मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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          चतुर्दश विधान सभा                                                                                              दशम् सत्र

 

 

फरवरी-अप्रैल, 2016 सत्र

 

मंगलवार, दिनांक 01 मार्च, 2016

 

(11 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1937 )

 

 

            [खण्ड-  10 ]                                                                                                       [अंक- 6 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

मंगलवार, दिनांक 01 मार्च, 2016

 

(11 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1937 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 10.32 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

          अध्‍यक्ष महोदय - प्रश्‍न क्रमांक-1.

          श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - मेरे द्वारा एक स्‍थगन प्रस्‍ताव दिया गया है.

          अध्‍यक्ष महोदय - कुछ नहीं लिखा जायेगा. प्रश्‍नकाल होने के बाद बात करेंगे.

          संसदीय कार्यमंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र) - यह गलत परम्‍परा हो जायेगी. (व्‍यवधान)

          श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - अध्‍यक्ष महोदय, पूर्व मुख्‍यमंत्री और पूर्व विधानसभा अध्‍यक्ष और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विरूद्ध, यह कहना है कि हमने स्‍थगन प्रस्‍ताव दिया है. शून्‍यकाल में कोई निर्णय हुआ है कि नहीं.

          अध्‍यक्ष महोदय - तिवारी जी, यहां बात नहीं होती है. आप वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं, आपको मालूम है. आपकी बात आ गई है. कृपा करके बैठ जाइये. आप बैठेंगे कि नहीं, सदन चलने देंगे कि नहीं. (व्‍यवधान)

          श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - अध्‍यक्ष महोदय, बैठेंगे भी और अपनी बात भी कहेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय - नहीं, बिल्‍कुल नहीं. आप दूसरे सदस्‍यों के अधिकारों का हनन नहीं कर सकते हैं. प्‍लीज. यहां प्रश्‍नकाल से खिलवाड़ नहीं होगा. आप जो भी बात है 11.30 बजे कीजिये. तिवारी जी का कुछ नहीं लिखा जायेगा. (व्‍यवधान)

          श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - (XXX)

          डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - यह आप कैसे कह रहे हैं कि आरोप लगाये जा रहे हैं. क्‍या आप न्‍यायाधीश हैं ? कि सच और असत्‍य का फैसला कर रहे हैं. (व्‍यवधान)

          श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - तो क्‍या आप न्‍यायाधीश है ?

          डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - मैं नहीं हूँ. न्‍यायालय है. न्‍यायालय करेगा, जो भी करेगा. (व्‍यवधान)

          श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - आपने असत्‍य प्रकरण पेश किये हैं.

          डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - आपके पास क्‍या आधार है कि आरोप असत्‍य है. (व्‍यवधान)

          श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - अधिकार आपका है क्‍या ?

          अध्‍यक्ष महोदय - कुछ रिकॉर्ड में नहीं आ रहा है.

          पशुपालन मंत्री (सुश्री कुसुम सिंह मेहदेले) - ये तनाशाही मचा रहे हैं, प्रश्‍नकाल नहीं चलने दे रहे हैं. (व्‍यवधान)

          श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - अध्‍यक्ष महोदय, चर्चा होनी चाहिए. हमारा स्‍थगन स्‍वीकार करना चाहिए.

          अध्‍यक्ष महोदय - आप बैठ जाएं.

          उच्‍च शिक्षा मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्‍ता) - अगर मुकदमें लगे हैं, जांच हो रही है तो क्‍यों घबरा रहे हो ?

          श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - घबरा नहीं रहे हैं.

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता - तो क्‍यों परेशान हो रहे हो. (व्‍यवधान)

          अध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्रीगण बैठ जाएं.

          श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - असत्‍य मामले लगा रहे हैं.

          पंचायत मंत्री (श्री गोपाल भार्गव) - जिसने जैसे करम किये होंगे, वैसा भुगतेगा. (व्‍यवधान)

          अध्‍यक्ष महोदय - आप लोग बैठ जाइये.

          अध्‍यक्ष महोदय - बाला बच्‍चन जी बोल रहे हैं, उनको बोलने दें.

          श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - मैं मिन्‍नत नहीं कर रहा हूँ.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री बाला बच्‍चन) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय तिवारी जी ने जो बता उठाई है. उन्‍होंने जो स्‍थगन दिया है. पूर्व मुख्‍यमंत्री जी से रिलिवेन्‍ट है. आप क्‍या इस पर व्‍यवस्‍था देंगे ? आप क्‍या चर्चा करायेंगे ? इस पर हाउस में चर्चा करानी चाहिए ताकि साफ बात हो सके.

          डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - नेता प्रतिपक्ष जी, कोई अभी कायमी हो गयी उसकी. अभी महीने, दो महीने में कायमी हो गई क्‍या. (व्‍यवधान)

          श्री बाला बच्‍चन - आप इसकी10 साल बाद कायमी कराइयेगा ?

          अध्‍यक्ष महोदय -  आप बैठ जाइये.

          डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - 10 महीने पहले की कायमी पर,  आज स्‍थगन मांग रहे हो.

          अध्‍यक्ष महोदय - आपकी बात आ गई है. (व्‍यवधान)

          श्री बाला बच्‍चन - अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक मिनिट लेना चाहता हूँ. माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी ने बोला है.

          अध्‍यक्ष महोदय - यहां कोई सीधी बात नहीं होगी, आपने जो बात बोली है. आप कक्ष में आकर बात कर लीजिये.  प्रश्न संख्या 1.

                   पंचायत मंत्री (श्री गोपाल भार्गव) --  अध्यक्ष महोदय,  इस प्रकरण में  जमानत  हो चुकी है, मामला सब ज्युडिस है, अब उस पर  क्या चर्चा होगी.

                   अध्यक्ष महोदय -- अब आप बैठ जायें.  विषय समाप्त हो गया.

                   श्री सुन्दरलाल  तिवारी -- (xxx)

                        अध्यक्ष महोदय --  तिवारी जी, विषय समाप्त हो गया.  उनसे भी बोल दिया है मैंने.  उनका उत्तर देना आपका जरुरी नहीं है.  उत्तर वह देंगे कि आप देंगे. आप बैठ जाइये.  (श्री गोपाल भार्गव से) जब नम्बर आयेगा, तब उत्तर देना. कृपया बैठ जायें.

                   श्री सुन्दरलाल  तिवारी -- (xxx)

                   अध्यक्ष महोदय -- आप बैठ जायें.

                   श्री गोपाल भार्गव --   प्रकरण सब ज्युडिस है, चालान पेश हो चुका है.  चार्जशीट  दाखिल हो चुकी है.

                   श्री सुन्दरलाल  तिवारी -- (xxx)

                   राज्यमंत्री, सामान्य प्रशासन ((श्री लाल सिंह आर्य)--  तिवारी जी ने गलत  करने का ठेका ले लिया है क्या.  गलत करोगे, तो कार्यवाही होगी.

                   श्री सुन्दरलाल  तिवारी -- (xxx)

                   श्री लाल सिंह आर्य --   आपको छोड़ दिया जायेगा क्या.  घोटाले, भ्रष्टाचार आपने किये हैं.

                   श्री सुन्दरलाल  तिवारी -- (xxx)

                   अध्यक्ष महोदय -- (श्री लाल सिंह आर्य को)  आप उत्तर नहीं दें, वे बोलकर  चुप हो जायेंगे. कृपा करके आप उत्तर नहीं दें.  वह अपने आप चुप हो जायेंगे.  कृपया बैठ जायें. (व्यवधान) कृपा करके तिवारी जी का उत्तर कोई न दे.  वही तरीका है उनको शांत करने का.  उनको जो कुछ बोलना है, उनको बोलने दें, रिकार्ड में  उनका कुछ नहीं  आयेगा. कृपा करके आप लोग बैठ जायें. शर्मा जी, बैठ जायें.

                   श्री रामेश्वर शर्मा -- अध्यक्ष महोदय,  कृपया आप इसमें व्यवस्था दीजिये.  हर बार तिवारी जी गड़बड़ करते रहेंगे,  हमारे सदन का  समय खाते रहेंगे.  ऐसे कैसे हो सकता है.

                   अध्यक्ष महोदय -- आप उनकी  बात का उत्तर देंगे, तो  उनका आप महत्व बढ़ा रहे हैं.  उनको बोलने दीजिये, जो बोल रहे हैं.

                   श्री अरुण भीमावद -- अध्यक्ष महोदय,  हमारे  प्रश्न से ज्यादा  महत्वपूर्ण इनकी बीमारी  को ठीक  करना जरुरी है.

                   अध्यक्ष महोदय -- आप तो अपना प्रश्न करिये.

10.37 बजे                              तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर

अनुसूचित जाति क्षेत्र की बस्तियों का विकास

1. ( *क्र. 2308 ) श्री अरूण भीमावद : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अनुसूचित जाति बाहुल्‍य क्षेत्रों की बस्तियों, टोले एवं मजरों में सी.सी. रोड़, नाली निर्माण एवं सामुदायिक भवनों के निर्माण हेतु शासन के प्रावधान क्‍या हैं? (ख) जिला शाजापुर में बस्‍ती विकास में सत्र 2013-14 एवं 2014-15 में कितना आवंटन दिया गया? प्रश्‍नांश (क) के अनुसार आवंटन की राशि कौन-कौन ग्राम पंचायतों को जारी की गई? (ग) जारी की गई ग्राम पंचायतों में अनुसूचित जाति का कितना प्रतिशत है? (घ) शासन द्वारा बस्‍ती विकास मद से राशि जारी करने हेतु ग्राम पंचायत स्‍तर पर अनुसूचित जाति का प्रतिशत कितना होना अनिवार्य है?

आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) : (क) प्रावधानों का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ‘’ अनुसार है। (ख) वर्ष 2013-14 में रूपये 106.71 लाख एवं वर्ष 2014-15 में रूपये 100.64 लाख का आवंटन दिया गया। पंचायतों को वितरित राशि का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ‘’ अनुसार है। (ग) विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ‘’ अनुसार है। (घ) अनुसूचित जाति की जनसंख्‍या 40 प्रतिशत अथवा अनुसूचित जाति के 20 परिवार निवासरत होना आवश्‍यक है।

                   श्री अरुण भीमावद -- अध्यक्ष महोदय,  मैं सबसे पहले  मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि  उन्होंने मेरे प्रश्न का उत्तर  प्रावधान के अनुसार दिया है.  लेकिन मैं इसमें  पूरक प्रश्न  में  जानना चाहूंगा कि  क्या मेरी विधान सभा  क्षेत्र की  ग्राम  पंचायत तुहेड़िया, पलसावदसोन, खामखेड़ा, कांजा खेड़ा, सतगांव, नारायणगढ़, पचोला बनहल, पचोला हरनाथ, बमोरी  के   अनुसूचित जाति बस्ती  बाहुल्य क्षेत्र में  क्या राशि स्वीकृत करेंगे.

                   श्री ज्ञान सिंह -- अध्यक्ष महोदय,  माननीय सदस्य ने  अपने प्रश्न के माध्यम से   यहां पर  जिन गांवों के विकास के बारे में बात कही है.  मैं अवश्य माननीय सदस्य को आश्वस्त करना चाहूंगा कि  जिन गांवों के  बारे में उन्होंने अपने  उद्बोधन में बात कही है,  उन गांवों   का हम परीक्षण कराकर के  अवश्य  निर्माण कार्य की  स्वीकृति देंगे.

                   श्री अरुण भीमावद --  मंत्री जी, बहुत बहुत धन्यवाद.

                   नीति के विरूद्ध किये गये स्‍थानांतरण

2. ( *क्र. 1242 ) श्रीमती उमादेवी लालचंद खटीक : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दमोह जिला अंतर्गत स्‍थानांतरण नीति वर्ष 2015 अनुसार कितने शिक्षकों के स्‍थानांतरण किस स्‍थान से किस स्‍थान पर किये गये हैं?         (ख) स्‍थानांतरण नीति 2015 किस दिनांक से किस दिनांक तक के लिए लागू की गई थी? नीति की एक सत्‍य प्रति उपलब्‍ध करावें। (ग) स्‍थानांतरण नीति तिथि के उपरांत स्‍थानांतरण कराये जाना हैं, तो क्‍या प्रक्रिया है? यदि स्‍थानांतरण नीति के विरूद्ध जिला शिक्षा अधिकारी दमोह द्वारा स्‍थानांतरण किये गये हैं, तो प्रश्‍नकर्ता द्वारा शिकायत वरिष्‍ठ अधिकारियों को सौंपे जाने के उपरांत भी कार्यवाही आज दिनांक तक क्‍यों नहीं की गई? कब तक कार्यवाही की जाएगी?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र एक अनुसार है। (ख) दिनांक 16.05.2015 से 10.06.2015 तक। प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र दो अनुसार (ग) पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट दो की कंडिका 10.1 एवं 10.2 अनुसार। संयुक्त संचालक लोक शिक्षण सागर संभाग को जाँच हेतु संचालनालय के पत्र क्रमांक 869 दिनांक 28.12.2015 द्वारा लिखा गया है। जाँच प्रतिवेदन प्राप्ति के उपरांत नियमानुसार कार्यवाही संभव हो सकेगी।

                   श्रीमती उमादेवी खटीक -- अध्यक्ष महोदय,   मैंने प्रश्न के माध्यम से  शासन की स्थानान्तरण  नीति के विरुद्ध   किये गये स्थानान्तरणों के बारे में  जानना चाहा था.  मैं प्राप्त जानकारी से संतुष्ट हूं  और मैं मंत्री जी को  धन्यवाद देती हूं.  ( सत्ता पक्ष की ओर  से मेजों की थपथपाहट)  मेरा मंत्री जी से  निवेदन है कि जिला शिक्षा  कार्यालय में  15-15 वर्षों से  जो लिपिक कर्मचारी  पदस्थ हैं, ये अधिकारियों को गुमराह करके  अवैध कार्यों को अंजाम देते हैं. दमोह जिले के जिला शिक्षा  कार्यालय  में पदस्थ  लिपिक  वर्ग के  कर्मचारियों का  हटाया जाना संभव है.  मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि  कि वह कब तक हटा देंगे.

                   राज्यमंत्री,  स्कूल शिक्षा (श्री दीपक जोशी) -- अध्यक्ष महोदय,  जैसे कि माननीय सदस्या की  भावना है.  हमने पहले भी  विभाग के माध्यम से  जो कर्मचारी तीन साल से  अधिक एक स्थान पर हैं,  उनको हटाने की प्रक्रिया  प्रारंभ की है  और अगर इनके जिले में कोई  विशेष इस प्रकार की  बात होगी,  तो  हम उसको  परीक्षण करके  तत्काल हटा देंगे.

                   श्रीमती उमादेवी खटीक -- अध्यक्ष महोदय, उनमें एक संजू  तिवारी हैं, एक कैलाश  बिदोलिया हैं, वह 15-15 वर्षों से पदस्थ हैं,  उनको तत्काल हटाये जाने की कार्यवाही की जाये.

                   अध्यक्ष महोदय -- उन्होंने परीक्षण कराने का बोल दिया है.

 

सरदारपुर विधान सभा क्षेत्र के निर्माण कार्य

3. ( *क्र. 33 ) श्री वेलसिंह भूरिया : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या आदिम जाति कल्‍याण विभाग के अंतर्गत आदिवासी एवं अनुसूचित जाति बस्तियों में खरंजा निर्माण एवं विद्युतीकरण के लिये राशि प्राप्‍त होती है? इसके लिए क्‍या मापदण्‍ड निर्धारित हैं? (ख) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित कार्यों हेतु धार जिले को वर्ष 2012-13 से वर्ष 2014-15 में कितनी राशि दी गई तथा किसकी अनुशंसा पर कितनी राशि आवंटित की गई? मदवार जानकारी दें। (ग) सरदारपुर विधान सभा क्षेत्र में उक्‍त वर्षों में किन-किन ग्रामों/मजरों में खरंजा निर्माण एवं विद्युतीकरण के कार्य स्‍वीकृत हुए हैं? कार्यवार लागत एवं कार्य एजेंसी सहित जानकारी दें। क्‍या इन कार्यों की गुणवत्‍ता की जाँच करायेंगे? (घ) उक्‍त स्‍वीकृत कार्यों में बस्‍ती विकास योजना में विधान सभा क्षेत्र सरदारपुर में कितने कार्य स्‍वीकृत हुए हैं एवं कितने लंबित हैं? शेष कार्य कब तक पूर्ण किये जायेंगे?

आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) : (क) प्रश्‍नांश अंतर्गत बस्‍ती विकास योजना में खरंजा निर्माण का प्रावधान नहीं है। अनुसूचित जाति अंतर्गत सी.सी. रोड हेतु राशि दी जाती है एवं राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना से वंचित 100 से कम आबादी वाली अनुसूचित जाति बस्तियों को विद्युतीकरण करने हेतु राशि आवंटित की जाती है, जबकि जनजाति मद से जिलों के प्रस्‍ताव एवं उपलब्‍ध बजट के आधार पर राशि पुनर्वंटित की जाती है। (ख) अनुसूचित जाति बस्‍ती विकास योजनांतर्गत वर्ष 2012-13 में रू. 76.24 लाख तथा वर्ष 2013-14 में रू. 79.48 लाख तथा वर्ष 2014-15 में रू. 20.69 लाख की राशि दी गई। शेष  जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है।      (ग) अनुसूचित जाति बस्‍ती विकास योजनांतर्गत स्‍वीकृत कार्यों की जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र  'एक' अनुसार है, जबकि जनजाति विद्युतीकरण योजनांतर्गत स्‍वीकृत कार्यों की जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। कार्यों की गुणवत्‍ता के संबंध में कोई विपरीत तथ्‍य प्रकाश में नहीं आये हैं। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) अनुसूचित जाति बस्ती विकास योजना में दो कार्य अपूर्ण हैं। कार्य पूर्ण होने की समय-सीमा बताना संभव नहीं है।

परिशिष्ट - ''एक''

            श्री वेलसिंह भूरिया -- माननीय अध्यक्ष महोदय,माननीय मंत्री जी के द्वारा जो उत्तर दिया गया है उससे मैं बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हूं. मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि आदिम जाति कल्याण विभाग के अंतर्गत आदिवासी एवं अनुसूचित जाति बस्ती विकास योजना में सीसी रोड निर्माण, खरंजा निर्माण एवं विद्युतीकरण के लिये जो राशि प्राप्त होती है, इसके क्या मापदण्ड निर्धारित हैं ?

            अध्यक्ष महोदय-- वह तो उत्तर में ही दिया हुआ है.

          श्री ज्ञान सिंह -- अध्यक्ष महोदय, उत्तर में स्पष्ट लिखा है.

          श्री वेलसिंह भूरिया -- अध्यक्ष महोदय, मुझे जवाब घुमा-फिराकर के दिया गया है. इसलिये मैं उत्तर से संतुष्ट नहीं हूं और मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि अनुसूचित जाति, जनजाति बस्ती विकास योजना में जो 80 प्रतिशत की राशि शासन के द्वारा जिले को दी जाती है, वह किस आधार पर वितरित की जाती है. जिले में जो सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास होता है क्या यह राशि उसके माध्यम से दी जाती है या कलेक्टर की अध्यक्षता में कोई कमेटी बनाकर उसके माध्यम से दी जाती है, यह राशि देने के कोई नियम हैं, कोई मापदण्ड इसके बारे में हों तो वह  मंत्री जी बता दें.

          अध्यक्ष महोदय-- वैसे तो परिशिष्ट में उल्लेख है. पर मंत्री जी आप बताना चाहें तो बता दें.

          श्री ज्ञान सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह 80 प्रतिशत की राशि जिले को स्थानांतरित होती है, परियोजना सलाहकार मंडल की बैठक में इस राशि को जनसंख्या का अनुपात में वहां के निर्माण कार्यों की आवश्यकता को देखते हुये ही राशि स्वीकृत की जाती है.

          श्री वेलसिंह भूरिया-- माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे यहां 7 विधानसभा में से 5 विधानसभा आदिवासी हैं जिसमें 70 प्रतिशत आदिवासी जनसंख्या वाला सरदारपुर विधानसभा क्षेत्र है. मेरे विधानसभा क्षेत्र में जो राशि जनसंख्या के आधार पर परियोजना में अथवा बस्ती विकास योजना में दी जाना चाहिये, वह राशि मापदण्ड पर रहते हुये भी क्यों नहीं दी जा रही है. मैं स्थानीय अधिकारियों से जब इस बारे में बात करता हूं तो उनका कहना रहता है कि आप माननीय मंत्री जी से बात करे. अध्यक्ष जी मैं माननीय मंत्री जी से क्यों बात करूं. जिले की बात जिले में हम करेंगे, विधानसभा की बात हम विधानसभा में करेंगे. अध्यक्ष महोदय, मामला यह है कि हमारे प्रस्ताव को सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास द्वारा शामिल क्यों नहीं किया जाता है.

          अध्यक्ष महोदय-- (मंत्री जी से) आप उनके प्रस्ताव दिखला लें, यदि कोई हों तो.

