखण्‍डों में शासकीय आई.टी.आई. अथवा प्राईवेट आई.टी.आई. संचालित हैं तथा 64 विकासखण्‍डों में कोई भी शासकीय तथा प्राईवेट आई.टी.आई. संचालित नहीं है। (ग) जी हाँ। जी नहीं। समय अवधि बताना संभव नहीं है।

          श्रीमती सरस्वती सिंह--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा जनहित का मुद्दा है. मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहती हूँ कि मेरे विकास खण्ड चितरंगी में महाविद्यालय आईटीआई  खुलवाने का प्रस्ताव मैंने रखा है. मैं माननीय मंत्री जी से यह निवेदन करना चाहती हूँ कि आज इस सदन में वे घोषणा करें.

          श्री दीपक जोशी--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्या की भावना का स्वागत करता हूँ और उन्हें विश्वास दिलाता हूँ, चूँकि शासन की नीति है कि हर विकासखण्ड में जहाँ आईटीआई संचालित नहीं होते हैं वहाँ आईटीआई होना चाहिए, चितरंगी में आईटीआई वर्तमान में संचालित नहीं है. चूँकि यह अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्र भी है, अतः आगामी योजना में हम इसको  प्राथमिकता पर जोड़ कर आईटीआई खुलवा देंगे.

          श्रीमती सरस्वती सिंह--  धन्यवाद.

 

 

 

 

 

 पॉलिथिन/प्‍ला‍स्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध

[पर्यावरण]

8. ( *क्र. 894 ) श्री राजेन्द्र फूलचं‍द वर्मा : क्या पशुपालन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र. शासन द्वारा प्रदेश में पॉलिथिन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है या नहीं? यदि हाँ, तो क्‍या इसका कठोरता से पा‍लन कराया जा रहा है? (ख) क्‍या शासन द्वारा पॉलिथिन/प्‍लास्टिक के उपयोग से होने वाले दुष्‍परिणामों के व्‍यापक प्रचार-प्रसार हेतु कोई योजना बनाई गई है? पॉलिथिन के कारण हजारों बेजुबान जानवरों की मृत्‍यु हो जाती है तथा पॉलिथिन व प्‍लास्टिक का उपयोग करने से हजारों लोगों को कई प्रकार की बीमारियां होने लगी हैं तथा पर्यावरण भी प्रदूषित होता जा रहा है? क्‍या इस भयानक स्थिति को नियत्रंण करने हेतु शासन कोई ठोस कदम उठाएगा या नहीं? यदि हाँ, तो क्‍या और नहीं तो क्‍यों नहीं? (ग) क्‍या भविष्‍य में पॉलिथिन/प्‍लास्टिक के उपयोग पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाया जाकर उसका कठोरता से पालन कराया जावेगा?

पशुपालन मंत्री ( श्री अंतर सिंह आर्य ) : (क) एवं (ख) भारत सरकार, पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अधिसूचना क्रमांक 320 (अ) दिनांक 18 मार्च, 2016 में उल्लेखित प्रावधान अनुसार 50 माईक्रोन से कम मोटाई की प्लास्टिक कैरी बैग का उपयोग वर्तमान में प्रतिबंधित है। प्रदेश में पॉलिथिन के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कराये जाने की कार्यवाही प्रचलन में है। पॉलिथिन/प्लास्टिक के उपयोग से होने वाले दुष्परिणामों के व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु नगरीय-निकायों के साथ पम्पलेट वितरण, रैली, नुक्कड़ नाटक, छापामार कार्यवाही एवं समाचार पत्रों में जानकारी के माध्यम से जनजागृति कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। जानवरों की मृत्यु होने तथा लोगों की बीमारियों के संबंध में तथ्यात्मक जानकारी नहीं है। अतः शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।                 (ग) प्रदेश में पॉलिथिन के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कराये जाने की कार्यवाही प्रचलन में है।

          श्री राजेन्द्र फूलचंद वर्मा--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा आज का प्रश्न पॉलिथिन और प्लास्टिक के प्रतिबंध को लेकर है और मैं समझता हूँ कि सदन में बैठे हुए सभी माननीय सदस्य इस बात से सहमत होंगे कि आज अनेक रिसर्च और अनेक रिपोर्ट्स में यह बात आई है कि पॉलिथिन और प्लास्टिक के कारण अनेक गंभीर बीमारियाँ हो रही हैं. बेजुबान पशु उसके शिकार हो रहे हैं तथा कैंसर जैसी अनेक बीमारियाँ हो रही हैं और उसके अलावा यह पर्यावरण के लिए भी अत्यंत घातक है, तो मेरा मंत्री जी से आग्रह है कि उन्होंने अपने जवाब में कहा है कि 50 माईक्रोन से कम मोटाई पर प्रतिबंध है, लेकिन अध्यक्ष महोदय, देखने में यह आता है कि जितनी छोटी दुकानें हैं, वहाँ पर चाहे चाय के छोटे डिस्पोजल हों, या शादियाँ हों, या कई जगह, मतलब हम कपड़े की दुकान पर भी जाते हैं तो छोटी-छोटी पॉलिथिन की थैलियाँ वहाँ पर दिखाई देती हैं, तो इस पर प्रतिबंध के मामले में मंत्री जी का क्या कहना है, यह बता दें,  उसके बाद दूसरा प्रश्न कर लूँगा.

          श्री अंतर सिंह आर्य--  माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जो प्रश्न किया है वह बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है. जो माननीय विधायक जी ने चिन्ता की है,  इसके लिए हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी चिन्ता की है. 26 जनवरी 2017 को माननीय मुख्यमंत्री जी ने घोषणा की है कि मध्यप्रदेश के अन्दर प्लास्टिक के कैरी बैग को पूर्ण प्रतिबंधित करेंगे. यह फाइल प्रोसेस में है. प्रशासकीय अनुमोदन होकर विधि विभाग में सलाह के लिए गई है. जैसे ही वहाँ से आएगी और इसके बाद में इसकी अधिसूचना जारी होगी. अधिसूचना के 30 दिन के बाद में 01 मई से माननीय मुख्यमंत्री जी की घोषणा के अनुसार प्लास्टिक कैरी बैग को पूर्ण प्रतिबंधित कर दिया जाएगा.

          श्री राजेन्द्र फूलचंद वर्मा--  अध्यक्ष महोदय, माननीय मुख्यमंत्री जी का और माननीय मंत्री जी का बहुत-बहुत धन्यवाद.


 

 

            प्रश्‍न संख्‍या -- 9 (अनुपस्थित)

         

आदिवासि‍यों की भूमि के बेनामी नामांतरण की जाँच

[राजस्व]

10. ( *क्र. 3402 ) श्री कालुसिंह ठाकुर : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि   (क) क्‍या शासन नियमों में निर्धारित प्रावधान अनुसार आदिवासियों के स्वामित्व की कृषि भूमि आदि की खरीदी अन्य वर्ग के लोग शासन की अनुमति के बगैर नहीं कर सकते हैं? क्या विश्‍व प्रसिद्ध पर्यटक स्थल माण्डव क्षेत्र में अधिकांश बड़े-बड़े उद्योगपतियों एवं व्यवसायियों द्वारा आदिवासियों की जमीनें सस्ते दामों में अपने यहां कार्यरत अ.ज.जा. वर्ग के अन्यत्र निवासरत अनपढ़ व गरीब मजदूर के नाम से धड़ल्ले से खरीद रहे हैं व उनके नाम से बेनामी नामांतरण करवाया जाकर स्वयं के होटल, रेस्ट हाउस, ढाबा आदि व्यवसाय में उपयोग किया जा रहा है? (ख) क्या शासन विगत 10 वर्षों से अब तक व्यवसायि‍यों द्वारा पंजीयन हेतु प्रस्तुत अभिलेखों की एवं राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज ऐसे बेनामी नामांतरणों की जाँच करवाकर पूंजीपतियों द्वारा गरीब आदिवासियों के नाम की भूमि पर किये जा रहे व्यवसाय व उनके शोषण को रोकने की दिशा में कोई ठोस कदम उठायेगा? यदि हाँ, तो समयावधि बतावें?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) :

         

          श्री कालुसिंह ठाकुर -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहूंगा कि माण्‍डव क्षेत्र में पर्यटन स्‍थल पर जो आदिवासी गरीबों की जमीनें हैं उन पर अन्‍य लोग बड़ी-बड़ी होटल और कॉलोनी काट रहे हैं. माननीय मंत्री बता रहे हैं कि जानकारी एकत्रित की जा रही है. मैं मंत्री जी से अनुरोध करना चाहूंगा कि कब तक जानकारी एकत्रित की जाएगी, और इस पर क्‍या कार्यवाही होगी ?

          अध्‍यक्ष महोदय -- जानकारी आ गई है. उसकी जानकारी आपके पास होगी.

          श्री कालुसिंह ठाकुर -- अध्‍यक्ष महोदय, जानकारी नहीं है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- ठीक है, आप उत्‍तर ले लीजिए.

          श्री कालुसिंह ठाकुर -- अध्‍यक्ष महोदय, इसमें भी ऐसा कोई निराकरण नहीं किया है. मैं अभी देख रहा था कि माननीय मंत्री जी ने हमारे विधायक साथियों को बहुत संतुष्‍ट किया. मुझे आशा है कि मुझे भी संतुष्‍ट करें. इसकी प्रदेश स्‍तर से एक कमेटी बनाकर जॉंच की जाए और उसके साथ मुझे भी शामिल किया जाए तो मैं बताऊंगा कि किसने कहॉं होटल बनाया और किसने कहां कॉलोनी काटी. मैं एक चीज उसमें साबित करके बताऊंगा कि जो जानकारी दी है उसमें पटवारी, गिरदावर और तहसीलदार के माध्‍यम से माननीय मंत्री को गुमराह किया गया है. मैं वास्‍तव में एक-एक चीज बताऊंगा और बताते हुए बड़ा आश्‍चर्य होगा कि पूर्व में श्री बांचूलाल मेहरा उसके संबंध में धरने पर बैठे. उसमें एफ.आई.आर. भी हुई. हम सत्‍ता वाले धरने पर तो नहीं बैठ सकते, पर जॉंच कमेटी में शामिल कर लेंगे तो माननीय मंत्री का बहुत-बहुत धन्‍यवाद हो जाएगा.

          श्री बाला बच्‍चन -- जब तक धरने पर नहीं बैठोगे, तब तक काम नहीं होगा. अब इस सरकार को धरने पर ही बैठना पडे़गा.

          श्री कालुसिंह ठाकुर -- नहीं-नहीं भैया, हम नहीं बैठेंगे धरने पर. आप बीच में क्‍यों बोल रहे हैं.

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम सब लोग कोशिश करते हैं माननीय सदस्‍य इस सदन में जो भी बातें ध्‍यान में लाते हैं उनको संतुष्‍ट किया जाए और कोई अगर गड़बड़ है, तो उसको ठीक किया जाए. आदरणीय विधायक महोदय अगर कुछ लिखकर देंगे क्‍योंकि उन्‍होंने कोई स्‍पेसिफिक नहीं दिया है लेकिन अगर कुछ लिखकर जानकारी देंगे तो निश्चित ही हम जॉंच करा लेंगे.

          श्री कालुसिंह ठाकुर -- माननीय मंत्री जी, मैं लिखकर भी लाया हॅूं लेकिन मेरा अनुरोध है कि जब जॉंच भोपाल स्‍तर पर की जाए तो उसमें मुझे भी शामिल किया जाए जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा.

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता -- जॉंच अधिकारी से कहेंगे कि माननीय विधायक जी से भी चर्चा करें और उनके पास जो जानकारी है, वह प्राप्‍त कर लें.

          श्री कालुसिंह ठाकुर -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, फोन पर तो चर्चा हो जाती है. एक-दो बार ऐसा हुआ था. जॉंच में आप साथ में शामिल कर लें तो आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद हो जाएगा. माननीय अध्‍यक्ष जी, जॉंच में मुझे शामिल करवाइए. 

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता -- हमें कोई दिक्‍कत नहीं है हम शामिल कर लेंगे.

          श्री कालुसिंह ठाकुर -- माननीय अध्‍यक्ष जी, माननीय मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          भोपाल में संचालित बुल मदर/डेयरी फॉर्म

[पशुपालन]

11. ( *क्र. 2016 ) श्री बाबूलाल गौर : क्या पशुपालन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि     (क) पुशपालन विभाग द्वारा भोपाल में संचालित बुल मदर फॉर्म एवं डेयरी फॉर्म में वर्तमान में किस-किस प्रजाति की कितनी-कितनी गायें एवं भैंसें हैं? पृथक-पृथक संख्‍या बताई जाए। (ख) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित बुल मदर फॉर्म एवं डेयरी फॉर्म में प्रश्‍न दिनांक से विगत 5 वर्षों में किस-किस प्रजाति की कितनी-कितनी गायें एवं भैंसें क्रय की गईं एवं इसमें कितनी-कितनी धनराशि व्‍यय हुई? पृथक-पृथक बताया जाए। (ग) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित बुल मदर फॉर्म एवं डेयरी फॉर्म में प्रतिदिन के हिसाब से प्रतिमाह कितना-कितना दूध संग्रहित होता है एवं क्‍या इस दूध का बाजार में विक्रय किया जाता है, इससे कितनी धनराशि प्रतिमाह प्राप्‍त होती है? पृथक-पृथक बताया जाए? (घ) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित बुल मदर फॉर्म एवं डेयरी फॉर्म के संचालन में प्रश्‍न दिनांक से 5 वर्षों में कितनी-कितनी धनराशि व्‍यय की गई, वर्षवार बताया जाए?

पशुपालन मंत्री ( श्री अंतर सिंह आर्य ) : (क) बुल मदर फॉर्म पर गिर नस्ल की 53, साहीवाल नस्ल की 27 तथा संकर नस्ल की 49 गायें रखी गई हैं एवं शासकीय जर्सी पशु प्रजनन प्रक्षेत्र भदभदा भोपाल में जर्सी नस्ल की 48, जर्सी साहीवाल क्रास की 46, साहीवाल नस्ल की 176 गौवंश का संधारण किया जाता है। बुल मदर फॉर्म एवं शासकीय जर्सी पशु प्रजनन प्रक्षेत्र भदभदा पर भैंसें नहीं हैं। (ख) बुल मदर फॉर्म पर गत 05 वर्षों में साहीवाल नस्ल की 20, गिर नस्ल की 24 तथा संकर नस्ल की 17 गायें क्रय की गई हैं, जिन पर क्रमश: रू. 9,95,150/-, रू. 11,38,597/- एवं रू. 11,90,000/- की राशि व्यय की गई है एवं शासकीय जर्सी पशु प्रजनन प्रक्षेत्र भदभदा भोपाल में विगत 05 वर्षों में साहीवाल नस्ल की 25 गायें, साहीवाल क्रास की 02 गायें तथा साहीवाल बछियां 50 क्रय की गई हैं, जिन पर कुल 28,44,000/- राशि‍ व्यय की गई है। (ग) बुल मदर फॉर्म एवं शासकीय जर्सी पशु प्रजनन प्रक्षेत्र भदभदा, भोपाल के द्वारा दूध संग्रह (कलेक्शन) नहीं किया जाता है, परन्तु फॉर्म पर प्रतिमाह जो दुग्ध उत्पादन होता है, उसे फॉर्म के द्वारा भोपाल शहर के अधि‍कारियों/कर्मचारियों आदि को विक्रय किया जाता है तथा शेष बचा दूध भोपाल दुग्ध संघ सहकारी मर्यादित, भोपाल को प्रदाय किया जाता है। शेष जानकारी संलग्‍न परिशि‍ष्ट अनुसार है। (घ) बुल मदर फॉर्म के संचालन पर वर्ष 2012-13 में राशि रूपये 77.32 लाख, वर्ष 2013-14 में राशि रूपये 82.76 लाख, वर्ष 2014-15 में राशि रूपये 69.63 लाख, वर्ष 2015-16 में राशि रूपये 82.62 लाख एवं वर्ष 2016-17 में (माह जनवरी तक) राशि रू. 112.16 लाख व्यय की गई है एवं शासकीय जर्सी पशु प्रजनन प्रक्षेत्र भदभदा भोपाल के संचालन में विगत 05 वर्षों में संचालन पर वर्ष 2012-13 में राशि रूपये 53.83 लाख, वर्ष 2013-14 में राशि रूपये 59.58 लाख, वर्ष 2014-15 में राशि रूपये 90.45 लाख, वर्ष 2015-16 में राशि रूपये 87.06 लाख एवं वर्ष 2016-17 में (माह जनवरी तक) राशि रू. 126.05 लाख व्यय की गई है।

          श्री बाबूलाल गौर -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने पूछा था कि बुल मदर फॉर्म और डेयरी फॉर्म में वर्तमान में गाय किस प्रजाति की हैं और उसके उत्‍तर में माननीय मंत्री जी ने सही बताया है लेकिन मेरा निवेदन यह है कि बड़ी बुद्धिमानी से उन्‍होंने उत्‍तर दिया है. हमने कारोबार के लिए डेयरी फॉर्म और बुल मदर फॉर्म नहीं बनाया. इसका मूल उद्देश्‍य यह है कि हम अच्‍छी नस्‍ल की गाय, बछडे़-बछड़ी किसानों को प्रदान करें. दूध बेचने के लिए और  प्रजनन के लिए नहीं बनाया.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हॅूं कि यह आपने जो बिजनेस किया है इसमें 5 साल के अंदर आपने वर्षवार बताया है कि वर्ष 2012-13 में राशि रूपये 53.83 लाख, वर्ष 2013-14 में राशि रूपये 59.58 लाख, वर्ष 2014-15 में राशि रूपये 90.45 लाख, वर्ष 2015-16 में राशि रूपये 87.06 लाख एवं वर्ष 2016-17 में (माह जनवरी तक) राशि रूपये 126.05 लाख. यदि वर्षवार व्‍यय जोड़ लिया जाए तो व्‍यय की राशि इसमें संस्‍था में खर्च की गई है वह 3 करोड़ 38 लाख 67 हजार है और दूध के विक्रय से क्‍या फायदा हुआ है ? जो दूध विक्रय हुआ है वह हानि में हुआ है, 53 लाख 83 हजार रुपये खर्च किए और मिले 24 लाख 39 हजार 43 हजार. वर्ष 2013-14 में 59.58 लाख खर्च किए और मिले 25 लाख 58 हजार 25 रूपये. यह विवरण मैं इसलिए बताना चाहता हॅूं क्‍योंकि कोई मॉनिटरिंग नहीं हो रही है. कुल कितना दूध से व्‍यय हुआ है यदि मैं बताऊंगा तो मुझे बताने में बहुत देर लगेगी. कुल व्‍यय में और कुल दूध से आय में 1 करोड़ 17 लाख 997 रूपये, 3 करोड़ 40 लाख का खर्च हुआ और दूध से विक्रय हुआ लगभग सवा लाख रुपये. इसका मुख्य उद्देश्य यह नहीं था. प्रजनन करके जो बछड़े-बछड़ी होंगे, वह किसानों को प्रदाय किये जाएंगे ताकि अच्छे नस्ल के गाय हों, बैल हों,क्या इस संबंध में कार्यवाही की जाएगी ?

          श्री अंतर सिंह आर्य--  माननीय अध्यक्ष महोदय,आदरणीय गौर साहब ने जो प्रश्न किया है उसका हमने उत्तर दिया है. उनका कहना यह है कि बुल मदर फार्म में घाटा चल रहा है परन्तु हमारे बुल मदर फार्म में उच्च नस्ल की केड़े-केड़ियाँ तैयार करके हमको कृषकों को देने की बात है क्योंकि दूध का जो उत्पादन होता है उसको तो हम कुछ हमारे सरकारी कर्मचारी को देते हैं, कुछ बाजार में बेचते हैं और जो बचा दूध है, उसको हम दुग्ध महासंघ को प्रदाय करते हैं और हमारे फार्म में सांड तैयार तैयार करके किसानों को हम देते हैं और केंद्रीय जो वीर्य सेंटर हैं उसको हम देते हैं. इस डेयरी का मकसद लाभ कमाना नहीं है उत्तम नस्ल के सांडों को ग्रामीण क्षेत्र के कृषकों को देने का हमारा उद्देश्य है.

          श्री बाबूलाल गौर-- अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि यह दूध आप अधिकारियों और कर्मचारियों को ही देते हैं बाकी जनता को क्यों नहीं देते हैं. क्या अधिकारियों के लिए फार्म बनाया है. यह तो गजब हो गया.

          श्री अंतर सिंह आर्य-- अध्यक्ष महोदय, जो दूध उत्पादन होता है उसको हम पैसे लेकर के देते हैं ना कि निशुल्क में देते हैं.

