मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा पंचदश

 

 

नवम्बर-दिसम्बर, 2017 सत्र

 

सोमवार, दिनांक 4 दिसम्बर, 2017

 

(13 अग्रहायण, शक संवत्‌ 1939 )

 

 

[खण्ड- 15 ] [अंक- 6 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

सोमवार, दिनांक 4 दिसम्बर, 2017

 

(13 अग्रहायण, शक संवत्‌ 1939 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.03 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ. सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर

दमुआ से बेलनीढाना के बीच सड़क निर्माण

[लोक निर्माण]

1. ( *क्र. 1997 ) श्री नथनशाह कवरेती : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) लोक निर्माण विभाग अंतर्गत छिन्‍दवाड़ा जिले के विधान सभा क्षेत्र जुन्‍नारदेव के दमुआ से बेलनीढाना के बीच 07 कि.मी. तक सड़क का निर्माण 2014-15 में (एम.पी.आर.डी.सी.) के तहत किस कंपनी द्वारा किया गया था? (ख) क्‍या कार्य अधूरा छोड़ दिया गया? यदि हाँ, तो कब तक पूरा कर दिया जायेगा? यदि पूरा कर लिया गया है तो वर्तमान में पूरी सड़क पर गड्ढे एवं जर्जर हालत में क्‍यों है? इसके लिये कौन दोषी है? उनके खिलाफ क्‍या कार्यवाही की जायेगी? (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) के प्रकाश में क्‍या शर्तों के अनुसार तत्‍काल मरम्‍मत कार्य कराया जायेगा? यदि हाँ, तो कब तक?

लोक निर्माण मंत्री (श्री रामपाल सिंह) : (क) मेसर्स डी.बी.एल. बैतूल-सारणी प्रा.लि. द्वारा निर्मित बैतूल-सारणी-परासिया मार्ग (लंबाई 124.10 कि.मी.) का कार्य (सतपुड़ा पेंच टाईगर रिजर्व कोरिडोर का भाग लंबाई 4.78 कि.मी. का कार्य छोड़कर) किया गया। (ख) जी हाँ, वन विभाग से अनुमति प्राप्‍त होने के उपरांत कार्य शीघ्र पूर्ण कराया जावेगा। मरम्‍मत हेतु वन मण्‍डल अधिकारी पश्चिम छिंदवाड़ा की अनुमति की शर्तों के अनुसार कार्य किया जा रहा है, सड़क निर्माण न किये जाने के लिये कोई दोषी नहीं है, अत: शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी हाँ। वन विभाग से प्राप्‍त अनुमति अनुसार मरम्‍मत की जा रही है, शीघ्र ही मरम्‍मत पूर्ण की जावेगी। चूंकि संधारण एक सतत् प्रक्रिया है अत: समय-सीमा बताना संभव नहीं है।

श्री नथनशाह कवरेती -- अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्नांश (ख) के उत्तर में यह आया है कि सड़क निर्माण में कोई दोषी नहीं है. मेरा यह तीसरी बार प्रश्न है और हमेशा यही उत्तर मिलता है. क्षेत्र में अनेक घटनायें हो गईं. कई लोग खत्म भी हो गये हैं और कई ट्रक पलट गये हैं, जिससे बहुत बार नुकसान होता है. दो बार तो आंदोलन भी हुए हैं. मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि इस रोड की स्वीकृति भी मिल गई है और यह रोड नहीं बन पा रही है. अगर यह रोड इस बार नहीं बनी, तो पूरा आवागमन बंद हो जायेगा और वहां से कोयले का ट्रांसपोर्टेशन भी चलता है. मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि इस रोड को जल्दी से जल्दी बनवाया जाये.

श्री रामपाल सिंह -- अध्यक्ष महोदय, यह लगभग 119 किलोमीटर बहुत अच्छी सड़क बनाई गई है और इसमें जो करीब 7-8 किलोमीटर वन क्षेत्र का काम रुका है, उसकी सैद्धांतिक सहमति हमको मिल गई है और जल्दी ही इस कार्य को विधायक जी की भावना अनुसार करवायेंगे.

श्री नथनशाह कवरेती -- अध्यक्ष महोदय मेरा निवेदन है कि मैंने यह प्रश्न तीन बार लगाया है और हर बार कहा जाता है कि यह सड़क बन जायेगी. दो बार वहां पर आंदोलन भी हो गये हैं और फिर ऊपर से फोन आता है कि इस आंदोलन को रोकिये. मेरा निवेदन है कि इस रोड को बनाइयेगा, दुर्घटनाएं हो रही हैं वहां पर बार बार जवाब देना मुश्किल होता है, कई लोग वहां पर मर गये हैं. आप समय बता दें कि यह सड़क कब तक बन जायेगी

श्री रामपाल सिंह -- अध्यक्ष महोदय भारत सरकार पर्यावरण वन मंत्रालय जलवायु परिवर्तन मंत्रालय नई दिल्ली के द्वारा 10- 10-2017 को हमें सैद्धांतिक अनुमति मिल गई है. यह छोटा सा काम रह गया है जल्दी हम इसको पूरा करेंगे.

श्री नथनशाह कवरेती -- आप हमें समय सीमा बता दें.

श्री रामपाल सिंह -- 6 माह तक हम इस सड़क को बना देंगे.

श्री नथनशाह कवरेती -- धन्यवाद्.

 

पेंच परियोजना से सिंचाई सुविधा से वंचित ग्राम

[जल संसाधन]

2. ( *क्र. 2404 ) श्री दिनेश राय (मुनमुन) : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विधानसभा क्षेत्र सिवनी में नवनिर्मित माचागौरा बांध (पेंच परियोजना) से निकलने वाली नहरों से लालमाटी (गोपालगंज) क्षेत्र के कई गांव सिंचाई सुविधा से वंचित रह गये हैं? यदि हाँ, तो इसके प्रस्‍तावित एवं लाभान्वित तथा शेष रह गये गांवों की सूची लालमाटी क्षेत्र सहित दी जावे। साथ ही बतावें की शेष रह गये गांव में नहरों के निर्माण कार्य को अंतिम रूप कब दिया जा सकेगा? यदि नहीं, तो कारण स्‍पष्‍ट करें कि उन गांवों में नहर का निर्माण क्‍यों नहीं किया जा सकेगा? (ख) क्‍या प्रश्‍नांश (क) में प्रश्‍नगत गांव में सिंचाई सुविधा हेतु नहर विस्‍तार के लिये कोई सर्वेक्षण किया गया है? यदि नहीं, तो इन गांवों का सर्वेक्षण कब तक पूर्ण कर निर्माण कार्य शुरू किया जा सकेगा। (ग) क्‍या प्रश्‍नांश (क) परियोजना का निर्माण कार्य पूर्व में प्रस्‍तावित प्राक्‍कलन के आधार पर न किया जाकर राजनैतिक दबाव के चलते संशोधित कर निर्माण कार्य कराया गया?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) जी हाँ। सिवनी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत लालमाटी क्षेत्र सहित सिंचाई से लाभांवित ग्रामों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''1'' तथा वंचित ग्रामों की सूची लालमाटी क्षेत्र सहित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''2'' अनुसार है। वंचित ग्राम निर्माणाधीन सिवनी शाखा नहर से लगभग 8 से 10 कि.मी. दूरी पर कमांड क्षेत्र से बाहर होने तथा वंचित ग्रामों का भू-सतह, नहर तल से लगभग 15 से 20 मी. ऊँचा होने के कारण तकनीकी दृष्टि से नहर द्वारा सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराना संभव नहीं है। (ख) जी हाँ। उत्‍तरांश (क) अनुसार। (ग) जी नहीं। परियोजना का निर्माण कार्य पूर्व में प्रस्‍तावित प्राक्‍कलन एवं तकनीकी स्‍वीकृति के आधार पर किया जाना प्रतिवेदित है।

 

श्री दिनेश राय -- माननीय अध्यक्ष महोदय, आज मेरा यह प्रश्न पांचवी बार लगा है. मैं आपसे आग्रह करूंगा कि मुझे आपका संरक्षण मिले. आप हमारे बहुत शानदार अध्यक्ष हैं, हमेशा सहयोग करते आये हैं तो आज उम्मीद करता हूं कि आज आपका मुझे संरक्षण मिलेगा. 21 जुलाई, 2015, 8-12-2015, 5-12-2016, 23-2-2017, 23-3-2017, 25-2-2017, 25-2-2016 और 25 जुलाई, 2017, 8-12-2016 को चर्चा में रखा था लगतार हमारा पत्राचार हुआ है. सदन में पुन: हमें जो आज के प्रश्न में जवाब दिया गया है कि लालमाटी क्षेत्र की जो लिस्ट दी गई है, 2003 के सर्वे के आधार पर पुन: 36 गांव के नाम काट दिये गये हैं. पिछली साल जब यह प्रश्न आया था तब माननीय मंत्री जी ने आश्वासन दिया था कि हम इसका पुन: सर्वे करा लेंगे किंतु आज दिनांक तक सर्वे नहीं हुआ है. उसका जो पानी है अभी एक माह पहले हमारे कृषि मंत्री जी पूरा पानी लेकर बालाघाट चले गये, हमारे 36 गांव में पानी नहीं मिल रहा है, लगातार उत्तर गलत आ रहा है, एक बात और मैं कहना चाहता हूं कि इसमें अगर राजनीतिक दवाब नहीं है तो पानी बाहर क्यों जा रहा है. दूसरा मेरा प्रश्न है कि मेंटेना कंपनी 86 करोड़ रूपये एडवांस निकालकर चली गई है जिसके कारण हमारे क्षेत्र में आज भी कार्य अधूरे हैं.

राजस्व मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्ता) -- माननीय अध्यक्ष महोदय एक तो मैं आग्रह करना चाहता हूं कि जब कोई बात तकनीकी रूप से संभव नहीं होती है तो कितनी बार भी कही जाय उसका जवाब नहीं आ पाता है. यह जो सारी योजना है इसमें लालमाटी क्षेत्र का आदरणीय विधायक जी कह रहे हैं इसके बारे में जवाब में दिया है कि कमाण्ड एरिया से बाहर है और ऊंचाई पर है 15 - 20 मीटर ऊंचा होने के कारण तकनीकी दृष्टि से इस योजना से वहां पर पानी नहीं दिया जा सकता है, इस कारण से वहां पर पानी देना संभव नहीं है. यह जवाब पहले भी दिया गया है और यह जो कुल योजना है इसमें से कृषि मंत्री जी 45 प्रतिशत ही पानी ले जाते हैं 55 प्रतिशत पानी सिवनी में ही आता है. यह योजना बालाघाट और सिवनी के लिए योजना है और सिवनी में भी जिस क्षेत्र में पानी जाता है उसमें 47 हजार हेक्टेयर क्षेत्र सिवनी जिले का सिंचित होता है उसमें से 42,278 हेक्टेयर हमारे माननीय विधायक महोदय का ही क्षेत्र है तो कहीं पर कोई पक्षपात होता है यह कहना उचित नहीं है. लेकिन जहां पर व्यावहारिक दृष्टि से, तकनीकी दृष्टि से इसका पानी नहीं पहुंच सकता है वहां पर पानी पहुंचाना संभव नहीं है.

श्री दिनेश राय -- माननीय अध्यक्ष महोदय आप 47 हजार हेक्टेयर बोल रहे हैं. मेरी बात एक बार पूरी सुन लें आप. सरकार ने 2003 में जो क्षेत्र सूखा है उसके लिए नहर का प्रावधान किया गया है. आपने सिंचित क्षेत्र जहां पर पहले से बोरिंग चल रहे हैं, जहां पर पहले छोटे मोटे डेम हैं, नदी हैं, कुएं हैं उस क्षेत्र को सिंचित कर दिया है. जो नहर जिस सूखा प्रभावित क्षेत्र तक जाना था वहां तक नहीं गई.

अध्यक्ष महोदय -- आपके प्रश्न का उत्तर तो आ गया है.आपको और कुछ पूछना है तो पूछ लें.

श्री दिनेश राय - अध्यक्ष महोदय, नहीं, वर्ष 2003 के बाद में सर्वे नहीं किया है. आपसे पूछा है. आश्वासन इसी आसंदी में आपके सामने दिया गया था कि हम सर्वे करा लेंगे और सर्वे कराकर आपको बताएंगे. एक साल में आपने कोई सर्वे नहीं कराया और जिस कंपनी ने 86 करोड़ रुपए एडवांस निकाल लिये, आपने यहां सर्वे के लिए बोला, (XXX)

अध्यक्ष महोदय - यह कार्यवाही से निकाल दें.

श्री दिनेश राय - अध्यक्ष महोदय, यह लिखने की बात नहीं है तो सुनने की बात तो है. माननीय मंत्री जी बता दें कि मेंटेना कंपनी पैसा खाकर भगी कि नहीं भगी?

अध्यक्ष महोदय - आप सीधा पिन-पाइंट प्रश्न कर लें ताकि वे उत्तर दे सकें. उनका एक प्रश्न तो है कि क्या पुनः सर्वे कराएंगे?

श्री उमाशंकर गुप्ता - अध्यक्ष महोदय, मेरे विभाग की जो जानकारी है कि वह टेक्नीकली संभव नहीं है, इसलिए कोई मतलब नहीं है. लेकिन जैसा माननीय सदस्य कह रहे हैं अगर सदन में माननीय मंत्री जी का आश्वासन है तो हम एक बार फिर से दिखवा लेंगे, उस आश्वासन की पूर्ति करेंगे.

श्री दिनेश राय - अध्यक्ष महोदय, साल भर निकल गया है, किसान वहां पर परेशान हैं.

अध्यक्ष महोदय - प्रश्न क्रमांक 3..

श्री दिनेश राय - अध्यक्ष महोदय, मैं पूछ रहा हूं कि 86 करोड़ रुपए जिसने खाए, उसका क्या?

श्री उमाशंकर गुप्ता - अध्यक्ष महोदय, मैं इसका भी जवाब दे रहा हूं. कोई किसी कंपनी को ज्यादा पेमेंट नहीं हुआ है.

श्री दिनेश राय - अध्यक्ष महोदय, यह पेपर बता रहे हैं, यह रिकार्ड बता रहा है. मंत्री जी (XXX) बोल रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय - यह शब्द भी निकाल दीजिए.

नेता प्रतिपक्ष ( श्री अजय सिंह ) - अध्यक्ष महोदय, मामला गंभीर है. माननीय विधायक जी ने 5 दफे इस प्रश्न को रखा. सरकार उसका गोल-मोल जवाब देती है. वर्ष 2003 का सर्वे है, लेकिन जो ड्राय एरिया है. आपका लक्ष्य क्या है? आपकी मंशा क्या है? ज्यादा से ज्यादा एरिया सिंचित हो. हम लोग आंकड़े भर पढ़ते हैं कि 75 लाख हैक्टेयर में सिंचाई हो रही है. आप मुस्करा रहे हैं, मतलब आप आंकड़ों के जाल में नहीं फंसना चाहते हैं. मैं विनम्रता के साथ कहना चाहता हूं कि यदि एक प्रोजेक्ट बना है सिवनी-बालाघाट के लिए तो सिवनी का जो ड्राय एरिया है, जहां पर विधायक महोदय चाहते हैं, उनकी इच्छा है वहां पर किसानों को जरूरत है, उसको न सिंचित करके भाऊ के एरिया में ही डबल पानी क्यों दिया जा रहा है, यह विषय है? मैंने भाऊ कहा, आपका नाम नहीं लिया है, क्या पूरे मध्यप्रदेश में आप ही भर भाऊ हो?

किसान कल्याण मंत्री ( श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन ) - अध्यक्ष महोदय, भाई साहब, मेरे नाम का जिक्र इसके पहले आ गया.

श्री अजय सिंह - नहीं, नहीं. आपका नाम किसी ने नहीं लिया.

श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन - अध्यक्ष महोदय, मेरे नाम का जिक्र इसके पहले आ गया, इसके पहले माननीय सदस्य ने जिक्र किया था.

श्री दिनेश राय - अध्यक्ष महोदय, मैंने उनका नाम लिया था, 2500 एकड़ आपकी जमीन है (व्यवधान)...

श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन - अध्यक्ष महोदय, पहली बात तो यह है कि पेंच का पानी बालाघाट जिले को जाता ही नहीं है. माननीय नेता प्रतिपक्ष को मैं बताना चाहूंगा कि पेंच का पानी बालाघाट जिले में जाता ही नहीं है. पेंच परियोजना से बालाघाट जिले में कोई सिंचाई नहीं है.

श्री अजय सिंह - अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय ने अभी उत्तर दिया कि 45 प्रतिशत जाता है

श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन - अध्यक्ष महोदय,वे ढोटी की बात कर रहे हैं पेंच का पानी नहीं जाता है. भीमगढ़ की बात कर रहे हैं. पेंच परियोजना से बालाघाट जिले की एक इंच जमीन सिंचित नहीं होती है.

श्री दिनेश राय - अध्यक्ष महोदय, (XXX)

श्री अजय सिंह - असत्य बात है.

श्री दिनेश राय - अध्यक्ष महोदय, अभी पूरा पानी गया, मैं इस्तीफा दे दूंगा अभी विधान सभा से, वे (XXX) बोल रहे हैं, यह रिकार्ड है.

अध्यक्ष महोदय - यह शब्द निकाल दें.

श्री उमाशंकर गुप्ता - अध्यक्ष महोदय, यह कोई तरीका है?

श्री दिनेश राय - अध्यक्ष महोदय, यह रिकार्ड है, मंत्री जी (XXX) बोल रहे हैं.

श्री अजय सिंह - मंत्री जी असत्य बोल रहे हैं.

श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन - अध्यक्ष महोदय, मैं सदन को बताना चाहता हूं कि पेंच परियोजना से बालाघाट जिले की एक इंच जमीन सिंचित नहीं है.

श्री दिनेश राय - अध्यक्ष महोदय, पूरे भीमगढ़ में पानी ले जा रहे हैं, पेंच का पानी ले जा रहे हैं. इसी सवाल का उत्तर जो मुझे कल दिया है कि यहां का पानी मिला और आज काटकर वह उत्तर बदल दिया. यह पूरे पेपर बोल रहे हैं .

अध्यक्ष महोदय - प्रश्न क्रमांक 3 श्री सुरेन्द्र सिंह बघेल..

श्री अजय सिंह - अध्यक्ष महोदय, यह मामला गंभीर है.

श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन - अध्यक्ष महोदय, रिकॉर्ड में लें. पेंच परियोजना से बालाघाट जिले की एक इंच जमीन सिंचित नहीं है.

श्री अजय सिंह - अध्यक्ष महोदय, यह गंभीर विषय है. जिस तरह से मनमानी कोई व्यक्तिगत राजनीतिक प्रभावशाली व्यक्ति उस अंचल का कर रहा है, उससे लोग पीड़ित हैं . अध्यक्ष महोदय, मेरा आपसे विनम्र निवेदन है कि कि मेंटेना कंपनी तो हमारे जिले में भी काफी ख्याति प्राप्त कर चुकी है. उच्चाधिकारियों का उसके ऊपर वरदहस्त है तो उसमें मुझे कुछ कहना नहीं है. मेंटेना कंपनी आपके यहां भी पहुंच गई.

श्री दिनेश राय - अध्यक्ष महोदय, मेंटेना और सरला.

श्री अजय सिंह - अध्यक्ष महोदय, हमारे यहां तो पूरे क्षेत्र में बना रही है. यह मामला गंभीर है. विधायक महोदय की जो चिंता है सिवनी जिले के उस अंचल में जहां पानी नहीं पहुंच पा रहा है किसी कारण से, इस विषय पर असत्य, सत्य सब बातें हो गईं. आप एक कोई कमेटी गठित करा दीजिए जो यह पता लगा ले कि वहां पर पानी जा सकता है कि नहीं जा सकता है, यदि वर्ष 2003 के बाद का कोई सर्वे नहीं हुआ हो.

श्री उमाशंकर गुप्ता - अध्यक्ष महोदय, मुझे नहीं पता था कि माननीय श्री कमलनाथ जी से श्री अजय सिंह जी का इतना झगड़ा है, जो यह कह रहे हैं कि प्रभावशाली नेता के क्षेत्र में पानी दे रहे हैं.

श्री अजय सिंह - प्रभावशाली भाऊ.

श्री उमाशंकर गुप्ता - अध्यक्ष महोदय, वहां पानी जाता ही नहीं है. वे तो छिंदवाड़ा के प्रभारी हैं.

श्री दिनेश राय - अध्यक्ष महोदय, यह रिकार्ड है.

श्री अजय सिंह - आप विषयांतर मत करो, कमलनाथ जी से नहीं, भाऊ से चिंता है सिवनी वालों को.

श्री दिनेश राय - अध्यक्ष महोदय, अगर वहां पानी नहीं जाता है तो मैं इस्तीफा देने के लिए तैयार हूं. क्या मंत्री जी इस्तीफा देंगे?

(व्यवधान)..

श्री उमाशंकर गुप्ता - अध्यक्ष महोदय, आप इंडायरेक्टली क्यों वार कर रहे हैं मुझे समझ में नहीं आया? क्योंकि भाऊ छिंदवाड़ा के प्रभारी हैं.

श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन - अध्यक्ष महोदय, सिवनी जिले में सर्वे में पानी जाएगा तो मैं पहला व्यक्ति होऊंगा जो उसका समर्थन करता हूं.

श्री दिनेश राय - अध्यक्ष महोदय, आपने भीमगढ़ डेम में पानी खुलवाया.

श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन - अध्यक्ष महोदय, सिवनी जिले में यदि पुनः सर्वे होने पर पानी जाएगा तो हम इसके लिए तैयार हैं.

अध्यक्ष महोदय - प्रश्न क्रमांक 3..

श्री दिनेश राय - अध्यक्ष महोदय, नहीं. मेरी बात पूरी होने दीजिए. भीमगढ़ डेम में पानी गया है.

अध्यक्ष महोदय - आपकी बात पूरी हो गई है.

श्री दिनेश राय - अध्यक्ष महोदय, मुझे यह पटल पर रखने के आदेश दीजिए.

अध्यक्ष महोदय - नहीं, इस प्रश्न में 15 मिनट हो गये हैं. अभी पटल पर रखने की अनुमति नहीं है.

श्री दिनेश राय - अध्यक्ष महोदय, मैं यह पटल पर रखना चाहता हूं.

अध्यक्ष महोदय - नहीं प्लीज. अभी पटल पर रखने की अनुमति नहीं है, आप बाद में विधिवत् दीजिए.

श्री दिनेश राय - अध्यक्ष महोदय, आप मेरी बात सुनिए.

अध्यक्ष महोदय - नहीं, आपकी बात सुन ली है.

11.14 बजे गर्भगृह में प्रवेश

श्री दिनेश राय, सदस्य का शासन के उत्तर से असंतुष्ट होकर गर्भगृह में प्रवेश

 

(श्री दिनेश राय, सदस्य शासन के उत्तर से असंतुष्ट होकर अपनी बात कहते हुए गर्भगृह में आए.)

अध्यक्ष महोदय - दिनेश राय जी, आपको बहुत समय दिया. आपको संरक्षण भी दिया. झूठ शब्द कार्यवाही से निकाल दें.(व्यवधान) आप अच्छे सदस्य हैं. आप अनुशासित सदस्य हैं. आप अपने स्थान पर बैठ जायें. आप जबरदस्ती थोड़ी ना कर सकते हैं. (व्यवधान) आप सहयोग करें. पटल पर नहीं रख सकते. आप उसकी लिखित अनुमति मांगिये उसके बाद उस पर विचार करेंगे. आप ऐसा करें यह जो आपके पास जानकारी है, वह माननीय मंत्री जी को प्रश्नकाल के बाद उपलब्ध करा देना. बैठ जायें. (व्यवधान) आप विधिवत् लिख कर दें. अखबार की कटिंग लेकर आये हैं उसको पटल पर कैसे रखने देंगे.

श्री रामनिवास रावत-- वह पटल पर नहीं रखने दें लेकिन आप निर्देश दे दें कि जिन गांवों की चिन्ता कर रहे हैं उन गांवों में पानी पहुंचाने के लिए सर्वे करा दें. आप सरकार को निर्देश दे दें, उनमें पानी पहुंचाने के लिए सर्वे करा दें.

श्री उमाशंकर गुप्ता-- अध्यक्ष महोदय, मैं स्पष्ट कर चुका हूं और माननीय सदस्य ने जो बात कही थी और विभिन्न अवसरों पर यह बात कह रहे हैं और बार बार यही जवाब आ रहा है. बार बार सर्वे कराने से कुछ नहीं होगा हां हम यह कर सकते हैं कि अगर इस योजना में पानी नहीं है क्योंकि जब योजना बनी डीपीआर बनाये, उसका रुपांकन हुआ उस समय यह क्षेत्र उसमें लिया ही नहीं गया.

