मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा दशम् सत्र

 

 

फरवरी-अप्रैल, 2016 सत्र

 

बुधवार, दिनांक 2 मार्च, 2016

 

(12 फाल्गुन, शक संवत्‌ 1937 )

 

 

[खण्ड- 10 ] [अंक- 7]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

बुधवार, दिनांक 2 मार्च, 2016

 

(12 फाल्गुन, शक संवत्‌ 1937 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 10.32 बजे समवेत हुई.

 

{ अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर.

 

श्री जितू पटवारी -- अध्यक्ष महोदय मैं एक मिनट का समय लूंगा. मैं आपसे माफी चाहता हूं.

अध्यक्ष महोदय -- प्रश्नकाल में कुछ नहीं सुनेंगे.

श्री जितू पटवारी -- अध्यक्ष महोदय बहुत ही संवेदनशील मामला है. भावनात्मक और सदन से जुड़ा हुआ मामला है. जो यहां पर विधान सभा के सामने गेट की घटना है. कल एक बच्चे की वहां पर मृत्यु हो गई है.

अध्यक्ष महोदय -- आगे से व्यवस्था करेंगे कि वह इलाका एक्सीडेंट फ्लोर न रहे. आप प्रश्नकाल हो जाने दें. 11.30 के बाद देखेंगे.

 

 

अनूपपुर जिले में निर्माणधीन कार्य

1. ( *क्र. 2066 ) श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अनूपपुर जिले को वर्ष 2012 के पश्‍चात प्रश्‍न दिनांक तक 12वें, 13वें वित्‍त आयोग मद में कितनी-कितनी राशि आवंटित की गई? (ख) उक्‍त राशि में से किस-किस कार्य के लिये कितनी-कितनी राशि, किस दिनांक को आवंटित हुई? ग्राम पंचायत एवं ब्‍लाकवार विवरण देवें। (ग) प्रश्‍नांश (ख) अनुसार कार्यों के लिये वित्‍तीय एवं प्रशासकीय स्‍वीकृतियां कब-कब जारी हुईं, स्‍वीकृत कार्य कितनी-कितनी राशि से किस-किस एजेंसी द्वारा पूर्ण कराया गया, इससे कौन से ग्राम को लाभ हुआ? (घ) स्‍वीकृत कार्यों में कौन-कौन से कार्य अभी निर्माणाधीन हैं तथा कौन-कौन से अभी प्रारंभ ही नहीं हुए? (ड.) पूर्ण हुए कार्यों पर कितनी-कितनी राशि व्‍यय हुई तथा किन-किन निर्माण कार्यों की शिकायत की गई? जाँच की अद्यतन स्थिति क्‍या है?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) अनूपपुर जिले को वर्ष 2012 के पश्चात प्रश्न दिनांक तक 12वें, 13वें वित्त आयोग मद में निम्नानुसार राशि आवंटित की गई है :- जिला पंचायत अनूपपुर में 805.98 लाख, जनपद पंचायत जैतहरी में 165.00 लाख, जनपद पंचायत कोतमा में 145.00 लाख, जनपद पंचायत अनूपपुर में 145.00 लाख एवं जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ में 165.00 लाख कुल 1425.98 लाख आवंटित की गई। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार(ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार(घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र एवं अनुसार(ड.) जिला पंचायत अनूपपुर एवं जनपद पंचायतों के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों में से पूर्ण कार्यों की संख्या 155 जिसमें व्यय राशि रूपये 706.51 लाख है, विवरण निम्नानुसार है :- जिला पंचायत अनूपपुर में 54 कार्य व्यय 266.58 लाख, जनपद पंचायत अनूपपुर में 24 कार्य व्यय राशि 118.53 लाख, जनपद पंचायत जैतहरी में 19 कार्य व्यय राशि 95.00 लाख, जनपद पंचायत कोतमा में 29 कार्य व्यय राशि 130.75 लाख एवं जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ में 29 कार्य व्यय राशि 95.65 लाख कुल स्वीकृत कार्य 155 कुल व्यय राशि 706.51 लाख। जिनमें किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त नहीं हैं। अतः जाँच करने का प्रश्न ही उपस्थित नहीं होता है।

 

श्री फुन्देलाल सिंह मार्को -- अध्यक्ष महोदय मेरा प्रश्न इस प्रकार से था कि अनूपपुर जिले को वर्ष 2012 के पश्चात् 12वां एवं 13वां वित्त आयोग के मद से कितनी कितनी राशि मिली और प्राप्त राशि में से कौन कौन से कार्य स्वीकृत किये गये, और उन कार्यों में से स्वीकृत कार्य कितने पूर्ण किये गये हैं. अध्यक्ष महोदय जो जानकारी आयी है उससे मैं संतुष्ट नहीं हूं. अनूपपुर जिले को जो राशि मिली है वह लगभग 1425.98 लाख रूपये है उसमें से 706.51 लाख रूपये का काम पूरा हुआ है और शेष राशि का काम जनपद पंचायतवार अपूर्ण है. माननीय अध्यक्ष महोदय 12वां एवं 13वां वित्त आयोग की जो राशि है वह सीधे पंचायत के खाते में भेजी जाती है और ग्राम पंचायत प्राक्कलन तैयार कर उपयंत्री के माध्यम से कार्य प्रारम्भ कराती हैं.

माननीय अध्यक्ष महोदय 2012 - 13 से प्रश्न दिनांक तक जो कार्य स्वीकृत हुए हैं और ऐसे कार्य जो कि मजरे टोलों को जोड़ने के थे. मैं यह चाहता हूं कि सीसी मार्ग निर्माण, पंचायत भवन निर्माण और मजरों टोलों में जो काम कराये गये हैं. वे सब अपूर्ण कार्य हैं. मैंने प्रश्‍न सं. 940 दिनांक 14.12.2015 के माध्‍यम से निर्माण कार्यों की जानकारी पूछी थी कि पुष्‍पराजगढ़ विधान सभा में और साथ ही उपयंत्री श्री सुमेर सिंह के क्षेत्र में उनके तकनीकी मार्गदर्शन में कौन-कौन से कार्य कराए गए, उनमें बहुत सारे कार्यों को पूर्ण बताया गया है. वही प्रश्‍न बाद में किया जाता है तो उन कार्यों को अपूर्ण बताया जाता है. वह वर्ष 2001 से उस पुष्‍पराजगढ़ विधान सभा में उपस्‍थित हुआ.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप विषय पर आएं. आपको अपूर्ण कार्यों को पूर्ण करवाना है या पूर्ण कार्यों की जांच करवाना है ?

श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं विषय पर ही आ रहा हूँ. 15 साल से एक उपयंत्री सुमेर सिंह उस क्षेत्र में कार्यरत है, उसके तकनीकी मार्गदर्शन में ये अपूर्ण कार्य वहां हो रहे हैं और उसके बाद भी शासन द्वारा उसको नहीं हटाया जा रहा है.

अध्‍यक्ष महोदय -- यह कोई प्रश्‍न नहीं है.

श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से बताना चाहता हूँ कि कुछ ऐसे पीसीसी मार्ग हैं जिनका निर्माण हुआ ही नहीं है और फर्जी तरीके से उनकी राशि आहरित कर ली गई.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप सीधे प्रश्‍न करें.

श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहूँगा कि क्‍या एक कमेटी बनाकर पुष्‍पराजगढ़ विधान सभा में 12वें और 13वें वित्‍त आयोग के माध्‍यम से जो कार्य कराए गए हैं उनकी जांच कराएंगे या नहीं ?

श्री गोपाल भार्गव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पूरे जिले से संबंधित प्रश्‍न है. जिला पंचायत अनूपपुर के अंतर्गत 4 जनपदें हैं, इनमें 14 करोड़ 25 लाख रुपये की राशि का आवंटन किया गया था. प्रत्‍येक कार्य का ब्‍यौरा, उसकी प्रशासकीय स्‍वीकृति, तकनीकी स्‍वीकृति परिशिष्‍ट में है जो कि पुस्‍तकालय में रखा हुआ है यह माननीय सदस्‍य को उपलब्‍ध करा दिया गया है. इसमें से वे बता दें कि कौन से ऐसे कार्य हैं जिनमें अनियमितताएं हुई हैं हम उनकी जांच करा लेंगे और कर्मचारी दोषी होगा तो कार्यवाही करेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय -- जिले भर की तो जांच नहीं कराई जा सकती, कोई स्‍पेसिफिक कार्य हों तो बता दें जिनमें अनियमितता हुई है.

श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को -- अध्‍यक्ष महोदय, जिले भर की बात मैं नहीं कर रहा हूँ. पुष्‍पराजगढ़ में जो पीसीसी कार्य कराए गए हैं मैं पंचायत मंत्री जी से चाहता हूँ कि एक कमेटी बनाकर इन कार्यों की जांच करा दी जाए, उसमें मुझे भी शामिल किया जाए क्‍योंकि मैंने प्रश्‍न किया है ताकि सत्‍यता को मैं प्रमाणित भी कर सकूँ. मेरा उद्देश्‍य मात्र यह है कि जो निर्माण कार्य स्‍वीकृत हो रहे हैं, शासन से पैसा मिल रहा है तो उसका लाभ लोगों को मिले और ऐसे लोग जो कार्य को प्रभावित कर रहे हैं, उन्‍हें हटाया जाए.

अध्‍यक्ष महोदय -- कौन से कार्य की जांच कराना है.

श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को -- अध्‍यक्ष महोदय, जांच कराना है और उपयंत्री के संबंध में माननीय मंत्री जी से मेरा निवेदन है कि उसे वहां 15 साल हो गए हैं तो यदि आप उसे भोपाल ले आएं.

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी, कुछ कहेंगे.

श्री गोपाल भार्गव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, शहडोल संभाग के सुपरिन्‍टेन्‍डेन्‍ट इंजीनियर से माननीय विधायक जी को साथ ले जाकर जांच करवा लेंगे.

श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उपयंत्री को वहां पर 15 साल हो गए हैं तो कृपा करके उसको अन्‍यत्र कर दें, यदि ज्‍यादा दूर आप नहीं भेजना चाहते तो डिविजन में कर दें.

श्री गोपाल भार्गव -- जब हटवाना है तो सीधा क्‍यों नहीं कहते कि हटवाना है ?

श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को -- आप बहुत सौहार्द्रपूर्ण हैं मैं आपको जानता हूँ कि आपका आशीर्वाद मिलेगा. कृपया उसको वहां से हटा दें.

श्री गोपाल भार्गव -- विचार कर लेंगे.

श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को -- अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद.

प्रश्‍न क्र. 2 (अनुपस्‍थित)

 

नर्मदा परिक्रमा परिपथ का निर्माण

3. ( *क्र. 401 ) श्री संजय शर्मा : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अप्रैल, 2014 से प्रश्‍न दिनांक की स्थिति में नरसिंहपुर जिले में महात्‍मा गांधी नरेगा की उपयोजना नर्मदा परिक्रमा पथ निर्माण के लिए कितने कार्य कितनी राशि के स्‍वीकृत किये गये? (ख) कितने कार्य किन-किन ग्राम पंचायतों में कराया जाना प्रस्‍तावित है? (ग) उक्‍त कार्य कब तक पूर्ण करवाये जायेंगे, निश्चित समयावधि बतायें? (घ) विधान सभा क्षेत्र तेंदूखेड़ा अंतर्गत नर्मदा परिक्रमा पथ के लिये चिन्‍हांकित मार्ग का पूर्ण विवरण दें?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) प्रश्‍नाधीन अवधि में नरसिंहपुर जिले में नर्मदा परिक्रमा परिपथ निर्माण के लिये 5 कार्यों पर राशि रू. 21.009 लाख व्‍यय की गयी है। कार्यवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 1 अनुसार है। (ख) नरसिंहपुर जिले में राशि रू. 105.00 लाख के कार्य प्रस्‍तावित हैं। कार्यवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 2 अनुसार है। (ग) महात्‍मा गांधी नरेगा माँग आधारित योजना होने से अपूर्ण कार्यों की पूर्णता जॉबकार्डधारियों द्वारा रोजगार की माँग पर निर्भर होने से कार्य पूर्णता की निश्‍चित समय-सीमा बतलाया जाना संभव नहीं है। (घ) महात्‍मा गांधी नरेगा के प्रावधानों के अनुरूप जॉबकार्डधारी परिवारों द्वारा काम की मांग के आधार पर लेबर बजट एवं लेबर बजट की पूर्ति हेतु कार्यों को चिन्‍हित करने के लिये ग्राम पंचायतें स्‍वतंत्र हैं, ग्राम पंचायतों को परिक्रमा पथ को ही चिन्‍हित करने के लिये निर्देशित नहीं किया जा सकता। केवल सुझाव के रूप में विभाग द्वारा पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 3 अनुसार निर्देश जारी किये गये हैं।

 

श्री संजय शर्मा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में माननीय मंत्री जी से जो जानकारी आई है वह ठीक नहीं है. सूरजकुंड की सीसी निर्माण सड़क नर्मदा पथ की जो बनाई गई है उसका निर्माण हो चुका है लेकिन वर्तमान में देखा जाए तो सड़क वहां पर बनी नहीं है और न ही वहां की किसी एजेंसी को, पंचायत को कोई जानकारी है. दूसरी बात उसमें बताई गई है कि काम स्‍वीकृत हैं लेकिन आज तक उन कार्यों का काम प्रारंभ नहीं हो सका है, प्रशासनिक स्‍वीकृति कब हुई, इसकी कोई जानकारी नहीं है और कब तक यह कार्य प्रारंभ हो जाएगा इसकी जानकारी उपलब्‍ध कराई जाए. कंडिका 6 में भौतिक सत्यापन ग्राम स्तरीय सतर्कता मूल्यांकन समिति से कराना है क्योंकि समिति को आज तक जानकारी नहीं है, न ही उसका मूल्यांकन समिति द्वारा कभी कराया गया और भुगतान हो चुका है. नर्मदा नदी हमारे विधानसभा क्षेत्र के बीच से निकली है और बड़ी तपो भूमि ब्रह्म जी के बरमान घाट पर रही है और हर अमावस्या और पूर्णिमा पर वहां पर हजारों लोग परिक्रमा करने आते हैं. दोनों तरफ पंचायतों में नर्मदा पथ है लेकिन कहीं नर्मदा पथ का निर्माण कार्य प्रारम्भ नहीं हुआ है. बहुत महत्वपूर्ण योजना सरकार की है तो मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करूंगा कि इसमें काम क्यों रुका है और काम कब तक प्रारम्भ हो जाएगा. जो राशि स्वीकृत है उसका कब कार्य प्रारम्भ होगा और इसकी जानकारी कि प्रशासकीय स्वीकृति कब हुई है, वह दिलाने की कृपा करें और जिन अधिकारियों ने इसमें अनियमितता की है उनके खिलाफ कार्यवाही करने की व्यवस्था की जाए?

श्री गोपाल भार्गव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय सदस्य ने पूछा है, यह बात सही है कि नर्मदा जी हमारे राज्य की जीवन रेखा है, जीवनदायिनी है और नर्मदा जी की परिक्रमा प्रतिवर्ष लाखों लोग करते हैं और हमारे लिए वह एक आस्था का विषय भी है और इस कारण से विभाग ने तय किया था कि नर्मदा जी के दोनों तरफ नर्मदा पथ का निर्माण किया जाए. खासतौर से महात्मा गांधी रोजगार गांरटी योजना के अंतर्गत हमने इसकी स्वीकृति नर्मदा पथ के चारों ओर घेरे में जो ग्राम पंचायतें हैं, उन ग्राम पंचायतों के लिए हमने उसकी प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति दी थी. कुछ पंचायतों ने काम कराये हैं, जैसा कि उत्तर में स्पष्ट है लेकिन कुछ पंचायतों ने काम नहीं कराये हैं लेकिन जिन्होंने काम नहीं कराये हैं वे काम करायें इसके लिए भी निर्देशित करेंगे और जहां काम में यदि कोई गड़बड़ी हुई है, जैसा माननीय सदस्य ने कहा है, हम यहां से किसी अधिकारी को भेज के उसकी  जांच करा लेंगे और यदि कोई अनियमितता होगी तो कार्यवाही भी करेंगे.

श्री संजय शर्मा-- माननीय अध्यक्ष जी, इसके लिए कोई विशेष एजेन्सी बनायी जाए. नर्मदा पथ बहुत आवश्यक है लेकिन कहीं निर्माण कार्य चालू नहीं हुआ है. जो जानकारी दी गयी है, वह गलत है कि 11 लाख के काम से सी.सी. सड़क बनी है और वर्तमान में धरातल पर वहां कोई योजना वहां पर चालू नहीं हुई है. इसके लिए आरईएस के पास बहुत काम होते हैं जहां नर्मदा जी निकली है उस जिले में, उस जनपद में आरईएस में अलग से एक इंजीनियर इसके लिए नियुक्त किया जाए जो इस कार्य को प्राथमिकता से कराये?

श्री गोपाल भार्गव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, बहुत अच्छा सुझाव है, इस पर विचार करेंगे.

लोक सेवा प्रबंधन में प्राप्‍त आवेदनों का निराकरण

4. ( *क्र. 3917 ) श्रीमती ललिता यादव : क्या परिवहन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) लोक सेवा प्रबंधन में 01 जनवरी 2014 से प्रश्‍न दिनांक तक किस-किस विभाग के छतरपुर विधानसभा क्षेत्र के लिये आवेदन आये? विभागवार बतायें। (ख) प्रश्‍नांश (क) के प्रकाश में प्राप्‍त आवेदनों में से कितने आवेदनों पर कार्यवाही की गई और कितने आवेदन क्‍यों लंबित हैं? (ग) लोक सेवा प्रबंधन में किस-किस कार्य के लिये किस-किस विभाग के लिये कितना-कितना समय निर्धारित है और कार्यों को कराने व उसकी समीक्षा के लिये कौन जवाबदार है?

परिवहन मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : (क) छतरपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत तहसील छतरपुर के लोक सेवा केन्द्र छतरपुर में दिनांक 01.01.2014 से 10.02.2016 तक 13 विभागों के 1,52,302 आवेदन प्राप्त हुये हैं, जिसकी सूची संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार (ख) प्रश्नांश (क) के प्रकाश में 1,52,003 आवेदनों पर कार्यवाही की गई। लंबित आवेदन कुल 299 हैं, जो निर्धारित समय-सीमा में है। (ग) लोक सेवा प्रबंधन विभाग में प्रत्येक विभाग की अधिसूचित सेवाओं के लिए अलग-अलग समय निर्धारित है जिसकी सूची संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार। कार्य को कराने के लिये प्रत्‍येक विभाग के पदाभिहित अधिकारी व उसकी स‍मीक्षा के लिये संबंधित विभाग के प्रथम अपीलीय अधिकारी जवाबदार हैं।

परिशिष्ट - ''एक''

 

श्रीमती ललिता यादव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न के पीछे यही उद्देश्य है कि सरकार की मंशा है कि आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान समय-सीमा में हो और उन्हें काम के लिए परेशान न होना पड़े. एक विधानसभा क्षेत्र में ही अल्प अवधि में इतने अधिक आवेदन आये.निश्चित ही लोगों का मानना है कि लोक सेवा प्रबंधन के माध्यम से उनके कार्य होंगे लेकिन मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहती हूँ कि विभाग के द्वारा कोई न कोई कारण बताकर आवेदन पर पूर्ण कार्यवाही कर दी जाती है. मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहती हूँ कि लोक सेवा प्रबंधन में आये आवेदन पर की गयी कार्यवाही की सतत् मॉनीटरिंग की आवश्यकता है क्योंकि इसकी जवाबदारी विभाग के अधिकारियों के पास होती है और अधिकारी कर्मचारियों पर कार्यवाही करना नहीं चाहते हैं. मैं माननीय मंत्री जी से इतना निवेदन करना चाहती हूँ कि क्या समय-समय पर इसकी मॉनीटरिंग करायेंगे?

संसदीय कार्यमंत्री(डॉ.नरोत्तम मिश्रा)-- अध्यक्ष जी,समय-समय पर मॉनिटरिंग करा देंगे.

श्रीमती ललिता यादव-- धन्यवाद.

श्री रामनिवास रावत-- इसका मतलब मॉनीटरिंग होती नहीं है(हंसी)

 

मुख्‍यमंत्री कन्‍यादान योजना में लाभांवित हितग्राही

5. ( *क्र. 1609 ) कुँवर विक्रम सिंह : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मुख्‍यमंत्री कन्‍यादान योजना अंतर्गत अप्रैल 2012 से अप्रैल 2015 तक छतरपुर जिले के जनपद राजनगर, लवकुशनगर, नौगांव, छतरपुर विजावर में कितने हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया? (ख) प्रश्‍नांश (क) में उपलब्‍ध कराई गई जानकारी से कितनी-कितनी राशि व्‍यय की गई व वर वधु को कौन-कौन से उपहार कितनी-कितनी राशि के दिये गये? (ग) वर-वधु को उपहार किस एजेन्‍सी से खरीदे गये? एजेन्‍सी का नाम व पता व भुगतान की गई राशि की जानकारी उपलब्‍ध करावें?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 अनुसार। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-2 अनुसार(ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-3 अनुसार

कुँवर विक्रम सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न के उत्तर में जो प्रश्नांश-ख के उत्तर के प्रपत्र-दो पर दी गयी जानकारी के अनुसार क्रय की गयी सामग्री घटिया किस्म की थी और इसमें कई लोगों ने शिकायतें कीं परन्तु जिले में शिकायतों पर कोई भी कार्यवाही आज तक नहीं हुईं. पहला प्रश्न तो यह है, माननीय मंत्री जी इसका उत्तर दें. दो प्रश्न और पूछूंगा, सीधे टू दि प्वाइंट पूछूंगा.

श्री गोपाल भार्गव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे पास में या मुख्यालया में ऐसी कोई शिकायत नहीं आयी है लेकिन जैसा माननीय सदस्य ने कहा है, यदि क्रय में कोई गड़बड़ी हुई होगी तो हम उसकी जांच करा लेंगे.

कुंवर विक्रम सिंह-- माननीय अध्यक्ष प्रश्नांश (ग) के उत्तर में प्रपत्र तीन पर जानकारी में क्या सभी संस्थाओं जिनके उपहार लिये गये उनके टैन नंबर वैरीफाइड किये गये हैं क्या. क्योंकि जो प्रपत्र मेरे पास में दिया गया है उसमें कईयों में टैन नंबर नहीं है. माननीय मंत्री जी, यह स्पष्ट करता है कि बड़े पैमाने पर इसमें घोटाला हुआ है और मैं चाहता हूं कि इसकी एक जांच कमेटी गठित की जाये जिसमें जिला पंचायत के सदस्य,जिले के विधायकों को रखकर कमेटी गठित की जाये और जांच की जाये.

श्री गोपाल भार्गव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जिला पंचायत को सीईओ और अध्यक्ष दोनों से जांच करा लेंगे.

कुंवर विक्रम सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं संरक्षण चाहूंगा यह पूरे जिले का मामला है और खासतौर से मुख्यमंत्री कन्यादान योजना का मामला है . मैं चाहूंगा कि इसमें विधायकों को भी साथ में सम्मिलित किया जाये और कमेटी गठित करके व्यवस्था दिलवायें.

श्री गोपाल भार्गव-- माननीय विधायक भी शामिल हो जाएंगे उसमें तीन लोग हो जाएंगे क्या दिक्कत है.

प्रश्न संख्या 6 --- (अनुपस्थित)

श्री सूबेदार सिंह रजौधा--- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा दूसरे नंबर का प्रश्न था मैं थोड़ा सा पूछना चाहता हूं मुझे आप अनुमति दे दें.

अध्यक्ष महोदय-- अब यह चक्र पूरा हो जाए इसके बाद पूछ लीजिये. इस तरह की परंपरा नहीं है ,पीछे जाने की परंपरा नहीं है. अब तो 25 प्रश्न होने के बाद फिर रिपीट करेंगे.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा-- अध्यक्ष महोदय, पूरा तो हो नहीं सकता है ज्यादा समय नहीं लूंगा.

अध्यक्ष महोदय-- अभी आप बैठे.

 

 

 

 

तकनीकी रूप से अनुपयोगी शौचालयों की मरम्‍मत

7. ( *क्र. 3585 ) श्री शैलेन्‍द्र पटेल : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या राज्‍य सरकार गरीब परिवारों के टूटे-फूटे, अधूरे और तकनीकी रूप से अनुपयोगी शौचालयों की मरम्‍मत करने और उन्‍हें उपयोगी बनाने के लिए स्‍वच्‍छ भारत मिशन की राशि का उपयोग अपने अधिकार क्षेत्र का करेगी? (ख) अगर नहीं तो प्रश्‍नांश (क) में वर्णित परिवारों के शौचालय बनाने की क्‍या योजना है? (ग) सीहोर जिले में ऐसे कितने शौचालय हैं? ब्‍लॉकवार जानकारी देवें।

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जी नहीं। (ख) स्‍वच्‍छ भारत मिशन (ग्रा.) अंतर्गत भारत सरकार के पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्रालय द्वारा अनुपयोगी शौचालयों को उपयोगी बनाने हेतु स्‍वच्‍छ भारत मिशन (ग्रा.) अंतर्गत स्‍वच्‍छ भारत कोष का प्रावधान किया गया है, जिसके अंतर्गत जिलों के द्वारा हितग्राहीवार प्रस्‍ताव तैयार कर भारत सरकार को भेजने का प्रावधान है। (ग) सीहोर जिले में प्रश्‍नांश (क) अनुसार कुल 9490 शौचालय हैं। सीहोर जिले के विकासखण्‍ड सीहोर में 1380, आष्‍टा में 1487, नसरुल्‍लागंज में 1769, इछावर में 4854 एवं विकासखण्‍ड बुदनी में प्रश्‍नांश (क) अनुसार निरंक शौचालय हैं।

श्री शैलेन्द्र पटेल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न प्रदेश और जिले के अंदर जो टूटे-फूटे और मिसिंग शौचालय हैं, उनके संदर्भ में था . मैं मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने बड़ी हिम्मत से इस बात को स्वीकारा कि हमारे सीहोर जिले में लगभग 10 हजार शौचालय टूटे-फूटे व अनुपयोगी हैं. इस अनुरूप मेरी जानकारी अनुसार पूरे प्रदेश में लगभग 7 लाख शौचालय मिसिंग हैं और लाखों शौचालय टूटे-फूटे हैं. केंद्र सरकार ने एक कोष की स्थापना की है कि जो ऐसे शौचालय हैं, उनको बनाने के लिए यदि राज्य सरकार प्रस्ताव बनाकर भेजती है तो यह टूटे-फूटे शौचालय बन सकते हैं. मेरा प्रश्न यह है कि जो टूटे-फूटे या मिसिंग शौचालय हैं, उसमें लाखों-करोड़ों का भ्रष्टाचार हुआ है तब ही तो वह शौचालय बने नहीं हैं सिर्फ कागजों में है. उसके लिए सरकार क्या कर रही है क्योंकि जीरो परसेंट टालरेंस की बात की जाती है और भ्रष्टाचार और सुशासन की जो बात होती है.

अध्यक्ष महोदय--- आप कृपया प्रश्न करें.

श्री शैलेन्द्र पटेल-- अध्यक्ष महोदय, यह जो टूटे-फूटे या अनुपयोगी शौचालय हैं, जो बने नहीं हैं, उसमें जो भ्रष्टाचार हुआ है क्योंकि स्वीकार है कि 10 हजार टूटे फूटे और अनुपयोगी हैं, मिसिंग बहुत सारे हैं. इसके लिए सरकार क्या कर रही है .

