मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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पंचदश विधान सभा अष्‍टम सत्र

 

 

फरवरी-मार्च, 2021 सत्र

 

गुरुवार, दिनांक 4 मार्च, 2021

 

(13 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1942 )

 

 

[ खण्ड- 8 ] [ अंक-8 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

गुरुवार, दिनांक 4 मार्च, 2021

 

(13 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1942 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.01 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (श्री गिरीश गौतम) पीठासीन हुए.}

 

11.01 बजे हास-परिहास

नेता प्रतिपक्ष (श्री कमल नाथ) - अध्‍यक्ष जी, मैं आपके माध्‍यम से मुख्‍यमंत्री जी को निवेदन करना चाहता हूँ कि आप इसी रूप में ज्‍यादा आया कीजिये, जब वे इस रूप में आते हैं तो आप समझ गए होंगे कि मैं क्‍या कह रहा हूँ ? तो इनका मूड जरा ठीक रहता है. (हंसी)

संसदीय कार्यमंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र) - इनका रूप हमेशा एक सा ही रहता है. आप जो रूप बार-बार बदलते हो, उसका सोचें.

श्री कमल नाथ - मैंने आज तक अपना रूप नहीं बदला है. यह कोई नहीं कह सकता कि उसने मुझे किसी दूसरे रूप में देखा हो पर नरोत्‍तम जी, आपकी तसल्‍ली के लिये एक दिन मैं दूसरे रूप में भी आऊँगा. (मेजों की थपथपाहट)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - हमें उस रूप की प्रतीक्षा रहेगी.

लोक निर्माण मंत्री (श्री गोपाल भार्गव) - (श्री कमल नाथ जी को देखकर) अध्‍यक्ष महोदय, यह बात जो आपने कही है, यह बात बिल्‍कुल सही है कि ठंड हो या गर्मी, आपके कपड़े हमेशा ऐसे ही रहते हैं. मैंने हमेशा ऐसे ही देखा है. कड़ाके की ठण्‍ड में भी आपके कपड़े ऐसे ही रहते हैं, आप क्‍या खाते हैं, क्‍या पीते हैं ? कुछ समझ में नहीं आता.

डॉ. गोविन्‍द सिंह - मैंने एक दिन अपने नेता जी से निवेदन किया था कि आप यह बताएं कि इसमें ऐसा कौन-सा करंट फिट है कि आप स्‍वेटर और जर्सी कुछ नहीं पहनते हैं, आप केवल कुर्ता-पजामा ही पहनते हैं लेकिन उन्‍होंने मुझे कुछ नहीं बताया.

श्री कमल नाथ - माननीय अध्‍यक्ष जी, आप एक ट्रेनिंग सेशन बुलवाइये. मैं इन सबको ट्रेनिंग दे दूँगा. (हंसी)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - दिक्‍कत क्‍या है, गोविन्‍द सिंह जी, इनने कभी आपकी मानी ही नहीं. यही पीड़ा रही.

अध्‍यक्ष महोदय - शायद इनके इस रूप से सामने वाले को ऊर्जा आती है, आप इसीलिए ऐसे आते हैं.

मुख्‍यमंत्री (श्री शिवराज सिंह चौहान) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिसमें सब प्रसन्‍न हों, मैं तो वही रूप धरता हूँ, जनता भी प्रसन्‍न रहे और आप भी प्रसन्‍न रहें. मुझे क्‍या दिक्‍कत है ?

 

11.03 बजे तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

जिलों में पदस्‍थ जिला खनिज अधिकारी

[खनिज साधन]

1. ( *क्र. 2574 ) डॉ. सतीश सिकरवार : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म.प्र. के कितने जिलों में जिला खनिज अधिकारी पदस्‍थ हैं एवं कितने जिलों में प्रभारी खनिज अधिकारी कार्यरत हैं? जिलों के नाम, प्रभारी अधिकारियों के समय सहित जानकारी दी जावे। (ख) क्‍या प्रदेश में अनेक जिलों में प्रशासनिक खनिज सेवा के जिला खनिज अधिकारी के पद पर पदस्‍थ किये गये, क्‍यों? तथ्‍यों सहित पूर्ण जानकारी दी जावे। (ग) प्रदेश के कितने जिलों में टे‍क्‍नि‍कल विंग (भौमकीय विधि) के खनिज अधिकारी कार्यरत हैं? क्‍या पूर्व में शासन द्वारा प्रशासनिक खनिज विंग के अधिकारियों को इन पदों से हटा दिया गया था, कब कितने ऐसे अधिकारियों को हटाया गया? स्‍थान, नाम सहित जानकारी दी जावे। (घ) क्या भौमिकीय विधि के जानकार खनिज अधिकारियों के अभाव में खनिज खोज की प्रगति धीमी पड़ गई है? क्‍या शासन सेवानिवृत्‍त हुए इस विंग के अधिकारियों को पुन: संविदा पर रखेगा? जानकारी दी जावे

खनिज साधन मंत्री ( श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' पर दर्शित है। (ख) विभागीय प्रशासनिक आवश्‍यकता के दृष्टिगत जिलों में पदस्‍थापनायें की गईं हैं। (ग) प्रदेश के 06 जिलों में टेक्‍नि‍कल विंग (भौमिकीय विधि) के अधिकारी प्रभारी अधिकारी (खनि शाखा) के रूप में कार्यरत हैं। शासन द्वारा प्रशासनिक आवश्‍यकता के दृष्टिगत स्‍थानांतरण उपरांत हटाये गये खनिज विंग के अधिकारियों की सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'पर दर्शित है। (घ) जी नहीं। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

डॉ. सतीश सिकरवार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पूरे प्रदेश में खनिज संपदा का अवैध उत्‍खनन हो रहा है, चाहे वह कोयला हो, चाहे वह पत्‍थर हो, चाहे वह रेत हो. सरकार द्वारा कोई प्रभावी कदम इस पर अभी तक नहीं उठाया गया है. आज पूरे प्रदेश में वन विभाग के कर्मचारियों पर पत्‍थर मा‍फियाओं द्वारा हमला किया जा रहा है, रेत माफियाओं द्वारा पुलिस प्रशासन पर हमला किया जा रहा है.

अध्‍यक्ष महोदय, जो हमारे यहां खनिज अधिकारी बनाये गये हैं, उसमें जो टेक्निकल विंग के जियोलॉजिस्‍ट हैं, उनको खनिज अधिकारी बना दिया गया है जबकि इनका काम यह है कि ये खोज करें और खोज करें कि कहां पर कौन-सा खनिज पदार्थ है, जिससे वहां पर उद्योग-धंधे स्‍टार्ट हों, लेकिन उनको खनिज अधिकारी बनाया गया है. माननीय तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री जी श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा दिशा-निर्देश दिये गये थे, उनके दिशा-निर्देश पर उस समय 22 जिलों में जो अधिकारी पदस्‍थ किये गये थे, वे सभी हटा दिये गये थे. लेकिन ऐसा क्‍या कारण है कि वे पुन: पदस्‍थ कर दिये गये. इससे क्‍या है कि दोगुना (डबल) नुकसान हो रहा है. एक तरफ तो वे खोज नहीं कर पा रहे हैं, दूसरी तरफ उनको प्रशासनिक अनुभव नहीं है, तो सरकार को उनके पास प्रशासनिक अनुभव न होने का भी नुकसान हो रहा है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा यह निवेदन है कि उन्‍हें माननीय मुख्‍यमंत्री जी के निर्देशानुसार हटाया गया था. किसके कहने पर पुन:पदस्‍थापन किया गया है, जबकि इनका काम प्रशासनिक नहीं है, इनको केवल फील्‍ड में रहना है और इनको केवल खनिजों की जांच करनी है, कौन-कौन से जिले में कौन -कौन से खनिज उपलब्‍ध हैं? जिससे सरकार वहां उद्योग धंधे स्‍थापित करे लेकिन इनको पैसे कमाने के लिये..

अध्‍यक्ष महोदय -- उत्‍तर आने दीजिये, माननीय मंत्री जी बोलें.

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय सदस्‍य ने बात कही है और जहां तक उनकी पदस्‍थापना की बात और हटाने की बात है, इन पांच लोगों को वहां से हटाया गया था और जहां तक पदस्‍थ करने की बात है, क्‍योंकि हमारा अभी सुप्रीमकोर्ट में कोई केस चलने के कारण पदोन्‍नति रूकी हुई है और अमले की कमी के कारण हमें यह सब चीजें करनी पड़ती है और प्रभारी के रूप में पदस्‍थ करना पड़ता है. यह हमें एक रूटीन वे में करना पड़ता है.

डॉ. सतीश सिकरवार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इनकी सेवा शर्तों में क्लियर लिखा है कि इनको प्रशासनिक पदों पर नहीं रखा जायेगा, इनको खनिज अधिकारी नहीं बनाया जायेगा, इनकी सेवा शर्तों में है, उसके बाद भी किसके कहने पर माननीय मंत्री महोदय इनको रखा गया है, क्‍यों रखा है, क्‍या कारण है और कब तक इनको हटायेंगे, इनको क्‍यों रखा गया है ?

अध्‍यक्ष महोदय -- वह कारण तो बता रहे हैं.

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जहां तक असिस्‍टेंट जियोलॉजिस्‍ट और माइनिंग अधिकारी, सहायक खनिज अधिकारी की शैक्षणिक योग्‍यता का मामला है, दोनों ही एक ही पोस्‍ट के हैं. दोनों की योग्‍यता एक ही है और उनकी श्रेणी भी एक ही है. अब जियोलॉजिस्‍ट एक टेक्निकल विंग में है और एक प्रशासनिक विंग में है. हमारे पास टेक्निकल विंग के लोग ज्‍यादा हैं और प्रशासनिक विंग के कम लोग हैं क्‍योंकि उनकी पदोन्‍नति नहीं हो पा रही है और सुप्रीमकोर्ट में केस लंबित है. हमारे कुछ अधिकारी कम होने के कारण हम जो टेक्निकल विंग के लोग हैं, उनको हम प्रशासनिक विंग में फॉर ए टाइम बीइंग पदस्‍थ करते हैं.

डॉ. सतीश सिकरवार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, किसी व्‍यक्ति को हड्डी वाले डॉक्‍टर या सर्जरी की जरूरत है और उसका इलाज रेडियालॉजिस्‍ट से कराया जा रहा है, यह कहां का नियम है ? उनकी सेवा शर्तों में क्‍लीयर लिखा है कि माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय के आदेशानुसार उनको तत्‍कालीन समय हटा भी दिया गया था, उसके बाद दोबारा उनको बनाया गया है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह भी निवेदन करना चाहता हूं कि पूरे प्रदेश में जिस प्रकार से खनन माफियाओं द्वारा..

अध्‍यक्ष महोदय -- आप इसी प्रश्‍न में अपने आपको सीमित रखिये.

डॉ. सतीश सिकरवार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप देखिये इसी प्रश्‍न में है. 6 जिलों में इनके द्वारा उनको खनिज अधिकारी बनाया गया है. कुछ जिलों में खनिज इंस्‍पेक्‍टरों को भी खनिज अधिकारी बनाया गया है.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप अपना प्रश्‍न पूछें कि आप चाहते क्‍या हैं?

डॉ. सतीश सिकरवार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह चाहता हूं कि जिसका जो काम है, वह काम करेंगे कि नहीं करेंगे ? रेडियोलॉजिस्‍ट का काम खोज करना है कि कौन से जिले में क्‍या-क्‍या खनिज पदार्थ हमको उपलब्‍ध हैं. क्‍या वह खोज कर रहे हैं ? उन्‍होंने खोज की है तो क्‍या-क्‍या खोज की है, उनका काम क्‍या है ? जब वह उनका काम ही नहीं कर पा रहे हैं तो हमको पता कैसे लगेगा कि हमारे मध्‍यप्रदेश में किन-किन स्‍थानों पर कौन सा खनिज पदार्थ उपलब्‍ध है ? जिससे सरकार वहां पर यदि कोई फैक्‍ट्री लगायेगी, कोई वहां पर उद्योग धंधा स्‍थापित करेगी, यह सरकार को जब पता होगा तभी तो वह करेगी.

अध्‍यक्ष महोदय -- यह तो आपका भाषण हो गया, आप प्रश्‍न पूछिये कि आप चाहते क्‍या हैं ?

डॉ. सतीश सिकरवार -- मैं यह चाहता हूं कि जिन लोगों की सेवा शर्तों में क्लियर लिखा हुआ है कि उनको खनिज अधिकारी नहीं बनाया जा सकता है, उनको काम नहीं दिया जा सकता है तो उनको काम किसके कहने पर दिया गया है और उनको हटायेंगे कि नहीं हटायेंगे और हटायेंगे तो कब तक हटायेंगे ?

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह -- जहां तक एज्‍युकेशन की बात है, दोनों की डिग्री सेम है, दोनों राजपत्रित अधिकारी हैं और इसलिये यह कहीं पर भी ऐसा नहीं है कि हम उनको नहीं रखेंगे या रखेंगे. लेकिन यह बात सही है कि टेक्निकल विंग का अमला कम होने के कारण हम फॉर ए टाइम बीइंग उनकी व्‍यवस्‍था बना रहे हैं और जहां तक इनका कहना है कि सर्वे कम हुआ है, यह सब चीजें हुई हैं, तो हमारे लगातार सर्वे हो रहे हैं. हमारे ब्‍लॉक आरक्षित हो रहे हैं और उसकी संख्‍या जो है वह निरंतर बढ़ रही है. अभी हमने करीब 13 जगह पर ब्‍लॉक ऑक्‍शन किये हैं जिससे कि हमें भविष्‍य में 60 हजार करोड़ के ऊपर उससे रेवन्‍यू भी मिलने वाला है. इसलिये हमारी हर साल लगातार प्रोग्रेस बढ़ रही है. यह कहना अनुचित है कि वहां पर हमारे जियोलॉजिस्‍ट पदस्‍थ होने के कारण हमारा सर्वे घट रहा है, ऐसा कहना गलत है.

डॉ. सतीश सिकरवार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसके अलावा भी जो संभाग स्‍तर पर फ्लाइंग स्‍कॉड बनाई गई हैं, उनको भी टेक्निकल विंग के अधिकारी जियोलॉजिस्‍टों को वहां पर भी पदस्‍थ कर दिया गया है, जबकि उनका काम ही यह नहीं है. वह क्‍यों रखे गये हैं ? यह सब जानते हैं, पूरा सदन जानता है कि इन जियोलॉजिस्‍टों को खनिज अधिकारी क्‍यों बनाया गया है और यह वहां क्‍या कर रहे हैं, इससे मध्‍यप्रदेश शासन को लाखों करोड़ों रूपये का चूना लग रहा है और अवैध उत्‍खनन को बढ़ावा मिल रहा है, क्‍योंकि इनको प्रशासनिक अनुभव नहीं है. इसलिये अवैध उत्‍खनन को बढ़ावा मिल रहा है और पूरे प्रदेश में अवैध उत्‍खनन हो रहा है. पत्‍थर माफिया हो चाहे रेत माफिया हो, वह पुलिस पर और वन अमले पर हमला कर रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- अब हो गया है.

डॉ. सतीश सिकरवार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपसे निवेदन यह है कि अगर एक पोस्‍ट पर उनके समान वेतनमान हैं तो इसका मतलब यह थोड़े है कि हम किसी को भी देंगे. हमें डॉक्‍टर की जरूरत है, बच्‍चों का इलाज कराने के लिये बाल रोग विशेषज्ञ की जरूरत है, क्‍या हम जियोलॉजिस्‍ट से इलाज करायेंगे, क्‍या हम रेडियोलॉजिस्‍ट से इलाज करायेंगे, क्‍या हम पैथोलॉजिस्‍ट से उनका इलाज करायेंगे? मैं यह पूछना चाहता हूं. प्रश प्

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दोनों की एजूकेशन सेम है.

अध्‍यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी, चूंकि वह पहली बार चुनकर आये हैं इसलिये उनको इतना संरक्षण दे रहा हूं.

श्री बृजेन्‍द्र प्र‍ताप सिंह-- मेरा यह कहना है कि यदि मेरे पास अमला होता तो हमने 7 जगह जो खनिज निरीक्षक, सीनियर खनिज निरीक्षक को प्रभारी खनिज अधिकारी बना रखा है तो हम नहीं बनाते, यदि हमारे पास माइनिंग आफीसर होते और मैं पहले ही बता चुका हूं कि उनका आरक्षण का प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और हमारे यहां पदोन्‍नति नहीं हो रही, अमला कम है और अभी हमने उसका प्रस्‍ताव भी करीब 1327 लोगों के सुदृढ़ीकरण के लिये प्रस्‍ताव हमारा वित्‍त विभाग में लंबित है, वह जैसे ही स्‍वीकृत हो जायेगा और हमारे पद क्रियेट हो जायेंगे, हम निश्चित रूप से उनको पदस्‍थ कर देंगे.

श्री जितु पटवारी-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय....

अध्‍यक्ष महोदय-- जितु जी, दूसरे में पूछियेगा, वह पहली बार के हैं इसमें रहने दीजिये, उनको खुद पूछने दीजिये.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

विधानसभा क्षेत्र पनागर के अंतर्गत स्कूल/ सड़क की भूमि पर अतिक्रमण

[राजस्व]

2. ( *क्र. 2717 ) श्री सुशील कुमार तिवारी : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या शासकीय स्कूल बल्हवारा एवं पड़वार में स्कूल की जगह पर कब्जे किये गये हैं? (ख) क्या पड़वार बाजार की सड़क पर दुकानें निर्मित कर सड़क पर कब्जा कर लिया गया है? (ग) यदि हाँ, तो क्या दबंगों एवं आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्तियों के कब्जे होने के कारण हटाने की कार्यवाही नहीं की जा रही है? (घ) यदि नहीं, तो क्या यह कब्जे हटाये जायेंगे? यदि हाँ, तो कब तक?

 

राजस्‍व मंत्री (श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत)--

श्री सुशील कुमार तिवारी-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी संशोधित उत्‍तर हमें प्राप्‍त हुआ कि शासकीय स्‍कूल में कब्‍जा पाया है. पूर्व में कब्‍जा नहीं था और अब संशोधित उत्‍तर में आया है कि कब्‍जा पाया है. हमारा माननीय मंत्री जी से यह निवेदन है, यह बताने की कृपा करें कि कब्‍जा होने के बाद आप इस संवेदनशील प्रकरण में कि स्‍कूल में कब्‍जा है इसको कब तक हटायेंगे, समय सीमा बताने की कृपा करें.

राजस्‍व मंत्री (श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, शासकीय स्‍कूल बल्‍हवारा भूमि के अंश भाग पर ईश्‍वर दास सन ऑफ हल्‍के, काशीराम बल्‍द हल्‍के, बैनीप्रसाद बल्‍द हल्‍के तथा शासकीय स्‍कूल पड़वार पर श्री सतेन्‍द्र गर्ग उर्फ बिजेन्‍द्र जोशी द्वारा अतिक्रमण करना पाया गया है. अध्‍यक्ष महोदय, ग्राम पड़वार की आबादी में गांवठान मद में खसरा नंबर 184 पर बनी ग्राम की सड़क पर किनारे में राकेश अग्रवाल एवं श्री आनंद साहू द्वारा अतिक्रमण किया गया था. आनंद साहू द्वारा स्‍वयं कब्‍जा हटा लिया गया है, स्‍कूल भूमि पडवार ग्राम की सड़क के किनारे अतिक्रमण करने वालों के विरूद्ध भू-राजस्‍व संहिता की धारा 248 का प्रकरण दर्ज कर कार्यवाही की जा रही है.

श्री सुशील कुमार तिवारी-- माननीय मंत्री जी से हम निवेदन करते हैं कि आप समय-सीमा बतायें कि कब तक यह अतिक्रमण हटा देंगे, कार्यवाही तो अब जब तय हो गया कि अतिक्रमण है तो मैं समझता हूं कि इसमें देर नहीं होना चाहिये. कृपया इसमें समय-सीमा निर्धारित करें.

श्री गोविन्‍द्र सिंह राजपू‍त-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, चूंकि प्रकरण तहसील न्‍यायालय में चल रहा है, उसकी सुनवाई के बाद ही निर्णय ले सकेंगे.

श्री सुशील कुमार तिवारी-- माननीय अध्‍यक्ष जी, हमारा एक निवेदन है कि इसमें कोई भी सुनवाई अभी तक नहीं चल रही है, शायद मैं मंत्री जी के संज्ञान में यह बात डालना चाहता हूं कि अतिक्रमण है यह आपके उत्‍तर में स्‍पष्‍ट हो गया कि अतिक्रमण है तो इसके बाद मैं समझता हूं कि इसमें कुछ करने की आवश्‍यकता नहीं है. आप समय-सीमा बतायें तो बड़ी कृपा होगी.

श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत-- अध्‍यक्ष महोदय, अतिक्रमण है यह सच है और पटवारी पर कार्यवाही भी की गई है, यह सच है कि प्रकरण तहसील न्‍यायालय में चल रहा है और न्‍यायालयीन प्रक्रिया पूर्ण होते ही तुरंत कार्यवाही की जायेगी.

 

 

 

 

मनावर विधान सभा क्षेत्रांतर्गत संचालित खदानें

[खनिज साधन]

3. ( *क्र. 2996 ) डॉ. हिरालाल अलावा : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मनावर विधान सभा क्षेत्र अन्‍तर्गत कितनी खदानों से कितने प्रकार के खनिज प्राप्‍त होते हैं? कितनी खदानें गिट्टी क्रशर वर्तमान में संचालित हो रहे हैं? खदानों, गिट्टी क्रशर के आवंटन की तिथि, लीज़ समाप्‍त होने की तिथि एवं संचालकों के नाम सहित ब्‍यौरा दें। (ख) प्रश्नांश (क) के खदानों, गिट्टी क्रशरों से जनवरी 2015 से प्रश्‍न दिनांक तक प्राप्‍त रॉयल्‍टी/राजस्‍व का वर्षवार ब्‍यौरा दें? (ग) प्रश्नांश (क) के खदानों, गिट्टी क्रशरों को किन नियमों/शर्तों के तहत किस दिनांक से कितने वर्ष के लिये लीज़ पर दिया गया, आवंटन किया गया? लीज़ समाप्‍त होने की तिथि एवं लीज़ नवीनीकरण के नियमों/शर्तों की प्रति सहित ब्‍यौरा दें। (घ) क्‍या प्रश्नांश (क) के खदानों, गिट्टी क्रशरों के आवंटन/नीलामी से पूर्व ग्रामसभा की अनुमति ली थी? अनुमति नहीं ली गई तो विधिसम्‍मत कारण बताएं। किसकी जवाबदेही तय कर क्‍या कार्यवाही की जाएगी? (ड.) प्रश्नांश (क) के खदानों, गिट्टी क्रशरों के प्रदूषण जाँच एवं निगरानी किसके द्वारा किस नियम के तहत की है? छमाही या वार्षिक जाँच एवं निगरानी के लिये कोई कमेटी का गठन किया जाता है? यदि हाँ, तो तत्‍संबंधी ब्‍यौरा दें? किस नियम के उल्‍लंघन पर कितना जुर्माना किन खदानों, ग‍िट्टी क्रशरों से जनवरी 2015 से प्रश्‍न दिनांक तक किस नियम के तहत वसूला गया? (च) प्रश्नांश (क) के खदानों, गिट्टी क्रशरों में क्‍या पंचायत अधिनियम 1996 की धारा 4 (घ), (ट), (ठ) का पालन किया गया? यदि हाँ, तो प्रति सहित उसका ब्‍यौरा दें? यदि नहीं, तो विधिसम्‍मत कारण बताएं? पंचायत अधिनियम 1996 के उल्‍लंघनकर्ताओं पर कब तक क्‍या कार्यवाही की जाएगी? (छ) प्रश्नांश (क) के खदानों, गिट्टी क्रशरों के आवंटन/नीलामी में आदिवासी/स्‍थानीय आदिवासी समितियों के लिये किस दिनांक को किस अधिसूचना के तहत कितना आरक्षण का प्रावधान किया गया? वर्तमान में क्‍या प्रावधान प्रचलित है?

