मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

__________________________________________________________

 

चतुर्दश विधान सभा दशम् सत्र

 

 

फरवरी-अप्रैल, 2016 सत्र

 

गुरुवार, दिनांक 3 मार्च, 2016

 

(13 फाल्गुन, शक संवत्‌ 1937 )

 

 

[खण्ड- 10 ] [अंक- 8]

 

__________________________________________________________

 

 

 

 

 

 

 

 

मध्यप्रदेश विधान सभा

 

गुरुवार, दिनांक 3 मार्च, 2016

 

(13 फाल्गुन, शक संवत्‌ 1937 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 10. 33 बजे समवेत हुई.

 

{ अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

 

तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर.

 

प्रश्न संख्या-1 -(अनुपस्थित)

 

कटनी जिलांतर्गत फ्लेटों का निर्माण/विक्रय

2. ( *क्र. 3338 ) कुँवर सौरभ सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि () प्रश्‍नकर्ता सदस्‍य द्वारा आयुक्‍त, नगर पालिका निगम कटनी से पत्र क्रमांक 2489, दिनांक 26.11.2015 से बिन्‍दु क्रमांक 1 से 8 तक की जानकारी चाही गई है? उक्‍त पत्र लिखने के बाद भी कार्यालयीन पत्र क्रमांक 2645 दिनांक 22.12.2015 लिखा गया है, किन्‍तु जानकारी नहीं दी गई है और ही किसी प्रकार का उत्‍तर दिया गया? () प्रश्‍नांश () यदि हाँ, तो उक्‍त जानकारी उपलब्‍ध कराने के साथ ही जानकारी देने के आदी नगर निगम कटनी के उत्‍तरदायी अमले के विरूद्ध शासन क्‍या कार्यवाही करेगा? () द्वारका सिटी कॉलोनाइजर द्वारा कटनी जिलान्‍तर्गत कितने फ्लेटों का निर्माण कर लिया है तथा उसमें से कितने विक्रय किये हैं, कितने फ्लेट निर्माण हेतु शेष हैं? आर्थिक रूप से कमजोर व्‍यक्ति के कोटे के तहत किन-किन को भवन विक्रय किये गये हैं?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : () जी हाँ। चाही गई जानकारी वृहद स्‍वरूप की थी, जिसे कार्यालयीन पत्र क्रमांक 6969/लो.नि.वि./2016 कटनी, दिनांक 12.02.16 के द्वारा माननीय विधायक को प्रेषित कर दी गई है। () उत्‍तरांश '''' के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। () कॉलोनाईजर द्वारा 18 फ्लेट निर्माणाधीन हैं, विक्रय किये गये फ्लेटों की संख्‍या निरंक है, 82 फ्लेटों का निर्माण शेष है। आर्थिक रूप से कमजोर एवं निम्‍न वर्ग के व्‍यक्तियों के लिए आरक्षित भूखण्‍ड/भवनों का विक्रय नहीं किया गया है।

 

कुँवर सौरभ सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न कटनी नगर निगम के विषय में था. इसमें आवासीय सह व्यावसायिक योजना क्रमांक-3 के नाम से कार्य कराकर तत्कालीन महापौर और कमिश्नर ने एक ठेकेदार को अवैध लाभ पहुंचाया था. इसमें मेरा प्रश्न था, मेरे द्वारा एक जानकारी चाही गयी है जो आज दिनांक तक अप्राप्त है एवं वहां पर जो लोग रह रहे हैं. इस विषय में जो उत्तर आया है उससे मैं पूर्णत: असंतुष्ट हूँ.

अध्यक्ष महोदय-- आप प्रश्न करें. इसमें लिखा है कि 12 फरवरी को आपको दे दी.

कुँवर सौरभ सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, इसमें यह लिखा गया है कि 12 फरवरी को हमको दे दी गयी है और इसमें (ग) में लिखा गया है, 18 फ्लैट निर्माणाधीन हैं. विक्रय किये गये फ्लैटों की संख्या निरंक है जबकि हकीकत यह है कि अगर मौके पर दिखवा लिया जाए तो बिजली के कनेक्शन हैं ,लोग रह रहे हैं, बाहर चौकीदार लगे हुए हैं. पूरा का पूरा उत्तर ही असत्य है.

राज्य मंत्री,सामान्य प्रशासन(श्री लालसिंह आर्य)-- अध्यक्ष महोदय,माननीय सदस्य चाहते क्या हैं, यह बता दें?

कुँवर सौरभ सिंह-- अध्यक्ष जी, मैं यह चाह रहा हूँ कि संबंधित कमिश्वर को सस्पेंड करके जो वहां कार्य हुए हैं उसकी जांच करायी जाए और जिसने असत्य उत्तर दिया है उस पर कार्यवाही की जाए. अध्यक्ष जी, जो पूछा गया है वे बोल रहे हैं जानकारी दे दी. जानकारी दी नहीं है और उन्होंने यहां उल्लेख कर दिया है. वहां बता रहे हैं कि कोई नहीं रह रहा है. पूरी कालोनी बसी हुई है.गरीबों के लिए जो आवंटन किया जाना है वह नहीं किया गया. मेरा निवेदन यह है कि संबंधित कमिश्नर को सस्पेंड करके उसकी जांच करायी जाए. वहां लोग रह रहे हैं और ठेकेदार को नगर निगम का पैसा लगाकर लाभ दिया गया है, उन लोगों पर कार्यवाही की जाए.

श्री लालसिंह आर्य-- अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य को मैं संतुष्ट करना चाहता हूँ, भवन अनुज्ञा से लेकर कलेक्टर के आदेश, शासन के आवंटन नियमों का पालन करते हुए हमने कालोनाईजर को अनुमति दी है और चूंकि सारी कार्यवाहियां हमने वैधानिक की हैं. मैं एक चीज और बताना चाहता हूँ, कोई भी ठेकेदार सरकारी लैंड पर अपना पैसा खर्च करके निर्माण नहीं करता है और वह सम्पत्ति अपने कब्जे में भी नहीं की. इसके बाद भी उसने नेहरु वार्ड के अंतर्गत बीएसएनएल रोड से एनएच-7 तक,द्वारका सिटी तक उसने सीमेंट कांक्रीट की रोड अपने पैसे से बनाकर दी.नियमों का पालन हुआ है इसलिए कार्यवाही करने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है.

कुँवर सौरभ सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, इन्होंने जवाब दिया है, जानकारी दी गयी है जबकि जानकारी नहीं दी गयी. ये कह रहे हैं कि वहां पर कोई नहीं रह रहा है, अभी निर्माणाधीन है. मौके पर जाकर जांच करवायें. वहां पर पूरी आबादी बसी हुई है.

अध्यक्ष महोदय-- आपका उत्तर आ गया.

श्री बाला बच्चन-- अध्यक्ष महोदय, उनका प्रश्न है और जो प्रश्न पूछने का आशय था, उससे संबंधित कोई उत्तर आया नहीं तो क्या आप जांच कराकर जैसे कि भ्रमित किया गया है उत्तर में, उन अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करेंगे.आदरणीय विधायक जी का कहना है कि पूरी कालोनी बस गयी है, रहने आ गये हैं. सरकार जवाब गलत दे रही है. इससे बड़ा असत्य क्या हो सकता है. थोड़ा आप इसको दिखवायें और जांच करवायें जिससे कि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके और आदरणीय विधायक जी को इसमें थोड़ा संरक्षण भी दें. प्रथम बार के विधायक हैं, प्रश्न अच्छा है.

श्री लाल सिंह आर्य-- माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे पास जानकारी है, 276 उनके भूखण्डों में से 176 भूखण्ड हैं,उनकी हमने लीज 2.1.2014 को हमने उसके निर्माण की अनुज्ञा प्रदान की है और आरक्षित जो हैं उनको भी अभी विक्रय नहीं किया गया है फिर भी माननीय सदस्य अगर यह चाहते हैं उसकी जांच करा लें तो मैं उसकी जांच करा लूंगा और दोषी कोई पाया जाएगा तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी.

कुँवर सौरभ सिंह-- अध्यक्ष जी, यह तो गोलमोल जवाब हो रहा है,आपका संरक्षण चाह रहा हूँ.

अध्यक्ष महोदय-- नेता जी ने जो कहा वह भी मान लिया, जांच कराने को तैयार हैं.

कुँवर सौरभ सिंह-- अध्यक्ष महोदय, वहां जवाब असत्य है, यह कैसे मालूम होगा. यह जांच के लिए कह रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय-- जांच से ही तो पता लगेगा कि जवाब असत्य है या नहीं.

कुँवर सौरभ सिंह-- अभी भी तो जो जवाब आया है वह गलत जवाब आया है.

 

 


 

प्रश्न संख्या 3 (अनुपस्थित)

प्रश्न संख्या 4 (अनुपस्थित)

 

प्रमुख अभियंता/मुख्‍य अभियंता के स्‍वीकृत पद

5. ( *क्र. 4076 ) श्री प्रदीप अग्रवाल : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म.प्र. शासन जल संसाधन विभाग भोपाल के अंतर्गत संरचना अनुसार प्रमुख अभियंता/मुख्‍य अभियंता/कार्यपालन यंत्री के कुल कितने पद स्‍वीकृत हैं तथा उनके विरूद्ध कितने पद भरे जाकर कार्यरत हैं? (ख) म.प्र. शासन जल संसाधन विभाग में मुख्‍य अभियंता के स्‍वीकृत पदों के विरूद्ध संरचना अनुसार कितने पदों पर नियमित रूप से अधिकारी कार्यरत हैं तथा कितने अन्‍य प्रकार से संभावित किये गये हैं? उक्‍त अधिकारियों में कितने सेवा निवृत्‍त होने के पश्‍चात् भी अन्‍य प्रकार के संयोजन से कार्यरत हैं? (ग) प्रश्‍नांश (ख) उल्‍लेखित पदस्‍थापना के कारण अन्‍य कनिष्‍ठ अधिकारियों की वरीयता एवं पदोन्‍नति प्रभावित हो रही है? यदि हाँ, तो क्‍यों? (घ) क्‍या विभाग में पदस्‍थ अधिकारियों को एक ही नीति से वरीयता एवं पदोन्‍नति प्रदान की जायेगी? यदि हाँ, तो कब तक, यदि नहीं, तो क्‍यों?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) विभाग के अंतर्गत संरचना अनुसार प्रमुख अभियंता 01, मुख्‍य अभियंता 13 एवं कार्यपालन यंत्री के 204 पद स्‍वीकृत हैं। इन स्‍वीकृत पदों के विरूद्ध 01 प्रमुख अभियंता, 12 मुख्‍य अभियंता, 183 कार्यपालन यंत्री कार्यरत हैं। (ख) मुख्‍य अभियंता के स्‍वीकृ‍त पदों में से एक पद पर अधीक्षण यंत्री को मुख्‍य अभियंता का प्रभार दिया गया है। सेवानिवृत्ति पश्‍चात कोई मुख्‍य अभियंता संविदा पर नियुक्‍त नहीं किया गया है। सेवानिवृत्‍त मुख्‍य अभियंता, श्री एस.के. खरे की विशेषज्ञ सेवाएं आवश्‍यकतानुसार वृहद बांध निर्माण के लिए सलाहकार के रूप में लेने की व्‍यवस्‍था की गई है। पूर्णकालिक नियोजन नहीं है। (ग) एवं (घ) जी नहीं। पदों का रिक्‍त होना और रिक्‍त पदों के लिए पदोन्‍नति की जाना एक सतत् प्रक्रिया है। मध्‍यप्रदेश जल संसाधन अभियांत्रिकी तथा भौमिकी सेवा (राजपत्रित) भर्ती नियम, 1968 के तहत सीधी भर्ती एवं पदोन्‍नति करने की सुस्‍पष्‍ट व्‍यवस्‍था है।

 

श्री प्रदीप अग्रवाल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न का जो जवाब आया है वह गलत है इसमें मुख्य अभियंता का एक पद बताया गया है , वह गलत है जबकि मुख्य अभियंता के तीन पद स्वीकृत हैं . मेरे पास इसकी कॉपी भी है और मैं चाहूं तो उसको पटल पर रख सकता हूं.

अध्यक्ष महोदय--- प्रमुख अभियंता का 1 पद है और मुख्य अभियंता के 13 पद स्वीकृत हैं.

श्री प्रदीप अग्रवाल-- मुख्य अभियंता के 3 पद हैं जबकि उत्तर में 1 पद बताया गया है वर्ष 2015 में जो मुख्य अभियंता से प्रमुख अभियंता के पदों के लिए डीपीसी की बैठक हुई थी उसमें भी 2 पद बताये गये थे.

श्री जयंत मलैया--- माननीय अध्यक्ष महोदय, जो मैंने अपने उत्तर में बताया है यह बिल्कुल सही है और जल संसाधन विभाग में प्रमुख अभियंता का 1 ही पद है और मुख्य अभियंता के 12 पदों में से 11 पद भरे हैं और 1 प्रभारी मुख्य अभियंता ग्वालियर में हैं .

श्री प्रदीप अग्रवाल--- माननीय अध्यक्ष महोदय, मुख्य अभियंता जैसे महत्वपूर्ण पद पर संविदा वाले व्यक्ति को पिछले पांच वर्ष से लगातार बिठाये हुए हैं .

श्री जयंत मलैया--- माननीय अध्यक्ष महोदय, पहले तो माननीय सदस्य क्लियर कर लें . प्रमुख अभियंता अलग होता है और मुख्य अभियंता अलग होता है वह कहना क्या कहना चाहते हैं.

अध्यक्ष महोदय-- वह प्रमुख अभियन्ता है, मुख्य नहीं.

श्री प्रदीप अग्रवाल-- मैं प्रमुख अभियन्ता की बात कर रहा हूँ.

श्री जयन्त मलैया-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह बात सही है कि प्रमुख अभियन्ता के पद पर पिछली 4 बार से हमने 1-1 वर्ष की संविदा नियुक्ति श्री चौबे को दी थी.

श्री प्रदीप अग्रवाल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत जो भर्ती नियम बनाए गए हैं उसका उल्लंघन कर सर्क्यूलर के आधार पर संविदा नियुक्ति क्यों की गई? इसके लिए संविधान क्यों नहीं बनाया गया मतलब और भी बहुत सारे लोग हैं जो कि इंतजार में हैं लेकिन उसके बाद भी इन सब नियमों को शिथिल करते हुए संविदा पर बैठे व्यक्ति को 4-4 साल से हम लगातार बैठाए हुए हैं जबकि उसके खिलाफ केस भी चले हैं, उसको दंडित भी किया गया है. (शेम-शेम की आवाज)

अध्यक्ष महोदय-- शासन का निर्णय है...मंत्री जी, आप उत्तर दे रहे हों तो दे दीजिए.

श्री जयन्त मलैया-- अध्यक्ष महोदय, जहाँ तक संविदा नियुक्ति का प्रश्न है मैंने अपने उत्तर में ही दिया है कि यह हमारे मध्यप्रदेश जल संसाधन अभियांत्रिकी तथा भौतिकी सेवा राजपत्रित भर्ती नियम 1968 के तहत सीधी भर्ती एवं पदोन्नति करने की सुस्पष्ट व्यवस्था है.

परियोजनाओं का निर्माण

6. ( *क्र. 1847 ) श्री मुकेश नायक : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या गुजरात, महाराष्‍ट्र और राजस्‍थान राज्‍यों के साथ मध्‍यप्रदेश नर्मदा घाटी की जिन संयुक्‍त बांध, सिंचाई और जल विद्युत परियोजनाओं में हिस्‍सेदारी है, उनमें मध्‍यप्रदेश अपने हिस्‍से की धनराशि समय पर नहीं चुका सका है? (ख) पिछले दस वर्षों में संयुक्‍त क्षेत्र की नर्मदा घाटी सिंचाई और जल विद्युत परियोजनाओं में मध्‍यप्रदेश ने अपने हिस्‍से की कितनी धनराशि का भुगतान कर दिया है और फरवरी 2016 की स्थिति के अनुसार कुल कितनी धनराशि बकाया है? (ग) संयुक्‍त क्षेत्र की गरूड़ेश्‍वर जल विद्युत परियोजना में मध्‍यप्रदेश को कितनी धनराशि चुकानी थी और कितनी धनराशि चुकायी गयी? (घ) क्‍या गरूड़ेश्‍वर परियोजना में मध्‍यप्रदेश 240 करोड़ रूपयों की राशि चुका नहीं पाया, इसलिये धन के बदले गुजरात ने पूरी परियोजना पर अपना अधिकार कर लिया है? हाँ या न, दोनों स्थिति में फरवरी 2016 के अनुसार इस परियोजना की स्थिति क्‍या है और इससे मध्‍यप्रदेश को क्‍या लाभ है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी नहीं। (ख) पिछले 10 वर्षों अर्थात 2005-06 से 2015-16 में मध्‍यप्रदेश ने अपने हिस्‍से के कुल रूपये 383.76 करोड़ का भुगतान गुजरात राज्‍य को किया है। इसके साथ-साथ सरदार सरोवर परियोजना के परिचालन एवं संधारण व्‍यय हेतु रूपये 75.9839 करोड़ का भुगतान भी किया गया है। इस प्रकार कुल राशि रूपये 459.7439 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। माह फरवरी तथा माह मार्च में इंदिरा सागर परियोजना यूनिट 01 तथा सरदार सरोवर परियोजना के अंतर्गत पुनर्वास कार्यों में हुये व्‍यय के समायोजन एवं डूब प्रभावित शासकीय राजस्‍व एवं वन भूमि की लागत तय होने के पश्‍चात ही लेखा अं‍तिम होगा। (ग) एवं (घ) गरूड़ेश्‍वर वीयर से मध्‍यप्रदेश को लाभ-हानि का तुलनात्‍मक अध्‍ययन किया जा रहा है और तदनुसार ही इसमें सहभागिता पर निर्णय लिया जाएगा। अत: शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। 

श्री मुकेश नायक-- माननीय अध्यक्ष महोदय, नर्मदा घाटी की संयुक्त सिंचाई और जल विद्युत परियोजनाओं में मध्यप्रदेश सरकार की गुजरात सरकार के लिए कितनी देनदारियाँ बनती हैं, मैंने यह प्रश्न माननीय मंत्री जी से पूछा है. मैं यह जानना चाहता हूँ कि क्या यह सही है कि गुजरात के सिंचाई मंत्री ने अनेकों बार पत्र लिखा है कि संयुक्त परियोजनाओं में मध्यप्रदेश के हिस्से के साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये बकाया हैं और गरूड़ेश्वर पन विद्युत परियोजना में पहले ही 245 करोड़ रुपये नहीं देने के कारण मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी में कमी आई है. मंत्री जी बताने की कृपा करें.

राज्य मंत्री, नर्मदा घाटी विकास(श्री लाल सिंह आर्य)-- माननीय अध्यक्ष महोदय,माननीय सदस्य का यह कहना सही नहीं है कि तीन हजार करोड़ से अधिक की देनदारियाँ मध्यप्रदेश सरकार पर है. मैं आपको आँकड़ा बता देता हूँ. अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश की लेनदारियाँ ज्यादा हैं. देनदारियाँ हमारी बहुत कम हैं इसलिए गुजरात राज्य से अनुमानित 5883.66 करोड़ की लेनदारियाँ हैं, मतलब हमको लेना है और गुजरात राज्य को जो देनदारी है वह केवल 973.03 करोड़ है. बल्कि कुल मिलाकर हमको 4910.63 करोड़ की लेनदारियाँ हैं, हमको लेना है, हमको देना नहीं है. अध्यक्ष महोदय, जहाँ तक गरूड़ेश्वर परियोजना की बात है तो अभी इस पर बातचीत चल रही है. अभी हमारी कोई सहमति नहीं है और जब तक हम उसमें देखेंगे कि हमारे राज्य का लाभ क्या है. तब तक हम उसमें, अभी तक कोई निर्णय उसमें चूँकि हुआ नहीं है इसलिए इसमें कुछ भी कहना उचित नहीं होगा.

श्री मुकेश नायक-- अध्यक्ष महोदय, मेरी जानकारी में यह है कि गुजरात के सिंचाई मंत्री ने गुजरात की विधान सभा में अपने भाषण में यह कहा कि संयुक्त क्षेत्र में चल रही जो सिंचाई परियोजनाएँ हैं, उनमें साढ़े तीन हजार करोड़ मध्यप्रदेश सरकार से लेना है और इसके रिमांइडर्स भी मध्यप्रदेश सरकार को पत्र लिख कर उन्होंने दिए हैं. क्या यह जानकारी सही है कि सिंचाई मंत्री ने कोई पत्र मध्यप्रदेश शासन और सिंचाई विभाग को लिखा है?