अध्यक्ष महोदय-- ( श्री दिनेश राय, सदस्य द्वारा गर्भगृह से अपनी बात कहने पर) आप अपने स्थान से बोलिये. यहां कही गई बात का कोई उत्तर नहीं दिया जायेगा.

श्री उमाशंकर गुप्ता-- माननीय सदस्य पूरी बात सुन लें.

अध्यक्ष महोदय-- दिनेश राय जी की यहां से (गर्भगृह से) कही गई किसी बात का उत्तर नहीं दिया जाएगा. आप अपनी सीट पर जायें. यहां से बहस नहीं करेंगे. यह मर्यादा के खिलाफ है. जो कुछ भी बोल रहे हैं नहीं लिखा जायेगा.

परियोजना क्रियान्‍वयन इकाई द्वारा कराये गये कार्य

[लोक निर्माण]

3. ( *क्र. 2877 ) श्री सुरेन्‍द्र सिंह बघेल : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) लोक निर्माण विभाग की परियोजना क्रियान्‍वयन इकाई जिला धार द्वारा विगत 3 वर्षों में कितने-कितने कार्य कहाँ-कहाँ करवाये गये? राशि सहित वर्षवार, विधानसभा क्षेत्रवार जानकारी देवें? (ख) इन कार्यों की अद्यतन स्थिति बतावें। इनमें कितने कार्य पूर्ण/अपूर्ण हैं तथा कितनी राशि इनमें आहरित की जा चुकी है? विधान सभा क्षेत्रवार बतावें। (ग) कार्यों में विलंब एवं गुणवत्‍ताहीन होने की जाँच कब तक करवाई जायेगी? स्‍वतंत्र कंसलटेंसी द्वारा उपरोक्‍त दी गई रिपोर्ट, पत्रों की छायाप्रति कार्यवार देवें? (घ) कार्यों में विलंब व गुणवत्‍ताहीन होने की विभाग कब जाँच कराएगा?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) एवं (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (ग) इस इकाई के अंतर्गत कार्य में प्रयुक्‍त मटेरियल की शासन द्वारा निरंतर जाँच कराई जाती है। परीक्षण में गुणवत्‍ताहीन सामग्री होने संबंधी किसी प्रकार की रिपोर्ट प्राप्‍त नहीं हुई है। अत: जाँच का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। कार्यों में विलंब हेतु अनुबंधानुसार कार्यवाही प्रचलन में है। (घ) कार्यों में विलंब हेतु अनुबंध में निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप कार्यवाही प्रचलन में है। प्रश्‍नांश (ग) के परिप्रेक्ष्‍य में शेष प्रश्‍नांश के संबंध में जाँच का प्रश्‍न उत्‍पन्‍न नहीं होता।

श्री सुरेन्द्र सिंह बघेल-- अध्यक्ष जी, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से अनुरोध करना चाहूंगा कि मेरा आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है और विभाग के द्वारा मेरी विधान सभा में काम चल रहा है उसका उपयोगिता अधिकतर ट्रायबल लोगों के लिए होगी. आपसे अनुरोध है कि यह कार्य समयावधि में हो जाये और दूसरा गुणवत्ता का ध्यान रखा जाये.

श्री रामनिवास रावत-- माननीय मंत्री, माननीय सदस्य को बुलाकर चर्चा कर लें.

श्री रामपाल सिंह-- माननीय बघेल साहब की जो चिन्ता है उनके क्षेत्र में 247 करोड़ रुपये के 42 काम चल रहे हैं,

अध्यक्ष महोदय-- (श्री दिनेश राय, सदस्य से) आप आधे घंटे की चर्चा मांग लीजिए.

श्री रामपाल सिंह-- माननीय बघेल जी ने जो चिन्ता की है. हम अधिकारियों को निर्देश भी दे रहे हैं कि वह समय सीमा में काम करें अच्छा काम करें. इसके बाद भी माननीय विधायक जी को कहीं ऐसा लगता है कि कहीं किसी चीज की कमी है जो देखने में आ रही है तो आप निश्चित रुप से लिख कर दें हम उसमें तुरन्त कार्यवाही करके माननीय विधायक जी को भी अवगत करायेंगे.

श्री सुरेन्द्र सिंह बघेल-- माननीय मंत्री जी आपको बहुत बहुत धन्यवाद. मेरा निवेदन है कि मेरा विधान सभा क्षेत्र कुक्षी है, उस पर थोड़ी विशेष कृपा हो जाये.

अध्यक्ष महोदय-- (श्री दिनेश राय,सदस्य द्वारा गर्भगृह से निरन्तर अपनी बात कहने पर)इस तरह एक सदस्य को सदन की कार्यवाही बाधित नहीं करने देंगे. आपकी यह बात ठीक नहीं है. आप अपने स्थान पर जाकर बैठ जाईये.

श्री सुरेन्द्र सिंह बघेल-- माननीय मंत्री जी, आपसे विशेष आग्रह है कि मेरी विधान सभा कुक्षी है, वह आदिवासी बाहुल्य है उस पर विशेष ध्यान देने का कष्ट करें.

श्री अजय सिंह-- अध्यक्ष महोदय....

अध्यक्ष महोदय-- अब कार्यवाही आगे बढ़ गई है.

श्री अजय सिंह-- अध्यक्ष महोदय, मैं मानता हूं. मैं आपसे और मुनमुन भाई से भी अनुरोध कर रहा हूं. यह थोड़ा गंभीर मामला है. माननीय मंत्री जी को आप निर्देशित कर दें कि इस विषय पर वे माननीय सदस्य से चर्चा कर लें.

अध्यक्ष महोदय-- अब प्रश्न आगे बढ़ गया है. (व्यवधान) मैंने उनको समझाया कि और भी नियम है, आधे घंटे की चर्चा मांग लें. यहां हल्ला मचाने से क्या मतलब है. आप कार्यवाही चाहते हैं या हल्ला मचाना चाहते है?

श्री रामनिवास रावत - माननीय सदस्य को कक्ष में बुलाकर चर्चा कर लें और संतुष्ट कर दें.

अध्यक्ष महोदय - अब कुछ उत्तर नहीं देंगे. बघेल जी, आपकी बात आ गई. आगे बढ़ें. प्रश्न क्र.4 श्री उमंग सिंघार..

प्रश्न क्र. 4 अनुपस्थित

(श्री दिनेश राय के लगातार गर्भगृह से अपनी बात कहने पर)

अध्यक्ष महोदय - प्रश्न क्र.5

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्यक्ष महोदय, पहले माननीय सदस्य को संतुष्ट कर दें.आपसे ही तो उन्हें संरक्षण मिलेगा.

अध्यक्ष महोदय - मैंने उनको बहुत संरक्षण दिया. उन्होंने 20 मिनिट दूसरे सदस्यों के ले लिये. यह बात ठीक नहीं है.

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्यक्ष महोदय, उन्हें मंत्री जी कक्ष में बुलाकर चर्चा कर लें.

अध्यक्ष महोदय - मुझे कुछ नहीं करना है. श्री उमंग सिंघार..(श्री दिनेश राय से) आप तो चिल्लाईये खड़े होकर..सारी मर्यादाएं सदन की खत्म करिये.

डॉ.गोविन्द सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने आधे घंटे की चर्चा के लिये निर्देश दिया. तो आधे घंटे की चर्चा स्वीकृत कर दें.

अध्यक्ष महोदय - वह मांगें तो. वह तो यहीं खड़े रहकर सब करवाना चाहते हैं.

श्री रामनिवास रावत - दिनेश बैठ जाओ. माननीय अध्यक्ष महोदय,

(श्री दिनेश राय गर्भगृह से अपने आसन पर वापस गये.)

वन मंत्री(डॉ.गौरीशंकर शेजवार) - पहले ही समझा देते.

श्री रामनिवास रावत - अशांति पुरुष आप शांति रहने दें.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार - अशांति की योजना आप ही बनाते हो.

श्री रामनिवास रावत - अशांति आप पैदा कर रहे हो सब कुछ निपट गया फिर क्या जरूरत थी आपके खड़े होने की.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार - व्यवधान की योजना आप ही बनाते हो. आप हीकहते हो यहां आओ और आप ही फिर मनाते हो. यह न करें तो बेहतर है.

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्यक्ष महोदय, अब आप ही बता दें कि अशांति कौन पैदा कर रहा है.

निर्माण कार्यों का भुगतान

[लोक निर्माण]

5. ( *क्र. 1376 ) श्री कमलेश्‍वर पटेल : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सिंगरौली जिले के राष्ट्रीय राजमार्ग विस्तार के कि.मी. 124/2 नौआ नाला पुल एवं उसके बाद रीकन्‍ट्रेक्‍शन ऑफ डेनेज ब्रिज का कार्य अनुबन्ध क्रमांक 61/एन.एच./2007-08 संविदाकार के द्वारा जाब क्र.0075 ई.एक्स./2006-07/एम.पी./521 का सम्पूर्ण कार्य दिनांक 31/03/2015 को पूर्ण कर दिया गया है? (ख) यदि हाँ, तो कार्यपूर्ण होने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग सागर उप संभाग रीवा द्वारा ठेकेदार के बकाया देयक का भुगतान आज दिनांक तक नहीं किया गया और राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 75 के विस्तार में स्थित नौआ नाला पुल एप्रोच निमार्ण कार्य के सभी दस्तावेज गुम हो गये हैं? दस्तावेजों के गुम होने की एफ.आइ.आर. जी.आर.पी. थाना भोपाल में विभाग के कर्मचारी द्वारा करायी गयी है? (ग) क्या अभिलेखों की द्वितीय प्रति निर्माण कराने एवं संविदाकार के भुगतान में विलम्ब करने वाले अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी और संविदाकार के लम्बित देयक का भुगतान अविलम्ब कर दिया जायेगा? (घ) यदि हाँ, तो किस दिनांक तक संविदाकार को सम्पूर्ण देयक का भुगतान बिना किसी शर्त और पेनाल्टी के करा दिया जायेगा?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) जी हाँ, कार्य स्‍थल की आवश्‍यकता अनुसार संविदाकार द्वारा पुल एवं सिंगरौली तरफ का पहुंच मार्ग का कार्य दिनांक 30.10.2015 को पूर्ण कर दिया गया था, पुल की सीधी तरफ का पहुंच मार्ग का कार्य अन्‍य एजेन्‍सी से करवाये जाने के कारण करवाया जाना आवश्‍यक नहीं था। (ख) जी नहीं। ठेकेदार का भुगतान रा.रा. संभाग सागर के अंतर्गत रा.रा. उपसंभाग रीवा के द्वारा नहीं अपितु क्षेत्रीय अधिकारी सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा किया जाना है। अंतिम देयक क्षेत्रीय अधिकारी सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय भोपाल को कार्यपालन यंत्री रा.रा. संभाग सागर द्वारा अपने पत्र दिनांक 08.11.2017 को प्रेषित किया गया है। ठेकेदार द्वारा मापों एवं बिल की अभिस्‍वीकृति नहीं दिये जाने के कारण क्षेत्रीय अधिकारी सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय भोपाल में भुगतान हेतु लंबित है। जी हाँ, दस्‍तावेजों के गुम हो जाने के कारण विभाग के कर्मचारी द्वारा जी.आर.पी. थाना भोपाल में लिखित शिकायत की गई थी, जी.आर.पी. थाना द्वारा एफ.आई.आर. दर्ज नहीं की गई थी। (ग) मूल अभिलेखों के गुम हो जाने के कारण नई माप पुस्तिका तैयार की गई। संविदाकार के भुगतान में विलंब हेतु कोई अधिकारी दोषी नहीं है, अत: किसी अधिकारी के प्रति कार्यवाही का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। ठेकेदार द्वारा माप एवं बिल की अभिस्‍वीकृति दिये जाने के पश्‍चात लंबित देयक के भुगतान की कार्यवाही की जा सकेगी। (घ) उपरोक्‍त प्रश्‍नांश (ग) के परिप्रेक्ष्‍य में देयक के भुगतान हेतु निश्चित समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। ठेकेदार का भुगतान अनुबंध की शर्तों एवं प्रावधान के अनुसार ही किया जा सकेगा।

अध्यक्ष महोदय - आप अपना प्रश्न करिये.

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्यक्ष महोदय, कमलेश्वर पटेल जी ने सिंगरौली जिले के राष्ट्रीय राज मार्ग विस्तार के कि.मी. 124/2 नौवा नाला पुल एवं उसके बाद रीकन्ट्रेक्शन आफ ड्रेनेज ब्रिज के कार्य के पूर्ण हो जाने के बाद भुगतान के संबंध में प्रश्न किया है और एक साईड एप्रोज का भी उन्होंने प्रश्न किया है कि उन्हें नहीं बनाने दी. इन्होंने "" के उत्तर में दिया है कि ठेकेदार द्वारा मापों एवं बिल की अभिस्वीकृति नहीं दिये जाने के कारण क्षेत्रीय अधिकारी सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय भोपाल में भुगतान हेतु लंबित है. जबकि पहले ही ठेकेदार द्वारा अंतिम देयक क्षेत्रीय अधिकारी सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय भोपाल को कार्यपालन यंत्री राष्ट्रीय राज मार्ग संभाग, सागर द्वारा अपने पत्र दिनांक 8.11.2017 को भुगतान के लिये प्रेषित किया गया है. आपने लिखा है कि ठेकेदार की अभिस्वीकृति नहीं मिली. भुगतान की क्या प्रक्रिया है. क्या बिना ठेकेदार की अभिस्वीकृति के माप पुस्तिका बन जाने के बाद बिल चढ़ जाने के बाद माप पुस्तिका पर क्या ठेकेदार से अभिस्वीकृति ली जाती है और उसकी अभिस्वीकृति के बाद ही भुगतान हो पाएगा ? प्रश्न "" के उत्तर में बताया है कि मूल अभिलेखों के गुम हो जाने के कारण विभाग के कर्मचारी द्वारा जी.आर.पी.थाना भोपाल में लिखित शिकायत की गई थी और जी.आर.पी. थाने में एफ.आई.आर. दर्ज नहीं की गई. नई माप पुस्तिका तैयार की गई और आप कह रहे हैं कि उसकी अभिस्वीकृति न मिलने के कारण भुगतान नहीं हो पाया है, तो क्या ठेकेदार की अभिस्वीकृति ठेकेदार ली जाती है, कि आपकी माप पुस्तिका पर जो बिल चढ़ा है, वह सही चढ़ा है कि नहीं, उसके बाद भुगतान किया जाता ? है माननीय मंत्री जी बता दें.

श्री रामपाल सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रश्नकर्ता विधायक जी नहीं हैं. उनकी जगह रामनिवास रावत जी प्रश्न पूछ रहे हैं तो जल्दी-जल्दी में वे प्रश्न ठीक से पढ़ नहीं पाए. आप कह रहे हैं कि माप पुस्तिका पर ठेकेदार के हस्ताक्षर होते हैं. सहमति होती है और वह कहते हैं कि मैंने इतना काम किया है. यह जरूरी है. दूसरी बात भुगतान की है तो हमारे अधिकारियों ने प्रस्ताव दिया है 28 लाख का उनका कहना है कि हमने 93 लाख का काम किया है. सब चीजें नियम,प्रक्रिया से होती हैं. वह सारी औपचारिकताएं पूरी करें. जिसने काम किया है उसको भुगतान होना चाहिये हम इस पक्ष में हैं लेकिन कहीं कोई गड़बड़ी है या शिकायत है माननीय रावत जी,आप बताएंगे तो हम उस पर कार्यवाही करेंगे.

श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें बड़ा स्‍पष्‍ट है, आप उत्‍तर देखें, 'ख' के उत्‍तर में अंतिम देयक क्षेत्रीय अधिकारी सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय भोपाल के कार्यपालन यंत्री राष्‍ट्रीय राजमार्ग संभाग सागर द्वारा अपने पत्र दिनांक 8.11.2017 को प्रेषित किया गया है. यह बता दें कि यह कितने का बिल बनाकर प्रेषित किया गया था और इस पर ठेकेदार के हस्‍ताक्षर थे कि नहीं ? प्रथम देयक को प्रेषित करने के बाद ठेकेदार द्वारा माप बिलों के, फिर लिखा है दस्‍तावेजों के गुम हो जाने के कारण विभाग के कर्मचारी द्वारा जीआरपी थाना, भोपाल में लिखित शिकायत की गई और जीआरपी थाना, भोपाल द्वारा शिकायत दर्ज नहीं की गई. पहले जो अंतिम देयक भेजे गये वह कितने लाख के भेजे गये और ठेकदार कह रहा है कि मेरे 93 लाख के देयक थे. माप पुस्तिका और पूरा रिकार्ड गायब हो जाने के बाद आप दोबारा माप पुस्तिका बना रहे हो, तैयार कर रहे हो, मूल अभिलेखों के गुम हो जाने के कारण नई माप पुस्तिका तैयार की है, उसमें आप 28 लाख का बिल बना रहे हो, तो इसमें किसका दोष है ? पहले कितने का बिल भेजा गया, दोबारा आप 28 लाख का बना रहे हो, दिक्‍कत तो यहां पैदा हो रही है. आप कब तक उसका भुगतान करा देंगे ? आप उसकी उपस्थिति में माप तैयार करा लें, माप पुस्तिका पर वेल्‍यूशन करवा लें, मापांकन करवा लें.

अध्‍यक्ष महोदय-- सीधा प्रश्‍न यही है कि उसका परीक्षण करवाकर उसका पेमेंट कब तक करा देंगे, डिले होने का कारण तो आपने बता दिया कि पुस्तिका गुम हो गई थी, परीक्षण करवाकर पेमेंट कब तक करा देंगे ?

श्री रामपाल सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माप पुस्तिका दूसरी तैयार हो गई है उसमें 28 लाख के बिल तैयार हैं, ठेकेदार वहां उपस्थित हो जाये.

श्री रामनिवास रावत-- पहली वाले में कितने का था ?

श्री रामपाल सिंह-- पहली वाली तो गायब है, उसका पता नहीं चल रहा.

श्री रामनिवास रावत-- यही तो विसंगति है.

श्री रामपाल सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, थाने में सूचना दी गई थी.

श्री रामनिवास रावत-- विसंगति तो यहीं पैदा हुई, पहला बिल था 93 लाख का, कोई बात नहीं बनी होगी तो गुम हो गई, पूरा रिकार्ड ही गुम हो गया. दोबारा 28 लाख का करा दिया, झगड़ा तो यहीं पैदा हो रहा है, आपके उत्‍तर से ही स्‍पष्‍ट है, मैंने तो पढ़ा नहीं है, मैंने तो देखा भी नहीं है.

श्री रामपाल सिंह-- आप कहलवाईये मत कि क्‍या स्‍पष्‍ट है, लेकिन आपसे निवेदन है कि आप चाहते क्‍या है बता दीजिये, हम वह कार्यवाही करवा देते हैं.

श्री रामनिवास रावत-- ठेकेदार के समक्ष में मूल्‍यांकन कराकर उसका भुगतान करा दें.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार-- अध्‍यक्ष महोदय, रावत जी तो ठेकदार की तरफ से बोल रहे हैं ना.

श्री रामनिवास रावत-- प्रश्‍न ही ठेकेदार की तरफ से किया गया है तो ठेकेदार की तरफ से ही तो बोलेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप एक लाइन में उत्‍तर दे दें, सीधा सा प्रश्‍न है.

श्री रामपाल सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, रावत जी ने जो कहा है पहले बिल बना नहीं था, 83 लाख का यह बना है और जो रिकार्ड गायब हुआ था उसकी सूचना थाने में दी थी उस पर भी पुलिस ने लिख दिया था कि अब हमको नहीं मिलेगा तो दूसरी माप पुस्तिका बन गई है. अब इसमें अगर कोई कमी है तो आप बता दें हम उसकी जांच करा लेंगे.

श्री रामनिवास रावत-- उसके समक्ष मूल्‍यांकन करा लें, पहले बिल नहीं बना था यह आप कह रहे हो, आपके ही उत्‍तर में आ गया कि अंतिम देयक भेजा गया. मुझे कह रहे हो कि मैं नहीं पढ़ता कि आप नहीं पढ़ते, आप तैयारी करके नहीं आते.

अध्‍यक्ष महोदय-- मूल्‍यांकन कराकर उसका परीक्षण कर लें, बड़ा काम्‍प्‍लीकेटेट मामला नहीं है. आप तो उसका परीक्षण कर लें कितने का काम हु‍आ है.

श्री रामपाल सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह था, मैं देख रहा था कि हमारे प्रश्‍नकर्ता विधायक जी नहीं हैं, आप आ गये तो आप भी जल्‍दी-जल्‍दी में आये होंगे इसलिये तैयारी नहीं होगी, कई बार होता है, स्‍वाभाविक है.

श्री रामनिवास रावत-- केवल इतना करा दें कि ठेकेदार के समक्ष मूल्‍यांकन करा दें और उसका पेमेंट करा दें.

अध्‍यक्ष महोदय-- उसका मूल्‍यांकन कराकर पेमेंट करा दें.

श्री रामपाल सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, चीफ इंजीनियर रीवा से इसकी जांच करायेंगे और उनको निर्देश कर रहे हैं कि वह जल्‍दी ही इसका निराकरण करें और यदि काम किया है तो सीधा भुगतान करें.

श्री रामनिवास रावत-- ठेकेदार के समक्ष मूल्‍यांकन करा लें.

श्री रामपाल सिंह-- समक्ष में ही होता है.

 

11.29 बजे स्‍वागत उल्‍लेख

(माननीय सांसद श्री गणेश सिंह जी का सदन में स्‍वागत)

 

अध्‍यक्ष महोदय-- आज सदन की दीर्घा में माननीय सांसद श्री गणेश सिंह जी उपस्थित हैं, सदन की ओर से उनका स्‍वागत है.

 

जिला रतलाम अंतर्गत सड़क निर्माण

[लोक निर्माण]

6. ( *क्र. 176 ) श्री जितेन्‍द्र गेहलोत : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) आलोट जिला रतलाम में महिदपुर रोड, खारवांकला, ताल-आलोट मार्ग जो पूर्णतः जर्जर हो चुका है, उक्‍त सड़क निर्माण प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति क्‍या है? कब तक उक्‍त सड़क निर्माण प्रारंभ होगा? पाँच माह पूर्व टेंडर की कार्यवाही व प्रशासकीय स्‍वीकृति भी हो चुकी है? फिर कार्य में देरी क्‍यों? (ख) सड़क निर्माण में देरी से पूर्व उक्‍त सड़क का मरम्‍मतीकरण एवं पेंचवर्क क्‍यों नहीं किया जा रहा है? (ग) आलोट विधानसभा क्षेत्र में कितनी व कौन-कौन सी सड़कें ग्‍यारंटी अवधि में खराब हुईं? पूर्ण ब्‍यौरा दें तथा की गई कार्यवाही से अवगत करावें?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) जी हाँ। मार्ग निर्माण हेतु निविदा स्‍वीकृति बाबत् प्रक्रियाधीन है। अनुबंध होने के बाद। द्वितीय निविदा आमंत्रण के कारण देरी हुई है। (ख) विभाग के स्‍थाई गैंग द्वारा आवश्‍यक मरम्‍मत कार्य किया जा रहा है। (ग) कोई नहीं। दो मार्ग परफारमेंस गारंटी में है। दोनों मार्गों की स्थिति संतोषजनक है। जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट अनुसार है।

परिशिष्ट - ''दो''

 

श्री जितेन्‍द्र गेहलोत-- माननीय अध्‍यक्ष जी, मैं माननीय मंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि जो सड़क के बारे में मैंने प्रश्‍न लगाया था वह सड़क स्‍वीकृत हो गई है और मेरी परफारमेंस गारंटी की जो दो सड़कें हैं, माननीय मंत्री जी का ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं कि वह सड़कें गारंटी में बनी हैं. वह बहुत जर्जर हो चुकी हैं उसको जल्दी से ठीक करवायें क्योंकि उस सड़क पर आवागमन बहुत ज्यादा है, कई ट्रक और बस उस सड़क मार्ग से निकलते हैं जिसके कारण वह सड़क खराब हो रही है. इसलिये मैं माननीय मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं कि वह सड़क कब तक स्वीकृत होकर के तैयार होगी ?