खनिज साधन मंत्री ( श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ) : (क) मनावर विधानसभा क्षेत्र में चूनापत्‍थर, पत्‍थर/गिट्टी एवं रेत खनिज उपलब्‍ध है। प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में चूनापत्‍थर के खनिपट्टों की सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ, क्रशर से गिट्टी निर्माण हेतु पत्‍थर के उत्‍खनन पट्टों एवं रेत की सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब पर दर्शित है।

(ख) जनवरी 2015 से प्रश्‍न दिनांक तक प्राप्‍त रॉयल्‍टी/राजस्‍व का वर्षवार विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-स पर दर्शित है।

(ग) पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब में उल्‍लेखित क्रशर से गिट्टी निर्माण हेतु पत्‍थर के उत्‍खनन पट्टे मध्‍यप्रदेश गौण खनिज नियम, 1996 के नियमों/शर्तों के तहत प्रदान की गई है। ये नियम अधिसूचित हैं। जिसमें लीज़ नवीनीकरण के प्रावधान भी दर्शित हैं। शेष जानकारी भी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब पर दर्शित हैं।

(घ) नवीन खदानों में ग्राम सभा/ग्राम पंचायत की अनुमति प्राप्‍त की गई है। शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

(ड.) क्षेत्रीय अधिकारी, क्षेत्रीय कार्यालय, मध्‍यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, धार से प्राप्‍त जानकारी अनुसार मध्‍यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रश्‍नाधीन क्षेत्र की खदानें गिट्टी क्रशरों के प्रदूषण की जाँच समय-समय पर की जाती है। वर्तमान में छमाही या वार्षिक जाँच एवं निगरानी के लिये कोई कमेटी गठित नहीं है। बोर्ड द्वारा जल एवं वायु अधिनियमों के तहत न्‍यायालयीन कार्यवाही करने व इकाई को बंद कराने का प्रावधान है। वर्ष 2015 से प्रश्‍न दिनांक तक किसी भी क्रशर से जुर्माना वसूल नहीं किया गया। क्षेत्रीय अधिकारी, मध्‍यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से प्राप्‍त जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-द पर दर्शित है।

(च)

(छ) मध्‍यप्रदेश गौण खनिज नियम, 1996 में गिट्टी क्रशरों के आवंटन/नीलामी में, आदिवासी/स्‍थानीय आदिवासी समिति के लिये अधिसूचना के तहत आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं किया गया है।

डॉ. हिरालाल अलावा-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद, आपका संरक्षण चाहता हूं और इस सदन से भी अनुरोध है कि इस गंभीर प्रश्‍न पर आप सभी ध्‍यान दें. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न अनुसूचित क्षेत्रों में 5वीं अनुसूची के प्रावधान और पर्यावरण से संबंधित हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सबसे पहले मैं आपको और इस सदन को आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि हम विकास विरोधी नहीं हैं, हम लोग आदिवासी क्षेत्रों में विकास चाहते हैं. आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा और स्‍वास्‍थ की बुनियादी सुविधायें मिलें, लेकिन हम ऐसा विकास भी नहीं चाहते जिसमें आदिवासियों के हितों को अनदेखा किया जाये.

अध्‍यक्ष महोदय-- प्रश्‍न पर आइये, आपको बजट में मौका दिया जायेगा.

डॉ. हिरालाल अलावा-- अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रश्‍न पर ही आ रहा हूं. मेरा जो प्रश्‍न था कि अनुसूचित क्षेत्र अंतर्गत मनावर विधान सभा क्षेत्र में कितनी खदानें हैं, किस-किस प्रकार के इनमें मिनरल्‍स निकाले जाते हैं.

और क्या इन खदानों को अनुमति देते समय ही पेसा कानून का अनुपालन किया गया. मुझे सवाल का जवाब मिला है कि " उल्लेखित मुख्य खनिज चूना पत्थर की खदानें,खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन)अधिनियमन,1957 में संशोधन, दिनांक 12.1.2015 के पूर्व से स्वीकृत है. तत्समय उक्त अधिनियम के तहत मुख्य खनिजों की ऐसी स्वीकृति से पूर्व ग्राम सभा/ग्राम पंचायत का अभिमत लिये जाने का प्रावधान नहीं था. "

माननीय अध्यक्ष महोदय, 1950 में जब प्रावधान बना. पांचवीं अनुसूची के प्रावधान जो अनुच्छेद 244(1) के तहत लागू किये गये. 1996 में संसद ने पेसा कानून बनाया और पेसा कानून के तहत यह सुनिश्चित किया गया कि अनुसूचित क्षेत्र में कोई भी परियोजना,कोई भी उद्योग अगर विकास के नाम पर आते हैं तो ग्राम सभा की अनुमति अनिवार्य है लेकिन मुझे जवाब दिया गया कि 1957 के संशोधन के तहत, जबकि यहां पर भी पेसा कानून के तहत उन कंपनियों को अनुमति लेनी चाहिये थी. मेरे विधान क्षेत्र में अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री एक बड़ा उद्योग है जिसने 965 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की है अनुसूचित क्षेत्रों में और उसने ग्राम सभा की अनुमति नहीं ली. तो मैं जानना चाहता हूं कि क्या अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री जो कि आदिवासी क्षेत्र में, अनुसूचित क्षेत्र में है जो बिना ग्राम सभा की अनुमति के स्थापित की गई है, क्या मंत्री महोदय यह बताने का कष्ट करेंगे कि क्या इस उद्योग को संचालित करने के लिये ग्राम सभा की अनुमति ली जायेगी जो वर्तमान के पेसा कानून के तहत जो मापदण्ड है ?

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा कि सदस्य जी ने बताया. अल्ट्राटेक के लिये उन्होंने पर्टिकुलर संबोधन भी दिया है. वह मेजर मिनरल में आता है और जो मेजर मिनरल का नियम है जैसा उन्होंने खुद ही कहा है कि हमारे खान एवं खनिज अधिनियम,1957 में यह नियम है कि उसमें ग्राम सभा या ग्राम पंचायत की अनुमति नहीं ली जाती. इसलिये उसके अंतर्गत वह चल रही है. जहां तक माइनर मिनरल की बात है माइनर मिनरल में हमने अनुमति ली और उसका जवाब हमने दिया भी है और इसलिये वह अनुमति हमने पंचायत के नियम के तहत जिसका उन्होंने प्रश्न में उल्लेख किया है उसके तहत ही ली.

डॉ.हीरालाल अलावा - माननीय अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि जो चूना पत्थर के नाम पर अनुमति ली गई है वह गौण खनिज में आता है और गौण खनिज में ग्राम सभा के प्रावधान, ग्राम सभा का पेसा कानून उन पर लागू होता है तो गौण खनिज के अंतर्गत यह राजपत्र के द्वारा अधिसूचित है कि चूना पत्थर गौण खनिज में आता है तो इसके लिये ग्राम सभा की अनुमति अनिवार्य है.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, 2 चीजें हैं. लाइम स्टोन अगर इंफीरियर क्वालिटी का रहता है तो वह गिट्टी में चला जाता है उसे गौण खनिज में हम लेते हैं यदि वह हाई क्वालिटी का, हाई ग्रेड का है तो वह मेजर में चला जाता है तो मेजर में परमीशन नहीं है. जो गौण खनिज में आ रहा है उसमें हम परमीशन ले रहे हैं. हमने बोला भी है कि हमने परमीशन ली और उसको हमने उपलब्ध भी कराया है. कहीं पर्टिकुलर आपको लग रहा है कोई चीज बची है, उल्लेख कर दें. मैं देख लूंगा.

डॉ.हीरालाल अलावा - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि पेसा कानून के तहत भाग- 9 में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसी भी राज्य का विधान मण्डल पेसा कानून के तहत बनाए गए नियमों के अधीन ही कोई नियम बनाएगा लेकिन मुझे नहीं लगता है कि पेसा कानून के तहत अनुमति दी गयी. तो मैं मंत्री जी से चाहता हूं कि पेसा कानून के प्रावधानों का पालन करते हुए ही अनुमति दी जाए अन्यथा अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट को केंसिल किया जाए.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, यदि माननीय सदस्य को कहीं लग रहा है क्योंकि हम तो नियम, प्रावधान की बात कर रहे हैं और उसमें हमने फालो किया है. यदि पर्टिकुलर जगह माननीय सदस्य बता देंगे तो हम उसका परीक्षण करा लेंगे.

डॉ.हीरालाल अलावा - माननीय अध्यक्ष महोदय, एक पर्यावरण से संबंधित महत्वपूर्ण बात है.

अध्यक्ष महोदय - अब आपका हो गया. आप लिखकर दे दीजिये मंत्री जी को.

डॉ.हीरालाल अलावा - माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने जवाब दिया कि मनावर विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत 31 खदानें हैं उसमें से ज्यादातर गिट्टी खदानें हैं और गिट्टी खदानों के लिये पर्यावरण की जांच की बात मैंने कही थी. गिट्टी खदानों से, अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट से इस क्षेत्र में वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण लगातार हो रहा है. इस क्षेत्र में प्रदूषण फैल रहा है और बहरापन और सिलिकोसिस  जैसी गंभीर बीमारियां उत्पन्न हो रही हैं, लेकिन प्रदूषण बोर्ड ने पिछले 5 सालों में इन फैक्ट्रियों के खिलाफ, इन खदानों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की और कोई जुर्माना नहीं लगाया. तो मैं कहना चाहता हूं कि अनुसूचित क्षेत्रों में 5वीं अनुसूची के जहां प्रावधान होते हैं, वहां पर यह विशेष रुप से निर्देश दिया जाये कि पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा जाये और मैं चाहता हूं कि प्रदूषण बोर्ड के जो अधिकारी हैं, जिन्होंने कोई कार्यवाही नहीं की है, उनके ऊपर कार्यवाही की जाये और जिन्होंने ग्राम सभा के नियमों का उल्लंघन किया है, उनके ऊपर कार्यवाही की जाये.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह -- अध्यक्ष महोदय, जहां तक कि गौण खनिज की बात की है, गिट्टी क्रेशर के 27 क्रेशर हैं, जो 18 एवं 9 संचालित हैं और जहां तक इन्होंने प्रदूषण बोर्ड की बात की है, 33 जगह पर इन्सपेक्शन हुए हैं. हमारे पास लिस्ट है, इनके औचक निरीक्षण होते रहते हैं और वहां जो भी गलती करता है, उनके नियम के अनुसार वह लोग कार्यवाही करते हैं, फिर उस पर हम लोग कार्यवाही करते हैं. वे हमारे डिपार्टमेंट को बताते हैं, हम उसके अंतर्गत कार्यवाही करते हैं.

अध्यक्ष महोदय -- माननीय सदस्य का कोई विशेष हो, तो आप बातचीत करके देख लीजियेगा.

डॉ. हिरालाल अलावा -- अध्यक्ष महोदय..

अध्यक्ष महोदय -- बस, बहुत हो गया.

 

 

 

फतेहपुर तालाब का निर्माण

[जल संसाधन]

4. ( *क्र. 1705 ) श्री लक्ष्‍मण सिंह : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नकर्ता के विधानसभा क्षेत्र चाचौड़ा के आदिवासी इलाके फतेहपुर तालाब का कार्य 2018 से क्‍यों बंद पड़ा हुआ है? (ख) तालाब निर्माण की वर्तमान स्थिति से अवगत करायें (ग) फतेहपुर तालाब का निर्माण कब तक पूर्ण कर दिया जाएगा?

जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) एवं (ख) विधान सभा चाचौड़ा के अंतर्गत फतेहपुर तालाब के डूब क्षेत्र से प्रभावित 4.50 हेक्‍टर वन भूमि की प्रथम चरण स्‍वीकृति वन विभाग से अपेक्षित होने के कारण वर्तमान में परियोजना का निर्माण कार्य बंद है। फतेहपुर तालाब का निर्माण कार्य वर्तमान में 25 प्रतिशत पूर्ण होना प्रतिवेदित है। (ग) फतेहपुर तालाब का निर्माण कार्य वन विभाग से प्रथम चरण की स्‍वीकृति प्राप्‍त होने तथा पूर्व निविदाकार का अनुबंध विखण्डित होने के कारण पुन: निविदा आमंत्रित कर एजेंसी निर्धारित होने के पश्‍चात प्रारंभ किया जाना संभव होगा। समय-सीमा बताना संभव नहीं है।

श्री लक्ष्मण सिंह -- अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद. मैं आपका संरक्षण चाहूंगा. मैं मंत्री जी के उत्तर से संतुष्ट नहीं हूं, न इनके उत्तर से संतुष्ट हूं, न इनकी राजनीति से संतुष्ट हूं. यह फतेहपुर तालाब, सिंचाई योजना जो है, यह अति महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके बनने से लगभग 15 गांव के गरीब मजदूरों का पलायन रुकता है, जो अधिकतर अनुसूचित जाति, जनजाति के हैं. अब इस तालाब की बड़ी विचित्र स्थिति है. इस तालाब का निर्माण शुरु हो गया, बिना वन विभाग की स्वीकृति लिये, करोड़ों रुपया खर्च हो गया और फिर इसको रोक दिया गया. तो जब बिना वन विभाग की स्वीकृति के शुरु कर दिया, तो रोका क्यों. फिर मैंने वहां जाकर धरना दिया और मुझे वहां के इंजीनियर ने बताया कि साहब दो महीने में हम काम शुरु कर देंगे. अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने उत्तर में कहा है कि समय सीमा बताना संभव नहीं है. जब आपके इंजीनियर को आपत्ति नहीं है, वह समय सीमा बता रहा है, तो आपको समय सीमा बताने में क्या आपत्ति है, पहली बात. दूसरी बात 4 हेक्टेयर भूमि का क्लीयरेंस होना है और वहां वन नाम की कोई चीज नहीं है, मैदान, पठार है. मैं मंत्री जी से यह जानना चाहूंगा कि क्या वन विभाग की स्वीकृति आप लेकर काम शुरु करायेंगे. वन मंत्री जी आपके सामने ही बैठते हैं. बैठकर उनसे बात कर लीजिये और स्वीकृति लेकर काम शुरु करा दीजिये, क्योंकि सरकार का करोड़ों रुपये खर्च हो गया है और मजदूरों के पलायन का मामला है. अगर आपको कोई आपत्ति है, वन विभाग स्वीकृति नहीं देता है, तो नया सर्वेक्षण करवाकर फिर उसको पूरा कराइये, कैसे भी उसको पूरा कराइये, क्योंकि वह काम शुरु हो गया है,करोड़ों रुपया खर्च हो गया है और हजारों मजदूरों के पलायन का प्रश्न है. यह काम आप कब तक शुरु करेंगे.

श्री तुलसीराम सिलावट -- अध्यक्ष महोदय, लक्ष्मण सिंह जी, हमारे वरिष्ठतम् सदस्य हैं, न वे मेरे उत्तर से संतुष्ट हैं, न मेरी राजनिति से संतुष्ट हैं. किस बात से संतुष्ट होंगे, मैं अलग से उनसे बात करुंगा. अध्यक्ष महोदय, फतेहपुर तालाब गुना जिले की चाचौड़ा तहसील में स्थित लघु सिंचाई परियोजना है. एक महत्वपूर्ण परियोजना है. मैं माननीय सदस्य की भावनाओं से सहमत हूं, आदिवासी इलाका है, पर जो काम प्रारम्भ हुआ था, उसके पीछे उस समय जिस प्रकार से आपने कहा कि एक बार जमीन का आधिपत्य हमें कलेक्टर द्वारा दे दिया गया था, बाद में वन विभाग ने आपत्ति लगाई, इसलिये काम रुका. साढ़े चार हेक्टेयर वन भूमि है और निरन्तर हमारा अपना विभाग वन विभाग से सम्पर्क में है. एक बार नहीं 11 बार कलेक्टर से लेकर, कमिश्नर से लेकर हर स्तर पर इस समस्या का समाधान करने के प्रयास एवं कोशिश की. मैं वरिष्ठ सदस्य को यह अवगत कराना चाहता हूं और यह विश्वास दिलाना चाहता हूं कि जैसे ही वन विभाग की स्वीकृति आ जायेगी, हम कार्य अतिशीघ्र प्रारंभ करेंगे.

श्री लक्ष्मण सिंह - (XXX) मेरा सवाल यह है कि..

श्री तुलसीराम सिलावट - अध्यक्ष महोदय, मेरी आपत्ति है.

उच्च शिक्षा मंत्री (डॉ. मोहन यादव) - अध्यक्ष महोदय, यह गलत बात है, माननीय सदस्य को मर्यादा में रहना चाहिए. ऐसी छूट नहीं दी जा सकती है. आप प्रश्न पूछने की मर्यादा का उल्लंघन कर रहे हैं.

श्री तुलसीराम सिलावट - (XXX)

श्री लक्ष्मण सिंह - अध्यक्ष महोदय, इंजीनियर को आपत्ति नहीं है. एक्जिक्यूटिव इंजीनियर 2 महीने से काम शुरू करने का कह रहा है, इनको क्या आपत्ति है?

श्री जितु पटवारी - (XXX)

(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय - (संकेत से) यह रिकॉर्ड नहीं करें.

श्री लक्ष्मण सिंह - एक्जिक्यूटिव इंजीनियर कह रहा है कि 2 महीने में शुरू कर दूंगा तो मंत्री को क्या आपत्ति है?

श्री तुलसीराम सिलावट - अध्यक्ष महोदय, मुझे कोई आपत्ति नहीं है.

श्री लक्ष्मण सिंह - (XXX) वह इंजीनियर कह रहा है कि मैं 2 महीने में शुरू कर दूंगा आपको क्या आपत्ति है? आप शुरू करिए, शिवराज सिंह जी खुद इस मामले में गंभीर हैं कि पलायन न हो. मैं उनसे तालाब के संबंध में भेंट कर चुका हूं.

श्री तुलसीराम सिलावट - अध्यक्ष महोदय, यह मामला गंभीर है. हमारे मध्यप्रदेश के ओजस्वी मुख्यमंत्री वह किसान के बेटे हैं यह सम्माननीय सदस्य ने खुद ने माना है.

श्री लक्ष्मण सिंह - सब जानते हैं 15 साल सुन रहे हैं और वह 15 साल के पहले से जानते हैं. मैं उनकी तारीफ कर रहा हूं.

श्री तुलसीराम सिलावट - आपने अभी माना कि मुख्यमंत्री जी गंभीर हैं, वन विभाग भारत सरकार से अनुमति प्राप्त होते ही मैंने कहा कि हम कार्य प्रारंभ कर देंगे.

श्री लक्ष्मण सिंह - इंजीनियर कह रहा है कि 2 महीने में शुरू कर दूंगा साहब, आपको समय सीमा बताने में क्या आपत्ति है, कहो दो महीने में शुरू कर देंगे, बात खत्म करो.

श्री तुलसीराम सिलावट - अध्यक्ष महोदय, सरकार इंजीनियर से नहीं चलती है.

श्री लक्ष्मण सिंह - (XXX) जब आपका इंजीनियर कह रहा है कि 2 महीने में काम शुरू कर दूंगा तो आपको आपत्ति क्या है? (XXX) हजारों मजदूरों का सवाल है आपका संरक्षण चाहूंगा आप आदेशित करें, यह बहुत महत्वपूर्ण मामला है.

अध्यक्ष महोदय - माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि आमने-सामने बात न करें, आसंदी को संबोधित करते हुए बात कहें.

श्री तुलसीराम सिलावट -अध्यक्ष महोदय, आप सदन के वरिष्ठ सदस्य हैं. मैंने कहा कि मैं पूरा प्रयास करूंगा कि वन विभाग से जैसे भी हमको प्रशासकीय स्वीकृति मिलती है, अतिशीघ्र हम क्योंकि यह आदिवासियों का मामला है, पूरे चाचौड़ा जिले में इस योजना को प्रारंभ कर देंगे.

श्री तुलसीराम सिलावट - (श्री जितु पटवारी, सदस्य के बैठे बैठे कुछ कहने पर) आपके प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है.

(व्यवधान).

अध्यक्ष महोदय - श्री आरिफ अकील जी..

संसदीय कार्यमंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र) - (XXX)

श्री जितु पटवारी - (XXX)

अध्यक्ष महोदय - यह रिकॉर्ड में नहीं आएगा.

डॉ. नरोत्तम मिश्र - (XXX)

डॉ. गोविन्द सिंह - (XXX)

डॉ. नरोत्तम मिश्र - (XXX)

श्री तुलसीराम सिलावट - (XXX)

अध्यक्ष महोदय - यह सब रिकॉर्ड में नहीं आएगा.

मध्‍यप्रदेश के विभिन्‍न संभागों में अवैध उत्‍खनन

[खनिज साधन]

5. ( *क्र. 2945 ) श्री आरिफ अक़ील : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या ग्‍वालियर चंबल संभाग और मध्‍यप्रदेश के अनेक संभागों में प्रशासन की मिलीभगत से रेत माफियाओं द्वारा अवैध रेत उत्‍खनन निरंतर चल रहा है? (ख) यदि हाँ, तो मार्च 2019 से प्रश्‍न दिनांक तक कहां-कहां रेत माफियाओं द्वारा कानून को अपने हाथ में लिया गया तथा माफियाओं के विरूद्ध क्‍या-क्‍या अपराध पंजीबद्ध किये गये? जिलेवार जानकारी उपलब्‍ध करावें। (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में उक्‍त घटनाओं में अभी तक जिन अपराधियों को गिरफ्तार किया है? क्‍या उनके चालान न्‍यायालय में पेश किये गये? यदि नहीं, तो कारण बतावें?

खनिज साधन मंत्री ( श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ) : (क) जी नहीं। ग्‍वालियर/चंबल संभाग एवं अन्‍य संभागों में निविदा के माध्‍यम से सफल निविदाकार को खदान संचालन की अनुमति प्रदाय की जा चुकी है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ख) प्रश्नांश (क) के उत्‍तर अनुसार सभी संभाग में सफल निविदाकार कार्य कर रहे हैं। रेत माफिया जैसी स्थिति नहीं है। (ग) प्रश्‍नांश (ख) के उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता है।

श्री आरिफ अकील -- अध्यक्ष महोदय मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि आपने जवाब दिया है हमने पढ़ा है. अभी भी मौका है उसमें संशोधन करने के लिए क्या उसमें कोई संशोधन करेंगे.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, सदस्य बहुत वरिष्ठ हैं उन्होंने माफिया शब्द का उपयोग करके प्रश्न लगाया है. हमारे सभी सफल निविदाकार हैं जो आये हैं माफिया वाली कोई बात नहीं है.

अध्यक्ष महोदय -- वह शब्द हटाकर कोई दूसरा पूछ लीजिए.

श्री आरिफ अकील -- अध्यक्ष महोदय माफिया तो इतना सुनने को मिल रहा है कि गड़ा देंगे, 10 - 15 फीट गड़ा देंगे, गड्डे में दफन कर देंगे और पनपने नहीं देंगे. माफिया की श्रेणी तो इस तरह से आने लगी है. मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से सीधा पूछना चाहता हूं कि धौलपुर राजस्थान के आईजी साहब ने भिण्ड के एसपी साहब को पत्र लिखा है कि अवैध उत्खनन हो रहा है जिससे हमारे यहां भी ट्रैफिक में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है. उसके कारण आये दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं उस पर विचार करें. जब उन्होंने नहीं किया है तो दूसरा पत्र आई जी को लिखा, जब आईजी को पत्र लिखा तो भिण्ड के एसपी 300 जवानों के साथ में उस क्षेत्र में गये और वहां पर अवैध उत्खनन रोकने की कोशिश की. मेरा प्रश्न यह है कि यह बात सही है या नहीं.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह -- अध्यक्ष महोदय जहां तक यह आईजी के पत्र व्यवहार की बात है तो यह गृह विभाग का मामला है. यह माइनिंग विभाग का मामला नहीं है. यह तो गृह विभाग ही बता सकता है कि कौन सा पत्राचार हुआ है.

श्री आरिफ अकील -- अध्यक्ष महोदय गृह विभाग जवाब देगा. मेरी जानकारी के अनुसार तो सरकार की मिली जुली जिम्मेदारी होती है. यह ही परंपरा चली आ रही है कि एक भी मंत्री अगर बोलते हैं तो वह सरकार का जवाब माना जाता है.

अध्यक्ष महोदय -- खनिज वाला आप कोई सवाल पूछ लें.

श्री आरिफ अकील -- मैं यह पूछना चाहता हूं कि अभी भिण्ड जिले में और आसपास के दूसरे जिलों में कितनी पनडुब्बियां जब्त की हैं, जो कि अवैध उत्खनन में संलग्न थीं.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय सदस्य ने जो प्रश्न किया है वह दो संभागों को लेकर है ग्वालियर और चंबल संभाग,

डॉ गोविन्द सिंह -- अभी केवल भिण्ड का नाम लिया है.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह - मैं भिण्ड का अलग से बता देता हूं.