          अध्यक्ष महोदय--  जो भी लेने आएगा उसको देंगे.

          श्री बाबूलाल गौर-- अध्यक्ष महोदय, बहुत-बहुत धन्यवाद.

          संसदीय कार्य मंत्री(डॉ. नरोत्तम मिश्रा)-- अध्यक्ष महोदय, गौर साहब बिना चश्मे के इस उम्र में पढ़ रहे हैं तो हमारी उम्र के जो और सदस्य हैं, उनकी जानने की इच्छा है कि यह कौनसी नस्ल की गाय का दूध पी रहे हैं.(हंसी)..

          श्री बाबूलाल गौर--  मैं गऊ माता की सेवा करता हूं और जाति का ग्वाला हूं, यादव हूं.

          डॉ. गोविंद सिंह--  कृष्ण जी के वंशज हैं.

         

          शासकीय आराजी की भूमि को कृषकों के नाम किये जाने की जाँच

[राजस्व]

12. ( *क्र. 596 ) श्रीमती ऊषा चौधरी : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                (क) क्या सतना जिले की तहसील रघुराजनगर के अंतर्गत पटवारी हल्का सिजहटा के मौजा सोनौरा की शासकीय आराजी क्र. 44, 309, 329/342, 37, 38, 135, 89, 104 एवं 131 जो 16 कृषकों के नाम कूटरचित दस्तावेज़ तैयार कर राजस्व विभाग के अधिकारी, पटवारी एवं भू-माफियाओं ने खुर्दबुर्द कर दी है, जो कृषक क्रमशः बद्रीप्रसाद ब्राम्हण, सीताराम विश्वकर्मा, रामनारायण विश्वकर्मा, श्वरप्रताप सिंह, गोरेलाल रैकवार, लक्ष्मीनारायण ब्रा., रामनरेश ब्रा., रामकृपाल ब्रा., रामशिरोमणि निवासी नई बस्ती कृपालपुर सभी काल्पनिक नाम हैं जिसका स्थल पंचनामा राजस्व विभाग द्वारा 12/03/2016 को किया जा चुका है? शेष सात कृषक क्रमशः छोटेलाल चमार, त्रिवेणीप्रसाद ब्रा., हीरालाल गौतम, विद्यासागर तिवारी, सहेंद्रसिंह, रामलखन, बाबूलाल के नाम कर दी गई? (ख) उक्त आराजियों को खुर्दबुर्द करने के संबंध में थाना कोलगवां में अपराध क्र. 168/16 धारा 420, 467, 468-34 का मुकदमा दर्ज है, जिसमें फर्जी बद्रीप्रसाद ब्रा. एवं प्रथम रजिस्ट्री कराने वाले लक्ष्मण सिंह की गिरफ्तारी हो चुकी है? क्या इस संबंध में नगर पुलिस अधीक्षक सतना ने पत्र क्र. 3958 दिनांक 01/12/2016 द्वारा एस.डी.एम. राघुराजनगर से जानकारी मांगी थी, जिसका जवाब किन-किन दिनांकों को दिया गया है? (ग) क्या उक्त आराजी का जाँच प्रतिवेदन क्रमश: 10/03/2016, 19/03/2016 को तहसील रघुराजनगर कार्यालय में जमा कर दिया गया है, जिस प्रतिवेदन में स्पष्ट है कि‍ कूटरचित ढंग से फर्जी दस्तावेज तैयार कर न्यायालय को गुमराह कर फर्जीवाड़ा किया गया है? (घ) क्या फर्जीवाड़े में संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की जाँच प्रतिवेदन में अनुशंसा की गई है? यदि हाँ, तो दोषियों के विरुद्ध अब तक कार्यवाही क्यों नहीं की गई है? विलम्ब के कारण सहित बताएं?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता )---

          श्रीमती ऊषा चौधरी--  माननीय अध्यक्ष महोदय, जिस तरह से हम सदस्यगण विधानसभा में क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर प्रश्न लगाते हैं लेकिन सरकार के जवाब में नकारात्मक सिर्फ एक लाइन  का जवाब आता है कि जानकारी एकत्रित की जा रही है. इतना कहकर सरकार पल्ला झाड़ लेती है. अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से आपके माध्यम से पूछना चाहती हूं कि जिस तरह से हमारे सतना जिले का जवाब माननीय राजस्व मंत्री जी ने दिया है कि  (क) से (घ) तक जानकारी एकत्रित की जा रही है.

          अध्यक्ष महोदय-- उसका उत्तर पीछे दिया गया है. इसमें अलग से एक पेपर है उसमें उत्तर दिया गया है. आपके खाने में रखा होगा.

          श्रीमती ऊषा चौधरी--  अध्यक्ष महोदय, सिर्फ एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है. 1600 एकड़ जमीन का इतना  बड़ा घोटाला  केवल एक व्यक्ति ने किया है क्या. मंत्री महोदय द्वारा हमारे सतना जिले के बड़े-बड़े (XXX), जो पूरी सरकारी जमीनों को डकार कर बैठे थे उनको बचाने का काम किया जा रहा है.

          अध्यक्ष महोदय--  आप सीधा प्रश्न करें.

          श्री बाबूलाल गौर--  (XXX) विलोपित करवा दें.यह (XXX) कहीं नहीं होते  हैं.

          अध्यक्ष महोदय-- इसे विलोपित कर दें.

          श्रीमती ऊषा चौधरी--  मेरा प्रश्न यही है कि दोषी अधिकारी कर्मचारियों पर मामला दर्ज हो गया. मुकदमा कायम हो गया तो इनको गिरफ्तार क्यों नहीं किया जा रहा है.

          श्री उमाशंकर गुप्ता--  माननीय अध्यक्ष महोदय, जो भी उसमें आरोपी हैं,सभी की गिरफ्तारी हो गई है. एक ने माननीय उच्च न्यायालय से स्टे ले लिया है उसको छोड़कर बाकी सबकी गिरफ्तारी हो गई है.

          श्रीमती ऊषा चौधरी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह गलत जवाब है. सिर्फ एक व्यक्ति की गिरफ्तारी हुई है. कई ऐसे मामले हैं मैं आपको बताना चाहती हूं जिस तरह से 23.2.2017 को प्रश्नोत्तरी में तारांकित प्रश्न को परिवर्तित करके अतारांकित में उत्तर ना देकर दो प्रश्न ही मेरे गायब कर दिये गये हैं. प्रश्नोत्तरी में छापा ही नहीं गया है यह सरकार की नाकामी को व्यक्त करता है. मध्यप्रदेश में राजस्व के इतने बड़े घोटाले हैं.

          अध्यक्ष महोदय--  आप इससे संबंधित प्रश्न तो करें.

          श्रीमती ऊषा चौधरी--  अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से पूछना चाहती हूं कि इन अधिकारियों-कर्मचारियों को जिन्होंने 1600 एकड़ जमीन का घोटाला किया.हम सदस्‍यगण इन जमीनों को समाज के हित में बचा रहे हैं और उसको खुर्द-बुर्द कर दिया, जिन अधिकारियों ने इतना बड़ा घोटाला किया उनकी गिरफ्तारी कब कराएंगे ?

            अध्‍यक्ष महोदय -- बैठ जाइये, वे उत्‍तर दे चुके हैं. फिर भी एक बार सुन लीजिए.

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक तो सारी जमीन शासकीय दर्ज हो गई और जो गिरफ्तारी हुई है उसमें लक्ष्‍मीप्रसाद, अखिलेश गौतम शामिल हैं. रामभाई तथा लक्ष्‍मण सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया है, इस तरह 4 गिरफ्तारिया हो चुकी हैं, पाचवा रजनीश शर्मा, इसको चूँकि उच्‍च न्‍यायालय ने स्‍टे दिया हुआ है इसलिए केवल एक व्‍यक्‍ति की गिरफ्तारी नहीं कर पाए हैं.

          श्रीमती ऊषा चौधरी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह नकारात्‍मक जवाब है, बिल्‍कुल गिरफ्तारी नहीं हुई है.

          अध्‍यक्ष महोदय - गिरफ्तार हो गए, जमीन सरकारी हो गई, अब और क्‍या है.

          श्रीमती ऊषा चौधरी -- अध्‍यक्ष महोदय, एक व्‍यक्‍ति की गिरफ्तारी हुई है, झूठा जवाब दिया जा रहा है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- वे हाऊस में रिपोर्ट दे रहे हैं.

          श्रीमती ऊषा चौधरी -- अध्‍यक्ष महोदय, कई प्रश्‍नों के मामले इसी तरह हैं, जवाब न देकर माननीय मंत्री जी पल्‍ला झाड़ लेते हैं और प्रश्‍नोत्‍तरी से प्रश्‍न भी गायब कर दिए जाते हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय -- बैठ जाइये आप, कुछ भी बोलते हैं.

 

 

बहिर्गमन

श्रीमती ऊषा चौधरी, सदस्‍य, बहुजन समाज पार्टी द्वारा सदन से बहिर्गमन

          श्रीमती ऊषा चौधरी -- (XXX) सरकार के उत्‍तर से असंतुष्‍ट होकर मैं सदन ने बहिर्गमन करती हूँ.

(श्रीमती ऊषा चौधरी, सदस्‍य द्वारा शासन के उत्‍तर से असंतुष्‍ट होकर सदन से बहिर्गमन किया गया)

          अध्‍यक्ष महोदय -- यह कार्यवाही से निकालिए, ये क्‍या तरीका है आपका ?

 

 

 

दृष्टिहीनों के लिये कम्‍प्‍यूटर प्रशिक्षण की सुविधा

[तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास]

13. ( *क्र. 97 ) श्री सुशील कुमार तिवारी : क्या राज्‍यमंत्री, तकनीकी शिक्षा महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या जबलपुर, भोपाल एवं रीवा में दृष्टिहीन युवकों के लिये कम्प्‍यूटर कोर्स प्रारंभ किया गया है? (ख) क्या दृष्टिहीन युवक लगभग 95 प्रतिशत पढ़ाई, सुनकर ही करते हैं? (ग) क्या ऐसे युवकों के लिये लेपटॉप, डी.वी.डी. की सुविधायें व्‍यक्तिश: दी गई हैं? (घ) यदि नहीं, तो क्यों?

राज्‍यमंत्री, तकनीकी शिक्षा ( श्री दीपक जोशी ) : (क) एवं (ख) जी हाँ। (ग) जी नहीं। (घ) व्‍यक्तिश: दिये जाने का प्रावधान नहीं है।

            श्री सुशील कुमार तिवारी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री से मेरा प्रश्‍न दृष्‍टिहीनों युवकों के लिए है. शासन कंप्‍यूटर से यह जानकारी दे रही है और बच्‍चों को कंप्‍यूटर के माध्‍यम से 95 प्रतिशत इसका ज्ञान होता है, किंतु अभ्‍यास के लिए कंप्‍यूटर की आवश्‍यता होती है और अभी प्राइवेट में ऐसे दृष्‍टिहीनों के लिए जो व्‍यवस्‍था है उसमें भारी फीस लगती है. हम माननीय मंत्री जी से निवेदन करेंगे कि क्‍या दृष्‍टिहीन छात्रों एवं युवकों के लिए कंप्‍यूटर की व्‍यवस्‍था कराई जाएगी जिससे अनुभव के माध्‍यम से वे अपना जीवनयापन कर सकें ?

            श्री दीपक जोशी --  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सम्‍मानित सदस्‍य को अवगत कराना चाहता हूँ कि यह योजना मूलत: केन्‍द्र सरकार के सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता विभाग की है और इसका क्रियान्‍वयन करने वाला हमारा विभाग है. चूँकि संसाधनों की उपलब्‍धता सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता विभाग द्वारा कराई जाती है, इसमें थोड़ा सा विलंब हुआ है. हम शीघ्रातिशीघ्र यह व्‍यवस्‍था करने के लिए प्रयत्‍नशील हैं. साथ ही मैं इस सदन को अवगत कराना चाहता हूँ कि मध्‍यप्रदेश पहला राज्‍य है जिसने दिव्‍यांगों की जो सीटें हमको अलाट की गई थीं वे पूरी की पूरी हमने भरी हैं और मध्‍यप्रदेश में 500 सीटों पर दिव्‍यांगों को प्रशिक्षित करने की भी व्‍यवस्‍था हमने प्रारंभ कर दी है.

          श्री सुशील कुमार तिवारी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद.

 

 

 

 

 

तहसील पलेरा एवं खरगापुर में स्‍थायी तहसीलदारों की पदस्‍थापना

[राजस्व]

14. ( *क्र. 1079 ) श्रीमती चन्‍दा सुरेन्‍द्र सिंह गौर : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या खरगापुर विधान सभा क्षेत्र में तहसील पलेरा एवं तहसील खरगापुर में प्रभारी तहसीलदार कार्यरत हैं? क्‍या तहसीलदारों को अतिरिक्‍त प्रभार सौंपने से शासन के एवं आम जनता के कार्य प्रभावित होते हैं? (ख) क्‍या उक्‍त दोनों तहसीलों में तहसीलदार न होने के कारण आम जनता के कार्यों पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है और दो-दो पदों के भार से अधिकारी तथा आम जनता भी परेशान होती है? क्‍या ऐसी स्थि‍तियों को ध्‍यान में रखते हुये पलेरा एवं खरगापुर में तहसीलदारों की पदस्‍थापना कब तक करा देंगे? यदि नहीं, तो कारण बतायें कि क्‍यों?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जी हाँ। जी नहीं। (ख) जी नहीं। स्वीकृत पदों के विरूद्ध संपूर्ण प्रदेश में तहसीलदारों की अत्यधिक कमी होने से सभी तहसीलों में पृथक-पृथक तहसीलदार की पदस्थापना में कठिनाई है। समय-सीमा बताना संभव नहीं है।

          श्रीमती चन्‍दा सुरेन्‍द्र सिंह गौर -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न है कि खरगापुर विधान सभा की तहसील पलेरा एवं खरगापुर में प्रभारी तहसीलदार कार्य कर रहे हैं और उनके द्वारा दो-दो पदों का कार्यभार संभालने के कारण आम जनता के कार्य प्रभावित होते हैं और जनता परेशान है. मैं पूछना चाहती हूँ कि तहसील पलेरा और खरगापुर में तहसीलदारों के खाली पद कब भर देंगे ? 

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तहसीलदारों की पूरे प्रदेश में कमी है. अभी टीकमगढ़ जिले में 5 तहसीलदार पदस्‍थ हैं और उनको एक-एक तहसील का अतिरिक्‍त चार्ज दिया हुआ है और सभी तहसीलों में तहसीलदार या प्रभारी तहसीलदार काम कर रहे हैं, जैसे ही प्रमोशन के बाद तहसीलदार के पद हमें मिलेंगे, हम खाली पद भर देंगे.

          श्रीमती चन्‍दा सुरेन्‍द्र सिंह गौर -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहती हूँ कि प्रदेश भर में तहसीलदारों की कमी बताई जाती है, शिक्षकों की कमी बताई जाती है और डॉक्‍टर्स की भी कमी बताई जाती है, आखिर जनता के हित में पलेरा, खरगापुर में सरकार कब और कैसे ऐसे पदों की पूर्ति करेगी ? मैं कारण जानना चाहती हूँ कि तहसीलदारों की कमी क्‍यों है ?

            श्री उमाशंकर गुप्‍ता -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तहसीलदार का पद प्रमोशन का पद है. नायब तहसीलदार के रूप में कम से कम 5 वर्ष जो कार्य करता है उसी को तहसीलदार के रूप में पदोन्‍नत करते हैं. 5 साल वाले नायब तहसीलदार कोई उपलब्‍ध नहीं थे, इसलिए प्रमोशन नहीं हुए हैं लेकिन अभी केबिनेट ने निर्णय लिया है कि वन-टाइम छूट प्रदान कर 3 साल जिन नायब तहसीलदारों का अनुभव है उनका भी प्रमोशन करेंगे. प्रमोशन का मामला जैसे ही क्‍लियर होता है, हम प्रमोशन कर देंगे.

          श्रीमती चन्‍दा सुरेन्‍द्र सिंह गौर -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहती हूँ कि मैंने दो तहसीलदारों की मांग की है, कम से कम एक तहसीलदार की मांग तो पूरी कर दें. माननीय मंत्री जी कम से कम एक तहसीलदार के लिए बोल दें.

                                               

जिला अशोकनगर में भूमि पर अवैध निर्माण

[राजस्व]

15. ( *क्र. 48 ) श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या जल संसाधन विभाग के उपयंत्री श्री ए.के. जैन ने तहसीलदार अशोकनगर को सर्वे क्रमांक 623624 पर अवैध निर्माण व अतिक्रमण की शिकायत की थी तथा जिले में इन नम्बरों तथा तुलसी सरोवर के बारें में कब-कब जिले में व किस-किस अधिकारी को शिकायत व ज्ञापन मिले व उन पर क्या कार्यवाही हुई? तहसीलदार ने कब-कब क्या आदेश व स्थगन दिये, तिथि सहित विवरण दें (ख) क्या तुलसी सरोवर की उपरोक्त भूमि में नक्शे के नम्बर से छेड़छाड़ कर बदलने की शिकायत शासन को हुई है तथा इस संबंध में पटवारी को निलम्बित कर पुलिस रिपोर्ट भी की गई है? पुलिस रिपोर्ट व पटवारी पर लगे आरोपों का विवरण व की गई कार्यवाही का विवरण देवें?         

          राजस्‍व मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्‍ता) :-

 

          श्री महेन्‍द्र सिंह कालूखेड़ा:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पहले तो मैं मंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि आपने जानकारी एकत्रित की जा रही है, ऐसे मेरे सारे प्रश्‍नों का जवाब दिया है और सैंकड़ों विधायकों का जवाब भी आपने ऐसे ही दिया है, तो यह आपके विभाग की अक्षमता दिखाता है. लेकिन धन्‍यवाद कि आपने बाद में इसकी जानकारी भेज दी है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न यह है कि सिंचाई विभाग की यह करोड़ों की भूमि है, जो भू-माफिया हड़प कर रहा था और हम लोगों ने दबाव बनाया तो वहां पर सिर्फ पटवारी को निलंबित किया, लेकिन उस पर भी राजस्‍व बोर्ड ने स्‍टे दे दिया, उस पर राजस्‍व बोर्ड ने एफ.आई.आर दर्ज करने का आदेश निरस्‍त कर दिया तो राजस्‍व बोर्ड ने अशोक नगर में कम से कम चार भूमिये हथाई खेड़ा, पिपरइ, भौंसले का बाड़ा की करोड़ों की भूमि में भू-माफिया को संरक्षण दिया है. शासन के हितो के विरूद्ध, शासकीय भूमि के विरूद्ध फैसले दिये हैं. क्‍या आप राजस्‍व मंडल के अधिकारियों की जांच करायेंगे ? आज सागर की खबर है कि कलेक्‍टर की आपत्ति के बाद भी 27 एकड़ सरकारी जमीन 35 करोड़ रूपये में बेच दी, यह राजस्‍व बोर्ड का फैसला है, या तो आप राजस्‍व बोर्ड को खत्‍म करे या फिर उनसे अधिकार छीन लें, क्‍योंकि यह अपील का थ्री-टायर सिस्‍टम है, एक तो तहसीलदार के फैसले की एस.डी.ओ और एस.डी.ओ के फैसले की कलेक्‍टर को अपील हो सकती है और कलेक्‍टर के फैसले की राजस्‍व कमिश्‍नर को अपील हो सकती है. लेकिन लोग तहसीलदार के फैसले के विरूद्ध कलेक्‍टर और कमिश्‍नर के पास न जाकर सीधे राजस्‍व बोर्ड चले जाते हैं. मेहरबानी करके आप यह सिस्‍टम खत्‍म करिये. आप पटवारी का निलंबित कर रहे हैं. मेरा कहना है कि तहसीलदार, एस.डी.ओ, कलेक्‍टर या कमिश्‍नर की जानकारी के बिना करोड़ों रूपये की भूमि की क्‍या इस प्रकार से रिकार्ड में हेराफेरी हो सकती है और वह पकड़ी न जाये ? जब हम दबाव दें तभी पकड़ी जाये. मेरा आपसे निवेदन है कि आप सभी मामलों की जांच करायें. राजस्‍व बोर्ड ने एफ.आई.आर निरस्‍त करने का फैसला दिया है. प्रशासन ने अच्‍छी कार्यवाही की है, मैं प्रशंसा करता हूं, लेकिन उसके फैसले को निरस्‍त किया हथई खेड़ा, अशोक नगर, पिपरइ और सागर यह तो सिर्फ चार हैं. ऐसे सैंकड़ों उदाहरण हैं जिसमें राजस्‍व बोर्ड ने शासन के हितों के  विरूद्ध फैसला दिया है. इन सब फैसलों की आप जांच कराने का कष्‍ट करेंगे और इस मामले में आप त्‍वरित कार्यवाही करेंगे क्‍या ?