श्री रामपाल सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, गोंगापुरताल मार्ग की लंबाई लगभग 20 किलोमीटर है, इसकी अनुमानित लागत 17 करोड़ 50 लाख रूपये है. इसका कार्य आदेश जारी कर दिया है. दिनांक 30.11.2017 को इसकी स्वीकृति जारी कर दी गई है. यह विधायक जी के लिये अच्छी खबर है. दूसरी समस्या जो माननीय सदस्य ने सड़कों की यहां पर की है उनको भी हम ठीक करायेगे.

श्री जितेन्द्र गेहलोत- इसके लिये माननीय मंत्री जी को बहुत बहुत धन्यवाद. अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूं कि मेरे यहां नागेश्वर पार्श्वनाथ जैन तीर्थ स्थल है, वह परफारमेंस गारंटी की रोड है, वास्तव में वह सड़क बहुत खराब हो चुकी है तो मंत्री जी उस रोड को ध्यानपूर्वक दिखाकर के अतिशीघ्र ठीक करवा दे.

श्री रामपाल सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, अतिशीघ्र. क्योंकि पहले भी माननीय विधायक जी ने आग्रह किया था.

श्री जितेन्द्र गेहलोत - मंत्री जी, बहुत बहुत धन्यवाद.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

सड़क निर्माण की स्‍वीकृति

[लोक निर्माण]

7. ( *क्र. 2595 ) श्री नारायण सिंह पँवार: क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रश्‍नकर्ता द्वारा दिनांक 03 सितम्‍बर, 2017 को माननीय लोक निर्माण मंत्री जी के ब्‍यावरा नगर के प्रवास के दौरान भूमि पूजन कार्यक्रम में नगर के पीपल चौराहा से राजगढ़ बायपास तक सीसी सड़क निर्माण, डिवाईडर एवं पोल शिफ्टिंग कार्य की स्‍वीकृति हेतु प्रश्‍नकर्ता द्वारा की गई मांग पर माननीय मंत्री जी द्वारा शीघ्र ही मार्ग निर्माण कराये जाने की घोषणा की गई थी? यदि हाँ, तो क्‍या प्रश्‍न दिनांक तक उक्‍त घोषणा के पालन में विस्‍तृत कार्ययोजना वरिष्‍ठालय को प्रेषित कर दी गई है? (ख) क्‍या नगर के उक्‍त भाग पर सीसी रोड निर्माण, डिवाईडर एवं पोल शिफ्टिंग कार्य कराये जाने से पूरा नगर सीसी युक्‍त होकर नगरवासियों को निरंतर अवरूद्ध होने वाले आवागमन से निजात एवं सुन्‍दर-स्‍वच्‍छ नगर की अनुभूति प्राप्‍त होगी? यदि हाँ, तो क्‍या माननीय मंत्री जी की घोषणा एवं ब्‍यावरा नगर के आमजन की पुरजोर मांग के दृष्टिगत पीपल चौराहा से राजगढ़ बायपास तक सीसी सड़क निर्माण कार्य, डिवाईडर व पोल शिफ्टिंग हेतु दि्वतीय अनुपूरक बजट 2017-18 में स्‍वीकृति प्रदान की जाएगी?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) घोषणा नहीं अपितु निर्देश दिये गये थे। जी नहीं। (ख) जी हाँ। प्रश्‍नांश () के उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में वर्तमान में कोई कार्यवाही प्रस्‍तावित नहीं है।

श्री नारायण सिंह पँवार-- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से अनुरोध है कि माननीय मंत्री जी का प्रवास 3 सितम्बर, 2017 को राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 3 के भूमि पूजन के लिये ब्यावरा नगर में हुआ था. उस मार्ग पर कार्य चल रहा है. एक और शहर का अत्यंत व्यस्त मार्ग है जो कि राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमाक 12 का ही भाग है. जो पीपल चौराहा कहलाता है वह शहर के अंदर से है तथा राजगढ बायपास चौराहे तक वह मार्ग जाता है. काफी छोटा मार्ग है. उसकी स्वीकृति के लिये मैंने मंत्री जी से निवेदन किया था और तत्समय माननीय मंत्री जी के द्वारा विभाग के अधिकारियों को मौखिक निर्देश भी दिये गये थे कि इस मार्ग का सर्वे कर लिया जाये. मेरा अनुरोध है कि यह शहर का अत्यंत व्यस्त मार्ग है और इसके पूर्ण होने से निश्चित रूप से ब्यावरा शहर के निवासियों को राहत मिलेगी. क्योंकि ब्यावरा की आबादी वर्तमान में लगभग 75 हजार के आसपास है. शहर में यही दो मार्ग हैं, एक का तो काम चल रहा है और दूसरे की स्वीकृति अपेक्षित है. अत: आपके माध्यम से मंत्री जी से अनुरोध है कि इसकी घोषणा सदन में करने की कृपा करेंगे.

श्री रामपाल सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी ने जो प्रश्न किया है. मै माननीय विधायक जी के क्षेत्र में स्वयं गया था. बहुत बड़ा वहां कार्यक्रम था सभी संगठनों ने स्वागत आदि भी किया था और तत्समय माननीय विधायक जी ने एक पुलिया बनाये जाने की मांग थी. वहां बहुत अच्छी सड़क बन रही है. उस पुलिया को मैंने देखा भी था, निरीक्षण किया था और कहा था कि यह पुलिया बनाई जायेगी क्योंकि बहुत अच्छी सड़क बन रही है. उस पुलिया के बारे मे विधायक जी से कहना है कि उस पुलिया को हम बनायेंगे, उसमें लगभग 5 करोड़ रूपये की लागत आयेगी. दूसरी बात विधायक जी ने पीपर चौराहे से बायपास तक सडक की बात की है, अभी वह सड़क बहुत अच्छी स्थिति में है. उस पर हम गंभीरता से विचार कर रहे है जैसे ही उस सड़क में कुछ कमी दिखाई देगी तो आगे विचार करके गंभीरता से लेंगे.

श्री नारायण सिंह पँवार-- अध्यक्ष महोदय, मेरा मंत्री जी से आग्रह है कि पुलिया निर्माण की जो मंत्री जी ने घोषणा की है वह बहुत आवश्यक थी, उसके लिये बधाई देता हूं. लेकिन यह जो मार्ग है इसके बारे में मंत्री जी ने कहा है कि रोड तो अच्छा है लेकिन सकरा है , पुराना मार्ग है, राष्ट्रीय राजमार्ग-12 था और शहर के बीचों बीच से यह मार्ग गुजरता है. मुझे आशा है कि मंत्री जी अभी नहीं तो आगामी बजट सत्र में इस मार्ग को शामिल कर लेंगे, जनता की तरफ से यही मांग है और बहुत दिक्कत शहर के अंदर आ रही है.

श्री रामपाल सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, विधायक जी की भावनाओं का हम आदर कर रहे हैं. लेकिन नगर के अंदर कुछ स्थानीय निकाय से भी काम करवाते रहें तो अच्छा रहेगा.नगरों से हम गांव को जोड़ देंगे, ऐसा हम आपसे आग्रह करेंगे क्योंकि नगर में कुछ काम आप भी स्थानीय निकाय से करा सकते हैं. यह अच्छा रहेगा.

श्री नारायण सिंह पँवार-- पुलिया निर्माण की घोषणा के लिये मंत्री जी को बहुत बहुत धन्यवाद.

 

 

 

जिला सहकारी बैंक/सहकारी समितियों की जाँच

[सहकारिता]

8. ( *क्र. 1879 ) डॉ. योगेन्‍द्र निर्मल : क्या राज्‍यमंत्री, सहकारिता महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला सहकारी बैंक बालाघाट के अधीन कितने-कितने सहकारी बैंक संचालित हैं? जिलावार/विधानसभा क्षेत्रवार बैंकों व समितियों की पतावार जानकारी देवें। (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में कितनी समितियों द्वारा खाद्यान्न खरीदी केन्‍द्रों में भण्‍डारण व उठाव किया, की जानकारी तथा बैंकों द्वारा किसानों को योजनावार स्‍वीकृत किये गये ऋणों की जानकारी हितग्राही की संख्‍यावार देवें? (ग) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में प्रत्‍येक बैंकों में जमा सन्ड्री क्रेडिटर्स राशि की जानकारी बैंकवार देवें। (घ) प्रश्‍नांश (ग) के संदर्भ में प्रत्‍येक बैंकों में जमा सन्ड्री क्रेडिटर्स राशि के उपयोग के लिए प्रचलित नियमों की प्रति देवें तथा उक्‍त राशि के उपयोग तथा दुरूपयोग करने के लिए कौन अधिकारी जिम्‍मेदार हैं? अधिकारियों की सूची सहित जानकारी देवें तथा उनके विरूद्ध दण्‍डात्‍मक कार्यवाही करेंगे?

राज्‍यमंत्री, सहकारिता ( श्री विश्वास सारंग ) : (क) जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्या., बालाघाट के अधीन अन्य कोई बैंक संचालित नहीं है। जिले में सहकारी बैंक की शाखाओं तथा उनसे संबद्ध प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्थाओं की सूची विधानसभावार पते सहित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 अनुसार है। (ख) उत्तरांश (क) की समितियों द्वारा संचालित खरीदी केन्द्रों में भण्डारण एवं उठाव नहीं किया जाता, अपितु समितियों द्वारा समर्थन मूल्य अंतर्गत खाद्यान्न क्रय किया जाता है, जिसकी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-2 अनुसार है। योजनावार स्वीकृत किये गये ऋणों की जानकारी हितग्राहियों की संख्यावार पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-3 अनुसार है। (ग) जानकारी निरंक है। (घ) उत्तरांश (ग) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

डॉ. योगेन्‍द्र निर्मल : माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं . मैं उत्तर से संतुष्ट हूं.

 

 

 

 

मार्ग निर्माण कार्य की जाँच

[लोक निर्माण]

9. ( *क्र. 2302 ) श्री मुरलीधर पाटीदार : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या आगर नगरीय क्षेत्र में 4 लेन सी.सी. रोड एवं नाला निर्माण कार्य निर्धारित अवधि निकल जाने के पश्चात् भी पूर्ण नहीं हुआ? यदि हाँ, तो क्या कार्यवाही की गई? कार्य का प्रशासकीय कार्यादेश एवं अनुबंध की सत्यापित प्रति उपलब्ध करावें। (ख) उक्तानुसार कार्य क्‍या निर्धारित मानक अनुरूप किया गया? यदि हाँ, तो जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कब-कब मानीटरिंग की गई? तिथि सहित विवरण देवें (ग) मार्ग निर्माण के प्रगतिरत रहते हुए गुणवत्ता संबंधी या निर्धारित मानक अनुरूप कार्य न होने संबंधी कितनी शिकायतें प्राप्त हुईं हैं एवं इसके संबंध में क्या कार्यवाही की गई? किन-किन अधिकारियों द्वारा जाँच की गई? शिकायतवार पूर्ण विवरण देवें जाँच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध करावें? (घ) क्‍या प्रश्नांश (ख) एवं (ग) के तारतम्य में या स्वप्रेरणा से स्वतः संज्ञान लेते हुए निर्माण कार्य की जाँच कर उचित कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो क्या व कब तक? विवरण देवें। क्‍या मार्ग निर्माण कार्य में घटिया सामग्री के उपयोग के संबंध में जाँच की जाकर उचित कार्यवाही की जावेगी?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) जी नहीं। आगर नगरीय क्षेत्र में 4 लेन सी.सी. रोड एवं नाला निर्माण कार्य पूर्ण हो गया है। कार्यवाही का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। कार्य की प्रशासकीय स्‍वीकृति, कार्यादेश एवं अनुबंध की सत्‍यापित प्रति की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-1 अनुसार है। (ख) जी हाँ। निरीक्षणकर्ता अधिकारी एवं दिनांक की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार एवं निरीक्षण का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-2 अनुसार है। (ग) मार्ग निर्माण के प्रगतिरत् रहते हुए म.प्र. सड़क विकास निगम को प्राप्‍त एक शिकायत की जाँच की गई। जाँच का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-3 अनुसार है। (घ) निर्माण कार्य अनुबंधानुसार मेसर्स लॉयन इंजीनियरिंग कन्‍सलटेंट की देखरेख में हुआ है। मटेरियल इत्‍यादि की जाँच निरंतर प्रक्रिया के तहत की जाकर निर्माण कार्य पूर्ण हुआ। पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-3 की जाँच अनुसार पेनल्‍स में वांछित सुधार कर दिया गया था। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-4 अनुसार है। शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

श्री मुरलीधर पाटीदार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न का उत्‍तर यह आया है कि एक शिकायत इस रोड की हुई थी और उसकी जांच कराई गई है. मेरा आपके माध्‍यम से विनम्र आग्रह है कि इस रोड में कई जगह दो नाली बना रखी हैं लेकिन जहां पर जरूरत है, वहां पर नाली नहीं बनी है. मेरा माननीय मंत्री से निवेदन है कि 40 करोड़ की चार किलोमीटर की सड़क है, मेरे ख्‍याल से मध्‍यप्रदेश में इससे ज्‍यादा मंहगी सड़क नहीं बनती होगी. अगर उसके दोनों तरफ नाली बन जाए तो दोनों तरफ का पानी निकल जायेगा.

श्री रामपाल सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी की चिंता वाजिब है. आप इस संबंध में पूरा परीक्षण कराकर एक पत्र लिख दें, हम उसे प्राथमिकता से लेने का प्रयास करेंगे. बाकी वहां पर बहुत अच्‍छी सड़क बनी है और आप जो पानी की निकासी की चिंता कर रहे हैं, उसका भी हम निराकरण करेंगे.

श्री मुरलीधर पाटीदार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विधानसभा का प्रश्‍न, पत्र से कम नहीं होता है और अगर आप पत्र की महत्‍ता ज्‍यादा समझें तो वह एक अलग बात है.

अध्‍यक्ष महोदय - आप इस संबंध में एक पत्र भी लिख दें.

श्री मुरलीधर पाटीदार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे आग्रह करता हूं कि वहां पर नाली का निर्माण प्रस्‍तावित था, पर ठेकेदार द्वारा वहां पर नाली का निर्माण नहीं किया गया है. मेरा दूसरा आग्रह यह है कि इतनी मंहगी सड़क बनाने के बावजूद उसका एलाइनमेंट ऐसा है कि अगर 50 की स्‍पीड से कोई गाड़ी निकाली जाए तो गाड़ी रोड छोड़कर नीचे चली जाएगी. मेरा आग्रह यह भी है कि उसका एलाइनमेंट पूरा गड़बड़ है, इसलिए उसके एलाइनमेंट भी सुधरवा दिया जाए.

श्री रामपाल सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने इस बात को विधानसभा में रखा है, हम इसको प्राथमिकता देकर वहां नाली का निर्माण भी करवाएंगे और जो-जो भी कमी होगी, उसको भी पूरा करवा देंगे.

श्री गोपाल परमार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह नगर का मामला है, अत: आप थोड़ी सी एक राशि ऐसी भी दे दें जिससे कि उसके बीच में लाइटिंग हो जाए क्‍योंकि वहां पर अंधेरे के कारण एक्‍सीडेंट होते हैं. कृपया आप इसमें और सहयोग कर दें.

प्रश्‍न संख्‍या -10 (अनुपस्थित)

 

 

लंबित विभागीय जाँच का निराकरण

[किसान कल्याण तथा कृषि विकास]

11. ( *क्र. 811 ) कुँवर विक्रम सिंह : क्या किसान कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍न दिनांक तक की स्थिति में कृषि उपज मंडी समिति कटनी के मंडी कर्मचारी एवं कटनी मंडी में पदस्‍थ रहे राज्‍य मंडी बोर्ड सेवा के कर्मचारियों की किन-किन की विभागीय जाँच कब-कब संस्थित की गई? कौन जाँच अधिकारी एवं कौन प्रस्‍तुतकर्ता अधिकारी हैं? पृथक-पृथक विवरण दें (ख) प्रश्‍नांश (क) के कर्मचारियों को जारी आरोप पत्र की प्रतियां उपलब्‍ध करावें? अब तक विभागीय जाँच पूर्ण न करने के क्‍या कारण हैं? क्‍या दोषियों को बचाने के लिए जाँच में विलं‍ब हो रहा है? खम्‍पारिया एवं मुकेश राय को निलंबित करने के बाद 45 दिवस में आरोप पत्र जारी न करने के लिए स्‍थापना प्रभारी को कब तक निलंबित किया जावेगा?(ग) कृषि उपज मंडी के किन फर्मों पर कितनी-कितनी राशि कब से बकाया है? विवरण दें तथा बकाया रहते उक्‍त फर्म की अनुज्ञप्ति क्‍यों जारी की है, क्‍या अनुज्ञप्ति निरस्‍त कर दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही की जावेगी? (घ) मंडी कटनी में कितने अनुज्ञा पत्र सत्‍यापन हेतु शेष हैं? क्‍या उक्‍त शाखा प्रभारी उक्‍त शाखा में पदस्‍थापना दिनांक से पदस्‍थ हैं? यदि हाँ, तो उसे कब तक बदला जावेगा?

किसान कल्याण मंत्री ( श्री गौरीशंकर बिसेन ) : (क) कृषि उपज मंडी समिति कटनी मंडी संवर्ग के कर्मचारियों के विरूद्ध वर्ष 2017 से प्रश्‍न दिनांक तक की स्थिति में संस्थित की गई जाँच की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। कटनी मंडी में पदस्‍थ रहे राज्‍य मंडी बोर्ड सेवा के 15 कर्मचारियों के विरूद्ध प्रश्‍न दिनांक की स्थिति में विभागीय जाँच प्रक्रियाधीन है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित कर्मचारियों को जारी आरोप-पत्र की प्रतियां पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। विभागीय जाँच शीघ्र पूर्ण कराने की कार्यवाही की जा रही है। दोषियों को बचाने का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। प्रतिवेदन प्राप्‍त होने पर गुण-दोष के आधार पर कार्यवाही की जावेगी। (ग) कृषि उपज मंडी कटनी की फर्मों की बकाया राशि की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। बकाया राशि की वसूली व अनुज्ञप्ति निरस्‍त न करने वाले दोषियों के विरूद्ध गुण-दोष के आधार पर नियमानुसार कार्यवाही की जावेगी। (घ) कृषि उपज मंडी समिति कटनी में दिनांक 31.10.2017 की स्थिति में मंडी शुल्‍क छूट के लिये प्राप्त 1954 अनुज्ञा पत्र सत्‍यापन के लिये शेष हैं। अनुज्ञा पत्र शाखा प्रभारी श्री अमृतलाल कुजूर मंडी, निरीक्षक मंडी, समिति कटनी में दिनांक 20.04.2013 से पदस्‍थ हैं तथा वे दिनांक 26.09.2013 से अनुज्ञा सत्‍यापन शाखा में कार्यरत हैं। पदस्‍थी बदलने का प्रश्‍न उदभूत नहीं होता।

कुँवर विक्रम सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रश्‍न की गंभीरता को देखते हुए आपसे संरक्षण चाहता हूं. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं कि प्रश्‍नांश (क) के उत्‍तर में संलग्‍न परिशिष्‍ट (अ) में दर्शाये गये मंडी कर्मचारियों के विरूद्ध संस्थित विभागीय जांच को कब तक पूर्ण कर लिया जावेगा इसकी समय-सीमा बताने का कष्‍ट करें, इसके साथ ही मंडी बोर्ड सेवा के 15 कर्मचारियों की विभागीय जांच कब तक पूर्ण कर ली जायेगी ?

श्री गौरीशंकर बिसेन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कृषि उपज मंडी समिति संवर्ग के जो12 कर्मचारी हैं, हम उनकी विभागीय जांच को दो माह में पूरा कर लेंगे तथा जो मंडी बोर्ड के कर्मचारी हैं, इनकी संख्‍या 15 है, इसमें क्रमांक 1 से 4 इनके ऊपर 2015-16 से आरोप हैं, इनकी जांच को हम इसी माह पूरा कर लेंगे और शेष बाकी 11 के ऊपर 2017 के मामले हैं, इसको थोड़ा समय लगेगा, लेकिन अतिशीघ्र हम इनके भी आरोपों की जांच को पूरा कर लेंगे. जैसे मैंने देखा कि 1 से 4 के विरूद्ध 2016 के और दो 2015 के आरोप हैं, बाकी जुलाई 2017 के आरोप हैं. हम यथासंभव कोशिश करेंगे कि इन जांचों को भी अविलंब पूरी किया जाए. हम इन जांचों को भी तीन महीने के अंदर पूरा कर देंगे.

कुँवर विक्रम सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं कि मंडी समिति सेवा के कर्मचारी श्री पाठक, आर.पी.खम्‍पारिया, मुकेश कुमार राय के द्वारा मंडी समिति को चार करोड़ से अधिक की आर्थिक क्षति पहुंचायी गई है. मंडी समिति ने यह निर्णय लिया है कि विभागीय जांच पूर्ण होने तक उक्‍त कर्मचारियों को अन्‍यत्र स्‍थानांतरित किया जाए, जिससे जांच प्रभावित न हो, लेकिन आज दिनांक तक उन्‍हें वहां से अन्‍यत्र पदस्‍थ नहीं किया गया है.

श्री गौरीशंकर बिसेन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज ही उनको हटा दिया जाएगा.

कुँवर विक्रम सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं दो बहुत ही महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न ओर करना चाहता हूं.

अध्‍यक्ष महोदय - आपने दो प्रश्‍न कर लिए हैं, आप एक प्रश्‍न और कर लीजिए.

कुँवर विक्रम सिंह - प्रश्‍नांश (ख) में पूछा गया है कि खम्‍पारिया एवं मुकेश राय को 45 दिनों में आरोप पत्र जारी न करने के लिये स्‍थापना प्रभारी को कब तक निलंबित किया जायेगा, क्‍योंकि स्‍थापना प्रभारी ने आरोप पत्र जारी ही नहीं किया है ?

श्री गौरीशंकर बिसेन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय हमने परिशिष्‍ट (स) में आरोप पत्र के पूरी विस्‍तृत जानकारी दी है, माननीय सदस्‍य उसका अध्‍ययन कर सकत हैं. मैं कठोर कार्यवाही करूंगा कहीं पर भी हम किसी को नहीं छोड़ेंगे. ख ासया

कुँवर विक्रम सिंह - अध्‍यक्ष महोदय, मैंने पूरे परिशिष्‍ट को पढ़ा है. मैं एक प्रश्‍न और पूछना चाहूँगा.

अध्‍यक्ष महोदय - अब नहीं, अन्‍य माननीय सदस्‍यों के भी प्रश्‍न हैं.

कुँवर विक्रम सिंह - ठीक है.

प्रश्‍न संख्‍या12. - (अनुपस्थित)

भितरवार में कृषक संगोष्ठी का आयोजन

[किसान कल्याण तथा कृषि विकास]

प्रश्‍न संख्‍या 13. ( *क्र. 1810 ) श्री लाखन सिंह यादव : क्या किसान कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या दिनांक 28.10.2017 को विकासखण्ड स्तरीय कृषक संगोष्ठी तकनीकी प्रशिक्षण एवं मृदापरीक्षण प्रयोगशाला का लोकार्पण भितरवार में किया गया था? यदि हाँ, तो उक्त कार्यक्रम के आमंत्रण पत्र को उपलब्ध करावें? क्‍या उक्त पत्र में सामान्य प्रशासन विभाग के द्वारा निर्धारित प्रोटोकाल का पालन किया गया था? यदि हाँ, तो क्या कार्ड में उल्लेखित नाम जैसे श्री योगेन्द्र सिंह कुशवाह, मण्डल अध्यक्ष भाजपा चीनौर, श्री मुकेश कुमार भार्गव, मण्डल अध्यक्ष भाजपा आंतरी इत्यादि आमंत्रण पत्र में दर्ज अनेकों नाम किस प्रोटोकाल में आते हैं? क्या यह प्रोटोकाल का खुला उल्लंघन है? यदि हाँ, तो इसके लिये कौन-कौन अधिकारी दोषी हैं? क्या प्रोटोकाल का उल्लंघन करने वाले अधिकारी के प्रति कठोर दण्डात्मक कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो क्या और कब तक? यदि नहीं, तो क्यों? (ख) ग्वालियर जिले में विभाग द्वारा 01 जनवरी, 2017 से प्रश्‍न दिनांक तक किन-किन दिनांकों में किन-किन स्थानों पर कृषि महोत्सव, कृषक मेला, कृषक संगोष्ठी, कृषि विज्ञान मेला सहप्रदर्शनी के कार्यक्रमों में किस-किस योजना एवं मद की कितनी-कितनी राशि, किन-किन कार्यों में किस-किस अधिकारी द्वारा व्यय की गयी? (ग) क्या इन योजनाओं में बहुत बड़े स्तर पर शासन की राशि का दुरूपयोग किया गया है? यदि हाँ, तो क्या इन कार्यक्रमों में हुये व्यय की जाँच कराई गई है? यदि हाँ, तो जाँच में कौन-कौन कर्मचारी/अधिकारी द्वारा अनियमितता करना पाया है? उनके नाम स्पष्ट करें? यदि जाँच नहीं कराई गई है तो क्यों?