श्री आरिफ अकील -- नहीं. मेरा प्रश्न तो पूरा है. मैंने उसके अलावा दूसरे जिलों का भी पूछा है. आप एक बार प्रश्न पढ़ लें.

अध्यक्ष महोदय -- अभी आपने भिण्ड का पूछा है.

डॉ नरोत्तम मिश्र -- गोविन्द सिंह जी तो जब उनकी सरकार थी तब भी दुखड़ा रो चुके थे कि कोई नहीं सुन रहा है. हम अवैध उत्खनन नहीं रूकवा पा रहे हैं, ऐसा उन्होंने भिण्ड के बारे में पत्र लिखा था.

श्री आरिफ अकील -- अब आप रूकवा लें.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह -- अध्यक्ष महोदय वरिष्ठ सदस्य ने जो बात कही हैं जहां तक ग्वालियर और चंबल संभाग की बात है तो इन दोनों संभागों में जो प्रकरण दर्ज हुए हैं वह 2369 हैं जिसमें हमने जेसीबी पोकलेन जो आप कह रहे हैं जब्त करने की बात है वह करीब 2111 हमने पनडुब्बियां भी जब्त की है उसमें पोकलेन भी हैं कई वाहन भी हैं जो हमने जब्त किये हैं. इसमें दोनों संभाग के हमने 2010 प्रकरण निराकृत भी किये हैं. दोनों संभाग में हमने 382 एफआईआर भी की हैं जिसमें से 56 के चालान भी हमने प्रस्तुत कर दिये हैं जो कोर्ट चले गये हैं. यह दोनों संभागों का निचोड़ है अलग अलग अगर कहेंगे तो वह भी उपलब्ध करा देंगे.

आरिफ अकील -- मैंने पनडुब्बियों के बारे में पूछा था.

अध्यक्ष महोदय -- नहीं, हो गया है हम आगे बढ़ गये हैं आपने जानकारी चाही थी वह दे दी हैं.

आरिफ अकील -- मैंने पनडुब्बियों के बारे में पूछा सीधा सीधी पूछा है.

अध्यक्ष महोदय -- वह उन्होने जवाब दे दिया है सबका बता दिया है.

श्री आरिफ अकील -- मैंने केवल पनडुब्बियों के बारे में पूछा है.

अध्यक्ष महोदय -- सबका उन्होंने बता दिया है.

श्री आरिफ अकील -- उन्होंने पनडुब्बियों के साथ में सबको मिला दिया है. मैं तो केवल पनडुब्बियों के बारे में पूछ रहा हूं कि कितनी पनडुब्बियां जब्त हुई और उस पर क्या कार्यवाही हुई है.

अध्यक्ष महोदय -- मंत्री जी वह केवल पनडुब्बी के बारे में पूछ रहे हैं वह बता दें.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह -- अध्यक्ष महोदय मैंने बताया है कि 2311 प्रकरण दोनों संभाग में जब्ती के हुए हैं जहां तक भिण्ड की बात है तो वहां पर वाहन जेसीबी या जो पनडुब्बी वगैरह जब्त हुई हैं वह दोनों में 40 कुल वाहन है उसमें जेसीबी, पनडुब्बी और भी जो वाहन हैं वह जब्त किये गये हैं. इस तरह से भिण्ड में 40 प्रकरण हुए हैं.

श्री आरिफ अकील -- अध्यक्ष महोदय एक प्रश्न....(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय -- नहीं आपका हो गया है गोविन्द सिंह जी पूछना चाहते हैं.

श्री आरिफ अकील -- पहले मैं अपना पूछ लूं फिर आप गोविंद सिंह जी को अनुमति देना हो तो देना नहीं तो मत देना...(व्यवधान)..अध्यक्ष महोदय आपके माध्यम से मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि अवैध उत्खनन की आपके पास में कोई शिकायत नहीं है. कुछ दिन पहले आपके एक मंत्री जी का स्टेटमेंट पढ़ने को मिला था उनका कहना था कि कुछ दिन पहले आपके एक मंत्री जी का स्‍टेटमेंट पढ़ने को मिला था, उन्‍होंने यह कहा था कि मैं आईजी से कह चुका हूं कि अवैध उत्‍खनन रोको, लेकिन अवैध उत्‍खनन नहीं रोका जा रहा. माननीय मंत्री जी, क्‍या वह आपके संज्ञान में है और उस पर आपने कोई कार्यवाही की है ?

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा यह कहना है कि हम लगातार कार्यवाही कर रहे हैं और जो अभी मैंने अवैध उत्‍खन्‍न की कार्यवाही के बारे में ही बताया, जो फिगर मैंने अभी पढ़ा है.

अध्‍यक्ष महोदय -- गोविंद सिंह जी.

श्री आरिफ अकील -- अध्‍यक्ष महोदय, आखिरी प्रश्‍न है, अनुमति दीजिये. आपसे मैंने क्‍लीयर नाम लेकर पूछा था, अब एक और नाम लेकर आपके माध्‍यम से पूछना चाहता हूं.

अध्‍यक्ष महोदय -- वे आपको सूची दे रहे हैं न.

श्री आरिफ अकील -- मैं आपके माध्‍यम से पूछना चाहता हूं, उधर देख भी नहीं रहा, देखूंगा तो आप नाराज़ हो जाएंगे कि उधर क्‍यों देख रहे हो हमें देखो.

अध्‍यक्ष महोदय -- बोलना इधर है, देखना उधर है.

श्री आरिफ अकील -- जी, ऐसा कर लेंगे. अब मैं आपके माध्‍यम से पूछना चाहता हूं कि फॉरेस्‍ट डिपार्टमेंट के लोगों ने इंदौर में कोई ऐसी कम्‍पलेंट की थी कि कोई मंत्री आये और अवैध उत्‍खनन की गाडि़यों को छुड़ाकर ले गये ?

अध्‍यक्ष महोदय -- प्रश्‍न में है क्‍या ?

श्री आरिफ अकील -- हां, जवाब में आया है कि अवैध उत्‍खनन नहीं हो रहा है, उस जवाब में सब आता है.

अध्‍यक्ष महोदय -- वह नहीं आता है.

श्री आरिफ अकील -- क्‍यों नहीं आता ? अवैध उत्‍खनन में आएगा कि नहीं आएगा ?

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं आएगा. गोविंद सिंह जी.

श्री आरिफ अकील -- अध्‍यक्ष महोदय, अगर यह परम्‍परा इन्‍होंने शुरू की यह जो कहेंगे वही आसंदी कहेगी तो हम लोगों का बोलना बेकार है, हम इधर ही देखकर बात कर लिया करें.

अध्‍यक्ष महोदय -- आरिफ अकील जी, आप भी मंत्री रहे हैं.

श्री आरिफ अकील -- अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश के सारे अखबारों में घटना छपी है आप कहें तो मैं आपको भी दिखा दूं.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं-नहीं अखबार से नहीं होगा. माननीय गोविंद सिंह जी.

श्री आरिफ अकील -- अध्‍यक्ष महोदय, एक आखिरी प्रश्‍न पूछ लेने दीजिये.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, बहुत हो गया. गोविंद सिंह जी प्रश्‍न करेंगे.

श्री आरिफ अकील -- फॉरेस्‍ट के लोगों ने शिकायत की थी या नहीं की थी इतना आ जाय.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- लंबी बीमारी के बाद आए हैं. इनके शतायु होने की कामना करें और गोविंद सिंह जी को अधिकृत कर दें. बहुत लंबे बीमार थे, शतायु होने की कामना कर रहे हैं, सीएम खुद बैठकर गये हैं.

श्री आरिफ अकील -- अध्‍यक्ष महोदय, कृपा करिये आखिरी प्रश्‍न पूछ लेने दीजिये. आप इनसे बाद में मोहब्‍बत कर लेना, लेकिन पहले मुझसे कर लीजिये.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, उनको तो समय दे दिया है.

श्री आरिफ अकील -- उसके बाद मुझे समय देंगे ?

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- आपसे कोई मोहब्‍बत करेगा ?

श्री आरिफ अकील -- आपके अलावा कोई नहीं है.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- आज कल घर पर भी प्रश्‍न वाचक रिमार्क लग जाता है.

डॉ. गोविंद सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं, क्‍या आपके विभाग का पोकलेन मशीनें, पनडुब्बियों के माध्‍यम से बीच नदी में रेत का अवैध उत्‍खनन या खनन कराने का कोई निर्देश है ? यदि नहीं, तो भिण्‍ड जिले में अवैध रेत उत्‍खनन में पनडुब्बियां, पोकलेन मशीनें, जेसीबी मशीनें पकड़ी गईं क्‍या वह जप्‍त की गईं हैं ? और क्‍या उनके मालिकों के विरुद्ध भी एफआईआर दर्ज की गई हैं, जैसा माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने घोषणा की है कि हम ड्रायवर के साथ उनके मालिकों को भी अपराध में चोरी का मुल्‍जि़म बनाएंगे, तो क्‍या आपने भिण्‍ड जिले में और आसपास के जिले दतिया, इसके बाद सबसे ज्‍यादा अवैध उत्‍खनन दतिया में हो रहा है...

अध्‍यक्ष महोदय -- आपने केवल भिण्‍ड के लिये कहा था.

डॉ. गोविंद सिंह -- उसके बाद डबरा इनमें क्‍या आप जो निर्देश है इसको जारी करके सख्‍ती से कार्यवाही करेंगे ?

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, जहां तक भिण्‍ड की बात है, तो मैं बता चुका हूं कि 40 प्रकरणों में जप्‍ती हुई है. चाहे वह मशीन हों, चाहे अवैध वाहन हों उन सबको जप्‍त करके हमने राजसात भी किये हैं. इसमें हमने 26 लाख रुपये से ऊपर का अर्थदण्‍ड भी अधिरोपित किया है. जहां तक दतिया की बात कर रहे हैं वहां पर भी हमने 8 वाहनों पर कार्यवाही की है. पोकलेन मशीन जप्‍त की हैं और इसलिये मैंने अलग-अलग संभाग वाईज़ चूंकि संभाग का प्रश्‍न था तो मैंने जिले वाईज़ उसको बताया है.

डॉ. गोविंद सिंह -- माननीय मंत्री जी हम यह सब नहीं जानना चाहते, हम केवल इतना जानना चाहते हैं कि जैसा माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने निर्देश दिया है मालिक पर एफआईआर करेंगे समाचार पत्र और मीडिया में पढ़ा है, क्‍या उन पर चोरी की एफआईआर और गिरफ्तार करने की कार्यवाही की गई है ? नहीं की गईं तो क्‍या प्रकरणों में उनको अपराधी बनाया जाएगा और वाहन राजसात किये जाएंगे ? अगर यह हो जाता है तो अपने आप अवैध उत्‍खनन बंद हो जाएगा.

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, जब से माननीय मुख्‍यमंत्री जी के निर्देश हुये हैं तब से बड़ी कड़ाई हुई है और निरंतर हमारी रॉयल्‍टी बढ़ रही है और हमारा अवैध उत्‍खनन बंद हो रहा है. जो भी आपके निविदाकार हैं सब पूर्व के आये हुये हैं, इनके एग्रीमेंट पहले हुये हैं. और इसलिए जहां तक एफआईआर की बात है तो दोनों संभागों में कुल मिलाकर 382 एफआईआर हुई हैं और करीब 56 लोगों का हमने चालान पेश किया है. जहां तक गिरफ्तारी की बात है, गिरफ्तारी पुलिस डिपार्टमेंट करेगा, लेकिन दोनों संभागों की एफआईआर हमने करवाई हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- मंत्री जी, नहीं, डॉ. गोविन्‍द सिंह का प्रश्‍न दूसरा है, उनका प्रश्‍न यह है कि क्‍या उनके मालिकों के खिलाफ भी कार्यवाही होगी ?

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह -- निश्‍चित रूप से, जो वहां पर वाहन पकड़े जाते हैं, उनके मालिकों के खिलाफ ही एफआईआर होती है.

अध्‍यक्ष महोदय -- बस हो गया. ..(व्‍यवधान)..

श्री आरिफ अकील -- अध्‍यक्ष महोदय, मुझे आखिरी प्रश्‍न पूछना है. ..(व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय -- मैंने संजीव सिंह जी को समय दिया है. उनका प्रश्‍न हो जाने दीजिए. मदद करिए. एक प्रश्‍न पूछने देंगे आपको, अभी आप बैठ जाएं. ..(व्‍यवधान)..

श्री संजीव सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने भी पूछा था, उसमें मुझे जवाब मिला है, अभी बात सिर्फ पनडुब्‍बियों की बात हो रही हैं कि अभी तक कितनी पनडुब्‍बियां पकड़ी गईं, इसका स्‍पष्‍ट जवाब माननीय मंत्री जी ने अभी तक नहीं दिया है कि कितनी पनडुब्‍बियां पकड़ी गई हैं और महत्‍वपूर्ण बात यह है कि जिस खदान पर पनडुब्‍बी पकड़ी गई, उसमें किसके ऊपर कार्यवाही की गई, कौन उस पनडुब्‍बी को चला रहा था, कौन उस खदान का संचालन कर रहा था, इस पर अभी तक स्‍पष्‍ट बात माननीय मंत्री जी के द्वारा नहीं की गई है. दूसरी बात, जो आपने राजसात करने की बात की है, मैंने एक प्रश्‍न पूछा था, माननीय मंत्री जी का उसमें जवाब आया कि मशीन पकड़ी गई है और मशीन के ऊपर जुर्माने की कार्यवाही जारी है. अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी से पूछना चाहता हूँ कि ट्रैक्‍टरों को आप जब्‍त करते हैं...

अध्‍यक्ष महोदय -- पूरक प्रश्‍न की इजाजत दे रहा हूँ तो इतना मत पूछिए.

श्री संजीव सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट, आप ट्रैक्‍टरों को जब्‍त करते हैं तो उनको तत्‍काल राजसात करने की कार्यवाही कर देते हैं और मशीन को आपने जब्‍त किया और अभी तक आपने राजसात करने की कार्यवाही नहीं की. (XXX) मुझे इस पर स्‍पष्‍ट जवाब चाहिए.

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, यह कहना सरासर गलत है कि संरक्षण दे रहे हैं. ये जो भी निविदाकार आए थे, सब इन्‍हीं के समय पर आए थे. जो माफिया वाली बात कही जा रही है, उन पर सख्‍ती से कार्यवाही हो रही है.

श्री संजीव सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अगर इनके समय आए थे तो क्‍या उनको कुछ भी करने की छूट है ? अध्‍यक्ष महोदय, ये कौन सी बात हुई कि इनके समय आए थे, अगर इनके समय आए थे तो क्‍या उनको कुछ भी करने की छूट है. हम कहते हैं कि उन पर सख्‍त से सख्‍त कार्यवाही की जाए और जो अवैध उत्‍खनन कर रहा है, जो माफिया वहां से रेत निकाल रहा है, पनडुब्‍बी चलाने का कार्य कर रहा है, उसके ऊपर कार्यवाही होनी चाहिए. उसके ऊपर जुर्माना होना चाहिए. उसको जेल में डाला जाना चाहिए. लेकिन कार्यवाही किस पर करते हैं, किसी ट्रैक्‍टर चलाने वाले पर कार्यवाही करते हैं, जब आप रेत का अवैध उत्‍खनन करके देंगे तो ट्रैक्‍टर वाला भरेगा, आप उसको पकड़ने का काम करते हैं. अध्‍यक्ष महोदय, आप भिंड में चले जाइये, बहुत महत्‍वपूर्ण बात है, नेशनल हाईवे है, खनिज विभाग के जो कंपनी के गुर्गे हैं, बंदूकें लेकर एनएच पर खड़े हैं. ..(व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय -- हो गया, हो गया, सबका महत्‍वपूर्ण है, अब बैठ जाइये. ..(व्‍यवधान)..

श्री संजीव सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से यह चाहता हूँ कि माननीय मंत्री जी स्‍पष्‍ट उत्‍तर दे दें. ..(व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय -- हो गया, अब आप बैठ जाइये. ..(व्‍यवधान)..

श्री आरिफ अकील -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से प्रश्‍न पूछना चाहता हूँ.. ..(व्‍यवधान)..

एक माननीय सदस्‍य -- जिला शिवपुरी में करैरा में अवैध उत्‍खनन धड़ल्‍ले से हो रहा है. ..(व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय (बहुत से माननीय सदस्‍यों के खड़े होने पर) -- सब लोग बैठ जाइये, रूक जाइये, बात तो करने दीजिए. मैं बात कर लूँ, फिर बताता हूँ ..(व्‍यवधान).. मंत्री जी बैठ जाइये. ..(व्‍यवधान)..मंत्री जी, आप सुन लीजिए, आरिफ अकील जी अभी एक सवाल करेंगे, मंत्री जी, दोनों सवालों के जवाब आप दे दीजिएगा. आरिफ अकील जी, पर अब आप घुमा-फिराकर सवाल मत कीजिएगा, सीधा सवाल करिए. ..(व्‍यवधान)..

ऊर्जा मंत्री (श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर) -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक बात कहना चाहूँगा, इनसे पहले.. ..(व्‍यवधान)..

डॉ. गोविन्‍द सिंह -- आप तो मंत्री हैं, (XXX), इस्‍तीफा दे दो. ..(व्‍यवधान)..

श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर -- आदरणीय सुन लीजिए, मैं कुछ गलत नहीं कह रहा .. ..(व्‍यवधान)..

श्री आरिफ अकील -- अध्‍यक्ष जी, आपने इनको परमिशन दी ? ..(व्‍यवधान)..

श्री कुणाल चौधरी -- अवैध उत्‍खनन में संरक्षण आप ही दे रहे हैं. अवैध खनन में आप क्‍यों खड़े हो जाते हैं. ..(व्‍यवधान)..

श्री प्रियव्रत सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या यह उचित है कि कोई मंत्री खड़ा हो.. ..(व्‍यवधान)..

श्री आरिफ अकील -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं बोलूँ ?

अध्‍यक्ष महोदय -- हां, बोलिए. आप घुमाकर मत सवाल पूछिए, सीधा सवाल पूछिए. ..(व्‍यवधान)..

श्री आरिफ अकील -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सीधा-सीधा सवाल मंत्री जी से पूछ रहा हूँ कि भैया, जो मंत्री दंबगाई से गाड़ी छुड़ाकर ले गए, क्‍या उनके खिलाफ आपने अभी तक एफआईआर की है ?

अध्‍यक्ष महोदय -- क्‍या यह इसमें है ?

श्री आरिफ अकील -- हां, इसमें है. ..(व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, इसमें नहीं है.

श्री आरिफ अकील -- अवैध उत्‍खनन .. ..(व्‍यवधान)..

डॉ.नरोत्‍तम मिश्र -- अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या इसका जवाब दे दूं?..(व्‍यवधान)..

श्री आरिफ अकील -- अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या आप जवाब देंगे, जब आपसे संबंधित होगा, तब आप जवाब दीजिएगा.

अध्‍यक्ष महोदय -- आरिफ जी, आप बहुत वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं.

श्री आरिफ अकील -- जब आपसे संबधित होगा, तब आप जवाब दीजिएगा. यह अवैध उत्‍खनन पूरे मध्‍यप्रदेश को बरबाद कर रहा है.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, हो गया.

श्री आरिफ अकील -- अध्‍यक्ष महोदय, और उसमें एक पक्ष कह रहा है कार्यवाही करो, एक उसको रोक रहा है. उसमें कुछ न कुछ तो निष्‍पक्ष होना चाहिए. आप संरक्षक हो, यदि आप मदद नहीं करेंगे तो हमें क्‍या मदद मिलेगी...(व्‍यवधान)..यह कुछ नहीं होते कहने वाले, आप जवाब दिलवाइए. केवल आप जवाब दिलवा दीजिए...(व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय -- कृपया आप बैठ जाइए. माननीय मंत्री जी, संजीव सिंह ने जो कहा है, वह मिलाकर आप जवाब दे दीजिए.

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, क्‍योंकि यह विषय पता नहीं इंदौर का पर्टीकुलर कोई अलग विषय हमें बता रहे हैं उसे लेकर उसमें हमारा कोई जवाब नहीं है और न उससे रिलेटेड हमारा कोई प्रश्‍न है. यदि आप अलग से बात करेंगे तो हम उसकी जानकारी लेकर संबंधित को उपलब्‍ध करा देंगे...(व्‍यवधान)..

11.46 बजे बहिर्गमन

इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यगण द्वारा सदन से बहिर्गमन

डॉ.गोविन्‍द सिंह (लहार)-- सरकार के जवाब से हम संतुष्‍ट नहीं हैं. ...(व्‍यवधान)...लगातार अवैध उत्‍खनन के मामले को दबाया जा रहा है ..(व्‍यवधान)...हमारी पार्टी बहिर्गमन करती है... ..(व्‍यवधान)...

 

 

(डॉ.गोविन्‍द सिंह, सदस्‍य के नेतृत्‍व में इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यगण द्वारा शासन के उत्‍तर से असंतुष्‍ट होकर सदन से बहिर्गमन किया गया)

...(व्‍यवधान)...

11.47 बजे तारांकित प्रश्‍नोत्‍तर के मौखिक उत्‍तर (क्रमश:)

अध्‍यक्ष महोदय -- प्रश्‍न क्रमांक 6, प्रश्‍न क्रमांक 7, प्रश्‍न क्रमांक 8, प्रश्‍न क्रमांक 9 श्री सूबेदार सिंह सिकरवार रजौधा.

प्रश्‍न क्रमांक-- 7 (अनुपस्थित),

श्री सूबेदार सिंह सिकरवार रजौधा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने बाजरा खरीदी पर प्रश्‍न लगाया है मैंने क्रम में ही पूछा है. समर्थन मूल्‍य बाजरा खरीदी खरीफ वर्ष 2020-21 में मुरैना जिले में ऐसे कितने किसान हैं जिन्‍हें बाजरा विक्रय कर पावती प्राप्‍त करने के उपरांत भी आज दिनांक तक भुगतान नहीं हुआ है.कारणों सहित खरीद केन्‍द्रवार भुगतान हेतु कुल राशि का विवरण देवें. दूसरा प्रश्‍न मैंने यह पूछा है कि क्‍या किसानों द्वारा फसल तुलाई के समय पंजीयन सत्‍यापित थे, किन्‍तु तुलाई उपरांत संबंधितों द्वारा किसानों से अवैध लाभ कमाने के उद्देश्‍य से असत्‍यापित कर दिये गये.

अध्‍यक्ष महोदय -- यह उत्‍तर आया है, आप प्रश्‍न पूछिये.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह पूछना चाहता हॅूं कि बाजरा खरीदी में सबसे पहले जो लक्ष्‍य था, उससे कई गुना खरीदी हमारे मुरैना जिले में हुई है..(व्‍यवधान)...

श्री कुणाल चौधरी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आठवें नंबर का प्रश्‍न है मैं यही हॅूं. यह तो गलत बात है. अध्‍यक्ष जी, हमारा प्रश्‍न है हम बैठे हुए हैं. ..(व्‍यवधान)... यह अवैध उत्‍खनन के माफिया को संरक्षण देने के लिए प्रश्‍नों को नहीं पूछने दिया जाएगा. माफिया का राज चलेगा. ..(व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय -- मैंने आपका नाम पुकारा था.

श्री कुणाल चौधरी -- मेरा आठवें नंबर का प्रश्‍न है. ...(व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय -- आप खडे़ नहीं हुए. मैंने प्रश्‍न पूछा. मैंने आपका नाम पुकारा. ...(व्‍यवधान)..

श्री कुणाल चौधरी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यहीं हॅूं...(व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय -- आप साथ में बाहर गए थे. ...(व्‍यवधान)..

श्री विश्‍वास सारंग -- अध्‍यक्ष महोदय, यह बहिर्गमन करके गए, आपने इनका नाम पुकारा था और यह कह रहे हैं कि सदन में मौजूद थे...(व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय -- विश्‍वास जी, आप बैठ जाइए. ...(व्‍यवधान)...

श्री प्रियव्रत सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह सदन में मौजूद थे...(व्‍यवधान)...