श्री लाल सिंह आर्य-- अध्यक्ष महोदय, उनकी विधान सभा में उन्होंने क्या कहा यह मैं नहीं कह सकता. लेकिन हमारे पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है.

श्री मुकेश नायक-- अध्यक्ष महोदय, आपके पास गुजरात सरकार का कोई पत्र नहीं आया?

श्री लाल सिंह आर्य-- अध्यक्ष महोदय, किसी प्रकार की लेनदारियों से संबंधित कोई पत्र नहीं आया. जहाँ तक पत्राचार, चूँकि संयुक्त परियोजनाएँ बहुत सारी रहती हैं, लेकिन लेनदारियों से संबंधित कोई पत्र हमारे पास नहीं आया.

श्री मुकेश नायक-- आप यह घुमा-फिरा कर के नहीं, स्पष्ट बताएँ, कोई पत्र आया कि नहीं?

श्री लाल सिंह आर्य-- मैं कह तो रहा हूँ.

श्री मुकेश नायक-- नहीं आया?

श्री लाल सिंह आर्य-- नहीं.

अध्यक्ष महोदय-- लेनदारियों से संबंधित नहीं आया.

मांझी जाति को दतिया जिले में अनुसूचित जन‍जाति का दर्जा

7. ( *क्र. 2079 ) श्रीमती शकुन्‍तला खटीक : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ता.प्र.संख्‍या 06 (क्रमांक 418) दिनांक 07 दिसम्‍बर, 2015 के भाग (क) में करैरा जिला शिवपुरी की गैस एजेंसी अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में स्‍वीकृत होने तथा भाग (ग) के उत्‍तर में नायब तहसीलदार दतिया द्वारा श्रीमती नीति पत्नि श्री अनिल कुमार निवासी ग्राम एरई जिला दतिया को अनुसूचित जनजाति श्रेणी के प्रमाण पत्र जारी किए जाने की जानकारी दी थी? यदि हाँ, तो जाति प्रमाण पत्र की प्रति उपलब्‍ध करावें? (ख) क्‍या अनुसूचित जनजाति के जाति प्रमाण पत्र नायब तहसीलदार स्‍तर के अधिकारी को जारी करने के अधिकार हैं? (ग) यदि मांझी जाति को दतिया जिले में अनुसूचित जन‍जाति माना गया है, तो क्‍या मांझी जाति के अन्‍य परिवारों को भी अनुसूचित जनजाति का लाभ दिया जावेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। जाति प्रमाण पत्र की प्रति संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को जाति प्रमाण पत्र जारी किये जाने हेतु ज्ञापन दिनांक 08.1.1962 द्वारा राजपत्रित अधिकारी, तहसीलदार या फारेस्ट रेंजर द्वारा जारी प्रमाण पत्र स्‍वीकार करने के निर्देश थे। परिपत्र दिनांक 10 अप्रैल, 1975 द्वारा माननीय मंत्रीगणों द्वारा दिया गया प्रमाण पत्र स्वीकार किया जाने के निर्देश जारी किए गए। परिपत्र दिनांक 26.7.1984 द्वारा उपरोक्त के अतिरिक्त नायब तहसीलदारों को भी जिन्हें भू-राजस्व संहिता के अंतर्गत तहसीलदारों के अधिकारों से वेष्टित किया गया हो, को भी जाति प्रमाण पत्र जारी किये जाने हेतु अधिकृत किया गया व परिपत्र दिनांक 26 मई, 1987 द्वारा जाति प्रमाण पत्र जारी करने हेतु केवल 1. कलेक्टर/एडीशनल कलेक्टर/डिप्टी कलेक्टर/एस.डी.ओ./ सबडिवीज़नल मजिस्ट्रेट/सिटी मजिस्ट्रेट। 2. तहसीलदार 3. नायब तहसीलदार 4. परियोजना प्रशासक/अधिकारी (वृहद्ध/मध्यम/लघु) एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना अधिकृत किया गया। विभागीय परिपत्र दिनांक 01.8.1996 की कंडिका 1 अनुसार अनुसूचित जाति, जनजाति के सदस्यों को स्थायी प्रमाण पत्र जिलाध्यक्ष/अपर जिलाध्यक्ष/उप जिलाध्यक्ष/अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को अधिकृत किया गया है। वर्तमान में विभागीय परिपत्र दिनांक 13.1.2014 द्वारा जाति प्रमाण पत्र जारी करने हेतु अनुविभागीय अधिकारी (राजस्‍व) को पदाभिहित अधिकारी घोषित किया गया है। (ग) भारत सरकार द्वारा दिनांक 19.11.2000 को संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश 1950 में किए गए संशोधन के माध्‍यम से मध्‍यप्रदेश के लिये जारी अनुसूचित जनजातियों की सूची में अनुक्रमांक 29 पर मांझी जाति को अधिसूचित किया गया है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। 

परिशिष्ट - ''दो''

श्रीमती शकुंतला खटीक-- माननीय अध्यक्ष महोदय, दतिया जिले में मांझी जाति को जनजाति का जाति प्रमाण-पत्र देकर करेरा, जिला शिवपुरी में जनजाति कोटे की गैस एजेन्सी दे दी. श्रीमती नीति मांझी के जाति प्रमाण-पत्र की दिनाँक परिशिष्ट 2 में 16.4.95 पढ़ने में आ रही है. जबकि भारत सरकार के परिपत्र दिनाँक 16.11.2000 के द्वारा मांझी जाति को जनजाति की श्रेणी में माना गया था.

अध्यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी, वे प्रमाण-पत्र के बारे में जानना चाहती हैं.

श्री लालसिंह आर्य--केन्द्र सरकार की जो अनुसूची है जो प्रदेश को दी जाती है उसमें 29 नंबर पर मांझी जाति का उल्लेख है और उस समय नायब तहसीलदार को जाति प्रमाण-पत्र बनाने के अधिकार थे. इसके अलावा कोई और जानकारी चाहती हों तो बता दें.

श्रीमती शकुन्तला खटीक--माननीय मंत्रीजी यह जाति प्रमाण-पत्र फर्जी है मांझी जाति के स्थान पर यह गैस एजेंसी जनजाति के व्यक्ति को दी जाना थी. गैस एजेंसी उचित व्यक्ति को नहीं दी गई है.

अध्यक्ष महोदय--वैसे तो उत्तर स्पष्ट है.

श्रीमती शकुन्तला खटीक--माननीय अध्यक्ष महोदय, फर्जी प्रमाण-पत्र है हमारे आदिवासी भाइयों को लाभ नहीं मिल पा रहा है अधिकारी इसमें घोटाला कर रहे हैं मैं मेरे विधान सभा क्षेत्र में ऐसा नहीं होने दूंगी.

श्री मुकेश नायक--माननीय अध्यक्ष महोदय, विधायिका जी ने मंत्री जी से स्पष्ट पूछा है कि अनुसूचित जाति और जनजाति के व्यावसायिक अधिकार का किसी ने गलत प्रमाण-पत्र देकर दुरुपयोग कर लिया है अब इसमें जांच करा लें फर्जी प्रमाण-पत्र बनाया है तो उन पर कार्यवाही करने का हाउस में एनाउंसमेंट करें अगर विधायिका जी की जानकारी सही है तो.

श्री लाल सिंह आर्य--मैं माननीय सदस्य की भावना से अवगत हूं यदि उनके पास कोई दस्तावेज हों तो मुझे जानकारी दे दें मैं उसकी जांच करा लूंगा.

श्री बाला बच्चन--माननीय अध्यक्ष महोदय मेरा माननीय मंत्रीजी से व्यवस्था का प्रश्न है.

अध्यक्ष महोदय--प्रश्नकाल में व्यवस्था नहीं होती है आप वैसे ही पूछ लीजिये.

श्री बाला बच्चन--माननीय विधायिका जी ने जो प्रश्न लगाया है वह एथेंटिक ही है जबलपुर से चलकर यहां तक बात आ चुकी है. क्या आप इसमें फर्जी अनुसूचित जाति या जनजाति का प्रमाण-पत्र लेने वालों के खिलाफ कार्यवाही करेंगे जिससे कि अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों का हक न मारा जाए और उसकी गैस एजेंसी भी निरस्त हो व वह भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति करने का प्रयास न करे साथ ही वह व्यक्ति ही नहीं मध्यप्रदेश में जो इस तरह के काम हो रहे हैं उस पर रोक लग सके.

अध्यक्ष महोदय--असल में प्रश्न इस बात का नहीं है, विषय यह है कि मांझी जाति को जनजाति का प्रमाण-पत्र दिया और इसके उत्तर में लिखा है कि अनुक्रमांक 29 पर वह अनुसूचित जनजाति दी गई है. यह प्रश्न है कि क्या इस जाति को यह प्रमाण-पत्र दिया जा सकता है.

डॉ. गोविन्द सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, जो पानी भरते थे कहार जाति के लोग उनको यह प्रमाण-पत्र मिल गये हैं. मांझी और कहार लोगों ने अनुसूचित जाति के नाम पर फर्जी प्रमाण-पत्र मिल गए हैं.

श्री बाला बच्चन--क्या यह अनुसूचित जाति, जनजाति में आते हैं. प्रश्न इसीलिए लगाया गया है कि वह व्यक्ति अनुसूचित जनजाति में नहीं आता है.

श्री लाल सिंह आर्य--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय प्रभारी नेता प्रतिपक्ष को संतुष्ट करना चाहता हूँ वे भी माननीय मंत्री रहे हैं.

डॉ. गोविन्द सिंह--ढीमर और कहार जाति के लोगों ने फर्जी प्रमाण-पत्र बना लिए हैं आप तो जांच करा लें जिसको मिला है वह कौन है कहार है या ढीमर है, हमारी जानकारी में वह ढीमर है और उसने गलत प्रमाण-पत्र ले लिया है.

अध्यक्ष महोदय--सवाल ढीमर और कहार का नहीं है आप उत्तर सुन लीजिये.

श्री लाल सिंह आर्य--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय गोविन्द सिंह जी, माननीय बाला बच्चन जी मंत्री रहे हैं. शासन में प्रक्रिया है कि अनुसूचित जाति, जनजाति का कोई फर्जी प्रमाण-पत्र बनाकर लाभ लेता है तो इसकी जांच के लिए अनुसूचित जाति, जनजाति कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में एक एजेंसी नियुक्त की गई है वह इसकी जांच करती है और उस जांच में कोई दोषी पाया जाता है तो शासन उसके खिलाफ कार्यवाही करता है और ऐसी कार्यवाहियां मध्यप्रदेश में हुई हैं. उस एजेंसी को आप लिखकर देंगे तो हम उससे जांच करा लेंगे.

अध्यक्ष महोदय--ठीक है.

प्रश्न संख्या- 08 (अनुपस्थित)

छतरपुर जिले में रेत खदानों से खनन/परिवहन

9. ( *क्र. 4121 ) श्रीमती रेखा यादव : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) छतरपुर जिले में गत दो वर्षों में किस-किस रेत खदान से कितनी रेत का खनन एवं परिवहन किया गया है, कौन-कौन सी रेत खदान किन कारणों से किस दिनांक से बंद है? (ख) रेत की खदानों के बंद होने के कारण रेत उपलब्‍ध करवाए जाने की विभाग ने क्‍या वैकल्पिक व्‍यवस्‍था की है? यदि नहीं, की गई तो कारण बतावें? (ग) गत दो वर्षों में जिले में रेत के अवैध खनन एवं अवैध परिवहन के कितने प्रकरण बनाए जाकर कितनी रेत जप्‍त की गई, कितना अर्थदण्‍ड वसूल किया गया। (घ) रेत की खदान प्रारंभ किए जाने के संबंध में क्‍या कार्यवाही कब तक की जावेगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) :

(ख) आसपास के जिलों से वैधानिक रूप से स्‍वीकृत होकर संचालित रेत खदानों से रेत क्रय करने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। अत: वैकल्पिक व्‍यवस्‍था किये जाने जैसी स्थिति नहीं है। (ग) गत दो वर्षों में रेत के अवैध खनन के 10 प्रकरण मात्रा 34706 घनमीटर के बनाये जाकर रूपए 143943560/- अर्थदण्‍ड प्रस्‍तावित कर प्रकरण संबंधित अनुविभागीय अधिकारियों के न्‍यायालयों में निराकरण हेतु भेजे गए हैं एवं अवैध भण्‍डारण के 45 प्रकरण रेत मात्रा 19408 घनमीटर जप्‍त कर प्रकरणों में प्रस्‍तावित अर्थदण्‍ड रूपए 45420300/- किया जाकर प्रकरण संबंधित अनुविभागीय अधिकारियों के न्‍यायालय में भेजे गये हैं एवं 1 प्रकरण में रूपए 2,55,000/- अर्थदण्‍ड राशि वसूल की गई है। अवैध परिवहन के 573 प्रकरण बनाए जाकर रूपए 13287910/- अर्थदण्‍ड वसूल किया गया है। (घ) रेत की खदानें जो ई-आक्‍शन से नीलाम हुईं हैं, उन बोलीदारों को सैद्धांतिक अनुमति जारी कर 'सिया' से पर्यावरणीय स्‍वीकृति प्राप्‍त करने हेतु निर्देशित किया गया है। 'सिया' से पर्यावरणीय स्‍वीकृति प्राप्‍त होने के उपरांत नियमानुसार रेत खदानें प्रारंभ की जावेंगी।

परिशिष्ट - ''तीन''

श्रीमती रेखा यादव :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहते हुए माननीय मंत्री जी से जानना चाहती हूं कि जो आपने मेरे प्रश्‍न के '''' में उसमें आपने बताया है कि रेत जो जिले में आयी हुई है वह आसपास के जिलों से लायी गयी है . मैं यह जानना चाहती हूं कि वह आसपास के जिले कौन से हैं, जिनकी वैधानिक रूप से स्‍वीकृति मिली है और वहां से रेत क्रय कर सकते हैं.

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो स्‍वीकृत खदाने हैं उनकी सूची माननीय सदस्‍या को उपलब्‍ध करा देंगे. वैसे टीकमगढ़ जिले में 7 रेत की खदाने हैं और पन्‍ना जिले में पांच रेत की खदाने संचालित हैं तो यहां से भी लोगों को रेत उपलब्‍ध हो जाती है.

श्रीमती रेखा यादव :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ग्रीन ट्रीब्‍यूनल के उच्‍चतम न्‍यायालय में 2014 से रेत की खदाने बंद पड़ी हुई है, तो जो रेत खदानें उनकी दी गयी है तो वह किस हिसाब उनको खदानें दी गयी है.

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल :-माननीय अध्‍यक्ष्‍ा महोदय, नेशनल ग्रीन ट्रीब्‍यूनल ने सिया की परमीशन के उपरान्‍त ही रेत के उत्‍खनन के निर्देश उन्‍होंने दिये थे. जिन खदानों में उन निर्देशों का पालन हो गया उन खदानों को संचालित करने में कोई परेशानी नहीं है.

श्रीमती रेखा यादव :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने प्रश्‍न '''' में पूछा है कि मध्‍यप्रदेश गौड़ खनिज नियम 1996 के नियम 53 के अवैध खनन के प्रकरण को अनुविभागीय अधिकारी न्‍यायालय में प्रस्‍तुत किया गया है. यह माननीय मंत्री महोदय के जवाब में आया है, लेकिन यह संशोधन किस दिनांक में और कब किया गया है.

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल :- अध्‍यक्ष महोदय, अवैध उत्‍खनन के प्रकरण जो एस डी एम न्‍यायालय में प्रकरण बनाकर वहां पर प्रस्‍तुत किये जाते हैं वहां पर जो निर्णय होता है उसके आधार पर वसूली की कार्यवाही होती है.

 

 

 

 

अशोकनगर जिलांतर्गत रेत खदानों की नीलामी

10. ( *क्र. 2871 ) श्री गोपीलाल जाटव : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2013-14, 2014-15 एवं वर्ष 2015-16 में अशोकनगर जिले में कितनी लीजें दी गईं और कितनी नीलामी बोली में गौण खनिज नीलाम की गई? (ख) क्‍या नीलाम की गई रेत खदानों का एग्रीमेंट हुआ है? यदि नहीं, तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ क्‍या कार्यवाही की जावेगी? (ग) उक्‍त नीलाम की गई रेत खदानों पर मशीन लगाकर सिंध नदी और बेतवा पर अवैध उत्‍खनन कब तक रोका जावेगा?

 

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) :

(ख) जी नहीं। प्रश्‍नांश '' में दिये उत्‍तर अनुसार वर्ष 2013-14 एवं वर्ष 2015-16 में नीलाम की गई रेत की खदानों का अनुबंध नहीं हुआ है। इसका कारण संलग्‍न परिशिष्‍ट में दर्शाया गया है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।
(ग) वर्ष 2013-14 में नीलाम की गई खदानें बेतवा नदी पर नहीं है, बल्कि सहायक नदियों पर हैं। उक्‍त नदियों में कोई अवैध उत्‍खनन का प्रकरण नहीं पाया गया। वर्ष 2015-16 में नीलाम की गई 05 रेत खदानों में से नीलाम खदान ग्राम सोबत के समीप सिंध नदी से लगे ग्राम सुनेरा में रेत निकालने पर अवैध उत्‍खनन का प्रकरण अनुविभागीय अधिकारी (राजस्‍व) अशोक नगर द्वारा बनाया गया है, जिसे कलेक्‍टर न्‍यायालय में निराकरण हेतु प्रस्‍तुत किया गया है। शेष नीलाम खदानों पर निगरानी रखी जा रही है। बेतवा नदी पर कोई रेत खदान वर्तमान में नीलाम नहीं की गई है।

परिशिष्ट - ''चार''

श्री गोपालाल जाटव :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं अपने प्रश्‍न के जवाब से संतुष्‍ट हूं. इसके लिये मैं मंत्री जी को संतुष्‍ट देता हूं.

मांडवी एवं खोडाना तालाब कार्य योजना की स्‍वीकृति

11. ( *क्र. 3509 ) डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विगत वर्षों में जावरा विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत मांडवी एवं खोडाना तालाब कार्य योजनाएं क्षेत्र सिंचित रकबा बढ़ाए जाने हेतु एवं जल संकट की गंभीरता को दृष्टिगत रख बनाई गई थी? (ख) यदि हाँ, तो क्‍या मांडवी एवं खोडाना तालाब कार्य योजनाएं शासन/विभागीय संपूर्ण सर्वे एवं नियमानुसार कार्यवाहियों को पूर्ण कर दोनो योजनाओं को स्‍वीकृति दी जाकर प्रारंभ किया जाना था? क्‍या कारण रहे कि ये प्रारंभ नहीं हुई?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) एवं (ख) जी हाँ। माण्‍डवी तालाब, जिला रतलाम की प्रशासकीय स्‍वीकृति दिनांक 27.06.2007 को रू. 111.84 लाख की एवं खोडाना परियोजना जिला मंदसौर की प्रशासकीय स्‍वीकृति दिनांक 07.08.2007 को रू. 819.18 लाख की प्रदान की गई थी। खोडाना परियोजना एक नि‍म्‍मजित तालाब है, जिसका मूल उद्देश्‍य भू-जल स्‍तर को बढ़ाना होकर वर्षा ऋतु उपरांत तालाब खाली कर तालाब के तल में कृषि की जाना है। खोडाना परियोजना की प्रति हेक्‍टेयर लागत निर्धारित मापदण्‍ड से अधिक हो गई थी। अत: परियोजना की प्रशासकीय स्‍वीकृति दिनांक 16.06.2011 को निरस्‍त की गई। माण्‍डवी परियोजना के डूब क्षेत्र में नदी घाटी योजना के अंतर्गत ग्रामीण यांत्रिकी विभाग द्वारा निर्मित एक परकोलेशन तालाब आने से परियोजना तकनीकी मापदण्‍ड पर साध्‍य नहीं रही। अत: शेष प्रश्‍न उत्‍पन्‍न नहीं होता है।

डॉ राजेन्‍द्र पाण्‍डेय:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपका संरक्षण चाहूंगा, मेरे जावरा विधान सभा क्षेत्र का जल स्‍तर लगभग 1000 से 1200 फीट नीचे जा चुका है और वह डार्क एरिया भी घोषित हो चुका है. दो योजनाएं स्‍वीकृत हुई थी, मांडवी एवं खोडाना तालाब . मांडवा तालाब की प्रशासकीय स्‍वीकृति दिनांक 27.6.2007 को 111.84 लाख रूपये की एवं खोडाना तालाब प्रशासकीय स्‍वीकृति दिनांक 07.08.2007 केा रूपये 819.18 लाख रूपये की. मुझे प्रश्‍न के जवाब में बताया गया है कि दोनों असाध्‍य पाकर खारिज कर दी गयी है. मेरा माननीय मंत्री जी से आग्रह है कि जब पूर्व इसके सर्वे की स्‍वीकृति दी गयी और सर्वे की राशि स्‍वीकृत की गयी और सर्वे का कार्य पूर्ण किया गया, वहां पर सम्‍पूर्ण सर्वे किया गया और उसके पश्‍चात उन योजनाओं की स्‍वीकृति दी जाकर के कार्य प्रारंभ करने की स्थिति भी आ गयी, ऐसी कौन सी स्थितियां आ जाती है, जिनके कारण यह असाध्‍य घोषित कर दी जाती है. यदि कर दी गयी है तो इसके बारे में आगे क्‍या किया जा सकता है क्‍योंकि वहां का जल स्‍तर काफी नीचे जा चुका है और वह डार्क जोन एरिया है. इसके बारे में विभाग क्‍या करने वाला है. ?