किसान कल्याण मंत्री ( श्री गौरीशंकर बिसेन ) : (क) जी हाँ। आमंत्रण पत्र पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र ''1'' अनुसार है। सामान्‍य प्रशासन विभाग द्वारा आमंत्रण कार्ड को तैयार करने के संबंध में प्रोटोकाल निर्धारित नहीं है। उप संचालक, किसान कल्‍याण तथा कृषि विकास विभाग जिला ग्‍वालियर द्वारा माननीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रण कार्ड में उपस्थिति‍ हेतु उल्‍लेख एवं निवेदन किया गया है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ख) पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र ''2'' अनुसार है। (ग) जी नहीं। व्‍यय का सत्‍यापन उपरान्‍त ही भुगतान हुआ है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

श्री लाखन सिंह यादव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न में माननीय मंत्री जी ने जवाब दिया है कि सामान्‍य प्रशासन विभाग द्वारा आमंत्रण कार्ड को तैयार करने के संबंध में कोई प्रोटोकॉल निर्धारित नहीं है. अध्‍यक्ष महोदय, मुझे ऐसा लगता है कि सामान्‍य प्रशासन विभाग ने शायद भाऊ के लिए कोई नया सर्कुलर जारी कर दिया है और उस सर्कुलर में लिखा है कि (XXX) अध्‍यक्ष महोदय - यह कार्यवाही से निकाल दें.

श्री लाखन सिंह यादव - अध्‍यक्ष महोदय, आप मेरा पूरा प्रश्‍न हो जाने दें.

अध्‍यक्ष महोदय - आप शब्‍दों की मर्यादा रखें.

श्री लाखन सिंह यादव - जो ज्‍यादा सेवा करते हैं, उनको सरकारी आमंत्रण दें और विशेष अतिथि के तौर पर आप उनका नाम कार्ड में छपवाएं. मुझे लगता है कि सामान्‍य प्रशासन विभाग ने ऐसा कोई सर्कुलर जारी कर दिया है, मात्र भाऊ के लिए. अभी ग्‍वालियर में दिनांक 28.10 को एक कार्यक्रम कृषि संगोष्‍ठी का मेरी विधानसभा में हुआ था.

अध्‍यक्ष महोदय - आप सीधे प्रश्‍न कर दें.

श्री लाखन सिंह यादव - अध्‍यक्ष महोदय, वही तो कर रहा हूँ. दिनांक 28.10 का एक कार्ड छपा है. सरकारी कार्यक्रम है. उस कार्ड में जो नाम छपे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - वे तो हैं, आप सीधे प्रश्‍न कर दें.

श्री लाखन सिंह यादव - मैं सदन को बता देना चाहता हूँ. जो कार्ड में नाम छपे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - वह सदन में सभी ने पढ़ लिए हैं.

श्री लाखन सिंह यादव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने पढ़ लिया है लेकिन सदन ने नहीं पढ़ा है. मैं यह जानना चाहता हूँ कि आपने कार्यक्रम में जो नाम छापे हैं. ये नाम क्‍या प्रोटोकॉल में आते हैं ? (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय - यह कार्यवाही से निकाल दें.

.....(व्‍यवधान) ....

श्री गौरीशंकर बिसेन - आप प्रश्‍न कीजिये. (XXX)

श्री लाखन सिंह यादव - भैया, आप बैठ जाएं. थोड़ा सुन तो लें, यह क्‍यों छपवा दिए ? यह सरकारी कार्यक्रम है. आप अपना प्रायवेट कार्यक्रम कराएं.

.....(व्‍यवधान) ....

अध्‍यक्ष महोदय - कृपया बैठ जाएं.

श्री लाखन सिंह यादव - यह प्रोटोकॉल का उल्‍लंघन है.

.....(व्‍यवधान) ....

अध्‍यक्ष महोदय - बैठ जाइये. आप प्रश्‍न नहीं करते, भाषण देते हैं. आप बैठ जाइये. आप भाषण देते हैं.

श्री लाखन सिंह यादव - और ने तो कुछ किया नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय - आप लांछन लगाते हैं.

श्री लाखन सिंह यादव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं कोई भाषण नहीं दे रहा हूँ.

अध्‍यक्ष महोदय - यह बात ठीक नहीं है.

डॉ. गोविन्‍द सिंह - अध्‍यक्ष महोदय, भारतीय जनता पार्टी के सरकारी खर्चे पर .....(व्‍यवधान)

.....(व्‍यवधान) ....

अध्‍यक्ष महोदय - डॉक्‍टर साहब, आप बैठ जाएं. दोनों यादव जी, आप बैठ जाइये. बना जी, तिवारी जी आप लोग बैठ जाइये. आप कृपा करके बैठ जाइये.

श्री लाखन सिंह यादव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूँ कि .......(व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय - आपसे अनुरोध यह है कि आप भाषण न दें. बैठ जाइये.

.....(व्‍यवधान) ....

डॉ. गोविन्‍द सिंह - आप भारतीय जनता पार्टी के प्रचार में लगाओगे.

श्री लाखन सिंह यादव - अध्‍यक्ष जी, उत्‍तर तो दिलवाइये.

कुँवर विक्रम सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या ये प्रोटोकाल में आते हैं ?

.....(व्‍यवधान) ....

अध्‍यक्ष महोदय - आप बैठ जाएं.

कुँवर विक्रम सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह चाहता हूँ. .....(व्‍यवधान)

श्री मधु भगत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक घण्‍टे पहले ये कार्ड डिस्ट्रिब्‍यूट करते हैं और प्रोटोकॉल में पूरी भारतीय जनता पार्टी की श्रेणी लिखी रहती है.

अध्‍यक्ष महोदय - आप बैठ जाइये.

राजस्‍व मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्‍ता) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी बात करें तो कोई मर्यादा होनी चाहिए या नहीं होनी चाहिए. अपनी बात दृढ़ता से करें, ताकत से करें लेकिन (XXX)

श्री लाखन सिंह यादव - आप मेरे प्रश्‍न का जवाब ही नहीं आने देना चाह रहे हैं.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह मर्यादा हमें भी ध्‍यान में रखनी चाहिए.

श्री लाखन सिंह यादव - आप बैठ जाइये.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता - अध्‍यक्ष महोदय, मेरा यह कहना है .....

.....(व्‍यवधान) ....

श्री लाखन सिंह यादव - आप बैठ जाओ (XXX), आप काहे के लिए ...

श्री उमाशंकर गुप्‍ता (XXX)

श्री लाखन सिंह यादव - आप हर चीज पर खड़े होगे क्‍या. आप जब देखो, जब हर प्रश्‍न पर खड़े होते हो. कोई उत्‍तर ही नहीं आने देना चाह रहे.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता (XXX)

डॉ. गोविन्‍द सिंह - संसदीय कार्यमंत्री जी इतना बता दें कि क्‍या शासकीय धन का उपयोग पार्टी के प्रचार में हो सकता है? इसका जबाव दे दें.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता - आप मंत्री को तू तड़ाक से बोलोगे, ये कौन सी भाषा है, तुम ऐसा कर लो यार, तुम बुला लो, यह कोई मंत्री से बोलने की भाषा है आपकी, यह कोई तरीका है बात करने का.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) - माननीय मंत्री जी, आप संसदीय कार्य मंत्री है.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता - माननीय नेता प्रतिपक्ष जी मैं आपसे भी पूछता हूं, आप भी मंत्री रहे हैं कि हाऊस में कोई बात रखी जा सकती है, आलोचना के साथ रखी जा सकती है, दृढ़ता से बात करिए, लेकिन मंत्री से बात करते समय तू तड़ाक की बात करेंगे, असंसदीय बात करेंगे, यह कोई तरीका है. अध्‍यक्ष महोदय, इसमें कुछ व्‍यवस्‍था चाहिए.

श्री लाखन सिंह यादव - आप कोई बात को सुनने दे तब, न आप बीच बीच में खड़े हो जाते हैं, यह कोई तरीका है?

श्री उमाशंकर गुप्‍ता - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपकी कुछ व्‍यवस्‍था चाहिए.

अध्‍यक्ष महोदय - नेता जी की और सुन लूं फिर व्‍यवस्‍था देता हूं.

श्री अजय सिंह - संसदीय कार्य मंत्री से प्रार्थना है कि आप सीधे बात न करें, आपसे तो उम्‍मीद करते हैं हम लोग कि एक परम्‍परा स्‍थापित करें. अध्‍यक्ष महोदय, यह गंभीर विषय है. मैं आपके माध्‍यम से पूछना चाहता हूं(...व्‍यवधान....)

श्री उमाशंकर गुप्‍ता - मेरा यह कहना है कि आप जबाव दे, उस बात को उठाए लेकिन क्‍या माननीय सदस्‍य को इस प्रकार से बोलना चाहिए क्‍या? मेरा आग्रह है कि क्‍या हाऊस में अपनी बात रखते समय, मंत्री से बोलते समय मर्यादा का पालन किया जाना चाहिए कि नहीं किया जाना चाहिए, यह मेरा प्रश्‍न है? (...व्‍यवधान....)

अध्‍यक्ष महोदय - प्रश्‍न क्रमांक 14.

श्री अजय सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कृपा करके आप संसदीय मंत्री से कह दीजिए कि जब तक मैं प्रश्‍न पूछ लूं तब तक थोड़ा बैठ लें.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उस प्रश्‍न के पहले मैंने एक बात उठाई है, जिसे आपने भी सुना है.

अध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी, प्रतिपक्ष के नेता बोल लें फिर आपको अवसर दूंगा.

श्री अजय सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह चिन्‍ता का विषय है.

अध्‍यक्ष महोदय - (सुन्‍दरलाल तिवारी की ओर देखते हुए) मेरा कहना है, आप बैठे बैठे मत बोलिए.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - उनको तो जबाव देना नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय - तिवारी जी बैठ जाइए.

श्री अजय सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह जो लाखन सिंह जी ने कार्ड की बात कही. मैं आपके माध्‍यम से सरकार से पूछना चाहता हूं क्‍या कोई शासकीय कार्यक्रम में किसी राजनीतिक पार्टी के लोगों के, जो प्रोटोकॉल से संबंध नहीं रखते हैं, उनके नाम क्‍या कार्ड में छप सकते हैं.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार - यदि योग्‍य आदमी है तो छप सकते हैं, विशेषज्ञ है तो छप सकते हैं, उनकी योग्‍यता के आधार पर उनको बुलाया गया था. प्रोटोकॉल में यदि अयोग्‍य आदमी है तो उनको बुलाने की आवश्‍यकता नहीं है. (...व्‍यवधान...)

श्री अजय सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विधान सभा के उपाध्‍यक्ष महोदय के क्षेत्र में भी इसी तरह की घटना हुई, अनेक क्षेत्रों में होती है. मैं आपके माध्‍यम ये यह पूछ रहा हूं, हमारे मंत्री महोदय खड़े हो गए, जो योग्‍य हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - डॉक्‍टर साहब दो मिनट.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार - आपकी सरकार के जमाने में तो कलेक्‍टर सूचना तक नहीं देता था और आपके महामंत्री और पदाधिकारी सभी को बुलाया जाता था, रिकार्ड निकलवाकर देख लो, यह तो हम है जो पालन कर रहे हैं. (...व्‍यवधान...)

श्री रामनिवास रावत - अध्‍यक्ष महोदय, यह संसदीय परम्‍परा है? (...व्‍यवधान...)

अध्‍यक्ष महोदय - प्रश्‍न क्रमांक 14.

श्री अजय सिंह - डॉ शेजवार जी, आपका स्‍वास्‍थ्‍य अभी पूरी तरह से ठीक नहीं हुआ है कृपा करके थोड़ा शांति से बैठे रहे. हमारी सरकार जब थी, और जब होगी तो क्‍या परम्‍परा रहेगी वह अलग बात है, लेकिन वर्तमान सरकार की बात हो रही है.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार - माननीय मंत्रियों को गाड़ी नहीं भेजते थे, दिग्विजय सिंह जी फग्‍गन सिंह कुलस्‍ते जी को बड़ी मुश्किल से एक बोलेरो उपलब्‍ध कराते थे, जिसके लिए यह विवाद हुआ है. आप क्‍या प्रोटोकॉल की बात करेंगे? (...व्‍यवधान...)

श्री रामनिवास रावत:-माननीय अध्‍यक्ष,यह क्‍या तरीका है. (व्‍यवधान).यह इतने वरिष्‍ठ हैं और नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके हैं, बड़े अचरज की बात है.

डॉ. गोविन्‍द सिंह:- क्‍या यह माननीय मंत्रियों के लिये भी होता है ? (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय:- जब सदन के नेता प्रतिपक्ष बोलें, तब माननीय मंत्रीगण भी और सभी माननीय सदस्‍यगण बैठ जायें. नेता प्रतिपक्ष जी बोल रहे हैं, कृपा करके कोई इंटरफेयर न करे. डॉक्‍टर साहब, बैठ जायें, मेरा सभी सदस्‍यों से अनुरोध है कि जब सदन के नेता प्रतिपक्ष खड़े होते हैं तो वह किसी प्रकार से व्‍यवधान न डालें.प्रतिपक्ष के नेता जी को बोलने दें. मैं माननीय मंत्रीगण आदरणीय गुप्‍ता जी और शेजवार जी को भी बोलने का समय दूंगा.किंतु पहले प्रतिपक्ष के नेता जी बोलेंगे.

श्री अजय सिंह :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमें एक चीज समझ में नहीं आ रही है कि 14 साल जिस पार्टी की सरकार को चलते हो चुके हों. वह सरकार अभी किसी भी सदन में किसी भी विषय में उदाहरण देते हैं, चाहे वह महिला उत्‍पीड़न की बात हो, वह 1993-2003 की तुलना करते हैं. 14 साल में, अब तो आप अपने 10-12 साल की तुलना करो.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं बड़े ही विनम्रता के साथ कह रहा हूं कि शासकीय धन का दुरूपयोग क्‍या इस तरह से प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाते हुए, ऐसे कार्यक्रम हो सकते हैं ? मैं आपके माध्‍यम से सरकार के माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं.

अध्‍यक्ष महोदय:- ठीक है. श्री गुप्‍ता जी, कृपया संक्षेप में कहें.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नेता प्रतिपक्ष जी ने प्रश्‍न पूछा है तो मैं कहना चाहता हूं कि कार्यक्रम के हिसाब से जो योग्‍य लगता है, उचित लगता है, उस क्षेत्र में कार्यरत लोग हैं, उनको बुलाना अधिकार है इसमें कोई गलती नहीं है.मैंने तो यह भी देखा है, फिर आप कहेंगे, कई बार तो क्रिमिनल रिकार्डेड लोगों को भी बुलाया है और जब शिकायत हुई राष्‍ट्रपति जी के स्‍वागत के लिये...(व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय:- (डॉ. गौरीशंकर जी शेजवार के खड़े होने पर)डॉक्‍टर साहब, प्‍लीज एक मिनट आप बैठ जायें.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता :- डॉक्‍टर साहब, अब आप सुन तो लो.(व्‍यवधान) आप शांति से बैठिये.

डॉ.गोविन्‍द सिंह:- आपको सदन चलाना है.इन्‍हें सरकार चलाना है, (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय :- यह कार्यवाही से निकाल दें.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता:- डॉक्‍टर साहब, जो वास्‍तविकता है उसे तो स्‍वीकार करें. इस कार्यक्रम में किसको बुलाना है, इसमें कौन सा खर्चा हो गया, कार्यक्रम तो होना ही था.अतिथि कौन-कौन बुलाये जायेंगे, यह उस समय वहां जैसा उचित लगा बुलाया होगा. विधायक को तो बुलाना ही चाहिये इसमें दो मत नहीं है और बुलाया भी है.

अध्‍यक्ष महोदय, विधायक को तो बुलाना ही चाहिये, वह तो प्रोटोकॉल है.इसके अतिरिक्‍त जो जरूरी होगा, उनको बुला लिया होगा. लेकिन मैं जो बात कह रहा था और नेता प्रतिपक्ष जी के पहले कहना चाहता था कि लाखन सिंह जी बहुत सीनियर विधायक हो गये हैं तो सदन में हम बात करते समय हम अपने प्रोटोकॉल की बात करते हैं, विधायक के नाते, मंत्री के नाते तो जब हम सदन में बात करते हैं तो दृढ़ता से कहें, आलोचना करें, कमियां बतायें लेकिन तू-तड़ाक शब्‍दों का उपयोग करके, हम क्‍या मैसेज देना चाहते हैं. मेरा केवल इतना ही कहना था.

अध्‍यक्ष महोदय:- डॉ. शेजवार जी आप कुछ कहना चाहेंगे, कृपया धीमी आवाज में कहें.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी विनम्र प्रार्थना केवल यही है कि केवल प्रोटोकॉल के नाम पर, यदि योग्‍य व्‍यक्ति हैं, यदि उन्‍हें विषय का ज्ञान है, निरंतर उसमें काम कर रहे हैं और उनको अध्‍ययन है तो उनको पार्टी के नाम पर उनको अलग नहीं किया जाना चाहिये.

अध्‍यक्ष महोदय:- विषय समाप्‍त.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार:- मेरी एक प्रार्थना यह है कि....

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी:- यह किस नियम में है ?

अध्‍यक्ष महोदय:- तिवारी जी आप बैठ जायें.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी:- क्‍या सदन नियम-कानून से नहीं चलेगा. किस नियम के अंतर्गत मंत्रियों ने बोला है ?

डॉ. गौरीशंकर शेजवार:- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा अपना अनुभव है कि जहां पर प्रोटोकॉल का पालन होना चाहिये. अध्‍यक्ष महोदय, मैं नियम बताता हूं. (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय:- वह नियम बता रहे हैं.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी:- अध्‍यक्ष महोदय, नियम बताये जायें. (व्‍यवधान)

डॉ. गौरीशंकर शेजवार:- अध्‍यक्ष महोदय, नियम में तो यह भी है कि विधायकों को जिला योजना समिति की बैठक में आना चाहिये.लेकिन आप पूछ लो कि तिवारी जी कितनी बार आते हैं.(व्‍यवधान)

कुंवर विक्रम सिंह नातीराजा:- अध्‍यक्ष महोदय, किस नियम के तहत इन लोगों को बुलाया जा रहा है ? (व्‍यवधान)

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी:- अध्‍यक्ष महोदय, आप नियम बतायें, मंत्रीद्वय ने अपनी बात कही है, उन नियमों का उल्‍लेख कर दें या जो भी शासन का सर्क्‍युलर है उसका उल्‍लेख कर दें.

अध्‍यक्ष महोदय:- इस विषय पर बहुत देर चर्चा हो गयी है. जबकि यह इतना महत्‍वपूर्ण विषय नहीं था.(व्‍यवधान) मेरा माननीय सदस्‍यों से अनुरोध है कि आपकी बात का उत्‍तर शासन की ओर से आ गया.

श्री लाखन सिंह यादव- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कृपया आप निर्देश दे दें.

अध्‍यक्ष महोदय- इसमें कोई निर्देश नहीं आयेगा.

....(व्‍यवधान)....

डॉ.गोविन्‍द सिंह- सामान्‍य प्रशासन विभाग की ओर से जारी 13 सर्कुलरों में इस बात का कोई उल्‍लेख नहीं है कि राजनैतिक दल का कार्यकर्ता शासकीय कार्यक्रमों में उपस्थित होगा.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार- क्‍या राजनैतिक दल का कार्यकर्ता देश का सामान्‍य नागरिक नहीं है ?

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी- नागरिक है.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार- यदि वह नागरिक है तो वह कार्यक्रम में आयेगा और कार्यक्रम का अतिथि भी बनेगा. अध्‍यक्ष महोदय, किसी भी नागरिक के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता है.

....(व्‍यवधान)....

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी- (XXX)

श्री अजय सिंह- आप सभी अधिकारों का हनन कर रहे हैं.

....(व्‍यवधान)....

अध्‍यक्ष महोदय- माननीय नेता प्रतिपक्ष जी, मेरा अनुरोध है कि यह विषय बहुत लंबा खिंच गया है, दूसरे और प्रश्‍न भी हैं.

श्री अजय सिंह- अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह पूछना चाहता हूं कि मध्‍यप्रदेश सरकार किसी कानून, किसी परंपरा से चलेगी कि नहीं ? सामान्‍य प्रशासन विभाग के सर्कुलर समय-समय पर जारी किए जाते हैं.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार- क्‍या किसी के मौलिक अधिकारों को छीना जा सकता है ? यदि नहीं तो उसे मुख्‍य अतिथि बनने का अधिकार है और कार्यक्रम में जाने का भी अधिकार है.

श्री अजय सिंह- शेजवार जी, आप अपने स्‍वास्‍थ्‍य का ध्‍यान रखें.

श्री रामनिवास रावत- शेजवार जी, आप इतने वरिष्‍ठ मंत्री हैं. यह कौन-सा तरीका है ?

....(व्‍यवधान)....

डॉ. गौरीशंकर शेजवार- आप किसी को कोई नियम बनाकर रोक नहीं सकते. यदि आयोजक किसी को बुलाना चाहते हैं तो आप उसे मना नहीं कर सकते हैं.

....(व्‍यवधान)....

श्री अजय सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, शेजवार जी के स्‍वास्‍थ्‍य की चिंता हम सभी को है. कृपया वे अपने स्‍वास्‍थ्‍य का थोड़ा ध्‍यान रखें. अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी, जिस परंपरा और मौलिक अधिकार को बता रहे हैं, वह ठीक है लेकिन यदि कोई सरकारी कार्यक्रम है तो वह किसी नियम-कानून-कायदे से होता है. सामान्‍य प्रशासन विभाग के सर्कुलर के तहत ही कार्ड में नाम छापे जाते हैं. एक ही पार्टी के व्‍यक्तियों के नाम, विशेषज्ञों के नाम, हो सकते हैं. अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह पूछना चाहता हूं कि यदि उस क्षेत्र का कोई जिला पंचायत सदस्‍य, कांग्रेस पार्टी का है तो उसका नाम क्‍यों नहीं है ? वह भी तो विषय विशेषज्ञ है. सरकार जिस तरह से प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ा रही है, वह चिंता का विषय है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह किसी एक कार्यक्रम की बात नहीं है. उपाध्‍यक्ष महोदय के क्षेत्र में भी इसी तरह की घटना हो चुकी है. वह ऐसे संवेदशील मामले पर बात नहीं करना चाहते हैं. लेकिन यह हकीकत है. अध्‍यक्ष महोदय, हमारा निवेदन है कि आप इस पर निर्देश दें कि सामान्‍य प्रशासन विभाग का जो प्रोटोकॉल है, उसी के तहत कार्ड छापे जायें और कार्यक्रम हो.

(मेजों की थपथपाहट)

श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इस पर कुछ कहना चाहता हूं. अध्‍यक्ष महोदय, मैं सदन को बतना चाहता हूं कि इस कार्यक्रम में मुख्‍य अतिथि के तौर पर श्री नरेंद्र सिंह तोमर जी हैं, अध्‍यक्षता मेरी है, जिला पंचायत अध्‍यक्ष प्रमुख अतिथि के रूप में है, श्री लाखन सिंह यादव जी प्रमुख अतिथि के रूप में हैं.

....(व्‍यवधान)....

(नेता प्रतिपक्ष श्री अजय सिंह, श्री लाखन सिंह यादव एवं श्री शैलेन्‍द्र पटेल द्वारा कार्यक्रम से संबंधित कार्ड सदन में प्रदर्शित किए गए)

 

(इंडियन नेशनल कांग्रेस के कई सदस्‍यगण अपनी-अपनी बात एक साथ कहने लगे)

 

अध्‍यक्ष महोदय- कृपया सभी बैठ जायें.

श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन- वे लोग भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता होने से पहले किसान हैं. अध्‍यक्ष महोदय, यह कार्यक्रम किसान संगोष्‍ठी का है. कृषक संगोष्‍ठी के कार्यक्रम में आम लोगों और किसानों को बुलाया जा सकता है. हमने किसान प्रतिनिधियों को बुलाया था.