डॉ.मोहन यादव -- अध्‍यक्ष महोदय, आसंदी पर असत्‍य आरोप लगाना, यह गलत बात है....(व्‍यवधान).. और यह हमारे अच्‍छे सदस्‍य का प्रश्‍न है इस चक्‍कर में उनका समय खत्‍म करना चाह रहे हैं. पहले ही बहुत लंबा समय चला गया है...(व्‍यवधान)...

श्री कुणाल चौधरी -- अध्‍यक्ष जी,..(व्‍यवधान)..

श्री सूबेदार सिंह सिकरवार रजौधा -- अध्‍यक्ष जी, मेरा प्रश्‍न पूरा हो जाए. ..(व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय -- सिकरवार जी, एक सेकेंड आप बैठ जाइए.

श्री कुणाल चौधरी -- अध्‍यक्ष जी, मेरा प्रश्‍न है कि..(व्‍यवधान)...

श्री विश्‍वास सारंग -- अध्‍यक्ष महोदय, यह व्‍यवस्‍था में है कि 25 प्रश्‍न होने के पश्‍चात् जो शेष बचते हैं उनका नाम बाद में पुकारा जाता है..(व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय -- ठीक है, आप बैठ जाइए. सवाल यह है कि आप तय करें कि आप इनके साथ बहिर्गमन में गए या नहीं गए. दो चीज तय करिए ना, आप गए कि नहीं गए? आप यहीं थे, यह तय करिए.

डॉ.गोविन्द सिंह-- माननीय अध्यक्ष जी, आप वहाँ गेट से वापस आ गए.

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, नहीं, तब तक हम प्रश्न में आगे बढ़ गए. गोविन्द सिंह जी, मदद कीजिए. तब तक प्रश्न में आगे बढ़ गए,..(व्यवधान)..नहीं, नहीं, मैं समय देने को तैयार हूँ, पर तय यह हो जाए कि वह बहिर्गमन में बाहर गए कि नहीं गए?

श्री जितु पटवारी-- जिसका प्रश्न था वह नहीं गया. बाकी सब गए.

अध्यक्ष महोदय-- वह नहीं गए ना? बहिर्गमन में नहीं गए आप. बैठ जाइये. प्रश्न क्रमांक 8 कुणाल चौधरी जी. यह भी आ जाए कि वह कह रहे हैं कि बहिर्गमन में नहीं गए...(व्यवधान)..

श्री कुणाल चौधरी-- माननीय अध्यक्ष महोदय...(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- नहीं आप तो गए, प्रश्न आएगा तो फिर कहोगे कि नहीं गए, कोई नहीं गया. अभी आप बैठ जाइये. उनका प्रश्न आने दीजिए. ..(व्यवधान)..

जिला सहकारी बैंकों के बकाया ऋण की वसूली

[सहकारिता]

8. ( *क्र. 3153 ) श्री कुणाल चौधरी : क्या सहकारिता मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) शाजापुर जिले में कितने किसानों पर प्रश्‍न दिनांक तक जिला सहकारी बैंकों का ऋण बकाया है? विधानसभा क्षेत्रवार किसानों की संख्‍या एवं राशि बतायें। (ख) जिला सहकारी बैंकों का ऋण जमा नहीं करने पर विभाग ने 01 अप्रैल, 2020 से प्रश्‍न दिनांक तक कर्ज वसूली को लेकर क्‍या-क्‍या कार्यवाही की है? (ग) जिला सहकारी बैंकों में ऋण जमा नहीं करने पर कितने किसानों के खाते एन.पी.ए. हो गये हैं? संख्‍या बतावें। (घ) शाजापुर जिले में कुल कितने किसानों की भूमि जिला सहकारी बैंकों के पास बंधक है? विधानसभा क्षेत्रवार संख्‍या बतायें।

सहकारिता मंत्री ( डॉ. अरविंद सिंह भदौरिया ) : (क) जिला सहकारी केन्‍द्रीय बैंक मर्या. शाजापुर, प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्थाओं एवं जिला सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक शाजापुर (परिसमापनाधीन) की जानकारी क्रमश: संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र 01, 02 एवं 03 अनुसार है। (ख) उत्तरांश (क) में उल्लेखित संस्थाओं की जानकारी क्रमश: संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र 01, 02 एवं 03 अनुसार है। (ग) उत्तरांश (क) में उल्लेखित संस्थाओं की जानकारी क्रमश: संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र 01, 02 एवं 03 अनुसार है। (घ) उत्तरांश (क) में उल्लेखित संस्थाओं की जानकारी क्रमश: संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र 01, 02 एवं 03 अनुसार है।

परिशिष्ट - "एक"

 

श्री कुणाल चौधरी-- अध्यक्ष महोदय, मेरे इस प्रश्न से किसान विरोधी सरकार का आईना दिख रहा है और जो कमलनाथ जी की कर्ज माफी की योजना को रोक कर इस सरकार ने किसानों की पीठ में छुरा घोंपने का काम किया है. उसी का परिणाम है कि जो सूची दी गई है कि किस प्रकार से किसानों के साथ अत्याचार यह सरकार कर रही है. मेरा पहला प्रश्न मंत्री जी से यह है कि सूची में सीमान्त तथा लघु कृषक कितने हैं और इस सूची में अनुसूचित जनजाति और जाति के कृषकों की संख्या कितनी है?

डॉ अरविन्द भदौरिया-- माननीय अध्यक्ष महोदय, पहले तो माननीय सदस्य ने यहाँ पर असत्य बोला, ये यहाँ पर बहिर्गमन में निकल गए थे. आपने नाम पुकारा.....

श्री कुणाल चौधरी-- माननीय अध्यक्ष जी, आप नाम पुकारते जब मैं आ जाता.

डॉ अरविन्द भदौरिया-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा कहना है कि ये पहले तो इस सदन से माफी मांगे....

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, मैंने अनुमति दे दी है.

डॉ अरविन्द भदौरिया-- नहीं तो वीडियो फुटेज निकाल कर देख लें. ये सदन से बाहर चले गए थे और इस सदन में असत्य बोलना, सत्य के जो परे है, वह ठीक नहीं है और जीतू भाई जैसे विद्वान व्यक्ति.....

श्री कुणाल चौधरी-- अध्यक्ष महोदय, यह प्रश्न का जवाब नहीं है. (XXX)

डॉ अरविन्द भदौरिया-- मैं सब जवाब दूंगा. आप जो पूछोगे मैं सब जवाब दूंगा.

श्री कुणाल चौधरी-- (XXX)

चिकित्सा शिक्षा मंत्री(श्री विश्वास सारंग)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह बात सही है कि ये लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर है, मैं अध्यक्ष जी की अनुमति से खड़ा हुआ हूँ, आपको बैठना चाहिए. अध्यक्ष महोदय, यह लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर है और हम यहाँ पर जो भी अपना आचरण करते हैं वह पूरा देश और प्रदेश देखता है. ..(व्यवधान)..

श्री कुणाल चौधरी-- माफिया को संरक्षण देना बंद करिए.

डॉ गोविन्द सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जब तक इनका भाषण चलेगा तब तक तो प्रश्न काल ही खत्म हो जाएगा. ..(व्यवधान)..

श्री कुणाल चौधरी-- अध्यक्ष महोदय, यह साजिश चल रही है. ..(व्यवधान)..

डॉ गोविन्द सिंह-- मैंने स्वीकार किया था कि वहाँ तक गए गेट से लौटकर वापस आए. ..(व्यवधान)..

श्री विश्वास सारंग-- काँग्रेस के विधायक द्वारा असत्य बोला गया यह आपत्तिजनक है. सरकार हर प्रश्न का जवाब देने को तैयार है...(व्यवधान)..हम सक्षम हैं पर जिस प्रकार का कृत्य इन्होंने किया, वह निन्दनीय है. ..(व्यवधान)..

श्री कुणाल चौधरी-- (XXX)..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- सब बैठ जाइये. कुणाल चौधरी जी को मैंने अनुमति दी है. सारी परिस्थितियों के बाद मैंने उनको अनुमति दी है. मैंने उनको प्रश्न पूछने की अनुमति दे दी है..(व्यवधान)..

श्री विश्वास सारंग-- पर माननीय अध्यक्ष महोदय, इस सदन में कहीं न कहीं सदस्य को आसन्दी से ..(व्यवधान)..हम तैयार हैं, अध्यक्ष महोदय, ये सदस्य आसन्दी से माफी मांगे. हम तैयार हैं. ..(व्यवधान)..(अनेक सदस्य एवं मंत्रीगण एक साथ खड़े होकर एक साथ अपनी अपनी बातें कहने लगे)

अध्यक्ष महोदय-- विधान सभा की कार्यवाही 5 मिनट के लिए स्थगित.

 

(विधान सभा की कार्यवाही 11.55 बजे 5 मिनट के लिए स्थगित की गई)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.05 बजे

{माननीय अध्यक्ष महोदय (श्री गिरीश गौतम) पीठासीन हुए.}

अध्यक्षीय व्यवस्था

आसंदी से दी गई व्यवस्था के पालन के संबंध में

अध्यक्ष महोदय -- माननीय सदस्यों से अनुरोध है, माननीय मंत्रियों से भी अनुरोध है कि यदि आसंदी से कोई व्यवस्था दी गई है तो कृपया उसको स्वीकार करें, उसमें किसी तरह के हस्तक्षेप या टिप्पणी की आवश्यकता नहीं है.

श्री कुणाल चौधरी -- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे आसंदी से व्यवस्था दी थी. मेरा नाम पुकारा था. इसके बाद मंत्री दबाव बना रहे हैं, क्या हमारे अधिकारों को संरक्षण नहीं मिलेगा. हमारे अधिकार सदन में संरक्षित नहीं रहेंगे क्या. यह मंत्री दबाव बना रहे हैं. (व्यवधान)

चिकित्सा शिक्षा मंत्री ( श्री विश्वास सारंग ) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने जो निर्णय लिया है वह शिरोधार्य है. आप जो कहेंगे उसका अक्षरश: पालन होगा.

डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ -- यह व्यवस्था पर व्यवस्था दे रहे हैं. आसंदी का अपमान कर रहे हैं. जब आपने निर्णय दे दिया है फिर भी बोल रहे हैं. (व्यवधान)

श्री सज्जन सिंह वर्मा -- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह आसंदी का अपमान कर रहे हैं. बीच में उठकर किसी मंत्री को बोलना चाहिए क्या, यह आसंदी का अपमान कर रहे हैं. यह गलत तरीका है. (व्यवधान)

श्री विश्वास सारंग -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जो किया है वह विशेषाधिकार हनन की परिधि में आता है. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय -- आप सभी बैठ जाइए.

 

 

 

12.06 बजे स्वागत उल्लेख

डॉ. के.पी.यादव एवं श्री सुधीर गुप्ता, सांसद का अध्यक्षीय दीर्घा में स्वागत

अध्यक्ष महोदय -- आज सदन की दीर्घा में माननीय डॉ. के.पी. यादव जी एवं श्री सुधीर गुप्ता जी, सांसद उपस्थित हैं. सदन की ओर से उनका स्वागत है.

श्री कुणाल चौधरी -- माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे हक का क्या होगा, हमारे अधिकारों का क्या हुआ जो हमने गरीब किसानों के संबंध में हमने प्रश्न पूछा था.

12.07 बजे नियम 267-क के अधीन विषय

अध्यक्ष महोदय --

 

 

12.08 बजे पत्रों का पटल पर रखा जाना

(1) संत रविदास म.प्र.हस्‍तशिल्‍प एवं हाथकरघा विकास निगम लिमिटेड, भोपाल का 38 वां वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखा वर्ष 2018-2019

 

कुटीर एवं ग्रामोद्योग मंत्री (श्री गोपाल भार्गव) --

 

(2) (क) मध्‍यप्रदेश वित्‍त निगम के 31 मार्च, 2017 को समाप्‍त हुए वर्ष के लेखों पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक का पृथक् लेखा परीक्षा प्रतिवेदन, तथा

(ख) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का राज्‍य के वित्‍त पर लेखा परीक्षा प्रतिवेदन 31 मार्च, 2019 को समाप्‍त हुए वर्ष के लिए मध्‍यप्रदेश शासन का वर्ष 2020 का प्रतिवेदन संख्‍या-3,

वित्त मंत्री (श्री जगदीश देवड़ा) --

(3) जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्‍वविद्यालय, जबलपुर (म.प्र.) की वैधानिक आडिट रिपोर्ट वर्ष 2017-2018

 

किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री (श्री कमल पटेल ) --

 

(4) मध्‍यप्रदेश पब्लिक हेल्‍थ सर्विसेस कार्पोरेशन लिमिटेड के लेखा परीक्षा प्रतिवेदन वर्ष 2014-2015, वर्ष 2015-2016 एवं वर्ष 2016-2017

 

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री (डॉ. प्रभुराम चौधरी) --

(5) (क) मध्‍यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अंकेक्षित लेखे वित्‍तीय वर्ष 2018-2019,

(ख) मध्‍यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग की अधिसूचना क्रमांक 678 मप्रविनिआ/2020, दिनांक 02 जून, 2020, तथा

(ग) मध्‍यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2019-2020,

 

ऊर्जा मंत्री (श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर) --


 

 

(6) आयुक्‍त, नि:शक्‍तजन, मध्‍यप्रदेश का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2019-2020

 

सामाजिक न्‍याय एवं नि:शक्‍तजन कल्‍याण मंत्री (श्री प्रेमसिंह पटेल)-- अध्‍यक्ष महोदय,

 

 

 

(7) (क) महर्षि महेश योगी वैदिक विश्‍वविद्यालय, कटनी (म.प्र.) का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2019-2020,

(ख) मध्‍यप्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय विनियामक आयोग, भोपाल का वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखा संपरीक्षण प्रतिवेदन वर्ष 2019-2020,

(ग) (i) देवी अहिल्‍या विश्‍वविद्यालय, इन्‍दौर का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2019-2020,

(ii) बरकतउल्‍ला विश्‍वविद्यालय, भोपाल (म.प्र.) का 48 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2019-2020, तथा

(iii) महाराजा छत्रसाल बुन्‍देलखण्‍ड विश्‍वविद्यालय, छतरपुर (म.प्र.) का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2019-2020,

(घ) महर्षि पाणिनि संस्‍कृत एवं वैदिक विश्‍वविद्यालय, उज्‍जैन (म.प्र.) का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2019-2020,

 

 

 

 

 

उच्‍च शिक्षा मंत्री (डॉ. मोहन यादव)-- अध्‍यक्ष महोदय,

 

 

 

(8) एम.पी.स्‍टेट एग्रो इण्‍डस्‍ट्रीज डेव्‍हलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड का 49 वां वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखे वर्ष 2017-2018

उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्‍करण,राज्‍यमंत्री (श्री भारत सिंह कुशवाह)-- अध्‍यक्ष महोदय,

 

(9) मध्‍यप्रदेश मानव अधिकार आयोग का वार्षिक लेखा वर्ष 2016-2017

 

राज्‍यमंत्री सामान्‍य प्रशासन, (श्री इन्‍दर सिंह परमार)-- अध्‍यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12:13 बजे ध्‍यानाकर्षण

 

(1) जबलपुर के केण्ट क्षेत्र में हितग्राहियों को प्रधानमंत्री आवास की दूसरी किश्त की राशि न मिलना

 

श्री अशोक ईश्‍वरदास रोहाणी (जबलपुर केन्‍टोनमेंट) -- अध्‍यक्ष महोदय,

 


 

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री(श्री भूपेन्‍द्र सिंह):- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

 

श्री अशोक ईश्‍वरदास रोहाणी:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज भी छत के लेवल तक कार्य होने के बाद भी, जियो टेगिंग होने के बाद भी अधिकारियों की लापरवाही के बाद 1500 लोग दूसरी किश्‍त से वंचित हैं, उनकी छत नहीं डल पा रही है, वह पन्‍नी डालकर या किराये के मकानों में रहकर वह अपना जीवन-यापन कर रहे हैं. प्रधानमंत्री जी की यह योजना की हर गरीब को मकान मिले, माननीय मुख्‍यमंत्री जी की यह योजना कि हर गरीब को मकान मिले, उसमें अधिकारियों की लापरवाही के कारण आज गरीब परेशान है. मेरा आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से अनुरोध है कि जिनकी जियो टेगिंग हो गयी है, जिनका कार्य छत के लेवल पर आ चुका है कम से कम उनकी किश्‍त पिछले दो सालों से नहीं मिल रही है, उसकी जांच कराकर उनके खातों में दूसरी किश्‍त चली जाये, यह मेरा आपके माध्‍यम से अनुरोध है.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा माननीय सदस्‍य ने बीच में राशि के संबंध में कहा है, कि विलंब हुआ है. मैं इसकी जांच भी करा लूंगा और मैं, माननीय सदस्‍य को आश्‍वस्‍त करता हूं कि जो हितग्राही रह गये हैं उन सभी की एक सप्‍ताह के अंदर सारी किश्‍तें उनके खाते में डाल दी जायेंगी.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, माननीय सदन को यह भी अवगत कराना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री आवास योजना एक बहुत ही महत्‍वपूर्ण योजना है और हमारी सरकार का माननीय प्रधानमंत्री जी का और माननीय मुख्‍यमंत्री जी का यह लक्ष्‍य है कि हमारे देश में कोई भी गरीब परिवार ऐसा न हो, जिसका अपना खुद का आवास न हो, खुद की अपनी छत न हो.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने यह निर्णय लिया है कि जो हमारे प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना के काम चल रहे हैं, पूरे प्रदेश में कई जगह किश्‍त जाना है और इसीलिये इसके लिये बजट में विशेष प्रावधान किये गये हैं और मैं सदन को अवगत कराना चाहूंगा कि अगले सप्ताह में संभावित दिनांक 12 है. प्रदेश के सभी जितने भी प्रधान मंत्री आवास के हितग्राही हैं उनके सभी के खाते में 16 सौ करोड़ की राशि वन क्लिक में माननीय प्रधान मंत्री जी उनके खाते में डालेंगे. न केवल प्रधान मंत्री आवास की राशि देंगे, पिछले कोविडकाल के कारण हमारे जो नगरीय निकाय हैं उनमें कहीं पर सड़कों के काम हैं, बाकी अन्य काम हैं. इन कामों के लिये भी माननीय मुख्यमंत्री जी ने बजट में विशेष प्रावधान किये हैं. 12 तारीख को ही प्रदेश की सभी नगरीय निकायों में लगभग 15 सौ करोड़ रूपये की राशि विकास कार्यों के लिये भी हम लोग जारी करेंगे.

श्री अशोक रोहाणी--माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारी केंट विधान सभा में बहुत सारी योजनाएं माननीय मुख्यमंत्री जी ने 2014 तक निवासरत् लोगों को पट्टा वितरित कर प्रधान मंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने का आदेश किया है. मैं माननीय मंत्री जी से चाहूंगा कि केन्ट विधान सभा के उन क्षेत्रों का जहां पर आबादी घोषित नहीं हुई है उनका सर्वे करवाकर उनको पट्टे वितरित कर प्रधान मंत्री आवास योजना का लाभ दिलायें.

अध्यक्ष महोदय--माननीय मंत्री जी इसमें तरूण भनोत जी से संबंधित प्रश्न भी जुड़वा दीजिये.

श्री तरूण भनोत-- धन्यवाद माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी का इस ध्यानाकर्षण के माध्यम से जो हमारे माननीय केन्ट क्षेत्र के विधायक जी ने लगाया है इस ओर आकर्षित कराना चाहूंगा कि माननीय उच्च न्यायालय के एक फैसले के अधीन बहुत भारी संख्या में जबलपुर में लोग विस्थापित हुए थे. तब इस सरकार ने उनको भरोसा दिलाया था कि हम आपको दूसरी जगह भी देंगे और प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत मकान की सुविधा भी देंगे. जो लोग विस्थापित हुए थे वह मेरे पश्चिम विधान सभा क्षेत्र में आते थे. विस्थापन के बाद केन्ट विधान सभा क्षेत्र में पहुंच गये हैं. सरकार ने प्रयास किया तथा तत्कालीन सरकार ने भी प्रयास किया, उसके पूर्व की सरकार ने भी प्रयास किया. उनका स्थापन तो किया गया, पर जैसा कि माननीय विधायक जी ने कहा है कि उनकी जो द्वितीय किश्त प्रधान मंत्री आवास की राशि है, वह नहीं प्राप्त हो रही है. माननीय मंत्री जी मुझे पता है कि सरकार इस मामले में गंभीर है, होना भी चाहिये. हमने उनसे वायदा किया था. चाहे सरकार जो भी हो पर साथ साथ इस बात की ओर आपका ध्यानाकर्षित करना चाहूंगा कि कुछ अधिकारी नगर निगम के ऐसे हैं जो बिना दलाली के वहां पर उनको किश्त जारी होने नहीं देते. जब तक वह गरीब आदमी वहां पर पैसा न दे दे जो आवासहीन है, तब तक उसको बार बार किसी न किसी छोटे-मोटे कागज की कमी बताते हुए, जबकि शासन की मंशा पर हमें कोई शक नहीं है कि वह पैसा नहीं देना चाहते हैं. इस व्यवस्था को दुरूस्त करने के लिये क्या माननीय मंत्री महोदय कोई नया प्लान लायेंगे कि जो आवासहीन लोग हैं उनको समय पर पैसा मिल सके और वह खुले में रहने की बजाय अपने आवास की छत के नीचे वह रह सके. दूसरा मामला भी गंभीर है और यह प्रदेश से जुड़ा हुआ है माननीय विधायक जी ने उसका भी जिक्र किया है. वह आबादी के पट्टो का है, यह समस्या पूरे मध्यप्रदेश की है और यह लगभग 50-60 वर्षों से चली आ रही है कि जो आबादी क्षेत्र घोषित हैं वह नगर निगम के क्षेत्र के शहरी सीमा क्षेत्र के अंतर्गत आ गये हैं वहां पर अभी भी लोगों का नाम दर्ज नहीं हुआ है अभी तक हमने प्रयास किया था जो अल्पकाल का समय सरकार के माध्यम से मिला था और उसमें प्रोग्रेस भी हुई थी. मेरा आपसे यह निवेदन है कि उसमें मैंने प्रश्न भी लगाया था और आज ही के प्रश्न में है, जिसमें राजस्व मंत्री जी ने यह तो मान लिया कि उन पर कार्यवाही पूर्ण हो गई है उनके नाम भी पट्टों पर चढ़ा रहे हैं, परन्तु उसमें समय सीमा नहीं बतायी गई है. अध्यक्ष महोदय, 50 वर्ष का समय बहुत लंबा होता है. अब यह बात न करें कि सरकार किसकी थी और किसकी नहीं थी लंबा समय आपका भी हो गया है. मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि वह राजस्व मंत्री जी से बात करके यह बात निश्चित कर दें कि आगामी 15 दिन से 3 महीने में उनका शासन की मंशा के अनुरूप नाम चढ़ जायेगा और उनको पट्टा प्राप्त हो जायेगा, जिससे वह भी प्रधान मंत्री आवास योजना का लाभ उठा सकें.

अध्यक्ष महोदय--श्री पी.सी.शर्मा जी आप भी पाईंटेड पूछ लीजिये.

श्री पी.सी.शर्मा-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी से प्रधान मंत्री आवास के बारे में बात करना चाहूंगा भोपाल की एक पूरा प्रोजेक्ट तैयार है.

अध्यक्ष महोदय--वहां की बात नहीं है, यह जबलपुर की बात है.

श्री पी.सी.शर्मा-- माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रधान मंत्री तो पूरे मध्यप्रदेश के चल रहे हैं. देश के हैं तो वह कहीं पर भी मामला फिट हो जायेगा.

अध्यक्ष महोदय--विधान सभा के नियम प्रक्रिया की मर्यादा है.

श्री पी.सी.शर्मा-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि एक कम्पलीट प्रोजेक्ट तैयार है उसके टेन्डर हो गये हैं उसका भूमि-पूजन भी हो गया है. उसमें एक साल के लिये सरकार से टेम्‍परेरी जमीन लेना है, उसमें एक साल हो गया है. लेकिन वह जमीन नगर निगम, भोपाल को नहीं मिल पा रही है. यह आठ स्‍टोरी बिल्डिंग गरीबों के लिये बन रही है. श्री जयवर्द्धन सिंह जी, जब मंत्री थे तब उन्‍होंने एप्रूव्‍ह किया था. वह काम शुरू हो जाये और उसके लिये जमीन का आवंटन टेम्‍परेरी दो वर्ष के लिये हो जाये. वह दो एकड़ जमीन है, पूरी प्रक्रिया हो चुकी है. यह हो जायेगा तो यह बहुत बड़ा प्रोजेक्‍ट प्रधानमंत्री जी के नाम से शुरू हो जायेगा.