श्री गोपाल भार्गव --- माननीय अध्यक्ष महोदय, टूटे-फूटे शौचालयों की मरम्मत के लिए भारत सरकार के स्वच्छता मिशन में प्रावधान करने की बात कही गई है. जो भी सीहोर जिले के ऐसे शौचालय हैं, इनके बारे में भारत सरकार को पत्र लिख दिया गया है और उनसे राशि अपेक्षित है.

श्री शैलेन्द्र पटेल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जो मेरी जानकारी है उसमें मध्यप्रदेश के मात्र दो जिलों के प्रस्ताव गये हैं, जो प्रस्ताव गये हैं, उनका क्या हुआ और बाकी जिलों के प्रस्ताव क्यों नहीं गये क्योंकि समस्या पूरे प्रदेश की है .

अध्यक्ष महोदय--- आपने टूटे फूटे का पूछा है सीहोर जिले का पूछा है उस तक आप सीमित रहिये.

श्री शैलेन्द्र पटेल--- अध्यक्ष महोदय, समस्या पूरे प्रदेश की है लेकिन एक जिले से पूरे प्रदेश की स्थिति समझ आती है जो कि मुख्यमंत्री जी का जिला है जब वहाँ यह स्थिति है तो पूरे प्रदेश की क्या स्थिति होगी.

श्री सचिन यादव-- अध्यक्ष महोदय, यह पूरे प्रदेश का मामला है.

अध्यक्ष महोदय--- आप उनको पूछने दें.

श्री शैलेन्द्र पटेल--- अध्यक्ष महोदय, मात्र दो ही जिले के प्रस्ताव गये हैं बाकी जिलों के प्रस्ताव क्यों नहीं गये जबकि केन्द्र इसके लिए राशि आवंटित कर रहा है और इसके लिए प्रावधान है कि अगर राज्य सरकार अपनी तरफ से इसको भेजता है तो केंद्र सरकार उसके लिए राशि आवंटित करेगी और शौचालय बन जाएंगे . जब देश के प्रधानमंत्री स्वच्छता के प्रति इतने गंभीर हैं तो क्या राज्य सरकार गंभीर नहीं हैं.

अध्यक्ष महोदय--- आप भाषण नहीं करें प्रश्न करें.

श्री शैलेन्द्र पटेल-- अध्यक्ष महोदय, अभी तक प्रस्ताव क्यों नहीं भेजे गये हैं एक और बात है कि हमारे पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में तेजी से काम चल रहा है वह राशि पंचायतों में सीधी आ गई है. अध्यक्ष महोदय, पहले तीन योजनाओं में यह शौचालय बने हैं पहले संपूर्ण स्वच्छता अभियान योजना थी उस दौरान मात्र 500 से 2300 रुपये तक मिले थे और उसके बाद निर्मल भारत योजना के अंतर्गत 4600 रुपये मिले. तो जो अनुसूचित जाति, जनजाति के लोग थे, जो बीपीएल कार्डधारी थे उनको यह राशि कम मिली और अब यह बीपीएल और एपीएल सभी के लिए है.

अध्यक्ष महोदय--- आपका प्रश्न क्या है.

श्री शैलेन्द्र पटेल--- अध्यक्ष महोदय, खास तौर पर जो हमारे अनुसूचित जाति, जनजाति के निर्धन लोग हैं उनमें अधिकतर के शौचालय टूटे-फूटे हैं और वह इस स्थिति में है कि उनको नहीं बना रहे हैं तो उनके शौचालय बनाने के लिए राशि कब तक आ जाएगी और जो यह भ्रष्टाचार मिसिंग शौचालय में हुआ है, उसमें सरकार क्या रवैया अपनाने वाली है?

श्री गोपाल भार्गव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, शौचालय एक बहुत महत्वपूर्ण चीज है. (हँसी) अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश में 51 जिले हैं, 313 जनपदें हैं, 52000 गाँव हैं एवं 23000 ग्राम पंचायतें हैं. इनमें शौचालय बनाने का काम निरंतर पिछले वर्षों से चल रहा है. माननीय सदस्य ने जैसा बताया कि तीनों कैटेगिरी में शौचालय बने. पहले 2200 रुपये मिलते थे. इसके बाद में राशि बढ़ी, अब 12500 रुपये है. अलग-अलग कैटेगिरी के शौचालय, भारत सरकार हमारे लिए जैसे-जैसे राशि देती है, वह जो व्यवस्था देती है, जितनी हमारे लिए राशि मंजूर करती है, उसी राशि से यह सब काम होते हैं और अध्यक्ष महोदय, 51जिलों में सर्वे का काम चल रहा है. अभी 2 जिलों में पूरा हो चुका है और धीरे-धीरे जैसे ही हमारे पास रिपोर्ट आती जाएगी, हम भारत सरकार को डिमांड भेज देंगे और जो टूटे-फूटे हैं, हम उनकी मरम्मत करवा देंगे.

अध्यक्ष महोदय-- प्रश्न क्रमांक 8 डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय...

श्री शैलेन्द्र पटेल-- अध्यक्ष महोदय, जो भ्रष्टाचार के कारण नहीं बने हैं उनके लिए सरकार क्या करेगी?

अध्यक्ष महोदय-- नहीं. प्रश्न क्रमांक 8 डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय....(व्यवधान)..

श्री शैलेन्द्र पटेल-- जो मिसिंग हैं, जो बने ही नहीं और पैसे निकल गए उसके लिए सरकार क्या कर रही है?भारी भ्रष्टाचार हुआ है और सिर्फ कागजों में बने हैं, मौके पर तो वो हैं ही नहीं...(व्यवधान)..

श्री सचिन यादव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जो सात लाख मिसिंग शौचालय बता रहे हैं उनकी जाँच कराएँगे क्या?..(व्यवधान)..सात लाख शौचालय कहाँ गए, उनका जो पैसा निकाला गया वह शौचालय क्यों नहीं बनाए गए? क्या इसकी जाँच होगी?..(व्यवधान)..

श्री शैलेन्द्र पटेल-- माननीय, जो भ्रष्टाचार के कारण पैसे निकल गए हैं क्या उसकी जाँच होगी?

प्रश्न संख्या-- 8 (अनुपस्थित)

अध्यक्ष महोदय-- प्रश्न क्रमांक 9 श्री रामकिशन पटेल...

प्रश्न संख्या-- 9 (अनुपस्थित)

श्री शैलेन्द्र पटेल-- अध्यक्ष महोदय, आपका संरक्षण चाहिए. जिनके पैसे निकल गए और शौचालय नहीं बने. उनके लिए सरकार क्या करेगी? क्या भ्रष्टाचार की जाँच कराएगी?

अध्यक्ष महोदय-- आप बैठ जाइये आपका प्रश्न हो गया. कुछ नहीं लिखा जाएगा श्री दिव्यराज सिंह जी का लिखा जाएगा.

श्री शैलेन्द्र पटेल-- (xxx)

अध्यक्ष महोदय-- आपकी बात हो गई. आपको दो की जगह चार प्रश्न करने दिए. कृपया सहयोग करें. सबके प्रश्न हैं. सबका उत्तर आ गया.

सिरमौर विधानसभा क्षेत्रांतर्गत सड़क निर्माण

10. ( *क्र. 2585 ) श्री दिव्‍यराज सिंह : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सिरमौर विधानसभा क्षेत्रांतर्गत क्‍या जवां से भनिगवां प्रधानमंत्री सड़क का निर्माण कार्य विगत कई वर्षों से अधूरा पड़ा है? यदि हाँ, तो निर्माण कार्य क्‍यों नहीं कराया जा रहा है एवं ग्राम पंचायत जवा में महूहा टोला से ग्राम रतनी प्रधानमंत्री सड़क का सर्वे कार्य कराया गया था, तो क्‍या सड़क का निर्माण कार्य कराया जायेगा? (ख) यदि हाँ, तो कब तक?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जी नहीं, सिरमौर विधानसभा क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजनांतर्गत जवां से भनिगवां सड़क निर्माण नहीं कराया जा रहा है, अपितु लूक से भनिगंवा सड़क निर्माण कार्य पूर्ण कराया गया है। प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। जवां विकासखण्ड में महूहा टोला से ग्राम रतनी मार्ग प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजनांतर्गत महूहा टोला से भखरवार के नाम से स्वीकृत है। इस मार्ग के आंशिक भाग (प्रारंभ से 1.60 कि.मी.) नहर के बैंक पर से होकर जाता है, किंतु बैंक की चौड़ाई योजना के मापदण्डों से कम होने से सड़क निर्माण हेतु पर्याप्त चौड़ाई उपलब्ध न होने से सड़क निर्माण हेतु अन्य वैकल्पिक एक रेखण विचाराधीन है। वैकल्पिक एक रेखण के निर्धारण के पश्चात सड़क निर्माण कराया जावेगा। (ख) निश्चित समय-सीमा बताना संभव नहीं है।

श्री दिव्यराज सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी के जवाब से संतुष्ट हूँ. मेरी मंत्री जी से केवल एक ही दरख्वास्त है कि जो महुआ टोला से भकरवार मार्ग है. उसका अंश भाग 1.6 किलोमीटर नहर के एलाइनमेंट के कारण, उसका एलाइनमेंट बदलना है तो मैं केवल यह निवेदन करूँगा कि बरसात के पहले इसका एलाइनमेंट बदल करके इसका निर्माण हो जाए.

श्री गोपाल भार्गव-- अध्यक्ष महोदय, नहर थी उस कारण से सिर्फ 3-4 फिट की चौड़ाई का स्थान सड़क बनाने के लिए मिल रहा था. एलाइनमेंट बदल कर और जल्दी से जल्दी से उसका काम, क्योंकि उसके किनारे सिंचित थे इस कारण से थोड़ा सा उसमें विलंब हुआ है. उसमें हम शीघ्र कार्य कर रहे हैं.

ग्राम पंचायत महमूदपुर के सरपंच द्वारा कराये गये कार्यों की जाँच

11. ( *क्र. 3460 ) श्री गिरीश गौतम : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या कलेक्‍टर रीवा को जन सुनवाई में दिनांक 26.08.2014 को सरपंच ग्राम पंचायत महमूदपुर के विरूद्ध कराये गये कार्यों की जाँच कराये जाने का आवेदन दिया गया था, जिसकी शिकायत संख्‍या 1516 दर्ज की गयी है तथा पुन: 01.09.14 एवं 07.10.15 को माननीय मुख्‍यमंत्री जी एवं कलेक्‍टर रीवा को शिकायती आवेदन दिया गया? यदि हाँ, तो जाँच कब किस अधिकारी द्वारा की गयी? क्‍या जाँच अधिकारी द्वारा शिकायतकर्ता को भी सुनवाई का अवसर दिया गया? यदि नहीं, तो क्‍यों? (ख) क्‍या उक्‍त शिकायतकर्ता द्वारा 25.08.14 को लोकायुक्‍त संगठन को भी शिकायत की गयी है? जाँच कब तक पूर्ण कर ली जायेगी?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जी हाँ। जनसुनवाई शिकायत दिनांक 26.08.2014 को प्राप्त हुई थी। पुनः दिनांक 01.09.2014 एवं 07.10.2015 को मान.मुख्यमंत्री एवं कलेक्टर जिला रीवा को अंकित शिकायत प्राप्त होना नहीं पाया गया। प्राप्त शिकायत दिनांक 26.08.2014 के संदर्भ में दिनांक 16.08.2015 को जाँच मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत गंगेव द्वारा पी.सी.ओ. एवं उपयंत्री से कराई गई। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन अनुसार निष्कर्ष में शिकायत निराधार पाई गई। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार। जी हाँ। शिकायतकर्ता को भी सुनवाई का अवसर दिया गया, शिकायतकर्ता द्वारा किसी प्रकार का कथन-मत देने से इंकार किया गया। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार। शेष प्रश्न नहीं उठता। (ख) लोकायुक्त को की गई शिकायत की जानकारी विभाग को नहीं है, अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

श्री गिरीश गौतम-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न मनरेगा के पैसे में किए गए भ्रष्टाचार से संबंधित है. इसमें अधिकारियों ने, जिन्होंने पैसा खाया, पूरा पैसा ले लिया, उन्होंने ही जाँच कर ली और असत्य तथ्यों पर हमारे माननीय मंत्री जी को भेज दिया और यहाँ पर सदन को गुमराह करने का प्रयास किया है. अध्यक्ष महोदय, इसमें आप उत्तर से ही देखें हमने पूछा था कि क्या शिकायतकर्ता को भी अवसर दिया गया? इन्होंने दिया है कि हाँ उसको अवसर दिया गया है. अभी जो आपने परिशिष्ट दिया है, परिशिष्ट में एक पत्र लगा हुआ है, पंचनामा, इस पंचनामे में लिखा है कि हम उपस्थित लोग आज दिनाँक 19.2.16 को, प्रश्न लगा है 1.2.16 को, उसकी सूचना के लिए चला गया और इसमें यह लिख रहे हैं कि 19.2.16 को कथन करते हैं कि ग्राम पंचायत महमूदपुर के सरपंच सचिव के विरुद्ध की गई शिकायत की जाँच के दौरान शिकायतकर्ता श्री सुदामा प्रसाद मिश्र उपस्थित रहे और उन्होंने अपनी शिकायत के संबंध में कथन/मत देने से मना किया. 19.2.16 को यह एक पंचनामा बना है और इसमें जाँच प्रतिवेदन में क्या है, जाँच प्रतिवेदन को बताया गया कि यह जाँच करने गए आपके, यह आदेश 13.8 को हुआ और 16.8.2015 को जाँच करने गए. जाँच करने कौन गए, जिन्होंने प्राक्कलन दिया, जिन्होंने टी एस किया, जिन्होंने काम कराया, वही जाँच अधिकारी हो गए. वही पी सी ओ, वही सब इंजीनियर, वही ए ई, वह सारे जाँच अधिकारी हो गए जिन्होंने पैसा खाया वही उसके जाँच अधिकारी हो गए और जाँच करके उन्होंने लिख दिया कि सब काम सही हुआ है. मेरा इसमें सीधा प्रश्न यह है कि माननीय मंत्री जी से मैं आग्रह करना चाहता हूँ कि यह जाँच जो हुई है इस जाँच में चार लाख चालीस हजार के भ्रष्टाचार का सवाल था और जिन्होंने पैसा निकाला मैं ऐसा मानता हूं कि सरपंच अनुसूचित जाति की महिला थी बेचारी बहुत पढ़ी लिखी नहीं थी. सारे अधिकारियों ने खेल किया है. सचिव, सब इंजीनियर और एई ने मिलकर सारा पैसा निकाल लिया है. मेरा आग्रह यह है कि क्या इन अधिकारियों को हटाकर कोई जांच कमेटी बनायेंगे जो उच्च अधिकारियों से निर्मित हो वह जाकर यह जांच करे और जिन अधिकारियों ने पैसा निकाला है उनके विरुद्ध कार्यवाही करेंगे क्या ?

श्री गोपाल भार्गव--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह सिर्फ एक ग्राम पंचायत से संबंधित मामला है. माननीय सदस्य ने जैसा कहा है हम सदस्य की उपस्थिति में सुप्रीन्टेंडेंट इंजीनियर, रीवा से जांच करा लेंगे और जो भी निष्कर्ष होगा उसके आधार पर कार्यवाही करेंगे.

श्री गिरीश गौतम--अध्यक्ष महोदय, मेरी उपस्थिति का प्रश्न नहीं है, मैं उपस्थित रहूं या न रहूं.

अध्यक्ष महोदय--मंत्री जी ने तो बोल दिया है अब आप उपस्थित रहें या न रहें यह आपकी इच्छा है.

श्री गिरीश गौतम--मेरी इच्छा यह है कि जांच समिति में एक कार्यपालन यंत्री, लोक निर्माण विभाग का, एक आरईएस का और जिला पंचायत के किसी अधिकारी को सम्मिलित कर लें तथा इस समिति को भेजकर जांच करा लीजिये.

श्री गोपाल भार्गव-- अध्यक्ष महोदय, करा लेंगे.

श्री गिरीश गौतम--बहुत-बहुत धन्यवाद.

पंचायत समन्‍वय अधिकारियों की पदोन्‍नति में विसंगति

12. ( *क्र. 68 ) श्री प्रहलाद भारती : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या पंचायत राज संचालनालय म.प्र. भोपाल द्वारा जारी आदेश क्रमांक/स्‍था./1/पं.सं./287/11386 दिनांक 10.10.2014 के द्वारा स्‍नातक संवर्ग के पंचायत समन्‍वय अधिकारियों को खण्‍ड पंचायत अधिकारी के पद पर पदोन्‍नति आदेश जारी किए? यदि हाँ, तो प्रसारित आदेश की स्‍वच्‍छ प्रति उपलब्‍ध करावें? (ख) प्रश्‍नांश (क) में प्रसारित आदेश के सरल क्रमांक 2, 3, 9, 16, 53, 58, 65, 110, 119 की पदक्रम सूचियों में हेराफेरी कर मनमाने ढंग से उपस्थिति दिनांक, जन्‍म दिनांक अंकित की गई है? (ग) क्‍या प्रश्‍नांश (क) में पदोन्‍नति सूची में भारी विसंगतियां कर प्रश्‍नांश (ख) में वर्णित सरल क्रमांकों के अभ्‍यर्थियों को कूटरचित दस्‍तावेजों द्वारा अनुचित लाभ दिया गया है? यदि हाँ, तो किन नियमों के अंतर्गत? वर्णित नियमों की प्रति उपलब्‍ध करावें? यदि नहीं, तो विवरण दें? (घ) प्रश्‍नांश (क) में वर्णित पदोन्‍नति सूची में गड़बड़ी/विसंगतियों के लिए किस स्‍तर के अधिकारी/कर्मचारियों का उत्‍तरदायित्‍व निर्धारण किया गया है एवं संबंधितों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई अथवा की जा रही है? यदि नहीं, तो क्‍यों? कारण सहित स्‍पष्‍ट करें।

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जी हाँ। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार। (ख) जी नहीं। (ग) जी नहीं। प्रश्न उपस्थित नहीं। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार। (घ) प्रश्नांश (ग) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न ही उपस्थित नहीं होता।

श्री प्रहलाद भारती--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्नांश (ख) का आधे से अधिक भाग ही प्रश्न से हटा दिया गया है. मैंने उसमें प्रसारित आदेश के सरल क्रमांक 2, 39, 16, 53, 58, 65, 110 एवं 119 पर अंकित अधिकारियों के नियुक्ति आदेश,उपस्थिति दिनांक, पदक्रम की सूची एवं जन्मतिथि मांगी थी जो कि मुझे नहीं दी गई है. माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्रीजी से उपरोक्त जानकारी चाहता हूं.

श्री गोपाल भार्गव--माननीय अध्यक्ष महोदय, जहां तक मैंने जानकारी ली है यह पदोन्नतियां नियमों के अनुसार हुई हैं यदि माननीय सदस्य ऐसा कह रहे हैं या उनकी जानकारी में यह आया है कि नियम विरुद्ध पदोन्नतियां की गई हैं तो वे लिखकर दे दें हम जांच करा लेंगे यदि नियम विरुद्ध पदोन्नतियां की गईं होंगी तो उन्हें रद्द कर देंगे.

श्री प्रहलाद भारती--अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी से जांच करा लें. यह प्रदेश स्तर का मामला है. डाक्यूमेंट्री प्रूफ है.

श्री गोपाल भार्गव--भोपाल से अधिकारी भेजकर जांच करा लेंगे.

अध्यक्ष महोदय--मंत्रीजी कह रहे हैं कि भोपाल से अधिकारी भेजकर जांच करा लेंगे.

श्री प्रहलाद भारती--प्रदेश स्तर का मामला है, जिला स्तर का नहीं यह भोपाल का ही मामला है.

श्री गोपाल भार्गव--माननीय सदस्य तथ्यपरक सूचना लिखकर दे दें हम जांच करा लेंगे नियम विरुद्ध कोई पदोन्नति होगी तो उसको निरस्त कर देंगे.

प्रश्न संख्या (13) अनुपस्थित.

सामान्‍य सभा द्वारा पारित निंदा प्रस्‍ताव पर कार्यवाही

14. ( *क्र. 4025 ) श्री सुरेन्‍द्र सिंह बघेल : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या दिनांक 01.07.2015 से दिनांक 31.01.2016 के मध्‍य आयोजित जनपद पंचायत निसरपुर जिला धार की सामान्‍य सभा की बैठक में जनपद स्‍तर के अधिकारियों के विरूद्ध निंदा प्रस्‍ताव पारित किये गये हैं? (ख) प्रश्‍नांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में पारित निंदा प्रस्‍ताव पर शासन द्वारा कोई कार्यवाही की गई? यदि हाँ, तो कब? यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं? कारण स्‍पष्‍ट करें। (ग) प्रश्‍नांश (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में क्‍या शासन स्‍तर से कोई कार्यवाही की जायेगी?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जी हाँ। (ख) जी हाँ। जनपद पंचायत निसरपुर द्वारा पत्र क्र. 287 एवं 301 दिनांक 29.01.2016 द्वारा पारित निंदा प्रस्ताव की प्रति संबंधित के विरूद्ध आवश्यक कार्यवाही हेतु जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी, जिला धार एवं कार्यपालन यंत्री, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग कुक्षी को प्रेषित की गई है। (ग) जाँच उपरांत गुण दोष के आधार पर कार्यवाही की जायेगी।

श्री सुरेन्द्र सिंह बघेल--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्रीजी से प्रश्न करना चाहूंगा. यह प्रश्न भी है और सुझाव भी है. जनपद पंचायत निसरपुर में विकास की गति लाने के लिए और जनप्रतिनिधि व अधिकारियों में समन्वय बनाने के लिए क्या मंत्री महोदय प्रदेश स्तर की समिति गठित कर जनपद पंचायत निसरपुर में समीक्षा बैठक करायेंगे जिससे जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों में समन्वय बैठ पाये और विकास की गति बढ़ पाये, क्योंकि वहां पर विरोधाभास चल रहा है.

श्री गोपाल भार्गव--माननीय अध्यक्ष महोदय, शासन की तरफ से स्पष्ट निर्देश पहले भी थे अभी पुन: दिए गए हैं कि जिला पंचायत, जनपद पंचायत की बैठकों में संबंधित अधिकारी अनिवार्य रुप से उपस्थित रहें जो उपस्थित नहीं रहेंगे उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही जो संबंधित विभाग हैं उनके जिला प्रमुख करेंगे जिला प्रमुख के ऊपर यदि कार्यवाही नहीं होगी तो प्रदेश स्तर पर कार्यवाही होगी. माननीय सदस्य जिला पंचायत के हों या जनपद पंचायत के हों चाहे अन्य संस्था के हों उनके मान-सम्मान की रक्षा करने और बैठकों में संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए विभाग से परिपत्र जारी हो गए हैं और सख्ती के साथ हमने निर्देश दिए हैं कि वहां पर जो भी समस्याएं आती हैं अधिकारी उनका निराकरण करें और उनकी उपस्थिति भी अनिवार्य हो.

श्री सुरेन्द्र सिंह बघेल--माननीय अध्यक्ष महोदय, वहां विरोधाभास है. दो बार निंदा प्रस्ताव हो चुका है एक बार कार्यवाही की मांग हो गई है. मेरा उद्देश्य अधिकारियों पर कार्यवाही करवाना या उन्हें दंडित करना नहीं है. मेरा सुझाव है कि वहां पर कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों में समन्वय हो जाये ताकि विकास के काम हो सकें, विकास महत्वपूर्ण है. यदि यहां से कोई प्रदेश स्तर का अधिकारी जाकर एक समीक्षा बैठक वहां पर ले ले तो स्थिति ठीक हो जाएगी. माननीय अध्यक्ष महोदय इसमें आपका संरक्षण चाहूंगा यह मेरा माननीय मंत्रीजी को सुझाव है.

श्री गोपाल भार्गव--माननीय अध्यक्ष महोदय, दो अधिकारी वहां पर अनुपस्थित थे. पहली बात इनसे स्पष्टीकरण लिया गया है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उसमें से मेरे विभाग का एक अधिकारी था और एक अधिकारी महिला बाल विकास विभाग का अधिकारी था. प्रदेश में 313 जनपदें है तो हम कहां कहां जनपदों में समन्‍वय करने के लिये भोपाल से अधिकारी भेजेंगे. हमने नियम बनाये हैं, यदि नियमों की कोई अवहेलना करेगा, जिला पंचायतों की बेठकों में न आने का काम करेगा, जनपद की बैठकों में न आने का काम करेगा या जो प्रस्‍ताव हैं उनके क्रियान्‍वयन न करने का काम करेगा तो उसके विरूद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी. यदि मेरे विभाग के इतर दूसने विभागों के अधिकारी होंगे तो उनके संबंधित विभागों को लिखकर कार्यवाही सुनिश्‍चित की जायेगी.

 

 

फसल बीमा योजना में संशोधन

15. ( *क्र. 2395 ) श्री कमलेश्‍वर पटेल : क्या किसान कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या केंद्र की नई फसल बीमा योजना के संदर्भ में राजस्‍व पुस्‍तक परिपत्र में राज्‍य सरकार द्वारा फसल बीमा के संबंध में किये गये राहत के प्रावधानों को संशोधित करने का कोई प्रस्‍ताव है? (ख) यदि नहीं, तो क्‍या केंद्र की नई फसल बीमा योजना और राजस्‍व पुस्‍तक परिपत्र के प्रावधान एक साथ लागू रहेंगे?

किसान कल्याण मंत्री ( श्री गौरीशंकर बिसेन ) : (क) फसल बीमा योजनांतर्गत दावों के भुगतान का राजस्‍व पुस्‍तक परिपत्र के प्रावधानों से सीधा कोई संबंध नहीं है, अत: शेष प्रश्‍न ही नहीं उठता है। (ख) उत्‍तरांश (क) के तारतम्‍य में प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता है।

श्री कमलेश्‍वर पटेल:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से जानना चाहेंगे कि जिन्‍हें आर.बी.सी 64 के अंतर्गत 33 प्रतिशत से अधिक का नुकसान का मुआवजा दिया है तो क्‍या उनकी आवश्‍यक रूप क्राप कटिंग करायी जाती है या नहीं और मेरा दूसरा प्रश्‍न है कि केन्‍द्र की बीमा योजना किस दिनांक से लागू की गयी है ? उसमें क्‍या क्‍या सुविधाएं मुहैया करायी जायेंगी.

श्री गौरीशंकर बिसेन :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, क्राप कटिंग के एक्‍सपेरीमेंट होते हैं उसके बाद ही मुआवजा दिया जाता है. जब अनावरी कम आयेगी तब ही उन्‍हें मुआवजा दिया जाता है. भारत सरकार से संबंधित जो दूसरा प्रश्‍न माननीय सदस्‍य ने किया है कि भारत सरकार की फसल बीमा योजना कब से प्रारंभ की जायेगी तो अभी हम इसके टेण्‍डर काल करेंगे और खरीफ सीजन से इसको लागू करेंगे.

श्री कमलेश्‍वर पटेल:- अध्‍यक्ष महोदय क्‍या मध्‍यप्रदेश में पहले से फसल बीमा योजना लागू नहीं थी तो उसका जो हश्र पूर्व में हुआ है क्‍या वही हश्र अभी भी होगा, पहले भी ऐसा ही था.

अध्‍यक्ष महोदय :- आप स्‍पेसीफिक प्रश्‍न करें, काल्‍पनिक प्रश्‍न न करें.