          श्री ज्ञान सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी प्रस्ताव देंगे, पत्र देंगे उन पर विचार किया जायेगा. मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को जानकारी देना चाहूंगा सरदारपुर जो माननीय विधायक जी का विधानसभा क्षेत्र है उसमें वर्ष 2012-13 में 76.24 लाख, वर्ष 2013-14 में 79.48 तथा 2014-15 में 20.59 लाख की राशि स्वीकृत की गई है. इसमें से एसटी के 57 कार्य पूर्ण हो गये हैं, एससी के 11 कार्य स्वीकृत हुये थे जिसमें से 9 कार्य पूर्ण हो चुके हैं तथा 2 कार्य अधूरे हैं.

          श्री वेलसिंह भूरिया-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं यह कहना चाहता हूं कि यह सारे काम तो कागज पर हैं, कोई काम हुआ नहीं है. मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से यह कहना चाहता हूं कि मंत्री जी एक समिति गठित करके क्या इन कार्यों की जांच करवायेंगे.

          अध्यक्ष महोदय-- आप मंत्री जी को लिखकर के दे दीजिये.

          श्री वेलसिंह भूरिया--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह तो अन्याय है. मैं मंत्री जी से यह चाहूंगा कि क्या इन सभी कार्यों की जांच मंत्री जी करवायेंगे.

          अध्यक्ष महोदय-- यदि कोई स्पेसिफिक हो तो वह आप मंत्री जी को बता दें तो उसकी जांच करा लें.

          श्री वेलसिंह भूरिया--अध्यक्ष महोदय, मैं ऐसा नहीं बताना चाहता हूं. अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी के बंगले पर मिलने के लिये जाता हूं तो मंत्री जी मिलते भी नहीं है.

          अध्यक्ष महोदय-- प्रश्न क्रमांक 4. भूरिया जी आप बैठ जाईये.

          श्री वेलसिंह भूरिया--नहीं, अध्यक्ष महोदय, आप मेरे साथ में न्याय करिये.

          अध्यक्ष महोदय-- कर दिया न्याय.

          श्री वेलसिंह भूरिया--अध्यक्ष महोदय, आज मुझे आपका संरक्षण चाहिये.

          अध्यक्ष महोदय-- नहीं, नहीं, इस तरह से नहीं होना चाहिये. प्लीज..

          श्री वेलसिंह भूरिया--अध्यक्ष महोदय, क्या मंत्री जी इन सभी कार्यों की जांच करायेंगे हां या नहीं में उत्तर दे दें. सीधी सी बात है.

          अध्यक्ष महोदय-- आप कृपया सहयोग करें.

          श्री वेलसिंह भूरिया--अध्यक्ष महोदय, मैं तो इतना कहना चाहता हूं कि जो कार्य विभाग के द्वारा स्वीकृत हुये हैं उनकी मंत्री जी जांच करायेंगे हां या ना में जवाब दे दें.

          अध्यक्ष महोदय-- अब कुछ नहीं लिखा जायेगा.

          श्री वेलसिंह भूरिया--xx            x       xxx     xxx

         

 

ग्‍वालियर जिलांतर्गत स्‍वीकृत/संचालित छात्रावास

4. ( *क्र. 2270 ) श्रीमती इमरती देवी : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि () क्‍या ग्‍वालियर जिले में वर्ष 2015-16 में अनुसूचित जाति के बालक कन्‍या छात्रावास स्‍वीकृत किये गये थे? यदि हाँ, तो कितने? किस शहर ग्रामीण में कहाँ-कहाँ पर स्‍वीकृत किये गये थे और क्‍या वे स्‍वीकृत होने के बाद पूर्व स्‍वीकृत स्‍थान पर चालू कर दिये गये हैं? यदि नहीं, तो कब तक चालू कर दिये जावेंगे? () प्रश्‍नांश () ग्‍वालियर जिले में अनुसूचित जाति छात्रावासों की डबरा शहर ग्रामीण, बिलौआ, पिछोर में जनसंख्‍या अनुसार खोले जाने की अति आवश्‍यकता थी, क्‍या इन शहर ग्रामीण में कोई छात्रावास स्‍वीकृत किया गया है? यदि नहीं, तो कब तक स्‍वीकृत किया जावेगा?

आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) : () जी हाँ। 20 छात्रावास स्‍वीकृत किये गये हैं। सभी छात्रावास ग्‍वालियर जिला मुख्‍यालय पर स्‍वीकृत किये गये हैं। 01 कन्‍या पोस्‍ट मैट्रिक छात्रावास ग्‍वालियर मुख्‍यालय पर संचालित कर दिया गया है। शेष 19 प्री मैट्रिक छात्रावासों का जिले में स्‍थल संशोधन का प्रस्‍ताव विचाराधीन है। () जी नहीं। समय-सीमा बताना संभव नहीं है।

 

            श्रीमती इमरती देवी--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहती हूं जो मैंने प्रश्‍न लगाया है, ग्‍वालियर जिले में कितने छात्रावास स्‍वीकृत हुये हैं, अगर हुये हैं तो किस-किस जगह  हुये हैं.

          श्री ज्ञानसिंह--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय जी, इस वित्‍तीय वर्ष में ग्‍वालियर जिले में 20 छात्रावास स्‍वीकृत हुये. पोस्‍ट मैट्रिक छात्रावास संचालित हैं, 19 छात्रावास संचालित न हो पाने के कारण, आवास की उपब्‍धता न होने पर प्रयास विभाग की ओर से लगातार जारी रहा,  जिला प्रशासन का भी.  इस कारण से वे 19 प्री-मैट्रिक छात्रावास अभी संचालित नहीं हो पाये हैं.

          श्रीमती इमरती देवी--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक कन्‍या पोस्‍ट मैट्रिक इन्‍होंने ग्‍वालियर शहर में चालू किया है, 19 संशोधन के लिये रखे गये हैं. संशोधन शहर से ग्रामीण को कर रहे हैं या ग्रामीण से शहर के लिये कर रहे हैं. हम उनसे यह पूछना चाहते हैं कि यह शहर में ही क्‍यों पूरे के पूरे बनाना चाहते हैं. डबरा के लिये 5 छात्रावास इनके अधिकारियों ने हमें बताया है, स्‍वीकृत हुये हैं, 2 बिलौआ को, 1 पिछौर और 2 डबरा में, 5 ऐसे इन्‍होंने स्‍वीकृत किये थे और अब संशोधन करके यह शहर में क्‍यों ले जाना चाहते हैं. आप मंत्री जी यह बतायें कि जनसंख्‍या एस.सी. की शहर में ज्‍यादा रहती है कि ग्रामीण में ज्‍यादा रहती है.

          अध्‍यक्ष महोदय--  आप एक प्रश्‍न कोई भी पूछ लें.

          श्रीमती इमरती देवी--  हां तो हम यही पूछना चाहते हैं कि छात्रावास ग्रामीण में खोले जायें, ग्रामीण में ज्‍यादा जनसंख्‍या एस.सी. की रहती है.

          श्री ज्ञान सिंह--   माननीय अध्‍यक्ष महोदय जी, माननीय सदस्‍य महोदय का बहुत अच्‍छा यह प्रश्‍न है, सारे क्षेत्र में संस्‍था खोले जाने के लिये शासन एवं विभाग की किसी दूसरी मंशा थी, उसका यह था कि ग्रामीण अंचल के हमारे भाई, बहिन शहरों में जाकर के पढ़ें और कुछ शहरी वातावरण का उन पर असर हो, जो 19 छात्रावास हमारे संचालित हैं, विदिशा में विभाग की ओर से प्रयासरत हैं, जहां तक आदरणीय हमारी सदस्‍य महोदया जी डबरा की बात कर रही हैं, आने वाले शिक्षा सत्र से आपके माध्‍यम से मैं आश्‍वस्‍त कराना चाहूंगा, वहां छात्रावास खो‍ल दिये जायेंगे.

          श्रीमती इमरती देवी--  आदरणीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी ने कहा है शहर में पढ़े, शहर में तो जब पढ़ें ग्रामीण के, एस.सी. के लोगों पर इतना पैसा नहीं है कि वह किराये से मकान लें, 5-5, 10-10 हजार रूपये महीना और फिर अपने बच्‍चों को रहकर, यह जरूर है कि बच्‍चों को सुविधा यह देते हैं, लेकिन ऐसे माता-पिता नहीं हैं कि अपनी बेटियों को और बच्‍चों को बिलकुल फ्री छोड़ दें ग्‍वालियर में. बच्‍चों को रहकर पढ़ाया जाता है, माता-पिता रहकर पढ़ाते हैं तो यह पूरे ग्रामीण में क्‍यों नहीं खोल रहे हैं और खोलेंगे तो कब तक खोलेंगे यह बता दें.

          श्री ज्ञान सिंह--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय जी, शहरों में रहकर के हमारी छात्र-छात्रायें शिक्षा ग्रहण करेंगी, छात्रावास बिल्डिंग नहीं बनेंगे तब तक छात्रावास जो आवासीय किराया देने की सरकार की जो व्‍यवस्‍था है, पहले तो 5 छात्रों के बीच में 2000 रूपये किराया देने का था, संभागीय मुख्‍यालय में 2 हजार, जिला मुख्‍यालय में 1500 रूपये, ब्‍लॉक मुख्‍यालय में 1200 रूपये. किराये की व्‍यवस्‍था हमारी सरकार ने छात्र-छात्राओं के लिये कर ली है, उसकी चिंता करने की कोई बात नहीं है, जहां तक आदरणीया जो कह रही हैं कि कब तक खोल दिये जायेंगे, मैं आश्‍वस्‍त कराना चाहूंगा माननीय अध्‍यक्ष महोदय जी आपके माध्‍यम से कि जहां वह 2-3 जगह बताई हैं, जुलाई के अगले सत्र में छात्रावास खोल दिये जायेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय--  ठीक है, हो गया काम उनका, वह जहां कहेंगी वहां खोलने के लिये तैयार हैं.

          श्री लाखन सिंह यादव--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय....

          अध्‍यक्ष महोदय--  अब कोई विषय नहीं है, प्‍लीज-प्‍लीज, सहयोग करें आप.

          श्री लाखन सिंह यादव--  मेरे जिले से संबंधित प्रश्‍न है.

          अध्‍यक्ष महोदय--  उनकी बात आ गई वह जहां कहेंगी, खोलने के लिये तैयार हैं और उनसे सहमत भी हैं.

            श्री लाखन सिंह यादव--  मैं पिछले 7 साल से लड़ रहा हूं. मेरे जिले से रिलेटेड प्रश्‍न है.

           अध्यक्ष महोदय-- चलिये पूछ लीजिए.

          श्री लाखन सिंह यादव--अध्यक्ष महोदय, पिछली पंचवर्षीय योजना के पांच साल और दो साल इस कार्यकाल कुल 7 साल से लगातार मैं अनुसूचित जाति के छात्रावासों की लड़ाई लड़ रहा हूं. आपने अभी 20 छात्रावास स्वीकृत किये और बीसों के लिए आपने कह दिया कि शहर में होंगे.

          अध्यक्ष महोदय-- वह बात तो समाप्त हो गई है.

          श्री लाखन सिंह यादव-- पिछली पंचवर्षीय के 5 साल और 2 साल इस अवधि के लगातार 7 साल से मैं अपने खुद के गाव में जहां जिले के सबसे ज्यादा SC के लोग रहते हैं. आप मेरी बात तो सुन लें.

          अध्यक्ष महोदय-- नहीं, प्रश्नकाल बात सुनने के लिए नहीं होता.

          श्री लाखन सिंह यादव-- वहां जगह भी स्वीकृत है, सब कुछ है 7 साल के बाद भी क्या आप मेरी ग्राम पंचायत कार में यह छात्रावास स्वीकृत करेंगे?

          अध्यक्ष महोदय-- प्रश्न उद्भूत नहीं होता. मंत्रीजी उत्तर देने की कोई जरुरत नहीं है.बैठिये.

          श्री लाखन सिंह यादव-- अध्यक्ष महोदय, मेरी बात तो सुनना ही नहीं चाह रहे हैं.

          अध्यक्ष महोदय-- आपकी बात सुन ली. 

          श्री लाखन सिंह यादव-- मैंने प्रश्न भी लगाया था.

          अध्यक्ष महोदय--आपकी बात आ गई. दूसरे सदस्य का प्रश्न है.

 

 

 

 चंबल नदी का शुद्धीकरण

5. ( *क्र. 423 ) श्री दिलीप सिंह शेखावत : क्या पशुपालन मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) नागदा नगर स्थित चंबल नदी के शुद्धीकरण हेतु जल शुद्धीकरण योजना लागू की गई थी? इसकी कुल लागत कितनी थी? यह किस वर्ष में स्‍वीकृत की जाकर कार्य कब प्रारंभ किया गया? (ख) इसमें अभी तक कुल कितना व्‍यय किया जा चुका है? क्‍या वर्तमान में धरातल पर नग‍ण्‍य कार्य हुआ है? यदि हाँ, तो इसके लिये कौन-कौन दोषी हैं? दोषियों पर क्‍या कार्यवाही की जा रही है?

पशुपालन मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) जी हाँ। मूल योजना की कुल लागत रूपये 254.324 लाख थी। योजना वर्ष 1997-98 में स्वीकृत हुई एवं कार्य वर्ष 1999 में प्रारंभ किया गया। (कालांतर में वर्ष 2005 में पुनरीक्षित योजना लागत रूपये 295.509 लाख स्वीकृत।) (ख) योजना पर कुल व्यय रूपये 295.509 लाख हुआ है। जी नहीं, योजना में प्रस्तावित समस्त कार्य पूर्ण किये गये हैं, अतः कार्यवाही का प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

 

          श्री दिलीप सिंह शेखावत-- अध्यक्ष महोदय, मंत्रीजी ने जो उत्तर दिया है, उससे संतुष्ट नहीं हूं. मेरे यहां चम्बल शुद्धिकरण योजना के तहत वर्ष 1997-98 में 2.54 करोड़ रुपये और 41.276करोड़ की राशि स्वीकृत हुई. यह योजना पूर्ण होने के बाद नागदा नगर पालिका को स्थानांतर की प्रक्रिया प्रारंभ हुई. लेकिन नागदा नगर पालिका ने 28.12.2001 को प्रथम बैठक में चूंकि उसमें 30 कर्मचारी लगना थे और कुछ आर्थिक व्यय भी होना था. इन सब के लिए लगभग 33 लाख रुपये का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा. उसके बाद फिर नगर पालिका ने 15.09.2013 को बैठक बुलाई.

          अध्यक्ष महोदय-- प्रश्न क्या है? जानकारी मत दीजिए.

          श्री दिलीप सिंह शेखावत-- उसी से संबंधित है. 2013 में फिर इन्होंने इस योजना को लेने से मना कर दिया. मेरा प्रश्न यह है कि जब भोपाल में प्रमुख सचिव,नगरीय प्रशासन की अध्यक्षता में एक बैठक हुई और उस बैठक के बाद नगर पालिका ने उस योजना को नहीं लिया तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है और दूसरा यह कि जब नगर पालिका ने लिया ही नहीं और विभाग ने उसको एक तरफा स्थानांतरित कर दिया और उस योजना को राम भरोसे छोड़ दिया. मेरे उत्तर में यह भी आया कि उसमें कुछ सामान चोरी भी हो गया और वह योजना बिलकुल भी लागू नहीं हुई है.

          अध्यक्ष महोदय-- यह कहां आया है?

          श्री दिलीप सिंह शेखावत-- मंत्रीजी से यह निवेदन करना चाहूंगा कि क्या उस योजना को आप वापस विभाग में लेकर जो योजना लागू नहीं हुई है, उसको लागू करेंगे. अभी उसकी संपूर्ण जांच के लिए क्या कोई कमेटी बनायेंगे? जब वह योजना पूरी नहीं हुई और स्थानांतरित नहीं हुई थी तो उसके देखभाल की जिम्मेदारी किसकी थी.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले--अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से निवेदन करना चाहती हूं कि यह योजना 01.09.2003 को नगर पालिका, नागदा को स्थानांतरित कर चुके हैं. हमने एक साल चलाने के बाद यह योजना नगर पालिका परिषद, नागदा को दी है. यह हमारी जिम्मेदारी नहीं बनती कि हम उसको सुधारें.

          श्री दिलीप सिंह शेखावत-- अध्यक्ष महोदय, जैसा नगर पालिका से भी लिखित में मंगाया है, यदि अध्यक्ष महोदय अनुमति देंगे तो पटल पर रख दूंगा.

          अध्यक्ष महोदय-- नहीं. आप सीधा प्रश्न पूछिये.

          श्री दिलीप सिंह शेखावत-- मेरा तो स्पष्ट आपसे निवेदन है कि वह इतनी महत्वपूर्ण योजना है कि आपके अधिकारियों ने मुझे कई बार लिख कर दिया है कि उस उद्योग के प्रदुषित पानी से भगतपुरी में 72 बच्चे दिव्यांग हो चुके हैं और 22 गांवों में पेयजल का गंभीर संकट है. यह बहुत अति महत्वपूर्ण योजना थी. मेरा आपसे स्पष्ट निवेदन है कि इस योजना को आप वापस लेकर, बजट प्रावधान करके, एक उच्च स्तरीय बैठक भोपाल में बुलाकर, उसको नगर पालिका को स्थानांतरित करने की कार्रवाई करेंगे?

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले--अध्यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहती हूं कि योजना को पुनः चालू करने के लिए हमें लगभग 1 करोड़ रुपये की आवश्यकता है और उसके संधारण के लिए 6 लाख रुपये प्रतिमाह चाहिए. नगर पालिका यदि यह व्यवस्था करती है तो हम लेने के लिए तैयार हैं.

          श्री दिलीप सिंह शेखावत-- अध्यक्ष महोदय, मैं, आपका संरक्षण चाहूंगा कि यह मेरा काम नहीं है कि उसमें 1 करोड़ रुपये खर्च होगा और प्रतिमाह यह खर्चा होगा और उसको नगर पालिका लेगी या नहीं यह तो शासन को निर्णय लेना है. इतनी गंभीर समस्या है.

          अध्यक्ष महोदय-- आपका प्रश्न यह है कि नगर पालिका से उसका संधारण शासन करने लगे. शासन कह रहा है कि हम नहीं करेंगे. अब यह डेड लॉक कैसे टूटेगा.

          श्री दिलीप सिंह शेखावत--अगर नहीं करेंगे तो....मंत्रीजी, 1 करोड़ रुपया आपके लिये बड़ी बात नहीं है.

          अध्यक्ष महोदय-- बैठ जायें.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले - अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से निवेदन करना चाहती हूं कि हम इसका संधारण करने के लिए तैयार हैं. बशर्ते कि नगरपालिका नागदा हमें 1 करोड़ रुपया दे और 6 लाख रुपया प्रतिमाह उसके संधारण के लिए दे तो हम इसे चालू करने के लिए एवं चलाने के लिए आपकी अनुमति से तैयार हैं.

श्री दिलीप सिंह शेखावत - अध्यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहूंगा कि यह मेरी जवाबदारी नहीं है..

अध्यक्ष महोदय - यह आपकी बात आ गई है.

श्री दिलीप सिंह शेखावत - अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी, माननीय मुख्यमंत्री जी से बात करें, मुख्यमंत्री जी उसमें हस्तक्षेप करें और नगरीय प्रशासन मंत्री जी को वह बोलें.

अध्यक्ष महोदय - यह आपकी बात आ गई और शासन का उत्तर आ गया, आपका सुझाव भी आ गया.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले - अध्यक्ष महोदय, मैं जो भी कह रही हूं, शासन की तरफ से कह रही हूं. शासन को यह बात जा रही है. माननीय सदस्य की यह जिम्मेदारी नहीं है, यह शासन की जिम्मेदारी है. जब यह बात यहां पर आई है तो शासन इस पर विचार करेगा. हमें 1 करोड़ रुपया और 6 लाख रुपए प्रतिमाह संधारण के लिए चाहिए.

विधान सभा क्षेत्र करैरा में शालाओं का उन्‍नयन

6. ( *क्र. 3371 ) श्रीमती शकुन्‍तला खटीक : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्राथमिक विद्यालय, माध्‍यमिक विद्यालय एवं हाईस्‍कूल को उन्‍नयन हेतु शासन के क्‍या नीति नियम आदि निर्धारित हैं? नियमों की प्रति उपलब्‍ध करावें। (ख) क्‍या विधान सभा क्षेत्र 23 करैरा जो नदी, नाले बीहड़ों से लगा हुआ है? यहां के छात्र/छात्राएं असुरक्षा व आर्थिक स्थिति दयनीय होने से व शालाओं के दूरदराज होने से आगे की पढ़ाई से वंचित हैं? (ग) क्‍या विभाग की नीति एवं माननीय मुख्‍यमंत्री जी की घोषणाओं के तहत विधान सभा क्षेत्र 23 करैरा जिला शिवपुरी के प्रश्‍नांश (क) में वर्णित शालाओं को उन्‍नयन कर छात्र-छात्राओं के आगे की शिक्षा प्राप्‍ति‍ हेतु कार्यवाही कब तक संभव है?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी नहीं। जी नहीं, छात्र-छात्राएं निकटस्थ शालाओं में अध्ययनरत हैं। (ग) नवीन प्राथमिक/माध्यमिक विद्यालय खोलने हेतु कोई भी प्रस्ताव लंबित नहीं है। वर्ष 2015-16 के बजट प्रावधान अनुसार हाईस्कूल/हायर सेकेण्डरी शालाओं के उन्नयन की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। 

श्रीमती शकुन्तला खटीक - अध्यक्ष महोदय, विधानसभा क्षेत्र करैरा में माध्यमिक शालाओं से हाईस्कूल में उन्नयन किये जाने बाबत् जो सूची शिक्षा विभाग करैरा से प्राप्त हुई है, उसके अनुसार 8 कि.मी. और उससे अधिक की दूरी पर 15 हाईस्कूल हैं. अधिक दूरी पर हाईस्कूल होने से हमारी बच्चियों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है. वे आगे की पढ़ाई बंद कर घर बैठ जाती हैं. माननीय मंत्री महोदय से अनुरोध है कि इन शालाओं का उन्नयन कर शासन नीति के अनुसार हाईस्कूल स्वीकृत कराएंगे क्या?