अध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी, तीनों माननीय सदस्‍यों का एक साथ जवाब दे दीजिये.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य श्री रोहाणी जी के द्वारा जो उन्‍होंने वहां पर शेष कार्य रह गये हैं और बाकि जो अन्‍य कार्य बताये हैं, उसके तत्‍काल हम निर्देश जारी कर रहे हैं. अध्‍यक्ष महोदय, वह सारे कार्य भी जो माननीय रोहाणी जी ने बताये हैं, वह सारे कार्य भी हम एक सप्‍ताह के अन्‍दर करायेंगे. माननीय सदस्‍य श्री तरुण भनोत जी, जो हमारे पूर्व मंत्री थे, उन्‍होंने दो विषयों की तरफ ध्‍यान आकर्षित किया है. पहला, उनका कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत किस्‍तों को लेकर कुछ बीच में कठिनाइयां आती हैं, लेन-देन की शिकायतें आती हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसको ध्‍यान में रखकर ही हमारी सरकार ने, माननीय प्रधानमंत्री जी, माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने यह व्‍यवस्‍था निश्चित की थी कि पैसा सीधे हितग्राही के खाते में ही भेजा जायेगा. यह व्‍यवस्‍था हमने बनाई है, पर आपका कहना है कि कुछ जगह से इस तरह की शिकायतें आती हैं, मैं इससे असहमत नहीं हूँ. आपने जो कहा है, अगर आप मुझे स्‍पेसिफिक बता देंगे तो मैं तत्‍काल उसकी जांच के आदेश करके और इस तरह की अनियमितता हुई होगी तो हम कड़ी से कड़ी कार्यवाही करेंगे. माननीय तरुण भनोत जी ने जो वहां पर विस्‍थापित हैं. और उनको पट्टे नहीं मिलने की बात भी कही है. मेरा माननीय सदस्‍य से आग्रह है कि हमारी सरकार ने 2016 में नई आवास नीति तैयार की है, उस नई आवास नीति में हमने सभी लोगों को पट्टे देने का प्रावधान किया है, इसके भी हम निर्देश जारी करेंगे, जो माननीय तरुण भनोत जी ने कहा है, उसका परीक्षण करवाकर और जितने भी अधिकतम लोगों को पट्टे दिये जा सकते होंगे, हम लोग पट्टे देने का प्रयास करेंगे.

अध्‍यक्ष जी, माननीय सदस्‍य श्री पी.सी.शर्मा जी, पूर्व मंत्री उन्‍होंने भी वहां पर आवास स्‍वीकृत हुए हैं. जहां पर आवास बनना हैं, वहां से लोगों को शिफ्ट करना है, इसके बारे में उन्‍होंने मुझे व्‍यक्तिगत तौर पर भी बताया था. मैंने तत्‍काल उसी समय निर्देश जारी कर दिये थे क्‍योंकि यह आवास का मामला है, गरीब का आवास बनना चाहिए, उनको आवास मिलना चाहिए और इसलिए इसके बारे में भी हम आज फिर से समीक्षा करेंगे. कमिश्‍नर नगर निगम से भी कहेंगे कि वे श्री पी.सी.शर्मा जी से बात करके और तत्‍काल इस कार्य को प्रारंभ कराएंगे.

श्री अशोक ईश्‍वरदास रोहाणी - धन्‍यवाद मंत्री जी.

 

 

 

12.29 बजे

(2) जबलपुर एवं डिण्‍डोरी शहर के गंदे नाले का पानी नर्मदा नदी

में मिलने से नदी का जल प्रदूषित होना.

सर्वश्री संजय यादव (बरगी) [ओमकार सिंह मरकाम, लखन घनघोरिया] अध्‍यक्ष महोदय,

 

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री (श्री भूपेन्‍द्र सिंह) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 


 

श्री संजय यादव (बरगी) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा विनम्र निवेदन है कि जिस भी अधिकारी ने आपको जवाब बनाकर दिया हो, वह बिल्‍कुल (XXX) बनाकर दिया है, असत्‍य जवाब बनाकर दिया है.

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री(श्री भूपेन्‍द्र सिंह) -- श्री संजय भाई एक मिनट पहली बात तो आप यह समझ लें.

श्री संजय यादव -- पहले मेरी बात तो आप सुन लें क्‍योंकि मैं वहां का रहने वाला हूं.

श्री लक्ष्‍मण सिंह(चाचौड़ा) -- वह भी चुने हुए प्रतिनिधि हैं, आप उनकी बात सुन लें.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह -- भाई साहब मैं सुन रहा हूं. पहली बात मैं आपको स्‍पष्‍ट कर दूं कि न मैं और न ही कोई भी मंत्री जवाब अधिकारियों से नहीं बनवाते हैं, हम लोग खुद जवाब बनाते हैं. यह जवाब भी मैंने खुद ने पूरा पढ़कर और देखकर बनाया है, इसलिये कृपया इस प्रकार से न बोलें.

श्री संजय यादव -- ठीक है. मां नर्मदा हम शर्मिन्‍दा हैं, तेरे आंचल में मिल रहे गंदे नाले आपके कारण जिंदा है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री महोदय से पूछना चहता हूं कि नर्मदा सेवा यात्रा के दौरान माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने कहा था कि हम नर्मदा जी में गंदे नाले नहीं मिलने देंगे. क्‍या उस घोषणा का यहां पर आपके पास कोई कागज है, या कोई प्‍लान है. ? मैं नर्मदा जन्‍मोत्‍सव के दिन जब अभी 19 तारीख को नाले के ऊपर धरना देकर बैठा था, तब पहली बार जबलपुर नगर निगम के कमिश्‍नर मेरे धरने के बाद वहां देखने आये थे, लेकिन दूसरे दिन उस कमिश्‍नर को हटा दिया गया. मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि क्‍या आपने कोई बजट में ऐसा प्रावधान रखा है कि हम मां नर्मदा में मिलने वाले गंदे नाले रोक सकें. माननीय मंत्री जी सड़क की इतनी आवश्‍यकता नहीं है, जितनी आवश्‍यकता हमें मां नर्मदा में मिलने वाली गंदगी को रोकने की आवश्‍यकता है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय,मेरे नगर परिषद भेड़ाघाट में पंचवटी के पास, भेड़ाघाट एक पर्यटक स्‍थल है, लेकिन जब हम जाते हैं तो वहां हम देखते हैं कि किस तरह से गंदा नाला नर्मदा में सीधे समाहित हो रहा है. मैंने अभी जहां दद्दा घाट के सामने धरना दिया है. वर्ष 2017 में जिस समय परम पूज्‍य गुरूदेव का वहां पर यज्ञ चल रहा था, माननीय मुख्‍यमंत्री जी वहां आने वाले थे, लेकिन मुख्‍यमंत्री जी पटवा जी के निधन के कारण नहीं आ पाये थे, मैं आपसे कहना चाहता हूं कि अगर आपको वास्‍तविकता देखना है तो आप जबलपुर में आईये और देखिये, होशंगाबाद में देखिये, डिण्‍डोरी में देखिये. जब तक आप स्‍वयं वहां आकर निरीक्षण नहीं कर लेंगे, तब तक आपके पास वास्‍तविक स्थिति नहीं आ पायेगी.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे कहना चाहता हूं कि जवाब में कहा गया कि उमरिया, डुंगरिया, मैं यह बताना चाहता हूं कि उमरिया, डुंगरिया भी मेरे क्षेत्र में है, लेकिन यह इतनी दूर है कि नर्मदा जी के आसपास से इसका कोई वास्‍ता ही नहीं है. जवाब में कहा गया कि खंदारी नाला, मैं बताना चाहता हूं कि ललपुर का मैं रहने वाला हूं और जहां वह नाला मिलता है, उसके सामने ही मेरा घर है, इसलिये मुझे बारीकियां पता हैं. मेरे साथ चाहे लखन भईया हों, चाहे तरण भनोत जी हों, चाहे जालमसिंह जी हों, इनको नर्मदा जी एक-एक जानकारी है, जो उन अधिकारियों को नहीं हैं क्‍योंकि अधिकारी इस नाले को नहीं देख सकते हैं, क्‍योंकि जो शाह नाला, खंदारी नाला सबसे बड़ा नाला है वह मेरे घर के सामने घाना है वहां पर मिलता है. मैं एक किलोमीटर उसके अंदर नाव से गया और जबलपुर नगर निगम कमिश्‍नर को अभी 19 तारीख को नाव से लेकर गये थे, इतना बड़ा गंदा नाला है. आप वहां वास्‍तविकता में जाकर देखेंगे तो आपको खुद शर्म आयेगी मेरा निवेदन आपसे यह है कि हम बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, सड़क की बातें करते हैं लेकिन माननीय मुख्‍यमंत्री जी की घोषणा के बावजूद भी जितना आपने नर्मदा सेवा यात्रा में राशि खर्च की, प्रचार प्रसार में राशि खर्च की है, आप उससे आधी भी खर्च कर देते.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप प्रश्‍न तो करें.

श्री संजय यादव -- मेरा प्रश्‍न यह है कि आप भेड़ाघाट या ग्‍वारीघाट या जहां भी नर्मदा के नाले मिल रहे हैं, वहां क्‍या आप निरीक्षण करने चलेंगे और दूसरा मेरा प्रश्‍न यह है कि जो सबसे बड़ा गंदा नाला ललपुर के पास शाह नाला मिल रहा है, उसको अभी बंद करने की आपके पास कोई योजना नहीं है, आप उसकी योजना कब तक तैयार करेंगे ? यह आप हमें बताने का कष्‍ट करें.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा माननीय सदस्‍य संजय यादव जी ने कहा है, यह बात सही है कि मां नर्मदा जीवनदायिनी है और मध्‍यप्रदेश की जीवन रेखा भी है और इसी बात को ध्‍यान में रखकर हमारी सरकार का यह संकल्‍प माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने लिया था कि मां नर्मदा में अमरकंटक से लेकर और ओंकारेश्‍वर में जहां-जहां पर भी जो लगे हुए शहर हैं. वहां पर जहां-जहां पर भी गंदे नाले जाकर मां नर्मदा जी में मिलते हैं, उन सभी के लिये हम सीवेज ट्रीटमेंट प्‍लांट बनाकर मां नर्मदा जी में गंदा पानी न जाये इसको रोकने के लिये सरकार प्रयासरत है. उसी के अंतर्गत जबलपुर में 4 एसटीपी बनाये गये हैं, जिनकी लागत 362 करोड़ 31 लाख रूपये है. माननीय अध्‍यक्ष जी, अगर हम पूरे प्रदेश में देखेंगे, हमारी सरकार ने जो एसटीपी स्‍वीकृत किये हैं, 19 शहरों में 1262 करोड़ की लागत से अमरकंटक, डिण्‍डोरी, मंडला, जबलपुर, भेड़ाघाट, नरसिंहपुर, सांईखेड़ा, होशंगाबाद, बुधनी, नसरूल्‍लागंज, नेमावर, मंडलेश्‍वर, ओंकारेश्‍वर, बड़वाहा, सनावद, महेश्‍वर, धर्मपुरी, अंजड़, बड़बानी इस तरह से हम लोगों ने 1262 करोड़ के सीवेज ट्रीटमेंट प्‍लांट हमारी सरकार ने उस समय स्‍वीकृत किये थे जो कुछ हो गये हैं और कुछ में काम अभी चल रहे हैं. भेड़ाघाट में भी 13 करोड़ 97 लाख की सीवेज परियोजना का कार्य प्रगति पर है, जो जुलाई 2022 तक पूर्ण होगा.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा माननीय सदस्‍य से, सदन से आग्रह है कि हमारे माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने, सरकार ने मां नर्मदा का जल शुद्ध हो और न केवल मां नर्मदा जी का बल्कि प्रदेश की जितनी भी हमारी पवित्र नदियां हैं उनमें सभी में उनका जल शुद्ध हो. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक उदाहरण के रूप में आपसे आग्रह करूंगा, मैं सिंहस्‍थ का इंचार्ज था, सिंहस्‍थ का प्रभारी मंत्री था और उस समय जो मां छिप्रा नदी है उसमें एक खान नदी आकर मिलती थी, छिप्रा में लोग शुद्ध जल में स्‍नान करें, उस समय माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने सिंहस्‍थ में 100 करोड़ रूपये की राशि खान नदी के डायवर्सन के लिये स्‍वीकृत की थी और शुद्ध नर्मदा जल में छिप्रा जी में हम लोगों ने स्‍नान कराये थे.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसी तरह से मां नर्मदा में न केवल गंदे नालों को रोकने का प्रयास, बल्कि माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने एक मिशन चलाया, अभियान चलाया और इसमें यह है कि नर्मदा जी के किनारे, नर्मदा जी की धारा कम न हो इसलिये वृक्षों को लगाना, नर्मदा के तट पर जैसे अंतिम संस्‍कार की परंपरा है हमारे यहां, उसके लिये अलग से शमशान घाट बनाने की व्‍यवस्‍था कराना, अस्थि विसर्जन के लिये नर्मदा कुण्‍ड बनाने का काम करना, एसटीपी बनाने का काम करना, यह सारे काम माननीय शिवराज जी की सरकार ने नर्मदा जी के शुद्धीकरण के लिये, शुद्ध जल के लिये किये हैं.

श्री संजय यादव-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी के जवाब से संतुष्‍ट नहीं हूं. मैं सुझाव भी देना चाहता हूं. अभी तक जो सबसे बड़ा गंदा नाला यह नगर निगम स्‍वीकार करती है, मैंने इसकी हाईकोर्ट में पिटीशन भी लगाई थी, हाईकोर्ट जवाब नहीं दे पाया, माननीय उच्‍च न्‍यायालय ने पिटीशन ग्रीन ट्रिब्‍यूनल, भोपाल में स्‍थानांतरित कर दी. माननीय मंत्री जी, जो सबसे बड़ा नाला है उसके लिये जबलपुर नगर निगम ने कोई भी योजना नहीं बनाई और जो आप ट्रीटमेंट प्‍लांट की बात कर रहे हैं, आपके आधे से ज्‍यादा ट्रीटमेंट प्‍लांट फैल हो चुके हैं जो ग्‍वारीघाट में लगे हुये हैं.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप सुझाव तो दीजिये.

श्री संजय यादव-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे पूछना चाहता हूं जो सबसे बड़ा नाला है शाह नाला, खंदारी नाला जो ललपुर के पास जाकर मिलता है उसके लिये क्‍या आपने कोई योजना बनाई है और दूसरा मेरा इसमें आपको सुझाव भी है कि मैंने कहा था कि उस नाले को केनाल रूपी आप बना दीजिये, बीच-बीच में स्‍टॉप डेम बना दीजिये और स्‍टॉप डेम का पानी जब खेत में किसान लेना चाहें तो वह ले लें, उस नाले को हम ट्रीटमेंट करके, साफ करके केनाल में भी मिला सकते हैं जो पाटन तक आती है और जो केनाल का पानी आता है नर्मदा का तो हम नर्मदा का शुद्ध जल बचा सकते हैं और इन गंदे नालों को गुजरात की तरह आप ऐसी योजना क्‍यों नहीं बनाते कि आप गुजरात की तरह अगर हम गंदे नाले का पानी ट्रीट करके अगर हम केनालों में दें तो किसानों के भी काम आयेगा. उसकी ओर शासन का ध्यान क्यों नहीं जाता. हम बात तो करते हैं बड़ी-बड़ी कि हम ऐसा कर रहे हैं उसका प्रावधान आपको रखना चाहिये. मेरा आपसे निवेदन है. मेरी बात का जवाब दे दें कि साय नाला के लिये जबलपुर नगर निगम ने उसकी कोई योजना बनाई क्या उस पर काम शुरू करेंगे क्या ?

अध्यक्ष महोदय - और लोग हैं उन्हें पूछने दीजिये.

(..व्यवधान..)

अध्यक्ष महोदय - अभी इसमें मूल प्रश्नकर्ता ही दो हैं. मैं प्रयास यह करूंगा क्योंकि यह संवेदनशील मामला है. 2-3 लोगों को समय देंगे और मंत्री जी कृपया आप सबकी बात सुनकर सबका एक साथ जवाब दे दें. श्री ओमकार सिंह मरकाम..(अनुपस्थित) श्री लखन घनघोरिया

श्री लखन घनघोरिया(जबलपुर पूर्व)‑ धन्यवाद अध्यक्ष महोदय. मां नर्मदा के प्रति सबकी आस्था और प्रदूषण को लेकर चिंता है. मैंने अपनी जो ध्यानाकर्षण की सूचना दी थी उसमें कुछ विषयों का उल्लेख इसमें नहीं आया है. मैं आपका संरक्षण चाहता हूं कि मेरी ध्यानाकर्षण सूचना के जो विषय हैं आपकी इजाजत हो तो पढ़ दूं.

अध्यक्ष महोदय - पढ़िये नहीं आप प्रश्न पूछें.

श्री लखन घनघोरिया - आदरणीय मंत्री महोदय ने अपने जवाब में 3 ट्रीटमेंट प्लांट 2017 में जबलपुर में लगाने की बात कही. उसके रिजल्ट क्या हैं. हमारे साथी आदरणीय संजय यादव जी ने बहुत विस्तार से बताया. सिर्फ आस्था और भक्ति का प्रश्न नहीं है. लोगों के स्वास्थ्य का भी मामला है. नर्मदा का जल प्रदूषण से किस तरीके से युक्त हुआ है इसके जो आंकड़े हैं. मैं आपसे रखना चाहूंगा कि पानी से बीओडी से 2.8 नाइट्रोजन प्रति घन मीटर, डिजाल्व आक्सीजन 8.7 नाइट्रोजन प्रति घन मीटर और कालीफार्म बैक्टीरिया 900 प्रति लीटर पाया गया और यह विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित मानक से कई गुना अधिक है और वह जल जबलपुर में आम लोगों के पीने के लिये उपयोग में लिया जा रहा है. ग्वारीघाट से जिलहरीघाट तक 2 बड़े नाले खंदारी व साय नाला. मंत्री जी बोल रहे थे कि खंदारी, साय नाला में मिलता है. ये दोनों अलग-अलग हैं और दोनों अलग-अलग जगह पर मिलते हैं. दोनों बड़े नालों के साथ-साथ ग्वारी घाट से खारीघाट,सिद्ध घाट, जिलहरी घाट, सिद्ध घाट में जहां बा बा सिद्धनाथ की तपोभूमि है और जिसको सिद्ध तीर्थ कहा जाता है उसमें बार-बार मांग होने के बावजूद भी आज तक उन नालों को रोका नहीं गया है.ऐसे करीब 7-8 नाले,नालियां हैं. दूसरी नदियों की बात भी माननीय मंत्री महोदय ने कही है. जबलपुर की ही बात करें तो गौर और खंदारी. जहां से भी हमारे पानी की सप्लाई होती है. वहां की स्थिति भी बिल्कुल अलग है. डेयरियां जाने के कारण वहां डेयरी का अपशिष्ट मिलता है. यह तमाम चीजों का उल्लेख मंत्री जी ने अब तक नहीं किया. 2016-17 में घोषणाएं बहुत हुईं. हमने नर्मदा तटों को पवित्र तीर्थ घोषित किया और दायरा भी बताया कि कितने दायरे तक इसको मुक्त रखा जायेगा. दायरा बताया मांस,मंदिरा की दुकानों तक. यह जो ट्रीटमेंट प्लांट हमारे हैं 2017 से अभी तक आप जिनको कह रहे हैं कि बन रहे हैं. वहां यदि यथार्थ की जमीन पर आकर देखें, तो आपको हकीकत समझ में आयेगी कि वहां प्रदूषण किस हद तक है. बार-बार कहने के बाद, बार-बार आवाज उठाने के बाद भी यह परिस्थिति बनी हुई है कि आज भी हम विसर्जन कुण्ड की वाह-वाही तो लूटते हैं, लेकिन नाला रोकने के लिये कोई प्रयास नहीं करते हैं.

अध्यक्ष महोदय -- कृपया प्रश्न पूछें, क्योंकि मैं इसमें और सदस्यों को अनुमति देना चाहता हूं.

श्री लखन घनघोरिया -- अध्यक्ष महोदय, यह ट्रीटमेंट प्लांट कब तक तैयार हो जायेंगे.

अध्यक्ष महोदय -- (श्री भूपेन्द्र सिंह,नगरीय विकास एवं आवास मंत्री के उठने पर) मंत्री जी, नहीं नहीं, अभी हमने कहा ना कि एक साथ जवाब दीजियेगा, सबका हो जाये.

श्री लखन घनघोरिया -- अध्यक्ष महोदय, हमारा एक प्रश्न रह गया. चूंकि हमारे विषय ही इसमें नहीं लिये गये.

अध्यक्ष महोदय -- आप दूसरी बात करने लगते हैं, आप सीधा प्रश्न पूछ लीजिये, वह उसका भी उत्तर दे देंगे. आप प्रश्न पूछिये.

श्री लखन घनघोरिया -- अध्यक्ष महोदय, मैं दूसरा प्रश्न मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि ग्वारीघाट जबलपुर का सबसे ज्यादा पवित्र स्थल कहलाता है. आज की स्थिति में हजारों लोग रोज शाम को दिन भर नर्मदा जी के दर्शन करने जाते हैं. वहां अव्यवस्था, अराजक स्थिति ऐसे बन जाती है कि रोड्स के दोनों तरफ जो डामरीकरण होना था, रोड खोद दी गई, दोनों तरफ डामरीकरण एक साल से नहीं हुआ. गड्ढे बने हुए हैं, तीज त्यौहार कोई भी हो, नर्मदा जयंती के अवसर पर यह स्थिति थी कि 5-7 घण्टे तक जाम की स्थिति बनी थी. मंत्री जी, आपसे निवेदन है कि कटंगा से ग्वारीघाट तक जो काम रोका गया था डामरीकरण का, वह काम आप कब तक पूरा कर लेंगे.

श्री तरुण भनोत (जबलपुर-पश्चिम) -- अध्यक्ष महोदय, बहुत बहुत धन्यवाद. मैं अपने आपको बहुत सौभाग्यशाली मानता हूं कि मुझे उस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलता है, जितने जगह की भी बात हो रही थी, यह मेरे सब जबलपुर पश्चिम विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं और मां नर्मदा जी की असीम कृपा हम सबके ऊपर है और मध्यप्रदेश की जनता के ऊपर भी बनी हुई है.यह राजनैतिक विषय नहीं है. मैं सिर्फ दो मिनट लूंगा.

अध्यक्ष महोदय -- आप स्वतः मंत्री रहे हैं, इतना थोड़ा सा समझ लें.

श्री तरुण भनोत -- अध्यक्ष महोदय, मैं समझता हूं उस बात को. मुझे याद हैं कि इस सदन में मुख्यमंत्री, श्री शिवराज सिंह चौहान जी ने वर्ष 2017 में यह कहा था कि हम नर्मदा सेवा यात्रा निकालने जा रहे हैं, हम विपक्ष में यहीं थे. हमने, मैंने सदन में खड़े होकर यह कहा था कि आप बहुत अच्छा काम करने जा रहे हैं, हम आपका स्वागत करते हैं और सिर्फ कहा नहीं था, जब उन्होंने नर्मदा सेवा यात्रा निकाली और वह जबलपुर में, हमारे पश्चिम विधान सभा क्षेत्र, जहां ग्वारीघाट की आप बात कर रहे थे माननीय सदस्य, वहां पहुंचे तो हमने सारे दायरों को, मायनों को भूलकर, क्योंकि वे एक बहुत अच्छे काम के लिये निकले थे, उनका स्वागत किया और जो भव्यतम् स्वागत संभव हो सकता था, वह किया. उसके बाद मध्यप्रदेश की इसी विधान सभा में हम सबको सौभाग्य प्राप्त हुआ कि मुख्यमंत्री जी एक संकल्प लेकर आये कि हम मां नर्मदा को जीवित इकाई का दर्जा देंगे. उसकी यहां चर्चा नहीं हुई, हम सबने उसका स्वागत किया और वह भी हुआ. बहुत घुमा फिराकर कहने की मेरी आदत भी नहीं है, मैं तो एक निवेदन मंत्री जी से करना चाहता हूं कि जब अमरकंटक से मां नर्मदा का जो उद्गम स्थल है, जहां से मां नर्मदा निकलती है और भरुच तक जाती है, खम्भात की खाड़ी में मिलती है. सबसे बड़ा अगर कोई महानगर रास्ते में पड़ता है, तो वह जबलपुर ही पड़ता है और शहर की सीमा के साथ लगभग 10-12 किलोमीटर सटे हुए शहर के साथ मां नर्मदा का जल प्रवाहित होता है. तो निश्चित तौर पर सबसे ज्यादा प्रदूषण भी वहीं होता है, उसको ध्यान में रखकर और हमारे संत समाज की भावनाओं को ध्यान में रखकर हमने पिछले वर्ष मध्यप्रदेश शासन के द्वारा मां नर्मदा गौ कुम्भ का आयोजन जबलपुर में किया, जिसमें पूरी दुनिया के संत आये. सबने वहां पर मां नर्मदा की सेवा के बारे में और गौ माता की सेवा के बारे में चिंता की और उसके बाद हमारी सरकार ने एक निर्णय लिया, जिसको हमने पिछले बजट में रखा भी था कि हम जबलपुर शहर में कम से कम जो नगर निगम सीमा में आता है, तिलवारा घाट से लेकर और भटौली घाट तक मां नर्मदा रिवर फण्ड का निर्माण करेंगे और उसके लिये राशि का प्रावधान भी तत्कालीन बजट में किया गया था. अध्यक्ष महोदय, आज बजट भाषण होने वाला है, मैं उस पर चर्चा करने वाला था, पर यह अच्छा बहुत पहले हो गया, आपको धन्यवाद. इस बजट में उसका उल्लेख नहीं है.