डॉ.गोविन्‍द सिंह- (XXX)

श्री उमाशंकर गुप्‍ता- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, किसानों की संगोष्‍ठी में किसानों को क्‍यों नहीं बुलाया जा सकता है ?

....(व्‍यवधान)....

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी- इसका नियमों में कहीं उल्‍लेख नहीं है. यदि है तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ये लोग आपके माध्‍यम से सदन को बतायें.

श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन- हमने पूरे प्रोटोकॉल का पालन किया है और सामान्‍य प्रशासन विभाग के सभी नियमों का भी पालन किया है.

....(व्‍यवधान)....

श्री विश्‍वास सारंग- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह किसान विरोधी मानसिकता है. ये किसानों का विरोध कर रहे हैं. हम किसानों की भलाई के लिए कार्यक्रम कर रहे हैं. य‍ही कांग्रेस की मानसिकता है.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी- अध्‍यक्ष महोदय, (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय- प्रश्‍नकाल समाप्‍त.

 

(प्रश्‍नकाल समाप्‍त)

 


 

12.00 बजे अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

प्रश्‍न संख्‍या 13 पर उत्‍पन्‍न हुए विवाद के संबंध में

अध्‍यक्ष महोदय-- प्रश्‍नकाल समाप्‍त हो गया है. वह विषय समाप्‍त हो गया है. आपने सुना ही नहीं कि प्रश्‍नकाल समाप्‍त हो गया है. कृपया सभी बैठ जाएं. शून्‍यकाल की सूचनाएं होने दें इसके बाद ही मैं कुछ बात सुनूंगा. अभी मैं कुछ नहीं सुनूंगा. आप कृपा करके बैठ जाइए. आप दूसरों के विषय उठाने देंगे कि नहीं. लाखन सिंह जी आप भी बैठ जाइए.

''आज एक साधारणत: विषय पर सदन के महत्‍वपूर्ण 25 मिनट चले गए. सदस्‍यों के महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न चले गए. यदि माननीय सदस्‍य इसी प्रश्‍न को पिन प्‍वाईंट पूछ लेते तो शायद शासन से पिन प्‍वाईंट उत्‍तर आ जाता. उसकी बजाय उन्‍होंने आक्षेप लगाया और इसी कारण यह झंझटें हुईं. मेरा माननीय सदस्‍यों से अनुरोध है कि सदन की उच्‍च परम्‍परा को देखते हुए अपनी भाषा संयत रखें ताकि सदन का समय खराब न हो. अब सारे विषय समाप्‍त हैं जो कुछ भी बात करना है आप अलग से शिकायत कर सकते हैं.''

 

12.02 बजे नियम 267-क के अधीन विषय

 

अध्‍यक्ष महोदय-- निम्‍नलिखित माननीय सदस्‍यों की शून्‍यकाल की सूचनाएं पढ़ी हुई मानी जाएंगी.

1. श्री विजय सिंह सोलंकी

2. श्री सूबेदार सिंह रजौधा

3. श्रीमती चंदा सुरेन्‍द्र सिंह गौर

4. श्रीमती शीला त्‍यागी

5. श्री प्रताप सिंह

6. श्री हरदीप सिहं डंग

7. श्री रामनिवास रावत

8. श्री नीलांशु चतुर्वेदी

9. श्रीमती ऊषा चौधरी

10. श्री शैलेन्‍द्र पटेल

श्री रामनिवास रावत-- सूचनाएं बांटी ही नहीं हैं कि कौन-कौन सी हैं. सदस्‍यों को पता ही नहीं हैं.

अध्‍यक्ष महोदय-- इसीलिए कि उसमें पहले से तय था कि पढ़ी हुई मानी जाएंगी चूंकि एक माननीय सदस्‍य ने अनुरोध किया था कि पढ़वा लें इसलिए मैंने नाम पढ़ा.

श्री रामनिवास रावत-- अब हमारा निवेदन भी सुन लें थोड़ा सा.

अध्‍यक्ष महोदय-- अब आप बोल लीजिए.

 

12.03 बजे शून्‍यकाल में उल्‍लेख

 

(1) बालाघाट जिले की जनपद पंचायत नेत्रा ग्राम में एक किसान द्वारा आत्‍महत्‍या किया जाना

 

श्री मधु भगत (परसवाड़ा) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे बालाघाट जिले की जनपद पंचायत के नैत्रा ग्राम में कल एक किसान ने बिजली कटौती के चलते आत्‍महत्‍या की और यह गृह निवास हमारे कृषि मंत्री जी का ही है. इसमें किसान के ऊपर दो लाख रुपए का कर्ज था. साहूकार का कर्ज, सोसायटी का कर्ज, बिजली कटौती का उसके ऊपर भार था. वह निरंतर 8 दिन से बिजली मांग रहा था पर उसको बिजली नहीं मिलने की वजह से उसने रात में आत्‍म‍हत्‍या कर ली. अध्‍यक्ष महोदय यह बिजली कटौती कब बंद होगी ?

अध्‍यक्ष महोदय-- भाषण नही देना है वह सिर्फ सूचना है.

 

 

(2) प्राईवेट मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के खिलाफ 2 हजार करोड़ की अनियमितता भ्रष्‍टाचार होने की शिकायत विषयक

 

श्री रामनिवास रावत (विजयपुर)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रदेश में व्‍यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा मेडिकल कॉलेजों के प्रवेश हेतु आयोजित की जाने वाली वर्ष 2010-11, 2012-13 की परीक्षाओं का सी.बी.आई द्वारा संज्ञान लिया गया. प्राईवेट मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के खिलाफ 2 हजार करोड़ की अनियमितता, भ्रष्‍टाचार होने की शिकायत मिली और सी.बी.आई. द्वारा चालान प्रस्‍तत किया गया है. इसी तरह नीट में भी काउं‍सलिंग में अनियमितताएं हुईं हैं.(XXX).{विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्‍ता) की और इशारा करते हुए बोला गया} इतना बड़ा भ्रष्‍टाचार हुआ है. प्रदेश की मेडिकल व्‍यवस्‍थाएं ठप्‍प हो चुकी हैं. इतने बड़े भ्रष्‍टाचार पर हमारे द्वारा स्‍थगन, ध्‍यानाकर्षण दिया गया है. प्रदेश की सवा सात करोड़ जनता के स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़ा हुआ मामला है कि मेडिकल कॉलेज की भर्ती परीक्षाओं में किस तरह से प्रवेश दिया जा रहा है. एक-एक करोड़ रुपए लेकर प्रवेश दिया जा रहा है. हद तो वहां हो गई कि प्रदेश के चिकित्‍सा शिक्षा मंत्री एक तरफ प्रमुख सचिव को लिखते हैं कि इनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए और उच्‍च शिक्षा मंत्री कहते हैं कि इनके खिलाफ कठोर वैधानिक कार्यवाही की जाए.(XXX). हमने स्‍थगन दिया है आप चर्चा तो करा लें.

अध्‍यक्ष महोदय-- आपका विषय आ गया है.

श्री राम निवास रावत-- बात तो आ गई है आप चर्चा तो करा लें.

अध्‍यक्ष महोदय-- शून्‍यकाल में वाद-विवाद नहीं होता है.

श्री रामनिवास रावत-- यह भ्रष्‍टाचार ऐसे ही चलता रहेगा.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं. वाद-विवाद नहीं होगा.

श्री रामनिवास रावत-- अध्‍यक्ष महोदय, (XXX)

श्री उमाशंकर गुप्‍ता-- अध्‍यक्ष महोदय, रामनिवास रावत जी ने जो अभी कहा है उसे कार्यवाही से निकलवा दीजिए.

अध्‍यक्ष महोदय-- जो रामनिवास रावत जी ने गुप्‍ता जी के बारे में कहा है उसे कार्यवाही से निकाल दें.

 

मंदसौर जिला मुख्यालय पर मेडिकल कॉलेज की स्थापना के संबंध में

(3) श्री यशपाल सिंह सिसोदिया(मंदसौर)--अध्यक्ष महोदय, मंदसौर शहर के गांधी चौराहे पर राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के सामने बीते एक सप्ताह से मंदसौर जिला मुख्यालय पर मेडिकल कॉलेज की स्थापना को लेकर धरना और प्रदर्शन किया जा रहा है. सामाजिक और स्वयंसेवी संगठन इस आंदोलन में अहम् भूमिका निभाकर शासन, प्रशासन से मेडिकल कॉलेज की स्थापना की मांग कर रहे हैं. मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी और सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ.

श्री रामनिवास रावत--सरकार नहीं मान रही है आप बहिर्गमन कर जाओ.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया--आपके परामर्श की आवश्यकता नहीं है.

 

 

 

(4) सागर जिला चिकित्सालय का मेडिकल कॉलेज में विलय समाप्त करने विषयक

श्री हर्ष यादव (देवरी)--अध्यक्ष महोदय, सागर जिला चिकित्सालय का मेडिकल कॉलेज में विलय होने से पूरे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं, खासतौर से गरीब मरीज परेशान हैं. एक तुगलकी आदेश के द्वारा मर्ज करने की कार्यवाही की गई है. मध्यप्रदेश में ऐसा कहीं नहीं हुआ है. मेरा आपके माध्यम से मुख्यमंत्री जी और स्वास्थ्य मंत्री जी से आग्रह है कि मर्जर की कार्यवाही खत्म की जाए. जो स्वास्थ्य सुविधाएं पहले जिला चिकित्सालय से मिलती थीं वे पूर्ववत् मिलती रहें.

(5) सागर जिला चिकित्सालय का मेडिकल कॉलेज में विलय समाप्त करने विषयक

श्री शैलेन्द्र जैन (सागर)--अध्यक्ष महोदय, पहले तो मैं श्री हर्ष यादव जी की बात का समर्थन करता हूँ. सागर नगर में मर्जर के बाद की परिस्थितियां बहुत विकराल हो गई हैं. वहां पर स्वास्थ्य सेवाएं लगभग पंगु हो गई हैं. शासन से मेरा भी अनुरोध है कि डी-मर्जर की कार्यवाही जो शासन स्तर पर लंबित है उस पर अतिशीघ्र कार्यवाही की जाए.

 

 

(6) रीवा जिले में मनीष पटेल नामक युवक के साथ मारपीट विषयक.

श्री सुखेन्द्र सिंह (मऊगंज)--अध्यक्ष महोदय, रीवा जिले में मनीष पटेल नामक युवक के साथ 3 दिन पहले मारपीट हुई उसमें पुलिस का भी कहीं-न-कहीं सहयोग रहा है. वह रीवा अस्पताल में एडमिट है. मरणासन्न स्थिति में है, वह गरीब आदमी है. मेरा आपके माध्यम से अनुरोध है कि उसे समुचित इलाज के लिए बाहर भेजा जाए. जिन्होंने उसके साथ मारपीट की है उन पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाए.

(7) खण्डवा से इच्छापुर मार्ग पर हो रही दुर्घटनाओं विषयक.

श्री देवेन्द्र वर्मा (खण्डवा)--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा 21 नंबर पर लोक निर्माण विभाग से संबंधित प्रश्न भी था. 4-5 जिलों की प्रमुख सड़क जो कि खण्डवा से इच्छापुर तक जाती है. 4-6 महीने पहले उस पर टोल टैक्स का बेरियर हट चुका है जिसके कारण कारण नेशनल हाई-वे का ट्रेफिक इस रोड से जा रहा है इसके कारण प्रतिदिन गंभीर दुर्घटनाएं हो रही हैं. मेरा अनुरोध है कि वहां पर भारी वाहनों पर टोल टैक्स की व्यवस्था की जाए या भारी वाहनों को उस रोड पर आने से रोका जाए.

 

 

(8) श्रीमती नीलम जैन को उनके पति की मृत्यु हो जाने से अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने विषयक.

 

श्री फुन्देलाल सिंह मार्को (पुष्पराजगढ़)--अध्यक्ष महोदय, दिनांक 1.6.2017 को मां नर्मदा मंदिर परिसर के बाहर स्थित तीर्थ कोटि स्नान कुण्ड में करंट लगने से संजय कुमार जैन, वार्ड - 4 भारतपुर, टीकमगढ़ (मध्यप्रदेश) की मुत्यु हो गई थी. उनकी पत्नी श्रीमती नीलम जैन न्याय के लिए दर-दर भटक रही है. आज दिनांक तक उसको शासकीय नौकरी नहीं मिल पाई है. शासन से अनुरोध है कि उसे शासकीय नौकरी दी जाए.

 

(9) सिवनी शहर में 15 साल की बालिका के साथ दुष्कर्म

श्री दिनेश राय (सिवनी)--अध्यक्ष महोदय, सिवनी शहर में 15 साल की बच्ची जो कि छिंदवाड़ा से आई थी उसके साथ दुष्कर्म किया गया है. इसमें जो लोग गिरफ्तार हुए हैं उनको वहां के सफेदपोश नेताओं द्वारा संरक्षण देकर अभी तक बचाया गया है. इसी के साथ एक और शून्यकाल की सूचना है कि नहर का पानी छोड़ा गया है वह पूरे क्षेत्र को नहीं मिल पा रहा है.

अध्यक्ष महोदय--दो विषय नहीं लिए जाते हैं.

 

(10) पत्रकार के समाचार छापने पर आरक्षक को निलंबित किया जाना

कुंवर सौरभ सिंह (बहोरीबंद)--अध्यक्ष महोदय, दिनांक 25.11.2017 को एक पत्रकार ने कटनी कोतवाली के टीआई के खिलाफ समाचार छापा था. उस पत्रकार के खिलाफ दिनांक 28.11.2017 को केस दर्ज करके आरक्षक को सस्पेंड कर दिया गया है. जबकि टीआई के बारे में समाचार पत्रकार ने छापा था मेरी इस सूचना पर ध्यान दिया जाए.

 

(11) शिवपुरी जिले के खनियाधाना नगर पंचायत में 48 वाल्मीक परिवारों के घरों को जलाया जाना.

 

श्री के.पी. सिंह (पिछोर)--अध्यक्ष महोदय, इसे विषय में मैंने आपसे व्यक्तिगत चर्चा भी की है और वही बात आज सदन में रख रहा हूँ. शिवपुरी जिले के खनियाधाना नगर पंचायत में 48 वाल्मीक परिवारों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है. उनके घर जला दिए गए हैं. इस संबंध में मैंने ध्यानाकर्षण भी लगाया था लेकिन वह आज तक आ नहीं पाया है इलसिए मुझे आज यह बात करना पड़ रही है. माननीय गृह मंत्री जी सदन में विराजमान हैं. जो आरोपी हैं जिनकी नामजद एफआईआर है वे हमारे प्रभारी जिले के मंत्री जी के साथ में खड़े होकर कार्यक्रम कर रहे हैं. नामजद आरोपी होने के बावजूद किसी को गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है. मैं गृह मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूँ कि जो 48 वाल्मीक परिवार वहां रहते हैं उनके मन में सरकार के प्रति क्या संदेश जा रहा है. कृपा करके उन आरोपियों को जो सरेआम घूम रहे हैं, दौरों में संग घूम रहे हैं उन आरोपियों को तो गिरफ्तार करवा दें. यह बात इसलिए रखना पड़ रही है क्योंकि शायद आज आप सदन का समय समाप्त करने वाले हैं.

 

बीएचईएल क्षेत्र में नवीन कॉलेज बिल्डिंग बनाने विषयक

 

श्री बाबूलाल गौर (गोविंदपुरा)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है.मध्यप्रदेश सरकार ने 7 करोड़ 10 लाख रुपयों की बीएचईएल में कॉलेज बनाने की स्वीकृति दी है और वह जमीन जहाँ पर कॉलेज बनना है वहाँ बीएचईएल की पुरानी खुद की बिल्डिंग बनी हुई है. ना तो वह खुद अपनी बिल्डिंग बनाते हैं और ना ही हमको बनाने की अनुमति देते हैं तो मेरा अनुरोध है कि सरकार दबाव डाले क्योंकि लगभग 2000 हजार लड़कियाँ उस कॉलेज में पढ़ती हैं.वह विद्यालय जर्जर हो चुका है औऱ कभी भी गिर सकता है सरकार ने जो 7 करोड़ 10 लाख रुपयों की मंजूरी दी है उसकी स्वीकृति हो जाये ताकि वह कॉलेज बन जाये.

सिंहस्थ के दौरान पदस्थ किये गये होमगार्ड्स को पुलिस के रिक्त पदों पर नियुक्ति देने विषयक

 

श्री कैलाश चावला (मनासा)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, सिंहस्थ 2016 में होमगार्ड्स के जवानों की भर्ती की गई थी और सिंहस्थ के बाद उनको निकाल दिया गया उसके बाद फिर एक बार आपदा प्रबंधन के लिए उनको 3 माह के लिए बुलाया गया फिर उनके किट जमा करा दिये गये उनका प्रशिक्षण भी हुआ है और उनका समय भी लगा है लेकिन आज उनको बेरोजगारी की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है तो जो होमगार्ड के रिक्त पद हैं और पुलिस की जो भर्ती हो रही है उसमें उनको रखने के लिए विचार किया जाये यह मेरा अनुरोध है.

चित्रकूट स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नयन विषयक

श्री नीलांशु चतुर्वेदी(चित्रकूट) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से निवेदन करना चाहूंगा कि सतना जिले के चित्रकूट विधान सभा क्षेत्र के जैतवारा, बिरसिंगपुर और चित्रकूट में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र होने से पर्याप्त सुविधा नहीं मिल पाने के कारण उक्त क्षेत्र की जनता को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है. गरीबों को किराया लगाकर सतना एवं अन्यत्र जाना पड़ता है जिससे गरीब तबके के लोगों को बड़ी परेशानी होती है. डॉक्टर्स की प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कमी है. उक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का उन्नयन कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में परिवर्तित ना होने के कारण क्षेत्र की जनता में भारी रोष एवं आक्रोश है.

 

12.12 बजे पत्रों का पटल पर रखा जाना

(1) वाणिज्यिक कर विभाग की अधिसूचना क्रमांक एफ ए 3-60-2015-1/पांच(119), दिनाँक 13 अक्टूबर, 2017

 

 

(2) (i) मध्यप्रदेश प्री आयुर्वेद, हौम्योपैथी, यूनानी, प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग(मध्यप्रदेश पाहुन्ट) स्नातक प्रवेश परीक्षा नियम, 2017,

(ii) मध्यप्रदेश एम.डी.(होम्यो) स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम प्रवेश नियम, 2017, तथा

(iii) मध्यप्रदेश एम.डी. (आयुर्वेद)/ एम.एस.(आयुर्वेद) स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के प्रवेश नियम, 2017

 

 

(3) नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर का वार्षिक लेखा वित्तीय वर्ष 2016-2017

 

 

 

12.14 बजे ध्यानाकर्षण

 

(1) बालाघाट जिले की कई तहसीलों के कृषकों को फसल बीमा की राशि ना मिलना

 

श्री के.डी. देशमुख (कटंगी),(सुश्री हिना लिखीराम कावरे)-- माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

 

 


 

किसान कल्‍याण तथा कृषि विकास मंत्री (श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

 

 

12.18 बजे (उपाध्‍यक्ष महोदय { डॉ.राजेन्‍द्र कुमार सिंह } पीठासीन हुए)

 

श्री के.डी.देशमुख -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, बालाघाट जिला मध्‍यप्रदेश में धान उत्‍पादक जिला है और वहां पर धान के अलावा अन्‍य कोई फसल नहीं होती. सिंचाई के साधन जहां उपलब्‍ध हैं कुछ मात्रा में वहां पर गेहूँ उत्‍पन्‍न होता है. जैसा माननीय मंत्री जी ने कहा, मैं कहना चाहता हॅूं कि आज मध्‍यप्रदेश में बालाघाट जिले के किसान सबसे ज्‍यादा दुखी हैं. फसल लग गई. जून और जुलाई महीने में जितना पानी आना चाहिए था, उतना पानी नहीं आया, जिससे धान की रोपाई नहीं हो पायी और धान की जहां-जहां रोपाई हुई, धान की अच्‍छी फसल आने के बाद बालाघाट जिले के परसवाड़ा क्षेत्र, लांजी क्षेत्र, कटंगी क्षेत्र, तिरोड़ी क्षेत्र, खैरलांजी क्षेत्र में और लालबर्रा क्षेत्र जो माननीय मंत्री जी का क्षेत्र है...

उपाध्‍यक्ष महोदय -- देशमुख जी, आपका प्रश्‍न क्‍या है ? आप केवल प्रश्‍न पूछें. आपकी सूचना में यह सारी बातें आ गईं हैं.

श्री के.डी. देशमुख -- माननीय उपाध्‍यक्ष जी, यह प्रश्‍न की भूमिका है.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- आप जो उल्‍लेख कर रहे हैं, ये सारी बातें आपकी ध्‍यानाकर्षण की सूचना में हैं.

श्री के.डी. देशमुख -- माननीय उपाध्‍यक्ष जी, धान के पौधे में जब बाली आ गई, उसमें आई हुई फसल में पूरी माहो लग गई, जो धान की एक बीमारी है. इसके अलावा करपा, ब्‍लास्‍ट बीमारियां भी लगने से आई हुई फसल पूरे जिले में नष्‍ट हो गई है. पूरे जिले के लोगों ने फसल बीमा कराया है, लेकिन फसल बीमा में जहां कीट और माहो से फसल नष्‍ट हुई है, उसका कोई बीमा नहीं हुआ है, कोई क्रॉप कटिंग नहीं हुई है. जबकि फसल बीमे के प्रारूप में प्रावधान है कि फसल की बोवाई से लेकर कटाई होने तक रोग लगने पर भी इनको शामिल किया जाएगा, लेकिन यह वहां नहीं हुआ है. पूरे बालाघाट जिले में पूरी फसल नष्‍ट हो गई है, खासतौर से कटंगी तहसील में, तिरोड़ी तहसील में.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- आपका प्रश्‍न आ गया.

श्री मधु भगत (परसवाड़ा) -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, ये बिल्‍कुल सत्‍य बोल रहे हैं. बालाघाट जिले में माहो, करपा से पूरी फसल नष्‍ट हो गई है.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- आप बैठ जाएं, आपकी सहायता की उनको जरूरत नहीं है.

श्री के.डी. देशमुख -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एग्रीकल्‍चर बीमा कंपनी ने बीमा कराया, कीट और माहो से फसल को नुकसान हुआ है, उसको शामिल नहीं किया गया है, इसकी क्रॉप कटिंग नहीं हो पाई है. मेरा कहना है कि इसकी भी क्रॉप कटिंग होनी चाहिए और कीट, माहो से नुकसान को भी फसल बीमा योजना में शामिल करना चाहिए.

श्री गौरीशंकर बिसेन -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, बालाघाट जिले के जिन भी किसानों ने कॉ-ऑपरेटिव्‍ह बैंकों से ऋण लिया, उनके बीमे का प्रीमियम ऋणी किसान के रूप में कटा है. अऋणी किसान, जिन्‍होंने बीमे का प्रीमियम दिया है, उनके बीमे का शुल्‍क जमा हुआ है.