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने भी आज इंगित किया है, लेकिन मैं एक बात भी ध्‍यान में लाना चाहता हूं कि आज ही राजस्‍व विभाग के करीब 136 प्रश्‍न हैं, जिसमें 100 से अधिक प्रश्‍नों के जवाब हमने देने की कोशिश की है. इस सिस्‍टम को और कैसे कसा जा सकता है और कई बार जिस प्रकृति के प्रश्‍न रहते हैं, उनकी जानकारी नीचे से लाने में समय लगता है, लेकिन मैं फिर भी माननीय सदस्‍यों की चिंता और आपकी चिंता से मैं भी सहमत हूं. इस सिस्‍टम को और ठीक करने की हम लगातार कोशिश कर रहे हैं. जहां तक माननीय कालूखेड़ा जी का जो प्रश्‍न है, वह बहुत वरिष्‍ठ मंत्री भी रहे हैं. राजस्‍व बोर्ड न्‍यायायिक प्रक्रिया वाला बोर्ड है, उसके खिलाफ जांच के अधिकार तो हमारे पास नहीं है. लेकिन पिछले दिनों माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने घोषणा की है कि राजस्‍व बार्ड के बारे में समिति को काम दिया है कि वह सारे क्रिया कलापों का अध्‍ययन करे. राजस्‍व बोर्ड खत्‍म करना, उसमें सुधार की कोई गुंजाइश है या सिस्‍टम को ठीक किया जा सकता है, उसका क्‍या विकल्‍प हो सकता है, इस पर भू सुधार आयोग काम कर रहा है और बहुत जल्‍दी ही हमें जो रिपोर्ट मिलेगी उसके हिसाब से सरकार कार्यवाही करेगी.

          श्री महेन्‍द्र सिंह कालूखेड़ा :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम राजस्‍व बोर्ड के जो स्‍पेसिफिक उदाहरण दे रहे हैं, आप इनकी तो समीक्षा कर लें कि इसमें शासन के हितों के विरूद्ध राजस्‍व बोर्ड ने फैसला दिया है. यह कुछ राजस्‍व बोर्ड की आदत है जो मैनेज हो जाते हैं और इस प्रकार के फैसले देते हैं. यह आपने बहुत बड़ा प्रश्‍न बना दिया है कि इसकी समीक्षा की जायेगी. इसकी बजाय ऐसे सब फैसलों की जो मैंने चार उदाहरण दिये हैं और ऐसे उदाहरण आपकी जानकारी में भी होंगे कि कहां शासकीय हितों के विरूद्ध फैसले दिये गये हैं, उनकी आप समीक्षा अलग से कर लें यह मेरा आपसे अनुरोध है.

          श्री बाबूलाल गौर :- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि जैसे क्रिमिनल कोर्ट में सरकार का पक्ष रखने के लिये डिस्ट्रिक्‍ट  कोर्ट में सरकारी वकील होते हैं, इसी तरह से क्‍या राजस्‍व मंडल में भी राजस्‍व के सरकारी वकील रहते हैं या नहीं ? यह मैं जानना चाहता हूं ?

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍व के वकील तो रहते हैं, लेकिन कई बार वकीलों की भी शिकायत आती है, हम उनको भी हटाने के लिये लिख रहे हैं और माननीय महेन्‍द्र सिंह जी राजस्‍व बोर्ड की यह सारी व्‍यवस्‍था बहुत पुरानी चल रही है. उसकी हम समीक्षा कर रहे हैं और राजस्‍व बोर्ड के निर्णय की समीक्षा सरकार नहीं कर सकती है, राजस्‍व बोर्ड के निर्णय के खिलाफ हम अपील कर सकते हैं तो ऐसे सारे मामले जो आप ध्‍यान में लायेंगे, या जो हमारे ध्‍यान में आते हैं, हम हाईकोर्ट में उनकी अपील भी करते हैं और कोई निर्णय अगर गलत हो तो उस पर न्‍यायपूर्ण निर्णय हो सके, यह सरकार कोशिश करती है. जैसा मैंने कहा राजस्‍व बोर्ड में भी अभी एक सदस्‍य को वहां से हटाया गया है. जो भी सरकार के हाथ में वह कार्यवाही सरकार कर रही है और राजस्‍व बोर्ड की स्थिति को कैसे ठीक कर सकते हैं, इस संबंध में हम बहुत जल्‍दी निर्णय कर लेंगे.

          श्री महेन्‍द्र सिंह कालूखेड़ा - माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  आप एक वाल्‍केनो पर बैठे हुए हैं. आप भ्रष्‍टाचार और भू-माफियाओं के वाल्‍केनो पर बैठे हैं. आप एक्‍ट में संशोधन करके अधिकार अपने हाथ में ले लीजिये, यह मेरा अनुरोध है.

          श्री मानवेन्‍द्र सिंह - एक बार फैसला जब रेवन्‍यू बोर्ड से हो जाता है तो क्‍या दोबारा उसी फैसले को परिवर्तन करने का रेवन्‍यू बोर्ड का अधिकार है ? फैसला एक पक्ष में किया उसका दोबारा परिवर्तन कर दिया.

          अध्‍यक्ष महोदय - यह तो फिर वही मामला आ गया.

          श्री मानवेन्‍द्र सिंह - जी हां मेरे पास मामला है. मैं उस मामले को माननीय मंत्री जी को दे दूंगा.    

मण्‍डला जिले में चालू/बंद नल-जल योजनाएं

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

16. ( *क्र. 3882 ) श्री रामप्यारे कुलस्ते : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) निवास विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत प्रत्‍येक विकासखण्‍डवार कुल कितनी नल-जल योजनाएं संचालित हैं? उक्‍त नल-जल योजना में कितनी चालू हैं और कितनी बंद हैं? (ख) प्रश्‍नांश (क) अंतर्गत विकासखण्‍डवार ग्रामवार कितनी ऐसी योजनाएं हैं, जिनमें स्‍वीकृति उपरांत कार्य पूर्ण नहीं किया जा सका है? (ग) स्‍वीकृत नल-जल योजनाओं के बंद रहने के क्‍या कारण हैं, बंद योजनाएं को चालू करने की कोई योजना है तो अवगत करायें।

लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी मंत्री (सुश्री कुसु‍मसिंह महदेले):-

           श्री रामप्‍यारे कुलस्‍ते - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से  पीने के पानी की जो मूलभूत समस्‍या का विषय है, उस संबंध में मुझे मेरे प्रश्‍न का उत्‍तर तो मिला है कि 138 नल-जल योजनाएं संचालित हैं, 106 चालू हैं और 32 योजनाएं बंद हैं. मैं इस संबंध में यह कहना चाहता हूं कि इसमें जो जानकारी दी गई है, इसमें जो 106 नल-जल योजनाएं चालू होने की बात कही जा रही है. उस संबंध में मैं यह कह रहा हूं कि इसमें लगभग आधे से ज्‍यादा, मैं गिनकर बता सकता हूं, जिसमें बंद हैं और जिसके संबंध में असत्‍य जानकारी दी जाती है. मैंने यह प्रश्‍न इसलिए लगाया था क्‍योंकि कहीं कहीं पर नल-जल योजनाओं की बहुत ही गंभीर समस्‍या है. वहां पानी का स्‍त्रोत हमको मिलता नहीं है और ऐसे गांवों में नल-जल योजना या फ्लोराईड की समस्‍या है. सामान्‍यत: गांव के लोग नल-जल योजना पसंद भी नहीं करते हैं.  तब भी ऐसी परिस्थितियों में नल जल योजनाएं संचालित की गई हैं, परंतु उनके बंद होने की जानकारी बताई गई. इस संबंध में मेरा माननीय मंत्री जी  से यह आग्रह है कि वह सही और तथ्‍यपरक जानकारी हमारे अधिकारियों को दिलाने के लिये निर्देशित करें ताकि वह नल-जल योजनाएं चालू हो सकें, यह मेरा पहला प्रश्‍न है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  दूसरा प्रश्‍न यह है कि एक तो जो नल-जल योजनाएं रोड बनाने में जैसे मानकपुर, निवास, सिंहपुर और बकोरी ऐसे तीन चार गांव की जो नल जल योजनाएं दो साल से टूटी पड़ी हैं, लोगों को स्‍वच्‍छ पेयजल नहीं मिल पा रहा है, उनको कब तक ठीक करा दिया जायेगा ?  यह माननीय मंत्री जी बताने का कष्‍ट करें.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पहले प्रश्‍न में माननीय सदस्‍य ने पूछा है कि 106 जो नल-जल योजनाएं बताई गई हैं, उसमें से भी कुछ खराब है, लेकिन मेरी जानकारी में तो 106 नलजल योजनाएं चालू हैं और माननीय विधायक अगर 106 में से कुछ नल-जल योजनाएं बतायेंगे तो उनकी मैं जांच करा लूंगी और उनके सुधार की व्‍यवस्‍था करूंगी.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दूसरे प्रश्‍न का जवाब यह है कि सी.सी. रोड बनाने में नल-जल योजनाएं क्षतिग्रस्‍त हो जाती हैं, यह वैसे तो पंचायतों का मामला है क्‍योंकि सीसी रोड वही बनाती हैं, तो उनको चाहिए कि वह जो भी नल-जल योजनाएं की पाईप लाईन क्षतिग्रस्‍त करें उनको वह सुधरवा दें. मैं माननीय पंचायत मंत्री जी से आग्रह करूंगी और जो जिला पंचायत, सी.ई.ओ. वगैरह हैं, उनको भी आप निर्देशित करें कि जो भी नल-जल योजनाएं की पाईप लाईन क्षतिग्रस्‍त करें   उनको वह सुधरवा दें. आपका निर्देश जायेगा तो वह जरूर सुधरवायेंगे.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दूसरा निवेदन यह करना चाहती हूं कि हमने आपकी विधानसभा में 8.20 लाख रूपये पंचायतों को नल-जल योजनाओं को सुधरवाने के लिये दिये हैं. जिसमें से दो लाख रूपये लाख तक की 24 बंद नल-जल योजनाओं को वह सुधरवायेंगे और योजनाएं सुधरवाने के लिये 273.33 लाख की स्‍वीकृति हमने जारी कर दी है, जिसकी निविदाएं जारी की जा चुकी हैं.

          श्री रामप्‍यारे कुलस्‍ते - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से मैं एक ओर प्रश्‍न यह करना चाहता हूं कि एक तो सतही नल-जल योजना के माध्‍यम से लगभग 446 गांवों की आपने जो ग्रुप योजना में स्‍वीकृति दी है, आपको इसके लिये बहुत-बहुत धन्‍यवाद, परंतु माननीय मंत्री जी मेहरबानी करके मैं आपसे यह जानना चाह रहा था कि आप इस योजना को कब तक प्रारंभ करवा देंगी, कब तक चालू करवा देंगी ?

          सुश्री कुसुम सिंह मेहदेले - अध्‍यक्ष महोदय, स्‍वीकृति के बाद में केबिनेट में मामला जाता है. वहां से स्‍वीकृति प्राप्‍त होने के बाद में प्रशासकीय स्‍वीकृति होती है फिर टेंडर होते हैं. हम यथासंभव शीघ्र ही इस योजना को सुधरवा देंगे.

         

पट्टे की जमीन का नियम विरूद्ध विक्रय

[राजस्व]

17. ( *क्र. 4664 ) श्री हर्ष यादव : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सागर नगर में खुरई मार्ग पर भाग्‍योदय तीर्थ चिकित्‍सालय के सामने स्थित भूमि रकबा लगभग 27 एकड़ को पट्टाधारक खत्री बंधुओं ने सुभाग्‍योदय डेव्‍हलपर्स को जनवरी 2017 में विक्रय किया है? क्‍या इस भूमि के नामांतरण का आवेदन तहसीलदार सागर को दिया गया है? यदि हाँ, तो उक्‍त भूमि खत्री बंधुओं को पट्टे पर कब किस प्रयोजन व किस अवधि के लिए दी गई थी? कब-कब मौका मुआयना कर पट्टे का नवीनीकरण किया गया? किस अधिकारी द्वारा मौका मुआयना किया गया? (ख) क्‍या कलेक्‍टर सागर द्वारा पट्टेधारियों को उक्‍त भूमि विक्रय की अनुमति दी थी? यदि हाँ, तो आदेश व नोटशीट की प्रमाणित प्रति दें। पट्टे की भूमि का भू-स्‍वामी कौन होता है? क्‍या लीज़धारी/पट्टाधारी भूमि का विक्रय कर सकता है। तत्‍संबंधी नियमों की प्रति दें। इस प्रकरण में पट्टाधारी खत्री बंधु कैसे उक्‍त भूमि के असली भूस्‍वामी बन गये? (ग) अध्‍यक्ष, राजस्‍व मंडल ग्‍वालियर के समक्ष भूमि विक्रय की अनुमति हेतु आवेदन कब आया एवं कब अनुमति जारी की गई? क्‍या मंडल को सागर जिले के राजस्‍व विभाग के शासकीय सेवकों द्वारा असत्‍य जानकारी/रिकॉर्ड/टीप दी, ताकि विक्रय अनुमति जारी हो सके। क्‍या इसकी जाँच की गई है? नहीं तो क्‍यों? (घ) उक्‍त वर्णित सागर की बेशकीमती शासकीय भूमि को भूमाफिया को विक्रय किये जाने के मामले में विक्रयपत्र व नामांतरण को शून्‍य किये जाने हेतु शासन/विभाग क्‍या कार्यवाही कब तक करेगा? क्‍या दोषियों पर पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई जावेगी? यदि नहीं, तो क्‍यों एवं हाँ तो कब तक?  

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता )

 

 

श्री हर्ष यादव - अध्यक्ष महोदय, अभी जो पूर्व सदस्यों ने आपत्ति दर्ज कराई है, राजस्व मंत्री से वही आपत्ति मेरी है. मेरा आज तारांकित प्रश्न है और मुझे जो जवाब मिला है वह अभी  यहां पर मिला है. ऐसी स्थिति में हम लोग कैसे तैयारी कर पाएंगे, यह विचारणीय प्रश्न है? मेरा प्रश्न यह है कि यह सागर जिले का मामला है, जो सुभाग्योदय जमीन है, यह नजूल की 28 एकड़ जमीन है. सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से, खास तौर से रेवेन्यू कोर्ट की सहमति से एक दिन में आवेदन दिया जाता है और उसी दिन उस पर स्वीकृति मिल जाती है. यह करोड़ों-अरबों की जमीन का मामला है. यह करीब-करीब 500-600 करोड़ रुपए का मामला है. श्री एम.के. सिंह के द्वारा सहमति दी जाती है, उसी दिन आदेश के साथ रजिस्ट्री हो जाती है. मैं यह पूछना चाहता हूं कि क्या नजूल की जमीन की रजिस्ट्री हो सकती है? यदि हो सकती है तो किस नियम और कानून के तहत? ऐसा कौन-सा कानून आ गया है जिसके तहत यह स्वीकृति हो सकती है?

श्री उमाशंकर गुप्ता - अध्यक्ष महोदय, मैंने जो जवाब दिया है उसमें इस बात को स्वीकार किया है. कलेक्टर सागर ने रजिस्ट्रार को लिखा भी था कि यह जमीन का जो रेवेन्यू बोर्ड का निर्णय हुआ है, यह मैंने खुद भी स्वीकार किया है कि रेवेन्यू बोर्ड में एक ही दिन में आवेदन हुआ और उसी दिन निर्णय हो गया. सरकार ने उसके खिलाफ होईकोर्ट में अपील की हुई है. इसका पंजीयन नहीं किया जाय, यह  कलेक्टर सागर ने पंजीयक को पत्र लिखकर भेजा था, लेकिन उसके बाद भी पता चला है कि पंजीयन हो गया है और जब नामांतरण के लिए प्रकरण आया तो हमने नामांतरण नहीं किया है. हाईकोर्ट में हमने उस केस को लगाया है, अपील उसके खिलाफ लगाई हुई है.

श्री हर्ष यादव - अध्यक्ष महोदय, जिन अधिकारियों ने यह मिलीभगत से काम किया है, उनके खिलाफ क्या कार्यवाही करेंगे. क्या इसकी लोकायुक्त से सरकार जांच कराएगी? दूसरा प्रश्न यह है कि जो राजस्व बोर्ड के सदस्य श्री एम.के. सिंह हैं, इनको हटाया गया है. परन्तु क्या इनको सस्पेंड करेंगे, क्या इन पर विभागीय जांच होगी? तीसरा प्रश्न यह है.

अध्यक्ष महोदय - एक ही प्रश्न में कितने प्रश्न पूछेंगे?

श्री हर्ष यादव - अध्यक्ष महोदय, यह बहुत बड़ा मामला है. यह 700 करोड़ रुपए का मामला है. (शेम-शेम की आवाज)..पूरे सागर जिले की आंखें उस फैसले पर लगी हुई हैं. अध्यक्ष महोदय, आपका संरक्षण चाहता हूं. यह पूरे जिले का मामला है. इतना बड़ा घोटाला सागर जिले और संभाग के इतिहास में कभी नहीं हुआ.

अध्यक्ष महोदय - आप प्रश्न पूछ लीजिए.

श्री हर्ष यादव - अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न यह है कि क्या ऐसे अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध होगा कि नहीं? और इनके खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए, यह मैं चाहता हूं?

श्री उमाशंकर गुप्ता - अध्यक्ष महोदय, हमारे किसी अधिकारी ने गड़बड़ी नहीं की है. हम किसके खिलाफ कार्यवाही करें? रेवेन्यू बोर्ड का एक निर्णय आता है, (कई माननीय सदस्यों के बैठे-बैठे बोलने पर) आप सुन तो लें. आपकी सरकार में कभी नहीं हुआ. आपकी सरकार कभी इतनी हिम्मत नहीं करेगी. अध्यक्ष महोदय, हमारे जैसे ही ध्यान में आया. रेवेन्यू बोर्ड ने फैसला कर दिया, उसको सरकार रोक नहीं सकती है. हम उसके खिलाफ तुरन्त अपील में चले गये. कलेक्टर ने रजिस्ट्रार को लिख दिया. अब रजिस्ट्रार ने किन परिस्थितियों में पंजीयन किया है? आजकल हमारा विभाग और पंजीयन विभाग मिलकर भी काम कर रहा है क्योंकि अभी पंजीयन के लिए जब जाते हैं तो अभी ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी कि रजिस्ट्रार उसके टाइटल को देखे और उसके कारण भी बड़ी समस्या खड़ी होती थी. एक साफ्टवेयर  रजिस्ट्रेशन और रेवेन्यू का मिलकर तैयार हो रहा है कि रजिस्ट्रार के यहां पर कोई रजिस्ट्री के लिए जाएगा तो रजिस्ट्रार रेवेन्यू की साइट पर उसके स्वामित्व को देखेगा और वहीं स्वामित्व वाला रजिस्ट्री करवा रहा है तो रजिस्ट्री होगी नहीं तो वह जांच करेगा. इस सिस्टम को कर रहे हैं. अब जैसे ही रजिस्ट्री होगी, जैसे वह रजिस्टर्ड होता है तो वह रेवेन्यू की वेबसाइट पर आ जाएगा और नामांतरण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. यह ट्राइल में है कुछ समय लगेगा.

श्री हर्ष यादव - अध्यक्ष महोदय, मैं जो पूछना चाह रहा हूं, उसका जवाब मुझे चाहिए.

डॉ. गोविन्द सिंह - अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने कहा कि रेवेन्यू बोर्ड का फैसला उच्च न्यायालय में भेज दिया है. मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि जब कलेक्टर ने लिखित में आदेश दिया था कि इसका पंजीयन नहीं हो, यह दिनांक 6 जून, 2016 को आदेश दिया था. उसके बाद पंजीयक ने किसके दबाव में, किन कारणों से पंजीयक ने  कलेक्टर के आदेश की अह्वेलना करते हुए, जबकि कलेक्टर क्लास वन अधिकारी है, पंजीयक कलेक्टर के अधीनस्थ है. उसने रजिस्ट्री कर दी. यह शहर के अंदर की जमीन है, यह पांच हजार स्क्वायर फिट की जमीन है 27 एकड़ जमीन 35 करोड़ रूपये में रजिस्ट्री की है, जबकि दो से ढाई सौ करोड़ रूपये उसका पंजीयन शुल्क आता था तो आपने पंजीयक के खिलाफ क्या कार्यवाही की ? पंजीयन किसके दबाव में किया? आखिर इसमें कौन सी परिस्थिति थी कि कलेक्टर के आदेश की अवहेलना करते हुए उसका रजिस्ट्रेशन किया ? इसमें इसका स्टे भी नहीं है आपने प्रकरण लगा दिया उसके लिये धन्यवाद. लेकिन क्या जो रजिस्ट्री हुई उसको शून्य करने का अधिकार शासन को है. रेवेन्यू विभाग उस पंजीयन को शून्य तो अभी कर सकता है. आप इसकी घोषणा करेंगे क्या ?