अध्यक्ष महोदय -- उसकी चर्चा बजट में करियेगा. केवल इसमें प्रश्न पूछ लीजियेगा.

श्री तरुण भनोत -- नहीं, ध्यान आकर्षण मां नर्मदा पर है. मैं मंत्री जी से सिर्फ यह निवेदन करना चाहता हूं कि आप खुद नर्मदा भक्त हैं. जबलपुर से आपका गहरा नाता है और आप बड़े संजीदा मंत्रियों में शुमार होते हैं, हम सब आपकी गंभीरता की तारीफ भी करते हैं. कृपया जल संसाधन मंत्री जी से बात करके पूरी तैयारियां हो चुकी थीं, जल्दी से जल्दी क्या सरकार जबलपुर को यह सौगात देगी और बड़े हर्ष का विषय है कि महामहिम राष्ट्रपति महोदय इसी माह परसों जबलपुर के उसी ग्वारीघाट के तट पर आ रहे हैं मां नर्मदा की आरती करने और उनके साथ हमारे सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस महोदय और अन्य पूरे देश भर के हाईकोर्ट से न्यायाधीश आ रहे हैं तो इससे अच्छा मौका नहीं होगा. आज जबलपुर के पूरे संत समाज माननीय मंत्री जी सही में उद्वेलित है, आम जनता सही में परेशान है और दोनों जो आपके जल शोधन संयंत्र हैं, जो जबलपुर को पानी देते हैं, उसी विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत मां नर्मदा के तट पर ही मौजूद है ललपुर का भी और जो नया आपने बनाया है रामनगरा का भी, तो कहीं न कहीं यहां से जो जल जबलपुर की 15 लाख की आबादी को जा रहा है, वह दूषित जल जा रहा है, उसके लिए कोई राजनीतिक बात हम करना नहीं चाहते हैं कि क्या हुआ, क्या नहीं हुआ. आपसे नम्र निवेदन है सदन के माध्यम से कि मां नर्मदा रिवर फ्रंट जो बनाना है तिलवारा घाट से लेकर बडौली तक उसको स्वीकृति प्रदान करें, जल्दी से जल्दी उसका काम करें. आप आएं, मुख्यमंत्री जी को लेकर आएं, हम खुले हृदय से वहां पर आपका स्वागत करेंगे. धन्यवाद.

श्री विनय सक्सेना (जबलपुर उत्तर) - अध्यक्ष महोदय, आपको धन्यवाद देना चाहता हूं . एक बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है जहां माननीय महामहिम राष्ट्रपति जी आ रहे हैं और माननीय चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया आ रहे हैं ग्वारीघाट जो उमाघाट आजकल कहलाता है. उसी जगह पर नाले का ट्रीटमेंट का माननीय मंत्री जी के संज्ञान में लाना चाहता हूं, वहीं पर एसटीपी जो काम नहीं कर रहा है उसी का गंदा पानी वहीं पर आ रहा है तो मैं आग्रह यह करना चाहता हूं कि कम से कम उस एसटीपी की तत्काल रूप से जांच करा लें और माननीय मंत्री जी कभी अगर जबलपुर पधारें तो कम से कम कांग्रेस के विधायक जो बात आपके संज्ञान में लाए हैं, नर्मदा जीवित इकाई की घोषणा इस सरकार ने की थी. नर्मदा जी जीवित इकाई के मामले में इस सदन को माननीय मंत्री जी संज्ञान देंगे कि आखिर उसमें क्या हुआ?

अध्यक्ष महोदय - आप प्रश्न पूछिए?

श्री विनय सक्सेना - उसमें तब तो यह हुआ था आदरणीय अध्यक्ष महोदय कि धारा 307 लगेगी जो नर्मदा जी को गंदा करेगा. माननीय श्री कमल पटेल जी सामने बैठे हुए हैं. अभी नरसिंहपुर में उत्खनन हो रहा है कलेक्टर के माध्यम से तो नर्मदा जी के साथ में जो ये घटनाएं चल रही हैं. मेरा कहना है कि उन पर कार्यवाही कब होगी? और जो नर्मदा नदी में ग्वारीघाट में गंदा पानी मिल रहा है उसको रोकने के लिए माननीय मंत्री जी क्या कदम उठाएंगे?

श्री फून्देलाल सिंह मार्को (पुष्पराजगढ़) - अध्यक्ष महोदय, माननीय अध्यक्ष जी मैं आपको बहुत बहुत धन्यवाद देता हूं और प्रणाम भी करता हूं. मां नर्मदा के श्री चरणों में प्रणाम करता हूं चूंकि मां नर्मदा का उद्गम स्थल अमरकंटक है. मैं इसलिए खड़ा हुआ हूं कि माननीय मंत्री जी के लिस्ट में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट अमरकंटक का उद्बोधन नहीं है. जब मां का जन्म ही नहीं होता तो छठीपूजा हम कहां से करते? मेरा निवेदन है कि 7 वर्ष से ट्रीटमेंट प्लांट खोद-खादकर पूरा रास्ता खराब कर दिया है. यह आपकी सूची में नहीं है माननीय मंत्री जी, मेरा निवेदन है कि मां नर्मदा का उद्गम स्थल अमरकंटक है, ट्रीटमेंट प्लांट स्वीकृत है, प्रशासन की लापरवाही शासन की अनदेखी जैसा भी हो मेरा अनुरोध है ट्रीटमेंट प्लांट को तत्काल गति प्रदान किया जाय, उसे अतिशीघ्र बनाया जाय, यह मैं आपसे अपेक्षा करता हूं.

अध्यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी सबका का जवाब एक साथ दे दें.

श्री जालम सिंह पटेल (नरसिंहपुर) - अध्यक्ष महोदय, मां नर्मदा नदी के तट पर जो मेला आयोजित होता है और लाखों लोग घाटों पर आते हैं, जो श्रद्धालुजन हैं, परिक्रमावासी भी घाटों पर रुकते हैं जो गीला सूखा कचरा छोड़कर जाते हैं उसके लिए समुचित व्यवस्था हो. बरमान घाट पर अमावस्या, पूर्णिमा पर लाखों लोगों की संख्या आती है, वहां पर स्थायी शौचालयों की व्यवस्था बने, जो अभी है वह पर्याप्त नहीं है, मेरा माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि इसमें कोई व्यवस्था आप देंगे.

श्री नारायण सिंह पट्टा (बिछिया) - अध्यक्ष महोदय, मैं मंडला जिले के रामनगर जहां पर प्रतिवर्ष आदि उत्सव का आयोजन होता है. मैं सिर्फ यह मांग करता हूं माननीय मंत्री जी से कि यह बहुत बड़ा आयोजन होता है और लगातार होता है. उपराष्ट्रपति जी, प्रधानमंत्री जी, मुख्यमंत्री जी और अनेक मंत्रीगण यहां पर आ चुके हैं. नर्मदा तट की सीढ़ी निर्माण के लिए माननीय मंत्री जी अपने जवाब में उल्लेख करें और इसको शामिल कर लें क्योंकि पर्यटन स्थल रामनगर है, गौंड़कालीन राजाओं का वहां पर इतिहास है, महल है और प्रत्येक वर्ष आदि उत्सव वहां पर आयोजित होता है.

श्री भूपेन्द्र सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय हमारे वरिष्ठ सदस्य श्री लखन घनघोरिया जी ने ग्वारीघाट के बारे में और ग्वारीघाट में जो कटंगी चौराहा है, उसके बारे में सदस्य ने कहा है. मैं सदस्य से आग्रह करना चाहूंगा कि ग्वारीघाट के समीप सड़कों की मरम्मत का कार्य प्रगति पर है और इसके लिए 5 करोड़ की राशि हमने विशेष निधि से दी है जिससे सड़क निर्माण का कार्य चल रहा है.

श्री लखन घनघोरिया -- अध्यक्ष महोदय माई की कृपा है कि मैं माई के दर्शन रोज करता हूं. मैं आपसे आग्रह करना चाहता हूं कि जबलपुर से आपका भी बहुत नजदीक का रिश्ता है. आप नहीं तो आपके अपने लोग हैं, उनसे जानकारी ले लें, आप बजाय विभागीय जानकारी लेने के आप अपने पारिवारिक लोगों से जानकारी लें.

श्री भूपेन्द्र सिंह -- नहीं. मैं तो आपकी बात मान रहा हूं. आप बतायें कि क्या करना है.

श्री लखन घनघोरिया -- वहां पर पूरा काम बंद है, काम हो ही नहीं रहा है.

श्री भूपेन्द्र सिंह -- मैं आज ही फिर से निर्देश जारी करूंगा, अगर काम बंद है तो तत्काल कार्य प्रारम्भ हो.

श्री तरूण भनोत -- माननीय मंत्री जी आप हम लोगों के साथ में एक बार दौरा कर लें.

श्री भूपेन्द्र सिंह -- हां, बिल्कुल. आ जायेंगे और आपके साथ में दौरा कर लेंगे. यह कार्य अगर प्रारम्भ नहीं हुआ है तो तत्काल प्रारम्भ हो जायेगा.

अध्यक्ष महोदय -- आप दौरे के समय सभी माननीय विधायकों को साथ में रख लें.

श्री संजय यादव -- मेरा जवाब नहीं आ पाया है.

अध्यक्ष महोदय -- आप सुन तो लें मेरी बात. जब यह तय हो गया है कि मंत्री जी दौरा करेंगे और आप सभी विधायकों को साथ में रखेंगे जिन्होने भी यहां परअपनी बात रखी है.

श्री रामपाल सिंह -- अध्यक्ष महोदय अगर सबको साथ में रखेंगे तो कमलनाथ जी घबरा जायेंगे. सावधानी रखना..(व्यवधान)..

 

 

 

 

 

 

 

 

01.02 बजे याचिकाओं की प्रस्तुति

अध्यक्ष महोदय -- आज की कार्यसूची में सम्मिलित समस्त याचिकाएं पढी हुई मानी जायेंगी.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

1.05 बजे कार्यमंत्रणा समिति का प्रतिवेदन


 



 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

1.08 बजे खनिज साधन मंत्री का वक्‍तव्‍य

 

दिनांक 30 दिसम्‍बर, 2020 को पूछे गये तारांकित प्रश्‍न संख्‍या 01 (क्रमांक 308) के

उत्‍तर में संशोधन करने के संबंध में खनिज साधन मंत्री का वक्‍तव्‍य

 

खनिज साधन मंत्री (बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह) -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं

 

 

 

 

01.10 बजे वर्ष 2020-2021 के प्रथम अनुपूरक अनुमान का उपस्‍थापन

01.11 बजे वर्ष 2020-2021 के द्वितीय अनुपूरक अनुमान का उपस्‍थापन

01.12 बजे वर्ष 2020-2021 की प्रथम अनुपूरक मांगों पर मतदान

 

सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई.

वित्‍त मंत्री (श्री जगदीश देवड़ा) -- अध्‍यक्ष महोदय, पारित किया जाए.

 

01.14 बजे शासकीय विधि विषयक कार्य

 

मध्‍यप्रदेश विनियोग विधेयक, 2021 (क्रमांक 16 सन् 2021) का पुर:स्‍थापन एवं पारण

 


 

 

 

 

 

 

 

 

1.16 बजे

(10) वर्ष 2020-2021 की द्वितीय अनुपूरक मांगों पर मतदान.

 

 

 

 

1.17 बजे

(11) शासकीय विधि विषयक कार्य

 

मध्‍यप्रदेश विनियोग (क्रमांक-2) विधेयक, 2021 (क्रमांक 17 सन् 2021) का

पुर:स्‍थापन एवं पारण

 

 

 

 

 

 

 

 

1.19 बजे वर्ष 2021-2022 के आय-व्‍ययक पर सामान्‍य चर्चा

 

अध्‍यक्ष महोदय -- अब, वर्ष 2021-2022 के आय-व्‍ययक पर सामान्‍य चर्चा प्रारंभ होगी. श्री तरुण भनोत जी.

श्री तरुण भनोत(जबलपुर-पश्चिम)-- धन्यवाद, अध्यक्ष महोदय. माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय वित्त मंत्री महोदय ने जो बजट मध्यप्रदेश विधान सभा में रखा है, उस पर हम लोगों ने बड़ा गौर किया, उसका अध्ययन किया और यह जानने का प्रयास किया कि ऐसी कौन कौन सी चीजें उसमें शामिल की गई हैं जो मध्यप्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए महत्वपूर्ण है, मध्यप्रदेश को आगे ले जाने के लिए महत्वपूर्ण है और दीर्घकालिक ऐसी कौनसी योजनाएं हैं जिससे प्रदेश में लगातार, जब कर्ज का बोझ बढ़ रहा है, उसको कम किया जा सके. अध्यक्ष महोदय, मैं यह जरूर कहना चाहूँगा कि,

अब किस किस सितम की मिसाल दूँ आपको, अब किस किस सितम की मिसाल दूँ आपको, आप तो हर सितम बेमिसाल करते हों.

अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश की जनता के ऊपर कोविड काल के दौरान जो गुजरी

उसके बाद आपने उनके घावों पर इस बजट के माध्यम से नमक छिड़का और अपनी खुद की पीठ थपथपाने का प्रयास किया, यह कह कर कि हमने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए जनता के ऊपर किसी भी प्रकार का कोई भी नया कर नहीं लगाया. माननीय मंत्री महोदय, गुंजाईश बची थी क्या? किस पर टैक्स लगाएंगे? कौनसा नया कर लगाएँगे? गरीब की थाली महँगी है, कर्मचारी की जेब खाली है, नौजवानों के हाथ में काम नहीं है, किसान खेत में परेशान है और आप कहते हैं हम जीरो परसेंट टेक्सेशन का बजट लाए हैं. अध्यक्ष महोदय, यह तो आँकड़ों के साथ मैं आगे आप से चर्चा के दौरान बताऊँगा कि आपने कौनसा जीरो परसेंट का टैक्सेशन लगाया क्योंकि आपके हाथ में तो कुछ था ही नहीं. क्या लगाते आप? पर हाँ, माननीय मंत्री महोदय, एक चीज जरूर आपके हाथ में थी कि इस संकट के समय में (श्री गोविन्द सिंह राजपूत मंत्री जी द्वारा पास की सीट पर आकर बैठकर माननीय सदस्यों से बात करने पर) माननीय मंत्री जी, थोड़ा सा.....

संसदीय कार्य मंत्री(डॉ नरोत्तम मिश्र)-- ये तुम्हें शुरू से ही डिस्टर्ब कर रहे हैं, तुम समझ समझ ही नहीं पाए. मेरे को अभी तक समझ में नहीं आई यह बात.

श्री तरुण भनोत-- यहाँ पर आप ही तो एक मेरे शुभचिन्तक हैं. माननीय, मेरी भावनाओं को सिर्फ आप ही तो समझते हों, मैं समझता हूँ इस बात को. माननीय अध्यक्ष महोदय, थोड़ी व्यवस्था आ जाए.

अध्यक्ष महोदय-- (श्री गोविन्द सिंह राजपूत जी से) माननीय मंत्री जी, अपनी सीट पर जाइये.

श्री तरुण भनोत-- (श्री जीतू पटवारी जी से) यह पूर्व मंत्री पटवारी जी को भी भेज दीजिए.

डॉ नरोत्तम मिश्र-- वास्तव में मर्म को मार कर रहा है, ये दो ही हैं जड़ में, एक ये बंगलौर पहुँच गया था , एक ये बंगलौर पहुँच गया था.

श्री तरुण भनोत-- आपने सही समय पर इशारा कर दिया माननीय, मैं समझ गया. (हँसी)

माननीय अध्यक्ष महोदय, जीरो परसेंट टेक्सेशन की बातचीत हो रही थी. जीएसटी लागू हो गया. राज्य सरकारों के हाथ में बचा नहीं कुछ और बचा भी तो क्या इसलिए कि हम अपनी परेशान जनता को और परेशान करें. अध्यक्ष महोदय, हर चीज पर राजनैतिक बात करना भी नहीं चाहिए. अध्यक्ष महोदय, पेट्रोल के दाम पूरे हिन्दुस्तान में बढ़े हैं और मध्यप्रदेश में तो इतने बढ़े हैं कि आसपास के जो बॉर्डर जिले हैं वहाँ पर पेट्रोल पम्प पर कोई पेट्रोल और डीज़ल नहीं भरवाता, हमारे जो पड़ोसी राज्य हैं, कहीं उत्तर प्रदेश, कहीं महाराष्ट्र, कहीं छत्तीसगढ़, वहाँ पर जाकर लोग अपनी गाड़ियों में लोग पेट्रोल और डीज़ल भरवाते हैं.

1.24 बजे

{सभापति महोदय (श्री लक्ष्मण सिंह) पीठासीन हुए}

सभापति महोदय, इस संकट काल में हम सबको ऐसी आशा थी कि सरकार आम जनता को राहत देगी और मध्यप्रदेश का यह सर्वोच्च संवैधानिक सदन से निकल कर एक ऐसी भावना मध्यप्रदेश की जनता के पास जाएगी कि हम बड़ी धीरता और गंभीरता के साथ यहाँ बैठकर चर्चा करते हैं और उनकी बेहतरी के काम के लिए उपाय भी करते हैं, सोचते भी हैं और ऐसे प्रावधान भी करते हैं. सभापति महोदय, माननीय वित्त मंत्री महोदय, मुझे विश्वास है कि आप भी अन्दर से जरूर परेशान होंगे कि हाँ एक दबाव आपके ऊपर भी होगा कि पेट्रोल और डीज़ल के रेट बढ़े हैं, गैस का सिलेण्डर महँगा हो गया और उसके कारण अन्य जो रोजमर्रा की चीजें हैं, वह भी महँगी होती जा रही हैं. जब आप इस चर्चा का जवाब देंगे तो आप जरूर सहानुभूति पूर्वक इस बात के ऊपर विचार करेंगे, बजट की इस किताब में तो उसका उल्लेख नहीं है पर आपके मुख से जरूर यह बात निकलेगी कि कम से कम आप 5 प्रतिशत वेट कम करेंगे और मध्यप्रदेश की आम जनता को राहत देंगे. मैं आपसे ऐसी अपेक्षा करता हूँ. यह कहा गया कि पूर्ववर्ती सरकार ने कुछ भी नहीं किया, सारी योजनाएं बंद कर दीं. मध्यप्रदेश की जनता की भलाई के लिए कोई काम नहीं किया. मैं इस परम्परा से हटकर बात करना चाहता हूँ. वर्तमान की सरकार ने भी कुछ अच्छे काम किए हैं. बजट भाषण के पैरा 67 में आपने गैस पीड़ितों को पेंशन देने की बात का उल्लेख किया है जो कि केन्द्र की सरकार द्वारा बंद की गई थी. मैं आपके इस कदम का स्वागत करता हूँ, यह प्रशंसनीय काम है परन्तु साथ में एक बात और कहता हूँ कि थोड़ा दिल बड़ा करते इसी पैरा में इस बात का भी उल्लेख कर देते कि कांग्रेस पार्टी की सरकार जो कि 15 महीने के लिए थी, उसने सामाजिक सुरक्षा पेंशन को 300 रुपए से बढ़ाकर 600 रुपए किया था यह भी कर देते तो आपका क्या जाता, उसका भी उल्लेख कर देते और आप और बड़े हो जाते.

माननीय सभापति महोदय, मैं मध्यप्रदेश की जनता की ओर से आपको धन्यवाद देना चाहूँगा कि आपने सीएम राइज योजना को इस बजट में शामिल किया कि हम नए सरकारी स्कूल बनाएंगे, कानवेंट स्कूलों की तर्ज पर बनाएंगे. जहाँ पर एक गरीब का बच्चा भी पढ़ सके. प्रायवेट स्कूलों के समकक्ष वहाँ पर सुविधाएं हों. अच्छे टीचर उपलब्ध हों, माहौल अच्छा हो, सारी व्यवस्थाएं हों. माननीय यह भी उल्लेख कर देते कि यह योजना बनकर कब तैयार हुई थी. हमें वर्ष 2020 का बजट रखने का सौभाग्य नहीं मिला. यह हम स्वीकार करते हैं कि इस सदन में जब हमें 20 मार्च को बजट रखना था तो हमारी सरकार गिर गई, पर योजना तो हम उसके पहले बनाकर ले आए थे. आपको धन्यवाद देना चाहते हैं, साधुवाद देना चाहते हैं कि आपने एक अच्छी परम्परा का निर्वहन किया. जो एक अच्छी योजना हमने बनाई थी उसको आप बजट में लेकर आए. मैं आपको शुभकामनाएं देता हूँ क्योंकि मध्यप्रदेश के भविष्य के लिए जरुरी है. यह योजना सिर्फ कागजों में न रह जाए इसको आप क्रियान्वित करिए इसमें हम विपक्ष के रुप में जो भी रचनात्मक सहयोग दे सकते हैं वह जरुर देंगे. वक्त आने पर अच्छे-अच्छे सुझाव भी देंगे. वित्त मंत्री महोदय, एक बात जरुर कहना चाहता हूँ कि इसके लिए आप केडर ही अलग बनाइएगा, भर्ती अलग कीजिएगा. गुणवत्ता के साथ बिना पैसे के, सस्ती दर पर गरीबों के बच्चों को पढ़ने का मौका मिले. कानवेंट स्कूल में जो छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं वैसी शिक्षा प्राप्त कर सकें. यह मध्यप्रदेश के लिए बड़े सौभाग्य की बात होगी इसके लिए मैं आपको बधाई देता हूँ. मैं आपको बधाई इसलिए भी देना चाहता हूँ भले ही आपने नाम बदल दिया हो, कोई बात नहीं ऐसा होता है. समय-समय पर नाम बदल जाते हैं पर आपने एक बहुत अच्छी महत्वाकांक्षी योजना जिसको हमने पिछले बजट में भी रखा था उसको नाम बदलकर पुन: इस बजट में शामिल किया और लेकर आए.

माननीय सभापति महोदय, राइट टू वाटर जिसका नाम अब आपने जल जीवन मिशन कर दिया है. मैं यह बातें सिर्फ भाषण के लिए नहीं कह रहा हूँ. मैं आँकड़े निकालूंगा और पुराने बजट के जो प्रावधान हैं वह भी हमारे पास उपलब्ध हैं वह मैं आपके सामने रखूंगा. माननीय वित्त मंत्री महोदय, आपको बहुत-बहुत बधाई कि आपने हमारी उस योजना को भी आगे बढ़ाया है. आपने उसको राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा. यह महत्वपूर्ण है कि सभी को पीने का साफ पानी मिलना चाहिए, घर-घर में स्वच्छ जल पहुंचना चाहिए. आपने उस बात को आगे बढ़ाया है.