उपाध्‍यक्ष महोदय, बीमे के संदर्भ में, जैसा मैंने ध्‍यानाकर्षण के उत्‍तर में कहा है कि तिरोड़ी और कटंगी तहसीलों के 25 पटवारी हलका नंबर ग्राम ऐसे हैं, जहां पर 75 प्रतिशत फसल का ट्रांसप्‍लांटेशन नहीं हो सका है, फसल उगी ही नहीं है, उनके दावे बन रहे हैं और उन दावों का अतिशीघ्र भुगतान होगा क्‍योंकि उन प्रकरणों में जहां पर 75 प्रतिशत अंकुरण नहीं होता, वहां पर एक ही बार जो स्‍केल ऑफ फाइनेंस है, बालाघाट जिले में धान का असिंचित का स्‍केल ऑफ फाइनेंस 24 हजार है और सिंचित का 32 हजार है, उसका 25 प्रतिशत मतलब असिंचित में 6 हजार और सिंचित में 8 हजार किसानों के खाते में बीमा कंपनी के द्वारा भुगतान किया जाएगा क्‍योंकि वहां पर क्रॉप कटिंग एक्‍सपेरिमेंट नहीं होते. दूसरी बात यह है कि उन क्षेत्रों में, चाहे वह लांजी हो, चाहे परसवाड़ा हो, चाहे किरनापुर हो, चाहे लालबर्रा हो, इसके अलावा इन तीन तहसीलों में और हमारे जिले की सभी तहसीलों में क्रॉप कटिंग एक्‍सपेरेमेंट होते हैं. जो एसएलआर के यहां से रेंडम नंबर आते हैं, उन रेंडम नंबर के आधार पर उस पटवारी हलका नंबर के खसरों का भाग दिया जाता है और अंत में जो नंबर आता है यदि वह धान वाला है तो वहां पर फसल कटाई के तजूर्बे लिए जाते हैं. यह वर्तमान फसल बीमे के आंकलन के मानदंड हैं. इसके अनुरूप अभी फसल कटाई के तजूर्बे लिए गए. उपाध्‍यक्ष महोदय, यह बात सही है, मैं स्‍वयं माननीय सदस्‍य के साथ उनके क्षेत्र में प्रवास पर था, 25 गांवों का हमने दौरा किया था, वहां पर ट्रांसप्‍लांटेशन नहीं हो सका था, तो प्रथम कैटेगरी में तो इनको लाभ मिलेगा, लेकिन दूसरी श्रेणी में, जैसा मैंने आपसे कहा कि खैरलांजी विधान सभा क्षेत्र के 80 ग्रामों में 992 हेक्‍टेयर क्षेत्र में फसल प्रभावित हुई, उनको भी चूँकि वहां पर थ्रैशहोल्‍ड, जो उपज है, उससे आधी से अधिक नुकसान में गई है, तो उनको भी बीमे के कवरेज का लाभ मिलेगा.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, थ्रैशहोल्‍ड का एक मानदंड है, जो वास्‍तविक उपज में से घटाया जाता है, उसके बाद में जो आता है, उसमें थ्रैशहोल्‍ड का भाग दिया जाता है और स्‍केल ऑफ फाइनेंस से उसका गुणा किया जाता है तो इसमें जो बैठता है वह मान लीजिए कि लगभग 27 क्‍विंटल थ्रैशहोल्‍ड आया और 12 क्‍विंटल वास्‍तविक उपज आई तो उसमें लगभग 14 से 16 हजार रुपये के बीमे का दावा बनता है. सारे बीमे के दावे बालाघाट जिले में बनाए जा रहे हैं. मुझे लगता है बीमे के दावे बनने में कहीं पर भी किसी तरह की लापरवाही नहीं होगी, इन 25 पटवारी हलका नंबर ग्रामों को अविलंब भुगतान करने के लिए हमने दावा बीमा कंपनी के सामने प्रस्‍तुत किया है. रहा सवाल तहसीलों को सूखाग्रस्‍त घोषित करने का, तो इस संदर्भ में भारत सरकार की गाइडलाइन है, यहां पर जो रेन्‍स आनी चाहिए, वे रेन्‍स निश्‍चित रूप से पिछले वर्ष से कम हैं लेकिन अभी फसल कटाई में क्‍या तजूर्बे आते हैं, इन दोनों की गणना करने के बाद शासन स्‍तर पर माननीय मुख्‍यमंत्री जी और माननीय राजस्‍व मंत्री जी इसमें कोई निर्णय लेंगे. चूँकि इसमें भारत सरकार की गाइडलाइन है, अत: उसका पूरा पालन करना पड़ेगा.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- देशमुख जी, आपके सभी सवालों के जवाब आ गये.

श्री के.डी. देशमुख -- उपाध्‍यक्ष महोदय बस एक-दो प्रश्‍न और करना चाहता हूं. पूरे बालाघाट जिले में इस समय किसान संकट में हैं. कीट व्‍याधि लगी है, जिससे किसानों में हाहाकार मचा हुआ है. मैं हकीकत बता रहा हूं, मेरे साथ और विधायक साथी परसवाड़ा, वारासिवनी के हैं. मैं यह कह रहा हूं कि जैसे छत्‍तीसगढ़ के कृषि मंत्री, छत्‍तीसगढ़ के मुख्‍यमंत्री ने ...

उपाध्‍यक्ष महोदय -- आप स्‍टेट से बाहर क्‍यों जा रहे हैं ? आप अपना प्रश्‍न कीजिये.

श्री के.डी. देशमुख -- उपाध्‍यक्ष महोदय, हमारा प्रदेश मध्‍यप्रदेश है, लेकिन मैं वहां की बात रख रहा हूं. वहां पर अन्‍य जगहों की हवा चल रही है उससे आपके माध्‍यम से शासन को अगवत करा रहा हूं.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- इस बारे में आप इतना संदर्भ दे चुके कि एक छोटी पुस्तिका प्रकाशित की जा सकती है. अब आप प्रश्‍न करिये.

श्री के.डी. देशमुख -- उपाध्‍यक्ष महोदय, मैंने उदाहरण दिया है. छत्‍तीसगढ़ से यह हवा चल रही है कि वहां के मुख्‍यमंत्री जी ने 300 रुपये प्रतिक्विंटल धान पर बोनस दिया है. इसी प्रकार महाराष्‍ट्र के मुख्‍यमंत्री जी ने वहां के किसानों का एक लाख रुपये का कर्जा माफ किया, तो हमारे प्रदेश के किसान हमसे कहते हैं कि क्‍या ऐसा नहीं हो सकता कि अन्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्रियों ने जैसा किया वैसा हमारे मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री जी भी करेंगे और कोई रास्‍ता निकालेंगे. मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि बालाघाट जिले की कटंगी, तिरोड़ी, खैरलांजी तहसीलों को सूखाग्रस्‍त घोषित करने के लिये शासन क्‍या कार्यवाही कर रहा है ?

श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, शासन ने जिले के कलेक्‍टर, से जो मानदण्‍ड के अनुरूप हैं, वह प्रारूप मंगाया है. वह प्रक्रियाधीन है और परीक्षण चल रहा है.

श्री मधु भगत -- उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा सीधा प्रश्‍न माननीय कृषि मंत्री जी से है कि माहो, करपा ब्‍लास्‍ट से धान की पकी हुई फसल नष्‍ट हुई, क्‍या यह फसल बीमा योजनांतर्गत आएगी ? क्‍या इसका मुआवजा मिलेगा ?

श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन -- जी हां.

श्री मधु भगत -- उपाध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी को धन्‍यवाद.

डॉ. योगेन्‍द्र निर्मल (वारासिवनी) -- उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा विधानसभा क्षेत्र वारासिवनी में पूरी माहो कीट से फसल समाप्‍त हो गई है. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से आग्रह करूंगा कि फसल बीमा दिलाने का काम करें. मेरे क्षेत्र की कुछ असिंचित भूमि है, वहां भी फरहा नहीं लग पाया, क्रापिंग नहीं हुई, तो उसकी ओर भी माननीय मंत्री जी का ध्‍यान आकर्षित कर रहा हूं.

श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन -- उपाध्‍यक्ष महोदय, आरबीसी 6(4) का प्रावधान लागू होगा. जहां पर रोपाई नहीं हो सकी और जहां पर फसलों को नुकसान हुआ है वहां पर उत्‍पादन थ्रैश होल्‍ड से 80 प्रतिशत नीचे आएगा तो अपने आप ही उस पर बीमे का दावा बनेगा और हम पूरा विस्‍तृत सर्वे करा रहे हैं. बालाघाट जिले में अधिकतम बीमे के दावे बनाये जा रहे हैं और उसका पूरा रिकार्ड हम तैयार करवा रहे हैं. वारासिवनी क्षेत्र, लांजी क्षेत्र की और पूरे जिले की चिंता की जाएगी. ..(व्‍यवधान)..

उपाध्‍यक्ष महोदय -- श्री सुरेन्‍द्र सिंह बघेल जी, अपनी ध्‍यानाकर्षण सूचना पढ़ेंगे.

2. धार जिले के कुक्षी एवं डही आदिवासी क्षेत्र में डायवर्सन को लेकर अधिकतम पेनाल्‍टी लगाई जाना

 

श्री सुरेन्‍द्र सिंह बघेल (कुक्षी) -- उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरी ध्‍यानाकर्षण की सूचना का विषय इस प्रकार है-

राजस्व मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्ता) -- उपाध्यक्ष महोदय,

श्री सुरेन्द्र सिंह बघेल -- उपाध्यक्ष महोदय, मेरा विधान सभा क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य है और दो नगर पंचायतें हैं, एक कुक्षी और दूसरा डही. 2009 में डही नगर पंचायत बनी, उसके पहले वह पंचायत थी, उसकी करीबन 1000 से 1500 की जनसंख्या थी. मुख्यमंत्री जी द्वारा 2009 में घोषणा के बाद उसको नगर पंचायत बनाया गया. एसडीएम, राजस्व अधिकारी, कुक्षी ने जो नोटिस दिये हैं, वह तब के हैं. तब वह चीज लागू ही नहीं होती थी और यह किया तो किया, उन लोगों को सुनवाई का मौका भी नहीं दिया गया. अगर उनको सुनवाई का मौका देते और दूसरा इसमें सरकार के नियम हैं कि मिनिमम 2 प्रतिशत से लेकर 20 प्रतिशत तक दण्ड करना चाहिये. तो उन्होंने मेक्सीमम 20 तक दण्ड कर दिया. अब जिसका मकान मान लीजिये 2 लाख का है, उस पर पेनाल्टी लग गई 4 लाख रुपये और उसको सुनवाई का अवसर भी नहीं दिया. इसमें अधिकतर लोग ट्रायबल के हैं. अब ट्रायबल का व्यक्ति इतनी पेनाल्टी दे नहीं सकता और उसको सुनवाई का अवसर भी नहीं दिया गया. इसी तरह से कुक्षी में भी हुआ है. उपाध्यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्यम से मंत्री जी से अनुरोध है कि जितने भी प्रकरण पंजीबद्ध हुए हैं, उन सभी प्रकरणों में सुनवाई के लिये और जवाब देने के लिये एक और अवसर दिया जाये. दूसरा, जिन प्रकरणों का निराकरण इनके बाद होगा, उन प्रकरणों पर जो दबाव डालकर पेनाल्टी वसूल की जा रही है, उस पर रोक लगाई जाये और जो मैंने एसडीएम, कुक्षी की बात कही है, वह अधिकतर प्रकरणों में या वह शासन से चल रहा हो या 151 की कायमी होकर एसडीएम के पास आता है, तो अगर वह नहीं मानता है, तो उस आदमी को वे थाने में बैठा देते हैं और वापस बुलाकर उसको जेल पहुंचा देते हैं. अब आप देखिये कि ट्रायबल के व्यक्तियों पर अगर इस तरीके की कार्यवाही होगी, तो यह उचित नहीं है, इससे वहां पर लॉ एण्ड ऑर्डर की सिचुएशन आयेगी और ट्रायबल वर्सेस एडमिनिस्ट्रेशन हो जायेगा. मेरा अनुरोध है कि वहां पर इस तरह का दबाव भी एसडीएम महोदय नहीं बनायें, यह मैं मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूं और अगर उनको लगता है कि यह चीज उन्होंने जो शासन से लिखकर भेजी है, वह ठीक है, तो एक जांच समिति यहां से भेज दें या फिर एक वरिष्ठ अधिकारी से मेरे समक्ष उसकी जांच करवा दें, ताकि इसका सही रुप से निराकरण हो सके. अगर इसकी जांच वही अधिकारी करेगा, तो उसका हल निकलने वाला नहीं है.

उपाध्यक्ष महोदय -- मंत्री जी, इनका प्रश्न यह था कि क्या उनको दोबारा सुनवाई का मौका दिया जायेगा.

श्री उमाशंकर गुप्ता -- उपाध्यक्ष महोदय, एक बार जिनकी सुनवाई हो गई है, इसके अतिरिक्त वे कोई तथ्य देना चाहते होंगे, तो हम सुन लेंगे, यह हम कह देंगे. लेकिन जैसा माननीय सदस्य कह रहे हैं कि जिनकी अगर सुनवाई नहीं हुई है या आपका कहना है कि उस समय से नोटिस दिये गये हैं..

उपाध्यक्ष महोदय -- 2009 के पहले, जब नगर पंचायत नहीं बनी थी.

श्री उमाशंकर गुप्ता -- हां, उस परिधि में नहीं आते हैं. ये जो आवेदक है, वे जिसको भी लिखकर देंगे, हम यह निर्देश जारी कर देंगे कि उनकी पूरी सुनवाई करके ही वसूली की जाये.

श्री सुरेन्द्र सिंह बघेल -- मंत्री जी, धन्यवाद.

श्री कैलाश चावला ( मनासा ) -- उपाध्यक्ष महोदय, जैसा कि ध्यानाकर्षण में यह बात उठायी गई है कि 20 प्रतिशत की पेनाल्टी के नोटिस किसानों को दिये जा रहे हैं और वह राशि लाखों रूपये में जा रही है, इसके कारण किसानों में अनावश्यक रूप से असंतोष पैदा हो रहा है. दूसरी बात यह है कि 59(2) में इस बात का उल्लेख है कि लगभग 100 वर्गमीटर तक अगर किसान अपनी खेती के कार्य के लिए कोई निर्माण कार्य करता है तो उसे डायवर्सन की जरूरत भी नहीं है, उसके बाद में भी ऐसे किसानों पर जुर्माना किया जा रहा है. मेरे विधान सभा क्षेत्र मनासा में भी ऐसे जुर्माने किये गये हैं. मैं मंत्री जी से यह प्रश्न करना चाहूंगा कि क्या वे राजस्व अधिकारियों को पुन: निर्देश देंगे कि 59(2) के तहत जो प्रावधान हैं, उसमें अगर किसान कृषि के उद्देश्य से कोई मकान बनाता है जिसमें वह पेस्टीसाइड रखता है, खाद रखता है, कोई इक्यूपमेंट रखता है या मजदूरों को रहने के लिए बनाता है तो ऐसे निर्माणों पर 59(2) का प्रावधान लागू होता है, इसलिए उनको नोटिस न दें और उन पर पेनाल्टी न लगायें. क्या यह निर्देश पुन: जारी करेंगे.

श्री उमाशंकर गुप्ता -- उपाध्यक्ष महोदय, जो नियम हैं उसके तहत ही कार्यवाही की जाय, इससे हटकर कार्यवाही न की जाय इस तरह के निर्देश हैं लेकिन माननीय हमारे वरिष्ठ सदस्य ऐसा कह रहे हैं तो हम पुन: इस निर्देश को जारी कर देंगे.

श्री कैलाश चावला -- उपाध्यक्ष महोदय, अगर निर्देश का पालन नहीं हो रहा है तब ही हम मंत्री जी का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं. मैंने इसमें अपने विधान सभा क्षेत्र का मामला भी बताया है. मैंने उसमें सेक्शन भी बताया है. मेरे पास में कुछ ऐसे प्रकरण भी आये हैं मैंने वह कलेक्टर के नोटिस में भी लाये हैं, लेकिन अगर लाखों रूपये का नोटिस एक गरीब किसान को दिया जाता है तो उसकी मन:स्थिति बहुत खराब होती है. इसलिए 2 प्रतिशत से 20 प्रतिशत का जो मामला है. एक तरफ सरकार मकान बनाने के लिए 1.5 लाख रूपये भी दे रही है. आवास के पट्टे भी दे रही है. अगर ऐसा कोई छोटा मोटा मकान किसी ने बनाया है तो शासन की नीति क्या है यह अधिकारी को समझना चाहिए कि आवास के लिए शासन खुद अपनी जमीन देने के लिए तैयार है और किसान ने खुद की जमीन पर अपने मकान बना लिये हैं तो उसको इस बारे में विचार करना चाहिए कि शासन मकान बनाने में अगर मदद कर रहा है और उसने अपनी जमीन पर बनाया है तो उसको कम से कम जुर्माना करके उस प्रकरण का निराकरण किया जाना चाहिए. यह निर्देश दिये जाना चाहिए.

उपाध्यक्ष महोदय -- नगर पंचायत के अंदर की बात कर रहे हैं या कृषि योग्य भूमि की.

श्री कैलाश चावला -- कृषि योग्य भूमि और गांव की भूमि की बात मैं कर रहा हूं.

श्री उमाशंकर गुप्ता -- उपाध्यक्ष महोदय मैं कह चुका हूं और ऐसी कोई स्पेसिफिक शिकायत होगी, नियमों के उल्लंघन से हटकर के वसूली के नोटिस दिये जा रहे हैं तो हम उस पर कार्यवाही करेंगे.

श्री ओमप्रकाश वीरेन्द्र कुमार सखलेचा(जावद) -- उपाध्यक्ष महोदय, कुछ पंचायतों में कृषि योग्य जमीन पर थोड़े से अतिक्रमण थे, पिछले साल एक नियम आया था कृषि में सेडे मेडे की अतिरिक्त जमीन पर लीज का प्रावधान का उसकी नियमावली अभी तक नहीं आयी है. कुछ किसानों पर खेत की मार्केट वेल्यू से 20 प्रतिशत का जुर्माना लगाकर अतिक्रमण परवसूली का प्रयास कर रहे हैं. यह बहुत तेजी से कई गांवों में हो रहा है. क्या मंत्री जी इस मामले में कुछ बतायेंगे क्योंकि जब अविवादित जमीन है और खेत और सड़क के बीच की जमीन है जिसमें यह नियम था कि पिछली बार 2011-12 में यह प्रावधान किया था कि अविवादित जमीन उसी किसान को लीज पर दे दी जायेगी, लेकिन लीज के नियमों की नियमावली नहीं आयी थी इसलिए वह अटका हुआ था. अभी उन्हीं जमीनों पर जिनके आवेदन पड़े हैं उन पर 20 प्रतिशत का जुर्माना लगाया है, ऐसे कई किसानों के कागज मेरे पास में भी आये हैं तो मैं माननीय मंत्री जी से चाहूंगा कि उसमें जो नियम बनना थे यदि नियम बन गये हैं तो उन नियमों की प्रति उपलब्ध करा दें, नहीं तो वहां पर निर्देशित करें कि जब तक नियम नहीं आयें, क्योंकि इस तरह से 20 प्रतिशत जुर्माना तो कोई किसान दे नहीं पायेगा और जमीन बिगड़ेगी जो वहां पर पैदावार हो रही है वह भी कम होगी, मंत्री जी थोड़ा सा इसको स्पष्ट करें.

श्री उमाशंकर गुप्ता -- ध्यानाकर्षण की विषय वस्तु तो नहीं है. विधायक महोदय कोई बात लिखित में देंगे तो उस पर कार्यवाही करेंगे.

उपाध्यक्ष महोदय -- अगर कोई नियम या नियमावली बन गई है तो वह उपलब्ध करा दें.

श्री उमाशंकर गुप्ता -- मेरी जानकारी में नहीं है.

उपाध्यक्ष महोदय -- लेकर दे दीजियेगा विधायक जी को.

 

 

12.40 बजे याचिकाओं की प्रस्तुति

 

उपाध्यक्ष महोदय - आज की कार्यसूची में सम्मिलित सभी याचिकाएं प्रस्तुत की हुई मानी जाएंगी.

 

 

12.41 बजे वक्तव्य

 

दिनांक 24 जुलाई, 2017 को पूछे गये परिवर्तित अतारांकित प्रश्न संख्या 47 (क्रमांक 1289) के उत्तर भाग (क) के पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट प्रपत्र-1 में संशोधन करने के संबंध में राज्यमंत्री सहकारिता का वक्तव्य

 

उपाध्यक्ष महोदय - अब श्री विश्वास सारंग, राज्यमंत्री सहकारिता दिनांक 24 जुलाई, 2017 को पूछे गये परिवर्तित अतारांकित प्रश्न संख्या 47 (क्रमांक 1289) के उत्तर भाग (क) के पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट प्रपत्र-1 में संशोधन करने के संबंध में वक्तव्य देंगे.

राज्यमंत्री, सहकारिता (श्री विश्वास सारंग) - उपाध्यक्ष महोदय, दिनांक 24.7.2017 की प्रश्नोत्तर सूची के पृष्ठ क्रमांक 50 में मुद्रित परि. अतारांकित प्रश्न संख्या 47 (क्रमांक 1289) में, मैं निम्नानुसार संशोधन करना चाहता हूं -

प्रश्नोत्तर सूची में मुद्रित उत्तर के भाग (क) में पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 के स्थान पर कृपया निम्नानुसार संशोधित उत्तर पढ़ा जावे :-

"पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के संशोधित प्रपत्र-1 अनुसार."

 

 

 

 

 

12.42 बजे शासकीय विधि विषयक कार्य

 

(1) मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2017 (क्रमांक 24 सन् 2017)

राज्यमंत्री, सहकारिता (श्री विश्वास सारंग) - उपाध्यक्ष महोदय, मैं, प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2017 पर विचार किया जाय.

उपाध्यक्ष महोदय - प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ कि मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2017 पर विचार किया जाय.

डॉ. गोविन्द सिंह (लहार) - उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने जो विधेयक कानून के रूप में परिवर्तन करने के लिए प्रस्तुत किया है, मैं इसका विरोध करता हूं. विरोध इसलिए करता हूं कि माननीय मंत्री जी ने इसमें उल्लेख किया है लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि इतनी क्या आवश्यकता थी, ऐसी कौन-सी इमरजेंसी थी कि आपको इसका अध्यादेश लाना पड़ा? पहले आप अध्यादेश लाए और अध्यादेश के बाद इसमें पूरी तरह से सहकारी आन्दोलन को बर्बाद करने की साजिश है. आज मध्यप्रदेश में आपके 13-14 वर्ष के कार्यकाल में जो ग्रामीण कृषि विकास बैंक हैं वे समाप्त कर दिये गये हैं. इसके साथ ही साथ मध्यप्रदेश की जितनी सहकारी बैंकें हैं. पहले धारा 11 के तहत कम से कम सभी बैंक निकल गई थीं, वर्ष 2003 तक 5 बैंक रह गई थीं. आज फिर मध्यप्रदेश की कम से कम 7-8 बैंक ऐसी हैं जो बंद होने की कगार पर हैं. यह सब इसलिए हुआ कि निर्वाचन एक तो सही तरीके से नहीं कराया. सहकारी संस्थाओं में ग्रामीण कृषक फार्म भरने को बैठे रहे लेकिन उनको कुछ पता नहीं चला, निर्वाचन अधिकारी आए नहीं, दूसरी बार जब लिस्ट आई तो पता चला कि फर्जी तरीके से निर्वाचन कराकर सब निर्विरोध घोषित हो गये. प्रदेश की कम से कम 95 प्रतिशत ऐसी सहकारी संस्थाएं हैं, जिनके चुनाव हुए..

राजस्व मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्ता) - आदरणीय गोविन्द सिंह जी, आपके समय की कह रहे हैं कि अभी श्री विश्वास सारंग के समय की कह रहे हैं?

डॉ. गोविन्द सिंह - अभी-अभी.

श्री जसवंत सिंह हाड़ा - विश्वास सारंग जी के समय तो चुनाव ही नहीं हुआ है.

डॉ. गोविन्द सिंह - सरकार के कार्यकाल की बात कर रहा हूं.

श्री जसवंत सिंह हाड़ा- मैंने कहा कि अभी वे नये मंत्री हैं तो थोड़ा संभाल के, आप तो वरिष्ठ हैं.

डॉ. गोविन्द सिंह - मैं मंत्री पर कौन-सा आरोप लगा रहा हूं? आपकी रीति-नीति पर लगा रहा हूं कि मंशा आपकी कहां है? आप इसमें अब केवल संशोधन कर रहे हैं तो हमारी इसमें बिल्कुल स्पष्ट शंका है कि प्रशासक अगर कहीं निर्वाचन न करा पाए, जब राज्य निर्वाचन आयोग बना रखा है, उसमें भारी वेतन वृद्धि, तनख़ा, स्टाफ पूरा अलग से अमला बना रखा है तो फिर आपको निर्वाचन न कराने में या असफलता में, अगर निर्वाचन कराने में सरकार सक्षम नहीं है तो ऐसी सरकार को अक्षम सरकार घोषित किया जाएगा और उनको पद पर बैठने का अधिकार नहीं है क्योंकि आप कह रहे हैं कि निर्वाचन न होने की दशा में और मध्यप्रदेश में कई सालों से निर्वाचन नहीं कराए. आवास संघ में करीब 10-15 वर्ष से जब से आए हैं 14 वर्ष के कार्यकाल में तब से आपने वहां का निर्वाचन नहीं कराया. वर्षों तक मार्केटिंग फेडरेशन में गैर नॉमिनेटेड सदस्य को बैठाले रहे. जो भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता थे, नेता थे. ठीक है आपकी सरकार है, आप बनाओ लेकिन उनका चयन भी तो देखो. आपने ऐसे लोगों को बना दिया. आपने सहकारी आंदोलन को चारागाह बना दिया. करीब 40 छोटी-मोटी संस्थाएं बची हुई हैं, उनको भी चरने का काम इस संशोधन के माध्यम से किया जा रहा है. इसमें लिखा है- तात्कालिक आवश्यकता को देखते हुए तो तात्कालिक आवश्यकता क्या है? क्या जरुरत पड़ गई. इसमें लिखा-- सत्र चालू नहीं है इसलिए संशोधन के लिए यह अध्यादेश लाये. आपने पहले जो अध्यादेश जारी किए पूरे उसके प्रावधान रहेंगे. अब अध्यादेश निलंबित हो जाएगा, समाप्त हो जायेगा.