श्री जयंत मलैया :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक योजना तो इनके जावरा विधानसभा क्षेत्र की थी और दूसरी मंदसौर जिले की थी. इन दोनों परियोजनाओं की प्रशासकीय स्‍वीकृति दी गयी थी. परन्‍तु परियोजनाएं हमारे तकनीकी आधार के ऊपर और वित्तीय मापदण्डों पर साध्य नहीं थीं इसके कारण इसको निरस्त किया गया. जहां तक माण्डवी का प्रश्न उठता है जैसा माननीय सदस्य ने कहा है इसमें योजना जो असाध्य हुई है डूब क्षेत्र में ग्रामीण यांत्रिकी विभाग का एक परकोलेशन टेंक वहां पर बना हुआ है इसके साथ-साथ इससे जो जल उपलब्ध है यह बहुत कम उपलब्धता है सिंचाई करने की और तीसरी बात है इसकी प्रति हेक्टेयर लागत काफी ज्यादा आ रही है क्योंकि डूब क्षेत्र इसमें 30 प्रतिशत से अधिक है इसलिये इस योजना को अस्वीकृत कर दिया गया परन्तु मैं यहां माननीय सदस्य से निवेदन करना चाहता हूं कि आपके विधान सभा क्षेत्र में और पूरे मालवा अंचल में जल क्षेत्र अंडर ग्राउण्ड वाटर का स्तर काफी नीचे है तो इसके लिये हमने 3 बैराज की साध्यता के आदेश कर डीपीआर बनाने के निर्देश जावरा विधान सभा क्षेत्र के लिये दे दिये हैं. एक डोडियाना बैराज है, पाताखेड़ी बैराज है और  हासनपालिया बैराज है.

डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय - माननीय अध्यक्ष महोदय, क्षमा चाहूंगा थोड़ा विनम्रतापूर्वक निवेदन करना चाहता हूं. मेरे विधान सभा क्षेत्र का परिसीमन हो चुका है. माननीय मंत्री जी को धन्यवाद कि कहीं पर भी बने बनना चाहिये लेकिन यह आलोट विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं जो कि बनने वाले हैं. मैं आग्रह करना चाहूंगा जो मैंने लिखित में दिये हुए हैं. चंबल और मलिनी नदी पर सिरीज आफ स्टाप डेम, एक कामलियाकुची घाट पर स्टाप डेम,मचून नदी पर स्टाप डेम, नांदलेटा के समीप मलेनी नदी पर स्टापडेम,गोठडा में स्टापडेम,आलमपुर-टिकरिया बैराज,मांडवी तालाब निर्माण,कुशलगढ़-अमेठी में स्टाप डेम कम रपटा,धतुरिया-बछोड़िया के मध्य स्टाप डेम कम रपटा,कोटडा तालाब योजना,बछोडिया स्टापडेम सह पुलिया, हतनारा बैराज,सुखेड़ा-सिलियाखेड़ी के मध्य स्टापडेम सह पुलिया,रानीगांव-ठिकरिया से मांडवी के मध्य स्टापडेम सहपुलिया,हसनपालिया बैराज और धामेडी स्टाप डेम. इनमें से यदि कुछ स्वीकृत करते हैं तो वह जावरा विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत आयेगा और वहां का जल स्तर बढ़कर वहां पर कृषकों को लाभ होगा और सिंचाई के संसाधनों में वृद्धि होगी. मेरा आग्रह स्वीकार करें.

श्री जयंत मलैया - आदरणीय पाण्डे जी से निवेदन है कि वे अपनी सूची मुझे दे दें मैं इसकी साध्यता का परीक्षण करा लेता हूं और जो भी साध्य होंगे उनमें से कुछ परियोजनाओं को लेने की कोशिश करेंगे.

डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय - माननीय अध्यक्ष महोदय,बहुत-बहुत धन्यवाद. एक सुझाव के रूप में निवेदन है चूंकि दोनों सर्वे हो गये थे सर्वे होने के बाद वह असाध्य होकर निरस्त किये गये उससे बहुत भ्रामक स्थिति क्षेत्र में बन गई है. आगामी समय में ऐसा न किया जाये.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया - माननीय अध्यक्ष महोदय, राजेन्द्र पाण्डेय जी ने जो प्रश्न किया वह मेरे विधान सभा क्षेत्र से भी संबंधित है. खुड़ाना जो तालाब है वह निजी कृषकों की भूमि स्वामी का तालाब है उस तालाब को समय प र यदि नहीं खोला जाता है तो जो किसान 400-500 की संख्या में मुआवजा मांगते हैं. मैं  माननीय मंत्री जीको धन्यवाद भी देना चाहूंगा कि तेरहवीं विधान सभा में जब मैं सदस्य था ध्यानाकर्षण आया था तो आपने ढाई करोड़ रुपये की राशि वहां के किसानों को मुआवजे की दी थी. यह समस्या हमेशा की बनी हुई है जब शासन,प्रशासन को उस भरे हुए पानी की आवश्यक्ता पड़ती है जल को ऊपर उठाने के नाम से जो निजमित तालाब हैं स्वयं के मालिक हैं उनको तालाब नहीं खोलने दिया जाता ताकि आसपास के कुंओं में पानी बना रहे जल स्तर बना रहे लेकिन उसके कारण किसानों को नुकसान होता है. जहां तक राजेन्द्र पाण्डेय जी ने कहा कि जो योजना 2007 में प्रशासकीय स्वीकृति के साथ स्वीकृत हुई थी साध्यता थी और 2011 में असाध्य हो गई है. मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से आग्रह करूंगा कि क्या यह परियोजना सूक्ष्म परियोजना जो प्रधानमंत्री जी की चल रही है उसके अंतर्गत यह डायवर्ट हो सकती है वृहद न होते हुए सूक्ष्म परियोजना दूसरे 31 नवंबर को वहां जल उपभोक्ता समितियां उसको खोलने के निर्देश देती है. अगर इस भरे पानी को दिसम्बर या जनवरी तक आसपास के किसानों को उनके स्वयं के संसाधनों से पानी को लिफ्ट करने की अनुमति दे दी जाये तो आसपास के किसान पानी को उपयोग कर लेंगे. अभी उस पानी को छोड़ना पड़ता है वह नदी,नालों में जनवरी-फरवरी में बह जाता है. मैं चाहूंगा माननीय मंत्री जी ऐसे निर्देश जारी कर दें या ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित कर दें कि उस पानी का उपयोग सांप भी मर जाये लाठी भी न टूटे. क्या ऐसी व्यवस्था माननीय मंत्री जी निर्देशित करेंगे कि आसपास के किसान उस पानी को अपने संसाधनों से लिफ्ट कर सकें ?

श्री जयंत मलैया - माननीय अध्यक्ष महोदय, जो आपने सिंचाई पद्धति से बात कही है इसमें भी यह परियोजना साध्य नहीं है. दो विकल्प आपने जो बताये एक तो एक माह बढ़ाने के लिये इसके लिये हमारे विभाग से कोई कार्यवाही नहीं होती है. एक जिला समिति होती है

उसके अध्यक्ष कलेक्टर होते हैं वह वहां की परिस्थिति तथा जल की व्यवस्था को देखते हुए उसका प्रबंध कर सकते हैं. दूसरी बात जहां तक आपने कहा कि निमजिद तालाब से पानी लेने की बात है उससे वहां की सिंचाई हो जाए, पानी नालों में बहकर के न जाए, यह अच्छी बात है कि तालाब के बाहर से कोई जितना भी पानी ले जाना चाहे उसकी मर्जी है वह ले जा सकता है.

प्रश्न संख्या 12

नगर पालिका परिषद, गुना द्वारा स्‍वीकृत प्रस्‍ताव

12. ( *क्र. 2773 ) श्री अजय सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या किसी नगर पालिका परिषद को राजपत्र में प्रकाशित वार्ड सीमा से बाहर स्‍थायी निर्माण कार्य करने का अधिकार है? (ख) क्‍या नगर पालिक परिषद को निजी स्‍वामित्‍व की भूमि, बिना अधिग्रहण किए नजूल भूमि पर बिना किसी पूर्व अनुमति के अन्‍य प्रयोजन से स्‍थायी निर्माण कार्य करने का अधिकार प्राप्‍त है? क्‍या ऐसे सभी निर्माण के पूर्व टाउन एवं कंट्री प्‍लानिंग की अनुमति आवश्‍यक है? (ग) क्‍या नगर पालिका परिषद, गुना के साधारण सम्‍मेलन दिनांक 24.02.15 के एजेन्‍डा क्र. 1 के बिन्‍दु क्र. 16 (व्‍यय लगभग 20 लाख) व बिन्‍दू क्र. 27 (व्‍यय लगभग 10 लाख), बिन्‍दु क्रं.32 (व्‍यय 30 लाख) तथा साधारण सम्‍मेलन के एजेन्‍डा-3 दिनांक 19.10.15 के बिन्‍दु क्र.5 (व्‍यय 40 लाख) एवं बिन्‍दु क्र. 13 (व्‍यय 35 लाख), बिन्‍दु क्र. 21 (व्‍यय 35 लाख) के प्रस्‍ताव के अलावा प्रेसिडेन्‍स इन काउन्सिल का एजेन्‍डा क्रं. 1 बैठक दिनांक 27.01.15 के बिन्‍दु क्रं. 1, 2 (व्‍यय 9 + 9 लाख), बैठक दिनांक 05.02.15 एजेन्‍डा क्रं. 2 के बिन्‍दु क्र. 42, 43 (व्‍यय 9.5 + 10 लाख), बैठक दिनांक 16.03.15 के एजेन्‍डा क्रं. 4 का बिन्‍दु क्र. 72 (व्‍यय 10 लाख), बैठक दिनांक 17.04.15 का एजेन्‍डा क्र. 5 के बिन्‍दु क्रमांक 102, 103 (व्‍यय 9 + 9 लाख) आदि के द्वारा स्‍वीकृत प्रस्‍तावों का कार्य पूर्ण हो चुका है? यदि हाँ, तो कार्यस्‍थल का भौतिक सत्‍यापन एवं व्‍यय राशि का विवरण क्‍या है? (घ) प्रश्‍न बिन्‍दु (क), (ख), (ग) द्वारा यदि नगर पालिका अधिनियम 1961 के नियमों का उल्‍लंघन होना पाया जाता है तो क्‍या शासन जाँच करवाकर दोषियों पर कार्यवाही करेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी नहीं। (ख) जी नहीं। उत्‍तरांश के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (घ) नगर पालिका अधिनियम 1961 के नियमों का उल्‍लंघन नहीं होने से शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

परिशिष्ट - ''पाँच

 

श्री अजय सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रश्न (क) एवं (ख) के उत्तर में माननीय मंत्री जी ने कहा कि जी नहीं. मैं मंत्री जी को बताना चाहता हूं कि यह जानकारी उनकी असत्य है वहां पर नगर परिषद् गुना में तीन पंचायतों में नगरी निकाय का पैसा लगाया गया है, शहदपुरा, माधोपुर, हरिपुर क्या नगरीय निकाय की राशि किसी पंचायत क्षेत्र में लगायी जा सकती है.

अध्यक्ष महोदय--तभी तो उन्होंने मना कर दिया है.

श्री अजय सिंह--अध्यक्ष महोदय, तीन पंचायतें हैं शहदपुरा, माधोपुर, हरिपुर यदि इसमें राशि लगाई गई है तो उसकी आप जांच करवाएंगे ?

राज्यमंत्री, नगरीय प्रशासन एवं विकास (श्री लाल सिंह आर्य)--अध्यक्ष महोदय, आपने तीन गांवों के नाम लिये हैं वैसे इन गांवों में तो राशि नहीं लगायी गई है, लेकिन आप कह रहे हैं तो इसकी मैं भोपाल से अधिकारियों को भेजकर जांच करवा लूंगा उसमें दोषी अधिकारी पाये जाएंगे तो उन पर कार्यवाही करूंगा.

श्री अजय सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण प्राप्त करते हुए बताना चाहता हूं कि वहां पर जो नगर-पालिका के अध्यक्ष हैं सलूजा जी वह वहीं हैं जो पूर्व में विधायक थे उनको जाति प्रमाण पत्र के मामले में हटाया गया था. उन्होंने अपने विधायक पद से एक 10 सीटर सुलभ शोचालय विधायक मद से बनवाया था और उसी शौचालय को नगरीय निकाय के फंड से फिर से दिखाया गया है, उसकी भी आप जांच करवा लेंगे.

श्री लालसिंह आर्य--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह जानकारी पूछी नहीं गई थी मैं उसकी भी जानकारी मंगवा लेता.

श्री अजयसिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, इस तरह के कामों की उच्च स्तरीय अधिकारियों से जांच करवा लेंगे जैसा कि आपने कहा. आपने परिशिष्ट के उत्तर में हनुमान टेकरी की बात कही है मंत्रीजी ने उसमें भी थोड़ी सी विसंगति है. हनुमान टेकरी में तीन सर्वे नंबर हैं मेरा आरोप है कि जो निजी भूमि का सर्वे नंबर है उस पर नगरीय निकाय के पैसे खर्च हुए हैं जो कि अवैधानिक हैं, उसकी भी जांच करवा लें. तीन मुद्दे हैं नगरीय निकाय के पैसे तीन पंचायतों में लगाये गये कि नहीं उसकी जांच, जो हनुमान टेकरी का उत्तर परिशिष्ट में उत्तर दिया है उसमें तीन सर्वे नंबर हैं एक सर्वे नंबर में प्रायवेट आदमी की जमीन है उनसे जानकारी भी नहीं ली तथा परमीशन भी नहीं ली वहां पर आपने खर्च कर दिया उसकी जांच करवा देंगे.

श्री लालसिंह आर्य--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह था कि सर्वे नंबर कौन सा आप बता दें राजपत्र मेरे हाथ में है यदि उसमें सर्वे नम्बर होगा तो हम उसकी जांच करवा लेंगे.

अजय सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, आपको मैं पूरी जानकारी दे दूंगा.

श्री लालसिंह आर्य--ठीक है. माननीय अध्यक्ष महोदय.

प्रश्न संख्या13

नगर परिषद लहार, मिहोना, दबोह में सड़क निर्माण

13. ( *क्र. 441 ) डॉ. गोविन्द सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) भिण्‍ड जिले की नगर परिषद लहार, मिहोना, दबोह में 01 जनवरी, 2010 से 31 दिसम्‍बर, 2014 तक सार्वजनिक, शासकीय एवं नगर परिषदों के स्‍वामित्‍व की भूमियों को छोड़कर निर्मित सड़कों के सर्वे क्रमांक भूमि स्‍वामित्‍व तथा व्‍यय का विवरण दें? (ख) उपरोक्‍त प्रश्‍नांश के परिप्रेक्ष्‍य में निजी स्‍वामित्‍व की भूमि पर उपरोक्‍त अवधि में निर्माण कराई गई सड़कों के डायवर्सन एवं जनहित में दान की गई भूमियों का ब्‍यौरा दें? (ग) क्‍या उपरोक्‍त अवधि में नगर परिषद लहार, मिहोना एवं दबोह द्वारा निजी भूमि स्‍वामियों से सांठ-गांठ कर सड़कें बनवाकर प्‍लाट विक्रय कराने की उच्‍च स्‍तरीय जाँच कराई जाएगी? यदि नहीं, तो क्‍यों? दोषी पाए जाने पर कब तक कार्यवाही की जाएगी?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) से (ग) निजी स्‍वामित्‍व की भूमि में सड़कों का निर्माण कार्य नहीं कराये जाने से जानकारी निरंक है

डॉ.गोविन्द सिंह--माननीय अध्यक्ष जी मेरा आपसे विनम्र निवेदन है कि कम से कम इस सरकार में जो 80-90 प्रश्नों के गलत जवाब आ रहे हैं इसके लिये आप इनको प्रताड़ित करें अगर नहीं कर सकते हैं इनको गोल्ड मेडिल दे दिया जाए.

अध्यक्ष महोदय--बिल्कुल एक्सट्रीम या तो इधर या उधर

डॉ.गोविन्द सिंह--अध्यक्ष महोदय, अब लगातार एक के बाद एक गलत उत्तर आ रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय--या तो प्रताड़ित करें या स्वर्ण पदक दें.

श्री उमाशंकर गुप्ता--आप तो डायमंड की बात करते थे आप तो गोल्ड पर आ गये (हंसी)

डॉ.गोविन्द सिंह--डायमंड तो सदन में एक ही हैं हमारे हीरो (हंसी)

अध्यक्ष महोदय--आप प्रश्न करें.

डॉ.गोविन्द सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय मैं 24 घंटे गांवों में रहने वाला आदमी हूं मुझे पूरी जानकारी एवं तथ्य मिलते हैं तभी मैं प्रश्न लगाता हूं नहीं तो नहीं.

डॉं गोविन्‍द सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नगर परिषद मिहोना के वार्ड क्रमांक 6 .