राज्यमंत्री, स्कूल शिक्षा (श्री दीपक कैलाश जोशी) - अध्यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय सदस्या की भावना है, हमने राज्य बजट से विगत 2 वर्षों में 100-100 हाईस्कूल संचालित करने का बजट में प्रावधान किया था. लेकिन वर्ष 2015-16 के वर्ष में आरएमएसए के माध्यम से 484 हाईस्कूल हमें मिलने जा रहे हैं. उसमें 17 शिवपुरी जिले में है, उसमें से माननीय सदस्या के विधान सभा क्षेत्र में 2 हाईस्कूल स्वीकृत होने जा रहे हैं. साथ ही अगले सत्र के लिए भी हमें केन्द्र सरकार ने जो आश्वासन दिया है, उसके तहत करीब 47 हाईस्कूल शिवपुरी जिले में उन्नयन होने जा रहे हैं. उसमें करैरा विधान सभा में 11 हाईस्कूल उन्नयन होने जा रहे हैं. ऐसे में माननीय सदस्या के क्षेत्र में लगभग 13 हाईस्कूल उन्नयन होने जा रहे हैं, यह मैं विश्वास दिलाता हूं.

श्रीमती शकुन्तला खटीक - माननीय मंत्री महोदय को बहुत-बहुत धन्यवाद देती हूं.

 

प्रतिनियुक्ति से पदों की पूर्ति

7. ( *क्र. 3079 ) श्री रामलाल रौतेल : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र. शासन ने प्रतिनियुक्ति पूर्णत: बन्‍द की है? यदि हाँ, तो निर्देश उपलब्‍ध करावें? क्‍या सहायक आयुक्‍त आदिवासी विकास, सीधी परियोजना प्रशासक सोहागपुर, जैसिंहनगर, विकासखण्‍ड अधिकारी जनपद पंचायत अनूपपुर के पदों को प्रतिनियुक्ति से भरा गया है? यदि नहीं, तो संबंधित अधिकारियों के मूल पद क्‍या हैं, मूल पदस्‍थापना कहाँ है, पदस्‍थ करने का क्‍या कारण हैं? (ख) क्‍या मुख्‍यमंत्री कार्यालय के पत्र क्रमांक 1342/सी.एम.एस./एम.एल.ए./087/2015, भोपाल दिनांक 07.7.2015 द्वारा विभाग को किसी प्रकार के कोई निर्देश प्राप्‍त हुए हैं? यदि हाँ, तो पत्र उपलब्ध करावें? क्‍या विभाग ने परिपत्र के परिपालन में कोई कार्यवाही की है? यदि हाँ, तो क्‍या? (ग) प्रश्‍नांश (क) के परिपालन में पदस्‍थ अधिकारियों को मूल विभाग कब वापस करेंगे? यदि नहीं करेंगे, तो क्‍यों?

आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) : (क) जी नहीं। सहायक आयुक्‍त आदिवासी विकास सीधी के पद पर श्री कमलेश कुमार पाण्‍डे, पशु चिकित्‍सा सहायक शल्‍यज्ञ एवं श्री राजेन्‍द्र सिंह पशु चिकित्‍सक की सेवाएं पशुपालन विभाग से प्रतिनियुक्ति पर ली जाकर क्रमश: सहायक आयुक्‍त आदिवासी विकास सीधी एवं परियोजना प्रशासक एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना जयसिंहनगर के पद पर प्रतिनियुक्ति से भरे गये हैं। विभाग में अधिकारियों की कमी होने पर संबधितों की सेवाएं प्रतिनियुक्ति पर ली जाकर पदस्‍थ किया गया है। (ख) जी हाँ। कार्यवाही प्रचलन में है। (ग) कार्यवाही प्रचलित है। शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्री रामलाल रौतेल - अध्यक्ष महोदय, हिन्दुस्तान में मध्यप्रदेश में सर्वाधिक जनजाति वर्ग के लोग निवास करते हैं और जो 2 ऐसे पद हैं, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास और दूसरा परियोजना प्रशासक, ये ऐसे महत्वपूर्ण पद हैं, जो हमारे आदिवासियों की परिस्थिति और तमाम चीजों को अनुभव करते हुए इनकी पदस्थापना की जाती है. मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि क्या आवश्यकता थी कि पशुपालन विभाग के दो अधिकारियों को आपने परियोजना प्रशासक और सहायक आयुक्त का दायित्व दिया है, यह मैं जानना चाहता हूं?

श्री ज्ञान सिंह - अध्यक्ष महोदय, विभाग के द्वारा समय-समय पर हितग्राही मूलक योजनाओं का लाभ और अन्य जिम्मेदारियों का निर्वहन हो सके, इसके लिए विभाग में एसी, डीसी, परियोजना प्रशासकों के पदों की पूर्ति कई वर्षों से न होने पाने के कारण से और जैसा कि प्रतिनियुक्ति में लेकर उनकी सेवाएं लेने का प्रचलन है, दोनों विभागों की सहमति के आधार पर उनकी प्रतिनियुक्ति हुई है.

          श्री रामलाल रौतेल -- माननीय अध्यक्ष महोदय मेरे विधान सभा क्षेत्र में एक प्रधानाध्यापक को माननीय मंत्री जी ने बीडीओ बनाया है, एवं एक अन्य को सहायक परियोजना प्रशासक शहडोल बनाया है जो अपर क्लास वन स्तर का अधिकारी होता है उस पद का दायित्व मंत्री जी ने व्याख्याता को दिया है. सरकार मानती है सरकार का दृष्टिकोण है और सरकार की सोच है कि जो लोग शैक्षणिक काम में लगे हैं उनको ऐसे दायित्व न दिये जायें. मैं माननीय मंत्री जी और सरकार की मंशा जानना चाहता हूं कि क्या विभाग आदिवासियों का हितैषी नहीं है. ऐसे व्यक्ति जो कि पूर्व मंत्री के सचिव रहे हैं, ऐसे व्यक्ति को बीडीओ और सीईओ बनाने का संकल्प किया है तो मैं यह जानना चाहता हूं कि क्या यह जो शिक्षक है उनको पद से पृथक करेंगे .

          श्री ज्ञान सिंह --  माननीय अध्यक्ष महोदय यह दोनों विभाग के अधीन कर्मचारी हैं. मैं आपको अवगत कराना चाहूंगा जैसा कि माननीय सदस्य की भावना है यह दोनों अधिकारी आज से ही स्थानांतरित माने जायेंगे.

          श्री रामलाल रौतेल -- धन्यवाद्.

प्रश्न संख्या -8 ( अनुपस्थित )

 

अनु.जाति बस्‍ती विकास योजनांतर्गत कार्यों की स्‍वीकृति

9. ( *क्र. 3326 ) श्री नारायण सिंह पँवार : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि () क्‍या कलेक्‍टर जिला राजगढ़ द्वारा .प्र. अनुसूचित बस्‍ती विकास योजना नियम 2014 के अंतर्गत अनुसूचित जाति बाहुल्‍य ग्रामों में विकास कार्य किये जाने हेतु ग्रामों के चयन के संबंध में आयुक्‍त, अनुसूचित जाति विकास, मध्‍यप्रदेश भोपाल को पत्र क्रमांक 07 दिनांक 02.01.2016 से योजनांतर्गत विकास कार्यों की स्‍वीकृति हेतु ग्रामों के चयन बाबत् जिले की विकासखण्‍डवार सूची तैयार कर कार्यालयीन पत्र क्रमांक 4257/आजाक/अनु.जा..वि./15-16 राजगढ़ दिनांक 02.11.2015 से अनुमोदन हेतु प्रेषित की गई है? यदि हाँ, तो उक्‍त संबंध में प्रश्‍न दिनांक तक क्‍या कार्यवाही की गई? () प्रश्‍नांश () के परिप्रेक्ष्‍य में क्‍या वर्तमान में जारी नियमों के अनुरूप जिले के समस्‍त विकासखण्‍डों के अनुसूचित जाति बाहुल्‍य ग्रामों में विकास कार्य कराये जाने में विकासखण्‍डवार लाभ प्राप्‍त होकर पहले एक विकासखण्‍ड फिर दूसरा विकासखण्‍ड का क्रम आवेगा? यदि हाँ, तो क्‍या शासन राजगढ़ जिले में कलेक्‍टर राजगढ़ द्वारा प्रेषित की गई ग्रामों की सूची अनुसार प्रस्‍ताव का अनुमोदन करेगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों?

आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) : () जी हाँ। कलेक्‍टर, राजगढ को आयुक्‍त, अनुसूचित जाति विकास के पत्र क्रमांक आर्थिक विकास/2015-16/9145 दिनांक 15.2.2016 द्वारा अनुमोदित सूची अनुसार कार्य कराने के निर्देश प्रदान किये गये हैं। () जी नहीं। वर्ष 2011 की जनगणना अनुसार जिले के अनुसूचित जाति बाहुल्‍य ग्रामों में सर्वाधिक अनुसूचित जाति की जनसंख्‍या के प्रतिशत वाले ग्रामों (अनुसूचित जाति की आबादी के प्रतिशत घटते अनुक्रम) में विकास कार्य कराये जाने का नियमों में प्रावधान है। शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

          श्री नारायण सिंह पंवार -- माननीय अध्यक्ष महोदय मैंने जो प्रश्न लगाया था कि आदिवासी बस्ती विकास योजना में जो विभाग की राशि प्राप्त होती है वह जिले की अनुसूचित जाति जनजाति को घटते प्रतिशत में उसके विकास कार्य कराये जाते हैं. लेकिन मंत्री जी ने उत्तर दिया है कि जिले में जो घटते क्रम में आदिवासी या अनुसूचित जाति के गांव होंगे उसके हिसाब से काम कराये जायेंगे. मेरी प्रश्न में यह भावना थी कि विधान सभावार इसकी प्राथमिकता बनायी जाय. क्योंकि अनेक गांव मेरे ही क्षेत्र में ऐसे हैं कि जो कि 85 प्रतिशत से शुरू होते हैं. लेकिन जिले के दूसरे गांव में राशि आवंटित होने के कारण मेरी विधानसभा का तो मौका आयेगा ही नहीं. मैं जानना चाहता हूं कि इसको विधान सभा वार प्राथमिकता देने पर विचार करेंगे.

          श्री ज्ञान सिंह -- अध्यक्ष महोदय अभी तक की विभाग में इ स तरह की व्यवस्था नहीं है जहां तक माननीय सदस्य ने अपनी भावना को यहां पर व्यक्त किया है. मैं उऩको आश्वस्त कराना चाहता हूं कि यह तो हमारे एससीएसटी के टोले, मजरों के विकास का काम निरंतर जारी रहेगा. आप जहां पर आवश्यकता महसूस करते हैं. मैं आपके माध्यम से उनको आश्वस्त करना चाहता हूं कि जहां पर गांव संख्या की दृष्टि में बहुल हैं वहां पर भी विकास किया जायेगा लेकिन अभी तक इस तरह की व्यवस्था नहीं है.

          श्री नारायण सिंह पंवार -- माननीय अध्यक्ष महोदय मेरा कहना है कि इसको पालिसी क्यों नहीं बनायी जाय क्योंकि यह समस्या तो सभी विधान सभाओं में आ रही है. विधान सभा वार पालिसी बनाने के लिए यदि विभाग आदेश करेगा तो इस समस्या का समाधान हो जायेगा. जैसे जैसे क्रम घटता जायेगा वैसे वैसे काम होते जायेंगे नहीं तो जिलों में बहुत सी जगह ऐसी रह जायेंगी जिसका नंबर 10 साल तक नहीं आयेगा. इसलिए इसे विधान सभा वार करने का कष्ट करेंगे तो अच्छा होगा. मैं माननीय मंत्री जी का आश्वासन चाहूंगा.

          श्री ज्ञान सिंह -- माननीय अध्यक्ष जी जैसा कि मैंने अपने उत्तर में कहा है कि इस तरह की व्यवस्था नहीं है. हमारे विभाग की एक ही योजना है कि जहां पर हमारे अनुसूचित जाति और जनजाति के लोग रहते हैं उनका विकास विभाग की ओर से कैसे कर सकें हमारी यह सोच है हमारी यह योजना है.

          श्री नारायण सिंह पंवार -- आपकी बात से मैं सहमत हूं लेकिन अगर एक एक विधान सभा में करेंगे तो अच्छा होगा नहीं तो किसी एक विधान सभा का नंबर 10 वर्ष तक नहीं आयेगा.

          अध्यक्ष महोदय -- वह कह रहे हैं कि आप उनसे चर्चा कर लें वह उसके अनुसार काम करेंगे.

          श्री नारायण सिंह पंवार -- अध्यक्ष महोदय वह कैसे करेंगे जिले में तो कोई पालिसी बनायी नहीं है मुझे जो उत्तर मिला है कि 16 - 2 को जो योजना जिले में भेजी है मुझे उसकी भी जानकारी चाहिए कि क्या योजना भेजी है जिले के किसी अधिकारी को उसके बारे में जानकारी नहीं है. हमारी विधान सभा के सभी गांव इस बात की अपेक्षा रखे हुए हैं कि कब 85 प्रतिशत की आबादी के गांव को लाभ मिलेगा.

          अध्यक्ष महोदय -- उनको जानकारी उपलब्ध करा दें जो योजना यहां से भेजी है.

                                                                                             

 

            सामग्री के क्रय में अनियमितता

10. ( *क्र. 2093 ) श्री बलवीर सिंह डण्‍डौतिया : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नकर्ता के परि. अता. प्रश्‍न संख्‍या 139 (क्र. 2909), दि. 31.07.2015 के उत्‍तर (क) व (ग) के पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अ, व (क) से (घ) के उत्‍तर में नियम प्रक्रिया व सामग्री से क्रय संबंधी उत्‍तर दिया है, तो शासन द्वारा प्रति नग खरीदी दर, जो खरीदे गये सामान की है, से अच्‍छी गुणवत्‍ता में वर्णित दर से बाजार में 50 प्रतिशत से कम दर में उपलब्ध होने पर भी लघु उद्योग निगम से दुगुनी दर से खरीदने का क्‍या कारण है? (ख) क्‍या शासन इस प्रकरण की प्रश्‍नकर्ता के समक्ष जाँच करायेगा? यदि हाँ, तो कब तक?

आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) : (क) म.प्र. भंडार क्रय नियम अनुसार जिले द्वारा म.प्र. लघु उद्योग निगम से नियमानुसार निर्धारित दर पर सामग्री क्रय की गयी है। (ख) प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

 

            श्री बलवीर सिंह डण्‍डौतिया -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं बताना चाहता हूँ कि जो मंत्री जी ने जवाब दिया है वह बहुत गलत दिया है. मैं मंत्री जी पूछना चाहता हूँ कि परि. अता. प्रश्‍न संख्‍या 139 (क्र. 2909), दिनांक 31.07.2015 के उत्‍तर (क) व (ग) के पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र अ, ब व (क) से (घ) के उत्‍तर में नियम प्रक्रिया व सामग्री से क्रय संबंधी उत्‍तर दिया है, तो शासन द्वारा प्रति नगर खरीदी दर, जो खरीदे गए सामान की है, से अच्‍छी गुणवत्‍ता में वर्णित दर से बाजार में 50 प्रतिशत से कम दर में उपलब्‍ध होने पर भी लघु उद्योग निगम से दुगुनी दर से खरीदने का क्‍या कारण है ?

            अध्‍यक्ष महोदय -- यह सब तो प्रश्‍न में लिखा है, आप अपना प्रश्‍न करिए.

          श्री बलवीर सिंह डण्‍डौतिया -- तो मैं मंत्री जी यह पूछना चाहता हूँ कि (XXX)

          अध्‍यक्ष महोदय -- यह कार्यवाही में से निकालिए.

          श्री बलवीर सिंह डण्‍डौतिया -- (XXX)

          अध्‍यक्ष महोदय -- यह कार्यवाही से निकाल दीजिए.

          श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, 100 रुपये की चीज 200 रुपये में खरीदवा रहे हैं तो भ्रष्‍टाचार तो है ही उसमें.

          अध्‍यक्ष महोदय -- आप बैठ जाएं, उनके प्रश्‍न का उत्‍तर आ जाने दें. लघु उद्योग निगम से चीजें महंगी मिल रही हैं और बाजार में अच्‍छी गुणवत्‍ता की चीजें सस्‍ती मिल रही हैं, क्‍या इस बारे में कोई नियम परिवर्तित करेंगे ?

          श्री ज्ञान सिंह --  माननीय अध्‍यक्ष महोदय जी, मैं आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍य और माननीय सदन को अवगत कराना चाहूंगा कि वास्‍तव में यह जो व्‍यवस्‍था लघु उद्योग निगम से क्रय करने की रही है, हमने इसकी पूरी समीक्षा कर ली है, बिल्‍कुल इस तरह की खरीद-फरोख्‍त चौगुने भाव में, तिगुने भाव में क्रय करने की जो व्‍यवस्‍था रही है, इसके बारे में हमने एक बैठक की है और प्रारंभिक तौर पर विगत वर्ष 2013-14 में हमने इस परिवर्तन की शुरूआत भी की है कि सीधे छात्रवृत्‍ति की राशि छात्रों के खातों में भेजी है. इस समिति में अभिभावक, छात्रावास के अधीक्षक मेंबर, उस विद्यालय का प्रिंसीपल मेंबर और हमारे विभाग का एसी-डीसी जो भी हो और एडिशनल कलेक्‍टर होते हैं. यह व्‍यवस्‍था हमने अभी शुरू की है और इसके अच्‍छे परिणाम आए हैं, बेशक इसमें परिवर्तन करने की बहुत आवश्‍यकता है क्‍योंकि बहुत पुरानी व्‍यवस्‍था रही है. मैं आपके माध्‍यम से आश्‍वस्‍त कराना चाहूंगा कि इसमें अवश्‍य विचार किया जाएगा.

          श्री बलवीर सिंह डण्‍डौतिया -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह निवेदन कर रहा हूँ कि क्‍या ये पुराने मामलों की जांच कराएंगे ? क्‍या समिति में लेंगे ?

            अध्‍यक्ष महोदय -- पुरानी खरीदी की जांच कराएंगे क्‍या ?

          श्री ज्ञान सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जांच कराने की आवश्‍यकता नहीं है क्‍योंकि व्‍यवस्‍था ही ऐसी थी.

          अध्‍यक्ष महोदय -- ठीक है.

          श्री बलवीर सिंह डण्‍डौतिया -- अध्‍यक्ष महोदय, जवाब तो दिलवा दो जांच कराएंगे क्‍या. क्‍या मुझे संग लेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय -- जवाब आ तो गया कि जांच नहीं कराएंगे.

          श्री बलवीर सिंह डण्‍डौतिया -- क्‍यों नहीं कराएंगे जांच ? (XXX)

            अध्‍यक्ष महोदय - यह कुछ नहीं लिखना है.

          प्रश्‍न क्र. 11 (अनुपस्‍थित)

          प्रश्‍न क्र. 12 (अनुपस्‍थित)

बैरसिया विधानसभा क्षेत्रांतर्गत संचालित पशु स्‍वास्‍थ्‍य/उपस्‍वास्‍थ्‍य केंद्र

13. ( *क्र. 3305 ) श्री विष्‍णु खत्री : क्या पशुपालन मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) बैरसिया विधानसभा क्षेत्रांतर्गत कहाँ-कहाँ पर पशु स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र एवं उपस्‍वास्‍थ्‍य केंद्र संचालित हो रहे हैं? (ख) प्रश्‍नांश (क) में दर्शित ऐसे केंद्र जो विभाग के भवनों में संचालित नहीं हो रहे हैं अथवा भवन विहीन हैं, के संबंध में क्‍या विभाग नवीन भवन तैयार कराने हेतु कोई विचार रखता है? (ग) ग्राम जमूसरकलां में संचालित पशु उपस्‍वास्‍थ्‍य केंद्र में भवन निर्मित किये जाने हेतु प्रश्‍नकर्ता के पत्र दिनांक 15.01.2016 पर विभाग क्‍या कार्यवाही कर रहा है एवं भवन निर्माण कब से प्रारंभ हो जावेगा? (घ) बैरसिया विधानसभा क्षेत्रांतर्गत संचालित केंद्रों में स्‍टाफ की कमी है, तो रिक्‍त पदों की पूर्ति विभाग कब तक कर देगा?