उपाध्यक्ष महोदय, आप इसमें शासकीय सेवक के लिए कर रहे हैं. पहले सोसायटी जहां भंग हो जाती थी या चुनाव नहीं हो पाते थे उस समय की अवधि में आपका शासकीय प्रतिनिधि जो शासकीय कर्मचारी होता था वह भी सरकार के अधीन है, सरकार का अंग है, विधायिका के साथ कार्यपालिका भी सरकार का अंग है. आपकी छोटी सोसायटी में जो ऑडिटर थे, इंस्पेक्टर थे वह प्रशासक बनते थे. आप उनको हटाकर नया प्रावधान जोड़ रहे हैं, उसमें उनको न बनाकर (XXX)

श्री कैलाश चावला-- उपाध्यक्ष महोदय, चरना शब्द क्या है? जानवर चरता है.इसको निकाला जाना चाहिए.

श्री शंकर लाल तिवारी-- उपाध्यक्ष महोदय, चरने वाली बात पर मुझे भी कहना है कि सूपा बोले तो बोले, चलनी बोल रही है जिसमें छेद ही छेद है.

डॉ गोविन्द सिंह-- भ्रष्टाचार कर अपना पेट भरेंगे.

श्री शंकर लाल तिवारी-- कांग्रेस के नेता कॉपरेटिव के विषय पर ऐसा बौद्धिक ज्ञान दे रहे हैं इसलिए मेरा कहना है कि सूपा बोले तो बोले चलनी बोल रही है जिसमें छेद ही छेद है.

डॉ गोविन्द सिंह-- जब आपका मौका आयेगा, तब बोलना. जैसा आपकी दाढ़ी में दिखाई दे रहा है.

श्री कैलाश चावला-- उपाध्यक्ष जी, कहावत है (XXX)

डॉ गोविन्द सिंह-- मैं, आपकी सरकार को चुनौती देता हूं. उमा भारती जी की सरकार ने हमारे पिछले 50 सालों के खानदान की जांच करायी थी. आपको पुनः चुनौती देता हूं. आप हमारे 50 साल के खानदान तक की जांच कराईये अगर आपने हमें कहीं भी दोषी पाया उस दिन हम राजनीति नहीं करेंगे, घर बैठ जाएंगे.

श्री कैलाश चावला-- उपाध्यक्ष महोदय, इनके कार्यकाल में जिस तरह से कॉपरेटिव के चुनाव कराते थे, पूरा हिंदुस्तान जानता है.

डॉ गोविन्द सिंह-- आपकी सरकार चुनाव करवाने से क्यों घबरा रही है?

राजस्व मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्ता)-- उपाध्यक्ष महोदय, गोविन्द सिंह का मतलब है अब अगला चुनाव लडूंगा ही नहीं. राजनीति से सन्यास ले लूंगा.

उपाध्यक्ष महोदय--चावला जी, अब तो आप चरना हटाना नहीं चाहते.

श्री कैलाश चावला-- बिलकुल हटाना चाहता हूं.

उपाध्यक्ष महोदय-- फिर बिल्ली और चूहे का क्या होगा?

श्री कैलाश चावला-- वह कहावत है. मेरे हिसाब से और कुछ नहीं है.

डॉ गोविन्द सिंह-- आप बड़े भाई हो. आपकी सभी बातें सहर्ष स्वीकार है.

उपाध्यक्ष महोदय-- चावला जी, आगे चल कर जब सदन की कार्यवाही लोग पढ़ें तो इन बातों से कार्यवाही थोड़ी सी रोचक बनी रहे, नीरस न हो जाये. इसलिए इन छोटे-मोटे विनोद (परिहास) को रहने दें. (हंसी)

डॉ गोविन्द सिंह-- इसलिए हमारा कहना है....

श्री शंकर लाल तिवारी-- उपाध्यक्ष जी, आप भले ही विलोपित करा दें लेकिन सत्य वही है जो चावला जी ने कहा है. अगर आपको लगता है अच्छा शब्द नहीं है तो भले ही विलोपित करा दीजिए.

उपाध्यक्ष महोदय-- मैंने विलोपित नहीं किया (व्यवधान)

श्री शंकर लाल तिवारी-- पूरे कॉपरेटिव मूवमेंट को आप ही ने खा लिया (व्यवधान)

श्री सचिन यादव-- तिवारी जी, चौदह साल से सरकार क्या कर रही है. जांच करा लीजिए.

डॉ रामकिशोर दोगने-- 14 साल से सरकार चला रहे हो उसके बाद आरोप लगा रहे हैं. अभी तक सो रहे थे क्या?

उपाध्यक्ष महोदय-- शंकर लाल जी का तो कहीं से मुंह दिखता ही नहीं, कहां से खा जायेंगे. आपको इनका मुंह दिखता है, हमें तो नहीं दिखता. (हंसी)

श्री जसवंत सिंह हाड़ा-- उपाध्यक्ष जी, उनका मुंह बहुत पारदर्शी है.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया-- उपाध्यक्ष जी, हाड़ा साहब सदन में आ गये.

उपाध्यक्ष महोदय-- बैठ जायें. आपकी उपस्थिति दर्ज हो गई.

डॉ.गोविन्द सिंह - हाड़ा जी, आप क्यों पैरवी करते हो. इतने वरिष्ठ हो, आप किसी पद पर नहीं. चलो आपको कुछ बना दें हम तैयार हैं.

श्री उमाशंकर गुप्ता - किस बात पर तैयार हैं ?

डॉ.गोविन्द सिंह - मंत्री जी, आप वायदा करो कि हाड़ा जी को अपेक्स बैंक का चेयरमेन बना देंगे तो हम अपने शब्द वापस ले लेंगे.उपाध्यक्ष महोदय, केवल मैं इसलिये इस बात का विरोध कर रहा हूं कि एक तो छोटी-छोटी सोसायटियां हैं. कापरेटिव सोसायटी में जो अधिकारी,कर्मचारी हैं कार्यरत् हैं उन पर उनका नियंत्रण रहता है. आपके पास उनका वेतन काटने का,सस्पेंड करने का,सजा देने का अधिकार है परन्तु जब जनता के लोग बैठ जायेंगे, मैं नहीं कहता सब एक जैसे हैं. सब पर हम आरोप नहीं लगाते लेकिन कुछ लोग समाज में ऐसे भी हैं क्योंकि मैं कई सोसायटियों में मैं देख रहा हूं कि वह घाटे में आ गईं हैं. कई बैंकों की हालत आज यह हो गई है कि अपेक्स बैंक ने जो कर्जा दिया किसानों को,सोसायटियों को, डिस्ट्रिक बैंक को जैसे एक करोड़ रुपये और जो वसूली हो रही है वह केवल 20-22 लाख रुपये है. 70-80 लाख रुपये का कहीं पता नहीं है कि कहां चला गया और यह किसने किया ? यह छोटे कर्मचारियों ने किया. आप बरसों से कर्मचारियों की भर्ती नहीं कर रहे हैं. भिण्ड जिले में 167 सोसायटियां हैं वहां कुल मिलाकर 5 या 7 सचिव रह गये हैं. जो सेल्समेन हैं, वे 8-10 सोसायटियों का काम देख रहे हैं. वह आधे से ज्यादा खाद्यान्न बांट ही नहीं पाता. हमारा यह कहना है कि आप जो संशोधन लाए हैं वह लाईये. सरकार बहुमत में है, आप लाओगे लेकिन हमारा सुझाव यह है कि यदि कापरेटिव्ह मूवमेंट को जिंदा रखना है तो नये काम करिये. सारंग जी का हमने समाचार-पत्रों में पढ़ा कि ट्रांसपोर्टेशन में, पर्यटन में आप नई संस्थाएं बना रहे हैं. इस ओर भी आप कदम बढ़ाईये. इसके लिये हम आपका स्वागत करेंगे. जैसे कोल्ड स्टोरेज बनाएं. अब सहकारी क्षेत्र में कई जगह आलू पैदा हो रहे हैं,शिवपुरी में टमाटर बहुत हो रहा है लेकिन वहां कोल्ड स्टोरेज नजर नहीं आते. आप सहकारी क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज खोलें ताकि जो सोसायटियों के माध्यम से जैसे पहले कांग्रेस के समय में कई कोल्ड स्टोरेज खोले गये थे, वैसा करेंगे तो आपकी सराहना होगी. हो सकता है कि राजनीतिक दबाव में आप यह काम कर रहे हों,पार्टी के निर्देश हों कि अब सरकार डूबने वाली है. बहुत साल हो गये,कार्यकर्ता नाराज हैं तो उनको भी कहीं न कहीं खुश करने के लिये काम करें. इसलिये जो संशोधन आपने प्रस्तुत किया है कि कोई भी सदस्य जो संचालक का पात्र हो उसको प्रशासक बनाया जाये. यह आज तक कभी नहीं हुआ है. कभी इस तरह का संशोधन आया नहीं है. इसलिये हमारा अनुरोध है कि इस संशोधन को आप वापस लें. यह सहकारिता के क्षेत्र में और आम जनता के हित में उचित नहीं है और आपके इस संशोधन विधेयक का मैं विरोध करता हूं.

श्री रामनिवास रावत(विजयपुर) - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग जी द्वारा लाये गये संशोधन विधेयक का मैं विरोध करता हूं. वाकई बहुत सी बातें डाक्टर साहब ने बताई हैं..

उपाध्यक्ष महोदय - यशपाल जी, आज आप बोल नहीं रहे हैं.

श्री रामनिवास रावत - क्या बोलेंगे आत्मा कुछ कहती है और बुलवायेंगे कुछ और तो कैसे बोलेंगे.

श्री यशपालसिंह सिसोदिया - गोविन्द सिंह जी अच्छा और रोचक बोलते तो हम भी कुछ बोलते उन्होंने निराशाजनक बातें कहीं.

श्री विश्वास सारंग - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, रामनिवास रावत जी को सबकी आत्मा की आवाज जल्दी पता चल जाती है इनके पास कौन सा गुर है यह आप बता तो दो.

श्री रामनिवास रावत - सबकी पता है. कम से कम थोड़ा बहुत नये हो कुछ अच्छा करने की जीवन में सोचो. अंगूठा टेक मन बनो पढ़े-लिखे हो.

श्री विश्वास सारंग - हम तो यह पूछ रहे हैं कि इनकी आत्मा की आवाज आप तक कैसे पहुंच गई.

श्री रामनिवास रावत-- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, बड़ी विडंबना है प्रदेश में स्‍थानीय संस्‍थाओं के चुनाव कराने के लिये चुनाव प्राधिकरण बनाया हुआ है, प्रदेश चुनाव अधिकारी है और इन संस्‍थाओं के प्रजातांत्रिक सिस्‍टम में हर 5 वर्ष में चुनाव होते रहना चाहिये. क्‍या आपत्ति है भाई आपको चुनाव कराने में, आपका दिसम्‍बर तक का समय है, सरकार को चुनाव कराना चाहिये. लेकिन सरकार किस तरह से सहकारी संस्‍थाओं को समापन की ओर, अपने लोगों को लाभ देने की ओर ले जा रही है यह इस संशोधन के माध्‍यम से देखने को मिलता है. आप पहले अध्‍यादेश लाये, पिछली विधान सभा में प्रस्‍तुत किया, पारित नहीं हो पाया अब फिर अध्‍यादेश लाये और पुन: इसे पारित कराना चाहते हैं. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसमें प्रशासक नियुक्‍त करना, चुना हुआ बोर्ड जब समाप्‍त हो जाये तब प्रशासक नियुक्‍त करने की व्‍यवस्‍था थी. अभी तक आप तृतीय श्रेणी एक्‍जीक्‍यूटिव अधिकारी या तृतीय श्रेणी कार्यपालक से अनिम्‍न श्रेणी का कोई शासकीय सेवक अथवा सोसायटी या सोसायटी का उसी वर्ग के अधिकारी को आप प्रशासक बनाते थे. अब आप संचालक मंडल के सदस्‍य को चुनाव लड़ने की या चुने जाने की जो पात्रता है केवल सोसायटी का ऋणी होना चाहिये, ऋणी जो होता है वह कालातीत न हो, वह चुनाव लड़ सकता है. वह पढ़ा-लिखा हो, नहीं हो, उससे कोई अंतर नहीं पड़ता, उसकी कोई योग्‍यता नहीं है और प्रशासक पद पर रहने के बाद और मैं समझता हूं प्रशासक बनने के बाद प्रशासक को पूर्ण अधिकार दे दिये जाते हैं, नियमों का पालन कराने की जिम्‍मेदारी प्रशासक की होती है, आपके सचिव की नहीं रहती. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, प्रशासक शब्‍द महत्‍वपूर्ण शब्‍द है, आप ज्‍यादातर तो सहकारिता आंदोलन को समाप्‍त करते जा रहे हो, सहकारी बैंको की क्‍या स्थिति हो रही है इसके ऊपर आप विधान सभा में एक श्‍वेत पत्र लाते कि सहकारी बैंकों की क्‍या स्थिति है, कितना कर्ज दे पा रही हैं, कितना घाटे में है और क्‍या स्थिति चल रही है. हमारे मुरैना जिले में सहकारी बैंक की स्थिति यह है कि यदि हम श्‍योपुर जिले को अलग कर दें तो वह सहकारी बैंक ही समाप्‍त हो जाये, श्‍योपुर से सहकारी बैंक जो चल रही है. आप इस अधिनियम के माध्‍यम से आप उन व्‍यक्तियों को, किसी को भी उठाकर आप सहकारिता आंदोलन में या उन सोसायटियों में प्रशासक बनाने के अधिकार आप ले रहे हो जो बिलकुल प्रजातांत्रिक और संवैधानिक मूल्‍यों के विरूद्ध है, सं‍वैधानिक सिस्‍टम और व्‍यवस्‍थाओं के विरूद्ध है, आप किसी को भी प्रशासक बना दोगे. संचालक मंडल होता है तो कम से कम चुने हुये 8 प्रतिनिधि होते हैं, 6 प्रतिनिधि होते हैं, निश्चित संख्‍या होती है. आप बिना चुने किसी एक ऐसे व्‍यक्ति को जिसके लिये क्‍वालीफिकेशन की आवश्‍यकता नहीं है, आप उसको प्रशासक बनाने का अधिकार ले रहे हो. उनको प्रशासक बनाओगे, उनसे कुछ भी काम कराओगे, प्रशासक को फसाओगे. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह सर्वथा जनभावनाओं के और सहकारिता आंदोलन के विपरीत बात है, हम चाहते हैं कि आप चुनाव करायें. जैसा कि डॉ. साहब ने कहा कि सहकारिता आंदोलन आज भी कई जगह, कई राज्‍यों में महाराष्‍ट्र में भी जीवित है, गुजरात में भी जीवित है. विश्‍वास सारंग जी जब से आपने सहकारिता आंदोलन संभाला है, आप बिलकुल इसे समाप्‍त करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हो, पढ़े-लिखे हो, नौजवान हो, कुछ अच्‍छा सोचो, कुछ अच्‍छा करने की कोशिश करो. मेरे यहीं कैलारस शुगर फैक्‍ट्री है, कांग्रेस के टाइम पर सहकारी समिति बनाकर चालू कराई और चलती रही और चुनाव भी हुआ, बोर्ड भी बैठा और आज तक उसके बाद जबसे आपकी सरकार बनी है उसको चालू ही नहीं कराया, बंद पड़ी है जिससे गन्‍ना उत्‍पादन में भारी कमी आई है और जो केश क्राप के रूप में किसान गन्‍ना उत्‍पादन करते थे जिस पर न सूखे की मार पड़ती थी, न ओले की पड़ती थी, न पाले की पड़ती थी, उससे वंचित हो रहे हैं. आप सहकारी आंदोलन को इस तरह से समाप्‍त करते जा रहे हैं. सहकारिता के क्षेत्र में आप कृषि से जोड़कर जैसा कि उन्‍होंने कहा आप बड़े-बड़े गोदाम बना लेते, बड़े-बड़े हाउस बना लेते, बड़े-बड़े कोल्‍ड स्‍टोरेज बना लेते, आप सहकारिता आंदोलन से जोड़कर प्‍याज के लिये कोल्‍ड स्‍टोरेज बना लेते, टमाटर के कोल्‍ड स्‍टोरेज बना लेते तो किसानों को 2 रूपये किलो प्‍याज नहीं बेचना पड़ती, आपको 8 रूपये किलो नहीं खरीदना पड़ती और प्रदेश के 6 किसानों को आप गोली नहीं मारते, उनकी हत्‍या का दाग आपको नहीं लगता. सहकारिता आंदोलन को इस दिशा में ले जाओ, आप कहां ले जाना चाहते हो सहकारिता आंदोलन को, सहकारी सिस्‍टम को, सहकारी बैंकों को पूरी तरह से समाप्‍त करना चाहते हो. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आज कई ऐसी बैंके हैं जो पूरी तरह से समापन की ओर जा रही हैं और आप उन्‍हें स्‍थापित करने का प्रयास नहीं कर रहे. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हम तो चाहते हैं कि सहकारी आंदोलन को आप बढ़ावा दें और इस तरह से सहकारी संस्‍थाओं में प्रशासक नियुक्‍त करने की किसी को भी, केवल संचालक मंडल का सदस्‍य रखने की पात्रता रखता हो उसको आप प्रशासक बनाने का अधिकार ले रहे हैं यह मैं समझता हूं कि उचित नहीं है. इससे सहकारी बैंके समाप्‍त हो जायेंगी, भ्रष्‍टाचार को बढ़ावा मिलेगा. और इसके लिये जिम्मेवार कौन होगा, सिर्फ और सिर्फ विश्वास सारंग जी इसके लिये जिम्मेवार होंगे. विश्वास जी कम से कम आप तो ठीक से काम करें और प्रशासक नियुक्त करने वाले अधिनियम को वापस लें. अगर आप यह विधेयक लाते कि हम हर पांच वर्ष में चुनाव करायेंगे तो उसका हम स्वागत करते, समर्थन करते और हमें खुशी होती . उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मुख्यमंत्री जी सदन में आ गये हैं इसलिये निवेदन है कि इस पर पुनर्विचार करें और इसको वापस लेने का कष्ट करें. उपाध्य़क्ष महोदय, आपने मुझे अपनी बात रखने का अवसर प्रदान किया, उसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद.

श्री सचिन यादव (कसरावद) -- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, राज्य मंत्री सहकारिता श्री विश्वास सारंग द्वारा लाये गये मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी(संशोधन) विधेयक, 2017का पुरजौर तरीके से विरोध करता हूं.

माननीय उपाध्यक्ष महोदय, इस विधेयक के संबंध में सदन के वरिष्ठ सदस्यगण डॉ. गोविंद सिंह और रामनिवास रावत जी द्वारा जो उद्गार व्यक्त किये गये हैं उनकी भावनाओं में मैं अपनी भानवाओं का समावेश करता हूं. उपाध्यक्ष महोदय, बहुत सारी बातें इस विधेयक पर हमारे वरिष्ठ सदस्यों द्वारा कही हैं. मैं सहकारिता मंत्री जी से यह अनुरोध आपके माध्यम से करना चाहता हूं कि यह जो मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी(संशोधन) विधेयक, 2017 लाये हैं इसको लाने के पीछे आपकी जो भावना और मंशा है, आप कहीं न कहीं पिछले दरवाजे से अपने लोगों को सहकारी संस्थाओं में बैठाने का प्रयास कर रहे हैं. इस विधेयक के आने से हमारी पुरानी सहकारी संस्थाओं पर बुरा असर पड़ेगा.

उपाध्यक्ष महोदय, चुनाव प्राधिकरण बनाया गया है, सारे अधिकार उनको दे रखे हैं. आप उनका चुनाव कराने के बजाए इस मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी(संशोधन) विधेयक, 2017 को लाकर के यह संकेत देना चाहते हैं कि सरकार की मंशा सहकारी क्षेत्रों में चुनाव कराने की नहीं है. क्यों नहीं है इसका कारण सरकार भलीभांति जानती है. यह किसानों की संस्थायें हैं, किसानों द्वारा खड़ी की गई संस्थायें हैं , अगर ऐसी संस्थाओं में चुनावी प्रक्रिया को दरकिनार करके पिछले दरवाजे से लोगों को व्यवस्थायें सम्हालने के लिये, संस्थाओं के संचालन के लिये इस विधेयक को लाये हैं, इससे मध्यप्रदेश में जो सहकारी आंदोलन खड़ा हुआ था, उस आंदोलन को बहुत बड़ा धक्का लगेगा.

उपाध्यक्ष महोदय, मेरा सहकारिता राज्यमंत्री श्री विश्वास सारंग जी से पुन: अनुरोध है कि इस विषय पर चिंतन किया जाये, पुनर्विचार किया जाये और इस विधेयक को वापस लेने की मैं प्रार्थना करता हूं.

राज्य मंत्री, सहकारिता(श्री विश्वास सारंग) -- माननीय उपध्यक्ष महोदय, आज का दिन सहकारी आंदोलन के लिये बहुत महत्वपूर्ण दिन है. आदरणीय डॉ.गोविंद सिंह जी ने, आदरणीय रामनिवास रावत जी ने और भाई सचिन यादव जी ने इस विधेयक को लेकर के अपनी बात रखी. तीनों वक्ताओं के स्वर एक जैसे थे. मुझे लगा कि शायद हमारे विद्वान सदस्यों द्वारा इस विधेयक की पूरी विषय वस्तु क्या थी शायद इस पर बहुत ज्यादा पढ़ाई नहीं की. आदरणीय रामनिवास रावत जी ने कहा कि मैं पढ़ा लिखा हूं और उसके बाद भी मैं ऐसा कुछ कर रहा हूं. मुझे आश्चर्य होता है और मुझे लगता है कि रामनिवास रावत जी भी पढ़े लिखे हैं थोड़ा बहुत यदि इस विधेयक को वे पढ़ते कि इस विधेयक की विषय वस्तु क्या है तो शायद वे इसका विरोध नहीं करते.

माननीय उपाध्यक्ष महोदय, बातें हुई कि भारतीय जनता पार्टी के आने के बाद सहकारी आंदोलन की स्थिति खराब हुई है. मैं दावे के साथ में कह सकता हूं कि जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार मध्यप्रदेश में आई है और शिवराज सिंह चौहान जी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने काम करना प्रारंभ किया है हम ताकत के साथ में कह सकते हैं कि सहकारी आंदोलन जो चंद नेताओं की ड्राइंगरूम पॉलिटिक्स होता था उसको हमने जमीन पर उतारकर के सहकारी आंदोलन मे परिवर्तित किया है. यह वही मध्यप्रदेश था जहां पर चंद नेताओं....

(...व्यवधान...)

डॉ. रामकिशोर दोगने- उपाध्यक्ष महोदय, फिर डर क्यों लग रहा है चुनाव करवाने में.......

(...व्यवधान...)

 

उपाध्यक्ष महोदय-- कृपया बैठें.

 

श्री सुंदरलाल तिवारी- उपाध्यक्ष महोदय, हमारे रीवा जिले में भी सहकारिता में बहुत गड़बड़ी है....

(...व्यवधान...)

डॉ. रामकिशोर दोगने - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अगर इतनी ईमानदारी से काम हो रहा है तो इनको चुनाव करवाने में इतना डर क्‍यों लग रहा है ? (व्‍यवधान)......

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सहकारिता की हालत यह है कि रीवा जिले में एक डी.एस.पी. और एक टी.आई. सहकारिता के करोड़ों रूपये लूटकर चले गये और वह दोनों अभी भी जेल में बंद है. (व्‍यवधान)......

उपाध्‍यक्ष महोदय - श्री तिवारी जी आप बैठ जाएं.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया - श्री तिवारी जी अभी आपने कहा था कि यह आपका विषय नहीं है. (व्‍यवधान)......

श्री के.के.श्रीवास्‍तव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब आप श्री तिवारी जी का नाम लेते हैं, तब श्री सुन्‍दरलाल तिवारी जी बोलते नहीं है. (व्‍यवधान)......

डॉ. रामकिशोर दोगने - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हरदा में सहकारिता के 02 करोड़ 75 लाख रूपये थाने में जमा हो रहे हैं. यह कैसे निष्‍पक्षता की बात कर रह हैं. अगर इनको डर नहीं है तो चुनाव क्‍यों नहीं करवाते हैं ?