            श्री उमाशंकर गुप्ता--अध्यक्ष महोदय, रेवेन्यू विभाग इसको शून्य घोषित नहीं कर सकता है.

          डॉ.गोविन्द सिंह--रजिस्ट्रेशन आपने किया है, कलेक्टर को यह अधिकार है.

          श्री उमाशंकर गुप्ता--नहीं किया.

          डॉ.गोविन्द सिंह--अध्यक्ष महोदय, पंजीयन शून्य करने का अधिकार कलेक्टर को है.

हमारे जिले में भी पांच ऐसे आदेश हैं जिसमें कलेक्टर ने रजिस्ट्री को शून्य किया है. यह साढ़े छः सौ करोड़ रूपये का घोटाला है.

          अध्यक्ष महोदय--इसमें जांच हो रही है.

          डॉ.गोविन्द सिंह--पंजीयन में चोरी है साढ़े छः सौ करोड़ रूपये शासन में बैठे हुए, भोपाल में बैठे हुए अधिकारी, विधायक एवं मंत्री, महापोर का दबाव है. महापोर के द्वारा,वहां के स्थानीय नेताओं के द्वारा शासन के मंत्रियों के दबाव के कारण कुछ नहीं हो रहा है. इसकी उच्च स्तरीय जांच होना चाहिये.

          अध्यक्ष महोदय--यह कोर्ट में मामला है.

          (व्यवधान)

          श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा--अध्यक्ष महोदय, आप लोग भू-माफियाओं को संरक्षण दे रहे हैं. (व्यवधान)                                           

 

बहिर्गमन

श्री बाला-बच्चन,सहित इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यों द्वारा सदन से बहिर्गमन

            श्री बाला बच्चन--   अध्यक्ष महोदय, हम उत्तर से संतुष्ट नहीं हैं इसलिए हम लोग सदन से बहिर्गमन करते हैं.(व्यवधान)

          (इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्य श्री बाला-बच्चन, डॉ.गोविन्द सिंह, श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा सदस्यों के नेतृत्व में कांग्रेस के समस्त सदस्यों द्वारा शासन के उत्तर से अंतुष्ट होकर सदन से बहिर्गमन किया गया.

विधानसभा क्षेत्र राजगढ़ में समूह जल योजना की स्‍वीकृति

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

18. ( *क्र. 4325 ) श्री अमर सिंह यादव : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या राजगढ़ जिले की विधानसभा क्षेत्र राजगढ़ में विभाग द्वारा गोरखपुरा एवं मोहनपुरा डेम से ग्रामों में पेयजल हेतु समूह जल योजना स्‍वीकृत की है? यदि हाँ, तो कब? आदेश की प्रति उपलब्‍ध करावेंl (ख) उक्‍त समूह जल योजना से कितने ग्राम लाभान्वित होंगे? प्रत्‍येक ग्राम में कितनी‍-कितनी राशि स्‍वीकृत की गई है? (ग) क्‍या उक्‍त योजना अन्‍तर्गत राशि स्‍वीकृत की जाकर टेण्‍डर लगाये जा चुके हैं? (घ) यदि नहीं, तो इसके लिये कब तक राशि उपलब्‍ध कराई जा सकेगी तथा कब तक टेण्‍डर लगाये जाकर कार्य प्रारम्‍भ किया जावेगा?

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) जी नहीं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ख) गोरखपुरा एवं मोहनपुरा समूह जल प्रदाय योजनाओं के क्रियान्वयन के उपरांत क्रमशः 163 एवं 400 ग्राम लाभांवित हो सकेंगे। ग्रामवार राशि स्वीकृत नहीं की गई है। (ग) जी नहीं।                 (घ) उत्तरांश (क) के परिप्रेक्ष्य में निश्चित समय अवधि नहीं बताई जा सकती।

          श्री अमर सिंह यादव--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि राजगढ़ विधान सभा क्षेत्र में मोहनपुरा तथा गोरखपुरा डेम से जल समूह नल-जल योजना स्वीकृत की गई है क्या ? मुझे जो उत्तर प्राप्त हुआ है जी नहीं. मैं मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि मेरी विधान सभा क्षेत्र में पानी की बड़ी समस्या है. वहां पर सूखे का भी दौर है वहां का सिंचाई रकबा भी बहुत कम है. मंत्री जी ने (क) एवं (घ) में कहा है कि उसकी डीपीआर बनाई है. गोरखपुरा में 163 एवं मोहनपुरा से 400 गांवों की योजना बनायी है. इस समूह योजना को स्वीकृत कर पेयजल संकट से निजात दिलाने की कृपा करेंगी.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले--माननीय अध्यक्ष महोदय, दोनों जल समूह की डीपीआर बनायी जा चुकी है उसका मंत्रि-परिषद् से अनुमोदन भी प्राप्त हो गया है उसका वित्तीय समायोजन प्राप्त होने पर हम उसको शीघ्र करवा देंगे.

          श्री अमर सिंह यादव--अध्यक्ष महोदय, इसमें मेरा दूसरा प्रश्न यह है कि मैं इसमें चार प्रश्न लगा चुका हूं वहां पर संकट की स्थिति है. वहां पर कुंआ-बावड़ी व हैण्डपम्प का जल स्तर भी बहुत कम हो गया है. मैं मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि वह घोषणा करें कि इसी वित्तीय वर्ष 2017 में उस समूह योजना का कार्य प्रारंभ कराये तथा राशि को स्वीकृत करायें.

          अध्यक्ष महोदय--आपका पूरा प्रश्न आ गया है. मंत्रि-परिषद् से इसका निर्णय हो चुका है.

          श्री अमर सिंह यादव--अध्यक्ष महोदय, मुझे जानकारी दी गई है कि वहां की नल-जल योजना चालू है, लेकिन वह चालू नहीं है और वहां पर हैण्डपम्प की स्थिति की जानकारी दी गई है 142 हैण्डपम्प बंद बताये गये हैं. मैं बताना चाहता हूं कि कम से कम वहां पर ढाई से तीन सौ हैण्डपम्प बंद हैं और लंबे समय से उसको सुधारा नहीं जा रहा है. वहां से कम से कम 100 नये हैण्डपम्प दे दें.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं पहले ही निवेदन कर चुकी हूं कि जैसे की वित्तीय व्यवस्था होगी हम उसको करा देंगे.

          श्री अमर सिंह यादव--अध्यक्ष महोदय हैण्डपम्पों की घोषणा करा दें.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले--अध्यक्ष महोदय, बिगड़े हुए हैण्डपम्पों को तत्काल सुधारवाया जायेगा.

          अध्यक्ष महोदय--प्रश्नकाल समाप्त.

                                                (प्रश्नकाल समाप्त)

                                                                                               

                                                                                               

 

 

 

12.00 बजे                         नियम 267- क के अधीन विषय

         

          अध्यक्ष महोदय- माननीय सदस्यों की शून्य काल की सूचनाएं सदन में पढ़ी हुई मानी जाएंगी.

शून्य काल में उल्लेख

         

          (1) श्री यशपाल सिंह( मंदसौर)-- अध्यक्ष जी, उज्जैन संभाग के विक्रम विश्वविद्यालय में छात्र आंदोलन की राह पर हैं. माननीय मंत्री जी भी सदन में विराजमान हैं.विक्रम विश्वविद्यालय परिसर में लगातार दो दिन से छात्र-छात्राओं द्वारा इस बात को लेकर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है कि बीएड की परीक्षा की अंतिम तिथि आज है. एक विसंगतिपूर्ण निर्णय के कारण जहां एक ओर विक्रम विश्वविद्यालय में उन छात्रों को जिनको 4 विषयों में बीएड की  परीक्षा देना हैं, उनकी परीक्षा फीस का निर्धारण 2500 रुपये किया है और वहीं दूसरी ओर बीएड में यदि किसी छात्र को एक विषय में पूरक आयी है तो उसके  आवेदन के लिए फीस 3540 रुपये ली जा रही है. इस विसंगति के कारण विक्रम विश्वविद्यालय  परिसर में आक्रोश है.

         

          (2) डॉ गोविन्द सिंह(लहार)--अध्यक्ष महोदय, राजधानी भोपाल में एक विदेशी महिला क्रिस्टियाना के साथ गुजरात के व्यापारी दीपक ने यहां पर आकर उसके साथ अभद्र व्यवहार किया. उस महिला को बीच सड़क पर पटक दिया. मुख्यमंत्री जी के सुरक्षा गार्ड ने खून से लथपथ महिला को हास्पिटल पहुंचाया. अभी तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की गई है. उस महिला की एफआईआर भी दर्ज नहीं की है. इस प्रकार की घटना किसी विदेशी महिला के साथ होना मप्र के लिए शर्मनाक है. मैं माननीय गृह मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि उस घटना की जांच करायें और जो अपराधी हैं, जिन्होंने गाड़ी चढ़ाकर उस महिला को मारने का प्रयास किया, वह महिला व्यापार के लिए यहां आयी थी, उसकी सुरक्षा करायें और एफआईआर करायें और पूरे बयान लें. उस पर दबाव डाला गया कि एफआईआर दर्ज न कराये.

 

          (3) श्री हर्ष यादव(देवरी)-- अध्यक्ष महोदय, 4 तारीख को सागर में संत रविदास जी का महाकुम्भ था. देवरी से एक बस में लोक हितग्राहियों को लाया गया था. चूंकि शासकीय कार्यक्रम था. अधिकारियों के कहने पर दलित वर्ग के लोगों को लाया गया. कार्यक्रम से लौटते समय बस का एक्सीडेंट हो गया जिसमें 4 अनुसूचित जाति के व्यक्तियों की मृत्यु हो गई और 39 लोग घायल हुए. चूंकि यह शासकीय आयोजन था तो मैं चाहता हूं उक्त मृत व्यक्तियों के परिवार को 10-10 लाख रुपये की राशि दी जाए. उनके परिजनों को शासकीय नौकरी दी जाए. घायलों को 5-5 लाख रुपये की राशि दी जाये.

         

          (4) श्री प्रताप सिंह(जबेरा)--अध्यक्ष महोदय, माननीय वन मंत्री जी यहां विराजमान हैं. नौरादेही वन अभ्यारण्य में कुछ गांव विस्थापित हो रहे हैं. इसमें जामुनझिरी और उन्हारीखेड़ा है. इस वर्ष उन गांवों का विस्थापन होना नहीं है फिर भी उनको मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है. वहां कहा जा रहा है कि इन गांवों को तो हटना है इसलिए वहां  प्रधानमंत्री आवास की कुटीरें नहीं दी जा रही हैं. मेरा निवेदन है कि जब वे गांव विस्थापित हों, तब उनकी मूलभूत सुविधाएं बंद की जाएं. अभी से उनकी मूलभूत सुविधाएं क्यों बंद कर दी गई हैं. इससे ग्रामीणों में रोष है.

         

          (5) श्री फुन्देलाल सिंह मार्को(पुष्पराजगढ़)-- अध्यक्ष महोदय, डीएसपी मानसिंह टेकाम जो दो वर्ष से लापता थे, वह मिल गए हैं. मैं इसके लिए माननीय गृह मंत्री जी को सदन के माध्यम से धन्यवाद देना चाहता हूं. 

          अध्यक्ष महोदय, मेरे पुष्पराजगढ़ के ग्राम सिवनीसग्गम में कल्पवृक्ष जो नर्मदा तट पर है. भू कटाव के कारण उसकी जड़े कमजोर हो गई हैं और कभी भी गिर सकता है. मेरा निवेदन है कि उसका संरक्षण किया जाए.

                            

          (6) श्री सोहनलाल बाल्मीक(परासिया) - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं धार जिले के गंगवानी के अंतर्गत ग्राम भुतिया में जो घटना घटी उसके संबंध में बताना चाहता हूं. हमारे साथी विधायक उमंग सिंघार जी ने प्रश्न लगाया था वह 22वें नंबर पर था इसलिये वह नहीं आ पाया.मेरा यह निवेदन है कि कभी-कभी 25 नंबर से प्रश्नकाल चालू कर दें बाद वालों का नंबर ही नहीं आ पाता. जिस तरह का घटनाक्रम हुआ है उसमें सही तरीके से उत्तर नहीं आ पा रहा है और महिलाओं के साथ जो अत्याचार या दुष्कर्म हुआ है उसकी जांच नहीं हो पा रही है.

 

          (7) श्री शैलेन्द्र पटेल(इछावर) - माननीय अध्यक्ष महोदय, भोपाल नगर निगम के अमले ने 5.3.2016 की रात को लगभग 11 बजे के आसपास देश के पूर्व राष्ट्रपति एवं प्रदेश के महान नेता माननीय शंकरदयाल जी शर्मा की प्रतिमा जो रेतघाट,वी.आई.पी. रोड पर है उसको हटाने का प्रयास किया है और रात को ही लोगों ने उनको रुकवाया है.इससे वहां के रहवासियों एवं आम नागरिकों में रोष व्याप्त है. मैं सदन से निवेदन करता हूं कि कार्यवाही रोकी जाये.

 

          (8) श्री दिनेशराय ""मुनमुन" (सिवनी) - अध्यक्ष महोदय, मेरे जिले में धान के गोदाम में जो माल रखा हुआ है उससे चावल मिल वाले परेशान है. पूरा बिहार और उत्तर प्रदेश का माल है और चावल मिल वाला उस माल को काट रहा है तो उसका परसेन्टेज ही नहीं निकल रहा है और अपने किसानों से माल नहीं लिया गया और दूसरे प्रदेशों से माल लाया गया. मैं चाहता हूं उसकी जांच हो जाये.

 

          (9) श्री रजनीश हरवंश सिंह(केवलारी) -  माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे क्षेत्र में कल एक बड़ी दुखद घटना हो गई. एक दुमना पुल है जिसमें संजय सरोवर का वेस्ट वाटर  रहता है. साल में मात्र दो महिने सूखा रहता है बाकी पानी उसके ऊपर से ओवरफ्लो होता रहता है. काई लग जाती है उससे. कल एक चार साल के लड़के की दुर्घठना होकर उसकी मृत्यु हो गई. मैं चाहता हूं उस पर पुल बन जाये.

 

          (10) श्री के.पी.सिंह(पिछोर) - अध्यक्ष महोदय, मैंने प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी लागू करने के लिये संकल्प प्रस्तुत किया है. दो शुक्रवार निकल गये. अब अगले शुक्रवार के बाद एक शुक्रवार और बचेगा. जब हम दौरे पर जाते हैं तो गांव में महिलाएं झुंड बनाकर आती हैं और कहती हैं कि प्रदेश में शराबबंदी लागू कराओ. मेरे संकल्प पर कृपा करके चर्चा करा लें. सरकार को जो करना हो वह करे.

 

          (11) श्री तरुण भनोत(जबलपुर पश्चिम) - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं वित्त मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं उन्होंने अभी बजट प्रस्तुत किया जिसमें उन्होंने हमारे कर्मचारियों को सातवें वेतनमान का लाभ दिया है लेकिन अध्यापक उसमें छूट गये हैं तो प्रदेश के सभी अध्यापकों को सातवें वेतनमान का लाभ मिलना चाहिये.

 

          (12) श्री मधु भगत(परसवाड़ा) - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे क्षेत्र में मोतेगांव पंचायत है वहां जो मिडिल स्कूल है उसकी छत नहीं है. बच्चे किसी अन्य जगह बैठकर शिक्षा ले रहे हैं. मैंने कलेक्टर से भी कार्यवाही करने की मांग की थी लेकिन उन्होंने कोई कार्यवाही नहीं की. कृपया इस पर ध्यान दें.

 

          (13) श्री गिरीश भण्डारी(नरसिंहगढ़) -  माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे नरसिंहगढ़ नगरपालिका द्वारा शहर में ट्रेचिंग ग्राऊण्ड न हो ने के कारण शहर के बीच में कचरा डाला जा रहा है और वहां पर 2 ऐतिहासिक मंदिर हैं वहां पर एक पूरी कालोनी है मन्दिरों में जाने वाले लोग परेशान है और कचरे की वहां डंपिंग की जा रही है उसके बाद उसमें आग लगाई जा रही है जिसके धुंए के कारण प्रदूषण की स्थिति बनी हुई है. उसके लिये कोई व्यवस्था की जाये.

 

                                                  पत्रों का पटल पर रखा जाना

(1)(क) वित्तीय वर्ष 2015-16 की द्वितीय छ:माही के दौरान बजट से संबंधित आय और व्यय की प्रवृत्तियों का छ:माही समीक्षा विवरण

(ख) वित्तीय वर्ष 2016-17 की प्रथम छ: माही के दौरान बजट से संबंधित आय और व्यय की प्रवृत्तियों का छ:माही समीक्षा विवरण

        वित्त मंत्री(श्री जयंत मलैया) - अध्यक्ष महोदय, मैं,मध्यप्रदेश राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम,2005 की धारा 11 की उपधारा(1) की अपेक्षानुसार -

1)(क) वित्तीय वर्ष 2015-16 की द्वितीय छ:माही के दौरान बजट से संबंधित आय और व्यय की प्रवृत्तियों का छ:माही समीक्षा विवरण

(ख) वित्तीय वर्ष 2016-17 की प्रथम छ: माही के दौरान बजट से संबंधित आय और व्यय की प्रवृत्तियों का छ:माही समीक्षा विवरण पटल पर रखता हूं.

 

(2)(क) महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय,चित्रकूट,जिला-सतना मध्यप्रदेश का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2015-16

(ख)(1) रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय,जबलपुर का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2015-16,

(2) देवी अहिल्या विश्वविद्यालय,इन्दौर का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2016

(3) बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय,भोपाल का 44वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2015-16

 

 

12.10 बजे                                         ध्‍यानाकर्षण

 

    (1) मंदसौर जिले में आपराधिक घटनाएं घटित होना

 

          श्री यशपाल सिंह सिसौदिया (मंदसौर)--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी ध्‍यानाकर्षण सूचना का विषय इस प्रकार है-

 

          मंदसौर विधानसभा क्षेत्र में आपराधिक एवं गोली चालन की घटनाओं में लगातार वृद्धि हुई है. आदतन अपराधियों द्वारा बेकसूर व्‍यापारीगणों से फिरौती मांगना, उन्‍हें डराने, धमकाने की घटना में वृद्धि हुई है. अपराधियों द्वारा गोली चालन से एक से अधिक निर्दोष लोगों की जान गवानी पड़ी है. विगत दिनों एक ज्‍वेलर्स व्‍यापारी के मंदसौर तथा नीमच शोरूम पर अंधाधुंध फायरिंग की गई जिसमें एक व्‍यापारी को गोली लगी और वह इन दिनों जीवन और मौत के बीच संघर्षरत है. सीमावर्ती राज्‍य राजस्‍थान से अपराध में लिप्‍त अपराधियों द्वारा लगातार मंदसौर, दलौदा, नीमच आदि स्‍थानों पर सरेआम अपराध किये जा रहे हैं. इन घटनाओं से आक्रोषित आम नागरिकों एवं व्‍यापारियों व अन्‍य संगठनों ने मंदसौर बंद एवं जुलूस निकालकर अपना विरोध दर्ज किया है. पुलिस प्रशासन के खिलाफ घटित घटनाओं के कारण आमजन में आक्रोष व्‍याप्‍त है.