श्री रामनिवास रावत- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पहले प्रश्‍न का जवाब आ जाए प्रताडि़त तो आप करेंगे नहीं, गोल्‍ड मेडल ही बनवा दें ।

अध्‍यक्ष महोदय- प्रश्‍न तो उनको मंत्री जी से करना है ।

डॉ. गोविन्‍द सिह- मंत्री जी, बाहर, विदेश के नहीं हैं, भिण्‍ड के ही हैं ।

गृहमंत्री(श्री बाबूलाल गौर)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो भी उत्‍तर आते हैं वह विभाग के माध्‍यम से आते हैं, सरकार के द्वारा पूरी जांच पड़ताल के बाद आते हैं ।

डॉ. गोविन्‍द सिंह- आपको डायमण्‍ड पारितोषिक देंगे, आप ही तो सदन के हीरो हो ।

अध्‍यक्ष महोदय- प्रश्‍न करिए, अन्‍य सदस्‍यों के भी प्रश्‍न हैं ।

डॉं. गोविन्‍द सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नगर परिषद मिहोना के वार्ड क्रमांक 6 भिण्‍ड-भाण्‍डेर रोड से भौरया स्‍कूल तक निजी भूमि है,इसी प्रकार वार्ड क्रमांक 6 में सुरभि कान्‍वेंट और उसके आगे तक निजी भूमि है, वार्ड क्रमांक 7 में गल्‍ला मंडी के पीछे शिवाजी माध्‍यमिक विद्यालय तक निजी भूमि है, वार्ड क्रमांक 14 में गोपालधाम के आगे तक खेतों में निजी लोगों से 10-10, 20-20 लाख रूपए वसूल किए, ताकि जमीन महंगी हो जाए और प्‍लाट बिक गए, जो प्‍लाट 2-3 लाख का नहीं था, वह 10-10 लाख का बिक गया, मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूँ कि आपने हमसे चर्चा में कहा भी था कि हम इसकी जांच कराएंगे आप निष्‍पक्ष रूप से कलेक्‍टर भिण्‍ड के द्वारा जिन नम्‍बरों का हमने हवाला दिया है, उनकी जांच एक माह में सुनिश्चित कर, दोषियों ने जिन्‍होंने गलत जवाब दिया है और जिन्‍होंने शासन के पैसों का,शासकीय धन का दुरूपयोग किया है, उसकी जांच कराकर दण्डित करेंगे ।

राज्‍यमंत्री,नगरीय प्रशासन(श्री लालसिंह आर्य)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जो प्रश्‍न पूछा है, मैं केवल मिहोना की नहीं, बल्कि लहार और दबोह की तीनों नगर पंचायतों में अगर निजी भूमि पर शासकीय राशि खर्च करके निर्माण कार्य कराया गया है तो हम एक माह के भीतर जांच भी कराएंगे और कठोर कार्यवाही भी करेंगे।

डॉं. गोविन्‍द सिंह, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसलिए धन्‍यवाद क्‍योंकि मिहोना और दबोह के अध्‍यक्ष तो भाजपा के ही हैं, वह कल आकर आपसे गिड़गिड़ा रहे थे तो मैंने कहा रहने दो अब आप उनकी भी करा लो,धन्‍यवाद ।

अध्‍यक्ष महोदय- अब गोल्‍ड मेडल दे कि नहीं दें । (हंसी)

तालाब के वेस्‍टवीयर पर पुलिया निर्माण

14. ( *क्र. 1301 ) श्री नारायण सिंह पँवार : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रश्‍नकर्ता के प्रश्‍न क्रमांक 118 दिनांक 08 दिसंबर, 2015 के उत्‍तर में बताया गया था कि तहसील ब्‍यावरा के ग्राम झरखेड़ा तालाब के अंतर्गत ग्राम पाडली महाराज के निकट तालाब के वेस्‍टवीयर पर पुलिया निर्माण हेतु डूब क्षेत्र में जल भरा होने से सर्वेक्षण कराना संभव नहीं हो सका है? यदि हाँ, तो क्‍या वर्तमान में उक्‍त डूब क्षेत्र में जल भराव नहीं है? (ख) यदि हाँ, तो क्‍या शासन ग्रामीणजनों को आवागमन की सुविधा सुलभ कराये जाने हेतु पुलिया निर्माण कार्य करवायेगा? यदि हाँ, तो कब तक? उक्‍त वेस्‍टवीयर पर पुलिया निर्माण नहीं कराये जाने से भविष्‍य में यदि कोई जनहानि होती है तो इसके लिये कौन उत्‍तरदायी रहेगा?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जी हाँ। जी हाँ। (ख) जी नहीं। प्रश्‍नाधीन स्‍थल पर शासकीय रास्‍ता नहीं होने तथा ग्राम पाडली महाराज से झरखेड़ा होते हुए ब्‍यावरा तक तथा ग्राम जामी होते हुए मलावर तक पक्‍का मार्ग आवागमन हेतु उपलब्‍ध होने के कारण। शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होता है।

श्री नारायण सिंह पँवार :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूँ कि मेरे विधानसभा क्षेत्र में झरखेड़ा तालाब है, उसके वेस्‍टवीयर के पानी से आम ग्रामीणों का रास्‍ता बंद है, मुझे उत्‍तर मिला है कि इसमें ब्‍यावरा जाने का मार्ग खुला हुआ है, मेरा निवेदन है ब्‍यावरा जाने के मार्ग से नहीं था, उनकी खेती-बाडी का पूरा रास्‍ता बंद है, मैंने पिछले सत्र में भी आग्रह किया था, मुझे जवाब मिला था कि अभी पुलिया में पानी भरा हुआ है, इसलिए सर्वे करना संभव नहीं है, मैंने मंत्री जी से भी अनुरोध किया था,विभाग के अधिकारियों से भी अनुरोध किया था कि उस मार्ग पर पुलिया बनाना अत्‍यन्‍त अनिवार्य है, लोगों को खेती-बाड़ी के लिए जाना अनिवार्य है, पशुधन का आना-जाना बंद है, इसलिए उस पर पुलिया या रपटा बनाना अत्‍यन्‍त आवश्‍यक है ।

श्री जयंत मलैया- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, झरखेड़ा तालाब के ऊपर वेस्‍टवेयर पर पुलिया निर्माण के लिए माननीय विधायक जी ने पहले भी दो बार प्रश्‍न लगाए हैं, एक बार अतारांकित एक बार तारांकित, इसके बाद वहां पर अधिकारियों को भेजा गया था और उन्‍होंने जाकर देखा वहां पर पानी भरा हुआ था, इसके बाद वहां बन सकता है कि नहीं बन सकता है, उन्‍होंने बताया था कि जब पानी नहीं हो, तब इसका देख लेते हैं । मैं कार्यपालन यंत्री, नरसिंहगढ़ को निर्देश कर दूंगा वह माननीय विधायक जी के साथ जाकर निरीक्षण कर लेंगे और यदि किफायती दाम में पुलिया बन सकती है, तो पुलिया बना देंगे ।

श्री नारायण सिंह पँवार :- माननीय मंत्री महोदय, बहुत-बहुत, धन्‍यवाद ।

नर्मदा नदी पर बांध निर्माण

15. ( *क्र. 732 ) श्री जितेन्‍द्र गेहलोत : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 1972 में प्रदेश सरकार ने नर्मदा नदी पर 29 बड़े बांध बनाने की योजना बनाई थी? (ख) क्‍या उक्‍त बांधों के निर्माण की मंजूरी नर्मदा जल न्‍यायिक प्राधिकरण द्वारा 1979 में प्रदान की गई थी? तत्‍संबंधी ब्‍यौरा क्‍या है। (ग) उक्‍त (क) एवं (ख) की स्‍वीकृतियों में से कितने एवं कौन-कौन से बांध निर्मित हो चुके? उनका निर्माण व्‍यय संबंधी ब्‍यौरा क्‍या है? (घ) कितने बांध अब त‍क निर्मित नहीं हुए एवं किस कारण? पूर्ण ब्‍यौरा क्‍या है।

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। (ख) जी नहीं। नर्मदा न्‍यायिक प्राधिकरण द्वारा मध्‍यप्रदेश को 18.25 मिलियन एकड़ फीट नर्मदा कछार जल का बंटवारा किया। मध्‍यप्रदेश को अपने हिस्‍से के जल उपयोग अंतर्गत प्रश्‍नांश (क) अनुसार प्रदेश सरकार ने 29 बड़े बांध बनाने की योजना बनाई थी। (ग) 10 परियोजनाएं निर्मित हो चुकी हैं, जिनकी जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र अनुसार है। 06 परियोजनाएं प्रगतिरत हैं, जिनकी जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र अनुसार हैं। (घ) 13 परियोजनाएं अब तक निर्मित नहीं हुईं हैं, जिनकी जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र अनुसार हैं। 

परिशिष्ट - ''छ:''

श्री जितेन्‍द्र गेहलोत- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूँ कि 1972 के अंदर नर्मदा नदी के ऊपर 29 डेम की कार्य योजना बनाई थी, जिसके अंदर से 10 डेम पूर्ण हो चुके हैं और 13 अभी तक वंचित हैं और 6 की स्‍वीकृति और 6 डेम बनना अभी तक शेष हैं तो वह 6 डेम कब तक बना लिए जाएंगे और 13 की जो योजना है, वह अभी तक पूर्ण है, उसको सम्मिलित नहीं किया गया है, उन 13 की स्‍वीकृति कब तक प्रदान कर दी जाएगी ।

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी (श्री लाल सिंह आर्य) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी जो प्रश्‍न कर रहे हैं. मैं उनको बताना चाहता हूँ कि हमारी जो 9 परियोजनाएं हैं, वे पूर्ण हो चुकी हैं. वे 10 परियोजनाएं नहीं हैं, एक ऊर्जा विभाग से संबंधित है. शेष हमारी जो 6 परियोजनाएं हैं, वे प्रगति पर हैं. किसी का 98 प्रतिशत, किसी का 90 प्रतिशत काम हो गया है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वर्ष 2024 के पूर्व, हम उनको पूर्ण करेंगे. यह हमारा संकल्‍प है. माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने सदन में कहा भी है कि हमारे हिस्‍से का जो वाटर है, उसे हम 2024 से ही पहले प्राप्‍त करेंगे. इसलिए सदस्‍यों को कहना चाहता हूँ कि आप चिन्‍ता नहीं करें. नर्मदा घाटी विकास विभाग में जो भी हमारी संरचनाएं एवं कार्ययोजनाएं हैं, उनको वर्ष 2024 के पहले पूर्ण करेंगे.

श्री जितेन्‍द्र गहलोत - मैं माननीय मंत्री जी से और भी पूछना चाहता हूँ. मेरी विधानसभा अनुसूचित जाति बाहुल्‍य है. जिसके अन्‍दर कई बैराज बनना हैं. क्‍या उसकी स्‍वीकृति प्रदान करेंगे ? जिसका मैं नाम उल्‍लेख करना चाहता हूँ. मेरे यहां 5 नदियां हैं- जिसमें मलिनी नदी पर, ग्राम हनुमंतिया पर, चम्‍बल नदी पर, ग्राम भानपुरा पर, लूनी नदी पर, लूनी और क्षिप्रा नदी पर ताजली, जिससे किसानों को सिंचाई का रकबा बढ़ेगा और सौगातें मिलेगी. आज जिस प्रकार प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जी की जो सिंचाई परियोजनाएं हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - आगे, आपका प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता.

श्री लाल सिंह आर्य - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बैराज एन.व्‍ही.डी.ए. नहीं बनाता है, वह जल संसाधन बनाता है.

विभागीय पदोन्‍नति समिति‍ की बैठकों का आयोजन

प्रश्‍न- 16. ( *क्र. 3384 ) श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सामान्‍य प्रशासन विभाग द्वारा विभागीय पदोन्‍नति समिति की बैठकों के निर्देश दिये गये हैं? यदि हाँ, तो क्‍या कटनी जिले के शासकीय विभागों में विभागीय पदोन्‍नति समितियों का गठन किया जा चुका है? वर्तमान में समितियों का गठन कब किया गया? वर्ष 2014 से प्रश्‍न दिनांक तक कब-कब बैठकें आयोजित कर क्‍या अनुसंशायें की गईं? (ख) कटनी जिले में स्‍कूल शिक्षा विभाग एवं स्‍थानीय निकायों के शिक्षकों की पदोन्‍नति एवं संविदा शिक्षकों के संविलियन की कार्यवाही, कब से किन-किन कारणों से लंबित है? (ग) क्‍या कारण है कि विभागीय पदोन्‍नति समितियों की बैठकों का नियमानुसार आयोजन नहीं किया जाता, शिक्षकों की पदोन्‍नति की अनुशंसायें नहीं की जा रही हैं एवं संविदा शिक्षकों का संविलियन नहीं किया गया है, क्‍या इन अनियमितताओं का संज्ञान लेते हुये समुचित जाँच एवं कार्यवाही कर शासकीय सेवकों को शासनादेशों का लाभ दिलाया जायेगा ?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। विभागीय भर्ती नियम में विभागीय पदोन्‍नति समिति का प्रावधान होता है। जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र एक एवं दो अनुसार है। (ख) वर्ष 2015 में पदोन्‍नति की कार्यवाही गोपनीय प्रतिवेदनों के अभाव में। वर्ष 2015 में संविदा शाला शिक्षक वर्ग-3 से 473 का सहायक प्राध्‍यापक के पद पर तथा संविदा शाला शिक्षक वर्ग-2 से 04 का अध्‍यापक पद पर संविलियन किया गया। (ग) प्रश्‍नांश '''' एवं '''' के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। 

परिशिष्ट - ''सात''

श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न का जो जवाब आया है. उसमें, मैं माननीय मंत्री जी का, शासन के 2 पत्र दि. 3/7/2014 की कण्डिका 2 और दि. 12/5/2014 की कण्डिका 2 में ध्‍यान आकृष्‍ट कराना चाहता हूँ. गोपनीय प्रतिवेदन के अभाव में पदोन्‍नति समिति की बैठक नहीं टाली जा सकती. इसमें शासन के स्‍पष्‍ट निर्देश हैं. पदोन्‍नति समिति की बैठक वर्ष में 2 बार अनिवार्य रूप से हों, क्‍यों नहीं हुईं ? इस संबंध में जांच और दोषी अधिकारियों को दण्डित किया जाये और आगामी एक माह के अन्‍दर पदोन्‍नति समिति की बैठक आयोजित कर पदोन्‍नति के प्रकरण का निपटारा किया जाकर, मैं माननीय मंत्री जी से आपके माध्‍यम से अनुरोध करना चाहूँगा. दूसरा प्रश्‍न, नगरपालिक निगम कटनी में वर्ष 2001 से संविदा में नियुक्‍त शिक्षाकर्मियों के संविलियन का प्रकरण बार-बार शासन से अनुरोध के लिए पत्र लिखे जाने के बावजूद, शासन के स्‍पष्‍ट निर्देश होने के बावजूद, उन्‍हें पद के अभाव में नहीं दिया जा रहा है. जबकि रिटायर्ड हुए कर्मचारियों एवं अधिकारियों के पद रिक्‍त हैं, उन पर संविदाकर्मियों की भर्ती दी गई है, तो क्‍या उनके लिये आदेश प्रदान किये जायेंगे ?

राज्‍यमंत्री, सामान्‍य प्रशासन विभाग (श्री लाल सिंह आर्य) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा माननीय सदस्‍य ने कहा है कि शासन के नियम हैं तो स्‍वाभाविक है एक वर्ष में दो बार पदोन्‍नति के लिए बैठक होती है. कटनी नगर-निगम में जिन विभागों द्वारा जिनकी समितियां पहले से गठित हैं. उन्‍होंने 2 वर्ष के अन्‍दर पदोन्‍नति की कार्यवाही यदि नहीं की है तो वह कौन-सा अधिकारी है ? और जिसने शासन के नियमों का पालन नहीं किया है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम आदेश जारी करेंगे कि उनके खिलाफ कार्यवाही हो.

श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल - माननीय मंत्री जी, कटनी के संविदा में नियुक्‍त कर्मचारियों शिक्षाकर्मियों का संविलियन नहीं हो पा रहा है और जो पदोन्‍नति का शिक्षा विभाग का है. जिला शिक्षा अधिकारी महोदय द्वारा पदोन्‍नति समिति की बैठकें आयोजित नहीं की गई हैं. दोनों अलग-अलग हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - इसका उत्‍तर आ गया है. वैसे एक ही 2 अलग-अलग प्रश्‍न थे.

श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, संविदा को नियमित करने का और यह पदोन्‍नति समिति की बैठक नहीं होने का है.

श्री लाल सिंह आर्य - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कल ही हम पत्र जारी करेंगे कि संबंधित जिले के कलेक्‍टर को, कि उनसे रिलेटेड जो भी विभाग की कमेटियां हैं, उनका शीघ्र बैठक करके और संबंधितों को उनका अधिकार प्राप्‍त हो, इसकी कार्यवाही करेंगे.

हरदा जिले में ट्रांसफार्मर एवं बिजली व्‍यवस्‍था

प्रश्‍न-17. ( *क्र. 4037 ) श्री संजय शाह मकड़ाई : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्रामीण और कृषि उपभोक्‍ता के जले ट्रांसफार्मर बदले जाने हेतु क्‍या नियम निर्देश लागू हैं? निर्देशों की प्रति उपलब्‍ध करावें। (ख) हरदा जिले में वर्तमान 2015-16 के रबी सीजन में खराब हुए ट्रांसफार्मरों को कितने-कितने दिनों में बदला गया? दिनांक एवं स्‍थान सहित जानकारी दें। (ग) टिमरनी तहसील के ग्राम बघवाड़ा में ट्रांसफार्मर समय में नहीं सुधारने में कौन-कौन उत्‍तरदायी हैं? ऐसे उत्‍तरदायी लोगों पर क्‍या कार्यवाही की गई है? (घ) टिमरनी विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत नौसर के खेरी टप्‍पर एवं ग्राम खारी में विद्युत व्‍यवस्‍था है? यदि नहीं, तो क्‍या इसके लिए शासन की तरफ से कोई योजना है ?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) ग्रामीण क्षेत्र के विद्युत उपभोक्‍ताओं के जले/फेल वितरण ट्रांसफार्मर वर्षा ऋतु (जुलाई से सितम्‍बर) में 7 दिन तथा शेष वर्ष के दौरान सूखे मौसम में 3 दिन में बदले जाने के नियम/निर्देश हैं, किन्‍तु जले/फेल वितरण ट्रांसफार्मर से संबद्ध उपभोक्‍ताओं के विरूद्ध बकाया राशि होने पर नियमानुसार बकाया राशि का 10 प्रतिशत जमा होने के उपरान्‍त उक्‍तानुसार उल्‍लेखित अवधि में ट्रांसफार्मर बदले जाने के निर्देश हैं। निर्देशों की छायाप्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'अ-1' एवं प्रपत्र 'अ-2' अनुसार है। (ख) हरदा जिले में वर्ष 2015-16 के रबी सीजन में खराब हुये ट्रांसफार्मरों को बदलने में लगे समय तथा बदलने की दिनांकवार एवं स्‍थानवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) टिमरनी तहसील के ग्राम बघवाड़ा में फेल ट्रांसफार्मर समय-सीमा में नहीं बदलने एवं क्षतिग्रस्‍त डी.पी. स्‍ट्रक्‍चर का सुधार कार्य समय-सीमा में नहीं करने के कारण संबंधित कनिष्‍ठ यंत्री, करताना वितरण केन्‍द्र को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है।(घ) टिमरनी विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत नौसर के अंतर्गत खारी नाम का कोई ग्राम नहीं है। ग्राम पंचायत नौसर के अंतर्गत स्थित खड़ी टप्‍पर में कुल 09 मकान (टप्‍पर) बने हुए हैं। जिले में संचालित राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के प्रावधानों के अनुसार 100 एवं 100 से अधिक आबादी वाली बसाहटों/मजरों/टोलों को ही योजना में सम्मिलित किया जा सका था। उक्‍त प्रावधानों के अंतर्गत नहीं आने के कारण उक्‍त मजरे का कार्य जिले हेतु स्‍वीकृत उक्‍त योजना में शामिल नहीं किया जा सका। वित्‍तीय उपलब्‍धता के आधार पर उक्‍त मजरे के विद्युतीकरण का कार्य भविष्‍य में स्‍वीकृत होने वाली योजना में सम्मिलित किया जा सकेगा। तथापि सांसद/विधायक निधि द्वारा वित्‍तीय सहायता उपलब्‍ध करायी जाती है तो उक्‍त मजरे के विद्युतीकरण का कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराया जावेगा।

श्री संजय शाह मकड़ाई - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे जो जानकारी दी गई है, उसमें और मेरे पास जो जानकारी है, उसमें थोड़ी भिन्‍नता है. मेरे '' के जवाब में दिया गया है कि नियमानुसार ट्रान्‍सफॉर्मर बदले जाते हैं. माननीय मंत्री महोदय, नियम 7 दिन एवं 3 दिन हैं. लेकिन हमारे जिले में लगता है कि 7 और 3 दिन, मेरे ख्‍याल से कोई भी ट्रान्‍सफॉर्मर नहीं बदला गया. माननीय मंत्री जी, मैं इकट्ठे ही प्रश्‍न कर लेता हूँ. '' में मुझे जानकारी दी है और पूरा फोल्‍डर दिया गया है, उसमें हर गांव में किसी में 2 दिन में, किसी में 3 दिन में ट्रान्‍सफॉर्मर बदलने की बात कही गई है. अगर यह 2 और 3 दिन में सब जगह ट्रांसफार्मर बदला जाता, तो शायद मुझे यहां पर प्रश्न करने की आवश्यकता ही नहीं होती. तो बहुत ही असत्य जानकारी मुझे यहां पर अधिकारियों के द्वारा दी गयी है. मैं इस ओर मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा. प्रश्नांश (ग) में ग्राम बघवाड़ा में जो ट्रांसफार्मर विलम्ब से लगाया गया था, वह मुझे यहां पर लगभग 15 दिन की जानकारी दी गयी है, लेकिन मेरी जानकारी के अनुसार वहां पर एक महीने से ऊपर का समय लिया गया गया था और सिर्फ एक शोकॉज नोटिस के माध्यम से इतिश्री कर ली गयी थी. मेरा सीधा प्रश्न है कि एक तो छोटे कर्मचारी को सिर्फ शोकॉज नोटिस देना, क्या यह सत्य है कि इसमें वरिष्ठ अधिकारियों की कोई जवाबदारी नहीं थी. सीजन में किसी गांव का ट्रांसफार्मर जल जाये और इतने दिनों के बाद ट्रांसफार्मर बदला जाये, तो वहां के किसानों की क्या हालत होती होगी, यह आप खुद समझ सकते हैं. दूसरा यह कि जो ट्रांसफार्मर नियमानुसार जितने दिनों में बदला जाना था, 7 दिन में मैक्सीमम बदलने का दिया था, तो इन्होंने 2-3 दिन में ही बदल लिया. तो ये कम से कम जानकारी में 7 दिन ही लिख देते. तो आपने जो जानकारी दी है, वह पूर्णतः असत्य है. इसमें कार्यवाही होनी चाहिये और वहां पर जितने भी ट्रांसफार्मर बदले गये हैं, सब 15 दिन, 20 दिन एवं एक महीने में लगाये गये हैं और उसमें भी कुछ व्यवस्था शुल्क के नाम पर लिया जाता है, उसके बाद ही होता है. यह व्यवस्था आप दिलवायेंगे, तो प्रसन्नता होगी.