श्री कमलेश्‍वर पटेल :- अध्‍यक्ष महोदय, इसी से संबंधित प्रश्‍न है,हमारे सीधी सिंगरोली जिले में फसल बीमा का एक भी किसान को कोई भी फायदा नहीं मिला है और पूरी सोसायटियों में जब किसान गल्‍ला बेचने के लिये गया है तो फसल बीमा के नाम पर हर सोसायटियों में उनके पैसे काटे गये हैं. मेरा प्रश्‍न है कि नयी फसल बीमा योजना कब तक लागू हो जायेगी दूसरा जो पूर्व में हश्र हुआ है.

अध्‍यक्ष महोदय :- उन्‍होंने बता दिया है.

श्री रामनिवास रावत :- अध्‍यक्ष महोदय, नयी फसल बीमा योजना में टेण्‍डर किये जायेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय:- आप उसको स्‍पष्‍ट करा लीजिये. आप उसका एक्‍सप्‍लेनेशन मांग लें.

श्री कमलेश्‍वर पटेल:- टेण्‍डर कराये जायेंगे यह तो ठीक है, उसमें क्‍या क्‍या प्रावधान है हमने यह भी पूछा था, वह भी नहीं बताया है.

श्री गौरीशंकर बिसेन :- अध्‍यक्ष महोदय, नई फसल बीमा योजना में और पुरानी फसल योजना में क्‍या अंतर है, मैं उसको स्‍पष्‍ट करना चाहता हूं. अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से सदन को अवगत कराना चाहता हूं. जो नई फसल बीमा योजना है उसमें खरीफ फसलों के दो प्रतिशत प्रीमियम राशि किसान को देय होगी, पुरानी में जो पूर्व की जो राष्‍ट्रीय फसल बीमा योजना थी उसमें 3.5 प्रतिशत तक इसमें प्रीमियम देय होती थी. इसी के साथ साथ गेंहूं के लिये 1.5 प्रतिशत प्रीमियम किसानों से देय होगी. इसी के साथ साथ जो हमारी खरीफ की नगदी फसलें हैं बागवानी इत्‍यादि इसका प्रीमियम 5 प्रतिशत होगा, पहले 13 प्रतिशत तक था. ओला वृष्टि, भूस्‍खलन जल पयावन आदि आपदाओं पर इसमें पूर्व में इसको कोई भुगतान का प्रावधान नहीं था, नयी योजना में इसको सम्मिलित किया गया है, इसमें किसान के किसी हिस्‍से में भी यदि नुकसान होगा तो उसका मुआवजा निर्धारित होगा. फसल की बोनी के बाद यदि फसल पैदा नहीं होती है या ट्रांसप्‍लाटेंशन नहीं हो सका तो ऐसी स्थिति में 25 प्रतिशत किसान को भुगतान किया जायेगा यह प्रावधान नयी फसल बीमा योजना में है. यह पुरानी योजना में नहीं था. इसी के साथ साथ फसल के कटाई के उपरांत 14 दिनों तक यदि खलियान में खेत में फसल रखी हुई है तो उसमें यदि प्राकृतिक आपदा से नुकसान होता है तो उसको भी फसल बीमा का कवरेज मिलेगा.पहले इस तरह का प्रावधान नहीं था. इसी के साथ साथ पहले हम मेन्‍युअल क्राप कटिंग के एक्‍सपेरीमेंट करते थे, अब अत्‍यानुधिक टेक्‍नालाजी को अपनाकर के क्राप कटिंग के एक्‍सपरीमेंट करें जायेंगे, जिससे की समय पर हमारे पास फसलों के नुकसानी के दावे प्राप्‍त हो सकें.

श्री कमलेश्वर पटेल - माननीय अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहेंगे कि जो फसल बीमा राशि किसी प्रायवेट कंपनी के माध्यम से किसानों को वितरित की जायेगी कि सरकार खुद यह क्रियान्वयन करेगी दूसरा जिस तरह से पूर्व में प्रायवेट कंपनी को फसल बीमा का काम दिया गया था योजना लागू की गई थी किसानों को किसी भी प्रकार की राहत राशि नहीं मिली वह पैसा कहां गया उसके बारे में भी नहीं बताया है.

अध्यक्ष महोदय इससे उद्भूत कहां हो रहा है.

श्री कमलेश्वर पटेल - माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारा सीधी, सिंगरौली जिला सूखा प्रभावित जिला है और किसी भी किसान को फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिला.

अध्यक्ष महोदय - आपकी बात रिकार्ड में आ गई.

श्री कमलेश्वर पटेल - माननीय अध्यक्ष महोदय, एक इसी से संबंधित प्रश्न है. आरबीसी 6(4) के अंतर्गत जो राहत राशि किसानों को दी जाती थी यह फसल बीमा योजना लागू हो जाने के बाद वह राहत राशि मिलती रहेगी कि नहीं ?

श्री गौरीशंकर बिसेन - मैंने अपने उत्तर में कहा कि आरबीसी 6(4) को नहीं हटाया गया है इसीलिये उस पर संशय करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता.

श्री कमलेश्वर पटेल - माननीय अध्यक्ष महोदय, यह नहीं बताया कि किस कंपनी से कराएंगे ?

अध्यक्ष महोदय - नहीं. अनुमति नहीं है.

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं यह जानकारी चाह रहा था कि एक तो आपने पिछली फसल बीमा और इस फसल बीमा योजना के प्रीमियम का अंतर समझाया. अंतर पहले ज्यादा था आज कम है यह बताया लेकिन पहले किसान का कितना था राज्य सरकार कितना था केन्द्र सरकार कितना देती थी. अब जो देंगे पूरा किसान देंगे. दूसरा नई फसल बीमा योजना के लिये टेंडर आमंत्रित किये जायेंगे. टेण्डर की प्रक्रिया स्पष्ट कर दें.

श्री गौरीशंकर बिसेन - माननीय अध्यक्ष महोदय, भारत सरकार ने राज्यों को इस बात के लिये स्वतंत्र किया है कि वे बीमा की नीति बनाएं. अभी मार्च महीने में राज्य सरकार बीमा कौन सी कंपनी से कराएंगे. भारत सरकार ने 8-9 बीमा कंपनियों को अधिकृत किया है. अभी हमारी सरकार माननीय मुख्यमंत्री जी सब बैठकर तय करेंगे कि हमको आगे किस तरह बढ़ना है. रहा सवाल प्रीमियम का पहले यह था कि जो फसल के दावे का निर्धारण होता था उसमें आधा राज्य देता था और आधा केन्द्र देता था प्रीमियम को माईनस करके. अबकी बार किसी फसल का जो प्रोडक्शन कास्ट आता है डिस्ट्रिक्ट का जो तय होगा उसके आधार पर दो प्रतिशत किसान देगा और ऊपर की जो राशि आएगी मान लीजिये 20 प्रतिशत किसी का प्रीमियम शिथिल होता है तो उस समय में 2 प्रतिशत किसान अंश होगा और बाकी जो 18 बच जायेगा उसमें 9 राज्य का होगा और 9 भारत सरकार का होगा. हम तो प्रत्येक ग्राम पंचायत में जाकर प्रधानमंत्री फसल बीमा को पहुंचाना चाहते हैं जिससे किसी तरह की विसंगति न हो. आज प्रदेश में 20-22 प्रतिशत लोग इंश्योरेंस के कवरेज में आ रहे हैं. हम चाहते हैं कि एक साल के अंदर 50 परसेंट से ऊपर किसान इस बीमा कवरेज में सम्मिलित हों.

रोहित गृह निर्माण सहकारी समिति के रिकार्ड की जप्‍ती

16. ( *क्र. 4016 ) श्री आरिफ अकील : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या रोहित गृह निर्माण सहकारी समिति का रिकार्ड सी.बी.आई. में जप्‍त है? यदि हाँ, तो किन-किन कारणों से व कब से जप्‍त है? (ख) यदि हाँ, तो क्‍या संस्‍था के रिकार्ड सी.बी.आई. में जप्‍त होने के बाद भी संस्‍था के कर्मचारियों/पदाधिकारियों द्वारा करोबार किया जा रहा है? यदि हाँ, तो किसकी अनुमति से और यदि अनुमति नहीं दी गई तो किन-किन विभागीय अधिकारियों की मिली भगत से अवैध रूप से संस्‍था के कारोबार किए जा रहे हैं? (ग) प्रश्‍नांश (क) (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में क्‍या नियम विरूद्ध कार्य करने वाले संस्‍था के कर्मचारियों/पदाधिकारियों एवं विभागीय अधिकारियों के विरूद्ध एफ.आई.आर. दर्ज कर विभागीय एवं वैधानिक कार्यवाही करेगें? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों कारण सहित बतावें?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जी हाँ. श्री घनश्याम सिंह राजपूत, हेड क्लर्क, वेस्टर्न सेन्ट्रल रेल्वे भोपाल के द्वारा आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने का संबंध रोहित गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित, भोपाल से होने के कारण प्रकरण क्रमांक. RC0082007A0002 में दिनांक 10.03.2008 को रिकार्ड जप्त किया गया है. (ख) मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 की धारा- 49 (7) के अंतर्गत दिनांक 11.6.2015 को संचालक मण्डल के स्थान पर विभाग द्वारा प्रशासक नियुक्त करने के पश्चात् बहिर्गामी संचालक मण्डल द्वारा रिकार्ड उपलब्ध न कराये जाने से स्पष्ट स्थिति बताया जाना सम्भव नहीं है. विभाग द्वारा किसी अवैध कार्य करने की अनुमति देने का प्रश्न उपस्थित नहीं होता तथा विभागीय अधिकारियों की संलिप्तता का कोई प्रमाण अभी तक उपलब्ध नहीं है. (ग) प्रथमतः रिकार्ड प्राप्त करने हेतु विभाग द्वारा सहकारी अधिनियम की धारा 57 (ए) के अंतर्गत कार्यवाही हेतु अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), टी.टी. नगर वृत्त को सर्च वारन्ट जारी करने हेतु आवेदन किया गया है. साथ ही उप पंजीयक, सहकारी संस्थायें, भोपाल को सहकारी अधिनियम की धारा 74 (ई) अंतर्गत कार्यवाही के निर्देश दिये गये हैं. समय-सीमा बताया जाना सम्भव नहीं है.

 

श्री आरिफ अकील - माननीय अध्यक्ष महोदय, किसी शायर का शेर याद आ रहा है कि "सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि सूरत बदलनी चाहिये"मैं आपके माध्यम से मध्यप्रदेश केबिनेट के सबसे दबंग मंत्री से यह रिक्वेस्ट करने के लिये खड़ा हुआ हूं कि आदरणीय वर्ष 2003 से यह रोहित गृह निर्माण समिति परेशान है. इसमें रिकार्ड जप्त हो गया. रिकार्ड जप्त होने के बाद संचालक मण्डल वहां काम करता रहा उसके बाद आपने प्रशासक नियुक्त कर दिया. रिकार्ड जप्त है लेकिन कारोबार जारी है. अब सीबीआई की जांच भी हो गई उसके बाद भी रिकार्ड उनके पास जप्त है और लेनदेन हो रहा है. लेनदेन में तो आप सख्ती से कार्यवाही करने के लिये मशहूर हो. आज मुझे देखना है कि आपकी कथनी और करनी में क्या अंतर होता है. मुझे उम्मीद है कि जो 1500 मेंबर हैं उनके अलावा जिनको भी प्लाट दिये हैं. चाहे संस्था के लोगों ने दिये हैं चाहे आपके अधिकारियों ने दिये हों. उनके खिलाफ कार्यवाही करके वह जप्त करके जो 137 लोग प्लाट के लिये घूमते फिर रहे हैं क्या उनको प्लाट दिलाने में मेरी मदद करेंगे ?

श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जो प्रश्न किया है. यह बात सही है कि यह रोहित गृह निर्माण समिति जो है इसमें भूखण्डों के आवंटन में गड़बड़ी हुई है. प्लाटों के आवंटन में गड़बड़ी हुई है इसे प्रथम दृष्टिया मैं स्वीकार करता हूं. समय समय पर इस समिति के जो पदाधिकारी हैं उनके विरूद्ध कार्यवाही की गई है, उनके विरूद्ध एफआईआर भी की गई है, जुर्माने भी लगाये गये हैं. जो पदाधिकारी हैं उनकी तीन पुलिस थानों में एफआईआर भी हैं मैं यह जानने का प्रयास कर रहा हूं कि इसमें हमारे विभाग के कर्मचारियों-अधिकारियों की जो हमारे ऑडिटर हैं और भी जो कर्मचारी हैं उनकी संलिप्तता होगी उसकी हम जां करवा रहे हैं. जिन सदस्यों प्लाट नहीं मिल पाये हैं उन सदस्यों के लिये प्लाट दिलाने का काम खास तौर से जिन अपात्र सदस्यों को प्लाट मिल गये हैं उनकी रजिस्ट्रियां निरस्त कराने का प्रयास कर रहे हैं, इसके लिये कलेक्टर को भी पत्र लिखा है, रिकार्ड जप्त है उस रिकार्ड को जो कमेटी का निर्वाचित बोर्ड है उसके सदस्य रिकार्ड को सुपुर्द नहीं कर रहे हैं तो हमने कलेक्टर को लिखा है कि एस.डी.एम के माध्यम से उस रिकार्ड के लिये हमारे अधिकारियों को उपलब्ध करवाए ताकि आगामी कार्यवाही हम सुनिश्चित कर सकें.

श्री आरिफ अकील--अध्यक्ष महोदय, यह 2003 का मामला है इसमें मंत्री जी ने आज जो जवाब दिया है उस जवाब में लिखा है कि समय सीमा बताना संभव नहीं है. 2003 से आज तक समय सीमा नहीं बता पाएंगे तो क्या 50 साल के बाद की समय सीमा निर्धारित करेंगे, क्या करेंगे मुझे आपसे बहुत सारी उम्मीदें मुझे भी तथा मध्यप्रदेश को भी हैं. मुझे उम्मीद है कि यह सवाल आपके नॉलेज में आने के बाद दूध का दूध और पानी का पानी होगा और जो लोग रिकार्ड नहीं दे रहे हैं तो क्या सरकार इतनी कमजोर हो गई है कि यह लोग रिकार्ड नहीं दे रहे हैं जो रिकार्ड सीबीआई के पास रिकार्ड जब्त है उसमें संचालक मण्डल के लोग आपके विभाग के अधिकारी प्लाट का कारोबार कर रहे हैं उनके विरूद्ध कार्यवाही करने में दबंग मंत्री सोचेंगे-विचार करेंगे उसमें समय सीमा नहीं बताएंगे तो कैसे काम चलेगा?

अध्यक्ष महोदय--आप तो सीधा सीधा प्रश्न करिये.

श्री आरिफ अकील--अध्यक्ष महोदय, मेरा सीधा प्रश्न है कि एक तो समय सीमा बताईये जिन लोगों ने आपके कर्मचारियों की मिली भगत से रिकार्ड जब्त होने के बाद संचालक मण्डल ने जिन लोगों के साथ कारोबार किया है, यह तो वैसे की डकैती हो गई इसमें क्या कार्यवाही करेंगे तथा कितने दिन में करेंगे ?

श्री गोपाल भार्गव--माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा मैंने बहुत ही स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि इसमें गड़बड़ी हुई है इसमें जो अपात्र सदस्य हैं उनके लिये प्लाट दे दिये गये हैं जो पात्र सदस्य हैं वह अभी भी प्लाट से वंचित हैं. मैं माननीय सदस्य को अवगत कराना चाहता हूं कि जहां पर पंजीयन मुद्रांक के यहां पर गई है उसको अभी मैंने समझा है उसको निरस्त कराने में डीजे के सिविल कोर्ट में कार्यवाही करनी पड़ेगी.मैंने यह भी सोचा था कि शायद जिन पंजीयक ने रजिस्ट्री की है वह निरस्त कर सकते होंगे, वह निरस्त नहीं कर सकते हैं, इस कारण से हम प्रयास कर सकते हैं. एक तरफ तो वह कार्यवाही दूसरी तरफ इसमें कोई बदमाशी हुई है. संचालक मण्डल के लोगों के खिलाफ तो एफआईआर हो गई है 50 हजार रूपये उनके ऊपर फाईन भी लग गया है संचालक मण्डल भंग भी हो गया है वहां पर एक कर्मचारी बैठा हुआ है इस सबके बावजूद भी हम तीन महीने में सम्पूर्ण जांच करके अगले विधान सभा सत्र के पहले तक आपको अवगत करवा देंगे.

श्री आरिफ अकील--अध्यक्ष महोदय, जिन लोगों को प्लाट नहीं मिले हैं उन लोगों को तीन महीने के अंदर प्लाट दिलवा देंगे.

श्री गोपाल भार्गव--अध्यक्ष महोदय, जहां तक प्लाट दिलाने का विषय है मैंने माननीय सदस्य को अवगत कराया है कि यह सिविल प्रक्रिया है उस प्रक्रिया में हम प्रयास भी करेंगे हम जल्दी से जल्दी इसमें कार्यवाही करने की कोशिश करेंगे.

श्री आरिफ अकील--अध्यक्ष महोदय, मेरा आपसे अनुरोध है कि आज जब चर्चा विधान सभा में हो रही है और आपके सामने बात आ गई है इसमें कुछ तो ऐसी कार्यवाही हो जिसमें संस्था का रिकार्ड जप्त होने के बाद संचालक मण्डल के जिन सदस्यों ने आपके विभाग के अधिकारियों की मिली भगत से जिन लोगों को प्लाट दिये हैं क्या उनके लिये कार्यवाही करने में भी आप तीन महीने लगाएंगे.

अध्यक्ष महोदय--तीन महीने का समय ज्यादा नहीं होता है.

श्री आरिफ अकील--अध्यक्ष महोदय, इनके लिये तीन महीने का समय ज्यादा है.

श्री गोपाल भार्गव--अध्यक्ष महोदय, फिलहाल रिकार्ड उपलब्ध नहीं हैं, हम जल्दी से जल्दी उसे इसी सप्ताह में प्राप्त करने की कोशिश करेंगे. अध्‍यक्ष महोदय, प्रमुख सचिव द्वारा कलेक्‍टर को पत्र भी लिखा गया है कि सब डिवीजन मजिस्‍ट्रेट के द्वारा जल्‍द से जल्‍द रिकार्ड उपलब्‍ध करवाएं, सी.बी.आई. से भी उसकी प्रति प्राप्‍त करने का प्रयास कर रहे हैं और हमें प्रति प्राप्‍त हो जाएगी । मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहता हूँ कि इस पूरी प्रक्रिया में थोड़ा समय लगेगा और यदि संचालक मण्‍डल के सदस्‍यों में, अध्‍यक्ष में अथवा हमारे कर्मचारियों में कोई मिली-भगत होगी तो इसको भी निर्धारित करने में हमें समय लगेगा अन्‍यथा अदालतों से स्‍टे मिल जाते हैं, इस कारण से 90 दिन का समय हम मानकर चलते हैं, विधानसभा के अगले सत्र में इसकी पूरी रिपोर्ट आपको दे देंगे ।

डॉं गोविन्‍द सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी का जवाब तो पूरा आ चुका है लेकिन मैं पूछना चाहता हूँ कि माननीय उच्‍च न्‍यायालय के निर्देश से 2014 में जांच पूरी होकर रिपोर्ट प्रस्‍तुत हो गई, एक तो इतनी देरी का कारण और दूसरा अगर वास्‍तव में रजिस्‍ट्री हो चुकी, न्‍यायालयीन प्रक्रिया है, तो माननीय मंत्री जी से हमारा अनुरोध है कि न्‍यायालयीन प्रक्रिया की कार्यवाही और जो गलत तरीके से प्‍लाट आवंटित हुए हैं,अपात्र लोगों ने ले लिए हैं, उनको निरस्‍त करने की कार्यवाही की समय-सीमा कृपया बता दें ।

श्री गोपाल भार्गव- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो अपात्र लोग हैं, उनपर जल्‍दी से जल्‍दी कार्यवाही करेंगे ।

डॉं गोविन्‍द सिंह- न्‍यायालय में जाना पड़ेगा, तो न्‍यायालय में जल्‍दी से जल्‍दी चले जाएं ।

अध्‍यक्ष महोदय- आप लोग बैठ जाइए, उनका अतारांकित था,इसलिए अनुमति दे दी, सारी बात आ गई, डॉं साहब आपकी बात भी आ गई, समय-सीमा तीन महीने है ।

 

 

अपात्र संचालकों के विरूद्ध कार्यवाही

 

17. ( *क्र. 3184 ) एडवोकेट सत्‍यप्रकाश सखवार : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या अपर आयुक्‍त सहकारिता मुख्‍यालय, भोपाल के आदेश क्र. 392/16.2.15 द्वारा म.प्र. सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 की धारा 50-ए के अंतर्गत अपात्र संचालकों के विरूद्ध कार्यवाही हेतु कोई आदेश जारी किया था? (ख) यदि हाँ, तो क्‍या उक्‍त आदेश के पालन में ऐसे अपात्रों को चिन्हित किया गया है? यदि हाँ, तो अपात्र पाये गये संचालकों, सदस्‍यों के प्रति क्‍या कार्यवाही की गई है? यदि अपात्रों की जाँच नहीं कराई गई हो, तो अब तक विलंब का कारण क्‍या है? (ग) क्‍या शाजापुर एवं मुरैना, श्‍योपुर जिलों में कई समितियों के संचालक प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित धारा के अंतर्गत 12 माह से अधिक के कालातीत ऋणी होने के बाद भी संचालक पद पर बने हुए हैं? यदि हाँ, तो क्‍या यह प्रश्‍नांश (क) में वर्णित अधिकारी के आदेश का उल्‍लंघन नहीं है? (घ) आदेश का उल्‍लंघनकर्ता हटाया जायेगा? समय-सीमा बतावें

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जी हाँ.

(ख) जी जां । 2631 अपात्र संचालक चिन्हित किए गए हैं । 470 संचालकों के पद रिक्‍त घोषित किए गए हैं । शेष में कार्यवाही प्रक्रियाधीन। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता ।

(ग) शाजापुर जिले में 51 मुरैना में 92 एवं श्‍योपुर जिले में 59 संचालक, अपात्र चिन्हित हुए हैं । मुरैना जिले में 7 संचालकों को पद से पृथक किया गया है । शेष में कार्यवाही प्रक्रियाधीन है । मध्‍यप्रदेश सहाकारी सोसायटी अधिनियम 1960 की धारा 50 ए के अंतर्गत 12 माह से अधिक का डिफाल्‍टर होने के कारण संबंधित संचालक स्‍वमेव कार्य करने से प्रवरित हो जाता है । ऐसे संचालक को संचालक मण्‍डल की आगामी बैठक में आमंत्रित नहीं करना तथा उसके पद को रिक्‍त घोषित करने हेतु जानकारी पंजीयनकर्ता को भेजने की कार्यवाही संबंधित संस्‍था को करनाहोता है । अत: किसी अधिकारी के आदेश का उल्‍लंघन का प्रश्‍न नहीं है ।

(घ) उत्‍तरांस ग अनुसार । संचालकों के डिफाल्‍टर होने की स्थिति समय समय पर परिवर्तित होती है, जो सतत प्रक्रिया है। संस्‍था से अपात्रता की जानकारी प्राप्‍त होने पर ऐसे संचालकों के पद रिक्‍त घोषित किए जाते हैं । अत: समयवाधि बताया जाना संभव नहीं है ।

एडवोकेट सत्‍यप्रकाश सखवार- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मेरा माननीय मंत्री जी से यह प्रश्‍न है ।

श्री अजय सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, (xxx)

अध्‍यक्ष महोदय- आप बैठ जाइए, कुछ भी रिकार्ड में नहीं आएगा, वकील साहब एडवोकेट सत्‍यप्रकाश सखवार का रिकार्ड में आएगा ।

श्री गोपाल भार्गव- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा अजय सिंह जी ने कहा है सरकार की यदि इच्‍छा शक्ति हो तो सरकार से बड़ा शक्ति शाली कोई तंत्र नहीं होता । मैं आपको विश्‍वास दिलाना चाहता हूँ किसी भी तरह से, सरकार लिप्‍त नहीं है मेरा यदि कोई प्‍लाट हो तो आप उस पर कब्‍जा कर लें नामी,बेनामी किसी भी तरह का कोई हो, मैं छूट देता हूँ ।

श्री अजय सिंह- एक नम्‍बर में कौन कब्‍जा करे, आप यह तो बताओ ।

एडवोकेट सत्‍यप्रकाश सखवार- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश सहकारी सोसायटी के अंतर्गत अपात्र संचालकों के विरूद्व में जो संचालक 12 माह से अधिक के कालातीत ऋण होने के बावजूद भी संचालक पद पर बने हुए हैं, मेरा माननीय मंत्री जी से सवाल है कि क्‍या ऐसे दोषियों का पता लगाकर जो अपात्र पाए गए हैं,संचालकों को कब तक पद से हटाएंगे, समय सीमा बताएं ।

श्री गोपाल भार्गव- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जहां के बारे में सदस्‍य महोदय ने प्रश्‍न किया है, वहां के संचालक मण्‍डल को हटा दिया गया है ।

एडवोकेट सत्‍यप्रकाश सखवार- माननीय मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्‍यवाद ।

मुख्‍यमंत्री कन्‍यादान योजना में दिव्‍यांग जोड़ों को राशि का प्रदाय

18. ( *क्र. 2421 ) श्रीमती नंदनी मरावी : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या जनपद पंचायत कुण्‍डम अंतर्गत वर्ष 2012 में मुख्‍यमंत्री कन्‍यादान योजना के अंतर्गत तीन ऐसे जोड़ों की शादी कराई गई थी, जिनमें लड़का-लड़की दोनों विकलांग थे? (ख) प्रश्‍नांश (क) जोड़ों को शासन के प्रावधान अनुसार रोजगार हेतु 50000/- रूपये प्रदाय किये जाने हेतु प्रश्‍नकर्ता द्वारा पत्र क्र. 458 दिनांक 14.12.2015 को विभागीय मंत्रीजी को लिखा गया था, किन्‍तु अभी तक योजना अनुसार राशि प्रदाय नहीं की गई? कब तक राशि प्रदाय कर दी जावेगी?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जी हाँ। (ख) जी हाँ। दिनांक 20 फरवरी 2016 को आर.टी.जी.एस. के माध्यम से संबंधितों के खाते में राशि जमा कर दी गई है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

श्रीमती नंदनी मरावी- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय के जवाब से मैं पूरी तरह संतुष्‍ट हूँ और इसके लिए मैं माननीय मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्‍यवाद देती हूँ ।

प्रश्‍न संख्‍या- 19- श्री सोहनलाल बाल्‍मीक (अनुपस्थित)

ग्राम हाट बाजार योजनांतर्गत राशि की स्‍वीकृति

20. ( *क्र. 903 ) श्री गोवर्धन उपाध्‍याय : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विदिशा जिले के सिरोंज एवं लटेरी विकासखण्‍ड में दिनांक 26.06.2013 से 31.03.2015 तक मुख्‍यमंत्री ग्राम हाट बाजार योजना के तहत किन-किन ग्राम पंचायतों में कितने कार्य एवं कितनी राशि स्‍वीकृत की गई है? (ख) प्रश्‍नांश (क) के अनुसार उनमें से कितने कार्य पूर्ण हुए एवं कितने कार्य अपूर्ण हैं? स्‍वीकृत कार्य में कितनी राशि का भुगतान किया गया है? भुगतान हेतु शेष राशि कितनी है? अपूर्ण कार्यों को कब तक पूर्ण किया जावेगा? (ग) प्रश्‍नांश (क) अनुसार किस-किस ग्राम पंचायत का ऑडिट हुआ है? क्‍या ऑडिट रिपोर्ट में भ्रष्‍टाचार होना पाया है? यदि हाँ, तो उस पर क्‍या कार्यवाही की गई?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) एवं (ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार(ग) सिरोंज विकासखण्ड में प्रश्नांश में दर्शित अवधि में ग्राम पंचायतों का ऑडिट नहीं हुआ है। लटेरी विकासखण्ड में ऑडिट पूर्ण हो चुका है। जी नहीं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

''परिशिष्ट - तीन''

श्री गोवर्धन उपाध्‍याय- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूँ कि परिशिष्‍ट 7 में उन्‍होंने पंचायतों के निर्माण के संबंध में बताया है । हाट और बाजार के संबंध में तो यह काम कब तक पूरे होंगे । मेरा दूसरा प्रश्‍न यह है कि पिछले 3 वर्षों से सिरोंज ब्‍लॉक का अभी तक ऑडिट नहीं हुआ. क्‍या कारण है कि अभी तक ऑडिट नहीं हुआ ? इस संबंध में भी आप जानकारी देंगे और सबसे प्रमुख प्रश्‍न है परिशिष्‍ट में दिये गये क्रमांक- 7 एवं 8 में इन गांवों के नाम ईसरवास, जिसमें 13,74,000/- रू. खर्च हुए हैं. एक बटौली ग्राम है, जिसमें 13,94,000/- रू. खर्च हुए हैं. जबकि इन दोनों ग्रामों में न हाट लगता है और न ही बाजार लगता है और काम पूरा बताया गया है. मैं यह जानना चाहता हूँ कि यह कैसे हो गया है ? हाट बाजार लगता नहीं है. आपने मंजूरी दे दी एवं काम भी पूरा हो गया.