 

          गृह मंत्री (श्री भूपेन्‍द्र सिंह)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

          श्री यशपाल सिंह सिसौदिया-- माननीय अध्यक्ष महोदय, निश्चित पूर से  माननीय मंत्री जी धीर-गंभीर हैं, सरल हैं तथा परिणाम देते हैं. उनकी छवि भी बहुत अच्छी है लेकिन मैं यह भी बताना चाहता हूं कि नि:संदेह दिसम्बर, 2016 से जनवरी, 2017 के मध्य पुलिस प्रशासन विभाग ने प्रशंसनीय काम किया है. क्योंकि इन्हीं दिनों में अपराधियों पर रासुका, जिलाबदर जैसी कार्यवाही हुई है. लेकिन यह कार्यवाही तब हुई जब पानी सिर से ऊपर हो गया. मेरा आज की तारीख में प्रश्न लगा है परिवर्तित आरांकित संख्या 72 प्रश्न क्रमांक 3221 जिसमें विभाग की ओर से बताया गया कि 1 जनवरी, 2014 के पश्चात  28 प्रकरणों में से 11 प्रकरणों में राजस्थान के कुल 42 अपराधी संलिप्त पाये गये हैं. आज का ही प्रश्न है उसमें विभाग से मुझे लिखित में जवाब मिला है कि राजस्थान के अखेपुर ,प्रतापगढ़, देवल्दी, नोंगामा, निम्भाड़ा, और साकरिया जैसे छोटे छोटे गांव में यह अपराधी निवास करते हैं औऱ चिह्नित अपराधी हैं. यह भी जानकारी में आया है कि 2014 के 8 आरोपी अभी भी फरार हैं परिशिष्ट ""में बताया है और 2015  के 8 अरोपी अभी भी फरार हैं परिशिष्ट "" 2016 का एक आरोपी अभी भी फरार है .इस प्रकार से कुल 17 आरोपी अभी भी फरार हैं.

          अध्यक्ष महोदय- आपका प्रश्न क्या है. भूमिका बहुत लंबी हो रही है.

          श्री यशपाल सिंह सिसौदिया-- अध्यक्ष महोदय, मैं तैयारी करके आया हूं. थोड़ी सी भूमिका इसलिये बना रहा हूं कि कुछ चीजें इसमें आई नहीं हैं.

          श्री मुरलीधर पाटीदार-- माननीय अध्यक्ष महोदय, वैसे तो सिसोदिया जी की सदैव तैयारी रहती है.

          श्री यशपाल सिंह सिसौदिया-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी का ध्यान भी आकर्षित करना चाहूंगा आपके संरक्षण के साथ में कि सिर्फ पुलिस विभाग को ही इसमें दोषी करार नहीं दिया जा सकता है. राजस्व और आबकारी महकमा, चूंकि नीचम-मंदसौर जिला मादक द्रव्य पदार्थों का जिला है वहां अफीम, डोडा-चूरा होता है. इन आपराधिक तत्व में लोगों से न केवल फिरौती मांगने का मामला, न केवल गोली चालन का मामला है बल्कि मैं मंत्री जी से आग्रह करूंगा कि आपका विभाग थोड़ा सा राजस्व और आबकारी विभाग के अंदर भी जाने की कोशिश करे क्योंकि अपराध वहां से पैदा हो रहे हैं. इसलिये अध्यक्ष महोदय, प्रश्न की गंभीरता को देखते हुये मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं और मंत्री जी से मुझे अपेक्षा भी है. जब आदरणीय बाबूलाल गौर साहब प्रदेश के गृह मंत्री थे तब मेरा एक प्रश्न था , तब उन्होंने मुझे लिखित में इस बात का आश्वासन दिया था कि मंदसौर में सायबर सेल को सुसज्जित किया जायेगा, अच्छे उपकरणों के साथ सुसज्जित किया जायेगा. लेकिन जिस जिले में इतनी आपराधिक घटनायें घट रही हैं वहां का सायबर सेल लुंजपुंज बना हुआ है, कोई कम्प्यूटर नहीं है, कोई बाबू-विशेषज्ञ नहीं है.

          अध्यक्ष महोदय- कृपया प्रश्न करें.

          श्री यशपाल सिंह सिसौदिया-- अध्यक्ष महोदय, मैं प्रश्न पर आ रहा हूं. मेरे छोटे छोटे

 तीन प्रश्न हैं.क्या माननीय मंत्री महोदय, मंदसौर के सायबर सेल को ताकत प्रदान करेंगे, उसको सुव्यवस्थित व्यवस्था देंगे ? दूसरा प्रश्न इतनी बड़ी घटनाओं में राजस्थान और मध्यप्रदेश के छोटे स्तर के डीआईजी स्तर के अधिकारी ने संवाद किये हैं, संयुक्त बैठकें की है. मैं मंत्री जी से अनुरोध करूंगा कि क्या मंत्रालय स्तर पर जिसमें गृह मंत्री जी स्वयं हो और राजस्थान सरकार के गृह मंत्री हों और दोनों प्रदेश के डीजीपी भी उपस्थित हो ऐसी बैठकें चित्तौड़गढ़ उदयपुर , मंदसौर और प्रतापगढ़ में हो सकती है, क्या ऐसी कोई वृहद बैठक जिसका कोई परिणाम निकले, क्या आप ऐसी बैठकें करने की कृपा करेंगे. तीसरा प्रश्न यह है कि चिह्नित व आदतन अपराधियों के ऊपर निरंतर निगरानी कर जनता को भयमुक्त करेंगे.

          श्री भूपेन्‍द्र सिंह  - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जहां तक माननीय विधायक जी ने सायबर सेल के बारे में कहा है, यह बात सही है कि जो मंदसौर, नीमच का क्षेत्र हैं, वहांपर अफीम की खेती है, इस कारण से जो लगा हुआ राज्‍य राजस्‍थान है, वहां के भी अपराधियों का यहां पर आना-जाना रहता है. इसलिए सायबर सेल को हम जैसा माननीय विधायक जी चाहते हैं, जितना भी वहां पर अच्‍छे से अच्‍छा करने की वहां पर जरूरत है, हम लोग उसको तत्‍काल करेंगे. दूसरा जो माननीय विधायक जी ने कहा है, यह बात सही है कि कई अपराधी दूसरे राज्‍यों के भी होते हैं, इसलिए अंतर्राज्‍यीय सीमा का लाभ उठाकर अपराध करके भागने में सफल होते हैं, इस‍के लिए हम इसी माह डी.जी. स्‍तर की मीटिंग इन राज्‍यों के डीजी के साथ करेंगे. हमारी कोशिश होगी कि इस तरह के आरोपियों को यह लाभ न मिल पाए. तीसरा, जो वहां पर सतत निगरानी के बारे में माननीय सदस्‍य ने कहा है, वहां पर हम सतत निगरानी की व्‍यवस्‍था करेंगे.

          श्री कैलाश चावला (मनासा) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक सवाल में माननीय गृह मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि यह देखने में आता है कि जो पुलिसकर्मी लंबे समय से नीमच और मंदसौर जिले में पदस्‍थ हैं, उनके रिश्‍ते तस्‍करों एवं माफियाओं से हो गए हैं, क्‍या पांच वर्ष से अधिक जो पुलिसकर्मी वहां पर पदस्‍थ है, उनका स्‍थानांतरण वहां से करेंगे  ताकि यह गठजोड़ खत्‍म हो सके.

          श्री दिलीप सिंह परिहार (नीमच)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से पूछना चाहता हूं कि नीमच में भी लगातार घटना बढ़ी है, नीमच का ही मामला है, मैं जिले से विधायक हूं, वहां पर कुछ भू-माफिया और शराब-माफिया लोगों की जमीन हड़प रहे हैं.  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा मंत्री जी से सीधा प्रश्‍न है कि क्‍या भू-माफिया और शराब-माफियाओं से समाज की सौम्‍य शक्ति की सुरक्षा करेंगे .

          श्री भूपेन्‍द्र सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे वरिष्‍ठ सदस्‍य, माननीय कैलाश चावला जी ने कहा है कि वहां पर पुलिस के अधिकारी है, जिनको पांच वर्ष पदस्‍थ रहने की अवधि हो गई है, उनका परीक्षण करवा लेंगे और जिन पुलिसकर्मी के पांच वर्ष हो गए हैं, उनको वहां से हटा देंगे.

          श्री दिलीप सिंह परिहार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नीमच जिले में सौम्‍य शक्ति के मकानों पर गुण्‍डों द्वारा कब्‍जा हो रहा है, लोगों को मारा जा रहा है, जमीनें हड़पी जा रही है. कम से कम सौम्‍य शक्ति की सुरक्षा का तो आश्‍वासन दे दें.

          श्री भूपेन्‍द्र सिंह  - अध्‍यक्ष महोदय, आप बता दें, जो आप कहेंगे वह कर देंगे.

          श्री दिलीप सिंह परिहार -  मंत्री जी, धन्‍यवाद.

          श्री आरिफ अकील(भोपाल उत्‍तर) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह पांच साल वाली व्‍यवस्‍था नीमच, मंदसौर के लिए करेंगे या पूरे मध्‍यप्रदेश में करेंगे कि जिनके पांच साल हो गए हैं, उनको हटाएंगे, आप जवाब दिलवाने की कृपा करेंगे तो मेहरबानी होगी. आप ना कर देंगे तो कोई हाथ खड़ा नहीं कर सकता, वह तो आपका  विशेष अधिकार है . मेरा कहना है कि सिर्फ नीमच, मंदसौर के लिए यह पांच साल की योजना है या पूरे मध्‍यप्रदेश के‍ लिए है, मेरा आज का ही प्रश्‍न था, जिसमें जवाब दिया गया कि जानकारी एकत्रित की जा रही है.  

          (2) मालवा क्षेत्र में गेहूं का उपार्जन केन्‍द्र न खोला जाना.

          श्री बहादुर सिंह चौहान (महिदपुर) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी ध्‍यान आकर्षण की सूचना का विषय इस प्रकार है-

                        खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री (श्री ओमप्रकाश धुर्वे) - अध्यक्ष महोदय,

 

 

                   श्री बहादुर सिंह चौहान -- अध्यक्ष महोदय,  उत्तर तो करीब करीब मिल  गया है और समस्या का हल भी हो गया है, लेकिन  विभाग के अधिकारियों ने जो उत्तर बनाया है, मैं  उसकी तरफ मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं.  मैंने  उज्जैन संभाग की समस्त  मंडियों की  27 फरवरी, 2017, 28 फरवरी,2017   एवं 1 मार्च,2017  की  रिपोर्ट मंगवाई है.  अध्यक्ष महोदय,  कितना नुकसान हुआ है,  यह जानकारी मैं  मंत्री जी को देना चाहता हूं.  27 फरवरी, 2017  को कृषि उपज मंडी, उज्जैन  में 24900  क्विंटल  गेहूं की आवक हुई. उसमें से 1800-1900 क्विंटल जो गेहूँ बिका है, वह 1,535 रूपये में बिका है और 23000 क्विंटल गेहूँ 1,250 रूपये में बिका है. अगर समर्थन मूल्‍य 1,625 रूपये से कम किया जाये तो 375 रूपये प्रति क्विंटल के नाम से लाखों का एक ही दिन में वहां की कृषि उपज मण्‍डी में घाटा हुआ है.

          अध्‍यक्ष महोदय - आपका काम तो हो गया है. आपका प्रश्‍न बताएं.

          श्री बहादुर सिंह चौहान - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न यह है कि चूँकि मेरी मांग 10 मार्च की थी. यह बात सही है कि 3 दिन होली की छुट्टियां भी आ रही हैं और तैयारियां भी हो रही हैं. यह चूँकि मालवा से जुड़ा हुआ, इन्‍दौर और उज्‍जैन संभाग से जुड़ा हुआ मामला है. मनोज जी आज नहीं आए हैं. यह हमारा दोनों का ध्‍यानाकर्षण था.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके ध्‍यानाकर्षण लेने के बाद जो कार्यवाही हुई. मैं, उससे अवगत कराना चाहता हूँ कि उसका कितना लाभ हुआ है ? जैसे ही ध्‍यानाकर्षण गया तो गेहूँ के रेट उठकर 1,500 रूपये से ऊपर हो गए. स्‍टॉकिस्‍ट को यह मालूम पड़ गया कि 15 तारीख के बाद हमें गेहूँ नहीं मिलेगा, उपार्जन केन्‍द्र में खरीदी चालू हो जायेगी. इससे किसानों को करोड़ों रूपये का अप्रत्‍यक्ष लाभ हुआ है. आपके माध्‍यम से, मैं माननीय मंत्री जी को धन्‍यवाद देते हुए यदि आपकी इच्‍छा हो तो एक जनहितैषी प्रश्‍न करना चाहता हूँ और वह हल भी हो जायेगा. वह किसानों से जुड़ा हुआ है.

          अध्‍यक्ष महोदय - आप प्रश्‍न कर दें.

          श्री बहादुर सिंह चौहान - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, खरीदी के बाद जो उपार्जन केन्‍द्र हैं, जो प्रभावशील लोग हैं, उनके गेहूँ का उपार्जन केन्‍द्रों में परिवहन हो जाता है लेकिन जो प्रभावशील लोग नहीं हैं, वहां पर 20,000 से 40,000 क्विंटल गेहूँ इकट्ठा हो जाता है. मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी से कहना चाहता हूँ कि क्‍या समस्‍त केन्‍द्रों पर परिवहन, इन दोनों संभागों में एक जैसा होगा, समय पर गेहूँ का परिवहन कर लिया जायेगा और उनका भण्‍डारण कर दिया जायेगा ?

          अध्‍यक्ष महोदय - यह इससे संबंधित नहीं है.

          श्री ओमप्रकाश धुर्वे - अध्‍यक्ष महोदय, समय पर परिवहन करा लिया जायेगा कि किसानों को दिक्‍कत न हो, उपार्जन सही समय पर हो जाये.

          श्री बहादुर सिंह चौहान - धन्‍यवाद मंत्री जी.

 

 

12.32 बजे

प्रतिवेदनों की प्रस्‍तुति

याचिका समिति का बयालीसवां एवं तैंतालीसवां प्रतिवेदन

               

 

 

 

 

12.33 बजे                        याचिकाओं की प्रस्‍तुति

          अध्‍यक्ष महोदय - आज की कार्य सूची में सम्मिलित सभी याचिकाएं प्रस्‍तुत की हुई मानी जाएंगी.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.34 बजे                             समितियों का निर्वाचन

 

 

                                                                                                                                                                                        

          अध्‍यक्ष महोदय--

 

12.36 बजे    वर्ष 2017-2018 के आय-व्‍ययक पर सामान्‍य चर्चा ( क्रमश:)

          श्री के.पी. सिंह -- मुकेश नायक जी की चर्चा नहीं हो पाई थी.

          अध्‍यक्ष महोदय-- वह बोलने के लिए खड़े नहीं हो रहे हैं.

          श्री मुकेश नायक-- आप अनुमति देंगे तभी तो हम बोलेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय-- आप पहले मेरी बात सुन लें. दरअसल 3 मार्च को भोजन अवकाश के बाद कार्यवाही निरंतर जारी रखने के निर्देश आसंदी से दिए गए थे किन्‍तु मुकेश नायक जी उस दिन उपस्थि‍त नहीं हुए थे. आखिरी ढाई घंटा अशासकीय कार्य के लिए होता है. इसीलिए एक-एक सदस्‍य दोनों ओर से चर्चा कराने का निर्णय किया गया था परंतु मुकेश नायक जी उस दिन उपस्थि‍त नहीं हुए थे. आज वे उपस्थित हैं परंतु आज दूसरे सदस्‍यों को भी चर्चा में भाग लेना है.

          श्री मुकेश नायक-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उस दिन अशासकीय संकल्‍प थे और दैनिक कार्य सूची में दूसरे जॉब वर्क भी थे. वह उस दिन संपादित भी हुए है और उस दिन आसंदी पर माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय बैठे थे. आप उस दिन की कार्यवाही उठाकर देख लें. उन्‍होंने कहा था कि मेरा भाषण आज जारी रहेगा. आपसे भी मैंने आग्रह किया था तो आपने विनम्रतापूर्वक मुझसे कहा था कि आप मुझे बोलने के लिए थोड़ा समय देंगे. यदि आप नहीं देते हैं तो भी मुझे कोई ऐतराज नहीं है.

          अध्‍यक्ष महोदय-- माननीय सदस्‍य से मेरा अनुरोध है कि आप संक्षेप में बोलें. आप पहले भी 13 मिनट बोल चुके हैं. आप अपनी बात संक्षेप में रखें.

          वन मंत्री, (डॉ. गौरीशंकर शेजवार)--आप मुकेश नायक बोल देते हैं तो वह एकदम डिप्रेस हो जाते हैं. आगे पीछे कुछ अलंकरण लगा दिया करें.

          अध्‍यक्ष महोदय-- शेजवार साहब क्‍या कहें.

          डॉ. गौरीशंकर शेजवार-- उनसे ही पूछें कि क्‍या लगाएं. क्‍योंकि अकेले सदस्‍य के लिए मजबूरी है कि यहां से वहां तक सब सिंह ही सिंह हैं. आप कहां फिट हो रहे थे मुझे बताइए. आप कुछ ऐसा बता दें जो आपके आगे पीछे लगने लगे.

          श्री के.पी.‍ ि‍संह-- एक नंबर पर कोई भी बैठै हों पर नायक तो यही रहेंगे.

          डॉ. गौरीशंकर शेजवार -- आपका नाम आरिफ सिंह कर देते हैं.

          श्री आरिफ अकील-- अध्‍यक्ष महोदय, हम से मामा कह रहे थे कि आपका नाम आरिफ सिंह कर देते हैं. अध्‍यक्ष महोदय, आगे सिंह ही सिंह हैं, आप तो इसमें कुछ संशोधन कर दीजिए.

          अध्‍यक्ष महोदय-- आपके अगल-बगल सभी सिंह हैं इसलिए डॉ. साहब ने ऐसा कहा.

          श्री के.पी.‍ ि‍संह -- यह वन तो है नहीं. वन में वन मंत्री फंस जायें तो समझ में आता है कि सिंहों के बीच में क्‍या करेंगे लेकिन यह तो सदन है यहां आप चिन्‍ता क्‍यों  करते हैं.

          डॉ. गौरीशंकर शेजवार-- मनुष्‍य सिंह हैं. आप उस तरफ मत ले जाइए. इनमें पूरी-पूरी मानवीयता है, इनमें दयालुपन है. यह सिंह जनता की सेवा के लिए हैं. इनमें से कोई भी सिंह शिकारी नहीं है. 

          श्री कैलाश चावला-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वन मंत्री का यह फर्ज है कि वह सिंहों का संरक्षण करें.

          खाद्य मंत्री, (श्री ओम प्रकाश धुर्वे) -- य‍ह बिना सींग के सिंह हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय-- सिंहों का संरक्षण वह कर रहे हैं, नायक का संरक्षण हम करेंगे.

          पंचायत मंत्री (श्री गोपाल भार्गव)--अभी सिंहों की चर्चा हो रही थी (XXX)

            डॉ. गौरीशंकर शेजवार--जब शेरों की गिनती होती है तो उनको केवल टाइगर कहते हैं.  (हंसी)

          श्री के.पी. सिंह-- (XXX).  (हंसी)

          अध्यक्ष महोदय--दोनों बातें विलोपित कर दें.

          श्री मुकेश नायक (पवई)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश की वास्तविक स्थिति पर अगर आप नजर डालें तो मध्यप्रदेश में मैदानी स्तर पर सरकार के पास योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए जो बुनियादी ढांचा होना चाहिए आज मध्यप्रदेश में सरकार के पास वह बुनियादी ढांचा नहीं है. तहसीलदार नहीं हैं, आर.आई. नहीं हैं, पटवारी नहीं हैं, डिप्टी कलेक्टर नहीं हैं. यहां तक तो छोड़ो आप, पिछले दिनों मैं अपने विधान सभा क्षेत्र के एक स्कूल में निरीक्षण करने गया था. मैंने वहां पूछा स्कूल में साइंस के कौन से टीचर कौन हैं जो फिजिक्स, मैथमेटिक्स और केमेस्ट्री पढ़ाते हैं तो मुझे बताया गया कि फिजिक्स का कोई टीचर नहीं है. मैंने पूछा कि फिर इस स्कूल में फिजिक्स कौन पढ़ाता है तो प्रिंसीपल ने कहा कि आर्ट्स के टीचर यहां फिजिक्स पढ़ाते हैं. आप मुझे यह बताइए जिन्होंने कभी अपनी जिंदगी में फिजिक्स नहीं पढ़ी वे स्कूल में फिजिक्स पढ़ा रहे हैं. मध्यप्रदेश में 4000 स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी टीचर नहीं है. मध्यप्रदेश में 17000 ऐसे स्कूल हैं जहां केवल एक टीचर है. अस्पतालों की हालत क्या है. आप सुदूर ग्रामीण अंचलों में चले जाओ, मेरे यहां एक प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र है उसमें तीन साल से ताला लगा हुआ है, कलदा और श्यामगिरी में, मेरे विधानसभा क्षेत्र में दो अस्पताल ऐसे हैं जहां एक भी डॉक्टर नहीं है. मैदानी स्तर पर इस सरकार की नीति, सिद्धांत और कार्यक्रमों को धरातल पर क्रियान्वित करने के लिए इस सरकार के पास बुनियादी ढांचा ही नहीं है, अब कैसे यह सरकार चल रही होगी आप कल्पना करें. माननीय अध्यक्ष महोदय, इसका सबसे ज्यादा प्रभाव गरीबों की हितग्राहीमूलक योजनाओं पर पड़ा है.