पशुपालन मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार(ख) विभागीय अधोसंरचना विकास योजना अंतर्गत उपलब्ध वित्तीय प्रावधानों के तहत निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। (ग) भवन निर्माण के लिए प्राक्कलन हेतु उपसंचालक पशुचिकित्सा सेवाएं द्वारा कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवाएं को पत्र प्रेषित किया गया है। आगामी वित्तीय वर्ष में वित्तीय प्रावधान प्राप्त होने पर निर्माण कार्य हेतु विचार किया जावेगा। समय-सीमा बताना संभव नहीं है। (घ) संचालित केन्द्रों हेतु स्टॅाफ की नवनियुक्ति या स्थानांतरण होने पर रिक्त पदों की पूर्ति पर विचार किया जावेगा। समय-सीमा बताना संभव नहीं है।

परिशिष्ट - ''चार''

          श्री विष्‍णु खत्री -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र बैरसिया में निराश्रित पशु बहुतायत में सड़कों पर और अन्‍यत्र स्‍थानों पर विचरण करते हैं इसके कारण यातायात भी बाधित होता है. इसके संबंध में मैंने माननीय मंत्री जी और माननीय मुख्‍यमंत्री जी को पत्र लिखा है कि इसमें एक गौशाला या गौ-अभ्‍यारण्‍य जो कि पशु पालन विभाग की 27 हेक्‍टेयर भूमि जमूसर में है वहां पर बना दिया जाए.

          अध्‍यक्ष महोदय -- इसमें यह प्रश्‍न कहां है ?

          श्री विष्‍णु खत्री -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह प्रश्‍न से जुड़ा हुआ है. इसी संबंध में मैंने प्रश्‍न के भाग (ग) में प्रश्‍न किया था कि ग्राम जमूसरकलां में संचालित पशु उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र भवन विहीन है तो इसमें माननीय मंत्री जी ने लिखा है कि इस पर कार्यवाही की जा रही है, इसमें मैं माननीय मंत्री से आश्‍वासन चाहता हूँ कि जो पशुपालन विभाग की 27 हेक्‍टेयर भूमि है वहां पर क्‍या माननीय मंत्री गौशाला का निर्माण कराएंगे और जो पशुपालन विभाग का उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र जमूसर में नहीं है तो क्‍या वहां पर उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र का भी निर्माण कराएंगे ?

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले-- माननीय अध्यक्ष महोदय, प्वाइंटेड प्रश्न करेंगे तो जवाब देंगे.

          अध्यक्ष महोदय-- (ग) में उन्होंने प्वाइंटेड ही प्रश्न किया है, स्वास्थ्य केन्द्र मांगा है और साथ में यह भी जोड़ दिया कि क्या गौशाला भी वहां बना देंगे क्योंकि जमीन है.

          सुश्री कुसुमसिंह महदेले-- अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से निवेदन करना चाहती हूँ कि  यदि कोई संस्था या ग्रामीणवासी कोई गौशाला बनाना चाहते हैं तो हम शासन के द्वारा उसकी मदद करेंगे. सरकार स्वयं गौशाला का निर्माण नहीं करती है यदि कोई संस्था या कोई दानवीर निर्माण करना चाहते हैं तो उसमें हम सहायता करेंगे और रही औषधालयों की बात, आप जहां औषधालय कहेंगे हम वहां बनवा देंगे.

          श्री विष्णु खत्री-- धन्यवाद माननीय मंत्री जी.

शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत नि:शुल्‍क प्रवेश

14. ( *क्र. 1916 ) श्री नीलेश अवस्‍थी : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि () शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 क्‍या है? अधिनियम की छायाप्रति देवें। इस अधिनियम के तहत गरीब/निर्धन छात्र-छात्राओं को नि:शुल्‍क प्रवेश प्रक्रिया के तहत अशासकीय शालाओं में प्रवेश के क्‍या नियम हैं? () जबलपुर जिले के अंतर्गत कितनी अशासकीय शालाएं संचालित हैं एवं इन संचालित शालाओं द्वारा प्रश्‍नांश () में उल्‍लेखित अधिनियम के तहत वित्‍त वर्ष 2012-13 से प्रश्‍न दिनांक तक कितने गरीब/निर्धन छात्र/छात्राओं को नि:शुल्‍क प्रवेश दिया गया? () प्रश्‍नकर्ता द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी जबलपुर को दिनांक 25.08.2015 को लिखे पत्र क्रमांक/एम/163/15/173 में चाही गई जानकारी का उत्‍तर प्रश्‍न दिनांक तक प्रश्‍नकर्ता को प्रदाय करने से क्‍या सामान्‍य प्रशासन विभाग के पत्र क्रमांक/एफ            19-76/2007/1/4/ भोपाल दिनांक 27.11.2015 के द्वारा दिये गये निर्देशों का उल्‍लंघन किया गया है? यदि हाँ, तो नियम का उल्‍लंघन करने वाले अधिकारियों पर शासन द्वारा कब तक क्‍या अनुशासनात्‍मक कार्यवाही की जावेगी? यदि नहीं तो क्‍यों नहीं?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : () जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। () 782 अशासकीय शालाएं। कुल 26867 बच्चों को प्रवेश दिया गया।   () जिला शिक्षा अधिकारी जबलपुर के पत्र क्र. मान्यता 83/2015/11810 दिनांक 18 सितंबर 2015 को प्रश्नकर्ता को जानकारी प्रदाय की गई है। जी नहीं, अतः शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। 

 

          श्री नीलेश अवस्थी--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूँ कि  शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के अधिकार नियम में  मैंने जानकारी मांगी थी, वह जानकारी मुझे पूरी नहीं मिली है. मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूँ कि मैंने जो जानकारी मांगी थी,प्रत्येक स्कूलवार, छात्रवार और वर्षवार वह जानकारी मेरे को उपलब्ध नहीं हुई है कि अधिनियम के तहत् उन बच्चों को अधिकार नहीं मिल रहा है उन स्कूलों में जो शासन द्वारा दिया जा रहा है. मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूँ कि जो अशासकीय मान्यता प्राप्त जो स्कूल हैं उनके नोटिस बोर्ड में, हर नोटिस बोर्ड में उनके चस्पा होना चाहिए कि किन-किन बच्चों को उसका लाभ मिल रहा है और हर विधायक के क्षेत्र में उनको जानकारी होनी चाहिए क्योंकि ऐसे कई स्कूल हैं जो सिर्फ पेपर में ही खानापूर्ति कर रहे हैं. माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि क्या यह करेंगे?

          राज्यमंत्री, स्कूल शिक्षा(श्री दीपक जोशी)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय सदस्य ने प्रश्न में पूछा था वह जानकारी हमने पूर्ण रुप से उपलब्ध करा दी लेकिन स्कूल और बच्चों सहित इन्होंने जानकारी मांगी है, वह हम इनको उपलब्ध करा देंगे. दूसरी बात इऩ्होंने जिला शिक्षा अधिकारी के विषय में भी इन्होंने पूछी थी, उन्हीं से शायद इनको असहजता महसूस हो रही है. इस हेतु हमने जिला शिक्षा अधिकारी से जब पूछा तो उन्होंने बताया कि 6 बिन्दुओं पर इन्होंने जानकारी मांगी थी. 5 बिन्दुओं पर इनको जानकारी उपलब्ध करा दी गयी. एक जानकारी डीपीसी के द्वारा देनी थी वह जानकारी इनको उपलब्ध नहीं हो पायी, वह भी हम इनको शीघ्र उपलब्ध करा देंगे.

          श्री नीलेश अवस्थी-- माननीय अध्यक्ष महोदय,मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि जिन स्कूलों में यह अधिनियम लागू है उनका कम से कम नोटिस बोर्ड में उन बच्चों की सूची रहे,जिसमें लोगों को जानकारी रहे और पारदर्शिता बनी रहे.

          अध्यक्ष महोदय-- ठीक है.

          श्री तरुण भनोत-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूँ कि सारे सम्मानीय विधायकों को कम से कम उनके जिलों में जो स्कूल हैं उसमें किस स्कूल में कितने छात्रों की राइट टू एज्यूकेशन के तहत् भर्ती होना है वह छात्र संख्या उपलब्ध करा दी जाए क्योंकि हो यह रहा है कि मान लीजिए किसी शाला में अगर 50 बच्चों की भर्ती होना है तो मात्र 15 बच्चों की भर्ती करते हैं, बाकी नहीं करते हैं जिससे कि गरीब परिवार शिक्षा के अधिकार से वंचित हो रहे हैं. मैं मंत्री जी से यह निवेदन करना चाहता हूँ कि कम से कम किस स्कूल में कितने बच्चों की एडमीशन होना है और कितने नहीं हो पाये हैं वह जरूर सदस्यों को उपलब्ध कराया जाए.

          श्री दीपक जोशी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय विधायक को आपके माध्यम से आश्वस्त करता हूँ कि यह हम जानकारी उपलब्ध करा देंगे.

 

आमला में वाणिज्‍य संकाय के व्‍याख्‍याता की पूर्ति

15. ( *क्र. 3612 ) श्री चैतराम मानेकर : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि () क्‍या शा. उत्‍कृष्‍ट .मा. विद्यालय आमला में वाणिज्‍य संकाय की कक्षाएं संचालित हैं? () यदि हाँ, तो वाणिज्‍य संकाय के कितने व्‍याख्‍याता कार्यरत हैं? () यदि नहीं, तो वाणिज्‍य संकाय के रिक्‍त पदों की पूर्ति कब तक कर दी जायेगी?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : () जी हाँ। () संस्था में वाणिज्य संकाय के व्याख्याता पदस्थ नहीं है परन्तु 01 अध्यापक की शैक्षणिक योग्यता एम.काम. होने से उनके द्वारा एवं 2 अतिथि शिक्षकों से अध्यापन कार्य कराया जा रहा है. () रिक्‍त पदों की पूर्ति सीधी भर्ती/पदोन्‍नति से करने की सतत् प्रक्रिया है, समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

 

 

          श्री चैतराम मानेकर-- माननीय अध्यक्ष महोदय, शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय,आमला विकासखण्ड का एक अच्छा विद्यालय है. इस विद्यालय में वाणिज्य संकाय की कक्षाएँ विगत 4-5 वर्षों से संचालित हैं और वहां अतिथि शिक्षकों के भरोसे वाणिज्य संकाय की कक्षाएँ संचालित की जा रही हैं.मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि विद्यालय में क्या नियमित व्याख्याताओं के रिक्त पदों की  पूर्ति की जाएगी?

          राज्य मंत्री,स्कूल शिक्षा(श्री दीपक जोशी)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह विभाग की निरंतर प्रक्रिया है. इसके माध्यम से हम लगातार यह प्रयास तो करते हैं लेकिन वर्तमान में भी इनके इस विद्यालय में वाणिज्य संकाय के  एक अध्यापक पदस्थ हैं जिसकी शैक्षणिक योग्यता एम.काम है. साथ में जो अतिथि शिक्षक है वह भी पूर्ण शैक्षणिक योग्यता के साथ है. आने वाले समय में हम यह पद पूर्ति करने का विश्वास दिलाते हैं.

          श्री चैतराम मानेकर-- धन्यवाद मंत्री जी.

 

वनाधिकार के लंबित आवेदन

16. ( *क्र. 3851 ) श्री वीरसिंह पंवार : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि () रायसेन जिले के विकासखण्‍ड सिलवानी, बेगमगंज में फरवरी, 2016 की स्थिति में कितने वनाधिकार (वन भूमि के पट्टे) के आवेदन पत्र कब से किस स्‍तर पर क्‍यों लंबित हैं? () उक्‍त विकासखण्‍डों में किन-किन आदिवासियों के वनाधिकार पत्र के आवेदन पत्र ग्राम सभा उपखण्‍ड स्‍तरीय समिति द्वारा क्‍यों अस्‍वीकृत किये गये? () उक्‍त विकासखण्‍डों में सामुदायिक वन संसाधनों/दावों से संबंधित ग्राम सभा द्वारा पारित किन-किन दावों को क्‍यों किसने अस्‍वीकृत किया? प्रकरणवार कारण बतायें। इस संबंध में अस्‍वीकृत करने वाले अधिकारी को उक्‍त अधिनियम की किस धारा में अधिकार है? प्रति दें। () उक्‍त प्रकरणों के संबंध में 1 जनवरी, 2015 से प्रश्‍न दिनांक तक मान. मंत्रीजी तथा विभाग के अधिकारियों को किन-किन विधायकों के पत्र कब-कब प्राप्‍त हुए तथा उन पर क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई?

आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) : () जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-एक अनुसार है। () जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के   प्रपत्र-दो अनुसार है। () जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-तीन अनुसार है। () जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-चार अनुसार है।

 

 

          श्री वीरसिंह पंवार--  माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी द्वारा जो जवाब आया है उससे मैं पूर्णत: संतुष्ट हूँ. माननीय मंत्री जी का  धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ. माननीय मंत्री जी से एक जानकारी और चाह रहा हूँ कि जो वन भूमि के पट्टे की भूमि है उस पर पट्टाधारी क्या कुआं निर्माण या तार फैंसिंग वगैरह कर सकता है या नहीं ?

 

          श्री ज्ञानसिंह--  माननीय अध्यक्ष महोदय, यह प्रश्न उद्भूत नहीं होता लेकिन आपके माध्यम से माननीय सदस्य को अवगत कराना चाहूंगा कि वनाधिकार से संबंधित जितने भी हितग्राहियों को पट्टे प्राप्त हो गये हैं वहाँ पर सरकार की , विभाग की पूरी चिंता है. वहाँ तक सड़क बनाने का, बिजली की व्यवस्था करने का,कपिल धारा कुंओं के माध्यम से सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराये जाने के प्रावधान हैं.

 

शैक्षणिक सत्र के दौरान किये गये स्‍थानांतरण

17. ( *क्र. 390 ) श्री सुशील कुमार तिवारी : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शासन की स्‍थानांतरण नीति के अनुसार शैक्षणिक सत्र के समय स्‍थानांतरणों पर रोक के दौरान स्‍थानांतरण न किये जाने का प्रावधान है?       (ख) क्‍या शैक्षणिक सत्र 2015-16 में विधानसभा क्षेत्र पनागर में स्‍थानांतरणों पर रोक के बावजूद भी शैक्षणिक सत्र के समय स्‍थानांतरण किये गये हैं? (ग) यदि शैक्षणिक सत्र के दौरान स्‍थानांतरण किये जाते हैं तो क्‍या शैक्षणिक कार्य प्रभावित नहीं होगा एवं ऐेसे स्‍थानांतरण करने के लिए दोषी अधिकारी पर कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) प्रावधान पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट की कंडिका 10 में निहित प्रावधानों के अनुसार स्‍थानांतरण किये गये हैं। (ग) जी नहीं। प्रश्‍नांश '''' के उत्‍तर के प्रकाश में शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

श्री सुशील कुमार तिवारी---  माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि स्थानांतरण नीति के विरुद्ध जबलपुर जिले में शिक्षा विभाग कार्य कर रहा है . मंत्री जी द्वारा जो उत्तर दिया गया है उससे हटकर मैं एक बात बताना चाहता हूं कि मैं दो लोगों के आदेश का प्रमाण लेकर आया हूं  श्रीमती इला शर्मा, श्रीमती सविता उपाध्याय, इनका नीति विरुद्ध स्थानांतरण किया गया . क्या इस पर कोई कार्यवाही होगी और जब मैंने विधानसभा प्रश्न लगाया तो उसके बाद इनका स्थानांतरण रद्द कर दिया गया.इस प्रकार से जबलपुर में शिक्षा विभाग में जो उद्योग चल रहा है , इस पर रोक लगेगी.

          राज्यमंत्री,स्कूल शिक्षा (श्री दीपक जोशी)--- माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय विधायक जी ने प्रश्नांकित शिक्षकों के बारे में बताया है, उसकी हम जांच करके उसमें कोई दोषी होगा तो कार्यवाही कर देंगे.

          श्री सुशील कुमार तिवारी--- मंत्री जी से निवेदन है कि इस प्रकार जो मेरे पास प्रमाण है इस पर आप जांच करेंगे और समयसीमा बताएंगे.

          श्री दीपक जोशी--- अध्यक्ष महोदय, मैंने पहले ही कहा है कि हम जांच करा लेंगे,परीक्षण करवा लेंगे यदि उसमें कोई दोषी पाया जाएगा तो कार्यवाही करेंगे.

 

 

कन्‍या हायर सेकेण्‍डरी के लिये पृथक भवन व्‍यवस्‍था

18. ( *क्र. 2528 ) श्री हितेन्द्र सिंह ध्‍यानसिंह सोलंकी : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या कस्‍बा बैडिया की आबादी लगभग 10,000 से अधिक एवं आसपास ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण बेडिया में वर्तमान में हायर सेकेण्‍डरी का संचालन छात्र एवं छात्राओं के लिये एक ही भवन में हो रहा है? यदि हाँ, तो क्‍या कस्‍बा बैडिया में कन्‍याओं के लिये पृथक से भवन की स्‍वीकृति के संबंध में प्रश्‍नकर्ता द्वारा विभागीय स्‍तर पर कार्यवाही की गई थी? (ख) प्रश्‍नांश (क) के अनुसार यदि हाँ, तो कस्‍बा बैडिया में कन्‍या हायर सेकेण्‍डरी भवन के लिये पृथक से क्‍या व्‍यवस्‍था की गई है? यदि नहीं की गई तो क्‍यों क्‍या कारण रहें है? नवीन पृथक भवन कब तक स्‍वीकृत हो जावेगा?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ प्रश्नाधीन शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बैडिया में सह-शिक्षा होने से छात्र-छात्राएं साथ-साथ अध्ययन करते हैं। विभाग द्वारा इस विद्यालय में कन्याओं के लिए पृथक से भवन निर्माण की कोई योजना विचाराधीन नहीं है। (ख) उत्‍तरांश ‘’ के प्रकाश में प्रश्नांश उद्भूत नहीं होता।

          श्री हितेन्द्र सिंह ध्यानसिंह सोलंकी--  माननीय अध्यक्ष महोदय, कन्याओं के लिए  हमारी सरकार, माननीय मुख्यमंत्री जी और शिक्षामंत्री जी बड़े संवेदनशील हैं.मैं  चाहता हूं कि लड़के और लड़कियां अलग अलग पढ़े और वहाँ दो भवन हैं, भवन बनाने की आवश्यकता नहीं है. कन्याओं के लिए पृथक से बैठने की व्यवस्था भवन हो जाएगी क्या, हायर सेकेंडरी उसमें लगने लग जाएगी क्या.

          राज्यमंत्री,स्कूल शिक्षा(श्री दीपक जोशी)--- माननीय अध्यक्ष महोदय, जो वर्तमान में शासन की नीति है उसके तहत अलग से कन्या विद्यालय खोलने का अभी प्रावधान नहीं है. माननीय विधायक ने एक अलग भवन में छात्राओं को बैठाने की व्यवस्था के लिए कहा है, वह हम कर देंगे.

 

 

 

          प्रश्न संख्या 19 (अनुपस्थित)

 

 

 

पिछड़ा वर्ग के छात्रावासों की स्‍वीकृति

20. ( *क्र. 2887 ) श्री बहादुर सिंह चौहान : क्या श्रम मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) महिदपुर वि.स. क्षेत्र में कितने श्रम विद्यालय संचालित हैं? यदि नहीं हैं तो कब तक प्रारंभ किये जाएंगे? (ख) महिदपुर वि.स. क्षेत्र में पिछड़ा वर्ग छात्रावास कब तक स्‍वीकृत कर दिया जाएगा? (ग) उज्‍जैन जिले में कितने श्रम विद्यालय एवं पिछड़ा वर्ग छात्रावास संचालित हो रहे हैं? विधानसभा क्षेत्रवार बतावें।

श्रम मंत्री ( श्री अंतरसिंह आर्य ) : (क) महिदपुर विधानसभा क्षेत्र में राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना अंतर्गत वर्तमान में कोई विद्यालय संचालित नहीं है। उज्जैन जिले में राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना का प्रस्ताव भारत शासन को भेजा गया है। भारत शासन से स्वीकृति प्राप्त होने तथा सर्वेक्षण में बाल श्रमिक पाये जाने पर आगामी कार्यवाही की जावेगी। (ख) शासन स्तर से कार्यवाही अपेक्षित। (ग) श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा उज्जैन जिले के लिए संचालित राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना अंतर्गत उज्जैन उत्तर/दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में 32 तथा नागदा विधानसभा क्षेत्र में 6 बाल श्रमिक विद्यालय संचालित थे। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार जून, 2014 में सभी बच्चों को मुख्य धारा के विद्यालयों में प्रवेशित कराया जा चुका है। अतः वर्तमान में बाल श्रमिक विद्यालय संचालित नहीं हो रहे हैं। उज्जैन जिले के उज्जैन दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा दो छात्रावास संचालित हैं। अन्य किसी भी विधानसभा क्षेत्र में पिछड़ा वर्ग छात्रावास संचालित नहीं हैं।

          श्री बहादुर सिंह चौहान--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा बीसवां प्रश्न चर्चा में आ गया उसके लिए धन्यवाद देना चाहता हूं. मंत्री जी के उत्तर से मैं संतुष्ट हूं. माननीय अध्य़क्ष महोदय, पिछड़ा वर्ग के जो हास्टल हैं पूरे मध्यप्रदेश में जिला स्तर पर ही खोले जाते हैं , यह एक पालिसी मैटर है. मंत्री जी ने जो प्रश्नांश (ख) में उत्तर दिया है कि यह शासन स्तर पर अपेक्षित है तो इसमें मैं आपके माध्यम से पूछना चाहता हूं कि मेरे विधानसभा क्षेत्र कस्बा झालड़ा में क्या माननीय मंत्री जी पिछड़े वर्ग का हॉस्टल खोलेंगे.