श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिलों से जो प्रस्‍ताव एवं मांग आती है. उसके आधार पर, जहां बाजार लगने की, हाट लगने की परम्‍परा है. वहां पर हाट बाजार स्‍वीकृत किये जाते हैं. मैं स्‍थान तय नहीं करता हूँ, स्‍थान तो अधिकारी तय करते हैं. जो जिलों से रिपोर्ट आती है, उसके आधार पर वे तय करते हैं. अब यदि वहां पर हाट बाजार उपयोगी नहीं हैं और उसकी स्‍वीकृति दे दी गई है, उसके औचित्‍य को भी देख लेते हैं, जो अपूर्ण हैं, इसके लिये हम शीघ्रातिशीघ्र 3 महीने में अपूर्ण कार्य पूर्ण करने की कोशिश करेंगे. ऑडिट का जहां तक प्रश्‍न है, लटेरी का ऑडिट हो गया है, बाकी के जगह की प्रक्रिया चल रही है. इस महीने ऑडिट की प्रक्रिया कुछ पूरी हो जायेगी.

श्री गोवर्धन उपाध्‍याय - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से यह जानना चाहता हूँ कि कम से कम यह तो जांच करा लें कि जहां जंगल के गांव हैं, वहां हाट भी नहीं लग रहा है और 19 लाख रूपये कोई साधारण नहीं हैं, जो खर्च हो गए. दोनों में हुआ है और बाकी के जो 7 ग्राम पंचायतों में जहां हाट लगते हैं, उनका काम पूरा नहीं हुआ है. काम कई जगह स्‍टार्ट भी नहीं हुआ पर जहां पर हाट बाजार नहीं लग रहे हैं, वहां पर काम पूरा बता रहे हैं तो आप उसकी जांच करवा लें.

श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें निर्माण एजेन्‍सी ग्राम पंचायतें थीं. हो सकता है कि जहां सरपंच, सचिव वगैरह ज्‍यादा सक्षम हों, उन्‍होंने काम करवा लिया ले‍किन उसके बावजूद भी मैं जांच करवा लूँगा कि एक जगह जल्‍दी क्‍यों पूर्ण हो गए हैं ? और दूसरी जगह अभी तक तक क्‍यों अपूर्ण हैं ?

प्रश्‍न क्रमांक - 21 (अनुपस्थित)

प्रश्‍न 22. ( *क्र. 3681 ) श्री राजकुमार मेव : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) खरगौन जिलान्‍तर्गत महात्‍मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के तहत वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 से प्रश्‍न दिनांक तक विकासखण्‍डवार एवं जिलेवार कौन-कौन से कार्य, कितनी-कितनी लागत के स्‍वीकृत किये गये? कितने कार्य पूर्ण हुये, कितने कार्य अपूर्ण हैं, कितने अप्रारंभ हैं? अपूर्ण, अप्रारंभ रहने का कारण बतावें। (ख) म.गा.रो.गा. योजना के तहत विगत वर्षों के वर्षवार कितने कार्य अपूर्ण हैं, अपूर्ण रहने का कारण बतावें? कब तक कार्यों को पूर्ण कराया जावेगा? (ग) क्‍या मनरेगा में अधिक कार्य अपूर्ण रहने से नये कार्यों की स्‍वीकृति पर प्रतिबंध लगाया गया है? क्‍या ग्राम पंचायत में पूर्व वर्षों के अपूर्ण कार्य नहीं होने के उपरान्‍त भी नये कार्य स्‍वीकृत नहीं किये जा रहे हैं?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) खरगौन जिलान्‍तर्गत महात्‍मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के तहत वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 से प्रश्‍न दिनांक तक कुल 5796 कार्य लागत रू. 6174.30 लाख के स्‍वीकृत किये गये हैं। स्‍वीकृत कार्यों में से 238 कार्य पूर्ण, 5465 कार्य अपूर्ण तथा 93 कार्य अप्रारंभ हैं। महात्‍मा गांधी नरेगा योजना श्रमिकों की मॉग एवं जॉबकार्डधारियों की उपलब्‍धता पर निर्भर होने के कारण अपूर्ण/अप्रारंभ हैं। विकासखण्‍डवार जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र 1 अनुसार है। (ख) म.गा.रो.गा. योजना के तहत विगत वर्षों के कुल 13095 कार्य अपूर्ण हैं, वर्षवार जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र 2 अनुसार है। कार्यों के अपूर्ण रहने का कारण उत्‍तरांश '' अनुसार है। कार्यों के पूर्ण होने की निश्‍चित समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। (ग) जी नहीं।

परिशिष्ट - ''चार''

श्री राजकुमार मेव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके द्वारा मंत्री जी से यह पूछना चाहूँगा कि महेश्‍वर में अपूर्ण कार्य कब तक पूर्ण हो जायेंगे. 953 अपूर्ण कार्य हैं. उसकी क्‍या मंत्री जी समय-सीमा बतायेंगे कि वे कब तक पूर्ण हो जायेंगे और नये कार्य की स्‍वीकृति कब तक दे पायेंगे ?

श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि उत्‍तर में बताया है. माननीय सदस्‍य स्‍वयं इस बात से अवगत है कि बड़ी संख्‍या में जो कार्य स्‍वीकृत हैं, वे अभी अपूर्ण हैं. अध्‍यक्ष महोदय, विभाग ने तय किया है कि जो कार्य अभी बड़ी संख्‍या में अपूर्ण हैं. यदि उनकी उपयोगिता है तो पहले उन कामों को हाथ में लेकर पूर्ण किया जाये, उसके बाद ही नये कार्य स्‍वीकृत किये जायें. हम लोगों ने 15 लाख रूपये तक के कार्य, स्‍वीकृत करने के जो प्रशासनिक अधिकार हैं, वे हमने ग्राम पंचायतों को दिये थे और पंचायतों ने बहुत बड़ी संख्‍या में काम अपने-अपने ग्राम पंचायतों के अन्‍तर्गत मंजूर कर लिये हैं और इस कारण से अभी निश्चित रूप से तुलनात्‍मक रूप से यदि हम देखें तो काफी कार्य अभी अपूर्ण हैं. इस कारण से, मैं प्रयास करूँगा कि पूर्व में जो स्‍वीकृत कार्य है, वे जल्‍दी से जल्‍दी हो जायें. उसके बाद, जैसा माननीय विधायक जी बताएंगे तो उनकी प्राथमिकता के आधार पर, हम कार्य स्‍वीकृत कर देंगे.

प्रश्‍न 23. ( *क्र. 2939 ) श्री महेन्‍द्र सिंह : क्या किसान कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का अनुमोदन संबद्ध विकासखण्‍ड स्‍तरीय स्‍थाई कृषि समिति से कराया जाना आवश्‍यक है एवं अनुमोदित विषयों के पारित प्रस्‍ताव पर कार्यवाही की जानी भी जरूरी है? (ख) यदि हाँ, तो विकासखण्‍ड गुनौर में कितनी बैठकें हुईं? किस बैठक में किस-किस योजना के प्रस्‍ताव पारित हुये व वर्ष 2015-16 में कितने हितग्राही को लाभ मिला? (ग) क्‍या कृषि विभाग द्वारा संचालित योजना नलकूप, खनन पर प्रतिबंध है? यदि हाँ, तो राज्‍य शासन का आदेश क्रमांक व दिनांक बताएं? क्‍या योजना के लाभ हेतु शासन द्वारा लक्ष्‍य निर्धारित होते हैं? यदि हाँ, तो विकासखंड गुनौर को कितने लक्ष्‍य प्राप्‍त हुये?

किसान कल्याण मंत्री ( श्री गौरीशंकर बिसेन ) : (क) जी हाँ। (ख) वर्ष 2015-16 में विकासखण्ड गुनौर में 4 बैठकें आयोजित हुईं। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) विभाग द्वारा प्रतिबंध नहीं है, किन्तु कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी जिला पन्ना के आदेश क्रमांक/394/रीडर/2015/पन्ना दिनांक 13.10.2015 द्वारा पन्ना जिले को जल अभावग्रस्त घोषित कर नलकूप खनन पर दिनांक 30.6.2016 तक प्रतिबंध लगाया गया है। योजना के लाभ हेतु शासन द्वारा लक्ष्य निर्धारित होते हैं। विकासखण्ड गुनौर को नलकूप खनन हेतु 22 प्रकरणों के लक्ष्य दिये गये हैं।

श्री महेन्‍द्र सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने लिखा था कि जनपद में कृषि समिति से कौन-कौन सी मीटिंग करवाई जाती है ? कितनी मीटिंग हुई हैं ? उन्‍होंने 4 लिखा है. मेरा आशय यह था कि उन्‍होंने जो अनुमोदन करवाया, वह कृषि की जो योजनाएं हैं, उनका अनुमोदन करवाते हैं. लेकिन किन हितग्राहियों को मिलना है, क्‍या चयन होना है और किन-किन हितग्राहियों को लाभ होना है. उस लिस्‍ट का अनुमोदन करवाया जाता है या क्‍या करवाया जायेगा ?

श्री गौरीशंकर बिसेन -- अध्यक्ष महोदय, जनपद की कृषि समिति में जिनके अनुमोदन किये जाने थे, वह सब कराये गये हैं. मैं माननीय सदस्य से जानना चाहता हूं कि किस संदर्भ का आप अनुमोदन चाहते हैं.

श्री महेन्द्र सिंह -- अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से एक निवेदन करना चाहता हूं कि जो हितग्राही चयन की प्रक्रिया है, उसमें किट्स देने की जो योजना है, किट किस को मिलती है, किस को अधिकारी देते हैं. मेरा निवेदन यह है कि हितग्राही चयन की जो लिस्ट बने, वह अनुमोदन हो जाये या देने के बाद भी अनुमोदन हो जाये तो पता लगे कि किस किस को किस मापदण्ड में दिया गया है.

श्री गौरीशंकर बिसेन -- अध्यक्ष महोदय, विधायक जी के प्रश्न के अनुसार हमने हलधर योजना में 31, सोयाबीन मिनिकिट में 500, अन्नपूर्णा योजना में 693, सूरजधारा योजना में 915, बीजग्राम में 500, कम्पोजिट नर्सरी में 856, बलराम जलाशय में 7,यह 9.7.2015 की बैठक में और 26.8.2015 की बैठक में सीड ड्रिल में 7, रोटावेटर 1, स्प्रिंकलर 4 और चेफकटर 25. इसी के साथ साथ उसके बाद की बैठक कोरम के अभाव में स्थगित हुई. 8.12.2015 की बैठक में दलहन कलस्टर प्रदर्शन 800, प्रेशर यंत्र 40, गेहूं कलस्टर प्रदर्शन 100, सूरजधारा योजना 672, अन्नपूर्णा योजना 175, मिनीकिट 330. इसी के साथ साथ जो राज्य पोषित नलकूप खनन के प्रस्ताव थे, इनके अनुमोदन नहीं हुए हैं और इनके जिले को 22 का टारगेट दिया गया है.

श्री महेन्द्र सिंह -- अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न का आशय शायद समझ में नहीं आया. मैं यह निवेदन कर रहा हूं कि जो हितग्राही हैं, उनकी लिस्ट का अनुमोदन ग्रामवाइज नहीं करवाया जाता है, केवल योजना का अनुमोदन करवाया जाता है. जो योजनायें दी जाती है, कितनी योजनायें कहां स्वीकृत की गईं. मैं चाहता हूं कि हितग्राहियों की लिस्ट बने, उसका भी अनुमोदन करवाया जाये.

श्री गौरीशंकर बिसेन -- अध्यक्ष महोदय, अब तो 1.1.2016 से ऑन लाइन पंजीयन की प्रक्रिया प्रारम्भ हो गई है. इसलिये जैसे ऑन लाइन में ड्रिप, स्प्रिंकलर, पाइप लाइन और जो हमारे कृषि यंत्र हैं, रेनगन, ट्रेक्टर मशीन, पावर चलित जो शक्ति यंत्र हैं. यह सब हम ऑन लाइन पर पंजीयन कर रहे हैं. इसलिये यह जो पहले असुविधा थी, वह अब नहीं होगी और पहला आओ एवं पहला पाओ को भी रखा है. इसके बाद यदि ज्यादा आवेदन आयेंगे, तो उसके बारे में विचार करेंगे.

श्री महेन्द्र सिंह -- मंत्री जी, धन्यवाद.

श्री घनश्याम पिरोनियां -- अध्यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र भाण्डेर में मैंने मंत्री जी से निवेदन किया था कि 2013-14,2014-15 और 2015-16 में..

अध्यक्ष महोदय -- इससे संबंधित ही पूछिये.

श्री घनश्याम पिरोनियां -- अध्यक्ष महोदय, जी हां, इसी से संबंधित है स्प्रिंकलर वगैरह जो हैं, यह वहां पर बांटे नहीं गये हैं और उन्होंने वहां से ठीक प्रकार से जानकारी नहीं दी है. गहरी जुताई का भी उसमें लिखा था, वह भी जानकारी नहीं दी गई है. मेरा निवेदन है कि उसमें अगर मंत्री जी बता देंगे, तो हमारे क्षेत्र के कृषकों का भला हो जायेगा.

अध्यक्ष महोदय -- यह प्रश्न ही उद्भूत नहीं होता.

श्री गौरीशंकर बिसेन -- अध्यक्ष महोदय, यह प्रश्न से उद्भूत नहीं होता, लेकिन वह लिखकर दे दें.

अध्यक्ष महोदय -- मंत्री जी कह रहे हैं कि यह प्रश्न से उद्भूत नहीं होता. लेकिन आप उनको लिखकर दे दें.

श्री गौरीशंकर बिसेन -- अध्यक्ष महोदय, यह प्रश्न से उद्भूत नहीं होता, लेकिन विधायक जी लिखकर दे दें, मैं उनको जानकारी से अवगत करा दूंगा.

श्री घनश्याम पिरोनियां -- जी. मंत्री जी, धन्यवाद.

स्‍वास्‍थ्‍य विभाग को आवंटित जमीन पर निर्माण कार्य

24. ( *क्र. 3247 ) श्रीमती अनीता नायक : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र पृथ्‍वीपुर को राजस्‍व विभाग के द्वारा कितनी भूमि आवंटित की गई है एवं स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के द्वारा कितनी भूमि पर निर्माण कार्य किया गया है एवं कितनी भूमि खाली पड़ी है? (ख) खाली पड़ी भूमि पर लोगों के द्वारा कितनी भूमि पर अवैध रूप से अतिक्रमण किया गया है? जिन लोगों के द्वारा अवैध रूप से अतिक्रमण किया गया है, उनके विरूद्ध क्‍या कार्यवाही कब तक की जायेगी?

राजस्व मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) सामुदायिक स्वस्थ्य केन्द्र पृथ्वीपुर को ग्राम पृथ्वीपुर की शासकीय भूमि 1.068 हेक्टेयर आवंटित की गई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पृथ्वीपुर को आवंटित की गई भूमि में से 0.600 हेक्टेयर पर स्वास्थ्य विभाग के शासकीय भवन निर्मित हैं एवं 0.468 हेक्टेयर भूमि मौके पर खाली पड़ी है। (ख) मौके पर खाली पड़ी भूमि पर वर्तमान में कोई अतिक्रमण नहीं है शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

 

श्रीमती अनीता नायक -- अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, पृथ्वीपुर को राजस्व विभाग के द्वारा कितनी भूमि आवंटित की गयी है एवं स्वास्थ्य विभाग के द्वारा कितनी भूमि पर निर्माण कार्य किया गया है एवं कितनी भूमि खाली पड़ी है.

अध्यक्ष महोदय -- इसका उत्तर तो लिखित में आ गया है. इसके अलावा आपको और कोई जानकारी चाहिये, तो वह पूछिये.

श्रीमती अनीता नायक -- अध्यक्ष महोदय, जी. वहां पर जो नगरपालिका में दुकानें बनाई गई हैं, उसका वह न किराया देते हैं और नगरपालिका वाले अपने कब्जे में किये हुए हैं और कुछ जमीन खाली पड़ी है, उसमें खेती हो रही है. तो हम चाहते हैं कि उस जमीन को कब्जे में लिया जाय.

अध्यक्ष महोदय -- उस पर अतिक्रमण है.

श्री रामपाल सिंह -- अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायिका जी का जो प्रश्न है, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, पृथ्वीपुर में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण की बात कही है. हमें जो जानकारी आई है, उसमें अतिक्रमण नहीं है. फिर भी माननीय सदस्य अगर लिखकर देंगी, कोई अतिक्रमण है, तो तुरन्त अतिक्रमण हटवाया जायेगा और उसका सीमांकन भी करवाया जायेगा.

अध्यक्ष महोदय -- आप लिखकर दे दीजिये. यदि कोई अतिक्रमण होगा, तो हटवा देंगे.

श्रीमती अनीता नायक -- अध्यक्ष महोदय, जी.

 

 

 

प्रधानमंत्री सड़क योजनांतर्गत सड़क निर्माण

25. ( *क्र. 3870 ) श्रीमती संगीता चारेल : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधान सभा क्षेत्र सैलाना अंतर्गत वर्ष 2013-14 से आज दिनांक तक प्रधानमंत्री सड़क योजना अंतर्गत कुल कितनी सड़कों का निर्माण किया गया? सड़कों के नाम, लंबाई एवं लागत सहित जानकारी उपलब्‍ध करावें। (ख) क्‍या सैलाना विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत प्रधानमंत्री सड़क योजना से निर्मित भाटखेड़ी से कोठारिया सड़क मार्ग में ठेकेदार द्वारा गुणवत्‍ताविहीन कार्य किया गया? यदि हाँ, तो शासन द्वारा दोषी ठेकेदार एवं अधिकारी के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई? यदि नहीं, तो क्यों? (ग) क्‍या शासन द्वारा भाटखेड़ी से कोठारिया सड़क मार्ग में हुये गुणवत्‍ताविहीन निर्माण कार्य की जाँच क्षेत्रीय विधायक को टीम में सम्मिलित कर करवाई जायेगी?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) विधानसभा क्षेत्र सैलाना में वर्ष 2013-2014 से आज दिनांक तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजनांतर्गत कुल 51 सड़कों का निर्माण किया गया है। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी नहीं, सैलाना विधानसभा क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजनांतर्गत भाटखेड़ी से कोठारिया सड़क निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार कराया गया है। उक्त सड़क का निरीक्षण स्टेट क्वालिटी मानीटर द्वारा विभिन्न स्तरों पर किया गया है, जिसमें उनके द्वारा सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता को संतोषप्रद श्रेणी में वगीकृत किया गया है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) उत्तरांश (ख) के प्रकाश में कार्य का निरीक्षण स्वतंत्र स्टेट क्वालिटी मानीटर द्वारा किया जा चुका है एवं कार्य संतोषजनक पाया गया। अतः अन्य किसी जाँच की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती।

परिशिष्ट - ''पाँच''

श्रीमती संगीता चारेल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, बहुत ही महत्वपूर्ण व जनहित से जुड़ा हुआ मामला है. सड़कों की गुणवत्ता यदि बनी रहेगी तो सरकार की छवि में और अधिक निखार आयेगा. देखने में आया है कि सड़क निर्माण के 3 से 6 माह के भीतर सड़कें उखड़ना प्रारंभ हो जाती है, ऐसे में जनता का आक्रोश जनप्रतिनिधियों के ऊपर रहता है.मंत्री जी के माध्यम से विभाग द्वारा जो जानकारी मुझे दी गई है उससे मैं संतुष्ट नहीं हूं. मैं मंत्री जी से जानना चाहती हूं कि सैलाना विधानसभा में जो सड़कों का निर्माण किया गया है उसमें पुलिया क्षतिग्रस्त है सड़कों की चौड़ाई भी संतोषजनक नहीं है. हम चाहते हैं कि मंत्री जी इस मामले मे जांच कराने की घोषणा करें.

 

 

श्री गोपाल भार्गव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, स्टेट क्वालिटी मानीटर के द्वारा इस सड़क की गुणवत्ता की जांच कराई गई थी. उस रिपोर्ट में सड़क का बनना सही पाया गया है. पुलिया के बारे में जरूर विषय आया था तो माननीय सदस्या जैसा चाहेंगी वैसा ही पुलिया निर्माण का कार्य कर देंगे.

श्रीमती संगीता चारेल-- मंत्री जी को धन्यवाद.

अध्यक्ष महोदय-- प्रश्नकाल समाप्त.

 

 

 

 

(प्रश्नकाल समाप्त)

 

 

 

 

 

 

 

श्री जितू पटवारी (राऊ)-- अध्यक्ष महोदय, कल जिस तरीके से विधानसभा के सामने एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के बेटे को बस ने टक्कर मारी और 1 घंटे तक वह तड़पता रहा, उसकी लाश पड़ी रही, आज के सारे अखबारों में आया है. मैं समझता हूं कि वहां पर जो भी अधिकारी ड्यूटी पर तैनात थे, उनकी लापरवाही का इससे बड़ा कोई दूसरा उदाहरण नहीं हो सकता है.

अध्यक्ष महोदय-- आपका विषय आ गया है. भविष्य में इसको देखेंगे कि यह व्यवस्था ठीक हो, और उनके परिवार के साथ में हमारी पूरी संवेदनायें हैं.

श्री जितू पटवारी -- मुख्यमंत्री का काफिला निकला, एक घंटे तक उसका शव पड़ा रहा जिस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया .

अध्यक्ष महोदय-- कृपा करके उसमें आप राजनीति न करें.

 

 

 

 

11.31 बजे

नियम 267-क- के अधीन विषय

अध्यक्ष महोदय--निम्नलिखित शून्यकाल की सूचनायें सदन में पढ़ी हुई मानी जायेंगी.

1.      श्री दिनेश राय

2.      श्री रामनिवास रावत

3.      श्री(इंजी.)प्रदीप लारिया

4.      डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय

5.      श्री देवेन्द्र वर्मा

6.      पंडित रमेश दुबे

7.      श्री दुर्गालाल विजय

8.      श्री नारायण सिंह पंवार

9.      श्री घनश्याम पिरौनिया

10. श्री प्रहलाद भारती.

श्री बाला बच्चन,प्रभारी नेता प्रतिपक्ष -- माननीय अध्यक्ष महोदय, कल ओलावृष्टि बहुत हुई है, बड़वानी, छिंदवाड़ा, बैतूल, डिण्डोरी, मंडला, सिवनी इत्यादि जिलों में बहुत ओलावृष्टि हुई है और किसानों की फसलों का बहुत नुकसान हुआ है. इतनी आंधी और तूफान आये हैं कि बिजली के खंबे भी उखड़ गये. मैं आपके माध्यम से सरकार से निवेदन करना चाहता हूं कि जल्दी से जल्दी सरकारी तंत्र उन किसानों के खेतों तक पहुंचे और रिपोर्ट प्रस्तुत कर पीड़ित किसानों को मुआवजे दिलाने की कार्यवाही करे.

किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री(श्री गौरीशंकर बिसेन) --माननीय अध्यक्ष महोदय, जिन जिन जिलों में ओला गिरा है वहां पर सर्वे का कार्य प्रारंभ हो चुका है. हमने सिवनी में, हमारे केवलारी के विधायक यहां पर बैठे हुये हैं . नुकसान का जो मोटा अनुमान हमारे पास में आया है उसके हिसाब से सरकार कार्य कर रही है. जानकारी नहीं देना थी चूंकि नेता प्रतिपक्ष ने मामले को उठाया है इसलिये मैं अवगत कराना चाहता हूं.सर्वे कराया जा रहा है. राजस्व मंत्री जी भी यहां पर बैठे हैं हम दोनों बैठकर के इस पर चर्चा कर रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय--बाला बच्चन जी आपकी बात को माननीय मंत्री जी ने संज्ञान(Cognizance) में ले लिया है.

श्री बाला बच्चन- आपको बहुत बहुत धन्यवाद.

श्री रामनिवास रावत--माननीय अध्यक्ष महोदय श्योपुर जिले में 66 लोगों की आंखों के आपरेशन किये गये थे उनमें 16 की आंख पूरी तरह से खराब हो चुकी हैं. इस बात को मैंने कई बार उठाया भी है और ध्यानाकर्षण के माध्यम से मामले को लगाया भी है. मैं चाहता हूं कि ध्यानाकर्षण स्वीकार कर ले. सरकार इसको मानती नहीं है. यहां पर श्योपुर के विधायक बैठे हैं भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं ,मंत्री जी उनसे पूछ लें कि उनके पीएसओ की मां की आंखें आज भी खराब हैं.

अध्यक्ष महोदय-- ध्यानाकर्षण की चर्चा कक्ष में कर लें.

श्री रामनिवास रावत-- ध्यानाकर्षण तो मैंने दिया हुआ है.

अध्यक्ष महोदय-- इसीलिये कह रहा हूं कि आप मेरे कक्ष में आ जायें. वहां चर्चा कर लें.

श्री रामनिवास रावत-- प्रदेश में लोगों की आंखें खराब हो रही हैं, स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थायें इतनी बेकार हो गई हैं कि ठीक से आपरेशन नहीं कर पा रहे हैं. पहले बड़वानी अब श्योपुर, कम से कम ऐसी व्यवस्था तो करा दें कि लोगों की रोशनी न जाये.स्वास्थ्य मंत्री जी क्या आप रोशनी लेते रहेंगे, लोगों की आंखें फोड़ते रहोगे लोगों की.

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री (डॉ.नरोत्तम मिश्रा)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, सम्मानीय सदस्य का परसों ही दूसरे नंबर पर प्रश्न है. श्योपुर और बड़वानी की आंख से जुड़ा हुआ मामला है. हालांकि मैं परसों नहीं हूं. मेरा पारिवारिक एक कार्यक्रम है. लेकिन उसके बाद भी आप लेंगे तो सरकार को चर्चा कराने में कोई दिक्कत नहीं है. बड़वानी के दोषियों को सजा मिल गई और मुख्यमंत्री जी ने 5 हजार रूपये महीने से लेकर के जितनी मदद कर सकते थे कर दी है उसके बाद भी सम्मानीत सदस्य जिस रूप में चर्चा चाहेंगे हम तैयार हैं.