श्री राजेन्द्र शुक्ल -- अध्यक्ष महोदय, जैसा कि हमारे जवाब में यह स्पष्ट है कि बघवाड़ा को छोड़कर, क्योंकि बघवाड़ा में ट्रांसफार्मर भर ही नहीं जला था, उसकी डीपी ही नहर के पानी से गिर गयी थी. तो डीपी को खड़ा करना, फिर उसमें ट्रांसफार्मर लगाना इसके कारण उसमें समय जरुर लगा है. लेकिन आपका यह कहना है कि 2-3 दिन में, वर्षा ऋतु को छोड़ कर 3 दिन में बदलना है, रबी और खरीफ के सीजन में और बाकी 7 दिन में वर्षा ऋतु में. लेकिन आपका यह कहना है, यदि आप स्पेसीफिक कोई जानकारी देंगे, तो सिर्फ कारण बताओ नोटिस ही नहीं देंगे, कड़ी कार्यवाही भी करेंगे.

श्री संजय शाह मकड़ाई -- अध्यक्ष महोदय, मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि इसमें वरिष्ठ अधिकारियों की भी जवाबदारी तय होनी चाहिये. आप ग्रिड से भी देख सकते हैं कि कब उनका ट्रांसफार्मर ठीक हुआ था, कितने दिनों में ठीक हुआ था और कितनी बिजली की खपत हुई थी. इस तरीके से आप वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कार्यवाही करने का आश्वासन दें.

श्री राजेन्द्र शुक्ल -- अध्यक्ष महोदय, जो भी तरीके जांच करने के हो सकते हैं कि ट्रांसफार्मर कब जला और कब बदला गया, उन सारे तरीकों के आधार पर हम उस जानकारी को निकालेंगे कि एक्चुअल में ट्रांसफार्मर कितने दिनों में बदले गये हैं. यदि यह जानकारी गलत पाई गई और दूसरे तरीकों से जांच करने में मालूम पड़ गया कि यह जानकारी गलत है, तो वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कार्यवाही होगी.

श्री संजय शाह मकड़ाई -- अध्यक्ष महोदय, एक छोटा सा प्रश्न और है.

अध्यक्ष महोदय -- आपकी पूरी बात आ गई है. सारी बातों का जवाब आ गया है.

श्री संजय शाह मकड़ाई -- अध्यक्ष महोदय, इसके लिये तो मैं आपको और मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूं. पर एक जानकारी और चाहिये. जो 2-3 सालों से वहां पर वरिष्ठ अधिकारी जमे हुए हैं, उनका स्थानान्तरण करके वहां पर नये अधिकारी भिजवाने का कष्ट करें.

अध्यक्ष महोदय -- आप उनको लिख करके दे दीजिये.

 

 

 

प्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थ पर लगने वाले टैक्‍स

18. ( *क्र. 3121 ) श्री रामनिवास रावत : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म.प्र. में पेट्रोल, डीजल, कैरोसीन एवं रसोई गैस, सिलेण्‍डर प्रति यूनिट, उत्‍पादन कं‍पनियों से म.प्र. को मूल रूप से किस दर पर प्राप्‍त होते हैं? पेट्रोल, कैरोसीन एवं डीजल की दर प्रति लीटर एवं रसोई गैस सिलेण्‍डर की दर प्रति सिलेण्‍डर में मूल रूप से प्राप्‍त होने की दर एवं प्रदेश में लगने वाले विभिन्‍न टैक्‍स उपरांत विक्रय की दर बतावें? (ख) वर्तमान में म.प्र. में पेट्रोल, डीजल, कैरोसीन एवं रसोई गैस पर कौन-कौन से टैक्‍स किस-किस दर पर लगाए जा रहे हैं? विगत दो वर्षों में प्रदेश सरकार द्वारा इनमें से कौन-कौन से टैक्‍सों में कितनी-कितनी वृद्धि की गई है? वर्तमान में पड़ोसी राज्‍यों छत्‍तीसगढ़, राजस्‍थान, गुजरात एवं महाराष्‍ट्र, हरियाणा, उत्‍तरप्रदेश व दिल्‍ली में इन उत्‍पादों पर लगाए जाने वाले टैक्‍सों की जानकारी म.प्र. सहित तुलनात्‍मक विवरण दें? (ग) क्‍या प्रदेश में अन्‍य पड़ोसी राज्‍यों की तुलना में इन उत्‍पादों पर टैक्‍स अधिक होने से सीमांत इलाकों में पड़ोसी राज्‍यों से डीजल, पेट्रोल लाकर प्रदेश में बेचा जा रहा है, जिससे प्रदेश को राजस्‍व की हानि हो रही है? क्‍या प्रदेश सरकार अन्‍य पड़ोसी राज्‍यों के समान उक्‍त उत्‍पादों पर लगने वाले टैक्‍स अनुसार टैक्‍स की दर निर्धारित करेगी? (घ) वित्‍तीय वर्ष 2013-14, 2014-15 एवं 2015-16 में प्रश्‍नांकित दिनांक तक प्रश्‍नांश (क) अनुसार उत्‍पादों पर लगने वाले विभिन्‍न प्रकार के टैक्‍सों से प्रदेश को कितने रूपये का राजस्‍व प्राप्‍त हुआ? कृपया वर्षवार बतावें।

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) यह जानकारी विभाग द्वारा संधारित नहीं की जाती है। (ख) वर्तमान में मध्‍यप्रदेश में पेट्रोल, डीजल, कैरोसिन एवं रसोई गैस पर लगाए जा रहे कर की दर की जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। अन्‍य राज्‍यों में लागू कर की दर विभाग द्वारा संधारित नहीं की जाती है। (ग) प्रदेश के सीमांत इलाकों में पड़ोसी राज्‍यों से डीजल, पेट्रोल लाकर प्रदेश में बेचे जाने की कोई जानकारी प्रकाश में नहीं आई है। प्रदेश सरकार प्रदेश में बजट अनुमान एवं राजस्‍व संग्रहण के आधार पर कर की दरें निर्धारित करती है। (घ) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र 'बी' अनुसार है। 

परिशिष्ट - ''आठ''

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय, सबसे पहले आपको धन्यवाद कि कल पूरे 25 प्रश्नों पर चर्चा हुई और आज भी 18 प्रश्नों पर पहुंच गये, लगभग पूरे होंगे. आपका संरक्षण चाहूंगा. मैंने मंत्री जी से प्रश्न किया था कि प्रदेश में पेट्रोल,डीजल, कैरोसिन, रसोई गैस, सिलेण्डर प्रति यूनिट किस रुप में कम्पनियों से मूलतः प्राप्त होती है. आपने कहा कि यह जानकारी विभाग द्वारा संधारित नहीं की जाती है. मैंने पूछा कि टैक्स लगाने के बाद कितने रुपये में बेची जाती है, वह भी जानकारी संधारित नहीं की जाती है. आप टैक्स लगाते हैं, डीजल पर आपका वेट टैक्स है 27 प्रतिशत, इंट्री टैक्स 1 प्रतिशत. तो आप यह बता दें कि यह 27 प्रतिशत कौन सी राशि पर टैक्स लगाते हैं. अगर आपको जब यह नहीं पता कि मूल रुप में कितने कीमत पर प्राप्त होती है, तो यह 27 प्रतिशत वेट टैक्स, एक प्रतिशत इंट्री टैक्स और वह ठीक है एक लीटर पर 1.50 रुपये फिक्स कर दिया है, उसके बारे में कुछ नहीं कहना है. लेकिन जो टैक्स लगाते हैं, जब आपको राशि, कीमत ही नहीं पता, तो किस कीमत पर टैक्स लगाते हैं, यह बतायें.

श्री जयंत मलैया -- अध्यक्ष महोदय, जैसे मैंने अपने उत्तर में निवेदन किया, यह बात सही है कि यह जानकारी हम संधारित नहीं करते हैं. उसका भी कारण है. हमारे प्रदेश में 5 पेट्रोलियम कम्पनीज हैं. इंडियन ऑयल कारपोरेशन, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम, रिलायंस पेट्रोलियम और एस.आर. पेट्रोलियम. इन सबसे यहां पर डीजल, पेट्रोल और कैरोसीन आता है. दूसरी बात यह है कि इनके अलग अलग जगह डिपो होते हैं, सबके अपने अलग अलग दाम होते हैं और लीड के हिसाब से हरेक जगह के डिपो के हिसाब से अंतर रहता है 600-650 जगह की जानकारी संधारित करना संभव नहीं है. इसलिये इसकी जानकारी संधारित नहीं की जाती है. आप देखेंगे एक शहर में ही डीजल और पेट्रोल के अलग अलग डिपो से आये हुये, अलग अलग कंपनी के दामों में भी थो़ड़ी बहुत भिन्नता होती है. हरेक जगह से जिस आउट-लेट से वह डीजल या पेट्रोल निकलता है उसके ऊपर हम वेट और एन्ट्री टैक्स लगाते हैं.

श्री रामनिवास रावत- आउट-लेट से जिस भाव में बेचते हैं उस पर एन्ट्री टैक्स लगाते हैं ? जैसे 50 रूपये बेचा तो 50 रूपये पर आपका टैक्स है ? आपने कहा कि आउट लेट से बेचते हैं, अलग अलग रेट हैं, अलग अलग रेट तो ट्रांसपोर्टेशन की दर के कारण हो जाते हैं, डिपो से तो दर एक ही होना चाहिये .

श्री जयंत मलैया-- उसका भी लीड कारण होता है. आउट लेट की लीड और वहां से डिपो की लीड.

श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा दूसरा प्रश्न यह है कि अभी जो डीजल और पेट्रोल के रेट हैं , डीजल पहले जब 150 रूपये प्रति बैरल था तब भी लगभग यही रेट था आज 35 रूपये डॉलर प्रति बैरल है तब भी यही रेट है. केन्द्र सरकार की पहले एक्साइज ड्यूटी थी 3 और आज डीजल 70 रूपये है पेट्रोल पर थी 9 आज 31 रूपये है.

अध्यक्ष महोदय-- आप जानकारी मत दें. आप प्रश्न करिये.

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि अभी जो आपकी केबिनेट हुई थी, पेपरों में छपा था कि आपने डीजल पर फिक्स रेट बढ़ा दिया है. (मंत्री जी द्वारा बैठे बैठे बोलने पर कि बढाया नहीं है, बढायेंगे ) ठीक है बढाया नहीं है तो कब से बढ़ायेंगे.

श्री जयंत मलैया-- हमारी मर्जी हम कब से बढ़ायें, आपसे पूछ कर के थोड़े ही बढायेंगे.

अध्यक्ष महोदय-- आप सीधा प्रश्न कर दीजिये. अन्य सदस्यों के भी प्रश्न हैं.

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, सीधा प्रश्न यह है कि अभी आपने 23.1.2016 से जो 50 पैसा लगता था अतिरिक्त कर 1 रूपये 50 पैसे कर दिया है. इस प्रकार आप कम से कम 24 रूपये आप लेते हैं और 21 रूपये केन्द्र सरकार ले लेती है, 35 रूपये लगभग आप डीजल और पेट्रोल पर लेते हैं. मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि प्रदेश में सूखा पड़ा हुआ है, किसान आंदोलित है, किसान आत्महत्या कर रहा है..

अध्यक्ष महोदय-- सीधा सीधा प्रश्न करें, भाषण मत दीजिये.

श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्यक्ष महोदय, क्या मंत्री जी किसानों के लिये उनकी कृषि भूमि की जोत सीमा के आधार पर बिना टेक्स की डीजल उपलब्ध करायेंगे.

श्री जयंत मलैया -- अध्यक्ष महोदय, हमने सब किसानों के लिये बिजली उपलब्ध कराई है अब डीजल की आवश्यकता उनको नहीं होती है. सिर्फ ट्रेक्टर के लिये आवश्यकता लगती है.

प्रश्न संख्या - 19 ( अनुपस्थित )

 

सिवनी जिले में खनिज खदानों की लीज़ स्‍वीकृति

20. ( *क्र. 3891 ) श्री दिनेश राय : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में स्‍टोन क्रेशर, रेत, फर्शी, पत्‍थर आदि खदानों की लीज़ स्‍वीकृत किये जाने की क्‍या प्रकिया है? नियम व शर्तों की प्रतिलिपि उपलब्‍ध कराएं। (ख) सिवनी जिले में विगत 5 वर्षों में किस-किस गांव में किस-किस सर्वे नम्‍बर में कितने-कितने क्षेत्रफल की स्‍टोन क्रेशर, पत्‍थर, रेत आदि खनिजों की लीज़ पर किन-किन फर्मों या व्‍यक्तियों को कब-कब, कितनी-कितनी अवधि के लिये स्‍वीकृत की गई? (ग) प्रश्‍नांश (ख) से संबंधित 2010 से प्रश्‍न दिनांक तक अवैध उत्‍खनन करने या नियमों का पालन नहीं करने या पर्यावरण प्रदूषित करने हेतु कितने-कितने प्रकरण, किस-किस फर्म या व्‍यक्तियों पर कहाँ-कहाँ दर्ज किये गये व उन्‍हें क्‍या दण्‍ड दिया गया?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) म.प्र. गौण खनिज नियम 1996 में स्‍टोन क्रेशर हेतु पत्‍थर खनिज, निजी भूमि में स्थित फर्शी पत्‍थर, म.प्र. राज्‍य खनिज निगम के पक्ष में रेत खनिज का उत्‍खनिपट्टा स्‍वीकृत किये जाने का प्रावधान है। शासकीय भूमि में स्थित फर्शी पत्‍थर एवं पत्‍थर को नीलामी के माध्‍यम से व्‍यापारिक खदान के रूप में स्‍वीकृत किये जाने का प्रावधान है। यह नियम अधिसूचित नियम है, जिसमें प्रक्रिया, नियम तथा शर्तें उल्‍लेखित हैं। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' एवं '' अनुसार है।

 

श्री दिनेश राय-- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपका संरक्षण चाहूंगा.मैंने मंत्री जी से जो प्रश्न किया था उसमें (क) (ख) में जो जानकारी दी है वह पूर्ण जानकारी नहीं दी गई है उसमें सिर्फ क्रेशरों की जानकारी दी गई है, उसमें मुरम, रेत,उत्खनन की जानकारी भी मांगी थी, वह पूर्ण जानकारी मुझे नहीं दी गई है.

श्री राजेन्द्र शुक्ल --माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने स्टोन, पत्थर, रेत आदि खनिजों की लीज पर किन किन फर्मों/व्यक्तियों की जानकारी चाही है. उस जिले में जितनी भी संचालित खदानें हैं, जो स्वीकृत हैं उन सभी की जानकारी परिशिष्ट में है. लगभग 94वें क्वेरी लीज हैं 45 आक्शन हैं जिसमें रेत, पत्थर, और मुरम है, 45 खदानें आक्शन की हैं.

श्री दिनेश राय-- अध्‍यक्ष महोदय, जो क्रेशरें आटोमेटिक बंद हैं उनकी जानकारी हैं, उनमें 2 हेक्‍टेयर की आप परमीशन देते हो, 5-5, 8-8 हेक्‍टेयर में वह खुदाई कर रहे हैं, 20 फीट गहराई तक ही आप अनुमति देते हैं, 40 फीट तक वह गहरा कर रहे हैं, ब्‍लास्टिंग कर रहे हैं, तो मैं चाहूंगा कि उनकी जांच करायेंगे, क्‍योंकि जांच हो नहीं रही है, जो अधिकारी है वह प्राइवेट गाड़ी में बत्‍ती लगाकर घूमते हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पिछली बार भी मैंने इसी बात को उठाया था, फिर उठा रहा हूं. उसकी जांच करायेंगे उच्‍च अधिकारियों से और मुझे साथ रखेंगे क्‍या.

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल-- जांच कराने में कोई आपत्ति नहीं है, हालांकि अवैद्य उत्‍खनन, परिवहन के प्रकरण बनाये गये हैं, जिसकी डिटेल परिशिष्‍ट में संलग्‍न है. लेकिन फिर भी जांच तो एक सतत प्रक्रिया है और हमने जिले में टॉस्‍क फोर्स भी बनाई है, वह टॉस्‍कफोर्स नियमित रूप से अभियान चलाकर अवैद्य उत्‍खनन वालों को पकड़ती है और उनके मामले बनाती है और परिवहन करते हुये यदि कोई वाहन मिलते हैं तो तत्‍काल उनको जप्‍त करके वसूली की कार्यवाही भी होती है, उसके रिकार्ड संलग्‍न हैं.

श्री दिनेश राय-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम खुद प्रभारी मंत्री जी के साथ मंगवानी गये थे क्रिकेट मैच में, वहां पर इनका माइनिंग अधिकारी 2 गाड़ी रोकता है हम लोगों को देखकर, उसके कुछ मिनट बाद जैसे ही हम लोग निकल जाते हैं, आधा घंटे बाद रिपोर्ट मिलती है गाडि़यां छोड़ दी जाती हैं.

अध्‍यक्ष महोदय-- प्रश्‍न क्रमांक 21, श्री कमल मर्सकोले.

श्री दिनेश राय-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमको जांच दल में आप रखेंगे क्‍या, आपकी जो समिति है उस पर हमको भरोसा नहीं है. नहीं, नहीं माननीय अध्‍यक्ष महोदय मैं बहिष्‍कार करता हूं, आपके द्वारा संरक्षण नहीं मिलता मुझे.

अध्‍यक्ष महोदय-- जांच दल में इनको, सुन तो लें....

श्री दिनेश राय-- जानकारी असत्‍य है, मैं बहिर्गमन करता हूं, मैं संतुष्‍ट नहीं हूं.

बहिर्गमन

 

(निर्दलीय श्री दिनेश राय, सदस्‍य द्वारा शासन के उत्‍तर से असंतुष्‍ट होकर सदन से बहिर्गमन किया गया)

नगर परिषद लांजी से प्राप्‍त शिकायतों की जाँच

21. ( *क्र. 3217 ) श्री कमल मर्सकोले : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि () राज्‍य शासन द्वारा लांजी नगर परिषद के दिनांक 25.08.2009 से गठन के उपरांत कितने विकास कार्यों के लिये नगर परिषद लांजी ने प्रेसिडेंट कौंसिल एवं नगर परिषद ने प्रस्‍ताव पारित कर राज्‍य शासन को दिनांक 29.01.2016 तक भेजे एवं राज्‍य शासन ने उस पर क्‍या कार्यवाही की? () अध्‍यक्ष नगर परिषद लांजी ने विकास कार्य नहीं होने की कितनी शिकायतें प्रमुख सचिव नगरी विकास एवं संचालनालय नगरीय विकास को प्रेषित की एवं उन पत्रों पर संबंधित अधिकारियों द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई? () नगर परिषद लांजी को फायर बिग्रेड खरीदने एवं शौचालय तथा शहर में नालियों के निर्माण के लिये बजट नहीं दिये जाने का कारण बताया जावे तथा फायर बिग्रेड का अनुदान एवं गंदे पानी के निकासी के लिये नालियां बनाने डी.पी.आर. बनाने की अनुमति कब तक प्रदान की जायेगी? निश्चित अवधि बताई जावे। () नगर परिषद लांजी को आवंटित बजट का ऑडिट एवं कर्मचारियों की भर्ती की जाँच कब तक करायी जावेगी?
मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : () जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। () नगर परिषद लांजी में विकास कार्य नहीं होने की, अध्‍यक्ष द्वारा कोई शिकायत प्राप्‍त नहीं हुई है। () नगर परिषद लांजी जिला बालाघाट को फायर बिग्रेड क्रय के लिए राशि रू. 25.00 लाख उपलब्‍ध कराया गया है। व्‍यक्तिगत शौचालय 500 नग के लिए राशि रू. 98.60 लाख की कार्ययोजना स्‍वीकृत की गई है। नगर परिषद लांजी द्वारा गंदे पानी के निकासी के लिए नाली निर्माण का कोई प्रस्‍ताव तैयार नहीं किया गया है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। () नगर परिषद लांजी द्वारा उप संचालक, स्‍थानीय निधि संपरीक्षा जबलपुर को पत्र क्रमांक 2375 दिनांक 08.01.2016 से ऑडिट कराने का अनुरोध किया गया है। कर्मचारियों के भर्ती की जाँच संबंधी कोई भी प्रकरण वर्तमान में लंबित नहीं होने से शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - HYPERLINK "http://mpvidhansabha.nic.in/house%20proceedings/14-2016-1/3217.pdf"''HYPERLINK "http://mpvidhansabha.nic.in/house%20proceedings/14-2016-1/3217.pdf"नौ''

श्री कमल मर्सकोले-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लांजी नगर पंचायत के गठन के उपरांत ग्राम पंचायत के कर्मचारी को नियम विरूद्ध संविलियन कर स्‍थाई कर दिया गया है, जो भरती नियम के तहत नहीं की गई है और न ही आरक्षण नियमों का पालन किया गया है, इसकी शिकायत कई बार की गई है. दूसरा मेरा यह प्रश्‍न है माननीय मंत्री जी से कि जब से नगर पंचायत का गठन हुआ है, उस नगर पंचायत का अभी तक आडिट नहीं हुआ है और न ही वहां का बजट बना है.