माननीय सभापति महोदय, यह तो मीठा-मीठा था और मैंने आपको शुभकामनाएं भी दीं कि इन कामों में आप सफल भी हों और आगे बढ़ें. थोड़ा सा कड़वा वाला भी कहना चाहता हूँ. हमारी सरकार ने एक और महत्वपूर्ण काम किया था. कर्मचारी आयोग बनाया था. कर्मचारियों की जो समस्याएं हैं उनके लिए एक आयोग बने, उससे चर्चा हो, उनकी बात को रखा जाए. जवाबदारी उन्हीं के ऊपर सौंपी जाए. उस आयोग के गठन का मकसद भी यही था कि कई बार सरकार के कामकाज में व्यवधान उत्पन्न हो जाता है, जब हमारा कर्मचारी आन्दोलित होता है. वह स्थितियां न बन पाएं, समय-समय पर उस कर्मचारी आयोग में कर्मचारी अपनी बातें रखते रहें, उसके ऊपर चर्चा होती रहे, सरकार तक आती जाए और सरकार उनका निदान करती रहे. माननीय वित्त मंत्री महोदय उस कर्मचारी आयोग की पिछले एक वर्ष में एक भी बैठक नहीं हुई. अगर हुई होती तो आज जो कर्मचारियों के अन्दर रोष का माहौल उत्पन्न हुआ है, वह चाहे उनके डीए को लेकर हो, चाहे उनके एरियर्स को लेकर हो, चाहे उनकी पदोन्नति को लेकर हो, चाहे रिटायर्ड कर्मचारियों के पेंशन के मामले हों यह वहीं सुलझा लिए गए होते और आज सरकार को भी कटघरे में खड़ा नहीं होना पड़ता.

माननीय सभापति महोदय-- माननीय सदस्य का भाषण जारी रहेगा. सदन की कार्यवाही अपराह्न 3.00 बजे तक के लिए स्थगित.

 

(1.30 बजे से 3.00 बजे तक अन्तराल)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

3:03 बजे विधान सभा पुन: समवेत हुई.

 

{अध्‍यक्ष महोदय (श्री गिरीश गौतम) पीठासीन हुए.}

 

अध्‍यक्ष महोदय-- तरुण भनोत जी अपना भाषण पूरा करें.

श्री तरुण भनोत-- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने अपने भाषण की शुरुआत ही की थी कि लंच ब्रेक हो गया. मैं माननीय वित्‍त मंत्री जी के भाषण को पढ़ रहा था जो सदन में रखा गया उसमें लिखा गया और आपके द्वारा बताया गया है कि हमें एक खाली खजाना मिला था.

3:04 बजे {सभापति महोदय (श्री लक्ष्‍मण सिंह) पीठासीन हुए.}

श्री तरुण भनोत-- अध्‍यक्ष महोदय, तत्‍कालीन सरकार कुछ भी छोड़क‍र नहीं गई थी इसीलिए हमें काम करने में बड़ी कठिनाई हुई. कोविड आया और कोविड के कारण ऐसी परिस्थितियां बनी कि निश्चित तौर पर कोई भी सरकार होती उसके लिए एक चुनौती का सवाल था और ऐसे समय पर ही हमारी परीक्षा होती है कि हम चुनौती का सामना किस प्रकार से करते हैं. वित्‍त मंत्री जी ने अपने बजट भाषण में उल्‍लेख किया कि एफ.आर.बी.एम. के ऊपर मैं अलग से सदन में अपना वक्‍तव्‍य दूंगा. मैं आपके बजट भाषण से बड़ा भ्रमित हो रहा हूं. वित्‍त मंत्री महोदय, मैं आपका ध्‍यान इस ओर आकर्षित करना चाहूंगा कि बजट भाषण के पेज 5 पर पैरा 10 में कहा गया है कि ''इस प्रकार भारत सरकार द्वारा मध्‍यप्रदेश के लिए लगभग रुपये 19 हजार 353 करोड़ के अतिरिक्‍त वित्‍तीय संसाधन का प्रावधान किया.'' ये कौन से अतिरिक्‍त वित्‍तीय संसाधन का प्रावधान केंद्र सरकार द्वारा मध्‍यप्रदेश की जनता के लिए किया गया है. यह बड़ा महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न है और मध्‍यप्रदेश की जनता को यह जानने का हक है कि केंद्र सरकार ने इतनी बड़ी दरियादिली दिखाई और 19 हजार 353 करोड़ रुपये अतिरिक्‍त वित्‍तीय संसाधानों का प्रावधान किया है. मैं बड़ा आश्‍चर्यचकित था, मुझे इसका जवाब कहीं मिल नहीं रहा था, परंतु जब मैं भाषण को पढ़ते हुए आगे बढ़ा तो मुझे इसका जवाब मिल गया.

माननीय सभापति महोदय, पेज 41 पैरा 163 में, वित्‍त मंत्री जी पेज 5 पर केंद्र सरकार को धन्‍यवाद दे रहे हैं और पेज 41 में कहते हैं कि- ''वित्‍तीय संसाधनों की कमी को देखते हुए भारत सरकार द्वारा अतिरिक्‍त ऋण लेने की सीमा स्‍वीकृत की गई है, जिसमें प्रदेश शासन को राजकोषीय घाटे की सामान्‍य सीमा 3 प्रतिशत के ऊपर, विशेष केंद्रीय सहायता के रुपये 1 हजार 320 करोड़ सहित कुल अतिरिक्‍त ऋण सीमा रुपये 19 हजार 353 करोड़ स्‍वीकृत की गई.''

माननीय सभापति महोदय, मेरी जानकारी के मुताबिक मध्‍यप्रदेश को, जो कि हमारा डेवॉल्‍यूशन (Devolution) का शेयर में है, वह लगभग 8.63% है या थोड़ा-बहुत, ऊपर-नीचे हो गया हो. उसके मुताबिक 61 हजार करोड़ रुपया मध्‍यप्रदेश को अपने हक का, जीएसटी शेयर का मिलना चाहिए था. वित्‍त विभाग के जिम्‍मेदार अधिकारी यहां बैठे हुए हैं, माननीय मंत्री जी चाहें तो उनसे जानकारी भी ले सकते हैं. आप यहां बता रहे हैं कि उस 61 हजार करोड़ के विरूद्ध रुपया 45 हजार करोड़ केंद्र से प्राप्‍त हुआ है. आप किस बात के लिए धन्‍यवाद, केंद्र सरकार को दे रहे हैं ? उन्‍होंने आपकी ऋण लेने की सीमा बढ़ा दी है, आप अतिरिक्‍त ऋण ले लीजिये, उसके ब्‍याज का भुगतान भी आप कीजिये, उसका बोझ भी मध्‍यप्रदेश की जनता और मध्‍यप्रदेश सरकार के खज़ाने पर आयेगा. हमारा पैसा कहां गया ?

माननीय सभापति महोदय, वर्ष 2019 में हमें जो रेवेन्‍यू जीएसटी के अगेंस्‍ट में केंद्र सरकार से प्राप्‍त हुई वह 49 हजार 500 करोड़ रुपया था. हम सरकार में थे. जीएसटी काउंसिल की बैठक हुई, हमने हल्‍ला मचाया, इस बात पर विरोध प्रकट किया कि 49 हजार 587 करोड़ की राशि या थोड़ी-बहुत, इधर-उधर होगी, उसके विरूद्ध आपने मध्‍यप्रदेश की जनता को 12 हजार करोड़ रुपये कम दिये हैं. हम उस 12 हजार करोड़ की क्षतिपूर्ति की बात कर रहे थे. अगले वित्‍तीय वर्ष में जब उस राशि को बढ़कर मिलना था तो आप 45 हजार करोड़ रुपये मिलने पर केंद्र सरकार को धन्‍यवाद दे रहे हैं और साथ ही यह भी कह रहे हैं कि हमें अतिरिक्‍त वित्‍तीय संसाधन केंद्र सरकार द्वारा उपलब्‍ध करवाये गये. उन्‍होंने कुछ उपलब्‍ध नहीं करवाया अपितु मध्‍यप्रदेश की जनता पर ऋणों का बोझ और बढ़ गया. हो सकता है, आप की मजबूरी हो, केंद्र सरकार के सामने आप नहीं कह पा रहे हों परंतु मैं बताना चाहूंगा कि यह हमारी और आपकी सरकार में अंतर था कि हम मध्‍यप्रदेश की जनता की बात निर्भीक तरीके से जीएसटी काउंसिल की बैठक में केंद्रीय वित्‍त मंत्री महोदया के समक्ष रखते थे और कहते थे कि मध्‍यप्रदेश को उसका पैसा मिलना चाहिए. हमारा पैसा कम हो रहा है, हमारा राजकोषीय घाटा बढ़ता जा रहा है, हमारे ऊपर लोन की सीमा बढ़ती जा रही है.

माननीय सभापति महोदय, मैं इस सदन के माध्‍यम से वित्‍त मंत्री जी से एक और प्रश्‍न पूछना चाहता हूं कि हमें यह जानकारी मिली है कि आपको FRBM (Fiscal Responsibility and Budget Management) में एक प्रतिशत की छूट मिली है कि आप अतिरिक्‍त लोन ले सकते हैं. मंत्री जी, जब आप इस सदन में इस चर्चा के पश्‍चात् जवाब देंगे तो जरूर पूरे सदन को इस बात से अवगत करवाइयेगा कि वह छूट कब तक के लिए है. मैं वित्‍त विभाग के आंकड़े देख रहा था और यह चौंकाने वाली बात है, इसमें राजनीति की बात नहीं होनी चाहिए. हम सभी सदन के जिम्‍मेदार सदस्‍य हैं. हम मध्‍यप्रदेश की जनता का प्रतिनिधित्‍व इस सदन में करते हैं, हमें उनके हक की बात को बड़े ध्‍यान से इस सदन में रखना पड़ेगा. यह नहीं कि आज हम सरकार में हैं, कल आप थे, कल हम होंगे. हमें मध्‍यप्रदेश के दूरगामी भविष्‍य को भी देखना पड़ेगा. क्‍योंकि विश्‍वास के साथ भी हमें भी लोगों ने इस सदन में भेजा है. 21 हजार करोड़ के लगभग ऋण के रूप में मध्‍यप्रदेश सरकार ने ब्‍याज की राशि अदायगी की. सिर्फ ब्‍याज 21 हजार करोड़ रूपये का, आप उसको भाग देकर देखिये वित्‍त मंत्री महोदय उसका अर्थ यह होता है कि 60 करोड़ रूपये मध्‍यप्रदेश सरकार प्रतिदिन ब्‍याज के रूप में भर रही है, जो आपने लोन लिया है उसका. आप उसका एक और भाग करके देखिये कि प्रति घण्‍टे मध्‍यप्रदेश की जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा ब्‍याज के रूप में हम ढाई करोड़ रूपये भर रहे हैं. माननीय हम कर्ज लेकर प्रदेश को आगे बढ़ाना चाहते हैं और माननीय मैं स्‍वस्‍थ परम्‍परा पर विश्‍वास करता हूं, मैं कर्ज के खिलाफ नहीं हूं. आम आदमी भी अपने जीवन में कर्ज लेता है और उसका प्रबंधन करता है, सोच के, विचार करके सलाह करके, जो इकानॉमिस्‍ट होते हैं उनके साथ बैठकर और आपके पास तो बहुत अच्‍छी टीम है जो वित्‍त विभाग को वल्‍लभ भवन में संभाल रही है. कई बार हम अपनी राजनीतिक मजबूरियों को देखते हुए ऐसी बातें थोपने का प्रयास करते हैं और उसके दूरगामी प्रभावों की, परिणामों की हम चिंता नहीं करते हैं, यह एक सोचनीय विषय है. आपने प्रस्‍तावित किया है कि इस वित्‍तीय वर्ष में आपने जो बजट पेश किया है उसकी पूर्ति हेतु लगभग 49 हजार 8 सौ करोड़ रूपये का कर्जा और लेंगे. यह बहुत ज्‍वलंत प्रश्‍न हम सबके सामने है. सभापति महोदय,कर्जा लेना तो बहुत आसान होता है और पीढि़यां भी कर्जे नहीं चुका पाती हैं. इस पर हमको विचार करना पड़ेगा, सरकार यह प्रयास क्‍यों नहीं करती कि हम अपने अतिरिक्‍त वित्‍तीय संसाधन जुटायें,बहुत से तरीके से हो सकते हैं, हमने भी प्रयास किया था, आपने कहा खाली खजाना छोड़ गये. माननीय वित्‍त मंत्री महोदय, आप अपने पुराने लेखे-जोखे को उठाकर देखिये कि जब हम सरकार में आये तो रेवेन्‍यु के रूप में आपको आबकारी से कितना पैसा प्राप्‍त होता था और जो नीति हमने बनायी उसके बाद आपको कितना रूपया प्राप्‍त हुआ.

सभापति महोदय, आज सदन में रेत का बड़ा ज्‍वलंत मुद्दा रेत का था, बार-बार उठ रहा था रेत के उत्‍खनन का, जब प्रश्‍नकाल चल रहा था तो सदन को स्‍थगित तक करना पड़ा था. माननीय वित्‍त मंत्री महोदय, पूर्ववर्ती सरकार के समय जब हम सरकार में आये उसके पहले मेरी जानकारी के मुताबिक सरकार को कुल दौ सौ, सवा दौ सौ रूपये की रेवेन्‍यु मिलती थी, जो नीति हमने बनायी उसके मुताबिक आज आपने बड़े गर्व के साथ कहा कि साढ़े चौदह सौ करोड़ रूपये हमें सिर्फ रेत के टेण्‍डर की नीलामी की प्रक्रिया अपनायी है, उससे प्राप्‍त होगा. माननीय महोदय, मैं श्रेय नहीं लेना चाहता हूं पर वह टेण्‍डर कब हुए थे, वह नीति कब बनी थी ? बनाकर हम गये थे, करके हम गये थे, पैसा आया, हमारे घर का पैसा नहीं था मध्‍यप्रदेश की आम जनता का पैसा था, परन्‍तु यह हमारा कर्तव्‍य भी बनता है कि जब पैसा आया तो पैसा खर्चा कैसे हो, यह प्रश्‍न हम बहुत दिनों तक टाल नहीं सकते हैं. इस समाधान को हम टाल नहीं सकते हैं, हमें कई बार राजनीतिक मजबूरियों को पीछे छोड़कर ऐसे कदम भी उठाने पड़ेंगे कि अगर हम सही में एक आत्‍म निर्भर मध्‍यप्रदेश बनाना चाहते हैं, हम अपने नौजवानों को काम देना चाहते हैं, हम सही में एक आधारभूत अच्‍छा ढांचा प्रदेश के अंदर खड़ा करना चाहते हैं, अगर हम यह चाहते हैं कि हमारे बेटे-बेटियां पढ़ें, आगे बढ़ें, उनके लिये अच्‍छी शिक्षा की व्‍यवस्‍था हो तो हमें बहुत गंभीरता के साथ कई चीजों को रिवाइज करके सोचना पड़ेगा और एक नई सोच के साथ आगे बढ़ना पड़ेगा और मैंने आपसे पहले भी कहा है कि आपके पास बहुत सारी ऐसी क्षमताएं मौजूद हैं जिनका उपयोग हमें राजनैतिक तौर-तरीकों को छोड़कर करना पड़ेगा. बड़े काबिल अधिकारी बैठे हैं, एक से एक इकॉनामिस्‍ट बैठे हैं, हम भी उनसे सलाह लेते थे. माननीय वित्‍त मंत्री महोदय, आप उनसे सलाह लीजिये आप उनको बुलाइये सेमीनार आयोजित कीजिये, आपने लिखा भी है कि आप वेबीनार आयोजित करेंगे, परन्‍तु यह तो आपको बजट लाने से पहले भी करना चाहिये था, उनसे चर्चा करना चाहिये था, पूछना चाहिये था कि बिना जनता पर बोझ डाले, बिना कर्ज का बोझ बढ़ाये हम कैसे अपने प्रदेश की जनता को सबसे अच्‍छी बेहतर सुविधाएं दे सकते हैं. कैसे हम आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश बनाने की ओर तेजी से अग्रसर हो सकते हैं ? आप वित्त विभाग के मंत्री हैं, कामर्शियल टैक्स विभाग भी आपके पास है, योजना भी आपके पास है, आर्थिक सांख्यिकी विभाग भी आपके पास है. एक बड़ी विरोधाभासी चीज मुझे देखने को मिली जो मैं कह रहा हूं तथ्यों के साथ कह रहा हूं. आपसे उत्तर की अपेक्षा भी करूंगा जब आप चर्चा के बाद अपना वक्तव्य देंगे. मध्यप्रदेश में आर्थिक सर्वेक्षण आया बजट के पहले प्लानिंग विभाग लाता है उसके मंत्री भी आप हैं. उसमें मैंने बड़ी चौकाने वाली चीज देखी. आर्थिक सर्वेक्षण यह कहता है कि हमारी जी.एस.डी.पी. सकल घरेलू उत्पाद 10 लाख करोड़ के करीब रहेगा, उसके नीचे रहेगा. जो बजट आपने 2021-22 का रखा है इसमें आप कह रहे हैं कि हमारी जी.एस.डी.पी. का अनुमान जो है 11 लाख 50 हजार करोड़ रूपये से अधिक है. मैं किसको सही मानू ? आप दोनों विभागों के मंत्री हैं. आपके प्लानिंग विभाग के आर्थिक सर्वेक्षण को सही मानू कि वित्त विभाग के द्वारा आपने जो बजट प्रस्तुत किया इसको मैं सही मानू ? अगर इस प्रकार से भ्रमित करके हम सिर्फ आंकड़ों का खेल खेलेंगे तो मध्यप्रदेश का भविष्य क्या होगा इसकी कल्पना हम यहां पर बैठे सब जिम्मेदार व्यक्ति कर सकते हैं. 175 पैरा इस बजट भाषण में है उसमें वायदे, प्रावधान, उसमें यह करेंगे, सोचेंगे, प्रयास करेंगे. पर अगर प्रावधानित करके बजट के लिये कुछ चीजे रखी गई हैं. वह मात्र 20 से 24 पैरा में सिमट जाती हैं. क्या इस प्रकार से हम आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश बनाने वाले हैं. सिर्फ एक कागज जिसे हम बजट विजन डाक्यूमेन्ट कहते हुए इस सदन के अंदर रख दें और अपेक्षा यह करें कि हम जिम्मेदार जन-प्रतिनिधि यहां पर बैठकर इसको पास कर देंगे. मैंने पहले ही कहा था कि मैं नकारात्मक राजनीति में कभी विश्वास नहीं करता. हम विपक्ष के रूप में सकारात्मक भूमिका निभाने के लिये तैयार हैं, हम आपको हर कदम पर साथ देने को तैयार हैं, क्योंकि आपके पास जिम्मेदारी जितनी महत्वपूर्ण शासन चलाने की है उससे ज्यादा महत्वपूर्ण जनता ने हमें जिम्मेदारी सौंपी है. हमें विपक्ष मे रहते हुए आपके हर कदम को अगर गलत दिशा में जाता है उसको ठीक करने के दायित्व हमारे पास में है. मैं वित्तमंत्री जी के सामने कुछ आंकड़े रखूंगा. आपने यह कहा था कि यह सब हमने किया पहले कुछ नहीं किया गया था वह मेरे पास में सारे आंकड़े हैं. मैं पुराना बजट का भाषण भी लाया हूं और उसमें जो प्रावधान थे वह भी आपके सामने जरूर रखूंगा. एक बात मैं समझ नहीं पा रहा हूं वैसे तो हम हर मामले में बड़े भावनात्मक हो जाते हैं और भारतीय परम्परा एवं हमारी संस्कृति है. मनुष्य में भावनाएं होनी भी जरूरी हैं, पर ऐसी भावनाएं हमारी जब हम वित्तीय प्रबंधन की बात करते हैं, हम क्यों यह सोचते हैं कि हम कहीं कमजोर दिखेंगे, कहीं कमजोर पड़ेंगे. मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि आप जो बाजार से ऋण लेते हैं उसका एक प्रोसेस है मार्केट में आपके 7 प्रतिशत से लेकर 8 प्रतिशत तक की दरों पर ब्याज पर पैसा मिलता है. आप हमेशा से प्रयास करते हैं जब मैं भी वित्त विभाग में था तो मुझे भी अधिकारी समझाते थे कि वेज एण्ड मीन्स नहीं लगना चाहिये, क्यों नहीं लगना चाहिये उससे क्या नकारात्मक होने वाला है, सदन को तथा मध्यप्रदेश की जनता को आप बतायें? अगर वेज एण्ड मीन्स लगेगा उसमें जो ऋण आप ले रहे हैं वह 3 से साढ़े तीन प्रतिशत पर मिलेगा. हम क्यों उससे बचना चाहते हैं ? क्यों भावनात्मक हो जाते हैं, क्यों झूठी वाहवाही करना चाहते हैं ? यह किसी का व्यक्तिगत रूपया थोड़े ही है जो हमें ब्याज के रूप में देना है. यह मध्यप्रदेश की आम जनता का पैसा है जो करों के रूप में हमें प्राप्त होता है चाहे वह जीएसटी से केन्द्र से आये चाहे यहां से आये. लगने दीजिये वेज एण्ड मीन्स लीजिये 3 से साढ़े तीन प्रतिशत पर पैसा, क्यों हम 7 से 8 प्रतिशत का ब्याज हम भरेंगे. कौन आपको रोकता है?

कौन रोकता है आपको हम आपका साथ देंगे हम यहां सवाल नहीं उठाएंगे, बल्कि यहां बैठकर ताली बजाएंगे कि नहीं आपने प्रदेश की जनता का पैसा बचाया. 4 प्रतिशत कम ब्‍याज पर आपने पैसा लिया. माननीय सभापति जी, 15 वां वित्‍त आयोग मध्‍यप्रदेश में आया था. हमने मुलाकात की एक बड़े काबिल व्‍यक्ति उसके अध्‍यक्ष थे, जो पूर्व में हिन्‍दुतस्‍तान के केबीनेट सेक्रेटरी भी रह चुके हैं, आदरणीय एन.के. सिंह साहब. मुझे जानकारी हुई मिली है कि शायद 15 वें वित्‍त आयोग ने अपनी सिफारिशें प्रस्‍तुत भी कर दी. हमने उनसे निवेदन किया कि केन्‍द्र सरकार मध्‍यप्रदेश के साथ बहुत भेदभाव करती है और खासतौर पर मध्‍यप्रदेश जैसा राज्‍य जो खेती के ऊपर 70 प्रतिशत निर्भर करता है. हिन्‍दुस्‍तान में यदि आनुपातिक देखा जाए तो आदिम जाति, हमारे यहां सबसे ज्‍यादा शेड्यूल ट्रायबल के लोग रहते हैं, उनकी संख्‍या सर्वाधिक है मध्‍यप्रदेश में, एस.सी. वर्ग के लोगों की संख्‍या सर्वाधिक है. हमारे साथ भेदभाव क्‍या होता है, सभापति महोदय, वित्‍त मंत्री महोदय, इस बारे में आप जरूर केन्‍द्रीय वित्‍त मंत्री महोदया से निवेदन कीजिए और जरूरत पड़े तो प्रधामंमंत्री महोदय के पास चले, मध्‍यप्रदेश की जनता की बात है, आपके नेतृत्‍व में हम भी आपके साथ चलने को तैयार हैं और यह मांग उनके सामने रखेंगे कि जब आप सरचार्ज और सेस लगाते हैं तो लाखों करोड़ों रूपए हमारे हिन्‍दुस्‍तान की जनता से मध्‍यप्रदेश की जनता से वसूलते हैं, उसको डिवोल्‍युशन के शेयर में क्‍यों नहीं डालते, अनुपातिक मात्रा जो हमें हमारा परसेंटेज मिलना है, जीएसटी के कलेक्‍टशन का वह सेस और सरचार्ज में क्‍यों नहीं मिलना चाहिए. क्‍या मध्‍यप्रदेश की जनता के ऊपर आप सेस और सरचार्ज नहीं लगाते. मेरी जानकारी के मुताबिक सेस और सरचार्ज से केन्‍द्र की सरकार को 4 लाख करोड़ रूपए से भी अधिक प्राप्‍त होगा. 4 लाख करोड़ में 32 हजार करोड़ कम से कम मध्‍यप्रदेश की जनता का हिस्‍सा है.

सभापति महोदय - आप 1-2 मिनट में खत्‍म कीजिए. सारे बिन्‍दुओं पर आपने बहुत अच्‍छी तरह से बात रखी.

श्री तरुण भनोत - अभी तो मैं आपसे बता रहा हूं, यह आपके और प्रदेश की जनता के काम आएंगे, अगर आपको लगता है, महत्‍वपूर्ण है तो वित्‍त मंत्री महोदय आप ही सभापति महोदय से निवेदन कर दें कि मुझे 5 मिनट अतिरिक्‍त देवें.