 

 

 

 

 

 

 

11.34 बजे.

पत्रों का पटल पर रखा जाना.

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय की वैधानिक आडिट रिपोर्ट वर्ष 2012-13

किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री (श्री गौरीशंकर बिसेन) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं, जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम, 1963 की धारा 40 की उपधारा (3) की अपेक्षानुसार जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर(मध्यप्रदेश) की वैधानिक आडिट रिपोर्ट वर्ष 2012-13 (उप संचालक, स्थानीय निधि संपरीक्षा, जबलपुर (मध्यप्रदेश) द्वारा प्रेषित प्रमुख आपत्तियां, स्पष्टीकरण हेतु उत्तर एवं प्रमण्डल की टिप्पणी) पटल पर रखता हूं.

 

 

(क) रानी दुर्गावती विश्‍वविद्यालय, जबलपुर (01 जुलाई, 2010 से 30 जून, 2011 को समाप्‍त होने वाले वर्ष) का वार्षिक प्रतिवेदन 2010-2011 एवं (01 जुलाई, 2013 से 30 जून, 2014 को समाप्‍त होने वाले वर्ष) का वार्षिक प्रतिवेदन 2013-2014.

 

 

 

(ख) महर्षि पाणिनि संस्‍कृत एवं वैदिक प्रतिवेदन सन् 2011-2012, चतुर्थ वार्षिक प्रतिवेदन सन् 2012-2013 एवं वार्षिक प्रतिवेदन सन् 2013-2014.

मध्‍यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड का त्रयोदश वार्षिक प्रतिवेदन वित्‍तीय वर्ष 2014-2015.

 

 

 

 

 

 

ध्‍यानाकर्षण

सागर जिले के सिदगुवां एवं चनाटोरिया औद्योगिक इकाईयों द्वारा स्थानीय युवकों को रोजगार न दिया जाना.

इंजी. प्रदीप लारिया-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी ध्‍यान आकर्षण की सूचना का विषय इस प्रकार है-

श्री अंतर सिंह आर्य (श्रम मंत्री)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, किसी भी श्रम कानून, नियम अथवा विभागीय निर्देश में इस आशय का प्रावधान नहीं है कि किसी औद्योगिक क्षेत्र अथवा उद्योग विशेष में किस क्षेत्र के व्‍यक्तियों को रोजगार उपलब्‍ध कराया जाना चाहिये, अतएव वांछित जानकारी श्रम विभाग द्वारा संधारित नहीं की जाती है.

श्री प्रदीप लारिया (नरयावली)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उद्योग संवर्धन नीति के तहत जैसे कि मध्‍यप्रदेश शासन की यह इच्‍छा है कहीं भी फैक्‍ट्री स्थित होती है तो वहां पर 50 प्रतिशत स्‍थानीय लोगों को रोजगार उपलब्‍ध कराना चाहिये, यह शासन की मंशा है माननीय अध्‍यक्ष महोदय. लेकिन हमारे यहां जो चनाटोरिया, सिदगुआ में जो फैक्ट्रियां हैं उसमें से जो मुख्‍य फैक्‍ट्री है, घड़ी साबुन फैक्‍ट्री, उसमें लगभग 1500 कर्मचारी कार्यरत हैं, उसमें 400 आफीसयल का स्‍टॉफ है और लगभग 1100 श्रमिक हैं, लेकिन इस 400 के आफीसियल के स्‍टॉफ में केवल 5 से 8 प्रतिशत स्‍थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है, वहीं श्रमिक वाले में भी बाहर से उत्‍तर प्रदेश से, बिहार से लोग काम करने के लिये आ रहे हैं, स्‍थानीय लोगों की उपेक्षा हो रही है. वैसे ही बुंदेलखंड में रोजगार के कम अवसर हैं और जब कोई फैक्‍ट्री आती है तो लोगों को आशा बनती है कि स्‍थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा. मेरा माननीय मंत्री जी से निवेदन है आप वहां का परीक्षण करा लें, उद्योग विभाग और श्रम विभाग दोनों उसका परीक्षण करा लें और उसमें आप जब परीक्षण करायेंगे तो यह पायेंगे कि 5 से 10 प्रतिशत स्‍थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है, बाकी बाहर के लोग काम कर रहे हैं.

 

मेरा माननीय अध्‍यक्ष महोदय आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि क्‍या श्रम विभाग और उद्योग विभाग की संयुक्‍त टीम वहां पर जाकर सिद्गुआ में औद्योगिक क्षेत्र की जितनी भी फैक्‍ट्री हैं उनका परीक्षण करेंगे, खास तौर पर घड़ी फैक्‍ट्री का और उसमें जो रोजगार मिल रहा है उस रोजगार का परीक्षण करके क्‍या स्‍थानीय लोगों को रोजगार सुनिश्चित करायेंगे.

श्री अन्तर सिंह आर्य-- अध्यक्ष महोदय, यह प्रश्न उद्योग विभाग से संबंधित है. क्योंकि उद्योग विभाग और श्रम विभाग एक दूसरे के पूरक हैं. माननीय सदस्य ने जो ध्यानाकर्षण लगाया वह महत्वपूर्ण है. हम उद्योग विभाग से, माननीय मंत्रीजी से अनुरोध करेंगे कि संयुक्त रुप से वहां पर भौतिक सत्यापन करे और जो भी नियमानुसार होगा, वह कार्रवाई करेंगे.

इंजी.प्रदीप लारिया-- अध्यक्ष महोदय, यह श्रम विभाग से भी जुड़ा हुआ विषय है.

अध्यक्ष महोदय-- इसी से संबंधित होना चाहिए.

इंजी.प्रदीप लारिया-- इसी से जुड़ा है. मेरा इसमें कहना है कि जो श्रमिक इनने रखे हैं, उसमें नियम है कि 8 घंटे काम कराना चाहिए, उनसे 12 घंटे काम करा रहे हैं. बच्चों से काम करा रहे हैं. मेरा निवेदन है कि चूंकि शासन की संयुक्त जिम्मेदारी है. मंत्रीजी समय सीमा बता दें कि कितने दिन में भौतिक सत्यापन करा लेंगे और दूसरा जो बच्चों से काम करा रहे हैं और 10-12 घंटे काम करा रहे हैं, उसके बारे में श्रम विभाग क्या कार्रवाई करेगा.

अध्यक्ष महोदय-- मंत्रीजी, एक मिनट रुकें, शैलेन्द्र जैन भी प्रश्न कर लें, फिर दोनों का उत्तर दे दीजिए.

श्री शैलेन्द्र जैन-- अध्यक्ष महोदय, चूंकि यह हमारे जिले का विषय है. यह हमारी विधानसभा क्षेत्र से लगा हुआ है. यह देखने में आया है कि बाहर के जो मजदूर हैं, जिसमें सेमी स्किल्ड,अन स्किल्ड और स्किल्ड हैं, उनको बिना पुलिस वेरिफिकेशन के रख लिया जाता है. वहां पर श्रम कानूनों का उल्लंघन हो रहा है. इससे वहां पर अपराध बढ़ने की संभावना हमेशा बनी रहती है. अध्यक्षजी, जो लेबर सागर में उपलब्ध है, वही लेबर हम यूपी और बिहार से लेकर आयें, यह प्राकृतिक न्याय के विपरित है. इस दिशा में आप आसंदी से जरुर इस पर घोषणा कराईये.

अध्यक्ष महोदय-- मंत्रीजी ने स्वयं ही घोषणा कर दी है.

श्री शैलेन्द्र जैन--धन्यवाद.

श्री अन्तर सिंह आर्य-- अध्यक्ष महोदय,मैं आपके माध्यम से दोनों माननीय सदस्यों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि जहां कार्य के घंटे से अधिक कार्य हमारे श्रमिक भाईयों से लिया जा रहा है, इसकी हम एक माह में जांच करा लेंगे.

अध्यक्ष महोदय-- मंत्रीजी, जो लेबर बाहर से आयी हैं, उनका पुलिस वेरिफिकेशन भी जरुर हो.

इंजी.प्रदीप लारिया--अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्रीजी से पूछना चाहता हूं कि क्या विधायक को भी परीक्षण के समय साथ रखा जायेगा?

श्री अन्तर सिंह आर्य-- अध्यक्ष महोदय, साथ में रख लेंगे.

 

 

दतिया जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में अनियमितता होने.

 

श्री घनश्याम पिरोनियां(भाण्डेर)अध्यक्ष महोदय, मेरी ध्यानाकर्षण सूचना का विषय इस प्रकार है--

 

 

 

 

 

 

लोक निर्माण मंत्री (श्री सरताज सिंह) - अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

 

 

श्री घनश्याम पिरोनिया -- माननीय अध्यक्ष महोदय मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि मैं भाण्डेर में 24 घंटे घूम रहा हूं तो यह माननीय मंत्री जी को अधिकारियों ने जो पढ़ने के लिए दिया है वह सही है या मैं जो कह रहा हूं वह सही है. मुझे बहुत दुख है कि जो भी जानकारी अधिकारियों ने मंत्री जी को दी है वह संभवतया असत्य है, क्योंकि वहां से न तो बिजली के खंबे हटाये गये हैं. मैं यहां पर निवेदन करूंगा कि विभाग की तरफ से मुझे एक पत्र आया था उ समें ए.सी. में बैठे हुए इनके विभाग के अधिकारियों ने मुझे लिखकर दिया था कि वहां पर कहीं भी दुर्घटना नहीं हो सकती है. वहां पर दुर्घटना इसलिए हो रही हैं कि वाहन चलाने वाले लोग है वह तेज गति से वाहन चलाते हैं, मैं कहूंगा कि वह अधिकारी वहां पर सायकिल ही चलाकर दिखा दें.

अध्यक्ष महोदय मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि इन कंपनियों को वहां पर संरक्षण देने की आवश्यकता क्यों है. मैं यह कहना चाहता हूं कि समय सीमा में होने के बाद भी, अभी हमारी प्रभारी मंत्री जी क्षेत्र में गई थीं तो भ्रमण के दौरान उन्होंने आपत्ति भी की थी. मेरा यह निवेदन है कि उसकी एक उच्चस्तरीय जांच हो जाय. यहां पर डॉ. गोविंद सिंह जी भी बैठे हैं. उन्होंने भी कई बार इसको उठाया है. मैं निवेदन करना चाहता हूं कि ऐसी कंपनी को ब्लेक लिस्टेड करने की कार्यवाही हो, और वहां पर सड़क ठीक प्रकार से बने, गुणवत्तापूर्ण बने, एक उच्चस्तरीय जांच यहां से भोपाल से भेज दी जाय तब कहीं जाकर के शांति का मामला बनेगा, साथ ही जिन अधिकारियों ने गलत जानकारी दी है ऐसे अधिकारियों पर भी कार्यवाही होना चाहिए.

श्री सरताज सिंह -- अध्यक्ष महोदय मैं उच्च स्तरीय जांच कराने के लिए सहमत हूं. जिस दिन जांच के लिए कोई टीम जायेगी तो माननीय विधायक जी को भी सूचित किया जायेगा उनकी उपस्थिति में जांच हो जायेगी और अगर कोई गलती पायी गई तो आवश्यक कार्यवाही की जायेगी.

अध्यक्ष महोदय -- अब तो मंत्री जी को धन्यवाद दे दें.

श्री घनश्याम पिरोनिया -- धन्यवाद् तो मैं दे रहा हूं लेकिन यह भी कह रहा हूं कि मंत्री जी उसकी समय सीमा तय कर दें कि वह कब तक पूर्ण हो जायेगा.

श्री नरेन्द्र कुशवाह -- अध्यक्ष महोदय इस कंपनी के द्वारा जहां जहां पर काम किया जा रहा है सभी जगह पर घटिया स्तर का काम हो रहा है इसलिए उसको ब्लेक लिस्ट घोषित किया जाय...(व्यवधान)..

श्री घनश्याम पिरोनिया -- वह कंपनी जहां जहां भी कार्य कर रही है वह गड़बड़ काम ही कर रही है.

डॉ. गोविन्द सिंह ( लहार ) -- अध्यक्ष महोदय यह बहुत ही गंभीर मामला है. इसी सड़क के मुद्दे पर पिछले 6 वर्ष में 7 बार ध्यानाकर्षण आ चुके है. 9 बार विधान सभा में प्रश्न लग चुके हैं, 8 अगस्त 2014 को माननीय मंत्री जी यहां पर आश्वासन देने के बाद में लहार पहुंचे तो हमने उनको सड़क दिखायी, गुणवत्ता की बात मंत्री जी ने वहां पर तो स्वीकार की थी कि ठीक है हम निर्देश जारी करेंगे. इसकी समय सीमा 3 - 4 बार बढ़ चुकी है. इसकी 86 करोड़ की लागत थी और 90 करोड़ रूपये भुगतान हो चुका. मैं केवल इतना ही कहना चाहता हूं कि मंत्री जी स्वयं देखकर आये थे और आपने 31 मार्च तक काम कराने का आश्वासन दिसम्बर के विधान सत्र में दिया था. मैं कहना चाहता हूं मंत्री जी आप स्वयं चलें या किसी को भेजें आपने एमडी को कहा था कि एमडी साथ में जायेंगे लेकिन एमडी गये होंगे लेकिन उन्होंने देखा नहीं. मैंकहना चाहता हूं कि वहां पर सड़क पर चिकनी मिट्टी डाल दी है तो क्या मंत्री जी आप स्वयं चले या एमडी या प्रमुख सचिव महोदय को भेजें. हमारे और पिरोनिया जी के समक्ष जांच करायें. अगर इसमें मिट्टी का बेस कमजोर नहीं निकले तो हम लोग आपको शक्ल नहीं दिखायेंगे. हमारा यह भी कहना है कि आप विधान सभा में गलत जवाब नहीं दिया करें.

श्री सरताज सिंह -- अध्यक्ष महोदय एक माह में जांच करा ली जायेगी.

डॉ गोविन्द सिंह -- हमें और किसी पर विश्वास नहीं है एमडी या प्रमुख सचिव जायें, बाकी के तो सब आपस में मिलकर खा रहे हैं.

श्री सरताज सिंह -- दूसरी बात जब भी जांच करने टीम जायेगी आपको और माननीय विधायक जी को सूचना दी जायेगी और आपकी उपस्थिति में जांच होगी..

अध्‍यक्ष महोदय -- कृपया बैठ जाइये, आप उत्‍तर चाहते हैं या भाषण देना चाहते हैं.

श्री सरताज सिंह -- तीसरी बात यह है कि कोर से नमूने लिए जाएंगे और उन नमूनों को ग्‍वालियर स्‍थित शासकीय लेब में टेस्‍ट कराया जाएगा. चाहे वह डामर रोड हो, चाहे सीसी रोड हो, कोर में सब चीज सामने आ जाती है. अगर उसमें कोई कमी पाई जाएगी तो निश्‍चित रूप से कार्यवाही की जाएगी.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

11.56 बजे अनुपस्‍थिति की अनुज्ञा

निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 190-बड़वानी से निर्वाचित सदस्‍य, श्री रमेश पटेल को विधान सभा के फरवरी, अप्रैल, 2016 सत्र की बैठकों से अनुपस्‍थित रहने की अनुज्ञा.

 

डॉ. गोविंद सिंह -- अध्‍यक्ष जी, हमारा जवाब आया नहीं है. मैं अनुरोध कर रहा हूँ बहुत बड़ा भ्रष्‍टाचार है. इतना तो रोहाणी जी भी नहीं करते थे जितना आप कर रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- बैठ जाइये. अब आगे बढ़ गए हैं अब वह विषय गया. आप लोगों की सब बात आ गई है आप लोग संतुष्‍ट ही नहीं होते.

श्री सरताज सिंह -- दोबारा जांच के लिए तो मैंने कह दिया है, कार्य प्रगति पर है काम तो लगातार चल रहा है.

डॉ. गोविंद सिंह -- चलो पीएस को भेज दो बस, पीएस के सामने दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा.

श्री सरताज सिंह -- ठीक है.

 

11.57 बजे प्रतिवेदन की प्रस्‍तुति

नियम समिति का द्वितीय प्रतिवेदन

श्री ओमप्रकाश सखलेचा (जावद) -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं मध्‍यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 231 के उप नियम (3) के अधीन नियम समिति का द्वितीय प्रतिवेदन पटल पर रखता हूँ.

 

याचिकाओं की प्रस्‍तुति

अध्‍यक्ष महोदय -- आज की कार्य सूची में उल्‍लिखित माननीय सदस्‍यों की याचिकाएं प्रस्‍तुत मानी जाएंगी.

 

11.58 बजे वर्ष 2016-17 के आय-व्‍ययक पर सामान्‍य चर्चा

अध्‍यक्ष महोदय -- अब वर्ष 2016-17 के आय-व्‍ययक पर सामान्‍य चर्चा प्रारंभ होगी.

श्री मुकेश नायक (पवई) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश की सरकार ने जो इस वर्ष का आय-व्‍यय का लेखा-जोखा रखा है, उस विषय पर मैं बातचीत करने के लिए खड़ा हुआ हूँ. बड़े दु:ख के साथ मुझे यह कहना पड़ रहा है कि सरकार ने जो बजट रखा है इसमें भविष्‍य का कोई रोडमैप नहीं है, यह बिल्‍कुल रूटीन का बजट है जो माननीय वित्‍त मंत्री जी ने भी अपने बयान में कहा है. कल राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य, राजस्‍व और कृषि के बुनियादी ढांचे को लेकर और कार्य संचालन को लेकर जिस तरह से तारीफ की और संतोष प्रकट किया है, उसको सुनकर ऐसा लगा कि इस सरकार में बैठे लोग न तो देखना चाहते हैं और न ही वस्‍तुस्‍थिति को समझना चाहते हैं. इतनी गलत जानकारियां विधान सभा के अंदर दी गईं, मैं अपनी जानकारी विधान सभा को देना चाहता हूँ और सम्‍माननीय वित्‍त मंत्री जी से यह कहना चाहता हूँ कि अगर इसमें कोई भी जानकारी गलत हो तो जो विधान सभा की विशेषाधिकार समिति है उसको आप दे सकते हैं.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं जब 1985 में पहली बार जनप्रतिनिधि बना था उस वक्‍त मैंने विधान सभा का माहौल देखा था. माननीय अर्जुन सिंह जी मुख्‍यमंत्री थे, माननीय वोरा जी मुख्‍यमंत्री थे और प्रतिपक्ष में इस मध्‍यप्रदेश के माननीय पटवा जी, माननीय कैलाश जोशी जी, माननीय विक्रम वर्मा जी जैसे प्रखर प्रतिपक्ष के नेता थे जो बात करते थे तो पूरा सत्‍ता पक्ष तिलमिलाता था. उनकी तीखी भाषा, उनकी जानकारी और उनके ज्ञान का ऐसा अद्भुत समन्‍वय विधान सभा में प्रतिपक्ष के नेता के रूप में देखने को मिलता था जो अनुकरणीय है एक उदाहरण माना जाता है उससे हम विधायकों ने और सम्‍माननीय सदस्‍यों ने विधान सभा के अंदर सीखा था लेकिन मैंने देखा है इस सत्र में कि लंबे समय तक सत्‍ता में रहने के कारण ....

 

12.00 बजे उपाध्यक्ष महोदय( डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह ) पीठासीन हुए.

 

श्री मुकेश नायक-- .......मध्यप्रदेश की सरकार के मुख्यमंत्री, इनके मंत्री और इनके नेताओं को आलोचना सुनने की आदत नहीं रही. मुझे याद है कि जब विधानसभा में माननीय पटवा जी,माननीय कैलाश जोशी जी और माननीय विक्रम वर्मा जी जब बातचीत करते थे. नीति सिद्धांत और कार्यक्रमों को लेकर सरकार को जब जगाने का काम करते थे. मध्यप्रदेश की विधानसभा में जब तथ्यपरक जानकारी देते थे.तीखी आलोचना करते थे. मैंने उस भाषा को सुना है और मैं साक्षी मध्यप्रदेश की विधानसभा में रहा हूँ लेकिन अब देखकर दु:ख होता है..

वन मंत्री(डॉ. गौरीशंकर शेजवार)-- बाला बच्चन जी का परफार्मेंस अच्छा नहीं है, यह बता रहे हैं क्या? (हंसी)

श्री मुकेश नायक-- माननीय शेजवार साहब भी प्रतिपक्ष के नेता था और मैं बड़े सम्मान के साथ में कहना चाहता हूँ..

श्री बाला बच्चन-- नाम आ गया उनका.

श्री मुकेश नायक-- वे बहुत अच्छे प्रतिपक्ष के नेता थे, बड़ी धारधार भाषा बोलते थे और बहुत ईमानदारी के साथ उन्होंने अपने प्रतिपक्ष के दायित्वों की निर्वहन भी मध्यप्रदेश की विधानसभा के अन्दर किया है. मैंने इस बात को देखा है लेकिन अब मध्यप्रदेश की विधानसभा का यह आलम है, मैं जब इनको बातचीत करते हुए मध्यप्रदेश की विधानसभा में देखता था और सदन के बाहर जब स्वर्गीय माननीय अर्जुनसिंह जी मेरे नेता, पटवा जी और कैलाश जोशी जी आपस में मिलते थे, सत्ता और विपक्ष के नेता जब आपस में मिलते थे, यह विश्वास नहीं होता था कि ये वही नेता हैं जो विधानसभा के अन्दर इस तरह की बातचीत करते रहे हैं.इतना सौहार्द्र, इतनी मर्यादा और इतना अनुशासन विधानसभा के बाहर लेकिन विधानसभा के अऩ्दर जब वे बैठते थे तो विश्वास नहीं होता था, मैं तो पहली बार चुनकर आया था कि ये वही नेता हैं जो विधानसभा के बाहर इस तरह का व्यवहार करते थे. एक संसदीय परम्परा, उसकी मर्यादा, उसकी सहिष्णुता और आलोचकों में संवाद, ये एक बहुत बारीक डोर होती है लोकतंत्र की और मुझे लगता था कि कहीं ये नेता अभिनय तो नहीं करते हैं लेकिन धीरे-धीरे मुझे लगा कि इनके दो रुप अभिनय नहीं है, इन नेताओं का वास्तविक चरित्र है और ईमानदार चरित्र है और वह चरित्र यह है कि अपने अपने दायित्वों का पूरी ईमानदारी से, पूरी निष्ठा से निर्वहन करना और मध्यप्रदेश की जनता ने जिन उद्देश्यों को लेकर उनको मध्यप्रदेश की विधानसभा में भेजा है, पूरी ईमानदारी से जनभावनाओं का सम्मान करते हुए उन कर्तव्यों का पालन करना लेकिन आज तो ऐसा हो गया कि आलोचकों में संवाद भी,उसका स्तर कितना नीचे गिर गया. मैं पहले देखता था जब आलोचकों में संवाद होता था तो आंखों का लिहाज होता था, संबंधों की नाजुकता बनी रहती थी, राजनीति का एक स्तर होता था और आज जब आलोचकों में संवादहीनता है तो इसका ही कारण है कि राजनीति का पराभव, मूल्यों का अवमूल्यन और राजनीतिक गिरावट ये मूल कारण हैं. अपनी आलोचना कोई सुनना नहीं चाहता. आपको 15 साल के लिए मध्यप्रदेश में जनादेश मिला है. आप कभी यह भूल मत जाइये कि आप अमर हो गये. समय-समय पर जनता हमारे क्रियाकलापों को ऑडिट करती है, समीक्षा करती है.अपने छोटे छोटे चुनावों में, अपने छोटे छोटे जनादेशों में जनभावनाओं की अभिव्यक्ति होती है. पिछले 3 महीने में झाबुआ में 8 विधानसभा क्षेत्रों के चुनाव हुए और तीन विधानसभा क्षेत्रों के चुनाव हुए. हमारे संसदीय कार्यमंत्री जी खड़े होकर बार बार धमकाते हैं. सत्तापक्ष को हारने की आदत नहीं बची. एक राजनैतिक दल को चुनाव हारने जीतने के कारखाने में तब्दील करना चाहते हैं. किसी भी राजनैतिक दल के अन्दर जो मान्य परम्पराएँ हैं, उनकी सांस्कृतिक अस्मिताएँ हैं, जनभावनाओं के प्रति जो दायित्व की भावना है उसके इतर ये तो खड़े होकर केवल नागपंचमी के पहलवान जैसी हुँकार भरते हैं, हम से कहते हैं कि अभी मैहर के चुनाव की धूल नहीं झड़ी. माननीय नरोत्तम जी, आठ विधानसभा क्षेत्र झाबुआ के उसमें चुनाव हुआ. तीन विधानसभा क्षेत्रों के उप चुनाव हुए, उसमे से आप सात में हारे हो और तीन में भर जीते हो. आप किस तरह के जनादेश की बातें कर रहे हो? किस तरह की आप अप्रत्यक्ष रुप से धमकियां देकर हमारे भीतर निराशा का वातावरण भरना चाहते हो? आज मध्यप्रदेश में वह स्थिति नहीं है जो आप सोच रहे हैं. मैहर के चुनाव का वातावरण पूरे मध्यप्रदेश का वातावरण नहीं है, आप यह मान के चलना और आने वाले समय में आपके दम्भ,अहंकार और सत्ता की..

संसदीय कार्यमंत्री(डॉ. नरोत्तम मिश्रा)-- उपाध्यक्ष जी, यह भाषण दे सकते हैं लेकिन बजट पर. एकाध शब्द तो आ जाए बजट का. उपाध्यक्ष महोदय-- वह इसका ध्यान रखेंगे, ऐसा करके वह अपना ही समय जाया कर रहे हैं.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया-- उपाध्यक्ष जी, इतने व्यथित और व्यथाओं में रहते हैं मुकेश जी इसलिए कथाओं का दौर शुरु कर दिया है.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार-- बजट पर बाद में आएंगे. पहले मानस पर फिर गीता पर बोलेंगे.

श्री मुकेश नायक-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री जी ने केंद्र सरकार के बजट अनुदान के बारे में बड़ी बड़ी बातें कही हैं. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री जी ने केंद्रीय सहायता और अनुदान और केंद्रीय करों में मध्यप्रदेश की भागीदारी पर इस सदन को गलत जानकारी दी है . मैं इस सदन को बताना चाहता हूं कि पिछले वर्ष के बजट में केंद्र सरकार से 13हजार करोड़ रुपये कम मिले हैं और इस वर्ष मध्यप्रदेश की सरकार को केंद्र सरकार से 17 हजार करोड़ रुपये कम मिले. वित्तमंत्री जी ,यदि मैं गलत जानकारी दे रहा हूं तो इसको दुरुस्त करियेगा. उपाध्यक्ष महोदय, मैं बताना चाहता हूं कि सिंचाई योजनाओं में 650 करोड़ रुपये मिलना थे, मात्र आपको 200 करोड़ रुपये मिले है, यह मैं 2014 की बात कर रहा हूं. फिर 2015-16 के भी आंकड़े आपको दूंगा. बैकवर्ड रीजन ग्रांट में 1107 करोड़ रुपये मिलना थे मात्र 221 करोड़ रुपये मिले और योजना भी बंद कर दी. मध्याह्न भोजन यह सोशल सेक्टर की अनिवार्य जरूरत है. आज मध्यप्रदेश कुपोषण में भारत में सबसे अव्वल नंबर का राज्य है. 51 फीसदी बच्चे यहाँ कुपोषण के शिकार हैं और बड़े दुख के साथ मुझे इस सदन को सूचित करना पड़ रहा है कि मध्याह्न भोजन में 1471 करोड़ रुपये मिलना थे केवल 796 करोड़ केंद्रीय सरकार से मिले .

माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मुख्यमंत्री जी कल राज्यपाल के अभिभाषण पर शिक्षा पर बड़ी बड़ी बातें कर रहे थे मैं अभी शिक्षा की पूरी पोल खोलूंगा पूरी जानकारी सदन को दूंगा बजट की भी और वर्तमान ग्राउण्ड रियलिटी की भी. मैं वित्तमंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि सर्वशिक्षा अभियान में 2630 करोड़ रुपये मिलना थे मात्र 1451 करोड़ रुपये मिले, मिले कि नहीं मिले ?प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में 1125 करोड़ रुपये मध्यप्रदेश को मिलना थे लेकिन केवल 708 करोड़ रुपये केंद्रीय सरकार से मिले. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मनरेगा के बारे में कहना चाहता हूं कि जब मध्यप्रदेश में सूखा पड़ा और किसान परेशान हुआ तो प्रधानमंत्री जी ने कहा था और प्रदेश के मुख्यमंत्री जी ने भी कहा था कि हम 50 दिन की अतिरिक्त मजदूरी मनरेगा के तहत मध्यप्रदेश के श्रमिकों को देंगे ताकि इस कठिन समय में उनको रोजगार मिल सके और उनकी अनिवार्य जरूरतें पूरी हो सके. लेकिन वित्तमंत्री जी आप बताइए कि मनरेगा में 4 हजार करोड़ रुपये मिलना थे मात्र 2452 करोड़ रुपये केंद्र सरकार से मिले, मजदूरी नहीं मिली और आज मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड में, जहाँ के वित्तमंत्री जी रहने वाले हैं, जहाँ से इतनी बार से वह विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं वहाँ ग्रामीण क्षेत्रों में दलित वर्ग के केवल बुजुर्ग आदमी और कुत्ते भर बचे हैं. गांव के गांव छोड़कर मजदूर मजदूरी करने के लिए पलायन करके चले गये हैं और जब मजदूर पलायन करके चले गये तो बड़े दुख के साथ इस विधानसभा को बताना पड़ रहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जो अनुसूचित जाति जनजाति के गरीब वर्ग के लोगों के सस्ते अनाज के राशनकार्ड होते हैं, ,जब वह बाहर मजदूरी करने चले जाते हैं तो व्यापारी बाहर से आते हैं उनके राशनकार्ड गिरवी रख लेते हैं. राशनकार्ड गिरवी रखने की एक नई परंपरा चली हुई है राशनकार्ड को गिरवी रखते हैं उतना राशन आहरित कर लेते हैं और उसको बाजार में ब्लैक कर देते हैं जब गांव के गांव खाली हो गये हैं तो मध्यप्रदेश नागरिक आपूर्ति निगम और आपका फूड डिपार्टमेंट इतने राशन को कहाँ ले जा रहा है इसको मध्यप्रदेश की विधानसभा में स्पष्ट करना चाहिए.

माननीय उपाध्यक्ष महोदय, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में हमें केंद्र शासन 561 करोड़ रुपये मिलना थे लेकिन केवल 512 करोड़ रुपए केंद्र सरकार ने दिये हैं. वित्तमंत्री जी, जरा 2015-16 में केंद्रीय अनुदान के रूप में मिलने वाली राशि का विवरण सुन लीजिये इसमें 30 हजार करोड़ रुपये की राशि हमें मिलना थी 17 हजार करोड़ रुपये की कटौती कर दी गई और यह कटौती जिन मदों में की गई वह ऐसी अनिवार्य उपयोगी मदें हैं, जिसका प्रभाव पूरे मध्यप्रदेश के जनमानस और गरीब जनता के ऊपर पड़ा है. राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में 589.5 करोड़ रुपये मिलने थे, केवल 230 करोड़ रुपये मिले. खाद्य सुरक्षा योजना में 310 करोड़ रुपये मिलने थे, लेकिन केवल 130 करोड़ रुपये मिले. मनरेगा में 4000 करोड़ रुपये मिलने थे, लेकिन 2300 करोड़ रुपये मिले. माननीय वित्त मंत्री जी, मैं गलत तो नहीं बोलता? प्रधानमंत्री सड़क योजना में 1125 करोड़ रुपये मिलने थे लेकिन मात्र 900 करोड़ रुपये केन्द्र सरकार से मिले. राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा में 447.5 करोड़ रुपये मिलने थे लेकिन मात्र 200 करोड़ रुपये मध्यप्रदेश को मिले. अब कल राज्यपाल जी के अभिभाषण पर, इस हिसाब से तो माननीय मुख्यमंत्री जी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मामला बनता है. पूरे सदन ने सुना कि मनमोहन सिंह जी की सरकार में केन्द्र सरकार से इनको कोई पैसा नहीं मिला. सब ने सुना, पूरी विधान सभा के सम्मानित सदस्यों ने सुना. मुझे एक चीज बताइये. अप्रैल में जब हमारी सरकार केन्द्र में थी. 27,881.23 करोड़ रुपये मध्यप्रदेश को मिले जो केन्द्रीय करों में मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी है उसमें और केन्द्रीय अनुदान के रूप में 30,063.19 करोड़ रुपये मध्यप्रदेश की सरकार को मिले और पूरी विधान सभा के सामने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री जी ने यह कहा कि केन्द्र सरकार से हमें कोई सहायता प्राप्त नहीं हुई. जिम्मेदारी से बोलना चाहिए, जानकारी के साथ बोलना चाहिए. मुख्यमंत्री जी का लंबा भाषण मैंने जब खुद 20-25 बार सुना है तो मध्यप्रदेश के लोग तो उनका यह भाषण एकाध हजार बार सुन चुके होंगे. उनके भाषण में कभी कोई परिवर्तन नहीं आता, सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया:. दो हजार बार तो उनका यह श्लोक हम लोग सुन चुके. मुख्यमंत्री जी का 10 साल से भाषण नहीं बदला. विधान सभा में जो हमारे सम्मानित बी जे पी के विधायक हैं वे भी इस बात को जानते हैं कि पिछले 10 साल से उनका एक ही टेप रिकार्ड चल रहा है, उनका भाषण कभी नहीं बदलता. चाहे स्पेस टेक्नालॉजी पर भाषण हो, चाहे नासा पर भाषण हो, चाहे फिजिक्स और केमेस्ट्री पर भाषण हो, सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया: ...(व्यवधान)...

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया-- मध्यप्रदेश की साढ़े सात करोड़ जनता को तो पसन्द आ रहा है...(व्यवधान)..

उपाध्यक्ष महोदय-- बैठ जाएँ. उनको बोलने दीजिए. श्रीवास्तव जी बैठ जाइये.

श्री के. के.श्रीवास्तव-- इनका स्वभाव ही क्षण-क्षण बदलने का है...(व्यवधान)..

उपाध्यक्ष महोदय-- श्रीवास्तव जी बैठ जाइये.उनको बोलने दें. मुकेश जी, आप जारी रखें.

श्री विष्णु खत्री-- उपाध्यक्ष जी, ये अभी जानकारी दे रहे हैं कि गाँव के गाँव खाली हो गए तो कृपया बता दें कि कितने गाँव खाली हो गए? मेरी विधान सभा में तो कोई गाँव खाली नहीं हुआ.

उपाध्यक्ष महोदय-- यह प्रश्नकाल नहीं है. न वे मंत्री हैं. आप बैठ जाइये. आपका जब भाषण देने का नंबर आएगा तब आप अपनी बात कह लीजिएगा.

श्री मुकेश नायक-- अगले चुनाव में आपको पता लग जाएगा कितने बचे हैं. माननीय वित्त मंत्री जी, अभी तो बजट पर ही भाषण चल रहा है फिर इतना व्यवधान क्यों हो रहा है? मैंने कहा है कि आलोचना सुनने की क्षमता होना चाहिए. शांतिपूर्वक सुनें. आपकी बात हम लोगों ने सुनी है. मध्यप्रदेश में कृषि के बारे में मैं कहना चाहता हूँ कि किसानों की और कृषि की सिंचाई क्षमता के प्रयोग की, उत्पादन की, बड़ी-बड़ी बातें मध्यप्रदेश की विधान सभा में की जाती हैं. उपाध्यक्ष महोदय, माननीय ऊर्जा मंत्री जी नहीं हैं. ज्यादातर मंत्री तो इनके विधान सभा में रहते ही नहीं हैं. विधान सभा को कुछ समझते ही नहीं कि विधान सभा भी कोई चीज है. इतने गंभीर विषय पर बात हो रही है, जितने महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व वाले मंत्रिमंडल के सदस्य हैं, वे विधान सभा में उपस्थित नहीं हैं. उपाध्यक्ष महोदय, आसंदी से आपको निर्देश देना चाहिए कि यह विधान सभा मंत्री और विधायक दोनों के लिए है. उन्हें उपस्थित रहना चाहिए और मध्यप्रदेश की विधान सभा को गंभीरता से लेना चाहिए. उपाध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश में 21 लाख बगैर मीटर के एग्रीकल्चर पंप के कनेक्शन हैं. 21 लाख ऐसे उपभोक्ता हैं, जिनको 1 साल के लिए कनेक्शन दिया जाता है, जिसके मीटर नहीं दिए जाते हैं, जिसमें पूर्वी क्षेत्र में 6.5 लाख, पश्चिम क्षेत्र में 9 लाख और मध्य क्षेत्र में 5.50 लाख कनेक्शन हैं और मैं इस सरकार पर आरोप लगाता हूँ चूँकि तीनों विद्युत कंपनियाँ बहुत भयंकर घाटे में चल रही हैं. और एक ऐसा करप्शन का खेल मध्यप्रदेश में चल रहा है विद्युत वितरण के नाम पर, बिजली खरीदी के नाम पर और उसके भुगतान के नाम पर कि भारत के किसी राज्य में करप्शन का ऐसा खेल नहीं चल रहा है जैसा कि मध्यप्रदेश के विद्युत विभाग में चल रहा है. इसका एक उदाहरण मैं आपको देना चाहूंगा किसान को बिना मीटर का कनेक्शन दिया जाता है और विद्युत नियामक आयोग के सामने मध्यप्रदेश के मंत्री और मध्यप्रदेश के ऊर्जा विभाग के अधिकारियों ने एक प्रजेन्टेशन दिया और उसमें विद्युत नियामक आयोग से यह कहा कि एक हॉर्स पॉवर का 0.746 kw और प्रतिदिन 8 घंटे का उपयोग होगा देहाती क्षेत्रों में 10 घंटे का उपयोग होगा शहरी क्षेत्रों में और एक महीने में 30 दिन इसका उपयोग होगा व किसान इसका 8 से 10 महीने तक उपयोग करेगा. इस तरह से शहरी क्षेत्रों में 1760 यूनिट और देहाती क्षेत्रों में 1790 यूनिट का हिसाब-किताब बनाकर नियामक आयोग के समक्ष प्रस्तुत कर दिया. इसकी 1200 से 1500 प्रतिवर्ष दर तय कर दी. कौन-सा किसान 10 महीने विद्युत पंप चलाता है कौन सा किसान 8 महीने विद्युत पंप चलाता है. एक यूनिट का किसान से 2.75 रुपये होता है. अगर इन किसानों को मीटर भी दे दिया जाता तो 1200 से लेकर 1500 रुपये जो इनका साल भर का खर्च आता है किसान के ऊपर इससे ज्यादा व्यय भार नहीं आता लेकिन इनको मीटर नहीं दिया गया. इनके मानक तय कर दिए गए. नियामक आयोग को कन्वेंश कर दिया गया.

माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं इस सरकार पर आरोप लगाता हूँ कि 4000 करोड़ से ज्यादा की सब्सीडी बंदरबांट के रुप में विद्युत कंपनियों को बांट दी गई. कितना दुर्भाग्यजनक है एक तरफ यह सरकार किसानों की बात करती है.

उपाध्यक्ष महोदय--मुकेश जी आप कितना समय और लेंगे.

श्री मुकेश नायक--आधे घंटे लूंगा.

उपाध्यक्ष महोदय--आप 20 मिनट बोल चुके हैं समय-सीमा में रहें. बजट पर बोलना आपने काफी देर से शुरु किया पहले ज्यादा बातें कर लीं. जारी रखिये जल्दी करिये.

श्री मुकेश नायक--उपाध्यक्ष महोदय, आप बहुत संसदविद् हैं. मध्यप्रदेश की विधान सभा की लायब्रेरी में मैंने देखा है कि प्रतिपक्ष के लोग जब डिबेट ओपन करते थे तो दो-दो ढाई-ढाई घंटे तक उन्हें कोई रोकता तक नहीं था इसकी एक पूरी परम्परा है एक लंबी श्रृंखला है मैं कोई उसका उल्लंघन नहीं कर रहा हूं. आप इस सदन के बहुत वरिष्ठ सदस्य रहे हैं, संसदीय नियम संचालन और प्रक्रिया के विद्वान हैं आप खुद साक्षी रहे हैं कि पटवा जी 2 घंटे से कम कभी बोलते थे, विक्रम वर्मा कभी 2 घंटे से कम बोलते थे.

उपाध्यक्ष महोदय--पटवाजी नेता प्रतिपक्ष की हैसियत से बोलते थे.

श्री मुकेश नायक--कैलाश जोशी नेता प्रतिपक्ष थे पटवा जी सदस्य थे.

श्री गोपाल भार्गव--पटवाजी अविश्वास प्रस्ताव पर दो घंटे बोलते थे बजट पर नहीं.

उपाध्यक्ष महोदय--आप चर्चा करें अपनी बात रखें, बजट पर अपनी बात रखें.

श्री मुकेश नायक-- मुझे बजट की प्रापर समीक्षा करना है इसके लिए मैं आपका संरक्षण चाहूंगा मुझे पर्याप्त समय की आवश्यकता है मुझे आधे से एक घंटे का समय और लगेगा अभी तो यह मैं बड़े-बड़े (सीट पर रखे साहित्य की ओर इशारा करते हुए) रखे हुए हूं इनके ऊपर फेंकने के लिए प्रमाण सहित अभी तो मुझे इनकी पूरी गाथा सुनानी है.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया--बाला बच्चन जी के बाद क्या इसी से सीआर बनेगी.

श्री जसवंत सिंह हाड़ा--इनके पास कुछ नहीं है बजट की जो कॉपी है वह दिखा रहे हैं इनके पास कुछ भी नहीं है.

श्री मुकेश नायक--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं कृषि कर्मण अवार्ड की भी इस सदन में पोल खोलना चाहता हूँ कि माननीय मुख्यमंत्रीजी कृषि कर्मण अवार्ड कैसे ले आये. इसके लिए मैं एक बहुत महत्वपूर्ण दस्तावेज सदन के पटल पर रखता हूँ. माननीय कृषि मंत्रीजी मुझे लगता है इस सदन में मौजूद हैं. यह दस्तावेज पॉवर पाइंट प्रजेंटेशन के समय केन्द्र सरकार के सामने इस मध्यप्रदेश की सरकार ने रखे थे उसका एक नमूना मैं सदन को बताना चाहता हूँ और जो पब्लिक के सामने यह बात करते हैं, विधान सभा में यह बात करते हैं उसके विरोधाभास को मैं विधान सभा के समक्ष रखना चाहता हूँ. माननीय कृषि मंत्री जी अगर मैं कहीं कोई गलत आंकड़ा दूं तो आप खड़े होकर उसको दुरुस्त कर देंगे तो मैं मानने के लिए तैयार हो जाउंगा.

उपाध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश की सरकार ने पॉवर पॉइंट प्रजेंटेशन के समय केन्द्रीय सरकार के समक्ष कृषि उत्पादन के जो आंकड़े रखे वह इस प्रकार से हैं उसकी कॉपी भी मेरे पास है सरकार की प्रति मेरे पास है राज्य सरकार ने जो केन्द्रीय सरकार के सामने

प्रजेंटेशन रखा उसकी प्रति मेरे पास है . वर्ष 2011 में गेहूं का उत्पादन 145 लाख टन वर्ष 2012-13 में 161.25 लाख टन बताया गया अर्थात् 10.87 प्रतिशत की ग्रोथ बतायी गयी . कुल खाद्यान्‍न का उत्‍पादन 2011-12 में 229.67 लाख टन और 2012-13 में 287.35 लाख टन बताया गया और ग्रोथ रेट बतायी गयी 25.11 प्रतिशत और इसी तरह 11 अक्‍टूबर, 2014को जो डेटा केन्‍द्र सरकार को भेजा गया उसमें बताया गया कि गेहूं का उसमें उत्‍पादन 2012-13 में 131.3 लाख टन, 2013-14 में 170.70 लाख टन और ग्रोथ रेट 33 प्रतिशत बतायी गयी. इस प्रकार कुल खाद्यान्‍न के बारे में जो डेटा दिया गया वह वर्ष 2012-13 में 234.2 लाख टन और वर्ष 2013-14 में 300.7 लाख टन इसका मतलब है कि 28. 82 प्रतिशत ग्रोथ रेट बतायी गयी; मंत्री जी ध्‍यान से सुनने का कष्‍ट करें. इस प्रकार 15 दिसम्‍बर, 2015 को जो डेटा भेजा गया उसमें गेहूं के उत्‍पादन को बताया गया . वर्ष 2013-14 में 139 .30 लाख टन, 2014-15 में 184.80 लाख टन और कुल खाद्यान्‍न का उत्‍पादन बताया गया 2012-13 में 242.40 लाख टन और 2014-15 में 320. 43 लाख टन इसका मतलब है कि 32.19 प्रतिशत की ग्रोथ बतायी गयी. मैं अब सच्‍चाई आपको बताता हूं . वर्ष 2011-12 में इन्‍होंने कहा, मैंने नहीं कहा, इनकी सरकार ने यह डेटा केन्‍द्र सरकार को दिया कि 2011-12 में 127 लाख टन और 2012-13 में 131 लाख टन और 2013-14 139 लाख टन और इसमें इन्‍होंने 6प्रतिशत से अधिक की ग्रोथ नहीं बतायी है, जिसे ये 32-33 प्रतिशत तक की ग्रोथ बढ़ा चढ़ाकर बता रहे हैं. इसी तरह से इन्‍होंने दाल,चावल और गेहूं कि कुल ग्रोथ रेट बढ़ाने के लिये झूठे आंकड़े प्रस्‍तुत करके चार वर्षों से कृषि कर्मण अवार्ड मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री जी ने लिया.

अगर कृषि मंत्री जी पावर पाईंट प्रेजेन्‍टेशन के समय आपने यह प्रस्‍ताव केन्‍द्र सरकार को भेजे हैं. वित्‍त मंत्री जी मैं आपसे विनम्र अपील करना चाहता हूं कि बीते महिनों में 42 जिलों की कुल 267 तहसीलों में सूखा पड़ा, सोयाबीन, उड़द और मूंग फसल बर्बाद हो गयी, सोयाबीन की फसल 77 लाख मीट्रिक टन से आधी होकर 38 लाख मीट्रिक टन हो गयी है. फसलों का नुकसान 130866 करोड़ का अनुमान है. प्रदेश के 330283 गांव और इन गांवों के 54 लाख, 94 हजार, 98 किसान सूखे से प्रभावित हुए. मध्‍यप्रदेश की सरकार ने 4220.39 करोड़ रूपये मांगे थे, जिसमें 762 करोड़ रूपये मनरेगा के भी शामिल हैं. आप माननीय वित्‍त मंत्री जी एक बात बताईये, क्‍या आपको इतने रूपये केन्‍द्र सरकार से मिले, आप खड़े होकर इमानदारी से बताईये. आपको कितने रूपये आज की तारीख तक मिले.

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ नरोत्‍तम मिश्र):- माननीय उपाध्‍यक्ष जी, ऐसे सवाल जवाब होंगे तो और भी समय मांगेंगे. अगर नहीं खड़े होंगे तो भी दिक्‍कत है. अगर खड़े नहीं होंगे तो वह बोलेंगे की हमारी बात प्रमाणित है, यह खड़े नहीं हो रहे हैं. अगर खड़े हो जायें तो समय और चाहिये.

उपाध्‍यक्ष महोदय:- वित्‍त मंत्री जी जब खड़े होंगे तो इन सब चीजों का जवाब देंगे.

श्री मुकेश नायक:- उपाध्‍यक्ष महोदय, यह कितनी गंभीर बात है कि किसान अपने पिछले 50 साल के सर्वाधिक गंभीर दौर से गुजर रहा है. सब तरह के प्राकृतिक प्रकोंपो का शिकार किसान हुआ है, लेकिन आज की तारीख तक केन्‍द्र की सरकार ने एक पैसा भी मध्‍यप्रदेश की सरकार के खातें में नहीं डाला है. मैं पूरी जानकारी के साथ बोल रहा हूं.6 फरवरी को आप जेटली जी से मिले थे या नहीं, आपने यह बात बोली थी या नहीं एक पैसा भी केन्‍द्र सरकार ने मध्‍यप्रदेश शासन के बजट में आज की तारीख नहीं डाला है और आप बड़ी किसानों की बात करते हैं. आप कृषि कर्मण पुरस्कार की बात करते हैं. आप खेती,किसानी में काम करने वाले मजदूरों के उत्थान की बात करते हैं. आप कहते हैं कि आर्थिक और सामाजिक विकास की दृष्टि से किसान हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता पर है. आपने किसान के लिये क्या किया. आपने सब्सिडी के चार हजार करोड़ रुपये खा लिये. आज की तारीख तक आपकी केन्द्र की सरकार ने एक पैसा मध्यप्रदेश को नहीं दिया और माननीय मुख्यमंत्री जी जब मनमोहन सिंह जी की सरकार थी पूरी संवैधानिक व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए धरने पर बैठ गये थे. मुख्यमंत्री को धऱना पर नहीं बैठना चाहिये. मुख्यमंत्री को आंदोलन नहीं करना चाहिये क्योंकि मुख्यमंत्री स्वयं अपने आप में एक संस्था है. आर्थिक,सामाजिक,शैक्षणिक,धार्मिक सभी हितों के संरक्षण और संवर्धन करने वाली एक मुख्य संस्था है किसी भी राज्य में लेकिन फिर भी वे मध्यप्रदेश के किसानों के इतने बड़े हितैषी बने थे कि वे भूख हड़ताल पर बैठ गये थे धरने पर बैठ गये थे. अब क्यों धरने पर नहीं बैठते. अब क्यों निष्ठा बदल गई. अभी जब प्रधानमंत्री आये थे तो मुख्यमंत्री जी ने उनको संकेत किया था कि नहीं मध्यप्रदेश के किसानों को मदद की आवश्यक्ता है. कुछ मदद मिली ? तेरह हजार करोड़ रुपये पिछले बजट में काट लिये. सत्रह हजार करोड़ रुपये इस साल के बजट में काट लिये. एक रुपया ओला,पाला और सूखे से पीड़ित मध्यप्रदेश के किसानों को नहीं दिया. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री जी ने राज्यपाल के अभिभाषण में शिक्षा और स्वास्थ्य की बात कही. अभी वे विधान सभा में हैं नहीं पता लग जाता. मैंने पन्ना जिले में एक मानक सर्वे किया आपके बुनियादी ढांचे की स्थिति का पन्ना जिले का. डिप्टी कलेक्टर के वहां 7 पद स्वीकृत हैं जिसमें से  3 डिप्टी कलेक्टर हैं ही नहीं. मेरे विधान सभा क्षेत्र में एसडीएम है ही नहीं. आप कैसे सूखा राहत बांट सकते हैं. 12 तहसीलदार हैं जिसमें से वर्तमान स्थिति में केवल 5 तहसीलदार हैं. 7 तहसीलदारों के पद पर कोई काम ही नहीं कर रहा. नायब तहसीलदार 13 हैं जिसमें से सिर्फ 2 नायब तहसीलदार पन्ना जिले में हैं. अस्पताल में 107 डाक्टरों के पद स्वीकृत हैं. आप सुन लीजिये नरोत्तम जी, मैं स्वास्थ्य की चर्चा करने वाला हूं. अस्पतालों में 107 डाक्टरों के पद स्वीकृत हैं उनमें से वहां केवल 39 डाक्टर हैं . मुख्यमंत्री जी कह रहे थे कि स्वास्थ्य सुविधाएं मध्यप्रदेश की बहुत अच्छी चल रही हैं. तुलना करते हैं 2003 से. अब मैं तुलना करने लगूं 1951-52 से तो उस समय पूरे भारत का बजट पौने तीन सौ करोड़ रुपये था. आज तो आपके एक आई.ए.एस.अधिकारी के यहां छापा पड़ता है तो उस अकेले के पास तीन सौ करोड़ रुपये से ज्यादा की सम्पत्ति बरामद होती है. इतनी भारत की स्थिति अब बदल गई है.

श्री विश्वास सारंग - उपाध्यक्ष महोदय,यह आपत्तिजनक है किसके यहां छापा पड़ा और किसके यहां इतनी सम्पत्ति मिल गई. इसको विलोपित किया जाय. इस तरह से झूठे आंकड़े दे रहे हैं.

श्री मुकेश नायक - अरविन्द जोशी और उसकी पत्नि के यहां नहीं मिली.

श्री रामनिवास रावत - सांवरिया ग्रुप के यहां.

श्री मुकेश नायक - सारंग जी अभी नये-नये दूसरी बार चुनकर आये हो.

उपाध्यक्ष महोदय - मुकेश जी समाप्त करें.

श्री मुकेश नायक - उपाध्यक्ष महोदय, मुझे आधे घंटे का समय और चाहिये.

उपाध्यक्ष महोदय - नहीं. यह संभव नहीं है. मुकेश जी,कार्यमंत्रणा समिति ने कुल 6 घंटे पूरी चर्चा के लिये आवंटित किये हैं. इसमें कांग्रेस पार्टी का कितना हिस्सा होगा आप अंदाज लगा सकते हैं. 14 माननीय सदस्य कांग्रेस पक्ष से बोलना चाहते हैं. यह सूची यहां पर है.

श्री रामनिवास रावत - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, चर्चा आज और कल चलना है. आप जितने समय हमें बैठने को कहेंगे पूरा विपक्ष बैठने को तैयार हैं.

उपाध्यक्ष महोदय - दस मिनट में समाप्त करें.

श्री मुकेश नायक - उपाध्यक्ष महोदय, सदन नियमों और परंपराओं से चलता है. मैं परंपराओं का हवाला देकर आपसे संरक्षण की मांग कर रहा हूं.

उपाध्यक्ष महोदय - उन सब चीजों पर मैं विचार कर रहा हूं. नियमों पर भी परंपराओं पर भी. आप दस-पंद्रह मिनट में समाप्त करें.

श्री मुकेश नायक --माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश की चिकित्सा सुविधाओं को लेकर के बातचीत कर रहा था उसमें मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सब ठीक चल रहा है उन्होंने तुलना की 2003-04 से उसके बाद से आपको तीन बार जनादेश मिल चुका है इसलिये आप पिछले 15 सालों की तुलना करिये आप उसकी तुलना क्यों कर रहे हैं, जिस पर जनादेश हो चुका है. हम लोग चुनाव हार गये जनता ने हम लोगों को रिजेक्ट कर दिया आप पुराने कार्यकाल की तुलना क्यों करते हैं. आज 12 सालों से शिवराज सिंह चौहान मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं आप साल-दर-साल बजट देते हैं आप साल दर साल का तुलनात्मक विश्लेषण सदन के पटल पर रखिये आप कह रहे हैं कि 2003 में ऐसा होता था, यह चतुराई चलने वाली नहीं है.