नगरीय विकास एवं पर्यावरण राज्‍य मंत्री (श्री लाल सिंह आर्य)-- माननीय सदस्‍य ने न तो संविलियन की कोई जानकारी चाही है, न आडिट की कोई जानकारी चाही है माननीय अध्‍यक्ष महोदय. उन्‍होंने जानकारी चाही थी विकास कार्यों की, मैं पूरे लेकर आया हूं, लेकिन फिर भी अगर आडिट नहीं हुआ है तो हम निर्देश जारी करेंगे कि आडिट हो.

श्री कमल मर्सकोले -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने अपने प्रश्‍न ख में मैंने बजट के आडिट और कर्मचारियों की भरती की बात की है.

अध्‍यक्ष महोदय-- आडिट की की है.

श्री कमल मर्सकोले -- आडिट की और कर्मचारी भरती की जांच की भी मैंने बात की है.

अध्‍यक्ष महोदय-- आडिट की की है खाली, आडिट आप (माननीय मंत्री जी की ओर हाथ दिखाते हुये) करा देंगे, ऐसा उन्‍होंने आश्‍वासन दिया है.

 

 

 

 

आरक्षित वर्ग के कृषकों को मुआवजा

22. ( *क्र. 3068 ) श्री लखन पटेल : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि () क्‍या दमोह जिले में तहसील पथरिया के ग्राम हथना (नंदरई) में सिंचाई विभाग द्वारा तालाब निर्माण कराया गया? इसमें कितने किसानों की जमीन डूब क्षेत्र में हैं? () ऐसे किसानों की संख्‍या नाम सहित बताएंगे, किस-किस किसान की भूमि कितना-कितना रकबा डूब क्षेत्र में है? () इन किसानों को वर्ष 1970-71 में राजस्‍व विभाग द्वारा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों को खेती के लिए पट्टे दिए गए थे? यदि हाँ, तो उनकी जमीन डूब क्षेत्र में आने से उन्‍हें मुआवजा दिया गया? यदि नहीं, तो क्‍यों? कब तक दिया जायेगा? कितनी-कितनी राशि दी जावेगी एवं कब तक?
जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : () जी हाँ, ग्राम हथना (नंदरई) में बासांकला जलाशय का निर्माण कराया गया है। 43 कृषकों की भूमि डूब क्षेत्र में है। () जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र ''1'' एवं ''2'' अनुसार है। () वनभूमि पर राजस्‍व विभाग द्वारा पट्टे दिए जाना नियम संगत नहीं होने के कारण मुआवजा भुगतान संभव नहीं हो सका। पट्टे की वैधानिकता का परीक्षण कर 3 माह के भीतर निराकरण करने के निर्देश कलेक्‍टर को दे दिए गए हैं।

परिशिष्ट - HYPERLINK "http://mpvidhansabha.nic.in/house%20proceedings/14-2016-1/3068.pdf"''HYPERLINK "http://mpvidhansabha.nic.in/house%20proceedings/14-2016-1/3068.pdf"दस''

 

श्री लखन पटेल-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी के जवाब से संतुष्‍ट हूं, परंतु आपका संरक्षण चाहता हूं. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों से जुड़ा हुआ मामला है. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से आश्‍वासन चाहूंगा कि क्‍या डूब में आये हुये आदिवासी और अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों का मुआवजा दिलायेंगे क्‍या.

जल संसाधन मंत्री (श्री जयंत मलैया)-- कलेक्‍टर को निर्देशित कर दिया गया है, 3 माह में मुआवजा बंट जायेगा.

श्री लखन पटेल-- धन्‍यवाद, माननीय मंत्री जी.

ट्रांसफार्मर का अन्‍यत्र व्‍यवस्थापन

23. ( *क्र. 3974 ) श्री मानवेन्द्र सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि () क्‍या अतारांकित प्रश्‍न संख्‍या 104 (क्रमांक 2364), दि. 28.07.2015 के प्रश्‍नांश () भाग के उत्‍तर में नगरीय प्रशासन एवं पर्यावरण विभाग से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार उक्‍त अनुज्ञाओं में तत्‍कालीन प्रचलित नियमों के तहत खुला क्षेत्र, सर्विस क्षेत्र, पार्क आदि स्‍वीकृत किया जाना स्‍वीकार किया है, तो उक्‍त ट्रांसफार्मर चयनित स्‍थल पर स्‍थापित है या अचयनित स्‍थल पर? () क्‍या अतारांकित प्रश्‍न क्रमांक 2197 उत्‍तर दिनांक 15.12.2015 के प्रश्‍नांश () भाग के उत्‍तर में अध्‍यक्ष, विनीत कुंज, गृह निर्माण संस्‍था की लिखित सहमति प्राप्‍त नहीं होना लेख किया गया है? हाँ, तो इस प्रश्‍न दिनांक तक उक्‍त संस्‍था से तत्‍संबंधी सहमति प्राप्‍त कर ली गई है, तो सहमति पत्र प्रस्‍तुत करें? यदि नहीं, तो शिथिलीय कार्यवाही करने के लिए कौन-कौन अधि./कर्म. दोषी हैं? दोषियों के नाम पदनाम उल्‍लेखित करें। () शासन, संभावित जनहानि को जन्‍म देने वाली सहमति देने में शिथिलता बरतने वाली उक्‍त संस्‍था के कॉलोनाईजर संबंधी अनुज्ञापत्र को निरस्‍त करने की कार्यवाही करेगा? हाँ तो अवधि नियत करें?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : () जी हाँ। प्रश्‍नाधीन ट्रांसफार्मर को विनीत कुंज, गृह निर्माण संस्‍था की सहमति पर तात्‍कालिक प्रचलित नियमों एवं सुरक्षा की दृष्टि से अनुकूल चयनित स्‍थल पर तकनीकी साध्‍यता तथा स्‍वीकृत बाह्य विद्युतीकरण के प्राक्‍कलन अनुसार '' श्रेणी के विद्युत ठेकेदार के माध्‍यम से स्‍थापित कराया गया है। () जी हाँ। अध्‍यक्ष विनीत कुंज गृह निर्माण संस्‍था के द्वारा दिनांक 18.02.16 को लिखित सहमति दी गई है। उक्‍त सहमति पत्र की छायाप्रति संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। () उत्‍तरांश () में दर्शाए अनुसार प्रश्‍नाधीन ट्रांसफार्मर तकनीकी साध्‍यता के अनुरूप ही लगाया गया था एवं वर्तमान में अध्‍यक्ष विनीत कुंज गृह निर्माण संस्‍था से 5 प्रतिशत पर्यवेक्षण शुल्‍क के आधार पर कार्य कराने की लिखित सहमति दिनांक 18.2.16 को प्राप्‍त हो चुकी है, अत: उक्‍त परिप्रेक्ष्‍य में वर्तमान में कोई कार्यवाही किया जाना प्रस्‍तावित नहीं है।

परिशिष्ट - HYPERLINK "http://mpvidhansabha.nic.in/house%20proceedings/14-2016-1/3974.pdf"''HYPERLINK "http://mpvidhansabha.nic.in/house%20proceedings/14-2016-1/3974.pdf"ग्यारह''

श्री मानवेन्‍द्र सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने अपने प्रश्‍न में माननीय मंत्री जी से जो जानकारी चाही थी कि विनीत कुंज गृह निर्माण संस्‍था की जो सोसायटी यहां भोपाल में है, यहां पर एक कंज्‍यूमर ने अपनी शिकायत की है कि वहां पर जो ट्रांसफार्मर लगा है, वह पूरे पोल और ट्रांसफार्मर की स्थिति उसके घर की ओर झुक चुकी है, उन्‍होंने अपना मांग पत्र दिया था कि यह ट्रांसफार्मर यहां से हटाया जाये, आज की स्थिति में अगर वह ट्रांसफार्मर वहां से नहीं हटाया जाता है तो किसी भी समय उनके घर पर वह ट्रांसफार्मर गिर सकता है. मेरा माननीय मंत्री जी से अनुरोध है क्‍योंकि अध्‍यक्ष ने अपनी सहमति दे दी है ट्रांसफार्मर की शिफ्टिंग की लेकिन 5 प्रतिशत जो उस पर शुल्‍क लगाया जा रहा है, वह उपभोक्‍ता से मांग की जा रही है. मेरा मंत्री जी से अनुरोध है कि यह विभाग से 5 प्रतिशत का शुल्‍क जमा कराकर के उसकी शिफ्टिंग करा दी जाये.

ऊर्जा मंत्री (श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो 600 रूपये का मामला है, वह जमा भी हो चुका है, यदि जमा नहीं होता तो इस पर विचार किया जा सकता था, लेकिन वह जमा हो चुका है, अब अतिशीघ्र वह ट्रांसफार्मर शिफ्ट हो जायेगा.

श्री मानवेन्‍द्र सिंह-- बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

अध्‍यक्ष महोदय-- प्रश्‍नकाल समाप्‍त.

 

प्रश्‍नकाल समाप्‍त

 

अध्यक्ष महोदय-- शून्यकाल की सूचनाएं.

श्री आरिफ अकील--अध्यक्ष महोदय...

अध्यक्ष महोदय-- पहले शून्यकाल की सूचनाएं पढ़ लेने दीजिए फिर आपको समय दे दूंगा.

 

नियम 267-क के अधीन सूचनाएं

(1) नरयावली के ग्राम भायेल में स्कूल भवन का निर्माण कराया जाने.

 

इंजी.प्रदीप लारिया(नरयावली)-- अध्यक्ष महोदय, सागर जिला के नरयावली विधानसभा क्षेत्र के ग्राम भायेल में हाई स्कूल एवं हायर सेकंडरी स्कूल संचालित हैं. यहां पर अध्ययनरत् छात्रों की संख्या लगभग 600 है. उक्त दोनों स्कूल मीडिल स्कूल के भवन में संचालित हैं. विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने के कारण स्कूल दो शिफ्ट लगने के बाद भी विद्यार्थियों को अध्ययन हेतु कक्षों की कमी बनी रहती है. यहां के आमजन एवं विद्यार्थी नये शाला भवन निर्माण की मांग समय समय पर करते रहे हैं. मेरे द्वारा भी शासन एवं प्रशासन से भवन निर्माण की मांग की जाती रही है. लेकिन अभी तक नया भवन निर्माण की अनुमति प्राप्त नहीं हो पायी है. जिसके कारण विद्यार्थियों की शिक्षा में समस्या आ रही है. मेरी मांग है कि अतिशीघ्र हाईस्कूल एवं हायर सेकंडरी भवन के निर्माण की अनुमति प्रदान करें जिससे विद्यार्थियों की समस्या का निराकरण हो सके. समस्या का निराकरण नहीं होने की दशा में विद्यार्थियों एवं जनमानस में रोष व्याप्त है.

 

 

 

 

 

(2) सिवनी जिले में खाद्यान्न वितरण व्यवस्था ठीक न होना.

 

श्री दिनेश राय,मुनमुन(सिवनी)-- अध्यक्ष महोदय, सिवनी जिला/सिवनी शहर में जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली में वितरित होने वाले अनाज की गुणवत्ता काफी निम्न स्तर की है. मेरे द्वारा कई बार शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों के भ्रमण के दौरान राशन दुकानों का निरीक्षण करने पर चावल की गुणवत्ता काफी खराब पायी गई. चावल में कचरा,इल्ली, चावल का टूटा होना पाया गया. इसके अलावा राशन दुकानों का समय पर न खुलना, राशन की सही मात्रा न दिया जाना आदि समस्याओं के संबंध में आमजनों द्वारा मुझे अवगत कराया गया तथा मेरे द्वारा निरीक्षण करने पर भी यह बातें सत्य पायी गईं. इसके अलावा स्कूलों में भी मध्यान्ह भोजन हेतु वितरित होने वाले अनाज की गुणवत्ता भी काफी निम्न स्तर की पायी गई है जिसके खाने में बच्चों का कोई रुझान नहीं है. जो बच्चे इस दूषित खाद्यान्न को खा रहे हैं, खाने के बाद उनके बीमार होने की घटनाएं अक्सर हमें ज्ञात होती रहती हैं. मेरे द्वारा समय समय पर निरीक्षण उपरान्त संबंधित विभागीय अधिकारियों को तत्संबंध में पत्राचार किया जाता रहा है किन्तु आज तक प्रभावी कार्यवाही अपेक्षित है. अतः मैं सदन से अनुरोध करता हूं कि इस विषय पर शीघ्र उचित कार्यवाही कर खाद्यान्न वितरण व्यवस्था एवं वितरित अनाज की गुणवत्ता सुधारने हेतु प्रभावी कार्यवाही करने की कृपा करें.

 

(3) विधानसभा क्षेत्र पथरिया में पेयजल संकट हेतु बंद पड़े जल स्रोतों को चालू कराये जाने.

श्री लखन पटेल(पथरिया)--अध्यक्ष महोदय, विधानसभा क्षेत्र पथरिया के अधिकांश ग्राम में जल स्तर दिनोदिन काफी नीचे जा रहा है जिसके कारण गांवों में पेयजल का भारी संकट व्याप्त हो गया है. काफी हैंडपंप बिगड़े पड़े हैं तथा काफी हैंडपंप जल स्तर नीचे होने से बंद हो गये हैं. गांवों में अन्य स्रोतों से पेयजल उपलब्ध कराने की मांग ग्रामीणों द्वारा की गई है. कृपया शीघ्र पेयजल की व्यवस्था की जावे.

 

 

 

 

(4) ब्यावरा विधानसभा क्षेत्र के सुठालिया नगर में पुराने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के नये भवन में स्थानांतरण न होने.

 

श्री नारायण सिंह पंवार(ब्यावरा)--अध्यक्ष महोदय, राजगढ़ जिले के विधानसभा क्षेत्र ब्यावरा के अंतर्गत नगर सुठालिया में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा आमजरों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दृष्टि से वर्ष 2013-14 में 1 करोड़ 21 लाख रुपये की लागत सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सुठालिया हेतु नवीन भवन निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई थी. उक्त भवन का निर्माण पूर्ण हुए भी लगभग डेढ़ वर्ष हो चुका है. लेकिन उक्त भवन में वर्तमान तक विद्युतीकरण कार्य एवं पदस्थ स्टाफ हेतु आवासीय भवनों का निर्माण नहीं कराये जाने से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र को स्थानांतरित नहीं किया जा सका है. जिससे पुराने भवन में ही स्वास्थ्य सुविधा आमजनों को दी जा रही है. लेकिन पुराने भवन में स्थान अभाव के कारण कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व निर्मित भवन का वर्तमान तक उपयोग नहीं किये जाने से आमजन में आक्रोश व्याप्त है.

(5) पोहरी विधान सभा क्षेत्र के ग्रामों में पेयजल संकट

 

श्री प्रहलाद भारती (पोहरी) - अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

(6) सीहोर के ग्राम खेरी के पहुंच मार्ग का घटिया निर्माण होना

 

श्री शैलेन्द्र पटेल (इछावर) - अध्यक्ष महोदय, सीहोर जिले के अंतर्गत इछावर विधान सभा के ग्राम खेरी तहसील इछावर के पहुंच मार्ग का निर्माण लोक निर्माण विभाग द्वारा किया गया है. इस डामर मार्ग की स्थिति बड़ी दयनीय हो गई है. यह डामर मार्ग पूरा उखड़ गया है, रोड गड्ढे में हो गई है. आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं. अतः इस रोड का पुनः निर्माण कराया जाय.

 

 

 

श्री मेहरबान सिंह रावत - (अनुपस्थित)

 

(7) श्योपुर के खैरकछा ग्राम में अभ्यारण्य के लिए ली गई भूमि का मुआवजा न मिलना

 

श्री रामनिवास रावत (विजयपुर) - अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

(8) छतरपुर शहर में बायपास मार्ग न बनने से दुर्घटनाएं होना

 

श्रीमती ललिता यादव (छतरपुर) - अध्यक्ष महोदय,

 

 

(9) कुक्षी क्षेत्र में विद्युत कटौती को समाप्त किया जाना

 

श्री सुरेन्द्र सिंह हनी बघले (कुक्षी) - अध्यक्ष महोदय,

 

 

मेरी विधानसभा में फीडर सेपरेशन का काम अधूरा है. कृषि फीडर से गांव की बिजली को जोड़ दिया गया है, जिससे ग्रामीण जनता को 24 घंटे बिजली नहीं मिल रही है. कई गांवों में जो फीडर सेपरेशन का काम हुआ है, वहां पर भी तार और पोल टूट गये हैं, कृपया उचित कार्यवाही करें.

श्री आरिफ अकील ( भोपाल उत्तर ) -- अध्यक्ष महोदय विकलांग, अंधे, लूले और लंगड़े लोग धरने पर बैठे हैं उन्होंने आमरण अनशन किया है परंपरा रही है कि कई मर्तबा अध्यक्ष जी ने बुलाकर व्यवस्था करवायी है. वह अपनी पेंशन और दूसरी मांगों के लिए बात कर रहे हैं आपकी मेहरबानी हो जाय या तो मेरे ध्यानाकर्षण पर चर्चा करा लें या तो उनको बुलाकर उनकी मांगों पर मदद करवा दें. आपको भी सबाब मिलेगा, सबाब का काम है सभी विकलांग लोग हैं. अनश्चितकाली धरने आमरण अनशन पर बैठे हैं.

डॉ नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष महोदय यह क्या है कि आपने यहां पर एसी चलवा दिया है. आज गौर साहब अलग ही अंदाज में हैं गुलबंद वगैरह पहनकर आये हैं. गुलबंद का मतलब सर्दी से प्रभावित एसी के कारण है या इन्होंने किसी उससे प्रभावित होकर पहना है.

अध्यक्ष महोदय -- किसी उससे यानि क्या.

श्री बाबूलाल गौर -- अध्यक्ष महोदय यह गुलबंद अभिमंत्रित है, जो इसको छूयेगा उसका दिमाग ठीक नहीं रहेगा.

 

श्री आरिफ अकील -- और जो गले में डालेगा उसका. अध्यक्ष महोदय मेहरबानी करके उनको बुला लीजिए आपको सबाब मिलेगा हम आपसे अनुरोध कर रहे हैं.

 

अध्यक्ष महोदय -- आपकी बात पर विचार कर लेंगे.

 

श्री तरून भनोत --अध्यक्ष महोदय, गत 26 तारीख को जबलपुर में एक बहुत ही हृदयविदारक घटना घटी है. एक घर में जब पूजन का कार्यक्रम चल रहा था तब तीन सिलेण्डर फटे, जिसमें करीब 15 लोग घायल हुए थे और कल उनमें से 5 महिलाओं की मृत्यु हो गई है. मैं यह चाहता हूं कि स्वास्थ्य मंत्री जी जो बाकी बचे गंभीर मरीज हैं उसमें से 5 की स्थिति अभी भी बहुत चिंताजनक है तत्काल अगर हम उनको किसी बेहतर अस्पताल में शिफ्ट करा सकते हैं तो करायें उनका समुचित इलाज कराया जाय और एक बहुत पुरानी मांग जबलपुर मेडीकल कालेज में बर्न यूनिट की पड़ी है. इसके लिए केन्द्र से राशि भी स्वीकृत है उसकी व्यवस्था करायी जाय.