श्री विश्‍वास सारंग - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यहां पर धारा 11 की बात हुई और हम पर यह आरोप लगाया कि हमने धारा 11 में बहुत सारे बैंकों को सम्मिलित करवा दिया. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं ज्ञानवर्धन करना चाहता हूं कि यदि मैं यह बोल रहा हूं कि पहले की सरकारों में यह ड्राइंग रूम पॉलिटिक्‍स थी तो मैं इसके आंकडे़ भी दे सकता हूं.

उपाध्‍यक्ष महोदय - आप ज्ञानवर्धन मेरा कर रहे हैं या इनका कर रहे हैं ? (हंसी)

श्री विश्‍वास सारंग - उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं किसी का ज्ञावर्धन नहीं कर रहा हूं. अभी श्री गोविन्‍द सिंह जी ने कहा कि हमारे कार्यकाल में बहुत सारे बैंक धारा 11 में आ गये मैं बताना चाहता हूं कि जब कांग्रेस की सरकार 2003 के पूर्व थी तब 38 में से 34 बैंक धारा 11 का पालन नहीं कर रहे थे. आज यह स्थिति यह है कि केवल दो बैंक हमारी इस धारा के अंतर्गत है, बाकी सबको हमने बाहर निकाल दिया है और सब काम ठीक ढंग से चल रहा है.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यहां पर बात भर्ती की आई है तो मैं बताना चाहता हूं कि आईबीपीएस के माध्‍यम से हमने भर्ती की प्रक्रिया की है किंतु वह मामला कोर्ट में विचाराधीन है. जैसे ही वह मामला निपटेगा हम भर्ती की प्रक्रिया करेंगे. अभी गोविन्‍द सिंह जी ने अलग-अलग संस्‍थाओं की बात की है कि हमारे कार्यकाल में हर संस्‍था डूबत स्थिति में पहुंच गई है और आवास संघ की बात यहां पर आई है. मैं आपके माध्‍यम से सदन को बताना चाहता हूं कि यह वही आवास संघ है, जिसमें ईओडब्‍ल्‍यू ने जब छापा मारा था, तो ईओडब्‍ल्‍यू ने 8-10 ट्रक भरकर उस समय की सरकार के कागज वहां से लेकर गये थे. लेकिन आज मुझे यह बताते हुए बहुत प्रसन्‍नता है और हमारी स्थिति यह है कि सांसदों विधायकों के जो मकान रचना नगर में बन रहे हैं, उसकी नोडल एजेंसी आवास संघ है और मुझे यह कहते हुए बहुत प्रसन्‍नता है कि कमेटी के चेयरमेन साहब ने हमें लिखित में भी प्रशंसा पत्र दिया है. आवास संघ के माध्‍यम से हम जून-जुलाई तक सभी विधायकों को उसका रजिस्‍ट्रेशन दिलवा देंगे और पजेशन दिलवा देंगे.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हमने लगातार सहकारी आंदोलन को मजबूत करने का काम किया है. अभी गोविन्‍द सिंह जी ने जिक्र किया है और निश्चित रूप से माननीय मुख्‍यमंत्री जी के निर्देश पर उनकी पहल पर, हमने कुछ नवाचार किये हैं. हमने पर्यटन की सोसायटी बनाई, हमने परिवहन की सोसायटी बनाई, हमने मध्‍यप्रदेश में लगभग 320 नई सोसायटी के माध्‍यम से सहकारी आंदोलन को नीचे उतारा है. चाहे वह पार्किंग का मामला हो, चाहे बी.पी.ओ. का मामला हो, चाहे चिकित्‍सा का क्षेत्र हो. मुझे यहां पर बताते हुए बहुत प्रसन्‍नता है कि आज लगभग 100 ई-रिक्‍शा जबलपुर शहर में सहकारी आंदोलन के तहत बहुत सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं.(मेजों की थपथपहाट)

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हमने हर क्षेत्र में सहकारी आंदोलन को बढ़ाने का काम किया है. हमने किसान से लेकर उसकी खेती, गांव से लेकर शहर और उसके बाद नवाचार के माध्‍यम से हमने सहकारी आंदोलन को वह स्‍थान देने का काम किया है जहां पर इस आंदोलन को पहुंचना था. हम दावे के साथ कहते हैं कि आगे आने वाले समय में हम निश्चित रूप से इस आंदोलन के माध्‍यम से मध्‍यप्रदेश में रोजगार के नये अवसर सृजित करेंगे, उसके साथ-साथ किसान की खेती फायदे का धंधा बन सके, उसके लिये भी सहकारी आंदोलन मुस्‍तैदी के साथ काम करेगा.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अभी इस विधेयक को लेकर बात चली माननीय श्री रावत जी ने बात कही कि यह संविधान के खिलाफ है. इस संबंध में मैं आपको बताना चाहता हूं कि 97 वां संविधान संशोधन 2011 में प्रस्‍तुत हुआ था उसको 2012 में लागू किया गया है और उसमें बहुत स्‍पष्‍ट रूप से जो शब्‍दावली थी, उसको मैं यहां पर पढ़कर बताना चाहता हूं कि सहकारी समितियों के स्‍वैच्छिक गठन, कामकाज में स्‍वायत्‍तता देने, लोकतांत्रिक नियंत्रण और व्‍यावसायिक प्रबंधन को बढ़ावा देने के प्रयास किये जाने के दिशा निर्देश तय किये गये हैं.

1.10 बजे [अध्‍यक्ष महोदय (डॉ. सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.]

 

श्री विश्‍वास सारंग - ...और माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह विधेयक पूरी तरह से सहकारी आन्‍दोलन मजबूत करने का है क्‍योंकि हमने केवल दायरा बढ़ाया है. अध्‍यक्ष महोदय, वे सदस्‍य जो सोसायटी में चुने जाने और संचालक मण्‍डल में चुने जाने की पात्रता रखते हैं, वे प्रशासक बन सकते हैं. अभी बात यहां पर आई कि आप किसी भी डिफॉल्‍टर को बना देंगे. मैं रावत जी से यह पूछना चाहता हूँ कि क्‍या डिफॉल्‍टर चुनाव लड़ सकता है ?

श्री रामनिवास रावत - डिफॉल्‍टर का नहीं कहा. आप जरा सुन लिया करो.

श्री विश्‍वास सारंग - आप हर किसी को बना देंगे. उसमें स्‍पष्‍ट लिखा है, आप पढ़ लो.

श्री ओमप्रकाश सखलेचा - यह सुन लें, सुन लें शब्‍द उचित है क्‍या ?

श्री रामनिवास रावत - आप कार्यवाही उठाकर देख लो. मैंने यह नहीं कहा.

श्री ओमप्रकाश सखलेचा - यह 'सुन लें ' मंत्री को शब्‍द कहना संसदीय है क्‍या ? इन शब्‍दों का चयन ठीक नहीं है.

श्री रामनिवास रावत - मैंने कहा कि मंत्री 'सुन लो, देख लो'. कार्यवाही देख लो, डिफॉल्‍टर नहीं कहा.

श्री विश्‍वास सारंग - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, रावत जी ने अभी कैलारस शुगर मिल की बहुत बातें कीं. मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि उसकी ......

श्री रामनिवास रावत - अध्‍यक्ष महोदय, मुख्‍यमंत्री जी घोषणा करके आए थे कि चालू करवाएंगे.

श्री विश्‍वास सारंग - मुझे पूरी बात कर लेने दीजिये. अध्‍यक्ष महोदय, कैलारस की जो शुगर मिल का मामला है. माननीय मुख्‍यमंत्री जी के निर्देश पर हम एक्‍सप्रेशन ऑफ इन्‍ट्रेस्‍ट निकाल रहे हैं और एक महीने के अन्‍दर वह एक्‍सप्रेशन ऑफ इन्‍ट्रेस्‍ट निकलेगा और उसको पुन: स्थिति में लाने के लिए हमारी सरकार पूरा प्रयास कर रही है. मैं यह कहना चाहता हूँ कि उसकी ऐसी स्थिति क्‍यों हुई, इसके बारे में जरूर आप भी जानकारी ले लें. हमें पूरी जानकारी है, उसके लिए कौन दोषी है, यह आप भी जानते हैं.

श्री रामनिवास रावत - आप कार्यवाही करें, आप स्‍वतंत्र हैं. हम तो चाहते हैं कि केवल चालू हो जाये. जिसकी वजह से भी गई है, खत्‍म हुई है. आप कार्यवाही कराएं, जांच कराएं.

श्री विश्‍वास सारंग - अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सदन से यह निवेदन करना चाहता हूँ कि यह विधेयक पूरी तरह से सहकारी आन्‍दोलन को मजबूत करने, उसकी स्‍वतंत्रता, उसकी लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था को, कायम करने के लिए बहुत महत्‍वपूर्ण है.

श्री रामनिवास रावत - आप कैसे मजबूत करोगे ?

राजस्‍व मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्‍ता) - रामनिवास रावत जी, आप बार-बार खड़े हो जाते हों, बैठ जाओ.

श्री रामनिवास रावत - एक चुनी हुई संस्‍था के बाद आप एक व्‍यक्ति को बैठालेंगे तो कैसे मजबूत होगी ?

श्री उमाशंकर गुप्‍ता - आप अपनी इन्‍टरनल पॉलिटिक्‍स यहां मत लाओ.

श्री रामनिवास रावत - आप सिस्‍टम बताओ. आप चुनी हुई संस्‍था को चुनाव नहीं कराने के बाद एक व्‍यक्ति को बिठाने का प्रयास कर रहे हैं, एक ही व्‍यक्ति को सारे अधिकार सौंप रहे हों एवं एक व्‍यक्ति किसी भी दिशा में जा सकता है.

श्री विश्‍वास सारंग - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिस व्‍यवस्‍था की ये बात कर रहे हैं. मैं बताना चाहता हूँ कि पहले भी यह व्‍यवस्‍था कायम थी. सन् 2015 के पहले यही व्‍यवस्‍था थी, रावत जी. तभी मैं कह रहा हूँ कि आप मुझे पढ़ा-लिखा कह रहे थे और जानकारी नहीं होने का अभाव होने की बात कर रहे थे. आप पढ़-लिखकर नहीं आए. आपको थोड़ा .......

श्री रामनिवास रावत - मैं तो अंगूँठा टेक हूँ. फिर संशोधन क्‍यों लेकर आए ?

अध्‍यक्ष महोदय - कृपया वाद-विवाद न करें.

श्री रामनिवास रावत - पहले व्‍यवस्‍था थी तो संशोधन क्‍यों लेकर आए ?

अध्‍यक्ष महोदय - आप पहले बोल चुके हैं. माननीय मंत्री जी, आप अपनी बात कहें.

श्री रामनिवास रावत - द्वितीय कार्यपालिक श्रेणी या निम्‍न श्रेणी का अधिकारी शासकीय सेवक ही प्रशासक बन सकता था.

श्री विश्‍वास सारंग - अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि इस आन्‍दोलन को और मजबूत बनाने के लिए यह सदन एक स्‍वर से इस विधेयक का समर्थन करे और आगे आने वाले समय में यह आन्‍दोलन और मजबूत हो, इसके लिए मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूँ कि इसको सर्वसम्‍मति से पारित किया जाये. बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

श्री रामनिवास रावत - आप इसका भाजपायीकरण करना चाहते हो.

श्री सचिन यादव - आप इस सदन को यह भी बता दें कि आपका चुनाव में कोई इन्‍ट्रेस्‍ट नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय - प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2017 पर विचार किया जाए.

प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ.

अब विधेयक के खण्‍डों पर विचार होगा.

प्रश्‍न यह है कि खण्‍ड 2 तथा 3 इस विधेयक का अंग बने.

खण्‍ड 2 तथा 3 इस विधेयक का अंग बने.

प्रश्‍न यह है कि खण्‍ड 1 इस विधेयक का अंग बने.

खण्‍ड 1 इस विधेयक का अंग बना.

प्रश्‍न यह है कि पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने.

पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने

श्री विश्‍वास सारंग - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूँ कि मध्‍यप्रदेश सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2017 पारित किया जाये.

 

अध्‍यक्ष महोदय - प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ कि मध्‍यप्रदेश सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2017 पारित किया जाए.

प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2017 पारित किया जाए.

प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ

विधेयक पारित हुआ.

 

अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

कार्यसूची में उल्‍लेखित कार्यों पर समय आव‍ंटित करने संबंधी.

अध्‍यक्ष महोदय - आज की कार्यसूची के पद 6 के उप पद दो एवं 8 में उल्‍लेखित विधेयकों पर एक-एक घंटे तथा उप पद 3 से 7 में उल्‍लेखित विधेयकों पर 30-30 मिनट का समय चर्चा हेतु सदन की अनुमति की प्रत्‍याशा में आवंटित किया गया है. मैं समझता हूं सदन इससे सहमत है.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - अध्‍यक्ष महोदय, सदन इससे सहमत नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय - सिर्फ आप इससे सहमत नहीं है. (हंसी..)

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - अध्‍यक्ष महोदय, फांसी की सजा देने का प्रावधान इस सदन में आ रहा है और आपने केवल 1 घंटे का समय दिया इतने बड़े महत्‍वपूर्ण कानून में. पार्लियामेंट में स्‍पेशल सत्र बुलाया गया था और दिनों दिन तक इस पर चर्चा हुई, इतना गंभीर मामला.

श्री रणजीत सिंह गुणवान - एक घंटे के समय में ज्‍यादा समय आप ले लेना.

अध्‍यक्ष महोदय - तिवारी जी आप कितना समय लेंगे?

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - अध्‍यक्ष महोदय, मेरे समय का सवाल नहीं है, हम व्‍यक्तिगत अपने लिए नहीं बोल रहे हैं, गंभीर चर्चा सदन में हो और उसके बाद हम निष्‍कर्ष में पहुंचे, ऐसा मेरा निवेदन है, इसलिए मेरा कहना है कि समय अपर्याप्‍त है.

अध्‍यक्ष महोदय - आपकी बात आ गई, मैंने सुन ली.

 

 

दण्‍ड विधि (मध्‍यप्रदेश संशोधन) विधेयक, 2017(क्रमांक 26 सन् 2017)

अध्‍यक्ष महोदय - दण्‍ड विधि (मध्‍यप्रदेश संशोधन) विधेयक, 2017 श्री रामपाल सिंह मंत्री.

विधि और विधायी कार्य मंत्री (श्री रामपाल सिंह) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, प्रस्‍ताव करता हूं कि दण्‍ड विधि (मध्‍यप्रदेश संशोधन) विधेयक, 2017 पर विचार किया जाए.

अध्‍यक्ष महोदय - प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ कि दण्‍ड विधि (मध्‍यप्रदेश संशोधन) विधेयक, 2017 पर विचार किया जाए.

डॉ. गोविन्‍द सिंह (लहार)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय विधि मंत्री जी द्वारा प्रस्‍तुत विधेयक महिला अत्‍याचार के ऊपर है और इसमें फांसी की सजा विभिन्‍न धाराओं में सजा बढ़ाने का प्रावधान किया गया है और उसको कठोर रूप देने का सरकार की ओर से प्रयास किया है. धारा 354-क को हटाकर के उसकी जगह 354 ख, 354 घ, और 376-क की जगह 376 क-क, 493 और छोटी धारा 29, 110 आदि का इसमें संशोधन है. आज मध्‍यप्रदेश ही नहीं समूचे देश में महिलाओं और नाबालिग बच्चियों के साथ व्‍याभिचार की घटनाएं बढ़ रही हैं, घटनाएं होने से कोई रोक नहीं सकता. अगर पुलिस का भय हो तो कमी आ सकती है. अपराधी अपराध करता है परन्‍तु अपराधी पर सरकार का दबाव, अंकुश होता है, भय होता है तो अपराधी क्षेत्र छोड़कर कहीं बाहर चले जाते हैं या अपना अपराध छोड़ देते हैं. मैं कहना चाहता हूं कि दिल्‍ली में जब निर्भया कांड हुआ था, उस समय तमाम लंबी बहस हुई, चर्चा हुई समूचे देश में और इन कानूनों में जो महिलाओं से संबंधित कानून थे, उनमें विभिन्‍न धाराएं आईपीसी में संविधान में संशोधन करके जोड़ी गई. माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने भी दो तीन वर्ष पहले कहा था कि मध्‍यप्रदेश में फांसी की सजा का प्रावधान करेंगे. मैं कहना चाहता हूं कि इस विधेयक को यहां पर लाने की आवश्‍यकता नहीं थी, क्‍योंकि जब इस विधेयक में हम कानून बना ही नहीं सकते, हम केवल रिकमंड कर सकते हैं, क्‍योंकि यह मध्‍यप्रदेश सरकार का अधिकार नहीं है, राज्‍य को इस प्रकार का अधिकार नहीं है, आईपीसी में संशोधन करने का. इस संशोधन के लिए दिल्‍ली में भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, माननीय राजनाथ सिंह जी गृहमंत्री हैं. अगर यहां के माननीय गृहमंत्री जी या मुख्‍यमंत्री जी जाकर अनुरोध करते, अगर आपको इतनी चिंता थी तो पहले से ही अनुरोध करते, अगर यहां से आप दिल्‍ली भेज भी दो तो कुछ अगर वहां नहीं होना है, एक बार वहां जब चर्चा विस्‍तार से हो चुकी है. यह बात वहां सभी माननीय संसदविदों ने और कानून के जानकारों ने ज्ञाताओं ने यह तय किया था कि इस धारा का दुरूपयोग भी होगा. अगर हम धारा 354-क में 12 वर्ष से कम उम्र की नाबालिग बच्‍ची से कोई रेप करता है तो उसको फांसी की सजा का प्रावधान होना चाहिये. लेकिन इस धारा के दुरूपयोग की भी ज्‍यादा संभावना है, जैसी शंका वहां पर भी व्‍यक्‍त की गयी थी और यहां पर शंका है. जब अपराधी यह समझ लेगा कि हमें इसके बाद फांसी होना ही है तो अपराधी इसके बाद सबूत भी नहीं छोड़ेगा. अभी तक अपराधी रेप के बाद बचाव में भाग जाते थे और छुपने का काम करते थे. अब उसको पता है कि इस घटना के बाद हमको फांसी की सजा होगी तो फिर अब बच्चियों की हत्‍या करने से भी अपराधी लोग पीछे नहीं रहेंगे. इसलिये इस धारा का दुरूपयोग होने की भी संभावना है. किसी भी प्रजातांत्रिक देश में, जहां निष्‍पक्ष चुनाव होते हैं, वहां पर फांसी की सजा का प्रावधान नहीं है, ऐसी मुझे जानकारी है हो सकता है कि किसी देश में हो. लेकिन जहां तक मुझे जानकारी है कि ज्‍यादातर देशों में फांसी की सजा का प्रावधान नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह कहना चाहता हूं कि इसमें एक धारा है, 304-घ, ''महिला का पीछा करना'', महिला का पीछा करने में आपने सजा बढ़ायी. अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको एक उदाहरण दे रहा हूं, यह सच्‍चाई है कि यदि कोई महिला मंदिर में दर्शन करने के लिये जा रही है और पीछे कोई व्‍यक्ति जा रहा है. कई लोगों की आपस में रंजिश भी होती है और वह आदमी को फंसाने के लिये शिकायत कर देते हैं. आजकल कानून में कोई ऐसा प्रावधान नहीं है. हमारे यहां ग्‍वालियर और चंबल संभाग में तो इस प्रकार की प्रथा चल गयी है कि अगर कोई एक व्‍यक्ति अपराध करता है, जब वह रिपोर्ट लिखवाने जाता है, तो पहले यह लिखा जाता है, जैस वह शासकीय कर्मचारी हो, जिनके पास हथियार का लायसेंस हो, जो घर का मुखिया हो और परिवार चलाने वाला हो तो एक के साथ दो-तीन लोगों को अपराधी बना देते हैं. हम एक जेल का निरीक्षण करने गये थे तो उसमें 90 प्रतिशत अपराधी ऐसे मिले और हमें जानकारी है, क्‍योंकि हम फील्‍ड में रहते हैं कि झूठी रिपोर्ट के आधार पर जेल में हैं और आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे हैं. बाद में सही अपराधी पकड़े गये तो उन पर भी केस चले. लेकिन बाद में जिनके ऊपर एफआईआर हुई थी वह न्‍यायालय से बरी हो गये, जो हत्‍या में बिल्‍कुल निर्दोष, जिन्‍हें कुछ मालूम ही नहीं था, वह गांव के किसान लोग आज जेल में सड़ रहे हैं.

मध्‍यप्रदेश में अरूणा शर्मा, एडिशनल चीफ सेक्रेटरी रही हैं. उन्‍होंने महिलाओं के संबंध में एक लेख लिखा है, वर्तमान में दिल्‍ली में हैं. उनका लेख मैंने भी पढ़ा है. उसमें उन्‍होंने लिखा है कि गलत को गलत बोलने में क्‍या हर्ज है. उन पर कई लोगों ने कमेंट भी किया. उन्‍होंने लिखा था महिलाओं पर जो अत्‍याचार हो रहे हैं, जैसे दहेज हत्‍या, बलात्‍कार और कई धाराओं का भारी पैमाने पर दुरूपयोग हो रहा है. इस पर भी हमें विचार करना चाहिये. ऐसे कानून या उच्‍चस्‍तरीय जांच के बाद ही कुछ कार्यवाही या चालान पेश होना चाहिये. कई लोगों ने कमेंट किया कि आप महिला होकर आप इस तरह की बात क्‍यों कर रही हो तो उन्‍होंने कहा कि सच को सच कहना गलत है तो लोग गलत समझें, लेकिन जो सच्‍चाई हमें जनता के बीच जाने में और सामाजिक अनुभव में जाने पर पता चली है, इसलिये मैंने यह लेख लिखा है.

अध्‍यक्ष महोदय, मैं स्‍वयं इसका भुक्‍तभोगी हूं. हमारे लहार क्षेत्र में तीन घटनाएं घटी हैं. वास्‍तव में लड़के लड़कियां आपसी सहमति से चले गये और आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली. पुलिस में एक बार लड़कियों के बयान हो चुके कि हमने शादी की है और अपने पति के साथ रहना चाहते हैं. बाद में घर वालों ने लड़की पर दबाव डालकर उसको जैसे-तैसे घर ले आये और लड़की पर इतना दबाव डाला कि जो लड़के निर्दोष थे, लड़के के दोस्‍त थे उनको भी रेप का आरोपी बनवा दिया वह जेल में सड़ रहे हैं. इस प्रकार की तीन घटनाएं हमारे विधान सभा क्षेत्र लहार में पिछले दो महीने में हुई हैं. इसलिये हमारा आपसे अनुरोध है कि आप धारा में संशोधन का बिल जा रहे हैं, हम इसका विरोध नहीं कर रहे हैं. आप केन्‍द्र सरकार को भेजिये. आप यह भी देखिये कि इस धारा के दुरूपयोग पर अंकुश लगे, ऐसा भी प्रावधान होना चाहिए. आपने संशोधन विधेयक की धारा 354 (ख) में दण्‍ड की अवधि को 3 से 7 वर्ष किया है. और दूसरी बार यदि किसी महिला से संबंधित अपराध है तो एक बार तो अपराधी को जमानती जुर्म के तौर पर सजा हो गई और दूसरी बार का जुर्म, गैरजमानती जुर्म होगा और 10 साल की सजा होगी.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह समाज की विडंबना हो गई है कि कई पुरूष अब महिलाओं से दूर रह रहे हैं. व्‍यक्ति ऐसी कौन सी प्रक्रिया का पालन करे कि उसका बचाव हो सके. आज समाज के पुरूषों में भय का वातारण है. महिलाओं की सुरक्षा तो हो रही है लेकिन पुरूषों की सुरक्षा के लिए कहीं कोई बात नहीं हो रही है. हमारा सरकार से अनुरोध है कि वह विचार करके ऐसी कमेटी बनाये कि इन धाराओं का दुरूपयोग रोका जा सके.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, धारा 493 में कहा गया है कि यदि शादी का वादा करके कई सालों से महिला-पुरूष साथ में रह रहे हैं और सहवास कर रहे हैं और यदि उसके बाद महिला ने कह दिया कि इसने मुझे धोखा दिया तो वह पुरूष सजा का पात्र हो गया लेकिन इसमें महिला का कोई अपराध नहीं है.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता- डॉ. साहब, महिलाओं की सुरक्षा की व्‍यवस्‍था करनी चाहिए कि नहीं ?

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