          श्री अंतरसिंह आर्य---  माननीय अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश में सभी जिलों के अंदर पिछड़ा वर्ग विभाग द्वारा 100 सीटर बालक छात्रावास, 50  सीटर कन्या पोस्ट मैट्रिक छात्रावास संचालित हैं और आने वाले समय में शासन इस ओर विचार कर रहा है कि ब्लाक स्तर पर भी इस प्रकार के छात्रावास खोले जाएं. यदि इस प्रकार का अगर आने वाले समय में निर्णय होगा तो माननीय सदस्य के विधानसभा क्षेत्र की जो छात्रावास की मांग है , उसको हम सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे.

          श्री बहादुर सिंह चौहान--- धन्यवाद.

 

आरक्षित वर्ग के हितग्राहियों को विद्युत कनेक्‍शन

21. ( *क्र. 209 ) श्री कैलाश चावला : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2014-15 में जिला संयोजक, आदिम जाति कल्‍याण विभाग जिला नीमच को अनुसूचित जन जाति व अनुसूचित जाति के कितने हितग्राहियों द्वारा विद्युत पम्‍प ऊर्जीकरण हेतु प्रार्थना पत्र प्राप्‍त हुए? (ख) उक्‍त प्रस्‍ताव में से दिनांक 31.12.2015 तक कितने प्रस्‍ताव जिला संयोजक आदिम जाति कल्‍याण विभाग द्वारा आयुक्‍त के माध्‍यम से प्रेषित किए गए? (ग) प्रश्‍न दिनांक तक कितने आवेदन को स्‍वीकृत कर राशि का आवंटन कर दिया गया है एवं हितग्राहियों को विद्युत कनेक्‍शन प्राप्‍त हो चुके हैं?

आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) :

          श्री कैलाश चावला--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न के उत्तर में यह बताया गया है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के 254 कनेक्शनधारियों के आवेदन पर 184 स्वीकृत किए गए पर 70 अभी तक स्वीकृत नहीं हो पाए हैं. मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूँ कि जो 70 कनेक्शनधारी हैं, क्या इनका आवंटन मार्च महीने में कर दिया जाएगा?

            श्री ज्ञान सिंह--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से सम्माननीय को अवगत कराना चाहूँगा कि मार्च के पहले जो लंबित हैं, उनके लिए राशि जारी हो जाएगी.

          श्री कैलाश चावला--  अध्यक्ष महोदय, जो पहले राशि जारी की गई है वह किस दिनाँक को की गई है, क्या इसकी जानकारी दे सकेंगे?

            श्री ज्ञान सिंह--  अध्यक्ष महोदय, वर्ष 2012-13 में राशि 9 लाख 72 हजार, वर्ष 2013-14 में रुपये 55026 लाख, वर्ष 2014-15 में रुपये 55250 लाख आवंटन हुआ.

          श्री कैलाश चावला--  अध्यक्ष महोदय, सवाल इतना है कि वर्ष 2014-15 में जो राशि आपने स्वीकृत की है, उसकी तारीखें क्या हैं?

          अध्यक्ष महोदय--  सिर्फ 2014-15 की बता दीजिए.

          श्री ज्ञान सिंह--  अध्यक्ष महोदय, अभी तो उपलब्ध नहीं है.

          अध्यक्ष महोदय--  बाद में उपलब्ध करा देंगे.

प्रश्न संख्या--  22 (अनुपस्थित)

ग्‍वालियर जिलांतर्गत स्‍कूलों का उन्‍नयन

23. ( *क्र. 24 ) श्री भारत सिंह कुशवाह : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2014 एवं 2015 में जिला ग्‍वालियर के कौन-कौन से शासकीय प्राथमिक विद्यालय/माध्‍यमिक विद्यालय/शासकीय हाईस्‍कूल/शासकीय हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल में उन्‍नयन किये गये? (ख) शासन स्‍तर पर विधानसभा क्षेत्र ग्‍वालियर ग्रामीण के कितने विद्यालयों के प्रस्‍ताव उन्‍नयन हेतु शासन स्‍तर पर लंबित हैं? सूची उपलब्‍ध कराई जाये। (ग) विधानसभा क्षेत्र के लंबित प्रस्‍तावों में से कितने प्रस्‍ताव उन्‍नयन की श्रेणी में आते हैं तथा कितने प्रस्‍ताव उन्‍नयन की श्रेणी में नहीं आते हैं? कारण सहित सूची उपलब्‍ध कराई जाये। (घ) शासन स्‍तर पर लंबित उन्‍नयन के प्रस्‍तावों को कब तक स्‍वीकृत किया जाकर अमल में लाया जावेगा? समय-सीमा बतायें।

स्कूल शिक्षा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) प्राथमिक विद्यालय से माध्यमिक विद्यालय में उन्नयन की जानकारी निरंक है। शासकीय माध्यमिक शाला मोतीझील, सेवन्त बटालियन को हाईस्कूल तथा शासकीय हाईस्कूल सुकलहारी को हायर सेकेण्डरी में उन्नयन किया गया है। (ख) वर्ष 2015-16 हेतु उन्नयन हेतु कोई शाला निर्धारित मापदण्ड अनुसार पात्र नहीं है। शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) एवं (घ) उत्तरांश ‘’ के प्रकाश में प्रश्न उपस्थित नहीं होता। 

          श्री भारत सिंह कुशवाह--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने यह प्रश्न किया था कि ग्वालियर जिले में इस बार कितने स्कूलों का उन्नयन किया गया है? इसके जवाब से मैं संतुष्ट हूँ. प्रश्नांश ख में मेरा माननीय मंत्री जी से यह अनुरोध है कि ग्वालियर जिले में तो आपने उन्नयन किए हैं. मेरी विधान सभा क्रमांक 14 ग्वालियर ग्रामीण में एक भी स्कूल का उन्नयन नहीं किया गया है, तो अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहूँगा कि मेरे विधान सभा क्षेत्र क्रमांक 14 ग्वालियर ग्रामीण, पूरा ग्रामीण क्षेत्र है और वहाँ के कई स्कूल ऐसे हैं कि उनका उन्नयन होना बहुत आवश्यक है. कई बच्चों को बहुत दूर दूर तक जाना पड़ता है तो मैंने कुछ प्रस्ताव दिए हैं, जो मेरे क्षेत्र के हैं, वह 10 स्कूलों के उन्नयन के लिए दिए हैं. मैं माननीय मंत्री जी से यह अनुरोध करना चाहूँगा कि मेरी विधान सभा के जो स्कूल उन्नयन हेतु प्रस्तावित किए हैं, वे कब तक किए जाएँगे?

          राज्य मंत्री, स्कूल शिक्षा (श्री दीपक जोशी)--   माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य के विधान सभा क्षेत्र 14 ग्वालियर ग्रामीण में आर एम एस ए के तहत ग्वालियर जिले में कुल 6 माध्यमिक शालाओं का हाई स्कूल में उन्नयन किया जाना है. उनमें से 3 माननीय विधायक जी के क्षेत्र में हैं.

          श्री भारत सिंह कुशवाह--  माननीय मंत्री जी, बहुत बहुत धन्यवाद.

 

जैन इरिगेशन जलगांव द्वारा अमानक पॉलीहाउस का निर्माण

24. ( *क्र. 3319 ) श्री बाला बच्‍चन : क्या पशुपालन मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या रतलाम में महिला कृषक श्रीमती रामकन्‍याबाई शर्मा ने अपने खेत पर निर्मित 2016 वर्ग मीटर के पॉलीहाउस में फरवरी, 2015 में पहली फसल रंगीन शिमला मिर्च (कलर केपीकम) लगाई थी? (ख) क्‍या जैन इरिगेशन जलगांव द्वारा गलत फाउन्‍डेशन पर घटिया सामग्री का पॉलीहाउस बनाने से निर्माण के छ: माह बाद मामूली बरसात में 19 जून, 2015 को फिल्‍म फट गई, जिससे पॉलीहाउस में दो-दो फीट पानी भर गया तथा रंगीन शिमला मिर्च की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई एवं यदि फसल बर्बाद नहीं होती तो 25 से 30 टन उत्‍पादन होता तथा औसत 100 रूपये प्रति किलो के मान से 25 से 30 लाख रूपये प्राप्‍त होते? (ग) क्‍या महिला कृषक की शिकायत पर जाँच समिति ने अपने प्रतिवेदन दिनांक 18.08.15 में बताया कि कंपनी की खराब कार्य कुशलता फिल्‍म को उचित रूप से फिट न करना, गटर की 2 शीट जोड़कर बनाना, फिल्‍म को स्प्रिंग से फिट न करना, आदि के कारण पॉलीहाउस में पानी का रिसाव हुआ है?    (घ) यदि (क) से (ग) हाँ तो क्‍या शासन महिला कृषक को हुये नुकसान का मुआवजा दिलायेगा, सही फाउन्‍डेशन का नया पॉलीहाउस का निर्माण करावायेगा तथा जैन इरीगेशन पर कानूनी कार्यवाही करेगा?

 

पशुपालन मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) पॉलीहाऊस में कृषकों द्वारा उगाई गई फसलों की जानकारी का संधारण विभाग द्वारा नहीं किया जाता है।           (ख) पॉलीहाऊस का निर्माण कृषक द्वारा स्वयं कंपनी का चयन कर हस्ताक्षरित अनुबंध अनुसार कराया गया है। शेष के संन्दर्भ में विभाग जानकारी संधारित नहीं करता है। (ग) जी हाँ। कंपनी द्वारा अपने व्यय पर समस्त सुधार कार्य किया गया है, जिसकी पुष्टि विभागीय अधिकारी से कराई गई है। (घ) कंपनी द्वारा सुधार उपरांत पॉली हाऊस मापदण्ड अनुसार है। फसल नुकसान यदि कोई हुआ हो, तो कृषक सक्षम न्यायालय में वाद प्रस्तुत कर सकता है।

          श्री बाला बच्चन--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने प्रश्न इसलिए पूछा है कि जैन इरीगेशन ने श्रीमती रामकन्या शर्मा जी के यहाँ जो काम किया है वह ठीक क्वालिटी का नहीं है और न ही ठीक ढंग से हुआ है. उससे उनका जो नुकसान हुआ है. मैं माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूँ कि जो नुकसान जिस कंपनी के द्वारा हुआ है, उस कंपनी पर कब तक कार्यवाही कर ली जाएगी और उस कंपनी ने श्रीमती रामकन्या शर्मा जी का जो नुकसान किया है, उन्हें सरकार उस कंपनी से मुआवजा कब तक उपलब्ध कराएगी?

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले--  माननीय अध्यक्ष महोदय, पॉली हाउस के निर्माण का जो कार्य होता है, वह पूरी तरह से कृषक के ऊपर होता है कि वह किस कंपनी का चुनाव करे और श्रीमती सुकन्या बाई जी ने अपनी मर्जी से जैन इरीगेशन का चुनाव किया था. तब उन्होंने पॉली हाउस बनाया इसलिए विभाग की और सरकार की यह कोई जिम्मेदारी नहीं बनती कि हम उन्हें नुकसानी दें. नुकसानी के लिए आप चाहें तो न्यायालय में जा सकते हैं या एफ आई आर दर्ज करवा सकते हैं.

            श्री बाला बच्चन--सरकार की यदि कोई जिम्मेदारी नहीं बनती है तो सरकार के दायरे में क्या आता है जो आता है वही व्यवस्था कर दें. आपके प्रति और सरकार के प्रति प्रदेश की जनता का विश्वास कैसे बना रहेगा ?

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले--आप कृपा करके बैठ जायेंगे तब तो मैं जवाब दूंगी.

          श्री बाला बच्चन-- मुझे मेरा प्रश्न कर लेने दीजिये तब तो मैं बैठूंगा. जिस पाइंट ऑफ व्यू से प्रश्न लगाया गया है. सरकार के मापदण्डों के अन्तर्गत वह कंपनी आती है या नहीं आती है. मंत्रीजी एक लाइन के जवाब से बचना चाह रही हैं, सरकार को कंपनी से बिलकुल अलग कर देना चाहती हैं, सरकार कुछ तो उसको मुआवजा दे, सरकार की मॉनिटरिंग, सरकार की जिम्मेदारी क्या बच जाती है.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले--सरकार की और विभाग की जिम्मेदारी यह होती है कि किसान को अनुदान दे और हमने अनुदान दिया है और कृषक की जिम्मेदारी यह  है कि जो रजिस्टर्ड कंपनियां होती हैं उनका वह चुनाव करे और पॉली हाउस बनवाये. यदि कोई शिकायत होती है तो हम उसकी जांच करवाते हैं और जांच करवाने के बाद जैन इरिगेशन ने पॉली हाउस में सुधार करवा दिया अब कृषक की जिम्मेदारी बनती है कि यदि कोई नुकसान हुआ है तो वह एफआईआर करा सकते हैं न्यायालय में जा सकते हैं. सरकार की जिम्मेदारी थी अनुदान देना और जांच करवाना वह हमने करवा दी है.

          श्री बाला बच्चन--अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्रीजी ने बताया है कि पॉली हाउस में सुधार करवा दिया गया है जबकि सुधार नहीं किया गया है. मैं चाहता हूँ कि क्या पॉली हाउस में सुधार करके रामकन्या जी को राहत दी जायेगी.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले--यदि रामकन्या जी दोबारा हमसे शिकायत करेंगी कि पॉली हाउस नहीं सुधरा है तो हम जांच करवाकर जैन इरिगेशन कंपनी को कहेंगे कि वह सुधार करवाये और वह सुधार करवायेंगे.

          वन मंत्री (डॉ. गौरीशंकर शेजवार)--माननीय अध्यक्ष महोदय, दोनों तरफ से बराबर प्रश्न उत्तर हो रहे हैं लेकिन किसी एक व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए विधान सभा में प्रश्न रखे जायेंगे ? क्या नाम से प्रश्न रखे जायेंगे ? प्रश्न उठाने के लिए क्या नियम हैं इन सबकी भी कभी हम चिन्ता करें तो बहुत अच्छा लगेगा.

          श्री बाला बच्चन--अध्यक्ष महोदय, मुझे समय देंगे तो माननीय मंत्रीजी ने जो मुझे कोट किया है इस पर भी मैं माननीय मंत्रीजी को जवाब दे सकता हूँ. अगर कोई हितग्राही प्रभावित हुआ है तो उसके बारे में हाउस में बात क्यों नहीं उठायी जा सकती है.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने आपके माध्यम से सही जवाब दिया है.

          इंदौर जिले के महाविद्यालयों में छात्रवृत्ति वितरण

25. ( *क्र. 805 ) चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) इंदौर जिले में निजी इंजीनियरिंग/नर्सिंग/एम.बी.ए./ सभी विषयों के ग्रेजुएट एवं पोस्‍ट ग्रेजुएट कॉलेजों के द्वारा 01.04.2013 से प्रश्‍न तिथि तक किस-किस नाम/पते वाले छात्रों एवं छात्राओं को कितनी-कितनी छात्रवृत्ति      किस-किस प्रकार की कब-कब दी? (ख) क्‍या छात्रों को छात्रवृत्ति की राशि उनके बैंकों के एकाउन्‍ट में शासन द्वारा दी? क्‍या कॉलेजों के एकाउन्‍ट में छात्रवृत्ति की राशि शासन द्वारा दी गयी? (ग) छात्रवृत्ति देने के राज्‍य शासन के क्‍या नियम हैं? नियमों की एक प्रति उपलब्‍ध कराते हुये बतायें कि क्‍या छात्रवृत्ति शासन कॉलेजों के एकाउण्‍ट में नियमानुसार दे सकता है? अगर नहीं तो किस नाम/पदनाम के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की जायेगी? (घ) कितनी-कितनी राशि शासन द्वारा वित्‍तीय वर्ष 13-14, 14-15, 15-30 जनवरी 2016 तक में प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित कॉलेजों के छात्रों को दी गयी? राशिवार/ छात्रसंख्‍यावार/कालेजवार/वर्षवार/माहवार जानकारी दें।

आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) : (क) इंदौर जिले में प्रश्नांश में दर्शाये पाठ्यक्रमों में कालेजों के द्वारा दिनांक 01/04/2013 से प्रश्न तिथि तक अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्र/छात्राओं को छात्रवृत्ति राशि वितरित की गई।

 

क्र.

वर्ष

छात्र संख्‍या

राशि लाख में

1.

2013-14

4423

1203.12

2.

2014-15

3783

1084.20

3.

2015-16

591

193.08


 

वर्ष 2015-16 का वितरण प्रक्रियाधीन है। विद्यार्थीवार राशि की सूची पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ‘‘ अनुसार है। (ख) शासन आदेशानुसार वर्ष 2013-14 में दिनांक 09/12/2013 के पूर्व विद्यार्थियों के खाते में जीवन निर्वाह भत्ता एवं संस्था के शिक्षण शुल्क का भुगतान किया गया। वर्ष 2013-14 में 09/12/2013 के पश्चात संपूर्ण स्वीकृत राशि (निर्वाह भत्ता एवं शिक्षण शुल्क सहित) का भुगतान विद्यार्थियों के बैंक खातों में किया गया। (ग) आदिम जाति कल्याण विभाग का पत्र क्रमांक एफ-12-2/99/25-2/935 दिनांक 07/07/2014 की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ‘‘ अनुसार है। छात्रवृत्ति का भुगतान शासन नियमानुसार किया गया है। अतः किसी नाम /पदनाम के विरूद्ध कार्यवाही का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ‘‘ अनुसार है।

          चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न के उत्तर में विभाग ने जो जानकारी दी है उसमें परिशिष्ट-स में लिखा है कि "उस आदेशानुसार कार्यवाही की गई है." मैं मंत्रीजी से पूछना चाहता हूँ कि माननीय उच्च न्यायालय के बाद विभाग ने आदेश किया और उसके उपरान्त जो गणना विभाग ने दी है उसमें 2013-14 में 4423 छात्र, 2014-15 में 3783 छात्र और 2015-16 में मात्र 591 छात्र. मेरा प्रश्न है कि कहीं न कहीं जो लोग छात्रवृत्ति में गड़बड़ कर रहे थे. उच्च न्यायालय के निर्णय के उपरांत शासन का जो आदेश हुआ तब जाकर छात्रों की संख्या कम हुई है इसका मतलब कोई न कोई गलती कर रहा था. क्या माननीय मंत्री महोदय उसकी जांच करायेंगे और संबंधितों को सजा दिलवायेंगे.

          श्री ज्ञान सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदयजी इस तरह की अधिकांश घटनायें निजी विद्यालयों के संचालकों के द्वारा प्रदेश के छात्र-छात्राओं के साथ अनियमितताएं की गई हैं. विभाग को जैसे ही जानकारी मिली प्रथम दृष्टया जांच के आदेश दिये गये जांच में सारी बातें सामने आईं. न्यायालयीन प्रक्रिया चल ही रही है. मैं आपको बताना चाहूंगा कि ऐसे फर्जी संस्थान जिनका कागज पर रिकार्ड था जो कागज पर रिकार्ड था और संस्‍था का संचालन हुआ ही नहीं और फर्जी नाम छात्रों के दर्शाकर लाखों करोड़ों रूपये की जो गड़बडि़या हुई थी ऐसी संस्‍थाओं के खिलाफ विभाग के द्वारा कड़ाई से कार्यवाही की जाकर के इसमें मैं संस्‍था का नाम नहीं बताना चाहूंगा. उस संस्‍था के नौ कर्मचारी और संस्‍था संचालक के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध हुए और उनके खिलाफ कार्यवाही हुई और यहां तक कि उस भ्रष्‍टाचार में हमारे विभाग का भी एक कर्मचारी लिप्‍त था उसके खिलाफ भी अपराध पंजीबद्ध हुए हैं. यह मैं आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍य को यह बात बताना चाहूंगा. 

          श्री मुकेश सिंह चतुर्वेदी :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा अनुरोध यह है कि 2009 से लेकर 2014 तक की जांच किसी पांच सदस्‍यीय समिति से करायी जाए. ऐसा आश्‍वासन माननीय मंत्री महोदय दें.  क्‍योंकि अपने जवाब में माननीय मंत्री जी ने यह कहा है कि किसी को उसमें जिम्‍मेदार नहीं माना है.अध्‍यक्ष महोदय, आपकी तरफ से कुछ तो संरक्षण मिले.