 

श्री रामनिवास रावत -- माननीय अध्यक्ष महोदय प्रदेश में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं. इन बोर्ड परीक्षाओं के चलते बच्चों पर इतना दवाब है कि आत्महत्या की घटनाएं बढ़ती जा रही है. यह बहुत ही संवेदनशील मामला है. छोटे बच्चों की जिंदगी और भविष्य का सवाल है.

 

अध्यक्ष महोदय -- उसको ध्यानाकर्षण में ले रहे हैं.

 

 

समय 11.42 पत्रों का पटल पर रखा जाना.

 

 

विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन का 57 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2013-14

उच्च शिक्षा मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) -- अध्यक्ष महोदय मैं मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 (क्रमांक 22 सन् 1973) की धारा 47 की अपेक्षानुसार विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन का 57वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2013-14 (1 जुलाई 2013 से 30 जून 2014 तक ) पटल पर रखता हूं.

 

 

मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड का तेरहवां वार्षिक प्रतिवेदन 2014-15

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ( डॉ नरोत्तम मिश्र ) -- अध्यक्ष महोदय मैं कंपनी अधिनियम 2013 (क्रमांक 18 सन् 2013) की धारा 395 की उपधारा (1) (ख) की अपेक्षानुसार मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड का तेरहवां वार्षिक प्रतिवेदन 2014-15 पटल पर रखता हूं.

 

 

मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का लेखा परीक्षण प्रतिवेदन वर्ष 2013-14

राज्यमंत्री नगरीय विकास एवं पर्यावरण ( श्री लाल सिंह आर्य ) -- अध्यक्ष महोदय मैं जल अधिनियम 1974 की धारा 40 की उपधारा (7) एवं वायू अधिनियम 1981 की धारा 36 की उपधारा (7) की अपेक्षानुसार मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का लेखा परीक्षण प्रतिवेदन वर्ष 2013-14 पटल पर रखता हूं.

 

 

समय 11.44

ध्यानाकर्षण

मण्डला जिले के ग्राम घोटा में निजी भूमि पर कन्या छात्रावास का निर्माण किये जाने से उत्पन्न स्थिति

 

 

श्री राम प्यारे कुलस्ते ( निवास )-- माननीय अध्यक्ष महोदय


 

राज्‍य मंत्री, स्‍कूल शिक्षा (श्री दीपक जोशी) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

श्री रामप्‍यारे कुलस्‍ते -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ये बात तो आ गई है कि निर्माण कार्य खसरा नं. 42 में हुआ है, वह आदिवासी किसान की जमीन है. जैसा कि मैंने ध्‍यान आकर्षण की सूचना में बताया है कि निर्माण कार्य के पूर्व के समय भी गांव वाले और स्‍वयं कृषक के द्वारा आपत्‍ति करने के बावजूद निर्माण कार्य किया गया. सरकारी जमीन बताकर प्राइवेट जमीन में निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ, धन का अपव्‍यय हुआ. माननीय मंत्री जी ने कहा है कि 19 लाख के करीब खर्च हुआ है तो निश्‍चित रूप से धन का अपव्‍यय हुआ है. दूसरी बात मैं यह कह रहा हूँ कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ क्‍या कार्यवाही करेंगे ? एक और विषय इसमें यह भी आता है कि राष्‍ट्रीय राजमार्ग की अधिसूचना इसके पूर्व भी हो चुकी थी तो अधिसूचना होने के बाद भी जान-बूझकर कार्य को बाधित करना, इस तरह की स्‍थिति निर्मित करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करेंगे क्‍या ? और जो पैसे का अपव्‍यय हुआ है उसकी वसूली के लिए क्‍या कार्यवाही करेंगे ?

श्री दीपक जोशी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, परियोजना संचालक, राष्‍ट्रीय माध्‍यमिक शिक्षा अभियान द्वारा दिनांक 04.02.2016 को जिला कलेक्‍टर को जांच कर जांच प्रतिवेदन प्रस्‍तुत करने हेतु निर्देश दिए गए थे. कलेक्‍टर द्वारा प्रथम दृष्‍टव्‍य आर.आई. और पटवारी को दोषी पाए जाने पर उनको सस्‍पेंड करने की कार्यवाही कर दी गई है. आगामी जांच प्रतिवेदन आने के बाद आगामी कार्यवाही प्रचलित की जाएगी.

श्री रामप्‍यारे कुलस्‍ते -- माननीय अध्‍यक्ष जी, राष्‍ट्रीय राजमार्ग में जो जमीन आ रही है उसका अवार्ड तो घोषित कर दिया गया है परंतु किसान को क्‍या दिया जा रहा है जिसको नुकसान हुआ है और हमारे छात्र-छात्राओं को आवासीय व्‍यवस्‍था में जो असुविधा हुई और उस वसूली के बारे में एक बार मंत्री जी आश्‍वस्‍त कर दें तो मैं समझता हूँ कि अच्‍छा होगा.

श्री दीपक जोशी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि हमने पटवारी और आर.आई. को कलेक्‍टर के निर्देश के बाद सस्‍पेंड कर दिया है और चूँकि अभी रिपोर्ट आई नहीं है अभी एकाध हफ्ता ही हुआ है तो दो हफ्ते के अंदर जैसे ही रिपोर्ट आएगी, जो उसमें दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कार्यवाही करेंगे और छात्रावास को बनाने के लिए पुनरीक्षित लागत और जमीन का आवंटन भी हमने ले लिया है, शीघ्रातिशीघ्र वहां पर छात्रावास बना दिया जाएगा.

श्री रामप्‍यारे कुलस्‍ते -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वसूली कब तक कर ली जाएगी.

अध्‍यक्ष महोदय -- मंत्री जी ने वसूली का कहा ही नहीं.

श्री दीपक जोशी -- जांच रिपोर्ट आने के बाद ही की जाएगी, अभी जांच रिपोर्ट आई नहीं है.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

(2) रीवा शहर में प्रदूषित पेयजल प्रदाय से उत्पन्न स्थिति

 

श्री सुन्दरलाल तिवारी(गुढ़)-- अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

 

 

 

राज्य मंत्री, नगरीय विकास एवं पर्यावरण(श्री लाल सिंह आर्य)-- अध्यक्ष महोदय,

 

 

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने कहा है कि कोई आक्रोश जनमानस में नहीं है. आक्रोश है कि नहीं, इसका मापदण्ड आपके पास क्या है मुझे मालूम नहीं, लेकिन यह वहां के स्थानीय अखबार हैं जिनमें पेयजल की समस्या का विधिवत बिन्दुवार दिया है कि यह अशुद्ध पानी दिया जा रहा है और रीवा में रोज अखबारों में यह प्रकाशित हो रहा है. नगर निगम के पार्षदों ने आंदोलन किया, आयुक्त को ज्ञापन दिया. वहां के जिले का विधायक होने के नाते हमने भी नगर निगम के आयुक्त को हमने ज्ञापन दिया. इसके बाद कमिश्नर, रेवेन्यू को ज्ञापन दिया. इसके बाद हम एस.पी. से मिले अपराध पंजीबद्ध करने के लिए और रेवेन्यू कमिश्नर ने मुझे पत्र भी लिख के दिया कि मैं इसकी जांच कराऊंगा और जांच के उपरांत शुद्ध पानी, पीने योग्य पानी मैं शहरवासियों को दूंगा. मैं आपसे यह निवेदन करना चाहता हूँ कि वहां बहुत सारी पाइप लाइनें ऐसी हैं जो सीवर,जहां से गंदा पानी जाता है, उनके बीच में बिछाई हुई है. वह जगह जगह फूटी हुई हैं, टूटी हुई हैं और जब उनका पानी का फोर्स कम हो जाता है, पानी टंकियों से देना बंद हो जाता है तो गंदा पानी उन पाइपों में आकर के आम जनमानस के घरों में जाता है और उसको वे पी रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय--- कृपया प्रश्न करें.

श्री सुंदरलाल तिवारी ---- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा यह कहना है कि क्या इस बात की आप गांरटी या जिम्मेदारी लेंगे और जांच कराएंगे कि यह पुरानी सड़ी हुई पाइपलाइन सीवर ड्रेनेज से कहाँ कहाँ पार हो रही है, उनको तुरंत हटवाकर और उनको दुरुस्त करवाएंगे. दूसरा मेरा यह कहना है कि शुद्ध जल प्राप्त करना हमारा संवैधानिक अधिकार है , यह सुप्रीम कोर्ट के द्वारा भी निर्धारित हो गया. इनका जो पाल्युएशन बोर्ड है, जो एक्ट है, उसमें जनता को कोई अधिकार नहीं दिया गया है उसमें यह है कि हम अदालत में भी कोई कंपलेंट दायर नहीं कर सकते हैं. कंपलेट दायर करने का अधिकार शासन को है. अब हम पीने के गंदे पानी की शिकायत करने के लिए थाने में जाते हैं या कहीं और शिकायत करते हैं तो कोई कार्यवाही नहीं हो पाती है. मेरा कहना है कि एक्ट में जो यह प्रोविजन इन्होंने बना रखा है कि प्रदूषण बोर्ड ही उसमें कंपलेंट दायर करेगा तो क्या यह अधिकार आम जनमानस को मिलेगा कि वह एक स्टेबलिश लेबोरेटरी से उस पानी की जांच करायें और अगर वह गलत पाया जाता है तो उसको सीधे अपराध में कंपलेंट दायर करने का अधिकार मिले या पुलिस में रिपोर्ट करने का अधिकार मिले. आप इस कानून में यह सुधार कराएंगे क्या.

श्री लालसिंह आर्य-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जिन विषयों को रखा हैं , उसमें मैं एक आग्रह तो यह करना चाहता हूं कि मैंने पहले ही स्वीकार किया है कि पुरानी पाइपलाइन थी और पानी के फोर्स से पुरानी पाइपलाइनें टूटती भी हैं लेकिन नगर निगम समय-समय पर उनको ठीक भी कराता है और इसी समस्या के निदान के लिए हमने अमृत योजना स्वीकृत की है. अध्यक्ष महोदय, हमारी निविदायें जारी हो चुकी हैं, आठ-दस दिन में निविदायें खुलना है और इसके बाद यह काम होना शुरु हो जाएगा. हमारा प्रत्येक परिवार को लगभग 135 लीटर पानी प्रतिव्यक्ति को प्रति दिन 2018 तक शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का संकल्प है और माननीय सदस्य के पास कोई अथेंटिक जानकारी इस प्रकार की हो कि जहाँ पाइप-लाइन फूटी है और वहाँ ठीक नहीं हुई है तो हम 8 दिन के अन्दर उन पाइप-लाइनों को वहाँ ठीक करा देंगे.

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- अध्यक्ष महोदय, मेरा एक सवाल और था कि यह जो इनका कानून है, जल प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण अधिनियम....

अध्यक्ष महोदय-- कॉल अटेंशन में कानून संशोधन की बात कैसे कर रहे हैं?

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- संशोधन की बात नहीं कर रहा हूँ. आदमी का जो मौलिक अधिकार है...

अध्यक्ष महोदय-- आप उसके लिए एक्ट ले आइये, संशोधन अधिनियम.

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह है कि क्या इस दिशा में सरकार ध्यान देगी, माननीय मंत्री जी ध्यान देंगे कि उसमें संशोधन हो? आम आदमी को दूषित पानी से लड़ने का अधिकार मिले. यह मेरा और सभी का सवाल है कोई मेरे अकेले का सवाल नहीं है. सभी सदस्यों का, हर नागरिक का सवाल है. इस पर भी आप कुछ विचार करेंगे?

अध्यक्ष महोदय-- विचार करने की कह रहे हैं.

श्री लाल सिंह आर्य-- अध्यक्ष महोदय, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जल एवं वायु की जो जाँच होती है उसके केन्द्रीय नियम बने हैं उसके अंतर्गत ही विभिन्न प्रदेशों में काम किया जाता है, उसमें संशोधन करने का किसी भी प्रदेश को अधिकार नहीं है इसलिए वह संभव नहीं है.

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- अध्यक्ष महोदय, मैं अंतिम बात यह कहना चाहता हूँ कि फ्लोरोसिस नियंत्रण, खारा पानी, लौहत्व, नाइट्रेट, इन सबकी अधिकता रीवा शहर में पानी में है और जिसकी वजह से वहाँ लोगों को गंभीर बीमारियाँ फैल रही हैं तो इन बीमारियों का क्या प्रतिशत है, इनकी जाँच करने के लिए, क्या कोई अलग से व्यवस्था करेंगे?

 

श्री मनोज निर्भयसिंह पटेल-- माननीय मंत्री जी, वहाँ से तिवारी जी को हटा लो तो वह सारी समस्याओं का निराकरण हो जाएगा. पानी भी स्वच्छ हो जाएगा और बीमारियों से वहाँ के क्षेत्र के लोग भी मुक्त हो जाएँगे.

 

अध्यक्ष महोदय-- यह कार्यवाही से निकाल दें.

 

श्री लाल सिंह आर्य-- अध्यक्ष महोदय, मैं पुनः कहना चाहता हूँ ये माननीय सांसद भी रहे हैं, वरिष्ठ सदस्य हैं, मेरा कहना है कि आप अथेंटिक जानकारी दीजिए. इस प्रकार की कहीं कोई बीमारी फैल रही है या कुछ हो रहा है. मुझे जानकारी दीजिए. मैं जब कह रहा हूँ कि आप जानकारी दीजिए हम उस पर परीक्षण करा लेंगे, उस पर कार्यवाही करेंगे.

 

अध्यक्ष महोदय-- आप पानी की जाँच के लिए पत्र लिख दें. वे फिर उसकी जाँच कराएँगे.

 

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- अध्यक्ष महोदय, मैं आपको अकेले जानकारी दे दूँगा लेकिन जनता रोज मंत्री जी को जानकारी कहाँ देगी, उसकी व्यवस्था की मैं बात कर रहा हूँ.

 

अध्यक्ष महोदय-- वे कह रहे हैं आप जनता की तरफ से दे दीजिए.

 

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- धन्यवाद.

 

श्री लाल सिंह आर्य-- वह गारंटी मध्यप्रदेश सरकार की है आप चिन्ता मत करिए.

 

 

 

12.05 बजे प्रतिवेदन की प्रस्तुति

प्रत्यायुक्त समिति का सप्तम प्रतिवेदन.

 

श्री शंकरलाल तिवारी (सभापति)-- अध्यक्ष महोदय, मैं, प्रत्यायुक्त विधान समिति का सप्तम् प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूँ.

 

12.06 बजे याचिकाओं की प्रस्तुति

अध्यक्ष महोदय--आज की कार्यसूची में सम्मिलित सभी याचिकाएं प्रस्तुत की हुई मानी जायेंगी.

12.06 बजे वर्ष 2016-2017 की अनुदानों की मांगों पर मतदान

राज्यमंत्री, सामान्य प्रशासन (श्री लाल सिंह आर्य)--अध्यक्ष महोदय, मैं,राज्यपाल महोदय

 

 

 

श्री रामनिवास रावत--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा पाइंट ऑफ ऑर्डर है. कटौती प्रस्ताव और मांगों पर चर्चा प्रारंभ हो चुकी है. कौल-शकधर की जो पुस्तक है उसमें पेज 855 पर स्पष्ट दिया हुआ है. "मंत्रालय के वार्षिक प्रतिवेदनों और कार्य निष्पादन परिणामी बजटों का परिचालन, बजट चर्चा के संबंध में मंत्रालय के वार्षिक प्रतिवेदनों की प्रतियां सदस्यों को उपलब्ध कराई जाती हैं इन प्रतिवेदनों में चालू वर्ष के दौरान मंत्रालय के कार्य निष्पादन के संबंध में आवश्यक जानकारी और उसके कार्यकरण की पृष्ठभूमि तथा अगले वित्तीय वर्ष का कार्यक्रम भी दिया जाता है."

मूलत: इससे ही सदस्यों को जानकारी मिलती है और चर्चा कराई जाती है. पैरा दो में स्पष्ट दिया है कि "वार्षिक प्रतिवेदन सामान्यत: बजट पेश किए जाने के बाद परन्तु मंत्रालय विशेष से संबंधित मांगों पर सभा में चर्चा होने से पहले सदस्यों को उपलब्ध कराए जाते हैं. विभागों से संबंधित स्थायी समिति प्रणाली की शुरुआत होने से इन समितियों को भी अनुदान की मांगों पर विचार करने के संबंध में वार्षिक प्रतिवेदनों और कार्य निष्पादन प्रणामी बजटों की प्रतियां उपलब्ध करा दी जाती हैं."

अध्यक्ष महोदय, लोक सभा में एक बार बिना प्रशासकीय प्रतिवेदन के चर्चा की बात आई किसी ने आपत्ति की तो माननीय लोकसभा अध्यक्ष ने...

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र)--प्रतिवेदन तो बंटे हैं यह जिस विषय पर चर्चा कर रहे हैं प्रतिवेदन तो दिए गए हैं, यह सामने टेबिल पर रखे हैं. अगर मैं गलत बोल रहा हूँ तो यह सामने रखे हैं.

श्री रामनिवास रावत--आप संसदीय कार्य मंत्री हैं आप मेरी पूरी बात सुन लें.

अध्यक्ष महोदय--उनकी पूरी बात आ जाने दें फिर उत्तर दे दें.

श्री रामनिवास रावत--अब मिल भी जायेगा तो कैसे पढ़ पायेंगे. मेरी पूरी बात सुन लें अध्यक्ष जी ने स्पष्ट निर्देश दिये थे कि मंत्रियों को यह बात सुनिश्चित करनी चाहिये कि सामान्‍य चर्चा प्रारंभ होने से पूर्व ही यह प्रतिवेदन सदस्‍यों को उपलब्‍ध करा दिये गये हों, क्‍योंकि जब तक यह विभिन्‍न प्रतिवेदन सदस्‍यों को नहीं मिलते, तब तक सामान्‍य चर्चा का कोई लाभ नहीं और यह आवश्‍यक नहीं है कि सभी सदस्‍य प्रत्‍येक विषय में रूचि रखते हों, परन्‍तु सामान्‍य चर्चा का उद्देश्‍य यही होता है कि सभी विषयों पर चर्चा हो सके. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसके लिये लोक सभा में वर्ष 1969 में प्रशासनिक सुधार आयोग गठित किया गया और उन्‍होंने सिफारिशें प्रस्‍तुत की कि उसके पैरा -856 के अंतिम पैरा की चार लाईन पढ़कर बता हूं- '' बजट सत्र प्रारंभ होने के पूर्व सरकार को सभी मंत्रालयों एवं विभागों को यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया जाता है कि मंत्रालयों के वार्षिक प्रतिवेदनों और कार्य निष्‍पादन आऊट कम बजटों की प्रतियां लोक सभा सचिवालय को पर्याप्‍त संख्‍या में पहले से उपलब्‍ध करा दी जायेंगी, ताकि संबंधित मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा प्रारंभ होने से पहले से एक सप्‍ताह पूर्व ही उन्‍हें सदस्‍यों को परिचालित किया जा सके.''

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें यह व्‍यवस्‍था है. अभी प्रशासनिक प्रतिवेदन आ गये होंगे. लेकिन हमें बिना कहे एक दिन पहले मिल जाते हैं. क्‍या अभी प्रतिवेदन लेकर के कोई भी सदस्‍य विभाग की पूरी जानकारियां प्राप्‍त कर सकता है ? एक सप्‍ताह पूर्व उन्‍होंने प्रस्‍तुत करने की सिफारिश की है. यह कौल एण्‍ड शकधर की किताब में लिखा हुआ है. अध्‍यक्ष महोदय मेरा निवेदन है कि सदन को नियमों और प्रक्रियाओं से चलाएं.(XXX)

अध्‍यक्ष महोदय :- यह कार्यवाही से निकाल दें.

श्री रामनिवास रावत :- इस पर चर्चा रोकें.यह उचित नहीं है. हम आप से भी निवेदन करेंगे की आप भी हमें संरक्षण दें. अभी हम क्‍या चर्चा कर पायेंगे.

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र) :- अध्‍यक्ष महोदय, मोटी-मोटी किताब लेकर बोलने से कोई बात वजनदार तो हो नहीं जाती है.

(व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय :-आपने जो पाईंट आफ आर्डर उठाया है उसके बारे में संसदीय कार्य मंत्री जी का क्‍या कहना है. (व्‍यवधान) आप सभी लोग बैठ जायें. यह कार्यवाही से निकाल दें जो बाद में जो कहा है.