श्री शंकरलाल तिवारी--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, 12 साल की बात हम नहीं करते हैं, 12 साल की तुलना वाली बात आपकी ठीक है. हम 50 साल बनाम 12 साल की बात कर रहे हैं.

श्री मुकेश नायक--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, इन्होंने अपनी आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट में कहा है कि मध्यप्रदेश में 5 करोड़, 38 हजार लोग सस्त अनाज की दुकानों से अनाज लेते हैं आप कहते हैं कि भारत का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ राज्य है. सवा सात करोड़ में से 5 करोड़, 38 हजार लोग खुली दुकान से खाना नहीं खरीद सकते हैं आपके राज में मध्यप्रदेश का यह हाल है. आपने खुद अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जब 5 करोड़ 38 हजार सस्ते अनाज की दुकानों से अनाज ले रहे हैं.

श्री ओमप्रकाश सकलेचा--बीपीएल के सभी बोगस कार्ड आप लोगों ने बना दिये थे उनके बारे में चर्चा होनी चाहिये.

श्री मुकेश नायक--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, 12 सालों से शिवराज सिंह जी मुख्यमंत्री हैं आप गलत बीपीएल के राशन कार्डों को काट नहीं पाये.

श्री शंकरलाल तिवारी--खाद्यान्न उनको मिल रहा है तो इनको पेट में दर्द क्यों हो रहा है.

उपाध्यक्ष महोदय--आप इस तरह से बात मत करिये.

श्री मुकेश नायक--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, असली बात यह है कि मध्यप्रदेश में गरीबी रेखा का एक कार्ड बनाने की कीमत 7 हजार रूपये है. अगर मैं गलत बोल रहा हूं तो आप बता दीजिये देहातों में जिनके पास में ट्रेक्टर, दुकान, मकान तथा जमीनें हैं, उनके गरीबी की रेखा के कार्ड हैं, लेकिन गरीब आदमियों के पास गरीबी रेखा के कार्ड आज भी नहीं है, यह हालत इस सरकार की है.

श्री लालसिंह आर्य--उपाध्यक्ष महोदय, ट्रेक्टर वालों के पास जितने भी कार्ड बने हैं वह कांग्रेस के राज्य में बने थे, बीजेपी के राज्य में नहीं बने हैं आप इसकी लिखित में शिकायत करें कि इन इन लोगों के पास में बीपीएल के कार्ड हैं.

उपाध्यक्ष महोदय--लालसिंह जी आप बैठ जाएं.

श्री मुकेश नायक--उपाध्यक्ष महोदय, आपकी कोई भी बात उत्तर देने के लायक है ही नहीं.

श्री गोपाल भार्गव--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, अनुसूचित वर्ग के हमारे मंत्री हैं इस कारण से उनकी उपेक्षा कर रहे हैं कि आपकी बातें उत्तर देने लायक नहीं हैं.

उपाध्यक्ष महोदय--ऐसी कोई बात नहीं है.

श्री गोपाल भार्गव--मुकेश जी आप इस बात का स्पष्ट उल्लेख करें कि आपके कहने का क्या उद्देश्य है.

श्री मुकेश नायक--आपने अपनी बुद्धि के हिसाब से ठीक समझा हमने अपनी बुद्धि के हिसाब से ऐसा कहा नहीं है.

श्री गोपाल भार्गव--सरस्वती जी ने बुद्धि का टेण्डर इन्हीं का मंजूर किया है.

श्री मुकेश नायक- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय,मध्‍यप्रदेश में मुख्‍यमंत्री सहायता कोष से 42 करोड़ की राशि बांटी गई, जिसमें से 90 प्रतिशत राशि सीहोर,रायसेन और विदिशा जिले में बांट दी गई । क्‍या मध्‍यप्रदेश के अन्‍य जिलों में कोई आदमी नहीं रहता है । अब कुछ बोलो गोपाल भैया क्‍या आपके रहली में जहां के आप विधायक हैं, वहां कोई आदमी नहीं रहता ।

श्री गोपाल भार्गव- उपाध्‍यक्ष महोदय, सी.एम. रिलीफ फण्‍ड का रिकार्ड देख लें, मेरे विधानसभा क्षेत्र में भी अनुपातिक रूप से जितनी सीहोर,रायसेन और विदिशा में राशि दी गई है ।

श्री मुकेश नायक- आपके क्षेत्र में जो राशि बांटी गई है वह सी.एम. रिलीफ फण्‍ड की नहीं है, वह पैसा राज्‍य बीमारी सहायता निधि योजना का है ।

श्री गोपाल भार्गव- उसका भी है ।

श्री मुकेश नायक- थोड़ा-पढ़ लिखकर आया करो ।

श्री गोपाल भार्गव - अच्‍छा शर्त रख लें, यदि सबसे ज्‍यादा राशि मेरे क्षेत्र में नहीं आई हो । मुकेश भाई आप भी मेरे क्षेत्र के रहने वाले हो, मेरे क्षेत्र के निवासी हो ।

श्री मुकेश नायक- हम आपके वोटर हैं, आपको वोट देते हैं और अगर ऐसी बात करोगे तो हम आपको वोट नहीं देंगे ।

उपाध्‍यक्ष महोदय- नहीं, नहीं, यह अनुचित है, आपस में वाद-विवाद न करें ऐसा लग रहा है कि जैसे बुंदेलखण्‍ड के दोनों नेताओं की मिली-जुली लड़ाई लग रही है ।

श्री गोपाल भार्गव - उपाध्‍यक्ष महोदय, मुकेश जी अच्‍छा भाषण करते हैं मेरे भाई हैं, मुझे दु:ख इस बात का है कि मेरे विधानसभा क्षेत्र के वोटर को इतनी कम जानकारी है ।

श्री मुकेश नायक - मुझे थोड़ा सा बोलने दें तो बड़ी कृपा होगी, मैं अपनी बात पूर्ण कर लूं ।

उपाध्‍यक्ष महोदय- 5 मिनट में आप समाप्‍त करेंगे ।

श्री मुकेश नायक - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय,15 मिनट में मैं खत्‍म कर दूंगा

उपाध्‍यक्ष महोदय- मुकेश जी, इतना नहीं, आप सबका समय मैंने जोड़ लिया है ।

श्री मुकेश नायक- उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं राज्‍य बीमारी सहायता योजना के पैसे की बंदरबाट की बात करना चाहता हूँ, राज्‍य बीमारी सहायता योजना की राशि का इस प्रदेश में कैसे बंदरबाट हो रहा है उसका एक नमूना प्रस्‍तुत करना चाहता हूँ । भोपाल में, एक शिवम हॉस्पिटल है, वह अस्‍पताल बहुत बड़े ठेकेदार का है जो आज से 10 साल पहले स्‍कूटर पर घूमता था,आज 18 करोड़ का मालिक बन गया है ।

वनमंत्री(डॉं गौरीशंकर शेजवार)- उपाध्‍यक्ष महोदय, ऐसे आरोप लगाने के पहले कम से कम कुछ नियम कानून होते हैं, इन्‍होंने क्‍या बोला है, इनसे पूछो रिकार्ड दिखवा लीजिए ।

डॉं गोविन्‍द सिंह- शिवम हॉस्पिटल से आपका क्‍या लेना-देना है ।

श्री मुकेश नायक- कृपया मैं पूरी बात कर लूं ।

डॉं गौरीशंकर शेजवार- (श्री अजय सिंह जी द्वारा अपने आसन पर खड़े होने पर) आपका विषय तो समाप्‍त हो गया है, एक नम्‍बर की सीट पर आने के लिए पहले तो अच्‍छी कुण्‍डली चाहिए और दूसरा लक्षण चाहिए और उपाध्‍यक्ष महोदय, यह दोनों गुण जिसमें नहीं है वह कभी एक नम्‍बर की सीट पर नहीं आ सकता । (व्‍यवधान) मैं आपसे नहीं कह रहा हूँ, आप क्‍यों खड़े हो रहे हो, मैंने आपसे तो नहीं कहा कि अजय सिंह जी कभी एक नम्‍बर की सीट पर नहीं आ सकते ।

उपाध्‍यक्ष महोदय- आपने बात कर ली, कृपया बैठ जाएं, उन्‍होंने किसी पर व्‍यक्तिगत आरोप नहीं लगाए हैं ।

डॉं गौरीशंकर शेजवार- इन्‍होंने स्‍पष्‍ट कहा है और इन्‍होंने इंगित किया है यह नहीं होना चाहिए ।

श्री मुकेश नायक- क्‍या सत्‍ता और शासन का दुरपयोग करने वाले किसी आदमी की ओर हम इंगित नहीं कर सकते ।

डॉं गौरीशंकर शेजवार- मैं यह प्रार्थना करना चाहता हूँ विपक्ष के प्रभारी नेता बैठे हैं क्‍या पूरा समय इन्‍होंने अपने दल के एक व्‍यक्ति को दे दिया है । (व्‍यवधान)

श्री मुकेश नायक- यह आपकी समस्‍या नहीं है ।

डॉं गौरीशंकर शेजवार- उपाध्‍यक्ष महोदय, आखिरकार विधान सभा नियमों से चलेगी, आपत्ति उठाने वाले लोग यह कह रहे हैं कि पूरा समय मुकेश नायक को दे दिया है ।

श्री मुकेश नायक- यह आपकी समस्‍या नहीं है ।

उपाध्‍यक्ष महोदय- डॉं साहब, नियम प्रक्रिया हम भी कुछ जानते हैं ।

श्री गौरीशंकर शेजवार - लेकिन व्‍यवस्‍था में कहीं कोई अव्‍यवस्‍था दिखेगी तो मैं यह कहूँगा कि व्‍यवस्‍था से यह सदन चले. (व्‍यवधान)

उपाध्‍यक्ष महोदय - क्‍यों व्‍यवधान पैदा कर रहे हैं ? डॉ. शेजवार साहब आप तो इस सदन के वरिष्‍ठतम सदस्‍य हैं. कृपा कर बैठ जायें. आप लोग भी बैठ जायें. नायक जी आप बोलें.

श्री गौरीशंकर शेजवार - उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा यह कहना है कि प्रभारी नेता प्रतिपक्ष खड़े होकर यह कह दें कि मेरे दल से इनके अलावा कोई दूसरा नहीं बोलेगा, इसमें हमें कोई आपत्ति नहीं है. (व्‍यवधान)

उपाध्‍यक्ष महोदय - बैठ जाइये. डॉक्‍टर साहब 3-4 मिनिट्स तो आप ही ने ले लिया है. हमको समय कम करना पड़ेगा. मुकेश जी आप 5 मिनिट्स में समाप्‍त करें. (व्‍यवधान)

श्री गौरीशंकर शेजवार - मैं अपने विभाग को बोलूँगा कि अपने 10 मिनिट्स यहीं समर्पित करता हूँ.

उपाध्‍यक्ष महोदय - आपका प्रस्‍ताव संज्ञान में ले लिया गया है. 5 मिनिट्स में समाप्‍त करिये.

श्री जितु पटवारी - डॉक्‍टर साहब, आप बड़े हैं, उम्र ज्‍यादा हो गई है. आप हिल-हुला जाओगे तो हम ऐसी आवाज कहां से लाएंगे ?

श्री गौरीशंकर शेजवार (श्री जितु पटवारी की ओर इशारा करते हुए) - मैं कहना चाहता हूँ कि इनको कांग्रेस के वरिष्‍ठ सदस्‍य कहने लग जायेंगे. ये इतने दिग्‍गज सामने बैठे हैं, इनकी तरफ से कभी कोई आपत्ति नहीं आती है. कानून का ठेका तो कांग्रेस ने श्री जितु पटवारी को देकर रखा है.

उपाध्‍यक्ष महोदय - श्री मुकेश जी, आप 2 मिनिट में समाप्‍त करें.

श्री मुकेश नायक - मैंने तो अभी ही बोला नहीं है.

उपाध्‍यक्ष महोदय - आपने बहुत बोल लिया है. मुझे दूसरे वक्‍ता को बुलाना पड़ेगा.

श्री मुकेश नायक - प्रतिपक्ष में कौन नेता कितना समय बोलेगा ? यह श्री शेजवार थोड़े ही तय करेंगे.

उपाध्‍यक्ष महोदय - दोनों ही पक्ष व्‍यवधान कर रहे हैं. किसी एक पक्ष को हम क्‍या कहेंगे ? डॉक्‍टर साहब कृपा करके बैठ जायें. [अच्‍छा, वे सदन के बाहर जा रहे हैं] श्री मुकेश जी 2 मिनिट में समाप्‍त करें.

श्री मुकेश नायक - उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं राज्‍य बीमारी सहायता योजना की चर्चा कर रहा था. एक शिवम हॉस्पिटल भोपाल में 10 नम्‍बर बस स्‍टॉप में है. इस शिवम हॉस्पिटल का रजिस्‍ट्रेशन भी, राज्‍य बीमारी सहायता योजना में नहीं है. उन्‍हीं अस्‍पतालों को राज्‍य बीमारी सहायता योजना का पैसा दिया जा सकता है, जो सरटेन स्‍पेसिफिकेशन्‍स को पूरे करते हों. स्‍वास्‍थ्‍य और सरकार के मापदण्‍डों को पूरा करते हों और उसी आधार पर राज्‍य बीमारी सहायता योजना का रजिस्‍ट्रेशन होता है, उसके बाद उनको पैसा दिया जाता है.

स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जी, यह बतायें कि यह शिवम हॉस्पिटल का कौन-सा रजिस्‍ट्रेशन है ? दूसरी चीज, कैन्‍सर के इलाज के लिये किन हॉस्पिटल को पैसा दिया जा सकता है ? और कैन्‍सर हॉस्पिटल के मापदण्‍ड क्‍या हैं ? सुनिये, आप स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री हैं, आपको पता नहीं होगा इसलिए मैं बता देता हूँ. पेट स्‍कैन होना चाहिये, कैन्‍सर हॉस्पिटल के लिए, कीमोथेरिपी की फैसिलिटी होनी चाहिए, ऑन्‍कोलॉजिस्‍ट स्‍पेशलिस्‍ट डॉक्‍टर होना चाहिए, रेडियोथैरिपी की फैसिलिटी होनी चाहिए. गामाकैमरा होना चाहिए और मैमोग्राफी की मशीन होनी चाहिए. शिवम हॉस्पिटल में कौन-सी मैमोग्राफी की मशीन है ? कौन-सा ऑन्‍कोलॉजिस्‍ट है ? कौन-सी रेडियो‍थैरेपी की फैसिलिटी है वहां पर. वहां पर कौन-सा कैन्‍सर सर्जन है ? किस आधार पर इतनी विपुल धनराशि आपने राज्‍य बीमारी सहायता योजना के अन्‍तर्गत दी गई और (XXX). मैंने प्रश्‍न लगाया था.

उपाध्‍यक्ष महोदय - नहीं, मुकेश जी. इस तरह नहीं. आपको आरोप लगाने के पहले नोटिस देना होगा. इसे कार्यवाही से निकाला जाये.

श्री मुकेश नायक - मैं पूरे दस्‍तावेज लाया हूँ एवं पटल पर रखता हूँ.

उपाध्‍यक्ष महोदय - इसे कार्यवाही से निकाला जाये.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया - उपाध्‍यक्ष महोदय, यह कार्यवाही से निकलवाइये. बिना नोटिस दिये सीधा आरोप लगा रहे हैं.

उपाध्‍यक्ष महोदय - इसे कार्यवाही से निकाल दिया है.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया - बहुत बहुत धन्‍यवाद.

उपाध्‍यक्ष महोदय - नियम है, मुकेश जी. तभी आप व्‍यक्तिगत आरोप लगा सकते हैं. अब आप समाप्‍त करें. हम विश्‍वास सारंग को बुलवायेंगे.

श्री मुकेश नायक - यह सच था, जिससे तिलमिला गये. मेरे विधानसभा के प्रश्‍न के उत्‍तर में शासन ने जो धनराशि देने का कहा है, इनका राज्‍य बीमारी सहायता योजना का फिक्‍स ऑपरेशन सिस्‍टम है. और मैं आरोप लगा रहा हूं कि सत्ता और सरकार में बैठे लोगों का इसमें कमीशन भी बिलकुल फिक्स है. आप चाहेंगे, तो मैं प्रमाण दे दूंगा. (सत्ता पक्ष के सदस्यों से) आपको भी पता है. मैं प्रमाण दे रहा हूं. मेरे पास कागज रखे हुए हैं.

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र) -- उपाध्यक्ष महोदय, आज तक ये जिंदगी में किसी चीज का प्रमाण नहीं दे पाये. सिर्फ कहते रहे हैं. एक्चुअल में ये बहुत अच्छे प्रवचनकर्ता हैं,रामायणी भी हैं और उसी रामायण में यह लिखा है कि साधु, चोर और लंपट, ज्ञानी,जस अपने तस अनका जानी। यह मैं नहीं कह रहा हूं, इनकी रामायण में लिखा है, जिसके यह प्रवचनकर्ता है.

श्री मुकेश नायक -- उपाध्यक्ष महोदय, यह इन पर लागू होता है, इनके बारे में यह कहा गया है.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- उपाध्यक्ष महोदय, ये वह शख्स हैं, जिन्होंने साधू नहीं छोड़े, संत नहीं छोड़े, अब हमको लपेट रहे हैं. ये कैसे पूंजीपति बने, हम जानते हैं, हमसे ज्यादा इनको कौन जानता होगा.

उपाध्यक्ष महोदय -- रामायण के आप दोनों विद्वान हैं. कृपया बैठ जायें.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- उपाध्यक्ष महोदय, अब हम बैठे रहें, तो दिक्कत हैं. हम खड़े हो जाते हैं, तो कहते हैं कि तिलमिला जाते हैं.

श्री मुकेश नायक -- उपाध्यक्ष महोदय, इस मध्यप्रदेश की राजनीति में आपको भी सब लोग जानते हैं, मुझे भी सब लोग जानते हैं. कोई छुपा हुआ थोड़ी है. यह आपके बारे में ही कहा गया है.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- उपाध्यक्ष महोदय, आप महर्षि महेश योगी जी के कितने बड़े भक्त रहे हो,यह पूरा मध्यप्रदेश जानता है.

श्री मुकेश नायक -- उपाध्यक्ष महोदय, मैं सस्पेसीफिक बता रहा हूं आपको. मेरे प्रश्न के जवाब में आपने यह उत्तर दिया कि इतनी इतनी धनराशि उनको उपलब्ध कराई गई. मैंने स्पेसिफिकेशन आपको बताये. आप बताइये कि किस आधार पर यह राशि आपने उनको उपलब्ध कराई.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- उपाध्यक्ष महोदय, जब ये हमारा नाम लेंगे, तो क्या हम जवाब नहीं दें. क्या हम इनकी बात को सुनते रहें, ये असत्य वाचन कर रहे हैं. हम अगर गरीबों की सेवा करते हैं, तो करेंगे. हमें अगर उनके इलाज के लिये पैसा देना पड़ेगा तो देते रहेंगे. हमारे मुख्यमंत्री जी कह रहे हैं और हम कह रहे हैं कि गरीबों के इलाज के लिये इस सरकार से ज्यादा पैसा देश में कोई दे नहीं पाया. जितना और पैसा गरीबों के इलाज के लिये देना होगा, वह हम देंगे.

श्री मुकेश नायक -- उपाध्यक्ष महोदय, आपने मापदण्ड बनाये हैं, कोई हमने मापदण्ड नहीं बनाये. आपने मापदण्ड बनाये हैं. इन्होंने शिवम् हॉस्पीटल को कैसे ये धनराशि उपलब्ध कराई, मैं यह इनसे जानना चाहता हूं. यह बीजेपी की सरकार के द्वारा प्रस्तुत किया हुआ बजट और इनके नेताओं के द्वारा दिये गये भाषण सिर्फ असत्य के पुलिन्दे हैं, इसके अलावा कुछ नहीं हैं और इसके कारण से यह बजट बिलकुल निर्रथक है, जनविरोधी है, भविष्य का कोई रोड मेप इस बजट में नहीं है. इसलिये मैं इस बजट का विरोध करता हूं. आपने बोलने के लिये समय दिया, इसके लिये धन्यवाद.

12.48 बजे अध्यक्ष महोदय (डॉ. सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.

श्री विश्वास सारंग (नरेला) -- अध्यक्ष महोदय, मैं वित्त मंत्री जी द्वारा प्रस्तुत बजट की प्रशंसा भी करता हूं, उसका समर्थन भी करता हूं और निश्चित रुप से बजट किसी भी सरकार का रोड मेप होता है. सरकार की आशा, आकांक्षा, सरकार की आगे की प्लानिंग और सरकार किस मंतव्य के साथ प्रदेश में अपना राज्य चला रही है, इसका पूरा का पूरा दस्तावेज बजट होता है. मुकेश नायक जी थक गये, पसीना आ गया. क्योंकि यह कहा गया है कि यदि हम सच बोलेंगे, तो हम कम्फर्टेबल रहेंगे. यदि हम असत्य बोलेंगे, तो हमें पसीना जरुर आयेगा. उनके द्वारा कहा गया कि कुछ नहीं है इस बजट में. मुकेश नायक जी कह रहे थे कि कुछ भी नहीं है. सब बर्बाद हो गया. सब असत्य का पुलिन्दा है. कृषि कर्मण अवार्ड गलत मिल गया, इस पर भी ये कहने लगे. दिल्ली की सरकार भी ऐसे ही चल रही है. केंद्र की सरकार जब कांग्रेस की थी, मुकेश नायक जी आप आदरणीय मनमोहन सिंह जी की बात कर रहे थे, उन्हीं ने इसकी शुरुआत की थी मध्यप्रदेश को कृषि कर्मण अवार्ड देने की. (श्री मुकेश नायक के बैठे बैठे कुछ कहने पर) मुकेश जी, मैं एक बार भी आपके बीच में नहीं बोला. आप तो बड़े भाई हो. कह रहे थे कि अभी नये नये आये हैं दो ही बार. आपका आशीर्वाद रहेगा, तो हर बार आऊंगा और हम सब लोग आयेंगे. माननीय मुकेश भैया आप कह रहे थे कि बजट में कुछ नहीं है, आपने बजट पढ़ा नहीं, आप तो हेल्थ वाला मामला पढ़ते रहे, रेडक्रास की बात मैंने नहीं कही नहीं तो आप बाद में मुझसे लडेंगे.कह रहे थे कि बजट में कुछ नहीं है, बजट पढ़ो, बजट में बच्चों की आशा है, बेटियों की आकांक्षा है, युवाओं का विश्वास है, महिलाओं की शक्ति है, किसानों का आत्मबल है, व्यापारियों का संबल है. आप बजट तो पढें.

श्री तरूण भानोत -- विश्वास भाई बजट में सब कुछ है पर सरकार के पास में पैसा कहां है.वह तो बताओ, बजट मे तो सब है. पैसा कहां है.

श्री विश्वास सारंग --मुकेश भाई बजट में मध्यप्रदेश की साढे सात करोड़ जनता का विश्वास है और यदि यह विश्वास देखना है तो मैहर के चुनाव का रिजल्ट देखो जहां हम 28,000 वोटों से जीते हैं. मुकेश भाई कह रहे थे कि मैहर का चुनाव कुछ नहीं है. मुकेश भाई यह सेम्पल सर्वे है हमने 12 साल में जो किया और आपने 12 साल विपक्ष में बैठकर जो कुछ किया उसका सेम्पल सर्वे है मैहर का चुनाव. मुकेश भाई किसी ने कहा है -

सच मानिये हुजूर चेहरे पर धूल है ,

इल्जाम आईने पर लगाना फिजूल है.

मुकेश भैय्या आपका यह अधिकार भी है और कर्तव्य भी है कि विपक्ष में बैठकर आप सत्ता पक्ष की बुराईयों को उजागर करें पर आपको यह बात जरूर ध्यान रखना चाहिये कि आपने बहुत से वरिष्ठ लोगों के नाम लिये, वो सीनियर्स आज इस सदन में नहीं है और हम चाहेंगे कि अगली बार हम भी आपका उसी तरह से नाम लें.

श्री तरूण भानोत-- इसका मतलब आप नहीं रहेंगे.

श्री विश्वास सारंग -- यह तो समझना पड़ेगा. हम यह चाहेंगे परंतु आप यदि असत्य की बात कहेंगे, आपने पटवा जी का नाम लिया, जोशी जी का नाम लिया, विक्रम वर्मा जी का नाम लिया...

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- अध्यक्ष महोदय, मैहर के चुनाव की बात आई है.

अध्यक्ष महोदय-- बहुत पहले निकल गई. बात आगे बढ़ गई है.

श्री विश्वास सारंग- जी, मैहर जो रीवा के पास है.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--अध्यक्ष महोदय, 7 हजार 481 लोगों के गरीबी रेखा में नाम लिखे गये हैं . 6 माह के अंदर यह पंचायत मंत्री का जबाव है.

श्री विश्वास सारंग -- तो इसमें क्या गलत है, क्या बुराई है.

श्री सुन्दरलाल तिवारी- एक विधानसभा में ?

श्री विश्वास सारंग -- तो इसमें क्या बुराई है. हमारे संजय पाठक जी जागरूक विधायक है 12,000 नाम लिखाये हैं.

श्री सुन्दरलाल तिवारी- अध्यक्ष महोदय, मेरा कहना यह है कि यह 7 हजार 481 गरीबी की रेखा के नीचे वालों के नाम चुनाव के 6 माह के अंदर यह जोड़े गये हैं. चुनाव इस तरह से जीता गया है. इस तरह से चुनाव आप जीते हैं और केवल गरीबी की रेखा के कार्ड ही नहीं, विभिन्न योजनाओं के तहत अलग है, इंदिरा आवास अलग है, सारी चीजें अलग हैं.

अध्यक्ष महोदय-- तिवारी जी आप बैठ जायें. विश्वास जी आप अपनी बात जारी रखें.

श्री रामेश्वर शर्मा -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी एक प्रार्थना है. तिवारी जी ने जो कहा है क्या मध्यप्रदेश का नागरिक, क्या मध्यप्रदेश की जनता को आप बिकाऊ समझते हैं, गरीबी रेखा के नीचे उसका नाम लिख लिया इसलिये उसने वोट दिया क्या कहना चाहते हैं इस लोकतंत्र में, क्या गरीब बिकाऊ है.

अध्यक्ष महोदय-- शर्मा जी, बैठ जायें. उन्हें अपना भाषण पूरा करने दें.

श्री रामेश्वर शर्मा-- क्या गरीब बिकाऊ है. अगर गरीब है तो मुख्यमंत्री जी की घोषणा है उसको 1 रूपये किलो गेहूं मिलेगा, उसका राशन कार्ड बनेगा.

अध्यक्ष महोदय-- रामेश्वर जी बैठ जायें.

श्री सुन्दरलाल तिवारी- अध्यक्ष महोदय, इसी सदन में पंचायत मंत्री जी का जवाब है.6 माह के अंदर 7 हजार 481 लोगों के नाम चुनाव के पहले जोड़े गये हैं. और जिस तरह से प्रजातंत्र की वहां पर हत्या की गई है , मैहर में प्रजातंत्र की हत्या की गई है. यह 7 हजार 481 गरीब कहां थे. अगर मैं गलत कह रहा हूं तो पंचायत मंत्री जी यहां पर विराजमान हैं.

अध्यक्ष महोदय-- तिवारी जी बैठ जायें, विश्वास जी को बोलने दें (श्री रामेश्वर शर्मा के खड़े होने पर) अरे आप बैठ जायें विश्वास जी उत्तर दे देंगे. वे सब बात का उत्तर दे देंगे. आप बैठ जायें. कृपा करके बैठ जायें. तिवारी जी बैठ जाईये.