सभापति महोदय - आपका अभी आधा घंटा हो गया है, पार्टी की तरफ से स्‍पष्‍ट नाम है, बाकी जो सदस्‍य हैं, उनका समय कम होता जा रहा है. एक-दो मिनट में समाप्‍त कीजिए.

श्री तरुण भनोत - हम लोग सब एक ही है, कहावत है न हाथी के पांव में सबका पांव.

सभापति महोदय - चलिए समाप्‍त कीजिए.

श्री तरुण भनोत - माननीय सभापति जी, आपके ऊपर टोटल जो लोन है वह लगभग 2 लाख 33 हजार करोड़ रूपए से अधिक हो गया है, जो आपने वर्ष 2021-22 के लिए रखा है, उसके मुताबिक वह हो जाएगा, 2 लाख 82 हजार करोड़ रूपए से भी अधिक. आप लोन लेते जा रहे हैं, ब्‍याज बढ़ता जा रहा है, पब्लिक वेलफेयर में, जनता के कल्‍याणकारी कार्यों में हमारी जो सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी हुई स्‍कीम्‍स है, उसके तहत जो लाभ मिलना चाहिए, उसका बहुत बड़ा भाग आप ब्‍याज के रूप में बैंकों को चुका रहे हैं. यह एक बड़ी सोचनीय बात है. वित्‍त मंत्री महोदय, आपने एक बात और कहीं थी, मैंने शुरू में कहा भा था, यह दावा किया गया, अखबारों में, टी.वी. में सभी जगह जीरों प्रतिशत टैक्‍सेशन का कर, आपने प्रस्‍तावित किया, राज्‍य के मुख्‍य कर राजस्‍व जो आपको प्राप्‍त होने वाले हैं, इस वित्‍तीय वर्ष में, जीएसटी बिक्री कर, प्रवेश कर विलासिता कर 36 प्रतिशत बढ़कर आपको मिलेगा, राज्‍य उत्‍पाद शुल्‍क 9 हजार करोड़ से बढ़कर 12 हजार 109 करोड़ रूपए हो जाएगा, स्‍टाम्‍प तथा पंजीकरण शुल्‍क 5 हजार करोड़ से बढ़कर 6 हजार 495 करोड़ हो जाएगा, आय तथा व्‍यय पर अन्‍य कर 325 से बढ़कर 340 करोड़ हो जाएंगे, वाहन कर ढाई हजार से बढ़कर 3 हजार 600 करोड़ रूपए हो जाएगा, भू राजस्‍व 500 करोड़ से बढ़कर 850 करोड़ हो जाएगा, विद्युत कर तथा शुल्‍क 3 हजार करोड़ से बढ़कर 31 सौ करोड़ हो जाएगा, खनिज उपकर 650 करोड़ से बढ़कर 680 करोड़ हो जाएगा. माननीय जब आप वही जीरों प्रतिशत टैक्‍सेशन का बजट लाए हैं, कोई नया कर आप नहीं लगा रहे हैं तो ये रेवेन्‍यु आपकी कैसे बढ़ रही है और अगर इतनी रेवेन्‍यू आपकी बढ़ रही है तो आप यह क्‍यों प्रस्‍तावित कर रहे हैं कि अगले वित्‍तीय वर्ष में हम लगभग 50,000 करोड़ रुपये का नया लोन लेने जा रहे हैं. इन प्रश्‍नों के जवाब मध्‍यप्रदेश की जनता आपसे चाहती है.

सभापति महोदय - अब आप समाप्‍त कीजिये.

श्री तरुण भनोत - मैंने आपसे कहा है कि हमारा एक वक्‍ता कम हो जायेगा. आप 5 मिनट दे दीजिये.

सभापति महोदय - मैं आपको 5 मिनट नहीं दे सकता हूँ. आप केवल एक मिनट में समाप्‍त करें.

श्री तरुण भनोत - सभापति महोदय, हमारी जनता परेशान है, कर्मचारी परेशान हैं, किसान परेशान हैं और साथ-साथ अब तो हमारे घरों की गृहणियां- हमारी माताएं एवं बहनें, जो चूल्‍हा-चौका करती हैं, वह भी महंगाई से परेशान हैं. मैं आपसे पुन: निवेदन कर रहा हूँ कि कम से कम पेट्रोलियम पदार्थों पर आप 5 प्रतिशत जीएसटी कम करें, स्‍टेट के लिए वैट कम करें. अब कुछ आंकड़े बताकर अपनी बात समाप्‍त करूँगा. आपने यह कहा था कि पिछली सरकार ने कुछ नहीं किया है. कृषि बजट के लिये सन् 2019-20 में 46,559 करोड़ रुपये का प्रावधान हमारी सरकार ने किया था. किसानों के ऋण माफ करने हेतु 'जय किसान फसल माफी योजना' में 8,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था और माननीय सभापति महोदय, वह बजट इसी सदन ने पास किया था और वह लागू भी हुआ था. आप कहते हैं कि हमारी सरकार ने किसानों का ऋण माफ नहीं किया. (डॉ. सीतासरन शर्मा जी को उनके स्‍थान पर खड़े होते हुए देखकर) पंडित जी, आप बहुत विद्वान हैं, आपको मौका मिलेगा.

डॉ. सीतासरन शर्मा - किसानों का ऋण कितना था ? 50,000 करोड़ रुपये. आपने 8,000 करोड़ रुपये दिये.

श्री तरुण भनोत - आप सभापति महोदय जी से बोल दें, वे मुझे समय दे दें. मैं आपकी बात का जवाब दूँगा.

सभापति महोदय - आप समाप्‍त करें.

श्री तरुण भनोत - माननीय हमारे यहां किसानों के ऊपर, आप बता रहे हैं 50,000 करोड़ रुपये कर्जा था. यह फिगर आपको किसने दिया. बैंकों ने किसानों के ऊपर कर्ज निकाला हुआ था, उनके एकाउंट बन्‍द थे, एनपीए था, हमारे माननीय तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री महोदय ने बैंक के उच्‍चाधिकारियों से बैठकर बात की. प्रथम चरण में जिन किसान भाइयों के ऊपर 28,000 करोड़ रुपये का ऋण बाकी था, उसका अगर हमने 8,000 करोड़ रुपये में सेटलमेंट करके उस ऋण को चुकाया तो हमने प्रदेश का पैसा ही बचाया, न कि हम वह पैसा उठाकर बैंकों को दे देते. जो जनता की गाढ़ी कमाई का टैक्‍सों के रूप में प्राप्‍त पैसा था. यह तो हमारा प्रबंधन था, हमारा कुशल मैनेजमेंट था कि 28,000 करोड़ रुपये की हमारी देनदारियां, हमने किसान भाइयों की 8,000 करोड़ रुपये में करवाकर उनके खाते पुन: चालू करवा दिये. आप बोलते हैं कि आपने 50,000 करोड़ रुपये क्‍यों नहीं दिये ? तो क्‍या वे 50,000 करोड़ रुपये हमसे मांगते और हम उनको दे देते. मुझे अपने घर से पैसा नहीं देना था. तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री जी को अपने खाते से पैसा नहीं देना था. यह जनता का पैसा था अगर हमने बैंकों से सहमति करके 28,000 करोड़ रुपये के कर्जे को 8,000 करोड़ रुपये में बराबर करके किसानों को राहत दी, तो आपको तो हमारी पीठ थपथपानी चाहिए.(मेजों की थपथपाहट) आप हमारा विरोध करते हैं.

माननीय सभापति महोदय, उद्यानिकी में हमने 1,116 करोड़ रुपये की राशि प्रस्‍तावित की थी, आपने 1,236 करोड़ रुपये प्रस्‍तावित किये हैं. यहां पर बड़ी-बड़ी बातें की जा रही थी, मैं दावे के साथ इस सदन में कह रहा हूँ कि आप पुराने बजट को उठाकर पढ़ लीजिये. मेरे पास कॉपी है, यदि आपको चाहिए तो आपको भी दे दूँगा. सहकारिता विभाग के लिए हमने 2,583 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था और हमने सहकारिता विभाग के अंतर्गत सहकारी बैंकों को अंश पूंजी हेतु 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था. सहकारी बैंकों के माध्‍यम से कृषकों को अल्‍पकालीन ऋण पर ब्‍याज अनुदान हेतु 700 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था, आप कहते हैं कि हमने किसानों के लिए कुछ नहीं किया, हमने सहकारिता के लिए कुछ नहीं किया. पशुपालन एवं मछुआ कल्‍याण में हमारे द्वारा 1,204 करोड़ रुपये की राशि प्रावधानित की थी और आपने 866 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया है. माननीय महोदय, ग्रामीण विकास की योजनाओं के लिए 17,186 करोड़ रुपये का प्रावधान माननीय वित्‍त मंत्री महोदय, तत्‍कालीन सरकार ने किया था, जिसमें ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना पर बार-बार यह हल्‍ला मचाया जाता है कि कांग्रेस पार्टी की तत्‍कालीन सरकार ने उन योजनाओं को बन्‍द कर दिया था, हमने दोबारा शुरू कर दी. मैं आंकड़ों के साथ आपको बता रहा हूँ. आप वित्‍त मंत्री हैं. हमने 6,600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था. राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना हेतु हमने 2,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था और आप सदन में, इस महत्‍वपूर्ण जगह पर खड़े होकर आप बोल देते हैं कि सरकार ने सारी योजनाएं बंद कर दी थीं, गरीबों के आवास बंद कर दिये थे, शहर में रहने वाले लोगों ने गरीबों के आवास बन्‍द कर दिये थे.

सभापति महोदय - तरुण जी, बहुत-बहुत धन्‍यवाद. आपका अच्‍छा संबोधन रहा. आपके मंत्री के रूप में संबोधन से भी अच्‍छा रहा. धन्‍यवाद. सारे बिन्‍दुओं पर चर्चा हो गई.

श्री तरुण भनोत - सभापति जी, संबोधन अच्‍छे या बुरे की बात नहीं है. आपने मुझे बोलने का समय दिया, उसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

सभापति महोदय -- आपने बहुत अच्‍छा बोला है, सारे बिंदुओं पर चर्चा हो गई है.

श्री तरूण भनोत -- माननीय सभापति महोदय, यह मध्‍यप्रदेश की जनता के भविष्‍य की बात है. आत्‍मनिर्भर मध्‍यप्रदेश का सपना सिर्फ सपना न रह जाये. सभापति महोदय, आपने समय दिया इसके लिये धन्‍यवाद. मैं बात तो अपनी ओर रखना चाहता था पर किसी ओर प्‍लेटफार्म पर व्‍यक्तिगत तौर पर मिलकर भी रख सकता हूं. माननीय सभापति महोदय, मुझे यह विश्‍वास है कि हमारे जो सुझाव होंगे आप उसको सकारात्‍मक तरीके से लेंगे और अधिकारियों से चर्चा करके अगर कुछ नया हम समाहित कर सकते हैं तो इसमें कोई छोटा बड़ा नहीं हो जाता है. जब आपने सुझाव रखे थे तो हमने भी आपके सुझावों को माना था. आप जरूर बड़प्‍पन दिखायेंगे और हमारी बातों को भी समाहित करेंगे, धन्‍यवाद.

श्री केदारनाथ शुक्‍ल (सीधी) -- माननीय सभापति जी, लोकोपकारी बजट के लिये माननीय मुख्‍यमंत्री जी, वित्‍तमंत्री जी और पूरी सरकार को धन्‍यवाद है.

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया,

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुख भागभवेत।

माननीय प्रधानमंत्री जी ने आत्‍मनिर्भर भारत का आह्वान किया है. मध्‍यप्रदेश सरकार ने नीति निर्धारकों, वरिष्‍ठ प्रशासनिक अधिकारियों, नागरिकों से इन सबसे विचार विमर्श करके कुछ रोड मेप तैयार किया है. आत्‍मनिर्भर मध्‍यप्रदेश के निर्माण के लिये चार स्‍तंभ तय किये गये है. भौतिक अधोसंरचना, शिक्षा एवं स्‍वास्‍थ्‍य, अर्थव्‍यवस्‍था एवं रोजगार, सुशासन सभी क्षेत्रों में समय सीमाओं में लक्ष्‍य प्राप्‍त करने का उद्देश्‍य है और चारों स्‍तंभों में अपने कुछ नये मिशन हैं, उन मिशन की हम प्राप्ति करेंगे.

माननीय सभापति महोदय,हम अगर विस्‍तार में जायेंगे तो भाषण बड़ा लंबा होगा लेकिन हम कुछ टू दा प्‍वाइंट बात करेंगे. आत्‍मनिर्भर बजट वर्ष 2021-22 में मिशन मोड तैयार किया है. जनता का बजट तैयार करने के लिये सुझाव लिये गये हैं. वर्ष 2021-22 का बजट डिजिटली प्रस्‍तुत किया गया है, जिसे एम.पी.गर्वनमेंट डायरी एप के माध्‍यम से कभी भी देखा जा सकता है. यह Budget www.finance.mp.gov.in वित्‍त विभाग की वेबसाईट पर भी उपलब्‍ध रहेगा. अब इसमें कुल विनियोग की राशि 2 लाख 41 हजार 375 करोड़ रूपया है, जिसमें कुल शुद्ध व्‍यय 2 लाख 17 हजार 123 करोड़ का प्रावधान किया गया है. इसमें राजस्‍व घाटा 8 हजार 294 करोड़ रूपये का है. सकल राज्‍य घरेलु उत्‍पाद से राजकोषीय घाटे का 4.5 प्रतिशत अनुमानित है. अनुमानित राजस्‍व प्राप्तियां 1 लाख 64 हजार 677 करोड़ है, जिसमें राज्‍य के स्‍वयं के कर की राशि 64 हजार 914 करोड़ रूपये है. केंद्रीय करों में प्रदेश का हिस्‍सा 52 हजार 247 करोड़, क्रयेत्‍तर राजस्‍व 11 हजार 742 करोड़ एवं केन्‍द्र से प्राप्‍त सहायता अनुदान राशि 35 हजार 774 करोड़ रूपये शामिल है. वर्ष 2021-22 में वर्ष 2020-21 के पुनरीक्षित अनुमान की तुलना में राज्‍य स्‍वयं के कर राजस्‍व में 22 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है. वर्ष 2021-22 में वर्ष 2020-21 के पुनरीक्षित अनुमान की तुलना में राजस्‍व व्‍यय में 9 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है. इसी तरह पूंजीगत परिव्‍यय में वर्ष 2021-22 में सकल घरेलू उत्‍पाद का 3.9 प्रतिशत अनुमानित है. राजस्‍व घाटा राज्‍य के सकल घरेलू उत्‍पाद का माइनस 0.73 प्रतिशत है. वर्ष 2021-22 में ब्‍याज भुगतान का कुल राजस्‍व प्राप्तियों का 12.72 प्रतिशत है.

माननीय सभापति महोदय, अब विभागवार हम इन सब बातों को देखेंगे तो अनुसूचित जनजाति सब स्‍कीम जितनी हैं, उनमें 24 हजार 911 करोड़ रूपया अनुसूचित जनजाति के लिये जो हमारी उप योजनाएं हैं, उनमें हम खर्च करने जा रहे हैं. अनुसूचित जाति सब स्‍कीम है, अनुसूचित जनजाति के लिये है 24 हजार 911 करोड़ रूपये है, अनुसूचित जाति के लिये जो विभिन्‍न परियोजनाएं हैं 17 हजार 980 करोड़ रूपये की हैं. सरकारी प्राथमिक शालाओं की स्‍थापना हेतु 9 हजार 793 करोड़ का प्रावधान स्‍कूल शिक्षा विभाग के मार्फत किया गया है. एक नई बात जो शुरू करने जा रहे हैं, जिसे प्रधानमंत्री जी ने भी कहा जल मिशन, तो जल जीवन मिशन हेतु 5 हजार 765 करोड़ रूपये का प्रावधान हमारी सरकार ने किया है. माध्‍यमिक शालाएं, शालाओं का विकास और शालाओं के लिये 5 हजार 329 करोड़ रूपये का प्रावधान माध्‍यमिक शालाओं के लिये किया है. अटल कृषि ज्‍योति योजना के लिये 4600 करोड़ रूपये का प्रावधान किया है. शासकीय हाईस्‍कूल, हायर सेकेण्‍डरी शालाओं हेतु 4 हजार 27 करोड़ रूपये का प्रावधान किया है. समग्र शिक्षा अभियान हेतु 3993 करोड़ रूपये का प्रावधान किया है. 15वें आयोग की बात आई थी, 15वें वित्‍त आयोग की अनुशंसा अनुसार स्‍थानीय निकायों को अनुदान हेतु 4394 करोड़ रूपये का प्रावधान किया है. प्रवेश कर से नगरीय निकायों को हस्‍तांतरण हेतु 3600 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है. मुख्‍यमंत्री किसान कल्‍याण योजना में 3200 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है. राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ मिशन हेतु 3035 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है. प्राथमिक शालाओं हेतु जनजातीय कार्य विभाग में 2987 करोड़ रूपये, जनजातीय के लिये अलग योजनायें हैं उनके लिये पहले बताया था, यह विद्यालय के लिये है, प्राथमिक शालाओं के लिये, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना हेतु 2925 करोड़ रूपये का प्रावधान, अटल गृह ज्‍योति योजना के लिये 2581 करोड़ रूपये का प्रावधान, प्रधानमंत्री आवास योजना हेतु 2500 करोड़ रूपये का प्रावधान है, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना हेतु 2220 करोड़ रूपये का प्रावधान है. नहर तथा उससे संबंधित निर्माण कार्य हेतु 2026 करोड़ रूपये का प्रावधान है. कला, विज्ञान तथा वाणिज्‍य महाविद्यालयों के लिये 2016 करोड़ रूपये का प्रावधान है. राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना हेतु 2 हजार करोड़ रूपये का प्रावधान है. मुख्‍यमंत्री कृषक फसल उपार्जन सहायता हेतु 2 हजार करोड़ रूपये का प्रावधान है. बाह्य तथा संलग्‍न कार्य हेतु 1885 करोड़ रूपये का प्रावधान है. सामाजिक सुरक्षा तथा कल्‍याण हेतु 1816 करोड़ रूपये का प्रावधान है. माध्‍यमिक शालाओं हेतु 1769 करोड़ रूपये, हाउसिंग फॉर ऑल के लिये 1500 करोड़ रूपये का प्रावधान है. सीएम राइज हेतु 1500 करोड़ रूपये का प्रावधान है. न्‍यूनतम आवश्‍यकता कार्यक्रम विशेष पोषण आहार योजना 1450 करोड़ रूपये का प्रावधान है. मध्‍यप्रदेश विद्युत मंडल द्वारा 5 एच.पी. के कृषि पम्‍प, थ्रेसर तथा एक बत्‍ती कनेक्‍शन को नि:शुल्‍क विद्युत प्रदाय हेतु प्रतिपूर्ति रूपये 1301 करोड़ रूपये का प्रावधान है. आंगनबाड़ी सेवायें जो गांव में चलती हैं उनके लिये 1272 करोड़ रूपये का प्रावधान है. मेग्‍नीफिसेंट, एमपी इनवेस्‍टमेंट अर्टेक्‍शन स्‍कीम हेतु 1237 करोड़ रूपये का प्रावधान है. जिला सिविल अस्‍पताल एवं औषधालय हेतु 1208 करोड़ रूपये का प्रावधान है. चिकित्‍सा महाविद्यालय तथा संबद्ध चिकित्‍सालय हेतु 1172 करोड़ रूपये का प्रावधान है. इंदिर गांधी राष्‍ट्रीय वृद्धवस्‍था पेंशन 1144 करोड़ और मध्‍यान्‍ह भोजन कार्यक्रम हेतु 1001 करोड़ रूपये का प्रावधान है. अटल मिशन फार रिजुवनेशन एण्‍ड अर्बन ट्रांसफार्मेशन 1000 करोड़ रूपये रूपये का प्रावधान है. सहकारी बैंकों के माध्‍यम से कृषकों को अल्‍पकालीन ऋण पर ब्‍याज अनुदान 1 हजार करोड़ रूपये का प्रावधान है.

श्री पी.सी. शर्मा-- शुक्‍ला जी, यह तो वित्‍तमंत्री जी ने बजट में पढ़ दिया था, आप उसको फिर से पढ़ रहे हो. यह सभी जानकारी बजट में आ गई है.

श्री केदारनाथ शुक्‍ल-- वित्‍तमंत्री जी ने जो बजट भाषण दिया है उसी पर तो भाषण होगा और उस पर यहां से निकालकर के किस मद में कितना दिया है, यह हम आपको निचोड़ बता रहे हैं फिर आपको जो विरोध करना होगा वह करियेगा. अब इतनी बड़ी योजनायें और इन पर जो दिया गया पैसा है अगर हम केवल भाषण देने लगेंगे तो यह बात थोड़ी आ जायेगी.

श्री पी.सी. शर्मा-- अभी भनोत जी ने बताया, पैसा कहां है.

सभापति महोदय-- शुक्‍ल जी आप अपना सम्‍बोधन जारी रखें.

श्री केदारनाथ शुक्‍ल-- लाड़ली लक्ष्‍मी हेतु 922 करोड़, स्‍मार्ट सिटी हेतु 900 करोड़, अनुरक्षण तथा मरम्‍मत हेतु 891 करोड़, ग्रामीण समूह जल प्रदाय योजना 878 करोड़, 11वीं और 12वीं महाविद्यालय छात्रवृत्ति हेतु 872 करोड़, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को अतिरिक्‍त मानदेय 8070 करोड़, प्रधानमंत्री सड़क योजना अंतर्गत निर्मित सड़कों का नवीनीकरण एवं उन्‍नयन 850 करोड़, गहन विकास परियोजना 684 करोड़, ग्रामीण सड़कों के निर्माण के लिये 620 करोड़, मुख्‍यमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिये 602 करोड़, मुख्‍यमंत्री जनकल्‍याण योजना हेतु 600 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है. मध्‍यप्रदेश सड़क विकास कार्यक्रम एडीव्‍ही वित्‍त पोषित 600 करोड़, राज्‍य शासन के उपक्रमों की पुनर्संरचना एवं ऋण सहायता हेतु 550 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है. प्रतिकरात्‍मक वन रोपण निधि 550 करोड़, एनव्‍हीडीए से वित्‍त पोषण 515 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है, निर्मल भारत अभियान हेतु 500 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है. माननीय सभापति महोदय, इन प्रावधानों के बाद एक बात उठती है कि पिछली सरकार की तुलना में, पिछले बजट की तुलना में आपने क्या अधिक किया क्या कम किया. तो उसमें सामान्य प्रशासन के लिये जो 2020-21 का बजट था उसमें बजट अनुमान था 857.9 करोड़. हमारा बजट अनुमान 2021-22 का 1016 करोड़ है. 158.1 करोड़ का अंतर है जो 18.4 प्रतिशत है. इसी तरह गृह विभाग में 8110 करोड़ का प्रावधान था 2020-21 में, हमारा है 8672 करोड़ का, अंतर है 565 करोड़. 6.9 प्रतिशत में अंतर है जेल विभाग में 442.3 करोड़ बजट था. हमारा 2020-21 का अनुमान है 528.5 करोड़. जो 19.5 प्रतिशत में अंतर है. इसी तरह विभिन्न विभागों में पिछले बजट की तुलना में कुल मिलाकर 35977.8 करोड़ का हमारे बजट में अंतर है जो17.5 प्रतिशत होता है. हमने लगातार बजट मे वृद्धि की है. हमारा लोकोपकारी बजट है. सामने की ओर से बात आती है कि हमारा यह बजट में प्रावधान था. इन्होंने बजट में प्रावधान किया था. इन्होंने घोषणा की कि हम बिटिया की शादी में, कन्यादान योजना में 51 हजार रुपये देंगे. एक भी माननीय प्रतिपक्ष के विधायक अपने क्षेत्र की एक भी बिटिया का, एक भी जोड़े का नाम बता दें जिसको 51 हजार रुपये दिये हों.

श्री कुणाल चौधरी - मेरे यहां 1 हजार शादियां हुई है और सबके पैसे आ गये. यह असत्य कह रहे हैं.

सभापति महोदय - शुक्ल जी, वरिष्ठ सदस्य हैं. उनको अपनी बात कहने दें.कृपया जल्दी समाप्त करें.