          श्री गोपाल भार्गव--मैं तो प्रस्ताव करता हूँ कि सरकार के लाखों रुपए एक डॉक्टर को बनाने में खर्च होते हैं और कुछ यहां आकर हाउस में बैठ जाते हैं वे कम से कम ऐसे बंद चिकित्सालयों में वे जा सकते हैं. (डॉ. गौरीशंकर शेजवार के बैठे-बैठे अध्यक्ष महोदय की आसंदी की ओर इशारा करते हुए कि वहां भी तो बैठे हैं) क्षमा करना अध्यक्ष महोदय. (हंसी)

          श्री लखन पटेल--अध्यक्ष महोदय भी खुद डॉक्टर हैं. (हंसी)

          श्री के.के. श्रीवास्तव--अध्यक्ष महोदय, यह प्रस्ताव वापस लिया जाए (हंसी)

          श्री मुकेश नायक--अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे कह रहा था कि यह बुनियादी ढांचा न होने के कारण हितग्राहीमूलक योजनाओं पर, गरीबी उन्मूलन के कार्यक्रमों पर सबसे ज्यादा असर मैदानी स्तर पर हुआ है. मैं उदाहरण देता हूँ कि ग्रामीण क्षेत्रों में एक-एक, डेढ़-डेढ़ साल से हितग्राहियों को पेंशन नहीं मिली है. मनरेगा की मजदूरी का भुगतान 6-6, 7-7 महीने से नहीं हुआ है. सामाजिक सुरक्षा पेंशन, विकलांग पेंशन, निराश्रित पेंशन योजना और परिवार सहायता के जो कार्यक्रम इस सरकार के द्वारा चलाए जा रहे हैं यह इतने कमजोर हैं, मैं आपका ध्यान सीएजी की एक रिपोर्ट की तरफ आकर्षित करना चाहूंगा जिन्होंने कहा है कि राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के दिशा निर्देशों के अनुसार राज्य से कम से कम केन्द्र सरकार के द्वारा दी गई सहायता के बराबर की अतिरिक्त राशि दिए जाने हेतु दृढ़ता से आग्रह किया गया था. राज्य सरकार ने इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना, इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय निराश्रित पेंशन योजना एवं राष्ट्रीय पारिवारिक परिवार सहायता योजना इनमें वर्ष 2010-2015 के दौरान 14 चयनित जिलों में से 6 जिलों में समग्र सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना, राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम में 1.49 लाख हितग्राहियों की 7.74 करोड़ रुपए की पेंशन की राशि का भुगतान नियत तिथि से 16 माह से विलंब से किया. यहां विधायक, मंत्री, आई.ए.एस. ऑफिसर हर माह अपनी तनख्‍वाह ले लेते हैं और नि:शक्‍तजनों, गरीब लोगों और निराश्रितों को सरकार 16-16 माह से पेंशन नहीं दे पा रही है. माननीय मुख्‍यमंत्री जी विधान सभा में कहते हैं कि '' सर्वे भवन्‍तु सुखिन:, सर्वे सन्‍तु निरामया''. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सी.ए.जी. की रिपोर्ट में दूसरा कमेंट किया गया है कि 16.16 लाख व्‍यक्ति, जो इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय वृद्धावस्‍था पेंशन योजना हेतु पात्र थे लेकिन वे योजना का लाभ प्राप्‍त नहीं कर सके. राज्‍य में 1.70 लाख व्‍यक्ति ऐसे हैं जो इंदिरा गांधी विधवा पेंशन योजना हेतु पात्र थे लेकिन वे योजना का लाभ नहीं प्राप्‍त कर रहे थे. माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने फिर कह दिया कि हम पेंशन तीन सौ रूपये महीना कर देंगे. अभी कह दिया कि जो विधवा पेंशन योजना है, वह तीन सौ रूपये कर देंगे. माननीय मुख्‍यमंत्री जी की इस घोषणा की मैं प्रशंसा करता हूं कि अब विधवा पेंशन योजना के लिए गरीबी सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है, बीपीएल कार्ड की आवश्‍यकता नहीं है. उन्‍होंने विधान सभा में घोषणा की कि जो भी विधवा महिला मध्‍यप्रदेश में होगी, सभी को इस पेंशन योजना का लाभ दिया जायेगा. यह बहुत ही अच्‍छा निर्णय है लेकिन धरातल पर आकर यह निर्णय कैसा हो जाता है इसका मैं एक उदाहरण देना चाहता हूं. राज्‍य में 1.70 लाख व्‍यक्ति ऐसे थे, जो इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय विधवा योजना हेतु पात्र थे लेकिन वे योजना का लाभ प्राप्‍त नहीं कर रहे थे. बढ़ी हुई पेंशन दर से भुगतान के लिए भारत सरकार के परिपत्र के विलंब से क्रियान्‍वयन होने के कारण अक्‍टूबर 2012 से मार्च 2013 तक बढ़ी हुई पेंशन दर तीन सौ रूपये प्रतिमाह के स्‍थान पर पुरानी दर दो सौ रूपये प्रतिमाह के आधार पर ही भुगतान किया गया. आपने पेंशन दर बढ़ाई, आपने विधान सभा में घोषणा कर दी लेकिन धरातल पर यह योजना मूर्त रूप नहीं ले पाई. इसका कोई लाभ हितग्राहियों को नहीं मिल पाया. राज्‍य में 0.12 लाख व्‍यक्ति इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय निराश्रित पेंशन योजना हेतु पात्र थे लेकिन वे योजना का लाभ प्राप्‍त नहीं कर रहे थे. इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय निराश्रित पेंशन योजना के अंतर्गत 2.2 लाख हितग्राहियों को अक्‍टूबर 2012 से मार्च 2013 तक बढ़ी हुई पेंशन दर तीन सौ रूपये प्रतिमाह के विरूद्ध दो सौ रूपये प्रतिमाह से ही पेंशन का भुगतान किया गया. यह मध्‍यप्रदेश की वास्‍तविक हालत है. गरीबी उन्‍मूलन के कार्यक्रम, हितग्राही मूलक योजनाओं के कार्यक्रम धरातल पर ठीक से कार्यान्वित नहीं हो रहे हैं. चूंकि समय कम है. सिंचाई परियोजनाओं एवं मध्‍यप्रदेश में सिंचाई क्षमता में वृद्धि की जो बात कही गई है, उस पर मुझे विस्‍तार से अपनी बात रखनी थी. ऊर्जा के उत्‍पादन में 17 हजार मेगावॉट बिजली उत्‍पादन की जो बात कही जा रही है, इस पर भी मुझे विस्‍तार से अपनी बात रखनी थी. आगे कभी समय प्राप्‍त होगा तो मैं इस पर अपनी बात रखूंगा. सिंचाई परियोजनाओं पर, बुंदेलखण्‍ड पैकेज पर जो दो घंटे समय का निर्धा‍रण किया गया है, मेरी कोशिश होगी कि मैं मुख्‍यमंत्री जी एवं इस सरकार को आईना दिखा सकूं. आपने मुझे थोड़ा सा समय दिया है इसलिए मैं केवल सांकेतिक रूप से एक विषय सदन के समक्ष रखना चाहता हूं.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह सी.ए.जी.की रिपोर्ट है. पिछली रिपोर्ट में जो कहा गया था, वह मैंने माननीय मंत्री जी एवं सरकार को बताया था. आपने मध्‍यप्रदेश में इतनी ज्‍यादा सिंचाई क्षमता बढ़ा दी, इतनी ज्‍यादा सिंचाई परियोजनायें बना दीं परंतु मैदान में सिंचाई परियोजनाओं एवं सिंचाई बांधों की वास्‍तविक स्थिति क्‍या है इसका एक उदाहरण सी.ए.जी.में लिखा है. मैं यह पढ़कर आपको सुनाता हूं. नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण एवं जल संसाधन विभाग में 68 अपूर्ण योजनाओं पर 31 मार्च 2015 तक 14 हजार 344 लाख 25 हजार करोड़ रूपये का व्‍यय किया गया है. 14 हजार करोड़ से ज्‍यादा रूपये निष्‍फल रहे, बर्बाद हो गए. इस सरकार में काम करने वाले धरातल के लोग 14-14 हजार करोड़ रूपये बर्बाद कर रहे हैं.

          वन मंत्री (डॉ. गौरीशंकर शेजवार)- प्‍वांइट ऑफ ऑर्डर. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सी.ए.जी. की रिपोर्ट के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि ये काम गलत हुए हैं.क्योंकि सीएजी की रिपोर्ट विधान सभा के पटल पर आएगी, पटल के बाद कमेटी में जाएगी और कमेटी में जाने के बाद जो पैरा रहेंगे, उनके ऊपर डिस्कशन होगा.

          श्री मुकेश नायक--  अध्यक्ष महोदय, मैं पूरी बात कर लूँ. इस पर प्वाईंट आफ ऑर्डर नहीं बनता.

          डॉ.गौरीशंकर शेजवार--  विभाग अपनी सफाई देगा, तब जाकर कहीं हम विश्वसनीयता से यह कह सकते हैं कि यह काम गलत है.

          श्री मुकेश नायक-- ये बहुत सीनियर विधायक हैं...(व्यवधान)..

          डॉ.गौरीशंकर शेजवार--  आप यदि सीएजी के आधार पर गवर्नमेंट के ऊपर यह आरोप लगा रहे हैं तो यह न्यायसंगत नहीं है और विधि संगत भी नहीं है और विधान सभा की कार्यवाही में इसको विलोपित किया जाए, यह मेरा आप से विनम्र निवेदन है.

          श्री मुकेश नायक-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं सीएजी की रिपोर्ट को कोट कर रहा हूँ....

          वित्त मंत्री (श्री जयन्त मलैया)--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह है कि पहली बार भी सीएजी की रिपोर्ट को लेकर बात हुई है. उस समय भी मैंने निवेदन किया था कि सीएजी की रिपोर्ट कोई अंतिम रिपोर्ट नहीं है. यह उसके ऑब्जर्वेशंस होते हैं और...

          श्री मुकेश नायक--  तो हम ऑब्जर्वेशंस तो बताएँगे ना.

          श्री जयन्त मलैया--  उसके बाद जो लोक लेखा समिति के सभापति हैं उनके यहाँ जाकर विटनेसेस होते हैं और जो अनियमितता हुई है, वह बताई जाती है, उसके बाद इसके ऊपर फिर आप बात कर सकते हैं.

          श्री मुकेश नायक--  तो आप मुझे यह बता दीजिए, 2012, 2013, 2014, 2015 एवं 2016 की सीएजी की रिपोर्ट आ गई हैं. आपने क्या किया? 2015 की रिपोर्ट में है कि 72,000 करोड़ के खातों का मिलान नहीं हुआ...

          डॉ.गौरीशंकर शेजवार-- अध्यक्ष महोदय, फिर मेरी आपत्ति है कि सीएजी की जो कमेटी है, लोक लेखा, वह क्या कर रही है. वह स्वतंत्र रूप से विधान सभा का एक छोटा स्वरूप होती है...

          श्री मुकेश नायक-- डॉक्टर साहब, मुझे पूरा बोल तो लेने दीजिए. फिर आप बोलिए.

          डॉ.गौरीशंकर शेजवार--  उसके ऊपर यहाँ जानकारी नहीं मांगी जा सकती है. अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि जब वह अपना परीक्षण पूरा कर लेगी और अपनी रिपोर्ट बनाएगी इसके बाद फिर से वह बात यहाँ विधान सभा के पटल पर आएगी. मेहरबानी करके नियम प्रक्रिया को समझें और पढ़ें, इसके बाद विधान सभा में बात करें.

          श्री मुकेश नायक--  डॉक्टर साहब, जोर से बोलने से कोई नियम नहीं बदल जाता है. आप प्वाईंट आफ ऑर्डर में भी गलत कोट कर रहे हैं और विधान सभा में आप बात भी गलत कर रहे हैं.

          श्री गोपाल भार्गव--  अध्यक्ष महोदय, एस्टीमेट कमेटी के चेअरमेन कालूखेड़ा साहब बैठे हैं. चाहें तो इस पर प्रकाश डाल दें.

          डॉ गोविन्द सिंह--  लेकिन 13 वर्षों में आपने सीएजी की रिपोर्ट पर इस विधान सभा में कितनी चर्चा कराई? आपके जो कारनामे हैं, वह सपोर्ट में रह कर दब गए. अगर आप में हिम्मत है तो आप चर्चा क्यों नहीं कराते? कराओ चर्चा यहाँ.

          श्री मुकेश नायक--  कराओ सीएजी की रिपोर्ट पर चर्चा. ..(व्यवधान)..सीएजी ने जो रिपोर्ट दी है उस पर भी चर्चा होगी.

          श्री गोपाल भार्गव--  अध्यक्ष महोदय, एस्टीमेट कमेटी के चेअरमेन कालूखेड़ा जी यहाँ बैठे हैं.

          डॉ.गौरीशंकर शेजवार--  गोविन्द सिंह जी ने कहा आप में हिम्मत है तो, हिम्मत नहीं, बात दिमाग की है, बुद्धि लगाइये और पढ़िए. हिम्मत है तो वहाँ सड़कों पर जाओ, जो अच्छा लगे वहाँ. यहाँ यदि बैठना है तो पढ़ना पड़ेगा. नियम प्रक्रिया से चलना पड़ेगा. यह हिम्मत वाली बातें, 2-5 मिनट में खड़े हो जाते हों, आप में हिम्मत हो तो ऐसा करिए.

          श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा--  एस्टीमेट कमेटी के चेअरमेन गौतम जी हैं.

          श्री गोपाल भार्गव-- पीएसी के चेअरमेन बैठे हैं. जबकि यह रिपोर्ट है उस समय के आप पीएसी के चेअरमेन थे.

          श्री मुकेश नायक--  आपने लोकसभा में तो सीएजी की रिपोर्ट में अपना धर्मग्रंथ बना दिया था. जिस तरह से सीएजी की रिपोर्ट को आपने लोकसभा में कोट की, उसके ऑब्जर्वेशंस को आप सड़क पर ले गए. पूरे देश में जिस तरह से आपने चर्चा की.अध्यक्ष महोदय, इस पर मुझे व्यवस्था चाहिए. क्या हम सीएजी के ऑब्जर्वेशंस सदन में नहीं रख सकते?

          अध्यक्ष महोदय--  आप रख सकते हैं....

          श्री मुकेश नायक--  तो फिर यह प्वाईंट आफ ऑर्डर क्यों कह रहे है?

          अध्यक्ष महोदय--  किन्तु संक्षेप में कर दें, मेरा यही अनुरोध है.

          श्री मुकेश नायक-- माननीय अध्यक्ष महोदय, संक्षेप में ही कर कर रहा हूँ.

          अध्यक्ष महोदय--  कृपया एक मिनट में समाप्त कर दें.

          डॉ.गौरीशंकर शेजवार--  अध्यक्ष महोदय, जब तक इनके नाम के आगे पीछे कोई अलंकरण नहीं लगाएँगे तब तक ये ऐसे ही व्यवधान करेंगे. आप सदस्य के साथ साथ कुछ न कुछ अलंकरण लगा दीजिए. इनका व्यवधान बिल्कुल समाप्त हो जाएगा.

          श्री के.पी.सिंह--  व्यवधान गौरीशंकर शेजवार जी आप कर रहे हैं.

          अध्यक्ष महोदय--  माननीय मुकेश नायक जी, कृपया एक मिनट में अपनी बात समाप्त करें.

          श्री मुकेश नायक--  अध्यक्ष महोदय, बोल सकूँ तब ना बोलूँगा. आप स्वयं देख रहे हैं कि अनावश्यक हस्तक्षेप कर रहे हैं. विचारों को तोड़ रहे हैं. नियम और प्रक्रिया के विरुद्ध बात कर रहे हैं. आवाज रोकने की कोशिश कर रहे हैं.

          अध्यक्ष महोदय--  अब बात हो गई. अब आप उस पर बहस मत करिए.

          श्री मुकेश नायक--  ऐसा थोड़े ही होता है कि इतने सीनियर लोग इस तरह से विधान सभा में हस्तक्षेप करें. ये कह रहे हैं कि हम हाउस में सीएजी के ऑब्जर्वेंशंस को कोट नहीं कर सकते. बताइए, आपने विनम्रतापूर्वक व्यवस्था दी.

          डॉ.गौरीशंकर शेजवार--  अध्यक्ष महोदय, मैंने कोट करने  पर आपत्ति नहीं की. मैंने तो विश्वसनीयता की बात कही है और एथेंटिसिटी क्या है उसकी?   इसकी बात की है.

          श्री मुकेश नायक--  तो फिर सीएजी को खतम कर दीजिए. अगर उसकी एथेंटिसिटी नहीं है तो क्यों आपने सीएजी बनाकर रखी है?

          डॉ.गौरीशंकर शेजवार--  आप ऐसा प्रस्ताव लाएँ, आप सीएजी के अगेंस्ट जा रहे हैं. आपका वक्तव्य संविधान के विरोध में है. आप संविधान के विरोध में बात कर रहे हैं.

          श्री मुकेश नायक-- यह देख लीजिए. जब आप कह रहे हैं कि उसकी कोई एथेंटिसिटी नहीं है तो सीएजी को आपने बना कर क्यों रखा है? सीएजी की रिपोर्ट पर आपने 13 सालों में सदन में एक बार भी चर्चा नहीं कराई. पहले मध्यप्रदेश में परंपरा रही है कि कि सीएजी की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी जाती थी सीएजी की रिपोर्ट्स पर विचार-विमर्श होता था.

          अध्यक्ष महोदय--  आप तो अपनी बात करिए.

          श्री मुकेश नायक-- अपनी राय देते थे. लेकिन 13 सालों से सीएजी की रिपोर्ट पर इस सदन में चर्चा नहीं हुई.

          अध्यक्ष महोदय--  आप एक मिनट में अपनी बात समाप्त करिए.

          श्री मुकेश नायक--  माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मुख्यमंत्री जी, जब भी बजट पर चर्चा होती है तो पिछले शासन काल से तुलना करने लगते हैं. मैं यह कहना चाहता हॅूं कि पिछली सरकार के खिलाफ तीन बार जनादेश हो चुका है. अब आप अपने 13 साल के लेखा-जोखा पर चर्चा करिए, परफॉर्मेंस पर चर्चा करिए.  आपने 13 साल मध्‍यप्रदेश में क्‍या किया. इस पर चर्चा नहीं करते हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय -- कृपया अब समाप्‍त करें.

          श्री मुकेश नायक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍वेस्‍टर्स मीट का वर्ष 2008 का एक उदाहरण उठाया और कितनी चतुराई से रख दिया. वर्ष 2008 के पहले कितने इन्‍वेस्‍टमेंट हुए हैं उसकी चर्चा तक नहीं हुई.

          अध्‍यक्ष महोदय -- श्री मुकेश नायक जी, कृपया बैठ जाएं.

          श्री मुकेश नायक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब मैं 1985 में एम.एल.ए. बना था तब मध्‍यप्रदेश का 3300 करोड़ रूपये का बजट था. भारत वर्ष का 1951-52 का बजट पौने तीन सौ करोड़ रूपये का था पूरे देश का.

          अध्‍यक्ष महोदय -- कृपया समाप्‍त करें.

          श्री मुकेश नायक -- माननीय प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी का बजट उठाकर देख लीजिए. गुजरात में 1961-62  का बजट.  

          अध्‍यक्ष महोदय -- श्री गिरीश गौतम, कृपया अपनी बात कहें. श्री मुकेश नायक जी आप कृपया बैठ जाइएं.

          श्री मुकेश नायक -- पिछली इस तरह की तुलनात्‍मक उपलब्धियों से आज हम तुलनात्‍मक दृष्टि रखते हैं तो किसी नतीजे पर नहीं पहुंचेंगे. यह बजट मध्‍यप्रदेश की जनता को धोखा देने की कोशिश है, जनता की आंखों में धूल झोकने की कोशिश है. इसलिए मैं इस बजट का विरोध करता हॅूं.

          वित्‍त मंत्री (श्री जयंत मलैया)  -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि सत्‍ता का हस्‍तांतरण वर्ष 2003 में एक पार्टी से दूसरी पार्टी में हुआ था तो कम्‍पेरिजन जब भी होगा तो वर्ष 2003 से ही होगा. उसमें किसी को विचलित होने की आवश्‍यकता नहीं है और वर्ष 2003 से लेकर वर्ष 2013 तक जो हुआ है जो हमारा परफॉर्मेंस है ये आंकडे़ बताते हैं.