          अध्‍यक्ष महोदय :- प्रश्‍न काल समाप्‍त.

 

 

 

 

 

(प्रश्‍नकाल समाप्‍त)

 

 

 

 

 

 

                   श्री रामनिवास रावत:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सदन का सम्‍माननीय विधायक श्री हरदीप सिंह डंग बाहर उसकी बात नहीं सुनी गयी उसके क्षेत्र में सूखा पड़ा हुआ है. प्रशासनिक अधिकारियों ने शासन को प्रस्‍ताव भी भेजा है उसे स्‍वीकृत नहीं किया गया है उसको लेकर सदन के बाहर गांधी जी की मूर्ति के सामने धरना देकर धरना देकर बैठा हुआ है. यह चिन्‍तनीय है शासन की तरफ से उसकी सुनवाई हो और माननीय मंत्री जी आश्‍वासन दे दें. उन्‍हें वहां से उठा ले तो बड़ी कृपा होगी, सदन चल रहा है. यह काफी चिन्‍ता का विषय है. आपका संरक्षण सदन के सदस्‍यों को चाहिये. हम उम्‍मीद करते है कि आपका पूरा संरक्षण मिलेगा और इस पर निर्देशित करेंगे.

          (संसदीय कार्य मंत्री) डॉ नरोत्‍तम मिश्र:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सम्‍माननीय सदस्‍य की अगर कोई बात है और पीड़ा है, महामहिम के अभिभाषण पर चर्चा चल रही है, बजट पर चर्चा चल रही है. उनको विषय यहां पर रखना चाहिये. सदन के चलते मुझे धरने औचित्‍य का समझ में नहीं आता है. फिर भी माननीय सदस्‍य कहेंगे तो हम जायेंगे, उनसे निवेदन करेंगे और उन्‍हें सदन में लायेंगे. अगर उनकी कोई बात है तो उनसे बात कर लेंगे.

          श्री रामनिवास रावत:- आप चले जायें और बात कर लें, यही चर्चा स्‍वीकार कर लें. आप उनको आश्‍वासन दे दें कि इस पर चर्चा करा लेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय:- चर्चा स्‍वीकार करने की बात अभी नहीं है. परन्‍तु आप उनसे बात कर लें कि वह क्‍या चाहते हैं.

          डॉ नरोत्‍तम मिश्र :- अध्‍यक्ष महोदय, जरूर.

          डॉ. गौरीशंकर शेजवार :- अध्‍यक्ष महोदय यह तो आपकी तरफ से स्‍थायी आदेश हो गये की जिस विधायक की कोई समस्‍या है तो वह गांधी जी के यहां पर बैठ जाये और आप संसदीय कार्य मंत्री जी से कहें कि आप जाकर उठायें. अध्‍यक्ष महोदय, यह बात कुछ बन नहीं रही है.

          अध्‍यक्ष महोदय  :- यह तात्‍कालिक है, परिस्थिति के अनुसार.

 

 

 

 

 

 

 

 

नियम 267 -क के अधीन विषय

          अध्‍यक्ष महोदय:- निम्‍न माननीय सदस्‍यों की सूचनाएं सदन में पढ़ी हुई मानी जायेंगी.

          1.       श्री जालम सिंह पटेल

          2.       श्री सुदर्शन गुप्‍ता (आर्य)

          3.       श्री यशपाल सिंह सिसोदिया    

          4.       डॉ. गोविन्‍द सिंह

          5.       श्री नीटू सत्‍यपाल सिंह सिकरवार

          6.       श्री दिलीप सिंह शेखावत

          7.       श्री आर.डी. प्रजापति  

          8.       श्री आशीष शर्मा

          9.       श्री रामनिवास रावत

          10.     श्री शैलेन्‍द्र पटेल

पत्रों का पटल पर रखा जाना

मध्‍यप्रदेश राजकोषीय उत्‍तर दायित्‍व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम , 2005 यथा अपेक्षित विवरण वर्ष 2016-2017

 

 

 

 

 

 

 

 

 मध्‍यप्रदेश पाठ्य पुस्‍तक निगम का वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखे वर्ष 2014-2015

 

 

 


                  

 

 

 

 

 

मध्‍यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लि., भोपाल का वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखे वर्ष 2014-2015

 

 

 

 

 

 

मध्‍यप्रदेश राज्‍य पर्यटन विकास निगम मर्यादित का 35वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2012-2013

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

(समय-11.35 बजे)                 ध्यान आकर्षण

 

(1)   श्योपुर एवं मुरैना जिले में अनुबंध के अनुसार सिंचाई हेतु पानी न मिलने से

उत्पन्न स्थिति

 

          सर्वश्री रामनिवास रावत(विजयपुर),दु्र्गालाल विजय,मेहरबान सिंह रावत - अध्यक्ष महोदय, मेरी ध्यानाकर्षण सूचना का विषय इस प्रकार है:-

 

 

 

 

 

जल संसाधन मंत्री(श्री जयंत मलैया) - माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

                                                                                           

 

 

 

          श्री रामनिवास रावत--माननीय अध्यक्ष महोदय, सरकार सदैव अधिकारियों एवं कर्मचारियों का बचाव करती है उसमें कोई गलत बात नहीं है. अगर आप पूरी स्थिति की तरफ जाएंगे आपके प्रश्न की तरफ जाऊंगा कि श्योपुर को कितना पानी मिला, श्योपुर को कितने पानी की आवश्यकता है, श्योपुर का डिजाईन कितने क्यूसिक का है, उसमें आपने कितना दिया तो मैं समझता हूं कि यह प्रश्न बहुत लंबा हो जाएगा. मैं केवल एक प्रश्न करना चाहता हूं कि किसानों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किये, ठीक है आपने कर दिये हैं, आपने उसको स्वीकार किया है. आपने कहा कि नहरों को क्षति पहुंचाने की बात कही. एक मैंने कहा था 24-25,26,27,28 एल, तथा 29 एल, जिन गांवों का मैंने उल्लेख किया है जहां पर पानी नहीं पहुंचा है, वहां की फसल सूख रही है, वहां पर माननीय मंत्री जी चलें अथवा अपना कोई दल भेज दें, या अपने अधिकारियों को भेज दें. वहां पर अगर फसल नहीं सूख रही होगी अथवा फसल हरी-भरी होगी, फसल को पानी की आवश्यकता नहीं होगी तो मैं विधान सभा से इस्तीफा देकर के घर पर बैठ जाऊंगा या आप जो कहेंगे वह करने को तैयार हो जाऊंगा. कम से कम विपक्ष का विधायक कोई मुद्दा उठाता है तो आप अपने अधिकारियों को कहें कि यह दिखवा लें इन इन गांवों में क्या स्थिति है. आपके पास सरकार का जवाब आया आपने उसी तरह से बोल दिया और दूसरी बात किसानों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने की बात की है. किसानों ने एक नई पाई की क्षति नहरो को पहुंचाई हो तो रामनिवास रावत आज के बाद विधान सभा में नहीं आयेगा, आपने उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर दिये कि नहरों को क्षति पहुंचाने के नाम पर आप इन दो प्रश्नों का उत्तर दे दें.

          श्री जयंत मलैया--माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसे कि मैंने अपने उत्तर में बताया कि 26 एवं 28 फरवरी, 2016 को हमने अपने अधीक्षण यंत्री को भेजा था वह 24 एल से लेकर के 28 एल तक सब नहरों तथा वितरकाओं को देखकर के आये हैं नहरों का लगातार पानी बह रहा है, फसलें ठीक हैं. जहां तक आपराधिक प्रकरण के मामले दर्ज किये गये हैं वह उन लोगों के खिलाफ दर्ज किये गये हैं जिन्होंने छेड़छाड़ की है.

          श्री रामनिवास रावत--माननीय अध्यक्ष महोदय, आज भी अभी मैंने पांच मिनट पहले ही फोन किया है वहां की स्थिति यह है कि 24 एवं 25, 28 तथा 29 एल बंद है, 26- 27 एल आज ही खोली है.

          माननीय मंत्री महोदय, प्रशासनिक अधिकारियों और प्रशासन के प्रति मेरा रोष नहीं है और न ही सरकार के प्रति कोई रोष है । मैं सिर्फ यह चाहता हूँ कि मैंने जो गांव बताए हैं, वहां पर अधिकारियों को भेजकर पानी दिलवा दें, किसानों के खेतों में पानी दिलवा दें मुझे और कोई शिकायत नहीं है । इन नहरों को खुलवाएं अपर हेड पोर्सन पर लोग पानी ले लेते हैं, अपने अधिकारियों को खड़ा करें, बंद करें वहां 5-5 पानी लग गए और नीचे एक पानी लगा है । आप इस तरह की व्‍यवस्‍था बनाकर नीचे तक पानी पहुंचवा दें मुझे कोई आपत्ति नहीं है,कोई शिकायत नहीं है ।

          वित्‍तमंत्री(श्री जयंत मलैया)-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि मैंने पूर्व में भी निवेदन किया है कि 28 फरवरी को हमारे अधीक्षण यंत्री देखकर आए हैं, जैसा आपने कहा है एक बार पुन: अधिकारियों को भेजकर दिखवा लूँगा ।

          श्री रामनिवास रावत-  इन गांवों में दिखवा लें ।  आप अपनी नाकामी छुपाने के लिए राजस्‍थान से पानी नहीं ले पा रहे हैं । अपनी अकर्मण्‍ता छुपाने के लिए किसानों को  परेशान कर रहे हैं, यह आपत्ति जनक है ।

          श्री जयंत मलैया-  मैं आपको बताना नहीं चाहता, आपकी सरकार जब थी तब आप राजस्‍थान से कितना पानी लेते थे और हम कितना ले रहे हैं । 

          श्री रामनिवास रावत- 3400-3500 तक पानी लिया था, आप अन्‍याय कर रहे हैं । (व्‍यवधान)

          श्री जयंत मलैया-  जहां तक राजस्‍थान का सवाल है, इंदिरा सागर सेट प्रोजेक्‍ट है । गांधी सागर से पानी राघव सागर जाता है और राघव सागर से जवाहर सागर में जाता है और वहां से होते हुए चम्‍बल में जाता है । तीन तालाब हैं और तीनों तालाबों से होते हुए जाता है । जब पानी ज‍मा रहता है तो खर- पतवार साफ नहीं की जा सकती, वहां से 120 किलोमीटर राजस्‍थान है और वहां से हम चालू होते हैं, उनको भी 30-35 प्रतिशत नुकसान हो रहा है और हमको भी हो रहा है ।  जब पानी बंद होगा तो राजस्‍थान की सरकार का विभाग और हमारी सरकार का विभाग खर-पतवार की सफाई करेगा ।

          श्री रामनिवास रावत-  आपके अधिकारी महसूस कर रहे हैं आप महसूस नहीं कर रहे हैं  । मेरा निवेदन है कि जिन गांवों में पानी नहीं है, उन गांवों की खेती सूख रही है, आप अधिकारी भिजवा दें, मेरा इतना सा प्रश्‍न है ।

          श्री जयंत मलैया-  ठीक है, हम दिखवा लेते हैं ।

          श्री दुर्गालाल विजय(श्‍योपुर)-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधानसभा क्षेत्र श्‍योपुर में नहर का पानी एक महीने बाद दिया । बताया गया था कि एक महीना पानी भिण्‍ड में चलेगा, श्‍योपुर के लोगों ने स्‍वीकार भी कर लिया, लेकिन जब 14.11 से नहर प्रारंभ हुई है, तब से श्‍योपुर विधानसभा क्षेत्र को जहां 1100 क्‍यूसिक पानी मिलना चाहिए था, वहां पर 600 और 700 क्‍यूसिक पानी उपलब्‍ध हो रहा है । माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसके कारण से टेल पोर्सन पर पानी नहीं पहुंच पा रहा है बहुत सारे ऐसे गांव हैं जिन्‍होंने गेहूं की फसल की है लेकिन पहला पानी नही लगा और जिनको पहला पानी लगा उनको दूसरा पानी नहीं लग पा रहा है। आज भी     1 एल. से लेकर के 11 एल. तक की पूरी डिस्‍ट्रीब्‍यूटरी बंद है और 12, 16, 18 एल. चालू है बाकी 1 एल. से लेकर के 22 एल तक की पूरी डिस्‍ट्रीब्‍यूटरी बंद हैं । इसके कारण से गेहूं की फसल सूख रही है ।

          अध्‍यक्ष महोदय-  सीधा प्रश्‍न करें ।

          श्री दुर्गालाल विजय-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रश्‍न कर रहा हूँ एक बात और कहना चाहता हूँ पहले ओले पड़े फिर सूखा पड़ा ।

अध्‍यक्ष महोदय-  आप सीधा प्रश्‍न कर दें जो होना था, वह हो गया ।

श्री दुर्गालाल विजय-  जी, अध्‍यक्ष महोदय, उसके बाद जो हमारे हाथ में था वह भी नहीं हुआ और एक बीघा में सरसों की बोनी चंबल नहर से नहीं हो पाई । माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  अब मैं प्रश्‍न यह पूछ रहा हूँ कि अभी क्‍या श्‍योपुर क्षेत्र की सभी डिस्‍ट्रीब्‍यूटरी 1 एल से लेकर 22 एल तक, क्‍या आज चालू कर दी जायेंगी ? और किसानों को जिनके गेहूँ सूख रहे हैं, उनको पानी मिल जायेगा और खासकर के टेल पोर्शन पर. टेल पोर्शन पर अभी भी किसान परेशान है.

          अध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी.

          श्री जयन्‍त मलैया - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज से 2 दिन पहले माननीय विधायक जी ने, माननीय मुख्‍यमंत्री जी जब वहां पर प्रवास पर थे, तो उनसे इस बारे में चर्चा की थी. उसके बाद जब जानकारी हमारे पास आई तो तत्‍काल ही, हमने अधिकारी वहां पर भेजा और श्‍योपुर जिले की जिस वितरिकाओं की बात माननीय विधायक जी ने की है. वहां जाकर वे देखकर आ रहे हैं और वहां पर जल प्रवाहित हो रहा है. उसमें कोई ऐसी फसल सूखने की बात नहीं परन्‍तु फिर भी माननीय विधायक जी ने कहा है. मैं अधिकारियों को भेजकर दिखवा लूँगा.

          अध्‍यक्ष महोदय - श्री मेहरबान सिंह रावत. बस एक-एक प्रश्‍न. (व्‍यवधान)  श्री मेहरबान सिंह रावत जी का ही लिखा जायेगा.

          श्री बलबीर सिंह डण्‍डौतिया - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नहरें बन्‍द कर दी गई हैं. पानी नहीं आ रहा है. दो-दो पानी लग गए हैं, अभी दो पानी और लगना हैं. यदि पानी नहीं दिया गया तो सारी फसलें सूख जायेंगी. (व्‍यवधान)

          अध्‍यक्ष महोदय - श्री मेहरबान सिंह रावत जी का ही लिखा जायेगा.

          श्री मेहरबान सिंह रावत (सबलगढ़) - मेरे विधानसभा क्षेत्र की भी यही स्थिति है कि एल पोरशन पर पानी मिल रहा है और मेरे यहां 33 एल सबसे बड़ी शाखा है. जिसमें 5 - 6,000 हैक्‍टेयर जमीन आती है. चार दिन के लिये चलाई जाती है, 15 दिन के लिए बन्‍द रखी जाती है.

          अध्‍यक्ष महोदय - आप सीधे प्रश्‍न पूछ लें.

          श्री मेहरबान सिंह रावत - मैं यह चाह रहा हूँ कि एल पोरशन पर पानी और 32 एवं 33 एल पर पानी कब तक छोड़ा जायेगा.

          अध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी, रावत जी आपका बता दिया है कि वहां अधिकारी भेजेंगे.

          श्री जयन्‍त मलैया - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने निवेदन किया है कि एक बार में एक विधायक महोदय बोलेंगे तो मुझे उत्‍तर देने में आसानी होगी.

          श्रीमती इमरती देवी -  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दतिया जिले में पूरी नहर सूख गई है एवं बन्‍द है.

          अध्‍यक्ष महोदय - मंत्री जी का उत्‍तर आने दीजिये. कृपया बैठ जाइये.

          श्री जयन्‍त मलैया - अध्‍यक्ष महोदय, जैसे मैंने अपने उत्‍तर में ही बताया था. बारहबंदी से रोस्‍टर के अनुसार, नहर चलाने की हम कार्यवाही कर रहे हैं. और टैल में भी निरीक्षण किया गया है परन्‍तु जैसे माननीय तीनों विधायकों ने यहां पर जिक्र किया है. मैं फिर से अधिकारियों को भिजवाकर दिखवा लूँगा.

          अध्‍यक्ष महोदय - अधिकारी भेज रहे हैं न. श्री जितु पटवारी अपने ध्‍यानाकर्षण की सूचना पढ़ें.

 

11.53                                        बहिर्गमन

श्री रामनिवास रावत, इ.ने.कां. के सदस्‍य द्वारा शासन के उत्‍तर से असंतुष्‍ट

होकर सदन से बहिर्गमन किया जाना

          श्री राम निवास रावत - अध्‍यक्ष महोदय, मैं शासन के उत्‍तर से असंतुष्‍ट होकर, मैं बहिर्गमन करता हूँ.

(श्री राम निवास रावत, इ.ने.कां. के सदस्‍य द्वारा शासन के उत्‍तर से असंतुष्‍ट होकर, सदन से बहिर्गमन किया गया)

 

 

11.54                                  ध्‍यानाकर्षण (क्रमश:)

 

(2)पीथमपुर में ऑटो टेस्टिंग ट्रेक हेतु अधिग्रहीत भूमि का मुआवजा कृषकों

को न दिया जाना.

                   श्री जितु पटवारी (राऊ) [डॉ. गोविन्‍द सिंह, श्री रामनिवास रावत] अध्‍यक्ष महोदय, मेरी ध्‍यान आकर्षण की सूचना विषय इस प्रकार है:-

          धार जिले के पीथमपुर में ऑटो टेस्टिंग ट्रेक के लिए राज्‍य सरकार द्वारा वर्ष २००७ में हजारों किसानों की लगभग 1080 एकड़ सिंचित भूमि अधिग्रहित की थी. 8 वर्ष व्‍यतीत हो जाने के बावजूद भी किसानों की उनकी अधिग्रहित जमीन की मुआवजे की राशि रू. 1800 करोड़ का भुगतान नहीं किया गया है जबकि माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय द्वारा सितम्‍बर, 2015 में राज्‍य सरकार को आदेश दिए थे कि किसानों को 4 माह के भीतर मुआवजे की राशि का भुगतान किया जाना सुनिश्चित करें किन्‍तु माननीय न्‍यायालय के आदेश का पालन नहीं किया गया है. एक ओर विगत 4 वर्षों से प्रदेश को कृषि कर्मण अवार्ड मिल रहा है वहीं दूसरी ओर किसान अपनी जमीन के मुआवजे के लिए 8 वर्ष से लगातार संघर्ष कर रहे हैं अभी हाल ही में 22 फरवरी, 2016 को सागौर औरी के आसपास के 10 ग्राम के हजारों किसानों ने पीथमपुर में प्रदर्शन भी किया, लेकिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस ने लाठी चार्ज और आंसू गैस के गोले दाग कर दबाने की कोशिश की, जिससे उनमें सरकार के प्रति रोष व्‍याप्‍त है. 

                   श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया, वाणिज्य, उद्योग और रोजगार  मंत्री -- अध्यक्ष महोदय,  

 

 

 


 

          मैं, माननीय मुख्यमंत्री और माननीय वित्त मंत्री जी को बहुत धन्यवाद देना चाहती हूं कि विधानसभा मे प्रस्तुत 2016-17 के बजट में आटो टेस्टिंग से संबंधित मुआवजा राशि के भुगतान हेतु राशि रूपये 800.00 करोड़ के प्रावधान का प्रस्ताव उन्होंने किया. यह राशि अगले वित्तीय वर्ष  में प्राप्त होगी तथा प्रभावितों को वितरित की जायेगी. कलेक्टर धार द्वारा किये जा रहे आंकलन अनुसार लगभग राशि रूपये 400.00 करोड़ की अतिरिक्त आवश्यकता होगी. विभाग ने यह राशि चतुर्थ अनुपूरक में उपलब्ध कराने के लिये वित्त विभाग को प्रस्ताव भेजा है. विभाग का प्रयास है कि चतुर्थ अनुपूरक 2015-16 एवं वर्ष 2016-17 के बजट आवंटन के माध्यम से प्रभावित कृषकों को संपूर्ण मुआवजा राशि का भुगतान कर दिया जावे.