अध्‍यक्ष महोदय-- कुछ नहीं लिखा जायेगा. केवल विश्‍वास सारंग जी का लिखा जायेगा, किसी का कुछ नहीं लिखा जायेगा. ...(व्‍यवधान)..

श्री सुंदरलाल तिवारी-- XXX

श्री गोपाल भार्गव (पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री)-- हम तो अंत्‍योदय के समर्थक हैं और अंतिम आदमी का भला करना चाहते हैं, इसलिये जुड़ा है, जब तक अंतिम आदमी गरीबी रेखा के ऊपर नहीं उठ जाता तब तक हम करेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय-- अरे तिवारी जी बैठो, यह वादविवाद क्‍या हो रहा है यहां पर. बैठ जाइये आप, तिवारी जी सीधी बात नहीं करेंगे, बैठ जाइये.

श्री गोपाल भार्गव-- यह पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय जी के सपनों को साकार कर रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी बैठ जाइये आप. तिवारी जी बैठ जाइये, विश्‍वास जी आप बोलिये किसी की बात का उत्‍तर देने की जरूरत नहीं है.

श्री विश्‍वास सारंग-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तिवारी जी ने गरीबी रेखा के राशन कार्ड में नाम बढ़ने की बात की, तिवारी जी आप यदि उदाहरण दे रहे हो तो आपके समय रीवा की वोटर लिस्‍ट में नाम जुड़े थे उसका भी जिक्र कर देना, भैंसों के तबेले में आदमियों के नाम जोड़े थे आपने. ....(व्‍यवधान)....

एक माननीय सदस्‍य-- अब नहीं है जवाब तिवारी जी के पास.....(व्‍यवधान)....

श्री विश्‍वास सारंग-- अब जवाब नहीं है, अब बैठे-बैठे मुस्‍कुराओगे. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बजट पर चर्चा हो रही है. ....(व्‍यवधान)....

श्री सुंदरलाल तिवारी-- अध्‍यक्ष महोदय, हम पर झूठे आरोप लगाये जा रहे हैं और हम प्रमाण के साथ दे रहे हैं (हाथ में कागज दिखाते हुये) यह प्रमाण हैं.

श्री विश्‍वास सारंग-- हम भी प्रमाण के साथ दे रहे हैं.

श्री सुंदरलाल तिवारी-- XXX

अध्‍यक्ष महोदय-- कुछ रिकार्ड में नहीं आयेगा, तिवारी जी ने जो बोला है. कुछ भी लिखा नहीं जायेगा. ....(व्‍यवधान)....

नगरीय विकास एवं पर्यावरण राज्‍य मंत्री (श्री लाल सिंह आर्य)-- कांग्रेस का छल है, मैहर में जनता की जीत हुई है, सरकार के कामों की जीत हुई है.

अध्‍यक्ष महोदय-- मंत्री जी बैठिये कृपया आप अपने सदस्‍य को बोलने दीजिये.

विश्‍वास सारंग-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा पूरा समय तो तिवारी जी ने ले लिया.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप कृपा करके अपनी बात जारी रखें.

श्री विश्‍वास सारंग-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मुकेश भाई बजट की बहुत बात कर रहे थे. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बात सही है कि मध्‍यप्रदेश का यह बजट जो वित्‍त मंत्री जी ने प्रस्‍तुत किया है इसमें कहीं भी आंकड़ों की बाजीगरी नहीं है, कहीं असत्‍य नहीं है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अमेरिकन प्रशासक जेकब लियो ने कहा है बजट के बारे में "Budget is not just a collection of numbers but an expression of our values an expression. मतलब बजट केवल आंकड़ों की बाजीगरी नहीं है. सरकार का मंतव्‍य, सरकार की भावना, सरकार का कमिटमेंट इसका जीता जागता दस्‍तावेज है यह बजट. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब मैं इस बात को कह रहा हूं तो लियो जेकब की इस बात को चरितार्थ माननीय वित्‍त मंत्री जी ने किया है. यह बजट केवल अर्थशास्‍त्र के उस शब्‍दकोष के आसपास नहीं घूमता जिसमें जीडीपी की बात होती है, जीएसडीपी की बात होती है, एसओटीआर की बात होती है, आयोजना व्‍यय, पूंजीगत व्‍यय केवल इस तक सीमित नहीं है माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बल्कि विगत दिनों हम सबको मालूम है भूटान में माननीय अध्‍यक्ष महोदय नई टर्मीनॉलॉजी शुरू हुई और उस पर पूरी दुनिया में बहस शुरू हुई है कि केवल जीडीपी किसी भी राज्‍य का किसी भी सरकार का ग्रोथ उससे नहीं मापी जाती. भूटान में नई टर्मीनॉलॉजी शुरू हुई Happiness Index की बात हुई, कि सरकार के कारण, सरकार की नीति के कारण, सरकार के बजट के कारण, सरकार के इम्‍प्‍लीमेंटेशन के कारण लोगों में खुशी है या नहीं, Happiness है या नहीं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं बधाई देना चाहता हूं माननीय मुख्‍यमंत्री जी को, माननीय वित्‍त मंत्री जी को और समस्‍त केबीनेट को कि मैं यह बात ताकत के साथ कह सकता हूं कि यदि मापदण्‍ड अपनाया जाये, यदि इसकी वेल्‍यू निकाली जाये तो देश में यदि Happiness Index में नंबर 1 है तो वह मध्‍यप्रदेश है, मध्‍यप्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की सरकार है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, चाणक्‍य ने कहा है किसी भी शासक के लिये संतोष की बात तब होती है, जब वहां की जनता शासक की नीतियों से खुशी की अनुभूति करती है और माननीय अध्‍यक्ष महोदय वह हमें देखने को मिलता है, मैहर का चुनाव हर क्षेत्र में माननीय अध्‍यक्ष महोदय जिस प्रकार से भारतीय जनता पार्टी जीत रही है, संसद से लेकर ..... (व्‍यवधान)....

अध्‍यक्ष महोदय-- बैठ जायें, आप भी बैठ जायें, माननीय सदस्‍य का भाषण पूर्ण होने तक सदन के समय में वृद्धि की जाये, मैं समझता हूं सदन इससे सहमत है.

श्री विश्वास सारंग-- अध्यक्ष महोदय, यह सरकार दीनदयाल जी के विचार अन्त्योदय पर काम कर रही है. समाज के अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति की सेवा, उसका कल्याण यही हमारा लक्ष्य है.

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- XXX (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय-- आप बोलें. वह (श्री तिवारी) नहीं मानेंगे.उनका कुछ भी रिकार्ड में नहीं आयेगा.

श्री विश्वास सारंग-- अध्यक्ष महोदय, घान का घान ही खराब है.(हंसी) तिवारी जी मेरी आपसे कोई जोड़ नहीं है. मेरे से आप वरिष्ठ हो.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--XXX

श्री विश्वास सारंग--अध्यक्ष महोदय, तिवारीजी को कुछ हो गया. जैसा मैंने कहा कि यह बजट सार्थक है, सकारात्मक है. सबसे महत्वपूर्ण बात है वह यह कि जिस दिन बजट प्रस्तुत हुआ था तो मैंने पहला रिएक्शन यही दिया था कि इस बजट में आर्थिक और वित्तीय अनुशासन और वित्तीय प्रबंधन का पूरा ध्यान रखा गया. यह केवल अभी से शुरु नहीं हुआ. 2003 की बात करें जब हमें सरकार प्राप्त हुई थी, यह प्रदेश बीमारु राज्य कहलाता था. कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलता था.

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- अध्यक्ष महोदय, हमसे असत्य नहीं सुना जा रहा है इसलिए मैं सदन से जा रहा हूं.

अध्यक्ष महोदय--मेहरबानी आपकी.

 

(माननीय सदस्य सदन से चले गये)

 

श्री तरुण भनोत--XXX

अध्यक्ष महोदय-- बैठ जायें.

श्री विश्वास सारंग--तरुण भाई साहब आप विद्वान सदस्य हैं. सभी बातें आयेंगी. अध्यक्ष महोदय, अर्थव्यवस्था में यदि हम औसत वृद्धि की बात करें तो इस सरकार ने 10 प्रतिशत की औसत वृद्धि की है. जीडीपी लगातार बढ़ा है. किसी भी प्रदेश में किसी भी शासन के विकास का मापदंड,उसके बजट के आयोजना व्यय(प्लान एक्सपेंडिचर) और पूंजीगत व्यय (केपिटल एक्सपेंडिचर)से मापा जाता है.

अध्यक्ष महोदय, मुकेश भाई ने बहुत बात की. उन्होंने बात भी सही कही कि आप केवल 2003 से बात करते हो. मुकेश भाई, मैंने थोड़ी बहुत मेहनत की है. आपको लोगों ने दे दिया. आप आंकड़ें कहां से लेकर आये,मुझे नहीं मालूम. मैंने मध्यप्रदेश शासन के वित्त सचिवों के स्मृति पत्रों को पूरा पढ़ा. अभी का नहीं पढ़ा, बल्कि 1993 से लेकर 2003 और 2003 से लेकर 2016 तक के सभी स्मृति पत्रों को पढ़ने के बाद आंकड़े दे रहा हूं. इसलिए आप इसको न चैलेंज करना और न असत्य मानना.

अध्यक्ष महोदय, मुकेश भाई ने कहा कि सब कुछ असत्य है, फरेब है. आंकड़े गलत हैं. जैसा मैंने कहा कि यदि विकास की बात हो तो प्लान एक्सपेंडिचर की हमें बात करनी चाहिए. 2014-15 में इसी सरकार में पिछले साल हमारा प्लान एक्सपेंडिचर था 40 हजार करोड़ रुपये, मैं वित्त मंत्रीजी को बधाई दूंगा कि आज यह बढ़कर 74 हजार करोड़ रुपये हुआ है. एक साल में हुआ है. ( श्री मुकेश नायक,सदस्य द्वारा बैठे बैठे कहे जाने पर) मुकेश भाई मैं बताऊंगा. अध्यक्षजी, एक साल में 80 प्रतिशत की वृद्धि. मात्र दो साल में लगातार वृद्धि. आप बात कर रहे थे तो 1993 का बता दूं. 1993 में यह केवल 2000 करोड़ रुपये था. वर्ष 1993 का बता दूं, वर्ष 1993 में यह केवल 2000 करोड़ रुपए था और ये वर्ष 1993 से वर्ष 2003 तक 10 साल रहे..

श्री के.पी. सिंह - अध्यक्ष महोदय, वर्ष 1990 से 1993 के बीच में कौन लोग थे? वर्ष 1993 की स्थिति जो आप बता रहे हैं, और वर्ष 1990 से वर्ष 1993 के बीच में जो स्थिति थी उसके लिए कौन जवाबदार है? उसके बारे में भी जरा बता दें, उसके लिए आप नहीं बोलेंगे?

श्री विश्वास सारंग - अध्यक्ष महोदय, यह जो मैं आपको आंकड़े दे रहा हूं, कांग्रेस सरकार के ही दे रहा हूं.

श्री के.पी. सिंह - अपने पुराने आंकड़े भी तो दे दो.

श्री विश्वास सारंग - आप वह बोलेंगे तो अगली बार वह भी दे देंगे.

श्री के.पी. सिंह - अगली बार दे देना, वर्ष 1990 से वर्ष 1993 की तुलना कर लेना.

श्री विश्वास सारंग - वह भी दे देंगे. वह अच्छे होंगे. फिर बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी. फिर वर्ष 1956 से 1990 भी लेना पड़ेगा. अध्यक्ष महोदय, जो आज 74000 करोड़ रुपए है, वह इनके शासनकाल में कितना था, जब इन्होंने हमें वर्ष 2003 में सत्ता सौंपी थी, उसके एक साल पहले, केवल 5684 करोड़ रुपए. यह आज कितना है, 74000 करोड़ रुपए है! इन्होंने 10 साल में 1-2 हजार करोड़ रुपए भी नहीं बढ़ाया, हमने 70000 करोड़ रुपए का इजाफा प्लॉन एक्पेंडिचर में किया है.

अध्यक्ष महोदय, यदि हम सरकार के कुल व्यय के अनुपात में प्लॉन एक्पेंडिचर की बात करें तो वर्ष 1993 में यह केवल 22 प्रतिशत था. वर्ष 2003-04 में यह 25 प्रतिशत हुआ. केवल 3 प्रतिशत की वृद्धि ये 10 साल में कर पाए. वर्ष 2016-17 में जो आज का साल है इसमें हम 47 प्रतिशत यह प्लॉन एक्पेंडिचर का अनुपात लेकर आ रहे हैं. मतलब हमने 25 से 47 प्रतिशत किया और आप 22 से 25 प्रतिशत ही कर पाए थे. कहने का मतलब है कि इन 12-13 वर्षों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने लगभग 13 गुना की वृद्धि प्लॉन एक्पेंडिचर में की है.

श्री तरुण भनोत - मैं यह पूछना चाहता हूं कि वर्ष 1993 में आपकी उम्र कितनी थी?

अध्यक्ष महोदय - यह प्रश्नकाल नहीं है, उनको अपनी बात कहने दीजिए. यह कोई प्रश्नकाल है क्या, आप बैठिए. आप किसी सदस्य का उत्तर मत दीजिए. आप सीधे अपनी बात रखें.

श्री विश्वास सारंग - अध्यक्ष महोदय, मैं किसी का उत्तर नहीं दे रहा हूं. वह इस लायक है भी नहीं कि उत्तर दिया जाय. अध्यक्ष महोदय, यह मेमोरेंडम ऑफ फाइनेंस सेकट्री है, यदि हम पूंजीगत व्यय की बात करें तो वर्ष 2016- 17 उसमें 36000 करोड़ रुपए अनुमानित है. इससे पहले साल में वर्ष 2015-16 में 21000 करोड़ रुपए था. हम साल में 21000 करोड़ रुपए से 36000 करोड़ रुपए पर पहुंचे हैं. यदि इसी की बात वर्ष 2003-04 की कहूं तो यह केवल 3000 करोड़ रुपए था. हम 3000 से 36000 करोड़ रुपए पर पहुंच गये हैं. अध्यक्ष महोदय, यह सीधे-सीधे विकास की बात है. यही परिलक्षित होती है, सड़क की बात, बिजली की बात, नहर की बात, खेत की बात, खलिहान की बात, हर जगह जो विकास दिख रहा है वह कमिटमेंट के कारण दिख रहा है. इन 10-12 वर्षों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने जो काम किया है, उसी का परिणाम है कि वह जमीन पर हमें हकीकत दिख रही है. यदि हम जीडीपी के अनुपात में पूंजीगत व्यय को देखे तो यह बहुत महत्वपूर्ण आंकड़ा है, वह आता है 5.06 प्रतिशत, यह शायद देश में जो विकसित राज्य बोले जाते हैं, चाहे गुजरात हो, चाहे तमिलनाडू हो, चाहे महाराष्ट्र हो, उनके लगभग बराबर हम पहुंचे हैं. शायद हम उनसे भी ऊपर हो गये हैं, 5.0 प्रतिशत. वर्ष 2003 में यह अनुपात केवल 2.8 प्रतिशत, जब इस राज्य में कांग्रेस की सरकार थी. केवल आयोजना व्यय, पूंजीगत व्यय पर ही हमने काम नहीं किया. अध्यक्ष महोदय यदि हम विकास करना चाहते हैं तो हमें साधन संसाधन भी चाहिए, हमें पैसा भी चाहिए जैसा कि अभी तरूण जी कह रहे थे कि बजट बहुत अच्छा है लेकिन पैसा नहीं है. वह आंकड़े भी मैं लेकर आया हूं. हमने इन 12 वर्षों में पैसे की भी समुचित व्यवस्था की है, उसी का परिणाम है कि यदि हम राजस्व प्राप्ति की बात करते हैं तो 2003-04 में राजस्व प्राप्ति थी 15863 करोड़ रूपये और आज मुझे यह बताते हुए खुशी है कि यह आर्थिक प्रबंधन है, यह सुशासन है, यह शासन की कसावट है कि आज हमने राजस्व प्राप्ति में जो इजाफा किया है वह 1 लाख 26 हजार करोड़ रूपये का किया है. यह पिछले वर्ष केवल 88664 करोड़ रूपये था और उसमें भी हमने इजाफा किया है. कहने का सीधा सीधा तात्पर्य है कि यदि हम विकास करना चाहते हैं तो हम केवल लफ्फाजी नहीं करते हैं, केवल हम आंकड़ो की बाजीगरी नहीं करते हैं, केवल हम दस्तावेज नहीं छपवाते हैं, केवल हम योजना नहीं बनाते हैं कोई योजना बनाने के पहले उसके लिए समुचित पैसा मिल सके उसके लिए भी पूरी प्लानिंग करते हैं.

माननीय अध्यक्ष महोदय, केन्द्र सरकार के मामले में अभी मुकेश भाई ने बहुत बातें की है. मैं इस सदन के माध्यम से भाजपा की केन्द्र सरकार को और नरेन्द्र मोदी जी को बधाई देना चाहता हूं, मुकेश भाई आपको भी मेज थपथपानी चाहिए 32 से बढ़ाकर 42 प्रतिशत हमें करों में हिस्सा देने की घोषणा की है, यह देश के इतिहास में पहली बार हुआ है, यह 10 प्रतिशत है और वित्त आयोग सिफारिशें आपके समय भी थीं आपने उनको नहीं माना है, यह सभी राज्यों में संघीय ढांचे को मजबूत बनाने के लिए, यह केवल पैसा नहीं देगा यह बड़े भाई और छोटे भाई के रिलेशन को ठीक करेगा, केन्द्र और राज्यों के बीच में जो संघीय ढांचा बना है, यह हमारे संविधान की व्यवस्था है जो हमारे संविधान की आशा है उसको भी प्रतिपादित यह निर्णय करेगा. अभी केन्द्रीय करों में हिस्से की बात मुकेश भाई कह रहे थे. मैं यहां पर बताना चाहता हूं कि इस बार हमें 43676 करोड़ रूपये केन्द्रीय करों से प्राप्त हुआ है. इसी तरह से मैं राज्य के करों की बात करूं. 2014-15 में यह 26हजार करोड़ था आज बढ़कर यह 46 हजार करोड़ रूपये हुआ है और जब इनकी सरकार थी तब यह केवल 7 हजार करोड़ रूपये था, क्योंकि उस समय भ्रष्टाचार था उ स समय करों की वसूली सही तरीके से नहीं होती थी नीचे के स्तर पर इतना भ्रष्टाचार था कि कर सरकार के खाते में नहीं जाते थेअधिकारियों और नेताओं की जेब में जाते थे.

माननीय अध्यक्ष महोदय अभी मुकेश भाई नान प्लान की बात कर रहे थे. मैं वित्त मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं. यदि भाजपा की सरकार के नान प्लान के बजट को आप देखेंगे तो उसमें बड़ा कंपोनेंट वेल्फेयर का है. मैं माननीय वित्त मंत्री जी से अनुरोध करना चाहूंगा कि अगली बार से जब बजट हो तो नान प्लान में जो वेल्फेयर का पैसा खर्च हुआ है वह यदि अलग से परिलक्षित हो तो पता लगेगा क्योंकि जो विकसित राज्य हैं उसमें कहीं भी वेल्फेयर के पैसे को नान प्लान में नहीं जोड़ना चाहिए. जो विकसित है वह अलग बात है लेकिन सही मायने में हमें कहीं न कहीं जो हमारा वेल्फेयर का पैसा है उसको अलग से बताना चाहिए वह नान प्लान में जरूर जाता है लेकिन कितना पैसा सरकार ने लोगों के वेल्फेयर पर खर्च किया है यह जरूर पता लगना चाहिए उसके बाद ही मुकेश भाई जैसे साथियों का ज्ञान वर्धन होगा.

माननीय अध्यक्ष महोदय कृषि कर्मण अवार्ड की बहुत बात हुई. मध्यप्रदेश कृषि के क्षेत्र में जैसा आगे बढ़ा है इसमें सही मायने में किसी के प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है. यह सामने दिखता है, हाथ अंगन को आरसी क्या और पढे़ लिखे को फारसी क्या. क्या हुआ है और क्या दिख रहा है. यह सब हमारे सामने है. कृषि के मामले में यह सरकार कितनी संवेदनशील है यह बजट में हमें देखने को मिलता है. इस बार वर्ष 2016-17 में आयोजना का बजट लगभग 2 हजार करोड़ रुपये है जो वर्ष 2002-03 में केवल 200 करोड़ था. इसी का परिणाम है जीरो प्रतिशत ब्‍याज पर ऋण देना, मुआवजा देना. मुआवजे के मामले में मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी को बधाई देना चाहता हूँ राजस्‍व मंत्री जी यहां बैठे हुए हैं, 15-15 सौ करोड़, 2 हजार करोड़ रुपये यह सरकार देती है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विपदाओं के मामले में डॉ.ए.पी.जे. अब्‍दुल कलाम साहब ने बहुत अच्‍छी बात लिखी है मैं यहां पर जरूर उसका जिक्र करना चाहता हूँ और उसका सीधा-सीधा पालन शिवराज सिंह जी की सरकार ने किया है. कलाम साहब ने लिखा था कि All birds find shelter during a rain but eagle avoids rain by flying above the clouds बारिश के दौरान सभी पक्षी कहीं न कहीं आश्रय ले लेते हैं पर जो लीडर होता है जो सभी चिंताओं से मुक्‍त होकर लोगों का संरक्षण करना चाहता है वह बाज वर्षा से बचने हेतु बादल के ऊपर उड़ान भरने लगता है और उसी का परिणाम निकला कि हमने 1500 करोड़ रुपया किसानों को बांटने का निर्णय लिया और उसको किसानों को बांटा.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह सरकार आगे के सालों में भी कृषि के मामले में बहुत अच्‍छा कार्य करना चाहती है और यह सीधा-सीधा मिलता है उत्‍पादन से लेकर उत्‍पादकता और उत्‍पादकता के बाद उसके विक्रय पर, इन तीनों को पूरी तरह लाइन-अप करने का इस बजट में प्रावधान किया गया है. मृदा परीक्षण की जो बात है उससे निश्‍चित रूप से दूरगामी परिणाम मिलेंगे क्‍योंकि जब तक मृदा की टेस्‍टिंग नहीं होगी तब तक उत्‍पादन नहीं बढ़ेगा और जब उत्‍पादन बढ़ गया तो उसको सही ढंग से बेचने के लिए ई-मंडी की जो परिकल्‍पना की गई है उसके लिए मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी को बहुत बधाई देता हूँ, कृषि मंत्री जी को, वित्‍त मंत्री जी को बधाई देता हूँ कि अप्रैल में पहली ई-मंडी मेरे क्षेत्र में ही शुरू होने वाली है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कृषि कर्मण अवार्ड की जब बात हो रही थी, कृषि का जिक्र यहां पर मुकेश जी ने किया है. वे पता नहीं आंकड़े कहां से लेकर आए, कुछ आंकड़े मेरे पास भी हैं. आंकड़े दो साल बाद आते हैं. वर्ष 2004-05 में कांग्रेस की सरकार के समय जो उत्‍पादन था उसका मैं यहां पर जिक्र कर रहा हूँ. गेहूँ का उत्‍पादन उस समय लगभग 73 लाख टन था जो आज बढ़कर 158 लाख टन हो गया है. इसी का परिणाम है कि हमें कृषि कर्मण अवार्ड मिला. केवल उत्‍पादन की ही बात नहीं है, यदि हम इसकी उत्‍पादकता की बात करें, यदि आपको क्रॉस करना है तो आप उत्‍पादकता के साथ इसको जोड़कर देखिए मुकेश भाई, आपको जिसने भी जानकारी दी है वह गलत जानकारी दी है. यदि उत्‍पादकता की बात करें तो वर्ष 2004-05 में यह प्रति हेक्‍टेयर 1735 किलोग्राम थी जो आज बढ़कर हमारी नीतियों के कारण 2405 किलोग्राम प्रति हेक्‍टेयर हो गई है. यदि धान के उत्‍पादन की बात करें तो वर्ष 2004-05 में यह 17 लाख टन था जो वर्ष 2013-14 में बढ़कर 34 लाख टन हो गया जो कि दुगुना है. यदि इसी में हम उत्‍पादकता की बात करें तो वर्ष 2004-05 में धान की उत्‍पादकता 720 किलोग्राम प्रति हेक्‍टेयर थी जो वर्ष 2013-14 में बढ़कर 1474 किलोग्राम प्रति हेक्‍टेयर हो गई, यह भी दुगुनी है.

अध्‍यक्ष महोदय -- अब कृपया आप समाप्‍त करें.

श्री विश्‍वास सारंग -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 5-7 मिनट का तो और समय दे दीजिए.

अध्‍यक्ष महोदय -- चलिए 3-4 मिनट और ले लीजिए, उसमें आप समाप्‍त कर दें क्‍योंकि समय हो गया है.

श्री विश्वास सारंग-- माननीय अध्यक्ष महोदय, कुल खाद्यान के उत्पादन की हम बात करें तो 2004-05 में 113 लाख टन था और 2013-14 में 248 लाख टन हो गया. कृषि के लिए बहुत जरूरी है, जो हमारी पुरातन परम्परा है और मुझे इस सदन में कहते हुए कोई संकोच नहीं है कि पुरानी सरकारों ने इस पर ध्यान नहीं दिया. यदि कृषि को लाभ का धंधा बनाना है तो केवल कृषि के माध्यम से नहीं चलेगा. उसमें पशुपालन का कम्पोनेंट जोड़ना पड़ेगा. उसका विकास नहीं होगा तो कृषि का विकास नहीं हो सकता. हमारी पुरानी परम्पराएँ है, हर गांव में हर खेत पर कहीं न कहीं मवेशी रखने की व्यवस्था होती थी और इसमें इस सरकार ने उसका पूरा ध्यान रखा है. पशुपालन के लिए मैं बधाई देना चाहता हूँ कि 109 चलित पशु चिकित्सालय जो शुरु करने की बात है, वह निश्चित रुप से इस सेक्टर को बहुत मजबूती देगा.

माननीय अध्यक्ष महोदय,यदि हमने कृषि कर्मण अवार्ड लिया है तो उसमें बहुत बड़ा योगदान सिंचाई का है. वे नहरें जो बन गयी थीं उसके टेल एण्ड तक पानी नहीं पहुंचता था. यह सरकार का कहीं न कहीं संकल्प था और उसी का परिणाम निकला. हमने जिसप्रकार से लगातार 10 वर्षों में सिंचाई का रकबा बढ़ाया है. 2003-04 में साढ़े 7 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई होती थी और आज वह बढ़कर 2014-15 में 33 लाख हेक्टेयर के ऊपर पहुंच गयी है. माननीय वित्त मंत्री जी जल संसाधन मंत्री हैं. आयोजना व्यय में 4 हजार करोड़ का प्रावधान रखा है और मुकेश भाई आपकी सरकार में कितना था, केवल 700 करोड़ रुपये और इसीलिए 10 साल तक आप शासन चलाते रहे. एक इंच भी जमीन पर एक्स्ट्रा पानी आप नहीं दे पाये. खुद सिंचित होते रहे. खुद के जेब में पैसा आता गया. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना मैं बधाई दूंगा, मोर क्रॉप पर ड्रॉप, एक ड्रॉप पानी से कितनी ज्यादा उसकी उत्पादकता बढ़ सकती है. इस क्षेत्र में यह सरकार काम कर रही है. मैं बहुत बधाई दूंगा मंत्री जी को,उऩ्होंने निश्चित रुप से इस क्षेत्र में बहुत अच्छा काम किया. <