          डॉ. गोविन्‍द सिंह -- बचपन से बुढ़ापे तक वही करते रहोगे.

          अध्‍यक्ष महोदय -- श्री गिरीश गौतम अपनी बात कहें. अब बह‍स नहीं होगी.

          श्री मुकेश नायक -- भारतवर्ष में पूरे देश में सभी राज्‍यों का बजट इसी रेश्‍यो से बढ़ा है जितना मध्‍यप्रदेश में बढ़ा है. राजस्‍थान का, गुजरात का, छत्‍तीसगढ़ का, मध्‍यप्रदेश का सभी राज्‍यों का बजट इसी रेश्‍यो से बढ़ा है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- श्री मुकेश नायक जी, कृपया बैठ जाएं. अब इनका कुछ लिखा नहीं जाएगा. श्री गिरीश गौतम कृपया अपनी बात कहें.

          श्री मुकेश नायक -- (XXX)

          अध्‍यक्ष महोदय -- इनका रिकार्ड में नहीं आएगा.

          श्री गिरीश गौतम (देवतालाब) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय वित्‍त मंत्री जी द्वारा प्रस्‍तुत बजट का समर्थन करने के लिए और प्रतिपक्ष द्वारा कटौती प्रस्‍तावों का विरोध करने के लिए खड़ा हुआ हॅूं. मैं अपनी बात शुरू करूं, उसके पहले चूंकि श्री मुकेश नायक जी ने शुरू किया है एक चौपाई से शुरू करना चाहता हॅूं बंदहूं सत्‍तह संजर चरना, दुग पर उभय बीज कछू बरना. अब इसकी परिभाषा श्री मुकेश नायक जी करेंगे. स्‍वाभाविक तौर पर हमें विरोध करना चाहिए यदि हम प्रतिपक्ष में हैं तो विरोध करो. मेरा निवेदन एक बात के लिए है कि हमें अंधविरोध नहीं करना चाहिए. हमारा विरोध रचनात्‍मक हो.

 

 

 

12.58 बजे           {उपाध्‍यक्ष महोदय (डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुए}

            माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, रचनात्‍मक विरोध से एक प्रदेश के लिए विकास की योजनाओं को ठीक ढंग से लागू कर सकते हैं जिन कमियों को आप गिनाना जानते हैं,गिना रहे हैं उनको भी दूर करने का अवसर हमें मिल सकता है और जब रचनात्‍मक विरोध की बात हम करते हैं तो मैं एक उदाहरण के साथ प्रस्‍तुत करना चाहता हॅूं. हमारा विरोध अंधविरोध हो गया. एक बडे़ चित्रकार ने बढि़या चित्र बनाया और उसको एक पब्लिक प्‍लेस में टांग कर उसमें नीचे लिख दिया कि इसमें जिसको कहीं बुराई दिखाई दे, वह चिन्‍ह लगाकर उसमें चिन्हिृत कर दे कि इसमें यहां पर गड़बड़ी है. दूसरे दिन शाम को जब चित्र देखने गया, चित्र काली स्‍याही से पटा हुआ था. वह बड़ा दुखी हुआ कि हमने सारी मेहनत की. मेहनत करने के बाद हालत यह है तो उसके मित्र ने सलाह दी कि इसमें एक लाईन लिख दो कि जिसको जहां गड़बड़ी दिखाई दे, वह वहां सुधार कर दे और जब वह चित्र टांगा तो दूसरे दिन एक भी बिन्‍दु उसमें नहीं लगा हुआ था. रचनात्‍मक विरोध यह है परन्‍तु आप संकल्‍प किस बात का लेते हैं हम जब तक मुख्‍यमंत्री नहीं हो जाएंगे, जब तक हम सरकार नहीं बना लेंगे तब तक माला नहीं पहनेंगे. संकल्‍प इस बात का होना चाहिए कि हम जब तक इस प्रदेश के भीतर कुपोषण समाप्‍त नहीं कर देंगे, जब तक हम इस प्रदेश से गरीबी रेखा से नीचे जीने वाले जो लोग हैं उनका स्‍तर ऊंचा नहीं कर देंगे, सरकार के साथ मिलकर उन बिन्‍दुओं को बताकर उसको ठीक करने का काम करेंगे और जब श्री मुकेश नायक जी बोल रहे थे तो उसमें नमामि देवी नर्मदे का जिक्र आया तो स्‍वाभाविक है कि नर्मदा देवी हमारी जीवन दायिनी हैं, मोक्ष दायिनी हैं, जीवन भी देती हैं और मोक्ष भी प्रदान करती हैं. हमारे मुख्‍यमंत्री जी जब नमामि देवी नर्मदे की उसके अस्तित्‍व को लेकर और उस क्षेत्र के भीतर से सुविधा पाने वाले लोगों को ठीक से उसका उपयोग हो सके, तो हमारे कई मित्र उसका विरोध कर रहे हैं. अभी आपने कहा कि केवल 50 करोड़ उसके घाटों के सौन्‍दर्यीकरण के लिए दिया तो विरोध चूंकि अंधविरोध आपका हो गया. माननीय उपाध्‍यक्ष जी, अंधविरोध हो गया तो कैसे होता है.

          श्री मुकेश नायक -- मैंने ये नहीं कहा था.....     

          श्री गिरीश गौतम -- आपने ये कहा कि 50 करोड़ चाहिए.

          श्री मुकेश नायक--  मैंने यह कहा था कि 20 करोड़ रुपये की रेत प्रतिदिन निकाली जा रही है तो साल भर का बजट बहुत हो जाता है उसका, उस अनुपात में कम दिया है.

          श्री गिरीश गौतम--  आपने यह कहा कि केवल 50 करोड़ दिया एक हजार करोड़ देना चाहिए था,शायद आपके यह शब्द थे. चूंकि हम कितना भी अच्छा काम करें आपको विरोध करना है इसका मैं एक किस्सा आपको सुना देता हूं कि वर्ष 2003 में मनगवाँ विधानसभा से मैं पहली बार विधायक बना. मनगवाँ से 18-18 विधायक और 3-3 सासंद होने के बाद भी वहाँ तहसील नहीं थी. हमने माननीय मुख्यमंत्री शिवराज जी से कहा कि इतना महत्वपूर्ण स्थान है, मनगवाँ को तहसील बनाना चाहिए. फिर वह कौन लोग हैं, उनकी पहचान होना चाहिए, जिन लोगों ने, मैंने अपने जीवन में पहली बार देखा कि तहसील नहीं बने इसका आंदोलन खड़ा दिया कि तहसील मनगवाँ में नहीं होना चाहिए, खून-खराबा किया, मामले-मुकदमे हुए फिर भी वह तहसील बन गई. अब जब बन गई तो क्या करें. तहसील बना दिया. चूंकि गिरीश गौतम के प्रयास से, शिवराज चौहान जी के आदेश से तहसील बनी थी तो कुछ लोगों को वह पचा नहीं तो उन्होंने यह शुरु कर दिया कि साहब, तहसील तो बन गई अब कर्मचारी कहाँ हैं ? कर्मचारी भी बिठा दिये, कार्यालय खोल दिया, तमाम बातें पूर्ण हो गई तो कहने लगे कि बिल्डिंग कहाँ हैं. जब तीन-चार करोड़ रुपये लगाकर बिल्डिंग भी बनकर तैयार हो गई और कुछ नहीं बचा तो कहना शुरु कर दिया कि यह देखो गिरीश गौतम का कमाल बिल्डिंग का दरवाजा पूर्व की तरफ होना चाहिए था तो पश्चिम की तरफ कर दिया. यह अंध विरोध है. इससे बचने की आवश्यकता है. प्रदेश के भीतर हम सत्ता पक्ष और विपक्ष में हैं. मतभेदों की राजनीति करिये, मनभेद की राजनीति की कोई गुंजाइश नहीं हो. हम इस तरह का संकल्प लें कि प्रदेश को हम उन तमाम सारी चीजों से बाहर निकालकर ले जाएंगे. इसमें यदि हमारे मुख्यंमत्री जी यदि प्रयास कर रहे हैं तो स्वाभाविक तौर पर विरोध नहीं करेंगे तो शायद वोट का इंतजाम नहीं होगा, वह इंतजाम करिये. पर ऐसा भी विरोध ना हो जिससे हमको नुकसान होता हो. साथियों, मैं आपसे एक चौपाई के रूप में निवेदन करना चाहता हूं कि "नहीं अस कोई जनमा जग माही,प्रभुता पाई काहि मद नाहीं". लेकिन हमारे मुख्यमंत्री शिवराज जी ने तय किया है, उन्होंने साबित किया है, इन 11 सालों के भीतर उनके अंदर मुख्यमंत्री का भाव नहीं दिखाई पड़ा,उनके अंदर सहजता का भाव है, सरलता का भाव है, उन्होंने वह दिखाया है और इस चौपाई का लगभग-लगभग फेल करने का प्रयास किया है और इसी कारण से हमारे प्रदेश की साढ़े सात करोड़ जनता का आशीर्वाद उनके साथ है और आप देखते हैं कि उनको कोई अपदस्थ नहीं कर पा रहा है. मैं कहना चाहता हूं कि यह जनता उनका कवच है.आपने कहा कि निराश्रित पेंशन150 का 300 हमने कर दिया लेकिन आप कहते हैं कि पेंशन नहीं मिलती. आप गांवों के भीतर जाकर देखिये तो पेंशन 300 रुपये मिलना शुरु हो गई है और मिल रही है. जनता शिवराज जी को आशीर्वाद दे रही है.

          माननीय उपाध्यक्ष महोदय, आपने कहा कि सिंचाई के भीतर हमने असत्य आंकड़े दिये मैं आपको अपने रीवा जिले में सभी साथियों आमंत्रित करना चाहता हूं. आप आईए हम आपको दिखाते हैं. जिस बाण सागर की हम कल्पना नहीं सकते थे,अभी उस दिन यादवेंद्र सिंह जी खड़े होकर आपत्ति कर रहे थे औऱ कह रहे थे कि सिंचाई कहाँ हो रही है, किसने इसकी घोषणा की, किसने इसको शुरु किया. शुरु जिसने भी किया होगा  किया होगा क्योंकि हम ठेका लेकर नहीं बैठे हैं इस संसार के भीतर कि हम रहेंगे तो संसार चलेगा हम नहीं रहेंगे तो नहीं चलेगा ऐसा कहने के लिए हम यहाँ नहीं खड़े हुए हैं. वह चलेगा पर उसको मूर्त रूप किसने दिया ,आज रीवा जिले के भीतर यदि हम 90 हजार हेक्टेयर जमीन की सिंचाई कर रहे हैं तो 2007  के भीतर हमारे शिवराज जी के प्रयास से बाण सागर को बांधकर के नहरों का जाल बिछाकर के हम 80 हजार हेक्टेयर की जमीन की सिंचाई कर रहे हैं.माननीय उपाध्यक्ष महोदय, आपको मालूम है कि चुरहट के ना जाने कितने गाँव, बड़खरा हो गया, मलदेवा हो गया, कौन-कौन से गाँव गिनाऊँ. हमारे नेता प्रतिपक्ष के गाँव और 125 पंचायतों के भीतर उस बाण सागर नहर का पानी जा रहा है और सिंचाई हो रही है और आप कहते हैं कि सब आंकड़े के भीतर हमने बाजीगरी कर दी. हमने ऐसा नहीं किया है. साथियों, मैं कहना चाहता हूं कि यह हमारे शिवराज जी के साथ सबका आशीर्वाद है और जब उनके साथ आशीर्वाद है तो एक मैं यहाँ कहना चाहता हूं. अब चूँकि मुकेश नायक जी ने शुरु किया था इसीलिए,उपाध्यक्ष महोदय, मेरी आदत में नहीं है इस तरह से चौपाई और शेरो-शायरी से बात करने की पर आज मेरा भी मन हो गया है. मैं कहना चाहता हूं कि

                                   खंजर छुपाए घूमते हैं जो उसकी मौत के इंतजार में,

                                   रूबरू होने पर तारीफ किया करते हैं, ये उसका काम है.

          श्री मुकेश नायक -- रूबरू होने पर भी वही कहता हूँ जो विधान सभा में कहता हूँ.

          श्री बाला बच्‍चन -- जो अभी सरकार में हैं इसके पहले सरकार वाले लोग ऐसा किया करते थे.

          श्री गिरीश गौतम -- बाला बच्‍चन जी, ऐसा नहीं है और ऐसा मत समझना कि मैं सरकार की तरफ से, सत्‍ता पक्ष की तरफ से खड़ा हुआ हूँ इसलिए इस तरह की बात कह रहा हूँ. मैं उस चौपाई का भी कायल हूँ-

          सचिव बैद गुरु तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आस ।

          राज धर्म तन तीनि कर होइ बेगिहीं नास ।।

          इसलिए मैं यदि सत्‍ता पक्ष का विधायक होने के नाते बोल रहा हूँ तो मैं इस बात को भी कहना चाहता हूँ कि हम सबको मिलकर यह काम करने की आवश्‍यकता है. आज हम देखें कि सातवें वेतन आयोग को लागू कर दिया, यह आपको दिखाई नहीं पड़ता, तीर्थ दर्शन योजना का बजट बढ़ा दिया, यह आपको दिखाई नहीं पड़ता, कैलाश मानसरोवर के लिए 30 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये का प्रावधान कर दिया, यह आपको दिखाई नहीं पड़ता, ओंकारेश्‍वर में शंकराचार्य पीठ की स्‍थापना की घोषणा हमने कर दी, यह आपको दिखाई नहीं पड़ता, उद्योग क्षेत्र की स्‍थापना के लिए ज्‍यादा बजट दे दिया, यह आपको दिखाई नहीं पड़ता, वेट को 14 से 12 कर दिया, यह आपको दिखाई नहीं पड़ता, जेल प्रशासन में 297 करोड़ रुपये का प्रावधान कर दिया, यह आपको दिखाई नहीं पड़ता, पेंशन योजना में 150 से 300 रुपये का प्रावधान कर दिया, यह आपको दिखाई नहीं पड़ता.

          श्री के.पी. सिंह -- उपाध्‍यक्ष महोदय, गौतम जी, आपके अनुसार यह हुआ कि हम लोग भी यही सब देखें जो आप देख रहे हैं. आपका मंतव्‍य यही है ना कि जो आप देख रहे हैं वही हम देखें.

          चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी -- उपाध्‍यक्ष महोदय, जो सत्‍य है वह देखें.

          श्री के.पी. सिंह -- उपाध्‍यक्ष महोदय, जो मुकेश नायक जी ने बोला है वह भी सत्‍य है.

          श्री ओमप्रकाश धुर्वे -- उपाध्‍यक्ष जी, हम सत्‍य ही देख रहे हैं और वे भी देखें.

          श्री के.पी. सिंह -- उपाध्‍यक्ष महोदय, सिक्‍के के दो पहलू हैं और दोनों पहलू देखने पड़ेंगे. आप हमारे पहलू देखकर बोलिए जरा, जो मुकेश नायक जी ने बोला, उसका जवाब दीजिए अब.

          श्री गिरीश गौतम -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय जी, मैं विनती करना चाहता हूँ, इसलिए मैंने कहा है रचनात्‍मक विरोध करें, अंधविरोध मत करिए. मतभेदों की राजनीति मत करिए.

          श्री के.पी. सिंह -- स्‍तुति के अलावा एकाध बात ऐसी भी तो आप करिए जो गलत है.

          श्री गिरीश गौतम -- मैंने इसलिए चौपाई सुनाई, आपने शायद सुनी नहीं.

          श्री के.पी. सिंह -- चौपाई नहीं सुननी, आप यह तो बता दो कि सरकार ने कहीं कुछ गलत किया है या नहीं ?

          उपाध्‍यक्ष महोदय -- के.पी. सिंह जी, उनको बोलने दीजिए.

          चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, के.पी. सिंह जी ने दो दिन पहले बोला था कि अगर आप मुकेश नायक जी के हिसाब से बोलेंगे तो दोबारा लौटकर नहीं आएंगे. (..व्‍यवधान..)

          श्री के.पी. सिंह -- अगर आप रचनात्‍मक बात कर रहे हैं.. (..व्‍यवधान..) जो गलत है तो यह भी तो बता दो कि कौन सी बात गलत है.

          श्री दिलीप सिंह परिहार -- गौतम जी जो बोल रहे हैं वह सुनो ना साहब, उसमें क्‍या है, सत्‍य तो स्‍वीकार करो.

          श्री के.पी. सिंह -- कहीं कुछ गलत हो रहा है कि नहीं, यह भी तो बता दो.

          चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आदरणीय के.पी. सिंह जी ने दो दिन पहले यह बात कही थी कि अगर मुकेश नायक जी के हिसाब से बोलेंगे तो दोबारा लौटके नहीं आएंगे. यह बात स्‍वयं के.पी. सिंह जी ने कही थी. यह बात रिकॉर्ड में है.

          श्री के.पी. सिंह -- यह हमारी आपस की बात है, आपको इससे क्‍या लेना-देना ?

            चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी -- सदन में कोई आपस की बात नहीं होती, सदन में जो बात होगी वह सार्वजनिक होगी.

          उपाध्‍यक्ष महोदय -- बैठ जाइये, आपस में चर्चा नहीं करें. गिरीश जी, आप जारी रखें.

          श्री गिरीश गौतम -- माननीय उपाध्‍यक्ष जी, मैं मुकेश जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूँ. अब ऐसा मत कहना कि मैं कोई वर्गीकरण कर रहा हूँ. आपने कम से कम विधवाओं को पेंशन वाले सत्‍य को स्‍वीकार किया, मैं जब यह कहता हूँ कि बजट ऐतिहासिक है, वास्‍तव में उन लाखों विधवाओं की आप कल्‍पना नहीं कर सकते, हम नहीं कर सकते, जबकि हम सब गाव के भीतर जाते हैं, जो यहा विधायक चुनकर आते हैं गाव में जाते हैं, अपने क्षेत्र में जाते हैं, हमारे सामने जब 15 साल की, 20 साल की विधवाएं हाथ जोड़कर खड़ी हो जाती हैं कि साहब हम 20 साल से विधवा हैं, हमारा नाम गरीबी रेखा में नहीं है तो हमें पेंशन नहीं मिल रही है और यदि इस बजट में यह व्‍यवस्‍था कर दी गई कि सेवारत और पेंशन पाने वालों को छोड़कर सभी विधवाओं को पेंशन दी जाएगी. इसकी तारीफ आपने की मैं आपका धन्‍यवाद करना चाहता हूँ. मैं के.पी. सिंह जी ने निवेदन करना चाहता हूँ कि इसको देखने की आवश्‍यकता है. यह हमको देखना चाहिए, पर हमको यह दिखाई नहीं पड़ता.

          माननीय उपाध्‍यक्ष जी, मैं एक किस्‍सा सुनाना चाहता हूँ. किस्‍सा सब जानते हैं मैं केवल सुनाना चाहता हूँ. यह किस्‍सा अकबर-बीरबल का है, अकबर की पत्‍नी बार-बार यह कहती थी कि बीरबल को मंत्री पद से हटा दो और उसके भाई को बना दो. अकबर बार-बार यह कहता कि वह बुद्धिमान नहीं है उसे कैसे मंत्री बना दें. पत्‍नी ने कहा कि उसकी परीक्षा ले लो, राजा ने कहा कि ठीक है परीक्षा ले लेते हैं. बीरबल को बुलाया गया, बीरबल से पूछा तो उसने कहा कि साहब जिसको आख है वह भी अंधा होता है तो अकबर ने कहा कि यह तुम कैसे कह रहे हो, तो उसने कहा कि हम इसको साबित करेंगे, राजा ने कहा कि क्‍या तुम मुझे भी कह रहे हो तो उसने कहा कि हा, हम आपको भी कह रहे हैं. राजा ने कहा कि साबित करो, अब बीरबल अपने घर में चले गए, तो जो हमारे यहाचारपाई होती है, जिसको गांव में बांस लेकर के बीनते हैं. बीरबल जी उसको लेकर उल्‍टा-सीधा बीनने लगे, अकबर ने 2-3 दिन बाद पूछा की बीरबल नहीं आ रहे हैं, क्‍या कर रहे हैं तो उनको बताया कि वह तो गांव में खटिया बीन रहे हैं, तो उन्‍होंने कहा कि हमको भी लेकर चलो और जब अकबर वहां पहुंचे, उनके सामने खड़े हुए और पूछा की बीरबल यह क्‍या कर रहे हो तो उन्‍होंने बोला कि क्‍या तुम अंधे हो, तुमको दिखाई नहीं पड़ता कि मैं खटिया बीन रहा हूं. इसी प्रकार हमको बनी हुई सड़कें नहीं दिखाई पड़ती हैं.