          श्री जितू पटवारी --माननीय अध्यक्ष महोदय, सारी बातें सभी सदस्यों के साथ में आपको भी समझ में आ गई होगी कि आज से 8 वर्ष पहले जो जमीन हमने ली उसका आज तक भुगतान नहीं हुआ है. मंत्री जी ने अपने वक्तव्य में स्वयं स्वीकार किया है कि उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिये हैं कि 4 माह के अंदर यह राशि कलेक्ट करके उनको दी जाये,राशि भी निर्धारित कर दी गई है. यह काम सरकार ने पहले क्यों नहीं किया जो कलेक्टर अब कर रहा है, जैसा कि मंत्री जी ने कहा है कि गणना हो रही है और हिसाब-किताब करके दिया जायेगा, 4 माह क्यों नहीं हुआ. उसके बाद मंत्री जी ने यह भी स्वीकार किया कि 2016-17 में 800 करोड़ का प्रावधान किया गया है. फिर 1 वर्ष हम लेट होंगे . अध्यक्ष महोदय, मेरी वेदना है, हो सकता है कि सदन के सदस्यों की भी वेदना हो, उद्योग मंत्री जी ने अपने वक्तव्य में कहा है कि इन्वेस्टर मीट के लिये हम जहां भी जाते हैं आंध्रप्रदेश और 2-3 राज्यों के नाम बताये परंतु मध्यप्रदेश में उनकी दृष्टि नहीं गई.

          अध्यक्ष महोदय -- आप स्पेसिफिक प्रश्न करें.

          श्री जितू पटवारी -- अध्यक्ष महोदय इस तरह का वातावरण बनेगा प्रदेश में कि किसान मुआवजे को लेकर के आंदोलित होगे, लाठीचार्ज होंगे, गोलियां चलेंगी..

          अध्यक्ष महोदय-- भाषण नहीं..

          श्री जितू पटवारी -- अरे.............

          अध्यक्ष महोदय-- अरे क्या,  जो नियम है तो है.

          श्री जितू पटवारी --अध्यक्ष महोदय, तो कैसे वातावरण बनेगा इस प्रदेश का और इन्वेस्टरों का.

          अध्यक्ष महोदय-- आप सीधे प्रश्न करिये.आपने जो ध्यानाकर्षण उठाया है उस पर प्रश्न करिये आप. अन्य चीजें आप विभाग की मांग के समय बोल दें.

          श्री जितू पटवारी --हां, प्रश्न ही कर रहा हूं. अध्यक्ष जी, मेरा आपसे भी अनुरोध है कि सकारात्मक बातें हैं इसलिये कहने देना चाहिये.

          अध्यक्ष महोदय-- नहीं, भाषण की व्यवस्था नहीं है.

          श्री जितू पटवारी -- मैं भाषण नहीं दूंगा. मेरा अनुरोध है कि इन्वेस्टर मीट हम करते हैं  तो इस तरह के आंदोलन से प्रदेश का वातावरण बिगड़ता है. तो क्या राज्य सरकार इस ओर ध्यान देगी कि इसी वर्ष उनका पूरा भुगतान हो जाये. दूसरा जिन किसानों पर लाठीचार्ज हुआ, जिन पर मुकदमे लगे, 42 लोग अस्पताल में भर्ती हुये, क्या उनसे मुकदमे वापस लिये जायेंगे . और पूरे प्रकरण में अगर यह दोनों कानून सम्मत हुये? पुलिस की कार्यवाही बर्बरतापूर्वक थी . क्या पुलिस पर प्रकरण दर्ज किया जायेगा. और अगर नहीं किया तो क्या विधायकों की एक समिति बनाकर के इस पूरे प्रकरण की जांच की जायेगी?

          श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं नकारात्मक जवाब नहीं देना चाहती हूं वह आंदोलन के बारे में कि कौन उनके साथ में उनके साथ था. पर विधायक जी भी संवेदनशील हैं 2 साल से जब से मैं आई हूं तब से ही यह नैट्रिप(ऑटो नेशनल ऑटोमोटिव टेस्टिंग एंड आरएनडी इन्फ्रॉस्ट्रक्चर प्रोजेक्ट (नैट्रिप))  पूरी योजना पटरी पर आ रही है. पर क्योंकि यह बहुत बड़ी योजना है और हमने कम से कम 7-8 बार भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय से लगातार संपर्क करके उनके साथ चर्चा करके इस बहुत ही एम्बेसिस प्रोजेक्ट को वापस ट्रेक पर लाया है. इस प्रोजेक्ट के बारे में हम यह सोचते हैं कि पहला फेस 2016 में ही कंपलीट हो जायेगा.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत ही एम्‍बीसियस प्रोजेक्‍ट को वापस ट्रेक पर लाया है, इस प्रोजेक्‍ट को आज हम सोच रहे हैं कि पहला फेज 2016 में ही कम्‍प्‍लीट हो जायेगा, दूसरा फेज 2018 तक कम्‍प्‍लीट हो जायेगा. तीसरा ट्रेक इंदौर के पास होगा..... (तालियां)... अब हम चाह रहे हैं कि जहां सरकार इतनी बड़ी रकम नहीं दे पा रही है, हम जुटा पा रहे हैं, हमने कोशिश की और आप सही कह रहे हैं हम अपने वक्‍तव्‍य में स्‍वीकार कर रहे हैं कि न्‍यायालय के जो 4 महीने पहले उन्‍होंने कहा था, इसके संबंध में कलेक्‍टर से बार-बार लगातार संपर्क करके यह चिन्हित कर रहे हैं, क्‍योंकि अलग-अलग मुआवजे लग रहे हैं तो उसमें कितने मुआवजे और कितना इंट्रेस्‍ट इसमें किया जाये, वह सब चीजें एकत्रित होती जा रही हैं, 10 गांव का मामला है और हमारी पूरी पारदर्शिता है कि हम जितनी जल्‍दी इसका करें, हमारे ही इंट्रेस्‍ट में है नहीं तो हमारे लिये लगतार इंट्रेस्‍ट के उपर इंट्रेस पे करना पड़ेगा. तो इसीलिये थोड़ा धैर्य रखें हमारे विधायक जी जो इतने संवेदनशील हैं इस बारे में क्‍योंकि उन्‍हीं के पास यह ऑटो ट्रेक आ रह है तो मैं आपको इस सदन के माध्‍यम से कहती हूं कि अगर नेट्रिप आ जाये तो यह आपकी इकोनामिक गेम चेंजर होगा आपके यहां.

          अध्‍यक्ष महोदय--  डॉ. गोविंद सिंह.

          श्री जितू पटवारी--  हो गया मेरा.

          अध्‍यक्ष महोदय--  हो गया न, 3 प्रश्‍न तो पहले ही पूछ लिये.... (व्‍यवधान).... किसी को अलाऊ नहीं, जिनके नाम होंगे उन्‍हें ही अलाऊ करेंगे.

          श्री मुकेश नायक--  अगर आप अनुमति देंगे तो एक प्रश्‍न पूछ लूं.

          अध्‍यक्ष महोदय--  नहीं, नहीं, प्‍लीज-प्‍लीज. पहले डॉ. गोविंद सिंह. विभाग की मांगे आयेंगी जब तब बोलिये आप.

          श्री जितू पटवारी--  कोई अंतिम तारीख कि इस तक सारा मुआवजा दिया जायेगा. और दूसरा.... (व्‍यवधान)... मेरा यह कहना है अध्‍यक्ष जी कि कोई अंतिम तारीख देगी सरकार कि हम जब तक मुआवजा दे देंगे और अगर नहीं दे पायेगी तो कितना वित्‍तीय कुप्रबंधन है आपका और तीसरा यह है कि कलेक्‍टर से मैंने लिखित में सूचना के अधिकार में मांग लिया है.

          श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया--  आप कितने प्रश्‍न पूछ रहे हैं.

          श्री जितू पटवारी--  मंत्री जी, आप कुछ बयान दे देंगी तो गलत हो जायेगा, मैंने सूचना के अधिकार में ले लिया है कि कलेक्‍टर ने राशि का पूरा मूल्‍यांकन करके सरकार को मांग पत्र भेज दिया है, अगर यह कहना कि कलेक्‍टर ....

          श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया--  इसीलिये तो पेपर नहीं दे रहे थे आप पिछले हफ्ते. आपने कहा था कि आप पेपर देने वाले हैं पर आपने पेपर दिया नहीं.

          श्री जितू पटवारी--  यह अलग बात है.

          अध्‍यक्ष महोदय--  आपके प्रश्‍न का उत्‍तर ले लीजिये आप.

          श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया--  आपने कहा था कि सूचना के अधिकार में आप पेपर दोगे.

          श्री जितू पटवारी--  सरकार का यह वक्‍तव्‍य गलत है कि हमारे पास कलेक्‍टर का मांग पत्र नहीं आया, क्‍योंकि मैंने सूचना के अधिकार में मांग पत्र का लेटर ले लिया है और दूसरा अंतिम तारीख कोई सरकार देगी क्‍या, मेरे दो प्रश्‍न हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय--  डॉ. गोविंद सिंह.

          श्री जितू पटवारी--  अध्‍यक्ष जी यह गलत है. यह कौन सा तरीका हुआ, आप कहो तो मैं पटल पर रख दूं जो कलेक्‍टर ने मांग पत्र दिया है इनको.

          अध्‍यक्ष महोदय--  आपकी बात आ गई.

          श्री जितू पटवारी--  नहीं, नहीं अध्‍यक्ष जी यह तो अन्‍याय हो गया. यह भेदभाव पूर्ण रवैया है.

          अध्‍यक्ष महोदय--  यह भेदभावपूर्ण नहीं है आपको स्‍पष्‍ट प्रश्‍न पूछना था.

          श्री जितू पटवारी--  अगर कन्‍फ्यूज है सरकार तो यह कहे कि हम कार्यवाही करके कल बतायेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय--  आपने यह कहां पूछा कि कलेक्‍टर का आ गया कि नहीं आ गया आपके पास.

          श्री जितू पटवारी--  पूछा, कलेक्‍टर का मांग पत्र आया या नहीं आया यह अब नया पूछ रहा हूं, चलो बताओ. ..... (हंसी).... यह कौन सी बात हुई और इसको अंतिम तारीख देना पड़ेगी अध्‍यक्ष जी.

          अध्‍यक्ष महोदय--  अंतिम तारीख पूछ रहे थे आप हम उत्‍तर दिलवा रहे थे. पर आप उसके बाद फिर भाषण देने लगे.

          श्री जितू पटवारी--  दिलवाओ. 2 प्रश्‍न के उत्‍तर दिलवाओ.

          अध्‍यक्ष महोदय--  नहीं, नहीं एक प्रश्‍न का. माननीय मंत्री जी कोई तारीख दे सकते हैं क्‍या.

          श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया--  अंतरिम रिपोर्ट आई है.

          अध्‍यक्ष महोदय--  समय-सीमा पूछ रहे हैं वह.

          श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया--  समय-सीमा कैसे दें.

          श्री जितू पटवारी--  समय-सीमा नहीं दें यह कौन सा तरीका है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा 4 महीने .....(व्‍यवधान)

          अध्‍यक्ष महोदय--  कुछ नहीं लिखा जायेगा. आप बैठ जायें कृपया.

            डॉ गोविन्द सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्रीजी ने कहा कि विभाग का प्रयास है अनुपूरक 2015-16, 2016-17 में आवंटन में होगा. 2016-17 में समय है. मंत्रीजी से हमारा अनरोध है कि बजट प्रावधान 2015-16 जो अभी है. सप्लीमेंट्री बजट आ रहा है. कृपया करके 2015-16 में प्रावधान कर देंगी. दूसरा, जिन किसानों पर लाठीचार्ज हुआ है. लाठी चार्ज की अनुमति किसने  दी और किसकी अनुमति से लाठीचार्ज हुआ. और जिन पर मुकदमे लगे, उनके मुकदमें वापस लेने का सरकार वचन देगी?

          श्रीमती यशोधराराजे सिंधिया-- अध्यक्ष महोदय, पारदर्शिता रखते हुए मैं अपना जवाब दे रही हूं. मैंने सदन को कहा है कि यह बहुत महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट था जो 16 साल से लंबित था. हम इतने संवेदनशील है कि हम उसको इंदौर के लिए ट्रेक पर ला रहे हैं. अब अगर माननीय ऐसे मुझे एक तरह से परेशान करेंगे..प्लीज..एक मिनट मुझे कहने दें.  अध्यक्षजी, हम  फायनेंस मिनिस्टर नहीं हैं.  फायनेंस हम नहीं चला रहे हैं. हम सिर्फ फायनेंस मिनिस्ट्री से पूछ सकते हैं कि कृपया हम जल्दी से जल्दी आप हमारा पैसा दे दें. आज हम समझ रहे हैं कि हम कोर्ट के कंटेम्प्ट में जा रहे हैं. वह भी हम समझ रहे हैं. लेकिन उस चीज में, उन हालातों में हमारी कोशिश है कि हम जल्दी से किसानों की मदद करें. मैं भी दो तीन बार वहां गई हूं. मैं भी वहां किसानों से मिली हूं. मैंने भी किसानों से कहने की कोशिश की कि हां, हम आपको, आपकी मुआवजा राशि देने वाले हैं. हमारी कोशिश होती है कि जो भी ब्याज हमें देना है, वह भी हमें देना ही पड़ेगा. वह बात नहीं है कि हम कल दे सकते हैं कि परसों दे सकते हैं. हमारी कोशिश है कि हमें देना है, पर कब देना है, वह तारीख मैं आपको कैसे दे सकती हूं.

          श्री मुकेश नायक--वित्तमंत्रीजी सामने बैठे हैं, कान में पूछ लीजिए, कब देंगे?

          डॉ गोविन्द सिंह-- अध्यक्ष महोदय, मैंने पूछा था कि किसानों पर जो मुकदमे लगे हैं, क्या उन्हें मानवीय आधार पर परीक्षण कराकर, वापस लेने का सरकार वचन देगी?

          श्रीमती यशोधराराजे सिंधिया-- काहे का वचन मांग रहे हैं आप.

          अध्यक्ष महोदय-- जो मुकदमें किसानों पर हैं, उनके बारे में है. आप परीक्षण करा लीजिए.

          श्रीमती यशोधराराजे सिंधिया-- मैं वचन देती हूं, हम इसका परीक्षण करा लेंगे.

          श्री मुकेश नायक-- अध्यक्ष महोदय, एक प्रश्न करने की अनुमति दीजिए.

          अध्यक्ष महोदय-- नहीं, अब नहीं.

          श्री मुकेश नायक--सबको अवसर दे रहे हैं, मुझे नहीं दे रहे हैं.

          अध्यक्ष महोदय-- उनका नाम है. नहीं, अनुमति नहीं देंगे. हम ध्यानाकर्षण में यह परम्परा चालू नहीं करेंगे.

          श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्षजी, इंदौर में ऑटो टेस्टिंग ट्रेक के स्थान के लिए 2009 में किसानों की , बहुत से गांवों की भूमि अधिग्रहित की थी. 2009 से वहां के किसान, उस जमीन पर खेती-किसानी नहीं कर पा रहे हैं. वह जमीन पूरी तरह से अधिग्रहण करने के बाद 2009 से लेकर आज 2016 आ गया और पिछले 7 सालों से वे किसान दर दर भटक रहे हैं, उनकी जीविका का कोई साधन नहीं है. मंत्री महोदया ने जो 2014 से यह विभाग संभाला है, उनको धन्यवाद देंगे कि उन्होंने इस मामले को ट्रेक पर लाया तो यही मानेंगे कि 2014 से पहले जो भी लोग थे उनकी इस पूरे ऑटो टेस्टिंग ट्रेक के निर्माण के प्रति उदासीनता थी.

          अध्यक्ष महोदय-- अभी क्या है वह पूछिये. ध्यानाकर्षण है ना.

          श्री रामनिवास रावत-- दोनों ही बातें आ जाती हैं. माननीय मंत्रीजी यह भी कह देती हैं कि शिवराज सिंह जी प्रतिबद्ध हैं. यदि प्रतिबद्ध थे तो 2014 से पहले क्यों नहीं थे.

          अध्यक्ष महोदय-- आप प्रश्न करिये. भाषण देने का समय अभी आयेगा. सीधा प्रश्न करें.

          श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, आपकी प्रतिबद्धता पर हमें विश्वास है. मेरा एक तो यह निवेदन है कि इस तरह की व्यवस्था बनाई जाय, उन्हें मुआवजे की बात तो आ ही गई, जो नया भूमि अधिग्रहण कानून आया था, जिसमें एक तो यह व्यवस्था थी कि 80 प्रतिशत किसानों की सहमति होने के बावजूद ही भूमि अधिगृहीत की जाएगी, क्या इसमें 80 प्रतिशत किसानों की सहमति प्राप्त की गई? भूमि का मुआवजा माननीय उच्चतम न्यायालय ने निर्धारित किया है, उसके आधार पर कब तक मुआवजा प्रदान कर दिया जाएगा? तारीख, समय-सीमा मैं जानना चाहता हूं. यह बात सही है कि समय-सीमा आप नहीं बताएंगी, वित्तमंत्री जी, माननीय मुख्यमंत्री जी यहां पर हैं, मैं तो यह चाहता हूं कि आप जल्दी से, हमारी तो यह शुभकामनाएं हैं कि आप उधर से  इधर  एक नम्बर सीट पर आ जाएं तो समस्या बहुत जल्दी हल हो सकती है.

श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया - अध्यक्ष महोदय, इस पर अब कोई जवाब ही नहीं देना है. मैं क्या जवाब दूं? आप इधर से उधर कह रहे हैं, इस पर मैं क्या जवाब दूं?

अध्यक्ष महोदय - समय-सीमा बताना संभव नहीं है, यह बात पहले आ चुकी है.

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, कौन-सी समय सीमा?

अध्यक्ष महोदय - यह पहले आ चुका है, समय-सीमा बताना संभव नहीं है.

श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया -माननीय मुख्यमंत्री जी आए हैं, इसीलिए आप यह सब अब कह रहे हो, आप सीधे टॉपिक पर रहें, माननीय आप एक अनुभवी सदस्य हैं, क्या आप यह डबल-डबल कह रहे हैं, जितू भाई भी वही कह रहे हैं, आप भी वही कह रहे हैं. मैंने कहा कि आज मैं वित्तमंत्री नहीं हूं, वित्तमंत्री जी से मुझे परमिशन लेनी होगी, माननीय मुख्यमंत्री जी से परमिशन लेनी होगी. हमने अभी से ही आपको बता दिया है कि कितना हमें आज इस बजट से पैसा मिल रहा है, अगले बजट से हमारी चाहत है कि हमें मिल जाय. अब हम कहां समय-सीमा, कौन-सी तारीख बताएं?

अध्यक्ष महोदय - सब बात आ गई है.

श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया - अध्यक्ष महोदय, ऐसे तो आधे घंटे और चलते जाएंगे.

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, मंत्रिमंडल की सामूहिक जिम्मेदारी है. माननीय मुख्यमंत्री जी भी बैठे हैं, माननीय वित्तमंत्री जी भी बैठे हैं.  (व्यवधान)..

श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया - मुख्यमंत्री जी की जवाबदारी नहीं है, मेरी जवाबदारी है.

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, एक ही सवाल है कि मुआवजा कब तक दे दिया जाएगा (व्यवधान)..माननीय मुख्यमंत्री जी, आप ही इसका जवाब दे दें. (व्यवधान)..अध्यक्ष महोदय, सरकार के मंत्री संवेदनशील नहीं हैं. सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी है. (व्यवधान)..

श्री जितू पटवारी - अध्यक्ष महोदय, मंत्री सरकार की तरफ से जवाब देता है. (व्यवधान)..आप यह बता नहीं पा रहे हो कि किसानों को मुआवजा कब तक देंगे, जो जमीनें आपने किसानों की 10 साल पहले छीन ली हैं. यह गलत तरीका है. जवाब अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है?

उप नेता प्रतिपक्ष (श्री बाला बच्चन)- अध्यक्ष महोदय, हम मंत्री जी के जवाब से संतुष्ट नहीं हैं. अध्यक्ष महोदय, आप प्रतिपक्ष के विधायकों को सुनना नहीं चाहते हैं. अध्यक्ष महोदय, हम माननीय मंत्री महोदया के जवाब से संतुष्ट नहीं हैं. (व्यवधान)..हम सदन से बहिर्गमन करते हैं. (व्यवधान)..

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, हम सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं है, सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी है.

(व्यवधान)..

श्री जितू पटवारी - अध्यक्ष महोदय, इस पूरी घटना पर मुख्यमंत्री वक्तव्य दें. अगर इनसे नहीं होगा तो मुख्यमंत्री इस पूरी घटना पर वक्तव्य दें. किसानों को मुआवजा नहीं मिल रहा है. आप कहते हैं कृषि कर्मण अवॉर्ड ले लिया, किसान मेरा भगवान है तो यह किस तरह का भगवान है? यह गलत तरीका है. सरकार किसानों के साथ बहुत अन्याय कर रही है. (व्यवधान)...

 

 

12.19 बजे                                       बहिर्गमन

इंडियन नेशनल कांग्रेस के माननीय सदस्यों का शासन के जवाब से असंतुष्ट होकर सदन से बहिर्गमन

(उप नेता प्रतिपक्ष श्री बाला बच्चन के नेतृत्व में इंडियन नेशनल कांग्रेस के माननीय सदस्यों द्वारा शासन के जवाब से असंतुष्ट होकर सदन से बहिर्गमन किया गया.)