डॉ. नरोत्‍त्‍म मिश्र :- अध्‍यक्ष महोदय, रामनिवास जी का दल उनको प्राथमिकता देता नहीं है, न बजट में बोलने को देता है न राज्‍यपाल के अभिभाषण पर बोलने देता है. अब अपनी भड़ास निकालने के लिये असत्‍य वाचन कर देते हैं. यह आर. एस.एस से आपका क्‍या रिश्‍ता है, हम स्‍वयं सेवक हैं, हमें गर्व है आर.एस.एस. के स्‍वयं सेवक होने का. (व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत :- मैं सचेतक हूं. (व्‍यवधान) नाम मैं देता हूं.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र :- मुझे गर्व है, आर. एस. एस. के स्‍वयं सेवक होने पर गर्व है. (व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत :- मैं नाम देता हूं और आप कह रहे हैं कि मुझे मौका नहीं मिलता. (व्‍यवधान)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र :-हम आर.एस.एस. के स्‍वयं सेवक हैं, यह रिश्‍ता है आर.एस.एस. हमारा.

(..व्यवधान..)

श्री रामनिवास राव - (XXX)

अध्यक्ष महोदय - कृपया बैठ जाएं. क्या नियम कानून से विधान सभा नहीं चलाओगे.

(..व्यवधान..)

डॉ.नरोत्तम मिश्र - (XXX)

डॉ.गोविन्द सिंह - (XXX)

डॉ.नरोत्तम मिश्र - (XXX)

अध्यक्ष महोदय - यह कार्यवाही से सब निकाल दें.

डॉ.नरोत्तम मिश्र - (XXX)

श्री रामनिवास रावत - (XXX)

अध्यक्ष महोदय - यह कार्यवाही से निकाल दें.

डॉ.नरोत्तम मिश्र - हम राष्ट्रभक्त हैं.

श्री रामनिवास रावत - यह आजाद भारत है. सदन नियम कानूनों से चलेगा. यह कोई तरीका नहीं है.(..व्यवधान..) अध्यक्ष महोदय,मेरी अपील है कि चर्चा स्थगित की जाये और आज प्रशासनिक प्रतिवेदन प्रस्तुत हुए हैं कल चर्चा कराई जाए और स्थाई आदेश दिये जायें कि एक दिन पूर्व प्रशासनिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किये जायें.

डॉ.गोविन्द सिंह - (XXX)

अध्यक्ष महोदय - कृपया बैठ जाएं.(...व्यवधान..) सभी सदस्य कृपया बैठ जाएं. कृपया बैठ जाएं.

डॉ.नरोत्तम मिश्र - (XXX)

गर्भगृह में प्रवेश

( इंडियन नेशनल कांग्रेस के श्री रामनिवास रावत एवं अन्य सदस्य संसदीय कार्य मंत्री के कथन के विरोध में गर्भगृह में आए.)

अध्यक्ष महोदय - यह विषय नहीं है.

(..व्यवधान..)

डॉ.नरोत्तम मिश्र - अध्यक्ष महोदय, (XXX).

(..व्यवधान..)

डॉ.गोविन्द सिंह - (XXX)

अध्यक्ष महोदय - कृपया सभी बैठ जाएं. दोनों तरफ के माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया बैठ जाएं.

डॉ.नरोत्तम मिश्र - माननीय अध्यक्ष महोदय, राहुल गांधी पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज है कि नहीं. देशद्रोही पार्टी के लोग हैं यह.

(..व्यवधान..)

श्री लालसिंह आर्य - माननीय अध्यक्ष महोदय, (XXX)

अध्यक्ष महोदय - सदन की कार्यवाही दस मिनट के लिये स्थगित.

(12 बजकर 17 मिनट पर सदन की कार्यवाही दस मिनट के लिये स्थगित की गई.)

 

12.36 बजे विधान सभा की कार्यवाही पुनः समवेत हुई.

{अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.

अध्यक्ष महोदय--सारी बातें कार्यवाही से निकाल दें. आप लोग कृपया बैठ जाएं. कृपया आप लोग सदन को चलने दें.

(व्यवधान)

श्री रामनिवास रावत--यह भाजपा की संस्कृति है.

डॉ.नरोत्तम मिश्र--हमको संस्कृति बता रहे हैं इतना तो बताएं कि राहुल गांधी पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज है कि नहीं. आपका प्रदेश अध्यक्ष संघ कार्यालय में झण्डा फहराने गया था कि नहीं.

(व्यवधान)

श्री रामनिवास रावत--तुमसे पाठ नहीं सीखना है और तुम होते कौन हो पाठ सिखाने वाले.

डॉ.नरोत्तम मिश्र--राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज है कि नहीं देशद्रोहियों के समर्थक हैं.

(व्यवधान)

डॉ.गोविन्द सिंह-- (XXX).

अध्यक्ष महोदय--सब लोग बैठ जाएं अजय सिंह जी कुछ कह रहे हैं.

श्री अजय सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, मामला बहुत ही उत्तेजित हो रहा है कृपया सब लोग शांत हो जाएं. अध्यक्ष महोदय, माननीय रावत जी ने एक व्यवस्था का प्रश्न उठाया जिन विभागों की किताबें विधायकों को नहीं मिली उस पर इन्होंने अपनी आपत्ति दर्ज करायी अपने व्यवस्था के प्रश्न में यदि यह सही है लोकसभा में पारित हो चुका उनका आदेश है तो यह सुनिश्चित कराया जाए कि विधायकों को यह पुस्तिका पहले मिले. हफ्ते भर न सही 2-3 दिन पहले मिल जाए जिससे हम लोग आपसे चर्चा करने थोड़ा विभाग का सहयोग कर सकें. पिछली बार भी विधान सभा में यही बात उठायी गई थी आपने उस पर स्पष्ट आदेश दिये थे अगले दफे से ऐसा नहीं होगा. माननीय संसदीय मंत्री महोदय यदि आप सुनिश्चित कर दें कि जिन विभागों की अभी चर्चा होनी है उनकी किताबें एक दिन पहले मिल जाएं. वैसे तीन दिन पहले मिलना चाहिये, मैं तो यह कह रहा हूं कि किताबें 2 दिन पहले मिल जाएं. वैसे 7 दिन पहले देने के नियम है. जो विभाग आज चर्चा में है जिनकी किताबें उपलब्ध नहीं हुई हैं उनको चर्चा के लिये आगे बढ़ाया जाए और जिनकी किताबें आ चुकी हैं उनको चर्चा में ले लिया जाए, इतनी सी बात है.

डॉ.नरोत्तम मिश्र--अध्यक्ष महोदय, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है मेरा इसमें यह निवेदन है माननीय अजय सिंह जी से कि यह सच है कि यह चारों प्रतिवेदन जब प्रश्न उठा था यहां पर आ चुके थे, लेकिन इस बात में आंशिक सचाई है कि एक प्रतिवेदन में थोड़ा विलंब हुआ है.

डॉं. नरोत्‍तम मिश्र- एक प्रतिवेदन में थोड़ा विलम्‍ब हुआ, उसका कारण सिर्फ इतना सा है कि जो क्रम विधान सभा निर्धारित करती है, कल तक के बाद क्रम में एक दम चेंज आ गया, जब चेंज आ गया तो स्‍वाभाविक रूप से यहां कार्य मंत्रणा समिति का जो प्रतिवेदन सुनाया गया था, उस क्रम से पहले आ गया, लेकिन इसके बाद भी सम्‍मानित सदस्‍यों की भावनाओं का ध्‍यान रखते हुए हर हाल में यह कोशिश होगी कि हम 24 घण्‍टे पहले प्रतिवेदन पहुचाएं ।

माननीय अध्‍यक्ष जी, इसके साथ मेरा एक निवेदन और है कि जब कोई विषय सारगर्भित चल रहा हो, हम उदाहरण किताबों का दे रहे हैं तो किताबों से सुनें, उस वक्‍त कम से कम राजनीतिक रोटी सेंक कर, यह तीसरी बार इनके चीफ ने (कांग्रेस के सदस्‍यों की तरफ इशारा करते हुए) ऐसा किया है, तीसरी बार आर.एस.एस. का उल्‍लेख किया है, यह ठीक नहीं है । माननीय अध्‍यक्ष जी, जब आपकी व्‍यवस्‍था आए तो यह भी आना चाहिए ।

....(व्‍यवधान)....

अध्‍यक्ष महोदय- उस बारे में करेंगे ।

डॉं. नरोत्‍तम मिश्र- यह भी आना चाहिए कि अकारण कोई तनाव पैदा नहीं करना चाहिए ।

अध्‍यक्ष महोदय- आप बैठ जाएं, व्‍यवस्‍था तो देने दें ।

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र- अगर कोई क्रिया करेंगे, तो प्रतिक्रिया होगी ।

......(व्‍यवधान)...

श्री रामनिवास रावत- यह सदन नियमों कानूनों से चलेगा ।

....(व्‍यवधान)....

श्री अजय सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, संसदीय कार्य मंत्री उत्‍तेजित क्‍यों होते हैं ।

अध्‍यक्ष महोदय- आप सभी बैठ जाएं, श्री गोपाल भार्गव बोलिए ।

पंचायत मंत्री(श्री गोपाल भार्गव)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी ने कहा है, सारे के सारे प्रतिवेदन आज की कार्यसूची में, संबधित जिन दोनों विभागों, मंत्रियों के बारे में प्रतिवेदन थे, वह सभी सदस्‍यों को उपलब्‍ध करा दिए गए हैं । अध्‍यक्ष महोदय, यह बात सही है कि इसमें थोड़ा विलम्‍ब हुआ है और उसी कारण से जैसा माननीय संसदीय कार्यमंत्री जी ने बताया जो क्रम था,वह क्रम थोड़ा परिवर्तित हुआ, इस कारण से जितने समय पहले दिया जाना चाहिए था, उतने पहले नहीं दिया जा सका, लेकिन मैं यह मानकर चलता हूँ कि यदि हमने आज सुबह या कल रात को यदि उसको दिया है तो पर्याप्‍त समय है और माननीय सदस्‍य इतने विद्वान, हैं,ज्ञानी हैं, इतने अनुभवी हैं, वरिष्‍ठ हैं तो मैं मानकर चलता हूँ कि इसमें उनको परेशान होने की आवश्‍यकता नहीं है ।

अध्‍यक्ष महोदय- अब व्‍यवस्‍था देंगे, आपने जो विषय उठाया है, प्‍वाइंट ऑफ आर्डर को स्‍वीकार किया है । प्‍वाइंट ऑफ आर्डर पर व्‍यवस्‍था सुनेंगे कि वह भी नहीं सुनेंगे ।

श्री रामनिवास रावत- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपसे निवदेन करके सिर्फ एक लाईन ।

अध्‍यक्ष महोदय- आप बैठ जाइए व्‍यवस्‍था दे रहे हैं, अब नहीं, अब उसमें बहुत बहस हो चुकी है ।

श्री रामनिवास रावत- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपकी अनुमति से इसमें दिया हुआ है कि संबंधित मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर चर्चा होने से एक सप्‍ताह पूर्व ही उन्‍हें सदस्‍यों को वितरित किया जाएगा ।

अध्‍यक्ष महोदय - उसका ही उत्‍तर दे रहा हूँ, आप बैठ जाइए ।

अध्‍यक्ष महोदय- माननीय सदस्‍य श्री रामनिवास रावत जी ने जो विषय उठाया है, प्‍वाइंट ऑफ आर्डर के माध्‍यम से और माननीय सदस्‍य श्री अजय सिंह जी ने उसके समर्थन में अपनी बात कही है,हमारे सचिवालय से यह बाट दिए गए हैं, किन्‍तु माननीय मंत्रीद्वय ने संसदीय कार्य मंत्री और शासन की ओर से श्री गोपाल भार्गव जी ने भी अपनी बात रखी और यह कहा कि देर हुई है, दोनों ने स्‍वीकार भी किया है, मैं भी इस बात को स्‍वीकार करता हूँ किन्‍तु कॉल शकधर का आपने कोड किया है, मैं भी कोड करता हूँ, आप कृपया इसको देखें, पृष्‍ठ 855 मंत्रालयों के वार्षिक प्रतिवेदनों और कार्य निष्‍पादन परिणामी बजटों का परिचालन,वार्षिक प्रतिवेदन सामान्‍यत: बजट पेश किए जाने के बाद परन्‍तु मंत्रालय विषय से संबंधित मांगों पर सभा में चर्चा होने से ..(पहले आप पूरा सुन लें, इसमें समय सीमा नहीं दी है,) समय से पहले सदस्‍यों को उपलब्‍ध कराए जाते हैं, विभागों से संबद्व स्‍थायी समिति प्रणाली की शुरूआत होने से इन समितियों को भी अनुदान की मांगों पर विचार के संबंध में वार्षिक प्रतिवेदनों और कार्य निष्‍पादन प्रणाली विधेयकों की प्रति उपलब्‍ध कराएं जो संसदीय समितियों के बारे में है । मंत्रियों को यह बात सुनिश्चित करनी चाहिए कि सामान्‍य चर्चा प्रारम्‍भ होने से पहले ही समस्‍त प्रतिवेदन समस्‍त सदस्‍यों को उपलब्‍ध करा दिए गए हों, 2 बार पेज 855 पर पहले ही आया है । समय सीमा नहीं लिखी, जो समय सीमा आपने पढ़ी है, वह प्रशासनिक सुधार आयोग 1969 में बना था, उस प्रशासनिक सुधार आयोग ने यह रिपोर्ट दी थी जिसको आप कॉल शकधर की कामेंट्री कहकर, जिसको आप कोड कर रहे हैं, वह कॉल शकधर की कामेंट्री नहीं है, वह कॉल शकधर की सूचना है कि प्रशासनिक सुधार आयोग ने यह रिपोर्ट दी थी कि 7 दिन पहले प्रस्‍तुत हो जाना चाहिए । यह रिपोर्ट है. यह व्‍यवस्‍था नहीं है. फिर भी आपने जो पाइन्‍ट ऑफ ऑर्डर उठाया है, मैं उससे सहमत हूँ.

मैं माननीय मंत्रीगणों को भी निर्देशित करता हूँ कि इस चर्चा के प्रारम्‍भ होने के कम से कम 2 दिन पूर्व प्रतिवेदन उपलब्‍ध करवायें. किन्‍तु माननीय सदस्‍य श्री रामनिवास रावत ने सचिवालय की तुलना और सचिवालय पर सीधा आक्षेप लगाया है. यह अत्‍यन्‍त खराब बात है. मध्‍यप्रदेश विधानसभा के सचिवालय पर, इस तरह के आक्षेप भारतवर्ष के संसदीय इतिहास में कभी नहीं लगे. मेरा अनुरोध है कि व्‍यंग्‍य या कोई बात करना है तो सत्‍ता पक्ष से करें, विधानसभा सचिवालय से न करें तो उचित होगा. (सत्‍ता पक्ष एवं विपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा मेजों की थपथपाहट)

श्री रामनिवास रावत - अध्‍यक्ष महोदय, मैंने विधानसभा सचिवालय पर आरोप नहीं लगाया है. मैंने नियमों को कोड करते हुए, आपने जो पढ़ा वह सही है. फिर भी, यदि ऐसा लगता है तो मैं इसे वापिस लेता हूँ.

अध्‍यक्ष महोदय - धन्‍यवाद.

श्री रामनिवास रावत - अध्‍यक्ष महोदय, विधानसभा 10.30 बजे प्रारम्‍भ होती है या तो हम सब सदस्‍य विधानसभा छोड़कर बाहर जायें और प्रतिवेदन लेकर पढ़ें.

अध्‍यक्ष महोदय - अब यह विषय समाप्‍त हो गया है. श्री रामनिवास रावत जी अनुरोध है कि वे व्‍यवधान न डालें. (व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे पीड़ा हुई है. आपने यह कहा कि मैंने सचिवालय पर आरोप लगाये हैं तो मैंने सचिवालय पर आरोप नहीं लगाये हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - आपकी बात आ गई. (व्‍यवधान)

श्री राम निवास रावत - अध्‍यक्ष महोदय, लेकिन मैंने सरकार पर जरूर लगाया है.

अध्‍यक्ष महोदय - आपकी बात आ गई है कि आपने नहीं लगाया है. श्री जितु पटवारी अपना विषय प्रारंभ करें. (व्‍यवधान)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - सरकार पर पूरे असत्‍य और मिथ्‍या आरोप लगाना और छेड़ने की इनकी परम्‍परा गलत है.

अध्‍यक्ष महोदय - नहीं, कंडीशनल उन्‍होंने उसको वापिस ले लिया है. विषय यहीं समाप्‍त हो जाता है. माननीय मंत्री जी आप बैठ जायें. (व्‍यवधान)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र (श्री रामनिवास रावत की ओर इशारा करते हुए) - आप उसमें राष्‍ट्रभक्‍त का उल्‍लेख करोगे. क्‍या आपको यहां संगठन का उल्‍लेख करना जरूरी है ? आप राष्‍ट्रभक्‍त संगठन का उल्‍लेख करोगे तो क्‍या हम देशद्रोही का उल्‍लेख नहीं करेंगे. (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय - यह विषय समाप्‍त हो गया है. मैं आपसे सहमत हूँ. माननीय मुख्‍य सचेतक और माननीय संसदीय कार्यमंत्री कृपया बैठ जाइये. आप लोग बैठ जाएं.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - आपका यह तरीका रहेगा तो हमारा भी यही तरीका रहेगा.

अध्‍यक्ष महोदय - रावत जी तथा मंत्री जी बैठ जाइये. (व्‍यवधान) आप लोगों से अनुरोध है कि सदन चलने दें. विषय समाप्‍त हो गया. बैठ जाएं.

श्री जितु पटवारी - आदरणीय अध्‍यक्ष जी, आपने मुझे अनुदान की मांगों पर बोलने का अवसर दिया, इसके लिये मैं धन्‍यवाद देता हूँ और सभी सदन में पारिवारिक एवं हमारे परिवार के सदस्‍यों से अनुरोध करता हूँ कि जब बजट की बात हो, मुख्‍यमंत्री जी का, राज्‍यपाल के अभिभाषण के बाद उन्‍होंने मध्‍यप्रदेश का बहुत अच्‍छे से वर्णन किया है कि इस बात का कि किस तरह से मध्‍यप्रदेश तेजी से विकास कर रहा है और आप लोगों की भी, अपनी बातों में कई बार मध्‍यप्रदेश के उच्‍च मापदण्‍ड हैं, उसका हवाला दिया है.

मैं समझता हूँ कि सदन में उच्‍च मापदण्‍डों का आप ध्‍यान रखेंगे और जब मैं आपसे बात करूँ तो आप कतई यह न समझें कि मैं कांग्रेस का एम.एल.ए. हूँ. यह समझें कि मैं इस परिवार और मध्‍यप्रदेश के साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहते हैं. और मेरा अनुरोध है कि आप भी व्यवस्था बनाने में मदद करेंगे. मुख्यमंत्री जी ने अपने राज्यपाल जी के अभिभाषण में और चूंकि मैं जिन मांगों पर बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं, वे विभाग भी मुख्यमंत्री जी के पास हैं. उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश किन किन चीजों में नम्बर एक पर है और लगातार लम्बे एक धारा प्रवाह में उन्होंने कई चीजों को गिनाया. कृषि के क्षेत्र में, उद्योग के क्षेत्र में, रोजगार के क्षेत्र में, शिक्षा के क्षेत्र में और चिकित्सा के क्षेत्र में. चिकित्सा की जहां बात आई और नरोत्तम मिश्र जी की तारीफ न हो, मैं नहीं समझता हूं कि चिकित्सा की बात करना अधूरी रह जायेगी. पहले मुख्यमंत्री जी ने जो बातें कहीं कि किस किस चीज में मध्यप्रदेश अग्रणी है, मुझे खुशी हुई और मुझे लगा भी कि क्या हम पढ़ लिखकर नहीं आते हैं. उन्होंने रामनिवास रावत जी को दो बार टोका कि रामनिवास जी, पढ़ लिख कर आया करो. मुख्यमंत्री जी को इतने आईएएस, आईपीएस सब ब्रीफिंग करते हैं, उसके बाद भी (xx) असत्य बोले और आंकड़ों से..(व्यवधान)..

 

अध्यक्ष महोदय -- इस शब्द को निकाल दें.

 

श्री जितू पटवारी -- वे असत्य बोले. मध्यप्रदेश पूरे देश में राजकोषीय घाटे में, यह याद होना चाहिये हम स