          श्री के.पी.सिंह :- गौतम जी, हमको सब दिखाई पड़ता है, आपको कुछ दिखाई पड़ता है या नहीं. आप एकाध कमी तो बता दो कि सब बढि़या है. आप अपनी सीट से एकाध कमी बताओगे तो हम मानेंगे कि आप रचनात्‍मक बात कर रहे हैं.

          श्री गिरीश गौतम :- माननीय के.पी.सिंह जी, हमारी बात का, आपकी बात का सत्‍यता का निराकरण जनता पांच साल के भीतर करती है, जब हम चुनाव के मैदान में जाते हैं. उस समय जनता फैसला करके यह बताती है कि कौन सत्‍य है, कौन असत्‍य है और बार-बार यह घटना घटने के बाद भी, यदि आप इस तरह की सोच नहीं रखने वाले हैं तो आप विश्‍वास रखिये कि 2018 के बाद भी आप वहीं बैठे रहोगे और फिर आप यह कहोगे कि हम आपका कैसे साथ दें तो आपको कई मामलों में साथ तो देना पड़ेगा. क्‍योंकि जनता बहुत समझदार है, यह मैं आपको बताना चाहता हूं.

          श्री के.पी.सिंह :- आपका साथ देंगे तो उधर आ जायेंगे, इसका मतलब यही हुआ.

          श्री गिरीश गौतम :- उप चुनाव के परिणाम ने तो साबित कर दिया.     

          श्री के.पी.सिंह :- हम भी चुनकर ही आये हैं, ऐसे नहीं आये हैं.

          श्री गिरीश गौतम:- इसलिये मैंने पहले ही चौपाई बतायी थी, मुकेश जी. शायद आपने उनको उसका अर्थ नहीं समझाया है. बंदऊं संत असज्‍जन जरना जी की चौपाई शायद आपने उनको नहीं समझायी. यदि समझायी होती तो हमको इतना समय नहीं लगता.

          माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं यह निवेदन करना चाहता हूं इसलिये मैं इसके समर्थन में खड़ा हुआ हूं कि हमारे प्रदेश के लिये इस बार का यह बजट वाकई में एतिहासिक बजट है और इसीलिये मैंने यह क‍हा  कि इस कारण से नहीं, मैं एक बात और हमारी सरकार से, वित्‍त मंत्री जी और मुख्‍यमंत्री जी से बोलना चाहता हूं कि एक चौपाई को हमेशा याद रखना -

                        तुलसी संत सुयंबतरू, पर कारज के हेत,

                        उतते वह पाहन हरत हैं, उतते यह फल देत.

          और जब यह फल चलेगा तो उसका उपयोग आप भी करेंगे.

          उपाध्‍यक्ष महोदय :- क्‍यों गिरीश जी, तुलसी बाबा आज आपकी आत्‍मा में प्रवेश कर गये हैं

          श्री गिरीश गौतम :- नहीं उपाध्‍यक्ष महोदय, यह आपकी कृपा है. तुलसीदास जी ने प्रवेश नहीं किया, क्‍योंकि मुकेश नायक जी ने शुरू किया था, मैं कोई ज्ञानी नहीं हूं, वह तो प्रवचन करते हैं.

          उपाध्‍यक्ष महोदय :- चित्रकूट वहां से नजदीक है.

          श्री गिरीश गौतम :- उपाध्‍यक्ष महोदय, नायक जी तो प्रवचन करते थे.

          श्री रामपाल सिंह:- प्रवचन तो नायक जी करते थे, इनके पास यह पूरी चौपाई कहां से आ गयी. प्रवचनकर्ता सामने बैठें हैं, यह समझ में नहीं आ रहा है.

          उपाध्‍यक्ष महोदय :- सदन सबका प्रतिनिधित्‍व करता है.

          श्री सोहन लाल बा‍ल्‍मीक:- उपाध्‍यक्ष महोदय, इन पर मुकेश नायक जी का प्रभाव पड़ गया है.

          श्री गिरीश गौतम :- उपाध्‍यक्ष महोदय, अच्‍छी बातों का प्रभाव तो पड़ना चाहिये, यह अच्‍छी बात है. हम कहां कह रहे हैं कि अच्‍छी बातों के लिये प्रभाव नहीं पड़ेगा, प्रभाव पड़ेगा, पड़ना चाहिये. यह अच्‍छी बात है, हमको सीखना चाहिये और शायद हमने आप सब लोंगो से सीखा है, यह सीख का मतलब यह नहीं है कि उसका हम कोई दुरूपयोग करें. इसलिये मैंने पहले ही निवेदन किया है कि हम सब को मिलकर मतभेद की राजनीति से बाहर निकलना पड़ेगा, कुछ चीजें जो अच्‍छी है उनको हमको स्‍वीकार करना पड़ेगा. वह यह कि जब फल गिरेगा तो सबको प्राप्‍त होगा. यदि हमारी सड़क बनती है तो वह रीवा से हनुमना जाती है तो उसमें न केवल हमारा क्षेत्र आता,बल्कि हमारे कांग्रेस के दो-दो विधायकों सुन्‍दरलाल जी का और सुखेन्‍द्र सिंह बन्‍ना जी का क्षेत्र भी आता है. उस दिन हमारे गोविन्‍द सिंह जी का एक संकल्‍प केंसर के सवाल को लेकर आया था. इसलिये मैं कहना चाहता हूं कि अस्‍पताल को लेकर हमारी मध्‍यप्रदेश की सरकार ने जो काम किया है वह वाकई में वह एतिहासिक काम है. शायद वह हमारे मित्र नहीं हैं, मैं केंसर के मरीजों का नाम में ठूंढकर के लाया हूं, मैं उनके नाम आपको बताना चाहता हूं, जब मैंने उनको कहा कि केवल पांच हजार के रिजेक्‍शन का कागज मिलता है.मेरे पास वह कागज है, दो लोगों का नाम है वह उनके क्षेत्र के हैं, वह हमारे क्षेत्र के नहीं हैं.यह हैं श्रीमती सरिता गुप्‍ता,शंशाक गुप्‍ता कुंदनपुरवा,मऊगंज केंसर के मरीज के पचास हजार एस्टिमेट पचहत्‍तर हजार का था मिला पचास हजार रूपये और दूसरे हैं प्रेम सागर गुप्‍ता, विश्‍वनाथ जायसवाल, ग्राम कुंदनपुरवा, मऊगंज, मेट्रो अस्‍पताल, केंसर रिसर्च सेंटर के लिये एक लाख रूपये. यह तो दो मैं ठूंढकर दो लोंगो के नाम लाया हूं. मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि इसमें तो कम से कम तारीफ होना चाहिये. हमें इस बात का ध्‍यान रखना चाहिये कि यह काम भी अच्‍छें हो रहे हैं. कम से कम हमको इन कामों की तारीफ तो करनी चाहिये. इसलिये साथियों, मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि और भी बहुत सारी बातें बहुत सारे साथी बोलेंगे, मैं तो केवल इतना ही कहना चाहता हूं. अभी दीन दयाल रसोई योजना में गांव और शहर के भीतर कलेक्‍ट्रेट आयेगा, तहसील आयेगा, अस्‍पताल आयेगा. अस्‍पताल में पहले से भी व्‍यवस्‍था चल रही है, उसमें अगर कहीं कोई गड़बड़ी हो रही है, तो हम सबकी जिम्‍मेदारी बनती है कि हम सब मिलकर उसको ठीक करने का काम करें. अगर कहीं कोई गड़बड़ है तो उसको ठीक करने का काम करें. 

          माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जैसे कई बार लोग ऐसा कहते हैं कि साहब विधायक और सांसद को गाली देते हैं, तो मैं कई बार उन लोगों से कहता हूं कि हमारे साथ चलो और हम भी अस्‍पताल में जाते हैं. यदि अस्‍पताल में कोई मरीज मर गया तो क्‍या अस्‍पताल हम बंद कर देंगे ? ट्रेन में एक्‍सीडेंट हो जाता है] लोग मर जाते हैं, तो क्‍या हम ट्रेन बंद कर देंगे ? हमारा सबका काम यह है कि उस ट्रेन की व्‍यवस्‍था को ठीक करें कि एक्‍सीडेंट नहीं हो. अस्‍पताल के भीतर यदि मरीज मरता है तो हमें अस्‍पताल की व्‍यवस्‍था को ठीक करने की आवश्‍यकता है.

          माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हम इस बात के लिये विधानसभा के भीतर आते हैं कि प्रदेश की जनता को मिलने वाले कोई लोक कल्‍याण के काम में, हमारे इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के काम में, हमारे विकास के काम में, कहीं कोई गड़बड़ी हो रही हो तो उसे ठीक करने का काम हमको करना चाहिए. इसलिए मैं निवेदन यहीं करना चाहता हूं कि हमें मतभेदों की राजनीति से बाहर निकलना चाहिए. मतभेद हमारे हो सकते हैं, हम पक्ष विपक्ष में हैं, लोकतंत्र का तकाजा है कि दोनों को रहना पड़ेगा.

          कुंवर विक्रम सिंह   - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसलिए तो प्रश्‍नकाल में 66 प्रश्‍नों का जवाब एकत्रित किया जा रहा है, क्‍या ऐसे होता है  ?

            उपाध्‍यक्ष महोदय - वह समाप्‍त कर रहे हैं, इसलिए आप बैठ जाईये.

          श्री गिरीश गौतम - सबका जवाब नहीं आयेगा. यदि कोई जवाब नहीं आता है तो उसके लिये हमारे पास तरीके हैं.

          उपाध्‍यक्ष महोदय - आप उनके प्रश्‍न का जवाब न दें, आप समाप्‍त करें.

          श्री गिरीश गौतम - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसलिए मैं निवेदन यही करना चाहता हूं कि आईये हम सब मिलकर और कम से कम एक बार, इस बार ही विधानसभा के भीतर इतिहास की रचना कर दीजिये. हम पक्ष और विपक्ष के लोग दोनों मिलकर के इसमें कोई वोटिंग का सवाल नहीं है, एक साथ मिलकर के ताली बजाकर हमारे वित्‍तमंत्री द्वारा प्रस्‍तुत इस बजट को पास करने का काम करें.

          उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझको बोलने का मौका दिया उसके लिये बहुत बहुत धन्‍यवाद. हमारे श्री मुकेश जी की उस चौपाई को लोगों ने अंगीकार करके ज्‍यादा विरोध नहीं किया इसलिए उन सब लोगों को भी धन्‍यवाद करना चाहता हूं.

          उपाध्‍यक्ष महोदय - मैं सभी माननीय सदस्‍यों से अनुरोध कर रहा हूं कि  आज बोलने वालों की संख्‍या बहुत है इसलिए आज बजट पर चर्चा 05.30 बजे तक समाप्‍त करनी है. 12 लोगों के नाम पक्ष से और 10 लोगों के नाम विपक्ष से हैं. बहुत सारी चीजें चर्चा में आ गई हैं, इसलिए जो अब आगे माननीय सदस्‍य बोलने वाले हैं, उन सबसे मेरा अनुरोध है कि वे पुनरावृत्ति न करें और संक्षेप में अपनी बात करें चूंकि आज हमें शाम तक समाप्‍त करना है. डॉ. गोविंद सिंह जी आप बोलें.

          डॉ. गोविंद सिंह (लहार) - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, नाम तो हैं लेकिन उपस्थिति कम है, इसलिए मैं आपसे प्रार्थना करूंगा कि बात कहने के लिये उचित समय मिले.

          उपाध्‍यक्ष महोदय - डॉ. गोविंद सिंह जी 05.30 तक समाप्‍त करना है.

          डॉ. गोविंद सिंह - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अगर लंच है तो एकाध घंटे 05.30 बजे के बाद भी सदन का समय बढ़ा सकते हैं. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय हमारे साथी मित्र कामरेड श्री गिरीश गौतम जी ने बड़े विस्‍तार चर्चा की है. अभी तक वह कामरेड थे.

          श्री गिरीश गौतम - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कामरेड का अर्थ कम्‍युनिस्‍ट होना नहीं होता है, अग्रेंजी की डिक्‍शनरी उठाकर देखेंगे तो आपको पता चलेगा. कम से कम उसको आप स्‍वीकार कर लें.

          डॉ. गोविंद सिंह - स्‍वीकार कर लिया. आप बैठ जाईये कामरेड मतलब साथी होता है. लेकिन कामरेड कौन लिखते हैं यह सबको पता है और आपका पूरी तरह से पांच ओ.टी.सी. करने के बाद भगवाकरण हो गया है, यह आज सिद्ध हो गया है.

          श्री गिरीश गौतम - भगवाकरण हो गया है तो कोई गलत थोड़ी ही कर दिया है कोई पाप थोड़ी ही कर दिया है, यह तो मैंने पुण्‍य का काम कर दिया है.

          डॉ. गोविंद सिंह - हां तो आपका हृदय परिवर्तन हो गया है, जिसके लिये हम आपको बधाई देते हैं.  

          श्री सुदर्शन गुप्‍ता   - हमको भगवाकरण पर गर्व है.

          डॉ. गोविंद सिंह - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं इतना कहना चाहता हूं कि श्री गिरीश गौतम जी ने बड़ा गिनाया है कि माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने तमाम यात्रा की तीर्थ यात्रा करना, ओंकारेश्‍वर को स्‍थापित करना, शंकर जी की हिमांचल यात्रा करना, मानसरोवर यात्रा करना, नर्मदा यात्रा करना, कुंभ यात्रा, वैचारिक मेला, श्री शंकराचार्य, श्री बाबा रामदेव, श्री श्री रविशंकर, सब महात्‍माओं के यहां कार्यक्रम कराना. मैं यह जानना चाहता हूं कि जो राजनीति में काम करने वाले हैं, उनका पहला कर्तव्‍य और धर्म जनकल्‍याण बनता है. हमारा काम और सरकार का काम केवल धार्मिक कार्यों तक सीमित नहीं है. हर आदमी अपने-अपने धर्म को अपनाता है लेकिन सरकार का काम केवल एकमात्र यह नहीं है कि धार्मिक भावना फैलाकर साम्‍प्रदायिकता फैलाने का काम करे. यह काम जो आपकी सरकार कर रही है उसकी मैं निंदा करता हूं.  .....(व्‍यवधान)...

          श्री सुदर्शन गुप्‍ता - दंगे भड़काने का काम तो कांग्रेस के शासन में होता था, और श्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार में पहली बार ऐसा हुआ है कि कोई दंगे नहीं हुए हैं. आपकी सरकार में दंगे होते थे.

          डॉ. गोविंद सिंह - दंगा तो हमारे यहां गौरमी में हुआ था, 32 आदमियों को बिल्‍कुल आग लगा दी. आपकी सरकार के गृहमंत्री का जवाब है उनको एक पैसा नहीं दिया गया है.

          चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी (मेहगांव) - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, गौरमी में दंगे नहीं हुए हैं, यह गलत बयान हो रहे हैं. ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि दंगे हुए हैं. वह एक हत्‍या का मामला था. यह मेरी विधानसभा क्षेत्र का मामला है.

उपाध्यक्ष महोदय - आपसे स्पष्टीकरण नहीं मांगा जा रहा है, आप बैठ जाएं. आपकी बात आ गई है. गोविन्द सिंह जी आप बजट पर बोलें.

डॉ. गोविन्द सिंह - उपाध्यक्ष महोदय, विदिशा, दीवानगंज की  तमाम घटनाएं हैं. माननीय मुख्यमंत्री जी  और माननीय वित्तमंत्री ने बजट भाषण के अंतिम पैरा में कहा है कि माननीय मुख्यमंत्री जी का प्रयास है कि हम बीमारू राज्य से ऊपर निकल रहे हैं, उससे बाहर आ रहे हैं. लगातार आप पिछले 5 वर्ष से यह प्रचार कर रहे हैं कि मध्यप्रदेश को हमने बीमारू राज्य से अलग निकाला है. फिर प्रधानमंत्री आए तो वह आपको प्रमाण पत्र भी दे गये कि पहले मध्यप्रदेश बीमारू राज्य था, वह अब नहीं रहा. अब विकसित राज्य हो गया है, फिर आपने इसमें यह उल्लेख क्यों किया है? आपकी कथनी और करनी का इसमें स्पष्ट अंतर दिखता है. जहां तक बजट का सवाल है. आपने वर्ष 2016-17 में जो बजट पेश किया था, वह 1 लाख 79 करोड़ रुपए का था, उसे आपने घटाकर इस वर्ष 10000 करोड़ रुपए कम का कर दिया है. अगर आप विकसित हैं, विकास कर रहे हैं तो बजट कम कैसे हुआ? जो राष्ट्रीय औसत आय है, वह प्रति व्यक्ति 112000 रुपए है, जबकि प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय 72599 रुपए है. लगभग 40000 रुपए प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय कम है, फिर आप कैसे विकसित राज्य में आ सकते हैं? आपने क्या किया? आप लगातार घाटे का बजट पेश करते जा रहे हैं. इस वर्ष  10000 करोड़ रुपए का बजट कम हुआ है और घाटा भी आपका 1000 करोड़ रुपए से अधिक का हो गया है. फसल बीमा की राशि जो आपने पिछले वर्ष 2700 करोड़ रुपए रखी थी, इस बार आपने किसानों के हित में काम न करके उसको 700 करोड़ रुपए कम कर दी है. किसानों के लिए बजट में आपने ऐसा कोई काम नहीं किया है, जिसमें किसानों को लाभ मिल सके. आपने लगातार 35 योजनाओं का बजट इस साल कम किया है. आप तरक्की कर रहे हैं, आगे बढ़ रहे हैं तो फिर योजनाओं में बजट कम कैसे हो रहा है?

1.22 बजे              {सभापति महोदय (श्री के.पी.सिंह) पाठासीन हुए.}

सभापति महोदय, पिछले वर्ष से आपका राजस्व विभाग में बजट कम है, वाणिज्यिक विभाग में बजट कम है, ऊर्जा विभाग में कम है. कृषि में वर्ष 2016-17 में बजट आपने 4797 करोड़ रुपए रखा था. इस बार आपने 2000 करोड़ रुपए से अधिक बजट कम कर दिया है. इसी प्रकार सहकारिता विभाग में बजट कम किया. योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी, जनसंपर्क, खाद्य, संस्कृति, ग्रामोद्योग विभाग में बजट घटाया है. जब आप प्रगति कर रहे हैं, आप लगातार आगे बढ़ रहे हैं, फिर आपका बजट घाटे में क्यों जा रहा है? वर्ष 2017-18 में जो आय-व्ययक पत्रक प्रस्तुत किया है. पिछले वर्ष की तुलना में कृषि की संबंधित योजनाओं पर खर्च 8 प्रतिशत की तुलना में उसको 7 प्रतिशत किया है. इसको आपने 1 प्रतिशत घटाया है.

संसदीय कार्यमंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र)- आप उधर को देखकर क्यों नहीं बोलते हैं, जब से सभापति महोदय बैठे हैं, आप इधर देखकर क्यों बोलते हो? उनकी तरफ आप देखो.

डॉ. गोविन्द सिंह - आपकी खूबसूरत शक्ल देखकर अच्छा बोलते हैं. (हंसी)..

डॉ. नरोत्तम मिश्र - सभापति जी का चेहरा सुदर्शन है आप देखो.

सभापति महोदय - ऐसा है हमारा चेहरा और उनका चेहरा एक जैसा है..

डॉ. नरोत्तम मिश्र - चांद एक जैसी है. (हंसी)..

सभापति महोदय - ..इसलिए चार्मिंग चेहरा जो ऐश्वर्या राय का है वह देखना पड़ता है.

श्री ओमप्रकाश धुर्वे - माननीय सभापति महोदय, रिफलेक्ट हो जाता है.

          डॉ. गोविन्द सिंह - उपाध्यक्ष महोदय, मैं यह कहना चाहता हूं कि आपने लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में केवल 5 प्रतिशत बजट रखा है. ब्याज एवं ऋण में 8 प्रतिशत बजट देंगे. ब्याज लगातार आपका बढ़ता चला जा रहा है. वर्ष 2002-03 से आप तुलना करते हैं तो कर्जा उस समय 26000 करोड़ रुपए का था. आज आपने 1 लाख 70 हजार रुपए से अधिक का कर्जा कर दिया है. 8 प्रतिशत राशि आप ब्याज और किश्तों में ही चुकाएंगे. आपका खजाना खाली है. आप घोषणा पर घोषणा करते जा रहे हैं. जहां मुख्यमंत्री जी जाते हैं घोषणाएं, आश्वासन देते हैं लेकिन उस