                  

समय 12.20 बजे       

         

 

 

 

 

 

 

                                  

 

 

 

            संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र)-- अध्यक्ष महोदय मैं प्रस्ताव करता हूं कि अभी अध्यक्ष महोदय ने वर्ष 2015-16 के चतुर्थ अनुपूरक अनुमान एवं वर्ष 2016-17 के आय व्ययक में सम्मिलित मंत्रियों की विभिन्न मांग समूहों पर चर्चा के लिए समय निर्धारण करने के संबंध में कार्य मंत्रणा समिति की जो सिफारिशें पढ़कर सुनाई उन्हें सदन स्वीकृति देता है.

          अध्यक्ष महोदय -- प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ.

          प्रश्न यह है कि जिन कार्यों पर चर्चा के लिए समय निर्धारण करने के संबंध में कार्य मंत्रणा समिति की जो सिफारिशें पढ़कर सुनाई उन्हें सदन स्वीकृति देता है.

          प्रस्ताव स्वीकृत.

 

याचिकाओं की प्रस्तुति.

 

 

          अध्यक्ष महोदय -- आज की कार्यसूची में उल्लेखित याचिकाएं प्रस्तुत की गई मानी जायेंगी.

 

 

राज्यपाल के अभिभाषण पर प्रस्तुत कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव पर चर्चा.

 

          श्री रामनिवास रावत -- मैं यहां पर निवेदन करना चाहता हूं कि 23 तारीख को अभिभाषण आया था. आपने चर्चा के लिए 25 और 29 दो दिन निर्धारित किये थे. सामान्यतया 3 दिन होते थे, आपकी कृपा रही, कल समय रहने के बावजूद भी आज के लिए अभिभाषण पर चर्चा जारी रखी गई. मैं यहां पर केवल यह जानना चाहता हूं कि ऐसा क्या कारण था कि जिसकी वजह से जहां एक तरफ आप भोजनावकाश को भी निलंबित कर रहे हैं. ऐसा क्या कारण था कि जिसकी वजह से आपने कल चर्चा समाप्त न करके आज भी ली है.

          अध्यक्ष महोदय --  आप समय बढ़ाने नहीं देते हैं. आधे घंटे में दोनों विषय आ नहीं सकते थे. फिर हम क्या करते इसलिए उसको आज लिया गया है, उसमें भी आपको आपत्ति है, आप समय पर भी आपत्ति उठाते हैं और जब समय की सीमा में भी करते हैं तब भी आपत्ति करते हैं तो आप ही बता दें कि क्या करना है.

          डॉ नरोत्तम मिश्र -- यह समय पर रहते नहीं है. अगर आपको आपत्ति उठाना थी तो कल उठाना थी, कल आपत्ति नहीं उठाई और उसके बाद में कार्य मंत्रणा समिति में भी बात करना थी तो वहां पर आप आये नहीं है, अध्यक्ष जी बहुत अरूचि है आपस की अंदर की इनमें गुटबाजी है.

          श्री रामनिवास रावत -- कोई गुटबाजी नहीं है. मेरी समझ में जो आया अध्यक्ष महोदय वह यह है कि एक ही कारण है कि कल अगर मुख्यमंत्री जी बोलते तो आज पेपरों में नहीं छपता क्योंकि कल केन्द्र सरकार का बजट भाषण था. आज जब यह बोलेंगे तो पेपरों में छपेगा.. केवल पेपरों में छपने के लिए आज उस चर्चा को लाये हैं...(व्यवधान)..

          डॉ गौरी शंकर शेजवार -- अध्यक्ष महोदय क्या अध्यक्ष के निर्णय पर यहां पर चर्चा होगी..(व्यवधान).. माननीय अध्यक्ष महोदय के निर्णय पर आपत्ति उठाई जायेगी और उस पर यहां चर्चा होगी ..(व्यवधान)..यह कौन सी परंपरा हो रही है सदन में...

          श्री उमाशंकर गुप्ता -- यह तो आपस की गुटबाजी है..(व्यवधान)..

          डॉ गौरी शंकर शेजवार -- अध्यक्ष महोदय हम कहां जा रहे हैं...(व्यवधान).. जरा सोचें तो आप..(व्यवधान)..

          अध्यक्ष महोदय -- श्री बाला बच्चन जी खड़े हैं कृपया सभी बैठ जायें...(व्यवधान)..

          श्री बाला बच्चन -- अध्यक्ष महोदय मैं महामहिम राज्यपाल जी के अभिभाषण पर जो कृतज्ञता प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ है मैं उसका विरोध करता हूं.

          डॉ गौरीशंकर शेजवार --(XXX)

          श्री आरिफ अकील -- मेजें आप थपथपायें हम सब आपसे रिक्वेस्ट करते हैं...(व्यवधान)..

          डॉ गौरीशंकर शेजवार --(XXX)

          अध्यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी उनको बोलने दें. यह सब कार्यवाही से निकाल दें.

          श्री गोपाल भार्गव --(XXX)

          श्री बाला बच्‍चन, उप नेता प्रतिपक्ष -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप मुझे सरंक्षण दें, ये जितने मंत्रिगण अभी खड़े हुए थे इनके कारनामे सब मैं उजागर करूंगा. माननीय राज्‍यपाल जी के अभिभाषण पर चर्चा चल रही है, माननीय राज्‍यपाल जी के अभिभाषण पर जो कृतज्ञता प्रस्‍ताव आया है उसका मैं विरोध करता हूँ. मैं विरोध इसलिए करता हूँ कि 154 कंडिकाओं वाले अभिभाषण को पढ़ने से यह समझ में आया कि सरकार ने अपने हाथों अपनी पीठ थपथपाई है और अपने मुँह मियां मिट्ठू बनने की कहावत को पूरी तरह से चरितार्थ किया गया है. पूरा अभिभाषण सरकार के अहंकार से भरा हुआ है, अभी सामने जो मंत्रिगण खड़े हुए थे, तो उनका अहंकार दिख रहा था. सरकार ने अभिभाषण में यह दिखाने का प्रयास किया है कि सरकार की वित्‍तीय स्‍थिति बहुत अच्‍छी है लेकिन सरकार कितनी गंभीर वित्‍तीय स्‍थिति से गुजर रही है इसको मैं समझता हूँ कि सदन ही नहीं पूरा मध्‍यप्रदेश बहुत अच्‍छे से समझ रहा है और जान रहा है. सरकार की वित्‍तीय स्‍थिति बहुत खराब है और सरकार दिवालियापन की कगार पर खड़ी है. चाहे अभिभाषण हो, चाहे बजट हो, माननीय मुख्‍यमंत्री जी आंकड़ों से और परियोजनाओं के नाम से भाषण बहुत अच्‍छे से बनाते हैं, पुराने अनुभवी वित्‍त मंत्री हैं इस कारण से बना लेते हैं लेकिन वित्‍तीय स्‍थिति सरकार की बिल्‍कुल ठीक नहीं है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं यह बताना चाहता हूँ कि अभिभाषण की कंडिका 11 से लेकर कंडिका 41 के बीच में किसानों के लिए सुविधाएं उपलब्‍ध कराने का आपने उल्‍लेख किया है जबकि किसानों को मुआवजा बांटने में आपने मनमानी की है. कई तरह की अनियमितताएं की गई हैं, किसानों को अभी भी मुआवजा नहीं मिल पा रहा है. सूखे के कारण, अल्‍पवर्षा के कारण, अतिवृष्‍टि के कारण, ओलावृष्‍टि के कारण मध्‍यप्रदेश के जो किसान प्रभावित हुए हैं उनको जितना मुआवजा मिलना था वह मुआवजा माननीय मुख्‍यमंत्री जी नहीं मिला है. इसके कारण किसान आज भी आत्‍महत्‍या के लिए विवश हैं और अभी भी मध्‍यप्रदेश के किसानों की आत्‍महत्‍याएं रूकी नहीं हैं. अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मुख्‍यमंत्री जी यहां बैठे हुए हैं, मैं आपके माध्‍यम से यह आग्रह करना चाहता हूँ माननीय मुख्‍यमंत्री जी से कि आपको इस पर विचार करना पड़ेगा और व्‍यवस्‍था देना पड़ेगा जिससे कि किसानों की आत्‍महत्‍याएं रूक सकें. आपने कंडिका 79 से 91 के बीच में शिक्षा का उल्‍लेख किया है कि स्कूलों से संबंधित शिक्षा बहुत अच्‍छी दे रहे हैं, महाविद्यालयों में शिक्षा अच्‍छी दे रहे हैं, मैं यह कहना चाहता हूँ कि ग्रामीण अंचल के स्‍कूलों में शिक्षक ही नहीं हैं. केमिस्‍ट्री, फिजिक्‍स, मेथेमेटिक्‍स, बॉयोलॉजी, बॉटनी, इंगलिश के शिक्षक नहीं हैं. जब गांवों में शिक्षक ही नहीं हैं तो क्‍या क्‍वालिटी ऑफ एजुकेशन मिल रहा होगा, सरकार, आप और हम सब इस बात का अनुमान लगा सकते हैं. महाविद्यालयों में प्राध्‍यापक और सहायक प्राध्‍यापक नहीं हैं. मुझे याद है कि एक समय था जिसको कि दुनिया का सुप्रीमो कहा जाता है अमेरिका के राष्‍ट्रपति अमेरिका में वहां के विद्यार्थियों को यह कहते हैं कि जागो, पढ़ो नहीं तो भारतीय छात्र आ जाएंगे और आप सबकी जगह ले लेंगे. अमेरिका की सिलिकान वेली जिससे पूरी दुनिया चलती है आज फेसबुक का टाइम है, ट्विटर का टाइम है, नेट का टाइम है, मोबाइल का टाइम है, उसमें लगभग 35 से 40 प्रतिशत हमारे भारतीय व्‍यक्‍ति हैं जिन्‍होंने अपने टेलेंट के माध्‍यम से वहां पर जगह बनाई है. फर्स्‍ट अटेम्‍प्‍ट में अंतरिक्ष में यान पहुँचना, यह हमारे टेलेंट की देन थी, पूरी दुनिया को लोहा मनवाया है और आप शिक्षक नहीं दे रहे हैं तो क्‍वालिटी ऑफ एजुकेशन की क्‍या स्‍थिति होगी, माननीय मुख्‍यमंत्री जी, आप इसका अनुमान लगा सकते हैं. मुझे याद है कि अभी-अभी माध्‍यमिक शिक्षा मंडल ने उन 1600 स्‍कूलों को क्‍यों मान्‍यता दी, दिसंबर में ही यह मान्‍यता क्‍यों नहीं दी जा सकी, विलंब के कारण 1600 स्‍कूल के 10वीं और 12वीं के दो लाख विद्यार्थियों को रेगुलर से निजी होना पड़ा है. इतने विद्यार्थियों के साथ में माननीय मुख्‍यमंत्री जी, आपकी सरकार ने और शिक्षा विभाग ने धोखा किया है, यह मेरा आरोप है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सहकारिता विभाग पर मैं आ रहा हूँ, माननीय भार्गव जी, किसानों से जुड़ा सहकारिता आंदोलन भ्रष्‍टाचार का शिकार हो गया है. सहकारिता को डंस लिया है भ्रष्‍टाचार के नागों ने, और घर को लगा दी आग घर के चिरागों ने, यह स्‍थिति बन गई है.   उसको मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ, चाहे वह जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक,खरगौन की बात हो जिसमें 42 नियुक्तियां कर दी गयीं और उसके बाद उनको नियमित भी कर दिया. क्या वहां के अधिकारियों को उसके बाद संचालक मंडल को उसका अधिकार था . चाहे वह जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक,खरगौन में नियुक्ति की अनियमितता का मामला हो, चाहे रीवा बैंक की डभौरा का जो लोन 16 करोड़ 17 लाख रुपये का वितरण किया गया है वह लोन की राशि किसानों की थी. उसके बाद आपने अगर जांच का आदेश दिया.उसमें पुलिस शामिल हुई. पुलिस ने भी पैसे ले लिया. टीआई और एसडीओपी भी उसमें सस्पेंड हुए हैं.चाहे रीवा के डभौरा बैंक के लोन का मामला हो, चाहे सीधी का 1100 ट्रेक्टर फायनेंस करने का भ्रष्टाचार हो. माननीय मुख्यमंत्री जी, आप हमारे प्रश्नों को, उत्तरों को और विधानसभा की कार्यवाही जो चलती है, मुझे नहीं लगता कि आप देखते हैं. मेरे प्रश्न के जवाब पर 1100 ट्रेक्टर एक साल में फायनेंस करना बताया. जब मैंने दूसरा प्रश्न लगाया आरटीओ विभाग में तो आरटीओ विभाग से जवाब आया  कि यह 1100 ट्रेक्टरों की नम्बर नहीं, यह मोटर साइकिलों के नम्बर हैं( शेम शेम की आवाजें) चाहे उसका मामला हो. चाहे होशंगाबाद में अऩ्य बैंकों में जो अनियमितताएँ हुई हैं उसका मामला हो. मैं आपकी जानकारी में सब लाना चाहता हूँ फिर आपने इसकी प्राथमिक और विस्तृत जो जांच करवाई है. किनसे आपने जांच करवाई है?  अपेक्स बैंक के 345 करोड़ रुपये की जमीन घोटाले में जो अधिकारी है उनसे आपने जांच कराई. जिनके खुद के ऊपर 345 करोड़ रुपये का आरोप है, 345 करोड़ रुपये के घोटाले में अपेक्स बैंक के अधिकारी फंसे हुए हैं उनसे आपने इनकी प्रारंभिक और विस्तृत जांच करवायी है. मुख्यमंत्री जी, सदन के बहुत सारे सदस्यों ने बढ़कर अभिभाषण पर चर्चा में हिस्सा लिया है. हमारे प्रतिपक्ष के साथियों ने भी हिस्सा लिया है. इधर के सत्तापक्ष के विधायकों ने भी हिस्सा लिया है. अपनी बात को कहने के अलावा भी मैं आपसे यह आग्रह करना चाहता हूँ  कि जो आरोप मैं आप और आपकी सरकार के ऊपर लगा रहा हूँ, मेरे विधायक साथियों ने जो आरोप लगाये हैं, कृपा करके अपनी बात न कहते हुए आप उनका जवाब दें. आप हमेशा अपनी बात कहते हैं, यह जो मैं मय तथ्य के मय फैक्ट के बोल रहा हूँ, जितनी चीजें हैं अगर मैं कहीं गलत हूँ तो मेरे पर आप जो कार्यवाही करना चाहें, वह कर लेना लेकिन सदन के सदस्यों का मान और सम्मान बना रहे, उनकी भी बात सदन के बाहर भी बनी रहे और सदन एक सर्वोच्च संस्था है बात उठाने के लिए, इसका भी सम्मान बना रहे. बहुत अच्छी बात है कि आज सदन में काफी अच्छी उपस्थिति है और माननीय मुख्यमंत्री जी भी हैं.

12.33 बजे          उपाध्यक्ष महोदय( डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह ) पीठासीन हुए

          यहां पर मैं आपसे आग्रह करना चाहता हूँ कि भूमि विकास बैंक को  क्यों बंद कर दिया है.राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक को क्यों बंद कर दिया है और बंद करने के पीछे मैं आपको बता रहा हूँ, आपकी जानकीर में लाना चाहता हूँ कि अभी भी ग्रामीण विकास बैंक के 5500 जो खाताधारक हैं उनकी  55 करोड़ रुपये की राशि,जो एफडी थी वह मेच्योर्ड हो चुकी है लेकिन सरकार ने उनको देने की कहीं व्यवस्था नहीं की है. क्या कुसूर है कि जबलपुर के एक केंसर के पेशेंट हैं सुखदेव तिवारी जी, उनकी एफडी मेच्योर्ड हो गयी है,वे केंसर से सफर कर रहे हैं,उन्हें उनकी राशि नहीं दी जा रही है. भोपाल के एक पेशेंट हैं शांता  पीके, हार्ट पेशेंट हैं, उनकी भी एफडी मेच्योर्ड हो चुकी है, लेकिन नहीं दी जा रही है तो कृपा करके माननीय मुख्यमंत्री जी से आग्रह है कि चाहे इनको मेरे सुझाव कह लीजिए, मेरे आरोप कह लीजिए, इनके आप जवाब दीजिएगा जब आप बोलेंगे तब. अब मैं स्वास्थ्य विभाग पर आता हूँ.

          सहकारिता मंत्री(श्री गोपाल भार्गव)-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है.

          श्री बाला बच्चन-- मैं आपकी बात पर आ रहा हूँ.

          श्री मुकेश नायक--   सत्ता और प्रतिपक्ष के नेता जब बोलते हैं तो इन्टरप्शन नहीं होता है.उनको अपनी बात कहने दीजिए.

          उपाध्यक्ष महोदय-- मैं अलाऊ नहीं कर रहा हूँ.आप बैठ जाएं.

          श्री गोपाल भार्गव-- मेरा व्यवस्था का प्रश्न है.

          श्री बाला बच्चन--  फिर माननीय मुख्यमंत्री जी आप बोलेंगे तो फिर हमारी तरफ से भी इन्टरप्शन होगा.

          श्री गोपाल भार्गव- आप सुन तो लें. आप सुन लें.कृपा करके बैठ जाएँ.

          उपाध्यक्ष महोदय--  मंत्री जी, वे ईल्ड नहीं कर रहे हैं, कृपा करके हस्तक्षेप नहीं करें. अगर वह ईल्ड करते हैं तो कोई बात नहीं है.यह व्यवस्था है.

 

                                                                            

          श्री गोपाल भार्गव—उपाध्यक्ष महोदय, औचित्य का प्रश्न है, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है उसको आप सुन लें, मेरी बात तो सुन लें.

          उपाध्यक्ष महोदय--  आप कम से कम आसंदी की व्यवस्था को तो मानिये.

          श्री गोपाल भार्गव—उपाध्यक्ष महोदय, हर सदस्य को बीच में बोलने का अधिकार है. ..(व्यवधान)..य़दि किसी व्यक्ति से या किसी विभाग से संबंधित कोई विषय आता है औऱ उससे संबंधित मंत्री यदि कुछ कहना चाहे तो कह सकता है.

          उपाध्यक्ष महोदय---  यह गलत बात है ...(व्यवधान)..देखिये मंत्री जी, वह ईल्ड नहीं कर रहे हैं यह गलत परंपरा मत डालिये. अभी माननीय मुख्यमंत्री जी को भी बोलना है.

          श्री बाला बच्चन---  यह आसंदी को मान रहे हैं ?

          श्री मुकेश नायक---  आप जो भी स्पष्टीकरण देना है बाद में दीजिये आपको अधिकार है.

          श्री गोपाल भार्गव--  इसके बाद कब अवसर मिलेगा आप तो कुछ भी बोलकर चले जाएंगे, ऐसा नहीं चलेगा.

          श्री बाला बच्चन--  मैं उसको प्रूव करुंगा. आपको इसके बाद समय मिलेगा तब सिद्ध करना मैंने पहले अपनी बात कही है कि जो सजा देना चाहे सरकार या आसंदी उसके लिए मैं तैयार हूं.

          श्री गोपाल भार्गव--  मुख्यमंत्री जी तो कहेंगे ही .

          उपाध्यक्ष महोदय---  बच्चन जी, आप कृपा करके आसंदी के माध्यम से संबोधित करें. हम खड़े हुए हैं कृपया करके मंत्री जी आप बैठ जाएं.

          श्री गोपाल भार्गव--- उपाध्यक्ष महोदय, यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन है मैं ट्रेजरी बेंच पर हूं तो इसका अर्थ यह नहीं है कि मैं बोल नहीं सकता .

          श्री आरिफ अकील---  व्यवस्था आसंदी की चलेगी या मंत्री की चलेगी.

          उपाध्यक्ष महोदय--  मैं खड़ा हुआ हूं आप सभी को बैठ जाना चाहिए. मेरा यह अनुरोध है कि जो माननीय सदस्य बोल रहे हैं यदि वह ईल्ड नहीं करते हैं तो उनको हस्तक्षेप न करें. अगर वह ईल्ड कर जाते हैं तो आपका हस्तक्षेप स्वागत योग्य है , आप बैठ जाइए.

          श्री गोपाल भार्गव---  उपाध्यक्ष महोदय, मैंने औचित्य का प्रश्न उठाया , यह मेरा अधिकार है और मुझे कुछ कहने का भी अधिकार है यदि मेरे विभाग के बारे में कुछ कहा गया तो मैं कहूंगा .

          श्री मुकेश नायक--- आपका अधिकार है लेकिन वह संसदीय नियम संचालन और प्रक्रिया के तहत है. जब चाहे मंत्री होने के नाते सदन में खड़े होकर आप नहीं बोल सकते हैं.

          श्री गोपाल भार्गव---  उसी के तहत मैं बोल रहा हूं.

          उपाध्यक्ष महोदय--- मंत्री जी, आप इस सदन के वरिष्ठतम सदस्यों में से एक हैं और आप जब इसका पालन नहीं करेंगे तो कैसे चलेगा. आपके ऊपर व्यक्तिगत आरोप नहीं लगा है यदि वह व्यक्तिगत आरोप लगाते हैं तो पí